Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 11 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#65.

उधर जेनिथ धीरे-धीरे अपने आगे चल रही क्रिस्टी के पीछे जा रही थी। इधर पता नहीं कैसे सोयी हुई क्रिस्टी जाग गयी।

उसने जेनिथ को पेड़ो की ओर जाते हुए देखा। उसे आश्चर्य हुआ की जेनिथ इतनी रात गये पेड़ो की तरफ क्यों जा रही है? वह उठकर जेनिथ की तरफ भागी। कुछ ही पल में क्रिस्टी जेनिथ के पीछे पहुंच गयी।

“क्या हुआ जेनिथ?" क्रिस्टी ने आगे जा रही जेनिथ को पीछे से आवाज लगाते हुए कहा- “तुम इतनी रात गये कहां जा रही हो?"

जेनिथ पीछे से आ रही आवाज को सुन पलट कर पीछे देखने लगी। अपने पीछे क्रिस्टी को खड़े देख वह आश्चर्य से भर उठी। उसे समझ नहीं आया की उसके आगे चल रही क्रिस्टी अचानक उसके पीछे कैसे आ गयी? जेनिथ ने पलटकर वापस आगे की ओर देखा।

आगे देखते ही जेनिथ की आँखे फटी की फटी रह गयी क्यों की आगे पेड़ो के झुरमुट के पास एक और क्रिस्टी खड़ी उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

यह देखकर जेनिथ के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। वह ‘धड़ाम’ की आवाज के साथ वहां लहरा कर गिर गयी।

पीछे वाली क्रिस्टी ने जेनिथ को लहराकर गिरते देखा, उसने इधर-उधर नजर घुमाकर देखा, पर उसे कुछ नजर नहीं आया। वह भागकर जेनिथ के पास पहुंच गयी।

जेनिथ जमीन पर बेहोश पड़ी थी। यह देख क्रिस्टी ने चीखकर सबको जगा दिया।

“कैप्टन...तौफीक...उठो। देखो इधर जेनिथ को क्या हुआ?"

क्रिस्टी की चीख सुनकर सभी जाग गये और भागकर क्रिस्टी के पास पहुंच गये।

“क्या हुआ?" सुयश ने जोर से कहा- “तुम लोग इतनी रात में इधर क्या कर रही हो? और जेनिथ बेहोश कैसे हो गयी?"

“पता नहीं!" क्रिस्टी ने उलझे-उलझे स्वर में कहा- “मै तो सो रही थी। तभी अचानक से मेरी नींद खुल गयी। मैने देखा कि जेनिथ उन पेड़ो की ओर जा रही है। मुझे यह देख अजीब सा लगा। मैने जेनिथ को पीछे से आवाज दी।

मेरी आवाज सुन जेनिथ एकदम से डर गयी। पहले उसने इधर पेड़ो की ओर देखा और गिर कर बेहोश हो गयी। मैने भी सामने देखा पर मुझे कुछ नजर नहीं आया।"

यह कहकर क्रिस्टी शांत हो गयी। पर उसकी निगाहे अभी भी बेहोश जेनिथ की ओर थी।

तब तक तौफीक भागकर एक पानी की बॉटल ले आया और उस बॉटल से पानी की कुछ बूंदे लेकर जेनिथ के चेहरे पर डाला। पानी की बूंदे जेनिथ के चेहरे पर पड़ते ही जेनिथ को होश आ गया।

एक सेकंड तक तो जेनिथ सबको देखती रही, फ़िर उसे सारी घटना याद आ गयी। वह एकदम से डरकर क्रिस्टी को देखने लगी।

“क्या हुआ जेनिथ?" तौफीक ने जेनिथ को सहारा देते हुए कहा-

“तुम बेहोश कैसे हो गयी थी? और क्रिस्टी को देखकर तुम डर क्यों रही हो?"

जेनिथ ने एकबार सबके चेहरे पर नजर मारी। सबको अपने पास पाकर धीरे-धीरे वह सामान्य हो रही थी।

पहले जेनिथ ने शैफाली के हाथ में पकड़ी बॉटल से खूब सारा पानी अपने गले के नीचे उतारा और फ़िर सामान्य होते हुए उन्हें सारी बात बता दी।

“दो-दो क्रिस्टी!" सभी के मुंह से एक साथ निकला।

“ये कैसे संभव है?“ तौफीक ने आश्चर्य से इधर-उधर देखते हुए कहा- “क्रिस्टी की शकल की दूसरी लड़की इस द्वीप पर कहां से आयी?"

अब बहुत से चेहरो पर डर के भाव भी दिखने लगे थे। कुछ देर तक किसी के मुंह से बोल तक ना फूटा। सभी बस एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे।

“कैप्टन, क्या आप तंत्र-मंत्र पर विश्वास करते हैं?" अल्बर्ट ने सुयश की ओर देखते हुए पूछा।

“यह आप कैसी बात कर रहे हैं प्रोफेसर?" सुयश ने अजीब सी नज़रो से अल्बर्ट को देखते हुए कहा-

“आज के इस विज्ञान के दौर मे तंत्र-मंत्र की बातों पर विश्वास कौन करेगा? तंत्र-मंत्र का जिक्र तो केवल किताबो मे ही मिलता है।"

“कैप्टन जादू और विज्ञान में बहुत थोड़ा सा ही अंतर होता है।"

अल्बर्ट ने सबको समझाते हुए कहा-

“हम जिन चीजो को समझ नहीं पाते है उसे जादू कहते है, पर जब उसे समझ जाते है तो उसे ही विज्ञान का नाम दे देते है। जैसे आज से 200 साल पहले अगर कोई कहता कि मैंने हजार किलोमीटर दूर बैठे इंसान से बात किया तो हम उसे जादू कहते और जल्दी उसकी बात पर विश्वास नहीं करते, पर आज के समय में हम मोबाइल के द्वारा ऐसा आसानी से कर सकते है।

तो मेरा ये कहना है कि इस द्वीप पर शायद वैसी ही कोई तकनीक है, जो हमें समझ नहीं आ रही है इसिलए हम चाहें तो उसे जादू कह सकते है। हो सकता है कि इस द्वीप पर रहने वाले लोगों को जादू आता हो?"

“ये भी हो सकता है ग्रैंड अंकल।" शैफाली ने अल्बर्ट को देखते हुए कहा- “कि इस द्वीप पर आज से सैकडो साल पहले का विज्ञान प्रयोग में लाया जाता हो, जिससे कि यहां के इंसान किसी का भी भेष बना सकते है?"

“एक बात तो स्पस्ट हो गयी कैप्टन कि इस द्वीप पर इंसान है, मगर वह जानबूझकर हमें देख कर छिप रहे है। क्यों? ये नहीं पता और वह काल्पनिक कहानी की तरह किसी का भी रूप बदलने में माहिर भी है।" ब्रेंडन ने अपने तर्क देते हुए कहा।

“लेकिन वह नकली क्रिस्टी जेनिथ को लेकर कहां जाना चाहती थी?" तौफीक ने कहा।

“आप भूल रहे है कैप्टन कि उस दिन लॉरेन भी लोथार को कहीं ले जाना चाहती थी।" जॉनी ने कहा-

“अब तो मुझे लगता है कि इसी द्वीप से निकलकर कोई इंसान लॉरेन और रोजर का भेष बनाकर हमारे जहाज पर दहशत फैला रहा था।" पहली बार सभी को जॉनी के शब्दो में कोई ढंग का लॉजिक दिखाई दिया था।

“मुझे भी जॉनी की बात सही लग रही है।" सुयश ने कहा- “लेकिन अब हमें इस द्वीप पर और सावधान रहना होगा।"

किसी के मुंह से अब कोई शब्द नहीं निकला।

“मेरे ख़याल से अब हमें वापस सो जाना चाहिए।" सुयश ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “अभी रात का समय है और हमें अभी दिन में वापस अपनी यात्रा शुरु करनी है।"

सुयश की बात सुनकर सभी वापस अपने सोने वाली जगह पर आ गये। नींद तो अब शायद ही किसी को आनी थी, पर वापस सभी लेट गये थे।

उन पर नजर रखने वाली वह आकृति भी अब एक ओर को चल दी थी।

चैपटर-4 रहस्यमय दुनिया

8 जनवरी 2002, मंगलवार, 09:00, ट्रांस अंटार्कटिक पर्वत, अंटार्कटिका

जेम्स और विल्मर बिना किसी को बताए आज फ़िर नियत स्थान पर आ गये।

दोनों ने आज ड्रिल मशीन के साथ-साथ मेटल काटने वाली ‘कटर मशीन’ भी ले रखी थी। दोनों के ही चेहरे पर आज खुशी के भाव नजर आ रहे थे। शायद उन्हें विश्वास था कि आज कुछ ना कुछ तो उनके हाथ जरुर लगेगा।

जिस स्थान पर कल उन्हें वह ढाल मिली थी, वहां पर उन्हेंने एक छोटा सा झंडा बना कर लगा दिया था।

उन्हें पता था कि रात में बर्फ गिरने के बाद उस स्थान को अगले दिन पहचान पाना मुश्किल हो जाता।

जेम्स और विल्मर ने अपना ‘स्की-स्कूटर’ उस झंडे से कुछ दूरी पर रोका और उतरकर झंडे के पास पहुंच गये।

विल्मर ने एक नजर जेम्स पर डाली और फ़िर ‘कटर मशीन’ निकाल कर उस स्थान की बर्फ को साफ करने लगा।

थोड़ी ही मेहनत के बाद विल्मर ने ढाल के आसपास के क्षेत्र की बर्फ साफ कर ली। अब वह ढाल साफ नजर आ रही थी।

“इस ढाल को काट कर निकालने की कोशिश करो।" जेम्स ने विल्मर से कहा- “कम से कम कुछ तो हाथ लगे पहले।"

विल्मर ने जेम्स की बात सुनकर धीरे से अपना सिर हिलाया और फ़िर कटर मशीन को शुरू कर उस ढाल को नीचे की ओर से उस सुनहरी दीवार से अलग करने की कोशिश करने लगा।

कटर मशीन के उस ढाल से टकराने पर तेज चिंगारी निकल रही थी, पर वह मेटल कट नहीं पा रहा था।

5 मिनट तक कटर मशीन चलाने के बाद विल्मर समझ गया कि ये धातु कटर मशीन से नहीं कटेगी।

हार कर विल्मर ने कटर मशीन को एक तरफ फेका और अपने टूल किट के बैग से ‘एसिटलीन टार्च’ निकाल ली।

एसिटलीन टार्च को ऑक्सीजन सिलेंडर से अटैच करने के बाद विल्मर ने एसिटलीन टार्च को ऑन कर दिया। एसिटलीन टार्च 3000 डिगरी सेंटीग्रेट के तापमान से जल उठी।

विल्मर ने एसिटलीन टार्च से पहले आसपास के क्षेत्र की बर्फ को पिघलाना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर में ढाल के आसपास 5 मीटर त्रिज्या के क्षेत्रफल में विल्मर ने सारी बर्फ को पिघला दिया।

अब विल्मर ने एसिटलीन टार्च का मुंह ढाल के नीचे की तरफ कर दिया। इतने अधिक तापमान की वजह से पूरी सुनहरी ढाल लाल रंग की नजर आने लगी, पर फिर भी 10 मिनट की अपार मेहनत के बाद भी वह ढाल उस सुनहरी दीवार से अलग नहीं की जा सकी।

इतनी गर्मी के कारण विल्मर का पूरा चेहरा भी पसीने से भर उठा। आख़िरकार विल्मर थक कर बैठ गया।

जेम्स की भी समझ में नहीं आ रहा था कि ये किस प्रकार की धातु है, जो 3000 डिगरी सेंटीग्रेट पर भी नहीं पिघल रही है।

जेम्स की नजर अब उस ढाल पर बनी ड्रेगन की आकृति पर गयी जो कि पूरी ढाल लाल हो जाने के बाद भी सुनहरा ही दिख रही थी।

कुछ सोचने के बाद जेम्स ने धीरे से उस ड्रेगन की आकृति को हाथ से छूकर देखा। वह आकृति बिलकुल भी गर्म नहीं थी, जबकि पूरी ढाल गर्मी के कारण अभी भी जल रही थी।

कुछ सोच जेम्स ने उस ड्रेगन की आकृति को धीरे से अंदर की ओर दबाया। जेम्स के द्वारा उस आकृति

को दबाते ही वह ढाल एकाएक घूमने लगी।

जेम्स यह देख डरकर पीछे हट गया। विल्मर की भी निगाह अब उस तेजी से घूम रही ढाल पर थी।

जारी रहेगा_________✍️
 
#66.

अचानक वह ढाल नाचते हुए वहीं पर जमीन में समा गयी। जहां पर वह ढाल जमीन में समायी थी, अब वहां पर एक 5 फुट चौड़ाई का गड्ढ़ा (छेद) दिखाई देने लगा।

जेम्स ने गड्डे में झांक कर देखा। गड्डे में नीचे की तरफ जाती हुई सीढ़ियाँ दिखाई देने लगी।

आश्चर्याजनक तरीके से वह सीढ़ियाँ ऐसे चमक रही थी, जैसे उनमें सुनहरी लाइट लगी हो। सीढ़ियों के अगल-बगल घुप्प अंधेरा था।

विल्मर ने अपने टूल बैग से एक पावरफुल टार्च निकाली और उसे ऑन कर उसकी रोशनी गड्डे में मारी, पर टार्च की रोशनी भूसे में तिनके के समान लगी। टार्च की रोशनी 10 फुट से ज़्यादा आगे नहीं जा रही थी।

“क्या हमें नीचे चलकर देखना चाहिए?" जेम्स ने विल्मर की ओर देखते हुए पूछा।

“अब जब इतनी मेहनत की है, तो नीचे भी जाकर अवश्य देखेंगे।" विल्मर ने हामी भरते हुए कहा।

“पर ये सीढ़ियाँ तो बहुत ज़्यादा दिख राही हैं, इनका तो कही अंत भी नही दिख रहा है।" जेम्स ने सीढ़ियों की ओर देखते हुए कहा- “शायद ये हजार से भी ज़्यादा है? पता नही जमीन से इतना नीचे ऑक्सीजन भी

होगा कि नही?"

“एक काम करते है। कुछ नीचे तक उतर कर देखते है, अगर हम उतने नीचे तक कंफर्टेबल नहीं होंगे तो वहां से वापस आ जाएंगे।" विल्मर ने जेम्स के सामने अपनी राय रखते हुए कहा।

“ठीक है, तो मैं नीचे चलने को तैयार हू।" जेम्स ने भी विल्मर की राय पर अपनी सहमती जताते हुए कहा।

फिर क्या था दोनो ने अपने कंधे पर टूल बैग टांगा और हाथो में टार्च लेकर सीढ़ियों पर उतर गये।

अभी वह 6-7 सीढ़ियाँ ही उतर पाये थे कि तभी उन्हे एक तेज हवा का झोंका महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे कुछ उनके बगल से तेजी से निकला हो और इसी के साथ एक तेज गड़गड़ाहट के साथ ढाल वाला रास्ता ऊपर से बंद हो गया।

“ये तो ऊपर वाला रास्ता बंद हो गया?" जेम्स ने डरते हुए कहा-“अब हम वापस कैसे जाएंगे?“

“परेशान मत हो।" विल्मर ने जेम्स का हौसला बढ़ाते हुए कहा-“अगर ऊपर से दरवाजा खोलने का तरीका था तो नीचे से भी जरूर होगा। पहले नीचे चलते है, ऊपर की बाद में सोचेंगे।"

दोनो अब सावधानी से नीचे उतरने लगे। लगभग 800 सीढ़ियाँ उतरने के बाद उन्हे आगे सीढ़ियाँ ख़तम होती दिखि। यह देख दोनों ने राहत की साँस ली।

कुछ और आगे जाने पर अब इन्हे आखरी सीढ़ी बिल्कुल साफ दिखने लगी थी।

“यह क्या? आखरी सीढ़ी तो लाल रंग में चमक रही है।" जेम्स ने आखरी सीढ़ी की ओर देखते हुए कहा।

विल्मर को भी कुछ समझ में नहीं आया। अब दोनों जल्दी-जल्दी सीढ़ियाँ उतरने लगे।

अगले 5 मिनट में ही दोनों आखरी सीढ़ी के पास पहुंच गये।

जेम्स ने आखरी सीढ़ी से पहले ही टार्च को सामने की ओर मारा। सामने लगभग 10 कदम आगे अंधेरे में एक दीवार थी।

कुछ सोच विल्मर ने धीरे से अपना एक पैर लाल रंग वाली सीढ़ी पर रख दिया।

विल्मर के ऐसा करते ही लाल वाली सीढ़ी का रंग हरा हो गया।

यह देख जेम्स ने भी अपना पैर हरे रंग वाली सीढ़ी पर रख दिया और जेम्स के ऐसा करते ही उस हरी सीढ़ी को छोड़ बाकी सभी सीढ़ियों का चमकना बंद हो गया।

अब पीछे कुछ भी नहीं दिख रहा था की वो लोग कहां से आये थे?

तभी उस पहाड़ में कहीं ‘खट्-खट्’ की आवाज उभरी और इसके साथ ही इनके सामने की दीवार सुनहरी रोशनी से जगमगा उठी।

उस दीवार में उसी सुनहरी धातु से बना एक दरवाजा लगा था, जिसको काटने की इन्होने कोशिश की थी। उस दरवाजे के बीचोबीच में एक चाँदी जैसी धातु से बना शेर का उभरा हुआ सिर लगा था।

उस शेर का मुंह खुला हुआ था और उस खुले मुंह से शेर की जीभ बाहर आ रही थी।

जेम्स और विल्मर के सामने वह चमकता दरवाजा था और बाकी की दोनो साइड बिल्कुल अंधेरा था।

“यह तो बहुत विचित्र जगह लग रही है। विल्मर ने जेम्स से कहा- “लगता है सच में हमने किसी नयी दुनियां को खोज लिया है?"

“क्या फायदा ऐसी नयी दुनियां का, जिसके बारे में अब हम किसी को बता ही नहीं सकते।" जेम्स ने नकारात्मक अंदाज में कहा।

“परेशान मत हो जेम्स। हमको यहां से निकलने का रास्ता जरूर मिल जायेगा।" विल्मर ने फ़िर जेम्स की हिम्मत बढ़ाते हुए कहा- “पहले यह सोचो कि यहां से आगे बढ़ने का रास्ता किधर है?"

यह सुन जेम्स ने आगे बढ़कर शेर की आँख को अंदर दबाने की कोशिश की, पर वह अंदर नहीं दबी।

अब जेम्स कभी शेर के कान उमेठता तो कभी उसकी जीभ, पर शेर के सिर का कोई भाग चलायमान नहीं था।

विल्मर ध्यान से जेम्स की यह बच्चे जैसी हरकत देख कर मुस्कुरा रहा था। तभी विल्मर की निगाह शेर के खुले मुंह के अंदर की ओर गयी। विल्मर ने जाने क्या सोचकर शेर के मुंह के अंदर टार्च मारकर देखा।

विल्मर को शेर के मुंह के अंदर कोई लीवर सा दिखाइ दिया। यह देख विल्मर ने शेर के मुंह में हाथ डालकर उस लीवर को धीरे से हिलाने की कोशिश की।

विल्मर के छेड़-छाड़ करने पर वह लीवर आगे की तरफ खिंच गया और तभी एक गड़गड़ाहट की आवाज के साथ, वह दरवाजा अंदर की ओर खुल गया।

जेम्स और विल्मर उस दरवाजे को पार कर दूसरी तरफ आ गये।

दरवाजे के दूसरी तरफ एक विशालकाय कमरा था। देखने में वह कमरा किसी पुराने राजा के दरबार जैसा था।

कमरे के बीचोबीच एक गोल पानी का फव्वारा लगा था। उस फव्वारे के बीच में एक विचित्र सी नक्काशी

किया हुआ एक धातु का खंभा बना था। उस खंभे के ऊपर की आकृति एक 7 सिर वाले साँप (सर्प) की थी, जिसके सातों फन गोल आकृति में आपस में जुड़े थे।

हर सर्प के फन से पानी की फुहार निकल रही थी, जो उस गोल फव्वारे में गिर रही थी। सर्प के उन फनों पर एक छोटा सा चबूतरा बना था, जिस पर एक असली कमल का फूल रखा हुआ था।

गोल फव्वारे के अंदर काफ़ी मात्रा में पानी भरा था जिसमें नीले रंग की छोटी-छोटी सुंदर मछिलयां तैर रही थी।

उस कमरे में दीवार से चिपके हुए 7 कांच के ताबूत भी लगे थे। सभी ताबूत के बीच लगभग 10 मीटर की दूरी थी।

हर एक ताबूत में अलग-अलग रंग का द्रव्य भरा था, जिसके बीच 7 पौराणिक योद्धाओ के निर्जीव शरीर भी उपस्थित थे।

हर एक योद्धा लंबा- चौड़ा दिख रहा था। उनमें से बीच वाले ताबूत के सामने एक 2 फुट का, धातु का पोडियम बना था, जिस पर 3 छोटे-छोटे सुराख बने थे।

कमरे की दीवार और छत पर उसी सुनहरी धातु से नक्काशी की गई थी। कमरे की छत पर एक उसी धातु से एक चित्र को उकेरा गया था।

उस चित्र में पहाड़ो के बीच बनी किसी घाटी के सीन को दिखाया गया था, जिसमें सूर्य पहाड़ो के बीच से निकलता दिखाई दे रहा था और सूर्य की किरणें घाटी में पड़ रही थी।

उस घाटी के आसमान पर एक इंद्रधनुष भी चमक रहा था।

कुल मिलाकर कमरे का माहौल बहुत ही रहस्यमयी दिख रहा था।

जेम्स और विल्मर कमरे में घूमते हुए पहले एक-एक कर सारी चीज़ो को देखने लगे। कमरे में सबसे आशचर्यजनक उन्हें वही काँच के ताबूत दिखे।

“विल्मर!" जेम्स ने विल्मर को सम्बोधित करते हुए कहा-

“क्या ये पौराणिक समय की ममी है जिन्हें किसी द्रव के अंदर सुरक्षित रखा गया है?"

“लग तो कुछ ऐसा ही रहा है, पर ताबूत में बंद हर द्रव का रंग अलग-अलग क्यों है?“ विल्मर ने कहा।

“एक बात और अजीब सी है।" जेम्स ने कमरे में एक नजर दौड़ाते हुए कहा- “उस खंभे पर मौजूद सर्प के 7 सिर है, यहां पर 7 ही ताबूत है और उन ताबूतों में 7 ही रंग का द्रव्य भरा है। तुम्हे यह अजीब सी समानता देख कर क्या लग रहा है?"

“तुमने छत की ओर ध्यान नहीं दिया।" विल्मर ने छत की ओर इशारा करते हुए कहा- “वहां पर भी जो चित्र बना है, उसमें सूर्य से 7 ही किरणें निकल रही है और वहां बने इंद्रधनुष में भी 7 ही रंग भरे है। इसका साफ मतलब है की 7 अंक का कुछ ना कुछ तो चक्कर है?"

“इंद्रधनुष!"

जेम्स इंद्रधनुष का नाम सुनकर फ़िर से उन काँच के ताबूतों की ओर देखने लगा और फ़िर चहक कर बोला- “विल्मर, इन ताबूत के अंदर भरा द्रव का रंग इंद्रधनुष के रंग से मैच कर रहा है। जरा ध्यान से इन सारे ताबूतों को देखो, पहले ताबूत में बैंगनी रंग का द्रव है, दूसरे में आसमानी, तीसरे में नीला, चौथे में हरा, पांचवे में पीला, छठे में नारंगी और सातवां में लाल रंग का द्रव भरा है, और इंद्रधनुष में भी यही सारे रंग पाये जाते है।"

विल्मर भी यह देखकर आश्चर्य से भर गया क्यों की जेम्स का अवलोकन बिल्कुल सही था।

“अच्छा, इस पूरे कमरे को देखकर यह भी महसूस हो रहा है जैसे कि ये पूरा सेटअप कल ही लगाया गया हो।" जेम्स ने कहा- “पूरा कमरा साफ-सुथरा नजर आ रहा है, यहां तक कि उन सर्प के ऊपर रखा कमल का फूल भी बिल्कुल ताजा दिख रहा है।"

कहते-कहते जेम्स उस फव्वारे के पास आ गया और ध्यान से उन सर्प की आकृति वाले खंभे को देखने लगा। कुछ सोचकर जेम्स ने फव्वारे के पानी में अपना कदम रख दिया।

उसके पानी में कदम रखते ही पानी में मौजूद नीली मछिलयां भाग कर दूसरी साइड चली गई।

जारी रहेगा_______✍️
 
#67.

जेम्स अब उस खंभे की ओर बढ़ा। उसने सर्प के एक फन को धीरे से हिलाकर देखा, पर कहीं कोई हरकत नहीं हुई। जेम्स ने सर्प के मुंह में भी हाथ डालकर देखा, मगर वहां भी कुछ नहीं था। कुछ सोचकर जेम्स ने सर्प के सिर पर रखा कमल का फूल हाथ में उठा लिया।

जेम्स के द्वारा फूल उठाए जाते ही अचानक से फव्वारे के पानी में मौजूद नीली मछिलयां बहुत तेजी से इधर-उधर भागने लगी।

यह देखकर जेम्स घबरा कर फव्वारे से फूल लेकर बाहर आ गया। मछलियों के पानी में भागने की रफ़्तार अब और भी तेज हो गयी।

“अरे यह क्या?" विल्मर ने मछलियों को देखते हुए आशचर्य से कहा- “इन मछलियों का तो आकार भी बढ़ता जा रहा है।"

विल्मर की बात सुन जेम्स भी हैरान रह गया क्यों की मछलियों का आकार सच में बढ़ रहा था और इसी के साथ कम होता जा रहा था फव्वारे का पानी भी।

ऐसा लग रहा था कि मछिलयां फव्वारे का पानी पीकर ही बड़ी हो रही है। जेम्स और विल्मर घबरा कर थोड़ा पीछे हट गये।

कुछ ही देर में नींबू के आकार की मछिलयां फुटबॉल के आकार की हो गयी और धीरे-धीरे फव्वारे

का सारा पानी भी ख़तम हो गया।

जैसे ही सारा पानी ख़तम हुआ, अचानक से उस सर्पकार खंभे ने लट्टू की तरह से नाचना शुरू कर दिया और नाचते-नाचते जमीन में समाने लगा।

धीरे-धीरे वह पूरा का पूरा खंभा जमीन में समा गया और उसके साथ ही उस गड्डे में सारी मछिलयां भी समा गई।

अब जमीन से हल्की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई देने लगी और इसी के साथ उस खाली स्थान से एक बर्फ़ की सिल्ली बाहर निकलती हुई दिखाई दी।

धीरे-धीरे 6 फुट की एक बर्फ़ की सिल्ली पूरी बाहर आ गयी।

सिल्ली के बाहर निकलते ही अचानक छत पर बने सूर्य से 7 रंग की किरण निकलकर उस बर्फ़ की

सिल्ली पर पड़ने लगी और इसी के साथ सिल्ली की बर्फ़ पिघलने लगी।

बर्फ़ के अंदर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बंद थी जो बर्फ़ के पिघलने के साथ-साथ सजीव होने लगी। वह लड़की किसी अप्सरा की मानिंद खूबसूरत दिख रही थी।

हिरन के समान काली आँखें, अग्नि के समान घुंघराले सुनहरे बाल, सीप से पतले होंठ, गुलाब सा चेहरा, सुराहीदार गरदन, दूध सा चमकता गोरा शरीर, सब कुछ उसकी खूबसूरती को बयां कर रहे थे।

उसके माथे पर सुनहरा मगर छोटा सा मुकुट था। उसने योद्धाओं के समान सुनहरी धातु की पोशाक भी पहन रखी थी। उसने हाथ में एक 6 फुट की सुनहरी धातु का त्रिशूल पकड़ रखा था।

जेम्स और विल्मर तो यह सीन देख डर कर भागने वाले थे, पर उस लड़की का सौंदर्य ही ऐसा था जो कि उनको वहां से हटने ही नहीं दे रहा था। दोनों मंत्र-मुग्ध से उस योद्धा अप्सरा को निहार रहे थे।

कुछ ही देर में बर्फ़ पूरी तरह से पिघल गयी और वह अप्सरा पूर्ण सजीव हो गयी।

अब उस अप्सरा की नजरे जेम्स और विल्मर पर गयी। वह धीरे-धीरे चलती हुई उन दोनों के सामने आ खड़ी हुई।

“जेम्स और विल्मर को शलाका का प्रणाम।" उस अप्सरा ने झुककर जेम्स और विल्मर को अभिवादन किया।

अपना नाम शलाका के मुंह से सुनकर जेम्स और विल्मर के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा। उन्हें कुछ

बोलते नहीं बन रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे उनके होंठ उनके तालू से चिपक गये हो।

“क.... क.... कौन हो आप?" बहुत मुश्किल से विल्मर ने डरते हुए शलाका से पूछा- “और हमारा नाम कैसे जानती हो?"

“थोड़ी देर इत्मिनान रखिये, अभी सब बताऊंगी आप लोग को, पहले जरा इन सबको तो जगा दू।" इतना कहकर शलाका ने उन ताबूतों को देखा जो कि कमरे में खड़े थे।

शलाका अब चलती हुई बीच वाले ताबूत के पास रखे पोडियम के पास पहुंच गयी। उसने एक बार सभी ताबूतों की ओर देखा और फ़िर पोडियम के बीच बने तीनो सुराख में अपना त्रिशूल घुसा दिया।

त्रिशूल के घुसाते ही हर ताबूत में जमीन की तरफ एक सुराख हो गया और उस सुराख के

माध्यम से सारा रंगीन द्रव्य जमीन में समा गया।

जैसे ही पूरा द्रव्य ताबूत से ख़तम हुआ, सारे योद्धा जीवित हो गये। योद्धाओं के जीवित होते ही सभी काँच के ताबूत जमीन में समा गये।

“सभी भाइयों का सन् 2004 में स्वागत है।" शलाका ने झुक कर सभी का अभिवादन किया।

आठों योद्धाओ ने अपने हाथ से मुक्के बनाकर आपस में टकराये। अब उनकी निगाहें डरे-सहमें जेम्स और विल्मर की ओर थी।

“हम 5000 वर्ष के बाद आज जागे है।" शलाका ने जेम्स और विल्मर की ओर देखते हुए कहा- “हम आपको सब बतायेंगे, पर अभी आप लोग थोड़ा आराम करे और हमें अपने कुछ जरुरी काम कर लेने दे। फ़िर हम आप को सब बतायेंगे।"

जेम्स और विल्मर के पास तो बहस करने की हिम्मत भी नहीं थी अतः उनहोने शांति से सर हिला दिया।

शलाका ने सहमित देख अपना त्रिशूल हवा में लहराया। जिसकी वजह से हवा में एक दरवाजा उत्तपन्न

हुआ। शलाका ने दोनों को उस दरवाजे से अंदर जाने का इशारा किया।

जेम्स और विल्मर ना चाहते हुए भी उस दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गये।

दरवाजे के दूसरी तरफ एक शानदार शयनकक्ष था जिसमें खाने-पीने के सामान के अलावा टॉयलेट भी मौजूद था। परंतु उस कमरे में कोई दरवाजा नहीं था और उनके शयनकक्ष में घुसते ही शलाका का बनाया द्वार भी गायब हो गया था।

जेम्स और विल्मर अब बिल्कुल असहाय महसूस कर रहे थे। उनके पास अब इंतजार करने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था।

इसिलए दोनों बिस्तर पर जाकर बैठ गये और इंतजार करने लगे शलाका के आने का।

नयनतारा: 8 जनवरी 2002, मंगलवार, 10:00, मायावन, अराका द्वीप

सुबह उठकर नित्य कार्यो से निवृत्त होने के बाद सभी ने हलका-फुलका फलो का नास्ता किया और फ़िर से जंगल के अंदर की ओर चल दिये।

इस समय सभी सावधानी से अपने कदम बढ़ा रहे थे। उन्हें इस बात का अहसास हो गया था कि द्वीप बहुत ही खतरनाक और विचित्र चीज़ों से भरा पड़ा है।

सबसे आगे सुयश चल रहा था, फ़िर उसके पीछे अल्बर्ट था, उसके पीछे एलेक्स और क्रिस्टी, फ़िर शैफाली और ब्रूनो, फ़िर जेनिथ और तौफीक, फ़िर असलम और ब्रैंडन और फ़िर सबसे पीछे जैक और जॉनी।

जैक और जॉनी इसिलये सबसे पीछे थे जिससे खतरा महसूस होते ही वह पीछे से भाग सके।

“पता नहीं कब ख़तम होगा ये जंगल?" जैक ने जॉनी से धीमी आवाज में कहा- “परेशान हो गया हू चलते-चलते।"

“मुझसे तो बिना शराब के चला ही नहीं जा रहा है।" जॉनी ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा- “पूरे 2 दिन से शराब की एक बूंद भी नहीं गयी हलक के नीचे। बेकार है इतने पैसे का होना, जबकि हम उसे प्रयोग में

ही ना ला सके।"

“तुझे शराब की पड़ी है। यहां मैंने कितने सपने सजाए थे कि ऑस्ट्रेलिया जाकर बीच पर घूमूंगा, लडकियों का डांस देखूंगा..... पर हाय री फूटी किस्मत.... सब बरबाद हो गया ... डांस देखने की छोड़ो अब तो यहां हमारे खुद पत्तियों को पहन कर जंगल में डांस करने की हालत आ गयी है।"

जैक की बात सुन जॉनी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

जॉनी को मुस्कुराता देखकर जैक को गुस्सा आ गया और वह बोल उठा- “तू क्यूं मुस्कुरा रहा है मेरी बात सुनकर?"

“बस तुझे पत्तियों को पहन कर डांस करते हुए कल्पना कर रहा हुं। सच्ची में यार बहुत खूबसूरत लगेगा तू तो ऐसी स्थिति में।" जॉनी ने मुस्कुराते हुए कहा।

जैक जॉनी की बात सुनकर भड़क उठा और एक घूंसा धीरे से जॉनी की पीठ में जड़ते हुए बोला-

“अच्छा होता कि ड्रेजलर कि बजाय वह अजगर तुझे मार देता।"

जॉनी घूंसा खाकर आगे भाग गया और सुयश से बोला-

“कैप्टन, यदि ड्रेजलर के पत्थर पर साँप बना था तो उस पर अजगर ने हमला कर दिया। मेरे पत्थर पर तो बंदर बना था तो मुझ पर अब किंग-कॉन्ग हमला करेगा या गोरिल्ला?"

ना चाहते हुए भी सुयश सिहत सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

“ऐसा कुछ भी नहीं है।" सुयश ने सबका डर कम करने के लिये कहा- “ये सिर्फ एक इत्तेफाक भी हो सकता है।"

“मैं इसे इत्तेफाक मानने को तैयार नहीं हुं कैप्टन।"अल्बर्ट ने सुयश को देखते हुए कहा- “क्यों की हम सभी शैफाली के सपनों के बारे में जानते

हैं। उसकी कही हर एक बात सच होती जा रही है।"

अल्बर्ट की बात सुन सभी अल्बर्ट और सुयश के पास आ गये।

शैफाली अब इन सबसे पीछे हो गयी थी। तभी उसे अपने कान के पास कुछ फुसफुसाहट सी सुनाई दी

जो की यकीनन इनमें से किसी की नहीं थी- “नयनताराऽऽऽऽ!"

शैफाली यह सुनकर विस्मित हो गयी और बिना किसी से बोले एक दिशा की ओर चल दी।

जारी रहेगा________✍️
 
#68.

उधर अल्बर्ट सबको समझा रहा था- “शायद शैफाली के पास छठी इंद्रिय है।"

“छठी इंद्रिय!" ब्रैंडन ने आश्चर्य से पूछा- “पर प्रोफेसर, इंद्रियां तो पांच ही होती है। ये छठी इंद्रिय क्या है?"

“कभी-कभी हमें किसी बुरी घटना के होने के पहले ही कुछ बुरा अहसास होने लगता है या फ़िर किसी अच्छी घटना घटने के पहले ही खुशी का अहसास होने लगता है। वैज्ञानिको का मानना है कि यह सब छठी इंद्रिय के कारण होता है।"

अल्बर्ट ने कहा- “यह छठी इंद्रिय सभी इंसान में और जानवरों में होती है, पर इंसान बहुत कम मात्रा में इसका प्रयोग कर पाता है। हो सकता है कि यही छठी इंद्रिय शैफाली में ज्यादा मात्रा में हो और इसी वजह से वह भविष्य देख लेती हो।"

“शायद आप सही कह रहे है प्रोफेसर।" सुयश ने भी अल्बर्ट की बात पर अपनी सहमित जताते हुए कहा- “मैंने सुना है कि पुराने समय में युद्ध होने के काफ़ी दिन पहले ही गिद्ध उस मैदान में जाकर बैठ जाते थे जहां युद्ध होने वाला होता था। उन्हें पता था कि युद्ध के बाद लाशें गिरेंगी और उन्हें वहां खाने को मिलेगा।"

अभी ये आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी इन्हें अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी-

“ऊवां .... ऊवांऽऽऽऽ।"

“ये तो किसी बच्चे के रोने की आवाज है।" क्रिस्टी ने इधर-उधर देखते हुए कहा।

“बच्चा! और वह भी इस जंगल में?" सुयश के स्वर में आश्चर्य और उलझन थी।

आवाज में बहुत दर्द भरा था। सभी पूरी तरह से चोकन्ना होकर इस आवाज को सुनने की कोशिश करने लगे।

अचानक सुयश को अपने ग्रुप का ख्याल आया।

सुयश ने ध्यान से एक नजर सब पर डाली और जोर से चीख उठा- “शैफाली....शैफाली कहां है?"

तुरंत सबकी निगाहें अपने आसपास घूम गई। लेकिन ऊंचे-ऊंचे वृक्षो और घने जंगल के सिवा उन्हें अपने आसपास कुछ ना दिखायी दिया।

“अभी-अभी तो वह मेरे साथ थी। इतनी जल्दी कहां जा सकती है?"

जेनिथ ने आसपास निगाह मारते हुए कहा-

“कहीं कोई जंगली जानवर.... नहीं ...नहीं....जानवर बिना आवाज किये उसे नहीं ले जा सकता। तो फ़िर..... तो फ़िर कहां गयी शैफाली?"

“शैफालीऽऽऽऽ .....शैफालीऽऽऽऽ!" तौफीक ने मुंह के दोनों साइड अपने हाथ लगाकर जोर से आवाज दी।

लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिला। केवल तौफीक की आवाज घने जंगल में घूमकर प्रतिध्वनि उत्पन्न करती रही।

अल्बर्ट भी अपने गले में टंगी सीटी को जोर-जोर से बजाने लगा। सभी लोग अलग-अलग होकर शैफाली को ढूंढने की कोशिश करने लगे।

“खबरदार! कोई भी ग्रुप से बाहर नहीं जायेगा" सुयश ने चीखकर सबको खबरदार किया-

“सभी लोग एक साथ रहकर शैफाली को ढूंढने की कोशिश करेंगे, क्यों कि एक साथ रहकर तो हम हर मुसीबत का सामना कर सकते है, पर अकेले रहकर कुछ नही कर सकते। इसिलये हम सभी को एक साथ रहना होगा।"

“कैप्टन, हम उस बच्चे के रोने की आवाज को भूल रहे है। जिसको सुनकर हमें शैफाली का ध्यान आया था।" ब्रैंडन ने कुछ याद दिलाते हुए कहा।

“लेकिन इतने भयानक जंगल में कोई बच्चा कहां से आ सकता है?" एलेक्स ने कहा- “अवस्य ही यह कोई मायाजाल है? दोस्तो हमें सावधान रहना होगा।"

“ऊवांऽऽऽऽ .... ऊवांऽऽऽऽ.... ऊवांऽऽऽऽऽ।"

तभी रोने की आवाज पुनः सुनाई दी। इस बार आवाज थोड़ा स्पस्ट थी।

“इधर से .... इधर से आयी है वह आवाज।" अल्बर्ट ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“कहीं यह शैफाली की आवाज तो नहीं?" जैक ने अपने होंठ पर जुबान फिराते हुए कहा।

“नहीं ये शैफाली की आवाज नहीं है।“ एलेक्स बोला- “यह किसी छोटे बच्चे की आवाज है।"

“क्या हमें आवाज की दिशा में चलना चाहिए?" जॉनी ने डरते-डरते कहा।

पर सुयश ने जॉनी की बात पर ना ध्यान देते हुए, इस बार ब्रूनो को इशारा किया। ब्रूनो सुयश का इशारा समझ कर तेजी से आवाज की दिशा में भागा।

सभी लोग ब्रूनो के पीछे-पीछे भागे। थोड़ा आगे बढ़ते ही इन्हें पुनः वही आवाज सुनाई दी।

“ऊवांऽऽऽऽ .... ऊवांऽऽऽ.... ऊवांऽऽऽऽऽ।" इस बार आवाज बिल्कुल साफ थी।

आवाज को सुन सभी के कदमों में तेजी आ गयी। थोड़ा आगे बढ़ते ही उन्हें एक अजीब सा नजारा दिखाई दिया।

वह रोने की आवाज सामने लगे एक झाड़ीनुमा पेड़ से आ रही थी और शैफाली धीरे-धीरे बिल्कुल सम्मोहित अवस्था में उन झड़ियों की ओर बढ़ रही थी।

उस झाड़ीनुमा पेड़ पर सितारे की आकृति लिये कुछ पीले रंग के रसीले फल लगे दिखाई दे रहे थे।

अब शैफाली पेड़ से लगभग 10 कदम दूर रह गयी थी। बाकी सभी लोगो की दूरी शैफाली से बहुत ज़्यादा थी।

“शैफालीऽऽऽऽ ... शैफालीऽऽऽऽ रुक जाओ।" अल्बर्ट शैफाली को पेड़ की तरफ बढ़ते देख जोर से चिल्लाया- “वहां पर खतरा है....रुक जाओ।“

मगर शैफाली ने जैसे अल्बर्ट की बात सुनी ही ना हो। वह निरंतर पेड़ की ओर बढ़ रही थी।

पेड़ की दूरी अब शैफाली से बामुश्किल 4 कदम ही बची थी। कोई भी इतने कम समय में शैफाली को दौड़कर नही पकड़ सकता था।

अब उसे कोई रोक सकता था तो वह था केवल ब्रूनो।

“ब्रूनो... रोको शैफाली को।" सुयश ने ब्रूनो को शैफाली की ओर इशारा करते हुए उसे रोकने को कहा।

इशारा समझ कर ब्रूनो बहुत तेजी से शैफाली की ओर भागा। कुछ ही सेकंड में वह शैफाली के पास था।

ब्रूनो ने एक नजर गौर से शैफाली को देखा और फ़िर उस पेड़ को देखने लगा, जिसमें से अभी भी रोने की आवाज आ रही थी।

“ब्रूनो... स्टोप शैफाली।" ब्रेंडन ब्रूनो को रुकते देख चिल्ला उठा।

लेकिन ब्रूनो ने एक बार फ़िर शैफाली को देखा और फ़िर उसे रोकने की बजाय ‘कूं-कूं’ करता हुआ वही घास पर ऐसे पसर कर बैठ गया, जैसे उसे शैफाली से कोई लेना-देना ही ना हो।

“यह ब्रूनो शैफाली को बचाने के बजाय वहां आराम क्यों करने लगा?" अल्बर्ट के स्वर उलझे-उलझे थे।

तब तक शैफाली उस झाड़ीनुमा पेड़ तक पहुंच गयी। पेड़ से निकलती वह रोती आवाज तेज होती जा रही थी।

अब शैफाली तक कोई नहीं पहुंच सकता था।

तभी अचानक उस झाड़ीनुमा पेड़ ने अपनी झाड़ियो को इस प्रकार आगे बढ़ाया जैसे वह झाड़ी नहीं उसके हाथ हैं और शैफाली को अपनी गिरफ़्त में ले लिया।

शैफाली उन झाड़ियो में उलझकर रह गयी।

“यह तो कोई आदमखोर पेड़ लग रहा है?" सुयश ने धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कहा- “पर इससे निकलती यह आवाज बड़ी अजीब सी है।"

तब तक सभी भागते हुए पेड़ तक पहुंच गये।

“खबरदार!" सुयश ने सभी को सावधान करते हुए कहा- “कोई पेड़ के पास नहीं जायेगा। यह आदमखोर खून चूसने वाला पेड़ भी हो सकता है। जो भी इसके पास जायेगा, वो शैफाली को बचाने के बजाय स्वयं भी उस खूनी पेड़ का शिकार भी बन सकता है। इसिलये दूर से ही शैफाली को बचाने की तरकीब सोचो।"

वह पेड़ बड़ा ही आश्चर्यजनक था क्यों की शैफाली को पकड़ने के बाद, अब उसमें से रोने के बजाय हंसने की आवाज आने लगी थी।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी बच्चे को उसकी पसंद का खिलोना मिल गया हो और वह किलकारियां मारकर हंस रहा हो।

उस पेड़ की यह हंसी जंगल में गूंजकर एक अजीब सा खौफ पैदा कर रही थी।

तभी ब्रेंडन और तौफीक ने अपने हाथो में चाकू निकल लिया और वह धीरे-धीरे उस पेड़ की ओर बढ़ने लगे।

शैफाली अभी भी सम्मोहित मुद्रा में थी। उसे शायद इस समय किसी दर्द का अहसास भी नहीं हो रहा था।

इससे पहले कि ब्रेंडन और तौफीक उस पेड़ पर चाकू से हमला बोल पाते, अचानक उन झाड़ियो में एक अजीब सी हरकत हुई और उसमें लगे सितारे के आकार के पीले फल, विचित्र लताओँ के साथ हवा में झूमने लगे।

वातावरण में अब हंसने की आवाज के साथ एक अजीब सी भिनभीनाहट भी गूंजने लगी।

ब्रेंडन और तौफीक यह देखकर एक क्षण के लिए अपनी जगह पर रुक गये।

तभी उन विचित्र फलो में से 2 फल हवा में उठकर लाताओं सहित शैफाली की आँखो के पास पहंच गये और इससे पहले कि कोई और कुछ समझ पाता, वह फल एक अजीब सी ‘पिच्छ’ की आवाज के साथ हवा में स्वतः ही फट गये।

उन विचित्र फलो के फटने से उसमें से एक रस की धार निकली और शैफाली की आँख में पड़ गयी।

अब शैफाली अपनी आँखे तेजी से रगड़ते हुए दर्द से चीखने लगी- “मेरी आँखे.... मेरी आँखो में बहुत

तेज जलन हो रही है।"

शैफाली की चीख को सुन मानो पेड़ को उस पर दया आ गयी क्यों की अब उसकी गिरफ़्त बहुत ढीली हो गयी।

पेड़ की पकड़ ढीली होते ही शैफाली पेड़ के पास नीचे की ओर गिर गयी।

जारी रहेगा_______✍️
 
#69.

तौफीक ने यह देख तुरंत चाकू को नीचे फेका और बिना अपनी जान की परवाह किये, भागकर शैफाली को उठाकर पेड़ से दूर चला गया। अब सभी भागकर शैफाली के करीब आ गये।

“तुम ठीक तो हो ना?" अल्बर्ट ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा।

“ग्रैंड अंकल, मेरी आँखो में बहुत तेज जलन हो रही है।" शैफाली ने अल्बर्ट की आवाज और उसके स्पर्श को पहचान लिया।

“धीरे-धीरे अपनी आँखो को खोलने की कोशिश करो। मैं तुम्हारी आँखें देखने के बाद ही बता पाऊंगा कि क्या परेशानी हुई है।" अल्बर्ट के शब्दो में प्यार और दर्द की साफ झलक मिल रही थी।

अल्बर्ट के शब्द सुन शैफाली ने धीरे-धीरे अपनी आँखो को खोलना शुरू कर दिया।

आँखें खुलने के बाद शैफाली ने फ़िर मिचमिचाकर अपनी आँखें बंद कर ली।

लेकिन तुरंत ही शैफाली ने अपनी आँखें दोबारा खोल दी। इसी के साथ वह खुशी से चीख पड़ी-

“ग्रैंड अंकल ... ग्रैंड अंकल ... मेरी आँखें ठीक हो गयी। मैं ... मैं अब देख सकती हू ... मुझे अब सबकुछ दिखाई दे रहा है।"

यह सुन सभी भोचक्के से खड़े रह गये।

“ये ... ये कैसे संभव है?" सुयश के स्वर में दुनियां भर का आश्चर्य दिख रहा था- 4a“जन्म से अंधे व्यक्ती की आँखें अपने आप कैसे आ सकती है?"

उधर शैफाली अल्बर्ट के गले लगी हुई ऐसे चारो तरफ का दृश्य देखने लगी मानो वह एक पल में दुनियां की हर चीज देख लेना चाहती हो।

शैफाली के चेहरे पर खुशी ही खुशी नजर आ रही थी। अब ब्रूनो भी शैफाली के पास आ गया था और प्यार से उसका हाथ चाट रहा था।

शैफाली ने खुशी से बारी-बारी सबको देखा और सूंघकर सबका नाम बताया। लगभग 10 मिनट तक यह खुशी का सेलिब्रेसन चलता रहा।

अब अल्बर्ट से ना रहा गया। वह धीरे-धीरे उस झाड़ीनुमा पेड़ के पास पहुंच गया।

सभी का ध्यान अब अल्बर्ट पर था। शैफाली भी पेड़ के पास पहुंच गयी।

कुछ सोचकर शैफाली ने एक कदम आगे बढ़ाया। शैफाली को पास आता देख पेड़ की लताएं पुनः हिली, पर इस बार उसने शैफाली को नहीं पकड़ा, बल्कि उसे प्यार से सहलाने लगी।

यह देख डरते-डरते अल्बर्ट ने भी अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाया, पर पेड़ ने अल्बर्ट को भी कुछ नहीं कहा। यह देख अल्बर्ट ने पेड़ से 2 फल तोड़ लिये।

“इस फल का क्या करेंगे प्रोफेसर?" ब्रेंडन ने अल्बर्ट से पूछा।

“मुझे भी अभी पता नहीं है।" अल्बर्ट ने एक गहरी साँस लेते हुए कहा- “पर अगर मैं कभी भी अपनी दुनियां में वापस पहुंचा, तो सबको यह फल जरूर दिखाऊंगा और बताऊंगा की कैसे इस फल ने एक जन्म से अंधी लड़की की आँखें सही कर दी।"

“प्रोफेसर!" तौफीक ने आगे बढ़कर अल्बर्ट से पूछा- “क्या आपने ऐसे किसी पेड़ का जिक्र कहीं सुना है?"

“नहीं!" अल्बर्ट ने जवाब दिया- “मैंने ऐसे किसी पेड़ का जिक्र कहीं नहीं सुना। वैसे बच्चे की तरह रोने

वाला पेड़ तो अफ़्रीका में पाया जाता है, जिसे ‘मेंड्रेक’ कहते है। मगर इस पौधे से तो हंसने, रोने और चिल्लाने की भी आवाज आ नहीं थी और ऐसा पेड़ तो कभी नहीं सुना जो किसी जन्म से अंधे व्यक्ति को आँख दे सकता हो।"

“कैप्टन!" इस बार असलम ने कहा- “मुझे तो लगता है की यहां सबकुछ ‘अपग्रेडेड’ है। मतलब हमारी दुनियां से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और विकसित।"

“तुम सही कह रहे हो असलम।" सुयश ने भी असलम की बात पर हामी भरते हुए कहा।

“कैप्टन ।" एलेक्स ने सुयश को देखते हुए कहा- “एक बात समझ में नही आयी की ब्रूनो ने शैफाली को रोका क्यों नहीं था? क्या उसे यह अहसास हो गया था की यह पेड़ शैफाली का कोई आहित नहीं करेगा।"

“हो सकता है।" सुयश ने ब्रूनो के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- “वैसे पहले भी ब्रूनो ने शैफाली की जान बचाई थी। वैसे शैफाली तुम यह बताओ कि सबके पुकारने पर भी तुम रुक क्यों नहीं रही थी?"

“अंकल, उस समय जब आप सभी लोग आपस में बात कर रहे थे, तभी मेरे कानो में एक अद्रस्य आवाज सुनाई दी थी। मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने मेरे कानो में ‘नयनतारा’ शब्द बोला था। उसके बाद का मुझे कुछ याद नहीं है। इसके बाद मुझे होश तब आया, जब उस पेड़ ने मेरी आँखो में वह रसीला फल निचोड़ दिया था।" शैफाली ने कहा।

“नयनतारा!" सुयश ने बड़बड़ाते हुए यह शब्द दोहराया- “यह तो हिन्दी शब्द लग रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे मैंने इस शब्द को कहीं सुना हो?"

“हिन्दी शब्द! और वह भी सुना हुआ।" जेनिथ ने आश्चर्य से कहा- “आपने यह शब्द कहां सुना है कैप्टन? याद करने की कोशिश करें।"

“नयनतारा ..... नयनतारा ....।" सुयश ने अपने दिमाग पर जोर डालना शुरु कर दिया। अचानक वह खुशी से चीख उठा- “याद आया ...यह शब्द मैंने अपने दादाजी की कहानियो में, अपने बचपन में सुना था।

जब मैं छोटा था तो मेरे दादाजी मुझे ‘यति’ और ‘उड़ने वाले घोड़े’ की कहानियाँ सुनाते थे, उसी एक कहानी में उन्होंने मुझे इस नयनतारा पेड़ के बारे में बताया था कि यह पौधा ‘हिमालय’ की पहाड़ीयो में पाया जाता है, जो आँखो की किसी भी तरह की परेशानी को जड़ से ख़तम कर सकता है और इसीलिये इसका नाम नयनतारा रखा गया था क्यों कि हिन्दी में ‘नयन’ का मतलब ‘आँखे’ होती है और ‘तारा’ का मतलब ‘स्टार’ होता है।

अब अगर इस पौधे के फल के आकार पर ध्यान दिया जाये तो वह एक स्टार की ही आकृति का है और उसमें किसी की आँखो को सही करने की छमता भी है। इस हिसाब से इस पौधे का नाम इसके कार्य को देखते हुए बिल्कुल फिट बैठता है।"

“अब यहां पर 2 बातें निकल कर आ रही है कैप्टन।" क्रिस्टी ने कहा- “नंबर 1 कि हिमालय की पौराणिक कथाओ का पौधा यहां पर कैसे आया? और दूसरा कि शैफाली को बार-बार यह रहस्य कौन बता रहा है?"

काफ़ी देर सोचने के बाद भी किसी की कुछ समझ में नहीं आया, अंततः उन्होने फ़िर से आगे बढ़ने का निश्चय किया। और सुयश का इशारा देख फ़िर सब जंगल के अंदर की ओर चल दिये।

जोड़ीयाक-घड़ी
(8 जनवरी 2002, मंगलवार, 11:00, वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका)

वेगा अपने फ्लैट में बैठा कंप्यूटर पर काम कर रहा था, तभी उसके मोबाइल की घंटी बज उठी।

वेगा ने एक बार अपने मोबाइल को देखा। कॉल वीनस का था। वीनस का कॉल देख वेगा के चेहरे पर

एक मुस्कान आ गयी।

उसने रिलेक्स होने के अंदाज से एक गहरी साँस भरी और वीनस का कॉल रिसीव कर लिया।

“हाय वेगा! कैसे हो?" दूसरी तरफ से वीनस का मधुर स्वर फोन पर गूंजा- “पुस्तकालय के बाद तो तुमने मुझे याद ही नहीं किया। ऐसा क्या लिख रहे हो अपने प्रोजेक्ट में जिसकी वजह से तुम्हें

अपने दोस्तों की याद ही नहीं आ रही है।"

“नहीं वीनस ... ऐसी कोई बात नहीं है।" वेगा ने सफाई देते हुए कहा- “मैं आज तुम्हें कॉल करने ही वाला था।"

“अरे वाह! पार्टी देने का इरादा है क्या?" वीनस ने खुश होते हुए कहा।

“पार्टी भी देंगे पर आज नहीं बल्की कल।" वेगा फोन को हाथ में लेते हुए वहीं बेड पर पसर गया-

“क्यों की कल मेरा जन्मदिन है।"

“वाह ... वाह! कल जन्मदिन है तुम्हारा। फ़िर तो पार्टी भी विशेष होनी चाहिए।" वीनस ने अपनी डिमांड रखते हुए कहा।

“हां-हां क्यों नहीं।" वेगा ने भी अपनी सहमित जताई- “बताओ क्या प्लान करें कल का?"

“ऊंऽऽऽऽऽ।" वीनस ने सोचते हुए कहा- “कल ‘जॉर्ज टाउन वाटर फ़्रैट पार्क’ चलते है, वहां पार्टी करने में मजा आयेगा। वहां पर बहुत सारे थीम एक साथ मिल जायेंगे।"

“ओ. के. तो कल के लिये ‘जॉर्ज टाउन वाटर फ़्रैट पार्क’ डन।" वेगा ने पार्टी पर मोहर लगाते हुए कहा।

“और कोई तो नहीं रहेगा ना पार्टी में?" वीनस ने शोखी बिखेरते हुए कहा।

“हम दो के बीच में किसी तीसरे का क्या काम?" वेगा ने वीनस को छेड़ते हुए कहा। लेकिन इसके

पहले कि वीनस और कुछ बोल पाती वेगा के कमरे की बेल बज उठी।

“लगता है कोई आया है? चलो कल सुबह की पार्टी पक्की। बाकी बातें बाद में करुंगा। बाय-बाय।" वेगा ने फोन को काटने वाले अंदाज में कहा।

“बाय-बाय वेगा! कल पार्क में मिलते है।" इतना कहकर वीनस ने फोन को काट दिया। फोन कटने के बाद वेगा बेड से उतरकर दरवाजे की ओर बढ़ गया।

वेगा ने दरवाजा खोलकर बाहर देखा। बाहर एक कूरियर वाला लड़का खड़ा था।

“आपका कूरियर है।" कूरियर वाले ने वेगा को एक छोटा सा पैकेट पकड़ाते हुए कहा।

वेगा ने वह पैकेट अपने हाथों में पकड़ लिया। कूरियर को देकर कूरियर वाला वहां से चला गया।

वेगा की नजर अब हाथ में पकड़े पैकेट पर थी। पैकेट पर भेजने वाले के नाम की जगह पर युगाका लिखा था। वेगा यह देखकर धीरे से मुस्कुरा दिया।

“कोई भी भूल जाए, पर भैया मेरा जन्म दिन कभी नहीं भूलते। लव यू भाई!" यह कहते हुए वेगा ने एक फ्लाइंग किस हवा में उछाला और पैकेट के सुनहरे रैपर को फाड़ने लगा-

“देखें तो इस बार भाई ने क्या भेजा है मेरे लिये?"

सुनहरे रैपर के नीचे एक शानदार धातु का डिब्बा था, जिस्में एक चमचमाती हुई गोल्डेन कलर की

स्मार्ट-वॉच रखी थी।

“वाह!" वेगा अपनी खुशी का इजहार करते हुए जोर से चिल्लाया-“ क्या शानदार वॉच है!“

वेगा ने ‘जोडियाक वॉच’ को ऑन कर लिया।

जोडियाक वॉच का डायल, साधारण वॉच से थोड़ा सा ज्यादा बड़ा था और उसकी स्क्रीन टच करने पर बदल रही थी। वेगा ने जल्दी- जल्दी जोडियाक वॉच के सारे वॉलपेपर को चेक कर लिया।

घड़ी में 12 वॉलपेपर थे और हर एक वॉलपेपर एक राशि का प्रतिनिधित्व कर रहा था। चूंकी वेगा की राशि ‘मकर’ थी इसिलये उसने ‘मकर’ राशि वाला वॉलपेपर वॉच पर लगा लिया।

उस वॉलपेपर पर एक मगरमच्छ मानव बना था जो कि किसी योद्धा कीतरह एक हाथ में तलवार पकड़े था। वेगा ने वॉलपेपर बदलने के बाद वॉच को अपनी कलाई पर बांध लिया।

जारी रहेगा_______✍️
 
#70.

चैपटर-5 (शलाका मंदिर)

(8 जनवरी 2002, मंगलवार, 12:30, मायावन, अराका द्वीप)

सूर्य अब सिर पर चढ़ आया था। पर कोई रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। सभी विचित्र से पेड़-पौधो को देखते हुए आगे बढ़ रहे थे। पीठ पर लदे बैग को सभी आदमी बारी-बारी से उठा रहे थे।

सुबह से दोपहर होने को आ गयी थी मगर कोई भी विचित्र घटना नहीं घटी थी।

“लगता है इस जंगल का कहीं अंत नहीं है?" जॉनी ने अपने होंठ पर जीभ फिराते हुए कहा- “कहीं चलते-चलते ही ना मर जाएं।"

“मर जा!" जैक ने मजा लेते हुए कहा- “वैसे भी अब तेरी जिंदगी में रखा क्या है?"

“खोपड़ी मत चाट।" जॉनी अब थोड़ा झुंझला कर बोला- “एक तो वैसे ही शराब ना मिलने से मेरे तो सिर में दर्द भी होने लगा है, जी चाहता है किसी पत्थर पर अपना सिर मार लूं।"

“ये आइिडया भी बुरा नहीं है। जा पत्थर मार कर फोड़ ले अपना सिर।" जैक तो जैसे जॉनी के पीछे ही पड़ गया था- “थोड़ा खून निकलते ही तुझे शांति मिल जायेगी।"

यह सुनते ही जॉनी ने सच में रास्ते में पड़ा एक पत्थर उठा लिया।

“अरे-अरे, क्या कर रहा है नशेड़ी?" जैक ने जॉनी को पत्थर उठाते देख चीख कर कहा- “मैं तो मजाक कर रहा था। तू इसे सच समझ बैठा क्या?"

“मैं कौन सा सीरियस हुं।" जॉनी ने भी ‘ही-ही’ करते हुए अपने दाँत चमकाये।

यह कहकर जॉनी ने पत्थर को पास के एक पेड़ पर जोर से मार दिया। पेड़ पर जहां पत्थर लगा था अचानक एलेक्स की निगाह उधर गई।

“यह तीर का निशान कैसा?" एलेक्स ने सबका ध्यान पेड़ पर उस निशान की ओर ले जाते हुए कहा।

एलेक्स के शब्द सुन अब सबकी निगाह उस पेड़ पर गयी। पेड़ पर सफेद रंग से एक तीर का निशान बना दिखाई दे रहा था। यह देख सभी पेड़ के पास पहुंच गये।

वह सफेद तीर का निशान बांयी तरफ जाने का इशारा कर रहा था। उस तीर के निशान के नीचे कुछ ना समझ में आने वाली कूट भाषा में लिखा भी था।

कूट भाषा को देख सभी की निगाहें स्वतः शैफाली की ओर चली गयी।

“क्या तुम इन निशानो को भी जानती हो शैफाली?" सुयश ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

“हां कैप्टन अंकल। मैं तीर के नीचे लिखी भाषा को पढ़ सकती हुं।" शैफाली ने पेड़ की ओर देखते हुए कहा- “इस पर लिखा है- “शलाका मंदिर!“

“शलाका मंदिर!“ सभी ने मन ही मन बुदबुदाया।

“लगता है इस द्वीप पर रहने वाले लोगों की देवी का नाम शलाका है।“ क्रिस्टी ने कहा- “और यह तीर बताता है की अवश्य ही आगे कहीं पर देवी शलाका का मंदिर है।“

“फ़िर तो हमें अवश्य ही उस दिशा में चलना चाहिए।“ अल्बर्ट ने कहा- “शायद वहां पर कोई इंसान भी हमें मिल जाए? और उसे इस द्वीप से निकलने का कोई रास्ता भी पता हो?“

अल्बर्ट की बात सभी को सही लगी अतः वह सभी उस तीर की दिशा में चल दिये।

सभी सावधानीपूर्वक इधर-उधर देखते हुए अपने कदम बढ़ा रहे थे।

“वो देखो सामने।“ जेनिथ ने सभी को एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा- “वहां पर एक और तीर बना है। वह तीर भी पिछले वाले तीर के जैसा ही है।"

जेनिथ की बात सुनकर सभी की निगाहें सामने बने तीर की ओर गयी। सभी लोग दूसरे बने तीर के हिसाब से फ़िर से मुड़ गये।

ये सभी इस बात से बेखबर थे की एक रहस्यमय साया काफ़ी देर से इनका पीछा कर रहा था जो निश्चय ही युगाका का था।

युगाका के चलने से, उसके पैरों से बिल्कुल भी आवाज नही हो रही थी।

रास्ते में कई और तीर के निशान मिले जिसका पीछा करते हुए सभी लोग एक विशालकाय मंदिर के पास पहुंच गये।

मंदिर इतना विशालकाय था कि उसे पूरा घूमने में 4 से 5 घंटे का समय लग जाता। मंदिर सुनहरे पत्थर और धातु से बना था।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी विशालकाय पहाड़ को काटकर वह मंदिर बनाया गया था।

दूर से देखने पर मंदिर की बनावट लगभग किसी हि..दू मंदिर के जैसी लग रही थी।

मंदिर के मुख्य मंडप के शीर्ष पर नटराज का एक चित्र उकेरा था। मुख्य मंडप के अगल-बगल 2 विशाल आदमकद मूर्तियाँ लगी थी।

मंदिर के पिछले हिस्से में 2 धातुओं के विशालकाय खंभे बने थे, जिन पर विचित्र सी आकृतियां बनी थी

और अजीब सी भाषा में कुछ लिखा हुआ था।

मंदिर के मुख्य मंडप में जाने के लिये लगभग 25 सीढ़ियाँ बनी हुई थी।

“यह तो कोई हि..दू मंदिर लग रहा है?" सुयश ने मंदिर को देखते हुए कहा- “और इसकी बनावट से लग रहा है की यह सैकडो साल पुराना है। इतना प्राचीन और भव्य मंदिर किसने इस जंगल में बनवाया होगा?"

सभी चमतकृत होकर इस भव्य मंदिर को निहार रहे थे।

“तो क्या देवी शलाका कोई हिं..दू देवी है?" जेनिथ ने सुयश की ओर देखते हुए पूछ लिया- “परंतु यह मंदिर तो भारत से हजारों किलोमीटर दूर है।"

“इंडिया की सभ्यता भी हजारो साल पुरानी है, हो सकता है इस द्वीप पर पहले कोई इंडियन रहता हो?" अल्बर्ट ने कहा।

सुयश ने अपने जूतों को सीढ़ियो के नीचे ही उतारा और नंगे पैर ही सीढ़ियाँ चढ़ने लगा। सुयश को ऐसा करते देख सभी ने अपने जूते सीढ़ियो के नीचे ही उतार दिये और सुयश के पीछे-पीछे चल पड़े।

मंदिर का मुख्य मंडप काफ़ी ऊंचा बना था। मुख्य मंडप के बीच का भाग, एक 10 मीटर त्रिज्या के घेरे में, 7 ऊंचे-ऊंचे स्तंभो से घिरा था। उन सातों खंभो पर एक-एक योद्धा का चित्र बना था। हर योद्धा अपने हाथो में एक खतरनाक अस्त्र पकड़े हुए था।

उन खंभो के बीचोबीच में एक पत्थर का चबूतरा बना था, जिस पर एक 6 फुट ऊंची संगमरमर की किसी देवी की प्रतिमा लगी थी।

उस प्रतिमा के चारो तरफ 7 फुट ऊंचे गोलाकार आकृती में पेड़ लगे थे, जो चारो तरफ से प्रतिमा के ऊपर झुके हुए थे। पेड़ो के ऊपर झुके होने की वजह से उस प्रतिमा का चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा था।

शैफाली पहले घूम-घूम कर खंभे पर बने योद्धाओ को देखने लगी।

“ये कैसे योद्धा है ? और इन खंभो पर क्या लिखा है शैफाली?" अल्बर्ट ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

“देवी शलाका के 7 भाई है। हर एक खंभा एक भाई का प्रतीक है।" शैफाली ने खंभो की ओर देखते हुए कहा- “और हर एक भाई के पास एक तत्व की शक्ति है।"

“पर यह तो 7 है। हमने तो सिर्फ पंच-तत्व के बारे में सुन रखा है, यह बाकी के 2 तत्व क्या है?" सुयश ने शैफाली से पूछा।

“यह पहले भाई का खंभा है। इस भाई का नाम ‘इवान’ है, इसके पास ‘अग्नि’ की शक्तियां है।" शैफाली ने पहले खंभे की ओर देखते हुए कहा।

सभी की नजर उस खंभे की ओर गयी, जिस पर इवान कोई अग्नि का हथियार हाथ में पकड़े दिखाई दे रहा था। इसके बाद शैफाली दूसरे खंभे के पास जाकर खड़ी हो गयी और सबके पास आने का इंतजार करने लगी।

“यह देवी शलाका का दूसरा भाई ‘ओरियन’ है, इसके पास ‘वायु’ की शक्तियां है।" यह बोल शैफाली किसी गाइड की तरह तीसरे खंभे के पास पहुंच गयी।

सभी फ़िर से शैफाली के पास आ गये।

“यह तीसरा भाई ‘डोरिक्स’ है, इसके पास ‘जल’ की शक्तियां है, फ़िर चौथा भाई ‘कैलीक्स’ है, जिसके पास ‘पृथ्वी’ की शक्तियां है, फ़िर पांचवे भाई का नाम ‘नेरिस’ है, जिसके पास ‘आकाश’ की शक्तियां है, फ़िर छठा भाई ‘डेल्फी’ जिसके पास ‘ध्वनि’ की शक्तियां है और आख़िर में सातवां भाई ‘नियो’ जिसके पास ‘प्रकाश’ की शक्तियां है।"

सभी मंत्रमुग्ध से शैफाली के शब्द सुनते हुए खंभो को देख रहे थे।

उधर मंदिर के द्वार पर छिपा युगाका भी आश्चर्य से शैफाली को खंभो पर लिखी विवरण को पढ़ते हुए देख रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि शैफाली ‘एरकान’ भाषा को कैसे पढ़ सकती है? वो तो ‘अटलांटियन’ है ही नहीं।"

“अच्छा तो यहां पर ‘ध्वनि’ और ‘प्रकाश’ को 2 तत्व और माना गया है।" सुयश ने कहा।

“इसका मतलब सामने चबूतरे पर खड़ी प्रतिमा जरूर शलाका की होगी? जिसे सातो भाइयो ने अपने बीच सुरक्षित रखा है।" क्रिस्टी ने मंदिर के बीच में खड़ी प्रतिमा को देखते हुए कहा।

अब सभी का ध्यान उस प्रतिमा की ओर गया। जो आधा पेड़ से ढकी होने की वजह से नजर नहीं आ रही थी।

“कैप्टन, जरा ध्यान दीजिये।" ब्रेंडन ने कहा- “उस प्रतिमा तक जाने के रास्ते में जमीन पर 7 वर्गाकार

सफेद पत्थर है। कहीं ये भी सात भाइयो के प्रतीक तो नहीं है?"

सुयश ने ध्यान से उन पत्थरो को देखा और कुछ सोचने के बाद पहले पत्थर पर कदम रख दिया।

सुयश के पहले पत्थर पर पैर रखते ही पहला पत्थर बैंगनी रंग से चमकने लगा और इसी के साथ पहले भाई ‘इवान’ का खंभा भी बैंगनी रंग का हो गया।

इसी के साथ उस खंभे से एक बैंगनी रंग की किरण निकली और शलाका की प्रतिमा को घेरे एक पेड़ पर पड़ी। रोशनी के पड़ते ही प्रतिमा के पास लगा वह पेड़ सीधा हो गया। उस पेड़ पर अब बैंगनी रंग के फूल दिखाई देने लगे।

यह देखकर असलम चीख उठा- “रुक जाइये कैप्टन। मुझे यहां पर कोई खतरा दिख रहा है? अब आप आगे मत बढिये।"

“असलम सर सही कह रहे है कैप्टन।" ब्रेंडन ने भी असलम की बात में अपनी सहमित जताई-

“आप वापस आ जाइये।"

सबको चिल्लाते देख सुयश ने अपना कदम पीछे की तरफ करना चाहा, सुयश का पैर पत्थर से उठा तो पर वह पीछे की तरफ नहीं गया। यह देख सुयश ने थोड़ा और ताकत लगायी, पर नतीजा वही रहा। सुयश पीछे ना जा सका।

“प्रोफेसर, मैं पीछे नहीं आ पा रहा।" सुयश ने अल्बर्ट की ओर देखते हुए कहा- “शायद यहां कोई ऐसी अदृश्य ताकत है जो मुझे पीछे नहीं जाने दे रही है।"

जारी रहेगा________✍️
 
#71.

यह देख अल्बर्ट चीख कर बोला- “यह किसी प्रकार का कोई तिलिस्म है। यहां खतरा भी हो सकता है।" यह सुन सुयश चुपचाप उसी पत्थर पर खड़ा हो गया।

“प्रोफेसर, ये तिलिस्म क्या होता है?" एलेक्स ने अल्बर्ट से पूछा।

“विज्ञान के प्रयोगो को अति आधुनिक तरीके से मैकेनिज्जम के द्वारा एक घटनाक्रम में बदल दिया जाता है, जो एक जादू की तरह दिखाई देने लगता है। इस मैकेनिज्जम को डीकोड करने का एक ही तरीका होता है, अगर किसी ने कोई गलत तरीका अपनाया तो वह तिलिस्म से बाहर नहीं आ सकता।

सरल शब्दो में ये समझ लो कि तुम अगर किसी कमरे में बंद हो गये हो और उस कमरे के दरवाजे पर अगर कोई नंबर वाला ताला लगा है तो तुम बिना सही नंबर को लगाये, ना तो ताला खोल सकते हो और ना ही कमरे से बाहर आ सकते हो।"

अल्बर्ट ने इतने सरल तरीके से समझाया कि एलेक्स तो क्या जॉनी की भी सब समझ में आ गया।

यह सुन तौफीक ने सुयश को कहा- “कैप्टन अगर आप वापस नहीं आ सकते तो एक बार आगे जाने की कोशिश करके देख लीजिये।"

तौफीक की बात सुन सुयश ने अपना दाहिना पैर आगे की ओर बढ़ाया और दूसरे पत्थर पर रख दिया।

तुरंत दूसरे पत्थर का रंग आसमानी हो गया। इसी के साथ शलाका के दूसरे भाई ‘ओरियन’ का खंभा भी आसमानी हो गया और उससे निकली किरण ने दूसरे पेड़ को भी सीधा कर दिया।

अब उस पेड़ पर लगे फूल भी आसमानी रंग के हो गए।

दूसरे पेड़ के सीधे होते ही शलाका की मूर्ति का चेहरा थोड़ा-थोड़ा नजर आने लगा। सुयश ने फ़िर पीछे पलटने की कोशिश की, पर वो फ़िर से पलट नहीं पाया।

अब सुयश ने फैसला कर लिया था कि उसे अब आगे ही बढ़ना है। यह सोच सुयश ने एक साथ सभी

पत्थरो को पार कर लिया। सभी साँस रोके सुयश के हर कदम पर कुछ ना कुछ नया होते देख रहे थे।

शलाका के भाईयों के सभी खंभे अब अलग-अलग रंगो से रोशन हो गये और इसी के साथ हट गये शलाका को घेरे, पेड़ रुपी सभी पर्दे।

अब सातों पेड़ पर भी अलग-अलग रंग के फूल खिल गये थे। परंतु सुयश की निगाह अब सिर्फ और सिर्फ शलाका की मूर्ति पर थी।

6 फुट की शलाका की मूर्ति संगमरमर के सफेद पत्थर से निर्मित थी।

मूर्ति के सिर पर एक सुनहरे रंग का छोटा सा मुकुट था। उसकी आँखो किसी हिरनी के समान लंबी और चमकीली थी। उसके बाल अग्नि के समान हवा में लहरा रहे थे। उसने किसी भारतीय नारी के समान, लंबी सी साड़ी अपने बदन पर लपेट रखी थी। उसने अपने दोनों हाथो को जोड़कर, उसमें एक फुटबाल के आकार का काले रंग का एक मोती पकड़ रखा था।

सभी मन्त्रमुग्ध से सुंदरता की उस देवी को निहार रहे थे।

तभी जैसे अल्बर्ट को कुछ याद आया। उसने अपनी जेब से अटलांटिस वाला सोने का सिक्का निकालकर अपने हाथ में ले लिया। उसमें बनी फोटो को अल्बर्ट ने मूर्ति से मिलाकर देखा।

“बिल्कुल वही है।" अल्बर्ट मन ही मन बड़बड़ाया- “सिक्के पर देवी शलाका की ही फोटो बनी है। इसका मतलब हम इस समय अटलांटिस में ही है।"

उधर सुयश शलाका का सौंदर्य देखने में इतना मग्न हो गया कि उसे आसपास का कुछ याद ही नहीं रह गया।

तभी सुयश को उस मूर्ति की आँखो में कुछ हरकत होती दिखाई दी। पता नहीं कितनी देर तक सुयश उस मूर्ति को देखता रहा और फ़िर उस मूर्ति की ओर बढ़ने लगा।

जैसे ही सुयश के पांव उस गोल चबूतरे पर पड़े, अचानक सारे पेड़ झूमकर देवी शलाका पर फूलो की बारिश करने लगे। सभी साँस रोके सुयश को देख रहे थे।

सुयश शलाका की मूर्ति के बिल्कुल पास पहुंच गया था। सुयश को अब उस मूर्ति से भीनी-भीनी सी खुशबू आती भी प्रतीत हो रही थी।

“रुक जाइये कैप्टन।" अल्बर्ट ने तेज आवाज में कहा।

इस बार सुयश ने बिना अल्बर्ट को देखे हुए अपना दाहिना हाथ उठाया, जो कि इस बात का संकेत था

कि वह होश में है और बाकी सभी लोग को वहीं रुकने का इशारा कर रहा है।

सुयश का संकेत समझ अल्बर्ट शांत हो गया। अब सभी साँस रोके हुए सुयश को देख रहे थे।

पता नहीं इस समय क्यों युगाका की भी साँस रुकी हुई थी।

सुयश ने धीरे से हाथ बढ़ाकर उस मूर्ति को स्पर्श कर लिया। मूर्ति को स्पर्श करने पर उसे ऐसा महसूस हुआ, जैसे वह पत्थर की मूर्ति ना होकर जीवित कोई शरीर हो।

इस अजीब मुलायम से स्पर्श से घबराकर सुयश ने अपना दाहिना हाथ पीछे खींच लिया।

अचानक सातों खम्भो से एक साथ अलग-अलग रंग की किरने निकली और सुयश के शरीर से टकराकर गायब हो गई।

इसी के साथ वहां से हज़ारों किलोमीटर दूर, अंटार्कटिका के बर्फ़ में दफन, शलाका महल में मौजूद, शलाका के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान बिखर गयी और वह धीरे से बुदबुदाई-

“मुझे तुम्हारा हज़ारों सालो से इंतजार था। आख़िर तुम आ ही गये ‘आर्यन’। अब तिलिस्मा को टूटने से कोई भी नहीं रोक सकता।"

इधर रोशनी के पड़ते ही सुयश के शरीर को तेज झटका लगा। इस झटके की वजह से सुयश 2 कदम पीछे हो गया।

यह देखकर युगाका के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गये और वह मन ही मन बड़बड़ाया-

“ये जिंदा कैसे बच गया?"

इधर सुयश के पीछे आते ही पुनः सभी पेड़ देवी शलाका की ओर झुक गये और सब कुछ पहले कि तरह सामान्य हो गया। यह देख ब्रेंडन ने भागकर सुयश को अपनी ओर खींच लिया।

“क्या कर रहे थे कैप्टन?" असलम ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “ इस द्वीप पर कोई भी चीज सामान्य नहीं है, ऐसे में किसी भी चीज को छूना खतरे से खाली नहीं है।"

“मेरे हिसाब से हमें इस मंदिर से बाहर चलना चाहिए।" एलेक्स ने कहा- “मुझे तो यह मंदिर भी तिलिस्म लग रहा है।"

एलेक्स की बात पर सभी ने सहमित जताई और सभी मंदिर के द्वार की ओर चल दिये। उन सभी को बाहर निकलता देख, युगाका मंदिर की सीढ़ियाँ उतरा और भाग कर एक पेड़ के पीछे छिप गया।

सभी मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर आ गये।

“मैंने देवी शलाका की ऐसी ही एक मूर्ति को अपने सपने में देखा था और ऐमू भी एक डोरी के द्वारा इनके हाथ से बंधा था। फ़िर इस देवी ने ऐमू की डोरी को अपने हाथ से छोड़ दिया था, जिससे ऐमू स्वतंत्र हो गया था।" शैफाली ने कहा।

एक छण के लिये सबकी आँखो में ऐमू का ख़याल आ गया।

“इसका मतलब है कि हमारे जहाज पर घट रही हर रहस्यमयी घटना का जिम्मेदार ये द्वीप ही था।" जेनिथ ने कहा।

“शायद आप लोग सही कह रहे हो।" अल्बर्ट ने यह कहकर अटलांटिस का सिक्का सुयश के हाथों में रख दिया- “यह देखिए कैप्टन, इस सिक्के पर भी देवी शलाका का ही चित्र बना है।"

सुयश ने ध्यान से सिक्के को देखा और फ़िर धीरे से सिर हिलाकर उसे अल्बर्ट को वापस कर दिया।

सुयश की आँखो में तो बस शलाका का सौंदर्य बस गया था। वह बहुत कोशिशों के बाद भी शलाका का चेहरा अपनी आँखो के आगे से हटा नहीं पा रहा था।

“यहां पर मंदिर तो है, पर एक भी इंसान यहां पर नहीं है। यह कैसे संभव हो सकता है? यहां के सारे लोग कहीं चले गये है? या फ़िर जानबूझकर हमसे छिप रहे है।" क्रिस्टी ने कहा।

“लगता है देवी शलाका के सौंदर्य के जादू ने सबको गायब कर दिया यहां से।" एलेक्स ने क्रिस्टी को चिढ़ाते हुए कहा- “जो भी हो पर देवी थी बहुत सुंदर। इतना खूबसूरत चेहरा भुलाए नहीं भूल रहा।"

“अच्छा जी! सुंदरता भुलाए नहीं भूल रही तुम्हे।"

क्रिस्टी ने गुस्से से एलेक्स को देखते हुए कहा- “सिर पर डंडा पड़ते ही सब कुछ भूल जायेगा।"

यह कहकर क्रिस्टी ने अपनी आँखे नचाते हुए एलेक्स के सिर पर धीरे से अपने हाथ में पकड़ी लकड़ी मार दी। सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

जेनिथ को क्रिस्टी और एलेक्स की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही थी। उसने एक नजर तौफीक को प्यार से देखा, पर बोली कुछ नहीं। जेनिथ की आँखो ने ही सबकुछ बोल दिया था। तौफीक की नजरें भी जेनिथ से मिली, पर उसकी आँखो के भाव बिल्कुल सपाट थे।

जेनिथ जानती थी कि तौफीक उससे प्यार तो करता है, पर वह उतना एक्सप्रेसिव नहीं है।

चलते-चलते जेनिथ ने भी धीरे से तौफीक का हाथ पकड़ लिया।

सभी फ़िर से अब आगे की ओर बढ़ गये।

रहस्यमय पिरामिड

(आज से 7 दिन पहले) 1 जनवरी 2002, मंगलवार, 08:15, अटलांटिक महासागर

“रोजर!" सुयश ने रोजर को संबोधित करते हुए कहा- “तुम तुरंत एक पायलेट के साथ इस हैलीकाप्टर से जाओ और देखो, शायद आसपास से जाता हुआ, कोई और शिप दिखाई दे जाए या फ़िर कोई और सुराग मिल जाए। जिससे यह पता चल जाए कि हम इस समय किस जगह पर है? और हां यह वॉकी-टॉकी सेट भी लेते जाओ। इससे मेरे संपर्क में रहना और मुझे सारी सूचना देते रहना।" यह कहते हुए सुयश ने जेम्स हुक से, वॉकी-टॉकी सेट लेकर, रोजर को दे दिया।

रोजर, सुयश से वॉकी-टॉकी सेट लेकर, पायलेट के साथ, हैलीकाप्टर में प्रवेश कर गया।

हैलीकाप्टर में बैठने के साथ, रोजर ने एक नजर वहां खड़े सभी लोगो पर मारी और फ़िर सुयश की तरफ देखते हुए, एक झटके से ‘थम्स-अप’ की शैली में अपना अंगूठा, जोश के साथ झटका देकर उठाया और फ़िर धीरे से पायलेट की ओर देखकर, उसे हैलीकाप्टर को उड़ाने का इशारा किया।

थोड़ी ही देर में, एक गड़गड़ाहट के साथ, हैलीकाप्टर रोजर को लेकर आसमान में था।

रोजर की नजर आसमान में चारो ओर घूम रही थी। दूर-दूर तक अथाह समुंदर के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा था।

“सर, मुझे नहीं लगता कि इतने अथाह समुंदर में, हमें ऐसी खतरनाक जगह पर कोई दूसरा जहाज नजर भी आयेगा।" हैलीकाप्टर के पायलेट ने रोजर से कहा।

“पर कोशिश करके देखने में क्या परेशानी है?" रोजर ने वॉकी-टॉकी सेट को हाथ में नचाते हुए जवाब दिया- “तुम हैलीकाप्टर को आसमान में थोड़ा और ऊंचा लो। मैं ऊंचाई से दूरबीन से देखने की कोशिश करता हू । शायद कुछ नजर आ ही जाए।"

“ठीक है सर।" यह कहकर पायलेट ने हैलीकाप्टर को थोड़ा और ऊंचे कर लिया।

लगभग 15 मिनट तक रोजर समुंदर में चारो ओर देखता रहा, पर उसे लहरो के सिवा कुछ भी नजर ना आया।

“थोड़ा और देखते है उसके बाद वापस चलते है।" यह कहकर रोजर ने पायलेट को बांयी तरफ हैलीकाप्टर को मोड़ने का इशारा किया।

10 मिनट और बीत गये, फ़िर भी कुछ नजर नहीं आया।

यह देखकर रोजर ने वॉकी-टॉकी सेट को ऑन करते हुए कहा- “हैलो-हैलो कैप्टन! क्या आप मेरी आवाज सुन रहे है? ओवर।"

“यस रोजर सर! हमें आपकी आवाज सुनाई दे रही है। ओवर!" दूसरी तरफ से असलम की आवाज सुनाई दी। असलम की आवाज सुन रोजर थोड़ा सोच में पड़ गया।

तभी रोजर को सुयश की आवाज सुनाई दी- “यस रोजर! बताओ, क्या कहना चाहते हो तुम? ओवर!" अब शायद सुयश ने वॉकी-टॉकी सेट असलम से ले लिया था।

रोजर ने सुयश कीआवाज पहचान ली। वह बोला- “कैप्टन हम लोग इस समय शिप से काफ़ी दूर आ चुके है। पर अभी दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आ रहा है। लगता है कि हम वास्तव में भटक गए है।"

पायलेट का भी पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ वॉकी-टॉकी सेट पर था।

रोजर का बोलना जारी रहा- “अब हम लोग और आगे बढ़ रहे है सर। हर तरफ सिर्फ समुद्र की लहरें ही नजर आ रही है। नीला समुद्र...... पानी ही पानी।"

जारी रहेगा_______✍️
 
Gaurav1969 ye story hamari hai, agar padhna chaho to padh sakte ho mitra :declare:
 
#72.

तभी दूर कहीं समुंदर में एक काला धब्बा सा दिखाई दिया। रोजर ने धीरे से पायलेट को हैलीकाप्टर को उस दिशा की ओर मोड़ने का इशारा करते हुए कहा- “सर हमें बहुत दूर एक काला धब्बा सा दिखाई दे रहा है। हम लोग अब उस दिशा में बढ़ रहे हैं। शायद वह कोई पानी का जहाज हो।"

पायलेट ने हैलीकाप्टर अब उस दिशा में मोड़ लिया।

थोड़ी देर रुककर रोजर ने फिर कहा- “हम लोग गलत थे सर। वह कोई जहाज नहीं, बल्कि कोई द्वीप है। अब हम लोग धीरे-धीरे उसके और पास जा रहे हैं। यह कोई छोटा सा, परंतु हरा-भरा द्वीप है।

इसके आसपास हल्कि सी धुंध दिखाई दे रही है।.................अब हम द्वीप के और पास पहुंच गए हैं सर। अचानक कुछ गर्मी बढ़ सी गई है। शायद यह द्वीप कुछ ज़्यादा ही गरम है।

क्यों की इस द्वीप से, समुद्र की ठंडी लहरें टकराकर, धुंध के रुप में आस पास फैल रही है, जो कोहरे के रुप में मुझे दूर से ही दिखाई दे रही है।................. यहां एक विचित्र सी पहाड़ी भी है। दूर से देखने पर यह कोई ताज पहने हुए मानव आकृति के समान प्रतीत हो रही है.. ..... ऐसा लग रहा है जैसे कोई योद्धा इस द्वीप की रखवाली कर रहा हो...........!

अब हम इस द्वीप के ऊपर उड़ान भर रहे हैं सर। ....... यहां किसी भी प्रकार के जीवन का कोई निशान नहीं है। हर तरफ एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। द्वीप के बीच में, एक साफ पानी की झील भी दिख रही है। देखने में यह द्वीप काफ़ी सुंदर लग रहा है सर।

ऊंचाई से देखने पर यह द्वीप एक त्रिभुज की आकृति के लिए हुए दिखाई दे रहा है। पर यह क्या सर?....ओऽऽऽ नोऽऽऽ ...... यह कैसे संभव है?....."

तभी द्वीप के चारो तरफ फैली धुंध धीरे-धीरे हैलीकाप्टर को घेरने लगी और आसमान में एक गहरे लाल रंग के बादलों की टुकड़ी उड़कर उस धुंध में समाहित हो गयी।

उस धुंध का अक्स पानी में पड़कर एक अजीब सा रंग उत्पन्न कर रहा था।

यह देख रोजर की आवाज अत्यन्त विस्मय से भर गई। इतना विचित्र नजारा देख रोजर की आँखो में खौफ साफ नजर आने लगा।

“क्या हुआ रोजर? क्या दिख रहा है तुम्हें?" वॉकी-टॉकी पर सुयश की घबरायी आवाज आयी।

“मैं समझ .....नहीं पा ......रहा हूं सर की मैं......आपको कैसे बताऊं? .......... मैं इस समय .....बड़ा अजीब सा ....महसूस कर रहा हु। ऐसा लगता है जैसे धुंध.......बड़ी तेजी से बढ़ गई है।

आसमान का रंग........समझ में ....नहीं आ ....रहा है।......पानी भी......जैसा दिखना चाहिए....... वैसा नहीं दिख रहा है....और ये क्या?......ये....ये .....यहां ये..... मुझे क्या दिख रहा है.....सर ऐसा लग रहा है .....जैसे कि हम.......।"

अभी रोजर इतना ही बोल पाया था कि तभी द्वीप से निकली एक रहस्मयी तरंग ने हैलीकाप्टर के मैकेनिजम को खराब कर दिया।

“खट् ....खट्..... खटाक।" और इसी के साथ रोजर का संपर्क सुयश से टूट गया।

“सर, हैलीकाप्टर के सारे कण्ट्रोलस एकाएक खराब हो गये हैं। शायद इस क्षेत्र में भी विद्युत चुम्बकीय तरंगे हैं।" पायलेट ने चीख कर रोजर को खतरे से आगाह किया।

हैलीकाप्टर अब किसी परकटी चिड़िया की तरह हवा में लहराने लगा। रोजर समझ गया कि अब हैलीकाप्टर को दुर्घटना होने से कोई नहीं बचा सकता।

रोजर की नजर अब द्वीप में फैले जंगल पर गयी।

घने जंगल के आगे कुछ दूरी पर रोजर को एक रेगिस्तान जैसा क्षेत्र नजर आया।

“उस तरफ ..... हैलीकाप्टर को कैसे भी उस रेगिस्तान में लैन्ड कराने की कोशिश करो।"

रोजर ने पायलेट को द्वीप के रेतीले हिस्से की तरफ इशारा करते हुए कहा- “अगर हमारा हैलीकाप्टर उधर गिरा तो जिंदा बचने की संभावनाएं ज़्यादा है।"

“मैं कोशिश कर रहा हुं सर।" पायलेट ने चीख कर कहा और हैलीकाप्टर को तेजी से नीचे करने लगा।

तभी एक धुंध ने हैलीकाप्टर के पंखे को अपने घेरे में ले लिया और पंखा नाचते-नाचते रुक गया। हैलीकाप्टर सीधे नीचे गिरने लगा। पायलेट और रोजर दोनों के ही पास अपने को बचाने के लिये बिल्कुल भी समय नहीं था।

रोजर की निगाहे अब सिर्फ और सिर्फ जमीन की ओर थी जो कि धीरे-धीरे उसके पास आती जा रही थी। तभी हैलीकाप्टर द्वीप के ऊपर मौजूद किसी अदृस्य दीवार से टकराया।

हैलीकाप्टर से बहुत तेज़ चिंगारी निकली और इससे पहले कि रोजर कुछ समझ पाता, हैलीकाप्टर घने पेडों से टकराता हुआ जमीन पर आ गया।

रोजर सीट सहित हैलीकाप्टर से निकलकर दूर जा गिरा। आवाज इतनी भयानक थी कि थोड़ी देर तक तो रोजर को कुछ समझ ही नहीं आया कि वह कहां गिरा?

लगभग 5 मिनट के बाद रोजर थोड़ा चैतन्य हो गया।

रोजर ने सबसे पहले उठकर अपने शरीर को चेक किया, पर ईश्वर की कृपा से रोजर को छोटी-मोटी खरौंच के सिवा ज़्यादा चोट नहीं आई थी। अब रोजर की निगाह अपने आसपास गयी।

“ये क्या? हैलीकाप्टर तो रेगिस्तान के क्षेत्र में गिरा था, पर यहां तो रेत का कहीं नामोनिशान तक नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है?" रोजर मन ही मन बड़बड़ाया।

तभी उसे द्वीप की अद्रस्य दीवार का ख्याल आया।

“वह अदृस्य दीवार कैसी थी? शायद उसी दीवार की वजह से यहां रेगिस्तान नजर आ रहा था।" रोजर ने आसमान की ओर देखते हुए, अपने मन में कहा।

तभी उसे हैलीकाप्टर का ख्याल आया। रोजर ने अपनी नजर इधर-उधर दौड़ाई। रोजर को कुछ दूरी पर हैलीकाप्टर के अवशेष पड़े दिखायी दिये, जिनसे धुंआ निकल रहा था।

उसे तुरंत पायलेट का ख्याल आया और यह ख्याल आते ही रोजर ने हैलीकाप्टर की ओर दौड़ लगा दी।

हैलीकाप्टर पेडों के एक झुरमुट के बीच गिरा पड़ा था।

रोजर अभी हैलीकाप्टर से थोड़ा दूर ही था कि तभी उसे हैलीकाप्टर के पीछे किसी जानवर की पूंछ दिखायी दी। यह देख रोजर तुरंत रुक कर एक पेड़ की ओट में हो गया।

अब रोजर की निगाहें हैलीकाप्टर की ओर थी।

तभी उसे एक बड़ा सा शेर दिखाई दिया, जो अब हैलीकाप्टर के अंदर की ओर जा रहा था।

रोजर के पास ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे वह शेर से लड़ सकता। इसिलये वह चुपचाप पेड़ के पीछे खड़ा शेर को देख रहा था।

थोड़ी देर बाद शेर पायलेट को मुंह में पकड़ कर बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया।

पायलेट का शरीर हवा में झूल रहा था। रोजर समझ गया कि पायलेट अब जीवित नहीं है।

शेर पायलेट के शरीर को मुंह में दबाए एक दिशा की ओर चल दिया।

शेर को पायलेट की लाश ले जाते देख रोजर को काफ़ी आश्चर्य हुआ इसिलये रोजर दबे पांव शेर के पीछे-पीछे चल दिया।

कुछ आगे जाने के बाद रोजर को पेडों के झुरमुट के पीछे एक इमारत दिखाई दी। जंगल में इमारत देख कर रोजर को हैरानी हुई।

शेर उस इमारत की तरफ ही जा रहा था। थोड़ी ही देर में ऊंचे-ऊंचे पेड़ पीछे छूट गये।

अब वह इमारत बिल्कुल साफ नजर आने लगी थी।

वह पिरामिड थे और वह भी एक नहीं बल्की 4, वह पिरामिड भी किसी धातु के बने नजर आ रहे थे।

“ये जंगल में पिरामिड कहां से आ गये? और ये शेर....ये शेर उन पिरामिड की तरफ क्यों जा रहा है?" रोजर मन ही मन बुदबुदाया।

शेर अब पिरामिड की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा था। रोजर के ये सब कुछ बहुत रहस्यमयी लग रहा था।

कुछ ही देर में शेर पिरामिड के दरवाजे तक पहुंच गया। शेर ने पायलेट की लाश वहीं दरवाजे पर रख दी।

इसके बाद शेर ने एक जोर की दहाड़ मारी, फ़िर पलट कर सीढ़ियों से उतरा और एक दिशा की ओर चल दिया।

रोजर कुछ देर तक सोचता रहा कि वह शेर के पीछे जाए या फ़िर पिरामिड के रहस्य को देखे।

पिरामिड तो अपनी जगह से हिलना नहीं था, इसिलये रोजर ने शेर के पीछे जाने का फैसला कर लिया।

तब तक शेर कुछ आगे तक जा चुका था। रोजर पेड़ के ओट लेते हुए शेर का पीछा करने लगा।

चलते-चलते जंगल का क्षेत्र खत्म होने लगा और पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो गया। मौसम में भी अब ठंडक का अहसास होने लगा था।

तभी रोजर को एक पहाड़ से झरना गिरता हुआ दिखाई दिया। शेर उस झरने के पास जाकर रूक गया।

शेर ने रूकने के बाद एक नजर चारो ओर मारी और फ़िर ना जाने क्या किया, कि शेर का शरीर धीरे-धीरे इंसान में बदल गया।

अब शेर की जगह एक लंबा-चौड़ा इंसान खड़ा दिखाई देने लगा। रोजर यह देख कर पूरी तरह से घबरा गया। रोजर का दिल अब बहुत तेज ‘धक-धक’ करने लगा।

रोजर के देखते ही देखते, वह इंसान झरने के अंदर प्रवेश कर गया। शायद झरने के अंदर कोई रास्ता था।

रोजर काफ़ी देर तक वहां खड़ा कुछ सोचता रहा। बहुत देर सोचने के बाद अब रोजर ने झरने के अंदर जाने का निर्णय कर लिया।

रोजर ने एक नजर चारो ओर मारी और धीरे-धीरे चलता हुआ झरने तक पहुंच गया। झरने के दूसरी तरफ कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

रोजर ने अपना एक हाथ झरने के अंदर डाला, उसे महसूस हुआ कि झरने के अंदर कोई रास्ता छिपा है। यह सोच रोजर झरने के अंदर प्रवेश कर गया।

झरने के दूसरी तरफ एक गुफा थी। गुफा प्रकाशमान थी। रोशनी गुफा में कहां से आ रही थी, यह पता

नहीं चल पा रहा था।

रोजर सधे कदमों से गुफा के अंदर की ओर चल दिया। गुफा अंदर से काफ़ी चौड़ी थी।

कुछ आगे जाने के बाद रोजर को गुफा में सामने की ओर 3 रास्ते दिखायी दिये।

रोजर को समझ नहीं आया कि वह सिंह मानव किस दिशा में गया था। अतः वह अंदाजे से बीच वाले रास्ते की ओर चल दिया। बीच वाला रास्ता आगे जाकर संकरा हो गया।

5 मिनट तक उस रास्ते पर चलने के बाद रोजर को पहाड़ में एक दरवाजा बना दिखाई दिया।

रोजर ने सतर्कता के साथ उस दरवाजे के अंदर कदम रखा। वह रास्ता एक विशालकाय कमरे में खुल रहा था।

यह कमरा अत्यन्त विशालकाय और खूबसूरत था। दीवार पर सुनहरी धातु की परत चढ़ी थी और उस परत पर भिन्न-भिन्न प्रकार के रत्न सजे थे। कमरे के बीच में एक सुनहरी धातु का शानदार पलंग रखा था। एक नजर में यह किसी रानी का शयनकक्ष नजर आ रहा था।

रोजर ये सब देखकर हत्तप्रभ रह गया।

तभी रोजर को किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। आहट सुनते ही रोजर एक बड़े से लकड़ी के संदूक में छिप गया। संदूक में एक छोटा सा सुराख था, जिससे रोजर को बाहर का सब कुछ दिखाई दे रहा था।

कमरे में आने वाले 2 लोग थे। पहली एक खूबसूरत सी लड़की थी, जिसने रानियों की वेशभूषा धारण कर रखी थी। उसके हाथ में जादूगरों की तरह एक लकड़ी का दंड था। उस दंड के ऊपरी कोने पर एक नीले रंग का कोई रत्न लगा था।

दूसरा इंसान ऊपर से नीचे तक काले वस्त्र पहने हुए था। उसके सिर पर एक भी बाल नहीं था। उसने भी अपने हाथ में एक सर्प के समान मुड़ी हुई, लंबी सी छड़ी ले रखी थी।

“तुम्हें अब सामरा राज्य में जाने की तैयारी शुरू करनी चाहिए ‘आकृति’, मेरी ज्योतिषी गणना के अनुसार ‘तिलिस्मा’ को टूटने में अब ज्यादा दिन शेष नहीं हैं। तब तक तुम्हें सामरा वासियौ को अपने अधिकार में लेना ही होगा।" मकोटा ने कहा।

जारी रहेगा_______✍️
 
#73.

“पर आप ही तो कहते हैं, कि सामरावासी दिमाग से अत्यन्त चतुर हैं। ऐसे में मैं उन्हे ‘देवी शलाका’ बनकर कैसे बेवकूफ बना पाऊंगी। जबकि मेरे पास तो देवी जैसी कोई शक्ति भी नहीं है। ऐसे में सामरावासी मुझे तुरंत पहचान जायेंगे।" आकृति ने मकोटा को देखते हुए कहा।

“तुम्हारा चेहरा देवी शलाका से बिल्कुल मिलता है और मैंने तुम्हें अपना ‘नीलदंड’ भी दे दिया है। ऐसे में कोई भी तुम्हें पहचान नहीं पायेगा।

वैसे भी मैं सदैव तुम पर अपनी गुप्त शक्तियो से नजर रखे रहूँगा और समय आने पर तुम्हारी सुरक्षा भी करुंगा।" मकोटा ने आकृति को साँत्वना देते हुए कहा।

“ठीक है मैं तैयार हूँ। आप जब कहेंगे मैं सामरा राज्य चली जाऊंगी। वैसे “ऐमू” का कुछ पता चला क्या? वह 2 दिन से गायब है, पता नहीं कहां चला गया।" आकृति ने कहा।

“ऐमू का अभी कुछ नहीं पता। जैसे ही कुछ पता चलेगा, मैं तुम्हें बता दूंगा। अच्छा अब मैं चलता हूँ, किसी चीज की जरुरत हो तो मुझे बता देना।" यह कहकर मकोटा कमरे से बाहर निकल गया।

मकोटा के बाहर निकलते ही आकृति ने कमरे का द्वार बंद करके अपने नीलदंड को वहीं दीवार पर टांग दिया और आराम से आकर अपने बिस्तर पर लेट गयी।

इधर संदूक में छिपे रोजर को मकोटा और आकृति की कोई भी बात समझ में नहीं आयी। वह तो परेशान था कि अब वहां से भागे कैसे? तभी रोजर को आकृति की आवाज सुनाई दी- “अब संदूक से बाहर आ जाओ रोजर, मकोटा यहां से चला गया है।"

रोजर, आकृति की यह बात सुन आश्चर्य से भर गया। एक क्षण के लिये रोजर ने कुछ सोचा और फ़िर

संदूक से निकलकर बाहर आ गया।

अब रोजर की नजर आकृति पर थी।

आकृति ने रोजर को पास रखी एक कुर्सी की ओर बैठने का इशारा किया।

रोजर वहां रखी कुर्सी पर बैठ गया और सवालिया निगाहोंसे आकृति की ओर देखने लगा।

आकृति के चेहरे पर मुस्कुराहाट के भाव थे। उसने रोजर से अब बोलने का इशारा किया।

रोजर तो जैसे सवालों के बोझ से दबा हुआ था। आकृति का इशारा मिलते ही उसने बोलना शुरु कर दिया।

“आप कौन हो? मकोटा कौन है? मैं इस समय पर किस जगह पर हूँ? और आप मेरा नाम कैसे जानती हो?" रोजर ने एक साथ असंख्य सवाल पूछ डाले।

आकृति ने एक गहरी साँस भरी और फ़िर बोलना शुरु कर दिया-

“मेरा नाम आकृति है, मैं इंडिया से हूँ। मैं इस क्षेत्र के पास से, एक बार एक पानी के जहाज से जा रही थी। तभी मेरा जहाज मकोटा ने अपनी शैतानी शक्तियों से डुबो दिया।

सारे लोग मारे गये, केवल मैं और मेरा तोता ऐमू ही इस हादसे में बच पाये। मुझे पकड़कर मकोटा ने इस द्वीप पर कैद कर दिया। बाद में मुझे पता चला कि मेरा चेहरा इस द्वीप की देवी शलाका से मिलता है। इसीलिये मकोटा ने मुझे बचाया था।"

इतना कहकर आकृति एक क्षण के लिये रुकी और फ़िर बोलना शुरु कर दिया-

“जिस द्वीप पर तुम खड़े हो, इसका नाम अराका है। यह द्वीप अटलांटिस का अवशेष है। इस द्वीप पर दो प्रजातियां रहती हैं। एक का नाम सामरा है और दूसरे का सीनोर।

तुम इस समय सीनोर राज्य में खड़े हो। मकोटा इस द्वीप का एक खतरनाक मान्त्रिक है, जो अंधेरे के देवता ‘जैगन’ की पूजा करता है।

इस द्वीप की देवी का नाम शलाका है, जो पिछले 5000 वर्ष से पता नहीं कहां गायब है? शलाका की सारी शक्तियां एक काला मोती में है जो कि इसी द्वीप पर मौजूद ‘तिलिस्मा’ में है। मकोटा मेरी सहायता से वह काला मोती प्राप्त करना चाहता है।" इतना कहकर आकृति खामोश हो गयी।

“तुम मेरा नाम कैसे जानती हो?" रोजर के शब्दो में उलझन के भाव नजर आये।

“मकोटा ने मुझे काफ़ी शक्तियाँ दे रक्खी है, जिस्में से कुछ का इस्तेमाल में कभी-कभी अपने लिये भी कर लेती हूं। उनमें से ही एक शक्ति का इस्तेमाल करने पर मुझे तुम हैलीकाप्टर में दिखाई दिये। मेरी ही शक्तियो से तुम उस दुर्घटना से बच पाये हो।" आकृति ने कहा।

“आसमान में वह धुंध और द्वीप के ऊपर वह दीवार कैसी थी?" रोजर ने पूछा।

“वह धुंध और अदृश्य दीवार, इस द्वीप की सुरक्षा के लिये है। उस अदृश्य दीवार की वजह से किसी को भी सामरा और सीनोर द्वीप आसमान से दिखाई नहीं देते। यहां तक कि कोई बाहरी व्यक्ती जमीन के रास्ते से सामरा और सीनोर राज्य में दाख़िल भी नहीं हो सकता।" आकृति ने समझाया।

“सीनोर द्वीप पर वह पिरामिड कैसा है? और वह शेर से इंसान में बदल जाने वाला मानव कौन था? उसने मेरे पायलेट की लाश उस पिरामिड के बाहर क्यों रखी?" रोजर ने एक बार फ़िर प्रश्नो की बौछार कर दी।

“वह पिरामिड अंधेरे के देवता ‘जैगन’ का पूजास्थल है। वहां जैगन मृत इंसानो पर कोई प्रयोग करता है। जिसका पता मुझे नहीं है। इसीलिये मकोटा हर इंसान की लाश को पिरामिड के बाहर रखवा देता है, जिसे बाद में जैगन अपने सेवक ‘गोंजालो’ के द्वारा पिरामिड के अंदर मंगवा लेता है और वह शेर बना इंसान सीनोर का राजकुमार ‘लुफासा’ है, जिसके पास किसी भी जानवर में बदल जाने की शक्ति है।“आकृति ने कहा।

“अब आखरी प्रश्न। तुम्हारे पास इतनी शक्तियां है, फ़िर तुमने मुझे क्यों बचाया? मुझसे तुम्हारा क्या काम हो सकता है?" रोजर ने आिखरी सवाल किया।

“हूं..... ये सवाल सही पूछा तुमने।" आकृति ने रोजर की तारीफ करते हुए कहा- “दरअसल बात ये है कि मेरे पास जितनी भी शक्तियां हैं, वो सब मकोटा की दी हुई हैं। मैं उन शक्तियो का प्रयोग तो कर सकती हूं, पर इस स्थान से मकोटा की इच्छा के बिना कहीं जा नहीं सकती।

मुझे ये मकोटा के द्वारा पता चल गया है कि तुम्हारे जहाज ‘सुप्रीम’ में कुछ ऐसे लोग हैं, जो कि इस द्वीप पर मौजूद तिलिस्मा को तोड़ पाने में सक्षम हैं, पर वह इस द्वीप पर आना नहीं चाहते। तो तुम्हे उन्हें भटकाकर इस द्वीप पर लाना पड़ेगा।"

“ये कैसे संभव है? अभी तुम्हीं ने कहा कि सामरा और सीनोर राज्य एक अदृश्य दीवार से घिरा है, जिसके आरपार जाना इंसानों के बस की बात नहीं, तो मैं भला इस दीवार को जमीन के रास्ते से कैसे पार कर पाऊंगा? और फ़िर सुप्रीम तक कैसे पहुंचुंगा?" रोजर ने अपनी परेशानी को आकृति के सामने रखा।

“वो तुम मेरे ऊपर छोड़ दो।" आकृति ने कहा- “मैं मकोटा की शक्तियो से तुम्हें एक ‘ऊर्जा-मानव’ में बदल दुंगी। ऐसी स्थिति में तुम कुछ बोल नहीं पाओगे पर तुममें द्वीप से बाहर जाकर पानी पर दौड़ने की शक्तियां आ जायेंगी।

ऐसे में तुम सुप्रीम तक आसानी से पहुंच जाओगे। तुम्हें सुयश को देखकर द्वीप की दिशा की ओर इशारा करना है। ऐसा करने पर सुयश सुप्रीम को इस द्वीप की दिशा में मोड़ देगा और पास आने पर हम उसे इस द्वीप पर लेते आयेंगे।"

“तुम कैप्टन सुयश को कैसे जानती हो?" रोजर के शब्द उलझन से भरे थे।

यह प्रश्न सुन आकृति के चेहरे पर एक रहस्य भरी मुस्कान आ गयी, पर उसने कहा कुछ नहीं।

रोजर समझ गया कि आकृति उसे बताना नहीं चाहती इसिलये उसने ज़्यादा जोर नहीं दिया। रोजर समझ गया कि इस द्वीप को जितना साधारण वो समझ रहा था, उतना साधारण ये द्वीप है नहीं।

रोजर को सोचते देख आकृति ने फ़िर कहा- “देखो रोजर, यहां पर मैं भी कैदी हूं और तुम भी। यहां तक कि इस क्षेत्र से ‘सुप्रीम’ भी अब बाहर नहीं निकल सकता और हम सभी के बचने का एक ही तरीका है कि यह तिलिस्मा टूट जाये।

तिलिस्मा के टूटते ही हम सभी आजाद हो जायेंगे। यहां तक कि बारामूडा त्रिकोण का क्षेत्र भी हमेशा-हमेशा के लिये मुक्त हो जायेगा। तो अब ज़्यादा सोचो नहीं, बस हां कर दो।"

यह सुन रोजर ने हां में सिर हिला दिया।

“ठीक है फ़िर तुम अभी आराम करो, समय आने पर मैं तुम्हें बता दुंगी।" यह कहकर आकृति रोजर को एक दूसरे कमरे में ले गयी और आराम करने को बोल वहां से चली गयी।

इस समय रोजर काफ़ी थकान महसूस कर रहा था इसिलये वह बेड पर लेट कर सो गया।

चैपटर-6 आदमखोर पेड़ (8 जनवरी 2002, मंगलवार, 16:30, मायावन, अराका)

चलते-चलते काफ़ी समय बीत गया था। सभी एक साथ चल रहे थे। जंगल में कोई रास्ता ना बना होने के कारण सभी अपने हाथ में पकड़ी लकड़ी से, झाड़ियो को हटाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

“पता नहीं ये द्वीप इतना विचित्र क्यों है? और पूरी पृथ्वी पर ऐसे पेड़ और जानवर क्यों नहीं पाये जाते?" अल्बर्ट ने कहा।

“मुझे लगता है कि इन विचित्रताओँ के पीछे कोई ना कोई कारण तो जरूर है?" तौफीक ने कहा- “पता नहीं क्यों मुझे ये सारी चीजे नेचुरल नहीं लग रही हैं। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने यह सब कुछ बनाकर यहां रख दिया हो?"

“ऐसी चीजे तो सिर्फ ईश्वर ही बना सकता है, मनुष्यो के तो बस में नहीं है ऐसी चीज़ो को बना पाना।" जेनिथ ने कहा।

“ईश्वर क्या है? क्या कोई बतायेगा?" अल्बर्ट ने एक बिलकुल विचित्र प्रश्न कर दिया।

किसी की भी समझ में नहीं आया कि अल्बर्ट क्या कहना चाह रहा है। इसिलये सभी चुप रहे।

अल्बर्ट ने सबको शांत देख स्वयं से ही ईश्वर की परिभाषा बताना शुरु कर दिया-

“ईश्वर वो है, जिसने हमको बनाया, यानी कि अगर हममें इतना ज्ञान आ जाये कि हम किसी जीव का निर्माण करने लगे, तो लोग हमारी भी तुलना ईश्वर से करने लगेंगे।

पर मुझे ये लगता है कि इस द्वीप की चीजे ईश्वर ने नहीं, बल्की हमारी ही तरह के किसी मनुष्य ने अपने ज्ञान और विज्ञान से की है। क्यों की ईश्वर द्वारा निर्मित हर वस्तु और जीव, कुछ सिद्धांतो पर काम करते है, पर यहां की हर वस्तु और जीव ईश्वर के सिद्धांतो से अलग दिख रही है। जैसे कि पेडों का स्वयं हरकत करना, उनका इंसान की भावनाएं समझ जाना, जीव के अंदर पानी को बर्फ में बदल देने की ताकत आदि।"

मगर इससे पहले कि कोई अल्बर्ट से कुछ पूछ पाता कि तभी वातावरण में एक आवाज गूंजी-

“दोस्त मिल गया.... दोस्त मिल गया....ऐमू का दोस्त मिल गया।"

ऐमू की आवाज सुन सभी की दृष्टि आसमान की ओर गयी। ऐमू सुयश के सिर के ऊपर हवा में गोल-गोल उड़ रहा था।

“यह ऐमू इस द्वीप पर कैसे आ गया?" असलम ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “यह तो शिप के डूबने के काफ़ी पहले ही गायब हो गया था।"

ऐमू अब सुयश के हाथ पर आकर बैठ गया- “अब ऐमू को छोड़ के मत जाना दोस्त। तुम बार-बार ऐमू को छोड़ के चले जाते हो।"

ब्रेंडन ऐमू को देख गुस्से से भर उठा- “मैं आज इस ऐमू के बच्चे को मारकर सारा किस्सा ही ख़त्म कर

देता हूँ। इसी के बताए रास्ते पर चलने की वजह से हमारा शिप डूब गया। यही है सारे मुसीबत की जड़।"

पर इससे पहले कि ब्रेंडन कुछ कर पाता, सुयश ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया।

अब सुयश की निगाहें पुनः ऐमू पर थी।

“तुम मुझे बार-बार दोस्त क्यों कहते हो?" सुयश ने ऐमू को देखते हुए पूछा।

“क्यों कि मैं ऐमू और तुम ऐमू के दोस्त।" ऐमू ने सुयश को देखते हुए भोलेपन से कहा।

“अच्छा ठीक है, तुम दोस्त ही हो।" सुयश ने मस्कुराते हुए कहा- “पर तुम इस द्वीप पर कैसे आये?"

“आकी ने बोला, आरू के पास जाओ। मैं आ गया।" ऐमू ने कहा।

ऐमू की बात सुन सबके चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गये।

“कौन ‘आरू’? कौन ‘आकी’?" सुयश ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा।

“आरू की आकी। तुम आरू। मैं आरू का दोस्त ।" ऐमू ने इस बार सुयश की आँखो में झांकते हुए कहा।

“पर मैं तो सुयश हूँ।" सुयश ने कहा- “मैं आकी को नहीं जानता।“

“तुम सब जानते .... तुम ऐमू के दोस्त।" यह कहकर ऐमू फ़िर से हवा में अपने पंख फड़फड़ाकर उड़ने लगा।

अब सुयश की नजर अपने आसपास खड़े सभी लोग पर गयी।

“मुझे लगता है कि ये ऐमू किसी गलतफहमी में है। यह मुझे अपना मालिक समझ रहा है।" सुयश ने इस बार अल्बर्ट की ओर देखते हुए कहा।

“आप सही कह रहे हो कैप्टन।" अल्बर्ट ने कहा- “मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है।"

“पर जो भी है कैप्टन अंकल, मुझे लगता है कि यह ऐमू आगे चलकर हमारे बहुत काम आने वाला है।" शैफाली ने कहा।

जारी रहेगा________✍️
 
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