Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 20 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::: 90

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जूली के पास पोहंचा तो जूली मुझे अपने केबिन में hi मिली.. जूली एक चेयर पर बैठी टेबल पर झुकी कुछ पेपर्स को रीड कर रही थी.. पूरा टेबल hi पेपर्स से भरा हुआ था..

लगता है जूली कल से बिजी है.. मेरे क़दमों की आहात से उसने सर्र उठा कर मुझे देखा, मुझपर नज़र पड़ते वो एक झटके में hi उठ कड़ी हुई.. और तेज़ क़दमों से चलती हुए मेरे पास आई और मेरे गले से लग गई.. मुझे अपनी बहन में लिए ज़ोर से भेंचा.. फिर मेरे गालों पर किश करने के बाद मेरे होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगी..

जूली अपने होंटो पर लगी लिपस्टिक को भूल क्र मुझे किश करने लगी..

जब जूली के होंटो का रंग मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर अच्छे से ट्रांसफर हो गया तो जूली ने मुझे छोड़ दिया....







जूली:- कोंग्रटुलतिओं विजय, तुमने अपना मिशन क बढ़िया से अंजाम दिया है.

मुझे बहुत ख़ुशी हुई है तुम्हे फिरसे अपने सामने पा कर...

मैं अपने होंटो को अपने एक हाथ की उलटी हथेली से साफ़ करते हुए बोलै..

विजय:- हाँ वो तो मैं देख hi रहा हों.. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर तुम्हारी ख़ुशी क सारे रंग दिख रहे हाँ..

जूली ने जैसे hi मेरे चेहरे पर धयान धयान दिया.. तो ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगी.. और फिर केबिन में लगे मिरर के पास जा कर खुद को देखने लगी...






विजय:- अब खुद को क्यों देख रही हो, मेरे चेहरे को देख कर सबब समझ में ा तो रहा है..

julie:-(hasste हुए) वो तो कुछ ज़यादा hi समझ में आ रहा है.. मैं तो देख रही हों, लिपस्टिक के साथ तुम्हे किश करने क बाद मैं कैसी लगने लगी हों.

बहुत वक़्त क बाद मैंने ऐसे किसी को किश की है.. विजय ऐसे किश करने का भी अपना एक मज़ा है.. आओ देखो हम दोनों एक साथ आईने में कैसे दीखते हाँ..

मैं चलता हुआ जूली क पास पोहंचा और उसे पीछे से बहन में भर लिया.. मैंने अपनी चीन जूली क कंधे पर रख दी....

विजय:- जूली तुम ऐसे खुश रहने से कितनी पायरी लगने लगी हो ना.. ऐसे hi रहा करो हमेशा.. मैंने पहले तो कभी तुम्हे नहीं देखा.. पर तुम्हारे चेहरे पर ऐसे रंग बहुत hi भले लगते हाँ..

जूली ने अपना एक हाथ उठाया और मेरे गालों को सहलाने लगी..

जूली:- हाँ विजय, लाइफ तो मैं पहले भी जी रही थी, पारर लाइफ असल में कैसे जी जाती है, वो मुझे अब्ब तुम्हारे साथ रहने से पता चला है, पहले साँसे तो थीं.. मैं मर्ज़ी भी थी.. सेक्स की इन्तहा भी थी.. पर देखो तुमसे बास एक बार hi कुछ देर क लिए चूड़ी हों, पर अंदर अब्ब वो आग नै रही जो हुआ करती थी, अब्ब लाइफ जीने का मज़ा आने लगा है.. प्यार में सबब किया जाए, किसी की चाह दिल में होने लगे, तो सबब कुछ बहुत hi भला लगने लगता है... ये सबब कितना रोमांटिक लग रहा है, मेरे लाइफ में ऐसी मोमेंट्स पहले कभी नहीं आयी थीं.. जब से तुम मिले हो अंदर खिला खिला सा रहने लगा... अब्ब मई बहुत खुश हों.. और..................

जूली आगे कुछ कहती किसी के खांसी की आवाज़ आई

ukhuuu..ukhuuu..

आवाज़ सुन कर हमने उधर देखा तो फिरसे कबाब में हड्डी.. उदय था दूर पर और साथ में बाक़ी सबब भी थे..

उदय:- विजय तुम्हे भी बास मौका चाहिए रोमांस करने का, जूली को अकेला पाया नहीं और हो गए शुरू. कभी तो उस बेचारी को छोड़ दिया करो.. और जूली तुम... तुम्हे भी कुछ ज़यादा hi आग लगी हुई है.. न जगा देखती हो और न hi टाइम...

जूली:- उदय तू मेरे हाथो से मरेगा किसी दिन.. कमीने जब्ब देख लिया था, तो सबब कुछ देर क लिए वापिस क्यों नहीं लौट गए.. हर बार मज़ा किरकरा करना ज़रूरी है क्या.. थिस इस लास्ट वार्निंग फॉर यू...

जूली की बात पर जीतो और अनु हस्सन लगे..

उदय:- अरे अंग्रेजी मैडम, हमारे सामने अंग्रेजी मैट झाड़ो.. हम तो देसी बन्दे हाँ.. देसी hi बोलिये हमसे... विजय है ना, उसके साथ अंग्रेजी बोलो या फ्रेंच हमे फर्क नहीं padta..parr....

उदय आगे कुछ बोलता जूली ने अपने बालों से हेयर बंद उतार कर उदय की तरफ उछाल दिया.. जिसे उदय ने जम्प लगते हुए कैच कर लिया... जितनी देर में उदय ने हेयर बंद कैच किया, उतनी देर में जूली भी जिमनास्टिक का मुज़ाहिरा करते हुए अपने हाथो पैरों पर घूऊमटी हुई उदय के पास पोहंच गई. इस सबब में जूली को कुछ सेकण्ड्स hi लगे थे...

जूली ने उदय को चारा डालने क लिए हेयर बंद फेंका था, जिसे उदय स्टुपिड ने अपनी हीरोगिरी क चक्कर में कैच कर लिया था..

जूली ने उदय के पास पोहचते hi उदय को दोनों हाथो की मदद से कमर पार्स पकड़ते हुए हवा में hi उठा लिया.. जब्ब तक्क उदय कुछ समझ पाटा, जूली ने उसे दो चक्कर दिए और साइड में पड़े हुए सूफी पर पटक दिया...







केबिन अचानक से hi सबब क ज़ोरदार kah-kahon से गूँज उठा.. उदय सूफी पर गिरा तो था पारर उसे सबब कुछ समझ में नहीं आया था.. वो वही बैठा सर्र को घुमा कर सबब को देखने लगा... फिर अपने सर्र घुमा कर आईने की तरफ देखने लगा..

वो सोच रहा था, क जूली तो वहां थी, फिर वो मेरे पास कब्ब आई, और मैं सूफी पर कैसे आया.. फिर शायद वो स्लोमोशन में सबब अपने दमाग में रिवाइंड करने लगा, जब्ब उसे सबब समझ में आया तो

उदय:- देख लूंगा तुझे भी जूली की बच्ची, बहुत फुर्ती है ना तेरे में. तेरे इस नजूल से शरीर में..... मुझे भी एक मौका चाहिए, सब वसूल लोनागा.. फिर दिखाना अपने करतब..

जूली भी हमारे साथ hi हस्स रही थी.. हस्ते हस्ते वो चुप हुई अपने शर्ट को बारी बारी दोनों बाज़ो पार्स ऊपर खेंचा और

जूली:- बाद में क्यों, अभी आ जाओ मैदान में, अभी सबब हाँ तो कुछ खेल भी हो जाए... और कितना दुम्म है तुममे वो भी देख लेते han..kyun विजय तुम क्या कहते हो...

विजय:- हाँ हाँ, दो दिनों से गुंडों का खेल देख देख कर उक्त गया हों.. उदय को लड़ते हुए देखे भी कई दिन हो गए हाँ.. कुछ रंग बदलने चाहिए.. मेरी तरफ से तो ok hi है.. बाकी का पता नहीं.

राजा:- मेरी तरफ से भी ok hi समझो...

jeeto.anu:- हाँ उदय जूली को भी आज दिखा दो, हम भी किसी से कम् नहीं हाँ.. जीतो और अनु उदय को छेड़ रहे थे.. वर्ण सबब hi जानते थे.. जूली से मेरे शिव कोई नहीं लड़ सकता..

उदय:- नहीं, नहीं अभी मेरा मैं नहीं है.. जूली से मुकाबला फिर कभी सही.. अभी ब्रेकफास्ट किये कुछ hi देर हुई है तो खाने क बाद फोरि लड़ाई अच्छी बात तो नहीं है नाआआ.....

उदय भी दांत निकलता हुआ बोलै तो सबब एक बार फिरसे हस्सन लगे..

10 मिंट बाद तक ऐसे hi हंसी मज़ाक़ चलता रहा..

सबब hi फिर टेबल के गिर्द बैठ गए.. अब्ब सबब hi सीरियस the..maine और जूली ने अपने चेहरे पर लग लिपस्टिक साफ़ कर ली थी..

विजय:- जूली कल से कुछ किया है क्या, या अभी भी तैयारी में हो...

जूली:- नहीं विजय एक काम हुआ है.. बाकी का भी जारी है.. ये सबब जो टेबल पर पड़ा हुआ तुम देख रहे हो.. ये उसी से रिलेटेड है.. जूली ने टेबल पर लगी घंटी बजाई.. तो एक लड़का अंदर आया..

जूली:- मोहन, शेखर को भेजना..

शेखर अंदर आया, मैं चुप hi रहा, मैं देख रहा था, जूली क्या करने वाली hai..shekahr 24-25 आगे का लड़का था...

जूली:- शेखर वो चेयर यही ला कर उसपर बैठ जाओ..

शेखर चेयर ला कर हमारे पास hi बैठ गया...

जूली:- विजय ये शेखर है.. हमारे hi कण्ट्रोल रूम में है, तुमने देखा hi होगा, पर अभी तुमने इससे बात नहीं की होगी.... शेखर तो बी चांस hi हमें मिल गया था.. शेखर एक कमाल का इंसान भी है.. किसी हद्द तक्क हैकिंग की जान कारी भी रखता है... एक तो इस हवाले से ये हमारे काम का है.. दूसरी बात इसकी दीदी जिसकी अब्ब शादी हो चुकी है.. कभी वो किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती रही हाँ.. वहां भी उसे वही प्रोब्लेम्स हुई, जैसा तुमने ज़िक्र किया था.. शेखर की बहन का नाम शुष्मा है... तो शुष्मा को खुद से कुछ कर दिखने का बहुत जूनून था.. वो जब तक उस कंपनी में रही .. कंपनी को उसकी वजा से बहुत प्रॉफिट हुआ.. कंपनी के आर्डर बढ़ने लगे... अभी उस कंपनी ने इंडिया में नई नई काम शुरू किया था.. तो शुष्मा की वजा से उस कंपनी ने काफी तरक्की की.. पारर फिर कुछ लोगों से शुष्मा से बाद बिहैवे शुरू कर दिया जिस वजा से शुष्मा को कंपनी से रिजाइन करना पड़ा..

शुष्मा का सपना टूटा तो फिर उसने कभी किसी और कमपनी में जॉब के लिए नहीं सोचा... शेखर तक्क तब्ब कुछ करने लायक हो चूका था.. और फिर शुष्मा की शादी भी हो गई तो शुष्मा ने खुद को घरदारी में मसरूफ कर लिया.. शेखर से हुई बातों से मुझे उनसे मिलने की छह तुई तो मैंने शेखर से डिटेल में बात करि.. और आज उन्हें आने के लिए भी कह दिया था..

क्यों शेखर तुम्हारी दीदी आई हाँ आज..

शेखर:- जी मैडम.. वो आई हुई हाँ.. पारर वो जॉब के लिए खुद को तैयार नहीं पाती हाँ.. बास मेरे कहने पारर hi वो यहाँन तक्क आई हाँ..

विजय:- शेखर तुम अपनी दीदी को बुलाओ. मैं उससे बात करता हों..

शेखर उठ कर चला गया..

कुछ देर में hi शेखर अपनी बहन क साथ अंदर आ गया.. मैं दूर की तरफ hi देख रहा था.. शेखर की दीदी 30 के आस पास थी.. पर देखने में वो शेखर जितनी hi लग रही थीं... उनकी पर्सनालिटी देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा.. अपनेपनं की फीलिंग्स मुझे उन्हें देख कर आने लगी थीं..

शुष्मा का चेहरा माँ के चेहरे से 40% मिलता जुलता था.. कुछ कुछ माँ जैसे नैन नक्श थे... मैं उनकी रेस्पेक्ट में खड़ा हो गया.. तो मुझे देख कर बाकी भी सबब खड़े हो गए...

दोनों हमारे पास पोहंचे तो

शुष्मा:- hello एवरीवन...

सबब hi फिर बरी बरी hello हाय करने लगे...

मैं साइड में हुआ और

विजय:- दीदी आप मेरी चेयर पर बैठ जाएँ..

शुष्मा मुझे देखने लगीं..

शेखर:- दीदी ये यहाँ क बॉस विजय हाँ..

विजय:- नहीं दीदी मई यहाँ का बॉस नहीं हों.. आप मेरी दीदी क सम्मान हाँ तो आप भी यहाँ की बॉस हुई.. आप प्लीज बैठ जाएँ, ऐसे hi समझें जैसे हम सबब भी आपके शेखर हाँ.. किसी की नज़रों में आपको वैसा hi सबब कुछ दिखेगा.. जैसे आपको शेखर की नज़रों में दीखता है.. हम सबब दिल से आपका सम्मान करते हाँ.. प्लीज पहले आप बैठ जाइये...

शुष्मा की आँखों में नमी सी आने लगी मेरी बातें सुन कर.. उन्हों सोचा भी नहीं था, अचानक से hi उन्हें इतनी रेस्पेक्ट मिलेगी.. एक ऊँगली से अपनी नम्म आँखों को दबा कर ानुसों को बहार आने से रोकना छह रही थी..

बात थी रेस्पेक्ट की, जैसी वो कभी खुद क लिए छह रखती थी, शायद तब्ब कभी किसी ने उन्हें वो रेस्पेक्ट नहीं दी थी, जितनी वो डेसेर्वे करती थीं..

शुष्मा दीदी बैठ गए.. तो फिर सबब hi बारी बारी अपनी चेयर अपर बैठ गए थे.. शेखर ने मुझे अपनी चेयर दी और अपने लिए बहार से एक और चेयर ला कर बैठ गया..

मेरी चेयर शुष्मा दीदी क पास hi थी.. दीदी ने अपने दोनों हाथ टेबल पर रखे और सर्र झुका कर बैठ गई.. वो किसी गहरी सोच में थें..

मैंने एक नज़र सबब को देखा तो सबब hi सीरियस थे, शेखर को मैंने देखा तो उसकी आँखों में भी आंसू थे.... बहुत hi रेस्पेक्टेड पर्सनालिटी की मालिक थी सुषमा दीदी... बड़ा रोबदार चेहरा .. जैसे किसी राज घिरने से राल्टेड हों...

मैंने अपना एक हाथ दीदी के हाथो पर रख दिया, दीदी ने मुझे देखा उनकी आँखों में आंसू बहने लगे थे.... जो धीरे धीरे उनकी आँखों से बहते हुए नीचे आने लगे..

मैंने दीदी क हाथो की पुष्ट को सहलाया..

विजय:- दीदी मई समझता हों, आपके मैं में क्या कुछ चल रहा है. मई तो एक नज़र में hi आपको देख कर जान गया था.. दीदी दिल से रेस्पेक्ट मिले तो सहन करना मुश्किल होता है.. वर्ण आपके जैसी पर्सनालिटी की मालिक किसी अनजान के सामने तो अपनी आँखों को नम्म भी न होने दें.. आप तो फिर भी आंसू बहा रही हाँ.. बहुत दर्द झेले होंगे ना आपने.. सारे खवाब चकनाचूर जो हो गए थे आपके .. आप जैसे इतनी पायरी परसोलालित्य की मालिक के साथ बुरा बर्ताव किया गया था, वो सबब आपसे सहन नहीं हुआ तो आपने जॉब छोड़ दी..

आपके खवाब टूट गए हाँ ना didi..aapka भाई है आपके साथ.. आपको वो रेस्पेक्ट भी मिलेगी जो आप चाहती हाँ.. वो सारे खवाब भी आपके पुरे होंगे जो आपने कभी देखे थे.. मैं दूंगा हमेशा आपका साथ.. आपका भाई सिर्फ शेखर hi नहीं है.. हम सबब भी आपके शेखर जैसे hi हाँ..

शुष्मा दीदी ने मुझे देखा मेरे हाथो क नीचे से अपना एक हाथ निकला और मेरे हाथो क ऊपर रख दिया... शुष्मा दीदी मेरी आँखों में गौरसे देखने लगीं... कुछ देर देखती रहीं और फिर मेरे हाथ पर अपने हाथ का दबाओ बढ़ने लगी.. उन्हें शायद मेरी आँखों में मेरी बातों की सच्चाई दिख गई थी..

शुष्मा दीदी ने खुद पर कण्ट्रोल प् लिया था.. पुरे केबिन में hi ख़ामोशी छाई हुई थी.... शुष्मा दीदी मेरे हाथ को thap-thapane लगी..

शुष्मा:- भाई, क्या नाम है तुम्हारा..

विजय:- दीदी, विजय..

शुष्मा:- विजय इंसानो को पहचानने की बड़ी परख है मुझमे.. और मैं तुम्हे देख कर तुम्हारी नेचर के बारे में भी सबब जान गई हों.. हर तरह क लोगों से मैं मिली हों, तुम्हारे जैसे भी मुझे कई मिले हाँ अपनी लाइफ में.. पारर तुम जितना साफ़ दिल इंसान मुझे कभी नहीं मिला.. मुझे ख़ुशी है, मेरा भाई शेखर तुम सबब क बीच है.. मैं क सच्चे लोग कम् hi कही मिलते हाँ, और इतनी रेस्पेक्ट देने वाले तो बिलकुल भी नहीं मिलते.. पहली hi बार तो मिले हाँ हम. बिलवाजा कोई किसी को इतनी रेस्पेक्ट नहीं देता.. कोई न ग़र्ज़ तो तुम्हे भी मुझसे होगी विजय भाई, पारर जो भी तुम्हारी घरज़ है, वो किसी क लिए गलत नहीं हो सकती, तुम्हारी आँखों की चमक और कुशादा पेशानी मुझे बहुत कुछ समझा रही है भाई... तुम्हारे मोहन से निकला हुआ एक एक शब्द सच्चा है और वो सबब तुम्हारे दिल की आवाज़ है.. मुझे तुमसे मिलकर बोहत ख़ुशी हुई है मेरे भाई..

यही सबब तो एक नारी अपने सामने वाले से चाहती है.. मुझे पता होता क मुझे यहाँ इतनी रेस्पेक्ट, इतना प्यार मिलने वाला हिअ , तो मैं कब की दौड़ी दौड़ी चली आती..

मैं और शुष्मा दीदी सबब को हैरत से देखने लगे... ताली बजने वळून में उदय सबब से आएगी था..

उदय:- विजय हमें शुष्मा दीदी मिली है... दीदियां तो पहले hi बहुत सी हाँ.. पारर इस बार की मिली दीदी सबसे NO 1 हाँ.. क्यों जीतो तुम क्या बोलते हो..

जीतो:- एकदुम्म सही बोलै तू उदय.. दीदी सच में hi बहुत ग्रेट हाँ.. हमें भी दीदी को अपने बीच पा कर बहुत ख़ुशी हुई है..

अनु:- दीदी क आने से हमारी टीम और भी स्ट्रांग हो जाएगी...

राजा:- (शेखर के कंधे पर हाथ रखते हुए) शेखर तुम्हारा और तुम्हारी दीदी का सवागत है हमारी टीम में.. मैं भी इस सबब से बहुत खुश हों.. मेरे मोहन बोले अपनों में एक और का इज़ाफ़ा हुआ है.. दीदी मुझे भी अपना भाई hi समझना.. मैं बहुत कम् hi किसी को अपना मानता हों.. सबसे पहले ये (uday,jeeto,anu की और इशारा करते हुए) मुझे मिले.. पारर हमारा रिश्ता और दोस्ती इतनी पक्की नहीं थी, हम सड़क छाप आवारा थे.. फिर हमें विजय मिला तो हमारी ज़िन्दगी को भी एक दिशा मिल गई.. तब्ब से hi हम सब बदल गए.. फिर धीरे धीरे और भी हम में शामिल होने लगे.. लाइफ कुछ और खूबसूरत होने गई.. अब्ब आप दोनों क आने से इस खूबसूरत लाइफ को चार चाँद लग जाएगा... कभी भी आपको लगे क आपकी रेस्पेक्ट में कोई कमी आ रही है, तो विजय से कह दीजिये, विजय ने मिला तो मुझे मई हों यही पर, मुझे बता दीजिये, पर कभी भी कोई भी बात अपने दिल में मैट रखना..

राजा की बात से शेखर और शुष्मा दीदी बहुत खुश हुए..

शेखर:- थैंक्स जूली मुझे और दीदी को ऐसे माहौल देने क लिए.. एक hi दिन में हमारा तो सबब कुछ hi बदल गया.. कभी सोचा नै था.. ये तो एक चमत्कार hi हुआ है.. क्यों दीदी पहले कभी ऐसा हुआ है क्या.. हमने तो दुन्या से ऐसे बर्ताव की उम्मीद hi छोड़ दी थी..

दीदी:- हाँ भाई, दुन्या में अच्छे लोग भी हाँ, जो दिल से रेस्पेक्ट देते हाँ, और दिल से किसी को अपना मानते हाँ, पर हमारी लाइफ में भी कुछ ऐसे लोग आएंगे, इसका यकीन नहीं रहा था.. पारर भगवन भी तो है ना, वो अपने बन्दों का ख्याल तो रखेंगे hi...

जूली:- विजय मैं सबब क लिए कॉफ़ी बना कर लाती हों, आज आप सबब मेरे हाथ की कॉफ़ी टास्ते करें..

उदय:- और मेरे लिए कॉफ़ी कड़वी मैट बना कर लाना..

उदय की बात से शेखर और दीदी को छोड़ कर हम सबब हस्सन लगे..

जूली:- अच्छा किया तुमने बता दिया.. शेखर और शुष्मा क चक्कर में मई तो पहले वाला सबब भूल hi गई थी.. तो फ़िक्र मैट करो, तुम्हारे लिए कफ मई कुछ ज़ायदा hi स्पेशल ले कर आओगी...

जूली कॉफ़ी बनाने चली गई...

विजय:- लो उदय तुमने तो जूली को सब याद दिला दिया...... उदय को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वो अपना सर्र खुजाने लगा.. बाकी उदय को देख कर हस्सन लगे..

दीदी और शिकार मुझे सवालिया नज़रों से देख रहे थे.. उन्हें इस बात की समझ नहीं आई थी.. तो मैंने जूली ने जैसे उदय को नीचे पटका था वो बता दिया.. दोनों भी हस्सन लगे..

जूली क आने क बाद सबने कॉफ़ी पि.... कुछ देर बातें हुई तो दीदी ने शेखर को उसका काम करने भेज दिया...

जिस काम क लिए शुष्मा दीदी की ज़रूरत थी, उसके रिलेटेड बातें होने लगीं, शुष्मा दीदी कई ऐसी लड़कियों को जानती थीं.. जो उन्ही की तरह से जॉब छोड़ चुकी थीं.. उन्हें इस सबब का एक्सपीरियंस भी बहुत था.. और नॉलेज भी.. शेखर किसी हद तक्क हैकिंग भी कर लेता था, दिल्ली में मौजूद कम्पनीज से डाटा चोरी कर सकता था.. हमें तो बास एम्प्लॉएंस की डिटेल hi चाहिए थी..

इस में ज़यादा प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी, और आगे का सबब दीदी और जूली खुद देख लेती.. दीदी को मैंने अपने विचार खुल कर बता दिए थे.. मैं बिज़नेस क्यों करना छह रहा हों, और कैसे लोगों को खुद में शामिल करना चाहता हों, अनाथ लोगों को खुद में शामिल करना, ज़रूरत मंद स्टूडेंटन्स को खुद में शामिल करना और जॉब में उन्हें कैसी कैसी फैसिलिटीज, दी जानी chahiye.kaise पैकेजेस मैंने उनके सोच रखे हाँ.

कुछ दिन पहल मैंने जूली से जो भी डिसकस किया था.. वो सबब शुष्मा दीदी को बता दिया..

शुष्मा दीदी मेरी पूरी बात सुनकर हैरान रह गई...

दीदी:- विजय भाई, ये सबब तुमने सोचा है, हैरत है, पर कमाल भी है.. जैसा तुमने सोचा है, वैसा करना अगरचे मुश्किल तरीन और रिस्की है. पारर जैसे तुमने कहा क तुम ये सबब पैसा कमाने क लिए नहीं कर रहे हो, तो मैं तो फिर यही कहूँगी क ऐसा करके कोई भी बिज़नेस शुरू किया जाए.. उसे रातो रात तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता.. अक्सर कम्पनीज इसी लिए लिमिट में रहती हाँ, वो खुद के प्रोफिर को पहले सामने रखती हाँ.. पारर हम जो बिज़नेस शुरू करेंगे, उसमे वर्कर्स को हम पहले नंबर कर रखेंगे....

तो फिर वर्कर तो आटोमेटिक अपना बेस्ट देंगे.. वो भी जान जाएंगे, जितना बेस्ट देंगे , उसी हिसाब से उन्हें पेमेंट मिलेगी..

मैं एडवांस में hi तुम्हे कॉंग्रट्स कर देती हों.. नए होने वाले बिज़नेस की सक्सेस की..

विजय:- दीदी जो बिज़नेस शुरू हो रहा है, वो मेरा नहीं होगा, वो होगा सबब का, कोठे से लाइ गई लड़कियों और औरतों के बारे में मैं आपको बता दिया है.. आप उन्हें ज़िन्दगी में आगे बढ़ना सिखाएंगी.. जैसी लाइफ वो जीना छह रही हाँ, उन्हें उस सबब क बारे में गाइड करेंगी. इन जैसी और भी हमे कई मिलेंगी, हमने सभी को अपने साथ मिलाना है.... मैंने तो बास अपने विचार आपके और जूली के सामने रखे हाँ, करना तो आप सबब को hi है ....

दीदी:- हाँ भाई वो भी सही है.. पर शुरू तो तुम hi करोगे ना, और इस सबब को पूरी तरह से हैंडल भी तुम्ही करोगे.. बिज़नेस को शुरू करना कोई आसान काम तो है नहीं.. कई मुखालिफ खड़े हो जाते हाँ. फ्लॉप करने क लिए यदि छोटी का ज़ोर लगाना शुरू कर देते हाँ...

विजय:- हाँ वो सबब तो मैं देखूंगा hi.....

दीदी और जूली से 1 घंटा मीटिंग हुई. राजा गैंग भी कभी कोई बात कर लिया karti..warna वो अक्सर चुप hi रही... जूली भी ज़रूरत के हिसाब से hi बोल रही थी.. मेरे बाद जूली ने hi सबब दीदी के साथ मिल कर करना था..

फिर सबब चले गए..... केबिन में मई और दीदी अकेले hi रह गए..

विजय:- दीदी आपको पता है, आप बहुत ज़यादा खूबसूरत हाँ....

दीदी मेरी बात पर मुस्कुराने लगीं..

दीदी:- अपनी दीदी से फ़्लर्ट कर रहे हो...

विजय:- हाँ दीदी, इतना तो चलना hi चाहिए ना.. वर्ण जैसी आपकी पर्सनालिटी है.. सोच के hi डर लगता है.. क कही आप एक थप्पड़ hi न मार दें...

दीदी इस बार मेरी बात पर हस्सन लगीं..

दीदी:- नहीं भाई, मुझे तुम्हारे कैसे भी बात करने से कोई आपत्ति नहीं है, जो दिल के साफ़ हों, उनके साथ तो ऐसी बातें और भी ज़यादा मज़ा देती है, वो सबब दिल की सदा होती हाँ ना.. और मैं सिर्फ देखनी में hi ऐसी हों, मुझे ऐसा रंग ज़माने ने hi तो दिया है.. गन्दी नज़र डाली गई मुझपर, फिर मेरे खवाब तोड़ दिए गए.. वर्ण मैं बहुत hi हंस मुख हों.. मुझे भी अपनी लाइफ हंसी ख़ुशी जीने की बहुत चाह है... पारर लाइफ के बदलता रंग कभी एक रंग में रहने हु नहीं देते.. जैसी बातें तुम कर रहे हो.. कभी मई भी ऐसी hi थी.. ऐसी बातों से तो लाइफ जीने का मज़ा hi कुछ और है.. और आज सालो बाद मुझे फिर वही शुष्मा बनने का मौका मिल रहा है, जैसी में पहले हुआ करती थी... थैंक्स

भाई मुझे अपनों शामिल करने क लिए.. एक बार फिरसे मुझे इंसानो पर भरोसा दिलाने क लिए.. वर्ण मई अपनी लाइफ में hi बिजी हो गई थी..... एक साइलेंट लाइफ जी जी कर मैं भी उक्त गई थी...

विजय:- दीदी, अभी तो मैंने आपको असली रंग तो दिखाए hi नहीं हाँ.. अंदर पैलेस में पूरी एक लेडीज मण्डली है, जिससे मिल कर आप को बहुत ख़ुशी मिलेगी.. आपकी लाइफ का सारा अधूरापन मिंटो में hi ख़तम होकर रह जाएगा...

दीदी:- हाँ तुम्हे देख कर मुझे तुम्हारी बात का यकीन भी आ गया है..

विजय:- दीदी जीजा जी क्या करते हाँ..

दीदी के हस्बैंड का ज़िक्र आते hi दीदी एकदुम्म से hi चुप हो गईं...

विजय:- सॉरी दीदी मैंने कुछ गलत बोल दिया हो तो..

didi:-(chehra साइड में घुमा कर लम्बी सांस लेते हुए, ) नहीं कोई बात नहीं.. वो एक गारमेंट्स फैक्ट्री में असिस्टेंट मैनेजर हाँ.. कुछ और मैट पूछना, मई नहीं बता पाऊँगी... दीदी का चेहरा एकदुम्म से hi मुरझा गया था..

मैं खड़ा हुआ और दीदी को भी एक बाज़ो से पकड़ कर उठा कर खड़ा कर दिया. मैं तो बेशरम था hi,mujhe दीदी को उठाने में कैसी झिझक.. दीदी मुझे हैरत से देखने लगीं..

मैंने अपने दोनों हाथ दीदी के दोनों कंधो पर रख दिया.. दीदी की ऑंखें मारे हैरत के बड़ी बड़ी होने लगीं...

अचानक से hi मैंने दीदी को अपने गले से लगा लिया.. और उनकी पीठ को सहलाने लगा.. दीदी का शरीर बोहत गरम था.. उनकी आँखों में मुझे एक पियास दिख गई थी, इक अधूरा पत्र था दीदी की लाइफ.. उनके कहे बिना hi मैं किसी हद्द तक्क समझ चूका था.. पारर यहाँ मेरी फीलिंग्स दीदी को लेके दूसरी नहीं थीं..

दीदी भी कही न कही पियासी थीं.. मैं उनकी पियास तो बुझाने से रहा..

पारर मैं दीदी क मैं की पियास तो बुझा hi सकता था... मुझसे दीदी का दर्द सहन नहीं हुआ... एक तो दीदी की सूरत माँ से बहुत मिलती थी, दूसरा मैं तो था hi ऐसा, किसी के दर्द को अपना समझने वाला..

कोई मुझसे आत्ताच हो और वो दुखी रहे.. ये कैसे हो सकता था.. मैं दीदी की पीठ को सहलाने लगा.. दीदी क बदन में कपकपी सी होने लगी. दीदी जो मेरे गले लगते hi सटपटाने लगी थी.... दीदी अब्ब पूरा ज़ोर लगा कर मुझसे छूटने की कोशिश करने में लगी थी.. पर मैंने दीदी को नहीं छोड़ा... दीदी ने कुछ देर के लिए बाहर ज़ोर लगाया मुझसे छूटने क लिए.. पारर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा.

मई कभी किसी को छोड़ने क लिए अपने गले से लगता hi कब्ब था.. जो एक बार मुझसे आत्ताच हो जाए.. वो मेरी फॅमिली का हिस्सा बन जाता था..

दीदी... विजय ये क्या कर रहे ho..chhodo mujhe..door खुला हुआ hai..koi देख लेगा.. शेखर आ जायेगा.. ये सही नहीं विजय... मैं कभी शेखर से भी ऐसे नहीं मिली.. भाई प्लीज मुझे छोडो.. मुझे बहुत अजीब लग रहा है.. ममममम..

मैं हमेशा मर्दों से दूर दूर hi रही हों... chh..chhhhoda दो भभ.. भाई..




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थैंक्स संदीप भाई..!!

लाइफ में कभी कभी अजीब चरक्टेर्स भी आते हाँ.. यहाँ भी ऐसा hi हुआ है. विज्जू से किसी का दुःख देखा नहीं जाता, इस लिए विज्जू ने शुष्मा को अपने गले से लगा लिया.. शुष्मा जो अपने शरीर को हमेशा hi मर्दों से बचा कर रखती थी, वही शरीर इस बार विज्जू की बहन में समाया हुआ था.. अब्ब नेक्ट देखते हाँ.. क्या होता है.. कैसी सिचुएशन क्रिएट होती है.. कही विज्जू को एक करारा थप्पड़ hi न पद जाए.. पूजा से थप्पड़ खाये हुए विज्जू को काफी समय बीत चूका है.. गुंडों की बात अलग है.. लेडीज से थप्पड़ पड़ना अलग बात..
 
थैंक्स Dear..!!...........((((((((((((((Asad भाई, आपके इस अपडेट में दिए गए वक्तत्वे की विजय को सेक्स की भूख नहीं हैं से सहमत नहीं हूँ. आपने अपने एक पुराने अपडेट में विजय की इस इच्छा को दर्शाया था कोई वह स्वेता के पिछवाड़े का उद्धघाटन करना चाहता उसे स्वेता के पिछवाड़े से प्यार हैं और यह उसका हक़ हैं, भाई यह विजय की सेक्स की भूख नहीं तो क्या hain.......aapki प्रतिक्रिया का प्रतीक्षा रहेंगी........)))))))))))))))))

ये मेरे विचार नहीं हाँ.. ये तो विजय क विचार हाँ.. अक्सर इंसान ऐसा hi सोचता है.. पर होता कुछ और hi है.. मैं भी साफ़ होता है.. पर अंदर से सब करने क लिए भी दिल मचलता रहता है.. श्वेता भी तो विज्जू से प्यार करने के बाद भी विज्जू से सेक्स के लिए पागल है.. विज्जू भी सेक्स क लिए पागल है........ अगर विज्जू को सभी पैलेस में रह रही महिलाओं की छूट और गांड मिल जाए.. और उसके बाद विज्जू से कह दिया जाए क विज्जू 2 महीने तक्क किसी को हाथ भी नहीं लगाना.. और रहना भी सभी क अस्त है तो तब्ब विज्जू को पता चलेगा.. क प्यार और सेक्स में क्या अंतर है.. अभी उसके मैं में जो चल रहा है.. मई वही लिखूंगा..

हम भी अक्सर ऐसा hi कुछ सोचते रहते हाँ.. पर अंदर हमारे भी सबब चल रहा होता है.. लिखे जैसे कोई लड़का या लड़की एक दूसरे से इन्तहा का प्यार करते हों.. वो साहड़ी करलें .. पर प्यार न करें तो .. तो ये होना पॉसिबल नहीं है.. सेक्स प्यार पर हावी होने लगेगा... बहुत काम ये देखने सुनने में आया है कोई खुद पर कण्ट्रोल करले... कण्ट्रोल तो कर hi लेगा पर.. अंदर तो सेक्स फीलिंग उसे ुसकती hi रहेंगी..

श्वेता ने अब्ब अपने अधूरे रह चुके रंगो को फिरसे वापिस ला आकर उसे विज्जू क ज़रिये पुरे करने का सोचा है.. उसकी ज़िन्दगी की जो खुशियां अधूरी रह गई थी..

जो रंग उससे छूट गए थे.. वो श्वेता में वापिस आने लगे हाँ..
 
थैंक्स..!!

विज्जू तो खुद सभी क लिए लड्द्दू है. वो किसी को क्या खायेगा.. सब मिकार विज्जउ के पहाड़ कर रख देंगी.. संतरे विज्जू क हाथ में आएंगे नहीं.. हाथ में थमाए जायेंगे.. अभी कुछ दिन बीत जाएंग.. विज्जू का रिवेंज ख़तम हो लें.. सबब की खुल जाए.. तब्ब विज्जू क लिए सब करना कैसा रहेगा.. ये देखने वाला सन होगा.

जो भी होगा जैसा भी होगा.. पर होगा बहुत hi इंटरेस्टिंग
 
थैंक्स..!!

सेक्स की तालाब भी रहती है.. पर अगर प्यार भी साथ में शामिल हो जाए तो तड़प कम् हो जाती है.. जूली को विज्जू से अपनापन मिला तो वो भी अब्ब बदल रही है..

जूली बहुत बड़ी चुड़ककर रही है.. पारर अब्ब उसका मैं शांत है.. सब की hi तरह से जूली भी विज्जू से खुशियां सेलिब्रेट करना चाहती है.. विज्जू तो जूली को ऑलवेज वेलकम hi करेगा.. उदय क साथ जूली ने सही किया है.. जूली ने भी उदय को मस्ती वाला सबक़ सिखाया है.. जैसे फ्रेंड्स में होता है.. जूली भी सबब समझती है.

ये सब ओपनली करेगी तो कोई भी ा कर डिस्टर्ब कर सकता है.. और फिर सबब हाँ भी तो एक टीम hi.. तो घुसा हो होने से रहा.. षष्मा का भी कुछ कनेक्शन है,. जल्द hi सब सामने आ जायेगा.... विज्जू ने बोहत अच्छे से शुष्मा को रेस्पेक्ट और प्यार दिया है.. वो भी अंदर से बहुत दुखी है.. विज्जू तो किसी को दुखी देहक hi नहीं सकता.. अब्ब शुष्मा विज्जू की टीम में शामिल हो चुकी है.. जूली के रहते और अब्ब शुष्मा के शामिल होने से विज्जू को बिज़नेस टीम के लिए भी बेस्ट पार्टनर्स मिल गए हाँ.. गुरनाम के होने से विज्जू की गैंग को अच्छा लीडर मिल गया..

शुष्मा क अंदर का भी जल्द hi सामने आ जायेगा.. विज्जू तो वो सब जान कर hi रहगा..
 


अपडेट ::: 91


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मैं दीदी की सुने बिना hi उन्हें कस में अपनी बहन में लिए दीदी की पीठ को सहलाता raha..unhe छोड़ा नहीं.. कुछ देर तक्क दीदी बहुत ज़यादा मचलती रही.

खुद को मुझसे अलग करवाने क लिए बहुत ज़ोर लगाया.. पर वो एक नाज़ुक से शरीर की मालिक मेरे जैसे हट्टे काटते इंसान से खुद कैसे छुड़वा सकती थी..

धीरे धीरे दीदी का मचलना कम् होने लगा.. शायद उनके दिल ने उन्हें बता दिया हो क मुझसे कोई खतरा नहीं है.. या वो खुद को बेबस जान कर शांत होने लगी थी..

vijay:-(dheere से दीदी क कान में) दीदी

दीदी कुछ नहीं बोली.. बास तेज़ सांस छोड़े जा रही थीं..

विजय:- दीदी, मुझसे डर लग रहा है आपको..

दीदी चुप....

विजय:- दीदी मैं आपका भाई हों न.... आपने hi तो कहा था ना.. क मेरा अंदर मैं सबब आईने की तरह साफ़ है... तो मुझसे कैसा डर.. दीदी आप मेरी बात सुन्न रही हाँ न..

दीदी की तेज़ गरम साँसे मेरी गर्दन से टकरा रही थी.. फिर जल्द hi दीदी की साँसे नार्मल होती चली गईं.... खुद को मुझसे अलग करने की कोशिश उन्हों से तर्क करदी थी.

कुछ देर तक मैं ऐसे hi दीदी क कान में धीरे धीरे बोलता रहा.. दीदी और भी शांत होती गईं.. और फिर अचानक से hi दीदी की सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गईं.. दीदी हलकी आवाज़ में रोने लगी थीं..

मैं दीदी की पीठ को सहलाता रहा, कुछ देर ऐसे hi गुज़री तो मैंने दीदी को खुद से अलग किया.... दीदी का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था.. आज उनके अंदर का ग़ुबार बहार निकल रहा था..

कैसी अजीब बात थी, अभी हमें मिले टाइम hi कितना हुआ था.. पर हम कितने पास आ गए थे.. दीदी जो अपने भाई क गले भी कभी नै लगी थीं.. आज मेरे पास आते hi दो बार आंसू भी बहा दिए थे.. मैंने उन्हें अपने गले से भी लगा लिया..

उनके बर्ताव से साफ़ झलक रहा था, क वो अंदर से कितनी अकेली हाँ.. कोई नहीं है उनका ग़म बांटने वाला.. शायद उनकी लाइफ में कुछ ऐसा है, जो दीदी ने अपने भाई को अपने घरवळून को भी नहीं बताया था..

मैंने दीदी का हाथ पकड़ कर उन्हें चेयर पर बिठाया.. और जा कर दूर अंदर से बंद कर दिया.. मैं वापिस आया और चेयर को दीदी की चेयर क साथ जोड़ कर बैठ गया..

मैंने दीदी का चेहरा अपने दोनों हाथो में थमा और अपनी तरड़ मोड़ लिया. इस बार दीदी ने कुछ नहीं कहा.. मैं दीदी की आँखों दे देखने लगा तो दीदी भी नम्म आँखों से मेरी आँखों में देखने लगीं..

विजय:- दीदी आपको पता है, आपका चेहरा मेरी माँ से 40% मिलता है.. इसी लिए मैं आपका दर्द सहन नहीं कर पाया..... मुझे ऐसा लगने लगा है, जैसे आप अपने अंदर मैं में कोई बात छुपाये हुए हाँ.. होगी कोई ऐसी बात जिसने आपको बहुत ज़यादा डिस्टर्ब किया है.. पारर मेरी एक आदत है.. मैं अपनों को कभी किसी ग़म में नहीं रहने देता.. देखा आपने, कैसे मैंने आज पहली मुलाक़ात में hi आपको गले से लगा लिया.. दीदी मैं अपनों को खुश रखने क लिए कुछ भी कर सकता hon..mujhe काम hi अब्ब शर्म आती है.. मेरे फॅमिली मैटर्स कुछ ऐसे हाँ, क मैं ऐसा बन्न गया हों..

मेरा ये ऐटिटूड ऐसा hi है, मैं किसी से किसी भी तरह की शर्म नहीं करता.. दीदी ऐसी शर्म को क्या करना है. जिसके होने से हम किसी का ग़म hi न बाँट सकें.. दीदी मेरी आँखों में उतर कर देखो, अंदर गहराई तक आपको अपने लिए प्यार और रेस्पेक्ट hi नज़र आएगी.. एक भाई ने आपको अपने गले से लगाया है..

आप हमेशा hi मर्दो से दूर रही हाँ.. भाई मर्द हो कर भी सिर्फ मर्द नहीं होता दीदी..

भाई, भाई भी होता है, दोस्त भी होता है, बहन भी होता है, एक भाई से, एक दोस्त से एक बेहेन से कैसा डर दीदी .. आप कुछ भी ऐसा वैसा न सोचें.

और जैसा मैंने अभी किया आपके साथ किया है, ये पहली बार भी नहीं था, और न hi मई यही पर रुकने वाला हों, और आप मुझे रोक भी नहीं पाएंगी.. आप खुद को रिलैक्स करें.. या मैं कुछ और भी करके आप को रिलैक्स करों.. दीदी आप समझ रही हाँ मेरी बात को.. मैं आपको खुश देखने क लिए कुछ और भी आगे बढ़ सकता हों..

मैं बात करते समय दीदी क गालों को भी अपनी उँगलियों से सेहला रहा था..

दीदी मेरी ुंलियों को अपने गालों पर अच्छे महसूस कर पा रही थी.. पर इस बार उन्हों ने मेरी आँखों पार्स नज़रें नहीं हटाई थीं.. मेरी बात ख़तम होने दीदी ने खुद पर काबू पा लिया था..

मेरी बात खातम होते hi...

दीदी:- भाई मैं कैसे बताओं.. तुम्हारा अचानक से मुझे अपने गले से लगाना.. एक बार तो मैं अंदर से पूरी hi हिल गई थी.. किसी मेल से गले लगने की आदत तो मुझे शुरू से hi नहीं है.. प्यार मुझे भी बहुत है अपने भाई शेखर से पारर मैं कभी शेखर को भी गले से नहीं लगा पाई.. ज़यादा से ज़यादा भी हम दोनों hi एक दूसरे का हाथ थाम लेते हाँ.. भाई, हमारा बचपन बहुत अच्छा था, पारर फिर कुछ ऐसा हुआ क मेरी लाइफ क मानी hi बदल गए.. मई काया हमारे तो पुरे खंडन में hi सबब कुछ बदल गया.. एक तूफ़ान आया था हमारे खंडन में..

उसके बाद से सबब क जीने का ढंग hi बदल गया था..

या ये कहने सही होगा क बदल दिया गया था.. सालों तक्क हमे घर से निकलने की इजात नहीं थी.. श्वेता मेरी मौसी की बेटी..

विजय:- दीदी क्या नाम बोलै आपने..

दीदी:- श्वेता मेरी मौसी की बेटी का नाम है, वही बोलै है भाई..

विजय:- दीदी क्या आपकी दीदी की शकल आपसे मिलती है..

दीदी:- bhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.... kkkk.kyaaa. ttt..tum...

विजय:- हाँ दीदी मुझे भी कुछ ऐसा hi लग रहा है.... मैंने दीदी का हाथ पकड़ा एक झटके में उठा और उन्हें अपने साथ बहार लेजाने लगा....

विजय:- दीदी माँ भी यही हाँ, मैं आपको वहीँ लेकर चलता हों....

दीदी कुछ तो पहले से hi काँप रही थीं.. माँ यही पैलेस में हाँ, ये सुनते hi कुछ और भी कांपने लगीं... उनकी हालत अचानक से hi बदल गई थी..

मैंने दूर खोला और कण्ट्रोल रूम से बहार जाने लगा... दीदी के इस बार के आंसुओं की लिमिट नहीं थी.. उनके आंसू उनके गालों से इक टवटर से बह बह कर उनकी चीन पर इकठे हो रहे थे.. और वही से अब्ब गिरने वाले थे...

हमे ऐसे देख कर.. ख़ास कर दीदी को रट हुए देख कर सबब hi शॉकेड हो गए.. जूली मुझे हैरत से देखने लगी... शेखर एक झटके में खड़ा हुआ और भाग कर हमारी तरफ आया...

शेखर:- दीदी क्या बात है.. आप लाइफ में कभी रोइ नहीं हाँ, आज कैसे, और इतनी शिद्दत से..

विजय:- शेखर चलो मेरे साथ, और अभी कुछ मत पूछना..

शेखर:- पारर...

विजय:- शेखर मैंने कहा ना, अभी कुछ मैट पूछो, बास इतना जान लो, कुछ अच्छी खबर है तुम्हारे लिए और तुम्हारी दीदी क लिए.....

फिर जूली से.

जूली सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स आ गए होंगे, उसके सवागत का और दोनों लड़कियों को और उनकी फॅमिली को सेक्रेटली लाने का इंतेज़ाम करो.. मुझे अभी कुछ देर हो जायेगी..

जूली:- (शॉक में तो थी hi) ok, मैं कर लूंगी, तुम जाओ..

मैं दीदी का हाथ... सॉरी अब्ब शायद दीदी, अब्ब दीदी नै रही थी, मौसी बन्न गई थीं.. पारर मौसी कहना मुझे सही नहीं लग रहा था, तो दीदी hi सही चलेगा.

मैं दीदी का हाथ थामे हुए पैलेस की तरफ बढ़ने लगा.. पैलेस का दूर कुछ फासले पर hi था.. शेखर हमारे पीछे पीछे आने लगा.. वो शॉकेड कंडीशन में था....

पैलेस में दाखिल हुए तो ज़यादा तर लेडीज सिटींग हाल में hi बैठी हुई दिखी..

जैसे hi सबब की नज़र हम पर पड़ी तो मुझे ऐसे किसी के साथ देख क्र सबब hi कड़ी हो गईं..

जूही फॅमिली नहीं थी.. दीक्षा आंटी नहीं thee..shetal, राज, अनिल, रूपा और शिखा नहीं थीं बाकी सबब hi थी..

मई सबब क बीच में जा कर खड़ा हो गया.. वहां जाते hi मैंने शुष्मा दीदी का हाथ छोड़ दिया..

माँ ने शुषम दीदी को देखते hi अपनी नज़रों में कैद कर लिए था, और शुष्मा दीदी की भी नज़र माँ पर पड़ते hi ठहर सी गई थी.. शेखर को पूरी समझ नहीं थी. पर वो माँ को देख कर कुछ हैरान हुआ था.. दीदी और माँ के नैन नक्श मिलते जुलते थे..

प्रिय:- विज्जू ये कौन हाँ और..

विजय:- अभी कोई कुछ नहीं बोलेगा.. सबब शांत....

माँ और दीदी एक दूसरे को देखने लगीं, दीदी की तो आँखों में सावन भादों पहले से hi शुरू हो गया था.. माँ दीदी को देखते हुए अपने लेफ्ट गाल पर एक जगा ऊँगली रखकर दीदी को देखने लगीं..

दीदी के लेफ्ट गाल पर होंटो से कुछ ऊपर बाहरी तरफ एक टिल था.. माँ वही टिल देख कर कुछ याद करने को कोशिश कर रही थी..

माँ को अचानक से hi जैसे सबब याद आने लगा.. तो माँ के भी आंसू निकलने शुरू हो गए..... माँ अचानक से hi बहुत ज़यादा इमोशनल हो गईं..

मैं चलता हुआ माँ क पास पोहंचा.. और माँ को कंधे से थाम कर अपने गले से लगा लिया.. माँ का चेहरा शुष्मा दीदी की तरफ hi था..

विजय:- माँ आपकी छोटी बेहेन शुष्मा.. आपकी मौसी की बेटी..

मैंने माँ की पीठ को सेहला कर खुद से अलग किया और माँ का हाथ थामे हुए hi दीदी क पास लेजाने लगा.... दीदी की भी हालत अब्ब बहुत ख़राब थी.. वो वही कड़ी आंसू बहा रही थीं..

शेखर कुछ कुछ समझने लगा था, शेखर ने अपनी दीदी क कंधे पर हाथ रख दिया था...

मैं माँ को लिए दीदी के सामने पोहंच गया..

माँ:- मेरी शुशी..

दीदी बोली तो नहीं पारर हाँ में सर्र हिलने लगी.. माँ ने अपनी बहन खोलीं, दीदी तड़प कर माँ की बहन में समां गई..

फिर दोनों की hi बर्दाश्त ख़तम हो गई.. और चीखो में रोने लगीं.. बाकी सबब भी पास आ चुके थे..

विजय:- शेखर कुछ समझे..

शेखर:- हाँ अब्ब मैं सबब समझ गया हों भाई... श्वेता दीदी की बातें अक्सर hi माँ करती रहती है.. श्वेता दीदी को देखते hi मुझे कुछ शक हो गया था..

विजय:- तो फिर आ जाओ य्र्र मेरे गले लग जाओ.. अब्ब तो हम रिश्तेदार निकल आये हाँ..

शेखर भी तड़प कर मेरे गले से लग gaya.sahi माने में मुझे आज मेरे पुराने मिले थे.. मेरा से जुड़े हुए कुछ लॉफ मिले थे.. और वो भी ऐसे जो माँ के लिए भी तड़प रहे थे... शेखर और मई दोनों hi बड़ी मोहब्बत से एक दूसरे के गले मिले. शेखर भी अपनी दीदी की तरह आंसू बहाने लगा था..

माँ और दीदी का मिलान बहुत hi दर्द भरा था.. दोनों को गुज़रा सब दर्द सबब यादें फिरसे याद आने लगीं थीं..

प्रिय ने माँ को पीछे से थाम लिया tha..maa ने दीदी को चूम चूम कर अपने सालों की साडी हसरत पूरी की..

कुछ मिनटुटेस तक्क माँ दीदी आपस में अपना दुःख और ख़ुशी शेयर करती रही..

फिर सबब भी दीदी और शेखर से अच्छे से मिलें..

शेखर हमारा मां भी था.. तो उससे मिलते हुए कुछ छेड़ छड़ भी होने लगी.. मेरी तितलितों को में और पूजा दीदी की शादी के बाद एक और टॉपिक मिल गया था, मस्ती करने के लिए.. अपनी आगे का मां मिला तो खूब मज़े लेने लगीं...

जिससे सभी का दुःख कम् हुआ.. पूजा दीदी अब्ब मेरे पास नहीं थीं.. अब्ब वो दूर दूर थी मुझसे..

पारर आँखों hi आँखों में मुझे बधाई देने लगीं.. कुछ देर क लिए शर्म वो भूल चुकी थी..

फिर सबब बैठ गए और बातों का न रुकने वाला सिसलिला शुरू हो गया..

दीदी और माँ की यादें, माँ की कहानी.. दीदी क घर की कहानी.. माँ क घर की कहानी ये सबब एक लम्बा टॉपिक था.. तो जल्दी ख़तम होने वाला नहीं था..

उस टॉपिक को पेंडिंग करते हुए सबब गुज़री बातों को सरसरी करते हुए मिलने की ख़ुशी को सेलिब्रेट करने लगे..

सस्पेंस तो था, क्या कुछ हुआ होगा, माँ के कोठे पर पोहचने के बाद..




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वार्निंग: गोर सन.. कमज़ोर दिल वाले न पढ़ें


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TIME:02:30:PM:




बेसमेंट में हम इस वक़्त सबब hi मौजूद थे.. एक बेसमेंट की दूसरी साइड थी, ये रेखा बाई वाली साइड नहीं थी..

जितना बड़ा पैलेस था, बेसमेंट भी उसी हिसाब से था.. बेसमेंट के कई हिस्से थे..

इस वक़्त बेसमेंट में एक दीवार पर बड़ा सा मिरर लगा हुआ था.. और मेरे फॅमिली मेंबर्स के साथ साथ दोनों लड़कियां और उसकी फॅमिली मौजूद थी..

जो एक अलग केबिन में मौजूद थे..

मिरर के दूसरी तरफ वही सिद्धार्त और उसके हरामी दोस्त थे.. जिन्हो ने लड़कियों का ब्रूटल रपे किया था.. सिद्धार्त समेत उसके सभी फ्रेंड्स इन वक़्त पूरी तरह से होश में थे.. और वो फिरसे बेहोश न हो जाएँ.. इसका भी पूरा पूरा बन्दों बास्त किया गया था..

उनकी पावर को बढ़ने क लिए उन्हें हाई पावर क इंजेक्शन लगाए गए थे.. उनके दिल को भी स्ट्रांग कर देने वाले इंजेक्शन लगा दिए गए थे.. जैसा टार्चर उनके साथ होने वाला था.. वो झेलने से पहले hi कही हार्ट अटक से न मर जाएँ.. जैसे घटिया वो थे.. जैसा वो सभी लड़कियों को किडनैप करके उनका रपे किया करते थे..

तो उनकी सजा भी बहुत बड़ी होनी चाहिए थी.. यहाँ मौजूद सभी फ्रेमलेस को पहले से hi कह दिया गया था, क जो उनपर टार्चर होता हुआ न देख सकें वो बहार जा सकती हाँ...

और जैसा टार्चर मैं उनके साथ करने वाला था.. मुझे 200% यकीन था क कोई भी उसे पूरा नहीं देख पायेगा..

रपे क बदले रपे भी उनके लिए बेस्ट सजा है.. पर जैसे उनके दिल कमज़ोर थे. वो साले खुद का रपे कर भी अपनी जान की भीक मांग लेते..

उनकी सजा तो सिर्फ और सिर्फ मौत थी.. और मौत देने में भी मई देर नहीं करना चाहता था.. दोनों लड़कियों और उनकी फैमिलीज़ को सटिस्फैक्शन मिल जाए क सच में hi उन कुत्तो को मार दिया गया है.. आगे लाइफ में बढ़ने क लिए उन्हें हौसला मिल जाएगा.. वर्ण सबब अंदर hi अंदर toot'te रहेंगे..

विजय:- जूली सबब रेडी करो. ऐसो की सांसे जितनी जल्दी ख़तम हों, उतना अच्छा है.. धरती के नासूर हाँ ये कुत्ते..

दोनों लड़कियों को और उनकी फैमिलीज़ को अलग केबिन में रखा गया था.. सेण्टर में एक और मिरर लगा हुआ था.. हम तो उन्हें देख सकते थे.. पर वो हमें नहीं देख सकते थे..

उन दोनों लड़कियों और उनकी फैमिलीज़ क साथ कुछ फीमेल सर्वेन्ट्स भी थीं.. जिन्हो ने अपने फेस कवर किये हुए थे..

जूली ने कॉल मिलाई और किसी को आर्डर देने लगी..

गुंडे जिस रूम में थे.. वो रूम 20 फ़ीट का था.. सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स की क्वांटिटी टोटल 6 थी..

सभी मज़बूती से चेयर्स पर बंधे हुए थे.. जूली के आर्डर देते hi रूम में 4 हट्टे काटते आदमी दाखिल हुए.. सभी किसी पहलवान के जैसी फिटनेस क मालिक थे. उन चरों ने भी अपने फेस कवर किये हुए थे..

आने वालों ने सिद्धार्त के एक दोस्त को चेयर से खोला, फिर उसे नीचे फर्श पर लिटा दिया गया..

आने वाले चरों आदमियों क हाथों में मोठे मोठे मूसल टाइप मोठे मोठे डंडे थे.

डंडे आगे से 5" के थे.. दस्ते वाली साइड से 3" के..

सिद्धार्त friend(s.friend) को नीचे फर्श पर लिटा दिया गया.. उसे बाँधा नहीं गया था.. बांधने से उसे सही से तड़पने का मौका नहीं मिलता..

2 आदमियों ने सिद्धार्त क दोस्त क दोनों पेअर पाकर लिए तो एक ने उसकी गर्दन पर अपना पेअर रख दिया.. उसके हाथ फ्री hi थे..

आदमी ने अपने हाथ मौजूद मोटा डंडा पुरे ज़ोर से s.friend क घुटने पर मार दिया...

कडककक....... की आवाज़ आई और s.friend का घुटना चोर चूर हो गया... रूम उसकी फलक शगाफ़ चीखों से गूँज उठा.. वो आदमी वही नहीं रुका.. उसने फिरसे वही डंडा s.friend क दूसरे घुटने पर भी मार दिया..

एकबार फिरसे ....कडककक.. की आवाज़ आई और उसका दूसरा घुटना भी चकनाबोर हो गया..

पुरे रूम में उसकी चीखों के साथ सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स की भी चीखों से गूँज उठा..

सबब के सबब hi दहशत ज़ादा हो चुके थे.. सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स को अपनी भयंकर मौत दिख चुकी थी.. पर वो गलत थे.. भयंकर मौत तो अभी बहुत दूर थी.. अभी तो टार्चर इ अज़ीम होना था..

तीनो आदमियों ने s.friend को छोड़ दिया.. वो अब्ब उठने लायक नहीं रहा था..

फिर चरों आदमियों ने hi s.friend मोठे ौड मज़बूत डंडे बरसाने शुरू कर दिए.

room..kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk... .kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk....kaddaakk..

की आवाज़ों से और सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स की दहशत नाक चीखों से गूंजने लगा.. चरों आदमी किसी भी बात पर धयान दिए बिना hi s.friend के हाथों और पैरों को चूर चूर कर रहे थे..

मैंने एक नज़र सबब की तरफ देखा तो सबब की hi ऑंखें फटी पड़ी थी.. फिर मैंने लड़कियों के केबिन की तरफ देखा तो वो अभी दर्रे तो नहीं थे.. डर के साथ मुझे सभी के चेहरों पर सुकून भी दिखने लगा था..

मैं दिल hi दिल में मुस्कुराने लगा.. क अभी कुछ hi देर में सभी क दिल ख़राब होने लगेंगे..

क्यूंकि कोई भी टार्चर देखने का आदि नहीं था.. अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई थी.. असली पिक्चर तो अभी बाकी थी... बास कुछ मिनट्स और, फिर सबब hi उठ कर भाग खड़े होंगे..

जो कुछ भी हो रहा था.. वो सबब रिकॉर्ड किया जा रहा था.. इसका भी एक मक़सद था.. वो बाद में चला चलेगा...

5 मिन्तुइस hi गुज़रे थे क

माँ:- विजू बीटा मुझे यहाँ से जाना है.. ै यहाँ नहीं रुक सकती.. कितनी भयंकर है ये sabb...mmmm.main

priya:-vijjuu ये क्या दिखा दिया.. यकककककककक.. प्रिय साइड में मोहन किया अबकाई लेने लगी.. मैंने सभी को देखा तो सबब के hi दिल ख़राब होने लगे थे..

वजा ये थी क इन पांच मिंटो में hi उस कुत्ते के दोनों हाथ और पेअर अब्ब रहे hi नहीं थे... उसके हाथो और पैरों की हड्डियां का सुरमा बन्न चूका था..

सबब hi फिर एक एक करके जाने लगीं.. मैंने किसी को नहीं रोका.. मैं लड़कियों के केबिन की तरफ देखने लगा..

दोनों लड़कियों को छोड़ कर बाकी सबब की भी हालत सही नहीं थी..

विजय:- जूली उधर कह दो जो उठ कर जाना चाहे जा सकता है..

जूली ने ऐसा hi किया.. दोनों लड़कियों को और एक लड़की के बड़े भाई को छोड़ कर बाकी सबब hi बहार चले गए.. दोनों लड़कियों ने जितना सहा था.. उनके लिए ये सबब देखना मुश्किल नहीं रहा था. वो तो शायद खुद अपने हाथों से उन कुत्तों का ऐसा हशर करने लगें..

मैंने केबिन की तरफ देखा तो सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स अपने पित्त रहे दोस्त को देख कर चिल्ला रहे थे. उनकी ऑंखें ऐसी हो गई थीं.. जैसे किसी वेरेनाने में किसी ने कोई बाला देख ली हो.....

वो खुद को आज़ाद करने क लिए गांड पहाड़ ज़ोर लगा रहे थे.. पर बंदिशों से आज़ाद होना उनके लिए मुमकिन नहीं था..

पित्त रहा लड़का उसकी हालत देख कर मुझे दिली सुकून मिल रहा था..

उसके दोनों हाथ और दोनों पेअर अब्ब उसके बदन से जुड़े हुए तो थे.. पर वो चोर चूर हो चुके थे.. हाथो और पैरों की हड्डियां अब्ब गोश्त में मिल चुकी थीं.. गोश्त में से कही कही उसकी टूटी हुई हड्डियां का चूरा दिख रहा था..

उसे हैवी इंजेक्शन लगाया गया था.. पारर ज़यादा खून बह जाने की वजा से अब्ब वो चीखने की हालत में नहीं था... उसके चीखने की कसार सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स पूरी कर रहे थे..

विअज्य:- जूली लड़कियों से डायरेक्ट बात करो, अगर किसी के मैं में कुछ है तो पता चल सके..

जूली ने दोनों लड़कियों से बात की तो दोनों लड़कियों ने थैंक्स बोलते हुए बास यही कहा क जैसा उनके साथ हो रहा है, वो बहुत सही है, और वो सभी लड़कों के साथ ऐसा होते हुए देखना चाहती हाँ...

फिर मैं ख़ामोशी से s.friend का हशर देखने लगा.. उसके दोनों हाथो पैरों का चूरा बनाने के बाद उसके बाकी के शरीर का भी चूरा बनाया जाने लगा..

पहलवान टाइप आदमी नहीं थके थे..

आधे घंटे में सिद्धार्त के फ्रेंड का कीमा बन्न चूका था.. सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स के गले चीख चीख कर बैठ चुके थे..

पारर सभी क लिए ट्रेमटेन्ट का पूरा पूरा अर्रंगे किया गया था.. सिद्धार्त क फ्रेंड के साथ जो टार्चर हुआ वो तो हुआ hi था..

पर वो सबब होता देख कर जो टार्चर सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स ने झेला था.. वो था सबब से बेस्ट..

ऐसा hi कुछ सिद्धार्त के साथ भी होना था.. पारर सबसे लास्ट में ... उसे की नज़रों क सामने उसके सभी फ्रेंड्स का कीमा बना कर सिद्धार्त को पल पल मारना था..

एक को मारने क बाद 5 मिंट की रेस्ट ली गई.. फिर सिद्धार्त के 2 फ्रेंड्स को खोला गया.. वो वही नीचे लेट गए और पैरों में गिर कर ज़िन्दगी की भीक मांगने लगे..

पर यहाँ दया की तो कोई बात hi नहीं थी.. जैसे घटिया काम सब ने अपनी लाइफ में किये थे.. उनका फल भी तो पाना था ना..

फिर दो दो करके सिद्धार्त क फ्रेंड्स का कीमा बनाया गया.. लास्ट में जब्ब सिद्धार्त की बारी आई..

तो वो आधे से ज़यादा मर्डर चूका था.. सिद्धार्त ने मेंटली टार्चर बहुत झेल लिया tha..yahi इसकी असली सजा थी.. चूरा तो उसका भी बनेगा.. पारर जो उसे मेंटली टार्चर दिया गया था..

उससे सिद्धार्त अपना दिमागी तवाज़न खोने लगा था.. वो अजीब ढंग से चीख रहा था.. सिद्धार्त की नज़रों क सामने hi उसके फ्रेंड्स को मोठे मोठे डाँडो से कूट कूट कर चूरा बना दिया गया था.. सिद्धार्त के मंद में जो भी देखा था.. वो किसी फिल्म की तरह से चल रहा.. मुसलसल 2 घंटो से वो सबब देख रहा था..

उसकी ऐसी हालत तो होनी hi थी...

फिर सिद्धार्त को भी उसके फ्रेंड्स की hi तरह से पहले दोनों पैरों से महरूम किया गया.. फिर उसके हाथ.. अंत में सिद्धार्त के बाकी बचे शरीर का कीमा बना दिए गया..

चरों आदमी अपना काम ख़तम करके रूम से बहार चले गए...

तो रूम में किसी इंसान का नामो निशान नहीं बचा था.. अंदर न तो कोई ढांचा था.. और न hi कोई हड्डी किसी की सलामत थी..

पूरा रूम hi फर्श और दीवारों समेत खून से रंगा जा चूका था... सिद्धार्त और उसके के फ्रेंड्स क शरीरों से खून फवारों की सूरत उछाल उछाल कर दीवारों पर जा चिपका था.... शायद किसी पोस्टमार्टम रूम में भी कभी किसी ने ऐसा हाल न देखा होगा...

सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स के शरीर ऐसे पड़े हुए थे.. जैसे बलि के बाद जानवर के अंदर से फालतू का कचरा निकला जाता है.. जैसा वो होता है..

वैसा hi हाल सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स का हुआ था..

किसी इंसान क ऊपर से कई बार जैसे रोड रोलर गुज़र दी गई हो.. कुछ ऐसा hi सन यहाँ भी हुआ था..

विजय:- जूली इस सबब की वीडियो को पुरे देश में वायरल कार्डो... ख़ास कर ये वीडियो इन दोनों लड़कियों क कॉलेज और हॉस्टल में पोहंचा दो...... आज के बाद जो भी ऐसा हमें मिलेगा.. उसका भी ऐसा hi हाल किया जाएगा...




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Laa-Waris: अपडेट:35 पोस्टेड....

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अडुल्टेरी - Laa-Waaris .... एडल्ट + एक्शन +थ्रिल (कम्प्लेटेड)

HIMMAT-WALA Part 2 स्टार्ट कर दिए गया है..

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अपडेट ::: 92

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बेसमेंट का काम ख़तम हुआ..

सिद्दरत और उसके दोस्तों का कचूमर बन चूका था. सभी की ऐसी हालत देख कर मुझे बहुत ख़ुशी थी.. दोनों लड़कियों के अधूरे रह चुके खवाब फिरसे पुरे करने क लिए, हर तरह की सुपप्रोत करने के लिए मैंने जूली को कह दिए था..

होता है ऐसा किसी किसी के साथ.. अब्ब जब्ब दोनों लड़कियों पर सबब बीत चूका था, तो उन्हें उस सबब को एक बुरा सपना समझ कर भूल जाना था.. भुला तो नहीं जा सकता था.. पर अब्ब वो खुद को लाइफ में कुछ ऐसा बना सकती थीं. क समाज के ऐसे घटिया करैक्टर रखने वाले लोगों से अपना बदला ले सकें..

उसकी स्टडी क पूरा होते hi मैं उन्हें उनकी मैं पसंद ज़िन्दगी देने वाला था..

फुल सुप्परत के साथ.. जूली की सपोर्ट से अब्ब वो सिद्धार्त जैसे लोगों से खुद को सेफ रखने के काबिल भी बनने वाली थीं..

जैसा दोनों लड़कियों क साथ हुआ था.. मैंने इस सबब पर भी बहुत सोचा था.. और कुछ फैसले भी अपने मैं में ले लिए थे.. गर्ल्स को भी स्ट्रांग होना चाहिए.. मेंटली भी और फिजिकली भी.. आने वाले समय में मुझे कुछ तो हट कर करना था.. वर्ण सभी को तो मैं एक hi बार में स्टॉन्ग बनाने से रहा..

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बेसमेंट से होता हुआ मई मालिकान के रूम में जा घुसा.. मालकिन को मैंने कभी भी अकेले से सही से टाइम नहीं दिया था.. वो अक्सर सभी क साथ hi रहती थीं..

आज मेरा मैं हुआ मालिकान से मिलने का.. उनका भी मुझपर पूरा पूरा हक़ था.. और हक़ तो अब्ब उनका कुछ और भी मुझपर बढ़ गया था..

5 का टाइम होने वाला था.. पता नहीं वो रूम में होंगी या नहीं.. मई किसी क पास न जा मर मालिकान के रूम में घुस गया.. मैं दूर नॉक किये बिना hi अंदर जा घुसा था.. अंदर मुझे मालकिन कही नहीं दिखी.. मैंने रूम में सबब जगा देखा तो मुझे बाथरूम से पानी की आवाज़ सुनाई देने लगी.. मालिकान अंदर नाहा रही थीं.. मैंने दूर को अंदर से लॉक किया और बीएड की बैक साइड से टेक लगा कर बैठ गया..

मैं मालिकान के बहार आने का वेट करने लगा.. मालिकान से बातों में मैं कुछ कुछ खुला हुआ था.. लेकिन मालकिन से पूरी तरह से खुल कर कभी मस्ती करने का मौका नहीं मिला था.

ये तो मैं जान hi गया था, क मालिकान भी अंदर से बहुत बेचैन हाँ मेरे लिए.

जैसे भाभी और पद्मा आंटी.. वैसे hi मालिकान भी सालों से छूट की आग में जल रही थीं..

बहुत समय उन्हों ने खुद पर जबर करते हुए बिता दिया था.. अब्ब उन्हें भी कुछ पल ख़ुशी क मिलने चाहिए थे.. यहाँ हर तरफ ख़ुशी hi थी.. पूजा से मेरी शादी भी उनकी ख़ुशी को बढ़ने वाली थी.. पर छूट की गर्मी के कारन सबब फीका फीका था.. छूट में उबाल रहा पानी कब्ब किसी ख़ुशी को पूरी तरह से सेलिब्रेट करने देता है..

मालिकान का फिगर बहुत hi मस्त था.. देखने में 35-36 से ज़यादा की नहीं दिखती थीं.. बूब्स बहुत बड़े थे उनके.. 38" क आस पास तो होंगे hi..

गांड भी उनकी 38-39 से कम् नहीं थी.. हर लिहाज़ से मालिकान एक सेक्स बम थी.. पर मैंने उन्हें कभी लिफ्ट नहीं करवाई थी..

या तब्ब मेरे पास टाइम नहीं था. मई खुद को स्ट्रांग बनाने में लगा हुआ था..

मैं बीएड पर आधा लेता हुआ था.. बाथरूम से मालकिन बहार निकली.. रूम में धयान दिए बिना hi वार्डरॉब की तरफ बढ़ गईं..

मालिकान ने टॉवल लपेटा हुआ था.. जो उनके बूब्स और चुत्तड़ को छुपाये हुए था.

गीले बाल पीछे से टॉवल को भिगो रहे थे. मालिकान का दूध जैसा बदन रूम में हो रही रौशनी में चमलने लगा...

मालकिन ने वार्डरॉब से ब्रा और पंतय निकली.. एक नज़र दूर की तरफ देखा, मुझपर उनकी नज़र नहीं पड़ी..

ब्रा पंतय लिए वो मिरर क सामने गईं.. पास पड़े स्टूल पर ब्रा और पंतय राखी और मिरर में देखते हुए टॉवल को खोलने लगीं..

उनके हाथ टॉवल खोलने hi वाले थे, क मिरर में से मालिकान की नज़र बीएड पद पड़ी. जहाँ मई था.. मालकिन ने झट से टॉवल पार्स हाथ हटा दिए..

और मेरे तरफ मुद कर मुझे हैरत से देखने लगीं.. मई उनके रूम में ऐसे अचानक से पहले कभी नहीं आया था.. इसीलिए वो हैरत से मुझे देख रही थी, मैं बीएड से नीचे उतरा और चलता हुआ उनके पास जा पोहंचा..

विजय:- क्या हुआ मालिकान मुझे ऐसे क्यों देख रही हाँ..

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Note:-aap ये न सोचे क मैं मालिकान को मालिकान hi क्यों बोलता हों.. मुझे आदत पद गई है.. जैसे अभी पूजा से मेरी शादी की बात शुरू हो गई है तो उन्हें मैं दीदी hi कहता हों.. माँ और अपनी बहनो को छोड़ते हुए हर किसम क नाम लिए जाते हाँ तो यहाँ भी ऐसा hi कुछ चक्कर है...

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मालिकान:- नहीं, कुछ नहीं.. बास तुम्हे कभी पहले खुद क इतने करीब नहीं देखा न.. न hi तुम पहले कभी मेरे रूम में ऐसे अचानक से आये हो.. इसी लिए मैं हैरान हों..

विजय:- तो कैसा लगा मुझे अपने सामने प् कर..

मालिकान:- बहुत ख़ुशी हुई है विज्जू बीटा, तुम्हे ऐसे अपने पास प् कर.. पहले भी तो यहाँ मेला लगा हुआ है.. पहले तुम अपने मक़सद क लिए मसरूफ थे.. मेरा भी दिल था कभी तुम मुझे से थोड़ा सा अकेले में टाइम दो.. पर कभी कह नहीं पाई..

विजय:- मालिकान मैं तो मेरा भी था, क मैं आप सबब को पूरा पूरा टाइम डॉन. पर तब्ब बात माँ और बहनो की थी.. अब्ब तो ऐसा कुछ नहीं है.. अब्ब अगर मई कही बिजी हो भी जाऊं तो आ मुझे कह दिया करें.. आपका हक़ बनता है मुझपर.

मालिकान:- विज्जू बीटा, मई भी सबब समझ रही हों, और मुझे भी सबब पता है, आज या कॉल मैं खुद hi तुम्हारे कान खेंचने वाली थी.. ये गुज़रे कुछ दिन तो तुम्हारे बहुत बिजी गए हाँ.. मई भी इसी लिए चुप रही.. अब्ब तो तुम फ्री हो तो मेरे लिए तो तुम्हे भी टाइम निकलना पड़ेगा ना..

विजय:- हाँ तो बाँदा हाज़िर है आपकी खिदमत में..

मालिकान:- विज्जू बीटा तुम बैठो मैं चेंज कर लोन, फिर बैठते हाँ..

vijay:-(malikan को छेड़ हुए) ऐसे hi करलें न मालिकान.. क्या फर्क पड़ता है..

मालिकान मुझे एक धप्प मारते हुए कुछ शरमाने लगी, कुछ मुस्कुराने लगीं..

मालिकान ने ब्रा और पंतय उठाई और बाथरूम में घुस गई...

ये पहला टाइम था तो मैंने मालिकान को ज़यादा परेशां करना सही नहीं समझा..

उनके साथ एक hi बार में सबब नहीं करना चाहता था मई.. मालिकान कुछ अलग टाइप की थीं.. पहले उनकी झिझक ख़तम करनी पड़ेगी..

भाभी और पद्मा आंटी से तो वो खुल चुकी थीं. मुझसे एकदुम्म से तो नहीं खुलेंगी.. कही उन्हें डिस्टर्बेंस न हो, इसलिए मैंने ज़यादा फाॅर्स नहीं किया..

मालिकान कुछ देर में ब्रा और पंतय पहन कर आ गईं.. पर टॉवल उन्हों ने नहीं उतरा था.. ब्रा और पंतय पहन कर फिरसे टॉवल को अपने बदन पर लपेट लिया था...

मालिकान;- आ जाओ विज्जू बीटा बीएड पर..

मैं चलता बीएड पर के पास पोहंचा.. मालिकान भी वही पोहंच चुकी थें..

विजय:- मालिकान आपने ब्रा पंतय तो पहन ली है, फिर टॉवल की क्या ज़रूरत है..

मालिकान:- अब्ब तुम्हारे सामने तो मई नहीं उतार सकती ना..

मैंने एक झटके में hi टॉवल को पकड़ कर मालिकान से बदन से अलग कर दिया..

मालिकान झटका लगने से घूम गईं तो मैंने एक हाथ से मालिकान को कमर पार्स से थाम लिया था, टॉवल को बीएड पर फ़ेंक दिया..

मालिकान शॉकेड सी मेरे गले लग गईं.. एक तो मालिकान टॉवल का झटके सेह नहीं पाई थी, ऊपर से वो मेरे गले से आ लगी थें..

मालिकान:- विज्जु बीटा ये सबब क्या है..

विजय:- कुछ भी तो नहीं है मालिकान.. छुपाने क लिए तीन hi तो चीज़ें होती हाँ जो आपने छुपाई हुई हाँ, यहाँ मुझे टॉवल गैर ज़रूरी लगा तो मैंने निकल दिया..

मालिकान:- पारर विज्जू बीटा ये...

मैंने दूसरा हाथ मालिकान के होंटो पर रख दिया.. और कमर कर रखे हुए हाथ से मालिकान की कमर को सहलाने लगा..

विजय:- आपका मुझपर पूरा हक़ है, और मेरा आप पर.. मैं सही कहा ना..

मालिकान:- हाँ परररर..

vijay:-(malikan के होंटो को ऊँगली से सहलाते हुए) तो फिर आप अपना हक़ कब वसूल करेंगी मुझसे.. मुझे तो अपना ाहक़ अभी वसूल करना है..

मालिकान अब्ब कुछ नहीं बोली, उनकी सांस तेज़ हो गई थी.. वो तो पहले से hi खुद पर जबर किये हुए थी.. मेरी ऊँगली जो उनके होंटो पर एक तसलसल से चल रही थी, मालिकान से अंदर शरारे से दौड़ने लगे मेरी ऊँगली की हरकत से..

मैंने अपना चेहरा मालिकान के फेस के करीब किया तो मालिकान से अपनी ऑंखें बंद कर लीं.. 3" क फासले पर पोहंच कर मैंने धीरे से मालिकान के चेहरे पर फूँक मार दी... फोन का ये असर हुआ क मालिकन के बूब्स जो मुझसे चिपके हुए थे.. वो फूलने लगे.. मालिकान में मस्ती की लेहेर सी उठने लगी थी.. मालिकान के अंदर की आग तो कब्ब का मालिकान के सभी हिस्सों को फूलने के लिए बेचैन थी.

मालिकान ने अपनी लाइफ में सेक्स कितना किया था, रोमांस भी उनकी लाइफ में था या नहीं.. पर जिस तरह मैं मालिकान पर हावी था.. मालिकान के शरीर में करंट सा दौड़ने लगा था..

मैं एक हाथ से मालिकान की कमर को सहलाते हुए उनके चेहरे पर हलकी हलकी फेंके मारने लगा..

मालिकान की इतने में हालत पतली हो गई थी.. मालिकान तेज़ तेज़ सांस लेने लगीं. अपनी ऑंखें जो उन्हों ने बंद की हुई थी.. अचानक से खोल दीं.

मैंने अपना चेहरे पीछे नहीं किया.. मालिकान की ऑंखें में नशा सा छाने लगा था. उनकी आँखों ने रंग बदलना शुरू कर दिए था...

मालिकान सच में hi मदहोश हो चुकी थी.. मालिकान तो सालों से बेचैन थी.. भाभी और पद्मा आंटी ने उन्हें लेस्बियन की लत्त लगा कर और भी बेचैन कर दिया था.. अब्ब कैसे वो खुद पर काबू पाती..

मालिकान का अब्ब खुद पार्स कण्ट्रोल जल्द hi टूटने वाला था.. और मैं मालिकान को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था..

मेरे होंठ थोड़े से नीचे हुए.. मालिकान के होंटो के पास आये तो मालिकान के बदन में कपकपी सी बढ़ गई.. मालिकान के बदन ने ठंडा ठंडा पसीना छोड़ना शुरू कर दिया था...

जब मैंने मालिकान को थमा था, तो मालिकान ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर तो दूसरा हाथ फोल्ड हो कर मेरे सीने से लगा हुआ था.. मेरे होंठ मालिकान क होंटो क पास आये तो मालिकान का हाथ जो मेरे कंधे पर था, उसका दबाओ बढ़ने लगा..

मेरे होंठ मालिकान के होंटो क पास आये तो फिर मैंने देर न करते हुए धीरे से

अपने होंठ मालिकान के होंटो पर रख diye.kiss नहीं किया मैंने...

अपनी जुबां थोड़ी सी बहार निकल कर मालिकान के होंटो पर फेरने लगा..

मालिकान ने मेरे कंधे पर अपने हाथ का दबाओ कुछ और भी बढ़ा दिया.. सीने पर उनके नाख़ून भी मैंने घुसते हुए महसूस किया थे...

कमर पर रखे हाथ पर ज़ोर देते हुए मैंने मालिकान को खुद में और भी कस लिया.. मालिकान के बूब्स मेरे सीने में दबने लगे..

मुझे पता था , मालिकना बेचैन तो बहुत हाँ, पारर अभी वो शायद मुझे खुद से किश न करें.. इसलिए मैंने मालिकान के निचले होंठ को अपने होंटो में लिए और हलके हलके किश करने लगा.. मालिकान की सांस तेज़ हो गई थी, मेरे ऐसा करने से.. मालिकान के दोनों हाथों की उँगलियाँ हरकत करने लगीं..

दो मिंट तक मैं धीरे धीरे मालिकान के होंठ को अपने होंटो में लिए किश करता रहा.. मालिकान ने अभी भी मुझे किश नहीं किया था..

मैंने मालिकान का होंठ नहीं छोड़े.. बास किश करना बंद कर दिए... कुछ देर गुज़री तो मालिकान ने अपनी ऑंखें खोली.. जो उन्हों ने किश करते समय फिरसे बंद कर ली थी.. मालिकान की ऑंखें मेरी आँखों से टकराई तो झट से अपनी ऑंखें बंद कर लीं मालिकान ने..

कुछ देर बाद मालिकान के होंटो ने कुछ हरकत की.. मालिकान मेरे ऊपर वाले होंठ को धीरे धीरर किश करने lageen..malikan के होंटो का टास्ते मेरे होंटो से होता हुआ मेरे अंदर उतरने laga..malikan किश में एक्सपर्ट दिख रही थीं..

मालिकान ने टाइम तो लिया था, पारर अब्ब वो अपने दिल के हाथो मजबूर होकर मेरा साथ देने लगी थी..

चाहत तो उनकी खुद की भी थी, पारर झिझक ख़तम नहीं हो रही थी.. उनकी इतनी मदद तो करदी थी मैंने. अब्ब भी अगर वो हिम्मत न करती तो अधूरी रह जाती..

फिरसे अपनी छूट की आग बुझाने क लिए भाभी या पद्मा आंटी से अपनी छूट चतवती..

मालिकान के साथ मैं सबब अपनी मर्ज़ी से नहीं करना चाहता था.. उनकी मर्ज़ी भी शामिल होना ज़रूरी था.. उनकी मर्ज़ी शामिल हुई तो अब्ब मई नहीं रुकने वाला था..

मालिकान ने धीरे धीरे किश करना शुरू किया था, पारर 2 मिंट बाद hi उनकी स्पीड कुछ तेज़ होने लगी.. उनका खुद पार्स कण्ट्रोल टूट रहा था.. मालिकान अब्ब मूड में आने लगी थीं..

मैंने भी अपने हाथ को मालिकान की कमर पर चलना शुरू कर दिया.. मालिकान ने स्माल पंतय पांच हुई थी.. सारे hi चुत्तड़ उनके बहार थे..

मेरा हाथ चलते हुए मालिकान के चुत्तड़ो पर आया तो मैंने अपना दूसरा हाथ भी मालिकान के चुत्तड़ पर रख दिया.. चुत्तड़ो पर मेरे हाथ महसूस होते hi मालिकान को एक झटका लगा.. किश करना उन्हों ने बंद किया.. पर होंटो को अलग नहीं किया..

मेरे हाथ अब्ब मालिकान के चुत्तड़ो को थोड़ा कस के दबा रहे थे.. मालिकान के अंदर की आग अब्ब बहुत भड़क चुकी थी.... मालिकान ने मुझे फिरसे किश करना शुरू किया.. तो इस बार की किश में बात कुछ और थी. अब्ब मालिकान अपने पुरे जोश से मुझे किश कर रही थी.. उनकी झिझक अब्ब ख़तम होती जा रही थी.. जितनी आगे उनकी थी, शर्म भी तो उनकी जल्द hi ख़तम होनी थी.. मैं कोई बहार का तो था नहीं.. सबब hi तो जानते थे मैं सभी का लड्डू हों..

मैंने मालिकान की पंतय में पानी उँगलियाँ घुसाई.. और गांड की दरार में फेरने लगा.. मालिकान की छूट तो सालों से ढंग से पानी नहीं निकाल पाई थीं.. एक मर्द के सुपर्ष पाते hi उनकी छूट का पानी मचलने लगा बहार आने क लिए..

कुछ देर गुज़री तो मालिकान की सांस फूल gai..maalikan ने मुझे किश करना छोड़ा और साइड में मोहन घुमा कर तेज़ तेज़ सांस लेने लगी..

मैंने मालिकान को चूतड़ों से पकड़ कर उठाया और बीएड पर लिटा दिया.. मालिकान को अच्छे से बीएड पर लिटा कर मैं मालिकान क ऊपर आ गया..

मैं पूरा hi मालिकान के ऊपर था.. मेरा लुंड भी अकड़ चूका था.. और मालिकान की छूट पर सेट हो चूका था.. मई लेता तो मेरे लुंड का दबाओ मालिकान की छूट पर बढ़ने लगा..

मैंने मालिकान की ब्रा को पकड़ कर ऊपर कर दिया.. मालिकान ने अपनी ऑंखें खोल कर मुझे एक नज़र देखा, फिर अपनी ऑंखें बंद कर दीं..

उनकी आँखों में लाल डोरे तेर रहे थे.. अब्ब उनकी शर्म छूट के पानी निकलने तक ख़तम हो चुकी थी..

मालिकान के दोनों बूब्स नंगे हुए तो मैंने एक को अपने मोहन में ले लिया.. और दूसरे बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा.. मालिकान मचलने lageen.mere खुरदरे हाथ की रगड़ और मेरी गरम जीब को मालिकान अपने बूब्स पर बर्दाश्त नहीं कर पाई...

मालिकान के बूब्स तो मेरे सीने से लगे हुए hi सख्त हो गए थे.. मालिकान के अकड़ चुके निप्पल को चूस चूस कर मई और भी सख्त करने लगा.. मेरा लुंड मालिकान की छूट पर दबा हुआ था.. मेरे अंडरवियर और मालिकान की पंतय को पहाड़ कर उनकी छूट में घुसने क लिए बेचैन होने लगा..

अभी मैंने वहां का धयान छोड़ कर बूब्स पर अपना फोकस बढ़ा दिया.. मालिकान ने अब्ब अपनी छूट को मेरे लुंड पर रगड़ना शुरू कर दिया था.. मालिआकन का सालों बाद ये पहले सेक्स एनकाउंटर था.. तो उनके लिए खुद पर कण्ट्रोल करना मुमकिन नहीं रहा था.. जल्द hi उनकी छूट पानी छोड़ने वाली थी..

मैं बहुत अच्छे से उनके बूब्स को मोहन और हाथ में लिए एन्जॉय कर रहा था.. जिस हिसाब से मालिकान के बूब्स फौल चुके थे. उस हिसाब से मालिकान को देर किये बिना जहद जाना चाहिए था...

मालिकान ने अपने दोनों हाथ मेरे सर्र पर रखे.. मेरे सर्र को अपने बूब्स पर पुरे जोरसे दबाने लगीं.. नीचे से भी अब्ब उन्हों ने अपनी छूट को मेरे लुंड पर कुछ ज़यादा hi रगड़ना शुरू कर दिया. मालिकान की छूट मेरे लुंड पर रैगर रही थी,, तो उनकी गांड बीएड पर...

मैंने भी मालिकान की मदद शुरू कर दी.. मैं भी अपने लुंड को उनकी छूट पर रगड़ने लगा..

कुछ hi देर में मालिआकन के झटके शुरू हुए तो फिर जल्द hi उनकी छूट का बंद भी खुल गया और उनकी छूट ने पानी छोड़ता शुरू कर दिया.. मालिकान के हाथ मेरे सर्र पर ढीले हो गए.. मालिकान की तेज़ साँसे रूम में गूंजने लगीं..

मेरी म्हणत रंग लाइ तो मैंने मालिकान को छोड़ दिया. और साइड में लेट गया..

मैंने दो काम किये थे.. एक तो मालिकान की झिझक जो मुझसे थी.. वो ख़तम हुई.. और दूसरा उनकी छूट का पानी निकल कर उन्हें शांत कर दिया था...

ये दोनों hi काम मालिकान के लिए ज़रूरी थे..

भाभी से ओरल सेक्स कर चूका था.. पद्मा आंटी की छूट में लेटर दे चूका था.

पारर मालिकान के साथ पहले बार ऐसा कुछ किया था..

कुछ देर बाद मालिकान रिलैक्स हुई तो मुझे देख कर उनकी आँखों में आंसू आने लगे.. छूट से निकला पानी क्या कम् था, जो अब्ब आँखों से भी निकलने लगीं..

कैसी कैसी हसरतें अंदर मैं में पलने लगती हाँ.. यहाँ मालिकान के भी मैं में पल रही हसरतों में से एक पूरी हुई तो आंसू बहाने लगीं.. मर्द क बिना एक औरत की लाइफ भी तो बेकार hi है.. सालों छूट को लुंड न मिले तो हर चीज़ का टास्ते जाता रहता है..

मालिकान को टास्ते मिला तो खुद पर काबू भूल गई.. ख़ुशी सहन नहीं हुई तो आंसू निकल गए..

मालिकान मेरे ऊपर आ गईं और मेरे चेहरे को चूमने लगीं.. मैंने उनके दोनों बूब्स पकड़ कर दबा दिए.. और उनके निप्पल्स को कुरफ्ने लगा.. जो अब्ब नरम पद चुके थे..

मालिआकन:- विज्जू बीटा, दबा लो जितना दबाना है, ये तो थे hi तुम्हारे.. जबसे तुम्हारा प्यार सबब को मिलने लगा है.. ये भी तब्ब से बहुत बेचैन हाँ, तुम्हारे प्यार के लिए.. शायद मई खुद पर कण्ट्रोल भी कर लेती.. पारर जिस औरत की बेटी उसकी आँखों के सामने hi किसी के साथ बिना शादी के नंगी होकर मस्ती करे.. वो औरत कैसे खुद पर काबू प् सकती यही.. और फिर तुम तो हो hi सबब के चाहते.. तुमसे प्यार करने क लिए तो सभी का दिल मचलता hi रहेगा..

मैं भी सालों से तुम्हारे लिए तड़प रही थी.. आज मैं को शान्ति मिली है, तुमने अच्छा किया विज्जू बीटा जो मुझसे पूछे बिना hi सबब कर लिया, वर्ण शायद मुझे हिम्मत न मिलती.. पारर अब्ब मैं नहीं तुम्हे माफ़ करने वाली..

मेरे हिस्से का जितना प्यार तुम्हारी तरफ उधार है, वो सबब मैं वसूल करुँगी तुमसे..

विजय:- मालिकान मैं तो हों hi सबब का.. अब तो पूजा दीदी से शादी होने की वजा से मैं आपका कुछ और भी ख़ास हो गया हों.. तो देर क्यों करें, अभी से hi अपना सबब मुझसे वसूल कर लें..

मालिकान मेरे होंटो पर झुकी और मेरे होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करते हुए बोली..

मालिकान:- वो तो मैं वसूल hi लुंगी.. अभी टाइम कम् है, वर्ण मैं तो है तुम्हे कच्चा hi खाओ जाओं..

मैंने मालिकान को बीएड पर पलटा. उनके ऊपर चढ़ गया. और घोरसे उनके बूब्स को ब्रा से बहार निकला हुआ देखने लगा.. फिर दोनों hi बूब्स पर अपनी जीब फेरने लगा.. निप्पल्स पर भी मैंने अपनी जीब फेरी और अपना सर उठा कर मालिकान की आँखों में देखने लगा..

विजय:- कैसा लग रहा है मालिकान अपने बूब्स पर मेरे जीब का सवाद..

मालिकान एक बार फिरसे शरमाई.. चेहरा साइड में करती हुई बोली..

मालिकान:- विज्जू बीटा, ये भी पूछने वाली बात है, किसी के भी दूध को इतने प्यार से चाटोगे तो वो तो खुद को स्वर्ग में hi देखेगी ना.. सालों बाद ऐसा सबब फिरसे फील किया है मैंने.. अमन को भी मेरे बूब्स बहुत पसंद थे, वो तो मेरे दूध को छोड़ता hi नहीं था..

विजय:- फिर तो आपकी चुदाई भी जम्म के हुई होगी..

मालिकान ने मेरे सर्र पर एक चपत लगा दी.. मालिआकन शरमाई और मुस्कुराई भी..

मालिकान:- विज्जू बीटा, मैंने अपनी लाइफ मज़े से जी है, अमन ने मुझे अपनी लाइफ में खुशियां बहुत दी हाँ.. पर हमें प्यार भरा समय कम् hi मिला था..

जल्द hi उन्हें बीमारी लग गई.. और वो किसी काम क नहीं रहे.. पूजा तो पहले साल में hi मेरे पेट में आ गई थी.. वर्ण शायद मई औलाद से भी महरूम रह जाती.. कुछ साल hi साथ दिया था अमन ने मेरा .. फिर वो मुझे और पूजा को छोड़ कर चले गए.. बहुत तड़प रही है मुझे प्यार की.. जो आज तुमसे मुझे मिल गया है..

विजय:- मई हों ना मालिकान आपकी साड़ी तड़प मिटने क लिए.. मई डोंगा ना आपको वो सबब जो आप सालों से नहीं पा सकीं.. मैं मालिकान के बूब्स फिरसे दबाने लगा... मालिआकन अपने अच्छे दिनों की यादों में जाने लगीं.. कुछ देर मैं मालिकान के बूब्स को दबाता रहा...

मैंने नीचे हुआ.... मालिकान की पंतय के ऊपर अपने होंठ रख दिए.... मालिकान ने जैसे hi मेरे होंटो को अपनी छूट पर पाया तो मालिकान ने अपने हाथो को मेरे सर्र पर रख दिया.. मैंने पंतय के ऊपर से hi मालिकान की छूट को चाटने लगा.. मालिकान की छूट ने जो पानी छोड़ा था.. वो मेरे मोहन में जाने लगा... एक मधुर सी स्मेल मेरे नाक से टकराने लगी... मेरे उँगलियाँ मालिकान की जांघों पर चलने लगीं.. मालिकान एक बार फिरसे मस्त होने लगीं..

मालिकान की छूट के लिप्स पंतय पर साफ़ दिखाई पद रहे थे.. कुछ देर मालिकान की पंतय को चाटने के बाद मई मालिकान की पंतय को पकड़ कर उतारने hi वाला था क किसी ने दूर नॉक कर दिया..

मालिकान के साथ मज़े को किसी ने ख़राब कर दिया था.. शाम होने वाली थी.. कोई भी इस टाइम आ सकता था..




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थैंक यू वैरी मच..!!

विजु ने पहले मालिकान को सही से टाइम नहीं दिया.. अब्ब तो मालिकान का हक़ भी बढ़ गया तो जब्ब सबब का hi no लगने वाला है.. तो मालिकान को भी जल्दी hi उसके रेडी करना पड़ेगा..

मालिकान जितनी तड़प रही हाँ.. और झिझक रही हाँ.. विज्जू ने उनकी झिझकहाक को डोर करके अच्छा किया.... जब सही टाइम मिलेगा तो विज्जू मालिकान को अच्छे से chodega..vijju का लुंड भी खुश और मालिकान की छूट भी खुश.. सैलून से लुंड क लिए मचल रही है
 
थैंक यू वैरी मच..!!

शुष्मा विज्जू की मौसी निकली.. विज्जू और श्वेता और सभी के लिए ख़ुशी की बात हो गई.. ये तो बाद में hi जब्ब सबब बैठ कर बात करेंगे तब hi पता चलेगा क श्वेता क कोठे पर पोहचने क बाद क्या हुआ.. सगवेत्ता क लिए तो विज्जू हमेशा से hi खास रहा है.. शुष्मा को जब सब पता चलेगा तो वो भी खुद को इस सबब क लिए तैयार कर लेगी.. जब सबको इस सबब पर कोई ऐतराज़ नहीं तो शुष्मा को क्यों होने लगा.. प्यार का माहौल मिले तो दिल में हलचल सी होने लगती है.. शुष्मा क दिल के तारों को तो विज्जू ने छेड़ hi दिया है.. और विज्जु है भी बेशरम,... अब तो वो मौका देखे बिना hi शुष्मा को अपने गले से लगा लेगा.. शुष्मा अंदर से मचलने लगेगी..

विज्जु ने सभी अच्छी सजा दी है.. ऐसो क साथ ऐसा hi होना चाहिए था.. वीडियो वायरल हुई तो सबब को भी पता चलेगा क रेपिस्ट की सजा क्या है.. सबब खुद को काबू में rakhenge..w करना उनका हशर भी शामे hoga,.,vijjuu गैंग इसी लिए hi तो बना रहा है..
 
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