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अपडेट 132 संजना विथ रघु ों लॉन्ग ड्राइव
उस दिन का तो संजना का होगया. तो हम अभी संजना पर hi रहते हैं और देखते हैं किआ किआ गाओं में उसस्के अगले बार जाने पर…..
दो दिन बाद वो फिर गयी गाओं हमेशा की तरह, हफ्ते में कभी तीन या चार बार जाती रहती है. उस्सको कार जो मिल गयी तो घूमने का शौख बढ़ गया उस्का और वो घूमती रहती है और वो होता है नाह नयी कार के ओनर्स लोगों के साथ के जितना भी ड्राइव करो उतना hi और दूर तक ड्राइव करने की छह पैदा होता है और नयी जगाओं को एक्स्प्लोर करने का मज़ा अत है.
तो संजना जब कबि 10 या 11 बजे घर से निकलती थी तो कहीं और भी चली जाती थी ड्राइव करते नए रास्तों पर, हाईवे से किसी भी एक ब्रांच रोड में चली जाती यह देखने के रास्ता किधर को लेजाता है, फिर वापस मुड़ती…. इस तरह से खूब शेर करती थी संजना. तो इस दिन को वो थोड़ा घूम घाम के वापस अपने गाओं गयी तो रघु के दूकान के पास रुकी और हॉंक किया. रघु जल्दी से दूकान के अंदर से निकला और संजना के कार के पास आकर कहा, “जी मैडम जी किआ चाहिए आप को? आप तो अब मैडम जी हो के कार से उतर भी नहीं रही, चलिए आप को यहीं सर्वे कर देता हूँ बोलिये तो किआ खिदमत करूँ!”
संजना कार से निकली और हँस्ते हुए कहा, “ोफो मैं सिर्फ यह देख रही थी के तुम यहाँ हो के नहीं, और किआ मैडम जी लगा रखे हो तुम? मुझे सिर्फ यह पूछना था के मेरे साथ कार में थोड़ा घूमने चलोगे? दूकान बांध करना होगा अगर चलना है तो, कहो किआ ख्याल है?”
रघु ने कहा, “आरी यह तो कमाल का आईडिया है ऋ संजना, क्यों नहीं चलूँगा, ज़रूर चलूँगा मगर किधर चलना है?”
संजना: “मैं ने हमेशा जानना चाहा है के यह रास्ता जो गुज़रता है आखिर एन्ड किधर होता है, किश इलाके में जाकर निकलता है या किश गाओं या शहर से जा मिलता है, शायद लम्बी ड्राइव करनी पड़े तो थोड़ा घूमेंगे, तो किआ कोई 3 या 4 घंटे साथ चल सकते हो किआ?!”
रघु: “अरे तेरे साथ तो 24 घंटे रह सकता हूँ मैं क्यों नहीं रे, चल अभी क्लोज करके अत हूँ शॉप को, वेट कर. संजना ने एक तवो पीेछे पहनी हुई थी, ब्लाउज उस्सकी कमर तक hi थे जैसे के एक चोली होता है और उस्सकी स्कर्ट तो कहने की ज़रुरत नहीं उस्सकी जांघें बिल्कुल दिख रहे थे, सनग्लास भी पहनी hi थी, हाथ में चैन, गले में चैन, उँगलियों में अंगूठियां, कान में बाली, लिपस्टिक, क्रेन पाउडर, बिल्कुल हॉट सेक्सी डॉल दिख रही थी संजना. वो थी तो सेक्स सिंबल 100%. और कोई भी मर्द उस्सको बीएड पर लेटना hi चाहता जैसे उस्सकी लुक थी उस वक़्त.
रघु के लिए तो यह एक लाटरी से कम नहीं थी के संजना ने खुद उस्सको अपने साथ चलने को कहा, और रघु ने सोच लिया के कैसे भी हो कहीं भी जाए मौका तो ज़रूर मिलेगा उस्सको उसस्के साथ सेक्स करने को.
उस दिन बात चीत के दौरान संजना ने उस से कहा था फिर कभी, तो रघु सोचने लगा के एहि वो ‘फिर कभी’ होगा उसस्के लिए.
रघु दूकान बांध करके ख़ुशी से आया सजाना के पास और पैसेंजर वाले ड्राइवर के बगल के सीट पर बैठ गया और कहा, “चल ऋ संजना तू ड्राइव कर मैं तुझे देखता हूँ!”
संजना ने कार स्टार्ट किये और कहा, “अरे रघु कितना देखेगा मुझे, कई सैलून से मुझे देखते आ रहा है, अब रास्ता देख!”
रघु: “तू इतनी मस्त चीज़ है के तुझे देखते hi रहने को मैं करता है ऋ, देखने को किआ तुझे अपने अंदर उतारने को मैं करता है…. मेरी किस्मत बहोत अछि है के तुझको जानता हूँ और करीब भी हुआ हूँ वार्ना ऐसी किस्मत कहाँ किसी की के तुझ जैसे रानी महारानी के साथ इस तरह कार में बैठ कर घूम सके! लगता है तू मालकिन मैं तेरा नौकर फिर भी मैं तुझको जहाँ चहुँ छह भी सकता हूँ चुम सकता हूँ रागढ सकता हूँ किआ किस्मत पाया है मैं ने नाह?!”
संजना मुस्कुराते हुए ड्राइव किये जा रही थी रघु को सुनते हुए…. और रघु ने अपना हाथ उसकी जगह पर रखा और सहलाया….. संजना थोड़ा सेहम कर कहा,
“अरे मैं ड्राइव कर रही हूँ नाह?! एक्सीडेंट हो जाएगा किआ कर रहा है तू?!”
रघु: “कैसे रोकूं अपने आप को मैं तुम्ही बताओ! तुमको ऐसे देख सकता हूँ भला बिना छुए? तू क़यामत ध रही है और मैं सिर्फ देखूं ऐसा तो नहीं हो सकता नाह मेरी जान!”
संजना: “ोफो, यह सही मौका नहीं है रे रघु तू धीरज तो रख नाह… थोड़ा इस रास्ते का मुआएना तो करने दे, वो देख उधर एक मोड़ ारः है, हाथ हत्ता अपना मैं कंसन्ट्रेट नहीं कर पाऊँगी ड्राइविंग पर!”
रघु का हाथ संजना के दोनों जाँघों के बीच में था और बढ़ रहा था उस्सकी पंतय की तरफ, और आगे मोड़ देख कर रघु ने हाथ निकाल लिया मगर तुरंत फिर रास्ता सीधा था तो वापस अपने हाथ को वहीँ किया संजना के जाँघों के बीच.
तब संजना ने पूछा, “तू इधर आया है कभी किआ? किधर निकलेगा यह रास्ता रघु?”
रघु के उँगलियाँ तब तक संजना के पंतय को छह चुके थे और संजना ने अपने दोनों जाँघों को दबा लिए जिस से रघु का हाथ जैसे कैद हो गया संजना के जाँघों के बीच. रघु की नज़र उस्सकी जाघों पर गड़े हुए थे, वो रास्ता तो बिल्कुल नहीं देख रहा था मगर संजना की जिस्म को निहार रहा था, और तब तक रघु ने अपने चेहरे को संजना के काँधे तक कर दिया और अपने जीब को उसस्के गले पर फेर्रा….. संजना ने ांसाते हुए कहा, “तू ज़रूर मुझसे एक्सीडेंट करवाएगा रघु ऐसा मत कर नाह!”
तो रघु ने कहा, “तुमको लेने का बड़ा मैं कर रहा है ऋ, किआ करूँ, देख मेरा कैसे खड़ा हो गया है!!”
संजना ने एक बार उसस्के पंत पर उसस्के मोठे लौड़े को पहला हुआ देखा और हंससने लगी! फिर कहा, “मगर यह रास्ता तो ख़तम hi नहीं हो रहा हमने करीबन 20 कंस ड्राइव कर लिए और नाह कोई गाओं, नाह कोई शहर आया है किधर जाता है यह रास्ता यार?!”
तब रघु ने कहा, “मैं कभी भी नहीं आया हूँ इधर…. एक किश करने दे नाह रानी!!”
संजना ड्राइव करती जा रही थी और रघु का चेहरे उस्सकी गाल से सट्टे हुए थे और उस्सने संजना के गाल पर जीब फेर्रा, तो संजना ने कहा, “रुक रुक, एक कच्ची गली देख कर मोड़ता हूँ, कितना सुसान जगह है एक परिंदा भी नहीं दिख रहा, तू साबरा तो कर, रोकता हूँ तब मज़ा करेंगे okay? अभी हट यहाँ से!”
राजू बहोत खुश हुआ और सीदह बैठ गया अपने लुंड सहलाते हुए….. फिर उस्सको आगे एक कच्ची गली दिखा तो कहा, “वो देख आगे एक कच्चा रास्ता है उस में मोड़ नाह, फिर थोड़ा आगे चल कर देखते हैं…..!”
संजना ने कार उस रास्ते में घुमाया और दोनों तरफ देखते हुए कहा, “अरे बाबा दोनों तरफ जंगल है, इतने बड़े बड़े पेयर, लगता है शाम हो गयी…. यह फारेस्ट डिपार्टमेंट की होगी नाह?”
तब एक सिग्न बोर्ड दिखा जिस पर लिखा हुआ था “एंडेमिक प्लांट्स!” तो दोनों जान गए के वो फारेस्ट डिपार्टमेंट का hi इलाका था… फिर और थोड़ा आगे जाकर एक और पतली सी गली थी जिस में संजना ने कार मोड़ा और रोक दिया कार को….
रघु ने जल्दी से अपने पंत उतार दिए और कहा “चल पीछे के सीट पर चलते है वहां ज़्यादा स्पेस है…..”
दोनों कार से निकले, संजना सर ऊपर उठाकर उन् बड़े बड़े दरख़तों को देखने लगी और कहा, “यह पेयर कितने साल पुराने होंगे रघु?”
रघु का मैं तो सिर्फ संजना को छोड़ने का था वो कहाँ से पैरों को देखता बिना देखे hi उस्सने कहा, “200 साल के तो होंगे शायद ज़्यादा भी….” यह कहकर उस्सने पीछे का दरवाज़ा खोला और अंदर बैठ गया संजना को अंदर आने का इंतज़ार करते हुए….. और उस्सने अपने अंडरवियर भी उतार दिए और लुंड को हाथ में लेकर सहलाने लगे….
संजना ने चारों तरफ ग़ौर से देखा और जब सर झुकाया कार के पीछे सीट पर तो देखा रघु अपने लुंड को हाथ में लिए बैठा हुआ था…. वो हँस्ते हुए अंदर बैठी और कहा, “तू इतना बेताब है रे! क्यों तुझसे सब्र नहीं होता हम्म्म?!”
रघु ने झट से संजना का हाथ पाकर कर खींचते हुए अपने लुंड पर किया, उसस्के खींचने से संजना झुक्क गयी उसस्के ऊपर और हाथ किआ संजना का पूरा चेहरा hi उसस्के लुंड पर चली गयी….. रघु ने अपने लुंड को संजना के गालों पर मसला और उसस्के होंठों पर दबाया…. संजना पथ के बल हो गयी सीट पर और खुद अपने मुंह खोल दिया रघु के लुंड को अपने मुंह में लेते हुए…..
रघु बैठे हुए पोजीशन में था, और अपने लुंड को संजना के मुंह में फील करते, उस्सकी गरम जीब को लुंड के टिप पर फील करते हुए रघु ने सर ऊपर उठाया और एक ख़ुशी की आह निकली उसस्के गले से और वो एन्जॉय करने लगा….
संजना के बूब्स रघु के जाँघों पर दबे हुए थे और वो रघु के लुंड को अपने मुलायम हाथों में लिए उस्सको चूस रही थी, जबकि रघु का हाथ उसस्के बूब्स को मसलने लगे थे धीरे धीरे, रघु ने उस्सकी ब्लाउज के अंदर हाथ घुसेड़ दिया था उसस्के कमर के टेल से hi, ब्लाउज एक टॉप की तरह थी और बहोत लार्ज थी, जिस से आसानी से हाथ अंदर चले गए, उस दौरान राजू ने उस्सकी ब्रा को उन्हुक कर दिया, संजना चुस्ती जा रही थी और रघु उस्सकी टॉप और ब्रा निकाल रहा था….
जब टॉप और ब्रा निकाल दिया रघु ने तो, अब संजना उठी, और बाहर देखते हुए कहा, “माना के यह जगह सुनसान है मगर एक फारेस्ट अफसर तो आ सकता है नाह?!”
रघु ने दोबारा अपने लुंड को संजना के मुंह में ठुस्स्ते हुए कहा, “अरे अगर अफसर आया भी तो कहाँ से उस्सको पता होगा के हम कौन लोग हैं, और फिर वो पैदल तो नहीं आएगा नाह? या तो उस्सकी मोटरसाइकिल की आवाज़ सुनाई देगी या जीप की, तो हम उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले रुक जाएंगे”
संजना ने फिर रुकते हुए कहा, “हाँ तू तो ऐसा कह रहा है के मुझे सभी कपडे पेहेन्ने का मौका मिल जाएगा उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले!!”
रघु ने कहा, “कौन सी साडी या सलवार पहनी है तुम्हें? सिर्फ टॉप और स्कर्ट तो खींचनी है अपने ऊपर, वो तो फटाफट कर लेगी तू….. फिर रघु ने सोचा, ‘िस्सने जान बुझ कर ऐसे कपडे पहने हुए हैं जिस्सको झट से पेहेन सके, इस्को पहले से पता था के यह मुझसे यहाँ आकर छुडवाएगी, इस्को छुड़वाने की शौख है लगता है अभी पेलता हूँ इस्को मैं!!”
और देर नाह करते हुए रघु ने जल्दी से संजना की स्कर्ट भी खिंच डाले और पंतय बाकी थी संजना पर तब रघु ने अब अपना मुंह किया उस्सकी जाँघों के बीच और पहले उस्सकी पंतय को hi चुस्सने लगा, फिर धीरे धीरे पंतय को उतार फेंका और उस्सकी छूट की पंखुरियों के बीच अपने जीब चलाने लगा रघु जिस से संजना कसमसाने लगी और सिकुड़ सी गयी रघु के काँधे पर दांत काटते हुए…
संजना की पानी छूटने लगी थी, जिस्सको रघु चुस्सने लगा था और संजना की तड़पती आवाज़ सुनाई देने लगे जिस वक़्त रघु का जीब उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ग़ुस्से, और रघु जैसे जीब से hi छोड़ रहा था संजना को…. जीब को जितना हो सके अंदर बाहर करता गया वो और संजना ने मुठी भरके रघु के सर के बाल को खिंचा……
संजना तैयार हो गयी थी अपने अंदर लेने के लिए और हांफते हुए उस्सने खुद रघु से इल्तेजा किये एक नशीले नज़रों से उसस्के चेहरे में देखते हुए, “अब दाल दे अंदर रे रघु मुझसे अब और इंतज़ार नहीं हो रही….. ग़ुस्सादे रे रघु… उफ्फ्फफ्फ्फ़…..”
राजू ने उस्सको लेता दिया सीट पर और चढ़ गया संजना के ऊपर जिसस्ने दोनों टांगों को फैला दिया था और अपनी फिसलती हुई छूट के अंदर रघु के लौड़े को ग़ुस्ता हुआ महसूस करते हुए संजना की चीख निकली, “आआआअह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ उईईईईई…….”
रघु ढाका देने लगा…. संजना ने उसस्के जिस्म पर अपने बाहों को कर दिया, अपने नाख़ून से रघु के पीठ पर जैसे खींचते हुए निशाँ बना दिए संजना ने अपने अंदर उसस्के लुंड के धक्के रिसीव करते हुए, और अपने जीब को संजना ने उसी दौरान रघु के मुंह में दाल दिया उसस्के जीब को चूस्ते हुए… रघु ढाका देते वक़्त कभी संजना के बूब्स को छत्ता, चुस्ता तो कभी उसस्के गर्दन छत्ता चुस्ता, तो कभी उस्सकी जीब chussta…hanffne लगा था मगर धक्कों को बरकरार रखा रघु ने जब तक के संजना ने झड़ते हुए “ोीीमाआआआ आआआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्छ्हःहःह रघुउउउउउउउ आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हूँ गया रे meraaaaaaaaaaa!” संजना अपने जिस्म को ऐंठ रही थी रघु के निचे ओर्गास्म के दौरान और रघु पेलता गया और झट से लुंड को बाहर निकालते हुए उस्सने अपना पानी चोर्रा संजना के पथ पर और लुंड को मसलता गया खुद अपने पानी को सनजना के पथ पर रघड़ते हुए…..
और दोनों हांफते हुए हंससने लगे कार के पीछे वाले सीट पर लेट करे……
तो बे कॉन्टिनोएड……….. (2200 वर्ड्स)
उस दिन का तो संजना का होगया. तो हम अभी संजना पर hi रहते हैं और देखते हैं किआ किआ गाओं में उसस्के अगले बार जाने पर…..
दो दिन बाद वो फिर गयी गाओं हमेशा की तरह, हफ्ते में कभी तीन या चार बार जाती रहती है. उस्सको कार जो मिल गयी तो घूमने का शौख बढ़ गया उस्का और वो घूमती रहती है और वो होता है नाह नयी कार के ओनर्स लोगों के साथ के जितना भी ड्राइव करो उतना hi और दूर तक ड्राइव करने की छह पैदा होता है और नयी जगाओं को एक्स्प्लोर करने का मज़ा अत है.
तो संजना जब कबि 10 या 11 बजे घर से निकलती थी तो कहीं और भी चली जाती थी ड्राइव करते नए रास्तों पर, हाईवे से किसी भी एक ब्रांच रोड में चली जाती यह देखने के रास्ता किधर को लेजाता है, फिर वापस मुड़ती…. इस तरह से खूब शेर करती थी संजना. तो इस दिन को वो थोड़ा घूम घाम के वापस अपने गाओं गयी तो रघु के दूकान के पास रुकी और हॉंक किया. रघु जल्दी से दूकान के अंदर से निकला और संजना के कार के पास आकर कहा, “जी मैडम जी किआ चाहिए आप को? आप तो अब मैडम जी हो के कार से उतर भी नहीं रही, चलिए आप को यहीं सर्वे कर देता हूँ बोलिये तो किआ खिदमत करूँ!”
संजना कार से निकली और हँस्ते हुए कहा, “ोफो मैं सिर्फ यह देख रही थी के तुम यहाँ हो के नहीं, और किआ मैडम जी लगा रखे हो तुम? मुझे सिर्फ यह पूछना था के मेरे साथ कार में थोड़ा घूमने चलोगे? दूकान बांध करना होगा अगर चलना है तो, कहो किआ ख्याल है?”
रघु ने कहा, “आरी यह तो कमाल का आईडिया है ऋ संजना, क्यों नहीं चलूँगा, ज़रूर चलूँगा मगर किधर चलना है?”
संजना: “मैं ने हमेशा जानना चाहा है के यह रास्ता जो गुज़रता है आखिर एन्ड किधर होता है, किश इलाके में जाकर निकलता है या किश गाओं या शहर से जा मिलता है, शायद लम्बी ड्राइव करनी पड़े तो थोड़ा घूमेंगे, तो किआ कोई 3 या 4 घंटे साथ चल सकते हो किआ?!”
रघु: “अरे तेरे साथ तो 24 घंटे रह सकता हूँ मैं क्यों नहीं रे, चल अभी क्लोज करके अत हूँ शॉप को, वेट कर. संजना ने एक तवो पीेछे पहनी हुई थी, ब्लाउज उस्सकी कमर तक hi थे जैसे के एक चोली होता है और उस्सकी स्कर्ट तो कहने की ज़रुरत नहीं उस्सकी जांघें बिल्कुल दिख रहे थे, सनग्लास भी पहनी hi थी, हाथ में चैन, गले में चैन, उँगलियों में अंगूठियां, कान में बाली, लिपस्टिक, क्रेन पाउडर, बिल्कुल हॉट सेक्सी डॉल दिख रही थी संजना. वो थी तो सेक्स सिंबल 100%. और कोई भी मर्द उस्सको बीएड पर लेटना hi चाहता जैसे उस्सकी लुक थी उस वक़्त.
रघु के लिए तो यह एक लाटरी से कम नहीं थी के संजना ने खुद उस्सको अपने साथ चलने को कहा, और रघु ने सोच लिया के कैसे भी हो कहीं भी जाए मौका तो ज़रूर मिलेगा उस्सको उसस्के साथ सेक्स करने को.
उस दिन बात चीत के दौरान संजना ने उस से कहा था फिर कभी, तो रघु सोचने लगा के एहि वो ‘फिर कभी’ होगा उसस्के लिए.
रघु दूकान बांध करके ख़ुशी से आया सजाना के पास और पैसेंजर वाले ड्राइवर के बगल के सीट पर बैठ गया और कहा, “चल ऋ संजना तू ड्राइव कर मैं तुझे देखता हूँ!”
संजना ने कार स्टार्ट किये और कहा, “अरे रघु कितना देखेगा मुझे, कई सैलून से मुझे देखते आ रहा है, अब रास्ता देख!”
रघु: “तू इतनी मस्त चीज़ है के तुझे देखते hi रहने को मैं करता है ऋ, देखने को किआ तुझे अपने अंदर उतारने को मैं करता है…. मेरी किस्मत बहोत अछि है के तुझको जानता हूँ और करीब भी हुआ हूँ वार्ना ऐसी किस्मत कहाँ किसी की के तुझ जैसे रानी महारानी के साथ इस तरह कार में बैठ कर घूम सके! लगता है तू मालकिन मैं तेरा नौकर फिर भी मैं तुझको जहाँ चहुँ छह भी सकता हूँ चुम सकता हूँ रागढ सकता हूँ किआ किस्मत पाया है मैं ने नाह?!”
संजना मुस्कुराते हुए ड्राइव किये जा रही थी रघु को सुनते हुए…. और रघु ने अपना हाथ उसकी जगह पर रखा और सहलाया….. संजना थोड़ा सेहम कर कहा,
“अरे मैं ड्राइव कर रही हूँ नाह?! एक्सीडेंट हो जाएगा किआ कर रहा है तू?!”
रघु: “कैसे रोकूं अपने आप को मैं तुम्ही बताओ! तुमको ऐसे देख सकता हूँ भला बिना छुए? तू क़यामत ध रही है और मैं सिर्फ देखूं ऐसा तो नहीं हो सकता नाह मेरी जान!”
संजना: “ोफो, यह सही मौका नहीं है रे रघु तू धीरज तो रख नाह… थोड़ा इस रास्ते का मुआएना तो करने दे, वो देख उधर एक मोड़ ारः है, हाथ हत्ता अपना मैं कंसन्ट्रेट नहीं कर पाऊँगी ड्राइविंग पर!”
रघु का हाथ संजना के दोनों जाँघों के बीच में था और बढ़ रहा था उस्सकी पंतय की तरफ, और आगे मोड़ देख कर रघु ने हाथ निकाल लिया मगर तुरंत फिर रास्ता सीधा था तो वापस अपने हाथ को वहीँ किया संजना के जाँघों के बीच.
तब संजना ने पूछा, “तू इधर आया है कभी किआ? किधर निकलेगा यह रास्ता रघु?”
रघु के उँगलियाँ तब तक संजना के पंतय को छह चुके थे और संजना ने अपने दोनों जाँघों को दबा लिए जिस से रघु का हाथ जैसे कैद हो गया संजना के जाँघों के बीच. रघु की नज़र उस्सकी जाघों पर गड़े हुए थे, वो रास्ता तो बिल्कुल नहीं देख रहा था मगर संजना की जिस्म को निहार रहा था, और तब तक रघु ने अपने चेहरे को संजना के काँधे तक कर दिया और अपने जीब को उसस्के गले पर फेर्रा….. संजना ने ांसाते हुए कहा, “तू ज़रूर मुझसे एक्सीडेंट करवाएगा रघु ऐसा मत कर नाह!”
तो रघु ने कहा, “तुमको लेने का बड़ा मैं कर रहा है ऋ, किआ करूँ, देख मेरा कैसे खड़ा हो गया है!!”
संजना ने एक बार उसस्के पंत पर उसस्के मोठे लौड़े को पहला हुआ देखा और हंससने लगी! फिर कहा, “मगर यह रास्ता तो ख़तम hi नहीं हो रहा हमने करीबन 20 कंस ड्राइव कर लिए और नाह कोई गाओं, नाह कोई शहर आया है किधर जाता है यह रास्ता यार?!”
तब रघु ने कहा, “मैं कभी भी नहीं आया हूँ इधर…. एक किश करने दे नाह रानी!!”
संजना ड्राइव करती जा रही थी और रघु का चेहरे उस्सकी गाल से सट्टे हुए थे और उस्सने संजना के गाल पर जीब फेर्रा, तो संजना ने कहा, “रुक रुक, एक कच्ची गली देख कर मोड़ता हूँ, कितना सुसान जगह है एक परिंदा भी नहीं दिख रहा, तू साबरा तो कर, रोकता हूँ तब मज़ा करेंगे okay? अभी हट यहाँ से!”
राजू बहोत खुश हुआ और सीदह बैठ गया अपने लुंड सहलाते हुए….. फिर उस्सको आगे एक कच्ची गली दिखा तो कहा, “वो देख आगे एक कच्चा रास्ता है उस में मोड़ नाह, फिर थोड़ा आगे चल कर देखते हैं…..!”
संजना ने कार उस रास्ते में घुमाया और दोनों तरफ देखते हुए कहा, “अरे बाबा दोनों तरफ जंगल है, इतने बड़े बड़े पेयर, लगता है शाम हो गयी…. यह फारेस्ट डिपार्टमेंट की होगी नाह?”
तब एक सिग्न बोर्ड दिखा जिस पर लिखा हुआ था “एंडेमिक प्लांट्स!” तो दोनों जान गए के वो फारेस्ट डिपार्टमेंट का hi इलाका था… फिर और थोड़ा आगे जाकर एक और पतली सी गली थी जिस में संजना ने कार मोड़ा और रोक दिया कार को….
रघु ने जल्दी से अपने पंत उतार दिए और कहा “चल पीछे के सीट पर चलते है वहां ज़्यादा स्पेस है…..”
दोनों कार से निकले, संजना सर ऊपर उठाकर उन् बड़े बड़े दरख़तों को देखने लगी और कहा, “यह पेयर कितने साल पुराने होंगे रघु?”
रघु का मैं तो सिर्फ संजना को छोड़ने का था वो कहाँ से पैरों को देखता बिना देखे hi उस्सने कहा, “200 साल के तो होंगे शायद ज़्यादा भी….” यह कहकर उस्सने पीछे का दरवाज़ा खोला और अंदर बैठ गया संजना को अंदर आने का इंतज़ार करते हुए….. और उस्सने अपने अंडरवियर भी उतार दिए और लुंड को हाथ में लेकर सहलाने लगे….
संजना ने चारों तरफ ग़ौर से देखा और जब सर झुकाया कार के पीछे सीट पर तो देखा रघु अपने लुंड को हाथ में लिए बैठा हुआ था…. वो हँस्ते हुए अंदर बैठी और कहा, “तू इतना बेताब है रे! क्यों तुझसे सब्र नहीं होता हम्म्म?!”
रघु ने झट से संजना का हाथ पाकर कर खींचते हुए अपने लुंड पर किया, उसस्के खींचने से संजना झुक्क गयी उसस्के ऊपर और हाथ किआ संजना का पूरा चेहरा hi उसस्के लुंड पर चली गयी….. रघु ने अपने लुंड को संजना के गालों पर मसला और उसस्के होंठों पर दबाया…. संजना पथ के बल हो गयी सीट पर और खुद अपने मुंह खोल दिया रघु के लुंड को अपने मुंह में लेते हुए…..
रघु बैठे हुए पोजीशन में था, और अपने लुंड को संजना के मुंह में फील करते, उस्सकी गरम जीब को लुंड के टिप पर फील करते हुए रघु ने सर ऊपर उठाया और एक ख़ुशी की आह निकली उसस्के गले से और वो एन्जॉय करने लगा….
संजना के बूब्स रघु के जाँघों पर दबे हुए थे और वो रघु के लुंड को अपने मुलायम हाथों में लिए उस्सको चूस रही थी, जबकि रघु का हाथ उसस्के बूब्स को मसलने लगे थे धीरे धीरे, रघु ने उस्सकी ब्लाउज के अंदर हाथ घुसेड़ दिया था उसस्के कमर के टेल से hi, ब्लाउज एक टॉप की तरह थी और बहोत लार्ज थी, जिस से आसानी से हाथ अंदर चले गए, उस दौरान राजू ने उस्सकी ब्रा को उन्हुक कर दिया, संजना चुस्ती जा रही थी और रघु उस्सकी टॉप और ब्रा निकाल रहा था….
जब टॉप और ब्रा निकाल दिया रघु ने तो, अब संजना उठी, और बाहर देखते हुए कहा, “माना के यह जगह सुनसान है मगर एक फारेस्ट अफसर तो आ सकता है नाह?!”
रघु ने दोबारा अपने लुंड को संजना के मुंह में ठुस्स्ते हुए कहा, “अरे अगर अफसर आया भी तो कहाँ से उस्सको पता होगा के हम कौन लोग हैं, और फिर वो पैदल तो नहीं आएगा नाह? या तो उस्सकी मोटरसाइकिल की आवाज़ सुनाई देगी या जीप की, तो हम उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले रुक जाएंगे”
संजना ने फिर रुकते हुए कहा, “हाँ तू तो ऐसा कह रहा है के मुझे सभी कपडे पेहेन्ने का मौका मिल जाएगा उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले!!”
रघु ने कहा, “कौन सी साडी या सलवार पहनी है तुम्हें? सिर्फ टॉप और स्कर्ट तो खींचनी है अपने ऊपर, वो तो फटाफट कर लेगी तू….. फिर रघु ने सोचा, ‘िस्सने जान बुझ कर ऐसे कपडे पहने हुए हैं जिस्सको झट से पेहेन सके, इस्को पहले से पता था के यह मुझसे यहाँ आकर छुडवाएगी, इस्को छुड़वाने की शौख है लगता है अभी पेलता हूँ इस्को मैं!!”
और देर नाह करते हुए रघु ने जल्दी से संजना की स्कर्ट भी खिंच डाले और पंतय बाकी थी संजना पर तब रघु ने अब अपना मुंह किया उस्सकी जाँघों के बीच और पहले उस्सकी पंतय को hi चुस्सने लगा, फिर धीरे धीरे पंतय को उतार फेंका और उस्सकी छूट की पंखुरियों के बीच अपने जीब चलाने लगा रघु जिस से संजना कसमसाने लगी और सिकुड़ सी गयी रघु के काँधे पर दांत काटते हुए…
संजना की पानी छूटने लगी थी, जिस्सको रघु चुस्सने लगा था और संजना की तड़पती आवाज़ सुनाई देने लगे जिस वक़्त रघु का जीब उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ग़ुस्से, और रघु जैसे जीब से hi छोड़ रहा था संजना को…. जीब को जितना हो सके अंदर बाहर करता गया वो और संजना ने मुठी भरके रघु के सर के बाल को खिंचा……
संजना तैयार हो गयी थी अपने अंदर लेने के लिए और हांफते हुए उस्सने खुद रघु से इल्तेजा किये एक नशीले नज़रों से उसस्के चेहरे में देखते हुए, “अब दाल दे अंदर रे रघु मुझसे अब और इंतज़ार नहीं हो रही….. ग़ुस्सादे रे रघु… उफ्फ्फफ्फ्फ़…..”
राजू ने उस्सको लेता दिया सीट पर और चढ़ गया संजना के ऊपर जिसस्ने दोनों टांगों को फैला दिया था और अपनी फिसलती हुई छूट के अंदर रघु के लौड़े को ग़ुस्ता हुआ महसूस करते हुए संजना की चीख निकली, “आआआअह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ उईईईईई…….”
रघु ढाका देने लगा…. संजना ने उसस्के जिस्म पर अपने बाहों को कर दिया, अपने नाख़ून से रघु के पीठ पर जैसे खींचते हुए निशाँ बना दिए संजना ने अपने अंदर उसस्के लुंड के धक्के रिसीव करते हुए, और अपने जीब को संजना ने उसी दौरान रघु के मुंह में दाल दिया उसस्के जीब को चूस्ते हुए… रघु ढाका देते वक़्त कभी संजना के बूब्स को छत्ता, चुस्ता तो कभी उसस्के गर्दन छत्ता चुस्ता, तो कभी उस्सकी जीब chussta…hanffne लगा था मगर धक्कों को बरकरार रखा रघु ने जब तक के संजना ने झड़ते हुए “ोीीमाआआआ आआआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्छ्हःहःह रघुउउउउउउउ आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हूँ गया रे meraaaaaaaaaaa!” संजना अपने जिस्म को ऐंठ रही थी रघु के निचे ओर्गास्म के दौरान और रघु पेलता गया और झट से लुंड को बाहर निकालते हुए उस्सने अपना पानी चोर्रा संजना के पथ पर और लुंड को मसलता गया खुद अपने पानी को सनजना के पथ पर रघड़ते हुए…..
और दोनों हांफते हुए हंससने लगे कार के पीछे वाले सीट पर लेट करे……
तो बे कॉन्टिनोएड……….. (2200 वर्ड्स)