Gharelu Maa se Modern Maa tak ka Safar - Jawan Bete ki Khwaish Ki Puri - Page 2 - SexBaba
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Gharelu Maa se Modern Maa tak ka Safar - Jawan Bete ki Khwaish Ki Puri

डिअर रीडर्स … प्ल्ज़ कहानी एन्जॉय करिये .. कहानी का पथ में डीडे कर चुकी हूँ .. आप बस आनंद लीजिये .. एक बात हैं की रत्न बस इन्सेस्ट में इन्वोल्वेद रहेगी वह बात फॉर सूरे हैं ..

तक एंड एन्जॉय
 
ओह, मैं सो नहीं सकीय! मैं सुबह शर्मिंदा थी कल रात केव वजह से., वह बहुत शर्मनाक बात थी., मैं उठी, सनउकरनी कॉफी लेकर आई और पूछी की मेरी आँखें लाल क्यों हैं? में उससे कही की मुझे ठीक से नींद नहीं आ रही थी. ओह नै जगह है इसलिए उसने कहा और मुझसे खाली कप ले लिया,

में नहाने के लिए, गर्म पानी तैयार करि फिर, में अपने कपडे उतरे, तौलिया ले लिया, बाथरूम चली गयी, मेरे पिताजी अपनी आरामकुर्सी पर बैठकर सुबह का पेपर पढ़ रहे the,coffi पि रहे थे. में झिझक के साथ उनके पास से गुजरने में बहुत शर्मा रही थी. मैं बाथरूम की और जा रही थी तब पिताजी ने मुझे देखा, में शर्म से अपना सर निचे कर ली और, उनहोंने भी कोई बात नहीं ki,aur फिर से पेपर पढ़ना शुरू कर दी.

मैं नहाने चली गयी, 20 मिनट में नाहा ली और अपने कपडे पेहेन में अपने कमरे में चली गयी. कमरे से बहार आते hi , पिताजी धीरे से बोले “ रत्न! बेटी! तुमने इतनी जल्दी नाहा लिया, आमतौर पर इसमें तुम्हे बहुत समय लग जाता है” वह मेरी और देखकर मुस्कुराये.

“है पापा, लेकिन आज जल्दी हो गया नहाकर.”

“, ठीक है बेटी! जाओ और नाश्ता करो”, उनहोंने मुस्कुराते हुए कहा, में राहत की सांस मिली की मेरे पिताजी मेरे बारे में कल रात के वजह से नाराज़ नहीं हैं,.

मैं रसोई में गयी, ब्रेकफास्ट करि और, मेरी माँ ने भी मेरे साथ ब्रेकफास्ट किया, उनकी सेहत में अब सुधार हो रहा था. हम तीन महिलाऐं में, माँ और वहां की नौकरानी, हॉल में बैठकर खुलकर बातें कर रही थे, हंस रहे थे. अचानक मेरे पिताजी ने मुझे फ़ोन किया, मैं उनके पास गयी, उनहोंने मुझसे पूछा की क्या मैं उनके साथ हमारे खेत में जाने के लिए तैयार हुई,





में इतने दिनों के बाद जा रही थी इसीलिए हाँ कही. जब भी मैं गाँव आती थी तो अपने खेत में जाती थी, अपना ज्यादातर समय वहीँ बिताती थी. खेतों में मेरे बच्चे, पति हमेशा मेरे साथ होते थे, लेकिन इस बार मैं केवल अकेली आयी थी गाँव! मैं अपने कमरे में गई, कपडे बदली. गुलाबी रंग की साडी पहनी, स्लिवकेसस और मनो बैकलेस ब्लाउज. ब्लाउज ऐसी की हाँ केवल 2 धागे मेरी पीठ को पकड़े हुए थे और मेरी नाभि के निचे साडी बाँधी है. में थोड़ा सा मेकअप लगाई , लिपस्टिक, काजल और ब्लश. बदन पर सुन स्क्रीन लोशन, मेरी बाहों के निचे खुशबूदार परफ्यूम . में आईने में खुद को देख रही थी, संतुष्ट थींमेरी गेटउप से. में बाहर आई और मेरे पिताजी हॉल में मेरा इंतज़ार कर रहे थे. वह मेरी और देखकर मुस्कुराये, में माँ को अलविदा कही और मेरे पिताजी के साथ चली गई.





मेरे पिताजी ड्राइवर की सीट पर बैठे. ोेहले हमें subah-subah कुछ खरीदने के लिए पास के टाउन जाना था और फिर हम, खेतों के लिए निकल पड़े.! मेरे पिताजी जिनका नाम हैं रघुनन्दन वह 70 साल के बहुत अच्छे स्वस्थ मर्द थे, अब भी वह पढ़ने का चश्मा नहीं पेहेनते हैं, उनका पेट भी फिट हैं ज्यादा मोठे नहीं हैं, हलके से बाल्डनेस आ रहा था, badi-badi मूंछें हैं, शायद 6 फिट की हाइट है उनकी. उनहोंने अब कार खेत के तरफ चलाना शुरू कर दी था, सुबह के 11 बजे थे और लोग रास्ते में मेरे पिता को शुभकामनाएं दे रहे थे क्योंकि वह बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं गाँव के सरपंच.

, हमारा खेत 100 एकर से अधिक है, बहुत विशाल क्षेत्र हैं , खेत में कुछ गीली भूमि है, नारियल के बगीचे, अंगूर के बगीचे, फूलों की खेती, कुछ सूखी भूमि है. मेरे पिताजी ने हमारे खेत में पानी की टंकी के पास एक सुन्दर फार्महाउस बनाया है, यह बहुत अच्छा है. और बहुत सारे बड़े पेड़ों के साथ शांत जगह, यह स्वर्ग जैसा दिखता है, कोई भी शान्ति महसूस कर सकता है वहां. गाडी चलाते समय मेरे पिताजी ने मुझसे कहा की मैं बहुत बदल गई हूँ और अधिक सुन्दर दिखने लगी हूँ. , उनकी टिपण्णी ने मुझे शर्म से लाल कर दी, मेरे गाल लाल हो गए!

फिर उन्होंने पूछ hi लिया की मैं कल रात क्या कर रही थी!!! हे भगवान, में कुछ उत्तर नहीं दी. लेकिन मेरे पिताजी फिर से पूछ रहे थे

“ रत्न बेटी! शरमाओ मत मुझे बताओ तुम कल रात क्या कर रही थी”

“! पापा कृपया मत पूछिए”, में बहुत शरमाते हुए कही. फिर वह मेरी और देखकर मुस्कुराए, “बेटी, मैं तुम्हारा पिता हूँ, मुझे बताओ शर्माओ नहीं, मुझे बताओ की मेरी बेटी कल रात क्या कर रही थी.”

, में मुस्कुराते हुए, नहीं बोली.

“बेटी बताओ , ! मुझे नहीं पता था की तुम क्या कर रही थी कल रात, अँधेरा था इसीलिए, में कुछ भी नहीं देखा,” वह शरारती ढंग से मुस्कुरा रहे थे. और dhire-dhire और मुस्कुरा रहे थे.

, हे भगवान! “पापा, आपने देखा की मैं क्या कर रही थी”, में उसी स्वर में जवाब दी.

“नहीं बेटी! तेरे पापा बुड्ढे हो गए हैं इसीलिए में नहीं देख पाया.”

“नहीं मेरे पापा बूढ़े नहीं हैं, मुझे पता है आप सब देखे..” में मुस्कुराते हुए कही.,

“बेटी नहीं देखा मैंने.. अब कल रात तोह अँधेरा था .. जो अँधेरे में दिख नहीं पाया उसे तुम अभी उजाले में दिखाओ बेटी तेरे बुड्ढे पापा को उजाले में सब दिखेगा बेटी ..:”

उफ्फ्फ मेरे पापा अपनी hi बेटी को में कल रात की चीज़ें दिखने कह रहे हैं .. हाई dhire-dhire मेरे पिताजी मुझे अपने जाल में खिंच रहे हैं! वह शिकारी है, मैं हिरणी हूँ, हे भगवान.





वह dhire-dhire गाडी चला रहा थे हमारे, पास में कोई भी नहीं था और, हम गाँव से बहुत दूर थे, मैं अपने पिताजी के बोलने के तरीके का आनंद ले रही थी, कोई कठोर शब्द नहीं लेकिन दोहरे अर्थ से भरी हुयी बातें. मैं भी उनसे मेल खा रही थी, आखिर बेटी किसकी हैं , मेरी पापा की hi है न.

उन्होंने पहले hi अपनी बेटी को नग्न देख लिया था. में बोली “पापा, अगर आपको देखना हैं फिर से तो में दिखाउंगी.”

, मेरे पिताजी ने कहा “हाँ बेटी. तुम जो कुछ भी दिखाओगी में देखने के लिए तैयार हूँ.”

“उफ़ नहीं पिताजी .. में शरमाते हुए फिर बोली पहले आप को दिखाना पड़ेगा अपने बेटी को …”

और मेरे पिताजी ने idhar-udhar देखते हुए . पास में कोई नहीं था , किनारे पर कार को स्टॉप कर उन्होंने अपनी धोती को साइड सरका दी और अपने कच्छे को निचे खींचकर अपना लुंड दिखाया! वह उनका लुंड, खड़ा था, 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा, 70 साल की उम्र में भी यह पूरी तरह से जीवित है, हे भगवान, मेरे अपने पिता ने लुंड मेरी नज़रों के सामने था,!





सच में वह मेरे पति के लुंड से बड़ा और मोटा था, आधे गहरे रंग का प्रेकम से उगलता हुआ. वह मुझे देख मुस्कुराये और पूछे की उनका लुंड कैसा है. में थोड़ा शरमाते हुए बोली

“काफी अच्छा है पापा, और अभी भी आपको एरेक्शंस होता है पापा.”

“पिछली रात से यह बहुत परेशानी दे रहा है बेटी, केवल तुम hi इसे ठीक कर सकती हो, क्या तुम इसे ठीक करोगे बेटी?”

उन्होंने मुझसे पूछा. मैं कुछ भी कहने में झिझक रही थी.

“अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो ठीक है छोर दो. तू मेरी बेटी है, इसलिए किसी को यह बात मत बताना. और वह अपना कच्छा पहनना शुरू करने लगे

“, नहीं पापा, मैं किसी से नहीं कहूँगी” और में अपनी छीलनि रेशमी हथेलियों को अपने hi पिता के लुंड पर रख दी! ओह्ह्ह पापा का लुंड ख़ुशी से मेरे हाथ में नाच रहा था, पापा इतने कामुक थे की उनहोंने तुरंत मेरे सर को अपने हाथ से खिंच लिया और मेरे होठों पर एक चुम्बन दे दी! में भी जवाब दी, अब मैं अपने 70 साल के पिता के लुंड पर अपनी छीलनि हथेली फिरा रही थी, ओह, उनका लुंड सख्त था.





इस बुढ़ापे में भी मेरे पिता का लुंड किसी भी योनि को छोड़ सकता हैं यहाँ तक की मेरी भी ., अब यह अपनी खुद की रचना की चुदाई करने के लिए तैयार है. मैं पहले से hi मेरी अपनी रचना से चूड़ी थी, मेरे बेटे से और अब मेरे पिता अपनी hi रचना की चुदाई के लिए तैयार हैं हे भगवान्. में अपने पिता के लुंड को जोरदार स्ट्रोक दिए, उनके मुंह को जोश से चूमने लगी, मेरा पल्लू निचे गिर गया, मेरे पिता मेरे स्तन दबाने लगे, उनके साथ खेलने लगे. कुछ 2 मं बाद अचानक हमने देखा की एक बैलगाड़ी हमारी दिशा में आ रही थी, लेकिन यह दूर थी इसकिये, हम तुरंत अपने कपडे ठीक करके ठीक से बैठ गए. मेरे पिता ने कार स्टार्ट की, बैलगाड़ी वाले ने मेरे पिता को शुभकामनाएं दिन, मेरे पिता ने भी और, हम अपने खेत में पहुँच गए.

मेरे पिता काम देखने गए थे, मैं बरामदे में बैठ कर idhar-udhar देख रही थी.. कुछ देर बाद घूमने का मूड था, मेरे पिता भी मेरे साथ आ गए, हमने यूं hi बात की, मेरे पिता ने लंच बॉक्स लेन के लिए कहे, जो हम घर से लाए थे., मुझे भी भूख लगी थी, हम खाने की मेज पर बैठे, हमारे नौकर ने खाना परोसा, हमने खाना खाया, दोपहर का भोजन ख़त्म किया. हम ऊपर चले गए और बालकनी पर बैठकर सुन्दर परिदृश्य देख रहे थे. मेरे पिताजी ने सर्वेंट को नारियल का पानी लाने के लिए कहे फिर हमने उसे भी पिया, . मुझे अब झपकी लग रही थी, क्योंकि कल रात ठीक से नींद नहीं आई थी. मैं शयनकक्ष में गयी और बिस्तर पर लेटने लगी. ठंडी हवा के कारण मुझे तुरंत नींद आ गई, मुझे नहीं पता की मैं कितनी देर तक सोती रही, अचानक मेरी नींद खुल गई!

में उठी तब हाँ, कोई मेरी गांड के नितम्बों को रगड़ रहा है, मैं चिल्लाई की वह कौन है, लेकिन एक बड़े हाथ ने मेरा मुंह बंद कर दी, और वह शख्स मेरे सामने आ गए, यह मेरे पिताजी hi थे! वह एकदम नंगे हैं, उनका लुंड हैवे में लहरा रहा था, उनका लुंड पूरे रूप में था, वह मेरी गांड को रगड़ रहे हैं, मेरी पीठ को चूम रहे थे मेरा नाम पुकारे “रत्नाआ मेरी बेटी!”

ओह, वह बहुत कामुक तरीके से बोले, मुझे दर था की कहीं किसी ने देख लिया तो.

“पापा, अगर कोई आ जाए तोह, कृपया मुझे छोड़ दें.”

“नहीं रत्न, कोई नहीं आएगा, में सारे दरवाजे बंद कर दिए, हमारा नौकर भी खेत में चला गया हैं, केवल तुम और मैं अब हैं फार्महाउस पर, प्रिये, पापा के पास आओ, मेरी प्यारी बेटी” उन्होंने कहा,

उन्हों मेरी पीठ को चूमा, मेरी साडी खिंच दी, ओह, मैं केवल पेटीकोट और ब्लाउज में हूँ, मुझे शर्म आ रही थी, पिताजी मेरे पास आए. में अपना सर उठायी और मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए मेरे होंठों को चूमे, बस उनके होंठों को दबाने लगे मेरे होठों par!oh, पापा कहते हुए में उनके सर पकड़ लिया और उसे गहराई से चूमा.









अब मेरे पापा ने मेरे ब्लाउज को पकड़ कर पीछे से गांठें खोल दिन,

“ओह्ह रत्न बेटी, तुम्हारे इस ब्लाउज को उतारना बहुत आसान है” यह कहते हुए वह हांसे, मैं भी उनके हंसी के साथ शामिल हो गई.

“है पापा इसीलिए में इसे पहनी हूँ ..”

“वह, तुम्हें पता है की मैं तुम्हारे साथ क्या कर रहा हूँ बेटी! उन्होंने मेरा ब्लाउज उतार दी, मेरी ब्रा से ढके हुए बड़े स्तनों को देखकर बोले,

“उफ़, तुम्हारे स्तन बहुत बड़े हैं बेटी, अपनी माँ से भी बड़े”

“ओह्ह पापा, आपके प्रशंसा के लिए थैंक्स. क्या आपको यह कहते हुए अच्छा लगा..” ऐसे बोलते हुए में अपनी ब्रा का हुक खोल दिए, मेरे पिता ने मेरे पैरेड हुए निप्पल को देखे.





“, ओह रत्न बेटी, तुमने तोह अपने स्तनों पर छल्ले पहने हुए हैं, ओह, वे बहुत अच्छे लग रहे हैं” , उनहोंने मेरे निप्पल्स पर चुटकी ली, वे इतने खड़े हो गए उफ्फ्फ

“, है पापा, यह अब फैशन है” वह चुटकी काट रहे थे छल्लों के साथ खेल रहे थे, उन्हें खिंच रहे थे…

“आउच पापा, दर्द हो रहा है, कृपया ध्यान से सम्भालो.”

“ओह, क्षमा करे, बेटी”, हमने फिर से चूमा, उन्होंने मेरे पेटीकोट का किनारा खोल दी, और उस माध्यम से निचे उसे धकेल दी. मेरे पापा के चहरे पर चंचलता थी.

ओह्ह ु नोट्टी पापा” में कहती रही और उनहोंने मेरी पंतय उतार दी. ओह्ह मेरे पापा ने मेरी पंतय को सूंघते हुए गहरी सांस लेते हुए छूट की सुगंध ली,

“ओह रत्न, तुम्हारी खुशबू बहुत अच्छी है”

, वह, मेरे पिताजी मेरी saaf-suthari शेव की हुई योनि को देख रहे थे, उनके लिप्स पर रिंग थी, बुर के ऊपर टैटू थी.

“ओह्ह्ह रत्न, में इस तरह की चीज़ें पोर्न फिल्मों में देखि हैं, ओह्ह्ह तुम बिलकुल ऐसी hi लग रही हो, ओह बेटी.”

यह कहते हुए उन्होंने मेरी टांगें चौड़ी कर दिन और मेरी जाँघों के बिच में बैठ कर मेरी छूट को सहलाने लगे.

ओह्ह्ह मेरे पापा मेरी छूट को अपनी नाक से छू रहे थे, हाँ उन्हें उसकी गंध बहुत पसंद आ रही थी.





“मेरी ताज़ी छूट की सुगंध लेते हुए अब इसे चाटना शुरू करो, ओह पापा.” यह कहते में उनके सर को अपनी छूट पर दबायी, उनकी मूंछें मेरी छूट पर कुछ शरारती हरकतें कर रही थीं, में हँसते हुए रही.

, मेरे पापा मेरे फैली हुए पैरों के बिच बैठ गए और मेरी योनि के होंठों को रगड़ते हुए मेरी क्लीट को चाटने , ओह्ह पापा, मैं ख़ुशी से चिल्लाई, उनके अर्ध गंजे सर को मेरी बुर पर खिंच ली. मेरी छूट पर अब वह मेरी बुर की छेड़ को चाटना शुरू कर दिए, अपनी लम्बी जीभ को अंदर दाल ,अपनी बिच वाली उंगली को मेरी बुर के andar-baahar करते हुए अपनी प्यारी बेटी को आनंद देने लगे.

“, ओह्ह पापा, मेरे अपने पिता द्वारा मेरी छूट को 15 मं तक चाटने के बाद मैं उनके चहरे पर जोर से जहर गई. मुझे कुछ वास्तविक चुदाई की ज़रुरत थी, हाँ, में पिछले एक सप्ताह से किसी से भी चुदाई नहीं किट hi…

में अपने पिता से बिना किसी शर्म या झिझक के मेरी चुदाई करने के लिए बोली, वह मुझे देखकर मुस्कुराए, उठे., में उनके मेरी बुर के रास से लथपथ चहरे की और देखि, उनकी बड़ी सफेद मूंछें मेरे बुर के रास से भीगी हुई थीं.

मेरे पापा ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरी प्यारी बेटी, तुमने तोह पापा का बैंगन भी बड़ा कर दी, तुम बहुत सेक्सी बेटी हो, यह कहते हुए उनहोंने मुझे चूमा, ओह, में मेरे hi बुर के रास का स्वाद चखी. अपना सह! मममममम!

यह अच्छा है ओह पापा डार्लिंग, कृपया उस बैंगन का उपयोग अपनी बेटी की चुदाई के लिए करें!” यह कहते हुए में उनके सख्त लुंड पर हाथ फेरी, मेरे पिता समझ गए की उनकी बेटी कितनी कामुक है, उनहोंने ज्यादा देर किए बिना मेरी गांड के निचे तकिया रख दी, जिससे मेरी टांगें चौड़ी हो गेन और उनहोंने अपनी बेटी की गीली योनि में अपना लुंड रगड़ने लगे









और dhire-dhire अंदर अपने लुंड को डालने लगे. अब उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी है और मेरे स्तनों को पकड़ कर उनकी मालिश कर रहे थे, मेरी आँखों में देख रहे है, हम बेटी, पिता के सेक्स मिलान को देख रहे थे.

, हाँ, जनहोने मेरी माँ को छोड़ा, वही लुंड जिसने मुझे पैदा किया, वही अब मेरी चुदाई कर रही थी. , में तोह उन्ही के वीर्य से हुयी रचना हूँ.

“ओह्ह पापा कहते हुए में उनकी बालों से भरी पीठ पर हाथ फेरी

“, हां रत्न, मेरी बेटी, ओह कहते हुए उन्होंने अपना गर्म वीर्य मेरी योनि में दाल दी., बहुत ज्यादा वीर्य नहीं, लेकिन 70 साल के मर्द के लिए यह बहुत था., हमने ek-doosare को गले लगाया, हमारी योनि और लुंड का मिलान ऐसे hi बना रहा..

कुछ देर तक ek-doosare को चूमते रहे, ek-doosare को सहलाते रहे, कुछ मिनट्स के बाद उनका लुंड मेरी योनि से बाहर आ गया, थोड़ा वीर्य भी निकला.

, हम जल्दी से स्नान कक्ष में गए क्योंकि वापस घर जाने का समय हो गया था. किसी भी समय हमारे नौकर भी आ सकते था. ,

, मैं शयनकक्ष से बाहर आती हूँ, मेरे पिता पहले से hi हॉल में बैठे थे, मैं उनके पास सोफे पर बैठ गयी., हमने एक सामान्य पिता की तरह बात की., कुछ hi मिनटों में हमारे नौकर खेत से आ गया, मेरे पिताजी ने हमेशा की तरह आज के काम के बारे में पूछताछ की,

हम वापस घर की और चल पड़े, रास्ते में मेरे पिता ने मुझे उस ख़ुशी के लिए धन्यवाद दी जो में उन्हें दी थी, में जवाब में मुस्कुरायी और उनकी चुदाई की तारीफ की. इस उम्र में भी वह सेक्स में बहुत मस्त थे और मुझे उन पर गर्व था.

, उनहोंने पूछा की अगली बार कब हम सेक्स कर पाएंगे , में बतायी की जब भी हमें अवसर मिलेगा तब., हम घर पहुंचे, मेरी माँ ने सब्जियां काटते हुए मुझसे पूछा की खेत कैसा है, क्या तुमने हमेशा की तरह आनंद लिया.

“है माँ, लेकिन आज और अधिक मज़्ज़े लिए है न पापा”, में कही.,

“हाँ राधा, तुम्हारी बेटी ने आज खेत में बहुत आनंद लिया. अपने hi पिता के खेत में.” मेरे पिता ने जवाबी हमला किया., मेरी मान मुस्कुराई और मुझे गले लगाई. मेरे गालों को चूमा. ओह मेरी बेचारी माँ, मैंने आज आपको धोका दी हैं, माफ़ करना माँ., मैं मन hi मन बोली!!! में दोषी महसूस करि! मैं अब माँ के साथ वहां नहीं बैठ साली इसलिए अपने कमरे में चली गयी! न जाने क्यों मेरे मन में इस सोच से मेरा मूड ठीक नहीं था.

, अचानक मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, ओह, यह मेरा बीटा नमन है. में कही

, “hello बीटा!”

“माँ आप कैसी हो? मैं यहां आपका इंतज़ार कर रहा हूँ, मैं आपको मेरे पास चाहता हूँ, मान, कृपया वापस आ जाओ, मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता.”, उसने एक hi बार में बात की.

ओह मेरा बेचारा बीटा! “में भी तुम्हें बहुत याद करती हूँ, मैं दो दिन में घर आ रही हूँ, मुझे माफ़ कर दो बीटा.”

“ठीक है माँ, मैं अपना ध्यान रखूँगा , लेकिन कृपया जल्दी आओ माँ!”

“क्या आप दादी को फोन दे सकती हैं? उसने पूछा, में अपनी माँ को जाकर फ़ोन दी और, दोनों ने ek-doosare के लिए शुभकामनाएं देते हुए बात की, फिर मेरी माँ ने फ़ोन वापस दे दी, में अपने बेटे को अलविदा कही और अपने कमरे में चली गई. अपनी ड्रेस बदली, निघ्त्य पहनी, ुर हॉल में वापस आई.

सीता ने मुझे कुछ गरमकोफी दी, इससे मैं तरोताजा हो गयी. में अपनी माँ से बहुत प्यार से बात की, मेरे पिता भी हमारे पास बैठे और हम माँ और बेटी के साथ और अधिक प्यार से बात की. , में अब सोची की, की मैं अपने पिताजी को दुबारा मुझे छोड़ने की अनुमति नहीं दूँगी!.

रात के खाने का समय हो गया है, हम सभी ने एक साथ बैठकर खाना खाया, कुछ देर बात करने के बाद मैं अपने कमरे में गयी. मैं वेट ड्रीम्स के साथ गहरी नींद में थी, ओह, मैं और मेरा बीटा नमन पूल के किनारे ek-doosare को छोड़ रहे थे, यह एक पार्टी थी जिसमें हम पब्लिक के सामने चुदाई कर रहे हैं, .





ओह, हम हांफ रहे थे. लोग ताली बजाकर हमें प्रोत्साहित कर रहे है! ओह्ह्ह उफ्फ्फ क्या चुदाई थी …. मममम अचानक मेरी नींद खुली, कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है! ओह मैं उठ गयी और उठकर दरवाज़ा खोली, ओह यह पापा थे, वह अंदर आये और दरवाज़ा बंद कर दी. मुझे बहुत दर लग रहा है की अगर किसी ने उन्हें मेरे बैडरूम में देर रात आते देखा तोह क्या होगा.

में उन्हें बाहर जाने के लिए कही. में अभी भी मेरे पापा के प्रति सेक्सयल फीलिंग्स काफी थी… अगर कुछ और देर रहते तोह हम फिर से चुदाई करते…

मैं अपनी माँ को और धोखा नहीं देना चाहती थी.

“है बेटी, मैं भी अपनी पत्नी को धोखा नहीं देना चाहता, तुम बस दूसरी hi महिला हो, जिससे मैं सेक्स करा हूँ. में तुम्हारी माँ से 52 साल पहले शादी की थी, तब से उन्हीं के साथ परिवार चला रहा हूँ. कभी दूसरी महिलाओं की तरफ नहीं देखा हूँ. में अपनी परिवार की गरिमा को अच्छे से रखा हुन्द, क्या तुमने पहले कभी अपने पिता को ऐसे कुछ करते देखा है?”

“ हाँ पापा, मुझे पता है आप बहुत अच्छे हो, मुझे आप पर गर्व है, यह मैं हूँ और मेरी गलती है की में बेहाल गयी. मुझे आप, माफ करना, पापा” ऐसे कहते हुए मैं रो पड़ी,

“ओह बेटी, रो मत मेरी बेटी, इसमें मेरा भी हिस्सा है, मुझे तुम माफ़ करना बेटी.”

, तुम्हें पता है में किसी से भी सेक्स नहीं करा , यहां तक की तुम्हारी माँ से भी नहीं, पिछले 12 वर्षों से, हाँ बेटी, उनके स्वास्थ्य के कारण हम सेक्स भी नहीं करते., लेकिन कल रात जब में तुम्हें उस तरह देखा तो मेरी साड़ी इच्छाएं एक साथ उड़ गेन, क्षमा करें बेटी, भूल जाओ की आज क्या हुआ, मैं उस पाप के साथ तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा”. ऐसे कहते हुए मेरे पिताजी हाथ जोड़कर सॉरी बोले और फिर तेज़ी से कमरे से बाहर चले गए.

हे भगवान, इतने मज़बूत स्वास्थ्य वाले मर्द , मेरे पापा अपनी इच्छाओं को इतने लम्बे समय तक कैसे नियंत्रित कर सके है. हाँ मेरे पिता महान हैं मुझे उन पर गर्व है. अब माँ को धोखा देने का कोई सवाल hi नहीं है अगर मेरे पिता चाहते हैं तो मैं अपनी मान का कर्तव्य निभा रही हूँ.

मेरे पापा इतने गठीले मर्द हैं वह कई बार महिलाओं से चुदाई कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए हमारी यह धोखेबाज़ी है! में तय करि की अगर मेरे पापा को उनकी बेटी चाहिए, जब भी वह चाहे, उसे वह चुदाई कर सकते हैं .. उनसे अब चुदाई के विचार से hi मैं उत्तेजित हो गई, मैं मुस्कराहट के साथ बिस्तर पर गिर गई.

फिर से मेरे बेटे के साथ मेरा सपना जारी है, ओह, फिर से वही पूल का किनारा, इतने सारे लोग हमें चुदाई करते हुए देख रहे हैं, हम नहीं किसी से भी डरते हुए हम पूरी तरह से नग्न थे, हम माँ बेटे छोड़ते हुए लव शो दे रहे हैं. हमारी चुदाई के दौरान हम कामसूत्र के सभी आसनों का अभ्यास कर रहे थे. अब इस बार, में देखि की मेरे पापा भी भीड़ में शामिल हो गए और गर्व के साथ उन्हें भी तालियां बजाते हुए देखि.

, ओह क्या सपना है. मुझे नहीं पता की सुबह कब होगी, मैं अभी भी बिस्तर पर लेती थी. , मेरी माँ इस बार कॉफ़ी का कप लेकर आई.

“बेटी! हे बेटी! 8 बज गए हैं”, हे भगवान, मैं इतनी देर तक सो गयी. में, माँ से सॉरी कहकर नहाने चली गयी, चेहरा धोकर आया, और कॉफी पिटे हुए, मेरी माँ मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरती हुई. हम दोनों माँ और बेटी एक साथ कॉफी पि रहे थे, मेरे पिताजी ने मेरी माँ को बुलाया

“ओह! तुम कहाँ हो मुझे देर हो रही है?”

“ हाजी, मैं रत्न के साथ आ रही हूँ”

फिर मेरे पापा ने बताया की फार्महाउस पर कुछ काम था ..

. ओह, अब मैं समझ गया की पिताजी रात में hi मेरे कमरे में क्यों आए थे. जाने से पहले हु सॉरी कहने आये थे… ओह मेरे प्यारे पापा …. में अब उनके साथ जाने का फैसला करि.

“माँ, क्या मैं पिताजी के साथ जाऊं क्योंकि मैं यहां बोर हो रही हूँ” में अपनी माँ से पूछी.

“बेटी बेहतर होगा की आप अपने पापा से पूछ लें बेटी,” माँ ने कहा तो हम दोनों माँ बेटी एक साथ कमरे से बाहर आ गेन, मेरे पिताजी ने मेरी और देखे बिना मुझे सुबह की शुभकामनाएं दिन. में भी अपनी मधुर मधुर आवाज से उसे शुभकामनाएं दिन.

“ पापा क्या मैं आपके साथ फार्महाउस चलूँ . माँ ने अभी बताया आप जा रहे हैं है.”

“ मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं बेटी, मेरा काम पूरा होने में पूरा एक दिन लग सकता हैं”

“कोई बात नहीं पापा, मैं यहां बोर हो रही हूँ, आप बिलकुल अकेले जा रहे हैं, बेहतर होगा की मैं आपके साथ चलूँ.

“ठीक हैं बेटी जल्दी तैयार हो जाओ, पहले hi देर हो चुकी है,”

, मैं स्नान कक्ष में गई, शावर ली., 15 मिनट में तैयार हो गयी.

में, थोड़ा सा मेकअप कृ है. स्लीवलेस ब्लाउज , लौ वैस्ट साडी … ब्लाउज इस बार पूरी बैकलेस थी .. 3 इन हिल्स पहने में और पापा निकल गए.. रस्ते में,, में फोन करि और, मेरे बेटे उसे बताया की मैं अपने दादाजी के साथ किसी काम से एक और दिन लेट होगा. यह सुनकर वह निराश हो गया, लेकिन किसी भी तरह में उसे मन ली.





फार्महाउस के काम होते hi में और पापा बैडरूम में गए हमारी सेक्स भरा दिन बिताने..

हम अब बिस्तर पर थे, , में अपने पापा का कठोर लुंड मेरी गीली, तंग कामुक छूट में डालना शुरू कर दी. पापा मेरे कड़े गोल विशाल स्तनों पर बेबी आयल मेल थे . में उनकी बेटी कितनी सेक्सी हैं, इस तरह की चीज़ें मेरे बूढ़े पिता ने अपने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी, वह कर रहे थे. हे भगवान!

पापा को छोडो, में खुद नहीं सोची थी की मैं ये चीज़ें करुँगी हु भी 2 महीने पहले बुइ नहीं. मेरे लिए सेक्स अब पत्नी के लिए बस कर्तव्य नहीं रहा, अब सेक्स भोजन से बढाकर है मेरे लिए, यह 2 आत्माओं की समझ को व्यक्त करती है.

15 मिनट की चुदाई के बाद, मेरे प्यारे पापा मुझे डोगग्य स्टाइल में छोड़ना चाहते थे.





“ रत्न बेटी! उन्होंने पूछा, “मैं तुम्हारी सेक्सी गीली योनि को पीछे से छोड़ना चाहता हूँ, क्या आप मुझे अनुमति देंगी?”

“ क्यों नहीं मेरे पापा.”, यह कहते हुए मैं उनके ऊपर से निचे उतरी. हाँ उनका लुंड वीर्य से लिपटा हुआ चमक रहा था! हमने ek-doosare को चूमा, मैं उनके सामने झुकी और खिड़की की रोड पकड़कर अपनी ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी लम्बी चिकनी टांगों को चौड़ा कर ली.

“ओह रत्न! तुम्हारे चूचियां और नितम्ब बहुत बड़े हैं, कहते हुए उन्होंने उन्हें मसला और उनकी चिकनी त्वचा को महसूस करे., मेरी रास से टपकती हुई छूट को थोड़ा सा चूस लिया, उन्होंने अपना लुंड पीछे से मेरी बुर में डाले और मुझे पीछे से लम्बे स्ट्रोक से चुदाई शुरू कर दी., उनका लुंड और मेरी बुर वह बहुत उत्तेजित थी. , उन्होंने मेरे स्तन पकड़ कर उन्हें मसला, मेरी चुदाई की. छूट और तेज़ी से ओह्ह्ह! हम दोनों इस स्थिति का आनंद ले रहे थे, लेकिन वह ज्यादा देर तक नहीं टिक सके और, उनके लुंड से वीर्य निकलना शुरू हो गया, .





ओह्ह्ह उन्होंने जितना संभव हो सके अपने लुंड को दबाकर, उन्होंने उनके लुंड से गर्म वीर्य निकला और मेरे मुँह में डाले

, अपनी प्यारी सेक्सी बेटी का नाम रत्न चिल्लाते हुए! वह मुझ पर गिर पड़े. हमारा सेक्स अब पूरा हुआ . में अपने घर पर फ़ोन करि, में कही की मैं आज शाम की ट्रैन से hi घर आउंगी.

. लेकिन मेरे पापा ने कहा की मैं दो दिन में आऊंगी! पापा आज रात और कल भी मेरे साथ चुदाई करना चाहते हैं. मेरा बीटा और मेरी बेटी दोनों उनसे सहमत नहीं थे और उनसे मुझे कल शाम को hi भेजने के लिए कहा .फिर हम बेटी और पापा ने फार्महाउस पर पूरी रात फिर सुबह से लेकर दोपहर तक चुदाई की. . हमने उनसे किये हर संभव पोज़ में सेक्स किये. मेरे पापा अब यौन रूप से थक गए थे! मैं पूरी तरह से संतुष्ट थी क्योंकि में अपनी योनि, स्तन, बस अपनी गांड को छोर पूरा शरीर दे दी थी! हाँ, उन्होंने मेरी गांड की छेद में चुदाई करने भी लिए कहे थे, लेकिन मैं उन्हें वहां सेक्स की अनुमति नहीं दी., क्योंकि यह मेरे बेटे नमन के लिए hi है! हाँ, मैं अपनी गांड की चेरी बस अपने बेटे को देना चाहती हूँ, मैं अपनी गुदा की विर्जिनिटी केवल मेरे बेट ेके साथ hi खोना चाहती हूँ! आखिरकार हम अपने गाँव आ गए, और शाम को में अपने घर के जाने के लिए तैयार हो गए! मेरे पिता चाहते हैं की मैं रात को रुकूँ क्योंकि आप जानते हैं की वह क्या करना चाहते है . वह बस अपनी बेटी को baar-baar छोड़ना चाहते हैं.





लेकिन मैं अपने बेटे को मिलना चाहती हूँ और मैं उसका मोटा कठोर विशाल लुंड चाहती हूँ और मैं उसके लिए एक माँ से भी अधिक बनना चाहती हूँ! अंत में , में अपनी माँ को अलविदा कही.,

पिताजी को एक बेटी के रूप में उनके पेअर छूए, मेरे पापा ने मुझे एक सुन्दर हिरे की अंगूठी दी, मेरे पिताजी ने मुझे रेलवे स्टेशन छोड़ने आये और वापसी यात्रा के लिए हर चीज़ की व्यवस्था की. अब ट्रैन ने सब कुछ पीछे छोड़कर अपनी गति पकड़ ली थी. मैं अपने पापा के साथ अपने यौन कारनामों के बारे में सोची और खुद पर मुस्कुरायी!!





अब मैं केवल आगे की और देख रही थी बस अब मेरी योनि मेरे बेटे को hi चाहती हैं, हे भगवन, अपने बेटे के बारे में सोचते hi मेरी योनि गीली हो जाती है!!!
 
मैं मेरे बेटे को लगभग 1 महीने के बाद देख रही थी इसलिए मैं बहुत उत्साहित थी. शुक्रवार को वह मुझे स्टेशन से पिक उप करने आया. अब में 1 महीने बाद अपने बेटे नमन को देखने वाली थी तो मैं और इंतज़ार नहीं कर सकीय और बड़े प्यार से उसे गले लगा लिया. नमन ने भी मुझे अपने करीब गले लगा लिया, और उसने मेरी पीठ को सहलाया और dhire-dhire अपना दाहिना हाथ मेरी पीठ के चरों और और बगल के निचे डालकर मेरे स्तन के किनारे को दबाने लगा. . में उस पल इतनी कामुक महसूस की , मैं कैसे बताऊँ.. मेरा अपना बीटा भी मुझषै मिलाने के लिए इतना उत्सुक था की वह मस्ती से मेरे स्तनों को मसल रहा था, ! हे भगवान. फिर में खुद को उसकी ोाकद से आज़ाद करि और हम अपनी कार की और चल दिए.

पहले मार्किट चलते है अआप्के लिए कुछ लेना है. नमन क्या लेना है बताओ, माँ हमें आपके लियए पंतय और ब्रा खरीदनी हैं. , अच्छा तू तेरी माँ को किस कलर की पंतय में पसंद करता है बता बेटे.”

मेरा बीटा शरारती ढंग से मुस्कुराता हुआ “मुझे तो माँ नंगी hi ज़्यादा पसंद अति है”

“अच्छा तो बेटे तुम्हें दिन रत अपनी माँ को नंगी hi रखना चाहता है क्या” “

“ माँ मेरा बस चले तो में अपनी माँ को दिन भर नंगी करके hi चिपका राहू.” “अरे मेरा जवान बीटा कितना नटखट है उफ्फ्फ. मार्किट में एक दुकान पर नमन और में, ब्रा और पंतय खरीदने लगे, गए, और फिर नमन ने मेरे लिए मस्त फैशनेबुल ब्रा और पंतय खरीद ली और कुछ थोड़ा बहुत सामान और खरीद लिया. .

मेरा बीटा गाडी चलना शुरू कर हम निकल पड़े. लेकिन मेरा बीटा हमारे घर के रस्ते पर नहीं चल रहा था. वह किसी और रस्ते से गाडी ले गया.

“बीटा यह कहाँ जा रहे हैं हम. यह घर का रास्ता नहीं हैं . कहाँ जा रहे हैं हम बेटे.”

“माँ घर पर सब हैं. समाधि जी और दामाद जी भी है. लेकिन माँ मुझे अआप्के साथ अकेले में. और पल बिताने हैं .. आप एक महीने के बाद जो मिली हो …”

और मेरा बीटा एक हाथ से गाड़ी चलते हुए दूसरे हाथों से मेरी झंघों को सहला रहा था .. उफ्फ्फ मेरा बीटा अपनी माँ की साथ मस्ती करने के लिए कितना. बेताब हैं हे भगवान. मेरी नज़र निचे गई तो उसका लुंड भी अब उभरने लगा था और लूसे पंत में बड़ा तम्बू बनाया हुआ था .. में अपने. बेटे के राक्षसी लुंड को बहुत मिस की थी … मेरी बुर भी रास चोर्ने लगी थी. हम फिर सीधे एक 5 स्टार होटल में पहुंच गए और रूम बुक करके रूम के अंदर ा गए.

“अब बोलो माँ क्या इरादा है” नमन आँख मारते हुए बोलै

“ नमन बेटे मैं आज तुझसे अपनी हर इच्छा पूरी करवाना चाहती, बोलो करोगे न, “ नमन मेरी मोठे चुचो को दबाता हुआ

.





“ माँ तुम जैसा जैसा कहोगी में वैसा hi करूंगा.”

“नमन बेटे आज तुम मुझे धीरे धीरे लेकिन काफी देर तक खूब गहराई से छोड़ो और मेरे हर अंग को खूब प्यार करो,”. नमन ने अपने सरे कपडे निकल दिए और मुझ को भी बस ब्रा और पंतय में hi रखा. , मेरा भरा हुआ गदराया बदन देख कर नमन का राक्षसी लुंड डंडे की तरह खड़ा हो गया. में झट से नमन के लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में लेकर खूब प्यार से चाटने लगी, और फिर पूरी तरह चूसने लगी.







नमन मेरी मोती मोती चूचियों को बेरहमी से मसलने लगा

करीब 10 मिनट तक में मेरे बेटे नमन का लुंड चूस चुस्की उसे गीली कर दी.

“माँ अब मेरे लुंड से रास बहार आने वाला है ाःह ”

“ नमन मुझे तुम्हारा सारा रास पीना है उसे मेरे मुँह में hi निकल दो” और फिर में उसके लुंड को और जोरों से चूसने लगी. नमन ने एक बड़ी अह्हह्ह्ह्ह करते हुए अपने लुंड का सारा रास मेरे मुँह में निकल दिया और में उसके रास की एक एक बूँद को चाट चाट कर पि गई. में अब मेरे बेटे नमन की बहो से चिपक गई और नमन ने मुझे अपनी गॉड में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और धीरे धीरे मेरी फूली हुई छूट अपने हाथो से सहलाने लगा.

, में भी अपने हाथो से नमन का लुंड सहला रही थी.

“माँ अआप्के मोठे मोठे चूतड़ों का तो में दीवाना हूँ और दिन रत मेरे सामने मेरी माँ की गदर्यी चूतड़ घूमते रहते है , बहुत hi मस्त हैं चूतड़ आपकी”

और मेरे बेटे नमन का लुंड फिर से खड़ा होते हुए झटके मरने लगा मेरी hi नज़रों के सामने हे भगवन.

“ माँ और एक बात है , कैसे बताओ आपको?!”

“बताओ न बेटे मुझसे कुछ न छुपाओ”

“माँ में .. में… अपनी बहन … अंजू .. की .. चुदाई… करना चाहता हूँ …..” हे भगवन मेरा बीटा.. अंजू.. की भी … उफ्फ्फ. मेरे बेटे की बढाती हुई हवस की आग देख में शर्मा गई .. वह भी मेरे बेटी के लिए .. उसकी बहन के लिए …

“उफ्फ्फ्फ़ माँ में अब आप दोनों को छोड़ना चाहता हूँ तुम कुछ आईडिया बताओ न की कैसे में आपको और मेरी दीदी को छोड़ू “

“हे भगवन , बेटे यह क्या .. तुम्हें अंजू भी चाहिए”

“माँ आप नहीं थी तो में अपनी दीदी को एक दिन नंगी देख लिया हूँ जब वह कपडे बदल रही थी. तब से .. बस मुझे मेरी बहन अंजलि के साथ भी पूरी मस्ती करनी हैं





. “अरे मेरे प्यारे बेटे अपनी बहन की नग्न तस्वीर से तो तुम्हारा लुंड झटके मरने लगा, कही बहन की छूट पाकर अपनी माँ को मत भूल जाना”

नमन ने मेरी मोती जांघो को दबोचते हुए “मेरी प्यारी माँ आपकी मस्तानी जवानी को में कैसे भूल जाऊंगा” मेरे बेटे को मेरी जवानी बुलाते सुन में तो काफी शर्मा गई.

“मुझे अब आप दोनों को छोड़ना है, दोनों घोडियो के नंग बदन सोचकर में पता नहीं कितनी बार मूठ मर चुक्का हूँ और खास कर आपकी मोती चूतड़ों को तो में दिन रत छोड़ना चाहता हूँ,”

“उफ़ क्यों तुम्हे अपनी माँ की चूतड़ इतनी पसंद है क्या,”

“माँ आपके मोठे मोठे चूतड़ों का तो में दीवाना हूँ और दिन रत मेरे सामने आपकी गदरायी चूतड़ घूमते रहते है , बहुत hi मस्त चूतड़ हैं आपकी” और यह कहते हुए मेरे बेटे नमन का लुंड फिर से काफी झटके मरने लगा,

“अरे मेरे प्यारे बेटे अपनी माँ की छुटद के नाम पर तो तुम्हारा लुंड कितने झटके मरने लगा हैं... अंजू का देखेंगे लेकिन पहले तू अपनी माँ से तो मस्ती कर ले”

“यह मेरी माँ कितनी खुले विचारों की हो गई हो आप … हाँ माँ तुम्हारी तो जैम कर चुदाई करने hi यहाँ लाया हूँ … ाजाओ मेरे पास”.

मेरे बेटे ने मेरी मोती जांघो को दबोचते हुए मेरी दोनों मोती जांघो को फैला दिया और मेरी दोनों घुटनो को ऊपर की तरफ उसके कंधो से सत्ता दिया जिससे मेरी मस्तानी छूट और चूतड़ के छेड़ , दोनों मेरे बेटे के सामने ा गए और नमन ने बिना देर किए अपनी जीभ को मेरी गांड के छेड़ से चाट लेते हुए ऊपर की तरफ मेरी छूट को पूरा चाटने लगा.







में अपने दोनों हाथो से अपनी फूली हुई छूट की फैंको को और ज़्यादा फैला दी और नमन ने मेरी और मस्त फूली हुई छूट और गांड की छेड़ की चटाई जारी राखी.

“में सिसकिया लेने लगी यह यह मेरे राजा ऐसे hi छतो अपनी माँ की मस्तानी छूट को, यह खा जाओ पूरी छूट को , में कब से अपनी गांड और छूट चाटने के लिए तरस रही थी और छतो मेरे राजा और जोर से छतो यह यह बस छत्ते रहो, सी सी यह यह… शाबाश मेरे राजा ऐसे hi खूब चुसो”

नमन भी मेरी बातो को सुन कर और जोर से मेरी पहली हुई बुर चाटने लगा और उसने मुझे अब नंगी करके मेरी रसीली छूट का रास पि रहा है तभी नमन ने मेरी उभरे हुए छूट के डेन को अपने दोनों होंठो के बिच दबा कर कास के चूसना शुरू कर दिया और में उसका सर अपनी मस्तानी भोसड़ी पर दबाने लगी और सीसीएनए लगी यह यह ..में अब जोर जोर से अपनी गांड ऊपर की और उठाने लगी और अपना रास नमन के मुँह में छोड़ने लगी

मेरी नमकीन रास के स्वाद ने नमन को पागल कर दिया होगा क्यूंकि वह मेरी छूट के छेद पर अपनी चीभ लगा कर मेरी बुर की रास चूसने लगा और में ने अपनी बुर का सारा रास मेरे बेटे नमन के मुँह में चोरड ी जी जिसिरा बीटा बड़े चाव से पूरा का पूरा मेर िरस को चाट गया.

और में पूरी झाड़ गई तब मेरे बेटे ने अपना मुँह हटाकर मेरी छूट देखि तो वह एक डैम लाल हो चुकी थी . अब मेरे बेटे ने मेरी ऐसी लाल पहली हुई बुर को अपने नज़रों से निहारते हुए हवस भरे नज़र से देखते हुए उसने अपना लुंड मेरी छूट के ऊपर रगड़ते हुए , एक जोर का झटका मारा और पूरा लुंड मेरी मस्तानी छूट में दाल दी.

मेरा बदन उस झटके से अकड़ गया और नमन ने मेरी मोती गांड के निचे अप्पने दोनों हाथ लेजाकर मेरी मोठे चूतड़ों को दबोच कर तगड़े धक्के मरना शुरू कर दिया में मजे से मेरे बेटे का मेरे बेटे ने मुझे उल्टा करके झुका दिया और मेरी मोती गांड को देखते hi पागलो की तरह मेरी गांड और छूट को पीछे की तरफ से बुरी तरह चाटने लगा, में जोर जोर से सीसीएनए लगी

मेरा बीटा मेरी गांड और छूट मदहोश कर देने वाली महक को शुंग कर पागलो की तरह मेरी गांड के छेंद और बुर को अपनी जीभ दबा दबा कर चाटने और चलने लगा करीब 5 मिनट तक छूट और मोती गांड की चटाई के बाद मेरे बेटे ने फिर अपने मोठे लुंड को मेरी छूट में एक तगड़े झटके के साथ अंदर पेल दिया ुर मेरे मुँह से चीख निकल गई . लेकिन मेरा बीटा सटासट अपना लुंड मेरी छूट में पीछे से ठोकने लगा करीब 10 मिनट की तगड़ी ठुकाई ने मेरी छूट को बिलकुल लाल कर दी.







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मेरा बीटा अब और जोर जोर से कास कास कर धक्के मरने लगा और में है है करने लगी पुरे कमरे में हमारी ठुकाई से थप थप का संगीत गूंजने लगा फिर नमन ने एक जोरदार झटका मेरी छूट में मारा और में अकड़ गई और मेरी छूट ने ढेर सारा रास फिर से चोर दी और इसी के साथ मेरे बेटे नमन के लुंड से भी फव्वारा फुट पड़ा और वह अपनी माँ की छूट में फिर से जहर गया आईटी इ महीने से जमा हुआ उसका वीर्य मेरी छूट को भर दी और काफिर अस बहार भी निकल पड़ा. में बिस्तर पर पड़ी पड़ी हाफने लगी . मेरी तोह पूरी ताकत ख़तम हुयी लेकिन मेरे बेटे अभी भी ज्यादा थका हुआ नहीं पायी. कुछ देर बाद में अपने बेटे के गलों को फिर होठों को चूमते

“ उफ्फ्फ नमन मेरे बेटे … आज की चुदाई में इतना मजा मिला जैसे में पहली बार चूड़ी हो. वाकई में तुम्हारे लुंड में गजब की ताकत है . तुमने तुम्हारी बुद्धि माँ को मस्त कर दिया है”

“अरे माँ आप भूदि नहीं बिलकुल जवान घोड़ी हो जवान घोड़ी ..





बार बार चढ़ कर आपकी बुर छोड़ने का माँ करता हैं …”

फिर हम दोनों 15 मं तक एक दूसरे के होठों को चूमते रहे … और फिर कपडे पेहेन कर वहां से निकल गए. 2 घंटों का खेल , खेला था हमने.

घर के राइड के दौरान मेरा प्यारा बीटा अब एक बेटे के नाते गाडी में मेरे पास बैठकर सामान्य बातें करने लगा .. मनो अभी कुछ 2 घंटे पहले हम दोनों ने प्रेमियों जैसे चुदाई करि hi नहीं थी. .
 
अगले दिन मैं जल्दी उठ गयी... मैं रसोई में गयी और जमुना बाई से कहा की मैं अपने बेटे नमन के लिए नाश्ता तैयार करूंगी. दूसरों के लिए नाश्ता जमुना बाई ने तैयार की. नमन के पापा कपडे पेहेन और नाश्ता करने लगे. अगले 15 मं बिट गए और मेरे पति काम पर चले गए. उन्हें विदा करने के बाद मैं अपने बेटे के कमरे में नाश्ता देने गयी. जैसे hi अंदर गयी मैं चौंक गयी





मेरा बीटा. नमन दरवाज़े के पास बिलकुल नंग खड़ा था. इससे पहले की मैं कुछ कहती, नमन ने मुझे पकड़ लिया और मुझे दीवार से चिपकाकर मेरे होठों पर एक जोरदार चुम्बन दिया और नमन के हाथ मेरे पूरे शरीर पर थे. तभी अचानक उसने मेरी कुर्ती के अंदर हाथ दाल मेरी ब्रा में कैद चूचियों को मसलने लगा..

“उफ़ नमन बेटे क्या कर रहे हो सुबह सुबह …” हे भगवान् तुम्हारा शैतान फिर से जग गया हैं … “

“उफ़ मम्मी अभी अभी अनजलि मेरी बेहेन के बारे में सपने देख रहा था .. में उससे चिपका हुआ हूँ और आप भी मुझे चुम रही हैं …”

मेरा हाथ अब मेरे बेटे नमन के लडक लुंड पर उसे सेहला रहा था ..





“उफ़ बेटे तुम्हे अपनी बेहेन इतनी चाहिए … उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारा शैतान उसके बारे में सोच खड़ा हैं डिअर …

“हाँ मा मुझे सच में आपकी और अंजलि की चुदाई एक साथ एक hi बिस्तर पर करनी हैं …. आप hi कुछ कर सकती हो मा.”

“ओह मेरे बेटे तुम्हारी ख़ुशी के लिए में कुछ भी लड़ूंगी .. “ में बस अपने बेटे के राक्षसी लुंड को सहलाते जुए कह रही थी ..

“माँ बताओ न कुछ तरकीब जिससे मुझे मेरी बेहेन की भी बुर मिल जाए …”

अब मेरा बीटा मेरी बड़ी चूचियों को का सकस कर दबा रहा था .. उफ्फ्फ मम मेरी बुर गीली हुयी थी ..

“ देखो नमन में तुम्हे एक तरकीब बताती हु जब तुम अपनी बेहेन को गले लगते हो तब तुम अपने साइन को उसकी चूचियों से कास कर दबाना और उसकी गोरी सी गर्दन पर एक दो मिनट तक अपने होठो से चूमना. मेरी बेटी अंजलि बहुत प्यारी और भावुक महिला हैं .. वह भी तुम्हे अपनी बहो में भर लेगी फिर तुम धीरे से अपना एक हाथ लेजाकर हलके हाथो से उसकी छूट को उसकी पंत या शॉर्ट्स के ऊपर से सहलाकर जल्दी से हाथ हटा लेना. अगर तुम्हारी बेहेन तुमसे छोड़ना चाहती होगी तो जब वह तुमसे अलग होकर तुम्हारे चेहरे को देखेगी तब तुम थोड़ा सा मुस्कुरा देना अगर वह भी मुस्कुरा देती है तब तू समझ जाना की वह भी तुमसे छोड़ना चाहती है और फिर मौका देख के तुम आगे बढ़ो.”





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“ उफ़ माँ क्या आईडिया दिया है आपने . बेहेन की छूट को में एक बार क्या दो बार सहला दूंगा,”

“है बेटे ज़रूर लेकिन थोड़ा ध्यान से”

“हाँ माँ .. अब उसे छोड़िये .. बताइये आप और में मस्ती कब करेंगे .. “ और मेरा बीटा मुझे चूमने लगा..

“धत बदमाश …” में बस नमन के राक्षसी लुंड को सहलाते hi उसे बोली …

“‘माँ तुम बदमाश कहती हो लेकिन तुम hi हो मेरे लुंड को पकडे हुए उसे सहलाते हुए … तोह बदमाश आप hi हो ..”

हे भगवान् हाँ सच हैं में भी बदमाशी से मेरे बेटे का कठोर लुंड प्यार से अपने नेल पोलिश से सजे हाथों से सेहल रही थी .. मन hi नहीं करता की में अपने बेटे के लुंड को चोर दू .. “

“बेटे अब तैयार हो और काम पर जाओ .. इतना बड़ा प्रोजेक्ट मिला हैं तुम्हे .. उस पार ध्यान देना .. में तोह हूँ hi घर पर ..”

“हाँ माँ सच बहुत काम हैं .. में तैयार होता हूँ ..:”

में बस उसके काइंड को पकड़ते हुए सहलाती रहे ..

“माँ अब तोह मेरा लुंड छोड़िये .. नहीं तोह कैसे जाओ नहाने .. क्या आप भी आपगी …”

हे भगवान् सच में अभी भी उसके मोठे लुंड को सेहला रही थी … उसके लुंड को चोरते हुए ..

“उफ़ नहीं बेटे अब तुम जाओ और नाहा कर ब्रेकफास्ट कर बहार आओ.. चलो”

मेरे बेटे ने मेरी चूचियों को एक आखरी बार दबाते हुए मेरी चूतड़ों को भी जोरों से दबोचते हुए अपने नहाने के किये चला गया .. में अपनी कुर्ती ठीक करते हुए थोड़ा लिपस्टिक लगते हुए निचे चली जाती हूँ.

अब में मेरी बेटी के कमरे के तरफ बढ़ती हूँ.. वह हर रोज़ की तरह अभी भी सो रही होगी …

मेरी बेटी के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था .. में थोड़ा झाँक दिल्ली तोह दांग रह गयी .. मेरी बेटी अंजलि अपने कमरे में मोबाइल पर कुछ देख रही थी और एक हाथ अपनी पाजामे के अंदर दाल कर अपनी छूट भी सहला रही थी ज़रूर वह गलती से दरवाजा बंद करना भूल गई थी.





उफ़ मेरी बेटी इतनी कामुक हैं … सुबह सुबह अपनी छूट से खेल रही हैं उफ्फ्फ्फ़..

में चुपके से कमरे में गई और अंजलि को कुछ सेकंड उसकी छूट मसलते देख लिया फिर सीधे जाकर अंजलि के हाथो से मोबाइल चीन ली.

ओह हे भगवान् यह क्या .. मेरी बेटी पोर्न देख रही थी जिसमें एक मातुरे महिला और एक जवान लड़की एक दूसरे की छूट चाट रही थी ..

में अब उसके बिस्तर पर उसके बगल में बैठ गयी .. उसकी तरफ देखते हुए .. लेकिन मेरी बेटी मुस्कुरायी.. में hi ज्यादा शर्म से लाल हुयी थी .. मेरी बेटी नहीं.

में hi शर्म से लाल अपनी गार्डन निचे झुकाये बैठी थी, मेरी बेटी अंजलि ने मोके का फायदा उठाते हुए मेरे पास और सरकते हुए मेरी मोठे मोठे चूचियों को अपने हाथो से मसल दिया, में अब बड़ी कामुकता से आह की कराह निकली..

“बेटी क्या कर रहे हो तुम … उफ्फ्फ माँ की चूचियों को चोरो न उफ्फ्फ कोई देख लेगा तोह ..”

“कौन देखेगा माँ , मेरा भाई ..?? वह तोह आपकी चुदाई का दीवाना हैं .. वह खुद शामिल हो जाएगा और आपको यहाँ पर hi छोड़ेगा ः..”

हे भगवान् यह भी सच hi बात थी .. उफ्फ्फ में तोह और शर्म से लाल हुयी.

मेरी बेटी अब मेरी लेग्गिंग्स के अंदर अपने हाथों को डालने लगी .. मेरी पंतय को छूने लगी ..

“बेटी उफ्फ्फ तुम ये क्या कर रही हो, पागल हो गयी हो तुम उफ्फ्फ कोई देख लेगा तोह …??””

“ओह हो माँ अब मई भी तो देखु मेरी माँ अपनी बुर से कितना रास चोर रही है” और एक झटके में मेरी बेटी ने मेरी मोती गांड से लेग्गिंग्स निचे सरका दी. मेरी मोती मोती केले के तने मेरे मोठे चूतड़ गुलाबी पंतय में समां नहीं रहे थे. मेरी पंतय भी खींच कर उसे मेरी बेटी ने निचे करि … और मेरी दोनों जंघे पिलाकर मेरी बुर के होठों को देखने लगी .

में शर्म से लाल होने लगी और मेरी बेटी मेरी पहली हुई चिकनी छूट पर हाथ फिरते हुए,

“उफ्फ्फ मम्मी आपकी तोह छूट तो बहुत रास छोड़ रही है, पक्का लगता हैं अभी भैया के कमरे से आयी होगी आप … बताइये सच हैं न …”

में शर्माती हियी मुस्कुराती हुयी बस सर को हाँ में हिला पायी ..

“ओह हो मेरी मम्मी आपको भैया ने सुबह सुबह गरम कर डाला .. कही उसने आपकी बुर की छू…..”

“उफ्फ्फ हे भगवान् बेटी क्या बोल रही हो … नहीं ऐसे कुछ नहीं हुआ बस में …”

“ओह बस आप क्या मम्मी बताइये ज़रा … बस क्या कर आयी आप मेरे भैया के साथ..?!!”

“बस कुछ नहीं …. बेटी ऐसी बातें नहीं करते मम्मी के साथ ….”

“अच्छा मम्मी फिर क्या करू मेरी प्यारी मम्मी के साथ …”

मेरी बेटी अब मेरी होंठो को चुम लेती है, और में भी अपनी बेटिनके बदन से चिपक जाती हूँ और मेरी बेटी अब मेरे हाथों को पकड़कर उसके hi

चूचियों पर रख देती है और में भी मस्ती में अपनी बेटी के मोठे मोठे दूधियाँ दबाने लग जाती हूँ..





.

में अपनी बेटी मेरी बाँहों से चिपक गई और मेरी रसीले होठो को चूमने लगी जोरों से … पूरी तरह से …

“ओह बेटी .. मम कोई ा जाएगा … प्ल्ज़ अभी नहीं .. ब्रेकफास्ट तैयार करना हैं … नमन भी आएगा .. प्ल्ज़ अभी नहीं .. बेटी चोर दो मुझे.”

“अच्छा मुम्ममय भैया जाएंगे तब में आपके कमरे में आउंगी .. वहां हम दोनों बहुत मस्ती करेंगे ..” इतना कहते हुए मेरी बेटी मेरी चूचियों को कसकर दबोच कर मुझे छोर देती हैं. में लेग्गिंग्स यह कर , लिपस्टिक लगा कर .. उसके कमरे से अपनी मोती चूतड़ों को हिलती हुयी बहार जाती हूँ निचे डाइनिंग टेबल के पास.

अब मेरा बीटा पूरा हैंडसम तैयार होकर अपने काम पर जाता हैं ..

और में घर के कामों में बिजी रहती हूँ .. मेरी बेटी को भी एक अर्जेंट कॉल आता हैं और वह भी बहार जाती हैं.. अब में बस हॉल में बैठे टीवी देखने लग जाती हूँ.

नमन दोपहर 5 बजे hi वापस ा जाता है, वह कहता है की उसे प्रोजेक्ट के काम से सिलसिले शहर जाना है. वह चाहता है की मैं उसके साथ आऊं. मैं बहुत उत्साहित थी और तुरंत हाँ कह दी.. में मेरे पति सुनील से मंजूरी ली जाने के लिए और मैं यात्रा के लिए तैयार हो गई. मेरे शरारती बेटे ने शहर जाने के लिए पूरी रात की यात्रा के लिए ट्रैन बुक की क्योंकि वह मेरे शरीर का आनंद लेना चाहता था.. हम तैयार हो गए, मैंने अपनी साड़ी सेक्सी ड्रेसेस और साड़ी एयर निघटिएस पैक कर लीन और हम दोनों ट्रैन से शहर के लिए निकल पड़े.

ट्रैन में एक कम्पार्टमेंट था इसलिए हमारे केवल में और बीटा hi केबिन में थे. ट्रैन शुरू होने के बाद और हम दोनों वबीन में अकेले थे, मेरे बीटा ने केबिन का दरवाज़ा बंद कर दिया और वह मेरे पास आकर बैठ गया. मेरे बेटे ने मुझे गले लगाया, मेरे मुंह को चूमा,





हम बहुत गहराई से चूमने लगे, इतनी गहराई तकनकी हम दोनों के जीभ तलवारों जैसे एक दूसरे से लड़ती रही!!!

ट्रैन में हमारे शरीर ने ek-doosare को कुचल दिया, हमारी यौन यात्रा की शुरुवात थी!! मेरे बेटे ने मेरी लेग्गिंग्स भी उतार दी, मेरी ब्रा भी, मैं आधी नंगी हो गई, मेरे स्तन उत्तेजना से खड़े हो गए, में अपने प्यारे बेटे की शर्ट उतार दी, और हम ek-doosare को देखकर मुस्कुरा रहे थे. , में उसकी बालों वाली छाती पर हाथ फेरी, मेरे बीटा ने मेरे निप्पल्स को चूसा, वे 2 निप्पल्स एक चट्टान की तरह खड़े थे!

मेरा बीटा एक के बाद एक मेरी निप्पल्स को चूस रहा था, मेरे निपल्स की कठोरता को महसूस करते हुए उनकी चुटकी काट रहा था.. हे भगवान्, मेरा बीटा नमन वास्तव में उन सफ़ेद खरबूजों का शौक़ीन है, उसके हाथ इतने खुरदरे और विशाल हैं की उसने मेरे एक पूरे स्तन को अपने मुंह में लेने की कोशिश की, लेकिन सक्षम नहीं हो सका!

“उफ़ आपके चूचियां इतने बड़े हैं माँ!!”

, में अपने बेटे का सर खींचकर उसे मेरी चूचियां खिलाई, ओह, हाँ, मैं बहुत कामुक महसूस कर रही थी .. , मैं अपने hi बीटा की गुड़िया थी! मेरे 2 सफ़ेद स्तन चूस चूस कर लाल हो गए!

मेरा बीटा मुझसे पूछ रहा था,

“माँ मुझे खिलाओ, मैं तुम्हारा दूध पीना चाहता थी माँ , मैं अपनी माँ का दूध चखना चाहता थी,

उफ्फ्फ्ब मेरे बेटे के उन शब्दों से में बहुत उत्तेजित महसूस हो रही थी.

“ बीटा तूने अगर मुझे गर्भवती कर दिया तो hi मैं तुम्हें दूध पीला पाउंगी !” में पहली बार इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रही थी!! मैं इतनी उत्तेजित हो गई थी की मेरे बीटा ने धीरे से मेरी लेग्गिंग्स की गाँठ खिंच दी, उसे पकड़कर मेरे पेअर ऊपर उठा दिए, उस लेग्गिंग्स को निकलते हुए , मेरी साटन लाल पंतय जो मेरे बूत के रास से भीगी हुई थी अब उसके सामने थी.

मेरा बीटा अपनी उँगलियों को मेरी पंतय के ठीक बगल में दाल रहा था, dhire-dhire मेरी पंतय के ठीक बगल में अपनी उँगलियों से मेरी पंतय की साइड से निकलती बुर की होंठों को dhire-dhire रगड़ रहा था, मेरी छूट के दाने को को हिला रहा था,

“ओह बीटा कराहते हुए में भी उसके पंत के बेल्ट बक्कल को खोलते हुए फिर उसकी पंत की ज़िप भी खोल दी, और मेरे बेटे की पंत निचे गिर गई

“बीटा तुम्हारा राक्षसी लुंड तोह बहुत कठोर हैं ..” यह कहते हुए में अपनी चिकनी रेशमी हथेली को उसके कच्छे के ऊपर रगड़ने लगी, ओह मेरे बीटा का शरारती, राक्षसी लुंड मेरे नज़रों के सामने मनो नाच रहा था .

ख़ुशी के मारे मैंने अपने हथेलियों से मेरे जवान बेटे के लुंड को सहलाने लगी. ,

“ओह्ह्ह माँ कहते हुए मेरे बेटे ने मेरे होंठ काटे, ..

“दर्द हो रहा है बीटा” में शिकायत की लेकिन उसने मेरी बात नहीं सुनी. अब मैंने रिस्पांस में मेरे बेटे के लुंड की गेंदों को दाबाई.

मेरा बीटा आउच कहने लगा…, उसे दर्द हुआ और मैं शरारत से मुस्कुराई,

“क्या दर्द हो रहा है बीटा”, में हसी

“अच्छा माँ इस खेल में आपसे ज्यादा में माहिर हूँ..”

यह कहते हुए मेरे बेटे ने मेरी योनि पर चुटकी काट ली.”

ओह, हम ऐसी चीज़ों का बहुत आनंद ले रहे थे, किसी भी चीज़ या शरीर की कोई परवाह नहीं करे. मेरे बेटे, ने अब मेरी छोटी सी पंतय उतार दी और मेरी छूट को देखने लगा,

“ओह मा मेरी प्यारी माँ की बुर इतनी गीली हो गई है”

में भी उसे डार्लिंग कहते हुए उसके कच्छे को पूरा निचे करि. ओह हे भगवान् मेरे बीटा का लुंड किसी भूके भेड़िये की तरह नाच रहा था, में उसके लुंड के शाफ़्ट की पूरी लम्बाई पर अपने हाथ फिराई, .

ान में उसे सीट पर बिठाई, घुटनों के बल उसके सामने खुद को बैठायी और, अपने गीले होंठों से उसके लुंड को भिगो दी और इस हरकत से मेरे बेटे का लुंड ख़ुशी से नाच उठा! मैं उसे देखकर मुस्कुरायी.

में एक hi बार में अपने बीटा का पूरा लुंड अपने मुँह में ले ली! यह बात अब मुझे आसान थी क्योंकि मैं पहले hi मेरे बेटे का शक्तिशाली 10 इंच के लुंड मुँह में ले चुकी थी.

मेरा बेचारा बीटा ख़ुशी से चिल्लाया, मैंने उसे ब्लोजॉब देना शुरू कर दी! उसके लुंड के ऊपर बालों की मालिश करते हुए! उसे स्वर्ग दिखा रही थी.. मेरे बीटा ने मेरा सर पकड़ लिया और अपने सख्त लुंड को मेरी मुँह में दबा दिया जो अब मेरे गीले मुंह से andar-baahar फिसल रहा था, ओह वह सचमुच मेरे मुंह को छोड़ रहा था.

मैं अपने प्रिय बीटा के स्वादिष्ट युवा लुंड का आनंद ले रही थी, उसे बहुत अच्छी तरह से चूस रही थी,









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कुछ 10 मं की चूसै के बाद , उसने मेरे सर को बहुत जोर से दबाया और मेरे मुंह में hi अपने वीर्य को गिराना शुरू कर दिया.

मेरा मुँह मेरे बेट ेके सफ़ेद वीर्य से पूरा भर गया था. अब मेरी बुर की चुसवाने की बारी थी, मेरे बेटे ने फिर लगातार 20 मिनट तक मेरी बुर की चूसै की, और मैं 2 बार झड़ी. लेकिन में अभी और झड़ना चाहती थी ! आखिरकार मेरे बेटे ने मेरी और एक बार ओर्गास्म निकल hi डिज़.

“ओह माँ मैंने आपके स्वादिष्ट रास का मैनर क कप से ज़्यादा रास पि लिया, हैं ..!”

फिर हमने एक दूसरे को चूमा.

“ बीटा प्रिय, कृपया थोड़ा आराम करें, हम थोड़ी देर बाद चुदाई करेंगे, मैंने प्यार से बोली और उसने अपने सर मेरी गॉड में रख दिया और आराम करने लगा. में उसके सर को सेहलायी. अब हमारे बिच सिर्फ माँ बेटे का रिश्ता नहीं रहा .. ल!!!

रात में खाना खाकर में फेस वाश करि और एक, बहुत सेक्सी निघ्त्य ली, साटन की ब्रा और पंतय, ब्रा इस प्रकार के, की वह बस केवल धागे वाला था, और कोई हुक नहीं थे. फिर में उन्हें मेरे बीटा को दे दी, और उसने बहुत सावधानी से मेरी ब्रा और पंतय पहना दी. , में ऐसी निघ्त्य पहनी जिसमें मेरी ब्रा और पंतय दिख रही थी.

में अपना मेकअप किट ली, लोरील फाउंडेशन लगाई, आँखों के निचे काजल फिर ेएलइनेर लगायी, गालों पर ब्लश लगायी, गुलाबी ेयेशादौ, मेरे होठों पर चेरी लाल लिपस्टिक, लिप लाइनर के साथ उन्हें शेप दी और फिर, उसके ऊपर लिपग्लॉस लगायी.. मैं अपने मेकअप को आईने में देख संतुष्ट थी.

मुझे मेकअप और उस ट्रांसपेरेंट निघ्त्य में देख मेरे बेटे ने फिर से अपने पंत की ज़िप खोली और पहले से hi सख्त हो चुके अपने लुंड को बाहर निकाल और उसकी मालिश करने लगा.

, मैंने अपने बीटा को मेरी जाँघों, गांड, नितम्बों और यहां तक की मेरी बुर के ऊपर भी मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाने के लिए कहा.

मेरा बीटा यह सब जब कर रहा था मैं उसके लुंड की हलकी मालिश कर रही थी. बेबी आयल से मालिश .. हाँ, मेरे किट में यह सामान था!

में अपने बेटे को मेरी निघ्त्य उतारने के लिए कही. , फिर उसने मेरी ब्रा भी निकली .. और , में अपने बड़े स्तन बाहर निकाली .

में अपने बेटे को बेबी आयल दी और उसे मेरी सेक्सी चूचियों पर रगड़ने के लिए कही. मैं उसकी जाँघों पर बैठ गई और dhire-dhire मेरे बेटे के अंडरवियर को एक तरफ धकेलते हुए उसके खड़े युवा लुंड को अपनी ख़ूबसूरत लाल नेल पोलिश वाली उँगलियों में ले ली और, हलकी मालिश की,

ओह, मेरा बीटा ख़ुशी से कराह रहा था, मेरे बीटा के लुंड को में अपने हाथों से पंप करना शुरू कर दी.

“, हाँ, माँ हाँ में स्वर्ग में हम, ममममममम”, मेरा बीटा ख़ुशी से कराह उठा, मैं उसके लुंड को dhire-dhire से सेहला रही थी,

ट्रैन की मूवमेंट्स ने मुझे मेरे बीटा के कुंड को पंप करने में मदद की.

ान मुझे मेरे बेटे का राक्षसी लुंड मेरी बुर में चाहिए था .. ओह्ह्ह, में अपने बेटे के सख्त जवान लुंड को अपनी गीली, तंग कामुक छूट में डालना शुरू कर दी… . मेरा बीटा ने मेरे कड़े गोल विशाल स्तनों पर बेबी आयल माली थी जिससे वह कितने सेक्सी दिख रहे थे.

, हे भगवान! छोडो मुझे बेटे”

, मैंने खुद कभी नहीं सोचा था की मैं सिर्फ 3 महीने पहले ऐसी कुछ चीज़ें करने की सोच भी नहीं सकती थी..





10 मिनट तक चुदाई के बाद , मेरा प्रिय बीटा मुझे डोगग्य स्टाइल में छोड़ना चाहता था..

“माँ मैं आपकी सेक्सी गीली योनि को पीछे से छोड़ना चाहता हूँ.”

“क्यों नहीं बेटे , यह कहते हुए मैं उसके ऊपर से निचे उत्तरी, हाँ मेरे बेटे का लुंड वीर्य से लिपटा हुआ चमक रहा था! हमने एक दूसरे को चूमा, मैं उसके सामने झुकी और खिड़की की रोड पकड़कर अपने ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी लम्बी चिकनी टांगों को चौड़ा करि









“. ओह माँ! तुम्हारे नितम्ब बहुत बड़े हैं” कहते हुए उसने उन्हें मसला और उनकी चिकनी त्वचा को महसूस करा..

उसने, मेरी रास से टपकती हुई छूट को थोड़ा सा चूसा, फिर अपना लुंड पीछे से मेरी बुर में दाल मुझे पीछे से लम्बे स्ट्रोक्स से छोड़ना शुरू कर दिया. मेरे बेटे को मेरी चूतड़ों को देख बहुत उत्तेजित कर दिया और, उसने मेरे स्तन पकड़ कर उन्हें मसला. अब वह मेरी चुदाई करने लगा.. मेरी. छूट की तेज़ चुदाई…. ओह्ह्ह! हम दोनों इस स्थिति का आनंद ले रहे थे, बस ऐसे hi हमारी रात भर तीन चार बार चुदाई हुई …

आखरी बार चुदाई के बाद मेरा बीटा वह ज्यादा देर तक नहीं टिक सका, और उसके लुंड से वीर्य निकलना शुरू हो गया, ओह्ह्ह उसने जितना संभव हो सके अपने लुंड को मेरी बुर में दबाये रखा और, उसने अपने गर्म वीर्य को पूरी तरह से मेरी बुर में उतार दिया, अपनी प्यारी सेक्सी माँ का नाम रत्न चिल्लाते हुए! फिर वह मुझ पर गिर पड़ा. वह धीरे से उठाकर सीट पर बैठ गया, मैं भी उसकी और देख मुस्कुराती हुई उठ गयी. , टॉवल से में, उसके लुंड को साफ करि, फिर खुद मेरी वीर्य से लथपथ योनि को क्लीन करि, मेरे चेहरा को भी क्लीन , अपने कपडे पहने और, अपने बीटा से उसके कपडे पहनने को कहा.

हमने अपने कपडे पहने और गहरी नींद में सो गए. हम subah-subah शहर पहुंचे. और हमने एक अच्छे 5 सितारा होटल में chek-in किया, तरोताज़ा होकर स्नान करे फिर, रेस्टुरेंट में ब्रेकफास्ट कर लिया.

, मेरा बीटा मीटिंग के लिए चला गया.. . मीटिंग ख़त्म होने के बाद हम होटल के कमरे में वापस आगे और पूरे दिन और रात तक हमने होटल के कमरे में चुदाई करि..

, मेरे जवान बेटे द्वारा हर संभव कामसूत्र की सेक्स पोसिशन्स को आज़माये.







अहह क्या चुदाई थी .. रात भर और दिन भर में 6-7 बार ज़हर गयी …







वापस जाते समय मेरे बीटा ने उड़ान की व्यवस्था की थी और हम अपने यौन रोमांच को जारी रखने घर के लिए निकल पड़े.
 
मेरे पति ऑफिस गए हुए थे.

.. मेरी बेटी भी काम पर गयी थी और में और मेरा बीटा और हमारी नौकरानी जामुन बाई hi घर पर थे ..

मेरा बीटा मेरे लिए बीएड में ब्रेकफास्ट लाया था ..

“ओह नमन तू मेरी कितनी ख्याल रखता हैं …”

“माँ आपने सब कुछ किया हैं मेरे लिए .. मेरा भी हक्क हैं आपके लिए कुछ करू ..”

“ओह शुर्किया बेटे .. लेकिन बीटा दर्द मेरे पुरे बदन मई हो रहा है इसका क्या करू प्ल्ज़ कुछ उपाय दो..”

मेरा बीटा एक हाथ से मेरी गदराई जांघो को सहलाते हुए “माँ क्या में आपकी मालिश करवा दू ? बस आपको कपडे उतरने पड़ेंगे… “

“बेटे लेकिन कपडे कैसे उतारूंगी , जमुना बाई भी हैं और वह अगर अंदर आ गई तोह ..”

“अच्छा मम्मी फिर आप अपने सरे कपडे मत उतरिये, मई बिना कपडे उतरे hi आपके पुरे बदन की मालिश कर दूंगा”

“ अच्छा ठीक है बेटे मई अपना ब्लाउज उतर देती हु”

और फिर मैंने अपना ब्लाउज उतर दिया और में सिर्फ सफ़ेद रंग की साटन ब्रा पहने हुए थी,





मेरा बीटा दरवाजाबंद करने के लिए चला गया.

नमन ने दरवाजा बंद करके तेल की बोतल उठा लिया और बीएड पर लेती मेरी पैरो की तरफ चढ़ कर बैठ गया, मेरा चेहरा आने वाले पल के एहसास से लाल हो गयी थी, नमन का लुंड अपनी मुझे सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में देख कर झटके मरने लगा मुझ दिख रहा था. में अपने दोनों घुटने मोड़ चित पड़ी हुई थी और मेरी मदमस्त चूचिया मेरी सांसो के साथ ऊपर नीचे हो रही थी

मेरा बीटा नमन अपने लुंड को पाजामे के ऊपर से मसलने लगा फिर नमन ने मेरी एक तंग को पकड़ कर मेरी पेटीकोट घुटनो तक चढ़ा दी और तेल लेकर मेरी मस्तानी गोरी झंघों पर लगाने लगा, और अपनी माँ की नंगी टैंगो को अपने हाथो से सहलाने लगा.

“माँ सच तुम्हारी टंगे कितनी गोरी और सुन्दर है.”

“है बीटा वैक्सिंग के वजह से मेरा सारा बदन चिकनी और सुन्दर है.”

में अब आँखे बंद किये मज़ा ले रही थी मेरी छूट रास से भीगने लगी थी. नमन उसकी टैंगो को अपने हाथो से मसले जा रहा था,

“माँ कुछ आराम मिल रहा है?”

“बीटा आज ज्यादा दर्द मेरी जांघो से लेकर कमर तक महसूस हो रहा है”

नमन समझ गया की आज उसकी छुडासी माँ अपनी छूट उसे दिखने और मरवाने का मन बना कर ली है. उसने सोचा आज में भी अपनी माँ की छूट मर कर hi रहुगा,





“माँ तुम फ़िक्र मत करो में आपकी पूरी टैंगो की मालिश कर देता हु.”

और नमन ने अपनी माँ की जांघो को पेटीकोट के अंदर हाथ दाल कर दबोचा तो मेरे के मुँह से सिसकी निकल गई आह.

“क्या हुआ माँ?”

“बीटा यही बल्कि थोड़ा और ऊपर सबसे ज्यादा दर्द है” में वासना में डूबी जा रही थी .. “बीटा पेटीकोट और ऊपर करदे नहीं तो तेल से ख़राब हो जायेगा”

“. अच्छा माँ और नमन ने पेटीकोट को अपनी मेरी जांघो की जड़ो तक चढ़ा दिया. मेरे बेटे नमन की आँखे फटी की फटी hi रह गई क्यूंकि आज में पेटीकोट के अंदर पूरी नंगी थी और मेरी चिकनी फूली हुई छूट उसे साफ दिखाई देने लगी. उसे देख नमन का लुंड मनो उसकी पंत को फाड़ने को उतावला हो गया था…

इसने मेरी गोरी गोरी जांघो को दबोच दबोच कर मसलना शुरू कर दिया .

“आह आह बीटा ऐसे hi आह है है बीटा यही ज्यादा दर्द है” कहते कहते में अपनी दोनों टंगे और फैला दी जिससे मेरी मस्ताने बुर की दोनों लिप्स अलग अलग हो गई और नामांकों मेरी छूट और उसका गुलाबी छेद साफ दिखाई देने लगा

में समझ गयी की नमन का तो हल बुरा हो गया होगा मेरी मस्त छूट देख कर. नमन ने अपनी अपने दोनों हाथो से मेरी जांघो को जांघो की जड़ तक मसल मसल कर दबोचने लगा, में अब बुरी तरह सिसकिया लेने लगी और मेरी छूट ने ढेर सारा रास छोरना शुरू कर दिया.

नमन ने मेरी छूट से बहते रास को देख कर और तेजी से मेरी जहनघन को दबोचने लगा और बीच बीच में मेरी छूट पर भी हाथ मर देता था और फिर जांघो को दबोचने लगता . मेरी छूट पर जैसे hi नमन के हाथो की थपकी पड़ती वह अपनी दोनों जांघो को और फैला देता.. उसने मेरे बुर के ऊपर अपनी नक् ले जाकर मेरी फूली हुई बुर को सूंघने लगा …. मुझे यकीन था की मेरी छूट की मादक गंध उसे मदहोश कर देती हैं हमेशा .. अभी भी इतनी बार मेरी चुदाई करने के बाद भी..

नमन मेरी पहली हुई मस्त छूट को गौर से देखता है और कहने लगता हैं

“है कितनी चौड़ी और कितनी पहली बुर है मेरी मम्मी की…”

में अपने बेटे से ऐसे सुन शर्म से लाल हो गयी … और में अपनी ानकेहिं बंद कर दी..

“ आज मम्मी में ऐसा मज़ा आपको की आप खुद कहने लगेगी बेटे मेरी छूट मई अपना मोटा लुंड दाल दाल कर देर तक खूब कास के छोड़ दे बीटा.”

और फिर नमन मेरी पहली हुई बुर को एक डैम से चुम लेता है जिससे में , अपनी बांध आँखे एक डैम से खोल देती हूँ…

“माँ अब आप पलट कर लेटो पेट पर ..”

में अपने बेटे के बातों से सहमति से पलट जाती हिन्.

नमन मेरी पेटीकोट का नाडा खोल कर थोड़ा ढीला कर के थोड़ा नीचे सरकाओ नहीं तो तेल लग जायेगा”. में ऐसे कहते हुए पड़े पड़े अपनी गांड थोड़ा ऊपर उठती हूँ और नीचे हाथ लेजाकर कर मेरी पेटीकोट का नाडा खोलने लगती हूँ जिससे मेरी गांड उठ कर नमन के मुँह के सामने आ जाती है और नमन अपने हाथ से मेरी उठी हुई मस्तानी गांड को सहला देता है.

में और अपनी पेटीकोट को थोड़ा नीचे सरका देती हुंम जिससे मेरी चूतड़ों की ऊपरी हिस्सा नजर आने लगती हैं .. फिर नमन अपने हांथो मई तेल लेकर मेरी खुली नग्न कमर पर तेल लगाने लगता है और धीरे धीरे अपनी उंगलियों को मेरी चूतड़ों की गहरी खाई मई मलने लगता है.











मेरा बीटा नमन कुछ इस तरह मालिश करता है की उसकी ऊँगली मेरी गांड की गहरी खाई मई सरकने लगती है और में आह आह करने लगती हूँ, तब मेरा बीटा नमन अपनी ऊँगली को तेल मई डुबो कर मेरी गांड की गहराई मई ऊँगली थोड़ा दबा कर नीचे की और दबाता हैं जिससे उसकी ऊँगली मेरी चूतड़ों के छेड़ मई सरक जाती है और में आह करके सिसकियाँ देती हूँ .

बीटा पेटीकोट और थोड़ी नीचे करो, तेल लग रहा है,

मेरा बीटा नमन पेटीकोट को मरीचूतडो से झंघों तक सरका देता है, और मेरा बीटा नमन खूब सारा तेल मेरी चिकनी गांड पर दाल कर अपने दोनों हांथो से मेरी गांड को दबोच दबोच कर मसलने लगता है

आह आह सिसकियाँ करती हुयी .. फिर मेरा बीटा मेरी गांड के छेड़ को सूंघता है और पागल हो जाता है और अपनी जीभ से मेरी गांड के छेड़ को चाटने लगता हैं

में आह आह करने लगती हूँ और तभी मेरा बीटा नमन अपनी ऊँगली मेरी गांड के छेड़ मई पेल देता है जिससे उसकी ऊँगली मेरी चूतड़ों के छेड़ मई आधी से ज्यादा उतर जाती है.

मेरा बीटा नमन अपना मुँह मेरी चूतड़ों के ऊपर रख कर दबाने लगता है

“माँ तुम्हारे तो पैरो और जांघो से खुशबू सी आ रही है.”

हे भगवान् bête मैंने तो तुझसे पहले hi कहा था की औरत के हर अंग से खुसबू आती है.”

“पर माँ जो खुशबू तुम्हारी झंघों से आ रही है वह खुशबू तो पहले वाली खुशबू से भी ज्यादा मस्त लग रही है, माँ अब में क्या तुम्हारी झंघों की खुशबू को सूंघ के देख लू??”

मेरी सुने बिना मेरी छूट पर मेरा बीटा नमन अपने हाथ रख, मेरी झंघों को दोनों हाथो से कास कर दबोच लिया,… उफ्फ्फ मेरा बीटा पागल हैं अपने hi माँ के किये …

में एक डैम से आह कर के सिसकती हुए

“है बीटा तुझे जहा की खुशबू सूंघना है सूंघ ले “

मेरा बीटा नमन ने झट से मेरी दोनों नंगी जांघो को अपने हाथो से और पहिलाते हुए मेरी पूरी छूट फैला दी और अपना मुँह अपनी माँ की छूट के ऊपर लेजाकर अपनी hi माँ की पहली हुई मस्त छूट को सूंघने लगा,

में देख पायी तिरछी नज़रों से की मेरे बेटे नमन का लुंड मनो पजामा फाड़कर बाहर निकल आएगा .. हे भगवान् उसका राक्षसी लुंड फिर से मेरी छूट की कुटाई करने को बेक़रार था….

और अब, मेरे बेटे नमन के नाक की गरम सांसें जब मेरी छूट पर पड़ी तोह में मदहोश होकर अपनी चूतड़ों को ऊपर की और उठाने लगी जिससे उसकी छूट का रास मेरे बेटे के होंठो से लग गया!!! में अपनी आँखे बंद किये अपने चूतड़ों को अपने bête के सामने उठा रही थी,

“ माँ तुम्हारी जांघो की महक तो इतनी मिठास वाली लग रही है की मन करता है इस खुशबू को सूंघने के साथ चाट भी लू”

में अब अपनी गांड उचकते हुए “हे भगवान् उफ्फ्फ चाट ले न बेटे, तुझे चाटने के लिए hi तो तेरी माँ के बदन से ये खुशबू आ रही है”

बस और क्या इतना सुनते hi मेरा बीटा नमन ने अपना मुँह अपनी माँ की रसीली पहली हुई छूट के छेड़ पर रख दिया और बुरी तरह मेरी चूतड़ों के बीच की छेद को फैलाकर चूसने लगा ,

“हाँ चूस ले , हां बीटा और चूस अपनी माँ की छूट की साडी खुशबू चूस और चूस ले .. ाः मेरी पूरी छूट .. आह ..आह ..आह”

चूतड़ों के बीच से सरका कर अब मेरा बीटा नमन अपनी जीभ मेरी छूट के गुलाबी छेद में दाल कर उससे बहते हुए रास भी खींच खींच कर चूसने लगा और में अब जल बिन मछली की तरह तड़प तड़प के अपनी चूतड़ों को उठा उठा कर अपनी छूट अपने bête के मुँह पर मरने लगी.

छूट चूसकर फिर मेरा बीटा अपने हांथो से मेरी गांड और छूट को phaila-phaila कर पागलो की तरह चाटने लगा.

कुछ 5 मं ऐसी चटाई के बाद उसने अपनी पजामा निकल नग्न हो गया ..

फिर मेरा बीटा अब मेरे ऊपर चढ़ लेता है और अपना मुँह मेरी गांड और छूट को सूंघते हुए लम्बी लम्बी जीभ निकल कर चाटने लग जाता है … अब मेरी मुँह के सामने मेरे बेटे का रालशासि लुंड झटकों पर खटके मारता हैं और उसके लुंड से रास की बूँदें भी टपकने लगती हैं सीधे मेरी होठों पर …

इससे में भी जोश मई आकर अपने बेटे के गुलाबी मोठे लुंड के टॉप को चूसने लग जाती हूँ …

अब बिस्तर पर हम दोनों माँ बेटे एक दूसरे के छूट और लुंड का रास निकल निकल कर पीने लगते है . 10 मिनट तक मेरा बीटा नमन अपनी प्यारी मम्मी की छूट और गांड चाट चाट कर लाल कर देता है और में उसके मोठे लुंड को चूस चूस कर फुला देती हूँ…

अब मनो दोनों से रहा नहीं जा रहा था और फिर दोनों अपना, अपना रास एक दूसरे के मुँह मई छोर देते है. मेरे बेटे का सफ़ेद वीर्य मेरी मुँह में उगलने लगतभाईन… उफ्फ्फ इतना सारा वीर्य मेरे बेटे के लुंड से हे भगवान् ..

, में अब अपने बेटे के ऊपर hi लेट कर बुरी तरह हाफने लगती हूँ और अब, पुरे कमरे मई केवल हमारी सांसो की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता हैं. मेरा बीटा नमन उठ कर मेरी के बगल मई आकर लेट जाता है और मुझे बांहो मई भर लेता है, और मेरी रसीले होंठो को चूसने लगता है .

में भी नमन का लुंड अपने हांथो से दबाने लगती हूँ फिर मेरा बीटा नमन अब मेरी ब्लाउज उतर कर मेरी चूचियों को कास कास कर दबाने लगता है और में जोरो से सिसकियाँ देने लगती हूँ. ,

“माँ तुम नंग कितनी सुन्दर लगती हो”

में अपने बेटे नमन के होंठो को चुम कर मुस्कुरा देती हूँ कामुक भरी निगाहों से. मेरा बीटा नमन मुझे बीएड पर पूरी नंगी करके लेट जाता हैं और फिर वैसे hi लेते मुझे अपनी गॉड मई लेते हुए अपने खड़े लुंड पर ऐसे बिठाता है उसका लुंड मेरी छूट मई सात से गहराई तक सरक जाता है…





मेरा बीटा नमन मेरी दूध की डेयरीज को अपने दोनों हांथो से बुरी तरह मसलने लगता है और में उछाल उचक कर मेरे बेटे के राक्षसी लुंड पर कूदने लगती हूँ …

“ओह बेटे ऐसे इस मुद्रा में कभी नहीं चूड़ी हूँ ओह्ह्ह मेरा बीटा तुम्हे सेक्स का इतना पता हैं ाः मम हाँ .. उफ्फ्फ में तुम्हरे लुंड पर कूद कर छोडूंगी .. अहह मेरा बीटा अहह मम अपनी माँ की छूट की ऐसी hi चुदाई कर ले बेटे .. अह्ह्ह मममम.”







कुछ और 15 मं ऐसी चुदाई के बाद फिर मेरा बीटा नमन मुझे वापस पीठ के बल लिटा देता है और मेरी दोनों टैंगो को अपनी शोल्डर्स के ऊपर तक चढ़ा कर कास कास के अपना लुंड मेरी छूट मई मरने लगता है.









मेरी ऐसी कुटाई के 15-20 मं बाद मेरा बीटा अपने लुंड से मेरी बुर में एक करारा झटका मरता है और में आह करके बीएड से चिपक जाती हूँ और नमन अपनी मम्मी की छूट की गहराई मई अपना लैंड दबा दबा कर फिर से ढेर सारा अपने लुंड का रास छोर देता hai.hey भगवान् अब तक इतने महीनो की चुदाई से , मेरे बेटे ने मेरी बुर में अपना वीर्य कुछ 10 बार छोरा होगा …
 
इस घमासान चुदाई के बाद मेरी तोह मनो जान hi निकल गयी .. में बस बिस्तर पर लेती hi रही. मेरे बेटे ने मुझे चूमा और फिर अपने कमरे में चला गया .. उसे आज दुपहर को एक मीटिंग थी.. में कुछ मिनट बाद उठकर नहायी .. फिरसे निचे रसोई घर में चली गई.. मेरी नौकरानी मुझे देख , दुपहर के भोजन में क्या चाहिए पूछने लगी .. में उसे बोलकर बहार हॉल में आयी की मेरी बेटी पीछे से मुझे जकड़ते हुए मेरी गलों को चूमने लगी ..

“ओह उफ़ बेटी क्या कर रही हो .. जमुना बाई देख लेगी तोह ..?”

“देखने दो न मम्मी , वह देखेगी की आपकी बेटी आपसे कितना प्यार करती हैं .. “

“ओह हो मेरी नटखट बेटी .. अच्छा बेटी लंच में भिंडी की सब्ज़ी चलेगी न?”

“हाँ माँ चलेगी न … अभी तोह मुझे बस आप hi चाहिए ..”

और मेरी बेटी फिर से मुझे चूमि , फिर मेरी होठों को hi चुम ली .. हे भगवन , जमुना बाई देख लेगीत ओह .. में सोचती रही लेकिन मेरी बेटी के मुलायम होठों के स्पर्श ने मेरी भी गर्मी बढ़ा दी और में भी उसके चुम्मों का साथ देने लगी .. फिर हमने जमुना बाई की आवाज़ सुनी और हम जुड़ा हुए .. हमारे होठं जुड़ा हुए तब दोनों के िटफं के बिच एक लार की धार निकली .. जिससे देख हम दोनों मुस्कुराये …

हम हॉल में बैठे मेरी बदली सी मॉडर्न बनने पर होने लगी . तब मेरी बेटी बोली

मम्मी यू शुड डेवेलोप योर फैशन स्किल्स ा बिट मोरे, अभी तोह आप 30स की उनर की लगती हो .. , अभी तुम्हे और सेक्सी कपडे पहने चाहिए..

में पूछी “तो आप क्या सुझाव डौगी बेटी, मुझे क्या पेहेनना चाहिए?” मेरी बेटी अंजलि ने बोली, "मैं बता दूँगी लेकिन मैं अपनी

सलाह के बदले में कुछ और लूंगी" मेरी बेटी एक शरारती मुस्कान के साथ बोली

“जो भी तुम चाहो अंजलि.” में मासूमियत से बोली .

मेरी बेटी अंजलि बोली हम्म, ठीक है मैं वक़्त आने पर आप वह चीज़ डौगी .. और अब में आपको सलाह दूँगी.

“हम आज दुपहर को और नए कपडे खरीदने के लिए बज़्ज़ार जा रहे हैं. मुझे लगता है की आपकी अलमारी में अभी भी उस तरह के कपडे नहीं हैं जैसे आप पहनी चाहिए और मुझे पता है की मेरे कपडे आप पर फिट नहीं बैठेंगे...” मेरी बेटी आंख मरते बोली ..

में तोह शर्म से लाल लाल हुयी ..

लंच के बाद हम ma-beti शहर के alag-alag माल्स में शॉपिंग के लिए गए. बहुत सारा पैसा खर्च हुआ लेकिन जो पोशाकें खरीदी गेन वे खरीदने लायक थीं. एक और बात की मुझ में समझ आयी हो गई की मेरी बेटी अंजलि के पास अलग अलग ओउत्फिट्स, जूते और मेकअप किट के बारे में एक अद्भुत और बेहतर विकल्प था, जो मुझमें या मेरे बेटे में से सौ गुना बेहतर था.

हमने semi-satin सामग्री वाले अलग अलग प्रकार के टॉप ख़रीदे जो काफी बोल्ड थी. उनमें से कुछ बिना आस्तीन के थे म, जो मेरे कन्धों से निचे तक केवल कुछ इंच को कवर करते थे.









निचे के लिए उसने मेरे लिए कई तरह के पैन्ट्स चुने इसमें शॉर्ट्स थी जो घुटनों तक मुश्किल से कुछ मेरे बदन की चीज़ें ढकती.

मेरी बेटी अंजलि बोली,

“ओह, माँ तीन घंटे हो गए, लेकिन में में जो आपके लिए जो चुनी, उससे मैं संतुष्ट हूँ.”

“ धन्यवाद मेरी बेटी अंजलि, यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि काम से काम ऑउटफिट के मामले में ठहरी पसंद बेहतर है.”

मेरी बेटी अंजलि बोली “माँ आपकी ड्रेसिंग स्टाइल dhire-dhire बेहतर हो जाएगी क्योंकि अब तुम मेरे साथ हो और घर जाने से पहले हमें कुछ और खरीदने जाना होगा.

मैं अब मॉल में घूमने से थकी बोली “क्या बेटी ?? अब कौन सी चीज़ बची है? “

मेरी बेटी अंजलि:

, “हमें उस लिंगेरी की दुकान के में जाना है” और उसने सामने की एक बड़ी ब्रांड की दुकान की और इशारा करि.

“बेटी लेकिन मेरे पास घर पर काफी कुछ लिंगेरिएस है...”

मेरी बेटी अंजलि बोली “मुझे पता है की आपके वार्डरॉब में किस तरह के लिंगेरिएस हैं. लेकिन अब से आप जो पहनोगी, वह और भी बेहतरीन होंगे.”

मैं थोड़ी शर्मिंदगी महसूस कर मेरी बेटी के pichhe-pichhe दुकान की और चल दी, वहां एक बहुत बड़ा स्टोर था इसमें विभिन्न प्रकार के लिंगेरिएस उपलब्ध थे. मेरी बेटी अंजलि ने मेरे लिए कुछ सुन्दर, मुलायम और छोटी स्टाइल वाली ब्रा ले रही थी.









उसने मेरी सहमति मांगी लेकिन और में बोली की उसे जो भी खरीदना हैं वह खरीद सकती हैं. उसने फिर मेरे लिए काफी साडी ब्रा और पंतय खरीदी और आखिरकार हम घर वापस ा गए.

घर पहुंचकर मेरी बेटी अंजलि झट से बोली: “ठीक है मम्मी, अब यह लिंगेरी और ड्रेस पहनो (उसने मुझे हलके नील रंग के स्लीवेल्स टॉप के साथ हरे रंग की टाइट पंत दी. और अंदर मस्त साटन की विभिन्न कलर की टाइट ब्रा और जैसे उसने कहा एक थोंग स्टाइल की पंतय.

“मेरी बेटी anjali,inhe मैं कल पहनूंगी, अभी नहीं.”

मेरी बेटी अंजलि बोली “ये आज hi ख़रीदे हैं, आज hi पहनने के लिए.”

में फिर से नहीं बोली … फिर अंजलि बोली

“ठीक है मम्मी जब चाहो पहन लेना मेरी मत सुनो ..” और वह नकली गुस्सा दिखाकर चली गई.

मैं बोली “ठीक है मेरी बेटी अंजलि, तुम नाराज़ मत होना, मैं पहनूंगी.

में यह सब डालने के लिए अपने कमरे में चली गई. अपने कपडे उतरने के बाद में अपने शरीर पर पहले वह लिंगेरी पहनी और खुद को शीशे में देखि. मेरी बेटी अंजलि सही थी, बस इन से मेरी लुक्स में चार चाँद लग जाये हैं.

उस push-ap ब्रा में मेरे स्तन और बड़े दिख रहे थे, उनसे पर्याप्त क्लीवेज भी दिख रहा था. निचे छोटी सी थोंग जैसी पंतय जिसमें पीछे से मेरी सिर्फ गांड की दरार के हिस्से को वह ढकती और सामने से कुछ इंच तक hi मेरी बुर को धक् रही थी.

फिर में टाइट पंत पहनी जो मेरी जांघों और पैरों से चिपक गई. अंत में, टॉप जो टाइट भी थी लेकिन मेरे ऊपरी शरीर पर जबरदस्त रूप से फिट थी. मेरी नज़र अपनी आर्मपिट्स पर पड़ी और वहां chhote-chhote बल उगे हुए थे. अब मुझे उन्हें शेव और वैक्स के लिए समय चाहिए था इसलिए में उन्हें कुछ और समय के लिए वैसे hi चोर दी और दरवाज़ा खोल हॉल में गई. जमुना बाई गयी थी मार्किट इसीलिए में और मेरी बेटी घर पर अकेले थे.

मेरी बेटी अंजलि सोफे पर बैठ कर मेरा इंतज़ार कर रही थी. उसने मेरी और देखि और उसकी ऑंखें प्रशंसा से भर गेन.... मेरी बेटी अंजलि बोली “ वह मम्मी, आपका रूप इतना सेक्सी .. . मैं बस शर्मा कर मुस्कुरा दी....

मैं और भी ज्यादा हैरान हो गयी जब मेरी बेटी मेरे करीब ा गई, और में उसके सामने वैसे hi कड़ी रही. , उसने अपना हाथ उठाया और मेरे सर पर रख दिया और ......... ......मेरी पहनी क्लच खोलकर मेरे बल आज़ाद कर दिए....





मेरी बेटी अंजलि बोली “मेरी तरह अपने बल खुले रखो, आप और भी ख़ूबसूरत लगती हो. मेरी बेटी ने बालों वाली बगलों को देखि और बोली.

“मम्मी आप को हमेशा के रूप से अपनी आर्मपिट्सों को शेव या वाक्सेड रखना hi होगा....”

में मुस्कुराते हुए “ओह्ह्ह इतना सारा काम........ बेटी उफ्फ्फ अब क्या मैं अब अपने कमरे में जा सकती हूँ?”

मेरी बेटी अंजलि “मम्मी में आपके लिए शहर के माल्स में 4 घंटे घूमी, और अपने मुझे कुछ नहीं दिया...

मैं: “ओह सॉरी मेरी बेटी अंजलि, मैं भूल hi गयी, तुम क्या चाहती हो? (में मासूमियत से बोलते हुए. मेरी बेटी अंजलि फिर से मेरे करीब ा गई, मुझसे 3 इंच लम्बी थी हु .. जिससे में उसकी गर्म सांसें अपने कंधे और गर्दन पर महसूस किन......

बेटी अंजलि बोली “उसके बारे में तो आपको hi सोचना है मम्मी ......”

और मेरी बेटी म मेरी गांड पर थप्पड़ मरी और खिलखिलाई..

हे भगवन मुझे समझ आया उसे क्या चाहिए … उफ्फ्फ मेरी बेटी इतनी नटखट … में बस मुँह को हाथों से धक् शर्माती हुयी मेरी बड़ी चूतड़ों को हिलती हुयी मेरे कमरे में भाग गयी.

“मम्मी में आपका इंतज़ार करुँगी … मेरी गिफ्ट देनी हैं आपको …”

में अब अपने कमरे में कुछ पल शरमाते हुए बीते और फिर नग्न होकर बाथरूम चली गयी.

में अपनी आर्मपिट्स को चिकनी बनाने के लिए नए रेजर का इस्तेमाल करि, फिर लम्बे समय तक स्नान करि. में लिंगेरी की एक और जोड़ी दाल दी जो गुलाबी रंग की थी और उसके ऊपर जाली (नेट) की सजावट थी. मेरी टॉप स्लीवलेस थी और आर्मपिट्स पर काफी खुली हुई थी. होना पसंदीदा परफ्यूम और डिओडोरेंट और थोड़ा सा मेकअप लगाने के बाद, मैं कमरे से बहार अपने बेटी के कमरे में जाने लगी.

जैसे hi मैं उसके कमरे में गयी, मेरी बेटी उठ गई और उसने देखा की मेरा टॉप के निचे मेरी नाभि दिख रही थी.

मेरी बेटी अंजलि वहां देख बोली “वह प्यारी, मम्मी आपकी नाभि बहुत प्यारी और गहरी है” और उसकी ऑंखें वहीँ तिकी हुई थीं.

“ उफ़ मेरी बेटी अंजलि, मुझे लगता है की साधारण सभी नाभियां एक hi प्रकार की होती हैं.”

“ कौन कहता है मम्मी! हम दोनोंकी नाभि का आकर अलग हैं और मुझे यकीं है की आपके पास hi सबसे प्यारी नाभि है.”

में थोड़ा शर्मिंदा होकर, टॉप को थोड़ा निचे खिंच ली तब उसे देख मेरी बेटी बोली “मम्मी आपके पास बहुत प्यारी बेल्ली स्टड है …और मम्मी, आप कुछ जानती हैं?”

“ क्या बेटी?”

मेरी बेटी अंजलि ने अपना टॉप उठाकर अपना प्यारा पेट दिखाया...........

“ओह्ह्ह्ह तुम्हारे पास की बेल्ली स्टड नहीं उफ्फ्फ और भी बड़ी हैं बेटी ..”

मेरी बेटी की केवल पेट की अंगूठी नहीं थी बल्कि लगभग 1.5 इंच की लटकती हुई रिंग थी. उसकी नाभि प्यारी, चिकनी लेकिन मेरी नाभि से छोटी थी.







मेरी बेटी अंजलि अपना बयां हाथ ले और मेरे माथे, मेरी नक् और फिर मेरे होठों पर ले गई...... मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर सकीय और में उसकी प्यारी उँगलियों को चूम ली.... वह मुस्कुराई और अपना हाथ मेरी गर्दन तक ले गई... मैं बस उसके मुलायम उँगलियों के स्पर्श से जल रही थी और मेरी छूट में आग लग गई थी, मेरे निप्पल्स खड़े हो गए थे जिन्हें वह मेरी टॉप से देख सकती थी क्योंकि वे मनो मेरी टॉप को चुभ रहे थे... वह फिर अपना हाथ और निचे ले गई और मेरे स्तनों को दबोचते हुए मेरे पेट की और बढ़ी.. उसके हाथ वहां वह रुक गई और मेरी टॉप को ऊपर खींचने लगी.

मैं तैयार थी और में उसकी रह आसान करने के लिए अपनी टॉप थोड़ी ऊपर कर ली... मैं सोच रही थी की मेरे स्तन अब मेरे बेटी के सामने खुलने वाले हैं... मेरी सांसें भरी हो रही थीं... उसने टॉप को मेरे स्तनों के लेवल तक खिंच ली

उसने मेरे पेट और बेल्ली स्टड वाली नाभि में झुनझुनाहट की...

“हे भगवान् मेरी बेटी अंजलि पलज़्ज़ज़....”

मेरी झुनझुनी देख मेरी बेटी खिलखिला उठी और वह एक कामुक मुस्कान दी. वह अपने हाथों को और निचे मेरे कमर क्षेत्र की और ले गई और अब निचे मेरी टाइट पंत के अंदर फिर मेरी पंतय के अंदर मेरी स्वीट स्पॉट को छूने hi वाली थी....

उफ्फ्फ्फ़ क्या यह सपना है या हकीकत???..........., जैसे hi मेरी बेटी अपना हाथ मेरी छूट पर घुमाई.... मेरी छूट की दीवारें, मेरी छूट के लिप्स सब कुछ अब उसकी सिमा में था...

मेरी बेटी अंजलि बोली “वह मम्मी आप तो पहले hi बहुत गीली हो...”

मेरी बेटी को मैं बस प्यार से देख रही थी... उसकी उंगलियां कुछ देर तक मेरी छूट के होंठों पर फिरि और फिर gol-gol उन्हें वह घूमती रहीं.

, उसकी मिडिल वाली उंगली निचे की और बढ़ी और मेरे प्रेम छिद्र में प्रवेश कर गई....... मैं अब कराह उठी, मेरी बेटी की उँगलियाँ मेरी बुर में दाखिल हो रही थी.... यह अलग फीलिंग थी और में कामुकता के शीर्ष पर थी. उसकी ऊँगली अब andar-bahar होती रही और मेरी छूट की दीवारों से टकराती रही.

कुछ सेकंडों के बाद उसने अपनी ऊँगली मेरी छूट के और अंदर घुसा दी...... मैं और जोर से कराह उठी. अब उसकी उँगलियों की हरकत के साथ मेरी योनि के वहां की रिंग की आवाज मेरी कराहों के साथ मिलकर मेरे कमरे में गूँज रही थी...

चूंकि मेरी बेटी की उंगलियां लम्बी थीं, वे मेरी उँगलियों की तुलना में अधिक अंदर तक प्रवेश कर रही थीं... मेरी चूतड़ में अब बिस्तर से ऊपर उठाई थी, और इसकी ऐसी कामुक हरकत मुझे पागल बना रही थी.... और फिर उसने अपनी उंगलियां निकलीं और मेरी योनि से खेलने लगी... मेरी बेटी कुछ मिनटों तक मेरी योनि से खेली जिससे मैं पागल हो गई इस प्रक्रिया से... मेरी हर जगह से पसीना ा रहा था और जलन हो रही थी...

मेरी बेटी ने पहले गाउन के अंदर रास्ता बनाने के लिए में जल्दी से अपना हाथ बधाई और मुझे रास्ता मिल गया. मेरी बेटी ने एक रेशमी निघ्त्य पहनी थी. मैं अपने हाथों को मेरी बेटी के दाहिने चुकी पर ले गयी, अब उसका निप्पल और मेरी उँगलियों में थी. में वहां दबाना और मसलना जारी राखी, मेरी बेटी की भी हलकी हलकी कराहें आने लगीं. मैं गति पकड़ रही थी और मेरे हाथ और मेरी बेटी के निघ्त्य के अंदर जाने लगी.

उसकी चूचियों की उरोज आखिरकार मेरे हाथों में थी... ओह, उसकी निप्पल, यह बहुत ज्यादा सख्त हुयी थी. में अब उसकी चूचियों और निप्पल्स को सहलाने और रगड़ने की गति बढ़ा दी जिससे मेरी बेटी अंजलि की कराहें भी बढ़ने लगीं. एक मिनट के बाद, में उसकी बाएं स्तन को पकड़ने के लिए अपने दूसरे हाथ उसके निचे ले गयी और उसके उस स्तन के साथ भी वही करना शुरू कर दी जो में बाएं स्तन के साथ कर रही थी. उसकी कराहें बढ़ गई

ओह, मेरी बेटी का प्यारा चेहरा मेरे सामने था, उसने अपना हाथ मेरे टॉप के स्ट्राप की और बधाई और उसे मेरे दाहिने कंधे से निचे ले गई. में अपने शरीर पर उसकी गर्म स्पर्श महसूस करि, में उसे प्यार से देखि और मेरी बेटी अपने होंठ मेरे होंठों के करीब ले ै और मुझे एक जोरदार स्मूच करि. में भी जवाब दी और हम पागलों की तरह ek-doosare को स्मूच करने लगे. उसके मुंह का स्वाद अद्भुत था और उसकी स्मूचिंग की तकनीक भी मस्त थी. वो मेरी जीभ पकड़ने के लिए अपनी जीभ मेरे मुंह में फिरने लगी, में भी वैसा hi करि. उसने मेरी जीभ भी चूसी और फिर मेरा ऊपरी और निचले होंठों भी. वह बहुत अच्छी किसर थी.







कुछ मिनटों की हॉट स्मूच के बाद... मेरी बेटी अंजलि, सुखद आवाज में “ी लव यू मम्मी!!!!”

“ओह मेरी प्यारी बेटी, मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ...” और फिर हम पागलों की तरह ek-doosare के चहरे को चूमने lage...fir चूचियों को, कानों को एक दूसरे के, नक्, माथे, ऑंखें, सर सब कुछ चूमने लगे.

. फिर मेरी बेटी ने चूमना छोड़ दिया और बिस्तर पर बैठ गयी.. उसने जल्दी से अपने गौण की गांठ खोली और उसे दूर फ़ेंक दी. अंदर उसने एक hi रंग की छोटी सी पतली इनर टाइटस पहनी थी, जो केवल उसकी एक चौथाई जांघों को धक् रही थी और ऊपर की तरफ तोह उसके बड़े स्तन नग्न hi थे.. उसने अपनी बहन फाइलें और अपनी नीति उठाई और अपने प्यारे शरीर से उतर दी... उसकी सम्पूर्ण ऊपरी शरीर अब मेरे सामने पूर्ण प्रदर्शन पर थी. मेरी बेटी के बेहद कैसे हुए, बड़े और सीधे स्तन , बिलकुल प्राकृतिक और प्रेरक थे.

उसकी पेट सपाट थी , वह बहुत फिट थी, और उसकी नाभि के आभूषणों से उसकी नाभि मनमोहक दिख रही थी. वह अपने हाथ मेरे टॉप की और ले गई और उसे मेरे शरीर से हटाने में मदद की. अंदर मेरी ब्रा भी थी जिसके पीछे वाले हुक बेटी ने खोले और मेरी ब्रा दूर फ़ेंक दिया. अब हम दोनों maa-beti एक दूसरे के सामने टॉपलेस थे. मेरी बेटी ने भी निचे एक छोटी सी पंतय पहनी हुई थी. उससे मेरी चूचियों की तुलना अपनी चुहियों से करने लगी .. मेरी चूचियां मेरी बेटी से काफी बड़े थे. उसके बड़े थे लेकिन मेरी चूचियों की तुलना में छोटे दिख रहे थे..

मेरी बेटी अब मेरे करीब ै और मुझे कसकर गले लगा ली.. ओह वह सचमुच कामुक थी, उसके खड़े हुए निप्पल्स मेरे स्तनों में डाब गए. हम दोनों एक दूसरे को कसकर गले लगते हुए एक दूसरे की गर्दन और कन्धों को चूम रहे थे, फिर उसने अपने हाथों से मेरे स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया और मेरे निप्पल्स को भी अपनी प्यारी लम्बी उँगलियों से मसलना शुरू कर दी. मेरी बेटी अपना चेहरा मेरे क्लीवेज की और ले गई और उस जगह को choomane-chatane लगी. ओह अब मैं कितनी कामुक महसूस कर रही थी.

मेरी बेटी मिनटों में किसी को भी गर्म करने में माहिर थी. वह अपना चेहरा मेरे स्तनों और निप्पल्स के पास ले गयी और मेरे सख्त निप्पल्स को चूमने और चाटने लगी. उसकी जीभ का स्पर्श मुझे पागल कर रही थी. वह ek-ek करके पहले मेरी निप्पल्स के एरोला को चाट रही थी और फिर निप्पल्स को भी चाट रही थी. उसकी मुँह से निकलती लार ने मेरे निप्पल्स को पूरा गिला कर दी, और फिर उसने मेरे निप्पल्स को अपने डेंटन से हलके से चबाना शुरू कर दिया.







इससे मेरी कराहें और तेज़ हो गेन और कराहें से में chikhane-chillane लगी..

बहुत देर तक, चाटने, चूसने और सहलाने के बाद, वह मेरे चहरे की और बढ़ी, मेरे होठों पर मुझे चूमि और मेरे कण में फुसफुसाई..

“ मम्मी मेरी प्यार.... जैसा में आपके साथ करि, hi वैसे hi मेरे साथ भी करो...” और उसने मेरे कण को चूमा और हलके से कांटी.

अब वह बिस्तर पर लेट गई.. मेरी इंतजार कर रही थी.. मैं अपनी बेटी के बाएं स्तनों को पकड़ने के लिए अपना डायन हाथ बधाई... उसकी चुकी आसानी से पूरी तरह से मेरे हाथ में आयी और में कुछ देर तक उसे सहलाई और फिर उसकी दाहिने चुकी के साथ भी यही करि. उसकी ऑंखें खुली हुई थी और उसकी आँखों में मंत्रमुग्ध कर देने वाली झलक मेरी हरकतों को देख रही थी. मैं अब अपना सर निचे उसकी बाएं चुकी पर ले गयी और वहां चूमना शुरू कर दिया. फिर वो समय ा गया जब मुझे उसके सख्त निप्पल्स को अपने मुंह में लेना पड़ा, उसके निप्पल्स लगभग सवा इंच खड़े हो गए थे और जब में उन्हें म अपने मुंह में डाला... हे भगवान् उफ्फ्फ क्या अहसास था... में बस एक hi महिला की चूचियों को चूसी थी और वह थी जो मेरी आँखों के सामने थी और वह थी मेरी बेटी अंजलि ..

फिर में उसके दाहिने चुकी के साथ वही हरकतें करना शुरू कर दी जैसे उसकी बाएं चुकी को मसली और सहलाई थी. फिर में उसके कन्धों को चूमि, उसकी बांहों को ऊपर ले जाकर उसकी चिकनी आर्मपिट्स को चूमि और फिर वहां छाती.

. उसकी आर्मपिट्स की गंध और उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले परफ्यूम का सुन्दर मिश्रण मुझे और कामुक कर दी. फिर मैं उसके पेट को चूमने के लिए फिर से निचे की और बढ़ी.. उफ्फ्फ क्या चिकनी पेट थी उसकी और उस पर नाभि के आभूषण बहुत अच्छे लग रहे थे. में उसके मुलायम पेट पर बहुत चूमि और निचे की और बढ़ी..

मेरी बेटी की बुर रास से टपक रही थी.... ओह यह लड़की बहुत गर्म थी... उसने अपनी पंतय उतरने में मेरी मदद करने के लिए अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई और. में उसकी प्यारी चिकनी झंघों, टांगों से उसकी पंतय को ऊपर कर di......ab मेरी बेटी मेरे सामने बिलकुल नंगी थी . उसकी छूट का साइज मेरी छूट से काफी छोटी थी लेकिन उसके बुर के होंठ बहार निकले हुए थे और हर जगह गीलापन था.

यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं थी की मेरी बेटी की बुर पूरी तरह से चिकनी थी, ऐसा लग रहा था की वह रोज़ वहां के बाल शेव करती हैं. में dhire-dhire अपनी उंगली उसकी कमर के ऊपर घुमाई और छूट तक पहुँच गई. में उसकी छूट के बाहरी होंठों को छुई और वह जोर से कराह उठी.. में अपनी उँगलियों को मेरी बेटी के छूट की बाहरी होंठों पर फिराई और फिर अपनी उंगली को उसकी छूट की छेद के अंदर डालने की कोशिश की.. वह दहाड़ने लगी और मेरी उंगली तेजी से फिसलकर मेरी बेटी की छूट में चली गई.... बहुत गर्म और बिलकुल फिसलन भरी. में अपनी उंगली को ज्यादा से ज्यादा अंदर किया और andar-bahar और फिर गोलाकार गति में फेरना शुरू कर दी...

मेरी बेटी अंजलि कराह उठी “ओह एसससस मम्मी, इसे हिलाओ, इसे और अधिक थूक के साथ छोड़ो... (मेरी बेटी की ऑंखें बंद थी और भरपूर मज़्ज़े ले रही थी. वह अपने दाहिने हाथ से अपने बड़े स्तनों और निपल्स को सहला रही थी और मसल रही थी, जबकि उसकी बायीं हाथ उसके सर के ऊपर थी और उसकी ख़ूबसूरत आर्मपिट्स दिख रही थी. कुछ मं बाद में अपनी बिच वाली उंगली भी उसकी छूट में घुसा दी. उसकी दहाड़ और भी शक्तिशाली हो गयी. कमरा उसकी सेक्सी दहाड़ें और उसकी छूट की pach-pach की आवाज से गूँज रहा था.













मेरी बेटी अंजलि चिल्लाई “इसे छतो mummy....chakhakar देखो...”

मम उफ़ बेटी नहीं शर्म आ रही हैं “””

ओह गॉड मम्मी … रुकिए में दिखती हूँ …”

और उसने मुझे अब झट से बिस्तर पर लिटा कर अब

उसका चेहरा मेरी छूट तक पहुँच गया और उसने अपनी लम्बी जीभ से मेरी छूट के होंठों पर छुआ... ओह्ह्ह क्या स्पर्श था उफ्फ्फ. उसने dhire-dhire अपनी जीभ मेरी छूट के होंठों पर और छूट के as-pas घुमाई और फिर मेरे प्यारे छेड़ में अपनी जीभ फिरने लगी मनो मेरी बेटी, इसमें भी अनुभवी थी, और उसने बस अपनी जीभ सही जगह पर घुमाई. यह सनसनी सी थी..

उसने अपनी जीभ को मेरे छेड़ में andar-bahar करना शुरू कर दिया और मेरी छूट के रास को भी पागलों की तरह चाटने लगी. उसकी उंगली मेरी छूट के होठों को रगड़ रही थी और कमरा अब मेरी तेज़ कराहों से गूँज रहा था. उसकी चाटने की गति dhire-dhire बढ़ता जा रही थी. फिर उसने मेरे पैरों को ऊपर किया और मुझे और खिंचा ताकि वह अधिक आराम से चाटने और चूसने के लिए अपना सर थोड़ा ऊपर कर सके. मेरी बेटी में ज़बरदस्त ऊर्जा थी और वासने में, मेरी ऑंखें आधी खुली थीं और अधिक से अधिक आनंद ले रही थीं. उसने अपनी जीभ मेरी छूट से निकली और उसे चाटने लगी और हलके हलके रगड़ने लगी.

उसने मेरी टाँगें ऊपर कर, अपने कन्धों पर रख लीन, मुझे और अपने पास खिंचा और अपना मुंह फिर से मेरी छूट पर रख दी. वो लगातार मेरी छूट को चाट रही थी, चूस रही थी और ऊँगली कर रही थी. मैं अपनी सिमा तक पहुँच रही थी और फिर मैं चरम सिमा तक chillai......oh और अब तक का सबसे अच्छी ओर्गास्म....

फिर मेरी बेटी ने मेरे पेअर अपने कन्धों से हटा दिए और मेरे ऊपर गिर गई और मुझे जोर से स्मूच करि. पहली बार में अपनी बुर से निकली रास चखी थी और वह भी मेरी खूबसूरत बेटी अंजलि के मुंह से!!!!!. हे भगवान् …

में उसे कसकर गले लगा ली और अपनी सांसें सामान्य कर लीन. तब मुझे एहसास हुआ की उसने मुझे भरपूर आनंद दिया लेकिन मैं उसे चाटने में कामयाब नहीं हुयी थी.

मैं उठी और मेरी बेटी के तरफ देखि. वह अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्यारी आँखों से मुझे देख रही थी और उसके ख़ूबसूरत चहरे पर उसके बल बिलकुल फैले हुए थे.

में उसे धीरे से चूमि और में उसकी स्तनों और पेट को चूमते हुए निचे कमर की और बढ़ी और उसकी छूट को देखि. में उसे छूने के लिए अपना हाथ बधाई और उसकी बुर रास से टपक रही थी. उसमें आकर्षक प्रभाव के साथ एक कामुक गंध थी. फिर में उसकी योनि को छूने के लिए अपनी जीभ घुमाई, इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई और में अपनी जीभ उसकी छूट के होंठों पर फिरना शुरू कर दी. वे पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसकी बुर से निकलता रास मेरी मुंह में जा रहा था. फिर में उसकी बुर में अपनी जीभ फिरने की कोशिश की, और में उंगली के माध्यम से अपना रास्ता बनायीं और अपनी जीभ को छेड़ में धकेल दी. मेरी जीभ ज्यादा अंदर तक नहीं पहुँच पायी, लेकिन मेरी बेटी अंजलि की कराह ऐसी थी जैसी पहले कभी नहीं हुई थी.

जब मेरी जीभ उसकी बुर के थोड़ी अंदर गई तो वो कम्प उठी.. में कुछ टाइम उसकी छूट में जीभ डाली रही और फिर उसकी छूट के होठों को चाटने की कोशिश की.. वह सचमुच बिस्तर पर उछाल पड़ी लेकिन में उसे अपनी बाँहों से संभाली और उसे हाथों में पकड़े हुए उसकी छूट चाटना जारी राखी. में उसकी चूतड़ों को थोड़ा ऊपर करि और उसकी बुर को अब रेहड़ी उँगलियों से और छाती भी.

में अब अपनी ऊँगली उसकी योनि के अंदर दाल दी और उसे andar-bahar करने लगी और अंदर उसकी योनि की दीवार को छूने लगो. मैं अपने दूसरे हाथ से उसकी योनि को मसलते रही. फिर में अपनी बिच वाली उंगली भी उसकी छूट में दाल दी और अब अपनी जीभ से उसकी क्लीट को छूने लगी.. वो बेकाबू हो गई थी... मेरी चूसै और चटाई से मेरी बेटी अपनी चरम सिमा तक दहाड़ने लगी और उसकी बुर से बहुत सारा रास बहार निकल आया . यह कुछ अलग hi था… मुझे बाद मेजन पता चला इसे कहते हैं स्क्वरटिंग… हे भगवान् .........

मेरे स्तनों पर, गर्दन और यहाँ तक की मेरे चेहरे पर भी मेरी बेटी के बुर से रास छिड़का था.

हम 1 घंटे से ज्यादा समय से ek-doosare के साथ मस्ती लार रहे थे .. लेकिन मेरी बेटी अंजलि रुकने के मूड में नहीं थी. मैं अपनी बांहें ऊपर कर सीधी लेती थी. मेरी बेटी पलटी और उसकी बड़ी गांड पूरी तरह से दिखने लगी, फिर वह अपनी प्यारी गांड मेरे चहरे पर सीधी करके बैठ गई और अपना चेहरा निचे मेरी छूट और गांड की और ले गई और वहां चाटना और चूमना शुरू कर दी. .. में इसे अपने बेटे के साथ कुछ बार की थी लेकिन पहली बार इस पोजीशन में छूट चाटने वाली थी.

उसके पूरे शरीर की तरह, उसकी गांड, उसकी गांड के बिच का क्षेत्र और उसकी गांड का छेड़ भी चिकनी थी. ये बिलकुल उन लड़कियों की जैसी थीं जिन्हें में एक दो बार लेस्बियन पोर्न क्लिप्स और फोटो में देखि थी... में भी उसकी चूतड़ों को चुनमा और दबाना शुरू कर दी. और फिर उसकी चूतड़ों के उभारों और गांड के छेड़ को चाटना और चूमना शुरू कर दी.. में ऐसे करने के बारे में कभी नहीं सोची थी, लेकिन मेरी बेटी अंजलि की सुंदरता के कारन, मैं ऐसे कर रही थी.

वह अपनी घुटनों के ऊपर थी लेकिन लगातार मेरी छूट और गांड के साथ भी वही कर रही थी. उसने मेरी गांड के छेड़ और चूतड़ों को चूसने मेरी चूतड़ों को थोड़ा और खिंचा. उसकी मेरी चूतड़ों और गांड के छेड़ को चाटना और रगड़ना मुझे फिर से गर्म कर रही थी

. उसके बड़े स्तन और नुकीले निप्पल्स मेरे पेट को छू रहे थे और वह कोमल स्पर्श भी सनसनीखेज जैसे थी. उसके खुले बल मेरी चिकनी जांघों पर थी और उसने मेरी छूट और गांड को चूमने और चाटने के sath-sath मेरी अंदरूनी जांघों को भी चूमा और छठा.. यह मेरे लिए एक और सुखदायक एहसास था. हालाँकि अभी आधे घंटे पहले hi उसकी बुर से एक बड़ी धार निकली थी, उसकी छूट फिर से पूरी गीली हो गई थी. ek-doosare की छूट और गांड के प्रति अपनी हरकतों से हम फिर से और अधिक गर्म हो रहे थे... फिर उसने फिर से मेरी छूट में उंगली करना शुरू कर दी और इस बार मेरी छूट के रास से गीली अपनी ऊँगली मेरी गांड के छेड़ में डालने की कोशिश कर रही थी मेरी बेटी. यह मेरे लिए एक नया अनुभव था... उसकी उस हरकत ने मुझे उसकी गांड के छेड़ के साथ भी वैसा hi करने की हिम्मत दी और मेरी उंगली उसकी छूट की रास से काफी गीली थी इसलिए मुझे उसकी गांड के छेड़ में उंगली डालने में भी कोई दिक्कत नहीं हुई. हमारी कराहें फिर से उत्तेजित हो रही थी जब हम एक साथ एक दूसरे की गांड के छेद में ऊँगली करने लगी.

मैं एक और ओर्गास्म करते हुए में उसकी गांड को अपने चहरे की और धकेली और अपनी चाटने की गति भी बढ़ा दी... फिर हम दोनों के ओर्गास्म आ गए ..

अभी भी कामुकता से भरपूर मेरी बेटी बोली “

“‘मम्मी अपनी योनि को मेरी योनि के साथ रगड़ो...”

में समझ गई और में अपनी योनि को उसकी योनि से रगड़ने की कोशिश की. जल्द hi इस पर हम शुरू हो गए. अब चूंकि दोनों की छूटें पूरी तरह से गीली थीं, ऐसे छूट से छूट रगड़ने से हम फिर से दहाड़ने और चीखने लगे. हम ek-doosare को कसकर गले लगा रहे थे जबकि हमारे निप्पल्स ek-doosare के शरीर से डाब रहे थे. मेरी बेटी अंजलि अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रही थी, हालाँकि वह निचे थी और मैं उसकी चालों से मेल खा रही थी , में उसकी चहरे की और देखि उसके खुले बिखरे बल, बंद आँखें …. मैं उसे चूमने के लिए खुद को रोक नहीं सकीय..

हम एक दूसरे को चूमने लगे और फिर एक जोर से दहाड़ से हमारी स्मूच टूट गयी… .. और हम दोनों पूरी तरह से जहर गए ..

अब हम कुछ देर स्नान करने बाथरूम गए और वहां गर्म पानी के निचे दोनों शावर कर लिए.. मेरे बेटे को आने में और 2 घंटे थे .. हम इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते थे .. माँ – बेटी और प्रेम का खेल, खेलना चाहते थे.

हम एक दूसरे से लिपटे हुए ..

“बेटी में तुमसे प्यार करती हूँ”

मेरी बेटी अंजलि “हाँ माँ में भी … और अब क्या आप मेरी चुदाई करना चाहती हो ? “

यह तोह एक अजीब तरीके का सवाल था!!!

बेटी आज से तोह हर समय, मेरी उंगलियां हमेशा तुम्हारे लिए हैं.”

में प्यार से कही

“मम्मी. उँगलियों से नहीं.”

उसने मेरे बालों में अपनी प्यारी उंगलियां फिरैं)

“फिर बेटी????!!!”

वह अपनी साइड टेबल का रैक खोलने के लिए आगे बढ़ी और एक बेल्ट और उसके बगल में एक भूरे रंग का एक लिंग जैसे आकर वहॉ कुछ लेकर मेरे तरफ मुड़ी...

“मम्मी इस एक strap-on कहते हैं... अब मुझे यह मिल गया...

मेरी बेटी मेरे करीब ै और मेरे होठों पर धीरे से चूमि. फिर उसने strap-on की बेल्ट को मेरी नंगी कमर के चरों और लपेटना शुरू कर दी.....

ओह, हे भगवान् , वह starp-on मेरी कमर पर बहुत कामुक लग रहा था की मनो मेरे कमर से लटकता हिअ लगभग 8-9 इंच का लिंग पूरी तरह से खड़ा था..

फिर मेरी बेटी ने मुझे म बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और तब डिलडो वाला हिस्सा पूरी तरह ऊपर था. वह मेरे पैरों के ऊपर चढ़ गई और मेरी कमर की और बढ़ी. उसने डिलडो को अपनी गीली छूट और योनि पर रगड़नी शुरू कर दी और हलके से कराहने लगी. कुछ रगड़ने के बाद, उसने डिलडो को अपनी बुर में प्रवेश करने के लिए अपनी नंगी कमर को थोड़ा सा हिलायी...

ओह हे भगवान् उफ्फ्फ क्या दृश्य था, मैं साफ़ देख रही थी की डिलडो मेरी बेटी की छूट में घुस रहा था.. 1 इंच, 2 इंच, 3 इंच, 4 इंच... वह अब डिलडो के ऊपर oopar-niche होने लगी..... जैसे hi मैं उसे छोड़ रही थी, में उसे पकड़ने के लिए अपने हाथ उसके पेट पर ले गए... नरम और गर्म शरीर.. वह मेरे ऊपर जोर मर रही थी मनो वह इस क्रिया को अच्छी तरह से जानती थी..

मैं उसके निचे लेती हुई सिसकारियां ले रही थी तो उसके bade-bade स्तन हिलने के साथ उछाल रहे थे और कमल के लग रहे थे. उसे अपनी हरकतों पर जबरदस्त नियंत्रण था, क्योंकि वह न केवल oopar-niche हो रही थी, बल्कि अपनी कमर और गांड को भी गोलाकार घुमा रही थी ताकि डिलडो उसकी छूट के हर इंच तक जा सके. उसने एक हाथ से अपने बल पकड़ रखे थे जबकि मेरा एक हाथ उसके शानदार स्तनों और चट्टान से उठे हुए निप्पल्स तक पहुँचने की कोशिश कर रहे थे..





लगभग 10-15 मिनट की लगातार uchhal-kood और पम्पिंग के बाद उसने अपना थूक और अधिक बढ़ा दिया और तेज़ी से कराहने लगी..

मैं समझ गयी की वह ओर्गास्म के करीब ा रही है.... में जाना बूझ कर अपने बाएं हाथ से उसकी योनि को छूने लगी ... और वह जोर से चिल्लाई.... वह उसी मुद्रा में रहते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को निचे करके मुझे गले लगा ली और. में , मेरी बेटी कंधे और गर्दन पर चूमि और फिर उसके चहरे को चूमि. फिर दोनों नग्न hi एक दूसरे के अगल बगल में हाँफते हुए लेते रहे .
 
मोबाइल छीनने के बहाने मेरी बेटी तेज़ी से आगे की और हुई. और उसकी छूट ठीक नमन बेटे के मुंह के ऊपर थी. मेरी बेटी , मेरे बेटे पर झपटती और उसके हाथ से मोबाइल छीनने के बहाने उसके मुंह पर गिर गयी.

ोोोूफ!!! मेरी बेटी की गीली छूट नमन के होंठों से चिपक गयी ुर उसने अपनी छूट को 5 सेकंड तक नमन के मुंह पर ज़ोर से दबा दी. उसकी छूट इतना रूस छोर रही थी की नमन के होंठ और मुंह गीले हो गए. ये hi नहीं मेरी बेटी की झांटें भी उसके मुंह में घुस गयी. मेरा बीटा नमन हार्बर गया और मेरी बेटी मोबाइल छीनने में कामयाब हो गयी.

मोबाइल छीन के जैसे hi अंजलि उठने लगी नमन ने उसे गिरा लिया और उसके ऊपर चढ़ बैठा. अब मेरी बेटी अंजलि पेट के बल पारी हुई थी और नमन उसकी पीठ पर बैठ हुआ था. मेरी बेटी मोबाइल को उसके चूचियों के नीचे दबा ली. नमन फिर हांफता हुआ बोलै,

“ दीदी मोबाइल दे दो नहीं तो छीन लूंगा.”

“ अरे जा, जा. इतना दम है तो चीन ले.” मेरी बेटी उसे चीरती हुई बोली.

मोबाइल छीनने के चक्कर में सरक कर मेरा बीटा, अंजू की टांगों के बीच में आ गया. उसका तना हुआ लुंड उसकी शूटरों से टकराने लगी. उसका लुंड कभी मेरी बेटी के शूटरों की दरार में घुस जाता तो कभी उसकी छूट पे रैगर जाता.

अब तो खेल और भी मादक हो गया था. नमन और अंजू, दोनों hi अनजान बने हुए थे. इस चीन झपटी में अंजू का गाउन तो खुल hi गया था, मेरी बेटी अचानक झटके से सीढ़ी हो कर पीठ के बल हो गयी. गाउन सामने से पूरा खुल कर हूत गया और नमन अब उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और अंजू उसके नीचे बिलकुल नंगी थी.

छीना झपटी का नाटक करते हुए अंजू ने मेरे बेटे नमन को अपनी टांगों के बीच में दबा ली.

“अब बोल नालायक! कहाँ बच के जाएगा? इतनी कमज़ोर नहीं हूँ.”

“ अच्छा दीदी, अभी आपको मज़ा चखता हूँ.”

ये कह के अपने खुद को छुड़ाने के लिए उसने अंजू की टांगें चौरी कर दी. टाँगें चौरी होते hi उसका तना हुआ लुंड जो उसकी शॉर्ट्स से बहार आ चूका था .. वह मेरी बेटी अंजू की चुत से रगड़ने लगा. अंजू मि छूट बुरी तरह से गीली थी, रूस बाहर निकल के वह उसकी झांटों को गीला कर रही थी. मेरी बेटी ने उसकी टांगों को मोर के अपने सीने से चिपका लिया औरु ऐसा करने से उसकी फूली हुई छूट की दोनों फांकें चौरी हो गयी और उसके बीच के होंठ खुल गए.





हे भगवन ये तो चुदाई की मुद्रा थी. इसी मुद्रा में तो औरत अपनी छूट मर्द के लुंड को सौंप देती है. अब मेरी बेटी ने अपने आप को अपने भैया के नीचे इस तरह से एडजस्ट किया की नमन के लुंड का सुपर मेरी छूट के छेड़ पे टिक गया.

“ नमन भैया मुझ में इतना दम है की तुझे एक hi झटके में उठा के फ़ेंक दूँ.”

“ अच्छा दीदी! इतना दम कहाँ से आ गया? जरा फ़ेंक के तो दिखाओ.”

“ तो ये ले.” उसने अपने चूतर ऊपर की और उछालते हुए बोली.

. नमन के लुंड का सुपर उसकी बुरी तरह गीली छूट के मुंह पे तो था hi, इस धक्के के कारण पहच से एक इंच अंडर भी घुस गया और इससे अंजू की मुंह से बरी ज़ोर से चीख निकलने वाली थी. लेकिन वह बरी मुश्किल से अपने आप को संभाली और उसकी छूट का छेड़ में इतने मोठे लुंड के अंडर घुसने के कारण बुरी तरह चौरा हो गयी थी.

मेरा दिल यह सब वीडियो में देख ज़ोर ज़ोर से धक् धक् करने लगा, मैं घबरा गयी. है राम कहीं मेरी बेटी की छूट पहात hi न जाए मेरे बेट ेके राक्षसी लुंड द्वारा!

“ बस दीदी इतना hi दम है?” नमन उसे और ज़ोर से गुदगुदाने लगा. शायद नमन को पता नहीं था की उसका लुंड अंजलि की छूट में दाखिल हो चुकी थी. मेरी बेटी ने अपने चूतर उछाल उछाल के उसे उसके ऊपर से गिराने का नाटक करने लगी. ऐसा करने से धीरे धीरे अब नमन का लुंड 3 इंच उसकी छूट में उतर चूका था.





“ दिखाओ दीदी हमें भी तो अपना दम दिखाओ. या फिर सारा दम निकल गया? किसी ऐसे वैसे मर्द से पला नहीं पारा है ” नमन मेरी बेटी अंजू को चिढ़ाते हुए बोलै. फिर अंजू ने पूरी ताकत से नमन को गिराने का बहाना करते हुए अपने चूतर ऊपर उछाल दिए,

“ अच्छा तो ये le….aaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiii… ोोोोोीी. ममम aaaaaaaaaa........ मर gayiiiiiiiiii…ye क्या कर रहा है बेशरम आआआआह्ह्ह्ह.”

इस ज़बरदस्त धक्के से नमन का मूसल 6 इंच उसकी छूट में धंस गया. नमन के मोठे लुंड ने अंजू की छूट इतनी ज़्यादा चौरी कर दी की फटने को हो रही थी. मर्दों का पूरा लुंड hi 6 इंच लुम्बा होता है, और मेरे बेटे का तोह बस आधे से ज्यादा hi लुंड अभी मेरी बेटी की छूट में घुसा था!

है भगवान्! उसका ौरस लुंड मेरी बेटी अंजू की टाइट बुर में. घुस गया तो क्या होगा?

मेरी बेटी इस एहसास से चीखी..

“ क्या हुआ दीदी?”

“ isssssss………Anjaan बनता है …….आआआआह. तुझे शर्म नहीं आती मैं तेरी दीदी हूँ. तेरी सगी बहिन hun.ooooooph, मर gayiiiiiiiiiiii….issss”

ये कहते हुए अंजू ने नमन का लुंड पाकर लिया और बिस्टेर के पास रखे टेबल लैंप को ों कर दिया. लुंड तो मेरी बेटी ने इस तरीके से पाकर लिया की कहीं मेरा बीटा अपना लुंड उसकी बुर के बाहर न निकाल ले, लेकिन मेरी बेटी नाटक ऐसा करि जैसे वह नमन को उसके लुंड को और उसकी छूट के अंडर घुसने से रोक रही थी.





लाइट ों होते hi अंजू को अपने नीचे नंगी देख कर नमन जान बुघ कर हकलाते हुए बोलै,

“ ये क्या दीदी आप के कपड़े…?”

“ चुप, बेशरम! भोला बनता है. गुदगुदी करने के बहाने मेरा गाउन खोल दिया. मुझे पता hi नहीं चला तूने अपनी शार्ट खूब उतारी. अपनी दीदी के साथ बलात्कार कर रहा है अँधेरे का फायदा उठा कर.”

“ नहीं दीदी आपकी कसम…..” नमन मणि सच में अब घबराया हुआ था.

“ बकवास मूत कर. मैं सुब समझती हूँ मर्दों को. ये क्या किया तूने ?” फिर अंजू ने अपनी टांगें खूब चौरी करके उसके लुंड को दबाती हुई बोली.

उसकी नज़रें मेरी चूचिओं पर लगी हुई थी. मेरी फैली हुई टांगों के बीच में अपना लुंड मेरी छूट में फंसा हुआ देख नमन मेरा बीटा अब अपने लुंड को बाहर खींचने की कोशिश करने लगा.

इससे देख अंजू भी सिहर उठी और उसने उसका लुंड पाकर रखा.

“ दीदी सुच मुझे नहीं पता ये कैसे हो गया. मैं तो आपके साथ खेल रही थी.”

“ क्यों झूट बोल रहा है. अगर तेरे मन में कोई खोट नहीं था तो तेरा ये खरा कैसे हो गया?” मेरी बेटी फिर से उसका लुंड दबाते हुए पूछी.

“ सुच दीदी आपकी कसम, मुझे कुछ पता नहीं चला.”

“ नाटक करना बून्द कर. ये खरा हो गया, तूने अपनी दीदी को नंगी कर दिया और इसे मेरे अंडर भी घुसा दिया और तुझे पता hi नहीं चला? तेरे मन में हमेशा से hi खोट था. तू क्या समझता है मुझे कुछ पता नहीं? 2 हफ्ते पहले जब मैं तेरे बाथरूम से तुझे नाहा करा एते देखि, तब तू मेरी पंतय के साथ क्या किया था?”

“ जज्जी, दीदी आपको कैसे पता?”

“ मुझे सुब पता है. मुझे ये भी पता है की तूने दरवाज़े में छेड़ कर रखा है और मेरे कमरे में झांकता है. सुच बता तूने अभी तक क्या देखा है?”

“ सुच दीदी मैंने कुछ भी नहीं देखा.”

मेरा बीटा बस वही कहता रहा.

“ तूने मुझे नंगी भी ज़रूर देखा होगा?”

“ मम हाँ दीदी. अभी कुछ दिन पहले उस दरवाज़े के छेड़ में से आपको कई बार पूरी तरह नंगी देख चुक्का हूँ. लेकिन जब आप खरी हुई होती हो टब आपकी छूट आपकी झांटों से धक् गयी थी”

“ अच्छा तो तू मेरी छूट के दर्शन नहीं कर सका?”

“ नहीं दीदी उसके बाद आप स्कर्ट और टॉप में लेती कुछ पढ़ रही थी तब आपकी स्कर्ट , आपकी जांघों तक उठा हुआ था. आपने टाँगें चौरी कर राखी थी. मैं दरवाज़े के छेड़ में से झांक रहा था और आपकी गोरी गोरी टांगों के बीच में से एक बार फिर आपकी छूट के दर्शन हो गए लेकिन फिर से आपली छूट के बालों से वह ढके हुए था. .

“ नमन भैया सुच सुच बोल. दीदी को छोड़ने का मन करता है?”

“ हाँ दीदी बहुत करता है.”

“ ओह अच्छा क्यों?”

“ आप हो hi इतनी सेक्सी. आपके लिए तरस रहा हूँ.”

“ अच्छा अगर तुझे किसी और लड़की की दिला दूँ तो?”

“ नहीं दीदी मुझे किसी और लड़की की नहीं चाहिए, मुझे तो सिर्फ आपकी…….”

“ हाँ हाँ बोल क्या बोल रहा है?”

“ दीदी मुझे तो सिर्फ आपकी hi chaahiye.Ek बात और बोलूं तो आप बुरा तो नहीं मानोगी?”

“नहीं मानूंगी, बोल.”

“आधा लुंड तो आपकी छूट में घुस hi चूका है. अब पूरा भी अंडर चला जाए तो क्या फरक पड़ेगा? सिर्फ आज छोड़ लेने दो प्लीज! आज के बाद फिर ऐसी गलती नहीं करूँगा.” नमन ने कहा.

“ ये क्या कह रहा है नमन ? एक भाई का अपनी सगी बहन को छोड़ना ठीक बात नहीं hai.Ye पाप है.”

“ किसी को पता नहीं लगेगा. आप कितनी अच्छी हो दीदी.“

“देख नमन ये बात अच्छी तो नहीं है लेकिन अब तू मुझे आधा तो छोड़ hi चूका है, इसलिए मैं तुझे सिर्फ आज एक बार छोड़ने दूंगी. आज के बाद फिर कभी इस बारे में सोचना भी मूत.”

“सुच दीदी ! आप कितनी अच्छी हो. लेकिन मैं तो चुदाई की कला में अनारी हूँ, आपको सीखना पड़ेगा. ”

मेरा बीटा तोह बेतहाशा झूट बोल रहा था .. मेरी बेटी को पता hi था उसने मेरी बुर की मस्त चुदाई करि हैं..





मेरा बीटा अंजू की चूचीऑन मसलने लगा. मेरी छूट बुरी तरह से गीली हो गयी थी. मैं उसके विशाल लुंड और बॉल्स को सहलाने लगी.

“ दीदी आप अपना गाउन तो उतार लो.”

“ क्यों गाउन उतारने की क्या ज़रुरत है?”

“ सिर्फ एक hi बार तो छोड़ना है, पूरी नंगी कर के छोडूंगा.” ये कह कर नमन ने अपना लुंड अंजू की छूट से बाहर खींच लिया और उसे उठा के खरा कर दिया. फिर उसने उसका गाउन उतार दिया और अपनी लुंगी को जो उसके पैरों में फँसी हुई थी निकाल फेंका और अब हम दोनों बिलकुल नंगे थे.

पहली बार अपने भैया और मेरे बेटे का तना हुआ राक्षसी लुंड इतने करीब से देख मेरी बेटी की चीख hi निकल गयी.

“ ूई माँ ये क्या है?”

“ लुंड है दीदी. आपने मेरा लुंड पहले कभी नहीं देखा?”

“ तूने सबको अपनी तरह समझ रखा है क्या ? मैं तेरी तरह टैंक झाँक नहीं करती.”

“ अच्छा दीद फिर अभी तोह हाथ लगा के देखो न.”

मेरी बेटी उसके विशाल लुंड को हाथ में ले कर सहलाती हुई बोली,

“ है राम! नमन तुझे पता है तेरा लुंड कितना लुम्बा और मोटा है? इतना बारे लुंड आदमिओं का तो होता नहीं, ऐसा लुंड तो घोड़े का होता है.”

“ हाँ दीदी एक दिन नापा था. 10 इंच है मेरा लुंड.”

“ बाप रे! लुंड है या बिजली का खुम्बा? पता नहीं मैं इसे झेल भी पाउंगी या नहीं. ”

“ क्यों दीदी राहुल जी का भी तो खासा मोटा होगा. उनका लुंड तो आपकी छूट में बरी आसानी से ली होगी .”

“ उनका लुंड तो आदमी का लुंड है न घोड़े का तो है नहीं और न hi मैं घोरी हूँ जो इस लुंड को झेल सकूँ.”

मेरी बेटी प्यार से नमन के विशाल लुंड पे आगे पीछे हाथ फेरने लगी.

मेरी बेटी के बुर को मसलता हुआ नमन बोलै,

“दीदी आपके चूतर भी बहुत सेक्सी हैं.”

“उफ्फ्फ भैया मैं व्वस्ना की आग में बुरी तरह जल रही थी.”

नमन फिर बोलै,

“ अब छोडूं दीदी?”

“ हूं, छोड़ ले”. नमन ने उसे अपनी बाहों में उठा के बिस्टेर पर चित लेता दिया. उसने अंजू की टांगों को चौरा किया और मोर के मेरी छाती से लगा दिया. इस मुद्रा में मेरी बेटी की हुई छूट और भी ज़्यादा उभर आयी और उसका मुंह ऐसे खुल गया जैसे बरसों से लुंड की प्यासी हो. नमन गौर से उसकी छूट के खुले हुए छेड़ को देख रहा था. फिर अचानक उसने उसकी टांगों के बीच मुंह दाल दिया और वो जीभ से उसकी छूट के खुले हुए होंठों को चाटने लगा.

“Aa….aaah नमन ये क्या कर रहा है?”

“ अअअअअ………..” बहुत मज़ा आ रहा था.”

मेरी बेटी की बुर ,बुरी तरह रूस छोड़ रही थी.

“ बस कर भैया, अब छोड़ अपनी दीदी को.” नमन ने उठ कर अपने मोठे लुंड के सुपर को अंजू की छूट के छेड़ पर टिका दिया,

“ इज़ाज़त हो तो पेल दूँ दीदी?”

“ ोूफ बदमाश ! अब तुंग मत कर. इतनी देर से टांगें चौरी कर के अपनी छूट तेरे हवाले क्यों की हुई है? अब छोड़ भी मेरे राजा.”

“ तो ये लो दीदी.” ये कहते हुए नमन ने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ ोी maa…….aa…..aaaaaah धीरे, तेरा बहुत मोटा है.” नमन का लुंड पहच से अंजू की छूट को चीरता हुआ 5 इंच अंडर घुस गया. उसने एक बार फिर लुंड को बाहर खींच के एक और ज़ोर का धक्का लगाया.

“ Aaaaaaa……hhhh….ooooohhhhhh.” लौड़ा 7 इंच घुस चुक्का था और इससे पहले की अंजू कुछ कहती नमन ने पूरा लौड़ा बाहर खींच के पूरी ताकत से एक भयंकर धक्का लगा दिया.

“ Aaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiii………ouiiiiii… म्मम्माआआआ मर गईइइइइइ आआह्ह्ह्ह. Aaa…….aaaaaahhhh ……ोुह्ह्हह्ह छोड़ मुझे a.aaa…..aaaaaaaah मैं मर जाउंगी”

इस भयंकर धक्के से वो मोटा तना 10 इंच अंडर घुस गया था. उस मोठे लौड़े ने अंजू की छूट बहुत फैला दी“

“नमन भैया बस कर मेरे राजा अब और अंडर मूत दाल. मर जाउंगी. तेरा बहुत बारे है.”

“ दीदी मैंने सुना है लुंड कितना hi बारे क्योंना हो औरत की छूट में समां hi जाता है.”

जब तक मर्द का पूरा लौड़ा छूट में न जाए टब तक चुदाई का मज़ा hi क्या.





नमन ने थोड़ी देर बिना हिले अंजू के ऊपर पारा रहा और फिर जब थोड़ा दर्द कम हुआ तो धीरे धीरे लुंड को उसकी छूट में अंडर बाहर करने लगा. इन छोटे छोटे धक्कों से अंजू की छूट फिर से गीली होने लगी. अचानक उसने पूरा लौड़ा बाहर खींच के बहुत hi ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ आयआईईईई….. आआअह्ह्ह्ह …..ऊऊऊओह्ह …माआ….. iisssss………aaahhh…..iiisssss. फॉर डालेगा ? इतनी बेरहमी से छोड़ रहा है अपनी दीदी को. तेरी सगी बहिन हूँ. Aaaa…hh…. कुछ तो ख्याल कर. ोोीी…. सुच मच पहात जाएगी, बेशरम!”

इस धक्के से नमन का लौड़ा जार तक अंजू की छूट में समां गया था.

“ओह दीदी आपने सबसे पहले मुझे अपनी छूट क्यों नहीं दी?”

“ कैसे देती भैया, मैं तेरी बहिन हूँ.”

“ अब भी तो दे रही हो.”

“अब की बात तो अलग है. मैंने दी कहाँ तूने ज़बरदस्ती ले ली.”

“ इतने प्यार से दे रही हो दीदी. इसे ज़बरदस्ती लेना कहते हैं?”

“मैं चाहती हूँ की आज में तेरे साथ छोड़ने का पूरा मज़ा मिले. और तेरा अपनी दीदी को छोड़ने का सपना भी पूरा करना चाहती हूँ. जी भर के छोड़ ले अपनी प्यारी दीदी को.”

नमन ने अंजू की चूचीऑन दोनों हाथों में पाकर के फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. वह भी चूतर उचका उचका के उसके धक्कों का जबाब दे रही थी. नमन लौड़ा पूरा निकाल के जार तक पेल रहा था. अंजू की छूट इतना ज़्यादा रूस छोड़ रही थी की नमन के हर धक्के के साथ उसकी छूट में से… पहच… पहच …. पहच……… …phach…phach …..पहच……. पहच …..phach……phach और अंजू के मुंह से ाःह…. ाः…. आआआआआईईई …..aaaaaahh……oooh….oui …. आए ……..ोी माआ…… ाआअह…. .ओह्ह….. उम्म्म्म…… .का मधुर संगीत गूंज रहा था.

“ दीदी आपको छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा है. बहुत महीनों से इसके लिए तरस रहा था”

“ सुच ! जी भर के छोड़ ले अपनी दीदी को. तुझमें तो बहुत स्टैमिना है लेकिन मेरी टांगों में बहुत दर्द हो रहा है.”

“ अच्छा, तो आप मेरे ऊपर आ जाओ, फिर टांगों में दर्द नहीं होगा.” ये कह कर नमन ने लुंड बाहर खींच लिया और पीठ के बल लेत गया. उसका 10 इन लुम्बा लुंड एकदम तना हुआ था और लुंड का सुपर आसमान की और था. पूरा लुंड छूट के रास में सना हुआ था और छूट का रास पी कर और भी मोटा लूग रहा था. उसके फनफनाए लुंड को देख कर अंजू की छूट की आग और भी भड़क उठी.





“ Aaaaaaaaaiiiiiii……dhere मेरे राजा. आआह्ह्ह्हह…..” नमन ने लुंड सुपर तक बाहर खींच के पूरी ताकत से फिर धक्का लगाया. इस बार के धक्के से उसका लुंड 10 इंच अंजू की छूट में दाखिल हो गया.

“ Ooiiiiimaaaa…..aaaaaaaaa िस्स्सस्स्स्स…..” नमन ने फिर पूरा लुंड बाहर खींचा.

“ oooooiiiiii…maaaaaa….. फॉर देगा क्या?” नमन कभी दोनों हाथों से अंजू की लटकती हुई चूचिओं को पाकर के धक्के लगता तो कभी कमर पाकर के और कभी मेरे शूटरों को मसलते हुए पूरा लुंड बाहर निकाल के अंडर पेलने लगता. पहच… पहच… ….phach….phach….phach …… अअअअअ आए…. .issssssss…..oooooohhhh…….aaaahhh phach…phach…….oooooiiiiii…..oooohhhh…aaaaahhhhh… पहच… पहच. बस सिर्फ ये hi आवाज़ें कमरे में गूंज रही थी.

नमन के धक्के इतने ज़बरदस्त हो जा रहे और जब उसका लौड़ा अंजू की छूट में जार तक घुसता तो उसकी जांघें अंजू की विशाल शूटरों से टकरा जाती. ोूफ क्या तगड़ा लौड़ा था. अंजू भी चूतर पीछे की और उचका उचका कीड़े बेटे और अपने भैया के धक्कों का जबाब दे रही थी.

“भैया मेरी छूट बहुत प्यासी है, इसे अपना वीर्य पीला के इसकी प्यास बुझा दे प्लीज .भर दे इसे अपने वीर्य से, अब और तुंग मूत कर मेरी छूट में अपना माल दाल … ” अंजू पूरी ताकत से चूतर पीछे की और उचकाते हुए और नमन के मूसल को अपनी छूट में पेलते हुए बोली.

मेरा बीटा फिर एक दहाड़ के साथ अपने लुंड से पानी निकलते हुए ढेर सारा वीर्य मेरी बेटी के hi छूट में उतरने लगा … 5 मं झरने के बाद फिर मेरा बीटा और बेटी एक दूसरे के बगल में लेट गए.

हे भगवान् क्या भयंकर चुदाई हुयी थी मेरे बेटे और बेटी के बीच !!!!!
 
अगले दिन मेरे बीटा ने मेरे लिए वेकेशन किए लिए प्लान बनाई .. लेकिन मुझे नहीं पता की वह मेरी बेटी अंजू को भी ले जा रहा था हमारे साथ.. हे भगवान, मेरा बीटा छुट्टियों के लिए अपनी माँ और बेहेन दोनों की चुदाई एक साथ करना चाहता होगा. नमन ने अंजू के मोबाइल पर कॉल कर उसे बताया की वह शाम 5 बजे आसपास आएगा और हमें वेकेशन के लिए ले जाएगा, हम किसी रिसोर्ट में जाएंगे जहां देर रात पार्टी भी है . मेरी बेटी और में हमारे मिनी वेकेशन के लिए अपनी ड्रेस पैक करने लगते हैं और फिर देर रात की पार्टी के लिए हम दोनों माँ और बेटी खुद को तैयार करने लगती हैं.

मैं एक काली रंग की स्कर्ट और स्लीवलेस लौ नीच वाली टाइट सिल्क डिज़ाइनर टॉप पहनती हूँ और अंदर में साटन नेट वाली पैडेड ब्रा और सैटिन पंतय पहनी, जो केवल मेरी छूट के क्षेत्र को एक ट्रायंगल रूप से ढकने में सक्षम थी! पंतय पीछे से एक दम पतली मानो धागे जैसी जो मेरी गांड और नितम्बों के बिच बिलकुल फिट बैठ रही थी है! ओह, मैं एक पार्टी हॉपर की तरह दिख रही थी. मेरी लिप ग्लॉस से लिपि हुई लाल लिपस्टिक और अधिक मुझे सेक्सी बना रही थी! मैंने मेरी आँखों को बहुत सेक्सी लुक देने लिए ब्लू ेयेशादौ लगाई और, मस्कारा, ऑय लाइनर भी लगाई. . मस्कारा मेरी आँखों की पलकों को लगभग दोगुना बढ़ा दे रही थी , वह वास्तव में सेक्सी लग रही थी. , मेरी आँखों पर मस्कारा और ेएलइनेर के कारण बहुत काली दिखती थी. उफ्फ्फ ओह, मेरी आँखें और अधिक सेक्सी लग रही थी! फिर में गालों पर गुलाबी रंग का फाउंडेशन , ब्लश लगाई जिससे में और गोरी दिख रही थी. फिर मैंने एक गोल आकार की हिरे की नाक की अंगूठी पहनी और कानों में पेंडुलम की तरह सेक्सी हिरे की बालियान डाली: मेरी, अच्छी तरह से कंघी की गई, रेशमी चिकनी भूरे रंग के रेंज हुए बाल थे और में. बड़ी सोने की चैन पहनी , आज में कोई मंगल सूत्र नहीं पेहेन्ने वाली थी. , मेरी नाभि पर में एक सुन्दर बेल्ली रिंग पहनी और, मेरा गोरा सा फिट दिखने वाला पेट मेरे टॉप और स्कर्ट के बिच में दिखाई दे रही थी.





मेरी अच्छी तरह से वैक्स किए हुए चिकने बाहें और टांगों पर में एक बॉडी क्रीम लगायी , जो मेरे खुले पैरों और कन्धों को बहुत चमक दे रही थी. निचे में. पायल, पहनी और ऊँची हील्स जो, खुले प्रकार से, मेरी नेल पोलिश वाली उँगलियों को दिखा रही थी. यदि आईने में खुद को देखकर में बहुत खुश थी!

मैं अपनी बेटी के साथ अपने बेटे के साथ पार्टी के लिए तैयार थी और इस सब में , मेरी उम्र 40’स की नहीं बल्कि 20’स की दिख रही थी! मेरी बेटी भी अपना मेकअप कर रही थी. उसने लाल कॉकटेल ड्रेस पहनी थी, उड़के पैरों पर काले रंग की नेल पोलिश लगी हुई थी! वह भी बहुत सेक्सी दिख रही थी,





हम maa-beti नहीं बल्कि, मनो हम बेहेन लग रहे थे.

हम दोनों. Apne-apne कमरों से बाहर आ गए . मेरा बीटा समय पर आ गया, उसने हम दोनों को आश्चर्यचकित होकर देखा! यहां तक की जमुना बाई भी मुझे देखकर दांग रह गई:

मैं शरमाई और शर्मिंदा हो गयी! मेरे बेटे ने मेरी तरफ देखते हुए आँख मारी! अब मेरे पति ने मुझे फोन किया और पूछा “रत्न! तुम आज रात क्या कर रहे हो.. तुम्हें मेरी याद आती है?”

. मेरी बेटी अंजू फोन लेती है और अपने पापा को बताती है की वह और मैं पार्टी के लिए जा रहे हैं.. मेरे पति ने मुझसे पूछा की उन्हें दिखाओ की में क्या पहनी हूँ. . उन्होंने मुझे वीडियो कॉल पर देखा और कहा, "रत्न मेरी जान, तुम बहुत अच्छी लग रही हो, पहचान में नहीं आ रही हो तुम.. लेकिन क्या तुम्हारा अपने बेटे और बेटी के साथ इस तरह रात की पार्टी में जाना ठीक है?"

“ओह! सुनील, में उनसे कही की मैं नहीं जाना चाहती थी लेकिन उनके बेटे नमन ने hi मुझे मजबूर किया और इस अवसर के लिए मुझे यह कपडे पहनने के लिए भी कहा, मैं क्या कर सकती हूँ?!”

मेरी बेटी ने मेरे पति, अपने पापा से फ़ोन पर कहा, "है पापा हमारा हर ड्रेस नमन hi चुना है और माँ ने कहा था की वह नहीं आएगी लेकिन उसने hi उन पर बहुत दबाव डाला. यह उनकी सौंपने द्वारा दी गई बहुत बड़ी पार्टी है, इसीलिए यह सब हो रहा है.” मेरी बेटी अंजू ने इतनी चतुराई से मेरे पति, अपने पिता को मन लिया था, और मेरी बेटी ने उनसे यह भी कहा, "पिताजी, पार्टी में आने वाले सभी लोग इसी तरह से कपडे पहनते हैं, इसलिए यह अगर हम इस तरह से कपडे नहीं पहनेंगे तो हम उनके सामने अजीब दिखेंगे. और वैसे भी पापा ये सब तो अब आम बात हो गई है आज कल पार्टीज में.”

मेरी बेटी के समझने के बाद उनहोंने चुप रहकर कोई सवाल नहीं पूछा और मुझे जाने को हाँ बोले और. मैं उनकी भी सहमति सुन बहुत खुश थी. इसके बाद बिना ज्यादा देर किए हमने सभी को अलविदा कहकर, मेरा बीटा अपनी माँ और बेहेन दोनों को पार्टी के लिए ले गया!

2 घंटे में हम एक ऐसी जगह पर पहुँच गए जो बहुत hi पॉश रिसोर्ट है, जैसे hi मेरे बेटे की गाडी एक भारी गेट के पास पहुंची, वहां का गार्ड बाहर आया और उसने हमें सलाम करते हुए गेट खोला. मेरे बेटे ने पार्किंग में कार पार्क की, निचे उतर कर अंदर चला गया. हम माँ बेटी कार में hi बैठी रही और कुछ मिनट बाद hi मेरा बीटा एक चाबी लेकर बाहर आया.

“माँ, पहले हम रिसोर्ट में पास के पार्टी हॉल में पार्टी में जाते हैं और फिर हमारे कॉटेज में जाते हैं.” में कुछ नहीं कही, बस शरमाते हुए सर निचे कर, हाँ में सर हिलायी. पहले हम पार्टी में गए, काफी देर तक हमने खूब एन्जॉय किया. मैं और मेरा बीटा और बेटी हमेशा एक साथ नाच रहे थे.. हमारे बिच में नाचते वक़्त मेरा बीटा मेरी, शरीर को छूटे हुए में अपने चूतड़ों को हिलाते हुए नाचने लगते. kabhi-kabhi मैं उन दोनों के बिच में नाचती तब मेरा बीटा और बेटी मेरे शरीर को रगड़ते दोनों के बीच. हे भगवान मुझे शर्म बहुत आ रही थी लेकिन बहुत मज़्ज़ा भी आया. .. फिर हम सबने ड्रिंक की. मेरी बेटी और में वोडका पिने लगे और बेटे ने स्कॉच और व्हिस्की पि.. और हम 2 घंटे तक डांस करे.. मैं नशे में खुद को महसूस कर रही थी इसलिए मेरा बीटा और बेटी मुझे हमारी कॉटेज में ले गए. . वह कॉटेज इतना बड़ा था मनो यह एक अपार्टमेंट जैसा hi दिख रहा था, इसमें सब कुछ था, एक बड़ा सोफे, एक टी , रेफ्रीजिरेटर, छोटी सी रसोई, एक बड़ा बैडरूम और उसके, साथ में बड़ा बाथरूम. , बैडरूम में भी एक टीवी था, एक होम थिएटर. , ओह, वास्तव में बहुत आरामदायक कॉटेज था. . जैसे hi हम सोफे पर बैठे. वहां स्नैक्स और अधिक बेयर की बॉटल्स थी और वाइन की बॉटल्स भी थी.

मेरे बेटे ने फिर एक और छोटी बोतल कार में राखी थी उसे लेन मेरा बीटा कार की चाबी लेकर बाहर चला गया, मेरे बीटा ने कहा की वह कार से कुछ चीज़ लाएगा. वह कुछ चीज़ जो लाया वह एक कद पाउच की तरह दिख रहा था. उसमें म्यूजिक की चड़स थी. फिर नमन और में एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुए उस इ दरवाज़ा बंद कर दिया. फिर उसने फ्रिज खोला और सभी बोत्तलें अंदड़ की बहार लाकर रख दिन और गिलास उठा लिया,

उसने मेरे और अंजू के लिए 2 गिलासों में वाइन डाली, 1 गिलास में बियर और एक गिलास में स्कॉच डाली और फिर उठकर होम थिएटर सिस्टम में कद लगा दी. सिस्टम पर कुछ वेस्टर्न संगीत आने लगा. अब पूरा दृश्य एक पार्टी जैसा लग रहा था. अब मेरा बीटा मुझे और अंजू को देख मुस्कुरा रहा था और हम भी मुस्कुराकर उसे अपनी आकर्षक ड्रेसेस के saath-saath और अपने मेकअप के साथ हमारे पास आमंत्रित कर रहे थे, मैं अपने बेटे को आकर्षित करने के लिए अपनी hi बेटी के साथ उसे सडके करना चाहती थी!! ! मेरा बीटा हमारे पास आकर हम माँ और बेटी दोनों को अपनी बाहों में लपेटते हुए गले लगा लिया. और हम दोनों ने भी उसके चारों और अपनी बाहें दाल दिन और अपने गीले होंठों को दबाते हुए उसके गालों को दोनों तरफ से एक साथ चूमा.







में अपना हाथ उसकी पंत पर फिरने लगी और पहले से hi उसके खड़े लुंड को बहुत आकर्षक ढंग से दबाने लगी.

“ ओह! माँ” मेरे बेटे ने कहा, और उसने मेरी गीली होंठ चूमे, में भी अपना मुंह खोल अपने बेटे को चूमने लगी .. उसकी जीभ को मेरे मुँह में प्रवेश करने के लिए आमंत्रित करि. वह अब मुझे और अधिक स्वतन्त्र रूप से चूमने लगा , हमारी जीभें ख़ुशी से मिलती हुयी चूमने लगे .. में उसे दिखाना चाहती थी की उसकी माँ कितनी सेक्सी बन गयी है और वह कितनी मस्त किसर है!

हम, maa-bete के इस सेक्सी हरकत से मेरी बेटी थोड़ी नाराज़ दिखी और उसने चंचलतापूर्वक से नमन का ध्यान आकर्षित करते हुए उसके सर पर अपने हाथों को फेर कर पकड़ी ... अब मेरा बीटा नमन, मेरी बेटी को देखकर मुस्कुराया और कहा,

“ओह अंजू, मेरी माँ एक अद्भुत किसर है, वह जानती है की एक मर्द को कैसे चूमना है!!! मममममम!”

मेरी बेटी ने भी कहा, "ठीक है, मैं भी उनकी बेटी हूँ, तुझे लगता हैं की में जानती नहींकिस्स कैसे करनी चाहिए .. में दिखती हूँ की और भी कामुक किश कैसे करना है." यह कहते हुए मेरी बेटी ने अपने होंठ मेरे बेटे के होठों पर दबा दिए, अपने होठों को सहलाते हुए, अपने दोनों हाथों से उसके सर को पकड़ कर और भी ज़ोर से उसे चूमने लगी.. उस गहरे चुम्बन कुछ 5-10 मं चली …







मेरे बेटे ने मुझे सेक्सी साडी और ब्लाउज पेहेन्ने को कहा और में लायी हुयी सबसे छोटी साडी और ब्लाउज.. पहनी.. मेरी साड़ी और ब्लाउज इतनी पारदर्शी दिख रही थी. , हे भगवान, मुझे मेरे बेटे और बेटी के सामने इस तरह आने से बहुत शर्म आ रही थी. फिर मेरे बेटे ने उठ कर मुझे बाँहों में ले लिया और चूमा. उसका लम्बा गहरा चुम्बन मुझे ऊर्जावान महसूस कर रही थी .. मैं अपने बेटे और बेटी के साथ हाथ में वाइन का गिलास लिए और वेस्टर्न संगीत हमारे पीछे चल रही थी! मेरे बेटे ने कहा चियर्स और मेरी बेटी भी उसके चियर्स में शामिल हो रही थी.

, वे संगीत पर डांस कर रहे थे, और मेरे बेटे ने मुझे उनके साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन में मन कर दी, लेकिन उनहोंने मुझे नहीं छोड़ा! इसलिए मैं भी उनके डांस के साथ शामिल हो गयी और मेरा बीटा मेरी कमर पकड़कर धुन पर नाच रहा है. ओह, मुझे नहीं पता की वह डांस स्टाइल क्या है, लेकिन मैं उसके साथ नाचती रही.. मेरा बीटा एक शानदार डांसर है. मेरे बेटे ने फिर अचानक मेरे पल्लू को हटा दिया, हे भगवान! में पल्लू को पकड़ने की कोशिश की लेकिन असफल रहने पर पल्लू निचे गिर गया और मेरी बेटी हंसाने लगी.

फिर मेरे बेटे ने मुझे अपनी साडी उतारने के लिए कहा “माँ इसे strip-tease की तरह उतरो”

ओह मैं अपने हिसाब से सेक्सी डांस करती हुयी मेरे बेटे ने मेरी साडी उतार दी और अब मैं ब्लाउज और पेटीकोट में डांस कर रही थी. फिर मेरे बेटे बे अपनी शर्ट और पंत भी उतार दी और अब वह केवल कच्छे में था.

हम तीनो थोड़ा और डांस करे , अब मैं अधिक नशे में थी और में नशे में अपने हाथोंको मेरे बेटे के कच्छे के अंदर उसके सख्त लुंड को महसूस करते हुए उसके लुंड के उभर को उसके कच्छे पर रगने लगी. मैं अपने बेटे नमन को देख , आकर्षक ढंग से मुस्कुराई और उसके सख्त राक्षसी लुंड को उसके कच्छे से बाहर निकाल कर आज़ाद कर दिया. ओह, उसका लुंड सच में कितना मोटा था और उस पर बहुत साड़ी खून की नसें हैं. उसके लुंड की चमड़ी पहले से hi खुली हुई थी और उसके लुंड का लाल टॉप प्रेकम से रिस रहा था और उसका लुंड मेरे सामने मनो नाच रहा था.





में अपने बेटे के लुंड पर अपना कोमल हाथ फिराई, उसे अपनी रेशमी अच्छी तरह से लगाई नेल पोलिश से लिपटी उँगलियों से पकड़कर थोड़ा जोर से दबाने लगी .. जिससे मेरा बीटा और अधिक खुश हो गया. उसके पूरे लुंड पर अपना हाथ फिराते हुए उसे अपनी माँ द्वारा मस्टरबैशन का आनंद दे रही थी. वह मुझे देख मुस्कुराया, और उसने अपने होंठ अलग कर दिए और अब मेरी गीली सेक्सी होंठों को चूमने लगा, मेरे होंठों को चबाने लगा, .. लिपस्टिक से लिपटे होंठों को.

“ओह नमन बीटा” कहते हुए में भी उसे समा रूप से जवाब दी और अब मेरी बेटी ने उसके लुंड पर हाथ फिराया. हम माँ और बेटी दोनों अपने रेशमी चिकनी हाथों से उसके लुंड का आनंद ले रही थी. . अब में मेरे बेटे के पूरे लुंड को अपनी बेटी को पकड़ने छोड़ दिया और उसके वीर्य से भरे लुंड के गेंदों को पकड़ कर थोड़ा दबायी . , जोर से नहीं!

“ओह्ह्ह्ह! माँ क्या अंदाज़ हैं आपका” मेरे ने यह कहते हुए उसने मुझे चूमते हुए मेरे होंठ काट लिए.





फिर मेरा बीटा बोलै “चलो मेरी रंडियों.. मेरा कच्छा उतार कर मुझे नंग कर दो.”

फिर हम माँ बेटी ने उसके कच्छे को निचे उतार दिया और उसे बिलकुल नंग कर दिया, और उसका लुंड नग्न होकर उछलने लगा! अब हम दोनों maa-beti ने उसकी ओर मुस्कुराते हुए ,बोले

"आओ, हरामी, हमें तुम hi बनाओ जो तुमने अभी कहा था"

“ओह उफ्फफ्फ्फ़ मेरी hi माँ और बेहेन दोनों की क्या जोड़ी है, कितने सेक्सी चूचियां हैं" आपकी” उसने कहा

फिर उसने, हमारी ब्रा भी उतार दी और हमारे नंगे चूचियों को कसकर दबाने लगा . उसने हमारी दोनों की ब्रा उतार दी और हमारे स्तन एक साथ दबाने लगा. मेरा बीटा “ वह मेरी चैनलों! फुसफुसाते हुए , बुदबुदाते हुए फिर उसने मेरे निप्पल्स को चूसा और मेरी बेटी के निप्पल्स को दबाया और फिर उसने मेरे कठोर निप्पल्स को काटा जिससे मुझे ख़ुशी से दर्द हुआ.

में मेरे बेटे के सर को अपनी चूचियों पर दबायी और दूसरे हाथ से उसकी गेंदों को दबाने लगी. मेरा बीटा अब अपने दोनों हाथों से मेरी बेटी, उसकी बेहेन , के स्तनों से खेल रहा था.. वह वास्तव में हमारी चूचियों का दीवाना था. उसने हमारे स्तनों को बहुत मसला .. हम maa-beti भी उसे अपने बड़े स्तनों को देते रहे जैसे hi वह चाहता था.

मेरा बीटा अब मेरी बेटी की चूचियों को चूस रहा था और मेरी चूचियां भी दबा रहा था. ओह, ुसस्स उसका कठोर युवा हाथ मेरे स्तनों को और अधिक आनंद दे रहा था और मैं अपने बेटे के मस्ती की आनंद ले रही थी. अब मेरे बेटे ने ज्यादा समय बर्बाद किए बिना मेरी बेटी की मिनी स्कर्ट का हुक खोल दिया.

अब हम दोनों Maa-Beti अपने शरीर पर केवल ड्रेस के रूप में छोटी सी पैंतीस में थे!

मैं गुलाबी ब्रा और पंतय में थी और मेरी बेटी अंजू मैरून रंग की ब्रा और पंतय में थी. हमारी पंतय हमारे बुर से टपकते रास से लथपथ थी क्यूंकि हमारी बुर इतनी गीली थी उफ़. मेरी बुर तो मेरी बेटी से भी ज्यादा गीली थी शायद क्योंकि मैं बहुत कामुक औरत हूँ ः में मन में हसने लगी!

मेरे बेटे, उसने अपने दोनों हाथ हमारी पंतय से ढकी हुई छूटों पर फेरे और साथ hi दोनों माँ और बेटियों की छूटों को पंतय के ऊपर से दबाने लगा. . ओह्ह्ह हम दोनों ख़ुशी से चिल्ला उठीं और अब उसने हम maa-beti की पंतय भी उतार दी. और मुझे और मेरी बेटी को केवल हाई हील्स में बिलकुल नग्न कर दिया.









“ ओह्ह्ह तुम दोनों बहुत सेक्सी हो,” यह कहते हुए उसने हमारी पहले से hi गीली हुई छूटों में अपनी उंगलियां दाल दिन और वहां अपनी उँगलियों को हमारी बुर के अंदर बहार करने लगा.. . अब मेरी बेटी पीछे से आई और हमने नमन का सैंडविच बन दिया हमारे बदन के बीच .. मेरी चूचियां अब नमन के साइन से दबी हुयी थी और पीछे से मेरी बेटी की चूचियां नमन के पीठ से चिपकी हुयी थी: . अब ऐसे में मामला बहुत गर्म होते जा रहा था..

अचानक हमने देखा की मेरा मोबाइल बज रहा है तो मैं सोफे के पास गयी और देखा की कौन कॉल कर रहा है. ओह, मेरे पति सुनील कॉल करे रहे हैं. में अपने बेटे से आवाज काम करने को कही. मेरे बेटे ने पूछा की कॉल किसने किया हैं.? में उससे कही की यह तुम्हारे पिता का कॉल हैं, मेरे पति का कॉल…...

अब मेरे बेटे ने म्यूजिक की आवाज काम कर दी. फिर में अपनी ब्रा और पंतय पहनी और अपने पति की कॉल का जवाब देने लगी केवल अपनी ब्रा और पंतय में hi !!!!!!!

. “हाँ बताइये जी.. क्या हुआ?”

मेरे पति ने पूछा की पार्टी कैसी है, और बेटे , बेटी कैसे है.. में तुरंत उनसे कही की हम अभी भी पार्टी में डांस कर रहे हैं, और हमें और अधिक समय लगेगा पार्टी में और वह, कृपया बाद में कॉल करें.

मेरे पति ने ज्यादा सवाल नहीं पूछे और फिर में फ़ोन बंद कर दी. जब में अपने बेटे से मोबाइल पर बात कर रही थी तब मेरी बेटी मेरे सामने hi नमन को गले लगा रही थी और उसके होंठों को चूम रही थी, मेरी उपस्थिति की भी परवाह नहीं कर रही थी न hi की में उसी के पापा से फ़ोन पर बातें कर रही थी. . मेरी बेटी ने मेरे बेटे नमन का खड़ा लुंड बाहर निकल अपने हाथों से मसल रही थी.. में भी अब उनके पास चली गयी ..

, ओह! मुझे अपने बेटे के लुंड की गर्मी महसूस हुई जब में उसके लुंड पर अपना रेशमी हाथों को फिराई.. ममममम मेरे बेटे, उसका लुंड बहुत बड़ा और मोटा हैं उफ्फ्फ्फ़. . अब मेरी बेटी ने नमन के लुंड को पकड़ लिया और हम दोनों maa-beti ने नमन के लुंड पर हाथ फिरै और उसे मसलने लगे.. मेरे प्यारे बेटे उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह उसने हम दोनों के होठों को चूमा बारी बारी

हम ये सब गर्मी का खेल , खेल रहे थे .. - बीटा, माँ और बेटी…

ओह फिर हम उठ गए.. अब हम जा रहे थे तीनो बिस्तर .. चुदाई के लिए! मैं अपनी बेटी को देख मुस्कुरायी और. मेरी बेटी ने कहा

, “ओह माँ! आप पहले से hi कई बार सुहागरात मन चुकी हो भैया के साथ.! सिर्फ एक सुहागरात नहीं बल्कि कई मनाई हैं .. , लेकिन में केवल एक hi बार सुहागरात मनाई हु भैया के साथ… . माँ! अब मैं अपने भाई नमन के साथ अपनी दुदृ सुहागरात मन रही हूँ.”

मैं अपनी बेटी के शब्दों पर शर्मा गयी और उसे कोई जवाब नहीं दे सकीय शर्म से.. अब वो दोनों हंस पड़े और अंजू ने मेरे बेटे, उसके भाई नमन के होठों को चूम लिया. ओह मेरी बेटी बहुत ज्यादा नोट्टी है, वह अब कोई मासूम लड़की नहीं रही, उसके पास चुदाई की मस्ती का बहुत अनुभव है!!!, नमन अब अंजलि को बैडरूम में ले गया. मैं उनके साथ शामिल होना चाहती थी लेकिन इतनी साड़ी ड्रिंक्स के कारण मुझे जोरों की पिशाब लगी थी .. और इसलिए पहले की मैं बैडरूम जा सकती .. मुह्हे अपना पेशाब ख़त्म करने बाथरूम जाना पड़ा. पिशाब के बाद खुद के चेहरे पर और थोड़ा मेक उप , लिपस्टिक लगाकर में, बहार आती हूँ और बैडरूम में जाने बढ़ती हूँ की मुझे चुदाई में कराहने की आवाज सुनाई देती है. और आगे जाकर में देख टी हूँ की हे भगवान, मेरी बेटी और बीटा ठीक से दरवाज़ा बंद नहीं करे थे और, में उन्हें डोगग्य स्टाइल में चुदाई करते हुए देख रही थी और मेरी नज़र मेरी बेटी और बेटे के लाइव पोर्न शो से नहीं हैट रही थी.





में उनकी चुदाई देख अपनी उँगलियों से छूट सहलाने लगी … क्या मस्त चुदाई कर रहा था बीटा मेरी बेटी की बुर का … उफ्फ्फ क्या मर्द था मेरा जवान बीटा …

मेरे बेटे ने मुझे देखते हुए देख लिया और मेरी बेटी अंजू की चुदाई और जोरों से करने लगा .. बस उसकी बुर पीछे से ठोकते hi रहा … नेरी बेटी निचे बेडशीट पकड़ी हुयी मेरे बेट ेके लुंड की धक्कों को झेल रही थी और जोरों से आवाज़ें निकल रही थी.. बस मेरा बीटा उसकी चुदाई ाकरते रहा और मेरी बेटी एक ाः निकली और जहर गयी ..

. कुछ मं बाद मेरे बेटे ने हम दोनों को बिस्तर पर बिठाया और वह हमारे बिच में बैठ गया. ओह्ह्ह! हाँ, मेरे बेटे ने मुझे और मेरी बेटी दोनों की बुर एक साथ उँगलियों से छोड़ना शुरू कर दिया, अपनी दो उंगलियां हमारी पहले से hi गीली हो चुकी छूट में दाल दिन, अपने अंगूठे से हमारी छूट की लिप्स को रगड़ने लगा. हम दोनों माँ और बेटी ने उसके सख्त लुंड को पकड़ ली और उसके लुंड को हिलने लगी लगी. मैं मेरे बेटे के गेंदों को पकड़ कर निचोड़ी और उसे दिखा रही थी की मैं कितनी कामुक हूँ! कुछ मिनटों की तेज़ उंगली से हमारी छूट की चुदाई के बाद, हम दोनों maa-beti की बुर से रास निकल गया मेरे बेट ेके उँगलियों को भिगो दिया रास से ! मेरे बेटे ने अपनी वीर्य से लथपथ उंगलियां हमारी छूट से बाहर निकालीं, और हमारे hi वीर्य का स्वाद हमें पिलाने लगा.. फिर उसने, मेरी बेटी की बुर से निकली रास को मेरे मुंह के पास लाया और मेरी बुर से निकली रास को मेरी बेटी के मुँह के पास लाया.

में मेरी बेटी के बुर क ेरस की स्वाद चखी और मेरी बेटी ने भी मेरी बुर से नीलकली हुयी रास को चखी अब हम मेरे बेटे के लुंड को अपने हाथों में पकड़कर, हम तीनों फ्रिज के पास गए और उसमें से वाइन, बियर और स्कॉच ली,

मेरे बेटे ने 2 गिलास में वाइन डाली, 1 गिलास में बियर और 1 गिलास में स्कॉच डाली और गिलास हमें सौंप दिए. हम दोनों माँ और बेटी ने अपना गिलास उठाया और वाइन पीना शुरू कर दिया.

अब मेरा कामुक बीटा .. मेरा हॉर्नी बीटा … उसने अपने सख्त लुंड को अपने ड्रिंक के गिलास में डुबोया और फिर उसे बाहर निकाला और मेरी तरफ मुस्कुराते हुए अपने ड्रिंक में दुबे हुए लुंड को मेरे मुंह के पास लाया,

और मैं उसके शरारती इरादे को समझ गई और मुस्कुराते हुए अपना मुंह खोलकर अपने बेटे के उस सख्त लुंड को मुंह में ले ली और उसे छोड़ने लगी.







ओह! बियर और स्कॉच का वह कॉकटेल बहुत hi मनमोहक स्वाद दे रहा था और में अपने बेटे के लुंड को चूसकर साफ़ कर दी और सारा लगा हुआ बियर और स्कॉच पि ली. अब उसने मेरे मुंह से अपना लुंड निकाला और उसे व्हिस्की और वाइन के गिलास में डुबोया और फिर अपना डूबा हुआ लुंड इस बार मेरी बेटी को चूसने दिया.. , मेरी बेटी ने भी वैसा hi किया जैसा में करि थी.







अब ऐसा सिलसिला तब तक चला जब तक मेरे बेटे ने ग्लास में अपना ड्रिंक ख़त्म नहीं कर लिया और हमने भी अपना ड्रिंक ख़त्म कर लिया

. मेरे बेटे ने म्यूजिक सिस्टम में कुछ संगीत चड़स लगाई, और हम तीनों नाचने लगे, लेकिन इस बार नग्न होकर, म्यूजिक के धुन पर. मैं डांसर नहीं हूँ लेकिन में धुन पर डांस करने की बहुत कोशिश की, लेकिन मेरी बेटी और बीटा अच्छे डांसर थे और संगीत की धुन पर बहुत अच्छे से थिरक रहे थे. मेरी बेटी अपने कूल्हों को बहुत अच्छे से हिलाते हुए अपने स्तन उछाल रही है. अब मेरे बेटे ने फिर से हमारे दोनों स्तनों को दबाना शुरू कर दिया, जिससे माँ और बेटी हम दोनों संगीत की धुन पर नाचने लगे और अपने कूल्हों को हिलाते हुए बेटे के कठोर लुंड को हिलाने लगे. ओह, पूरा दृश्य वास्तव में कामुक था. थोड़ी देर डांस करने के बाद ड्रिंक्स का एक और राउंड ख़त्म करने के बाद हम तीनों बैडरूम में वापस चले गए.

अब मैं बिस्तर पर लेट गई और अपने बेटे को देखकर बुरी तरह मुस्कुराई और उससे मेरी चुदाई करने के लिए कही!!! काफी बोल्डली, में बिना किसी झिझक के बोली. मेरा बीटा नमन, मुझे देखकर मुस्कुराया, “वह, क्या सेक्सी कामुक माँ है मेरी” यह कहते हुए उसने अंजू से थोड़ी देर के लिए मेरी गीली छूट को चूसने के लिए कहा क्योंकि वह माँ- बेटी की लेस्बियन क्रिया देखना चाहता था! मेरी बेटी उसके अनुरोध को मानते हुए मेरी पहले से hi खुली टांगों के पास बैठ गई और मेरी छूट के होंठों को पकड़ कर अपनी चिकनी उँगलियों से उन्हें आसानी से रगड़ने लगी, अपनी जीभ मेरी चित पर रख दी और उसे चूसना शुरू कर दी. ओह! उसकी जीभ मेरी उभरी हुई छूट को आनंद दे रही थी, में उसके सर को अपनी छूट पर पकड़ कर जोर से दबायी.





“ओह अंजू बेटी! मम्मी की छूट चूसो प्लीज़ ओह्ह!” में चिल्ला कर बोली. मेरी बेटी ने मेरी गीली छूट पर बड़ी कुशलता से अपनी उँगलियों और जीभ का इस्तेमाल कर चूसने लगी .. वहां खेलने लगी . कुछ 5-10 मं वहां खेलती रही और मेरा बीटा इसे देख अपने मोठे सख्त लुंड को हिलाते रहा ..

“ठीक है ठीक है अंजू छोडो माँ की छूट , अब मेरी बारी है” मेरे बेटे ने कहा. ओह, मेरे बेटे ने मेरी खुली टांगों के बिच अपना स्थान बना लिया और अपनी लम्बी उँगलियों से मेरी छूट के होंठों को रगड़ने लगा, साथ hi मेरी उभरी हुई छूट की क्लीट को भी रगड़ने लगा और मेरी ख़ूबसूरत सेक्सी छूट को बहुत करीब से देखने लगा.

“ओह! माँ तुम्हारी छूट बहुत सेक्सी लग रही है, सच न अंजू” उसने मेरी बेटी से पूछा. “है! नमन भैया, माँ की छूट का स्वाद भी बहुत अच्छा है कृपया इनकी छूट चूसो” मेरी बेटी बोली. फिर. नमन ने अपनी लम्बी जीभ मेरी छूट में दाल दी, “ओह्ह्ह नमन मेरे बेटे” कहते हुए में उसके सर को दबा दी मेरी बुर पर और, बहुत अच्छे से मेरी छूट चूसी और उंगली की. इसके 5 मिनट के बाद, में मेरे बेटे से मेरी चुदाई के लिए विनती की क्योंकि मैं अपनी गीली छूट में उसका मोटा राक्षसी सख्त लुंड चाहती थी

.मेरे बेटे ने माँ के उसे छोड़ने के अनुरोध को मानते हुए अपना मुंह मेरी छूट से हटा लिया और फिर अपने मुंह से मुझे चूमा जिससे मुझे अपने रास का स्वाद चखने को मिला. इसी बिच मेरी बेटी ने भी मेरी छूट को एडजस्ट करते हुए मेरे बेटे के सख्त लुंड को मेरी छूट के छेड़ पर ठीक से लाकर उसे मेरी छूट में डालने के लिए बोली. ! ओह! मेरे बेटे ने अपने लुंड से एक जोरदार धक्का मारा, और मेरे बेटे का लुंड मेरी बुर के अंदर चला गया. चूंकि हम अभी भी चुम्बन कर रहे थे, में अपनी कमर ऊपर उठाई और उसने अपना लुंड ज़ोर से धकेल दिया मेरी छूट में.. ओह, हम बहुत उत्तेजित हो गए थे, हम दोनों उस चुदाई को चाहते थे! अब बेटे ने अपने मोठे लुंड से मुझे jor-jor से झटके देना शुरू कर दिया.





मेरा बीटा अपनी माँ को अपनी बेहेन, मेरी बेटी , के सामने छोड़ रहा था.. उसका लुंड अपने कूल्हों को अच्छी तरह से हिलाकर मेरी गीली छूट को आनंद दे रहा था, वह मेरी छूट को बहुत जोर से छोड़ रहा था.. उसका लुंड मेरी छूट में गहराई तक जाते हुए उसका मोटा लम्बा लुंड g-spot पर भी बहुत अच्छी तरह से थोक रहा था. अह्ह्ह्ह हाँ. अब मेरी बेटी मेरे स्तनों को अपने हाथों में पकड़कर बहुत अच्छे से मसल रही थी , मुझे चूम रही थी और चूस रही थी. ओह ! वे दोनों - मेरा बीटा और बेटी - मुझे स्वर्गीय आनंद दे रहे थे! जब मेरा बीटा मुझे छोड़ रहा था तो में भी अपनी बेटी की छूट को रगड़ रही थी उँगलियों से .. . ओह मेरी बेटी की छूट, वह कितनी गीली थी.. , ओह मेरी उंगलियां उसकी छूट में कितनी गहराई तक फिसल रही थी.. !







मेरा बीटा मुझे इतनी ज़ोरों से छोड़ रहा था की मैं बहुत ज़ोर से झरने लगी…. , आठ ओह्ह्ह उफ्फ्फ ममम हैं ममम करते हुए ..

ओह, उस बैडरूम में चुदाई की आवाज़ हमारे मिलान से आ रही थी, माँ और बेटे का पवित्र मिलान. अब मेरा नमन बेटे ने मेरी पहले से hi जहर चुकी छूट की चुदाई की अपनी गति और इतनी तेज़ कर दी की पूरा बिस्तर हिल रहा था .. . में उसके कमर को क्रॉस लेग से पकड़ते हुए उसकी पीठ को अपने हाथों से पकड़ लिया और मेरा बीटा अपना बड़ा लुंड मेरी छूट में गहराई तक पेलता रहा.





वह मुझे छोड़ते हुए चुम रहा था .. मैं भी उसे मेरे साथ की जा रही चुदाई की वासना में डूबी हुयी उसके होठों को बहुत चूम रही थी. haaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa, एक घंटे की चुदाई के बाद आखिरकार मेरे बेटे ने आह करते हुए अपने गाढ़े वीर्य से मेरी बुर और एक बार भरने लगा .. उसका लुंड का मेरी छूट में बीज तोह बच्चे पैदा कर दे!!!

हाँ! मेरे बेटे ने मेरी बुर को फिर से अपने वीर्य से भर दिया.... ओह! हे भगवान, हमारी धमाकेदार चुदाई के बाद वह मुझ पर गिर पड़ा. ओह नमन बीटा! यह कहते हुए में उसे कास कर पकड़ ली , और अपनी बेटी को भी चूमा की उसने मुझे अपने बेटे को उसी के सामने छोड़ने की इजाजत दित hi आज…. . हम तीनों ek-doosare को देखकर मुस्कुराए और थोड़ा आराम करने लगे एक दूसरे के बाँहों में!!! नमन बीच में लेता हुआ था और हम दोनों maa-beti उसके agal-bagal में !!!!!!!



 
सुबह हुयी और हम सब वापस अपने घर चले गए .. अगला पूरा हफ्ता नमन की नयी प्रोजेक्ट में वह बिजी हो गया था .. आज प्रोजेक्ट का आखरी दिन खतम हुआ था ..

शाम को 9 बजे वह घर आया और खाना खा कर सीधे मेरे पास आ गया. घर पर न बेटी थी न पति और न थी जमुना बाई..

नमन खाना खाकर मेरे पास आते hi उसने मुझे ज़ोर से हुग किया और मेरे पूरे फेस पे किश करने लगा. मैंने भी उसको टाइट से पकड़ लिया अपने सॉफ्ट बड़े बड़े चुचों में दबा के. मैंने अपनी थिगह उसकी थिगह से चिपका के अपनी छूट उससे रगड़ी. मेरे लिप्स को किश और चिउ करने के बाद और मेरी ज़बान का टास्ते लेने के बाद नमन ने मुझे छोड़ा.

जैसे hi मेरे नीज बीएड पे तिकी, मैंने अपनी साड़ी अपनी हिप्स के ऊपर उठा ली, नमन को अपनी प्यारी गोल मटोल गांड दिखा दी एक पतली सी नायलॉन पंतय में. नमन ने अपना फेस मेरी छूट और गांड में घुसा दिया. मैं प्लेअसुरे से मोअन कर रही थिस और नमन को पंतय निकलने को कह रही थी.





उसने मेरी छूट, बटक्स और गांड के होल को किश किया और मेरे फ्लेशी बटक्स को पेटीकोट के ऊपर से hi काटा और मेरी बदन की खुशबु को डीपली िंहले करा. उसका लुंड एक आयरन रोड की तरह उसकी पंत में खड़ा हो गया था और मैंने उसके मोठे लुंड को उसकी पंत से निकल दी. मेरी तइस को तिघ्टलय पकड़ के नमन ने मेरी पंतय निकल दी.

नमन ने मेरी छूट के दाने को अपने लिप्स में लेके अपनी टंग से तैसे किया. मैं ज़ोर ज़ोर से प्लेअसुरे से मोअन कर रही थी. मैं अपनी हिप्स ऐसे घुमा रही थी जैसे छोड़ रही हूँ.

'यह, बीटा मुझे पागल कर रहा है. हाँ, मेरी छूट को चूस बेबी... ऊऊऊह्ह्ह्ह, बस ऐसे hi काट मेरी छूट के लिप्स और अपनी टंग अंदर तक दाल डार्लिंग, काट मेरी छूट बीटा यह या ऐसे hi ममम हाँ थोड़ा और ज़ोर से अब मेरी क्लीत्ती को तैसे कर बीटा उफ्फ्फ ओह्ह्ह्ह मममम वहीँ वहीँ ओह मैं झड़ने वाली हूँ बीटा.. मेरा जूस निकल रहा है ोू उफ्फ्फ पी ले बेबी पी ले अपनी माँ की छूट का जूस अह्ह्ह्हह'

मैं उसके विशाल लुंड को हाथ में ले कर सहलाती हुई बोली,









“ है राम! नमन तुझे पता है तेरा लुंड कितना लुम्बा और मोटा है? इतना बारे लुंड आदमिओं का तो होता नहीं, ऐसा लुंड तो घोड़े का होता है.”

“ हाँ माँ एक दिन नापा था. एक फुट लुम्बा है और गोलाई में 8 इंच है.”

“ बाप रे! लुंड है या बिजली का खुम्बा? पता नहीं मैं इसे झेल भी पाउंगी या नहीं. ”





“ क्यों माँ पापा का भी तो खासा मोटा है. उनका लुंड तो आपकी छूट में बरी आसानी से जा रहा था.”

“ उनका लुंड तो आदमी का लुंड है न घोड़े का तो है नहीं और न hi मैं घोरी हूँ जो इस लुंड को झेल सकूँ.” मैं प्यार से नमन के विशाल लुंड पे आगे पीछे हाथ फेरने लगी. मेरी उंगलिओं के घेरे में तो उसका लुंड आ नहीं रहा था. आज मेरा बरसों का सपना साकार होने जा रहा था लेकिन डर भी लूग रहा था की कहीं मेरी छूट पहात न जाए. नमन ने मुझे बाँहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगा. एक हाथ उसने मेरी टांगों के बीच दाल दिया और मेरी छूट को अपनी मुठी में भर लिया. धीरे धीरे वो मेरी लुम्बी लुम्बी झांटों में हाथ फेर रहा था और कभी कभी छूट की दोनों फांकों के बीच ऊँगली रैगर देता. फिर उसने दोनों हाथों से मेरे विशाल शूटरों को सहलाना शुरू कर दिया और उसका लुंड मेरी छूट से टकराने लगा. मैंने पंजों के बल ऊपर हो कर उसके लुंड को अपनी टांगों के बीच में ले लिया. ऐसा लूग रहा था जैसे मैं किसी पेअर की मोती टहनी पे टांगें दोनों तरफ किये लटक रही थी. नमन का उतावलापन बढ़ता जा रहा था. मेरे शूटरों को मसलता हुआ bola,Maa आपके चूतर भी बहुत सेक्सी हैं.” मैं व्वस्ना की आग में बुरी तरह जल रही थी. नमन फिर बोलै,

“ अब छोडूं माँ?”

“ हूं, छोड़ ले”. नमन ने मुझे अपनी बाहों में उठा के बिस्टेर पर चित लेता दिया. उसने मेरी टांगों को चौरा किया और मोर के मेरी छाती से लगा दिया. इस मुद्रा में मेरी फूली हुई छूट और भी ज़्यादा उभर आयी और उसका मुंह ऐसे खुल गया जैसे बरसों से लुंड की प्यासी हो. नमन गौर से मेरी छूट के खुले हुए छेड़ को देख रहा था. फिर अचानक उसने मेरी टांगों के बीच मुंह दाल दिया. वो जीभ से मेरी छूट के खुले हुए होंठों को चाटने लगा

Aa….aaah नमन ये क्या कर रहा है? अअअअअ………..” बहुत मज़ा आ रहा था. नमन छूट के कटाव में और कभी छूट के अंडर जीभ पेलने लगा. पहली बार किसी लड़की की छूट चाट रहा था लेकिन अनारी बिकुल नहीं लूग रहा था. उसने मेरी छूट को अच्छी तरह छाता और जितनी अंडर जीभ दाल सकता था उतनी अंडर जीभ को घुसइरा. मेरी छूट बुरी तरह रूस छोड़ रही थी. मेरी झांटें नमन के मुंह में घुस गयी थी लेकिन उसकी परवाह किये बिना वो मेरी छूट छाते जा रहा था. मेरे मुंह से “ …आए, …. उह उवि मायआ…. आआह” जैसे वासना भरे शब्दों को सुन कर उसका जोश और भी बढ़ गया था. मैंने भी जोश में आ कर उसका मुंह अपनी छूट पे मसल दिया. मेरी छूट तो गीली थी hi, झांटें भी गीली हो चुकी थी. नमन का चेहरा मेरे रूस से सुन गया. मुझ से और नहीं सहा जा रहा था. एक बार तो झाड़ भी चुकी थी. मैं नमन के मुंह को अपनी छूट पे रगरते हुए बोली,

“ बस कर नमन, अब छोड़ अपनी माँ को.” नमन ने उठ कर अपने मोठे लुंड का सुपर मेरी छूट के छेड़ पर टिका दिया,

“ इज़ाज़त हो तो पेल दूँ माँ?”

“ ोूफ बदमाश ! अब तुंग मत कर. इतनी देर से टांगें चौरी कर के अपनी छूट तेरे हवाले क्यों की हुई है? अब छोड़ भी मेरे राजा.”

“ तो ये लो माँ.” ये कहते हुए नमन ने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ ोी maa…….aa…..aaaaaah धीरे, तेरा बहुत मोटा है.” नमन का लुंड पहच से मेरी छूट को चीरता हुआ 4 इंच अंडर घुस गया. उसने एक बार फिर लुंड को बाहर खींच के एक और ज़ोर का धक्का लगाया.

“ Aaaaaaa……hhhh….ooooohhhhhh.”





लौड़ा 7 इंच घुस चुक्का था और मुझे ऐसा लूग रहा था की अब मेरी छूट में और जगह नहीं है. मेरी वासना के साथ मेरे दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी. अभी तो 5 इंच और अंडर जाना बाकी था. इससे पहले की मैं कुछ कहती नमन ने पूरा लौड़ा बाहर खींच के पूरी ताकत से एक भयंकर धक्का लगा दिया.

“ Aaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiii………ouiiiiii… म्मम्माआआआ मर गईइइइइइ आआह्ह्ह्ह. Aaa…….aaaaaahhhh ……ोुह्ह्हह्ह छोड़ मुझे a.aaa…..aaaaaaaah मैं मर जाउंगी” इस भयंकर धक्के से वो मोटा तना 10 इंच अंडर घुस गया था. उस मोठे लौड़े ने मेरी छूट इतनी फैला दी की बस फटने को हो रही थी. अंडर जाने की तो बिलकुल जगह नहीं थी. है राम! क्या मोटा लुंड हैं मेरे बेटे का उफ्फ्फ्फ़.









“ नमन बस कर मेरे राजा अब और अंडर मूत दाल. मर जाउंगी. तेरा बहुत बारे है.”

“ माँ मैंने सुना है लुंड कितना hi बारे क्योंना हो औरत की छूट में समां hi जाता है.” एक तरफ डर भी लूग रहा था और दूसरी तरफ नमन के एक फुट के लौड़े से चुदाई का मौका भी नहीं खोना चाहती थी. जब तक मरद का पूरा लौड़ा छूट में न जाए टब तक चुदाई का मज़ा hi क्या. नमन थोड़ी देर बिना हिले मेरे ऊपर पारा रहा और फिर जब थोड़ा दर्द कम हुआ तो धीरे धीरे लुंड को मेरी छूट में अंडर बाहर करने लगा. इन छोटे छोटे धक्कों से मेरी छूट फिर से गीली होने लगी. अचानक उसने पूरा लौड़ा बाहर खींच के बहुत hi ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ आयआईईईई….. आआअह्ह्ह्ह …..ऊऊऊओह्ह …माआ….. iisssss………aaahhh…..iiisssss. फॉर डालेगा ? इतनी बेरहमी से छोड़ रहा है अपनी माँ को. तेरी सगी बहिन हूँ. Aaaa…hh…. कुछ तो ख्याल कर. ोोीी…. सुच मच पहात जाएगी, बेशरम!” इस धक्के से नमन का लौड़ा जार तक मेरी छूट में समां गया था. उसके मोठे मोठे बॉल्स मेरी गांड से टकरा रहे थे. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की मेरी छूट नमन का एक फुट लुम्बा लौड़ा निगल गयी थी. दर्द तो बहुत हो रहा था लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था.

“ अब जब तूने ले hi ली है तो क्यों न अच्छी तरह से दूँ. मैं चाहती हूँ की आज तुझे मेरी बुर को छोड़ने का पूरा मज़ा मिले. जी भर के छोड़ ले अपनी प्यारी माँ को.” नमन ने मेरी चूचीऑन दोनों हाथों में पाकर के फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. मैं भी चूतर उचका उचका के उसके धक्कों का जबाब दे रही थी. नमन लौड़ा पूरा निकाल के जार तक पेल रहा था. उसके बॉल्स मेरी गांड से टकरा रहे थे. मेरी छूट इतना ज़्यादा रूस छोड़ रही थी की नमन के हेर धक्के के साथ मेरी छूट में से… पहच… पहच …. पहच……… …phach…phach …..पहच……. पहच …..phach……phach और मेरे मुंह से ाःह…. ाः…. आआआआआईईई …..aaaaaahh……oooh….oui …. आए ……..ोी माआ…… ाआअह…. .ओह्ह….. उम्म्म्म…… .का मधुर संगीत गूंज रहा था. नमन के मोठे लौड़े ने मेरी छूट इतनी ज़्यादा चौरी कर दी थी की फटने को हो रही थी. जब जार तक लुंड अंडर पेलता तो ऐसा लगता जैसे छूट फॉर के छाती में घुस जाएगा. शायद नमन का लुंड दुनिया के सबसे बारे लौडों में से एक हो. इतना लुम्बा और मोटा लौड़ा करोड़ों औरतों में किसी एक औरत को hi नसीब होता होगा. मैं सचमुच बहुत भाग्यशाली हूँ. मैंने टाँगें खूब चौरी कर रहकी थी ताकि नमन को लुंड पूरा अंडर पेलने में कोई रुकावट न हो.

देखो नमन बेटे मैं भी तो औरत हूँ. तेरे जैसे मर्द के जिस्म से जिस औरत का जिस्म रगरता रहे, वो औरत गीली काफी होगी. और फिर तेरा खड़ा हुआ लौड़ा भी तो मेरे बदन और मेरी छूट से रैगर रहा था. इतने मोठे लौड़े की रैगर खा कर किसी भी औरत की छूट गीली हो जाएगी.” मैं चूतर ऊपर उचका के नमन का पूरा लुंड अपनी छूट में लेती हुई बोली. क्या दुमदार मरद था मेरा बीटा नमन ! एक घंटे से ज़्यादा तो हो hi चुक्का था छोड़ते हुए. फिर भी झरने का नाम नहीं ले रहा था. उसके पहले भी आधे घंटे तक उसका लुंड मेरी छूट में फंसा हुआ था. मैं तो दो बार झाड़ चुकी थी. मेरी टांगें इतनी देर से फैली होने के कारण दर्द करने लगी थी. विकी के लम्बे, मोठे लौड़े के दमदार धक्कों से मेरी छूट में मीठा मीठा दर्द हो रहा था. छुड़वाने में इतना मज़ा कभी नहीं आया था. नमन ने फिर अपना लुंड मेरी बुर से अचानक से निकल लिया..

में बस नमन के खड़े मोठे लुंड को देखती रही ..













“ऐसे क्या देख रही हो माँ? अब आओ न माँ मेरे लुंड पे बैठ जाओ. आपकी टांगों को आराम मिलेगा.”“ बारे ख्याल है तुझे अपनी माँ का ! लेकिन तेरे इस खम्बे पे चढ़ने के लिए तो मुझे खड़ा होना पड़ेगा.” मैं नमन के दोनों और टाँगें कर के बिस्टेर पे कड़ी हो गयी. नमन की आँखें मेरी टांगों के बीच में लगी हुई थी. उसके लुंड का सुपर भी मेरी छूट को ललचायी नज़रों से देख रहा था. मैंने बहुत धीरे धीरे बैठना शुरू किया. जैसे जैसे मैं नीचे होने लगी वैसे वैसे मेरी टांगें चौरी होने लगी. टांगें चौरी होने के साथ साथ घनी झांटों के बीच से मेरी छूट नज़र आने लगी. अब मेरी छूट नमन के तने हुए लौड़े से सिर्फ 6 इंच ऊपर थी. टांगें खूब चौरी होने के कारण छूट की दोनों फांकें भी फैल गयी और छूट के खुले हुए होंठ और छेड़ नज़र आने लगा. नमन के मोठे लुडे ने मेरी छूट के छेड़ को खूब चौड़ा कर दिया था. नमन ऐसे कामुक नज़ारे को देख के बेहाल हो रहा था. जब मेरी छूट नमन के सुपर से सिर्फ एक इंच ऊपर थी तो अचानक नमन बोलै,

“ रुको माँ, कड़ी हो जाओ.” मैं कड़ी हो गयी.

“ क्या हुआ ? माँ को छोड़ के मन भर गया?”

“ नहीं माँ ! आपको छोड़ के तो मेरा मन कभी नहीं भर सकता. ज़रा आगे आओ.” मैं आगे हो गयी.

“ और आगे” मैं और आगे हो गयी.

“ ओह हो ! और थोड़ा आगे.”

“ तू क्या चाहता है ?” मैं और आगे होते हुए बोली. अब मैं ठीक नमन के मुंह के ऊपर थी.

“ अब ठीक है. बैठ जाओ.” मैं समज़ह गयी नमन मेरी छूट वापस चाटना चाहता था. मेरा दिल उत्तेजना से धक् धक् करने लगा. मैंने फिर बैठना शुरू कर दिया. जैसे जैसे नीचे की और होती गयी मेरी टांगें फैलने लगी और मेरी फूली हुई छूट झांटों के बीच से झाँकने लगी. छूट के चारों तरफ के बाल बुरी तरह से छूट के रूस में साणे हुए थे. नमन की आँखें मेरी छूट पे तिकी हुई थी जिसका मुंह नमन के मोठे लौड़े ने चौड़ा कर दिया था. मैं ऐसे बैठ गयी जैसे लड़किआं पेशाब करने बैठती हैं. मेरी छूट नमन के होंठों से सिर्फ आधा इंच ऊपर थी. नमन मेरी छूट के अंडर झाँक सकता था क्योंकि उसके मोठे लुंड ने मेरी छूट के छेड़ को फैला जो दिया था.

“ ले बैठ गयी. ऐसे क्यों बैठा दिया ?”

“ ाः ! क्या मादक खुशबू है. इतनी मादक खुशबू तो आपकी पंतय में भी कभी नहीं आयी.”

“ अरे बुद्धू, मैं कितनी गीली हूँ. है तो तेरे लुंड का hi कमाल जो इतना गीला कर दिया.”

“ माँ, इस खूबसूरत छूट को चाटने के सपने बचपन से ले रहा हूँ.” ये कहते हुए नमन ने दोनों हाथों से मेरे चूतर पाकर के अपना मुंह मेरी छूट से चिपका दिया. नमन मेरी छूट को पागलों की तरह चाटने लगा. बीच बीच में अपनी जीभ छूट में घुसा देता.









नमन का मुंह मेरी छूट और घनी झांटों में धक् गया था. मैं भी बहुत उत्तेजित हो गयी और मैंने नमन का सर पाकर के ज़ोर से अपनी छूट में मसल दिया. मेरे मुंह से सिसकारिआं निकल रही थी और मैं एक बार फिर झाड़ गयी. नमन का मुंह मेरी छूट के रास से सुन गया. बेचारा सांस भी नहीं ले पा रहा था लेकिन मेरी छूट में मुंह धंसा के चाटता hi रहा.

“ नमन छोड़ मुझे ये क्या कर रहा है ? तूने मुझे ये कैसे बैठा रखा है?”

“ सुच माँ मज़ा आ गया. ऐसे छूट फैला के बैठी हुई आप बहुत hi सेक्सी लूग रही हो.”

“ हूत पागल ! ऐसे तो पेशाब करने बैठते हैं.”

“ Hai…..maa. पेशाब करते वक़्त आपकी छूट से पसससससस….. की आवाज़ सुन के तो मेरा लुंड कई बार खड़ा हो चूका है. जब भी आप बाथरूम में पेशाब करने जाती हो तो मैं दरवाज़े पे कान लगा के सुनता हूँ. क्या जब से आपकी शादी हुई है टब से hi आपकी छूट पेशाब करते हुए और भी ज़्यादा आवाज़ करने लगी है. ऐसा हैं माँ?”

“ शादी के बाद का ो अत नहीं लेकिन तेरा यह घोडा इतने महीनो से ले रही हूँ उससे तोह ज़रूर मेरी छूट का छेड़ चौरा हो गया है, शायद इसीलिए ज़्यादा आवाज़ करने लगी होगी.”

“ आपकी चुत से निकलती हुई पससससससस……. की आवाज़ बहुत hi मादक होती है. अब तो आपकी छूट इतने ज़ोर से आवाज़ करती है की दरवाज़े से कान लगाने की भी ज़रुरत नहीं पार्टी. पूरे घर को पता लूग जाता है की मेरी प्यारी माँ पेशाब कर रही है.”

“ अब तू चुप कर बदमाश, नहीं तो मैं तेरे ऊपर hi पेशाब कर दूंगी.

“ कर दो न माँ. आपकी छूट से निकलती हुई अमृत की धार देखने के लिए बहुत तरस रहा हूँ. करो न माँ प्लीज…” नमन दोनों हाथों से मेरे शूटरों को दबा कर मेरी छूट को चूमता हुआ बोलै. नमन इसकदर मेरी छूट का दीवाना था मुझे पहली बार पता चला.

“ तू माँ को छोड़ना चाहता है या नहीं ? अगर नहीं छोड़ना है तो मुझे जाने दे.”

“ हाँ माँ ज़रूर छोडूंगा लेकिन उससे पहले आपकी इस खूबसूर्रत घनी झांटों से भरी छूट से निकलती अमृत की धार देख लूँ और pssssssss…..ka मधुर संगीत तो सुन लूँ. उसके बाद आपकी छूट छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.”

“ तू तो पागल हो गया है. मैं जा रही हूँ.” मैं झूठा गुस्सा करते हुए बोली.

“ कहाँ जा रही हो ? उठोगी तो मैं आपकी छूट काट लूंगा.” ये कहते हुए उसने मेरे शूटरों को पाकर के मेरी छूट की दोनों फांकों को अपने दांतों के बीच दबा दिया.

“ oooiiii….aaah..ye क्या कर रहा है नालायक!”

“ करो जल्दी से नहीं तो ज़ोर से काट लूंगा.” नमन मेरी छूट पे दांतों का दबाव बरता हुआ बोलै. बाप रे, ये तो सचमुच hi मेरी छूट को काट लेगा. इस तरह छूट खोल के नमन के ऊपर पेशाब करने की कल्पना से hi मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक् धक् करने लगा. अजीब तरह की उत्तेजना का अहसास हो रहा tha.Ye तो काम कला का एकदम नया नुस्खा था. लेकिन नमन के ऊपर पेशाब कैसे कर देती, और वो भी उसके मुंह पे. हालांकि पेशाब का प्रेशर ज़्यादा होता जा रहा था क्योंकि नमन करीब दो घंटे से छोड़ रहा था और मैं तीन बार झाड़ चुकी थी. नमन छूट की फांकों के बीच के कटाव में जीभ फेर रहा था और कभी कभी फूली हुई छूट को काट लेता.

“ नमन प्लीज मुझे छोर दे. अगर तू देखना hi चाहता है तो मैं तेरे सामने बाथरूम में पेशाब करने को तैयार हूँ.”

“ नहीं मेरी प्यारी माँ, आपकी छूट से निकलती हुए धार देखने के लिए ये बिलकुल सही मुद्रा है. अब कर भी डालो. उसके बाद तो आपकी छूट लेने में बहुत hi मज़ा आएगा.”

“ नमन मैं तेरे ऊपर कैसे पेशाब कर दूँ ? तू तो बिलकुल पागल हो गया है. प्लीज नमन तू मेरे साथ कुछ भी कर ले मैं कुछ नहीं कहूँगी लेकिन इस बात की ज़िद मूत कर.” नमन तो मानो मेरी बात सुन hi नहीं रहा था. वो पागलों की तरह मेरी छूट में मुंह दे कर चाट रहा था. फिर वो ज़ोर ज़ोर से मेरे शूटरों को मसलने लगा और एक ऊँगली से शूटरों के बीच की दरार को सहलाते हुए ऊँगली मेरी गांड के छेड़ पे रख दी. अब तो उत्तेजना के मरे मेरा बुरा हाल था. अचानक नमन ने मेरे शूटरों को बहुत ज़ोर से दबाया और ऊँगली को गांड के अंडर सरकते मेरी छूट की फांकों को ज़ोर से काट लिया. मैं और न सहन कर सकीय और मेरी छूट में से पेशाब निकल hi पारा. क्योंकि नमन ने मेरी पूरी छूट अपने मुंह में दबा राखी थी, पेशाब की गरम गरम तेज़ धार जिसमे मेरी छूट का रूस और नमन का वीर्य भी मिला हुआ था सीधे नमन के मुंह में घुस गयी. नमन हरबारा गया. मैंने बरी मुश्किल से पेशाब को रोका. नमन का चेहरा पेशाब से गीला हो गया था. काफी सारा पेशाब तो वो पी गया था.

“ है माँ मज़ा आ गया. अब थोड़ा सा पीछे हो के मेरे ऊपर पेशाब करो ताकि मैं आपकी छूट से निकलती हुई धार देख सकूँ. मैं थोड़ा सा पीछे हो गयी और इस बार पूरे प्रेशर के साथ पेशाब करने लगी. Psssssssssss……………..ki आवाज़ से पूरा कमरा गूंजने लगा. काफी देर से पेशाब रोक रखा था इसलिए धार बहुत तेज़ निकली. पेशाब की धार नमन की छाती पे लूग रही थी. नमन बारे ध्यान से मेरी छूट से निकलती हुई धार को देख रहा था. पूरा बिस्टेर गीला हो गया. नमन तो पूरा पेशाब में नाहा hi गया था. जब पेशाब कर चुकी तो नमन ने फिर से मेरी छूट में मुंह दे दिया और मेरी गीली छूट और झांटों को चाट चाट के साफ़ करने लगा.

“ अब तो खुश है न ? जा अब नाहा ले.”

“ माँ आज तो मैं सचमुच बहुत खुश हूँ. आपकी छूट से निकलती धार को देखने का नज़ारा बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. अभी नहीं आपको पूरी तरह से छोड़ के hi नहाऊंगा.” बाप रे नमन आदमी नहीं घोरा था. दो घंटे से छोड़ रहा था लेकिन झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा था.











“ छोड़ hi तो रहा है दो घंटे से, अब और कैसे छोड़ेगा? तुझमे बहुत स्टैमिना है नमन, मैं तो तीन बार झाड़ चुकी हूँ और तू एक बार भी नहीं.”

“ माँ अभी कैसे झाड़ सकता हूँ ? आज के बाद आप फिर कभी छोड़ने नहीं डौगी, इसलिए आज तो आपके साथ सुब कुछ करके hi झाड़ूंगा.”

“ सुब कुछ से क्या मतलब ? अभी और क्या करेगा ? पता नहीं क्या क्या काम करवा रहा है mujhase.Achha चल अपने और मेरे बदन को पोछ तो ले. ये बिस्टेर भी गीला हो गया है. ”

“ ठीक है माँ, पहले अपना गीला बदन पोछ लेते हैं.” ये कह कर हम दोनों उठ गए. नमन ने टॉवल से अपने और मेरा बदन पर से पेशाब के गीलेपन को पोछा. फिर उसने एक सूखा गद्दा ज़मीं पर दाल दिया, और बोलै,

“ माँ अब आप घोरी बन जाओ. आप मुझे घोरा बोलती हो न. अब मैं आपको घोड़े की तरह छोडूंगा.” नमन वाकई काम कला में बहुत माहिर लूग रहा था. विश्वास नहीं होता था की सिर्फ किताब पढ़ कर और चुदाई की पिक्टूरें देख कर इतना सुब सीख गया था. मैं घोरी बनते हुए बोली,

“ आजा मेरे घोड़े छोड़ अपनी घोरी को अपने एक फुट के लुंड से.” मैंने टांगें खूब चौरी कर के शूटरों को इस प्रकार ऊपर कर दिया की नमन को मेरे मोठे मोठे शूटरों के बीच से छूट का खुला हुआ मुंह साफ़ दिखाई देने लगा. नमन मेरे पीछे घोरा बन गया और फिर से अपना मुंह पीछे से मेरी छूट में दे दिया. वो पीछे की और उभरी हुई मेरी छूट को चाटने और दांतों से काटने लगा. बहुत hi आनंद मिल रहा था. मेरी छूट ने बुरी तरह रास छोड़ना शुरू कर दिया. नमन छूट के पूरे कटाव में जीभ फेरता और बीच बीच में जीभ छूट में घुसेड़ देता. उसके होंठ तो मेरी छूट से चिपके हुए थे थे लेकिन नाक मेरे शूटरों के बीच घुस गया था. मैंने चूतर और भी पीछे की और उचका दिए.

इस वक़्त मैंने चूतर इस तरह से उचका के फैला रखे थे की मेरे भारी शूटरों के बीच मेरी गांड का छेड़ भी नमन की आँखों के सामने था. नमन मेरे शूटरों को मसलता हुआ गहरी सांस लेकर बोलै,

“ माँ आपके चूतर बहुत hi सेक्सी हैं. मालुम है सारा कॉलेज आपके इन कातिलाना शूटरों पे मरता था ? लड़के कहते थे की आपकी गांड लेने में तो ज़न्नत का मज़ा मिलेगा.”

“ तेरे इरादे मुझे ठीक नहीं लूग रहे नमन. कहीं तू मेरी गांड मारने के तो चक्कर में नहीं है ?”

“ माँ आपने कहा की मैं जहाँ चाहूँ चुदाई कर सकता हूँ.”

“ हाँ मेरे बेटे जो चाहे कर लेकिन तेरा ये मोटा खम्बा मेरी गांड में कैसे जाएगा ? और फिर अभी तक तूने आज मेरी छूट तो अच्छी तरह से छोड़ी नहीं”

“ ये बात ठीक है माँ पहले मैं आपकी छूट तो जी भर के छोड़ लूँ, बाद में गांड के बारे में सोचेंगे. लेकिन माँ आपने कभी घोड़े को घोरी की चुदाई करते देखा है?”

“ नहीं मैं कभी नहीं देखि"

तो मैं बताता हूँ. पहले एक घोरी घोड़े के लुंड को चाट के खरा करती है. जब घोड़े का लुंड तुन जाता है टब जिस घोरी की चुदाई करनी होती है उसे लाया जाता है. उसके बाद hi घोरा उस घोरी की जम के चुदाई करता है. अब अगर मुझे भी आपको घोरी की तरह छोड़ना है तो आप मेरे लुंड को चुदाई के लिए तैयार तो करो. लो मैं घोरा बन जाता हूँ.” ये कह कर नमन भी घोरा बन गया. मैं समझ गयी नमन मुझसे क्या चाहता था.

“ ठीक है घोड़े राजा ! पहले मैं आपके लुंड को चुदाई के लिए तैयार करती हूँ.” नमन घोरा बना हुआ था और उसका एक फुट लुम्बा लौड़ा नीचे ऐसे झूल रहा था जैसे वाकई किसी घोड़े का लुंड हो. मैं तो बरसों से इस लौड़े को चूमने के लिए तरस रही थी. सुच कहूं तो गधे या घोड़े के लम्बे मोठे लटकते हुए लुंड को जब भी देखती, मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो जाती. हमेशा सोचती की काश मैं ऐसे लुंड को कभी चूस पाऊं. नमन का लुंड भी किसी घोड़े के लुंड से कम नहीं था. मैं घोरी बने हुए hi नमन के पीछे गयी. नमन के बारे बारे बॉल्स लटक रहे थे. मैंने उसकी टांगों के बीच में मुंह दाल कर उसके बॉल्स को चाटना शुरू कर दिया. क्योंकि नमन घोरा बना हुआ था, उसके लुंड को चूस पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.









नमन बोलै.

“ माँ अब आप चित लेत जाओ तभी आप इस घोड़े का लुंड चूस पाओगी.” मैं चित लेत गयी और नमन घोरा बना हुआ मेरे मुंह के ऊपर आ गया. उसका एक फुट लुम्बा लुंड अब मेरे मुंह के ऊपर झूल रहा था. बरसों पहले जब एक रात नमन सो रहा था टब मैंने उसके लुंड को चूमा था. उस दिन तो उसका लुंड ढीला उसकी जाँघों पर पारा हुआ था. लेकिन आज तो पूरा तना हुआ था और मेरी छूट का रास पी पी कर खासा मोटा हो गया था. लुंड का फूला हुआ सुपर बहुत भयंकर लग रहा था. धीरे धीरे नमन ने अपने लुंड के सुपर को मेरे होंठों पे टिका दिया. बरसों की मेरी प्यास भरक उठी. मैंने जीभ निकाल के उसके सुपर को चाटना शुरू कर दिया. मेरी जीभ का स्पर्श मिलते hi नमन का लौड़ा फनफनाने लगा. मैं थोड़ा सा उठ कर उसके पूरे लौड़े को ऊपर से नीचे तक चाटने लगी. बाप रे ! कितना लुम्बा और मोटा था. सुच ऐसा लौड़ा तो बहुत किस्मत वाली औरत को hi नसीब होता है. बीच में उसके बारे बारे बॉल्स भी चाट लेती. मैं नमन के लुंड को मुंह में लेने के लिए तरस रही थी लेकिन घबरा भी रही थी की इतना मोटा लौड़ा मेरे मुंह में जाएगा कैसे? मैंने हिम्मत करके पूरा मुंह फॉर के लुंड के सुपर को मुंह में दाल लिया. ोूफ ! कितना अच्छा लग रहा था. बरी मुश्किल से करीब तीन इंच लुंड मुंह में ले के चूसने लगी. नमन को जोश आ रहा था. उसने हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर दिए. मेरा मुंह तो पूरी तरह खुला हुआ था. नमन इतना उत्तेजित हो गया की वो मेरा सर पाकर के अपने लुंड से मेरे मुंह को छोड़ने लगा. उसका लुंड मेरे गले तक चला गया था. और अंडर पेलता तो मेरा दम hi घुट जाता. थोड़ी देर इस प्रकार मेरे मुंह में लुंड पेलने के बाद नमन घूम गया और अब उसका मुंह मेरी टांगों की और था. उसने झुक के मेरी छूट को चाटना शुरू कर दिया. अब नमन मेरे ऊपर था, उसका लुंड मेरे मुंह में और मेरी छूट उसके मुंह में थी. बहुत hi मज़ा आ रहा था. नमन थोड़ी देर बाद उठता हुआ बोलै,

“ माँ अब इस घोड़े का लुंड घोरी को छोड़ने के लिए तैयार है. चलो घोरी बन जाओ.” मैं उसके लुंड को मुंह से निकाल के फिर से घोरी बन गयी. इस बार मैंने अपनी छाती बिस्टेर पे टिका दी और टांगें खूब चौरी करके चूतर ऊपर की और उचका दिए. मेरी छूट मुंह खोले नमन के लौड़े के लिए तैयार थी. नमन भी घोरा बन गया और जल्दी से एक बार फिर मेरी छूट को चूम कर लौड़े के सुपर को छूट के मुंह पे टिका दिया. मैं नमन के विशाल लुंड को लेने के लिए तैयार थी लेकिन वो भी मुझे तरसा रहा था. हलके से लुंड पे दबाव दाल के मेरी छूट के मुंह को फैला देता लेकिन अंडर घुसने से पहले hi बाहर निकाल लेता. मुझसे नहीं सहा जा रहा था.

“ नमन तुंग क्यों कर रहा है ? पेल दे न प्लीज !”

मेरी उत्तेजना जितनी बढ़ रह थी नमन उतना hi मुझे तारपा रहा था.

“बेटे .. उफ्फ्फ मैं तेरे लुंड की प्यासी हूँ, अब और मूत तारपा प्लीज…. छोड़ न !” मैं शूटरों को पीछे की और उचका कर उसका लुंड छूट में लेने की कोशिश करती हुई बोली.“ जैसा आपका हुकुम.” ये कह कर नमन ने छूट के छहद पे लुंड को टिका के ज़ोरदार धक्का लगा दिया. मैं बुरी तरह से गीली थी. उसका मोटा लुंड मेरी छूट को चीरता हुआ 5 इंच अंडर घुस गया.

“ Aaaaaaaaaiiiiiii……dhere मेरे राजा. आआह्ह्ह्हह…..” नमन ने लुंड सुपर तक बाहर खींच के पूरी ताकत से फिर धक्का लगाया. इस बार के धक्के से उसका लुंड 8 इंच मेरी छूट में दाखिल हो गया.

“ Ooiiiiimaaaa…..aaaaaaaaa िस्स्सस्स्स्स…..” नमन ने फिर पूरा लुंड बाहर खींचा. मैं अब उसके आखिरी धक्के के लिए तैयार थी. उसने मेरे चूतर पाकर के फिर ज़बरदस्त धक्का लगा दिया. इस बार पूरा का पूरा 10 इंच का लौड़ा मेरी छूट में समां गया.

“ oooooiiiiii…maaaaaa….. फॉर देगा क्या?” नमन कभी दोनों हाथों से मेरी लटकती हुई चूचिओं को पाकर के धक्के लगता तो कभी कमर पाकर के और कभी मेरे शूटरों को मसलते हुए पूरा लुंड बाहर निकाल के अंडर पेलने लगता. पहच… पहच… ….phach….phach….phach …… अअअअअ आए…. .issssssss…..oooooohhhh…….aaaahhh phach…phach…….oooooiiiiii…..oooohhhh…aaaaahhhhh… पहच… पहच.













बस सिर्फ ये hi आवाज़ें कमरे में गूंज रही थी. नमन का मूसल तो मानो मेरी छाती तक घुसा जा रहा था. मर्द का लुंड औरत की छूट में सबसे ज़्यादा अंडर दो hi मुद्राओं में घुसता है. एक तो जब औरत मर्द के ऊपर बैठ के चुदवाती है और जब मर्द औरत को घोरी या कुटिआ बना कर छोड़ता है. इसका कारण ये है की मर्द का लुंड तो सामने की और होता है लेकिन औरत की छूट उसकी टांगों के बीच पीछे की और गांड के छेड़ से सिर्फ एक इंच दूर होती है. इस कारण से जब औरत चित लेत के चुदवाती है तो मर्द को औरत की टांगें मोर के उसकी छाती से लगनी पार्टी हैं ताकि आसानी से लुंड पािल सके. कुटिआ बनाने से छूट जो की गांड के छेड़ के नज़दीक होती है खूब उभर जाती है जिससे छूट में लुंड जार तक आसानी से पेला जा सकता है. नमन के धक्के भयंकर हो जा रहे और जब उसका लौड़ा मेरी छूट में जार तक घुसता तो उसकी जांघें मेरे विशाल शूटरों से टकरा जाती. ोूफ क्या तगड़ा लौड़ा था. मैं भी चूतर पीछे की और उचका उचका के नमन के धक्कों का जबाब दे रही थी. मेरा पूरा बदन वासना की आग में जल रहा था. एक अजीब सा नशा छाता जा रहा था. नमन मेरी छूट को मुट्ठी में भरते हुए बोलै,

“ माँ छुड़वाते वक़्त आप और आपकी छूट दोनों इतनी आवाज करते हैं की परोस में भी पता लग जाए की किसी की चुदाई हो रही है.”

“ तो इसमें शर्माने की क्या बात है? परोसी की बीवी अपने पति को नहीं देती क्या.?”

“ हाँ माँ लेकिन आप तो अपने पति को नहीं अपने खुद के बेटे को दे रही हो हहहह”

में तोह नमन के मुँह से .. खुद ऐसी बात सुन कर शर्म से लाल हो गयी और उसके चौड़े साइन में चेहरा छुपाने लगी. ..

मेरा अंग अंग वासना की आग में जल रहा था.

“ नमन मेरी छूट बहुत प्यासी है, इसे अपना वीर्य पीला के इसकी प्यास बुझा दे प्लीज . उंडेल दे सारा वीर्य मेरी छूट में. भर दे इसे अपने वीर्य से. तू चाहे तो इसे छोड़ छोड़ के फॉर दाल. लेकिन अब और तुंग मूत कर. ” मैं पूरी ताकत से चूतर पीछे की और उचकाते हुए और नमन के मूसल को अपनी छूट में पेलते हुए बोली.

नमन भी आख़िरकार झड़ने के काअगर पर आ गया और एक बड़ी लम्बी से आठ और एक आखिर धक्के के बाद मेरी बुर में hi अपने लुंड का गधा माल छोड़ने लगा ..









हम दोनों थक कर लेते हुए थे … की अचानक से दरवाज़ा खुला और मैंने मेरी बेटी सामने कड़ी पायी.. लेकिन में थक कर आँखें बंद होकर लेती रही.
 
इन्सेस्ट स्टोरी रेस्टार्टेड एवरीवन !!!! ❤️❤️❤️
 
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