Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 16 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Kasam - Love is not Everything (Completed)

वेलकम डॉ. साहब ों थे स्टोरी :hug:...Accha लगा आपको यहाँ देख kar...Contest स्टोरी से hi पता चल गया है की आप कितने अच्छे राइटर hai...Bas 2ंद स्टोरी पढ़ नहीं paaya...Jald hi पढ़ कर आपको पं वाया रिव्यु पोस्ट कर दूंगा.

और स्टोरी आपको कैसा लगा जरूर bataaiye...Any अप्प्रेसिअशन और पॉजिटिव क्रिटिसिज्म इस वेलकम.

यह स्टोरी तोह अभी काफी आगे निकल चूका hai...Agar आपने कैच कर लिया तोह बहुत अच्छा लगेगा या फिर अभी एक और स्टोरी "एक भूल" को रीस्टार्ट किया hai...Usse आसानी से कैच कर सकते है.

अपना ओपिनियन जरूर दीजिये भाई स्टोरी पर.
 
अपडेट 112

अब्ब अचानक क्या हो गया? पैसे की कमी हो गयी?

थोड़ा गुस्सा के साथ आमिर ने अतुल से puccha...Atul जवाब समे उसको हैरानी से देखता है.

आमिर:- आपने hi तोह कहा था अगर आपको पैसे की जरुरत होता तोह आप सेहर में काम karte...Aur आज आप इस गांव को छोड़ कर जाने की बात कर रहे है.

अतुल:- मैंने तुझे ये भी कहा था की कभी किसी बात का गलत मतलब मत nikaalna...Insaan और बातों को हमेशा अच्छे से समझना chaahiye...Thodi सी गलती बहुत भारी पद सकता है.

फिर अतुल एक नजर आमिर को देखता है और थोड़ा मुस्कुरा कर कहता है.

अतुल:- कुछ hi दिनों की तोह बात hai...Tujhe सब कुछ बता तोह दिया maine...Abhi हालात ऐसे है की मई कुछ सोच समझ नहीं पा रहा hu...Shreya की पापा की बात का कोई जवाब नहीं है मेरे paas...Jald hi फ्रेश हो कर आऊंगा वर्ण अभी तोह यहाँ मेरा दम घुट रहा है.

और वापस मुझे यही तोह आना है.

बस गांव वालो को समझा dena...Sabhi की हेल्थ के बारे में ख्याल rakhna...Hospital तक पहुँचने में हेल्प kar...Baaki वो लोग देख lenge...Agar कुछ ज्यादा hi सीरियस हो तोह मुझे फ़ोन कर देना.

इतना कह कर अतुल वह से निकल gaya...Ek अनजाना सा सफर में अनजानी वजह के साथ.

पीछे आमिर बस अतुल को जाते देख hi सकता tha...Kuch कर नहीं पा रहा tha...Baat तोह सिर्फ कुछ hi दिनों का tha...Lekin अब्ब अतुल की ये गैर मौजूदगी भी आमिर के दिल में दर पैदा कर रहा tha...Naa जाने कुछ hi सालों में कितना कुछ बदल गया था.

5 इयर्स एगो

बात तब की है जब अतुल एक डॉक्टर के रूप में पहली बार उस गांव गया tha...Laghbhag 1 हफ्ते बाद hi उसने पुरे गांव को एक साथ जम्मा किया tha...Saaf सफाई और बीमारी के बारे में पुरे गांव को जागरूक करना चाहता था वो.

वो अपनी बात कह hi रहा था की तभी बिच में एक आदमी उठ कर बोलना सुरु कर देता hai...Wo आदमी आमिर hi था.

आमिर:- किसी पर भी भरोषा करना लेकिन डॉक्टर्स पर नहीं.

आमिर की इस बात पर उसके दोस्त उसका साथ देते है.

हाँ haan...Picchla डॉक्टर भी निक्कमा hi tha...Kuch आता नहीं था usse...Bas सर्कार की तरफ से मिलने वाले पैसे मुफ्त में लूट रहा tha...Jab वो कुछ कर नहीं पाया तोह एक दिन यहाँ से निकल कर चला गया.

रहने दो Doctor...Tumhari कोई जरुरत नहीं hai...Beemari से कैसे लड़ना है हम जानते हैं और आगे भी इसी तरह जीते रहेंगे.

कुछ गांव वालों की तरफ से भी आवाज उठा.

अतुल बस खड़ा हो कर तमाशा देख रहा था.

आमिर:- ी हैवे सीन 2 टाइप्स ऑफ़ डॉक्टर इन माय life...One हु अरे कपबले एंड ानोथेर हु अरे उसेलेस एंड जाबलेस लिखे यू एंड वर्क्स व्हेरेवेर थे गेट chance...I हैवे नेवर सीन अन्य कपबले डॉक्टर इन विलेज.

एंड थिस इस थे प्रॉब्लम विथ आवर मेडिकल system...We गेट ओनली उसेलेस डॉक्टर्स, हु फुरदर रूइंस आवर हेल्थ सर्विसेज इंस्टेड ऑफ़ इम्प्रोविंग आईटी.

समझ रहे हो naa...Main क्या कह रहा हु.

अतुल:- (हल्का स्माइल के साथ) अच्छा निंजा तकनीक hai...English से लोगों का इंटेलिजेंस चेक करने ka...Khair, आपका बात समझ gaya...Aapka बात सुन कर लग रहा है की आप पढ़े लिखे hai...Ummeed नहीं था की आप इतनी जल्दी किसी को जज कर लेंगे.

आमिर भी आज शांत रहने वाला नहीं था.

आमिर:- एक और baat...Yaad है एक बार आपसे चेकउप कराने आया tha...Aapne मुझसे मेरा रिलिजन भी पूछा tha...Kya आप ऐसे hi अपने पेशेंट्स को ट्रीट करते है? बायस्ड हो कर!!

और फिर बाकी की गांव वाले भी इसी मुद्दे को उठाते hai...Maahaul गरम हो रहा tha...Lekin अतुल भी शांत hi था.

अतुल:- पेशेंट पर्टिकुलर का ये जरुरी हिस्सा hai...Ilaaj में बहुत मदद मिलती hai...Abhi शायद सबको समझा नहीं paaunga...Lekin अगर जानना hi चाहते है तोह अकेले में आइये अच्छे से समझा दूंगा.

आमिर:- कोई जरुरत nahi...Koi नहीं आएगा तुम्हारे पास इलाज कराने.

फिर आमिर वह से चला gaya...Picchle डॉक्टर के साथ वो कितना ना खुस था और मेडिकल सिस्टम के बारे में कैसा सोच बन गया था ये आज उसकी बातें दिखा रहा था.

आमिर के साथ साथ धीरे धीरे सभी गांव वाले वह से जाने लगे.

अतुल:- (उन्हें रोक कर) ये आप का मर्जी hai...Mujhse इलाज कराना या नहीं karaana...Agar आपका इच्छा नहीं तोह मेरा कोई हक़ nahi...Kyuki एक दोकट को अपने मरीज के इच्छा (ऑटोनोमी) को सबसे ऊपर रखना पड़ता hai...Haa अगर तबियत काफी खराब हो तोह याद कर लीजिये.

लेकिन सब अतुल की बात को अनसुना करके चले जाते hai...Sirf एक को छोड़ kar...Shreya...Aaj पहली बार उसको अतुल के लिए बुरा लग रहा tha...Pehli बार अतुल की बातें सुन उससे लगा की उसमे कुछ तोह बात hai...Jo सब उसके खिलाफ होने पर भी एक बार गुस्सा नहीं hua...Pyar से सब को समझाने की कोशिश करता रहा.

दूसरी तरफ Atul...Abhi भी मुस्कुरा रहा tha...Apna इस प्रोग्राम फ़ैल होने par...Uske दिमाग में दो अलग अलग ख्याल चल रहे thhe...Pehla उससे वो पिछले डॉक्टर सही लग रहा था की ये गांव वाले अच्छा हेल्थ सर्विस डेसेर्वे hi नहीं karte...Aur dusra...Thik alag...Nahi nahi...Ye उनका सोच hai...Jaisa उन्होंने महसूस किया वैसा उन्होंने बोल diya...Abb उसकी जिम्मेदारी है की उनको गलत साबित करे.

फिर कुछ दिन ऐसे hi चलता raha...Atul हॉस्पिटल में अपना ड्यूटी तोह करता लेकिन पेशेंट ना के बराबर thhe...Lekin अभी अभी निशा से बिछड़ा अतुल, वो तोह अपने hi दुनिया में खोया हुआ tha..Ek दर्द भरी duniya...Shayad hi वो कभी उससे बाहर निकल पाए.

ऐसे hi एक दिन.

डॉक्टर डॉक्टर चिल्लाते हुए कुछ लोग हॉस्पिटल आये.

अतुल ने देखा की 3 लोग उसकी तरफ आ रहे hai...Pehchaane में परेशानी नहीं hua...Aamir और उसके दो दोस्त thhe...Aamir बीमार लग रहा था.

आमिर:- मुझे बचा लीजिये डॉक्टर.

एक दर भरी आवाज में आमिर ने कहा.

अतुल:- क्या हुआ आपको?

चेयर पर बैठा कर अतुल ने पूछा.

आमिर:- बहुत तेज बुखार hai..Thodi देर बाद ठीक हो जाता hai...Lekin फिर कुछ hi देर में waapas...Bahut तेज बुखार hai...Paseena पसीना हो जाता hu...Aur पेशाब भी अब्ब काला (ब्लैक) आने लगा है.

समझ में नहीं आ रहा क्या हुआ है.

धीमी आवाज में आमिर ने kaha...Thoda बहुत वो समझ गया की वजह क्या है.

फिर वो आगे कुछ और सवाल पूछता hai...Diagnosis को और कन्फर्म करने के लिए.

अतुल:- मुझे लगता है की आपको मलेरिया hai...Blood टेस्ट करने पर कन्फर्म होगा.

आमिर:- लेकिन मलेरिया तोह मेरे दोस्तों को भी हुआ था pehle...Itna तेज बुखार और काला peshaab...Aisa प्रॉब्लम तोह नहीं था उन्हें.

अतुल:- आपको अलग मलेरिया हुआ hai...Yaa फिर कहु तोह सबसे खतरनाक वाला मलेरिया...प्लासमोडियम फाल्सीपेरम...इस जीवाणु की वजह से जो की एक मच्चर (मॉस्क्वीटो) में होता hai...Baaki मलेरिया जो ज्यादा लोगों को होता है वो होता है प्लासमोडियम विवक्स se...Jo उतना खतरनाक नहीं होता.

आमिर:- खतरनाक?

अतुल की बात से वो और भी दर गया.

अतुल:- Haan...Kabhi कभी जान भी जा सकती है isse...Lekin आप घबराइए mat...Vakt पर आये hai...Blood टेस्ट करके आगे क्या करना है वो देखता हूँ..

ब्लड सैंपल लेने के बाद.

अतुल:- कुछ दवाई और दोसे लिख रहा hun...Agar ठीक ना हुआ तोह फिर वापस aaiye...Kabhi कभी एक दवाई इस जीवाणु के खिलाफ काम नहीं karte...Aise में दवाई बदलना पड़ता है.

फिर अतुल आमिर को अच्छे से समझा कर भेज देता है.

आफ्टर ा वीक

अतुल:- कैसे हो आमिर भाई अब्ब?

आमिर:- अब्ब बिलकुल ठीक hun...Aapka बहुत बहुत शुक्रिया डॉक्टर saahab...Mujhe लगा की कही मई...

अतुल:- कुछ ज्यादा hi सोच लेते ho...Aakhir ये जाबलेस डॉक्टर किस दिन काम आता?

आमिर:- क्या डॉक्टर साहब आप भी? मई सच में शर्मिन्दा hun...Ek गलती समझ कर माफ़ कर दीहिये.

अतुल:- कोई बात nahi...Hota रहता है यह सब.

आफ्टर ा मंथ

एक पेशेंट दिअररहोइअ का कंप्लेंट ले कर हॉस्पिटल aaya...History लेने पर पता चला की उससे कॉलरा hai...Kuch hi देर में दूसरा पेशेंट bhi...Aise hi करते करते 15 और पेशेंट्स.

अब्ब अतुल को कुछ बहुत बड़ा खतरा दिख रहा था.

सभी गांव वालों को बुलाया एक ग्राउंड में मीटिंग के liye...Aur वह एक शॉकिंग फैक्ट पता chala...Gaanw के आधे से ज्यादा लोग अचानक इस बीमारी के चपेट में आ गए है.

और वजह एक tha...Gaanw का मेला में एक bhoj...Jo 7 घंटे पहले हुआ था.

अतुल:- बहुत hi सीरियस बात है ye...Agar कुछ देर और हुआ तोह पता नहीं क्या हो jaayega...Gaanw में ोर्स (ओरल रिड्रेशन सलूशन) (जीवन जल) भी ख़त्म हो चूका है.

आमिर:- क्या करना चाहिए ऐसे में?

अतुल:- किसी के गांव के बाहर कोई लोग है सेहर me...Agar हैं तोह फ़ोन करके kaho....Jitna हो सके उतना जीवन जल यहाँ भेज दे और पड़ोस के गांव में भी उनके लिए जो उस भोज में गए थे.

फिर सभी वैसा hi करते hai...Atul भी बेचैनी में अपनी तरफ से पूरी ख्वाहिश कर रहा tha...Jab जरुरत के अनुसार उसको ोर्स मिलता है तोह सभी गांव वालों को उसका इस्तेमाल कैसे करना है वो बता देता है.

और राहत की सांस उसने तब लिया जब सभी का सही सलामत होने की बात पता चली.

और फिर वो एक मीटिंग बुलाता है.

अतुल:- पिछली बार जो दिअररहोइअ हुआ था उसका वजह था दूषित (पोलूटेड) खाना और paani...Ussi से जीवाणु (बैक्टीरिया) एक दूसरे से फैलता gaya...Aur कुछ hi देर में आधे से ज्यादा गांव भर में फ़ैल gaya...Aur जब वो जीवाणु आपके शरीर में जाता है तोह 6 घंटे में hi दिअररहोइअ सुरु हो जाता hai...Aur इलाज ना हुआ तोह शरीर में पानी की कमी से जान भी जा सकता है.

एक दो मरीज का आसानी से इलाज कर सकता hun...Lekin पुरे गांव का? वो भी अकेले इतने काम वक्त में?

सभी गांव वाले चुप थे.

अतुल:- इसी लिए कहता हु साफ़ सफाई जरुरी hai...Jitna साफ़ सफाई होगा उतना hi काम ऐसी बीमारी फैलेगी.

बीमारी दो तरह के होते hain...Ek जो एक इंसान से दूसरे में फैलते हैं (कम्युनिकेबल) और दूसरा जो नहीं failta...Failne वालो बीमारी को हम रोक सकते hai...Acche साफ़ सफाई से या फिर उसको जड़ से ख़त्म कर के (रुट कॉज).

बीमारी का इलाज करने से अच्छा है बीमारी होने hi ना दे.

मैं आप सब को कुछ बीमारी के बारे में कहने वाला hun...Ummeed है आप सब उस बात पर ध्यान denge...Fir देखिये कूटना बदलाव आता है.

इस बार गांव वाले अतुल की हर बात और प्रोग्राम पर साथ देते hain...Aur देखते hi देखते बीमारी भी काफी हद्द तक घाट जाता hai...Communicable डिजीज में काफी सुधार आया तोह non-communicable डिजीज (डायबिटीज, बोल्ल्ड प्रेशर, अष्टम, हार्ट अट्रैक) जैसे बीमारी वाले मरीज के लाइफस्टाइल में भी काफी सुधर आया.

अब्ब धीरे धीरे गांव वालों का भी हॉस्पिटल और डॉक्टर पर फिर से विश्वास होने लगा.

आमिर:- भाई सच में आपने तोह कमाल कर दिया?

अतुल:- असली क्रेडिट तुम सब को hi जाता hai...Mera तोह काम है एक कोशिश karna...Maanna या ना मानना तुम लोगो पर hai...Tum लोग बदलाव के लिए तैयार हुए और नतीजा सबके सामने हैं.

अतुल:- एक बात aur...Accha पढ़ा लिखा है tu...Kuch बात कहना चाहता hu...Kabhi भी इंसान को गलत मत samajhna...Galat इंसान को सही समझा तोह कभी भी धोखा मिलेगा और सही इंसान को galat...Toh अपना hi नुकशान है.

और जरुरी नहीं की हर डॉक्टर जो काबिल है वो सेहर में hi jaaye...Sabhi का अपना अपना वजह होता hai...Haa अगर मुझे सिर्फ पैसे कमाने का hi शौख होता तोह मई भी सेहर में hi होता.

आमिर बस अतुल को देख hi रहा tha...Samajh में नहीं आ रहा था की क्या कहे.

अतुल:- एक हेल्प चाहिए मुझे तेरा.

आमिर:- मेरा हेल्प? क्या?

अतुल:- एक और मीटिंग करना hai...Mujhe उन् सभी गांव वालों का नाम चाहिए जो HIV/AIDS, कुस्थ रोग (लेप्रोसी) और डायन जैसे केस के विक्टिम हो?

आमिर:- लेकिन क्यों? उन् लोगों की पूरी गांव में बेइज्जती हो jaayegi...Gaanw वालों का नजर बहुत गलत होता है ऐसे लोगों पर.

अतुल:- यही नजर बदलना hai...Aise लोग जो ऐसी समस्या के साथ जी रहे है उनकी जिंदगी नर्क से बदतर होती hai...Human राइट की बातें तोह बहुत करते है hum...Lekin ऐसे लोगों को देख सांप सूंघ जाता है.

और फ़िक्र मत kar...Unki नाम नहीं लूंगा किसी के saamne...Bas उनकी समस्या को सबके सामने लाना है.

आमिर:- इससे क्या होगा? मुझे नहीं लगता कुछ बदलाव होगा.

अतुल:- कोशिश तो कर hi सकते hain...Agar नहीं बदले तोह ये समस्या है पुरे गांव ka...Wohi भुगतेंगे.

आमिर:- कैसे?

अतुल:- अगर किसी को एड्स या लेप्रोसी है तोह वो किसी को नहीं बताएँगे इस दर से की समाज उन्हें अलग आकर dega...Wo अपनी बीमारी छुपा lenge...Aur अनजाने में एक से दूसरे लोगों को फैलता जाएगा.

दो प्रॉब्लम hai...Ek दूसरे लोगों को failega...Aur दूसरा बात है हम उनके साथ गलत कर रहे hai...Jitna देर होगा उतना hi बीमारी और बढ़ता jaayega...Aise में हम उनका नुकशान कर रहे है जो हमारा कोई हक़ nahi...Aur हम उनका इलाज का हक़ भी चीन रहे है.

लेप्रोसी होना या फिर डायन जैसी samasya...Isme लोगो की कोई गलती नहीं hota...Bas दूसरे लोगों के लिए वो गलत हो जाते hain...AIDS ये भी ज्यादातर अनजाने में होता है.

अगर वक्त रहते इलाज किया तोह लेप्रोसी पूरी तरह ठीक हो सकता hai...AIDS पूरी तरह ठीक तोह नहीं होगा फिर भी अच्छे लाइफ जी सकते है.

ऐसे में दो फायदा hai...Ek हम ऐसी बीमारी फैलने से रोक सकते hain...Aur dusra...Humar Right...Unko भी जीने का हक़ दे सकते hai...Acchi जीवन दे सकते है बिना किसी दर के.

अतुल की ये बात आमिर को भी काफी पसंद आया.

वो सोच रहा था की "अब्ब और कितना कुछ karega...Itna तोह कर hi चूका hai...Gaanw का हेल्थ में बहुत बदलाव आया tha...Uske सोच से pare...Aur ये पैसे के लिए भी नहीं tha...Bas एक डॉक्टर होने का धर्म."

और आज अतुल को जाते देख आमिर यही सब सोच रहा था.

ऐसी hi कुछ बातें था जो आमिर को अतुल की और भी इज्जत करने पर मजबूर कर रहा था.
 
अपडेट 113

क्या बात है नेहा? आज कल कुछ ज्यादा hi खोयी हुई लगती है? ध्यान hi नहीं रहता किसी चीज में?

थोड़ा साख के साथ शिकायत भरी आवाज में निशा ने पूछा.

नेहा:- अरे कुछ भी तो नहीं.

निशा:- कुछ तो जरूर है...

नेहा:- क्या आप भी?

इतना कह कर नेहा वह से भाग जाती hai...Wo निशा का सामना और नहीं कर पा रही थी.

फिर निशा ऐसे hi अपने राउंड पर निकल जाती है.

ऐसे में उससे कुछ बहुत hi अजीब दीखता hai...Dr. समीर.

समीर आज अपने दोस्तों या फिर डॉक्टर्स की कुछ टीम्स के साथ हँसते मुस्कुराते हुए जा रहे थे.

यह सच में हैरान करने वाली बात thi...Sameer को हँसता देख वो विश्वाश hi नहीं कर पा रही thi...Aur उसका बदलाव उसका लुक भी साबित कर रहा tha...Kabir सिंह जैसा दाढ़ी मूंछ वाला लुक से आज का बदला हुआ look...Clean शवेद वाला.

पहली नजर में तोह निशा भी उससे पहचान नहीं पायी.

दूरिंग लंच टाइम.

समीर अभी भी अपने दोस्तों के साथ उसी रूप में thha...uske चेहरे का वो रौनक, वो ख़ुशी अभी भी वैसा hi था जैसे सुबह में thha...Pata नहीं कैसा बदलाव था ये? अब्ब निशा से और रहा नहीं गया.

निशा समीर और उसके दोस्त के पास जाती है.

निशा:- क्या बात है डॉ. Sameer...Kuch बदले हुए लग रहे है? तबियत तो ठीक है ना आपकी?

डॉ. सौरव:- अरे इससे क्या होगा? तबियत को ख़राब होने के लिए भी इसकी परमिशन लेनी पड़ती hai...Itna बड़ा डॉक्टर hai...Aise कैसे तबियत ख़राब हो जाएगा.

डॉ. समीर:- (घूरते हुए) कुछ भी.

डॉ. सौरव:- सही hi तोह कह रहा hun...Tera इंटेलिजेंस लेवल क्या है पुरे हॉस्पिटल स्टाफ को पता है.

डॉ. समीर:- वो तोह पता nahi...Par पुरे हॉस्पिटल स्टाफ को ये जरूर पता है की मई कितना बड़ा बेवड़ा hun...Kyun डॉ. निशा?

हँसते हुए समीर ने पूछा.

निशा:- क्या आप भी?

निशा को समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले.

निशा:- आपने बताया नहीं अचानक से ऐसे बदलाव.

समीर कुछ बोलता उससे पहले hi,

सौरव:- हाँ ये बात तोह मई भी नोटिस कर रहा hun...Kaafi खुस लग रहा है आज kal...Ek दम से positivity...Aaj कल तो साथ में फूंकने (स्मोकिंग) भी नहीं चलता है.

खैर जो भी ho...Accha लग रहा है तुझे ऐसे देख कर.

कुछ देर समीर दोनों को देखता है और फिर कहता है.

समीर:- Badlaaw...Iske लिए किसी मकशद की जरुरत hai...Aur मुझे वो मकशद मिल गया है.

समीर ने ये बात निशा को देख कर kaha...Uske बात में एक गहराई था जो इस वक्त दोनों शायद महसूस नहीं कर पाए.

निशा:- ऐसा क्या मकशद मिला आपको?

समीर:- Bataaunga...Lekin सही वक्त आने par...Right थिंग ात राइट टाइम.

सौरव:- बता भी दे? क्यों इतना भाव खा रहा है.

समीर:- फिर kabhi...Iss बार जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता.

समीर की बात सौरव की समझ से बाहर tha...Lekin इतना वो जानता था की समीर से जिद्द करके भी कोई फायदा नहीं.

निशा:- लेट में guess...Shayad Responsibility...Aap अपने पेरेंट्स के लिए और भी ज्यादा रेस्पोंसिबल होना चाहते है.

निशा की इस बात पर समीर मन hi मन hansa...Aur बस इतना hi कह पाया.

समीर:- शायद.

इतना कह कर समीर वह से निकल गया.

[Friends jaanta hu ye update kaafi chhota hai...Lekin iss topic ke liye itna hi thha...Ye update aage ki kahani ke liye kaafi jaruri hai...Next update bhi jald hi aayega.]
 
अपडेट 114

अब्ब और किस बात की इंतजार है तुम्हे?

गुस्से से निशा अतुल से बोली.

अतुल अभी भी चुप था.

निशा:- पहले कहा था जब अपने पेअर पर खड़ा होंगे tab...Aur उसके बाद एक और बहाना, "इंटर्नशिप में ज्यादा पैसे नहीं मिलते."

अब्ब इंटर्नशिप भी सिर्फ 1 मंथ hi रह गया hai...Abb और कितना देर करोगे?

अतुल:- क्या ये जरुरी है?

अतुल की इस बात पर निशा बुरी तरह छिद्ध gayi...Kaha वो इतना सीरियस हो कर बातें कर रही थी और अतुल इतना केयरलेस.

निशा:- तुम सीरियस भी हो या नहीं?

अतुल:- जिंदगी है दो पल ki...Serious हो कर क्या milega...Pyar और मस्ती से गुजारना चाहिए jindagi...Naa की सीरियस हो कर.

निशा गुस्से से अतुल को देखती hai...Lekin अतुल को कोई परवाह नहीं था.

अतुल:- कितना अच्छा तोह चल रहा है हमारे बिच सब kuch...Abb कौन ये शादी वाली टेंशन अपने सर पर uthaaye...Ham लोग ऐसे hi जिंदगी भर खुश नहीं रह सकते?

अब्ब निशा को छेड़ने में अतुल को और भी मजा आ रहा था?

निशा:- तुम से तोह बात करना hi बेकार है.

अतुल निशा से मुंह छुपा कर हस्ता है और फिर.

अतुल:- तोह क्या ख्याल है?

निशा:- जैसा तुम chaaho...Karte रहो मस्ती इस दो पल की जिंदगी me...Jab मेरी शादी किसी और से हो जायेगी तब और भी मस्ती करना!!!

निशा की गुस्सा का अब्ब कोई सीमा नहीं था.

अतुल अब्ब निशा के पास आ जाता है और उसका कन्धा पकड़ कर.

अतुल:- मेरे रहते ऐसा कैसे होगा?

निशा:- लेकिन तुम्हे तोह कोई मतलब hi नहीं!

अतुल:- वो तोह मई अपने निशु के साथ मजाक कर रहा था.

निशा:- हर चीज के लिए सही वक्त होता hai...Aur ये वक्त मजाक का नहीं है.

अतुल:- अच्छा तोह ये वक्त किस चीज के लिए है?

निशा:- हमारे रिश्ते की बात के लिए.

अतुल:- अच्छा baba...Jald आऊंगा तुम्हारे घर.

निशा:- हमेशा यही कह कर ताल देते हो.

अतुल:- तुम समझती नहीं हो यार.

निशा:- क्या?

अतुल:- यही की मेरा सच में फैट रही hai...Tumhe तोह पता लिया तुम्हारे घर वालों को कैसे पटाऊ वो समझ में नहीं आ रहा!!

निशा:- पहले तोह बड़ी बड़ी बातें करते thhe...Ye कर दूंगा वो कर दूंगा.

अतुल:- अरे उस वक्त जोश अलग hi tha...Flow फ्लो में बक दिया सब kuch...Itna कुछ फेंक दिया की अब्ब समेत नहीं पा रहा हूँ.

फिर अतुल कुछ देर के लिए चुप हो जाता hai...Aur खुद में hi बड़बड़ाने लगता है.

अतुल:- जिसको पटना चाहिए उन्हें पटाने में फट रहा है और जिससे कोई मतलब नहीं वो कुछ ज्यादा hi चिपकने की कोशिश कर रहे हैं.

निशा:- किसकी बात कर रहे हो?

अतुल:- प्रीती की फॅमिली.

निशा:- मन किया है न हज़ार बार नाम भी मत लो उस चुड़ैल का.

अतुल:- Accha...Wo तोह ठीक hain...Lekin क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

निशा:- वो तुम जानो.

अतुल कुछ सोचने लगता है...

निशा:- अगर तुम कहो तोह मैं hi तुम्हारे घर आ जाती हूँ.

निशा की ये बात सुन अतुल का मुंह खुला का खुला रह जाता है.

अतुल:- सोचना भी मत abhi...Warna पूरी तरह से हमारे प्यार पर टैग लग जाएगा "थे एन्ड". उन्हें धीरे धीरे मैं समझा dunga...Mujhe यकीं है मन लूंगा unhe...Lekin जल्दबाज़ी से नहीं.

निशा:- अच्छा तोह ठीक hai...Kal तुम आओगे मेरा घर.

अतुल:- हम्म ठीक है.

निशा:- पूरा विश्वाश है तुम पर.

फिर निशा एक मुस्कान के साथ अपने रूम में चली जाती है.

अतुल कुछ देर छत पर ऐसे hi सोचते रहता hai...Aur जब कुछ समझ में नहीं आता तब वो थक हार कर अपने रूम में चला जाता है.

रूम में पहुँचते hi.

अतुल:- अरे didi...Aap?

निधि:- हाँ तेरा hi इंतजार कर रही थी.

अतुल:- इंतजार?

निधि:- क्या बातें हो रही है इतनी रात को?

अतुल:- बाकी दिन तो बस नार्मल baatein...Lekin आज.

अतुल का चेहरा देख निधि भी समझ गयी की अतुल कुछ परेशान है.

निधि:- आज?

अतुल:- वो मुझे हमारे रिश्ते की बातें करने के लिए कह रही है.

निधि:- ये तोह अच्छी बात hain...Isme परेशानी की क्या baat...Aaj नहीं तोह कल तुम दोनों को शादी तोह करना padega...Fir देरी क्यों?

अतुल:- लेकिन निशा की पापा से बात कैसे करू?

निधि:- तोह इसमें डरने की क्या बात है? अच्छे से उन्हें समझा दे!!! उनकी किस्मत है की उन्हें तेरे जैसे दामाद मिल रहा hai...Tujhe बिलकुल भी मन नहीं करेंगे वो.

अतुल:- ये तोह पता nahi...Kismat किसका अच्छा है और किसका kharaab...Lekin दर बहुत लग रहा है.

निधि:- ऐसे डरेगा तोह कैसे chalega...Ye हिम्मत और विश्वाश से काम लेने का वक्त hai...Aur तू है की ऐसे दर रहा है.

ये एक ऐसा दौर है जिससे हर प्यार करने वालों को गुजरना पड़ता hai...Bas खुद पर विश्वाश रख.

अतुल अभी भी बहुत सी उलझन में था.

अतुल:- लेकिन हमारे घर के बिच दुश्मनी? मुझे लगता है पहले मुझे माँ और पापा से बात करना padega...Unhe मन लूंगा और फिर उनके साथ hi जाऊँगा निशा की हाथ मांगने.

निधि:- अगर हमारे बिच प्रॉब्लम नहीं रहता तोह ऐसा hi करना अच्छा hota...Lekin अब्ब अचानक से ये सब होगा तोह मुझे नहीं लगता की कोई भी maanenge...Ego पर बात आ जायेगी.

निशा की पापा तुझे भी अच्छा मानते hain...Bahut बार बताया भी है तूने की तुम दोनों कितना फ्रेंडली ho...Agar तूने उन्हें मन लिया तोह धीरे धीरे पापा को भी मन hi lega...Aur इसमें मई भी तेरा साथ दूंगी.

अतुल अभी भी अपने सोच में hi गुम्म था.

अतुल:- फ्रेंडली होना अलग बात hai...Lekin रिश्ता? क्या वो हमारे घर अपना बेटी को भेजना chaahenge...Aur ऊपर से कासते प्रॉब्लम.

निधि:- ये सब बाद की बात hai...Sabse जरुरी है tu...Aur उनका तेरे ऊपर vishwas...Agar निशा के लिए उन्हें तू सही लगता है तोह उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं hoga...Wo मान जाएंगे.

अतुल को दी की बात तोह सही लग रहा था लेकिन फिर भी दिल में अनजाना सा घबराहट महसूस हो रहा था.

निधि:- अच्छा तोह अभी चलती hun...Kal बिना किसी दर के उन्हसे बात karna...Ekdum होनेस्त्ली अपने दिल की बात kehna...Jarurat से ज्यादा भी nahi...Mujhe भरोषा है तुझ पर.

फिर दी वह से जाने लगती है.

गेट में पहुँच कर.

निधि:- इस घर की छोटी बहु निशा hi होना chaahiye...Bahut अच्छे लगते हो तुम दोनों एक साथ.

फिर अतुल बीएड पर बैठ कर सोचने लगता hai...Di की बातें तोह उससे सही लग रहा tha...Lekin वक्त ऐसा था की हर बात पर उससे शक था की आगे कुछ सही होगा या नहीं.

आखिर दिल की बात tha...Jindagi से जुड़ा था.

आओ अतुल beta...Bahut दिनों बाद आये हो?

गेट से अंदर आते वक्त पूरा उत्साह के साथ निशा के पापा ने अतुल का स्वागत किया.

न. डैड:- 2 कप चाय बनाना?

थोड़ी तेज आवाज में उन्होंने निशा की माँ से कहा ताकि किचन तक भी ये बात सुनाई दे.

न. डैड:- और सुनाओ हाल चाल?

अतुल:- सब ठीक है अंकल.

न. डैड:- और घर में?

अतुल:- घर में भी सब ठीक hai...Aur आप.

न. डैड:- (गर्व के साथ) फिट एंड fine...Dekh hi रहे ho...Bas ये मोटापा थोड़ा काम करना hai...Warna ये निशा मुझे एक पल छैन से जीने नहीं देगी.

हमेशा कहती है डायबिटीज और हार्ट डीएएसएस का रिस्क होता है मोटापा se...Tum डॉक्टर लोग भी naa...Chhoti छोटी बातों को बड़ा इशू बना देते हो.

अतुल:- इस बात पर तोह मैं भी निशा से सहमत hu...Aakhir सेहत की बात है.

न. डैड:- अच्छा वो chhodo...Kuch काम था?

अतुल जो कुछ देर पहले निशा की पापा से बात करते वक्त खुल गया tha...Abb उनकी इस सवाल से उसके चेहरे पर फिर से घबराहट की लकीर दिखने लगा.

न. डैड:- कोई भी बात हो? बेझिझक बोलो.

अतुल:- अंकल इस बार पिछली बार की तरह बात नहीं ghumaunga...Sidhe मुद्दे पर आता हूँ.

हिम्मत करके अतुल ने बोल hi diya...Saath hi निशा की पापा भी थोड़ा सीरियस हो गए.

न. डैड:- हम्म कहो?

अतुल:- मैं और निशा एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी भी करना चाहते हैं!!! इसी बारे में आपसे बात करने के लिए आया था.

अतुल की ये बात सुन निशा की पापा के चेहरे का रंग एक दम से बदल जाता hai...Tab तक निशा की माँ भी चाय ले कर आ गयी thi...Unka भी हाल उनके पति जैसा hi था.

कुछ देर दोनों एक दूसरे को देखते है और फिर निशा के पापा अतुल को.
 
अपडेट 115

निशा की पापा को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या bole...Wo ऐसे hi बिना किसी भाव के अतुल को देखते रहे.

अतुल:- अंकल मई और अपने फीलिंग्स को छुपा नहीं sakta...Aisa लगा की वक्त आ गया है सब कुछ कहने का.

निशा की पापा अभी भी चुप थे.

अतुल:- लेकिन ये आप का फैसला hai...Nisha भी यही चाहती hai...Agar आप दोनों राज़ी है तब hi हम शादी करेंगे.

आप मुझे जानते hi है मई कैसा hun...Itne वक्त से हम साथ साथ hai...Agar आप को मई निशा के लिए सही लगता हूँ तो हमें आशिर्बाद दीजिये साथ में सुखी रहने का.

मई अपनी तरफ से एक बेटी के पिता को सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की निशा को मई कभी प्यार और पैसे की कमी होने नहीं dunga...Usse हमेशा खुश rakhunga...Koshish करूँगा वो मेरे साथ यहाँ से भी ज्यादा खुश rahe...Sirf koshish...Ek पिता की प्यार को आज तक कौन जीत पाया है?

अतुल ने निशा की पापा की आँखों में देख कर कहा इज़्ज़त से अपनी बातों पर यकीं दिलाने के लिए.

कुछ देर बाद.

न. डैड:- क्या निशा भी तुम से प्यार करती है?

एक सख्त आवाज में उन्होंने पूछा!!!

अतुल:- हाँ Uncle...Hum दोनों hi एक दूसरे से प्यार करते है.

न. डैड:- निशा निशा.

थोड़ी तेज आवाज में उन्होंने निशा को bulaya...Nisha की माँ को भी थोड़ा दर लगने लगा.

न. माँ:- ये आप.

न. डैड:- बस कुछ पूछना है उससे.

न. डैड:- निशा

उनकी आवाज भी तेज होता जा रहा था.

निशा जो गेट में छुप कर साड़ी बातें सुन रही थी वो डरते डरते रूम में आयी.

न. डैड:- क्या अतुल सही कह रहा है? तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो?

अपने पापा की सख्त आवाज से निशा भी एक पल के लिए दर gayi...Darte हुए निशा अतुल को देखने लगी.

अतुल को भी दर लग रहा tha...Kahi निशा अपने पापा की दर से "ना" न कह दे.

निशा:- हां Papa...Atul सही कह रहा है.

निशा ने हिम्मत करके सच कह hi diya...Atul को भी राहत मिला.

और निशा फिर अपनी आँख बंद कर लेती है ये सोच कर की अगले पल क्या होने वाला है.

लेकिन उसके उम्मीद से ठीक उल्टा निशा की पापा प्यार से उसकी गाल सेहला देते है.

न. डैड:- इसमें डरने की क्या बात है?

अचानक से उनका आवाज में प्यार था.

ये बात सिर्फ निशा को hi नहीं अतुल को भी चौकाने वाला था.

न. डैड:- मई प्यार का खिलाफ कब से हो गया? भूल गयी क्या? मेरा भी लव मैरिज था.

निशा एक राहत की सांस लेती है और फिर.

निशा:- आपने तोह द्वारा hi दिया.

न. डैड:- जरुरी tha...Maine तुम दोनों की तरह शरीर के बारे में तोह नहीं padha...Lekin इंसान के सोच को आसानी से पढ़ सकता hoon...Aur यही एक तरीका tha...Tum दोनों के बारे में जान्ने ka...Dar में भी फैसला को नहीं बदला और सच hi बोलते rahe...Mujhe ये अच्छा लगा.

अतुल:- अंकल आप एक्टिंग काफी अच्छे कर लेते hai...Mai भी दर गया था.

न. डैड:- Beta...Acting तोह अच्छा करता hi hoon...Khaas कर विलन wala...Agar थोड़ा भी झूट बोलता और मुझे शक होता तोह आज तेरा खैर नहीं tha...Tere लिए सच में विलन hi बन जाता.

अतुल इस बार कोई जवाब नहीं deta...Wo काफी खुश tha...Abhi से वो शादी और शादी के बाद के सपने देख रहा tha...Kitna खुश था wo...Pehla pyar...Aur उसको भी आज एक मंजिल मिल गया था.

एक नजर वो निशा को देखता है प्यार se...Aur फिर मुस्कुरा देता है.

निशा की भी हाल वैसा hi tha...Atul की इस मुस्कान पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी.

न. डैड:- (विथ सीरियसनेस) अतुल अगर तुम्हारे जगह तुम्हारे पेरेंट्स आते तोह मुझे और भी ज्यादा ख़ुशी hota...Shaadi सिर्फ दो लोग को hi जोड़ने का काम नहीं करता बल्कि दो परिवार को एक करता है.

अतुल:- जरूर Uncle...Jald लाऊंगा उन्हें इस रिश्ते के लिए.

न. डैड:- क्या मन पाओगे तुम उन्हें? और याद रखना तुम्हारे पेरेंट्स का भी सहमति चाहिए इस शादी के liye...Warna ये शादी नहीं होगा.

ये सुन कर अतुल तो एक पल के लिए दर गया लेकिन अगले hi पल.

अतुल:- विश्वाश है अंकल मुझे खुद par...Unhe मन lunga...Mere लिए वो जरूर maanenge...Aur हमारे घर के बिच की सभी शिकायत भी दूर होंगे.

न. डैड:- ऐसा hi होना chaahiye...Mai अपने बेटी के लिए अच्छे दामाद के साथ साथ अच्छा ससुराल भी चाहता हूँ.

उस ससुराल में उन्हें बेटी की तरह प्यार करने वाले सास ससुर होना chaahiye...Uski अपने ससुराल में एक इज़्ज़त होना चाहिए जहा वो खुल कर बाकी के जिंदगी अपने पति के साथ जी सके.

अतुल:- मई पहले भी एक बेटी के पापा को बचन दे चूका hun...Mai निशा के साथ कभी गलत नहीं होने dunga...Aur माँ और पापा भी उससे बेटी की तरह hi प्यार karenge...Wo गलत बिलकुल भी नहीं hai...Bas हमारे बिच प्रॉब्लम अपने अपने सोच की वजह से hai...Iska असर उन्होंने अपने बच्चों पर कभी होने नहीं दिया.

आज तक पापा ने मुझे कभी आपके बारे में नहीं भड़काया और ना hi कुछ गलत सिखाया.

विश्वाश है हमारे बिच की दूरियां जल्द hi ख़त्म hoga...Bas आप मुझ पर विश्वाश रखिये.

न. डैड:- विश्वाश है इसी लिए अपनी बेटी की हाथ तुम्हारे हाथ में दे रहा हूँ.

अतुल के लिए ये गर्व की बात था.

न. डैड:- मेरा कोई बीटा नहीं hai...Lekin सोचता हूँ अगर होता तोह शायद तुम्हारे जैसे hi होता hai...Jitna भी बात किया है तुमसे, जितना तुम्हे जाना है मैंने यही पाया है की तुम साफ़ दिल के ho...Accha सोच है, मेहनती हो, सभी को इज़्ज़त देते ho...Kisi की बातों में न आ कर अपना एक अलग सोच रखते ho...Aur वो साड़ी काबिलियत है जो मुझे अपने दामाद में चाहिए था.

और सबसे बड़ी baat...Tum दोनों एक दूसरे को प्यार करते हो.

इतना तारीफ़ सुनने के बाद अतुल का सीना गर्व से फूलता जा रहा था.

न. डैड:- (तो निशा' माँ) तुम खुश हो ना इस रिश्ते से? या फिर कोई आपत्ति है?

एक आखिरी दर यही था अतुल के मन me...Lekin निशा की माँ की जवाब से ये दर भी दूर हो गया.

न. माँ:- मुझे क्यों कोई आपत्ति hogi...Bacchon की ख़ुशी में hi मेरी ख़ुशी hai...Ulta मई hi आपसे इन् दोनों के बारे में बात करना की सोच रही थी.

निशा:- (चौंकते हुए) आप को हमारे बारे में पता था?

न. माँ:- Haan...Wo भी बहुत पहले se...Khud की तरह बेवकूफ समझती है क्या?

(तो अतुल) तुझे देख कर hi सब कुछ पता चल जाता hai...Nisha से मिलने के लिए वो bahana...Khud hi बॉल हमारे घर में फेंकते हुए बहुत बार देखा hai...Router को ऑफ करके बहाने से हमारे घर में आ कर padhna...Extra क्लास कह कर लाइब्रेरी में टाइम स्पेंड karna...Aur भी बहुत कुछ.

निशा की माँ की इस बात पर अतुल बिलकुल चुप हो जाता hai...Jaise उसका चोरी पकड़ा गया हो.

न. माँ:- लेकिन मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं hua...Vishwash था तुम दोनों par...Aur ये विश्वाश कभी टूटने मत देना.

अतुल:- कभी नहीं.

अतुल ने भी पुरे विश्वाश के साथ कहा.

गौरव:- देखा Papa...Kya गुल खिला रहा है ये लड़का? मैंने पहले भी कहा था इतना आज़ादी मत दीजिये.

गौरव भड़काने की लाख कोशिश कर रहा tha...Atul बस गौरव को घर रहा था.

रिया:- अब्ब समझ में आ रहा है? तुम प्रीती को मन क्यों कर रहे थे? बेचारी प्रीती.

अतुल:- बहुत पहले समझ आ जाना चाहिए tha...Lekin आप भी अपनी बहिन की तरह hi दिमाग से पैदल है.

अतुल का गुस्सा भी बढ़ता hi जा रहा था.

रिया:- देखो tum...Hadd से...

अतुल:- मेरे सिर्फ रिश्ते की नाम से Bhabhi...Bas इतना hi kahunga...Mai गाली बहुत काम देता hun...Ladkiyon को तो और भी kam...Gandi गाली तोह आज तक nahi...Kya आप सुन्ना चाहेंगी?

रिया को चुप कराने का सिर्फ यही तरीका अतुल के दिमाग में आया.

गौरव:- तुझे तोह...

इतना कह कर गौरव आगे बढ़ता है.

अतुल:- चल aaja...Pitnee का बहुत शौख है naa...Aaj पूरा कर hi देता हूँ.

अतुल ने भी खुद को तैयार कर लिया लेकिन.

ा. डैड:- बस करो तुम दोनों.

आवाज इतना तेज था की दोनों अपनी जगह पर रुक गए.

अतुल:- पापा!!!

लेकिन अतुल के पापा कुछ कहे बिना चले गए.

अतुल:- अपना जवाब तोह दीजिये.

लेकिन वो कुछ कहे बिना hi वह से चले गए.

माँ ने आँखों से इतना hi कहा, "सब ठीक hoga."...Aur वो भी वह से चली गयी.

एयर निधि अतुल के पास आ कर उसके कंधे में हाथ रखती है और कहती है "हौसला rakh...Sab ठीक होगा."

अतुल भी बेसब्री से पापा की जवाब का इंतजार कर रहा tha...Uparwale से एक बार फिर दुआ किया की काश सब कुछ ठीक हो jaaye...Ek अलग सा दर उसके दिल और दिमाग में बैठ गया tha...Upar से गौरव और रिया का टेंशन.

[Note:- Friends aaj kal reviews bahut kam aa rahe hain...Agar updates pasand nahi aa raha hai toh bataaiye improve karne ki koshish karunga...Abhi thoda free hun...Daily updates ki chance bhi hai...Agar aap sab ka comments aata raha toh...Ye update Friday post karne wala tha lekin comment ki intejaar me likha hi nahi...Kal busy tha iss liye aaj post kar diya...Agar comments regularly aata raha toh mujhe bhi aur likhne ka josh milega warna wohi 2-3 days ki gap me formality ke liye story complete karne ke liye likhunga.

Request hai aap sab se ki jaisa bhi laga update positive yaa fir negative reviews dete rahiye.]
 
थैंक्स कामदेव भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Review की बात इस लिए कर रहा था क्यों की अचानक रेविएवस काम हो गए thhe...Aise में खुद से यही सवाल आता है की कही अच्छा लिख रहा हु या नहीं.

और रही बात फ्री होने की तो इस लिए की अभी एग्जाम आने में 11 वीक्स बाकी hai...Tab तक वक्त निकाल लूंगा उपदटेस के लिए.

साथ बने रहिये भाई.
 
अपडेट 116

मुझे ख़ुशी है की बच्चों की ख़ुशी के खातिर आप भी मान गए इस रिश्ते के लिए.

निशा की पापा ने ख़ुशी के साथ अतुल की पापा से कहा.

शायद पहली बार था जो दोनों एक दूसरे से बात करते वक्त खुश थे.

ा. डैड:- आखिर बच्चों की ख़ुशी की बात hai...Socha अपने निजी दुश्मनी का असर क्यों उन् पर पड़े.

एक लम्बी सांस ले कर.

ा. डैड:- शायद हम सबको भी अपने मन मुटाव को भुला कर नयी तरीके से रिश्ते की सुरुवात करना चाहिए.

न. डैड:- मई भी यही कहना चाहता tha...Aakhir ये दुश्मनी में रखा क्या hai...Aur दुश्मनी की ख़ास वजह भी क्या है? ये छोटी छोटी बातें.

इन् बातों को भुला कर फिर से प्यार और ख़ुशी में रहना hi सही hoga...Ek koshish...Fir धीरे धीरे ये कड़वाहट भी काम होता जाएगा.

फिर धीरे धीरे सभी आपस में बातें करने लगते hain...Sab कुछ ठीक होता जा रहा था.

आज अतुल का अपने पापा के लिए इज़्ज़त काफी बढ़ गया tha...Jab वो निकले थे निशा की फॅमिली से बात करने तोह उससे दर लग रहा था की कही वो मन ना कर de...Lekin हुआ वो जो उसके सोच से ठीक उल्टा.

दूसरी तरफ गौरव और Riya...Bas जो हो रहा था सब कुछ सिर्फ देख hi रहे thhe...Kuch कर नहीं पा रहे thhe...Riya को प्रीती के लिए बुरा लग रहा था.

गौरव के लिए तोह ये किसी बुरे सपने से काम नहीं tha...Aaj तक की साड़ी नफरत मिटटी में मिल गया tha...Pehle अतुल को घर से निकालने की ख्वाहिश और फिर रिया की वजह से उसका प्रीती से शादी कराने की khwahish...Sab कुछ ख़त्म हो gaya...Bas वो लाचारी से सब कुछ देख hi सकता था.

बहुत मुश्किल से वो सभी के सामने अपना गुस्सा दबा पाने में सफल tha...Ye देख अतुल का ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

फिर धीरे धीरे दोनों की इंगेजमेंट और शादी की डेट भी फिक्स कर दिया जाता है.

इंगेजमेंट बहुत hi धूम धाम से hua...Atul और निशा के कॉलेज के सभी फ्रेंड्स और रिलेटिव्स को इनविटेशन दिया gaya...Sab खुस थे दोनों के लिए कुछ को छोड़ कर.

अतुल और निशा की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Wo दोनों अपने जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल जी रहे थे.

दिन की शुरुवात एक मसाज से होता "गुड morning"...Saath कॉलेज जाते और इंटर्नशिप का आखिरी 1 वीक इनके लिए किसी रोमांटिक स्पॉट बन jaata...Alag अलग डिपार्टमेंट में पोस्ट होने के बावजूद एक दूसरे से मिलने की बहाना मिल hi जाता.

और फिर कॉलेज के बाद अपने रोमांटिक डेटिंग par...Bina घर वाले और दुनिया वालो से किसी तरह के dar...Dono अपने लाइफ को बहुत एन्जॉय कर रहे थे.

अभिशेख:- ये क्या हालत बना रखा है तूने?

रवि को इतने नशे में देख अभिशेख भी दर गया.

रवि:- बर्दास्त नहीं कर पा रहा हूँ.

अभिशेख:- क्या?

रवि:- दोनों को एक saath...Itne करीब.

रवि का गुस्सा था की काम होने के नाम नहीं ले रहा tha...Atul का वो कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता था और ना hi उन्हें खुश देख सकता था.

अभिशेख:- अब्ब किस्मत hi उनका ऐसा है तो क्या कर सकते है?

रवि:- किस्मत को बदल दूंगा.

अचानक से रवि में एकदम से आत्मविश्वास आ गया.

अभिशेख:- क्या? कैसे?

अभिशेख को दर था की रवि कही कोई गलत कदम ना उठा ले.

जवाब में रवि कुछ देर हँसता रहा.

रवि:- गौरव! अतुल का भैया!!!

अभिशेख सवालिया नजर से रवि को देखता है.

रवि:- दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है.

अभिशेख:- साफ़ साफ़ बोल.

रवि:- सुना है दोनों में बहुत दुश्मनी hai...Gaurav अतुल को अपने आस पास देखना भी नहीं chaahta...Bas उसका इस्तेमाल करना hai...Baaki काम वो खुद कर देगा.

इतना कह कर रवि फिर हसने लगता hai...Abhi से उससे अपना जीत साफ़ दिख रहा था.

अभिशेख:- क्या ये ठीक रहेगा?

रवि:- बिलकुल ठीक rahega...Aise में अतुल को समझ भी नहीं आएगा की उसके साथ क्या हो रहा hai...Dushman उसका घर का hi hoga...Kehte है ना "घर का भेदी लंका ढाये"

और दोनों को अलग करना है तो इतना रिस्क तो लेना hi पड़ेगा.

रवि एक तरफ अपना प्लानिंग कर रहा था और दूसरी तरफ Gaurav...Bas एक मौके का इंतजार में पागल होता जा रहा था.

इन् साजिशो से anjaan...Atul और Nisha...Wo दोनों तोह अपने फर में इस तरह डूब गए थे की उन्हें अंदाजा भी नहीं था की आने वाला तूफ़ान क्या तबाही के कर आने वाली है.
 
अपडेट 117

आओ गौरव.

निशा की पापा ने एक मुस्कान के साथ गौरव का स्वागत किया.

गौरव भी बिना कुछ बोले घर के अंदर आ जाता है.

न. डैड:- और bataao...Kya चल रहा है आज कल?

गौरव:- सब कुछ ठीक है.

एक फींका सा जवाब दिया गौरव ने.

न. डैड:- परेशान दिख रहे ho!!!Koi बात है क्या?

गौरव:- बात hi कुछ ऐसा है Uncle...Kaise बताओ कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

गौरव परेशान होने का दिखावा अच्छे से कर रहा tha.Karta भी क्यों नहीं? इससे अच्छा मौका शायद hi उससे कभी मिलता.

बात ये था की अतुल और निशा कॉलेज लाइफ कम्पलीट होने के बाद एक हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम के लिए एक गांव गए थे 3 दिन के liye...Jaha फ़ोन नेटवर्क था hi नहीं...3 दिन तक अतुल और निशा से कांटेक्ट करना लगभग नामुमकिन tha...Yahi मौका था जितना हो सके उतना झूठ बोलने का और निशा की पापा को अतुल के खिलाफ भड़काने ka...Nisha भी यहाँ नहीं थी जो अपने पापा को इमोशनल हो कर किसी तरह अपने पापा से अपनी बात मनवाती.

न. डैड:- बेफिक्र हो कर bolo...Kya बात है?

गौरव:- वो अतुल ने कुछ कहा था गांव जाने से पहले.

न. डैड:- मुझे भी बता सकता tha...Khair तुम bolo...Kya कहा था अतुल ने?

अब्ब निशा की पापा भी थोड़ा सीरियस हो गए थे.

गौरव:- शादी से पहले कुछ कंडीशंस.

न. डैड:- पूरी बात तो बताओ?

अब्ब गौरव की बात से वो छिड़ने भी लगे थे जो गौरव चाहता tha...Nisha की पापा को थोड़ा बहुत अंदाजा तोह हो गया था लेकिन वो गौरव की मुंह से सुन्ना चाहते थे.

गौरव:- दहेज़...40 लक्ष की.

न. डैड:- व्हाट?

उनकी आवाज में गुस्से के साथ साथ हैरानी भी था.

गौरव चुप रहा.

न. डैड:- लेकिन अतुल ने तोह पहले ये बात कभी नहीं कहा tha...Aur ना hi ऐसी बात तुम्हारे पेरेंट्स के साथ हुआ था.

गौरव:- ये सब तोह मुझे पता नहीं Uncle...Lekin जाने से पहले अतुल ने ये बात मुझे आपको बता देने के लिए कहा था.

निशा की पापा कुछ नहीं kehte...Abhi भी वो हैरानी में कुछ सोच रहे थे.

गौरव:- तो क्या मई हां समझू अंकल?

न. डैड:- बिलकुल नहीं.

गौरव:- (बड़बड़ाते हुए) पहले भी बोलै था अतुल को इनसे रिश्ता मत jod...Lekin मानता hi नहीं.

गौरव ने धीरे से बड़बड़ाते हुए कहा और वो काफी था निशा की पापा की कानो तक पहुँचने में.

न. डैड:- क्या मतलब?

गौरव:- कुछ nahi...Lekin आप को प्रॉब्लम क्या है? सिर्फ 40 लक्ष की hi तो बात है.

न. डैड:- 40 लक्ष तो दूर की बात hai...Mai 40 पैसे भी नहीं dunga...Mai दहेज़ जैसी चीजों की सख्त खिलाफ हूँ.

निशा की पापा ने सख्त आवाज में कहा.

गौरव:- लेकिन ये निशा के लिए hi तो है? आखिर फायदा निशा को hi तो होगा.

न. डैड:- और वो कैसे?

गौरव:- अतुल ये पैसा आगे की पढ़ाई के लिए मांग रहा hai...MS करने के liye...Aap hi सोचिये जब वो न्यूरोसर्जन बनेगा तोह कितना पैसा कमायेगा और कितनी अच्छी तरह से निशा का ख्याल रखेगा?

न. डैड:- मैंने इस लिए इस रिश्ते को सहमति नहीं दिया था की अतुल बाद में ज्यादा या काम पैसा kamayega...Sirf इस लिए क्यों की अतुल के रूप में मैंने निशा के लिए अच्छा जीवनसाथी देखा था.

और अतुल को क्या जरुरत पड़ने लगा पैसों का पढ़ाई के लिए? इतना अच्छा स्टूडेंट hai...Mehnat करेगा तो फुल स्कालरशिप मिल जाएगा उससे.

गौरव:- आप hi sochiye...Itna अच्छा स्टूडेंट है क्युकी आज तक पढ़ाई में म्हणत करते आया hai...Abb म्हणत करते करते थक गया है wo...Abb उससे और नहीं होगा.

न. डैड:- जिस दिन इंसान म्हणत करना बंद कर de...Uss दिन से उसका कोई मोल नहीं rehta...Aur ऐसे इंसान किसी काम के nahi...Jindagi में सुख और दुःख दोनों पल आते hain...Aise इंसान दुःख के पल का सामना कैसे करेंगे जब वो इतनी जल्दी हार मान लेंगे.

अतुल को अपनाने की एक वजह ये भी था की वो एक मेहनती लड़का है.

गौरव:- बस अंकल आप अपने ज्ञान अपने पास hi rakhiye...Aur मेरा भाई का और बेइज़्ज़ती मत kijiye...Mai बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.

आप बस इतना बता दीजिये आपको अतुल का शर्त मंजूर है या नहीं?

न. डैड:- बिलकुल nahi...Mai एक बार अतुल से बात karunga...Agar उसका यही शर्त है तो ये रिश्ता ख़त्म.

निशा की पापा भी अब्ब काफी हद्द तक गुस्सा हो गए थे.

गौरव:- आप हमारे बेइज़्ज़ती कर रहे है?

न. डैड:- जैसा तुम सोचो.

निशा की पापा ने गौरव के बिलकुल करीब आ कर बोले आँखों में आँख दाल कर.

गौरव अपना एक मुख्या पाशा फेंक देता है.

वो खिंच कर एक थप्पड़ निशा की पापा को मारने hi वाले थे की निशा की पापा बिच में hi उसके हाथ को पकड़ लेते है.

न. डैड:- बच्चे हो tum...Nadaan समझ कर छिड़ रहा hu...Warna.

इतना कह कर निशा की पापा गौरव के हाथ को मरोड़ने लगते hai...Gaurav दर्द में कराहने लगता है.

न. डैड:- हड्डियों को लकड़ी की तरह तोड़ दूंगा.

इतना कह कर वो गौरव को दूर धकेल देते है.

न. डैड:- निकल जाओ abhi...Warna मुझे धक्का मार कर भी निकालना आता है.

गौरव भी जाने लगता hai...Jab वो गेट में पहुँचता है तब.

न. डैड:- और haan...Jab अतुल वापस आ जाए तोह एक बार भेज देना मुझसे बात करने के लिए.

गौरव वह से चला जाता hai...Usse अपना बेइज़्ज़ती से कोई फर्क नहीं padta...Wo अपना काम कर चूका था.

घर से बाहर निकलते hi वो रवि को मैसेज कर देता है. "मैंने अपना काम कर दिया hai...Abb तुम्हारा बारी."

फिर गौरव जाता है अपना आखिरी और सबसे जरुरी काम को अंजाम देने.

वही निशा की पापा अभी भी हॉल में बैठे थे परेशान और कुछ सोंचते hue...Tabhi पीछे से निशा की माँ आती है लंच रेडी करने के बाद.

न. माँ:- क्या हुआ? आप इतने परेशान क्यों है? और वो गौरव? क्या कह रहा था? बातें तोह ऊँची आवाज में कर रहा था.

[Friends aane wale week mai thoda free hun...Aur koshish karunga jyada se jyada updates post karne ki...Jitna jaldi aap sab ka reviews aayega utna jaldi updates post hoga kyuki mujhe reviews ka wait karna nahi padega. :D]
 
स्टोरी तो कंटिन्यू रहेगा hi...Abhi थोड़ा टाइम है और अपडेट जल्द से जल्द पोस्ट करने की कोशिश कर रहा hun...Bas इसी लिए रिक्वेस्ट था की सब जितना हो सके उतना जल्द कमैंट्स करे ताकि मुझे कमेंट का ज्यादा इंतजार करना ना pade...Abhi तोह कोशिश यही है की स्टोरी को जितना हो सके उतना अच्छा लिखू और जल्द कम्पलीट करू. :)
 
अपडेट 118

अरे Ravi...Kaise हो?

थोड़ा पहचानने की कोशिश करते हुए निशा की पापा बोले. (निशा की पापा और रवि की पापा के बिच थोड़ा जान पहचान है)

रवि:- मई ठीक हूँ Uncle...Aap कैसे है?

न. डैड:- मई भी ठीक hun...Tum यहाँ?

रवि:- अतुल से मिलने आया tha...Wo नहीं है तोह वापस जा रहा था.

न. डैड:- अभी गांव गया hai...Ek हेल्थ कैंपेन के लिए.

रवि:- Haan...Abhi पता chala...Accha Uncle...Chalta हूँ अभी.

न. डैड:- ऐसे कैसे? पहली बार हमारे घर आये ho...Chaai नास्ता करके hi जाना पड़ेगा.

रवि:- अरे नहीं Uncle...Fir कभी.

लेकिन निशा की पापा के सामने वो कैसे टिक सकता tha...Aur रवि का तोह प्लान भी यही था.

आखिर उससे कामयाबी मिल hi गया निशा की पापा से बात करने ki...Karib 20 मिनट से वो अतुल के घर का चक्कर लगा रहा था की एक बार वो निशा की पापा की नजरो के सामने आ सके और ये कहे की वो अतुल से मिलने आया था.

न. डैड:- अब्ब तो तुम भी डॉक्टर बन गए हो निशा और अतुल के साथ hi...Aage का क्या प्लान है?

रवि:- अभी कुछ मोनथस रेस्ट करूँगा और फिर ड्यूटी ज्वाइन करूँगा.

फिर ऐसे hi बात चीत होता है रवि और निशा के पापा के बिच.

रवि:- बहुत ख़ुशी हुई ये जान कर की अतुल और निशा की शादी होने वाला है.

रवि ने ये बात तो कह दिया लेकिन उसकी आवाज से hi उसका दर्द पता चल रहा tha...Aur वो ये सब जान बूझकर कर रहा tha...Nisha की पापा को भी ये अजीब लग रहा था.

न. डैड:- दोनों प्यार करते है एक दूसरे se...Aur मुझे भी अतुल सही लगा निशा के लिए.

रवि:- अच्छा किया आपने Uncle...Aaj भी कॉलेज वाले अतुल और निशा को जब याद करता हूँ तोह ऐसा लगता है की दोनों "मेड फॉर एच इतर" हैं.

न. डैड:- कॉलेज main!!!Kya सभी को पता था उनके बारे में?

रवि:- शायद hi कोई ऐसा हो जिससे पता nahi...2nd ईयर से इंटर्नशिप तक दोनों साथ थे एक दूसरे के saath...Kabhi कभी तोह अतुल को देख जलन भी होता था.

रवि अब्ब अपने मुद्दा पर आ रहा था.

न. डैड:- जलन?

रवि:- अंकल प्लीज बुरा मत मानियेगा मई जो भी कहने वाला हूँ.

रवि डरने की एक्टिंग करते हुए बोलै.

न. डैड:- बोलो.

रवि:- प्यार तोह मई भी बहुत करता था निशा se...Wo थी hi इतनी acchi...Khair मेरा किस्मत hi ख़राब tha...Atul ने मुझसे पहले अपने प्यार का इजहार कर दिया.

लेकिन फिर भी निशा के लिए खुश hun...Atul उससे बहुत प्यार करता hai...Shayad मुझसे भी ज्यादा.

रवि अपना हर एक चाल संभल कर चल रहा tha...Usse ये भी ख्याल रखना था की निशा की पापा को उस पर कही शाख ना हो जाए अगर एकदम से अतुल का बुराई करने लगा तोह.

निशा की पापा कुछ देर तक चुप hi rahe...Fir कुछ सोंचते हुए.

न. डैड:- तुमसे भी ज्यादा?

रवि:- हाँ Uncle...Atul का प्यार बहुत hi खास था निशा के लिए.

जब निशा ने उससे मन किया तोह वो एकदम पागल जैसा हो गया tha...Din भर निशा की यादों में नशे में rehta...Cigarette और दारु में डूबा रहता.

और जब निशा ने उसके प्यार को हाँ कह diya...To वह निशा का अच्छे से ख्याल रखने laga...Kabhi कभी ओवर प्रोटेक्टिव भी हो jaata...Agar निशा को कोई परेशान करता तोह अतुल उसका हड्डियां तोड़ देता tha...Kabhi कोई परेशानी नहीं होने देता था निशा को.

और तो और कभी निशा अगर कॉलेज भी नहीं आती तोह उससे तब तक छैन नहीं आता जब तक उसका निशा से बात नहीं हो jaata...Har 5 मिनट में फ़ोन कॉल्स और मेस्सगेस.

इतना जूनून था अतुल का प्यार में निशा के liye...Aaj कल तोह लोग 2 महीने तक पगार निभा नहीं paate...Lekin Atul...Wo 4 सालों se...Ussi जूनून के साथ अभी तक प्यार करता आया है और आगे भी करता रहेगा.

रवि की बात सुनने के बाद निशा की पापा सोच में पद gaye...Pehli बार रवि ने झूठ बोलै था और उसका असर वही हुआ जो रवि चाहता tha...Wo अंदर hi अंदर बहुत खुश था लेकिन बाहर से खुद को नार्मल दिखा रहा था.

फिर कुछ डेट ऐसे hi बातें कर वो वह से निकल जाता है.

चीनी भी ज्यादा खाने से कड़वा लगने लगता hai...Yahi बात निशा के पापा के साथ हो रहा tha...Pyar भी इतना ज्यादा पागलपन जैसा लगने लगता hai...Ek दर सा बैठ गया था उनके मन में.

कल गौरव और आज Ravi...Lekin अभी भी इससे सच मान नहीं पा रहे thhe...Jis अतुल को वो जानते थे वो तो एकदम अलग है.

लेकिन दोनों की बात से उनपर ये असर जरूर पड़ा की उनका बेचैनी बढ़ गया अतुल से मिलने ki...Ek बार वो फिर से अतुल को अच्छे से जानना चाहते थे समझना चाहते थे.

आफ्टर 1 डे

आज गौरव बहुत खुश tha...Jo वो चाहता था वही hua...Uska आखिरी चाल भी कामयाब raha...Aakhir दोनों घर में झगड़ा करवाने में वो सफल रहा.

कुछ देर पहले hi अतुल और निशा के पापा के बिच बहुत कहा सुनी हुआ.

निधि:- पापा आपने बहुत गलत किया?

गुस्से में निधि boli...Usse और देखा नहीं जा रहा था.

ा. डैड:- क्या? मैंने गलत किया? सब कुछ देखते हुए भी तू यही कह रही है.

निधि:- सब कुछ देखते hue...Dikhaai तो आपको कुछ नहीं दे रहा hai...Yaa फिर आप सच देखना hi नहीं chaahte...Dekhte भी वही है जो आप देखना चाहते हैं.

ा. डैड:- जरा तमीज से बात कर.

निधि:- मई अब्ब आपसे नहीं डर्टी.

बिना किसी दर के निधि ने जवाब दिया.

कुछ देर तोह अतुल की पापा निधि को गुस्से से देखते रहे फिर.

ा. डैड:- अच्छा तू hi बोल मैंने क्या गलत किया? वो इस रिश्ते की दम पर गौरव पर हाथ उठाये तोह मई चुप रहूँगा क्या? रिश्ते की आड़ पर उन्हें मनमानी करने नहीं दे सकता.

निधि:- उन्होंने गौरव पर हाथ उठाया मई ये मान नहीं sakti...Bilkul भी विश्वाश नहीं है मुझे गौरव par...Acche से जानती हूँ isko...Aur अगर हाथ उठाया भी होगा तोह इसने hi कुछ किया होगा.

गौरव को गुस्से से देखते हुए निधि बोली.

गौरव:- Di...Aap कुछ ज्यादा hi...

गौरव इससे आगे कुछ बोलता उससे बिच में रोक कर.

निधि:- अतुल से इस लिए बच जाता क्युकी अतुल तुझे अपना सा बड़ा सोच कर छोड़ देता लेकिन mai...Mujhe ज्यादा सोचना नहीं पड़ेगा तेरे कान के निचे दो थप्पड़ लगाने में.

ा. डैड:- बस करो तुम log...Hamesha लड़ते रहते हो एक दूसरे के saath...Pareshan हो गया हु ये सब देख kar...Kuch नहीं कह रहा हु इसका मतलब ये नहीं की तुम सब अपने मनमानी पर उतर आओ.

निधि:- Papa...Aap एक बार उनसे (न. डैड) फिर बात कीजिये.

ा. डैड:- बिलकुल nahi...Abb ये रिश्ता ख़त्म हो चूका hai...Mere लिए अतुल और गौरव बराबर hai...Ek के लिए दूसरे के साथ अन्याय नहीं karunga...Aur इसमें तोह उनका hi गलती है.

पहले गौरव पर हाथ उठाते है और फिर मन करते है इस बात se...Mujhe ऐसे झूठे लोगो से कोई रिश्ता नहीं रखना.

निधि:- Waah...Itni आसानी से रिश्ता khatm...Ek बार भी अतुल से बात किया आपने?

ा. डैड:- मेरा बीटा है wo...Agar अच्छे से समझाऊंगा तोह मान जाएगा वो.

निधि:- बच्चा नहीं है wo...Jo एक लोल्लिपोप दे कर उससे बात मनवा लेंगे.

ा. डैड:- इतना बड़ा भी नहीं हुआ की घर का फैसला वो लेने लगेगा?

निधि:- आप देखते rahoye...Wo आपका इस फैसला को मन्ना तोह दूर सुनेगा भी nahi...Agar वो सही है तोह किसी को सुनता भी nahi...Aur बात यहाँ उसके प्यार का है !!!

ा. डैड:- कुछ भी ho...Mai अपना फैसला नहीं badlunga...Jab तक वो आ कर गौरव से माफ़ी नहीं मांग लेते.

निधि:- तोह आप इंतजार करते रहिये उस पल ka...Jo इस जन्म में तोह कभी नहीं आएगा.

बात का गरमा गर्मी बढ़ता देख.

ा. माँ:- बंद करो तुम लोग ऐसे झगड़ना.

निधि:- माँ देखते रहना आपका ये प्यार दोनों के liye...Yahi वजह बनेगा जब ये घर को तोड़ कर रख dega...Aap भी जानते है गौरव गलत hai...Aur इस वक्त पापा bhi...Aur आपका ये भ्रम और इंतजार की गौरव बदल jaayega...Dekhte रहिये आपके सामने क्या से क्या हो jaayega...Aur फिर आप अकेले पछताते रहना.

फिर इतना कह कर निधि वह से चली जाती hai...Itna तोह वो समझ चुकी थी की उसकी बात से किसी को कुछ फर्क नहीं padega...Bas अब्ब उससे अतुल का इंतजार tha...Ussi पर भरोषा था की वो सब कुछ ठीक कर देगा.

दूसरी तरफ अतुल का Papa...Unhone मन बना लिया था इस रिश्ते को तोड़ने ka...Bahut अच्छे से अपना खेल खेला था गौरव ne...Atul की पापा का बस यही गलती था की वो हमेशा गौरव पर भरोषा करते आये थे और आज भी उन्होंने यही kiya...Unke सामने निशा की पापा एकदम गलत थे और गौरव सही जैसा गौरव ने उन्हें दिखाया.

गौरव का इतने सालो का म्हणत रंग लाया tha...Apne पापा का विश्वाश जितने की लिए उसने कई सालो से म्हणत किया था ताकि उनको अतुल के खिलाफ कर सके.

अतुल के खिलाफ तोह आज भी नहीं thhe...Lekin हालात ऐसा बन गया था की वो इस बार अतुल का साथ नहीं दे सकते थे या फिर देना hi नहीं चाहते thhe...Unhe यकीं था गौरव पर की अतुल का ये चॉइस गलत है.
 
Back
Top