Fantasy इच्छाधारी देव - Page 18 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Fantasy इच्छाधारी देव

गाइस वाडे के मुताबिक अपडेट दे दिया है. फ्रेंड्स अब जो देवा यहाँ से निकलेगा तो कब लौटेगा किस हल में लौटेगा ये तो इस वक़्त वो भी नहीं जनता. ये उसका आखरी सेक्स था. सो अब चलिए इस कहानी में आज रत से hi देव एंड टीम का हंट चालू हो जायेगा. लेकिन उससे पहले आप सब के जोरदार रेविएवस का इंतजार हम कर रहे है. गिव में योर रिव्यु फ़ास्ट एंड गेट नई अपडेट.
 
संदीप भाई मए तुमको क्लियर करता हु देखो जब समय काम और काम ज्यादा हो तो ऐसा करना पड़ता है भाई. जो मैरिड होंगे वो समझ hi सकते है के कभी कभी ये सन रियल लाइफ में भी होता है के कही लम्बे समय के लिए जाना है तो एक hi नाईट में दो से तीन राउंड लगा लिए जाते है. वैसे ी क्नोव के कुछ लोग इतने लम्बे सेक्स सन से बोर होते होंगे लेकिन तुम ये भी तो सोचो के अब कोई ऐसा माहौल नहीं बनने वाला तो क्यों न सुहागरात का पूरा मजा लिया जाये. ये ठीक है के ये कहानी सिर्फ सेक्स के ऊपर नहीं है बल्कि इसकी अपनी एक स्टोरी लाइन है लेकिन ये पुरे थ्रिलर स्टोरी भी नहीं है बीआरओ. इतस ा मिक्स्ड सागा. पर हम तुम्हे भी निराश नहीं होने देंगे क्यों की यही इस कहानी की खूबी है के हर तरह का इंट्रेस्ट रखने वाले इस पसंद करे. तो अब तुम्हारे इंट्रेस्ट की बात ये है के नाउ थ्रिलर इस गोइंग ों. बस कोई सेक्स सन नहीं फ़िलहाल. मए फिर कहुगा मेरे रीडर्स की हर बात हर रिव्यु मेरे लिए कीमती है. चाहे पॉजिटिव वे में हो या नेगेटिव. ऑलवेज वेलकम. थैंक्स फॉर योर पॉइंट. संदीप भाई.
 
बीआरओ आपकी कमेंटरी बेस्ट थी लिखे ऑलवेज. इतस ब्रिलियंट . आपने जो अनाकोंडा और गुफा का सन बनाया है इतस अवेसमे. लेकिन आपकी आखरी की लीणो ने डरा hi दिया. भाई किसी को ये मत कहना अब के. बे पॉजिटिव. है स्टे सेफ वाला वर्ड सही है. क्यों की आजकल पॉजिटिव वर्ड सुन कर hi सबकी फैट जाती है. 😅 शेयर योर रिव्यु ऑलवेज लिखे तहत.
 
अपडेट - 120

देवा के लेट ते hi ज्योति ने उसे बाहों में कास लिया और उस के सीने पर किश कर के अपना सर देवा के सीने पर रख दिया और दोनों को कब नींद आयी पता hi नहीं चला पर देवा की आँख 4 बजे खुल गयी अपने आप वो बस 1 घंटा hi सो पाया था ............ ज्योति के चेहरे पे पूर्ण रूप से संतुष्टि और एक हलकी सी मुस्कान थी.

देवा उठकर अपनी साधना में लग जाता है, आज रत उसे अपने सफर पे भी निकलना था. वह क्या हालत होंगे इस बात का उसे कुछ भी अंदाजा नहीं था. इसिलीये वो अपनी साधन को पूरा टाइम देना चाहता था. करीब 6 बजे वो उठकर तैयार हो जाता है. और फिर नीचे आता है जहा उसे कोई नहीं दीखता शायद सब अब तक सो रहे थे. वो चन्नो के कमरे में जाता है तो उसे देख कर ख़ुशी होती है के चन्नो भी अपने बिस्तर पे साधना में hi बैठी थी. फिर वो चुप चाप अपनी गाड़ी उठा कर निकल जाता है अभी वो घर नहीं जाना चाहता था उसका मन नहीं लग रहा tha.kuchh बेचैनी सी महसूस हो रही थी, एक उलझन सीट hi उसके दिलो दिमाग में जैसे वो खुद से लड़ रहा था. और इस बेचैनी से निकलने का उसे रास्ता मिल नहीं रहा था. तो वो काफी दूर निकल जाता है और नदी किनारे गाड़ी कड़ी कर के दूर तक नदी को देखने लगता है. सुबह के इस ठन्डे बातावरण में बहता हुआ शीतल जल और ठंडी हवा उसे कुछ सुकून तो दे रही थी लेकिन उसके अंदर एक युद्ध चल रहा था. वो इस बात से अनजान था के कोई उसे hi देख रहा है और धीरे धीरे उस के करीब आ रहा है. अचानक………..

देवा……….

देवा चौंक कर पलट ता है – अरे बाबा आप? प्रणाम बाबा.

फब – आयुष्मान हो putra.yaha क्या कर रहे हो इस वक़्त?

देवा – कुछ नहीं बाबा मए तो अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहा था. के मए क्या था और क्या हो गया हु. जब से मैने होश संभाला तब से अब तक की हर बात मेरे मन में घूम रही थी. अपने रहस्यों को जान कर मए खुश भी हु, और उदास भी. सोच रहा था के काश मुझे ये सब न पता चलता. तो शायद आज मेरी जिंदगी कुछ और होती. पूनम तो तब भी मेरी हो जाती लेकिन बाकि सब न होता. मैने इतने क़त्ल किये, कितने झूठ बोले, कितनी लड़कियों और औरतो के साथ मेरे सम्बन्ध बने. मए क्या से क्या हो गया.

फब - पुत्र मैने पहल भी कहा था के ये सब नियति है.

देवा – नियति??....... लेकिन सिर्फ नियति कह कर मए अपने मन को शांत नहीं कर सकता बाबा मेरा मन बहोत विचलित है इस समय.

फब – मए तुम्हारे मन की हालत को समझ रहा हु देव लेकिन तुम भी समझने की कोशिश करो. जिन परिस्थितियों में तुम्हारे पिछले जनम का अंत हुआ उस के बाद ये सब होना जरुरी था.

देव – बाबा मुझे एक बात बताइये. क्या हर इंसान अपने जीवनकाल में मरते मरते सब कुछ ठीक कर के जाता है? क्या ये कोई फिल्म की कहानी है जिसे पूरा न दिखाया गया तो उसका part 2 आना जरुरी है? अरे जो हुआ सो हुआ मन गलत हुआ किसी की लालच किसी का क्रोध किसी की शक्तिया वो सब बाटे अपनी जगह ठीक है लेकिन वो सब बीती बाटे है. उस वजह से मेरा पुनर्जन्म और फिर अब सैकड़ो सालो के बाद मए उस एक दुर्घटना का बदला लेने निकल रहा हु आज. एक ऐसे अनजाने और जोखिम भरे सफर पे जिसका अंत क्या होगा कोई नहीं जनता स्वयं आप भी नहीं. मन लीजिये के इस सफर में मुझे कुछ हो जाता है तो क्या होगा मेरे इस जनम के माता पिता का? क्या होगा उन सब का जो अब सिर्फ मेरे भरोसे हो चुके है. क्या होगा हवेली की साडी औरतो का जनका मैने जिम्मा लिया है और जिन्हे मैने सुरक्षित करने का बीड़ा उठाया है, क्या होगा मेरी एकलौती बहन का मेरे माँ बाबू जी का मेरी आधी अधूरी बीवी यानि मेरी भाभी का ये सब तो मेरी मौत की खबर सुनते hi मर जायेगे. और ये सब किस लिए? क्यों की कई सोउ साल पहले मेरे साथ एक अन्याय हुआ था उस बदले के लिए? अरे मए तो मर hi गया थान ा उसके बाद न तो मेरा नागलोक से कोई वास्ता रहा न तिलिस्म नगरी से. न वह के लोगो से. अभी वो मेरे लिए जरुरी है क्यों की मुझे सब यद् है लेकिन यद् hi न होता तो मेरे लिए इस जनम में तो सब ठीक hi रहता न. आखिर बचपन से जवानी तक तो मए मस्त अपनी जिंदगी जी hi रहा थान ा. अब ये सब करना है ये तो कुछ ज्यादा hi हो गया न, क्या ये मेरे साथ अन्याय नहीं? मुझे तो ऐसा लग रहा है के मेरा दुबारा जनम हुआ hi नहीं मए सदियों से एक श्राप की तरह जी रहा हु बस जी रहा हु. ये दिखने में वरदान लगता है लेकिन ये किसी श्राप से काम नहीं.

फ़कीर बाबा ने देव की पूरी बात सुनी और उसे अपने मन को हल्का करने दिया.

फब – तो तुम क्या चाहते हो? क्या तुम्हे दुबारा जनम नहीं लेना चाहिए था क्या उस ईश्वर ने गलत किया?

देव – नहीं बाबा ईश्वर तो सर्वशक्तिमान है उनसे गलती तो हो hi नहीं सकती. लेकिन मए……… मए एक इंसाने हु मुझे समझ नहीं आती उनकी बड़ी बड़ी प्लानिंग्स. न hi मए ये सब संभल सकता हु. है ठीक है जो मए अब कर रहा हु वो मेरे हाथो होना था ये नियति थी. तो होता मए कब मन कर रहा हु. बस मुझे इसी जनम में कारन दे देते और मुझसे जो चाहे करवा लेते. सब पिछले यद् दिला कर तो मुझे उलझा hi दिया. न मए यहाँ का रहा न वह का. कहने को ये सब आसान है लेकिन जब सोचता हु तो अपना जीवन कल मुझे अनंत नजर आता है जिससे मए भयभीत होने लगता हु. अब मुझे समझ में आ रहा है बाबा के क्यों हर जनम के समाप्त हो जाने के बाद ईश्वर इंसान को पिछले जनम की बाटे यद् नहीं रखने देता. क्यों उसकी एक नयी फ्रेश शुरुआत होती है. अगर इंसान को अपनी पिछली बाटे यद् होती तो न मर पता न जी पता. वो कभी भी एक नयी शुरुआत नहीं कर पता. लोग एक दूसरे से डबल लेने में hi व्यस्त रहते ये धरती तबाह हो जाती.

फब – है देव तुम सही कह रहे हो. लेकिन तुम्हे अगर सब यद् है तो इसके कई सरे कारन है बीटा. जिनमे से अभी बहोत कुछ तुम्हे धीरे धीरे समझ आ जायेगा तब हम बात करेंगे.

देव – है बाबा मुझे भी लगता है सदियों के सवालो के जवाब यु मुझे कुछ hi समय में समझ नहीं आ सकते. बस मन विचलित हो रहा था. तो सरे सवाल भी जबान पे आ गए.

फब – ये स्वाभाविक है देव. अब तुम रत को तैयार रहना. इस सफर के बाद तुम अपने आप में बहोत कुछ बदलाव पाओगे. और जब तुम्हे स्वर्ण मणि हासिल हो जाये तो मुझसे मानसिक संपर्क बनाना मए तुम्हे कुछ निर्देश दुगा.

देव – अभी hi बता दीजिये बाबा

फब मुस्करा के – तुम उतावले तो शुरू से हो पर अब तो संभल जाओ हर बात का वक़्त होता है देव. अब मए जा रहा हु. रत को मिलेंगे बीटा. खुद को सम्भालो इस तरह खुद को विचलित न होने देना . ईश्वर तुम्हरी सहायता करेंगे.

फिर फ़कीर बाबा वह से निकल जाते है. और देव भी अपनी घडी में समय देखता है तो उसे पता चलता है के बहोत देर हो चुकी है. वो मोबाइल निकलता है तो उसमे कई सरे मिस्ड कॉल थे जो साइलेंट मोड़ में होने के कारन देवा देख नहीं पाया था. वो तुरंत अपनी गाड़ी में बैठ कर घर की तरफ निकल जाता है.

घर पंहुचा तो सब जैसे उसी का इंतजार कर रहे थे.

दन – देवा तू आ गया कहा था तू कितने कॉल किये तुझे

देवा – बाबू जी वो मए जरा नदी किनारे चला गया था. और वही एकांत में बैठा था. मोबाइल साइलेंट मोड़ पे था तो ध्यान नहीं गया.

सावित्री – तू तो बैठा था एकांत में यहाँ हमारा साँस लेना hi दुश्वार हो गया कितनी चिंता होने लगी थी पता है.

देवा आगे बढ़ कर सावित्री को बहो में भर लेता है और कास के गले लगा लेता है.

सावित्री – उउउउउउउउउठ्हह्हह्म्मम्म्म्माआआआआ छोड़ देवा कितनी जोर से गले लगता है. पूरी हाडीया चटक गयी

देवा – नहीं छोड़ता अभी तो मेरे लिए बेचैन थी अब छोड़ने को कह रही हो.

सावित्री देवा के सीने पे चुम लेती है.

सावित्री – ऐसे मत जाया कर मुझे छोड़ कर और जाना हो तो बता के जाया कर बीटा चिंता होती है.

नेक्स्ट अपडेट - 121
 
थैंक्स लीओन 32 जी आप के बेहतरीन रिव्यु के लिए बहोत ाचा लगता है जब आप जैसे दोस्त ऐसे खुल कर अपना रिव्यु देते hae.hame भी लगता है के आपने स्टोरी को ध्यान से पढ़ा क्यों की लिखने का मजा तभी आता है जब पढ़ने वाले उसे इतने hi ध्यान से पढ़े और वही समझे जो कहानी के माध्यम से हम समझने की कोशिश कर रहे है. बहोत बहोत धन्यवाद भाई यु hi साथ बने रहिये. जल्द hi मिलेंगे नए ुपड़ते के साथ
 
अपडेट – 121

सावित्री – ऐसे मत जाया कर मुझे छोड़ कर और जाना हो तो बता के जाया कर बीटा चिंता होती है.

देवा भी सावित्री के माथे पे चुम लेता है और फिर आकर हॉल में बैठ जाता है और नाश्ता करने लगता है. जहा सभी उसे खा जाने वाली नजरो से घर रहे थे. खास कर के रूद्र.

देवा – अबे खा जायेगा क्या मुझे. ऐसे घर क्यों रहा है?

रूद्र कुछ बोलने hi वाला था के उसे शलाका ने रोक दिया. वो लोग उसे फिर घूरने लगे.

देवा – आरईईए नाश्ता करू या उठा जाऊ? कोई कुछ बोलता क्यों नहीं. अरे नहीं देखा यार मोबाइल हो गयी गलती माफ़ करो अब नाश्ता करने दो.

फिर भी सब चुप चाप उसे बस घूरते रहे. तो देवा ने भी सब को इग्नोर करते हुए नाश्ते पे कंसन्ट्रेट करना सही समझा और नाश्ता कर के वो सबको इशारा करते हुए बहार निकल आया सभी उसके पीछे आ गए और फिर ये मण्डली जमा हो गयी बेसमेंट में.

देवा – कोई सुबह की बात नहीं करेगा मए सॉरी बोल चूका हु. अब आगे बात करते है. मैं बात ये है के मए नदी पे था और वह फ़कीर बाबा आये थे उनसे बात करने में देर हुई. अब वो रत में आएंगे. तो सब तैयार hi रहे . और गुरुम तुम लोग कब निकलोगे?

भाई अभी जा तो सकते है लेकिन अटैक के लिए हमें भी रत का hi टाइम सही लग रहा है.

देवा – है सही है तो तुम लोग शाम को निकल जाना अपनी तयारी से और कावेरी से बात कर लो वो जहा बोले उससे मिल लेना.

गुरुम – ok मए उनसे बात कर लगा. और हम सब भी अपनी तैयारियां कर लेते है.

देवा – एक बात और चन्नो को जितना हो सके दूर hi रखना और जैसे हमने प्लान किया था. इस बार तुम हैड हो इस टीम के तो सबका ध्यान रखना पावर्स उसे मत करना अपनी स्किल से जितना है तुम लोगो को. मैं एक्शन में शलाका, चन्नो और नागार्जुन होंगे. तुम इन तीनो पे नजर रखोगे. के कही इन के साथ कोई दुर्घटना न हो जाये. जब कोई रास्ता न बचे तो आखिर में तुम इनकी मदद करोगे. और बहोत ज्यादा जरूरी हो तभी पावर्स का उसे करना. जब उसके बिना काम न चले तो. और अगर पावर्स के बिना काम निपटा दो तो बहोत बढ़िया होगा.

गुरुम - मए ध्यान रखुगा देवा. मए एक्शन में नहीं आउगा इन सब को बैकअप दुगा. और अगर ये तीनो मजबूर हो जायेगे तभी मए कुदुगा. वार्ना नहीं.

देवा – गुड़. सो फ्रेंड्स अभी आराम hi करो क्यों की रात हम सबकी खतरनाक होने वाली है. अचानक………….

देवा रूद्र को देखता है जो अब तक मुँह फुलाए बैठा था. तो देवा उसकी पीठ में घुसा मर देता है.

देवा – अबे तुझे क्या हुआ बे ऐसे मुँह में गोलगप्पे भर के क्यों बैठा है. हंस दे सेल आज अपन घूमने जायेगे.

रूद्र – ाजी घंटा……. कहे का घूमने बे?..........

……… सेल मरने जा रहे है तुझे मसखरी सूझ रही है? और तू इसे घूमना कहता है?

देवा – भाई बात समझ जहा तू और नीलम होंगे वो जगह तो साला नरक भी हो तो भी तुझे घंटा फरक पड़ना है तू तो नीलम के साथ हर जगह जन्नत hi महसूस करेगा न. ऐसा hi हल मेरा है पूनम के साथ. अबे pre-honeymoon पैकेज मिल रहा है गधे. और तू मायूस हो रहा है. और दर मत मए हु न?

रूद्र – वह मेरे मिटटी के शेर तू है? अबे तेरे लिए मए हु समझा बात करता है, और एक बात तुझे मालूम है न मेरी पीठ पे कौन बैठा रहता है. सेल तू भाई है इसीलिए पीठ पे घुसा मरने के बाद भी बैठा है वार्ना सोच ले क्या होता?

देवा – ओह्ह्ह माय गोस्सस्सश्ह उन महाशय को तो मए भूल hi गया. देवा ने रूद्र की पीठ सहला दी और सॉरी बोल दिया अंदर बैठा ड्रेगों भी हंस रहा था. जिसकी गुदगुदी रूद्र को फील हुई

रूद्र – अबे हंस क्यों रहा है एक सॉरी तो बोलै है तुझे वो भी घूंसा मरने के बाद. चुप चाप बैठ.

गुरुम – ये आप लोग क्या बात कर रहे है हमें तो समझ नहीं आ रहा?

रूद्र – भाई रहने दे फिर कभी बतायेगे. या तू खुद hi समझ जायेगा. अभी बता दुगा तो तू दर जायेगा बेकार में. अब ये सभा बर्खास्त करे मुझे नीलम के पास जाना है.

शलाका – एक मिनट मुझे कुछ कहना है.

देवा – बोलो शलाका?

शलाका – देव वैसे तो सब बाटे सही है लेकिन एक विल्सन को मर के क्या कर लगे हम उसकी जगह कोई और आ जायेगा न. और फिर विल्सन जैसे तो कई सरे है एना की गैंग में.

देवा – देखो शलाका मए ये नहीं कह रहा की तुम गलत सोच रही हो लेकिन शुरुआत तो करनी पड़ेगी न. और फिर वक़्त आने पर. उन सब का खत्म होगा अभी तुम लोग एना को सिर्फ जगाने जा रहे हो के उसके बाप भी है, उसे इस ग़लतफ़हमी से निकलने जा रहे हो के उसे कोई ख़तम नहीं कर सकता चोट नहीं पंहुचा सकता, तुम लोगो की दी हुई चोट से उसे भी लगेगा के उसे भी चोट पहुंचने वाले मौजूद है.

शलाका – इससे तो वो सतर्क हो जायेगा और हमारा काम मुश्किल हो जायेगा.

देवा – नहीं मुश्किल नहीं आसान होगा. क्यों की उसे अब ऐसी ऐसी चोट पहुंचेगी के वो बौखला जायेगा और उसी बौखलाहट का नतीजा उसकी बर्बादी होगी वो भी जल्द से जल्द.

शलाका – ok आज उसे बता hi देंगे . के लड़कियों को खिलौना समझना कितना महंगा पद सकता है.

देवा – गुड़ अब आराम करो. सब, चल भाई रूद्र?

रूद्र – कहा चल? मए कही नहीं चल रहा मए तो जा रहा हु अपनी नीलम के पास.

देवा – अबे खच्चर मए भी वही चलने को बोल रहा हु. मए भी पूनम से मिल लगा न. चल बैठ गाड़ी में.

रूद्र और देवा दोनों पूनम के घर चल पड़ते है. वो जैसे hi पूनम के घर पहुंच कर गाड़ी से उतारते है तो उन्हें घर के बहार नीलम पूनम और सुधा नजर आती है तीनो तैयार हो कर कही जा रही थी.

रूद्र – अरे नीलम ये भाभी लोग के साथ कहा जा रही हो ?

नीलम अरे वो हम लोग तो वैद जी के घर जा रहे है उनके यहाँ उनके बेटे की सगाई है तो बस होकर आते है

रूद्र – धत्त तेरे की मेरा तो दिन hi ख़राब है.

उसकी बात सुन के पूनम और सुधा हसने लगती है

सुधा – ारे देवर जी अगर आपका इतना मन है तो नीलम को हम यही छोड़ जाते है

रूद्र खुश हो जाता है और कुछ कहने hi वाला था के नीलम. रूद्र को देख के……..

नीलम - सोचना भी मत.

नीलम फिर सुधा से – कोई जरुरत नहीं मुझे छोड़ के जाने की और इनका कोई मन वन नहीं. मए क्यों अपना प्रोग्राम बिगाड़ू. हहह बड़े आये मन वाले.

रूद्र का मुँह लटक जाता है तो देवा करीब आ जाता है

देवा – अरे नीलम कुछ ऐसा इलाज सोचो की इसका दिल भी न टूटे और तुम जा भी सको

सुधा - ऐसे इलाज में तो इन्हे समय लग जायेगा जब तक नीलम इन्हे खुश कर के हमारे साथ चलना चाहेगी तब तक तो हम हो भी आएंगे क्यों नीलम?

नीलम भी समझ जाती है और शर्मा जाती है.

देवा – अरे भाभी आप भी क्या सोच लेती है. मेरे कहने का मतलब था की आप लोगो को जाना hi है और वैद जी का घर भी दूर है तो आप लोग जायेगे वह थोड़ा रुकेंगे फिर आएंगे इसमें तो काफी टाइम लग जायेगा न तो रूद्र आप लोगो को गाड़ी से ले जायेगा इससे ये नीलम के साथ भी रह लेगा वह ये दोनों अलग बैठ कर समय बिताएंगे आप लोग निपटा लेना वैद जी के यहाँ सगाई प्रोग्राम.

सुधा – है ये सही है.

रूद्र – पर भाई तू अकेला पद जायेगा तू भी चल न साथ में

देवा – अरे यार वैद जी क्या सोचेंगे इतने लोग आ गए. वैसे भी बाबू जी वह के लिए निकल चुके है गाँव के दूसरे बुजुर्गो के साथ. वार्ना तो मेरा जाना hi तय था. पर तू जा मेरी चिंता छोड़.

पूनम – तो मए नहीं जा रही

देवा – पूनम ऐसा मत करो देखो सुधा भाभी का मूड ऑफ हो जायेगा न तुम जाओ और जल्दी आ जाना मए इंतजार करता हु न.

रूद्र – सही है भाई हम लोग जल्दी आते है हमें कौन सी पूरी सगाई करवानी है . जायेगे व्यव्हार देंगे और आ जायेगे जल्दी. फिर तूने hi कहा बाबू जी तो है hi अपनी तरफ से वह और वो तो पूरी सगाई के बाद hi आएंगे वैसे भी वो सरपंच भी है आधे में तो आएंगे नहीं.

फिर सुधा पूनम नीलम और रूद्र गाड़ी में बैठ कर निकल जाते है तो देवा पूनम के घर के अंदर जाता है.

नेक्स्ट अपडेट - 122
 
भाई लोग अभी मए अपनी HI स्टोरी को रीड कर रहा था अपडेट वाइज तो हमें ये महसूस हुआ के 121 अपडेट हो जाने पर भी मेरी तरफ से आप लोगो को कोई सरप्राइज नहीं मिला है तो सोचा क्यों न आप लोगो को अडवांटुरे ट्रिप से पहले एक सरप्राइज दे दिया जाये. जिससे आप लोग खुश भी हो और एडवेंचर ट्रिप के बाद वापस आने के लिए एक्सीटेंड भी. अब ये ऐसा क्या सरप्राइज है? ये आप लोगो को नई अपडेट में पता चल HI जायेगा. सो गाइस रेडी फॉर ा एक्सिटिंग सरप्राइज. बस कल तक का इंतजार क्युकी अभी वो सरप्राइज रेडी हो रहा है आप लोगो के लिए. तब तक बाकि रीडर्स के रेविएवस का भी इंतजार रहेगा हमें.

सी यू टुमारो BYE
 
अपडेट – 122

देवा - अरे कोई है क्या घर में?

पद्मा किचन से निकल के आयी - अरे देवा तू आया है, लेकिन सब लोग तो चली गयी अभी.

देवा पद्मा को देखता रह जाता है वो इस वक़्त पसीने से भीगी हुई थी साड़ी का पल्लू कमर में खोंस रखा था जिससे उसकी गोरी चिकनी कमर साफ नजर आ रही थी और उसकी नाभि भी.

पद्मा के माथे पे पसीना था जिससे उसके बाल भी कुछ बिखरे हुए थे. वो शायद आता गूथ रही थी. क्यों की उसके हाथो में आता लगा हुआ था. देवा उसके रूप में खो सा गया.

पद्मा - अरे क्या हुआ कहा खो गया? मैने कुछ कहा अभी.

देवा – है…. वो….. जनता हु काकी रूद्र hi ले गया उन्हें गाड़ी से. अभी आ जाएगी जल्दी.

पद्मा – अच्छा हुआ चल तू बैठ मए आती हु नाश्ता करेगा क्या?

देवा – नहीं काकी नाश्ता तो कर के आया हु.

फिर पद्मा किचन में चली जाती है और देवा टीवी चालू कर के बैठ जाता है. लेकिन उसकी आँखों के सामने पद्मा का वही पसीने में भीगा हुआ रूप नजर आ रहा था और वो अपने सपनो में उसी को देख रहा था. कुछ hi मिनट हुए थे की

पद्मा की आवाज देवा के कानो में पड़ती है – आआआआअह्हह्ह्ह्हह

aaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiuuuuuiiiiiiiimmmmmmmaaaaaaaaaaaa

देवा दौड़ता हुआ अंदर जाता है तो देखता है के पद्मा आंखे बंद किये यहाँ वह हाथ मर रही थी और तड़प रही थी. वो इस समय पूरी लाल हो चुकी थी क्यों की उसके ऊपर सर से पाँव तक इस समय पीसी हुई लाल मिर्च गिरी हुई थी.

देवा – हे भगवन काकी ये क्या हुआ?

पद्मा हाथ लहराती हुई देवा को ढूंढने लगती है और देवा से टकरा जाती है वो चीख रही थी रो रही थी. क्यों की उसकी आंखे hi नहीं पूरा बदन जल रहा था एक तो पसीना था hi उस पर लाल मिर्च पूरे शरीर से चिपकी हुई.

पद्मा - देवा कुछ कर ये मिर्च मुझे मर डालेगी पूरा डब्बा आआआह्ह्ह्ह मेरे ऊपर पलट गया ऊपर से उतर रही थी mae.uuuhhhhhhhhhhh uiiiiiiiiiiiiimmmmmaaaa पूरा शरीर जल रहा है देवा कुछ कर नाआआआ.

देवा तुरंत पद्मा को गॉड में उठा के घर के अंदर बने बाथरूम में ले जाता है और उसकी साड़ी को खिंच कर उतर फेंकता है .

पद्मा - ये क्या कर रहा है देवा?

देवा – कुछ मत कहना काकी वार्ना बदन को खुजला खुजला के अपनी हालत बिगड़ लोगी चुप चाप कड़ी रहो और खुद को शांत करने की कोशिश करो. तुम्हरा बप नहीं बढ़ना चाहिए ऐसे चिल्लोगी तो बप हाई होगा और तुम्हे गर्मी और जलन ज्यादा होगी. बस चुप चाप कड़ी रहो. खुद को शांत रखने की कोशिश करो अपने बदन को एक डैम ढीला छोड़ दो. कही और ध्यान लगाओ इस वक़्त, कुछ भी सोचो कुछ भी और सोचो बस इस पीड़ा की तरफ से ध्यान हटाओ. और है आंखे मत खोलना जब तक मए न कहु.

देवा आगे बाद के शावर चालू कर देता है और पद्मा को शावर के नीचे खड़ा कर देता है. और अपने हाथो से उसका चेहरा नीचे झुका देता है थोड़ा आगे करके जिससे सर पे गिरी मिर्ची आँखों में न आजाये. फिर दूसरा नल चालू कर के बाल्टी भरने लगता है. और उसमे से पानी उठा उठा के पद्मा की गार्डन पे डालने लगता है और उसकी गार्डन और पीठ को मसलने लगता है. लेकिन पद्मा की जलन काम होने का नाम hi नहीं ले रही थी. कोई 10 मिनट बाद……..

देवा – काकी अब धीरे से आँखे खोलने की कोशिश करो.

जैसे hi पद्मा आँखे खोलने लगती है वो फिर उछाल उछाल के नाचने लगती है

पद्मा – देवा आँखे भी जल रही है मए क्या करू मुझे कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा है.

देवा - अब मए जो करू करने देना.

इतना कह कर देवा पद्मा का ब्लाउज खोलने लगता है तो पद्मा एक डैम शांत हो जाती है. लेकिन देवा के हाथ पकड़ लेती है

पद्मा - नहीं देवा ये सही नहीं है

देवा – हम इस वक़्त वो नहीं कर रहे जो सही नहीं है. इस वक़्त मए बस आपका इलाज कर रहा हु एक डॉ. की तरह और डॉ, के लिए मरीज का इलाज गलत नहीं होता. आप हाथ नीचे कर लो और अब कुछ मत कहना करो नीचे हाथ या मए जाता हु आप शरमाते रहो खुद hi कर लो जो करना है. फिर मुझे मत कहना के मए मुसीबत में छोड़ गया.

पद्मा अपने हाथ नीचे कर लेती है. लेकिन जलन के मरे उसका बुरा हल था. तो वो रो रही थी चिल्ला रही थी

देवा एक एक कर के उसके ब्लाउज के हुक खोल देता है अंदर पद्मा ने ब्लैक ब्रा पहनी हुई थी जो की अब तक लाल पड़ी हुई थी और उसकी गोरी गोरी चूचिया भी जो ब्रा से बहार झांक रही थी पूरी लाल थी.

देवा - पूरा बदन तो लाल पड़ा है आराम कहा से मिलेगा इतना कह कर देवा पद्मा के पेटीकोट का नाडा खिंच देता है अब पद्मा देवा के सामने एक ब्रा और पेंटी में कड़ी थी उसका ध्यान अब अपनी हालत पे ज्यादा जा रहा था वो शर्म से गाड़ी जा रही थी तभी देवा हाथ पीछे ले जा कर पद्मा की ब्रा खोल देता है और फिर एक झटके में नीचे बैठ कर उसकी पेंटी भी खिंच के पैरो तक ले आता है जिससे पद्मा एक झटके में बैठ जाती है

पद्मा - नहीं देवा ऐसे मत कर मए मर जोगी तू जा यहाँ से.

देवा – आप उठ कर कड़ी हो जाइये आपको नजर नहीं आ रहा है कह फिसल गयी तो सर फोड़ लेगी अपना . पूरे बदन पे मिर्च लगी है आपको बहोत तकलीफ होगी जल्दी कड़ी हो जाइये. अभी जो पानी सर पे डाला था वो पेंटी के अंदर तक लाल मिर्च को ले गया है वह भी जलन होने लगेगी फिर करती रहना खुद hi अपना इलाज.

पद्मा नहीं उठती तो देवा उसके कंधो को पकड़ के उसे उठा देता है वो भी धीरे धीरे कड़ी हो जाती है अब पद्मा लाल मिर्च से पता हुआ बदन देवा के सामने था देवा उस पर अभी ध्यान नहीं देता वो बस पद्मा को शावर के नीचे खड़ा कर देता है. जिससे उसके सर की मिर्च बहन लगती है.

देवा – अब थोड़ी देर आँख मत खोलना सर की मिर्च बाह कर नीचे आ रही है. फिर देवा भी अपनी शर्ट निकल देता है और पद्मा के चारो तरफ घूम घूम कर उसे रगड़ के साफ़ करने लगता है. इतने में उसकी नजर वही रखे शैम्पू की बोतल पे जाती है तो देवा उसे उठा कर पद्मा के सर पे दाल देता है और शावर बंद कर के उसकी छोटी खोल देता है. और फिर बोतल को दबाते हुए पद्मा के पूरे बदन पे शैम्पू गिराने लगता है.

और उसके बाद वो बोतल को साइड में रख कर पद्मा के सर को धोने लगता है. फिर देवा के हाथ नीचे आते है और पद्मा की गार्डन को मसलते हुए वो पद्मा की पीठ को रगड़ने लगता है इस वक़्त देवा पद्मा के आगे खड़ा था जिससे एक तरह से वो पद्मा को गले hi लगाए हुए उसकी पीठ को मसल रहा था. और उसका सीना पद्मा की चुशियो में धसा हुआ था और पद्मा की चूचिया देवा के सीने से दबी हुई थी अब देवा अपने हाथ आगे लेकर पद्मा के सीने को रगड़ते हुए उसकी चूचिया पकड़ लेता है.

पद्मा – sssssssseeeeeeeeeeaaaaaaaaaahhhhh

देवा के होठो पे मुस्कान आ जाती है लेकिन वो अपने हाथ नहीं रोकता बस जोर जोर से पद्मा की चूचिया दबाने लगता है और फिर वो उन्हें छोड़ कर पद्मा का पेट सहलाते हुए साफ़ करने लगता है.

पद्मा अपने दांतो में अपने होठो को दबाये सिसक रही थी देवा भी समझ रहा था, लेकिन ये वक़्त कुछ और hi था. इसीलिए वो उत्तेजित नहीं होना चाहता था.

देवा पद्मा के पेट को साफ करके उसे फिर से गले लगा लेता है और उसकी कमर को पीछे से रगड़ने लगता है जिससे पद्मा फिर देवा से चिपक जाती है उसे अपनी नंगी बुर पे देवा का लुंड चुभ रहा था. तो वो मन hi मन मुस्कराने भी लगती है लेकिन न चाहते हुए भी उसकी सिकरिया निकल hi रही थी. थोड़ी देर बाद उसे लगता है देवा ने उसे छोड़ दिया है.

देवा अपने हाथ धो कर साफ करता है और अपने हाथो में और शैम्पू लेकर पद्मा के सामने बैठ जाता है और सीधा hi उसकी छूट को रगड़ने लगता है .

पद्मा – ssssssssssseeeeeeeaaaaahhhhhhhdevvvaaaaaa वह nahiiiiiiiiiiaaaaaaahhhhh उईईईईईमएएआनहि न देवआ छोड़ उसे मए कर आआआह्ह्ह्ह कर लगी.

लेकिन देवा बड़ी तेजी से पद्मा की छूट को रगड़ रहा था पूरे हाथ में भर के उसकी मिडिल फिंगे पद्मा की छूट की लकीर पे hi चल रही थी तो देवा को अहसास हो जाता है के पद्मा की छूट पानी छोड़ रही है. देवा सिर्फ अपना हाथ तेजी से ऊपर नीचे कर के छूट को बहार से hi साफ कर रहा था इतने में पद्मा देवा का हाथ हटाने के लिए उसका हाथ दबा देती है

पद्मा – देवा छोड़ न इसे मत कर आआआआह्ह्ह्हह्ह
 
अपडेट – 123

देवा – अरे काकी अब कहे की शर्म इतनी देर से सब कुछ तो देख hi रहा हु मए नहीं करुगा तो दिक्कत होगी तुम्हे. छोडो मेरा हाथ और केरने दो जो मए कर रहा हु.

पद्मा नहीं देवा uuuuuuuuuuuuhhhhhhh छोड़ दे न मुझे मत कर aaaaaahhhhhhhhhhuuuuuuuuffffff ये क्याआआआ.

हुआ ये के इस खींचातानी में पद्मा ने कुछ ज्यादा जोर लगाया तो देवा की मिडिल फिंगर सीधे उसकी बुर में hi घुस गयी थी जिससे वो चौंक गयी

पद्मा - ये kyaaaaaaaaaa किया देवाआआआ

देवा – मए तो नहीं करना चाहता था पर आपने इतना जोर लगाया के ऐसा हो गया चलो अच्छा hi है अब अंदर से भी साफ कर दुगा.

पद्मा - बदमाश अंदर कोई मिर्ची नहीं लगी मुझे वो तो बहार से hi बस………

देवा खड़ा हो गया अब भी उसकी ऊँगली पद्मा की झांटो से भरी हुई बुर में hi थी. जिसे वो आगे पीछे कर रहा था. देवा पद्मा के कण के पास आ कर, मिर्ची नहीं लगी लेकिन जल तो ये भी रही है न मेरी ऊँगली मुझे बता रही है के ये अंदर से कितनी जल रही है. और जब मेरी ऊँगली अंदर चली hi गयी है तो अब इसकी जलन शांत कर के hi निकलेगी काकी

और देवा पद्मा के डूब्स दबाने लगता है और उसकी गार्डन पे चुम लेता है जिससे पद्मा न चाहते हुए भी देवा से लिपट जाती है. और देवा की ऊँगली के साथ अपनी गांड को हलके हलके आगे पीछे करने लगती है

पद्मा – sssssssssssseeeeeeeeaaaaaaaahhhhh devaaaaaaaaaaa बस कर aaaaaaahhhhhhhhhhhh uiiiiiiiiiiiaaaaaaaayyyyaaaaaaaa ये सही नहीं देवाआआआ छोड़ अब बहोत हो गयी सफाई देख मेरी आंख भी खुल रही है अब

देवा बिना ऊँगली निकले बिना बूब्स से हाथ हटाए पद्मा की तरफ देखता है तो पद्मा उससे नजर मिलते hi मुस्कराने लगती है देवा भी मुस्करा के अपनी ऊँगली को तेजी से आगे पीछे करने लगता है

पद्मा - aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाऊऊऊऊह्ह्हह्हह्हूफ्फ ffffffffffffaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiaaaaaaaaddddeeevvvvaaaaaaaaaaa आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नहीं naaaaaaaaaahhhhhhh छोड़ मुझे अब बस कर न

देवा छूट में ऊँगली डेल hi नीचे बैठ कर उसकी गांड को अपने दूसरे हाथ से रगड़ ने लगता है फिर पानी उठा के अपने उस हाथ पे डालता है जो ऊँगली छूट में खलबली मचा रही थी. देवा वह से शैम्पू साफ कर देता है पद्मा अब दीवाल से पीठ सताए गहरी साँस ले रही थी उसकी आँखे बंद थी तभी देवा अपनी ऊँगली निकल के झटके से अपना मुँह रख देता है

पद्मा का हैरानी के मरे बुरा हाल हो जाता है वो देवा सर पकड़ के सिसकते हुए पीछे करने लगती है लेकिन देवा बस पद्मा की छूट को चूस रहा था. चाट रहा था तभी पद्मा को महसूस होता है के देवा ने अपनी जबान पद्मा की दहकती छूट में दाल दी हो पद्मा एक डैम से देवा का सर अपनी छूट पे दबा देती है.

पद्मा- ऊऊओह्ह्ह्हह्हहस्सस्सस्सीीीीे देवाआआआ ये क्या कर दिया तूने aaaaaaaaaahhhhhhhhhssssssssssseeeeeeeeee जोर से चूस इसे बहोत ज्यादा जलन हो रही है चूस ले पूरी जलन अअअअअ ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhoooooooooohhhhhhhhhhhhhsssssseeeeeee aaaaaaaaaaahhhhhdevvvvvvvv हैट जा हैट जा हैट जा मए छूटने आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हस्स्स्सस्स्स्सीीीी

और पद्मा झाड़ जाती है लेकिन देवा नहीं हत्ता वो पद्मा की छूट को जोर जोर से चूसने लगता है और उसकी छूट का सारा पानी पीने के बाद उसकी छूट को अंदर तक चाट कर साफ़ कर देता है और भरी हुई बाल्टी उठा के पद्मा के ऊपर दाल देता है. पद्मा को रहत महसूस होती है.

देवा पद्मा का चेहरा उठा के उसके होठो को चुम लेता है तो पद्मा शर्मा जाती है.

देवा – तो और कोई सेवा करनी है?

पद्मा – बदमाश तुझे तो मए बाद में देख लगी अब जा यहाँ से मए आती हु

वो देवा को बाथरूम के बहार निकल कर एक बार फिर से नहाती है साबुन लगा के. तब कही उसके बदन को शांति मिलती है लेकिन जलन अब भी हो hi रही थी.

पद्मा के पास वह कपडे तो नहीं थे. तो वो देवा को आवाज़ लगाती है.

देवा – क्या हुआ काकी जलन फिर से होने लगी क्या? बुझा दू?

पद्मा - बेशरम कोई जलन नहीं मेरे कमरे से कोई साड़ी ला दे न

देवा – काकी अब मजाक नहीं सीरियस बोल रहा हु ऐसे कपडे मत पहनो पहले अंदर चलो पूरे बदन पे कुछ लगा लो रहत मिलेगी वार्ना फिर से पसीना होगा तो जलन होने लगेगी और खुजलाने से जखम हो जायेगे.

पद्मा – वो तो ठीक है लेकिन मए ऐसे कैसे

देवा – ओफ्फो तुम भी न देखो कैसे आना है

इतना कह कर देवा झटके से पूरा दरवाजा खोल देता है. और सामने कड़ी नंगी पद्मा को गॉड में उठा लेता है

पद्मा - अरे अरे ये क्या कर रहा है मुझे नीचे उतर न.

देवा – पद्मा की आँखों में देखते हुए सच में नीचे उतर दू फिर मत कहना के मए नंगी हु.

पद्मा शर्मा के आँखे बंद कर लेती है और मुस्कराने लगती है और अपना चेहरा देवा के सीने में छुपा लेती है

देवा उसे लेकर सीधा उसके कमरे में जाता है और उसे बीएड पे लिटा देता है.

पद्मा वही पड़ी एक चादर उठा के खुद को ढँक लेती है

देवा – अरे काकी क्या छुपा रही हो जो मए कितनी देर से देख चूका हु. अपने हाथो से महसूस कर चुक्का हु. चुम चूका हु? अब शर्माना छोड़ दो काकी मन के वो वक़्त की जरुरत थी पर इस तरह मत करो अब चादर हटा के लेट जाओ.

पद्मा घबरा के - क्यों?

देवा – डालना है

पद्मा - देवा?

देवा – अरे काकी पाउडर डालना है तुम्हरे पूरे बदन पर ये ठण्ड ठंडा वाला. समझा करो.

फिर देवा खुद hi चादर उठा के पद्मा के पूरे बदन पे पाउडर दाल के सहलाने लगता है जिससे उसे बहोत रहत मिलती है. और पूरा बदन यु ठंडा लगने लगतरा है मनो बर्फ गिरा दी गयी हो पूरे बदन पर. फिर देवा पद्मा को खड़े होने को कहता है पद्मा बिना कुछ कहे कड़ी हो जाती है तो देवा उसे पीछे की तरफ से भी वैसे hi प्यार से सहलाते हुए पाउडर लगा देता है.

देवा – काकी अब ब्रा पेंटी मत पहनना कोई निघ्त्य दाल लो जिससे पाउडर साफ न हो जाये. फिर बहार आ जाओ. और है अपने नीचे के बाल आज hi साफ़ कर के वह भी यही पाउडर लगा लेना अभी तो मैने बालो के ऊपर hi लगाया है. बल साफ करने के बाद लगाओगी तो ज्यादा आराम मिलेगा. वार्ना वह जलन इतनी जल्दी ख़तम नहीं होगी.

पदमा गार्डन झुकाये देवा की बाटे सुन भी रही थी, मुस्करा भी रही थी, और शर्मा भी रही थी.

देवा बहार निकल जाता है और पद्मा उसे जाते हुए देखती रह जाती है. उसकी आँखों में हलके से आंसू भी थे और होठो पे मुस्कान भी . मन में दर भी था और दिल में कही प्यार भी.

थोड़ी देर बाद पद्मा बहार आती है और देवा को देख कर शर्माने लगती है.

देवा - अब क्या हुआ. शर्मा क्यों रही हो?

पद्मा – देवा तूने जो आज किया शर्म उस वजह से है लेकिन मेरा रोम रोम तुझे धन्यवाद् देना चाहता है.

देवा - पता है और मैने तुम्हरे रोम रोम का धन्यवाद् ले भी लिए चूस के अब चलो बहार आओ मुझे कुछ और भी काम है.
 
अपडेट – 124

पद्मा - अभी आयी लेकिन किचन भी तो साफ करना है थोड़ी देर लगेगी.

पद्मा किचन में जाती है तो देखती है सब साफ़ सुथरा पड़ा है कही कोई निशान नहीं

वो वापस आकर कमर पे हाथ रख कर देवा को घूरने लगती है

देवा – अरे क्या हुआ?

पद्मा - ये सफाई क्यों की तुमने ? मए कर लेती न?

देवा – जब मए तुम्हे साफ कर सकता हु तो किचन में क्या बुराई है. वैसे भी तुम नाहा रही थी तभी कर दी थी मैने.

पद्मा आगे बाद के देवा के गाल पे चुम लेती है – कितना करेगा रे हमारे लिए.

देवा पद्मा का चेहरा हाथो में ले कर - तुम लोग मेरी जिम्मेदारी हो. और मए उस से कभी पीछे नहीं हटूगा इस घर में रहने वालो को जिस चीज की जरुरत होगी हर जरुरत मए पूरी करुगा

पद्मा - हर जरुरत ?..........सच्ची?

देवा भी समझ जाता है - है तुम कह के तो देखो, और अब तो कहने में शर्म भी नहीं आणि चाहिए. जब कहोगी तब पूरी करुगा.

पद्मा - देखेंगे अभी मुझे जाने दे मए कुछ खाने को लती हु.

देवा पद्मा को कंधो से पकड़ के उसे कुर्सी पे बिठा देता है.

पद्मा – अरे क्या कर रहा है जाने दे न अभी.

देवा – नहीं अभी थोड़ी देर रुको मुझे अपना काम करने दो.

पद्मा – सब तो कर लिया अब और क्या करने वाले हो?

देवा – जो भी करुगा तुम्हे तो मजा hi आएगा चिंता मत करो

पद्मा – मुझे मालूम है तू करेगा तो मजा तो बहोत आएगा.

देवा – क्या?

पद्मा कुछ नहीं तू करना क्या चाहता है?

देवा एक कटोरी ले कर उस के सामने कर देता है

देवा – ये आपके चेहरे पे लगाना है , ‘

पद्मा - क्यों? और ये है क्या?

देवा – अरे यार एक तो सवाल बहोत करती हो चुप चाप बैठो और मुझे ये लेप लगाने दो.

इतना कह कर देवा , पद्मा को कुर्सी से टिका देता है अरु खुद खड़ा हो जाता है.

देवा लेप ऊँगली में ले कर पद्मा के चेहरे पे लगाने लगता है और लेप लगते हुए – इससे आप के चेहरे पे आराम मिलेगा. चेहरे की स्किन बहोत नाजुक होती है न इससे बहोत ज्यादा ठंडक मिलेगी और जब ये लेप धो लोगी तो पता भी नहीं चलेगा के चेहरे पे कुछ हुआ भी था. एक डैम साडी जलन हमेशा के लिए छू हो जाएगी.

देवा चेहरे पे लेप लगा चुक्का तो अब उसका हाथ गार्डन पे चलने लगा इधर पद्मा की सांसे फिर से भरी होने लगी जिसका सबूत था उसकी उठती गिरती चूचिया.

पद्मा - बस्सस देवा रुक जा यही पर मत कर इतना मुझे तंग.

देवा – चुप चाप बैठी रहो आप बोलना मत एक भी शब्द.

जहा तक निघ्त्य का गाला खुला था देवा वह तक लेप लगता है. यानि बूब्स के ऊपरी हिस्से तक. उसके बाद वो पद्मा को उठा कर खड़ा कर देता है और उसकी गार्डन से लेकर जितनी पीठ निघ्त्य के बहार थी वह तक लेप लगा देता है.

फिर वो पद्मा को वापस कुर्सी पे बिठा देता है.

देवा – अब आप कुछ देर तक अपनी आंखे बंद रखो और आराम करो फिर देखना चमत्कार ये लगाया तो सिर्फ चेहरे पे है लेकिन इसका असर पूरे शरीर पे होगा पूरा शरीर एक डैम ठंडा लगने लगेगा और तजा भी. बस जब तक मए न कहु आँखे मत खोलना.

पद्मा – ठीक है अब न तो कुछ बोलूगी न आंखे खोलूँगी जब तक तू न कह दे.

इधर पद्मा के आंख बंद करते hi देवा उसके सामने खड़ा हो कर अपने दोनों हाथ आगे करता आहे और उसके जिसमे से कुछ इंच दूर से hi सर से लेकर पाँव तक धीरे धीरे अपने हाथ नीच लता है जैसे जैसे देवा के हाथ चल रहे थे एक सफ़ेद बर्फ सी पद्मा के जिसमे में समाती जा रही थी. देवा उसके पैरो तक आकर रुक जाता आहे. ऐसा वो तीन बार करता है. पद्मा को इतना सुकून मिल रहा था के उस के चेहरे पे आनंद झलकने लगता है.

थोड़ी देर के बाद देवा पद्मा के सामने वाली कुर्सी पे बैठ जाता है. और वही से बड़े प्यार से आवाज लगता है.

पद्मा……. ो पद्मा……. अब आंखे खोलो और मेरी तरफ देखो.

पद्मा धीरे से आंखे खोल कर देवा को देखती है तो शर्मा जाती है.

देवा – क्या हुआ बोलो कैसा लग रहा है अब.

पद्मा – सब कुछ बहोत अच्छा लग रहा है जी..

एक डैम हल्का सा महसूस हो रहा है. एक ठंडक सी आ गयी पूरे बदन में. और दिल में आज ख़ुशी बहोत महसूस हो रही है.

देवा हंस के - दिल में? लेकिन लेप तो मैने सिर्फ चेहरे पे लगाया था दिल में परिवर्तन कैसे आ गया?

पद्मा - अभी जो आपने मुझे मेरा नाम ले कर इतने प्यार से बुलाया उस वजह से जी…

आप जानते है , पूनम के बापू के जाने के बाद आज तक मुझे किसी ने इस तरह नहीं पुकारा जिस पुकार में इतना अपनापन , इतना अधिकार और ीनता प्यार हो. लेकिन आज आपकी आवाज़ में, पुकार में वो सब मुझे महसूस हुआ . इसीलिए दिल में बहोत ज्यादा ख़ुशी महसूस हो रही है.

क्या मए आज आपसे कुछ मांग सकती हु?

देवा – मानगो न पद्मा मए तो तरस रहा हु के तुम कुछ मानगो मुझसे.

पद्मा मुस्क्रत हुई नीचे देखने लगती है. – मए चाहती हु. के आज के बाद आप मुझे अकेले में हमेशा ऐसे hi बुलाएंगे , पूनम के बापू की तरह, और मए भी आपको अकेले में आपके नाम से नहीं बुलाऊंगी बल्कि आपको वही इज्जत दूगी.

देवा उठकर पद्मा के करीब जाता है और उसके कंधे पकड़ के – सच में मुझे अपनी इज्जत डौगी? अगर तुम इज्जत डौगी तो मए तो तुम्हारी इज्जत ले hi लगा. अच्छा है मुझे तुम्हारी इज्जत लूटनी नहीं पड़ेगी, तो कब दे रही हो अपनी इज्जत मुझे ?

पद्मा बहोत ज्यादा शर्मा जाती है और अपने हाथो से अपना चेहरा ढँक लेती है. देवा उसके हाथो को चुम के उसके हाथ चेहरे से हटा लेता है. और पद्मा का चेहरा अपने हाथो में भर के अपने होठ उसके होठो पे रख के चुम लेता है. लेकिन बिना चूसे कुछ hi पालो में उन तपते हुए होठ को देवा छोड़ कर खुद दूर हो जाता है. पद्मा भी उस मदहोशी से निकल आती है और देवा को उम्मीद भरी नजरो से देखने लगती है.

देवा घडी देखते हुए – अरे बाप रे इतनी देर हो गयी? एक काम करो अब ये लेप धो लो और मए चला अपने घर वो लोग बस आते hi होंगे.

……तो आने दो मए क्या उनसे डर्टी हु? ….. पद्मा ने अपने दोनों हाथ कमर पे रख के देवा को देखते हुए कहा.

देवा – अरे जनता हु हिन्द की शेरनी तुम किसी से नहीं डर्टी लेकिन तुम अभी ये लेप धो लो और साड़ी पहन लो ये निघ्त्य उतर दो. वार्ना 100 सवाल होंगे. और मए भी जा रहा हु घर मुझे काम है. ok. फिर मिलेंगे जल्द hi और वो भी बहोत देर के लिए.

इतना कह कर देवा पद्मा को आँख मर देता है तो पद्मा फिर से शर्माने लगती है. देवा वह से निकल जाता है क्यों की उसे अंदाजा हो गया था के रूद्र की गाड़ी रस्ते में hi है और वो लोग कोई 15-20 मिनट में पहुंचने वाले है.

नेक्स्ट अपडेट - 125
 
Back
Top