Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 17 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

बहोत शुक्रिया सॉफ्ट भाई. मुझे पता था के फ्लैशबैक के अंत होने तक आप ज़रूर और खूब पसंद करोगे, आप को सब्र नहीं होता आओ बहोत जल्द कन्क्लूसिओं निकाल लेते हो और फ़िक्र करने लगते हो के सान्वी को ऐसा नहीं ह्ण चाहिए था सान्वी हर किसी के सामने नहीं झुक सकती ेट्स etc...ab देखा नाह आप ने भाई? मुझे पता था के आप जल्दबाज़ी में ho....thoda सब्र करो तो सब सही हो जाता है नाह भाई?

चलो कोई बात नहीं, मुझे ख़ुशी है के आप मो उपदटेस पसंद आये और आप खुश हुए. थैंक्स वैरी मच, पढ़ते चलना और कमैंट्स करते चलना साथ साथ भाई. थैंक्स अगेन.
 
अरे भाई कोई छोटा या बड़ा नहीं होता हम सब बराबर हैं

आगा आप नहीं होते मेरे कहानी और उपदटेस को नहीं पढ़ते तो मैं कहाँ से होता

मुझे आप की उतनी hi ज़रूरत है जितना किसी भी एक रीडर की

आप सब मेरे लिए एक हो और मैं कोई बड़ा वादा नहीं हूँ बुसस लिखता हूँ और कभी ाचा लिख जाता है

सात बने रहना दोस्त और थैंक्स वैरी मच वन्स अगेन :लव:
 
थैंक्स सो वैरी वैरी मच रोदय बीआरओ, ी वास् वेटिंग फॉर योर रिप्लाई

यू अरे थे ओनली ओने तो सी थे पैन ऑफ़ आरव, एंड आईटी इस व्हिले राइटिंग हिज पैन तहत ी क्रिएड!!

यू हैवे शामे फीलिंग लिखे माइन बीआरओ. ग्लैड तो क्नोव तहत... यू पॉइंटेड आउट थे पार्ट्स व्हिच इवन ी फेल्ट शुड बे सीन बी इतर रीडर्स बूत नोने दीद, ओनली यू दीद... थैंक्स वैरी मच फॉर शेयरिंग माय फीलिंग्स बीआरओ :लव:
 
वाओ!!! ओह माय गॉड!!! सुच ा लॉन्ग रिव्यु बीआरओ??? यू कुड हैवे रिटेन ान अपडेट lol...

यू फाउंड एवरीथिंग तो थे point...you हिट थे बुल्स आईज माय डिअर

यस सान्वी है बीन गिवेन प्रायोरिटी बी क्रशिंग आरव ी एग्री, आरव वास् लिखे थे विलन व्हेन इन फैक्ट हे वास् नॉट, राथेर संवी शुड हैवे बीन पॉइंटेड थे फिंगर बूत थिस इस हाउ थे वर्ल्ड अराउंड उस इवॉल्वेस नाह बीआरओ? isn't आईटी? बूत नेवर मंद माय डिअर इन फ्यूचर उपदटेस आरव विल गेट व्हाट हे वास् ओन्ड (ी होप सो ात लीस्ट)

यू फाउंड आईटी आल राइट एंड तो थे पॉइंट

ी won't से मोरे अस आईटी ी से आईटी थे क्लाइमेक्स विल स्टार्ट तो अप्पेअर...

सो जस्ट स्टे तुनेड माय फ्रेंड एंड फॉलो आईटी यू विल अंडरस्टैंड आल ग्रेजुअली

टिल नाउ यू ऑलमोस्ट हैवे आल अंडरस्टुड ी सी :डी

थैंक्स वैरी वैरी मच फ्रॉम थे डेप्थ ऑफ़ थे हार्ट फॉर अंडरस्टैंडिंग आईटी डीप लिखे में बीआरओ :लव:
 
अपडेट 127 – बैक तो नार्मल डेज

आज से सिर्फ एक अपडेट आएगा इस थ्रेड पर फ्रेंड्स, और उपदटेस सिर्फ मोंडेस से फ़रिदेस तक होगा वीकेंड्स में नहीं. थैंक्स आल ऑफ़ यू.

दोस्तों, फ्लैशबैक तब शुरू हुई थी जिस दिन सान्वी को सेक्स की ज़रूरत महसूस हुई थी जब उस्सने आरव को संजना के साथ सेक्स करते सुना था अपने कमरे के अंदर… तहत वास् ों अपडेट 103. मैं ने सोचा था कोई 6 या 8 उपदटेस में सान्वी की फ्लैशबैक को एन्ड कर दूंगा मगर यह तो अपडेट 103 से 126 तक चला गया :डी

मतलब यह सब कुछ सान्वी सोच रही थी उस रात को अपने कमरे में बीएड पर लेते हुए वो इस लिए के उस्सको चावला साहब ने कहा था के किआ पता के अब उस्सको आरव सेक्स की नज़र से देखने लगा है क्यूंकि अब वो शादी शुदा है और सेक्स करने लगा और समझने लगा है….. इसी बात को लेकर सान्वी ने वो सब कुछ सोचा के वो किश तरह से धीरे धीरे आरव के करीब गयी थी और किश तरह से उस से दूर हुई थी और कैसे 3 साल बाद आरव यूनिवर्सिटी से वापस नार्मल होकर वापस आया था….

अब उसस्के वापस आने से लेकर अब तक सान्वी और आरव के रिश्ते कैसे रहे यह बीच बीच में छोटे छोटे फ़्लैश बैक में बताया जाएगा; उस तरह के 23 उपदटेस के फ्लैशबैक में नहीं…..

तो इस दिन को याद होगा आप सब को के हुआ यह था के आरव अचानक से सवेरे ऑफिस से वापस आगया था जबकि सान्वी और चावला साहब काउच पर इंटिमेट हो रहे थे, सान्वी की जांघें दिख रहे थे और आरव गेराज के दरवाज़े से अचानक अंदर आगया था, तब सान्वी आअराव से बातें करने गयी जब चावला साहब अपना व्हिस्की पीते हुए आरव और सान्वी को बात करते हुए घुर्र रहा था…. जिस तरह से आरव सान्वी के हाथ पाकर रहे थे, जिस तरह से उसस्के बालों से खेल रहा था बात करते वक़्त, वो सब कुछ hi देख कर चावला साहब ने सान्वी से कहा था के हो सकता है के आरव भी उसस्के तरफ सेक्सुअली इंटरेस्टेड हो रहा है….

मगर चावला साहब को तब भी यह सब बिल्कुल पता नहीं था जो कुछ पिछले 23 उपदटेस में आप लोगों को बताया गया. मगर सान्वी को तो सब अच्छी तरह से पता था. तो करना यह है के हमको सान्वी के मैं का पता लगाना होगा के अब 5 सालों के बाद उस्सकी किआ नज़र्या है आरव के तरफ, आरव के लिए. इस वक़्त सान्वी ने उन् पिछले गुज़रे हुए दिनों के बारे में सोचने के बाद किआ फील किया? और राइट नाउ सान्वी किआ सोच रही है जब पूरा विज़न कर लिया तब? चलें सान्वी के कमरे में वही देखते हैं के सान्वी किआ कर रही है इस वक़्त…..

सान्वी दीप्ति को सुला चुकी थी और उस्सको सम्भोग करने की बहोत मैं कर रहा था इस लिए निचे गयी थी चावला साहब के पास मगर वो नशे में धुत था तो सान्वी वापस आकर चावला साहब के कहे हुए बातों पर आरव को लेकर सोचने लगी थी. और अब उन् दिनों को याद करने के बाद खुद से यह कहने लगी,

“सब कुछ डिलीट कर दिया था मैं ने मेमोरी से तो यह सब आज क्यों वापस आये मेरे ज़हन में? किआ आरव भी यह सब सोचता होगा आज भी? किआ आरव के पास वो मेरे रिकॉर्ड किये हुए वीडियोस आज भी होंगे? मुझे किसी दिन छुपके से उसस्के लैपटॉप में चेक करना होगा… अगर होगा तो मेरे नाम से hi सेव किया होगा उस्सने…. मगर पासवर्ड प्रोटेक्टेड ज़रूर होगा, तो किआ करूँ किआ उस से उन् दिनों के बारे में कुछ सवाल करूँ किआ? वो किआ सोचेगा अगर मैं ने वो सब उस से पूछा तो?... मगर अब तो वो एक मातुरे यंग मन हो गया है, बहोत hi रेस्पोंसिबल और सीरियस भी है… अब तो संजना भी है उस्सकी ज़िन्दगी में….. किआ उन् दिनों को वहां यूनिवर्सिटी में आरव उन् लड़कियों के साथ बाहर गया होगा? किआ शादी से पहले उस्सने सेक्स किया होगा? मैं ने उस से उन् दिनों के बारे में बिल्कुल भी बात नहीं किया और नाह hi उस्सने कभी कुछ कहा मुझसे…. जब से वो वापस आया ऐसा बेहवे किया के कभी भी हम दोनों के बीच कुछ हुआ hi नहीं ….. हम्म्म सही तो किया उस्सने मैं ने उस से कहा था के सब कुछ डिलीट करना है मेमोरी से तो उस्सने वही किया नाह….. ोफो मैं भी नाह पता नहीं किआ किआ सोचने लगी हूँ धत!!”

सान्वी अब वो सान्वी नहीं थी जो उस वक़्त थी जिस ने आरव को उतना नसीहत दिया tha…Saanvi तो अब अपने ससुर से इश्क फरमाती थी और सेक्स के तरफ उस्सकी नज़र्या अब कुछ और hi थे.. जितना अब सान्वी को सेक्स की ज़रूरत और सेक्स की जानकारी थी उन् दिनों तो उतना नहीं थी, उस्सको कभी नहीं पता था के एक दिन अपने ससुर के साथ hi वो प्यार कर बैठेगी… हाँ मगर यह सान्वी ने ज़रूर कहा था आरव से के अगर उन् दिनों आरव मातुरे होते तो शायद वो उसस्के पास चली भी जाती और उस्सको सेक्सुअली खुश कर भी देती….. तो ससुर तो बहोत hi मातुरे इंसान थे, मतलब के सान्वी ने जो आरव में नहीं पाया था वो चावला साहब में मिल गया था सान्वी को… और दोनों के बीच हालात hi कुछ ऐसे पैदा हुए थे, साथ रहने की एक दूसरे के केयर करने ki…aur किन्न हालातों में दोनों एक दूसरे के करीब हुए थे यह सब तो हम जानते hi हैं.. यह भी सान्वी ने ठीक hi कहा था आरव को के जब दो इंसान एक साथ रहते हैं, एक दूसरे के हरकतों को पसंद करने लगते हैं, एक दूसरे के करीब होते जाते hein…yeh सान्वी ने उस वक़्त कही थी आरव को जब वो चावला साहब के बिल्कुल भी करीब नहीं हुए थे.. और उसी के ज़िन्दगी में वैसा hi कुछ हुआ जो नसीहत वो आरव को दे रही थी उन् दिनों को….

सान्वी यह भी सोचने लगी के उस्सने आरव को इतना कुछ कहा सुनाया था उस्सने और आरव के इंटिमेट रिश्ते के बारे में तो अब किआ होगा अगर आरव को सान्वी और चावला साहब के रिश्ते के बारे में पता चला तो? आरव तो बहोत hi सुनाएगा तब सान्वी को, बहोत गालियां भी दे सकता है, ज़रूर यह कहेगा के वो इतना तड़पता रहा उसस्के साथ सोने के लिए और सान्वी उसस्के पिता के साथ सोती रही…. यह सब सोचते हुए सान्वी कभी घबरा जाती.

अब सान्वी यह सोचने लगी के जिस दिन आरव वापस आया कितना खुश था और उस्का व्योहार कैसे था उसस्के तरफ उस दिन को, फिर सोचा के नहीं उस से पहले वो चावला साहब और विवान के साथ उसस्के ग्रेजुएशन सेरेमनी में गयी थी दीप्ति को आया के साथ चोरर कर… पर वहां सिर्फ एक बार आरव से मिली थी और सिर्फ hi hello हुआ था और एकांत फोटो लिए गए थे क्यूंकि आरव अपने दोस्तों के साथ ज़्यादा टर्र रहता था, तो सान्वी ने याद किया के जिस दिन वापस आया था वो दीप्ति को गॉड में लिए कड़ी थी लाउन्ज में और आरव उस से गले मिलने को बढ़ा था मगर क्यूंकि दीप्ति उस्सकी गॉड में थी वो सान्वी से गले नहीं मिल पाया था बुसस सान्वी का हाथ अपने हाथ में लेकर चूमा था और दीप्ति को अपने गॉड में लेकर चूमने लगा था…. उस दिन सान्वी को बहोत अच्छी तरह से याद है के सान्वी की ेंखें भर आयी थी और ेंसू टपकने को hi थे के आरव ने गिफ्ट्स के बैग खोल दिया और सबके लिए गिफ्ट बांटने लगे थे तो सान्वी ने अपने ेंसुनवों को रोक लिया था. उस दिन सान्वी आरव को घंटों भर देखती रही…. मगर उस दिन तो आरव ने कुछ ऐसा नहीं फील होने दिया था के उस्सने सान्वी को मिस किया या उसस्के साथ ऐसा वैसा कुछ था यह है…. तो सान्वी ने सोचा और खुद से कहा भी, “नहीं नहीं आरव ने मुझसे बेहतर सब कुछ डिलीट कर दिया hai….wo सब कुछ भूल चूका है और उस बारे में मुझको भी बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए…”

पर तब सान्वी को यह भी याद आया के पिछले दो सालों में जब से आरव वापस आया है कितने hi बार वो उसस्के करीब हुई, आरव ने कई बार उसकी छोटी खींचे, उसस्के काँधे पर हाथ रखा, कितने मज़ाक किये, कितने hi बार एक दूसरे को गिफ्ट diye…..phir भी आरव भी अपने भैया की तरह सिर्फ काम काम काम….

चावला साहब ने तब से ऑफिस जाना बांध किया जब दीप्ति पैदा होने वाली थी, मतलब उसस्के ठीक 1 महीने pehle…aya को भी उस्सने वापस कर दिया था और घर पर रहने लगे थे सान्वी के देख भाल करने के लिए और अपने कंप्यूटर से ऑनलाइन सब कुछ ऑफिस के कामों को कण्ट्रोल करता और फिर विवान तो था hi ऑफिस में हमेशा.

और जब आरव ने भी विवान को ज्वाइन कर लिया ऑफिस में वापस आने के बाद तो दोनों भाई एक साथ जाते सुबह को और वापस भी एक साथ एते थे, एक hi कार से भी जाते थे, मगर कभी कभार आरव को पहले आना होता तो वो कंपनी की ड्राइवर से उस्सको घर ड्राप करने को कहते तब वो पहले आते मगर बहोत hi कम दिनों को ऐसा हुआ करता था….

तो सान्वी को कुछ भी ऐसा नहीं दिखा जो आरव के वापसी के बाद में ऐसा लगे के आरव सान्वी के तरफ ज़्यादा क्लोज होने की या कुछ करने की कोशिश किया हो…. सान्वी ने सोचा के चावला साहब ऐसे hi उस्सको वेहम हो रहा hoga…..yeh सब सोचते सान्वी को नींद आ गयी….

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
भाई आप नहीं चाहते थे के इस फ्लैशबैक का अंत हो हहहहए सच कहूं तो मैं भी नहीं छठा था... इसी लिए कहा था के 6 उपदटेस होंगे फ्लेशबैक्स के मगर 23 हो गया.... मगर आप से एक बात कहूं भाई बहोत से लोग ऐसे हैं जिनको फ्लैशबैक नाम सुनके बोरिंग होती होती है पता नहीं क्यों... अरे फ्लैशबैक ज़िन्दगी के कुछ बीते हुए पल होते हैं जिससे हम अक्सर सोचते हैं और उन् यादों में डूब जाते hein...yehi तो होता है फ्लेशबैक्स.... मगर मेरे एक नहीं कई रीडर्स हैं जिनको फ्लस्कबैक पसंद नहीं आते वह लोग चाहते हैं कहानी सिर्फ एक्चुअल प्रेजेंट में लिखूं यह तो बिल्कुल असंभव है bhai...koyi भी कहानी हो उस में फ्लैशबैक ज़रूर होते हैं!!

आरव ने कैसे अपने अंदर बदलाव लाया वो खुद बताएगा धीरे धीरे छोटे छोटे उपदटेस में बताया जाएगा आने वाले उपदटेस mein...aur वो सान्वी को hi बताएगा क्यूंकि सान्वी सं जान्ने की कोशिश करेगी ....

हाँ यह आप जानना चाहते हो के आरव के आने के बीच उन् दोनों के बीच कैसे सब गुज़रा होगा.... यह भी पता चलेगा भाई मगर बाद में.... मगर वैसे 3 साल गुजरने के बाद इंसान बहोत कुछ खुद भुला देता है या भूलने की कोशिश करता hai...aur फिर जब आरव आया तो अपनी मिन्नी भतीजी से जो मिल गया उसस्के साथ वक़्त बड़े प्यार से गुज़रा आरव का तो पुराणी बातों को ज़्यादा याद करने का मौका hi नहीं मिला, रंजिश को दूर रखा गया उस्सने अपने आप को सच में एक मातुरे आदमी बना लिया था तब तक....

हाँ सान्वी की करैक्टर को ठीक पहचाना आप ne...haan सही याद किया आप ने के सान्वी खुद को मारने की कोशिश में लगी थी जब चावला साहब उस्सको भाव नहीं दे रहे थे आग लगा दिया था याद है नाह? हाहाहाहा सही पकड़ा भाई.... संवी संम्वी hi है..

मुहे ख़ुशी है भाई के इस कहानी में आप को वो सब मिला जो आप धुनते थे....

कहानी के साथ बने रहना भाई अभी बहोत hi कुछ होना बाकी है.....

आप का तेहि दिल से शुक्रिया सॉफ्ट भाई :लव:
 
अपडेट 128 थ्री टुगेदर


हमेशा की तरह सुबह 5 बजे सान्वी किचन में पायी गयी वही अपनी निघ्त्य में ऊपर गाउन पहने हुए, बाल खुले हुए, जिस्सको बार बार वो अपने चेहरे से हत्ता रही थी काम करते हुए. मगर आज कुछ अजीब हुआ, 5.15 पर संजना ने भी उस्सको ज्वाइन किया किचन में मगर वो सिर्फ निघ्त्य में थी बिना गाउन के, उसी निघ्त्य की स्ट्रैप्स काँधे से बार बार उस्सकी गोरी बाज़ू पर सरक जाती थी, कोई काम करती थी तो बूब्स नज़र आने लगते थे ऊपर से बिना ब्रा के थी…. सान्वी खुद उस्सकी बूब्स देख कर छुप छुप कर हंस रही थी….. सान्वी ने याद किया बाथटब में उस दिन दोनों कैसे एक दूसरे के जिस्म को चुम चाट रहे थे….

सान्वी ने कहा, “तुझे ऐसे बिना ब्रा के निघ्त्य में रहना ाचा लगता है? शर्म नहीं आती तुमको किआ?”

संजना: “ोफो किआ करूँ मेरी तो आदत है घर पर ऐसे hi रहती थी पापा के सामने भी तो मुझे नार्मल लगता है हाँ मगर सिर्फ आप के उस विवान से बचना पड़ेगा बाकी साहब और आरव के सामने तो ऐसे hi रह सकती हूँ हीहीहीही, आप का विवान जी कब उठते हैं?”

सान्वी: “वो तो दस बजे उठेंगे, मगर तुमको उस से क्यों बचना पड़ेगा वो तो तेरे तरफ देखेगा भी नहीं वो अपने बाप की तरह ठरकी नहीं है हेहेहे!”

संजना: “रियली? मुझे तो ठरकी लोग पसंद हैं, वह लोग हम औरतों को इम्पोर्टेंस जो देते हैं, हम को फील करते हैं के हम सेक्सी हैं, हम में कुछ हैं जो उनको अत्त्रक्ट करते हैं, बाकी के जो ठन्डे आदमी होते हैं उन् से तो मैं नहीं इम्प्रेस होती हीहीहीही”

सान्वी: “हे तुम ने मेरे पति को ठंडा कहा! एक बचा पैदा कर चूका है वो हाँ!”

संजना: “अरे उनको तो नहीं कहा मैं ने, बाकी लोगों के बारे में सोच रहा था जी!..... सान्वी आप के गले लगने को मैं कर रहा है लग जॉन किआ?”

सान्वी ने उसस्के चेहरे में मुस्कुराते हुए देखा और अपने बाहों को खोल कर ेंखों के इशारे से उसस्के बाहों में आने को कहा.

संजना झट से सान्वी के बाहों में गयी और दोनों ने एक दूसरे को कस्सके हुग किया…. संजना की निघ्त्य की स्ट्राप सरक गयी थी जिस्सको सान्वी ने ऊपर करते हुए उसस्के काँधे को चूमा, और संजना ने सान्वी के गाल को चूमा फिर उसस्के होंठों पर चूमा और सान्वी बाहर के तरफ देखते हुए कहा, “वो उठने वाला है, उस्का टाइम है वो अभी टेरेस पर एक्सरसाइज करने जायेंगे, देखना तुम…”

संजना: “हम्म आप तो उनके हर लम्हे को पहचानते हो, वो कब किआ करता है सब पता है आप को!”

दोनों एक दूसरे के बाहों में hi थे और सान्वी ने कहा, “हम्म्म इतने दिनों से एक साथ रहते हैं तो पता तो चल hi जाता है ….”

संजना: “ाचा आप मुझे बताओ आप कैसे उंनसे इतना क्लोज हुए के उनके साथ आप भी सोने लगे? मतलब आप को उंनसे प्यार हुआ या सिर्फ ऐसे hi मौज मस्ती के लिए सोते हो?”

सान्वी तब हुग को ब्रेक करते हुए बाहर चावला साहब के कमरे के दरवाज़े के तरफ देखते हुए कहा,

“उफ़ यह एक लम्बी कहानी है संजना, इतने दिनों से एक साथ रहते रेथे समझलो के प्यार हो गया उन् से…. वो बहोत hi केयरिंग इंसान है, मेरे इतना ख्याल रखते थे के मैं इग्नोर नहीं कर पायी, मेरे हस्बैंड से बहोत ज़्यादा वो मेरे ख्याल रखने लगे थे ख़ास कर दीप्ति के पैदा होने से पहले… मैं अकेली रहती थी दिन भर घर में, उन्हों ने ऑफिस जाना बांध कर दिया था मेरे लिए, मेरे देख भाल करने के लिए, 7 महीनों तक उन्हों ने मेरे पथ में दीप्ति को बढ़ते देखा और मेरे हर छोटे छोटे ख्वाहिशों को पूरा kiya….mere हस्बैंड तो ऑफिस के इलावा और कुछ नहीं करता tha….ab समझलो के सेक्स तो उन 7 महीनों में मेरे साथ किया hi नहीं था क्यूंकि मैं प्रेग्नेंट थी… फिर भी मुझे ज़रुरत तो महसूस होती थी, मगर विवान समझता था के प्रेग्नेंट हूँ इस लिए उस्सको नहीं करना चाहिए…… उन् दिनों मैं ने कभी चावला साहब के साथ ऐसे रिश्ते के बारे में नहीं सोचा था…. मगर वो मुझे इतना छूटे थे कभी भी के कभी कभी मेरे जिस्म के रोवाण रोवाण तरस जाते थे प्यार करने के liye…wo जब मुझे छूटे थे तो सेक्स के नियत से नहीं, बुसस मुझको हेल्प करते वक़्त, मेरे दोनों पाऊँ बहोत फूल गए थे जब मैं प्रेग्नेंट थी, ख़ास कर आखरी के 2 महीनों में तो चलना मुश्किल होता था, चावला साहब मुझको उठाकर यहाँ से वहां करते थे….. मैं तो ऊपर रहती हूँ और वो निचे, मुझे कभी निचे आना होता तो मुझको बीएड से उठा कर निचे लेट थे अपने गॉड में…… इतना क्लोसनेस्स बढ़ गए थे के किआ बताऊँ…. मुझे खुद ऐसा लगता था के वही मेरा रियल हस्बैंड है….”

संजना बड़े आराम से सब सुन रही थी और कहा,

“वूऊऊऊऊ हाउ रोमांटिक ा मन हे इस नाह?!”

सान्वी, “हम्म्म रोमांटिक तो वो वो सच में है….”

इतने में चावला साहब के कमरे का दरवाज़ा खुला और सान्वी ने किचन के सिंक के पास पीठ करते हुए फुसफुसाते हुए कहा, “वो उठ गए शह्ह्ह्ह!”

तब संजना चावला साहब के कमरे के तरफ उनको टॉयलेट के तरफ जाते हुए देखा, उनको नज़रों से फॉलो किया, मगर चावला साहब ने नहीं देखा के संजना भी किचन में है, उस्सने सिर्फ सान्वी को देखा और चला गया.

कुछ देर बाद ब्रश वग़ैरा करके चावला साहब चले गए टेरेस पर अपने एक्सरसाइजेज करने को तब संजना किचन से धीरे धीरे सान्वी से बात करते हुए पूछा, “उन्हों ने टिया कफ कुछ भी नहीं लिया? मैं ने सोचा वो यहाँ आएंगे आप से मिलने…”

सान्वी: “नहीं मैं थोड़ी देर में उनको वहीँ टिया देने जाउंगी, तब मुझको जकरेगा और किश करेगा… मगर कभी कभी एते हैं वो भी किचन में और यहीं मुहको बाँहों में भरते हैं, उसस्के मूड पर देपेंद करता है”

संजना ने कहा, “मैं यहीं छुप कर रहूंगी उंनसे मत कहना के मैं जाग गयी हूँ, मैं आप को उनके साथ देखना चाहती हूँ ok? हीहीहीही!”

सान्वी मान गयी और कुछ देर बाद वो एक कप चाय लेकर गयी टेरेस पर उनको देने के लिए.

संजना किचन से सब देख रही थी, सान्वी जब उनके करीब हुए तो चावला साहब ने झुक कर उनको चाय पिलाने को कहा…. सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “क्यों जी आप छोटे बचे हो जो चाय पिलाना पर रहा है आप को?”

चावला साहब ने बड़े आशिकाना मिसेज में कहा, “अरे जानेमन तुम्हारे हाथ से तो ज़हर भी पिळुन मैं!”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “बुसस बुसस ज़्यादा फेंकिए मैट मैं रख देती हूँ चाय यहाँ बाकी के खुद पी लेना आप मैं चली…”

संजना सब सुन रही थी और दोनों को वैसे एक साथ देख कर संजना को बहोत अच्छा लग रहा था, लगता था सच में दो बहोत प्यार करने वाले हैं बिल्कुल जैसे हस्बैंड और वाइफ लग रहे थे दोनों.

और जैसे hi सान्वी ने कप को टेरेस के छोटे से राउंड टेबल पर रखा झट से चावला साहब ने सान्वी को अपने बाहों में लिया और उस्सको किश करने लगे.

संजना किचन से देख कर कहा, “वूऊओऊ हाउ रोमांटिक थे अरे थी तवो, बहोत प्यार हैं दोनों में देखो तो बिल्कुल पति पत्नी लग रहे हैं, वह चावला साहब वह, आप बड़े आशिक hi हो शाबाश!”

सान्वी ने अपने बाहों को उनके गले में दाल दिया था उनको किश करते वक़्त और किश के बाद उनके गले से लग कर कहा, “बड़ा प्यार ारः है अभी और कल रात मुझको आप की ज़रूरत थी तो जनाब नशे में धुत सो रहे थे!”

तो सान्वी को जाकर हुए hi चावला साहब ने कहा, “अरे तो तू आयी क्यों नहीं? मुझको जगा के शुरू तो करती, तुमको नहीं पता किआ करना चाहिए था मुझको उठाने के लिए?”

सान्वी ने कहा, “हाँ पता है आप के पंत उतार कर आप को वहां सहलाना चाहिए था तब वो खड़ा होता और आप जागते….”

चावला साहब: “हाँ तो फिर किया क्यों नहीं?!”

सान्वी: “वो करने को मैं नहीं था कल, सिर्फ अंदर लेने को बहोत मैं कर रहा था उस वक़्त, आप को उठाने में बहोत वक़्त लगता नाह जी!”

चावला साहब ने और ज़ोर से सान्वी को जकरते हुए अपने लिंग को ज़ोर से दबाया सान्वी के निचे और कहा, “तो चलो मेरे रूम में अभी पूरा कर देता हूँ तेरी तमनाः!”

सान्वी ने उनके बाहों से निकलते हुए कहा, “नहीं नहीं अभी नहीं, बाद में अब, किचन में बहोत कुछ करना है अभी…..”

और सान्वी चली गयी वापस.

जब वो किचन मैं आयी तो संजना ने कहा, “वह भाबी किआ सन था! वो आप को बेहद चाहते हैं नाह?! किआ हर सुबह को ऐसा hi होता है आप दोनों के बीच?”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम्म हाँ ऑलमोस्ट एव्री मॉर्निंग यह होता है, कभी कभी तो मुझको उठा के अपने कमरे में लेजाते हैं और वो सब करके वापस किचन में आती हूँ हाहाहा!”

संजना बहोत इम्प्रेस और खुश हुआ वो सब देख और जान कर. शुक्र है बिल्कुल भी जलन नहीं थी दोनों में.

और कुछ देर बाद जब चावला साहब किचन में गए तो संजना को वहां पाकर बहोत हैरान हुआ और सान्वी के चेहरे में देखते हेउ पूछा, “अरे, तुमने बताया नहीं के यह भी किचन में है आज!”

संजना हंसती जा रही थी ज़ोरों से…. सान्वी ने चावला साहब को बताया के संजना ने बताने से मन किया हुआ था इसी लिए उनको नहीं बताया. तब चावला साहब संजना के तरफ बढ़ा और उस्सको जकरा, और सान्वी सिंक के पास बर्तन धोते हुए दोनों को देखते हुए हंस रही थी और कहा, “अब तेरी बारी है संजना!”

क्यूंकि संजना सिर्फ निघ्त्य में थी बिना गाउन के तो जिस दम चावला साहब ने उस्सको जकरा उस्सकी स्ट्राप तो निचे गए hi थे और जब चावला साहब संजना को किश करने लगे तो संजना के बूब्स बाहर आ गए जिस्सको सान्वी देख कर हंससने लगी….

किश के बाद चावला साहब ने सान्वी को भी पास बुलाया और दोनों बहुओं को एक एक बाज़ू में लेते हुए दोनों को अपने सीने से ज़ोर से लगाते हुए कहा, “वह मैं कितना खुश किस्मत हूँ के ऐसे दो अनमोल हीरे मिले हैं मुझे मेरे घर में, एक फोटो होना चाहिए था अभी….. तो संजना ने कहा “वेट मैं अपनी मोबाइल लेकर आई हूँ” और वो जाने लगी तो चावला साहब ने कहा,

“आरी सुन ऊपर कहाँ जाएगी अपनी मोबाइल लेने, मेरे कमरे से मेरे मोबाइल लेकर आह नाह जल्दी से मेज़ पर है मेरे बीएड के पास…..”

जब संजना किचन में वापस आयी उनके मोबाइल लेकर तो देखा के दोनों किश कर रहे हैं तो एकांत फोटो ले लिया सान्वी और चावला साहब को किश करते हुए… फिर वो भी गयी उनके बाहों में और और चावला साहब ने उन् दोनों को एक साथ अपने बाहों में भरके कई सेल्फीज़ लिए, कुछ क्लिक्स उन्हों ने किये और कुछ संजना ने क्लिक किये कोई 20 फोटोज लिए तीनों ने एक साथ.

तो बे कॉन्टिनोएड…….
 
अपडेट 129 सान्वी & चावला अगेन

संजना ने सान्वी के सामने चावला जी को मुंह में किश किया और सान्वी ने संजना की बट पर उस वक़्त हलके से एक चमाट मारी हँस्ते हुए…

और कुछ देर बाद सब अलग हो गए. चावला साहब अपने कमरे में चले गए, सान्वी किचन में बिजी रही और संजना आरव को उठाने के लिए अपने कमरे में गयी.

जब दोनों भाई तैयार हो गए ऑफिस के लिए तो एक साथ ब्रेकफास्ट कर रहे थे किचन के पास डाइनिंग रूम में, वेल डाइनिंग रूम और किचन एक hi रूम थे, मगर थोड़ा सा डिस्टेंस था जिस जगह पर ओवन, सिंक वग़ैरा थे उस जगह से.

विवान चेयर पर बैठे टेबल पर झुके खा रहे थे, और एक तरफ आरव थे. सनजना ने कपड़े वदल लिए थे अब, वो एक सिंगल ड्रेस में थी जो उस्सकी घुटनों के ऊपर थे, मतलब उस्सकी जांघें दिख रहे थे और वो बैठी भी इस तरह से थी के कोई नज़रें फेरर कर देखे तो उस्सकी पंतय भी दिख जाते. खाते वक़्त आरव बातें कर रहा था. वो सान्वी की तारीफ़ कर रहा था के ब्रेकफास्ट स्वादिष्ट बानी है. और सान्वी के तरफ देखते हुए कह रहा था वो. उस वक़्त संजना सान्वी को देख कर मुस्कुरायी और आरव ने भी सान्वी के तरफ देखा था. तब विवान ने कहा, “क्यों पहली बार उस्सकी बनायी ब्रेकफास्ट खा रहे हो किआ तुम?” तुरंत उस्सको सुनकर संजना ने कहा, “हीहीहीही आप बोलते भी हो?” यह सुनकर विवान का निवाला हाथ में रह गया और खुले मुंह उस्सने पहले संजना को देखा फिर सान्वी के तरफ तो सान्वी ने भी हँस्ते हुए कहा, “संजना ने ठीक hi तो कहा, कब आप की आवाज़ सुनाई देती है इस घर में?!” तो विवान ने मुंह बनाते हुए कहा, “मुझे बेकार की बातें करना पसंद नहीं बिल्कुल, वो तो आरव का काम है उस से बातें करो तुम दोनों मैं निकलता हूँ अब” और मुड़कर आरव के तरफ देखते हुए कहा, “तू आज अपनी कार से आना मुझे वो डील के लिए कुंजल फर्म के यहाँ जाना है बाद में ऑफिस आऊंगा.” इतना कहकर वो निकला गए.

सान्वी ने उनके बाउल उठाते हुए कहा, “यह कभी भी अपने ब्रेकफास्ट कम्पलीट नहीं करते, हमेशा थोड़ा सा चोरर जाते हैं!”

तो आरव ने सान्वी के तरफ देखते हुए कहा, “आप कम्पलीट कार्डो नाह भाबी, कहते हैं झुटान खाने से प्यार बढ़ता है!” और उस्सको विंक किया आरव ने तो संजना जो उसस्के पास बैठी थी उस्सको कहा, “अरे!! अपने भाबी को ेंख मारते हो तुम?!” तो आरव एक मस्करी भरे मुस्कान से सान्वी को देखते हुए संजना को रिप्लाई किया, “वो मेरी भाबी कम फ्रेंड ज़्यादा थी!!” तो संजना ने कहा, “थी?! अब नहीं है?” तब सान्वी भी मुड़कर आरव का जवाब सुनने के लिए उसस्के चेहरे में देखने लगी तो आरव ने संजना को रिप्लाई किया मगर सान्वी के तरफ देखते हुए, “अब तुम आगयी हो नाह संजू डार्लिंग, तुम्हारे आने से पहले की बात कर रहा था मैं!”

इतना कहकर आरव भी उठा, वाश बेसिन में अपना हाथ धोया, मिरर में देख कर अपने बाल सवार और कुछ सामान हाथ में लेकर, संजना को किश किया, उस वक़्त सान्वी सिंक के पास कड़ी दोनों को देख रही थी. जिस वक़्त आरव झुक कर संजना को अपने गाल दे रहा था किश करने के लिए वो सान्वी को देख रहा था, सान्वी भी उसी को देख रही थी, मगर जैसे उस्सने देखा के आरव उस्सको देख रहा है तो सान्वी ने अपनी नज़रें एक तरफ कर लिए. और उस्सने संजना को bye कहा और बाहर के तरफ निकलने लगा तो संजना ने कहा, “भाबी को bye नहीं कहोगे?!” तो आरव बिना पीछे मुड़े कहता गया थोड़ा ऊंचे आवाज़ में “bye भाबी!” सान्वी उसी को मुस्कुराते हुए देख रही थी और धीरे से कहा, “bye आरव”

गेराज में तो किचन के दरवाज़े से hi जाते हैं, तो आरव सान्वी के पास से hi होकर गुज़रा, और सान्वी को एक खुशभु महके आरव के साथ जिस्सको सूंघ कर सान्वी को कुछ याद आया…..

यह वो परफ्यूम था जो सान्वी ने आरव को गिफ्ट किया था जिस दिन वो एयरपोर्ट जा रहा था यूनिवर्सिटी के लिए… सान्वी ने hi आरव के कपड़ों में, उसस्के गले पर इस परफ्यूम को लगाया था उस दिन और जिस वक़्त सान्वी आरव के बाहों में थी एयरपोर्ट पर जाकर हुए, तो आरव के कपड़ों से वो पेर्फुमेस सान्वी के कपडे में ट्रांसफर हुए थे… तो आरव के रवाना होने के बाद कई दिनों तक सान्वी ने उस साडी को नहीं धोया था सिर्फ आरव की वो खुशभू को अपने साडी में बरकरार रखने के लिए…… इस वक़्त सान्वी उस दिन को और उन् लम्हों को याद करने लगी thi…tab तक आरव की कार गेट से निकलते देखा सान्वी ने, संजना बाहर चली गयी थी गेट के पास आरव को सी ऑफ करने, अंदर से सान्वी उस्सको देख रही थी….

और अचानक सान्वी की विज़न को तोडा दीप्ति ने स्टैर्स से उतारते हुए अपने नन्ही नन्ही पाऊँ को एक के बाद एक स्टैर्स उतारते हुए कहा, “मम्मीयिययी, चाचींईईई मैं उठ गईइइइइइ!!!”

उस्सकी आवाज़ बाहर तक गयी जिस्सको सुनकर संजना भागती हुई अंदर आयी सान्वी को देखते हुए, और जल्दी से जाकर दीप्ति को गॉड में उठाते हुए उस्सको हज़ारों चुंबन देते हुए उस्सको टॉयलेट की तरफ ले गयी….. सान्वी उस्सको देखती रही मुस्कुराते हुए, तब तक चावला साहब अपने कमरे से निकली सान्वी को देखते और कहा, “यह दीप्ति जब जागती है तो शोर तो करती थी hi अब उस्सको एक पार्टनर मिल गयी है और ज़्यादा शोर करने के लिए संजना में!!” तो सान्वी ने उनके पास जाते हुए उनके गिरेबान को ठीक करते हुए कहा, “हम्म और उस पार्टनर को किश ने ढूंढा? आप ने hi तो!”

और चावला साहब ने सान्वी को जकरा और अपने कमरे में चलने को कहा. तो सान्वी बोली, “अरे दीप्ति को ब्रेकफास्ट खिलाना है अभी!” चावला साहब ने अपने होंठों को सान्वी के गर्दन पर ब्रश करते हुए कहा, “अरे उस्सको संजना संभाल लेगी नाह, हम तो अब आराम से अंदर रह सकते हैं चलो तो, कल रात की कमी पूरा कर देता हूँ नाह!”

सान्वी ने कहा, “नहीं वेट, पहले मैं संजना को समझाड़ूं के दीप्ति को किआ देना है उसस्के बाद आती हूँ, आप यहीं ठहरो!”

और सान्वी ने जाकर दीप्ति को संजना के साथ ब्रश कराई और वापस आये तीनों किचन में तो सान्वी ने दीप्ति का ब्रेकफास्ट सर्वे किया जिस्सको संजना ने लिए खिलाने के लिए, तो चावला साहब आकर सान्वी को बाहों में भरा संजना के सामने और कहा, “तुम दीप्ति को संभालना तब तक हम कुछ देर में आते हैं okay?” तो संजना दोनों को देखते हुए एक नटखटी ऐडा से कहा, “मैं भी ज्वाइन करूँ?!” तो सान्वी ने उस्सको हलके से मारा तब संजना ने कहा, “इतस okay मैं मज़ाक कर रही थी आप दोनों जाओ मैं संभाल लुंगी दीप्ति को!”

कमरे में पहुँचते hi चावला साहब ने झट से सान्वी की गाउन को निकाल फेंका और उस्सकी निघ्त्य में उस्सको जाकर; खड़े हुए दोनों एक दूसरे को किश करते हुए चलते गए बीएड के तरफ, उस दौरान सान्वी की बाहें चावला साहब के पीठ पर फेरर रहे थे और चावला साहब वैसे hi किश जारी रखते हुए चलते जा रहे थे मगर उसी वक़्त सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप को सरकाते हुए बढ़ रहे थे बीएड के तरफ और बीएड तक आने पर सान्वी की निघ्त्य निचे फर्श पर पाए गए…. चावला साहब का एक हाथ सान्वी के बूब को दबाने लगे तब तक बीएड आगया और चावला साहब बीएड पर बैठे, और सान्वी ने उनके टीशर्ट निकला, वो उस वक़्त कड़ी थी उनके सामने, फिर सान्वी ने चावला साहब को लेटाया बीएड पर, और उनके पंत उनतारने लगे….. दिख रहा था कैसे सान्वी को उनकी ज़रुरत ज़्यादा थी उस वक़्त. चावला साहब लेते हुए सान्वी के चेहरे में देख रहे थे, और उनको दिखा के जिस बेसब्री और ख़ुशी से सान्वी उनके पंत फिर अंडरवियर निकाल रहे थे उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते और चूमते हुए, बिल्कुल ऐसा लगा जैसे किसी भटके हुए मुसाफिर को मंज़िल गयी हो. सान्वी कल रात से उनके साथ हमबिस्तर होना चाहते थे, उस आग को उस्सने बरकरार रखा रात भर और अभी बुझाने का वक़्त सामने आया था सान्वी के लिए.

चावला साहब का लुंड जमके खड़ा हो गया था सान्वी के मुलायम हाथों में आकर, और सान्वी ने खुद उनके दोनों टांगों के थोड़ा सा फेलाते हुए उनके लिंग को पहले किश किया, फिर अपनी जीब फेर्रा उसस्के ऊपर सान्वी ने तब मुंह में ले लिया और चुस्सने लगी नज़रों को ऊपर बीएड पर करके चावला साहब के चेहरे में एक तड़प देखते हुए……

चावला साहब से सेहेन नाह हुआ और जल्दी से सान्वी को अपने ऊपर उठाया, सान्वी उनके ऊपर थी, और सान्वी की पंतय अब भी उसस्के जिस्म पर थे मगर तब चावला साहब के लिंग पर रागढ रहे the…Chawla साहब सान्वी को उस पोजीशन में किया के सान्वी के बूब उनके मुंह में थे और जिस्म बिल्कुल उनके ऊपर थी सान्वी के. सान्वी खुद अपनी कमर को हिलाते हुए चावला साहब के लिंग पर अपनी योनि को पंतय समेत रागढ रही थी गर्दन को ऊपर उठाये हुए छत ताकते हुए.

तब धीरे धीरे चावला साहब के हाथ सान्वी के नितम्बों से होते हुए उस्सकी पंतय को निकल फेंका और झट से सान्वी ने अपने हाथ से उनके लिंग को अपने फिसलती हुई योनि के अंदर डाला और खुद अपनी कमर हिलाते हुए लुंड का मज़ा अपने अंदर महसूस करने लगी हांफते हुए.

चावला साहब पीठ पर लेते हुए थे और सान्वी उनके ऊपर कसमसाते हुए अपने जिस्म के अंदर उनके लिंग को अंदर बाहर होते हुए महसूस किये जा रही थी और चावला साहब के जीब भी चूस रही थी एक साथ.

ज़िदा देर नहीं लगी सान्वी को फील करते के चावला साहब भी उसस्के निचे अपने कमर को उठाकर ढाका देने लगे और सान्वी की चीख निकली, “आआआअह्ह्ह्ह उउउउउइइइइइइइ स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह uuuufffffffffff….. सान्वी झड़ने लगी उस्सकी योनि से जैसे नदी बहने लगे और चावला साहब का लुंड और भी बहोत ज़्यादा आसानी से अंदर बाहर होने लगा…. सान्वी लेट गयी उनके छाती के ऊपर अपने गाल सटाते हुए और हांफते हुए ज़ोरों से जबकि चावला साहब ने कुछ ढके और दिए तब जल्दी से अपने लिंग को बाहर निकाल के तमान वीर्य को सान्वी के और अपने जिस्म के बीच में चोर्रा…. सान्वी के पथ और चावला साहब के पथ के बीच सारे वीर्य लत पथ हो गए, और दोनों के पथ जैसे चिपक गए उनके वीर्य से…..

दोनों हांफते हुए कुछ देर वैसे hi लेते रहे एक दूसरे के ऊपर, किश करते, और एक दूसरे को सहलाते हुए जब बाहर से दीप्ति की आवाज़ सुनाई दिए चिलाते हुए “मुम्ममइय्यययय वापस ाजाआऊवो!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……….
 
अपडेट 130 सान्वी एंड चावला इन लव

संजना उस दिन शाम को 3 बजे अपनी कार लेकर निकली अपने पापा से मिलने जाने को. दीप्ति भी जाना चाहती थी मगर सान्वी ने कहा के दीप्ति को बुरी आदत पर जाएगी इस तरह से हर रोज़ कार में गुमने को, तो संजना ने दीप्ति को समझा बीझा कर घर पर hi रहने दिया और वो चली गयी.

सान्वी और चावला साहब तबसे लेकर शाम 7 बजे तक अकेले रहे एक लोविंग कपल की तरह कभी एक दूसरे के बाहों में तो कभी दीप्ति उनके बीच में जैसे चावला साहब hi दीप्ति के पिता थे.

चावला साहब कल की सान्वी और आरव के एक साथ रहने की बात को लेकर एक कन्वर्सेशन करने लगे सान्वी के साथ. तब दीप्ति उन् के बीच नहीं थी, उस्सको हमें थमा कर ऊपर उस्सकी छोटी जेल में चोर दिया था सान्वी ने. मगर बात किसी और सब्जेक्ट से शुरू हुई थी तब जाके आरव पर होने लगे.

लाउन्ज में काउच पर बैठे, सान्वी चावला साहब के बाहों में थे, उस्का सर उनके छाती से लगे हुए थे बिल्कुल प्यार में डूबे थे दोनों. हमेशा की तरह सान्वी उनके छाती के बालों में अपनी उँगलियाँ फरते हुए बात किये जा रही थी, और चावला साहब सान्वी के सर के बालों में अपने उँगलियाँ फरते हुए बात कर रहे थे.

सान्वी ने बड़े प्यार से पूछा,

“आप किश दिन को मुझसे इस तरह के चाहने लगे थे, बहोत पहले की बात है, दीप्ति के जनम से पहले या बाद में?”

चावला साहब ने कहा, “तुम यकीन नहीं करोगे अगर सच कहूंगा तो!”

सान्वी: “क्यों यकीन नहीं करुँगी, यकीन करुँगी आप बताएँ तो!”

चावला: “अगर मैं कहूं के जिस दिन तुम इस घर में पहले दिन आयी थी तभी से मैं तुमको चाहने लगा था तो यकीन करोगी?”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “नहीं अभी तो आप झूट बोल रहे हो!”

चावला: “देखा मैं ने कहा नाह के तुम यकीन नहीं करोगी!”

सान्वी उनके सीने से उठते हुए उनके चेरे में देखने लगी थोड़ा हैरानी से और कहा,

“मगर यह कैसे मुमकिन है? आप तो मेरे तरफ देखते भी नहीं थे उन् दिनों को, कब और कैसे आप मुझे चाहने लगे थे तब भला?”

चावला “तुम दुल्हन की लिबास में थी, मैं पीछे लाउन्ज में खड़ा था, तुम्हारा स्वागत विवान के दूर के चहियों और उनके बेटियों ने किया था, मैं तुम्हारे सामने था मगर तुम्हारी नज़र झुके हुए थे, मैं वहां किचन के पास खड़ा सीधे तुम्हारे चेहरे मं देख रहा था, जिस वक़्त तुमने वो चावल वाले बर्तन पर लात मार्के गिराया था मेरी नज़र तुम्हारे पाऊँ पर पड़े थे, तुम ने कुछ देर अपने पाऊँ को ऐसे hi हवा में उठाये रखा था, मैं तुम्हारे पाऊँ की रंग और उँगलियों को देख रहा था, अदमीरे कर रहा था, कितनी कोमल और नाज़ुक दिख रहे थे, फिर मैं ने नज़र ऊपर उठाकर तुम्हारे ेंखों को देखा , उन् में एक उदासी थी, शायद अपने घर को चौररने वाली उदासी थी, फिर तुम्हारे गालों को, नाक को, पेशानी को, थोड़ी को, तुम्हारे नाक की उस नथनी में जो चैन लगा हुआ है जो कान की बाली तक जाता था उस्सको देखा, तब देखा एक बार तुम्हारी नज़र मुझ पर पड़े उस वक़्त मैं ने नज़रों को हटाया एक पल के लिए….”

उस वक़्त सान्वी बहोत hi हैरान चावला साहब को सुन रहे थे और, अपने पाऊँ को अपने करीब किया और चावला साहब को दिखाते हुए कहा, “यह रहा किआ है इस में नार्मल तो है…..”

चावला साहब ने कहा. “तुम मेरी नज़रों से देखोगी तब नाह तुमको वो दिखेगा जो मुझे दिखा था….”

और चावला साहब ने तुरंत सान्वी की उस पाऊँ को चूमा, सान्वी को हंसी आयी और पाऊँ को खिंच लिया मगर अब चावला साहब सान्वी के पाऊँ को और चूमना और प्यार करना चाहता था… तो वो निचे फर्श पर बैठ गए और, सान्वी की पाऊँ को अपने हाथ में पकड़ने की कोशिश में था मगर सान्वी ने अपने पाऊँ को साडी के अंदर छुपा लिया हँस्ते हुए….

“नहीं चोररये नाह हम्म किआ कर रहे हो आप किआ है मेरे पाऊँ को चोररये नाह मुझको गुदगुदी हो रहा है हाहाहाहाहा!” ऐसा कुछ कहने लगा सान्वी जब चावला साहब उसस्के पाऊँ को पकड़ने की कोशिश में लग गया था….

आखिर में चावला साहब ने सान्वी की एक पाऊँ को अपने हाथ में ले लिया और वह, किआ बात है, कभी एक हसीं जवान औरत की गोरी पाऊँ को करीब से देखा है किसी ने? बहोत रोमांटिक होता है जब एक मर्द एक खूबसूरत गोरी, पाऊँ को अपने हाथों में लेता है, सहलाता है, चूमता है. यह सब चावला साहब करने लगा सान्वी के पाऊँ को… सान्वी के रौंदते खड़े हो गए थे उस वक़्त, और सिकुड़ सी गयी थी उस छुवन से….. वो चावला साहब के चेहरे में देख रही थी पाऊँ को अपने तरफ खींचने की कोशिश में, मगर चावला साहब को जैसे उसस्के उस पाऊँ से प्यार था, उस्सने पाऊँ को थोड़ा सा ऊपर उठके उसस्के तलवे को चुम्मा, और उसस्के उँगलियों को मुंह में ले लिए चुस्सने को… सान्वी ने ेंखें मुंध लिए और एक गहरी सांस लेते हुए तड़पती आवाज़ में कहा, “उफ्फ्फ प्लीज चोररये नाह किआ कर रहे हो आप, प्लीज बुसस कीजिये नाह अब तो!!”

चावला साहब ने तब ऊपर नज़रें करके सान्वी के चेहरे में देखा हाथ में पाऊँ को लिए हुए और कहा, “क्यों कैसा लग रहा है तुमको?”

सान्वी ने ेंखें खोली और उनके नज़रों की गहराई में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “उफ़ मैं नहीं बता सकती के कैसा लग रहा है आप बड़े वो हो! मुझको बहोत अजीब laga…weise आप ने पिछले 5 सालों में तो कभी नहीं कहा कुछ भी मेरे पाऊँ के बारे में और पिछले कई बार इश्क करते वक़्त भी आप ने तो मेरे पाऊँ को कबि भी नहीं छुआ ऐसे तो आज किआ हुआ आप को?!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए हाथ में में पाऊँ को थामे और सहलाते हुए कहा, “तुम तो ऐसे कह रहजी हो जैसे पिछले 5 सालों से तुमसे यह सब करता आया हूँ, हम ने तो सिर्फ 4 या 5 बार सेक्स किया है डार्लिंग, और हर बार रश में किया हैं, कभी ऐसे आराम से प्यार करने मौका कब मिला हैं हमें? तुम्हारे जिस्म के हर एक हिस्से को प्यार करता हूँ, पुरे जिस्म को एक्स्प्लोर करने का मौका hi कहाँ मिला है अभी? तुम्हारे साथ कभी 6 घंटे भी मिले साथ बिताने को तो भी कम होगा तुम्हारे पुरे जिस्म के हर कोने को छूना और चूमना और निहारना….”

संवी ने चावला साहब के गाल पर प्यार से अपने हाथ फरते हुए कहा, “इतना प्यार करते हो आप मुझसे? मुझे मालूम नहीं था, मैं समझी आप सिर्फ सेक्सुअली अत्त्रक्ट हो मेरे तरफ!!”

चावला साहब ने कहा, “मैं अगर किसी से प्यार नाह करूँ तो सेक्स कर hi नहीं पाउँगा, मुझे पहले प्यार करना चाहिए तब सेक्स करूँगा वार्ना बिल्कुल भी सेक्स नहीं करूँगा…..”

सान्वी, “इस्सके मतलब वो वासना नहीं था हमारे बीच?”

चावला साहब, “बिल्कुल भी नहीं, तुम किआ उस्सको वासना समझते थे इतने दिनों से?”

सान्वी: “पता नहीं?” मेरे समझ में तो कुछ भी नहीं आया, हाँ शायद मैं इस्को वासना hi समझती रही हूँ!!..... मगर एक बात बताइये, मैं ने पिछले 5 सालों में आप को कभी भी मेरे पाऊँ को देखते हुए नहीं देखा!”

चावला साहब: “तुम किआ जनों के कब मैं तुम्हारे पाऊँ को देखता हूँ! उस वक़्त तुम मेरे तरफ देखते hi नहीं जिस वक़्त मैं वहां देखता हूँ…”

सान्वी: “मगर कब?”

चावला साहब: “जब तुम कपडे सूखने को डालती हो चाट पर, जब तुम टीवी देखती हो लाउन्ज में, जब तुम लेती रहती हो काउच या बीएड पर, जब तुम चलती आती हो कहीं भी….”

सान्वी: “और उस वक़्त मैं क्यों आप को नहीं देखती के आप मेरे पाऊँ को देख रहे हो?”

चावला साहब: “वो तुम जानों नाह?! शायद तुम यह सोचती हो के मैं निचे ज़मीन देख रहा होता हूँ हहहहए!”

और चावला साहब ने तब सान्वी के दूसरे पाऊँ को हाथ में लेकर चूमने और चाटने भी लगे, सान्वी की आवाज़ तड़प में निकली और और उस्सने फिर ेंखें मुंध लिए उंनसे रोकने की बिनती करते हुए. सान्वी की दिल की धड़कनें तेज़ होने लगी थी और और वो थोड़ा सा हांफने भी लगी थी और चावला साहब धीरे धीरे पाऊँ को किश करते हुए उस्सकी साडी को ऊपर उठाते हुए ऊपर बढ़ने लगे और उस्सकी जाँघों के तरफ जा पहुंचे…. सान्वी लेट गयी काउच पर और हांफते हुए कहा, “ोफो अभी यहाँ करोगे किआ आप?!”

चावला साहब: “करना ज़रूरी है किआ? इतना कुछ hi करना काफी होगा, क्यों तुम्को और करने का मैं कर रहा है तो बोलो करते हैं नाह किआ हर्ज है!”

सान्वी, “नहीं मुझको और नहीं करना अभी कुछ देर पहले तो किया नाह?!” वैसे अगर आप को मैं कर रहा है टी कीजिये!”

चावला साहब, “बूढ़ा हो रहा हूँ और अब तो दो दो संभालना है इस लिए बचा कर एनर्जी को रखना होगा मुझे तो इस्को जाया क्यों करूँ जानेमन, जब तुमको ज़रूरत होगी तो हिचकिचाना मत बस इशारा कर देना मैं समझ जाऊंगा okay स्वीटहार्ट?!”

सान्वी: “हम्म्म ठीक है मगर आप नशे में नहीं होंगे तब नाह इशारा करूँ, कल रात को कितना चाहिए था मुझे मगर आप लुढ़क गए थे, इसी लिए कहती हूँ ज़्यादा मत पिया करो आप!!... या थोड़ा सा पियो, फिर करने के बाद जितना चाहे पी लेना…”

चावला साहब: “हाँ यह सही कहा तुमने, करने के बाद लुढ़क जाऊंगा तो chalega…to तुम मेरी जान मुझको इशारा तब करना जब मैं पीना शुरू करूँ, ठीक है?!”

सान्वी: “हम्म ठीक है… मगर मेरे समझ में नहीं ारः की आप कैसे मुझसे शुरू से प्यार करते हो? आप तो बहोत सीरियस रहा करते थे, मैं तो आप से डर्टी थी बात करने को भी… आड़ है आरव के लिए खाना लेजाती थी ऊपर तो आप किश तरह से ग़ुस्से में देखते थे मुझे, और आप नहीं कहते थे के मैं हर बार आरव के लिए खाना ले जॉन ऊपर?!”

चावला साहब: “हाँ तो अब भी तुम नहीं समझी के क्यों मई नहीं चाहता था के तुम ऊपर अकेली उसस्के साथ उसस्के कमरे में रहो? अब आयी किआ बात समझ में?!”

सान्वी: हाय राम तबसे?? आप को जलन होती थी जब मैं आरव के कमरे में जाती थी? उन् दिनों से आप मुझको चाहते थे? दीप्ति के आने से पहले? मेरा प्रेग्नेंट होने से पहले? उफ़ मेरी माँ!! मुझे क्यों कुछ नहीं दिखा था तब?

चावला साहब: “तब से? अरे जिस दिन तुमने इस घर में कदम रखा था तबसे कहा मैं ने!! किआ करता मैं ने इस घर में एक औरत को नहीं देखा था पिछले 18 सालों से…. 18 सालों के बाद एक तुम जैसी खूबसूरत औरत आयी थी इस घर में, मैं अकेला था, तनहा था, और तुम बहोत अच्छी थी, बेहद खूबसूरत और कमाल की अदाओं वाली थी, तुम्हारे इंग अंग को देखता था मैं… एक दिन तो तुम नाहा रही थी अपने कमरे में तब मैं ग़ुस्सा था छुपके से तुमको झाँकने के लिए और तुम्हारे उतारे हुए कपड़ों को सुंघा था तुम्हारे घर में ान ेके 1 हफते की बात बता रहा हूँ!!”

सान्वी: “रियली? तो यह तो ठरकीपन वाली बात हुई इस में प्यार कहाँ था?!”

चावला साहब: “लो कल्लो बात अरे प्यार करता था तुमसे तभी तो तुम्हारे कपड़ों से भी प्यार करता थान नाह?!

सान्वी पागल होती जा रही थी उनके बातों को सुनकर और सोच रही थी क्यों उन् दिनों को hi उस्सने भी उंनसे प्यार नहीं कर लिया था…..

चावला साहब ने पूछा, “और तुम कब से मुझसे प्यार करने लग गयी यह तो बताओ….”

सान्वी: “जब मैं प्रेग्नेंट थी, जीन दिनों आप ने ऑफिस जाना बांध कर दिया, आप मेरे ेंखों के सामने रहते थे चारों पेहेर तब!! तबसे आप के लिए दिल में जगह बना लिया था मैं ने और तब से आज तक आप की हर हरकतों पर नज़र रखते आयी हूँ… दिन बा दिन आप के लिए प्यार और भी बहोत ज़्यादा बढ़ता गया और मैं डूबती गयी आप के प्यार में…. आप से दूर रहना मुश्किल हो गया था, जीन दिनों आप संजना के यहाँ जाने लगे थे तो मैं जैसे बीमार हो जाती थी, उन् दिनों आप को सामने देखने के लिए तड़पती थी आप को बहोत hi मिस करती थी, लगता था दिन भर घर में कुछ कमी है, लगता था मेरे जिस्म का एक अंग मिसिंग है….. बहोत दुःख होता था मुझे…..”

चावला साहब ने “ओह माय पुअर स्वीटहार्ट” कहकर बड़े ज़ोर से सान्वी को गले लगाया और दोनों एक दूसरे के बाहों में इस तरह से खो गए जैसे इस दुन्या में नहीं थे दोनों……

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2200 वर्ड्स)
 
अपडेट 131 Sanjana’s part


संजना जबसे शादी के बाद ड्राइविंग करके अपने गाओं जाती रही अपने पापा से मिलने तो कई सारे वाक़ियात पेश आये उस तरफ भी जो अभी तक नहीं कहा गया है.

संजना थी तो बहोत hi सेक्स माइंडेड और कितनों के साथ जा चुकी थी यह तो सबको पता hi है. मगर किआ किसी ने सोचा के शादी के बाद जब वो घर से कार लेकर निकलती है तो किआ किआ करती है? किश किश से मिलती है, कहाँ कहाँ जाती है?

तो चलिए ज़रा उस के बारे में कुछ पता करते हैं.

जब शुरू में संजना शादी करके चावला फॅमिली मेंबर बन गयी तो उस्का स्टेटस अपने आप बढ़ गयी क्यूंकि वो मरस. चावला जो बन गयी थी.

और सारे गाओं में सबको पता चल गया था के चावला की बहु बानी है संजना तो सब उस्सको रेस्पेक्ट करने लगे यहाँ तक के उस छोटे से शहर में जहाँ वो कॉलेज जाती थी वहां के बहोत सारे लोगों को भी पता चल गया के वो चावला की बहु बन गयी है, और जब वो कार लेकर उस शहर में जाती कभी अपने पापा से मिलने, फिर मॉल में कुछ खरीदने, या पेट्रोल पंप पर पेट्रोल लेने, या कहीं से भी गुज़रती उस शहर में तो हर किसी को पता था के अब वो सिर्फ संजना नहीं जिस्सको वह लोग पहले से जानते थे मगर अब वो मरस. चावला है. चावला की टैग लग गयी थी उस पर तो रेस्पेक्ट सभी के तरफ से ऑटोमेटिकली उसस्के तरफ बढ़ गए थे.

तो शादी के बाद संजना ने खुद को संभालने की कोशिश किया के अब वो शादी शुदा है और सीरियस हो जाना चाहिए एक ज़िम्मेदार बहु की तरह. मगर जिस वक़्त शादी के बाद भी उस्सने चावला साहब को, याने अपने ससुर के साथ सेक्स किया, फिर गाओं जाकर अपने पापा से भी सेक्स किया तो संजना अपने आप को फिर से वही संजना महसूस करने लगी जो वो पहले thi…matlab फ्री सेक्स के बारे में और जिस्म की गर्मी को मिटाने के लिए उसस्के लिए किसी से भी सेक्स करना नार्मल लगने लगा.

संजना उस टाइप की लड़की थी जो लाइफ को खूब एन्जॉय करना जानती और चाहती थी, और ख़ास कर सेक्स को लेकर वो बहोत hi ओपन थी और उसस्के लिए सेक्स सिर्फ एक प्यास थी जिस्सको बुझाना होता था जिस किसी से भी उस्सको पसंद आये. उस्सको सेक्स वैसे पसंद था जिस से कोई बंधन नाह हो, बुसस एक बार हो और किस्सा ख़तम. प्यार, लगाओ, अपनापन सिर्फ आरव, चावला साहब और अपने पापा के साथ था, बाकी वो ऐसा सोचती थी के अगर अपने पहले आशिकों के साथ एक बार एन्जॉय कर लिया जाए तो बुसस एक मोमेंट की प्लेअसुरे था उसस्के लिए और कुछ नहीं….

संजना और सान्वी में एहि एक फरक था. सान्वी एक बंधन में बांध कर जीना चाहती थी मगर विवान वैसा नहीं था तो उस्सको चावला साहब से वो बंधन वाला प्यार मिला…. मगर संजना के लिए सब बहोत डिफरेंट थे इस लिए के वो सेक्स को लेकर बहोत कम उम्र से hi ओपन थी और कितनों से एन्जॉय कर चुकी थी तो उसस्के लिए यह सब बहोत नार्मल बात होती thi…magar वो जानती थी के कौन सा रिश्ता सीक्रेट और बिल्कुल प्राइवेट होना चाहिए और कौन से रिश्ते को आम पब्लिक को पता चलना चाहिए, मतलब संजना को पता था के सोसाइटी में से किआ छुपाना चाहिए और किआ सामने लाना चाहिए. उस्सको पता था के हमारे सोसाइटी में कितने चीज़ों को तबू समझा जाता है और संजना तबू चीज़ को मानती hi नहीं थी अपने दिल से. उसस्के लिए सब कुछ नार्मल था और कुछ भी तबू नहीं होती थी, संजना के लिए सिर्फ समाज ने सब कुछ तबू किया हुआ है…. उसस्के नज़र्या बिल्कुल अलग होते थे समाज के बनाये हुए उसूलों और दस्तूरों से….

तो शादी के कोई दो हफ्ते बाद जब वो एक दिन गयी थी अपने पापा के यहाँ, तो वैसे तो वो शाम को जाती थी हमेशा क्यूंकि उसस्के पापा काम से शाम के 5 बजे घर वापस एते थे तब उसस्के साथ वक़्त बिताती 7 बजे तक तब वापस अपने चावला फॅमिली के घर आती और कभी कभी आरव उस्सको लेने जाते थे ड्राइवर के साथ जो कार लेकर वापस अत था और आरव संजना के कार में वापस एते थे. ऐसा बहोत बार हुआ.

तो एक दिन ऐसा हुआ था के संजना दिन के बारह बजे अपने पापा के घर जा चुकी थी.

अपने पापा के घर में उस्सने कुछ काम किये और बाहर निकली थी कुछ नज़ारा देखने को के, रघु गुज़र रहा था अपने बाइसिकल पर तो वो रुक कर उस से बात करने लगे…. इस से पहले कोई 3 बार संजना जा चुकी थी वहां और एक बार रघु के दूकान पर रुक कर संजना ने कुछ ख़रीदा भी था, मगर ज़्यादा बात नहीं हुई थी रघु से उस दिन को. और हर बार जब संजना आती तो ऑफ़ कोर्स रघु के दूकान के सामने से गुज़रती तो थी hi, मगर सिर्फ वेव करती थी रघु को अगर दीखता था तो. अब रघु भी उसस्के तरफ ज़्यादा रेस्पेक्ट से देखता क्यूंकि वो एक बंव ड्राइव करते हुए गुज़रती, और संजना की स्टेटस बड़ा दीखते थे सबको, तो रघु को भी वैसा hi दीखता, के संजना अब वो सनजना नहीं रही जिस से वो कभी मज़ा किया करता था….

मगर इस दिन को जब संजना अपने घर के सामने कड़ी ठंडी हवा खा रही थी तो रघु गुज़र रहा था साइकिल पर तो वो रुक कर बात करने लगा संजना से.

रघु: “hello मैडम जी किआ हाल है!”

संजना: “हीहीहीही मैडम जी क्यों कह रहे हो मैं तो वही संजना हूँ, एक बंव ड्राइव करती हूँ तो मैडम जी हो गयी मैं?”

रघु: “अरे तौबा तौबा, तुम तो चावला फॅमिली की मेंबर हो रेस्पेक्ट तो बनता है बाप!”

संजना: “अरे चोर्रो यार, यह सब कहने की बातें हैं मैं वही हूँ जो थी पहले कोई बड़ी नहीं हूँ मैं!”

रघु: “अगर वही हो तो हमारा वो भी हो जाए क्यों? अकेली हो नाह अभी?!”

संजना: “अरे नहीं रघु ी ऍम मैरिड नाउ, पति है मेरा, मैं किसी की पत्नी हूँ तो ठीक लगता है किआ वो सब करना अब… जब यहाँ रहती थी, शादी नहीं हुई तब बात और थी नाह यार!”

रघु: “देखा एहि तो कह रहा हूँ के अब चावला बन गयी हो तभी तो यह डिफरेंस हुआ है नाह!”

संजना: “ोफो अब तुम मेरा मुंह मत खुलवाओ वार्ना गाली दूंगी तुमको अभी हाँ!! मेरा किसी से भी शादी होता, चाहे चावला हो या किसी और से भी तब भी मैं एहि कहती तुमको!”

रघु: “हम्म अगर, यहीं गाओं में उस उल्लू से शादी करती तब भी मुझको नहीं लेने देती? बोल!”

संजना: “तुमको कैसे पता के मेरा शादी उस से होता?”

रघु: “तेरे बाप ने कहा था के तेरा शादी उस से करवाएगा ताके तुम उसस्के ेंखों के सामने रहो!”

संजना: “और तुम किआ समझते हो के मैं उस पागल से शादी करती किआ?”

रघु: “मुझे तो ख़ुशी होता के तुम उसी से शादी करती, तब तो मैं तुमको रोज़ मिलता और खूब एन्जॉय करता उसस्के सामने hi वो कुछ भी नहीं समझता के हम मिया कर रहे हैं!! हाहाहा!”

संजना ने हँस्ते हुए रिप्लाई किया, “वह बीटा यह सब सोच लिया था तुमने? तेरा सपना तो टूट गया रे रघु!”

रघु: “अगर तू चाहे तो वो सपना अब भी पूरा हो सकता है, बुला ले नाह अंदर एक बार ज़रा चख के तो देखूं के शादी के बाद तेरा स्वाद बदला है के वही है अब भी!”

संजना: “नहीं यार यह ठीक नहीं होगा ाचा नहीं लगता नाह!”

रघु: “ाचा तो एक बात बता मुझे, किआ तू अपने पापा को खुश नहीं करती अब भी? क्यों अति रहती हो बार बार उस्सको खुश करने के लिए hi नाह? शादी करने के बाद भी अगर पापा को खुश करने अति है तो मुझे भी वैसे hi खुश कार्डो नाह एक बार, सिर्फ आज फिर कभी नहीं कहूंगा!”

संजना उस्सको मुस्कुराते हुए देखती है और पूछती है, “तुमको कैसे पता के मैं उसस्के लिए आती हूँ? यह मेरा घर है इस्को मिस करती हूँ इस लिए आती हूँ!”

रघु: “चल झूटी मुझे सब पता है…”

संजना: “किआ तू अब भी झाँकने अत है जब मैं पापा के साथ होती हूँ?”

रघु: “हम्म अब समझी तू!”

संजना: “बदमाश कहीं का बेशरम, मगर तू कैसे अत है तेरा तो दूकान चलता है उस वक़्त?!”

रघु: “कौन सी बड़ी बात है चुंगल को दूकान संभालने को कहता हूँ कुछ देर के लिए तुमको देख कर वापस चला जाता हूँ मुठ मार्के तेरे नाम पर!!”

संजना फिर से हँस्ते हुए कहती है, “तू नहीं सुधरेगा रे रघु, तू शादी क्यों नहीं कर लेता अब?”

रघु: “किश से करूँ? तू तो चली गयी, उस पगले के बदले मैं खुद तेरे पापा से तेरा हाथ मांगने वाला था, मैं तुझको तेरे बाप से शेयर करने को तैयार होता और उस से कहता के तेरी शादी मुझसे करदे और जब भी चाहे वो भी तुझे लें!”

संजना ने फिरसे हँस्ते हुए कहा, “अरे वह तो फिर कहा क्यों नहीं पापा को वो तो ज़रूर मान जाता, तब तो सच में मज़ा अत नाह?!”

रघु: “साला जब कहने वाला था तो तेरी मांगनी की खबर दिया तेरे बाप ने मुझको, फूटी किस्मत जो है मेरी साला!”

संजना: “अरे अरे बेचारा रघु ने मुझको मिस कर दिया हीहीहीहीही! मगर फिर भी मुझसे खूब ेश किया नाह तुमने बिना शादी के तो तुमको खुश होना चाहिए!”

रघु: “एक बार और करते हैं नाह ेश, चल न अंदर अत हूँ main…chal नाह ऋ संजना बेबी!”

संजना: “नहीं आज नहीं, जब मैं करेगा तो बताउंगी तुझे, अभी नहीं, फिर कभी रघु!”

रघु: “यह तेरा फिर कभी, कभी भी नहीं आएगा पता है मुझे!”

संजना: “हीहीहीही! क्यों?”

रघु: “तुम नहीं आओगी मेरे साथ अब, तुमको आमिर लोगों की लेथ लग गयी है अब नाह इसी लिए!”

संजना: “बिल्कुल भी नहीं, मैं अब भी वही संजना हूँ और वही रहूंगी, मुझे अमीरी या पैसों से कोई भी लगाओ नहीं है…. समझा तू? अब चल भाग यहाँ से वार्ना मैं गली देना शुरू करती हूँ हु भी ज़ोर से चिल्ला कर चल भाग!”

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वो उस दिन हुआ था जब संजना तीसरी बार गाओं गयी थी… अब आते हैं आज जब संजना आयी है दीप्ति को घर पर चावला और सान्वी के साथ चोरर कर…. फिर बाद में देखते हैं किआ किआ किया था संजना ने गाओं में…….

शाम को आनंद वापस आया काम से तो संजना ने ख़ुशी से उस्सको रिसीव किया उसस्के बाहों में जाकर कसके उस्सको जकरते हुए. आनंद खुश नहीं दिख रहा था थक्का हुआ और फिकरमंद दिख रहा था तो संजना ने पूछा,

“किआ बात है पापा आप बहोत स्ट्रेंज दिख रहे हो आज!! आप तो मुझे देख कर ख़ुशी से उछलते थे!”

आनंद ने एक लम्बा सांस चोरते हुए कहा,

“किआ बताऊँ बेबी, काम में कुछ प्रोब्लेम्स चल रहे हैं कुछ दिनों से!”

संजना: “कैसा प्रॉब्लम पापा?”

आनंद: “कंपनी के मालिक ने अन्नोउंस किया के कंपनी बांध होगा अब!!”

संजना: “अरे मगर क्यों? स्टील कंपनी कितना ाचा चल रहा था!”

रघु: “रेसीवेर्शिप में चला गया है, ओनर ने बन्क्रप्त डिक्लेअर किया हुआ है, रीज़न दिया है के अल्लिमिनियम इंडस्ट्रीज की एक्सपेंशन की वजा से स्टील के काम बिल्कुल गिरर्र गए हैं और वो आगे नहीं बढ़ सकता…. कोई 2000 वर्कर्स हैं सब रास्ते पर आजायेंगे…. अल्लिमिनियम भी स्टार्ट किया गया है और मुझे सभी अल्लिमिनियम के यूपीएस एंड डाउन्स का बहोत अच्छी तरह से पता है, मेरा बुसस चलता तो पुरे फैक्ट्री को अल्लिमिनियम में hi कन्वर्ट कर देता तब 100% प्रॉफिट होता, मगर साला यह मालिक चुटिया लग रहा है मुझे, वो मालिक का बीटा है, ेश करता है, बाप मर गया और बीटा पैसों को उदा रहा है, कंपनी को लोस्स करा रहा है……”

संजना: “तो अब किआ होगा? आप बेकार हो जाओगे किआ?”

आनंद: “नहीं संजना मैं कुछ नाह कुछ तो करूँगा कंपनी को बचाने के liye….ek बहोत hi बड़ा दो चलना है मुझे अब… दो नहीं बल्कि असलियत को अब सामने लेन के वक़्त आगया लगता है मुझे!”

संजना: “ोफो आप किआ बड़बड़ा रहे हो पापा मेरी तो कुछ समझ में नहीं आरहे हैं, उफ़, आप जाइये एक गरम शावर ले लीजिये, और बे क्विक कहीं आरव फ़ोन नाह करे के वो आने वाला है उसस्के आने से पहले हमको लव कर लेना चाहिए okay जल्दी करो आप…. मेरा मैं हो रहा है आप के साथ हीहीहीहीही!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………….. (2050 वर्ड्स)
 
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