Fantasy इच्छाधारी देव - Page 44 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

थैंक यू वैरी मच आल फ्रेंड्स फॉर योर रेविएवस ी एग्री अपडेट अब पहले की तरह जल्दी नहीं आ पते बूत स्टिल आ रहे है स्टोरी रनिंग कंडीशन में है दुसरो की तरह बंद नहीं हुई न होगी ये मए बता hi चूका हु पहले. अब हर बार मए एक्सप्लेन नहीं कर सकता की मेरी प्रॉब्लम एंड आल. सो हैवे फन स्टोरी में स्पीड भी आ जाएगी जब हम अपनी पोजीशन सेट कर लगे. लेकिन तब तक भी स्टोरी में उपदटेस आते hi रहेंगे है कभी स्लो तो कभी फ़ास्ट. बूत जो दोस्त हमें छोड़ गए है ैतुल्ली वो छोड़ के नहीं गए है वो भी अब तक स्टोरी तो पढ़ hi रहे है बस रपल्य नहीं करते कोई न, जब उनका मन हो वो रिप्लाई कर सकते है अपना रिव्यु शेयर कर सकते है हमें अच्छा hi लगेगा. सो गयुस लेटस कंटिन्यू थे स्टोरी अपडेट बस थोड़ी hi देर में दे देंगे.
 
अपडेट – 255

रूद्र – नहीं धन्ना उस महल की कीमत इतनी नहीं जितनी तुम सोच रहे हो.

धन्ना - माफ़ी हुजूर मए अनपढ़ गवर हु इसीलिए 10-20 हजार शायद ज्यादा बोल गया आप जो चाहे दे दीजिये मुझे कुछ नहीं पता उसकी कीमत के बारे में.

देवा मुस्कराते हुए – अरे पागल इसके कहने का मतलब था के तूने जो कीमत बोली उससे कही ज्यादा है उसकी कीमत. है ये अलग बात है के जो उसकी सही कीमत होगी वो इसीलिए अब मायने नहीं रखती क्युकी वो शहर से दूर भी है और भूतिया भी इसीलिए उसकी कोई कीमत नहीं रह गयी है मार्किट में. लेकिन मए तुम्हे उसकी सही कीमत देना चाहता हु वो भी जो तू चाहे.

धन्ना ने एक नजर अपनी बीवी पे डाली जो बस अब तक सुन रही थी लेकिन उसकी भी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

देवा - तुम hi बताओ कितना लेना चाहोगे उस महल का …… देवा ने धन्ना की बीवी से कहा

……….. मेरा पति सही कह रहा है हुजूर हम अनपढ़ गवर लोग है हमें अपना नाम लिखने के आलावा कुछ आता hi नहीं. हमें क्या पता उसकी कीमत कितनी होगी जब से शादी कर के आयी हु मेरे पति ने एक बार मुझे वो महल दिखाया था वो भी बहोत दूर से. धन्ना की बीवी ने नजरे झुका के कहा.

रूद्र - चलो ठीक है अगर तुम लोग नहीं बता सकते तो मए कुछ कहु?

अब सभी रूद्र की तरफ देखने लगे

रूद्र - देखो भाई धन्ना हम तुम्हे उस महल के 10 करोड़ देंगे. इतना काफी है?

…………..10 करोड़ का नाम सुन कर धन्ना और उसकी बीवी के मुँह और आंखे फैट गयी वो दोनों कभी रूद्र को देखते कभी एक दूजे को.

धन्ना – मालिक आप ये क्या कह रहे है इतना बड़ा मजाक? भला उस खंडहर के लिए आप हमें 10 करोड़ क्यों देंगे? नहीं मालिक मुझे जीते जी मत मारिये मुझे दिल का दौरा पद जायेगा अभी.

देवा – रूद्र सही कह रहा है. तुम्हे मंजूर है तो बोलो?

धन्ना – हुजूर आप भगवन हो मेरे लिए मेरी 7 पुष्टि आप के पैर धो कर पीये तो भी काम है मए तो 10-20 हजार बोल रहा था आप 10 करोड़ बोल कर भी मुझसे पूछ रहे है?

देवा – वो इसीलिए क्यों की तुम जानो या न जानो लेकिन हम जानते है के ये भी उस महल की असली कीमत नहीं है. पर तुम कुछ बता नहीं प् रहे हो तो ठीक है सुनो, उस महल के बदले में हम तुम्हे देंगे 10 करोड़, ये बांग्ला जिसमे तुम बैठे हो, इसकी हर एक चीज़, इसके गेराज में कड़ी हुई कार. और उस महल में जब होटल बन जायेगा तो तुम अपने परिवार के साथ या किसी के भी साथ जब चाहो जितने दिन चाहो आकर रह सकते हो खा पी सकते हो, पूरे मजे कर सकते हो वो भी बिलकुल फ्री. वह तुम्हारे लिए एक आलीशान कमरा हमेशा तैयार और खली मिलेगा चाहे महल पूरा क्यों न भरा हो तुम्हारा रूम हमेशा वह खली रहेगा और उसकी चाबी भी हमेशा तुम्हारे पास रहेगी वह आने के लिए तुम्हे किसी से पूछने की जरूरत नहीं जब चाहो आओ जब चाहो जाओ जो खाना पीना है खाओ पियो. वो चाबी तुम्हे जल्द hi मिल जाएगी. कुछ और चाहिए तो वो भी बता दो?

धन्ना तुरंत उठा और देवा के पैरो में लेट गया. – मेरे भगवन मुझे माफ़ कीजिये मैने आपको पहचाना नहीं आप इतना देने के बाद भी मुझसे पूछ रहे है मेरी क्या औकात है के मए कुछ मांगू? मए 70 जनम में इतना न बना पता जो आपने मुझे इस 1 घंटे में दे दिया है. आपने मुझसे तो कुछ लिया hi नहीं सिर्फ दिया hi दिया है. और ऐसा तो भगवन hi कर सकता है आप जरूर भगवन या कोई देवदूत hi है.

देवा – उठो धन्ना ऐसा नहीं करते, तुम गलत समझ रहे हो मैने तुम्हे कुछ नहीं दिया ये सब तुम्हारे उन्ही पूर्वजो का आशीर्वाद है उन्ही की संपत्ति है जो आज तुम्हे मिल रही है मए ये सब देकर तुम पर कोई अहसान नहीं कर रहा हु. मए तो उस महल की कीमत दे रहा हु जो तुम्हारा hi है तुम्हारे पूर्वजो ने तुम्हे दिया है अगर आभार मन्ना है तो अपने पूर्वजो का मनो जिनके लिए अभी तुम कह रहे थे की उन्होंने तुम्हे कुछ नहीं दिया और वो महल एक अभिशाप है तुम्हारी जिंदगी का.

धन्ना का रो रो कर चेहरा भीग गया था आँखे लाल हो गयी थी उसकी बीवी की भी आँखे रोने से लाल हो गयी थी. अब ये आंसू उनकी ख़ुशी के थे या अपने उन शब्दों के लिए थे जो उन्होंने अपने पूर्वजो के लिए थे ये वही जाने

देवा – लेकिन उस महल के आलावा भी मुझे एक चीज़ चाहिए तुमसे.

धन्ना – मालिक मेरा पूरा परिवार आपका गुलाम बन कर रहेगा मए, मेरी बीवी, मेरी बेटी सब.

देवा – नहीं धन्ना तुम लोग मेरे गुलाम क्यों बनोगे. तुम सब आजाद थे और आज़ाद hi रहोगे. किसी के गुलाम नहीं. लेकिन मुझे चाहिए ये के आज के बाद न तो तुम कोई नशा करोगे न hi अपनी बीवी या बच्ची पे हाथ उठाओगे. बल्कि एक जिम्मेदार मर्द बनकर अपना परिवार चलोगे. मेहनत से कमाओगे खाओगे. जो तुम्हारे नीचे काम करेंगे चाहे वो इस घर के नौकर hi क्यों न हो उन्हें इंसान hi समझोगे अपना गुलाम नहीं. कुल मिलकर एक अचे इंसान बनोगे, आदर्श पति, आदर्श पिता बनोगे.

धन्ना – मए वचन देता हु हुजूर मए आज बल्कि अभी से वैसा hi बन जाउगा जैसा आप चाहते है.

रूद्र – है अब तो बनेगा hi क्यों के तुमने देवा भाई को वचन दे दिया अब तुझे कोई नशा पकड़ भी नहीं पायेगा. और तूने अगर नशे को पकड़ा तो यद् रखना जो दे सकता है वो वापस लेने की भी ताक़त रखता है.

देवा – दूसरी बात तुम्हारा नाम वही चलेगा जो तुम्हारे माता पिता ने रखा था यानि धनराज. तुम्हारी बेटी का नाम भी तुमने रखा था राज नंदिनी तो वो भी इसी नाम से जनि जाएगी उसे अब तुम सच मच hi एक राजकुमारी की तरह पलना और उसे सरे सुख देना.

धन्ना हैरानी से - आप इतना सब कैसे जानते है?

रूद्र - कितनी बार हैरान होंगे यार, हमने तेरे पास आने से पहले तेरी पूरी कुंडली देखि थी इसीलिए देवा भाई सब जानते है तेरे बारे में. अब खुश या और कुछ जानना है?

धन्ना – नहीं साब मए भला क्या जान पाउगा आप लोगो को आप तो हर पल मुझे हैरान किये जा रहे है. आपका बहोत बहोत धन्यवाद.

देवा धन्ना की बीवी से – आपका नाम आरती है न .

आरती - जी साब

देवा – आरती हम लोग कोर्ट जा रहे है. महल के कागजात बनवाने में थोड़ा टाइम लगेगा. अब से ये घर आपका hi है घर में 2 -3 नौकर नौकरानी भी है जो के इस वक़्त घर के पीछे बने हुए अपने कमरों में है. कोई भी काम हो उन्हें आवाज़ दीजियेगा. आप चाहे तो घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लीजिये ऊपर के कमरे में आपकी बेटी के लिए साडी सहूलियतें है. और साथ hi दूसरा कमरा आपका है जिसमे आप दोनों की जरूररत की हर चीज़ है. वही की अलमारी में सबके कपडे भी है आप फ्रेश हो लीजिये और अगर जरुरत हो तो नौकरो को आवाज़ लगा देना जिससे वो आकर खाना बना देंगे. किसी में इतनी हिम्मत नहीं के आप में से किसी के साथ बदतमीजी से बात करे. तो निश्चिन्त हो कर अब यहाँ रहिये और अपनी जिंदगी की एक नयी शुरुआत कीजिये.

शलाका इन्हे इनके कमरे दिखा दो और वह की साडी चीज़े समझा दो.

………….और है धन्ना इस बंगले के कागज और 10 करोड़ तुम्हारे कमरे की अलमारी में है जाओ एक बार देख के आओ और अपनी तसल्ली कर लो फिर कोर्ट चलना है हमें.

धन्ना - कैसी बात कर रहे है मालिक मए और देखने जाऊ मेरी इतनी हिम्मत नहीं की आपकी बात को परखने की गलती करू आपने कहा के अलमारी में पैसे है तो है. उसे देखने की जरुरत नहीं है. आप चलिए मए चलता हु आप के साथ

थोड़ी hi देर में शलाका , आरती और उसकी बेटी ख़ुशी ख़ुशी नीचे आती हुई दिखी .

………… आरती मए आता हु थोड़ी देर में तब तक तुम लोग कुछ खा पी के आराम कर लो. धन्ना ने चहकती हुई आवाज़ में अपनी बीवी से कहा.

देवा – एक मिनट धन्ना क्या मए तुम्हारी बेटी से बात कर लू?

धन्ना – आप मुझसे पूछकर मुझे शर्मिंदा न करे मालिक आप hi की बेटी है ये भी.

देवा – राजनंदिनी बीटा इधर आओ.
 
अपडेट – 256

वो बच्ची ख़ुशी से भगति हुई देव के पास आ गयी देव घुटनो पे बैठ कर उसे प्यार से सहलाते हुए

------- बीटा ये घर आपका है, इस घर की हर चीज़ आपकी है ये सब आपके पापा का दिया हुआ है ठीक है न?

राजनंदिनी - लेकिन अंकल ये तो आपका घर है न? मेरा घर तो वो है जहा से मए आप लोगो के साथ गाड़ी में बैठ के आयी थी. आप भूल जाते हो क्या? और यहाँ मेरी सहेलिया भी नहीं है. मए किस के साथ खेलूंगी? “राजनंदिनी ने बहोत मासूमियत और भोलेपन के साथ देवा से कहा तो देवा के साथ साथ सबके चेहरे पे मुस्कान छ गयी”.

देवा – बीटा ये मेरा घर नहीं है, आपके पापा मम्मी और आपका घर है. आपके पापा ने मुझे कहा था बनवाने के लिए और मुझे ये भी कहा था के जब हमारी बिटिया का जामंदिन हो उसी दिन ये घर हमें चाहिए अब ये बन गया तो मए आपको यहाँ ले आया तो हुआ न ये घर आपका? और आज आपका जन्मदिन भी है तो ये सब आपके पापा ने आपके जन्मदिन का तोहफा दिया है आपको. इस घर में आपके लिए ढेर सरे खिलोने भी है. जो सब आपके है. और रही बात सहेलियों की तो यहाँ के आसपास के घरो में भी आपकी उम्र के बच्चे है जल्द hi उनसे आपकी दोस्ती हो जाएगी तो आपकी वो कमी भी पूरी हो जाएगी.

राजनंदिनी ख़ुशी से उछाल पड़ी – अरे वह मए तो भूल hi गयी थी आज मेरा जन्मदिन है. लेकिन मेरे पापा बहोत अचे है उन्हें यद् था और कितना बड़ा और अच्छा घर दिया है आज उन्होंने मुझे गिफ्ट में. और आप भी बहोत अचे है अंकल आपने मेरे पापा के कहने पे इतना अच्छा घर बना दिया वार्ना हमारे पुराने घर में तो मेरे खेलने की जगह hi नहीं थी.

देव – तो अब आप भी अपने पापा को ख़ुशी देगी न बीटा.

राजनंदिनी - कैसी ख़ुशी अंकल?

देव - पापा आपको अचे स्कूल में भेजगे वह आपकी नयी सहेलिया बनेगी. आप खूब पढ़ लिख कर अपने मम्मी पापा को खुश कीजियेगा ठीक है?

राजनंदिनी - जरूर अंकल मुझे तो बहोत शौक है पढ़ने का लेकिन जब हम वो छोटे से घर में रहते थे तो पापा मुझे पढ़ने नहीं भेजते थे. अब मए जरूर पढ़ूगी और 1सत भी ाउगि.

देवा उसके सर पे हाथ फेर के – भोलेनाथ हमेशा आपकी रक्षा करेंगे, कभी आपको कोई तकलीफ नहीं आएगी, ये मेरा वादा है आप हमेशा खुश रहोगी. और एक दिन बहोत बड़ी डॉक्टर भी बन जाओगी.

राजनंदिनी – सच अंकल?

देवा – है बीटा सच. “ इतना कह कर देव ने अपने गले से एक रुद्राक्ष की माला निकल कर उस नन्ही पारी को पहना दी. बीटा इसे हमेशा अपने पास hi रखना. ये भोले नाथ का आशीर्वाद है. कोई भी मुश्किल हो मुसीबत हो वो आपको छू भी नहीं पायेगी.

राजनंदिनी – जी अंकल मए इसे अब कभी खुद से अलग नहीं करुँगी. लेकिन जब तक मए डॉक्टर बानगी तब तक तो आप बूढ़े हो जायेगे लेकिन अगर आपकी तबियत ख़राब हो तो मेरे पास hi आना मए दवाई दे दूगी.

उसकी इस बात पे सब हसने लगे.

रूद्र – है बीटा हम बुधो का इलाज तुम hi करना तभी तो तुम्हे डॉक्टर बना दिया अंकल ने. इन्होने कुछ सोच के hi कहा होगा. हे भोलेनाथ क्या होगा हमें जिसका इलाज ये पारी करेगी एक दिन. आप कृपा करना. रूद्र हाथ जोड़े ऊपर देखते हुए बात करने लगा

देव – अच्छा बीटा अब हम चलते है हमें भूलना मत शायद हम फिर कभी जरूर मिलेंगे.

राजनंदिनी – मए आपको वचन देती हु मए आपको कभी नहीं भूलूँगी. थैंक यू अंकल आपने इतना अच्छा घर बनवा के दिया.

अच्छा बीटा अब हम लोग चलते है अपने मम्मी पापा का ध्यान रखना. Bye.

राजनंदिनी - आप लोग बहोत अचे है . bye bye.

फिर देवा एंड पार्टी धन्ना को ले कर वह से निकल जाते है कोर्ट की तरफ और वह जा कर पूरी फॉर्मेलिटी करते है जिसमे लगभग पूरा दिन निकल जाता है. सब कुछ निपटने के बाद देवा धन्ना को उसके बंगले पे छोड़ देता है और फिर निकल जाता है.

धन्ना गेट पे खड़ा हो कर भीगी आँखों से देवा की गाड़ी को जाता देख रहा था. और उन्हें दिल से दुआए दे रहा था जिन्होंने उसकी जिंदगी को एक hi दिन में पलट के रख दिया. धीरे धीरे देवा की गाडी उसकी आँखों से ओझल हो गयी और धन्ना ख़ुशी ख़ुशी अपनी फॅमिली के पास चला गया…..

गाड़ी तेजी से मुंबई की सड़को को चीरती हुई मुंबई से बहार भागी जा रही थी और गाड़ी चलने वाला इस समय देवा था.

रूद्र – देव अब कहा चल रहे हो?

देव – महल

रूद्र - यार पहले पेट पूजा कर ले क्या बहोत भूख लग रही है दिन भर कुछ खाया नहीं है.

शलाका - है देवा वह भी कुछ मिलेगा नहीं तो खाना तो काम से काम खा के hi चलते है

रूद्र - है मए तो रत का भी ले के hi चलुगा क्यों की उस बिया बन में तो कुछ नहीं मिलने वाला खाने को.

देव – अबे तू चूहे खा कर पेट भर लेना.

रूद्र - अबे क्या भोंक रहा है चूहे तो मैने तब भी न खाये जब मए एक साधारण सांप था अब क्या खाऊंगा पगला गया है क्या?

शलाका – शठ चुप करो रूद्र वो मजाक कर रहे है.

रूद्र - ा शलाका समझा ले अपने जिज्जी को ऐसे भयानक मजाक न किया करे मेरे साथ वार्ना ………

देव ने तेज ब्रेक मरी और गाड़ी स्किड होती हुई रुक गयी

देव रूद्र की तरफ पलटकर – वार्ना…….. वार्ना क्या…………….?

रूद्र - अरे भाई टी टी टी तू नाराज मत हो मए तो कुछ कह hi नहीं रहा वैसे भी मुझे कोई भूख नहीं लगी है ये तो शलाका hi बोल रही थी बस मए तो यु hi इसका साथ दे रहा था तू आँखे मत दिखा भाई चल गाड़ी चला तू मेरा राजा भैया है न.

शलाका फिर हसने लगती है तो रूद्र - अब तू क्यों बत्तीसी निकल रही है?

शलाका - रूद्र बहार देख देवा ने रेस्टोरेंट के पास गाड़ी रोकी है तुम तो ऐसे दर गए मनो देवा तुम पर हमला कर रहा है.

रूद्र - हाय???? है तो सही है मैने तो देख hi लिया था न के गाड़ी रेस्टोरेंट पे रुकी है वार्ना देव से कौन डरता है चलो चलो खाना खा लेते है.

रूद्र तेजी से गाड़ी से उतर के होटल में घुस जाता है इधर शलाका और देव दोनों हसने लगते है फिर वो भी उतर के अंदर चले जाते है खाना खाने.

खाना कहते हुए रूद्र - देव अब वह का क्या सोचा है.

देव - देखो आज तो मुझे समय hi नहीं मिला ऐसा के मए तुम लोगो को कुछ बता सकू लेकिन कल रत मए गया था उस महल में

शलाका और रूद्र चौंकते हुए - क्या?????????

देव - है मए गया था वह.

शलाका - क्या बात कर रहे हो देव तुम वह गए कल रत? वो भी ऐसे अचानक तुम्हे बताया था न मैने के वह खतरा है वह सचमुच में hi कुछ खतरनाक आत्माये है जो तुम्हे नुकसान पंहुचा सकती थी ये कोई धरती के साधारण लोग नहीं जिनसे अकेले hi कोई भी जा कर निपट सके . ये तो अच्छा हुआ तुम्हे कुछ नहीं हुआ वार्ना क्या पता वह कितना खतरा है तुम्हे कुछ हो जाता तो?

रूद्र – रुको शलाका बात कुछ और है. मए देव को अचे से जनता हु. बोल देव तुम वह कैसे गए और वह क्या हुआ.

देव – मए कल वह सूक्ष्म रूप में गया था. सिर्फ वह के हालत जानने क्यों की मए बिना वह के हालत जाने ऐसे hi तुम लोगो को वह नहीं ले जाना चाहता था. जैसा की तुम लोगो ने hi कहा वह कुछ भी हो सकता था ऐसे में तुम लोगो की जान को खतरे में मए नहीं डालना चाहता था. No नेवर

शलाका - ी क्नोव . . . तो क्या पता चला वह ?

देव – हुआ कुछ ऐसा के. ……………..
 
अपडेट 257

शलाका - ी क्नोव . . . तो क्या पता चला वह ?

देव – हुआ कुछ ऐसा के. ……………..

फिर देव ने महल में हुई कल रत की साडी घटना बता दी दोनों को

शलाका - ok तो राजकुमारी प्राण ने बताया के उनके पिता प्रेतराज को तुमसे कोई खास काम है ऐसा क्या काम हो सकता है प्रेतराज को की उन्होंने तुम्हारा इतना इंतजार किया और इस जगह की सुरक्षा के लिए अपनी बेटी को hi बिठा दिया. वो सीधा नागलोक जा कर तुम्हारे पिता महाराज से भी पूछ सकते थे तुम्हारे बारे में. क्यों की जहा तक मए जानती हु prêt लोक वालो से हम दोनों की hi नागरियो की कोई दुश्मनी नहीं रही है. बल्कि उनसे तो maître सम्बन्ध hi है.

रूद्र - कोई खास hi वजह होगी वार्ना वो इंतजार के लिए तो किसी भी पहरेदार से बोल देते अपनी बेटी को यहाँ नहीं रहने देते.

देव – है मए भी यही सोच रहा हु. चलो ज्यादा सोचने की कोई बात नहीं वह तो चल hi रहे है तो वही पता चल जायेगा की असल बात क्या है.

रूद्र – तुम्हे क्या लगता है वह कोई खतरा तो नहीं होगा न?

देव – नहीं यार मुझे नहीं लगता वह कोई खतरा होगा. क्यों के जैसे की अभी सहलाका ने कहा, हमारी तो प्रेतराज से कभी कोई दुश्मनी रही नहीं है.

शलाका – देव आप नागलोक में अपने पिता जी से संपर्क कर के पूछ क्यों नहीं लेते कही उनकी कोई दुश्मनी रही हो तो बात बिगड़ सकती है अभी.

देव – नहीं शलाका इसकी जरुरत नहीं क्यों के. मए नाग लोक के हर दोस्त और हर दुश्मन को जनता हु और प्रेत राज काम से काम हमारे दुश्मनो की लिस्ट में नहीं है ये मए जनता हु. इसीलिए पिता जी महाराज से बात करने की कोई जरुरत नहीं,

रूद्र - ये सही बात है प्रेतराज की नागलोक से कोई दुश्मनी नहीं है.

शलाका – फिर तो कोई बात hi नहीं है चलो बाकि बाटे तो प्राण और प्रेतराज बता hi देंगे. अब खाना ख़तम हो चूका हो तो चला जाये रूद्र?

रूद्र – है चलो मए तो कब से कह रहा हु तुम लोग hi बेकार की बातो में बैठ गए और यहाँ होटल आ कर भी समय ख़राब किया. तुम लोगो को सच में समय की कोई कदर hi नहीं है. वह प्राण इंतजार में होगी वही कुछ खाने का इंतजाम कर देती. पर नहीं तुम लोगो से कौन बहस करे टाइम वास्ते करना तो कोई तुम लोगो से सीखे. सुच ा अग्ली पेओप्लेस. लेटस मूव नाउ गाइस. व्हाट अरे यू वाइटिंग फॉर क्रिसमस?

देव और शलाका एक दूसरे का मुँह देखने लगे क्यों की रूद्र तो आगे बढ़ चूका था गाड़ी की तरफ इन्हे इतना सुना कर.

देव – ये साला किसी जनम में नहीं सुधर सकता,

फिर देव और शलाका भी गाड़ी में आ गए और देव ने गाड़ी बढ़ा दी महल की तरफ,

थोड़ी देर के बाद उनकी गाड़ी महल के गेट के पास कड़ी थी. उसी समय महल का गेट अपने आप खुल गया और देव ने गाडी आगे बढ़ा दी.

पूरा महल वीरान पड़ा था. जगह जगह सुखी हुई झाडिया और फर्श पे टहनिया बिखरी हुई थी, कही पे कोई पेड़ की बड़ी बड़ी टहनिया टूट के गिरी हुई थी और महल की दीवारों के प्लास्टर उधड़े हुए थे कुछ जगह पर, दीवारे बेहद पुराणी हो चुकी थी खिड़कियों के हालत भी खस्ता थी जिन पे कोई गिलास तो लगा hi नहीं था.

देव ने गाडी अंदर ले जाकर महल के एंट्रेंस गेट पे रोकी तो रूद्र ने अपनी तरफ का दरवाजा खोलते हुए कदम बहार निकला लेकिन तभी वह बहोत तेज हवाएं चलने लगी और पूरी धुल मिटटी उड़ कर तेजी से कार की तरफ आने लगी. रूडी ने तुरंत गेट बंद कर दिया. तभी देव ने अपनी तरफ का दरवाजा खोला और अपना पैर बहार निकल के जमीन पे रखा तो तेज हवाएं ऐसे शांत हो गयी जैसे कुछ हुआ hi नहीं था, फिर देव बहार आ गया और रूद्र और शलाका को बहार आने का इशारा किया. अब वो दोनों भी बहार आ गए इस बार कुछ नहीं हुआ. तीनो महल के एंट्रेंस गेट पे खड़े थे अपनी अपनी कमर पे हाथ रखे महल को ध्यान से देख रहे थे. उसी वक़्त

महल के अंदर से छम छम करती पायल की आवाज आने लगी और कुछ hi मिंटो में वह एक बेहद खूबसूरत लड़की नजर आने लगी. एक डैम सफ़ेद कलर के चमकदार लहंगे चोली में उसके काळा लम्बे बाल खुले हुए थे, सफ़ेद चमकदार चुन्नी को सर पे क्लिप कर के छोड़ दिया थाउस्ने, उसके काळा घने बालो की लत बार बार उसकी खूबसूरत गोर चेहरे पे आ रही थी. उसने रेड कलर की लिपिस्टिक लगायी हुई थी माथे पे सिल्वर बिंदी. हाथो में लाल सफ़ेद चमकदार चुडिया. और उसके गोर पैरो में चंडी की पायल जो उसके चलने से छनक रही थी. पैरो में एक कीमती शानदार सफ़ेद जुटती.

रूद्र, शलाका, देव तीनो उसे बिना पलके झपकाए देख रहे थे. वो लड़की उन तीनो के सामने आ कर कड़ी हो गयी, और मुस्कराने लगी. बरी बरी से उसने तीनो को देखा. फिर देव से उसकी नजरे मिली तो दोनों मुस्कराने लगे.

लड़की- एक बार फिर से आपका स्वागत है देव आइये.

शलाका – तुम प्राण hi हो राइट?

प्राण - अब्सोलुतेल्य राइट शलाका.

रूद्र - तुम्हे भी इंग्लिश आती है? देव ने तो कहा तुम प्रेत हो?

प्राण – ऐसे तो आप भी एक इच्छाधारी नाग है रूद्र बूत ी क्नोव यू आल्सो टॉक इन इंग्लिश वैरी वेल.

रूद्र – ओह्ह बिलीव में ी दो, लिखे ी लाइव अंग्रेज बिहाइंड

प्राण – तो फिर मए क्यों नहीं बोल सकती इंग्लिश? अरे यार मए भी इसी दुनिया में कोई 100-150 साल से तो हु hi. बहोत कुछ हुआ है इस बीच इस धरती पर कई सरे युद्ध महा युद्ध बहोत कुछ देखा है मैने. और बहोत कुछ सीखा भी है. उसमे इंग्लिश भी आती है. और फिर हम लोगो की शक्तियों के सामने ये भाषा की समस्या कब आती है?

शलाका - बिलकुल ठीक कहा तुमने राजकुमारी प्राण.

प्राण - अरे राजकुमारी शलाका आप हमें सिर्फ प्राण hi कहिये हमें अच्छा लगेगा.

शलाका – तो फिर आज से तुम भी हमें सिर्फ शलाका hi कहोगी. तभी हमारी दोस्ती लम्बी चलेगी.

प्राण - ok दोने. नाउ वे अरे फ्रेंड्स शलाका?

शलाका प्राण को गले लगते हुए. – ओफ़्कौर्से डार्लिंग वे अरे.

रूद्र – ये क्या ड्रामा है बे. ये तो चिपका चिपकी चालू हो गयी ा शलाका संभल अपने आप को वार्ना अभी नागार्जुन को बोलूगा तू लड़कियों से चिपकती है.

शलाका – शुतुप रूद्र.

रूद्र - क्या शुतुप? ये तो गलत बात है न प्राण दोस्त तो हम भी है फिर तुमने गले सिर्फ शलाका को क्यों लगाया?

शलाका – अब मए बुलाऊ क्या नीलम को? प्राण से गले मिलना है तुम्हे?

प्राण मुस्कराते हुए– आइये अंदर चलते है.

फिर ये चारो अंदर चल पड़ते है. प्राण उन्हें एक हाल में लती है जो एक डैम साफ़ सुथरा था और वह कोई गन्दगी या बदबू नहीं थी वह शानदार सोफे रखे थे जिस पर ये बैठ जाते है

देव - नीस, हमारे लिए काफी मेहनत की है तुमने प्राण.

प्राण - अरे देव ये तो कुछ नहीं बस अब तक ऐसी कोई जरुरत नहीं पड़ी इसीलिए इस महल को बुरी हालत में रखना पड़ा. अब आप आ गए तो उस बुरी हालत में कैसे आपका स्वागत करती?

रूद्र – लेकिन राजकुमारी प्राण ऐसी भी क्या जरुरत थी जो आपने इस महल को hi अपना अड्डा बनाया.

प्राण - देखो पहली बात तो ये के मए आप लोगो की दोस्ती चाहती हु अब हर एक को मए नहीं बोलूगी के मुझे राजकुमारी मत कहो. अब अगर मुझे किसी ने राजकुमारी कहा न तो मए पिताजी महाराज को hi बुला दूगी फिर करते रहने उनसे बाते मए चली जोगी अपने प्रेत लोक क्यों की काम तो उन्हें hi है. मए तो बस पहले यहाँ की सिक्योरिटी गार्ड थी और बी सिर्फ मैसेंजर. एंड ी थिंक ी दोने माय वर्क निकलय हेरे सो ी ऍम आलरेडी दोने.

रूद्र – अरे यार नाराज क्यों होती हो हम सब दोस्त hi है लेकिन मेरी मजाक हर कोई हजम नहीं कर सकता यद् रखना .

प्राण - है तो अगर शलाका तुम्हारा मजाक हैंडल कर सकती है तो मए भी कर लगी पर इतनी भी इज्जत देने की कोई जरुरत नहीं है.

रूद्र – ये साला लड़कियों के साथ यही प्रॉब्लम है इज्जत दो तो प्रॉब्लम लो तो प्रॉब्लम.

शल्का और प्राण दोनों कड़ी हो गयी कमर पे हाथ रख के और एक hi सुर में एक साथ - क्या कहा रूद्र तुमने?

रूद्र ने इन दोनों के तेवर देखे और पलट कर देव को देखा तो वो भी उसे खा जाने वाली नजरो से घर रहा था.

रूद्र हाथ जोड़ते हुए – माफ़ कर दो देवियो मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था ये चंडी रूप मत दिखाओ कमर से हाथ हटाओ और बैठ जाओ देखो मए कान पकड़ रहा हु.

दोनों hi रूद्र को घूरती हुई बैठ गयी और फिर शलाका प्राण और देव तीनो हसने लगे
 
अपडेट – 258

रूद्र – अबे डरते भी हो हस्ते भी हो अजीब हो यार तुम लोग.

प्राण - बस कर रूद्र एक hi दिन में पेट दुखने लगेगा मेरा. यू अरे तू मच.

देव – ऐसा hi है ये वार्ना डरता तो ये मुझसे भी नहीं. है जान छिड़कता है ये हम सब पे ये भी सच है.

प्राण - हाउ स्वीट

शलाका – रहें दे कोई फायदा नहीं. स्वीट बोलने का

रूद्र – अब तेरे को क्यों जलन हो रही है

शलाका - क्यों जब ये मुझसे गले मिली तब तुझे भी तो जलन हुई थी न. वैसे प्राण इसके चक्कर में मत आना इसकी नीलम है पहले से.

प्राण - अरे नहीं शलाका मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है. don’t वोर्री लेकिन है ये अच्छा किया जो बता दिया नीलम के बारे में अब तो मए सीधा नीलम को hi बुला दूगी अगर इसने ज्यादा परेशां किया तो. अब मए अपने लोक जाने की धमकी नहीं दूगी बल्कि नीलम को बुलाने की धमकी दूगी इसे.

रूद्र- नहीं देवी उसे मत बुलाना वो भी कोई काम नहीं है तुम लोगो से.

वह फिर हसी गूंजने लगी. तभी वह एक तेज प्रकाश होने लगा सभी सतर्क हो गए देव प्राण को देखने लगा तो प्राण मुस्कराने लगी . कुछ hi देर में वो रौशनी ख़तम हुई और वह एक अचे डीलडौल वाला आदमी खड़ा था लम्बा चोगा सर पे मुकुट कमर में एक भरी तलवार दाढ़ी और मूछ से भरा हुआ खतरनाक चेहरा बड़ी बड़ी लाल आँखे. ये है प्रेत र आज प्रकाळा.

प्राण ने झुक कर उनका अभिवादन किया.

प्राण – पिता जी महाराज आज आपका दिया हुआ कार्य पूरा हुआ. आपको जिनका इंतजार इतने लम्बे समय से था आज मए उन्हें आपसे मिलवा रही हु. इनसे मिलिए ये है नाग लोक के युवराज देव सिंह. और इनके साथ है इनके परम मित्र रूद्र और तिलिस्म नगरी की राजकुमारी शलाका.

इन तीनो ने भी प्रेत राज का अभिवादन किया.

देव – आइये महाराज विराजिए.

प्रकाळा – धन्यवाद देव सिंह जी

देव – सबसे पहले तो मए क्षमा चाहुगा महाराज मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था के आप को मेरी जरुरत है वार्ना मए आपसे स्वयं मिलने चला आता. और आपको यहाँ आने का कष्ट नहीं लेना पड़ता. पर आपने इतना कष्ट क्यों लिया हमसे मिलने के लिए? आप हमारे पिता जी महाराज के पास सन्देश भेज देते मए आपके पास आ जाता.

प्रकाळा -नहीं युवराज हम ऐसा नहीं कर सकते थे. क्यों की जब हमें आपसे मिलने की जरुरत महसूस हुई तो हमने पता करवाया था किन्तु उस समय आप अपनी नगरी में मौजूद नहीं थे ये तब की बात है जब नगरी की लड़ाई हो चुकी थी. तब हमारे गुरुदेव ने हमें एक खास कार्य सौंपा था जिस वजह से हमें आपसे मिलना था अब कार्य हमारे गुरुदेव ने हमें सौंपा था तो हमें hi आना था आपके पास आपको बुलाना शोभा नहीं देता.

देव – ये तो आपका बड़प्पन है महाराज वार्ना उम्र और ओहदे में आप हमसे बड़े है, श्रेष्ठ है, उस हिसाब से यदि आपका आदेश होता तो हम जरूर आ जाते आपकी सेवा में.

प्रकाळा – बहोत खूब देव सिंह जी जैसा हमने आपके बारे में सुना था आप उससे बढ़कर है आपसे मिलकर ख़ुशी हुई हमें.

देव – आपसे एक प्रार्थना है के आप हमारे पिता सामान है इसीलिए आप हमें सिर्फ देव hi कहे. और अब आप हमें बताइये के हम आपके लिए क्या कर सकते है. क्या प्रेत नगरी खतरे में है या कोई और दुश्मन आपको परेशां कर रहा है?

प्रकाळा – ऐसा कुछ नहीं है देव, हम आपको पूरी बात बताते है. तो जैसे के हमने आपको बताया ये बात तब की है जब नगरी में आप लोगो की लड़ाई हुई उस मन्त्रिक से. बहोत कुछ तबाह हो गया था उसमे और आपकी तो जान भी गयी थी. हमारा सम्बन्ध नागलोक से और तिलिस्म नगरी से अच्छा hi था. दोनों hi नागरियो से हमारी कोई दुश्मनी नहीं रही कभी भी. महाराज भैरव सिंह जी और महाराज सुमंतदेव जी से जब भी हम मिले है दोस्ताना अंदाज़ में hi मिले है. जब हमें नगरी के युद्ध का पता चला तो हम तुरंत नागलोक गए थे उस इतनी बड़ी तबाही से चारो तरफ माहौल बहोत ग़मगीन हो चुक्का था. संयोग से वह महाराज सुमंत देव भी थे हमने दोनों महाराज से ये शिकायत की, के इतनी बड़ी बात हो गयी तो उन्होंने हमें क्यों नहीं बुलाया. हम उस मन्त्रिक को छोड़ते नहीं यदि हमें मौका मिलता. क्यों के कोई कितना भी बड़ा मन्त्रिक हो हम सब की शक्तियों के आगे वो टिक नहीं पता. लेकिन महाराज भैरव सिंह जी ने हमें बताया के वो वक़्त आपकी सगाई का था और उस मन्त्रिक ने धोखे से हमला कर दिया था किसी को बुलाने का तो छोड़िये अपनी तरफ से भी कोई खास तयारी नहीं थी ऐसे में बहार से सहायता के लिए किसी को भी कैसे बुलाते. सब कुछ जानकर हमें बेहद दुःख हुआ. आपकी और राजकुमारी पूनम की मौत सिर्फ दोनों नागरियो के लिए hi नहीं बल्कि हम जैसे शुभचिंतको के लिए भी एक गहरा आघात था.

उसके बाद हम वापस अपने लोक में ऑटो गए किन्तु हम भी इस हादसे से उबार नहीं प् रहे थे. और उसी दौरान एक दिन हमारे गुरुदेव हमारे पास आये तो मैने उन्हें अपनी व्यथा बताई और अपने दुःख का कारन भी तो उन्होंने हमसे कहा . . . . .

फ़्लैश बैक. . . .

गुरुदेव - क्या बात है प्रकाळा तुम एक शक्तिशाली प्रेत हो प्रेत लोक के राजा हो और एक राजा को इस तरह चिंताग्रस्त नहीं होना चाहिए. अपने दुःख का कारन बताओ.

प्रकाळा – कुछ नहीं गुरुदेव बस यु hi परेशां हु. वैसे आपके दर्शनों का मुझे लाभ मिला उसके लिए आपका धन्यवाद किन्तु आपने क्यों कष्ट किया मुझे बुला लिया होता .

गुरुदेव - नहीं प्रकाळा कारन hi कुछ ऐसा है जिसके लिए मुझे तुमसे मिलने आना पड़ा लेकिन पहले तुम अपनी उदासी का कारन बताओ क्यों की इस दशा में तुम हमारी कही कोई दूसरी बात समझ hi नहीं पाओगे. . . . .
 
तो अब तक आप लोगो ने पढ़ैपड़ाते 258 में के परकाला अपने गुरुदेव के सामने था और उनसे बात कर रहा था

प्रकाळा – कुछ नहीं गुरुदेव बस यु hi परेशां हु. वैसे आपके दर्शनों का मुझे लाभ मिला उसके लिए आपका धन्यवाद किन्तु आपने क्यों कष्ट किया मुझे बुला लिया होता .

गुरुदेव - नहीं प्रकाळा कारन hi कुछ ऐसा है जिसके लिए मुझे तुमसे मिलने आना पड़ा लेकिन पहले तुम अपनी उदासी का कारन बताओ क्यों की इस दशा में तुम हमारी कही कोई दूसरी बात समझ hi नहीं पाओगे.
 
अपडेट - 259

प्रकाळा – जो आज्ञा गुरुदेव, तो मेरी व्यथा का कारन है दो नवजवान बच्चो की असमय मृत्यु जो बेहद दुखद और दिल को चीयर देने वाला वाकया है. अभी कुछ दिन पहले जो कुछ भी तिलिस्म नगरी में हुआ उससे निश्चित hi आप भी अनजान नहीं होंगे. उस लड़ाई ने मुझे विचलित कर दिया है दो परिवारों के दो जवान और जांबाज़ बच्चे इस तरह चले गए. वो भी उस वक़्त जब वो दोनों hi अपने आने वाले सुनहरे भविष्य के सपने बन रहे थे. ये बात मुझसे सहन नहीं हो रही है. देव सिंह और राजकुमारी पूनम सच में बहोत बहादुर थे जिन्होंने मरते मरते भी न सिर्फ उस दुष्ट का खत्म किया, बल्कि अपनी नागरियो को भी सुरक्षित कर गए और उन्ही की वजह से हम भी सुरक्षित हो गए. क्यों की उनकी नागरियो को पार किये बैन कोई मुसीबत हम तक पहुंच hi नहीं सकती. अब वो दोनों नगरीय तो सुरक्षित हो गयी साथ hi हम भी सुरक्षित हो गए. और ये सब हुआ उस समय जब के वो तैयार भी नहीं थे ऐसे युद्ध के लिए. सोचिये यदि वो दोनों पूरी तयारी के साथ मैदान में खड़े हो जाते तो भला ऐसा कौन है इस सृष्टि में जो उन्हें हरा पता, अचानक हुए हमले के बावजूद भी उस मन्त्रिक को उन्होंने मार डाला जो खुद पूरी तयारी से आया था. यदि वो ललकार के आता तो भला क्या hi मार पता वो देव सिंह और पूनम को, ये तो वो वीर बच्चे थे जिन्होंने अपने प्राणो की आहुति दे कर दोनों नागरियो को बचा लिया वार्ना उस दुष्ट की योजना तो दोनों नगरी वासियो को ख़तम करके खुद वह राज करने की थी. यदि ऐसा होता तो शायद मुसीबत हमसे ज्यादा दूर नहीं थी. क्यों की उस की बाद वो मन्त्रिक वही नहीं रुकता बल्कि हम सबके लिए भी समस्या hi कड़ी करता. क्यों की हवस तो कभी बुझती hi नहीं चाहे हो जिस्म की हो या सत्ता की. और उस दुष्ट की इस घिनौनी हवस का अंजाम क्या होता कोई नहीं जनता. एक तरह से जाने अनजाने उन बच्चो ने हमें भी सुरक्षित किया है. पर विधि का विधान देखिये जिन दो बच्चो की वजह से आज हम सब सुरक्षित महसूस कर रहे है न तो हम उनकी कोई सहायता कर पाए न hi उनका धन्यवाद. देखा जाये तो ये राज पैट ये राज सिंघासन सब उन्ही की दी हुई भेंट है अब मेरे लिए. यदि वो दोनों अपने जीवन की आहुति दे कर उस दुष्ट का खत्म न कर देते तो हमारे लिए भी कोई काम मुश्किलें न कड़ी होती आने वाले भविष्य में.

गुरुदेव – तुम बेहद संवेदनशील हो प्रकाळा और एक अच्छा ह्रदय भी रखते हो. तुम्हारी यही सच्चाई शायद उस प्रभु ने सुन ली है. और मए अब जो तुम्हे बताने जा रहा हु उसे सुन कर अवश्य hi तुम्हे बेहद प्रसन्नता होगी.

प्रकाळा - मुश्किल है गुरुदेव क्यों की अभी हम इतने व्यथित है की कोई भी बात हमें ख़ुशी नहीं दे सकती इन होठो पे मुस्कान नहीं ला सकती किन्तु फिर भी बताइये ऐसी क्या बात है गुरुदेव जिससे आपको लगता है के हमें जान कर प्रसन्नता होगी.

गुरुदेव – हे राजन तुम्हारे दुखी ह्रदय का मरहम hi लाये है हम, राज कुमार देव और राजकुमारी पूनम मरे नहीं है.

प्रकाळा चौंकते हुए उठ खड़े हुए – क्या??? क्या कहा आपने गुरुदेव क्या सच में गुरुदेव मेरे कानो ने यही सुना के दोनों बच्चे जीवित है? लेकिन उनके माता पिता ने तो हमें बताया के वो दोनों….

गुरुदेव – उन्होंने भी सच hi बताया तुम्हे.

प्रकाळा - ये कैसी पहेली है गुरुदेव?

गुरुदेव – असल में वो दोनों बच्चे अपना शरीर तो छोड़ hi चुके है किन्तु जिस पशुपतिनाथ की साजिशो के चलते नगरी में लड़ाई छिड़ी थी उसे इन बच्चो की मौत ने तोड़ दिया और वो पछतावे की आग में जलने लगा.

बहोत रोया गिड़गिड़ाया और अपने पापो की माफ़ी भी मांगी लेकिन उसे बड़ी ताक़तों ने श्राप दिया की उसकी सजा ये hi है के अब उसे मुक्ति नहीं मिलेगी किसी भी तरह से चाहे वो तप करे या जप. जब उसने कई बार अपनी गलती की क्षमा मांगी तो भोलेनाथ ने प्रसन्न हो कर उस पर दया की और उसे कहा के देव और पूनम की आत्माओ को ढूंढे और उन्हें तपस्या में लीं कर दे और उन्हें इतना शक्तिशाली बना दे के जब उनके दुबारा जनम लेने का समय आये तब तक वो पूरी तरह से तैयार हो चुके हो. और ऐसा hi पशुपतिनाथ ने किया और अब वो दोनों पवित्र आत्माये यानि देव और पूनम दोनों hi उस पशुपतिनाथ की शरण में है जिसे उसने किसी गुप्त स्थान पे रखा है जिससे के उनकी साधना में कोई व्यवधान न आये. और वो आने वाले युद्ध के लिए खुद को तैयार कर सके.

प्रकाळा - ये तो बेहद ख़ुशी की बात है गुरुदेव पर क्या ये सब बाटे उनके माता पिता नहीं जानते?

गुरुदेव – पहले नहीं जानते थे किन्तु ईश्वर के आदेश से पशुपतिनाथ ने उन टूटे हुए माँ बाप को ये खुशखबरी दे दी है और अब वो लोग भी अपने बच्चो की वापसी का इंतजार कर रहे है. जो कुछ वक़्त के बाद उनसे यही आके मिलेंगे.

प्रकाळा – आपने बहोत बड़ी खबर सुनाई है मुझे गुरुदेव मए खुद उस दुःख से बहार नहीं निकल प् रहा था. आपने सच hi कहा था के हमे प्रसन्नता होगी आज आपकी ये बात सुन कर हम बेहद प्रसन्न है गुरुदेव इससे बड़ी खुशखबरी तो कोई हो hi नहीं सकती. ईश्वर का लाख लाख धन्यवाद के वो दोनों बच्चे सही सलामत वापसी की रह पे चल पड़े है. कुछ समय बाद hi सही किन्तु वो आएंगे. किन्तु आपने ये नहीं बताया के अपनी इतनी व्यस्तता से समय निकल के स्वयं यहाँ आने का कष्ट क्यों किया?

गुरुदेव – वही बताने जा रहा हु पुत्र suno.jis देव और पूनम के लिए तुम इतने व्याकुल हो गए थे जब वो दुबारा जनम ले कर आएंगे तब तुम्हे उनसे मिलने का मौका मिलेगा. यही नहीं तुम उनकी सहायता करने के इच्छुक थे न तो अब तुम्हारा ये दायित्व है के तुम्हे उनकी सहायता का मौका उस वक़्त मिलेगा.

प्रकाळा – ये तो मेरे लिए गर्व की बात है गुरुदेव बताइये मुझे क्या करना होगा?

गुरुदेव – प्रकाळा मए तुम्हे एक चीज़ देने जा रहा हु जिसे तुम्हे देव को देना है और ………………….

वर्तमान



प्रकाळा – और फिर मेरे गुरुदेव ने मुझे कुछ दिया और साडी बात समझा दी

रूद्र – लेकिन प्रेतराज ऐसा क्या दिया उन्होंने आपको.

प्रकाळा – रूद्र उन्होंने मुझे ये दिया है





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अपडेट – 260

सभी लोग उस बोतल को बहोत ध्यान से देखने लगे.

देव – प्रेतराज ये क्या है?

प्रकाळा – ये एक दिव्या जल है देव. और मेरे गुरुदेव ने कहा था के इसे आपके सुपुर्द करना है क्यों के हर बीतते हुए दिन के साथ आप की दुरी उस भीषण लड़ाई से घटती जा रही है जो होनी तय है. जिसका इंतजार जितना आपको है उतना hi बुरी ताक़तों को भी है जिस तरह आपने अपनी तैयारियां कर ली है और अब भी कर रहे हो ठीक वैसे hi बुरी ताकते भी अपनी पूरी तैयारियों में लगी हुई है और इसीलिए मेरे गुरुदेव ने ये आपको देने के लिए कहा था

देव – लेकिन प्रेतराज इससे मुझे क्या फायदा होने वाला है?

प्रकाळा - ये बताने का हक़ मेरे पास नहीं है ये बड़ी ताक़तों का काम है वक़्त आने पे आपको वही ये बतायेगे. पर ये मन लो के ये आप के लिए जीवन अमृत के सामान है . आप बेहद शक्तिशाली है आपको हराना आसान नहीं लेकिन इसका कुछ अद्भुत hi काम है जिसके बारे में आपको बड़ी ताकते या फिर उनके द्वारा निश्चित की हुई कोई तककत hi बता सकती है.

लेकिन प्रेत राज…………….. अभी देव ने इतना hi कहा था के अचानक उसे एक झटका सा लगा और उसने तुरंत hi आंखे बंद कर ली.

देव की देखा देखि शलाका और रूद्र ने भी तुरंत आंखे बंद की इन्हे ऐसे देख कर प्राण और परकाला चौंक गए उनके चेहरों पे लाखो प्रश्न घूमने लगे. थोड़ी hi देर में देव की आंखे खुली जो गुस्से से लाल थी यही हाल रूद्र और शलाका का भी था. तीनो का चेहरा इस समय गुस्से के मरे जल रहा था. तीनो एक साथ hi उठ खड़े हुए.

देव बिना कुछ कहे आगे हाथ बढ़ाया तो सामने एक पोर्टल खुल गया. जिसमे देव बिना किसी से कुछ कहे तेजी से घुस गया उसके पीछे लगभग दौड़ते हुए रूद्र और शलाका भी उस पोर्टल में समां गए. तभी प्राण उठी.

प्राण - पिताजी जरूर कोई बड़ी गड़बड़ हुई है वार्ना देव ऐसे न जाते यहाँ से चलिए. हम भी चलते है.

फिर प्रेतराज और प्राण भी उस पोर्टल में चले गए और तभी वो पोर्टल वह से गायब हो गया. और सब कुछ पहल जैसा हो गया जैसे वह कभी कोई रास्ता खुला hi नहीं tha.poore महल में वही वीराना छ गया.

उधर गाँव मेकुछ समय पहले,

बंगलो के बेसमेंट में सुबह के वक़्त nagarjun,poonam, नीलम, रजनी, गुरुम और चन्नो बैठे थे सभी के चेहरे पे कुछ टेंशन थी.

गुरुम - क्या कहती हो भाभी देव को बुलाया जाये?

पूनम - नहीं गुरुम वो लोग बेहद खास काम से गए है और मुझे मेरी शक्तिया बता रही है के इस वक़्त वो बिजी भी है तो उन्हें बुलाना उचित नहीं होगा.

रजनी – लेकिन पूनम देव का गुस्सा तो तुम जानती hi हो उसे पता चल hi जायेगा और जब उसे पता चलेगा तो वो हम में से किसी को नहीं बख्शेगा सब की परेड लग जाएगी

नागार्जुन – मए भाभी से सहमत हु हमें अभी उन लोगो को डिस्टर्ब नहीं करना है. हलाकि देव और रूद्र से कुछ छुपा नहीं रहेगा मन लो वो अपनी व्यस्तता में इधर ध्यान नहीं भी दे पाए तो वो है न शैतान की खला शलाका उसका ध्यान तो जायेगा hi फिर उन्हें यहाँ पहुंचने में देर नहीं लगने वाली.

नीलम - है तो सही है न देव भैया का गुस्सा हम लोग झेल लगे. और तुमने पूनम के बच्चो को शैतान कैसे कह दिया? अरे पागल उसके बच्चो की hi तो शलाका खला बनेगी न? आगे से जरा सोच के बोलै कर. वैसे भी जब पूनम दीदी साथ है तो देव को तो वही संभल लेगी क्यों पूनम?

चन्नो - अरे यार ऐसा भी नहीं है मेरा भाई, के बिना बात के हमें डाँटेगा.

गुरुम – तुम समझ नहीं रही हो चन्नो ये छोटी बात नहीं है भगवन न करे कुछ भी ऊंच नीच हो गयी तो?

पूनम – गुरुम क्यों बेकार में चिंता कर रहे हो ऐसा कुछ नहीं होगा और ये बात यद् रखो के मच्छरों को मरने के लिए बैगन hi काफी होता है उन के लिए टैंक बुलाने की जरुरत नहीं है और फिर अगर देव ने कुछ कहा तो मए बात कर लगी न.

गुरुम – ठीक है जब सबकी यही रे है तो यही सही चलो देव का गुस्सा भी सब मिल के सहेंगे और है के सहेंगे वैसे उस समय भाभी आपको hi सबसे आगे खड़े रहना पड़ेगा.

पूनम - मंजूर है अब प्लान कर ले?

नागार्जुन – प्लान सिंपल है वो लोग जंगल में है यानि इस गाँव से बहोत दूर है उन्हें बिना कोई मौका दिए थोक देते है.

गुरुम - नहीं नागार्जुन ये कोई साधारण लोग नहीं जिन्हे थोक देंगे वो भी चुप चाप. वो बहोत ज्यादा है. और मत भूलो वो सब पिशाच है.

नागार्जुन - भाई पिशाच लोग को अपनी पिशाब न पीला दी तो कहना मुझे.

पूनम – ा………. लैंग्वेज…

नागार्जुन - सॉरी लेडीज लेकिन गुरुम उनसे परेशां होने की भी जरुरत नहीं है. मैने कुछ सोचा है उन के बारे में

फिर नागार्जुन उन्हें अपना प्लान बताता है. सब कुछ सुन कर

पूनम - प्लान तो जबरदस्त है इस हिसाब से हमला उन्हें hi पहले करने दिया जायेगा. वैरी गुड़ नागार्जुन ……….. तो ये तय रहा इस प्लान में किसी को कुछ भी चेंज करना है तो अभी बता दो आखरी समय में कोई चेंज नहीं होगा.

सभी एक साथ - कोई चेंज नहीं होगा

पूनम - फिर ठीक है नागार्जुन तुम लग जाओ काम पे लेकिन उन्हें तुम्हारे एक्शन की भनक नहीं लगनी चाहिए.

चन्नो - मेरा एक सवाल है.

पूनम - बोलो

चन्नो - ऐसा हो नहीं सकता के देव भैया को पता न चले और उन्हें पता चला तो वो सब छोड़ के पहुंच जायेगे ऐसे में अगर देव भैया ने अपनी तरफ से अलग hi एक्शन किया जो के करेंगे hi तो? तब क्या होगा?

पूनम - तुम्हारा विचार सही है चन्नो, लेकिन जहा देव रूद्र और शलाका एक साथ खड़े हो वह वैसे भी हम में से किसी को कुछ करने की जरुरत नहीं रह जाएगी तब बस जो सामने आये उसे ख़तम करना इसके आलावा कोई प्लान नहीं. और वो कहलायेगा “प्लान बी”

सभी फिर से - एग्री……

सब अपनी अपनी तैयारियों में लग जाते है और नागार्जुन चला जाता है उस मैदान की तरफ जो आज रत उनका मैदान- इ- जुंग बनने वाला था यानि जंगल की तरफ. क्यों की जंगल जहा ख़तम होता है वही से एक बहोत बड़ा कई एकड़ का मैदान है उसके बाद गाँव शुरू होता है यानि गाँव की सरहद और जंगल के बीच.

नागार्जुन वह जाकर स्पेशल शील्ड लगा देता है जिसे कोई पर नहीं कर सकता सिवाए उन्ही की पूरी टीम के जिसमे देव रूद्र और शलाका भी शामिल थे. इन सब के आलावा कोई उसे पर नहीं कर सकता. साथ hi गाँव के पास नागार्जुन अपनी शक्तियों से एक अदृश्य दीवार बना देता है यानि इस तरफ आज रत जो भी होगा गाँव वालो को उसकी बिलकुल भी खबर नहीं लगने वाली. न कोई नजारा न कोई आवाज़ इस तरफ कुछ नहीं आने वाला. उसके बाद गुरुम वह की जमीन में भी कुछ खुराफात कर देता है. और उस पूरे मैदान को अपनी तरफ से तैयार कर के दोनों आ जाता है वापस घर की तरफ.

पूनम - तो कैसा रहा बंदोबस्त.

नागार्जुन - एक no. भाभी वह ऐसी पावर्स फिट कर दी है के अब उन्हें यमलोक जाने से कोई नहीं बचा सकता. और इन सब के बाद हम लोग तो है hi.

पूनम - ok फिर अब रत का इंतजार है.

उधर जंगल में अघोरी बुरी तरह बौखलाया हुआ घूम रहा था अपनी गुफा में जिसके सामने पिशाचराज का खास आदमी खड़ा था.

अघोरी - पिपासु ये बहोत गलत कर दिया पिशाचराज ने उसे खुद आना था यहाँ इस वक़्त. मैने कहा था के ये बेहतरीन मौका है. पर वो पता नहीं कहा व्यस्त है.

पिपासु – तुम घबरा क्यों रहे हो अघोरी? अभी तुम्हे मेरी ताक़तों का अंदाज़ा नहीं और ऐसे छोटे छोटे कामो के लिए पिशाचराज आने लगे तो वो कहे के राजा रह जायेगे. तुम परेशां मत हो मए आया हु मतलब पिशाचराज स्वयं आये है बस आज रत को देखना मए कैसे उनके घर में घुस कर उन्हें मौत की नींद सुलाता हु और पिशाचराज ने कहा है वह की लड़कियों और औरतो को लेन के लिए तो उन्हें मए अपने साथ hi ले जाउगा.

अघोरी – ले तो तब जायेगा न जब उन्हें हराएगा.

पिपासु - उन्हें हरा हुआ hi समझ अघोरी. और अब चिंता छोड़ मुझे प्यास लगी है मेरे लिए ताजे खून का बंदोबस्त कर.

अघोरी ताली बजता है तो वह कनिका हाजिर हो जाती है जो इस वक़्त भी अपनी hi वेशभूषा में थी यानि पूरी नंगी. जिसे देख कर पिपासु की आंखे लाल हो जाती है वो आगे बढ़ कर कनिका की चूचिया पकड़ के मसलने लगता है.

अघोरी - ये तेरे भोगने के लिए नहीं है पिपासु ये मेरी खास है इसे मेरे आलावा और कोई नहीं छू सकता. ये तुझे लेने आयी है इसके साथ जा ये तुझे तेरे कमरे में ले जाएगी वह सब इंतजाम है. खून का भी और छूट का भी चल जा और बुझा ले अपनी हर तरह की प्यास. लेकिन अपनी तयारी पूरी रखना ऐसा न हो के तू यहाँ मदहोश पड़ा रहे और सब किये कराये पे पानी फिर जाये.

पिपासु कनिका की चूचिया मसते हुए – ऐसा नहीं होगा अघोरी. मैने कहा न मेरे होते तू चिंता मत कर. पर अगर तेरी ये खास सेविका आज मेरे नीचे आ जाती तो मजा hi आ जाता क्या मस्त बदन है इसका इसे छोड़ने को दिल नहीं मन रहा है.

अघोरी - बकवास न कर और जा अपने रूम में………….. कनिका इसे इसका कमरा दिखा के मेरे पास आओ कुछ काम है.

कनिका - ठीक है अघोरी मए अभी आयी.

फिर कनिका आगे आगे चलने लगती है और उसकी नंगी गांड को अपनी आँखों से छोड़ते हुए पिपासु भी उसके पीछे जाने लगता है. अपना लुंड मसलते हुए.
 
दोस्तों बहोत लम्बे समय के बाद हम इस पोर्टल पे आये है क्यों कहे को इन सब बातो का कोई मतलब नहीं क्यों के आप लोग यहाँ अपना मनोरंजन करने आते है हम वरिटेरस की समस्याएं सुनने नहीं . तो हम आप सब से माफ़ी चाहते है की इतने समय बाद आये है और कोशिश करेंगे के अब ऐसा न हो.

सो लेटस स्टार्ट और जर्नी ओनेस अगेन.
 
तो कहानी ये थी अभी तक के

अघोरी - बकवास न कर और जा अपने रूम में………….. कनिका इसे इसका कमरा दिखा के मेरे पास आओ कुछ काम hae.Kanika - ठीक है अघोरी मए अभी आयी.

फिर कनिका आगे आगे चलने लगती आहे और उसकी नंगी गांड को अपनी आँखों से छोईडे हुए पिपासु भी उसके पीछे जाने लगता है.

अपडेट 261


थोड़ी देर के बाद कनिका वापस आ जाती है लेकिन उसकी चूचिया पूरी लाल पड़ी हुई थी और उसके बाल भी बिखरे हुए थे.

अघोरी - उस जानवर ने तेरा भोग तो नहीं लगा दिया?

कनिका - इतना भी आसान नहीं है मेरा भोग लगाना अघोरी. और जितना उसने किया वो तो ये समझता है उसने अपने बाहुबल से किया मुझे मजबूर कर के लेकिन उसे ये पता नहीं के अगर मए खुद उसे इतना करने की छूट न देती तो वो मुझे छू भी न पता . पर वो तुम्हारा मेहमान है और उसकी अहमियत मए समझती हु इसलिए उसे इतना बर्दाश्त कर लिया मैने.

अघोरी - चुटिया है साला, मुर्ख कही का , गधा. पता नहीं आज रत क्या होगा. ये गुरुदेव भी आज कल मेरे पास नहीं आ रहे है पता नहीं कहा व्यस्त है. तुम मेरे लिए जैम बनाओ और मनिका कहा है?

कनिका – वो अंदर hi है अपनी साधना में बुलाऊ क्या उसे भी?

अघोरी - नहीं रहने दो अभी उसकी जरुरत नहीं है बस आज की रत जैसा मैने सोचा है अगर वैसा हो जाये तो तुम दोनों को कई दिनों तक एक साथ छोड़ूगा और तुम दोनों को खुश कर दुगा ये थोड़ी परेशानी ख़तम हो जाये बस.

कनिका मुस्कराते हुए - सचमे? हमें भी उस पल का इंतजार रहेगा अघोरी .

इसी तरह रत हो जाती है और पिपासु बहार आता है उस कमरे से उस कमरे में जगह जगह खून बिखरा हुआ था जो पिपासु ने पिया था एक तरफ शराब के गिलास पड़े थे और बिस्तर पे एक लड़की की नंगी लाश पड़ी थी जिसे पिपासु ने आगे पीछे से छोड़ छोड़ के उधेड़ दिया था और आखिर में उसी का कौन पूरा चूस के कमरे से बहार निकला था.

पिपासु - अघोरी मेरे हिसाब से अब सही वक़्त आ गया है उन पर हमला करने का. इसीलिए मए जाता हु.

अघोरी - जा लेकिन मुझसे किसी तरह की कोई उम्मीद मत रखना क्यों की ये लड़ाई मए पिशाचराज के साथ लड़ने वाला था पर वो नहीं आया तो अब तू खुद hi संभल.

पिपासु – मुझे तेरी कोई जरुरत भी नहीं पड़ने वाली तू वह जा कर भी कुछ नहीं कर पता वैसे भी मए hi सब निपटा देता. तो मए hi जाउगा तू यही रह और अपनी दासी की बजा मए आता हु.

पिपासु बहार निकलता है और अपनी सेना को देखता है जो के कोई 1000 के आसपास सैनिको की थी सभी इस वक़्त तैयार खड़े थे.

पिपासु - तो साथियो अब वो वक़्त आ गया है जिसके लिए हम लोग यहाँ आये है हम लोग जिस गाँव में जा रहे है वह पहले हमें अपने दुश्मनो को मरना है उन्हें बिना कोई मौका दिए और जब वो सब ख़तम हो जाये तो उन दुश्मनो के आलावा जिसे जो औरत या लड़की पसंद हो वो उसे भोग सकता है और किसी का भी लहू पी कर अपनी प्यास बुझा सकता है अगर कोई बहोत पसंद आ जाये तो उसे अपनी बिरादरी में शामिल कर के हमेशा के लिए उसे अपनी दासी भी बना सकता है और जिंदगी भर उसे भोग सकता है बच्चे भी पैदा कर सकता है. वैसे सुना है के यहाँ की औरते बहोत hi सुन्दर और कामुक है. तो लग जाओ अपने काम पर लेकिन पहले दुश्मनो का नाश फिर अपना काम समझ गए न तुम लोग

सभी सैनिक - हआ…………….

पिपासु - चलो फिर चलते है अपने निशाने की तरफ

पिपासु आगे आगे बढ़ रहा था सब के हाथो में खतरनाक किन्तु अजीब hi तरह के हथियार थे. वो लोग आगे बढे चले जा रहे थे. पिपासु अपने पूरे सैनिको के साथ जंगल से बहार आ जाता है और आगे बढ़ने लगता है उसे ये नहीं पता चलता के जैसे hi वो लोग सब के सब जंगल से बहार आये नागार्जुन की अदृश्य दीवार ने जंगल के बहार भी अपना जल बिछा दिया अब जंगल के अंदर बैठे अघोरी को बहार सब शांत hi नजर आने वाला है वह होने वाले घमासान की उसे कोई खबर नहीं मिलने वाली. एक तरह से पिपासु अपने पूरे सैनिको के साथ नागार्जुन के चक्रव्यूह में कैद हो चुक्का था और अघोरी से उसके सरे कनेक्शन कट चुके थे लेकिन वो इस बात से अनजान अपनी hi मस्ती में आगे बढ़ा चला जा रहा था.

तभी उसे घोडा आगे बढ़ते बढ़ते एक डैम से रुक गया. पिपासु ने उसे आगे बढ़ाने की बहोत कोशिश की लेकिन घोडा एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा था. पिपासु घोड़े से नीचे उतर के आगे कदम बढ़ाता है तो वो खुद भी आगे नहीं जा प् रहा था.

पिपासु की आंखे गुस्से में जलने लगती है - धोखाआ..

लेकिन तब तक बहोत देर हो चुकी थी. गुरुम की शक्तियों से वह चारो तरफ धमाके शुरू हो चुके थे जिसमे कई पिशाच तो बिना बात को समझे hi उड़ गए उन में अफरा तफरी मच गयी एक तरफ से उन पर नीलम ने अपने वार करने चालू कर दिए तो दूसरी तरफ से चन्नो ने . सबसे आगे गुरुम था और सबसे पीछे यानि जंगल की तरफ का मोर्चा नागार्जुन ने संभल लिया एक तरह से वो पिशाच चारो तरफ से घिरे हुए थे और उन पर चारो तरफ से hi हमले हो रहे थे और उनके शरीर तूफ़ान में तिनके की तरह उड़ रहे थे उनके अंग हवा में उड़ रहे थे. कोई अपनी जगह पे खड़े खड़े hi रख के ढेर में बदल रहा था. और ये सब पिपासु बौखलाया हुआ बीचो बिच खड़ा देख रहा था. तभी उसे अपनी पीठ पर बहोत तेज धार से वॉर महसूस हुआ और उसकी पीठ पे एक आग की लकीर बन गयी ये कोई और नहीं बल्कि पूनम थी जो अकेली पिपासु के सामने कढ़ी थी. उसकी मौत बन कर.

पिपासु - तुम लोगो ने धोखे से वार किया हम पर……….

पूनम - है तू तो हमें न्योता देने आ रहा था न युद्ध का . सेल नीच तू खुद हमें धोखे से मरने की नियत से hi आ रहा था न? हमने कोई धोखा नहीं दिया इसे सिर्फ अपनी सावधानी कहते है अपनी सीमाओं की रक्षा करना कहते है तूने हमारे इलाके में आकर हम पर घाट लगाने की कोशिश की. खुद को ताक़तवर , होशियार और हमें बेवक़ूफ़ समझा तो ये बेवकूफी तेरी थी इसमें हमारी तरफ से कोई धोखा नहीं था हमने नहीं कहा था की तू हमें यानि अपने दुश्मनो को कमजोर समझ. तूने खुद hi हमें कमजोर समझा और अब रो रहा है?

………….. और क्या कह कर अपने सैनिको का मनोबल बढ़ा रहा था हमारे साथियो को मार के हमें और यहाँ की औरतो को ले जाने वाले थे न तुम लोग. तो अब औरतो के हाथो से hi मर तू.

इतना कह कर पूनम ने अपना हाथ आगे किया और उस पर अपनी शक्ति का वार किया जिसे पिपासु ने अपनी मायावी तलवार पे काट दिया और उल्टा वार पूनम पे कर दिया तो पूनम ने भी उसकी शक्ति को सिर्फ झुके देकर विफल कर दिया. लेकिन तभी पिपासु ने लगातार पूनम पे वार शुरू कर दिए. तो पूनम ने भी अपने हाथ में एक चमकती हुई तलवार प्रकट की और बिजली की तेजी से अपनी जगह पे घूमने लगी पूनम की तेजी इतनी ज्यादा थी के पिपासु की आँखों की आगे सिर्फ धुल का बवंडर hi नजर आ रहा था वो छह कर भी पूनम की स्पीड का न तो मुकाबला कर प् रहा था न hi उसे रोक प् रहा था, और न hi उसे देख प् रहा था.

उधर गुरुम , नीलम, चन्नो, रजनी, और नागार्जुन भी सरे सैनिको पे मौत बन कर बरस रहे थे.

तभी नागार्जुन को एक सैनिक की तलवार पैरो में लगी और वो जमीन पे गिरा तो एक साथ कई सैनिको ने उसे घेर लिया और अपनी तलवारो से hi उसे मरने को लपके नागार्जुन इस वक़्त बुरी तरह से घिरा हुआ था. उन के बीच और किसी का भी वार उस पर चल सकता था. लेकिन उन सैनिको ने नागार्जुन पे एक साथ हमला किया और कई तलवारे नागार्जुन की तरफ बढ़ रही थी लेकिन तभी तेजी से दो तलवारे लपकी जिससे उन सैनिको की गर्दन अलग होती चली गई और एक बहोत बाद ढल आकर गिरी नागार्जुन पर जिससे उस तक पहुंच चुकी कुछ तलवारे उस ढल से टकरा कर बेकार हो गयी ये थे नीलम, चन्नो और गर्म जिन्होंने आखरी समय पे नागार्जुन को घिरे देखा तो तेजी से घूमते हुए सैनिको की गार्डन काटते चले गए और चन्नो ने अपनी पीठ से ढल उतर कर नागार्जुन के ऊपर फेंक दी थी. बस इतना वक़्त काफी था नागार्जुन के लिए वो फुर्ती से उठा और उसे घेरे खड़े सैनिको के पेट कट्टा चला गया. चारो तरफ कोहराम मचा हुआ था. सरे सैनिको की चीखे hi चीखे गूंज रही थी .

इस युद्ध में भी मायावी शक्तियों के आलावा शारीरिक बल का इस्तेमाल हो रहा था.

तभी कुछ सैनिको ने चन्नो को घेर लिया एक सैनिक की तलवार चन्नो की पीठ पे चली जिससे वो चीख पड़ी लेकिन तुरंत hi खुद को संभल लिया वो सैनिक अपनी तलवारे और गंडासे लिए चन्नो को घेरते जा रहे थे और उस पर हंस रहे थे तभी एक सैनिक ने चन्नो को पीछे की तरफ से पकड़ लिया और उसकी गार्डन पे अपने दन्त गाड़ने hi वाला था की उसके पीछे गुरुम पंहुचा और और उस सैनिक को सर से पैर टेक क hi वार में चीयर के रख दिया. ये देख बाकि सैनिक क्रोध में उन पर लपके तो गुरुम ने चन्नो का हाथ पकड़ा और उसे हवा में उठा दिया और खुद से दूर कर दिया . फिर तुरंत सरे सैनिको के बीच पहुंच कर उन्हें काटना चालू कर दिया.

उधर पिपासु पूनम के साथ उलझा हुआ था. और पूनम ने उसे जख्मी भी कर दिया था. जिससे वो समझ गया के पूनम उस पर भरी पद रही है. तो उसने यहाँ वह नजर घुमाई और उसकी नजर पड़ी नीलम पर जो उससे कुछ hi दूर कड़ी उसके सैनिको को काट रही थी और उसके सैनिक उसका मुकाबला नहीं कर प् रहे थे. उसने तेजी से आगे बढ़ कर नीलम का हाथ पकड़ा और उसे लेकर हवा में ऊपर उठता चला गया. अब नीलम की गार्डन पिपासु के हाथ में थी.

पूनम ने जब ये देखा तो – पिपासु छोड़ उसे वार्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा .

पिपासु - हम यहाँ किसी अचे अंजाम के लिए आये भी नहीं है जानेमन. या मरेंगे या तुम लोगो को मार देंगे. और अब तो ये मेरे कब्ज़े में है अगर तुममे से कोई भी आगे बढ़ा तो इसकी गार्डन मए तोड़ दुगा. इतना कह कर उसने नीलम की गार्डन पे अपनी पकड़ सख्त कर दी.

पूनम - कायर है तू क्यों की अगर तुझमे एक योद्धा होता तो तू मुकाबला करता इस तरह धमकिया देकर डरने की कोशिश न करता अगर तू सच में एक योद्धा आहे तो मुकाबला कर मेरा. छोड़ उसे और मेरे सामने आ.

पिपासु - अब तू मुझे अपनी बातो में नहीं फसा सकती पर है तुझ पर मेरा दिल आ गया है बहोत खूब लड़का है तू तुझे मसलने में मजा आएगा. अगर तू चाहती है के मए इसे छोड़ दू तो अपनी साडी शक्तिया त्याग कर आजा मेरे पास मए तुझे जान से नहीं मरुँगा बल्कि तुझे अपनी रानी बनाऊगा. और तेरे इस बदन की खूब सेवा करुगा अपनी मर्दानगी से. हम दोनों के बीच एक नया मुकाबला होगा वो भी नंगे हो कर मेरे शानदार बिस्तर पर बोल करेगी बिस्तर पे मेरा मुकाबला ?

पूनम - सेल नामर्द तू मुझे मर्दानगी दिखायेगा? मेरे मर्द का सामना अगर हो गया न तुझसे तो तू यही मूट देगा.

पिपासु – फिर भी तुझे चखने का विचार नहीं छोड़ सकता मए. जल्दी आ वार्ना मए जा रहा हु इसे लेकर आज इसका hi भोग लगाऊगा.

उधर ये साडी बाटे गुरुम, नागार्जुन, चन्नो और रजनी भी सुन रहे थे लेकिन पूनम ने उन्हें बीच में आने से मन कर दिया उन्हें इशारा कर के इसीलिए वो इन से दूर रह कर अपनी तरफ के सैनिको से hi भिड़े हुए थे लेकिन सबकी नजर बराबर उन पर थी. गुरुम बार बार लाचारी से पूनम को देख रहा था और आँखों hi आँखों में आगे जाने की इजाजत भी मांग रहा था लेकिन पूनम ने उसे रोक रखा था. वो जानती थी के एक इशारे की देर है ये सब पिपासु पे टूट पड़ेगे लेकिन इसमें नीलम की जान भी जा सकती है. इसीलिए वो इन्हे आगे नहीं आने दे रही थी. बस वो एक मौका चाहती थी जिससे वो पिपासु के करीब जा सके.

पूनम - ठीक है मए आती हु तेरे पास इतना कह कर पूनम भी ऊपर आ जाती है ठीक पिपासु के सामने आकर ……… अब छोड़ इसे और चल मुझे ले चल जहा ले जाना हो मए तैयार हु.

पिपासु - मए तेरे जिस्म का दीवा जरूर हु लेकिन मुर्ख नहीं मए जनता हु तू तिलिस्मी शक्तियों की मालिक है वो साडी शक्तिया इस बोतल में दाल और चल मेरे साथ तब छोड़ूगा इसे. इतना खा कर पिपासु ने हाथ आगे बढ़ाया तो उसके हाथ में एक कांच की बोतल आ गयी

पूनम जानती थी ये एक मायावी बोतल है जिसमे उसकी शक्तिया नष्ट हो जाएगी.
 
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