Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 10 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#57.

सभी सुयश के पीछे चल पड़े। सुयश ने मोटरबोट को एक बार देखा। उसके अंदर 3 स्विमिंग कॉस्ट्यूम, ओक्सिजन सिलेंडर के साथ रखे दिखें जो कि सुयश ने सुप्रीम के प्रोपेलर की जांच करने के लिए मंगवाए थे।

मोटरबोट के अंदर और कुछ नहीं दिख रहा था। सुयश मोटरबोट के अंदर घुस गया। उसने मोटरबोट के जमीन पर लगे हैंडल को खींचकर उठा लिया। उतनी दूर का लकड़ी का वह हिस्सा ढक्कन की तरह से खुल गया और अंदर रखा काफी सारा सामान दिख गया।

सुयश ने इशारे से ब्रेंडन को सारा सामान निकालने को कहा।

बामुस्किल 10 मिनट में ही ब्रेंडन ने कुछ लोगो की मदद लेकर मोटरबोट का सारा सामान निकालकर वही द्वीप के किनारे एक साफ जगह देख कर रखवा दिया।

अब सभी की नजर मोटरबोट से निकले सामान पर थी।

मोटरबोट में था- “ताज़ा वॉटर की लगभग 40 बोतलें, ड्राई-फ्रूट्स के लगभग 100 पैकेट, 10 चिप्स, 1 केम्पास, 1 सिग्नल मिरर, 6 मजबूत पीठ पर ढोने वाले ट्रेवल बैग, 2 पावरफुल टार्च, 2 बड़े चाकू और आग जलाने वाले 2, 2 सीटियाँ, ओर लाइटर।"

“यह मोटरबोट एक तरह की लाइफबोट थी, इसलिए इसमें ये सब सामान उपस्थित था। तो अब आप लोग ने देख ही लिया की हमारे पास क्या-क्या है।" सुयश ने सबको बारी-बारी देखते हुए कहा- “अब हमें इन्ही चीज़ो से गुजारा करना पड़ेगा।"

“कैप्टन, मेरे काले बैग में भी एक टार्च और सिग्नल फ़्लेयर है।" असलम ने अपने कंधे पर टंगे बैग की ओर इशारा करते हुए कहा।

“कैप्टन क्या हमें यही किनारे पर रहकर अपना बचाव करना चाहिए या फिर इस द्वीप के जंगल में प्रवेश करके वहां बचाव का कुछ साधन ढूंढना चाहिए।" जेनिथ ने सुयश से पूछा।

लेकिन इससे पहले कि सुयश कुछ जवाब दे पाता, तौफीक बीच में ही बोल उठा-

“हमारे पास खाने-पीने की चीजे बहुत ही सीमीत है, अगर हम थोड़ा-थोड़ा भी यूज करे, तब भी 5 दिन से ज़्यादा ये चीजे नही चालेंगी, ऐसे में सामान ख़तम होने के बाद भी हमें द्वीप के अंदर तो जाना ही पड़ेगा, तो फ़िर क्यों ना हम अभी ही द्वीप के अंदर जाने का फ़ैसला ले-ले ।"

“तौफीक सही कह रहे है ।" एलेक्स ने कहा- “वैसे भी यह द्वीप बहुत बड़ा है, अगर हम सब कुछ ख़तम होने के बाद इस द्वीप को पार करने कि कोसिस करे तो पता नहीं हमें अंदर खाने-पीने कि चीजे मिलेंगी भी कि नहीं। इसिलए में तौफीक के विचार से पूर्णतया सहमत हूं ।"

अब सभी ने तौफीक कि बात पर सहमित जताई। “तो फ़िर ये ‘फाइनल’ रहा कि हम इस द्वीप के अंदर जाएगे।"

सुयश ने ‘थम्सअप-अप’ करते हुए कहा- “तो फ़िर मेरे हिसाब से पहले सबको कुछ खा-पी लेना चाहिए, फ़िर जरुरत के सारे सामान को इन 6 ट्रेवल बैग में भर लेंगे और लड़कियाँ और अल्बर्ट सर को छोड़कर बाकि सभी लोग बारी-बारी से इसे उठाकर चलते रहेंगे।"

सुयश कि बात सभी को सही लगी, इसिलए किसी ने ऐतराज जाहिर नही किया। अब सभी वही रेत पर जमीन में बैठ गये।

ब्रेंडन ने सभी को ड्राई-फ्रूट्स का एक पैकेट और पानी कि एक बॉटल पकड़ा दी। ब्रेंडन ने ड्राई-फ्रूट्स का एक पैकेट फाड़कर ब्रूनो को भी दे दिया। 30 मिनट में सभी ने खाना खाकर जरुरत का सभी सामान पैक कर लिया और सुयश को देख, उठ कर खड़े हो गये।

क्यो की किसी ने रात में भी कुछ नही खाया था, इसिलए खाना खाकर सभी में एक नयी फुर्ती का संचार हो गया। सुयश ने आसमान की तरफ सिर उठाकर, हाथ जोड़कर ईश्वर से कुछ प्रार्थना किया और जंगल की ओर चल दिया।

अलबर्ट, शैफाली, एलेकस, क्रिस्टी, तौफीक, जेनिथ, जैक, जॉनी, ब्रेंडन, असलम, ड्रेजलर और ब्रूनो भी सुयश के पीछे-पीछे चल पड़े।

ट्रेवेल बैग इस समय तौफीक, ब्रेंडन, सुयश, जैक, असलम और ड्रेज़लर के पास थे। अलबर्ट ने एक सीटी को शैफाली के गले मे टांगने के बाद, एक अपने गले मे पहन लिया।

तौफीक ने एक चाकू उठाकर अपने पास रख लिया। दूसरा चाकू ब्रेंडन को दे दिया। मौसम इस समय बिलकुल साफ था। आसमान मे सूर्य अपनी किरणें बिख़ैरता हुआ चमक रहा था।

द्वीप के अंदर की ओर विशालकाय पेड़ लहरा रहे थे। सुयश ने जंगल मे घुसने से पहले किनारे पर मौजूद कुछ पेडों से डंडे तोड़ते हुए कहा-

“सभी लोग अपने हाथ मे कुछ ना कुछ अवस्य ले-ले। क्यों की जंगल घना लग रहा है। अगर किसी तरह का कोई जंगली जानवर हुआ तो यह डंडे हमारे काम आ सकते हैं।"

सुयश की बात सभी को सही लगी। अतः बाकी लोग ने भी लकड़ी के डंडे तोड़कर अपने हाथो मे ले लिये। इसके बाद सभी द्वीप के अंदर की ओर चल दिये।

जंगल बहुत ही घना था इसिलए सभी एक सीधी लाइन मे एक के पीछे एक चल रहे थे। जेनिथ, क्रिस्टी और शैफाली को बीच मे कर दिया गया।

सबसे आगे सुयश था। वह बहुत सावधानी के साथ अपने कदम बढ़ा रहा था। कुछ दूर चलने के बाद शैफाली को थोड़ी मस्ती सूझी। उसने अपने गले मे टंगी सीटी को एक बार जोर से बजा दिया।

“टऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ" जंगल इतना शांत था कि एक जोरदार आवाज पूरे जंगल में गूंज गयी। सीटी की आवाज सुन, सभी हैरानी से शैफाली कि तरफ देखने लगे।

“मैं तो बस चेक कर रही थी कि जंगल में सीटी की आवाज गूंजती कितनी जोर से है?" शैफाली ने शैतानी से मुस्कुराते हुए कहा।

शैफाली की शैतानी देख सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी। इधर तो सीटी कि आवाज के कारण मस्ती चल रही थी, पर इसी आवाज को सुन अराका द्वीप पर मौजूद ‘पोसाइडन की पहाड़ वाली मूर्ति’ की आँखे अचानक से लाल हो गई और एक तेज हवा का झोंका पहाड़ से शैफाली कि ओर बढ़ा।

चलती हुई शैफाली के बाल हवा के झोंके कि वजह से हवा में लहराये और उसे अपने कानो में एक फुसफुसाहट सी सुनाई दी:-

“अराकाऽऽऽऽऽऽ!"

शैफाली यह सुन बहुत हैरान हो गई- “कौन है? .... कौन है यहां?"

शैफाली की आवाज सुन सभी पलटकर शैफाली को देखने लगे।

“क्या हुआ शैफाली?" क्रिस्टी ने शैफाली का हाथ पकड़कर पूछा।

“पता नही, पर किसी ने मेरे कानो में फुसफुसाकर ‘अराका’ कहा।"

“अराका?" सभी ने समवेत स्वर में कहा।

“पर यहां तो हम लोगो के सिवा कोई भी नही है।" जॉनी ने डर कर इधर-उधर देखते हुए कहा।

“नही-नही कोई था मेरे पास....।" शैफाली के शब्दो में एक बार फिर रहस्य झलकने लगा- “और मुझे ऐसा लगा जैसे कि में उसे जानती हूँ।"

“क्या?" अब सुयश की भी आँखे सिकुड गई - “तुम इस द्वीप पर किसी को कैसे जान सकती हो?"

अब सभी की नजर इधर-उधर घूमने लगी, पर जब काफ़ी देर तक उनको कुछ नजर नही आया तो सभी फिर से आगे बढ़ गये।

सभी को चलते-चलते 2 घंटे हो गये थे। धीरे-धीरे जंगल घना होने लगा था। जंगल के अंदर से चिड़ियाँ के चहचहाने की आवाज आ रही थी ।

कभी-कभी कुछ जानवरो कि आवाज भी उस में आकर मिल जाती थी । कुछ और आगे बढ़ने पर इनहे एक हरा-भरा बाग दिखाई दिया।

बाग में लगे पेड़ भी अजीब सी आकृति के थे और उस पर सेब के समान परंतु नीले रंग के फल लटक रहे थे।

“यह तो बहुत विचित्र पेड़ लग रहा है।" अल्बर्ट ने पास जाकर पेडो को देखते हुए कहा- “ऐसे पेडो के बारे में तो मैंने पढ़ा तक नही है।"

“आप सही कह रहे है प्रोफेसर।" सुयश ने भी पेडो को देखते हुए कहा- “मैंने भी कभी ऐसे पेड़ और फल के बारे में नही सुना और इनका नीला रंग भी कितना विचित्र है।"

“पर ग्रैंड अंकल!" शैफाली ने मासूमियत भरे अंदाज में कहा- “मुझे तो इन फलो कि खुशबू बहुत अच्छी लग रही है। खुशबू से तो यह फल रसीले भी प्रतीत हो रहे है। क्या हमें इन्हे खाना चाहिए?"

“नही शैफाली!" जेनिथ ने कहा- “हमें बिना चेक किए, इन फलो को नही खाना चाहिए। इनका नीला रंग देखकर लगता है कि यह जहरीले भी हो सकते है।"

“तो फिर क्यों न एक फल तोड़कर हम ब्रूनो को सुंघाएं?" शैफाली ने कहा- “अगर ब्रूनो ने फल खा लिया। तो फिर हम भी खा सकते है।"

सभी को शैफाली का यह तर्क सही लगा। एक फल जो नीचे तक लटक रहा था, जैक ने आगे बढ़कर उसे तोड़ने की कोशिश की, पर जैसे ही जैक का हाथ उस फल तक पहुंचा, अचानक ही आश्चर्यजनक जनक तरीके से वो फल कि डाल थोड़ा ऊपर की ओर उठ गयी।

“यह कैसे हो सकता है?" ब्रेंडन ने हैरानी से पेड़ को देखते हुए कहा- “यह पेड़ की डाल अपने आप ऊपर कैसे हो गयी?"

“शायद यह पेड़ ‘मीमोसा पुडिका’ के पेड़ के समान ‘सेम पेड’ है, जिनको छूने पर वह अपने आप में सिमट जाते है।"

अल्बर्ट ने अपनी वनस्पति विज्ञान की जानकारी को सबसे साझा करते हुए कहा।

अब कोई भी फल इतनी ऊंचाई पर नही लगा था कि उसे जमीन पर रह कर तोड़ा जा सके।

“लगता है पेड़ पर चढ़े बिना फल को नहीं तोड़ा जा सकता।”असलम ने कहा।

“चढ़ना तो पड़ेगा।“ इस बार अल्बर्ट ने कहा- “पर चढ़ोगे कैसे? देख नही रहे, यह पेड़ कितना सीधा है और इसकी सबसे नीची डाल भी कम से कम 12 फुट ऊपर है। ऐसे में इस पेड़ पर चढ़ना इतना सरल नहीं है।"

“मैं चढ़ सकता हू इस पेड़ पर।" एलेक्स ने आगे आते हुए कहा- “मेरे लिये यह बात आसान है।"

यह कहकर एलेक्स ने बीना किसी से पूछे, अपने जूते उतारे और एक पेड़ के तने को छूकर पेड़ को पकड़ का जायजा लिया। इसके बाद एलेक्स किसी प्रशिक्षित बंदर कि तरह तने को पकड़कर, पेड़ पर चढ़ने लगा।

“बंदर कहीं का।" क्रिस्टी ने मुस्कुराते हुये एलेक्स पर कमेंट किया।

अनायास ही सभी के चेहरे पर एक मुस्कान सी खिल गई।

थोड़ा ऊपर चढ़कर एलेक्स ने आसपास के फलो को देखा। अब एलेक्स कि नजर एक पास के फल पर गयी, जो कि उससे ज्यादा दूर नही था।

एक दूसरी शाख पर कूदने के बाद एलेक्स ने उस फल कि ओर हाथ बढ़ाया। सबकी नजर एलेक्स पर थी।

तभी एकाएक एलेक्स के पीछे की पेड़ की एक डाली स्वतः गतिमान हूई और वह रबर की तरीके से तेजी से आकर एलेक्स की पीठ पर लगी-

“सटाक्"

“आहऽऽ!" पीठ पर लगी चोट के कारण एलेक्स के मुंह से एक तेज कराह निकली और उसका हाथ डाल से छूट गया।

एलेक्स का शरीर हवा में लहराया और तेजी से जमीन की तरफ गया।

एलेक्स ने फुर्ती से एक डाली पकड़ ली, नही तो वह सीधे जमीन पर आ जाता। यह घटना किसी कि आँखो से छीपी ना रह सकी।

“एलेक्स तुरंत नीचे आ जाओ।" क्रिस्टी ने चीखकर कहा- “पेड़ पर कुछ खतरा है।"

एलेक्स को कुछ समझ नही आया पर क्रिस्टी की आवाज सुन वह पेड़ से नीचे कूद गया।

“यह कैसे संभव है, यह पेड़ तो बिल्कुल किसी सजीव की तरह व्यवहार कर रहा है और इसे देखकर मुझे नही लगता कि हम लोग इस पेड़ से एक भी फल तोड़ पायेंगे।"

अल्बर्ट ने आश्चर्य से पेड़ को देखते हुए कहा।

जारी रहेगा________✍️
 
#58.

“अब तो 100 प्रतिशत मुमकिन है कि हमे इस द्वीप पर अभी बहुत से आश्चर्य और देखने को मिलेंगे ।" ड्रेजलर ने कहा।

“अंकल क्या मैं इस पेड़ को छू सकती हुं ?" शैफाली ने सुयश कि ओर सर घुमाते हुए कहा- “पता नही क्यों मुझे इसे छूने का मन कर रहा है।"

सुयश ने एक बार ध्यान से शैफाली को देखा और फ़िर शैफाली का हाथ पकड़ उसे पेड़ तक लेता गया।

वैसे तो शैफाली कि यह बात बहुत ही सामान्य सी थी, परंतु पता नही क्यों सुयश को इसमे भी कुछ रहस्य सा महसूस हुआ। सुयश के हाथ के इशारे पर, शैफाली ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेड़ को स्पर्श कर लिया।

शैफाली के स्पर्श करते ही अचानक पेड़ मे कुछ हलचल सी हुई और बिना किसी हवा के उस पेड़ कि डालीयां झूमने लगी।

पेड़ कि यह हरकत देख सभी लोग डरकर पीछे हट गये। सुयश भी शैफाली को लेकर दूर चला गया। डालीयां के झूमने की गति धीरे-धीरे तेज होने लगी। जिसकी वजह से उस पर लगे फल टूट-टूट कर नीचे गिरने लगे।

मात्र 30 सेकंड मे ही पेड़ के नीचे फलो का अम्बार लग गया। जब पेड़ से सारे फल टूटकर नीचे गिर गये तो पेड़ स्वतः ही शांत हो गया।

“ये सब क्या था?" जेनिथ ने आश्चर्य से फलो के टूटे अंबार को देखते हुए कहा।

“शायद यह कोई मायावी पेड़ है। जिसके अंदर स्वयं कि समझ भी है।" तौफीक ने कहा।

“तुमने पेड़ को छूकर ऐसा क्या किया था?" सुयश ने शैफाली को देखते हुए पूछा- “जिसकी वजह से पेड़ ने हरकत की।"

“मैंने केवल उसे छूकर फल को खाने कि इच्छा व्यक्त की थी बस.... और मुझे कुछ नही पता?"

शैफाली स्वयं भी आश्चर्य में थी। किसी को समझ नही आया कि ये सब कैसे हुआ।

“प्रोफेसर, आपको कुछ समझ में आया क्या?" ब्रेंडन ने अल्बर्ट से मुखातिब होते हुए पूछा।

अल्बर्ट ने एक गहरी साँस भरी और ब्रेंडन से कहना शुरू कर दिया-

“मैं स्वयं इस घटना से आश्चर्य में हुं, मैंने कभी भी ऐसे किसी पेड़ के बारे में नही सुना। हाँ, पर हिंदू माइथालोजी में ‘पारीजात’ नामक एक ऐसे पेड़ का वर्णन है, जो किसी कि भी इच्छा को पूर्ण करता था। मुझे यह पेड़ भी कुछ वैसा ही लग रहा है, क्यों की जब हमने इसकी इच्छा के विरूद्ध इसके फल तोड़ने चाहे तो नही तोड़ पाये, पर जब शैफाली ने इससे प्रार्थना कि तो इसने स्वयं ही अपने सारे फल हमें दे दिये।"

“पर .... शैफाली ने तो मन में प्रार्थना की थी, शैफाली के मन कि बात इसे कैसे समझ में आ गयी।" सुयश के शब्दो में तर्क तो था।

“मैं श्योरिटी से तो कुछ नही कह सकता, पर ये भी हो सकता है कि यह पेड़ मन कि बात को समझ लेता हो, आख़िर हमारी सोच भी तो एक ऊर्जा का ही रूप होती है।" अल्बर्ट ने कहा।

“अंकल अब क्या हम इन फलो को खा सकते है?" शैफाली ने सबके विचारो पर पूर्ण विराम लगाते हुए पूछा।

शैफाली की आवाज सुन सुयश ने एक फल ब्रूनो के सामने रखा। ब्रूनो ने पहले फल को सूंघा और फ़िर खा लिया। थोड़ी देर तक ब्रूनो को देखते रहने के बाद सुयश ने सबको फल खाने कि इजाजत दे दी।

फल का स्वाद बहुत ही अनोखा था। उसमें कोई बीज नही था और रस भी बहुत ज्यादा था। सभी को वो फल बहुत ही अच्छा लगा। फल खाकर सुयश ने फ़िर सभी को आगे चलने का इशारा किया।

सभी उठकर चल दीये । शैफाली ने कुछ आगे बढ़ने के बाद पीछे पलटकर उस चमत्कारी पेड़ को ‘बाय’ किया।

शैफाली के ऐसा करने पर पेड़ की भी एक डाल जोर से हिली, ऐसा लगा मानो उस पेड़ ने भी शैफाली को बाय किया।

चैपटर-2 (सुनहरी ढाल)

7 जनवरी 2002, सोमवार, 11:30, ट्रांस अंटार्कटिक पर्वत, अंटार्कटिका

अंटार्कटिका की धरती पर बर्फ़ की एक मोटी चादर बिछी थी। जनवरी का महीना अंटार्कटिका का सबसे गरम महीना था फ़िर भी उस छेत्र में किसी भी प्रकार के जीव-जंतू और पेड़-पौधे का नामो-निशान तक नहि था।

आसमान इस समय बिलकुल साफ था और तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस था। ऐसे मौसम में 2 अमेरिकी व्यक्ति ट्रांस अंटार्कटिक के पहाड़ों के पास ड्रिल मशीन से बर्फ़ में सुराख करने की कोशीश कर रहे थे।

“तुम्हें क्या लगता है जेम्स, हमारी इस मशीन ने आज क्या खोजा होगा?“ विल्मर ने मैटल खोज करने वाली मशीन के जलते हुए इंडीकेटर को देखकर कहा।

“जरूर यहाँ पर कोई पुराना खजाना दबा हुआ होगा?" जेम्स ने मुस्कुराते हुए विल्मर पर कटाक्ष किया- “फ़िर इस खजाने को पाकर हम करोड़पती बन जाएंगे।"

“हा....हा...हा..... खजाना!“ विल्मर भी जेम्स की बात सुनकर जोर से हंसा- “पुराने टूटे-फूटे स्कूटर के अवशेष के अलावा यहां आज तक कुछ मिला है जो आज मिलेगा। ये कोई पिकनिक मनाने की जगह तो है नही। यहां पर हमारी- तुम्हारी तरह के कुछ खोजी दस्ते ही आते है, अपने ‘स्की-स्कूटर’ से। उन्हि में से कुछ दुर्घटना का शिकार भी हो जाते है । उसमे से ही होगा, किसी का कोई सामान, जिसका यह खोज- सूचक (search-indicator) हमे संकेत दे रहा होगा।"

“सही कह रहा है भाई।" जेम्स ने अब उदास होते हुए कहा- “चल ड्रिल करता रह, जब थक जाना तो मुझे बता देना, आगे की खुदाई मैं कर लूंगा।"

लेकिन इससे पहले कि विल्मर और कुछ बोल पाता, ड्रिल मशीन एक ‘खटाक’ कि आवाज के साथ किसी चीज से टकराई। यह आवाज सुन दोनो के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

“ले भाई मिल गया तेरा खजाना।" विल्मर ने ड्रिल छोड़कर खड़े होते हुए कहा- “अब तू ही निकाल अपने इस खजाने को।"

जेम्स ने हंसकर विल्मर कि जगह ले ली और अपने ग्लब्स पहने हाथो से उस जगह की बर्फ़ साफ करने लगा।

थोड़ी ही सफाई के बाद जेम्स कि आँखे आश्चर्य से सिकुड़ गई।

“य...य...ये क्या है?" जेम्स ने जमीन की ओर देखते हुए आश्चर्य से कहा। जेम्स कि ऐसी आवाज सुनकर विल्मर भी उस गड्डे में देखने लगा।

गड्डे में एक सुनहरी अंजान सी धातु की बनी हुई एक ढाल नजर आ रही थी जो देखने में किसी पुरातन योद्धा की लग रही थी। ढाल पर ड्रेगन कि तरह के एक विचित्र जीव कि उभरी हुई आकृति बनी थी।

“लग रहा है सच में खजाना मिल गया!" उस ढाल को देखकर जेम्स ने रोमांच से कहा।

अब जेम्स और विल्मर तेजी से उस जगह कि बर्फ़ को साफ करने लगे। ढाल अब पूरी नजर आने लगी थी।

“यह कौन सी धातु हो सकती है?" जेम्स ने उस सुनहरी धातु को देखते हुए पूछा।

“सोना तो नही है, पर है यह कोई बहुमूल्य धातु।" विल्मर ने उस धातु को हाथो से टच करते हुए कहा।

ढाल पर पड़ी पूरी बर्फ़ अब हट गयी थी।

“चल निकाल जल्दी से इस खजाने को, अब सबर नहीं बचा मेरे पास।" विल्मर ने कहा।

जेम्स ने ढाल को एक हाथ से खिंचा, पर वह ढाल उठना तो छोड़ो, हिली तक नहीं । यह देख जेम्स ने दोनो हाथो का इस्तेमाल किया, पर पूरी ताकत लगाने के बाद भी वह उस ढाल को हिला तक नहीं पाया।

यह देख विल्मर ने क्रोध से जेम्स को धक्का दीया और स्वयं आकर उस ढाल को उठाने कि कोसिश करने लगा। पर ढाल विल्मर से भी ना हिली । अब दोनों ने मिलकर पूरी ताकत लगायी, फिर भी वह ढाल को हिला नहीं पाये।

“शायद यह ढाल बर्फ़ में ज़्यादा अंदर तक घुसी है, इसे निकालने के लीए, लगता है और बर्फ़ हटानी पड़ेगी।" जेम्स ने कहा।

यह सुन विल्मर ने दोबारा से ड्रिल मशीन अपने हाथ में ले ली और उस स्थान के अगल-बगल कि बर्फ़ हटानी शुरु कर दी।

थोड़ी देर में ढाल के पास का लगभग 6 मीटर का क्षेत्र दोनो ने साफ कर लिया। पर अब उस जगह को देख उनकी आँखे फटी की फटी रह गई, क्यों की अब उस साफ किये 6 मीटर के दायरे में, उसी धातु की सुनहरी दीवार दीखाई दे रही थी।

एक ऐसी दीवार जिसमें वह ढाल लगी हुई थी और उस दीवार का अंत कहीं नजर नहीं आ रहा था।

“ये है क्या?" जेम्स ने उस दीवार को देखते हुये कहा- “इसका तो कहीं अंत ही नहीं दिख रहा है।“

अब दोनों की आंखें रहस्य से फैल गई। अब विल्मर ने उस स्थान से 10 मीटर दूर ड्रिल करना शुरु कर दिया। थोड़ी देर बाद वहां भी बर्फ़ के नीचे वही दीवार दिखाई दी।

अब विल्मर जैसे पागल हो गया। उसने लगभग 500 मीटर के दायरे में अलग-अलग जगह की बर्फ़ हटायी, पर सभी जगह से एक ही परिणाम निकला। हर जगह पर वह सुनहरी दीवार मौजूद थी।

विल्मर अब थककर पूरी तरह से चूर हो चुका था। इसिलये वह जेम्स के पास आकर बैठ गया।

“क्या लगता है तुम्हे? ये चीज क्या हो सकती है?" विल्मर ने जोर- जोर से साँस लेते हुये जेम्स से पूछा।

“शायद यह कोई पनडुब्बी या पानी का जहाज हो सकता है, जो कि यहां बर्फ़ में दबा है, या फिर कोई एलियन का स्पेससिप या .......।" कहते-कहते जेम्स ने अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया।

“या ....?"

विल्मर ने जेम्स की बात को पूरा करते हुए कहा- “कोई ऐसी सभ्यता जो अभी तक दुनियाँ कि नजर में आई ही ना हो।" अब दोनों की आँखो में थोड़ा डर भी दिखायी देने लगा।

“तो फिर क्या हमको इसकी जानकारी अपने हेड-कवाटर भेज देना चाहिए?" जेम्स ने विल्मर से पूछा।

“अब अगर हमें इस चीज से कोई निजी फायदा नहि हो सकता, तो हेड-कवाटर बता देना ही ठीक रहेगा। कम से कम इस परियोजना को ढूंढने में हमारा नाम तो आयेगा।"

विल्मर ने कहा- “अगर तुम कहो तो एक कोशिश और करके देख ले?, शायद कुछ हो ही जाए।"

“कैसी कोशिश?" जेम्स ने ना समझने वाले अंदाज में पूछा।

“देख भाई, चाहे यह कोई पनडुब्बी हो, चाहे एिलयन का स्पेससिप या फिर कोई नयी सभ्यता, इसका रास्ता तो कहीं ना कहीं से होगा ही। क्यों ना हम इसके रास्ते को ढूंढने की कोशिश करे। शायद हमें सच में कोई खजाना मिल जाए।" विल्मर ने जेम्स को समझाते हुए कहा।

विल्मर की बात सुन जेम्स थोड़ी देर सोचता रहा और फिर उसने हाँ में सर हिलाते हुए कहा-

“ठीक है, हम अभी इस परियोजना की जानकारी कीसी को नही देते और इस दूसरी दुनियां का रास्ता ढूंढने की कोशिश करते है। अगर हम अगले 5 दिन में भी इसका रास्ता नहीं खोज पाये तो फिर इसके बारे में सबको बता देंगे।"

“डन।" विल्मर ने थम्स-अप करते हुए कहा और एक बार फिर दुगने उत्साह से अलग दिशा में खुदाई करने चल दिया।

जारी रहेगा________✍️
 
#59.

मगरमच्छ मानव (7 जनवरी 2002, सोमवार, 14:30, अराका द्वीप, अटलांटिक महासागर)

चलते चलते सभी को 2 घंटे बीत चुके थे। पर अभी तक इन लोगों को ना तो कोई जंगली जानवर मिला था और ना ही मनुष्य के किसी प्रकार के पद-चिन्ह:।

चलते-चलते सभी को पेडों के एक झुरमुट के बीच एक छोटी सी झील दिखाई दी।

झील के चारो तरफ कुछ दूरी पर फलो के बहुत सारे पेड़ दिखाई दे रहे थे। झील का पानी काफ़ी साफ लग रहा था।

“क्यों ना हम अपनी खाली हो चुकी बोतलों में यहां से पानी भर ले?" क्रिस्टी ने झील को देखते हुए कहा।

“क्रिस्टी बिलकुल सही कह रही है, वैसे भी 2 घंटे से चलते-चलते सबका दम भी निकल गया है, थोड़ी देर रुक कर आराम भी कर लेना चाहिए।" सुयश ने सभी को देखते हुए कहा।

सुयश के इतना कहते ही कुछ लोग झील के किनारे की मिट्टी के पास बैठ गये और कुछ झील की तरफ आगे बढ़ गये।

“वाह! कितना साफ पानी है।" जेनिथ ने झील कि ओर देखते हुए कहा- “मेरा तो नहाने का मन करने लगा।"

यह कहकर जेनिथ झील के पानी कि ओर बढ़ गयी।

“ठहरो!" अल्बर्ट कि आवाज ने जेनिथ को रोक लिया - “यह झील इतनी शानदार है, पर इसके आस- पास किसी पशु-पक्षी के कदमो के निशान मौजूद नहीं है।"

अब सबका ध्यान झील के पास कि मिट्टी पर गया। मिट्टी हर जगह से बिलकुल बराबर लग रही थी।

“बात तो आपकी सही है प्रोफेसर ।" सुयश ने भी मिट्टी पर नजर मारते हुए कहा- “द्वीप पर इतना बड़ा जंगल है, तो इस जंगल में तो बहुत सारे जंगली जानवर भी होंगे और जानवर पानी पीने तो झील के किनारे अवश्य आते होंगे। ऐसे में उनके कदमो के निशान तो मिट्टी पर होने चाहिए थे।"

“ऐसा कैसे हो सकता है कैप्टन?" असलम ने भी सुयश कि हां में हां मिलाते हुए कहा।

“ऐसा एक ही शर्त में हो सकता है।" शैफाली ने अपना ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “जबकि इस झील के आसपास खतरा हो।"

खतरा शब्द सुनते ही सबकी निगाह अपने आसपास घूमने लगी। पर आसपास कुछ ना पाकर जेनिथ ने अपने जूते उधर झील के किनारे पर उतारे और अपनी जींस को तह कर थोड़ा ऊपर कर लीया। इसके बाद वह झील के पानी कि तरफ बढ़ गयी।

अब जेनिथ के पैर पंजो तक पानी के अंदर थे।

जेनिथ ने एक बार फ़िर से अपने आसपास नजर मारी और फ़िर पानी को अपनी अंजुली में भरकर धीरे-धीरे पीने लगी।

“पानी का स्वाद काफ़ी मीठा है।" जेनिथ ने सभी की ओर देखते हुए कहा- “आप लोग भी पी सकते हो।"

सभी लोग जो अभी तक झील से थोड़ा दूर खड़े थे, झील की तरफ आने लगे।

अभी जेनिथ ने बामुस्किल 2 अंजुली ही पानी पिया था, कि अचानक उसे झील के बीच से पानी में कुछ बुलबुले उठते दिखाई दिये। जेनिथ सहित सभी आश्चर्य से उन बुलबुलो को देखने लगे।

देखते ही देखते एक अजीब सा मगरमच्छ मानव झील से बाहर निकलने लगा। सभी हतप्रभ होकर उस विचित्र जीव को देखने लगे।

अचानक सुयश जोर से चीखा- “जेनिथ जल्दी झील से बाहर आओ।“

सुयश कि आवाज सुन जेनिथ जैसे सपनों से जागी हो, उसने तुरंत झील से बाहर निकलने कि कोशिश की।

परंतु तभी आश्चर्यजनक तरीके से झील का पानी बर्फ़ में बदल गया। इसी के साथ जेनिथ के पैर भी पंजो तक बर्फ़ में फंस गये।

“आह!" जेनिथ के मुंह से कराह निकल गयी- “मेरे पैर बर्फ़ में बुरी तरह से फंस गये है, कोई मेरी मदद करो?"

यह देख सुयश और तौफीक तेजी से जेनिथ की तरफ भागा ।

जेनिथ अपने पैर को बर्फ़ से निकालने कि भरसक कोशिश करने लगी, पर वह रत्ती भर भी कामयाब नहीं हो पाई।

तौफीक अपने हाथ में चाकू निकालकर बर्फ़ को काटने की कोशिश करने लगा। पर तौफीक जितनी बर्फ़ काटता उतनी ही बर्फ़ वापस उस स्थान पर जम जाती।

उधर वह मगरमच्छ-मानव अब पूरा का पूरा जमी हुई झील से बाहर निकल आया।

भारी-भरकम पूंछ वाला वह मगरमच्छ-मानव आश्चर्यजनक तरीके से अपने दो पैरों पर चल रहा था।

कद में 9 फुट ऊंचे उस मगरमच्छ मानव का वजन कम से कम 800 किलोग्राम तो जरूर रहा होगा।

इतना भयानक राक्षस देख वहां खड़े कई लोगो के मुंह से चीख निकल गयी।

मगरमच्छ मानव कि लाल-लाल आँखे अब जेनिथ की ओर थी।

उसके मुंह से गुर्राने जैसी अजीब सी आवाज निकल रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह मगरमच्छ मानव अपने शिकार को देखकर बहुत खुश हो गया हो।

धीरे-धीरे वह अब जेनिथ की तरफ बढ़ने लगा।

“कैपटेन, जल्दी जेनिथ को बर्फ़ से निकालो।" अल्बर्ट दूर से चिल्लाया- “वह मगरमच्छ मानव आप लोगो की ओर आ रहा है।"

तौफीक ने मगरमच्छ मानव पर एक नजर मारी और फ़िर तेजी से बर्फ़ तोड़ने की कोशिश करने लगा।

पर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बर्फ़ मायावी हो, क्यों की तौफीक के इतनी कोशिश करने के बाद भी वह बर्फ़ जरा सा भी कम नही हो रही थी।

सुयश भी अपने हाथ में पकड़ी लकड़ी का उपयोग कर बर्फ़ को खुरचने की असफल कोशिश कर रहा था।

जेनिथ कि निगाह कभी मगरमच्छ मानव पर तो कभी बेतहाशा बर्फ़ तोड़ने कि कोशिश करते तौफीक पर पड़ रही थी।

जेनिथ अभी भी भयभीत नही थी, पर तौफीक के कट चुके हाथो से रिसते खून को देख कर उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव थे।

उधर किनारे पर खड़े लोगो ने आसपास पड़े पत्थर और लकड़ियो को मगरमच्छ मानव पर मारना शुरु कर दीया।

वह लोग अपने मुंह से तेज आवाज़ें निकालकर व शोर मचाकर मगरमच्छ-मानव का ध्यान अपनी

ओर आकर्षित करने लगे। पर मगरमच्छ-मानव का ध्यान केवल और केवल जेनिथ पर था।

“तौफीक भागो यहां से।" जेनिथ ने पीड़ा भरे स्वर में तौफीक को वहां से जाने के लिये बोला- “मेरा बचना अब नामुमकिन है, पर तुम तो अपनी जान बचाओ। कैपटेन आप भी जाइए यहां से।"

मगरमच्छ मानव अब कुछ ही दूरी पर रह गया था।

तौफीक ने एक नजर जेनिथ को देखा पर कुछ बोला नही। वह पुनः बर्फ़ को तोड़ने कि कोशिश करने लगा।

उधर सुयश को जब जेनिथ को बचाने के लिए, कोई उपाय ना दिखा तो वह अपने हाथो में लकड़ी लेकर जेनिथ व मगरमच्छ मानव के बीच खड़ा हो गया। ऐसा लगा कि जैसे वह मगरमच्छ मानव से दो-दो हाथ

करना चाहता हो।

वैसे तो दोनो के शरीर के अनुपात के हिसाब से यह कोई मुकाबला नही था, पर वह इंसान ही क्या जो मुसीबतो से इतनी आसानी से हार मान ले।

मगरमच्छ मानव अब सुयश के काफ़ी पास आ गया था। सुयश ने अपना एक पैर पीछे कर बिल्कुल आक्रमण करने के अंदाज में अपनी पोज़िशन ले ली। अब वह पूरी तरह से उस जानवर से लड़ने के लिये तैयार था।

तभी अचानक शांत खड़ी शैफाली के शरीर में हरकत हुई और वह एक अंदाज से चलती हुई झील की ओर बढ़ी।

झील के किनारे पर पहुंचकर शैफाली रुक गयी। अब उसका चेहरा मगरमच्छ मानव की तरफ था।

मगरमच्छ मानव कि दूरी अब सुयश से केवल एक कदम ही बची थी।

मगरमच्छ-मानव ने एक तेज हुंकार भरी और अपना दाहिना हाथ सुयश को मारने के लिये हवा में उठा लिया।

सभी के दिल की धड़कन तेज हो गई। किसी भी पल कुछ भी हो सकता था।

तभी शैफाली के मुंह से एक तेज आवाज निकली- “जलोथाऽऽऽऽ"

मगरमच्छ मानव यह आवाज सुन शैफाली कि तरफ देखने लगा।

शैफाली को देख अचानक मगरमच्छ मानव के चेहरे पर भय के भाव नजर आने लगे।

शैफाली ने अब एक कदम मगरमच्छ मानव कि ओर बढ़ा दिया। मगरमच्छ मानव भय से एक कदम पीछे हो गया।

शैफाली के एक कदम और आगे बढ़ाते ही मगरमच्छ मानव एक कदम और पीछे हो गया।

शैफाली का आगे बढ़ना और मगरमच्छ मानव का पीछे जाना जारी रहा। थोड़ी देर में ही वह मगरमच्छ-मानव वापस उसी स्थान पर पानी में समा गया, जहां से वह निकला था।

किसी को कुछ समझ में तो नही आया पर मगरमच्छ मानव को वापस पानी में घुसता देख सबने राहत कि साँस ली।

सुयश वापस जेनिथ कि ओर पलटा। जेनिथ का पैर अभी भी बर्फ़ में फंसा हुआ था। अब सभी लोग जेनिथ के पास पहुंच गये।

ब्रेंनडन ने लाइटर जलाकर बर्फ़ को पिघलाने कि कोशिश की, पर बर्फ़ फिर भी ना पिघली।

“यह तो कोई मायावी बर्फ़ लग रही है, जो ना कट रही है और ना ही पिघल रही है।" अल्बर्ट ने बर्फ़ को देखते हुए कहा।

तभी शैफाली भी जेनिथ के पास आ गयी। शैफाली ने जेनिथ को कराहते देख उसके पैर को अपने हाथो से पकड़ लिया।

जेनिथ को शैफाली के हाथ काफ़ी गर्म से महसूस हुए।

बर्फ़ कि ठंडक ने जेनिथ के मस्तिष्क को भी स्थिर करना शुरु कर दिया था, पर शैफाली के गर्म हाथो से जेनिथ को बहुत ही बेहतर महसूस हुआ।

शैफाली के हाथो कि गरमी धीरे-धीरे बढ़ने लगी और इसी के साथ पिघलने लगी जेनिथ के पैर के आसपास कि बर्फ़ भी।

कुछ ही छण में जेनिथ के आसपास कि सारी बर्फ़ पिघल गयी और जेनिथ का पैर पानी से बाहर आ गया।

जेनिथ के पैर को बाहर आते देख तौफीक ने जेनिथ को गोद में उठाया और उस मनहुस झील से बाहर आ गया।

झील के किनारे पर कुछ दूरी पर एक बड़ा सा पत्थर मौजूद था, तौफीक ने जेनिथ को उस पत्थर पर बैठा दिया और उसके पैर के तलवो को अपनी हथेली से रगड़ने लगा।

इस समय जेनिथ की आँखो में तौफीक के लिए प्यार ही प्यार दिख रहा था।

एलेक्स झील के पास से जेनिथ के जूते उठा लाया था ।

“बाप रे! हम लोग इस द्वीप को जितना खतरनाक समझते थे, ये तो उससे भी कहि ज्यादा खतरनाक है।" असलम ने कहा।

“ऐसा लग रहा है, जैसे हम किसी पौराणिक दुनिया या फिर उस समयकाल में आ गये है, जब पृथ्वी पर मायावी संसार हुआ करता था।" क्रिस्टी ने कहा।

“पहले चमत्कारी पेड़ का मिलना और फिर इस ‘जलोथा’ का मिलना तो इसी तरफ इशारा करता है।" अल्बर्ट ने कहा।

“जलोथा से याद आया।" सुयश ने शैफाली कि ओर नजर डालते हुए कहा- “क्या तुमने यह शब्द भी अपने सपने में सुना था शैफाली?"

जारी रहेगा_________✍️
 
#60.

“नही .... मैंने यह शब्द सपने में नही सुना, मुझे स्वयं नही पता की यह शब्द उस समय मेरे दिमाग में कैसे आया। यह शब्द अचानक ही मेरे मुंह से निकले।" शैफाली ने अपनी बातों से सुयश का संशय दूर करते हुए कहा।

“कैपटेन हम लोगो को पता है कि शैफाली के अंदर कोई तो ऐसी शक्ति है जो समय-समय पर हमारी जान बचा रही है, पर इस ‘जलोथा’ शब्द को सुनकर वह मगरमच्छ मानव इतना भयभीत क्यों हो गया।" इस बार अल्बर्ट ने अपने विचार व्यक्त किये।

“शायद जलोथा किसी पौराणिक योद्धा का नाम हो, जिससे वह मगरमच्छ मानव डरता रहा हो और शैफाली के द्वारा वह शब्द पुकारे जाने पर, मगरमच्छ मानव को उसी योद्धा कि याद आ गयी हो।“ सुयश ने कहा- “प्रोफेसर, वैसे क्या आपने कभी भी ऐसे किसी जीव के बारे में पढ़ा या सुना है? जो इस तरह विशालकाय और विचित्र हो।"

“ऐसे जीव के बारे में वर्तमान में तो शायद किसी जीव विज्ञानी ने नहीं लिखा है।" अल्बर्ट ने सुयश को बताते हुए कहा- “पर हां कुछ पौराणिक कथाओ में ऐसे जीवो के बारे में जरूर लिखा है। ऐसे जीव आधा जानवर और आधा इंसान होते थे। उनमें कमाल की शक्तियां होती थी, पर इंसान के पास किताबो और कुछ गुफ़ाओ व खण्डहरों के भीति चित्रों के अलावा कोई सबूत नहीं है।"

“पर ये पौराणिक कथाओ का जीव यहां इस द्वीप पर कैसे आ गया?" जैक ने अल्बर्ट को देखते हुए कहा।

“तुम हरे कीडो के बारे में भूल रहे हो जैक।" कहते-कहते अल्बर्ट की आँखे गुस्से से लाल हो गई। शायद उन्हे मारिया की याद आ गयी थी- “हरे कीड़े भी पृथ्वी पर और कहीं नहीं पाये जाते। इन्ही सब कारनों से तो यह द्वीप रहस्यमयी बन गया है।"

“आप सही कह रहे है प्रोफेसर।" एलेक्स ने कहा- “ यह स्थान है ही रहस्यमयी ।"

“पर प्रोफेसर।"

जेनिथ बोल उठी-“वह पानी एकाएक बर्फ़ कैसे बन गयी? और वह भी ऐसी बर्फ़ जिसकी सतह पतली होने के बाद भी वह टूट नही रही थी।"

“हो सकता है उस मगरमच्छ मानव के पास पानी को बर्फ़ में बदल देने की शक्ति हो।" इस बार ड्रेजलर ने कहा।

“यह कैसे संभव है?" जॉनी ने डरते हुए कहा- “ऐसी कोई शक्ति नहीं होती।"

“हो सकता है।" अल्बर्ट ने जॉनी की बात का जवाब दिया “क्यों कि जिस प्रकार मकड़ी अपने शिकार को पकड़ने के पहले जाल बुनती है, जिससे की उसका शिकार भाग ना सके। ठीक उसी प्रकार से यह मगरमच्छ मानव भी अपने शिकार को बर्फ़ में फंसा कर मारता हो।"

क्यों कि अब सबके पास सवाल ख़तम हो गये थे, इसिलये सभी सुयश कि तरफ देखने लगे, पर अब किसी कि हिम्मत दोबारा झील में उतरकर अपनी बोतल भरने कि नहीं बची थी।

सुयश के एक इशारे पर सभी फ़िर से आगे बढ़ गये।

रहस्यमय बाज: (7 जनवरी 2002, सोमवार, 15:30, वॉशिंगटन डी.सी.,)

वेगा ने वीनस को पुस्तकालय से लौटते समय, उसकि बताई जगह पर बाज़ार में छोड़ दिया था।

वेगा ने अपनी कार अब अपने सोसाइटी के अंदर कर लिया। कार को पार्किंग में खड़ा करके, उसने उस किताब के पैकेट को हाथ में लिया और लिफ्ट की ओर बढ़ गया।

बेसमेंट में इस समय बिल्कुल सन्नाटा था। लिफ्ट का इंडीकेटर अब लिफ्ट को तीसरी मंजिल पर दिखा रहा था।

तभी वेगा को अपनी कार का सायरन बजता हुआ सुनाई दिया जो इस बात का संकेत था कि किसी ने वेगा कि कार के साथ कोई छेड़-छाड़ की है।

शांत वातावरण में सायरन की तेज आवाज एक अजीब सा खौफ पैदा कर रही थी। वेगा ने पलटकर अपनी कार को देखा, पर उसे कुछ नजर नहीं आया।

वेगा वापस अपनी कार की ओर चल दिया। कार के पास पहुंचने पर उसने देखा कि उसकी कार पर एक बड़ा सा बाज बैठा हुआ है।

“यह इतना बड़ा बाज यहां भूमिगत पार्किंग में कहां से आया?" वेगा मन ही मन बड़बड़ाया।

उसने बाज को भगाने के लिये आसपास कोई चीज देखनी शुरू कर दी, पर उसे आसपास ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया जिससे की वह उस बाज को भगा सके।

यह देख वेगा ने अपने हाथ में पकड़ी किताब को ही बाज की तरफ लहराया। उसका अनुमान था कि बाज इससे भाग जायेगा। पर ऐसा नहीं हुआ ।

बाज ने भागने की जगह अपने पंजो से उस किताब को जोर से पकड़ लिया। वेगा यह देख हैरान रह गया।

बाज अब भयानक तरीके से अपने पंख को फड़फड़ा कर वेगा को डराने कि कोशिश करने लगा। बाज अपनी पूरी ताकत लगाकर वेगा के हाथ से किताब छीनने कि कोशिश करने लगा, पर वेगा ने भी किताब को नहीं छोड़ा।

तभी लगातार बज रही कार की आवाज सुनकर, एक सुरक्षा रक्षक (security-guard) उधर आ गया।

इतने बड़े बाज को वेगा से लड़ते देख, गार्ड ने अपने हाथ में पकड़ा डंडा, पीछे से पूरी ताकत से बाज के सिर पर मार दिया। चुंकी बाज कि नजर वेगा की तरफ थी, इसिलए वह पीछे से आये इस खतरे को भांप नहीं पाया।

डंडे की चोट बहुत खतरनाक थी, बाज के हाथ से किताब निकलकर वेगा के हाथ में आ गयी और बाज उछलकर दूर जा गिरा।

एक पल को लगा कि वह बाज इतनी भयानक चोट से मर गया, मगर अगले ही पल वह उठकर, इस बार गार्ड कि ओर झपटा।

गार्ड पूरी तरह से सावधान था, उसने तेजी से झुककर अपने आप को बचाया, पर उसके हाथ में पकड़ा डंडा, जमीन पर गिर गया।

यह देख गार्ड ने इस बार पिस्तौलदान (holster) में लगे रिवाल्वर को निकालकर अपने हाथ में ले लिया।

उधर अपना शिकार हाथ ना आते देख, बाज फिर पलटा और कुछ दूर रुककर गार्ड को घूरने लगा। गार्ड ने भी रिवाल्वर बाज की ओर तान दी और बाज के अगले कार्रवाई का इंतजार करने लगा।

वेगा अवाक होकर इस पूरी घटना को देख रहा था। बाज ने इस बार तेजी से गार्ड की ओर उड़ान भरी।

घबराकर गार्ड ने गोली चला दी, पर उसी समय गोल-गोल घूमकर बाज उस गोली से बच गया और सीधा गार्ड के हाथ पर आक्रमण कर दिया।

गार्ड ने रिवाल्वर तो नहीं छोड़ी, पर दूसरे हाथ से उस बाज को अपने शरीर से दूर हटाने कि कोशिश करने लगा। बाज ने गार्ड के हाथ को लहुलुहान कर दिया।

यह देख वेगा ने अपने पास पड़े गार्ड के डंडे को उठाया और दबे पांव पहुंचकर पूरी ताकत से बेस बॉल कि तरह से डंडे को हवा में लहराया।

डंडा पूरी ताकत से बाज के सिर पर लगा। बाज लहराकर फिर से जमीन पर गिर गया।

इस बार गार्ड ने कोई गलती नहीं की, और उस बाज के शरीर में एक के बाद एक 3 गोली मार दी। बाज एक बार जोर से तड़पा और उसके प्राण पखेरू उड़ गये।

तब तक गोली चलने कि आवाज सुन कुछ और गार्ड भी उधर आ गये।

वेगा ने सारी बातें सिलसिलेवार तरीके से बाकी गार्ड को सुना दी। वह सभी गार्ड उस गार्ड को लेकर तुरंत अस्पताल कि ओर चले गये।

वेगा ने भी एक बार फिर से अपनी कार का लॉक चेक किया और बाज कि लाश पर एक नजर मारी।

फिर वह किताब ले लिफ्ट की ओर चल दिया।

वेगा के जाते ही बाज की लाश से धुंआ निकला और वह लाश हवा में ऐसे गायब हो गयी, जैसे वह वहां कभी थी ही नहीं।

उधर वेगा लिफ्ट से निकलकर अपने कमरे में पहुंच गया। चूंकी वेगा ने आज सुबह से कुछ नहीं खाया था, इसिलए उसने फ़्रिज खोलकर 2 चिकेन सैंडविच निकाले और उसे अवन में गर्म करने को रख 5 मिनट का टाईमर लगा दिया। फिर टेलीविज़न खोलकर, समाचार चैनल लगाकर, वह कपड़े बदलने लगा।

टेलीविज़न पर इस समय ब्रेकिंग न्यूज चल रहा था। वेगा ने यह देख टेलीविज़न का आवाज़ थोड़ा बढ़ा दिया।

“ब्रेकिंग न्यूज! 23 दिसंबर को न्यूयॉर्क बंदरगाह से होकर सिडनी जाने वाला पानी का जहाज ‘सुप्रीम’ अपने 2700 यात्रीयो और 500 क्रु-मेम्बर्स के साथ ‘बारामूडा त्रिकोण’ के रहस्यमय अंधे अँधेरो में खो गया।

यह खतरनाक त्रिकोण एक बार फिर इंसानो के लिए जानलेवा साबित हुआ है। क्या है ऐसा उस रहस्यमय त्रिकोण में जो लगातार मासूम इंसानो की जान ले रहा है। आइये आपको लेकर चलते हैं, भौतिक विज्ञान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भूगोलशाशास्त्री प्रोफेसर वाटसन के पास और इनसे जानने कि कोशिश करते है बारामूडा त्रिकोण के कुछ वैज्ञानिक तथ्य।"

तभी अवन ने सीटी बजाकर सैंडविच के गर्म होने की जानकारी दी। वेगा का ध्यान अवन की ओर गया, उसने टेलीविज़न को बंद कर दिया और कॉफ़ी मशीन से एक कॉफ़ी निकालकर, सैंडविच के साथ सोफे पर जाकर बैठ गया।

वेगा के दिमाग में सुप्रीम को लेकर बहुत से ख्याल आ रहे थे, तभी उसकी नजर सामने टेबल पर रखी किताब पर गयी।

अब वेगा सुप्रीम, बारामूडा त्रिकोण और अटलांटिस की कड़ियो को आपस में जोड़ने कि कोशिश करने लगा।

वेगा को सोचते-सोचते 15 मिनट से भी ज्यादा समय बीत गया। यहां तक कि कब उसकी कॉफ़ी और सैंडविच ख़तम हो गया, उसे पता भी ना चला। वह तो बस अपने ही ख्यालों में गुम था।

तभी फोन कि घंटी बजने से वेगा का ध्यान भंग हुआ। वेगा ने सोफे से उठकर पहले टिश्यु पेपर से अपना हाथ पोंछा और फ़िर आगे बढ़कर फोन के क्रेडल को उठा लिया।

“हैलो वेगा!" दूसरी तरफ से आने वाली आवाज वेगा के भाई ‘युगाका’ की थी।

“हैलो भैया, कैसे हो आप? आज बहुत दिन बाद फोन किया आपने?" वेगा ने खुश होते हुए पूछा।

“हां .... आज मुझे सुबह से ही तुम्हारी याद आ रही थी, तो मैंने सोचा कि तुम्हें फोन ही कर लूं।.... तुम ठीक तो हो ना?" युगाका की आवाज में चिंता के भाव दिख रहे थे।

“हां... हां... मैं बिलकुल ठीक हुं.... मुझे क्या होगा?" वेगा ने बेपरवाह आवाज में कहा और जानबूझकर बाज वाली घटना को युगाका को नहीं बताया।

“चलो बहुत अच्छी बात है, वैसे भी अब तुम्हारी पढ़ाई के केवल 2 साल और बचे हैं। क्या योजना बनाई है उसके आगे?" युगाका ने अपनापन दिखाते हुए कहा।

“कुछ खास नहीं भैया, जैसा आप लोग चाहेंगे, वैसा ही करुंगा। अगर आप कहेंगे तो अराका भी वापस आ जाऊंगा।" वेगा ने कहा।

“नहीं-नहीं ..... अराका वापस आने की जरुरत नहीं है, यहां बहुत खतरा है तुम्हारे लिए।

"और वैसे भी यहां अराका में रखा क्या है जंगलो के सिवा.... इसीलिए तो बाबा ने तुम्हें 8 साल की आयु में ही अमेरिका भिजवा दिया था.... अपनी पढ़ाई अच्छे से पूरी करो और वही कोई अच्छी सी नौकरी ढूंढ कर सेटल हो जाओ .... और हां पैसे की चिंता बिलकुल मत करना... आख़िर तुम अराका के युवराज हो।" युगाका ने छोटे भाई को प्यार जताते हुए कहा।

“अच्छा भाई... त्रिकाली दीदी कैसी है?" वेगा ने पूछा।

“वह भी बहुत अच्छी है... तुम्हें बहुत याद करती है ... मैं उससे बोल दंगा तुम्हारे बारे में....।" युगाका ने कहा।

“भाई एक बात पूछूं?" वेगा ने अचानक विषय परिवर्तन करते हुए कहा।

“पूछो!" युगाका भी वेगा को अचानक से सीरीयस होते देख सोच में पड़ गया।

“भाई क्या बाबा ने आज तक ‘एरकान’ भाषा में कोई किताब लिखी है क्या?" वेगा के शब्दों में

रहस्य ही रहस्य भरा दिख रहा था।

वेगा की बात सुनकर, कुछ देर तक युगाका कुछ नहीं बोला।

“किसने की तुमसे ये सब बातें?" युगाका ने सवाल के जवाब देने की जगह उल्टा वेगा से सवाल ही कर लिया- “तुम ठीक तो हो ना वेगा? कुछ ऐसा तो नहीं है जो तुम हमसे छिपाने की कोशिश कर रहे हो?"

“नहीं-नहीं भैया ... कुछ खास बात नहीं है, वो तो बस मैंने ऐसे ही पूछ लिया था।" वेगा ने फिर बातो को छुपाया- “अच्छा भैया, अभी एक कॉलेज के प्रोजेक्ट पर काम करना है इसिलए अभी फोन रखता हूँ।

बाय-बाय भैया।"

“बाय-बाय!" युगाका ने अनचाहे मन से वेगा को बाय किया। वेगा ने जल्दी से फोन को रख दिया।

वेगा की नजर एक बार फिर उस किताब की ओर गयी।

फिर वह होठो ही होठो में बुदबुदाया- “भैया मुझसे झूठ क्यों बोल रहे हैं? क्या ये सारी चीजे मुझसे छिपाना चाहते हैं?"

फिर वेगा ने अपने सिर को एक झटका दिया और अपने काम पर लग गया।

जारी रहेगा_________✍️
 
तो दोस्तों जिसके भी रिव्यू बाकी है, फटाफट पोस्ट कर दो ताकी आगे का अपडेट पोस्ट करूॅ।। :D
 
#61.

भविष्य के पत्थर:- 7 जनवरी 2002, सोमवार, 16:30, (अराका द्वीप, अटलांटिक महासागर)

“कैप्टेन।" अल्बर्ट ने कहा- “हम लोगो को झील वाली जगह से निकले लगभग 2 घंटे हो गये हैं। एक तो थकान भी लग रही है, दूसरा शाम भी होने वाली है, ऐसे में हमें किसी सुरक्षित जगह की भी तलाश करनी होगी, क्यों कि ये जंगल अगर दिन में इतना खतरनाक है, तो रात को तो इसमें रुकना और भी ज़्यादा मुस्किल हो जायेगा।"

“आप ठीक कह रहे हैं प्रोफेसर ।" सुयश को अल्बर्ट की बात बिल्कुल सही लगी- “अभी अंधेरा होने में 1 घंटे शेष हैं, इतने समय में ही हमें किसी सुरक्षित जगह को ढूंढना होगा।"

“क्या इस काम में ब्रूनो हमारी कोई मदद कर सकता है?" शैफाली ने कहा।

“यह किस प्रकार से हमारी मदद कर पायेगा?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा।

यह सुनकर शैफाली ब्रूनो के पास बैठ गयी.... उसने धीरे से ब्रूनो के सिर को सहलाया और उसके कान

के पास कुछ फुसफुसा कर कहा। उसके कहे शब्द किसी और को सुनाई नहीं दिए ।

शैफाली कि बात सुन ब्रूनो ने भोंककर शैफाली को अपनी भाषा में कुछ कहा और फिर सूंघते हुए एक दिशा में चल दिए ।

किसी को कुछ समझ तो नहीं आया पर इस रहस्मयी द्वीप में सबसे ज्यादा सभी को शैफाली पर ही भरोसा था। इसिलए बिना कोई सवाल किए सभी ब्रूनो के पीछे-पीछे चल पड़े।

आगे-आगे चलता हुआ ब्रूनो बीच-बीच में कुछ सूंघता और फिर अपना रास्ता बदल देता। ब्रूनो एक जगह पर पहुंचकर कुछ खुरचने लगा।

सभी ने जाकर जब उस स्थान को देखा तो वह आश्चर्य से भर उठे। उस जगह पर जमीन में एक अर्द्ध -चंद्राकार पत्थर लगा हुआ था।

यह पत्थर बिल्कुल किसी माइलस्टोन की तरह प्रतीत हो रहा था।

“कैप्टेन।" एलेक्स पत्थर पर नजर मारते हुए बोला- “ये तो बहुत अजीब से पत्थर हैं।"

अब सभी की नजरे पत्थर पर थी।

“यह तो माइलस्टोन की तरह से लग रहा है।" ब्रेंडन ने कहा।

अल्बर्ट अब बैठकर ध्यान से उस पत्थर को देखने लगा।

“अरे यहां आसपास बहुत से ऐसे पत्थर हैं।" क्रिस्टी ने चारो तरफ नजर दौड़ाते हुए कहा।

क्रिस्टी की आवाज सुनकर अब सभी लोग चारो तरफ देखने लगे।

वहां पर आसपास उसी प्रकार के लगभग 11 और पत्थर थे। पत्थरो पर कुछ रंग- बिरंगी आकृतियां बनी

थी और कुछ कूट भाषा में लिखा भी हुआ था। वह कूट भाषा इनमें से किसी को समझ में नहीं आयी।

“कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “यह सभी पत्थर एक बराबर साइज के है और इस पर कुछ लिखा हुआ भी है। इससे यह तो साफ हो गया कि इस द्वीप पर इंसान हैं क्यों कि ये काम कोई जानवर नहीं कर सकता।"

“आप सही कह रहे हो तौफीक।" सुयश ने तौफीक की बात का जवाब दिया- “और यह भी श्योर है कि जो इंसान इस द्वीप पर है, वह सभ्य भी है और समझदार भी है।"

अल्बर्ट अभी भी झुककर पत्थर को ध्यान से देख रहा था।

“कैप्टेन, सभी पत्थरो पर आकृतियां तो अलग-अलग है, पर इन सभी पत्थरो के बीच में बनी यह आग के गोले की आकृति सब में कॉमन है।" अल्बर्ट ने सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए कहा।

तभी शैफाली की आवाज ने एक बार फिर सबको आश्चर्य में डाल दिया-

“कैप्टेन अंकल, क्या इनमे से किसी पत्थर पर एक बिच्छू जैसी आकृति बनी हुई है ?"

शैफाली की आवाज सुन अब सभी उन पत्थर के निशानो को ध्यान से देखने लगे। कुछ ही देर में एलेक्स की आवाज सुनाई दी- “यहां है वो पत्थर, जिस पर बिच्छू जैसी आकृति बनी हुई है।"

तभी शैफाली की आवाज पुनः गूंजी- “एलेक्स भैया, क्या उस पर एक काला गोला और एक रोमन तलवार भी बनी है?"

“हाँ है!" अब एलेक्स की आवाज में विस्मय था।

“आप सब एक-एक पत्थर के पास खड़े हो जाइये। में कुछ और आकृतियां बताती हूँ ।"

शैफाली ने फिर कहा। शैफाली की आवाज सुन सभी लोग एक-एक पत्थर के पास खड़े हो गये। ऐसा लग रहा था जैसे शैफाली कोई क्लास-टीचर हो और बाकी सारे लोग उसके छात्र हो ।

“कैप्टेन अंकल, आपके पत्थर पर एक शेर जैसी आकृति होगी, उसके आसपास एक अंगूठी भी बनी होगी।" शैफाली ने सुयश से कहा।

सुयश अपने पत्थर को देखकर अवाक रह गया। उसके पत्थर पर वह सारी चीजे बनी थी, जो शैफाली बता रही थी।

“पर शैफाली।" सुयश ने आश्चर्य भरे स्वर में पूछा- “तुम्हे कैसे पता कि मैं किस पत्थर के पास खड़ा हूँ ।"

पर जैसे शैफाली ने सुयश की बात सुनी ही ना हो, वह अनवरत बोलती जा रही थी।

“अल्बर्ट अंकल आपके पत्थर पर एक मछली की आकृति बनी है, जिसके आसपास कुछ आग के चीन्ह भी दिख रहे होंगे आपको।"

“बिल्कुल सही!" अल्बर्ट ने कहा। धीरे-धीरे शैफाली ने सभी पत्थर के बारे में बिल्कुल सही-सही बता दिया।

सब कुछ बताने के बाद शैफाली अपनी जगह पर ऐसे खड़ी हो गयी जैसे किसी ने उसे स्टेचू बोल दिया हो।

“शैफाली-शैफाली!"

अल्बर्ट ने पास आकर शैफाली को पकड़कर झकझोरा- “क्या हुआ तुम्हें? ठीक तो हो ना?"

“हाँ ग्रैंड अंकल, में बिल्कुल ठीक हूँ।" शैफाली ने शांत स्वर में कहा- “मुझे कुछ नहीं हुआ।“

सभी पत्थरो के पास से हटकर शैफाली के पास आ गये। सुयश ने शैफाली को वही एक साफ स्थान देखकर बैठा दिया।

अब शैफाली सामान्य दिखने लगी थी, तभी ब्रूनो पास आकर शैफाली का हाथ चाटने लगा। अल्बर्ट प्यार से शैफाली के सिर पर हाथ फेरने लगा।

“ये क्या रहस्य है शैफाली?" क्रिस्टी ने शैफाली के पास बैठते हूए पूछा-

“तुम इन सब आकृतियों के बारे में कैसे जानती हो?"

“मैंने ये सभी आकृतियां अपने सपने में देखा था।" शैफाली ने मासूमियत से जवाब दिया।

“पर तुम्हे यह कैसे पता चला कि कौन किस जगह खड़ा है?" जैक ने संदेह भरी नज़रों से शैफाली को देखते हुए पूछा।

“मुझे नहीं पता कि कौन कहां खड़ा था?" शैफाली ने उलझे-उलझे स्वर में कहा- “पर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे दिमाग में ये सारी आकृतियां अपने आप बन रही है। मेरा मतलब

दिमाग में जिस भी व्यक्ति के बारे में बताने चलती, उसकी आकृति उस समय मेरे दिमाग में स्वयं आ जा रही थी।"

शैफाली ने जो कुछ भी कहा, वो वहां खड़े कई लोग को डराने के लिए काफी थी। जैक और जॉनी तो इतना डर गये कि वो अपने अगल-बगल देखने लगे।

यह सुन अल्बर्ट ने गहरी साँस लेते हुए कहा- “मुझे जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि इस द्वीप पर बहुत कुछ रहस्यमयी है। यह द्वीप हम लोग कि सोच से भी ज़्यादा खतरनाक है।“

“आप सही कह रहे है प्रोफेसर।" सुयश ने अल्बर्ट पर निगाह मारते हुए कहा- “मुझे भी एहसास हो रहा है कि इस द्वीप पर विज्ञान से अलग हटकर कुछ है, जो हम लोग कि समझ से बाहर है।"

तभी जेनिथ ने शैफाली से पूछा-

“तुम इन पत्थर या इनकी आकृति के बारे में कुछ और बता सकती हो शैफाली? या फ़िर इस द्वीप के बारे में ऐसा कुछ जो हम लोग नहीं जानते।"

“हाँ जेनिथ दीदी।" शैफाली ने अंदाजे से अपना चेहरा जेनिथ की ओर करते हुए कहा-

“पहली बात तो ये है कि ये पत्थर हमें हमारा भविष्य दिखा रहे है।"

“भविष्य!" सभी के मुंह से समवेत स्वर निकला।

“हाँ भविष्य।" शैफाली ने पुनः कहा- “आप लोग ने शायद गौर नहीं किया कि हम लोग भी 12 है और यह पत्थर भी 12 है।"

शैफाली के यह बोलते ही अब सभी का ध्यान फ़िर से पत्थरो की ओर गया।

उधर शैफाली का बोलना बदस्तूर जारी रहा- “यह पत्थर हमारे ही लिये यहां पर लगाए गये है। इन पर बनी आकृतियां भविष्य में हमें मार्ग दिखाएंगी।“

“मगर इन पत्थरो को देखकर तो यह लगता है कि यह सैकड़ों वर्ष से यहां पर लगे है।“अल्बर्ट ने पत्थरो की स्थिति को देखते हुए कहा।

“मुझे बहुत ज्यादा नहीं पता ग्रैंड अंकल।" शैफाली ने दिमाग पर जोर डालते हुए कहा-

“पर मुझे इतना जरूर लग रहा है कि हमारा जहाज स्वयं दुर्घटना ग्रसित नहीं हुआ। हमें जान-बूझकर यहां लाया गया है, बल्कि ये समझ लीजिये कि यहां आना हमारी नियती थी और ये भी हो सकता है कि ये पत्थर यहां हमारा सैकड़ों साल से इंतजार कर रहे है।"

शैफाली का हर शब्द सभी के दिमाग में विसफोट कर रहा था।

“अगर ये पत्थर हमारा भविष्य है तो क्या मेरे भविष्य में सांप है? क्यों कि मेरे पत्थर पर तो सांप बना है।" ड्रेजलर ने घबराकर कहा।

“हो भी सकता है?" शैफाली ने ड्रेजलर को जवाब दिया- “मुझे तो जो महसूस हो रहा है, मैंने आप लोगों को बता दिया।"

ड्रेजलर अभी शैफाली से बात कर ही रहा था कि अचानक एक पेड़ से सरसराहट की आवाज सुनाई दी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एनाकोंडा की तरह का एक विशालकाय अजगर पेड़ से ड्रेजलर के ऊपर कूद पड़ा।

अजगर ने बिना समय दिए ड्रेजलर को अपनी कुण्डली में जकड़ लिया। इतना विशालकाय अजगर देखकर सभी के मुंह से चीख निकल गयी।

“बाप रे ! इतना बड़ा अजगर....ये तो एनाकोंडा का भी बाप लग रहा है।" जैक का मुंह दहशत के कारण सफेद हो गया।

ड्रेजलर के मुंह से लगातार चीखे निकल रही थी। किसी कि समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे ड्रेजलर को बचाया जाए?

“बचाओ कैप्टन !" ड्रेजलर पूरी ताकत लगाकर चीखा।

अल्बर्ट ने शैफाली को तुरंत अपनी तरफ खींच लिया सारे लोग ड्रेजलर से थोड़ा दूर हट गये।

तभी तौफीक ने असलम से फ्लेयर-गन मांगी। असलम ने जल्दी से अपने काले बैग से गन निकालकर, उसमें सिग्नल-फ्लेयर फ़िट कर, तौफीक के हाथ में पकड़ा दी।

फ्लेयर गन अब तौफीक के हाथ में थी। तौफीक ने अजगर के सिर पर निशाना साधा।

“ठीसऽऽऽ“की आवाज करता सिग्नल-फ्लेयर अजगर के मुंह की ओर झपटा।

पर जैसे ही वह फ्लेयर अजगर के मुंह के पास पहुंचा, अचानक से अजगर का सर अपनी जगह से हिला और फ्लेयर उसके बगल से होता हुआ, जमीन पर गिर गया।

अजगर को फ्लेयर की गरमी का एहसास होते ही, उसने एक नजर पहले फ्लेयर पर मारी और फ़िर तौफीक की ओर घूम कर उसे घूरने लगा। अब वह थोड़ा गुस्से में भी दिखने लगा।

तभी तौफीक ने असलम से एक और फ्लेयर मांग कर उसे गन में लोड कर लिया। तौफीक ने दोबारा निशाना साधा और फ़िर से फायर कर दिया।

इस बार निशाना बिल्कुल सटीक था। फ्लेयर सीधा अजगर के मुंह पर जाकर लगा।

अजगर के चेहरे पर आग लग गयी। अब उसने अपनी कुण्डली और कस ली।

‘कट्-कट्’ की आवाज के साथ ड्रेजलर की हड्डियाँ टूटने लगी।

अजगर अब अपना चेहरा इधर-उधर पटकने लगा। अजगर ने गुस्से की वजह से अपना पूरा शरीर अब बहुत ज़्यादा कड़ा कर लिया।

ड्रेजलर का सिर अब हवा में झूलने लगा।

जारी रहेगा_________✍️
 
#62.

“हिस्स...हिस्स...!" अजगर अब बहुत तेज फुंफकारने लगा।

“कैप्टन।" अल्बर्ट ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “ड्रेजलर अब मर चुका है। हमें तुरंत यहां से चलना चाहिए क्यों की यह अजगर अब अपने साथियों को पुकार रहा है। कुछ ही देर में यहां पर और अजगर भी आ जाएंगे। तब हमारा बचना भी मुश्किल हो जायेगा।"

सुयश ने अल्बर्ट की बात सुनी जरूर, पर वह अब भी वही खड़ा रहा।

“चलिए कैप्टन।" इस बार ब्रैंडन ने कहा- “प्रोफेसर सही कह रहे है और वैसे भी ड्रेजलर अब मर चुका है।"

सुयश ने एक गहरी साँस भरकर आखरी बार ड्रेजलर को देखा और फ़िर बाकी सबको लेकर वहां से निकल गया। उसके कानो में अब भी ड्रेजलर की चीख सुनाई दे रही थी।

चैपटर-3 अराका द्वीप का वर्णन

अराका द्वीप-अटलांटिस की सभ्यता का अंतिम साक्ष्य, जिसकी रचना स्वयं पोसाइडन ने अपने हाथों से की थी। जिसके ‘पोसाइडन पर्वत’ के अंदर ‘क्लिटो’ कहीं कैद है।

अराका द्वीप-जिस पर शलाका ने सामरा और सीनोर वासियो को लाकर बसा दिया।

अराका द्वीप- एक ऐसा क्रत्रिम द्वीप जो पानी पर भी तैर सकता है।

अनेकानेक विचित्रताओ से भरा यह द्वीप ही बारामूडा त्रिकोण के रहस्यो का स्त्रोत है।

तो फिर आइये मित्रों, इससे पहले की यह कहानी और आगे बढ़े, थोड़ा सा हम इस द्वीप की भोगोलिक स्थिति के बारे में जान लेते है, इससे आपको कहानी का सार समझने में सरलता होगी।

अराका द्वीप त्रिभुज कि आकृति वाला एक क्रत्रिम द्वीप है जिसकी तीनो भुजाएं 20 किलोमीटर लंबी है। यह द्वीप 200 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है।

अराका द्वीप के पिछले हिस्से के बीचोबीच के क्षेत्र में देवता पोसाइडन की एक बैठी हुई आकृति के समान एक विशालकाय पर्वत है जिसे ‘पोसाइडन पर्वत’ के नाम से जाना जाता है।

इस पर्वत के सामने की तरफ एक अर्ध चंद्राकर आकृति में, 6 किलोमीटर की त्रिज्या में, एक काफ़ी गहरी और 10 मीटर चौड़ी, पानी की नहर है, जिसे ‘जलकवच’ कहा जाता है।

पोसाइडन पर्वत के अंदर इस ब्रह्माण्ड का सबसे बड़ा तिलिस्म मौजूद है, जिसे तिलिस्मा कहते है, जिसका द्वार इस पर्वत पर ही कहीं मौजूद है।

इस तिलिस्मा के बांई तरफ के 36 किलोमीटर क्षेत्रफल का हिस्सा ‘सामरा राज्य’ और दांई तरफ 36 किलोमीटर क्षेत्रफल का हिस्सा ‘सीनोर राज्य’ कहलाता है।

सामरा और सीनोर राज्य को चारो ओर से एक अदृश्य दीवार दीवार ने घेर रखा है। इस अदृश्य दीवार को केवल सामरा या सीनोर वासी ही पार कर सकते है। अर्थात ना तो कोई बाहरी इंसान इन दोनो राज्य में प्रवेश कर सकता है और ना ही बाहर से उसे अंदर की दुनिया दिखाई देगी।

अराका द्वीप की यह व्यवस्था दोनो राज्यो की सुरक्षा का एक भाग है।

अराका द्वीप के बाकी हिस्से को ‘मायावन’ के नाम से जाना जाता है। इस ‘मायावन’ में पेड़-पौधे, जीव- जंतू, पहाड़, रेजिस्थान, दलदल, बर्फ़, झील, झरना, मैदान, ज्वालामुखी व अन्य बहुत सी रहस्यमयी चीजे है, जो खतरों के रूप में चारो तरफ फैली हैं ।

इससे ज़्यादा पहले से कुछ भी कहना कहानी को खराब करना होगा। तो आइये दोस्तो शुरु करते हैं आगे की कहानी ...................।"

सामरा राज्य : (7 जनवरी 2002, सोमवार, 17:00, सामरा राज्य, अराका)

युगाका वेगा से बात करने के बाद से ही उलझन में था।

“वेगा को बाबा की किताब के बारे में किसने बताया? क्या वेगा को अराका द्वीप के बारे में सबकुछ पता चल गया? कहीं ऐसा तो नहीं की वेगा हमसे कुछ छिपा रहा है? फ़िर ...फ़िर तो वह खतरे में भी हो सकता है। लगता है बाबा से सब कुछ बताना ही पड़ेगा।“

युगाका मन ही मन बुदबुदा रहा था- “पर बाबा ने तो कुछ दिन तक मिलने से मना किया था..... क्या करूं?...क्या करूं?.... नहीं-नहीं, मुझे कुछ भी करके बाबा से मिलना ही होगा।"

यह सोच युगाका अपने बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया और शयनकक्ष से बाहर निकल गया अब वह अपने महल के गिलयारे में था। रास्ते में खड़े सैनिको ने युगाका को देख अपना सिर झुका लिया।

चलता हुआ युगाका अब सामरा महल के प्रांगण में आ गया। विशालकाय ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ सामरा महल बिल्कुल अभेद्य दिख रहा था।

चारो तरफ ऊंची-ऊंची, कद-काठी वाले सैनिक सजगता से पहरा दे रहे थे। महल के मुख्य द्वार पर लकड़ी का एक विशालकाय द्वार लगा था।

युगाका धीरे-धीरे चलता हुआ, उस द्वार तक पहुंचा और धीरे से द्वार को अपने दाहिने हाथ से स्पर्श किया। जाने क्या खास बात थी युगाका के स्पर्श में कि द्वार स्वतः ही जमीन के अंदर समा गया। कुछ ही देर में द्वार अपने स्थान से गायब हो गया।

युगाका के महल से बाहर निकलते ही द्वार जमीन से निकलकर वापस अपनी जगह पर खड़ा हो गया।

द्वार के बाहर एक विशालकाय चबूतरा बना था, जिस पर 20 सीढ़ियाँ बनी थी।

युगाका सीढ़ियाँ उतरकर किनारे पर आ गया। जहां पर ये सीढ़ियाँ ख़तम हो रही थी, वहां से महल के बाहर की ओर लगभग 200 मीटर आगे तक गहरा पानी भरा था, जो देखने में एक छोटी झील के जैसा नजर आ रहा था।

झील में बहुत सी लकड़ी की बनी, हंस की शकल वाली छोटी-छोटी नाव घूम रही थी, जिस पर कोई भी इंसान दिखाई नही दे रहा था।

युगाका ने जैसे ही अपना कदम अंतिम सीढ़ी पर रखा, एक नाव स्वतः ही युगाका के समीप आ गयी।

युगाका उस नाव में सवार हो गया। युगाका के बैठते ही नाव दूसरे किनारे की ओर चल दी। झील के पानी के अंदर मछलियों की तरह के कुछ विशालकाय जीव तैर रहे थे। वह सभी जीव महल की सुरक्षा के लिये थे।

किनारे पर पहुंचकर युगाका नाव से उतर गया। युगाका के उतरते ही नाव वापस झील की तरफ चली गयी।

युगाका ने कुछ देर इधर-उधर देखा और फ़िर एक तेज सीटी की आवाज अपने मुंह से निकाली।

तभी एक लकड़ी से बनी अजीब सी कार की तरह का कोई वाहन युगाका के सामने आ गया।

लकड़ी की उस कार के चारो पहियों पर रबर जैसा कोई द्रव्य चिपकाया गया था, मानो उसे टायर का शेप दिया गया हो। कार के अंदर काफ़ी मुलायमदार सीट लगी हुई थी।

पूरी कार खूबसूरत फूलों से सजी थी। कुल मिलाकर वह लकड़ी की कार किसी खूबसूरत पुराने रथ के जैसी लग रही थी।

युगाका उस कार का गेट खोलकर उसमें बैठ गया। कार के अंदर न तो कोई स्टीयरिंग व्हील था और न ही किसी तरह का मैकेनिज्म उसमें दिखाई दे रहा था।

“बाबा के पास जाना है।" युगाका ने कहा।

युगाका के बोलते ही कार चल पड़ी। वह कैसे चल रही थी? उसे कौन ड्राइव कर रहा था? कुछ समझ में नही आ रहा था?

कलाट का महल वहां से 3 किलोमीटर दूर था। युगाका आराम से आँख बंद करके लकड़ी कि कार में लेट गया।

कार बड़े ही विचित्र तरीके से चलती जा रही थी। जंगल में ना तो कोई सड़क थी और ना ही आरामदायक रास्ता, पर कार में बैठे युगाका को बिल्कुल भी झटके महसूस नही हो रहे थे।

कार की रफ़्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा से कम नही थी क्यों की बामुश्किल 5 मिनट में ही कार ने युगाका को कलाट महल पहुंचा दिया।

युगाका ने एक नजर कलाट महल पर मारी और कार से उतरकर नीचे आ गया। युगाका के उतरते ही कार वहां से चली गयी।

कलाट महल बहुत ही भव्य था। महल के बीचोबीच सोने की अनोखी डिजाइन में एक बड़ा सा गोल गुम्बद बना था। महल की छत हरे रंग के शीशे से बनी थी, जिसके पार कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था।

महल के प्रांगण में लाल रंग के खूबसूरत फूल की क्यारियां लगी थी और बीच में संगमरमर के पत्थरो से

बने चबूतरे पर एक शानदार हरा पेड़ लगा था

मुख्य द्वार के दोनो तरफ सीढ़ीयां बनी थी। युगाका बांये तरफ की सीढ़ीयां चढ़कर मुख्य द्वार तक पहुंच गया।

मुख्य द्वार किसी धातु का बना था। मुख्य द्वार के बगल एक छोटी सी मशीन लगी थी, जिस पर युगाका ने अपना हाथ स्कैन कर दिया।

युगाका के हाथ को स्कैन करते ही, मुख्य द्वार खुल गया। युगाका ने एक नजर अंदर की ओर डाली और फ़िर अंदर प्रवेश कर गया।

सबसे पहले एक बहुत बड़ा सा शानदार कमरा था, जो कि पूरा सफेद पत्थर से बना था। दीवारों पर भी शानदार सोने की कारीगरी थी।

तभी युगाका के सामने के द्वार से एक 4 फुट का छोटा पेड़ चलता हुआ अंदर आया।

युगाका के सामने पहुंच वह पेड़ धीरे से युगाका के सम्मान में झुका और फ़िर पलटकर अंदर के द्वार की ओर चल दिया। युगाका उस पेड़ के पीछे-पीछे अंदर की ओर चल दिया।

महल में एक भी इंसान नजर नहीं आ रहा था, मगर रास्ते में अलग-अलग प्रकार के अनेक पेड़ कुछ ना कुछ काम करते हुए नजर आ रहे थे।

चलते-चलते वह पेड़ एक बड़े से द्वार के पास रुक गया और युगाका को अंदर की ओर जाने का इशारा किया। युगाका उस द्वार से अंदर की ओर प्रवेश कर गया।

वह एक बहुत बड़ी सी प्रयोगशाला थी, जिसमें बहुत से पेड़ काम कर रहे थे। हर तरफ काँच के बीकर और फ्लास्क में अनेक रंग के रसायन भरे थे।

एक छोटी मगर गोल टेबल के चारो ओर 3 बौने बैठकर कुछ प्रयोग कर रहे थे। तीनो बौनो की ऊंचाई लगभग 3 फुट के आसपास थी। वह तीनो देखने में एक जैसे ही लग रहे थे, बस उनकी दाढ़ी के रंग अलग-अलग थे।

सफेद दाढ़ी वाले का नाम ‘किरीट’, भूरी दाढ़ी वाले का नाम ‘रिंजो’ और काली दाढ़ी वाले का नाम ‘शिंजो’ था।

यह तीनो बौने आपस में भाई थे, जिनमें किरीट सबसे बड़ा था, जबकि रिंजो और शिंजो जुड़वा थे।

यह तीनो बौने कलाट के वैज्ञानिक थे। एक तरह से ये तीनो सामरा राज्य के रीढ़ की हड्डी थे। कलाट इन तीनो को ‘शैतान तिकड़ी’ के नाम से पुकारता था।

युगाका को देख वह तीनो आदर से खड़े हो गये। युगाका ने उन्हे बैठने का इशारा किया। इशारा देख तीनो बैठ गये और फ़िर से काम करने लगे।

तभी युगाका की नजर सामने लगी ऊंची-ऊंची मशीनों की ओर गयी।

उन मशीनों के आगे एक 6 फुट ऊंचा बूढ़ा इंसान खड़ा था। जिसने पुराने जमाने के जादूगर के समान पोशाक पहन रखी थी। उसके सिर के और दाढ़ी के बाल बिल्कुल सफेद थे।

वह कलाट था, सामरा का महान जादूगर वैज्ञानिक, जिसे युगाका और वेगा ‘बाबा’ कह कर संबोधित करते थे।

युगाका कलाट के पास पहुंच गया। युगाका ने अपने दाहिने हाथ से मुट्ठी बंद कर अपने सीने से लगाया और झुककर कलाट को अभीवादन किया।

कलाट ने धीरे से सिर हिलाया और फ़िर से अपने काम में लग गया।

युगाका चुपचाप वहां खड़ा कलाट को मशीनो पर काम करते देखता रहा। बीच-बीच में युगाका को तीनो बौनो की बहस भरी आवाज भी सुनाई दे रही थी, शायद वह किसी प्रयोग के बारे में बात कर रहे थे।

20 मिनट तक अनवरत काम करने के पश्चयात कलाट ने अपना कार्य बंद कर दिया और युगाका को अपने पीछे आने का इशारा किया। युगाका कलाट के पीछे-पीछे चल दिया।

जारी रहेगा_________✍️
 
#63.

एक-एक कर तीन कमरो को पार कर कलाट एक ऐसे कमरे में पहुंचा जो कि शायद कलाट का शयनकक्ष था।

कमरे के एक किनारे कुछ बैठने वाली आरामदायक कुर्सियां रक्खी थी।

कलाट के इशारे से 2 कुर्सियां अपने आप चलती हुई आई और युगाका के पास आकर रुक गयी। युगाका और कलाट दोनो कुर्सियों पर बैठ गये।

कलाट ने एक गहरी साँस भरी और युगाका से पूछा-

"हाँ, अब बताओ युगाका...मेरे पास आने का क्या कारण है?"

“बाबा आपके पास आने का कारण वेगा है।"

युगाका तो जैसे इंतजार ही कर रहा था, वह कलाट की ओर देखते हुये बोला- “पता नहीं किसने उसे आपकी किताब की जानकारी दे दी है। वह आपकी किताब के बारे में पूछ रहा था।"

“मेरी किताब तो उसके हाथ नहीं लगेगी क्यों कि उसकी सभी प्रतिलिपियां आज से 500 वर्ष पहले ही नष्ट की जा चुकी है।" कलाट ने गंभीर भाव से कहा- “अब रही बात वेगा की...तो हो सकता है कि उसके मन में कुछ उत्सुकता हो, अराका के बारे में जानने की, इसीलिये वह तुमसे कुछ पूछना चाह रहा हो।"

“हो सकता है बाबा ... पर पता नहीं क्यों आज मुझे वेगा की बातों में रहस्य भरा दिख रहा था? कुछ तो ऐसा था जिसे वह छिपाने की चेष्टा कर रहा था।" युगाका के शब्दो में आत्मीयता भरी थी।

कलाट युगाका की बात सुन सोच में पड़ गया। कुछ देर तक सोचने के बाद कलाट ने एक गहरी साँस भरी और युगाका से बोल उठा-

“मैं जानता हूं कि वेगा को सीनोर जाति के लोगों से खतरा है, इसीलिए तुमने वेगा को कभी अराका के किसी रहस्य के बारे में नहीं बताया और 8 साल कि आयु में ही उसे अमेरिका पढ़ने के लिए भेज दिया। पिछले 14 साल से वेगा तुम्हारे सिवा किसी अराकावासी से मिला तक नहीं है।

फोन पर भी उसने केवल तुमसे, मुझसे और त्रिकाली से ही बात की है। इसिलए तुम्हें उसकी सुरक्षा के लिए इतना चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह अमेरिका में एकदम सुरक्षित है। लेकिन अगर फिर भी तुम्हें कोई परेशानी महसूस हो रही हो तो ‘शैतान तिकड़ी’ से मिल लो। शायद उनके पास तुम्हारी चिंता का कोई उपाय हो।"

युगाका समझ गया कि अवश्य ही उन बौनो के पास ऐसा कुछ है जो उसकी समस्या का निवारण है, अतः उसने कलाट की ओर देख धीरे से अपना सिर हिला दिया।

युगाका को सिर हिलाते देख कलाट ने वहां टेबल पर रखे एक घंटे की ओर घूर कर देखा।

कलाट के घूरते ही घंटा अपने आप हवा में उठकर बजने लगा। शायद यह बौनो को वहां बुलाने का कोई संकेत था।

घंटे की आवाज शांत वातावरण में बहुत तेज गूंजी। कुछ ही देर में तीनो बौने कलाट के सामने खड़े थे।

“किरीट।" कलाट ने सफेद दाढ़ी वाले बौने को संबोधित करते हुए कहा- “युगाका को वेगा की सुरक्षा की चिंता है, अगर तुम्हारे पास वेगा की सुरक्षा के लिये कोई इलेक्ट्रॉनिक यंत्र हो तो तुम उसे युगाका को दे सकते हो?"

कलाट की बात सुन किरीट कुछ देर तक सोचता रहा और फ़िर बोल उठा- “जोडियाक वॉच! हां केवल वही वेगा की छिपकर मदद कर सकती है।"

“ये ‘जोडियाक वॉच’ क्या है?" युगाका ने प्रश्न भरी निगाह से किरीट को देखते हुए पूछा।

“रुकिये, पहले दिखाता हूँ फ़िर बताता हूँ।" इतना कहकर किरीट ने रिंजो की ओर देखा।

रिंजो किरीट का इशारा समझ जोडियाक वॉच लेने चला गया। कुछ ही देर में जोडियाक वॉच युगाका के हाथो में थी।

“जोडियाक वॉच हाथ में पहनने वाली स्मार्ट वॉच है, जिस पर वेगा समय भी देख सकता है और उसका वॉलपेपर भी चेन्ज कर सकता है।" किरीट ने युगाका की ओर देखते हुए कहा।

“ये तो एक सामान्य स्मार्ट वॉच लग रही है। इससे वेगा की सुरक्षा किस प्रकार होगी?" युगाका अभी भी समझ नहीं पा रहा था।

“वेगा के लिए यह केवल एक स्मार्ट वॉच होगी, मगर इसकी मदद से आप कभी भी वेगा की लोकेशन का पता लगा सकते हो।" किरीट ने कहा- “अब मैं आता हूँ इसकी सबसे बड़ी खासीयत की तरफ। इस स्मार्ट वॉच में 12 अलग-अलग प्रकार के वॉलपेपर है, जो 12 अलग-अलग राशियों का प्रतिनिधित्व भी करते है। वेगा को खतरे में देख यह वॉच स्मार्ट तरीके से स्वयं सक्रिय हो जायेगी और इसमें उपस्थित 12

राशियां चुपचाप घड़ी से निकलकर वेगा की मदद करेंगी। पर यह बात वेगा जान नहीं पायेगा।" किरीट ने आखरी बात मुस्कुराते हुए कही।

“पर यह किस प्रकार संभव है?" युगाका ने जोडियाक वॉच को उलट-पलट कर देखते हुए कहा- “राशियां, इस प्रकार रूप कैसे धारण कर सकती है?"

“हमने इस वॉच में ‘धरा तत्व’ के एक कण का इस्तेमाल किया है, जो कि इस वॉच के केन्द्र में लगा है। इस कण में स्वयं का एक दिमाग है जो कि किसी भी मुसीबत के समय इस स्मार्ट वॉच से बाहर आ जायेगा और जमीन में मौजूद सूक्ष्म कण से मिलकर, इन 12 राशियों का रूप धारण कर लेगा।

मुसीबत से लड़ने के बाद यह कण वापस इस जोडियाक वॉच में समा जायेगा। यह कण इतना सूक्ष्म है कि यह किसी को भी दिखाई नहीं देगा, जिसकी वजह से वेगा कभी जान नहीं पायेगा कि उसकी मदद किसने की?"

“यह धरा शक्ति आपको कहां से मिली, ये तो देवी शलाका के एक भाई ‘कैलिक्स’ के पास थी।" युगाका की आँखो में आश्चर्य दिखा।

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“यह पूर्ण ‘धरा शक्ति’ नहीं है, ये केवल उसका एक अंश मात्र है। इसका आविष्कार रिंजो व शिंजो ने किया है। तभी यह केवल 12 रूप ही धारण कर सकती है। पूर्ण ‘धरा शक्ति’ अभी भी ‘देवता कैलिक्स’ के पास ही है।" किरीट ने कहा।

रिंजो व शिंजो अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गये।

“वाह! अदभुद....।" युगाका जोडियाक वॉच की खासीयत देख कर खुश हो गया और घुटनो के बल बैठकर किरीट को गले से लगा लिया- “क्या शानदार आविष्कार है!"

युगाका का किरीट को गले लगाते देख रिंजो-शिंजो भी मचलने लगे-

“मुझे भी गले लगना है .... मुझे भी गले लगना है।"

युगाका ने मुस्कुराकर रिंजो-शिंजो को देखा और उन्हें भी पास आने का इशारा किया।

दोनों यह देखकर दौड़ कर युगाका के गले लग गये। यह देख कलाट के चेहरे पर मुस्कान उभर आयी।

इनको यहां छोड़ कर चलो देखते हैं कि सुयश एंड पार्टी क्या कर रहे हैं?

बैंक डकैती का रहस्य (7 जनवरी 2002, सोमवार, 17:30, मायावन, अराका)

धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए पूरा दिन बीत चुका था। अब शाम का धुंधलका चारो ओर फैलने लगा था।

सुयश सहित सभी के चेहरे पर थकान साफ नजर आ रही थी। दिन भर सभी ने सूखे मेवे बिल्कुल यूज नहीं किये थे। रास्ते में उन्हे जो कुछ मिला था, सभी ने वह खाकर अपना गुजारा किया था।

“कैप्टन!" ब्रेंडन बोल उठा- “शाम हो चुकी है। कुछ देर के बाद रात का अंधेरा चारो ओर फैल जायेगा। ऐसे में हमें रात काटने के लिए कोई सुरक्षित जगह ढूंढनी होगी।"

“सही कह रहे हो ब्रेंडन।" सुयश ने सभी के थके चेहरों पर निगाह मारते हुए कहा- “पर चारो तरफ पेड़ ही पेड़ हैं, इनके नीचे रात बिताना खतरे से खाली नहीं होगा। हमें कहीं खुला आसमान चाहिए होगा।"

“बात तो आप ठीक कह रहे हैं कैप्टन।" जेनिथ ने सुयश को देखते हुए कहा- “खुले आसमान के अलावा हमें पानी भी चाहिए होगा। क्यों की सुबह उठ कर सभी को फ्रेश भी तो होना होगा।"

तभी शैफाली ने हवा में कुछ सूंघते हुए कहा- “कैप्टन अंकल, मुझे हवा में नमी का अहसास हो रहा है। यकिनन हमारे बांयी तरफ कहीं पानी का तालाब है।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने सभी को उधर चलने का इशारा किया। बामुश्किल 100 कदम आगे चलते ही पानी का एक छोटा तालाब दिख गया।

तालाब का पानी साफ दिख रहा था। उसके आस-पास जमीन पर कुछ छोटे जानवर के पैर के निशान भी बने थे, जो इस बात का घोतक थे कि वह तालाब पूरी तरह से सुरक्षित है।

फिर भी सुयश ने सावधानी बरतते हुए तालाब का पानी एक बार ब्रूनो को पिलाकर देखा। ब्रूनो को किसी भी प्रकार की कोई समास्या नहीं दिखी। अब सभी ने वही रुकने का प्लान कर लिया।

तालाब से कुछ दूरी पर एक बड़ी सी जगह देख सभी ने वहां सोने का प्लान किया।

ब्रेंडन ने असलम, तौफीक और एलेक्स की मदद से कुछ झाड़ियां और कुछ पेड़ की जड़ों तोड़कर उनसे झाड़ू बना लिये। उस झाड़ू की मदद से जैक और जॉनी ने उस जगह की जमीन को साफ कर लिया।

“हमें आग जलाने की व्यवस्थथा भी करनी पड़ेगी।" अल्बर्ट ने सभी की तरफ देखते हुए कहा- “नहीं तो रात में जंगली जानवर भी यहां आ सकते है।"

“असलम तुम ब्रेंडन के साथ कुछ सूखी पत्तियां और लकिड़यां ले आओ। तब तक मैं पानी की व्यवस्था करता हूँ।" इतना कहकर सुयश खाली बोतलों को इकट्ठा करने लगा।

थोड़ी देर के बाद सभी ने आग को जलाकर वह स्थान इतना साफ-सुथरा कर लिया था कि अब वहां सोया जा सकता था।

आज चाँदनी रात होने की वजह से चारो ओर चाँद की रोशनी फैली हुई थी।

सभी आग के चारो ओर एक गोले की शक्ल में बैठ गये। सभी ने दिन भर के बटोरे कुछ फल खाकर पानी पी लिया। पेट भरने के बाद अब सभी को थोड़ा रिलेक्स महसूस हो रहा था।

“ग्रैंड अंकल!" शैफाली ने अल्बर्ट के हाथ को छूते हुए कहा- “कुछ बोरिंग -बोरिंग सा नहीं लग रहा आपको?"

शैफाली के शब्दो को सुनकर सभी का ध्यान शैफाली की तरफ हो गया।

किसी को ना बोलते देख शैफाली फ़िर से बोल उठी- “माना कि हम सब इस समय खतरों के बीच है, पर हमारे मुंह लटका कर बैठने से खतरे तो नहीं कम हो जाएंगे। तो कम से कम अपनी बातों ही सबसे शेयर करते है, कुछ तो मूड ठीक होगा उससे।"

“शैफाली सही कह रही है।" जेनिथ ने शैफाली की हां में हां मिलाते हुए कहा- “चलो कोई गेम खेलते है।" इतना कहकर जेनिथ ने पास पड़ी एक लकड़ी से जमीन पर एक गोला बनाया और उस गोले के बाहर 11 लकीरे खींच दी। सभी ध्यान से जेनिथ को देख रहे थे।

फ़िर जेनिथ ने उन 11 लाइनों पर 11 तक नंबर डाल दिये और अपने हाथ में पकड़ी उस पानी को बोतल को बीच में रख दिया।

“मेरा नंबर 1 है और फ़िर मेरे बांये बैठे तौफीक का नंबर 2 है, इसी तरह ‘क्लॉक वाइज’ सबके नंबर लिखे है। अब में बॉटल घुमाने जा रही हुं, बॉटल जिसके नंबर पर रुकेगी। उसे 1 मिनट तक अपने बारे में कुछ ना कुछ बोलना पड़ेगा। क्या सब तैयार है?" जेनिथ ने बारी सबको देखते हुए पूछा।

सभी ने सहमित में सिर हिला दिये।

इधर सभी गेम खेल रहे थे, उधर उनसे कुछ दूरी पर पेड़ के पीछे खड़ा एक साया, इन सभी को देखकर मुस्कुरा रहा था। वह साया किसी लड़की का था।

इधर जेनिथ ने बॉटल को जोर से नचा दिया। बॉटल ने अल्बर्ट के नंबर की ओर इशारा किया।

यह सुन शैफाली खुश होकर तालियाँ बजाने लगी- “हां-हां बताइये ग्रैंड अंकल, आप कैसा महसूस कर रहे है इस जंगल की आउटिंग पर?"

एक पल के लिए अल्बर्ट ने ताली बजाती हुई शैफाली को देखा और फ़िर आग को देखते हुए कहना शुरु कर दिया-

“काफ़ी अच्छा और साहसिक महसूस कर रहा हूँ मैं। वैसे मैंने तो बहुत रातें बिताई है ऐसे जंगल के बीच। लेकिन फर्क बस इतना सा है कि उन जंगलो में मैं स्वयं अपनी मर्जी से जाता था, पर यहां मुझे नियति ले आयी है।

मैं हमेशा विज्ञान को मानता रहा हूँ, पर आज इस द्वीप के हालात को देखकर अचानक ईश्वर पर भरोसा करने लगा हूँ। मुझे लगता है विज्ञान चाहे जितना ही ताकतवर क्यों ना हो जाए, लेकिन ईश्वर के सामने आज भी नगन्य है।

लेकिन मैंने अपनी जिंदगी में कुल जितना सीखा है, उससे भी ज़्यादा मुझे इस द्वीप पर एक दिन में देखने को मिला है। ऐसी नायाब और अनोखी चीज़ो को देखकर मुझे काफ़ी अच्छा महसूस हो रहा है।"

जारी रहेगा............✍️
 
#64.

“अरे वाह ग्रैंड अंकल!" शैफाली ने बिलकुल बच्चे की तरह चहकते हुए कहा- “आप तो जंगल को पूरा एन्जॉय कर रहे हैं.... वेरी गुड। पर ग्रैंड अंकल अगर आपको समय में पीछे जाकर कुछ बदलने का मौका मिले तो आप अपनी लाइफ में क्या बदलना चाहेंगे?"

“अगर मुझे अतीत में जाकर कुछ बदलने का मौका मिले तो मैं अतीत में ही अपनी सिगरेट की लत को छोड़ना चाहूँगा।" कहते-कहते अल्बर्ट की आवाज थोड़ा भर्रा सी गयी और अल्बर्ट खामोश हो गया। शायद उसे मारिया की याद आ गयी थी।

जेनिथ ने अल्बर्ट को खामोश होते देख फ़िर से बॉटल को नचा दिया। इस बार बॉटल सुयश के नंबर पर जाकर रुकी।

“तो फ़िर कप्तान अंकल अब आप क्या कहना चाहेंगे?" शैफाली ने एक छोटी सी लकड़ी को माइक की तरीके से सुयश के मुंह के पास ले जाते हुए कहा।

यह देखकर सुयश ने बोलना शुरु कर दिया- “मेरे लिये ये सफर मेरी जिंदगी का सबसे खतरनाक और यादगार सफर रहा। मैंने बहुत सारे अपनो को खोया, इतनी मुशकिलें देखी, फ़िर भी मैं सकारात्मक हुं। अगर मुझे अतीत में जाने का मौका मिले तो मैं नए साल की रात घटी हर घटना को बदलना चाहूँगा। अब अंततः मैं यही कहूँगा की

‘जो बीत गया उसे जाने दो, जो बाकी है उसे बचाने दो’।" सुयश ने अंत की लाइन शायराना अंदाज में कहा।

सुयश को खामोश होते देख जेनिथ ने बॉटल को एक बार फ़िर घुमा दिया। इस बार बॉटल एलेक्स के नंबर पर गयी।

शैफाली की माइक रूपी लकड़ी अब एलेक्स के हाथ में पहुंच गयी थी।

एलेक्स कुछ देर लकड़ी को पकड़े कुछ सोचता रहा, फ़िर उसने क्रिस्टी को देखा और बोलना शूरु कर दिया- “मैंने अपनी पूरी जिंदगी बहुत ही सिंपल तरीके से गुजारी है, लेकिन ‘सुप्रीम’ पर आने के बाद मेरी जिंदगी में एकाएक बहुत से बदलाव आये। पहले मैं बहुत डरता था। लोग मुझे डराकर अपना काम निकाल लेते थे।"

बोलते-बोलते एलेक्स की निगाह जैक और जॉनी की ओर गयी। अचानक से एलेक्स के चेहरे के भाव बदलने लगे। अब वह थोड़ा गुस्से में नजर आने लगा।

“पर अब मैं किसी से नहीं डरता।" एलेक्स को बोलना बदस्तूर जारी रहा- “मुझे यह नहीं पता कि कब इस जंगल में मेरी जिंदगी का अंत हो जाए। इसिलए अब डरने का कोई मतलब भी नहीं बचता। दोस्तो अगर मुझे अतीत में जाकर कुछ बदलने का मौका मिले तो मैं अपने एक अपराध को अपने अतीत से हटाना चाहूँगा।"

एलेक्स की बात सुनकर सभी आश्चर्य से भर उठे। अचानक से ही क्रिस्टी के चेहरे के भाव बहुत सख्त हो गये और जैक व जॉनी के चेहरे पर डर दिखाई देने लगा।

जैक ने जॉनी की ओर देखा पर बोला कुछ नहीं, शायद अब बोलने का कोई मतलब भी नहीं था।

एलेक्स ने कुछ देर रुक कर सभी पर नजर डाली। सभी उत्सुकता से एलेक्स को ही देख रहे थे।

एलेक्स ने क्रिस्टी का हाथ अपने हाथ में लेकर फ़िर से बोलना शुरु कर दिया- “कैप्टेन मैं आप सबके सामने एक कन्फ़ेशन करना चाहता हूं।"

“कैसा कन्फ़ेशन?" सुयश ने एलेक्स को आश्चर्य से देखते हुए कहा।

“कैप्टेन मैं बहुत सीधा-साधा आदमी हूं। मगर पिछले साल मैंने किसी के साथ मिलकर एक बैंक डकैती को अंजाम दिया। पर उस दिन वहां बैंक में एक आदमी भी सूटकेस लेकर पैसा जमा करवाने आया था। जो अपना सूटकेस उस दिन मेरे साथी को नहीं दे रहा था।

मेरे साथी और उस आदमी के बीच सूटकेस को लेकर धक्का-मुक्की शुरू हो गयी। जिससे मेरे साथी की गोली गलती से उस आदमी को लग गयी और वह आदमी वहीं पर मर गया। यह देख हम बहुत घबरा गये और लूट का सामान लेकर वहां से भाग निकले। हालांकि उस समय मेरे हाथ में खाली रिवाल्वर थी और उस आदमी की हत्या में मेरा कोई हाथ नहीं था। फ़िर भी कैमरे की फुटेज देखने के बाद पुलिस ने मुझे ही इस गिरोह का बॉस समझ लिया। अब मैं दुनिया की नजर में लुटेरा और खूनी दोनो ही बन गया।"

यह सुनते ही क्रिस्टी की आँखे बिल्कुल लाल हो गई। उसने धीरे से एलेक्स के हाथ से अपना हाथ छुड़ाया और चुपचाप अपना इमोशन कण्ट्रोल करने लगी।

“तो क्या सुप्रीम पर भी तुम्हारे वो साथी तुमको डरा रहे थे?" ब्रैंडन ने एलेक्स के चेहरे की ओर देखते हुए पूछा- “नाम क्या है तुम्हारे साथियों का?"

“मेरे उन साथियों के नाम है- जैक और जॉनी।" एलेक्स ने जैक और जॉनी की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।

यह सुन जैक और जॉनी का सिर शर्म से झुक गया।

थोड़ी देर तक किसी की समझ में नहीं आया कि वह जैक और जॉनी से क्या कहें?

इस सन्नाटे को क्रिस्टी की आवाज ने तोड़ा। उसने एलेक्स को संबोधित करते हुए कहा- “ऐसी क्या मजबूरी थी तुम्हारी? जो यह लोग तुम्हे बैंक डकैती करने के लिए मजबूर कर दिये?"

एलेक्स ने एक गहरी साँस भरी और फ़िर बिना क्रिस्टी की तरफ चेहरा घुमाये, बोल उठा-

“दरअसल मैं एक चोर हूं। मैं छोटी-मोटी चोरियां करता रहता था। पर मैने आज तक किसी को नहीं मारा।

जब जैक और जॉनी ने मुझे अपनी डकैती में मिलाना चाहा, तो मैं इसी शर्त पर तैयार हुआ था कि हम किसी को मारेंगे नहीं।

मुझे विस्वास था कि इस बैंक डकैती के बाद मुझे फ़िर कभी चोरी की जरुरत नहीं पड़ेगी। पर उस हत्या के बाद मुझे बहुत अफसोस हुआ। इसीलिये मैंने जैक और जॉनी से अपने हिस्से का पैसा भी नहीं लिया। उस हत्या के बाद अब मेरा नाम भी पुलिस रिकार्ड में आ जाना था। इसीलिये मैंने हमेशा के लिये अमेरिका छोड़ने का निर्णय लिया और सुप्रीम पर आ गया।

पर हाय री मेरी फूटी किस्मत! ये जैक और जॉनी भी बदकिस्मती से इसी जहाज पर थे। मैने इनहे जहाज पर देखने के बाद, इनसे कभी भी ना मिलने का फैसला लिया। इन्होने भी कभी मुझसे बात नहीं की। शायद कभी भी यह रहस्य आप लोग के सामने न आ पाता, पर मैने जबसे क्रिस्टी को देखा, अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे जीने का मुझे नयी प्रेरणा मिल गई हो। पर पहले सुप्रीम की दुर्घटना और फ़िर इन विचित्र घटनाओं का घटना।...आज शैफाली की बातों से ऐसा लगा कि मुझे अपने सिर का बोझ हल्का कर लेना चाहिए। और सच कहूँ तो अब मैं अपने आप को बहुत हल्का महसूस कर रहा हूँ। अब भले कोई मेरा सच जानने के बाद मुझसे प्यार करे या ना करे। अंत में मैं बस इतना कहना चाहूँगा कि मैं बुरा आदमी नहीं हूँ।"

“बेशक आप बुरे आदमी नहीं हैं एलेक्स भैया।" शैफाली ने एलेक्स के दोनो हाथो को, अपने हाथो में लेकर प्यार से पकड़ते हुए कहा-

“हर किसी के पास नहीं होता इतना साहस कि इतनी दिलेरी से सबके सामने सच कह सके। कोई और भले ही आपके साथ ना हो, पर मैं तो हमेशा आपके साथ रहूँगी, आपकी छोटी बहन बनकर।"

एलेक्स शैफाली की बात सुनकर भाव-विभोर हो गया। उसकी आँख से 2 बूंद आँसू निकलकर शैफाली के हाथो पर टपक गये।

अब क्रिस्टी के चेहरे के भाव भी सामान्य दिखने लगे। क्रिस्टी ने एलेक्स और शैफाली को एक साथ गले से लगाया और बोली-

“मै भी अब अपने ‘ऐलू’ को कभी नहीं छोड़ूंगी।" कहते-कहते क्रिस्टी का गला भी भर आया।

‘ऐलू’ शब्द सुनकर सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। इस इमोशन के बाद वहां का माहौल थोड़ा सा सामान्य हो गया।

थोड़ी देर बाद क्रिस्टी को यह अहसास हुआ कि वह कहां पर है? वह धीरे से शर्मा कर एलेक्स से अलग हो गयी।

तभी ब्रेंडन सुयश से बोल उठा- “कैप्टेन हो ना हो, पर न्यूयॉर्क से आया अपराधी वाला मैसेज जैक, जॉनी और एलेक्स के लिए ही रहा होगा।"

“ठीक कहते हो ब्रेंडन। जिन अपराधियों के बारे में इंटरपोल ने हमें सावधान किया था, ये यही होंगे।" सुयश ने कहा।

तभी जैक ने सुयश से मुखातिब होते हुए कहा-

“माफ़ी चाहता हूँ कैप्टेन। पर मेरा भी उस आदमी को मारने का कोई इरादा नहीं था, पर शायद होनी को यही मंजूर था। लेकिन मै आपसे वादा करता हूँ कि जब तक आप लोगों के साथ हूँ कोई गड़बड़ नहीं करूंगा और अगर हम वापस अपनी सभ्यता तक पहुंच गये, तो बेशक आप हमें इंटरपोल के हवाले कर सकते हैं।"

“मै भी अपने किये की सभी से माफ़ी चाहता हूँ।" जॉनी ने भी अपने स्थान पर बैठे-बैठे ही सिर झुकाकर कहा।

अगर कोई और परिस्थिती होती तो शायद सुयश जैक और जॉनी पर कोई और प्रतिक्रिया दिखाता, पर

इस समय के हालात ऐसे थे कि सुयश से कुछ कहते ना बना।

कुछ देर तक वहां पर सन्नाटा छाया रहा और इससे पहले कि जेनिथ फ़िर से बॉटल घुमाती, सुयश बोल उठा-

“रात काफ़ी हो चुकी है और हम लोग दिन भर के थके भी हैं, इसिलए अब हमें आराम करना चाहिए।"

सच में सभी को बुरी तरह से थकान लग रही थी। इसिलये सुयश की बात सुन सभी वही आग के चारो तरफ बिखर कर सो गये।

इन सबको सोता देख पेड़ के पीछे छुपी वह आकृति भी वहि पास के एक पेड़ पर चढ़कर बैठ गयी। लेकिन उसकी आँखे अभी भी सबके ऊपर ही थी।

दूसरी क्रिस्टी: (8 जनवरी 2002, मंगलवार, 02:30, मायावन, अराका द्वीप)

चाँदनी रात थी। आसमान भी बिल्कुल साफ था। सभी आग के चारो तरफ गहरी नींद में सो रहे थे।

तभी अचानक एक खटके की आवाज सुनकर जेनिथ की नींद खुल गयी। उसकी नजर आवाज की दिशा में गयी, पर उसे कुछ नजर नहीं आया।

तभी वैसी ही खटके की आवाज दोबारा आयी। जेनिथ ने अपना चेहरा आवाज की दिशा में घुमाया। जेनिथ को कुछ दूरी पर क्रिस्टी खड़ी नजर आयी।

जैसे ही जेनिथ की नजर क्रिस्टी पर पड़ी, क्रिस्टी ने अपने मुंह पर उंगली रखते हुए जेनिथ को चुप रहने का इशारा किया।

जेनिथ अब सस्पेंस के झूले में झूलने लगी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्रिस्टी ऐसा क्यूं कर रही हैं?

तभी क्रिस्टी ने जेनिथ को अपने पास आने का इशारा किया और पेड़ों के एक झुरमुट की ओर चल दी।

जेनिथ पहले तो अचकचायी, फ़िर उठकर चुपचाप क्रिस्टी के पीछे चल दी। उसे लगा कि शायद क्रिस्टी उसे कुछ दिखाना चाह रही है। अगर जेनिथ की नजर अपने आस-पास सोये लोगो पर गयी होती, तो उसे झटका लग जाना था क्यों की उससे कुछ ही दूरी पर क्रिस्टी सो रही थी।

जारी रहेगी_______✍️
 
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