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अपडेट 10 संजना गोज फॉर ा ड्राइव विथ चावला साहिब
और तुरंत चावला साहिब सनजना का हाथ थामे बाहर निकले अपने 4क्ष4 के तरफ जाते हुए. क्यूंकि बारिश हुए थे वहां से सभी लोग चले गए थे, कोई भाई नज़र नहीं आया और दोनों कार के अंदर बैठे. संजना ऑफ़ कोर्स आगे hi बैठी चावला साहिब के बगल में और उस्सकी वो ब्लैक ड्रेस और ऊपर उठ गयी जिस से उस्सकी जांघें और भी दिखने को मिला चावला साहिब को. (ड्रेस की फोटो अपडेट 5 में देखलो) तो चावला साहिब ड्राइव करते हुए अपने एक हाथ को संजना के जाँघों पर रखा करेस करते हुए और संजना ने मन नहीं किया. अपने होंठ को दांतों में दबाये आगे देख रही थी हलकी सी मुस्कान के साथ. फिर एक नटखटी आवाज़ में संजना बोली, “हे मिस्टर, अपने होने वाली बहु के जाँघों पर हाथ फेरर रहे हो आप? हीहीहीही” तो चावला साहिब बहोत खुश दिखाई दिए और बाएं तरफ झुक कर संजना के लिप्स पर किश किया और कहा, “यू अरे जस्ट ान ादोराबले डार्लिंग, तुम कैसे सिचुएशन से समझौता कर लेती हो यह मुझको बहोत पसंद है. मूवएह”
कच्चे रास्ते से गुज़रते हुए एक सुनसान पहाड़ी जगह पर चावला साहिब ने गाड़ी रोका और गाड़ी से बाहर निकलते हुए संजना को पीछे के सीट पर इन्विते किया. संजना कार से उत्तरी और चरों तरफ देखते हुए कहा, “अगर कोई कहीं से हमको देख रहा हो तो?”
चावला साहिब ने चरों तरफ देखा और कहा, “अरे अभी अभी बारिश हुई है, देखो इस जगह को, लगता है अँधेरा होने वाला है हालां के अभी सिर्फ 4 बजे हैं, इस वक़्त ऐसी जगह पर कौन आएगा भला?” और संजना बोली, “इस जगह पर लोग आते हैं मुझको पता है, कोई भी दिख सकते हैं अचानक, और हम दोनों को कार के पीछे वाले सीट पर बैठे देख लिया तो किआ सोचेंगे? सब गर्बर हो जाएगा, बात पुरे गाओं में फेल जाएगी… सोचिये तो ज़रा, शुरू होने से पहले सब कुछ ख़तम हो जाएगा!”
तो वहीँ दोनों कार के एक तरफ खड़े हुए बात कर रहे थे एक कार के लेफ्ट में एक राइट में पीछे वाले दूर के पास और दूर खोलने hi वाले थे मगर बात किये जा राजे थे अंदर घुस्सने से पहले. चावला साहिब ने संजना से कहा, “बताओ तुम ने क्यों झट से कह दिया के मैं अपने फॅमिली को लेकर एवं तुम्हारे यहाँ? तुमने तो सब गड़बड़ कर दिए, जब तुम्हारे पापा ने पूछा के किआ किया जाए तब तो मैं हमारे बारे में सोच रहा था और तुमने तो सब खराब कर दिए, अब तो मजबूरन तुमको मेरे बेटे से सगाई करनी पड़ेगी!” तो सनजन एक हाथ को कार पर फरते हुए जैसे उस्सको पांच रही हो और मुस्कुराते हुए कहा, “पागल हो आप? आप किआ सोच रहे हो की आप मेरे पापा से अपने बारे में बात करोगे? किआ आप मुझको देखने ए हो यह कहते आप मेरे पापा से? तुरंत आप को खली हाथ वापस लौटना परता तब तो!”
तो चावला साहिब बोले, “अरे नहीं मगर रुमको इतना किश करने के बाद, और यह जान्ने के बाद के तुम कितनी अच्छी किसर हो तुमको सिर्फ अपने लिए चाहता था, मगर अब तो….!” पहिए संजना ने ‘हीहीहीही’ करते हुए कहा, “आइये अंदर आइये मैं आप को समझाती हूँ!”
और खुद पहले वो अंदर गयी कार के दाएं तरफ से और चावला साहिब भी अंदर गयी बाएं तरफ से. जैसे संजना बैठी चावला साहिब तुरंत उस से सत् कर बैठा और अपने हाथों को डायरेक्ट संजना के जाँघों पर किया और फरने लगा तो संजना उनके हाथों को अपने हाथ में लेते हुए कहा, “ठहरये तो, सुनए मुझे किआ कहना है.” तो वो रुक गए अपने हाथों को संजना के हाथ में किये और कहा, “हाँ तो बोलो!”
तो संजना अपनी मीठी बचपने वाले आवाज़ में बोली, “तो सुनए, किआ अगर आप के बेटे ने मुझे अपनाया तो किआ मैं आप के पास नहीं रहूंगी? आप hi के घर में आउंगी नाह? आप के hi घर में रहूंगी नाह? आप ने मुझको अपने बेटे के लिए पसंद किया है नाह? तो बताइये आप किआ मुझको शेयर करना चाहते हो? क्यों आप ने अपने बेटे की शादी वाली बात मेरे पापा से किये थे पहले दिन? वो तो इसी बात पे राज़ी हुआ नाह की आप की बहु बनूँगी? अब बोल्ये?!”
संजना के यह बातें सुनकर चावला साहिब का लुंड हलचल करने लगा उसस्के पंत के अंदर और जैसे के उस्का हाथ संजना के हाथ में था तो उस्सको खींच के अपने लुंड पर दबाया उसस्के चहरे में प्यार से देखते हुए. संजना ने हाथ अपने तरफ खींचने की कोशिश की मगर बेकार था और संजना ने अपने होने वाले ससुर के लुंड को ेरेक्ट महसूस किया अपने मुलायम कलाई पर, और शर्म से नज़रें झुका लिए उस्सको फील करते हुए और हाथ को नहीं खिंचा….. चावला साहिब का जमके खड़ा हो गया था हालां के पंत के अंदर hi था, उस्का फॉर्म साफ़ दिख रहे थे और संजना ने धीरे धीरे अपनी नज़रों को उस जगह पर किया जहाँ उस्का हाथ था याने के चावला साहिब के लुंड पर….. यह शेयर वाली वर्ड को सुनकर चावला साहिब ने फील किया के ‘अपनी बहु को अपने बेटे के साथ शेयर करूँगा यह संजना ने खुद अपने आप मुझे से पूछा!’ और यह बात उस्सकी दिमाग़ में शोर मचा रहा था उस वक़्त. जिस ऐडा से सनजना ने बात की थी वो सुनने लायक था.
और फिर अचानक संजना ने बाहर देखा चरों तरफ नज़रें फरते हुए और कहा, “अब चलिए यह जगह ठीक नहीं है कोई भी हमको यहाँ देख सकता है.”
चावला साहिब बेक़रार हो रहे थे और इंसिस्ट किया के वहीँ पीछे कार में बैठें! संजना ने कहा, “आप ने पी रखे हैं आप को समझ में नहीं ारः मैं किआ कह रही हूँ, किसी ने देखा तब कहना!” फिर तुरंत चावला साहब संजना को जाकर के किश करने लगा एक भूके जानवर की तरह उस पर टूट पड़ा वो, संजना की ड्रेस को बिल्कुल ऊपर उठाते हुए जिस से उस्सकी पथ तक ड्रेस उठ गया और चावला साहिब का मुंह संजना के जाँघों के बीच उसस्के पैंटी पर फरने लगे…… संजना अब भी बाहर चारों तरफ देख रही थी….. और एक सिसक के साथ गर्दन पीछे करते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “ोफो, मुझे बहोत डर लग रहा है, किसी ने देखा तो किआ होगा, आप नशे में हो, यह बिल्कुल ठीक नहीं है उफ़ माआ!!!”
और तबक तक चावला साहिब का मुंह संजना के पंतय को सूंघ और चाट रहा था और संजना जैसे लेट गयी थी सीट पर, फिर भी बाहर देखे जा रही थी आगे पीछे, दाएं बाएं चरों तरफ के कहीं कोई नाह गुज़रे उधर से.
चावला साहिब ने अपने दो उँगलियों को संजना के पंतय की इलास्टिक पर किये और हलके से उस्सको निचे के तरफ करना चाहा संजना के पथ को चाटते हुए, उस जवान 18 साल की जवान जिस्म को अपने आग़ोश में लेकर चावला साहिब बिल्कुल दीवाना हो रहा था और संजना खुद को संभाल नहीं पा रही थी, थोड़ा सरेंडर भी कर रही थी और थोड़ा डर से इधर उधर देखे जा रही थी. जिस वक़्त चावला साहिब उस्सकी पंतय निचे करने की कोशिश करने लगी तो जल्दी से संजना ने अपने पंतय को ज़ोर से पकड़ा और उफ्फ्फ करते हुए एक डिस्टर्बेद और शर्मिंदा और पतली आवाज़ से कहा, “न्यू नहीं यह नहीं” तो चावला साहिब एक प्यासे भूके ग़रीब की तरह ऊपर संजना को देखते हुए कहा, “मुझे तेरा रस चखना है फ़िक्र मत करो कुछ नहीं करूँगा सिर्फ चखूगा तुमको भी मज़ा आएगा देखना मेरा यकीन कर बेबी!”
संजना अपने आप को संभालते हुए कहा, “हम्म्म नहीं वहां वो गन्दी है, मैं भीगी हुई हूँ वहां, नहीं आप यह मत करो!” तो चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए खुश दीखते हुए कहा, “आरी पगली इस्को गन्दी नहीं कहते, यह बिल्कुल गन्दी नहीं उसी रस को तो चखना है मुझे, तुम भी एन्जॉय करोगी यकीन मानों, करने दो नाह प्लीज, थोड़ा सा बस थोड़ा सा निचे करदूँ इस पंतय को फिरर देखना….” और संजना अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुए अपने हाथ को हत्ता लिया तो चावला साहिब ने आराम से धीरे धीरे उस्सकी पंतय को निचे करता गया उस्सकी मुलायम सफ़ेद पथ के निचे वाले हिस्से पर अपना जीब चलाते हुए, जहाँ छोटी छोटी ट्रिम की हुई बाल नज़र आने लगे, और फिर ेंखों को संजना के तरफ देखते हुए पूछा, “शेव करती हो? वैरी गुड, बहोत साफ़ है, बाल अभी अभी उगने लगे हैं शेव के बाद, लगता है कल, परसों hi शेव किया हुआ है….”
चावला साहिब का लाढ़ छू रहा था, और संजना अब तक दांतों में होठों को दबाये हुए चावला साहिब को उस एक्शन को करते हुए देख रही थी चेहरे में लाली के साथ और वो एक गर्मी जैसे महसूस कर रही थी उस वक़्त. थोड़ा जिस्म में थरथराहट भी थी संजना के, अपने टांगों को जैसे फैला कर चावला साहिब को पोजीशन देने लगी थी उसस्के लिए आसानी से पंतय को निचे करने के लिए, और जैसे चावला साहिब ने पंतय को जाँघों तक करने की कोशिश किये तो संजना ने खुद अपनी कमर उठाया टेक उस्सकी पंतय निचे जा सके, यह देख कर चावला साहिब खुश हुए के लड़की अब मान गयी है और उस्का भी मैं कर रहा है शायद.
तो पंतय को तक़रीबन संजना के घुटनों तक रोके चावला साहिब ने और अपने जीब को सीधे उस्सकी छूट पर फेर्रा और उसस्के दोनों जाँघों के बीच अपने हाथ डालते हुए संजना के चेहरे में देखा और अपने जाँघों को खोलने के लिए kaha.Sanjana ने अपने एक ऊँगली को दांत से डाब आये हुए चावला साहिब के चेहरे में देख रही थी और थोड़ा सा अपने जाँघों को दोनों तरफ part किये उस्सने और थोड़ा हांफने भी लगी थी उस्सकी दिल की धड़कन बहोत तेज़ हो रहे थे, चेहरा बिल्कुल लाल टमाटर के जैसा हो गया था, कुछ कांप भी रही थी… तो चावला साहिब का हाथ उन् दो जाँघों के बीच गया और उस्का ऊँगली डायरेक्ट संजना के छूट के बीचो बीच और गीली गीली, नरम नरम महसूस करते हुए चावला साहिब ने संजना का पानी ऊँगली में लेकर अपने जीब पर किया संजना को दिखाते हुए. जिस वक़्त उस्का हाथ संजना के छूट पर गए उस वक़्त संजना ने जैसे एक अंगराई लिया और एक लम्बी सिसकती धीमी आवाज़ में “इस्स्स्सह्ह्हह्ह, ह्म्म्मम्म उफ्फफ्फ्फ़” किया. और जब चावला साहिब अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा तो संजना ने उनको देखते हुए कहा, “chhee!!wo कितनी गन्दी है! आप पागल हो और बिल्कुल नशे में हो इस वक़्त!” पहिए चावला साहिब ने उनके दोनों टांगों और फैलाना चाहा तो संजना ने अपने घुटनों पर पंतय दिखाते हुए कहा, “कितना फैलाऊं और नहीं होगा देखो पंतय बीच में रुका हुआ है, बुसस इतने में काम चला ला आप, मुझे अजीब सी फील हो रही है जल्दी करो, पापा सोच रहे होंगे हम कहाँ हैं इतनी देर तक!”
तो चावला साहिब ने उस्सकी पंतय पूरा निकाल दिया और सीट पर रख दिया. संजना ने कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाई पंतय जब उतारर रही थी तब. तब किआ, चावला साहिब ने उस्सकी दोनों जाँघों को बिल्कुल खोल कर एक तंग को लेफ्ट और एक को राइट में करते हुए अपना मुँह उसस्के बीच में दाल कर अपने जीब को सीधे संजना की छूट चाटने लगा. संजना जैसे होश खोने लगी, उस्का एक हाथ चावला साहिब के सर के बालों को अपने मुठी में जाकर लिया और उस्सकी आवाज़ कुछ ऐसी निकली एक सिसक के साथ, “हम्म्म्म आआआहहह स्स्स्सह्शशशश बस्स्स बुसस कीजिये उफ़ मैं नहीं होल्ड कर सकती हूँ रुकिए आप प्लीीाआज़ी!” और उस्सकी पानी और भी ज़्यादा निकलने लगे जिस्सको चलवा अपने मुंह में कैद करता गया. संजना का जिस्म कांपने लगी और उस्सकी टांगें थर्र थार हिल रहे थे और उस्सकी सेंसें बहोत तेज़ हो गयी थी और एकांत बूंद पसीना उसस्के पेशानी से होकर उसस्के गले तक आ चुके थे पर चावला साहिब ने अपने जीब को धीरे से उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ठुस्सा जिस से संजना चिल्ला उठी और कमर को हिल्ला कर एक तरफ किया. चावला साहिब जैसे उस्सकी छूट को एक गोश्त के टुकड़े की तरह खा रहा था. तो जब संजना ने कमर हिल्ला कर एक तरफ कर लिया अपने जिस्म को, चावला साहिब उस्सको दिलाशा देते हुए kaha,”are क्यों डर रही हो, कुछ भी नहीं है, तुमको ओर्गास्म ारः है बुसस!”
इतने में संजना ने एक खौफ्फ़ भरी आवाज़ में कहा, “वो देखो कोई वहां से इस तरफ ारः है, मैं ने कहा था मगर आप मने नहीं अब किआ करूँ मैं उफ़ मेरी माँ!” और जल्दी से चावला साहिब ने उस्सकी पंतय को खुद संजना के निचे किया और कहा “इस पर बैठ जाओ, ड्रेस को निचे करो और बात करो मुझसे!”
संजना की नज़र उस आते हुए आदमी पर था और कहा, “यह दामोदर चाचा है लकड़ी काटने गया होगा देखो उसस्के हाथ में एक कुल्हाड़ी है”
एक अधेड़ आदमी हाथ में कुलहरि लिए कार के तरफ hi बढ़ रहा था अंदर झाँकने की कोशिश करते हुए. और जब कार के पास आगये तो अंदर देखते हुए कहा, “अरे तुम तो आनंदवा की बिटिया हवा नाह? इधर का करात बाटे इस बखत को तू? और ी आदमी कोण बाटे?” संजना ने कांपते आवाज़ में कहा, “चाचा ी हमार होने बाला ससुर बाटे, हम एकरा पहाड़ दिखाने को लावत बा.” तो उस बूढ़े आदमी ने कहा, “तोहार कपार ठीक नैबा का? अइसन मौसम में पहाड़ दिखाने को लावत बा इस्को? अच्छा तो तोहार साडी के बात लग गेल बा, अच्छा बा अच्छा बा” यह कहकर वो बूढ़ा आगे चलने लगे.”
संजना ने अपने छाती पर हाथ रख कर एक लम्बी सांस चोररटे हुए कहा, “उफ़ मेरी माँ, मेरी तो जान hi निकल गयी जैसे!” फिर जल्दी से अपनी पंतय पेहेनते हुए कहा, “अब जल्दी से वापस चलए मुझे और नहीं रहना यहाँ, आप ने मेरे बात का यकीन नहीं किया नाह, किआ होता अगर वो आदमी 5 मिनट पहले एते तो? वो सब कुछ देख लेता!” तो चावला साहिब ने संजना को जाकर के उसस्के मुंह का रस चुस्सने लगा और खुद संजना भी चावला साहिब का जीब अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगी उस्सको बाहों में भरके. तक़रीबन 5 मिनट तक किश जारी रहा और उसस्के बाद संजना ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और आगे जाकर बैठ गयी और चावला साहिब बहोत खुश दीखते हुए अपने लुंड को पंत के अंदर सीधा करते हुए आगे आये ड्राइविंग सीट पर. चावला साहिब ने अपने लुंड को संजना के मुंह में डालने को सोच रखा था, मगर सोचा कोई बात नहीं अगली बार hi सही.
दोनों घर वापस आये तो देखा के आनंद नशे में धुत्त सोफे पर खर्राटे मार रहे हैं. तो चावला साहिब ने एक शैतानी मुस्कान से संजना को देखा……………..
तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (2400 वर्ड्स)
और तुरंत चावला साहिब सनजना का हाथ थामे बाहर निकले अपने 4क्ष4 के तरफ जाते हुए. क्यूंकि बारिश हुए थे वहां से सभी लोग चले गए थे, कोई भाई नज़र नहीं आया और दोनों कार के अंदर बैठे. संजना ऑफ़ कोर्स आगे hi बैठी चावला साहिब के बगल में और उस्सकी वो ब्लैक ड्रेस और ऊपर उठ गयी जिस से उस्सकी जांघें और भी दिखने को मिला चावला साहिब को. (ड्रेस की फोटो अपडेट 5 में देखलो) तो चावला साहिब ड्राइव करते हुए अपने एक हाथ को संजना के जाँघों पर रखा करेस करते हुए और संजना ने मन नहीं किया. अपने होंठ को दांतों में दबाये आगे देख रही थी हलकी सी मुस्कान के साथ. फिर एक नटखटी आवाज़ में संजना बोली, “हे मिस्टर, अपने होने वाली बहु के जाँघों पर हाथ फेरर रहे हो आप? हीहीहीही” तो चावला साहिब बहोत खुश दिखाई दिए और बाएं तरफ झुक कर संजना के लिप्स पर किश किया और कहा, “यू अरे जस्ट ान ादोराबले डार्लिंग, तुम कैसे सिचुएशन से समझौता कर लेती हो यह मुझको बहोत पसंद है. मूवएह”
कच्चे रास्ते से गुज़रते हुए एक सुनसान पहाड़ी जगह पर चावला साहिब ने गाड़ी रोका और गाड़ी से बाहर निकलते हुए संजना को पीछे के सीट पर इन्विते किया. संजना कार से उत्तरी और चरों तरफ देखते हुए कहा, “अगर कोई कहीं से हमको देख रहा हो तो?”
चावला साहिब ने चरों तरफ देखा और कहा, “अरे अभी अभी बारिश हुई है, देखो इस जगह को, लगता है अँधेरा होने वाला है हालां के अभी सिर्फ 4 बजे हैं, इस वक़्त ऐसी जगह पर कौन आएगा भला?” और संजना बोली, “इस जगह पर लोग आते हैं मुझको पता है, कोई भी दिख सकते हैं अचानक, और हम दोनों को कार के पीछे वाले सीट पर बैठे देख लिया तो किआ सोचेंगे? सब गर्बर हो जाएगा, बात पुरे गाओं में फेल जाएगी… सोचिये तो ज़रा, शुरू होने से पहले सब कुछ ख़तम हो जाएगा!”
तो वहीँ दोनों कार के एक तरफ खड़े हुए बात कर रहे थे एक कार के लेफ्ट में एक राइट में पीछे वाले दूर के पास और दूर खोलने hi वाले थे मगर बात किये जा राजे थे अंदर घुस्सने से पहले. चावला साहिब ने संजना से कहा, “बताओ तुम ने क्यों झट से कह दिया के मैं अपने फॅमिली को लेकर एवं तुम्हारे यहाँ? तुमने तो सब गड़बड़ कर दिए, जब तुम्हारे पापा ने पूछा के किआ किया जाए तब तो मैं हमारे बारे में सोच रहा था और तुमने तो सब खराब कर दिए, अब तो मजबूरन तुमको मेरे बेटे से सगाई करनी पड़ेगी!” तो सनजन एक हाथ को कार पर फरते हुए जैसे उस्सको पांच रही हो और मुस्कुराते हुए कहा, “पागल हो आप? आप किआ सोच रहे हो की आप मेरे पापा से अपने बारे में बात करोगे? किआ आप मुझको देखने ए हो यह कहते आप मेरे पापा से? तुरंत आप को खली हाथ वापस लौटना परता तब तो!”
तो चावला साहिब बोले, “अरे नहीं मगर रुमको इतना किश करने के बाद, और यह जान्ने के बाद के तुम कितनी अच्छी किसर हो तुमको सिर्फ अपने लिए चाहता था, मगर अब तो….!” पहिए संजना ने ‘हीहीहीही’ करते हुए कहा, “आइये अंदर आइये मैं आप को समझाती हूँ!”
और खुद पहले वो अंदर गयी कार के दाएं तरफ से और चावला साहिब भी अंदर गयी बाएं तरफ से. जैसे संजना बैठी चावला साहिब तुरंत उस से सत् कर बैठा और अपने हाथों को डायरेक्ट संजना के जाँघों पर किया और फरने लगा तो संजना उनके हाथों को अपने हाथ में लेते हुए कहा, “ठहरये तो, सुनए मुझे किआ कहना है.” तो वो रुक गए अपने हाथों को संजना के हाथ में किये और कहा, “हाँ तो बोलो!”
तो संजना अपनी मीठी बचपने वाले आवाज़ में बोली, “तो सुनए, किआ अगर आप के बेटे ने मुझे अपनाया तो किआ मैं आप के पास नहीं रहूंगी? आप hi के घर में आउंगी नाह? आप के hi घर में रहूंगी नाह? आप ने मुझको अपने बेटे के लिए पसंद किया है नाह? तो बताइये आप किआ मुझको शेयर करना चाहते हो? क्यों आप ने अपने बेटे की शादी वाली बात मेरे पापा से किये थे पहले दिन? वो तो इसी बात पे राज़ी हुआ नाह की आप की बहु बनूँगी? अब बोल्ये?!”
संजना के यह बातें सुनकर चावला साहिब का लुंड हलचल करने लगा उसस्के पंत के अंदर और जैसे के उस्का हाथ संजना के हाथ में था तो उस्सको खींच के अपने लुंड पर दबाया उसस्के चहरे में प्यार से देखते हुए. संजना ने हाथ अपने तरफ खींचने की कोशिश की मगर बेकार था और संजना ने अपने होने वाले ससुर के लुंड को ेरेक्ट महसूस किया अपने मुलायम कलाई पर, और शर्म से नज़रें झुका लिए उस्सको फील करते हुए और हाथ को नहीं खिंचा….. चावला साहिब का जमके खड़ा हो गया था हालां के पंत के अंदर hi था, उस्का फॉर्म साफ़ दिख रहे थे और संजना ने धीरे धीरे अपनी नज़रों को उस जगह पर किया जहाँ उस्का हाथ था याने के चावला साहिब के लुंड पर….. यह शेयर वाली वर्ड को सुनकर चावला साहिब ने फील किया के ‘अपनी बहु को अपने बेटे के साथ शेयर करूँगा यह संजना ने खुद अपने आप मुझे से पूछा!’ और यह बात उस्सकी दिमाग़ में शोर मचा रहा था उस वक़्त. जिस ऐडा से सनजना ने बात की थी वो सुनने लायक था.
और फिर अचानक संजना ने बाहर देखा चरों तरफ नज़रें फरते हुए और कहा, “अब चलिए यह जगह ठीक नहीं है कोई भी हमको यहाँ देख सकता है.”
चावला साहिब बेक़रार हो रहे थे और इंसिस्ट किया के वहीँ पीछे कार में बैठें! संजना ने कहा, “आप ने पी रखे हैं आप को समझ में नहीं ारः मैं किआ कह रही हूँ, किसी ने देखा तब कहना!” फिर तुरंत चावला साहब संजना को जाकर के किश करने लगा एक भूके जानवर की तरह उस पर टूट पड़ा वो, संजना की ड्रेस को बिल्कुल ऊपर उठाते हुए जिस से उस्सकी पथ तक ड्रेस उठ गया और चावला साहिब का मुंह संजना के जाँघों के बीच उसस्के पैंटी पर फरने लगे…… संजना अब भी बाहर चारों तरफ देख रही थी….. और एक सिसक के साथ गर्दन पीछे करते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “ोफो, मुझे बहोत डर लग रहा है, किसी ने देखा तो किआ होगा, आप नशे में हो, यह बिल्कुल ठीक नहीं है उफ़ माआ!!!”
और तबक तक चावला साहिब का मुंह संजना के पंतय को सूंघ और चाट रहा था और संजना जैसे लेट गयी थी सीट पर, फिर भी बाहर देखे जा रही थी आगे पीछे, दाएं बाएं चरों तरफ के कहीं कोई नाह गुज़रे उधर से.
चावला साहिब ने अपने दो उँगलियों को संजना के पंतय की इलास्टिक पर किये और हलके से उस्सको निचे के तरफ करना चाहा संजना के पथ को चाटते हुए, उस जवान 18 साल की जवान जिस्म को अपने आग़ोश में लेकर चावला साहिब बिल्कुल दीवाना हो रहा था और संजना खुद को संभाल नहीं पा रही थी, थोड़ा सरेंडर भी कर रही थी और थोड़ा डर से इधर उधर देखे जा रही थी. जिस वक़्त चावला साहिब उस्सकी पंतय निचे करने की कोशिश करने लगी तो जल्दी से संजना ने अपने पंतय को ज़ोर से पकड़ा और उफ्फ्फ करते हुए एक डिस्टर्बेद और शर्मिंदा और पतली आवाज़ से कहा, “न्यू नहीं यह नहीं” तो चावला साहिब एक प्यासे भूके ग़रीब की तरह ऊपर संजना को देखते हुए कहा, “मुझे तेरा रस चखना है फ़िक्र मत करो कुछ नहीं करूँगा सिर्फ चखूगा तुमको भी मज़ा आएगा देखना मेरा यकीन कर बेबी!”
संजना अपने आप को संभालते हुए कहा, “हम्म्म नहीं वहां वो गन्दी है, मैं भीगी हुई हूँ वहां, नहीं आप यह मत करो!” तो चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए खुश दीखते हुए कहा, “आरी पगली इस्को गन्दी नहीं कहते, यह बिल्कुल गन्दी नहीं उसी रस को तो चखना है मुझे, तुम भी एन्जॉय करोगी यकीन मानों, करने दो नाह प्लीज, थोड़ा सा बस थोड़ा सा निचे करदूँ इस पंतय को फिरर देखना….” और संजना अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुए अपने हाथ को हत्ता लिया तो चावला साहिब ने आराम से धीरे धीरे उस्सकी पंतय को निचे करता गया उस्सकी मुलायम सफ़ेद पथ के निचे वाले हिस्से पर अपना जीब चलाते हुए, जहाँ छोटी छोटी ट्रिम की हुई बाल नज़र आने लगे, और फिर ेंखों को संजना के तरफ देखते हुए पूछा, “शेव करती हो? वैरी गुड, बहोत साफ़ है, बाल अभी अभी उगने लगे हैं शेव के बाद, लगता है कल, परसों hi शेव किया हुआ है….”
चावला साहिब का लाढ़ छू रहा था, और संजना अब तक दांतों में होठों को दबाये हुए चावला साहिब को उस एक्शन को करते हुए देख रही थी चेहरे में लाली के साथ और वो एक गर्मी जैसे महसूस कर रही थी उस वक़्त. थोड़ा जिस्म में थरथराहट भी थी संजना के, अपने टांगों को जैसे फैला कर चावला साहिब को पोजीशन देने लगी थी उसस्के लिए आसानी से पंतय को निचे करने के लिए, और जैसे चावला साहिब ने पंतय को जाँघों तक करने की कोशिश किये तो संजना ने खुद अपनी कमर उठाया टेक उस्सकी पंतय निचे जा सके, यह देख कर चावला साहिब खुश हुए के लड़की अब मान गयी है और उस्का भी मैं कर रहा है शायद.
तो पंतय को तक़रीबन संजना के घुटनों तक रोके चावला साहिब ने और अपने जीब को सीधे उस्सकी छूट पर फेर्रा और उसस्के दोनों जाँघों के बीच अपने हाथ डालते हुए संजना के चेहरे में देखा और अपने जाँघों को खोलने के लिए kaha.Sanjana ने अपने एक ऊँगली को दांत से डाब आये हुए चावला साहिब के चेहरे में देख रही थी और थोड़ा सा अपने जाँघों को दोनों तरफ part किये उस्सने और थोड़ा हांफने भी लगी थी उस्सकी दिल की धड़कन बहोत तेज़ हो रहे थे, चेहरा बिल्कुल लाल टमाटर के जैसा हो गया था, कुछ कांप भी रही थी… तो चावला साहिब का हाथ उन् दो जाँघों के बीच गया और उस्का ऊँगली डायरेक्ट संजना के छूट के बीचो बीच और गीली गीली, नरम नरम महसूस करते हुए चावला साहिब ने संजना का पानी ऊँगली में लेकर अपने जीब पर किया संजना को दिखाते हुए. जिस वक़्त उस्का हाथ संजना के छूट पर गए उस वक़्त संजना ने जैसे एक अंगराई लिया और एक लम्बी सिसकती धीमी आवाज़ में “इस्स्स्सह्ह्हह्ह, ह्म्म्मम्म उफ्फफ्फ्फ़” किया. और जब चावला साहिब अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा तो संजना ने उनको देखते हुए कहा, “chhee!!wo कितनी गन्दी है! आप पागल हो और बिल्कुल नशे में हो इस वक़्त!” पहिए चावला साहिब ने उनके दोनों टांगों और फैलाना चाहा तो संजना ने अपने घुटनों पर पंतय दिखाते हुए कहा, “कितना फैलाऊं और नहीं होगा देखो पंतय बीच में रुका हुआ है, बुसस इतने में काम चला ला आप, मुझे अजीब सी फील हो रही है जल्दी करो, पापा सोच रहे होंगे हम कहाँ हैं इतनी देर तक!”
तो चावला साहिब ने उस्सकी पंतय पूरा निकाल दिया और सीट पर रख दिया. संजना ने कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाई पंतय जब उतारर रही थी तब. तब किआ, चावला साहिब ने उस्सकी दोनों जाँघों को बिल्कुल खोल कर एक तंग को लेफ्ट और एक को राइट में करते हुए अपना मुँह उसस्के बीच में दाल कर अपने जीब को सीधे संजना की छूट चाटने लगा. संजना जैसे होश खोने लगी, उस्का एक हाथ चावला साहिब के सर के बालों को अपने मुठी में जाकर लिया और उस्सकी आवाज़ कुछ ऐसी निकली एक सिसक के साथ, “हम्म्म्म आआआहहह स्स्स्सह्शशशश बस्स्स बुसस कीजिये उफ़ मैं नहीं होल्ड कर सकती हूँ रुकिए आप प्लीीाआज़ी!” और उस्सकी पानी और भी ज़्यादा निकलने लगे जिस्सको चलवा अपने मुंह में कैद करता गया. संजना का जिस्म कांपने लगी और उस्सकी टांगें थर्र थार हिल रहे थे और उस्सकी सेंसें बहोत तेज़ हो गयी थी और एकांत बूंद पसीना उसस्के पेशानी से होकर उसस्के गले तक आ चुके थे पर चावला साहिब ने अपने जीब को धीरे से उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ठुस्सा जिस से संजना चिल्ला उठी और कमर को हिल्ला कर एक तरफ किया. चावला साहिब जैसे उस्सकी छूट को एक गोश्त के टुकड़े की तरह खा रहा था. तो जब संजना ने कमर हिल्ला कर एक तरफ कर लिया अपने जिस्म को, चावला साहिब उस्सको दिलाशा देते हुए kaha,”are क्यों डर रही हो, कुछ भी नहीं है, तुमको ओर्गास्म ारः है बुसस!”
इतने में संजना ने एक खौफ्फ़ भरी आवाज़ में कहा, “वो देखो कोई वहां से इस तरफ ारः है, मैं ने कहा था मगर आप मने नहीं अब किआ करूँ मैं उफ़ मेरी माँ!” और जल्दी से चावला साहिब ने उस्सकी पंतय को खुद संजना के निचे किया और कहा “इस पर बैठ जाओ, ड्रेस को निचे करो और बात करो मुझसे!”
संजना की नज़र उस आते हुए आदमी पर था और कहा, “यह दामोदर चाचा है लकड़ी काटने गया होगा देखो उसस्के हाथ में एक कुल्हाड़ी है”
एक अधेड़ आदमी हाथ में कुलहरि लिए कार के तरफ hi बढ़ रहा था अंदर झाँकने की कोशिश करते हुए. और जब कार के पास आगये तो अंदर देखते हुए कहा, “अरे तुम तो आनंदवा की बिटिया हवा नाह? इधर का करात बाटे इस बखत को तू? और ी आदमी कोण बाटे?” संजना ने कांपते आवाज़ में कहा, “चाचा ी हमार होने बाला ससुर बाटे, हम एकरा पहाड़ दिखाने को लावत बा.” तो उस बूढ़े आदमी ने कहा, “तोहार कपार ठीक नैबा का? अइसन मौसम में पहाड़ दिखाने को लावत बा इस्को? अच्छा तो तोहार साडी के बात लग गेल बा, अच्छा बा अच्छा बा” यह कहकर वो बूढ़ा आगे चलने लगे.”
संजना ने अपने छाती पर हाथ रख कर एक लम्बी सांस चोररटे हुए कहा, “उफ़ मेरी माँ, मेरी तो जान hi निकल गयी जैसे!” फिर जल्दी से अपनी पंतय पेहेनते हुए कहा, “अब जल्दी से वापस चलए मुझे और नहीं रहना यहाँ, आप ने मेरे बात का यकीन नहीं किया नाह, किआ होता अगर वो आदमी 5 मिनट पहले एते तो? वो सब कुछ देख लेता!” तो चावला साहिब ने संजना को जाकर के उसस्के मुंह का रस चुस्सने लगा और खुद संजना भी चावला साहिब का जीब अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगी उस्सको बाहों में भरके. तक़रीबन 5 मिनट तक किश जारी रहा और उसस्के बाद संजना ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और आगे जाकर बैठ गयी और चावला साहिब बहोत खुश दीखते हुए अपने लुंड को पंत के अंदर सीधा करते हुए आगे आये ड्राइविंग सीट पर. चावला साहिब ने अपने लुंड को संजना के मुंह में डालने को सोच रखा था, मगर सोचा कोई बात नहीं अगली बार hi सही.
दोनों घर वापस आये तो देखा के आनंद नशे में धुत्त सोफे पर खर्राटे मार रहे हैं. तो चावला साहिब ने एक शैतानी मुस्कान से संजना को देखा……………..
तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (2400 वर्ड्स)