Fantasy इच्छाधारी देव - Page 3 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट -19

इधर देवा आधी रात को 3 बजे उठा और अपने गेराज में बने बेसमेंट में चला गया. और वही अपनी साधना में लीं हो गया. दो घंटे बाद जब वो उठा तो उसका शरीर नयी ताक़त से भरा हुआ था और उसका चेहरा गजब का चमक रहा था.

तभी वह फ़कीर बाबा आते है.

फब - देवा……………..

देवा हाथ जोड़ कर – प्रणाम बाबा

फब – आयुष्मान रहो पुत्र, ………..

………..देवा अब तुम्हरे अंदर बहोत साडी शक्तिया आ गयी है जो के तुम्हरे अंदर अब अपने आप नयी शक्तियों को बनती जाएगी. और उन शक्तियों को सँभालने के लीये तुम्हे अब परेशां भी नहीं होना पद रहा है क्यों के समय समय पर सम्भोग करने से तुम्हारा शरीर अब उन शक्तियों के दबाव को भी सहन करता जार अहा है. अन्यथा तुम्हरे अंदर की पोटष शक्ति इतनी बाद जाती के तुम अपना मानसिक संतुलन भी न बना पते न hi अपनी शक्तियों का सही तरीके से इस्तमाल कर पते. अब तुम कोई साधारण पुरुष नहीं रह गए हो. तुम किसी को भी सम्मोहित कर सकते हो, सुरक्षा घेरे बना सकते हो, दिव्या शक्तियों की सहायता से तुम बुरी ताक़तों से लड़ सकते हो, कोई ताक़त कोई अस्त्र शास्त्र तुम्हे मजबूर नहीं कर सकते, यदि तुम घायल भी हो जाओ तो तुम्हारे घाव कुछ hi पालो में ठीक हो सकते है, अपना pratiroop(clone) भी बना सकते हो, इन के आलावा भी बहोत कुछ तुम अपनी म्हणत से प्राप्त कर चुके हो मए बेहद खुश हु तुमसे देवा. अब तुम्हे वक़्त आने पे कई साडी शक्तिया और मिलती जाएगी.

देवा – सब आपका आशीर्वाद है baba.kintu मुझ जैसे मामूली इंसाने को आपने इतना खास बना दिया इस के पीछे क्या राज है?

फब – देवा अब वो वक़्त नजदीक है. जब तुम्हारे सरे सवालो के जवाब तुम्हे मिलेंगे. बस थोड़ा सा और रुक जाओ.

किन्तु आज मए तुम्हे कुछ बताने hi आया हु. कल तुम्हे अपनी शक्तियों का कुछ अंश पूनम को देना है. ये ऐसा hi होगा जैसे की कोई एक दिए से दूसरा दिया जलाता है. इससे रौशनी hi बढ़ती है पहले दिए की रौशनी नहीं घटती.

देवा – बाबा पूनम को? क्या मए कारन जान सक्तु हु बाबा?

फब - ……….पूनम कोई साधारण स्त्री नहीं है देवा. वो तुम्हारा जनम जनम का प्यार है. सेकड़ो वर्ष पहले तुम्हारा और उसका प्रेम शुरू हुआ था.

………जब वो तिलिस्म लोक की राजकुमारी थी और तुम नाग लोक के राजकुमार. तुम एक महँ योद्धा थे. तभी विशेष परिस्थितियों के षाले तुम्हारी मुलाक़ात पूनम से हुई थी और तुम दोनों का प्रेम शुरू हुआ लेकिन परिस्थितियों ने तुम दोनों को अलग कर दिया. उस के बाद मेरे hi कहने पे तुम दोनों आत्माओ ने गहरी समाधी ले ली जो सेकड़ो वर्षो की थी.

…….उस में तुम्हरे अंदर साड़ी शक्तिया आ गयी और पूनम की आत्मा के साथ होने की वजह से वो भी मजबूत हो गयी किन्तु उसे शक्तिया तुमसे hi प्राप्त हो सकती है. इसलिए कल तुम उसे अपनी शक्तियों का कुछ अंश डोज उस के बाद उस की आत्मा साडी शक्तिया खुद hi हासिल कर लेगी. अपनी तिलिस्मी शक्तिया भी.

देवा ये सब सुन कर हैरान था उसे यकीन नहीं हो रहा था. तभी उसे याद आया नागार्जुन जिसने उसे योद्धा कह के पूजकरा था .

देवा – बाबा हमारे इस जनम का क्या उद्देश्य है?

फब - वो भी जल्द hi तुम्हे पता चल जायेगा देवा. कल जब तुम पूनम को शक्ति डोज उस के बाद तुम्हे शलाका नाग लोक ले के जाएगी. ये शलाका कोई और नहीं पिछले जनम की पूनम की बहन hi hae.jise पूनम देखते hi पहचान लेगी. बाकि वह पहुंच के तुम्हे पता चलेगा.

…..क्यों की वो जानने का हक़ पूनम को भी है. इसलिए जब दोनों साथ होंगे तब तुम्हे पता chalega.ab मए चलता हु.

……फ़कीर बाबा चले गए लेकिन देवा के मन में उलझन पैदा कर के गए थे. देवा तो कभी आश्चर्य करता कभी खुश होता कभी टेंशन में आ जाता फिर उसने सब भगवन के भरोसे छोड़ा और बहार आ गया और लॉन में दौड़ते हुए वो दन के पास पंहुचा

देवा - क्या बाबू जी आज अखाड़े नहीं चलेंगे क्या?

दन – नहीं देवा आज मेरे जाने की जरुरत नहीं. तुम वो सब सीख चुके हो जो मेरे पास था. अब तुम उसका अभ्यास करो.

देवा – ठीक है आज छोड़ देता हु आपको लेकिन आपको भी स्वस्थ रहने के लिए अखाड़े तो रोज चलना hi पड़ेगा. और है कल से भैया को भी ले जाना hae.mae उन्हें सिखाऊंगा भी जिससे मेरा अभ्यास भी होता रहेगा.

दन – बहोत खूब सोचा है देवा. वैसे भी रघु ने शराब पी पी कर अपना स्वस्थ बिगड़ दिया है अब उसे बनाना है. तो अखाड़े जाना hi पड़ेगा उसे.

देवा दिया को आवाज लगते हुए – अरे भाभी भैया कहा है?

दिया – वो आज उनकी तबियत कुछ ख़राब है वो सो रहे है.

देवा – अरे क्या हुआ उन्हें?

दिया – अचानक से शराब बंद कर दी है न तो शरीर कैंप रहा है. मैने खुद उन्हें कहा के अचानक कुछ नहीं करना चाहिए धीरे धीरे बंद कर देना अभी पी लीजिये…….

……. पर उन्होंने कहा के नहीं मैने देवा और बाबू जी को वचन दिया है. इसलिए अब चाहे जो हो जाये मेरे साथ मए नहीं पियुगा.

देवा – अरे इस में उदास होने की क्या बात है ये तो ख़ुशी की बात है. इससे उनका दर्द संकल्प दीखता है. आप चिंता मत कीजिये मए अभी उन्हें दवाई दे के साथ ले आता हु वो अभी मेरे साथ दौड़ने जायेगे.

दन – देवा बीटा उसकी तबियत ठीक नहीं तो उसे आराम करने दो.

देवा – अच्छा ठीक है अगर थोड़ी देर के बाद वो खुद सोना चाहेंगे तो मए जबरदस्ती नहीं करुगा. पर दवाई तो दे दू उन्हें.

देवा अपने क्लिनिक वाले कमरे में जाता है और पानी का गिलास आधा भर के उस में आँखे बंद कर के अपनी शक्ति दाल देता है. और पहुंच जाता है रघु के कमरे में

……… देवा – भैया उठो दवाई पी लो

रघु उठ कर दवाई पीटा है. और फिर लेट जाता है. 5 मिनट बाद वो आँखे खोलता है और एक भरपूर अंगड़ाई लेता है. देवा उसके सर पे हाथ रखता है तो रघु एक डैम फिट था.

रघु – अबे क्या पीला दिया भाई तूने मुझे तो लग रहा है के मए कभी बीमार था hi नहीं अभी एक घुसे में घोड़े को गिरा सकता हु इतनी ताक़त महसूस हो रही है.

देवा – अरे भैया ये साडी दवाइया मैने विदेश से मंगवाई है जो नीचे राखी है कमरे में. आज के बाद आपको न कभी दारू की तालाब सताएगी. न कभी आप इस वजह से बीमार होंगे. बल्कि आपको दारू का स्वाद भी याद नहीं आएगा.

रघु – तू सही कह रहा है भाई?

देवा – बिलकुल अब चलो

रघु – कहा ?

देवा – अरे अभी अखाड़े चलना है आपको मेरे साथ अब आपका शरीर भी मजबूत बनाना है.

रघु – तू सच मच देवता है यार.

देवा – क्या भाई चने पे चढ़ा रहे हो. चलो न

रघु उठ कर चल पड़ता है. नीचे सब दोनों भाइयो को जैसे hi देखते है चौंक जाते है रघु एक डैम फिट नजर आ रहा था उस के चेहरे पे एक डैम ताजगी थी.

देवा – अच्छा बाबू जी हम लोग आते है. और दोनों भाई निकल जाते है. अखाड़े पहुंचते है वह देवा रघु की कसरत शुरू से शुरू करवाता है. कोई 2 घंटे कसरत करने के बाद.

देवा – भाई अब आपको यहाँ रोज आना है कल से बाबू जी भी साथ आएंगे. अब आपको खुद को मजबूत बनाना है. देसी रियाज़ से. और जब समय मिले तो घर में छत पे जाकर गयम में भी कसरत करनी है. वो भी मए आपको सीखा दुगा……….

…………. कुछ हलकी कसरत मए भाभी को भी सीखा दुगा जिससे होने वाले बच्चे की सेहत अच्छी रहे और वो मजबूत पैदा हो. आपको उन दोनों का भी ध्यान रखना है अब.

रघु – है भाई अब तक जो मए नहीं कर पाया वो तूने किया , लेकिन अब जितना हो सकेगा मए करुगा परिवार के लिए भी और अपनी बीवी बच्चो के लिए भी.

फिर दोनों घर की और चल देते है. और घर आ कर नाहा धो कर तैयार हो कर नाश्ता करते हुए.

देवा – बबाबू जी मैने कुछ सोचा है है कल से आप हमारे साथ अखाड़े चलेंगे. और वापस आ कर भैया, भाभी, माँ और पायल ऊपर गयम में कसरत करेगी. फिट रहने के लिए. उन के गयम वाले कपडे मए आज शहर से ले आउगा मुझे अभी शहर जाना है बैग की दवाइयों का आर्डर देने के लिए.

दन – ठीक है बीटा वैसे भी एक्सरइसीसे करने से, होने वाला बचा भी स्वस्थ होगा ये तुमने सही सोचा है. लेकिन तेरी माँ तो वैसे भी फिट है उसे क्या जरुरत है.

देवा – फिट है तो हमेशा फिट hi रहे उस के लिए.

दन – जैसा तू कहे बीटा.

रघु – अच्छा बाबू जी मए चलता हु खेत जा रहा हु.

देवा – भाई रुको

रघु – बोलो देवा

देवा उसे अपना मोबाइल देता है - भाई ये रख लो.

रघु – अब इसका मए क्या करुगा?

देवा – कुछ नहीं बस खेतो में बोर हो जाओ तो भाभी से बात कर लेना. और फिर मए भी तो शहर जा रहा हु न कोई काम हो तो बोल देना

रघु - ठीक है भाई

फिर रघु निकल जाता है.

देवा – बाबू जी वो मए कह रहा था की अगर आप लोग इजाजत दे तो क्या मए पूनम को भी साथ ले जाऊ? हम शाम तक आ जायेगे.

दन – भाई मुझे से क्या पूछता है संधान जी से पूछ लो मुझे कोई एतराज नहीं.

देवा पद्मा से – काकी अगर आप बुरा न मने तो क्या हम दोनों जाये. भरोसा रखिये मए पूनम को सही सलामत ले आउगा

पद्मा – देवा क्यों शर्मिंदा करता है? मए भला क्यों बुरा मानूगी ? और रही बात भरोसे की तो माँ बाप अपने बच्चो पे hi तो भरोसा करते है. और तुझ पे भरोसा नहीं करेंगे तो हम सब का कौन है जिस पर हम भरोसा कर सके. तुम दोनों ख़ुशी से जाओ.

फिर पूनम और देवा दोनों रर में बैठ कर शहर की तरफ निकल पड़ते है. देवा मस्त गाने चला देता है

पूनम – आप हमें क्यों ले आये हम क्या करेंगे यहाँ शहर में आ कर ?

देवा – क्यों तुम्हे मेरा साथ पसंद नहीं क्या?

पूनम ऐसी बात नहीं है देवा आप के आलावा मुझे और कुछ पसंद आ सकता है क्या? पर मए ये कह रही थी आप तो बिजी रहेंगे न शहर में.

देवा – नहीं पूनम मुझे शहर में कोई काम नहीं मुझे तुमसे कुछ बात करनी है. जिस के लिए घर या गाँव सही जगह नहीं थी. इसीलिए तुम्हे शहर लाया हु.

पूनम – देखो मुझे डराओ मत प्लीज बोलो ऐसी क्या बात है जो तुम घर या गाँव में नहीं बता सकते.

देवा – घबराने की जरुरत बिलकुल भी नहीं है. बल्कि आज मए तुम्हे वो खुश खबरि दुगा के तुम बिना मेरे कहे मेरे होठो को चबा जाओगी.

पूनम शरमाते हुए – कुछ भी….. मए एसिया कुछ नहीं करने वाली अब बताओ भी.

देवा – पहले तुम लोगो के लिए एक्सरसाइज के कपडे ले लेते है कल से तुम भी गयम ज्वाइन करोगी सब के साथ घर में ok?

पूनम - ok जी

फिर देवा माल के सामने गाडी रोकता है और वो लोग अंदर जाते है और सब के लिए गयम वाले कपडे खरीद लेते है जिसमे शॉर्ट्स स्पोर्ट्स ब्रा कुछ शूज वगैरह थे. देवा रघु के लिए भी कुछ कपडे खरीदता है और मोबाइल भी. फिर देवा और पूनम एक होटल में जाते है. और एक रूम लेकर वह चले जाते है.

पूनम – आपके इरादे कुछ खतरनाक लग रहे मेरे को.

देवा – क्यों जी ऐसा मैने क्या किया?

पूनम आपने होटल का रूम क्यों लिया है?

देवा – तुम लड़कियों की अकाल भी न…… कुछ भी सोचती हो यार. अरे मेरी जान तुम्हरे साथ प्यार तो मए अपने घर के बैडरूम में hi करुगा जब हमारी सुहागरात होगी फूलो से सजा कमरा और बिस्तर होगा और जब तुम पूरी दुल्हन के लिबास में होगी. ………

……….पूनम तो देवा की बातो से वो सन hi देखने लगी खुली आँखों से तभी………..

देवा – ऐसे घटिया होटल के सादे हुए कमरे में हम प्यार करेंगे क्या?

देवा की ऐसी बात सुन कर पहले तो पूनम चौंक गयी फिर शर्मा गयी.

पूनम - अच्छा मेरी जान नाराज मत हो बोलो क्यों आये है हम यहाँ.

देवा- पूनम अपनी आँखे बंद करो और गहरी साँस लो और अपना शरीर ढीला छोड़ दो.

पूनम वैसे hi करती है तो देवा उसके सर पे हाथ रखता है और देवा के हाथ से नीली रौशनी निकल कर पूनम के अंदर सामने लगती है. ………

………थोड़ी देर के बाद देवा अपना हाथ हटा देता है. और उस के बाद पूनम धीरे धीरे आँखे खोलती है. और देवा को देखते hi उसकी आँखों में आंसू आ जाते है. उसके सामने उसके पिछले जनम की हर घटना फिल्म की तरह चल रही थी. और पूनम बस रोये जा रही थी थोड़ी देर के बाद पूनम दौड़ कर देवा के गले से लग जाती है.

पूनम – देव देव देव देव मेरे प्यारे देव आखिर हम मिल hi गए हमारा प्यार सच्चा निकला देव. आखिर हम फिर से मिल hi गए.

देवा की आँखों में भी आंसू आ जाते है. – हां पूनम हम मिल hi गए. हमें मिलना hi था. सेकड़ो सालो के बाद आखिर आज तुम फिर मेरी बहो में हो. दोनों hi एक दूजे को चूमने लगते है काफी देर तक जब वो दोनों अलग नहीं हो रहे थे तभी

उमठ ुम्मःहः ुखु ुखहु

ऐसी आवाज़ों से वो चौंकते है तो सामने कमर पे हाथ रखे शलाका कहदी मुस्करा रही थी.

पूनम – शलाका मेरी बहन तू कब आयी कैसी है तू ……..

……….फिर वो दोनों गले मिलती है और दोनों की आँखों से आंसू निकलने लगते है . इस मिलाप के बाद तीनो वही बिस्तर पे बैठ जाते है/

पूनम – देव आपने ये सब कैसे किया?

देवा – ये सब फ़कीर बाबा ने किया है पूनम

पूनम – फ़कीर बाबा से मिल चुके हो तुम

देवा – हां और उन्होंने hi मुझे एक अनपढ़ गवर जाहिल से इतना मजबूत और शक्तिशाली पड़ा लिखा बना दिया साथ hi इन सब में इस शलाका का भी पूरा हाथ है., मुझे तो कल रत hi पता चला की तुम कौन हो मए कौन हु ये शलाका कौन है . वार्ना अब तक फब और शलाका ने मुझे कुछ नहीं बताया था बस मेरी शक्तियों को जगाने में लगे हुए थे.

पूनम – शलाका तू इतने दिनों से देवा के साथ थी तू मुझसे मिलने क्यों नहीं आयी.

शलाका – दीदी मए नहीं आ सकती थी. मुझे जैसा आदेश था मए वैसा hi कर सकती थी . जब तक देवा खुद को तैयार न कर ले तब तक मुझे खुद को आपसे भी छुपा के रखना था. क्यों की ये बहोत लम्बी लड़ाई है इसमें अगर देव कमजोर रह जाता तो सब कुछ बिखर जाता. आप दोनों का मिलान फिर से अधूरा रह जाता और ये मए कैसे होने देती , इसलिए अपने दिल पे पथ्थर रख कर तुम्हारे सामने होते हुए भी तुमसे दूर रही. कई बार रातो को जब तुम सो रही होती थी तो तुम्हरे सिरहाने बैठ कर रोटी रहती थी तुम्हारे माथे को सहलाते हुए चूमते हुए तुम्हे देखा करती थी. पर अब ये भी तैयार है और इन्ही की शक्तियों से आपको सब याद आया है यानि अब आप भी तैयार हो. ……..

……….. मए तो एक तरह से आप दोनों को hi तैयार कर रही थी. म्हणत भले hi सिर्फ देवा कर रहा था लेकिन काम आप दोनों का बन रहा था.

पूनम – तिलिस्म लोक में सब कैसे है शलाका? माँ कैसी है बाबू जी कैसे है?

शलाका - यु तो सब ठीक है लेकिन ………….

पूनम – लेकिन क्या शलाका?

शलाका- बहोत बड़ी मुसीबत आने वाली है दोनों ग्रहो पर नाग लोक और तिलिस्म लोक कुछ भी सुरक्षित नहीं है. क्यों की देवा ने पिछले जनम में मरने से पहले दोनों ग्रहो को सुरक्षित करने के लिए शील्ड बना दी थी इस लिए अब तक सब ठीक है लेकिन अब उसका भी समय पूरा होने वाला है और नयी शील्ड को बनाना देवा की आलावा किसी के बस की बात नहीं . देवा इस बार वो शील्ड बनाएगा जिसमे आपकी भी शक्ति मिली होगी इससे फिर कभी शिलेड बदलने की जरुरत hi नहीं रह जाएगी करोडो सालो तक . या शायद अनंत काल तक. और दोनों गृह सुरक्षति हो जायेगे

देवा – ऐसी बात है तो हम ये काम तुरंत करेंगे.

शलाका नहीं देवा उस के लिए आपको पहले नाग लोक चलना होगा आगे का रास्ता आपको वही मिलेगा. और हम लोग आज रत को नाग लोक चलेंगे उस के बाद तिलिस्म नगरी.

देवा – तो फिर तय रहा आज रत 12 बजे हम चलेंगे नाग लोक. शलाका तुम पूरा इंतजाम कर देना.

शलाका – है ठीक है मए नागार्जुन को सन्देश भेज देती हु रात ठीक 12 बजे वो हमें लेने आ जायेगा.
 
अपडेट - 20

उस के बाद देवा तो वही आराम करने लगता है. और दोनों बहने अपनी बातो में लग जाती है जैसा की आम तौर पर औरतो में होता है. करीब 4 बजे देवा की आँख खुलती है तो देवा देखता है के वो दोनों हंस हंस के बाते कर रही थी. देवा उठकर फ्रेश होता है और फिर वही नाश्ता कर के ये लोग निकल आते है अपने घर की तरफ. ………

………….घर पहुंच के कुछ खास नहीं होता बस पूनम सब लेडीज को उन के लिए लाये हुए गयम की ड्रेसेस दिखती है. और सब तरय कर के चेक कर लेते है जो की उन्हें फिट hi थे.

देवा भी रघु के लिए कुछ नार्मल कपडे मोबाइल और गयम ड्रेसेस लाया था. वो उसे दे देता है और अपना मोबाइल उससे ले लेता है.

फिर रत के खाने के बाद सब लोग सोने चले जाते है. जहा देवा सभी के सो जाने के बाद अदृश्य हो कर उन के रूम्स में जाता है उन्हें गहरी नींद में सुलाने के लिए जिससे की कोई रात को देवा के पास न आये.

लेकिन दन और सावित्री के रूम में पहुंचते hi देवा जब उन्हें देखता है तो मुस्कराने लगता है उस की आँखों के ठीक सामने पलंग पर दोनों नंगे हो कर चुदाई में लगे हुए थे एक बार तो सावित्री को देख कर देवा का मन भी दोल जाता है. लेकिन वो उन्हें चुदाई करने देता है अभी और वह से निकल कर पायल के रूम में जाता है जो लेती हुई कुछ सोच रही थी देवा उसे सुला देता है.

फिर दिया के रूम में जाता है . तो देखता है के रघु और दिया नंगे सो रहे थे लेकिन रघु का लुंड शांत था और दिया की आँखों में हलकी सी पानी की बुँदे शायद रघु की इसी हालत की वजह से . पर देवा से ये देखा नहीं गया. वो जनता था रघु के सोने के बाद दिया जरूर आएगी देवा से छुड़वाने क्यों की रघु उसे गरम कर चूका था.

देवा रघु को गहरी नींद में सुला देता है. और बहार आ कर दरवाजा खत खटता है. दिया दरवाजा खोल कर देवा को देख कर चौंक जाती है और इशारे से रघु के जागने की बात कहती है देवा जेब से रुमाल निकल के रघु की नक् पे रख देता है और हटा लेता है. ( सब नाटक था दिया को दिखने के लिए)

देवा – लो डार्लिंग अब ये सो गए सुबह hi उठेंगे और जब ये उठेंगे तो इन्हे यही लगेगा की रात को इन्होने तुम्हे जैम के छोड़ा है ये इस दवाई का असर है.

दिया देवा से लिपट जाती है और फिर देवा भी नंगी दिया को ले कर पलंग पे लेट जाता है और उसे बुरी तरह छोड़ता है जब दिया संतुष्ट हो जाती है तो देवा भी अपना पानी दिया की छूट में भर के उसे अपनी पावर्स से उसी हालत में सुला देता है.

फिर देवा अपने मां ममी के कमरे जाता है जहा दोनों कपल सो रहे थे मामियो की साड़ी उनकी जांघो तक उठी हुई थी. लेकिन देवा उन्हें नहीं छेड़ता बस उन्हें भी गहरी नींद में दाल देता है.

और वापस आता है माँ बाबू जी के कमरे में जो अपनी चुदाई से फ्री हो चुके थे और नंगे hi एक दूजे से बुरी तरह लिपट के सो रहे थे जैसे नई कपल हो.

देवा उन्हें भी गहरी नींद में दाल के वह से निकलता है अपने सर्वेंट कटर्स की तरफ और उन सब को भी सुला देता है. हलाकि वह भी कपल्स थे कोई नार्मल सो रहा था तो कोई नंगा. पर अभी देवा के पास न तो छूट की कमी थी न hi समय था इसलिए अपने नौकरो की बीवियों को भी बिना छुए निकल जाता है.

……….. अब इस घर में सब सो चुके थे. तो देवा जाता है. पूनम के कमरे में जहा देवकी और पद्मा के साथ पूनम सो रही थी. देवा पद्मा और देवकी को गहरी नींद में सुला देता है और ………

………….पूनम को आवाज़ लगा के उठता है.

पूनम धीरे से – अरे देव आप यहाँ क्यों आ गए मए आ जोगी न आप के कमरे में जब इन्हे गहरी नींद आएगी. अभी तो ये सोइ hi है बाते कर कर के.

देवा नार्मल आवाज़ में – अरे मए नहीं आ सकता क्या अपनी जानेमन के बैडरूम में.

पूनम - क्या करते है आप देव माँ आठ जाएगी तो क्या सोचेगी प्लीज आप जाइये मए थोड़ी देर में आती हु न.

देवा – ोये होये आती हो ? वो भी बीएड रूम में क्या इरादा है ?

पूनम – देव क्यों सत्ता रहे हो आप जाओ न माँ उठ जाएगी?

देवा – अच्छा उठ जाएगी मए भी तो देखु कैसे उठती है? अरे सासु जी उठिये देखिये आपका दामाद आया है. और देवा पद्मा का कन्धा पकड़ के हिलने लगता है उसी के बगल में लेट कर.

पूनम की तो सांस hi रुक गयी और उसने आंखे बंद कर ली दर के मरे.

देवा उठा और पूनम के हाथो को चुम कर – मेरी जान तुम भूल गयी तुम्हारा देव कोई साधारण आदमी नहीं है न hi तुम कोई साधारण लड़की हो . चिंता मत करो मैने इन्हे अपनी शक्तियों से सुला दिया है अब ये सुबह से पहले नहीं उठेंगे.

पूजनम हैरत से देवा को देखती है और रहत की साँस लेती है- हाय देव आपने तो मुझे डरा hi दिया था.

देवा पूनम को अपनी बहो में भर के पद्मा के बगल में लिटा देता है और उसके पास लेट जाता है – अरे मेरी जान ऐसे दरोगी तो कैसे चलेगा.

पूनम - देव ये सब मत कीजिये न प्लीज वो भी माँ के बगल में लेट कर. मुझे शर्म आती है.

देवा – अच्छा तो चलिए हम दोनों अपने बैडरूम में चल कर करते है.

……… और देवा पूनम को गॉड में उठा लेता है ………पूनम नहीं नहीं करती रह जाती है और अचानक चारो तरफ देखती है तो वो देवा की गॉड में hi थी लेकिन अब वो लोग देवा वाले बैडरूम में थे. देवा ने अपनी पावर्स उसे कर ली थी .

………….पूनम को बड़े प्यार से बिस्तर पे लिटा कर देवा उसके बगल में लेट जाता है. और उसके चेहरे को निहारने लगता है पूनम भी देवा की आँखों में खोई हुई थी, धीरे धीरे दोनों के होठ नजदीक आ रहे थे. एक दूजे की सांसो की गर्मी दोनों hi अपने चेहरे पे महसूस कर रहे थे. क तभी…………

……………. ो लैला मजनू ये क्या हो रहा है?

दोनों चौंक कर सामने देखते है तो शलाका कड़ी मुस्करा रही थी. पूनम शर्मा जाती है.

देवा – शलाका की बच्ची शर्म नहीं आती हमें डिस्टुरेब करते हुए. जब देखो आ जाती है बीच में कबाब में हड्डी बन कर. और तू आइंदा से दरवाजे से आया कर वो भी दरवाजा खटखटा के समझी.

शलाका हस्ते हुए – मए नहीं आने वाली दरवाजे से. और आप जीजा जी मेरी दीदी को इस तरह क्यों परेशां करते हो बहोत देर से देख रही हु मए.

देवा – अच्छा बड़ी आयी बहन की सगी. चल आ बैठ और बता करना क्या है अब.

शलाका नार्मल होकर - समय हो गया है देवा अब हमें चलना चाहिए. यहाँ से 2 कम. दूर एक खंडहर में मैने उसे बुलाया है. चलो वो आता hi होगा.

देवा ने तुरंत अपने हाथ से इशारा किया और उसका क्लोन वही बिस्तर पे बैठा नजर आने लगा. दोनों आपस में देख कर मुस्कराये और देवा वह से निकल के नीचे आया. और पूनम को साथ लेकर उस के कमरे में गया जहा देवकी और पद्मा सो रही थी. देवा ने पूनम की ऊँगली पकड़ के आँखे बंद की और हल्का सा खींचा तो पूनम का क्लोन भी पूनम के शरीर से बहार आया और फिर देवा और पूनम उसे वही छोड़ के बहार आ gaye.aur अंदर पूनम की क्लोन पद्मा के बगल में सो गयी.

फिर देवा शलाका और पूनम तीनो टेलिपोर्ट होकर वह पहुंच जाते है. और नागार्जुन का इंतजार करने लगते है.

……….. अभी उन्हें वह इंतजार करते हुए कुछ 10 मिनट hi हुए थे के सोने का रथ वह प्रकट होता है जिस में 4 सफ़ेद घोड़े लगे हुए थे. और उसकी ऊपर जो छतरी लगी थी वो किसी बहोत बड़े अजगर टाइप की थी जो अपना पूरा फन फैलाये खड़ा था. और रथ पर भी सांपो की hi आकृति बानी हुई थी. नागार्जुन अपनी नाग लोक की वेशभूषा में था और उसके मुकुट पे भी एक फन फैलाये नाग की आकृति थी जो की सोने का hi था.

नागार्जुन- प्रणाम राजकुमार. उम्मीद है आपको अब तक आपके प्रश्नो के उत्तर मिल गए होंगे इसलिए आज मैने आपको राजकुमार कह कर आपका अभिवादन किया है.

देवा – नागार्जुन मुझे अब तक सब कुछ तो पता नहीं चला लेकिन इस सफर की शुरुआत के लिए जितना जरुरी है उतना पता चला है. और है आज से तुम मेरे दोस्त हो इसीलिए मुझे देवा hi कहना राजकुमार नहीं. अरे यार मुझे अजीब लगता है काम से काम तुम लोग तो ऐसा मत करो.

……….सब हसने लगते है.

न- ठीक है मए आज से तुम्हे देवा hi कहुगा. वैसे कुछ भी तो नहीं बदला तुम आज भी बिलकुल वैसे hi हो यारो के yar.Ab चले सब हमारी वह राह देख रहे है.

फिर चारो उस रथ पे चढ़ जाते है जो इस अँधेरी रात में चमक रहा था लेकिन उन के आलावा वो किसी को दिखना नहीं था.

अचानक रथ बिना आवाज़ किया ऊपर उठने लगता है और कुछ hi सेकंड में आसमान में पहुंच जाता है और तेजी से एक तरफ चलने लगता है. देवा और पूनम के लिए ये सब कुछ नया था उन्हें हैरानी भी हो रही थी और अच्छा भी लग रहा था.

न – वह पूरी प्रजा आप सब लोगो के स्वागत के लिए तैयार है. इतने समय के बाद अपने राजकुमार को देखने की उनकी इच्छा आज पूरी जो होने वाली है.

देवा – मए भी उन सब से मिलने को बेचैन हो रहा हु दोस्त. पता नहीं क्यों लेकिन अब ये पल कटे नहीं काट रहे है.

न – बस देवा हम पहुंच hi गए है.

अचानक रथ एक तरफ को मुद कर नीचे की तरफ चल पड़ता है और करीब 10मिनट के सफर के बाद उन्हें नाग लोक का गेट दिखाई देने लगता है .

देवा – नागार्जुन मए गेट के अंदर पैदल जाउगा. तुम बहार hi गेट पे रथ को रोक देना

न – ठीक है देवा

…….. नागार्जुन गेट के सामने रथ को रोक देता है और चारो उस में से उतर जाते है. आगे आगे देव उस के आजु बाजु पूनम और शलाका थी और पीछे नागार्जुन .

नाग - लोक

देवा ने जैसे hi नाग लोक में प्रवेश किया उसकी वेश भूषा पल में बदल गयी अब उसके तन पर भी वह के राजकुमार के कपडे थे और सर पे सोने का हीरे जड़ित शानदार मुकुट था उसने देखा वह चारो तरफ हद से ज्यादा हरियाली hi हरियाली और सड़के एक डैम साफ शीशे की तरह चमक रही थी, जगह जगह ऊँचे घने पेड़,. लेकिन पर्क्रतिक रौशनी की पूरी व्यस्था वो एक नगर की तरह hi था. हर जगह कच्चे पक्के माकन बने हुए थे जिनमे ज्यादातर पक्के hi थे.

वह की वेश भूषा भी पृथ्वी के लोगो की तरह hi थी और चारो तरफ भीड़ का कोलाहल था औरतो और लड़कियों ने नए कपडे पहन रखे थे और उनके तन पे सुन्दर गहने भी थे . देवा को ये देख कर आश्चर्य हुआ की वह की औरते 99% खूबसूरत थी चाहे वो जवान हो या मातुरे और मर्दो का शरीर भी पहलवानो की तरह था एक डैम तंदुरुस्त.

देवा के ग्रुप को चारो तरफ से कई सरे लोग नजर आने लगे जो हाथ जोड़े खड़े थे कुछ उस पर फूल बरसा रहे थे कुछ उसकी जय जय कार कर रहे थे. देवा उन सब को हाथ जोड़ के मिलता हुआ आगे बड़ा तभी कोई 4-5 लोगो ने आ कर देवा के पैर छुए.

अभी देवा ने पैदल कुछ रास्ता hi पार किया था के तभी

आदमी 1 – राजकुमार आप पैदल क्यों चल रहे है.

देवा – भाई मुझे आप लोगो से मिलने की उतनी hi ख़ुशी है जितनी आप सब को और मए भी तो आप सब से मिलना चाहता हु न.

आदमी 2- आप आज भी नहीं बदले राजकुमार आप आज भी वैसे hi है अपनी प्रजा से प्यार करने वाले

आदमी1 – लेकिन हमारे होते आप पैदल तो बिलकुल नहीं चलगे.

……… इतना कह कर उन लोगो ने देवा को कंधे पे उठा लिया और उसे लेकर आगे चलने लगे

……….. थोड़ी देर के बाद सब राजमहल पहुंच गए. उन लोगो ने देवा को वह उतरा तो सामने उनका कुलगुरु खड़ा था.

देवा उन्हें देखते hi पहचान गया उनके पेअर छू कर .

देवा – प्रणाम गुरुवार

कग – आयुष्मान भाव राजकुमार

फिर देवा दूसरी तरफ देखता है तो उसे अपने माता पिता दीखते है ( ये नाग लोक वाले माँ बाप है, जिन्हे राजकुमार की माँ को यानि महारानी नीलमणि मन और राजकुमार के पिता भैरव सिंह बीएस कहेगे) देवा उनके भी पैर छू कर प्रणाम करता है तो मन उसे गले से लगा लेती है और उसकी आँखों से आंसू निकलने लगते है.

मन – जीते रहो बीटा कितना समय लगा दिया आने में मेरे लाल …

…… और मन उसे गले से लगा लेती hae.………anjane में hi देवा की आंखे भी भीग जाती है. और उसे एक सुखद अहसास होता है . जो की माँ की गॉड में hi मिलता है. उसे भी महसूस होता है की जैसे बरसो से प्यासी आत्मा आज तृप्त हो गयी हो.

देव – माँ आप रोइये मत भोलेनाथ की कृपा से मए वापस आ गया हु न अब रोने के दिन ख़तम हो गए. आप चुप हो जाइये. मन देवा का माथा चुम लेती है और शलाका और पूनम को देखती है बड़े स्नेह से. और उनकी तरफ बहे फैला के उनका स्वागत करती है.

मन – आओ मेरी बच्चियों.

…………फिर शलाका और पूनम भी मन और बीएस से मिलती है.

मन – तू तो रूठ hi गयी हम सब से पूनम. तेरा वादा था मेरी बहु बनने का फिर क्यों छोड़ के चली गयी हमें.

पूनम भी रोने लगती है – माँ आप सब से दूर होना हमारे लिए भी दुखगदायी था. लेकिन देव को अकेले कैसे जाने देते हम? ये हमारे प्यार के साथ धोखा होता न. तो उनका साथ तो निभाना था हमें. इसलिए खुद को आपकी ममता की छाव से दूर करना पड़ा.

मन – जग जग जियो बेटी. अब तुम और देव हमें छोड़ के कभी मत जाना.

कग - आइये अंदर चलते है

अंदर राज सभा में पहुंच कर देवा देखता है के पूरी सभा उस के स्वागत के लिए हाथ जोड़े कड़ी है. देवा उन सब से मिलता है और अपने माँ बाप के साथ सिंहासन के पास जाकर बैठता है.

बीएस – देव बीटा क्या ये राजकुमारिया भी तुम्हारे साथ hi थी?

देवा – है पिता जी (पूनम की तरफ इशारा करते हुए) ये इस जनम में भी मेरे साथ hi है मेरे गाँव में hi इनका जनम हुआ है और अब भी ये मेरे साथ hi है, और ये तो शलाका hi है आप जानते hi है. ये कुछ दिन पहले मुझसे धरती पे मिली थी.

बीएस – है बीटा. ऐसा लग रहा है कुछ भी नहीं बदला. वो दिन आज भी याद है मुझे जब पूनम के पिता और हमने मिल कर तुम दोनों का रिश्ता जोड़ा था. और उस के तुरंत बाद वो सब हो गया.

देवा – माँ आपको जानकर हैरानी होगी के धरती लोक पे भी जो हमारे माँ बाप है उन्होंने कुछ hi समय पहले पूनम और मेरा रिश्ता तय किया है.

मन – तो क्या तुम्हारी शादी हो गयी?

देवा – नहीं माँ अभी शादी नहीं हुई बस रिश्ता जोड़ा गया है.

मन – ये तो बहोत अच्छी बात है बीटा अब मए अपने बेटे की शादी बहोत धूमधाम से करुँगी. और जो तुम्हरे धरती लोक के माता पिता है. उन्हें भी यहाँ बुलाएंगे जिससे की वो सब भी तुम्हरी शादी अपने हाथो से करवा सके. जो सपना मेरा सदियों पहले अधूरा रह गया था पूनम को इस घर की बहु बना के लेन का वो अब पूरा हो जायेगा.

……….. फिर कुछ देर के बाद सब लोग विदा हो जाते है और बाकि पूरा परिवार अंदर महल में जाता है. और ………

बीएस – बीटा ये है तुम्हरा कमरा. तुम यहाँ आराम करो. हम बाद में बात करेंगे अभी तुम लोग थक गए होंगे.

देवा – जी पिता जी.

मन पूनम और शलाका से– आओ बीटा तुम दोनों मेरे साथ आओ मए तुम्हे भी कमरा दिखा देती हु.

फिर शलाका और पूनम मन के साथ चली जाती है. और देवा भी लेट जाता है. थोड़ी hi देर में उसे नींद आ जाती है.

……. फिर देवा .4 बजे उठता है और अपनी साधना में लग जाता है.

करीब 6 बजे उठ कर देवा फ्रेश हो कर तैयार हो जाता है . तभी वह एक सेवक आ कर……..

………..राजकुमार की जय हो. महाराज और महारनी आपका बहार इंतजार कर रहे है.

देवा – ठीक है चलो

सेवक – आइये राजकुमार.

फिर देवा उस सेवक के साथ चल पड़ता है जहा सब उसी का इंतजार कर रहे the.waha पूनम और शलाका भी तैयार बैठी नजर आती है.

बीएस – आओ बीटा नींद कैसी आयी

देवा – एक डैम अच्छी नींद आयी पिता जी. सदियों बाद अपने बिस्तर पे जा के अच्छा लगा हमें.

बीएस – लो बीटा ये फल खाओ और दूध पि लो.

देवा को भी बहोत तेज भूख लगी थी तो वो फल खाने लगता है जो की बहोत ज्यादा टेस्टी थे. और फिर दूध पि लेता है. सब का नाश्ता हो शुका था. ………..

………… तभी वह फ़कीर बाबा आते है. सब उठ कर उन्हें प्रणाम करते है.

देवा आगे बाद के उनके पेअर छूटा है.

फ़कीर बाबा - कैसे हो देवा?

देवा – मए तो एक डैम ठीक हु बाबा.

फब – देवा आज समय चक्र फिर वही पहुंच गया है. कभी इस नगरी से तुम अपने माता पिता के साथ तिलिस्म गए थे और फिर सदियों तक वापस नहीं आ पाए. क्यों के वह एक डस्ट ने अपना जाल फैलाया था.

……..आज तुम फिर तिलिस्म नगरी जा रहे हो. लेकिन इस बार तुम खुद उस दुष्ट का कॉल बनने जा रहे हो.

देव- बाबा आपने कहा था के आप मुझे सब कुछ बता दगेतो क्या अब मए जान सकता हु?

फब - है देवा अब वो वक़्त आ गया है लेकिन बस कुछ प्रतीक्षा और,

………फब – महाराज आप इन बच्चो को लेकर शीघ्र hi तिलिस्म लोक पहुँचिये मए आप लोगो को वही मिलुंगा और बाकि बाते सब मिल कर करेंगे.

फिर फ़कीर बाबा गायब हो जाते है और बीएस ,मन, देवा, पूनम, शलाका और नागार्जुन सब वह से चल देते है तिलिस्म नगरी.
 
अपडेट - 21

तिलिस्म - नगरी

यहाँ पर भी पहले से सब को पता चल चूका था की तिलिस्मी नगरी की राजकुमारी पूनम और शलाका नाग लोक के राजकुमार और उस के परिवार के साथ आ रहे है. सभी बहोत उत्सुकता से उनका इंतजार कर रहे थे.

और वो सब वह पहुंचते है. जहा पूरी नगरी राजकुमारियों और राजकुमार का स्वागत फूलो की बारिश और जय जय कर से करती है.

फिर ये सब पहुंचते है राज महल जहा पूनम के इस नगरी के माँ बाप उस का इंतजार पलके बिछाये कर रहे थे पूनम उन्हें देखते hi पहचान जाती है और दौड़ कर अपनी माँ से गले मिलती है और अपने पिता के भी.

और उसकी आखो से आंसू बहना शुरू हो जाते है. उसकी माँ भी अपनी सेकड़ो सालो से बिछड़ी हुई बेटी को पा कर खुद के आंसू रोक नहीं पा रही थी. फिर वो सब अंदर जाते है.

पूनम की माँ महारानी कौशल्या (मक) – कैसी हो मेरी बच्ची?

पूनम मए बिलकुल ठीक हु माँ. मुझे तो यकीन नहीं आ रहा है की मए आप लोगो के साथ बैठी हु.

पूनम के पिता सुमनत देव (सड़) – है बेटी सब कुछ कल की hi बात लग रही है अब. तू तो हमें छोड़ के चली गयी अपना शरीर भी त्याग दिया लेकिन हम लोगो ने कैसे ये समय बिताया है हम hi जानते है.

वैसे तुम अपनी नयी जनदगी के बारे में बताओ

पूनम - पिता जी मए धरती लोक पर एक गाँव में पैदा हुई और मुझे कल तक तो कुछ पता hi नहीं था मए तो वह एक साधारण लड़की की जिंदगी hi बिता रही थी.

फिर एक दिन अचानक मेरी जिंदगी में देव आये. और हमें पता hi नहीं चला के हम कब एक दूसरे से प्यार करने लगे. तब तक देव भी पूर्व जनम की बातो से अनजान थे बस एक ताक़त थी जिसने हमें एक दूसरे की तरफ आकर्षित किया और फिट बढ़ते बढ़ते वह हमारी जिंदगी इस मोड़ पे पहुंची की हमारे घरवालों ने हमारा रिश्ता तय करवा दिया. उस हिसाब से ये हमारे होने वाले जीवन साथी है.

……… फिर अचानक कल देवा ने मुझे अपनी शक्तिया दी और उन्ही शक्तियों के प्रभाव से मुझे सब कुछ याद आ गया वही मेरी मुलाकात शलाका से भी हुई.

मक – क्या इसका मतलब तुम और शलाका भी अब तक नहीं मिली थी?

पूनम – नहीं माँ मए तो एक साधारण लड़की थी न तो ये मेरे सामने नहीं आ सकती थी , पर मुझे शक्तिया मिलते hi. ये मेरे सामने आ गयी और उसी वजह से तो मए इसे देखते hi पहचान गयी. वार्ना तो शायद ये मेरे सामने आ भी जाती तो मए इसे पहचान नहीं पाती. और ये सब हुआ फ़कीर बाबा की सहायता से. जिन्होंने हमें आज मिलवा दिया.

तभी वह फ़कीर बाबा प्रकट होते है.

सभी उठकर उन्हें प्रणाम करते है.

फब – पूनम बेटी आज तुम्हे अपने माता पिता के साथ तुम्हारी hi नगरी में देख कर बहोत अच्छा लग रहा है.

देवा – बाबा आप में तो बहोत शक्तिया है. फिर आपने इतना समय क्यों लगाया हमें मिलाने में? आप चाहते तो ये सब पहले भी हो सकता था.

फब मुस्कराते हुए – नहीं देवा. शक्तियों का भी अपना दायरा होता है. कुछ वक़्त की पाबंदिया होती है. वक़्त से पहले तो मए भी कुछ नहीं कर सकता था. और रहा सवाल अपनी शक्तियों से, तो वो भी मुमकिन नहीं था. क्यों की अभी जो तुम दोनों के अंदर शक्तिया है वो तुम्हरी सेकड़ो सालो की म्हणत का नतीजा है जिन्हे कोई तुमसे छीन नहीं सकता .

……. और यकीन मनो तो आज मुझसे भी ज्यादा शक्तिया तुम दोनों के पास है अगर किसी दुश्मन के सामने तुम दोनों खड़े हो जाओ तो उसे तुम दोनों को पार करना लगभग असंभव है. ऐसा किसी की दी हुई शक्ति से नहीं होता. पर अब तुम दोनों तैयार हो मेरे बच्चो.

देवा – बाबा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है अभी कई सारे प्रश्न है जिनका जवाब नहीं है.

फब – वो इसलिए क्यों की तुम्हरे पिछले जाना में जो भी हुआ वो सब तुम्हरी आँखों के सामने नहीं हुआ था. कुछ यहाँ इस नगरी में हुआ कुछ नागलोक में तो कुछ कही और. फिर उन सब बातो का नतीजा जो निकला वो बहोत खतरनाक रूप में था.

देवा – बाबा क्या आप हमें सब कुछ बता सकते है?

फब – है देवा आज मए वही बताने आया हु. सुनो आज से सेकड़ो बरस पहले ये तिलिस्म नगरी और नाग लोक दोनों hi अपनी अपनी सीमाओं में बेहद खुश थे. जानते तो थे एक दूजे के बारे में लेकिन कभी कोई मेल मिलाप नहीं हुआ था. इसलिए अनजान भी कह सकते हो. फिर…………….

फ़्लैश बैक

तिलिस्मी नगरी का राजा सुमंत देव अपनी प्रजा से बहोत प्यार करता था उसकी सिर्फ दो बेतिया hi थी ( राजकुमारी पूनम और राजकुमारी शलाका) कोई बीटा नहीं था. लेकिन उन्हें इस बात का कोई अफ़सोस नहीं था. क्युकी ये दोनों राजकुमारिया उनका अभिमान थी और किसी भी नवयुवक पे भरी. ये किसी शक्तिशाली योद्धा को भी धुल चाटने में सक्षम थी. बेहद चालक और furteeli.har युद्ध कला में दक्ष. और खूबसूरत इतनी की इंद्रा की अप्सर भी इनके सामने कुछ नहीं.

उनके राज्य में खुशहाली थी. वह का कार्य hi ये था के सब अपनी तिलिस्मी शक्तियों में पारंगत हो जो जितनी शक्तिया हासिल करेगा उतना ऊँचा उसे पद मिलता था.

वही पे एक व्यक्ति था पुष्पक नाथ जो तिलिस्म नगरी के मुताबिक था तो सिर्फ एक साधारण व्यक्ति. लेकिन उसने भी कई साडी शक्तिया हासिल की हुई थी. और उसका मक़सद था सुमंत देव को हटा कर राजा बनना . चाहे उस के लिए उसे कुछ भी करना पड़े. लेकिन वो जनता था के वोट क बार सुमंत देव को तो हरा भी दे लेकिन शलाका और खास टूर पे पूनम को हरण इस के बस में नहीं था. इसीलिए वो चिंतित रहता था के कैसे अपना सपना पूरा करे और तिलिस्म नगरी का सिंघासन उसका हो जाये.

वो निरंतर अपनी चालबाजियों से कोशिश करता था लेकिन उसे एक भी मामूली सी भी सफलता नजर नहीं आयी. उसे ये पता चल गया के ये अकेले उस के बस की बात नहीं. लेकिन वो मौके की तलाश में रहने लगा.

उन्ही दिनों उस नगरी में एक मन्त्रिक आया जिससे मिलने वालो की भीड़ लगी हुई थी इस की जानकारी पुष्पकण्ठ को भी मिली तो वो भी उसे देखने चला गया. वो रोज जाता और उसे दूर से देखता और उसे समझने की कोशिश करता. और जो लोग उसे मिल कर आते उनसे भी पुष्पक नाथ मिलता और मन्त्रिक के बारे में जान्ने की कोशिश करता करीब एक हफ्ते तक उसने यही किया. और जो नतीजा उसने निकला उस नतीजे को जान कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और उसे मंजिल सामने नजर आने लगी अब वो तैयार था मन्त्रिक से मिलने के लिए .

एक दिन पुष्पक नाथ सुबह सुबह पहुंच गया मन्त्रिक के पास जहा पे लोग उसे मिलने के लिए आ रहे थे. वो एक किनारे में बैठ गया. लोग आते गए और मन्त्रिक से मिल कर जाते रहे. इस सब में आधा दिन निकल गया. जब वह कोई न बचा तो पुष्पक नाथ मन्त्रिक के पास गया.

मन्त्रिक – आओ पुष्पक नाथ सब कुछ जान लिया मेरे बारे में? कोई शंका बाकि तो नहीं?

पुष्पक नाथ ये सुन कर उस के पेअर पकड़ लेता है. नहीं महाराज मेरे मन में कोई शंका नहीं लेकिन यदि आप जानते थे तो आपने मुझे रोका क्यों नहीं?

मन्त्रिक – क्यों की यहाँ मए ये दान धर्म करने नहीं आया. मए तो यहाँ खास तुमसे hi मिलने आया हु. तुमने hi मुझ तक आने में देर कर di.Par अब आ गए हो तो पहले तुम बोलो जो बोलना चाहते हो.

पुष्पकण्ठ – महाराज मए यहाँ के राजा सुमंत देव की गद्दी पे बैठने चाहता हु.

मन्त्रिक - ये नहीं हो सकता.

पुष्पक नाथ हैरना हो कर – क्यों महाराज?

मन्त्रिक क्यों की तुम उस योग्य नहीं हो तुम एक लालची इंसाने हो भला यहाँ की प्रजा तुम्हे राजा क्यों मानेगी. हलाकि ये संभव तो नहीं पर मान लो तुमने राजा को मार भी दिया तो उसकी पुत्रिया यहाँ का शासन संभालेगी. मए जनता हु उस की दो पुत्रिया भी है. जो की योग्य है.

पुष्पकण्ठ –तो क्या मेरा सपना कभी पूरा नहीं हो सकता.

मन्त्रिक – देखो पुष्पकण्ठ. मेरे पास इतनी शक्ति है के मए तुम्हरी मनोकामना पूरी कर सकता हु. लेकिन मेरी भी कुछ शर्त है.

पुष्पक नाथ – मुझे आपकी हर शर्त मंजूर है.

मन्त्रिक - पहले सुन तो ले.

पुष्पक नाथ – ठीक है बताइये

मन्त्रिक – इस राजा के पास एक विशेष मणि है जो उसे देवताओ की कठोर तपस्या से प्राप्त हुई है. उसकी ये खूबी है के वो मणि सड़ के पास तो रहेगी और उसके बाद जॉब hi इस सिंघासन पे बैठेगा वो मणि उस के आधीन हो जाएगी. लेकिन अगर उस सिंघासन पर बैठा राजा चाहे तो किसी को भी दे सकता है. बस मुझे वही मणि चाहिए जो के राजा सड़ ने कही सुरक्षित जगह पे राखी है कहा ये उस के आलावा और कोई नहीं जनता उसी की वजह से यहाँ हर कोई इतना खुशहाल है.

तुम नहीं जानते लेकिन अगर ये राजा चाहे तो पूरे ब्रम्हांड पे राज कर सकता है, लेकिन ये लालची नहीं है. इसलिए उस मणि का उपयोग नहीं करता. पर मुझे वो मणि चाहिए. मए राजा के पूरे वंश को ख़तम करुगा और तुम्हे राजा बना दुगा जैसे hi राजा मरेगा और तुम उस सिंघासन पे बैठोगे वो मणि तुम्हरे पास आ जाएगी. और तुम उसे मुझे सौंप डोज बोलो मंजूर है?

पुष्पक नाथ – बिलकुल मंजूर है महाराज. मुझे मणि का लोभ नहीं मुझे तो बस ये सिंघासन चाहिए.

मन्त्रिक - ठीक है अब तुम जाओ और एक सप्ताह के बाद आना आज से आठवे दिन उस राजा की जिंदगी का आखरी दिन होगा. लेकिन याद रखना तुम्हारे मन में हमें धोखा देने का विचार भी आया तो मए तुम्हे उसी समय भस्म कर दुगा.

पण - ऐसा नहीं होगा महाराज. अब आज्ञा दे.

इधर नाग लोक में भी सब बेहद खुशाल थे.

यहाँ के राजा भैरव सिंह अपनी रानी नीलमणि के साथ एक शांत और खुशाल जिंदगी जी रहे थे रानी भी धर्मिक स्वाभाव की भगवन भोलेनाथ की पूजा में व्यस्त रहती थी. उनका एक hi बीटा है देव सिंह

राजकुमार देव सिंह के क्या कहने महाबलशाली, महा पराक्रमी, हर युद्ध कला में पारंगत और कई साडी दिव्या शक्तियों का ज्ञानी था. वैसे तो कोई दुश्मन इनके राज्य का था नहीं पर यदि कोई दुश्मन हमला कर भी देता था तो युवराज देव सिंह और उसका खास दोस्त रूद्र जो के अकेले hi पूरी सेना पे भरी पड़ते थे. ये उस दुश्मन को ऐसा सबक सीखा देते थे के वो शायद अपनी गद्दी पे भी बैठने के लायक नहीं रहता था. इन दोनों का साथ पूरी नगरी में मशहूर था.

भैरव सिंह का दरबार लगा हुआ था आज वह देव सिंह का जनम दिन मनाया जा रहा था तभी वह देव और रूद्र आते है.

भैरव सिंह – आओ बीटा और ये मिठाइयों और तोहफों पर अपना हाथ रखो इन्हे प्रजा में बात दो

देव सिंह उन थालियों पे अपना हाथ रखता है.

और सामने कड़ी प्रजा में वो सब बाटने के लिए सेवक ले जाते है.

फिर देव और रूद्र महाराज के पैर छूटे है.

बीएस – जीते रहो मेरे बच्चो रूद्र आज तुम्हारा भी जनम दिन है. तो तुम्हे भी बहोत बहोत बधाई हो बेटे.

देवा सिंह - महाराज आज मेरा और रूद्र दोनों का जनम दिन है हमें आशीर्वाद दे की हमारी दोस्ती कभी न टूटे

भैरव सिंह - तुम दोनों सदैव साथ रहोगे और तुम दोनों की दोस्ती तो मिस्साल रहेगी. सदा खुश रहो मेरे बच्चो.

…..वैसे आज क्या विचार है कही जा रहे हो क्या?

देव सिंह – जी पिता महाराज हम आपसे आज्ञा लेने hi आये है

भैरव सिंह – अच्छा तो कहा चली ये जोड़ी?

रूद्र - महाराज हम बस यु hi घूमने जा रहे है. आपसे आज्ञा लेने आये थे.

भैरव सिंह - ठीक है जाओ पर जल्दी आ जाना

फिर दोनों अपने घोड़ो पे सवार हो कर निकलते है . और दूर तक जाते है. और एक जगह पे झरने के किनारे एकांत में बैठ कर मौसम का आनंद लेने लगते है.

तभी उन्हें वह कुछ आवाज़े आती है.

1 – अरे आज तो कमल की लड़की हाथ लग गयी हमारे मालिक तो खुश हो जायेगे.

2. है पर किसी को पता न चले की हमने इसे अगवा किया है वार्ना महाराज हमें जान से मार देंगे. रात होते hi हमें पाने राज्य की तरफ चल पड़ना है. जिससे की कोई हमें देख न पाए.

इतना सुनते hi देव सिंह और रूद्र एक दूसरे को देखते है और फुर्ती से एक कोने में छुप जाते है और उस तरफ देखने लगते है जहा कोई 8-10 ामी दूर दूर खड़े थे. ये दो आदमी देव और रूद्र के नजदीक थे जिनकी बाते इन्होने सुन ली थी.

देव सिंह चरण अपनी तलवार निकल के सामने आ जाता है रूद्र वही छुप के खड़ा रहा.

देवसिंघ - कौन हो तुम लोग और यहाँ क्या कर रहे हो.

वह जीतनेय भी आदमी थे वो देव सिंह को देखते hi उस पर बिना कोई जवाब दिया हमला बोल देते है. और देव सिंह भी उनसे भीड़ जाता है.

एक साथ सारे लोग देव पे तलवार से हमला करते है देव नीचे बैतरह कर सरे वार अपने सर पे झेलता है जहा उसने अपनी तलवार आगे की हुई थी. और एक झटका मारता है तो 10 के 10 लोग दूर हो जाते है. फिर देव बड़ी फुर्ती से. अपने पास के दो लोगो के सीने पे तलवार से वार करता है और पूरी राफ्तेर से पीछे तलवार घमता है जो पीछे आ रहे एक आदमी के पेट से आर पर हो जाती है.

इन तीन लोगो को मौत की नींद सुला के देव वही पेड़ से लटक रही एक बेल पकड़ के दूसरा हाथ हवा में लहरा देता है तो उस की तलवार फिर से 2 लोगो की गार्डन को चीरते हुए गुजर जाती है.

देव इनसे लड़ने में व्यस्त था के इतने में रूद्र चुप के से वह बानी एक छोटी सी झोपडी में जाता है जहा एक बेहद खूबसूरत लड़की बंधी हुई पड़ी थी. उसके हाथ पैर और मुँह बांध कर वही जमीन पे छोड़ दिया गया था.

रूद्र आगे बढ़ता है और उसकी साडी रस्सिया खोल देता है और उसकी hi आँखों में खो जाता है. वो लड़की भी रूद्र में खो जाती है. ऐसे hi कोई 5 मिनट हो जाते है तभी झोपडी में तेजी से एक आदमी आता है और उसने रूद्र को मरने के लिए तलवार उठाई hi थी के पीछे से देव अपनी तलवार फेंक कर उसे मरता है जो उसकी पीठ में घुस कर छाती फाड़ते हुए निकल आती है.

रूद्र उस लड़की का हाथ पकड़ कर बहार लता आहे तो देखता है के दो लोगो ने देव को घेरा हुआ था और देव उनसे बच रहा था.

रूद्र वही एक पत्थर पे बैठ जाता है और हसने लगता है.

लड़की – अरे ये कौन है जो अकेला लड़ रहा है.

रूद्र - कोई नहीं मेरा दोस्त है.

लड़की कमल करते है आप वो दो लोग उसे मरने की कोशिश कर रहे है और वो निहथा उन तलवार वालो से लड़ रहा है और आप है के यहाँ बैठे हंस रहे है. उस बचते क्यों नहीं. जाइये उसे बचाइए कही कुछ अनर्थ न हो जाये.

रूद्र – अरे कोई अनर्थ वनरथ नहीं होगा ऐसे टुच्चे लोग इसे मरने लगे तो हो गया काम

लड़की – अरे काम से काम अपनी तलवार तो उसे दे दीजिये.

रूद्र – कोई जरुरत नहीं उसे कुछ देने की. आप भी बैठ जाओ यही पे.

देव – रूद्र क्या कर रहा है बे तलवार दे न.

रूद्र – क्या कहा? आपने कुछ कहा हमसे भाई?

देव – रूद्र तुझे तो मए छोड़ूगा नहीं. रुक अभी बताता हु.

इतने में देव अपनी तरफ हमला करने वाले एक आदमी की तलवार हाथ से पकड़ लेता है और एक झटका मारता है तो तलवार उस के हाथ से निकल कर देव के हाथ में आ जाती है.

देव बिना देर किये तेजी से तलवार ले कर एक राउंड गोल घूम जाता है. तो उस के पास खड़े आखरी दोनों लोग भी कटे हुए पेड़ की तरह गिर जाते है. फिर देव आता है रूद्र के पास

देव – क्यों बे मुझे बचा नहीं सकता था.

पर यहाँ रूद्र तो उस लड़की की आँखों में खोया हुआ था देव जब नजर घूमता है तो लड़की भी मदहोश हो चुकी थी. रूद्र की आँखों में. देव मुस्क्रत देता hae.aur रूद्र को और लड़की को पकड़ के हिला देता है.

देव – अरे ो तोता मैना होश में आओ

रूद्र – अरे देव टी.. टी.. टी.. तू आ गया मए तो बस आ hi रहा था तुझे बचने.

देव – आआआआह क्या बात है. तू आ रहा था. बोल देता न मुझे मए उन लोगो से कह देता भाई अभी रुक जाओ रूद्र आएगा मुझे बचने तब मरना.

तुझे शर्म नहीं आती मुझे वह उन के बीच अकेला छोड़ कर यहाँ नैन लड़ा रहा है.

इतना सुन कर लड़की शर्मा जाती है.

देव – ख़ैर चलो जाने दो वक़्त आने पे बदला लगा. वैसे आप कौन है? “देवा लड़की की तरफ िश्रा कर के”

रूद्र - लड़की है और यहाँ मुसीबत में थी तो मैने इन्हे बचाया.

देव – अछाअअअअअअअ यार मुझे तो पता hi नहीं था.

रूद्र - क्या बोलता है बे ?

लड़की का हंस हंस के बुरा हाल था – आप दोनों हो क्या मुझे तो समझ नहीं आ रहा

रूद्र – मए हु रूद्र यहाँ के महाराज का खास सेवक पूरी नगरी मुझे जानती है. बड़े से बड़ा दुश्मन मेरा सामना नहीं कर सकता. बाजुओं में इतनी ताक़त है ेके लोहे के सरिये को कलाई पे रुलमल की त्र लप्पेट सकता हु. और अब तक कुंवारा hi हु. मेरी शादी नहीं हुई अब तक.

लड़की देव की तरफ देख कर– और ये कौन है ?

रूद्र – ये? ये कोई नहीं, ये तो ऐसे hi बस मेरा दोस्त है . तुम इसे छोडो मेरी बात का जवाब दो क्या नाम है तुम्हरा?

लड़की मेरा नाम नीलम है और मए यहाँ पास के गाँव में रहती हु अभी नगरी की तरफ जा रही थी के इन लोगो ने पकड़ लिया. अच्छा हुआ आप लोग आ गए.

रूद्र कोई बात नहीं अब तुम मुझे धन्यवाद मत कहना ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

नीलम – लेकिन उन लोगो को मर कर तो मुझे इन्होने बचाया न

रूद्र - अरे इसे तो आदत है मार काट करने की अभी सिख रहा है ये भी तलवार चलना मए जल्दी hi इसे भी पूरा सीखा दुगा. वैसे मैने hi तुम्हे बचाया है देखा नहीं अपनी जान पे खेल कर मए झोपडी में घुस आया तुम्हे निकलने के लिए.

नीलम हंस कर – अच्छा तो आप इतने बहादुर है

Dev-ji है इनकी बहादुरी तो पूरी नगरी जानती hi है.

रूद्र - चलिए न आपको घर छोड़ दे.

नीलम जी नहीं मए चली जोगी .

फिर नीलम चली जाती है.

उस के बाद रूद्र और देव वापस महल आ जाते है.
 
अपडेट - 22

दूसरे दिन राज सभा में.

कुलगुरु- देव आपको एक कार्य करना है आप और रूद्र मेरे साथ आइये.

रूद्र और देव दोनों उठ कर कग के पास चले जाते है जो उन्हें एकांत में ले जाता है.

कग - देव आप को कल यहाँ से शिरोमणि पर्वत पर जाना है और कुछ जड़ी बुटिया लानी है. जिन्हे केवल आप दोनों hi ला सकते है. वो जड़ी बुटिया 100 वर्षो में एक बार निकलती है जिस के कुछ पत्तियों के सेवन से पूरा राजघराना स्वस्थ जवान जीता है और बलवान रहता है. और जवान रहता है. यदि उसे किसी लगभग मृत जीव के मुँह में भी दाल दो तो वो उसके प्रभाव से चरण स्वस्थ हो जाता है और पहले से अधिक शक्तिशाली हो जाता है. आप दोनों कल hi चले जाये प्रातः काल.

देव – जी कुलगुरु हम चले जायेगे किन्तु उसकी पहचान?

कग – उस में एक अद्भुत रौशनी फूटती है और उसकी महक hi तुम्हे अपनी तरफ खिंच लेगी. शिरोमणि पर्वत पे पहुंच कर तुम दोनों उत्तर दिशा में जाना तुम्हे खुद hi पता चल जायेगा.

देव – जो आज्ञा गुरुवार

फिर रूद्र और देव कग को प्रणाम कर के निकल जाते है.

इधर मन्त्रिक और पुष्पकण्ठ बैठे बाते कर रहे थे.

मन्त्रिक – पुष्पक नाथ जश्न मानाने का दिन नजदीक आ रहा है बस किसी तरह कल का दिन निकल जाये परसो का दिन शुभ है. परसो hi हम अपना हमला करेंगे मेरी मायावी सेना तैयार है और मुझे अपनी सिद्धि से ये तलवारे भी प्राप्त हो चुकी है जो की अभिमंत्रित है इस राजा को तो मेरी मायावी सेना hi निपटा देगी न निपटा पायी तो इस अभिमंत्रित तलवार के वॉर से मए राजा सुमंतदेव को मौत की नींद सुला दुगा. और फिर हमर सपना पूरा होगा.

पुष्पकण्ठ – लेकिन कोई रुकावट तो नहीं आएगी?

मन्त्रिक पहली बात तो कोई रुकावट आएगी नहीं और अगर आ भी गयी तो मेरी मायावी सेना के आगे नहीं टिकेगी और फिर भी कोई बड़ी दिक्कत हुई तो मए इस अभिमन्तिरित तलवार के वॉर से उस रुकावट को भी दूर कर दुगा. तुम निश्चिन्त रहो.

इधर नए दिन का सूर्य उदय होते hi देव और रूद्र अपने घोड़ो पर निकल पड़ते है शिरोमणि पर्वत की और अभी वो कुछ hi आगे गए थे की रूद्र का घोडा रुक जाता है. क्यों के उसे सामने से नीलम आती हुई नजर आ जाती है देव उसे देख कर मुस्करा देता है.

पास आ कर नीलम- अरे वह आज तो आप दोनों एक डैम सज धज के निकले है. कहा जा रहे है?

रूद्र – नीलम हम किसी काम से जा रहे है. शिरोमणि पर्वत पे. तुम भी चलोगी?

नीलम - मए भला वह जा के क्या करुँगी?

देव रूद्र को चिढ़ाते हुए – है है तुम hi चली जाओ नीलम क्यों की रूद्र मुझे भी यु hi ले जा रहा है मेरा कोई काम नहीं वह इसे तो बस अवरो की तरह घूमना आता है. कोई काम धाम तो करता नहीं.

नीलम समझ जाती है देव की मजाक और – क्या आप अवरो की तरह घूमते है मए तो समझी थी के आप दोनों कोई महँ योद्धा है. पर आप तो अवर निकले.

रूद्र – क्या बकता है बे?

देव – अच्छा मए बक रहा हु ?

रूद्र - नीलम तुम इसकी बातो में मत आओ. हम काम से hi जा रहे है. कल तक आ jayege.tum जाओ अपने घर इसका तो दिमाग hi ख़राब है लड़की देखि नहीं के बक बक चालू.

नीलम – मए जानती हु ये यहाँ के युराज है. आवारा की तरह नहीं घूम सकते . और आप इन के साथ है इसका मतलब आप भी पूरी नगरी में श्रेष्ट hi है. मए तो मजाक कर रही थी. ाचा अब आप जाइये. मए भी चलती हु.

रूद्र घोड़े से निचे उतर कर – सुनो नीलम

नीलम – क्या हुआ?

रूद्र - वो क्या तुम कल मुझे शाम को शिव मंदिर पे मिल सकती हो?

नीलम – क्यों ?

रूद्र - हद है यार सब अभी बता दुगा तो कल मिलने का क्या फायदा? तुम मिलोगी या नहीं

नीलम – अभी तो जाओ कल देखूँगी समय मिला तो ाउगि” और वो मुद कर जाने लगती है

रूद्र भी अपने घोड़े पर सवार हो कर आगे बढ़ता है तो पीछे से

नीलम – मए इंतजार करुँगी तुम्हारा रूद्र

रूद्र की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता वो पीछे मुड़कर देखता है तो नीलम हस्ती हुई भाग जाती है. फिर ये दोनों भी आगे निकल जाते है.

देव – बधाई हो रूद्र तूने तो मुझे भाभी दे दी यार

रूद्र - अरे तेरी भाभी वो अभी हुई नहीं हे.

देव – अबे जहंदुस कमी क्या रह गयी अब?

रूद्र – नहीं यार लड़कियों का भरोसा नहीं है. कल उसने मन कर दिया तो?

देव- तू बेवकूफ hi रहेगा अबे अगर मन करना होता तो ये क्यों कहती के इंतजार करेगी. तू चिंता मत कर देखना लड़क hi होगा.

रूद्र – क्या मतलब लड़का hi होगा?

देव – अबे मेरा मतलब है hi कहेगी , खुशखबरी hi मिलेगी . गधा है तू भी पहले दर्जे का. कुछ समझता hi नहीं. चल आगे.

रूद्र भी ख़ुशी ख़ुशी चलने लगता है. और पूरे दिन भर का सफर तय करने के बाद वो लोग जब शिरोमणि पर्वत पे पहुंचते है तो रात होने लगी थी.

रूद्र - अबे ये तो रात हो गयी यार अब क्या करेंगे?

देव – चिंता मत कर यही कही अपना महल बनायेगे पहले वो जड़ी बूटी लेलेते है आजा.

फिर देव और रूद्र उत्तर दिशा की तरफ बढ़ने लगते है अँधेरा तो था लेकिन चांदनी रात का समय था उन्हें इतनी भी दिक्कत नहीं आ रही थी. जब अँधेरा घाना होने लगा तो रूद्र ने अपने घोड़े के साथ बंधा हुआ मशाल का सामान निकला और मशाल जला ली क्यों के अब वह पेड़ घने हो गए थे तो चाँद की रौशनी पर्याप्त नहीं थी. सुनसान पर्वत पे वो लोग करीब 2 घंटे पैदल चलते रहे तभी देव को एक मनमोहक खुशबू आने लगी.

देव – लगता है बूटी इसी तरफ है क्यों की आगे से खुशबू आ रही है. चल रूद्र

फिर वो लोग तेजी से आगे बढ़ने लगते है तो थोड़ी दूर जाकर उन्हें वह उस जड़ी बूटी के दर्शन हो hi जाते है. देव पास जाकर उस बूटी का एक पत्ता तोड़ कर सूंघता है तो उसका पूरा शरीर झनझना जाता है सांसो से होती हुई खुशबू उसके पूरे जिस्म में भर जाती है.

देव – रूद्र यही है वो बूटी चल आजा.

जैसे hi वो आगे बढ़ने वाले होते है तभी उन के ठीक सामने एक साथ करीब 500 नाग गिरते है.

जिन्हे देख कर देव को बहोत क्रोध आता है. और रूद्र भी अपनी तलवार खींच लेता है तो देव उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक देता है.

देव – ये क्या बदतमीजी है? जानते हो हम कौन है?

तभी एक नाग उन के सामने इंसाने रूप में प्रगट होता है. तुम जो कोई भी हो हमें उससे कोई मतलब नहीं तुमने यहाँ आकर पहली गलती की है दूसरी गलती यहाँ का पत्ता तोड़ कर की तीसरी गलती अगर तुमने की हम से उलझ कर तो अपनी जान गवा बैठोगे. निकल जाओ यहाँ से.

रूद्र - अबे ो सांप हो कर भोंकता कितना है be.tu जनता नहीं हम लोग कौन है सुनेगा न तो मूट देगा

देव – रुद्रा शांत रह यार तू भी न …..

रूद्र - अबे मुझे नहीं इसे समझा तुझे भी क्या हो गया है.

देवा उस नाग से - तुम लोग कौन हो और यहाँ हमें रोकने का कारन?

नाग – देखो हम नाग लोक से यहाँ नियुक्त किये गए पहरेदार है. वह के कुलगुरु ने हमें यहाँ तैनात किया है. ये जो जड़ी बूटी है सर्फ हमारे महाराज और उनके परिवार के लिए है किसी अन्य क लिए नहीं इसलिए निकल जाओ यहाँ से

रूद्र - अबे केंचुए जिससे बात कर रहा है उसकी भी सुन ले सेल भोंकता hi जा रहा है. उसे पूछ तो ले के हम लोग है कौन

नाग – अच्छा इतना घमंड है अपनी पहचान पर तो चलो बताओ कौन हो तुम लोग?

रूद्र - हाआआआ अब फटेगी बीटा तेरी. सुन ये है शूरवीर, महावीर, कई सरे दानवो का अंत करने वाले, महा पराक्रमी, मायावी शक्तियों के मालिक नाग लोक के होने वाले सम्राट युवराज देव सिंह.

और मए हु इनका परम मित्र रूद्र.

वो नाग और उस के सारे साथी सीधे जमीन पे सर रख देते है.

देव -उठो मित्र ये क्या कर रहे हो.

नाग – युराज हमें क्षमा कर दे हमने आपको पहचाना नहीं इसलिए ऐसी गलती कर बैठे . कृपया हमें क्षमा कर दे. और रूद्र आप भी हमें क्षमा कर दे हम आप दोनों को नहीं जानते थे यहाँ से निकलने का कभी अवसर मिला hi नहीं हम यहाँ से बंधे हुए है. इसलिए आप दोनों योद्धाओ को नहीं पहचान पाए.

देव – अरे अरे आप यु लज्जित न हो आप लोग तो बस अपना कार्य कर रहे थे आपकी स्वामी भक्ति अद्भुत है. एक सच्चे सेवक के सारे गन आप में है. शायद इसलिए कुलगुरु ने आप लोगो को यहाँ रखा है. वैसे मए कुलगुरु से कह कर आप लोगो की यहाँ की सेवा हर 6 महीने में बदलवा दुगा जिससे आप भी नगरी का सुख भोग सके.

नाग -धन्यवाद् युवराज आप लोग आज रत यही विश्राम कीजिये मए अभी साडी जड़ी बूटी बांध कर आप को दे देता हु आप लोग कल सुबह जाइएगा. फिर वह से थोड़ा आगे वो नाग अपनी शक्तियों से देव और रूद्र के ठहरने और खाने पीने का इंतजाम कर देता है और वो दोनों वह जा कर खाना खा कर आर्म करने लगते है. जहा रूद्र तो नीलम के सपनो में खोया था और कल होने वाली मुलाकात का सोच रहा था. वही देव को नींद आ गयी दिन भर की थकन की वजह से.

दूसरे दिन प्रातः काल दोनों उठकर तैयार होते है. तभी नाग आता है. युराज आपके घोड़ो के साथ hi मैने जड़ीबूटियां बाँध दी है.

देव – बहोत बहोत धन्यवाद मित्र. अब हमें जाना होगा. सफर काफी लम्बा है. हम चलते है.

नाग - मए धन्य हो गया युराज आप के दर्शन प् के.

देव और रूद्र उसे गले लगते है और निकल पड़ते है अपनी नगरी की और.

वो लोग पर्वत शिखर से बड़ी तेजी से उतर आये और अब जंगल को पार करते हुए तेजी से आगे बाद रहे थे. उन्हें सफर शुरू किये हुए करीब 3 घंटे हो चुके थे के तभी

देव और रूद्र को दिखाई देता है के एक राजा अपने 10-12 सैनिको के साथ घिरा हुआ है. उसे सेना की एक टुकड़ी ने घेरा हुआ है जिनके पास हर तरह के हथियार है. राजा शायद लड़ाई करने के उद्देश्य से नहीं निकला था इसीलिए न तो उसने कोई कवच पहना था न hi उस के पास एक तलवार की लावा कोई हथियार. है उस के सैनिक जरूर थे पर उन के पास भी सिर्फ एक एक तलवार hi थी.

लेकिन वो सभी इस वक़्त घिरे हुए. थे तभी उस सेना ने राजा और उस के सैनिको पर हमला कर दिया और उन्हें काटने लगे.

इधर देव और रूद्र ये देख कर एक दूजे को देखते है और तेजी से अपने घोड़े उन की तरफ मोड़ देते है . और वह पहुंचते hi. तेजी से उस सेना को काटने लगते है.

इधर कोई 5 सैनिक राजा को घेर चुके थे. और उस पर वॉर कर रहे थे राजा खुद को भली भाटी बचा रहा था फिर भी वो थोड़ा जख्मी हो चुक्का था. शायद अचानक हुए हमले की वजह से और सामने वाली सेना में सैनिक भी ज्यादा थे. राजा अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है लेकिन सैनिको पर उसका कोई असर नहीं हो रहा था. वो निरंतर राजा की और बाद रहे थे. तभी वह देव अपनी पूरी राफ्तेर से पहुँचता है और सैनिको को काटने लगता है.

देव की तलवार के आगे. कोई सैनिक टिक नहीं पा रहा था. राजा गंभीर रूप से घायल हुआ पड़ा था.

उधर रूद्र भी सैनिको से अकेला लड़ रहा था लेकिन वो उन सब पर अकेला भरी था. इधर देव ने सरे सैनिक मार डेल और राजा की तरफ देखा और उन्हें सँभालने लगा राज का सर अपनी गॉड में रखे वो उन्हें होश में लेन लगा.

इतने में रूद्र भी सब को निपटा कर आ गया. तो वो भी देव की सहायता करते हुए राजा को उठाने लगा. वो लोग जा hi रहे थे. के अचानक सामने मन्त्रिक प्रकट हुआ.

मन्त्रिक – रुक जाओ लड़को तुम लोग राजा को ले कर नहीं जा सकते. इसे यही रख दो वार्ना तुम दोनों की गार्डन भी अपनी तलवार से काट दुगा .

रूद्र - अरे बाप रे मे तो बहोत दर रहा हु. हमें बक्शा दे हमें जाने दे. अबे चंगड़ा की औलाद. तूने क्या हमें तिनका समझ रखा है. सेल गांड फाड़ दुगा अगर एक शब्द भी निकला तो जनता है किस के सामने खड़ा है, बीटा जान जायेगा न तो जिन्दागी भर खड़ा नहीं होगा न तू न तेरा. समाजः गया.

मन्त्रिक – दुष्ट कैसी अभद्र भाषा बोल रहा है. लगाम दे अपनी जबान को

रूद्र - सेल लगाम हम देते है सिर्फ घोड़े को, अपने लोडे और जबान को नहीं तू है क्या बे. और इस तरह से इन पर हमला क्यों किया.

देव उन दोनों की बात सुन रहा था और शांत खड़ा था.

मन्त्रिक - तुझसे मए नहीं मेरी तलवार बात करेगी.

देव ने तुरंत राजा को रूद्र के हवाले किया रूद्र भी राजा को लेकर किनारे हो गया और एक पेड़ के नीचे राजा को लिटा दिया और देव को देखने laga.wo जनता था अब इस लोडे मन्त्रिक के दिन पूरे हो गए क्यों की उसने देव को ललकार के गलती कर दी है.

……..मन्त्रिक ने हमला किया तो देव ने भी अपनी तलवार निकल के मन्त्रिक की तलवार का वॉर रोका. लेकिन ये क्या देव की तलवार के दो टुकड़े हो गए जिसे देख कर देव चौंक गया लेकिन इधर रूद्र का क्रोध सातवे असंना पे पहुंच गया.

रूद्र – devvvvvvvvvv ………. shaktiiiiiiiiiiiiiiiii

देव रूद्र की बात समझ गया और तुरंत अपनी आँखे बंद कर ली और अपना हाथ आगे किया इधर रूद्र ने भी अपनी आँखे बंद की रूद्र और देव की मिली हुई शक्ति के आगे कुछ नहीं ठहर सकता था. देव के हाथ में एक चमचमाती हुई बहोत भरी तलवार प्रकट हुई जिसे देख कर मन्त्रिक की भी आँखे सिखुद गयी कुछ देर के लिए तो उसकी आँखों के आगे उस तलवार की चमक से सारा नजर hi गायब हो गया उसकी आँखे चुंधिया गयी.

पर मन्त्रिक ने वापस खुद को संभाला और देव के ऊपर हमला किया. इस बार उसकी तलवार जैसे hi देव की तलवार से टकराई एक जोर की बिजली कड़की और और एक गर्जना हुई.

एक झटका सा लगा मन्त्रिक को जिससे उसका पूरा शरीर झनझना गया.

वो संभल कर फिर आगे बड़ा और लगातार देव पे हमले करने लगा. देव अभी सिर्फ उस के वॉर रोक रहा था.

के तभी देव 10 फुट ऊपर छलांग लगा के सीधा तलवार का हाथ मन्त्रिक के सर पे मार देता है मन्त्रिक का सर पहात जाता है .

जमीं पे आ कर देव मन्त्रिक पे तेजी से वॉर करने लगता है वॉर इतने ज्यादा तेजी से हो रहे थे के मन्त्रिक को न तलवार नजर आ रही थीं ा वॉर समझ आ रहे थे वो बोखला जाता है वो अपनी पूरी कोशिश करता है पर देव वॉर पे वॉर किये जार अहा था जिसे मन्त्रिक बड़ी मुश्किल से रोक प् रहा था इस बीच उसे कई घाव लगते है. वो तो मन्त्रिक था और उस के हाथ में अभिमंत्रित तलवार वार्ना कोई और होता तो देव की तलवार के एक hi वॉर से ख़तम हो जाता.

मन्त्रिक समझ जाता है. के गलत आदमी से उलझ बैठा है. देव उस पर फिर वॉर करता है तो मन्त्रिक जान बुझ कर लुढ़कता हुआ दूर हो जाता है. और फिर खड़ा हो कर.

मन्त्रिक – मए अभी जा रहा हु. लेकिन तुमसे जल्द hi मिलुंगा और तुम्हारा काल बन के आएगा ये मन्त्रिक याद रखना. जल्द hi आउगा मए.

और मन्त्रिक वह से गायब हो कर भाग जाता है.

रूद्र तुरंत देव के पास आ जाता है.

रूद्र – कौन था ये मादरचोद. बहोत लम्बी लम्बी फेंक रहा था काल बन के आएगा. सेल की काली गांड hi मार लगा अगली बार आया तो. वैसे भी बहोत दिन हो गए किसी की गांड नहीं मारी मैने. हर बार तू मुझे किनारे कर देता है.

देव – रूद्र मेरे यार जब तक मए हु तुझे किसी के आगे आने की जरुरत नहीं तू मेरे लीये कीमती है. तुझे कैसे सामने कर के मए किनारे हो जाऊ.

रूद्र – बस कर पगले रुलाएगा क्या? तू हमेशा मुझे किनारे करता है न. लेकिन अगर तुझे कुछ हो गया तो जनता है क्या होगा?

देव – अच्छे से जनता हु. तू पूरा रावण है. मुझे जिस दिन कुछ हुआ उस दिन तू सब कुछ भूल कर उसके खून का प्यासा हो जायेगा जब तक मुझे चोट करने वाले के शरीर में एक बूँद भी खून की होगी तू उसे मरता रहेगा. वो मौत मांगेगा पर तू इतना कमीना है उसे मरने भी नहीं देगा.

रूद्र - अरे वाह तू तो सब जनता है.
 
अपडेट - 23

रूद्र - अरे वाह तू तो सब जनता है. पर मेरे यार मे तो भोलेनाथ से यही प्रार्थना करुगा के तुझे कुछ न हो कभी. वार्ना मए भी जीते जी मर जाउगा. और अभी तो मुझे बहोत जीना है बे. नीलम के साथ 20 25 बच्चे पैदा करने है, और……..

………. अरे है नीलम से याद आया शाम को नीलम के पास भी जाना है चल जल्दी उस राजा को देखते है अभी उसे भी उसके महल पहुंचना है. तू भी न जब देखो बातो में लगा देता है, चल.

देव मुस्क्रत हुआ रूद्र के साथ पेड़ के नीचे पहुँचता है. जहा राजा बेहोश पड़ा था. किसी तरह उसे होश में लाया जाता है.

देव – प्रणाम महाराज

सुमंत देव – तुम कौन हो युवक?

देव – महाराज मए नाग लोक का राजकुमार देव सिंह हु और ये मेरा परम मित्र रूद्र है.

सुमंत देव – क्या आप दोनों देव और रूद्र हो . आप दोनों से मिल कर बेहद ख़ुशी हुई. बहोत नाम सुना है आप लोगो का.

रूद्र - अरे वाह हमारा भी नाम चलने लगा है क्या? महाराज भी हमें जानते है.

सुमंत देव मुस्कराते हुए – है बीटा तुम दोनों की कीर्ति तो चारो दिशाओ में है. वैसे मए तिलिस्म नगरी का राजा सुमंत देव हु.

देव – आइये महाराज पहले आप को आपके महल पंहुचा देते है फिर बात करेंगे.

फिर देव उन्हें उनके रथ में बिठा देता है और खुद उनका सारथि बन कर रथ बड़ा देता है रूद्र पीछे से दोनों घोड़े ले कर चलने लागत है.

कुछ hi देर में वो लोग महल पहुंच जाते है. देव सैनिको से कह कर महाराज को उनके कक्ष में पंहुचा देता है. जहा एक एक कर के सब आ जाते है. महारानी, राजकुमारिया, मंत्री. थोड़ी देर के बाद बाकि तो सब चले जाते है अब वह सिर्फ राज परिवार और देव, रूद्र hi बचे थे,

सुमंत देव – बीटा देव ये है हमारी रानी कौशल्या देवी

और ये हमारी बड़ी सुपुत्री पूनम और ये छोटी शलाका.

देव और रूद्र सबसे हाथ जोड़ कर मिलते है किन्तु पूनम और देव एक दूजे में hi खो जाते है. ये बात सबने देखि और सब के चेहरे पे मुस्कराहट थी.

सुमंत देव – बेटी पूनम आप जानती है. आज अगर देव न होते तो शायद हमारा आज आखरी दिन होता. इन्होने अपनी बहादुरी से हमें बचाया और इनका साथ देने वाले हमेशा की तरह रूद्र ने भी. ये दोनों फ़रिश्ते की तरह वह पहुंचे और हमारे प्राणो की रक्षा की.

महारानी कौशल्या (मक) – युराज आप नहीं जानते आपने हम सब पर और इस राज्य पर कितना बड़ा उपकार किया है.

देव – नहीं महारानी जी ये तो हमर फ़र्ज़ था भला महाराज को मुसीबत में छोड़ कर हम कैसे निकल जाते.

मक – चलो ईश्वर का धन्यवाद् आपकी जान तो बच गयी. और ये जख्म भी कुछ hi दिनों में ठीक हो जायेगे.

तभी देव – महाराज मए अभी आता हु.

महाराज - अरे युराज कहा चल दिए

तब तक देव बहार निकल चुक्का था. थोड़ी देर में वो आया तो उसके हाथ में वही जड़ी बुटिया थी. देव ने महाराज के पास आकर उन्हें जड़ी बूटियों के कुछ पत्ते हाथ से मसल कर खिला दिए. अभी 2 मं भी नहीं गुजरे थे के महाराज के चेहरे की खरोंचे और शरीर पे लगे घाव तेजी से भरने लगे और देखते hi देखते महाराज जो हिलने में भी कराह रहे थे एक डैम से उठ कर बैठ गए.

ये देख कर सब की आँखे खुली की खुली रह गयी क्यों की ये चमत्कार तो देव और रूद्र के लिए भी नया hi था.

रूद्र - क्या बात है महाराज आप तो न सिर्फ ठीक हुए बल्कि उठ कर खड़े भी हो गए. और इतनी फुर्ती भी आ गयी. हो जाये दो दो हाथ कुश्ती के

सब लोग हसने लगे.

सुमंत देव – युराज ये कैसा चमत्कार है?

देव – महाराज असल में हम हमारे कुलगुरु की आज्ञा अनुसार इन जड़ी बूटियों को लेने hi गए थे के वापस आते हुए आपसे मुलाकात हो गयी. ये सब इन्ही जड़ीबूटियों का असर है.

सुमंत देव – जीते रहो वत्स. तुमने तो मुझ में नव यौवन जगा दिया ऐसा प्रतीत हो रहा है.

रूद्र – महारानी जी संभल के रहिएगा……

देव – rudraaaaaaaaaaaaaaaaaa

रूद्र – ओह्ह क्षमा महारानी मुँह से निकल गया

इधर महारानी तो शर्म से पानी पानी हो गयी रूद्र की बात सुन कर.

फिर महाराज उन्हें अपने साथ ले गए और दोपहर का खाना खिलाया, लेकिन हर वक़्त पूनम और देव की नजर बार बार एक दूजे से टकराती और पूनम शर्मा के गार्डन नीचे कर लेती. तब

देव – अब आज्ञा दे महाराज नाग लोक पहुंचने में भी समय लगेगा

सुमंत देव – ठीक है राजकुमार. आते रहिएगा. हमारे महल के इस नगरी के और हमारे ह्रदय के द्वार आप के लिए और नाग लोक वासियो के लिए हमेशा खुले रहेंगे.

देव – धन्यवाद् महाराज

रूद्र – पूनम को देखते हुए हाथ जोड़ के, वैसे महाराज नाग लोक भी अति सुन्दर है कभी पधारिये वह भी देव “आपको” पूरी नगरी दिखायेगा अपनी. क्यों देव?

देव – जरूरर आप लोग भी अवश्य आइये नाग लोक

सुमंत देव – है युवराज हम भी आएंगे. अपने पिता श्री को हमारा सदर नमस्कार कहियेगा.

फिर देव और रूद्र निकल पड़ते है नाग लोक की तरफ अभी वो तिलिस्म नगरी की सीमा में hi थे के तभी एक कबूतर उड़ता हुआ आया और देव के कंधे पे बैठ गया. देव ने अपना घोडा रोका और कबूतर को हाथ में पकड़ के देखने लगा तो उस के गले में तावीज देखा और तावीज निकल के देखा तो उसमे एक सन्देश था देव न चरण वो पढ़ा तो पढ़ के खुश हो गया और महल की चाट की तरफ देखा जहा राजकुमारी कड़ी मुस्क्रत रही थी.

देव ने राजकुमारी को देख के वो सन्देश चुम लिया और कबूतर को अपने पास रख लिया. तो राजकुमारी तुरंत शर्मा कर नीचे भाग गयी.

रूद्र – अरे क्या है इसमें ऐसा जो तू चुम रहा है. देव ने सन्देश रूद्र की तरफ बड़ा दिया .

रूद्र सन्देश पड़ते हुए – “आपने हमारे पिटस हरी की जान बचायी उस के लिए हम आप के सदैव ाधारी रहेंगे. और दुबारा आपसे मिलने के लिए बेक़रार भी. पूनम”

सन्देश पढ़ के रूद्र - वाह मेरे शेर महाराज को बचा लिया और राजकुमारी का दिल चुरा लिया सौदा बुरा नहीं रहा. शाबाश.

देव भी मुस्करा दिया और फिर दोनों चल पड़े अपने नगर की और.

देव – क्यों बे क्या बकवास कर रहा था. तू वह पे जबान को रोक नहीं सकता क्या. महारानी को शर्मिंदा कर दिया

रूद्र - मैने क्या कहा ऐसा जो महारानी ने अब तक नहीं क्या? अरे मए तो मजाक में कह रहा था. और बीटा तूने जो अब तक रोज रात को सिर्फ सपनो में किया है न महारानी ने वो कई रातो तक हक़ीक़त में किया है जग कर. ये दोनों राजकुमारिया जमीन से नहीं निकली समझा, इसलिए मुझे ये ज्ञान मत पेल. चुप चाप चल

देव – साले तू नहीं सुधरेगा.

रूद्र – है बीटा तू जो मेरी खिचाई करता रहता है नीलम के सामने वो भूल गया अब मैने कुछ किया तो बुरा लग रहा है.

ये दोनों इसी तरह बाटे करते हुए नाग लोक आ जाते है जहा पे महल में पहुंचते hi रूद्र तो भाग जाता है भोलेनाथ के मंदिर. जहा नीलम उसका इंतजार कर रही थी.

और देव अंदर महल में जाता है.

देव – प्रणाम पिता जी , प्रणाम कुलगुरु

दोनों – जीते रहो देव

भैरव सिंह – पुत्र आने में इतना विलम्ब कैसे हुआ?

देव – पिता जी वो रस्ते में कुछ समस्या आ गयी थी उसी वजह से देर हुई

भैरव सिंह – किस का इतना दुस्साहस के हमारे पुत्र का रास्ता रोके तुम हमें बताओ देव

देव – अरे अरे पिता जी क्रोधित न हो जो भी थे उन्हें मैने और रूद्र ने अपने तरीके से समझा दिया लेकिन वो एक मन्त्रिक था जिसने हमला किया था तिलिस्म नगरी के राजा पर वो भी अचानक जिससे राजा गंभीर रूप से घायल हो गए वो मन्त्रिक उन्हें मरने hi वाला था के हम बीच में कूद पड़े और उन्हें बचा लिया फिर मन्त्रिक से तलवार बजी की जिसमे वो डूम दबा कर भाग गया देख लगा जैसी धमकी देकर . जिसका कोई सार नहीं . फिर हम गए तिलिस्म नगरी और महाराज का आतिथ्य स्वीकार किया फिर यहाँ आये इसलिए देर हो गयी.

भैरव सिंह – ठीक है युवराज अब आप अपने कक्ष में जाकर विश्राम कीजिये.

देव के जाने के बाद

भैरव सिंह – कुलगुरु. आप तुरंत पता लगाइये वो कौन सा दुष्ट मन्त्रिक था जिसने ये हमला किया और उसका इतना सहस हुआ कैसे के वो हमारे बेटे को धमकी देकर चला गया. उसे हम स्वयं दंड देंगे.

कग – जो आज्ञा महाराज मए अभी पता करता हु.

इधर भोलेनाथ के मंदिर जब रूद्र पंहुचा तो वह उसे नीलम गुस्से में टहलती हुई नजर आयी.

रूद्र - मर गए पहली मुलाकात में hi देर से आया हु पता नहीं अब ये मेरा क्या हाल करेगी वैसे डरता तो मए राक्षसों से भी नहीं पर है इससे पता नहीं क्यों दर लग रहा है. हे भोलेनाथ बचा लेना अपने इस नादाँ भक्त को.

नीलम रूद्र को देखते hi भड़क गयी. – आ गए आप इतनी जल्दी आने की क्या जरुरत थी 4-6 महीने बाद भी आते तो मए आपका क्या कर लेती? मए तो बेवकूफ हु hi यही इंतजार करती रहती आपका

रूद्र -अच्छा इतनी जल्दी इतनी मोहब्बत हो गयी मुझसे

नीलम को अपनी गलती का अहसास होता है वो शर्मा जाती है लेकिन तुरंत खुद को संभल कर…….

…………कोई मोहब्बत नहीं हुई ये तो आपने मुझे बुलाया था इसलिए आ गयी मए. वार्ना मुझे और भी बहोत से काम है. अब जल्दी से बोलो जो भी बोलना है मुझे घर भी जाना है. फालतू नहीं रहती मए.

रूद्र नीलम का हाथ पकड़ कर – सोच रहा हु इन हाथो के लिए सोन ेके कंगन बनवा दू. लेकिन तुम्हरे पास समय नहीं तो मए क्या करू?

नीलम मेरे लिए कंगन बनवाने की कोई जरुरत नहीं अपनी बीवी के लिए hi बनवा लेना और पहना भी देना.

रूद्र – उसी से तो पूछ रहा हु

नीलम – अच्छा फिर तुम……………….

रूद्र – क्या हुआ?

नीलम – क्या कहा आपने? बीवी? मए?

रूद्र – है नीलम जब से तुम्हे देखा है तुम hi तुम नजर आती हो मुझे हर जगह. क्या तुम मेरी जीवन संगिनी बनोगी?

नीलम – रूद्र क्या मए इस लायक हु?

रूद्र – बेशक नीलम सिर्फ तुम hi इस लायक हो बोलो डौगी साडी जिंदगी मेरा साथ?

नीलम है रूद्र मैने भी जब से आपको देखा है कुछ हो गया है मुझे और मुझे भी हर जगह बस आप hi नजर आते है. मए भी आपसे प्यार करने लगी हु.

रूद्र आगे बाद के नीलम को गले से लगा लेता है तो नीलम भी रूद्र की छाती से लिपट जाती है.

इधर राजमहल में देव सिंह पूनम के सपनो में खोया हुआ था. हलाकि वो चाहता तो एक पल में पूनम के पास पहुंच सकता था. लेकिन उसे मर्यादा का ख्याल था इसलिए वो मजबूर था. बस आँखे बंद कर के पूनम का मुस्क्रत चेहरा देख रहा था. उसे भी कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. तो वो बार बार वही सन्देश निकल के पढ़ रहा था अचानक देव भी उठ बैठता है और एक सन्देश लिखने लगता है अपनी पूनम के लिए.

“ पूनम ये तो हमारे लिए बहोत बड़ी बात है के एक ब्रम्हांड सुंदरी हमारी आभारी है, हमने आप के पिता जी के प्राण तो बचा लिए लेकिन तिलिस्म नगरी में आ कर हमारी एक बहोत कीमती चीज़ चोरी हो गयी और हमें यकीन है की वो चोरी जिसने भी की है वो आपके महल में hi hae.par हम वह कुछ कह नहीं पाए.”

इतना सन्देश लिखकर वो कबूतर के गले में दाल देता है और उसे उदा देता है, फिर वो बेचैनी में रात काट लेता है. के पता नहीं कल क्या जवाब आएगा.

सुबह होते hi वो तैयार हो कर अपने कमरे से निकल hi रहा था की रूद्र आ जाता है.

रूद्र - क्या बात है मेरे शेर कहा जा रहे हो.

देव – कही नहीं यार. बस थोड़ा मन बेचैन है. तो बाग़ में जा रहा हु चल आजा दोनों चलते है.

रूद्र और देव महल के बैग में आ जाते है

रूद्र – तुझे एक खुशखबरी देनी है क्यों की उस पर सबसे पहला हक़ तेरा है.

देव – अच्छा ऐसा है तो बोल फिर

रूद्र – देव तुझे यकीन नहीं होगा लेकिन नीलम ने मुझे हां कर दी है. वो भी मुझसे शादी करना चाहती है.

देव- धत्त तेरे की ये कोई खुशखबरी है?

रूद्र – क्या बोलता है यार मए उसे प्यार करता हु

देव – सर्कार इस साल में आपका ये पांचवा प्यार है जो शादी तक पहुंच गया है.

रूद्र – अरे वो सब तो यु hi थी बस समय गुजरने के लिए पर ये तो मेरी जिंदगी है देव मए सच कह रहा हु.

देव – अगर ये बात है तो खा दोस्ती की कसम. क्यों की मए जनता हु तू किसी भी हाल में दोस्ती की झूठी कसम नहीं खा सकता

रूद्र – हमारी दोस्ती की कसम देव नीलम hi तेरी भाभी बनेगी वार्ना मए कभी शादी नहीं करुगा.

देव – वाह ये हुई न सही खुश खबरि. अब सुन मए भी तुझे खुशखबरी सुनाता हु.

रूद्र - जनता हु मए तेरी खुशखबरी.

देव – अच्छा तो बोल जरा मए भी सुनु के तू मुझे कितना जनता है

रूद्र – राजकुमारी पूनम से प्रेम हो गया है आपको , आपकी नींद हराम हो गयी है, उसे देखना चाहते है, उसे मिलना चाहते है, उससे शादी कर के 10-15 बच्चो के बाप बनना चाहते है. है न यही बात?

देव मुँह फाडे उसकी बाते सुन रहा था- यार तू तो सच में कमल है. तुझे कैसे पता ये सब बाते

रूद्र – राजकुअंर जी हम भी दिमाग रखते है और आँखे हमारी एक डैम सही है अब तक . कल जो आप दोनों का नैन मटक्का चल रहा था न वो मैने तो क्या वह मौजूद सबने देखा और एक बात बताऊ.

देव – क्या?

रूद्र – आप दोनों को एक दूजे से प्यार हो गया है ये आप दोनों से पहले राजकुमारी के माँ, बाप, बहन और मुझे पता चल चूका है. क्यों की कल आप दोनों की हालत साफ़ साफ़ चिल्ला के कह रही थी. के आप दोनों तो गए काम से.

देव – है यार सच में हमें प्यार हुआ है. मैने तो कल रात hi राजकुमारी को सन्देश भेज दिया था.

रूद्र – अरे वाह तब तो तुम लड़ाओ बैठ के प्रेम की पतंग हम चले.

देव – कहा जा रहा है बे?

रूद्र यार मुझे कुछ काम है बाद में मिलुंगा तुझसे. वैसे भी वो देख आ गया तेरा कबूतर. मए चला

देव ऊपर देखता है तो सामने से वही कबूतर उड़ता हुआ चला आ रहा था. और आकर सीधा देव के कंधे पे बैठ गया. देव ने कबूतर के गले से सन्देश निकला

“आप कैसे है? आप पहुंच गए थे न सकुशल? और आपने ये क्या सन्देश भेजा था? मए कोई ब्रम्हांड सुंदरी नहीं. बस एक साधारण सी लड़की हु. खूबसूरती तो आपकी नजरो में है जिसने हमें इतना मान दिया. अब बताओ ये नाग लोक के एकलौते युवराज की ऐसी कौन सी कीमती चीज़ थी जो चोरी हुई? वो भी हमारे महल में? अगर आप चोर को भी जानते है तो जरूर बताइयेगा उसे हम दंड देंगे.

पूनम”

देव –सन्देश पा कर झूम उठता है और कबूतर को चुम लेता है. – यार तू तो बड़े काम की चीज़ है. चल तू आराम कर मए आता हु.

फिर देव अपने कक्ष में जाता है. और दुबारा सन्देश लिखने लगता है.

“पूनम , मए यहाँ पहुंच तो गया लेकिन मेरी कुशलता नहीं है. मेरी कीमती चीज़ जो चोरी हो गयी तो मए कैसे कुशल हो सकता हु. वो कीमती चीज़ था मेरा दिल. और जिसने चोरी किया उस चोर का नाम है {ब्रम्हांड सुंदरी पूनम} लेकिन आप उसे कोई दंड मत देना. क्यों की अब मेरा उस के बिना जीना मुश्किल है. है पूनम. हम आपसे बेहद मोहब्बत करने लगे है. हम नहीं जानते हमारी मोहब्बत का अंजाम लेकिन. बस आपसे प्यार हो गया है. अगर आप के दिल में हमारे लिए थोड़ी सी भी जगह हो तो इस सन्देश का जवाब जरूर देना चाहे वो है में हो या न में. हम बेचैनी से इंतजार करेंगे.

देव”

देव फिर से रात का इंतजार करता है और पाना सन्देश कबूतर के गले में दाल के भेज देता है.

दूसरे दिन पूनम का जवाब आ जाता है.

“देव आपकी कीमती चीज़ हमें बहोत प्यारी लगी इसलिए हमें ले ली लेकिन उस के बदले में अपना दिल भी तो दिया आपको. ये चोरी नहीं अदला बदली थी . क्यों के हमारी भी हालत आप की तरह hi है. हम भी आपसे प्रेम करने लगे है. लेकिन हम चाहते थे पहले ये बात आप कहे तब हम आपको बताये. आपने हमें इस काबिल समझा उसके लिए शुक्रिया देव.

सिर्फ आपकी पूनम”

देव की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता ये जान कर के पूनम भी उसे प्यार करती है. और अब तो उसने ये बात स्वीकार भी कर ली….. ………लेकिन अब तो बस इस तरह सन्देश का hi सहारा था.

इसी तरह के प्रेम भरे सन्देश उन के लगभग रोज hi होते रहे इसी तरह करीब 6 महीने बीत गए. लेकिन देव और पूनम मिल नहीं पा रहे थे पर ये जुदाई उन के प्यार को और बड़ा रही थी और मिलने की इच्छा भी बढ़ती hi जा रही थी.

ये हालत महाराज सुमंत देव भी समझ रहे थे. पर उन्हें सही वक़्त का इंतजार था वो कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे.

और इधर देव की हालत तो ख़राब hi होने लगी थी पूनम की याद में.

एक दिन जब रूद्र आया तो बीएस ने सीधे उसे अपने पास बुलाया

रूद्र – क्या बात है महाराज सब कुशल तो है?

बीएस - नहीं रूद्र सब कुशल नहीं है इसलिए तुम्हे बुलाया है हमने.

रूद्र – आपके इस सेवक के होते यदि आप चिंतित है तो ये मेरा दुर्भाग्य होगा महार मुझे बटैत ऐसी कौन सी चिंता आपको घेरे कड़ी है.
 
अपडेट - 24

बीएस - हम तुम्हे कुछ कहे तो क्यात ुम वो करोगे रूद्र?

रूद्र – आप को हमसे पूछने की जरुरत नहीं है आज्ञा दे महाराज.

बीएस – रूद्र क्यात ुम जानते हो आजकल देव इतना उदास क्यों रहने लगा है? न ठीक तरह से खता है न पीटा है, कई बार हमने उसे रातो में टहलते देखा है. आखिर उसे हो क्या गया है. बस यही चिंता हमें सताए जा रही है.

रूद्र मुस्कराते हुए – बस इतनी सी बात है? वैसे उसे कुछ नहीं हुआ है महाराज वो बहोत दिनों से हम कही गए भी नहीं एक hi तरह की दिनचर्या चल रही है कुछ नया नहीं है शायद इसलिए ऐसा होगा . आप चिंता न करे मए उससे बात कर लगा.

बीएस – है रूद्र हम भी यही चाहते है के तुम उससे बात करो. अगर कही जाना चाहो तो घूम आओ.

रूद्र – जो आज्ञा महाराज

फिर रूद्र सीधा आता है देव के पास लेकिन देव तो वही महल के बैग में बैठा पूनम के सन्देश पद रहा था.

रूद्र - क्या हाल है मेरे यार

देव – आओ रूद्र .

रूद्र - ये क्या हल बना दिया है अपना दोस्त

देव – कुछ नहीं यार अब पूनम के बिना कुछ अच्छा नहीं लगता

रूद्र – अगर ऐसी बात है तो तू बोल के तो देख साली साडी तिलिस्म नगरी एक तरफ और तेरा ये फौलादी दोस्त एक तरफ आज के आज hi पूनम तेरी बहो में होगी

देव – जनता हु यार लेकिन मए ऐसा चाहता नहीं.

रूद्र - तो फिर तू चाहता क्या है.

देव – मए पूनम से शादी करना चाहता हु. लेकिन हमारी बात तो अब तक हम दोनों के दिल में hi है तू hi बोल मेरी बात आगे कैसे बढ़ेगी.

रूद्र – अबे मए क्या यहाँ मोची लगा हु क्या? तेरा दोस्त हु तो मए hi आगे बदउगा न. तेरी तरह नहीं हु मए. अब तू देख बीटा ये रूद्र क्या करता है बस बीच में अपनी चोंच बंद रखना वार्ना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा तेरे लीये समझा. क्यों की मुझे अब तो पूनम hi चाहिए भाभी के रूप में मेरे यार. अब चल के पहले अपना हुलिया सुधर ले और फिर चल महाराज के पास, और देख तेरा ये दोस्त क्या करता है.

देव – लेकिन महाराज के पास क्यों ?

रूद्र – अबे अकाल के दुश्मन शादी क्या खुद hi कर के आएगा? अब चल न यार.

देव और रूद्र अंदर जाते है जहा देव तैयार होता है और फिर वो दोनों दरबार में जाते है जहा महाराज बैठे थे.

महारज भैरव singh(BS) – आओ मेरे वीरो बोलो क्या हाल है?

रूद्र – सब आपकी कृपा है महाराज, अगर आपकी आज्ञा हो तो मए कुछ कहना चाहता हु.

बीएस – है है रूद्र कहो तुम्हे हमसे पूछने की जरुरत नहीं. निसंकोच होकर कहो.

रूद्र – वो महाराज देव ने आपको बताया hi है के तिलिस्म नगरी के महाराज से हमारी भेंट हुई थी.

बीएस – है देव ने बताया था. तो ?

रूद्र - महाराज देव ने उन्हें अपना मित्र बनाया है और यु औपचारिक रूप से उन्हें नाग लोक आने का आमंत्रण भी दिया. लेकिन मेरा ये सुझाव है की तिलिस्म नगरी के महाराज से आपको मित्रता बदनी चाहिए जिससे की वक़्त आने पर उस तरफ की सीमाएं भी सुरक्षित रहे.

बीएस – ये तो उत्तम सुझाव है. हम अभी उन्हें दोस्ती भरा सन्देश और कुछ उपहार भेज कर उनसे मित्रता करना चाहेंगे.

रूद्र – आपका विचार उत्तम है महारज किन्तु मेरे पास उससे भी अच्छा एक रास्ता है.

बीएस – तो निसंकोच हो कर कहो रूद्र

रूद्र – महाराज अगले हफ्ते से हमारे यहाँ जो वार्षिक खेल महोत्सव और प्रतियोगिताएं होनी है. क्यों न उनमे तिलिस्म नगरी के महाराज और उनके पूरे परिवार को यहाँ से एक घरेलु राजकीय निमंत्रण भेजा जाये. वो यहाँ आपके अतिथि बन कर रहेंगे तो आपकी मित्रता भी बढ़ेगी और उन्हें सपरिवार इस नगरी को जानने का मौका भी मिलेगा.

देवा तो मुँह फाड़े रूद्र को सनटैन रह गया और मन hi मन रूद्र के दिमाग की तारीफ भी कर रहा था.

बीएस – अद्भुत रूद्र सिर्फ तुम्हारे शास्त्र hi नहीं तुम्हारा दिमाग भी काफी तेज चलता है . हम आज hi उन्हें सन्देश भिजवा देते है.

रूद्र – अब हमें आज्ञा दे महाराज.

बीएस – जाओ लेकिन दरबार के बाद हमारे कक्ष में hi आज आप दोनों दोपहर का भोजन करेंगे.

रूद्र और देव सकपका जाते है

रूद्र – ज ज ज जी…… महाराज मेरा तो पेट hi ख़राब है और देव भी कह रहा था आज उसकी कुछ तबियत ठीक नहीं है. क्यों देव? तो फिर कभी …….

बीएस – ये हमारा आदेश है अब जाइये आप दोनों

रूद्र और देव वह से गार्डन झुका कर चले जाते है और बीएस मंत्री से कह कर राजा सुमंत देव को वार्षिक कार्यक्रम में सपरिवार आने का निमंत्रण भेज देता है.

देव – अबे मरवा दिया न सेल अब महाराज हजारो सवाल करेंगे क्या जवाब दुगा उन सवालो का

रूद्र – अबे है यार फैट तो मेरी भी रही है मैने तो सोचा hi नहीं था. के महाराज हमें यु बुलवा लगे.

देव – बीटा इसलिए कहते है बाप बाप होता है. अब फास गए न

रूद्र – अबे घबराता क्यों है. बाप से याद आया बाप hi तो है वो तेरे कोई दुश्मन तो नहीं . सब अच्छा hi होगा वो देख तेरी माशूका को बुलाने के लिए सैनिक सन्देश ले कर निकल भी पड़ा. मंटा है के नहीं भाई को.

इसी तरह की बाते करते हुए. काफी देर हो जाती है दोनों बैग में बैठे थे के तभी एक सैनिक आता है.

सैनिक – युराज की जय हो. महराज ने आप दोनों को महल में बुलवाया है . खाने का समय हो गया है.

देव – तुम चलो हम लोग आते है.

फिर थोड़ी देर के बाद रूद्र और देव पहुंचते है महाराज के सामने जहा भोजन लगा हुआ था. महारानी नीलमणि भी वही बैठी हुई थी

बीएस – आओ बीटा baetho.aur हमारे साथ भोजन करो.

दोनों बैठ जाते है. और खाना शुरू करते है अभी पहला hi निवाला मुँह में डाला था के भैरव सींग

बीएस – तो क्या चक्कर है तिलिस्म नगरी के राज परिवार को बुलाने का

रूद्र - ुखु…. ुखु……… कर के कहसने लगता है उसके तो गले में hi कौर अटक जाता है.

देव चुप चाप बैठा था.

बीएस – अरे बोलो भाई हमने कुछ पुछा है देव?

देव – जी पिता महाराज मुझे कुछ नहीं पता ये तो इस रूद्र का hi कहना था उन्हें बुलाये मए नहीं जनता

रूद्र खा जाने वाली नजरो से देव को घूरता है और मन hi मन उसे सेकड़ो गालिया देता है.

बीएस – है तो रूद्र तू hi बता दे.

रूद्र - जी महाराज जैसा के मैने कहा था दरबार में के उनसे दोस्ती कर के देश की सीमाएं………

बीएस - वो सब रहने दो और असली कारन बताओ. वो हमने सुन लिया था.

महारानी Neelmani(MN)- तू इतना घबरा क्यों रहा है रूद्र बता न बीटा असल बात क्या है?

रूद्र - वो राज माता असल में उस दिन जब हम लोग तिलिस्म नगरी गए थे. तो वह

देव – ुक्खू ुक्खू….. कर के खस्ने लगता है अब कौर देव के गले में अटका.

बीएस – आराम से खाओ देव, है तो रूद्र फिर?

रूद्र – तो वह के महाराज ने हमें अपने महल में hi रखा और अपने साथ भोजन भी करवाया. और हमें काफी इज्जत भी दी और………

बीएस – रूद्र तू असल बात बताएगा या मार खायेगा?

रूद्र – जी महाराज वो असल बात ये है के वह की राजकुमारी पूनम से अपने देव को प्यार हो गया है.

रूद्र एक hi सांस में ये कह के हाफने लगता है जैसे काफी दूर से दौड़ता हुआ आया हो.

बीएस और मन दोनों ख़ामोशी से कभी रूद्र को देखते तो कभी देव को थोड़ी देर के बाद दोनों हंस पड़ते है.

रूद्र - क्या हुआ महाराज आप हांसे क्यों?

बीएस – तुम दोनों की हालत पर अरे बेवकूफो तुम दोनों को क्या लगा हम यहाँ के महाराज ऐसे hi बने हुए है. हम सब जानते है.

देव- पिता महाराज?

बीएस – हां बीटा हम सब जानते है और हमने अपने स्टार पे पता भी करवाया है राजकुमारी की सुंदरता की कीर्ति तो चारो और है. हमें ख़ुशी होगी अगर महाराज सुमंत देव ने ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया तो.

मन – हां पुत्र तू चिंता मत कर. मए खुद महारानी कौशल्या से बात करुँगी वैसे भी अब तो वो अगले हफ्ते आ hi रहे है न.

बीएस – चलो मेरा तो हो गया तुम लोग आराम से खाना खाओ हम षाले है.

फिर महराज और महारानी चले जाते है.

देव – वाह बीटा कमल कर दिया तूने तो. यार

रूद्र – भाई तेरे लिए तो कुछ भी. पर अब अपनी हालत सुधर ऐसे उजाड़ बन के मत घुमा कर. तेरे माँ बाप को तकलीफ होती है तू उनका एकलौता बीटा है और मेरा एकलौता यार. खुश हो जा अब तो और हां ये सब बाटे भाभी को सन्देश में मत लिख देना थोड़ा सा उन्हें भी चौका देंगे जब यहाँ उन्हें ये बाटे पता चलेगी.

उधर तिलिस्म नगरी में जब दूत पहुँचता है. महाराज के सामने

दूत – महाराज की जय हो. महाराज मए नाग लोक से आय हु और हमारे महाराज ने आप के लिए एक आमंत्रण भेजा है.

महारज का आग्रह है की अगले हफ्ते नाग लोक में होने वाले वार्षिक महोत्सव में आप सपरिवार सदर ामन्तिरत है. आप आइये और हमें सेवा का मौका दीजिये. और हमारा आतिथ्य स्वीकार कीजिये.

सुमंत देव – हम महारज बहिराव सिंह जी का निमंत्रण स्वीकार करते है. आप आज की रात यही विश्राम कीजिये कल हमारा सन्देश ले जा कर महाराज को दे दीजियेगा.

फिर सुमंत देव आता है अपनी महारानी कौशेय (मक) के पास जहा उसकी दोनों बेतिया पूनम और शलाका भी बैठी हुई थी.

सड़ – आप लोगो के लिए एक आमंत्रण आया है. नाग लोक से

नाग लोक का नाम सुन कर पूनम का चेहरा खिल उठता है जिसे राजा और रानी बड़े गौर से देखते है.

मक – ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है पर आमंत्रण कैसा?

सड़ – महाराज भैरव सिंह जी का कहना है के अगले सप्ताह उन के नाग लोक में वार्षिक कार्यक्रम होने जा रहे है जिसमे हम सपरिवार वह जाये और वही रह कर राजकीय आतिथ्य स्वीकार करे साथ hi वार्षिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओ का आनंद ले.

तो अगर आप सब लोग चलना चाहे तो हम उनके दूत के द्वारा सहमति सन्देश भेज दे.

शलाका – जी पिता महाराज हम सब चलेंगे वैसे भी बहोत समय से हम लोग अपने राज्य से बहार कही घूमने नहीं गए है. इसी बहाने घूम भी लेंगे नाग लोक . क्यों पूनम?

पूनम – जैसी आप सबकी मर्जी अगर पिता महाराज चाहेंगे तो हम लोग वह अवश्य चलेंगे.

मक – तो फिर ठीक है महाराज आप उन्हें सन्देश भेज दे के हम लोग आ जायेगे.

सड़ भी ये जान कर खुश होता है. के उसकी सोच सही जा रही है. और वो अपने कक्ष में चला जाता है. दूसरे दिन वो भैरव सिंह को सन्देश भेज देता है और अपने आने की सहमति देता है.

इधर नाग लोक में जब ये खबर देव सुनता है तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.

बीएस – देव हम चाहते है के जब वो लोग यहाँ आये तो उन्हें यहाँ आप घुमाये और कार्यक्रमों का आनंद भी लेने दे हम उनसे कार्यक्रमों के ख़तम होने के बाद ये बात करेंगे.

देव – जो आज्ञा महाराज.

बड़ी मुश्किल से दिन कट रहे थे पूरे राज्य में कार्यक्रमों की तयारी हो रही थी राज महल का खेल मैदान भी सजाया जा रहा था. पर देव को अब उस दिन का इंतजार था जब पूनम अपने परिवार के साथ नाग लोक में आये.

आखिर वो दिन भी आ गया. देव सुबह से तैयार हो कर बेचैनी से पूरे महल में घूम रहा था. तभी एक सेवक ने आ कर सूचना दी ,

सेवक – युराज तिलिस्म नगरी के महाराज अपने परिवार सहित नाग लोक में पधार चुके है. महारज ने आपको याद किया है.

देवद दौड़ता हुआ महाराज के पास गया. जहा रूद्र पहले से खड़ा मुस्करा रहा था.

बीएस – देव, महाराज सुमंत देव नगर की सीमा में प्रवेश कर चुके है. आप हमारे साथ यहाँ उनका स्वागत करेंगे और रूद्र तुम शीघ्र जाओ और उन्हें सम्मान के साथ हमारे पास ले आओ. जाओ

रूद्र - जो आज्ञा महाराज

रूद्र चला जाता है. इधर देव भी सब इंतजाम देखने लगता है थोड़ी देर के बाद महाराज सुमंत देव परिवार सहित महल में आते है जहा महाराज बीएस महारानी नम और देव उनका स्वागत करते है. और सब लोग अंदर आ जाते है.

बीएस – महाराज आपको आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई?

सड़ – नहीं महाराज सब कुशल रहा. इनसे मिलिए महाराज ये है महारानी कौशल्या और ये है हमारी बड़ी बेटी पूनम, और छोटी बेटी शलाका.

पूनम और शलाका उठ कर बीएस के पेअर छूती है – प्रणाम महाराज

बीएस – खुश रहो बच्चियों.

नम – बड़ी प्यारी बच्चिया है आपकी महारानी कौशल्या

मक – धन्यवाद् महारानी. पर अब तो ये यहाँ है तो आपकी भी बेटी जैसी hi हुई न

नम – है क्यों नहीं जरूर , देखो बेटी अब तो आपकी माता श्री ने भी कह दिया है. तो अब इसे अपना hi घर समझो किसी चीज़ का संक्च मत करना. अब आप लोग जाओ बहार घूमो. देव जाओ ले जाओ और इन्हे महल दिखाओ.

देव – जी माता श्री

फिर देव शलाका और पूनम को लेकर महल दिखने लगता है.

पूनम का तो शर्म से hi बुरा हाल था.

शलाका – तो युराज

देव – मेरा नाम देव है तो आप भी मुझे देव hi कहिये.

शलाका – तो देव क्या ये वार्षिक कार्यक्रम हर वर्ष होते है?

देव – जी है बिलकुल ये कई वर्षो से हो रह है और अब तो जैसे एक परंपरा सी बन गयी है.

शलाका – तो क्या आप भी भाग लेते है इन प्रतियोगिता में

देव – है कई बार लिया है. दूर देशो से राजकुमार भी आते है उन के साथ मुक़ाबला करने में बड़ा मजा आता है. घुड़सवारी, तलवार बजी , तीरंदाजी कई तरह की प्रतियोगिताएं होती है.

शलाका – वैसे पूनम भी इन सब में काफी तेज है.

देव – अरे ये बात तो हमें पता hi नहीं थी.

शलाका – अभी तो देखते जाइये आपको पूनम की बहोत सी बाते पता चलना बाकि है.

देव – हम जरूर जानना छाएगी .

तभी वह रूद्र आ जाता है.

रूद्र - प्रणाम राजकुमारी जी

पूनम और शलाका - प्रणाम

रूद्र – तो कैसा लगा आपको महल

शलाका – सच में महल तो बहोत सुन्दर है.

रूद्र आइये हम आपको आप लोगो का कक्ष दिखते है इस तरफ. अरे देव तुमने राजकुमारी जी को अपना कक्ष दिखाया के नहीं.

देव – नहीं बस वो हम तो यही घूम रहे थे.

रूद्र – क्या यार काम से काम उन्हें अपना कक्ष तो दिखा दे और है चाट पे भी घुमा देना हम तुम्हे चाट पे hi मिलते hae.aaiye शलाका जी.

शलाका भी समझ जाती है और रूद्र के साथ चली जाती है.

इधर देव पूनम को अपने कमरे में ले आता है.

देव – पूनम ये है हमारा कक्ष

पूनम – हमारा?

देव –अगर तुम चाहो तो ये हमारा भी हो सकता है. और अगर न चाहो तो …….

पूनम आगे बाद के देव के होठो पे हाथ रख देती है

पूनम - ऐसा कभी मत सोचन देव क्यों के आप के आलावा तो मए कुछ छह hi नहीं सकती अब.

देव – पूनम का हाथ चुम लेता है तो पूनम शर्मा के हाथ देव के होठो से हटा लेती है.

पूनम – क्या करते हो देव?

देव- पूनम हमने आपका बहोत इंतजार किया है. और बी जब आप मेरे सामने है तो ये जुदाई सहन नहीं होती न ये दूरी

पूनम - इस वक़्त मए आप के साथ अकेली आप के hi कमरे में कड़ी हु. दूरी है कहा?

देव – है आप हमारे कमरे में है लेकिन फिर भी जो दूरी है वो सहन नहीं होती ये बहे तो अब भी खली है न पूनम

पूनम - तो आपको किसी की इजाजत का इंतजार है क्या?

इतना सुनते hi देव लपक कर पूनम को अपनी बहो में भर लेता है और कास के अपने सीने से लगा लेता है.

पूना भी देव की बहो में आ कर एक ठंडी सांस भर्ती है. oooooooooohhhh देव इस लम्हे का मैंने कितना इंतजार किया आप को बता नहीं सकती

देव – है पूनम मए समझ सकता हु क्यों की जुदाई की इसी आग में मए भी जला हु न.

देव थोड़ा पूनम को दूर करता है दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते है और इस बार पूनम देव को बहो में भर लेती है. दोनों के मन में वासना कही नहीं थी बस मिलान के इन पालो को वो महसूस कर के खुश हो रहे थे. थोड़ी देर के बाद पूनम देव के सीने से लगी हुई.

पूनम – देव अब छोड़िये न किसी ने हमें आप के साथ इस तरह देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी.

देव – आप हमारी जान है पूनम और आपकी बदनामी करने वाला इस दुनिया में पैदा नहीं हुआ. यकीन रखिये

पूनम – आप पर तो अब खुद से भी ज्यादा यकीन है देव पर अब चलिए ऊपर रूद्र और शलाका हमारा इंतजार कर रहे होंगे.

फिर देव और पूनम ऊपर आ जाते है जहा रूद्र और शलाका खड़े बाते कर रहे थे और हंस भी रहे थे.

रूद्र – आ गए आप हमें तो लगा हमें hi नीचे आना पड़ेगा शायद पूनम जी को चाट से ज्यादा कमरा देखना अच्छा लगा क्यों पूनम जी?

पूनम – ऐसी बात नहीं हम तो बातो में खो से गए थे.

रूद्र – जी है शायद आपकी बाते कुछ ज्यादा hi लम्बी चल निकली.

पूनम – रूद्र आप भी अब तक अकेले है?

रूद्र - नहीं राजकुमारी अभी मए शलाका जी से वही बता रहा था. मए एक लड़की से प्रेम करता हु. उसका नाम है नीलम.

पूनम - अरे वह ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है फिर उसे बताया के नहीं?

रूद्र अरे मैने तो कब का बता दिया है. और वो शादी भी करने को तैयार है पर मैने सोचा है देव और मए एक साथ एक hi मंडप में शादी करेंगे.

शलाका – लेकिन अगर राजकुमार देव अभी फ़िलहाल शादी न करना चाहे तो?

रूद्र - अरे ऐसे कैसे नहीं करेगा? और इसे न करनी हो तो न करे मए तो मंडप लगवा के इसकी भी करवा दुगा क्यों की मुझे तो करनी है न यार. सब हंस पड़ते है.

पूनम – रूद्र आप से मिल के बहोत अच्छा लगा. अब आप हमें नीलम से कब मिलवा रहे है?

रूद्र – कल hi मिलवा देंगे. उसे भी आप के आने का समाचार मिल चुक्का है और वो भी आप लोगो से मिलना चाहती है.

पूनम - फिर तो कल हम नीलम से जरूर मिलेंगे.

देव – अब चले नीचे सब लोग इंतजार कर रहे होंगे.

रूद्र - है है चलते है युवराज देव सिंह जी लेकिन जो पूनम जी से आप नीचे बातो में खो गए थे उस के निशान तो मिटा दीजिये.

देव – मतलब?

रूद्र - अरे यार राजकुमारी का झुमका तुम्हारे कंधे पे फंसा हुआ है. वो दे दो अब इन्हे. जब जाएगी तो ले लेना देखने के लिए.

इतना सुन कर जहा देव और शलाका हसने लगते है वही पूनम का चेहरा शर्मा से लाल हो जाता है.

देव – तू भी न कुछ भी कहता है ये तो बस यु hi ( देव तुरंत वो झुमका अपने कंधे पे लगे कपडे में से निकल के पूनम को दे देता है.)

फिर सब नीचे चले जाते है. और सब के साथ बैठ जाते है. उसके बाद कुछ खास नहीं होता रत के खान ेके बाद सब लोग आराम करते है
 
अपडेट 25

फिर दूसरे दिन तैयार हो कर देव पूनम और शलाका घूमने निकल जाते है भोलेनाथ के मंदिर जहा उन्हें रूद्र और नीलम मिलते है.

रूद्र – राजकुमारी जी ये है मेरी नीलम और नीलम ये है तिलिस्म नगरी की राजकुमारी पूनम और शलाका.

तीनो गले मिलती hae.tab नीलम

……. राजकुमारी जी आपका इंतजार तो सबसे जयादा देव भैया ने किया है आपको देखा तो अब समझ आया के ये इतने बेचैन क्यों थे, आप सच में बहोत सुन्दर है और हमारे देव भैया की जीवन साथी बनने के पूरे गन है आप में.

पूनम – पहली बात तो ये के तुम हमें पूनम hi कहोगी राजकुमारी नहीं और रही बात इंतजार की तो हमने भी उतना hi इंतजार किया है नीलम. एक लड़की हो के तुम ये आसानी से समझ सकती हो. के जिसे चाहो यदि वो hi नजरो से दूर हो तो कैसा महसूस होता है.

नीलम - तो पूनम देर किस बात की आप के माता पिता भी यही है और तुम भी यहाँ आयी हो तो यही रह जाओ शहनाई भी बाजवा hi देते है. रूद्र को वैसे भी बहोत जल्दी है. जलेबी खाने की.

ये बात सुन कर पूनम शलाका और नीलम हसने लगती है.

रूद्र - जलेबी? कौन सी जलेबी? कहा की जलेबी?

नीलम - आप चुप hi रहो. मेरे कहने का मतलब है आपको बड़ी जल्दी है शादी का लड्डू खाने की.

पूनम मुस्करा के – चाहते तो हम भी यही है लेकिन नीलम ये इतना आसान नहीं होगा. क्यों की अब तक हमारे बड़ो के बीच ये बात हुई नहीं है. तो फिर कैसे हो सकता है. शायद उसमे समय लगेगा अभी. पर है अगर देव चाहेंगे तो मए ाउगि जरूरर यही.

शलाका – देव क्यों नहीं चाहेंगे अब ?क्या वो लिख कर दे उस की तो आँखे hi बता रही है की उनका बस चले तो अभी फेरे कर ले तुम्हारे साथ. उन्हें भी जलेबी खाने का बड़ा मन कर रहा hae.kyu देव?

सब लोग हसने लगते है.

अब रूद्र और देव भी समझ गए थे के ये किस जलेबी की बात कर रही है तीनो.

रूद्र - अच्छा आज के कार्यक्रम शुरू होने वाले है. तो चलिए सब लोग महल चलते है.

फिर पांचो महल आ जाते है जहा सब उनका hi इंतजार कर रहे थे. उस के बाद खा पी के सब लोग निकल जाते है खेल महोत्सव के लिए जहा आज कई तरह के नाच गाने का कार्यक्रम था. वह इन के पहुंचते hi कार्यक्रम शुरू होता है जो के करीब 4-5 हजानते चलता है और सूर्य के ढलने पर कार्यक्रम समाप्ति होता है.

फिर सब लोग वापस महल आ जाते है. और बातो का दौर शुरू हो जाता है

बीएस – सुमंत देव जी वो उस मन्त्रिक का पता चला क्या जिसने आप पर हमला किया था?

सड़ – है हमने पता किया था. लेकिन उसे पकड़ नहीं पाए क्यों के उस मन्त्रिक के पास भी कई साडी शक्तिया है. जो उसकी रक्षा कर रही है. फ़िलहाल वो कही गायब है. पर वो पलट कर वॉर जरूर करेगा. ऐसे लोग शांत नहीं बैठते.

देव – महाराज क्या आप उसे पकड़ने का कोई रास्ता बता सकते है?

सड़ - नहीं देव उसे पकड़ने का फ़िलहाल कोई रास्ता नहीं है. उसे तभी पकड़ पाएंगे जब वो सामने हो.

रूद्र – क्षमा चाहुगा महाराज लेकिन ये तो खतरे की बात है यदि उसने अचानक हमला किया या कभी आप अपने राज्य में न हो तब उसने हमला किया तो परेशानी हो जाएगी.

सड़ - हमें भी यही चिंता है.

बीएस – चिंता मत कीजिये महाराज ईश्वर की कृपा रही तो ऐसा कुछ नहीं होगा. बाकि कल हम स्वयं कुलगुरु से बात कर के इस समस्या का कोई समाधान भी निकलते है. क्यों की अब वो आप के साथ साथ हमारा भी दुश्मन है. और उसने देव को भी धमकी दी थी तो हल तो मिल कर निकलना hi पड़ेगा.

सड़ – ठीक है भैरव सिंह जी कल hi कग से बात कीजिये देखिये यदि वो कोई हल बता सके तो बहोत बेहतर होगा.

फिर सब सोने चले जाते है.

दूसरा दिन मुक़ाबले का दिन था. जिसमे तलवार बजी का मुकाबला होने वाला था. रोज की तरह सब वह पहुंचते है. पहले तो कई योद्धा आते है और लड़ने लगते है. करीब दो घंटे बाद उन में एक श्रेष्ट योद्धा का जोड़ा निकलता है. जो पूरी तरह नक़ाब के पीछे थे. उन दोनों का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था.

बीएस – अद्भुत आप दोनों ने कमल कर दिया हम आपको विजेता घोषित करते है और उपहार देंगे.

योद्धा - ऐसे नहीं महाराज पहले मए यहाँ बैठे सेकड़ो लोगो से पूछना चाहता हु की है कोई जो हम दोनों का मुक़ाबला कर सके? यदि कोई नहीं तो hi हम दोनों आप के पास आ कर पुरुस्कार स्वीकार करेंगे.

बीएस – तुम विजयी हुए हो हम भी चाहेंगे तुम पुरस्कार ले कर जाओ यु ललकार के तो तुम हार भी सकते हो.

योद्धा - कोई बात नहीं महाराज यदि हम हार भी जाये तो मुझे गम नहीं होगा लेकिन इस तरह मए इनाम नहीं ले सकता मुझे क्षमा करे.

तभी देव ऊपर से नीचे छलांग लगता है. उसकी पीठ पे दो तलवारे फांसी हुई थी.

योद्धा - आप तो राजकुमार है. कही आप मुझसे हार न जाये

देव – उसकी चिंता तुम मत करो.

य – लेकिन हम जोड़े में है

देव – तो मेरा मित्र रूद्र भी मेरे साथ है

देव ने इतना hi कहा था के ऊपर से रूद्र कूद पड़ता है

य – क्या तुम्हारा मित्र एक स्त्री से लड़ेगा?

देव देखता है के उस के साथ जोड़ी में स्त्री थी.

देव – कोई बात नहीं मेरा मित्र नहीं लड़ेगा और न hi मए इन पे वॉर करुगा. है ये चाहे तो मुझ पर वॉर कर सकती है. मए सिर्फ इन्हे रोकूंगा और वॉर सिर्फ तुम पर करुगा तुम्हारे हारते hi ये भी हार जाएगी.

य – क्या यहाँ इतनी बड़ी सभा में कोई ऐसी युवती नहीं जो मैदान में तलवार चला सके? क्या यहाँ की स्तरीय सिर्फ चुडिया hi पहनना जानती है? पायल की झंकार hi सुनती है? क्या उनमे इतना सहस नहीं के वो तलवार ले कर मैदान में उतर सके? क्या यहाँ सब युवतिया और स्तरीय खेल देखने आयी है? अगर ऐसा है देव सिंह तो मुझे तुम्हरी बात मंजूर है. आ मैदान में……………

तभी बिजली की तेजी से देव के बाजु में कूद के आ जाती है पूनम इस वक़्त उसकी पीठ पे भी तलवारे लगी हुई थी. और दोनों जांघो पे खंजर.

पूनम – योद्धा तुमने एक गलती की महाराज की बात न मान के, दूसरी गलती की देव सिंह की बात न मान के और तीसरी सबसे बड़ी गलती की यहाँ की स्त्रियों को ललकार के. अब किसी गलती के लिए तुम नहीं बचोगे. क्यों के मए देव के साथ हु और इस बार हम दोनों पे तुम दोनों वार करोगे कोई भी किसी पे भी वॉर कर सकता है. कोई स्त्री पुरुष का भेद भाव नहीं.

तभी बिगुल बजता है और चारो की तलवारे आपस में टकराती है. चारो बहोत hi फुर्ती से लड़ रहे थे. योद्धा 1 ने देव पे हमला किया जिसे देव बड़ी hi खूबसूरती से बचा गया लेकिन जहा देव घूम के पंहुचा तो पीछे से योद्धा 2 ने देव की पीठ पे तलवार से वॉर कर दिया देव सामने hi देख रहा था लेकिन पूनम ने अपनी तलवा देव की पीठ पे रख दी जिससे य2 का वॉर रुक गया इतने में पूनम ने य2 को एक लात मरी और उसके सर का निशाना बना के वॉर किया जिसे उसने अपनी एक तलवार से रोका और दूसरी तलवार पूनम के पेट में घुसनी चाही लेकिन पूनम करवट ले कर घूम गयी और अपनी कोहनी का भरपूर वॉर उसके सर पे किया तो वो लड़खड़ाती हुई नीचे गिरने लगी पर अपनी तलवार जमीन से लगा के खुद को गिरने से रोक लिया

इधर देव के ऊपर य1 तेजी से हमले कर रहा था और देव सिर्फ हमले रोक रहा tha.abhi देव ने एक भी वॉर नहीं किया था.

इस समय देव और पूनम लड़ते लड़ते एक दूजे से पीठ चिपका के खड़े अपने अपने सामने के योद्धाओ से लड़ रहे थे अचानक देव और पूनम ने कलाबाजी खाई और उन दोनों से दूर हो गए देव ने बैठ कर अपने हाथ मिलाये जिस पे पूनम छड़ी और देव ने उसे उछाल दिया जिससे पूनम उड़ती हुई य 2 के सर पे एक किक देकर जमीन पे कड़ी हो गयी य 2 भर भरा के नीचे गिरी और तिलमिला के अपनी दोनों तलवार एक पूनम की तरफ और एक देव की तरफ फेंक दी पूनम अभी संभल नहीं पायी थी लेकिन देव ने देख लिया

देव ने अपनी एक तलवार पूनम की तरफ खिंच मरी और अपनी तरफ आती हुई तलवार को एक तेज वॉर से कटा तो वो तलवार दो टुकड़े हो गयी और देवा की फेंकी हुई तलवार सीढ़ी जाकर पूनम के पेट के पास पहुंची उसी समय य2 की फेंकी तलवार भी वह तक पहुंची लेकिन देव की तलवार की वजह से टूटकर नीचे गिर पड़ी इधर य2 ने पूनम की तरफ दौड़ लगायी तो पूनम ने वही से हाई जम्प लेकर अपनी दोनों टंगे फैलाई और य2 की गार्डन पे सवार हो कर हल्का सा मोड़ दिया जिससे य2 अपने होश खो बैठी और जमीन पे गिर पड़ी तो पूनम उसके सर पे टॉवर रख कर शान से कड़ी हो गयी

उधर य1 ने देव पे दोनों तलवारो से हमले शुरू किये देव अपनी एक तलवार से उसका जवाबी हमला दे रहा था य1 ने देव पे फिर से हमला किया देव ने पूरी ताक़त से उसके वॉर को रोका और जवाबी हमला किया जिससे य1 की एक तलवार टूट गयी इधर पूनम का ध्यान देव पर था के अचानक से नीचे लेती हुई य2 ने पूनम को एक धक्का मारा और पूनम के नीचे गिरते hi उस की तरफ छलांग लगा दी वो अपनी तलवार पूनम के पेट में घुसा देना चाहती थी इधर देव भी य 1 के हमले से नीचे जमीन पे था तो य1 ने भी देव पे तलवार से हमला किया दोनों hi योद्धा ने देव और पूनम को जमीन पे लिटा दिया था और उन पर तलवार का वॉर कर दिया था लेकिन पूनम और देव ने अपनी अपनी तलवार से वो वॉर रोके हुए थे के तभी दोनों ने अपने प्रतिद्वंदी के पेट पे लात रख कर अपने सर के ऊपर से उछाल दिया जिससे दोनों योद्धा के हाथो से तलवार निकलगई और वो दूर जा गिरे इधर पूनम और देव फुर्ती से जम्प कर के उठे और एक ऊँची छलांग लगा कर अपनी अपनी तलवार उनकी गार्डन पे लगा दी. तो दोनों hi योद्धाओ ने हाथ ऊपर कर दिए और आत्मसमर्पण किया.

तभी महाराज बीएस ने रुकने का िश्रा किया.

चारो उठ कर खड़े हुए.

बीएस – इस मुक़ाबले में युराज देव सिंह और राजकुमारी पूनम की जोड़ी विजयी हुई.

और योद्धा क्यों की तुम पहले दिन भर की लड़ाई में जीते हुए थे इसलिए आज का पुरुस्कार तुम दोनों को दिया जाता है. राजकुमार और राजकुमारी का पुरस्कार इन्हे बाद में मिल जायेगा. खेल समाप्ति की घोषणा हो जाती है.

इसी तरह दिन पर दिन निकलने लगे और रोज प्रतियोगिताएं होती कभी खेल कूद होती. करीब एक हफ्ता इसमें निकल गया. और खेल समाप्त हो गया.

रत के समय भोजन के बाद जब सब लोग इकट्ठा हुए तो.

सड़ – भैरव सिंह जी हम सब का तो मन लग गया है यहाँ आपने बहोत अच्छा किया जो हमें यहाँ बुलवा लिया बहोत आनंद आया. अब तो खेल भी समाप्त हो चुके है तो कृपया अब हमें जाने की इजाजत दीजिये जिससे की कल सुबह हम यहाँ से अपनी नगरी तरफ प्रस्थान करे.

बीएस - महाराज आपने हमारा आतिथ्य स्वीकार कर के हमारा मान बढ़ाया है. और इन बच्चियों के साथ रहते हुए तो हमें हमारा परिवार पूरा लगने लगा. आपसे एक विनती है.

सड़ – ऐसा न कहे महाराज आप आदेश दे सकते है.

बीएस – नहीं सुमंत देव जी आदेश का तो प्रश्न hi नहीं उठता. बल्कि हम तो आपसे आज एक दान के अभिलाषी है.

सड़ – ये कैसी बाते कर रहे है मित्र भला मए और आपको दान में कुछ दू ये तो संभव hi नहीं है.

बीएस – संभव है मित्र क्यों के मांगने वाले से हमेशा देने वाला hi बड़ा कहलाता है. आज हम आपसे आपके जीवन की सबसे अनमोल धरोहर दान में मांगते है. क्या आप अपने जिगर का टुकड़ा अपनी बेटी पूनम का हाथ देव के हाथो में देंगे? क्या आप हमें अपनी कन्या दान करेंगे हमारे देव के लिए.

सड़ – मित्र आपने तो हमारे मुँह की बात छीन ली. देव जैसा दामाद पाकर तो मए खुद संसार का सबसे भाग्यवान व्यक्ति बन जाउगा. आपने मेरी बेटी को इस लायक समझा ये आप लोगो का बड़प्पन hi है. आज से पूनम आप hi की बेटी हुई. देव की हुई महाराज.

बीएस – नहीं मित्र बड़प्पन हमारा नहीं बल्कि आपने हमें ये फूल सी बच्ची देकर हमें धन्य कर दिया बड़प्पन तो आपका है. आप लोग तैयारियां कीजिये हम आज से दो दिन बाद hi इनका रिश्ता पक्का करने के लिए आपकी नगरी में आएंगे.

सड़ – जरूर मित्र हमें आपका इंतजार रहेगा.

बीएस – तो देव और बेटी पूनम उस दिन जो आप लोगो ने दोनों नगरों की शान बनाये राखी और तलवारबाजी के मुक़ाबले में जीत हासिल की थी उस. के इनाम स्वरुप हम आप दोनों को आपका रिश्ता तोहफे में देते है. आप लोग यु hi सदा एक दूजे का साथ निभाना हर कठिनाई में. और दोनों कुलो का मान भी बनाये रखना. हमारा आशीर्वाद आप दोनों के साथ है.

पूनम और देव आगे बढ़ कर पहले भैरव सिंह के पेअर छूटे है, फिर सुमंत देव के.

बीएस - सदा सौभाग्यवती रहो बेटी., खुश रहो बीटा

फिर पूनम और देव रानी नीलमणि के पैर छूने लगती है तो रानी दोनों को पकड़ के सीने से लगा लेती है.– नहीं मेरे बच्चो तुम दोनों की जगह हमारे दिल में है. और पूनम बेटी तूने तो मुझे आज संपूर्ण कर दिया मेरे पास बेटी की hi कमी थी आज तेरे आने से वो कमी भी पूरी हो गयी.

फिर दोनों रानी कौशल्या के भी पैर छू कर आशीर्वाद लेते है.

फिर सब लोग मुँह मीठा करते है और थोड़ी देर बातो के बाद सोने चले जाते है.

दूसरे दिन सुबह पूनम और देव जीतनेय खुश थे उतने hi दूर जाने की वजह से उदास भी थे. महाराज भैरव सिंह और रानी नीलमणि खूब सरे तोहफे दे कर पूनम को विदा करते है फिर सुमंत देव अपने परिवार के साथ तिलिस्म नगरी की और चले जाते है.

रूद्र को भी ये पता चल चूका था के देव का रिश्ता भी पक्का हो गया है. तो अपने घरवालों के साथ जाकर नीलम से रिश्ता पक्का कर के आता है . और उन्हें बता देता है. उसकी शादी और देव की शादी एक साथ होगी.

महल में रूद्र नीलम के साथ आता है और रानी नीलमणि से नीलम को मिलवाता है

मन– अरे वह रूद्र मेरी ये बहु भी बेहद खूबसूरत है मए आज बहोत खुश हु आज मुझे मेरी दो बहुए मिल गयी

रूद्र – अभी कहा मिली है रानी माँ

मन – तू छुपा कर नहीं मिली तो मिल जाएगी आखिर मेरे सामने तो आ गयी न दोनों मए बहोत खुश हु बीटा तुम दोनों के लिए.

रूद्र - देव मैने अपने ससुराल वालो से कह दिया है के मेरी शादी उसी दिन होगी जिस दिन देव की होगी तो अब तू ज्यादा देर मत करना यार.

मन. – तू चिंता मत कर रूद्र मए अपनी दोनों बहुओ को साथ hi लॉगी ऐसा हो सकता है के मेरा एक बीटा बैठा रहे और दूसरा शादी कर ले. ये तो तुझे नीलम मिल गयी नहीं मिली होती तो मए देव की भी शादी नहीं करवाती जब तक तेरे लिए दुल्हन न धुंध लेती. तुम दोनों तो मेरी आँखों के टारे हो.

अच्छा कल चलना है. देव का रिश्ता पक्का करने तिलिस्म नगरी. तो टाइम से आजाना तुम दोनों भी.

रूद्र – क्या कल? लेकिन कल तो मुझे नीलम के माता पिता के साथ शिव जी के बड़े वाले मंदिर जाना है. उन्हें बोल चूका हु मए. चलो अच्छा हुआ आपने बता दिया उन्हें मन कर देता हु बाद में जायेगे मंदिर.

मन – बिलकुल नहीं बड़ो को मन नहीं करते तू जा और मंदिर हो कर आ. वैसे भी ये तो यु hi औपचारिकता है बीटा. सब कुछ तो तेरे सामने तय हो hi गया है. और शादी की तारिख भी हम उन्हें बाद में बतायेगे. तू रहने दे कल हम लोग हो कर आते है.

रूद्र – लेकिन रानी माँ देव अकेला मेरे बिना?

देव – अबे पागल है क्या मए कोई युद्ध पे नहीं जा रहा तू चिंता मत कर.

रूद्र - ठीक है देव लेकिन जल्दी मिलना भाई तेरे बिना मेरा दिल नहीं लगेगा. पता नहीं क्यों मेरा दिल नहीं मान रहा है.

देव – आज तू ऐसा क्यों बोल रहा है भाई. वैसे तेरे बिना मेरा भी दिल नहीं लगेगा मए जल्दी hi आउगा और जरूर ौगा.

देव और रूद्र गले मिलते है पर अनजाने hi रूद्र और देव दोनों की आँखे भर आती है.

फिर रूद्र चला जाता है नीलम को लेकर और देव भी सोने चला जाता है कल के हसीं सपने देखते हुए.

दूसरे दिन देव और उस के माता पिता अपने कुछ सेवको, दसियो और कुछ सैनिको के साथ निकल पड़ते है तिलिस्म नगरी की और. रास्ता तो कुछ hi घंटो का था लेकिन देव के लिए मनो सदियों का लग रहा था उस के मन में इस वक़्त पूनम की hi यदि थी और आँखों में उसका मुस्कराता, शर्माता चेहरा. जैसे तैसे कर के वो सफर भी ख़तम होता है. और सब लोग राजा सुमंत देव के राज महल में पहुंचते है जहा उन सब का भव्य स्वागत किया जाता है .

सड़ – महाराज आज आप के और महारानी जी के कदम इस नगरी में पहली बार पड़े है. ये तिलिस्म नगरी तो धन्य हो गयी.

बीएस – ऐसी कोई बात नहीं सुमंत देव जी. ये तो हमारा सौभाग्य है के हम यहाँ आये और आपके मेहमान होने का गौरव हमें मिला.

दोनों रनिया भी एक दूजे से गले मिलती है. और महारानी कौशल्या रानी नीलमणि को अपने कक्ष में ले जाती है. जहा उनकी आपसी बाटे चलौ हो जाती है.

इधर देव राजा सुमंत देव और भैरव सिंह के पास hi बैठा था आज उसे रूद्र का न होना आखर रहा था. पर वो खुश भी था उस के लिए क्यों की एक तरह से दोनों दोस्तों का रिश्ता एक hi दिन तय होने जा रहा था.

लेकिन देव को अभी पूनम भी नहीं दिख रही थी इसलिए वो काफी अकेलापन महसूस कर रहा था.
 
अपडेट – 26

अब तक...........

................लेकिन देव को अभी पूनम भी नहीं दिख रही थी इसलिए वो काफी अकेलापन महसूस कर रहा था.........................................................

इधर मन्त्रिक तिलमिलाया हुआ घूम रहा था अपनी गुफा में, जहा पशुपतिनाथ भी मौजूद था.

पण – क्या हुआ मन्त्रिक बहोत बेचैन नजर आ रहे हो

मन्त्रिक - पण तू तो जनता है के हार मुझसे बर्दाश्त नहीं होती. उस राजा सुमंत देव को तो मैने मार hi दिया था. के अचानक आखरी मौके पर पता नहीं कहा से वो दोनों लड़के आ गए और मेरी इच्छा अधूरी रह गयी.

पण – लेकिन तुम दो मामूली लड़को से हार कैसे गए मन्त्रिक?

मन्त्रिक - वो दोनों लड़के कोई साधारण नहीं थे , मुझे अपनी शक्तियों से ज्ञात हुआ है के वो दोनों hi नाग लोक के वासी है जिनमे से एक है देव सिंह जो नाग लोक का राजकुमार है और दूसरा उसका अभिन्न मित्र रूद्र.

……….देव सिंह कई दिव्व्य शक्तियों का मालिक है उसकी साधना बहोत उच्च स्टार की है. और वो बहोत जल्द hi अपनी साधना के डैम पे इच्छाधारी बनने वाला है. जब भी वो लगातार लम्बी साधना में बैठेगा तो वह इच्छाधारी बन जायेगा. क्यों के उस के पास ऐसी ऐसी शक्तिया है. जो उसे इस काम में मदद करेगी. इसीलिए उसने मेरी अभिमंत्रित तलवार का भी सामना कर लिया जो किसी के बस की बात नहीं. मए उन दोनों को माफ़ नहीं कर सकता. इस बार मए उन्हें भी मार डालूगा. बस सही वक़्त का इंतजार है.

पण – ऐसी बात है तो वो वक़्त तुम्हारे सामने hi है जहा हमारे सरे दुश्मन एक साथ होंगे और तुम आसानी से उन्हें मार सकते हो. लेकिन तिलिस्म नगरी का सिंघासन मुझे चाहिए ये भूलना मत.

मन्त्रिक - क्या बात कर रहे हो ऐसा वक़्त मेरे सामने है ? मगर कैसे?

पण – तुम्हरी वो हार देव सिंह की जीत थी. और उसी जीत के बदले में राजा सुमंत देव अपनी बेटी देव सिंह को दे रहे है.

मन्त्रिक – मए समझा नहीं.

पण - तो सुनो राजा सुमंत देव की दो बेतिया भी है ये तो तुम जानते hi हो. जिनमे से वो अपनी बड़ी बेटी का विवाह देव सिंह से कल तय करने वाला है. और उसी प्रयोजन से आज तिलिस्म नगरी में देव सिंह अपने माँ बाप के साथ आया हुआ है . कल उनका रिश्ता पक्का हो जायेगा.

…………..मतलब अब हमारे सामने सिर्फ सुमंत देव hi नहीं बल्कि देव सिंह जैसी मजबूत दीवार भी कड़ी होने वाली है. कल तक तो देव सिंह सुमंत देव का कुछ नहीं लगता था. लेकिन अब ये रिश्ता हो जाने के बाद तुम खुद सोचो क्या देव सिंह के ससुर बन चुके उस सुमंत देव का बल भी बांका कर पाओगे?

वो देव सिंह आकाश पटल एक कर के भी तुम्हे खोज निकलेगा और तुम्हे मार डालेगा.

मन्त्रिक को देव सिंह का वो रूप याद आ जाता है. तो वो भी काँप जाता है.

मन्त्रिक - तुम सीधे सीधे बताओ कहना क्या चाहते हो?

पण – कहना ये चाहता हु के कल का दिन अगर उन के रिश्ते के लिए शुभ है तो फिर उनकी मौत के लिए भी शुभ है. जब उन्हें मरना hi है तो कल hi क्यों नहीं?

………….कल वो लोग लड़ने की मानसिक स्थिति में नहीं होंगे सब अपनी खुशिया मानाने में लगे हुए होंगे ऐसे में उन पर आक्रमण यदि हुआ तो वो संभल नहीं payege.aur जैसा की तुम्हारा विचार भी है के तुम्हे सबको मारना है तो सब इकट्ठे भी होंगे. और देव अभी इच्छाधारी नहीं बना, उसे अभी मरना आसान होगा तुम्हारे लिए.

………तुम अपनी पूरी शक्ति से उन पर हमला कर दो निश्चित hi जीत तुम्हरी होगी.

मन्त्रिक - तुम्हे पूरा यकीन है की सब लोग वह मिलेंगे?

पण – बिलकुल. सुमनत देव का परिवार तो यहाँ है hi. देव सिंह का रिश्ता होने जा रहा है तो देव सिंह , उसके माता पिता भी नगरी में है, और रूद्र अपने खास मित्र की इस खास घडी में साथ नहीं है ये तो सोचना hi मूर्खता होगी न? वो भी अवश्य साथ होगा.

……….मुक़ाबला तो होगा लेकिन क्यों की तुम तैयार होंगे किन्तु वो नहीं. इसलिए जीत तुम्हारी hi होगी.

मन्त्रिक - सही कहा तुमने पण कल सच में सभी मौजूद होंगे राजा सुमनत देव तो मरेगा hi लेकिन……..

………. मए उन दोनों को (देव और रूद्र )छोड़ूगा नहीं उन्हें जान से मार दुगा. तुम्हे तो सिर्फ तिलिस्म नगरी चाहिए थी न मए नाग लोक का वंश hi मिटा दुगा कल, फिर नाग लोक भी तुम्हारा हो जायेगा.

पण – तुमने तो दिल खुश कर दिया मन्त्रिक अब तो मुझे भी कल का बेसब्री से इंतजार रहगी.

पशुपति नाथ अपने घर पहुँचता है और अपनी साधना में लीं हो जाता है. वो था तो एक साधक hi. उसे भी अपनी शक्तिया बदनी hi थी. वो उसी में लगा हुआ था. पूरी रात निकल जाती है सुबह जब वो उठता है तो सामने उस के गुरु प्रकट होते है.

गुरु – पशुपतिनाथ कैसे हो?

पण – सब आपकी कृपा है गुरुवार

गुरु – किन्तु मैने तो तुम्हे हमेशा लोगो की भलाई hi सिखाई थी तुम लोगो को मरने का कार्य कब से करने लगे?

पण – मए कुछ समझा नहीं गुरुवार

ग – तुम जो आज करने जा रहे हो उसे हो सके तो रोक लो. क्यों की उससे किसी का भला नहीं होने वाला.

पण – गुरुवार मैने आपकी हर बात आज तक मणि है. किन्तु बचपन से hi मुझे राजा बनने का शौक था. आज मेरा वो सपना पूरा होने वाला hae.aur आप मुझे रोक रहे है?

ग – है रोक रहा हु क्यों की तेरे रुक जाने में hi सबकी भलाई है.

पण – मुझे क्षमा करे गुरुवार किन्तु मैने मन्त्रिक को सब बताया है. और वो अपनी पूरी ताक़त इकट्ठी कर चूका है अब उसे रोकना मेरे बस में नहीं.

ग -क्रोधित होते हुए – यदि रोकना तुम्हारे बस में नहीं था तो उसे शुरू क्यों किया?

पण – लेकिन गुरुवार ………

ग – चुप रहो मुर्ख तू नहीं जनता के आज जो होने वाला है उसका अंजाम क्या होगा. किस किस को भुगतना पड़ेगा., और कितनी सदियों तक इसका असर चलेगा, कब तक भुगतना पड़ेगा ये सबको तुम्हे इसका अंदाज़ा भी नहीं है. उस तबाही से कोई नहीं बचेगा सिर्फ तू hi उसे रोक सकता है. हो सके तो रोक ले वार्ना उस तबाही की आंधी तुझे भी ले डूबेगी. मए जा रहा हु. तेरे पास अंतिम चेतावनी देने आया था. अब अपना और सबका भविष्य सुधारना चाहता है या बिगड़ना ये तेरे हाथ में है.

इतना कह कर पण के गुरु गायब हो जाते है.

पण मन में – ये गुरु जी को भी पता नहीं क्या हो गया है. भला मेरे ऊपर क्या विपत्ति आएगी. दोनों राजा मरेंगे और देव मरेगा मेरा क्या नुकसान है इसमें. मए तो राज hi करुगा न. जाने दो बाद में गुरु जी से मिलुंगा पहले आज का काम हो जाये.

इधर सुबह होते hi सब लोग तैयार हो कर एक जगह इकट्ठे होते है जहा पर आज देव और पूनम का रिश्ता होने जा रहा था. कुछ देर के बाद राजकुमारी पूनम भी सोने और हीरो से लड़ी हुई वह पहुँचती है शलाका के साथ जिसे देख कर देव तो अपनी सुध बुध hi खो देता है.

पूनम भी देव को देख कर बेहद खुश होती है क्यों की देव भी बहोत सुन्दर लग रहा था. दोनों की आँखे एक दूजे से मिलती है और आँखों hi आँखों में बाते भी होती है.

फिर वह पूजा शुरू होती है जहा पर वेदी पे देव और पूनम को बिठाया जाता है. और बाकि सब लोग भी पूजा में साथ hi बैठे थे. करीब 2 घंटे की पूजा के बाद समापन होता है. और पंडित जी का इशारा पाते hi देव और पूनम उठकर खड़े हो जाते है फिर देव पूनम का हाथ थम कर उसे एक सोने की हिरे जड़ित अंगूठी पहना देता है और फिर पूनम भी देव को हिरे की अंगूठी पहना देती है.

फिर सब लोग उन पर फूलो की बरसात करते हुए तालिया बजा कर बधाई देते है. उस के बाद राजा सुमंत देव की तरफ से आमंत्रित मेहमान आ कर पूनम और देव को बदहि के साथ तोहफे देने लगते है. और उस के बाद दोपहर का भोजन शुरू हो जाता है.

इधर रूद्र सुबह सवेरे अपने माँ बाप के साथ नीलम के घर पहुँचता है , जहा पर नीलम और उस के माता पिता उनका hi इंतजार कर रहे थे. वह से सब लोग शिव जी के बड़े वाले मंदिर जाते है जो के नाग लोक से थोड़ा दुरी पे था वह पहुंच कर वो लोग पूजा में बैठते है. उन की पूजा भी काफी समय तक चली जिस के बाद नीलम और रूद्र ने भी एक दूसरे को अंगूठी पहना दी और फिर अपने बड़ो का आशीर्वाद लिया.

……….. अभी वो लोग वह खड़े बाते hi कर रहे थे की तभी रूद्र को कुछ बेचैनी होने लगी.

नीलम - क्या हुआ रूद्र?

रूद्र – नीलम आज मुझे बहोत घबराहट हो रही है. मुझे समझ नहीं आ रहा है ऐसा क्यों हो रहा है.

नीलम - आपकी तबियत तो ठीक है न वैद जी के पास चले?

रूद्र - नहीं नीलम मए बिलकुल ठीक हु तुम चिंता मत करो, बस जी घबरा रहा है. और पता नहीं क्यों मेरी आँखों में आंसू बार बार आ रहे है ऐसा लग रहा है की मए बहोत जोर से रोने लागु.

नीलम - क्या रूद्र आप आज भी मजाक करने लगे भला अपने रिश्ते के दिन कोई रोने का सोचता है? मए क्या इतनी बुरी हु?

रूद्र - नहीं नीलम तू तो मेरा दिल मेरी सांस की डोर है लेकिन आज देव जो की मेरी जान है वो मेरे साथ नहीं है और मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है.

इधर तिलिस्म नगरी में अचानक तेज शोर होने लगता है. जिसे सुन कर सब चौंक जाते है. तभी सुमनत देव

सड़ – सेवक देखो बहार ये शोर कैसा है

सेवक दौड़ कर बहार जाता है और उलटे पेअर hi वापस आता है.

सेवक – महारज किसी ने आक्रमण कर दिया है. जो के दूर से hi नजर आ रहे है. काफी भयानक सेना है

इतना सुनते hi देव अपनी तलवार खिंच कर बहार निकलता है पीछे पीछे भैरव सिंह और सुमंत देव भी तलवारे लेकर निकलते है.

सामने का नजारा देख कर कुछ देर को तो सुमंत देव भी घबरा जाते है तभी उनकी नजर देव को ढूंढने लगती है जो के उनके पास नजर नहीं आ रहा था.

सुमंत देव – अरे ये देव कहा गए

भैरव सिंह सामने की तरफ इशारा कर देता है. जहा देव सामने के पेड़ पे बहोत तेजी से चढ़ चुक्का था और पेड़ की सबसे ऊँची दाल पर खड़ा होकर अपने हाथ आगे बढ़ाता है तो उसके हाथ से नीली रौशनी निकलती है और सामने नजर आ रहे सैनिको पे बिजली बन के गिरती है बहोत से सैनिक उड़ते हुए दूर जा गिरते है.

लेकिन सैनिको की मात्रा ज्यादा थी जो की नगर में घुस चुके थे सुमंत देव के सैनिक उनसे लड़ने में लगते है इधर सुमंत देव, भैरव सिंह और नागार्जुन भी मैदान में आ जाते है. और अपनी अपनी शक्तियों के प्रहार करने लगते है.

उधर देव वह से छलांग लगा कर उड़ता हुआ उन सैनिको के बीच कूद पड़ता hae.apni आंखे बंद कर दोनों हाथ फैला देता hae.jis से रंग बिरंगी चिंगारिया निकलने लगती है वो तेजी से गोल चक्र के जैसे घूमता है और उसके आस पास के सैनिक रख के ढेर में बदलने लगते है. देव इतनी तेज घूम रहा था की बस एक बवंडर सा नजर आ रहा था और उस के आस पास राख होते सैनिक , देव तो नजर hi नहीं रहा था.

दूर से ये सब मन्त्रिक देख रहा था उसे आश्चर्य होने लगता है देव की शक्तियों से. उसे समझ में आ जाता है की इस तरह देव कुछ hi देर में उसकी साड़ी सेना का खत्म कर देगा.

ये सब कोई और भी छुप कर देख रहा था. और वो था पशुपतिनाथ. जो इस वक़्त आर्म से एक जगह छुपकर बैठा था लेकिन इस साडी तबाही की जड़ सिर्फ वही था.

उधर सब , बीएस , और नागार्जुन भी मन्त्रिक की मायावी सेना पर मौत बन कर टूट पड़े थे और अपनी अपनी शक्तियों का भरपूर इस्तेमाल कर के तेजी से मन्त्रिक की सेना को मिटटी में मिला रहे थे. तिलिस्मी शक्तियों की बदौलत महाराज सड़ भी अकेले एक तरफ मन्त्रिक की सेना को जड़ से उखाड़ने में लगे थे. और दूसरी तरफ़ा नागार्जुन और बीएस भी कुछ ऐसा hi कर रहे थे. किन्तु नागार्जुन महाराज बीएस के आस पास hi रहने की कोशिश कर रहा था. क्यों की वो जनता था के महाराज की सुरक्षा यहाँ उसका पहला काम है. उसकी खास वजह ये थी के इस वक़्त देव और रूद्र दोनों hi महाराज के आस पास नहीं थे. देव व्यस्त था और रूद्र तो आया hi नहीं था.

इधर मन्त्रिक अपना आकर बड़ा कर देव के सामने जा पहुँचता है.

देव भी अपनी आंखे बंद कर के मन्त्रिक के बराबर आकर कर लेता है. मन्त्रिक क्या हुआ देव सिंह आज तू अकेला hi खड़ा है? तेरा वो दोस्त भाग गया क्या डूम दबा के?

देव – शुक्र मन के वो यहाँ नहीं है. वार्ना इस बार जो तूने आक्रमण कर के गलती की है इस गलती के बाद वो तुझे इतने टुकड़ो में काट देता के पता नहीं चलता तेरा मुँह किधर है और सर किधर है. उसे याद भी मत कर क्यों की उसका कोई भरोसा नहीं उस तक तेरी सोच भी पहुंची न तो वो खुद इसी पल यहाँ आ जायेगा.

इतना सब सुन कर मन्त्रिक की आंके लाल हो जाती है गुस्से से वो अपने दोनों हाथो से देव का गाला पकड़ लेता है तो देव दोनों हटो की मुठिया बंद कर के मन्त्रिक के पेट में बहोत तेजी से मरता है

मन्त्रिक के हाथो से देव का गाला छूट जाता है और वो कुछ फुट दूर जा कर गिरता है लेकिन उस के विशाल आकर के करना उस के नीचे उसी के सैनिक डाब जाते है जब तक वो उठे उसके सैनिक डैम तोड़ चुके थे.

पर मन्त्रिक इन सब की परवाह नहीं करता. और फिर से उठ कर देव के सामने जा खड़ा होता है.

देव – मन्त्रिक तुझे क्या chahiye.kyu हमला किया है तिलिस्म नगरी पर.

मन्त्रिक - बातो में समय नष्ट मत कर मुर्ख बालक मुझे तेरी मौत चाहिए क्यों की तूने मेरे रस्ते में आने की गलती की है.

देव – जा यहाँ से वार्ना तेरा अंजाम बहोत बुरा होगा.

मन्त्रिक देव पर अपनी शक्ति का वार करता है तो देव सिर्फ अपना हाथ आगे कर देता है जिससे मन्त्रिक की शक्ति बीच में hi एक धमाके के साथ नष्ट हो जाती है. तभी

सड़ – मन्त्रिक चला जा मेरे राज्य से देव पे हमला किया तो अच्छा नहीं होगा तेरे लिए. मन्त्रिक घूम कर सुमंत देव के सामने जा खड़ा होता है और उस पर भी अपनी शक्ति फेंकता है जिसे सुमंत देव रोकता है. लेकिन वो उस शक्ति के दबाव से काफी दूर जाकर गिरता है. मन्त्रिक आंखे बंद कर के अपना हाथ आगे कर देता है तो सुमंत देव और भैरव सिंह एक साथ बांध जाते है.

तभी एक तेज रौशनी की किरण आ कर सुमंत देव और भैरव सिंह के बंधनो से टकराती है. और वो लोग आज़ाद हो जाते है ये कोई और नहीं बल्कि पूनम थी जो इस वक़्त एक योद्धा के रूप में आ कर मैदान में कड़ी हो चुकी थी. और उसी के साथ शलाका भी थी ये दोनों बहने इस वक़्त राजसी वस्त्रो में न हो कर एक योद्धा के रूप में आ चुकी थी.

शलाका तेजी से दूसरी तरफ दौड़ लगा देती है और अपनी तलवार से दुश्मन सैनिको को कटती चली जाती है उसकी तलवार इस समय बिजली की तरह नाच रही थी. देखते hi देखते वो अपने महल के आसपास जीतनेय दुश्मन सैनिक थे उन्हें साफ़ कर देती है और दूसरी तरफ बढ़ जाती है जहा उनके सैनिको पर दुश्मन भरी पद रहा था. लेकिन वह भी शलाका के पहुंचने से हड़कंप मच जाता है. शलाका का चेहरा इस समय खून से रंगा हुआ बड़ा भयानक लग रहा था.

उधर जैसे hi पूनम देव के पास पहुँचती है...............

देव – पूनम आपको नहीं आना चाहिए था. जाइये आप मए हु न सब संभल लगा.

पूनम - नहीं देव तुम अकेले नहीं हो मए तुम्हारे साथ hi रहूगी.

पूनम भी अपना आकर देव के बराबर कर लेती है देव हाथ आगे बढ़ाता है और पूनम का हाथ थम कर दोनों एक साथ छलांग लगते है मन्त्रिक पर. दोनों की एक साथ किक मन्त्रिक पर पड़ती है जिससे जमीन पे घिसटता हुआ काफी दूर जा कर गिरता है. साथ hi अपने सेकड़ो सैनिको को भी अपने नीचे पिस्ता चला जाता है. मन्त्रिक बेहद गुस्से में आ जाता है और अपनी मुठी बंद कर के पूनम की तरफ कर देता है फिर अचानक से उसे खोल कर फूंक मार देता है.

पूनम भी समझ जाती है और अपनी तलवार सामने कर के तेजी से गोल घूमने लगती है जिससे वह एक बवंडर सा बन जाता है और मन्त्रिक की फेंकी हुई शक्ति पूनम तक आने से पहले hi उस बवंडर में घुस के गायब hi जाती है. मन्त्रिक को समझ में नहीं आ रहा था तो अपना हाथ आगे बढ़ाता है पानी का अंजुल भर के मंत्र पड़ता है और पूनम पर फेंकता है तभी देव आगे बाद के पूनम को अपनी बहो में भर के छुपा लेता है. और वो पानी के छींटे तेजाब की तरह देव पे पड़ने से पहले hi देव की पावर्स से वो देव की पीठ पे पहुंचने से पहले hi सूख जाते है.

मन्त्रिक से भी अब बर्दाश्त नहीं होता

मन्त्रिक – देव सिंह मए नहीं चाहता था के तुझ पर अपनी साडी शक्ति लगा दू ये मैने कई वर्षो के तपस्या से एकत्रित की है लेकिन तू मुझे मजबूर कर रहा है. और हारना मेरा स्वाभाव नहीं इसलिए तुम्हे आखरी बार मौका दे रहा हु अब भी वक़्त है लौट जा तिलिस्म नगरी छोड़ कर मए तुझे और तेरे नाग लोक को बक्श दुगा. वार्ना तुम सब को मार डालूगा.

देव – तूने काम से काम मुझे वापस जाने का मौका तो दिया लेकिन तूने दो गलतिया की है एक यहाँ हमला कर के दूसरा मुझसे दुश्मनी मोल लेकर, ये तो शुक्र मन के मए अकेला हु अगर मेरा रूद्र यहाँ होता तो अब तक तुझे सिर्फ पटक पटक कर hi समाप्त कर देता. वैसे जिन्दा तो तुझे मए भी नहीं छोड़ूगा वार्ना वो साला मुझे छोड़ेगा नहीं. अब उसकी नाराजगी दूर करनी है तो तुझे मौत तो देनी hi पड़ेगी.

मन्त्रिक – अच्छा हुआ तेरा दोस्त नहीं आया वार्ना वो भी अभी यहाँ मारा पड़ा होता पर उस के नसीब में कुछ साँसे बाकि है. तुझे मरने के बाद मए उसे भी मार डालूगा वो कही भी हो मुझसे बच नहीं पायेगा.

देव – ये तूने तीसरी गलती कर दी मेरे सामने मेरे दोस्त की जान लेने की बात कह कर, अब तो तू गया मन्त्रिक

मन्त्रिक जल्दी से अपने दोनों हाथ ऊपर कर के अपनी शक्तिया इकठ्ठी करता है. जिसे देख कर पूनम घबरा जाती है.

पूनम - देव ये वज्रा शक्ति का इस्तेमाल करने वाला है कुछ करो. देव पूनम को धक्का देकर खुद से काफी दूर कर देता है और वह भी अपने दोनों हाथ उठा के साडी सहक्ति इकठी करता है .

इधर मन्त्रिक हमला कर देता है देव पर तभी देव आँखे खोलता है मन्त्रिक की शक्ति देव से टकराने hi वाली थी के पूनम बीच में आ कर पूरा वॉर अपने ऊपर ले लेती है और देव को दूर कर देती है. मन्त्रिक की शक्ति से पूनम का आकर तेजी से घटने लगता है और वो तेजी से जमीन पे आ कर गिरती है. उस की सांसे उखाड़ने लगी थी. उसका पूरा शरीर इस वक़्त नीला पड़ता जार अहा था.

………….ये देख कर देव का क्रोध बढ़ जाता है वो मन्त्रिक की तरफ बढ़ता है तो मन्त्रिक फिर से एक वॉर कर देता है किन्तु तब तक देव भी उस पर वॉर कर चूका था दोनों के सीने पे एक दूजे की शक्ति का वार होता है तो जहा देव जमीन की तरफ गिरने लगता है वही मन्त्रिक को झटका इतना जबरदस्त लगता है के वो आकाश की उचाईयो में उड़ता हुआ अनंत आकाश में गायब हो जाता है. उस के गायब होते hi उसकी मायावी सेना के बचे हुए सैनिक भी जादुई तरीके से गायब हो जाते है.

इधर देव की हालत भी नाजुक थी . वो और पूनम एक साथ लगभग मरने की स्थिति में पहुंच जाते है.

पूनम - देव.......... हमारा.......... Milan........hamara.......... मिलान अधूरा........... रह गया देव...........

देव – पूनम मुझे छोड़ के.......... अकेली मत जाओ......... मए तुम्हरे....... saath........saath चालुगा बस कुछ क्षण की मोहलत दे दो. मए आता हु.……… जैसे तैसे देव उठकर खड़ा होता है और आसमान की तरफ दोनों हाथ कर के आंखे बंद कर देता है और मंत्र पड़ने लगता है. थोड़ी देर के बाद एक तेज हरे रंग की रौशनी देव के हाथो से निकलती है और पूरे तिलिस्म नगर के ऊपर फ़ैल कर गायब हो जाती है. देव की हालत इस शक्ति के इस्तेमाल से और बिगड़ जाती है.

वो धड़ाम से पूनम के पास गिर जाता है. उन दोनों को घेर के सब लोग खड़े थे. रानी नीलमणि और कौशल्या तो रो रो कर बेहाल हो चुकी थी सुमंत देव और भैरव सिंह भी रो रहे थे. और शलाका भी बहन से लिपट के रोये जा रही थी. उसकी गॉड में एक तरफ देव का सर रखा था दूसरी जांघ पे पूनम का.

देव – पिता जी, मैने यहाँ आने से पहले नाग लोक को सुरखित घेरे (शिलेड कवर ) में बांध दिया था. और ……….. और……….. अभी मैने तिलिस्म नगरी को भी ……….. सुरखित ……….. सुरक्षित घेरे में बांध दिया है………….…….. माआआ........... मए जा रहा हु. आप रोइये मत h...h...h...hum……. दोनों जरूर वापस आएंगे आप लोगो के पास. हम दोनों साथ जा रहे है न तो एक साथ hi आएंगे.........

सुमंत देव – देव, पूनम तुम दोनों मुझे माफ़ कर देना मेरी वजह से ये सब हुआ है.

देव – नहीं महाराज इसमें आपका कोई दोष नहीं है. आप दुबारा ये मत कहियेगा. और अब जब तक हम दोनों वापस नहीं आते तब तक आप लोगो की आँखों में आंसू नहीं आने चाहिए.

नाग लोक और तिलिस्म नगरी अब सुरक्षित है कोई बहरी ताक़त मेरे इस सुरक्षा घेरे को तोड़ कर नहीं आ पायेगी और न hi किसी दूसरे व्यक्ति की कोई भी बुरी शक्ति यहाँ काम करेगी.

…………. यदि कोई आया भी तो वो यहाँ अपनी शक्ति का इस्तेमाल इस नगरी के विरूद्ध नहीं कर पायेगा.

देव – पिता जी रूद्र जब मेरी मौत की खबर सुनेगा तो उसे सहन नहीं होगा. उस पगले को संभल लेना उसे कहना मुझे माफ़ कर दे मए दोस्ती का रिश्ता तोड़ कर ja……ja… रहा हु लेकिन मए जल्द hi वापस आउगा तब उसे मुझसे जितना लड़ना हो लड़ सकता है.

बीएस – देव बीटा ऐसा मत बोल तुम लोग ठीक हो जाओगे. हमने वो बूटी लेन के लिए सैनिक भेज दिए है नागलोक, बस कुछ देर रम जाओ वो बूटी आते hi तुम दोनों स्वस्थ हो जाओगे मेरे बच्चो बस कुछ पल रुक जाओ.

देव – नहीं पिता जी बहोत देर हो चुकी है और अब हमारा अंतिम समय आ गया है आप रूद्र का ख्याल रखना.

बीएस - मए उसे कैसे सम्भालूंगा देव...... उसे कोई नहीं संभल पायेगा वो पागल हो जायेगा. वो अपनी जान दे देगा.

देव – पिता जी उसे आप ये कड़ा दे देना (देव अपने हाथ में पहना हुआ कड़ा उतर के अपने पिता को देता है)

देव – पिता जी hum......hum.. जा रहे है हमें aagyaaaa……..aaaaaaa…….

पूनम………

पूनम- देव…………..

दोनों हाथ में हाथ पकडे हुए hi शांत हो जाते है. दोनों की hi आक्न्हे एक दूजे के चेहरे पे थी हाथो में हाथ था. लेकिन दोनों के hi जिस्मो में जान नहीं थी. एक सन्नाटा वह छ जाता है..................
 
ृतिमा आपने जो ज्योति वाला पॉइंट बोलै उस में जहा तक आपने पढ़ा हो सकता है आपको सही नहीं लगा हो बूत देवा किसी का भी फायदा नहीं उठाएगा. ये कररेक्टर लोवबले है जो बी इससे जुड़ेगा अपनी मर्जी से जुड़ेगा ज्योति और देवा बी ऐसे hi जुड़े रहेंगे हमेशा. और जो लोग आगे मिलेंगे वो भी. रही बात ममियों की. तो उनकी बी जरूरते है . है हवस कह सकते है बूत उसे जरुरत भी कह सकते है एक तरह की. वैसे आपके ओपिनियन क लिए थँक्स. कोशिश करुगा अपने रीडर्स के मुताबिक आगे बाद सकू. साथ बने रहिएगा.???
 
अपडेट – 27

वही पण की आँखों में भी ासु थे और वो भी इन दो प्यार करने वालो की मौत को सह नहीं पाया . और तुरंत वह से उठकर अपने घर आ गया.

तभी जोरो की बिजली कड़कड़ाने की आवाज़ आती है और तेज बारिश होने लगती है.

उधर मंदिर में रूद्र को एक झटका लगता है और उसे बहोत तेज चक्कर आ जाता है

रूद्र – deeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeevvv

सब लोग चौंक कर उसे देखने लगते है उन्हें कुछ समझ में नहीं आता के क्या हुआ. रूद्र बहोत तेज रोने लगता है.

नीलम – क्या हुआ रूद्र ?

रूद्र – नीलम मुझे अभी तिलिस्म नगरी जाना है इसी वक़्त. मुझे कुछ बहोत बुरे की आशंका हो रही है मेरा देव खतरे में है नीलम मेरे भाई को मेरी जरुरत है. मए जा रहा हु तुम यहाँ सब का ख्याल रखना .

नीलम – नहीं रूद्र नहीं जो गलती तुमने की देव को अकेले जाने दे कर. वही गलती मए नहीं दोहरौगी. तुम पछता रहे हो न देव को अकेले जाने दिया

रूद्र – है नीलम मुझे उस के साथ जाना चाहिए था.

नीलम – मए पछताना नहीं चाहती रूद्र इसीलिए मए भी तुम्हारे साथ जोगी.

दोनों अपने माँ बाप के पास आते है

रूद्र – माँ बाबू जी मुझे जाना है अभी तिलिस्म नगरी. मुझे बहोत घबराहट हो रही है मेरे देव को मेरी जरुरत है वो खतरे में है .

रूद्र के पिता – ऐसी बात है तो जाओ बच्चो हम तुम्हे नहीं रोकेंगे अपना ख्याल रखना

फिर दोनों उन सब से विदा ले कर घोड़े पे निकल पड़ते है. आज उनकी राफ्तेर हवा से भी तेज थी. जहा वो दिन भर का सफर था रूद्र और नीलम ने उस सफर को मात्रा 3 घंटे में पूरा किया और तिलिस्म नगरी पहुंचे. वह की हालत डाटा रही थी के एक भयानक तूफ़ान इस नगरी से कुछ hi समय पहले गुजरा है. जिसमे सब कुछ तबाह हो चुक्का है .

रूद्र और नीलम तेजी से राज महल पहुंचते है तो वह सामने सफ़ेद कपडे में लिपटी हुई देव और पूनम की लाशे सामने पड़ी थी. और उन्हें ले जाने की तयारी चल रही थी.

रूद्र – deeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeevvvvvvvv मेरे bhaiiiiiiiiii नही ये नहीं हो सकता उठ जा देव ये कैसे सो रहा है तू

उसकी हालत इस समय पागलो जैसी हो गयी थी. वो जोर जोर से देव को पकड़ के हिलने लगता है वही नीलम भी देव और पूनम के पास आ जाती है और पूनम से लिपट के रोने लगती है.

किसी तरह बड़ी मुश्किल से महाराज भैरव सिंह रूद्र को सँभालते है

रूद्र – महाराज किस की इतनी हिम्मत हुई की मेरे देव को मुझसे छीन लिया. कौन हो वो नीच

बीएस – रूद्र बीटा, वो जो कोई भी था देव ने उसे ख़तम कर दिया है. और देव के आखरी शब्द यही थे के तू परेशां मत होना मैने बदला ले लिया है. उसे पता था तू पूरी दुनिया को आग लगा देगा. इस लिए उसने तुझे शांत रहने के लिए hi कहा है और तेरे लिए अपना ये हाथ का कड़ा दिया है.

रूद्र वो कड़ा ले कर चुम लेता है और उसे अपने हाथ में पहन लेता है. उसे पहनते hi रूद्र आँखे बंद अकर्ता है तो उसे शुरू से लेकर आखरी तक सब नजर आ जाता है. और वो फुट फुट के रोने लगता है.

इधर पशुपतिनाथ अपने घर में भरी दिल के साथ बैठा था. उसे तो खुश होना चाहिए था. लेकिन उसकी आँखों से आंसू बंद hi नहीं हो रहे थे वो बस रोये जा रहा था. तभी उसके गुरु वह आते है

ग – बधाई हो पशुपतिनाथ तुम कामयाब हुए. जाओ और जाकर सिंघासन ले ले.

पण – नहीं गुरुवार आप तो मुझे यु ताने मत दीजिये मए पचता रहा हु

ग – पचता रहे हो? हमें उल्टा पथ पड़ा रहे हो पशुपतिनाथ

पण – नहीं गुरुवार मए तो बस सिंघासन चाहता था है उस के लिए सुमंत देव मारा जाता तो मुझे अभी इतना बुरा नहीं लगता पर सिर्फ सुमंत देव .लेकिन यहाँ तो लाशो के अम्बर लग गए गुरुवार भला इतनी लाशो से बने सिंघासन पर मए कैसे बैठ सकता हु………….

…………..और सबसे भयानक बात देव और पूनम का बिछड़ना दो प्यार करने वाले मेरी वजह से मौत की नींद सो गए. ये क्या हो गया गुरुवार

……….. आप तो सक्षम है रोक सकते थे न फिर आपने क्यों ऐसा हो जाने diya?boliye गुरुवार

ग – है मए रोक सकता था इसीलिए मैने रोका भी लेकिन क्या तुमने मेरी बात मणि ? नहीं तुम उस वक़्त ताक़त के नशे में चूर हो चुके थे. तुमने मेरी बात को अनसुना कर दिया और ये सब हुआ तुम्हरी वजह से. मए तुम्हे श्राप देता हु पशुपतिनाथ के तुम्हरी वजह से दो प्रेमियों की मौत हुई है और उनकी आत्माये भटक रही है वैसे hi तुम भी भटकते रहोगे सादिया बीत जायेगी लेकिन न तो तुम्हे शांति मिलेगी न hi मौत. अब तुम इस शरीर का बोझ उठाकर अकेले भटकते रहोगे. एक फ़कीर बन कर पशुपतिनाथ फ़कीर बन कर अनंतकाल तक.

इतना कह कर उसका गुरु वह से चला गया.

पण – नहीं गुरु देव मुझे क्षमा कर दीजिये . मए ये सब नहीं चाहता था मैने उनकी मौत की कामना नहीं की थी

गुरुदेव मुझे माफ़ी दे दो मुझे ऐसा श्राप ने दे मए आपके hi सहारे हु. मुझे क्षमा कर दे गुरुवार

पशुपतिनाथ रोटा रहा बहोत देर तक अपने गुरु से माफ़ी मांगता रहा. आखिर उसके गुरु को वापस आना पड़ा.

ग – पण तुम्हारा अपराध क्षमा योग्य नहीं है. क्यों के ईश्वर सब कुछ क्षमा कर देता है किन्तु जिस ह्रदय में प्रेम का वास होता है उसका टूटना , बिखरना वो बर्दाश्त नहीं करता

पण – गुरवार मए मंटा हु मुझसे घोर पाप हुआ है किन्तु आप तो अंतर्यामी है. आप hi सोचिये क्या मेरी ऐसी मंशा थी? क्या मए उन के प्यार का दुश्मन था? क्या मए उन्हें जुड़ा करना चाहता था? नहीं गुरुवार मेरा उद्देश्य उन्हें मरना या उनसे उनका प्रेम छीनना नहीं था. कदापि नहीं

क्या मैने देव और पूनम की मौत चाही थी?

क्या मैने इतने लोगो की मौत चाही थी?

नहीं गुरुदेव मए ये सब नहीं चाहता था. मए पचता रहा हु. जो मैने सिंघासन का लालच किया और अब जान भी गया हु के ईश्वर जिसे जो देता है उसे उतने में hi खुश रहना चाहिए. ज्यादा का लालच बुराई को जनम देता है पाप को जनम देता है. आप मुझे क्षमा नहीं करना चाहते तो मत कीजिये लेकिन अब ये पाप से भरा जीवन मए नहीं जी पाउगा मुझे भी मौत hi दे दीजिये.

ग- पशुपतिनाथ तुम अचे से जानते हो के मए सिद्ध योगी हु. मेरा दिया हुआ श्राप खली नहीं जा सकता अब तुम्हे मुझसे मौत तो नहीं मिल सकती. है लेकिन मए तुम्हरी सजा को काम जरूर कर सकता हु. लेकिन उस के लिए तुम्हे कठोर तप करना होगा अपने तपोबल से तुम्हे देव और पूनम की भटकती हुई आत्माओ को खोजना होगा वो जहा भी है साथ hi है. उन्हें खोजने के बाद तुम्हे देव की आत्मा को शक्तिया एकत्रित करने के लिए साधना में बैठना होगा पूनम की आत्मा भी साथी hi रहेगी जिससे वो मजबूत बन सके. सही वक़्त आने पर उन्हें नया जनम मिलेगा और जब उनका पुनर्जन्म हो तो दोनों के बालिग होने तक तुम्हे इंतजार करना होगा और फिर तुम्हे पहले देव को तैयार करना होगा के वो अपनी शक्तिया जगाये जब वो तैयार हो जायेगा तो उसी के द्वारा पूनम को सब यद् दिलाना होगा और फिर यहाँ तिलिस्म नगरी में उन्हें वापस लेकर सबसे मिला देना जो तुम्हारी वजह से बिछड़े है उन्हें एक कर दो ईश्वर तुम पर कृपा karege.ho सकता है उसमे एक सदी लगे या उससे भी अधिक पर तुम्हे अपना तप तब तक करना होगा. किन्तु ये तो तुम्हारा प्रय्चित hi होगा, मुक्ति तुम्हे तब मिलेगी जब इस कहानी का अंत होगा, जो तुम्हारी वजह से शुरू हुई.

इतना सब कह कर गुरु जी गायब हो जाते है……

……….पशुपतिनाथ - धन्यवाद् गुरुवार आपने मुझ जैसे पापी पर दया की है . मए इंतजार करुगा मए इंतजार करुगा देव और पूनम के वापस आने का उन्हें मिला के रहुगा मए गुरुदेव.……………………

………………इतना कह कर फ़कीर बाबा चुप हो जाते है और सब के चेहरे देखने लगते है.

फब - देव अब ये बताने की जरुरत नहीं के वो नीच पापी जिस की वजह से ये सब हुआ वो पशुपतिनाथ कोई और नहीं बल्कि मए hi हु.

वह मौजूद सब उन्हें देखने लगते है. उनकी आँखों में ासु थे.

फब – देव पूनम मुझे माफ़ कर दो बच्चो मए स्वार्थ में अँधा हो गया था.

देव – नहीं बाबा ये तो नियति थी जो आपके द्वारा पूरी हुई आप तो मात्र एक साधन थे. लेकिन ये भी सच है की आज अगर हम सब एक है तो उस के पीछे आपकी सदियों की तपस्या और म्हणत है. उसी की वजह से आज हम सब एक हो चुके है. आपने अपना प्रायश्चित पूरा किया बाबा. हमें आपसे कोई शिकायत नहीं, लेकिन अभी आपको हमें साथ देना है. मए आपको जाने नहीं दुगा.

फब – जैसा तुम कहो देव

देव – बाबा मेरा वो पागल दोस्त कहा है रूद्र. वो कही नजर नहीं आ रहा है.

फब - देव रूद्र यहाँ नहीं है. wo…..wo……..
 
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