अपडेट.... 67
प्रीवियस....
सामने का नजारा देखते hi मेरी आँखें खुली की खुली रह गई... इतना बड़ा महल इतने सारे लोग जो अपना काम करने में लगे हुए थे... बड़ी बड़ी पेंटिंग्स... बड़ी बड़ी मूर्तियां.. मई अभी इन्हे देखने में बिजी hi था की तभी मेरा ध्यान एक मूर्ति पर गया...
मई उसकी तरफ बढ़ hi रहा था की...
रुको.....
अब आगे....
मैंने देखा तोह मेरे पीछे शैडो खड़ा हुआ था... मुझे देख क्र थोड़ा गुस्से मई बोलै...
शैडो... अगर तुम्हारा लड़कियों जैसा सजना हो गया है तोह चले जिस काम से आएं ह वह पूरा क्र लें...
मई.. ( हड़बड़ा क्र ) हाँ हाँ बिल्कुल मई तोह कब से आपको ढूंढ रहा हूँ... आप hi न जाने खान थे...
शैडो... बस बस चलो मेरे साथ... हमे देर हो रही है...
फिर मई कुछ नहीं बोलै चुप चाप उसके साथ चलता रहा... मई पलट क्र एक नजर मूर्ति को देखा जैसे कुछ कह रही हो मुझसे... मई पलट क्र इस चीज़ को दरकिनार क्र आगे बढ़ा hi था की मुझे सोफिया माँ नजर आई वह अब भी मुझे देख रही थी...
मेरे अंदर घबराहट बढ़ने लगी की दी ने आकर मेरा हाथ पकड़ा... और हम महल से निकल क्र दूर आ गए फिर कुछ hi देर मई हम जंगल मई पहुंच गया.. जंगल काफी घाना था और काफी रहस्यमयी भी...
तरह तरह के पेड़ पौधे लगे हुए थे... और जगह जगह से लताओं ने रास्ता रोक रखा था... शैडो हमारे आगे चल रहा था... वह अपनी तलवार चलते हुए हमारे लिए रास्ता बना रहा मई दी का हाथ पकडे हुए उसके पीछे चलता रहा...
हम 4 घंटे से लगातार चल रहे थे... मगर जंगल था की ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रहा था... दी बुरी तरह से थक चुकी थी...
दी... ( सांस ऊपर निचे होते हुए ) बेतु अब मुझसे और नहीं चला जा रहा.. आह्हः
और एक पेड़ जो गिरा हुआ था उसपर बैठ गई... मई भी उन्ही क साथ बैठ गया और उनकी पीठ सहलाने लगा... उन्हों ने अपना सर मेरे कंधे पर रथ लिया और अपनी साँसे सँभालने लगी... वही शैडो आगे चला जा रहा पर जब उसने पलट क्र देखा हम वंहा नहीं थे... वह हमे ढूंढ़ते हुए आया और हमे ऐसे बैठे देख...
शैडो...( गुस्से में ) क्या हुआ रुक क्यों गए अब यह मत शुरू हो जाना चलो हमे शाम होने से पहले पहुंचना भी है...
मई... ( गुस्से में ) क्या चलो चलो लगा रखा है... देख नहीं रहे हम कितने थक गए है.. एक तोह 4 घंटे से चले जा रहे है... बिना कुछ खाये पीये रुको अब कुछ मत बोलना वर्ण तुम्हारे लिए ाचा नहीं होगा...
शैडो... ( गुस्से में ) क्या खा तुमने... तुम भूल तोह नहीं गए तुम किस्से बात क्र रहे हो...
मई... ( गुस्से में ) हाँ तोह तू होगा राजा अपने देश का... तो क्या हमपर हुक्म चलाएगा...
दी.. ( मेरा हाथ पकड़ ) बेतु..
मई... आप चुप रहो दी कबसे देख रहा... हम यह इसकी मदत करने आये है वर्ण मुझे कोई शोक नहीं यह आने का..
शैडो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखता रह गया फिर कुछ देर बाद अपनी तलवार उठा आगे चल दिया... मई चुप चाप दी के पास बैठ गया और उनकी पथ सहलाने लगा...
दी... ऐसा क्यों किया बेतु.. वह परेशान है उसे...
मई... मुझे पता ह दी इसलिए मैंने उसे समझाया...
दी... लेकिन वह तोह...
मई... कहि नहीं गया वह गम फिर क्र यही आएगा...
इससे पहले दी कुछ और बोलती मैंने उनकर होठ पर होठ चिपका दिए...
उनकी आंखें बड़ी हो गई मगर मई कबि ऊपर तो कभी नीचे वाले होठ को कोस्टा... धीरे धीरे उनके हाथ भी मेरे बालों में घूमने लगे और वह भी मेरा सहयोग देने लगी... सांस फूलने से हम दोनों अलग हुए और वह मुस्कुराते हुए मेरे सीने पर मुक्के मार क्र गले लग गई....
अभी हम बैठे hi हुए थे शैडो फिर से हमारे सामने आ गया... मगर इस बार वह गुस्सा नहीं मुस्कुरा रहा था... मैंने एक बार फिर घूर क्र उसे देखा...
शैडो...( मुस्कुराते हुए ) ाचा अच्छा ठीक है बाद में क्र लेना पहले कुछ खा लो....
और हमारी तरफ बहुत सारे फल मैंने भी बिना कुछ सोचे उसके हाथ से फल उठा क्र दी को खिलाया फिर उन्हों ने भी मुझे अपने हाथ से hi खिलाया... फल बबुत hi मीठे थे नाम पता नहीं था वह तोह बास भूख क चक्क्र में खा गया.... फल खाने के बाद उनसे एक बैग हमारी तरफ बढ़ा दिया जिसमे पानी था मैंने अपने हाथो से दी को पानी पिलाया फिर खुद पी हम खड़े हो गए...
मई... ( उठ क्र अंगड़ाई लेते हुए ) अब ठीक लग रहा है... चलो शैडो भाई खा चलना है हम आपके पीछे पीछे चल रहे... शुक्रिया आपका फल बहुत टेस्टी थे मैंने आजतक ऐसे फल नहीं खाये...
अभी मई कुछ बोल hi रहा था की शैडो ने आगे बढ़ मुझे गले लगा लिया... मैंने भी उसको हुग किया फिर अलग करके..
मई... क्या क्र रहे हो तुम छे छे... मुझे तुम पर पहले hi शक्क था... पूरा फयदा उठा रहे जो आजकल तुम लोग...
जिसे सुन वह एक पल हँसा फिर सीरियस हो क्र ....
शैडो... ( हाथ जोड़ क्र ) मुझे माफ़ करना मेरे दोस्त मई अपनी खुसी के चक्क्र मई आपका कयल hi नहीं रख पाया.... आप मेरे लिए इतना कुछ क्र रहे हो आप मेरे भगवान् से काम नहीं हो...
दी... अरे भैयाआ यह क्या कह रहे हो... माफ़ी हमे मांगनी चाहिए जो हमने आपसे बदतमीज़ी से बात की वह क्या है न बेतु मुझे तकलीफ मई देख पता और उस समय मई थक गई थी.. ी ऍम सॉरी चलो अब हम जल्दी से चलते है... मई बिल्कुल ठीक हूँ...
शैडो ने मुस्कुरा क्र फिर सोनाली को आगे बढ़ गले लगा लिया...
शैडो... आपका बहुत बहुत शुक्रिया...
फिर हम सब ऐसे hi बातें करते हुए चलते झा पहले हम ख़ामोशी से चल रहे वही इस बार शैडो हम पूरे जंगल के तरह तरह क पौधों के बारे में बता रहा था...
जिनमे बहुत साड़ी जड़ी बुटिया भी थी.. कुछ को दी ने अपने पास रख लिया ऐसे हम घूमते घूमते आगे बढ़ने लगे थे की..... सामने का नज़ारा देख हम ृक्क गए...
सामे बड़े बड़े बरगद जैसे पेड़ थे जिसकी पूरी पत्तियां काली और बड़ी बड़ी थी... हम दोनों हैरत भरी नज़र से देख hi रहे थे की...
आअह्ह्ह्ह बेतु...
तो बे कॉन्टिनोएड....