#126.
चैपटर-8, बर्फ का ड्रैगन:
(13 जनवरी 2002, रविवार, 16:10, मायावन)
जैसे-जैसे सभी आगे की ओर बढते जा रहे थे, बर्फ की घाटी की सुंदरता बढ़ती जा रही थी।
चारो ओर बर्फ ही बर्फ दिखाई दे रही थी, पर उस बर्फ में ज्यादा ठंडक नहीं थी।
तभी चलती हुई शैफाली ने जेनिथ की ओर देखा, जेनिथ शून्य में देखकर मुस्कुरा रही थी।
शैफाली को यह बात थोड़ी विचित्र सी लगी। इसलिये वह चलती-चलती सुयश के पास आ गयी और धीरे से फुसफुसा कर बोली-
“कैप्टेन अंकल, मुझे आपसे कुछ कहना है?”
“हां-हां बोलो शैफाली।” सुयश ने शैफाली पर एक नजर डाली और फिर रास्ते पर चलने लगा।
“कैप्टेन अंकल, मैं जेनिथ दीदी के व्यवहार में कुछ दिनों से परिवर्तन देख रहीं हूं।” शैफाली ने कहा।
“परिवर्तन! कैसा परिवर्तन?” सुयश ने आगे जा रही जेनिथ की ओर देखकर कहा।
“पिछले कुछ दिनों से वह तौफीक अंकल से बात नहीं कर रही है और मैंने यह भी ध्यान दिया है कि वह बिना किसी से बात किये ही अचानक मुस्कुरा उठती हैं। मुझे लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति उनके साथ है, पर वह यह बात हम लोगों से बता नहीं रहीं हैं।” शैफाली ने जेनिथ पर अपना शक जाहिर करते हुए कहा।
“यह भी तो हो सकता है कि तौफीक से उसकी लड़ाई हो गयी हो, जो हम लोगों की जानकारी में ना हो और रही बात बिना किसी से बात किये मुस्कुराने की, तो वह तो कोई भी पुरानी यादों को सोचते हुए ऐसा ही करता है” सुयश ने जेनिथ की ओर से सफाई देते हुए कहा।
“पर कैप्टेन अंकल, आप स्पाइनो सोरस के समय की बात भी ध्यान करिये। अचानक से जेनिथ दीदी ने उस स्पाइनोसोरस के ऊपर हमला कर दिया था।”शैफाली ने पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा।
“ठीक है, मैंने अभी तक तो इस बात पर ध्यान नहीं दिया था, पर अब अगर तुम कह रही हो तो मैं भी ध्यान देकर देखता हूं। अगर मुझे भी जेनिथ पर कोई संदेह हुआ? तो हम उससे अकेले में बात करेंगे।
"तब तक तुम यह ध्यान रखना कि यह बात तुम्हें अभी और किसी से नहीं करनी है? नहीं तो हम आपस में ही एक दूसरे पर संदेह करते हुए, अपनी एकता खो देंगे।” सुयश ने शैफाली को समझाते हुए कहा।
“ठीक है कैप्टेन अंकल मैं यह बात ध्यान रखूंगी।”
यह कहकर शैफाली ने अपनी स्पीड थोड़ी और बढ़ाई और आगे चल रहे जेनिथ, तौफीक और क्रिस्टी के पास पहुंच गयी।
लगभग 1 घंटे तक चलते रहने के बाद, सभी घाटी के किनारे के एक पहाड़ के नीचे पहुंच गये।
उन्हें उस पहाड़ के नीचे एक बहुत खूबसूरत सा पार्क दिखाई दिया। जहां पर किसी बूढ़े व्यक्ति की लकड़ी से निर्मित 7 मूर्तियां, एक गोलाकार दायरे में लगी दिखाई दीं।
वहां पर एक बोर्ड पर किसी दूसरी भाषा में ‘कलाट उद्यान’ लिखा था, जिसे शैफाली ने पढ़कर सभी को बता दिया।
“शायद इस बूढ़े व्यक्ति का नाम ही कलाट है।” जेनिथ ने बूढ़े व्यक्ति की मूर्तियों का ध्यान से देखते हुए कहा।
जेनिथ की बात सुन सुयश ने भी सहमति में अपना सिर हिलाया।
अब सभी ध्यान से उन मूर्तियों को देखने लगे। पहली मूर्ति में कलाट किसी ज्यामिति विद् की तरह जमीन पर बैठकर कुछ आकृतियां बनाता दिख रहा था।
वह आकृतियां गोलाकार, त्रिभुजाकार, शंकु आकार और पिरामिड आकार की थीं।
दूसरी मूर्ति में कलाट किसी खगोलशास्त्री की भांति हाथ में दूरबीन लिये आसमान में विचरते ग्रहों को निहार रहा था।
तीसरी मूर्ति में कलाट किसी रसायन शास्त्री की भांति कुछ अजीब से बर्तनों में रसायन मिला रहा था।
चौथी मूर्ति में कलाट लकड़ी की नाव में बैठकर समुद्र में जाता दिख रहा था।
पांचवी मूर्ति में कलाट एक जगह बैठकर किसी पुस्तक को लिख रहा था।
छठी मूर्ति में कलाट एक हाथ में तलवार और एक हाथ में कुल्हाड़ा लेकर किसी ड्रैगन से युद्ध कर रहा था।
सातवीं मूर्ति में कलाट हाथ जोड़कर देवी शलाका की वंदना कर रहा था। वंदना कर रहे कलाट के सामने एक लकड़ी का यंत्र रखा हुआ था। जिस पर आग फेंकते हुए गोल सूर्य की आकृति बनी थी।
यह वही आकृति थी, जो सुयश की पीठ पर टैटू के रुप में बनी थी।
सुयश ने आगे बढ़कर उस लकड़ी के विचित्र यंत्र को उठा लिया।
तभी क्रिस्टी बोल उठी- “मुझे लगता है कि यह बूढ़ा व्यक्ति इस द्वीप का कोई योद्धा है, जिसने इस द्वीप के लिये बहुत कुछ किया है। उसी की याद में ये उद्यान एक प्रतीक के रुप में बनवाया गया होगा। क्यों कैप्टेन मैं सही कह रही हूं ना?”
मगर सुयश तो जैसे क्रिस्टी की बात सुन ही नहीं रहा था, वह अभी भी उस विचित्र यंत्र को हाथ में लिये उस पर बनी सूर्य की आकृति को निहार रहा था।
कुछ सोचने के बाद सुयश ने धीरे से उस यंत्र पर बनी सूर्य की आकृति को अंदर की ओर दबा दिया।
सूर्य की आकृति के अंदर दबते ही उस यंत्र से तितली की तरह दोनों ओर लकड़ी के पंख निकल आये।
बांये पंख पर नीले और हरें रंग के 2 बटन लगे थे और दाहिने पंख पर पीले व लाल रंग के 2 बटन लगे थे।
“अब यह क्या है?” तौफीक ने झुंझलाते हुए कहा- “इस द्वीप पर कोई भी चीज सिम्पल नहीं है क्या? हर चीज अपने अंदर कोई ना कोई मुसीबत छिपा कर रखे है?”
“इन्हीं मुसीबतों के बीच में कुछ अच्छी चीजें भी तो छिपी हैं।” जेनिथ ने कहा- “अगर हम हर वस्तु को मुसीबत समझ उसे नहीं छुयेंगे, तो उन अच्छी चीजों को कैसे प्राप्त कर पायेंगे, यह भी तो सोचो।”
“अब क्या करना है कैप्टेन अंकल?” शैफाली ने उस यंत्र को देखते हुए पूछा- “क्या इस पर लगे बटनों को दबा कर देखा जाये? या फिर इसे यहीं छोड़कर आगे की ओर बढ़ा जाये?”
“रिस्क तो लेना ही पड़ेगा।” सुयश ने एक गहरी साँस भरते हुए कहा- “बिना रिस्क लिये हम इस जंगल से बाहर नहीं निकल पायेंगे।”
यह कहकर सुयश ने उस यंत्र के ऊपर लगा नीले रंग का बटन दबा दिया।
नीले रंग का बटन दबाते ही उस उद्यान के बीच में, जमीन से एक लगभग 15 फुट ऊंचा पाइप निकला।
पूरी तरह से निकलने के बाद उस पाइप के बीच से असंख्य पाइप निकलने लगे।
थोड़ी देर के बाद, वह पाइप से बना एक वृक्ष सा प्रतीत होने लगा।
“यह सब क्या है कैप्टन?” क्रिस्टी ने घबराते हुए कहा- “क्या इस पाइप से फिर कोई नयी मुसीबत निकलने वाली है?”
सभी अब पाइप से थोड़ा दूर हट गये थे।
तभी प्रत्येक पाइप से पानी की एक पतली धार फूट पड़ी और उस उद्यान के चारो ओर बारिश की बूंदों की तरह बरसने लगी।
पहले तो सभी खूनी बारिश को याद कर थोड़ा डर गये, पर जब कुछ बूंदें उनके ऊपर पड़ने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं हुआ, तो सभी खुश हो गये।
हल्की बारिश की बूंदों से मौसम बहुत सुहाना हो गया था।
यह देख सुयश ने उस विचित्र यंत्र पर लगा हरा बटन भी दबा दिया।
हरे बटन के दबाते ही उद्यान के अंदर हर ओर, सुंदर हरे रंगीन फूलों से लदे वृक्ष, बर्फ से निकलने लगे।
कुछ ही देर में बर्फ से ढका वह उद्यान पूरा का पूरा सुंदर फूलों से ढक गया। इन फूलों की खुशबू भी बहुत अच्छी थी।
“वाह! यह यंत्र तो कमाल का है।” जेनिथ ने खुश होते हुए कहा- “एक मिनट में ही पूरे उद्यान का हुलिया ही बदल दिया।
अब तो सभी को बाकी के 2 बटनों को दबाने की जल्दी होने लगी। यह देख सुयश ने यंत्र पर लगे पीले बटन को दबा दिया।
पीले बटन को दबाते ही पार्क के 2 ओर से, जमीन से 2 विशाल गिटार निकल आये और स्वतः ही बजकर वातावरण में मधुर स्वरलहरी घोलने लगे।
“वाह! कितने दिनों के बाद आज कुछ अच्छा प्रतीत हो रहा है।” जेनिथ ने तौफीक की ओर देखते हुए कहा- “कुछ लोग तो इस यंत्र का प्रयोग ही नहीं करने देना चाहते थे?”
तौफीक जेनिथ के कटाक्ष को समझ तो गया, पर उसने कुछ कहा नहीं।
अब सुयश ने यंत्र पर लगे लाल रंग के बटन को दबा दिया।
लाल रंग के बटन को दबाते ही सामने मौजूद पहाड़ का एक हिस्सा, अपने आप ही एक ओर खिसकने लगा।
पहाड़ के खिसकने से जोर की गर्जना हो रही थी।
तभी पहाड़ के खाली स्थान से मुंह से बर्फ छोड़ता एक विशाल ड्रैगन बाहर आ गया।
“ले लो मजा... दबालो और बटन को....।” तौफीक ने गुस्से से जेनिथ को घूरते हुए कहा- “अब झेलो इस नन्हीं सी मुसीबत को।”
लग रहा था कि ड्रैगन बहुत दिनों बाद पहाड़ से निकला था। वह पूरे शक्ति प्रदर्शन पर लगा हुआ था।
वह मुंह आसमान की ओर उठा कर जोर से हुंकार भरते हुए, अपने मुंह से बर्फ फेंक रहा था।
बर्फ के टुकड़े आसमान की ओर जा कर पूरी घाटी में बरस रहे थे। भला यही था कि वह बर्फ के टुकड़े उद्यान पर नहीं बरस रहे थे।
तभी हुंकार भरते ड्रैगन की निगाह उन सभी पर पड़ गयी और वह आसमान में एक उड़ान भरकर उद्यान की ओर आने लगा।
“सब लोग अलग-अलग दिशा में भागो। इतने बड़े ड्रैगन से हम लोग नहीं निपट पायेंगे।” सुयश ने चीखकर सभी से कहा।
सुयश की बात सुनकर सभी अलग-अलग दिशाओ में भागने लगे।
हवा में उड़ते ड्रैगन ने सबको अलग-अलग दिशाओं में भागते हुए देखा और सुयश के पीछे उड़ चला।
ड्रैगन ने भागते हुए सुयश के पीछे से हमला किया। उसने अपने मुंह से ढेर सारी बर्फ सुयश के ऊपर छोड़ दी। सुयश पूरी तरह से बर्फ से ढक गया।
तभी सुयश की पीठ पर बने टैटू से गर्म आग की लपटें निकलने लगीं। उन आग की लपटों ने पूरी बर्फ को पिघला दिया।
आश्चर्यजनक ढंग से निकली वह आग सुयश के शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही थी।
जैसे ही सुयश के शरीर की पूरी बर्फ पिघली, वह रहस्यमय आग ड्रैगन की ओर झपटी।
ड्रैगन उस आग से घबरा गया और सुयश को छोड़ शैफाली की ओर लपका।
इस बार ड्रैगन ने शैफाली पर बर्फ की बौछार कर दी, पर इससे पहले कि शैफाली को एक भी बर्फ का टुकड़ा छू पाता, शैफाली के शरीर को एक रबर के पारदर्शी बुलबुले ने अपनी सुरक्षा में ले लिया। जिसकी वजह से बर्फ का एक भी टुकड़ा शैफाली को छू भी नहीं पाया।
तभी शैफाली ने अपनी ड्रेस में लगे डॉल्फिन के बटन को दबा दिया। शैफाली की ड्रेस से तेज अल्ट्रासोनिक तरंगें निकलकर ड्रैगन के शरीर से टकरायीं।
तरंगों ने ड्रैगन को कई जगह से घायल कर दिया।
ड्रैगन उन तरंगों से बहुत ज्यादा डर गया। इसलिये वह आसमान में उड़कर उद्यान के चक्कर काटने लगा।
तभी तौफीक की नजर उद्यान में मौजूद मूर्तियों की ओर गयी। उद्यान में अब 6 ही मूर्तियां दिखाई दे रहीं थीं।
यह देख तौफीक ने सुयश से चिल्ला कर कहा- “कैप्टेन, उद्यान से कलाट की ड्रैगन से लड़ने वाली मूर्ति गायब है। कहीं इसमें कोई राज तो नहीं?”
यह सुन सुयश का ध्यान भी ड्रैगन से हटकर मूर्तियों वाली दिशा में गया।
तभी सुयश को उन मूर्तियों वाले स्थान पर एक तलवार पड़ी हुई दिखाई दी, जो सूर्य की रोशनी में तेज चमक रही थी।
सुयश ने आगे बढ़कर उस तलवार को उठा लिया।
“मुझे लगता है कि इस ड्रैगन का अंत इसी तलवार से ही होगा?” तौफीक ने तलवार को देखते हुए कहा।
“नहीं...मुझे ऐसा नहीं लगता कि इतना बड़ा ड्रैगन इस छोटी तलवार से मरेगा।” सुयश ने अपनी शंका जाहिर की- “हो ना हो यह सिर्फ हमें भ्रमित करने के लिये रखी गयी है।”
यह कहकर सुयश ने वह तलवार तौफीक को थमाते हुए कहा- “देख लो तौफीक, जब तक इस तलवार से अपना बचाव कर पाओ, तब तक
करो। मैं इस डैगन से बचने का कोई दूसरा उपाय सोचता हूं।”
तभी क्रिस्टी के चीखने की आवाज सुनाई दी- “वह ड्रैगन फिर से नीचे आ रहा है।”
क्रिस्टी की आवाज सुन शैफाली, फिर से ड्रैगन पर तरंगों का वार करने के लिये तैयार हो गयी।
पर इस बार ड्रैगन क्रिस्टी पर झपटा। ड्रैगन ने अपने तेज पंजे क्रिस्टी की ओर बढ़ाये।
क्रिस्टी के पास बचने के लिये बिल्कुल समय नहीं था।
तभी क्रिस्टी अपनी जगह से गायब होकर दूसरी जगह पहुंच गयी। ड्रैगन का वार खाली गया।
क्रिस्टी ये देखकर स्वयं भी हैरान रह गयी।
इस बार ड्रैगन ने पलटकर क्रिस्टी पर बर्फ की बौछार कर दी।
तभी क्रिस्टी फिर गायब हो कर दूसरी जगह पहुंच गयी।
पर इस बार शैफाली की तेज आँखों ने जेनिथ को क्रिस्टी को हटाते देख लिया, पर उसने सुयश की बात याद कर अभी कुछ बोलना उचित नहीं समझा।
जब ड्रैगन के द्वारा क्रिस्टी पर किया गया, हर वार खाली जाने लगा, तो झुंझला कर ड्रैगन तौफीक की ओर लपका।
पर तौफीक पहले से ही सावधान था। उसने पास आते ड्रैगन की आँख का निशाना ले तलवार जोर से फेंक कर मार दी।
निशाना बिल्कुल सही था। तौफीक की फेंकी हुई तलवार ड्रैगन की आँख में जा कर घुस गयी।
ड्रैगन बहुत तेज चिंघाड़ा और बर्फ पर अपनी पूंछ जोर-जोर से पटकने लगा।
ड्रैगन के पूंछ पटकते ही ड्रैगन के पैर के नीचे मौजूद झील की, बर्फ की पर्त टूट गयी और ड्रैगन उस झील मंं समा गया।
यह देख सुयश को छोड़ सबने राहत की साँस ली।
“अभी इतना खुश होने की जरुरत नहीं है। वह बर्फ का ही ड्रैगन है, वह झील से जल्दी ही बाहर आ जायेगा। तब तक हमें उसको मारने के बारे में कुछ और सोचना होगा।”
सुयश के शब्द सुन सब फिर से परेशान हो उठे।
अब सभी एकठ्ठे हो कर उस ड्रैगन से बचने का कोई उपाय सोचने लगे।
तभी शैफाली के चेहरे के पास कोई छोटी सी चीज उड़ती हुई बहुत तेजी से निकली। जिसे सुयश सहित सभी लोगों ने महसूस किया।
पर उस चीज की स्पीड इतनी तेज थी कि कोई यह भी नहीं देख पाया कि वह चीज आखिर है क्या?
“ये क्या हो सकता है कैप्टेन?” जेनिथ ने सुयश से पूछा।
तभी सुयश को कुछ याद आया- “कहीं यह वही विचित्र यंत्र तो नहीं? जिसके तितली की तरह से पंख निकल आये थे….अरे उसी के लाल बटन को दबाने पर तो वह ड्रैगन निकला था।
तभी वह चीज फिर से उनके चेहरे के सामने से बहुत तेजी से निकली, पर इस बार उसे सबने देख लिया। वह उड़ती हुई चीज, वही विचित्र यंत्र थी।
“यह यंत्र ही है। इसका मतलब ड्रैगन की मौत का राज इसी में छिपा है।” क्रिस्टी ने कहा- “पर इसकी स्पीड तो इतनी तेज है कि हम इसे छू भी नहीं सकते।”
तभी जेनिथ ने सुयश के हाथों में वह यंत्र पकड़ाते हुए कहा- “ये लीजिये वह यंत्र और जल्दी से उस ड्रैगन को खत्म करने का कोई उपाय कीजिये।”
सभी जेनिथ का यह कारनामा देख हक्का-बक्का रह गये।
“यह तुमने कैसे किया? तुम तो यहां से हिली भी नहीं।” सुयश ने आश्चर्य भरे स्वर में जेनिथ से पूछा।
“मैं आप लोगों को सब बता दूंगी, पर पहले उस ड्रैगन से निपटने का तरीका ढूंढिये।” जेनिथ ने कहा।
तभी ड्रैगन एक भयानक हुंकार भरता हुआ झील के पानी से बाहर आ गया।
तलवार अभी भी उसके एक आँख में चुभी हुई थी।
ड्रैगन के पंख भीगे होने की वजह से, वह जमीन पर चलकर उनकी ओर बढ़ने लगा।
सुयश ने तौफीक के हाथ में पकड़े चाकू से उस यंत्र को नष्ट करने की कोशिश की। पर चाकू के प्रहार से उस यंत्र पर खरोंच भी नहीं आयी।
“वह तलवार... वह तलवार उस ड्रैगन को मारने के लिये नहीं बल्कि इस यंत्र को नष्ट करने के लिये प्रकट हुई थी।“ सुयश ने चीख कर कहा।
“पर वह तो ड्रैगन की आँख में घुसी हुई है, उसे वहां से निकालेंगे कैसे?” शैफाली ने कहा।
“ये लो तलवार।” जेनिथ ने सुयश को तलवार पकड़ाते हुए कहा। सभी ने तलवार जेनिथ के हाथ में देख ड्रैगन की ओर देखा।
ड्रैगन जमीन पर गिरा हुआ था और जेनिथ के हाथ में तौफीक का चाकू थमा था, जिस पर ड्रैगन का थोड़ा सा खून लगा था।
सुयश ने तुरंत यंत्र को अपने हाथ में पकड़ा और तलवार तौफीक को देते हुए उस पर वार करने को कहा।
तौफीक ने बिना समय व्यर्थ किये तलवार से उस यंत्र के 2 टुकड़े कर दिये।
तलवार के टुकड़े करते ही ड्रैगन सहित, उस उद्यान की सारी चमत्कारी चीजें गायब हो गयीं।
अब उद्यान की सातों मूर्तियां पुनः दिखने लगीं थीं, पर अब वो यंत्र वहां पर नहीं था।
सभी परेशानियों को समाप्त होते देख सभी जेनिथ की ओर घूम गये।
जेनिथ समझ गयी कि अब उनसे कुछ छिपाने का कोई फायदा नहीं है। इसलिये वह बोल पड़ी-
“जिस पार्क में हमें मेडूसा की मूर्ति मिली थी, उस पार्क से एक अदृश्य शक्ति भी मेरे साथ है, जिसका नाम नक्षत्रा है, जो पूरे दिन भर में कुछ क्षणों के लिये मेरे शरीर को स्पीड दे सकता है। उसने ही आप लोगों को यह सब बताने से मना किया था, जिसकी वजह से मैंने आप लोगों को कुछ नहीं बताया था। स्पाइनोसोरस को मैंने उसी की सहायता से मारा था।”
जेनिथ ने जानबूझकर नक्षत्रा की सारी सच्चाई सबको नहीं बतायी।
“यह कैसे सम्भव है, कोई भला इतनी स्पीड कैसे जेनरेट कर सकता है?” तौफीक ने कहा।
“इस द्वीप पर कुछ भी हो सकता है।” सुयश ने कहा- “ब्रह्मांड की हर चीज की एक स्पीड होती है। जैसे कि ध्वनि 1 सेकेण्ड में 332 मीटर तक ही चल सकता है, जबकि प्र्काश 1 सेकेण्ड में 30 लाख किलोमीटर चल सकता है। हो सकता है वह प्रकाश की गति को नियंत्रित करके ऐसा करता हो।.... पर जेनिथ... अब तो हम उसके बारे में जान चुके हैं, फिर वह हमारे सामने प्रकट क्यों नहीं हो रहा?”
“उसका शरीर किसी दुर्घटना में जल चुका है, अब वह बस एक ऊर्जा मात्र है और वह सिर्फ मुझसे ही बात कर सकता है।” जेनिथ ने सबको सफाई देते हुए कहा।
“वाह...वाह जेनिथ।” नक्षत्रा ने जेनिथ से कहा-“क्या कहने तुम्हारे.. एक के बाद एक झूठ बोले चली जा रही हो। वाह मेरी फेंकूचंद।”
नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ मुस्कुरा दी।
जेनिथ ने इतने सटीक तरीके से झूठ बोला था कि किसी को उस पर
शक नहीं हुआ। इसलिये सभी फिर से आगे की ओर बढ़ चले।
“इस बार कितने नम्बर दिये तुमने मुझे नक्षत्रा?” जेनिथ ने नक्षत्रा से मजा लेते हुए पूछा।
“समय का इस्तेमाल करने के 10 में से 9 और झूठ बोल कर एक्टिंग करने के 10 में से 10 पूरे।”
जेनिथ जोर से हंस पड़ी, पर इस बार उसकी हंसी किसी को अजीब नहीं लगी।
सब समझ गये थे कि वह नक्षत्रा से बात कर रही है।
जारी रहेगा______
