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अपडेट 19 बोथ स्टिल टुगेदर
तो उन्हों ने संजना के छाती पर अपना चेहरा किये हुए बड़े नरमी से अपने जीब को बाहर किया और संजना के नरम बूब पर फेर्रा और जैसे hi उसस्के जीब ने वहां छुवा तो संजना उनके सर को थामे हुए गर्दन को ऊपर उठाया और उस्सकी आह निकल गयी…..
अब आगे……..
संजना की नरम, नाज़ुक बूब चावला साहब के मुंह में था और संजना की गर्दन ऊपर छत के तरफ उठे हुए ेंख मुंढे हुए धीमी आवाज़ में ‘आआह्ह्ह’ किये जा रही थी और चावला साहब की नज़रें संजना के चेहरे पर था उस्सकी बूब चूस्ते हुए. संजन की मुठी में चावला साहब के सर के बाल भरे हुए थे उस वक़्त. संजना चावला साहब की जीब अपने नाज़ुक निप्पल पर उस्सकी रागढ फील करते हुए और ज़ोर से उनके बालों को अपनी मुठी में जकरा और ज़्यादा ज़ोर से “आआह्ह्ह्हह सष्स्स्सस्शःशशशह” करती गयी. चावला साहिब का दूसरा हाथ उस्सकी दूसरे बूब को मसल रहा था और संजना बेहाल होती जा रही थी बीएड पर.
कुछ पल बाद चावला साहब ने मसलते हुए बूब को चोरर कर उस हाथ को संजना के जाँघों के बीच किया और धीरे से संजना की योनि पर लगाया जिस से संजना ने ेंखें खोल दी और फिर से कहा, “उफ़ वहां मत छुवो नाह बहोत सेंसिटिव है वहां प्लीज,” तो चावला साहिब बिना कुछ कहे दूसरी बूब को मुहं में लेकर चुस्सने लगा और संजना ने फिर से ेंखें मुंध लिए उस्सकी बूब की सूचक को फील करते हुए. और चावला साहब ने अपने लुंड को उस्सकी घुटने के थोड़ा ऊपर दबाया और रगड़ा…. क्यूंकि वो बूब चूस रहा था तो उस्का लुंड वहीँ रीच होता था उस वक़्त, तो वहीँ रगड़ा और फिरसे संजना ने ेंखें खोल के देखा और एक हाथ से उनके लुंड को सहलाया अपने घुटनों पर दबाते हुए, जैसे संजना उनको हेल्प कर रही थी.
बूब को खूब चुस्सने के बाद चावला साहब संजना के ऊपर चढ़ गया कम्प्लीटली, तो संजना ने कहा, “हम्म्म आप भारी हो, मैं आप का वज़न नहीं सपोर्ट कर पाउंगी हम्म्म!” तो चावला साहिब ने कहा, “वेट मैं अपने बाज़ुओं पर अपना वेट सपोर्ट करूँगा और तुमको भारी नहीं फील होगा.” तो उन्हों ने संजना के दोनों कांधों के तरफ एक एक बाज़ू को किया और अपने केहुनी पर सपोर्ट करते हुए अपने लुंड को संजना के छूट के ऊपर रगड़ना शुरू किया, आहिस्ते आहिस्ते शुरू करते धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ता गया रागढ की. संजना उसस्के निचे एक छोटी सी डॉल दिख राकी थी उस वक़्त. जानवरों की मिसाल ली जाये तो समझ लीजिये के ऐसा लगता था एक हाथी एक खरगोश के ऊपर चढ़ा हुआ है. मगर संजना की बदन, उस्सकी बूब्स और जांघें बिल्कुल फिट दिख रहे थे किसी भी आदमी से सेक्स के लिए. उस्सकी बॉडी सेक्सुअली बिल्कुल फिट दिख रही थी हालां के कोमल और नाज़ुक नज़र अति थी संजना मगर नंगी देखि जाए तो कुछ और थी उस्का जिस्म.
और चावला साहब रगड़ते हुए एकांत बार अपने लुंड को फिसलते हुए संजना की जाँघों के बीच कुछ इस तरीके से करते के लुंड छूट के द्वार के तरफ लेजाते तो झट से संजना अपने दोनों जाघों को एक साथ सत्ता देती ताके लुंड छूट के अंदर ना जाये….. जब चौथी बार ऐसा हुआ तो संजना ने बड़े प्यार और आराम से उसी बचपने आवाज़ में चावला साहिब के पीठ पर अपने बाहों को किये और अपनी उँगलियों को वहां फ्रेटी हुए कहा, “अंदर मत जाने दो नाह प्लीज, ऐसे hi रगड़ते हुए ऊपर ऊपर तो आप कर सकते हो मुझे पता है.” चावला साहिब की सांसें बढ़ रहे थे, दिल का धड़कन तेज़ होता जा रहा था मगर उस्सने फिर सोचा ‘इस लड़की को कैसे पता है के ऊपर ऊपर रगड़ते हुए झरर सकता हूँ? ‘िस्सने ज़रूर पहले यह सब किया हुआ है, यह बहोत चालू चीज़ है!’
चावला साहिब हांफने लगा था और उसस्के पसीने छूटने लगे थे तो संजना अपने कलाई से उनके पसीने पांच रहे थे उनके चेहरे में बड़े प्यार से देखते हुए. जितना रागढ का रफ़्तार बढ़ता गया उतना hi चावला साहिब का हांफना भी. और संजना उनके निचे लेती हुई उनके चेहरे में देखे जा रही थी और अपने बाहों के उन् के पीठ पर किये हुए उनको अपने छाती पर ज़ोरों से दबा रही थी उन् के पीठ पर कलाई को फरते हुए. संजना इस कोशिश में थी के चावला साहिब को बहोत ज़्यादा प्यार करें के वो जल्दी से प्लीज हो जाये और झरर जाये. जिस जगह लुंड रागढ रहा था वह संजना के जांघें और छूट की शुरुवाती निचे के हिस्सा लाल हो गया था और संजना को उस जगह पर बहोत गर्मी महसूस हो रही थी….
जब संजना ने देखा के ज़्यादा टाइम हो गया और उंनका नहीं झरर रहा है तो कहा, “मैं पथ के बल सोती हूँ आप पीछे में रगड़ो ज़्यादा क्विकली हो जाएगा हम्म?” तो अब चावला साहिब को जैसे पूरा यकीन हो गया के यह लड़की बहोत कुछ जानती है, िस्सने सब कुछ किया हुआ है पहले भी. खैर, चावला साहिब का लुंड फनफना रहा था, जमके खड़ा था और घुस्सने के लिए बिल्कुल तैयार था मगर संजना वर्जिन थी तो चावला साहिब तरस खा रहा था उस पर. सोच रहा था के खुद को सच में वो ऊपर से hi करके खुद को प्लीज तो कर hi सकता है, और उनको कोई जल्दी भी नहीं थी संजना की छूट के अंदर अभी घुसने को. चावला साहिब यह भी सोच रहा था के अगर उसस्के बेटे के साथ सच में इस्सकी शादी हुई तो वर्जिन तो अपने बेटे के लिए संजना को रखना होगा. उस्सने सोचा शादी के बाद भी इस्सकी छूट मार सकता है कभी भी, तो अभी ऊपर से hi काम चला लेने में किआ हर्ज है.
और चावला साहिब उठे, तो संजना अपनी पथ के बल लेट गयी. चावला साहिब उस्सकी गांड देखते हुए खुद से कहा यह एक 18 साल की लड़की की गांड इतनी बड़ी कैसे हैं? जब संजना कपड़ों में होती है तो कोई भी नहीं कह सकता के इतनी खूब सूरत गांड की मालकिन है यह. चावला साहिब भूके भेड़ए की तरह संजना की गांड को मसलते हुए उनको चुम्मा और अपने जीब फेर्रा जिस से संजना सेहम सी गयी और गर्दन घुमा कर उनको देखने लगी…. गोरी गोरी उभरे हुए गांड, चिकनी बिल्कुल बिना किसी दाग के, चावला साहिब के जी में आया के संजना की गांड hi मार ले…. मगर फिर सोचा के नहीं उस्सको ज़्यादा दर्द होगा, चिल्लायेगी, तो उसस्के ऊपर चढ़ा और गांड के बीच ो बीच, दोनों हिस्सों के बीच में लुंड रखा और संजना के गर्दन के पीछे छत्ते चूस्ते हुए लुंड रगड़ने लगा गांड के ऊपर, और इस बार बिल्कुल देर नहीं हुआ क्यूंकि साहब संजना की बेदाग़ पीठ और उस्सकी कर्व्स को ध्यान से देखते हुए कर रहा था, इतनी चिकनी और मस्त बॉडी थी के जल्द hi उनके दिमाग़ के न्यूरॉन्स ने स्पर्म को लुंड के तरफ भेज दिया, और कहाँरते हुए चावला साहिब ने तड़पते आवाज़ में, “ायघघघघघघघ, स्सश्श्श्श्श्श्श्श ऊऊफफफफफ” करते हुए अपने वीर्य की पिचकारी संजना के गांड से होते हुए उस्सकी पीठ पर यहाँ तक के गर्दन और सर के बालों पर भी पहुँचाया!! संजना मूढ़ कर देखने लगी थी जिस वक़्त चावला साहिब तड़पने लगे थे और संजना को समझ में आगया के वो झाररने लगे हैं तो जिस दम संजना मुड़कर देख रही थी एक कटरा वीर्य की उस्सकी गाल पर पड़े!! उस्सने अपने हाथ को गाल पर फेर्रा और चावला साहिब की उस कतरे वीर्य को अपने दो उँगलियों में मिस्सते हुए एक नटखटी मुस्कराहट के साथ चावला साहिब के ेंखों में देखते हुए कहा, “हम्म्म मैं प्यासी नहीं हूँ जो आप अपने पानी मेरे चेहरे तक कर रहे हो आप! नॉटी मन!” चावला साहिब बहोत ज़्यादा हांफ रहे थे और कुछ जवाब नहीं दे पाया, लेता रहा कुछ देर संजना के पीठ पर, और संजना ने कहा, अब आप हत्तीए भी मैं आप के उस मॉन्स्टर को देखना चाहती हूँ के उलटी करने के बाद किस्सा दीखता है हीहीहीहीहीही”
तो चावला साहिब जल्दी से अपने पीठ के बल लुढ़क गया और संजना बैठ कर उनके लुंड को अपने हाथ में लेकर एक खिलोने की तरह जैसे एक्सामिने करने लगी, थोड़ा मुस्कुराते, थोड़ा होठों को दांतों में दबाते, कभी चावला साहिब के चेहरे में देखते तो कभी उनके लुंड को देखते, संजना एक बची की तरह बेहवे कर रही थी. तब चावला साहिब ने कहा, “लेलो नाह मुंह में इस्को!” और संजना ने कहा, “इसी का तो इंतज़ार कर रही हूँ के आप इस्को मुहं में लेने को कहो क्यों नहीं कह रहे थे आप?” और उस्सने लुंड को मुंह में लेते हुए चावला साहिब के चेहरे में देखने लगी उनके लुंड को चूस्ते और चाटते hue…..Chawla साहिब जैसे सातवां आसमान पर था, तृप्ति आवाज़ में “aaaaaaaaaahhhhhh” करते हुए.
संजना ने चुस्सने के बाद लुंड को हाथ में कुछ देर लिए रखा उस्सको मुरझाते हुए देखने के लिए, जैसे जैसे वो मुरझाता गया वैसे वैसे संजना के चेहरे पर मुस्कान बढ़ती गयी लुंड को जैसे निहारते हुए. और संजना ने वो किया जो चावला साहिब ने बिल्कुल नहीं सोचा था वो करेगी… संजना ने लुंड को अपने चूचियों पर रगड़ा काफी देर तक कुछ जिस्मानी एहसास को फील करते हुए… सजाना उस दौरान अपनी ेंखने मुंध ली थी और अपने चूचियों पर लुंड को रगड़ते गयी काफी देर तक और चावला साहिब उस्सको हैरान देखता रहा बिना कुछ कहे. फिर कुछ देर बाद संजना ने उस मुरझाए हुए लुंड को किश किया, प्यार किया और थोड़ा अपने मुंह में लिया फिर चावला साहिब को दिखते हुए कहा, “देखो अब तो इस्को पूरा मुंह में ले सकती हूँ, क्यूंकि अब छोटा हो गया है हीहीहीहीहीहीहीही” उस्सकी इन् अदाओं पर चावला साहिब फ़िदा थे.
तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (1571 वर्ड्स)
तो उन्हों ने संजना के छाती पर अपना चेहरा किये हुए बड़े नरमी से अपने जीब को बाहर किया और संजना के नरम बूब पर फेर्रा और जैसे hi उसस्के जीब ने वहां छुवा तो संजना उनके सर को थामे हुए गर्दन को ऊपर उठाया और उस्सकी आह निकल गयी…..
अब आगे……..
संजना की नरम, नाज़ुक बूब चावला साहब के मुंह में था और संजना की गर्दन ऊपर छत के तरफ उठे हुए ेंख मुंढे हुए धीमी आवाज़ में ‘आआह्ह्ह’ किये जा रही थी और चावला साहब की नज़रें संजना के चेहरे पर था उस्सकी बूब चूस्ते हुए. संजन की मुठी में चावला साहब के सर के बाल भरे हुए थे उस वक़्त. संजना चावला साहब की जीब अपने नाज़ुक निप्पल पर उस्सकी रागढ फील करते हुए और ज़ोर से उनके बालों को अपनी मुठी में जकरा और ज़्यादा ज़ोर से “आआह्ह्ह्हह सष्स्स्सस्शःशशशह” करती गयी. चावला साहिब का दूसरा हाथ उस्सकी दूसरे बूब को मसल रहा था और संजना बेहाल होती जा रही थी बीएड पर.
कुछ पल बाद चावला साहब ने मसलते हुए बूब को चोरर कर उस हाथ को संजना के जाँघों के बीच किया और धीरे से संजना की योनि पर लगाया जिस से संजना ने ेंखें खोल दी और फिर से कहा, “उफ़ वहां मत छुवो नाह बहोत सेंसिटिव है वहां प्लीज,” तो चावला साहिब बिना कुछ कहे दूसरी बूब को मुहं में लेकर चुस्सने लगा और संजना ने फिर से ेंखें मुंध लिए उस्सकी बूब की सूचक को फील करते हुए. और चावला साहब ने अपने लुंड को उस्सकी घुटने के थोड़ा ऊपर दबाया और रगड़ा…. क्यूंकि वो बूब चूस रहा था तो उस्का लुंड वहीँ रीच होता था उस वक़्त, तो वहीँ रगड़ा और फिरसे संजना ने ेंखें खोल के देखा और एक हाथ से उनके लुंड को सहलाया अपने घुटनों पर दबाते हुए, जैसे संजना उनको हेल्प कर रही थी.
बूब को खूब चुस्सने के बाद चावला साहब संजना के ऊपर चढ़ गया कम्प्लीटली, तो संजना ने कहा, “हम्म्म आप भारी हो, मैं आप का वज़न नहीं सपोर्ट कर पाउंगी हम्म्म!” तो चावला साहिब ने कहा, “वेट मैं अपने बाज़ुओं पर अपना वेट सपोर्ट करूँगा और तुमको भारी नहीं फील होगा.” तो उन्हों ने संजना के दोनों कांधों के तरफ एक एक बाज़ू को किया और अपने केहुनी पर सपोर्ट करते हुए अपने लुंड को संजना के छूट के ऊपर रगड़ना शुरू किया, आहिस्ते आहिस्ते शुरू करते धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ता गया रागढ की. संजना उसस्के निचे एक छोटी सी डॉल दिख राकी थी उस वक़्त. जानवरों की मिसाल ली जाये तो समझ लीजिये के ऐसा लगता था एक हाथी एक खरगोश के ऊपर चढ़ा हुआ है. मगर संजना की बदन, उस्सकी बूब्स और जांघें बिल्कुल फिट दिख रहे थे किसी भी आदमी से सेक्स के लिए. उस्सकी बॉडी सेक्सुअली बिल्कुल फिट दिख रही थी हालां के कोमल और नाज़ुक नज़र अति थी संजना मगर नंगी देखि जाए तो कुछ और थी उस्का जिस्म.
और चावला साहब रगड़ते हुए एकांत बार अपने लुंड को फिसलते हुए संजना की जाँघों के बीच कुछ इस तरीके से करते के लुंड छूट के द्वार के तरफ लेजाते तो झट से संजना अपने दोनों जाघों को एक साथ सत्ता देती ताके लुंड छूट के अंदर ना जाये….. जब चौथी बार ऐसा हुआ तो संजना ने बड़े प्यार और आराम से उसी बचपने आवाज़ में चावला साहिब के पीठ पर अपने बाहों को किये और अपनी उँगलियों को वहां फ्रेटी हुए कहा, “अंदर मत जाने दो नाह प्लीज, ऐसे hi रगड़ते हुए ऊपर ऊपर तो आप कर सकते हो मुझे पता है.” चावला साहिब की सांसें बढ़ रहे थे, दिल का धड़कन तेज़ होता जा रहा था मगर उस्सने फिर सोचा ‘इस लड़की को कैसे पता है के ऊपर ऊपर रगड़ते हुए झरर सकता हूँ? ‘िस्सने ज़रूर पहले यह सब किया हुआ है, यह बहोत चालू चीज़ है!’
चावला साहिब हांफने लगा था और उसस्के पसीने छूटने लगे थे तो संजना अपने कलाई से उनके पसीने पांच रहे थे उनके चेहरे में बड़े प्यार से देखते हुए. जितना रागढ का रफ़्तार बढ़ता गया उतना hi चावला साहिब का हांफना भी. और संजना उनके निचे लेती हुई उनके चेहरे में देखे जा रही थी और अपने बाहों के उन् के पीठ पर किये हुए उनको अपने छाती पर ज़ोरों से दबा रही थी उन् के पीठ पर कलाई को फरते हुए. संजना इस कोशिश में थी के चावला साहिब को बहोत ज़्यादा प्यार करें के वो जल्दी से प्लीज हो जाये और झरर जाये. जिस जगह लुंड रागढ रहा था वह संजना के जांघें और छूट की शुरुवाती निचे के हिस्सा लाल हो गया था और संजना को उस जगह पर बहोत गर्मी महसूस हो रही थी….
जब संजना ने देखा के ज़्यादा टाइम हो गया और उंनका नहीं झरर रहा है तो कहा, “मैं पथ के बल सोती हूँ आप पीछे में रगड़ो ज़्यादा क्विकली हो जाएगा हम्म?” तो अब चावला साहिब को जैसे पूरा यकीन हो गया के यह लड़की बहोत कुछ जानती है, िस्सने सब कुछ किया हुआ है पहले भी. खैर, चावला साहिब का लुंड फनफना रहा था, जमके खड़ा था और घुस्सने के लिए बिल्कुल तैयार था मगर संजना वर्जिन थी तो चावला साहिब तरस खा रहा था उस पर. सोच रहा था के खुद को सच में वो ऊपर से hi करके खुद को प्लीज तो कर hi सकता है, और उनको कोई जल्दी भी नहीं थी संजना की छूट के अंदर अभी घुसने को. चावला साहिब यह भी सोच रहा था के अगर उसस्के बेटे के साथ सच में इस्सकी शादी हुई तो वर्जिन तो अपने बेटे के लिए संजना को रखना होगा. उस्सने सोचा शादी के बाद भी इस्सकी छूट मार सकता है कभी भी, तो अभी ऊपर से hi काम चला लेने में किआ हर्ज है.
और चावला साहिब उठे, तो संजना अपनी पथ के बल लेट गयी. चावला साहिब उस्सकी गांड देखते हुए खुद से कहा यह एक 18 साल की लड़की की गांड इतनी बड़ी कैसे हैं? जब संजना कपड़ों में होती है तो कोई भी नहीं कह सकता के इतनी खूब सूरत गांड की मालकिन है यह. चावला साहिब भूके भेड़ए की तरह संजना की गांड को मसलते हुए उनको चुम्मा और अपने जीब फेर्रा जिस से संजना सेहम सी गयी और गर्दन घुमा कर उनको देखने लगी…. गोरी गोरी उभरे हुए गांड, चिकनी बिल्कुल बिना किसी दाग के, चावला साहिब के जी में आया के संजना की गांड hi मार ले…. मगर फिर सोचा के नहीं उस्सको ज़्यादा दर्द होगा, चिल्लायेगी, तो उसस्के ऊपर चढ़ा और गांड के बीच ो बीच, दोनों हिस्सों के बीच में लुंड रखा और संजना के गर्दन के पीछे छत्ते चूस्ते हुए लुंड रगड़ने लगा गांड के ऊपर, और इस बार बिल्कुल देर नहीं हुआ क्यूंकि साहब संजना की बेदाग़ पीठ और उस्सकी कर्व्स को ध्यान से देखते हुए कर रहा था, इतनी चिकनी और मस्त बॉडी थी के जल्द hi उनके दिमाग़ के न्यूरॉन्स ने स्पर्म को लुंड के तरफ भेज दिया, और कहाँरते हुए चावला साहिब ने तड़पते आवाज़ में, “ायघघघघघघघ, स्सश्श्श्श्श्श्श्श ऊऊफफफफफ” करते हुए अपने वीर्य की पिचकारी संजना के गांड से होते हुए उस्सकी पीठ पर यहाँ तक के गर्दन और सर के बालों पर भी पहुँचाया!! संजना मूढ़ कर देखने लगी थी जिस वक़्त चावला साहिब तड़पने लगे थे और संजना को समझ में आगया के वो झाररने लगे हैं तो जिस दम संजना मुड़कर देख रही थी एक कटरा वीर्य की उस्सकी गाल पर पड़े!! उस्सने अपने हाथ को गाल पर फेर्रा और चावला साहिब की उस कतरे वीर्य को अपने दो उँगलियों में मिस्सते हुए एक नटखटी मुस्कराहट के साथ चावला साहिब के ेंखों में देखते हुए कहा, “हम्म्म मैं प्यासी नहीं हूँ जो आप अपने पानी मेरे चेहरे तक कर रहे हो आप! नॉटी मन!” चावला साहिब बहोत ज़्यादा हांफ रहे थे और कुछ जवाब नहीं दे पाया, लेता रहा कुछ देर संजना के पीठ पर, और संजना ने कहा, अब आप हत्तीए भी मैं आप के उस मॉन्स्टर को देखना चाहती हूँ के उलटी करने के बाद किस्सा दीखता है हीहीहीहीहीही”
तो चावला साहिब जल्दी से अपने पीठ के बल लुढ़क गया और संजना बैठ कर उनके लुंड को अपने हाथ में लेकर एक खिलोने की तरह जैसे एक्सामिने करने लगी, थोड़ा मुस्कुराते, थोड़ा होठों को दांतों में दबाते, कभी चावला साहिब के चेहरे में देखते तो कभी उनके लुंड को देखते, संजना एक बची की तरह बेहवे कर रही थी. तब चावला साहिब ने कहा, “लेलो नाह मुंह में इस्को!” और संजना ने कहा, “इसी का तो इंतज़ार कर रही हूँ के आप इस्को मुहं में लेने को कहो क्यों नहीं कह रहे थे आप?” और उस्सने लुंड को मुंह में लेते हुए चावला साहिब के चेहरे में देखने लगी उनके लुंड को चूस्ते और चाटते hue…..Chawla साहिब जैसे सातवां आसमान पर था, तृप्ति आवाज़ में “aaaaaaaaaahhhhhh” करते हुए.
संजना ने चुस्सने के बाद लुंड को हाथ में कुछ देर लिए रखा उस्सको मुरझाते हुए देखने के लिए, जैसे जैसे वो मुरझाता गया वैसे वैसे संजना के चेहरे पर मुस्कान बढ़ती गयी लुंड को जैसे निहारते हुए. और संजना ने वो किया जो चावला साहिब ने बिल्कुल नहीं सोचा था वो करेगी… संजना ने लुंड को अपने चूचियों पर रगड़ा काफी देर तक कुछ जिस्मानी एहसास को फील करते हुए… सजाना उस दौरान अपनी ेंखने मुंध ली थी और अपने चूचियों पर लुंड को रगड़ते गयी काफी देर तक और चावला साहिब उस्सको हैरान देखता रहा बिना कुछ कहे. फिर कुछ देर बाद संजना ने उस मुरझाए हुए लुंड को किश किया, प्यार किया और थोड़ा अपने मुंह में लिया फिर चावला साहिब को दिखते हुए कहा, “देखो अब तो इस्को पूरा मुंह में ले सकती हूँ, क्यूंकि अब छोटा हो गया है हीहीहीहीहीहीहीही” उस्सकी इन् अदाओं पर चावला साहिब फ़िदा थे.
तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (1571 वर्ड्स)