Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 8 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट :40

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सूबा जब मेरी आंख खुली तो पूजा दीदी मेरे ऊपर और रानी मेरे बाज़ो में सिमटी सो रही थीं.

दोनों के अंदर की गर्मी के निकलने से दोनों के hi चेहरे बोहत hi प्यारे लग्ग रहे थे. मैंने रानी और पूजा दीदी को खुद से अलग किया. तो दोनों थोड़ी सी हिली जुली लेकिन इतनी pur-sakoon नींद में थी भला कैसे उठती. मैंने पहले पूजा दीदी के होंठों पर एक किश किया फिर रानी को भी किश कर के मैं बाथरूम में घुस गया. और फ्रेश हो कर अखाड़े की तरफ निकल गया. फिरसे से वही रूटीन शुरू हो गई....... अखाड़े से 3 बजे मैं वीराने की तरफ निकल लिया. सबब वहीँ थे और फिरसे से शुरू हो गई वही रूटीन. पहले जो सीखा था उसकी प्रैक्टिस ki..phir मुझे कुछ नई सिखाया जाने लगा ...... लास्ट के 1 घंटा में गन्स की ट्रेनिंग भी ली. गन्स को चलने में मैं एक्सपर्ट हो hi गया था. ख़ास कर ग26 का पिस्तौल राज सर के कहने के मुताबिक़ सच में hi मेरे लिए फवौरीते हो गया था. ग्लोक को हाथ में लेते hi ऐसा लगता जैसे ये बना hi मेरे लिए है.... ग्लोक से निशाना मेरा सब से अच्छा था दूसरी गन्स की निस्बत. और ग्लोक को उसे करने में मेरी फुर्ती तो ऐसे थी क तीनो देखते hi रह जाते थे. और राज सर मुझे देख कर मुस्कुरा देते थे. जैसे मैं उनकी उम्मीदों पारर सही से पूरा उतर रहा हूँ. और उनके hi जैसे मेरा भी फवौरीते ग्लोक hi था .............



राज सर ने मुझे भी ग्लोक के साथ 100+ बुलेट्स भी दे दी थीं. जो घर में hi पड़ी थीं. कभी इमरजेंसी में ज़रुरत पद सकती थी.

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इंट्रोडक्शन:

नागराज: 63 आगे




नागराज के बारे तो आप जान hi चुके हैं. इन जैसों का डिटेल इंट्रो किस काम का. घटिया लोग भी कभी इंट्रो के लायक होते हैं. बाकी इन के करैक्टर के बारे स्टोरी में सबब कुछ आपके सामने आता hi रहेगा..............





सुमित्रा: आगे :62: नागराज वाइफ




ये भी नागराज की hi तहा कमीनी और घटिया है. जवान होते hi नागराज से छोड़ने लगी और नतीजे में दन्न पैदा हो गया..... छोड़ने में इस का कोई सांई नहीं था.. और उस वक़्त नागराज की इसने बड़ी मदद की. लुच्चे के साथ सुमित्रा मिल कर लुछी बन गई. नागराज के बूढ़े होने पर और नागराज के लुंड की गर्मी कम् होने पर अपने नौकरों से भी चुदती रहती है .. या ये कहना सही रहेगा क छोड़ने क लिए स्पेशल नौकर रखे हुए हैं .... नागराज और दन्न सबब जानते हैं क सुमित्रा कितनी बड़ी चुड़ककर है. पर नागराज और दन्न को is'se कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता...




विमला : आगे:60: नागराज वाइफ




ये भी नागराज की hi धरम पत्नी है. उसके जैसी तो नहीं है लेकिन किसी से कम् भी नहीं है. अभी भी 45 की दिखती है. लेकिन सख्त मज़ाज है. और हर्र किसी को मोहन नहीं लगाती. सुमित्रा की तरह हर किसी के आगे छूट नहीं खोलती. खोलती है लेकिन अपना मैं पसंद बाँदा और लुंड ढून्ढ कर चुदती है .... छोड़ने में सुमित्रा से कम् नहीं. लेकिन अपनी छूट और गांड को सोच समझ कर उसे में लाती है.. अब्ब बॉडी फिगर की बात ज़रूरी नै है.. जो इस उम्र में भी चुदती रहती हैं. उनकी बॉडी तो मस्त और फिगर dhamake-daar तो होगा hi.....




दन्न : आगे :42:




नागराज और सुमित्रा की हवस का निशाँ..... चुटिया कहीं का... हरामी होने का ग़म नहीं दन्न को.... दन्न को इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता..... . हमारी स्टोरी का मैं विलन है...... कैसा है ये सबब तो आप जान hi गए होंगे ........... बाकी इस बारे मेरा बताने का मान नहीं है.....


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नागराज के सुमित्रा और विमला से और कितने बच्चे हैं. हुए उनके बच्चों के कितने बच्चे हैं ........... दन्न के छोड़ने से कितने इस दुन्या में ए वो सबब बाद में सही. अभी इसकी ज़रुरत नहीं है. और इस घटिया खानदान से जुड़े अगर किसी भी पर्सन का स्टोरी में काम शुरू हुआ तो साथ साथ hi बता दिया जायेगा .....

ये है कुछ इंट्रो डिटेल ................. बाकी ज़रुरत पढ़ने पर बाद में..


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मुंबई के साहिल से 20 किलोमीटर दूर समंदर में एक हेलीकाप्टर उड़द रहा था...

समंदर की लहरों से उस हेलीकाप्टर की ऊंचाई 25 फ़ीट थी.....

हेलीकाप्टर से एक रस्सी नीचे समंदर में लटक रही थी .... और उस रस्सी को अपने एक हाथ में पड़के एक लड़की पैरों में स्केटिंग बोर्ड बंधे समंदर की लहरों पर सर्फिंग कर रही थी ....... लड़की की महारत हेलीकाप्टर में बैठे हुए लोग और समंदर के पानी में रहने वाली क्रीचर्स बोहत अच्छे से जानती थी. लड़की को हेलीकाप्टर से रस्सी लटका कर से स्केटिंग करने में कभी कोई परेशानी नहीं होती थी. और हो भी कैसे सकती थी... समंदर से उसे कोई डर नहीं थी ...

और jaan-leva स्टंट करना उस की आदत. लड़की सिर्फ समंदर में स्केटिंग hi नहीं करती थी. और भी कई तरह के स्टंट वो हेलीकाप्टर से लटक रही रस्सी को पकड़ कर से क्रीचर्स को दिखाया करती थी...... 30 मिंट तक लड़की से स्केटिंग करती रही ... हेलीकाप्टर लड़की को कभी स्ट्रैट तो कभी राउंड में घुमा कर से स्केटिंग करवा रहा था....

जब्ब लड़की का मैं से स्केटिंग से भर गया तो फिर उस लड़की ने दोनों हाथों से रस्सी को पकड़ कर एक जम्प हवा में लगाया. और फिर पलटी खाते हुए एक हाथ के ज़रिये फुर्ती से अपने दोनों परिरों में बंधे सकते बॉर्ड्स के लॉक खोल दिए. दोनों सकते नीचे समंदर के पानी में जा गिरे.

स्केट्स के गिरणसे से पहले hi लड़की ने रस्सी को छोड़ कर अपने बदन को घूमते हुए दोनों हाथों को जोड़ कर सर्र के बॉल समंदर के पानी को कूद गई ... लड़की जब्ब तक समंदर के पानी से बहार आती. तब्ब तक हेलीकाप्टर से पहले वाली रस्सी को खेंच कर दो और रस्सियों को नीचे लटका दिया गया... लड़की समंदर की गहराई से सतह पर आई.

उसे पहले से hi पता था क अब्ब उसे क्या करना है. उसने दोनों रस्सियों को पकड़ लिया. लड़की को दोनों रस्सियां पकड़ते देख कर एक आदमी ने पायलट को हेलीकाप्टर ऊपर उठाने का इशारा किया .... हेलीकाप्टर 10 फ़ीट और भी ऊपर उठ गया . और फिर मुंबई के साहिल की तरफ जाने लगा........

लड़की 1 मिंट तक दोनों रस्सियों को पकडे लटकी रही. फिर लड़की खुद को एडजस्ट करते हुए हवा में hi दोनों रस्सियों से लटके स्टंट करने लगी .. लड़की कई तरह के स्टंट में माहिर थी. दोनों रस्सियों के ज़रिये वो हवा में hi गुम्नास्टिक के पोज़ देने लगी.

हेलीकाप्टर अचानक से उड़ता हुआ 10 फ़ीट ऊपर गया. हेलीकाप्टर के ऊपर होते hi दोनों रस्सियों ने एक झटका खाये और फिर लड़की दोनों रस्सियों पर गुम्नास्टिक की मश्क़ करती हुई एक झाकते में नीचे समंदर की तरफ आने लगी .....

ऐसे hi जब्ब तक हेलीकाप्टर मुंबई के साहिल से कुछ आगे एक खाली जगा तक्क पोहचता. तब्ब तक्क लड़की हवा में hi रस्सियों से लटकते हुए अपनी मश्क़ करती रही.

हेलीकाप्टर के अपनी मंज़िल पर पोहचते hi लड़की ने खुद का बैलेंस बनाते हुए दोनों रस्सियों को छोड़ कर एक जम्प लगाए. और 15 फ़ीट नीचे ज़मीन की तरफ आने लगी... पैरों के ज़मीन को छूटे hi लड़की ने एक कल्टी मारी और कुछ फ़ीट लुढ़कती हुई उठ कड़ी हुई ......

हेलीकाप्टर कुछ फासले पर लैंड हो गया ....

दो लड़कियां भागती हुई उस लड़की के पास आई. एक के हाथ में टॉवल था तो दूसरी के हाथ में पानी की बोतल.... लड़की ने पहले पानी की बोतल ले कर उस का ढक्कन खोला और बोतल को अपने चेहरे पारर ला कर पानी गिराने लगी ... बोतल का पानी लड़की के चेहरे पर गिरते hi लड़की का चेहरा चमकने लगा ..

लड़की ने दो घूँट पानी पिया और बोतल उस लड़की को वापिस करदी. दूसरी लड़की से टॉवल ले कर अपने चेहरे को साफ़ किया फिर दूसरी लड़की को टॉवल वापिस दे कर एक चेयर उस के पास ले गई थी. लड़की ने चेयर पर बैठ कर अपने सर्र पीछे टिका कर ऑंखें बंद कर लीं .....

लड़की के आस पास 8 लड़कियां और भी कड़ी हुई थीं और कुछ फासले पर 20 गन ब्रदर सिक्योरिटी गार्ड्स खड़े हुए थे सबब लड़कियां और सिक्योरिटी गार्ड्स उस लड़की की ऑंखें बंद देख कर चैन की सांस ले रहे थे .....

लड़की का चेहरा समंदर के पानी और जिमनास्टिक की मश्क़ की वजा से बोहत hi निखरा निखरा लग रहा था.... वैसे भी इस लड़की के जैसी khub-soorti और कहाँ दहकने को मिलेगी ....... गयमानस्टिक की मास्टर होने की वजा से लड़की का जिस्म ऐसा matnasib(pro राटा) था क पास कड़ी लड़कियां हसरत hi करती रहती थीं.

""ऐ काश हाम्रा भी जिस्म ऐसा होता""

.....पागल ladkiyaan..........us लड़की के जैसे स्टंट तो करके दिखाओ. फिर उस लड़की के जैसी khub-soorat होने की हसरत भी दिल में पाल लेना .....

पर लड़कियां भी बेचारी क्या करें. उस लड़की का बदन था hi ऐसा fit..badan की चमक ऐसी चाँद तारों की रौशनी भी मांड पद जाये... और बदन ऐसा लचकीला क समंदर में रहने वालियां मछलियां भी लड़की के बदन को देख कर शर्मा जाए ..... लड़की का बदन जितना लड़कीला और जिमनास्टिक की वजा से जितना भी नरम था.

लेकिन लड़की के बूब्स की कसावट किसी ठूस चटान की मानिंद थी. ऐसे तन्न कर खड़े रहते थे क देखने वाले अपनी राल टपकने से खुद को रोक नहीं पाते थे...

लड़की को देख कर कम् hi किसी का लुंड खड़ा होता था क्यूंकि जैसे hi उसे इस बात का पता चलता क उसे देख कर किसी के लुंड में सरसराहट भी हुई तो वो लड़की उसका लुंड hi काट देती थी ....

लड़की जितनी जिमनास्टिक और स्टंट्स में माहिर थी .. us'se बढ़ करख़तरनाक थी.. किसी को जान से मारना तो अलग बात है. खुद किसी को चीयर फहद कर देना उस लड़की की आदत थी ... जितनी khub-soorat थी us'se कहीं बढ़ कर khatar-naak थी..

अपने साथ रह रहे गन्स बरदार गार्ड्स की कभी परवा नहीं करती थी. खुद को खुद hi सिक्योर कर लिया करती थी .....फाइटिंग में उस लड़की को कमाल हासिल था .....

लड़की ने आंख खोल कर एक लड़की को देखा तो वो लड़की भागती हुई आई और एक गाउन उस लड़की को दे कर वापिस अपनी जगा चली गई .... लड़की ने गाउन पहन कर सबब लड़कियों की तरफ देखा और फिर गार्ड्स की तरफ देखा ... लड़की के देखने से hi गार्ड्स सबब समझ गए ... 3 गार्ड्स ने पास में कड़ी हुई एक वन में से एक आदमी को बहार निकला. वो आदमी बंधा हुआ था .... उसे ला कर लड़की के पैरों में फ़ेंक दिया गया.

उस बंधे हुए आदमी ने जब्ब लड़की को देखा तो उसकी ऑंखें पहटि की पहटि रह गई थीं . उसे इतनी जल्दी अपनी मौत का यकीन नहीं था... लड़की ने गार्ड्स को एक बार फिर से देखा कुछ बोली नहीं ... गार्ड्स तो जैसे सबब समझते थे... गार्ड्स ने आदमी की बंदिशें खोल दीं ....

आदमी खुद को आज़ाद प् कर डर के मारे थार थार कांपने लगा .... लड़की ने एक बार फिर से एक गार्ड्स की तरफ देखा तो उस गार्ड्स ने अपनी कमर पर बंधा हुआ खंजर उतार कर लड़की के हाथ में दे दिया ... लड़की के हाथ में खंजर देखते hi आदमी माफ़ी मांगने लगा .....




आदमी :- मम मुझे माफ़ करदें फिर कभी महजसे ऐसी गलती नहीं होगी .....



आदमी की बात सुन कर लड़की के होंठों पर एक दरिंदों जैसे स्माइल आ गई.....



लड़की :- हममममममममम माफ़ी और वो भी मुझसे .......



लड़की की स्माइल और फिर बोलने के अंदाज़ से hi न सिर्फ वो आदमी बल्कि जो भी ये सबब देख रहा था .... थार थार कांप रहा था ... लड़की के साथ की लडकियां और गार्ड्स इन सबब के आदि थे लेकिन लड़की की दहशत hi इतनी थे क जब्ब भी लड़की इस रूप में आती थी... वो सबब खुद के डर पर काबू नहीं रख पाते थे.....

कुछ गार्ड्स को छोड़ कर सबब की hi हालत पतली होने लग गई थी......'

आदमी ने जब्ब लड़की की बात और स्माइल देखि तो उसका मूट उसकी पेण्ट में hi निकल गया.

लड़की ने जब देखा क आदमी का पेशाब निकल गाय है. तो




लड़की:- वाह ये तो अच्छा हुआ क तुमने पहले hi मूट दिया. अब्ब मुझे परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी....


ये बोल लड़की ने फिर एक गार्ड को देखा वो लड़की का इशारा समझ गया.

उस गार्ड ने फ़ौरन hi उस आदमी के कपडे अपने चाकू से काटने शूर कर दिए.. कुछ hi देर में वो आदमी उस लड़की के सामने नंगा हो गया ....

आदमी अब्ब बोलने लायक नहीं रहा था.... कभी वो भी इन सबब गार्ड्स के साथ मिल कर ऐसे hi किसी और को उस लड़की के हाथों मरता हुआ देखा करता था .... अब्ब आगे वो लड़की क्या करेगी वो आदमी जानता था. लेकिन वो कुछ भी नहीं कर पा रहा था... उसके पास कोई ऑप्शन hi नहीं .. लड़की से बच निकलना किसी के लिए मुमकिन hi नहीं था ... पूरे इंडिया में कोई ऐसी जगा नहीं थी जहाँ से वो लड़की अपनी शिकार को ढून्ढ न पाए .... आदमी को अपनी मौत दिख चुकी थी ..

लड़की अपने हाथ में मौजूद खंजर से आदमी के लुंड को टटोलने लगी ...... और फिर




लड़की :- क्यों कुछ ज़यादा hi गर्मी छड़ गई थी ... (आदमी के लुंड की तरफ इशारा करती हुई) इसी के बलबूते पर तू किसी के साथ कुछ भी करेगा ... इसी की वजा से hi तूने उस बेचारी लड़की का रपे कर दिया था ... बड़ा गर्व होगा ना तुझे अपने लुंड पर .... क्यों मैं सही कह रही हूँ ना ... तेरे पास है तो क्या तो किसी की भी इज़्ज़त लूट लेगा .... साला कुत्ता कही का .....




बोलते बोलते लड़की की आवाज़ में दरिंदगी बढ़ने लगी. फिर लड़की ने पास कड़ी एक लड़की की तरफ dekha.ladki जल्दी से अपने हाथ में मौजूद ग्लव्स अपनी मम को थमा कर वापिस अपनी जगा कड़ी हो गई .... लड़की ने ग्लव्स पहने और खंजर को उठा कर आदमी के लुंड को दुसरे हाथ से पकड़ लिया ... आदमी ये सबब देखते हुए ऐसे काँप रहा था. जैसे सर्दियों में होने वाली बारिश में कोई बाँदा गलती से बिना कपड़ों के hi भीग गया हो ...

लड़की बड़े hi मज़े से खंजर की नोक से उस आदमी के लुंड को चीरने लगी......

आदमी की चीखों ने एक अजीब सा खौफ सबब के दिलों में जगा दिया था .... सभी को उस आदमी की होने वाली मौत ने हिला दिया था .... लेकिन लड़की को किसी के कांपने से या उस आदमी की चीखों से कोई मतलब नहीं था वो बास अपने काम में लगी रही ... उस आदमी का लुंड चीरता जा रहा था लेकिन आदमी की इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी क खुद को सेफ करने के लिए उस लड़की पर हाथ भी उठा सके ... लड़की से लड़ना या उसके काम में मदाखलत करना भी एक नयी शामत कड़ी कर देता था .....

लड़की ने पहले उस आदमी के लुंड को जगा जगा से चीरा.... फिर उस लड़की ने

आदमी के लुंड को लम्बाई के रुख से चीरना शुरू कर दिया ... लड़की आदमी के लुंड को चीयर कर एक पीेछे को अलग करती फिरसे दुसरे पीेछे को अलग करने के लिए लुंड को चीरने लगती..... कुछ देर में आदमी का लुंड एक नहीं रहा था. उस के लुंड की कई पीेछे नीचे झूल रहे थे. वो आदमी गिर ना जाये इस लिए दो गार्ड्स ने उसे पकड़ा हुआ था ...

नीचे की ज़मीन उस आदमी के लुंड से गिरते हुए खून से रंगने लगी थी ... लेकिन लड़की ने अपना काम अधूरा नहीं छोड़ा....... लड़की को कोई जल्दी नहीं थी वो ऐसा काम बड़े hi आराम से किया कर्त टी थी. उसे इस सबब में बड़ा मज़ा आता था .... इज़्ज़त के लूटेरों का वो ऐसा hi हशर किया करती थी .... कुछ hi देर में आदमी का लुंड मज़ीद चीरने लायक नहीं बचा तो लड़की ने गार्ड्स को देखा तो गार्ड्स ने उस आदमी को साइड ले जा कर शूट कर दिया .... लड़की ने ग्लव्स उतारे और फिरसे कुछ लड़कियों की मदद से खुद को साफ़ किया और चेयर पर बेथ गई...

अब्ब उस के चेहरे पर दरिंदगी नहीं एक बड़ी hi पायरी सी स्माइल थी.. वो सबब लड़कियों को प्यार भरी नज़रों से देखने लगी .... लड़की का मूड चेंज होते hi सबब ने सुख का सांस लिया .........

कुछ hi देर में एक गार्ड्स भागता हुआ आया उसके हाथ में मोबाइल था ... लड़की ने उस गार्ड को देखा तो




गार्ड्स:- मम सर का फोन है ..... गार्ड के मोहन से सर सुनते hi लड़की का मूड फिर से ख़राब हो गया ... मोबाइल ले कर लड़की सर से बोली ..


लड़की :- हाँ किस लिए फोन किया आपने (लड़की रूखे अंदाज़ में बोली)

उधर से:- महक बीटा ऐसे भी कोई बात करता है क्या अपने डैड से?

महक :- ओह्ह्ह्हह्ह डैड hmmmmmmmmmmm चलें ठीक है ........ तो डैड फिर बताएं मुझे कैसे याद किया ... कुछ काम था क्या मुझसे ...

डैड :- महक बीटा अगर काम होगा तब्ब hi तुमसे बात करूँगा क्या ..... क्या मैं अपनी बेटी से बात भी नहीं कर सकता .........


महक :- डैड क्यों नहीं मैं आप की hi तो बेटी हूँ .. आप कैसे नहीं मुझसे बात कर सकते ... आप का पूरा पूरा हक़ है मुझ पर .. (महक कुछ तीखे अंदाज़ में बोली)

डैड :- महक कोई ऐसे भी बात करता है क्या अपने डैड से ... आखिर तुम क्यों मुझसे ऐसी बात करती है .... डैड हूँ मैं तुम्हारा ..... यू स्टुपिड गर्ल


महक :- वो सबब छोड़ें और ये बताएं कॉल क्यों की है आज .. वो भी इतने दिनों बाद .कुछ काम hi होगा वर्ण आप को क्या ज़रुरत है बात करने की.

आपके लिए तो आपके काम hi काफी हैं. उजाड़ते रहिये लोगों को. और खेलते रहें बेबस और मजबूर ो लाचार औरतों और लड़कियों की इज़्ज़तों से ..... मेरे पास आप के लिए न hi कोई टाइम है और न hi दिल में आपसे बात करने का कोई शोक ... आप सबब के सबब एक जैसे हैं .. अगर अप्प सबब को अपनी ज़िन्दगी अपने हिसाब से जीने का शोक है .. तो जियें आप सबब अपनी ज़िन्दगी और मुझे मेरी ज़िन्दगी जीने दें .. वर्ण ऐसा न हो क मैं कुछ गलत करदूँ ....

डैड महक क बातें सुन कर ग़ुस्से में आ गया .. उसे कभी भी महक की बातें हज़म नहीं होती थीं .. लेकिन फिर भी बेटी होने की वह से कभी कभी फोन कर लिया करता था लेकिन जब्ब भी कभी फोन करता ऐसी hi बातें सुनने को मिलती थी ..

डैड :- महक तुम अपनी हद्द तो बोहत पहले hi क्रॉस कर चुकी हो .. लेकिन हर बार मुझसे ऐसी बातें मैट किया करो .. पूरा इंडिया मुझसे डरता है .. समझी तुम पूरा इंडिया दन्न से डरता है .. और तुम दन्न को कुछ समझती hi नहीं हो ..


महक :- ohhhhhhhhhhh तो दन्न को ग़ुस्सा आ गया मेरी बातें सुन कर ... अगर मेरी बातें बर्दाश्त नहीं होती तो छोड़ क्यों नहीं देते ऐसे घटिया काम .. इज़्ज़तों को पामाल करने में बड़ा मज़ा आता है ना शायद इसलिए नहीं छोड़ना चाहते .. जैसे आप हैं वैसे hi सबब लोग और वैसी hi साड़ी घर की औरतें .. घर के सारे मर्द छोड़ने में और औरतें छोड़ने में लगी हुई हैं .. अगर इतनी hi गर्मी है तो निकालते रहें सबब के सबब मुझे किसी से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता .. लेकिन मासूमों को तो छोड़ दिया करो .. जो कुछ नहीं कर सकते उनसे खेल कर खुद को na-jaane क्या से क्या समझ रहे हैं सबब के सबब .. मर दन्न एक दिन ऐसा आएगा जब्ब तुम सबब के दस्से हुए लोगों में से कोई आ कर तुम सबब को उजाड़ कर और बर्बाद करके रख देगा ..

और फिर मैं क्यों इस सबब में पदों .. मेरा आप में से या किसी से भी कोई लेना देना नहीं है ..

न hi आप से और न hi आप के ऐसे घटिया तरीकों से कमाए हुए पैसों से मुझे कोई मतलब है .. मुझे दोबारा कॉल करने की ज़रुरत नहीं है ................................. इतना बोलते hi महक ने मोबाइल को नीचे जोरर से फ़ेंक दिया. मोबाइल के पार्ट्स ज़मीन पर जगा जगा बिखर गए .... महक का ग़ुस्सा देखना लायक था .. उसका बास नहीं चल रहा था .. क उसके सामने फिरसे कोई आये और वो उसे चीरना शुरू करदे .. उसे कभी कभी दन्न की बेटी होने पर बड़ी शर्मिंदगी होने लगती थी .. इसलिए वो कम् hi किसी एक जगा पर टिकती थी ... अलग अलग शहरों और देशों में घूमती रहती थी .. या फिर समंदर से अपने शो पूरे किया करती थी .........................................


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इंट्रोडक्शन

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महक : आगे:19

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अर्ली आगे में hi सबब के लिए महक के दिल में नफरत सी आने लगी थी.. जब्ब घर की औरतों को रोज़ अलग अलग लुंड से चुड़ते देखती थी ... शायद चुआड़ाई नागराज के घर की परम्परा थी ... महक को इस सबब से नफरत थी .. जैसे जैसे बड़ी होती गई .. महक के सामने उसकी माँ और पिता दन्न के करतूत खुलते गए .. फिर महक को जल्द hi पता चल गया क उस घर की कोई औरत हो या मर्द छुड़ाए के इलावा और कोई काम नहीं ......

महक को अपने hi घर वालों से नफरत तब्ब ज़यादा हुई जब्ब महक को सही से पता चला क दन्न और नागराज के इलावा घर के सरे मर्द hi बेबस, मजबूर और लाचार लड़कियों और औरतों की इज़्ज़त को किसी गिरी पड़ी चीज़ की तरह बर्बाद कर दिया करते हैं ... महक की नफरत अपने hi घर वालों से बढ़ने लगी ...

महक की नफरत को देखते हुए महक की माँ और घर की औरतों ने महक को भी खुद के जैसा बनाने की कोशिश शुरू करदी .. तब्ब महक अभी नै नै जवान हुई थी .. महक को जब्ब रीलीज़ हुआ क अब्ब सभी घर वाले उसकी नफरत को देखते हुए उसे भी खुद के जैसा बनाने वाले हैं . तो महक अपनी स्टडी के लिए अब्रॉड चली गई .... वही रह कर स्टडी की और अपने अंदर की नफरत और आग को कम् करने के लिए jaan-leve हथकंडे सीखने लगी ... महक के अंदर की आग ने महक को मुलती टैलेंटेड बना दिया .. बोहत hi कम् उम्र में महक ने हार फील्ड में अपना लोहा मनवा लिया .... जीनियस है लेकिन स्टडी के लिए पागल नहीं .. स्टडी करके महक को कौनसी जॉब करनी है .. अगर स्टडी उसे काबिल बनती है .. तो ये महक के लिए नहीं था .. महक शुरू से hi जीनियस लड़की थी ........ महक ने खुद के बलबूते पर उभर कर सामने आई ... और अपने लिए पैसों का ढेर लिया ... अपने अंदर की आग को शांत करने के लिए ज़रुरत मंडनं की मदद करने लगी ... और घटिया और रेपिस्टों का सर्वनाश करना शुरू कर दिया ... जैसे इस आदमी के साथ वो सबब कर चुकी थी .... ऐसे hi वो कभी किसी रेपिस्ट को माफ़ नहीं किया करती थी ....



क्यों रीडर्स लोग कैसी लगी विजय के लिए विज्जी (स्टोरी की हीरोइन)

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थैंक्स डिअर"

जल्द hi लेकिन अभी विजय इतना भी स्ट्रांग नहीं हुआ क रेखा बाई के कोठे पर जा पोहंचे ...

वहां सिर्फ रेखा बाई की hi नहीं हकूमत है...

दन्न ने भी तो श्वेता को वहां से भाग निकलने से रोकने के लिए उच्च तो किया hi गए..............

सबब आसान नहीं है........... विजय के लीये अपनी फॅमिली को उस दलदल से निकलना .... किसी पहाड़ को खोदने के बराबर हैं...

और इस अब्ब के लिए विजय को पॉवरफुलहि नहीं अपने साथ कुछ और लोगों किओ ज़रुरत पड़ेगी...................

विजय पहले अपने लिए एक गैंग बनाएगा............ उसके बाद अपने माँ और बहनो की सुरक्षा के लिए बंदोबस्त करेगा.........

तब hi वो अपनी माँ और बहनो को निकलने के लिए जायेगा ............

और अभी बग्गा का भी पन्गा रहता है ........... जो श्वेता के लिए जेल में चला गया है ....

अब्ब बग्गा हमेशा तो जेल में रहगा नहीं .... कुछ तो करेगा hi वो ...........
 
थैंक्सक्सक्सक्सक्सक्स bosssssssssssss:

कहानी में आगे बोहत से मोड़ आने वाले हैं. श्वेता का फ्लैशबैक अभी बोहत लेट है.. जब विजय उन सबब को आज़ाद करवा कर लाएगा.. उसके बाद hi सबब

कुछ खुल कर सामने आएगा... इसलिए फ्लैशबैक की टेंशन न लें..........

और पूजा का ग़ुस्सा जो विजय के लिए है ... वो विजय के लिए नहीं . बास किसी पर तो उतरना था . तो विजय पर उतार दिया ....

नेक्स्ट अपडेट में आपको खुद hi पता चल जायेगा
 
अपडेट ::: 41

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पूजा दीदी और रानी का पानी निकलने के 10 दिन बाद

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3 बजे मैं अपने दूसरे ट्रेनिंग सेण्टर जब्ब पोहंचा तो

राज सर:- विजय बीटा आज तुम्हारा पहला टेस्ट है .. तुमने आज तक्क जो भी सीखा है .. तुम उसमे किश हद्द तक त्रिनेड हुए हो मैं ये jan'na चाहता हूँ .. इस लिए आज तुम (सुनील आदित्य और अभय को देखते हुए) इन तीनो के साथ जाओ .. तीनो तुमको रास्ते में सबब बता देंगे ... और हाँ घर फोन करके बता दो क आज तुम कुछ लेट भी हो सकते हो ...

विअज्य :- जी राज सर....

is'se ज़ायदा मैंने राज सर से नै पूछा और पूजा दीदी को कॉल मिला दी..

कॉल अटेंड होते hi ..

पूजा दीदी:- हाँ विज्जु आज इस टाइम कैसे फोन किया है सबब ठीक तो है ना ..

विजय :- हाँ दीदी सबब ठीक है .. आज राज सर ने मुझे एक काम दिया है.

इस लिए लेट हो जाओगे .. ये बताने के लिए hi फोन किया है ...

पूजा दीदी:- ठीक है तू फ्री हो कर आ जा फिर बात करते हैं ..

विजय :- ok दीदी bye ..

पूजा दीदी:- ok bye

कॉल करने के बाद मैंने राज सर की तरफ देखा तो

राज सर:- ok विजय ..... दो योर जॉब ... अब्ब जाओ और पास हो कर आओ ... कल यही मिलते हैं .. इतना बोलते hi राज सर मुद कर जाने लगे और मेरा रुख तीनो की तरफ हो गया ...

सुनील :- क्यों विजय आज तुम तैयार हो टेस्ट के लिए ....

विजय :- क्यों नहीं सुनील भाई ... मैंने तो कब्ब से इस सबब के लिए रेडी हो रहा हूँ. अब्ब खुद को aaz-maane का टाइम आया है . तो फिर पीछे क्या हटना ..

आदित्य :- विजय चलो रास्ते में बात करते हैं ...

अभय मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था .. तो सुनील और आदित्य के होंठों पर भी धीमे धीमे मुस्कान थी .. अब्ब मुझे मेरे टेस्ट का तो नहीं पता था लेकिन मुझे अपने अंदर से कुछ अलग सी फीलिंग्स आ रही थीं. जैसे कुछ स्पेशल है आज मेरे लिए ....

जिस टाउन में हम रहते हैं वो दिल्ली सिटी के एन्ड पर hi था .. हम जीप में बैठ कर सिटी से बहार की तरफ जाने लगे .. 20 मिंट बाद जीव एक जंगल की तरफ मुद गई .... अभय गाडी ड्राइव कर रहा था उसने जीप एक जाग रोक दी तो फिर

आदित्य :- विजय हम तुम्हें यहाँ जिस काम के लिए ले कर आये हैं .. अब्ब उस पर डिटेल में बात कर लें ...

विजय :- जी आदि भाई..

सुनील :- विजय यहाँ हमारी इन्फो के मुताबिक़ कुछ टेररिस्ट छुपे हुए हैं और हमें उनको यही पारर hi मार गिरना है .. कहीं ऐसा न हो क वो बच जाएँ और सिटी में जा कर कोई आतंक ना फैलाना शुरू करदें .. अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली शहर में खून की नदियां बह जाएँगी ......... हम तो ऐसे काम करते hi रहते हैं .. लेकिन तुम्हारे लिए भी ये एक नाइक काम भी देश भगति भी है और तुम्हारा टेस्ट भी हो जायेगा ... क तुम किस हद्द तक्क त्रिनेड हुए हो ... हम सबब तुमको फॉलो करेंगे . मतलब तुम सब्बसे आगे रहोगे ...

एक बात और हम जिन लोगों को मारने जा रहे हैं ... वो किसी भी तरह से दया के लायक नहीं नहीं . उनके चेहरे देख कर अगर तुमको ज़रा सी भी दया आ गई .. यहाँ 1 सेकंड भी बोहत ज़यादा होता है .. 1 सेकंड से पहले hi तुम मारे जाओगे. क्यंकि टेररिस्ट कभी किसी पर रेहम नहीं किया करते ...उनका तो काम hi लोगों का खून बहाना है और फिर जब्ब वो खुद खतरे में आ जाएने ... तो कैसे भी करके अपनी राह में आने वालों को ज़िंदा नहीं छोड़ते ...

इस लिए तुम्हे यहाँ जो भी नज़र ए. बिला सोचे hi उनको शूट कर देना वर्ण उनमे कोई भी तुम्हे सोचने का मौका दिए बगैर hi शूट करदेगा .... मेरी साड़ी बात तुम्हारी समझ में आ रही है या नहीं ............

सुनील भाई की साड़ी बातें सुन कर एक बार तो मैं हैरान और परेशान हो गया था.. में अंदर से एक्ससिटेड भी बोहत हो रहा था .. लेकिन एक बार एक्ससिटेड हो कर गोली खा चूका था .. इस लिए खुद को शांत रखने की कोशिश में भी लगा हुआ था ....

विजय :- जी सुनील भाई मैं सबब समझ रहा हूँ ... जो भी आपने उन टेररिस्ट के बारे में बताया ... मैं कोई भी गलती नहीं करूँगा .. और वैसे भी किसी भी टेररिस्ट को ज़िंदा रहने का कोई हक़ भी नहीं है .. हमारे देश की शान्ति को भांग करने आये हैं .मासूमो को मारने ए हैं.. तो फिर मैं तो बड़े मज़े से सबब को hi ऊपर से भी ऊपर तक्क पोहंचा दूंगा ....

आदित्य :- गुड यही सबब तुम्हारे अंदर मैं में भी हर्र वक़्त रहना चाहिए .. टेररिस्ट को जहाँ भी देखो "किल हिम"

फिर सुनील ने मुझे मेरा फवौरीते ग:26 पिस्तौल दिया और एक बेल्ट भी दी जिसमे कुछ मैगज़ीन लगे हुए थे. एक खंजर भी था जो उसी बेल्ट में अटका हुआ था ....

सुनील :- विजय बोहत एक्ससिटेड लग्ग रहे हो लेकिन यहाँ एक्ससिटेमेंट नहीं हाज़िर दमाग़ी चलेगी.. वो सबब टेररिस्ट छुपे हुए होंगे सावधान रहना और किसी को कोई भी मौका दिए बगैर दिए बगैर शूट कर देना . वर्ण हमें तुम्हारी लाश hi यहाँ से लजानी पड़ेगी ....

फिर सुनील ने मुझे bullet-proof जैकेट पहनने को दी. मैंने अच्छे से उसे सीने पर बाँध लिया ......

आदित्य :- विजय ज़रूरी नहीं है क तुमने bullet-proof जैकेट पहनी हुई है. तो तुम बच जाओगे .. टेरोरिस्ट लोगों के पास कई तरह के हथियार होते हैं .. रोज़ रोज़ कोई न कोई स्पेशल गन्स मार्किट में आती रहती है . उन टेररिस्ट लोगों के पास कोई ऐसी गन भी हो सकती है जो इस bullet-proof जैकेट को चीरते हुए भी तुम्हारी जान ले सकती है . इस लिए खुद को हर तरह से बचाये रखना ... और bullet-proof जैकेट के इलावा तुम्हारा जो भी शरीर बचा हुआ है . वहां पर भी तुमको टारगेट किया जा सकता है .... इस लिए हर तरह से सावधान रहना ...

सुनील :- विजय तुम तैयार हो आगे बढ़ने के लिए :

विजय :- जी सुनील भाई . मैं तैयार हूँ .

मेरे अंदर से एक्ससिटेमेंट उबाल उबाल कर बहार आने चाहती थीं लेकिन इसी एक्ससिटेमेंट की वजा से मैं एक गोली खा चूका था. इसलिए मैं खुद पर काबू रखते हुए .. प्रेजेंट में hi रहना चाहता था... और इस बार मैं कोई भी गलती नहीं करना चाहता था ............

फिर सुनील आदित्य और अभय के कहने पर मैं सबब से आगे बढ़ने लगा वो तीनो भी मेरे पीछे पीछे आने लगे ..

मैंने अपने ग:26 पिस्तौल को हाथ में थमा हुआ था . और बोहत hi करेफुल्ली स्टेप बी स्टेप आगे बढ़ रहा था. मेरे खून की रफ़्तार बढ़ने लगी थी. लेकिन मैं लम्बी लम्बी सांस ले कर खुद को हर्र हाल में एक्टिव रखने की कोशिश में लगा हुआ था.

ये एक बोहत hi खतरनाक मिशन था. इस बार मेरा सामना टेररिस्ट लोगों से था.

और टेररिस्ट स्पेशल त्रिनेड होते हैं और उनको अपनी जान की भी परवा नहीं होती . अपने सामने आने वालों को मार देना उन सबब के लिए किसी कीड़े मकोड़े को मारने के बराबर था . उनके लिए उनकी जान अगर कीमती नहीं थी . लेकिन मेरे लिए मेरी जान मुझसे भी ज़यादा किसी और के लिए भी थी .

मैं खुद को किसी किसम की यादों में उलझना चाहता था . इस लिए सबब भूल कर अपने मिशन पर फोकस करते हुए मैं आगे बढ़ने लगे... जंगल में जगा जगा दरख्त थे और उनके मोटे मोटे तनय हम सबब को छुपाने के लिए काबी the...hum तीनो एक एक कर दर्खों की ारः लेते हुए आगे बढ़ रहे थे ..

सबब ने hi मुझे आगे किया हुआ था. और मेरे लिए भी ये बोहत बड़ी बात थी.

आज मेरा टेस्ट भी था . और खुद को man-waane का एक चांस भी था. इसलिए मेरा फोकस पूरा का पूरा टेररिस्ट की मूवमेंट को फंड करने पर लगा हुआ tha...aise hi हम एक दरख्त से दुसरे फिर दुसरे से तीसरे दरख्त की ारः लेते हुए आगे बढ़ते गए . हमें 10 मिंट हो चुके थे लेकिन अभी तक मुझे कोई भी नहीं दिखा था..

ऐसे hi हम दरख्तों की ारः लेते हुए आगे बढ़ने लगे. हमारे क़दमों की आवाज़ नहीं आ रही तह. साले टेररिस्ट लोगों के कान बोहत hi तेज़ होते हैं. कही ऐसा न हो क उनको शूट करे की बजाये हम मारे जाएँ. 5 मिंट और आगे बढ़ने पर मुझे एक टेररिस्ट नज़र आया वो एक जाग बैठा अपनी गन की सफाई कर रहा था.

हम सब्बने पहले से hi अपने हथियारों पर सिलनेकेर लगाए हुए . गन शूट की आवाज़ से बाकी के सारे टेररिस्ट सावधान न हो जाएँ..... मैंने अपने ग्लोक पिस्तौल से उस टेररिस्ट का निशाना लिया और 3 फायर एक साथ hi कर दिए ......

सीलेंसर की वजा से हलकी सी टिक टिक टिक की आवाज़ आई और फिर तीनो hi गोलियां उस टेररिस्ट के सीने में उतर गेन. गोलियां लगते hi उसे चीखने का मौका नहीं मिला और वो पलट कर मोहन के बॉल ज़मीन पर गिर गया .... एक मारा गया था ...

मैंने एक बार फिरसे सामने उस मरने वाले टेरोरिस्ट के आस पास देखा कोई नहीं दिखा तो मैंने पीछे मुद कर सुनील आदित्य और अभय की तरफ देखा तो मुझे देख कर thums-up का इशारा देने लगे. मेने भी मुस्कुरा कर उनको ok का इशारा दिया और फिर आगे बढ़ गए ............ अब्ब एक टेररिस्ट मारा गया था . तो हमारे लिए खतरा भी बढ़ गया था. म्ररने वाले के और भी साथी कहीं आस पास hi हो सकते थे . अब्ब मेरे लिए उन सबब से खुद को सेफ भी रखना था और उनको मौत के घात भी उतारना था....

मैं अब्ब पहले से भी ज़यादा सावधान हो कर आगे बढ़ने लगा. क्यूंकि खतरा अब्ब सर्र पर आ चूका था..... मैंने उस म्ररने वाले आदमी को क्रॉस किया . आस पास नज़र दौड़ाई लेकिन कोई नहीं दिखा . हर तरफ जंगली दरख्त hi दरख्त थे. कुछ फासले कुछ चाटने नज़र आने लगीं. कहीं वो सबब उनके पीछे तो नहीं छुपे हुए .

मैंने एक दरख्त की ारः लेते हुए सुनील आदित्य और अभय को देखा और फिर उन तीनो का धयान सामने दिख रही चटानों की तरफ मोड़ दिया .. वो भी मेरे इशारे को समझ गए ... और फिर मुझे खुद hi कोई फैसला लेने का बोल दिया .

ये मेरा टेस्ट था . ये मेरा मिशन था .

इस में जो भी करना था मुझे hi करना था . अगर मुझे कोई परेशानी हुई तो वो मेरी मदद के लिए तो थे hi ... कुछ देर मैंने सोचा क्या करना चाहिए .. डायरेक्ट खुद को खतरे में नहीं दाल सकता था . इसलिए कुछ सोचना भी ज़रूरी था . और लड़ने के इलावा खुद के पास कोई प्लान भी होना चाहिए था. और bar-waqt बलदती सिचुएशन में मुझे सही से फैसला लेने की काबिलयत भी अपने अंदर जगानी थी .. मैं भी ये सबब समझ रहा था .. आज मेरा पूरा पूरा फोकस मेरे मिशन पारर था .. और मैं कोई गलती न कर बेटों ये सबब भी मेरे मंद में था ... क्यूंकि मेरे लिए लाइफ के किसी भी मोड़ पारर गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी ..... अभी तो मुझे एक बोहत hi बड़ी जुंग लड़नी थी. और मैं यहाँ ठुस्स्सस्स होने नहीं आया था ..

मैंने सोच लिया क मुझे उस चटान के दूरी तरफ घूम कर और खुद को सेफ रखते हुए जाना होगा .... कुछ मिंट लगने वाले थे मुझे उन टेररिस्ट लोगों के अड्डे तक्क पोहचने में.

कही से कोई भी गोली चल सकती थी. और मेरा काम तमाम कर सकती thi.is लिए मैं न सिर्फ सामने बल्कि ऊपर दरख्तों पर भी धयान दे रहा था. कहीं कोई टेररिस्ट ऊपर न छुपा हुआ हो ... कुछ देर चलने के बाद मैं घूमता हुआ चट्टान के दूसरी तरफ आ गया ... यहाँ से चट्टान के पास मौजूद लोगों को देखा जा सकता था .. और फिर मैंने जो देखा तो

वहां 5 टेररिस्ट और भी थे . मैं नीचे लेट गया और पहले खुद की साँसों पर पूरा पूरा कण्ट्रोल हासिल किया . जल्द hi मैं रिलैक्स हो गया वर्ण मेरी एक्ससिटेमेंट बोहत hi बढ़ने लग जाती थी. जो क मेरे लिए khatar-naak थी ... मुझे हर्र हाल में होश में रहना था . वर्ण एक गलती और मेरा काम तमाम .... सबब के सबब टेररिस्ट के पास लेटेस्ट और भयंकर हथियार थे. पास में कुछ बॉक्सेस भी पड़े हुए .. यकीनन उन बॉक्सेस में बॉस वगैरा hi होंगे. मैंने लेट कर पहले अपने आस पास और पीछे देखा . सबब ठीक था . मैंने अपने ग्लोक पिस्तौल का मैगज़ीन चेंज किया .पहले वाले मैगज़ीन में कुछ गोलियां कम् जो गई थी.. . और अभी मुझे इमरजेंसी की ज़रुरत पड़ सकती थी .. इस लिए मैंने एक मैगज़ीन को बेल्ट से निकल कर पास में hi रख लिया .. फिरसे लोड करने में मुझे टाइम न लगे ....

मैंने ग्लोक पिस्तौल पर अपनी ग्रिफ्ट मज़बूत की और उन 5ंचो टेररिस्ट की तरफ कर पहले अपनी सांस दुरस्त की और फिर देरर न करते हुए पूरा का पूरा ग्लोक मैगज़ीन उन पांचो पारर खाली कर दिया. साड़ी गोलियां उन पांचो को लग गईं.

लेकिन फिर भी मैंने जल्दी से दूर मैगज़ीन लोड किया और दोबारा से उन टेररिस्ट की तरफ तान दिया... लेकिन वो सबब लम्बे लेट चुके थे....

मैं कोई भी चांस नहीं लेना चाहता था... सीलेंसर की वजा से गोलियों के चलने से ज़यादा आवाज़ तो नहीं हुई लेकिन फिर भी कोई और भी टेररिस्ट आस पास हो सकता था. मुझे कोई नहीं दिखा तो मैंने फिरसे आस पास देखा. फिर पीछे मुद कर देखा. मुझे कोई नहीं दिखा. मैं सोचने लगा अब्ब मुझे क्या करना चाहिए ....

मैंने फिर सोचा मुझे कुछ मिंट और वेट करना चाहिए ... ये जंगल है और कहीं से भी कोई गोली आ कर मेरा काम कर सकती थी ... मेरा धयान हर्र तरफ था ... जब्ब मज़ीद 5 मिंट गुज़रे तो मैं उठ खड़ा हुआ लेकिन मेरा धयान फिर भी किसी अनदेखी गोली की तरफ hi था .... ऐसा न हो क मैं किसी की गोली का शिकार हो जाऊं..........

मैं चलता हुआ उन 5ंचो टेररिस्ट के पास गया. वो सबब hi मर्डर कहके थे .. या मरने वाले थे. क्यूंकि उनमे से कोई भी हिल जल नहीं रहा था ... मैं मज़ीद कुछ और करता क अचानक से



tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad



की आवाज़ के साथ राइफल का पूरा मैगज़ीन hi फायर हुआ और राइफल की चलने वाली गोलियों से जंगल का पुरसकून इलाका देहल उठा ....




राइफल की साड़ी की साड़ी गोलियां मुझ पारर hi चलाई गई थीं .... लेकिन मेरे पीछे से मुझपर चलाई गई थीं ... लेकिन मेरे पीछे तो कोई था नहीं फिर किश ने चलाई थीं गोलियां



एक हिसाब से मैंने अपना मिशन पूरा कर लिया था लेकिन ..........

कुछ गोलियां मेरी बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी... तो कुछ मेरे पिछवाड़े में और कुछ मेरी टांगों में लगी थीं ....

अब्ब बुलेटप्रूफ जैकेट की वजा से लगने वाली गलियां मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाती. लेकिन जहाँ bullet-proof जैकेट नहीं थी वहां लगने वाली गोलियों से मैं खुद को कैसे बचा सकता था ... मेरे चूतड़ों और परिरून में 8 के करीब गोलियां लग चुकी थीं.

मैंने पीछे मुद कर देखा तो मैं हैरान रह गया क्यूंकि

अभय अपने हाथ में राइफल लिए खली हो चूका मैगज़ीन उतार कर नया मैगज़ीन लोड कर रहा था...... कुछ hi सेकंड में उसने फिरसे राइफल का रुख मेरे चेहरे की तरफ कर दिया ..... उसके होंठों पर मुस्कान थी. और



अभय :- वाह वाह क्या बात है. विजय तुमने सभी टेररिस्ट को मार दिया. लेकिन अब्ब खुद को कैसे मेरे हारहों म्ररने से बचाओगे .... (मैंने अपने पिस्तौल वाले हाथ को हरकत देने की कोशिश की) न न विजय गलती से भी अपने हाथ को हिलना भी मैट. वर्ण इस बार साड़ी की साड़ी गोलियां तुम्हारे सर्र में उतार दूंगा. बड़ी ट्रेनिंग ले रहे हो ना तुम... क्या फायदा ऐसी ट्रेनिंग का जो आज तुमको मेरे हाथों मरने से भी न बचा सके .....



ितं अबोलते hi अभय ने फिर से मेरे चेहरे का निशाना ले कर गोलियां चलनी शुरू कर दीं ....

लेकिन इतनी गोलियां लगने का बाद भी मैं ऐसे hi तो नहीं अभय के हाथों मर्डर सकता था. मेरा पूरा फोकस अभय की ऊँगली पर hi था, जैसे hi अभय ने ट्रिगर पर अपनी ऊँगली का दबाओ बढ़ाया तो मैं एक झटके में नीचे गिरा ... अभय की राइफल से चलने वाली गोलियां मेरे ऊपर से गुजरने लगीं . लेकिन अब्ब मैं भी अभय को टाइम नहीं देने वाला था. पता नहीं मुझे लगने वाली गोलियों ने मुझे कितना घायल किया था. लेकिन अभी ये सबब सोचने का टाइम नहीं था .... मैंने भी पूरा का पूरा ग्लोक पिस्तौल का मैगज़ीन अभय पर खली कर दिया.... अभय चीखता हुआ नीचे गिर पड़ा. मैं खुद की साँसों पर काबू पाने की कोशिश में लग गया ....

अब्ब मेरा धयान मुझे लगने वाली गोलियां की तरफ जाने लगा .....




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मैंने तो पहले hi कह दिया था क आने वाली अपडेट में बड़ा hi ज़बरदस्त किसम का धमाका होगा..

अब्ब विज्जु के पिछवाड़े का क्या बने gaaaaaaaaaaaaaaaa :फ्लमेट्रोवेर:

कुछ महीने तो उल्टा ले कर hi सोयेगा ..........

मैंने यहाँ भी कुछ ऐसा hi सन दिया जो आज तक्क स्फोरम पे मुझे नहीं मिला ................

कुछ भी डिफरेंट करने का मज़ा hi अलग होता है .............

:firing::firing::firing:
 
वो हो हूँगी hi......... और वैसे भी इंसान बचपन से जिसे देखता है ... और जिससे ज़यादा प्यार मिलता है.

वही उस्ले लिए सबब से ख़ास होता है ........... इस लिए पूजा रानी शिखा और रूपा ........ उधर से विअज्य की माँ प्रिय कजहांवी और षुरूति के भी विजय के लिए सबब से बढ़ कर हैं ...

लेकिन घर वालों से बहार भी तो मिल जाती हैं ..... और बहार वालियों में कोई एक तो स्पेसेल बनती hi है.....

और वैसे भी विजय को na-jaane कितना टाइम लग जाए दन्न से लड़ने में ..............

तो बहार महक जैसे लड़की hi विजय के काम आएगी ......
 
अपडेट ::: 42

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अब्ब्ब्ब टककककक

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लेकिन इतनी गोलियां लगने का बाद भी मैं ऐसे hi तो नहीं अभय के हाथों मर्डर सकता था. मेरा पूरा फोकस अभय की ऊँगली पर hi था, जैसे hi अभय ने ट्रिगर पर अपनी ऊँगली का दबाओ बढ़ाया तो मैं एक झटके में नीचे गिरा ... अभय की राइफल से चलने वाली गोलियां मेरे ऊपर से गुजरने लगीं . लेकिन अब्ब मैं भी अभय को टाइम नहीं देने वाला था. पता नहीं मुझे लगने वाली गोलियों ने मुझे कितना घायल किया था. लेकिन अभी ये सबब सोचने का टाइम नहीं था .... मैंने भी पूरा का पूरा ग्लोक पिस्तौल का मैगज़ीन अभय पर खली कर दिया.... अभय चीखता हुआ नीचे गिर पड़ा. मैं खुद की साँसों पर काबू पाने की कोशिश में लग गया ....

अब्ब मेरा धयान मुझे लगने वाली गोलियां की तरफ जाने लगा .....


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अपडेट ::: 42


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अब्ब्ब ाजेईई

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अब्ब मेरा धयान मुझे लगने वाली गोलियां की तरफ जाने लगा

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मुझे हैरत होने लगी क जब्ब मुझे एक गोली लगी थी. तू मेरी चीख तो निकली hi थी. कुछ मिनटों बाद hi सही लेकिन बेहोश ज़रूर हो गया था..

लेकिन इस बार इतनी गोलियां लगने के बाद भी मुझे गोली लगने जैसा दर्द क्यों नहीं फील हो रहा था ... मैं नीचे लेते लेते hi (जहाँ जहाँ गोलियां लगने का एहसास हुआ था) अपने ज़ख्मो को टटोलने लगा .

लेकिन हैरत की बात थी क मुझे किसी किसम का कोई भी ज़ख्म या दर्द का एहसास तक्क नहीं हो पा रहा था ... ऐसा क्यों हुआ मेरे साथ मुझे कुछ समझ नहीं आई तो मैंने अभय की तरफ देखा ..



ohhhhhhhhhhhhhhh terrrrrrrrrrrrrrrrrrriiiiiiiiiiiiiiiii

ये सबब क्या है ...........................




अभय उठ कर खड़ा था और अभय के साथ आदित्य और सुनील भी खड़े थे. और वो तीनो मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे . अब्ब जब्ब मुझे कोई ज़ख़्म या दर्द नहीं था तो मैं भी उठ खड़ा हुआ... और चल कर उनके पास जाने लगा.

जब्ब मैं उसके पास पोंछा तो मेरा चेहरा मारे हैरत के बड़ा अजीब सा दिखने लगा था ..... मुझे देख वो तीनो हसने लग गए ...... कुछ देर बाद

तीनो ने hi मुझे गले लगा लिया और बधाई देने लगे...



सुनील :- इस टेस्ट में तुम्हे तीन मिशन मिले थे. दो में तो तुम पास हुए लेकिन एक में फ़ैल हो गए .....

विजय :- मतलब मैं कुछ समझा नहीं? सुनील भाई .. और मुझे गोलियां भी तो लगी थीं. लेकिन मुझे कुछ हुआ क्यों नहीं.....



सुनील :- वो भी बता देंगे.... आज के मिशन में उसे होने वाली सभी बुलेट्स नक़ली थीं. पहले जीप के पास चलते हैं फिर आगे की बात का तुम्हें पता चलेगा .......

तभी मुझे कुछ फासले पर वही टेररिस्ट दिखे. वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे.



उनमे से एक बोलै:- वेल दोने यंग मन. बोहत अच्छे तुमने तो हमें लड़ने का मौका दिए बगैर hi चित कर दिया. हम तो खुद को बड़ा तीस मार खान समझते थे.

हम सबब यही समझ रहे थे. क आज तुम्हारा हुलिया hi बिगाड़ देंगे. लेकिन तुमने तो हमारी hi बंद बजा दी.

उस बन्दे की बात सुन कर सबब hi हंसने लगे.

फिर सबब मिल कर जीप की तरफ चल पड़े.

जब्ब हम जीप के पास पोहंचे तो राज सर के साथ आज isn-ranjeet भी खड़े थे..

सुनील और आदित्य ने जो भी हुआ सबब राज सर को बता दिया ....

जैसे hi बात पूरी हुई राज सर ने मुझे गले लगा लिया ... और फिर ins-ranjeet ने भी मुझे गले से लगाया. रणजीत के गले मिलते hi मुझे बड़ा अच्छा लगा. आज पहली बार मैं उनके गले मिल रहा था ... मुझे अंदाज़ा तो था क ये सबब ins-ranjeet के hi कहने पर हो रहा है. लेकिन मैंने कभी भी पहलवान जी या राज सर से नहीं पूछा ........

कुछ देर बाद ins-ranjeet मुझसे अलग हुए तो




राज सर:- सुनील ने तुम्हे बता hi दिया होगा क आज का तुम्हारा टेस्ट तीन मिशन पर बेस्ड था ... दो में तुम सक्सेस्फुल रहे और 1 में फ़ैल हो गए थे . अब्ब तुम मुझे बताओ क तुम किश मिशन में फ़ैल हुए ....



सबब मेरी hi तरफ देख रहे थे. मुझे अब्ब इतनी भी समझ नहीं थी क मैं राज सर की बात का मतलब सही से समझ सकता. लेकिन फिर भी जो मुझे लगा वो मैं राज सर को बताने लगा...



विजय :- राज सर आज जो भी मेरा टेस्ट हुआ या मुझे जो भी मिशन मिला है. उसमे मैंने अपने हिसाब से हर एक बात पर पूरा पूरा धयान दिया है. आगे भी और पीछे भी. ऊपर दरख्तों तक पर से मेरा धयान नहीं हटा ... आखिर वक़्त तक मेरा हर तरफ धयान था ... लेकिन फिर जो कुछ अभय ने किया वो मैं समझ नहीं पाया था .... टेररिस्ट को मारने के मिशन में तो मैं कामियाब हो hi गया था.

और आपके हिसाब से मैं दुसरे मिशन में भी सक्सेसफुल रहा....


तो जो मुझे लगता है वो ये है क अभय के मुझपर अटैक के बाद जब्ब दूसरी बार अभय मुझपर हमला करने वाला था . तो मैंने उसी सिचुएशन में खुद को सेफ रखते हुए अभय को शूट कर दिया .... मुझे लगता है क यही मेरा दूसरा मिशन था जिस में मैं सुसेसफ़ुल रहा हूँ .. क्यूंकि आखरी लम्हे में भी मैंने खुद का फोकस नहीं टूटने दिया और दूसरी बार खुद को अभय से सेफ रखते हुए अभय को शूट कर दिया............... क्यूंकि मैं यहाँ म्ररने नहीं आया था ... वैसे एक बार तो मैं में आया क अभय से पूछों क उसने मुझे शूट क्यों किया. लेकिन वक़्त की कमी की वजा से मुझे अभय को फूरी hi मार्र्ण पड़ा... ये था मेरा दूसरा मिशन..

लेकिन जिस टेस्ट में मैं फ़ैल हुआ हूँ उस बारे मैं सही से नहीं जानता .....




मेरी बातें सुन कर कुछ तो हैरान हुए और कुछ बोहत ज़यादा खुश हुए ..

राज सर ins-ranjeet सुनील आदित्य और अभय मेरी बातों से बोहत खुश हुए ...

तो जो टेरोरिस्ट बन्न कर मेरे लिए टारगेट बने थे . वो सबब बड़े हैरान हुए ....



आईएनएस रणजीत:- वेल दोने विजय बीटा जो बात अभी हमने नहीं की तुमने उसे भी अच्छे से समझ लिया . यही चीज़ तुम्हें आगे बोहत काम आएगी .... तुमने जिस तरह से आज के टेस्ट को पास किया है . वो बोहत hi बढ़िया था. हम सबब तुमसे बोहत खुश हैं.

ज़रूरी नहीं था क तुम इस टेस्ट में पास hi होते .. ये कोई आम टेस्ट नहीं था...

इस सबब में रियल से हट कर कुछ नहीं नहीं था ... सिर्फ बुलेट्स को छोड़ कर जो क नक़ली थीं. बाकी जब्ब तुम्हारा तेस्सोरिस्ट बने लोगों से डायरेक्ट आमना सामना होता तो तब्ब पता चलता क तुम इस टेस्ट को कैसे पार करते हो .. लेकिन किसी से फाइट का चांस hi नहीं आने दिया तुमने ....


आज तुमने जो सबब से बेस्ट परफॉरमेंस दी है . वो ये है क तुमने किसी को भी कोई भी चांस दिए बिना hi अपना टेस्ट पूरा कर लिया ... और दूसरी बात जो तुमने अपने दुसरे मिशन को जस्टिफाई किया ... वो तुम्हारे पहले मिशन से भी बढ़कर है...

किसी भी चीज़ को जजमेंट करना और सही से समझ लेना hi बोहत बड़ी बात होती है ......

और तुमने आखरी लम्हे में जिस तरह से अभय को चीट किया ... यही चीज़ तुम्हारे लिए हमेशा kaar-aamd रहेगी... किसी भी जुंग या लड़ाई में यही तो एक चीज़ होती है. जो तुम्हें कभी भी हारने और म्ररने नहीं दे सकती ....




इतना बोल कर ins-ranjeet ने एक बार फिर से मुझे गले लगा लिया.



राज सर:- और जिस टेस्ट में तुम फ़ैल हुए हो... वैसे भी वहां तक्क तुम्हारी सोच जा hi नहीं सकती थी. इस लिए मुझे पहले से hi यकीन था क तुम इस टेस्ट में फ़ैल हो जाओगे.. लेकिन कुल मिला कर तुमने ये टेस्ट बढ़िया मार्क्स से पास कर लिया है.

इतनी अच्छी परफॉरमेंस दी है तुमने. सच कहूं तो मुझे तुमसे इतनी उम्मीद नहीं थी ...

ins-ranjeet:- विजय बीटा अब्ब आते हैं हम असल बात की तरफ.... (ins-ranjeet के बोलते hi मैं चौकस हो गया) तुम अपनी ट्रेनिंग में जिस तरह मैं लगा रहे हो.

वो तारीफ के काबिल तो है hi. लेकिन सिर्फ ट्रेनिंग में लड़ना hi नहीं होता ...

हर एक में 6तह सेंस होती..... उसी 6तह सेंस हो जगाना भी पड़ता है.

वर्ण




जितना भी अच्छा फाइटर हो अगर उसमे 6तह सेंस नहीं है तो वो कभी भी मारा जा सकता है .. और तुम 6तह सेंस में महरूम हो ... मेरा मतलब कहने का ये है क पिछले 2 दिन से कोई तुम्हारा पीछा कर रहा है और तुम कुछ भी नहीं जान पाए .. तुम हमेशा आगे hi मात देखा करो. अपने आस पास की हर एक चीज़ पर नज़र बनाये रखने की आदत डालो ........

(जैसे hi ins-ranjeet ने कहा क कोई मेरा पीछा कर रहा है. तो एक बार तो मेरा दमाग hi ख़राब हो गया. ऐसा कैसे हो सकता है क मुझे पता hi चला हो और दूसरा वो कौन हो सकता है जो मेरा पीछा कर रहा था)

ins-ranjeet:- जो राहें तुम्हारी आनेवाली ज़िन्दगी में आने वाली हैं. उस में हर तरह की एबिलिटी और सेंस तुम्हारे अंदर होनी चाहिए. वर्ण तुम किसी भी लम्हे किसी भी चूक से मारे जाओगे. जैसे अभय ने कितनी hi गोलियां तुम पर चला दीं. लेकिन तुम फिर भी समझ नहीं पाए ...

ये मेरे hi कहने पे राज ने किया था. तुमको एक सबक़ देने के लिए. आगे आने वाली लाइफ में तुम्हारे साथ कई लोग जुड़ेंगे. उनमे से कोई भी तुम्हारे साथ vishvas-ghat कर सकता है. और जुंग में हर एक से सावधान रहना पड़ता है. ज़रूरी नहीं क आगे वाला hi हमला करे. कोई अपना भी ग़द्दार बन कर तुम्हारा काम तमाम कर सकता है. लोगों को बदलते देर नहीं लगदी. अपने आस पास सिर्फ उन्ही को रखना जिन पर पूरा भरोसा कर सको वर्ण दूर दूर hi रखो ऐसे लोगों को. जो सिर्फ मतलब के लिए hi तुम्हारे साथ मिल जायेंगे ......

तुम जो भी ट्रेनिंग करो लेकिन तुम्हे मैंने जो अब्ब बताया है. सब्बसे ज़यादा फोकस मेरी इन्ही बातों पर करना. वर्ण तुम एक अच्छे फाइटर बन्न कर भी किसी काम के नहीं रहोगे...... अपने अंदर की 6तह सेंस को जगाओ. जग्गू से कह कर तुम्हारी एक्सरइसीसे में कुछ चंगेस लाये जायेंगे. बाकी तुमने खुद की हिम्मत से अपनी 6तह सेंस को जगाना है ..

एक बार पहले भी तुम गोली खा चुके हो. अगर आज का मिशन ओरिजिनल होता तो तुम अब्ब तक्क मर्डर चुके होते ... मेरी आज की बातों को कभी मैट भूलना .. हर्र कोई तुम्हे ये नहीं बताएगा .....

ीनता बोल ins-ranjeet चुप हो गए और मेरे लिए कई तरह से सवाल छोड़ गए ..

आज की ins-ranjeet की बातें तो मेरी लाइफ की सबब से बड़ी बातें थीं. अगर आज ins-ranjeet ये सबब नहीं बताते तो मैं अपनी आने वाली जुंग में देर किये बिना hi फ़ैल हो जाता. मैं सोचो में गुम्म था क

राज सर:- बाकी ये सबब बातें घर जा कर अच्छे से सोचना अब्ब हमें चलना चाहिए ..... बोहत देर हो गई है .....

विजय :- राज सर मेरा पीछा करने वाला कौन था.

राज सर:- वो सबब तुम्हे तुम्हारी पूजा दीदी से पता चल जायेगा.. उसे सबब बता दिया गया है ..............

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घर पोहचते पोहचते 10 बज्ज गए............

मैंने कॉल करके पूजा दीदी को दूर ओपन करने के लिए कहा .... तो कुछ देर में दूर ओपन हो गया ..... मैं अपनी hi सोचो में गम कमरे की तरफ चल दिया ...

कमरे में रानी भी जाग रही थी .........

पूजा दीदी ने रानी को मेरे लिए खाना लेन को कहा तो रानी बहार चली गई ..

पूजा दीदी:- क्या हुआ ऐसे क्यों मोहन लटकाये हुए हो.....

विजय :- कुछ नहीं दीदी पहले खाना खा लून फिर बात करते हियँ तब्ब तक्क रानी भी आ जाएगी ......

रानी खाना ले आई बबब तक्क मैं खता रहा दोनों hi मुझे देखती रहीं .. खाने से फ्री होने के बाअद .... दोनों hi

दोनों:- हाँ अब्ब बताओ क्या बात है ......................

विजय :- दीदी आज मेरा टेस्ट था . और

रानी:- टेस्ट अच्छा फिर क्या हुआ ....

पूजा डीड ने रानी की जंग पे चुटकी काटी

पूजा दीदी:- चुप कर कमीनी विज्जु को बोलने दे. वर्ण विज्जु की बात बीच में hi रह जाएगी .... अगर तेरी जीब ऐसे hi चलती ताहि तो...

मैंने आज जो मेरा मिशन और टेस्ट था... वो सबब डिटेल में दोनों को बता दिया .. दोनों hi मोहन खोले मुझे hi देख रही थीं......

विजय :- ऐसे मोहन क्यों खोला हुआ है. कोई माखी न घुस जाये.

दोनों ने hi मुझे पकड़ लिया और चूमने लगी. जब तक दिल की हसरत पूरी नहीं हुई तब्ब तक्क लगी रहीं.

पूजा दीदी को जैसे hi कुछ यद् आया तो झट से मेरे कपडे उतारने लगी. मैं भी समझ गया क वो क्या करना चाहती हैं. मैंने रानी की तरफ देखा तो वो एक्ससिटेड होने लगी थी. दीदी को मेरे कपडे उतारते देख कर .....

मैं हसने लगा कर

विजय :- दीदी रानी कमीनी को तो देखो कैसे मोहन में पानी आ गया है इसके ....

पूजा दीदी ने रानी की तरफ देखा तो

पूजा दीदी:- रानी कमीनी तुझे हर वक़्त गन्दा hi क्यों सूझता रहता है..

रानी :- क्या मतलब गन्दा सूझता रहता है . मैं तो आपको विज्जु के कपडे निकलते देख कर थोड़ा एक्ससिटेड hi हुई हूँ. आपकी तरह विज्जु को नंगा तो नहीं कर रही.

पूजा दीदी:- रानी कमीनी मैं तो विज्जु के जिस्म को देखने वाली हूँ तू अपनी गन्दी सोच बीएड के नीचे फ़ेंक क आ.....

पूजा दीदी ने मेरे कपडे उतर दिए थे..... जहाँ जहाँ बुलेट्स लगी थीं वहां की स्किन लाल पद चुकी थी .... अब्ब रानी को समझ आई क पूजा दीदी क्यों मेरे कपडे उतार रही हैं ..... वो कमीनी तो थी hi.

रानी :- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तो विज्जु को चोट लगी है. लाओ मैं मस्सगे कर देती हूँ.

रानी कमीनी ये बोल कर अपनी जीब निकल कर मेरी रेड पद रही स्किन को चाटने hi वाली थी. क

पूजा डीड ने कस के एक लगाईं रानी की गांड पे

रानी oiiiiiiiiiiiiiiiiiii दीदी इतनी ज़ोर से क्यों मारा

पूजा दीदी:- ाछठ कुछ ज़यादा लगी है. कोई नहीं अब्ब थोड़ा हलके से लगाती हूँ. रानी बीएड से उठ कर भाग गई. पूजा दीदी और मैं हसने लगे.

रानी कुछ hi देर में आयल गरम कर के लाइ और पूजा दीदी को दे दिया.... रानी कमीनी hi नहीं समझदार भी थी. क्या हुआ अगर मेरा पानी उसकी मुनिया के अंदर नहीं गया था. मेरे मुन्ने की रगड़ ने hi रानी को जीनियस बना दिया था ... कमीनी तो वो अपने अंदर की गर्मी की वजा से बन गई थी.... और समझदार मेरे मुन्ने की वजा से ............

पूजा दीदी ने मुझे आयल मस्सगे दिया. तो रानी ने भी अपने कपडे निकाल कर बड़े hi अच्छे से मुझे मस्सगे करना शुरू कर दिया. रानी कम् hi ऐसा मौका छोड़ती थी. मेरा और पूजा दीदी का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन मुझे मस्सगे करते करते रानी ने अपना काम कर लिए .... मुझे मस्सगे भी दे दिया और अपनी मुनिया की गर्मी भी शांत कर्ली.............

विजय :- आज कुछ नयी बात पता चली है. और उसके बारे में आप को सबब बताया गया है ..

पूजा दीदी:- हाँ वो वही अज्जू का मटर था. किसी तरह से वो हम तक्क पोहंच गए हैं ...

मैं उठ कर बैठ गया .

विजय:- मतलब अज्जू के भाई और उनके पार्टनर्स को पता चल गया है क अज्जू का मर्डर मेने और मेरे दोस्तों ने किया था .....

पूजा दीदी :- हाँ कुछ ऐसा hi हुआ है....

विजय :- लेकिन दीदी is'se तो घर पर परेशानी हो जाएगी.

पूजा दीदी:- नहीं कुछ नहीं होता. मेरी हर्ष अंकल से बात हुई है. और उन्हों ने कुछ लोगों को हमारी सुरक्षा के लिए भेज लिया है. अब्ब इतनी जल्दी तो कुछ भी नहीं कर पाएंगे वो लोग ..........

फिर दीदी मुझे पूरी बात बताने लगी. जिसे सुन कर मुझे ग़ुस्सा आने लगा.

पूजा दीदी:- विजु तू टेंशन न ले मैं और रानी हर्ष अंकल के भेजे हुए आदमियों को ले कर सबब सेट कर लेंगे.........

कुछ देर बातों के बाद हम सोने लगे. दोनों मेरी बहन में सिमट कर सो गेन.

मुझे अभी नींद नहीं आ रही थी ......... आज सबब जो हुआ उस के बारे hi सोच रहा था. सबब कितना अजीब है. लाइफ इतनी भी आसान है होती जितना उसे समझ लिया जाता है. आज के टेस्ट में मुझे कितने सबक़ मिले. और कितना अचे से मुझे ins-ranjeet ने सबब समझा भी दिया ............ अब्ब तो मुझे अपनी 6तह सेंस के लिए कुछ भी करना पड़े वो मैं करूंगा ..... ये मेरे लिए सबब से ज़यादा ज़रूरी है. वर्ण जिस जुंग में मैं कूदने जा रहा हूँ. वहां तो क़दम क़दम पर मौत के जाल बिछे हुए मिलेंगे मुझे. मैं कुछ देर इसी बात को ले कर सोचता रहा ..

फिर अचानक से मेरी सोचों में मातलि भाभी आने लगी... कुछ दिनों से मालती भाभी को क्या हो गया है. अब्ब तक तो सबब कुछ ठीक था. लेकिन अचानक से मातलि भाभी के साथ ऐसा क्या हुआ है. जो वो मुझे देखते hi ूत पतंग सी हरकतें करने लगी हैं.

मेरा पूरा बचपन hi कोठे पर गुज़रा था तो मुझे दुन्या का कोई नॉलेज मिले या न मिले लेकिन औरतों और लड़कियों के अंदर की फीलिंग्स को समझना मेरे लिए मुश्किल नहीं था. ख़ास कर जब्ब उनकी ऑंखें और छूट में पानी आने लगे तो मैं सबब समझ जाय करता था. मातलि भाभी की छूट कुछ दिनों से हर वक़्त hi गीली रहने लगी थी. और जब्ब हम दोनों hi पास होते तो उनकी छूट का चुतरस कुछ ज़यादा hi बहने लगता था.

अब्ब मैं मालती भाभी की छूट को तो देख नहीं सकता था. लेकिन मेरा जो एक्सपीरियंस था. us'se मुझे पता चल जाता है क किस की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया है ..... मैंने an-ginat बार अपनी माँ को चुड़ते देखा है तो फिर मैं ऐसा एक्सपर्ट कैसे नहीं हो सकता था. मैं तो दूर से hi छूट की खुशबू सूंघ कर hi बता सकता था. क कितना पानी छोड़ सकती है. और कितनी देर में छोड़े गई.........

देखना पड़ेगा या मालती भाभी से पूछना पड़ेगा. क वो क्यों मुझे याद करके अपनी छूट को बहाने में लगी हुई हैं. वैसे मुझे कोई ख़ास फ़र्क़ भी नहीं पड़ता था. मैं तो था hi बेशरम और मेरे साथ रहने वालियां कोई छोटी हो या बड़ी वो भी बेशरम बन hi जाया करती थीं. जब शिखा और रूपा इतनी बेशरम बन गई थीं मुझे ले के. तो उनकी माँ मेरे सामें बेशरम क्यों नहीं बन सकती .

मुझे नींद आने लगी तो मैंने सूबा उठ कर मालती भाभी से पूछने का सोचा. और फिर मैं नींद की गहराइयों जा पोहंचा

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थैंक्स:

आप सबने घोर hi नहीं किया ... राज सर ने कहा तो था क विजय आज तुम्हारा टेस्ट है तो पास हो कर आना ........

आप सबब लोग डर क्यों गए थे ...........

अब्ब विज्जु बड़ा हो रहा है तो उसका लुंड भी तो बड़ा होगा hi .... जब्ब मालती की बेटियां विज्जु के लिए पागल हो सकती हैं ...

तो वो खुद क्यों नै.......... मालती भाभी कैसे विज्जु के लिए पागल हैं ... जल्द hi पता चल जायेगा
 
अपडेट ::: 43

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सूबा जब्ब मेरी आंख खुली तो मैंने दोनों को खुद से अलग किया. फ्रेश हो कर कमरे से बहार निकल कर मालती भाभी के कमरे की तरफ जाने लगा. सभी के कमरे अक्सर खुले hi रहते थे. सिर्फ हमारा hi कमरा बंद रहता था. क्यूंकि हम अक्सर गन्दा काम कर लिया करते थे. घर में तकरीबन सब को hi पता था. क हम कमरे में क्या कुछ करते हैं. लेकिन किसी ने भी हमें कभी डिस्टर्ब नहीं किया था. मालिकान को भी इस पर ऐतराज़ नहीं था. उनकी बेटी hi अगर सबब कुछ करना चाहती है. तो मालिकान क्यों कर पूजा दीदी को रोके गईं.......

मैं मालती भाभी के कमरे में पोहंचा.







तो मालती भाभी के कमरे में पद्मा आंटी भी सो रही थीं. पद्मा आंटी कभी मालिकान के साथ सो जाती थीं तो कभी मालती भाभी के साथ ...

दोनों hi सोइ हुई थीं. और दोनों के hi नीचे वाले हिस्से पर एक चादर थी. मैंने सोचा क्या करून.

फिर अचानक से मेरे मैं में एक बात ै. और फिर मैंने बीएड के पास आ कर मालती भाभी के एक हाथ को पकड़ कर अपने नाक से लगाया. ये जान्ने के लिए क उनके हाथ से छूट के पानी की स्मेल आती है या नहीं. लेकिन मुझे स्मेल नहीं आई....

फिर मैंने मालती भाभी का दूसरा हाथ भी पकड़ कर अपने नाक से लगाया तो मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई. मालती भाभी के हाथ से स्मेल आ रही थी. और उनके हाथ की उँगलियों पर उनके छूट का रस खुश्क हो चूका था.

मतलब मालती भाभी रात भर अपनी छूट को चेक करती रही हैं.

फिर अचानक से मेरे दमाग में एक और बात आई. क अगर मालती भाभी पद्मा आंटी के साथ मिल कर सो रही हैं तो क्या पद्मा उल्टी को पता नहीं चला होगा.....

बस फिर क्या था मैं बीएड की दूसरी तरफ गया और पद्मा आंटी के हाथों को भी चेक करने लगा. पद्मा आंटी के भी हाथों से चुतरस की स्मेल आ रही थी.

अब्ब पता नहीं ये स्मेल दोनों की अपनी अपनी छूट के पानी की है या एक दुसरे की छूट के पानी की...

मुझे दोनों के शरीर पर पड़ी हुई चादर खटकने लगी. तो मैंने एक बार दोनों को देखा. दोनों hi शांत सो रही थीं. जैसे दोनों के चेहरे चमक रहे थे. साफ़ पता चलता था क रात को अंदर की गर्मी निचोड़ कर सोइ हैं. मैंने दोनों के ऊपर से चादर हटा दी






wooooooooooooooooooow

पद्मा आंटी और मालती भाभी दोनों hi नीचे से नंगी थीं. अब्ब मैं भी कुछ कुछ एक्ससिटेड होने लग गया था..... अब्ब ऐसा मौका मैं कैसे छोड़ता. मैं तो था hi बेशरम .और वैसे भी कोठे पर रहते हुए तकरीबन सभी लड़कियों और औरतों की छूट और गांड तो मैं देख hi चूका था.... वहां का तो माहौल hi अलग hi होता है ........... जो साड़ी साडी रात चुदती रहे और पास में रहने वालियां सबब hi जानती हूँ तो फिर छूट को छुपाने की क्या ज़रुरत है.. सैर hi लड़कियां और औरतें रात भर छोड़ने के बाद ऐसे hi छूट के दर्शन दिए नंगी hi सो जाया करती थीं. खुद मेरी माँ भी ऐसे गई किया करती थी.... बेचारी रात भर की चुदाई से थक जो जाती थी. भुदाई के बाद की थकन और फिर नींद का खुमार इस लिए ऐसे सोने से क्या फ़र्क़ पड़ता था.... माँ भी दलदल में रह कर आदि हो गई थी. लेकिन दर्द सहन नहीं होता था. वो वक़्त के साथ hi बढ़ रहा था.

मैंने मालती भाभी के पैरों को उठा कर फोल्ड कर दिया फिर उनके घुटनो पर दोनों हाथ रख कर मालती भाभी की छूट के दर्शन करने के लिए उनके पैरों को खोलने लगा. मालती भाभी थोड़ी सी हिली ज़रूर लेकिन छूट की गर्मी निकल जाने के बाद की नींद इतनी जल्दी कैसे टूट सकती है.

मालती भाभी की छूट पर छोटे छोटे बाल थे. मैंने भाभी के पैरों को थोड़ा सा और खोला. अब्ब अगर भाभी उठ भी जाती तो मुझे कोई टेंशन नहीं थी. हमारा रिश्ता hi एक दुसरे से अलग किसम का था. इसलिए मुझे कोई डर नहीं थी.

जैसे hi मैंने भाभी के पैरों को खोला तो मुझे भाभी की छूट साफ़ दिखने लगी. भाभी की बहुत पर उनकी छूट से निकला हुआ पानी जमा हुआ था.

मतलब भाभी छूट के शांत होते hi नींद में चली गई हूँगी.

मैंने अपनी एक ऊँगली को भाभी की छूट के लिप्स में दाखिल किया.




भाभी की छूट अंदर से गीली थी. मैंने अपनी एक ऊँगली को अच्छे से भाभी की छूट में फेरा. फिर अपनी ऊँगली निकाल कर.

पद्मा आंटी की तरफ गया.




उनके साथ भी वैसा hi किया जो भाभी के साथ किया था. पद्मा आंटी के पैरों को खोल कर उनकी छूट के दर्शन किये और फिर उनकी छूट में भी ऊँगली डाली. पद्मा आंटी थोड़ी सी हिली लेकिन उठी नहीं.

पद्मा आंटी की छूट किसी कुंवारी लड़की की तरह टाइट थी..... होती भी कैसे न कितने hi सालों से चुदाई जो नहीं की थी. मैंने अपनी ऊँगली को जितना पद्मा आंटी की छूट में दाखिल कर सकता था "करने लगा" मेरी ऊँगली फस फस कर आंटी की छूट में जाने lagi.aunty की छूट भी अंदर से गीली थी. दोनों hi खुद को साफ़ किये बिना hi सो गई थीं. मैंने आंटी का चेहरा देखा. तो वो सो रही थीं.

मैं सोचने लगा क ये तो मुझे इमेजिन करके एक दुसरे की छूट को ठंडा करने में लग गईं हैओं. कुछ इन के लिए करना चाहिए ......

मैं सोचने लगा क मुझे क्या करना चाहिए ... इन दोनों की छूट तो अब्ब मुझे देख कर रिसना बंद नहीं कर सकती तो मुझे भी इन दोनों के साथ भी कुछ करना चाहिए ... मैं यही सोच रहा था क क्या करून इन दोनों के साथ.. मेरे पास टाइम भी काम था . मुझ अखाड़े भी जाना था. जो भी करना था जल्दी करना था.

अचानक से मेरे दमाग में एक बात आई.. मेरे होंठों पर एक मुस्कान आ गई .. अज्ज शाम के लिए दोनों के साथ कुछ तफरीह hi सही .. मैं हो हूँगा नहीं. ये दोनों सारा दिन मुझे hi याद करती रहेंगी.

वह ये सही रहेगा.. मैं फिरस अपने कमरे में आया और वहां से नोटबुक और पेंसिल उठाई और फिर उसपर कुछ लिखने लगा ...

दो अलग अलग पेपर पर मैंने कुछ लिखा और फिर भाभी के कमरे की तरफ चल दिया. मैंने भाभी और पद्मा आंटी की छूट में वही पेपर फोल्ड करके दाल दिया..




और उन दोनों के ऊपर जो चादर थी वो मैंने वापिस अपने कमरे में आ कर रानी और पूजा दीदी के ऊपर दाल दी .... ये सबब करके मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था ..

मैं फिरसे वापिस कमरे से बाहर जाने लगा क मुझे फिरसे कुछ याद आया ..

रो मैंने दो और पेपर रानी और पूजा दीदी के ब्लाउज में दाल दिए...




और उनपर वो सबब लिख दिया जो मैंने भाभी और पद्मा आंटी के साथ किया था... और ये भी क चादर उन दोनों की है ..... ये सबब करते हुए मैं कुछ खुश सा हुआ था. आज na-jaane कितने hi वक़्त के बाद मेरा दिल खुश हुआ था ... खुश तो मैं अक्सर होता hi रहता था. लेकिन ऐसे कभी शरत नहीं की थी ... मैं अचानक फिरसे से माँ और बहनो की यादों में जाने लगा...

अब्ब तो कभी कभी अंदर से टीसें सी उठती हुई महसूस होती थीं.

वहां माँ और बहनो कितना दर्द झेल रही होंगी. और मेरी जुदाई ने तो उन सबब को तोड़ hi दिया होगा .... कुछ पल मैं कितना खुश था . लेकिन अब्ब दुसरे hi पल दिल में दर्द सा उठने लगा था ..... बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाया और फिर अखाड़े के लिए निकल गया .........................





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लोकेशन: रीना पार्लर:




पार्लर ने इस वक़्त रानी पूजा दीदी रीना और तृषा ये चरों hi थीं. और पार्लर को अंदर से कुण्डी लगी हुई थी.




कुछ देर बाद रानी पूजा दीदी के कहने पे तृषा को घोड़ी बनाया और फिर





तृषा की हालत बोहत hi बुरी थी. तृषा फुल नंगी नीचे फर्श पर घोड़ी बानी हुई हुई थी और रानी ने पूजा दीदी के कहने पे तृषा को उल्टा लिटा कर उस की गांड में एक जलती हुई कैंलड डाली हुई थी ... कैंडल के जलने से तृषा की का जिस्म काँप रहा था. और जलती हुई कैंडल उसकी जांघों और छूट कर फिर रहित hi. तृषा की हालत बोहत hi दर्द भरी थी.

फिर रानी ने कैंडल निकाल कर अपनी की 4 उँगलियाँ तृषा की गांड में घुसा दीं. और तृषा मारे दर्द से बिलबिला रही थी.






और रीना भी ग़ुस्से से तृषा को hi देख रही थी. जब्ब क पूजा दीदी आराम से इक चेयर पर बैठी हुई थी .... उसने रानी को सबब समझा दिया था क तृषा के साथ क्या करना है .... और रानी लगी हुई थी अपने काम में और तृषा की हालत तब्ब ज़यादा ख़राब होती जब्ब रानी अपनी उँगलियों का दबाओ तृषा की गांड पर बढ़ा देती थी. तृषा की गांड का छेड़ बोहत hi खुला था. क्यूंकि तृषा सिर्फ छूट hi नहीं गांड भी बड़े hi मज़े से मरवाया करती थी. लेकिन रानी की उँगलियाँ तृषा की छूट में नहीं गांड में थीं और रानी अपनी उँगलियों को तृषा की गांड के अंदर गोल गोल घुमा रही थी. तृषा को मज़ा तो आ रहा था लेकिन दर्द भी बोहत हो रहा था.

रानी क्यों ऐसा कर रही थी तृषा के साथ.....................




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धर्मेश और प्रेम अज्जू के कातिल को नहीं ढून्ढ पाए थे. लेकिन शंकर हरामी वो कभी भी चैन से नहीं बैठता था. जब तक वो अपने शिकार को ढून्ढ न ले.

वक़्त तो लग गया था शंकर को लेकिन वो अपने शिकार को ढूंढ़ने में कामियाब रहा था.

शंकर को एक बात पता चली थी क अज्जू के मर्डर से कुछ दिन पहले शहर में दो लड़कियों के साथ उसका कोई फड्डा हुआ था.

बास फिर शंकर ने अपने दमाग के घोड़े दौड़ने शुरू कर दिए. शंकर के पास एक 23 साला लड़का धनञ्जय काम करता था. सूरत और सेहत में तो ख़ास नहीं था. गन शूटिंग अच्छी थी लेकिन फाइटिंग अच्छी नहीं थी... जो सबब से ख़ास बात थी वो ये थे क धनञ्जय का लुंड बोहत hi बढ़िया था. तो शंकर को जब्ब पता चला क उन दो लड़कियों में से एक को बॉयफ्रेंड बदल बदल कर छोड़ने का बड़ा शोक है. तो शंकर ने धनञ्जय को तृषा के लिए काम पर लगा दिया .....

धनञ्जय का लुंड देख कर तृषा कमीनी कुत्तिया की तरह राल टपकने लगी.

लास्ट 15 दिन से तृषा की छूट और गांड के रेगुलर hi मज़े हो रहे थे. और तृषा को भी पहली बार ऐसा लुंड मिला था. तो तृषा बाकी सबब को छोड़ कर धनञ्जय के लुंड पर छड़ कर 24 हॉर्स hi नाचने लगी. तृषा ने इन 15 दिनों में कितनी बार धनञ्जय का लुंड लिया वो तो खुद भी नहीं जानती थी. लेकिन तृषा के मज़े बोहत हो गए थे.

ऐसे hi एक दिन तृषा धनञ्जय के साथ रीना के पास आई. तो बातों hi बातों में तृषा ने उस दिन वाली बात पर सॉरी बोल दिया.. लेकिन रीना ने तृषा को जाने को बोल दिया. लेकिन तृषा या रीना धनञ्जय को सही से नहीं जानती थीं.

कुछ देर बाद तृषा धनञ्जय के साथ चली गई. धनञ्जय ने तृषा को "टाउन में कुछ काम है " बोल कर उसे बाघा दिया. धनञ्जय का एक काम हो गया था. वो फिरसे वापिस रीना के पास आया. पार्लर में अभी कोई लड़की नहीं आई थी. रीना अकेली hi थी. धनञ्जय ने टाइम वास्ते न करते हुए अपना पिस्तौल निकल कर रीना की छूट पर रख दिया...... और फिर

धनञ्जय:- अज्जू को मारने वाले कौन हैं.

रीना वैसे hi कमज़ोर दिल वाली थी. जितना रीना का दिल कमज़ोर था. us'se भी ज़यादा रीना की छूट कमज़ोर थी . सील अगर टूट भी चुकी थी . लेकिन छूट और दिल में हमेशा छूट hi कमज़ोर होती है. जब्ब भी कोई बड़ी और khatar-naak चीज़ उसमे घुसने वाली हो तो.

बर्दाश्त लम्हों में hi ख़तम हो जाती है. और रीना कमज़ोर दिल और कमज़ोर छूट वाली ने पूजा और विज्जु का सबब बता दिया....



धनञ्जय ने रीना को छोड़ दिया ..... और बहार आ एक शंकर को सबब बता दिया.... शंकर ने विजय की पूरी डिटेल निकलने को बोल दिया .... लेकिन विजय के पीछे तो हर वक़्त hi रणजीत का एक आदमी लगा रहता था. उसने धनञ्जय को देख कर ins-ranjeet को बता दिया. फिर रणजीत के सामने धनञ्जय कैसे सबब छुपा सकता था............... बक दिया धनञ्जय ने सबब क वो शंकर के कहने पर hi ये सबब कर रहा था.....

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aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii उम्मम्मम्ममा मररररररररर gaiiiiiiiiiiiiiiii

siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii और ज़ोर से करो बड़ा मज़ा ा रहा है ..........

नहीं मुझे छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ दू .......... मैं मानती हूँ मुझसे गलती हुई है. लेकिन मैंने ये सबब जान बूज कर नहीं किया ................... तृषा कभी मज़ा लेने लगती तो कभी मारे दर्द के चीखने लगती ... अजीब सी हालत हो रही थी त्रिशि की....

पूजा दीदी ने अपने पास में पड़े हुए एक बर्ष को उठाया और चल के तृषा के पास आई ..

पूजा दीदी :- रानी इस कुट्टी को सीधा करो ...

रानी ने तृषा को सीधा किया.... फिर पूजा दीदी के कहने पे रानी ने त्रिसदः की टांगों को ऊपर उठाया ....

प्पोजा दीदी :- रानी ऐसे नहीं . तू इस कुत्तिया के सर्र की तरफ आ फिर इस हरामज़ादी की टांगों को पकड़.... जितनी इसकी छूट और गांड में खुजली होती रहती है. वो आज मैं साड़ी hi निकाल दूँगी.

रानी तृषा के सर्र वाली साइड आई तो

पूजा दीदी:- (रीना से) अब्ब तू क्या कड़ी मोहन देखती रहेगी. तीन बार मरते मरते बची है. अब्ब भी तुम्हे अकाल नहीं ै. पकड़ इस कुटिया की टांगों को और दे रानी के हाथों में............ रीना दर्री हुई भी थी और उसे तृषा पर ग़ुस्सा भी बोहत था. फिर उसने हिम्मत करके तृषा के पैरों को पकड़ कर उठा दिया. रानी ने तृषा के पैरों को पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा तो तृषा की गांड 10" तक ऊपर उठ गई......... waahhhhhhhhhhh क्या नज़ारा था. 3 लड़कियां मिल कर एक लड़की की छूट और गांड का satya-nash कर रही थीं.

तृषा बोहत ज़ोर लगा कर खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी. तृषा को दर्द के मारे रोना आ रहा था. लेकिन आज लाइफ में पहली बार उसे खुद से भी कुछ कुछ घिन आने लगी थी. क उसकी वजा से 3 बार रीना जैसे शरीफ लड़की की इज़्ज़त और जान खतरे में आ गई थी. तृषा इतनी भी कम्मं नहीं थी क इन तीनो से मुक़ाबला न कर सके. लेकिन एक तो वो खुद की फीलिंग्स में फँसी हुई थी और दूसरा बहार हर्ष चौहान के भेजे हुए 2 gun-man भी खड़े थे.

इसलिए तृषा सिर्फ ohhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hayyyyyyyyyyyyyyeeeee

siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

कर रही थी.

तृषा कमीनी को जितना दर्द हो रहा था. रानी के हार्ड बर्ताव की वजा से उसे एक अलग किसम का मज़ा भी आ रहा था.....

तृषा की 10" उठी हुई गांड पर पूजा दीदी हाथ फेरते हुए अपने हाथ को तृषा की छूट की तरफ लाने लगी. फिर पूजा दीदी ने एक झटके में hi अपनी उंगलियां तृषा की छूट में घुसा दीं.






तृषा:- oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

marrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiii प्लेस कुछ धीरे धीरे करलो ........ बोहत दर्द हो रहा है.

पूजा दीदी:- साली कुत्तिया हम यहाँ तुझे मज़ा देने आये हैं क्याआआआ?

ये बोल कर पूजा दीदी ने तृषा की छूट से उँगलियाँ निकल कर 7" के बर्ष को एक झटकने में hi तृषा की खुली छूट में घुसा दिया............






ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh तृषा चीखते हुई झटके खाने लगी. हवा में उठी हुई होने की वजा से तृषा अपनी गांड को नीचे ला कर कुछ देर रेस्ट भी नहीं कर सकती थी.

तृषा का हशर आज बोहत hi ख़राब हो चूका था. तृषा की चिकनी छूट और गांड आज अपनी चिकनाहट खो चुकी थीं. बर्ष ने तृषा की हालत ख़राब की हुई थी. बर्ष न तो लुंड की तरह मोटा था और न hi चुतरस की वजा से चिकना ... बर्ष के खुश्क और लुंड से भी ज़यादा सख्त होने की वजा से तृषा की छूट के अंदर का सिस्टम डैमेज होने लगा था.

कुछ देर बाद पूजा दीदी ने तृषा को छोड़ दिया और फिर से चेयर पर बैठ गई..

इतना hi काफी था तृषा के साथ. आखिर पूजा दीदी भी तो एक प्यार करने वाली लड़की थी. वो कैसे तृषा को इतनी सख्त सजा दे सकती थीं. तृषा से हर बार भूल hi तो हुई थी. तृषा की मस्ती और हुडने की आदर की वजा से हम सबब अपने दुश्मनो के सामने आ गए the.....trisha की छोड़ने की आदत की वजा से आज हालात बदल गए थे........

पूजा दीदी:- चल रानी बोहत हुआ इस कुत्तिया के साथ. अब्ब इसकी जान तो हम ले नहीं सकते. (पूजा दीदी और रानी ने एक नफरत भरी निगाह तृषा पर डाली और बहार को जाने लगी)

तृषा :- सॉरी पूजा जी आज मुझे सही में रीलीज़ हुआ है क मैं कितनी गलत हूँ. मैंने कभी भी दिल से किसी के साथ बुरा नहीं किया. लेकिन अपने मज़े के चक्कर में रीना को फंसा बैठी. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था.....

पूजा दीदी:- पहली बात तो ये है क तुझे अभी रीना hi नज़र आई है. खुद के सारे कार्टून और घटिया हरकतों को सोच.. तो तुझे पता चलेगा क तेरी वजा से और भी कई लड़कियों की इज़्ज़त ज़रूर गई होगी. जिस तरह के हरामी तेरे बॉयफ्रेंड होते हैं. क्या तू रीना जैसी किसी शरीफ लड़की से दोस्ती करने के काबिल भी है. रीना की hi तरह तूने और भी कई लड़कियों से दोस्ती की होगी. और फिर अपनी छूट और मस्ती के चक्रों में अपने hi दोस्तों को उनकी इज़्ज़त लुटा दी होगी. वो भी मस्ती और मज़े के liye.......(fir तृषा की तरफ ऊँगली उठा कर) तू जो मर्ज़ी कर लेकिन रीना से और इस टाउन से हमेशा के लिए दूर हो जा और जो तेरी फ्रेंड्स यहाँ आती हैं. उनसे भी कह दे यहाँ ना आया करें वर्ण तेरे जैसा उनका भी हाल होगा..

इतना बोल पूजा दीदी और रानी बहार निकल गई............

तृषा ने रीना के पैरों में गिर माफ़ी मांगी.. लेकिन अब्ब माफ़ी किस काम की. इतना कुछ बेचारी रीना के साथ हो चूका था. गन तक्क रीना की छूट तक्क पोहंच गई थी. na-jaane तब्ब से रीना को कभी चैन भी मिला होगा या नहीं ... रीना ने तृषा को बास जाने के लिए कह दिया और अपना सामान सेट करने लगी...........

तृषा सर्र झुकाये बहार चली गई..... शायद आज तृषा भी बदल गई थी...


दिल की अच्छी थी लेकिन छूट की गर्मी ने उस से कुछ गलत काम करवा दिए थे.. शायद अब्ब तृषा वो सबब छोड़ दे ... तृषा छोड़ना तो छोड़ सकती थी लेकिन अच्छे दोस्तों को कैसे छोड़े....... रीना की be-rukhi ने तृषा को अंदर से झंझोड़ कर रख दिया था. और फिर पूजा दीदी की सजा और वो भी इतनी कम्. मारे शर्म के तृषा का सर्र और भी नीचे होने लगा था .............. वो अपने चुदाई के फर्स्ट डे से ले कर अब्ब तक्क जितना से चूड़ी है सबब के बारे में सोचने लगी...... वो दिल hi दिल कोई फैसला कर रही थी.......... जब्ब चोट दिल पर लगे तो नया hi रंग दिखने को मिलता है .......... अब्ब देखते हैं तृषा की आने वाली लाइफ कैसी होती है..........

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थैंक्स किशन जी:

बोहत से दिल ने आपने मेरे लिए लिखा है .. मुझे पढ़ कर बोहत hi ाचा लगा.. मेरी म्हणत पूरी हुई...

भाई आपका सुग्गेस्टिव भी सही है ... लेकिन यहाँ अगर आपके सुग्गेस्टिव की ज़रुरत पड़ी तो सोचोगे.....

और सुग्गेस्टिव देने पर सॉरी कैसा ..

लेकिन ये स्टोरी कुछ हट के है .. और विजय को अपनी हिम्मत की ज़यादा ज़रुरत है इस स्टोरी में
 
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