ओह, मैं सो नहीं सकीय! मैं सुबह शर्मिंदा थी कल रात केव वजह से., वह बहुत शर्मनाक बात थी., मैं उठी, सनउकरनी कॉफी लेकर आई और पूछी की मेरी आँखें लाल क्यों हैं? में उससे कही की मुझे ठीक से नींद नहीं आ रही थी. ओह नै जगह है इसलिए उसने कहा और मुझसे खाली कप ले लिया,
में नहाने के लिए, गर्म पानी तैयार करि फिर, में अपने कपडे उतरे, तौलिया ले लिया, बाथरूम चली गयी, मेरे पिताजी अपनी आरामकुर्सी पर बैठकर सुबह का पेपर पढ़ रहे the,coffi पि रहे थे. में झिझक के साथ उनके पास से गुजरने में बहुत शर्मा रही थी. मैं बाथरूम की और जा रही थी तब पिताजी ने मुझे देखा, में शर्म से अपना सर निचे कर ली और, उनहोंने भी कोई बात नहीं ki,aur फिर से पेपर पढ़ना शुरू कर दी.
मैं नहाने चली गयी, 20 मिनट में नाहा ली और अपने कपडे पेहेन में अपने कमरे में चली गयी. कमरे से बहार आते hi , पिताजी धीरे से बोले “ रत्न! बेटी! तुमने इतनी जल्दी नाहा लिया, आमतौर पर इसमें तुम्हे बहुत समय लग जाता है” वह मेरी और देखकर मुस्कुराये.
“है पापा, लेकिन आज जल्दी हो गया नहाकर.”
“, ठीक है बेटी! जाओ और नाश्ता करो”, उनहोंने मुस्कुराते हुए कहा, में राहत की सांस मिली की मेरे पिताजी मेरे बारे में कल रात के वजह से नाराज़ नहीं हैं,.
मैं रसोई में गयी, ब्रेकफास्ट करि और, मेरी माँ ने भी मेरे साथ ब्रेकफास्ट किया, उनकी सेहत में अब सुधार हो रहा था. हम तीन महिलाऐं में, माँ और वहां की नौकरानी, हॉल में बैठकर खुलकर बातें कर रही थे, हंस रहे थे. अचानक मेरे पिताजी ने मुझे फ़ोन किया, मैं उनके पास गयी, उनहोंने मुझसे पूछा की क्या मैं उनके साथ हमारे खेत में जाने के लिए तैयार हुई,

में इतने दिनों के बाद जा रही थी इसीलिए हाँ कही. जब भी मैं गाँव आती थी तो अपने खेत में जाती थी, अपना ज्यादातर समय वहीँ बिताती थी. खेतों में मेरे बच्चे, पति हमेशा मेरे साथ होते थे, लेकिन इस बार मैं केवल अकेली आयी थी गाँव! मैं अपने कमरे में गई, कपडे बदली. गुलाबी रंग की साडी पहनी, स्लिवकेसस और मनो बैकलेस ब्लाउज. ब्लाउज ऐसी की हाँ केवल 2 धागे मेरी पीठ को पकड़े हुए थे और मेरी नाभि के निचे साडी बाँधी है. में थोड़ा सा मेकअप लगाई , लिपस्टिक, काजल और ब्लश. बदन पर सुन स्क्रीन लोशन, मेरी बाहों के निचे खुशबूदार परफ्यूम . में आईने में खुद को देख रही थी, संतुष्ट थींमेरी गेटउप से. में बाहर आई और मेरे पिताजी हॉल में मेरा इंतज़ार कर रहे थे. वह मेरी और देखकर मुस्कुराये, में माँ को अलविदा कही और मेरे पिताजी के साथ चली गई.

मेरे पिताजी ड्राइवर की सीट पर बैठे. ोेहले हमें subah-subah कुछ खरीदने के लिए पास के टाउन जाना था और फिर हम, खेतों के लिए निकल पड़े.! मेरे पिताजी जिनका नाम हैं रघुनन्दन वह 70 साल के बहुत अच्छे स्वस्थ मर्द थे, अब भी वह पढ़ने का चश्मा नहीं पेहेनते हैं, उनका पेट भी फिट हैं ज्यादा मोठे नहीं हैं, हलके से बाल्डनेस आ रहा था, badi-badi मूंछें हैं, शायद 6 फिट की हाइट है उनकी. उनहोंने अब कार खेत के तरफ चलाना शुरू कर दी था, सुबह के 11 बजे थे और लोग रास्ते में मेरे पिता को शुभकामनाएं दे रहे थे क्योंकि वह बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं गाँव के सरपंच.
, हमारा खेत 100 एकर से अधिक है, बहुत विशाल क्षेत्र हैं , खेत में कुछ गीली भूमि है, नारियल के बगीचे, अंगूर के बगीचे, फूलों की खेती, कुछ सूखी भूमि है. मेरे पिताजी ने हमारे खेत में पानी की टंकी के पास एक सुन्दर फार्महाउस बनाया है, यह बहुत अच्छा है. और बहुत सारे बड़े पेड़ों के साथ शांत जगह, यह स्वर्ग जैसा दिखता है, कोई भी शान्ति महसूस कर सकता है वहां. गाडी चलाते समय मेरे पिताजी ने मुझसे कहा की मैं बहुत बदल गई हूँ और अधिक सुन्दर दिखने लगी हूँ. , उनकी टिपण्णी ने मुझे शर्म से लाल कर दी, मेरे गाल लाल हो गए!
फिर उन्होंने पूछ hi लिया की मैं कल रात क्या कर रही थी!!! हे भगवान, में कुछ उत्तर नहीं दी. लेकिन मेरे पिताजी फिर से पूछ रहे थे
“ रत्न बेटी! शरमाओ मत मुझे बताओ तुम कल रात क्या कर रही थी”
“! पापा कृपया मत पूछिए”, में बहुत शरमाते हुए कही. फिर वह मेरी और देखकर मुस्कुराए, “बेटी, मैं तुम्हारा पिता हूँ, मुझे बताओ शर्माओ नहीं, मुझे बताओ की मेरी बेटी कल रात क्या कर रही थी.”
, में मुस्कुराते हुए, नहीं बोली.
“बेटी बताओ , ! मुझे नहीं पता था की तुम क्या कर रही थी कल रात, अँधेरा था इसीलिए, में कुछ भी नहीं देखा,” वह शरारती ढंग से मुस्कुरा रहे थे. और dhire-dhire और मुस्कुरा रहे थे.
, हे भगवान! “पापा, आपने देखा की मैं क्या कर रही थी”, में उसी स्वर में जवाब दी.
“नहीं बेटी! तेरे पापा बुड्ढे हो गए हैं इसीलिए में नहीं देख पाया.”
“नहीं मेरे पापा बूढ़े नहीं हैं, मुझे पता है आप सब देखे..” में मुस्कुराते हुए कही.,
“बेटी नहीं देखा मैंने.. अब कल रात तोह अँधेरा था .. जो अँधेरे में दिख नहीं पाया उसे तुम अभी उजाले में दिखाओ बेटी तेरे बुड्ढे पापा को उजाले में सब दिखेगा बेटी ..:”
उफ्फ्फ मेरे पापा अपनी hi बेटी को में कल रात की चीज़ें दिखने कह रहे हैं .. हाई dhire-dhire मेरे पिताजी मुझे अपने जाल में खिंच रहे हैं! वह शिकारी है, मैं हिरणी हूँ, हे भगवान.

वह dhire-dhire गाडी चला रहा थे हमारे, पास में कोई भी नहीं था और, हम गाँव से बहुत दूर थे, मैं अपने पिताजी के बोलने के तरीके का आनंद ले रही थी, कोई कठोर शब्द नहीं लेकिन दोहरे अर्थ से भरी हुयी बातें. मैं भी उनसे मेल खा रही थी, आखिर बेटी किसकी हैं , मेरी पापा की hi है न.
उन्होंने पहले hi अपनी बेटी को नग्न देख लिया था. में बोली “पापा, अगर आपको देखना हैं फिर से तो में दिखाउंगी.”
, मेरे पिताजी ने कहा “हाँ बेटी. तुम जो कुछ भी दिखाओगी में देखने के लिए तैयार हूँ.”
“उफ़ नहीं पिताजी .. में शरमाते हुए फिर बोली पहले आप को दिखाना पड़ेगा अपने बेटी को …”
और मेरे पिताजी ने idhar-udhar देखते हुए . पास में कोई नहीं था , किनारे पर कार को स्टॉप कर उन्होंने अपनी धोती को साइड सरका दी और अपने कच्छे को निचे खींचकर अपना लुंड दिखाया! वह उनका लुंड, खड़ा था, 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा, 70 साल की उम्र में भी यह पूरी तरह से जीवित है, हे भगवान, मेरे अपने पिता ने लुंड मेरी नज़रों के सामने था,!

सच में वह मेरे पति के लुंड से बड़ा और मोटा था, आधे गहरे रंग का प्रेकम से उगलता हुआ. वह मुझे देख मुस्कुराये और पूछे की उनका लुंड कैसा है. में थोड़ा शरमाते हुए बोली
“काफी अच्छा है पापा, और अभी भी आपको एरेक्शंस होता है पापा.”
“पिछली रात से यह बहुत परेशानी दे रहा है बेटी, केवल तुम hi इसे ठीक कर सकती हो, क्या तुम इसे ठीक करोगे बेटी?”
उन्होंने मुझसे पूछा. मैं कुछ भी कहने में झिझक रही थी.
“अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो ठीक है छोर दो. तू मेरी बेटी है, इसलिए किसी को यह बात मत बताना. और वह अपना कच्छा पहनना शुरू करने लगे
“, नहीं पापा, मैं किसी से नहीं कहूँगी” और में अपनी छीलनि रेशमी हथेलियों को अपने hi पिता के लुंड पर रख दी! ओह्ह्ह पापा का लुंड ख़ुशी से मेरे हाथ में नाच रहा था, पापा इतने कामुक थे की उनहोंने तुरंत मेरे सर को अपने हाथ से खिंच लिया और मेरे होठों पर एक चुम्बन दे दी! में भी जवाब दी, अब मैं अपने 70 साल के पिता के लुंड पर अपनी छीलनि हथेली फिरा रही थी, ओह, उनका लुंड सख्त था.

इस बुढ़ापे में भी मेरे पिता का लुंड किसी भी योनि को छोड़ सकता हैं यहाँ तक की मेरी भी ., अब यह अपनी खुद की रचना की चुदाई करने के लिए तैयार है. मैं पहले से hi मेरी अपनी रचना से चूड़ी थी, मेरे बेटे से और अब मेरे पिता अपनी hi रचना की चुदाई के लिए तैयार हैं हे भगवान्. में अपने पिता के लुंड को जोरदार स्ट्रोक दिए, उनके मुंह को जोश से चूमने लगी, मेरा पल्लू निचे गिर गया, मेरे पिता मेरे स्तन दबाने लगे, उनके साथ खेलने लगे. कुछ 2 मं बाद अचानक हमने देखा की एक बैलगाड़ी हमारी दिशा में आ रही थी, लेकिन यह दूर थी इसकिये, हम तुरंत अपने कपडे ठीक करके ठीक से बैठ गए. मेरे पिता ने कार स्टार्ट की, बैलगाड़ी वाले ने मेरे पिता को शुभकामनाएं दिन, मेरे पिता ने भी और, हम अपने खेत में पहुँच गए.
मेरे पिता काम देखने गए थे, मैं बरामदे में बैठ कर idhar-udhar देख रही थी.. कुछ देर बाद घूमने का मूड था, मेरे पिता भी मेरे साथ आ गए, हमने यूं hi बात की, मेरे पिता ने लंच बॉक्स लेन के लिए कहे, जो हम घर से लाए थे., मुझे भी भूख लगी थी, हम खाने की मेज पर बैठे, हमारे नौकर ने खाना परोसा, हमने खाना खाया, दोपहर का भोजन ख़त्म किया. हम ऊपर चले गए और बालकनी पर बैठकर सुन्दर परिदृश्य देख रहे थे. मेरे पिताजी ने सर्वेंट को नारियल का पानी लाने के लिए कहे फिर हमने उसे भी पिया, . मुझे अब झपकी लग रही थी, क्योंकि कल रात ठीक से नींद नहीं आई थी. मैं शयनकक्ष में गयी और बिस्तर पर लेटने लगी. ठंडी हवा के कारण मुझे तुरंत नींद आ गई, मुझे नहीं पता की मैं कितनी देर तक सोती रही, अचानक मेरी नींद खुल गई!
में उठी तब हाँ, कोई मेरी गांड के नितम्बों को रगड़ रहा है, मैं चिल्लाई की वह कौन है, लेकिन एक बड़े हाथ ने मेरा मुंह बंद कर दी, और वह शख्स मेरे सामने आ गए, यह मेरे पिताजी hi थे! वह एकदम नंगे हैं, उनका लुंड हैवे में लहरा रहा था, उनका लुंड पूरे रूप में था, वह मेरी गांड को रगड़ रहे हैं, मेरी पीठ को चूम रहे थे मेरा नाम पुकारे “रत्नाआ मेरी बेटी!”
ओह, वह बहुत कामुक तरीके से बोले, मुझे दर था की कहीं किसी ने देख लिया तो.
“पापा, अगर कोई आ जाए तोह, कृपया मुझे छोड़ दें.”
“नहीं रत्न, कोई नहीं आएगा, में सारे दरवाजे बंद कर दिए, हमारा नौकर भी खेत में चला गया हैं, केवल तुम और मैं अब हैं फार्महाउस पर, प्रिये, पापा के पास आओ, मेरी प्यारी बेटी” उन्होंने कहा,
उन्हों मेरी पीठ को चूमा, मेरी साडी खिंच दी, ओह, मैं केवल पेटीकोट और ब्लाउज में हूँ, मुझे शर्म आ रही थी, पिताजी मेरे पास आए. में अपना सर उठायी और मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए मेरे होंठों को चूमे, बस उनके होंठों को दबाने लगे मेरे होठों par!oh, पापा कहते हुए में उनके सर पकड़ लिया और उसे गहराई से चूमा.


अब मेरे पापा ने मेरे ब्लाउज को पकड़ कर पीछे से गांठें खोल दिन,
“ओह्ह रत्न बेटी, तुम्हारे इस ब्लाउज को उतारना बहुत आसान है” यह कहते हुए वह हांसे, मैं भी उनके हंसी के साथ शामिल हो गई.
“है पापा इसीलिए में इसे पहनी हूँ ..”
“वह, तुम्हें पता है की मैं तुम्हारे साथ क्या कर रहा हूँ बेटी! उन्होंने मेरा ब्लाउज उतार दी, मेरी ब्रा से ढके हुए बड़े स्तनों को देखकर बोले,
“उफ़, तुम्हारे स्तन बहुत बड़े हैं बेटी, अपनी माँ से भी बड़े”
“ओह्ह पापा, आपके प्रशंसा के लिए थैंक्स. क्या आपको यह कहते हुए अच्छा लगा..” ऐसे बोलते हुए में अपनी ब्रा का हुक खोल दिए, मेरे पिता ने मेरे पैरेड हुए निप्पल को देखे.

“, ओह रत्न बेटी, तुमने तोह अपने स्तनों पर छल्ले पहने हुए हैं, ओह, वे बहुत अच्छे लग रहे हैं” , उनहोंने मेरे निप्पल्स पर चुटकी ली, वे इतने खड़े हो गए उफ्फ्फ
“, है पापा, यह अब फैशन है” वह चुटकी काट रहे थे छल्लों के साथ खेल रहे थे, उन्हें खिंच रहे थे…
“आउच पापा, दर्द हो रहा है, कृपया ध्यान से सम्भालो.”
“ओह, क्षमा करे, बेटी”, हमने फिर से चूमा, उन्होंने मेरे पेटीकोट का किनारा खोल दी, और उस माध्यम से निचे उसे धकेल दी. मेरे पापा के चहरे पर चंचलता थी.
ओह्ह ु नोट्टी पापा” में कहती रही और उनहोंने मेरी पंतय उतार दी. ओह्ह मेरे पापा ने मेरी पंतय को सूंघते हुए गहरी सांस लेते हुए छूट की सुगंध ली,
“ओह रत्न, तुम्हारी खुशबू बहुत अच्छी है”
, वह, मेरे पिताजी मेरी saaf-suthari शेव की हुई योनि को देख रहे थे, उनके लिप्स पर रिंग थी, बुर के ऊपर टैटू थी.
“ओह्ह्ह रत्न, में इस तरह की चीज़ें पोर्न फिल्मों में देखि हैं, ओह्ह्ह तुम बिलकुल ऐसी hi लग रही हो, ओह बेटी.”
यह कहते हुए उन्होंने मेरी टांगें चौड़ी कर दिन और मेरी जाँघों के बिच में बैठ कर मेरी छूट को सहलाने लगे.
ओह्ह्ह मेरे पापा मेरी छूट को अपनी नाक से छू रहे थे, हाँ उन्हें उसकी गंध बहुत पसंद आ रही थी.

“मेरी ताज़ी छूट की सुगंध लेते हुए अब इसे चाटना शुरू करो, ओह पापा.” यह कहते में उनके सर को अपनी छूट पर दबायी, उनकी मूंछें मेरी छूट पर कुछ शरारती हरकतें कर रही थीं, में हँसते हुए रही.
, मेरे पापा मेरे फैली हुए पैरों के बिच बैठ गए और मेरी योनि के होंठों को रगड़ते हुए मेरी क्लीट को चाटने , ओह्ह पापा, मैं ख़ुशी से चिल्लाई, उनके अर्ध गंजे सर को मेरी बुर पर खिंच ली. मेरी छूट पर अब वह मेरी बुर की छेड़ को चाटना शुरू कर दिए, अपनी लम्बी जीभ को अंदर दाल ,अपनी बिच वाली उंगली को मेरी बुर के andar-baahar करते हुए अपनी प्यारी बेटी को आनंद देने लगे.
“, ओह्ह पापा, मेरे अपने पिता द्वारा मेरी छूट को 15 मं तक चाटने के बाद मैं उनके चहरे पर जोर से जहर गई. मुझे कुछ वास्तविक चुदाई की ज़रुरत थी, हाँ, में पिछले एक सप्ताह से किसी से भी चुदाई नहीं किट hi…
में अपने पिता से बिना किसी शर्म या झिझक के मेरी चुदाई करने के लिए बोली, वह मुझे देखकर मुस्कुराए, उठे., में उनके मेरी बुर के रास से लथपथ चहरे की और देखि, उनकी बड़ी सफेद मूंछें मेरे बुर के रास से भीगी हुई थीं.
मेरे पापा ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरी प्यारी बेटी, तुमने तोह पापा का बैंगन भी बड़ा कर दी, तुम बहुत सेक्सी बेटी हो, यह कहते हुए उनहोंने मुझे चूमा, ओह, में मेरे hi बुर के रास का स्वाद चखी. अपना सह! मममममम!
यह अच्छा है ओह पापा डार्लिंग, कृपया उस बैंगन का उपयोग अपनी बेटी की चुदाई के लिए करें!” यह कहते हुए में उनके सख्त लुंड पर हाथ फेरी, मेरे पिता समझ गए की उनकी बेटी कितनी कामुक है, उनहोंने ज्यादा देर किए बिना मेरी गांड के निचे तकिया रख दी, जिससे मेरी टांगें चौड़ी हो गेन और उनहोंने अपनी बेटी की गीली योनि में अपना लुंड रगड़ने लगे


और dhire-dhire अंदर अपने लुंड को डालने लगे. अब उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी है और मेरे स्तनों को पकड़ कर उनकी मालिश कर रहे थे, मेरी आँखों में देख रहे है, हम बेटी, पिता के सेक्स मिलान को देख रहे थे.
, हाँ, जनहोने मेरी माँ को छोड़ा, वही लुंड जिसने मुझे पैदा किया, वही अब मेरी चुदाई कर रही थी. , में तोह उन्ही के वीर्य से हुयी रचना हूँ.
“ओह्ह पापा कहते हुए में उनकी बालों से भरी पीठ पर हाथ फेरी
“, हां रत्न, मेरी बेटी, ओह कहते हुए उन्होंने अपना गर्म वीर्य मेरी योनि में दाल दी., बहुत ज्यादा वीर्य नहीं, लेकिन 70 साल के मर्द के लिए यह बहुत था., हमने ek-doosare को गले लगाया, हमारी योनि और लुंड का मिलान ऐसे hi बना रहा..
कुछ देर तक ek-doosare को चूमते रहे, ek-doosare को सहलाते रहे, कुछ मिनट्स के बाद उनका लुंड मेरी योनि से बाहर आ गया, थोड़ा वीर्य भी निकला.
, हम जल्दी से स्नान कक्ष में गए क्योंकि वापस घर जाने का समय हो गया था. किसी भी समय हमारे नौकर भी आ सकते था. ,
, मैं शयनकक्ष से बाहर आती हूँ, मेरे पिता पहले से hi हॉल में बैठे थे, मैं उनके पास सोफे पर बैठ गयी., हमने एक सामान्य पिता की तरह बात की., कुछ hi मिनटों में हमारे नौकर खेत से आ गया, मेरे पिताजी ने हमेशा की तरह आज के काम के बारे में पूछताछ की,
हम वापस घर की और चल पड़े, रास्ते में मेरे पिता ने मुझे उस ख़ुशी के लिए धन्यवाद दी जो में उन्हें दी थी, में जवाब में मुस्कुरायी और उनकी चुदाई की तारीफ की. इस उम्र में भी वह सेक्स में बहुत मस्त थे और मुझे उन पर गर्व था.
, उनहोंने पूछा की अगली बार कब हम सेक्स कर पाएंगे , में बतायी की जब भी हमें अवसर मिलेगा तब., हम घर पहुंचे, मेरी माँ ने सब्जियां काटते हुए मुझसे पूछा की खेत कैसा है, क्या तुमने हमेशा की तरह आनंद लिया.
“है माँ, लेकिन आज और अधिक मज़्ज़े लिए है न पापा”, में कही.,
“हाँ राधा, तुम्हारी बेटी ने आज खेत में बहुत आनंद लिया. अपने hi पिता के खेत में.” मेरे पिता ने जवाबी हमला किया., मेरी मान मुस्कुराई और मुझे गले लगाई. मेरे गालों को चूमा. ओह मेरी बेचारी माँ, मैंने आज आपको धोका दी हैं, माफ़ करना माँ., मैं मन hi मन बोली!!! में दोषी महसूस करि! मैं अब माँ के साथ वहां नहीं बैठ साली इसलिए अपने कमरे में चली गयी! न जाने क्यों मेरे मन में इस सोच से मेरा मूड ठीक नहीं था.
, अचानक मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, ओह, यह मेरा बीटा नमन है. में कही
, “hello बीटा!”
“माँ आप कैसी हो? मैं यहां आपका इंतज़ार कर रहा हूँ, मैं आपको मेरे पास चाहता हूँ, मान, कृपया वापस आ जाओ, मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता.”, उसने एक hi बार में बात की.
ओह मेरा बेचारा बीटा! “में भी तुम्हें बहुत याद करती हूँ, मैं दो दिन में घर आ रही हूँ, मुझे माफ़ कर दो बीटा.”
“ठीक है माँ, मैं अपना ध्यान रखूँगा , लेकिन कृपया जल्दी आओ माँ!”
“क्या आप दादी को फोन दे सकती हैं? उसने पूछा, में अपनी माँ को जाकर फ़ोन दी और, दोनों ने ek-doosare के लिए शुभकामनाएं देते हुए बात की, फिर मेरी माँ ने फ़ोन वापस दे दी, में अपने बेटे को अलविदा कही और अपने कमरे में चली गई. अपनी ड्रेस बदली, निघ्त्य पहनी, ुर हॉल में वापस आई.
सीता ने मुझे कुछ गरमकोफी दी, इससे मैं तरोताजा हो गयी. में अपनी माँ से बहुत प्यार से बात की, मेरे पिता भी हमारे पास बैठे और हम माँ और बेटी के साथ और अधिक प्यार से बात की. , में अब सोची की, की मैं अपने पिताजी को दुबारा मुझे छोड़ने की अनुमति नहीं दूँगी!.
रात के खाने का समय हो गया है, हम सभी ने एक साथ बैठकर खाना खाया, कुछ देर बात करने के बाद मैं अपने कमरे में गयी. मैं वेट ड्रीम्स के साथ गहरी नींद में थी, ओह, मैं और मेरा बीटा नमन पूल के किनारे ek-doosare को छोड़ रहे थे, यह एक पार्टी थी जिसमें हम पब्लिक के सामने चुदाई कर रहे हैं, .

ओह, हम हांफ रहे थे. लोग ताली बजाकर हमें प्रोत्साहित कर रहे है! ओह्ह्ह उफ्फ्फ क्या चुदाई थी …. मममम अचानक मेरी नींद खुली, कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है! ओह मैं उठ गयी और उठकर दरवाज़ा खोली, ओह यह पापा थे, वह अंदर आये और दरवाज़ा बंद कर दी. मुझे बहुत दर लग रहा है की अगर किसी ने उन्हें मेरे बैडरूम में देर रात आते देखा तोह क्या होगा.
में उन्हें बाहर जाने के लिए कही. में अभी भी मेरे पापा के प्रति सेक्सयल फीलिंग्स काफी थी… अगर कुछ और देर रहते तोह हम फिर से चुदाई करते…
मैं अपनी माँ को और धोखा नहीं देना चाहती थी.
“है बेटी, मैं भी अपनी पत्नी को धोखा नहीं देना चाहता, तुम बस दूसरी hi महिला हो, जिससे मैं सेक्स करा हूँ. में तुम्हारी माँ से 52 साल पहले शादी की थी, तब से उन्हीं के साथ परिवार चला रहा हूँ. कभी दूसरी महिलाओं की तरफ नहीं देखा हूँ. में अपनी परिवार की गरिमा को अच्छे से रखा हुन्द, क्या तुमने पहले कभी अपने पिता को ऐसे कुछ करते देखा है?”
“ हाँ पापा, मुझे पता है आप बहुत अच्छे हो, मुझे आप पर गर्व है, यह मैं हूँ और मेरी गलती है की में बेहाल गयी. मुझे आप, माफ करना, पापा” ऐसे कहते हुए मैं रो पड़ी,
“ओह बेटी, रो मत मेरी बेटी, इसमें मेरा भी हिस्सा है, मुझे तुम माफ़ करना बेटी.”
, तुम्हें पता है में किसी से भी सेक्स नहीं करा , यहां तक की तुम्हारी माँ से भी नहीं, पिछले 12 वर्षों से, हाँ बेटी, उनके स्वास्थ्य के कारण हम सेक्स भी नहीं करते., लेकिन कल रात जब में तुम्हें उस तरह देखा तो मेरी साड़ी इच्छाएं एक साथ उड़ गेन, क्षमा करें बेटी, भूल जाओ की आज क्या हुआ, मैं उस पाप के साथ तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा”. ऐसे कहते हुए मेरे पिताजी हाथ जोड़कर सॉरी बोले और फिर तेज़ी से कमरे से बाहर चले गए.
हे भगवान, इतने मज़बूत स्वास्थ्य वाले मर्द , मेरे पापा अपनी इच्छाओं को इतने लम्बे समय तक कैसे नियंत्रित कर सके है. हाँ मेरे पिता महान हैं मुझे उन पर गर्व है. अब माँ को धोखा देने का कोई सवाल hi नहीं है अगर मेरे पिता चाहते हैं तो मैं अपनी मान का कर्तव्य निभा रही हूँ.
मेरे पापा इतने गठीले मर्द हैं वह कई बार महिलाओं से चुदाई कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए हमारी यह धोखेबाज़ी है! में तय करि की अगर मेरे पापा को उनकी बेटी चाहिए, जब भी वह चाहे, उसे वह चुदाई कर सकते हैं .. उनसे अब चुदाई के विचार से hi मैं उत्तेजित हो गई, मैं मुस्कराहट के साथ बिस्तर पर गिर गई.
फिर से मेरे बेटे के साथ मेरा सपना जारी है, ओह, फिर से वही पूल का किनारा, इतने सारे लोग हमें चुदाई करते हुए देख रहे हैं, हम नहीं किसी से भी डरते हुए हम पूरी तरह से नग्न थे, हम माँ बेटे छोड़ते हुए लव शो दे रहे हैं. हमारी चुदाई के दौरान हम कामसूत्र के सभी आसनों का अभ्यास कर रहे थे. अब इस बार, में देखि की मेरे पापा भी भीड़ में शामिल हो गए और गर्व के साथ उन्हें भी तालियां बजाते हुए देखि.
, ओह क्या सपना है. मुझे नहीं पता की सुबह कब होगी, मैं अभी भी बिस्तर पर लेती थी. , मेरी माँ इस बार कॉफ़ी का कप लेकर आई.
“बेटी! हे बेटी! 8 बज गए हैं”, हे भगवान, मैं इतनी देर तक सो गयी. में, माँ से सॉरी कहकर नहाने चली गयी, चेहरा धोकर आया, और कॉफी पिटे हुए, मेरी माँ मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरती हुई. हम दोनों माँ और बेटी एक साथ कॉफी पि रहे थे, मेरे पिताजी ने मेरी माँ को बुलाया
“ओह! तुम कहाँ हो मुझे देर हो रही है?”
“ हाजी, मैं रत्न के साथ आ रही हूँ”
फिर मेरे पापा ने बताया की फार्महाउस पर कुछ काम था ..
. ओह, अब मैं समझ गया की पिताजी रात में hi मेरे कमरे में क्यों आए थे. जाने से पहले हु सॉरी कहने आये थे… ओह मेरे प्यारे पापा …. में अब उनके साथ जाने का फैसला करि.
“माँ, क्या मैं पिताजी के साथ जाऊं क्योंकि मैं यहां बोर हो रही हूँ” में अपनी माँ से पूछी.
“बेटी बेहतर होगा की आप अपने पापा से पूछ लें बेटी,” माँ ने कहा तो हम दोनों माँ बेटी एक साथ कमरे से बाहर आ गेन, मेरे पिताजी ने मेरी और देखे बिना मुझे सुबह की शुभकामनाएं दिन. में भी अपनी मधुर मधुर आवाज से उसे शुभकामनाएं दिन.
“ पापा क्या मैं आपके साथ फार्महाउस चलूँ . माँ ने अभी बताया आप जा रहे हैं है.”
“ मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं बेटी, मेरा काम पूरा होने में पूरा एक दिन लग सकता हैं”
“कोई बात नहीं पापा, मैं यहां बोर हो रही हूँ, आप बिलकुल अकेले जा रहे हैं, बेहतर होगा की मैं आपके साथ चलूँ.
“ठीक हैं बेटी जल्दी तैयार हो जाओ, पहले hi देर हो चुकी है,”
, मैं स्नान कक्ष में गई, शावर ली., 15 मिनट में तैयार हो गयी.
में, थोड़ा सा मेकअप कृ है. स्लीवलेस ब्लाउज , लौ वैस्ट साडी … ब्लाउज इस बार पूरी बैकलेस थी .. 3 इन हिल्स पहने में और पापा निकल गए.. रस्ते में,, में फोन करि और, मेरे बेटे उसे बताया की मैं अपने दादाजी के साथ किसी काम से एक और दिन लेट होगा. यह सुनकर वह निराश हो गया, लेकिन किसी भी तरह में उसे मन ली.

फार्महाउस के काम होते hi में और पापा बैडरूम में गए हमारी सेक्स भरा दिन बिताने..
हम अब बिस्तर पर थे, , में अपने पापा का कठोर लुंड मेरी गीली, तंग कामुक छूट में डालना शुरू कर दी. पापा मेरे कड़े गोल विशाल स्तनों पर बेबी आयल मेल थे . में उनकी बेटी कितनी सेक्सी हैं, इस तरह की चीज़ें मेरे बूढ़े पिता ने अपने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी, वह कर रहे थे. हे भगवान!
पापा को छोडो, में खुद नहीं सोची थी की मैं ये चीज़ें करुँगी हु भी 2 महीने पहले बुइ नहीं. मेरे लिए सेक्स अब पत्नी के लिए बस कर्तव्य नहीं रहा, अब सेक्स भोजन से बढाकर है मेरे लिए, यह 2 आत्माओं की समझ को व्यक्त करती है.
15 मिनट की चुदाई के बाद, मेरे प्यारे पापा मुझे डोगग्य स्टाइल में छोड़ना चाहते थे.

“ रत्न बेटी! उन्होंने पूछा, “मैं तुम्हारी सेक्सी गीली योनि को पीछे से छोड़ना चाहता हूँ, क्या आप मुझे अनुमति देंगी?”
“ क्यों नहीं मेरे पापा.”, यह कहते हुए मैं उनके ऊपर से निचे उतरी. हाँ उनका लुंड वीर्य से लिपटा हुआ चमक रहा था! हमने ek-doosare को चूमा, मैं उनके सामने झुकी और खिड़की की रोड पकड़कर अपनी ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी लम्बी चिकनी टांगों को चौड़ा कर ली.
“ओह रत्न! तुम्हारे चूचियां और नितम्ब बहुत बड़े हैं, कहते हुए उन्होंने उन्हें मसला और उनकी चिकनी त्वचा को महसूस करे., मेरी रास से टपकती हुई छूट को थोड़ा सा चूस लिया, उन्होंने अपना लुंड पीछे से मेरी बुर में डाले और मुझे पीछे से लम्बे स्ट्रोक से चुदाई शुरू कर दी., उनका लुंड और मेरी बुर वह बहुत उत्तेजित थी. , उन्होंने मेरे स्तन पकड़ कर उन्हें मसला, मेरी चुदाई की. छूट और तेज़ी से ओह्ह्ह! हम दोनों इस स्थिति का आनंद ले रहे थे, लेकिन वह ज्यादा देर तक नहीं टिक सके और, उनके लुंड से वीर्य निकलना शुरू हो गया, .

ओह्ह्ह उन्होंने जितना संभव हो सके अपने लुंड को दबाकर, उन्होंने उनके लुंड से गर्म वीर्य निकला और मेरे मुँह में डाले
, अपनी प्यारी सेक्सी बेटी का नाम रत्न चिल्लाते हुए! वह मुझ पर गिर पड़े. हमारा सेक्स अब पूरा हुआ . में अपने घर पर फ़ोन करि, में कही की मैं आज शाम की ट्रैन से hi घर आउंगी.
. लेकिन मेरे पापा ने कहा की मैं दो दिन में आऊंगी! पापा आज रात और कल भी मेरे साथ चुदाई करना चाहते हैं. मेरा बीटा और मेरी बेटी दोनों उनसे सहमत नहीं थे और उनसे मुझे कल शाम को hi भेजने के लिए कहा .फिर हम बेटी और पापा ने फार्महाउस पर पूरी रात फिर सुबह से लेकर दोपहर तक चुदाई की. . हमने उनसे किये हर संभव पोज़ में सेक्स किये. मेरे पापा अब यौन रूप से थक गए थे! मैं पूरी तरह से संतुष्ट थी क्योंकि में अपनी योनि, स्तन, बस अपनी गांड को छोर पूरा शरीर दे दी थी! हाँ, उन्होंने मेरी गांड की छेद में चुदाई करने भी लिए कहे थे, लेकिन मैं उन्हें वहां सेक्स की अनुमति नहीं दी., क्योंकि यह मेरे बेटे नमन के लिए hi है! हाँ, मैं अपनी गांड की चेरी बस अपने बेटे को देना चाहती हूँ, मैं अपनी गुदा की विर्जिनिटी केवल मेरे बेट ेके साथ hi खोना चाहती हूँ! आखिरकार हम अपने गाँव आ गए, और शाम को में अपने घर के जाने के लिए तैयार हो गए! मेरे पिता चाहते हैं की मैं रात को रुकूँ क्योंकि आप जानते हैं की वह क्या करना चाहते है . वह बस अपनी बेटी को baar-baar छोड़ना चाहते हैं.

लेकिन मैं अपने बेटे को मिलना चाहती हूँ और मैं उसका मोटा कठोर विशाल लुंड चाहती हूँ और मैं उसके लिए एक माँ से भी अधिक बनना चाहती हूँ! अंत में , में अपनी माँ को अलविदा कही.,
पिताजी को एक बेटी के रूप में उनके पेअर छूए, मेरे पापा ने मुझे एक सुन्दर हिरे की अंगूठी दी, मेरे पिताजी ने मुझे रेलवे स्टेशन छोड़ने आये और वापसी यात्रा के लिए हर चीज़ की व्यवस्था की. अब ट्रैन ने सब कुछ पीछे छोड़कर अपनी गति पकड़ ली थी. मैं अपने पापा के साथ अपने यौन कारनामों के बारे में सोची और खुद पर मुस्कुरायी!!

अब मैं केवल आगे की और देख रही थी बस अब मेरी योनि मेरे बेटे को hi चाहती हैं, हे भगवन, अपने बेटे के बारे में सोचते hi मेरी योनि गीली हो जाती है!!!