उस दिन की चुदाई के बाद में ज्यादा कुछ नहीं करि . उस दिन के अगले दिन मैं जब सो के उठी तो मेरा और भी बुरा हाल था. छूट और भी ज़्यादा सूज गयी थी और गांड का दर्द भी ठीक नहीं हुआ था. डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी था. अगले दिन मैं एक लेडी डॉक्टर के पास गयी. लेडी डॉक्टर को देखते hi मेरे होश ुर गए. वो मेरे कॉलेज की दोस्त रोमा निकली. वो भी मुझे देखते hi पहचान गयी और खूब गले मिली.
“ अरे रत्न तू! तू यहां कैसे. कितने दिनों बाद मिल रही है.”
“ हाँ रोमा, कॉलेज के बाद अब मिल रहे हैं. कैसी है तू?” रोमा भी मेरी अच्छी दोस्त थी. अभी भी मुझसे भी ज्यादा फिट हैं. कॉलेज के टाइम में वह सबसे फ़्लर्ट करती थी और सब बॉयज उसके hi पीछे पड़े रहते थे. पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए आज डॉक्टर बन गयी थी. हूँ दोनों बचपन की खूब बातें करते रहे.
“ रत्न मुझे अच्छी तरह याद है तू कॉलेज की सबसे सेक्सी लड़की थी.”
“ हूत ! तू कौन सी कम थी?”
रोमा

रत्न

“ जीजाजी को क्यों नहीं साथ लायी?”
“ मेरी माँ की तबियत थोड़ी खराब थी तोह में खुद आयी.” (में तोह उफ्फ्फ झूट बोल रही थी, मेरे पति को कैसे बताऊ क्यों फीमेल के डॉक्टर के पास आयी हूँ)
“ अच्छा बता डॉक्टर के पास कैसे आना हुआ?” अब मैं चुप हो गयी. हार्बर के बोली
“ नहीं वैसे हैं, कोई ख़ास बात नहीं है. फिर कभी दिखा लुंगी.”
“ अरे रत्न तू पागल है क्या. तेरी दोस्त डॉक्टर है और तू मुझे कुछ बताना नहीं चाहती.”
“ नहीं कुछ ख़ास नहीं.”
“ अब तू ये hi कहती रहेगी या कुछ बताएगी भी. डॉक्टर से क्या छुपाना.” मैं साहस जूता के बोली,
“ देख रोमा मेरे टांगों के बीच की जगह में दर्द हो रहा है.”
“ ो ! तो तू इसलिए इतना शर्मा रही है! चल उतार अपनी सलवार. देखें क्या प्रॉब्लम है.”
“ मैंने तो आज तक किसी के सामने सलवार नहीं उतारी.” मैं शर्माते हुए बोली.
“ अच्छा ! जीजाजी के सामने भी नहीं?”
“ ओह हो! वो तो दूसरी बात है.”
“ जब एक मरद के सामने सलवार उतार सकती है तो औरत के सामने उतारने में कैसी शर्म? वो भी एक डॉक्टर के सामने.” रोमा ने मेरी सलवार का नारा खींच दिया.
“ चल अब बिस्टेर पे लेत जा, और पंतय भी उतार दे.” मैं बिस्टेर पे लेत गयी लेकिन पंतय नहीं उतारी. रोमा ने hi मेरी पंतय भी उतार दी. मैंने टांगें जोर के छूट को छुपा रखा था.
“ रत्न, चल टांगें फैला. देखें क्या प्रॉब्लम है.” मैंने शर्म से आँखें बून्द कर लीन और टांगें फैला दी.
“ बाप रे ! रत्न, इतना जंगल क्यों ऊगा रखा है?” रोमा ने मेरी झांटें हटा के छूट को देखने लगी, “ है राम ! ये क्या ? तेरी छूट तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है. और भी कहीं दर्द है?”
“ हाँ पीछे भी दर्द हो रहा है.” मैं हिचकिचाते हुए बोली. रोमा ने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे शूटरों को दोनों हाथों से फैला के मेरे गांड के छेड़ को देखने लगी.
“ हे भगवान् ! रत्न तू क्या कर रही थी ? ये तो सूज गयी है.” मैं तो मारे शर्म के लाल हो गयी. “ और भी कहीं दर्द है?”
“ हाँ पूरे बदन में ही दर्द हो रहा है.”
“ हूँ! चल कपड़े पहन ले, फिर बात करते हैं.” मैंने अपनी पंतय और सलवार पहन ली. रोमा बोली
“ देख मैंने ऐसे केसेस पहले भी देखे हैं. लेकिन वो सुब ऐसी लड़किओं के थे जिनकी नयी शादी हुई थी और वो सुहाग रात के बाद या हनीमून के बाद मेरे पास आयी थी. आमतौर पे लड़किआं छोटे कद की थी और उनकी शादी लम्बे तगड़े मर्द से हो गयी. सुहाग रात को कुंवारी छूट को छोड़ना हेर मर्द को नहीं आता. ऐसे में अगर मरद का लुंड मोटा और बारे हो और लड़की की छूट छोटी हो तो उसकी ये हालत हो जाती है.
तेरी तो गांड की भी बहुत सूज गयी है. देख रत्न मुझे मालूम है मरद लोगों को औरत की गांड मारने का बहुत शौक होता है. मेरे पति को भी है. अगर मैं उनसे कहूं की आज आपको या तो सिर्फ छूट दूँगी या सिर्फ गांड, एक चीज़ ले लीजिये तो वो तो मेरी गांड hi लेंगे. लेकिन जो हालत तेरी गांड की है वो हालत तो कोई मूसल या घोड़े का लुंड hi कर सकता है. अब मुझे सुच सुच बता तेरे साथ किसी घोड़े ने छोड़ा तो नहीं न.”
“ नहीं रोमा उफ्फ्फ तू कैसी बातें कर रही है? अरे बीटा शादी शुदा हूँ और मेरे पति का खासा मोटा और बारे है.”
“ ो ! तो तेरी ये हालत जीजाजी ने की है?”
“ तो और कौन करेगा?”“ क्यों झूट बोल रही है. सुच सुच बता किसने छोड़ा है तुझे ?”


“ मैं क्यों झूट बोलूंगी ? मेरे पति का बहुत बारे है. उन्होंने hi ये सुब किया है.”
“ देख रत्न तू बिलकुल झूट बोल रहे है. पहली बात तेरी शादी को इतने ज़्यादा साल हो चुके हैं. तू कुंवारी तो है नहीं. जीजाजी का कितना भी मोटा और बारे क्यों न हो अगर वो तुझे इतने सालों से छोड़ रहे हैं तो आज अचानक तेरी छूट के ऐसी हालत कैसे हो गयी ? ऐसी हालत तो उस कुंवारी छूट की होती है जिसे मोठे तगड़े लुंड से बहुत बेरहमी से छोड़ा गया हो. और फिर क्या जीजाजी ने तेरी गांड इतने साल में कल रात पहली बार ली ?
दूसरी बात, जीजाजी की उम्र भी कुछ 50 की हैं न ?” मेरी चोरी पकरि गयी और मैं शर्म से एकदम लाल हो गयी.
“ तेरा चेहरा बता रहा की तुझे किसी गैर मरद ने छोड़ा है. वो भी किसी ऐसे मरद ने जिसका लुंड वाकई घोड़े के लुंड जैसा होगा. बोल मैं ठीक कह रही हूँ न ? सुच सुच बता. मैं तेरी दोस्त हूँ किसी से कहूँगी नहीं.”
मेरे पास कोई चारा नहीं बचा. लेकिन फिर भी मैं ये तो कभी नहीं बता सकती थी की मेरे खुद के जवान बेटे ने hi मुझे छोड़ा है. मैं धीमी आवाज़ में बोली.
“ हाँ रोमा मुझसे गलती हो गयी . मैंने एक गैर मरद से……….”
“ क्यों जीजाजी तुझे संतुष्ट नहीं कर पते ?”
“ नहीं रोमा ऐसी बात नहीं है. लेकिन मैंने जब उस मर्द का देखा तो अपने पर कण्ट्रोल न कर सकीय.”
“ क्यों बहुत बारे था.?”
“ बारे ? बिलकुल घोड़े के लुंड जैसा ! मैंने कभी पिक्चर या फोटो में भी इतना बारे लुंड नहीं देखा. पूरा एक फुट लुम्बा लुंड है उसका.”
“ बाप रे! मेरे पास एक दो पेशेंट्स आये थे जिनके पति का 9 इंच का था. सिर्फ एक पेशेंट आयी थी जो कहती थी की उसके पति का लुंड 10 इंच लुम्बा है. लेकिन एक फुट लुम्बा लुंड !”



“ सुच रोमा सिकुड़ी हुई हालत में hi 8 इंच का होता है. ऐसे लुंड को देख कर तो अच्छी से अच्छी पति व्रत औरत का मन भी दोल जाए. जब पहली बार उसकी टांगों के बीच में एक मोठे नाग के सामान झूलता हुआ देखा तभी मेरा मन दोल गया था. लेकिन खरा होक बिजली का खम्बा बन जाएगा इसका बिलकुल अंदाज़ नहीं था. छुड़वाने से पहले जब उसका लुंड देखा तो मैं कांप गयी लेकिन टब तक बहुत देर हो चुकी थी. बेशरम ने पूरी रात बरी बेरहमी से छोड़ा और गांड भी मारी. तू hi सोच, एक फुट लुम्बा लुंड अच्छों अच्छों की छूट फॉर दे. उसने तो पूरा एक फुट का लुंड मेरी गांड में पेल दिया. मैं तो दो बार बेहोश भी हो गयी थी.. अब मुझे बहुत बुरा लूग रहा है. पति को क्या मुंह दिखाउंगी.”
मैंने अपनी सफाई पेश करते हुए रोमा को आधा सुच बता दिया. रोमा मेरी कहानी सुन के कुछ उत्तेजित लूग रही थी. वो बोली,
“ रत्न बुरा मूत मान. गलती तो हेर इंसान से हो जाती है. विश्वामित्र जैसे सन्यासी का मन अगर एक अप्सरा को देख के दोल सकता है तो तू तो एक साधारण औरत है. फिर ऐसे लम्बे ,मोठे लुंड को देख कर किस औरत का मन नहीं डोलेगा? मैं तेरी जगह होती तो शायद एहि गलती मैं भी कर बैठती.” रोमा की बात सुन के मुझे चैन आया.
मैं पूछी,
“ रोमा तेरे पति कैसे हैं मैं आज तक मिली नहीं.”
“ मिलवा दूँगी. उनको देख कर तेरा मन नहीं डोलेगा क्योकि उनका लुंड तो 6 इंच का है.” ये कह कर वो ज़ोर से हसने लगी. मुझे लगा की रोमा के मन में भी एक लम्बे मोठे लुंड की चाह है. हेर औरत के मन में होती है.
“ रोमा सुच बता तूने भी कभी किसी गैर मरद से छुड़वाया है ?”
“ अरे बीटा हमारा ऐसा नसीब कहाँ. हाँ अगर तू इस मरद से मिलवा दे तो सोच सकती हूँ” रोमा हँसते हुए बोली.
“ धुत ! अच्छा रोमा अब इसका इलाज तो बता.”
“ देख रत्न इस मर्द से अब teen-chaar तक तो बिलकुल मूत छुड़वाना, नहीं तो तेरी छूट और गांड इलाज मुश्किल होगा. अपना ये बने जंगल भी साफ़ कर ले क्योंकि मैं तुझे एक दवाई दे रही हूँ जो रोज़ छूट के चारों और लगानी है. ये hi दवाई गांड के चारों और भी लगानी है. छूट और गांड को सेकने की भी ज़रुरत है. एक हफ्ते के बाद फिर से दिखा देना. मैं तुझे एक जेली भी देती हूँ. जब भी गांड देनी हो तो अपनी गांड में और लुंड पे अच्छी तरह लगा लेना. ये जेली वेसिलीन से ज़्यादा चिकनी है. इतनी चकनी की लुंड एक hi धक्के में पूरा गांड में उतर जाए. इसलिए जीजाजी को बोलना ज़रा धीरे धीरे डालें. और हाँ इस मर्द को अब गांड मूत देना. नहीं तो कुछ दिनों में तेरी गांड इतनी चौरी हो जाएगी की जीजाजी को पता लूग जाएगा की तू किसी औरको भी गांड दे रही है.”



दवाई ले कर मैं घर चली गयी. रोमा को क्या बताती की अब तो मेरी छूट और गांड पे मेरे बेटे नमन के मोठे लम्बे लुंड का hi नाम लिखा है. मेरी छूट या गांड कितनी भी चौरी क्यों न हो जाए अब तो नमन मेरा बेटे के लुंड के बिना जीना नामुमकिन था.
लेकिन एक हफ्ते का टाइम निकालना ज़रूरी था. एक हफ्ते से पहले मेरी छूट और गांड की हालत ठीक नहीं होने वाली थी. घर पहुंची तो नमन मेरा इंतज़ार कर रहा था. देखते hi बोलै,
“ कहाँ गयी थी माँ ? मैं तो बहुत देर से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ. मैं तो समझा आप नाराज़ हो”
“ तुझसे नाराज़ क्यों होउंगी? तू जो कुछ करते जा रहा हैं मेरी मर्ज़ी से किया. मैं तो डॉक्टर के पास गयी थी.”
‘ क्या हुआ माँ?” नमन ने घबरा के पूछा.
“देख नमन तेरा बहुत बारे है. मेरे आगे और पीछे बहुत दर्द हो रहा था.”
“ तो डॉक्टर ने क्या कहा?”
“ आगे से तो बहुत सूज गयी है, और पीछे का छेड़ भी.”
“ सॉरी माँ मैंने जान के कुछ नहीं किया.”
“ जानती हूँ, तेरा है hi इतना बारे. तेरा कोई दोष नहीं.”
“ डॉक्टर ने क्या इलाज बताया?”
“ पहले तो बाल साफ़ करने को कहा. आगे और पीछे लगाने के लिए दवाई दी है और सेक भी करना है एक हफ्ते तक. पता नहीं बाल कैसे साफ़ कर पाउंगी?”
“ माँ आप बुरा न मानो तो मैं आपके बाल साफ कर दूंगा.”
“ हूत पागल ! तूने जो कुछ करना था कर लिया.”
“ माँ विश्वास करिये. मैं ख़याल रखूँगा आपका.
“ अच्छा ! बीटा तो अपनी माँ की छूट के बाल साफ़ करेगा?”
“ तो क्या हो गया माँ? माँ की तकलीफ में बीटा काम न आए तो बीटा कैसा? और मैं आपको धोका नहीं दूंगा. वैसे भी आप अपने आप कैसे बाल साफ़ करोगी?”
“ तू ठीक कह रहा है. ठीक है तू hi साफ़ कर देना. लेकिन ध्यान रहे कोई शरारत नहीं.”
“ प्रॉमिस माँ बिलकुल नहीं.”
“ ठीक है आज रात को में तुम्हारे कमरे में आउंगी. वहां अपना शेविंग का सामान होगा न?.”
रात में जब मेरे पति अपने कमरे में चले गए और पुरे सो गए थे तब में एक मस्त सी निघ्त्य पेहेन कर मेरे बेटे नमन के बैडरूम में चली गयी. मैं भी नाहा धो कर नमन के कमरे में गयी थी. मैंने वोही छोटा सा नाईट गाउन पहन रखा था. अंडर से सिर्फ पंतय पहनी हुई थी.



“ चलो माँ अपना गाउन उतार दो और बिस्टेर पे बैठ जाओ.”
“ अच्छा! गाउन क्यों उठाऊँ? तूने जिस जगह पे काम करना है वो जगह तुझे मिल जाएगी.”
“ अच्छा बाबा अब बैठ जाओ.” मैं बिस्टेर पे बैठ गयी.
“ अब टांगें तो खोलो शेव कैसे करूँगा?” मैंने धीरे धीरे टांगें फैला के चौरी कर दिन. गाउन सामने से खुल गया. मेरी छोटी सी पंतय ने मेरी सूजी हुई छूट को बरी मुश्किल से धक् रखा था. झांटें तो पूरी बाहर hi निकली हुई थी.
“ ऑफ माँ आपने तो पंतय भी नहीं उतारी. वैसे भी बरी मुश्किल से आपकी जायदाद को धक् पाती है.” ये कह के उसने मुझे खरा कर दिया और पंतय नीचे सरकाने लगा. मेरी पंतय हमेशा की तरह मेरे विशाल शूटरों से सिमट के उनके बीच की दरार में फँसी हुई थी. नमन ने खींच के शूटरों के बीच फँसी पंतय को निकाला.
“ माँ आपकी पंतय हमेशा hi आपके नितम्बों के बीच में फँसी होती है.”
“ अरे तो इसमें मेरा क्या कसूर ?”“ हाँ माँ आपका कोई कसूर नहीं. कसूर तो इन मोठे मोठे नितम्बों का है. बेचारी पंतय क्या करे? पीस जाती होगी इन भारी नितम्बों के बीच में.” नमन ने मेरी पंतय ुतात दी और अपने नाक पे लगाके सूंघने और चूमने लगा.
“ूफ क्या मादक खुशबू है! सुच माँ आपकी पंतय कितनी लकी है. अब अपना गाउन भी उतार दो नहीं तो शेव करते हुए खराब हो जाएगा.” ये कह कर नमन ने मेरा गाउन भी उतार दिया.
अब तो मैं बिलकुल नंगी थी. अपने बीटा के सामने इस तरह नंगी खरे हुए मुझे अभी भी उससे इतनी छोड़ने के बाद भी शर्म आ रही थी.
वासना के नशे में नंगी होना और होशो हवास में नंगी होने में बहुत फ़र्क़ है. अपनी जांघों के बीच में अपनी छूट को छुपाने की कोशिश करने लगी. नमन ने मुझे बिस्टेर पे बैठा दिया और टांगों को चौरा कर दिया. मेरी झांटों से भरी छूट नमन के सामने थी. नमन का चेहरा लाल हो गया. उसका लौड़ा हरकत करने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश करने लगा. नमन मेरी टांगों के बीच में बैठ गया.
नमन मेरी झांटों में हाथ फेरने लगा. मेरी छूट धीरे धीरे गीली होने लगी.
“ नमन तू ये सुब क्या कर रहा है. अपना काम कर.”
नमन ने पहले कैंची से मेरी झांटों को काटना शुरू किया. जब झांटें इतनी छोटी हो गयी की अब कैंची से काटना मुश्किल हो गया टब नमन ने शेविंग क्रीम निकला. झांटें काटने से मेरी पूरी छूट की बनावट नज़र आणि शुरू हो गयी थी. नमन ने खूब सारा शेविंग क्रीम मेरी छूट के चारों और लगाया और फिर रेजर से बाल साफ़ करना लगा. जैसे जैसे बाल साफ़ होते जा रहे थे मेरी गोरी चिकनी स्किन उभरती जा रही थी. नमन ने बारे प्यार से शेव कर रहा था. थोड़ी देर में बोलै,
“ माँ अब लेत जाओ और पेअर ऊपर की और मोर के फैला दो.” मैं लेत गयी और टांगें मोर के छाती से लगा दी. बिलकुल छुड़वाने की मुद्रा थी. नमन ने उस जगह भी शेविंग क्रीम लगाया जहाँ वो मेरे बैठे होने के कारण नहीं लगा सका था. बाल तो मेरी गांड तक थे. नमन ने अच्छी तरह शेविंग क्रीम लगा के रेजर से बाल साफ़ कर दिए. पूरी छूट शेव करने के बाद उसने गरम पानी से छूट को साफ किया. फिर बोलै “ माँ देखो अब ठीक है?” मैंने टांगों के बीच देखा तो अपनी hi छूट को पहचान न पायी. कितनी गोरी, sunder,saaf और चिकनी लूग रही थी. कितने फूली हुई थी. नमन के लौड़े ने इतनी सूजा दी थी की अब तो किसी डबल रोटी से भी डबल लूग रही थी. दोनों फांकों के बीच से निकले होंठ इतने बारे थे मनो छोटा सा लुंड हो. नमन भी मेरी छूट को घूरे जा रहा था. उसके लुंड ने तो लुंगी का टेंट बना दिया था. मैं उसके लुंड की और इशारा करके बोली,
अरे हमेशा मुझे देख तेरा मोटा मोस्साल तोह खड़ा हो जाता हैं”



“माँ आपकी ये है hi इतनी खूबसूरत की भाई का मन भी दोल जाए. ये तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है, मैं सेक के दवाई लगा देता हूँ. लेकिन सकेंगे कैसे?”
“ कोई बात नहीं बिना सके hi दवाई लगा दे.”
“ नहीं माँ ऐसे नहीं हो सकता. मैं सेकने का इंतज़ाम करता हूँ.” ये कह कर नमन बाहर जाने को हुआ. मैं उसे रोकते हुए बोली,
“ कहाँ जा रहा है? मम्मी पापा उठ जाएंगे.” नमन वापस आ गया.“ ये बात तो ठीक है. अच्छा, मेरे पास एक उपाय है. अगर आप मानो तो बोलूं.”
“ बोल तो. पता तो लगे कौन सा उपाय है.”
“ माँ जब जानवर को चोट लगती है तो वो अपने जख्म को चाट के सकता है और उसकी चोट ठीक हो जाती है. वो तो दवाई भी नहीं लगाता.”
“ तेरी बात ठीक है. लेकिन न तो मैं जानवर हूँ और न hi मेरी जीभ मेरे टांगों के बीच में पहुंचेगी.”
“ मैंने खूब कहा आपकी जीभ आपकी टांगों के बीच में पहुंचेगी? लेकिन मेरी जीभ तो पहुँच सकती है न.”
“ ो ! तो अब समझी. तेरी नियत फिर से खराब हो रही है.”
“ नहीं माँ मेरी नीयत बिलकुल खराब नहीं है. सेकने का और कोई रास्ता भी तो नहीं है. मैं आपको प्रॉमिस करता हूँ कोई गलत काम नहीं करूँगा. सिर्फ चाट के सेक दूंगा और फिर दवाई लगा देंगे.” छूट की चटाई की बात सुन के hi मेरी छूट गीली होने लगी थी. गीली तो जब नमन शेव कर रहा था तभी हो गयी थी लेकिन अब तो और भी ज़्यादा गीली हो गयी थी. मैं अपनी उत्तेजना को छुपाते हुए बोली,
“ देख नमन तुझे मेरी कसम यदि तूने कोई गलत काम किया तो. सिर्फ सेकना और दवाई लगाना है. कुछ और किया तो कभी बात नहीं करुँगी.”
“ आपकी कसम माँ, और कुछ नहीं करूँगा, चलो गाउन उतार दो और लेत जाओ.”
“ अच्छा बदमाश गाउन क्यों उतारूं? माँ को नंगी करने का बहुत शौक हो गया है? वैसे भी तो सेक सकता है.”
“ माँ वैसे अच्छी तरह नहीं सेक पाऊंगा. उतार भी दो न. मेरे सामने कपड़े उतारने में क्या शर्माना?”
“ ठीक है उतार देती हूँ, लेकिन कोई शरारत नहीं करना.” मैं तो नंगी होना hi चाहती थी. मैंने गाउन उतार दिया और बिस्टेर पे चित लेत gayi.Naman ने मेरी टांगें चौरी कर दिन. टांगों के बीच का नज़ारा देखते hi उसका लुंड फनफनाने लगा. वो जल्दी से मेरी टांगों के बीच में बैठ गया और अपनी जीभ मेरी छूट से लगा दी. ोोूफ ! नमन की गरम गरम जीभ बहुत अच्छी लूग रही थी. मुझे अहसास हुआ की यदि छूट चेतवानी हो तो झांटें नहीं होनी चाइये. एक नया सा अहसास हो रहा था. मेरी छूट बुरी तरह से गीली हो रही थी. मुझे डर तह ा की कहीं मेरी छूट का रूस बाहर न निकल आये. नमन मेरी छूट के छेड़ के चारों और चाट रहा था लेकिन एक बार भी छेड़ को नहीं छाता और न hi जीभ को छेड़ में डाला. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी लेकिन आज छुड़वाना खतरे से खाली नहीं था. जब मुझ से और नहीं सहा गया तो मैंने नमन का सर पाकर के छूट का छेड़ उसके होंठों पे रैगर दिया. मेरी छूट के होंठ उसके चेहरे पे रैगर गए और उसका चेहरा मेरी छूट के रूस से सुन गया.
“ माँ क्या कर रही हो? मैं तो ठीक से सेक रहा था.”
“ नहीं मेरे राजा तू ठीक से नहीं सेक रहा था. जिस जगह सबसे ज़्यादा चोट लगी है वहां तो तूने सका hi नहीं. उसके चारों और सके जा रहा है.”
“ सॉरी माँ वहां भी सेक देता हूँ.” ये कह के नमन ने मेरी छूट में मुंह दे दिया और जीभ छूट के अंडर घुसेड़ दी. अब तो बहुत मज़ा आ रहा था. मैं तो झरने वाली हो रही थी. नमन ने मेरी टांगें मोर के मेरे सीने से चिपका दी. इस मुद्रा में मेरे चूतर और ऊपर हो गए मेरी गांड का छेड़ नमन के मुंह के सामने आ gaya.Naman ने मेरी गांड को भी चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ गांड के छेड़ में भी घुसेड़ देता. बहुत मज़ा आ रहा था. नमन के होंठ मेरी छूट के रूस से गीले हो गए. नमन बोलै,
“माँ, आपकी छूट तो बिलकुल गीली है. इसका मतलब ये कुछ चाहती hai.”“Hut बदमाश ये कुछ नहीं चाहती. कोई मरद इस तरह से किसी औरत की छूट चाटेगा तो क्या गीली नहीं होगी? लेकिन तेरा लुंड भी तो फनफनाया हुआ है.”
“ माँ आपके जैसी खूबसूरत औरत जिसके पीछे सारा शहर जान देता है, किसी मरद के सामने छूट खोल के बिलकुल नंगी पारी हुई हो और वो मरद उसकी सेक्सी छूट चाट रहा हो तो क्या उसका लुंड खरा नहीं होगा. आपको नंगी देख कर तो विश्वामित्र जैसे सनेसि का मन भी दोल जाए. मेरी तो किस्मत खराब है. मेरे लुंड की प्यास तो अब कभी नहीं बुझेगी.”



“ ऐसा मूत बोल नमन. जब तेरी शादी हो जाएगी तो तेरी अपनी बीवी को रोज़ छोड़ना.”
“ माँ आपको छोड़ने के बाद अब किसी और को छोड़ने का मन नहीं करता.”
“ सुब ठीक हो जाएगा मेरे राजा. आखिर तू मुझे साड़ी ज़िन्दगी तो नहीं छोड़ सकता.”
“ जब तक छोड़ सकता हूँ टब तक भी तो आप छोड़ने नहीं दे रही हो.”
“अच्छा ! तो तेरे प्रॉमिस का क्या हुआ.?”
“ माँ आपको छोड़ने के लिए तो मैं कोई भी प्रॉमिस तोर सकता हूँ.”
“ नमन मैं तेरे दिल की हालत समझती हूँ. मुझे मालूम है की कोई भी मरद इस तरह किसी औरत को नंगी करके उसकी छूट छाते तो अपने आप को आखिर खूब तक कण्ट्रोल कर सकता है? एक काम कर सकती हूँ. जब तू मेरी छूट को सैक के दवाई लगा देगा उसके बाद तू अपने लुंड को मेरे मुंह में दाल सकता है. मैं तुझे उतना hi मज़ा दूंगी जितना तुझे छोड़ने से मिलेगा. इस तरह तेरे लुंड की प्यास भी बुझ जाएगी.”
“ सुच माँ? आप बहुत अच्छी हो. लेकिन आप जानती हो छोड़ने और लुंड को चूसने का अलग अलग मज़ा होता है. दोनों को कपड़े नहीं कर सकते. मैं आपसे एक बात कहूं तो बुरा तो नहीं मानोगी?”
“ नहीं मेरे राजा बोल, क्या बात है?”
“ जब आप ठीक हो जाओगी, तो क्या मैं आपको पुरे वीकेंड में दिन रात छोड़ सकता हूँ?”
“ तू तो बहुत चालाक है. ठीक है छोड़ लेना.“
“ फिर तो मज़ा आ जाएगा. सुच रोज़ छोडूंगा आपको.”
“ तू जी भर के छोड़ लेना अपनी माँ को. अब तो खुश है न?”
उसके बाद नमन ने थोड़ी देर और मेरी छूट और गांड को छाता. मैं इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी. फिर उसने मेरी छूट और गांड के छेड़ पे दवाई लगा दी. दवाई लगाने के बाद उसने अपनी लुंगी उतार दी और अपने फनफनाये हुए लौड़े को मेरे होंठों पे टिका दिया. मैं तो उसके गधे जैसे लुंड को चूसने के लये उतावली हो hi रही थी.
नमन के मोठे लुंड को मुंह में लेने के लिए मुझे पूरा मुंह खोलना पारा. मैं बारे प्यार से लुंड के सुपर को चूसने लगी. धीरे धीरे पूरे लुंड को चाटने लगी और उसके नीचे लटकते हुए बारे बारे बॉल्स को भी सहलाने और चूमने लगी. काफ देर तक मैंने नमन के मूसल को चूसा. नमन ने जोश में आके लुंड मेरे मुंह में पेलना शुरू कर दिया. उसका लुंड मेरे गले तक घुस गया था. नमन ने मेरा मुंह पाकर के धक्के लगाने शुरू कर दिए. वो अपने एक फुट लम्बे लुंड को सुपर तक बाहर खींचता और फिर पूरा लुंड मेरे मुंह में पेलने की कोशिश करता. अब एक फुट लुम्बा लुंड तो मुंह में जाना मुश्किल था लेकिन 8 इंच तो घुस hi जाता था. नमन मेरे मुंह को ऐसे छोड़ रहा था जैसे मेरी छूट छोड़ रहा हो. मैं उसके लटकते हुए बॉल्स को दबा और सहला रही थी. करीब आधे घंटे तक भयंकर धक्के लगाने के बाद नमन झाड़ गया और ढेर सारा वीर्य मेरे मुंह में निकाल दिया. ऐसा लगता था था की कभी उसका वीर्य निकलना बून्द hi नहीं होगा. मैं जल्दी जल्दी उसके वीर्य को पीती जा रही थी, लेकिन फिर भी बहुत सारा वीर्य मेरे मुंह से निकल कर टपकने लगा. नमन के लौड़े को कुछ राहत मिली. अब ये रोज़ का सिलसिला हो गया. नमन रोज़, मेरी छूट और गांड को चाट को सकता और दवाई लगाने के बाद मेरे मुंह में अपना लुंड पेल कर अपनी प्यास बुझाता.
एक हफ्ते के बाद मैं फिर अपनी सहेली रोमा के पास चेक उप कराने गयी. उसने अच्छी तरह से मेरी छूट और गांड की जांच की.
“रत्न तेरी छूट और गांड तो बहुत जल्दी ठीक हो गयी, लगता है जीजाजी ने बहुत सेवा की है. देख रत्न मैं एक बार फिर से कह देती हूँ अब उस मर्द को भूल के भी गांड मूत देना.”
“नहीं दूँगी डॉक्टर साहिबा.”
“कुछ दिन और सेक कर ले तो अच्छा है. लेकिन अब दवाई लगाने की ज़रुरत नहीं है. वैसे किससे सेक करवा रही है?”
“तेरे जीजाजी से और किससे?”
“अच्छा बाबा मत बताना सच .. बस जिस किसी ने भी सका हो कहो की बहुत अच्छा काम हुआ हैं सेकने का .. बस याद रख अपनी गांड मूत देना कुछ और दिन उसे
बस फिर कॉलेज की और लाइफ की यहाँ वहां की बातें कर में घर के लिए निकल गयी.
मैंने नमन को बताया की डॉक्टर ने कुछ दिन और सेक करने को कहा है लेकिन गांड देने को बिलकुल मना किया है. ये सुन कर नमन का दिल टूट सा गया.
“माँ जिस गांड के लिए ज़िन्दगी भर तारपा हूँ वो hi नहीं डौगी तो कैसे जीऊंगा?”
“ है मेरे प्यारे बेटे, तेरे लिए तो जान भी दे दूँ. तुझे गांड नहीं दूँगी तो किसे दूँगी? देख डॉक्टर ने एक जेली दी है. आगे से ये जेली मेरी गांड में और एकपणे मूसल पे लगा लेना. लेकिन गांड थोड़ा धीरे धीरे मारा कर. तू तो गधा है लेकिन मैं तो गढ़ी नहीं हूँ न. मैं तो औरत हूँ.”
“है माँ आप कितनी अच्छी हो. आप की कसम आगे से ऐसे आपकी गांड मारूंगा की आपको पता hi नहीं चलेगा.”

वैसे माँ! तुम्हारे चूचियां अब कितनी मस्त हैं.” नमन मुझ से बोलै.
मेरी चूचियां अब गोल गोल थे और उनके निप्पल्स करीब ½” लम्बे थे और निप्पल इस समय तना हुआ था जो मेरे ट्रांसपेरेंट ब्लाउज से साफ़ दिख रहा था..
“ दर्द हो रहा हैं बीटा बदन में, अब प्लीज मुझे यह निघ्त्य पहने में मदद करो इसीलिए इस ब्लाउज के हुक खोलो बीटा”
“ अच्छा फिर मई भी अपना पंत उतर सकता हूँ,” नमन में हंस कर मुझे से बोलै.
“उफ्फ्फ तो तोह बड़ा शैतान हैं” में मुस्कुरा कर बोली.
नमन ने जल्दी से मुझे निघ्त्य पहना दिया और उसके डोरी भी बांध दी.
में निघ्त्य पहन कर खरी होने के बाद घूम कर मेरे बेटे नमन के सामने एक मॉडल को तरफ खरी हो गयी.
दोनों मेरे कमरे से निकल कर ड्राइंग में आ कर बैठ गए और T.V. चला दिया. में सोफे पर hi लेट गयी और जितना हो सके अपनी निघ्त्य से अपने पैरों को धक् लिया. दोनों T.V. देखते रहे. काफी समय के बाद नमन बोलै, “बहुत समय हो गया और मुझे भूक लग रही है. क्या मई पिज़्ज़ा के लिए आर्डर कर दूँ?”
“ठीक है और डॉक्टर का दिया दवाई खाने का समय भी हो गया है, मेरे वहां निचे फिर से दर्द होने लगा है,” में बोली.
नमन ने पिज़्ज़ा के लिए फ़ोन का दिया और फिर मेरे लिए दबाइयाँ भी ले आया और साथ एक गिलास पानी भी ले आया. में अपने जगह पर उठ कर बैठ गयी और दबाइयाँ लेकर अपने मुंह पर रख कर पानी पी लिया.
“थैंक्स बेटे,” में धीरे से बोली और फिर से सोफे पर लेट गयी. में जैसे hi अपने जगह पर घूम कर लेटने की कोशिश की तो मेरी निघ्त्य मेरे चुतर के ऊपर चार गयी. मुझे ऐसे देख नमन का हाथ अपने आप अपने पंत के अंदर चला गया और वह अपने खरे मोठे लुंड को सहलाने लगा. थोड़ी देर के बाद, में अपने जगह पर फिर घूम गयी और अब अपने पीठ के बल लेट करके अपना एक पेअर ऊपर उठा कर घुटने से मोर कर सोफे के बैक से टिका दिया. मेरी की निघ्त्य अब कमर तक आ गयी थी . में पंतय पेहेनना भूल गयी थी और उसके वजह से मेरी छूट का आधा हिस्सा एक्सपोज़ हुआ.
नमन मुझे आंखे फर फर कर मेरी नंगी छूट को देखने लगा.
तभी दरवाजे की घंटी बाजी. नमन जल्दी से दरवाजे पर गया और पिज़्ज़ा लेकर उसको पैसा दे दिया और पिज़्ज़ा लेकर टेबल पर रख दिया.
नमन मेरे बगल में सोफे पर बैठ गया. नमन का हाथ मेरी नंगी पेट पर था. नमन अपना हाथ धीरे से और नीचे ले आया और छूट के ऊपर रख दिया और में सिसकियाँ मारी .. मेरी छूट ठीक हुयी थी और दर्द भी काफी काम हुआ था.
मेरी खुली चुकी का निप्पल अपने मुंह में भर लिया और उसको चूसने लगा और धीरे धीरे से दन्त से काटने लगा. में काफी कसमसाई. नमन ने अपनी एक उंगली धीरे से मेरी छूट के अंदर कर दिया और अंदर की गर्मी और गीलापन से खुश हुआ.
नमन एक ऊँगली मेरी छूट के अंदर दाल कर उसकी चूँची को चूस रहा था काट रहा था. नमन ने अपना उंगली मेरी छूट के और अंदर दाल कर हिलने लगा. में अब सस्शह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह्ह की आवाज निकलते हुए अपनी कमर उचकने लगी. नमन ने अपनी उंगली मेरी छूट के अंदर से निकल लिया और छूट के छेद के चारो तरफ घूमने लगा और कभी कभी छूट के छेद को सहलाने लगा. फिर उसने अपना दो उंगली एक साथ मेरी छूट में घुसेड़ दिया. में अब ज़रा जर्रों से ओह! अहह! ममममम ! अहह! कर उठी.
नमन में अपने उंगली छूट से निकल लिया और उनको फिर से छूट में घुसेड़ दिया. में अब भी धीरे धीरे आवाज कर रही थी. नमन ने अपने अंगूठे से मेरी छूट के दाने को पहले छुआ और उसपर अपना अंगूठा रगड़ने लगा. नमन अपने उंगलिओं को मेरी छूट में पेलना जारी रखा. अब मेरी सांसे तेज हो गयी और वो अपनी चुतर जोर जोर से उछाल रही थी. मेरी शरीर सख्त हो गयी और अपनी चुतर जोर जोर से उछलने लगी, मेरी गार्डन आकर गयी और उनके होणत खुल गए और गले में से आवाज हल्की हल्की ओह्ह्ह! ओह्ह्ह! ओह्ह्ह! निकलने लगी.
नमन वहीँ पर बैठा रहा और अपना उंगलिओं को मेरी छूट पर फेरता रहा.
“माँ में नहाने जा रहा हूँ,” नमन कहा और फिर पूछा, “तुम ठीक तो रहोगी?”
“हाँ मई तीख हूँ”
मुझे नमन की नहाने की आवाज सुनाई दी. जैसे मुझे बाथरूम से शावर की आवाज सुनाई दी, मुझे hi खुद पेशाब लगने लगी.
“की हर बक्त मुझे कुछ कुछ चाहिए,” में अपने आप से बोली और अपने बिस्टेर पर से उठ कर बाथरूम की तरह चल दिया.
“ओह भगवान, नमन ने बाथरूम का दरवाजा बंद न कर लिया हो,” में सोचने लगी.
“मई धीरे से बाथरूम घुस कर पिशाब कर लुंगी और नमन को पता भी नहीं चलेगा.”
माया बाथरूम के दरवाजे के पास जाकर थोड़ी देर के लिए रुकी और शावर की आवाज सुनने लगी. शावर की आवाज से मुझे और जोर पिशाब लगने लगी. में ने धीरे से दरवाजा खोला और बाथरूम में घुस गयी और अंदर जा कर में टॉयलेट पर बैठ गयी. मेरी पिशाब की धार जोरों से टॉयलेट पर गिरने लगी. फिर में अपना सर घुमा कर नमन की तरफ देखी. नमन उस समय बिलकुल नंग खरा था और अपने हाथ से अपना मोटा पूरा सख्त लुंड पकड़े हुए था. इस समय नमन के लुंड का सुपर बहुत फूल गया था और गर्मी के मरे लाल लाल था और उसमे से हल्की हल्की पानी निकल रहा था. नमन उसे जोरों से हिला रहा था और सिस्क्यान मार रहा था ..
मुझसे गलती से कुछ आवाज़ निकली और नमन आवाज़ सुन हड़बड़ा गया और मेरे तरफ मुदा .. उसका हाथ अभी भी अपने मोठे लुंड पर था और उसका मोटा लुंड अब सीधे मेरे तरफ था.
“ओह सही… ओह्ह्ह माँ … नहीं रोक sakta…nahi रोक sakta…Oh!” फिर नमन के लुंड के सुपर से गधा सफ़ेद माल के जोरदार फुहारे मेरे बदन की तरफ निकले .
इतने सारे फुव्हारे निकल गए थे उफ्फ्फ .. पहला फुव्हारे मेरे मुंह पर गया, और दूसरा मेरी चूँची पर पारा और फिर ढेर सारा उसके लुंड का गधा सफ़ेद माल मेरे पेट और पर मेरी छूट के ऊपर गिरा. मेरा पूरा बदन नमन के सफ़ेद गधे माल से भरा हुआ था ..


