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प्रकाळा – जो आज्ञा गुरुदेव, तो मेरी व्यथा का कारन है दो नवजवान बच्चो की असमय मृत्यु जो बेहद दुखद और दिल को चीयर देने वाला वाकया है. अभी कुछ दिन पहले जो कुछ भी तिलिस्म नगरी में हुआ उससे निश्चित hi आप भी अनजान नहीं होंगे. उस लड़ाई ने मुझे विचलित कर दिया है दो परिवारों के दो जवान और जांबाज़ बच्चे इस तरह चले गए. वो भी उस वक़्त जब वो दोनों hi अपने आने वाले सुनहरे भविष्य के सपने बन रहे थे. ये बात मुझसे सहन नहीं हो रही है. देव सिंह और राजकुमारी पूनम सच में बहोत बहादुर थे जिन्होंने मरते मरते भी न सिर्फ उस दुष्ट का खत्म किया, बल्कि अपनी नागरियो को भी सुरक्षित कर गए और उन्ही की वजह से हम भी सुरक्षित हो गए. क्यों की उनकी नागरियो को पार किये बैन कोई मुसीबत हम तक पहुंच hi नहीं सकती. अब वो दोनों नगरीय तो सुरक्षित हो गयी साथ hi हम भी सुरक्षित हो गए. और ये सब हुआ उस समय जब के वो तैयार भी नहीं थे ऐसे युद्ध के लिए. सोचिये यदि वो दोनों पूरी तयारी के साथ मैदान में खड़े हो जाते तो भला ऐसा कौन है इस सृष्टि में जो उन्हें हरा पता, अचानक हुए हमले के बावजूद भी उस मन्त्रिक को उन्होंने मार डाला जो खुद पूरी तयारी से आया था. यदि वो ललकार के आता तो भला क्या hi मार पता वो देव सिंह और पूनम को, ये तो वो वीर बच्चे थे जिन्होंने अपने प्राणो की आहुति दे कर दोनों नागरियो को बचा लिया वार्ना उस दुष्ट की योजना तो दोनों नगरी वासियो को ख़तम करके खुद वह राज करने की थी. यदि ऐसा होता तो शायद मुसीबत हमसे ज्यादा दूर नहीं थी. क्यों की उस की बाद वो मन्त्रिक वही नहीं रुकता बल्कि हम सबके लिए भी समस्या hi कड़ी करता. क्यों की हवस तो कभी बुझती hi नहीं चाहे हो जिस्म की हो या सत्ता की. और उस दुष्ट की इस घिनौनी हवस का अंजाम क्या होता कोई नहीं जनता. एक तरह से जाने अनजाने उन बच्चो ने हमें भी सुरक्षित किया है. पर विधि का विधान देखिये जिन दो बच्चो की वजह से आज हम सब सुरक्षित महसूस कर रहे है न तो हम उनकी कोई सहायता कर पाए न hi उनका धन्यवाद. देखा जाये तो ये राज पैट ये राज सिंघासन सब उन्ही की दी हुई भेंट है अब मेरे लिए. यदि वो दोनों अपने जीवन की आहुति दे कर उस दुष्ट का खत्म न कर देते तो हमारे लिए भी कोई काम मुश्किलें न कड़ी होती आने वाले भविष्य में.
गुरुदेव – तुम बेहद संवेदनशील हो प्रकाळा और एक अच्छा ह्रदय भी रखते हो. तुम्हारी यही सच्चाई शायद उस प्रभु ने सुन ली है. और मए अब जो तुम्हे बताने जा रहा हु उसे सुन कर अवश्य hi तुम्हे बेहद प्रसन्नता होगी.
प्रकाळा - मुश्किल है गुरुदेव क्यों की अभी हम इतने व्यथित है की कोई भी बात हमें ख़ुशी नहीं दे सकती इन होठो पे मुस्कान नहीं ला सकती किन्तु फिर भी बताइये ऐसी क्या बात है गुरुदेव जिससे आपको लगता है के हमें जान कर प्रसन्नता होगी.
गुरुदेव – हे राजन तुम्हारे दुखी ह्रदय का मरहम hi लाये है हम, राज कुमार देव और राजकुमारी पूनम मरे नहीं है.
प्रकाळा चौंकते हुए उठ खड़े हुए – क्या??? क्या कहा आपने गुरुदेव क्या सच में गुरुदेव मेरे कानो ने यही सुना के दोनों बच्चे जीवित है? लेकिन उनके माता पिता ने तो हमें बताया के वो दोनों….
गुरुदेव – उन्होंने भी सच hi बताया तुम्हे.
प्रकाळा - ये कैसी पहेली है गुरुदेव?
गुरुदेव – असल में वो दोनों बच्चे अपना शरीर तो छोड़ hi चुके है किन्तु जिस पशुपतिनाथ की साजिशो के चलते नगरी में लड़ाई छिड़ी थी उसे इन बच्चो की मौत ने तोड़ दिया और वो पछतावे की आग में जलने लगा.
बहोत रोया गिड़गिड़ाया और अपने पापो की माफ़ी भी मांगी लेकिन उसे बड़ी ताक़तों ने श्राप दिया की उसकी सजा ये hi है के अब उसे मुक्ति नहीं मिलेगी किसी भी तरह से चाहे वो तप करे या जप. जब उसने कई बार अपनी गलती की क्षमा मांगी तो भोलेनाथ ने प्रसन्न हो कर उस पर दया की और उसे कहा के देव और पूनम की आत्माओ को ढूंढे और उन्हें तपस्या में लीं कर दे और उन्हें इतना शक्तिशाली बना दे के जब उनके दुबारा जनम लेने का समय आये तब तक वो पूरी तरह से तैयार हो चुके हो. और ऐसा hi पशुपतिनाथ ने किया और अब वो दोनों पवित्र आत्माये यानि देव और पूनम दोनों hi उस पशुपतिनाथ की शरण में है जिसे उसने किसी गुप्त स्थान पे रखा है जिससे के उनकी साधना में कोई व्यवधान न आये. और वो आने वाले युद्ध के लिए खुद को तैयार कर सके.
प्रकाळा - ये तो बेहद ख़ुशी की बात है गुरुदेव पर क्या ये सब बाटे उनके माता पिता नहीं जानते?
गुरुदेव – पहले नहीं जानते थे किन्तु ईश्वर के आदेश से पशुपतिनाथ ने उन टूटे हुए माँ बाप को ये खुशखबरी दे दी है और अब वो लोग भी अपने बच्चो की वापसी का इंतजार कर रहे है. जो कुछ वक़्त के बाद उनसे यही आके मिलेंगे.
प्रकाळा – आपने बहोत बड़ी खबर सुनाई है मुझे गुरुदेव मए खुद उस दुःख से बहार नहीं निकल प् रहा था. आपने सच hi कहा था के हमे प्रसन्नता होगी आज आपकी ये बात सुन कर हम बेहद प्रसन्न है गुरुदेव इससे बड़ी खुशखबरी तो कोई हो hi नहीं सकती. ईश्वर का लाख लाख धन्यवाद के वो दोनों बच्चे सही सलामत वापसी की रह पे चल पड़े है. कुछ समय बाद hi सही किन्तु वो आएंगे. किन्तु आपने ये नहीं बताया के अपनी इतनी व्यस्तता से समय निकल के स्वयं यहाँ आने का कष्ट क्यों किया?
गुरुदेव – वही बताने जा रहा हु पुत्र suno.jis देव और पूनम के लिए तुम इतने व्याकुल हो गए थे जब वो दुबारा जनम ले कर आएंगे तब तुम्हे उनसे मिलने का मौका मिलेगा. यही नहीं तुम उनकी सहायता करने के इच्छुक थे न तो अब तुम्हारा ये दायित्व है के तुम्हे उनकी सहायता का मौका उस वक़्त मिलेगा.
प्रकाळा – ये तो मेरे लिए गर्व की बात है गुरुदेव बताइये मुझे क्या करना होगा?
गुरुदेव – प्रकाळा मए तुम्हे एक चीज़ देने जा रहा हु जिसे तुम्हे देव को देना है और ………………….
वर्तमान
प्रकाळा – और फिर मेरे गुरुदेव ने मुझे कुछ दिया और साडी बात समझा दी
रूद्र – लेकिन प्रेतराज ऐसा क्या दिया उन्होंने आपको.
प्रकाळा – रूद्र उन्होंने मुझे ये दिया है

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