अपडेट ::: 69
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माँ और isn-ranjeet के मिलान की जितनी हैरानी मुझे और बाकी सबब को थी. उसकी कोई हद नहीं थी.
लेकिन इस हैरानी के इलावा मेरे अंदर इक ख़ुशी की लहर भी उतनी शुरू हो गई थी. ख़ुशी इस बात की थी. क माँ को कोई तो ऐसा मिला जो मेरे और प्रिय के इस दुन्या में आने से पहले hi माँ की ज़िन्दगी में मौजूद था. माँ के लिए पुराने रिश्ते बोहत अहमियत रखते थे. माँ के साथ जैसा हुआ था, माँ के लिए हम सबब के होते हुए भी, माँ खुद को एक तरह स अकेला hi समझती. कुछ दर्द ऐसे भी होते हाँ, जो औलाद होने पर भी कम् तो हो जाते हाँ. लेकिन ख़तम नहीं होते.
और माँ के लिए isn-ranjeet से रिश्ता होना माँ के लिए बोहत hi अच्छा था. माँ के ग़म को बांटने के लिए सिर्फ हम hi काफी नहीं थे.
माँ के लिए उसकी अर्ली लाइफ में मौजूद रिश्तों से में किसी का मिल जाना, माँ के दर्द को ख़तम करने का सबब बनने वाला था. ins-ranjeet का माँ की ज़िन्दगी से कैसा कनेक्शन था. वो तो हम सबब देख hi रहे थे..... मेरा दिल माँ को मिलने वाली ख़ुशी से झूमने लगा था.
माँ और ins-ranjeet दोनों खुद में समाये आंसू बहा रहे थे.
मैंने प्रिय को देखा. प्रिय की आँखों में भी आंसू थे. फिर मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा तो वो भी आंसू बहा रही थीं.
मैंने प्रिय को पकड़ा और खेंच के अपने गले से लगा लिया.. प्रिय मेरे गले लगते hi और भी रोने लगी. सबब का रोना ख़ुशी का रोना था. मेरी भी ऑंखें नम्म होने लगी थीं. मिलने वाली ख़ुशी बोहत बड़ी थी, दिल को इतनी ख़ुशी सहन करने की आदत भी तो नहीं थी ना. दिल के झूमने से आँखों में पानी सा आने अलग था.
थोड़ी देर प्रिय को गले से लगाए रखा, हम दोनों hi एक दूसरे से इस ख़ुशी को बाँट रहे थे.
फिर प्रिय को खुद से अलग किया और प्रिय के साथ माँ के पास चला गया. माँ और ins-ranjeet अभी भी गले लगे हुए थे.
मैंने एक बार सबब को देखा, सभी महिला मण्डली भी आंसू बहाने में लगी हुई थी. पहले हैरानी बथि, फाई शॉक लगा और अब्ब ख़ुशी से आंसू बहाये जा रहे थे. िसाब्ब माँ को मिलने वाली ख़ुशी से खुश थे.
मैंने प्रिय को इशारा किया और फिर दोनों ने hi माँ और ins-ranjeet को गले से लगा लिया.
माँ और ins-ranjeet ने ऑंखें खोल क्र मुझे और प्रिय को देखा. लेकिन न तो कुछ बोले और न hi दोनों अलग हुए हुए.... मेरी और प्रिय के बहन माँ और ins-ranjeet के गिर्द लिपित गईं.
अब्ब हम चरों hi गले से मिले हुए थे. और चरों hi मिल कर इस नए रिश्ते को महसूस करने लगे.. कुछ तो रिश्ता था hi मेरा और प्रिय का ins-ranjeet से.
5 मिंट ऐसे hi गुज़रे और फिर ins-ranjeet की आवाज़ सुनाई दी..
ins-ranjeet:- श्वेता मुझे माफ़ कार्डो. मैं तो सोच भी नहीं सकता था. तुम किसी कोठे पर जा पोहंची हो. वर्ण मैं तो कब्ब का तुम्हे वहां से निकल कर ले जाता.
माँ:- रणजीत तुम मुझसे माफ़ी मैट मांगो. तुम्हे तो किसी बात का पता भी नहीं चला होगा. और फिर मैं किसी कोठे पर जा पोहंचु गई. ये न तो मैंने कभी सोचा था. और न hi तुम सोच सकते थे. मैंने बड़ी कोशिश की तुमसे राब्ता करने की. लेकिन मैं छह कर भी ऐसा नहीं कर पाई. मुझे हर वक़्त hi निगरानी में रखा जाता था. वाशरूम तक मुझे अकेला नहीं जाने दिया जाता था. रणजीत मैं बोहत रोई तुम्हरे लिए, बोहत तदपि हूँ मैं तुम्हारे लिए, तुम्हारे प्यार के लिए.
रणजीत:- मैं भी तुम्हरे लिए तड़पा हूँ श्वेता. मेरा तो कोई था hi नहीं तुम बिन श्वेता, इस पूरी दुन्या में एक तुम hi तो मेरी ज़िन्दगी थी, तुम भी नहीं रही, तो मेरा तो सबब कुछ hi ख़तम सा हो गया था. तुम क्या गई मेरी ज़िन्दगी से मैं तो जैसे जीना hi भूल गया था. बोहत वक़्त मेरी हालत पागलों जैसी रही.
श्वेता तुम्हरा मेरी ज़िन्दगी में आना, मेरे लिए जीने का मक़सद बन गया था, लेकिन फिर तुम भी कही खो गई. जीना मुमकिन नेह रहा था. लेकिन फिर भी जीना तो था hi. धीरे धीरे करके मैं ज़िन्दगी की तरफ वॉइस आया और पीर मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारे बाद कोई नहीं आई.
माँ और ins-ranjeet धीरे धीरे बोल रहे थे. मेरे और प्रिय के सिवा किसी को दोनों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी. मैं और प्रिय माँ और ins-ranjeet की बातें सुन कर हैरान हो रहे थे. लेकिन मैंने या प्रिय ने माँ और ins-ranjeet को दितुर्ब नहीं किया....
माँ:- रणजीत मैं भी तो पागल हो गई थी. मेरा तो सबब कुछ hi बर्बाद कर दिया गया था, मेरी इज़्ज़त दो कोड़ी की भी नहीं रह गई थी. ऐसी हालत हो गई थी, सुसाइड के ीालवा मेरे पास कोई चारा नहीं बचा था. लेकिन मैं तो मर्डर भी नहीं सकती थी रणजीत... क्यूंकि तुम्हारी निशानी जो मेरे पेट में आ गई थी. उसी की वजा से मैं मर्डर नहीं सकीय. वर्ण ज़िन्दगी तो मेरे लिए खतम हो hi चुकी थी.
माँ की बात सुनकर हम तीनो को hi झटका लगा. और हम तीनो hi माँ से अलग हो गए. और माँ को दीदे फहाद फहाद कर देखने लगे.
ins-ranjeet:- shsh...shweta kkk....kya.yy..ye..sach... है...
माँ:- हाँ रणजीत विज्जु तुम्हारा hi खून है.....
माँ ने ये बोल कर एक धमाका कर दिया.. और इस बार माँ की आवाज़ सबब ने hi सुन ली थी......
माँ की बात सुनते hi ins-ranjeet घुटनो के बॉल नीचे गिर गए... और आंसू बहाने लगे...
मैं माँ और ins-ranjeet(papa) को बारी बारी देखने लगा.. मतलब मैं कोठे की पैदाइश नहीं था. मैं जबरन इस दुन्या में नहीं लाया गया tha..me माँ और पापा के प्यार की निशानी था. ये मेरे लिए बोहत hi बड़ी खुशखबरी थी.. मुझे मेरे पापा का पता चल गया था...
सबब आस पास खड़े एक दूसरे का मोहन टेककन लगे. आज सबब को hi जटके पे झटके लग्ग रहे थे..
प्रिय माँ के गले लगकर रोने लगी.. और मैं ins-ranjeet यानी क अपने पापा के सामने hi घुटनो के बल बैठ गया.
इस बार मेरी भी हालत ख़राब होने लगी थी. ये ऐसा झटका था, जो सहन करना मुश्किल हो गया था..... पापा मोहन नीचे किये हुए hi आंसू बहाये जा रहे थे.
मैंने अपने कांपते हुए हाथों से अपने पापा के हाथों को पकड़ लिया. पापा ने मुझे देखा और फिर बैठे बैठे hi मुझे गले से लगा लिया.. हम दोनों की hi आँखों में आंसू लगातार बह रहे थे.
ऑंखें रो रही थीं और दिल झूम रहे थे.
मेरे अंदर नयी फीलिंग्स ने जनम लेना शुर कर दिया. मैं भी अपने पापा को अपने सीने से लगाए नयी जाग चुकी फीलिंग्स को जान्ने में लग्ग गया, मेरा दिल बेपनाह रफ़्तार से धड़क तो रहा था. मेरा दिल धड़क भी रहा थे और नयी फीलिंग्स जनम लेने की वजा से झूमने भी लगा था...
मुझे नहीं पता मेरे अस पास खड़े हुओं की क्या कंडीशन हो चुकी है. मैं तो बास आज उपरवाले की दी गई खुशियों को अपने अंदर उतार रहा था. मेरे पापा मेरे पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगे और ins-ranjeet के हाथों का लम्स बदल कर मेरे पापा के हाथों का हो गया था...
एक कनेक्शन तो था hi हमारा शुरू से. मेरे दिल में उनके लिए रेस्पेक्ट तो शुरू से hi आ गई थी. लेकिन वो एक पुलिस वाले भी थे. तो मैं उनसे दूर दूर hi रहा था. लेकिन पापा मुझसे दूर नहीं रहे थे. शायद ये खून की कशिश थी. या वक़्त ने कोई अपना hi रंग दिखने का मैं बना लिया था.
खैर जो भी था. हम सबब के लिए खुशियों की बरसात उपरवाले ने कर दी थी.
पापा:- विजय तुम मेरे बेटे हो. आज मैं बोहत खुश हूँ विजय बीटा. भगवन ने तुम्हे मेरे खून से सेणचा है. शुरू से hi तुम्हे देख के मेरे दिल को कुछ कुछ होता था. लेकिन मुझे क्या पट्ठा तुम मेरा hi खून हो. तुम मेरे और श्वेता के प्यार की निशानी हो. अगर मुझे पहले पता होता तो मैं कब्ब का तुम्हे अपने सीने से लगा लेता. विजय बीटा तुम भी मुझे माफ़ कार्डो. मैं तुम्हरे लिए और तुम्हरी माँ के लिए कुछ भी नहीं कर सका.
विजय:- पापा
पापा:- एक बार फिर से bolna..vijay बीटा..
विजय:- papa..papa..papa..
पापा:- आज मुझे वो ख़ुशी मिली है, जिसकी तमन्ना मैं कभी किया करता था.
मैंने तो तुम्हारी माँ के बाद कभी किसी के बारे में सोचा भी नहीं था.. और देखो विजय बीटा, आज भगवन ने मुझे मेरे सबर का और तुम्हारी माँ से प्यार का कितना बड़ा इनाम दे दिया है ..... जो मुझे कभी भी नहीं मिल सकता था. वो मुझे मिला है. विजय बीटा मैं कैसे अपनी खुशियों को समेटो ... आज की खुशियां मेरा दिल सहन अनहि कर पा रहा है. उसे इतना खुश रहे की आदत भी तो नहीं है naa.............papa मेरे गालो को और मेरे माथे को चूमते हुए बोले..
पहलवान जी आये और पापा के कंधे पर हाथ रख दिया..
पापा ने अपने दोस्त को देखा और
पापा:- देखा जग्गू, उपरवाले ने मुझे कितना बड़ा इनाम दे दिया हिअ.. मैं कहता था ना. क मुझे विजय में किसी की खुशबु महसूस होती है . और देखो आज वही खुशबु भी मुझे मिल गई. और एक बीटा भी मिल गया...
माँ:- रणजीत प्रिय भी हमारी बेटी है..
हम अपनी ख़ुशी में प्रिय को तो भूल hi गए थे.... आज जहाँ इतनी बड़ी ख़ुशी का माहौल बन्न गया था. वही प्रिय के लिए ये एक बोहत hi बड़ी दर्द भरी बात थी. मुझे मेरे पापा मिल गया थे, लेकिन प्रिय के पापा कौन हाँ, ये तो माँ hi जानती थी. और प्रिय इस सबब को दिल में रख कर दुखी भी हो सकती थी.
पापा माँ की बात सुनकर सबब समझ गए और वो एक झटके में खड़े हो गए.
पापा:- श्वेता ये भी कोई कहने की बात है. मुझे तो आज भगवन सबब कुछ देने पर तुला हुआ है. मुझे तुम मिल गई श्वेता. एक बीटा मिला है. और एक बेटी भी तो मिली है... प्रिय बेटी क्या मैं तुम्हारा पापा नहीं हूँ...
प्रिय ने माँ को देखा और फिर मुझे देखा, जैसे मुझसे परमिशन मांग रही हो, मैंने सर्र हिला दिया....
प्रिय:- क्यों नहीं पापा आप hi मेरे पापा हाँ. और मुझे किसी ैरे गैर को अपना पापा कहने की ज़रूरत भी नहीं है..
प्रिय ये सबब हिचकियों में बोल रही थी. पापा ने अपनी बहन पेहलाई और प्रिय उड़ती हुई पापा की बहन में समां गई...... इस बार प्रिय का रोना दिल दहलाने वाला था.. प्रिय अपना पूरा ज़ोर लगा कर रो रही थी..... प्रिय खुश भी थी और किसी हद्द तक अधूरी भी थी.
जहान्वी और श्रुति भाग क्र आई और मेरे गले लग्ग कर वो भी ऊंची ऊंची रोने लगें.. उन्हें भी अपने घरवाले याद आ गए थे..... इतने साल बीत गए थे. मैंने कभी नहीं पूछा था दोनों का घर कहाँ है. और वो दोनों कहाँ से हाँ. पहले बचपन था और अब्ब मैं उन्हें भूले हुए दर्द को याद दिलाना नहीं चाहता था. इसलिए माँ प्रिय या मैंने कभी भी दोनों को पास्ट में जाने नहीं दिया था.
लेकिन आज बानी सिचुएशन की वजा से वो दोनों hi अपने पास्ट में चली गईं थी.
मेरे दोस्त थके हुए थे तो जा कर सो गए थे. इसलिलये डिनर के लिए नै ए थे. उन सबब की फॅमिली थी हमारे आस पास..
वो सबब ins-rajeet के सवागत के लिए तो आगे नहीं आये थे. लेकिन थे वो पैलेस के गेट के पास hi. अब्ब बदली सिचुएशन में सब ने hi मेरे दसौतों को जा कर उठा दिया था. और इस वक़्त पूरा पैलेस hi हमारे आस पास खड़ा हुआ था...
जो खास थे वो कुछ करीब खड़े थे. और जो हमने पैलेस में रहने के लिए बेसहारा खंडन बुलवाये हुए थे. वो भी कुछ फासले पर खड़े पल पल बदलते हुए हालात को देख रहे थे.
अजित भाई आगे बहे और मेरे पास आ कर मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ फेरने लगे. फिर अजित भाई की देखा देखि सब hi आगे बढे और अपना प्यार जताने लगे.
प्रिय पापा की बहन में अपना ग़म हल्का करके चुप हो गई थी. और माँ पास कड़ी हुए ऊपर आस्मां की तरफ देख रही थी....
माँ उपरवाले का शुक्रिया अदा कर रही थी. जो उन्हें इतने साल की ज़िल्लत भरी ज़िन्दगी के बाद खुशियों से भरपूर ज़िन्दगी मिल गई थी.
एक औरत के लिए उसके पति या प्रेमी से बढ़ कर भी कुछ होता है क्या .. माँ के अंदर के सारे दुःख पापा के आने से एक hi जहटके में ख़तम हो गए थे. अब बास माँ के दिल में सिर्फ एक आग hi बाकी रह गई थी.
बाकी माँ का दिल अब्ब हर दुःख दर्द से निजात प् चूका था...
तो फिर माँ भगवन को थैंक्स कुयं न बोले.
कुछ hi देर में सबब शांत हो गए. और फिर हर्ष अंकल, पहलवान जी, अजित भाई, राज, anil,karan भी पापा से मिले और पापा को बधाई दी.
लेडीज मण्डली ने भी माँ और को और पापा को बधाई दी. कुछ देर बाद सबब hi पैलेस के अंदर जा पोहंचे. डिनर क्या करना था. भूक hi सबब की उड़द गई थी. अभी भी किसी का डिनर के लिए मैं नहीं था. तो फिरसे सबब सिटींग हाल में आ गए थे.
मैं अभी तक अपनी दिल्ली वाली फॅमिली से सही से नहीं मिला था. सबब के hi दिल मचल रहे थे मुझे स्पेशल थैंक्स बोलने के लिए.
मेरे लिए बोहत बड़ी टेंशन बन्न गई थी. जबसे शंकर गैंग से पला पड़ा था. मैं किसी को भी सही से टाइम नहीं दे पाया था. हालात भी पल पल बदल रहे थे. पूजा दीदी, रानी, और बाकी सबब के साथ भी ज़यादती हो रही थी. सबब का hi दिल मेरे लिए मचल रहा था. और मैं इस सिचुएशन में किस किसको टाइम दूँ.
मुझसे नाराज़ तो किसी ने क्या होना था. हाँ दिल की भी भूक होती है, जो उनकी मिटत नहीं पा रही थी. और मेरे लिए इतनी लम्बी लाइन लगी हुई थी. क सोचते हुए hi पाईना आना शुरू हो जाता था.
मैं इन सबब को हैंडल कैसे करूँगा. मैं इन्ही सोचों में था. क मुझे हर्ष अंकल की बात सुनाई दी और मैं अपनी सोचो से बहार आ गया..
हर्ष अंकल पापा से कुछ पूछ रहे थे. और मैं.......
मैंने एक नज़र पुरे हाल में दौड़ाई, लड़कियां सबब मुझे hi देख रही थीं. शायद वो भी कुछ कुछ समझ रही थी, मैं क्या सोच रहा हूँ.
पुरे हाल में मेला लगा हुआ था.... राजा एंड फ्रेंड्स भी मुझे hi देख रहे थे और मैं कभी उन सबब को देखता और कभी पूजा दीदी और बाकी सबब को. अभी बड़ी महिलायें माँ और पापा में बिजी थीं...
मैं देखने लगा, हाल में कौन कौन है.....
raja,uday,jeetu,anupam, और उनकी फैमिलीज़.......................
karan,juhi, जूही माँ............................................................
अजित भाई, bhabhi,raj,shikha,rupa,padma आंटी, रानी.......
सोनाक्षी aunty,kriti,anil.....................................................
malikan,puja दीदी................................................................
हर्ष uncle,deeksha aunty,shetal,natasha दीदी...............
papa,maa,vijay,priya,jhanvi,shruti,aparna.......................
पहलवान जी............................................................................
कोठे से ले गई कुछ और भी लड़कियां और औरतें भी हाल में बैठी हुई थीं.
लाली अभी बीएड रेस्ट में hi थी.
इतने सबब थे और सबब के लिए टाइम निकलना पड़ेगा. वर्ण रोज़ hi किसी न किसी का शिकवा बढ़ता जाएगा.
वसीसे सबब को देख कर एक बार मेरी हालत पतली ज़रूर हो रही थी.
विजय:- माँ मैं कुछ देर पूजा दीदी और बाकी सबब से अकेले में बैठ लून. उन सबब...
maa:-(chehakte हुए) हाँ हाँ विज्जु बीटा. हम सबब बाद में फिरसे मिल लेंगे. अभी तुम बाकियों से अपनी ख़ुशी को बाँट लो..
माँ ने बात क्या की. मेरे ग्रुप की सभी गर्ल्स एंड बॉयज उठ खड़े हुए...
सबब बड़े अपने बातें छोड़ कर ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे.. पूरा हाल hi सभी के kah-kahun से गुन्जे लगा....
चर्च:- लो रणजीत छोटी पार्टी तो अभी से hi हमारी बातों से फेड उप होने लगी.
पापा भी हस्सन लगे.
पापा:- हर्ष यार ये भी क्या करें. यहाँ मेला लगा हुआ है. और कोई भी किसी से सही से मिल नहीं पा रहा. इनको आपस में मिलने दो. हम अपना मिलान क्र लेते हाँ.
मा पापा के एक बाज़ो को थामे खुद को पापा से सत्ता क्र बैठी थीं. माँ का चेहरा बोहत चमक रहा था. कितना यकीन था माँ को अपने प्यार पे. वर्ण माँ कह सकती थी.
""रणजीत मैं अब्ब तुम्हारे लायक नहीं रही. मेरी इज़्ज़त मेरा मान सम्मान सबब कुछ मुझसे लूट लिया गया. मेरा वो सबब कुछ तो तुम्हारे लिए था. वो भी कोई मुझसे छे. कर ले गया. अब्ब मैं किश मोहन से तुम्हारा सामना करूँ""
क्या रंग था माँ और पापा के प्यार का. कितना स्टोरंग प्यार था माँ और पापा का.
पापा ने भी माँ से कुछ नहीं कहा. पापा तो ऐसे रियेक्ट कर रहे थे. जैसे माँ से उनकी शादी हो चुकी है और माँ के साथ जो भी बुरा हुआ है. वो शादी के बाद hi हुआ है. और कुछ भी हो जाए वो सबब दुःख, दर्द. तकलीफ मिल कर बांटेंगे.
कितना सच्चा प्यार था माँ और पापा का, जिस्मो की बात hi नहीं थी. माँ और पापा की आत्मा hi प्यार के अटूट बंधन से जुडी यही थी....
दोनों ने hi मिलते हुए बास अपने प्यार का इज़हार किया था. अपनी जुदाई का ज़िक्र किया था. एक दूसरे से दूर हो जाने के दर्द को याद किया था..
पापा ने माँ से माफ़ी मांगी थी. क वो माँ को बचा नै सके और माँ ने कहा था. क रणजीत तुम कुछ जानते भी तो नहीं थे.
मई अपने ग्रुप के साथ ऊपर वाले पोरशन के हाल में जा पोहंचा.
वहां पोहचते hi रानी और पूजा दीदी ने मुझे अपने गले से लगा लिया.. शिखा rupa,shetal और नताशा दीदी, भी हमारे गले लग गई.
अपर्णा और जूही ..priya.shruti.jhanvi के साथ कड़ी थी. अब्ब यहाँ भी ग्रुप बन गए थे. अपर्णा खुद hi हम से आत्ताच हो गई थी. वो कोठे से आने वाली दूसरी लड़कियों से अलग हो कर हमारे साथ hi शामिल हो गई थी. मतलब मेरे लिए एक और का ऑप्शन बन गया था..
हाय मेरी kismat......pata नै अच्छी है. yaaaaaaaaaaaaaa
पूजा दीदी:- मेरा विज्जु आज खुश है ना.
rani:-khush क्यों नै hoga.bethe बैठे इतना सबब जो मिल गया है...
शीतल:- सच में आज विज्जु की लाटरी निकल पड़ी है. कितनी खुशियों एक साथ hi मिल गई हाँ.
नताशा दीदी:- क्यों न मिलती आखिर हमारा भाई है भी इतना क्यूट सा. भगवन ने भी देने में देर नहीं की.
मैं पूजा दीदी को जवाब क्या देता. जवाब तो बाकी तीनो ने hi दे दिया था.
कुछ देर में हम अलग हुए और फिर एक एक करके मेरे दोस्त भी मुझसे मिलने लगे.
पैलेस से बाहर तो सर साडी सेसब hi मिल लिए थे. लेकिन अब सब hi मुझसे स्पेसेल मिल रहे थे. सबब hi मुझे दिल से बधाई दे रहे थे.
कारन और जूही ने भी मुझे गले से लगा कर बधाई दी. यहाँ आने के बाद मैं अब्ब दोनों से सही से मिल रहा था. कारन का ज़ख्म अब्ब कुछ बेहतर था.
कारन मेरे गले लगा तो..
कारन:- विजय भाई बोहत बोहत बधाई हो, आज भगवन ने भी तुम्हारे दर्द क्र ख़तम कर दिया है. खुश रहो मेरे भाई..
जूही भी पुरे दिल से मेरे गले लगी रही. जूही रोने लग गई थी. एक तो यहाँ इतनी साडी खुशियां सबब को hi मिल गई थीं. और दूसरा जूही का अधूरा पत्र ख़तम हो गया था..
जूही:- थैंक यू विजय भाई, हमें यहाँ लाने के लिए. वर्ण हम इतने प्यारे और खूबसूरत माहौल के कैसे देख पाते.
मैंने जूही के माथे को चूम लिया.
कीजै:- जूही तुम भी तो मेरी बहन हो. और देखो सब की hi तरह से तुम्हें भी अपनी ज़िन्दगी की खुशियां मिलनी चाहिए थीं. मैंने तो जितना मुझसे हुआ, वो किया था.
कुछ देर बाद सबब hi सोफ़ोन पर बैठ गए. पूजा दीदी मेरे और प्रिय के सेण्टर में बेथ गई थी. पूजा दीदी प्रिय को चूम रही थी. और प्रिय भी एक बड़ी बहन का प्यार प् कर निहाल हो गई थी. प्रिय का दर्द भी कम् हो शुका था. जो पापा से मिलने से पहले उसके दिल में जाएगा था.. प्रिय अब्ब शांत थी. प्रिय के दर्द का कोई इलाज तो था नहीं किसी क पास. इस लिए वो खुद को संभल गई थी.
ऐसे hi बातों में समय बीता और फिर 1 घंटे बाद डिनर के लिए सबब उठ खड़े हुए...
डिनर के बाद भी 1 घंटे तक सबब hi सिटींग हाल में बैठे.
और फिर माँ और पापा का ख्याल रखते हुए माँ और पापा को एक रूम में भेज दिया गया....
आज माँ की रात थी, रात तो पापा की भी थी. इतने सालों बाद दोनों मिल रहे थे. na-jaane कैसे इतनी देर से दोनों hi खुद को संभाले हुए थे. वर्ण जैसा उनका प्यार था. वो तो दिख hi रहा है. खुद पर काबू रखना आसान नै था..
अब्ब दोनों अंदर रूम में जा कर अपने पास्ट में खो जायेंगे और फिर गुज़रे हुए वक़्त को फिर याद करके खुश भी होंगे और दुखी.
वक़्त ने दोनों को hi बोहत भयंकर ज़ख्म दिए थे. वो ज़ख्म फिरसे हरे हो गए हे. और दोनों hi मिलकर एक दूसरे के ज़ख्मों को भरने की कोशिश करेंगे.
दोनों का मिलान भी होगा. और वही सब्बसे बसेत होगा दोनों के ज़ख्मो को भरने के लिए......
माँ की छूट तो पापा के लिए आज भी टाइट hi थी माँ ने इतने साल तक चुद चुद के भी अपनी छूट को बोहत अच्छे से असंभल कर रखा उहा था. और माँ की छूट का असली मालिक भी आ गया था..
अब्ब से पहले सालों तक्क माँ जबरन चुदती रही थी. पारर आज वो अपने प्रेमी से अपना पूरा पूरा प्यार वसूलते हुए छुड़ेगी.... और फिर यही चुदाई माँ के अंदर के बचे खुचे दर्द को भी उनकी छूट से निकाल बहार करेगी..
माँ की ये रात माँ के लिए और माँ की छूट के लिए एक स्पेशल रात टी...
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