Gharelu Maa se Modern Maa tak ka Safar - Jawan Bete ki Khwaish Ki Puri - Page 3 - SexBaba
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Gharelu Maa se Modern Maa tak ka Safar - Jawan Bete ki Khwaish Ki Puri

ओनली फाइव लाइक्स फॉर नई रेस्टार्टेड अपडेट !! 😬
 
कुछ टाइम बाद उसकी आँखें खुल तोह मेरा बीटा नमन मुझसे पूछा ..

“माँ ठीक तो हो ? ये क्या हो गया आपको?”

फिर में बोली “ ये बात तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? अपने इस मूसल से पूछ.” मैं उसके झूलते हुए लुंड को प्यार से सहलाते हुए बोली. “

ये तो किसी भी औरत का बंद बजा देगा. और तूने भी तो कितने बेरहमी से छोड़ा है.













वहां से अंजलि उसकी बेटी है कर कहती हैं .. “अरे भैय्या उफ्फ्फ्फ़ ऐसे छोड़ा जाता है कोई अपनी माँ को? ”

“ अंजलि माँ मैं तो बहुत डर गया था. उसकी प्यारी माँ को कुछ हो जाता तो?”

इतना कहकर नमन उसके होंठों को चूमने लगा .. में उसका लुंड सहलाने लगी थी और उसके कारण उसका मोटा सांड का लुंड फिर से खरा होने लगा था.













लेकिन में तोह पूरी थकी हुयी थी …

“नमन बेटे अभी और नहीं , थोड़ी सी ब्रेक चाहिए तुम्हारी प्यार माँ को.”

“उफ्फ्फ मा मैं तोह अब फिर से वासना की आग में जलने लगा हूँ . आखिर मेरा लुंड अभी भी और प्यासा हैं..

मेरा लुंड वापस तैयार हैं चुदाई के लिए देखो माँ ..

“ओह बेटे उफ्फ्फ देख तोह , सुबह के चार बज रहे थे. पूरी रात की भयंकर चुदाई के कारण मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था. उसकी छूट की हाल बुरी हैं.

लेकिन बेटे अभी भी तेरे लौड़े की प्यास कितनी हैं उफ्फ्फ.

नमन का लुंड तोह पूरी तरह तुन गया था. ोोूफ क्या भयंकर लूग रहा था. साड़ी रात उसकी छूट का पानी जो पिया था.

“माँ चुदाई तोह करनी hi हैं .. अगर आपकी नहीं तोह ..

कुछ बोलने से पहले अंजलि उसकी बाथरूम से निकल कर बहार आयी और हम दोनों के तरफ बारी बारी देखने लगी.

“उसकी प्यारी माँ की करूँगा..”

नमन अब अंजलि पर नज़र टिकाये खड़ा था .. अंजलि जान चुकी थी की उसकी चुदाई की बात चल रही हैं..

वह नमन और उसके पास बिस्तर पर आ बैठी ..

अंजलि उसकी बेटी बोली“ अरे, भैया ये तो फिर से खरा हो गया. अब क्या इरादा है ? साड़ी रात छोड़ने के बाद भी मन नहीं भरा तेरा?”

“ माँ आप को चोदे बिना मेरा मन भर सकता है क्या? आपने भी आपको छोड़ने की इज़ाज़त दी है और अभी मेरा लौड़ा फिर से

खड़ा हो हैं!”

“ है राम ! तू तो सांड है. पता नहीं कितना चुदाई करता रहेग .

अब तोह उसकी भी प्यासी छूट तरप रही है, तू उसकी प्यास बुझायेगा?”

नमन कुछ बोलने से पहले hi उसकी बेटी अंजलि उसके मोठे सुपर को पागलों की तरह चाटने लगी.













“ ठीक है माँ मैं आपकी इच्छा पूरी कर देता हूँ. चलो कुटिआ बन जाओ.

अंजलि फिर से कुटिआ बन गयी और अपने चूतर ऊपर की और उभार दिए. उसकी छूट से अब रूस बाहर निकलने लगा tha.Naman ने उसके मुंह से अपना सुपर बाहर निकला और उसके शूटरों के पीछे आ कर कुत्ता बन गया. उसने अपने मूसल का सुपर उसकी छूट के छेड़ पे टिका के एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ Aaaaa..hhhhh…….ooooooiiiiiiii….aaahhhhh” उसकी छूट बुरी तरह से गीली थी.

नमन का लौड़ा छूट की दोनों फांकों को आसानी से चीरता हुआ आधा अंडर धंस gaya.Naman ने उसके शूटरों को पाकर के लुंड बाहर खींचा और एक भयंकर धक्के के साथ पूरा का पूरा लुंड जार तक उसकी छूट में उतार दिया.

“ Aaaaaaaaaaaaa…………..oui….. माआआआ ……… ah…ah……aaaahh….issss आइइइइइइ.”

अब नमन पूरा लुंड सुपर तक बाहर निकाल कर जार तक अंडर पेलने लगा. Phach…phach …. पहच….. ……ाआअह ……ooooohhhh..phach…phach ….पहच …aaaiiiii….phach…phach. बहुत hi मज़ा आ रहा था अंजलि को. अंजलि भी चूतर उछाल उछाल कर उसके धक्कों का जबाब दे रही थी. हेर दकके के साथनमान का एक फुट लुम्बा लुंड उसकी प्यासी छूट में जार तक समा जाता. आज तक किसी मर्द ने एक माँ और बेटी को इस तरह नहीं छोड़ा था. अंजलि नमन के रूस के लिए पागल हो रही थी. जब तक उसका लुआंडा उसकी छूट को अपने वीर्य से भर नहीं देता टब तक उसकी छूट की प्यास नहीं बुझ सकती थी. आखिर अंजलि बेशर्म होक बोल hi पारी,

“नमन छोड़ अपनी माँ की प्यासी छूट

“ हाँ मेरी जान. आज मैं आपकी प्यास ज़रूर बुझाऊंगा.” ये कहते हुएनामान ने अपना एक फुट का लुंड उसकी छूट से लुंड निकला और फिर से छूट के छेड़ पे टिका के एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया.

इससे पहले की मुझे सँभालने का मौका मिले आधा लुंड उसकी छूट में समां गया.

“Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa………………oooooooooooooiiiiiiii iiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiimmmmaaa” मैं ज़ोर से चीखी. लेकिन इतनी देर मेंनमें ने लुंड सुपर तक बाहर खींचा और उसकी कमर पाकर के एक भयंकर धक्के के साथ पूरा जार तक छूट में उतार दिया.

“ ooooiiiimmmaaaaa…aaaaahhhhhh…..aaaahhhhNaman dheere….aaaahhhhh….” अबनमान लुंड पूरा बाहर निकाल कर जार तक उसकी छूट में पेलने लगा. जैसे hi लुंड पूरा छूट में ग़ुस्तानमान के बॉल्स पहच की आवाज़ के साथ उसकी गीली छूट से टकरा जाते. धीरे धीरे दर्द थोड़ा कम हो रहा था. छूट के अंडर बाहर होता हुआ लुंड अब अच्छा लूग रहा था. करीब 10 मिनट छूट मारने के बाद नमन ने फिर अपना लुंड बाहर खींच लिया और इससे पहले की मैं कुछ समझूँ उसने सामने आ के तने हुए लुंड को अब मेरे hi मुंह में पेल दिया. मैं जितना चूस सकती थी उतना चूसने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इतने मोठे लुंड को चूसना कोई आसान काम नहीं था. उसने धक्के मार मार के लुंड उसके गले तक घुसेड़ दिया था. मैं सांस भी बरी मुश्किल से ले पा रही थी. दस मिनट तक उसके मुंह को छोड़ने के बाड़नामान ने फिर से लुंड मेरी बेटी अंजलि की छूट में पेल दी. ये सिलसिला एक घंटे तक चलता raha.Naman पहले उसकी छूट लेता फिर और फिर मेरे मुंह में पेल देता. मेरे मुंह में कई चीज़ों का स्वाद tha.Naman के लुंड का, उसके वीर्य का, मेरे बेटी की छूट का और मेरी भी छूट के रास का. ये स्वाद तो किसी शराब से भी ज़्यादा नशीला था. सुबह के 7 बुज रहे थे. अंजलि कुटिआ बानी पागलों की तरह छुड़वा रही थी. कमरे में एक अजीब सा नशा छा रहा था. इतने मेंनमें जो की उसकी छूट में लुंड पेल रहा था अब तोह उसके धक्के तेज़ होने लगे.

उसने मेरी बेटी अंजलि की एक घंटा लगातार चुदाई करि थी .. अंजलि थक रही थी और उसके पेअर सुन पद रहे थे ..

“भैया उफ्फ्फ ममम बस करिये अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ में माँ जैसी घोरी नहीं हूँ की लगातार घंटो तक तू मेरी बुर की कुटाई करते रहे उफ्फ्फ अहह .. अब मुझे आराम करने दे अह्ह्ह …”









नमन रुका नहीं और बस अपनी बेहेन की बुर की कुटाई करते रहा फिर बोलै ..

“ओह हो हैं तू माँ जैसी घोरी बिलकुल नहीं .. माँ तोह तीन घंटे चूड़ी फिर कहाँ जा कर थकी थी उफ्फ्फ .. लेकिन मेरा यह घोडा अब भी बेकाबू हैं .. इसे तोह बस चुदाई से मतलब ..”

में समझ गयी की अब उसका निशाना फिर से में hi हूँ .. में भी अब रेस्ट करि थी और एक मेरे बेटे की चुदाई के राउंड के लिए तैयार थी..

वह मेरे तरफ देखा और में उसके तरफ .. बस मेजन सर हाँ में हिलायी और नमन ख़ुशी से स्माइल दी ..

मेरी तोह पिछले कुछ महीनो से बस एक hi भूख थी – नमन के एक फुट लम्बे और मोठे लौड़े की ..

“ है माँ उफ्फ्फ मेरी माँ ! पूरी ज़िन्दगी आपके बदन ने मुझे तुंग किया है.

“मेरी माँ आज तो सुबह भी तुम्हारी छोडूंगा.” ये कह कर नमन ने अंजलि बेटी के छूट के रास में सना हुआ लुंड बाहर खींच लिया और मेरे पीछे फिर से घोरा बन के मेरी बुरी तरह गीली रास टपकती छूट में मुंह दे दिया. थोड़ी देर तक छूट को चाटता चूमता रहा और जीभ छूट के अंडर पेलता रहा. फिर उसने जीभ मेरे शूटरों के बीच की दरार में फेरना शुरू कर दिया. अब वो छूट की दरार से ले कर शूटरों के बीच की दरार तक जीभ फेरने लगा. जब उसकी जीभ मेरी गांड के छेड़ के ऊपर से गुज़रती तो मैं काँप जाती. फिर उसने मेरे दोनों शूटरों को पैला दिया और गांड के छेड़ के चारों और जीभ फेरने लगा. अचानक नमन ने मेरे शूटरों को ज़ोर से फैला के जीभ को गांड के छेड़ में पािल दिया. अब तो वो ज़ोर ज़ोर से गांड चाटने लगा और गांड के छेड़ में जीभ अंडर बाहर करने लगा. ोूफ बहुत मज़ा आ रहा था. मैं भी गांड पीछे की और उचका उचका के पूरा मज़ा लेने लगी. मैं समझ गयी की नमन अब मेरी गांड मारने के चक्कर में है. शायद वो मेरी गांड को अपने लौड़े के लिए तैयार कर रहा था. ऐसा कभी हो hi नहीं सकता की कोई मर्द मुझे कुटिआ बना के चोदे और उसके बाद मेरी गांड मारने का ख्याल उसके मन में न आये. आखिर मेरे इन विशाल चौरे चौरे शूटरों ने मर्दों की नींद ऐसे hi तो हराम नहीं कर राखी थी. मेरे फैले हुए चूतर मेरे बेटे नमन का क्या हाल करते थे मैं अच्छी तरह से जानती थी. गांड मरवाने के लिए तो मैं भी बेताब थी लेकिन नमन का लौड़ा इतना मोटा और लुम्बा था की मेरी गांड निश्चित रूप से पहाड़ देता. जब मर्द का लुंड गांड में जाता है तो मज़ा तो बहुत आता है.







नमन ने पास राखी वैसेलिन की बोतल से खूब सारा वेसिलीन अपनी ऊँगली पे लगा के ऊँगली को मेरी गांड में पािल दिया. उसने तीन चार बार ढेर सारा वेसिलीन मेरी गांड के अंडर अच्छी तरह से लगा दिया. वो भी समझता था की उसका मूसल मेरी गांड के लिए बहुत मोटा था. फिर मेरे हाथ में वेसिलीन देता हुआ बोलै,

“ लो माँ अपने चाहतों से आप इसे मेरे लुंड पे लगा दो.” मैंने ढेर सारा वेसिलीन हाथ में ले कर उसके तने हुए लौड़े पे लगाना शुरू कर दिया. बाप रे ! कितना लुम्बा और मोटा था! मेरी छूट के रास में सना हुआ बहुत hi भयंकर लूग रहा था. उसके विशाल लुडे पे वेसिलीन मलते हुए मैं सोच रही थी की ये मूसल मेरी गांड के छोटे से छेड़ में कैसे जाएगा ? कैसे झेल पाउंगी इसको ?

“ नमन तू सचमुच मेरी गांड लेना चाहता है ? देख तेरा लुंड बहुत बारे है मैं इसे झेल नहीं पाउंगी.” मैं उसके विशाल लुंड पे वेसिलीन मलते हुए बोली.

“ माँ, जिस गांड ने पूरे शहर की नींद हराम कर राखी है उसे ले कर तो मैं धन्य हो जाऊँगा. फिर आपकी गांड के लिए तो मैं बचपन से तरस रहा हूँ. मैंने एक फिल्म में एक कालू को एक 18 साल की लड़की की गांड में अपना मूसल पेलते देखा है. उस कालू का तो शायद मेरे लुंड से भी बारे लुंड था. आप डरो मूत मैं बहुत प्यार से पेलुँगा.”

मैं बोतल का सारा वेसिलीन नमन के लुंड पे मलते हुए बोली,

“ ठीक है आज तू अपने मन की कर ले. लेकिन बहुत धीरे से डालना.”

ठीक है माँ, बहुत धीरे से डालूंगा. अब चलो फिर से कुटिआ बन जाओ” नमन मेरे होंठों को चूमता हुआ बोलै. मैं फिर से कुटिआ बन गयी. मैंने अपनी छाती बिस्टेर पे टिका के चूतर खूब ऊपर हवा में कर दिए. इस मुद्रा में मेरी छूट का मुंह खुल गया और गांड का छेड़ भी नमन को निमंत्रण देने लगा. नमन ने मेरे दोनों शूटरों को पाकर के खूब फैला दिया और अपने तने हुए लुंड के मोठे सुपर को मेरी गांड के छेड़ पे टिका दिया. मेरी तो सांस hi गले में अटक गयी. मैं उसके मोठे सुपर का गांड में घुसने का इंतज़ार करने लगी. तभी नमन ने मेरे चूतर पाकर के एक धक्का लगाया. मेरी गांड में तो खूब वेसिलीन लगा hi हुआ था नमन का मूसल भी मेरी छूट के रास और ढेर साडी वेसिलीन से सना हुआ था. उसका मोटा सुपर मेरी गांड के छेड़ को चीरता हुआ गुप्प से 2 इंच गांड में धंस गया.

“Oooooooiiiiiiiiiiiiiiiii……………….aaaaaaaaaaaaaaaaaa aa…………..aaaaahhhh… ोोोोीी… मम्मा..... आआ ा ा....... aaaa…ooohhhh…aahhhh मर गयी .” मेरी गांड का छेड़ बुरी तरह चौरा हो गया. मैं इतने ज़ोर से चीखी की पूरे मोहल्ले में आवाज़ पहुँच गयी होगी. इससे पहले में संभल पति, नमन ने फिर एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उसका लुंड 5 इंच मेरी गांड के अंडर धंस गया.









“ aaaaaaaaaa…………ooooooooooooiiiiiiiiiiiiii.......... . मम्माआआआ नमन बस कर aahhhhhh…chhor मुझे …एआईईईई ..आह मैं और नहीं झेल सकती. प्लीज मैं तेरे हाथ जोरती हूँ ….aaaahhhhh….nikaal ले ..ाः.” मुझे पूरा विश्वास हो चला था था की मैं उसके लुंड को नहीं झेल पाउंगी. दर्द के मरे बुरा हाल था. ऐसा लूग रहा था जैसे गांड का छेड़ पहात चूका था. आखिर एक फुट लुम्बा लुंड कैसे किसी औरत की गांड में जा सकता है ? मुझे पहले hi सोचना चाहिए था. लेकिन उस वक़्त तो नमन के मूसल से गांड मरवाने का भूत सवार था मेरे सर पे. अभी मैं सोच hi रही थी के कैसे मनाऊं नमन को अपना लुंड मेरी गांड से बाहर निकालने के लिए, की उसने लुंड सुपारी तक बाहर खींच के पूरी ताकत से एक और ज़बरदस्त धक्का लगा दिया.

“Aaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii i……aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh……………” मैं बहुत ज़ोर से चिल्लाई. मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गया. दर्द के मरे बुरा हाल था. मेरी गांड तो शायद पहात hi गयी थी. लुंड 10 इंच मेरी गांड में जा चुक्का था. उसकी जांघें मेरे शूटरों से चिपक गयी और उसके बारे बारे बॉल्स जो उसकी टांगों के बीच में किसी सैंड के बॉल्स की तरह झूलते रहते थे मेरी गीली छूट से पहच की आवाज़ के साथ टकरा गए.

पूरी रात की भयंकर चुदाई के कारण मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था. मेरी छूट और मेरी गांड का तो और भी बुरा हाल था. लेकिन नमन के लौड़े की प्यास के सामने कुछ नहीं सूझ रहा था. नमन का लुंड इतनी चुदाई करके भी पूरी तरह से खड़ा था. ोोूफ क्या भयंकर लूग रहा था उसका लुंड. साड़ी रात मेरी छूट का पानी जो पिया था और सुबह में मेरी बेटी की छूट का पानी ..

“ अरे, ये तो इतनी चुदाई कर भी खरा हैं. अब और क्या इरादा है ? साड़ी रात छोड़ने के बाद और अब सुबह भी .. मन नहीं भरा तेरा?”

“ माँ आप को छोड़ के किसी का मन भर सकता है क्या?

“ है राम ! तू तो सांड है. पता नहीं खूब झरेगा.”

नमन मेरी छूट बहुत प्यासी है, इसे अपना वीर्य पीला के इसकी प्यास बुझा दे प्लीज . उंडेल दे सारा वीर्य मेरी छूट में. भर दे इसे अपने वीर्य से. तू चाहे तो इसे छोड़ छोड़ के फॉर दाल. लेकिन अब और तुंग मूत कर. ” मैं पूरी ताकत से चूतर पीछे की और उचकाते हुए और नमन के मूसल को अपनी छूट में पेलते हुए बोली. अब तो मैं शर्म हाय बिल्कुल भूल चुकी थी. मैं वासना की आग में इतना जल रही थी की ये भी भूल गयी की मैं न सिर्फ एक औरत हूँ बल्कि ये जो मर्द मुझे छोड़ रहा है मेरा बीटा hi है. मेरी सिर्फ एक hi प्यास थी – नमन के लुंड की वीर्य की.

“ हाँ माँ अब आपकी इस छूट की प्यास ज़रूर बुझाऊंगा, और मेरे अपने लुंड की प्यास भी बुझा लूंगा.”

अंजलि बेटी भी फिर से छोड़ने तैयार थी …

अब हम दोनों घुटनो के बल नमन के सामने अपने चूतड़ों को हवे में हिला रहे थे , उसके लुंड को पुकार रहे थे ..

फिर नमन कबि मेरी छूट मई लुंड पेलता कभी अपनी दीदी की छूट मई सात से घुसा देता और इस तरह उसने लगातार हमारी छूट को बरी बरी से मरना शुरू कर दिया हम दोनों माँ और बेटी लगातार

एक दूसरे के नंगे शरीर को अपने शरीर से रगड़ती हुई एक दूसरे के दूध को दबोच रही

थी और नमन हमारी छूट को पूरी ताकत से कूट रहा था फिर हम दोनों घोड़िया एक डैम से जोर जोर से

सिस्याने लगी

“ आह आह है है है बीटा मुझे छोड़ और जोर से छोड़ और

फिर मेरी बेटी अंजलि कहती मेरे भैया मेरी छूट छोड़ो आह आह और छोड़ो खूब छोड़ो पहाड़ दो अपनी बेहेन

की छूट और कुछ hi पलों में पहले मेरी बेटी फिर

में झड़ने लगी और नमन हमारे ऊपर उल्टा लेट कर हम माँ और बेटी की झड़ती छूटो को चाटने

लगा और फिर में और अंजलि नमन के लुंड को अपने मुँह मई लेकर चूसै

शुरू कर दी . हम दोनों घोडियो की इस मादक लुंड चूसै से नमन आखिर कर अपने आप को ज्यादा देर रोक नहीं पाया और उसने जैसे hi अपनी पिचकारी मरी हम दोनों माँ बेटी उसके लुंड का रास चूस चूस कर उसके लुंड का पूरा माल निगल गयी .. हम माँ बेटी दोनों एक दूसरे को चुनने लगे और एक दोनों के मुँह से नमन के लुंड के गधे वीर्य को पीने लगे ..











फिर हिम तीनो एक डैम

नंगे एक दूसरे से चिपककर हाफने लगे और पुरे रूम मई सिर्फ और सिर्फ चुदाई की सुगंध चा चुकी थी..

दो दिन लगातार फिर से मेरे बेटे नमन ने उसकी माँ और उसकी बेहेन की साथ में कुटाई करि थी ..
 
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थैंक्स एवरीवन फॉर ुर कॉन्टिनोएड सपोर्ट

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उस दिन की चुदाई के बाद में ज्यादा कुछ नहीं करि . उस दिन के अगले दिन मैं जब सो के उठी तो मेरा और भी बुरा हाल था. छूट और भी ज़्यादा सूज गयी थी और गांड का दर्द भी ठीक नहीं हुआ था. डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी था. अगले दिन मैं एक लेडी डॉक्टर के पास गयी. लेडी डॉक्टर को देखते hi मेरे होश ुर गए. वो मेरे कॉलेज की दोस्त रोमा निकली. वो भी मुझे देखते hi पहचान गयी और खूब गले मिली.

“ अरे रत्न तू! तू यहां कैसे. कितने दिनों बाद मिल रही है.”

“ हाँ रोमा, कॉलेज के बाद अब मिल रहे हैं. कैसी है तू?” रोमा भी मेरी अच्छी दोस्त थी. अभी भी मुझसे भी ज्यादा फिट हैं. कॉलेज के टाइम में वह सबसे फ़्लर्ट करती थी और सब बॉयज उसके hi पीछे पड़े रहते थे. पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए आज डॉक्टर बन गयी थी. हूँ दोनों बचपन की खूब बातें करते रहे.

“ रत्न मुझे अच्छी तरह याद है तू कॉलेज की सबसे सेक्सी लड़की थी.”

“ हूत ! तू कौन सी कम थी?”

रोमा





रत्न





“ जीजाजी को क्यों नहीं साथ लायी?”

“ मेरी माँ की तबियत थोड़ी खराब थी तोह में खुद आयी.” (में तोह उफ्फ्फ झूट बोल रही थी, मेरे पति को कैसे बताऊ क्यों फीमेल के डॉक्टर के पास आयी हूँ)

“ अच्छा बता डॉक्टर के पास कैसे आना हुआ?” अब मैं चुप हो गयी. हार्बर के बोली

“ नहीं वैसे हैं, कोई ख़ास बात नहीं है. फिर कभी दिखा लुंगी.”

“ अरे रत्न तू पागल है क्या. तेरी दोस्त डॉक्टर है और तू मुझे कुछ बताना नहीं चाहती.”

“ नहीं कुछ ख़ास नहीं.”

“ अब तू ये hi कहती रहेगी या कुछ बताएगी भी. डॉक्टर से क्या छुपाना.” मैं साहस जूता के बोली,

“ देख रोमा मेरे टांगों के बीच की जगह में दर्द हो रहा है.”

“ ो ! तो तू इसलिए इतना शर्मा रही है! चल उतार अपनी सलवार. देखें क्या प्रॉब्लम है.”

“ मैंने तो आज तक किसी के सामने सलवार नहीं उतारी.” मैं शर्माते हुए बोली.

“ अच्छा ! जीजाजी के सामने भी नहीं?”

“ ओह हो! वो तो दूसरी बात है.”

“ जब एक मरद के सामने सलवार उतार सकती है तो औरत के सामने उतारने में कैसी शर्म? वो भी एक डॉक्टर के सामने.” रोमा ने मेरी सलवार का नारा खींच दिया.

“ चल अब बिस्टेर पे लेत जा, और पंतय भी उतार दे.” मैं बिस्टेर पे लेत गयी लेकिन पंतय नहीं उतारी. रोमा ने hi मेरी पंतय भी उतार दी. मैंने टांगें जोर के छूट को छुपा रखा था.

“ रत्न, चल टांगें फैला. देखें क्या प्रॉब्लम है.” मैंने शर्म से आँखें बून्द कर लीन और टांगें फैला दी.

“ बाप रे ! रत्न, इतना जंगल क्यों ऊगा रखा है?” रोमा ने मेरी झांटें हटा के छूट को देखने लगी, “ है राम ! ये क्या ? तेरी छूट तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है. और भी कहीं दर्द है?”

“ हाँ पीछे भी दर्द हो रहा है.” मैं हिचकिचाते हुए बोली. रोमा ने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे शूटरों को दोनों हाथों से फैला के मेरे गांड के छेड़ को देखने लगी.

“ हे भगवान् ! रत्न तू क्या कर रही थी ? ये तो सूज गयी है.” मैं तो मारे शर्म के लाल हो गयी. “ और भी कहीं दर्द है?”

“ हाँ पूरे बदन में ही दर्द हो रहा है.”

“ हूँ! चल कपड़े पहन ले, फिर बात करते हैं.” मैंने अपनी पंतय और सलवार पहन ली. रोमा बोली

“ देख मैंने ऐसे केसेस पहले भी देखे हैं. लेकिन वो सुब ऐसी लड़किओं के थे जिनकी नयी शादी हुई थी और वो सुहाग रात के बाद या हनीमून के बाद मेरे पास आयी थी. आमतौर पे लड़किआं छोटे कद की थी और उनकी शादी लम्बे तगड़े मर्द से हो गयी. सुहाग रात को कुंवारी छूट को छोड़ना हेर मर्द को नहीं आता. ऐसे में अगर मरद का लुंड मोटा और बारे हो और लड़की की छूट छोटी हो तो उसकी ये हालत हो जाती है.

तेरी तो गांड की भी बहुत सूज गयी है. देख रत्न मुझे मालूम है मरद लोगों को औरत की गांड मारने का बहुत शौक होता है. मेरे पति को भी है. अगर मैं उनसे कहूं की आज आपको या तो सिर्फ छूट दूँगी या सिर्फ गांड, एक चीज़ ले लीजिये तो वो तो मेरी गांड hi लेंगे. लेकिन जो हालत तेरी गांड की है वो हालत तो कोई मूसल या घोड़े का लुंड hi कर सकता है. अब मुझे सुच सुच बता तेरे साथ किसी घोड़े ने छोड़ा तो नहीं न.”

“ नहीं रोमा उफ्फ्फ तू कैसी बातें कर रही है? अरे बीटा शादी शुदा हूँ और मेरे पति का खासा मोटा और बारे है.”

“ ो ! तो तेरी ये हालत जीजाजी ने की है?”

“ तो और कौन करेगा?”“ क्यों झूट बोल रही है. सुच सुच बता किसने छोड़ा है तुझे ?”







“ मैं क्यों झूट बोलूंगी ? मेरे पति का बहुत बारे है. उन्होंने hi ये सुब किया है.”

“ देख रत्न तू बिलकुल झूट बोल रहे है. पहली बात तेरी शादी को इतने ज़्यादा साल हो चुके हैं. तू कुंवारी तो है नहीं. जीजाजी का कितना भी मोटा और बारे क्यों न हो अगर वो तुझे इतने सालों से छोड़ रहे हैं तो आज अचानक तेरी छूट के ऐसी हालत कैसे हो गयी ? ऐसी हालत तो उस कुंवारी छूट की होती है जिसे मोठे तगड़े लुंड से बहुत बेरहमी से छोड़ा गया हो. और फिर क्या जीजाजी ने तेरी गांड इतने साल में कल रात पहली बार ली ?

दूसरी बात, जीजाजी की उम्र भी कुछ 50 की हैं न ?” मेरी चोरी पकरि गयी और मैं शर्म से एकदम लाल हो गयी.

“ तेरा चेहरा बता रहा की तुझे किसी गैर मरद ने छोड़ा है. वो भी किसी ऐसे मरद ने जिसका लुंड वाकई घोड़े के लुंड जैसा होगा. बोल मैं ठीक कह रही हूँ न ? सुच सुच बता. मैं तेरी दोस्त हूँ किसी से कहूँगी नहीं.”

मेरे पास कोई चारा नहीं बचा. लेकिन फिर भी मैं ये तो कभी नहीं बता सकती थी की मेरे खुद के जवान बेटे ने hi मुझे छोड़ा है. मैं धीमी आवाज़ में बोली.

“ हाँ रोमा मुझसे गलती हो गयी . मैंने एक गैर मरद से……….”

“ क्यों जीजाजी तुझे संतुष्ट नहीं कर पते ?”

“ नहीं रोमा ऐसी बात नहीं है. लेकिन मैंने जब उस मर्द का देखा तो अपने पर कण्ट्रोल न कर सकीय.”

“ क्यों बहुत बारे था.?”

“ बारे ? बिलकुल घोड़े के लुंड जैसा ! मैंने कभी पिक्चर या फोटो में भी इतना बारे लुंड नहीं देखा. पूरा एक फुट लुम्बा लुंड है उसका.”

“ बाप रे! मेरे पास एक दो पेशेंट्स आये थे जिनके पति का 9 इंच का था. सिर्फ एक पेशेंट आयी थी जो कहती थी की उसके पति का लुंड 10 इंच लुम्बा है. लेकिन एक फुट लुम्बा लुंड !”









“ सुच रोमा सिकुड़ी हुई हालत में hi 8 इंच का होता है. ऐसे लुंड को देख कर तो अच्छी से अच्छी पति व्रत औरत का मन भी दोल जाए. जब पहली बार उसकी टांगों के बीच में एक मोठे नाग के सामान झूलता हुआ देखा तभी मेरा मन दोल गया था. लेकिन खरा होक बिजली का खम्बा बन जाएगा इसका बिलकुल अंदाज़ नहीं था. छुड़वाने से पहले जब उसका लुंड देखा तो मैं कांप गयी लेकिन टब तक बहुत देर हो चुकी थी. बेशरम ने पूरी रात बरी बेरहमी से छोड़ा और गांड भी मारी. तू hi सोच, एक फुट लुम्बा लुंड अच्छों अच्छों की छूट फॉर दे. उसने तो पूरा एक फुट का लुंड मेरी गांड में पेल दिया. मैं तो दो बार बेहोश भी हो गयी थी.. अब मुझे बहुत बुरा लूग रहा है. पति को क्या मुंह दिखाउंगी.”

मैंने अपनी सफाई पेश करते हुए रोमा को आधा सुच बता दिया. रोमा मेरी कहानी सुन के कुछ उत्तेजित लूग रही थी. वो बोली,

“ रत्न बुरा मूत मान. गलती तो हेर इंसान से हो जाती है. विश्वामित्र जैसे सन्यासी का मन अगर एक अप्सरा को देख के दोल सकता है तो तू तो एक साधारण औरत है. फिर ऐसे लम्बे ,मोठे लुंड को देख कर किस औरत का मन नहीं डोलेगा? मैं तेरी जगह होती तो शायद एहि गलती मैं भी कर बैठती.” रोमा की बात सुन के मुझे चैन आया.

मैं पूछी,

“ रोमा तेरे पति कैसे हैं मैं आज तक मिली नहीं.”

“ मिलवा दूँगी. उनको देख कर तेरा मन नहीं डोलेगा क्योकि उनका लुंड तो 6 इंच का है.” ये कह कर वो ज़ोर से हसने लगी. मुझे लगा की रोमा के मन में भी एक लम्बे मोठे लुंड की चाह है. हेर औरत के मन में होती है.

“ रोमा सुच बता तूने भी कभी किसी गैर मरद से छुड़वाया है ?”

“ अरे बीटा हमारा ऐसा नसीब कहाँ. हाँ अगर तू इस मरद से मिलवा दे तो सोच सकती हूँ” रोमा हँसते हुए बोली.

“ धुत ! अच्छा रोमा अब इसका इलाज तो बता.”

“ देख रत्न इस मर्द से अब teen-chaar तक तो बिलकुल मूत छुड़वाना, नहीं तो तेरी छूट और गांड इलाज मुश्किल होगा. अपना ये बने जंगल भी साफ़ कर ले क्योंकि मैं तुझे एक दवाई दे रही हूँ जो रोज़ छूट के चारों और लगानी है. ये hi दवाई गांड के चारों और भी लगानी है. छूट और गांड को सेकने की भी ज़रुरत है. एक हफ्ते के बाद फिर से दिखा देना. मैं तुझे एक जेली भी देती हूँ. जब भी गांड देनी हो तो अपनी गांड में और लुंड पे अच्छी तरह लगा लेना. ये जेली वेसिलीन से ज़्यादा चिकनी है. इतनी चकनी की लुंड एक hi धक्के में पूरा गांड में उतर जाए. इसलिए जीजाजी को बोलना ज़रा धीरे धीरे डालें. और हाँ इस मर्द को अब गांड मूत देना. नहीं तो कुछ दिनों में तेरी गांड इतनी चौरी हो जाएगी की जीजाजी को पता लूग जाएगा की तू किसी औरको भी गांड दे रही है.”









दवाई ले कर मैं घर चली गयी. रोमा को क्या बताती की अब तो मेरी छूट और गांड पे मेरे बेटे नमन के मोठे लम्बे लुंड का hi नाम लिखा है. मेरी छूट या गांड कितनी भी चौरी क्यों न हो जाए अब तो नमन मेरा बेटे के लुंड के बिना जीना नामुमकिन था.

लेकिन एक हफ्ते का टाइम निकालना ज़रूरी था. एक हफ्ते से पहले मेरी छूट और गांड की हालत ठीक नहीं होने वाली थी. घर पहुंची तो नमन मेरा इंतज़ार कर रहा था. देखते hi बोलै,

“ कहाँ गयी थी माँ ? मैं तो बहुत देर से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ. मैं तो समझा आप नाराज़ हो”

“ तुझसे नाराज़ क्यों होउंगी? तू जो कुछ करते जा रहा हैं मेरी मर्ज़ी से किया. मैं तो डॉक्टर के पास गयी थी.”

‘ क्या हुआ माँ?” नमन ने घबरा के पूछा.

“देख नमन तेरा बहुत बारे है. मेरे आगे और पीछे बहुत दर्द हो रहा था.”

“ तो डॉक्टर ने क्या कहा?”

“ आगे से तो बहुत सूज गयी है, और पीछे का छेड़ भी.”

“ सॉरी माँ मैंने जान के कुछ नहीं किया.”

“ जानती हूँ, तेरा है hi इतना बारे. तेरा कोई दोष नहीं.”

“ डॉक्टर ने क्या इलाज बताया?”

“ पहले तो बाल साफ़ करने को कहा. आगे और पीछे लगाने के लिए दवाई दी है और सेक भी करना है एक हफ्ते तक. पता नहीं बाल कैसे साफ़ कर पाउंगी?”

“ माँ आप बुरा न मानो तो मैं आपके बाल साफ कर दूंगा.”

“ हूत पागल ! तूने जो कुछ करना था कर लिया.”

“ माँ विश्वास करिये. मैं ख़याल रखूँगा आपका.

“ अच्छा ! बीटा तो अपनी माँ की छूट के बाल साफ़ करेगा?”

“ तो क्या हो गया माँ? माँ की तकलीफ में बीटा काम न आए तो बीटा कैसा? और मैं आपको धोका नहीं दूंगा. वैसे भी आप अपने आप कैसे बाल साफ़ करोगी?”

“ तू ठीक कह रहा है. ठीक है तू hi साफ़ कर देना. लेकिन ध्यान रहे कोई शरारत नहीं.”

“ प्रॉमिस माँ बिलकुल नहीं.”

“ ठीक है आज रात को में तुम्हारे कमरे में आउंगी. वहां अपना शेविंग का सामान होगा न?.”

रात में जब मेरे पति अपने कमरे में चले गए और पुरे सो गए थे तब में एक मस्त सी निघ्त्य पेहेन कर मेरे बेटे नमन के बैडरूम में चली गयी. मैं भी नाहा धो कर नमन के कमरे में गयी थी. मैंने वोही छोटा सा नाईट गाउन पहन रखा था. अंडर से सिर्फ पंतय पहनी हुई थी.









“ चलो माँ अपना गाउन उतार दो और बिस्टेर पे बैठ जाओ.”

“ अच्छा! गाउन क्यों उठाऊँ? तूने जिस जगह पे काम करना है वो जगह तुझे मिल जाएगी.”

“ अच्छा बाबा अब बैठ जाओ.” मैं बिस्टेर पे बैठ गयी.

“ अब टांगें तो खोलो शेव कैसे करूँगा?” मैंने धीरे धीरे टांगें फैला के चौरी कर दिन. गाउन सामने से खुल गया. मेरी छोटी सी पंतय ने मेरी सूजी हुई छूट को बरी मुश्किल से धक् रखा था. झांटें तो पूरी बाहर hi निकली हुई थी.

“ ऑफ माँ आपने तो पंतय भी नहीं उतारी. वैसे भी बरी मुश्किल से आपकी जायदाद को धक् पाती है.” ये कह के उसने मुझे खरा कर दिया और पंतय नीचे सरकाने लगा. मेरी पंतय हमेशा की तरह मेरे विशाल शूटरों से सिमट के उनके बीच की दरार में फँसी हुई थी. नमन ने खींच के शूटरों के बीच फँसी पंतय को निकाला.

“ माँ आपकी पंतय हमेशा hi आपके नितम्बों के बीच में फँसी होती है.”

“ अरे तो इसमें मेरा क्या कसूर ?”“ हाँ माँ आपका कोई कसूर नहीं. कसूर तो इन मोठे मोठे नितम्बों का है. बेचारी पंतय क्या करे? पीस जाती होगी इन भारी नितम्बों के बीच में.” नमन ने मेरी पंतय ुतात दी और अपने नाक पे लगाके सूंघने और चूमने लगा.

“ूफ क्या मादक खुशबू है! सुच माँ आपकी पंतय कितनी लकी है. अब अपना गाउन भी उतार दो नहीं तो शेव करते हुए खराब हो जाएगा.” ये कह कर नमन ने मेरा गाउन भी उतार दिया.

अब तो मैं बिलकुल नंगी थी. अपने बीटा के सामने इस तरह नंगी खरे हुए मुझे अभी भी उससे इतनी छोड़ने के बाद भी शर्म आ रही थी.

वासना के नशे में नंगी होना और होशो हवास में नंगी होने में बहुत फ़र्क़ है. अपनी जांघों के बीच में अपनी छूट को छुपाने की कोशिश करने लगी. नमन ने मुझे बिस्टेर पे बैठा दिया और टांगों को चौरा कर दिया. मेरी झांटों से भरी छूट नमन के सामने थी. नमन का चेहरा लाल हो गया. उसका लौड़ा हरकत करने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश करने लगा. नमन मेरी टांगों के बीच में बैठ गया.

नमन मेरी झांटों में हाथ फेरने लगा. मेरी छूट धीरे धीरे गीली होने लगी.

“ नमन तू ये सुब क्या कर रहा है. अपना काम कर.”

नमन ने पहले कैंची से मेरी झांटों को काटना शुरू किया. जब झांटें इतनी छोटी हो गयी की अब कैंची से काटना मुश्किल हो गया टब नमन ने शेविंग क्रीम निकला. झांटें काटने से मेरी पूरी छूट की बनावट नज़र आणि शुरू हो गयी थी. नमन ने खूब सारा शेविंग क्रीम मेरी छूट के चारों और लगाया और फिर रेजर से बाल साफ़ करना लगा. जैसे जैसे बाल साफ़ होते जा रहे थे मेरी गोरी चिकनी स्किन उभरती जा रही थी. नमन ने बारे प्यार से शेव कर रहा था. थोड़ी देर में बोलै,

“ माँ अब लेत जाओ और पेअर ऊपर की और मोर के फैला दो.” मैं लेत गयी और टांगें मोर के छाती से लगा दी. बिलकुल छुड़वाने की मुद्रा थी. नमन ने उस जगह भी शेविंग क्रीम लगाया जहाँ वो मेरे बैठे होने के कारण नहीं लगा सका था. बाल तो मेरी गांड तक थे. नमन ने अच्छी तरह शेविंग क्रीम लगा के रेजर से बाल साफ़ कर दिए. पूरी छूट शेव करने के बाद उसने गरम पानी से छूट को साफ किया. फिर बोलै “ माँ देखो अब ठीक है?” मैंने टांगों के बीच देखा तो अपनी hi छूट को पहचान न पायी. कितनी गोरी, sunder,saaf और चिकनी लूग रही थी. कितने फूली हुई थी. नमन के लौड़े ने इतनी सूजा दी थी की अब तो किसी डबल रोटी से भी डबल लूग रही थी. दोनों फांकों के बीच से निकले होंठ इतने बारे थे मनो छोटा सा लुंड हो. नमन भी मेरी छूट को घूरे जा रहा था. उसके लुंड ने तो लुंगी का टेंट बना दिया था. मैं उसके लुंड की और इशारा करके बोली,

अरे हमेशा मुझे देख तेरा मोटा मोस्साल तोह खड़ा हो जाता हैं”









“माँ आपकी ये है hi इतनी खूबसूरत की भाई का मन भी दोल जाए. ये तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है, मैं सेक के दवाई लगा देता हूँ. लेकिन सकेंगे कैसे?”

“ कोई बात नहीं बिना सके hi दवाई लगा दे.”

“ नहीं माँ ऐसे नहीं हो सकता. मैं सेकने का इंतज़ाम करता हूँ.” ये कह कर नमन बाहर जाने को हुआ. मैं उसे रोकते हुए बोली,

“ कहाँ जा रहा है? मम्मी पापा उठ जाएंगे.” नमन वापस आ गया.“ ये बात तो ठीक है. अच्छा, मेरे पास एक उपाय है. अगर आप मानो तो बोलूं.”

“ बोल तो. पता तो लगे कौन सा उपाय है.”

“ माँ जब जानवर को चोट लगती है तो वो अपने जख्म को चाट के सकता है और उसकी चोट ठीक हो जाती है. वो तो दवाई भी नहीं लगाता.”

“ तेरी बात ठीक है. लेकिन न तो मैं जानवर हूँ और न hi मेरी जीभ मेरे टांगों के बीच में पहुंचेगी.”

“ मैंने खूब कहा आपकी जीभ आपकी टांगों के बीच में पहुंचेगी? लेकिन मेरी जीभ तो पहुँच सकती है न.”

“ ो ! तो अब समझी. तेरी नियत फिर से खराब हो रही है.”

“ नहीं माँ मेरी नीयत बिलकुल खराब नहीं है. सेकने का और कोई रास्ता भी तो नहीं है. मैं आपको प्रॉमिस करता हूँ कोई गलत काम नहीं करूँगा. सिर्फ चाट के सेक दूंगा और फिर दवाई लगा देंगे.” छूट की चटाई की बात सुन के hi मेरी छूट गीली होने लगी थी. गीली तो जब नमन शेव कर रहा था तभी हो गयी थी लेकिन अब तो और भी ज़्यादा गीली हो गयी थी. मैं अपनी उत्तेजना को छुपाते हुए बोली,

“ देख नमन तुझे मेरी कसम यदि तूने कोई गलत काम किया तो. सिर्फ सेकना और दवाई लगाना है. कुछ और किया तो कभी बात नहीं करुँगी.”

“ आपकी कसम माँ, और कुछ नहीं करूँगा, चलो गाउन उतार दो और लेत जाओ.”

“ अच्छा बदमाश गाउन क्यों उतारूं? माँ को नंगी करने का बहुत शौक हो गया है? वैसे भी तो सेक सकता है.”

“ माँ वैसे अच्छी तरह नहीं सेक पाऊंगा. उतार भी दो न. मेरे सामने कपड़े उतारने में क्या शर्माना?”

“ ठीक है उतार देती हूँ, लेकिन कोई शरारत नहीं करना.” मैं तो नंगी होना hi चाहती थी. मैंने गाउन उतार दिया और बिस्टेर पे चित लेत gayi.Naman ने मेरी टांगें चौरी कर दिन. टांगों के बीच का नज़ारा देखते hi उसका लुंड फनफनाने लगा. वो जल्दी से मेरी टांगों के बीच में बैठ गया और अपनी जीभ मेरी छूट से लगा दी. ोोूफ ! नमन की गरम गरम जीभ बहुत अच्छी लूग रही थी. मुझे अहसास हुआ की यदि छूट चेतवानी हो तो झांटें नहीं होनी चाइये. एक नया सा अहसास हो रहा था. मेरी छूट बुरी तरह से गीली हो रही थी. मुझे डर तह ा की कहीं मेरी छूट का रूस बाहर न निकल आये. नमन मेरी छूट के छेड़ के चारों और चाट रहा था लेकिन एक बार भी छेड़ को नहीं छाता और न hi जीभ को छेड़ में डाला. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी लेकिन आज छुड़वाना खतरे से खाली नहीं था. जब मुझ से और नहीं सहा गया तो मैंने नमन का सर पाकर के छूट का छेड़ उसके होंठों पे रैगर दिया. मेरी छूट के होंठ उसके चेहरे पे रैगर गए और उसका चेहरा मेरी छूट के रूस से सुन गया.

“ माँ क्या कर रही हो? मैं तो ठीक से सेक रहा था.”

“ नहीं मेरे राजा तू ठीक से नहीं सेक रहा था. जिस जगह सबसे ज़्यादा चोट लगी है वहां तो तूने सका hi नहीं. उसके चारों और सके जा रहा है.”

“ सॉरी माँ वहां भी सेक देता हूँ.” ये कह के नमन ने मेरी छूट में मुंह दे दिया और जीभ छूट के अंडर घुसेड़ दी. अब तो बहुत मज़ा आ रहा था. मैं तो झरने वाली हो रही थी. नमन ने मेरी टांगें मोर के मेरे सीने से चिपका दी. इस मुद्रा में मेरे चूतर और ऊपर हो गए मेरी गांड का छेड़ नमन के मुंह के सामने आ gaya.Naman ने मेरी गांड को भी चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ गांड के छेड़ में भी घुसेड़ देता. बहुत मज़ा आ रहा था. नमन के होंठ मेरी छूट के रूस से गीले हो गए. नमन बोलै,

“माँ, आपकी छूट तो बिलकुल गीली है. इसका मतलब ये कुछ चाहती hai.”“Hut बदमाश ये कुछ नहीं चाहती. कोई मरद इस तरह से किसी औरत की छूट चाटेगा तो क्या गीली नहीं होगी? लेकिन तेरा लुंड भी तो फनफनाया हुआ है.”

“ माँ आपके जैसी खूबसूरत औरत जिसके पीछे सारा शहर जान देता है, किसी मरद के सामने छूट खोल के बिलकुल नंगी पारी हुई हो और वो मरद उसकी सेक्सी छूट चाट रहा हो तो क्या उसका लुंड खरा नहीं होगा. आपको नंगी देख कर तो विश्वामित्र जैसे सनेसि का मन भी दोल जाए. मेरी तो किस्मत खराब है. मेरे लुंड की प्यास तो अब कभी नहीं बुझेगी.”









“ ऐसा मूत बोल नमन. जब तेरी शादी हो जाएगी तो तेरी अपनी बीवी को रोज़ छोड़ना.”

“ माँ आपको छोड़ने के बाद अब किसी और को छोड़ने का मन नहीं करता.”

“ सुब ठीक हो जाएगा मेरे राजा. आखिर तू मुझे साड़ी ज़िन्दगी तो नहीं छोड़ सकता.”

“ जब तक छोड़ सकता हूँ टब तक भी तो आप छोड़ने नहीं दे रही हो.”

“अच्छा ! तो तेरे प्रॉमिस का क्या हुआ.?”

“ माँ आपको छोड़ने के लिए तो मैं कोई भी प्रॉमिस तोर सकता हूँ.”

“ नमन मैं तेरे दिल की हालत समझती हूँ. मुझे मालूम है की कोई भी मरद इस तरह किसी औरत को नंगी करके उसकी छूट छाते तो अपने आप को आखिर खूब तक कण्ट्रोल कर सकता है? एक काम कर सकती हूँ. जब तू मेरी छूट को सैक के दवाई लगा देगा उसके बाद तू अपने लुंड को मेरे मुंह में दाल सकता है. मैं तुझे उतना hi मज़ा दूंगी जितना तुझे छोड़ने से मिलेगा. इस तरह तेरे लुंड की प्यास भी बुझ जाएगी.”

“ सुच माँ? आप बहुत अच्छी हो. लेकिन आप जानती हो छोड़ने और लुंड को चूसने का अलग अलग मज़ा होता है. दोनों को कपड़े नहीं कर सकते. मैं आपसे एक बात कहूं तो बुरा तो नहीं मानोगी?”

“ नहीं मेरे राजा बोल, क्या बात है?”

“ जब आप ठीक हो जाओगी, तो क्या मैं आपको पुरे वीकेंड में दिन रात छोड़ सकता हूँ?”

“ तू तो बहुत चालाक है. ठीक है छोड़ लेना.“

“ फिर तो मज़ा आ जाएगा. सुच रोज़ छोडूंगा आपको.”

“ तू जी भर के छोड़ लेना अपनी माँ को. अब तो खुश है न?”

उसके बाद नमन ने थोड़ी देर और मेरी छूट और गांड को छाता. मैं इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी. फिर उसने मेरी छूट और गांड के छेड़ पे दवाई लगा दी. दवाई लगाने के बाद उसने अपनी लुंगी उतार दी और अपने फनफनाये हुए लौड़े को मेरे होंठों पे टिका दिया. मैं तो उसके गधे जैसे लुंड को चूसने के लये उतावली हो hi रही थी.

नमन के मोठे लुंड को मुंह में लेने के लिए मुझे पूरा मुंह खोलना पारा. मैं बारे प्यार से लुंड के सुपर को चूसने लगी. धीरे धीरे पूरे लुंड को चाटने लगी और उसके नीचे लटकते हुए बारे बारे बॉल्स को भी सहलाने और चूमने लगी. काफ देर तक मैंने नमन के मूसल को चूसा. नमन ने जोश में आके लुंड मेरे मुंह में पेलना शुरू कर दिया. उसका लुंड मेरे गले तक घुस गया था. नमन ने मेरा मुंह पाकर के धक्के लगाने शुरू कर दिए. वो अपने एक फुट लम्बे लुंड को सुपर तक बाहर खींचता और फिर पूरा लुंड मेरे मुंह में पेलने की कोशिश करता. अब एक फुट लुम्बा लुंड तो मुंह में जाना मुश्किल था लेकिन 8 इंच तो घुस hi जाता था. नमन मेरे मुंह को ऐसे छोड़ रहा था जैसे मेरी छूट छोड़ रहा हो. मैं उसके लटकते हुए बॉल्स को दबा और सहला रही थी. करीब आधे घंटे तक भयंकर धक्के लगाने के बाद नमन झाड़ गया और ढेर सारा वीर्य मेरे मुंह में निकाल दिया. ऐसा लगता था था की कभी उसका वीर्य निकलना बून्द hi नहीं होगा. मैं जल्दी जल्दी उसके वीर्य को पीती जा रही थी, लेकिन फिर भी बहुत सारा वीर्य मेरे मुंह से निकल कर टपकने लगा. नमन के लौड़े को कुछ राहत मिली. अब ये रोज़ का सिलसिला हो गया. नमन रोज़, मेरी छूट और गांड को चाट को सकता और दवाई लगाने के बाद मेरे मुंह में अपना लुंड पेल कर अपनी प्यास बुझाता.

एक हफ्ते के बाद मैं फिर अपनी सहेली रोमा के पास चेक उप कराने गयी. उसने अच्छी तरह से मेरी छूट और गांड की जांच की.

“रत्न तेरी छूट और गांड तो बहुत जल्दी ठीक हो गयी, लगता है जीजाजी ने बहुत सेवा की है. देख रत्न मैं एक बार फिर से कह देती हूँ अब उस मर्द को भूल के भी गांड मूत देना.”

“नहीं दूँगी डॉक्टर साहिबा.”

“कुछ दिन और सेक कर ले तो अच्छा है. लेकिन अब दवाई लगाने की ज़रुरत नहीं है. वैसे किससे सेक करवा रही है?”

“तेरे जीजाजी से और किससे?”

“अच्छा बाबा मत बताना सच .. बस जिस किसी ने भी सका हो कहो की बहुत अच्छा काम हुआ हैं सेकने का .. बस याद रख अपनी गांड मूत देना कुछ और दिन उसे

बस फिर कॉलेज की और लाइफ की यहाँ वहां की बातें कर में घर के लिए निकल गयी.

मैंने नमन को बताया की डॉक्टर ने कुछ दिन और सेक करने को कहा है लेकिन गांड देने को बिलकुल मना किया है. ये सुन कर नमन का दिल टूट सा गया.

“माँ जिस गांड के लिए ज़िन्दगी भर तारपा हूँ वो hi नहीं डौगी तो कैसे जीऊंगा?”

“ है मेरे प्यारे बेटे, तेरे लिए तो जान भी दे दूँ. तुझे गांड नहीं दूँगी तो किसे दूँगी? देख डॉक्टर ने एक जेली दी है. आगे से ये जेली मेरी गांड में और एकपणे मूसल पे लगा लेना. लेकिन गांड थोड़ा धीरे धीरे मारा कर. तू तो गधा है लेकिन मैं तो गढ़ी नहीं हूँ न. मैं तो औरत हूँ.”

“है माँ आप कितनी अच्छी हो. आप की कसम आगे से ऐसे आपकी गांड मारूंगा की आपको पता hi नहीं चलेगा.”





वैसे माँ! तुम्हारे चूचियां अब कितनी मस्त हैं.” नमन मुझ से बोलै.

मेरी चूचियां अब गोल गोल थे और उनके निप्पल्स करीब ½” लम्बे थे और निप्पल इस समय तना हुआ था जो मेरे ट्रांसपेरेंट ब्लाउज से साफ़ दिख रहा था..

“ दर्द हो रहा हैं बीटा बदन में, अब प्लीज मुझे यह निघ्त्य पहने में मदद करो इसीलिए इस ब्लाउज के हुक खोलो बीटा”

“ अच्छा फिर मई भी अपना पंत उतर सकता हूँ,” नमन में हंस कर मुझे से बोलै.

“उफ्फ्फ तो तोह बड़ा शैतान हैं” में मुस्कुरा कर बोली.

नमन ने जल्दी से मुझे निघ्त्य पहना दिया और उसके डोरी भी बांध दी.

में निघ्त्य पहन कर खरी होने के बाद घूम कर मेरे बेटे नमन के सामने एक मॉडल को तरफ खरी हो गयी.

दोनों मेरे कमरे से निकल कर ड्राइंग में आ कर बैठ गए और T.V. चला दिया. में सोफे पर hi लेट गयी और जितना हो सके अपनी निघ्त्य से अपने पैरों को धक् लिया. दोनों T.V. देखते रहे. काफी समय के बाद नमन बोलै, “बहुत समय हो गया और मुझे भूक लग रही है. क्या मई पिज़्ज़ा के लिए आर्डर कर दूँ?”

“ठीक है और डॉक्टर का दिया दवाई खाने का समय भी हो गया है, मेरे वहां निचे फिर से दर्द होने लगा है,” में बोली.

नमन ने पिज़्ज़ा के लिए फ़ोन का दिया और फिर मेरे लिए दबाइयाँ भी ले आया और साथ एक गिलास पानी भी ले आया. में अपने जगह पर उठ कर बैठ गयी और दबाइयाँ लेकर अपने मुंह पर रख कर पानी पी लिया.

“थैंक्स बेटे,” में धीरे से बोली और फिर से सोफे पर लेट गयी. में जैसे hi अपने जगह पर घूम कर लेटने की कोशिश की तो मेरी निघ्त्य मेरे चुतर के ऊपर चार गयी. मुझे ऐसे देख नमन का हाथ अपने आप अपने पंत के अंदर चला गया और वह अपने खरे मोठे लुंड को सहलाने लगा. थोड़ी देर के बाद, में अपने जगह पर फिर घूम गयी और अब अपने पीठ के बल लेट करके अपना एक पेअर ऊपर उठा कर घुटने से मोर कर सोफे के बैक से टिका दिया. मेरी की निघ्त्य अब कमर तक आ गयी थी . में पंतय पेहेनना भूल गयी थी और उसके वजह से मेरी छूट का आधा हिस्सा एक्सपोज़ हुआ.

नमन मुझे आंखे फर फर कर मेरी नंगी छूट को देखने लगा.

तभी दरवाजे की घंटी बाजी. नमन जल्दी से दरवाजे पर गया और पिज़्ज़ा लेकर उसको पैसा दे दिया और पिज़्ज़ा लेकर टेबल पर रख दिया.

नमन मेरे बगल में सोफे पर बैठ गया. नमन का हाथ मेरी नंगी पेट पर था. नमन अपना हाथ धीरे से और नीचे ले आया और छूट के ऊपर रख दिया और में सिसकियाँ मारी .. मेरी छूट ठीक हुयी थी और दर्द भी काफी काम हुआ था.

मेरी खुली चुकी का निप्पल अपने मुंह में भर लिया और उसको चूसने लगा और धीरे धीरे से दन्त से काटने लगा. में काफी कसमसाई. नमन ने अपनी एक उंगली धीरे से मेरी छूट के अंदर कर दिया और अंदर की गर्मी और गीलापन से खुश हुआ.

नमन एक ऊँगली मेरी छूट के अंदर दाल कर उसकी चूँची को चूस रहा था काट रहा था. नमन ने अपना उंगली मेरी छूट के और अंदर दाल कर हिलने लगा. में अब सस्शह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह्ह की आवाज निकलते हुए अपनी कमर उचकने लगी. नमन ने अपनी उंगली मेरी छूट के अंदर से निकल लिया और छूट के छेद के चारो तरफ घूमने लगा और कभी कभी छूट के छेद को सहलाने लगा. फिर उसने अपना दो उंगली एक साथ मेरी छूट में घुसेड़ दिया. में अब ज़रा जर्रों से ओह! अहह! ममममम ! अहह! कर उठी.

नमन में अपने उंगली छूट से निकल लिया और उनको फिर से छूट में घुसेड़ दिया. में अब भी धीरे धीरे आवाज कर रही थी. नमन ने अपने अंगूठे से मेरी छूट के दाने को पहले छुआ और उसपर अपना अंगूठा रगड़ने लगा. नमन अपने उंगलिओं को मेरी छूट में पेलना जारी रखा. अब मेरी सांसे तेज हो गयी और वो अपनी चुतर जोर जोर से उछाल रही थी. मेरी शरीर सख्त हो गयी और अपनी चुतर जोर जोर से उछलने लगी, मेरी गार्डन आकर गयी और उनके होणत खुल गए और गले में से आवाज हल्की हल्की ओह्ह्ह! ओह्ह्ह! ओह्ह्ह! निकलने लगी.

नमन वहीँ पर बैठा रहा और अपना उंगलिओं को मेरी छूट पर फेरता रहा.

“माँ में नहाने जा रहा हूँ,” नमन कहा और फिर पूछा, “तुम ठीक तो रहोगी?”

“हाँ मई तीख हूँ”

मुझे नमन की नहाने की आवाज सुनाई दी. जैसे मुझे बाथरूम से शावर की आवाज सुनाई दी, मुझे hi खुद पेशाब लगने लगी.

“की हर बक्त मुझे कुछ कुछ चाहिए,” में अपने आप से बोली और अपने बिस्टेर पर से उठ कर बाथरूम की तरह चल दिया.

“ओह भगवान, नमन ने बाथरूम का दरवाजा बंद न कर लिया हो,” में सोचने लगी.

“मई धीरे से बाथरूम घुस कर पिशाब कर लुंगी और नमन को पता भी नहीं चलेगा.”

माया बाथरूम के दरवाजे के पास जाकर थोड़ी देर के लिए रुकी और शावर की आवाज सुनने लगी. शावर की आवाज से मुझे और जोर पिशाब लगने लगी. में ने धीरे से दरवाजा खोला और बाथरूम में घुस गयी और अंदर जा कर में टॉयलेट पर बैठ गयी. मेरी पिशाब की धार जोरों से टॉयलेट पर गिरने लगी. फिर में अपना सर घुमा कर नमन की तरफ देखी. नमन उस समय बिलकुल नंग खरा था और अपने हाथ से अपना मोटा पूरा सख्त लुंड पकड़े हुए था. इस समय नमन के लुंड का सुपर बहुत फूल गया था और गर्मी के मरे लाल लाल था और उसमे से हल्की हल्की पानी निकल रहा था. नमन उसे जोरों से हिला रहा था और सिस्क्यान मार रहा था ..

मुझसे गलती से कुछ आवाज़ निकली और नमन आवाज़ सुन हड़बड़ा गया और मेरे तरफ मुदा .. उसका हाथ अभी भी अपने मोठे लुंड पर था और उसका मोटा लुंड अब सीधे मेरे तरफ था.

“ओह सही… ओह्ह्ह माँ … नहीं रोक sakta…nahi रोक sakta…Oh!” फिर नमन के लुंड के सुपर से गधा सफ़ेद माल के जोरदार फुहारे मेरे बदन की तरफ निकले .

इतने सारे फुव्हारे निकल गए थे उफ्फ्फ .. पहला फुव्हारे मेरे मुंह पर गया, और दूसरा मेरी चूँची पर पारा और फिर ढेर सारा उसके लुंड का गधा सफ़ेद माल मेरे पेट और पर मेरी छूट के ऊपर गिरा. मेरा पूरा बदन नमन के सफ़ेद गधे माल से भरा हुआ था ..









 
लेटेस्ट अपडेट (गिफ्स अपडेटेड) गिवेन अबोवे

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पोस्ट इन थ्रेड 'घरेलु माँ से मॉडर्न माँ तक का सफर - जवान बेटे की ख्वाइश की पूरी'


 
अब में अगला अपडेट लिखूंगी बेटे नमन के पॉइंट ऑफ़ व्यू से -

में वापस काम पर ज्वाइन कर लिया मेरे उस कोर्स के एक्साम्स के बाद .. लेकिन काम में बस मेरी आँखों के सामने माँ का चेरा आ रहा था और में में माँ के बारे में hi सोचने लगा.

मेरी माँ 44 साल की मस्त औरत होने पर किसी भी हालत में 35 से ज्यादा की नहीं लगती. माँ भी मेरी तरह hi लम्बे कद की थी और काफी कर्तव्य शरीर की है. माँ का शरीर मांसल और भरा हुवा है पर किसी भी हालत में मोती नहीं कही जा सकती; एक सुन्दर औरत के शरीर में जहाँ भराव होने चाहिए वहीँ पर भराव हैं. गोल चेहरा और उस पर फूले फूले गाल .बड़े मस्त एप्पल जैसे चिकने गालों को चूसते चूसते किसी का जी नहीं भरे, सदा मुस्कराते रसीले होंठ जिन का रसपान करने कोई भी मर्द पागल हो जाय,







छाती पर दो कैसे हुए बड़ी बड़ी चूचिया जिनको चूसने और दबाने के लिए मर्द हमेशा तैयार रहे और पतली कमर और कमर ख़तम होते ही भारी उभरे हुए गोल मटोल चूतड़ और विशाल फैली हुई चिकनी जांघें की बस उनका तकिया बना सोते रहें और सोते रहें.

मेरी माँ तो साक्षात रति देवी की अवतार थी और हर दिन नए नए रूप में नै सजधज के साथ मेरी आँखों के आगे रहती थी तो माँ की और मेरा आकर्षण होना स्वाभाविक था. मेरी माँ के रूप में मुझे मेरे सपनों की रानी मुझे मिल जायेगी में कभी सोचा नहीं था.

में धीरे धीरे माँ को अपनी बना चूका था और उसके साथ खुल के में अपनी हवस मिटाना, अपने जैसी बेबाक बेशरम बना के खुल के उसके साथ जवानी का मज़ा लू. उसके साथ चाहता था . मेरी माँ जैसी रंगीन मस्त औरत मेरे से पैट गयी थी और वह मुझे , अपने यार को अपनी जवानी का पूरा जैम मस्त हो कर पिलाई थी.







में यही सब सोचते सोचते मैंने काम से माँ को फ़ोन किया ,

"माँ अभी कुछ hi दिनों पहले एक नया मल्टीप्लेक्स खुला है. उसमें बड़ी मस्त पिक्चर लगी है. उसमें शहर की सबसे अच्छी रेस्टोरेंट भी खुली है. मैंने भी उसे अभी तक नहीं देखा. बोलो, तुम्हारी इच्छा हो तो शाम को पिक्चर देखेंगे और वहीँ खाना खाएंगे."

माँ: "मुझे तो पिक्चर देख के बहुत मजा आता था. अब तुम मुझे पिक्चर दिखने ले जाओ?."

(उफ़ मेरी रानी तुझे ऐसे पिछ दिखाऊंगा की तेरी निचे से गीली हो जाएगी और फिर तेरे साथ अपनी hi पिक्चर banaunga)Tumhen खूब ,मस्त मस्त पिक्चर दिखाऊंगा. में 5 बजे घर आ जाऊँगा और आज बहार का hi मजा लेंगे." मा ने खुश हो कर अपनी हमें भर दी.

शाम को मेरे ऑफिस में कुछ काम आ गया तो मैंने माँ को मोबाइल पर कह दिया की वह रेडी हो जाए और में 6 बजे तक घर आऊंगा फिर हम एक पार्क में घूमेंगे , कुछ शॉपिंग करेंगे , नए सिनेमा हॉल में पिक्चर देखेंगे , डिनर करेंगे और फिर घर वापस आ जाएंगे. माँ ने हाँ बोलै और में खुश हो गया .

माँ सजधज के 6 बजे घर रेडी थी. में घर जाकर उन्हें देखा , बड़ी मस्त लग रही थी माँ.

माँ ने हलके गुलाबी रंग की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहन रखा था. हलके मेक उप में भी माँ का रूप निखरा हुवा था.

माँ को बता दिया की आते वक़्त मुझे किसी सप्लायर ने यह यहां कपड़ों के कुछ सैंपल दिए हैं. (जिस सप्लायर के पास मुझे जाना था उसके पास ओवरसीज़ ब्रा, पंतय और निघ्त्य का नया स्टॉक आया हुवा था.)

मेरे हाथ में सैंपल गारमेंट्स का एक बड़ा सा पैकेट था जो मुझे उस सप्लायर ने दिया था.

माँ: "जरा देखूं तो आज मेरा लाल मेरे लिए क्या नया लेके आया है?" यह कह माँ ने मेरे हाथ से पैकेट ले लिया और उसे खोलने लगी. उसमें से 2 ऐसी पंतय निकली जो मुश्किल से छूट भर को धक् सके और उन 2 में से 1 ट्रांसपेरेंट भी थी. 2 hi बिना बांह की तंग और टाइट ब्रा थी. 1 झीनी निघ्त्य थी और एक ओपन लेडीज नाईट गाउन था.











सारे माँ की साइज के थे क्योंकि इस मुझे एक्सएक्ट पता था की माँ को किस साइज के फिट बैठेंगे. माँ उलट पलट के देखती रही.

माँ: "तो आज तू अपनी माँ के लिए ये सब लाया है. ऊफ्फ ऐसी hi ब्रा और थोंग तोह में अब तक नहीं पहनी

में बोलै "अरे माँ ये तो सैंपल है जो मुझे उस सप्लायर ने दिए हैं. यदि तुझे पसंद है तो सारे तुम रख लो."

माँ: "तो क्या मेरी उम्र की औरतें ऐसे कपडे पहनती है की कुछ भी ढाका न रहे. मुझे तो इनको देख के hi शर्म आ रही है."

में: "माँ ये सब हलके और बहुत अच्छी क्वालिटी के हैं. इन्हें निचे पहन के बहुत आराम लगता है और पता hi नहीं चलता की कुछ पहन रखा है. तुम से बड़ी बड़ी उम्र की औरते इन्हें लेने के लिए ऐसी कपड़ों के स्टोर में भीड़ लगाए रखती हैं. और किसी स्टोर में यह ड्रेसेस चले गए तोह तुम्हारी उम्र से बी बड़ी औरत अपने जवान यार के साथ उनको पसंद करवाके खरीदती hi . फिर तुम किसी से काम थोड़े hi हो. रख लो इन्हें, ऐसे कपडे पहनने से सोच भी मॉडर्न होती है."

माँ मुस्कुरायी बोली “हाँ नमन बीटा तुम्हे सब पता हैं, तुम hi मेरे जवान यार हो.. चलो अब जाते हैं , देरी हो जाएगी पिक्चर के लिए. वहीँ से सीधे सिनेमा हॉल में चले जाएंगे.

मैंने एडवांस में 2 टिकट्स बुक करवा राखी थी और शो ठीक 6.00 पर शुरू होने वाला था. हॉल बहुत hi शानदार बना था. हॉल के इंटीरियर मन को मोहने वाले थे. पिक्चर शुरू होने के कुछ देर पहले हम हॉल में आ गए.

कुछ hi देर में हॉल की बत्तियां गुल हो गई और कुछ एड्स के बाद पिक्चर शुरू हो गई. पिक्चर बहुत hi रोमांटिक और बहुत मस्त थी. हीरो हेरिने की छेड़छाड़, मस्त गाने, द्वी अर्थी संवाद, बैडरूम सन इत्यादि सारा मसाला था. पिक्चर 9 बजे के करीब ख़तम हो गई. कुछ देर मल्टीप्लेक्स के शॉपिंग सेंटर्स देखे और फिर रेस्टोरेंट में आ गए. माँ की पसंद पूछ के खाने का आर्डर दिया, तबियत से दोनों ने खाने का आनंद लिया.

"नमन बीटा तुम मेरा कितना ख्याल रखते हो. तुम्हारे साथ पिक्चर देख के, घूम के, होटल में खाना खाके बहुत अच्छा लगा.

माँ की बात सुन में मुस्कुराया.

माँ पिक्चर की बात छेड़ती हुई boli,"Bataao इन सिनेमाओं की हेरोइनों के rakh-rakhaav और अंदाज़ के सामने हम लोगों की क्या जिंदगी है?"

Mein,"Maa वह हीरोइन तुम्हारे सामने क्या हैं? वे तो पाउडर और क्रीम में पुती हुई रहती हैं. तुम्हारे सामने तो ऐसी हजारों हीरोइन पानी भर्ती हैं."

Maa,"achha तो ऐसा मेरे में क्या देखा है?"

Mein,"tumko क्या पता है की तुम्हारे में क्या है. कहाँ तुम्हारा सब कुछ नेचुरल और उनका सब कुछ बनावटी और दिखावटी"







“अच्छा जी, मेरा बीटा तारीफों के बस पल hi बाँध रहा हैं.. अच्छा अब बताओ नेक्स्ट क्या मस्त सा प्लान बनाया हैं तुमने बेटे”

हम बाइक पर पार्क तक. पहुँच गए.

में अपनी माँ को ऐसे पार्क की शेर कराने ले चला जहां काफी तादाद में लोग अपने जोड़ीदार के साथ मौज मस्ती के लिए आते थे.

संडे की वजह से पार्क में और दिनों की अपेक्षा काफी भीड़ थी. अभी 8.30 hi हुए थे तोह काफी तादाद में फॅमिली वाले भी अपने बच्चों के साथ थे. मौज मस्ती वाले जोड़े काम थे.

वे 9 बजे आने शुरू होते हैं जब फॅमिली वाले वापस जाने लग जाते हैं. पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुवा था,

झाड़ियों से भरपूर पार्क था और काफी जगह जगह पर लम्बे झाड़ियां थे, पार्क के चारों और करीब 6' चौड़ी पगडण्डी थी जिस पर वाक करने वाले पार्क का राउंड काट रहे थे, बच्चों के लिए एक स्थान पर कई तरह के झूले और स्लीडिंग्स भी बने हुए थे.

माँ: "नमन बीटा, आज तो तुम मुझे स्वर्ग में ले आये हो. बहुत hi अच्छी जगह है." में माको लेके लाइटिंग और म्यूजिक वाले फव्वारे के पास आ गया.

. फव्वारे के चारों और जवान जवान लड़कियां बहुत थी लेकिन माँ के उम्र की औरतें काम थी लेकिन जो थी वह बहुत hi मॉडर्न, शरीर के उभारों को उजागर करते परिधानों में सजी धजी हंस थी, इस दिलकश वातावरण का पूरा मजा ले रही थी, अपने पुरुष साथियों के साथ हाथ में हाथ डाले घुल मिल बातें कर रही थी. चारों और लिपिस्टिक के होंठ, फेसिअल सा सजा चेहरा, बॉब कट तथा खुले केश, जीन्स में कैसे हुए चूतड़, खुले गले की चोलियों से झांकती चूचियों की बहार थी. हम कई देर उस फव्वारे का आनंद लेते रहे.

"चलो माँ पहले कुछ पि लेते हैं फिर तुम्हें पूरा पार्क दिखाऊंगा." मैंने माँ से कहा. में ऐसे hi कुछ समय व्यतीत करना चाहता था ताकि पार्क में घुमते समाय माँ मनचले जोड़ों की भी मस्ती देखे. हमने कोल्ड ड्रिंक की 2 बॉटल्स ली और मजे से पिने लगे.

फिर में माँ को वहां ले गया जहां अधिकतर नौजवान अपनी गिर्ल्फ्रेंड्स के साथ आइसक्रीम का मजा लेने आते हैं

माँ: "मेरे लिए तो एक चूसने वाली hi कैंडी लाना." माँ के कैंडी कहने पैर मैंने माँ से शरती पैन से कहा “लगता hi माँ तुम्हे कैंडी चूसने का बड़ा शौक है. क्या अब तक आपका कैंडी चूसने का शौंक पूरा हुआ नहीं हुआ , मेरी प्यारी माँ. ऐसे हैं तोह में आज से आपको खूब कैंडी चुसवाऊँगा . माँ मेरी बात सुन कर काफी शर्मा गयी. में माँ के लिए 1 कैंडी और मेरे लिए 1 कोन लेके आ गया. माँ कैंडी को मुँह में ले चूसने लगी और में कोन में जीभ दाल दाल आइस क्रीम चाटने लगा.

में: "माँ तुझे आइस क्रीम चूस के खाने में मजा आता है पर मुझे तो इस लम्बी कोन में जीभ दाल चाट के खाने में मजा आता है." माँ खिलखिलाके हंस पड़ी.

में इसी सोच में था की अब में माँ को लेकर वापस घर ले जाकर बीएड पर अपने लौड़े को उसके हाथ मि देकर मेरी माँ से मेरा ये लौड़ा चुसवाऊँगा जैसे वह इस आइसक्रीम कैंडी को मज़े से चूस रही थी.









“माँ यह पार्क बहुत बड़ा है. क्या पार्क का पूरा चक्कर काट के देखोगी?"

माँ: "हाँ, देखो लोग कैसे चक्कर काट रहे हैं. में तो अभी भी ऐसे पार्क के 3 चक्कर काट लून." माँ की बात सुन में उठ खड़ा हुवा और माँ की तरफ हाथ बढ़ा दिया जिसे पकड़ वह भी कड़ी हो गई. फॉर में माँ को पार्क की ऐसी जगह ले गया जहाँ अधेड़ जोड़े सब थे जो साथ की महिला के हाथ में हाथ डाले, उसके कंधे पर हाथ रखे, उसकी कमर में हाथ डाले या उसे अपने बदन से बिलकुल सताये दीं दुनिया से बिलकुल बेखबर हो चल रहे थे. हम माँ बेटे भी जो दुनिया की नज़र में जो भी हों उससे बेखबर चुपचाप चल रहे थे. चलते चलते हम पार्क के और फिर उस भाग में आ पहुँचे जहां कुछ अँधेरा था और काफी घने झाड़ थे. हर झाड़ के साये में एक जोड़ा बैठा हुवा था, सेंटर ऑफ़ पार्क से विपरीत दिशा में मुख किये एक दुसरे को बाँहों में समेटे गड्डमड्ड हो रहे थे, पुरुष महिलाओं की मस्त भरी चिकनी जाँघों पर लेते हुए थे, कुछ एक पुरुष तो महिलाओं को चेहरे पर झुके हुए किश कर रहे थे. चारों तरफ बहुत hi रंगीन नज़ारा था. माँ कनखियों से जोड़ों की हरकतें देख रही थी और मेरे साथ चुपचाप चल रही थी.

में आज रात के लिए माँ की सेक्स की भूख को इस तरह जगा देना चाहता था और माँ में इतनी तड़प पैदा करना चाह रहा था. एक चक्कर काट के hi हम पार्क से बहार आ गए. 10.30 पर हम घर पहुँच गए

आज कुछ गर्मी थी सो घर पहुँच कर माँ नहाने के लिए बाथरूम में चली गई. में भी अपने रूम में चला गया और शावर लेके नाईट ड्रेस चेंज कर ली. और में अपने रूम में बाथरूम में घुस गया. बाथरूम से फ्रेश होक निकला तो देखा की माँ का रूम खुला था और आज रात पापा भी नहीं थे घर पर.

में कमरे में एंटर करते hi मेरा ध्यान माँ की तरफ गया. एक बार ध्यान गया की में माँ की तरफ देखते hi रह गया. माँ बहुत ही आकर्षक निघ्त्य में थी. माँ को निघ्त्य में में पहली बार देख रहा था. निघ्त्य में मेरी माध मस्त माँ 35 साल की भरी पूरी बिलकुल मॉडर्न महिला लग रही थी.

"क्या घूर घूर के देख रहा है? जब बीटा मुझे इस रूप में देखना चाहता है, मेरी छोटी सी छोटी ख़ुशी के लिए मारा जाता है तो में क्या मेरे प्यारे बेटे की इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकती. अब देखो ठीक से तुम्हारे लिए में पूरी मॉडर्न बन गई हूँ." माँ ने कहा और मेरे पास बीएड पर बैठ गई.

“ माँ ेल बात कहु आपसे , बहुत दिनों से कहना चाहता था.

“हाँ बीटा बोलो न बेझिझक.”

“मम्मी आज से तुम मेरी सुहागन हो, आज से आप बस पापा की नहीं लेकिन मेरी भी सुहागन खुद को समझो.

यह कहते मैंने मम्मी की चूची कास के दानबे लगा.

"नमन बेटे तुम्हे तोह मेरे सुहाग होने का पूरा अधिकार जमा तो रहे हो. मन तो सदा से hi तुमको दिया हुवा था. धन की कोई बात hi नहीं; जो मेरा था वह सदा hi तुम्हारा था. जो तन बचा था उसे भी मुझे अपनी सुहागन बना के अधिकारी बन गए हो तुम.

इतने से मन नहीं भरा तो और कुछ भी चाहिए क्या?" माँ ने शरारत भरे अंदाज़ में कहा.

“लो अब जब मुझे अपना सुहाग मान hi लिया है तो क्या इस प्रथम मिलान की घडी में इतने से काम चल जाएगा? देखती जाओ आज में तुझे कैसा आनंद देता हूँ. मुझे पता है आपके इस जवानी के कुंवे से में मेरी प्यास खुल के बुझाऊंगा. समझ रही हो न में किस कुंवे की बात कर रहा हूँ."

अब में तो बेशर्मी पर उतर गया पर देखना चाहता था की माँ इस बेशर्मी में कहाँ तक साथ निभाती है.

“सब समझती हूँ. तुम मेरी दोनों टांगों के बीच में उभरे हुए टिल्ले के बीचों बीच कुंवे की बात कर रहे हो. वह कुंवा बहुत गहरा है, पानी तक पहुंचना आसान नहीं."

माँ की यह बात सुन कर में बहुत खुश था.

"ऐसे गहरे कुंवे के पानी का hi तो में प्यासा हूँ. चिंता मत करो मेरे पास लुम्बा मोटा और मजबूत रस्सा है और बड़ा सा बकेट भी है. में उस बकेट को रस्से के आगे बांधके तेरे गहरे कुंवे में उतारूंगा और देखना वह बकेट तेरे कुंवे का सारा पानी खींच लेगा. ठीक से समझ रही होना."

मैंने कहा. "जानती हूँ, तुम मेरी दोनों टांगों के बीच वाले कुंवे में अपनी दोनों टांगों के बीच में लटके मोठे और लम्बे रस्से के आगे अंडे जैसा बकेट बांधके उतारोगे और मेरे कुंवे को अच्छी तरह अपने इस मोठे लुंड के रसीले पानी से अपनी प्यास बुझाओगे."

माँ ने तोह नहले पर hi दहला मारा.

“है मेरी माँ , उसे रस्सा नहीं लुंड बोलो. पूरा 11 इंच लुम्बा और 4 इंच मोटा है. आज तोह तुम इतनी मचल जाओगी की पूरी लौंडिया बन जाओगी"









यह कह कर मैंने माँ के होंठों को वापस मुख में ले लिया और माँ के मुंह में अपनी लुम्बी जुबान दाल दी. यह चुम्बन काफी लुम्बा चला. "

माँ कामुकता भरी स्वर में बोली “मेरे राजा ऐसे मोठे डंडे जैसे लौड़े के आगे तो में सचमुच में लौंडिया हूँ." माँ पूरी बेशर्मी के साथ हंस के बोली. अब मैंने माँ की दोनों बड़ी बड़ी चूचियां निघ्त्य के अंदर दाल अपने दोनों हाथों में भर ली और उन्हें निचोड़ निचोड़ दबाने लगा.

“ उफ्फ्फ नमन बीटा ममम में तुझसे मस्त होक छोड़ने के लिए पूरी तैयार हूँ. मेरी छूट गीली होती जा रही है. अब मुझसे और बर्दास्त नहीं हो रहा है. अपनी माँ की तरसती छूट का अपने विशाल लुंड से मंथन करो. जिस प्रकार बिलकुल खुली बातें कर रहे हो उसी प्रकार बिलकुल खुल के अपने मनचाहे ढंग से मेरी जवानी को भोगो, मेरे यौवन का स्वाद चखो, देखो मेरी गीली होती जा रही छूट में अब अपना मस्त लुंड दाल दो."

में बीएड पर से खड़ा हो गया और माँ को भी हाथ पकड़ के मेरे सामने खड़ा कर लिया. माँ को मैंने अपने आगोश में ले लिया. माँ की कड़ी चूचियां मेरे सीने में चुभने लगी. माँ अपने इस रास भरे होंठो का रास चूसने दो न और मेने माँ के होंठों पर मैंने अपने होंठ रख दिए. माँ के अमृत भरे होंठों का रसपान करते करते मैंने पीछे दोनों हथेलियां माँ के उभरे विशाल चूतड़ों पर जमा दी. माँ के गुदाज चूतड़ों को अपने हाथो से दबाते हुए में माँ के पेल्विस को अपने पेल्विस पर दबाने लगा.

"आपके नंगे जिस्म को जी भर के देखूँगा, तुम्हारे काम अंगों को छूउंगा, उन्हें प्यार करूंगा." चुम्बन के बाद माँ की ठुड्डी को ऊपर उठाते मैंने कहा और एक एक करके पहले माँ के गहने उतार दिए. मैंने माँ की निघ्त्य उतर दी और अब माँ उसी मॉडर्न हलके गुलाबी रंग की पंतय और ब्रा में थी जो उस दिन मुझे सप्लायर ने दी थी.





5'8" लम्बाई और गदरायी शरीर की मलिका, यानि की मेरी माँ सिर्फ पंतय और ब्रा में कड़ी मंद मंद मुस्करा रही थी. विशाल जांघों और पीछे उभरे हुए चूतड़ों से पंतय पूरी सटी हुई थी. माँ की फूली छूट का उभर स्पस्ट नज़र आ रहा था. सीने पर दो बड़े कलश बड़े hi तरीके से रखे हुए थे. मैंने ब्रा के ऊपर से माँ के भरे भरे मुम्मों को हलके से सहलाया और ब्रा के स्ट्राप खोल दिए और ब्रा भी शरीर से अलग कर दी. वह माँ के चूचिया बिलकुल शेप में थे. और उस पैर की बड़ी निप्पल्स तने हुए और काफी बड़े थे.

"है मम्मी तुम्हारे अंगूर के डेन तो बड़े मस्त हैं." यह कह कर मैंने मुंह नीचे कर दाएं चुचुक को अपने मुंह में भर लिया और चुचुक को चुभलाने लगा. तभी माँ मेरे सर के पीछे हाथ रख कर मेरे सर को अपनी चुकी पर दबाने लगी तथा दुसरे हाथ से अपनी चुकी मनो मेरे मुंह में ठूंसने लगी. मुझे माँ का यह खुलापन और उसकी ऐडा बहुत hi पसंद आई. कुछ देर चुकी चूसने के बाद में बीएड पर बैठ गया और माँ की पंतय में उंगलियां डालने लगा. मैंने सर ऊपर उठाते हुए माँ की आँखों में देखा. माँ ने आँखों के इशारे से हामी भर दी. मैंने वैसे ही माँ की आँखों में देखते देखते पंतय निचे सरका दी और माँ की टांगों से निकल कर सोफे पर उछाल दी. अब माँ मेरे सामने नंगी कड़ी थी.

है मेरे नमन बीटा तुझे अपनी माँ की छूट कैसी लगी? लो जी भर के देखो इसे, छोड़ी कर कर के देखो और बताओ तुझे पसंद आई." माँ ने हँसते हुए पूछा.

"है क्या प्यारी छूट है. जितनी प्यारी यह तेरी चीज है उतने hi प्यार से इसे मेरे सामने पेश करो. इसे पूरी सजा के पूरी छटा के साथ मुझे सौंपो तब मेरी पसंद नापसंद पूछो. खूब बोल बोल के पूरी कामातुर होक मुझे इसे भोगने के लिए कहो मेरी जान." यह कह कर में बिस्तर पर लेट गया. माँ मेरा मतलब समझ गई और बिस्तर पर आ गई. माँ ने मेरी छाती के दोनों और अपने घुटने तक लिए और घुटनों को जितना फैला सकती थी फैला ली. मैंने भी अपने घुटने मोड़ लिए और पीछे माँ के पीठ टिकने के लिए उनका सपोर्ट बना दिया. माँ ने उन पर अपनी पीठ टिका दी और छूट मेरी और आगे सरकाते हुए अपने दोनों हाथों से जितना चिडोर सकती थी उतनी चिडोर दी. माँ की छूट का लाल छेड़ पूरा फैला हुवा मुझे आमंत्रण दे रहा था. माँ की छूट से विदेशी सेंट की मीठी खुशबू आ रही थी.

"लो मेरे साजन तेरी सेवा में मेरा सबसे खाश और प्राइवेट अंग पेश है, इसे ठीक से अंदर तक देखो. भीतर झाँक के देखो, इसकी ललाई देखो, इसकी चिकनाहट देखो. अपनी रानी की इस सबसे प्यारी डिश का चटखारे लेले कर स्वाद लो." माँ ने खनकती और थरथराती आवाज़ में कहा. में पागल हो उठा. मैंने अपने दोनों होंठ लगभग माँ के खुले छूट के छेड़ में ठूंस दिए. माँ के लसलसे छेड़ में मैंने 2-3 बार अपने होंठ घुमाये और फिर जीभ निकाल कर माँ की छूट की अंदरूनी दीवारों पर फिरने लगा. माँ की छूट का अंदरूनी भाग लसलसा और हल्का नमकीन था. छूट की नेचुरल खुशबू विदेशी सेंट से मिली हुई बहुत hi मादक थी. में माँ की छूट पर मुंह दबा कर छूट को बेतहाशा छाते जा रहा था. मेरी जीभ की नोक किसी कड़ी गुथालीनुमा चीज से टकरा रही थी. जब भी में उस पर जीभ फिरता माँ के शरीर में कम्पन अनुभव होता. तभी माँ ने उठ कर ठीक मेरे चेहरे पर आसान जमा लिया और जोर जोर से मेरे चेहरे पर अपनी छूट दबाने लगी. मैंने माँ के फूले चूतड़ों पर अपनी मुट्ठियां कास ली और माँ की छूट में गहराई तक जीभ घुसा कर मेरी मस्त माँ की छूट का स्वाद लेने लगा.

कुछ मं छूट चूसै बाद में खड़ा हुआ और माँ मेरे सामने थी.

मेरा 11 इंच का लुंड लोहे की रोड की तरह तन कर खड़ा था. बड़ा सा गुलाबी रंग का सुपर एक डैम चमक रहा था. मैंने एक पाँव माँ के बगल में बिस्तर पर रखा और अपना लुंड हाथ से पकड़ कर माँ के चेहरे से टकराने लगा.







वह! क्या शानदार शाही लुंड है. ऐसे लुंड पर तो में बलि बलि जाऊं. में तेरे लुंड की दासी हूँ. अब और मत तड़पाओ, इस मस्ताने लुंड से मेरी 2 हफ़्तों से प्यासी छूट की प्यास बुझा दो. इस लुंड को मेरी छूट में पूरा उतार दो मेरे साजन, मेरी छूट का अपने विशाल लुंड से मंथन करो. अपनी तड़पती माँ की जवानी को खुल के भोगो. अपने लुंड के रास से मेरी छूट को सींच दो. आओ मेरे प्यारे बालम आओ. मेरे ऊपर आ जाओ और मेरी ख़ुशी ख़ुशी लो. में तुम्हें देने के लिए बहुत आतुर हूँ" माँ तड़प तड़प कह रही थी.

मेरी माँ मेरे सामने घुटनो के बल बैठ गयी. वो कराहने लगी, "मुझे तुम्हारा लुंड किसी भी चीज़ से ज़्यादा पसंद है बीटा. मुझसे गन्दी बातें करो, बीटा... यह मुझे बहुत उत्तेजित करता है." मेरे लुंड को एक हाथ में पकडे हुए, उन्होंने अपने होंठ खोले और उसे मेरे लुंड के सुपाड़ी पर फिराने लगीं. उनका मुंह नरम, गरम और गीला था और उनकी जीभ मेरे लुंड के सुपाड़ी पर घूम रही थी. जैसे hi मैंने उनका सर पकड़ा और अपना लुंड उनके मुंह में और अंदर धकेला, वो कराह उठी. मैंने पहले प्यार से और फिर तेज़ी से उनके मुंह को छोड़ना शुरू किया. "ओह, हाँ!" ससुर कराह उठे. "चलो... चुसो! मेरा लुंड चुसो! ज़ोर से चुसो कुटिया! ओह, यह, हाँ, साली...!" सर झुकाए, मैं नीचे उन्हें देख रहा था, वो मेरा लुंड चूस रही थी. उनकी जीभ मेरे लुंड के सुपाड़ी पर चल रही थी और jaise-jaise वो ज़ोर से मेरा लुंड चूस रही थी, उनका लुंड मेरी जाँघों के बीच aage-peeche होता रहा. मैं हांफने और गुर्राने लगा, ख़ुशी से उसके चेहरे को छोड़ने लगा, उसके सर को अपने हाथों में जकड लिया, अपने कूल्हों को aage-peeche हिलाने लगा. "हाँ! ओह हाँ! बस, बेबी.. हाँ.. चुसो. ओह हाँ! चलो... ज़ोर से चुसो... चलो माँ! मेरा लुंड चुसो! ओह यह हाँ यह हाँ!" मैं अपनी सेक्सी माँ को छोड़ने के लिए तैयार होने से पहले कुछ मिनट तक वह मेरा लुंड चुस्ती रही.





]





में तेरा दीवाना हूँ मेरी छमकछल्लो , तेरी छूट का रसिया हूँ. जब से तू यहां आई है तब से में तेरी इस मस्त जवानी पर फ़िदा हूँ. सोते जागते में हरदम तेरी मस्तानी गदराई जवानी और तेरी मस्त गुलाबी छूट का hi ख्वाब देखा करता था. अब जब मेरे सामने तेरी यह मस्त जवानी और छूट मेरे सामने नंगी पड़ी है तो में इसे मनचाहे ढंग से छोडूंगा. तेरी ये मस्त मदभरी जवानी देख कर लगता hi तेरी इस गदराई जवानी को अभी तक किसी मर्द ने लूटा नहीं hi किसी ने . तेरी इस मस्त गदराई जवानी को देख कर तो लौडिया बी शर्मा जाये और तुज से जलने लगे. तो तू बिलकुल मस्त लौंडिया लग रही हो. तेरी यह बड़ी सी फूली हुई पावरोटी सी छूट ठीक मेरे लुंड की साइज की है. सचमुच में तेरी छूट बहुत मस्त है. क्या झाँट्दार शानदार छूट है. इतने दिन इतनी मस्त और मेरी पसंद दीदा चीज छुपाये तू मेरे सामने फिरती रहती थी. जब बी तुम मेरे सामने ये बड़ी मस्त गांड लेकर ठुमक कर चलती थी और मेरा ये लुंड एक दम लोहे की रोड जैसा खड़ा हो जाता था. और उस टाइम मैं hi जनता hi की तेरी ये मस्त गांड देख कर अपने इस लौड़े को कसीसे समजता था. मेरी बुलबुल क्या तेरे मन में मेरे लुंड का जरा भी ख्याल नहीं आया की अपनी छूट नंगी कर के मेरे सामने आ जाती. क्या में समझता नहीं की माँ की छूट में छुड़वाने की खाज चल रही है? जब में तेरे सारे शौक पूरे करने के लिए मारा जा रहा हूँ तो क्या तेरा छुड़वाने का शौक पूरा नहीं करता. अब तो में तुझे तड़पा तड़पा तेरी जवानी को भोगूँगा मेरी जान तेरे हर एक अंग का रास मि दिल खोल कर पियोगे." यह कह मैंने माँ को लिटा दिया और माँ की गांड के निचे एक बड़ा सा तकिया लगा दिया ताकि छूट उभर जाय.

माँ: "हाँ मेरे नमन प्यारे मेरे सैया मेरे राजा मेरे बालम लो अब तो तेरे सामने यह मातृ अंग खुला पड़ा है, लो अब अपनी इस जन्मस्थली का खुल के उपभोग करो. अपने विशाल लुंड से मेरी छूट का भेदन करो. हाँ मेरे स्वामी अपनी इस प्यासी चरणों की दासी को अपना वीर्य दान दो, मेरी वर्षों से सुखी पड़ी इस बावड़ी में अपने रास का नाला बहा दो और इसे लबालब भरदो."

में: "हाँ मेरी माँ में तेरी टांगों के बीच तेरी लेने आ रहा हूँ." में माँ की टांगों के बीच आ गया और माँ की छूट के छेड़ पर अपने लुंड का सुपर रख दिया. माँ की छूट पूरी लसलसी थी. थोड़ा सा जोर लगते hi सुपर 'पांच' करके अंदर फिसल गया. अब में माँ के ऊपर पूरा झुक गया और माँ को होंठों को अपने होंठों में ले लिया. 4-5 बार केवल सुपर अंदर डालता और पूरा बहार निकल लेता. इसके बाद सुपर अंदर डालने के बाद मैंने लुंड का दबाव माँ की छूट में बढ़ाया. में दबाव बहुत धीरे धीरे दे रहा था . अगले 2-3 मिनट में मेरा आधा लुंड माँ की छूट में समां चूका था. उधर माँ के होंठ मेरे होंठों में थे. निचे माँ कसमसा रही थी. अब में माँ की छूट में आधा के करीब लुंड डालता और वापस निकाल लेता.

कई बार ऐसा करने से छूट अंदर से अच्छी तरह से गीली हो गई. इसके बाद आधा लुंड डालने के बाद मैंने छूट में दबाव बनाये रखा और मेरा लुंड छूट में धीरे धीरे सरकने लगा. माँ का शरीर नीचे अकड़ रहा था माँ: "तूने तो अपने हलबी लौड़े से आज मुझे 18 साल की कंवरी लौंडिया बना दिया है , मेरे सैन्य . इतना मजा तो में जब जिंदगी में पहली बार चूड़ी थी तब भी नहीं आया था. तुम्हारा यह मोटा सोता तो मेरी छूट में पूरा ादास गया है. अपनी इस रानी में धीरे धीरे पेलो और आहिस्ते आहिस्ते मेरी जवानी का पूरा मजा लो."









में: "हाँ मेरी माँ देखो कितने आराम से तुझे छोड़ रहा हूँ. में तेरा बहुत शुक्र गुजार हूँ की तूने इतने साल से मेरे लिए अपनी यह मस्त छूट बचा के राखी. जितना मजा मुझे तेरे साथ आ रहा है उतना मजा मुझे कोई लड़की दे hi नहीं सकती थी. अब में बिलकुल शादी नहीं करूंगा. अब से तू hi मेरी बीवी है, मेरे घरवाली है मेरी जोरू hi और मि hi तेरा मर्द हु . दुनिया की नज़रों में तू भले hi मेरी माँ बने रहना, उससे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता पर जब भी मौका मिले यूँ hi मस्त हो छुड़ाते रहना." अब मेरा लुंड माँ की छूट में जड़ तक अंदर घुसने में बिलकुल थोड़ा सा बाकि रह गया तो मैंने छूट में लुंड के हलके धक्के देने प्रारम्भ कर दिए. माँ है है करने लगी. मेरा लुंड माँ की छूट में जड़ तक अंदर बहार होने लगा था. धीरे धीरे में धक्कों की स्पीड बढ़ाता गया. लुंड 'फच्च' फच्च' करता छूट से अंदर बहार हो रहा था.

अब माँ ने दोनों हाथ मेरी कमर में जकड दिए और धक्कों में मेरा साथ देने लग गई. माँ की अह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह की सिसकारियों में बदल गई. माँ की आँखें मुंड गई और वह मुझसे चुदाई का स्वर्गीय आनंद लेने लगी. में माँ को बेतहाशा चोदे जा रहा था. अब पौन के करीब लुंड छूट से बहार निकालता और एक करारा शॉट लगा के जड़ तक वापस पेल देता. उदार माँ भी मस्त हो अपनी भरी गांड निचे से ऊपर उछाल उछाल मेरे धक्कों से ताल मिलाने लगी. माँ ने मुझे कास के अपने से चिपका लिया और मेरे होंठ अपने होंठों में कास उन्हें चूसने लगी, मेरे मुख के अंदर अपनी जीभ डालने लगी. माँ की यह मस्ती देख में और जोश में आ गया और में हाथों के बल ऊपर उठ बहुत hi प्रचंड तरीके से अपना लुंड उस प्यासी छूट में दनादन पेलने लगा.











"अरे मत पूछ. तुम ने जब से मेरी चुदाई करनी शुरू करि हैं बड़े , उस दिन से जैसा आनंद तो मुझे जीवन में आज तक नहीं मिला. तुम बहुत hi मस्त बनकर छोड़ते हो. मुझे दर्द महसूस तक नहीं होने दिया और 11 इंच का हलबी लौड़ा पूरा का पूरा मेरी छूट में उतार दिया." माँ ने कहा. अब में पूरे जोश में आ चूका था और जोर जोर से हुमच हुमच कर लुंड पेलने लगा. माँ भी नीचे से धक्कों का जबाब दे रही थी.









में: "देख तुझे कैसे कास के छोड़ रहा हूँ. ले ये मेरा धक्का झेल मेरी माँ . बड़ी मस्त औरत है तू. तू तो सिर्फ मेरे से छोड़ने के लिए hi बानी है. तुझ जैसी चूड़ाकड और सेक्सी औरत को तो दिन रात नंगी करके hi रखना चाहिए और जब भी लुंड खड़ा हो जाय तो तेरे किसी भी छेड़ में पेल देना चाहिए. बहुत गरम है तेरी छूट और तेरे में भी बहुत गर्मी है. आज में तेरी साड़ी गर्मी झाड़ दूंगा. माँ तू बहुत hi करारा माल है, गाँव का ख़ालिश माल है. इस उम्र में भी तू एक लौंडिया की तरह कड़क है." में बस अपनी मस्त माँ को चोदे जा रहा था. करीब 10 मिनट तक यह चुदाई चली की माँ ने मुझे बुरी तरह से जकड लिया. माँ की आँखें लाल हो गई, वह हांफने लग गई और जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी. फिर उसका शरीर एक बार ऐंठा और वह कुछ ढीली पड़ने लगी.

माँ: "है नमन बेटे छोड़ अपनी माँ को. हाँ में बहुत गरम हूँ, मेरी साडी गर्मी झाड़ दे. देख मेरी छूट से रास बहने लग गया. है खूब कास कास के छोड़ मुझे. में तेरा डंडा पिलवाते पिलवाते झड़ना चाहती हूँ. में इतनी कमजोर क्यों होती जा रही हूँ. तूने तो एक hi चुदाई में मुझे ढीली कर दिया. मेरे पर ऐसे hi चढ़ा रह, मुझे अपने निचे दबोचे रख. में पूर्ण तृप्त हो गई."

तभी मेरे लुंड से जोर से ज्वालामुखी पहात पड़ा. लुंड से पिघला लावा माँ की छूट में बहने लगा. में बहुत तेज़ी से हम दोनों के रास से सराबोर छूट में फचाक फचाक करके धक्के मार रहा था. धीरे धीरे माँ के साथ में भी शीतल पड़ता गया.

हम दोनों एक दुसरे से एकदम चिपक गए और कई देर उसी मुद्रा में पूर्ण तृप्त हो पड़े रहे और कब सो गए पता hi नहीं चला.
 
लेटेस्ट अपडेट गिवेन अबोवे

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