Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 13 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::: 60

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जीतू ने मुझे पानी पिलाया, मैं कुछ रिलैक्स हुआ, रिलैक्स तो मैं पहले भी था, यहाँ कदम कदम पर मौत थी, और एक एक सांस एक्टिव रह कर निकलना हमारे लिए ज़रूरी भी था और हमारे लिए मज़बूरी भी, इसलिए हम सभी एक्टिव थे.

लेकिन जितने घोड़े मैंने दमाग के दौड़े लिए थे. अब्ब मुझे इस पैलेस में फैलाये गए शंकर के जाल से भी बढ़ के अपने दमाग को एक्टिव रखना था.

बहार पुलिस ा गई थी और पुलिस के लिए ाडणार घुस क्र शनकर गैंग को खतम करना मुमकिन नहीं था. हम दोस्तों को hi करना था. जो भी करना था.

इस पैलेस में कौन सा जाल किस एरिया में था. हम नहीं जानते थे. अब्ब हमें पूरी तरह से खुद को बचते हुए शंकर गैंग को ख़तम करना था.

ये एक आसान मिशन नहीं था. जितना खतरनाक ये मिशन था. उतना hi हम सबब के लिए मौत का खतरा भी था. और मैं यहाँ न तो खुद मरने आया था और न hi अपने दसौतों में से किसी को मरने देने चाहता था..

अब्ब डायरेक्ट एक्शन लेना था और वो भी बोहत hi तेज़ी से. पर इस के लिए ज़रूरी था क हमें किसी भी जाल में न फंसें. और इस पैलेस की बिल्डिंग में रहते हुए हमारे लिए हर एक फ्लोर पर कई कई जाल हो सकते थे.

बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर के दूर से बहार मैंने जितने भी गुंडों को स्नाइपर गन से उदय था उस जजा पर एक छोटा सा दो मंज़िला गार्टर मकान था. अब्ब हमारे लिए वही सेफ थी और इस के इलावा कोई भी जगा सेफ नहीं थी....

ये भी हो सकता है क इस कण्ट्रोल रूम को कही और से कण्ट्रोल की जा सकता हो और हम यही कण्ट्रोल रूम में खुद को सेफ समझते रहे और प्रेम धर्मेश इसी कण्ट्रोल रूम को हमारे लिए क़ैद खाना बना दें...

हमे इस बिल्डिंग से दूर जाना था. और वो भी जल्द स जल्द..

मैं कण्ट्रोल रूम में सबब जगा देखने लगा. कण्ट्रोल रूम में काम क्र रहे लड़के सबब नहीं जान सकते थे. किसी भी ैरे गैर को तीनो पार्टनर्स सब सीक्रेट नहीं बता सकते थे... ये लड़के भी सभी सीक्रेट्स से jaan-kaari नहीं रखते थे...

मैं कण्ट्रोल रूम को देखने लगा और मेरे दोस्त मुझे देखने लगे....

विजय:- राजा उदय जीतू जितनी जल्दी हो सके इन चरों लड़कों को बेहोश करके के बाँध दो..

सब को hi लग गया था. क जितना उन्हों से इस पैलेस को आसान समझा है. उतना है नहीं. और मेरे कहते hi 3 मिंट में hi चरों लड़के बेहोश होक बंधे पड़े थे..

मैं राजा के पास गया और उसके कान में कुछ कहा. राजा एक बार तो हैरान हुआ. लेकिन फिर राजा ने उदय और जीतू के कान में वही बात बोल दी... और अजय को भी उस के कान में hi सबब बताया गया....

शंकर को ज़िंदा रखना अभी ज़रूरी था. लेकिन यहाँ जैसे हालत हमें फेस करने को मिल रहे थे. हम शंकर के लिए कोई भी चांस नहीं ले सकते थे.

हम कहाँ कहाँ शंकर को उठाये हुए फिरते रहेंगे.. इसलिए शंकर को मरना ज़रूरी था.. लेकिन यहाँ नहीं.

हो सकता है शंकर की वजा से hi अभी हम पर डायरेक्ट हमला न किया जा रहा हो.

प्रेम और धर्मेश शंकर को बचने के लिए कुछ वेट कर रहे होंगे. और फिर शंकर के सेफ होते hi सभी गुंडे मिल कर हमें घेर लेंगे...

मेरे कहने पे hi उदय राजा और जीतू ने पूरे कण्ट्रोल रूम में लगी हुए स्क्रीन्स को गोलियों से उड़ाना शुरू कर दिया. कुछ hi देर में पूरा कण्ट्रोल रूम hi तबाह हो गया. अब्ब इस कण्ट्रोल रूम के ज़रिये हमें इस पैलेस में कही नहीं देखा जा सकता था..

अगर प्रेम और धर्मेश कही बैठे हुए हमें देख रहे थे. तो सिर्फ हमें इसी बिल्डिंग के अंदर hi कही कही देख सकते थे. और हम पर्म और धर्मेश की नज़रें से ओझल हो जाना चाहते थे....

जैसे hi कण्ट्रोल रूम तबाह हुआ. मेरा सोचा हुआ सही सबत हुआ. प्रेम और धर्मेश की आवाज़ पूरे कण्ट्रोल रूम में गूंजने लगी.. अब्ब पता नहीं कौनसी सी आवाज़ किसकी थी.

उधर से:- ये तुम सबब ने क्या कर दिया.. सबब कुछ hi बर्बाद क्र दिया. अब्ब तुम्हारी मौत और भी खतरनाक होगी.. तुम नहीं जानते इस कण्ट्रोल रूम के लिए शंकर और हम वो ने कितनी म्हणत की थी.

मैंने राजा उदय जीतू और अजय को देखा.. वो सबब मेरे ामकान को सही सबत होते देख कर बड़े हैरान थे.... लेकिन बोले कुछ नहीं..

विजय:- प्रेम और धर्मेश तुम क्या समझते हो क हम तुम्हारे जाल में फँस जायेंगे.

शायद फँस भी जाएँ. लेकिन अभी हमारे पास शंकर है ना. यही हमें

बचाएगा और शनकर के बिना तुम सबब भी दिल्ली पर राज नहीं कर सकते. इसलिए शंकर तुम दोनों के लिए भी ज़रूरी है. और हमारे लिए भी...

तुम दोनों अपना काम करो और हम अपना काम करते हैं....

मैंने उदय और राजा को इशारा किया . तो वो शंकर को उठा कर बहार जाने लगे. जीतू और अजय ने वो वेपन वाला बैग उठाया. इसी कण्ट्रोल रूम में मरे हुए गुंडों की गन्स और मैगज़ीन भी थे. जो जो उठाया जा सकता था वो उठाया. और वापिस उसी दूर की तरफ जाने लगे. जहाँ से मैंने बहार गुंडों को स्नाइपर गन से टारगेट किया था.....

दूर को खोल कर जब्ब देखा तो सामने दूर दूर तक कोई नहीं था. और 200 मीटर के फैसले पर इक साइड में वो मकान था जहाँ हमें जाना था. वहां जाते hi हम सबब इस पैलेस के गुंडों से सेफ रह सकते थे .....

विजय:- बैग में से मौजूद ऊपर से लाये गए टाइम बम निकल कर हाल में लगा दो. और इस पैलेस को जितना हो सके. उतना धमाके से उड़ा दो. हमें prem,dharmesh और शंकर के इस पैलेस से क्या लेना देना है.

उसी हाल में लगे हुए एक लोड स्पीकर से आवाज़ आने लगी...

उतर से:- ye..ye.. ttt..tumm सबब पागल हो गए हो. पैलेस को क्यों उड़ाना चाहते हो. तुम खुद भी यहाँ से बच कर नहीं जा सकते. इसलिए अपनी मौत को अगर आसान बनाना चाहते हो तो पैलेस को कोई भी नकसान न पोहनचाओ . और शंकर को हमारे हवाले कार्डो. वर्ण तुम में से किसी को ज़िंदा नहीं रहने दिया जाएगा..

विजय:- जीतू जल्दी करो और इन कुत्तों पर ध्यान देना छोडो. हमें जितनी जल्दी हो सके इस पैलेस को तबाह करके यहाँ से जाना भी है....

उतर से:- मैं ने जो कहा वो सुनाई नहीं दिया क्या.. इस पैलेस को तबाह मैट करो. वर्ण तुम सबब भी कुत्ते की मौत मारे जाओगे...

बोलने वाले की आवाज़ से देरर साफ़ दिखाई पद रहा था. और यही चीज़ मेरे लिए फायदेमंद थी...

इतनी देर में जीतू और राजा ने 2 बम लगा दिया.....

विजय:- लग गए बम...

दोनों hi:- हाँ विजय लग गए बास 5 मिंट में hi ये पैलेस उड़ जाएगा...

विजय:- चलो ठीक है... अब हम ज़िंदा बचें या न बचें. ये पैलेस तो ज़रूर udega......(uday से) शंकर को उसकी नयी दुन्या में भेज दो.. वही जा कर हमसे अपना रिवेंज लेता रहेगा...

उदय ने खंजर से जो उसे 2ंद फ्लोर से मिला था. उसी खंजर की मदद से शंकर का गाला काटना शुरू कर दिया.........

उतर से:- ये ये tu...tum.. शान.. शंकर का गाला क्यों काट रहे हो....

विजय:- अब्ब क्या हम तुम्हारे हिसाब से चलते रहें.. तुम टेंशन मैट लो कुछ hi देर में बम फटेगा और तुम दोनों भी शंकर के पास पोहंच जाओगे...

अब्ब उधर से आवाज़ आणि बंद हो गई.....

अब्ब तक्क मुझे लड़की की आवाज़ नहीं सुनाई दी थी.... शंकर की स्पेशल राखिल थी तो उसे कुछ न कुछ तो बोलना hi चेहये था. लेकिन वो नहीं बोली..

कुछ hi देर में शंकर का आधा गाला काट गया और शंकर मर गया.. शंकर बेहोशी में hi ये दुन्या छोड़ गया था....

मुझे शंकर के ऐसे मरने से मज़ा नै आया था. शंकर के लिए मैंने कुछ और सोचा था. लेकिन यहाँ की पल पल बदलती हुई सिचुएशन ने शंकर को मारने पर मजबूर कर दिया था. हम कोई भी चांस नहीं ले सकते थे. जितना शंकर यहाँ इस पैलेस में हमारे लिए खतरनाक हो सकता था. उतना प्रेम और धर्मेश नहीं.

और हम शंकर को ज़िंदा छोड़ कर कोई चांस नहीं लेना चाहते थे.. जितना बड़ा कमीना शंकर था. वो खुद के लिए ऐसी मौत अफ़्फोर्ड नहीं करता था......

शेर नहीं था. लेकिन शेरोन जैसा जिगरा तो था hi शंकर में और शंकर को ऐसे लाचारों की तरह से मरता हुआ देख कर इक पल के लिए मुझे भी अफ़सोस हुआ. लेकिन फिर मैंने अपने सर्र को झटक दिया... इनसे भी तो कई ऐसे hi लाचारों को मारा होगा.

पैलेस में लगने वाला बम की वजा से पूरे पैलेस में शोर सा सुनाई दिया था. और हम इसी का फायदा उठा कर अपने मतलूबा मकान की तरफ भाग निकले. इस तरफ से हमें किसी किसम की मुज़हमत का अंदेशा नहीं था. इस लिए हम सेफ hi उस मकान तक जा पोहंचे.

अभी प्रेम और धर्मेश के लिए खुद को सेफ रखना ज़यादा ज़रूरी था. और उनके लिए इस बिल्डिंग से जितनी जल्दी हो सके फरार होना था. और दोनों के साथ गुंडों ने भी भाग कर अपनी जान बचानी थी...

वह पोहनहते hi

विजय:- अब्ब तुम सबब तब तक के लिए यहाँ सेफ हो. जब तक यहाँ पर गुंडे नहीं आ जाते. यहाँ पहले इस मकान में पहले चेक करो क ये किस लिए बनाया गया था.

जहाँ तक्क मुझे लगता है. ये सिक्योरिटी के लिए बनाया गया है..

सबब मकान को देखने लगे और मैं जहाँ तक्क नज़र जाती पैलेस को और पैलेस के आस पास देखने लगा.

पल्स के दूसरी तरफ दूर मुझे कुछ गुंडों की मूवमेंट नज़र आई... लेकिन अभी मैंने किसी को कुछ कहा नहीं . बस सब को hi देखता रहा.....

फिर अपने पास मौजूद नाईट विज़न दूरबीन निकल कर पैलेस की बिल्डिंग को देखने लगा. लेकिन वहां मुझे कुछ नहीं दिखा....

सब hi ने बुलिडिंग खली कर दी थी...

दो hi मिंट में सबब आ गए..

उदय:- विजय ये सिक्योरिटी रूम hi है...

विजय:- तो फिर यहाँ भी वेपन्स पड़े होंगे.

राजा:- यहाँ गन्स और मैगजीन्स पड़े हैं...

विजय:- यहाँ इस मकान से कोई रास्ता कही और आता जाता तो नहीं ना..

उदय:- हमें कोई ऐसा रास्ता दिखा तो नहीं..

vijay:-thek है.. अब्ब तुम सबब यहीं रह कर खुद को सेफ रखो. जब्ब ज़रूरत पड़े तो फायर कर देना. लेकिन किसी को भी अपने पास मैट आने देना... दीवार के साथ मौजूद रूम्स से होता हुआ दूर जाता हूँ और वही से गोंडों को स्नाइपर से टारगेट करता हूँ.....

अब्ब बोहत देर हो चुकी है. और प्रेम और धर्मेश भी अब्ब सोचने लगे होंगे क अब्ब तक्क बम फटे क्यों नहीं....

इससे पहले क दोनों कुछ समझते.. उससे पहले hi मुझे बोहत कुछ करना था. टेक उनका ध्यान टूट जाए और वो खुद को कहीं भी सेफ न समझ सकें....

मैंने तीनो को सेफ रह कर लड़ने के लिए बल दिया और रूम्स से होता हुआ दूसरी साइड जाने लगा.... जहाँ से मेरे लिए तो किसी को निशाना बनाना आसान हो लेकिन कोई मुझे टारगेट न कर सके .......

मैं जल्द hi छुपते हुए अपनी जगा पर जा पोहंचा.... मैं एक रूम की चाट पर जा कर लेट गया और स्नाइपर गन सेट करके अपने पास में मौजूद बैग में से स्नाइपर गन क मैगज़ीन निकल कर इक लाइन में रख लिए...

मुझे इस साइड 50 के करीब गुंडे दिख रहे थे. जो बिल्डिंग की hi तरफ देख रहे थे.... उनके पास गन्स की गोली का मुझ तक पोहंच पाना मुमकिन नहीं था. वो दूर मार गन्स नहीं थीं. और ये मेरे लिए बेस्ट भी था..

साले शंकर ने स्नाइपर बेचने के लिए राखी हुई थी. अपने किसी कुत्ते को चलना hi सीखा देता. तो आज बाज़ी hi पलट कर उसके हाथ में होती....... सबब गुंडे hi चूतिये होते हैं. गोली चला क्र देंगें हांकने लगते हैं..

मैंने एक मैगज़ीन स्नाइपर में लोड किया और 2 मैगज़ीन को फूरी उसे के लिए पास hi रख लिया.

मैंने सबब को देखा और फिर मेरे होंठों पर एक खुनी स्माइल आई और मेरी ऊँगली हर 2 सेक् के बाद ट्रिगर पर डब्बने लगी. जितनी बार मेरी ऊँगली दबती उतनी hi बार किसी न किसी गुंडे का सर्र उड़द जाता....

अचानक से होने वाली मौत सभी के लिए शॉकिंग hi होती है. कोई आम इंसान हो या फिर कोई गुंडा. 2 मिंट तो लगते hi हाँ सबब समझने में.. और 2 मिंट मेरे लिए बोहत थे.

2 hi मिंट में 40 क करीब गुंडे मारे जा चुके थे

और बच जाने वाले गुंडे पागलों की तरह से अपनी गन्स को चलने लगे और खुद hi एक दूसरे को मारने लगे...

मैंने उनके पागलपण का पूरा पूरा फायदा उठाया और एक एक आकरके उन्हें भी ख़तम कर दिया..

एक और जगा साफ़ हो गई थी.... और अब्ब मेरे लिए ये जगा छोड़ना भी ज़रूरी था... मैंने जल्दी से सबब समेटा और नीचे उतर के इक साइड चुप कर उधर hi देखने लगा... मुझे कोई नहीं दिखा तो मैंने फिरसे पैलेस की बिल्डिंग की तरफ देखा तो मुझे वहां 3रह फ्लोर पे कुछ गुंडे दिखे. जो अपने गुंडे भाइयों को मारने वाले को hi ढून्ढ रहे थे. और उनके हाथों में भी अच्छी गन्स थी.

अगर कोई उन्हें सही से चलना जानता था तो मुझे टारगेट कर भी सकता था...

अब्ब तक्क यकीनन प्रेम और धर्मेश भी सबब समझ गए होंगे..... क मैंने उन्हें उलझने के लिए नकलील बम प्लान किये थे.. और दोनों hi एक दूसरे को चूतिये बने नज़रें चुरा कर देख रहे होंगे.

अब्ब तक्क 80 से भी ज़यादा गुंडे मारे जा चुके थे.. और अब्ब आधे से भी कम् रह गए थे.... मैंने एक नज़र बुलिडिंग की तरफ देखा और फिर बेसमेंट की तरफ जाने वाले रस्ते को देखने लगा. वो खाली था. और वहां पर ऊपर जाने वाले गुंडों की नज़रें नै थीं. मैंने तीसरी साइड देखा तो मुझे वहां भी सभी गुंडे छुपे हुए hi दिखे.. अब्ब मैं उस सबब से छुपा हुआ था और मुझे इस टाइम बेसमेंट से होकर बुलिडिंग में घुसना था..... उसकी चाल उनके लिए घातक बनाने का टाइम आ गया था..

मैंने ऊपर देख कर खुद को छुपाते हुए बेसमेंट के रस्ते की तरफ दौड़ लगा दी.

और मैं सेफ hi पोहंच गया.. मैं एक बार फिर से वही पोहंच गया था जहाँ से मैं आया था...

मैंने जल्दी में पूरा बेसमेंट छान मारा पर मुझे कोई नहीं दिखा...

मैंने isn-ranjeet को कॉल मिला दी..

ins-ranjeet:- हाँ विजय बीटा बड़ी देर लग रही है..

विजय:- हाँ सर यहाँ बोहत से जाल भी हाँ. इसलिए देर हो रही है..

ins-ranjeet:- तो अब्ब क्या करने का सोच यही तुमने..

विजय:- सर मैं एक बार फिरसे बेसमेंट में ा गया हूँ.. अगर आप चाहें तो मैं बसेमेटन का रास्ता खोल सकता हूँ..

ins-ranjeet के पास hi कमिश्नर खड़ा था..

कम:- हाँ विजय बीटा क्यों है.. अगर हमारी पुलिस यहाँ से छुपते हुए अंदर घुस जाए तो हम पूरे पैलेस पर अपना होल्ड जमा सकते हाँ..

vijay:-(ins रणजीत से) सर आप क्या कहते हाँ.

ins-ranjeet:- वजिजय ये हमारे लिए और तुम सबब के लिए भी सही है. और वैसे भी तुम कह रहे हो क बोहत से गुंडे और जाल हाँ अभी भी इस पैलेस में . तो तुम्हारे लिए सबब आसान नहीं होगा. तुम हमें अंदर लेने के लिए वो दीवार वाला दूर ओपन कर दो.. मिल कर सबब करते हाँ..

विजय:- ok सर मैं अभी खोलता हूँ....

मैं भागता हुआ गया और सुरंग वाला दीवारी दूर खोल दिया. isn-ranjeet के साथ कम भी अपनी फाॅर्स के साथ hi अंदर आने लगे..

isn-ranjeet और कमिश्नर में मुझे गले लगा कर बधाई दी.

ins-ranjeet:- विजय बीटा चलो बाकि की बातें ऊपर hi करते हाँ.

विजय:- चलें सर...

मैं सब को hi ले कर अंदर जाने लगा. और फिर मैंने आईएनएस रणजीत को ऊपर वाला दूर दिखाया और अपने दोस्तों की लोकशन भी बता दी... बेसमेंट में पड़े हुए वेपन्स सब ने hi देख लिए थे.. और कम के कहने पे सबब hi बेसमेंट में बने हुए दोनों पोरशन 'जो मैंने पहले देखे थे' वो देखने लगा..

मैंने isn-ranjet से बेसमेंट में से रास्ता ढूंढ कर बुलिडिंग में घुसने के लिए कह दिया.

ins-ranjet:- ठीक है विजय बीटा. खुद का ध्यान रखते हुए जाओ और जल्दी से सबब ख़तम करो. मैं भी यहाँ की चेकिंग के बाद ऊपर जाता हूँ. और देखता हों क क्या किया जा सकता है.

मैं ins-ranjeet को bye बोल कर बामसेमेन्ट में रास्ता ढूंढ़ने लगा..

प्लीसेवालों की चेकिंग से hi उनको वो रास्ता मिल गया. तो isn-ranjeet ने मुझे बता दिया क रास्ता इस तरफ से जाता है. मैं उसी रस्ते से अंदर दाखिल हुआ और मेरे पीछे रास्ता बंद कर दिया gaya..kyunki पुलिस के शामिल रहने से मेरे लिए दिक्कत बढ़ सकती थी. और मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था ..... इसलिए मैं अकेला hi आगे बढ़ गया था...

अभी इस तरफ किसी का भी धयान नहीं था. आधे से ज़यादा गन्ने मारे गए थे. और नीचे बेसमेंट में छुपे रहने से कुछ हासिल नहीं होने वाला था.... सब गुंडों के लिए hi हमारा मारा जाना ज़रूरी था..

मैं तेज़ी से आगे बढ़ रहा था. और ये रास्ता बिल्डिंग की तरफ hi जा रहा था. जहा जगा लाइट्स लगी हुई थीं. मुझे कोई परेशानी नहीं हुई...

आगे बढ़ते हुए मुझे राहरदी के कार्नर पर एक गुंडा दिखा जो कहीं जा रहा था. वो बोहत hi तेज़ी में था. मैंने सीलेंसर लगी गन ने उसके पेअर को शूट कर दिया और भाग कर उसके पास पोहंचा. वो चिल्लाता उससे पहले hi मैंने उसका मोहन बंद कर दिया. वो अभी भी सुरप्रीसेड था.. मैं उसे खेंचता हुआ इक साइड ले गया और

विजय:- तुम इतनी तेज़ी से कहाँ भाग क्र जा रहे हो.....

वो कुछ नहीं बोलै तो मैंने राइफल को उसके माथे पर लगा दिया

विजय:- मेरे पास टाइम नहीं है और तुम कुछ भी बोल नै रहे.

मेरी आवाज़ में दरिंदगी देख कर वो बोल पड़ा..

wo:-raghu उस लड़की के साथ ज़बरदस्ती करने वाला है. मुझे बॉस को बताना पड़ेगा. वर्ण बॉस मुझे नहीं छोड़ेगा...

विजय:- चलो मुझे वहां ले चलो.

और मैं यस्य खेंचता हुआ उस तरफ ले जाने लगा जहाँ उसने कहा था. लड़की इस रूम में है और रघु नाम का एक वांटेड क्रिमिनल भी वही है.. जो लड़की का रपे करने की कोशिश में था..

लड़की नेहा के इलावा और कौन हो सकती थी...

जब हम दूर पर पोहंचे तो मैंने उसे शूट कर दिया....

और दूर को एक लात मार कर अंदर जा घुसा. अंदर नेहा के कपडे पहात चुके थे और वो चीख चीख कर खुद को रघु से दूर हटने के लिए बोल रही थी. लेकिन रघु पागल हो गया था. वो नेहा की कुछ भी सुने बिना hi उसके साथ ज़बरदस्ती करने में लगा हुआ था..

दूर के एकदुम्म से खुलते hi वो मेरी तरफ पलटा और

रघु:- कौन हो तुम... कही तुम वही तो नहीं जो इस पैलेस पर हमला कारण..

वो कुछ बोलता मैंने टाइम न वास्ते करते हुए उसे शूट क्र दिया. वो खून उगलता हुआ नेहा के ऊपर hi गिर गया.. और नेहा की चीखें फिरसे गूंजने लगी..

विजय:- नेहा दर्रो नहीं. मैं तुम्हारे अजय का दोस्त हों. और वो भी इस टाइम इसी पैलेस में मेरे साथियों के साथ है. वो भी तुम्हे यहाँ बचने के लिया मौजूद है. इसलिए प्ल्ज़ तुम दररना और चीखना बंद करो..

मेरे नेहा के कमरे में घुसते hi मेरे ट्रांसमीटर लगी चिप से सबब को hi पता चल गया. और फिर मेरे कालर से अजय की आवाज़ गूंजने लगी.. मैं नेहा के पास गया. नेहा डर गई..

मैंने नेहा कुछ भी कहे बिना hi उसका सर्र पकड़ कर अपने कालर के पास कर दिया. वो और भी ज़यादा डर गई. लेकिन फिर अजय की आवाज़ सुन कर चुप हो गई. और इधर उधर देखने लगी. मैंने उसका चेहरा पकड़ कर फिरसे अपने कालर की तरफ झुकाया तो उसे कुछ समझ आया.. वो अजय की आवाज़ मेरे कालर से सुन के हैरान तो हुई लेकिन फिर अजय अजय बोलते हुए मेरे कालर को पकड़ कर रोने लगी.... और अजय भी रोने लगा.

मैंने नेहा को खुद से अलग किया और बोलै

विजय:- अभी रोने के लिए भी टाइम नहीं है. चलो मेरे साथ मन तुम्हे सेफ जगा पोहंचा दूँ.

मैं नेहा को लेकर ins-ranjeet के पास पोहंचा और उन्हें सबब बता क्र फर से वापिस बेसमेंट से बिल्डिंग में घुसने वाले रस्ते की तरफ हो लिया. इस बार मेरी स्पीड ज़यादा थी. और राइफल मेरे हाथ में तैयार थी. किसी को भी मारने के लिए...

थोड़ी hi देर में मैं एक मोड़ तक जा पोहंचा. उस मोड़ से ऊपर इक रास्ता सीढ़ियों की शकल में ऊपर जा रहा था. मैंने आस पास देखा और फर ऊपर जाने लगा.

ऊपर पोहंच कर मैं देखा तो मुझे कोई नहीं दिखा.. अब्ब मुझे अपने सामने दिखने वाले हर एक को मरना था और जल्द स जल्द सबब का काम तमाम करके इस बिल्डिंग को गुंडों से पाक करना था...

मुझे नीचे वाले फ्लोर में कोई नहीं दिखा तो मैं 2ंद फ्लोर पर चढ़ने लगा. जैसे hi ऊपर पोहंचा तो मुझे 15 के करीब गुंडे दिखे जो इधर उधर टहल कर खिड़कियों से बहार झांक रहे थे..

मेरा ख्याल है अब्ब उन्हें बामेसमेंट में पुलिस के घुसने का पता चल गया था. सबब के चेहरे पर खौफ भी था. और दरिंदगी भी..

सभी मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स थे. मर तो जाते लेकिन पुलिस के हाथे नहीं चढ़ना चाहते थे.......... मैंने उनको देखते hi राइफल को सिंगल मोड़ से हटा कर ऑटो मोड़ पर कर दिया और फिर राइफल को गुंडों की तरफ करके ट्रिगर दबा दिया. राइफल ने सभी को भूनना शुरू कर दिया. लेकिन सबब hi ेमदुमं से तो मरने से रहे. अब्ब वो भी एक्टिव हो चुके थे..

उन्हों ने भी मुझे देख लिया था. लेकिन उनके कुछ करने से पहले hi मैंने उसी फ्लोर के एक पिलर के पीछे खुद को सेफ किया और राइफल का मैगज़ीन चेंज करके

उन पर फायर करने लगा.

उनमे से 3 बच गए थे और वो भी छुपने के लिए जगा ढून्ढ रहे थे. लेकिन मुझे इनको मारने में देर नहीं करनी थी. सिलिये मैंने पिलर की साइड से निकल कर फर्श पर गिर कर खुद लुढ़काया और फिर उन बच गए गुंडों को भी उनके साथियों के पास पोहंचा दिया..

अब्ब बिल्डिंग में सबब को hi पता चल गया था, क कोई अंदर घुस चूका है. अब्ब देर करना सही नहीं था....

इस फ्लोर पर मुझे कोई और नहीं मिला था. तो मैं ऊपर गया. और ऊपर वाले सबब hi तैयार थे, किसी के ऊपर आने के लिए.....

तैयार तो मैं भी था, और वो भी कई घंटों से.. ऊपर पोहनस्ते hi मैंने सही से देखे बिना hi खुद को फर्श पर गिराया और फिरसे ऑटो मोड़ पर सेट राइफल के ट्रिगर को तब्ब तक्क दबाये रखा जब्ब तक्क मैगज़ीन खली नहीं हो गया... जैसे hi मगज़नी खली हुआ, मैं लेते लेते hi लुढ़कता हुआ खुद को कुछ दूर ले गया और इसी बीचे मैंने राइफल का मैगज़ीन भी चेंज कर लिया था...

लेकिन मुझपर गोली चलने वाले ज़यादा टर्र तो गिर चुके थे और बाकी भी खुद को सेफ रखें के लिए नीचे गिरे पड़े थे.

मैं जल्दी से बच रहे गुंडों पर फिरसे वो नया लोड किया हुआ मागज़ीने भी खाली कर दिया.....

उनमे कोई ज़िंदा है या नहीं. ये देखने के लिए मैं वहां रुका नहीं.

इस फ्लोर पर अब तक मारे गए जुड़े 20 से ऊपर hi थे...

मतलब 120 के करीब मरे गए थे..... अब्ब मैं भी थकने लगा था.....

इतनी इंसानी जानो के मेरे हाथों जाया होने से मुझे अपने मसल्स कुछ थके थके से लगने लगे थे.. गुंडे थे पर थे तो इंसान hi...

फिर मैं अपने सर्र को झटक कर राइफल का मैगज़ीन चेंज किया आगे बढ़ा गया.

आगे एक हाल था और हाल में मुझे 5 गुंडों के साथ प्रेम धर्मेश और जूली बैठे हुए दिखे........

जूली मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. लेकिन प्रेम और धर्मेश के साथ साथ खड़े हुए गुंडे मुझे खुनी आँखों से देख रहे थे..

मुझे अपने पीछे से आवाज़ सुनाई दी. मैंने गर्दन मोड़ कर देखा तो मेरे पीछे दो गुंडे गन्स लिए हुए खड़े थे...

प्रेम:- जितनी हीरोगिरी तुमने करनी थी कर्ली.. अब्ब चुप चाप अपनी गन्स को हमारे आदमियों के हवाले कार्डो. वर्ण तुम्हारे कुछ भी करने से पहले hi तुम्हारे शरीर के चीथड़े उड़ते हुए दिखेंगे तुमको......

अब्ब सिचुएशन मेरे खिलाफ हो गई थी. तो मुझे उसकी बात माननी hi थी.... मैं समझ गया था. क अब्ब मैं यहाँ सभी को भी एक साथ शूट नहीं कर सकता. वर्ण खुद को उसके हवाले मैं करना नहीं चाहता था.....

इसलिए मजबूरन मुझे खुद को सरे वेपन्स से अलग करना पड़ा.....

मेरे जिस्म से सारे वेपन के अलग होते hi मेरी पीठ कर पीछे से किसी ने अपनी गन के दस्ते से हमला किया और मैं दर्द से कराहता हुआ आगे झुक गया.....

कोई कितना भी ताकतवर हो गन के डेट की मार सहना आसान नहीं है. एक बार तू बंद अहिल hi जाता है. और मन भी हिल गया था...

अब्ब मन उनके शिकंजे में था....... अब्ब देखना था क मैं ऐसी सिचुएशन में कैसे खुद के लिए सर्वाइव कर सकता हूँ...........



मुश्किल था.. या मुश्किल तरीन.. लेकिन na-mumkin तो नहीं था........



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थैंक्स राजेश जी..

मुझे आपका सुग्गेस्टिव अच्छा लगा.. मैं भी आप hi की तरह से स्टोरी को बोहत आगे तक भगा लेजाना साहहता हूँ .. लेकिन यहाँ मसला पैलेस की सिक्योरिटी को ले के था. और शंकर पैलेस को विजय के लिए फ़ौरन hi अपंनी कस्टडी में ले लेना सही नहीं था.. यहाँ विजय को ऐसा पैलेस म्हणत किये बगैर कैसे मिल सकता था.. इसलिए विजय को शंकर पलए में देर हुई..

और आपका ये भी कहना सही है. क रीडर्स का इंटेस्ट भी कम् ो जाता है.. लेकिन यहाँ ये सबब मैं भी तो आप सबब रीडर्स के लिए hi तो लिख रहा हूँ.. बास मेरा राइटिंग स्ट्य्लेकुछ हैट के है.. और इसीलिए कुछ डिटेल में लिख दिया.. अगर शार्ट में लिखता तो विजय की सही स्ट्रिगल आप सबब के सामने नै आती..

थैंक्स ु वैरी मुश् फॉर थे सुग्गेस्टिव.. और मुझे नेक्स्ट भी आपके ऐसे hi सुग्गेस्टिव की ज़रूरत रहे गई
 
अपडेट ::: 61

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2 दिन बाद


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लोकेशन शंकर पैलेस


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TIME:09:00:PM:


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आज शंकर पैलेस में रौनक लगी हुई थी. पुरे पैलेस को रंग बरंगी रोशनियों से सजाया गया था. हर तरफ खिलते मुस्कुराते और चहकते हुए चेहरे दिख रहे थे. आज इस पैलेस में देहली शहर की सबब hi बड़ी हस्तियां मौजूद थें. और

कम, मिनिस्टर्स, Mla,police कमिश्नर और दिल्ली सिटी के आल रिच पर्सन्स अपनी फैमिलीज़ के साथ ए हुए थे...........

वहीँ दूसरे तरफ इसी पैलेस में नार्मल कपड़ों में दिखने वाले बेसहारा लोग भी अपनी फॅमिली के साथ मौजूद थे. वो भी आज इसी पैलेस में इन्वितेद थे.........

ये पैलेस दिल्ली सिटी रेजिडेंस के हिसाब से सबब से बड़ा र सबसे खूबसूरत था..

आज सबब hi बड़े मज़े से और बड़े hi शोक से पुरे पैलेस का विजिट कर रहे..

दिल्ली शहर में रहने वाले कई लोगों के दिल की खवाहिश थी क वो कभी इस पैलेस को अंदर से देख सकें. और ख़ास कर इस पैलेस के आस पास रहने वाले वो भी आज इन्वितेद थे. वो भी अपने दिल की तालाब को पूरी करते हुए पुरे पैलेस को देखने में मगन थे....

मतलब आज अगर पूरा पैलेस जगमगा रहा था. तो पैलेस के अंदर मौजूद पैलेस को देखने वळून के भी दिल आज अंदर से जगमगा रहे थे...

सब के चेहरे ख़ुशी से खिले हुए थे....

इसी पैलेस में आने वाले मेहमानो के बचो को इंटरटैं करने के लिए टेम्पररी झूले और स्लाइड्स लगाईं गई थीं..

आज कोई ऐसा नहीं था. जो खुश न दिख रहा हो .....

ऐसे hi khush-haal चेहरों में एक चेहरा था.. जूली का

जूली भी आज बोहत ज़यादा चहक रही थी. और आने वाले सभी मेहमानो का बड़े hi अच्छे से सवागत कर रही थी. जूली को जानने वाले जूली को ऐसे खुश खुश देखते हुए उसे अच्छी लाइफ मिलने पारर मुबारक बाद भी दे रहे थे. और जूली भी सबको उनके अच्छे विचारो की वजा से धन्यवाद् क्र रही थी. सच में hi आज जूली की लाइफ में एक ऐसा मोड़ आया था. जिस बारे उनसे कभी सोचा भी नहीं..

पैलेस के अंदर इक स्टेज भी बनाया गया था. लेकिन अभी वहां पर कोई भी नै बैठा हुआ था.....

जूली को पैलेस के अंदर से कुछ लोग आते हुए दिखे तो वो भाग क्र उस सभी के पास जा पोहंची... जूली सभी को ढक कर चहकने लगी थी. आज वो थकी हुइटभी बोहत थी. केकिन दिल की ख़ुशी इतनी बढ़ी हुई थी क वो अपनी थकन को भूल कर आज के इस खूबसूरत दिन और रात को नेजोय सभी के साथ मिल कर एन्जॉय कर रही थी..

जूली:- बॉस आप आ गए. बड़ी देर लगा दी. मेहमान कब से hi वेट कर रहे हैं आपका..

बॉस:- जूली मैंने कितनी बार कहा है मुझे बॉस मैट कहो. मुझे मेरे नाम से बुलाओ..

जूली:- ok वजिजय जी.. तो आप पहले कहाँ जाना पसंद करेंगे. स्टेज पर या

vijay:-stage पर बाद में जाएंगे पहले हमें हर्ष अंकल और पहलवान जी और आईएनएस रणजीत जो मेहमानो में शामिल हाँ उसके पास जाना है.

जूली :- तो चलो फिर सब hi बड़ी शिदत से वेट कर रहे हैं तुम्हारा..

विजय:- हाँ चलो..

आप भी सोच रहे हँगे ये अचानक से कैसे हो गया. तो मैं आप सब को बताता हूँ पहले ज़रा इन मेहमानो से मिल लूँ. आपके दिल में मचल रहे सवालुं के जवाब भी मिल hi जायेंगे....

यहाँ इस वक़्त मेरे साथ मेरी दिल्ली की पूरी फॅमिली और हर्ष अंकल की भी पूरी फॅमिली थी. मतलब दिल्ली में मुझसे कनेक्टेड जितने भी लोग थे. वो सभी यहाँ पर मौजूद थे.

रानी ने अचानक से जूली की गांड पे एक हल्का सा थप्पड़ लगा दिया..

जूली उछाल पड़ी और उसकी हलकी सी चीख निकल गई..

पूजा दीदी:- रानी क्या करती हो. उसके चोट लगी है न वहां पे.. क्या तुम्हे नहीं पता.

रानी:- (कमीनी) सूबा से hi काम में लगी हुई है. वही चेक करने के लिए hi तो हलकी सी लगाई है. दर्द है या ख़तम हो चूका है. वो वेख रही थी.

सूबा से भागी भागी फिर रही hai.....muje लगा ये अब्ब ठीक hi होगी..

जूली कुछ नै बोली बास मुस्कुराती हुई रानी की बात सुनने lagi..uay ये सबब बोहत अच्छा लग रहा था. कहाँ उसने अपनी लाइफ में ये अपनापन्न देखा होगा..

शीतल:- तो ऐसे चेक करने की क्या ज़रूरत है.

रानी:- अच्छा तो कैसे चेक करते हैं.

दीक्षा आंटी:- चलो बास करो. एक तो बेचारी सूबा से मारी मारी फिर रही है. क्यों तुम सबब उसको तंग करने में लगी हो..

रानी:- तो मैंने कहा था. क यौन मारी मारी फिरती रहे. यहाँ काम करने के लिए पूरी एक फ़ौज है. तो इसे करने की क्या ज़रूरत है.....

मैं और पूजा दीदी सबको hi ऐसे बातें करते सुन रहे थे.. और जूली को अपनी लाइफ की पहली ऐसे फॅमिली मिली थी. जूली ऐसे hi माहौल को हमेशा से ढूंढा करती थी. लेकिन बुरी दुन्या में रह कर उसे ऐसा माहौल कैसे मिल सकता था..

हम चलते हुए मेहमानो में जा पोहंचे. वहां हर्ष अंकल के साथ isn-rnjeet और पहलवान जी थे. साथ में एरिया कमिश्नर भी थे .....

पहलवान जी:- आओ आओ मेरे शेर. तुमने तो बड़ा इंतज़ार करवा दिया.

हर्ष उनक:- अरे जग्गू जी जहाँ ये था. वहां देर न हो ऐसा कैसे हो सकता है.

हर्ष अंकल ने ये बात लेडीज को देख कर कही थी. और उनकी इस बात से सबने hi kah-kahe लगाए ...

अब्ब भरी महफ़िल में मैं लेडीज वाला हो गया tha..sabb मर्द बहार थे और मैं अकेला साड़ी लेडीज के साथ अंदर पाले में था..

आज अंकल भी एक अलग hi मूड में थे..

ins-ranjeet:- ये हमारा शेर है, जहाँ भी रहे. इसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.. और वैसे भी यहाँ जल्दी किसको है. आज सब hi आये हुए है. तो अच्छे से टाइम स्पेंड करके hi जायेंगे. यहाँ सबब की hi फैमिलीज़ आई हुई है. तो किसी को जल्दी कैसे होगी.

कम:- और जिसे जल्दी है, वो जा सकता है. मुझे तो कोई जल्दी नहीं है.... मेरी खुद की फॅमिली यहाँ बड़े मज़े से घूम फिर रही है...

हर्ष अंकल:- सही कहा कमिश्नर साब aapne...(fir मुझसे) विजय बीटा पहले तुम्हरी कम साब से और मिनिस्टर्स से मुलाक़ात करवाते हाँ. फिर दूसरे लोगों से भी मिलवाएंगे.. आगे ज़रूरत पड़ती रहेगी ...

मेरे इलावा सब hi वहीँ रुक गए. सिर्फ जूली hi मेरे साथ आई. और मैं हर्ष अंकल, ins-ranjeet, पहलवान जी, और कमिश्नर के साथ कम साब और मिनिस्टर्स की तरफ बढ़ गया.

वहां पोहंचे तो

हर्ष अंकल:- कम साब इनसे मिलिए ये हाँ विजय और मेरी बहन के बेटे हाँ..

कम :- विजय बीटा कैसे हो.

विजय:- भगवन की किरपा है सर. आप सुनाएँ आप कैसे हाँ.

कम :- (खुश दिली से मुस्कुराते हुए) बीटा मई भी ठीक हूँ. बस अगर शहर में शांति बानी रहे तो मई और भी अच्छा हूँ...

कम साब की बात से सभी मुस्कुराने लगे. कम साब हसंमुख किसम के इंसान थे. और हर्ष अंकल को बोहत अच्छे से जानते भी थे.

और फिर एक के करके हर्ष अंकल ने मेरा सभी से इंट्रो करवाया. सभी से hi उन्हों ने ये कहा, क मैं उनकी बहन का बीटा हूँ. अभी मेरे बारे काम hi किसी को पता था. और ये पैलेस मुझे मेरे मिशन की वजा से मिला था. जहाँ से मिलने वाले माल की वजा से पॉलिटिशंस की भी जेबें भर गई थीं. और वो खुश थे.

ins-ranjet और कम के इलावा कोई नै जनता था मेरे बारे में.... कुछ पुलिस वालों ने मुझे मेरे दूसरे रूप में देखा था. मेरा ये रूप मेरे जान्ने वळून और कम के इलावा सभी आज पहली बार देख रहे थे..

मैं इस वक़्त अपने असली रूक में था .. कम को कल hi यहाँ मैंने ins-ranjeet के कहने भी अपना असली चेहरा दिखा दिया था...

आईएनएस रणजीत को सही लगा होगा तो hi उन्हों ने ये सबब करने को कहा होगा... अभी कम् hi किसी से डिटेल में बात हुई थी..........

पूरी डिटेल आपको भी मैं थोड़ी देर में देता दूंगा...........

सबसे hi मेरा इंट्रो करवाया गया. मुझे कोई उलझन नै हुई. और मैंने सभी से दिल से बात की, इसी में टाइम लग गया था..

कम साब और मिनिस्टर्स के लिए ख़ास बैठने का अर्रंगे किया गया था.. लेकिन फिर उन सभी को स्टेज पर बिठाया गया. वो कुछ देर वहीँ बैठे फिर अपनी जगा पर आ कर बैठ गए.. इस बीच मेरा सिटी के दूसरे लोगों से भी इंट्रो होता रहा..

स्टेज पर जा कर भी मेरा सभी के साथ एक साथ hi इंट्रो हो सकता था.. लेकिन मैं कोई व्विप नहीं था. जो स्टेज पर खड़ा हो कर अपना इंट्रो करवाता फ़िरों..

हालांकि पहले हर्ष अंकल ने कहा था. क इंट्रो स्टेज पर सही रहेगा. लेकिन मुझे इसमें मज़ा नै दिख रहा था....

किसी से मिलने के लिए अगर टाइम लगता है, तो टाइम लगाने में क्या हर्ज है.

वो सबब भी खुश और दिल भी खुश..

सबसे मिलने के बाद सबके पेट का सोचते हुए उन्हें भरने का इंतेज़ाम किया गया..

पेट भर जाए तो मिलने मिलाने आसानी रहती है. वर्ण सभी एक दूसरे से पूछते रहते हाँ, यार खाना क्यों इतना लेट हो गया, मैं तो आज जल्दी में घर से कुछ हल्का फुल्का खाने से भी रह हूँ..

राजा अकेला था. उसकी कोई फॅमिली नै थी, लेकिन उदय जीतू और अनुपम की फॅमिली अब्ब हमेशा के लिए यहीं शिफ्ट हो चुकी थी..

और हर्ष अंकल के साथ मेरे जान्ने वाले भी सभी यही थे....

मेरे चरों दोस्त भी यही थे वो भी लोगों से मिलने में लगे हुए थे.. अजय नेहा और दोनों की फॅमिली भी यही आई हुई थी....

मेरे जान्ने वळून में जिसको जगा मिली या जिसका मैं हुआ वो स्टेज पर जा के बैठ गया..

जूली इंट्रो टाइम मेरे साथ hi रही थी. लेकिन अब्ब वो बोहत hi ज़यादा थक चुकी थी. जूली ने बड़ी हिम्मत से आज का सारा सेटअप ाररगने किया था...

मेरी जूली के साथ एक बोहत ज़बर्द्सस्त किसम की फाइट हुई थी.

जिस वजा से जूली मेरी बेदाम घुलम बन गई .....

मैं भी सबब को सत्गे पर देख कर वही जा पोहंचा..

नताशा दीदी:- बड़ी देर लगा दी मेहरबान आते आते

राज:- दीदी भाई अब्ब बड़ा बन्न गया है. तो बड़े बड़े लोगों से मिलने में टाइम तो लग hi जायेगा... राज मुझे देख मुस्कुराता हुआ बोलै..... वो भी सब की hi तरह से चहक रहा था....

शीतल:- राज तेरे बड़े दांत निकल रहे हाँ.

राज:- दीदी मेरे दन्त हाँ. मन जैसे चाहे निकालों. अब्ब क्या मुझे आपसे पूछ के दन्त निकलाकने पड़ेंगे..

राज भी तीखी मिर्ची बनता जा रहा था. उसकी माँ और बहने काम थी क्या, जो ये भी एक सबब में शामिल होने लगा था...

शीतल:- अल्ले मेला मुन्ना बाला हो दिया ा....

शीतल की बात सुन कर राज के दांत छुप गए और सबब शीतल की बात और अंदाज़ पर ज़ोर सा हस्सन लगे.

राज ने शीतल को घर के देखा..

शीतल:- (अपनी बहन खोलती हुई) मेरा भाई अपनी दीदी को ऑंखें दिखता है. चल आ जा. नाराज़ मैट हो.

राज:- दीदी सबब के सामने तो ऐसे न किया करो.... इतना कह कर राज शीतल के गले लगा और शीतल के गालों को काट कर अलग हो गया.. और शीतल चीखते हुए राज को घूरने लगी..

भाभी:- तुम लोग यहाँ भी बाज़ नहीं आ रहे हो.. सबब तुम्हे hi देख रहे हाँ.

पूजा दीदी:- रहने दो भाभी, आज ये सब मस्ती नहीं करेंगे तो कब्ब करेंगे..

दीक्षा आंटी:- सही कहा पूजा बेटी. मैं भी इसी लिए इन को नै रोक रही हूँ.

आज इनके दिल खुश हैं. तो जो करते हाँ इन्हे करने दो....

नताशा दीदी ने मुझे गले लगा लिया और मेरे गाल चूम कर बोली

नताशा दीदी:- विज्जु तुम कितने बिजी हो गए हो. इतने महीनो के बाद ए हो और मुझे ढंग से टाइम भी नै दे प् रहे हो...

विजय:- दीदी क्या बताओ. सबब आपके सामने hi तो है. जब्ब भी फ्री होता हूँ तो फिर आप सबब के लिए hi तो हूँ मैं....

नताशा :- हाँ सही कहा वज्जु तुमने. चल कोई ना अब्ब तो तुम यही हो. फ्री हो लो. फिर तुमसे खूब इतने महीनो की दुरी का उधार चुकाएंगी..

rani:-(dheere से) क्यों दीदी आप कुछ ज़यादा मस्ती चढ़ गई है. आप टेंशन न लें. आज मैं आपके साथ hi सो जाऊँगी.... सबब ठीक हो जाएगा.. सूबा आप कहेंगी. क अब्ब कुछ दिल को सकूँ है..

नताशा दीदी रानी की बात सुनके बुरी तरह से झींप गई और मेरे साथ साथ रानी और पास में कड़ी शीतल hi हस्सन लगी... जिसको नहीं पता था. वो पूछने लगा क हांसे क्यों..

रानी:- कुछ नै हम तो बस ऐसे hi एक दूसरे से लगे हुए हाँ.. रानी के अंदाज़ से सब hi समझ गए. क ज़रूर रानी ने कोई उलटी बात की होगी....

रानी कमीनी जो थी.......

ऐसे hi मस्ती में टाइम गुज़रा और सब hi मेहमानपणी ये हसम और रात हैप्पी हैप्पी गुज़र क्र चले गए ....

मेरे जान्ने वाले वही स्टेज पर और जिसको स्टेज पर जगा नहीं मिली वो चेयर्स को घसीट क्र स्टेज के पास ले आया.. आज की रात हमारे सोने के लिए नै थी...

आज की रात सभी के लिए सेलिब्रेशन की रात थी.. जो खुशियां मिल रही थीं. वो एक दूसरे से बांटने की रात थी. सोने के लिए तो पूरी लाइफ hi पड़ी थी.

कमीओस्स्नेर साब चले गए.. और ins-ranjeet और पहलवान जी यही रुक गए थे...




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जब्ब तक्क मैं यहाँ बिजी हूँ. तब्ब तक के लिए आप वो जान लें. जो मेरे साथ उस रात प्रेम और धर्मेश के चुंगुल में फंसने के बाद हुआ था....



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जूली मुझे देख कर नार्मल रही थी. जैसे उसे मेरी पैलेस में की गई मार धड़ से कोई खास फर्क न पड़ा हो. और न hi उसे शंकर के मर्डर से कोई लेना देना हो.

हाँ प्रेम और धर्मेश के साथ मौजूद कुत्ते मुझे खुनी आँखों से ज़रूर घर रहे थे....

धर्मेश:- प्रेम इसे ज़यादा टाइम देना सही नै है. देखा नै था. तुमने क ये कितना खतरनाक है....

प्रेम:- सही कहा धर्मेश, लेकिन पहले इससे पूछ तो लें क इसने ये सबब किया क्यों है...

मैं दोनों को hi देख रहा था.. दोनों hi बोहत ज़यादा ग़ुस्से में थे. लेकिन मेरी आज की कार्रवाई ने दोनों का hi टेल निकाल के रख दिया था.... और वो मुझे किसी भी हाल में ज़यादा टाइम नहीं देने वाले the.itne गुंडे के मरने के बाद भी वो अभी तक यही थे. भागे नहीं थे, ये हैरानी की बात थी..

जूली प्रेम और धर्मेश को देख कर बोली

जूली:- इतनी भी क्या जल्दी है. मैं भी तो हूँ यहाँ पर. मैं भी तो देखों क कितना दुम्म है इसमें. गन से लड़ाई करना भी कोई बात है. गन सीढ़ी की और उदा दिए अपने सामने आने वाले को.. ऐसा तो कोई भी कर सकता है..

हैंड तो हैंड फाइट करे तब्ब पता चलेगा. कितना दुम्म है इसमें ..

जूली इतना बोल क्र मुझे ऊपर से ले कर नीचे तक देखती हुई..

जूली:- तो दिखाओगे तुम मुझे अपना दुम्म.

विजय:- हाँ क्यों नहीं. और वैसे भी जितना तुम्हरे बारे में सुना है. मैं भी तो देखों. वो कण्ट्रोल रूम वाले मुझे तुम्हरी फाइटिंग स्किल्स बारे कुछ अलग hi ढंग से मुझे बता रहे थे... अब्ब देख hi लेते हाँ. जो तुम्हे देख के लगता है. क्या तुम भी वैसी hi हो. बास ऐसी hi दिखती हो..

वैसे तो मैं कभी किसी लड़की से लड़ा नहीं. लेकिन आज लगता है क ये भी कर के देखना पड़ेगा..

जूली कड़ी होती हुई... प्रेम और धर्मेश से

जूली:- जब्ब तक्क हमारा आपस में जोड़ पद रहा है. कोई बीच में टांग नहीं अदाएगा..

प्रेम और धर्मेश भी जानते थे. क जूली कितनी खतरनाक है. इसलिए

प्रेम:- जूली तुम्हरे लड़ने से हमे कोई भी परेशानी नै है. तुम लड़ो इससे..

कोई बीच में नहीं आएगा...

जूली ने टाइट फिटिंग शर्ट और जींस पहनी हुई थी. बड़ी hi कातिल लग रही थी. और उसका कॉन्फिडेंस लेवल भी मुझसे कम् नहीं था... मतलब के लिए जूली कोई आसान हरीफ़ नहीं थी...

जूली चलते हुए मेरे सामने 10 फ़ीट के फासले पर आ कर रुक गई और मेरी आँखों में देखती हुई फाइटिंग स्टाइल में आने लगी....

जूली की बॉडी लैंग्वेज को देख कर hi मुझे लगने लग गया था. क जूली फाइटिंग में स्पेशलिस्ट है. अब्ब मुझसे बेटर है, या मैं जूली से बेटर हूँ, जूली फाइटिंग स्किल्स मुझसे ायदा जानती है, या मैं जूली से ज़यादा जनता हूँ,

ये तो लड़ने के बाद hi पता चलेगा.......

कुछ सेकण्ड्स मैंने जूली को देखा उसकी बॉडी लैंग्वेज को परखा और फिर मैं भी अपने स्टाइल में खड़ा हो गया....

जूली ने मुझे मेरे स्टाइल में आते देख कर आँखों hi आँखों में मुझे लड़ने के लिए बेस्ट हरीफ़ होने पर ख़ुशी का इज़हार किया...

मतलब जूली को भी मेरे फाइटिंग स्टाइल में आते देख कर ाचा लगा था..

और ये तब्ब hi होता है, जब लड़ने वाले को अपने मतलब का कोई मिल जाता है, आज हम दोनों को भी अपने अपने हिसाब से बेस्ट हरीफ़ मिल गए थे.

जूली अपने पैरों को तोलते हुए स्टेप बी स्टेप आगे बढ़ने ागि. और मैं भी जूली के जैसे hi आगे बढ़ने लगा. जूली की आँखों में कुछ हैरत सी उभरी. बस सिर्फ आधे सेक् के लिए. लेकिन फिर जूली खुद को हैरानगी में जाता छोड़ क्र मुझपर अपना फोकस बनाने लगी....

हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे .. जूली ने आगे बढ़ के मुझे किक मरने की कोशिश की लेकिन मैंने जूली की किक को बलकक कर दिया.. जूली थोड़ा सा पीछे हटी और फिर अगले पेअर पर झुकते हुए उसने दूर पेअर को घुमा कर मेरे सीने पर किक मार दी. किक मेरे सीने में लगी, जूली में फुर्ती बोहत थी.

मुझे सीने में दर्द हुआ, और जूली के होंठों में मुस्कान आ गई. मैंने अपने दर्द को पी कर जूली को देखा और फिरसे जूली की तरफ बढ़ा. इस बार जूली ने मुझे धोका देकर किक मारने का इशारा करते हुए एक पंच फिरसे मेरे सीने पर उसी जगा मार दिया. जहाँ जूली ने किक मारी थी.. जूली के होनोटं पर फिरसे एक मुस्कान आई.

लेकिन इस मुस्कान से वो मेरा मज़ाक़ उदा रही थी, बास इतना hi दुम्म है तुममे..

मैंने जूली को देखा और एक बार अपना सर्र झटका और फिरसे जूली से लड़ने के लिए तैयार हो गया..

जूली ने इस बार मुझे हिट नै किया वो मेरा वेट कर रही थी. क मैं जुइली को मारुं. मैंने जूली का चलेंगे एक्सेप्ट किया और जूली की तरफ बढ़ने लगा..

सब hi हमें देख रहे थे. और मैं और जूली एक दसूरे की आँखों में देखते हुए लड़ रहे थे....

मैंने भी जूली को धोका देने के लिए फ्रंट फुट पर घूमा. लेकिन फिर फ़ौरन hi अपने पेअर को वापिस से ज़मीन लेट हुए दूसरे पेअर पर घूम गया. लेकिन जूली मुझसे भी ज़यादा शातिर थी. वो पालक झपकते hi मुझसे दूर हो गई और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.....

अब्ब मुझे लगा क जूली को मैंने कुछ ज़यादा hi आसान समझ लिया यही. अब्ब मुझे अपने दूसरे रंग में आना पड़ेगा. वर्ण जूली मुझे हाथ भी नहीं लगाने देगी..

मैं जूली की तरफ बढ़ने लगा और जूली को भी मेरी आँखों से बोहत कुछ समझ आ गया.. जूली ने भी अपन फाइटिंग स्टाइल को बदल लिया लेकिन इस बार वो मुझ जैसे कॉन्फिडेंस में नहीं थी.

जूली ने आगे बढ़ कर मुझपर एक किक मारी और फिर अपने दोनों हहतों के पंच बना क्र रेगुलर hi मेरे सीने पर मारने लगी. जूली की स्पीड बोहत तेज़ थी. लेकिन इस बार मुझे जूली का कोई भी पंच पावर में नै लगा.

जूली को अपनी नाकामी पर थोड़ा घुसा आने लगा.. वो तो समझ रही क मेरे सीने की धज्जियां उड़ जाएँगी. लेकिन मुझे कुछ नै हुआ..

जूली जैसे hi एक सेकंड के लिए ग़ाफ़िल हुई, मैंने थोड़ा सा झुक कर एक ज़ोरदार मुक्का जूली की पसलियों से नीचे जूली के पेट में मार दिया.. जूली ओह्ह्ह्हग्गहह करती हुई पीछे हटी. लेकिन मैंने जूली को मौका दिए बिना hi हवा में hi जम्प लगाया और फूटे हुए hi अपन राइट पेअर को जूली के सीने पर दे मारा, जूली उड़ती हुई 5 फ़ीट दूर जा गिरी..

जूली ने एक मुक्का नीचे फर्श पर मारा और कड़ी हो गई..

जूली के मोहन से थोड़ा सा खून निकलने लगा था.. लेकिन जूली ने अपने खून की परवा किये बिना hi. मेरी आँखों में देखा और फिर मेरी तरफ बढ़ने लगी..

जूली के तेवर अब बदल गए थे और वो सीरियस हो गई थी.. जूली मेरी तरफ बढ़ी, वो भी मेरी hi तरह से हवा में जम्प करते हुए पलटी और और दोनों पैरों को मेरे सीने पर दे मारा. जूली ने ये सबब बोहत hi फुर्ती में किया था.

इस बार मैं भी जूली की तरह से दूर जा गिरा.. लेकिन जूली भागती हुई आई. मैं संभल पात उससे पहले hi जूली ने फूटबाल के जैसे मेरे सीने की साइड में एक ज़ोरदार किक मार दी. मुझे अपने पहलु में तैसे उठती हुई महसूस हुई. जूली की ये किक बोहत hi ज़ोरदार थी..

मुझे फ़ौरन hi उठना था. वर्ण ऐसे hi एक और चोट मेरे लिए खतरनाक हो सकती थी. जूली ने एक किक और मुझे मारने की कोशिश की लेकिन मैं फर्श पर hi लुढ़क क्र जूली की लगने वाली किक से बच गया...

मैं खड़ा हुआ तो मुझे सीने और अपने पहलु में बोहत ज़यादा दर्द मेहसूस होने लगा..

जूली के मोहन से खून निकल रहा था. और मेरे सीने में दर्द हो रहा था..

लेकिन हम दोनों hi अपने अपने दर्द को भूल कर एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे.

मैं तो पहले hi कई घंटों से लड़ रहा था. कुछ कुछ थकान पहले से hi शुरू हो गई थी. लेकिन अब्ब दर्द के साथ थकन का आना शुरू हो गया था..

जूली अचानक से hi अपने हाथों और पैरों को उसे में लाते हुए जिमनास्टिक जम्प लगते हुए hi मेरी तरफ बढ़ी. जूली की स्पीड बढ़ी हुई थी जिस वजा से मैं जूली पर सही से कंसन्ट्रेट नहीं कर पाया.. और मेर पास पोहचते hi जूली एक ज़ोरदार टक्कर मेरे सीने पर दे मारी..

जूली मुझे टक्कर मारे गई मैंने सोचा नहीं था.. जूली ने फिर फ़ौरन एक किक मेरे सीने पर मारी मैं गिर गया. लेकिन जूली अब्ब मशीन बन गई थी. और मुसलसल किक मारने लगी. मेरा चेहरा खून से भरने लगा.

मैंने जूली के एक पेअर को पकड़ क्र को उसे पीछे की तरफ धक्का दिया. जूली गिरी तो नै लेकिन उसका मुझसे फैसला बढ़ गया मैं लड़खड़ा क्र खड़ा हुआ.

जूली अब्ब मुझे कोई भी मौका नै देना चाहती थी. और मैंने भी अब टाइम वास्ते न करते हुए जूली को चित करने का सोच लिया. बास बोहत हो गया था. जूली से खेलना....

जूली मेरी तरफ बढ़ी और अपनी कड़ी हथेली से मेरे सर्र पर वॉर करने लगी.

जूली का ये वार बोहत hi घातक था. अगर मुझे लगता तो बात बिगड़ भी सकती थी.... लेकिन

मैंने जूली के हाथ को अपने दोनों हाथों को बंद करके उसमे क़ैद कर लिया.

ये मेरा एक सेप्सिअल एक्ट था. अगर जूली अपने हाथ को मेरे हाथों से निकलने के लिए ज़ोर लगाती तो जूली का हाथ टूट सकता था. जूली ने थोड़ी सी कोशिश की लेकिन उसके हाथ की हड्डी पर दबाओ पड़ने लगा. मेरे दोनों हाथों की उँगलियाँ एक दूसरे में फँसी हुई थीं. और मेरी दोनों हाथों की कोहनियां भी एक दूसरे से जुडी हुई थीं जिस वजा से जूली का हाथ कलाई के ऊपर से मेरे हाथों में क़ैद हो कर रह गया..

अगर यहाँ मैं थोड़ा सा भी ज़ोर लगता तो जूली का हाथ टूट सकता था.

लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. '

जूली ने कुछ देर और कोशिश की लेकिन उसे समझ आ गया था क अब्ब अगर उसने ने ज़ोर लगाया तो उसका हाथ hi नहीं रहेगा. वो मेरी आँखों में देखती रही.. और मैं भी उसकी आँखों में देखते हुए जूली के हाथ पर दबाओ बढ़ने लगा..

जब्ब दर्द उसकी बर्दाशर्त से बहार होने लगा. तो जूली

julie:-(dard भरी आवाज़ में) मैं तुमसे हार मानती हूँ. प्ल्ज़ मेरा हाथ छोड़ दो.. वर्ण टूट जायेगा.. और दर्द भी अब्ब मुझसे एहन नहीं हो प् रहा hai..tum जीते मैं हारी..

मैंने जूली की आँखों में देखा. एक बार फिर सबब की तरफ देखा और जूली का हाथ छोड़ दिया.....

जूली कड़ी रही कुछ देर और फिर वापिस अपनी जगा जाने लगी......

जूली को हारते देख कर धर्मेश बोलै

धर्मेश:- अब्ब इसका काया करना है..

प्रेम:- नै अब्ब इसे और छूट नै दे सकते.... जैसे िसँ जूली से फाइट की है. इसे टाइम देना और इन्फो लेना हमारे लिए भी सही नै है. लेट हुए तो मारे जायेंगे.. फिर प्रेम अपने आदमियों को इशारा करने लगा क मुझे शूट कर दिया जाए..

अब्ब मैं ऐसा भी हलवा नै था. जो गोलियां खा लेता. और मर्डर जाता.

उनके कुछ करने से पहले hi मैंने जूली के जैसे hi जिमनास्टिक स्टाइल अपने हाथों और पैरों पर घूमता हुआ पास कुछ फैसले पर काढ़े एक गुंडे के सर पर पोहंचा और उसकी गन छीन ली. फिर उसकी आड़ लेता हुआ हुआ हाल में मौजूद गुंडों को शूट करने लगा ..

मुझपर भी गोलियां चलाई गई थीं. लेकिन मुझे लगने की बजाये उनके hi साथी को लगने लगीं......

मैंने उसकी ऐड लेते हुए hi 5 गुंडों को मार दिया. अब्ब हाल में जूली प्रेम धर्मेश और मैं hi थे....

प्रेम और धर्मेश बाज़ी पलटने से बोकखला गए. वो फटी पहटि आँखों से मुझे देखने लगे. दोनों को hi अपनी मौत नज़र आ चुकी थी.

विजय:- उदय आईएनएस. रणजीत को ऊपर मेरे पास भेजो और तुम सबब भी आ जाओ. अब्ब यहाँ सबब hi ख़तम हो चुके हाँ.. मैंने उदय को अपनी लोकेशन बता दी..

प्रेम और धर्मेश मेरी बार सुन क्र भागने लगे. वीओ तो सोच रहे थे क मुझे मार कर किसी रस्ते से बहार भाग जायेंगे. लेकिन यहाँ तो बाज़ी एक बार फिरसे उनके हहतों से निकल चुकी थी.

दोनों को hi भागते देख कर मैंने दोनों के hi पैरों पर गोलियां चला दीं. गोलियां लगने से वो मोहन के बॉल गिरी और चीखने लगे..

जूली मुझे hi देख रही थी. मैंने जूली को कुछ नहीं कहा...

जूली की मुझे ज़रूरत थी. और जिस तरह से वो मुझसे लड़ी थी. वो मुझे दोगली नै लगी थी.. अगर ऐसा होता तो उसकी आँखों में भी मुझे पैलेस की तबाही का ग़ुस्सा दीखता...

कुछ मिंट बाद सबब hi आ गए... और

आईएनएस रणजीत ंपोलिस वालों से कह कर प्रेम और धर्मेश को लेजाने को बोल दिया.

और कुछ को लाशूँ के लिए कह दिया क उन्हें एक जगा इकठा करने का इंतेज़्म करो...

और कमिश्नर भी सभी पुलिस वळून के साथ निगरानी में लग गए थे. आज उनकी भी बल्ले बल्ले होने वाली थी... मिशन तो हमारा hi था. लेकिन नाम तो अब्ब पुलिस वालों का hi आने वाला था..

आईएनएस रणजीत मेरे साथ hi खड़े हो गए..... वो जूली को देख कर बोले

आईएनएस रंजीत:- विजय बीटा लगता है क तुम्हारी इस लड़की के साथ फाइट हुई है..

विजय:- जी सर. हुई है और वो भी बड़ी तूफानी. बड़ी खतरनाक फाइटर है जूली.

इस रणजीत:- करना क्या है इसका तुमने इसे पुलिस लो देने को मन क्यों किया..

विजय:- सर ये भी अब्ब से मेरी टीम में होगी.. (जूली से) क्या तुम मेरे साथ hi रहना पसंद करोगी. अगर नहीं तो जहा जाना चाहती हो, जा सकती हो ...

जूली:- नहीं मुझे कही नहीं जाना. मेरा है hi कौन. अकेली हूँ, इसलिए ऐसे काम में रही. अब्ब तुम कह रहे हो तो ठीक है. मुझे कोई परेशानी नै है तुम्हारे साथ रहने से ...

जीतू राजा और उदय कभी जूली को तो कभी मुझे देख रहे थे..

अजय को उसकी नेहा भी मिल चुकी थी. और वो साइड खड़े इक दूसरे में गम थे...

विजय:- चलो यार बैठते हैं, आज तो मैट hi मारी गई..

उदय:- तो अपुन को काहे के लिए बोल रेया ा.. वो पड़े हैं सूफी और जा कर बैठ जाओ.

उदय की बात सुन कर सबब हंस पड़े और मैं जूली की तरफ देख क्र फीकी सी स्माइल देने लगा. मैं तो जूली की वजा से खुल कर हंस hi नहीं सकता था...

कमीनी ने बोहत पीटा था.

जूली से फाइट और भी लेट हो सकती थी लेकिन मैंने जूली से जूली के hi हिसाब से लड़ाई की thi.aur मैंने अपनी पूरी ट्रेनिंग की फाइटिंग स्किल्स उसे नै की थीं..

बास लास्ट में जल्दी की वजा से जूली को शिकंजे में लिया था. और मैं जूली को हराना भी चाहता था. मैं समझ गया था क जूली हार कर खुद से बढ़ क्र लड़ने वाले के साथ रहना में किसी किसम का ऐतराज़ नहीं उठाएगी.. और मेरे पीछे जूली hi एक ऐसी थी. जो मेरी पूरी फॅमिली की सुरक्षा अच्छे से कर सकती थी..

मैं सूफी पर जा के बैठ गया.. जीतू ने मुझे पानी पिलाया. जूली को भी पानी दिया गया. उसने थैंक्स बोल कर पानी लिया और अपनी पियास बुझाने लगी.....

उदय:- विजय तुम्हारी हालत ऐसे ख़राब क्यों है. क्या जूली ज़यादा एक्सपर्ट है..

जूली :- नै ऐसा नहीं है. मैं इसे देख कर hi समझ गई थी क ये आसान हरीफ़ नहीं है.. बास मैं भी खुद को टेस्ट करने के लिए इससे से लड़ी थी. मुझे भी आज एक लम्बे आरसे के बाद कोई अपने जैसा मिला है. लड़ क्र मज़ा आ गया....

जूली अपने होंठों पर जीब फेरते हुए बोली....

शायद अभी भी उसे अपने होंठों पर खून लगा हुआ फील हो रहा था.....

ऐसे hi हम बात करते रहे........ और टाइम गुजरने लगा..

हमारे सूफी पर बैठते hi ins-ranjeet चले गए थे..

अभी उनके लिए पुरे पैलेस में बोहत काम था करने लायक ......

रात ऐसे hi कटी और कोई भी नहीं सोया... सूबा हुई ऑंखें तो नींद से बंद होने लगी थीं. लेकिन सोने के लिए अभी टाइम नै था. तो मैंने पूजा दीदी को कॉल मिला दी.

अब्ब उनके उठने का टाइम हो गया था......

पूजा दीदी:- हाँ विज्जु सुना क्या रहा, वह सबब हुआ या अभी भी वहीँ बिजी हो..

विजय:- दीदी अब्ब हम सबब अपने मिशन से फ्री हो गए हाँ, और शंकर मारा गया प्रेम और धर्मेश पुलिस के हवाले किये जा चुके हाँ.

पुजा दीदी:- सच विज्जु ये तो तुमने बड़ी अच्छी खबर सुनाई...

पूछा दीदी कुछ ऊंचा बोली तो रानी भी उठ गई.. रत देर तक शायद मेरा वेट करती रही होगी. इसलिए अभी पूजा दीदी के साथ नै उठी लेकिन पूजा दीदी को फोन पर बात करते और चीखते देख कर वो झट से कड़ी हो गई. अब्ब इतनी कमीनी तो थी hi क उसे पता न चले क फोन पर कौन हो सकता है..

वहीँ बीएड पार्स hi छेखते हुआ बोली

रानी:- विज्जु तुम्ही हो ना..

पूजा दीदी:- चुप कर चल पहले जा कर मोहन हाथ धो ले फिर कर लेना बात....

रानी झट से उठी और पत् से बाथरूम में घुस गई...

पूजा दीदी मुझसे डिटेल ले रही थी. और मेरे पास अब्ब टाइम hi टाइम था. इसलिए मैं भी पूजा दीदी को जितना हो सका बटनेलगा. रानी भी फ्रेश हो कर आ गई थी.

आधा घंटा ऐसे hi बातें होती रहें.

विजय:- दीदी अब्ब आप सबब नाश्ता वगैरा करके हर्ष अंकल के घर चली जाएँ और फिर वही से सब को ले कर जहाँ आ जाएँ.. अब्ब से हम यही रहेंगे..

रानी :- चकते हुए.. वीजजजजूउउ क्या हम उसी महक में रहेंगे.... वूऊऊऊऊव्व

पूजा दीदी भी एक्ससिटेड हो गई थीं. रानी के चिल्लाने से सब hi उसी रूम में आ गए और फिर रानी और पूजा दीदी ने शार्ट में उन्हें भी सबब बता दिया.. सबब hi ये जान आकर बड़े खुश हुए.. और वही रहने का सुन कर कहते बड़े सभी एक्ससिटेड होने लगे...

कहाँ इतना टाइम टाउन में एक टूटे हुए घर में रहते रहते वक़्त बिता दिया था. और कहाँ एक पैलेस में रह कर बाकी मांडा लाइफ गुजरने को मिलने वाली थी.... सबब ऊपर वाला hi करता है...




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मैं पूजा दीदी से बात करके फ्री हुआ. तो जूली ने ब्रेकफास्ट का इंतेज़ाम क्र लिया था. सबब भी तो रात की मारा मारी से थके हुए थे..

सभी बातें छोड़ कर ब्रेअकासट करने में लग गए.........

आज का सारा दिन इसी मसरूफियत में गुजरने वाला था...

ins-ranjeet और कमिश्नर साब ने अपने काम को जल्द hi कम्पलीट कर लिया... मीडिया को बता दिया गया था. कल के फार्महाउस और रात के हुए हमले में क्यों और कैसे एक सीक्रेट मिशन रखा गया. और उनकी hi टीम के कुछ लोगों ने मिल क्र फार्महाउस से लड़कियों को बचाया और इस पैलेस में चल रहे गैर कानूनी धंदे की वजा से पुरे दिल्ली सिटी में लोगों की ज़िन्दगी खतरे में थीं. अंदर पैलेस में मितले वाले फ्रूग्स और वेपन्स को मीडिया के सामने लाया गया. और मीडिया भी एक अच्छे स्टोरी किलने की वजा से खुश हुई. कभी कभी hi तो मीडिया को कोई स्पेसेल न्यूज़ हाथ लगती है....

किसकी को हवा भी नहीं लगने दी गई... क इस मिशन में कौन कौन शामिल था... शंकर के जान्ने वाले शंकर के म्ररने से चुप रह गए.. शंकर गैंग तो ख़तम हो गई थी. और प्रेम धर्मेश लंगड़े हो कर पुलिस कस्टडी में चले गए थे.. इस गैंग से जहाँ कई दिल्ली शहर का एक एरिया साफ़ हुआ तो वही कई लोगों के धंदे ठन्डे पद गए थे.. ये सबब उनके लिए सहन करना बोहत मुश्किल था.

ये सबब सोचना मेरा काम नै था. ins-ranjeet और कमिश्नर की प्रॉब्लम थी. अगर मुझे कभी हुई तो देखा जाएगा.. फिलहाल उनकी तरफ से मैंने सोचना छोड़ दिया था... अब्ब कौन कौन शंकर गैंग्स से रिलेटेड था. जो मेरे लिए परेशानी का सबब बन सकता था.. वो सबब बाद के लिए था.. और वैसे भी कोई मुझे जानता hi नहीं था..

पैलेस को हर्ष अंकल के नाम कर दिया गया था.. पुरे पाले को पुलिस की कस्टडी मिली थी. और बीच में hi ins-ranjeet कमिश्नर और हर्ष अंकल ने सबब कुछ तय करके पैलेस अपने अंडर ले लिया था...

पैलेस था तो मेरा hi लेकिन मैं कोई रिच पर्सन तो था नहीं. जो सबब को hi बताता फ़िरों क "मैं हूँ इस पैलेस का मालिक" और फिर लोगों के सवालों के जवाब देता फ़िरों.

अब्ब हम सबब एक थे. तो पैलेस मेरे नाम हो या मुझसे कनेक्टेड किसी के भी नाम पे. बात एक hi थी...

10 बजे तक्क पूरा पैलेस क्लीन हो गया था... और फिर कुछ hi देर हर्ष चौहान की फॅमिली और मेरे घर वाले आ गए... मेरे कहने पे राजा के इलावा उदय जीतू और अनुपम ने भी अपनी फॅमिली को यही आने को बोल दिया था...

अब्ब जैसी हमारी लाइफ थी. हमारे लिए और हमारे अपणु के लिए हर दुम्म hi खतरा था. और सबब का hi पैलेस में रहना सेफ था....

यहाँ रह क्र जितना सेफ रहा जा सकता था. वो मुझे और सबब को भी अच्छे से मालूम हो चूका है..

यहाँ पर पोहचते hi गर्ल्स पार्टी ने धमाल डालनी शुरू कर दी थी.

अभी वो मुझ तक्क नहीं पोहंचे थे लेकिन वो अपनी ख़ुशी सहन नहीं कर प् रहे थे.. पूजा दीदी और नताशा दीदी मुझे hi इधर उधर ढून्ढ रही थीं..

उन दोनों के इलावा, राज शिखा रूपा रानी शीतल ये पांचू नाचने लगे थे....

सबब को आते देख क्र मैं भी पैलेस से बहार निकला और फिर जैसे hi सबब की नज़र मुझ तक्क पोहंची तो पूजा दीदी और नताशा दीदी मुझे देख कर मेरी तरफ भागने लगी.

पांचू को जब्ब पता चला क दोनों क्यों भाग रही हाँ. तो उन्हों ने भी नाचना छोड़ा और भागते हुए मेरी hi तरफ आने लगे..

उनके पीछे अनुपम, हर्ष अंकल, दीक्षा आंटी, भाभी, मालिकान और पद्मा आंटी सबब को hi ऐसे भागते देख कर हस्सन लगे...

मैं थका हुआ था. लेकिन सबब के आने से ख़ुशी बोहत बढ़ गई थी , मैंने भी अपनी बहन पहला दीं.. मेरे होंठों पर मुस्कान थी और दिल में करार..

नताशा दीदी और पूजा दीदी मेरी बहन में आ कर समां गईं.. उनकी सांस फूल रही थी. कुछ ज़यादा hi तेज़ी से भाग कर आई तीन. मैंने दोनों को hi खुद में समां लिए था... और मेरी नज़र सामने से भाग कर आ रहे पांचो पर और उनके पीछे आ रहे बाकी के घरवळून पर थी.. अनुपम भागा नहीं था. अभी उसका एक पेअर ठीक नहीं था.

लेकिन उसका चेहरा भी बाकियों की तरह से चमक रहा था.. वो भी दिल से खुश था.. मेरी नज़र भाभी मालिकान पद्मा आंटी दीक्षा आंटी और हर्ष अंकल पर भी गई. हर्ष अंकल और अनुपम के इलावा सभी की ऑंखें ख़ुशी से नममम थीं.

गर्ल्स पार्टी जोश में थी तो बड़ी पार्टी मेरी आज की सक्सेस से इमोशनल होने लगी थी...

पांचू भी मुझ तक्क पोहंच गए. उन्हें मुझमे सामने के लिए जगा नै मिली तो ऐसे hi वेट किये बिना सबने hi अपने हाथों को हम तीनो के गिर्द दाल दिया. अब्ब एक बड़ा "गले मिलान" होने लग गया था.. जैसी इमोशनल कंडीशन थी. सभी को एक एक करके मिलने में बोहत टाइम लगने वाला था. इसलिए बड़ों को छोड़ क्र बाकी सबब hi एक दूसरे से चिपक गए थे....

पैलेस के अंदर से जूली समेत सभी बहार ए बाकी बच रहे सभी से मिलने लगे...

अनुपम जीतू उदय और राजा से बड़े hi जोश से मिला.. और हर्ष अंकल ने सभी को बधाई दी..

10 मिंट तक हम ऐसे hi मिलते रहे. फिर पूजा दीदी hi मेरे सीने में कुछ हिली जुली. तो पूजा दीदी के हिलते hi सब ने मुझे छोड़ दिया. लेकिन खड़े वही रहे....

पूजा दीदी और नताशा दीदी मेरी ऑंखें में देहने लगी. तो दोनों की hi आँखों में आंसू थे.. ये ख़ुशी और मेरी एक बड़ी कामयाबी के लिए थे...

नताशा दीदी तो मुझे एक लम्बे आरसे के बाद देख रही थी. इसलिए भी उनकी आँखों में आंसू थे.

नताशा दीदी:- विज्जु मुझे बोहत बहत गर्व है तुमपे.. आज मेरा दिल तुमसे मिल के और तुम्हे ऐसे रूप में देख के बोहत खुश हुआ है....

पूजा दीदी:- विज्जु तुमने मुझे.. (फिरसे मेरे सीने लगता हुए) विज्जु तुमने आज मेरा सर ऊंचा कर दिया है.. मुझे तुम्हारी इस सक्सेस से बोहत ख़ुशी मिली है. ऐसे hi सदा सफल रहना हर एक मैदान में...

शीतल:- दीदी हमें भी भाई से मिलने दो.. अभी सभी रहते हैं. अभी तक आप दोनों के सीवे कोई भी सही से भाई से मिला नहीं है..

नताशा दीदी और पूजा दीदी दूसरों का सोचते हुए मुझसे लग हो गईं.. सबसे पहले शीतल hi मेरे गले लगी और अपने रुके हुए आंसुओं को बहाने लगी....

शीतल के मन को करार मिला, तो दूसरों के मैं के करार का सोच क्र मुझसे अलग हो गई. रानी मेरी आँखों में देखकर आंसू बहाने लगी...

राज शिखा और रूपा भी मुझसे रट हुए मिले.... उनके बाद बरी आई बड़ों की तो.

भाभी भागती हुई आई और मेरे गले लग गई. उनके आंसू बहने और भी तेज़ हो गए. फिर मालिकान पद्मा आंटी हर्ष अंकल और दीक्षा आंटी से भी मिला...

अनुपमा अभी राजा भी बिजी था. जब उसने मुझे देखा तो लंगड़ाता हुआ मेरे पास आया और मुझे बधाई देते हुए मेरे गले लग गया....

1 घंटा हमें यही खड़े हुए hi बीत गया था....

दीक्षा आंटी:- चलो अब्ब अंदर भी जाना चाहिए. सबब इतनी धुप में 1 घंटे से खड़े हाँ.....

शीतल:- माँ हमें धुप की चिंता नहीं है..

नताशा दीदी:- हाँ मुझे पता है. तुझे तेरा भाई मिल गया है तो चेहरे के रंग की क्या ज़रूरत है. वो बाद में फिर से वापिस मिल hi जायेगा..

ऐसे hi मच मस्ती और हुई.............. फिर सबब hi अंदर जाने लगे....



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लोकेशन कोठा रेखा बाई

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TIME:10:14:PM:

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तीन आदमी जिन की आगे 25--30 के दरमियान थी.. अपने साथ 4 गार्ड्स से साथ रेखा बाई के कोठे पर पोहंचे.. तीनो hi ग़ज़ब की पर्सनालिटी के मालिक थे. उन्हों ने हाफ बाज़ो लम्बी कमीज़ें पहन राखी थी.. फिटिंग ऐसी थी, जिससे से उनके सारे hi मसल्स शो हो रहे थे. चूड़ीदार पजामा पहने फिटिंग वाली कमीज के साथ वो बोहत हिज़यादा जांच रहे थे.. तीनो के hi मोहन में एक एक पान. बाज़ारी अंदाज़ नहीं था. वो तो एक नवाबजादे दिख रहे. उनके कपड़ों और चेहरे की चमक की वजा से गेट पर खड़े दरबान ने उन्हें नै रोका और वो तीनो अपने गार्ड्स के साथ अंदर जाने लगे ...

तीनो को देखते hi रेखा बाई अपनी जगा से उठी और

रेखा बाई:- आइये आइये हुज़ूर. धन भाग हमारे. जो आप आज यहाँ पधारे.

तीनो में से एक ने रेखा बाई को देखा और फिर अपने साथ वालों को देख कर बोलै:-

आदमी:- रेखा बाई, तुम्हारा नाम बोहत सुना है हमने. आज दिल्ली आना हुआ तो यहाँ के दर्शन करने भी आ गए... अब्ब हमें भी जानना है, क्यों तुम इतनी फेमस हो. ऐसा क्या ख़ास है तुम्हरे पास... जो दूर दूर तक तुम्हारा नाम लिया जाता है.

ऐसा कौनसा ख़ास नगीना है तुम्हारे पास. ज़रा हमें भी तो दिखाओ..

रेखा बाई अपनी तारीफ सुन कर खुश हो गई..

रेखा बाई:- हुज़ूर आप पहले बैठिये तो सही... यहाँ जो कुछ भी है. वो सबब आप जैसों के लिए hi तो रखा हुआ है.. आप जैसे यहाँ आ कर हमारे इस कोठे की रौनक बढ़ाएं, हमें इसके शिव और क्या चाहिए ...

रेखा बाई ने एक बन्दे को इशारा किया और वो भाग कर अंदर गया. और जल्दी hi तीन खूबसूरत गोल तकिये ले आया.

रेखा बाई के कहने पे उस बन्दे ने हाल में मौजूद एक जगा वो तकिये रख दिए.

रेखा बाई:- हुज़ूर आइये यहाँ बैठिये, आपके लिए हमने स्पेशल मंगवाए हाँ.

आदमी अपने दोनों दोस्तों के साथ बेथ गया. और गार्ड्स हाल को देखते हुए एक साइड कुछ फैसला रख के खड़े हो गए... सभी गार्ड्स के हाथों में लेटेस्ट गन्स थीं..

रेखा बाई:- हुज़ूर कहा से तशरीफ़ लाये हाँ, क्या ये कनीज़ जानने की अहलियत रखती है.

आदमी:- रेखा बाई इतनी जल्दी भी क्या है, अभी तो आये हाँ, नाम भी बता hi देंगे.

रेखा बाई:- जी जी हुज़ूर जैसी आपकी इच्छा....

रेखा बाई अपनी जगा जा बैठी. और श्वेता को गाने का इशारा किया...

जब तीनो आये तो श्वेता अपने फन का मुज़ाहिरा कर रही थी. लेकिन तीनो के आते hi रेखा बाई के इशारे पे सबब कुछ देर के लिए रोक दिया गया था. और दूसरे बैठे हुए तमाशबीन कुछ डिस्टर्ब तो हुए लेकिन फिर तीनो की पर्सनालिटी और गार्ड्स को देख कर चुप hi रहे थे ..

जब रेखा बाई ने एक बन्दे को तकिये लेने भेजा तो उस आदमी की नज़र हाल में बैठी हुई श्वेता पर गई. श्वेता अपनी सज धज के साथ रेखा बाई के धंदे को चमकाने के लिए खूबसूरती का नमूना बने बैठी हुई थी. वो अपनी सुरीली आवाज़ का जादू जगा रही थी तो कुछ लड़कियां नाच रही थी.. लेकिन उनके आने से वो रुक गई थीं..

आदमी की नज़र श्वेता पर पड़ी तो बास वो उसे hi देखता रह गया.. वो श्वेता की आँखों में देखते hi श्वेता की आँखों की गहराई में उतरने लगा था. लेकिन रेखा बाई ने जिस को तकिये लेने भेजा था. उसके वापिस आने से उस आदमी की तंत्र टूट गई थी..

अब्ब वो बैठा श्वेता को hi देखने में लगा हुआ था... और श्वेता भी उसे खुद को देखते हुए पा कर उसकी आँखों में देखने लगी.. श्वेता को ये ऑंखें देखि देखि लग रही थीं... और वो इन्ही सोचों में थी क ये कौन है. लेकिन उसे ज़यादा सोचने का समय नहीं मिला...

रेखा बाई के कहने पे श्वेता ने अपनी आवाज़ का जादू जगाना शुरू किया... दो मिंट के बाद उस आदमी के दो गार्ड्स बहार गए और पांच मिंट के बाद वापिस भी आ गए.

और अंदर हाल में आ कर उस आदमी के कान में कुछ कहा. आदमी ने भी अपने गार्ड से कुछ कहा. आदमी की बात सुनकर गार्ड अपनी जगा जा क्र खड़ा हो गया..

आदमी अपनी जगा से उठा तो उसके दोस्त भी उसके साथ hi उठ खड़े हुए..

आदमी चलता हुआ रेखा बाई के पास पोहंचा तो श्वेता ने गाना बंद क्र दिया. और लड़कियों ने भी अपना नाच बंद करके आदमी और रेखा बाई को देहकना शुरू कर दिया.

आदमी रेखा के पोहंचा तो.

आदमी:- रेखा बाई तेरे कोठे के नगीने मुझे कुछ ख़ास नहीं लगे. लेकिन तू मुझे बोहत भा गई है ...

रखा बाई कुछ हैरान हुई क आदमी खड़ा क्यों हुआ है. खड़ा तो हुआ लेकिन उनके पास आ कर ऐसी बात क्यों क्र रहा है.... लेकिन फिर अपने धंदे के असूलों को समझते हुए वो बोली.

रेखा बाई:- हुज़ूर आप खड़े क्यों हुए हाँ. अगर वहां कुछ परेशानी है आपको तो मैं आपके लिए कुछ और बढ़िया से इंतेज़ाम करवा देती हूँ..

आदमी:- नै रेखा बाई, अब हमारा मूड बदल गया है. हमें तुम्हारा कोठे के नगीनो में से सिर्फ तुम hi भाई हो. बोलो तुम मेरी क्या सेवा कर सकती हो.

रेखा बाई:- हुज़ूर नाचीज़ अब किस काम की है. आपके लिए यहाँ लाइन लगाए देती हूँ. मुझमे अब वो सबब आपको कैसे दिखेगा. वो जवान लड़कियों में आपको मिल सकता है.. और वैसे भी अब्ब मेरी उम्र इस सबब के लिए तो रही नहीं ... मैंने अब धंदा छोड़ दिया है. बास आप जैसों के लिए मैंने कुछ सामान किया हुआ है. वर्ण मुझमे तो अब कुछ नै रहा.

आदमी रेखा बाई की बात से मुस्कुराया और

आदमी;- नै रेखा बाई, तुम अब्ब भी वैसी की वैसी hi हो जैसे सालों पहले थी तुम. और मुझे तो तुम्हारे इलावा कोई और नहीं चाहिए. बोलो एक रात का क्या लोगी..

रेखा बाई से अब्ब आदमी की बातें बर्दाश्त करना मुश्किल होने लगा था.

रेखा बाई:- हुज़ूर अगर आपको ये सबब नहीं चाहिए तो मुझसे भी आपको कुछ नै मिलने वाला. इसलिए आप...

रेखा बाई आगे बोलती आदमी ने रेखा बाई को पकड़ा और उसे खुद के सीने में भींच लिया. रेखा बाई तिलमिलाने लगी..

आदमी:- क्यों रेखा बाई तुम खुद को नै बेचती, लेकिन तुम दूसरों को बेचने का बढ़िया से कारोबार कर रही हो. तुम ऐसी भी गई गुज़री नै हो. यकीनन कब से बंद रहने की वाज से तेरी छूट भी अब्ब किसी कुंवारी लड़की के जैसी हो गई होगी.. क्यों क्या ऐसा नहीं है.... और मुझे लगता है. ऐसा hi कुछ हाल तुम्हारी गांड का भी होगा.

रेखा bai:-chhodo मुझे और तमीज से बात करो. तुमने मेरा नाम सुना है. लेकिन मुझे सही से जाना नहीं है. मुंबई में मेरा राज चलता है. और तुम जैसों की यहाँ कोई ौक़ा....

रेखा बाई की बात फिर से अधूरी रह गई. आदमी ने रेखा बाई को खुद से अलग किया और फिर रेखा बाई के ब्लाउज को पकड़ कर एक जोरर झटका दिया और रेखा बाई का ब्लाउज ब्रा समेत उसके चुके से अलग हो गया. हाल में लगी रोशनियों ने रेखा बाई के चुचों को चमकना शुरू कर दिया. रेखा बाई का फटा हुआ ब्लाउज ब्रा समेत नीचे लटकने लग गया.... रेखा बाई ऊपर से आधी नंगी हो गई थी..

ये इस कोठे पर पहला ऐसा वाकिअ था. जो रेखा बाई के साथ हुआ था.

पुरे हाल में एकदुम्म से शान्ति छाए गई.

रेखा बाई का बोलना बंद हुआ. अब्ब उसकी ऑंखें बोलने लगी thee.rekha बाई की ऑंखें मारे ग़ज़ब के लाल होने लगीं....

रेखा बाई को अपने नंगे होने की कोई टेंशन नै थी. कुट्टी नेसल से थी. घटिया धंदे से वाबस्ता थी, na-jaane किस किस के आगे कुट्टी बनकर कितनी बार चूड़ी थी.

लेकिन फिर भी आज तक कभी किसी ने रेखा बाई के साथ ऐसा कभी नहीं किया था. और वो भी रेखा बाई के hi कोठे पर.

रेखा बाई की ऑंखें ग़ुस्से से लाल hi नै हुई. रेखा बाई का पूरा चेहरा hi उसकी आँखों की तरह से लाल पड़ने लगा..... रेखा बाई उस आदमी को ग़ुस्से से देखने लगी. लेकिन वो आदमी रेखा बाई को देख के मुस्कुराने लगा...




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अपडेट ::: 62

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रेखा बाई के 3 गार्ड्स जो हाल में hi खड़े. अभी तक उन्हों ने कुछ भी नहीं किया था. एक तो अभी उन्हें रेखा बाई का आर्डर नहीं मिला था. और दूसरा आदमी के गार्ड्स ने उन तीनो गुंडों के ऊपर अपनी गन्स तानी हुई थीं. रेखा बाई के बूब्स नंगे होते hi वो टीनू गुंडे शूट कर दिए गए थे...... रेखा बाई को दो दो झटके लग चुके थे. लेकिन अभी उसके और भी गॉर्डस बहार थे. इसलिए वो किसी हद तक रिलैक्स थी.

रेखा बाई:- कौन हो तुम.??

आदमी ने रेखा बाई के एक निप्पल को पकड़ा और फिर उसे ज़ोर से खेंच दिया...

हाल में रेखा बाई की एक ज़ोरदार चीख गूँज गई.. रेखा बाई का निपल लाल पद गया था....

रेखा बाई उसे ग़ुस्से से देखने लगी ....

आदमी:- कहा न इतनी जल्दी भी क्या है मुझे जानने की. और वैसे भी अब्ब से टाइम शुरू हो गया है. तुम मुझे hi हर दुम्म जानने में लगी रहोगी. तुम मुझे सोचने के सिवा कुछ और कर भी नै पाऊँगी. कुछ ऐसा hi आज से मैं तुम्हारी ज़िन्दगी में लाने वाला हूँ....

आदमी की बात सुन कर हाल में मौजूद सब hi एक बार तो सेहम से गए. आदमी बोलते बोलते अचानक से खूंखार दिखने लगा था.. श्वेता समेत सब hi उस आदमी को देखने में लगे हुए थे....

आदमी ने आगे बढ़ के एक ज़ोरदार थपड रेखा बाई के चेहरे पर मारा. रेखा बाई चीखती हुई नीचे गिर पड़ी. आदमी चलता हुआ रेखा बाई के पास पोहंचा और फिर उसकी साड़ी जो ब्लाउज और ब्रा के साथ hi नीचे लटक गई थी. उसे पकड़ कर ज़ोर से खेंचा. रेखा बाई लुढ़कती हुई कुछ दूर चली गई. आदमी ने फिर रेखा बाई के पेटीकोट को पकड़ कर एक झटके में रेखा बाई के दीमक ज़ादा जिस्म से अलग कर दिया. रेखा बाई शॉकिंग हालत में आदमी को देखने लगी. जितना हो रहा था रेखा बाई के साथ, इतना सबब भी नै सोचा था रेखा बाई ने.

आदमी ने अपने दोस्तों और गार्ड्स की इशारा किया तो उन्हों ने हाल में मौजूद तमाशबीनो को इक साइड खड़ा किया और फिर अपनी पॉकेट से एक स्प्रे निकल कर कोठे से बहार के सभी लोगों को बेहोश कर दिया..

आदमी:- (साज़िन्दों से) इन माँ के लौडों को ठिकाने लगा दो. बड़ा शोक है किसी की आवाज़ सुन कर मौसिकी बजने का. हरामजादों को पेट भरने के लिए कोई और धंदा नै मिलता क्या....... आज इस सबब को भी हमेशा के लिए इस धंदे से निजात दिला दो. और हाल में मौजूद सबब कचरा साफ़ करो जल्दी. मुझे और भी काम है.

रेखा बाई आदमी को देखती रही. और आदमी हाल साफ़ होने का वेट करने लगा..

कुछ देर बाद हाल में सिर्फ....... आदमी उसके दोस्त और गार्ड्स.. रेखा बाई, श्वेता और नाचने वाली लड़कियां hi रह गई.. बाकी कुछ को मार दिया गया और कुछ को बेहोश करके कोठे के hi इक रूम में बंद कर दिया गया ..

आदमी:- हाँ तो रेखा बाई, तू मुझे जानना चाहती है, चल अब तुझे बताने का टाइम आ गया है. आदमी श्वेता की तरफ देखने लगा.... "आपने भी मुझे नै पहचाना क्याआ"

श्वेता:- विज्जु बीटा एक माँ अपने बेटे को कैसे नै पहचाने गई. बास तेरे बदले हुए रूप को देख कर कुछ देर लग गई. लेकिन फिर टाइम कम् मिला और रेखा बाई भी तो थी. इसलिए कुछ देर हो gai............(maa से अब्ब बर्दाश्त नै हुआ) और भाग कर रट हुए मेरे गले लग गई...

रेखा बाई के कोठे पर मैं hi था. मेरे साथ उदय और राजा थे. गार्ड्स में जीतू और अनुपम शामिल थे. और सबब ने hi अपना गेटउप चेंज किया हुआ था.. मेरा यहाँ अचानक से कैसे आना हुआ. वो भी बाउंगा. पहले माँ से मिल लूँ और रेखा बाई के गंदे शरीर को देख लूँ. बड़ा मान रहा है इसे अपने इस कुत्तिया जैसे जिस्म पर ...........

माँ:- तू आ गया मेरे लाल .. बोहत देर लगा दी आने में. देख तेरी माँ का क्या हाल हो गया है. अगर अब्ब तू और भी लेट हो जाता तो पता नै क्या हो जाता.

विजय:- माँ मैं आपसे दूर hi कब था. बास दिख नहीं रहा था. वर्ण मैं तो हर दुम्म आपके hi साथ था..

एक लड़की भाग कर अंदर चली गई प्रिय को बताने. और उसे किसी ने भी नै रोका.... सबब hi तो यहाँ मजबूर थी. कोई भी इस कोठे की पैदावार नहीं थी. सब को hi कही न कही से उठा कर लाया गया था.. और आज ये सबब आज़ाद होने वाली थीं....

माँ:- विज्जु बीटा तेरी जुदाई ने बड़ा तड़पाया है हम सबब को. तेरे बिन जीने का तो कभी मैं hi नै था. और तेरी बहने भी रोज़ पल पल मरती रही हाँ तुझे देखने के लिए..

माँ बोल भी रही थी और मेरे चेहरे को भी चुम रही थी.. और रेखा बाई शॉकिंग हालत में नीचे पड़ी हुई मुझे और माँ को hi देखे जा रही थी ...

आज पहली बार माँ की आँखों में दर्द के साथ ख़ुशी के भी आंसू देखने को मिल रहे थे.. कितना दर्द सहा था माँ ने. कितना इंतज़ार किया था माँ ने थोड़ी सी खुशियों के लिए. पारर खुशियों ने माँ को बड़ा इंतज़ार करवाया दिया था.

फिर भी भगवन ने देर से hi सही माँ की, मेरी बहनो की, और मेरी ज़िन्दगी में खुशियां लिख तो दी थीं. यही हम सबब के लिए बोहत था..

मैं माँ की आँखों से बह रहे पानी को अपने होंठों से साफ़ करने लगा. आज एक लाबय आरसे के बाद मैं फिरसे माँ की खुशबू महसूस कर प् रहा tha...mere नादर के ज़खम भरने लगे. माँ की आँखों का पानी मेरे लिए सकूँ ला रहा था. ये माँ के दुःख के नहीं ख़ुशी के आंसू थे. और ख़ुशी के आंसू मेरे लिए ज़िन्दगी बन्न रहे थे.... माँ के हाथ मेरे चेहरे पर चल रहे थे... और माँ इतने सालों बाद अपने जिगर के टुकड़े को फिरसे अपने अपने हथुन से महसूस कर पा रही थी.. जो शायद दर्द और ज़ुल्म सहते सहते उनकी उम्मीद को तोड़ जा रही थी..... माँ को उम्मीद थी भी और नहीं भी.. मेरे दुश्मन और माँ के दुश्मन कोई मामूली तो थे नहीं. और ऐसी सूरत में माँ के जिगर का टुकड़ा फिरसे उसकी बहन में आ के समां जाए तो ख़ुशी का अंदाज़ा आप खुद hi लगा लें.......

माँ वही ख़ुशी महसूस कर प् रही थी. और उनकी आँखों के अंदर का दर्द अब्ब ख़ुशी बन्न कर आंसुओं की शकल में निकल रहा था... माँ का दर्द कम् हुआ और फिर

अंदर से भागने और चीखने की आवाज़ें आने लगी. मैं समझ गया क आने वाली मेरी बहने hi हाँ.

तीनो रट हुए भागे आ रही थीं.... हाल में दाखिल होते hi एक बार माँ के गले में मुझे देखा. अजनबी था लेकिन फिर जैसे hi माँ की आँखों की चमक और फिर मेरी आँखों में देखा तो बावली हो कर भागी और मुझसे लिपट गईं. उनके पीछे hi सोनाक्षी आंटी, कृति और अनिल भी खड़े थे.

जहान्वी और श्रुति ज़ारो कतार रोने लगीं. पारर प्रिय मुझ तक पोहनहते hi बेहोश हो गई. उससे से मेरे आने की ख़ुशी सहन नै हो पाई थी. मेरी जान मेरी प्रिय अपने भाई की बहन में आने के लिए बावली हो गई थी. वो गिरने लगी थी क मैंने उसे अपने एक हाथ से थाम लिया.

जहान्वी:- vijju........vijju..tu...... आगे नहीं बोल पाई और रओं अलगी. उसकी आंखें जुदाई और ख़ुशी के दर्द से छलकने लगी थीं.

श्रुति:- मेरा... मेरा.. vijjjjj...mera..vijjjjjuuuuu...aaa... गया......

माआ..... hamara..vijjuu....aaa..gaya....maaaaa....shruti माँ को और मुझे गले से लगते हुए रट हुए बोली...........

माँ:- हाँ बेटी हम सबब का विज्जु आ गया..

jhanvi:-vijjjuuuuuuuuuuuuuuuuu(itna बोल कर साइड से मेरे गाल को चूमें लगी)

विजय:- अभी सबब खुद पर काबू रखो और यहाँ से निकलने के लिए तैयार हो जाओ. किसी सेफ जगा पोहंच कर अच्छे से मिलते हाँ.

श्रुति:- विजजू तू कितना बदल गया है ना..

विजय:- हाँ मेरी तितली.. तुम सबब के लिए मुह्जे बदलना तो था.... अपनी माँ और अपनी तितलियों के लिए मुझे ऐसा बनना तो था hi.. वर्ण फिर कैसे आता है. तुम सबब को लेने के लिए...

विजय:- राजा उदय.. अपना काम शुरू करो.... तब्ब तक्क मैं माँ और बहनो को संबलता हूँ. कोई न रहे इस कोठे पर सबब को hi लेजाने की तैयारी करो..

सब hi अपने काम में लग गए और maa,jhavi और श्रुति मुझे देखने लगी..

माँ:- विज्जु बीटा तू कितना बदल गया है. ये सबब.. हमने कुछ कुछ तो सुना था. लेकिन तुम इतना बदल जाओगे. ये नहीं सोचा था....

विजय:- माँ वक़्त ने बदला है. और फिर मेरी जुंग भी तो कितनी बड़ी है. ऐसा तो मुझे बनना hi था..... लाली कहाँ है माआ.

माँ:- बीटा उसकी बोहत बुरी हालत है. रेखा बाई ने उसे एक कमरे में नंगा hi बंद किया हुआ है. और दो दिन से उसे कुछ भी नै दिया गया है खाने पीने को. पता नै अब्ब उसकी कैसी हालत होगी..

मैंने माँ अउ जहान्वी श्रुति को खुद से अलग होने को कहा और प्रिय को साइड में hi कालीन पर लिटा दिया.

विजय:- जहान्वी श्रुति प्रिय का ध्यान रखना. मैं ज़रा इस हरामज़ादी से निमत लूँ...

एक गार्ड रेखा बाई के नंगे और गंदे शरीर के पास hi खड़ा था....

मेरी नज़र सोनाक्षी आंटी, कृति और अनिल पर गई तो मैं उनके पास चला गया.

विजय:- आप सोनाक्षी आंटी हाँ न, और ये मेरी छोटी बहन कृति और ये अनिल भाई है ना.......... तीनो hi आँखों में आंसू लिए हाँ में सर्र हिलने लगे.

मैंने सोनाक्षी अनूठी को गले लगा लिया, आंटी मेरे गले लगते hi रोने लगी. कृति और अनिल भी हलकी आवाज़ में रोने लगे. ये ख़ुशी का रोना था. वर्ण कृति और अनिल कभी नहीं रट थे....

विजय:- आंटी अब्ब मैं आ गया हूँ न. अब आपको रोने की ज़रूरत नै है... मैं भी आपका अनिल hi हूँ. जितना दर्द आप ने झेल लिया अब्ब और नै,

अब्ब मैं आपकी ज़िन्दगी में दर्द को आने नहीं दूंगा ..

आंटी:- हाँ विज्जु बीटा तुझे कभी देखा तो नै लेकिन दिल ने तुझे देखे बिना hi अपना मान लिया था. अब्ब मुझे कोई ग़म नै और न hi कोई डर है. मेरे 2 बेटे हाँ तो मैं क्यों अब्ब दररने लगी..

मैं आंटी से अलग हुआ और फिर अनिल और कृति को एक साथ गले लगा लिया. दोनों

मेरे गले लगते hi ""विज्जु bhai"vijju भाई" बोल कर रोने लगे. कुछ देर उनका भी दिल हल्का किया. फिर दोनों को खुद से अलग किया और

विजय:- बास अब्ब चुप करो और जाने की तैयारी करो.

यहाँ से लजाना तो कुछ था नहीं. यहाँ की घटिया कमाई से किसी को काया वास्ता हो सकता था....

विजय:- हाँ तो रेखा बाई, कैसा लगा ये ट्रेलर, मस्त सन था ना ये... आज के बाद तेरे लिए बाकी की पूरी लाइफ hi अब्ब मस्त मस्त सन hi दिखती रहेगी. और तू यकीनन अपनी hi लाइफ में चलने वाले अपने hi सीन्स को देख देख कर बोहत मज़ा लेगी..... रेखा बाई तूने अपनी इस घटिया ज़िन्दगी में बड़े रंग देखे होंगे. लेकिन जो रंग तू अपनी ज़िन्दगी में नै देख पाई वो रंग मैं तुझे अब्ब बोहत hi अच्छे से दिखाऊंगा ..... और वो रंग देख के तू कभी मुझे भूलेगी नै.

रेखा बाई:- तुम विज्जु नै हो सकते. वो इतना कैसे बदल सकता है. वो तो मेरे सामने सर तक्क उठाने की हिम्मत नै रखता था.. तू ज़रूर कोई और है...

हहहहहहहहहहहहहहह

विजय:- waaaaaaaaaahhhhhhhh रेखा बाई वाह्ह्हह्ह्ह्ह... आज तेरा तजुर्बा भी तुझे धोका दे गया ... या तू अपनी ये हालत देख कर बोखला गई है. तुझे ये सबब देख क्र भी नै लगा क मैं hi वो विज्जु हूँ. जो तेरे दिए हुए हर टार्चर को सेहत आयाहै.. मेरी आँखों को भी भूल गई तू रेखा बाई. (मैं रेखा बाई के पास जेक उसकी आँखों में देखने लगा) देख मेरी आँखों में, तुझे वही दर्द दिखेगा जो तूने धीरे धीरे करके इनमे भरा है. अब्ब यही दर्द तेरा भी मुकद्दर बन चूका है...

रेखा बाई:- क्या करले तू मेरा.. तू भूल रहा है, मैं कौन हु. रेखा बाई नाम है मेरा. जितना तुमने कर liya,ab मेरे आदमी तुम्हे यहाँ से ज़िंदा जांरे नहीं देंगे....

विजय:- रेखा बाई. तेरा दमाग कहीं घास चरने गया हुआ है. जितनी देर हो गई है. इतनी देर में तेरे आदमी ज़िंदा होते तो आ ना चुके होते...

रेखा बाई:- काया मतलब....??????

विजय:- वो तुझे बाद में डिटेल से बताऊंगा. अभी टाइम कम् है..

राजा:- विजय सबब हो गया है....

विजय:- अच्छे से देख लिया है ना.. और लाली वो मिली क्या.??????

राजा:- हाँ विजय वो भी मिल गई है और उसे जूस पीला कर नींद की गोली देदी है. अभी उसके लिए इतना hi कर सकते हाँ. बाकी का कोठी पर पोहंच कर करलेंगे. अब्ब हमें निकलना चाहिए....

विजय:- उदय इस हरामज़ादी को घसीट कर नीचे ले चलो.... इसे कोई कपडे मैट देना. अभी ये कपड़ों के बिना hi रहे. इसे भी पता चले क किसी के सामने बिना कपड़ों के रहना कैसा लगता है.

मैंने प्रिय को उठाया और हम सबब बहार निकलने लगे..



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फ्लैशबैक

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पूजा दीदी और बाकी सबब के पैलेस में आने के बाद कुछ देर बात चीत हुई और फिर मैं वही बैठे बैठे hi पूजा दीदी की गॉड में सर रख कर सो गया था.....

वो दिन ऐसे hi गुज़रा.. पैलेस बोहत बड़ा था. और उसमे रहने वाले बोहत कम् तो मेरे hi कहने पे हर्ष अंकल और ins-ranjeet ने कुछ बेसहारा फैमिलीज़ को पैलेस में रहने के लिए बुलवा लिया था .....

अब्ब एक मेले का सा सामान बन चूका था पैलेस में. पैलेस के अंदर मेरी फॅमिली. हर्ष अंकल की फॅमिली, उदय, जीतू और अनुपम की फॅमिली रहने आ गई थी...

पहलवान जी और ins-ranjeet ने यहाँ रहने से माज़रत कर्ली थी. वो टाउन में hi रह कर अच्छे से दूसरों के लिए कुछ कर सकते the......maine भी फाॅर्स नहीं किया. वैसे भी अब्ब जब्ब भी उनको टाइम मिलेगा वो यही आते रहेंगे. और जब्ब मेरा टाइम लगा तो मैं वहां जाता रहूँगा.....

दूसरे दिन सबने hi पैलेस में एक पार्टी रखने का कह दिया.... जूली से फाइट करके जूली और मैं अभी मुकम्मल फिट नहीं थे. लेकिन फिर भी पार्टी तो बनती hi थी... इसलिलये सभी तय्यरिआईं में लग गए थे.....

अनुकशा और उसकी बहन अनन्य को भी बुला लिया गया था. वो भी ये सबब देख कर बोहत खुश थीं... लास्ट अपडेट में मैं इनका बताना भूल गया था........ वो भी यहाँ थीं ......... और खूब मस्ती कर रही थीं..

पार्टी वाली रात सबब स्टेज के पास hi बैठ कर बातों में लगे रहे थे. और फिर बातों बातों में सूबा हो गई. सबब hi थक चुके थे. जूली और मेरी हालत सबसे ज़यादा ख़राब थी. लेकिन अब्ब रेस्ट का टाइम hi नै था. तो कैसे रेस्ट करते.

पार्टी ख़तम हुई रात गुज़री. अब्ब रेस्ट hi रेस्ट थी सबब के लिए और मेरे लिए भी रेस्ट का दिन था.....

पारर मेरे नसीब में रेस्ट थी नहीं .....

अभी सोये हुए 2 hi घंटे हुए थे.. क पूजा दीदी भागती हुई आई और मुझे झंझोड़ कर उठाने लगी..... अब्ब थकन तो बेतहाशा थी लेकिन ट्रैंग की वजा से मैं फ़ौरन hi उठ गया.....

विजय:- क्या हुआ दीदी. ऐसे क्यों उठा रही हो. सबब ठीक है ना..??

पूजा दीदी:- नहीं विज्जु कुछ भी ठीक नहीं है. तुम्हे आज hi मुंबई जाना पड़ेगा....

दीदी के मोहन से मुंबई जाने की बात सुन कर मैं एक झटके में hi उठ गया..

विजय:- क्यों, क्या हुआ दीदी, आप इतनी परेशां क्यों दिख रही हाँ... अरु मुंबई में सबब ठीक है ना??

पूजा दीदी:- अजित भाई की कॉल है तू खुद hi बात करले.......

मैंने पूजा दीदी से फोन लिया और कान से लगा कर..

विजय:- hello अजित भाई, क्या हुआ, ऐसे अचानक से, कुछ गड़बड़ है क्या.??

अजित भाई:- हाँ विज्जु, यहाँ बाज़ी पलट गई गई, और एक दो दिन में hi कुछ बड़ा होने वाला है..

विजय:- अजित भाई आप मुझे सबब डिटेल में बातएं. "क्या क्या हुआ है"

अजित भाई:- विज्जु लाली की बात पता चली है. श्वेता बहन ने पहले कभी किसी को नहीं बताया था लाली के बारे में .... लेकिन अब्ब जो बात पता चली है.

वो ये है क लाली भी हमारी टीम में शामिल थी, और तुम्हारे लेट हो जाने के कारन उसने hi जहान्वी श्रुति के 18+ हो जाने की बिना पर अपना दमाग इस्तेमाल करते हुए रेखा बाई से दोनों के hi मस्सगे करने का बहाना बना करके टाइम ले लिया था.. और लाली के इस प्लान की वजा से जहान्वी और श्रुति को टाइम तो मिल गया, लेकिन अब्ब लाली का भेद रेखा बाई के सामने खुल चूका है. रेखा बाई ने लाली को बोहत मारा है, और उसे नंगा hi एक कमरे में बंद किया हुआ है.

तू जल्दी hi कुछ कर, नहीं तो रेखा बाई जहान्वी और श्रुति के साथ कुछ गलत न करदे..... और लाली की जान भी अब्ब तुझे hi बचानी है.. वर्ण लाली के बचने की उम्मीद तुम ख़तम hi समझो...

लाली का सुन कर एक बार तो मैं बड़ा हैरान हुआ क लाली ने ये सबब मेरे लेट होने की वजा से किया है. लेकिन फिर लाली को सोचना छोड़ के मैं अजित भाई से बात करने लगा....

विजय:- ठीक है अजित भाई, मैं अभी hi निकलता हूँ. बास आप मुझे जो भी बात हो वो बताते रहना .....

अब्ब तक सबब को hi ीलताह दे दी गई थी. और ऐसी सूरत में किसी का चैन से सो पाना मुमकिन नहीं था.......

सब hi दर्रे हुए थे. कही हमारे पोहचने से पहले hi कुछ गड़बड़ न हो जाये.

मेरे दोस्त भी उठ चुके थे. सबब तैयारी में लग गए. अनुष्का और उसकी बेहेन के चेहरे पर भी चिंता दिखाई पद रही थी..... वो भी अब्ब सबब hi जान चुकी थीं...

हर्ष अंकल ने फ़ौरन hi ट्रैन के लिए टिकट्स बुक करवा ली थीं. अनुपम का पेअर अब्ब बेहतर था और वो भी हमारे साथ hi जाने वाला था..... जूली को मैंने अपने पीछे बाकी सबब का ध्यान रखने के लिए बोल दिया..

जूली:- विजय तुम टेंशन न लो. अब्ब मेरा भी इस सबब से रिलेशन बन गया है. मैं सब्बका अपणु के जैसे hi ख्याल रखूंगी.... तुम बेफिक्र होक जाओ.... जूली को भी मेरी कहानी मालूम पद गई थी... वो बड़ी हैरान हुई क मैं उतने बुरे हालत के शिकंजे में जकड़ा हुआ हूँ..

सबकी दुआएं लेते हुए मैं अपने दोस्तों के साथ स्टेशन के लिए निकल पड़ा...

जाने से पहले पूजा दीदी की आँखों में दररर भी था. एक आशा भी थी. क अब्ब जल्द hi इस पैलेस की रौनक भी बढ़ने वाली है. उन सबब के लिए hi ये पैलेस लिया गया था. और अब्ब वो सबब एक बार फिरसे खतरे में आ गए थे...

पूजा दीदी:- विज्जु अब्ब तुम जा hi रहे हो तो खली हाथ मैट आना. और इस बार जो भी तुम्हरी राह में कांटे लाये उसे ख़तम कर देना... मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी. मुझे भी माँ और बहनो से मिलने की बड़ी बेचैनी है.. भगवन करे तुम्हारे पोहचने से पहले उनके साथ कुछ भी बुरा न हो..

वाया:- दीदी आप टेंशन न लें. भगवन सबब अच्छा hi करेगा...... टेंशन तो मुझे भी थी. लेकिन अभी रेखा बाई एक hi दिन में तो सबब करने से रही.

वो मेरे बारे कुछ जानती भी तो नहीं थी ....

2 जानते बाद ट्रैन चली. हम यहाँ से कुछ भी साथ नहीं ले कर जा रहे थे.. वहां हमें हमारे लिए वेपन्स और आदमी सबका अर्रंगे हर्ष अंकल और ins-ranjeet ने करने का कह दिया था. और फिर इतनी दूर सबब ले जाने की ज़रूरत भी नहीं थी.

अब्ब हमें पोहचने में टाइम लगने वाला था. तो सोने के लिए टाइम था. यही ट्रैन में hi हम अपनी नींद पूरी करलें तो hi अच्छा है. वहां कैसे हालत हूँ. सोने का टाइम मिले या न मिले. सो कर खुद को एक्टिव करने के लिए यही टाइम हमारे लिए बेस्ट था.. स्पेशल बुकिंग थी तो किसी के आने की टेंशन भी नहीं थी....

हम सो गए...... दिल खोल कर नींद पूरी की.... आंख खुलती तो खा पी कर फिर सो जाते. कई दिनों की थकन थी. वो हम सबब ने खूब उतारी ....

मुंबई पोहचने से 1 घंटा पहले हम सबब फ्रेश हुए अगले दिन की सूबा होने वाली थी ....... हम सबब बातें करने लगे..

उदय:- विज्जु ये लाली का क्या चक्कर है. पहले जैसे हमने सुना था. उस हिसाब से तो लाली भी दूसरी रेखा बाई जैसी hi लगी थी हम सबब को.. लेकिन ये जो अब्ब सुनने में आया है. लाली भी माँ और बहनो को सेफ रखने में शामिल थी .... बड़ी अजीब बात है..

जीतू:- साला अपुन की खोपड़ी hi हिल के रह गई थी. जब ये सुना क लाली माँ और बहनो के लिए टार्चर तक्क झेल गई....

अनुपम:- बात तो मेरे लिए बड़ी अजीब है. वर्ण मैंने और जीतू ने तो तय कर लिया था. लाली और रेखा बाई की छूट और गांड का वो हाल करेंगे. अब्ब तक्क की गई सबब चुदाई भूल जाएंगी..

राजा:- वो सबब छोड़ो, यहाँ बात सब्बसे बढिये है क लाली ने कितना कुछ कर लिया माँ और बहनो के लिए. वर्ण कौन इतना किसी के लिए करता है..

मैं सबब की hi बातें सुन रहा था. एक बार तो मेरी भी खोपड़ी सटक गई थी. क लाली ऐसा भी कर सकती है. मुझे लाली का किया खुद से बर्ताव याद आने लगा. कैसे वो हर वक़्त मुझे नफरत से देखा करती थी. गन्दी गन्दी गालियां देने लगती थी. बास मुझे मार नहीं पाती thi.warna उसका बास चले तो मेरा खून hi कर देती.. और जब्ब लास्ट का जो मैंने उसके कुत्ते के साथ किया था.

लाली में इतना चेंज मुझे अजीब भी लगा. लेकिन जो कुछ वो कर गई थी. वो इतना ज़यादा था क लाली मेरे लिए इक महान हस्ती बन गई थी..

मेरी माँ और बहनो के लिए कोई एक थप्पड भी खा ले तो मैं उसके आगे घुटनो के बॉल बैठ जाऊं. लाली ने तो फिर भी मेरी माँ और बहनो के लिए खुद को बलि पर चढ़ा दिया था... लाली एक अज़ीम काम कर गई थी.... लाली ने वो सबब कैसे और क्यों किया ये तो नहीं पता था. लेकिन अब्ब मेरा दिल लाली की अज़मत को सलाम कर रहा था .....

लाली दलदल में रह कर खुद की ज़िन्दगी का न सोच कर मेरी माँ और बहनो के लिए खुद को तयाग गई थी ... अपनी जान की परवा न करके लाली ने मेरी बहनो के लिए समय ढूंढ निकला था.......... वर्ण जहान्वी और श्रुति के लिए तो रेखा बाई और दन्न कब्ब का कुछ गलत कर चुके होते...




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अपडेट ::: 63

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मुंबई स्टेशन आने तक हम बातें hi करते रहे और ज़यादा तर बातें लाली को लेकर hi होती रहें .....

ट्रैन मुंबई पोहंची तो हम ट्रैन से उतर कर बहार की तरफ चल पड़े. 1--2 दिन के लिए ए थे, तो कुछ फालतू का सामान था नै हमारे पास इस लिए हम इजी थे.

आज वक़्त एक बार फिरसे मुझे मुंबई ले कर आ गया था. बोहत समय बीत चूका था मुझे मुंबई छोड़े हुए. मैं जिस मक़सद के लिए मुंबई से निकल कर भागा था. आज मैं अपने उसी मक़सद को पूरा करने के लिए फिरसे वापिस मुंबई आ गया था. अब देखना था क मन अपने मक़सद में कैसे कामियाब ठहरता हूँ.

माँ और बहनो को रेखा बाई के चुंगल से निकलना अब्ब बड़ी बात नहीं रही थी. असल बात उन्हें यहाँ से सेफ ले कर जाना था. जब शंकर जो दिल्ली के एक हिस्से पर कब्ज़ा जमाये हुए था. वो मेरा और मेरे दोस्तों का कुछ उखड नहीं पाया था. तो रेखा बाई क्या चीज़ थी. वहां से माँ और बहेनो को निकलना 5% भी मुश्किल नै था......

रेखा बाई एक ओपन धंदा करती थी. और हर ऐरा गैर वहां जा सकता था. मैं अगर अपने असली रूप में भी जाऊं. तब भी मुझे कोई पहचानने वाला नहीं था. लेकिन फिरभी मुझे अपना और अपने दोस्तों का गेटउप चेंज करके के जाना था...

असल मसला मुझे सब को यहाँ स ले कर जाना था. और उसी के लिए हमें आज hi कोई प्लान बनाना था..... दन्न को पता चलने में देर नहीं हो सकती थी. दन्न के पता चलते hi मैं अपनी माँ और बहनो को तो बचा hi लूंगा. लेकिन सबब को बचाना नामुमकिन था. रेखा बाई का कोठा भरा पड़ा था, माँ और मेरी बेहणु के जैसी बीस और मजबूर लड़कियों और ऑर्टन से. सबके लिए hi मुझे कुछ करना था, ये तो हो नै सकता था क में अपनी माँ और बेहणु को बचाओं और बाकि सबब आँखों में आस लिए मेरी hi तरह किसी अपने के आने का इंतज़ार करें.. हर कोई मेरी तरह से हो सकता. हर कोई मेरी hi तरह से जुंग में कूदने के लिए तैयार नहीं था. मुझे hi रेखा बाई के कोठे की सभी लड़कियों और औरतों को वहां से निकलना था.....

सबब पहले hi इतने सैलून से ज़ुल्म ो सितम झेलते आ रहे थे. ज़यादा तर इज़्ज़त तो गुणवा hi चुकी थी, अगर मेरे कुछ करने से उनकी ज़िन्दगी में कुछ बेहतरी आ सके, तो मैं पीछे नहीं रहने वाला था...

तो मुझे कोई ऐसी फूलप्रूफ प्लानिंग बनानी थी. जो सभी के लिए खतरे से बचत का सबब बन सके. जुंग लड़ना मसला नहीं था. मसला असल ये था क सबब को सेफ कैसे लेकर जाना है.

मेरा मैं था क रेखा बाई के कोठे पर फँसी सभी लड़कियों और औरतों को यहाँ से लेकर निकल जाऊं. आखिर वो सबब भी तो दलदल में फँसी हुई हाँ..

किसी को भी इस दलदल से निकल जाने की उम्मीद नहीं थी. इसलिए मैं सभी को इस दलदल से निकलते हुए सेफ लेकर जाना चाहता था... मैं किसी की भी ज़िन्दगी का कोई चांस नहीं ले सकता था...

स्टेशन से बहार निकले और एक टैक्सी करके हम अपने मतलूबा एड्रेस पर जा पोहंचे.. यहाँ हर्ष अंकल की फॅमिली के दूसरे मेंबर्स भी रहते थे और उनकी एक कोठी खली थी. हम वहां चले गए...

कोठी पोहंच क्र हम फ्रेश हुए. वहां एक माइड और एक नौकर था. हमारे फ्रेश होने तक ब्रेकफास्ट रेडी था.

ब्रेसफास्ट के बाद हम लाउन्ज में जा कर बैठ गए. कुछ देर में कॉफ़ी आई.

सब ने hi एक एक कप कॉफ़ी का लिया और पीने लगे...

उदय:- हाँ तो विजय अब्ब्ब कैसे करना है सबब..

विजय:- (सबब की तरफ देख क्र) हम यहाँ लड़ने नहीं ए हाँ. लड़ाई वजन होती है. जहाँ खुद के लिए तो खतरा हो लेकिन अपणु के लिए नहीं. और रेखा बाई के कोठे पर सबब के लिए hi खतरा है. हमें सबब कुछ खामोश रह क्र करना है. किसी को भी अनाड़ज़ नहीं होना चाहिए क हमारे अंदर कुछ और hi चल रहा है.

हम सबब hi त्रिनेड हो चुके हाँ. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है. रेखा बाई अब्ब हम से कम् हो गई है. शंकर गैंग को हमने ख़तम कर hi दिया है. तो रेखा बाई हमारे लिए कुछ भी नहीं.

मैं यहाँ किसी को भी हलके में नहीं ले सकता.

जब्ब तक्क हम यहाँ से सबब को सेफ लेकर नहीं जाते खतरा बना रहेगा...

रेखा बाई के कोठे पर हम किसी किसम का कोई भी चांस नै लेंगे... सब कुछ शांत रह कर hi हमने करना है. कैसे करना है. वो सबब बाद में डिसकस करेंगे ....

पहले हमे ये प्लान बनना है क सबब को लेकर कैसे जाना है. अगर हमसे एक लम्हे की भी चूक हुई. या दन्न को एक सेक् भी पहले पता चल गया. तो रेखा बाई के कोठे से तो हम निकल hi जायेंगे. पारर मुंबई से निकल पाना नामुमकिन हो जाएगा. और फिर मैं सबका चेहरा बदलने से रहा. उसके लिए कई दिन लग जायेगे. और हमें फ़ौरन hi मुंबई छोड़ना है. दन्न कोई आम इंसान नहीं है. उसके बारे सुना बोहत है देखा नहीं है. और अभी मैं उसे न तो मेरे पास दन्न को जान्ने का टाइम है और hi उसे दहकने का. इस वक़्त सबको सेफ लेजाना ज़रूरी है.

राजा :- ये सब होगा कैसे.

विजय:- वो भी सोच लेते हाँ.....

मैंने फोन निकला और अजित भाई को कॉल मिलादी..

अजित भाई:- हाँ विजय पोहंच गए क्या.???

विजय:- हाँ अजित भाई हम सबब पोहंच गए han.aap इस वक़्त कहाँ हैं.

अजित भाई:- विजय मैं अभी कुछ देर में दुकान पर जाने वाला ुहं.

विजय:- अजित भाई आप पहले यहाँ आ जाएँ.

अजित भाई:- ठीक है मुझे पता संस करो...

विजय:- ठीक है.. मैं पता संस करता हूँ.. ok bye..

अजित भाई:- ok bye..

जीतू:- तू अजित भाई अब्ब यहाँ आ रहे हाँ..

विजय:- हाँ अब्ब उनका काम भी यहाँ ख़तम हो गया है.. तो वो यहाँ आ कर कोठी देख जायेंगे. और फिर जब्ब हम माँ और बहनो को लेने जायेंगे तो वो दुकान बंद करके फिर कोठी पर आ जायेंगे. और हम सबब के साथ hi दिल्ली जायेंगे.

उदय:- हाँ ये ठीक रहेगा .... अब उनका यहाँ काम भी ख़तम हो गया है.

राजा:- विजय उसके बाद तुम क्या करने वाले हो.

vijay:-kuch शॉपिंग करनी पड़ेगी.

जीतू:- हम भी जाने वाले हैं क्या तुम्हारे साथ या तुम अकेले hi जाओगे.

विजय:- नहीं तुम सबब यहाँ रह कर इंतेज़ाम करना. टाइम को बचाना भी ज़रूरी है....

राजा:- ठीक है विजय...

मैंने फोरने निकला और हर्ष अंकल का नंबर डायल क्र दिया.

कॉल मिलते hi...

हर्ष अंकल:- कैसे हो विजय बीटा. तुम सबब पोहंच गए क्या.?

विजय:- जी अंकल पोहंच गए हाँ. हम सबब ठीक हाँ. आप वह का बताएं..

हर्ष अंकल:- बीटा यहाँ भी सबब ठीक है. बास तुम्हारे लिए hi दुआएं कर रहे हाँ..

विजय:- अंकल आप ने अपने आदमियों से कह दिया है क्या. और ins-ranjeet से भी आप ने साडी बात कर ली है.

चर्च अंकल:- हाँ बीटा हम दोनों ने hi सब इंतेज़ाम कर लिया है. बास कुछ hi देर आदमी और असला पोहंच जाएगा कोठी पे .....

विजय:- वो सबब यही मुंबई के हाँ. या किसी और जगा से.

हर्ष अंकल:- बीटा वो सबब मुंबई के hi हाँ.

विजय:- नै अंकल मुंबई क हाँ. तो कोई गड़बड़ भी हो सकती hai.main ये रिस्क कैसे ले सकता हूँ. कोई रेखा बाई से या दन्न से भी कनेक्टेड हो सकता है.

हर्ष अंकल:- नहीं बीटा, तुम उन सबब की टेंशन न लो. और वैसे भी तुम सबब पहले उन्हें जितना ज़रूरी हो उतना बता देना. उनका सबब जानना ज़रूरी भी तो नहीं है..

विजय:- अच्छा अगर आपको उन सबब पे भरोसा है. तो मुझे कोई परेशानी नहीं है. लेकिन अगर बाद में बात खुली. तो यहाँ आपके घरवाले उनके लिए तो परेशानी बन सकती है.

हर्ष अंकल:- विजय बीटा तुम्हारा कहना भी सही है. लेकिन जो आदमी आ रहे हाँ. वो सबब हमारे खानदानी गार्ड्स hi हाँ. उनके बड़े बरसों से हमारे साथ hi रहते ए हाँ. इसलिए तुम उनकी टेंशन न लो. मैंने किसी भी फालतू बन्दे को तुम्हारे पास कैसे आने दे सकता हूँ.. तुम्हे चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है....

विजय:- चलें अंकल ये मसला तो सोल्वे हुआ. अब्ब दूसरा टॉपिक भी डिसकस कर लेते हाँ.

हर्ष अंकल:- दूसरा टॉपिक मतलब.???

विजय:- अंकल सबको ले जाना भी तो है ना. और सबब को ले क हम बी रोड तो जाने से रहे. और यहाँ से ट्रैन करना भी सही नै है...

हर्ष अंकल:- हाँ ये तो है. तो अब्ब तुमने क्या सोचा है. अगर कोई प्लान है तुम्हारे मैं में तो बताओ. वर्ण मैं कोई प्लान सोचता हूँ.

वजिजय:- एक बात आए रही हाँ अंकल दमाग में.

हर्ष अंकल:- हाँ बीटा बोलो... अगर वो तुम्हे सही लगे तो वही कर लेते हाँ..

विजय:- अंकल आपका कुछ बुसिनेस्स शिपिंग में भी है ना..

हर्ष अंकल:- हाँ है तो. लेकिन उससे क्या??

विजय:- अंकल मैं सोच रहा हूँ. क यहाँ से निकलने की बजाये अगर हम किसी बड़ी बोट से समंदर के रस्ते सूरत की तरफ निकल जाएँ. और फिर वहां से दिल्ली के लिए निकलना हमारे लिए सेफ रहेगा... बस ये है मेरे मैं में.. अगर आप को सही लगे तो..

हर्ष अंकल:- विजय बीटा ये तो सबब से बेस्ट है. और इस तरफ तो किसी का ध्यान भी नहीं जाएगा.

विजय:- तो आपका बुसिनेस्स तो पुरे इंडिया में पहला हुआ है. सूरत में भी है या.

हर्ष अंकल:- है न वहां भी है.

विजय:- तो अंकल वहां कोई कोठी भी देख लें. अगर हमें इमरजेंसी हुई तो वही रुक जायेंगे. वर्ण वही से सीधा दिल्ली के लिए निकल जायेंगे..... अगर आप को ये सबब सही लग रहा है. तो फिर आप सबब इंतेज़ाम कर दें. और सर रणजीत से भी मश्वरा कर लें.. तब्ब तक हम भी यहाँ का सबब रेडी करते हाँ.

हर्ष अंकल:- ठीक है विजय बीटा. मैं करता हूँ रणजीत से fone.fir देखते हाँ . वो क्या कहता है.... अब्ब तुम वहां टाइम दो फिर बात करते हाँ..

विजय:- ठीक है uncle...bye..

हर्ष अंकल :- bye बीटा...

कॉल एंडेड..

अनुपम:- विजय तेरा दमाग है या मशीन. साले तूने ये सबब कब्ब सोचा. अभी तो हम दूसरी बात क्र रहे थे..

सबब hi हैरान थे मेरी बात सुनकर..

विजय:- बास अचानक से दमाग में आ गया था, तो अंकल से मश्वरा कर लिया, kyun,kyaaaa, ये प्लान सही नहीं है क्या.??

उदय:- अरे भिड़ु तूने तो कमाल िच कर दिया रे...

उदय मुलती स्टाइल में बोलै तो सबब hi हस्सन लगे..

जीतू:- विजय तूने बोहत सही सोचा है. और वैसे भी जो तुमने पहले बातें की हाँ क अब्ब कोई चांस भी नहीं ले सकते, माँ और बहनो के लिए हमें सच में hi फूलप्रूफ प्लानिंग की ज़रूरत है..

राजा:- और इसके लिए सबब को फुल एक्टिव रहना होगा. विजय की तरह ये हमारी भी लाइफ का सबसे बेस्ट और रिस्की मिशन है. और इसमें खतरा हमें नहीं है. माँ और बहनो के साथ साथ वहां फँसी लड़कियों और औरतों को ज़यादा है...

"और सबसे ज़यादा खतरा इस वक़्त लाली को है" हमें एक आवाज़ सुनाई दी. हमने बोलने वाले की तरफ देखा तो वो अजित भाई थे,.

मैं खड़ा हुआ तो अजित भाई मुझतक पोहंच चुके थे. वो मेरे गले लगे और ऑंखें नाम लिए हुए hi बोले..

अजित भाई:- विजय बोहत इंतज़ार करवा दिया तूने यार.

मैं भी अजित भाई से मिलकर बोहत खुश हुआ. आज एक साल से ऊपर हो गया था अजित भाई से मिले हुए. अजित भाई से मिलकर मुझे बोहत अच्छा लगा. अजित भाई की सेहत भी कुछ डाउन हो गई थी. मेरी वजा से अपनी फॅमिली से दूर हो गए थे. और घर का खाना न मिलने की वजा से उनकी सेहत अब्ब पहले जैसी नहीं रही थी....

अब्ब मुझे भी अजित भाई का क़र्ज़ चुकाना था. और अजित भाई के लिए कुछ भी करना पड़े मैं करूँगा...

अजित भाई:- विजय तू कुछ बोल क्यों नहीं रहा:-

विजय:- अजित भाई आपने अपना हाल क्या बना रखा है. कितने कमज़ोर हो गए हाँ आप..

अजित भाई:- विजय अब तू आ गया है ना. तो सबब hi ठीक हो जाएगा...

विजय:- हाँ अजित भाई अब्ब मैं आ गया हूँ तो सब ठीक हो jaayega.aapne बोहत काम कर लिया. अब्ब आपको काम करने की ज़रूरत नहीं है. और वैसे भी अब्ब आप अपने पैलेस को संभालें. मुझे और भी बोहत से काम हैं. और अब्ब आप आराम की लाइफ जियें..

अजित भाई मेरे गले से अलग हुए. उनकी ऑंखें नम्म थीं.

फिर अजित भाई बाकि चरों से भी मिले.

कुछ देर अजित भाई से बातें होती रहीं और वो दुकान पर चले गए. अभी उनकी वहां ज़रूरत थी.

विजय:- राजा तुम कुछ सामान लेने जा रहा हूँ. तुम सबब यहाँ का देख लेना. हर्ष अंकल के आदमी और हथियार आने वाले हाँ वो देख लेना..

राजा:- ठीक है तुम लगा आओ चक्कर बहार का, हम यही हैं..

कुछ देर बाद मैं कोठी में hi कड़ी एक गाड़ी ले कर एक माल की तरफ निकल गया.

जो कोठी के नौकर से hi पूछना पड़ा था....

आज पहली बार मैं ऐसे आज़ाद मुंबई में घूम रहा था.. मेरा पूरा बचपन यही मुंबई में hi रह कर गुज़र गया था, लेकिन मैं कभी भी मुंबई घूम नहीं सका था.....

कुछ देर मैं ऐसे hi अपने मैं को बहलाने के लिए गाडी को माल में न ले जा के इधर उधर भटकने लगा.

अभी टाइम था तो मैंने सोचा कुछ घूम लिया जाए. आखिर मुंबई मेरा hi शहर था और मैंने आज तक्क मुंबई देखा नहीं था...

सब कुछ तो दिल्ली जैसा था, वही बिल्डिंग्स, वही लोग, बास दिल को चैन देने के लिए मैं गाडी इधर उधर रोड्स पर घूमता रहा....

ऐसे hi घूमता हुआ मैं एक कॉलेज की तरफ से गुजरने लगा. तो आगे भीड़ लगी हुई थी.

और कुछ शोर की आवाज़ें सुनाई दे रही थी... मुझे लगा मुझे नीचे उतर कर देखना चाहिए.. मैंने गाडी साइड में लगाई और फिर गाडी से उतर कर भीड़ की वजा जान्ने के लिए आगे बढ़ गया...

जैसे hi मैं वहां पोहंचा तो मैंने जो देखा. उसे देख कर मेरा खून hi खोलने लगा. एक लड़की को कुछ गुंडे टाइप लड़के पकडे हुए थे. और उसके साथ hi एक और लड़का था. वो खून में नहाया हुआ था. लड़की की कमीज फटी हुई थी. और उसके आधे बूब्स दुईखने लगे थे. वो रो रही थी लेकिन कोई उसे बचने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा था..

गुंडे टाइप लड़के 10 के करीब थे, शायद और भी हूँ लेकिन मेरा िद्या 10 का hi था...

मैं तेज़ी से आगे और जिस लड़की ने लड़की को पकड़ा हुआ tha...usay गर्दन से पकड़ कर पीछे को धक्का दे दिया. वो चीखता हुआ पीछे जा gira..fir मैंने उसके साथ hi खड़े हुए 2 और लड़कों को गर्दन से पकड़ा और एक ज़ॉर्डर झटका दिया. फिर छोड़ दिया, वो भी चीखे हुए नीचे गिर पड़े और अपनी गर्दन को पकड़ कर मसलते हुए कराहने लगे.

एकदुम्म से सन्नाटा छा गया. मैंने लड़की और लड़के को साइड किया और

विजय:- कोई पहले इन दोनों की मदद करो. कोई लड़की को एक चादर दो, लेकिन कोई भी आगे नहीं बढ़ा. मुझे ग़ुस्सा आने लाग. और एक मोडरें दिखने वाली लड़की के स्कार्फ़ को इसके गले से खेंच लिया. वो चीखती हुई एक झटके से नीचे गिर पड़ी. मुझे ऐसियों की भला क्यों परवा होने लगी...

मैंने स्कार्फ़ से लड़की का नंगा हो चूका जिस्म ढांप दिया. लड़की मुझे मश्कूर नज़रों से देखने लगी..

जिस लोफर लड़के को मैंने पहले गर्दन से पकड़ कर नीचे फेंका था, वो खड़ा हुआ और फिर..

लोफर:- ऐ तुम कौन हो और हमारे लफड़े में टांग क्यों घुमा रहे हो. जाओ तुम यहाँ से नहीं तो तुम्हारा भी हशर इस लड़के के जैसा हो जायेगा..

विजय:- अच्छा तो फिर करो मेरा hi भी हशर इस लड़के के जैसा. मैं भी देखो. कितना दुम्म है तुममे.... कुत्तों को ले कर इक लड़की और लड़के पर चढ़ दौड़े हो. खुद को मर्द समझते हु. थूऊऊऊ है तुम जैसों पर..

लोफर:- आई तमीज से बात करो. तुम जानते नहीं हो मुझे. मेरा बाप यहाँ का मला है. और ये कएलगे भी हमारा है. मैं और मेरे दोस्त जो मर्ज़ी करें. तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले. और दोबारा से ऐसी बात भी मैट करना. वर्ण..

विजय:- साले मैंने कहा ना अगर तुझमे दुम्म है तो आजा, नै तो भेज अपने कुत्तों को....

लोफर:- ऐ देख क्या रहे हो तुम सबब, मारो इसको...

साले सारे hi एक दुम्म से आगे बढे मुझे मारने के लिए .... मैंने भी भाग क्र अपने पैरों पर उछाल कर आगे वाले दो लोफरों के सीने पर अपने दोनों hi पेअर मार दिए. वो उड़ते हुए अपने 3 साथियों को लेते हुए नीचे गिर पड़े. एक hi फटके में 5 गिर पड़े. बाकी फ़ौरन hi रुक गए..

विजय:- आ जाओ, रुक क्यों गए, मेरे पास इतना टाइम नहीं है.. मुझे और भी काम है..

पुरे कॉलेज के स्टूडेंट हामरे ird-gird खड़े हो कर तमाशा देखने lage.aur कुछ दीवार पर छड़ कर देखने लगे.. सबब के सबब चूतिये थे.. तमाशा किसी की इज़्ज़त लूटने का हो या किसी की लड़ाई ka"dekhte सब hi मज़े से हैं"

बाकी मेरे पास पोहचते उससे पहले hi मैंने मला के बेटे को एक बाज़ो से पकड़ा और हवा में उठा क्र गोल गोल घूमने लगा, और मला के बेटे के पैरों से hi उसके दोस्तों को मारने लगा. सबब की hi चीखें निकलने लगी...

एक ऊंची आवाज़ सुनाई दी.....

"""ये इतनी भीड़ क्यों लगी हुई..""

मैंने उस तरफ देखा तो एक बोहत hi खूबसूरत लड़की कड़ी हुई थी और वही पूछ रही थी. मैंने 2 सेक् लड़की को ग़ौर से देखा, बड़े hi कातिल नक़ूश की मालिक थी.

फिर मैंने उसे देखना छोड़ कर मला के बेटे को नीचे phenka....abb तक्क सबब hi ढेर हो गए थे.....

और मला का बीटा नीचे पड़ा अपनी टांगों को पकडे कराह रहा था.. मैंने लड़के और और लड़की को देखा. लड़की मुझे hi देख रही थी. मैं उसके पास गया और

विजय:- अब्ब तुम ठीक हो न..

लड़की :- हाँ भाई मैं अब्ब ठीक हु.. थैंक्स भाई जो आपने मेरे लिए ये सबब किया. वर्ण मेरी इज़्ज़त और मेरे भाई की जान दोनों hi खतरे में थीं..

विजय:- ये तुम्हारा भाई है... और ये सबब है क्या,

लड़की:- मेरे भाई ने बड़ी म्हणत की है, part टाइम काम करके अपने लिए और मेरे लिए आगे पढ़ने का इंतेज़ाम किया, बड़ी मुश्किल से हम तक पोहंच पाए पढ़ने keliye..lekin यहाँ आ कर मला के लड़के की गन्दी नज़र मेरे ऊपर पद गई.. प्रिक्लिपाल सर भी कुछ नहीं कर पाए.. ............. इतना बोल कर वो रोने लगी..

विजय:- तुम्हारे घर में और कौन है...

लड़की:- (रट हुए hi)bhai मेरी एक माँ है और हम दोनों भाई बहन. बास हम तीन hi हाँ, और कोई नहीं है हमारा...

मैंने लड़के की तरफ देखा. वो भी मुझे hi देख रहा था. अच्छा खासा सेहतमंद था, लेकिन गुंडा नहीं था ना, वर्ण अपनी बहन को बचा लेता...

लड़का:- थैंक्स भाई आअज तुमने मेरी बहन को बचाया...

विअज्य:- (दोनों बेहेन भाई से) मेरे साथ मेरी फॅमिली में शामिल होना पसंद करोगे.... मेरी घर में तुम दूँ के जैसे hi दो भाई और कई बहने हाँ. तुम दोनों के हमारे साथ रहने से हमारे घर में और भी रोनन आ जाएँगी... और फिर माँ को भी वहां चुके hi जैसी बहने भी मिल जाएँगी.

लड़की अपने भाई को देखने लगी.. लकड़ा खुद्दार किसम का था. वो कश्मकश में फँस गया....

विजय:- चलो पहले गाडी में चल कर बैठते है, वहां बात करते हाँ..

लड़ाई के दौरान जिस लड़की की आवाज़ सुनी थी, वो फिर बोली

लड़की:- कमाल है, ज़िन्दगी में आज पहली बार किसी को देख कर अच्छा लग रहा है, वर्ण इस पूरी दुन्या में मर्द रह hi नहीं गए.. सब के सबब hi साले मादरचोद हाँ ...... नीचे से खुद को मर्द समझते हाँ. लेकिन हाँ सबके सबब सारे hi नामर्द... पारर तुझे देख के अच्छा लगा..... मेरा नाम महक है.. और तुम्हरा..

महक ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया.. मैंने भी महक का हाथ थाम लिया. बड़ा गरम हाथ था महक. नरमी भी थी और गर्मी भी. सख्ती भी थी हाथों में ... और आँखों में बिकलियाँ सी कुन्द्ती नज़र ा रही रही. क्या ग़ज़ब की लड़की थी..

विजय:- ख़ुशी हुई आपसे मिल के और मेरा नाम विजय है.. दिल्ली से हूँ..

महक:- ख़ुशी तो मुझे भी हुई है. पारर तुम ये फॉर्मेलिटी छोडो, मैं कोई ओल्ड आगे लेडी तो हूँ नहीं जो तुम मुझे आप कहोगे.. वैसे तुम्हारी शकल और तुम्हारा बर्ताव देख कर सच में hi ख़ुशी मिली है मुझे . तुमने दोनों की मदद hi नहीं की.. अपनी फॅमिली में शामिल करने के लिए भी बोल दिया.. ी लिखे आईटी..... तुम्हरे जैसा मुझे आज तक नहीं मिला.. दोस्ती करोगे मुझसे.

विजय:- ज़रूर क्यों नहीं, अच्छे लोग जहाँ भी मिलें, उन्हें खुद से दूर नहीं जाने देना चाहिए....

महक:- गुड ये भी अच्छी बात है. BTW अब्ब तुम कहाँ जा रहे हो..

विजय:- मैं तो बास किसी माल के लिए निकला था. तो ऐसे hi मुंबई घूमने के लिए आवारा गर्दी कर रहा था. यहाँ ये सबब देखा तो रुक गया. और फिर ये सबब जो है वो तुम्हारे सामने hi है......

इतनी देर में पुलिस भी आ गई..

इंस्पेक्टर:- क्या हो रहा है यहाँ पर...... फिर जैसे hi उसकी नज़र मला के बेटे पर गई तो

इंस्पेक्टर:- अरे शेखर बाबू आप हाँ, किसने किया है ये सबब आप के साथ. मैं उसे छोडूंगा नहीं..

शेखर भी इंस्पेक्टर को आते और बोलते देख कर खड़ा हो गया. उसकी टांगें दर्द से काँप रही थें.. मजमा अभी भी लगा हुआ था..

शेखर:- इंस्पेक्टर ये (मेरी तरफ ईशर करके) है जिसने मुझे और मेरे दोस्तों को मारा है..

inspecter:-kyun बे बोहत ज़यादा चर्बी छड़ी है तेरे को जो मला सब के लड़के को मारा..

विजय:- इंस्पेक्टर पहले उससे पूछ तो ले. मैंने उसे मारा क्यों है.. बाकी की बात बाद में कर लेना.. अभी मैं यही हूँ. तुम पहले उससे पूछो..

इंस्पेक्टर:- मुझे सिखाता है, तुझे तो साले मैं अंदर दाल कर तेरी माँ... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वो आगे बोलता मैंने एक लात उसके सीने पर दे मारी.. वो उड़ता हुआ अपने पुलिस भाइयों के ऊपर जा गिरा..

वो खड़ा होता उससे पहले hi मैं उसके पास गया. और उसे कालर से पकड़ कर उठाया अरु

विजय:- तू पुलिस इंस्पेक्टर है तो क्या तू किसी को भी अपनी माँ की छूट देता फिरेगा.. बोलै न तुमसे पहले अपने बाप से तो पूछ "यहाँ हुआ क्या है."

वो मेरी आँखों की लाली देख कर डर गया. और महक ये सच देख कर मुस्कुराने लगी थी.

महक की आँखों की चमक बढ़ गई थी.........................

और मेरी ऑंखें देख कर इंस्पेक्टर की माँ मर गई थी..........

इंस्पेक्टर:- (डरता हुआ) देखो तुम एक पुलिस इंस्पेक्टर पर हाथ उठा रहे हो. इसका अंजाम जानते हो..

विजय:- चुप अब बिलकुल भी मैट बोलना .. वर्ण मेरी एक लात तुम्हे 10 फ़ीट दूर पोहंचा सकती है. तो सोच जब्ब वही लात तेरे नीचे उस जगा पर लगेगी तो तेरा क्या बनेगा.......

महक:- चलो भागो इंस्पेक्टर यहाँ से.. यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं है..

इंस्पेक्टर की नज़र पहली बार महक पर गई तो इंस्पेक्टर की पतलून और भी गीली होने लगी.... मतलब महक भी कुछ थी..

आईएनएस:- मैडम आप यहाँ.. मैडम मुझे माफ़ कर दीजिये, मुझसे गलती हो गई, मैडम प्लीज मेरे छोटे छोटे बचे हाँ... मुझे नहीं पता था. आप भी यहाँ हैं.

महक:- चल अब्ब फूट ले यहाँ से और ये कचरा भी साफ़ करते jaao..(mehak ने पब्लिक को देख कर आखरी बात की)

और फिर 2 hi मिंट में सबब क्लीन भी हो गया.. पुलिस चली गई और मला का बीटा भी अपने दोस्तों को ले कर चला गया..

vijay:-(dono बहन भाई से) देखो अब्ब तुम यहाँ सेफ नहीं हो. (लड़के से) मैं समझता हूँ तुमने सबब कुछ अपने दुम्म पर किया है. लेकिन क्या तुम अपनी खुद्दारी के लिए अपनी बहन की इज़्ज़त दो पे लगा सकते हो.. मेरे पास रह कर तुम काम भी करना और अपनी माँ और बहन का भी ख्याल रखना.. मेरे साथ hi दिल्ली चलो.. वहां तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी.. और वासे भी तुम मुझे बोहत पसंद भी आ गए ho..(mehak को देख कर) और फिर मुझे अच्छे लोगों को छोड़ने की आदत भी नहीं है.. चलो अब्ब गाडी के बैठ कर पहले तुम्हारा ट्रीटमेंट करवाने चलते हाँ. फिर तुम्हारे घर जा कर माँ से भी बात कर्लिंग... मुझे यकीन है माँ को कोई ीाट्राज़ नहीं होगा..

महक:- माँ को क्यों ऐतराज़ होने लगा.. माँ की बेटी की इज़्ज़त अगर खतरे में हो और एक बेटे की जान भी खतरे में हो. तो माँ क्यों सोचने लगी... मुझे यकीन है वो फ़ौरन hi मान जाएँगी....

लड़की:- ठीक है भाई, चलें हम आपके साथ hi जाते han(fir अपने भाई से) चलो न भाई इसमें सोचने वाली कौन सी बात है, आप वह भी काम कर लेना, bhai(vijay) ने कहा तो है ना क आपकी खुद्दारी पर कोई हर्फ़ नहीं आएगा..

महक:- ू hello पहले इंट्रो तो हो जाए, कब्ब से यौन बेगानो के जैसे बोल रहे हो तीनो.

लड़की:- हाँ आप भी ठीक बोल रही हाँ.... मेरा नाम जूही है..

लड़का:- और मेरा नाम कारन ..

विजय:- और मेरा नाम तो दम दोनों ने याद नै रखा होगा.. मेरा नाम

महक:- विजय है.... और मेरा नाम महक है.

महक:- अब आया न maza..sabka ईंटो हो गया.. चलो अब्ब गाडी में बैठते हाँ.

.... महक के साथ hi इक लड़की और थी वो बोली

लड़की:- मम आपको मीटिंग के लिए भी तो जाना था ना..

महक:- नै सुरभि आज नहीं, आज तो मैं इन सबब के साथ hi रहना चाहती हु.. आज मेरा मैं इनके साथ रहने को है, तो मीटिंग कालसल करा दे..... फिर जूही का हाथ थम के

महक:- चल आज मैं सारा दिन hi तुम्हरे साथ रहूंगी....

मैं महक को hi देखने लगा.. महक का चेहरा बोहत चमक रहा था. और महक खूबसूरती का शाहकार थी. लेकिन कितनी सिंपल थी. महक के चेहरे को देख कर मैं समझ गया, महक भी खुद में बोहत कुछ हेमाहक की चाल महक का कॉन्फिडेंस लेवल. महक का ऐटिटूड. महक की ऑंखें और उनका अकेलापन मुझे भी महक में बोहत कुछ दिख रहा.

महक दिल पर पर बिजलियाँ गिराए अपने कोहली मटकते हुए जूही का हाथ थामे गाडी की तरफ बढ़ने लगी.. मैं और कारन जूही और कहां के पीछे चलने लगे. लेकिन मेरी नज़र महक की दिल के तार झुन्झना देने वाली चाल पर थी.




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अपडेट ::: 64

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फि हम सबब hi गाड़ी में बैठ कर पहले एक क्लिनिक पर गए. वहां कारन की ड्रेसिंग करवाई. उसे कुछ जूस वगैरा पिलवाया. कारन बास "अरे इस सबब की क्या ज़रूरत है मैं बिलकुल ठीक हूँ" बोलता रहा..

लेकिन हमने उसकी नहीं सुनी...... और फिर हम कारन और जूही के घर में जा पोहंचे.. सिंपल सा मकान था.. जूही और कारन दोनों hi महक और मुझे बड़े प्यार से अंदर ले गए...

जूही :- माआ... मायआ.. कहाँ हाँ आप. देहको तो कौन आया है..

जूही माँ:- जूही बीटा मैं अंदर कमरे में हु. कौन आया है हमारे घर में, पहले तो तुम दोनों ने कभी किसी से मुझे नहीं मिलवाया.. आज किसे ले आये तुम दोनों..

जूही और कारन महक और मुझे अंदर hi माँ के पास ले गए.

जूही भाग कर अपनी माँ के गले लग्ग गई, जूही की आँखों में पानी आ गया था. माँ ने जूही की आँखों में पानी देखा, और फिर जैसे hi उसकी नज़र कारन के खून से रेंज कपड़ों पर गई.. एक बार वो हिल सी गई.. लेकिन बड़े hi सबर वाली थी वो. आम औरतों की तरह से जूही को साइड में धक्का नहीं दिया. और न hi भाग कर अपने बेटे के गले लगी.

और न hi रो कर ये कहा" किस नास पीते ने मेरे बेटे का ये हाल किया है"

मुझे मेरी माँ याद आ गई.. वो भी दर्द सहते सहते अंदर से बोहत मज़बूत हो गई थें.. मेरी माँ की hi तरह से जूही और कारन की माँ भी अंदर से बोहत मज़बूत थी..

जूही माँ:- (मज़बूत लहजे में) कारन बीटा ये सबब क्या है..

जूही माँ से अलग हुई और

जूही:- माँ आज उस मला के लड़के ने फिरसे मेरे साथ ज़बरदस्ती की और मेरे कपडे भी पहाड़ दिए.. और भाई को भी मारा.. माँ फिर विजय भाई ने आ कर मुझे और भाई को बचाया...

माँ चितना में डूब गई.. मला के लड़के से पन्गा कोई छोटी बात तो थी नहीं..

जूही माँ:- बीटा हमें यहाँ से कहीं और चल देना चाहिए.. यहाँ हमारे लिए अब्ब खतरा बढ़ गया है. हम किसी से लड़ भी तो नहीं सकते..

मैं आगे बढ़ा और जूही माँ के पैरों में बैठ गया.. फिर उनके हाथों को पकड़ लिया..

विजय:- माँ आप के जैसी hi मेरी भी माँ है. कारन के जैसे दो भाई, और जूही के जैसे 9--10 बहने हाँ, मैंने कारन और जूही से कहा है, वो मेरे साथ hi दिल्ली चलें, दोनों वह रह कर पढ़ भी लेंगे और कारन वहां कोई काम भी करलेगा.. वहां मेरा एक पैलेस है, वहां बोहत काम है करने के लिए, कारन वहां काम भी करलेगा. दोनों की पढाई भी चलती रहेगी. और आप सबब की खुद्दारी भी सलामत रहेगी.... वहां आपको अपनी बेटी और बेटे की चिंता भी नहीं रहेगी, वहां आपको एक बोहत बड़ी और प्यार करने वाली फॅमिली भी मिल जायेगी.. मुझे यकीन है आपकी ज़िन्दगी की अधूरी खुशियां वहीँ आपको मिल जाएंगी...

जूही की माँ मुझे हैरत से देखने लगी. जूही और महक माँ को देख कर मुस्कुराने लगी...

जूही:- माँ विजय भाई ऐसे hi हाँ. बिना मतलब के मुझे और भाई को भी बचाया और अब्ब देखो हमारे लिए आगे की सुरक्षा और पढाई का भी इंतेज़ाम कर दिया..

जूही की माँ कड़ी हुई और मुझे भी खड़े होने को बोलै, मैं खड़ा हुआ तो माँ ने मुझे गले से लगा लिया.

माँ कारन की चोट पर भी आंसू नहीं बहा सकीय थी.. इतनी वो अंदर से स्ट्रांग थी, लेकिन apna-pann मिलने से वो खुद के आंसू बहने से नहीं रोक पाएं.

ऐसे आंसू बह hi जाने चाहिए.. बरसों से रुके रहने की वजा से अंदर घुटन को बढ़ए रखते हाँ..... माँ के आंसू मेरे कंधे को भिगोने लगे..

पांच मिंट तक्क उन्हों ने अपने अंदर का ग़ुबार निकला और फिर

जूही माँ:- बीटा तुम्हारी आँखों में भी मुझे वही दिखा है, जो मैं सालों से अपने अंदर समोए हुए हूँ.. बीटा तुम्हारी आँखों में मुझे सबब सच्चाई दिख गई है.. बीटा मुझे अपनी खुद्दारी पे कभी भी कोम्प्रोमाईज़ करने की आदत नहीं है. लेकिन तुम्हारे मैं में मुझे जो सच्चाई दिखी है. और जो तुमने हमसे अपनी मोहब्बत का इज़हार किया है.. विजय बीटा वो मोहब्बत और सच्चाई मुझे मेरी खुद्दारी से भी बढ़कर लगी है. और वैसे भी जब तुमने कारन को भाई और जूही को बहन माना है. तो तुम भी मेरे बेटे हुए. और माँ बेटे के सामने अपनी खुद्दारी को कैसे याद रख सकती है... बीटा मुझे तुम्हरे और तुम्हारी फॅमिली के साथ रह कर ख़ुशी होगी... बोलो बीटा कब्ब जाना है..

जूही और कारन अपनी माँ को देख और और उनकी बातें सुनकर शॉकेड हो गए थे. जूही और कारन की माँ ऐसे भी बातें क्र सकती हाँ, शायद दोनों ने कभी सोचा नहीं था.... जूही और कारन अपनी माँ के गले लग गए. जूही रोने लगी और कारन अपनी माँ को देख कर बोहत खुश हैरान था. लेकिन फिर माँ को देख कर खुश भी बोहत था.

शायद कारन और जूही ने अपनी माँ को कभी भी ऐसे कोम्प्रोमाईज़ करते नहीं देखा था.. या जितना वो आज खुश थीं इतना कभी नहीं देखा था...

महक:- देखा मैंने कहा था ना. माँ फ़ौरन hi मान जाएगी....

जूही माँ:- सॉरी बीटा मैंने अभी तक तुम्हे नहीं बुलाया..

महक भी आ कर इक साइड से माँ के गले लग गई...

माहक:- माँ मेरे लिए भी ये मेरी लाइफ का पहला ऐसा इंसिडेंट है. एक तो मैं कभी भी इतनी खुश नहीं हुई और दूसरा मुझे कबि भी आप जैसे प्यार करने वाले नहीं mile...warna एक बड़ी फॅमिली होने के बावजूद भी मैं अकेली hi रहती हूँ.. रिश्ते नाते सबसे दिल भर सा गया था.. एक khali-pann सा था अंदर मैं में आज वो भी ख़तम होता हुआ दिख रहा है.. माँ आपके दो बेटे हैं. तो आजसे आपकी दो दो बेटियां भी हाँ....

महक की बात सुनकर जहाँ मैं हैरान था. वही जूही माँ ने महक को भी जूही जैसा प्यार देना शुरू कर दिया....

महक की ऑंखें तो नम्म नहीं हुई लेकिन महक की आँखों में मुझे महरूमी दिख गई थी.... जूही कारन जूही की माँ .. मैं और महक हम सबब hi अपनी लाइफ में बोहत कुछ झेल चुके थे.....

विजय:- चलो माँ मेरे पास टाइम कम् है और मुझे कुछ शॉपिंग भी करनी है, एक बोहत hi ज़रूरी काम भी करना है मुझे. जिस के लिए मैं मुंबई आया हूँ. उसे लेट नै कर सकता इसलिए आप प्लीज यहाँ से जो ज़रूरी है वो उठा लें. हमें अभी निकलना है ...

जूही माँ:- ठीक है बीटा.. जूही, कारन चलो बीटा तैयारी करो. विजय बीटा जल्दी में है...

आधे घंटे बाद हम सबब घर से निकल कर कोठी की तरफ जा रहे थे.. महक भी हमारे साथ hi थी.. महक भी अजीब से लड़की थी.. हमारे लिए. हामरे साथ रहने के लिए उसने अपनी मीटिंग कैंसिल क्र दी थी..

आधे के बाद हम कोठी पर पोहंच गए...

मेरे दिल में कोई भी परेशानी नै जाएगी.

महक या जूही कारन और माँ के आने से. पता नहीं क्यों. हालांकि जैसा काम आज मैं करने वाला था. उसे सीक्रेट रखना भी ज़रूरी था, लेकिन फिर भी मैं सबको hi कोठी पर ले आया था... वहां सबब थे, हर्ष अंकल के आदमी भी आ गए हँगे... और अंदर वेपन्स भी पड़े होंगे....

हम अंदर पोहंचे तो बिलकुल वैसा hi था, अंकल के आदमियों के सिवा मेरे चरों दोस्त और वेपन्स लाउन्ज में hi थे.. जैसे hi हम सबब अंदर पोहंचे तो मेरे चरों दोस्त मुझे किसी के साथ देख क्र हैरान परेशां से हो गए.. कहाँ मैं शॉपिंग करने गया था और शॉपिंग के सामान की बजाये इक फॅमिली उठा लाया था..

उदय:- विजय ये सबब कौन हाँ...

मैं कुछ बोलता.. महक हथिया देख कर बीच में hi बोल पड़ी.

महक:- woooooooooooow क्या सन बनाया हु है लाउन्ज का... विजय ेय सबब क्या है.

विजय:- महक मैं यहाँ अपनी माँ और बहनो को बचने के लिए आया हूँ. ये सबब उसकी hi तैयारी चल रही है..

juhi..mehak..karan..juhi माँ:--- kyaaaa???matlab???? कहाँ हाँ तुम्हारी माँ और बहने...

विजय:- बताता हूँ अभी सबब को... (चरों दोस्तों से) हमारे मेहमान कहाँ han.....sabb समझ गए मैं क्या पूछ रहा हूँ..

उदय:- वो कोठी की दूसरी साइड हाँ. जब ज़रूरत पड़ेगी तो उन्हें बुला लेंगे.. अभी यहाँ उनकी ज़रूरत नहीं है..

विजय:- ठीक है. तुम चरों बैठो, मैं आता हूँ अभी....

मैं महक जूही कारन और माँ को अपने साथ hi कमरे में ले गया...

कमरे में एंटर करते hi...

चरों:- हाँ अब्ब बोलो कहाँ हाँ तुम्हारी माँ और बहने...

विजय:- रेखा बाई का नाम तो सुना hi होगा आप सबब ने..

चरों:- हाँ सुना है. लेकिन उसका यहाँ क्या काम.??

विजय:- वही हाँ मेरी माँ और बहने..



सबब:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaa??????????



विजय:- हाँ और मैं कुछ साल पहले वजन से भाग कर खुद को काबिल बनाने के लिए मुंबई से भाग क्र दिल्ली चला गया था.. खुद से वडा करके, एक दिन लौटूंगा, और अपनी माँ और बहनो को इस दलदल से निकल कर लेजाऊंगा....

मेरी बात सुनकर महक की आँखों में खून उतरने लगा. तो वही जूही अपनी माँ के गले लग कर रोने लगी. माँ भी आंसू बहाने लगी और कारन की आँखों में भी महक के जैसी hi इक आग सी दिखने लग गई थी...

कितनी जल्दी वक़्त किसी को भी किसी के साथ इतना स्ट्रॉन्ग्ली आत्ताच क्र देता है..

महक:- (चीखते हुए) मुझे भी अपने साथ ले चलो मैं भी देखती हूँ. कैसे रेखा बाई तुम्हारी राह में कड़ी रहती है.. उस हरामज़ादी को चीयर के न रख दिया तो मेरा नाम भी महक नहीं है. उसके इतने टुकड़े करुँगी. फिर कभी कोई किसी की ज़िन्दगी उजाड़ने का सोच hi न सके... इतना खून बहाऊँगी रेखा बाई का क उसके खून के देख के hi सबब का चैन सकूँ उड़द जायेगा.. ऐसा मातम बरपा करदूँ गई मैं रेखा बाई के आस पास फिर कभी किसी पोथे पर किसी मजबूर औरत को बंदी बना कर धंदे पर नहीं बिठाया जायेगा..

महक ग़ुस्से में मुझे किसी भेड़िये के जैसे लगने लगी. महक में मुझे वो सारे रंग दिखे. जो मुझमे थे.. महक के अंदर वही आग थी. जो मुझे जला रही थी. मतलब महक भी किसी ऐसी hi आग से गुज़र चुकी है. या गुज़र रही hai..mera शक सही निकला महक सच में hi अपने आप में बोहत कुछ थी..

विजय:- नहीं अभी वहां मुझे कोई भी परेशानी नै होने वाली. मैं सबब देख लूंगा.. बास असल मसला माँ और बहनो के साथ साथ रेखा बाई के कोठे पर फँसी सभी लड़कियों और औरतों को वहां से निकाल क्र कही सेफ करना.

हमारी ज़रा सी गलती से दन्न हमारे लिए खतरा बन जाएगा ....

दन्न का नाम सुनते hi सबब एक साथ



सबब:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa??? D....N....N



जूही:- माँ यहाँ भी दन्न hi है. दन्न ने किसी को भी नहीं छोड़ा माँ.

दन्न का नाम सुनकर जूही कारन जूही माँ और महक चरों को hi झटका लग गया था..

महक एक बार फिरसे ग़ुस्से से बोलने लगी..

महक:- उस हरामज़ादे ने सबब को hi दसा हुआ है... उस हरामी से कोई और उम्मीद की भी कैसे जा सकती है. जो अपनी hi बेटी को बर्बाद करने पे तुला हुआ हो. वो किसी और को कैसे बख्श सकता है. अपने hi खून की जब्ब उसकी नज़र में कोई वैल्यू नहीं है. तो फिर आप सबब तो उसके लिए खिलने सम्मान hi हाँ..

महक इतना बोल कर रूम में hi इक दीवार के पास गई और फिर दीवार पर मुक्के मरने लगी.

हम सबब hi महक को इतने ग़ुस्से में देख कर हैरान थे. और फिर उसकी बात भी अजीब सी लगी हम सबब को..

महक वापिस मुड़ी. तो उसकी ऑंखें आग उगल रही थी.

जूही माँ:- महक बेटी, तुम कैसे दन्न की बेटी की बात कर रही थी. और वो क्यों अपनी hi बेटी को बर्बाद करेगा..

mehak:-(paglon जैसे हस्ते हुए) मैं हूँ महक D.....N.....N की बेटी.... जहाँ भी जाती हूँ. उसी घटिया इंसान के दसय हुए लोग hi मिलते हाँ मुझे. कही भी मुझे चैन नहीं है. सालों से उससे दूर भाग रही हूँ. लेकिन हर तरफ आपके जैसे hi मिलते हाँ मुझे..

और अब्ब वो मुझे भी अपने जैसे बनाने पे तुला हुआ है.... कैसे बताओं मैं आपको माँ, मेरा बाप कितना घटिया इंसान है, कैसे बताओं क मेरी माँ भी मेरे बाप के जैसी hi घटिया नेचर की है, कैसे बताओं क मेरे घर की साड़ी औरतें hi एक सम्मान हैं, कैसे बताओं क मेरी माँ और मेरा बाप मुझे अपने पास रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, कैसे बताओं क मैं भी आपके जैसे hi दन्न के चक्कर में फँस चुकी हूँ... कैसे बताओं के मेरी hi माँ और मेरे hi डैड ने मुझे भी दस् लिया hai....mujhe मेरी hi माँ और डैड ने धोके सेक्स ड्रग्स की दोसे दे दी है...

हहहहहहहहह देखा आप सबब ने ऐसा है मेरा बाप, जब्ब उसने मुझे, अपनी बेटी को नहीं छोड़ा तो क्या वो आप सबब को छोड़ देता...... आप सबब के जैसे मैं भी अब्ब दन्न से चोट खाये हुए लोगों में शामिल हो गई हूँ....

लेकिन फिर भी मैं आप सबब से हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगती हूँ. मैं दन्न को अपना बाप तो नहीं मानती, लेकिन उसके ज़ुल्म की वजा से आप सबब से मैं माफ़ी मांगती हूँ. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना..

इतना बोलकर मैं महक बहार जाने लगी. सबब hi महक की बातें सुनकर हैरान रह गए थे. दन्न इतना भी घटिया हो सकता है किसी ने सोचा तक नहीं था.. और महक hi दन्न की बेटी है, ये भी कोई नहीं जानता था..

इस वक़्त महक की ज़ेहनी कैफियत सही नहीं थी, और महक को इस वक़्त हम सबब की hi ज़रूरत थी. हम सबब के पास कोई न कोई था.

लेकिन महक के लिए तो इस दुन्या में कोई था hi नहीं. जिस की वजा से वो अपना दिल हल्का कर सके.

मेरे पास तो मेरी फॅमिली. फिर पूजा दीदी की फॅमिली. फिर हर्ष अंकल की family.padma आंटी फिर रानी, मेरे दोस्त उनकी family.main तो एक वही खंडन से जुड़ चूका था. और अब्ब कारन और जूही और उसकी माँ..

लेकिन महक के लिए पूरी दुन्या में शायद कोई भी न हो..

महक जाने लगे तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. महक ने मुद कर मुझे देखा. उसकी आँखों में कुछ कुछ नमी थी. वो रोइ तो नहीं थी. लेकिन उसकी आँखों में अनगिनत तूफ़ान आये हुए थे.. महक को इस वक़्त अकेला छोड़ना सही नहीं था. महक को हम सबब की ज़रूरत थी..

महक मुझे देख कर फिर मेरे हाथ को देखने लगी..

महक :- विजय मुझे जाने दो. मैं तुम सबब की नज़रों का सामना नै कर सकती. मैं दन्न के साथ नहीं रहती लेकिन हूँ तो उसकी बेटी hi. और आप सबब लोग दन्न के ज़ुल्म का शिकार हाँ. मैं कैसे आप सबका सामना करूँ. अगर दन्न मौत का सौदागर होता तो शायद मुझे इतनी शर्मिंगडी नहीं होती.. लेकिन वो तो इज़्ज़तों से खेलने वाला इक हैवान है... ये सबब सोचते हुए अक्सर मरा सर्र और ऑंखें झुक सी जाती हैं..

विजय:- महक इसमें तुम्हारा क्या कसूर है. और हम सबब भी तो तुम्हे जान गए हाँ. और दूसरा तुमने खुद hi कहा, क दन्न ने तुम्हे भी नहीं छोड़ा, जितना ज़ुल्म उसने हम सब पर किया है. उतना न सही लेकिन फिर भी उसने जैसा हम्हारे साथ भी किया हिअ. उस वजा से तुम भी हमारे जैसी hi हो. तुम भी अब्ब हम सबब में शामिल हो चुकी हो...

जुई माँ:- हाँ महक बेटी, अब्ब तुम उस घटिया इंसान की बेटी नहीं रही हो, आज से तुम भी मेरी लिए मेरी जूही हो, मैट जाओ कही, सब साथ में hi रहते हाँ..

महक बारी बारी सबब को दहकने लगी. शायद वो सभी की आँखों में अपने लिए कुछ ढून्ढ रही थी. और जब्ब उसे वो सबब दिख गया तो जूही माँ के गले लग गई.

मेहजक:- थैंक यू माँ. आपने मुझे मेरी hi नज़रों से गिरने से बचा लिया. आज hi तो आप सबब मुझे मिले हाँ. और आज hi मुझे ये सबब भी सुन्ना पद गया. अगर आज आप मुझे न रोकती तो फिर पता नहीं मैं क्या कुछ कर जाती.

जूही माँ ने महक को बड़े प्यार से गले लगाया. और महक के सर पर हाथ फेरने लगी.. जूही भी पीछे से hi महक के गले लग गई.. मैंने कारन की आँखों में देखा तो वो भी बोहत खुश दिख रहा था....

ज़िन्दगी कभी कभी एक hi दिन में कितने रंग दिखा देती है. और ग़मों के ढेर को एक hi पल में दूर भी कर देती है....... मैं नहीं जानता कारन की फॅमिली को क्या ग़म है , और कितना ग़म है, लेकिन फ़िलहाल के लिए सबब hi खुश थे.. और महक आज सबब से ज़याद खुश दिख रही थी.

ज़िन्दगी का adhura-pann और akela-pann अगर ख़तम हो जाए तो फिर ऐसे hi होता है.. दिल चहकने लगता है. और चेहरा चमकने लगता hi.....

दिन ऐसे hi गुज़रा. मैंने बाजार जा कर शॉपिंग की और फिर ुम सबब मिल बैठ कर प्लान बनाने लग गए..

क्या करना है कैसे करना है. और किस किस ने क्या क्या करना है.... हम सबब ने फाइनल कर लिया था..

कारन जूही और जूही माँ को मैंने दिल्ली के लिए भेज दिया था. और दिल्ली में पूजा दीदी को सबब समझा भी दिया था. वो भी खुश हो गई थीं.. एक और फॅमिली जो आने वाली थी... महक भी हमारे प्लान में शामिल रही.. और उसने भी कुछ मश्वरे दिए... फिर महक शाम को चली गई ये कह कर क वो कुछ दिनों में यहाँ से फ्री हो कर दिल्ली के लिए निकल पड़ेगी.. महक के बारे ज़यादा बात नै हुई. अभी हमारे पास एक्स्ट्रा टाइम नहीं था... बास आज के मिशन को hi ले कर बातें होती रही थी..



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फ्लैशबैक एंडेड

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प्रेजेंट Time..Location रेखा बाई कोठा

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मैं प्रिय को उठाये हुए माँ जहान्वी और श्रुति, सोनाक्षी आंटी, कृति, अनिल के साथ बाहर निकला. गेट से बहार निकलने से पहले hi कोठे की साड़ी लड़कियां और औरतें गेट के अंदर साइड में कड़ी थीं..

अचानक से पुरे इलाके की लाइट चली गई. अँधेरा हुआ और कुछ hi सेक् में बहार 2 कोस्टर बसेस आ कर रुक गईं. उदय राजा अनु और जीतू सबब को hi जल्दी से गेट से बहार ले जा कर बसेस में बिठाने लगे... दो गाड़ियां भी थी. एक में लाली के लिए इंतेज़ाम था. और दूसरी में हम सब जा के बैठ गए.....

5 मिंट में hi हम सबब इस इलाके से निकल गए थे.... और हमारे निकलने के 5 मिंट बाद लाइट भी आ गई थी... लेकिन अभी किसी को भी सही से पता नहीं था. क यहाँ रेखा बाई का कोठा उजाड़ चूका है.

हमारा रुख मुंबई समंदर के जुहू बीच की तरफ था. रेखा बाई के कोठे से 45 के करीब लड़कियां और औरतें मिली थीं. सब को hi लेकर हम जुहू बीच की तरफ निकल पड़े.... बीच रस्ते में hi हमने बसेस को रुकवाया और फिर बसेस को खली करके 3 बड़ी वन में सब को शिफ्ट किया gaya.aur फिरसे जुहू के लिए निकल गए.

रेखा बाई के कोठे से निकल कर जुहू बीच तक जाने में हमें 40 मिंट लगे. और फिर अगले 10 मिंट में हम एक बड़ी मोटर बोट में बैठे सूरत के लिए रवाना हो चुके थे....



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लोकेशन कोठा रेखा बाई

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रेखा बाई की पावर और उसके रिलेशन्स की वजा से इस बाजार में कभी लाइट नहीं जाय करती करती थी. जाना तो दूर कभी ट्रिप भी नहीं कर पाती थी.. लेकिन आज इस बाजार में लाइट के न जाने का रिकॉर्ड टूट गया था. कई सालो से लाइट न जाने की वजा से किसी ने इमरजेंसी के लिए कुछ अर्रंगे भी नहीं किया हुआ था. बास अंदर रूम्स के लिए इमरजेंसी लाइट्स का इंतेज़ाम था..

रेखा बाई को बड़ा ग़रूर था अपने रिलेशन्स और अपनी पावर का, और वाइज भी दन्न की वजा से रेखा बाई का टेहका hi कुछ और था.... खैर अब्ब तो रेखा बाई उजाड़ चुकी.. सालों तक इसी बाजार के ेरखा बाई के चर्चे कहे और सुने जाते रहेंगे....

""कभी थी एक रेखा bai..kya अंदाज़ था uska..kya काट थी इसकी आवाज़ में.. क्या

दबदबा था रेखा बाई का. कभी किसी को अपने सामने ठहरने नहीं दिया रेखा बाई ने. जिसने भी रेखा बाई के सामने अपनी आवाज़ उठाने की कोशिश की, वो आवाज़ hi दबा दी गई, या आवाज़ उठाने वाले को hi इस दुन्या से उठा दिया गया..... अब्ब तो रेखा बाई इस बाजार में हर एक की जुबां अपर रहने वाला एक किस्सा बन्न कर रह गई थी..."""

लाइट गई और फिर 10 मिंट में hi आ भी गई. इसलिए सबब फिर से नार्मल दिखने लगे थे. कोई जान hi नहीं पाया क रेखा बाई अपने hi कोठे से न सिर्फ नंगी ले जाए गई है, बल्कि रेखा बाई का कोठा hi उजाड़ दिया गया है.. कुछ लोगों को रेखा बाई के कोठे के सामने बसेस के रुकने पर अचंभा तो हुआ लेकिन फिर सब hi ये सोच कर खामोश रह गए क रेखा बाई ने किसी काम से मंगवाई होंगी.

लाइट आने के 20 मिंट बाद रेखा बाई के सामने के कोठे के बहार खड़े हुए दो दरबानो में से एक बोलै..

दरबान 1:- गंगू यार ये रेखा बाई के कोठे पर ऐसे शानि सी क्यों दिख रही है. लाइट जाने के 10 मिंट पहले तक तो सबब ठीक hi था.. और फिर पहले कभी भी इतनी देर तक्क ख़ामोशी नहीं रही.

गंगू :- हाँ शेरो मुझे भी ये सबब बड़ा अजीब सा लग रहा है. रात 2 बजे तक्क तो रेखा बाई के कोठे की रौनक भी कभी ख़तम नहीं हुई थी. काफी देर से लाइट भी आई हुई hai.aisi ख़ामोशी मुझे भी खटक रही है.

रेखा बाई के कोठे के दरबान भी बहार नहीं खड़े हाँ. और गेट भी बंद है.

शेरो :- मुझे तो कोई गड़बड़ लग रही है. तुझे याद है न जब्ब बग्गा से रेखा बाई की दुश्मनी हुई थी. कही आज भी कुछ ऐसा hi तो नहीं हुआ कुछ.. चल चलके देखते हाँ.

गंगू :- नहीं तू यहाँ रुक मैं देखता हूँ. यहाँ भी किसी को रुकना चाहिए..

शेरो :- ठीक है तू जल्दी पता कर. कही बाद में हमारे लिए कोई मसला न हो जाए..

गंगू रेखा बाई के कोठे के गेट के पास पोहंचा तो उस ने गेट को थोड़ा सा हिलाया. लेकिन गेट बंद था. गंगू ने ज़ोर से हिलाया फिर भी नहीं खुला और न hi कोई रिस्पांस मिला. फिर गंगू की नज़र बहार से लगे लॉक पर पड़ी.. वो वही से चीखा

गंगू:- गंगू यहाँ भाग कर आ, यहाँ बहार से लॉक लगा हुआ है. कुछ बड़ा लोचा लग रहा है मुझे.

गंगू की बात सुन कर शेरो भी भागता हुआ आया, और फिर उसने भी बहार से ताला लगा हुआ देखा तो गेट को पीटने लगा.. 2 hi मिंट में बहार मजमा लग गया और फिर देखते hi देखते सारे कोठे की रेखा बाई जैसी कोठे की मालिकाने भागती हुई आ गईं..

पुरे बाजार में मातम सा छ गया था. सबको hi किसी बड़े काण्ड का आभास हो रहा था...

कुछ लोग दीवार कूद के अंदर घुसे और फिर फ़ौरन hi बहार भी ा गए..

आने वळून ने बताया क अंदर लाशें पड़ी हुई हाँ. और एक कमरे में कुछ बेहोश लोग पड़े हाँ. बाकी का पूरा कोठा hi खली है. न रेखा बाई है और न कोठे पर रहने लड़कियां और औरतें..

हर तरफ कोहराम मच गया था.. और फिर देखते hi देखते कुछ hi मिन्ट्स में पुरे मुंबई में ये बात फेल गई. पुरे शहर की पुलिस और मीडिया में हलचल सी होने लगी... रेखा बाई का एक नाम था. उसके कनेक्शस थे. रेखा बाई के जान्ने वळून ने पल भर में hi हंगामा मचा दिया. पुलिस पर प्रेशर बनने अलग. और मीडिया पूरी न्यूज़ को hi टेलीकास्ट करने लगी...

लाइट आने के बाद महज़ 40 मिंट में hi पूरा मुंबई ये जान गया था. क रेखा बाई का पूरा कोठा hi उजाड़ दिया गया है.. पुरे शहर की पुलिस रेखा बाई को और उसके कोठे से लापता हो जाने वाली लड़कियों और औरतों को ढूंढ़ने में लग गई थी.... एक अजीब सा खौफ पुरे शहर में फेल गया था.



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लोकशन पुणे

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दन्न अपने कुछ गैर मुल्की फ्रेंड के साथ अपनी hi हवेली में बैठा हुआ दारु पि रहा था. सामने टेबल पर रखा उसका फोन बजा..

दन्न ने फोन उठा कर देखा.. नंबर देख कर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई.. उसने कॉल रइवे की और फिर

दन्न:- बोल शेठी कुछ ख़ास है क्या श्वेता के बारे में. जो आज मुझे फोन कर रहे हो. तुम कुछ ख़ास बनाने के लिए hi मुझे फोन करते हो. बोहत दिन हो गए श्वेता के बारे में सुने हुए, उसी कोई नयी दोसे मिले hi मुद्दत गुज़र गई है.

दन्न की बात सुनकर शेट्टी की माँ hi कर गई. अब्ब वो कैसे उसे बताता क श्वेता पारर लगा कर उड़द गई है. और साथ में रेखा बाई और पूरा कोठा भी श्वेता के जाने से उजाड़ चूका है.

दन्न:- क्या हुआ शेट्टी तुम चुप क्यों हो गए हो. मैं क्या पूछ रहा हूँ.

शेट्टी ने कैसे भी करके दन्न को रेखा बाई के कोठे पर होने वाली करवाई बता दी..

दन्न एक झटके में खड़ा हो गया.. सबब सुन कर दन्न के दमाग का फ्यूज hi उड़द गया. मारे तैश के उसका चेहरा hi लाल पद गया. उसके दोस्त दन्न को दखने lage.DNN को हुआ क्या है.

दन्न:- (छीकता हुआ) जब ये सबब हुआ तो उस वक़्त तुम कहाँ अपनी माँ छुड़ा रहे थे कुत्ते के बच्चे ... और बाकी के सारे madarchod,kutte,harami कहाँ हैं. शेट्टी ये तुमने सही नहीं किया है, मैं कोठे पर रह रहे अपने किसी भी अङमो को ज़िंदा नहीं छोड़ोगे, तुमने जानते थे ना, श्वेता से मेरा बदला केस है, तो फिर ये सबब क्यों हुआ... तब्ब सब के लिए मैंने पासिओं का ढेर लगा दिया, और बदले में मुझे क्या दिया है तुमने... क्या सबब के सबब मैंने नामर्द पाल रखे हाँ..

शेट्टी:- सर मेरे इलावा सबब hi मरे पड़े हाँ. मैं भी बास किसी काम के लिए hi... होटल में गया हुआ था. सर मुझे नहीं पता था क ऐसा भी कुछ हो सकता है. आज तक तो कभी ऐसा नहीं हुआ. और फिर वजन हमारे 6 आदमी भी तो थे..

दन्न:- (ग़ुस्से से चीखते hue)wo सारे कुत्ते मारे गए हाँ. और तुम मुझे ज़िंदा रह कर ये बता रहे हो. क कोठे पर अब्ब कोई भी नहीं है. शेट्टी मुझे किसी भी हाल में रेखा बाई, श्वेता और उसकी बेटियां चाहिए ... वर्ण तुम खुद को मारा उहा समझो. अभी भी वो सबब शहर में hi कही होंगी. अपने सारे आदमियों को काम पे लगा दो. मुंबई से निकलने वाले हर रास्ते को चेक करो. कोई भी किसी भी हाल में मुंबई से बहार नहीं जाना चाहिए... तुम समझ रहे हो न मैं क्या कह रहा हूँ..

शेट्टी:- सर मैंने पहले hi सबको काम पर लगा दिया है..

दन्न ने आगे कुछ भी बात किये बिना फोन काट दिया....

दन्न का ग़ुस्सा pagal-pann की हद्द तक जा पोहंचा था. उसका बास नहीं चल रहा था. और न hi उसे कुछ समझ ा रही थी. श्वेता और बाकी सबब को कहाँ चले गए..

दन्न का एक दोस्त

फ्रेंड:- क्या हुआ दन्न आज ीनता ग़ुस्सा क्यों आ रहा यही. हुआ क्या है हमे भी बताओ, शायद हम कोई हल निकाल सकें..

दन्न ने अपने दोस्तों को भी सबब बता दिया...

फ्रेंड:- दन्न तो फिर क्या है तुम्हारे दमाग में. ऐसा कौन कर सकता है....

दन्न:- अभी तक कोई ऐसा मिला hi नहीं. जो मेरे सामने ठहर सके. ये कौन है कुछ समझ नहीं आ रहा... वहां की साड़ी hi लड़कियां और औरतें ग़ायब हाँ. अब्ब वो ख़ास किसके लिए आये थे. ये भी नहीं पता, वर्ण कुछ समझ भी जाता.

पुरे कोठे किओ लड़कियां और औरतें कही न कही से उठाई गई हाँ. अब्ब ये सबब मेरे किसी दुश्मन ने किया है. या कोठे पर मौजूद किसी और की मदद के लिए ये सबब किया गया है. अभी मुझे सही से समझ नहीं आ रहा.

फ्रैंड 2:- तुम्हारे hi किसी दुश्मन ने ये किया होगा.

दन्न:- वही तो कह रहा हूँ. क अभी तक्क तो मेरा ऐसा कोई दुश्मन इतनी पावर में रहा hi नहीं क ऐसा भी कुछ कर सके.

फिर दन्न ने एक कॉल milaai...cal मिलते hi..

दन्न:- मंत्री कुछ सुना रेखा बाई का कोठा उजाड़ चूका है.

मैंट्री :- हाँ दन्न साब मैंने सुन लिया है. और अब्ब तो हर तरफ hi ये बात फेल चुकी हिअ..

दन्न:- तो फिर मुंबई से बहार जाने वाले हर एक रास्ते को बंद कार्डो. मुझे रेखा बाई और उसके कोठे की हर एक लड़की और औरत वापिस चाहिए. किसी भी हाल में.

मंत्री:- दन्न साब आप फ़िक्र न करें. पुरे मुंबई पुलिस डिपार्टमेंट को आर्डर दे दिया गया है. कोई भी मुंबई से बहार नहीं जा पायेगा.. आप सबब कुछ हम पर छोड़ दें..

दन्न:- मंत्री मेरी कुछ ख़ास दुश्मन भी कोठे पर मौजूद थी, रेखा बाई के साथ मुझे वो भी चाहिए. कैसे भी करके उन्हें मुंबई से बहार न जाने दिया जाए.. हर तरफ अपने आदमियों को और पुलिस को फेल जाने को बोल दो... ये मटर मेरे लिए मेरा ईगो है. और मैं अपने ईगो पर कोम्प्रोमाईज़ नहीं कर सकता.

इस मटर को कैसे भी करके सोल्वे करो.. बदले में तुम्हे और भी बोहत कुछ मिलेगा.... मैं कम को भी बोल देता हूँ....

मंत्री:- दन्न साब मैं कम साब के पास hi बैठा हुआ हूँ. और इसी टॉपिक पर hi हम बात कर रहे थे.. .....

मोबाइल लाउड स्पीकर पर था..

कम :-दन्न साब आप चिंता न करें. हमने ऑर्डर्स दे दिया हाँ. कोई भी मुंबई से बहार नहीं जा पायेगा.....

दन्न :- ठीक है. मुझे पॉजिटिव रिपोर्ट hi चाहिए और वो भी जल्दी.. अगर कुछ भी हट के सुनने को मिले तो मुझे बताना.. टाइम जितना भी हो जाए तुम मेरे आराम को ले के मैट सोचना. बास मुझे सबब बताते रहना..

कम और मंत्री:- ठीक है दन्न साब.. हम हर मिलने वाली रिपोर्ट आपको देते रहेंगे..

दन्न:- ठीक है तो फिर आप दोनों अपने काम में लगे रहें. और मुझे सबब बताते रहें. अब मैं रखता हूँ.

कॉल एंडेड....

फ्रेंड 3:- दन्न तुम्हारी जो दुश्मन है रेखा बाई के कोठे पर. कहीं उसे छुड़ाने के लिए तो किसी ने ये कार्रवाई न की हो..

दन्न अपने दोस्त की बात को सुन कर सोच में पद गया..

दन्न:- मार्टियन.... श्वेता का एक बीटा कुछ साल पहले कोठे से भाग गया था.. वो भी हो सकता है. लेकिन जिस हिसाब ने ये सबब प्लान किया गया है. ऐसा वो कर नहीं सकता.

मार्टियन:- क्यों नहीं कर सकता.???

दन्न:- वो अकेला था. और इतना बड़ा भी नहीं था, उसपर से वो पढ़ा लिखा बी नहीं था.. इतना दमाग उसका नहीं हो सकता, और इतने कम् समय इ वो इतना पावरफुल नहीं बन्न सकता...

मार्टियन:- दन्न तुम सठिया गए हो.. उस लड़के को भागे कितने साल हो गए हाँ.

दन्न:- 5 साल से ऊपर हो गए हाँ... मारतें तुम ये कहना चाहते हो क 5 सालों में वो कुछ बाण के आया और अपने साथ सबको hi छुड़ा कर ले गया.. मार्टियन दिल नहीं मानता. लेकिन फिर भी मैं इस ामकान को नज़र अंदाज़ नहीं करूँगा.

फ्रेंड2 :- हाँ दन्न तुम इसी बात को ले कर कुछ ग़ौर करो. फिर जवाब देना. शायद कुछ ऐसा भी हो. जो इस वक़्त तुम समझ नहीं प् रहे हो.

दन्न:- ह्म्मम्म्म्म देखते हाँ.... फिर दन्न किसी को कॉल मिलाने लगा......... आज की रात दन्न के लिए जागने की रात थी. उसकी सालों से जारी दुश्मनी और बदले की आग आज फिर से बढ़ गई थी.. वो किसी भी हाल में श्वेता को रेखा बाई के कोठे से दूर जाने नहीं देना चाहता था...





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मुंबई शहर में हर एक चौक हर एक इशारे पर किसी भी गाडी में फीमेल हूँ, उसे ख़ास चीख किया जा रहा tha.aksar पुलिस वाले महिलाओं से बुरा बर्ताव भी करने लगे थे, कई ऐसे कपल्स को भी पुलिस से अरेस्ट करना शुरू कर दिया था, जो अपनी आइडेंटिटी नहीं बता पा रहे थे.. पूरी पुलिस फाॅर्स को सख्ती से आर्डर दिए जा चुके थे, क किसी को भी बगैर आइडेंटिटी के जाने न दिया जाए.. पुलिस वळून को शक था. क कही रेखा बाई के कोठे पर से उठाई गई लड़कियां एक एक या दो दो करके इस शहर से न भाग रही हूँ..

पूरा मुंबई शहर hi इस सबब से परेशां सा हो गया था. आम जनता पुलिस वळून का अपनी बेहेन, माँ ाभु बेटियों से बुरे बर्ताव की वजा से तंग आने लगी थी.

आम जनता जितनी परेशां थी. पुलिस उससे भी ज़यादा परेशां थी. और मीडिया को एक स्पेशल किसम की न्यूज़ मिल गई थी. वो रेखा बाई के कोठे पर हुए काण्ड को और फिर पुरे मुंबई में पुलिस के बर्ताव को मिर्च मसाला लगा कर दिखने लगी.

आम जनता ये बर्ताव बर्दाश्त न कर पाई, और मुंबई शहर में अलग अलग जगा पर मुज़ाहिरे शुरू हो गए.. पुलिस और नेताओं को गलियां दी जाने लगीं.

रेखा बाई का एक कोठा क्या उजड़ा पूरा मुंबई hi हिला कर रख दिया गया था.

ये है वो पावर जो आम जनता की प्रॉब्लम को हल करने की बजाये एक तवायफ को ढूंढ़ने के लिए सर्फ़ की जा रही थी..... इज़्ज़तदार लोगों से बढ़ कर हो गई थी. एक कीचड ज़ादा बदन की मालिक रेखा बाई.....

पुरे मुंबई में रहने वळून का जीना हराम किया किया जा रहा था. आम जनता की वैल्यू ख़तम हो गई थी. और एक तवायफ की वैल्यू ज़यादा हो गई थी.

एक तवायफ को ढूंढ़ने के लिए आम इज़्ज़तदार बहु बेटियों की इज़्ज़त को बीच सड़क पर तार तार किया जा रहा था.....

यही है हमारा निज़ाम जो कंजरों की सुरक्षा करने के लिए तो पूरा का पूरा खड़ा खड़ा hi हिल गया था. और वही एक बेबस और मजबूर लड़की को उठा क्र कोठे पर बिठा दिया जाता है. तो मीडिया उसे 10 मिंट दिखा कर दूसरे मिर्च मसाले वाले टॉपिक ढूंढ कर चलना शुरू कर देती है.

जिनकी इज़्ज़त लूट जाए, उनके लिए इतना सबब कुछ नहीं किया जाता,

लेकिन रेखा बाई जिसके बदन की बदबू भी शायद किसी gattar(main होल) से भी ज़यादा हो, उसके लिए सबब कुछ किया जा रहा था.

अगर एक बार किसी बेटी की इज़्ज़त लूटने से पहले hi ऐसा कुछ पूरा पुलिस डिपार्टमेंट कर जाए.

पूरी हकूमत एक बार कभी किसी बेटी की इज़्ज़त को लूटने से बचने के लिए ऐसे hi आर्डर दे दे तो क्या फिर कभी किसी में इतना दुम्म रहेगा. क वो किसी की बहु बेटी की तरफ आंख उठा कर भी देख सके...

पुलिस डिपार्टमेंट और हकूमत हमेशा इज़्ज़त के लुटेरों के लिए ऐसे इक़दामात कर सकती है. किसी की इज़्ज़त बचने के लिए नहीं.

अगर विजय 10 मिंट भी लेट हो जाता तो क्या वो अपनी माँ, अपनी बहनो, रेखा बाई के कोठे पर फँसी हुई दूसरी बेबस और मजबूर लड़कियों और औरतों को कभी भी मुंबई से निकल कर ले जाने में कामियाब हो पाटा..



1000% इम्पॉसिबल

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जब्ब ऊपर से प्रेशर आता है, तो इज़्ज़त बचने वाले भी अपनी अपनी इज़्ज़त के चक्कर में पद जाते हाँ. ईमानदार ऑफिसर्स बास इतना hi बोल पाते हाँ.

""मैं क्या कर सकता हूँ. मेरा तो कोई ज़ोर hi नहीं चल रहा.""

अक्सर ईमानदार अफसर भी मेरी नज़र में चूतिये होते हाँ... जब्ब क्रिमिनल्स बुरे काम करने के लिए हर कानून को तोड़ सकते हाँ. तो क्या अच्छे काम करने के लिए इंदिरेक्ट कानून तोड़ कर किसी की भलाई नहीं की जा सकती.. अगर इतना दम नहीं है तो रेसिग्नेशन दे कर कोई और काम धंदा करलें. पेट भरने के लिए धंदे की कमी तो होने से रही..

पुलिस ऑफिसर हो तो ins-ranjeet के जैसा..... किसी की मदद करने के लिए कुछ भी कर जाए. अगर ins-ranjeet ऐसा न करता तो क्या विजय के मैं में गलत विजचार न आ जाते. विजय के अच्छा बनने में ins-ranjeet का भी बड़ा रोले है.

ऐसा hi सबको होना चाहिए... विजय जैसे हालातों में कई मासूम फंसे हुए हाँ. और उनको भी ins-ranjeet जैसे hi पुलिस वाले मिलने चाहिए. जिनसे इनसपिरे होक वो आगे चल कर कुछ गलत भी करे तो कोई हर्ज नहीं. लेकिन किसी ऐसे को तो वो परेशां नहीं करेगा. जो पहले से hi हालत की चाकी में पइसस रहा हो.

लास्ट में मैं कुछ ज़यादा तो नहीं लिख गया..... अगर किसी को अच्छा न लगे तो उसके लिए सॉरी.. बास मैं में आया. तो फिर खुद को लिखने से रोक नहीं पाया.




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ये भी आपने सही कहा है. लेकिन खुद की प्रोब्लेम्स को ऐसे hi तो नहीं कोई बीच लड़की किसी के सामने रख सकती.. वक़्त लगता है.. और वैसे भी महक खुद की छूट में ऊँगली करके 15 दिनों के लिए शांत हो जाती है. और अभी उसे कुछ hi दिन हुए हाँ अपनी छूट को ठंडा किये हुए.. और उसे सेक्स ड्रग्स का नशा है.. किसी से छोड़ने का अभी महक को कोई शोक नहीं है..

और महक की विल पावर विजय से कहीं ज़यादा.. और महक की स्टेज तक्क पोहचने के लिए विजय को बोहत टाइम लगने वाला है.. विजय फाइटिंग और बाकी सब में भी बेस्ट है..

लेकिन महक मुलती टैलेंटेड है. वो इतनी आसानी से विजय के सामने अपनी छूट नहीं खोले गई.......... अगर किसी के मैं में ये आये क विजय के साथ बाकी फिर क्यों ये सबब करती हाँ. ये बात यहाँ गुज़रे सालों की भी है.. पूजा हो रानी हो.. या fir..shikha rupa.shetal.natasha.. या फिर विजय की बहनो सभी को विजय से ये सबब करने के लिए सालों लगे हाँ
 
थैंक यू वैरी मच....!!

अब्ब तो अक्सर साथ में hi दिखेंगे.. दोनों का पेअर बोहत hi ज़बरदस्त है. ये सबब गेम hi दमाग की थी. वर्ण रेखा बाई के कोठे से अपनी माँ और बहनो को निकलना विजय के लिए मुश्किल नहीं था. दन्न चुप तो रहने वाला है नहीं.. कुछ तो वो करेगा hi.. अब देखते हाँ दन्न विजय और महक के साथ क्या करता है. अभी महक दन्न की नज़रों से ओझल है.
 
अपडेट ::: 65

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मैं सबब के साथ hi बोट पर बैठा हुआ था. आज मुझे अपना दमाग इतना एक्टिव रखना था. जितना किसी दुश्मन मुल्क के बॉर्डर पर फंसे हुए एक मिलिट्री कैडेट खुद को एक्टिव रखता है. आज मेरे लिए भी बिलकुल वैसी hi कंडीशन बानी हुई थी. और मेरा एक एक पल हर बात पर ग़ौर करते हुए गुज़र रहा था.

यहाँ किसी पैसेंजर बोट पर भी जाय जा सकता था. हर्ष अंकल के किसी स्माल शिप को भी हम लेकर जा सकते थे. लेकिन यहाँ भी एक एक बात पर ध्यान देना पड़ा था. बड़ी मोटर बोट को किसी तरह से इक साइड बीच पर लाया गया. और हम सबब उसी मोटर बोट पर एक दूसरे से जुड़ कर बैठे हुए थे. ज़यादा लड़कियों और औरतों के ऊपर तरपाल डाली हुई थी. दूर से किसी की नज़र पड़े तो कोई जजमेंट न कर सके...

पैसेंजर्स बोट आसानी से नज़र आ जाती है. और कोई किसी को ये भी बता सकता है. क इस रूट से गुज़ार कर एक पैसेंजर बोट सूरत के लिए रवाना हुई है.

आज फिर यहाँ पर शंकर पैलेस के जैसी hi कंडीशन बानी हुई थी.

एक एक पहलु पर ग़ौर करना पद रहा था. बात थी भी तो बाहर बड़ी, मेरी फॅमिली और मासूम दलदल में फँसी हुई लड़कियां और औरतें जो एक नयी ज़िन्दगी की उमंग अपने दिल में लिए हुए थीं. और उनकी इस नयी उमंग को मैं ख़तम नहीं होने देना चाहता था.

मेरे चेहरे पर संजीदगी तारी थी. और मैं दन्न को hi लेकर hi सोच रहा था. मुंबई से निकलते hi मुझे इन्फो मिल चुकी थी. क पुरे मुंबई में hi हम सबब को ढूंढ़ना शुरू कर दिया गया है.

सबब कुछ मेरी तवक़्क़ो के ऐन मुताबिक़ hi हो रहा था. अगर मेरे डांग में समंदरी रास्ते के लिए विचार न आते. तो मेरे लिए सबब को ले कर मुंबई से निकल पाना मुमकिन नहीं था.

एक हिसाब से देखा जाए तो मुमकिन अब्ब भी नहीं था. दन्न कोई आम इंसान तो था नहीं. वो एक हिसाब से हाकिम था पुरे महाराष्ट्र का. तो ये सोच लेना क वो सिर्फ महाराष्ट्र में hi सबब कुछ कर सकता है. तो ये गलत होगा. जितनी उसकी पावर है. पैसा भी उसके पास वैसा hi बेहिसाब होगा. और जिसके पास पैसा हो. वो क्या कुछ नहीं कर सकता. वो तो पुरे इंडिया को पैसे दे कर मुझे और मेरी माँ बहनो को कही से भी ढूंढ निकालेगा..

अगर वो समझ गया क ये सबब मैं hi कर गया हूँ. तो वो अपने दमाग को दौड़ना शुरू करदेगा. क मैं किस रास्ते से जा सकता हूँ. और कहाँ जा सकता हूँ.

और मुझे अभी से hi दन्न के दमाग को सामने देखते हुए सबब प्लान करना था.. अब्ब मैं अपनी माँ और बहनो को नहीं खो सकता था.

मुझे एक एक चीज़ पर ग़ौर करना था. कहीं भी गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी... एक छोटी सी गलती और सबब कुछ बर्बाद.

सबब मुझे hi देख रहे the.aur मेरे चेहरे पर संजीदगी को देखते हुए मुझे किसी ने डिस्टर्ब नहीं किया.

सबब को hi हालात की संगिनी का पूरा पूरा एहसास था. प्रिय को अभी होश नहीं आया था. और अभी उसका होश में आना सही भी नहीं था. मेरे hi कहने पे उसे नींद का इंजेक्शन भी लगा दिया गया था. माँ जहान्वी और श्रुति भी सबब कुछ समझते हुए खुद पर काबू पाए हुए थी..

मिल तो लिया था. लेकिन ये कोई मिलना नहीं था. सही से मिलना तो तब्ब hi होता जब्ब कहीं एक जगा बैठने को मिले और जहाँ कुछ सकूँ भी हो...

मैंने सोच लिया था क आगे सूरत में पोहंच कर मुझे क्या करना है. अब्ब वहां पोहंच कर मुझे हर्ष अंकल और ins-ranjeeet से क्या बात करनी है...

सूरत पोहचने में अभी बोहत टाइम था...

मैंने माँ को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. साथ में जहान्वी, श्रुति, सोनास्खी आंटी, कृति और अनिल भी थे.

विजय:- आप सबब मुझे ऐसे क्यों देख रहे हाँ.

माँ:- विज्जु बीटा मैं देख रही हूँ, मेरा बीटा एकदुम्म से जवान हो गया है. कही से भी वो पहले जैसा नहीं दिख रहा, विज्जु बीटा तेरी शकल तो मैंने अभी नहीं देखि लेकिन तेरी ऑंखें कितनी बदल गई हाँ. तू एक दुम्म गबरू हो गया है. और एक माँ को अपने बेटे को ऐसे देख कर कितना गर्व होता है मैं तुझे कैसे बताओं.. बीटा तुझे देख के मुझे खुद पर नाज़ होने लगा है. सच कहूं तो मुझे तुमसे इतनी उम्मीद नहीं थी. जितना तूने कर दिखाया है... ी ऍम सो प्राउड ऑफ़ यू बीटा.. आज मुझे कुछ रहत मिली है. वर्ण ज़िन्दगी तो मेरे लिए कब्ब की ख़तम हो चुकी थी.

विज्जु बोहत रह लिया तेरे बिना, अब्ब कभी मुझसे दूर न जाना. मैं तो कब्ब की थक गई हूँ ज़ख्म खाते खाते. और सहते सहते... अब्ब मुझे तुझे खुद में समाये हुए hi एक लम्बी नींद सोना है. सालों से जाग जाग के मैं थक गई हूँ. मुझे तेरे मेरे पास होने से नींद सी महसूस होने लगी है. विज्जु बीटा बीटा कहीं पोहंच और मुझमे में समा जा. तेरी मा कहीं बीच में hi न गिर जाए. संभल लेना अब्ब अपनी माँ को विज्जु बता. तेरे लिए सालों तक खुद को संभल पाई हूँ. अब्ब और नहीं खुद से लड़ सकती.

माँ इमोशनल बातें और उनके खतरनाक अलफ़ाज़ सुन कर मुझ समेत एक बार तो सबब hi हिल से गए. पास में बैठे मेरे दोस्त, कोठे की औरतें, और jhanvi,shruti, सोनाक्षी, कृति, अनिल सबब के hi दिल देहल उठे थे.

मैंने माँ को खुद में समां लिया. माँ का बास चले तो दहाड़ें मार मार रोये.

खुल के रोने से भी अंदर के ज़ख्म कुछ कुछ भर जाते हाँ. लेकिन माँ कभी भी खुल कर रो नहीं पाई थी. वर्ण शायर माँ के दिल का बोझ कुछ हल्का हो जाता ..माँ की हिम्मत hi थी जो ये सबब झेल गई थी. वर्ण ऐसी कंडीशन में तो औरतें पागल तक हो जाती हाँ.

विजय:- maa....maa.. जितना दर्द मिलना था आपको वो मिल चूका. अब्ब मैं आपको कभी भी दुखी नहीं रहने दूंगा. जितना दुःख जितना दर्द आपके लिखा गया था. आप वो झेल चुकें. अब्ब बास सबब ठीक हो जाएगा. अब्ब आकपा विज्जु आप सबब के लिए लौट आया है. आपका विज्जु अब्ब कभी भी आपको दुखी नहीं होने देगा.

बास देर के लिए खुद पर काबू रख लें. हम कही पोहंच जाएँ. फिर आप अपने दिल की हर हसरत पूरी कर लेना. माँ मैं तो हूँ hi आपका आप में समां जाने के लिए तो मैं भी कब्ब से तरस रहा हूँ. आपकी hi तरह मैं भी तो सालों तड़पा हूँ. मुझे भी आपके जैसे hi सकूँ वाली नींद चाहिए. मैं भी तो आपकी ममता की चाओं से सालों दूर रहा हूँ. मुझे भी फिर से वही आपके आँचल की ठंडी चाओं डरकर है.

मेरा अंदर रेज़ा रेज़ा हो रहा था. माँ के दर्द को देख कर. लेकिन खुद पर काबू रखते हुए माँ को खुद में समाये माँ के दर्द को कम् कर रहा था. जहान्वी और श्रुति भी मुझसे और माँ से लिपट गई theen.sonakshi आंटी, कृति और अनिल ने भी मेरे बाज़ो थम लिए थे. जहाँ इतने हाथ हूँ आपको सँभालने के लिए.

वहां आप कैसे डगमगा सकते हाँ. मैं बोहत खुश नसीब था जो मुझे हर एक का प्यार मिला था, प्यार मिला था और वो भी इतना भरपूर और दिल से क मैं खुद के लिए इतना प्यार देख कर उपरवाले का धन्यवाद् करते करते नहीं थकता था.

अगर मैंने बेहिसाब दर्द भी झेले थे. तो प्यार भी मुझे बेहिसाब hi मिला था... सबब की आँखों में आंसू थे.

माँ मेरी बहन में चैन की नींद सोने लग गई थीं. माँ सच में hi बोहत ज़यादा थक चुकी थी. अब्ब माँ को एक लम्बी रेस्ट की ज़रूरत थी. और लम्बी रेस्ट सिर्फ पैलेस में hi माँ को मिल सकती थी. और मुझे माँ को जल्द से जल्द पैलेस में पोहंचना था.




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दन्न वही बैठा हुआ तिलिमला रहा था. हर मिलने वाली रिपोर्ट दन्न के ग़ुस्से को और भी बढ़ा रही थी. श्वेता समेत किसी का भी कहीं से कोई सुराग़ नहीं मिल पा रहा था. ऊपर से पुरे मुंबई की आम जनता परेशां थी लेकिन दन्न को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था.

कम समेत पूरा पुलिस डिपार्टमेंट hi मुंबई की बदल चुकी सूरत इ हाल से परेशां से हो गए थे. सबब पर hi बोहत प्रेशर आ गया था आम जनता को इतना परेशां करने के लिए.

मीडिया की वजा से पूरा इंडिया hi मुंबई कम और पुलिस डिपार्टमेंट को गालियां देने लगा था. जिस वजा से पुलिस कुछ कुछ पीछे हटने लगी. और आम जनता को परेशां करना छोड़ दिया.

दन्न के लिए ये सबब और hi ज़यादा ग़ुस्सा दिलाने का सबब बन्न रहा था..

मार्टियन:- दन्न कूल हो जाओ य्र्र, खुद को ठंडा रख कर सोचो, तुम अपने ग़ुस्से की वजा से खुद को hi नुकसान पोहंचा रहे हो. कहा गया वो शातिर दन्न जिस के लिए किसी भी बात को समझ लेना मुश्किल नहीं था.. 2 घंटे हो गए हाँ. तुम भी तक्क ग़ुस्से में हो. तुम पहले खुद को रिलैक्स करो. फिर दोबारा से इस सबब के बारे में सोचो. हम भी सोचते हाँ. वो सबब कहाँ गए होंगे. मुंबई से बी रोड तो वो कही जाने से रहे. वो कही चुप गए हाँ या फिर उन्हें ने कोई ऐसा रास्ता चूसे किया है. जो हम सबब की hi समझ नहीं नै आ रहा...

दन्न अपने दोस्त की बात सुन कर सोच में पद गया क वो अपने गुस्से की वजा से सोचने समझने की शक्ति खो बैठा है. वो तो बास कम और पुलिस वळून या फिर अपने आदमियों को आर्डर दे कर इंतज़ार कर रहा है. सबब कब्ब मिलेंगे.

उसे खुद भी तो खुद को ठंडा रख क्र सोचना चाहिए था..

दन्न:- हाँ तुम भी सही कह रहे हो मार्टियन. मुझे ग़ुस्से में नहीं आना चाहिए था. ग़ुस्से की वजा से 2 घंटे भी जाया हो गए ...

दन्न फ्रेंड्स:- एससससससस.. ये है हमारा दोस्त दन्न.. अब्ब तुम जल्द hi अपने दमाग के घोड़े डुडाने लगोगे. और फिर देखना तुम कोई न कोई हॉल निकाल hi लोगे.

दन्न ने टेबल से ब्लैक लेबल उठाई और अपने मोहन से लगा कर पीने लगा. आधी बोतल पी कर उसने बोतल फिरसे टेबल पर रख दी...

अब्ब दन्न पहले जैसा हो गया था.

दन्न के दोस्त दन्न को देख कर खुश हुए.. और दन्न सबब को hi देख कर

दन्न:- ये मटर hi ऐसा था क एक बार तो मेरा भी अंदर से सबब हिल गया था. कितनी आसानी से सबब को hi कोठे पार्स लेजाया गया था. और फिर श्वेता और उसकी बेटियों के ग़ायब हो जाने से मेरा घुसा खुद के काबू में नहीं रहा था..

फ्रेंड्स:- दन्न रेखा बाई के कोठे पर हुआ काण्ड कोई छोटी बात नहीं है. वहां पर घुस कर ऐसा सबब कर जाना, और वो भी इतनी सफाई से, मामूली बात नहीं है. कोई बोहत hi बड़ा दमाग है इस सबब के पीछे. ऐसे सबब में फिर तुम्हारा ग़ुस्से में आ जाना भी सही है. लेकिन तुमने टाइम ज़यादा लगा दिया. खैर देर से hi सही, तुमने अपने ग़ुस्से पर काबू तो पा लिया. अब्ब चलो मिल कर सोचते हाँ. कौन हो सकता है. और सबब को लेकर कहाँ गया होगा..

दन्न:- ok तो फिर चलो दोबारा से इसी टॉपिक पर शुरू से डिसकस करते हाँ. शायद हम कुछ अधूरा छोड़ ए हूँ...

फ्रेंड 2:- दन्न वो सबब मुंबई में हाँ या नहीं. एक सवाल ये है. दूसरा सवाल है क अगर वो मुंबई से निकल चुके हाँ तो फिर कौन सा रूट ुनहु ने चूसे किया होगा.

मार्टियन:- हाँ और हमें इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए ग़ौर करना है.

फ्रेंड 2 और मार्टियन की बात से सबब सोच में दुब गए. और अपने दमाग के घोड़े दौड़ने लगे.

10 मिंट बाद..

फ्रेंड 1:- दन्न मुंबई से बहार जाने के सिर्फ बी रोड hi रास्ते नहीं निकलते..

छोटे छोटे टौंस या विल्लगेस से हो कर, या किसी वीराने से भी निकल कर मुंबई से बहार जाया जा सकता..

फ्रेंड 2:- और ये भी हो सकता है. वो मुंबई के बाहरी किसी दूर दराज़ इलाके में खुद को मेहफ़ूज़ किये हुए हूँ.

मार्टियन- jacob(friend 2) तुम्हारा अनुमान भी सही हो सकता है. वो ऐसा भी कर सकते हाँ. (फिर दन्न se)DNN वो समंदरी रास्ता भी इस्तेमाल कर सकते हाँ. लेकिन फिर सोच आती है क वो कहाँ के लिए निकले होंगे. समंदर में किसी को ढून्ढ लेना आसान नहीं है.

दन्न:- मार्टियन तुम भी सही हो. वो समंदर के रास्ते भी जा सकते हाँ. ठहरो मैं पूछता हूँ किसी से....

फिर दन्न ने किसी को कॉल मिलाई और मोबाइल लाउड स्पीकर पर दाल दिए..

उधर से:- सर आप .... हुकम करें मुझे कैसे याद किया...

दन्न:- शर्मा आज रात लास्ट तीन घंटे में जो भी बोट या शिप कही गया है उस बारे में जानकारी चाहिए मुझे ..

शर्मा :- सर मैं भी साहिल पर बने हुए अपने एक कोट्टेगे में हूँ. और मुझे भी आज हुए काण्ड की साड़ी रिपोर्ट मिल चुकी हाँ. यहाँ पर भी पुलिस और कई लोग चेकिंग में लगे हुए हाँ. और अब्ब तक्क की रिपोर्ट के अनुसार यहाँ से कोई पस्सनगेर बोट या शिप कही नहीं गए हाँ.. और वैसे भी रेखा बाई वाले काण्ड के बाद फ़िलहाल के लिए सबब को रोका हुआ है.. इसके इलावा अगर मुझे कोई रिपोर्ट मिलती है तो वो मैं आप को बता दूंगा...

दन्न अपने दोस्तों को देखते हुए

दन्न:- ठीक है शर्मा .. तुम सबब ध्यान रखना और कुछ भी ऐसा वैसा हो तो मुझे बड़ा देना.

शर्मा:- ठीक है सर.. आप टेंशन न लें. मुझसे जो भी बन पड़ा वो मैं आपके लिए ज़रूर करूँगा.

दन्न कॉल काट कर अपने दोस्तों को देखने लगा..

सबब एक बार फिरसे सोच में दुब गए..




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सूरत पोहचने में हमें 5 घंटे से ऊपर लग गए थे. 1.5 घंटे बाद सूबा होने वाली थी. और हमें सूबा से पहले सूरत वाली हर्ष अंकल की कोठी पर पोहंचना था.

एक संसान साहिल पर बोट को रोक दिया गया. और फिर सबब को hi एक के करके बोट से उतार लिया गया. अब्ब तक्क सबब के hi जिस्म बैठे बैठे अकड़ चुके थे.

साहिल पर पोहचते hi सबने एक रहत भरी सांस ली. माँ भी उठ चुकी थी. यहाँ भी हमारे लिए वंस का अर्रंगे किया गया था. सबब उसमे बैठ कर कोठी की लिए निकल पड़े...... जाने से पहले मैंने अपने साथ मौजूद हर्ष अंकल के आदमियों से बोट को तोड़ देने के लिए बोल दिया था. अभी बोट को आग भी नहीं लगा सकते थे.

बोट को तोड़ कर छुपाना आसान भी था. और जल्द hi किसी को सही से पता भी नहीं चल सकता था... कोठी एयरपोर्ट से एक किलोमीटर के फासले पर थी. और हम जल्द hi वहां पोहंच गए ....

कोठी में सबब साफ़ सफाई कर दी गई थी. और कोठी में खाने पीने का सामान तो था. लेकिन वहां कोई भी नौकर या माइड नहीं थे. हमने किसी किसम का चांस नहीं लिया था. खाने पीने के लिए हमारे साथ ाललरेअद्य hi बोहत सी गर्ल्स एंड वीमेन थी.

सबब अंदर पोहचते hi गिर से पड़े. मारे ख़ुशी के सब की hi आँखों में आंसू से आ गए थे....

लाली को एक रूम में शिफ्ट कर दिया गया... और 2 लड़कियों को उसके साथ भेज दिया गया.

अब्ब मुझे टाइम मिला था सबब को सही से देखने का.... साड़ी लड़कियां और औरतें माँ को hi देख रही थीं .. सब की सबब hi माँ को गर्व से देख रही थी.

एक लड़की जो क बोहत hi मासूम सूरत वाली थी. वो भागी भागी आई और माँ के पैरों में गिर कर पड़ी और माँ के पैरों पर सर्र रख कर रोने लगी... उस लड़की को रोटा हुआ देख कर सबब ने hi अपने आंसू और भी बहाने तेज़ कर दिए थे...

80% लड़कियां अपनी इज़्ज़त लुटवा छुई थी. लेकिन फिर भी दिल से इस सबब की आदि नहीं हुई थी. सबब hi मजबूर थी और आज उन्हें दलदल से निकल जाने का एहसास हुआ तो खुद पर काबू पाने में नाकाम हो रही थी..

कृति की hi तरह 5 लड़कियां और थी थी. जो अपनी माँ के गले लगे हुए रो रही थी. और उनकी मायें भी अपनी बेटियों को खुद में समाये हुए अपना दिल हल्का कर रही थी....

ज़यादा तर ऐसी थी जो हर रात के लिए बुक हुआ करती थी. वो सेक्स की आदि भी हो चुकी थी. लेकिन फिर भी खुद को एक दलदल में पैसा हुआ महसूस करती रहती थी. कोई भी लड़की हो या औरत चाहे वो अपने मैं से हर 2 घंटे के बाद किसी का लुंड अपनी छूट या फिर गांड में लेती रहे ुसया कोई परेशानी नहीं होती. लेकिन जब्ब सबब कुछ hi जबरन उसके सात होता रहे और फिर हर्र रात hi मर्द और लुंड बदलते रहें तो मेंटली सहन शक्ति ख़तम होने लगती है..

इन सबब के साथ भी ऐसा hi कुछ हो रहा था....

माँ भी आंसू बहती हुई झुकी और लड़की को कंधे से पकड़ कर उठा लिया. और अपने गले से लगा लिया...

माँ:- मैट रो मेरी बच्ची तो अब्ब अकेली नहीं है और न hi अब्ब तुम्हे कोई खतरा है. न रो मेरी बच्ची देख मेरा बीटा भी jhanvi,priya और श्रुति की hi तरह से तेरा भी भाई है. जा और जा कर अपने भाई से मिल, तुझे और भी शक्ति मिलेगी...

लड़की माँ को देख कर मुझे देखने लगी... मैं भी लड़की को देखने लगा. बिलकुल अनुष्का और उसकी बहन अनन्य के जैसी hi इक फूल सी लड़की थी..

पायरा सा चेहरा. आंसूं से भीगी हुई ऑंखें मुझे मेरे दिल में उतरती हुई लगीं. ऐसी पारी जैसी लड़की को भी उसके घर से उठवा लेते हाँ हरामी लोग.

मैंने अपनी बहन पहला दीं. उसने एक बार माँ को देहका. माँ ने हाँ में सर्र हिलाया और फिर वो भागती हुई मेरी बहन में समां गई..

लड़की:- bhaiya..mere भैया.. वो इतना hi बोलती रही और मुझे चूमने लगी.. जाह्नवी और श्रुति आएं और वो भी इस मिलान में शामिल हो गयी..

लड़की ने दोनों को देखा और फिर

लड़की:- दीदी देखो मुझे भी मेरे भैया ने बचा लिया.. didi..didi...mujhe....bhi.....

और फिर रट हुए मेरे गले से लग गई.. उसकी हिचकियाँ बढ़ गई थी.. मारे ख़ुशी के उससे बोलै भी नहीं जा रहा था..

सबब की hi ऐसी हालत थी..

विजय:- जानवी .. श्रुति पहले सबब के लिए खाने पीने का इंतेज़ाम करो. हमारे पास टाइम कम् है. खा पी कर कुछ रेस्ट करते हाँ. फिर आगे का भी सोचना है ..

jahnvi.shruti:- ठीक है विज्जु. हम कुछ करते हाँ.. जहान्वी और श्रुति के बोलते hi कुछ और भी लड़कियां इस सबब में दोनों का हाथ बताने के लिए तैयार हो गईं..

प्रिय को इक सूफी पर लिटाया हुआ था. और अब्ब वो भी उठने वाली थी. अजित भाई को मैंने रात 8 बजे वाली ट्रैन से दिल्ली जाने को बोल दिया था. और वो चले भी गए थे.

मैं माँ और लड़की को लेके प्रिय के पास गया और फिर लड़की को खुद से अलग करके प्रिय को उठाया और फिर उसे सोये हुए hi बिठा कर खुद के गले लगा लिया. प्रिय नींद में hi मुझे कस के पकड़ने लगी. माँ और लड़की भी सूफी पर hi बैठ गई थीं.

माँ ने सोनाक्षी आंटी और उनके बच्चों को भी अपने सामने रखे हुए सूफी पर बैठने के लिए बोल दिया था.. लड़कियों और औरतों से कह दिया था. क वो कोठी में जहाँ उनका दिल करे जा कर रेस्ट क्र सकती हाँ और वो सभी अंदर रूम्स में चली गई थी. बास हम hi रह गए थे..

प्रिय मेरे गले लगे हुए hi नींद से बहार आने लगी. उसके बदन में हलचल सी होने लगी. आंख खुली नहीं थी और वो

प्रिय:- विजजूउउउउउउ तू आ gaya....vijjjjjuuuuuuuu.. mera...bhaiiiiiiii.. tu..aa..gaya........

प्रिय धीरे धीरे नींद से बहार आते hi बोलने लगी.. मुझसे भी अब्ब सहन नहीं हुआ और मैंने प्रिय को खुद की गॉड में बिठाया. प्रिय के पेअर माँ ने अपनी गॉड में रख लिया. और लड़की प्रिय की पीठ को सहलाने लगी. कितना प्यार जीता रहे थे सबब hi प्रिय से. मैंने एक नज़र सामने देखा तो सोनाक्षी आंटी, कृति और अनिल आँखों में आंसू लिए हुए हमें hi देख रहे थे..

फिर मैंने माँ को देखा और फिर मेरे होंठ प्रिय के माथे पर जा रुके. मेरे होंठों के लम्स से प्रिय के बदन में कुछ और भी हलचल होने लगी.

और फिर धीरे धीरे करके प्रिय की ऑंखें पूरी तरह से खुलने लगीं..

हमारा लम्स तो पहले से hi एक दूसरे के अंदर जज़ब हो चूका था... मेरा लम्स पाते hi प्रिय की नींद साड़ी hi खत्म हो गई और फिर जैसे hi उसे सबब याद आया...

प्रिय:- vijjjjjjjjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu....

मैंने प्रिय के होंठों पर अपना हाथ रख दिया. प्रिय ने मुझे देखा और फिर मेरी आँखों में देखते hi उसकी आँखों ने भी रंग बदल लिया. प्रिय अपनी बहन मेरे गले में डालते हुए मुझे चूमने लगी...

प्रिय:- मेरा vijjjjjuuuuuu..sach..me ..aaa..gaya.................. प्रिय रोने लगी.. रट हुए hi मुझे बेतहाशा चूमने लगी... बहते आंसुओं से वो मुझे चूम रही थी और माँ प्रिय के पैरों की उँगलियाँ को एक एक करके थोड़ा थोड़ा दबा कर अपना प्यार दिखा रही थी. लड़की प्रिय की पीठ सेहला रही थी. और मैं प्रिय की सालों की तड़प को देख रहा था.. कितना ताड़ती थी मेरी प्रिय मेरे लिए. कितना दर्द सहा था मेरी प्रिय ने मेरे लिए...

प्रिय जो मुझे खुद से एक दिन के लिए भी जुड़ा नहीं करना चाहती थी.

वही प्रिय मुझसे सालों के लिए दूर हो गई थी और मैं प्रिय से..

प्रिय के जैसे hi मेरे दिल में भी वही दर्द और प्यार था जो प्रिय के दिल में मेरे लिए था....

जब तक प्रिय के अंदर का दर्द और जुदाई की तड़प ख़तम नहीं हुई. वो आंसू बहते हुए मुझे चूमती रही... जब वो कुछ बेहतर हुई तो मेरे गले लग कर मेरे गर्दन को चूमने लगी और फिर मुझे कस के गले लगा लिया..

प्रिय धीरे धीरे लम्बी लाबी सांस ले रही थी. प्रिय मेरी खुशबू खुद के अंदर उतार रही थी. और मैं प्रिय के सर्र को सहलाने लगा..

प्रिय नार्मल हुई तो सीढ़ी होकर मेरे आँखों में देखने लगी.. और फिर मेरी आँखों पर बी अपने प्यार का हक़ जताने लगी. प्रिय बारी बारी मेरी दोनों hi आँखों को चूमने लगी..

प्रिय:- वजूउउउ तूने बोहत देर लगा दी थी. पता है हम सबब का क्या हाल हो रहा था.. पता है हम कितना दर्रे हुए थे. लेकिन फिर भी तू जल्दी नहीं आया.

विजय:- मेरी जान (मैंने प्रिय के गाल पर किश किया).. मैं चाहता तो पहले बी आ सकता था. और तुम सबब को यहाँ से लेकर जा सकता था. लेकिन फिर वही टेंशन रहती तुम सबब को सेफ कैसे रखूँगा... बास इसी वजा से देर हो गई. वर्ण मैं तो कब्ब का तुम सबब को यहाँ से ले कर कहीं चला गया होता...

पिया:- हाँ विजजू मैं भी सबब समझती hun..(mera हाथ पकड़ कर अपने दिल पर रखते हुए) पारर मई अपने इस दिल कर क्या करती. जिसे तुझ बिन रहने की आदत नहीं है..

माँ:- प्रिय बेटी अब्ब तो तेरे दिल की सुनी गई है.. और तू तो विज्जु को दखते hi बेहोश हो गई थी. वर्ण तुझे भी सबब पता होता. तेरे भाई ने वहां फँसी हुई सभी लड़कियों और औरतों को भी वहां से निकाल लिया है.. विज्जु बीटा लेट तो हुआ है. लेकिन उसने काम सही से किया है. वर्ण सिर्फ हमारे लिए शायद विज्जु को देर न लगती...

प्रिय ये सबब सुनते hi मुझे हैरत से देखने लगी..

प्रिय:- विजजूउउ तुमने इतना सबब कर लिया.. मेरा विजजू कितना अच्छा बन कर आया है.. मेरा bhai....hmmmmmha..mera विजजूउ..... hmmmmmha...meri जान...

उम्म्म्मम्गा..... तू कितना अच्छा और प्यारा हो गया hai..ummmmmmmha.. प्रिय मेरे गालों को चूमती रही और साथ बोलती भी रही..

प्रिय मेरी आँखों में देखने लगी और एक बार फिरसे मेरे चेहरे पर झुक गई और इस बार वो मेरे होंठों को चूमने लगी. मैं हड़बड़ा गया. प्रिय सबब के सामने hi मुझे किश करने लग गई थी.

मैंने माँ को तिरछी आंख से देखा तो माँ मंद मंद मुस्कुरा रही थी. माँ ने मुझे इशारे से शांत रहने को बोल दिया. मुझे कुछ हैरानी तो हुई लेकिन फिर प्रिय को उसकी मर्ज़ी करने दी और प्रिय किसी को भी खातिर में न लाते ुए hi मेरे सर्र को पीछे से पकड़ कर मेरे होंठों का रस्सपान करने लगी..

जिस तरह के माहौल सबको मिला था. और जिस तरह से मैंने और priya,jhanvi और श्रुति ने भी माँ को हर रात नया मर्द बदल बदल कर चुड़ते देखा था. तो ये सबब तो फिर एक नार्मल बात थी. माँ मजबूर थी वो अपनी मर्ज़ी से तो ये सबब नहीं कर रही थी. लेकिन फिर भी सालों ऐसे hi माहौल में रहकर किसी हद तक वो आदि तो हो hi गई थी. और ऐसा प्यार अब्ब हमारे लिए नार्मल सी बायत बन्न कर रह गई.

माँ कैसे मुझे या प्रिय को रोक सकती थी. माँ तो खुद प्रिय के सामने hi कई बार अपनी टांगें खोल कर चुद चुकी थी.. बात थी तो गन्दी लेकिन जो सच है वो सच hi है, भले hi ये सच बोहत दर्द भरा था. लेकिन था जो एक संगीन सच hi..

माहौल सबब के लिए बदल गया था. लेकिन चुदाई का बुखार तो सबब के अंदर भरा hi जा चूका था.... माँ भी अगर 1 हफ्ते तक्क किसी से न चुद ले तो उसे भी बेचैनी होनी लाज़िम है.

अब्ब मुझे सबब को खुश देखना था और सबब के लिए hi कुछ न कुछ तो करना hi था. कोठे पर चुद रही सालों से लड़कियां और औरतें अब्ब सेक्स के बिना तो रहने से रही.. कुछ दिन या शायद 2 महीने वो खुद को नए माहौल में एडजस्ट तो कर hi लेंगी. लेकिन अपनी छूट और गांड की खुजली और गर्मी की वजा से बेचैन होती रहेंगी hi.....

shittttttttttttttt ये भी एक बोहत बड़ी समस्या थी मेरे लिए...

खैर देखते हाँ दिल्ली में पोहंच कर सब के लिए क्या किया जा सकता है....

प्रिय बड़े hi मज़े से मुझसे अपना हक़ वसूल करने में लगी हुई थी. प्रिय का एक हाथ मेरे सर्र के पीछे था तो एक हाथ से प्रिय ने मेरा कालर पकड़ा हुआ था. मैंने अभी तक्क प्रिय को रिस्पांस नहीं दिया था. लेकिन प्रिय इस सबब को भूल कर मुझे सबब के hi सामने किश कर रही थी .... प्रिय के नरम और गरम होंठों के एहसास की वजा से मेरा लुंड खड़ा हो चूका था. जो प्रिय को भी अपनी गांड के नीचे चुभने लगा था. लेकिन प्रिय ने उसपर ध्यान दिए बिना hi मेरे होंठों का पानी अपने अंदर उतारने में लगी हुई थी..

प्रिय तो नशे में हो गई थी और मुझे भी नशे में ला जा रही थी. अब्ब सबब के सामने मैं अपने लुंड का क्या करता. जिसे पूजा दीदी, रानी और भाभी ने एक खतरनाक आदत दाल दी थी.

आदत तो कोठे पर hi शुरू से पद गई थी. लेकिन तब्ब मेरे लुंड को ऐसे झटके नहीं मिलते थे. तब्ब छोटा था और प्यार और मस्ती ज़यादा हुआ करती थी. पारर अब्ब तू मैंने छूट का पूरा न सही, बोहत ज़यादा टास्ते कर लिया था.

अब्ब आने वाला वक़्त मेरे लिए क्या कुछ नया लेकर आने वाला था. मुझे कुछ कुछ इसका एहसास हो रहा था.





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थैंक यू वैरी मच..!!

विज्जु के लिए सालों से सेह रहे अपनी माँ और बहनो के दर्द को देखते हुए ऐसा प्लान तो बनाना hi था. यहाँ जुंग लड़ने का ऑप्शपन तो था नहीं. लड़ाई करने से कई मासूम लड़कियां और औरतें मारी jaati.isliye ब्रेन का उसे करना सही था. और विज्जु ने ऐसा hi किया. और ले कर निकल गया सबको..

होता है बोहत वक़्त बाद कोई मिले तो डिफरेंट किंड्स की सिचुएशन आती रहती हाँ. विजु भी कुछ टाइम के लिए कंफ्यूज तो हो hi गया..
 
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