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एक छोटा सा ट्रेलर 25 ौडते के बाद का .
मम्मी और दीदी सोफे के पास आकर कड़ी हो गयी तो सुलेमान चाचा खड़े हुए और बोले,-- subhaan.....kya हुस्न ह. खुदा ने बहुत फुर्सत से बनाया ह तुम्हे सोभा .
मम्मी सुलेमान चाचा के कदमो में झुक गयी और प्रणाम किया तो चाचा ने मम्मी के बूब्स को पकड़कर ऊपर उठाया तो मम्मी सिसक पड़ी .
Chacha,--wah समीर ये तो संस्कारी से साथ पूरी गुणवान भी ह . तेरा हुस्न ऐसे hi बना रहे सोभा .
मम्मी मुस्करा कर,-- सुक्रिया जी .
फिर सुलेमान चाचा दीदी को देखकर बोले,-- सोभा ये भी असलम से hi ह ना .
मम्मी,-- नहीं सुलेमान जी असलम जी से तो सिर्फ रोहित ह ये तो मेरे स्वर्गीय पति की निशानी ह .
चाचा,-- बिलकुल तुम पर गयी ह तेरी बेटी .
मम्मी,-- जी , सोना ,बेटी चढ़ा को प्रणाम कर .
दीदी चाचा के कदमो में झुक गयी तो चाचा उनकी छोड़ी नंगी पीठ को देखने लगे क्योंकि दीदी की पीठ पर सिर्फ दो रस्सिया थी ब्लाउज की एक गले में और एक पीठ पर .
चाचा दीदी की सेक्सी पीठ को तब तक देखते रहे जब तक दीदी खुद कड़ी नहीं हुयी और उनके खड़े होते hi बोले.
चाचा,-- बेटी तेरा हुस्न सोभा से भी ज्यादा निखरे और तू हर मर्द की चाहत बने .
दीदी,-- सुक्रिया चाचा जी .
तभी समीर भैया बोले,-- सोना डिब्बी कहा ह .
दीदी ने मुठी खोलकर एक डिब्बी समीर भैया को दी तो समीर भैया बोले.,-- चचाजान अभी सोभा पूरी संस्कारी नहीं लग रही ह सिंदूर के बिना .ये लीजिये सोभा की मांग भरिये
चाचा डिब्बी लेकर मम्मी को देखने लगे तो समीर भैया बोले,-- सोना तूने बताया नहीं सोभा को .
ये सुनकर मम्मी ने अपनी मांग का टिका साइड में किया और बोली,-- सुलेमान जी इस अभागिन की मांग में सिंदूर भरकर इसे पूरी संस्कारी बना दीजिये .
चाचा ने मम्मी की मांग में सिंदूर भर दिया तो समीर भैया फिर से bole,chachajaan अभी भी सोभा के संस्कारी होने में एक कमी ह .
चाचा मम्मी की सुंदरता को निहारते हुए बोले ,-- अब क्या कमी ह .
समीर भैया,-- सोना बिंदी कहाँ ह .
सोनाक्षी दीदी,-- जी ये रही पर मम्मी बोली की ये अब्दुल लगाएगा .
सुलेमान चाचा,-- अब्दुल जल्दी से सोभा को बिंदी लगा दे अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा ह. मुझे इसका हुस्न पीना ह
अब्दुल,-- जी चाचा
मम्मी और दीदी सोफे के पास आकर कड़ी हो गयी तो सुलेमान चाचा खड़े हुए और बोले,-- subhaan.....kya हुस्न ह. खुदा ने बहुत फुर्सत से बनाया ह तुम्हे सोभा .
मम्मी सुलेमान चाचा के कदमो में झुक गयी और प्रणाम किया तो चाचा ने मम्मी के बूब्स को पकड़कर ऊपर उठाया तो मम्मी सिसक पड़ी .
Chacha,--wah समीर ये तो संस्कारी से साथ पूरी गुणवान भी ह . तेरा हुस्न ऐसे hi बना रहे सोभा .
मम्मी मुस्करा कर,-- सुक्रिया जी .
फिर सुलेमान चाचा दीदी को देखकर बोले,-- सोभा ये भी असलम से hi ह ना .
मम्मी,-- नहीं सुलेमान जी असलम जी से तो सिर्फ रोहित ह ये तो मेरे स्वर्गीय पति की निशानी ह .
चाचा,-- बिलकुल तुम पर गयी ह तेरी बेटी .
मम्मी,-- जी , सोना ,बेटी चढ़ा को प्रणाम कर .
दीदी चाचा के कदमो में झुक गयी तो चाचा उनकी छोड़ी नंगी पीठ को देखने लगे क्योंकि दीदी की पीठ पर सिर्फ दो रस्सिया थी ब्लाउज की एक गले में और एक पीठ पर .
चाचा दीदी की सेक्सी पीठ को तब तक देखते रहे जब तक दीदी खुद कड़ी नहीं हुयी और उनके खड़े होते hi बोले.
चाचा,-- बेटी तेरा हुस्न सोभा से भी ज्यादा निखरे और तू हर मर्द की चाहत बने .
दीदी,-- सुक्रिया चाचा जी .
तभी समीर भैया बोले,-- सोना डिब्बी कहा ह .
दीदी ने मुठी खोलकर एक डिब्बी समीर भैया को दी तो समीर भैया बोले.,-- चचाजान अभी सोभा पूरी संस्कारी नहीं लग रही ह सिंदूर के बिना .ये लीजिये सोभा की मांग भरिये
चाचा डिब्बी लेकर मम्मी को देखने लगे तो समीर भैया बोले,-- सोना तूने बताया नहीं सोभा को .
ये सुनकर मम्मी ने अपनी मांग का टिका साइड में किया और बोली,-- सुलेमान जी इस अभागिन की मांग में सिंदूर भरकर इसे पूरी संस्कारी बना दीजिये .
चाचा ने मम्मी की मांग में सिंदूर भर दिया तो समीर भैया फिर से bole,chachajaan अभी भी सोभा के संस्कारी होने में एक कमी ह .
चाचा मम्मी की सुंदरता को निहारते हुए बोले ,-- अब क्या कमी ह .
समीर भैया,-- सोना बिंदी कहाँ ह .
सोनाक्षी दीदी,-- जी ये रही पर मम्मी बोली की ये अब्दुल लगाएगा .
सुलेमान चाचा,-- अब्दुल जल्दी से सोभा को बिंदी लगा दे अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा ह. मुझे इसका हुस्न पीना ह
अब्दुल,-- जी चाचा