Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 11 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स ...!!

विजय नाम बदल कर सिटी में दहशत का निशान नहीं बनना चाहता इसलिए उसने अपना नाम स समाजसेवक रखा है.......... उसे आजम जनता का प्यार और विशवास जीतना है इसलिए स से अच्छा कोई नाम नहीं है.. डेविल या ब्लैक किंग से ेधशत बनती है............. और ये फँसतास्य स्टोरीज में ाचा लगता है .. यहाँ मैं इस स्टोरी को कुछ अलग रंग देना चाहता हूँ..

विजय दिल्ही सिटी में कैसे राज करेगा और पुलिस के लिए विजय और राजा की क्या सोच है .. और विजय के पुलिस से क्या कनसतिओन्स बन्न सकते हैं वो नेक्स्ट hi पता चलेगा...
 
थैंक्स..!!

विजय को वक़्त ने बदलना तो था hi और विजय अब्ब सबब समझ भी चूका है.. किसी का खून निकलना hi काफी नहीं होता.. खून को किसी के शरीर में सूखा देना भी एक आर्ट है...

फेस मास्क विजय के लिए परफेक्ट है....... उसके दुश्मन उसकी फैमीओली को न परेशां करें इसलिए विजय का चेहरा सबब से छुपा रहे तो हिओ अच्छा है..

विजय को बदले हुए फेस के साथ भाही की कमर पर हाथ रखे देख कर और भी बोहत मज़ा आने वाला है...........
 
उप्दत :: 53

***********



मुझे अपनी माँ के साथ देख कर raj..shikha और रूपा के होश उदय हुए थे..

आज से पहले उन सबब की लाइफ में ऐसा कभी नहीं हुआ था..

उनकी माँ हर एक अजनबी से दूर hi रहा करती थी लेकिन आज पहली बार उनकी माँ एक अजनबी के साथ कमर में हाथ डाले हुए सभी को देख कर मुस्कुरा रही थी... जितनी वो शॉकेड थे.. उससे बढ़ कर वो अंदर से दरी हुई थी..... उनकी माँ उनके पापा से बहुत hi ज्यादा प्यार करती है.. लेकिन आज वो पापा को भूल कर एक अजनबी की बाँहों में समायी हुई थी......

राज अब बच्चा नहीं रहा था.. वो भी अपनी माँ को ऐसे देख कर गुस्से में आने लगा.. उसकी आँखों का रंग बदलना शुरू होआ..

तो भाभी राज की अनखुन का रंग बलदता देख कर मुस्कुराना शुरू कर दिया..

और फिर अचानक से भाभी ने ज़ोर जोर से हंसना शुरू कर दिया.. सब भाभी को ऐसे पागलों के जैसे रियेक्ट करते हुए देख कर और भी ज्यादा शॉकेड हो गए.....

ये भी भाभी का एक नया हे रूप था... भाभी कभी भी ऐसे खुल कर कभी नहीं हंसी थी... राज का गुस्सा एक आदम से hi ख़तम हो गया और वो अपनी माँ को ऐसे जोर जोर से हँसते हुए देखकर हैरान हो गया.. उसे कुहक भी समझ नहीं आ रही थी क वो ग़ुस्सा करे .. हैरान हो या शॉकेड रिएक्शन दे... राज की तरह शिखा और रूपा भी राज के जैसे भी स्टुपिड लोगों की तरह अपनी माँ को हँसते हुए देख रही थी... आज उनकी माँ ऐसे अजीब अजीब हरकतें क्यों करे लगी हियँ...

भाभी हँसते हँसते एक सोफे पर बैठ गई.. हंसने की वजह से उनकी आँखों में पानी आना शुरू हो गया राज शिखा और रूपा एक बार फिर से अपनी माँ का या रूप देखकर हैरान और परेशां हो चुके थे..

भाभी के इस तरह हंसने से पूजा दीदी और रानी भी उठ कर बहार ड्राइंग रूम में ा गई... वो भी मुझे देख कर कुछ हैरान तो हुई.. वो सब को देहक कर हैरान हुई क इन सबब को क्या हुआ है और भाभी क्यों इतना हंस रही हैं और राज शिखा और रूपर के चेहरे पर घुस्स्सा और डिफरेंट रिएक्शंस क्यों हैं... ये सबब देहक कर रानी और पूजा दीदी और भी हैरान हो गईं...

क्यूंकि उनको कुछ समझ में नहीं ा रहा था..

पूजा दीदी:- क्या हुआ ऐसे क्यों ऐसे पागलों के जैसे हंस रही हैं आप.. (फिर मेरी तरफ िसहरा करते huye)aur ये शख्स कौन है..

पूजा दीदी के आते hi भाभी की हंसी को ब्रेक लग गई थी....

सब भाभी को hi देख रहे थे..

भाभी:- मैं अपने हंसने की वजह बाद में बताउंगी पहले आप सब ये बताएं क

मेरे नए साजन आप सबब को कैसे लगे... मुझे भी आज hi रीलीज़ हुआ है क इससे बिना मैं मैं नहीं रह सकती.. हम दोनों hi एक दुसरे से प्यार करते हैं.......

और किसी को मैं इजाज़त नहीं ढोऊंगी क वो मेरे साजन जी कुहक भी गलत बोलेन.. जिसने जो भी बोलना है.. प्यार से बोले.. ये मेरे लिए ख़ास हैं..

ये बोल कर भाभी पूजा दीदी और रानी की परवा किये बगैर hi फिरसे हंसने लगीं... भाभी को बोहत ज़यादा माज़ा आ रहा था.. और मैं तो पहले hi सबब के ऐसे रियेक्ट करने से मज़ा ले रहा था लेकिन अब्ब मुझे भी भाभी ी बातों से कुछ और भी मज़ा आने लगा....

सब के सबब भाभी को ऑंखें फाड़े देखने लगे.. राज रूपा और शखा भी अपनी माँ को ऐसे बातिन करते देख कर डरने लगे.. क आज हुनकी माँ को क्या हुआ है.. कहीं उनकी माँ उनके पापा को छोड़ने तो नहीं वाली.... राज को ग़ुस्सा भी आने लगा और अपनी माँ की बातें सुन कर वो डर भी गया था.........

मैं और भाभी raj..shikha और रूपा के दर्रे हुए चेहरे देख रहे थे.. उनको डरता देख कर भाभी मुस्कुराने लगी.. और

bhahbi:-(apne बच्चों से) राज शखा रूपा क्या तुम्हारी माँ को भी अपनी ज़िन्दगी जीने का हक़ नहीं है.. क्या तुम सबब के जैसे खुश रहने का मुझे कोई हक़ नहीं है..

तीनो की hi आँखों में आंसू आ गए..

शिखा:- (रट हुए) माँ आप पापा को छोड़ देंगी क्या..

रूपा:- (रट हुए) माँ प्लीज आप सबब ये न करें.. पापा को धोका मैट दें. पापा हमसबब के लिए कितना कुछ कर रहे han..please आप हमें दुखी न करें..

राज:- (रट हुए थोड़ा घुसा में) माँ मेरा विज्जु भाई आ जाये फिर मैं देखता हूँ क आप कैसे सबब करती हैं.. (मेरी तरफ इशारा करते हुए) फिर मैं देकता हूँ क कैसे आप इस शख्स के साथ ऐसे चिपकती हैं.. मैं .. मेरा भाई विज्जु आ जाये.. फिर मैं इसको देख लूंगा..

राज डेरिंग दिखते हुए बोलै

पूजा डीड और रानी भी ऐसीबदलि हुई सिचुएशन को देख कर दररने लगीं. कहीं उनकी खुशियों भरी लाइफ में फिर से कहीं ग़म तो नहीं आने वाले..

भाभू को भी दुःख होने लगा.. क आज उसने अपने hi बच्चों को रुला दिया था.. लेकिन उसे फिर भी मज़ा बोहत आ राह तह.. वोखुद पर काबू रखते हुए अभी विज्जु का भेड़ नहीं खोलना चाहती थीं.

भाभी:- आप सबब क लिए मैं एक बात और कहना चाहती हूँ. क ये शख्स कोई अजनबी नहीं है न मेरे लिए और नहीं सबब के लिए.. इसलिए आप सबब hi बताएं क ये कौन हैं ...

राज शिखा और रूपा रट हुए भी हैरान हो गए क वो अजनबी को कैसे जानते हैं..

अनुष्का और उसकी बहन बोहत hi ज़यादा कंफ्यूज हो चुकी थीं.. इस सबब बदले हुए हालत को देख कर.. वो दोनों इक साइड चुप करके बैठी हुई थीं..

सब hi आज पहली बार इस शख्स को देख रही thi...wo कैसे बता सकतें थीं.

क आने वाला कौन है..

पूजा दीदी:- (मुझसे) भाई सब आप hi बता दें.... आप कौन हैं...???

भाभी:- पूजा मैं कुछ देर पहले hi तुम्हार रूम में गई थी.. तो मेरा साजन मुझे तुम्हारे hi रूम में मिला था.. मैं अपने साजन से मिल कर बोहत hi ज़यादा खुश हुई कुछ देर बात करने के बाद हम दोनों hi तुम्हारे रूम से निकल कर ड्राइंग रूम में ा gye..mera साजन तुम्हारे hi रूम में था और तुम hi पूछ रही हो क ये कौन हैं. क्या तुम इसे नहीं जानती..

पूजा दीदी:- मैं कैसे जानू गई क ये सख्श कौन है. मैं तो आज पहले बार इसे देख रही हूँ.

मालिकान:- हाँ मालती बोलो कौन है ये शक्श....

भाभी:- मैं क्यों बातों अब सबब hi बताएं.. क ये कौन है.. और इस घर में क्यों है.. मुझे तो ये पूजा के रूम में मिला था..

राज शिखा और रूपा का रोना बंद हो गया ..

सबब रानी और पूजा दीदी को देखने लगे..

रानी और पूजा दीदी की छूट की हवा और पानी जो रात भर में निकला था.. उसका मज़ा और सरूर अचानक से hi ख़तम ुये.. उनकी छूट की ख़ुशी मर्डर गई और उन दोनों की गांड की हवा बंद हो गई.... दोनों की गांड की हवा बंद होने से .. गांड की हवा का दबाओ चेहरे पर बढ़ने लगा और दोनों का hi चेहरा लाल होने लग्ग गया.

भाभी की बात सुन कर सबब hi हैरान हुए थे.. और सवाल भरी नज़रों से रानी पूजा दीदी को देखने लगे.. रानी और पूजा दीदी सबब की नज़रों के तीर अपनी छूट और गांड में घुसते हुए मेहुस करने लगीं.. क अब्ब वो सबब को क्या बताएं.. वो तो सोइ हुई थें और वो कैसे बताएं क ये अजनबी कौन है..........

मुझे अब और भी मज़ा आने लगा था... मैं दिल hi दिल में मुस्कुरा रहा था.. और भाभी अब्ब खुल के रानी और पूजा दीदी को देख के मुस्कुराये जा रही थीं..

बदली हुई सिचुएशन में अब्ब सबब hi भाभी को छोड़ रानी और पूजा डीड को देखने लगे.. और

पूजा दीदी और रानी के तोते hi उड़द गए क अजनबी उसके रूम में था.. और पता नहीं उसने उन दोनों को कैसी हालत में देखा होगा.... और क्या उसने हमें कपडे बदलने से पहले कहीं नंगा तो नहीं देखा था... उनके चेहरे पसीना आने की वजा से भीगने lage..rani और पूजा दीदी के पसीने निकलते देख कर

vijay:-(awaz चेंज करके भाबी से बोलै) ok अब्ब मैं चलता हूँ.. फिर कभी आऊँगा..

ये बोल कर मैं जाने लगा.. तो सब को hi अचानक से जैसे होश आया ..

सबब से पहले शिखा और रूपा और राज ने खुद को संभाला और तीनो ने hi मुझे जाने से रोक दिया और

शिखा:- आप कौन हैं और मेरी माँ के साथ आपका क्या रिलेशन है..

रूपा:- और आप माँ को कैसे पकडे हुए थे.. सही से बताएं वर्ण यहाँ से जाना आपके लिए मुमकिन नहीं है.. अगर जान की सलामती चाहते हो तो सच बताओ.. वर्ण ..

राज कुछ बोलता उससे पहले hi भाभी फिरसे ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.. लेकिन इस बार सबब को hi घस्सा आने लगा था.. सबब का hi सस्पेंस की वजा से खून खुश्क हुआ पड़ा था.. और यहाँ पर कोई कुछ बताना hi नहीं चाहता था......

मैं दिल hi दिल में सबब के hi मज़े ले रहा था.. आज भाभी ने बोहत मज़े कराये थे ..मेरे फेस मास्क में होने से सबब कुछ ज़यादा से बढ़िया से हो गया था..

मुझे इस समय बहुत hi मजा ा रहा था... अनुष्का और उसकी बहन भी सबको दीदे फाड़ फाड़ कर देख रही थी.. उन्हें दो कुछ भी समझ नहीं ा रहा था ..

दोनों hi इस घर में नई थीं.. वो बस देखती hi रह गईं कुछ कर जो नहीं सकती थीं..

रानी और पूजा दीदी की हालत ख़राब होने लगी.. रानी कमीनी छूट नंगी होते hi कैसे शानदार परफॉरमेंस देती है.. और यहाँ वो थुश हो गई थी.. साली कमीनी की छूट का भी यहाँ कॉन्फिडेने ख़तम हो गया था.

और पूजा दीदी की बहार को निकले हुए चुत्तड़ गांड में बंद हो चुकी हवा की वजा से और भी बहार को निकल आये थे..

दोनों के hi पास कोई जवाब नै था....

लेकिन फिर रानी.. ूजा दीदी और सब की परेशानी को देखते हुए मैंने भाभी को इशारा कर दिया.. भाभी ने मुस्कुराते हुए न में सर हिला दिया... वो ये सबब बंद नहीं करना चाहती थीं.. ऐसा मज़ा उनकी लाफ़े में उन्हें कभी भी नहीं आया था...

और सबब के साथ साथ आज भाभी ने अपने hi बच्चों का खून भी खुश्क कर दिया था.. लेकिन फिर भी वो सबब ख़तम नहीं करना चाहती थीं...

भाभी की छूट पर आज मेरी जीब और लुंड के चलने की वजा से रंग hi बदले हुए थे. भाभी सच में hi आज अंदर और बहार से फ्रेश और बोहत hi ज़यादा खुश दिख रही थीं.. एयर एक ऐसा रंग वो अपनी ज़िन्दगी में ले आई थीं.. जिस की वजा से अब्ब इस कोठी में कुछ और भी रौनक लगने वाली थी.......... भाही का ऐसा रूप सबब के लिए hi अच्छा था.. मस्ती वाला.. प्यार वाला... खुल के हंसने वाला.. अपने बच्चों का खून खुश्क करने वाला..........

अब बस बहुत मस्ती हो गई थी इसलिए मैंने टाइम न जाया करते हुए पूजा दीदी के सामने खड़े होकर उनके कान में अपनी आवाज़ में बोलै..

vijay:-didi क्या आपने भी मुझे नहीं पहचाना..

पूजा दीदी के पास hi रानी कड़ी हुई थी.. दोनों hi मेरी आवाज़ को सुनते hi झटके खाने लगी वो मेरी आवाज़ और चेहरे पैर चेंज देखकर और भी ज़यादा परेशां हो गई..

पूजा दीदी और रानी जितना हैरान और परेशां थी.. फिर भभुइ के दिए जाने वाले झटके ने hi उनकी हालत ख़राब करदी थे. मेरे बोलने से और मेरा चेहरा बदल जाने से वो आउट भी ज़यादा झटके खाने लगी..

उनका दिल इतने जहटके बर्दाश्त नहीं कर प् रहा था.. आखरी झटका सब्बसे बड़ा था.. वो इतना शॉकिंग था क वो कभी सोच hi नहीं सकती थीं .. क ऐसा भी कभी हो सकता है क्याआ..

लेकिन फिर पूजा दीदी ने जल्द hi खुद पैर का कण्ट्रोल कर लिया. और एक झटके में hi मेरे गले से लग गई.. पूजा दीदी के मेरे गले लगते हे रानी ने भी मुझे अपनी बाँहों में भर लिया... रानी ने भी मुझे पहचान लिया था..

भाभी के आलावा बाकि सब एक बार फिर से शॉक में चले गए.. वो अभी तक्क भाभी के दिए जाने वाले झटके नहीं सेह पाए थे क एक और झटका सब को लग्ग गया..

पूजा दीदी और रानी का चेहरा एक्ससिटेमेंट की वजह से लाल पद गया था उनका बस नहीं चल रहा था के वो मेरे चेहरे को चूमना शुरू कर दें....

पूजा दीदी:- विजु तुमने ये क्या हुलिया बना रखा है.. ऐसे कैसे तुम एक दम से चेंज हो गए... हममे से कोई भी तुम्हें पहचान नहीं पाया.. इतना चेंज और फिर तुम्हारी आवाज़ ............ इतने झटके खाने के बाद वो मुझपर घुसा करना भूल गई थीं.. वर्ण जैसी आज उनकी हवा टाइट हुई थी.. तो मेरी कहिअर नहीं थी.. लेकिन बचत हो गई..

पूजा दीदी के मुंह से मेरा नाम सुनते hi भाभी एक बार फिर से हंसने लगी और बाकि सब को भी पता चल गया के मैं कौन हूँ..

शिखा रूपा और राज दौड़ कर मेरे पास आये.. और मुझे मरने लगे..

शिखा-:- विज्जु तुम्हें शर्म नहीं आती हमें इतना परेशां करते हुए..

हमारा तो दिल hi बंद होने को आ गया था.. अगर आज हमें कुछ तो जाता फिर...

रूपा:- विजु आज तुमने मा के साथ मिलकर हमारे साथ अच्छा नहीं किया..

इसका बदला तो हम तुमसे लेकर hi रहेगी..

राज:- भाई आपने तो मुझे भी हिला hi डाला था.. मैं आज पहली बार माँ को किसी अजनबी के साथ देखकर इतने ग़ुस्से में आने लगा था.. अगर मुझसे कुछ हो जाता तो..

विजय:- कुछ हुआ तो नहीं न.. ये सब तुम्हारी माँ का काम है..

खुद hi सब के मजे लेना चाहती थी... और तुम तीनो भी देखो आज भाभी कितनी खुश हैं.. देहको उनका चेहरा कितना खिला हुआ है.. वो आज अंदर के कितना हल्का और खुश दिख रहे हैं...... तीनो ने hi अपनी माँ को देखा और फिर भाग कर अपनी माँ के गले लग कर ख़ुशी से रोने लगे..

शिखा अरूपर और राज:- माँ हमने आपसे ज़यादा hi बोल दिया था.. सॉरी हमें माफ़ करदो...

भाभी:- सॉरी मत बोलो मेरे बच्चो.. मुझे तुम तीनो की बातों से ख़ुशी हुई है.. और मेरे बच्चे कितने समझदार भी हैं. और अपने माँ और पापा से कितना प्यार भी करते है.. तुम तीनो तो मेरे दिल के टुकड़े हो.. भला मैं कैसे तुम तीनो को दुखी कर सकती हूँ.. भाभी भी कुछ इमोशनल हो गईं और उनकी आँखों में आंसू आने लगे.........

फिर मैं सब के साथ hi मिलकर बैठ गया और खूब बातें होने लगी सब मुझसे पूछ रहे थे मैंने ऐसा क्यों किया.

फिर मैंने सबको बताना शुरू कर दिया के मैं क्या करने वाला हूँ..

सब मेरी बात सुनकर और भी ज़्यादा हैरान हो गए..

फिर ब्रेकफास्ट तक ऐसे hi बातें होती रही अनुष्का और उसकी बहन भी सब के साथ मिलकर फुल मस्ती करने में लग गई थी... दोनों बहनों की hi जिज्जाक अब ख़त्म हो गई थी........... यहाँ आ आकर उनकी लाइफ कुछ और भी मज़े वाली हो गई थी..

ब्रेकफास्ट के ख़त्म होते hi दोनों बहनों ने हॉस्टल जाने का कह दिया.. अब मेरे पास तो टाइम था nahi..donon बहनों को छोड़ने के लिए नहीं जा सकता था..

इसलिए ड्राइवर के साथ एक सिक्योरिटी गार्ड को भेज दिया..

सब लोगों के साथ बाद में बात करने का सोच कर मैं राजा के पास चल दिया..

जब मैं वहां पहुंचा तो राजा और बाकि तीनो गुंडे से डिटेल निकलवा चुके थे.

मेरा चेहरा बदला हुआ था. चरों hi मुझे देख कर हैरान हुए क ये कौन है.. लेकिन फिर जब्ब मेरी आवाज़ सुनी तो वो भी मारे हैरत के शॉकेड हुए लेकिन फिर जल्दी hi सबब ने खुद को संभल लिया.............

विजय:- राजा इसने क्या कुछ बताया है... राजा :-

इससे जो भी डिटेल मिली है.. वो सब हमने एक पेपर पैर नोट कर ली है..

विजय:- लाओ मुझे दिखाओ.

राजा ने मुझे पेपर थमाया..

मैं गुंडे से शंकर के बारे मिलने वाली डिटेल को देखने लगा..

मुझेब बता था क शंकर कुछ कम् नहीं है.. ज़रूर वो कुछ ज़यादा hi गलत किसम के धंदे करता होगा... शंकर के वही धंदे थे तो आजकल के चूतिये गैंगस्टर किया करते थे.........

साड़ी डिटेल को पढ़ने के बाद मैंने उस गुंडे की तरफ देखा.. वो भी मुझे hi देख रहा था.. मुझे खुद की तरफ देखते हुए पाया तो उसकी आँखों में फिर से दहशत बढ़ने लगी..

vijay:-jo कुछ तुमने बताया है आलावा कुछ और है बताने को..

मेरी बात सुन कर वो चुप हो गया.. वो दरार हुआ था. लेकिन न रहने से कुछ शांत हिओ गया था. और राजा को असबब नहीं बताया था उसन..

मुझे लगा कुछ और भी है जो उसने नहीं बताया...

विजय:- राजा इसने तुम्हे सब कुछ नहीं बताया है. ऐसा करो वो जो सामने ड्रिल मशीन पड़ी हुई है उठा कर लाओ..

ड्रिल मशीन का नाम सुनते hi गुंडा फिर से सीखने लगा

gunda:-nahin नहीं प्लीज प्लीज उसे मुझसे दूर रखो मैं सब बता देता हूँ

विजय:- हाँ बोलो क्या कुछ छुपाया है..........

फिर आधे घंटे तक्क वो बकता रहा... जब कुछ झिझकने लगता तो मैं ड्रिल महसीने को ों करके उसके के चेहरे की तरफ लाने लगता.. वो कुछ भी अंदर छुपा न सका और असबब hi बक्क दिया.............



************************************************************************

TIME:08:38:AM:

शंकर .. धर्मेश और प्रेम तीनो hi ग़ुस्से में थे..




और शंकर अपने आदमियों को गालियां बक्क रहा था.. तीनो hi इस वक़्त दिल्ली सिटी में मौजूद अपने सबब से ख़ास अड्डे पर थे.. रात को जो भी राजा उदय जीतू और अनुपम ने किया था वो जल्द hi शंकर को पता चल गया tha..hamare रवाना होने के 1 घंटे बाद hi शंकर धर्मेश और प्रेम अपने आदमियों को लेकर वहां पोहंच गए थे....................... और फिर वहां की हालत को देख कर शंकर का दमाग ख़राब होने लगा..

आज तक्क किसी ने भी शंकर गैंग के किसी भी अड्डे पर हमला नै किया tha..lekin यहाँ सिर्फ हमला hi नहीं हुआ था.. आअज दी जाने वाली डिलीवरी का सारा hi माल गायब हो चूका था.. ड्रग्स जल चुकी थीं और वेपन गायब थे...

लोस्स तो शंकर बर्दाश्त कर लेता लेकिन उससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ क उसके अड्डे पर कोई आ कर ऐसा सबब कर जाए.. शंकर के आदमियों को मार कर शंकर का माल ले गए थे... शंकर के लिए ये बात सहन करना कमउम्किन नहीं था.. क्यूंकि ऐसा होने से शंकर गैंग की पावर और इमेज कम् हो जाती थी.. और आज शंकर गैंग की इमेज कम् हो गई थी...

धर्मेश और प्रेम भी शंकर की hi तरह से ग़ुस्से में थे................

लेकिन जहाँ अब्ब कुछ नहीं था.. तो कुछ घंटे गुज़र कर अपने मैं बेस पर पोहंच गे थे.... सारी रात hi पीते हुए गुज़री थी..

धर्मेश और प्रेम शंकर को ग़ुस्से में देख कर बोले

प्रेम:- शंकर कौन हो सकता है.. आज से पहले तो किसी ने ऐसी हिम्मत नहीं दिखाई.

धर्मेश:- शंकर दोनों गैंग्स वाले अगर हमारे दुश्मन हैं लेकिन फिर भी वो ऐसा काण्ड नहीं कर सकते.. ये कोई और hi है.. जिसने हमारे अड्डे पर घुस ार हमारा माल भी उदा लिया और हमारा आदमी भी मार दिए..

प्रेम :- और धनुष को भी उठा कर ले गए........ कही वो उससे कुछ उगलवा न लें..

शकर:- नहीं धनुष से कुछ भी उगलवाना मुमकिन नहीं hai..wo मर्डर तो सकता है लेकिन कुछ बोल नहीं सकता...... वो किसी से काम नहीं है.. ऐस hi तो नहीं हमने उसे विजय की फॅमिली के पीछे लगाया हुआ है ...........

धर्मेश:- शंकर फॉर तो धनुष मारा जायेगा..

प्रेम:- हम उस के लिए कुछ नहीं कर सकते..... हम तो ये भी नहीं जानते क वो है कहाँ और उसे लेजाने वाले कौन हैं......... (फिर शंकर से)

और फिर जो हमारे टाउन वाले घर में रुके हुए आदमी मारे गए हैं.. कहीं इस सबब में हर्ष चौहान तो नहीं है..

शंकर:- नहीं हर्ष चौहान नहीं हो सकता.. जब से वो घर खली हुआ है मेरी हर्ष पे hi नज़र है.. हर्ष चौहान या उसके आदमी क्या कर रहे हैं.. मुझे सबब डिटेल मिल रही है.. हर्ष इस सबब में नहीं है.. और रणजीत ऐसा कर नहीं सकता... उसे ऐसा करने की ज़रुरत भी नहीं है ... कुछ और hi बात है जो अभी मेरी भी समझ में नहीं आ रही है.

शंकर गैंग्स अभी raja..uday. जीतू और अनुपम को नहीं जानते थे.. जब पूजा वाले घर में हमला हुआ था तो राजा और तीनो ने hi खुद को छुपाया हुआ था और वैसे भी वो घर के अंदर थे तो शंकर एंड गैंग्स वाले राजा गैंग को नहीं देख सके थे..




************************************************************************




जहाँ मैं पहली बार दो गुंडों को खेलते हुए मारा था.. उसी जगा के पास वाले रोड के दूसरी तरफ 5 किलो मीटर के फासले पर एक फार्महाउस था.. वो एक बोहत hi बड़ा फार्म हाउस था... ये शंकर का दूसरा ख़ास अड्डा था.. जहाँ हमने रात को हल्ला बोलै था.. वो तो बास डिलीवरी देने के लिए एक पॉइंट बना हुआ था ....

यहाँ hi टेक सेकरतीय तो नहीं थी लेकिन फिर भी.. मिलने वाली डिटेल के मुताबिक़ यहाँ अक्सर 30 के करीब गुंडे रहा करते थे......

और यहाँ फार्महाउस में बने बससेमेन्ट में कुछ लड़कियों को किडनैप करके रखा हुआ था था........ और आज उन सबब लड़कियों को मुंबई के लिए रवाना किया जाने वाला था...

मिलने वाली डिटेल के मुताबिए शंकर ने दमाग का इस्तेमाल बढ़िया से किया था... इतने लम्बे सफर के लिए शंकर कंटेनर उसे नहीं किया करता था.. वो हरामी दिल्ली से hi ट्रैन की बोगियों को अपने लिए स्पेशल बुक कर लिया करता था... शंकर इस काम के लिए कई लोगों को मंथली दिया करता था.. शंकर मुंबई से hi अपने लिए ड्रग्स और वेपन अक्सर ट्रैन में hi लाया करता था..

ऐसा आज तक किसी ने नहीं किया था.. तो इस तरफ कम् hi hi किसी का धयान जाता था.. शंकर ने वैसी भी रास्ते में कई लोगों से कोंनेस्टिव भी बनाये हुए थे.

और शंकर की दहशत भी कम् नहीं थी....... शंकर का माल कभी ट्रैन मेसे नहीं पकड़ा गया था.. ये शंकर की गुडलुक थी या शंकर का ब्रेन...

लेकिन शंकर के लिए ये रूट शंकर की इक पोवे रभी बन चूका था... शंकर ने इसी रूट के ज़रिये बोहत कुछ काम लिया था.. शंकर ऐसे hi खतरनाक काम किया करता था..

हमें भी पहले यकीन नहीं हुआ था क ट्रैन के ज़रिये इतना सबब कुछ शंकर कैसे कर लेता है.. लेकिन यहाँ हर दुसरे आदमी भी तो पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है... और ऐसे लोग शंकर के लिए फायदेमंद थे.....




************************************************************************


मुझे ट्रेनिंग में एक बात सिखाई गई थी

*************************************




कोई भी कमज़ोर या डरपोक दिखने वाले आदमी तुमसे डर के मारे ज़िल्दागी की भीग मांगे तो अगर वो माफ़ी का हक़दार है तो उसे माफ़ कार्डो.. लेकिन अगर वो बुरे काम करने वाला है तो उसे कभी भी माफ़ मत करना.. क्यूंकि वो तुमसे अपनी ज़िन्दगी की भीग मांग रहा है. तो उसे अपनी ज़िन्दगी से प्यार है l;ekin किसी और की ज़िन्दगी से नहीं ..... ज़रा भी ध्यान भटका तो वही दररने वाला तुम्हे पल भर में ी मार देगा..

क्यूंकि जब्ब बुरे आदमी की लाइफ खतरे में आती है तो वो गिरगिट की तरह से रंग बदलने लगता है.. और जैसे hi उसकी ज़िन्दगी खतरे से बहार आती है.. तो वो प्लाट क्र वॉर ज़रूर करेगा...........

और फिर यहाँ तो मौजूद सबब कुत्ते जैसी नेचर के थे यहाँ कोई भी माफ़ ी के लायक नहीं था............................




************************************************************************




यहाँ दिल्ली में आते hi जो कुछ मैंने किया tha.pall भर में hi मैंने शंकर के गुंडे का हुलिया बिगड़ दिया. या जो कुछ भी रात भर में राजा और तीनो ने किया था.... वो एक आसान मिशन था.. सबब कुछ हमें प्लेट में रख हुआ hi मिला था..

और अब्ब तो शंकर प्रेम और धर्मेश भी सावदहं हो गए थे.. अब्ब हमारा शंकर ग्नाग के साथ फेस तो फेस आमना सामना होने वाला था..

और ये सबब आसान नहीं था.. हम त्रिनेड हो चके थे.. तो ज़रूरी नहीं था क दुन्या हमारे पैरों क नीचे आ जायेगी.. शंकर गैंग वाले भी ऐसे hi तो नहीं दिल्ली में नंबर 3 पर थे..

मेरी अब्ब तक्क की लाइफ का ये सबब से बड़ा और स्पेशल होने के साथ सतह खतरे से bhar-poor भी था ......... आज हमने शंकर गैंग के दुसरे नंबर पर आने वाले बेस को ख़तम करना था और फिर वहां से क़ैद की हुई लड़कियों को भी उठाना था.

तीसरा यहाँ पर हमारे लिए वेपन भी ढेर सारे थे.. और ये शंकर का एक स्पेशल बेस था तो ज़रूर शंकर ने यहाँ पैसा भी छुपा कर रखा होगा.

और हमें लड़कियों के साथ साथ...... कुछ और भी चाहिए था....



1:-शंकर के बेस की बर्बादी......................

2:- शंकर के गुणों कखत्म.....................

3:- शंकर का यहाँ से मिलने वाला माल...........

4:- शंकर का यहाँ रखा हुआ पैसा...............

**********************************************




आज का मिशन हर लिहाज़ से एक बोहत बड़ा मिशन था... इस मिशन के बाद शंकर गैंग आधा ख़तम और फिर बचेगा.. शंकर का आखरी बेस.. उसके ख़तम होते hi शंकर गैंग भी ख़तम............ और ये सबब मैं आज hi करने वाला था... दिन को फार्महाउस वाले बेस को ख़तम करना.. जहाँ इस वक़्त हम मौजूद थे. और रात ो दूसरा बेस खतम करना था............... शंकर कभी भी सोच भी नहीं सके क एक hi दिन में सके दुसरे बेस पर भी कोई हमला कर सकता है..

और हमें शंकर की इसी सोच को सामने रख कर आज hi शंकर का सफाया करना था............................................................................




************************************************************************
 
थैंक्स..!!

लुंड मिल जाए और भी अपने किसी का.. और फिर मिले भी प्यार से .. तो मैं में बोहत कुछ होता है.. और विजय के लुंड को अपनी छूट पर महसूस आकरके hi भाभी इतनी खुल उठी क अपने hi बचूं के साथ मस्ती करने लगी...

विजय और भाभी ने मिल कर सही से सबब को मज़ा कराया.. और सबके hi पसीने निकाले..

जल्द hi शंकर गैंग खटक हो जाएगा..
 
अपडेट ::: 54

*************




यहाँ आने से पहले मेरी हर्ष uncle..deeksha aunty..natasha दीदी और शीतल से फोन पर बात हो गई थी..

जिस तरह से हालत the..harsh अंकल ने एक सही फैसला किया था क वो खुद और अपनी फॅमिली को लेके 2ंद कोठी पर नहीं आये थे.. शंकर के आदमियों की उनके सभी फॅमिली मेंबर्स पर नज़र है ये बात वो भी जान गए थे.. और इसी लिए वो यहां मुझे कोठी में नहीं दिखे थे..

शंकर गैंग को ख़तम करने के बाद मैंने उनसे मिलने का सोचा था.. क्यूंकि शंकर अपनी नाकामी से बौखलाया हुआ था.. और वो ग़ुस्से में आ क्र कुछ भी बड़ा और खतरनाक कर सकता था.. और किसी की ज़िन्दगी खतरे में आ सकती थी..

दूसरा रात जो हमने किया वो भी कही उसको पता न चल जाए.. अभी हमें सबब कुछ hi सोच समझ कर करना था...

हीरोगिरी खुद के लिए सही रहती है.. लेकिन अगर हीरोगिरी के चक्कर में फॅमिली फँस जाये तो ऐसी हीरोगिरी को गांड में लेना है फिर......

और मुझे सस्ता हीरो बनने का कोई शोक नहीं था........... पहले hi सालों गुज़र गए थे. हालात के शिकंजे में फंसे हुए. अब्ब तो मुझे एक एक क़दम सोच समझ कर उठा न था..........................................

मेरी ins-ranjeet से भी बात हो गई थी.. और हमारे मिशन के पूरे होते hi लड़कियों को यहाँ से निकाल ले जाने के लिए ins-ranjeet और हर्ष चौहान ने कह दिया क वो इन सबब की टेंशन न ले... वो सबब इंतेज़ाम कर देंगे......




*********************************************************************************




हर्ष अंकल से कह कर उनके hi किसी जान पहचान वाले शो रूम से हमने सुव गाडी मंगवा ले थी.. कोठी पर मौजूद गाडी हमारे लिए ज़यादा अच्छी हालत में नहीं थी.. और दूसरा वो रात में कही किसी ने देख न ली हो.. इसलिए उसे नहीं लाये थे.. और हर्ष अंकल की दूसरी कोठी से डायरेक्ट गाडी मंगवाना भी सही नहीं था....

अभी उनपर शंकर की नज़र थी..........

हम पांचो hi अपनी सबब तैयारी के साथ सुव में बैठे फार्महाउस से कुछ फैसले पर पोहंच गए थे.................







मेरी तरह सबब hi नार्मल दिख रहे थे... साआलाअ वटक क्या कुछ नहीं बदल deta.kal के पतीचेर फ्रेंड्स आज एक मंझे हुए एजेंट लग्ग रहे थे...

डर तो जैसे सबब के अंदर से निकल hi गया था.. और उदय साला टपोरी खुद को हीरो समझने लगा था.....






खुद को ऐसे शो करवाता जैसे कुछ भी उस केलिए मुश्किल नहीं है. और हर्र मिशन में वो आराम से सफल हो जाएगा.. कॉन्फिडेंस अच्छा था उदय का.. लेकिन वो भी सबब समझता था.. बास हमें वो एक अलग hi स्टाइल में देखता था.. जैसे वो हममे से में किसी से कम् न हो... वैसे भी हम सबब बराबर hi थे.. लेकिन उदय को खुद को शो करवाने में बड़ा मज़ा आता था. और हम सबब भी उदय के ऐसे स्टाइल के मज़े लेते थे......

उदय:- हाँ विजय अब्ब तो हम पोहंच गए हाँ.. कैसे करना है सबब..

विजय:- पहले सबब मिल कर फॉर्महउसे के आस पास मौजूद ट्रीज पर छड्ड कर अंदर का व्यू देखने की कोशिश करते हैं.. फिर आगे का सोचेंगे .... मैंने गाडी में मौजूद बैग को खोला और उसमे से डिजिटल कमरे निकाले.. वो सबब मुझे देखने लगे.. मैंने अभी किसी को अपने सामान के बारे में नहीं बताया था ...... सबब hi फिर बैग में मौजूद सामान को देखने लगे......

विजय:- बाकी का बाद में देख लेना. पहले स्नैप्स ले लेते हैं...

फार्महाउस से बाहर का व्यू आसान था और अंदर का हम सही से नहीं जानते थे.. शंकर के पालतू से मिलने वाली इन्फो समझ में तो आई थी.. लेकिन हम उसके हिसाब से नहीं अपने हिसाब अपने मिशन को पूरा करना चाहते थे.......... उसके लिए हमें प्लान बनाना था....

हमारा मिशन बोहत hi टेढ़ा था.. ये शंकर का 2ंद मैं बेस था तो सबब सोच क्र hi करना था.....

आधे घंटे में हम सबब ने पूरे फार्महाउस के स्नैप्स ले लिए.. और फिर सबब hi मिल कर सभी स्नैप्स को देखने लगे.. फिर हम आपस में मश्वरा करने लगे...

12:00:पं का टाइम होने वाला था... और हमारे पास 2 घंटे का टाइम था....

मिलने वाली रिपोर्ट के मुताबिक़ लड़कियों को 2 बजे यहाँ से निकला जाने वाला था..

पहले हमने सोचा क क्यों न जब्ब वो बेस से बहार ाएँ.. तो उन पर हमला क्र दिया जाए.. लेकन इससे बेचारी मासूम लड़कियां मारी जा सकती थी.. और ऐसा रिस्की काम मुझे पसंद नहीं था.. इसलिए हमने उनकी डिलीवरी से पहले hi सबब गुंडों को मार कर लड़कियों को बचने का सोचा..

राजा:- राजा तो फिर क्या प्लान है...

मैं स्नैप्स को देख कर कुछ प्लान बनाने में लगा हुआ था.. मश्वरा हमने कर लिया था और सबब के hi अलग अलग प्लान थे... किसी ने एक बताया तो किसी ने 2 प्लान बता दिए the..abb हमारे पास उन सबब प्लान में से जो परफेक्ट था वो चूसे करना था...

विजय:- राजा अभी 5 मिंट रुको मैं कुछ और भी सोच रहा हूँ..

उसे:- विजय क्या सोच रहे हो.. हमें बताओ.. शायद कुछ ाचा प्लान बन जाए..

vijay:-detail से जो बात पता चली है.. उस हिसाब से अंदर हर वटक 30 के करीब गुंडे रहते हैं. तो आज डिलीवरी देने का समय है.. तो मेरा ख्याल है क आज कुछ और भी गुंडे होंगे.. और फिर रात को हुए हमले की वजा से हो सकता है क शंकर ने अपने सभी अड्डे पर सिक्योरिटी बढ़ा दी हो..

राजा:- तो इससे से क्या हुआ..

विजय:- राजा हमें अचानक से तो अंदर जाना नहीं है. तो मैं सोच रहा हूँ..

क स्नाइपर गन के फार्महाउस से 300 मीटर की दूरी पर मौजूद दरख़्त पर चढ़ कर अंदर मौजूद जितने गुंडे मारे जा सकते हैं. उनको मार दिया जाये. अगर हमने सही से सबब कर लिया तो. चाँद मिंट में hi हम शंकर के कई गुंडों को मार गिराएंगे.

लेकिन इस में खतरा भी हो सकता है. अगर हमने ने देर की तो वो हमे नहीं छोड़ेंगे.. दरख्तों पर हमारा ज़यादा देर सेफ रहना भी मुमकिन नहीं है.

मेरी बात सुन कर तीनो hi सोचने लगे.. क क्या ये सही रहेगा... रिस्क तो फार्महाउस के अंदर घुसने में भी होगा.....

राजा:- ठीक है अगर हम ऐसा करते हैं तो फिर तुमने इससे आगे का क्या सोचा है.

विजय:- हममे दो इक साइड के ट्रीज पर चढ़ कर स्नाइपर से गुंडों को मारेंगे तो बाकी के तीन पीछे से अंदर घुसने की कोशिश करेंगे..

हमले की वजा से सबब hi फायरिंग वाली साइड में ध्यान देने लगेंगे. तो बाकी के तीन अंदर घुस कर कोई सेफ जगा ढून्ढ कर चुप जायेंगे... जैसे hi उनको कोई सेफ जगा मिलेगी.. दरख़्त पर छाडे हुए दोनों नीचे उतर कर खुद को सेफ रखेंगे..... फिर अंदर की बदली हुई सिचुएशन के हिसाब से हम आगे का सोचेंगे. इस बीच हम सबब एक दुसरे से कॉन्फ्रेंस कॉल के ज़रिये राब्ते में रहेंगे.............

मैंने सबब डिटेल में बता दिया............ था तो रिस्क hi लेकिन सबब करना भी तो था.. इस तरह न सही किसी और तरह से...

तीनो फिर से सोच में पद गए.. कुछ देर सोचने के बाद

उदय:- ठीक है लेकिन अंदर जाने वाले 3 में से एक मैं होंगे...

उदय अपने हीरोगिरी स्टाइल में बोलै और फिर हम सबब हस्सन लगे..

कुछ देर बाद जेतु और अनुपम दरख्त पर चढ़ कर निशाना लगाने के लिए मान गए.

राजा मैं और उदय अंदर जा कर अपना कण्ट्रोल बनाने की कोशिश करेंगे...

फिर हम सबब ने अपनी अपनी तैयारी की और अपनी अपनी मंज़िल की तरफ चल दिए....




********************************************************************************




जीतू और अनुपम दोनों अलग अलग ट्री पर छाडे हुए थे. और वहां से अंदर का सबब देख रहे थे.. दोनों को hi 12 गुंडे नज़र आ रहे थे.. अंदर और कितने हैं. वो नहीं जानते थे.. स्नैप्स में चलते फिरते टोटल 20 के करीब गुंडे दिखे थे....

जीतू और अनुपम मेरे बोलने का hi वेट कर रहे थे... जब्ब हम तीनो भी किसी ऐसी जगा पर पोहंच गए जहाँ से अंदर जाते हुए खतरा कम् था.. स्नैप्स ले लेने से हमें बोहत आसानी हो गई थी.......

पूरा फार्महाउस 5 एकर पर पहला हुआ था.. और फार्म हाउस की बुल्डिंग सेण्टर में बानी हुई थी लेकिन एक साइड दीवार से 8 10 फ़ीट के दूरी पारर कुछ रूम बने हुए थे. जिन में गार्ड्स रहते थे........ हमारा काम था दीवार के पास गार्ड्स के रूम के ज़रिये नीचे उतरना.. क्यूंकि जैसे hi जीतू और अनुपम गोलियां चलते वो सबब रूम खली हो जाते और हमारे लिए आसानी बन जाती ...

फार्महाउस की दीवार 10 फ़ीट ऊंची थी. दीवार पर चढ़ना हमारे लिए मुष्किल नहीं था.. हमारे पास एक रस्सी थी और रस्सी के साथ एक हुक बंधी हुई थी.

मैंने सबब तैयारी की हुई थी..

विजय:- हाँ जीतू बताओ इस वक़्त तुम्हे कितने गुंडे देख रहे हैं..

जीतू:- विजय मेरे सामने िक वक़्त 12 गुंडे हैं.. और हम दोनों ने hi उन सबब को अपने निशाने प् रखा हुआ है..

विजय:-- और अनुपम तुम्हारी क्या सिचुएशन है....

अनु:- मुझे भी जीतू की hi तरह से दिख रहा है...

विजय:- ok तो फिर ठीक है.. तुम दोनों खुद में डीडे करके जिसने जिस को मारना है वो तय करलो..

कोशिश करना क सामने आने वाला हर एक गुंडा फ़ौरन hi मरता जाए.. लेकिन अगर वो गोलियां चलाये और रिस्क बने तो फ़ौरन hi नीचे उतर का खुद को सेफ कर लेना..... उनके पास भी तो लेटेस्ट गन्स हैं.. अब उनका निशाना कैसा है.. वो तो नहीं पता लेकिन रिस्क ज़यादा मैट लेना.. और फिर जैसे hi दीवार के पैसा वाले रूम के गार्ड्स बहार निकलें मुझे बता देना...... सबब समझ गया ना.

जीतू :- हाँ सबब समझ गया.. ok तो फिर मैं और अनुपम करें अपना काम शुरू.

मैंने राजा और उदय को देखा तो दोनों ने hi thumbs-up का सिग्नल दे दिया....

विजय:- ok जीतू अंडा अनुपम "कैर्री ों" एंड गुडलुक..

jeetu..aunpam:- ok .. गुडलुक

जीतू और अनुपान ने अपना काम शुरू कर दिया और 10 सेकंड में hi चलाई जाने वाली 4 गोलियों से चार गुंडे मारे गए.. उन चारों के hi सीने खून से रंगने लगे.. फार्महाउस के अंदर हड़बड़ाहट सी मच गई और जब्ब तक कोई समझता.. अगले 10 सेकंड में 4 और मारे गए.. जीतू और अनुपम का निशाना बढ़िया था...

8 मारे गए तो बाकी के 4 नीचे लेट गए.. और गोलियां कहाँ से चल रहा हैं. ये देखने लगे.. लेते हुए पर निशाना लगाना आसान नहीं था.. लेकिन फिर भी जीतू और अनुपम ने कोशिश की तो एक गुंडे की टांग में गोली लगी तो दुसरे की छाती के पास से गुज़र कर ज़मीन पर लगी..

तीनो hi गुंडों ने लुढ़कना शुरुर कर दिया ...... अब्ब वो सावधान हो गए थे. और खुद को बचने में लग्ग गए थे..

अब्ब जीतू और अनुपम के लिए उनका निशाना बनाना आसान नहीं था. जीतू और अनुपम उनको छोड़ कर बाकी के फार्महाउस में मौजूद गुंडों को देखने लगे.. दीवार के पास वाले रूम्स से 3 गुंडे और निकले तो

जीतू:- विजय 9 गुंडों को गोलियां लग चुकी हैं और दीवार वाले रूम्स से 3 गुंडे बहार निकले हैं.

विजय:- ठीक है अब्ब तुम जल्दी से खुद को सेफ रखते हुए देखो अगर कोई और सामने आता है और उसे मारना आसान है तो मारो वर्ण नीचे उतर जाओ..

अब्ब वो सबब hi मिल कर तुम्ह दोनों को टारगेट करेंगे या बहार निकल कुछ करने का सोचेंगे.. इसलिए जल्दी कारु..

जीतू:- ठीक है विजय..

ये बोल कर जीतू ने एक नज़र सामने देखा और

जीतू:- अनुपम हमें क्या करना चाहिए..

अनु:- मेरा ख्याल है 5 सेकंड में एक कोशिश और करते हैं फिर नीचे उतर जाते हैं..

जीतू:- ok

मेरे कुछ बोलने से पहले hi दोनों ने फिर देर न करते हुए गोलियों चलनी शुरू कर दीं.. रूम से निकले हुए दो गुंडे ढेर हो गए.... लेकिन अब्ब फार्महाउस की बिल्डिंग में से किसी ने दोनों को टारगेट करना शुरू कर दिया..

2 गोलियां दोनों के पास से ""शुओं"" कर के गुज़र गईं..

अनु:- जीतू उतरो नीचे जल्दी से..

जीतू ने अनु की बात पूरी होने से पहले से अपनी जगा छोड़ दी .. और नीचे उतरना शुरू कर दिया.. दोनों ने कुछ सेकण्ड्स और रुक कर गलती करदी थी..

मैं सबब सुन रहा था...

विजय:- गन्स को नीचे फ़ेंक का छलांग लगा दो.. उतरना सेफ नहीं है अब्ब तुम दोनों hi नज़रों में आ गए हो...

मैंने उदय को रस्सी दीवार अपर फेंकने का सिग्नल दे दिया....

जीतू और अनुपम अब्ब तक 5 फ़ीट नीचे उतार चुके थे और 10 फ़ीट की हिघ्त अभी भी थी.. मेरी बात सुनते hi दोनों ने गन्स को नीचे फ़ेंक दिया और नीचे ज़मीन पर छलांग लगा दी..

अगर दोनों hi छलांग न लगते तो अब्ब की बार कई गोलियां hi दोनों के सीने में उतर चुकी होती..

क्यूंकि लुढ़क रहे गुंडे भी खुद पर काबू पा चुके थे.. और फार्महाउस की बिल्डिंग में मौजूद सबब गुंडे भी दोनों को टारगेट करने में लग गए थे..

दोनों बाल बाल बचे थे...

दोनों ने hi बैलेंस बनाये बगैर hi चलंग लगाई थी.. और अनुपम का पाऊँ कुछ ज़यादा hi ज़मीन पर डब्ब गया.. जिस वजा से उसकी चीख निकल गई..

जीतू ने अपनी गन को उठा और भाग कर अनुपम के तरफ गया..

जीतू:- क्या हुआ अनु चीखे क्यों???

अनु:- लगता है मेरा पाऊँ मुद गया है..

जीतू:- चलो यहाँ से भागो.. दर्द को और पाऊँ को बाद में सोचना... वो सबब बहार आने वाले होंगे..

अनुपम खड़ा हुआ और थोड़ा सा लड़खड़ाया.. उसकी हलकी सी चीख निकल गई..

लेकिन यहाँ अभी अपने पेअर को देखने का टाइम नहीं था.. जीतू ने अनुपम की भी गन उठाई और फिर दोनों hi गाडी की तरफ भागने लगे...

अब्ब तक्क राजा और उदय अंदर पोहंच चुके थे.. मैं अनुपम की वजा से रुक गया था.. क कहीं उन दोनों को मेरी ज़रुरत न पद जाए..

विजय:- राजा तुम दोनों खुद को सेफ रख कर गार्ड्स रूम चीख करो और फिर मुझे बताओ.. दूसरा दूरबीन से देखो क कोई हमें इस तरफ से देख तो नहीं रहा.. कही ऐसा न हो हम अंदर जाते hi फँस जाएँ....

5 मिंट में hi जीतू और अनु गाडी तक पोहंच गए और राजा एंड उदय ने भी सबब ""ok है"" बोल दिया...

vijay:(jeetu से) जीतू तुम गाडी ले कर उन का ध्यान भटकाओ.. वो ज़रूर बहार निकल कर तुम्हारा पीछा करेंगे.. अगर ऐसा हुआ तो मुझे बताना.. लेकिन कहीं रुकना मैट... जितना हो सके उन को उलझना और अगर खतरा लगे.. तो कोठी की तरफ निकल जाना..

जीतू:- लेकिन विजय तुम्हारा राजा और उदय का क्या ???????????

विजय:- वो सबब तुम मैट सोचो और टाइम जाया मैट करो.. जैसा कहा है वैसा hi करो..

जीतू:- ok

मैंने जीतू को गाइड करके दीवार पर चढ़ने लगा लेकिन उससे पहले hi मैंने राजा से पूछ लिया था.......

मैंने अंदर पोहचते hi रस्सी को हुक समेत दीवार से अलग किया और फिर राजा और उदय के पास पोहंच गया.....

विजय:- हाँ राजा कैसा रहा सबब.. सेफ जगा कौनसी है...

राजा:- खुद hi देख लो...

मैंने राजा से दूरबीन ली और देखने लगा... वैसे तो सबब hi कुछ फैसले पर नज़र आ रहा था.. लेकिन दूरबीन से व्यू स्पेशल था और हमें एक एक चीज़ पर ग़ौर करना था....

गार्ड्स रूम 4 थे और देवर से 8 फ़ीट की दूरी पर थे. हम तीनो hi इस वक़्त उन रूम्स के पीछे थे... क्या सोच कर ये रूम बनाये गए थे.. इन रूम्स की वजा से

किसी को अंदर आ कर छुपने की जगा आसानी से मिल सकती थी...........

अगर ये शंकर का दूसरा बड़ा बेस था तो यहाँ की सुरक्षा क्यों इतनी कम् थी..

खैर जो भी हो.. ये सोचने का टाइम नहीं था मेरे पास..

मैंने दूरबीन से सामने देखा तो दो गाड़ियों में 8 गुंडे सवार हो कर बहार जाने के लिए निकलने वाले थे........ राजा ने पहले hi जीतू को बता दिया था क गुंडे उन के पीछे आने वाले हैं.. इसलिए कम् hi टेंशन थी..

11 गोलियों का निशाना बन्न गए थे.. और 8 बहार जाने के लिए तैयार थे.. तो मतलब 19 गुंडे कम् हो गए थे... मतलब अब्ब हमें ज़यादा से ज़यादा 15 और गुंडे मिल सकते थे.. अगर इससे ज़यादा न हुए तो ... फिर मैं फार्महाउस की बिल्डिंग को अच्छे से देखने लगा..

दो मंज़ला बुल्डिंग थी और उसके एक पोरशन में कम् से काम भी 20 रूम्स तो होंगे hi.. मैं खिड़कियों में से अंदर देखने लगा... तो मुझे ऊपर वाले पोरशन में एक बाँदा दिखा जो फोन पर किसी से बात कर रहा था.. ज़रूर शंकर से hi बात क्र रहा होगा..

उसके फोन के दौरान hi दोनों गाड़ियां बहार निकल चुकी थीं..... मैंने फिर दुसरे तरफ देखने लगा.. लेकिन मुझे कोई और नहीं दिखा तो मैंने फिर उस फोन वाले को देखने लगा.. लेकिन इस बार वो नहीं दिखा मतलब उसने फोन बंद कर दिया था.. या कहीं और चला गया था..

फिर मैंने नीचे देखा तो बिल्डिंग के बहार मुझे 3 गुंडे दिखे जो आस पास देख रहे थे.. उनके हाथों में गन्स थीं. मतलब अब्ब वो सावधान हो गए थे..

विजय:- अब्ब यहाँ से फिलवक्त हम हिल भी नहीं सकते.........

राजा:- मैं भी सबब देख रहा हूँ. हमें भी कोई जल्दी नहीं है..

मैंने फिर नीचे के फ्लोर पर देखने लगा तो फर्स्ट फ्लोर का हाल दिखा मुझे..

जहाँ वही आदमी अपने सामने 15 के करीब गुंडों पर अपना ग़ुस्सा उतार रहा था..

अभी हमारे लिए कुछ भी करने का समय नहीं था.....

मैंने दूरबीन अपनी आँखों से हटाई और

विजय:- राजा यहाँ से हमारे कूदने के निशान मिटा दो.. और कोशिश करो क हमारे परिरों के निशान न बन्न पाएं...

राजा और उदय नीचे देखने लगे .....




**********************************************************************************

लोकेशन शंकर बेस 1

*************************




शंकर को जैसे hi पता चल क उसके सिटी से बहार वाले बेस पर भी हमला हुआ है तो वो एकदुम्म से बोखला गया.. उसके पास hi धर्मेश और प्रेम भी बैठे हुए थे..

शकर के हाथ में फोन था और कोई उसे इन्फो दे रहा था क हमला हुआ है और इतने मारे गए हैं......

प्रेम ने उठ कर अलमारी से वोडका की बोतल निकली और एक गिलास में भर कर गलास शंकर के सामने कर दिया.. शंकर ने प्रेम को आँखों hi आँखों में थैंक्स बोलै और एक hi सांस में वो साड़ी वोडका अपने अंदर उंडेल ली..

अब शंकर कुछ रिलैक्स था... और उसका दमाग चलने लगा...

शंकर:- सूरी इस वक़्त बेस पर कितने आदमी हैं हमारे..






सूरी:- बॉस इस वक़्त बेस पर टोटल 40 के करीब आदमी हैं हमारे जिन में 11 तो गए.. लेकिन

शंकर:- लेकिन क्या??

सूरी:- बॉस वो दो गाड़ियों में हमारे 8 आदमी उन हमला करने वालों का पीछे करने जाने वाले हैं..

शंकर:- no..no..no.. सूरी ऐसा मैट करना.. उन्हें जाने मैट देना... बेस पर जितने भी आदमी हैं सबब को सावधान रहने को बोलो.. मैं कुछ और आदमी भेजता हूँ.. लेकिन अभी कोई भी बेस से बहार न जाए..

सूरी:- ok बॉस.....................

शंकर ने कॉल ऑफ करके फोन साइड में रख दिया.. और दोनों के सामने रखे हुए सोफे पर जा के बैठ gaya....shankar ने बेल्ल बजा कर किसी को अंदर बुलाया और कुछ आदमियों को बहार वाले बेस पर भेजने को बोल दिया......

शंकर सोचने लगा क बात उतनी भी सीढ़ी नहीं है जितना वो समझ रहा था.. कौन ऐसा है जो उसे टारगेट करने में लगा हुआ है..

प्रेम:- अब्ब क्या सोच रहे हो शंकर..

शंकर- प्रेम मैं सोच रहा हूँ क कौन है वो जो हमें टारगेट करने में लगा है.. रात का हमला और फिर अभी बेस पर जो अटैक हुआ है.. कुछ तो ऐसा है जो मुझे समः नहीं आ रहा..

धर्मेश:- शंकर यार आज हमारी लड़कियों वाली डिलीवरी भी तो है..

प्रेम:- हाँ आज तो सब को मुंबई के लिए भी भेजना था.. कहीं ये सबब उसी के लिए तो नहीं हो रहा... और रात वाला हमला भी शायद उसी वजा से हुआ हो ....

शंकर:- कुछ तो ऐसा है जो अभी मुझे समझ नहीं आ रहा.. तुम दोनों ऐसा करो के आदमियों के साथ बहार वाले बेस पर चले जाओ.. और मैं खुद को कुछ रिलैक्स करके अपना दमाग लड़ता हूँ. साला कल रात से hi बंद हुआ पड़ा है.. अभी मुझे सही से समझ में नहीं आ रहा.. और एक बार फिर से हर्ष चौहान और रणजीत की मूवमेंट की खबर भी लो..

दोनों:- ठीक यही शंकर हम जाते हैं और देखते हियँ क कौन है और आगे क्या करने वाला है हमारे साथ..

प्रेम और धर्मेश दोनों hi चले गए और शंकर ने बेल्ल बजा दी.. एक आदमी अंदर आया ..

shankar:-julie को बुलाओ..

5 मिंट में hi जूली आ गई........

जूली:- सर आपने मुझे बुलाया है..

शंकर जूली को आते देख कर खुश हुआ और

शंकर:- जूली तुम्हे भी पता चल hi गया होगा क आज hi दूसरा अटैक भी हुआ है तो इस वक़्त दमाग काम नहीं कर रहा.. और वैसे तुम्हारी छूट के दर्शन किये हुए भी कितने दिन हो गए हैं.. शायद इसी वजा से दमाग काम नहीं कर रहा..

जूली शंकर की बात सुन कर मुस्कुराई




और फिर बड़े hi स्टाइल में अपने कपडे उतारने लगी. जूली कपडे उतार का नीचे बैठ गई और अपने पैरों को खोल कर शंकर को सेदुए करने लगी.. शंकर जूली के अंदर से घायल होने लगा.. शंकर का लुंड टाइट होने लगा...



जूली ने कुछ शनकर को अपनी छूट के दर्शन दिए .. जब्ब शंकर की हालत ख़राब होने अलगी तो उठ कर शंकर के पास गई.... शंकर का लुंड जूली को नंगा होते और जूली के कातिल अंदाज़ को देखते hi ठुमके मारने लगा था ...

जूली ने शंकर के सामने नीचे बैठ क्र शंकर की बेल्ट खोलनी शुरू की .. कुछ hi देर में शंकर

की बेल्ट के साथ साथ पेण्ट की ज़िप भी खुली पड़ी थी.. शंकर ने थोड़ा सा उठ कर अपनी पेण्ट को नीचे सरकाया तो जूली ने शंकर के लुंड को अपने हाथ में लेते हुए शंकर की आँखों में देखा.. शंकर बावला होने लगा.. वो चाह रहा था क जूली फ़ौरन hi उसके लुंड को अपने मोहन में ले ले.. लेकिन जूली ने शंकर को तड़पना शुरू का दिया......... जूली ने पास की टेबल पर राखी हुई वोडका की बोतल उठाई और फिर वोडका का ढक्कन खोल कर शंकर के लुंड पारर उंडेलने लगी.. शंकर को जूली के ऐसे hi स्टाइल मार दिया करते थे.............

जूली ने बड़े hi कातिल अंदाज़ में वोडका से भीग चूका शंकर का लुंड अपने मोहन में लिया और वोडका के साथ साथ शंकर के लुंड का मज़ा लेने लगी...

जूली मज़ा ले रही थी या शंकर दे रही थी..

लेकिन शंकर पागल होने लगा और उठ उठ कर जूली के मोहन में अपने 6.5" के लुंड को उतरने की कोशिश करने लगा.. अब्ब शंकर जूली के मोहन में लुंड समेत तो घुस नहीं सकता था.. लेकिन वो कोशिश में लगा रहा..




शंकर के लिए अपने लुंड को काबू करना आसान नहीं रहा था.. जूली की 5 मिंट की चुसाई ने hi शंकर के लुंड का सारा वीर्य hi निकाल दिया.. जुलीले का मोहन शंकर के लुंड से निकलने वाले वीर्य से भर गया...



शंकर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगा..

और जूली शंकर को देख कर मुस्कुराने लगी.....

जूली जानती थी क अब्ब शंकर 4 गोलियां वियाग्रा की खा कर 2 घंटे तक उसकी छूट की अच्छे से सेर्विए करेगा..... जूली शंकर के इलावा प्रेम और धम्रेश की भी पर्सनल रखेल थी........... शंकर को लंदन में उसके एक दोस्त ने जूली को गिफ्ट में दिया थी..

जूली भी एक कुट्टी चीज़ थी.. फिघ्टन एक्सपर्ट थी ..... शंकर धर्मेश और प्रेम कभी जूली से ज़बरदस्ती नहीं किया करते थे.. जूली khatar-naak भी थी..

और छूट में लुंड लेने की शैदाई भी.. लेकिन खुद को सस्ता नहीं करती थी..

जूली को इन तीनो से कोई परेशानी नहीं थी... क्यूंकि वो खुद एक जुर्म की दुन्या की इंसान थी ..... कोई था नहीं उसका तो उसने यही काम करना शुरू कर दिया.. अगर चाहती तो यहाँ से भाग सकती थी.. लेकिन उसे यहाँ कोई परेशानी नहीं थी..

जूली ने शंकर की शर्ट को पकड़ा और एक झटके में hi पहाड़ दिया और फिर शंकर को बीएड की तरफ चलने का ईशर किया.. जूली के मोहन में अभी भी शंकर के लुंड का पानी था.... शंकर जूली के इशारे पर चलते हुआ बीएड पर जा कर लेट गया.

और जूली ने अपने मोहन में लिया हुआ शंकर के लुंड का पानी शंकर के सीने पर ढेर कर दिया.. और फिर वो शंकर की आँखों में देख कर शंकर के सीने पर पड़े शंकर के hi लुंड से निकला हुआ पानी जो जूली ने अपने मोहन से निकल कर शंकर के सीने पर डाला था.. जूली उसे चाटने lagiiiiiiiiiiiiiiiiii...

कुछ देर में जूली इस काम से फ्री हुई तो पास की टेबल से टाइमिंग की गोलियां निकाल कर शंकर को दीं और शंकर ने वोडका के साथ वो 4 गोलियों अपने पेट में उतार लीं.................

अब शंकर का लुंड कुछ hi देर में तूफ़ान लाने वाला था.... ये सोचते hi जूली की

छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया ............था.........................................................




**********************************************************************************




 
भाई कोशिश तो है .. लेकिन टाइम की कमी और मेरे इंटरनेट की अक्सर रहने वाली डिस्टर्बेंस की वजा से GIF के लिए टाइम बोहत लगने लगता है... जिस वजा से अपडेट कभी कभी 30 मिंट भी लग जाते हैं पोस्ट करने में .... लेकिन GIF की वजा से अक्सर लेते हो जाता हूँ .. और पोस्ट अधूरी रह जाती है.. मजबूरन GIF को छोड़ के पिछ ऐड करके hi अपडेट पोस्ट करनी पड़ती है............... अब्ब GIF का लिंक ज़रूर ऐड करूँगा..........

ोथेरविसे कोशिश है क जल्द से जल्द GIF दे कर आपका भी मैं अच्छा करून...

थैंक्स फॉर थे सुगेसटिव..............!!!!!!!!!!!
 
थैंक्स..!!

विजय का शंकर को जल्द से जल्द ख़तम करना ज़रूरी है तो .. विजय के खुद के लिए भी जल्द hi शंकर का ख़तम हो जाना और उसके गैंग का भी नाम ो निशान ख़तम होना ज़रूरी है.. शंकर ऐसे hi तो नहीं जूली की छूट में घुसा .. 1 या 2 बेस ख़तम हो जाने से शंकर को लोस्स तो होगा hi लेकिन अगर शंकर के जूली की छूट के घुसते hi शंकर के दमाग ने काम करना शुरू कर दिया.. तो विजय के लिए शंकर से भीड़ पाना आसान नहीं होगा.. अहीर वो भी तो सालों से अपने गैंग को चला रहा hi.......
 
अपडेट::: 55

*************

*******************************************************




जीतू और अनुपम हामरे साथ कॉन्फ्रेंस के ज़रिये राब्ते में थे.... और राजा ने जीतू को बता दिया क फार्महाउस से 2 गाड़ियां उसके पेशे लग गई हैं..

जीतू और अनुपप दोनों hi गाडी में बैठ कर गाडी को भगा कर ले गए थे...

अनुपम का पाऊँ वज़न पड़ने से डब्ब गया था लेकिन

अभी अनु के लिए अपने दर्द को याद रखने का टाइम नहीं था.. जीतू ने स्टेरिंग संभल लिया और अनु एक्शन के लिए तैयार हो गया ......

कुछ hi देर में वो कुछ फासला तय करने का बाद एक मोड़ की साइड में गाडी रोक कर कड़े हो गए....

जीतू:- विजय मैं और अनु एक मोड़ के पीछे आ कर उनका वेट कर रहे हैं.

और वो जैसे hi मोड़ के पास पोहंचे तो हम उन्हें उदा देंगे... अब तुम बोलो क्या ऐसा सही रहेगा या.....

मैं अब्ब तक्क दूरबीन हटा कर सामने hi देख रहा था...

विजय:- जीतू वो मोड़ सेफ भी है और नै भी.... मैंने यहाँ से किसी को शंकर को फोन करते हुए देखा है.. और तुम आगे का देखोगे तो पीछे से घेरे में आ जाओगे.... और फिर दोनों का बच पाना मुमकिन नहीं रहेगा..... हाँ अगर गाडी को भगाते हुए अनु कुछ कर सकता है तो ज़रूर करो .. वर्ण एक जगा खड़े रह कर उनसे लड़ना सही नहीं है.....

जीतू ने फ़ौरन hi गाडी का स्टेरिंग संभाला और

जीतू:- हाँ विजय तुम भी ठीक कह रहे हो. वैसे यहाँ से अगर शंकर के और आदमियों के न आने का चांस होता तो हमारा पीछा करने वाले ज़रूर मारे जाते.

जीतू ने गाडी भगाणी शुरू करदी.. और अनुपम ने मशीन गन संभल ली..

अनु ने बैक दूर का एक शीशा डाउन कर दिया और मशीन गन को सेट करके पीछा करने वालों के लिए क़यामत बनने के मूड में आ गया ......

अनु:- विजय वो हमारे पीछे लग गए हैं..

विजय:- कितना फ़ासला है तुम्हारा उनसे..

अनु:- मेरे ख्याल से 250 मीटर का होगा.....

विजय:- इससे तो तुम दोनों भी उनकी रेंज में हो और उनके टारगेट में आ सकते हो.. कुछ भी करने से पहले खुद को देख लेना .. वो सबब मारे तो जायेंगे hi ..

अभी नहीं सही कुछ देर में सही लेकिन रिस्की चांस मैट लेना..

अनु:- ok

एंटी देर में गोंडो की गाडी से फायरिंग शुरू होने लग्ग गई थी.. और जीतू गाडी को ज़िगज़ैग करने की बजाये की गाडी को सपेद देने लगा. कुछ बुलेट्स गाडी के पीछे वाले शीशे से नीचे गाडी की बॉडी से टकराएं..

जीतू और अनु नीचे झुक गए.... जीतू ने गाडी की स्पीड देनी शुरू करदी..

विजय:- क्या हुआ गोलियों की आवाज़ क्यों आई......

अनु:- विजय उन्हों ने फायरिंग शुरू करदी है.....

विजय:- जल्दी से उनकी रेंज से निकलो....

जीतू ने गाडी का फासले गुंडों से बढ़ाना शुरू कर दिया... और कुछ hi देर में उनकी रेंज से बहार हो गया...

अनु के लिए उनपर गोलियां कहलाना इजी नहीं था.. इसलिए उसने चांस नै लिया.

एक बार मेरी बात न मान क्र दरख़्त पर उन दोनों ने गलती करदी थी.. अब्ब जीतू कोई और गलती नहीं करना चाहता था..... इसलिए फिलवक्त गोंडों को टारगेट करने की बजाये वो खुद को और अनु को बचाने लगा ....

जीतू ने फासला बढ़ा कर गुंडों को उलझाए रखा.......

10 मिंट बाद hi गुंडों की गाडी एकदुम्म से रुकने लगी...

अनु:- जीतू गुंडों की गाड़ियां रुक गई हैं..

विजय:- क्या हुआ अनु ..

अनुपम:- विजय उनकी गाड़ियां रुक गईं हैं.. और मेरा ख्याल है क वो वापिस जाने लगे हैं..

उदय:- मैं समझ गया विजय .. ज़रूर शंकर ने उन्हें वापिस आने के लिए कहा होगा.. जीतू अब्ब तुम उनके पीछे लग्ग जाओ और उनको वापिस मैट पोहचने देना... अगर मशीन गन से टारगेट कर सकते तो .. तू उड़ा दो सबब को .. वर्ण आने दो उनको वापिस फार्महाउस में.. हम हैं न यहाँ उनका सवागत करने के लिए ....

उदय बीच में hi बोल पड़ा.. और मैं सोचने लगा क अब्ब क्या करना चाहिए....

ज़रूर शंकर बैकअप भेजेगा और फिर सबब hi उनके चुंगुल में फँस जायेंगे.

मेरे चुप रहने से सबब hi चुप हो गए..

राजा:- विजय क्या सोच रहे हो...

विजय:- राजा शंकर के बैकअप के लिए सोच रहा hoon...abb डायरेक्ट ऑपरेशन के इलावा कोई रास्ता नहीं है..

उदय:- वही तो मैं भी कह रहा हूँ.. क उनको वापिस hi न आने दो..

राजा:- उदय ये सबब इतना भी आसान नहीं... और विजय के कहने के मुताबिक़ अगर सच में hi शंकर ने बैकअप भेज दिया तो... जीतू और अनुपम के साथ साथ हम तीनो भी पहनास जायेंगे......

विजय:- और बैकअप के आते hi फार्महाउस की सुरक्षा भी बढ़ जायेगी... फिर हमारे लिए कुछ भी करना आसान नहीं रहेगा.. और मेरा ख्याल है क लड़कियों की सुपली भी अब्ब कैंसिल हो जाएगी.........

राजा:- तो फिर अब क्या करना है.. इस मिशन को नेक्स्ट के लिए रख लें..

विजय:- नहीं नेक्स्ट के लिए कुछ भी नै.. जो भी करना है अब्ब फोरि hi करना है.

vijay:-(jeetu से) जीतू उन्हें वापिस आने दो और कुछ फासला रख के उनके पीछे आओ और फिर तेज़ी से गाडी भगाते हुए गेट के पास से गुज़र जाओ.. अनु तुम इस बेच गेट और उनकी फ्रंट की दीवाओं पर हैंड ग्रेनेड फ़ेंक देना...

जितने भी फ़ेंक सकते हो फ़ेंक देना लेकिन गेट ब्लास्ट ज़रूर होना चाहिए...

अनुपम और जीतू जोश में:- ठीक है विजय...

राजा:- विजय क्या ये सही रहेगा .....

उदय:- एकदुम्म परफेक्ट.. राजा इससे से एक बार तो सबब का hi ध्यान टूट जाएगा और हमें भी हो सकता है क बिल्डिंग में घुसने का मौका मिल जाए....

विजय:- क्यूंकि अभी वो नहीं जानते क फार्महाउस के अंदर भी कोई घुसा हुआ है..

और इस ब्लास्ट के बाद उनका भड़कना भी कन्फर्म है......

राजा:- हाँ ये तो है.. लेकिन हम ये भी तो नहीं जानते क बेसमेंट कहाँ है.

कहीं ब्लास्ट से लड़कियों को खतरा न हो..

विजय:- राजा अब्ब रिस्क के बिना काम नहीं चलने वाला....

राजा:- ठीक है फिर... इतना बोल कर राजा खुद को आने वाले समय के लिए तैयार करने लगा .....

उदय तो हर वक़्त hi तैयार रहता था..........

शंकर के रात वाले अड्डे पार्स कुछ काम वज़न वाली महसीने गन्स भी मिली थीं.. और इस वक़्त हम तीनो के पास वही मशीन गन्स थीं... एक एक राइफल और एक एक पिस्तौल के साथ एक एक खंजर भी था.. एक एक बैग हम तीनो ने hi अपने पीठ पीछे बंधा हुआ था.. और उसमे बोहत कुछ था..... हमें यहाँ किसी किसम की टेंशन नहीं थी.. हमारे पास अम्मुनितिओं की कमी नै thi...agar थी तो शंकर के आने वाले बैकअप को ले के थी.. और उनके आने से पहले हमें सबब को मार गिरना था............

*********************************************************************************

गुंडों की गाड़ियों ने जल्दी से फार्महाउस के लिए वापसी पकड़ ली.. और उनसे फासला रख के जीतू ने गाडी को भगा दिया .....

जल्द hi गुंडों ने फार्महाउस के अंदर एंट्री मारी.. तब्ब तक जीतू उनके बोहत पीछे था. जब्ब जीतू को लगा क अब्ब उसका टाइम शुरू हो गया है तो....

जीतू:- विजय क्या अब्ब हम अपना काम शुरू करें......

विजय:- एक मिंट रुकू..

इतना बोल कर मैं दूरबीन से पूरे फार्महाउस को देखने laga..kaun क्या कर रहा है.. मैंने फार्मोसे के ग्राउंड और बिल्डिंग के दोनों hi पोरशंस को देखने laga...hamara बिल्डिंग से फासला 1.5 एकर था.. और इतना फासला भाग क्र तय करना आसान नहीं था.. लेकिन कुछ न कुछ तो करना hi था.....

विजय:- राजा क्या हम गेट के बैस्ट होते hi बुल्डिंग में घुस सकते हियँ....

राजा ने मुझे देखा और फिर उदय को देख कर..

राजा:- विजय जब्ब करना hi है तो सोचना क्या.. बैस्ट होते hi देहकेंगे. क क्या सूरते हाल बनती है.. फिर उसी हिसाब से फोरि एक्शन लेंगे..

उदय:- विजय राजा सही बोल रहा है..

वो दोनों भी दूरबीन लगाए हुए थे... और तैयार थे सबब कुछ करने के लिए..

विजय:- जीतू चलो भगाओ गाडी को .....

जीतू ने मेरे "ok" बोलते hi गाडी को भगा दिया.. और अनुपम अपने काम के लिए रेडी हो गया.. बोहत hi रिस्की काम था.. और ऊपर के पोरशन में कोई भी दिख नहीं रहा था.... लेकिन चांस तो लेना hi था.........

और ये चांस बोहत hi घातक tha....oopar हमें कोई दिखा नहीं था.. लेकिन हो सकता है क वो किसी ऐसी पोजीशन में हो.. जहाँ वो हमें नज़र न आया हो.. लेकिन जीतू को गाडी भगा कर लाते हुए देख रहा हूँ...

और हुआ भी वही............ ऊपर एक बाँदा था.. जैसे hi जीतू ने गाडी को स्पीड देनी शुरू की तो ऊपर से शोर होने लगा.. ऊपर ज़यादा से ज़यादा 3 लोग हो सकते थे.. और जीतू और अनुपम के लिए खतरा बन सकते थे .....

जैसे जैसे गाडी फार्महाउस के पास आने लगी.. ऊपर से फायरिंग शुरू हो गई.. लेकिन जीतू ने गाडी को स्पीड hi इतनी दी थी क गोलियां इस बार गाडी से दूर hi रहें.

जीतू गाडी गाडी को ड्राइव करते हुए फार्महाउस से 100 मीटर की दूरी पर पोहंचा और फिर उसने गाडी को ब्रेक लगा कर एक राउंड में घुमाया... एक फिर गाडी को तेज़ी दीवार के पास ले जा कर ऊपर से होने वाली फायरिंग से बचने में कामियाब हो गया.

इस सबब के होने से गौंड में खड़े हुए गुंडे भी बोखला गए.. वो सोचते hi रहे क बहार जाएँ.. या यही खड़े रहें....

अगर वो बहार जाते तो हमने उनको अपनी मशीन गन्स से वही ढेर कर देना था.

लेकिन जब्ब तब्ब तक्क गुंडे कोई भी फैसला करते...

जीतू ने गाडी गेट के पास से गुज़ारते हुए थोड़ा धीरे कर दी और अनुपम गाडी के गेट तक्क पोहचने से पहले hi एक हैंड ग्रेनेड की पिन हटा चूका था.. उसने देर न करते हुए वो ग्रेनेड गेट प् फ़ेंक दिया.............

एक ज़ोरदार धमाका हुआ और गेट उड़द गया.. अनुपम ने जीतू के गाडी धीरे से भागने का एडवांटेज उठाया और एक और ग्रेनेड गेट से कुछ फैसले पर दीवार पर दे मारा..

हम तीनो hi ये सबब होते होये देख रहे थे.. जैसे hi ब्लास्ट से फार्महाउस का गेट उड़ा .. तो एक बार तो सबब hi हिल गए .....

इस बेस के हेड के इलावा 2 और गुंडे अंदर बिल्डिंग में थे.. और बाकि सबब वहीँ फार्महाउस के ग्राउंड में थे... वो ये सबब अचानक से होने की वजा से हड़बड़ाए और फ़ौरन hi नीचे गिर पड़े.... मैं उदय और राजा ने देर न करते हुए उस बुल्डिंग

के पीछे की तरफ दौड़ लगा di..hamare भागते hi एक और ब्लास्ट हुआ. जिसकी वजा से गुंडे जो नीचे hi थे. अरु भी नीचे लेट गए.

और हम इस मोके का फायदा उठा कर बिल्डिंग के पीछे पोहंच गए.......

बोहत तेज़ भागने की वजा से हमारी सांस फूल गई thi..lekin अभी फोरि एक्शन की ज़रुरत थी.. तो हमने मशीन गन्स और राइफल को अपने पीछे लटकाया और सीलेंसर लगे हुए पिस्तौल को हाथों में लेके पीछे से hi घूम के बिल्डिंग के दूसरी तरफ जाने लगे.

हमें कोई रास्ता चाहिए था अंदर जाने के लिए..

अब्ब हम एक तरह से सेफ हो गए थे.. किसी के भी गुमान में नहीं होगा क कोई फार्महाउस के अंदर भी होगा........ दूसरी तरफ घूमते hi हमे एक खिड़की खुली हुई मिली.... मुझसे पहले hi उदय ने अंदर देखा तो वो किचन था..

उदय:- ये किठन का रास्ता hai..kya कहते हो तुम दोनों हमें अंदर जाना चाहिए या नहीं..

राजा:- अभी सोचने का समय नहीं है .. फ़ौरन hi अंदर घुसो ..

उदय ने मुझे देखा और फिर खिड़की पर हाथ रख क्र जम्प लगाई और अंदर पोहंच गया.. उसके पीछे hi हम दोनों भी पोहंच गए...

जब तक्क मैं और राजा अंदर pohnchte.tabb तक्क उदय किचन के दूर से बहार झाँक रहा था..

बहार झाँकने के बाद उदय ने मुझे ok का सिग्नल दिया. हम किचन से निकल कर बहार जाने लगे..

अनु बोलै:- विजय ऊपर वाले पोरशन में तीन गुंडे दूरबीन लिए हुए फार्महाउस के बहार देख रहे हैं..

मैं कुछ नहीं बोलै bass"hoon" hi कह कर अनु को इशारा किया क मैं इस टाइम नहीं बोल सकता.. पारर अनु ने एक बात अच्छी बता दी थी जो हमारे लिए फायदेमंद थी.. मतलब नीचे का पूरा पोरशन hi खाली हो चूका था.

मैंने राजा और उदय को आगे बढ़ने का इशारा किया.. हम तीनो hi हाथों में पिस्तौल लिए आगे बढ़ने लगे.. जब्ब हम किसी हद तक सेफ हो गए तो..

विजय:- उदय ऊपर तीन बन्दे हैं.. (सुन तो दोनों ने भी लिया था) और तुम दोनों उनको देखो मैं नीचे देखता हूँ कोई अंदर न आ जाए..

राजा .. उदय:- ठीक है......

मैं बिल्डिंग के अंदर आना वाले दूर को देखने लगा.. लेकिन अभी काम hi किसी के अंदर आने के चांस थे....

उदय और राजा ऊपर जाने लगे.. वो अपने पैरों की आवाज़ को दबाये ऊपर जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ने लगे.. दोनों hi एक्टिव थे .. और हर आने वाले खतरे से निमटने के लिए तैयार भी थे.... ऊपर पोहंच कर

राजा:- अनु वो किस तरफ हैं..

अनु:- राजा मुझे अपनी तरफ से तीसरे रूम का िद्या लगता है..

और तुम किस तरफ हो..

अनुपम ने राजा को अपनी लोकेशन बताई और फिर राजा उसी तरफ जाने लगा.. उदय राजा से कुछ फासला रख चल रहा था.....

कुछ आगे जाने के बाद एक कमरे से आवाज़ें सुनाई देने लगी तो राजा ने उदय को इशारा दिया क इस रूम में कोई है...

विजय:- राजा उनमे जो सीनियर दिखे उसे मैट मारना.. उससे कुछ डिटेल चाइये मुझे.

राजा:- "हूँ"

राजा उदय के साथ hi रूम के दूर के पास पोहंचा तो अंदर तीन hi गुंडे थे जो बहार देख रहे थे.. राजा और उदय दोनों ने hi एक hi टाइम में गोली चला कर दो के सर्र उड़ा दिए..

बॉस एकदुम्म से सुन्नन रह गया.. वो सोच भी नहीं सकता था क अंदर से भी कोई ऐसा कर सकता है.. लेकिन राजा ने उसे चुप रहने का ईशर किया और उदय ने भाग क्र उसे गन से दूर कर दिया.. जो खिड़की में एक gun-stand पर लगी हुई थी.. ज़रूर इसी से जेतु की गाडी पर फायरिंग की गई थी...

उदय ने कोई भी मौका दिए बगैर hi उसके गले को पकड़ लिया.. ता के वो कोई भी आवाज़ न निकल सके ... और राजा ने जल्दी से अपना बैग खोला और उसमे से तप निकल कर पहले उसके मोहन पे चिपकाई और फिर उसके हाथों को पीछे मोड़ कर उसके हाथों को भी तप से बांध दिया..

राजा:- विजय सबब हो गया है .....

विजय:- ठीक है अब खिड़की के ऊपर से hi बहार गुंडों पर ग्रेनेड फ़ेंक दो और फिर महसीने गन से सबब को hi bhoon'na शुरू कार्डो.. मैं भी नीचे से उनको टारगेट करता हूँ..

जीतू:- विजय कुछ गाड़ियां इस तरफ आती हुई दिख रही हैं..

विजय:- क्याआ? कितनी हैं.....

राजा और उदय भी रुक गए थे .....

जीतू:- 3 या शायद 4 हैं.. लेकिन अभी कुछ दूर हैं और उन्हें यहाँ आने में 4 या 5 मिंट लग जायेंगे....

उदय भी एक खिड़की से दूरबीन लगा कर देखने लगा था..

उदय:- विजय गाड़ियां 5 हैं और बड़ी hi तेज़ी से इस तरफ बढ़ रही हैं..

विजय:- तो उदय फिर जल्दी करो और जीतू तुम दोनों अगर उनके रास्ते में बम लगा सको तो लगा दो .. और अब्ब ins-ranjeet को भी सिग्नल भेज दो... अब्ब यहाँ लड़कियों के लिए खतरा बढ़ जाएगा..... इसलिए सबब जल्दी करो.....

राजा ने पहले यहाँ के बॉस के पैरों में दो गोलियां दाल दी. वो दिस्तुरत न करे इसलिए.. गोली लगते hi वो तप लगे मोहन से hi "हूँ" "हूँ" करने लगा...... गोलियां उसके पैरों में लगी थीं.. फटने उसकी गांड लगी थी..

राजा और उदय ने बहार मौजूद गुंडों पर ग्रेनेड फ़ेंक दिए .. जो अब गेट वाले बैस्ट के बाद नीचे गिर गए थे.. और इधर उधर बिखर कर तीन ग्रुप बना कर

देख रहे थे और एक दुसरे से बातों में लगे हुए थे..

हैंड ग्रेनेड से टारगेट के लिए फासला राजा और उदय के लिए कुछ ज़यादा hi था.. लेकिन कुछ काम बन सकता था..

धमाके से पहले hi मैं भी बहार निकलने वाले दूर के पास पोहंच गया और

फिर जैसे hi दो हैंड ग्रेनेड बाहर गिरे.. kaan-phaad देने वाले दो धमाके हुए और कुछ गुंडे उड़ते हुए दूर जा गिरे.. अब्ब यहाँ किस को कितनी चोट लगी है..

वो देखने की ज़रूरत नहीं थी.. पूरा फार्महाउस hi तीन मशीन गन्स की ज़ोरदार आवाज़ से गूँज उठा...... मशीन गन्स की चलने वाली गोलियों की आवाज़ में गुंडों की चीखों की आवाज़ें दबने लगीं और एक एक कर के सबब के hi जिस्म में ढेरों सुराख़ बनने लगे....

मेरी निस्बत उदय और राजा की महसीने गन्स की मर ज़यादा थी.. क्यूंकि वो ऊपर थे.. और नीचे लेते हुए गुंडे उदय और राजा दोनों के लिए hi आसान टारगेट थे.

कुछ देर बाद मैं भी ऊपर चला गया राजा और उदय के पास..

********************************************************************************

धमाकों की आवाज़ से धर्मेश और प्रेम भी अपनी फाॅर्स के साथ और भी तेज़ी से फार्महाउस की तरफ आने लगे ....

लेकिन वो अभी अपने लिए आने वाली मुसीबत से अनजान थे..

जीतू ने उसी मोड़ का इंतेखाब कर लिया था ..... वो मोड़ 200 मीटर के एरिया में था.

और दोनों साइड्स कुछ पेड़ थे.. जेत्तु और अनुपम ने उसी मोड़ पर अपना टारगेट सेट किया था.... क्यूंकि वहां से गाड़ियों का स्लो होना कन्फर्म था.. और इसी से जीतू और अनुपम ने फायदा उठाना था .....

जैसे टीनू गाड़ियां मोड़ से कुछ आगे बढ़ीं.. अभी वो स्पीड पकड़ने hi वाली थीं.. क एक हैंड ग्रेनेड आगे वाली गाडी के ऊपर गिरा वो उड़ती हुई दूर जाने lagi...aur दूसरा ग्रेनेड उसके पीछे वाली गाडी के ऊपर gira..girte hi वो गाडी भी हवा में उड़ती हुई बल खाने लगी... तीसरी गाडी अचानक से hi तेज़ होने की वजा से आगे निकल गई. लेकिन कुछ दूर जाते hi एक झटके में रुक गई..

और बाकी की पीछे वाली दो गाड़ियां .. लास्ट वाली गाडी फ़ौरन hi रुक गई.. और उससे आगे वाली एक झटका खा के लुढ़क गई...

तीसरी गाडी जो आगे जा कर रुक गई थी.. वो फिरसे स्टार्ट हुई और आगे बढ़ने लगी..

जीतू और अनुपम के लिए भी ये एक अजीब बात थी.. धमाके से गाडी रुक जानी चाहिए थी.. लेकिन ब्रेक की बजाये उस गाडी के ड्राइवर ने घबराते हुए रेस बढ़ा दी थी.. लेकिन फिर आगे जा कर एक झटके में hi रुक गई.. जीतू और अनुपम के कुछ करने से पहले hi वो दूर जाने लगी...

अब्ब उस गाडी के लिए जीतू और अनुपम के पास टाइम नहीं था.. एक गाडी अभी भी पीछे थी और उसके अंदर बैठे हुए गुंडे भी खुद को बचने के लिए गाडी से बहार निकल कर.. खुद के लिए सेफ जगा ढूंढ़ने लगे..

जीतू:- अनु तुम बम फेंको मैं मशीन गन चलता हूँ..

अनु:- ठीक है......

अनु के गाडी अपर बम फ़ेंक दिया.. लेकिन एक hi गुंडा गाड़ी में रह गया था और बाकी सबब गाडीसे निकल कर भागने लगे थे.. जेतु ने उनपर मशीन गन से फायर खोल दिया....... लास्ट वाली गाडी में टोटल 7 गुंडे थे... एक गाडी के अंदर hi मर गया था तो .. तीन को जीतू ने मशीन गन से टारगेट कर दिया....

जितुआ पने काम में लगा लगा .. तो अनु तबाह होने वाली गाड़ियों को देखने लगा.. कहीं उनमे से कोई बच तो नहीं गया.. जो ुजो अनु को दीखता ज़िंदा दीखता.. अनु उसे टारगेट करने लगता .....

जीतू ने एक और भी मार गिराया था.. लेकिन अभी भी 2 बच गए थे और पास के ट्रीज में चुप कर खुद के सांस बहाल कर रहे थे. अब्ब जीतू और अनु के लिए दो दो का मुक़ाबला रह गया था...

अगर आगे वाली गाडी से भी गुंडे उतर कर वापिस घूम कर ा गए तो जीतू और अन्नू के लिए खतरा हो सकता था...

जीतू:- उदय जो गाडी निकल गई यही.. उसकी क्या लोकेशन है.. कहीं वो वापिस तो नहीं आए रही..

उदय:- नहीं वो वापिस तुम्हारी अतराफ़ नहीं जा रहे .. वो बोहत आगे आ कर रुक गए.. और मेरा ख्याल है क अब्ब वो या तो अपने और साथी मंगवाएंगे या शंकर से मश्वरा करके आगे का सोचेनेगे.. या यही बेस पर मौजूद हेड से बात करेंगे...

जीतू:- ठीक है अगर गाडी की मूवमेंट हो तो बताना.. अभी यहाँ दो गुंडे बच कर चुप गए हैं.

उदय: ठीक है...

जीतू और उदय ने सामने देखा तो रोड से हट कर 150 मीटर दूर कुछ ट्रीज के पीछे दोनों गुंडे छुपे हुए थे..

जीतू:- अनु अब क्या करें....

अब तो न तो हम अपनी जगा से हिल सकते हैं और न hi वो होनी जगा से आगे पीछे हो सकता हैं..

अनु आस पास देख रहा था .. क कही से वो घूम कर उस साइड में जा सकता है..

अनु:- जीतू तुम उन दोनों पर मशीन गन से फायर करो और मैं घूम कर रेंगते हुए थोड़ा साइड में हट आकर उनको टारगेट करता हूँ..

मैं भी दोनों को hi सुन रहा था..

विजय:- अनु तुम अभी सही नहीं हो और ऐस रिस्क अभी मत लो...

अनु:- लेकिन वजिजय और कोई चांस भी नहीं है..

विजय:- तुम दोनों की गाडी कहाँ है.. वहां तक जाना आसान है या रिस्की..

जीतू:- नहीं विजय.. हम जहाँ रेक हुए हैं वहां से हिलना भी मतलब... सीधा सीधा उनकी गोलियां का निशाना बनना है....

विजय:- तो फिर तुम जाओ रेंगते हुए कुछ फासले पर जाओ और अनु को अपने जगा रह कर उन्हें टारगेट करने दो... लेकिन ये तब्ब hi करना जब्ब सेफ लगे...

गुंडे मारे गए हैं और उनकी गाड़ियां भी तबाह हो चुकी हैं और अब्ब वो खुद की जान बचने केलिए कुछ भी करने से पीछे नहीं हटेंगे....

जीतू:- ठीक है विजय मैं देखता हूँ.........

जीतू:- अनु तुम रेड हो..

अनु:- हाँ मैं रेडी हूँ. लेकिन अगर मैं जाता उनकी तरफ तो ..

जीतू:- नहीं अनु मुझे hi जाना पड़ेगा.. तुम्हारा पारी अभी ठीक नहीं है.. और मैं ये रिस्क नहीं ले सकता.. अगर भागना पड़ा तो मैं भाग सकता हूँ लेकिन तुम्हारे लिए प्रॉब्लम हो जाएगी...

अनु:- ठीक है.. फिर चलो जो बचे हैं उनकी भी माँ छोड़ते हैं....

अनु को मूड में देख कर जीतू भी खुश हुआ...

जीतू और अन्नू नीचे लेते हुए थे.. जजीतु ने पहले डोरबेन से सामने गुंडों को देखा और अनु को एक राउंड चलने के लिए बोल दिया..

tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...

की आवाज़ वेरने में गूंजी और गुंडों के पास वाले दरख्तों के परखचे उड़ने शुरू हो गए.. उन गुंडों के पास कौनसी गन्स थी.. दोनों hi नहीं जानते थे.. लेकिन अनु की महसीने गन की आवाज़ ने अंधेर मचा दिया था... पता नहीं अब्ब जितनी गोलाइयाँ अनु ने चलाई थीं.. वो अंधी गोली की तरह से किसी गुंडे को लगी या नहीं लगी.. लेकिन जीतू इस बीच बोहत hi तेज़ी से ज़मीन पर छिपकली की मानिंद रेंगता हुआ आगे बढ़ने लगा...

जीतू इक साइड से गया था.. जितनी देर में अनु ने अपना राउंड पूरा किया. तब्ब तक्क जीतू अनु से 70 मीटर दूर जा चूका tha.......abb भी जीतू के लिए गुंडों से फासला उतना hi था.. बास जीतू की साइड बदल गई थी..

अनु:- जीतू तुम सेफ जगा पोहंच गए हो ...

जीतू:- हाँ अनु मैं सेफ हूँ. और यहाँ से वो मुझे दोनों hi दिख रहे हैं. लेकिन ज़मीन पर लेते हुए हैं.. कोई भी हरकत नहीं कर रहे..

जीतू ने दूरबीन लगाई और

जीतू:- अनु अब्ब एक छोटा सा राउंड और चलाओ.. माने देखता हूँ क वो क्यों लेते हुए हैं.. मर गए हैं या नाटक कर रहे हैं...

जीतू की बात सुन कर अनु ने एक छोटा सा राउंड चलाया और जीतू उन दोनों hi देखने लगा.. मशीन गन के फिरसे चलने पर भी उन दोनों में कोई मूवमेंट नहीं हुई..

जीतू:- अनु वो हिल तक्क नहीं रहे.

अनु:- तो अब्ब क्या करना चाहिए....

जीतू:- मैं ऐसे hi रेंगते हुए उनके पास जाता हूँ और तुम दूरबीन लगा कर देखो.. कही उनका नाटक hi न हो..

अनु:- ठीक है.. लेकिन खुद का ध्यान रखना..

जीतू गुंडों की तरफ बढ़ने लगा.. और अनु उन्हें देखने लगा... लेकिन कुछ भी नहीं हुआ और जीतू उनके पास पोहंच गया.... वो दोनों hi मर चुके थे.. और उनकी गन्स दरख्तों से कुछ फैसले पर गिरी हुई थीं.. मतलब जब्ब वो यहाँ भाग कर ा रहे थे.. तब hi हिट हो गए थे.. और यहाँ आते hi लम्बे हो गए..

जीतू:- अनु ये दोनों मर्डर चुके हैं.... ये बोल कर जीतू ने एक एक गोली दोनों के hi सर में उतार दी. अगर किसी का सांस बाकी था तो वो भी अब्ब न रहे..

मिशन मोड़ कम्पलीट..

**********************

जीतू और अनु के अपने मिशन को कम्पलीट करते hi.. मैंने राजा और उदय को देखा तो दोनों hi बहार देख रहे थे..

मैंने भी दूरबीन उठाई और वही रुक चुकी गाडी को देखने लगा .... वो गाडी अभी हमारी रेंज से दूर थी..

**********************************************************************************

धर्मेश और प्रेम की गुडलुक थी जो वो दोनों hi सेण्टर वाली गाडी में थे..

और बी चांस hi गाडी के ड्राइवर ने गाडी आगे भगा दी दी थी...

और फिर जैसे hi गाडी दुखी तो धर्मेश और प्रेम.. जो दोनों गाड़ियों के ब्लास्ट होने से काँप क्र रह गए थे.....

प्रेम:- गाडी जल्दी से यहाँ से निकालो..

और गाड़ी फिर फ़ौरन hi आगे बढ़ गई थी..

जब्ब प्रेम को लगा क अब्ब वो सेफ हो गए हैं... तो उसने गाडी रोकने को बोल दिया..

गाडी के रुकते hi प्रेम और धार्मश गाडी सेबाहर आये.. धर्मेश के चेहरे पसीने से टर्र था............ गानु कही का.....

शहर का गुंडा बना फिरता है और........ मौत को सामने देख कर hi पसीने छोड़ने लग गया था.. प्रेम तो फिर भी कुछ बेहतर हालत में था..

प्रेम ने फोन निकल क्र पहले फार्महाउस पर राब्ता किया लेकिन वहां से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो.. तो उसने शंकर को कॉल मिला दी..........

वहां से भी कोई रिस्पांस नहीं मिल पा रहा था.... और प्रेम सोचने लगा क अब्ब वो क्या करे.... आगे फार्महाउस में जाना भी किसी काम का नहीं था.. क्यूंकि वहां किसी से कोई भी राब्ता नहीं हो प् रहा था और फिर वहां पर होने वाले धमाके प्रेम को सबब समझा रहे थे...

प्रेम सोच में डूबा रहा और धर्मेश अपनी गांड से हवा निकाल निकाल कर खुद को रिलैक्स करने में लगा हुआ था.................

*********************************************************************************

शंकर कैसे प्रेम से राब्ता करता वो तो जूली की छूट और गांड में घुसा हुआ था..





शंकर वहां अपने मैं बेस पे जूली की गांड में घुसा हुआ था और यहाँ विजय और उसकी टीम ने शंकर की गांड फहद कर रख दी थी ....

शंकर एपीआई गांड पहड़वा कर भी जूली की गांड की धज्जियां उड़ने में लगा हुआ था......

गांडू कहींन kaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

******************************************

अपने दोस्तों को मरवाने के लिए भेज कर खुद जूली की गांड में घुस गया था....





 
अपडेट ::: 56

**************




शंकर से राब्ता न होने की वजा से और फार्महाउस में गड़बड़ी की वजा से प्रेम ने वापिस अपने "मैं बेस" पर जाने का फैसला कर लिया ... लेकिन अब्ब उसे रास्ता बदल कर जाना पड़ेगा ....

प्रेम:- धर्मेश चलो वापिस चलते हैं. आगे हमारे लिए कुछ भी नहीं बचा होगा. और शंकर से भी राब्ता नहीं हो पा रहा ......

धर्मेश:- हाँ हाँ चलो.. अब्ब वैसे भी यहाँ क्या रखा है.. और वैसे भी हमारे कई आदमी तो मर्डर चुके हैं.

धर्मेश और प्रेम गाडी में बैठ कर वापिस जाने लगे...

मैं राजा और उदय उन्हें hi देख रहे थे....

राजा:- विजय ये तो वापिस जा रहे हैं. क्या इनको वापिस जाने देना चाहिए..

उदय:- विजय इनको रोकना पड़ेगा..

विजय:- नहीं अभी हम उनको नहीं रोक पाएंगे.. और वैसे भी अभी हमें इस बेस में फँसी हुई लड़कियों को भी आज़ाद कराना है ....रात को तो शंकर के दुसरे बेस पर भी हमला करना है न humen.....to वहां देख लेंगे......

uday..raja:- ठीक है vijay..tu भी ठीक hi बोल रहा है..

उदय ने नीचे पड़े हुए सूरी को देखा.. जो दर्द के मारे बंद मोहन से hi कराह रहा था... उदय ने उसके मोहन से तप उतरी....

उदय:- अब तुम्हे क्या बताएं क आने वाली पांच गाड़ियों में से 4 ब्लास्ट हो चुकी है और एक गाडी वापिस चली गई hai..aur यहाँ भी कोई नहीं बच पाया.. तो तू बता दे क बेसमेंट में जाने के लिए रास्ता कहाँ है... और देर करने से तू खुद की hi जान को और भी दर्द पुहंचाने वाला है.. मार्र्ण तो तुझे है hi.. लेकिन तू चाहे तो अपना दर्द कम् कर सकता है.. वर्ण तू एक लम्बे आरसे तक्क पल पल मरता रहेगा.. लेकिन तुझे मौत नहीं आने दी जायेगी.. इसलिए सोचना छोड़ और बता दे क बेसमेंट का रास्ता कहाँ है. और वैसे भी यहाँ कुछ देर में मीडिया भी आने वाली है. तो तू किसी काम न नहीं रहेगा... और शंकर के साथ साथ धर्मेश और प्रेम भी आज hi मारे जायेंगे. तू ये बात दिल से निकाल दे क तुझे कोई बचने आएगा..... आज तुम्हारे सरे साथी गुंडे मारे जायेंगे... चल अब्ब बोल ..

राजा ने इस बीच जीतू और अनु को फार्महाउए आने को बोल दिया था..

उदय की बात सुन कर सूरी का स्टैमिना टूट गया और उसने सबब बता दिया.....

उदय उसे गोली मरने वाला था

विजय:- उदय अभी इसे छोड़ा और बेसमेंट का रास्ता देखो.. फिर इसे मार देना..

उदय सूरी को बालों से खेंचते हुए अपने साथ नीचे लाने लगा..... जब्ब सीढ़ियों पार्स सूरी को नीचे लाया जाने लगा तो पैरों में गोली लगने की वजा से सूरी की चीखें निकलने लगीं.

लेकिन हममे से किसी ने भी सूरी की चीखों पर ध्यान नहीं दिया....

और चलते हुए बेसमेंट के दूर तक जा पोहंचे...

बेसमेंट का रास्ता नीचे के फ्लोर के एक रूम से जाता था..

हम वहां पोहंचे तो सूरी के बताये गए तरीके से दूर ओपन किया...

दूर ओपन होते hi उदय ने सूरी को वहीँ सर्र में गोली मार दी...

हम नीचे पोहंचे तो वहां 40 के करीब लड़कियां क़ैद की हुई थीं...

वो हमें देखते hi दररने लगीं..

उदय:- कोई भी दर्रो नै.. अब्ब तुम सबब आज़ाद हो और कुछ hi देर में तुम सबब को तुम्हारे घर में भेज दिया jayega.....tum सबब हमारे पीछे hi बाहर आ जाओ..

उदय की बात सुन कर लड़कियों में जान आई और खुश होते हुए बहार जाने को लपकें..

विजय:- ठहरो आराम से बहार जाओ.. यहाँ अब्ब कोई भी खतरा नहीं है तो.. डरना छोडो और खुद को रिलैक्स रखते हुए हमारे पीछे पीछे आओ..

सबब लडकियां हमारे पीछे hi बहार आ गईं.. बहार की हालत देख क्र एक बार वो सबब दरी.. लेकिन फिर खुद को संभल गईं..

बहार गुंडों के टुकड़े बिखरे पड़े थे.. और जगा जगा खून से फार्महाउस की ज़मीन का रंग बदल चूका था...

कुछ देर बाद जीतू और अनुपम भी आ गए.....

उदय ने कुछ लड़कियों के कह कर किचन में मौजूद सामान में से हमारे लिए और खुद उनके लिए भी कॉफ़ी के लिए कह दिया..

कुछ देर बाद हम कॉफ़ी पी रहे थे..

इतनी देर में ins-rnjeet के भेजे हुए कुछ लोग ए.. और लड़कियोजन को लेजाने का इंतेज़ाम करने लगे ..

ins-ranjeet के आदमी ज़यादा दूर नहीं थे.. इसलिए वो जल्द hi आ गए थे..

जब तक लड़कियां नै गई.. हम बैठे बातें hi करते रहे..

जब सबब hi चले गए और हम hi रह गए तो.. अनुपम के पेअर को देखते हुए मेने पुछा

विजय:- अनु तुम्हारे पेअर का क्या हाल है..??

अनु:- विजय बॉस बचत hi हो गई है.. कुछ डब्ब गया था.. लेकिन अब्ब बोहत बेहतर है.. कोठी पर पोहंच कर कुछ कर लूंगा इसका भी..

विजय:- ठीक है तू ऊपर चल कर बहार नज़र रख और हम सबब hi फार्महाउस को चेक करते हैं.. देखते हैं यहाँ क्या कुछ है........

यहाँ हमारे लिए बोहत कुछ था...... आगे चल कर हमारे बोहत से काम आसान हो जाने थे ..............

शंकर 60% ख़तम हो गया था ...........



************************************************************************



लोकेशन: मुंबई

****************



महक अपने रूम को अंदर से लॉक करके इधर उधर टहल रही थी..... कभी वो अपने हाथों की उँगलियों को मरोड़ने lagti..kabhi वो लम्बी लम्बी सांसें लेने लगती.

कभी एक पेअर को उठा कर लाचारी से डीआर को देखती और फिर से टहलने लगती.

महक अपने जिस्म के अंदर होने वाली हलचल से बोहत hi ज़यादा बच्चें भी थी ..और परेशां भी...

उसका बास नहीं चल रहा था क कोई उसके सामने आये और वो उसके बदन की छोटे छोटे टुकड़े करना शुरू करदे...

महक अभी तक्क अपने घर नहीं गई थी. महक की अपने घर वालों से और भी बिगड़ चुकी थी.. दन्न और महक की माँ ने मिल कर महक को भी खुद के जैसे बना कर अपने साथ hi रखने का प्लान बनाया था ....

दन्न और उसकी पत्नी ने महक को बोहत बर्दाश्त करलिया था.. लेकिन महक बार बार अपने माँ डैड के साथ साथ बाकी के घर वालों के साथ भी bad-tameezi करने लग गई थी..

दन्न ने महक को अपने अंडर करने के लिए महक को सेक्स ड्रग्स खिलने के साथ साथ महक के बदन के अंदर इक चिप भी लगवा दी थी ....

महक जहाँ भी जाती दन्न को पता चलता रहता था.. लेकिन महक भी किसी से कम् नहीं थी.. उसे भी एहसास हो गया था क उसका बाप दन्न क्या कुछ कर सकता है..

इसलिए महक ने अपने अंदर से उस चिप को ढून्ढ निकला और हर कुछ दिन के बाद

वो अपनी जगा बदलने लगी ...... चिप से तो महक को छुटकारा मिल गया था..

लेकिन सेक्स ड्रग्स की वजा से महक के अंदर की बेचैनी रोज़ रोज़ बढ़ती जा रही थी...

अब्ब महक दन्न की नज़रों से दूर तो हो गई थी... लेकिन अपने अंदर आ चुके सेक्स ड्रग्स को ख़तम करने में नाकाम hi रही.... महक ने बहार जा कर भी अपना इलाज करवाया.. बहार के कंट्री से ट्रीटमेंट करवा कर महक को कुछ सकूँ तो मिला..

लेकिन कुछ वक़्त गुजरने के बाद महक को सेक्स ड्रग्स के असर ने फिर से तंग करना शुरू कर दिया.. महक अपनी बेपनाह विल पावर की वजा से आज तक्क खुद को रोके हुए थी.......... लेकिन कभी कभी वो खुद पार्स कण्ट्रोल खोने लगती थी.....

अगर महक को मर्दों से नफरत न होती तो कब्ब का अपनी छूट किसी के हवाले कर चुकी होती.................... लेकिन अभी तक्क महक ने खुद को बचाया हुआ था..

महीने में 2 या 3 बार hi महक की छूट की खुजली ज़यादा बढ़ती थी.. वर्ण अक्सर कम् रहने वाली खुजली की वो आदि हो गई थी.....

आज भी महक की छूट की खुजली महक को परेशां कर रही थी.. और महक रूम में टहल कर खुद को कैसे ठंडा करे.. ये सोच रही थी.. सेक्स ड्रग्स से पहले महक को अपनी छूट में ऊँगली घुसाने का कोई शोक नहीं था.. लेकिन अब्ब वो मजबूर हो गई थी......

महक खुद पर काबू पाने की बड़ी कोशिश करती रही लेकिन जब्ब us'se नहीं रहा गया. तो वो वही नीचे hi लेट गई..

और लम्बी लम्बी सांस लेते हुए........ बोली..

महक:- दन्न तू कैसा हरामी बाप है एक बेटी को hi सेक्स के नशे वाली ड्रग्स खिला दी.. दन्न तूने ये काम करके खुद के लिए बुरा वक़्त ला खड़ा किया है..... बोहत बार दिल को समझाया क नहीं अपनी फॅमिली को नुकसान नहीं पोहंचना चाहिए.....

लेकिन अब और नहीं..............

बास मुझे भी अब्ब एक मौका चाहिए.. फिर मैं भी तुम्हारे साथ साथ माँ को भी नहीं chhodogi.......sab के सबब hi घटिया सोच के मालिक हैं...............

महक का ग़ुस्सा बढ़ने लगा था.. लेकिन महक की सोच पर महक की छूट की खुजली बढ़ने लगी ..

और महक ने न चाहते हुए भी.... अपनी छूट को ठंडा करना शुरू कर दिया...

महक ने अपने ट्रॉउज़र की डोरी को लूसे किया और अपने एक हाथ को अपनी छूट की तरफ बढ़ा दिया... अब्ब महक सिर्फ अपनी छूट को hi सोच रही थी.....

महक ने अपने राइट हैंड को अपने एक बूब्स पारर रखा और लेफ्ट हैंड से अपनी छूट को मसलने लगी....

महक का हाथ जैसे hi उसकी छूट को छुआ.. महक को इक सकूँ सा मिला.. और महक ने पहले धीरे धीरे अपनी छूट को मसलने लगी... महक अपने हाथ से अपने बूब्स और निप्पल को भी अपनी उँगलियों से बढ़ाने लगी.. अब्ब धीरे धीरे महक मदहोश होने लगी थी.. महक अपनी दरिंदगी भूल कर छूट के नशे की दुन्या में खोने लगी..

ये महक वो नहीं थी.. जो बीच समंदर में अपने स्टंट दिखाया करती थी.....

और फिर समंदर के पानी और क्रीचर्स को चैलेंज किया करती थी..

ये महक सिर्फ छूट की दुन्या की बासी लग रही थी... इस वक़्त महक को सिर्फ अपनी छूट की खुजली से ग़र्ज़ थी.. न तो दन्न की याद थी और न hi अपनी माँ और बाकी के घर वालों की.... न अपने अंदर काम कर रहे लोगों की ...

फ़िक्र थी तो बास सिर्फ इतनी क छूट की खुजली ख़तम हो जाए.......

धीरे धीरे करके महक की छूट ने पानी निकालना शुरू किया और महक की बेचैनी कम् होने की बजाये और भी बढ़ने लगी.....

महक ने लाचारी से अपनी छूट से ऊँगली निकाल क्र पहले अपनी ऊँगली पर लगे हुए छूट के पानी को देखा और फिर पूरे रूम में अपनी नज़रें घूमने लगी..

जैसे देख रही ho..k इस सिचुएशन में किया चीज़ उसके काम आ सकती है..

महक को कुछ भी ऐसा नहीं दिखा जो उसके काम ए..... अब वो अभी तक्क सील पैक थी वर्ण कोई बर्ष hi उठा कर एक झटके में hi अपनी छूट के अंदर घुसा देती.. लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकती थी.. जितनी भी बेचैनी हो लेकिन वो अपनी छूट को ऐसे hi बर्बाद नहीं कर सकती थी..

महक ने लेते लेते hi अपने ट्रॉउज़र को अपनी छूट से नीचे सरकाना शुरू कर दिया. और महक की जिमनास्टिक वाली छूट नंगी होने लगी.. कोई था नहीं वर्ण ऐसी फिटिंग वाली छूट देख क्र hi स्टेचू बन्न जाता..

जैसे hi महक का ट्रॉउज़र उसके घुटनो तक्क आया महक ने अपने घुटने उठाये और फिर अपने हाथों से अपने ट्रॉउज़र को उतार दिया.

फिर महक थोड़ा सा उठ के अपनी शर्ट और ब्रा भी उतार दी और नंगी हो गई..

महक ने एक बार अपने पूरे जिस्म पारर अपने हाथ फेरे तो महक अपने hi हाथों के लम्स से सिहर उठी..... फिर महक ने अपने पूरे जिस्म को hi अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया.. महक का लचकदार बदन कुछ ज़यादा hi अट्रैक्टिव लग रहा था..

महक के नंगे होते hi रूम में लगी लाइट्स की रौशनी मद्धम पड़ने लगी थी... महक के बदन की चामल रूम में लगी लाइट से बढ़ क्र थी.

महक अपने जिस्म को अचे से सहलाने से बाद फिरसे अपनी छूट में ऊँगली घुसा कर उसे रगड़ने लगी..

महक एक un-touch लड़की थी. लेकिन दन्न के सेक्स ड्रग्स की वजा से महक किसी मर्द के लिए un-touch तो थी लेकिन अब्ब उसकी छूट सील तक उसकी अपनी hi ऊँगली की वजा से खुल चुकी थी.. महक अपनी छूट में ऊँगली घुसाए उसे ठंडा करने की कोशिश में लग गई.. जैसे जैसे महक ने अपनी ऊँगली को अपनी छूट में घुसा कर रगड़ना शुरू किया महक के जिस्म में नशा भी बढ़ने लगा... महक बंद रूम में hi सिसकने लगी.

अब्ब महक को अपनी सिसकियों का भी ध्यान नहीं रहा था.. अब्ब तो बास छूट का पानी निकले और उसे सकूं मिले..

महक ऐसे hi अपनी छूट में ऊँगली घुसाए हुए hi पलट गई.. और उलटी लेट कर अपनी छूट में ऊगली करने लगी.. महक की मस्ती और छूट की गर्मी अब्ब बोहत बढ़ चुकी थी.. महक की सिसकियाँ और भी तेज़ हो गई और महक उलटे लेते हुए hi अपनी छूट में ऊँगली घुसा घुसा कर उसके अंदर रुका हुआ पानी निकलने लगी...

.




.

कुछ देर में hi महक का बदन अकड़ने लगा और महक अपनी गांड को ज़ोर ज़ोर से हिलाते हुए अपनी छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगी.... महक के बूब्स और निप्पल रूम के फर्श पर रगड़ खाने लगे.. अकड़ चुके निप्पल की वजा से महक और भी ज़यादा मदहोश होने लगी....

महक की म्हणत रंग ले.. और महक की छूट ने पानी छड़वा शुरू कर दिया...

महक अब्ब कुछ दिनों के लिए अपनी छूट की टेंशन से फ्री हो गई.......

कुछ देर महक अपनी सांस को बहाल करने में लगी रही.. जो छूट के पानी निकलते hi बोहत तेज़ हो गई थी...

महक जैसे hi रिलैक्स हुई. वो एक झटके में कड़ी हुई और खुद को नंगा देख क्र उसकी ऑंखें जो कुछ देर पहले सेक्स के नशे की वजा से और छूट की गर्मी की वजा से लाल हो गई थीं.. अब्ब महक के ग़ुस्से की वजा से लाल होने लग गई थी..

महक:- नहीं छोडूंगी मैं तुझे ... नहीं छोडूंगी... बोहत ी गलत किया है मेरे साथ.. मुझे इतनी सस्ती चीज़ बना के रख दिया ..

मैं किसी कचरे में पड़ी हुई कोई चीज़ हूँ जो मुझे मेरे hi बाप ने सेक्स ड्रग्स दे दी.. कैसे खटिया हो तुम दन्न .. मुझ जैसे एक शेरनी को भी सेक्स की लत लगा दी तुमने.. बोहत hi बुरा किया तुमने मेरे साथ दन्न..

महक का घुसा बढ़ने लगा.. महक नंगी hi फिरसे रूम में टहलने लगी....

पहले छूट की बेचैनी thi..to अब्ब छूट के ठंडा होते hi दन्न के बर्ताव की वजा से महक ग़ुस्से में आ गई थी........ खुद को एक सस्ती छूट वाली समझ कर महक का ग़ुस्सा बढ़ने लगा.. महक ने कभी सोचा भी नहीं था.. क उसकी लिए में कभी ऐसा घटिया कमाहाट भी आएंगे........

महक का ग़ुस्सा आखरी हद्द तक जा पोहंचा और फिर उसने रूम की चीज़ों को उठा उठा कर पहनना शुरू कर दिया....



************************************************************************

लोकेशन: शंकर बेस 1

************************

Time:10:00:PM:




आज दिन में शंकर के फार्महाउस की बर्बादी के बाद हमने वहां का सारा hi माल जो हमारे काम का था.. वो अपने हैंडओवर कर लिया था. और वो इतना था.. क सही से बताया नहीं जा सकता... अगर बात वेपन्स की की जाए तो अब्ब मुझे मज़ीद किसी और वेपन की ज़रुरत नहीं थी.... फार्महाउस से hi इतना कुछ मिल चूका था.. क वो हमारे लिए सालों ख़तम नहीं हो सकता था...........

500 मिलियन से भी बढ़कर बालक मनी हमें हासिल हुई थी.. और ये भी हमारे लिए एक बोहोत hi अच्छी बात हुई थी.. अब्ब हम अपने ग्रुप को hi टेक बनाने के लिए बोहत कुछ कर सकते थे....

हर्ष अंकल की मदद के आगे तो ये ब्लैक मनी कोई हैसियत नहीं रहती थी.. लेकिन फिर भी हमारे लिए खुद के दुम्म पर कुछ करने का समय आ गया था....

वही पास में hi सिटी के अंदर एंटर करते hi एक और बिल्डिंग थी हर्ष अंकल की वहीँ हमने सारा माल स्टॉक कर लिया... अभी सबब कोठी लेजाना सही नहीं था.

अब्ब काम का टाइम था.. तो घर में किसी को टाइम नै दे प् रहा था मैं.. और पूजा दीदी ने फोन पर कह दिया क इतस ok.. दो युर जॉब फर्स्ट...

**********************************************************************************

और अभी रात के 10 बजे शंकर के मैं बेस के बहार कुछ फासले पर खड़े थे. हमारे साथ अनुपम नहीं आया था.. वो तो आना चाहता था.. लेकिन मैंने कोई भी रिस्क लेना मुनासिब नहीं समझा.. और उसे नेक्स्ट किसी मिशन के लिए तैयार रहने को बोल दिया ...................

मेंटली टार्चर करके मैंने जिस गुंडे से शंकर के मैं बेस की देतेलनिकलवाई थी.. उसके हिसाब से यहाँ पर हमला करना आसान नहीं था...

मुझे भी लग रहा था. क शंकर से उसके इस मैं बेस पर टकराना हमारे लिए बोहत hi घातक है.. लेकिन जब्ब करना hi था.. तो फिर jaan-lea हो या घातक.

पीछे हटने का सवाल hi नहीं उठता था......

प्लान हमने बना लिया था..

और यहाँ मैं पहले अकेला hi जाने वाला था.. क्यूंकि अभी मैं अपने किसी भी दोस्त को ऐसे खतरे में डालने वाला नहीं था......

हाँ एक ट्रांसमीटर चिप हम सबने अपने अपने कालर में हाईड करके लगाई हुई थी..

यहाँ मोबाइल फोन का उसे सही नहीं था.. और हमारे लिए रिस्की भी था....

राजा:- कीजै एक बार फिर से सोच लो.. तुम जो करने जा रहे हो.. वो मुझेसहि नहीं लग रहा..

उदय:- विजय राजा ठीक कह रहा है.. तुम्हारा अकेले जाना सही नहीं है..

जीतू:- हाँ विजय तुम हम तीनो में से किसी एक को ले जाओ.

विजय:- देखो हम सबब अंदर के बारे में सही से नहीं जानते.. और जितना मैं एक ेला कर सकता हूँ. वहां तुम सबब में से कोई नहीं कर सकता... इसलिए मुझसे बहस मैट करो... और मैं अभी पूरे बेस को उड़ने नहीं जा रहा. मैं वहां चुप कर पहले सबब देखूंगा.. फिर कुछ करूँगा.. और वैसे भी हम सब एक दुसरे से कनेक्टेड हैं. तो फिर टेंशन किस बात की. और मैं सब बताता भी रहूँगा... अब्ब मुझे चलना चाहिए.. बोहत देर हो रही है..

तीनो hi मुझे देखने लगे.. लेकिन अब्ब वो क्या कह सकते थे... मैंने अपना फैसला सुना दिया था...

मैं सब को bye बोल कर शंकर के बेस की तरफ बढ़ गया......




************************************************************************




 
जब्ब हीरोइन है तो विजय के इलावा किसी और के लिए तो केहक की छूट हो hi नहीं सकती थी....

खतरनाक तो क्या हुआ.. है तो छूट वाली hi ना.. विजय दन्न को सन्न बनाएगा या विजय ने दन्न के कुछ और भी स्पेशल सोच रखा है... वो तो आगे hi पता चलेगा...

और दन्न और रेखा बाई के लिए विजय ने क्या सजा सोच राखी है.. वो भी आने वाला वक़्त hi बताये गए

थैंक्स फॉर थे कमेंट...... एंड सुग्गेस्टिव.....
 
Back
Top