Dhadkan ( Fallen love ) { Incest , Suspense , Thrill , Romance , Magic } - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Dhadkan ( Fallen love ) { Incest , Suspense , Thrill , Romance , Magic }

तय सो मच भैयाआ...

यह हुई न.. . बात क्रिटिक वाली..

एक्चुअली तृषा अभी सेक्स क लिए कुछ और सोच ढखा इसलिए अभी ने फिलहाल उसको hi सेटिसफी क्र वापस आ गया..

यर्ह मई स्टोरी मई लिखने वाला था.. बूत फिर छोड़ दिया बूत आपकी पारखी नज़रों ने पकड़ hi लिया...

और रही बात आवाज़ की तोह नेक्स्ट अपडेट मई पता चल जाना है... तब तक.. कीप समिलिंग...
 
अपडेट.... 64

प्रीवियस....

मई घबरा गया इधर उद्गार देखने लगा मगर मुझे कोई दिखाई नहीं दिया... रोने की आवाज़ इतनी दर्दनाक थी की मेरी आँखों से ाँसों बहने लगे... मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था यह कोण है.. तभी वह आवाज़ बंद हो गई...

दी.. ( मंद तो मंद ) बेतु... तुम ठिक्क तोह हो...

मई... हाँ दी और यह आवाज कैसी है मुझे पता नहीं क्या हो गया था..

दिल... यह तोह मुझे भी नहीं पता भाई...

अब आगे...

अभी मई कुछ और सोचता उससे पहले... मौसम बदलने लगा और अचानक से तेज तेज हवाइयन चलने लगी.... बिजली कड़कने लगी... कुछ hi देर मई हवा एंटी तेज हो गई की आस पास कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था...

यह तूफ़ान कुछ hi देर में शांत हो गया... मैंने आस पास देखा.... चारो तरफ पेड़ पौधे गिरे पड़े थे... मैंने कार से बहार निकल जायजा लिया तोह माहौल एक दम शांत हो चूका था... सब जगह ख़ामोशी चाय हुई थी...

मगर हैरत की बात थी की इतनी आंधी में भी मेरी कार तस से मास नहीं हुई थी अभी मई इस बारे मई सोच hi रहा था की आसमान से मुझे एक तेज रोशिनी नीचे की तरफ आती दिखाई पड़ी...

दी... ( मंद तो मंद ) यह क्या हो रहा है.. बेतु मुझे डर लग रहा है.. तू जल्दी मेरे पास आ..

मई... मुझे भी नहीं पता दी.. लेकिन देखना तोह पड़ेगा न आखिर क्या है यह...

दी... नहीं मुझे पता नहीं क्यों घबराहट हो रही तू प्लीज वापस आजा.. ( और रोने लगी )

मई.. ाचा ठीक ह आप रोइये मत मई आ रहा...

मगर जैसे hi मैंने पलट क्र कार का गेट खोला.. एक तेज रोशिनी का गोला मेरे आँखों क सामने गिरा... रोशिनी इतनी जायदा थी की मुझसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था... और मजबूरन मुझे अपनी आँखें बंद करनी पड़ी...

कुछ hi देर में सब कुछ शांत हो गया मैंने आँख खोल क्र देखा तोह देखता रह गया... सामने एक 20 या 22 साल का लड़का मुझे देख क्र मुस्कुरा रहा था... उसके चेहरे पर इतना तेज था की मई मूर्खो की तरह उसे घूरे जा रहा था...

images-32e2c38c4311c9782.jpg


इतना खूबसूरत आदमी मैंने आज तक नहीं देखा था उसकी वह आँखे... मई एक तक उसे देख रहा था...

दी... ीीेहःहः कुन्नन हह बीचु... मेरररा.. दिल्ल गब्बरा रहा है... ट्टूओ आएगी मत्तट जाना...

अब्बी मई कुछ बोलता उससे पहले...

आदमी... स्वागत नहीं करोगे हमारा...

जैसे hi मेरे कानो में यह सब्द पड़े मेरे और दी क मुह्ह से एक साथ हैरत भरे अंदाज़ से निकला... शैडो....

शैडो... है है है... बहुत खूब रक्षाक सही पहचाना... बहुत सालों से तुम्हारी तलाश थी... जो अब जा क्र पूरी हुई ह... आखिर कार मैंने तुम्हे ढून्ढ hi निकला...

मगर मई अभी भी हैरत से उसे देख रहा था..

शैडो.... ऐसे मूर्खो की तरह मत देखो... तुम्हे अभी इसी वक़्त मेरे साथ चलना होगा...

मई.. ( हड़बड़ा गया फिर कुछ संभल क्र ) मई कैसे मान लून तुम शैडो हो जबकि तुम तोह मुझे कोई 20 22 साल के लड़के लगते हो... कहि ऐसा तोह नहीं तुम मुझे अकेले देख मेरा फायदा उठना चाहते हो...

शैडो... छी छियई... मई ऐसे कोई शोक नहीं रखता यह तुम धरती वासी hi करो... ऊपर से 377 भी हटवा क्र सब ज्याज भी क्र दिया... अब तोह साला खुले आम मौज चलती ह तुम्हारी...

मई... देखा तुम झूठ बोल रहे हो.. तुम्हे यह सब कैसे पता भला...

शैडो... मई पूरे ब्रम्हांड का ज्ञान रखता हूँ तोह तुम कोण से खेत क बैगन हो...

मई... बैगन नहीं मूली होता ह..

शैडो.... तू टॉपिक मत चेंज क्र... तुझे अभी मेरे साथ चलना होगा वर्ण तू जानता नहीं में क्या क्र हूँ...

मई... हाँ हाँ मालूम है चल अपने बाप को मत बता...

शैडो... ( तलवार निकलते हुए ) क्या खा तुमने...

मई... भाई गलती से निकल गया जुबान फिसल गई मेरी.. उसको अंदर क्र मई चल तोह रहा हूँ...

...

और मई भी...

मैंने पलट क्र देखा सोनाली दी मेरे पीछे hi कड़ी थी... . . उनके चेहरे पर घबराहट और दर साफ़ दिख रहा था.. मैंने कुछ बोलता उससे पहले उन्होंने मुझे बहून मई भर लिया... और उनकी रुलाई फूट गई...

मई... ( आंसू पोंछते हुए ) क्या हुआ दी मई ठीक हूँ आप सम्भालो खुद को...

दी... नहीं बेतु तू कहि नहीं जायेगा मुझे बहुत घबराहट हो रही है... और जायेगा तोह मई भी साथ hi चलूंगी...

.

मई... दी आप समझने की कोशिश करो.. माँ पापा का खिल रखने क लिए भी तोह कोई होना चाहिए न.... मई जल्द hi वापस आ जगूंगा...

दी... ( और कास क्र गले लगते हुए ) वो सब मुझे नहीं पता मई भी साथ चलूंगी...

मई... ाचा ठीक है रुको पहले घर पर फ़ोन क्र दूँ.. वर्ण सब परेशान होंगे...

शैडो... उसकी कोई जरुरत नहीं है... मई तुम्हे जिस टाइम लाइन से ले जा रहा हूँ उसी मई छोड़ जाऊंगा जिससे तुम्हारा समय आगे नहीं बढ़ेगा..

मई और.. दी... ( चौंकते हुए ) क्या... ?

शैडो... कानपूर में हड़ताल है क्या तुम्हारे... तुम्हे जिस टाइम लाइन से ले जा रहा उसी मई छोड़ दूंगा जिससे समय आगे नहीं बढ़ेगा और तुम इसी जगह पर इसी समय पहुंच जाओगे...

मई... कुछ भी.. भरता समझ रखा है क्या...

दी... ( सर पर हाथ मारते हुए ) बुद्धू वह हलवा होता है... बेतु तुम्हे मुहावरे आते नहीं तोह क्यों बोलते हो...

अभी मई उन्हें कुछ बोलता उससे पहले...

शैडो... ( मन मई कुछ बोलते हुए ) सिमसिम...

और आसमान से एक रोशिनी हमसब पर पड़ी... दी ने मुझे कस क गले लगा आँखे बंद क्र ली

और साथ मई मैंने भी... कुछ hi देर मई हम रुके मैंने आँखे खोल क्र देखा तोह मेरी आँखे फटी की फटी रह गई... एहि हाल दी का भी था...

तो बे कॉन्टिनोएड...

 
अपडेट... 65



प्रीवियस...

शैडो... ( मन मई कुछ बोलते हुए ) सिमसिम...

और आसमान से एक रोशिनी हमसब पर पड़ी... दी ने मुझे कस क गले लगा आँखे बंद क्र ली

और साथ मई मैंने भी... कुछ hi देर मई हम रुके मैंने आँखे खोल क्र देखा तोह मेरी आँखे फटी की फटी रह गई... एहि हाल दी का भी था...

अब आगे...

मई... ओह्ह भाई... यह सब क्या है... यह तोह किसी सपने जैसा लग रहा है..

शैडो... यह हमारा घर है...



emirates-palace-abu-dhabi-uae-picture-id165824154.jpg




मई... ( शॉकेड ) क्या...

दी.. इतना बड़ा बेतु मुझे तोह दर लग रहा... ( और मुझे कस लिया बाहों में.. )

मई... ( धीरे से ) अब क्या बोलू डीडू फैट तोह मेरी भी रही है... पता नहीं अंदर क्या आफत हो...

शैडो बस हम दोनों को देख मुस्कुरा रहा था... कुछ hi देर मैं मई संभल गया... और दी भी उसने हमसे आगे बढ़ने को खा हम दोनों भी उसके साथ चल दिए.. अब कुल्हाड़ी मार hi ली तोह दर्द से क्या डरना....

मई... भाई शैडो.. वैसे मई तुम्हे भाई बुला सकता हूँ न...

शैडो.. ( कुछ सोच क्र ) हाँ..

मई... हाँ तोह भाई शैडो... इस घर मई कितने लोग रहते है...

शैडो... तकरीबन 5000 क्यों..

मई... हाँ हाँ तोह इसे घर क्यों बोलते हो जिला घोसित क्यों नहीं क्र देते...

शैडो... ( गुस्से में ) अपनी बकवास बंद करो...

दी.. ( बेतु पीजे न मार मेको वैसे hi डॉ लग रहा.. और तू कॉमेडी किये जा रहा )

मई.. ( मेको भी लग रहा दी उसी को छुपाने क लिए मन बेहला रहा हूँ.. )

हम मन मई बात क्र रहे थे की शैडो ने एक बार मुस्कुरा क्र हमे देखा...

शैडो... डरने की जरूरत नहीं ह..

मई.. हद्द है अब हम मन मई भी बात नहीं करें...

वह कुछ नहीं बोलै लेकिन तभी हम गेट तक पहुंचा गए और हमे बहुत साड़ी महिलाओं ने घेर लिया... और हमारा स्वागत सत्कार चलने लगा... मई और दी बस हैरानी से सभी को देख रहे थे क्युकी सभी महिलाओं के पर निकले हुए थे और कान भी बिल्लियों क जैसे बड़े बड़े..

लेकिन थी बेहद hi खूबसूरत हम अभी इनसब मई खोये hi थे की तभी मैंने किसी को देखा जो मुझे अज़्ज़ेब नज़रों से देख रहा था... मेरा दिल पता नहीं क्यों फिर से धड़कने लगा जोर जोर से...

मेरी सांस लेते नहीं बन रही थी... दी को भी घबराहट होने लगी उनका हाल भी मेरे जैसा hi हो गया और हम वंही लुढ़क गए... शैडो हमे देख घबरा गया और तुरंत अपने सैनिको से बोल हमे एक कक्ष में ले जाया गया...

शैडो... ( घबरा क्र ) माँ आप कड़ी क्यों है जल्दी से राज वैद को बुलाएँ...

Sofiya's मदर... हाँ हाँ अभी लो...

और भहर आ सैनिको को वैद को बुलाने क लिए कह देती है... उनके चेहरे पर दर और चिंता साफ़ देखि जा सकती थी... पता नहीं किश सोच में गम थी...

Sofiya's मदर... ( अब होनी को कोई नहीं ताल सकता लगता है सच जायदा देर तक छुपा नहीं रह पायेगा... )

फिर कुछ सोच क्र खुश भी हुई और कक्ष में प्रवेश क्र मेरी तरफ देखने लगी... झा मेरी हालत देख वो फिर चिंतित हो गई..

शैडो भी चिंतित दिख रहा था.. कुछ hi देर मई राज वैद आ गए... और मुझे और दी को चेक करने लगे काफी देर तक वह हमे देखते रहे अब उनके चेहरे पर भी हैरानी क भाव आ गए...

राज वैद... असंभव...

शैडो... क्या हुआ वैद जी..

राज वैद... यह कोण है महाराज... क्या यह..

शैडो... हाँ यह वही है...

जिसे सुन राज वैद मुझे घूर क्र देखने लगते हैं..

राज वैद... क्या यह बालक यह तोह अभी बच्चा है... यह कैसे.. ?

शैडो... ( मुस्कुरा क्र ) जो दीखता है हमेश वैसा हो सभव नहीं है न वैद जी... आप फिलहाल इन्हे देखें क्या हुआ है..

राज वैद... वह तोह मई देख चूका घबराहट क कारन यह बेहोश हुए ह मगर इन्हे क्या हुआ... ( सोनाली की तरफ इशारा करते हुए )

शैडो... यह इनकी पहली पत्नी हैं... ( फिर सोनाली और मेरे बारे में कुछ बताते है जिसे सुन उन्हें हैरत होती ह )

राज वैद... ( मुस्कुरा क्र ) ऐसा प्रेम हमने आजतक नहीं देखा...

अभी वह बात क्र hi रहे थे की मई और दी एक साथ होश में आ जाते ह और अपनी आखें खोल देखते है तोह दी की तोह चींख निकल जाती ह... और घबरा क्र मेरी गॉड में चढ़ गई.. डॉ तोह मुझे भी लग रहा था..

दी... ( चिल्लाते हुए ) बेतु... चमकदार... मुझे बचाओ मुझे डर लग रहा... बोलै था न मैंने मत चलो मगर तुम सुनते hi नहीं.... अब यह हमे मार क्र यही खा जायेगा...



images-4.jpg




राज वैद... डरो नहीं बेटी मई तुम्हारा इलाज करने आया हूँ मैं एक वैद हूँ...

जिसे सुन हमारी जान में जान आई मगर दर दी फिर भी डॉ रही थी... की राज वैद शैडो से कुछ बात क्र चले गए.. शैडो भी हमे कुछ देर आराम करने का बोल चला गया...

अभी रूम मई सिर्फ ख़ामोशी थी.. मगर पता नहीं क्यों मेरी दिल घबरा रहा था...

तो बे कॉन्टिनोएड...

 
अपडेट... 66

प्रीवियस.....

राज वैद... डरो नहीं बेटी मई तुम्हारा इलाज करने आया हूँ मैं एक वैद हूँ...

जिसे सुन हमारी जान में जान आई मगर दर दी फिर भी डॉ रही थी... की राज वैद शैडो से कुछ बात क्र चले गए.. शैडो भी हमे कुछ देर आराम करने का बोल चला गया...

अभी रूम मई सिर्फ ख़ामोशी थी.. मगर पता नहीं क्यों मेरी दिल घबरा रहा था...

अब आगे....

दी... यह क्या हो रहा है बेतु... तुम ठीक तोह हो न... मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है... चलो हम वापस चलते है...

मई... पता नहीं क्यों दी मेरा दिल भी बहुत घबरा रहा ऐसा लग रहा जैसे कोई अपना मुझे बुला रहा है... कोई बहुत दर्द मई है उसका रोना सुन पता नहीं मुझे क्या हो जाता ह...

और आँख से आसूं गिर गया... जिसे देख... दी मुझे गले लगा क्र आंसूं पांच...

दी... सब थीय जो जायेगा बेतु... तुम जाओ फ्रेश हो क्र आओ...

और हल्के से मेरे होठो पर किश क्र दी.. उनकी इस हरकत से एक पल मेरे होठो पर मुस्कराहट आ गई और मई फ्रेश होने चला गया...

कुछ देर बाद जब मई बहार आया तोह दी किसी से बात क्र रही थी... मैंने पास जाकर देखा तोह यह क्या.. यह तोह वही है जो मुझे बहार घूर रही थी.... जैसे hi उनकी नज़र मुझे मिली मेरे दिल में फिर से धक् धक् होने लगी... दी मेरे पास आ गई...

दी.... ( घबरा क्र ) क्या हुआ बेतु....

मई... ( उनकी तरफ इशारा करते हुए ) ईठ.... यह...

दी... अरे इनसे क्यों घबरा रहे हो... ( और मुझे पानी का गिलास देते हुए ) यह सोफिया की माँ हैं... हमे थैंक्स बोलने आई है...

जिसे सुन थोड़ी रहत की सांस आई मगर वह अभी भी मुझे देख रही थी... मई इस बार उन्हें इग्नोर क्र दोनों बीएड पर बैठ गए...

और वह दी से बात करने लगी... फलाना फालना... मई चुप चाप उनकी बातें सुन रहा था.. अभी तक उंहोने मुझसे कोई बात नहीं की थी.. मगर उनका पूरा ध्यान मुझ पर hi था... जब भी वह मुझे देखती उनकी आँखें कुछ और hi कहानी ब्यान करती जैसे कुछ कहना चाहती ह...

मई.. ( मन मई ) भाई यह कोण है.. ?

......

मई... ( मन मई ) बोल न खान चला गया.. ?

......

मई.. ( मन मई ) यह कुछ बोल क्यों नहीं रहा.. जब से मई आया हूँ तब से यह भी शांत है... लगता है यह मेरी पावर्स काम नहीं क्र रही..

दी ने एक नज़र मुझे देखा फिर अपना ध्यान बातों मई लगा लिया... खैर कुछ देर मई उनकी बात ख़त्म हुई और वह भी आराम करने का बोल चली गई.. मगर जाते हुए भी वह मुझे hi देख रही थी..

उनके जाने के बाद मई कुछ सोच hi रहा था की..

दी... अब क्या हुआ कब से आवाज दे रही..

मई... दी मुझे तोह इनकी नीयत ठीक नहीं लग रही... देखा नहीं आपने कैसे घूर रही थी मुझे.. जैसे खा hi जाएँगी...

दी... पता नहीं मुझे भी कुछ गड़बड़ लग रही है...

मई... छोड़ो जो होगा देखा जायेगा...

उसके बाद दी फ्रेश होने चली गई और मई बीएड और लेत गया... और sofiya's माँ क बारे में सोचते सोचते कब आँख लग गई पता नहीं चला...

कुछ देर बाद मेरी नींद खुली तोह मैंने खुदको दी की बाहों मई पाया मई सब कुछ भूल गया बस उनके चेहरे में खो गया कितनी मासूम और प्यारी है मेरी दी... और खुद को रोक न पाया उनको किश करने से..

उनकी भी आँखें खुल गई... और हलकी सी मुस्कहत लिए मुझे देखने लगी.. हिय कोई तोह रोक लो... उनका मुझे देखना दिल मेरा बहार आने को हो रहा था... मुझसे रहा नहीं गया तोह में दोबारा उन्हें किश करने के लिए आगे बढ़ा की..

अहंमम अहम्म्म्म..

आवाज सुन दी झट से मुझसे अलग हो गई.. जो मुझे ाचा नहीं लगा मई गुस्से मई पलट क्र...

मई.. कोण है बहनच.... अरे शैडो भाई आआप्प... यह कब आये मुझे बुला लिया होता...

शैडो... ( पहली बार मुस्कुरा क्र ) मई बहुत देर से तुम्हारी हरकत देख रहा हूँ... तुम यह मेरी मदद करने आये हो की अपना हनीमून मानाने....

उनकी बात सुन मेरी तोह बोलती बंद हो गई और दी भी शर्म क मारे वाशरूम मई चली गई...

शैडो... ( हस्ते हुए ) चेहरा देखो अपना कैसे लड़कियों जैसे शर्मा रहे हो.. पता नहीं किसने तुम्हे रक्षक चुना... चलो जल्दी तैयार हो जाओ हमे कही जाना है.. मई बहार तुम्हारा इन्तजार क्र रहा...

उसके बाद वह चला गया.. कुछ देर बाद दी बहार आई और मई भी फ्रेश होने चला गया... कुछ देर बाद तैयार होकर हम दोनों निचे चल दिए...

मैंने दी ko.dekha शर्म से उनके गाल लाल थे.. . मन क्र रहा था चूम लून मगर फिर किसी क दर से चुप चाप हॉल मई पहुंच गए...

सामने का नजारा देखते hi मेरी आँखें खुली की खुली रह गई... इतना बड़ा महल इतने सारे लोग जो अपना काम करने में लगे हुए थे... बड़ी बड़ी पेंटिंग्स... बड़ी बड़ी मूर्तियां.. मई अभी इन्हे देखने में बिजी hi था की तभी मेरा ध्यान एक मूर्ति पर गया...

मई उसकी तरफ बढ़ hi रहा था की...

रुको.....

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट.... 67

प्रीवियस....


सामने का नजारा देखते hi मेरी आँखें खुली की खुली रह गई... इतना बड़ा महल इतने सारे लोग जो अपना काम करने में लगे हुए थे... बड़ी बड़ी पेंटिंग्स... बड़ी बड़ी मूर्तियां.. मई अभी इन्हे देखने में बिजी hi था की तभी मेरा ध्यान एक मूर्ति पर गया...

मई उसकी तरफ बढ़ hi रहा था की...

रुको.....

अब आगे....

मैंने देखा तोह मेरे पीछे शैडो खड़ा हुआ था... मुझे देख क्र थोड़ा गुस्से मई बोलै...

शैडो... अगर तुम्हारा लड़कियों जैसा सजना हो गया है तोह चले जिस काम से आएं ह वह पूरा क्र लें...

मई.. ( हड़बड़ा क्र ) हाँ हाँ बिल्कुल मई तोह कब से आपको ढूंढ रहा हूँ... आप hi न जाने खान थे...

शैडो... बस बस चलो मेरे साथ... हमे देर हो रही है...

फिर मई कुछ नहीं बोलै चुप चाप उसके साथ चलता रहा... मई पलट क्र एक नजर मूर्ति को देखा जैसे कुछ कह रही हो मुझसे... मई पलट क्र इस चीज़ को दरकिनार क्र आगे बढ़ा hi था की मुझे सोफिया माँ नजर आई वह अब भी मुझे देख रही थी...

मेरे अंदर घबराहट बढ़ने लगी की दी ने आकर मेरा हाथ पकड़ा... और हम महल से निकल क्र दूर आ गए फिर कुछ hi देर मई हम जंगल मई पहुंच गया.. जंगल काफी घाना था और काफी रहस्यमयी भी...

तरह तरह के पेड़ पौधे लगे हुए थे... और जगह जगह से लताओं ने रास्ता रोक रखा था... शैडो हमारे आगे चल रहा था... वह अपनी तलवार चलते हुए हमारे लिए रास्ता बना रहा मई दी का हाथ पकडे हुए उसके पीछे चलता रहा...

हम 4 घंटे से लगातार चल रहे थे... मगर जंगल था की ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रहा था... दी बुरी तरह से थक चुकी थी...

दी... ( सांस ऊपर निचे होते हुए ) बेतु अब मुझसे और नहीं चला जा रहा.. आह्हः

और एक पेड़ जो गिरा हुआ था उसपर बैठ गई... मई भी उन्ही क साथ बैठ गया और उनकी पीठ सहलाने लगा... उन्हों ने अपना सर मेरे कंधे पर रथ लिया और अपनी साँसे सँभालने लगी... वही शैडो आगे चला जा रहा पर जब उसने पलट क्र देखा हम वंहा नहीं थे... वह हमे ढूंढ़ते हुए आया और हमे ऐसे बैठे देख...

शैडो...( गुस्से में ) क्या हुआ रुक क्यों गए अब यह मत शुरू हो जाना चलो हमे शाम होने से पहले पहुंचना भी है...

मई... ( गुस्से में ) क्या चलो चलो लगा रखा है... देख नहीं रहे हम कितने थक गए है.. एक तोह 4 घंटे से चले जा रहे है... बिना कुछ खाये पीये रुको अब कुछ मत बोलना वर्ण तुम्हारे लिए ाचा नहीं होगा...

शैडो... ( गुस्से में ) क्या खा तुमने... तुम भूल तोह नहीं गए तुम किस्से बात क्र रहे हो...

मई... ( गुस्से में ) हाँ तोह तू होगा राजा अपने देश का... तो क्या हमपर हुक्म चलाएगा...

दी.. ( मेरा हाथ पकड़ ) बेतु..

मई... आप चुप रहो दी कबसे देख रहा... हम यह इसकी मदत करने आये है वर्ण मुझे कोई शोक नहीं यह आने का..

शैडो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखता रह गया फिर कुछ देर बाद अपनी तलवार उठा आगे चल दिया... मई चुप चाप दी के पास बैठ गया और उनकी पथ सहलाने लगा...

दी... ऐसा क्यों किया बेतु.. वह परेशान है उसे...

मई... मुझे पता ह दी इसलिए मैंने उसे समझाया...

दी... लेकिन वह तोह...

मई... कहि नहीं गया वह गम फिर क्र यही आएगा...

इससे पहले दी कुछ और बोलती मैंने उनकर होठ पर होठ चिपका दिए...

IMG-20200406-WA0036.md.jpg


उनकी आंखें बड़ी हो गई मगर मई कबि ऊपर तो कभी नीचे वाले होठ को कोस्टा... धीरे धीरे उनके हाथ भी मेरे बालों में घूमने लगे और वह भी मेरा सहयोग देने लगी... सांस फूलने से हम दोनों अलग हुए और वह मुस्कुराते हुए मेरे सीने पर मुक्के मार क्र गले लग गई....

अभी हम बैठे hi हुए थे शैडो फिर से हमारे सामने आ गया... मगर इस बार वह गुस्सा नहीं मुस्कुरा रहा था... मैंने एक बार फिर घूर क्र उसे देखा...

शैडो...( मुस्कुराते हुए ) ाचा अच्छा ठीक है बाद में क्र लेना पहले कुछ खा लो....

और हमारी तरफ बहुत सारे फल मैंने भी बिना कुछ सोचे उसके हाथ से फल उठा क्र दी को खिलाया फिर उन्हों ने भी मुझे अपने हाथ से hi खिलाया... फल बबुत hi मीठे थे नाम पता नहीं था वह तोह बास भूख क चक्क्र में खा गया.... फल खाने के बाद उनसे एक बैग हमारी तरफ बढ़ा दिया जिसमे पानी था मैंने अपने हाथो से दी को पानी पिलाया फिर खुद पी हम खड़े हो गए...

मई... ( उठ क्र अंगड़ाई लेते हुए ) अब ठीक लग रहा है... चलो शैडो भाई खा चलना है हम आपके पीछे पीछे चल रहे... शुक्रिया आपका फल बहुत टेस्टी थे मैंने आजतक ऐसे फल नहीं खाये...

अभी मई कुछ बोल hi रहा था की शैडो ने आगे बढ़ मुझे गले लगा लिया... मैंने भी उसको हुग किया फिर अलग करके..

मई... क्या क्र रहे हो तुम छे छे... मुझे तुम पर पहले hi शक्क था... पूरा फयदा उठा रहे जो आजकल तुम लोग...

जिसे सुन वह एक पल हँसा फिर सीरियस हो क्र ....

शैडो... ( हाथ जोड़ क्र ) मुझे माफ़ करना मेरे दोस्त मई अपनी खुसी के चक्क्र मई आपका कयल hi नहीं रख पाया.... आप मेरे लिए इतना कुछ क्र रहे हो आप मेरे भगवान् से काम नहीं हो...

दी... अरे भैयाआ यह क्या कह रहे हो... माफ़ी हमे मांगनी चाहिए जो हमने आपसे बदतमीज़ी से बात की वह क्या है न बेतु मुझे तकलीफ मई देख पता और उस समय मई थक गई थी.. ी ऍम सॉरी चलो अब हम जल्दी से चलते है... मई बिल्कुल ठीक हूँ...

शैडो ने मुस्कुरा क्र फिर सोनाली को आगे बढ़ गले लगा लिया...

शैडो... आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

फिर हम सब ऐसे hi बातें करते हुए चलते झा पहले हम ख़ामोशी से चल रहे वही इस बार शैडो हम पूरे जंगल के तरह तरह क पौधों के बारे में बता रहा था...

जिनमे बहुत साड़ी जड़ी बुटिया भी थी.. कुछ को दी ने अपने पास रख लिया ऐसे हम घूमते घूमते आगे बढ़ने लगे थे की..... सामने का नज़ारा देख हम ृक्क गए...

सामे बड़े बड़े बरगद जैसे पेड़ थे जिसकी पूरी पत्तियां काली और बड़ी बड़ी थी... हम दोनों हैरत भरी नज़र से देख hi रहे थे की...

आअह्ह्ह्ह बेतु...

तो बे कॉन्टिनोएड....
 
अपडेट... 68

प्रीवियस....


जिनमे बहुत साड़ी जड़ी बुटिया भी थी.. कुछ को दी ने अपने पास रख लिया ऐसे हम घूमते घूमते आगे बढ़ने लगे थे की..... सामने का नज़ारा देख हम ृक्क गए...

सामे बड़े बड़े बरगद जैसे पेड़ थे जिसकी पूरी पत्तियां काली और बड़ी बड़ी थी... हम दोनों हैरत भरी नज़र से देख hi रहे थे की...

आअह्ह्ह्ह बेतु...

अब आगे....

मैंने पलट क्र देखा तोह दी नीचे बैठ अपने पाऊँ को पकड़ क्र आंसूं बहा रही है.. मई जल्दी से भाग क्र उनके पास गया... दी की हालत देख आसूं तोह मेरे अपने आप hi निकल आये थे...

मई... ( घबरा क्र ) क्या हुआ दी... आप रो क्यों रहे हो...

दी... ( दर्द में ) आह्ह्ह्ह बेतु.. मेरे पेअर मई कुछ गुस्स गया है... आह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है...

जैसे hi मैंने यह सुना जल्दी से दी का जूता निकल दिया और उनके पेअर को देखना लगा... दी के पेअर मई एक मोटा सा काँटा घुसा हुआ था... मैंने उसको निकलने की कोशिश की तोह दी कराह उठती... तभी मैंने एक बार फिर अपनी आँखें बंद क्र पावर को उसे करना तोह नहीं हुआ...

मई.. ( परेशान होकर ) भाई यह हो क्या रहा है मेरे साथ मिझे कुछ समझ नहीं आ रहा मेरी पावर्स क्यों काम नहीं क्र रही...

शैडो ( जो इतनी देर से हम दोनों को देख रहा था ) दोस्त यह जगह मायावी है... और तुम अभी धरती पर नहीं हो... इसलिए तुम्हारी शक्तियां काम नहीं क्र रही... यह सिर्फ धरती पर hi काम करेंगी यह तुम पहले जैसे आम इंसान हो... दूसरे ग्रह पर शक्ति का प्रयोग करने क लिए तुम्हे और शक्ति की जरूरत होगी जो तुम्हे यह नहीं मिलेगी....

मई... तोह खान मिलेगी वह शक्ति...

शैडो... वह तोह मई तुम्हे अभी नहीं बता सकता..... मगर जल्द hi तुम्हे उसकी जरुरत पड़ेगी.... तुम खुद उस तक पहुंच जाओगे मगर वह जगह खतरे से खाली नहीं तोह उसके लिए तुम्हे मेरी विद्या की जरूरत पड़ेगी.... फिलहाल उसमे अभी वक़्त है पहले अपनी पत्नी को देखो...

मैंने भी अपना ध्यान दी की और hi करना ठीक समझा और उसे वक्त पर hi छोड़ दिया... मगर यह दी शैडो के मुँह से पत्नी सुन अपना दर्द भूल शर्मा रही थी... उनका ध्यान पेअर पे न देख मैंने अपनी फुर्ती दीखते हुए कांटे को पेअर से अलग क्र दिया...

काँटा निकलते hi दी को एक दम से झटका लगा और दर्द से उनकी चींख निकले hi वाली थी की मैंने उनके होठ को होठों में ले लिया... उनकी पूरी चींख मेरे मुँह में रह गई और मई तेजी से उनके होठों को चूसने में लगा गया... कभी ऊपर तोह कभी नीचे वाले को को मुह्ह मई ले में चूस hi रहा था की दी ने भी मेरा साथ देना शुरू क्र दिया..

दी का धयान चोट पर न देख मैंने जल्दी से रुमाल निकल उनके पेअर पर बांध दिया.... जब सांस फूलने लगी तोह हम अलग हुए... कुछ देर गले लगने क बाद जब दी ने शैडो को देखा तोह वह हस्स रहा था...

दी... क्या हुआ भैयाआ हस्स क्यों रहे हो...

दी की बात सुन वह और तेज हसने लगा... हसी तोह मुझे भी आ रही थी बूत मई खुद को कण्ट्रोल क्र बैठा था... दी ने मुझे सवालियां नज़रों से देखा तोह मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हुआ मेरी भी हसी छूट गई... शैडो और मुझे हस्ता देख दी सोचने लगी की क्या हुआ की तभी...

उनका ध्यान पेअर की तरफ गया वंहा रुमाल देख वह समझ गई की हम क्यों है रहे है... फिर क्या था मुझे धक्का दे सीने पर चढ़ गई और मुझ पर मुक्को की बारिश क्र दी... और फिर जब थक गई तोह अलग हो क्र पलट गई और मुँह फुला क्र बैठ गई... मुझे ुस्नपर बड़ा प्यार आया और मैंने पीछे से उन्हें बाहों में भर लिया...

दी... ( मुँह बनाते हुए ) हटो मुझसे दूर गंदे कहि के... पता है मुझे कितना दर्द हुआ जाओ मई तुमसे बात नहीं करती...

मई... डीडू सॉरी न... ुम्हाए उम्म्म्मः देखो मई अपने कान पकड़ता हूँ माफ़ क्र दो...

दी एक नज़र पलट क्र देखा फिर आगे देखने लगी उन्हें भी इसमें मजा आ था... मैंने भी अपने दोनों हाथों को ढीला क्र उनके पेट पर रख गुदगुदी क्र लगा... जिससे दी खिलखिला क्र हसने...

दी... ( हस्ते हुए ) बस बेतु... बस अब छोड़ भी दो... मैंने क्र दिया माफ़... अब और नहीं... नहीं प्लीज...

मैंने भी उनको छोड़ दिया और हम अलग हो गए... मगर उनसे अब भी खड़ा नहीं हुआ जा रहा था... मैंने आगे बढ़ उन्हें गॉड में उठा लिया... और फिर उन्हें अपनी पीठ और बैठा लिया...

images-8.jpg




मई... आह्हः बहुत भारी हो गई हो डीडू.. क्या खा रहे हो...

दी.. ( मुस्करा क्र मुक्का मार क्र ) चुप क्र... भैयाआ आप चलो यह ठीक ह...

शैडो.... ( मुस्कुरा क्र ) ठीक है वैसे हम जायदा दूर नहीं पहुंचने hi वाले हैं.....

फिर हम तीनो चलने लगे... करीब 2 घंटे चलने क बाद में सांस फूलने लगी तोह हम एक जगह रुके...

मई... ( हरामखोर बोलै था पास में hi है 2 घंटे से चलए जा रहा है... आह्हः माँ जान निकली जा रही है )

शैडो एक नज़र मुझे देख हस्ता है पर बोलता कुछ नहीं...

दी... बेतु क्या क्र रहे हो वह मन की बातें भी पढ़ लेता ह..

मई.. ( हड़बड़ा क्र ) वेद तोह मई... ाचा शैडो भाई एक सवाल पूछना था क्या मई पूछ सकता हूँ...

शैडो... ( मुस्कुरा क्र ) मुझे पता ह तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है... तोह मई पहले hi बता देता हूँ.... हाँ में हूँ राजा इस ग्रह क्र मगर कभी मुझे उन चीज़ों की जरूरत नहीं हुई मई स्वयं म्हणत करने मई विश्वास रखता इसलिए जयादा तर पैदल घूमने निकल जाता हूँ बिना किसी सुविधा के... क्युकी बचपन से मेरे पास यह सब नहीं था... तोह आदत है और इसी आदत ने मुझे जुगल में जीना शिखाया और योद्धा बनाया... क्यों एहि पूछना था न... तुम चाहो तोह कुछ और भी पूछ सकते हो...

मई.. नहीं नहीं मेरे सवालों का जवाब मिल गया चलो चलते है....

और मई दुबारा दी को पीठ पर टांग क्र चल दिया... कुछ आधा घंटा चलने के बाद धीरे धीरे जंगल खतम हो गया और हम खुली जगह में पहुंच गए... ऐसे hi कुछ देर चलने क्र बाद हम एक जगह ृक्क गए...

शैडो.... लो हम पहुंच गए....

सामने का नजारा देख मई तोह पालक झपकना hi भूल गया ऐसा hi कुछ हाल दी का भी था... मैंने कब उन्हें पथ से उतर क्र नीचे सहारा दे खड़ा क्र दिया... मुझे पता hi नहीं चला....

images-9.jpg




सामने का तलाव पूरा चमक रहा था... सूरज की तालीम से लाल हो रखा था... और पानी बिल्कुल ठहरा हुआ था ऐसा खूबसूरत नज़ारा हमने पहली बार hi देखा था... की शैडो बोल उठा...

शैडो... हमारे पास जयादा समय नहीं है हमे जो भी करना है जल्दी करबा होगा तोह सुनो....

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट... 69

प्रीवियस....


सामने का तलाव पूरा चमक रहा था... सूरज की तालीम से लाल हो रखा था... और पानी बिल्कुल ठहरा हुआ था ऐसा खूबसूरत नज़ारा हमने पहली बार hi देखा था... की शैडो बोल उठा...

शैडो... हमारे पास जयादा समय नहीं है हमे जो भी करना है जल्दी करना होगा तोह सुनो....

अब आगे....

शैडो की बात सुन हम दोनों सकते मई आ गए और मैंने दी को पास मई बैठा क्र तैयार हो गया... कुछ क्र दिखने क लिए..

मई... ( एक गहरी सांस लेकर ) कहो भाई मुझे क्या करना होगा...

शैडो... यह जो तलाव देख रहे हो... बहार से जितना खूबसूरत है अंदर से उतना hi खतरनाक... तुम्हे बस इसके अंदर जा क्र.... ( फिर एक और इशारा क्र के ) वह रोशिनी दिख रही है...

मई... ( थूक निगल क्र ) हाँ ....

शैडो.... तुम्हे उस रोशिनी को इस बोतल में भर क्र लाना है.... लेकिन यह इतना आसान नहीं है... यह दिव्या तलाव है इसके अंदर क्या है यह कोई नहीं जानता... आज तक कोई भी इस तलाव से ज़िंदा वापस नहीं आया...

मई... ( हकला क्र ) ककया मतलव haa..i.. जब क्कोई ..नहिई आया तुह मुज्झी क्योऊ मरवाना छाते होऊ...

शैडो.... क्युकी नियति ने तुम्हे इस क्रय क लिए चुना ह... मैंने कई साल तपस्या क्र पता लगाने की कोशिश की मगर कोई फयदा नहीं... मैंने अपने गुरु से इसका हल पता किया तोह उन्होंने किवल इतना खा...

गुरु.... " यह तालाव एक पहेली है... एब कब से यह है कोई नहीं जानता... जब आतंक अपने चरम पर होगा तब दुनिया को बचने क लिए रक्षक का जन्म होगा वही तुम्हारी समस्या का हल है... "

शैडो... तब से मई तुम्हे ढून्ढ रहा हूँ... तुम्हे यह मई नहीं लाया नियति ने hi मुझे यह लाने को भेज दिया है...

मई... ( बीच में ) एक मिनट एक मिनट ... बस मई किसी नियति को नहीं जानता... और तू तोह बोलै की तेरी वाइफ को ठीक करना फिर यह नियति खा से बीच में आ गई.... और तोह और मेरी hi मारने पर तुली है हाँ भला... ????????

मुझे लग रहा था की मैंने पॉइंट की बात की ह... मगर मेरी बात सुन दी ने अपना सर पीट लिया और शैडो का गुस्सा और बढ़ गया और वह भड़कते हुए बोलै....

शैडो... तू चुटिया ह और चुटिया hi रहेगा... ऐसे माहोल में भी तुझे ंजक सूझ रहा है....

दी... बेतु नियति कोई लड़की नहीं डेस्टिनी होती ह... एक तरह से किस्मत...

मई... ाचा अच्छा ठीक ह...

शैडो... जल्दी करो हम्हारे पास समय बहुत कम है... अगर सूरज ढल गया तोह तुम वापस नहीं आ पाओगे.....

उसकी बात सुन मेरी और फट रही थी... दिल में धक् धक् बढ़ रही की तभी.... दी सहारा लेकर कड़ी हुई और मुझे हुग क्र लिया उनकी आँखों में कुछ बूँद आंसू आये जिन्हे मैंने पूँछ दिया... और उनके गाल पर किश क्र दिया...

दी... बेतु कयल रखना अपना...

मई... और आप भी... जब नियति यह तक लायी है तोह देखते है क्या ह यह...

और फिर उनसे अलग हो एक एक क्र कपड़े निकाल दिया... और शैडो से लकड़ी का बोतल लिया... ( सिड यह प्लाटिक बन्न है ??? ) पता नहीं क्यों एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी मुझे.. कुछ था जो मुझे सम्मोहित क्र रहा था... एक बार आँख बंद क्र माँ , पापा , सोना सभी को याद किया.... और कूद गया तलाव मई...

पर ये क्या मुझे अजीव सा झटका लगा पानी इतना थड़ा था की मेरा शरीर सुन्न पड़ने लगा मई.... मगर मई इस चीज़ को दरकिनार क्र जल्दी जल्दी अपने हाथ पेअर चलने लगा... मगर मई जितना आगे जा रहा पानी और थड़ा होता चला गया.... अभी मई पहुंचने hi वाला था.... और मेरी आँखें बंद होने लगी... मेरे हाथ पाऊं सुन्न पड़ने लगी...

वही शैडो क पास दी भी ठण्ड से कापने लगी और उनके हाथ पेअर सुन्न पड़ने लगी... शैडो ने उन्हें संभल क्र पत्थर क सहारे बैठाया और हाथ पैरों की मालिश करने लगा... दी वही किनारे बैठ मुझे देख रही थी... धीरे धीरे उनका पूरा शरीर सुन्न पद गया बस आँखें खुली रह गई...

मई जैसे तैसे रोशिनी तक पहुंचा मेरा शरीर फूलने लगा और मई बेहोश होकर डूबने लगा... दी ने हिम्मत जूता क्र... बेतु बोल वह भी बेहोश हो गई... शैडो ने मुझे डूबता देख परेशान हो गया और थपथपा क्र दी को जगाने लगा पानी भी डाला चेरे अरे पर सब कोशिश नाकाम हो गई... तोह वह वही साइड मई बैठ क्र अपने गुरु का आवाहन करने लगा...

अब चाहते है कही और.....

एक घर के बहार एक औरत छुपते छुपाते खाने का सम्मान लेकर कड़ी थी... आज उसके चेहरे पर किसी चीज़ को लेकर ख़ुशी थी... यह क्यों है वह hi जानती थी... उसने एक बार पलट क्र देखा जब उसे कोई न दिखा तोह वह चुपके से अंदर घुस गई.....

मगर जैसे hi उसने कदम रखा एक पत्थर उड़ता हुआ आया और उसके सर पर लगा... और धड़ाम से वह निचे गिर गई...

सामने एक लड़की गुस्से मई पत्थर लेकर कड़ी थी... उसका पूरा चेहरा बालो से ढाका हुआ था... फटे पुराने कपडे पता नहीं कितने दिन नहाया तक न हो.... आँखों में आसूं तप तप गिर्र रहा थे.... कमजोर दिल वाले देख ले तोह दर के मारे hi सुसु निकल निकल जाये...

उसने सर पर हाथ रख क्र देखा तोह खून से पूरा चेहरा भीगा हुआ था... जिसे देख उसकी चींख निकल गई....

लड़की....( गुस्से में रट हुए ) तुमसे एक बार बोलै समझ नहीं आता.... क्यों आते हो यह बार बार चले जाओ यह से...

औरत... ( आंसू बहते हुए ) बेटी...

लड़की... ( छींकते हुए ) कोण बेटी किसकी बेटी मर गई तुम्हारी बेटी... चले जाओ यह से वर्ण ाचा नहीं होगा...

और वही दीवार से लग रोने लगी और पागलों क जैसे अपने बाल नोचने लगी और अपने शरीर और जगह जगह खुजाने लगी... जिससे हर जगह से खून निकलने लगा... वह औरत से और नहीं देखा गया और भाग क्र घर से बहार निकल गई... पूरे रास्ते उसके आँख से आंसूं गिरते रहे... रास्ते में जो भी उसे देखता स्तब्ध रह जाता... मगर वह बिना किसी परवाह के सुध बुध खो भागती रही... नंगे पेअर उसके पेअर जगह जगह से कट गए और खून भेह रहा था मगर वह तेजी से अपने घर पहुंच रूम ने जा अंदर से बंद क्र रोटी रही....

वही लड़की भी रोटी रही और अपने शरीर को खरोंचे जा रही थी... अचानक hi वह बेहोश हो गई....

वंही एक तरफ....

मेरी आँखें बंद हो चुकी थी और मई गहरे पाने मई नीचे जाता रहा की तभी एक रौशनी का गोला मेरी तरफ आने लगा और उसने मुझे कैद क्र लिया....

तो बे कॉन्टिनोएड....
 
Back
Top