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- Dec 5, 2013
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हम तीनो hi रूम में थे.. पूजा दीदी को भी सब पता था, .. माँ पूजा दीदी को अपने साथ रूम में ले गई थीं..
मैं रानी और नताशा दीदी तीनो hi बीएड पर लेते हुए थे.. रूम में आते मैंने अपनी शर्ट उतार दी थी, नीचे का सबब वैसे hi था..
मेरी राइट साइड में नताशा दीदी और लेफ्ट साइड में रानी थी... दोनों मेरी बहन में थी.. अभी कुछ भी शुरू नहीं किया था..
मेरा चेहरा सामने था, तो दोनों मुझे देखते हुए एक दूसरे को देख रही थीं..
दोनों ने hi आँखों hi आँखों एक दूसरे को कुछ इशारा किया. दोनों hi मेरे गलों पर किश करने लगीं.. नताशा दीदी शरमाई तो thee..room में आते hi छूट की आग ने, या सैलून की तड़प ने उनकी शर्म ग़ायब दी थी.. वो मुझसे पूरा पूरा प्यार प् लेना चाहती थीं..
दीदी ने साडी ड्रेस पहना हुआ था.. तो रानी ने स्लीवलेस शर्ट क साथ जींस की पेण्ट..
दोनों मुझे गालों पर किस करने लगें.. मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. मैंने दोनों को कुछ देर उनके दिल की करने दी... 2 hi मिंट में वो मेरे को गीला करके साइड में हो गयी.. दोनों की सांस एक्ससिटेमेंट की वजा से तेज़ चल रही थी..
मैं बारी बारी दोनों को hi देखने लगा.. रानी की आँखों में चमक बढ़ गई थी, बहार जो रानी को शर्म आ रही थी, वो अब जा कुहकी थी, मैंने नताशा दीदी को देखा तो उनका चेहरा फिरसे शर्म और छूट की आग की वजा से लाल पद गया था..
मैंने पहले नताशा दीदी को खोलने का सोच लिया.. मई दीदी क उप्पर छड्ड गया और उन्हें किश करने लगा.. दीदी भी मुझे किश करने लगीं.. रानी ने मेरी बेल्ट की तरफ हाथ बढ़ा दिया..
मई थोड़ा सा ऊपर उठकर रानी को अपनी बेल्ट खुलने में मदद देने लगा.. रानी अपने काम में लगी रही और मैंने दीदी को किस करने लगा..
दीदी के होंटो की तपिश ने मेरे लुंड को खड़ा करना शुरू कर दिया.. दीदी मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ चलते हुए मुझे किश कर रही थी.. दीदी अब्ब पुरे मज़े से मेरे होंटो को चूस रही थी.. हम दोनों hi होंटो बदल बदल कर एक दूसरे को किश करने लगे..
जब्ब सांस उखाड़ने अलगी तो हमने किश तोड़ दिया.. दीदी ऑंखें बंद किये तेज़ तेज़ साना लेने लगी...
रानी मेरी बेल्ट खोल चुकी थी.. मैं खड़ा हुआ और अपनी पेण्ट ुंडेरवेरा समेत निकल दी... मई फुल नुदे हो चूका था. .
रानी ने मेरे लुंड को पकड़ लिया, मुझे बीएड पर बैठने भी नहीं दिया और मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए छोस्ने लगी...
रानी मेरे लुंड को जितना उसके मोहन में जा रहा तह, मोहन में लिए चूसने लगी, बाकी बचे हुए लुंड को रानी अपने हाथ से मसल भी रही थी.. रानी तो लुंड चूसने में बहुत एक्सपर्ट हो चुकी थी.. रानी को उनकी मरग़ूब ग़िज़ा मिली तो वो किसी भुकी बिल्ली की तरह से मेरे लुंड पर टूट पड़ी..
suuuururr.ssurrrurr... रानी ने मेरे लुंड छोस्ने से रूम में आवाज़ आने लगी.. नताशा दीदी भी हमें देखने लगी.. रानी के मोहन में रे लुंड को देख कर उनके मोहन में भी पानी आने लगा...
अब्ब तक्क नट्सः दीदी की छूट ने भी उन्हें बेशरम बनाना शुरू कर दिया था.. वो भी आगे बढ़ी और मेरे लुंड के उस हिस्से को छाते लगीं जो रानी के हाथ में था.. रानी ने मेरे लुंड पार्स अपना हाथ हटा दिया था..
अब्ब दोनों hi मेरे लुंड को चूस रही थी.. मेरा और मेरे लुंड का बुरा हाल होने लगा था.. रानी की एक्सपर्टनेस ने मेरे लुंड की साड़ी hi रगों को पहला दिया.. रानी के मेरे लुंड पर लगने वाले दांत मेरे लुंड को और भी बेक़रार कर चुके थे.. अब्ब इसे जल्द hi छूट में घुसना था..
पारर शायद अभी दोनों मेरे लुंड को अच्छे से चूस लेना चाहती थीं.. अभी तो मुझे दोनों को भी अच्छे से चूसना और चाटना था.. फिर कही जा कर मेरा लुंड उन दोनों की छूट में जाने वाला था..
रानी मेरा लुंड चोस कर थक गई तो वो मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल कर साइड में हो गई.. अब्ब दीदी ने मेरे लुंड को अच्छे से अपने मोहन में लिया और छोस्ने लगी.. कुछ देर hi हुई थी, क दीदी ने भी मेरे लुंड को छोड़ दिया और मुझे बीएड पर लेटने को कह दिया..
मैं बीएड पर लेता तो दीदी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर चूसना चाहती थीं..
रानी ने दीदी को रोका.. दीदी रानी को देखने लगी..
रानी;- दीदी पहली कपडे उतार लें, फिर तीनो hi मिलकर सबब करते हाँ..
फिर दोनों भी नंगी होने लगी, अब्ब तक्क दोनों की hi ऑंखें छूट की गर्मी क कारन अपना रंग बदल चुकी थी...
कुछ hi देर में दोनों नंगी हुई तो दीदी मेरे लुंड पर आ और उसे अपने मोहन में लेकर चूसने अलगी..
रानी पहले से hi लेट गई थी.. दीदी ने लेटने से पहले अपनी छूट को रानी क मोहन कर रख दिया था.. अब्ब दीदी क मोहन में मेरा लुंड था, तो रानी के मोहन में उनकी छूट ..
दीदी मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए चूसने लगीं, तो रानी दीदी की छूट में जीब घुसाए दीदी की छूट का पानी चाटने लगीं..
रानी की म्हणत ने दीदी को और भी ज़यादा गरम करना शुरू किया तो दीदी की आग भड़क उठी ,. दीदी मेरे लुंड को वाइल्ड तरके से चूसने लगी..
कुछ hi देर गुज़री थी.. क दीदी ने मेरे मेरे लुंड को अपने मोहन से निकला ..
दीदी:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह रानी तुमने क्या कर दिया मेरी छूट में आग लगा दी... सीई
मा अब्ब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा..
दीदी साइड में बीएड पर लेट गई.. मैं दीदी क ऊपर आया और उनके बूब्स पर झुकता चला गया....
मैं दीदी के निप्पल को चूसने लगा, दीदी के निप्पल बहुत hi सेंसिटिव थे, जैसे hi दीदी क एक निप्पल मेरे मोहन में आया दीदी की तड़प और भी बाहड़ने लगी.. दीदी के दूसरे बूब्स को अपन हाथ दूसरे हाथ से दबाने लगा.. दीदी और भी ज़यादा मचलने लगी. दीदी के दोनों hi बूब्स बोहतु सहक्त हो चुके थी.. दीदी की आहें निकलने लगी. दीदी ने मेरे सर्र के बाएं में अपनी उँगलियाँ चलनी चूरू कर दी.. दीदी की सिसकियाँ और भी तेज़ होने अल्जेमन.. दीदी की छूट का नीचे से क्या हाल हो रहा होगा, वो मई समझ रहा था.. दीदी के अकड़ते हुए निप्पल मुझे दीदी की छूट का सबब हल बात रहे थे.. कुछ देर दीदी क बूब्स और निप्पल को चूसने चाटने क बाद मैं नीचे आने लगा..
धीरे धीर मैं दीदी के बूब्स के नीचे वाले हिस्से को चाट ता हुआ मैं नीचे आने लगा.. दीदी और भी मचलें लगे..
दीदी:- आठ विज्जू ये कैसे आग लगा दी है तुमने, हाय हम्म्म्मे उफ़ हहहह ओह्ह्ह
सीई कुछ करो मेरा विज्जू आग बहुत बाद गई है..
मैं दीदी को चूमंता हुआ और भी नीचे आने लगा, दीदी की नाभि तक पोहंचा तो मैंने अपनी जेब दीदी की नाभि में दाल दी.. दीदी को एक झटका लगा, उनकी गांड कुछ ऊपर उठी, फिर एक झटके में बीएड पर जा गिरी.. दीदी की बेककारी और भी बढ़ चुकी थी..
दीदी की तड़प का ख्याल करते हुए जाहत से उनकी छूट पर जा पोंछा.. दीदी की पानी छोड़ रही छूट पर मई जैसे hi पोहंचा.. दीदी की एक बड़ी सिसकी निकली..
रानी को दूध के कटोरे खली मिले तो वो उन्हें मोहन में लिए पीने लगें.. दीदी पहले hi मेरी वजा से बेहाल थी, रानी के उनके दूध को चूसने से उनका खुद पार्स कण्ट्रोल और भी टूटने लगा.. और मॉनिंग कतरे हुए अपनी छूट को बड़े जोश से मुझसे चुसवाने लगी.. रानी के बेच में आ जाने से वो मेरे सर्र को अपनी छूट पर नहीं दबा सक्तित हैं..
मैं छूट की छूट के लिप्स खोले उनकी छूट के छेड़ में अपनी जीब घुसाए छूट से बहन रहा पानी पि रहा था.. दीदी की हालत और भी ख़राब होने लगी..
दीदी की छूट पर आते hi मैंने दीदी की दोनों जाएंगे को थोड़ा सा खोल दिया था..
दीदी की छूट के छेड़ में अपनी जीब घुसाने क बाद मैंने अपनी जीब को ऊपर दीदी की छूट क दाने चलना शुरू किया तो दीदी इस बार अपनी छूट के किनारो पर रुका हुआ सैलाब न रोक पाई और झाकते कहते हुए झड़ने लगीं...
रानी दीदी क ऊपर से उठ गई और मैं भी दीदी को छोड़ कर रानी पर टूट पड़ा...
रानी ख़ुशी ख़ुशी मेरे सुपर्ष को महसूस करने लगी.. पहले मैंने रानी को अच्छे से किश किया, उससे होंटो सा सारा रस निचोड़ा.. फिर रानी क सख्त हो चुके बूब्स को अपने मोहन में लिया और चूसते हुए अपनी बढ़ चुकी पियास को बुझाने लगा..
रानी:- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विज्जउ बड़ा इंतज़ार करवाया है तुमने.. बहुत बेचैन हो गए थे मेरे बूब्स और निप्पल तुम्हारे मोहन में जाने क लिए.. अब्ब इनकी बेकरी भी ख़तम हो जानी चाहिए.. पारर लगता है ये जल्द hi मुह्जे चैन नई लेने देंगे.. और कस के निचोड़ो मेरे दोनों दूध को.. सारा दुध पि लो मेरे राजा.. अह्ह्ह
ओह्ह्ह उफ़ हाय मेरे दोनों दूध अंदर से बहुत उबाल रहे हाँ विज्जू.. इन्हे खली कार्डो, तभी मुझे चैन आएगा... आईई सीईई हाँ ऐसे hi.. लव यू विज्जु
ह्म्म्मम्म सी
रानी भी मस्त माहौल में जा पोहंची थी.. मई मज़े से रानी के एक बलून मोहन में लिए उनमे हवा भर रहा था.. मेरे चूसने से वो और भी फूलने लगे थे..
दूसरा हाथ भी रानी के बूब्स में अपनी उँगलियों से हवा भरने में लगा हुआ था..
रानी की आहें भी शुरू हो गईं थी.. रानी तो पहले से hi बहुत गरम थी.. मेरी छेड़ छड़ ने रानी का पानी निकलना शुरू कर दिया..'
रानी की गांड बीएड पर झटके पे झटके कहने लगे..
रानी भी दीदी की तरह से अपना पानी अपनी छूट के अंदर न रोक सकीय, और एक बड़ा झटका कहते हुए झाड़ गई.... रानी अपनी छूट मुझसे चटवाये बिना hi झाड़ गई थी..
मैंने रानी को छोड़ा और दीदी को देखने लगा.. दीदी अब्ब तब्ब रिलैक्स हो चुकी थी, और हमें hi देख रही थी..
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मैंने दीदी को देखा..
विजय:- क्यों दीदी अब्ब आगे की स्टेज के लिए खुद को तैयार पाती है आप..
दीदी शर्मा गई.. छूट का पानी निकला तो एक बार फिरसे उन्हें शर्म आने लगी थी.. छूट के खुलने की ेक्सइटेमेंट भी बहुत थी..
विजय:- दीदी अगर नहीं खुलवानी तो मैं रानी की खोल देता हों, फिर सोते हाँ, रात भी बहुत हो चुकी है..
दीदी:- मुझे आंख दिखते हुए) विज्जू मुझसे मार कहानी है.. तुझे तो सबब पता hi है, ये सबब जितना एक्ससिटेमेंट से भरपूर है, उससे बढ़कर दर्रा देने वाला भी है, ऊपर से तुम मुझे छेड़ रहे हो.. जाओ मैं नै बोलती तुमसे..
दीदी भी नखरा करने लगी.. मैंने दीदी को पैरों से पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा, दीदी गांड के बल बीएड पर से ghisit'ti हुई मेरी तरफ खींची चली आई..
मैंने दीदी की आँखों में देखा और फिर दीदी के पैरों को खोल कर दीदी की छूट को अपने लुंड के लिए ग्रीन सिग्नल देने लगा... दीदी की छूट ने भी मुझे एक स्माइल दी.. वो जो कुछ देर पहले आंसू बहा रही थी, इस बार झूमने लगी..
दीदी भी जानती क अब्ब उनकी छूट क खुलने समय ाँ पोहंचा है..
didi:-vijjuu मेरे भाई, अपनी दीदी का ख्याल रखना. तुम्हारी दीदी की वो बहुत नाज़ुक है, बड़ा दर्द होगा उसे, धयान से और प्यार से सबब करना..
विजय:- दीदी आपको कुछ भी कहने की ज़रूरत नहीं है, मैं प्यार से hi करूँगा..
मेरी नज़र दीदी की एक दम साफ़ गुलाबी छूट पर जैसे hi गयी, मेरे लुंड ने उछालना शुरू कर दिया.. मैंने धीरे से अपने हाथो की एक उँगलियों से दीदी की छूट की फैंको को खोल कर अंदर देखा तो, दीदी की छूट का गुलाबी छेड़ उसके कॉमर्स से एक दम भीगा हुआ था.
क्या नज़ारा था. एक दम नयी और फ्रेश छूट. जो लुंड को पहली बार अपने अंदर सम्मा जाने के लये अपना कॉमर्स टपका रही थी. और फिर जैसे hi मैंने अपने एक ऊँगली को दीदी की छूट के गुलाबी गीले छेड़ पर रखा तो. दीदी की कमर ने एक और जोरदार झटका खाया. दीदी की गांड बीएड से ऊपर उचक गए.
शहीइइइइइइइ ुंहःहःहःह विज्जू.
दीदी ने सिसकते हुए बीएड पर कड़े हुए तकिये को दोनों हाथो से कसके पकड़ लाया.
मैंने दीदी की छूट में अपनी ऊँगली कुछ आगे बधाई, तो मेरी ुंगक्ली थोड़ी सी दीदी की छूट में आगे जा घुसी, आगे से दीदी की छूट बहुत टाइट थी, तो दीदी को दर्द होने लगा.. दीदी की दर्द भरी सिसकी निकल गई..
दीदी:- वीजूउ धयान से, अपनी दीदी को कम् दर्द देना.. अभी तुमने ऊँगली hi घुसाई है तो दर्द होने लगा.. जब्ब तुम वो ......... विज्जू मैंने कभी पहले क्या नहीं है. और तुम्हरा वो बहुत बड़ा भी hai.ye इससे बहुत तकलीफ होगी ना?
विजय- हाँ दीदी थोड़ी तकलीफ तो होगी. पर थोड़ी देर के लये. फिर मैं अपनी दीदी को बहुत मज़ा दूंगा..
दीदी:- विज्जू तुम सच कह रहे होना..
मई- हाँ दीदी मैं सच कह रहा हों. कुछ नहीं होता घबरा नहीं.
कुछ देर मैं दीदी की छूट को अपनी ऊँगली से चेक करता रहा, फिर मैंने अपने ऊँगली को दीदी की छूट से निकला और अपने लुंड को दीदी की छूट में घुसाने क लिए मैदान में आ गया..
मैंने अपने लुंड के मोठे सुपड को दीदी की छूट के फैंको के बीच मई जैसे hi लगाया तो, दीदी मेरे लुंड के दहकते हुए सुपडे को अपने छूट के लिप्स के बीच महसूस करते hi दीदी झटके खाने लगी..
मैंने दीदी की झंगो को कसके पकड़ा और अपने लुंड के सुपड को उसके छूट के लिप्स के बीच धीरे-2 रगड़ना शुरू कर दया.
दीदी- ओह्ह्ह्हह विज्जू ुंहःहःह शीइइइइइइइ विज्जू यी यी करना कितना अच्छा लगता है अह्ह्ह्हह ुंहःहःह उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है भाई
विजय- दीदी अंदर दालों..
दीदी- हाँ विज्जू डालो, पर अपनी दीदी के दर्द का ख्याल भी रखना..
मई- दीदी याद है ना थोड़ी देर के लिए दर्द होगा.
दीदी- हैं याद है पारर फिर भी डर सा लग रहा hai...didi ने दररते हुए
कहा.
मई अब्ब पुरे जोशो खरोश से दीदी की छूट के लिप्स के बीच मई अपने लुंड के सुपडे को रगड़ रहा था. बीच बीच में जब मेरा लुंड दीदी की छूट के छेद पर जाकर रगड़ खता तो, दीदी सिसकने लग जाती. मैंने दीदी के दोनों टैंगो को ऊपर उठा कर घुटनो से मोड़ा. और फिर एक हाथ से अपने लुंड के सुपडे को उसके छूट के छेद पर सेट काया, तोह दीदी सिसक उठी.
रानी भी अब्ब रिलैक्स थी, तो मुझे दीदी की छूट में लुंड घुसते देख कर दीदी की होंटो को अपने होंटो लेकर छोस्ने लगी, दीदी क बूब्स भी रानी के हाथ में आ गए.. अब्ब मुझे दीदी की छूट में अपना लुंड घुसा देना चाहिए थी.. डीड क दर्द को कम् करने क लिए रानी मैदान में आ गई थी..
मई कुछ पालो के लिए रुका, मैंने अभी भी एक हाथ से अपने लुंड के सुपडे को पकड़ रखा था. और फिर अपनी पूरी ताकत के साथ अपने लुंड के सुपडे को दीदी की छूट के टाइट छेड़ पर दबाता चला गया.
क्योंकि मई छठा था की, जो दर्द दीदी को होना है, वो एक ही बार मई हो. ऐसे धीरे धीरे करके मई दीदी की तकलीफ को बढ़ाना नहीं छठा था. मेरे लुंड का सूपड़ा दीदी के छूट के छेद को फैलता हुआ अंदर ग़ुस्सा तो, दर्द के मरे दीदी के अपना बदन ने ऐंठना शुरू कर दया. पर मई ना रुका. और मेरे लुंड का सुपड दीदी की छूट के सील को तोड़ता हुआ अंदर और अंदर घुसता चला गया.
दीदी- ओह्ह्ह्ह विज्जू रुको. अह्ह्ह्हह शीइइइइइ रुको अह्ह्ह्ह भोत दर्द हो रहा है. है मेरे जान निकल गए... रानी ने मुझे धक्का न लगते हुए देखने क लिए मेरी तरफ मोहन मोड़ा था.. इसी बीच ये सब हुआ तो रानी ने फिरसे दीदी के होंटो को अपने मोहन में लेकर चूसना शुरू कर दिया..
दीदी बुरी तरह से तड़पने लगी थी. दीदी कैसे भी आकरके मेरे लुंड को अपनी छूट से निकल लेना चाहती थी.. रानी और मैंने दीदी को अपने कब्ज़े में लिया हुआ था.. दीदी की कोशिश बेकार hi गई...
मैं रुका गया.. मेरा लुंड दीदी की छूट की सील तोड़ते हुए 4" तक्क अंदर जा घुसा था.. दीदी क लिए ये दर्द सहन नहीं हुआ था.. उनकी नाज़ुक सी सील ने टूट कर उन्हें अंदर तक हीला डाला था..
कुछ देर में रानी ने दीदी की किश की.. फिर रानी दीदी के बूब्स पर आई और एक बूब्स को मोहन में ले लिया और फुसरे हाथ से दीदी क दूध और निप्पल को बढ़ाने लगी.....
दीदी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह विज्जू प्लीज बहार निकालो उसे. बहुत दर्द हो रहा है, जैसे तुमने वो नहीं, कोई चाकू मेरे वहां घुसा दिया हो...
दीदी ने दर्द से कराहते हुए कहा.
विजय:- दीदी डरो नहीं, अब्ब तो सारा hi नादर जा चूका है...
दीदी- अह्ह्ह्ह मुझे नहीं पता विज्जू प्लीज बहार निकालो अपने मूसल को..
मई- मई कह रहा हूँ ना बुसस और दर्द नहीं होगा.
दीदी- हैए मेरे जान निकल गयी. प्लीज विज्जू हटो पीछे.
मई- अच्छा एक काम करो. सिर्फ एक मिनट ओनली 60 सेकंड तक वेट करो. अगर दर्द काम नहीं हुआ तोह, मई बहार निकाल लूंगा.
दीदी सच मई दर्द से कराह रही थी. पर मेरे बात सुन कर वो चुप हो गए. और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.
मुझे पता था दीदी कुछ hi देर में शांत हो जाएगी.. रानी की म्हणत जल्दी hi रंग लेन वाली.. रानी की स्पीड को तेज़ करने क लिए मैंने रानी की छूट में अपनी एक ऊँगली दाल दी.. मैना पनि ऊँगली को रानी की छूट के छेड़ में घूमने लगा.. रानी एकदुम्म से hi मछली, और फिर मुझे देख्नते हुए दीदी के बूब्स को वाइल्ड तरीके से चूसने औअर मसलने लगी...
कुछ देर दीदी की दर्द भरी कराहें गोपोजटि रहें.. फिर दीदी की कराहें सिसकियों में बदलने लगी.. रानी की म्हणत रंग लाइ.. दीदी फिर से गरम होने अलगी थी.. दीदी ने जल्द hi अपनी गांड को हिला मुझे सिगनल देना शुरू कर दिया..
रानी बहुत अच्छे से दीदी के निप्पल्स को बारी बारी चूस और अपनी उंगलियोंसे कुरेद रही थी..
दीदी का दर्द धीरे धीरे करके कम् हो गया..
मैंने अपने लुंड को दीदी की कहत से बहार खेंचा, दीदी की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिए था.. मेरा लुंड कुछ मुश्किल से hi सही पर सुपडे तक बहार आए गया.. दीदी की सिसकी निकला गई. “अह्ह्ह्ह vijjuu.jaise उससे दर्द हुआ हो.
मैंने नार्मल ढके से अपने लुंड को फिरसे दीदी की छूट में घुसा दिया.. मेरा लुंड फस कर दीदी की छूट में गया.. दीदी को इस अबार दर्द के साथ मज़ा भी आने लगा.. मेरे लुंड ने और रानी की चुसाई ें दीदी को नयी दुन्या की नयी लज़्ज़तों से रोशनास करना शुरू क्र दिया था....
मैं धीरे धीरे से दीदी की कहत में अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा.. दीदी मस्त होती जा रही थी, तो दीदी को अपनी छूट की दीवारों पर मेरे लुंड के सुअपड़े के अच्छे से महसूस आकर प् रही थी.;.
ऐसी खवाहिश, ऐसा मज़ा तो दीदी कब्ब से लेना छह रही थी... अब्ब दीदी का दर्द कम् हुआ तो में दीदी को वो मज़ा देना शरू कर दिया, जिसके लिए दीदी कब्ब से तड़प रही थी....
दीदी की मस्ती बढ़ने लगी तो
दीदी:- ाःह ओह्ह्ह्ह विज्जू मेरे भाई ऐसे hi मुझे अब्ब बहुत अच्छा लग रहा है.. ऐसे hi धीरे धीरे करो.. रानी ने अब्ब दीदी के बूब्स को छोड़ दिया था..
रानी ने कुछ देर की ब्रेक ले ली..
रानी साइड में हुई तो मैं दीदी पर झुक गया..
दीदी ने मेरे फेस को दोनों हाथो से पकड़ कर ऊपर खेंचते हुए मेरे होंटो को अपने गर्दन पर लगा दया.
“ओह्ह्ह्ह विज्जू तुम सही कह रहे थी. बहुत मज़ा आ रहा है.
दीदी ने नीचे से अपनी छूट को उचकते हुए कहा. दीदी का रंग अचानक से hi चेंज हो गया था.;. दीदी अब्ब मज़ा लेने लगी थी.. शर्म तो छूट के खुलते hi चली जाती है.. किसी का लुंड छूट में हो तो फिर बाद में कैसा शरमाना..
दीदी भी अब्ब नहीं शर्म रही थीं. दीदी अब्ब पूरा पूरा मज़ा ले रही थी..
दीदी नीचे से धीरे धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी थी. मई भी धीरे धीरे अपने लुंड को दीदी के छूट के अंदर बहार करने लगा. हम दोनों का रयथेम ऐसा था की, मई जब अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठता तो, दीदी अपनी गांड को नीचे कर लेती, जिससे मेरा लुंड सुपडे तक दीदी की छूट से बहार आ जाता. और जब मई अपने लुंड को अंदर करने के लिए अपनी कमर को नीचे के तरफ karta,to दीदी भी साथ मैं अपनी गांड को ऊपर के तरफ उठती, तो लुंड छूट के गेहरों मई सामने जाता, अभी मेरा लुंड दीदी की छूट में पूरा नहीं गया था.. दीदी को अब्ब भी दर्द हो रहा था. दीदी क ऐसा करने से मेरा लुंड धीरे धीरे करके दीदी की छूट को खोलते हुए और भी अंदर जाने लगा,.. दीदी अपने दर्द को सहन करते हुए, मेरे होंटो को पीने लगी... हम दोनों hi एक रिधम से धीरे धीरे करके चुदाई का मज़ा ले रहे थे..
रानी ने भी हमें डिस्टर्ब नहीं किया, अभी दीदी की छूट पूरी नहीं खुली थी, वर्ण रानी चुप बैठने वाली नहीं थी....
कुछ देर गुज़री तो दीदी ऐसी चुदाई से फुल गरम हो गई, दीदी छूटने वाली हुई तो दीदी ने मेरे चूतड़ों पर अपने दोनों पेअर रखकर एकदुम्म से पूरा ज़ोर लगा दिया.. वो भूल गई थीं क अभी मेरा लुंड सारा उनकी छूट में नहीं घुसा है..
दीदी ने मेर चूतड़ों पर ज़ोर तब्ब बाध्य था, जब्ब मैं दीदी की छूट से लुंड को सुपडे तक्क निकाल कर अंदर दाल रहा था..
दीदी के ऐसा करने से मेरा भी बैलेंस कुछ बिगड़ा और फिर मेरा लुंड दीदी की छूट की साड़ी रुकावटें तोड़ता हुआ दीदी की बच्चेदानी तक जा पोहंचा..
एक बार तो दीदी का सांस hi अटक गया था, छूट पानी छोड़ने वाली थी, तो दीदी जल्द hi इस भयानक दर्द को सहन कर गई, मई भी रुके बिना दीदी को दर्द देता हुआ दीदी को स्पीड से छोड़ने लगा, दीदी फिरसे मूड में आने लगी. दीदी की छूट में पानी की नदिया बहनी शुरू कर दी... दीदी के शरीर के झटके बढे तो दीदी की छूट का पानी भी खून में शामिल हो कर मेरे लुंड के बहार आने से बहार आने लगा,.
धीरे धीरे ढक्कू में तूफानी स्पीड आने लगी, दीदी भी खुल के सिसकियाँ लेने लगीं, उनकी आहें बढ़ें तो ौंके अल्फ़ाज़ भी बदलने लगे.
दीदी मुझसे चुड़ते हुए, मेरे मोटा और लम्बे लुंड को अपनी कुंवारी और टाइट छूट में लेते हुए, आहें सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगी...
मेरा लुंड फिर भी नहीं रुका, दीदी का बदन ढीला पद गया, तो मैंने की छूट से लुंड निकल दिया..
रानी ने मुझे रेस्ट दिए बिना hi दीदी की छूट के पानी से सना हुआ मेरा लुंड थमा और ghapach..ghapach करके उसे मोहन में लेकर चूसने लागु..
रानी भी चुदाई देख कर हॉर्नी हो चुकी थी.. कुछ देर रानी ने मरा लुंड चूसा, उसके बाद रानी लेट गई..
मई रानी के ऊपर आया उसके पैरों को खोला, रानी की छूट पर झुकता हुआ रानी की छूट को चाटने लगा..
रानी:- ाः विजजूउउ चाट लो पूरा अपनी रानी की छूट को, बहुत देर से तेरी जीब के सवाद के लिए बेताब है, घुसा दो अपनी जीब की नोक में मेरी छूट की अंत गहराई me....aahhh ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फफ्फ्फ़ जल्दी से छतो विजजूउउ माआआआ.. मई झड़ने वाली हों... लीक माय पुसी विज्जउ फास्टर फास्टर..
मैं रानी की छूट के देने को अंगूठे से मसलता हुआ चाटने लगा,., रानी जल्द hi अपनी छूट का पानी छोड़ गई..
मैंने एक नज़र दीदी को देखा दीदी भी ऑंखें बंद किते हुए पहले का आनंद ले रही थीं...
मैंने रानी के पैरों को खोला.. अपने लुंड को पकड़ कर लुंड के सुपड से रानी की छूट के लिप्स में से निकल रहे छूट को बहार निकलने लगे.. मेरे लुंड के ऊपर वाले हिस्से पर रानी की छूट का पानी लग गया, जो मेरे लुंड के सुपड पर चमकता हुआ बहुत खूबसूरत दिख रहा था...
मैं अपने लुंड को रनै की छूट के लिप्स में ऊपर नीचे करने लगा.. कुछ देर मई ऐसे hi मैं बहलाता रहा, जब रानी रिलैक्स हुई तो मैंने रानी को देखा, रानी भी मुझे hi देख रही थी, रानी की आँखों में बहुत चमक आ गई थी..
विजय:- रानी मेरी जान, दाल डॉन अपने लुंड को तेरी छूट में, और कार्डों उपघटन तेरी छूट का..
रानी:- हाय विज्जू मई तो कबसे इसी पल के इंतज़ार में थी, मई तो कई रातों से अपनी छूट का उपघटन होते हुए देख रही हों... खोल दो मेरी छूट को और दे दो मुझे वो ख़ुशी जिसे पाने क लिए मई नजाने कब्ब से इंतज़ार में हों...
मैंने अपने लुंड लो अच्छे से रनै की छूट में फंसाया.. रानी के ऊपर झुका रानी को एक किश किया, फिर एक ज़ोरदार धक्का मार दिया.. मेरे लुंड का सुपड रानी की छूट में घुस gaya..aiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa phattttttttttttttttt
gaiiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiiiiiiii chutttttttttttttttttttttttttttttttttt
रानी की चीख निकल गई, मैं रानी को देखते हुए एक और कसके धक्का मार दिया. इसबार भी रानी बुरी तरह से चीख पड़ी, रानी की आँखों से पानी निकल पड़ा, रानी का चेहरा दर्द के कारण लाल पद गया,... मेरा लुंड रनै की छूट की सील को तोड़ता हुआ 4" अंदर चला गया था...
रानी की सील टूटी तो रानी भी लड़की से औरत बन्न गई.... रानी चीखती रही, मैंने रानी को पूरा मज़ा देने की सोच ली, रानी और दीदी का अलग अलग हिसाब था, रानी खुल के छोड़ना चाहती थी, रानी शुरू में तो बौह्त चीखती पर मुझसे तो पूरा मैं से और पुरे दर्द से चुदती...
यही सोचते हुए मैंने लुंड को थोड़ा सा पीछा खेंचा और एक बड़ा धक्का और मार दिए...
इस बार रानी क साथ रानी की मार की छूट भी खुल गई, रानी की चीख इस बार सबसे ज़यादा दर्द भरी थी,.... मेरा लुंड रानी की छूट की अंत गहराई में उतर चूका था.... रानी बेहोश तो नहीं हुई, पारर उसकी हालत बहुत डरावनी हो गई थी.
दीदी:- विज्जू क्यों रही को तड़पा रहे हो.. क्यों उसे इतना दर्द दे रहे हो..
मैंने दीदी को देखा..
विजय:- दीदी, रानी खुलके सेक्स करने की आदि है, देखना कुछ hi देर में रानी कैसे मज़े से चुदती है.. आप भी कभी ऐसी hi चुदाई करवाना, बहुत मज़ा आता है चुदाई का.....
दीदी:- ना भाई, मैं तो ऐसे hi बहुत खुद हों, पहले hi इतना दर्द हुआ, बड़ी मुश्किल से सहन किया है, आसान नहीं था, सहन करना...
मेरा मोटा और लम्बा लुंड रानी की छूट को पूरा hi खोल चूका था... दीदी अब्ब्ब रिलैक्स थी तो दीदी ने मुझे सीधा किया और दीदी के बूब्स को पीने लगी..
दीदी खुद की छूट को खोल कर रनै का दूध पि रही थी, दीदी को भी बहुत दर्द हो रहा था... दीदी की छूट खून और उनकी छूट के पानी से भरी हुई थी, बीएड शीट भी इसी मिसुरे से भरी हुई थी..
दीदी लगी रही जब तक रानी शांत नहीं हो गई..
रानी:- ी लव यू विजजूउउ जितना दर्द दिया है, अब्ब उतना hi मज़ा भी दो मुझे, ऐसे hi बेदर्दी से छोड़ो मुझे.. कार्डो मेरी छूट को पूरा खुला...
दीदी रानी को हैरत से देखने लगी..
दीदी:- रानी तुझे विज्जू से वैसे चुद लेगी, जैसे कह रही है, तुझे इतना तो दर्द है...
रानी:- दीदी दर्द तो मुझे होगा hi, आराम से चूड़ों या स्पीड से... तो फिर मई पूरा मज़ा क्यों न लोन, सालों से hi तो विज्जू के लिए तड़प रही हों..
दीदी:- वो तो मैं भी भाई क लिए तड़प रही हों... पर ऐसी दर्द भरी चुदाई... ना बाबा ना मैं तो नहीं कर सकती..
रानी:- विज्जू अब देख क्या रहे हो... हो जाओ शुरू..
मैंने दीदी को देखा दीदी साइड में होक मुझे और रानी को देखने लगी..
मैं रानी के ऊपर आया और अपने लुंड को हिलने के बाद रानी की छूट से सुपड तक बहार निकल दिया.. 3-4 बार नार्मल से अंदर बहार किया, फिर स्पीड बढ़ने लगा, रानी दर्द भरी सिकियाँ भरने लगी..'
धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी.. रनै को बहुत दर्द हो रहा था, रानी ने मेरे होंटो को अपने होंटो के लिया और चूसने लगी..
कुछ देर में hi रानी की छूट की दीवारे निचोड़ने लगी, रानी ने मुझे किश करना छोड़ दिया...
मई कुछ ऊपर हुआ .. बीएड साइड में वज़न डालते हुए रानी को स्पीड से छोड़ने लगा, रानी की छूट ने पानी का बहाओ तेज़ कर दिया...
मेरा पूरा लुंड रानी के छूट के अंदर बहार हो रहा था. रानी अब्ब बहुत ऊँची आवाज़ मई सिसकते हुए मज़ा ली रही थी. ओह्ह्ह्ह एस विज्जू अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह फ़क मी अह्ह्ह्हह ुंहःहःह ममममममम. मेरा लुंड रानी की छूट के कॉमर्स से और भी चिकना हो गया था. दीदी अब्ब फिरसे नशे में होने लगी थी. वो मज़े से मेरी और रानी की चुदाई देखने लजीईए.
रानी की छूट बेहद गरम हो चुकी थी.
ओह्ह्ह विज्जू एस्सस फ़क मी. विज्जू मुझे डोगग्य स्टाइल मई छोड़ो आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरा बहुत मान था क, तुम मुझे डोगग्य स्टाइल में छोड़ो. प्लीज विज्जू मेरे ये तमन्ना पूरी कर दो.
विजय- अहह, हाँ क्यों नहीं मेरे जान. तुम मेरे दिल की भी रानी हो, तो मई तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ.
मैं ऊपर हुआ, अपने लुंड को रानी के छूट से बहार निकला. तो रानी खुद hi, जल्दी से डोगग्य स्टाइल मई हो गयी. मैं रानी के पीछे आते हुए, उसकी छूट की फैंको के बीच उसकी छूट के छेद पर अपने लुंड को सेट करते हुए एक जोर दर देखा मारा दिया......... अह्ह्ह्हह vijjuuuuuuuuuuuuuu रानी की दर्द भरी तेज़ सिसकी निकल गई.
मैंने रानी की कमर को कस के पकड़ हुए तेजी से अपने लुंड को अंदर बहार करना शुरू कर दया.
अह्हह्ह्ह्ह शी विज्जू हैं ऐसे ही और जोर से करो अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह विज्जू अह्ह्ह्हह तुमने अपनी रानी को खुस कर दिया आज. ुंहःहः है विज्जू. अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह विज्जू ी ऍम क्युम्मिंग.
रानी फुल मज़े में थी...
दीदी ने भी पीछे के तरफ अपने चूतड़ों को देखेलना शुरू कर दया था.
मेरे झांगेन रानी के चूतड़ों पर बुरी तरह से टकरा रही थी. तभी रानी का बदन एक दम से कंपनी लगा. और वो अग्गे के तरफ लुढ़क गए. वो बुरी तरह से झाड़ रही थी. पर मई लगतार अपने लुंड को अंदर बहार किये जा रहा था.
ओह्ह्ह्ह विज्जू ुंहःहःहःहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हो और स्पीड से छोड़ो अपनी रानी को.
रानी आखरी सिसकियाँ लेते हुए अपने चुत्तड़ को हिलाते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में िनौत होते हुए भयंकर खाने खाने लगी..
रानी की छूट ने खून और पानी की बरसात शुरू करदी.. रानी दुमदार चुदाई के बाद झाड़ गई थी...
रानी बीएड पर ढेर हो गई तो मैंने अपने लुंड को रानी की छूट से निकल दिया...
उसके बाद दीदी को छोड़ छोड़ कर अपने लुंड के पानी को दीदी की छूट में खाली कर दिए.............. रानी भी फिरसे तैयार हो चुकी थी.......
रानी ने मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर फिरसे जवान कर दिया, फिर एक राउंड और चला ..
रानी और दीदी की छूट मेरे लुंड से चुद चुद के पूरी तरह से खुल गई.. रानी और दीदी के अंदर मेरे प्यार से मेरे लुंड से पूरी तरह से खिल उठे थे..
तीनो को पूरा पूरा प्यार मिला... तो तीनो hi फिर सो गए.....
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