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#202.
गुप्त द्वार: (9 दिन पहले...... 13.01.02, रविवार, सीनोर राज्य की सीमा, मायावन, अराका द्वीप)
अलबर्ट टेरोसोर से बचने के बाद एक सूखे कुंए में जा गिरा था, जहां मौजूद एक बिल्ली जैसी देवी वाली प्रतिमा के हाथ में एक सुनहरी धातु का पात्र था।
अलबर्ट ने इस पात्र में मौजूद दिव्य जल को पीकर, देवी के हाथ में पहना ब्रेसलेट भी उतारकर अपने हाथ में पहन लिया था।
पर जब यह सब करने के बाद भी अलबर्ट के शरीर में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो निराश हो अलबर्ट उस सूखे कुंए से निकलने का रास्ता ढूंढने लगा।
पर आज एक दिन बीत जाने के बाद भी, अलबर्ट उस सूखे कुंए से निकलने का रास्ता ढूंढ नहीं पाया था।
पर आश्चर्य की बात थी, कि एक दिन बीत जाने के बाद भी अलबर्ट को ना तो भूख महसूस हो रही थी और ना ही प्यास। उल्टा अलबर्ट इस समय अपने आपको बहुत तरोताजा महसूस कर रहा था।
“अगर यह गुफा किसी ने बनाई है, तो इस गुफा में आता-जाता तो जरुर होगा। इसका मतलब कि इस गुफा में कहीं ना कहीं कोई गुप्त मार्ग अवश्य होगा?" यह सोच एक बार फिर अलबर्ट, जोश के साथ गुफा की प्रत्येक वस्तु को ध्यान से देखने लगा।
पहले अलबर्ट ने सभी अर्द्धचंद्राकार पत्थरों को ध्यान से देखा, जिसमें से निकलकर महीन पानी के फव्वारे गिर रहे थे। पर अलबर्ट को उसमें कुछ भी खास नजर नहीं आया।
अब अलबर्ट वापस देवी की प्रतिमा के आगे आकर खड़ा हो गया। अलबर्ट की सूक्ष्म निगाहें देवी की मूर्ति को ध्यान से देखने लगीं।
तभी अलबर्ट की नजर उस पत्थर पर जाकर टिक गई, जिस पर देवी की मूर्ति खड़ी थी। उस पत्थर और जमीन के बीच अलबर्ट को बहुत बारीक सा रिक्त स्थान दिखाई दिया।
अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान को देख देवी की मूर्ति को धीरे से हिलाया। अलबर्ट के हिलाते ही देवी की प्रतिमा, अपने स्थान पर घूम गई और एक तेज गड़गड़ाहट के साथ प्रतिमा के सामने की ओर, जमीन में एक रिक्त स्थान दिखाई देने लगा।
अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान पर झांककर देखा, परंतु अंदर अत्यंत अंधेरा होने की वजह से, अलबर्ट को कुछ दिखाई नहीं दिया।
अब अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान में अपना पैर लटकाकर देखा, तो अलबर्ट को अहसास हुआ कि नीचे कुछ सीढ़ियां बनी हैं। अलबर्ट अब उन सीढ़ियों के द्वारा नीचे की ओर उतरने लगा।
“पहले से ही कुएं में था, पता नहीं अब ये सीढ़ियां मुझे पाताल में ले जा रहीं हैं क्या? अलबर्ट मन ही मन बड़बड़ाया और अंधेरे में टटोलते हुए सीढ़ियां उतरने लगा।
लगभग 20 सीढ़ियां उतरने के बाद अलबर्ट को कुछ दूर एक धीमी सी रोशनी दिखाई दी।
"लगता है कि यह स्थान सिर्फ बिल्लियों के लिये ही बनाया गया है, क्यों कि बिल्लियां ही इतने अंधेरे में चल सकती हैं। यह सोच अलबर्ट किसी तरह से टटोलते हुए, उस धीमी रोशनी की ओर बढ़ने लगा।
कुछ ही देर में पत्थरों से टकराते हुए, अलबर्ट किसी तरह से उस रोशनी तक पहुंच गया।
वह रोशनी एक कमरे से आ रही थी, जिसकी चारो ओर की दीवारों में 4 दरवाजे बने थे। वह कमरा बिल्कुल खाली था।
एक दरवाजे से तो अलबर्ट आया ही था, अतः वह सामने के दरवाजे में प्रवेश कर गया। सामने वाला कमरा भी बिल्कुल वैसा ही था, जैसे कमरे से अलबर्ट अभी आया था। यह देख अलबर्ट इस बार बांई ओर वाले दरवाजे में प्रवेश कर गया।
लेकिन यह क्या? यह कमरा भी बिल्कुल पिछले कमरे की भांति ही था।
चारो ओर देखने के बाद, अब तो अलबर्ट यह भी भूल गया कि वह आया किस दरवाजे से था? अब अलबर्ट बार-बार अलग-अलग दरवाजों में प्रवेश करके देख रहा था, परंतु कुछ देर में अलबर्ट समझ गया, कि वह किसी प्रकार की भूल-भुलैया में है। इसलिये वह थककर एक स्थान पर बैठ गया और उस भूल-भुलैया से निकलने का कोई प्लान करने लगा।
तभी अलबर्ट की निगाह कमरे में, एक स्थान पर पड़े एक छोटे से कोयले के टुकड़े पर गई। कोयले को देख अलबर्ट के दिमाग में एक आइडिया आया।
अब उसने कोयले के टुकड़े को उठा लिया और जिस दरवाजे में घुसने चला, उसके बाहर कोयले के टुकड़े से एक क्रास का निशान बना दिया।
इस प्रकार अब वह जिस दरवाजे में घुसता, एक क्रास का निशान बनाता जा रहा था, ऐसा करने की वजह से अब वह एक ही दरवाजे में बार-बार नहीं घुस रहा था।
आखिरकार आधे घंटे की अपार मेहनत के बाद अलबर्ट, एक बड़े से कक्ष में निकला, जहां पर जरुरत की सभी चीजें उपस्थित थीं।
देखने से ही वह किसी राजा का शयनकक्ष प्रतीत हो रहा था। परंतु उस कमरे में एक ही द्वार था और वह द्वार वहीं था, जिससे होकर अलबर्ट इस कमरे में आया था।
यानि कि अलबर्ट एक बार फिर फंस गया था, क्यों कि अब इसके आगे कहां जाना था? यह उसे भी नहीं पता था।
अलबर्ट काफी देर तक उस कक्ष में बैठा, उस कक्ष की सभी चीजों को देखता रहा, फिर वह उठकर सभी दीवारों को अपने हाथों से ठोंक-ठोंककर देखने लगा। एक दीवार पर ठोंकते ही अलबर्ट की आँखें चमक उठीं।
दीवार से उभरने वाली आवाज से साफ स्पष्ट हो रहा था कि वह दीवार अंदर से खोखली है। अब अलबर्ट की निगाह उस दीवार पर टंगी एक फोटो की ओर गई, जिसमें एक राजा और एक रानी का चित्र बना था।
यह चित्र मुफासा और कागोशी का था। जी हां लुफासा के माता और पिता का।
अलबर्ट चित्र में उपस्थित किसी को भी पहचानता नहीं था। अब अलबर्ट ने उस चित्र को धीरे से हिलाकर उसके पीछे झांकने की कोशिश की, परंतु अलबर्ट के छूते ही, दीवार पर टंगा वह चित्र एक ओर को अपने आप घूम गया।
चित्र के घूमते ही उस दीवार में एक बड़ा सा दरवाजा दिखाई देने लगा। अलबर्ट ने उस दरवाजे को ध्यान से देखा और उस दरवाजे के पार निकल गया। दरवाजे के दूसरी ओर एक लंबी सुरंग थी।
अलबर्ट जैसे ही उस सुरंग में दाखिल हुआ, सुरंग की दीवारों पर लगी, मशालें अपने आप जल उठीं।
अलबर्ट अब लगातार उस सुरंग में बढ़ता जा रहा था। लगभग 20 मिनट तक चलते रहने के बाद, वह सुरंग एक पेड़ की बड़ी सी कोटर से होते हुए एक खुले स्थान पर निकली।
काफी देर के बाद खुली हवा मिलने से, अलबर्ट ने पहले खुल कर साँस ली और फिर अपने चारो ओर देखने लगा।
तभी अलबर्ट को वहां से कुछ दूर बने, 4 पिरामिड दिखाई दिये।
ऐसे वीरान जंगल में पिरामिड का दिखना अलबर्ट के लिये एक विचित्र अनुभव था, पर इससे पहले कि अलबर्ट उन पिरामिडों की ओर बढ़ पाता कि तभी उसके कानों में एक आवाज सुनाई दी।
"दोस्त का दोस्त मिल गया...दोस्त का दोस्त मिल गया।
अलबर्ट ने आवाज की दिशा में देखा, तो उसे हवा में उड़ता हुआ ऐमू दिखाई दिया, जो कि उसे देखकर काफी खुश हो रहा था।
"चलो कोई तो मिला बात करने के लिये?" ऐमू को देख अलबर्ट भी खुश हो गया।
अलबर्ट ने अब अपना हाथ हवा में आगे कर दिया, ऐमू आकर अलबर्ट के हाथ पर बैठ गया। अलबर्ट को याद आया कि ऐमू, युगाका के हमले की वजह से डरकर कहीं भाग गया था।
“तुम कहां चले गये थे ऐमू?" अलबर्ट ने ऐमू से पूछा।
“ऐमू, दूऽऽऽऽऽऽऽर....आसमान में गया...ऐमू को उड़ना अच्छा लगता।” ऐमू ने कहा।
“ऐमू क्या तुम्हें पता है कि बाकी सारे लोग कहां हैं?" अलबर्ट ने ऐमू की ओर देखते हुए पूछा।
“ऐमू सब-कुछ जानता...ऐमू से कुछ नहीं छिपा।' यह कहकर ऐमू एक दिशा की ओर उड़ चला।
अलबर्ट समझ गया कि ऐमू उसे कहीं ले जाना चाहता है? इसलिये वह ऐमू के पीछे-पीछे चल पड़ा।
ऐमू अलबर्ट को लेकर एक घनी झाड़ियों की ओर चल दिया। अलबर्ट ने अब अपने हाथ में एक बड़ी सी लकड़ी उठा ली थी, जिससे वह घनी झाड़ियों को काटता हुआ, आगे बढ़ने लगा।
ऐमू आगे बढ़ता हुआ, एक ऊंची सी चट्टान पर जाकर बैठ गया। कुछ ही देर में अलबर्ट भी उस चट्टान के पास पहुंच गया।
“यह ऐमू मुझे इस चट्टान के पास क्यों लाया? यहां तो कुछ भी नहीं है?" तभी अलबर्ट को उस चट्टान के पीछे से, एक जोड़ी विशाल पंख हिलते हुए नजर आये।
“यह कमीना ऐमू कहीं मुझे फिर से तो टेरोसोर के पास नहीं ले आया?" अलबर्ट ने ऐमू को घूरते हुए मन ही मन गाली दी।
पर वह अंजान पंख, अब अलबर्ट के लिये कौतूहल का विषय थे, इसलिये धीरे से अलबर्ट ने झांककर चट्टान के पीछे देखा।
वह अंजान पंख अकेले नहीं थे, उनके साथ एक शरीर भी था, जो कि निसंदेह ब्रूनो का था।
ब्रूनो को देख, अलबर्ट भागकर चट्टान के पीछे पहुंच गया। ब्रूनो के सिर पर बेर के समान फल गिरने की वजह से ब्रूनो के पंख निकल आये थे और वह उड़कर कहीं गायब हो गया था?
इस समय ब्रूनो का शरीर अपने साधारण आकार से, 3 गुना बड़ा नजर आ रहा था।
अलबर्ट ने ब्रूनो के शरीर को हिलाया, पर वह पूर्णतया बेहोश था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि वह पिछले कुछ दिनों से यहां पर ऐसे ही पड़ा था।
तभी चट्टान पर बैठा ऐमू कहीं उड़कर चला गया? अलबर्ट ने एक बार उड़कर जाते हुए ऐमू को देखा और फिर ब्रूनो को जगाने की कोशिश करने लगा, पर ब्रूनो नहीं जागा।
“यहां तो आसपास कहीं पानी भी नहीं है, फिर इस ब्रूनो को किस प्रकार जगाऊं?" अलबर्ट ने चारो ओर देखते हुए कहा।
तभी अलबर्ट को ऐमू उड़कर वापस आता दिखाई दिया। इस समय ऐमू के मुंह में, कुछ पेड़ की पत्तियां दिखाई दे रहीं थीं।
ऐमू ने उन पत्तियों को अलबर्ट का पकड़ा दिया। अलबर्ट ने आश्चर्य से उन पेड़ की पत्तियों को देखा। उन पत्तियों से बहुत तेज एक अजीब सी गंध उठ रही थी।
कुछ सोच अलबर्ट ने उन पत्तियों को ब्रूनो की नाक के आगे कर दिया। पत्तियों की गंध सूंघते ही ब्रूनो उठकर बैठ गया।
ब्रूनो ने आँखें खोलकर इधर-उधर देखा, फिर अलबर्ट का हाथ चाटने लगा। यह देख अलबर्ट ने राहत की साँस ली।
अब अलबर्ट ने ऐमू को देखते हुए कहा- “अगर तुझे पता था कि ब्रूनो इन पत्तियों से होश में आ सकता है, तो अभी तक ऐसा क्यों नहीं किया?"
अलबर्ट की बात सुन ऐमू मूर्खों की तरह, अलबर्ट को पलकें झपकाकर देखने लगा, पर उसने कुछ कहा नहीं।
“ब्रूनो, क्या तुम शैफाली की गंध सूंघकर मुझे उसके पास ले चल सकते हो?" अलबर्ट ने ब्रूनो की ओर देखते हुए पूछा।
अलबर्ट की बात सुनकर ब्रूनो उठकर खड़ा हो गया। एक बार उसने अपने विशाल शरीर को देखा और फिर अपने पंख फड़फड़ाये।
इसके बाद वह अलबर्ट के पास आकर उसके पैरों से अपना शरीर रगड़ने लगा।
ब्रूनो को ऐसा करते देख अलबर्ट समझ गया कि ब्रूनो उसे अपने पर बैठने को कह रहा है।
अलबर्ट के लिये किसी कुत्ते की सवारी करना एक अलग ही अनुभव था, इसलिये वह रोमांचित होकर ब्रूनो पर बैठ गया।
अलबर्ट के ब्रूनो पर बैठते ही ऐमू उड़कर, अलबर्ट के कंधों पर बैठ गया। अब ब्रूनो ने अपने पंख जोर से फड़फड़ाये और उछलकर आसमान में उड़ने लगा।
कुछ ही देर में ब्रूनो एक ऐसे स्थान पर पहुंच गया, जहां जमीन से 5 फुट ऊपर हवा में एक ऊर्जा द्वार बना था। वह ऊर्जा द्वार बहुत हल्का था और ध्यान से देखने पर ही दिखाई दे रहा था।
उस ऊर्जा द्वार को देख अलबर्ट की आँखें सिकुड़ गईं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह किस प्रकार का ऊर्जा द्वार है और यह कहां जाकर खुलता है?
तभी अलबर्ट के देखते ही देखते ब्रूनो, अलबर्ट व ऐमू सहित उस ऊर्जा द्वार के अंदर प्रवेश कर गया।
वह ऊर्जा द्वार एक विशाल सुरंग में खुला। अलबर्ट को उस ऊर्जा द्वार के मुहाने पर एक विचित्र जीव पड़ा हुआ दिखाई दिया।
वह जीव कई जानवरों का मिला-जुला रुप दिख रहा था।
उस जानवर का शरीर 6 फुट ऊंची, एक विशाल बिल्ली की तरह दिख रहा था, उसके सिर पर कुछ अजीब से पंखों का ताज जैसा लगा दिखाई दे रहा था।
उसके शरीर पर मछली के समान गलफड़ बने थे, जिसे देखकर साफ पता चल रहा था कि वह जीव पानी में भी आसानी से साँस ले सकता है।
उस जानवर की पूंछ पीछे से किसी झाडू के समान थी। उसने अपने गले में धातु के लॉकेट में एक पीले रंग का रत्न पहन रखा था।
यह जीव और कोई नहीं अपितु गोंजालो था, जो व्योम से युद्ध के बाद जख्मी हालत में ऊर्जा द्वार के माध्यम से भागा था, परंतु गोंजालो के ऊर्जा द्वार की फ्रीक्वेंसी, तिलिस्मा के गुप्त द्वार की फ्रीक्वेंसी से मैच हो जाने की वजह से वहां पहुंच गया था।
अलबर्ट ने आज तक किताबों में भी कभी ऐसा जीव नहीं देखा था। इसलिये उसने ब्रूनो को जमीन पर उतरने का इशारा किया।
इशारा पाकर ब्रूनो उस ऊर्जा द्वार की सख्त सी जमीन पर उतर गया।
“बड़ा बिल्ला...बड़ा बिल्ला।” गोंजालो को देखकर ऐमू जोर से चिल्लाया।
अलबर्ट अब उतरकर धीरे-धीरे गोंजालो के पास जा पहुंचा। गोंजालो काफी घायल अवस्था में था और जोरजोर से कराह रहा था।
पर इससे पहले कि अलबर्ट गोंजालो के लिये कुछ कर पाता कि तभी अलबर्ट को उस ऊर्जा द्वार के बाहर से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी।
यह सुन अलबर्ट ने धीरे से झांककर बाहर की ओर देखा, तो उसे एक अजीब सा भेड़िया मानव उसी ओर आता दिखाई दिया, जिसके हाथ में किसी प्रकार का यंत्र था।
वह भेड़िया मानव वुल्फा था, जो कि उन अजीब से सिग्नल को ढूंढता हुआ वहां तक आ पहुंचा था।
वुल्फा को देख, अलबर्ट ने ब्रूनो और ऐमू को चुप रहने का इशारा किया और स्वयं ऊर्जा द्वार की दीवार से चिपककर खड़ा हो गया।
तभी वुल्फा ने उस ऊर्जा द्वार के अंदर झांककर देखा, पर अंदर अंधेरा होने की वजह से वुल्फा को कुछ दिखाई नहीं दिया।
कुछ नजर ना आते देख वुल्फा ने अपना हाथ उस ऊर्जा द्वार के अंदर डाल दिया। वुल्फा का हाथ गोंजालो से टकराया, जिसे वुल्फा ने अपने हाथों से पकड़कर बाहर की ओर खींच लिया।
'धम्म' की आवाज करता, गोंजालो का शरीर उस ऊर्जा द्वार से बाहर जा गिरा।
तभी अलबर्ट को ऊर्जा द्वार के अंदर की ओर से, कुछ खटके की आवाज सुनाई दी, जिसे सुन अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के साथ ले एक बड़े से पत्थर के पीछे छिप गया।
कुछ ही देर में अलबर्ट को ऊर्जा द्वार के अंदर से एक विचित्र जीव निकलकर आता हुआ दिखाई दिया।
वह विचित्र जीव 8 फुट लंबा था, उसकी 3 आँखें थीं और 4 हाथ थे। उसकी पीठ पर कछुए के समान एक कवच लगा हुआ था। उसके पैर और हाथ के पंजे किसी स्पाइना सोरस की तरह बड़े थे।
उसकी बलिष्ठ भुजाओ को देखकर साफ पता चल रहा था, कि उसमें असीम ताकत होगी। उसके हाथों में कोई अजीब सी गन के समान मशीन थी।
वह विचित्र जीव, उनके पास से झूमता हुआ, ऊर्जा द्वार से बाहर की ओर निकल गया। उस विचित्र जीव के बाहर निकलते ही वह ऊर्जा द्वार बंद हो गया।
अब अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के साथ उस सुरंग से अंदर की ओर चल दिया।
कुछ देर के बाद अलबर्ट को सुरंग का रास्ता समाप्त होते हुए दिखाई दिया।
अलबर्ट ने पहले धीरे से बाहर की ओर झांका। पर बाहर का नजारा देखकर अलबर्ट पूरी तरह से हैरान हो गया।
वह एक बहुत विशालकाय कमरा था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी पहाड़ को अंदर से खोखला करके, उस कमरे को बनाया गया हो या फिर वह कोई विशालकाय पिरामिड हो?
उस कमरे में किनारे-किनारे पत्थरों से फ्लोर बनाया गया था। उस फ्लोर के बीचो बीच एक विशाल पानी का हौज दिखाई दे रहा था।
एक नजर में वह हौज, कोई बहुत बड़ा स्विमिंग पूल जैसा नजर आ रहा था।
कमरे में चारो तरफ सुरंग जैसे कई रास्ते बने थे। उन्हीं में से एक रास्ते से वह वहां तक पहुंचे थे।
तभी अलबर्ट की निगाह उस हौज के किनारे सो रही एक विशाल ब्लू व्हेल पर पड़ी।
"बाप रे, यह कौन सी जगह है? यह जगह तो बहुत ही खतरनाक लग रही है?" अलबर्ट ने उस जगह को देखते हुए सोचा- “यह जगह तो किसी हॉलीवुड की, विज्ञान पर आधारित फिल्म का एक सेट लग रही है। और...और यह ब्लू व्हेल कैसे यहां सो रही है?"
तभी ब्रूनो धीरे-धीरे उस ब्लू व्हेल की ओर बढ़ा और आगे बढ़कर उस ब्लू व्हेल को सूंघने लगा, पर उसके इस प्रकार सूंघने के बाद भी ब्लू व्हेल नहीं उठी।
यह देख अलबर्ट भी डरता-डरता उस ब्लू व्हेल के पास आ गया।
थोड़ा और पास जाने पर अलबर्ट को उस ब्लू व्हेल का पेट एक जगह से कटा हुआ दिखाई दिया। जहां पर एक दरवाजा लगा हुआ था।
“यह क्या?...यह तो नकली व्हेल है…. नहीं-नहीं शायद यह कोई पनडुब्बी है जो ब्लू व्हेल की शक्ल में है। पर यह तो बिल्कुल सजीव जैसी दिख रही है। क्या मैं किसी और दुनिया में पहुंच गया हूं? या फिर किसी प्रकार से भविष्य में आ गया हूं? क्यों कि यह तकनीक तो बहुत ही आधुनिक महसूस हो रही है।“
अब अलबर्ट का ध्यान उन बाकी सुरंगों की ओर गया। अलबर्ट उनमें से एक सुरंग के अंदर प्रवेश कर गया।
वह सुरंग जिस जगह निकली, उसे देखकर अलबर्ट हैरान रह गया। वह कमरा एक आधुनिक प्रयोगशाला लग रहा था। उस प्रयोगशाला के मध्य में एक खूबसूरत सी परी की मूर्ति खड़ी थी।
यह मूर्ति देखने में बिल्कुल सजीव प्रतीत हो रही थी। परी के शरीर पर बैंगनी रंग की एक बहुत ही खूबसूरत ड्रेस थी।
उसने अपने हाथ में एक लंबा सा राजदंड भी पकड़ रखा था। उस परी के शरीर पर, बहुत से तार लगे हुए थे, जो कि एक मशीन से जाकर जुड़े हुए थे।
अलबर्ट अब उस मशीन को ध्यान से देखने लगा। उस मशीन पर अलग अलग रंग के बटन लगे थे।
तभी ऐमू ने बिना कुछ समझे एक बटन को दबा दिया।
“अरे-अरे ऐमू, यह क्या कर रहे हो? यहां की किसी भी चीज को हाथ मत लगाओ क्यों कि हमें तो यह भी नहीं पता कि यह सब चीजें हैं क्या?” अलबर्ट ने ऐमू को रोकते हुए कहा।
अब अलबर्ट की निगाह उस बटन पर गई, जिसे अंजाने में ही ऐमू ने दबा दिया था। उस बटन पर 'फीलींग' लिखा हुआ था।
ऐमू के बटन दबाते ही एक मशीन सक्रिय हो गई और उसने ना जाने उस मूर्ति में क्या किया? पर उसकी वजह से मूर्ति में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ? यह देख अलबर्ट ने राहत की साँस ली।
अब अलबर्ट उस कमरे से निकलकर वापस सुरंग में आ गया और सुरंग के एक नये रास्ते पर चल दिया।
वह रास्ता एक महल में निकल रहा था।
महल के बीचो बीच एक शानदार पानी का फव्वारा चल रहा था। उस फव्वारे के चारो ओर बहुत से कमरे बने थे, पर वहां पर कोई भी नजर नहीं आ रहा था।
अब अलबर्ट एक-एक कमरे में झांक कर देखने लगा। कोई कमरा बेडरुम जैसा लग रहा था, तो कोई किचन जैसा। एक कमरे में तो किताबें ही किताबें भरी हुई थीं।
वहां देखकर साफ पता चल रहा था कि इस क्षेत्र में कोई एक ही आदमी रहता है और वो भी इस समय यहां से कहीं गया है?
एक कमरे में जैसे अलबर्ट ने झांका, वह हैरान रह गया। उस कमरे में चारो तरफ स्क्रीन ही स्क्रीन लगी थी। हर स्क्रीन पर अलग वीडियो चलती दिख रही थी। अधिकतर वीडियो जंगलों के थे।
उस कमरे का दरवाजा छोटा था, जिससे ब्रूनो अंदर दाखिल नहीं हो सकता था, इसलिये अलबर्ट ने ब्रूनो को वहीं रहने का इशारा किया और स्वयं ऐमू के साथ अंदर की ओर आ गया।
तभी अलबर्ट को अपने पीछे एक आहट सुनाई दी, आहट सुन अलबर्ट पलटा, तो उसने देखा कि पता नहीं किस प्रकार से ब्रूनो ने अपने शरीर को, वापस पहले जैसे आकार में कर लिया था? हां ये बात और थी कि उसके शरीर पर अभी भी पंख मौजूद थे।
अलबर्ट यह देख आश्चर्य में पड़ गया, तभी उसका ध्यान वापस से कमरे में लगी स्क्रीन की ओर चला गया।
उन स्क्रीन को देखकर ऐसा लग रहा था, कि किसी जंगल में हजारों वीडियो कैमरे लगे हुए हों?
"दोस्त मिल गया दोस्त मिल गया।” तभी ऐमू चिल्लाते हुए एक स्क्रीन के पास उड़ने लगा।
अब अलबर्ट की नजर ऐमू की आवाज का पीछा करते हुए, एक वीडियो पर जाकर रुक गयी, उस वीडियो में उसे सुयश सहित सभी लोग एक विशाल बर्फ के ड्रैगन से लड़ते हुए दिखाई दिये।
“यह क्या? इसका मतलब मैं किसी और स्थान पर नहीं बल्कि उसी रहस्यमय द्वीप के ही किस गुप्त स्थान पर हूं? और कोई यहां बैठकर इस रहस्यमय द्वीप की निगरानी करता है?"
तभी अलबर्ट को एक किनारे रखी हुई, एक आदमकद मशीन दिखाई दी। उस मशीन पर एक छोटा सा प्लेटफार्म बना था। उसके सिर वाली जगह पर कोई कैमरे जैसी चीज बिल्कुल किसी बाथरुम के शावर की तरह लग रही थी।
उस मशीन पर बहुत से अलग-अलग रंग के बटन भी लगे थे। ब्रूनो उस मशीन को देखकर उस पर अपने पंजे मारने लगा।
अलबर्ट को ब्रूनो का यह अंदाज कुछ रहस्य से भरा लगा, इसलिये वह उस मशीन के प्लेटफार्म पर चढ़कर उसे ध्यान से देखने लगा।
देखते-देखते अलबर्ट ने उस मशीन पर लगे एक नीले बटन को दबा दिया। बटन को दबाते ही ऊपर लगे कैमरे जैसे यंत्र से एक नीले रंग की तेज रोशनी निकलकर कमरे में फैल गई और अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के ऊपर जाकर पड़ी।
उस रोशनी के गिरते ही अलबर्ट को अपना शरीर लाखों टुकड़ों में बंटता हुआ सा महसूस हुआ। उसे ऐसा लगा जैसे उसका शरीर किसी अंधे कुएं में गिर रहा हो।
जारी रहेगा______
गुप्त द्वार: (9 दिन पहले...... 13.01.02, रविवार, सीनोर राज्य की सीमा, मायावन, अराका द्वीप)
अलबर्ट टेरोसोर से बचने के बाद एक सूखे कुंए में जा गिरा था, जहां मौजूद एक बिल्ली जैसी देवी वाली प्रतिमा के हाथ में एक सुनहरी धातु का पात्र था।
अलबर्ट ने इस पात्र में मौजूद दिव्य जल को पीकर, देवी के हाथ में पहना ब्रेसलेट भी उतारकर अपने हाथ में पहन लिया था।
पर जब यह सब करने के बाद भी अलबर्ट के शरीर में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो निराश हो अलबर्ट उस सूखे कुंए से निकलने का रास्ता ढूंढने लगा।
पर आज एक दिन बीत जाने के बाद भी, अलबर्ट उस सूखे कुंए से निकलने का रास्ता ढूंढ नहीं पाया था।
पर आश्चर्य की बात थी, कि एक दिन बीत जाने के बाद भी अलबर्ट को ना तो भूख महसूस हो रही थी और ना ही प्यास। उल्टा अलबर्ट इस समय अपने आपको बहुत तरोताजा महसूस कर रहा था।
“अगर यह गुफा किसी ने बनाई है, तो इस गुफा में आता-जाता तो जरुर होगा। इसका मतलब कि इस गुफा में कहीं ना कहीं कोई गुप्त मार्ग अवश्य होगा?" यह सोच एक बार फिर अलबर्ट, जोश के साथ गुफा की प्रत्येक वस्तु को ध्यान से देखने लगा।
पहले अलबर्ट ने सभी अर्द्धचंद्राकार पत्थरों को ध्यान से देखा, जिसमें से निकलकर महीन पानी के फव्वारे गिर रहे थे। पर अलबर्ट को उसमें कुछ भी खास नजर नहीं आया।
अब अलबर्ट वापस देवी की प्रतिमा के आगे आकर खड़ा हो गया। अलबर्ट की सूक्ष्म निगाहें देवी की मूर्ति को ध्यान से देखने लगीं।
तभी अलबर्ट की नजर उस पत्थर पर जाकर टिक गई, जिस पर देवी की मूर्ति खड़ी थी। उस पत्थर और जमीन के बीच अलबर्ट को बहुत बारीक सा रिक्त स्थान दिखाई दिया।
अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान को देख देवी की मूर्ति को धीरे से हिलाया। अलबर्ट के हिलाते ही देवी की प्रतिमा, अपने स्थान पर घूम गई और एक तेज गड़गड़ाहट के साथ प्रतिमा के सामने की ओर, जमीन में एक रिक्त स्थान दिखाई देने लगा।
अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान पर झांककर देखा, परंतु अंदर अत्यंत अंधेरा होने की वजह से, अलबर्ट को कुछ दिखाई नहीं दिया।
अब अलबर्ट ने उस रिक्त स्थान में अपना पैर लटकाकर देखा, तो अलबर्ट को अहसास हुआ कि नीचे कुछ सीढ़ियां बनी हैं। अलबर्ट अब उन सीढ़ियों के द्वारा नीचे की ओर उतरने लगा।
“पहले से ही कुएं में था, पता नहीं अब ये सीढ़ियां मुझे पाताल में ले जा रहीं हैं क्या? अलबर्ट मन ही मन बड़बड़ाया और अंधेरे में टटोलते हुए सीढ़ियां उतरने लगा।
लगभग 20 सीढ़ियां उतरने के बाद अलबर्ट को कुछ दूर एक धीमी सी रोशनी दिखाई दी।
"लगता है कि यह स्थान सिर्फ बिल्लियों के लिये ही बनाया गया है, क्यों कि बिल्लियां ही इतने अंधेरे में चल सकती हैं। यह सोच अलबर्ट किसी तरह से टटोलते हुए, उस धीमी रोशनी की ओर बढ़ने लगा।
कुछ ही देर में पत्थरों से टकराते हुए, अलबर्ट किसी तरह से उस रोशनी तक पहुंच गया।
वह रोशनी एक कमरे से आ रही थी, जिसकी चारो ओर की दीवारों में 4 दरवाजे बने थे। वह कमरा बिल्कुल खाली था।
एक दरवाजे से तो अलबर्ट आया ही था, अतः वह सामने के दरवाजे में प्रवेश कर गया। सामने वाला कमरा भी बिल्कुल वैसा ही था, जैसे कमरे से अलबर्ट अभी आया था। यह देख अलबर्ट इस बार बांई ओर वाले दरवाजे में प्रवेश कर गया।
लेकिन यह क्या? यह कमरा भी बिल्कुल पिछले कमरे की भांति ही था।
चारो ओर देखने के बाद, अब तो अलबर्ट यह भी भूल गया कि वह आया किस दरवाजे से था? अब अलबर्ट बार-बार अलग-अलग दरवाजों में प्रवेश करके देख रहा था, परंतु कुछ देर में अलबर्ट समझ गया, कि वह किसी प्रकार की भूल-भुलैया में है। इसलिये वह थककर एक स्थान पर बैठ गया और उस भूल-भुलैया से निकलने का कोई प्लान करने लगा।
तभी अलबर्ट की निगाह कमरे में, एक स्थान पर पड़े एक छोटे से कोयले के टुकड़े पर गई। कोयले को देख अलबर्ट के दिमाग में एक आइडिया आया।
अब उसने कोयले के टुकड़े को उठा लिया और जिस दरवाजे में घुसने चला, उसके बाहर कोयले के टुकड़े से एक क्रास का निशान बना दिया।
इस प्रकार अब वह जिस दरवाजे में घुसता, एक क्रास का निशान बनाता जा रहा था, ऐसा करने की वजह से अब वह एक ही दरवाजे में बार-बार नहीं घुस रहा था।
आखिरकार आधे घंटे की अपार मेहनत के बाद अलबर्ट, एक बड़े से कक्ष में निकला, जहां पर जरुरत की सभी चीजें उपस्थित थीं।
देखने से ही वह किसी राजा का शयनकक्ष प्रतीत हो रहा था। परंतु उस कमरे में एक ही द्वार था और वह द्वार वहीं था, जिससे होकर अलबर्ट इस कमरे में आया था।
यानि कि अलबर्ट एक बार फिर फंस गया था, क्यों कि अब इसके आगे कहां जाना था? यह उसे भी नहीं पता था।
अलबर्ट काफी देर तक उस कक्ष में बैठा, उस कक्ष की सभी चीजों को देखता रहा, फिर वह उठकर सभी दीवारों को अपने हाथों से ठोंक-ठोंककर देखने लगा। एक दीवार पर ठोंकते ही अलबर्ट की आँखें चमक उठीं।
दीवार से उभरने वाली आवाज से साफ स्पष्ट हो रहा था कि वह दीवार अंदर से खोखली है। अब अलबर्ट की निगाह उस दीवार पर टंगी एक फोटो की ओर गई, जिसमें एक राजा और एक रानी का चित्र बना था।
यह चित्र मुफासा और कागोशी का था। जी हां लुफासा के माता और पिता का।
अलबर्ट चित्र में उपस्थित किसी को भी पहचानता नहीं था। अब अलबर्ट ने उस चित्र को धीरे से हिलाकर उसके पीछे झांकने की कोशिश की, परंतु अलबर्ट के छूते ही, दीवार पर टंगा वह चित्र एक ओर को अपने आप घूम गया।
चित्र के घूमते ही उस दीवार में एक बड़ा सा दरवाजा दिखाई देने लगा। अलबर्ट ने उस दरवाजे को ध्यान से देखा और उस दरवाजे के पार निकल गया। दरवाजे के दूसरी ओर एक लंबी सुरंग थी।
अलबर्ट जैसे ही उस सुरंग में दाखिल हुआ, सुरंग की दीवारों पर लगी, मशालें अपने आप जल उठीं।
अलबर्ट अब लगातार उस सुरंग में बढ़ता जा रहा था। लगभग 20 मिनट तक चलते रहने के बाद, वह सुरंग एक पेड़ की बड़ी सी कोटर से होते हुए एक खुले स्थान पर निकली।
काफी देर के बाद खुली हवा मिलने से, अलबर्ट ने पहले खुल कर साँस ली और फिर अपने चारो ओर देखने लगा।
तभी अलबर्ट को वहां से कुछ दूर बने, 4 पिरामिड दिखाई दिये।
ऐसे वीरान जंगल में पिरामिड का दिखना अलबर्ट के लिये एक विचित्र अनुभव था, पर इससे पहले कि अलबर्ट उन पिरामिडों की ओर बढ़ पाता कि तभी उसके कानों में एक आवाज सुनाई दी।
"दोस्त का दोस्त मिल गया...दोस्त का दोस्त मिल गया।
अलबर्ट ने आवाज की दिशा में देखा, तो उसे हवा में उड़ता हुआ ऐमू दिखाई दिया, जो कि उसे देखकर काफी खुश हो रहा था।
"चलो कोई तो मिला बात करने के लिये?" ऐमू को देख अलबर्ट भी खुश हो गया।
अलबर्ट ने अब अपना हाथ हवा में आगे कर दिया, ऐमू आकर अलबर्ट के हाथ पर बैठ गया। अलबर्ट को याद आया कि ऐमू, युगाका के हमले की वजह से डरकर कहीं भाग गया था।
“तुम कहां चले गये थे ऐमू?" अलबर्ट ने ऐमू से पूछा।
“ऐमू, दूऽऽऽऽऽऽऽर....आसमान में गया...ऐमू को उड़ना अच्छा लगता।” ऐमू ने कहा।
“ऐमू क्या तुम्हें पता है कि बाकी सारे लोग कहां हैं?" अलबर्ट ने ऐमू की ओर देखते हुए पूछा।
“ऐमू सब-कुछ जानता...ऐमू से कुछ नहीं छिपा।' यह कहकर ऐमू एक दिशा की ओर उड़ चला।
अलबर्ट समझ गया कि ऐमू उसे कहीं ले जाना चाहता है? इसलिये वह ऐमू के पीछे-पीछे चल पड़ा।
ऐमू अलबर्ट को लेकर एक घनी झाड़ियों की ओर चल दिया। अलबर्ट ने अब अपने हाथ में एक बड़ी सी लकड़ी उठा ली थी, जिससे वह घनी झाड़ियों को काटता हुआ, आगे बढ़ने लगा।
ऐमू आगे बढ़ता हुआ, एक ऊंची सी चट्टान पर जाकर बैठ गया। कुछ ही देर में अलबर्ट भी उस चट्टान के पास पहुंच गया।
“यह ऐमू मुझे इस चट्टान के पास क्यों लाया? यहां तो कुछ भी नहीं है?" तभी अलबर्ट को उस चट्टान के पीछे से, एक जोड़ी विशाल पंख हिलते हुए नजर आये।
“यह कमीना ऐमू कहीं मुझे फिर से तो टेरोसोर के पास नहीं ले आया?" अलबर्ट ने ऐमू को घूरते हुए मन ही मन गाली दी।
पर वह अंजान पंख, अब अलबर्ट के लिये कौतूहल का विषय थे, इसलिये धीरे से अलबर्ट ने झांककर चट्टान के पीछे देखा।
वह अंजान पंख अकेले नहीं थे, उनके साथ एक शरीर भी था, जो कि निसंदेह ब्रूनो का था।
ब्रूनो को देख, अलबर्ट भागकर चट्टान के पीछे पहुंच गया। ब्रूनो के सिर पर बेर के समान फल गिरने की वजह से ब्रूनो के पंख निकल आये थे और वह उड़कर कहीं गायब हो गया था?
इस समय ब्रूनो का शरीर अपने साधारण आकार से, 3 गुना बड़ा नजर आ रहा था।
अलबर्ट ने ब्रूनो के शरीर को हिलाया, पर वह पूर्णतया बेहोश था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि वह पिछले कुछ दिनों से यहां पर ऐसे ही पड़ा था।
तभी चट्टान पर बैठा ऐमू कहीं उड़कर चला गया? अलबर्ट ने एक बार उड़कर जाते हुए ऐमू को देखा और फिर ब्रूनो को जगाने की कोशिश करने लगा, पर ब्रूनो नहीं जागा।
“यहां तो आसपास कहीं पानी भी नहीं है, फिर इस ब्रूनो को किस प्रकार जगाऊं?" अलबर्ट ने चारो ओर देखते हुए कहा।
तभी अलबर्ट को ऐमू उड़कर वापस आता दिखाई दिया। इस समय ऐमू के मुंह में, कुछ पेड़ की पत्तियां दिखाई दे रहीं थीं।
ऐमू ने उन पत्तियों को अलबर्ट का पकड़ा दिया। अलबर्ट ने आश्चर्य से उन पेड़ की पत्तियों को देखा। उन पत्तियों से बहुत तेज एक अजीब सी गंध उठ रही थी।
कुछ सोच अलबर्ट ने उन पत्तियों को ब्रूनो की नाक के आगे कर दिया। पत्तियों की गंध सूंघते ही ब्रूनो उठकर बैठ गया।
ब्रूनो ने आँखें खोलकर इधर-उधर देखा, फिर अलबर्ट का हाथ चाटने लगा। यह देख अलबर्ट ने राहत की साँस ली।
अब अलबर्ट ने ऐमू को देखते हुए कहा- “अगर तुझे पता था कि ब्रूनो इन पत्तियों से होश में आ सकता है, तो अभी तक ऐसा क्यों नहीं किया?"
अलबर्ट की बात सुन ऐमू मूर्खों की तरह, अलबर्ट को पलकें झपकाकर देखने लगा, पर उसने कुछ कहा नहीं।
“ब्रूनो, क्या तुम शैफाली की गंध सूंघकर मुझे उसके पास ले चल सकते हो?" अलबर्ट ने ब्रूनो की ओर देखते हुए पूछा।
अलबर्ट की बात सुनकर ब्रूनो उठकर खड़ा हो गया। एक बार उसने अपने विशाल शरीर को देखा और फिर अपने पंख फड़फड़ाये।
इसके बाद वह अलबर्ट के पास आकर उसके पैरों से अपना शरीर रगड़ने लगा।
ब्रूनो को ऐसा करते देख अलबर्ट समझ गया कि ब्रूनो उसे अपने पर बैठने को कह रहा है।
अलबर्ट के लिये किसी कुत्ते की सवारी करना एक अलग ही अनुभव था, इसलिये वह रोमांचित होकर ब्रूनो पर बैठ गया।
अलबर्ट के ब्रूनो पर बैठते ही ऐमू उड़कर, अलबर्ट के कंधों पर बैठ गया। अब ब्रूनो ने अपने पंख जोर से फड़फड़ाये और उछलकर आसमान में उड़ने लगा।
कुछ ही देर में ब्रूनो एक ऐसे स्थान पर पहुंच गया, जहां जमीन से 5 फुट ऊपर हवा में एक ऊर्जा द्वार बना था। वह ऊर्जा द्वार बहुत हल्का था और ध्यान से देखने पर ही दिखाई दे रहा था।
उस ऊर्जा द्वार को देख अलबर्ट की आँखें सिकुड़ गईं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह किस प्रकार का ऊर्जा द्वार है और यह कहां जाकर खुलता है?
तभी अलबर्ट के देखते ही देखते ब्रूनो, अलबर्ट व ऐमू सहित उस ऊर्जा द्वार के अंदर प्रवेश कर गया।
वह ऊर्जा द्वार एक विशाल सुरंग में खुला। अलबर्ट को उस ऊर्जा द्वार के मुहाने पर एक विचित्र जीव पड़ा हुआ दिखाई दिया।
वह जीव कई जानवरों का मिला-जुला रुप दिख रहा था।
उस जानवर का शरीर 6 फुट ऊंची, एक विशाल बिल्ली की तरह दिख रहा था, उसके सिर पर कुछ अजीब से पंखों का ताज जैसा लगा दिखाई दे रहा था।
उसके शरीर पर मछली के समान गलफड़ बने थे, जिसे देखकर साफ पता चल रहा था कि वह जीव पानी में भी आसानी से साँस ले सकता है।
उस जानवर की पूंछ पीछे से किसी झाडू के समान थी। उसने अपने गले में धातु के लॉकेट में एक पीले रंग का रत्न पहन रखा था।
यह जीव और कोई नहीं अपितु गोंजालो था, जो व्योम से युद्ध के बाद जख्मी हालत में ऊर्जा द्वार के माध्यम से भागा था, परंतु गोंजालो के ऊर्जा द्वार की फ्रीक्वेंसी, तिलिस्मा के गुप्त द्वार की फ्रीक्वेंसी से मैच हो जाने की वजह से वहां पहुंच गया था।
अलबर्ट ने आज तक किताबों में भी कभी ऐसा जीव नहीं देखा था। इसलिये उसने ब्रूनो को जमीन पर उतरने का इशारा किया।
इशारा पाकर ब्रूनो उस ऊर्जा द्वार की सख्त सी जमीन पर उतर गया।
“बड़ा बिल्ला...बड़ा बिल्ला।” गोंजालो को देखकर ऐमू जोर से चिल्लाया।
अलबर्ट अब उतरकर धीरे-धीरे गोंजालो के पास जा पहुंचा। गोंजालो काफी घायल अवस्था में था और जोरजोर से कराह रहा था।
पर इससे पहले कि अलबर्ट गोंजालो के लिये कुछ कर पाता कि तभी अलबर्ट को उस ऊर्जा द्वार के बाहर से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी।
यह सुन अलबर्ट ने धीरे से झांककर बाहर की ओर देखा, तो उसे एक अजीब सा भेड़िया मानव उसी ओर आता दिखाई दिया, जिसके हाथ में किसी प्रकार का यंत्र था।
वह भेड़िया मानव वुल्फा था, जो कि उन अजीब से सिग्नल को ढूंढता हुआ वहां तक आ पहुंचा था।
वुल्फा को देख, अलबर्ट ने ब्रूनो और ऐमू को चुप रहने का इशारा किया और स्वयं ऊर्जा द्वार की दीवार से चिपककर खड़ा हो गया।
तभी वुल्फा ने उस ऊर्जा द्वार के अंदर झांककर देखा, पर अंदर अंधेरा होने की वजह से वुल्फा को कुछ दिखाई नहीं दिया।
कुछ नजर ना आते देख वुल्फा ने अपना हाथ उस ऊर्जा द्वार के अंदर डाल दिया। वुल्फा का हाथ गोंजालो से टकराया, जिसे वुल्फा ने अपने हाथों से पकड़कर बाहर की ओर खींच लिया।
'धम्म' की आवाज करता, गोंजालो का शरीर उस ऊर्जा द्वार से बाहर जा गिरा।
तभी अलबर्ट को ऊर्जा द्वार के अंदर की ओर से, कुछ खटके की आवाज सुनाई दी, जिसे सुन अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के साथ ले एक बड़े से पत्थर के पीछे छिप गया।
कुछ ही देर में अलबर्ट को ऊर्जा द्वार के अंदर से एक विचित्र जीव निकलकर आता हुआ दिखाई दिया।
वह विचित्र जीव 8 फुट लंबा था, उसकी 3 आँखें थीं और 4 हाथ थे। उसकी पीठ पर कछुए के समान एक कवच लगा हुआ था। उसके पैर और हाथ के पंजे किसी स्पाइना सोरस की तरह बड़े थे।
उसकी बलिष्ठ भुजाओ को देखकर साफ पता चल रहा था, कि उसमें असीम ताकत होगी। उसके हाथों में कोई अजीब सी गन के समान मशीन थी।
वह विचित्र जीव, उनके पास से झूमता हुआ, ऊर्जा द्वार से बाहर की ओर निकल गया। उस विचित्र जीव के बाहर निकलते ही वह ऊर्जा द्वार बंद हो गया।
अब अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के साथ उस सुरंग से अंदर की ओर चल दिया।
कुछ देर के बाद अलबर्ट को सुरंग का रास्ता समाप्त होते हुए दिखाई दिया।
अलबर्ट ने पहले धीरे से बाहर की ओर झांका। पर बाहर का नजारा देखकर अलबर्ट पूरी तरह से हैरान हो गया।
वह एक बहुत विशालकाय कमरा था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी पहाड़ को अंदर से खोखला करके, उस कमरे को बनाया गया हो या फिर वह कोई विशालकाय पिरामिड हो?
उस कमरे में किनारे-किनारे पत्थरों से फ्लोर बनाया गया था। उस फ्लोर के बीचो बीच एक विशाल पानी का हौज दिखाई दे रहा था।
एक नजर में वह हौज, कोई बहुत बड़ा स्विमिंग पूल जैसा नजर आ रहा था।
कमरे में चारो तरफ सुरंग जैसे कई रास्ते बने थे। उन्हीं में से एक रास्ते से वह वहां तक पहुंचे थे।
तभी अलबर्ट की निगाह उस हौज के किनारे सो रही एक विशाल ब्लू व्हेल पर पड़ी।
"बाप रे, यह कौन सी जगह है? यह जगह तो बहुत ही खतरनाक लग रही है?" अलबर्ट ने उस जगह को देखते हुए सोचा- “यह जगह तो किसी हॉलीवुड की, विज्ञान पर आधारित फिल्म का एक सेट लग रही है। और...और यह ब्लू व्हेल कैसे यहां सो रही है?"
तभी ब्रूनो धीरे-धीरे उस ब्लू व्हेल की ओर बढ़ा और आगे बढ़कर उस ब्लू व्हेल को सूंघने लगा, पर उसके इस प्रकार सूंघने के बाद भी ब्लू व्हेल नहीं उठी।
यह देख अलबर्ट भी डरता-डरता उस ब्लू व्हेल के पास आ गया।
थोड़ा और पास जाने पर अलबर्ट को उस ब्लू व्हेल का पेट एक जगह से कटा हुआ दिखाई दिया। जहां पर एक दरवाजा लगा हुआ था।
“यह क्या?...यह तो नकली व्हेल है…. नहीं-नहीं शायद यह कोई पनडुब्बी है जो ब्लू व्हेल की शक्ल में है। पर यह तो बिल्कुल सजीव जैसी दिख रही है। क्या मैं किसी और दुनिया में पहुंच गया हूं? या फिर किसी प्रकार से भविष्य में आ गया हूं? क्यों कि यह तकनीक तो बहुत ही आधुनिक महसूस हो रही है।“
अब अलबर्ट का ध्यान उन बाकी सुरंगों की ओर गया। अलबर्ट उनमें से एक सुरंग के अंदर प्रवेश कर गया।
वह सुरंग जिस जगह निकली, उसे देखकर अलबर्ट हैरान रह गया। वह कमरा एक आधुनिक प्रयोगशाला लग रहा था। उस प्रयोगशाला के मध्य में एक खूबसूरत सी परी की मूर्ति खड़ी थी।
यह मूर्ति देखने में बिल्कुल सजीव प्रतीत हो रही थी। परी के शरीर पर बैंगनी रंग की एक बहुत ही खूबसूरत ड्रेस थी।
उसने अपने हाथ में एक लंबा सा राजदंड भी पकड़ रखा था। उस परी के शरीर पर, बहुत से तार लगे हुए थे, जो कि एक मशीन से जाकर जुड़े हुए थे।
अलबर्ट अब उस मशीन को ध्यान से देखने लगा। उस मशीन पर अलग अलग रंग के बटन लगे थे।
तभी ऐमू ने बिना कुछ समझे एक बटन को दबा दिया।
“अरे-अरे ऐमू, यह क्या कर रहे हो? यहां की किसी भी चीज को हाथ मत लगाओ क्यों कि हमें तो यह भी नहीं पता कि यह सब चीजें हैं क्या?” अलबर्ट ने ऐमू को रोकते हुए कहा।
अब अलबर्ट की निगाह उस बटन पर गई, जिसे अंजाने में ही ऐमू ने दबा दिया था। उस बटन पर 'फीलींग' लिखा हुआ था।
ऐमू के बटन दबाते ही एक मशीन सक्रिय हो गई और उसने ना जाने उस मूर्ति में क्या किया? पर उसकी वजह से मूर्ति में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ? यह देख अलबर्ट ने राहत की साँस ली।
अब अलबर्ट उस कमरे से निकलकर वापस सुरंग में आ गया और सुरंग के एक नये रास्ते पर चल दिया।
वह रास्ता एक महल में निकल रहा था।
महल के बीचो बीच एक शानदार पानी का फव्वारा चल रहा था। उस फव्वारे के चारो ओर बहुत से कमरे बने थे, पर वहां पर कोई भी नजर नहीं आ रहा था।
अब अलबर्ट एक-एक कमरे में झांक कर देखने लगा। कोई कमरा बेडरुम जैसा लग रहा था, तो कोई किचन जैसा। एक कमरे में तो किताबें ही किताबें भरी हुई थीं।
वहां देखकर साफ पता चल रहा था कि इस क्षेत्र में कोई एक ही आदमी रहता है और वो भी इस समय यहां से कहीं गया है?
एक कमरे में जैसे अलबर्ट ने झांका, वह हैरान रह गया। उस कमरे में चारो तरफ स्क्रीन ही स्क्रीन लगी थी। हर स्क्रीन पर अलग वीडियो चलती दिख रही थी। अधिकतर वीडियो जंगलों के थे।
उस कमरे का दरवाजा छोटा था, जिससे ब्रूनो अंदर दाखिल नहीं हो सकता था, इसलिये अलबर्ट ने ब्रूनो को वहीं रहने का इशारा किया और स्वयं ऐमू के साथ अंदर की ओर आ गया।
तभी अलबर्ट को अपने पीछे एक आहट सुनाई दी, आहट सुन अलबर्ट पलटा, तो उसने देखा कि पता नहीं किस प्रकार से ब्रूनो ने अपने शरीर को, वापस पहले जैसे आकार में कर लिया था? हां ये बात और थी कि उसके शरीर पर अभी भी पंख मौजूद थे।
अलबर्ट यह देख आश्चर्य में पड़ गया, तभी उसका ध्यान वापस से कमरे में लगी स्क्रीन की ओर चला गया।
उन स्क्रीन को देखकर ऐसा लग रहा था, कि किसी जंगल में हजारों वीडियो कैमरे लगे हुए हों?
"दोस्त मिल गया दोस्त मिल गया।” तभी ऐमू चिल्लाते हुए एक स्क्रीन के पास उड़ने लगा।
अब अलबर्ट की नजर ऐमू की आवाज का पीछा करते हुए, एक वीडियो पर जाकर रुक गयी, उस वीडियो में उसे सुयश सहित सभी लोग एक विशाल बर्फ के ड्रैगन से लड़ते हुए दिखाई दिये।
“यह क्या? इसका मतलब मैं किसी और स्थान पर नहीं बल्कि उसी रहस्यमय द्वीप के ही किस गुप्त स्थान पर हूं? और कोई यहां बैठकर इस रहस्यमय द्वीप की निगरानी करता है?"
तभी अलबर्ट को एक किनारे रखी हुई, एक आदमकद मशीन दिखाई दी। उस मशीन पर एक छोटा सा प्लेटफार्म बना था। उसके सिर वाली जगह पर कोई कैमरे जैसी चीज बिल्कुल किसी बाथरुम के शावर की तरह लग रही थी।
उस मशीन पर बहुत से अलग-अलग रंग के बटन भी लगे थे। ब्रूनो उस मशीन को देखकर उस पर अपने पंजे मारने लगा।
अलबर्ट को ब्रूनो का यह अंदाज कुछ रहस्य से भरा लगा, इसलिये वह उस मशीन के प्लेटफार्म पर चढ़कर उसे ध्यान से देखने लगा।
देखते-देखते अलबर्ट ने उस मशीन पर लगे एक नीले बटन को दबा दिया। बटन को दबाते ही ऊपर लगे कैमरे जैसे यंत्र से एक नीले रंग की तेज रोशनी निकलकर कमरे में फैल गई और अलबर्ट, ब्रूनो और ऐमू के ऊपर जाकर पड़ी।
उस रोशनी के गिरते ही अलबर्ट को अपना शरीर लाखों टुकड़ों में बंटता हुआ सा महसूस हुआ। उसे ऐसा लगा जैसे उसका शरीर किसी अंधे कुएं में गिर रहा हो।
जारी रहेगा______