Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

hotaks

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चावला फॅमिली की कहानी

एक्सक्लुसिवली रिटेन फॉर स्फोरम

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कहते हैं के प्यार अँधा होता है. अगर किसी ने शादी से पहले सेक्स कर लिया तो वासना कहते ऐसे प्यार को.

इस कहानी की बात है तो पूछना यह है किआ एक अधेड़ आदमी को किआ एक जवान लड़की से प्यार हो सकता है? किआ एक जवान लड़की अपने बाप से भी उम्र वाले आदमी को सच में दिल से प्यार कर सकती है? आदमी के तरफ से उस प्यार को सिर्फ वासना का नाम देते हैं. तो किआ उसस्के दिल की गहरायी में कोई झांकता है जो मालूम हो के वासना है या सच में प्यार है?................ अब जवान लड़के लड़की भी अगर शादी से पहले सेक्स करे तो भी ग़लत कहते हे दुन्या वाले.... मगर मेरा कहना है के हर किस्सम का प्यार होता है.

मैं कहूंगा के पुराने ज़माने में लोग पहले शादी करते थे बिना लड़का लड़की को देखे, फिर सेक्स करने के बाद एक दूसरे से जुड़ जाते थे.... अब अगर पुछा जाए के बिना किसी से प्रेम किये कैसे सेक्स करते थे वह लोग? तो किआ वह वासना नहीं था? वह भी तो सेक्स करते थे बिना प्यार किये,

तो इस लिए मेरा मानना है के, आज की इस मॉडर्न ज़माने में, इस तेज़ रफ़्तार से बदलती दुन्या में प्यार भी बहोत तेज़ी के साथ बदला है और कई प्रकार के रूप धारण किया है इस प्यार ने भी. इंसान भी वैसे hi बदले हैं उसी रफ़्तार के साथ, तो आज सेक्स हो या प्यार दोनों बराबर तौला जाता है. सेक्स के नाम पर प्यार तो कभी, प्यार के नाम पर सेक्स. अपने रूह से, गहरी आत्मा से किसी को प्यार करने वाला तो करोड़ों में एक मिलेगा, तो उस्सकी बात क्यों करें वो अजूबा है. चलो आम लोगों की बात करें जो आज कल हमारे दाएं बाएं मौजूद हैं.....

इस कहानी में ऐसा hi कुछ प्यार से शुरू होगा और किआ रूप धारण करेगा कहानी के अंत तक समझ में आएगा के इंसान शुरू किआ करता है और उस्का अंजाम किआ होता है.............. पहला अपडेट कुछ घंटे बाद दूंगा फिलहाल इस्को ट्रेलर समझ लिया जाए :डी
 
चावला फॅमिली की कहानी (अडुल्टेरी- ेरोटिसिस्ट- इन्सेस्ट)

अपडेट 1- चावला साहब मीट्स संजना

चावला साहब की बहोत बड़ी बिज़नेस थी. शुरू से ज़मींदार थे उसस्के परिवार वाले और आज चावला साहब बड़े शहर में बड़े पैमाने पर बिज़नेस करता है. पैदा गाओं में हुआ था एक ज़मींदार फॅमिली में और बड़े हवेली का मालिक था उस्का दादा. इज़त वाले लोग थे जिनके निचे हज़ारों लोग काम करते थे. मगर आज के ज़माने में चावला साहिब ने गाओं की हवेली और ज़मीन बेच कर शहर में शिफ्ट हो गया पिछले 18 सालों से. क्यूंकि चावला साहिब अपने खानदान का आखरी चराग़ था, सो सारे ज़मीन और हवेली सब उस्का अपना हो गया था.

बड़े शहर के शोर शराबे से कोई 2 किलोमीटर्स की दूरी पर एक आलिशान बुगलो टाइप घर है अभी उस्का. चावला साहिब का पहला नाम सूरजप्रकाश हुआ करता था गाओं में. अब भी वही नाम है मगर पिछले 18 सालों में सब उनको सिर्फ चावला साहब hi कहकर बुलाते हैं. बड़े बिज़नेस पार्टनर्स, बड़े सोसाइटी के लोग, क्लब वाले, गोल्फ क्लब के साथी ेट्स, सब उनको चावला साहिब से जानते हैं. इनके दो बेटे हैं.

पहला बीटा का नाम विवान चावला, जो अभी करीब 40 इयर्स का है और एक उस से छोटा बीटा जो तक़रीबन 26 साल का है और जिस का नाम आरव है.

एक बेटी है, पूजा जिस की शादी हो चुकी और इसी शहर में रहती है मगर अक्सर अपने पिता के घर आया जाया करती है.

विवान शादी शुदा है; उस्सकी पत्नी , सान्वी अभी कोई 27 या 28 साल की है और एक बेटी की माँ है. बेटी अभी छोटी है. **** साल की है. उस्का नाम दीप्ति है. सब डीप बुलाते हैं उस्सको, नटखट है और सबके दुलारी. घर में उस्सकी आवाज़ दिन रात गूंजती है. बहोत शोर मचाती रहती है. हल्ला गुल्ला सब दीप्ति का काम है.

चावला साहिब का छोटा बीटा आरव, भी अपने पिता के साथ hi बिज़नेस संभालता है बराबर विवान की तरह. आरव बहोत शांत किस्सम का लड़का है और बहोत फर्माबरदार है. अपने बाप और बड़े भाई के सभी बातें सुनता है. शर्मीला भी है वो, ज़्यादा बात भी नहीं करता था मगर हाँ बिज़नेस बहोत अच्छी तरह से करता है. काम में बहोत ध्यान देता है और कंपनी का बहोत हैं मेंबर है. उस्सकी अभी तक शादी नहीं हुई और चावला साहिब एक लड़की की तलाश में है उसस्के लिए. घर में एक बड़ी बहु तो है hi, अब एक और लाना था.

चावला साहिब की पत्नी की देहांत के बाद hi उस्सने अपने ज़मीन वग़ैरा बेच कर सिटी में शिफ्ट हुआ और नया बिज़नेस शुरू किया, याने 18 साल पहले. दोनों बेटों और एक बेटी की देख भाल नौकरों ने ज़्यादा किये क्यूंकि चावला साहिब बिज़नेस में मसरूफ रहते थे. पैसे वाला था तो नौकरों की लाइन लगा दिया था अपने तीनों बच्चों की देख भाल के लिए. नौकरों की कमी होती गयी जब बच्चे बड़े होने लगे और ज़्यादा कम हुए जब पहली दुल्हन सान्वी घर में आयी. हाँ एक ड्राइवर और एक बगीचे के देख भाल करने के लिए माली अभी तक हैं घर में. किचन खुद सान्वी संभालती है. जो पहले से रसोई में काम करता था उस्सको कंपनी के किचन में भेजा गया.

आरव और सान्वी की बहोत बनती है. बहोत प्यार है देवर भाबी के बीच. और छोटी दीप्ति तो पागल थी अपने चाचा के लिए. विवान का बैडरूम ऊपर वाले माले पर है और आरव का भी. चावला साहिब का कमरा निचे है. किचन भी निचे है. बहोत बड़ा लाउन्ज है निचे hi जहाँ सबको रिसीव किया जाता है. बिज़नेस पार्टनर्स कभी एते थे तो सब उसी लाउन्ज में बैठते थे और किचन एक तरफ था तो सर्वे करने के लिए आसानी होती थी. वैसे एक छोटा सा किचन ऊपर भी है. लाउन्ज लगता था किसी बड़ी 5 स्टार होटल की लिविंग एरिया है.

अस्सल कहानी तब शुरू होती है जब चावला साहिब आरव के लिए लड़की पसंद करता है. अगर आरव को hi लड़की चुनने की और पसंद करने की बात होती तो वो बूढ़ा हो जाता मगर कभी नहीं सेलेक्ट करता. वो इन् सब चीज़ों से दूर भागता है. इतना शर्मीला है के अपनी भाबी से पहली बार बात किया 4 महीने के शादी के बाद. चावला साहिब और विवान ने सान्वी को समझा दिया था के आरव को वक़्त दिया जाये उस से दोस्ती करने की क्यूंकि वो बहोत शर्मीला है, लड़कियों के मामले में वो जीरो है. एक भी लड़की उस्का दोस्त नहीं था. कॉलेज तो बॉयज कॉलेज में पढ़ा था तो सिर्फ लड़के दोस्त थे उसस्के. इतना शर्मीला और छुप चाप सा था के बाप ने सोचा के अगर वो उस्सकी शादी नहीं करवेगा तो आरव ऐसे hi रहेगा ज़िन्दगी भर, बैचलर hi मरेगा.

चावला साहिब ने कई लड़कियों को देखे दोस्तों के तरफ से मगर एक भी पसंद नहीं आयी थी अब तक आरव के लिए. फिर एक दिन चावला साहिब, को अपने गाओं के तरफ जाना था किसी काम के लिए, तो वहां उस्का पुराण दोस्त आनंद भाई मिला. आनंद ग़रीब आदमी था और कुछ साल पहले चावला खानदान के हवेली का नौकर हुआ करता था. आनंद की एक बेटी थी उन् दिनों जो 18 साल पहले पैदा हुई थी. और जिस्सको चावला साहिब ने गॉड में लिया था और एक सोने की नेकलेस पहनाई थी उस्सको. आनंद जी गाओं के दूसरे हिस्से में रहते थे जहाँ चौला साहिब का एक छोटा सा फार्म हाउस था और जो उस्सने आनंद की वफादारी के लिए उस्सको गिफ्ट कर दिया था. गाओं का वो हिस्सा पहाड़ी इलाका था, और आनंद का तो एक छोटा सा झौंपड़ी था इस से पहले.

जब चावला साहिब गाओं के उस हिस्से में गए तो आनंद से मिले और आनंद ने उनको घर आने की दावत दी. एक 4क्ष4 में चावला साहिब गए थे उधर. वैसे तो ड्राइवर हैं उंनका मगर कभी कभी खुद भी ड्राइव करते हैं और लॉन्ग ड्राइव बहोत पसंद था चावला साहिब और दोनों बेटों को भी.

चावला साहिब जब खुद अपनी दी हुई घर के अंदर दाखिल हुआ तो उस्सको एक अजीब सी फीलिंग हुई. बहरहाल, चावला साहिब को बैठाया गया और कुछ hi देर बाद एक बहोत खूब सूरत लड़की चाय सर्वे करने को आयी. लड़की बेहद खूबसूरत थी, बहोत हॉट दिख रही थी, सेक्सी थी, और बिल्कुल गोरी रंग की मेम लग रही थी. चावला साहिब को बहोत हैरानी हुई इतनी खूबसूरत लड़की को आनंद के यहाँ देख कर. बेशक सवाल किया के लड़की कौन है? आनंद भाई के जवाब देने से पहले लड़की ने खुद थोड़ा शर्माते हुए कहा,

“ लो! आप तो मुझे पहचानते hi नहीं, मैं तो आप को पहचान गयी क्यों के आप के सात मेरे कई फोटोज हैं जब मैं बेबी थी….. आप तो आज भी बिल्कुल वैसे hi दिख रहे हो जैसे 17 साल पहले दीखते थे. आप की उम्र नहीं बढ़ती किआ?”

उस्सकी आवाज़ एंटी सुरीली थी के चावला जी को उस लड़की को सुनते रहने का मन किया और कुछ हैरान नज़रों से आनंद के तरफ देखते हुए पूछने hi वाला था के आनंद ने कहा,

“मेरी बिटिया है साहिब, वही जो पैदा हुई थी जब आप हवेली बेचने वाले थे, फिर जब ये एक साल की हुई थी तो आप ने इस्को नेकलेस दिया था और तसवीरें खिंचवाई थी जो इस ने बहोत संभाल के रखे हैं. आप के बारे में हमेशा पूछती रहती है. इस ज़माने की लड़की है साहिब, मोबाइल से दिन भर सेल्फी लेती रहती है और वो कान में स्पीकर ठुस्से रहती है, पता नहीं किआ सुनती रहती है…..”

चावला साहिब की नज़रें उस लड़की के चेहरे से हट hi नहीं रही थी. ुस्स्सने लड़की से पुछा, “मोबाइल उसे करती हो मतलब पढ़ी लिखी हो तुम? नेटवर्क अत है किआ यहाँ?”

और लड़की की जगह उसस्के पिता ने जवाब दिया, “कॉलेज भेजा था साहिब, छोटी सी शहर है नाह इस गाओं के उस पार. वहीँ जाती थी….. मगर कम्पलीट नहीं किया, इंग्लिश तो फटाफट बोलती है मगर गणित में बहोत वीक है, उस्का मैं नहीं लगता था कॉलेज में इसी साल की शुरू में जाना बांध किया. मैं ने भी कह दिया के किआ उखाड़ लेगी पर लिख कर, घर के काम काज सीख ले शादी के बाद एहि तो काम आएगी, घर के देख भाल करना….”

चावला साहिब के चेहरे में एक चमक सा दिखा, और फिर उस लड़की को ऊपर से निचे देखता रहा मानों के एक अप्सरा दिख गयी हो उससे. “उस मधुर आवाज़ की मालकिन का नाम किआ है आनंद?” चावला साहिब ने पुछा. तो लड़की ने खुद एक दिलकश्त मुस्कराहट में जवाब दिया, “संजना ात योर सर्विस सर.”

चावला साहिब खड़े हो गए और लड़की को कहा, “अरे तुझे तो मेरे गले लग्न चाहिए, अजा अजा, सीने से लगलूं तुझे!”

लड़की थोड़ा सा शर्मायी पर चली गयी चावला साहिब के बाँहों में यह कहते हुए, “मैं ने तो सोचा था के मुझे देखते hi आप मुझको गले लगाओगे, मैं तो वेट कर रही थी, मगर आप ने तो मुझको पहचाना hi नहीं!”

ज़ोर से सनजना को बाँहों में भर के चावला साहिब उसस्के पीठ तपतपा रही थी, फिर उसस्के दोनों गालों पर चुम्बन दिए, और लड़की ने भी चावला साहिब को गालों पर किश किया और कूदते हुए वापस किचन के तरफ चली गयी.

चावला साहिब को एक सुकून सा महसूस हुआ और एक अजीब सी फीलिंग हुई. उस्सको लगा के कोई बरसों से बिचरा हुआ मिला जिस्सको गले लगा के एक अनजान सी राहत मिली दिल के अंदर. चावला साहिब समझ नहीं पा रहा था के यह फीलिंग किसी थी.

संजना के जाने के बाद चावला साहब ने आनंद को बाहर चलने को कहा क्यूंकि उस्सको एक ख़ास बात करनी थी उस से. मगर ठीक तभी संजना वापस आयी, और चावला साहिब जो खड़े हो गए थे बाहर निकलने के लिए, मुड़कर मुस्कुराते हुए उस्सको देखने लगा. पर इशारे से, नज़रों के माध्यम से पता नहीं क्यों आनंद संजना को वापस जाने का इशारा कर रहा था. मगर संजना नहीं गयी और वहीँ कड़ी रही चावला साहिब को मुस्कुराते हुए देखते. तो चावला साहिब ने कहा,

“मेरी बहु बनेंगी संजना?”

तो बे कॉन्टिनोएड......................
 
अपडेट 2 संजना वाट्सप चावला साहब

यह सुनकर संजना का मुंह खुला के खुला रहगया और अपने पापा के तरफ देखने लगी. आनंद ने तन्हाई को तोड़ते हुए कहा, “पिछले एक साल से कहते कहते थक गया हूँ मगर यह शादी के लिए मानती hi नहीं!” आनंद ने ग़ुस्से में संजना को तिरछी नज़रों से देखा और हाथ से अंदर जाने का इशारा किया, और इस बार संजना चुप चाप चली गयी.

तो चावला साहिब ने आनंद से कहा, “मुझे लगा के तुम दोनों ख़ुशी के मारे पागल हो जाओगे यह सुनकर के मैं उस्सकी हाथ अपने छोटे बेटे के लिए मांग रहा हूँ, क्यों के कौन ग़रीब एक करोड़पति के घर अपने बेटी को भेजना नहीं चाहेगा.”

आनंद ने उदास चेहरा बनाते हुए कहा, “यह बात नहीं साहिब, कौन नहीं खुश होगा आप के जैसे लोग के यहाँ अपनी बेटी देकर? मगर संजना बिल्कुल hi शादी नहीं करना चाहती अभी. इस बात को लेकर कई बार हमारा बेहेज़ हो चूका है. लड़ती है मुझसे, आप तो आज कल के बच्चों को जानते hi हो साहिब, हमारा ज़माना नहीं रहा, यह जो चाहते हैं वही करते हैं!”

चावला साहिब ने कहा, “साहिब इस्सकी ज़िन्दगी में एक लड़का था. वो होता है नाह बॉयफ्रेंड. जब यह कॉलेज में थी तो कुछ चक्कर था इसी लिए तो मैं ने कॉलेज बांध करवाया इस्सकी.”

चावला साहिब ने कहा, “यह कौन सी बड़ी बात है? इस से किआ फरक पड़ता है भाई? तुम बुलाओ उस्सको मैं बात करता हूँ.”

आनंद ने कहा, “नहीं साहिब जाने दो नाह. चोर्रो इस बात को!”

तो चावला साहिब कुछ नाराज़ सा लगा और उठकर जाने लगा.

बाहर अपनी गाडी के पास खड़ा चावला साहिब ने आनंद से कहा, “एक बार जाने से पहले बात तो करदे अपनी बेटी से. मुझे अत है ऐसे मामले में बात निपटना. मगर आनंद खामोश खड़ा रहा. संजना सब सुन रही थी अंदर से तो बाहर खुद आगयी और आनंद उस्सको ग़ुस्से भरी नज़रों से देखने लगा. फिर चावला साहिब ने संजना से कहा, “अपनी मोबाइल नंबर दे मुझे वक़्त आने पर मैं तुमसे बात करूँगा. तो संजना ने नंबर दे दिया चावला साहिब को. और तुरंत मिसकॉल करने अपना नंबर दे दे दिया संजना को.

जब चावला साहिब चले गए तो संजना ने अपने बाप से कहा, “ झूट बोलने में तो माहिर हो आप. क्यों झूट बोलै के मेरा बॉयफ्रेंड था? झूठा पापा!”

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चावला साहिब कोई 5 किलोमीटर्स तक ड्राइव करते हुए पोंहचे थे के उस्सकी मोबाइल बजी. उस्सने देखा के संजना ने मैसेज भेजा है. “hi” तो उस्सने फौरन रिप्लाई किआ “Hi” और ड्राइव जारी रखा. फिरसे मैसेज आया, “कहाँ तक पोहंचे हो आप?” तो चावला साहिब ने कार पार्क करके सोचा छोटी सी चाट करले इस लड़की से.

चावला साहिब: “अभी अभी तो निकला हूँ बुसस 5 या 6 कंस ड्राइव किया हूँ. क्यों किआ हुआ?”

संजना: “कुछ नहीं ऐसे hi आप ने नंबर दिया तो सोचा मैसेज कर लून थोड़ा सा हीहीही”

चावला साहिब को लगा लड़की बचकानी हरकतें कर रही है तो जव्वाब लिखा;

“देखो ड्राइव करते वक़्त तो मैं नहीं चाट कर सकता घर जाने के बाद हम चाट करेंगे okay? ी ऍम ड्राइविंग नाउ सो we’ll टॉक लेटर. Bye. T.c.”

और इतना कहकर चावला साहिब ड्राइव करने लगे जब संजना ने जवाब दे दिया, “okay”

घर पहुंचने के बाद चावला साहिब की दिमाग़ में संजना बस्सी हुई थी. उस्सकी सुरीली आवाज़, उस्सकी लड़खपन, उस्सकी अदाएं, उस्का भोलापन, शुशीलता सब चावला साहिब को हैरान कर रहे थे. बहोत बरसों बाद आज चावला साहिब को ऐसा महसूस हो रहा था. किआ संजना में उस्सको अपनी बेटी पूजा दिखाई दे रही थी? किआ उस में उस्सको अपनी पत्नी की कुछ झलक दिख रही थी? या अपनी बड़ी बहु सान्वी में कुछ ऐसी अदाएं या बात थी जो चावला साहिब को संजना में दिखा? क्यों वो उस भोली भली लड़की के बारे में इतना सोच रहा था? चावला साहिब खुद को परेशान फील कर रहा था जब कार को गेराज में पार्क करके गेराज के दरवाज़े से जो सीधे किचन में खुलता है अंदर दाखिल हुआ तो सामने सान्वी को पाया जो मुस्कुराते हुए अपने ससुर का इस्तेकबाल कर रही थी एक कप गरम चाय के साथ.

चावला साहिब ने कहा, “अरे थैंक्स बूत no, मुझे कुछ बहोत ठंडा पिने को मैं कर रहा है, फ्रिज में से कुछ खूब ठंडा मिलेगा?

सान्वी, अपने नाक को टेढ़ा करते हुए एक मुस्कान में बोली, “किआ हो गया है आज सबको? सब चिल्ड hi मांग रहे हैं पिने को, आप की छोटी लाड़ली दीप्ति ने अभी अभी चिल्ड जूस माँगा. अब आप को भी चिल्ड पीना है जबकि आप की फवौरीते तो गरम चाय है; okay ठीक है चिल्ड hi लाती हूँ आप बैठिये.”

चावला साहिब वहीँ किचन में hi एक चेयर पर बैठ गए डाइनिंग तलबे के पास. अपना सर खुजाते हुए दीप्ति को आवाज़ दी साहिब ने, “किधर हो दीप्ति बीटा? छुपी हो किआ कहीं?”

फ्रिज के पास से सान्वी ने कहा, “वो कहाँ से दिखेगी आप को यहाँ इस वक़्त? टीवी के सामने बैठी है रिमोट हाथ में लिए और चैनल्स बदल बदल कर एनिमेशन्स देख रही है जूस पिटे पिटे”

और तब तक सान्वी जूस लेकर पास आये और अपने ससुर को जूस देते और उसस्के चेहरे में देखते हुए पुछा, “कोई प्रॉब्लम है किआ पिता जी? आप परेशान दिख रहे हो. कोई टेंशन की बात हुई किआ ऑफिस में? आप ऑफिस hi गए थे नाह?”

“नहीं नहीं मैं ऑफिस नहीं गया था, मैं अपने पुराने गाओं से वापस ारः हूँ अभी, 300 कंस ड्राइव किया नाह इसी लिए शायद थक गया हूँ” ससुर ने जवाब दिया.

जानवी ससुर के पास बैठी और कहा, “तभी तो मैं सोचूं जो आदमी पिछले 5 साल से अपने ऑफिस के काम सिर्फ ईमेल और वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से करता है घर से hi तो आज ऑफिस क्यों गए हैं? तो गाओं का किआ हाल है पिता जी? सब खुशाल मंगल है उधर? कुछ अपने मिले वहां किआ?”

जिस वक़्त चावला साहिब ने सान्वी के मुंह से (कुछ अपने) लव्ज़ सुनिए; तो उस्सको फिर उसी संजना की याद आयी और दिल में एक तीस सा हुआ. तो वो सान्वी के चेहरे में देखते हुए ढूंढ़ने लगा के किआ कोई ऐसी बात है उस्में जो संजना में चालक रही थी. और जब सान्वी ने देखा के उस्का ससुर उसस्के चेहरे में घुर्र रहे हैं तो पूछा, “किआ बात है पिता जी? आप सच में ठीक नहीं लग रहे आप को बुखार तो नहीं? देखूं?” यह कहकर सान्वी ने अपनी हथेली को अपने ससुर के गालों पर और गले पर लगाया उस्सकी टेम्परेचर चेक करने को. फिर कहा, नहीं फीवर तो नहीं है मगर आप इतने पीला क्यों हो? हुआ किआ? कोई मिला उधर किआ आप को? कुछ बात हुई होगी?”

चावला साहिब ने बात को टालते हुए कहा, “अरे नहीं रे, ऐसी कोई भी बात नहीं, मैं थक गया बहोत दिनों के बात इतना लम्बा ड्राइव किया नाह? हाँ उधर गाओं में एक पुराण दोस्त मिला, ग़रीब है बेचारा, फिर भी बेटी को पाल पास कर बड़ा कर दिया और लड़की शहर वाली लड़कियों जैसी दिख रही है बिल्कुल भी गाओं की छोर्री नहीं दिखती मगर भोलापन वही गाओं की है.”

सान्वी ने फिर कहा, “आप भी नाह पिता जी, इतने सारे ड्राइवर्स हैं कंपनी के, घर में भी ड्राइवर है तो आप ने क्यों ड्राइव किया इतने दूर तक? किसी भी एक ड्राइवर को कह देते वो लेजाता आप को…… और हाँ अच्छी बात है अगर आप के दोस्त ने अपनी बेटी की अच्छी देख भल किया.”

तब तक दीप्ति ऊपर से निचे स्टैर्स से उतारते हुए ज़ोरों से “दादा जी, दादा जी! चिलाती हुए अपने दादा की गॉड में आ टपके” चावला साहिब ने उस्सको गले लगाते हुए गॉड में लेकर “अरे मेरी गद्य, दादा का पुड्या, अभी से hi है यह तो बुढया!” गुनगुनाने लगा. सान्वी देखकर हस्ती जा रही थी.

और चावला साहिब दीप्ति को लेकर अपने कमरे में चले गए. सान्वी सर हिलाते हुए बड़बड़ायी, “बचे के साथ पिता जी भी बिल्कुल बचा बन जाता है, बहोत प्यार है इन् दोनों में”

अपने कमरे में चावला साहिब ने दीप्ति को बीएड पर रखा क्यूंकि उस्सकी मोबाइल में मैसेज की टोन बजी, और देखा तो संजना ने पूछा था, “आप अभी तक घर नहीं रीच हुए हो?”

चावला साहिब ने दीप्ति को तुरंत वापस अपने माँ के पास वापस किया यह कहते हुए के एक कांफ्रेंस चल रही है कंपनी वालों के साथ तो वो दीप्ति को उससे डिस्टर्ब मत करने दें. और जब चावला साहिब कांफ्रेंस करते थे तो अपने कमरे का दरवाज़ा हमेशा लॉक किया करते थे. तो वो वापस अपने कमरे में गए और बीएड पर लेट कर वाट्सअप पर संजना से चाट करना शुरू किया.

चावला साहिब: “हाँ जी मैं घर आगया हूँ अब, अब हम बात कर सकते हैं. तो सुनाओ किआ हाल है?”

संजना: “हाल? अरे आप तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे कभी मिले hi नहीं, अभी कुछ देर पहले तो मिले थे हम. आप सेफ पंहुचे या नहीं एहि पूछ रही थी”

चावला साहिब: “यू अरे वैरी ब्यूटीफुल यू क्नोव तहत?”

संजना ने ब्लश वाली स्माइली के साथ कहा, “थैंक यू बूत मुझे नहीं लगता के मैं सच मेज ब्यूटीफुल हूँ, आप ऐसे hi कह रहे हो”

चावला साहिब: “अरे मेरी नज़रों से देखोगी तब नाह पता चलेगा तुम्हें. अच्छा बताओ क्यों तुम्हारे पापा ने कहा के तुम शादी नहीं करना चाहती? किआ यह सच है?”

संजना: “NO यह झूट है!”

चावला साहब: “तो फिर तुम्हारे पापा ने इंकार क्यों किया मेरी समझ में नहीं आयी यह बात? वो बहाना बना रहा है, है नाह?”

संजना रिप्लाई नहीं कर रही थी… तो कुछ देर बाद चावला साहिब ने और मैसेज किया,

“hello यू तेरे? जवाब क्यों नहीं दे रही हो?”

“हाँ यहीं हूँ. आप से यह सब बातें मिलकर करुँगी, मोबाइल पर बात समझाना मुश्किल लग रही है.

“क्यों? किआ तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड था सच में? अगर हाँ तो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता ये आज कला आम बात है. और किआ अभी तक तुम उस बॉयफ्रेंड के साथ हो? किआ तुम उस से प्यार करती हो और तुम्हारे पापा नहीं चाहते? बताओ तो बात किआ है?

संजना ने फिर कहा, “ये बातें मिलने पर करेंगे. अभी कुछ और बात करें किआ?

चावला साहिब ने कहा, “ तो अब किआ बात करनी है?”

संजना, “कुछ भी. आप अपने बारे में बताओ, मैं अपने बारे में बताउंगी हीहीहीही”

चावला साहिब ने कहा, “बहोत बचपना है तुम में संजना!”

संजना: “हाँ मुझे पता है. पापा भी एहि कहता है. मैं हूँ hi ऐसी. मुझे बचपना करना और बच्चों जैसे बेहवे करने में बहोत मज़ा अत है हीहीहीहीही”

चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए लिखा, “ऐसे hi रहना हमेशा, तुमको बहोत hi सूट करता तुम्हारी यह अदाएं.”

संजना: “हम्म सूट करता है नाह? तो ऐसे hi रहूंगी हमेशा मैं देख लेना जी”

“तुम्हारी आवाज़ सुनने को मैं कर रहा है. बहोत प्यारी और मीठी बोलती हो, बिलककोल सुरीली आवाज़ है, चलो बात करते हैं, सिर्फ कॉल करें या वीडियो कॉल करें एक दूसरे को देख कर भी बात कर सकते हैं, किआ कहती हो?”

संजना ने टाइप किया, “सशह्ह्ह्ह no, पापा इस हेरे वो हमें सुन लेगा और पूछेगा किश से बातें कर रही हूँ….. जब वो घर पर नहीं होंगे तब वीडियो कॉल करेंगे okay?”

यह पढ़कर चावला साहिब को ऐसा फील हुआ के वो एक नौजवान है और एक लड़की से चाट कर रही है जैसे एक बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड अक्सर किया करते हैं…. चावला साहिब के जिस्म में एक अजीब सी रवानी दौड़ी और उस्सको कुछ अलग फील हुआ.

तो चावला साहिब ने पुछा, “इस वक़्त कहाँ हो घर के अंदर या बाहर?”

संजना: “अपने कमरे में हूँ”

चावला साहिब: “और उसी ड्रेस में हो जिस में थी जब मैं आया था?”

संजना: “हीहीहीही, हम्म अब थोड़ी देर में चेंज करुँगी”

चावला साहिब: “किआ तुम सिर्फ ड्रेस hi पहनती हो घर में? मेरा मतलब गाओं की लड़कियां तो ट्रेडिशनल गाओं वाले ड्रेस पेहेनते हैं मगर तुम तो एक शहर वाले लड़की की तरह ड्रेस हो, सिर्फ एक ड्रेस…….”

संजना: “मैं भी गाओं की ट्रेडिशनल ड्रेस भी पहनती हूँ, कई चोली और स्कर्ट भी हैं, पर जबसे कॉलेज जाना शुरू किया नाह, तब से आदत हो गयी ड्रेस या two-piece पेहेन्ने की, पापा से ज़िद करके ख़रीदवाती हूँ, वो भी खुद खरीद के लता है जब शहर जाता है तो. मगर आज जब मैं ने आप को देखा तब जा कर ड्रेस पहनी थी जिस वक़्त आप अपने कार से निकले, पापा से बात कर रहे थे तब ड्रेस चेंज किया वार्ना वही चोली में थी मैं.”

यह सब पढ़कर चावला साहिब के जिस्म में एक गर्मी की रवानी दौड़ी…. उस्सको लगा के फ़्लर्ट कर रहे हैं दोनों…. अपने आप को संभालते और टॉपिक को बदलते हुए चावला साहिब ने लिखा, “तो बताओ मेरी बहु बनेंगी तुम?”

तो बे कॉन्टिनोएड....................... (2103 वर्ड्स)
 
अपडेट 3 थे कंटिन्यू तो टॉक बूत थें…

संजना उस तरफ मुस्कुरा रही थी और अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुए टाइप किया, “पता नहीं हीहीहीही”

चावला साहिब: “मेरे घर में तुम आगयी तो राज करोगी. मैं बहोत hi आमिर आदमी हूँ, मेरा घर बहोत बड़ा है और बहोत सारे कार, लुक्सुरिएस सब कुछ हैं हमारे पास.”

संजना: ”हम्म मालूम है मुझे, आप कितने आमिर हो सब जानती हूँ. बचपन से आप के बारे में जानती हूँ. आप ने यह फार्म हाउस नहीं दिया होता पापा को तो हम झौंपड़े में hi रहते अब तक. आप की बहोत एहसान हैं हम पर. मां ने मुझको सब बताया था.”

चावला साहिब: “अरे हाँ तुम्हारी माँ नहीं दिखी मैं भी अब सोच रहा हूँ, हु कहीं काम करती है किआ?”

संजना उदास होते हुए टाइप किया, “मां नहीं रहे साहिब, वो तो 6 साल पहले, जब मैं 12 साल किट hi चल बसे!”

चावला साहिब: “ओह वैरी सॉरी तो हेअर तहत, मैं ने तुम्हारे पापा से पुछा भी नहीं, उनको कह देना के मैं ने तुम से पुछा और मेरे सिम्पथी देना उस्सको okay?”

संजना: “ अरे नहीं जी, मैं नहीं बताउंगी पापा को की आप से चाट कर रही हूँ, जब आप उन् से मिलो तब खुद केहडेना, हमारे चाट के बारे में मत बताना उस्सको प्लीज okay सर जी?”

चावला sahib:”are क्यों मैं ने उसस्के सामने hi तो तुमको नंबर दिए तो उस्सको पता होना चाहिए के हम कम्यूनिकेट करेंगे नाह? और प्लीज तुम मुझको यह सर और साहिब बोलना बांध करो प्लीज!”

संजना: “तो किआ बुलाऊँ आप को?”

चावला साहिब, “मुझे किआ पता? (स्माइली)

संजना: “ पापा यह चाट वग़ैरा कुछ नहीं समझते, वो इस्को कुछ ग़लत चीज़ समझते हैं, गाओं में संस, चाट, वाट्सअप, फब वग़ैरा की बहोत नेगेटिव वाइब्स हैं. यहाँ के लोग समझते हैं के बुरा काम करते हैं लोग इन् सब चीज़ों के ज़रिए. बहोत बदनाम हैं चाट वग़ैरा इस गाओं में क्यूंकि इस गाओं के 3 लड़कियों के अफेयर हुए चाट के थ्रू और….. और……. और…..”

चावला sahib:”aur किआ?”

संजना: ”और मुझे बताना नहीं अत… और कुछ हुआ तीनों लड़कियों के साथ!”

चावला साहिब: “बताओ नाह किआ हुआ उन् लड़कियों के साथ?”

संजना: “ोफो समझ जाओ नाह! तीनों प्रेग्नेंट हो गए जीन से चाट कर रहे थे उन् से hi!”

चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए टाइप किया, “मतलब वह तीनों के बॉयफ्रैंड्स थे और चाट करते थे अपने बॉयफ्रैंड्स से फिर मिलने लगे और प्यार किया सब ने, तो किआ हुआ? यह तो नार्मल बात है! फिर तीनों ने शादी किये नाह?”

संजना: “नहीं, सिर्फ एक की शादी हुई, बाकी के दो ने आत्महतिया किये! इस लिए पापा कहते हैं के चाट, मेस्सगेस, फब गूगल वग़ैरा सब जान लेवा hein…who तो अनपढ़ ठहरा कुछ नहीं समझता मैं उस्सको समझाते समझात थक गयी हूँ पर उंनका ओपिनियन वैसा hi है. बहोत ग़लत मानते हैं यहाँ के लोग इन् सब चीज़ों को. शुक्र है पापा को लिखना पढ़ना नहीं अत वार्ना मुझे सभी मेस्सगेस को डिलीट करना पड़ता.”

यह सब सुनकर चावला साहिब ने खुद से कहा, “उफ़ यह किन्न लोगों से पाला पर गया है अब धत्त!” फिर भी उस ने रिप्लाई ये किया,

“तुम्हारे पापा पुराने खयालात के हैं, हु अब भी उसी ज़माने में जी रहा है जब हम गाओं में रहा करते थे, मैं अलग हूँ. मैं मॉडर्न हूँ. जीने का ढंग बदल गया है मेरा. खैर चोर्रो इन् बातों को. बताओ कब तुमको देख सकता हूँ वीडियो कॉल पर? तुम्हें देखने को बहोत मैं कर रहा है.”

संजना ने कहा, “शाम को पापा पीने जाएगा रघु के यहाँ, तब वीडियो कॉल करेंगे, मैं भी तब तक नाहा कर चेंज कर लुंगी, मतलब अभी से एक घंटा बाद. Okay?”

चावला साहिब: “ओह तो हु अब तक पीटा है, ok. बताओ कौन सी ड्रेस पहनोगी नहाने के बाद?”

संजना: “हीहीहीही, देख लेना वीडियो कॉल करेंगे तब”

चावला साहिब: “नहीं, मेरा मतलब है के मैं तुमको ट्रेडिशनल ड्रेस में देखना चाहता हूँ!”

संजना: “यह किआ बात हुई, मैं ने सोचा आप कहोगे की आप मुझको एक मिनी स्कर्ट या एक सस्य ड्रेस में देखना पसंद करोगे मगर आप भी तो पुराने खयालात के हो जो ओल्ड फाशिवेद गाओं की ट्रेडिशनल ड्रेस में देखना चाहती हो मुझे!”

चावला साहिब बोले: “अरे संजना, गाओं की ट्रेडिशनल ड्रेस भी कितनी सेक्सी होती है, पता नहीं तुम आज कल कौन सी गाओं की ड्रेस पहनती हो, मेरे ज़माने में तो गाओं की लड़कियां एक छोटी सी चोली, और एक बहोत छोटा सा लेहंगा जो चिपकी रेंती थी कमर से जाँघों तक वैसा पेहेनते थे, किआ तुम लम्बी स्कर्ट जैसा लंहगा पहनती हो?”

अचानक संजना ने टाइप किया, “पापा बुला रहे हैं बाद में बात करती हूँ bye.”

चावला साहिब काफी हैरान थे के इस लड़की ने एक बार भी नहीं पुछा की आप का बीटा कैसा है, किआ काम करता है, उस्सकी किआ उम्र है, हु तो सिर्फ उसी से बात किये जा रही है जैसे उसी से शादी करनी है……. मगर चावला साहिब को संजना बेहद पसंद थी और वो उसस्के ख्यालों में छायी हुई थी.

देर घंटे के बाद.

चावला साहिब लाउन्ज मैं बैठे, एक व्हिस्की का गिलास लिए, जिस में जैक डेनियल व्हिस्की में 3 टुकड़े बर्फ के घुल रहे थे, अपने एंड्राइड पर निगाहें लगाए बैठे थे. सूरज ढल रहा था और रौशनी धीमा होते जा रहा था, तो सान्वी ने लाइट्स ों किये लाउन्ज के और अपने ससुर को मुस्कुराते हुए कहा, “आज आप ने बहोत सवेरे hi व्हिस्की बना लिए पिता जी? और खुद बनाये मुझको नहीं कहा बनाना को आज क्यों? लगता है किसी को याद कर रहे आज आप, है नाह?”

चावला साहिब थोड़ा सा चाहंका अचानक, सान्वी की आवाज़ सुनकर और अपने कनपट्टी से ग्लासेज उतारते हुए सान्वी के चेहरे में देखते हुए पुछा, “कोई ऑफिस से वापस नहीं अयाह ै अब तक?”

सान्वी वापस किचन के तरफ जाते हुए जवाब देती गयी, “आज दोनों भाई रेस्टोरेंट से होकर आएंगे हमको खाने के लिए कह दिए हैं दोनों ने. जब आप को भूक लगे तो बता देना खाना पड़ोस दूंगी.”

चावला साहिब ने खुद को गिलटी जैसा महसूस किया के उस्सकी बहु आज उस से कुछ दूर है क्यों के आज हु खुद सब कुछ कर रहे हैं जबकि सान्वी हमेशा उस्का सब काम करती है हर रोज़. तो वो हाथ में व्हिस्की का गिलास लिए किचन के तरफ जाने लगा सान्वी के पास.

किचन की टेबल पर बैठ कर चावला साहिब की एक तंग ज़मीन छह रहे थे और एक तंग ऊपर लटके हुए, अपनी बहु के पास उसस्के चेहरे में मुस्कुराते हुए देख कर बोलै, “क्यों आज मेरी बहु कुछ नाराज़ लग रही है मुझसे? किआ बात हो गयी जी? हम्म?” सान्वी ने मुस्कुराते हुए एक डिश हाथ में लिए मेज़ पर रखते हुए ससुर को हलके से ढाका देते हुए कहा, “क्यों? आज नशा एक hi व्हिस्की में चढ़ गया किआ? बहोत प्यार आने लगा मुझपर अचानक?” और तुरंत वहां से माइक्रो वेव की तरफ बढ़ते हुए सान्वी बोलती गयी, “अब आप कहें तो दूसरी व्हिस्की मैं बना दूँ या आप खुद बनाओगे? दीप्ति अभी वापस निचे आएगी खाने के लिए, इस से पहले आप अपना ख़तम कर लीजिये ड्रिंक, तब तक मैं एक शावर लेकर आती हूँ. दीपू आये तो उस्सको अपने पास hi रोक कर रखना उस्सकी बुरी आदत है जब शावर में होती हूँ तो ताका झांकी करती है हाहाहा”

यह कह कर सान्वी चली गयी वाशरूम की तरफ और चावला जी को याद आया के संजना ने भी कहा था के वो भी नहाने जाएगी….. लो फिरसे संजना की याद agayi…har एक बात पर संजना बीच में आरही थी…. चावला साहिब सोचने लग ेके अब तक उस्सकी डैड पिने के लिए चला गया होगा और वीडियो कॉल करेंगे वो संजना के साथ. मगर अब तो उस्सकी पोती दीपू उसस्के पास आने वाली थी, उस्सको फ़िक्र होने लगा के कहीं संजना ठीक तभी कॉल नाह करे.

बुसस इतना hi सोचा के दीपू शोर करते हुए ऊपर से निचे स्टैर्स पर एते हुए दिखाई दिए और अपने दादा को देख कर अपनी तोतली आवाज़ में चिलाती हुए kaha,”dadu, दादू मां बाथ को गयी मैं अभी खबर लेती हूँ वेट करो मैं अब्जी आयी!” मगर जल्दी से दादा ने उस्सको थामा और कहा, “अले मिली बेबी, जब कोई बाथ करता है तो उसे देखना बुरी बात होती है, मां को मत देखना चाहिए, चलो मैं तुमको एक गेम दिखता हूँ मोबाइल पर.” गेम का नाम सुनकर दीप्ति छुप हो गयी और दादा के साथ चली गयी. अपने रूम में चावला साहिब ने मोबाइल लेकर दीपू को खेलने को दिया और दूसरी व्हिस्की बनाया और फिर संजना की सोच में डूब गए. सोचने लगा के क्यों आनंद उस्सकी शादी से इंकार कर रहा है जबकि संजना ने कहा के उस्सकी कोई बॉयफ्रेंड नहीं है. तो आनंद ने झूट क्यों कहौ उस से.

और थोड़ी hi देर बाद सान्वी एक मैक्सी में, हाथ में टॉवल लिए, सर को एक तरफ झुकाये, पार्टली अपने बालों को टॉवल से रगड़ते हुए उसस्के कमरे आयी पूछने के दीपू खाना कहेगी के नहीं. यह तक़रीबन हर शाम का सन था उस घर में. इस वक़्त या तो सान्वी ड्रिंक बना रहे होते हैं अपने ससुर के लिए या तो शावर के बाद, वापस लाउन्ज में काउच पर बैठ कर टीवी ों करती है, और जीन दिनों आरव और विवान घर पर होते सो सब इकठा लाउन्ज में बैठते हैं और गुप्षुप लगते हैं. पर ज़्यादा तर विवान और आरव लेट hi घर वापस एते हैं, कोई 8 या 9 बजे. अभी तो सूरज ढला था और वह दोनों ने तो रेस्टो की प्रोग्राम बांये थे तो घर में सिर्फ यह तीन जान थे.

जिस वक़्त सान्वी दीप्ति को अपने ससुर के बीएड से उठा रही थी, उस्सने पुछा, “दूसरी ड्रिंक बन आलिया आप ने या बना दूँ?” तो ससुर उस्सको ग़ौर से देखते हुए कहा, “जब तुम शावर लेने गयी तो बनाया, मगर आज एक तीसरा लूंगा बना दो एक और, तुम्हारी हाथ का नशा अलग होता है हेहेहे!” तो सान्वी ने दीप्ति को वापस बीएड पर रख कर अपने ससुर के हाथ से गिलास लिया और उसस्के लिए एक ड्रिंक बनायी. ससुर तब तक उसी को देख रही थी. सान्वी बिलककोल फ्रेश दिख रही थी, खुले बाल कुछ भीगे कुछ सूखे, मैक्सी ड्रेस में वो जैसे चमक रहे थी. सान्वी जब गिलास थमाने आयी तो नोट किया के ससुर उस्सको जैसे घुर्र रहा है तो हँस्ते हुए कहा, “आज लगता है आप को पहली hi ड्रिंक से चर्र गयी है और अब तीसरी ले लिया लुढ़क जाओगे, देखना कहीं गिर्र नाप अदो आप, टेक केयर, मैं चली दीपू को खाना खिलाने.”

वो दीपू को लेकर चली गयी, और जैसे चावला साहिब ने तीसरी गिलास की पहली सिप लिया उस्सकी मोबाइल बीएड पर बजने lagi…..Sanjana के तरफ से वीडियो कॉल था…..

तो बे कॉन्टिनोएड………………. (1772 वर्ड्स)
 
अपडेट 4 थे वीडियो कॉल ऑफ़ संजना

एक हसीं मुस्कान के साथ संजना ने कहा, “hello तो लो हम वीडियो चाट पर आगये जी”

चावला साहिब ने संजना की मधुर आवाज़ और दिलकश्त चेहरे को देखते हुए मुस्कुराकर कहा, “ओह! कितना ख़ुशी हो रहा है मुझे तुमको देख कर मैं बयां नहीं कर सकता, कितनी हसीं दिख रही हो स्क्रीन पर तुम! लगता है एक फ़िल्मी हीरोइन हो!”

पहली चीज़ जो चावला साहिब देखना चाहती थी वो यह के संजना कैसे ड्रेस थी उस वक़्त, मगर सिर्फ उस्सकी चेहरे hi दिख रहा था तो उस्सने कहा, “ ज़रा सा मोबाइल को दूर करो अपने आप पर देखूं तो किआ लिबास पहनी हो और किसी दिख रही हो इस वक़्त?!” तो संजना ने “हीहीहीही” खिलखिलाते हुए अपने आप से मोबाइल को कुछ दूर किया एक पाउच के साथ. हु कुछ ऐसी दिख रही थी.

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चावला साहिब ने उस्सको ज़ूम करने को कहा, या दूसरी एंगल में देखने की मान की, तो संजना ने मोबाइल की एंगल चेंज किया और मुस्कुराते हुए यह पोज़ दिखा मोबाइल पर चावला साहिब को:

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चावला साहिब जैसे दीवाना हुए जा रहा था और उसस्के देखते हुए उस्सने एक सिप लिया अपने व्हिस्की का तो संजना ने कहा, “आप भी पी रहे हो पापा की तरह?”

चावला साहिब अपने व्हिस्की की गिलास को एक तरफ करते हुए, संजना को मोबाइल पर ग़ौर से देखते हुए कहा, “तुम इसी पोज़ में रहो मैं सेव कर रहा हूँ इस एंगल में तुमको, बेहद खूबसूरत लग रही हो, वह किआ बात है, तुम्हारी खूबसूरती कमाल की है और तुम्हारी मुस्कराहट तो बुसस जान लेवा है संजना!”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “मेरा पिछ सेव करके अपने बेटे को दिखाओगे किआ?” अभी मत दिखाना किसी को प्लीज, अपने लिए रखना अभी के लिए okay?”

चावला साहिब पर व्हिस्की का नशा चढ़ रहा था और उसस्के मैं में अजीब खयालात आरहे थे उस वक़्त तो उस्सने अचानक संजना से कहा, “तुम्हारे ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल सकती हो किआ?”

संजना ने शॉकेड वाला शकल बनाते हुए अपने खुले मुंह पर एक हाथ रखते हुए शरारती आवाज़ में कहा, “क्यों? हाय राम ऐसा क्यों कह रहे हो आप?” तो चावला साहिब ने सोचा शायद उस्सने ग़लती करदी यह कहकर, तो उस्सको सॉरी कहा मगर देखा के संजना मुस्कुराते हुए ऊपर अपने ब्लाउज की 2 बटन खोल रही है. नाह चाहते हुए भी चावला साहिब ने उस्सकी क्लीवेज देखते hi फील किया के उस्का लुंड पंत के अंदर मचलने लगा है! एक तो नशा सा छह रहा था व्हिस्की पिने का बाद ऊपर से यह संजना की जवानी और उस्सकी चंचल अदाएं और उस्सकी मुस्कराहट और दिलकसष्ट सुरीली आवाज़ ने चावला साहिब को परेशान कर दिया था. यह शबाब का नशा था ऊपर से…..

संजना, मुस्कुराती जा रही मगर अपने क्लीवेज पर अपने गेसुओं को झटक दिया तो कम क्लीवेज दिखने लगे चावला साहिब को. बुसस संजना ने बटन तो खोले मगर ब्लाउज वैसी hi थी, और कुछ ख़ास नहीं दिख रहे थे, मगर संजना का इतना करना चावला साहिब के लिए बहोत बड़ी बात थी.

संजना बुसस एक मॉडल की तरह पोज़ दे रही थी और कभी पाउच तो कभी चेहरा बना रही थी और हस्ती जा रही थी. चावला साहिब ने सोचा के उस में बहोत बचपना है अभी उस्सको खुद नहीं पता के वो किआ कर रही है. तो साहब ने सोचा के कुछ बातें कर लिया जाए उस से. उस ने पुछा,

“तुम्हारे पापा कितने बजे वापस आएंगे?”

“पता नहीं वैसे तो घंटा देर घंटा में वापस आजाते हैं मगर कभी कभी दो ढाई घंटा लगा देते हैं जब उसस्के फ्रेंड्स से ज़्यादा बकबक करने लगता है.” संजना ने मुस्कुराते हुए अपने होंठों को ट्विस्ट करते हुए जवाब दिया.

तो चावला साहिब ने कहा, “तुम्हारे पापा की किआ प्रॉब्लम है? क्यों नहीं चाहता के तुम्हारी शादी हो?”

संजना: “मैं ने कहा न के ये सब बातें हम मिलेंगे तब करेंगे.”

चावला: “अरे मगर बात तो करना पड़ेगा नाह पर कैसे? अभी भी तो बात hi तो कर रहे हैं अभी hi कर लेते हैं”

संजना ने अपने बालों को अपने गालों से पीछे करते हुए एक मुस्कान के साथ थोड़ा धीरे से कहा, “आप दोबारा आइये हमारे यहाँ, फिरसे पापा से बात कीजिये, मगर आप के आने से पहले, मुझे उनको मानाने तो दो, मैं उनको कन्विंस करने की कोशिश करुँगी और जब वो हाँ कहे तो मैं आप को बोलूंगी तब आप ज़रूर आना. ावोगे नाह?”

चावला साहिब अपने मोबाइल को इधर उधर घुमा कर संजना की क्लीवेज को देखने की कोशिश कर रहे थे जैसे के उस्सको हिलने से उसको ज़्यादा दिखेगा, अरे उतना hi दिखेगा जितना रियल में है नाह? उनको चढ़ गया था, नाशी में थे वो तो थोड़ा लडख़ड़ाते ज़ुबान में पुछा,

“तो तुम कैसे मनाओगे उनको? किआ कहोगी?..... आरी तुम अपने आप को फुल दिखाओ नाह मुझे, सिर्फ ऊपर दिख रही हो, सेल्फी स्टिक नहीं है किआ? कम्पलीट दिखाओ मुझे….. मैं तुमको देखना चाहता हूँ”

संजना उनके लड़खड़ाते जुबां सुनकर हंस पड़ी और खिलखिलाते हुए बोली, “आप को तो चढ़ गयी बिल्कुल, पापा भी कभी ऐसे hi बात करते हैं मुझसे, बहोत हंसी आती है मुझे, आप जाईये अब मैं रखती हूँ!”

यह सुनकर चावला साहिब थोड़ा अपने आप को संभालते हुए मोबाइल अपने चेहरे के पास लेट हुए, बोलै, “बिल्कुल भी नहीं मुझे कहाँ चढ़ी है मैं तो तुमसे ठीक से बात कर रहा हूँ”

संजना ने आराम से अपने मीठी आवाज़ में कहा, “ोफो आप नाशी में हैं आप को कुछ भी याद hi रहेगा कल, और पापा भी आने hi वाला है, कल बात करते हैं okay? आप जाइये मैं कट करती हूँ बबीर, गुड नाईट, स्वीट ड्रीम्स. स्लीप वेल एंड टेक केयर. मुउउउउआअह.”

चावला साहिब ने अपने होंठों को ट्विस्ट करके किश वाला बना के मोबाइल को किश किया जैसे संजना को किश कर रहा है और कहा, “वेट जाने से पहले एक किसी तो देती जाओ मुझे, एक हुग भी!”

संजना: “अभी अभी तो किश किया आप को, मगर हुग कैसे दूँ मोबाइल पर, जब आप आओगे तब हुग करलेना, लो और एक किसी “और उस्सने भी मोबाइल को किश करते हुए वीडियो कॉल ऑफ किया.

चावला साहिब ने जीतनेय क्लिक्स किये थे उस्सकी तस्वीर की बात करते वाक्य वो सब ेके क करके देखने लगा अपने मोबाइल पर, पिक्स को क्रॉप कर रहा था, उस्सकी क्लीवेज को ज़ूम करके देख रहा था, बीएड पर लेथ गया और सोचा के अब सनजना से मिलना बहोत ज़रूरी है. और अब संजना को वाट्सअप पर टेक्स्ट किया यह लिख कर,

“किआ हम दोनों अकेले मिल सकते हैं? कल तुम्हारे पापा काम पर चले जाये तो किआ तुम मुझसे मिलने आ सकती हो?”

संजना ने तुरंत रिप्लाई किया, “अरे बाबा इस गाओं में सब लोग इधर उधर घूमते रहते हैं सभी को हर किसी का पता रहता है, दो कदम चलूंगी तो सारे गाओं को पता चल jaega….to कैसे मिलने आउंगी, शाम को मेरे घर आने से पहले पापा को पता चल जाएगा, तो मैं उन् से किआ कहूँगी के कहाँ गयी थी?”

चावला साहिब ने रिप्लाई किया, “तो किआ तुम कभी भी बाहर नहीं जाती? दिन भर घर में रहती हो?”

संजना: “कहाँ जाउंगी साहब? बस गाओं में hi घूमती हूँ, उधर जो डैम बन रही है देखने जाती हूँ कभी, तो कभी नदी के तरफ टहलने निकलती हूँ, सब लोग टोकते हैं के किधर जा रही हूँ…. अब शहर के तरफ निकली तो बस लेना पड़ेगा तब तो हर एक को पता चल जाएगा के मैं बस से शहर गयी हूँ तो सब सवाल करेंगे के कॉलेज तो जाना चोरर दिया फिर बस लेकर कहाँ जा रही हूँ. आप समझे बात को?”

चावला साहिब रिप्लाई टाइप करने लगे थे के संजना की एक और मैसेज आयी, तो वो पढ़ने लगा, लिखा था, “आप पहले पापा से मिल लीजिये, बात हो गयी तब हम ज़रूर मिल सकेंगे, तब किसी ने भी पुछा बल्कि सबको तब पता चल जाएगा की आप मेरे रिश्तेदार बन गए हो, तो कोई टोक टाक नहीं करेगा. (स्माइली)

तो अब चावला साहिब ने लिखा, “फिट ठीक है तुम आज hi अपने पापा को मनाओ, बिल्कुल मनाओ, उनको समझाओ के मेरे घर में तुम बहोत खुश रहोगी, उन् से कहो के ऐसा घर नसीब वालों को मिलता है तो उनको बहोत खुश होना चाहिए, मैं चाहता हूँ के कल मुझे तुम जवाब दो के तुम्हारे पापा मुझसे मिलना चाहते हैं! Okay? Bye.”

संजना ने जल्दी से टाइप किया “पापा वापस आगये. Bye. सी यू टुमारो. तक”

चावला साहिब बीएड पर लेते हुए गहरी सोच में डूब गए और उस्सकी ेंख लग गयी.

रात को बारह बजे जब आरव और उस्का बड़ा भाई घर वापस आये तब सान्वी को पता चला के ससुर जी ने खाना नहीं खाया क्यों के डिनर पड़ोसते वक़्त उस्सने सुना था हु चाट पर है तो सोचा के बिज़नेस पार्टनर्स से बात कर रही है तो उस्का डिनर मेज़ पर सर्वे करके उन् से बाहर से hi कह दिया था के डिनर सर्वे हो गयी है हु आकर खा लें, और दीप्ति सोना चाहती थी तो वो ऊपर चली गयी उस्सको सुलाने और खुद भी सो गयी. जब विवान ने सान्वी को जगाया और पुछा के क्यों डाइनिंग टेबल पर पापा के प्लेट वैसा के वैसा hi है……. तो जल्दी से सान्वी ने अपने ससुर का दरवाज़ खोला और अंदर देखा के वो नींद में है. बिना चेंज किये hi सो रहे हैं. सान्वी को अजीब लगा क्यूंकि पहले ऐसा कभी भी नहीं हुआ था. उस्सने उनको हिल्ला कर जगाया, शराब की बड़बुह आरही थी तो सान्वी को पता चल गया के ससुर ने ज़्यादा पी लिया होंगे इसी लिए सो गए. कैसे भी करके उन् को जगाया और खान ेके लिए कहा…… अपने ेंखों को मसलते हुए चावला साहिब सान्वी के पीछे डाइनिंग टेबल तक gaye….aur हाथ मुहं धो कर सान्वी के खाना माइक्रोवेव में हीट करके उन् को पड़ोस.

खाने के बाद तक़रीबन 2 बजे चावला साहिब अपने कमरे में गए, तो अपने मोबाइल को उठाया फिरसे संजना की तस्वीरों को देखने के लिए, तो देखा संजना के 5 मेस्सगेस हैं. उस्का दिल, बहोत खुश हुआ और टाइम चेक किया तो सुबह के साढ़े एक बजे की सेंड की हुई मेस्सगेस थी मतलब जब वो खाना खा रहे थे तब संजना ने टेक्स्ट किया.

तो मैसेज को पढ़ने से पहले उस्सने यह टाइप करके सेंड किया, “किआ तुम अभी जाग रही हो?”

वेट करता रहा कोई 5 मीन्स मगर जवाब नहीं आया तो उस्सने संजना के मैसेज रीड किये, संजना ने लिखा था;

“मैं ने पापा से बात कर लिया है. आप कल hi यहाँ आइये. मैं ने उनको तक़रीबन मन लिया है फिर भी आप को उन् से बात करनी होगी. मैं भी साथ बात करुँगी. आप कल hi ज़रूर ाइयेगा. मैं आप का इंतज़ार करुँगी. मऊआअह.”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 5 चावला साहब गोज तो मीट संजना

संजना की मैसेज पढ़कर चावला साहिब खुश हुआ और उस्सको एक उम्मीद की किरण नज़र आयी. फिर भी उस्सने संजना को और टेक्स्ट किया, “कितने बजे आना चाहिए मुझे कल? तुम्हारे पापा तो काम पर जाएंगे दिन में, तो शाम को आऊं किआ?”

कोई सुबह के 9 बजे संजना की जवाब आयी, “अरे सर, पापा नहीं होंगे तब भी तो आप आ सकते हो नाह? मुझसे अकेले में मिलना चाहते हो न आप? तो पापा के आने से कुछ घंटे पहले भी आ सकते हो, हम अकेले होंगे, आप खुश नहीं होंगे मेरे साथ अकेले?”

यह पढ़कर चावला साहिब इतना खुश हुआ के तुरंत वहां जाने का मैं बना लिए, सोचा के दिन भर संजना के साथ वक़्त बिताएगा. वो तैयार हुआ और घर से निकलने जा रहा था 10 बजे के सान्वी ने देखा और उसस्के तरफ आते हुए कहा, “अरे आप कहाँ चल दिए इतना सुबह सुबह, इस टाइम तो आप कहीं नहीं जाते हो बल्कि आप को तो अब जागना चाहिए था? आप मुझसे कुछ ज़रूर छुपा रहे हो पिता जी, मैं कल से देख रही हूँ. कोई बात है जो मुझे अजीब लग रहा है. केहये तो किआ बात है?!”

चावला साहिब ने खुद से kaha,”Iss से कुछ छुपाना आसान नहीं, यह मुझको बहोत करीब से जानती है, मेरे हर बात से वाकिफ हो जाती है किआ कहूं इस से मैं?”

और एक झूट मूठ के मुस्कराहट के साथ उस्सने सान्वी से कहा, “आरी बहु, उन् दोनों भाइयों को मत बताना मैं एक डील करने जा रहा हूँ जो उन् दोनों को बिल्कुल नहीं पता, सरप्राइज देना है दोनों को.”

सान्वी को दिख गया के उस्का ससुर झूट बोल रहे हैं तो पुछा, “डील? कैसा डील? कब कांटेक्ट किया आप ने? और किश से भला जो मुझे नहीं पता?”

चावला साहिब बोले, “वो वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग चल रही थी कल रात देर तक तभी सब तय हुआ, अब निकलता हूँ 11 बजे वहां पहुंच जाना चाहिए मुझे, वो लोग वेट कर रहे होंगे. चलता हूँ शायद लेट आऊं, कोई भी पूछे कुछ मत बताना, कहना के तुमको कुछ नहीं पता. मैं बाद में सब बताऊंगा खुद वापस आकर.”

तब तक दीप्ति दावते हुए आयी और अपने दादा से अपने हाथ फैलाते हुए कहा, “दादा जी मुझे भी लेचलो कार में घूमने को” पर सान्वी ने उस्सको उठा लिया गॉड में उस से यह कहते हुए के दादा जी काम पर जा रहे हैं अपने ससुर को शक की निगाह से देखते हुए. और कहा, “किआ परफ्यूम लगाया है आप ने आज, बहोत hi अचछह महक रहा है हम्म? लेडीज से डील करने जा रहे हो किआ आप?”

चावला साहिब ने मुस्कुराकर सान्वी को देखा और अपने 4क्ष4 के तरफ चल दिए. जब रिवर्स ड्राइव करके गाड़ी को अब आगे गेट की तरफ चलने लगे तो सान्वी ने ज़ोर से कहा, “पिता जी ड्राइवर तो लेलो किसी को? आप क्यों ड्राइव कर रहे हो?”

मगर गाड़ी गेट के बाहर निकल गयी और चावला साहिब जाने लगे. वो उस वक़्त ऐसा महसूस कर रहा था जैसे एक बच्चा अपने पेरेंट्स से झूट बोलकर कोई ग़लत काम करने जा रहा था. खुद एक जीत हुआ उस्का ऐसा महसूस हो रहा था उस्सको.

उधर सान्वी घर के अंदर जाते हुए बड़बड़ातु गयी, “पता नहीं किआ गुल खिला रहे हैं पिता जी भी, वही जाने किआ माजरा है.”

ड्राइव करते हुए कुछ एक घंटा के बाद चावला साहिब ने गाड़ी रोका और संजना को कॉल किया. वीडियो कॉल नहीं नार्मल कॉल.

संजना ने कॉल पिक करते हुए कहा, “जी, केहये कैसे हो आप?”

चावला साहिब: “मैं ारः हूँ”

संजना: “रियली? No आप मज़ाक कर रहे हो”

चावला साहिब: “अरे सच मैं निकल चूका हूँ एक घंटा पहले, कार रोक कर तुमसे बात कर रहा हूँ एक घंटा में तुम्हारे गाओं पहुंच जाऊंगा. फ़ोन इस लिए किया के मैं तुमसे पूछूं के कौन सी ड्रेस पहने हुए हो इस वक़्त?”

संजना: “हीहीहीही, किआ आप भी? मैं सिर्फ एक ड्रेस में हूँ ब्लैक कलर की.”

एक फोटो भेजो जल्दी से, अगर मुझको पसंद आयी तो उसी में रहना, अगर पसंद नहीं आया तो कुछ और पहना.” उस्सने ये कहा संजना से.

संजना: “हीहीहीहीही किआ आप लड़की को देखने आरहे हो जी?”

चावला साहिब: “ोफो सेंड करो नाह जल्दी से!”

संजना ने उस्सको तैसे करते हुए कहा, “नहीं भेजती आप आकर खुद देख लो, तब भी पसंद नहीं आयी तो बोलना तब बदल लुंगी.

तो चावला साहिब ने सोचा के यह भी ठीक है मगर इतना पुछा,

“अच्छा यह बताओ के वो ड्रेस निचे कहाँ तक रीच होता है घुटनों के ऊपर या निचे?”

संजना ने कहा “ऊपर” और ज़ोर से हंसी

तो चावला साहिब ने कहा, “फिर ठीक है ी ऍम किंग स्वीटहार्ट.”

तो वो वापस ड्राइव करने लगे. चावला साहिब को ऐसा फील हो रहा था के वो पहली बार एक लड़की से मिलने जा रहे हैं. बिल्कुल वो वाला फीलिंग आरही थी जैसे एक यंग लड़का पहली बार अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने जा रहा हो. वो संजना को उस ड्रेस में इमेजिन कर रहे थे के उस्सकी ऊपर वाले टांगों का हिस्सा दिखेगा. वो खूब गोरी तो है hi, और वो तंग का हिस्सा एक लड़की का जो धक्का रहता है, और ड्रेस ऊपर हो जाता है तो कितना ज़्यादा गोरा और सफ़ेद की मिलावट जैसा रंग दीखता है, उसस्के बारे में सोचते हुए चावला साहिब ड्राइव किये जा रहे थे तेज़ रफ़्तार से.

उसस्के दिमाग़ में सिर्फ और सिर्फ संजना छाए हुए थे, कल रात वाले पिक्स जो वीडियो कॉल के दौरान उस्सने सेव किये थे मोबाइल पर चेक करते हुए ड्राइव करते गए. उसस्के जिस्म में एक जवान लेहेर दौड़ रहे थे उस वक़्त.

चावला साहिब एक बहोत हैंडसम आदमी था, उम्र किआ है उस्का कोई भी कभी एक्साक्ट्ली नहीं बता पाते. उस्का शरीर उस्सकी उम्र नहीं दिखते थे जब वो 25 साल का था तो लगता था 12 साल का है. जब 40 का हुआ तो सब लोग सोचते थे के वो 20 की उम्र का होगा. जब 50 का हुआ तो 30 का दीखते थे. ऐसे बहोत सरे लोग होते हैं जो ज़्यादा hi यंग दीखते हैं अपने उम्र से. चावला साहिब उन् लोगों में से था. मगर संजना को उस्का असली उम्र तो पता था फिर भी वो उंनसे ऐसे बातें करते जैसे के वो एक बॉयफ्रेंड से कर रही हो. ऐसा क्यों था कौन जाने?!

तक़रीबन एक घाटे के बाद चावला साहिब की गाडी रुकी संजना के घर के सामने. जल्दी से संजना बाहर निकली और खिलखिलाती हस्ती हुई दरवाज़े के पास वेट करने लगी चावला साहिब के तरफ देखते हुए. चावला साहिब ने जब उस्सको देखा तो बहोत खुश हुए. उस्सने सोचा के ड्रेस बिल्कुल वैसी है जैसा उस्सने ने सोचा था. संजना कुछ ऐसी दिख रही थी उस ड्रेस में.

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चावला साहिब चलते हुए उसस्के तरफ बढ़ रहे थे और उस्सकी नज़र पहले संजना की जाँघों पर गया, फिर उसस्के छाती पर जहां संजना के बाल रुके हुए थे, चावला साहिब ने नोट किया के ड्रेस व् कट है और हलकी सी क्लीवेज तो नज़र आरहे हैं, और साथ बैठे तो और बहोत ज़्यादा दिखने के चान्सेस हैं……

तो बे कॉन्टिनोएड……………………….
 
अपडेट 6 चावला साहिब ात Sanjana’s प्लेस

जब चावला साहिब संजना के तरफ बढ़ रहे थे उसस्के चेहरे में देखते हुए, तो एकांत लोग उसस्के गाड़ी के पास खड़े उस्सको देख रहे थे तो संजना ने नज़रों से चावला साहिब को पीछे देखने के लिए कहा. चावला साहिब नहीं समझे और उसस्के काफी करीब आगये थे तो पूछा, “किआ?” तो संजना ने कहा, “पीछे देखो”

और जब वो पीछे मुद्दे तो देखा एक महिला, एक बच्चा और दो मर्द उसस्के गाडी के पास खड़े उसस्के तरफ देखे जा रहे थे. तो उस्सने उन् लोगों से पूछा, “किआ हुआ?” संजना मुस्कुरा रही थी, तो उन् में एक मर्द ने कहा, “कौन हो बाबू?” वो आदमी कुछ बूढ़ा था, तो उसस्के पास खड़े दूसरे आदमी ने कहा, “अरे यह तो वही गाओं के उस तरफ के हवेली वाला है!”

तब चावला साहिब ने कहा, “हाँ मैं वही हूँ” फिर बूढ़ा आदमी जल्दी से आकर चावला साहिब के पाऊँ में गिद्ध पड़े यह कहते हुए, “अरे मालिक शमा करना मुझे मैं ने आप को नहीं पहचाना आप तो मालिक हो, यह घर भी तो आप ने hi आनंदवा को दिया था नाह? कहाँ रहते हो मालिक बरसों बाद नज़र आये हो!”

चावला साहिब ने उस्सको ऊपर खड़े करते हुए कहा, “कोई बात नहीं आप से कोई ग़लती नहीं हुई. अच्छा मुझे कुछ काम है इस फार्महाउस की मरम्मत के लिए इस लिए आया हूँ. आप लोग अपने अपने काम में लग जाएं. इतना कहकर चावला साहिब आगे बढे. उस्सने सोचा था के संजना को देखते hi वो उस्सको ज़ोर से गले लगाएगा, उस्सको अपनी बाहों में जाकर लेगा मगर यहाँ तो लोग पीछे खड़े जैसे तमाशा देख रहे थे. उस्का प्लान फ़ैल हुआ नज़र ारः था. वह लोग वहीँ गाडी के पास खड़े रहे और कुछ और लोग भी आकर साथ जुड़ गए उनके गाडी के पास.

जब वो संजना के बिल्कुल पास आगये तो उस्सने कहा, “किसी हो तुम, वह लोग अब भी यहीं हैं किआ?” संजना ने हँसते हुए कहा, “हाँ वह लोग अब नहीं जाने वाले यहाँ से, यहाँ किसी की भी कार गुज़रती या रूकती है तो ऐसे hi करते हैं सब.” तो बिना पीछे मुड़े चावला साहिब ने संजना को अंदर चलने के लिए कहा. और संजना पहले अंदर दाखिल हुई और उसस्के पीछे चावला साहिब अंदर गए और तुरंत संजना को अपने बाँहों में लिया और संजना ने खुद अपने बाँहों को भी चावला साहिब के कांधों पर किया और एक ज़ोर का हुग किया उनको.

उस्सको बाँहों में जाकर हुए hi चावला साहिब ने उस से कहा, “मैं ने सोचा था के जैसे नज़र होगी मैं तुमको ऐसे ज़ोर से बाँहों में भर लूंगा मगर यह लोग कमाल के लोग हैं सब ऐसे घुर्र रहे हैं जैसे एक चोरर को देख लिया हो!”

संजना उन् के बाहों में hi रहे और कहा, “मैं ने भी ऐसा hi सोचा था की आप आते hi मुझको हुग करोगे द्वार पर hi मगर मुझे भी नहीं पता था के वह लोग आजाएंगे.” और चावला साहिब अपने हाथ को संजना के पीठ पर हलके से फरते हुए पूछा, “तो बताओ किसी है मेरी प्यारी, सी संजना?” संजना का सर चावला साहिब के सीने से लगे हुए थे और वो खामोश रही मुस्कुराते हुए फिर चावला साहिब का हाथ संजना के पीठ पर थपथपाते हुए आहिस्ते से उस्सकी उँगलियों टेल संजना की ब्रा की स्ट्राप फील हुई. और संजना के बूब्स उसस्के छाती पर दबे हुए भी फील किया चावला साहिब ने जिस से उस्सको गरम फील हुआ और खुद संजना को अपने बाहों से अलग किया उसस्के चेहरे में देखते हुए.

तो संजना चावला साहिब का हाथ अपने उँगलियों में पाकर कर घर के अंदर लेजाते हुए कहा, “वेलकम है आप को हमारे यहाँ, बल्कि आप के खुद के घर में.” चावला साहिब संजना को चलते हुए निहार रहे थे, उस्सको ऊपर से निचे देखते जा रहे थे, और संजना ने अपने ड्रेस की निचे वाला हिस्से को अपने उँगलियों में थोड़ा सा उठाकर हलके से ऊपर करके घूमते हुए एक राउंड करते हुए पुछा, “और मेरा ड्रेस किसी है? पसंद है या चेंज करूँ इस्को? हीहीही” जिस वक़्त उस्सने वैसा किया तो (लास्ट पोस्ट की फोटो में देखिये सब) – एक तो वो ड्रेस घुटनों के ऊपर थे और अब उस्सकी उस एक्शन से ड्रेस और थोड़ी सी ऊपर गयी और राउंड किया तो उस्सकी खूबसूरत मुलायम जांघें चावला साहिब को नज़र आये, जिस्सको देख कर चावला साहिब हकबका सा गए और अपने पंत में हलचल महसूस किया.

फिर चावला साहिब खिरकी के परदे को हलके से हत्ता कर बाहर अपने कार के तरफ देखा तो संजना ने कहा, “वह लोग नहीं जाएंगे जब तक आप की कार यहाँ है वह यहीं रहेंगे बल्कि और भी लोग आएंगे, यहाँ के लोग ऐसे hi हैं. बहोत hi कम कार अंदर गाओं में एते हैं. बस हमको 150 मीटर दूर उतारते हैं, हमको चल कर यहाँ ता काना पड़ता है, रास्ता कच्चा है नाह इस लिए. साल में कभी कभार एक या दो कार यहाँ एते हैं तो इन् लोगों के लिए यह कुछ नया और अजीब होता है. उन् लोगों की फ़िक्र चोररये आप. Don’t वोर्री योर कार विल बे फाइन.”

तब तक एक सोफे के पास आगये थे चावला साहिब और संजना ने उन् के बाहों को पकड़ते हुए उनको वहां बैठने के लिए कहा. तो चावला साहिब ने पूछा, “मुझे मेरी कार की फ़िक्र नहीं है, मैं तो सोच रहा हूँ के वह लोग यहाँ खिरकी या दरवाज़े का पास तो नहीं आएंगे सुनने या देखने के लिए हमको?” संजना ने हँस्ते हुए कहा, “नहीं जी यहाँ तो नहीं आएंगे वह लोग. उनके लिए आप की कार एक नयी चीज़ हैं और आप भी तो बड़े आदमी हो, अब तक पूरा गाओं जान गया होगा के आप कौन हो और यहाँ आये हो.”

तो चावला साहिब ने कहा, “तब तो तुम्हारे पापा को पता चल जाएगा मैं कितने बजे यहाँ आया हूँ?” तो संजना ने कहा, “तो किआ हुआ? जान्ने दो उनको तो मालूम है आप आने वाले हो, मगर टाइम के बारे में तो सिर्फ मैं और आप जानते हैं उनको तो नहीं बताया के आप अभी ावोगे”

तब संजना अपने दाएं जाते हुए यह कहती गयी, “मैं आप के लिए कुछ ठंडा लाती हूँ पिने के लिए आप बैठिये.” और वो किचन के तरफ चली गयी. चावला साहिब के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें अब, और कैसे संजना से बात करें, करें भी या नहीं. किआ करेंगे जब तक संजना के पापा वापस नहीं अत! अजीब अजीब के ख्याल आरहे थे उनके दिमाग़ में और बहोत अजीब सी फीलिंग हो रहे थे उनको. वो इस बहोत hi खूबसूरत लड़की के तरफ आकर्षित हो रहा था. और सोच रहा था के संजना की किआ फीलिंग है? किआ वो भी उनको उसी तरह पसंद करते थे या वो उनको एक पिता के रूप में देख रहे थे? मगर कल चाट के दौरान संजना ने अपने ब्लाउज की दो बोटों क्यों खोले थे? उनको खुश करने के लिए या ऐसे hi?

चावला साहिब सोच रहे थे के कैसे आगे बढ़ें संजना के साथ. उंनका दिमाग़ गरम हो गया था, और एक डर भी था के कहीं यह गाओं वाले में से कोई पास आकर कुछ देख न लें और पुरे गाओं में संजना बदनाम न हो जाए…… सोचने लगे के कैसे संजना से एप्रोच किया जाए….. उस्सने सोचा के उस्सको अपने करीब सोफे पर बैठने को कहेगा और उस्सकी क्लीवेज देखने की कोशिश करेगा और देखेगा के संजना की बेहेवियर किसी होगी, उसस्के टांगों पर अपना हाथ भी रख सकता है और देखेगा के संजना की रिएक्शन किआ होगी…. ये सब सोच hi रहे थे के संजना की आवाज़ ने उस्सको जैसे एक नींद से जगाया, “यह लिए ठंडा पीजिये आप”

संजना झुकी हुई थी एक ट्रे हाथ में लिए जिस में एक गिलास जूस था. चावला साहिब ने गिलास लेते वक़्त सीधे संजना के क्लीवेज को देखा, झुकने से उस्सकी काळा ब्रा के स्ट्रैप्स और थोड़ा सा संजना के बूब्स गोआल, फर्म दिख रहे थे. सफ़ेद और गुलाबी रंग की मिलावट थी, चावला साहिब ने गिलास लेते हुए एक हाथ से अपने लुंड को पंत में सीधा किया जिस वक़्त संजना ट्रे को टेबल पर रख रहे थे.

‘अब किआ करूँ मैं’ चावला साहिब ने अपने आप से पूछा. और जूस पीते हुए वो संजना को अपने पास कड़ी देख रहे थे तो कहा, “आओ बैठो मेरे पास” और मुस्कुराते हुए संजना उनके पास सोफे पर बैठी. तुरंत कहवला साहिब ने अपने दाएं बाज़ू को संजना के कांडों पर किया क्यूंकि वो उनके दाएं तरफ बैठी थी, और संजना ने उनके उस हाथ के उँगलियों को अपने डायन हाथ में पकड़ते हुए एक बचपने आवाज़ में कहा, “तो बताओ आप मेरे पापा से किआ कहोगे अब?” एक गहरी सांस लेते हुए चावला साहिब संजना के क्लीवेज को hi देखे जा रहे थे और कहा, “तुम्ही बताओ किआ कहना चाहिए मुझे उन् से?”

संजना बोली, “अरे मैं किआ बोलूं? आप जनों आप किश लिए आये हो और किआ बात करना है उंनसे!” जूस के गिलास ख़तम करते hi उस्सको मेज़ पर रख कर चावला साहिब ने संजना के टांगों पर अपने बयां हाथ रखा और हलके से अपनी उँगलियों को फरते हुए कहा, “तुम पे बहोत hi प्यार अत है, तुम इतनी क्यूट हो के तुम से बहोत प्यार करने को मैं करता है चलो एक किसी दो मुझे!” संजना ने हँस्ते हुए उनके गाल पर एक किश किया. तो चावला साहिब ने कहा, “इधर भी इस गाल पर भी, तो वहां भी किया, फिर चावला साहिब ने कहा, “और एक, और एक, और एक करती जाओ बहोत अच्छा लगता है.”

संजना ने हँस्ते हुए कहा “कितना किश करूँ आप को! बहोत किया. और चावला साहिब ने कहा, “मगर मैं ने तो नहीं किया!” तो संजना बोली, “तो करो किश ने मन किया आप को?”

तो चावला साहिब का एक हाथ तो संजना के कांधों पर था hi और अपने दूसरे हाथ से संजना के चेहरे को अपने हाथ में लेते हुए अपने मुंह के पास किया और दायां गाल को किश किया, अपने लबों को काफी देर तक उसस्के गाल पर दबाये रखा, फिर दूसरे गाल को भी बिल्कुल उसी तरह किश किया, फिर उसस्के पेशानी को चुम्मा फिर थोड़ी को चूमा फिर हलके से उसस्के गले को चूमा, फिर गर्दन को चूमते हुए निचे के तरफ चूमते जा रहा था यहाँ तक के जैसे संजना को थोड़ा पीछे के तरफ होना पड़ा और अपने गर्दन को पीछे करना पड़ा और चावला साहिब उस्सकी क्लीवेज की शुरुवात को हलके से किश करते हुए उस्का बायां हाथ संजना के जाँघों पर हलके से फेरने लगे, जब झट से संजना ने उसस्के उस हाथ को अपने ुआंगलियों में थामा. और मुस्कुराते हुए संजना ने कहा, “बहोत किश कर लिया आप ने चलो फार्महाउस के पीछे के तरफ थोड़ा घूमते हैं!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………………
 
अपडेट 7 संजना एंड चावला साहिब स्टिल टुगेदर

और मुस्कुराते हुए संजना ने कहा, “बहोत किश कर लिया आप ने चलो फार्महाउस के पीछे के तरफ थोड़ा घूमते हैं!”

इतना कहते हुए संजना चावला साहिब का हाथ थामे घर के पीछे के दरवाज़े के तरफ से होते हुए उस फार्महाउस के पीछे निकले जहाँ एक बड़ा सा बागीचा था, बड़े बड़े पेयर, पौधे, फूल, चिडयों की आवाज़ भी सुनाई दे रहे थे, और एक ठंडी हवा की लेहेर महसूस हो रही थी उस जगह.

संजना चावला साहिब का हाथ पकडे जैसे उनको खींचते हुए आगे बढ़ रही थी एकांत बार मुस्कुराते हुए मुड़कर उनको देखते. और जनाब तो लड़की की जिस्म निहारते हुए चल रहे थे उनके पीछे पीछे. उस्का दिल कुछ ज़्यादा hi फ़िदा था उस लड़की पर जिस्सको वो अपने बेट ेके लिए चुनने वाले थे, मगर सोच रहा था किआ अब इरादा बदल लिया जाए? मगर इरादा बदले भी तो कैसे? किआ कहेगा संजना के पिता से और खुद संजना से? उसस्के दिमाग़ में शैतानी खयालात ने घर बनाना शुरू कर दिया था. उस्सने सोचा किसी भी कीमत पर इस लड़की को खोना नहीं है अब. कैसे भी हो एक रिश्ता तो बनेगा चाहे अपने बेटे से शादी hi करके. चावला साहिब यह सब सोचते हुए संजना की क्लीवेज देखने लगा जब संजना एक बड़े से पैर से पीठ करके कड़ी हुई और चावला साहिब के चेहरे में देखते हुए कहा, “कितने साल हुए जब आप आखरी बार इस जगह पर ए थे?” और संजना को महसूस हुआ के चावला साहिब किन ाज़ार उस्सकी छाती पर है, फिर भी उस्सने अपने नज़रें झुकाते हुए एक मुस्कान से बात किये.

चावला साहिब संजना के बहोत करीब खड़े हुए और जान बूझकर अपने एक तंग को संजना के टांगों के बीच करते हुए उसस्के गाल पर से उस्सकी लत्त को हटते हुए कहा, “तुम इतनी प्यारी कैसे हो, इतनी खूबसूरत और हसीं कैसे हो? कोई भी आदमी तुमसे प्यार कर बैठेगा!” संजना के चेहरे पर हलकी सी लाली आयी और अपने जांघों के बीच चावला साहिब के उस एक तंग को दबाते हुए कहा, “झूट कह रहे हो आप, मैं इतनी तो ना hi खूबसूरत हूँ और न hi हसीं” मगर चावला साहिब उस्सकी गालों पर अपने हाथ फरते हुए कहा, “चिराग टेल अँधेरा! तुमको खुद नहीं पता के तुम किआ हो संजना…. इस गाओं के लोग तुमको नहीं चेररते? कोई लड़का या आदमी ने कभी तुम्हारा तारीफ़ नहीं किया? और हाँ कॉलेज जाती थी तब तो बहोत सरे बॉयफ्रैंड्स दीवाने हुए होंगे? बताओ?!”

उस वक़्त चावला साहिब की घुटना संजना की जाँघों के बीच ो बीच में था और संजना को फील हुआ के उस्का घुटना करीबन उस्सकी पैंतीस को छह रहा था और उस हारकर की वजह से उस्सकी ड्रेस काफी ऊपर उठ गयी थी और उस्सकी जांघें बहोत ऊपर तक दिख रहे थे तो चावला साहिब की नज़रें उसी पर ठीके हुए थे…. संजना ने सर्र उठा कर देखा के चावला साहिब की नज़रें उस्सकी जाँघों पर हैं फिर संजना ने उस जगह से निकलते हुए एक बहाना बनाते हुए कहा, “वहां एक आम का पेयर है वहां चलें?”

चावला साहिब ने उसस्के पीछे चलते हुए कहा, “तुम बात को ताल रही हो है नाह?” जिस्का जवाब संजना ने सिर्फ मुस्कुराते हुए दिया. आम के पेयर के पास आकर इस बार संजना ने उस पेयर से पीठ लगाकर नहीं खड़ा हुआ जैसे पिछले पेयर पर किया था, तो अब चावला साहिब को उस तरह उसस्के टांगों के बीच अपना तंग लगाना नामुमकिन था. तो चावला साहिब ने सोचा के संजना वैसे सिचुएशन अवॉयड कर रही है जिस में उनको उसस्के जिस्म के करीब होना पड़े. यह चावला साहिब सोच रहे थे, मगर किआ संजना वैसा hi कर रही थी? या उस्सको पसंद था के चावला साहिब उसस्के उस तरह से छुवे? मगर थोड़ी सी तैसिंग कर रही थी उसस्के साथ?

अब उस पेयर के चार कदम पर एक बेंच था जैसे पब्लिक गार्डन्स में हुआ करता है, तो चावला साहिब वहां जाकर बैठ गए और संजना खुद वहां उनके पास बैठने को आयी. तो फिर से सिचुएशन वैसा hi हुआ जो लाउन्ज में था घर के अंदर जब सोफे पर बैठे हुए थे. फिर से चावला साहिब ने एक हाथ संजना के काँधे पर रखा और एक हाथ संजना के जाँघों पर जबकि उस्सकी ड्रेस और ऊपर हो गयी थी बैठने की वजह से. उस्सकी लाल गुलाबी जांघें जो बहोत नरम थे उस पर चावला साहिब की उँगलियाँ नाच रहे थे और संजना को उस वक़्त किआ मज़ा ारः था या वो परेशान हो रही थी? किआ वो उस सिचुएशन से फिर से निकलना चाहती थी या एन्जॉय कर रही थी? कौन उसस्के दिलका हाल को जान सकता है उस वक़्त? इस के बारे में संजना खुद बटेगी कुछ दिनों बाद के वो किआ फील कर रही थी इस वक़्त.

चावला साहिब जैसे उसस्के साथ फ़्लर्ट कर रहा था और संजना उनको फ़्लर्ट करने दे रही थी बुसस देखने से तो ऐसा hi लगता था. और उस्सको करेस करते हुए चावला साहिब ने फिर कहा, “तुम पे बहोत hi प्यार अत है, ना जाने क्यों तुम्स ीक बंधन सी महसूस होती है. तुम में कुछ है जो मुझे तुम्हारे तरफ खींचता है वो किआ है? तुम बताओ?” संजना ने हँस्ते हुए कहा, “मुझे किआ पता? वो तो आप जनों!” फिर चावला साहिब ने कहा, “तुमको और हुग करने को मैं कर रहा है प्लीज स्टैंड उप एंड गिव में टिघटेर हुग, प्लीज.” संजना ने इंकार नहीं किया और कड़ी हो गयी. तो झट्ट से चावला साहिब ने संजना को अपने बाहों के कसके भरते हुए फील किया संजना के चूचियों को अपने चेस्ट पर दबते हुए, कुचलते हुए, और संजना ने अपने बाँहों को उनके कमर से होते हुए उनके पीठ कर किया. मगर चावला साहिब ने कहा, “ऐसे नहीं अपने बाहों को ऐसे मेरे काँधे के ऊपर करो.” संजना कद में उंनसे छोटे थे तो उस्सको अपने टॉस पर खड़ा होना पर उनके कांधों पर अपने बाहों को करने के लिए. उस एक्शन से संजना का चेहरा चावला साहिब के काफी करीब हो गए तो संजना ने नज़रें झुका लिए और चावला साहिब ने अपने पंत के अंदर अपने लुंड को बड़ा होते महसूस किया जो संजना के जाँघों पर थे उस वक़्त. संजना ने भी वही फील किया तो हलके से पीछे हटती मगर एम्ब्रॉस में hi रहे चावला साहिब के. और उसी पोजीशन में दोनों एक दूसरे को बाँहों में लिए हुए थे और चावला साहिब ने कहा, मुझे और पप्पी करो जैसे किया था कुछ देर पहले, प्लीज” और संजना ने उनके चेरे में देखते हुए उनके एक गाल पर किश किया फिर दूसरे गाल पर और उसस्के पेशानी पर और उस दौरान चावला साहिब के हाथ संजना के चुतरों पर गया और उस्सको अपने लुंड पर दबाया. तब झट से संजना उनके बाहों से निकली यह कहते हुए, “चोररये, किआ कर रहे हो आप” उस वक़्त एक रागढ तो हुई चावला साहिब के लुंड का ठीक संजना के छूट के ऊपर कपड़ों के ऊपर hi सही, चावला साहिब ने अच्छी तरह से अपने लुंड को उस्सकी ड्रेस के ऊपर जाँघों के बीच उस्सकी छूट पर रघड़ते हुए महसूस किया. संजना को भी अछि तरह वो फील हुई तभी वो उनके बाहों से निकली. वो लम्हा दोनों के लिए एक तन्हाई का लम्हा बन गया. किसी ने एक दूसरे के कुछ नहीं कहा, और संजना निचे ज़मीन देखती रही. कुछ दो मिनट तक दोनों खामोश रहे, और उस ख़ामोशी को एक चिडया ने पारर मारते हुए तोडा जो उड़कर उन् दोनों के बीच से गयी.

चावला साहिब का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और संजना की भी. चावला साहिब अब सोचने लगा कहीं यह बात वो अपने पिता को नाह बता दें. उस्सको एक खौफ्फ़ सा महसूस हुआ तो संजना के करीब जाकर कहा, “यह बात हम दोनों के बीच की है नाह? कहीं कस्सी से इस्सके ज़िक्र रो नहीं करोगी?” संजना अपने छाती पर हाथ रखे हुए खुद अपनी दिल की तेज़ धड़कनों के फील कर रही थी और ज़मीन देखते हुए सर हिलाते हुए नाह में जवाब दिया. मतलब के वो किसी से इस बात के बारे में ज़िक्र नहीं करेगी. फिर भी चावला साहिब ने कहा, “बोल के बताओ किआ अपने पापा को बताओगी मेरे जाने के बा दिस्स बारे में?” तो धीमी आवाज़ में निचे के तरफ hi देखते हुए संजना ने कहा, नहीं बताउंगी किसी को भी” ुर चावला साहिब ने “थैंक यू वैरी मच कहा”

अब चावला साहिब के समझ में नहीं ारः था के किआ बात करें संजना के साथ. खुद गिलटी महसूस कर रहा था और सोच रहा था के उस्सने बहोत जल्दबाज़ी कर दिए शायद. तो बात को फिर से शुरू करने के लिए कहा, “तुम्हारे मोबाइल कहाँ है? तुम्हारे बहोत सारे सेल्फीज़ होंगे नाह उस में मुझे सेंड करो सारे के सारे, मैं अपने मोबाइल में सब सेव करूँगा!” तब संजना मुस्कुरायी और कहा, “चार में है चलिए आप को दिखती हूँ” फिर चावला साहिब को एक आईडिया सुझा, उस्सने कहा, “अरे ठहरो तो, मुझे तुम्हारी कुछ रसवीरें तो लेने दो अभी इसी वक़्त. कुछ करो मेरे लिए, मैं अपने मोबाइल में तुमको कैद करता हूँ.”

संजना मुस्कुराते हुए मान गयी और खड़े होते हुए कई पोज़ दिए चावला साहिब को जिसस्ने ख़ुशी ख़ुशी निकाले, फिर चावला साहिब ने संजना को उस बेंच पर बैठने को कहा और कई तस्वीरें लिए वहां बैठे हुए, तब चावला साहिब ने उस्सको लेटने को कहौ स बेंच पर, संजना लेती और एक दो पोज़ के बाद चावला साहिब ने उस्सको एक तंग ऊपर और एक तंग निचे करने को कहा, सनजना को पता था अगर वैसा करेगी तो उस्सकी पैंटी नज़र आएगी तो उस्सने इंकार किया, फिर चावला साहिब कैसे भी करके सभी पोज़ लेने के दौरान कई ऐसे पोज़ लिए जिस में संजना की जांघें अच्छी तरह से दिख रेक थे उन् में से एक पोज़ यह वाला था जो चावला साहिब ने बड़े इत्मीनान से खींचे, और क्यूंकि लेट कर संजना ने तंग उठाने से मन किया तो बैठ कर एक पेयर को थोड़ा ऊपर करने के लिए कहा जो संजना ने किया और यह पोज़ मिला चावला साहिब को ….. तस्वीर कुछ ऐसा था….

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तो अब वहां से घर के अंदर जाने लगे तो चावला साहिब इस तस्वीर को अपने मोबाइल पर देखते हुए अपने लुंड को पंत के अंदर सीधा करते हुए संजना के पीछे घर के अंदर गए जहाँ संजना ने अपनी मोबाइल के पिक्स उनको दिखने के लिए लाये………..

तो बे कॉन्टिनोएड………………
 
अपडेट 8 संजना विथ चावला साहिब इनसाइड थे हाउस

चावला साहिब संजना के पास बैठे उसस्के तस्वीरों को देखने के लिए. और एक बार फिर बिलककोल एक दूसरे के करीब उसी सोफे पर दोनों पाए गए. संजना को बिल्कुल उन् से सत् कर बैठना पड़ा क्यूंकि अपने मोबाइल से फोटोज दिखा रही थी और चावला साहिब से फिर सहा नहीं गया और उसस्के हाथ फिर दौड़ने लगे संजना के जिस्म पर……. कभी उसस्के जाँघों पर तो कभी उसस्के कमर पर फिर उसस्के गर्दन पर तो कभी उसस्के पथ पर… संजना फोटोज दिखाए जा रही थी जैसे कुछ नहीं फील कर रही थी के चावला साहिब उस्सको चरों तरफ छह रहे हैं….. तो चावला साहिब ने सोचा ‘मैं इस्को इतना छह रहा हूँ, मगर अभी तो कुछ नहीं कह रही जैसे के कुछ पता hi नहीं, अभी अभी मेरे उँगलियाँ उसस्के दोनों जाँघों के बीच में था और उस्सने हिलने की कोशिश भी नहीं किया और मेरे उँगलियों को वहीँ रहने दिया, मतलब राज़ी है किआ? किआ करूँ अब मैं उँगलियों को उसस्के पैंतीस तक लजौन के नहीं’

इतना सोच hi रहे थे के उस्सने अपने हाथ को संजना के पैंतीस तक धीरे धीरे करने लगा उसस्के मोबाइल पर उसस्के तसवीरें देखते हुए. संजना उस वक़्त चावला साहिब के काँधे पर सत्ती हुई थी मुस्कुराते हुए अपने पिक्स दिखते हुए उनको जबकि चावला साहिब का हाथ उसस्के दोनों जाँघों के बीच था. चावला साहिब ने एक बार उसस्के चेहरे में देखा और जब देखा के संजना कोई भी रेजिस्टेंस नहीं दिखा रही थी तो उस्सने अपने ऊँगली को आहिस्ते से उसस्के पैंतीस पर फेर्रा और उस वक़्त संजना ने अपने दोनों जाँघों दो एक साथ दबाया जिस से चावला साहिब के हाथ वहीँ जैसे कैद हो गए. तो चावला साहिब ने सोचा के संजना इंकार नहीं कर रही थी के उस्का हाथ उस जगह पर हो. और धीरे से एक शरारती मुस्कान में संजना ने चावला साहिब के कान में कहा, “आप का हाथ वहां किआ कर रहा है जी?” इतना कहा के चावला साहिब ने झट से दूसरे हाथ से संजना की गर्दन को अपने करीब खींचते हुए अपने होंठों को संजना के होंठों से लगाया. उस हरकत से संजना की जिस्म पूरा चावला साहिब पर आगये तो चावला साहिब ने संजना को बाहों में भर लिया और उस्सने रसीले होंठों की चूसने लगा और संजना ने कुछ नहीं कहा, न कुछ किया. चावला साहिब ने फील किया के जहाँ उसस्के ऊँगली उस्सकी पंतय छह रहे थे थोड़ी से भीग गयी है…..

यह बहोत जल्दी, झट से हुआ कोई 10 सेकंड में और तब संजना अपने होंठ को अपने हाथ से पोंछते हुए ज़मीन पर देखने लगी चेहरे में लाली के साथ. चावला साहिब का दिल बड़े ज़ोरों से धड़क रहा था मगर संजना नार्मल थी जैसे कुछ हुआ hi नहीं, और तब चावला साहिब का हाथ बाहर हो गए थे क्यूंकि उस्सने संजना को होल्ड किया था अपने पर लगते हुए. चावला साहिब ने उस ऊँगली को देखा जो भीगी पंथ पर थे और उस्सको चूस लिया संजना को दिखाते हुए….. तब संजना ने आहिस्ते से पुछा, “आप ने मुझे किश क्यों किया यहाँ,” अपने होंठों के तरफ ऊँगली से दिखते हुए.

तो चावला साहिब ने कहा, “बहोत मैं कर रहा था तुमको वैसे किश करने को, जब से आया हूँ, तब से मैं कर रहा था बल्कि जिस दिन से तुमको देखा है तभी से तुमको अपने बाहों में भरके वैसे तुम्हें चूमने को बड़ा मैं कर रहा था. तो संजना फिर अपने शरारती मुस्कान में बोली, “okay अब कर लिया नाह तो बुसस इतना काफी है आप का मैं भर्रा तो ठीक है.”

मगर चावला साहिब बोले, “अरे मैं कहाँ भरा यह तो सिर्फ 10 सेकंड में hi हुआ मैं तो आराम से, ज़्यादा लम्बा वाला किश करना चाहता हूँ तुम्हें!”

संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “क्यों? ऐसा क्यों? मैं आप की गर्लफ्रेंड हूँ किआ जी?” यह कहकर संजना उठ कड़ी हुई अपने मोबाइल चावला साहिब के हाथ में चोरर कर. और उसस्के अपोजिट वाले कुर्सी पर जा बैठी उनको देखते हुए और हँस्ते हुए. कुछ चलचलता दिख रही थी उस्सकी अदाओं में उस वक़्त. लगता था के चावला साहिब को रिझा रही थी या अपने तरफ और भी आकर्षित किये जा रही थी. ऐसा चावला साहिब को लगा. चावला साहिब का लुंड जमके खड़ा हो गया था पंत के अंदर और उन् से रहा नहीं जा रहा था, तो वो मोबाइल सोफे पर रख के चलते हुए संजना के करीब गया.

संजना बैठी थी, चावला साहिब खड़े थे, तो ज़ाहिर है के जब चावला साहिब उसस्के करीब आया तो उस्का लुंड उसस्के पंत के अंदर संजना को दिख रहा था, और चावला साहिब एक शैतानी मुस्कराहट के साथ अपने कमर को आगे करते हुए जैसे उस लुंड वाले हिस्से को संजना के मुंह के करीब किया. लुंड पंत के अंदर ज़रूर था मगर वो फॉर्म जो दीखता है किसी के लुंड खड़े होने पर हु साफ़ दिख रहा था और वो संजना के चेहरे के बहोत करीब था और सिर्फ अगर चावला साहिब कमर को हिलता तो वो सनजन के मुहं पर डाब जाता.

सनजन उनको वैसे देखते हुए हंस पारी, “हीहीही जाईये आप ऐसे क्यों मेरे पास सटके खड़े हो?” यह कहकर वो उठ कड़ी हुई, और चावला साहिब ने उस्सको पीछे से थामा अपने बाहों में और उसस्के कानों में भुनभुनाते हुए कहा, “खड़ा हूँ हाँ ठीक कहा तुमने खड़ा हो गया हूँ तुमने खड़ा किया, किआ चीज़ हो तुम, दीवाना बना दिया है मुझे तुमने पता है तुमको, उस दौरान चावला साहिब अपने लुंड को पंत के अंदर से hi संजना के चुतरों पर ज़ोर से दबाते हुए बोल रहा था और संजना उनके लुंड को अपने जिस्म पर अच्छी तरह से फील कर रही थी. संजना का चेहरा लाल हो गया था और महसूस कर रही थी चावला साहिब किआ कर रहे हैं.

उसी पोजीशन में चावला साहिब को थोड़ा अपने घुटनों को टेढ़ा करना पड़ा खुद को संजना से बेहतर पोजीशन में रघड़ने के लिए. और संजना झुक गयी जिस तरह से चावला साहिब ने उस्सको जकरा था उस वजह से याने चावला साहिब के प्रेशर से उस्सको झुकना पारा और जब झुकी तो कहने की ज़रुरत नहीं के उस्सकी गांड चावला साहिब के लुंड पर ज़्यादा डाब गए जिस से चावला साहिब को बेहद मज़ा आया. ऐसा लगा के संजना उनको पोजीशन दे रही है रगड़ने के लिए. क्यूंकि संजना कद में उन् से छोटी थी तो चावला साहिब के दोनों बाज़ू संजना के काँधे के ऊपर से होकर उसस्के आगे पथ पर से होते हुए उस्सकी जाँघों पर गए और उस्सने संजना की ड्रेस को ऊपर करना चाहा. तब संजना ने उनके हाथ को थाम लिया मगर ड्रेस थोड़ी सी उठ hi गयी और उस्सकी जांघें बहोत ज़्यादा नज़र आये चावला साहिब को तो अपने हाथ को उस्सने उन् मुलायम जाँघों पर फेर्रा, मगर जल्दी से संजना ने उनके हाथों को अपने हाथ में थाम लिया, और पीछे मुड़कर कहा, “वो देखिये बाहर आप के कार के पास अब कितने लोग इकठे हो गए हैं!”

मतलब संजना ने सिचुएशन को ब्रेक किया जिस से वो चावला साहिब के बाहों से निकल गयी और कुछ दूर खड़े होकर चावला साहिब के चेहरे में देखती रही मुस्कुराते हुए, इस बार उस्सकी मुस्कराहट कुछ शर्मीली थी. और थोड़ा सा संजना कांप भी रही थी चावला साहिब ने नोट किया.

वहीँ कोई 4 कदम के दूरी पर कड़ी संजना ने थार्र्थराटे होंठों से पूछा, “एक बात बताईये मुझे आप”

तो चावला साहिब ने कहा, “हाँ पूछो”

संजना उनके चेहरे में देखते हुए एक लम्बी संन्स लेकर पुछा, “आप ने मुझको अपने बेटे के लिए पसंद किया नाह?”

तो चावला साहिब ने भी एक गहरी सांस लिया और कहा, “कैसे समझों तुम्हें मैं, हाँ तुमको उसी के लिए पसंद किया, मगर अब समझ में नहीं अत किआ करूँ, प्यार हो गया मुझे तुमसे. तुम्ही बताओ मैं किआ करूँ अब?”

सनजन ने कहा, “यह प्यार नहीं, वासना है!”

चावला साहिब ने कहा, “मेरा यकीन मानों, मेरे दिल के गहराई से तुमको चाहता हूँ रात दिन मेरे ख्यालों में रहने लगी हो, सच में दीवाना बन गया हूँ तुम्हारा, मगर हाँ जानता हूँ कोई भी यकीन नहीं करेगा इस बात को.”

संजना ने पुछा, “आप की उम्र किआ है? शायद आप मेरे पापा से भी बड़े हो हालां के दीखता नहीं, आप आमिर लोग हो तो आराम से जीते हो इस लिए आप यंग नज़र आते हो, आप मज़दूरी करते तो जिस्म कुछ और होते….”

चावला साहिब ने कहा, “अरे चोर्रो इस उम्र की बातों को; मेरे पास ावो नाह मैं तुमको बाँहों में भरना चाहता हूँ, अपने पापा के आने से पहले मुझे और प्यार करने दो तुम्हें. किआ पता ऐसा मौका मुझे फिर मिले नाह मिले?!”

संजना ने कहा, “मौका तो भरपूर मिलेगा आप को अब क्यूंकि यह घर आप का है, पापा लगभग आप के ग़ुलाम, मैं आप के ग़ुलाम की बेटी, कौन आप को यहाँ आने से रोक सकता है भला? आप तो जब भी चाहे आ सकते हो. मौका बहोत मिलेगा आप को तो!”

चावला साहिब बोलै, “तो ावो नाह, मौके का फायदा तो उठाने दो मुझे, तुम्हारे पापा की ने से पहले तुमसे मैं भर प्यार तो करूँ” इतना कहते हुए वो खुद संजा ा के करीब गए और उस्सको फिर से बाहों में लिया. संजना सर्र निचे झुकाये उनके बाँहों में चली गयी अपने सर को उनके छाती से लगाए.

चावला साहिब की बाहें सज्नना के पीठ पर फेरर रहे थे और संजना ने खुद अपनी बाहों को उनके पीठ पर कर लिया और चावला साहिब झुक कर संजना के होंठों को फिर से चूमना चाहा, पर संजना ने अपना चेहरा एक तरफ कर लिया और चावला साहिब ने कहा, “एक लम्बा वाला किश दो मुझे इस बार प्लीज और जीब से किश करना, अपने जीब को बाहर निकालो ज़रा, इनके रस को चखने दो मुझे.”

संजना नाह मुस्कुरा रही थी नाह कुछ बोल रही थी, खामोश थी निचे देखते हुए और कांप रही थी उस पल को. चावला साहिब ने उसस्के कांपते हुए जिस्म को फील किया और पुछा, “क्यों कांप रही हो? डर रही हो किआ?” तो संजना ने एक लम्बी सांस लेते हुए कहा, “पता नहीं क्यों. ऐसे हालत से नहीं गुज़री हूँ शायद इस लिए, या कुछ और बात है जो खुद नहीं समझ रही हूँ”

तो चावला साहिब ने कहा, चलो एक गुड्डी गुड्डी किश करो मुझे फिर देखना कांपना रुक जाएगा. और उस्सने संजना की थोड़ी को अपने हाथ से उठाते हुए उसस्के मुहं को अपने मुंह से लगाया और अपने जीब को संजना के मुंह के अंदर डालने की कोशिश किया, मगर शुरू में संजना मुंह नहीं खोल रही थी तो चावला साब ने धीरे से कहा, “मुंह तो खोलो नाह, चखने दो मुझे अपने रसीले लजतदार रस को प्लीज डिअर.”

संजना ने अपने गर्दन को ऊपर किया और आहिस्ते आहिस्ते मुंह को खोला और चावला साहिब के जीब उसस्के मुंह के अंदर गए और दोनों एक दूसरे को किश करने लगे…. दो मिनट तक वैसे रहे, चावला साहिब उस किश का आनंद ले रहे थे और उस्सने नोट किया के संजना ने भी अपने जीब चलाये उसस्के मुहं के अंदर, फिर 2 मिनट के बाद रुके, फिर तुरंत किश किये इस बार 4 मिनट तक. संजना ने चावला साहिब के जीब को चूसा इस बार ेंखें मूंढ़ते हुए, मगर चावला साहिब ने ेंखें खोले रखा संजना के चेहरे में देखते हुए के किश तरह आराम से संजना उनको किश कर रही थी. फिर एक पल के लिए रुके, और फिर से किश किये इस बार 5 मिनट से ज़्यादा चावला साहिब ने संजना के मुंह का रस निचोरा और संजना ने भी चावला साहिब के मुंह का रस पिया. किश के दौरान दोनों एक दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे जैसे दो पुराण आशिक किश कर रहे हों! संजना का बदन बिलककोल चावला साहिब के जिस्म से चिपकी हुई थी, उस्सकी बूब्स उनके छाती पर कुचल रहे थे और चावला साहिब के दोनों हाथ संजना के छूटों को मस्सल रहे थे फिर भी संजना किश में डूबी रही. चावला साहिब ने नोट किया के इस बार तो संजना ने अपने चुतरों को मसलने दिए पहली बार की तरह झटक के रोका तो नहीं.

और चावला साहिब ने यह भी नोट किया के संजना बेहतरीन किसर है. बहोत बेहतरीन तरीके से किश किया. तो चावला साहिब ने सोचा यह लड़की पहले भी किश कर चुके है, इस्सके बॉयफ्रेंड ने खूब किश किया हुआ उस्सको. चावला साहिब को पक्का यकीन हो गया के यह संजना की पहली किश तो नहीं हो सकता.

किश के बाद धीरे धीरे दोनों एक दूसरे के बाहों से अलग हुए, और दोनों सोफे पर बैठे. तो चावला साहिब ने कहा, “देखा कुछ भी तो नहीं हुआ और तुम्हारा कांपना भी बंद हो गया.” और चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए कहा, “हे तुम तो बहोत अच्छा किश करती हो, मज़ा आगया मुझे, लगता है एक्सपीरियंस है तुम्हें हम्म? बोलो?!” संजना हंसी और कहा, “नहीं इस में एक्सपीरियंस की किआ बात है, यह तो नैचुरली हो गया, अपने आप ऐसा हुआ मुझे तो समझ में नहीं आया मैं ने तो वही किया जो आप कर रहे थे, शुरू में मैं नहीं समझ पा रही थी के किआ करूँ, फिर आप ने मेरे जीब चुस्सना शुरू किया, तो दूसरी बार मैं ने आप की जीब चूसा फिर एक दूसरे को वैसा hi करते गए, बुसस अपने आप हो गया.”

और चावला साहिब ने धीरे से उसस्के कानों में कहा, “अब अपने छाती पर से ड्रेस के यह दो पहले वाले बटन खोलो नाह प्लीज.” संजना ने नखरें वाली ऐडा में कहा, “नहीं.” चावला साहिब ने इंसिस्ट किया फिर भी हँस्ते हुए संजना ने कहा नहीं. तो चावला साहिब ने कहा, उस रात को चाट करते वक़्त तो खोला था तुमने!” तो संजना ने कहा, “उस वक़्त आप सामने नहीं थे, दूर थे मुझसे, आज मेरे पास बैठे हो!” चावला साहिब बोलै, “हम्म तैसे करती हो मुझे हैं, चलो मैं खुद खोलता हूँ” यह कहकर चावला साहिब के दोनों हाथ उस्सकी छाती पर गए और उस्सकी बटन को खोलने लगे, मगर संजना झट से उठ कड़ी हुई और हँस्ते हुए उनको अपने जीब से चेररते हुए आगे वाले दरवाज़ा को खोल कर बाहर चली गयी और जाते जाते अपना ठेंगा दिखाया चावला साहिब को!

चावला साहिब ने कहा, ‘यह तो मुझको तारपा रही है जान बूझ कर लगता है. बाहर चली गयी जहाँ से सब लोगों को सब नज़र आएगा, वहां तो मैं उस्सको छह भी नहीं सकता, अब कब अंदर आएगी? अब किआ करूँ मैं?!’

चावला साहिब भी बाहर निकले और ज़ोर से उन् लोगों से कहा, “खबरदार अगर मेरी गाडी को एक खरोच भी आयी तो! दूर रहो सब मेरी कार से!”

और संजना ज़ोर से हंसी. फिर मुड़कर चावला साहिब को देखते हुए अपनी जीब से उनको चिररहाते गए.

और कुछ देर बाद वहीँ से नज़र आया के आनंद, संजना के पापा कार के पास घर के तरफ आते हुए. संजना ने अपने दांतों को दबाते हुए धीरे से कहा, “पापा आ रहे हैं आप कोई ऐसी वैसी बात मत करना, सशह्ह्ह!! बिल्कुल चुप! Okay समझे आप?”

तो बे कॉन्टिनोएड……………………… (2481 वर्ड्स)
 
अपडेट 9 चावला साहिब टॉक्स तो sanjana’s डैड इन हेर प्रजेंस

और कुछ देर बाद वहीँ से नज़र आया के आनंद, संजना के पापा कार के पास घर के तरफ आते हुए. संजना ने अपने दांतों को दबाते हुए धीरे से कहा, “पापा आ रहे हैं आप कोई ऐसी वैसी बात मत करना, सशह्ह्ह!! बिल्कुल चुप! Okay समझे आप?”

अब आगे……….

आनंद जी अंदर ए, चावला साहिब से मिले, और तीनों अंदर सोफे पर बैठे. आनंद जी संजना को कुछ अजीब नज़रों से देख रहा था जैसे उस्सको कुछ शिकायत है उस से. और संजना अपने पापा से जैसे नज़रें चुरा रही थी. चावला साहिब ने नोट किया के जैसे बाप बेटी एक दूसरे से खफा हैं, तो वो सोचने लगा के शायद संजना ने अपने बाप को मजबूरन या ज़बरदस्ती से मनवाया है और इस बारे में तो बिल्कुल भी बात नहीं किया उन्हों ने संजना से के कैसे उसस्के पिता राज़ी हो गए जब पहले इंकार किया था. तो उन्हों ने संजना के तरफ देखते हुए कहा, अपने पापा कके लिए कुछ खाने पिने के लिए लाओ तो. तब संजना ने अपने पापा को देखते हुए मुस्कुराकर कहा, “कुछ लेंगे आप पापा?” इस से पहले के आनंद जी कुछ कहता चावला साहिब ने कहा, “अरे पूछ क्यों रही हो, वो काम से थके हरे आये हैं तुमको कुछ सर्वे करना चाहिए बिना पूछे!”

तब संजना के बाप ने संजना को पहले देखते कहा, “नहीं नहीं कुछ भी नहीं, फिर चावला साहिब से कहा, “नहीं उस्सको पता है के मैं वापस आकर कुछ नहीं लेता नाहा धो कर बाहर जाता हूँ.” और तुरंत संजना ने बात जोड़ते हुए जैसे डांटे हुए कहा, “हाँ पिने जाएंगे रघु के यहाँ तो अभी कैसे कुछ लेंगे!” और आनंद ने कहा, “अरे हाँ चावला जी एक एक पेग हो जाए? मैं अभी रघु के यहाँ से लेकर आता हूँ!” चावला साहिब जवाब देने hi वाले थे के आनंद खड़ा हो गया फिर से निकलने के लिए और संजना ने कुछ नाराज़गी दिखते हुए कहा, “लो अब आप दोनों पिएंगे तो कोई काम की बात नहीं हो पाएगी! नहीं पापा यह साहिब आप के देसी दारू नहीं पिएंगे मेरे ख्याल से!”

मगर चावला साहिब चाहता था के वो बाहर जाएं ताके वो संजना के साथ और कुछ देर अकेले रह पाए. उनको उस वक़्त दारु की नहीं पारी थी के वो देसी हो या कुछ और उनको तो सिर्फ संजना की अकेली होने से मतलब था. और संजना के पिता यह कहते हुए निकले एक चौथा सा बक्सा लेकर, “तू किआ जाने संजू के पीने से बातें और भी मजेदार होते हैं!” तो संजना ने ग़ुस्सा दिखते हुए अपने पापा को तिरछी नज़र से देखते हुए कहा, “सब पता है मुझे आप को पिने के लिए बहाना जो मिल गया, खबरदार अगर पीकर आये तो, और जल्दी आना वहां पिने मत बैठ जाना!”

आनंद जी हँस्ते हुए चले गए तो चावला साहिब ने झट से पीछे से संजना को जकरते हुए कहा, “मैं तो बहोत खुश हूँ के वो फिर जा रहा है तुम क्यों उस्सको रोक रहे हो, अरे मुझको तो तुम्हारे साथ वक़्त बिताना है, समझा करो!” अपने पीठ पर सट्टे हुए चावला जी को संजना ने उसस्के बाज़ू को अपने छाती पर थामे हुए कहा, “हाँ जानती हूँ आप मौके का भरपूर फायदा उठाना चाहते हो, जाओ मैं आप से बात नहीं करती अब” और मुंह पहला कर उनके जाकर से निकल कर एक कोने में कड़ी हो गयी! बाहर एक हलकी सी बारिश की बूँदें खिरकी की शीशे पर टपके तो चावला साहिब ने संजना के तरफ बढ़ते हुए कहा,

“क्यों हम से खफा हो गए ेय जाने तमन्नाह

भीगे हुए मौसम का मज़ा क्यों नहीं लेते”

तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा आप को शेर ो शाइरी भी आती है?”

चावला साहिब ने कहा, “अरे नहीं यह तो एक पुराणी गीत है!” और संजना को सामने से बाहों में ज़ोर से जकरा और अपने होंठों को उसस्के चेहरे पर फरने लगा. संजना को गर्दन ऊपर करना पारा जिस तरह से और जिस पोजीशन में साहिब ने उस्सको थामा था, और तब चावला साहिब का मुंह उस्सकी क्लीवेज पर गए और उनके जीब संजना के बूब के दीखते हुए हिस्से पर फ्री, उस से संजना का जिस्म थरथरा गयी और उसस्के गले से एक सिसक निकली, और उफ़ करते हुए वो फिर से चावला साहिब के चुंगल से निकलते हुए कहा, “आज के लिए इतना काफी है आप ने बहोत hi फायदा उठाया आज मेरा” और हंससने लगी. मगर उस वक़्त एक दूसरे के हाथ थामे हुए थे, बल्कि संजना ने चावला साहिब के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए हुए थे और उनके जाकर से बाहर थी. दोनों खड़े थे तो चावला साहिब ने कहा, “हाँ तुमने यह बात तो बताया hi नहीं के पहले तुम्हारा डैड मन कर रहे थे तो कैसे तुमने मनाया उनको? बताओ मुझे.” यह पूछते वक़्त चावला साहिब की नज़रें संजना के बूब्स पर थे जैसे वो नज़रों से उस्सकी मेज़रमेंट ले रहे हो.

संजना एक दो कदम चलते हुए उन् का हाथ थामे hi जवाब दिया, “बहोत कुछ पूछ लिया आप ने, बहोत लम्बी डिस्कशन के बाद वो मेरी बात को समझे और माने, यह मैं आप को किसी और दिन समझाउंगी, अभी वो टाइम नहीं आया के वो सब बताऊँ आप को.” और खिलखिलाती हुई कहा, “बहोत लम्बी कहानी है जी, शायब आप तब सब जानकार नाराज़ होंगे या तो फिर ज़्यादा खुश भी होंगे. अभी आप को उतना नहीं जान पायी हूँ के बता सकूँ के आप खुश होंगे या खफा मगर आप की आशिकाना मिज़ाज देखकर सोचती हूँ के आप खुश होंगे!”

चावला साहिब संजना को कुछ हैरान नज़रों से देखते हुए और सोचते हुए कहा, “ऐसी किआ बात हुई के अभी नहीं बता सकती हो? कुछ हैरान कर देती हो कभी तुम मुझे. खैर तुम जानों के किआ बात हुई है मगर चोर्रो मुझे तो तुमसे मतलब है नाह, आओ और एक किसी दो मुझे हम्म्म” इतना कहते hi चावला साहिब ने फिर खड़े hi पोजीशन में संजना के मुंह को अपने मुंह में ले लिए और संजना रोक नहीं पायी और एक लम्बी किश में खो गए दोनों, उस दौरान कहने की ज़रुरत नहीं है के चावला साहिब के दोनों हाथ संजना के चुतरों पर फिर से उस्सको मसलते हुए अपने लुंड पर ज़ोर से दबाते हुए रगड़ते जा रहे थे और कमर को भी हिलाते हुए अपने जिस्म को संजना के जिस्म पर दबा कर जैसे खड़े पोजीशन में छोड़ रहा था…… और अपने एक हाथ को उस्सकी पैंटी के अंदर भी किया ठीक छूट के ऊपर और एक ऊँगली से वहां मस्ला तो भीगी सी महसूस भी किया… संजना की छोटी ड्रेस जाँघों के बिल्कुल ऊपर उठ गए थे जिस से उस्सकी जांघें काफी ज़्यादा दिखने लगे थे और पंतय भी नज़र आने लगे थे, और चावला साहिब की ेंखें खुले थे किश करते वक़्त संजना के जिस्म के उस हिस्से को देखने के लिए.

उस लम्बी किश के बाद संजना ने हलके से धक्के देते हुए उन् से दूर हुई एक लम्बी सांस लेते हुए और हांफते हुए कहा, “उफ़ आप भी नाह, कितनी देर तक किश करते हो, मेरा सांस फूल गया!” चावला साहिब एक शैतानी मुस्कराहट में कहा, “किश तो तुम मुझे कर रही थी जानेमन, मैं ने तो सिर्फ अपने जीब को तुम्हारे मुंह में डाला था, वो तो तुम मेरे जीब के रस नोइचोरर रही थी हेहेहे”

और यह सुनकर संजना जैसे शर्मा सी गयी और चेहरे पर लाली के साथ कहा, “हम्म मुझे किआ पता, मैं भी किश hi तो कर रही थी, आप के हाथ बहोत दौड़ते हैं मेरे जिस्म पर मुझे ख्याल hi नहीं रहा के मैं किश कर रही थी या आप, मेरे तवज्जुह आप के हाथों पर ज़्यादा थे के आप मुझको कहाँ छह रहे हो…..”

उस ऊँगली को जो चावला साहिब ने उस्सकी भीगे हुए छूट पर मसला था वो संजना को दिखाते हुए चावला साहिब ने उस ऊँगली को चूसा. और संजना बिलककोल लाल हो गयी और एक तरफ देखने लगी. तब चावला साहिब ने संजना का एक हाथ पकड़ा और अपने तरफ हलके से खींचा, और संजना उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा, “हम्म अब किआ है जी?” तो चावला साहिब ने संजना के उस हाथ को अपने पंत के ऊपर अपने सेक्स पर दबाया! सनजना अपने हाथ को खींच रही थी उसस्के तन्ने हुए लुंड को पंत के अंदर देखते हुए, जैसे के उस्का हाथ किसी गन्दी चीज़ पर जा रही हो, वो एक्सप्रेशन दे रही थी संजना का चेहरा उस वक़्त फिर भी चावला साहिब कामयाब हुए उस्का हाथ अपने लुंड के ऊपर दबाने को मगर सिर्फ कुछ पल के लिए क्यूंकि संजना ने झट से अपने हाथ खिंच लिया और दो कदम पीछे जाते हुए कहा, “ बताइये, अपने होने वाली बहु के साथ कोई यह सब भी करता है किआ?” यह कहकर वो हंस पारी. और चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए कहा, तुम भीग गयी हो मतला तुम्हारा भी मैं कर रहा है, है नाह?” और संजना निचे देखते हुए कुछ कांपते आवाज़ में धीरे से कहा, “आप जिस तरह और जीन जगाओं पर मुझको छह रहे तो भीगूँगी नहीं भला?” फिर चावला साहिब ने पूछा, “तो बताओ बनोगी मेरी बहु? यह तीसरी बार पूछ रहा हूँ तुमसे”

संजना भी मुस्कुरा रही थी और अपने निचे वाले होठ को अपने डेंटन में दबाते हुए कहा, “तो आप किश लिए आये हो? एहि बात तय करने नाह मेरे पापा से बात करके?”

और फिर से चावला साहिब ने संजना को अपने बाहों में भरते हुए कहा, “समझ में नहीं ारः के अब मैं किआ करूँ, और किआ कहूं तुम्हारे पापा से” और अपने होंठों को संजना के गालों पर फरने लगा उस्सको सीने से दबाते हुए. और संजना ने कहा, बुसस अब चोररये मुझे पापा आते hi होंगे….”

और सच में आनंद जी आये अपने सर से पानी झटकते हुए क्यूंकि बाहर थोड़ी बारिश होने लगी थी. आते hi वो मुस्कुराते हुए चावला साहिब के करीब गए और धीरे से कहा, “देसी पीने का कुछ अलग hi मज़ा है साहिब कुछ हमारे साथ आज चियर्स करलो”

संजना खड़े दोनों को देख रही थी मगर उस्सकी नज़रें ज़्यादा चावला साहिब पर थे और जैसे एक ख्याल में खोये हुए देख रही थी चावला साहिब को. चावला साहिब ने नोट किया के किश अंदाज़ से संजना उस्सको देख रही थी. दोनों के दिल धड़क रहे थे मगर आनंद के सामने अजनबी जैसे बेहवे करना था.

कोई 15 मिनट बाद दोनों मर्दों ने थोड़ा पी लिए थे और संजना ने पकोड़ा पडोसा उनको, वो किचन से एते जाते दिखाई दे रही थी. जब भी आती तो दोनों ऐसे वैसे इधर उधर के बातें कर रहे होते, तो संजना ने एक बार आकर खफा होने की आवाज़ में कहा,

“जो बात करनी है वो तो तुम दोनों कर hi नहीं रहे, पी रहे हो और मस्ती किये जा रहे हो आप लोग!”

तो उसस्के बाप ने उस्सको पास बैठने को कहा और उसस्के सर पर हाथ फेररते हुए कहा, “अब तुझे बड़ी जल्दी है पराया होने की? हम्म?” और चावला साहिब के तरफ देखते हुए कहा, “मालिक, एहि मेरी सब कुछ है, इस्को दूर करने का बिल्कुल मैं नहीं है मेरा इसी लिए उस दिन इंकार किया था मैं ने, बिल्कुल अकेला हो जाऊंगा इस्सके बिना, सोचकर डर लगता है मुझे. मगर इस्को यकीन है के आप के घर में यह रानी बांके रहेगी इसी लिए मुझको मनाया िस्सने के मैं हाँ कहूं.”

चावला साहिब ने कहा, “बिल्कुल सही कहा आप की बिटिया ने ऑफ़ कोर्स रानी बांके रहेगी मेरे घर में इस में कोई शक है भला?” संजना उनको देख कर मुस्कुराये जा रही थी और कभी अपने पापा को देखती और थोड़ा उदास हो रही थी.

आनंद जी ने कहा, “तो बात पक्की करने की ख़ुशी में यह एक पेग और मालिक, चियर्स!! मेरी संजना आप की हुई मालिक.” यह सुनकर चावला साहिब ने दिल में कहा, “मेरी कैसे नहीं होगी, यह तो मेरी हो चुकी है… और उधर संजना ने भी अपने पापा की उस बात को सुनकर दिल hi दिल में कह रही थी मुस्कुराते हुए ’मैं तो इनकी की कब के हो चुकी हूँ पापा, आप को नहीं पता’….. फिर संजना ने ेंखें चुराते हुए एक नज़र चावला साहिब को देखा और मुस्कुरा दिए, और चावला साहिब ने भी उसी वक़्त संजना को देखते हुए एक सिप ले रहा था देसी थर्रा का….. तो संजना ने कहा, “आप को ड्राइव करनी है बुसस कीजिये और मत पीजिये”

यह सुनकर आनंद जी ने कहा; “आप बताओ के अब कब कैसे होगा? एक मांगनी वग़ैरा तो होना चाहिए नाह? आप के बेटे को देखा भी नहीं है मैं ने और बिना देखे हाँ कह दिया, यकीन है आप पर के आप का बीटा बिल्कुल आप की तरह hi होगा.”

अब यह बात सुनकर दोनों संजना और चावला साहिब के चेहरे से रंग ुध गए एक दूसरे के तरफ देखते हुए!! संजना वेट कर रही थी के अब चावला साहिब किआ जवाब देंगे. और चावला साहिब सोच में पर गया के अब किआ कहें!

तो संजना ने कहा, “आप अपने फॅमिली के साथ किसी दिन आईये हमारे यहाँ मैं आप के बेटे को देखना चाहती हूँ, और आप की एक और बहु है नाह? उन् से भी तो मिलना है मुझे.” यह बात कहकर जैसे संजना ने चावला साहिब की काम आसान कर दिया और उस्सने कहा,

“हाँ यह भी ठीक है मगर किआ डायरेक्टली एक सगाई नहीं हो सकता जिस दिन हम लोग यहाँ आये?”

तो संजना के पापा ने कहा, “हाँ बिल्कुल वैसा hi होगा. आप बुसस डेट बताईये मैं तैयारी कर लूंगा. अगले हफ्ते ठीक रहेगा किआ?”

चावला साहिब ने कहा, “आप को कुछ नहीं करना है मैं सब बंदोबश्त कर लूंगा, साडी ज़िम्मेदारी मेरी, मैं पुरे फार्महाउस को सजवा दूंगा अपने आदमियों को भेज कर आप को एक भी पैसा नहीं इस्तेमाल करना है, सब कुछ मेरे तरफ से hi होगा. कुछ पैसे भी भेजवा दूंगा सभी सामान के लिए जिसकी ज़रुरत पड़ेगी उस मौके के लिए. सारे गाओं वालो को आमंत्रित करना और उस गाओं वालों को भी बुलाना जहाँ मेरा हवेली हुआ करता था.”

आनंद जी खुश हुए और संजना मुस्कुराये जा रही थी. तब चावला साहिब ने कहा, “मगर एक बात है आनंद; मैं कुछ देर संजना से अपने घर के बारे में बात करना चाहता हूँ के हम लोग कैसे रहते हैं, हमारा जीना यहाँ गाओं के जीने के तरीके से तो अलग है नाह भाई? तो देखो बारिश भी थम गया मैं संजना को एक ड्राइव पर लेजाता हूँ, गाओं भी घूम लेंगे और मैं उस से बात भी कर लूंगा तुम पीना जारी रखो क्यों ठीक है नाह?”

संजना समझ गयी के चावला साहिब फिर उस के साथ अकेले होना चाहते हैं और मुस्कुराते हुए कहा, “ड्राइव पर इस गाओं में किधर जाएंगे भला? कहाँ ऐसी जगह है इधर?” चावला साहिब संजना को एक ेंख मारते हुए कहा, “अरे बहोत दिनों से उस पहाड़ के तरफ नहीं गया हूँ उधर जाने को मैं था चलो नाह थोड़ा घूम के आएंगे तुम्हारा भी मैं बहल जाएगा.”

आनंद जी ने थोड़े नशीले आवाज़ में कहा, “हाँ बेटी जाओ, जाओ घूम आओ गाडी में मालिक के साथ.”

संजना को पता था के वो पहाड़ी इलाका बिल्कुल सुनसान जगह है जहाँ चावला जी उसे लेकर जाना चाहते हेजन, उस्सने सोचा, ‘लो अब फिर मुझको जकरेंगे यह इसी लिए मुझे उधर लेजा रहे है, उफ़!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………..(2532 वर्ड्स)
 
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