Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 22 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)



अपडेट ::: 96


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हम तीनो hi रूम में थे.. पूजा दीदी को भी सब पता था, .. माँ पूजा दीदी को अपने साथ रूम में ले गई थीं..

मैं रानी और नताशा दीदी तीनो hi बीएड पर लेते हुए थे.. रूम में आते मैंने अपनी शर्ट उतार दी थी, नीचे का सबब वैसे hi था..

मेरी राइट साइड में नताशा दीदी और लेफ्ट साइड में रानी थी... दोनों मेरी बहन में थी.. अभी कुछ भी शुरू नहीं किया था..

मेरा चेहरा सामने था, तो दोनों मुझे देखते हुए एक दूसरे को देख रही थीं..

दोनों ने hi आँखों hi आँखों एक दूसरे को कुछ इशारा किया. दोनों hi मेरे गलों पर किश करने लगीं.. नताशा दीदी शरमाई तो thee..room में आते hi छूट की आग ने, या सैलून की तड़प ने उनकी शर्म ग़ायब दी थी.. वो मुझसे पूरा पूरा प्यार प् लेना चाहती थीं..

दीदी ने साडी ड्रेस पहना हुआ था.. तो रानी ने स्लीवलेस शर्ट क साथ जींस की पेण्ट..

दोनों मुझे गालों पर किस करने लगें.. मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. मैंने दोनों को कुछ देर उनके दिल की करने दी... 2 hi मिंट में वो मेरे को गीला करके साइड में हो गयी.. दोनों की सांस एक्ससिटेमेंट की वजा से तेज़ चल रही थी..

मैं बारी बारी दोनों को hi देखने लगा.. रानी की आँखों में चमक बढ़ गई थी, बहार जो रानी को शर्म आ रही थी, वो अब जा कुहकी थी, मैंने नताशा दीदी को देखा तो उनका चेहरा फिरसे शर्म और छूट की आग की वजा से लाल पद गया था..

मैंने पहले नताशा दीदी को खोलने का सोच लिया.. मई दीदी क उप्पर छड्ड गया और उन्हें किश करने लगा.. दीदी भी मुझे किश करने लगीं.. रानी ने मेरी बेल्ट की तरफ हाथ बढ़ा दिया..

मई थोड़ा सा ऊपर उठकर रानी को अपनी बेल्ट खुलने में मदद देने लगा.. रानी अपने काम में लगी रही और मैंने दीदी को किस करने लगा..

दीदी के होंटो की तपिश ने मेरे लुंड को खड़ा करना शुरू कर दिया.. दीदी मेरे सर्र के बालों में उँगलियाँ चलते हुए मुझे किश कर रही थी.. दीदी अब्ब पुरे मज़े से मेरे होंटो को चूस रही थी.. हम दोनों hi होंटो बदल बदल कर एक दूसरे को किश करने लगे..

जब्ब सांस उखाड़ने अलगी तो हमने किश तोड़ दिया.. दीदी ऑंखें बंद किये तेज़ तेज़ साना लेने लगी...

रानी मेरी बेल्ट खोल चुकी थी.. मैं खड़ा हुआ और अपनी पेण्ट ुंडेरवेरा समेत निकल दी... मई फुल नुदे हो चूका था. .

रानी ने मेरे लुंड को पकड़ लिया, मुझे बीएड पर बैठने भी नहीं दिया और मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए छोस्ने लगी...

रानी मेरे लुंड को जितना उसके मोहन में जा रहा तह, मोहन में लिए चूसने लगी, बाकी बचे हुए लुंड को रानी अपने हाथ से मसल भी रही थी.. रानी तो लुंड चूसने में बहुत एक्सपर्ट हो चुकी थी.. रानी को उनकी मरग़ूब ग़िज़ा मिली तो वो किसी भुकी बिल्ली की तरह से मेरे लुंड पर टूट पड़ी..

suuuururr.ssurrrurr... रानी ने मेरे लुंड छोस्ने से रूम में आवाज़ आने लगी.. नताशा दीदी भी हमें देखने लगी.. रानी के मोहन में रे लुंड को देख कर उनके मोहन में भी पानी आने लगा...

अब्ब तक्क नट्सः दीदी की छूट ने भी उन्हें बेशरम बनाना शुरू कर दिया था.. वो भी आगे बढ़ी और मेरे लुंड के उस हिस्से को छाते लगीं जो रानी के हाथ में था.. रानी ने मेरे लुंड पार्स अपना हाथ हटा दिया था..

अब्ब दोनों hi मेरे लुंड को चूस रही थी.. मेरा और मेरे लुंड का बुरा हाल होने लगा था.. रानी की एक्सपर्टनेस ने मेरे लुंड की साड़ी hi रगों को पहला दिया.. रानी के मेरे लुंड पर लगने वाले दांत मेरे लुंड को और भी बेक़रार कर चुके थे.. अब्ब इसे जल्द hi छूट में घुसना था..

पारर शायद अभी दोनों मेरे लुंड को अच्छे से चूस लेना चाहती थीं.. अभी तो मुझे दोनों को भी अच्छे से चूसना और चाटना था.. फिर कही जा कर मेरा लुंड उन दोनों की छूट में जाने वाला था..

रानी मेरा लुंड चोस कर थक गई तो वो मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल कर साइड में हो गई.. अब्ब दीदी ने मेरे लुंड को अच्छे से अपने मोहन में लिया और छोस्ने लगी.. कुछ देर hi हुई थी, क दीदी ने भी मेरे लुंड को छोड़ दिया और मुझे बीएड पर लेटने को कह दिया..

मैं बीएड पर लेता तो दीदी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर चूसना चाहती थीं..

रानी ने दीदी को रोका.. दीदी रानी को देखने लगी..

रानी;- दीदी पहली कपडे उतार लें, फिर तीनो hi मिलकर सबब करते हाँ..

फिर दोनों भी नंगी होने लगी, अब्ब तक्क दोनों की hi ऑंखें छूट की गर्मी क कारन अपना रंग बदल चुकी थी...

कुछ hi देर में दोनों नंगी हुई तो दीदी मेरे लुंड पर आ और उसे अपने मोहन में लेकर चूसने अलगी..

रानी पहले से hi लेट गई थी.. दीदी ने लेटने से पहले अपनी छूट को रानी क मोहन कर रख दिया था.. अब्ब दीदी क मोहन में मेरा लुंड था, तो रानी के मोहन में उनकी छूट ..

दीदी मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए चूसने लगीं, तो रानी दीदी की छूट में जीब घुसाए दीदी की छूट का पानी चाटने लगीं..

रानी की म्हणत ने दीदी को और भी ज़यादा गरम करना शुरू किया तो दीदी की आग भड़क उठी ,. दीदी मेरे लुंड को वाइल्ड तरके से चूसने लगी..

कुछ hi देर गुज़री थी.. क दीदी ने मेरे मेरे लुंड को अपने मोहन से निकला ..

दीदी:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह रानी तुमने क्या कर दिया मेरी छूट में आग लगा दी... सीई

मा अब्ब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा..

दीदी साइड में बीएड पर लेट गई.. मैं दीदी क ऊपर आया और उनके बूब्स पर झुकता चला गया....

मैं दीदी के निप्पल को चूसने लगा, दीदी के निप्पल बहुत hi सेंसिटिव थे, जैसे hi दीदी क एक निप्पल मेरे मोहन में आया दीदी की तड़प और भी बाहड़ने लगी.. दीदी के दूसरे बूब्स को अपन हाथ दूसरे हाथ से दबाने लगा.. दीदी और भी ज़यादा मचलने लगी. दीदी के दोनों hi बूब्स बोहतु सहक्त हो चुके थी.. दीदी की आहें निकलने लगी. दीदी ने मेरे सर्र के बाएं में अपनी उँगलियाँ चलनी चूरू कर दी.. दीदी की सिसकियाँ और भी तेज़ होने अल्जेमन.. दीदी की छूट का नीचे से क्या हाल हो रहा होगा, वो मई समझ रहा था.. दीदी के अकड़ते हुए निप्पल मुझे दीदी की छूट का सबब हल बात रहे थे.. कुछ देर दीदी क बूब्स और निप्पल को चूसने चाटने क बाद मैं नीचे आने लगा..

धीरे धीर मैं दीदी के बूब्स के नीचे वाले हिस्से को चाट ता हुआ मैं नीचे आने लगा.. दीदी और भी मचलें लगे..

दीदी:- आठ विज्जू ये कैसे आग लगा दी है तुमने, हाय हम्म्म्मे उफ़ हहहह ओह्ह्ह

सीई कुछ करो मेरा विज्जू आग बहुत बाद गई है..

मैं दीदी को चूमंता हुआ और भी नीचे आने लगा, दीदी की नाभि तक पोहंचा तो मैंने अपनी जेब दीदी की नाभि में दाल दी.. दीदी को एक झटका लगा, उनकी गांड कुछ ऊपर उठी, फिर एक झटके में बीएड पर जा गिरी.. दीदी की बेककारी और भी बढ़ चुकी थी..

दीदी की तड़प का ख्याल करते हुए जाहत से उनकी छूट पर जा पोंछा.. दीदी की पानी छोड़ रही छूट पर मई जैसे hi पोहंचा.. दीदी की एक बड़ी सिसकी निकली..

रानी को दूध के कटोरे खली मिले तो वो उन्हें मोहन में लिए पीने लगें.. दीदी पहले hi मेरी वजा से बेहाल थी, रानी के उनके दूध को चूसने से उनका खुद पार्स कण्ट्रोल और भी टूटने लगा.. और मॉनिंग कतरे हुए अपनी छूट को बड़े जोश से मुझसे चुसवाने लगी.. रानी के बेच में आ जाने से वो मेरे सर्र को अपनी छूट पर नहीं दबा सक्तित हैं..

मैं छूट की छूट के लिप्स खोले उनकी छूट के छेड़ में अपनी जीब घुसाए छूट से बहन रहा पानी पि रहा था.. दीदी की हालत और भी ख़राब होने लगी..

दीदी की छूट पर आते hi मैंने दीदी की दोनों जाएंगे को थोड़ा सा खोल दिया था..

दीदी की छूट के छेड़ में अपनी जीब घुसाने क बाद मैंने अपनी जीब को ऊपर दीदी की छूट क दाने चलना शुरू किया तो दीदी इस बार अपनी छूट के किनारो पर रुका हुआ सैलाब न रोक पाई और झाकते कहते हुए झड़ने लगीं...

रानी दीदी क ऊपर से उठ गई और मैं भी दीदी को छोड़ कर रानी पर टूट पड़ा...

रानी ख़ुशी ख़ुशी मेरे सुपर्ष को महसूस करने लगी.. पहले मैंने रानी को अच्छे से किश किया, उससे होंटो सा सारा रस निचोड़ा.. फिर रानी क सख्त हो चुके बूब्स को अपने मोहन में लिया और चूसते हुए अपनी बढ़ चुकी पियास को बुझाने लगा..

रानी:- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह विज्जउ बड़ा इंतज़ार करवाया है तुमने.. बहुत बेचैन हो गए थे मेरे बूब्स और निप्पल तुम्हारे मोहन में जाने क लिए.. अब्ब इनकी बेकरी भी ख़तम हो जानी चाहिए.. पारर लगता है ये जल्द hi मुह्जे चैन नई लेने देंगे.. और कस के निचोड़ो मेरे दोनों दूध को.. सारा दुध पि लो मेरे राजा.. अह्ह्ह

ओह्ह्ह उफ़ हाय मेरे दोनों दूध अंदर से बहुत उबाल रहे हाँ विज्जू.. इन्हे खली कार्डो, तभी मुझे चैन आएगा... आईई सीईई हाँ ऐसे hi.. लव यू विज्जु

ह्म्म्मम्म सी

रानी भी मस्त माहौल में जा पोहंची थी.. मई मज़े से रानी के एक बलून मोहन में लिए उनमे हवा भर रहा था.. मेरे चूसने से वो और भी फूलने लगे थे..

दूसरा हाथ भी रानी के बूब्स में अपनी उँगलियों से हवा भरने में लगा हुआ था..

रानी की आहें भी शुरू हो गईं थी.. रानी तो पहले से hi बहुत गरम थी.. मेरी छेड़ छड़ ने रानी का पानी निकलना शुरू कर दिया..'

रानी की गांड बीएड पर झटके पे झटके कहने लगे..

रानी भी दीदी की तरह से अपना पानी अपनी छूट के अंदर न रोक सकीय, और एक बड़ा झटका कहते हुए झाड़ गई.... रानी अपनी छूट मुझसे चटवाये बिना hi झाड़ गई थी..

मैंने रानी को छोड़ा और दीदी को देखने लगा.. दीदी अब्ब तब्ब रिलैक्स हो चुकी थी, और हमें hi देख रही थी..

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मैंने दीदी को देखा..

विजय:- क्यों दीदी अब्ब आगे की स्टेज के लिए खुद को तैयार पाती है आप..

दीदी शर्मा गई.. छूट का पानी निकला तो एक बार फिरसे उन्हें शर्म आने लगी थी.. छूट के खुलने की ेक्सइटेमेंट भी बहुत थी..

विजय:- दीदी अगर नहीं खुलवानी तो मैं रानी की खोल देता हों, फिर सोते हाँ, रात भी बहुत हो चुकी है..

दीदी:- मुझे आंख दिखते हुए) विज्जू मुझसे मार कहानी है.. तुझे तो सबब पता hi है, ये सबब जितना एक्ससिटेमेंट से भरपूर है, उससे बढ़कर दर्रा देने वाला भी है, ऊपर से तुम मुझे छेड़ रहे हो.. जाओ मैं नै बोलती तुमसे..

दीदी भी नखरा करने लगी.. मैंने दीदी को पैरों से पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा, दीदी गांड के बल बीएड पर से ghisit'ti हुई मेरी तरफ खींची चली आई..

मैंने दीदी की आँखों में देखा और फिर दीदी के पैरों को खोल कर दीदी की छूट को अपने लुंड के लिए ग्रीन सिग्नल देने लगा... दीदी की छूट ने भी मुझे एक स्माइल दी.. वो जो कुछ देर पहले आंसू बहा रही थी, इस बार झूमने लगी..

दीदी भी जानती क अब्ब उनकी छूट क खुलने समय ाँ पोहंचा है..

didi:-vijjuu मेरे भाई, अपनी दीदी का ख्याल रखना. तुम्हारी दीदी की वो बहुत नाज़ुक है, बड़ा दर्द होगा उसे, धयान से और प्यार से सबब करना..

विजय:- दीदी आपको कुछ भी कहने की ज़रूरत नहीं है, मैं प्यार से hi करूँगा..

मेरी नज़र दीदी की एक दम साफ़ गुलाबी छूट पर जैसे hi गयी, मेरे लुंड ने उछालना शुरू कर दिया.. मैंने धीरे से अपने हाथो की एक उँगलियों से दीदी की छूट की फैंको को खोल कर अंदर देखा तो, दीदी की छूट का गुलाबी छेड़ उसके कॉमर्स से एक दम भीगा हुआ था.

क्या नज़ारा था. एक दम नयी और फ्रेश छूट. जो लुंड को पहली बार अपने अंदर सम्मा जाने के लये अपना कॉमर्स टपका रही थी. और फिर जैसे hi मैंने अपने एक ऊँगली को दीदी की छूट के गुलाबी गीले छेड़ पर रखा तो. दीदी की कमर ने एक और जोरदार झटका खाया. दीदी की गांड बीएड से ऊपर उचक गए.

शहीइइइइइइइ ुंहःहःहःह विज्जू.

दीदी ने सिसकते हुए बीएड पर कड़े हुए तकिये को दोनों हाथो से कसके पकड़ लाया.

मैंने दीदी की छूट में अपनी ऊँगली कुछ आगे बधाई, तो मेरी ुंगक्ली थोड़ी सी दीदी की छूट में आगे जा घुसी, आगे से दीदी की छूट बहुत टाइट थी, तो दीदी को दर्द होने लगा.. दीदी की दर्द भरी सिसकी निकल गई..

दीदी:- वीजूउ धयान से, अपनी दीदी को कम् दर्द देना.. अभी तुमने ऊँगली hi घुसाई है तो दर्द होने लगा.. जब्ब तुम वो ......... विज्जू मैंने कभी पहले क्या नहीं है. और तुम्हरा वो बहुत बड़ा भी hai.ye इससे बहुत तकलीफ होगी ना?

विजय- हाँ दीदी थोड़ी तकलीफ तो होगी. पर थोड़ी देर के लये. फिर मैं अपनी दीदी को बहुत मज़ा दूंगा..

दीदी:- विज्जू तुम सच कह रहे होना..

मई- हाँ दीदी मैं सच कह रहा हों. कुछ नहीं होता घबरा नहीं.

कुछ देर मैं दीदी की छूट को अपनी ऊँगली से चेक करता रहा, फिर मैंने अपने ऊँगली को दीदी की छूट से निकला और अपने लुंड को दीदी की छूट में घुसाने क लिए मैदान में आ गया..

मैंने अपने लुंड के मोठे सुपड को दीदी की छूट के फैंको के बीच मई जैसे hi लगाया तो, दीदी मेरे लुंड के दहकते हुए सुपडे को अपने छूट के लिप्स के बीच महसूस करते hi दीदी झटके खाने लगी..

मैंने दीदी की झंगो को कसके पकड़ा और अपने लुंड के सुपड को उसके छूट के लिप्स के बीच धीरे-2 रगड़ना शुरू कर दया.

दीदी- ओह्ह्ह्हह विज्जू ुंहःहःह शीइइइइइइइ विज्जू यी यी करना कितना अच्छा लगता है अह्ह्ह्हह ुंहःहःह उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है भाई

विजय- दीदी अंदर दालों..

दीदी- हाँ विज्जू डालो, पर अपनी दीदी के दर्द का ख्याल भी रखना..

मई- दीदी याद है ना थोड़ी देर के लिए दर्द होगा.

दीदी- हैं याद है पारर फिर भी डर सा लग रहा hai...didi ने दररते हुए

कहा.

मई अब्ब पुरे जोशो खरोश से दीदी की छूट के लिप्स के बीच मई अपने लुंड के सुपडे को रगड़ रहा था. बीच बीच में जब मेरा लुंड दीदी की छूट के छेद पर जाकर रगड़ खता तो, दीदी सिसकने लग जाती. मैंने दीदी के दोनों टैंगो को ऊपर उठा कर घुटनो से मोड़ा. और फिर एक हाथ से अपने लुंड के सुपडे को उसके छूट के छेद पर सेट काया, तोह दीदी सिसक उठी.

रानी भी अब्ब रिलैक्स थी, तो मुझे दीदी की छूट में लुंड घुसते देख कर दीदी की होंटो को अपने होंटो लेकर छोस्ने लगी, दीदी क बूब्स भी रानी के हाथ में आ गए.. अब्ब मुझे दीदी की छूट में अपना लुंड घुसा देना चाहिए थी.. डीड क दर्द को कम् करने क लिए रानी मैदान में आ गई थी..

मई कुछ पालो के लिए रुका, मैंने अभी भी एक हाथ से अपने लुंड के सुपडे को पकड़ रखा था. और फिर अपनी पूरी ताकत के साथ अपने लुंड के सुपडे को दीदी की छूट के टाइट छेड़ पर दबाता चला गया.

क्योंकि मई छठा था की, जो दर्द दीदी को होना है, वो एक ही बार मई हो. ऐसे धीरे धीरे करके मई दीदी की तकलीफ को बढ़ाना नहीं छठा था. मेरे लुंड का सूपड़ा दीदी के छूट के छेद को फैलता हुआ अंदर ग़ुस्सा तो, दर्द के मरे दीदी के अपना बदन ने ऐंठना शुरू कर दया. पर मई ना रुका. और मेरे लुंड का सुपड दीदी की छूट के सील को तोड़ता हुआ अंदर और अंदर घुसता चला गया.

दीदी- ओह्ह्ह्ह विज्जू रुको. अह्ह्ह्हह शीइइइइइ रुको अह्ह्ह्ह भोत दर्द हो रहा है. है मेरे जान निकल गए... रानी ने मुझे धक्का न लगते हुए देखने क लिए मेरी तरफ मोहन मोड़ा था.. इसी बीच ये सब हुआ तो रानी ने फिरसे दीदी के होंटो को अपने मोहन में लेकर चूसना शुरू कर दिया..

दीदी बुरी तरह से तड़पने लगी थी. दीदी कैसे भी आकरके मेरे लुंड को अपनी छूट से निकल लेना चाहती थी.. रानी और मैंने दीदी को अपने कब्ज़े में लिया हुआ था.. दीदी की कोशिश बेकार hi गई...

मैं रुका गया.. मेरा लुंड दीदी की छूट की सील तोड़ते हुए 4" तक्क अंदर जा घुसा था.. दीदी क लिए ये दर्द सहन नहीं हुआ था.. उनकी नाज़ुक सी सील ने टूट कर उन्हें अंदर तक हीला डाला था..

कुछ देर में रानी ने दीदी की किश की.. फिर रानी दीदी के बूब्स पर आई और एक बूब्स को मोहन में ले लिया और फुसरे हाथ से दीदी क दूध और निप्पल को बढ़ाने लगी.....

दीदी- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह विज्जू प्लीज बहार निकालो उसे. बहुत दर्द हो रहा है, जैसे तुमने वो नहीं, कोई चाकू मेरे वहां घुसा दिया हो...

दीदी ने दर्द से कराहते हुए कहा.

विजय:- दीदी डरो नहीं, अब्ब तो सारा hi नादर जा चूका है...

दीदी- अह्ह्ह्ह मुझे नहीं पता विज्जू प्लीज बहार निकालो अपने मूसल को..

मई- मई कह रहा हूँ ना बुसस और दर्द नहीं होगा.

दीदी- हैए मेरे जान निकल गयी. प्लीज विज्जू हटो पीछे.

मई- अच्छा एक काम करो. सिर्फ एक मिनट ओनली 60 सेकंड तक वेट करो. अगर दर्द काम नहीं हुआ तोह, मई बहार निकाल लूंगा.

दीदी सच मई दर्द से कराह रही थी. पर मेरे बात सुन कर वो चुप हो गए. और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

मुझे पता था दीदी कुछ hi देर में शांत हो जाएगी.. रानी की म्हणत जल्दी hi रंग लेन वाली.. रानी की स्पीड को तेज़ करने क लिए मैंने रानी की छूट में अपनी एक ऊँगली दाल दी.. मैना पनि ऊँगली को रानी की छूट के छेड़ में घूमने लगा.. रानी एकदुम्म से hi मछली, और फिर मुझे देख्नते हुए दीदी के बूब्स को वाइल्ड तरीके से चूसने औअर मसलने लगी...

कुछ देर दीदी की दर्द भरी कराहें गोपोजटि रहें.. फिर दीदी की कराहें सिसकियों में बदलने लगी.. रानी की म्हणत रंग लाइ.. दीदी फिर से गरम होने अलगी थी.. दीदी ने जल्द hi अपनी गांड को हिला मुझे सिगनल देना शुरू कर दिया..

रानी बहुत अच्छे से दीदी के निप्पल्स को बारी बारी चूस और अपनी उंगलियोंसे कुरेद रही थी..

दीदी का दर्द धीरे धीरे करके कम् हो गया..

मैंने अपने लुंड को दीदी की कहत से बहार खेंचा, दीदी की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिए था.. मेरा लुंड कुछ मुश्किल से hi सही पर सुपडे तक बहार आए गया.. दीदी की सिसकी निकला गई. “अह्ह्ह्ह vijjuu.jaise उससे दर्द हुआ हो.

मैंने नार्मल ढके से अपने लुंड को फिरसे दीदी की छूट में घुसा दिया.. मेरा लुंड फस कर दीदी की छूट में गया.. दीदी को इस अबार दर्द के साथ मज़ा भी आने लगा.. मेरे लुंड ने और रानी की चुसाई ें दीदी को नयी दुन्या की नयी लज़्ज़तों से रोशनास करना शुरू क्र दिया था....

मैं धीरे धीरे से दीदी की कहत में अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा.. दीदी मस्त होती जा रही थी, तो दीदी को अपनी छूट की दीवारों पर मेरे लुंड के सुअपड़े के अच्छे से महसूस आकर प् रही थी.;.

ऐसी खवाहिश, ऐसा मज़ा तो दीदी कब्ब से लेना छह रही थी... अब्ब दीदी का दर्द कम् हुआ तो में दीदी को वो मज़ा देना शरू कर दिया, जिसके लिए दीदी कब्ब से तड़प रही थी....

दीदी की मस्ती बढ़ने लगी तो

दीदी:- ाःह ओह्ह्ह्ह विज्जू मेरे भाई ऐसे hi मुझे अब्ब बहुत अच्छा लग रहा है.. ऐसे hi धीरे धीरे करो.. रानी ने अब्ब दीदी के बूब्स को छोड़ दिया था..

रानी ने कुछ देर की ब्रेक ले ली..

रानी साइड में हुई तो मैं दीदी पर झुक गया..

दीदी ने मेरे फेस को दोनों हाथो से पकड़ कर ऊपर खेंचते हुए मेरे होंटो को अपने गर्दन पर लगा दया.

“ओह्ह्ह्ह विज्जू तुम सही कह रहे थी. बहुत मज़ा आ रहा है.

दीदी ने नीचे से अपनी छूट को उचकते हुए कहा. दीदी का रंग अचानक से hi चेंज हो गया था.;. दीदी अब्ब मज़ा लेने लगी थी.. शर्म तो छूट के खुलते hi चली जाती है.. किसी का लुंड छूट में हो तो फिर बाद में कैसा शरमाना..

दीदी भी अब्ब नहीं शर्म रही थीं. दीदी अब्ब पूरा पूरा मज़ा ले रही थी..

दीदी नीचे से धीरे धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी थी. मई भी धीरे धीरे अपने लुंड को दीदी के छूट के अंदर बहार करने लगा. हम दोनों का रयथेम ऐसा था की, मई जब अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठता तो, दीदी अपनी गांड को नीचे कर लेती, जिससे मेरा लुंड सुपडे तक दीदी की छूट से बहार आ जाता. और जब मई अपने लुंड को अंदर करने के लिए अपनी कमर को नीचे के तरफ karta,to दीदी भी साथ मैं अपनी गांड को ऊपर के तरफ उठती, तो लुंड छूट के गेहरों मई सामने जाता, अभी मेरा लुंड दीदी की छूट में पूरा नहीं गया था.. दीदी को अब्ब भी दर्द हो रहा था. दीदी क ऐसा करने से मेरा लुंड धीरे धीरे करके दीदी की छूट को खोलते हुए और भी अंदर जाने लगा,.. दीदी अपने दर्द को सहन करते हुए, मेरे होंटो को पीने लगी... हम दोनों hi एक रिधम से धीरे धीरे करके चुदाई का मज़ा ले रहे थे..

रानी ने भी हमें डिस्टर्ब नहीं किया, अभी दीदी की छूट पूरी नहीं खुली थी, वर्ण रानी चुप बैठने वाली नहीं थी....

कुछ देर गुज़री तो दीदी ऐसी चुदाई से फुल गरम हो गई, दीदी छूटने वाली हुई तो दीदी ने मेरे चूतड़ों पर अपने दोनों पेअर रखकर एकदुम्म से पूरा ज़ोर लगा दिया.. वो भूल गई थीं क अभी मेरा लुंड सारा उनकी छूट में नहीं घुसा है..

दीदी ने मेर चूतड़ों पर ज़ोर तब्ब बाध्य था, जब्ब मैं दीदी की छूट से लुंड को सुपडे तक्क निकाल कर अंदर दाल रहा था..

दीदी के ऐसा करने से मेरा भी बैलेंस कुछ बिगड़ा और फिर मेरा लुंड दीदी की छूट की साड़ी रुकावटें तोड़ता हुआ दीदी की बच्चेदानी तक जा पोहंचा..

एक बार तो दीदी का सांस hi अटक गया था, छूट पानी छोड़ने वाली थी, तो दीदी जल्द hi इस भयानक दर्द को सहन कर गई, मई भी रुके बिना दीदी को दर्द देता हुआ दीदी को स्पीड से छोड़ने लगा, दीदी फिरसे मूड में आने लगी. दीदी की छूट में पानी की नदिया बहनी शुरू कर दी... दीदी के शरीर के झटके बढे तो दीदी की छूट का पानी भी खून में शामिल हो कर मेरे लुंड के बहार आने से बहार आने लगा,.

धीरे धीरे ढक्कू में तूफानी स्पीड आने लगी, दीदी भी खुल के सिसकियाँ लेने लगीं, उनकी आहें बढ़ें तो ौंके अल्फ़ाज़ भी बदलने लगे.

दीदी मुझसे चुड़ते हुए, मेरे मोटा और लम्बे लुंड को अपनी कुंवारी और टाइट छूट में लेते हुए, आहें सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगी...

मेरा लुंड फिर भी नहीं रुका, दीदी का बदन ढीला पद गया, तो मैंने की छूट से लुंड निकल दिया..

रानी ने मुझे रेस्ट दिए बिना hi दीदी की छूट के पानी से सना हुआ मेरा लुंड थमा और ghapach..ghapach करके उसे मोहन में लेकर चूसने लागु..

रानी भी चुदाई देख कर हॉर्नी हो चुकी थी.. कुछ देर रानी ने मरा लुंड चूसा, उसके बाद रानी लेट गई..

मई रानी के ऊपर आया उसके पैरों को खोला, रानी की छूट पर झुकता हुआ रानी की छूट को चाटने लगा..

रानी:- ाः विजजूउउ चाट लो पूरा अपनी रानी की छूट को, बहुत देर से तेरी जीब के सवाद के लिए बेताब है, घुसा दो अपनी जीब की नोक में मेरी छूट की अंत गहराई me....aahhh ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फफ्फ्फ़ जल्दी से छतो विजजूउउ माआआआ.. मई झड़ने वाली हों... लीक माय पुसी विज्जउ फास्टर फास्टर..

मैं रानी की छूट के देने को अंगूठे से मसलता हुआ चाटने लगा,., रानी जल्द hi अपनी छूट का पानी छोड़ गई..

मैंने एक नज़र दीदी को देखा दीदी भी ऑंखें बंद किते हुए पहले का आनंद ले रही थीं...

मैंने रानी के पैरों को खोला.. अपने लुंड को पकड़ कर लुंड के सुपड से रानी की छूट के लिप्स में से निकल रहे छूट को बहार निकलने लगे.. मेरे लुंड के ऊपर वाले हिस्से पर रानी की छूट का पानी लग गया, जो मेरे लुंड के सुपड पर चमकता हुआ बहुत खूबसूरत दिख रहा था...

मैं अपने लुंड को रनै की छूट के लिप्स में ऊपर नीचे करने लगा.. कुछ देर मई ऐसे hi मैं बहलाता रहा, जब रानी रिलैक्स हुई तो मैंने रानी को देखा, रानी भी मुझे hi देख रही थी, रानी की आँखों में बहुत चमक आ गई थी..

विजय:- रानी मेरी जान, दाल डॉन अपने लुंड को तेरी छूट में, और कार्डों उपघटन तेरी छूट का..

रानी:- हाय विज्जू मई तो कबसे इसी पल के इंतज़ार में थी, मई तो कई रातों से अपनी छूट का उपघटन होते हुए देख रही हों... खोल दो मेरी छूट को और दे दो मुझे वो ख़ुशी जिसे पाने क लिए मई नजाने कब्ब से इंतज़ार में हों...

मैंने अपने लुंड लो अच्छे से रनै की छूट में फंसाया.. रानी के ऊपर झुका रानी को एक किश किया, फिर एक ज़ोरदार धक्का मार दिया.. मेरे लुंड का सुपड रानी की छूट में घुस gaya..aiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa phattttttttttttttttt

gaiiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiiiiiiii chutttttttttttttttttttttttttttttttttt

रानी की चीख निकल गई, मैं रानी को देखते हुए एक और कसके धक्का मार दिया. इसबार भी रानी बुरी तरह से चीख पड़ी, रानी की आँखों से पानी निकल पड़ा, रानी का चेहरा दर्द के कारण लाल पद गया,... मेरा लुंड रनै की छूट की सील को तोड़ता हुआ 4" अंदर चला गया था...

रानी की सील टूटी तो रानी भी लड़की से औरत बन्न गई.... रानी चीखती रही, मैंने रानी को पूरा मज़ा देने की सोच ली, रानी और दीदी का अलग अलग हिसाब था, रानी खुल के छोड़ना चाहती थी, रानी शुरू में तो बौह्त चीखती पर मुझसे तो पूरा मैं से और पुरे दर्द से चुदती...

यही सोचते हुए मैंने लुंड को थोड़ा सा पीछा खेंचा और एक बड़ा धक्का और मार दिए...

इस बार रानी क साथ रानी की मार की छूट भी खुल गई, रानी की चीख इस बार सबसे ज़यादा दर्द भरी थी,.... मेरा लुंड रानी की छूट की अंत गहराई में उतर चूका था.... रानी बेहोश तो नहीं हुई, पारर उसकी हालत बहुत डरावनी हो गई थी.

दीदी:- विज्जू क्यों रही को तड़पा रहे हो.. क्यों उसे इतना दर्द दे रहे हो..

मैंने दीदी को देखा..

विजय:- दीदी, रानी खुलके सेक्स करने की आदि है, देखना कुछ hi देर में रानी कैसे मज़े से चुदती है.. आप भी कभी ऐसी hi चुदाई करवाना, बहुत मज़ा आता है चुदाई का.....

दीदी:- ना भाई, मैं तो ऐसे hi बहुत खुद हों, पहले hi इतना दर्द हुआ, बड़ी मुश्किल से सहन किया है, आसान नहीं था, सहन करना...

मेरा मोटा और लम्बा लुंड रानी की छूट को पूरा hi खोल चूका था... दीदी अब्ब्ब रिलैक्स थी तो दीदी ने मुझे सीधा किया और दीदी के बूब्स को पीने लगी..

दीदी खुद की छूट को खोल कर रनै का दूध पि रही थी, दीदी को भी बहुत दर्द हो रहा था... दीदी की छूट खून और उनकी छूट के पानी से भरी हुई थी, बीएड शीट भी इसी मिसुरे से भरी हुई थी..

दीदी लगी रही जब तक रानी शांत नहीं हो गई..

रानी:- ी लव यू विजजूउउ जितना दर्द दिया है, अब्ब उतना hi मज़ा भी दो मुझे, ऐसे hi बेदर्दी से छोड़ो मुझे.. कार्डो मेरी छूट को पूरा खुला...

दीदी रानी को हैरत से देखने लगी..

दीदी:- रानी तुझे विज्जू से वैसे चुद लेगी, जैसे कह रही है, तुझे इतना तो दर्द है...

रानी:- दीदी दर्द तो मुझे होगा hi, आराम से चूड़ों या स्पीड से... तो फिर मई पूरा मज़ा क्यों न लोन, सालों से hi तो विज्जू के लिए तड़प रही हों..

दीदी:- वो तो मैं भी भाई क लिए तड़प रही हों... पर ऐसी दर्द भरी चुदाई... ना बाबा ना मैं तो नहीं कर सकती..

रानी:- विज्जू अब देख क्या रहे हो... हो जाओ शुरू..

मैंने दीदी को देखा दीदी साइड में होक मुझे और रानी को देखने लगी..

मैं रानी के ऊपर आया और अपने लुंड को हिलने के बाद रानी की छूट से सुपड तक बहार निकल दिया.. 3-4 बार नार्मल से अंदर बहार किया, फिर स्पीड बढ़ने लगा, रानी दर्द भरी सिकियाँ भरने लगी..'

धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी.. रनै को बहुत दर्द हो रहा था, रानी ने मेरे होंटो को अपने होंटो के लिया और चूसने लगी..

कुछ देर में hi रानी की छूट की दीवारे निचोड़ने लगी, रानी ने मुझे किश करना छोड़ दिया...

मई कुछ ऊपर हुआ .. बीएड साइड में वज़न डालते हुए रानी को स्पीड से छोड़ने लगा, रानी की छूट ने पानी का बहाओ तेज़ कर दिया...

मेरा पूरा लुंड रानी के छूट के अंदर बहार हो रहा था. रानी अब्ब बहुत ऊँची आवाज़ मई सिसकते हुए मज़ा ली रही थी. ओह्ह्ह्ह एस विज्जू अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह फ़क मी अह्ह्ह्हह ुंहःहःह ममममममम. मेरा लुंड रानी की छूट के कॉमर्स से और भी चिकना हो गया था. दीदी अब्ब फिरसे नशे में होने लगी थी. वो मज़े से मेरी और रानी की चुदाई देखने लजीईए.

रानी की छूट बेहद गरम हो चुकी थी.

ओह्ह्ह विज्जू एस्सस फ़क मी. विज्जू मुझे डोगग्य स्टाइल मई छोड़ो आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरा बहुत मान था क, तुम मुझे डोगग्य स्टाइल में छोड़ो. प्लीज विज्जू मेरे ये तमन्ना पूरी कर दो.

विजय- अहह, हाँ क्यों नहीं मेरे जान. तुम मेरे दिल की भी रानी हो, तो मई तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

मैं ऊपर हुआ, अपने लुंड को रानी के छूट से बहार निकला. तो रानी खुद hi, जल्दी से डोगग्य स्टाइल मई हो गयी. मैं रानी के पीछे आते हुए, उसकी छूट की फैंको के बीच उसकी छूट के छेद पर अपने लुंड को सेट करते हुए एक जोर दर देखा मारा दिया......... अह्ह्ह्हह vijjuuuuuuuuuuuuuu रानी की दर्द भरी तेज़ सिसकी निकल गई.

मैंने रानी की कमर को कस के पकड़ हुए तेजी से अपने लुंड को अंदर बहार करना शुरू कर दया.

अह्हह्ह्ह्ह शी विज्जू हैं ऐसे ही और जोर से करो अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह विज्जू अह्ह्ह्हह तुमने अपनी रानी को खुस कर दिया आज. ुंहःहः है विज्जू. अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह विज्जू ी ऍम क्युम्मिंग.

रानी फुल मज़े में थी...

दीदी ने भी पीछे के तरफ अपने चूतड़ों को देखेलना शुरू कर दया था.

मेरे झांगेन रानी के चूतड़ों पर बुरी तरह से टकरा रही थी. तभी रानी का बदन एक दम से कंपनी लगा. और वो अग्गे के तरफ लुढ़क गए. वो बुरी तरह से झाड़ रही थी. पर मई लगतार अपने लुंड को अंदर बहार किये जा रहा था.

ओह्ह्ह्ह विज्जू ुंहःहःहःहः अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हो और स्पीड से छोड़ो अपनी रानी को.

रानी आखरी सिसकियाँ लेते हुए अपने चुत्तड़ को हिलाते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में िनौत होते हुए भयंकर खाने खाने लगी..

रानी की छूट ने खून और पानी की बरसात शुरू करदी.. रानी दुमदार चुदाई के बाद झाड़ गई थी...

रानी बीएड पर ढेर हो गई तो मैंने अपने लुंड को रानी की छूट से निकल दिया...

उसके बाद दीदी को छोड़ छोड़ कर अपने लुंड के पानी को दीदी की छूट में खाली कर दिए.............. रानी भी फिरसे तैयार हो चुकी थी.......

रानी ने मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर फिरसे जवान कर दिया, फिर एक राउंड और चला ..

रानी और दीदी की छूट मेरे लुंड से चुद चुद के पूरी तरह से खुल गई.. रानी और दीदी के अंदर मेरे प्यार से मेरे लुंड से पूरी तरह से खिल उठे थे..

तीनो को पूरा पूरा प्यार मिला... तो तीनो hi फिर सो गए.....





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अपडेट ::: 97


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सूबा मेरी आंख खुली तो रानी और नताशा दीदी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं.. दोनों hi रात भर की चुदाई से थक गई थीं.. दोनों क चेहरे चमक उठे थे. कुछ देर मैंने दोनों को hi निहारता रहा..

जितना प्यार सबब मुझसे करते थे, और जितना प्यार ये दोनों मुझसे करती थीं, उतना hi प्यार मैं भी तो इनसे करता था..

दर भरी और प्यार भरी रात क बाद की सूबा हो चुकी थी, और ये सूबा दोनों क लिए hi बहुत खूबसूरत होने वाली थी, दोनों को hi देख कर सबब बहुत देर तक दोनों को hi छेड़ेंगी, फिर मज़े लेते हुए अपनी बारी आने का इंतज़ार करने लगेंगी..

रानी की तो खैर थी, पारर दीदी......... देखना पड़ेगा उसके क्या एक्सपेरशन होते हाँ, चुदाई के बाद सबका सामने करते समय.....

जूही और अपर्णा को इस सबब का पता नहीं था...

अपर्णा तो मेरे बारे में सबब जानती थी, माँ से मेरे रिलेशन भी वो जान गई थी, उसके मासूम दिल में भी मेरे लिए फीलिंग्स जाग चुकी थीं. पारर वो ज़यादा बेचैन नहीं थी.. वो बहुत hi प्यारी लड़की थी.. मुझे भी अपर्णा से बहुत लगाओ होने लगा था..

वो अपने घर जाने क लिए भी उतनी बेचैन नहीं थी, जितना उसे होना चाहिए थी, अपना घर अपना होता है.. घर की एक एक चीज़ से मकीनो की यादें जुडी हुई होती हाँ.. रअपर्ण की अब्ब वो यादें दर्द में डूब चुकी थीं.. अगर वक़्त ने साथ दिया तो अपर्णा के साथ सभी गर्ल्स अपनों में हंसी खुसी ज़िन्दगी बिताएंगी.. मुझे भी सबब का बहुत एहसास था..

पारर जैसे हालत सभी क लिए पैदा कर दिए गे थे.. पहले उन्हें सोसाइटी में एक नाम बनाने में हेल्प और सपोर्ट देनी थी, फिर सभी के घर वळून को सब बता दिया जाता..

अभी बता दिया तो कम् hi किसी क घर वाले उन्हें कोठे वालियां समझते हुए एक्सेप्ट करेंगे..

सभी लड़कियों के कोठे पर रहते हुए अनगिनत लोगों ने देख लिए था, तो अगर कोई किसी को अपने घर में लेजाता है, और फिर सबब खुल कर सामने आ जाता है तो उनके लिए परेशानी हो सकती थी, इसी लिए मई पहले सभी को एक ख़ास मुक़ाम पर खड़े देहकना चाहता था, फिर उनके लिए कोई परेशानी नहीं रहती..

रेखा जैसी हरामज़ादी को अगर पावर मिले तो लोग उसके बारे में बोलते हुए सोचते हाँ, तो फिर अगर कोठे से आज़ाद कराई गई लड़कियां सोसाइटी में अपना नाम बना लेंगी, तो कैसे कोई उन्हें पहचानने क बाद बुरा भला कहेगा..

फिर भी अगर किसी की गांड में, या किसी की माँ की छूट में ज़रा सी भी खुराक हुई तो उसे मिटने क लिए hi गैंग बना रहा हों मैं.. जो भी उछलेगा, उसे हमेशा क लिए चुप करवा दिया जायेगा..

मुझे अपनी इस सोच को लेके कोई परेशानी नहीं थी.. अभी तक तो सभी कोठे वालियां जो पैलेस में रह रही थी.. वो खुशहाल लाइफ जी रही थीं..

अगर किसी को कोई आपरेशानि होती है, तो उसके लिए मैंने जूही माँ को सेहत शामिल कर लिया था, वो सभी की प्रोब्लेम्स को जान कर जूली या पूजा दीदी की हेल्प ले सकती थी....

मई हर तरफ से रिलैक्स था....

मई रानी और नताशा दीदी को देखते हुए ख्यालों में चला गया था, जब्ब मैं ख्यालों की दुन्या से वापिस आया तो मेरे होंठ नताशा के होंटो से मिले हुए थे..

मैंने अपने मोहन से अपनी जीब निकली और दीदी जो होंठ रात भर चूस चूस के मैंने खली किये थे, वो अब्ब फिर से अमित से भर गए थे.. मैं फिरसे अपनी जीब के ज़रिये वो अमृत चाटने लगा..

दीदी क बाद मैंने रानी के भी मीठे हनी जैसे होंटो का अमृत पिया और फिर दोनों का खुद से अलग करके बाथरूम में जा घुसा..

कुछ मिंटो बाद मैं अपने रूम से निकल रहा था..

मई किचन की तरफ बढ़ा तो अंदर घुसते hi मुझे सोनाक्षी आंटी मिल गई, वो शायद खुद क लिए कॉफ़ी बना रही थी..

मैं धीमे क़दमों से चलते हुए उनके पीछे जा पोहंचा.. वो खुद में कुछ ज़यादा hi मगन थी, वो मेरी आहात को न पा सकीं..

सोनाक्षी आंटी ने निघ्त्य पहनी hi थी.. जो उनके घुटनो से कुछ hi ऊपर थी.. स्लीवलेस थी, जो बास उनके बूब्स और चुत्तड़ छुपाने क लिए थी... बूब्स क ऊपर से इलास्टिक टाइप थी.. और नीचे से बहुत ज़यादा खुली.. सोनाक्षी आंटी ने ये निघ्त्य भी फार्मलिटी को पूरा करने क लिए hi पहनी हुई थी, वर्ण एक हल्का सा झटका और निघ्त्य उनके पैरों में.. उनकी गांड को देखकर अंदाज़ा नहीं हुआ क उन्हों पंतय पहनी हुई है या नहीं, पारर उन्हों ने ब्रा नहीं पहनी थी, उनके निप्पल तो मैंने किचन में आते हुए hi देख लिए थे..

सोना आंटी आज जल्दी उठ गयी थी.. अभी भाभी क आने में कुछ टाइम था.. चलो आंटी अगर बी चांस मुझे अकेली मिल hi गई हाँ तो उनके भी मज़े ले लिए जाएँ.

सोना आंटी अपनी गांड को थोड़ा सा बहार निकल कर सच में hi कॉफ़ी बना रही थीं.. पारर वो किसी ख्याल में भी थीं.. अजीब बात थी सूबा सूबा किस सोच में गुम्म है..

मैं नीचे बैठा और सोना आंटी की निघ्त्य को पकड़ कर थोड़ा सा ऊपर उठा diya,jitni खुली उनकी निघ्त्य थी, मुझे उनके चूतड़ देखने में कोई परेशानी नहीं हुई..

सोना आंटी ने पंतय नहीं पहनी हुई टी, मुझे उनकी गांड और छूट के छेड़ तो नहीं दिखे पर पंतय नहीं पहनी ये मई जान गया था..

मैंने देर न करते हुए सोना आंटी की निघ्त्य को उनके चुत्तड़ो से ऊपर कर दिया,

अपने मोहन को निघ्त्य में घुसाया और सोना आंटी की गांड की दरार में अपनी जीब फेरना शुरू कर दिया.. काया मज़ा था, सोना आंटी की गांड का.....

वो सूबा फ्रेश हो कर अपनी छूट और गांड को अच्छे से धो क्र आई थी, पानी की नमी अभी भी उनकी गांड पर मुझे महसूस हो गई थी.. मैं वही नमी चाटने लगा था..

सोना आंटी को एक ज़बरदस्त झांकता लगा और जो कप उनके हाथ में था, वो फर्श पर गिर गया...

सोना:- oiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa, कौन haiiiiiiiiiiiiiiiiii.. सोना आंटी घूम गयीं तो उनकी गांड की दरार से मेरी जीब हट गई.... पारर मेरे मोहन तो उसकी नाईट में था, उनके घूमने से उनकी नाईट फिरसे नीचे हो गई थी... जो मैंने ऊपर उठा दी थी..

सोएं:- विज्जू तुम hi हो ना, प्लीज मुझे बता दो, वर्ण मई ये चमच तुम्हारे सर्र पर मार डोंगी...

vijay:-(nighty के अंदर से) और कौन इतनी हिम्मत कर सकता है आंटी.. ये आपका विज्जू hi hai..itna बोलै था क आंटी ने अपनी निघ्त्य को ऊपर खेंच दिया.. उनका नीचे का सबब नंगा हुआ तो मैं भी उनके निछले हिस्से को अच्छे से सूंघते हुए उठा खड़ा हुआ..

विजय:- क्या आंटी सभी मज़ा एक दुम्म से ख़राब कर diya..aise आपने पानी में कौनसा परफ्यूम दाल कर अपनी गांड को धोया था, बड़ी मज़े की स्मेल ा रही थी.

सोना आंटी तो मुझे देखते hi खुश हो गई थी.. मुझे उठा कर मेरे गले से लग्ग गई... मेरे चेहरे को चूमने लगीं...

सोना:- थैंक्स विज्जू मुझे प्यार देने क लिए.. वर्ण मई तो इंतज़ार करते करते थक hi जाती, बड़ी लम्बी लाइन लगी हुई है ना तुम्हारे लिए..

अपनी ख़ुशी का इज़हार करते हुए अंत में सोना आंटी हस्सन लगी..

विजय:- आपका अभी नंबर लगा डॉन क्या.... मैंने आंटी को खुद में कस्ते हुए कहा... आंटी के बिना ब्रा के बूब्स मेरे सीने पर दबने लगे..

सोना:- क्या बताओं विज्जू तुम्हरे लिए तो मैं भी बेचैन रहने लगी हों, छूट की आग तो बढ़ी हुई hi है... पारर तुम्हारा सबब के लिए प्यार देख कर मेरे अंदर का मौसम भी बदलने लगा है.... छूट का क्या है, लुंड फ़ौरन न मिले तो कृति या किसी और से चटवा कर शांत करवा सकती हों.. पर तुम्हारे प्यार में जो मज़ा है, वो अब्ब किसी काम में नहीं आएगा.. मुझे कोई जल्दी नहीं है, पहले तुम सबब क नंबर लगा लो.. फिर मुझे भी अपना प्यार दे देना.. इंतज़ार का भी अपना एक मज़ा है विज्जउ....

विजय:- (होंटो पर हलके से किश करते हुए) हाँ ये तो है, इंतज़ार का मज़ा भी चुदाई से काम थोड़ी न है..... मैं भी जल्द hi सब का नंबर लगा कर आपकी छूट में उतर कर अंदर की सैर करूँगा... अभी जितना आपका हक़ बनता है वो तो मैं dedon..(fir मई मज़ा लेते हुए बोलै) चाहिए न अभी भी मुझसे कुछ मज़ा... छूट का पानी तो एक बार निकल hi सकता हों...

सोना आंटी क आँखों में चमक बढ़ी तो वो भी मुझसे थोड़ा सा मज़ा लेने का सोचने लगीं.. फिर कुछ याद आते hi..

सोना:- पारर विज्जू हम किचन में हाँ, और सूबा भी हो चुकी है, कोई भी आ सकता है..

विजय:- तो क्या हुआ कोई आता है तो आने दो.. हमें किसी से क्या परेशानी होनी है.... मई लापरवाही से बोलै

सोना:- नहीं न विज्जू किसी के आने से वो मज़ा नहीं आएगा, बीचे में रुकना अच्छा भी तो नहीं है..

विजय:- ठीक है आप 2 कॉफ़ी बना कर छत पर पोहंचे, मैं 15 मिंट में वहीँ पोहचता हों, वहां सूबा कोई नहीं जाता, वहां आपको मज़ा देता हों..

सोना आंटी मेरी बात सुनकर खुश हो गईं... और मेरे किश करने लगी

सोना:- विज्जू ये सही है, तुम जल्दी से ऊपर पोहंचो मई भी बास फटाफट छत पर पोहंचती हों.. सोना आंटी के बदन में बिजलियाँ सी भर गई थी, वो आज बहुत हो गई थी, मेरा प्यार जो पाने वाली थी..

मैं भी सोना आंटी को किश करते हुए बहार निकल गया..

पैलेस में जॉगिंग करने लगा.. जब 15 मिंट हुए तो मैं छत की और जाने लगा...

किचन के पास से गुज़रा तो मुझे भाभी भी मिल गयी, भाभी को गम विश kiya..mai भाभी को छत पर जाने का बोल कर निकल लिया था..

मई छत पर पोहंचा तो सोना आंटी वही साइड में योग मत बिछाए बैठी हुई थीं.. ये मत कहाँ से आ गया था छत पर.

मुझे देख कर सोना आंटी खुश हो गईं.. वो कड़ी हो गईं उनके दोनों हाहतो में कॉफ़ी से बहरे हुए 2 कप थे..

विजय:- आंटी ये मत किस लिए, और आया कहाँ से.?

ये मैं अपने रूम से लाइ हों, मई रूम में hi योग भी करती हों..

शरीर को खूबसूरत बनाने क लिए कोठे पर भी सभी को एक्सरसाइज करवाई जाती थी, सभी इस सबब की आदि थीं..

ये तो ाब्धिया है, चलो वही बैठते हाँ..

हम दोनों वही बैठ गए.. यहाँ पैलेस की छत आस पास मौजूद सभी कोठियों से ऊंची थी.. आस पास सभी बिल्डिंग्स hi थीं. और कोई भी पैलेस से ऊंची नहीं थी, हम यहाँ इजी हो कर कुछ भी कर सकते थे... हमे कोई नहीं देख सकता था...

सूबा टाइम मेरे इलावा कोई भी नहीं आता था छत पर.. इसलिए मैं टेंशन फ्री था..

बातें करते हुए हम कॉफ़ी पीने लगे.. जल्द hi हमने कॉफ़ी ख़तम कर ली.. कॉफ़ी कुछ ठंडी भी हो गई थी, इसलिए जल्द hi ख़तम भी हो गई...

पता नहीं सच में hi ठंडी हो गई थी, या मस्ती करने क लिए जल्दी ख़तम कर दी थी..

कॉफ़ी ख़तम हुई तो मैंने सोना आंटी को मत पर लिटा दिया और उनके ऊपर आ कर उनके होंटो पर झुक गया.. सोना आंटी भी अंदर से बहुत तड़प रही थीं..

वो भी सालों से चुद रही थीं.. उनकी छूट भी किसी का लुंड लेने क लिए मचल रही थी.. लेकिन छूट में लुंड लेने से भी ज़यादा उनके दिल में प्यार की भूक थी, जिसके लिए वो मचल रही थी.. बेदर्दी से सालों तक छोड़ने क बाद सोना आंटी को पहली बार प्यार मिल रहा था.. वो कैसे न इस प्यार को पुरे मैं से महसूस करती...

मैं सोना सुनती के निचले होंटो को अपने दोनों होंटो में लिए प्रेम से पीने लगा.. प्यार का टास्ते , उनके होंटो का ओरिजिनल टास्ते और कॉफ़ी का मिला टास्ते मिलकर एक हसीं सूबा को और भी रंगीन बनाने लगे.. मई हो पहले रानी और नताशा दीदी क प्यार क नशे में था, रानी और नताशा दीदी क प्यार के नशे में सोना आंटी के शराबी होंटो का भी नशा शामिल होने लगा....

एक कॉकटेल तैयार हुई, जिसने मुझे मदहोश करना शुरू कर दिया.. जब्ब नशा ज़यादा बढ़ा तो हमने अपने होंटो को एक दूसरे से अलग कर दिया... सोना आंटी बंद आँखों से किश के सवाद को अपने अंदर तक्क उतारने में लग गयी थी. उनके चुके मेरे सीने में दबे फूलने लगे थे. उनकी सांस कुछ तेज़ हो गई थे.. मैं उन्हें प्यार से देखने laga..kuch देर में सोना आंटी ने ऑंखें खोलें, तो उनकी ऑंखें लाल हो चुकी थी, नशा उनकी आँखों में भी उतर आता था.. मेरे होंटो पर कॉकटेल का असर सोना आंटी को भी हो गया था..

मैना सोना आंटी की आँखों को भी चूम लिया..

फिर मैं नीचे हुए और सोना आंटी की इलास्टिक वाली नाईट को नीचे सरका दिया.. सोना आंटी क बिग्ग बूब्स सूबा की ताज़ा हवा में नंगे हूँ गए... उनके निप्पल कुछ कुछ अकड़ चुके थे.. मैंने सोना आंटी के दोनों hi निप्पल्स को बारी बारी चूसा.. फिर उनकी आँखों में देखने लगा..

विजय:- सोना डार्लिंग...... मैं सोना आंटी को और भी खुश करने क लिए उनका नाम लिया और साथ hi उन्हें डालरिंग भी कह दिया...... सोना आंटी अंदर तक्क खुश हो गईं..

सोना:- क्या कहा विज्जू तुमने.. मुझे सोना डार्लिंग... विज्जउ कितना प्यार डोज मुझे.. क्या मई इस लायक हों....

विजय;- मेरी सोना डार्लिंग ऐसी बात क्यों करती है... सोना मेरी बहन में है, इस लायक है तो hi तो मेरी बहन में है, आप माँ की भी तो ख़ास हाँ.. और फिर मुझे तो हर उस इंसान से प्यार है, जो मुझसे थोड़ा सा भी प्यार करता है..

आप ऐसा फिर कभी मैट सोचना..

soan:-nahi सोचूंगी मेरे विज्जू, बास दलदल में धंसी, बुरी सोचों की आदि जो हो गई थी.. पारर अब्ब मैं खुद को हमेशा hi खुश रखेंगी.. भले hi मेरा गुज़रा हुआ कल कितना भी भयानक क्यों न हो...

विजय:- हाँ ऐसा hi सोचना, गुज़रा हुआ कल तो सभी क लिए hi दर्द भरा होता हिअ.. सोना डार्लिंग क्या आपका भी गुज़रा हुआ कल दर्द भरा है, जो मुझे पता नहीं है, क्या आपके घर वाले, या आपके रिष्टरेदार अभी भी कही हाँ..

सोना:- हाँ विज्जू मेरी कहानी भी श्वेता से मुख्तलिफ नहीं है.. मुझे भी किसी से अपना अपमान का बदला लेना है.. विज्जू तुम मेरे अनिल और कृति को भी अपने जैसा बना दो.. बहुत दर्द झेले हाँ मैंने भी.. मुझे और मेरे बच्चो को बहुत रुलाया और तड़पाया गया है.. मेरा जीवन बर्बाद करके मुझे कोठे पर बिठाया गया है, मेरे देवर ने मेरे स्वामी को मार कर उनकी सभी प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर लिया था... मुझे अब्ब रहना तो हर दुम्म्म hi तुम्हारे पास है, पर मुझे अपना स्वामी के खून का, अपनी इज़्ज़त के लूटने का, अपने बच्चो क हक़ के छीनने का बदला लेना है...

मैंने सोना आंटी क आंसू पीने शुरू कर दिए.. सोना आंटी क होंटो को भी मई पीने लगा.. उनके बूब्स पर आ कर एक बार फिर से मई झुक गया और उनके दर्द में डूब जाने क कारण ढीले हो चुके बूब्स और निप्पल को वापिस पहले वाली पोजीशन पर लाने क लिए सर गरम हो गया..

मई एक हाथ से सोना डार्लिंग के दूध को दबाने लगा, दूसरे दूध को मैंने जितना मेरे मोहन में जा सकता था, उतना सोना डार्लिंग का एक मां अपने मोहन में लिया और उसे चूसने लगा.. सोना आंटी का दूध मेरे मोहन में गया तो निप्पल मेरे जीब से लगते hi मुझे करंट दे गया.. मेरे लुंड भी खड़ा होने लगा.. जो सोना डार्लिंग की छूट पर चुभने लगा था..

मैं भी निक्कर पहने हुए थे.. मैंने सोना के दूध से हाथ हटाया और अपनी निक्कर को नीचे करके अपने लुंड को बहार निकल लिया... फिर सोना की छूट पर से निघ्त्य को ऊपर उठाया और अपने लुंड को डायरेक्ट hi उनकी छूट पर दबा दिया.. जो छूट क लिप्स को खुलता हुआ, छेड़ से रगड़ खाता हुआ नीचे जाना लगा..

मेरा हाथ फिर से सोना के दूध पर आया, तो मई फिरसे उनके दूध और निप्पल को दबाने लगा.. दूसरा दूध तो मैं पहले से hi खाली करने में लगा हुआ था....

जल्द hi सोना क दोनों दूध और निप्पल्स फूलने, अकड़ने लगे.. सोना का हम्म रहत में बदलने लगा. सोना सिसकियाँ लेते हुए अपनी गांड को भी हिला कर मेरे लुंड को अपनी छूट पर अच्छे से महसूस करने लगी..

उनकी छूट बहुत पानी छोड़ने लगी थी.. मेरा उनके दूध को निचोड़ना उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ. तो वो गरम होने लगी थी..

जल्द hi मेरी म्हणत ने उन्हें सिसकियाँ लेने पर मजबूर कर दिया..

सोएं:- अअअअअअअ विजजूउउ तुम्हारे लुंड में कितनी गर्मी है, मेरी छूट के अंदर जमा हुआ सारा पानी निकलने लगा है.. सीईई उफ़ हाए विजजू पि जाओ अपनी सोना डार्लिंग के दूध को. अनिल ने कबका पीना छोड़ दिए है, कृति कभी कबि पि लेती है........... अब्ब तुम्हारा लिए hi बचा हुआ है तो पि जाओ आज सारा hi.. और मुझे शांत कार्डो, छूट से भी और दूध से भी..

सोना आंटी की बेचैनी बढ़ी तो मैंने उनके दूध को छोड़ा और नीचे आते हुए उनकी छूट तक जा पोहंचा..

सोना डालरिंग को भी एहसास हुआ क अब्ब उनकी छूट पर मेरा प्यार बरसने वाला है, तो वो और भी ज़यादा एक्ससिटेड हो गयी..

मैंने सोना की टांगो को खोला और सूबा की रौशनी में उनकी छूट का नज़ारा देखने लगा.. सूरज निकल चूका था, पर अभी को इतना ऊपर नहीं आया था, क धुप हम तक्क आ पोहंचे.. लेकिन सोना की छूट का व्यू मुझे बहुत अच्छे से हो रहा था..

सोना की छूट के लिप्स बड़े थे, थोड़े खुले हुए थे, रेगुलर hi तो उन्हें खुला रहे की आदत सी हो गई थी, पारर फिर भी उनकी शेप ख़राब नहीं हुई थी, शायद माँ के टोटके सोना की छूट पर भी सही से काम कर गए थे..

मैं नीचे झुका और हाथों से सोना की छूट के लिप्स खोल कर देखने लगा..

सोना:- अह्ह्ह्हह विजजूउ क्या देख रहे हो.. श्वेता बेहेन ने मेरा और मेरी छूट

का बहुत ख्याल रखा है, वर्ण ये तो जैसे खुलती रही है, अब्ब तक्क तो भोसड़ा hi बन्न चुकी होती.. देखो खूबसूरत दिख रही है ना, और चमक भी रही है...

विजय:- हाँ सोना डार्लिंग तुम्हारी छूट बहुत पायरी है, और छूट क अंदर का छेड़ भी मुझे टाइट दिख रहा है..

सोना:- ये सबब दीदी का hi काम है, वर्ण इसका भी बुरा हाल हो चूका होता.. अब्ब देर न करो ना, देखो कितनी देर से मेरी छूट तुम्हारे प्यार के लिए मचल रही है, अब्ब उसे भी अपना प्यार दे दो प्लीज..

मई सोना डार्लिंग की छूट का अच्छे से दीदार करने क बाद और भी नीचे झुका और अपनी जीब निकल कर उनके खुले हुए लिप्स में डाली दी.. मैंने सोना क चूतड़ों क नीचे हाथ डाल कर उनकी छूट को कुछ ऊपर उठाया और जहाँ तक मुमकिन हो सका, अपनी जीब को सोना की छूट के छेड़ में घुसा दिया..

सोना:- aaahhhhhhhhhh ोुह्ह्हह्ह, पहली बार इतने प्यार से किसी की जीब अपनी छूट में घुसती हुई महसूस की है मैंने... मेरी छूट तो कभी मेरे स्वामी ने भी नहीं छाती थी.. कोठे पर मुझे कभी छूट चटवा कर मज़ा नहीं आया.. विजजूउ बीटा मेरी छूट भी प्यार क लिए तरस रहे है, उसे अपना पूरा प्यार दे दो.. अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ सीईई हममममममः.. और आगे तक घुसाओ अपनी जीब को विजजूउउउ सीई...

मैं अपनी उँगलियों से सोना के चुत्तडों को सेल्हता हुआ उनकी छूट में अपनी जीब गुहसाये अच्छे से छूट का पानी निचोड़ रहा था..

मेरी म्हणत रंग लाने लगी.. मेरी जीब सोना डार्लिंग की छूट की दीवारों से सारा hi पानी काशीद करते हुए बहार निकलने लगी. मैं छूट में रहते हुए सोना की छूट का पानी पीने लगा..

मेरी स्पीड और सोना की आहें बढ़ने लगी, सोना अपने हाथों से मत को कस्ते हुए सिसकियाँ लेने लगी.. सोना की जिस्म ने झाकते पे झटके खाने शुरू कर दिए..

कुछ देर और गुज़री तो सोना चीखते हुए झड़ने लगी.. उनकी गांड का ज़ोर मेरे हाथों पर पड़ा तो मैंने उन्हें छोड़ दिया.. उनकी छूट ने भल भल पानी छोड़ना शुरू कर दिया..

मैं ाललरेअद्य hi रात भर रानी और नताशा दी की छूट का पानी पि लिया था, अब्ब भी काफी देर से सोना की छूट का पानी पि रहा था, मेरा पेट भर चूका था..

कुछ सूबा की ठंडी हवा को भी तो सोना की छूट का पानी पीने देना चाहिए था.

धुप कुछ तेज़ होती तो वो बुखारात बन्न कर उड़द जाता और बदलाव में जा मिलता, फिर वो बरसता तो वही बारिश कितना मज़ा देती, बारिश के पानी में सोना की छूट का रस मिलकर बारिश को और भी मज़े से भरपूर बना देता..

यही सोच कर मैंने सोना की छूट क पानी को नहीं पिया...

सोना के बूब्स उनकी तेज़ चल रही साँसों से उछाल रहे थे.....

मैं सोना के पहाड़ों जैसे बूब्स की उछाल कूद को देखने लगा, सूबा की रौशनी में छत पारर ये नज़ारा मुझे बहुत hi भला लगा.. मई वो नज़ारा देखने लगा, जब्ब तक्क सोना की सांस बहाल नहीं हो गई..

विजय:- सोना डार्लिंग अब्ब तो खुश हो ना..

सोना:- विज्जू खुश तो पहले से hi थी.. अब तुम्हरा प्यार पा कर मैं अंदर तक निहाल हो गई हों..

विज्जू:- मई तुम्हारा बदला लूंग सोना डार्लिंग..

सोएं:- नहीं विज्जू जैसे श्वेता दीदी तुम्हे बदला लेते देख कर खुश हो रही हाँ, मई भी वैसी hi ख़ुशी पाना चाहती हों, तुम बास मेरे अनिल और कृति को मज़बूत बना दो.. तुम उनका साथ तो छोड़ोगे नहीं, ये मुझे पता है, पारर वो दोनों भी तुम्हारे साथ रहने चाहिए... मई सबब अपने बच्चो को करते उहे देखना भी चाहती हों.. जितना दर्द मुझे और मेरे बच्चो को दिया गया है, वो सबब मई अपने दुशमनो को देना चाहती हों.. मेरे बच्चे लेंगे मेरा, अपना पिता का बदला.. और तुम उन्हें तैयार करोगे..

मैंने सोना को किश किया

विजय:- जैसी मेरी सोना की मर्ज़ी, अब्ब खुश..

सोना:- (अपने दोनों हहतों को फैलते हुई) आज सोना इतनी इतनी इतनी खुश है, जी करता है एक जम्प लगाओ और हवा में उड़द जाओ, तुम्हारी सोना डार्लिंग इतनी खुश है..

मेरी नज़र छत के दूर पर पड़ी तो भाभी वही कढ़ी थीं.. उनकी हालत भी सही नहीं थी, शायद उन्हों ने सबब देख लिया था, और अब्ब वो गरम हो गई थीं.

वो नीचे नहीं गई थीं, नीचे कौन उन्हें शांत करता वो मेरी तरफ आस भरी नज़रों से देख रही थी..

सोना ने भी मेरी आँखों में कुछ देख लिया था, वो पीछे मुद कर देखने लगी. फिर भाभी को देख कर एक झटके में कड़ी हुई और अपनी निघ्त्य ठीक करके भागती हुई नीचे जाने लगीं..

भाभी क पास से गुज़री तो सोना की हिम्मत नहीं हुई भाभी से नज़रें मिला सके.

सोना नीचे गई तो भाभी ने पीछे मुद कर dekha...fir छत वाला दूर बंद करने के बाद मेरे तरफ आने लगीं..

उनके आने के अंदाज़ को देख कर मुझे कुछ हट के लगने लगा.. भाभी क चेहरे के भाव कुछ बदले हुए थे.. भाभी मुझे मुसलसल देखती हुई मेरे पास आने लगीं..




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थैंक्स ..!!

दिल के दर्द गए तो खुशियों भरे पल सब की लाइफ में आ गए हाँ.. जिसे सब मिलकर अच्छे से सेलिब्रेट कर रहे हाँ, पूजा और विज्जु ने अपने दिल का हाल

शायरी की सूरत में किया.. दोनों को भी बहुत समय के बाद अपने दिल का पूरा हाल बयां करने का मौका mila..sabhi को मुद्दतो बाद कोई ख़ुशी मिली है तो सबब hi बहुत खुश हाँ.. विज्जू अपनी माँ का खास ख्याल तो रखेगा hi.. सब कुछ उसके लिए hi तो है..
 
थैंक्स..!!

विज्जू सभी से प्यार करता है तो सोना को कैसे न ख़ुशी देता.. वो भी तो सालों से किसी अपने के प्यार के लिए तरस रही thi..vijjuu ने अच्छा किया जो सोना के दिल को ख़ुशी दे दी.. सोना जो प्यार भूल चुकी थी, वो फिरसे पा गई, विज्जू भी सोच समझ कर अनिल और कृति को ट्रैंनिंग देगा.. सेल्फ डिफेन्स तो सीखना hi पड़ेगा, और स्टडी सभी की पैलेस में शुरू हो चुकी थी, अभी सभी सीरियस नहीं हुए मसरुजियत की वजा से , जैसे hi सभी फ्री हुए तो स्टडी रेगुलर शुरू hi जाएगी.. भाभी भी कमसे विज्जू के लिए बेककर हैं अब भाभी क दिल की मुहृद पूरी होने का समय आ गया है.
 
अपडेट ::: 98

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भाभी मेरी तरफ आने लगीं तो उनकी आँखों में लालजी देख कर मई समझ गया क आज भाभी मेरे लुंड को अपनी छूट में लिए बगैर नहीं रहने वाली.. आज उनके अंदर की आग कुछ ज़यादा hi बढ़ी हुई थी, लाइव सेक्स देख कर वो बहुत हॉर्नी हो गई थी.. मेरा लुंड भी निक्कर से बहार hi था..

भाभी चलती हुई मेरी और बढ़ने लगी.. मेरे लुंड पर नज़र पड़ते hi उनके क़दमों की स्पीड बढ़ने लगी.. वो झट से hi मेरे पास आई और नीचे बैठ कर मेरे लुंड को पकड़ कर दबाने लगीं. उनकी सांस बहुत तेज़ थी..

उनके बूब्स उसकी तेज़ चल रही साँसों की वजा से फूलने लगे थे..

भाभी की ऑंखें लाल हो hi चुकी थीं.. भाभी की छूट ने बरस बरस करके उनकी शरीर को भी kap-kapane पर मजबूर कर दिया था..

किसी को सेक्स करते हुए या वैसी hi कंडीशन में देखना, फिर खुद पर काबू पाना आसान नहीं है.. भाभी कैसे खुद पर काबू पाती, मेरे लुंड का सवाद तो वो चख hi चुकी थी..

भाभी हॉर्नी होकर मेरे लुंड को कस के दबाने लगी, कुछ मेरे लुंड को अच्छे से महसूस करने क बाद भाभी ने उसे अपने मोहन में लेने में देर नहीं लगाईं.

मेरा आज की एक्सरसाइज सेक्स की नज़र हो चुकी थी, पहले सोना और अब्ब भाभी..

अब तो टाइम भी था और भाभी की छूट की आग भी बढ़ी हुई थी, तो आज भाभी की भी छूट को खुश कर hi दिया जाए.. यही सोचते हुए मैंने भाभी के सर्र के बालों को अपनी मुठी में भर लिया, और भाभी की सकिंग का मज़ा लेना लाना..

मेरा मैं तो हुआ क भाभी की मोहन को फ़क करून, पारर मेरा मोटा लुंड भाभी को परेशां करता, अभी भाभी मेरे लुंड को अपने मोहन में लेने की आदि नहीं हुई थी.

भाभी मेरे लुंड में अपने नाख़ून गाढ़े अपने गले तक मेरे लुंड को लिए हुए आगे पीछे होने लगी.. मेरा मोटा लुंड फस फस कर भाभी के मोहन में जाने लगा..

जितनी भाभी की छूट किओ गर्मी बढ़ी हुई थी, भाभी को ज़ायदा परेहनी नहीं हुई, और भाभी मज़े से लुंड को चूसने लगीं..

कुछ देर भाभी मेरे लुंड को चूसती रही, फिर मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल कर लुंड की जड़ से लुंड के सुपड तक चाटने लगीं...

भाभी के मोहन से थूक नुकील निकल कर नीचे गिरने लगा.. भाभी सबब भूल कर मेरे लुंड के पुरे मज़े ले रही थीं..

सोना से प्यार करके hi में अंदर तक्क जोश से भर गया था..

अब्ब भाभी क मेरे लुंड चूसने से मेरे अंदर भी करंट दौड़ने लगा,.. मेरे लुंड की राजन पूरी तरह से फूलने लगीं..

भाभी को जब्ब लगा क अब्ब मेरा लुंड पूरी परफॉरमेंस देने लायक हो चूका है तो वो मेरे लुंड को छोड़ कर मत पर जा लेती..

लेटने से पहले भाभी ने अपनी निघ्त्य निकल कर खुद को पूरा hi नंगा कर लिया था..... भाभी मेरी तरफ तरसी हुई नज़रों से देखने लगी.. मुझे भाभी पर प्यार और तरस आने लगा..

कबसे भाभी मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने क लिए मचल रही थीं...

कल मैंने उनकी छूट में आधा लुंड दाल कर उन्हें और भी बेचैन कर दिया था. अब्ब भाभी क लिए खुद को रोक पाना मुमकिन नहीं रहा था....

भाभी के बूब्स पर मेरी नज़र पड़ी तो भाभी ने अपने बूब्स को दोनों हाथो से पकड़ कर दबा दिया..

भाभी:- देखो विजजू कैसे फूल चुके हाँ.. अब्ब इनकी हवा निकल दो, वर्ण ये पहात जायेंगे... अब्ब तो मुझे अपना प्यार दे दो, और मुझे सुकून दे दो.. वर्ण कही मुझे कुछ हो न जाये...

भाभी:- अजित भाई अब्ब ठीक तो हाँ.. क्या वो आपकी छूट को ठंडा नहीं कर सकते...

भाभी:- नहीं विज्जउ, अब्ब अजित में वो दुम्म नहीं रहा है, उनका प्यार मुझे पूरा मिल रहा है, पारर छूट से वो मुझे पूरा शांत नहीं कर पाते.. मई रोज़ hi रात भर जलती रहती हों.. मैंने कभी अजित को कुछ भी महसूस नहीं होने दिया, जबसे वो आये हाँ 2 बार हमने चुदाई की है, मुझे शांत करने से पहले hi वो झाड़ जाते हाँ.. मैं उनका दिल नहीं दुखाना चाहती, इसलिए कभी मैंने उन्हें महसूस नहीं होने दिए, क मैं कितने महीनो से अधूरी हों.. विज्जउ छूट में लुंड अगर महीनो तक न जाए तो खुद पर कण्ट्रोल बनने लगता है, पर जब छूट में लुंड घुसे, और छूट को ठंडा किये बिना hi रोने लगे, तो कण्ट्रोल नहीं बन पाटा, विज्जू मई बहुत तकलीफ में हों, अपनी भाभी की शांत कार्डो...

भाभी की आँखों में आंसू आने लगे.. मुझे बहुत दर्द होने लगा, भाभी के अधूरी पत्र को देख कर.. पर भाभी अजित भाई को भी कोई दुःख नहीं देना चाहती थीई.. ये अच्छी बात थी.. अगर मई भाभी की महीने में 2 बार भी छूट की आग को बुझा देता तो भाभी हमेशा hi खिली खिली रहेगी.. यही सोचते हुए मैं भाभी के ऊपर आ गया.. मैंने अपना निक्कर उतार दिया था.. शर्ट का भी कोई काम नहीं था मेरे बदन पर, मैंने उसे भी उतार कर साइड में रख दिया..

और नंगा hi भाभी के ऊपर ा गया, भाभी का दर्द भी कम् करना ज़रूरी था, तो मैं भाभी का दर्द कम् करने लगा..

भाभी की आँखों से बहने वाले आंसुओं पर मैंने अपनी जीब लगा फि, भाभी क नमकीन आंसू मेरी जीब से टकराये, रानी, नताशा दीदी और सोना के टास्ते में एक और टास्ते मिल गया..

एक और कॉकटेल तैयार होने लगी.. मैंने जल्दी से कॉकटेल में कुछ और शराब मिलाने क लिए भाभी क आंसुओं को जल्दी से पीने लगा.. भाभी के आंसू बहने रुक गए और भाभी शांत होने लगी, भाभी को भी प्यार मिला तो वो दर्द को भूल कर मेरे प्यार में डूबे लगी..

पूरा पैलेस hi बेशर्मो से भरा पड़ा था.. पारर सबब बेशरम होकर भी दर्द भरी लाइफ जी रहे थे..

कैसा सिस्टम था ये....

कही भी ऐसा देखा न सुना.. कही भी ऐसा नई होगा.. बेसहरामि और दर्द एक साथ कम् hi किसी की लाइफ में होते हाँ..

भाभी का दर्द कम् हुआ तो वो बेशरम बनने लगीं.. अपना हाथ नीचे लेजाते हुए मेरे लुंड को पकड़ कर दबाने लगीं..... दूसरे हाथ से मेरे पीठ को सहलाने लगीं.. मई भाभी की छूट से थोड़ा सा ऊपर उठ गया.. भाभी सही से मेरे लुंड को पकड़ प् रही थीणं..

मैं भाभी क होंटो पर आया तो उन्हें अपने होंटो में ले कर चूसने लगा... भाभी भी मुझे किश में साथ देने लगी.. साथ hi भाभी ने अपने दोनों पेअर साइड में करके पहला लिए... डॉन पेअर फैलते हुए भाभी के दोनों पैर मेरे चूतड़ों पर आये तो मेरा लुंड सीधा जा कर भाभी की छूट पर आ टिका.. भाभी ने अपने हाथ से मेरे लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर सेट किया, और फिर अपने पैरों से मेरे छूटों को दबाने लगी..

भाभी खुद hi सब कर रही थी, भाभी क हाथ से अपने लुंड को उनकी छूट पर सेट होते हुए महसूस करके मैं ने थोड़ा सा दबाओ बढ़ा दिया.. भाभी ने भी मेरे चूतड़ों पर दबाओ बढ़ाया तो मेरे लुंड भाभी की गीली छूट में अंदर जाने लगा.. भाभी नहीं रुकी भाभी ने फिर से दबाओ बढ़ाया तो मेरा लुंड भाभी की टाइट छूट को खोलता हुआ और भी अंदर जाने लगा..

भाभी की म्हणत से मेरा लुंड भाभी की छूट में कल जितना अंदर चला गया.. भाभी ने दबाओ और नहीं बढ़ाया.. जितना कल मेरे लुंड ने भाभी की छूट में जगा बनाई थी, भाभी ने मेरा उतना लुंड लेकर खुद को रोक लिया था.. आगे से भाभी की छूट और भी टाइट थी.. भाभी ने मुझे किश करना छोड़ दिया..

मैं भी भाभी के होंटो को छोड़ कर कुछ ऊपर हुआ.. भाभी मुझे hi देख रही थी.. हमारी नज़रें मिले.. तो भाभी की आँखों में दर्द ख़तम होकर गर्मी का नशा दिखने लगा..

कितनी जल्दी ये औरतें अपना चोला बदल लेती हाँ.....

विजय:- भाभी अब्ब तो दर्द नहीं है ना..

भाभी:- विज्जू मेरी जान, वो दर्द अब्ब नहीं है, पारर तुम मुझे और भी दर्द तो, आज मेरी छूट को पूरा hi खोल do..jahan अजित नहीं पोहंच पाया, तुम वहां तक का सफर करो.. मुझे दर्द दे कर वो मज़ा दे दो, जिसे पाने क लिए मैं भी सालों से मचल रही हों...... हाए कभी सोचा भी नहीं था, अजित के बाद मैं कभी किसी और का लुंड भी अपनी छूट में लूंगी..

भाभी मुस्कुराने लगी, वो बहुत खुश भी दुःख रही थी. पर उनके चेहरे पर ऐसे भाव भी थे, जैसे कभी किसी ने कुछ सोचा न हो और फिर अचानक से उनकी ज़िन्दगी का सबब कुछ hi बदल जाए... भाभी को अपनी ज़िन्दगी के ये नए रंग भी बहुत भा रहे थे.. भाभी अंदर तक्क खुश थीई..

मेरे लुंड क लिए सालों से मचलते रहने से वो मेरे लुंड क शिव कुछ सोच hi नै पाई थीं

अगर कभी भाभी को मेरे लुंड की चाह न होती, तो भाभी अपनी छूट की तड़प को बर्दाश्त भी कर लेती..

पर एक अदद लुंड के होते हुए अपनी तड़प को वो कैसे रोक पाती...

विजय:- भाभी आपकी आँखों में कित्ते रंग दिखने लगे हाँ.. कितनी खूबसूरत हाँ ना आपकी ऑंखें... कितनी गहराई आ गई है ना इनमे...

भाभी:- ये सबब तुम्हरे प्यार के कारन hi तो है विज्जउ, वर्ण इनमे इतने रंग कभी न आते.. चल अब्ब अपने लुंड को आगे पीसह कर.. टाइम भी कम् है सूरज भी सर्र पर ाँ पोहंचा है, कही कोई भटकता हुआ ऊपर न आ जाये... किसी के आने से पहले hi मेरी छूट की साडी आग को बुझा दो....

विजय:- भाभी में भी तो आपकी पायरी छूट का मज़ा लेने के लिए मचल रहा था.

मुझे भी तो अपनी तड़प ख़तम करनी है.. मुझे भी तो आपके बदन की साड़ी तरंगें खुद में उतरनी हाँ... आपका सारा रस पीना है मुझे.. आँखों और होंटो का पि लिया, अब्ब आप के दूध को पीना hai..aapki छूट और गांड को मैं नहीं छोड़ने वाला..

मैं बोलते समय अपने लुंड को भी धीरे धीरे आगे पीछे कर रहा था.. भाभी मेरे लुंड को अपनी छूट की दीवारों से रगड़ खाते हुए पुरे मैं से महसूस कर पा रही थी.. साथ में मेरी बातें भी सुन रही थी..

विजय:- हाय्यएईए विजजूउउउ मेरी गांड भी मारोगे तुम,, सीईई आआआ मेरी गांड सील पैक है विज्जउ.. तुम्हरा घोड़े जैसा लुंड कैसे जाएगा मेरी नन्ही सी गांड क छेड़ में ....

विजय:- जैसे आपकी छूट में जा रहा है, वैसे hi जाएगा ना मेरी पायरी भाभी जान...

मैंने अपनी स्पीड कुछ तेज़ कर दी थी.. मैंने भाभी की छूट में अपने लुंड को पेलते हुए भाभी की बूब्स पर झुका और भाभी के निप्पल को अपने दांतो ले कर चूसते हुए धक्के मारने लगा.... भाभी अपने निप्पल को मेरे डाँडो में पाते hi और ज़यादा मचल उठी.. भाभी के बदन में सनसनी सी दौड़ गई.. भाभी से ये बर्दाश्त नहीं हुआ.. भाभी ने अपने पैरों का दबाओ मेरे चत्तड़ो पर और भी बढ़ा दिया, जिस्सके कारन मेरे लुंड फिसलता हुआ भाभी की छूट को और भी खोलता हुआ अंदर जाने लगा.. भाभी की छूट कुछ खुली.. मेरा लुंड भाभी की छूट 6" तक्क घुसता चलता गया..

भाभी को दर्द तो हुआ, पारर भाभी नहीं रुकी.. मुझे लगा भाभी आज मेरा सारा hi लुंड अपनी छूट में घुसा लेंगी..

भाभी की टाइट छूट मेरा लुंड खोलने में लगा हुआ था.... मुझे भाभी के बूब्स को पीने में मुश्किल होने अलगी, तो मैंने भाभी के बूब्स को छोड़ कर अपने हाथ साइड में मत पर रखते हुए खुद को बैलेंस किया और भाभी की आँखों में देखने लगा..

विजय:- भाभी कैसा लग रहा है, सूबा सूबा हलकी हलकी धुप में मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर..

bhabhi:-(bhabhi सिसकियाँ लेते हुए बोली) अह्ह्ह ओह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है, थोड़ा तेज़ करो, आज मैं दर्द को याद नहीं करना चाहती, मेरी छूट को अंत गहराई तक्क खोल कर अंदर तक्क अपने लुंड को घुसाओ विज्जू, कभी अपनी बच्चेदानी तक्क लुंड को महसूस नहीं किया.. हममममममः आह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ सुना बहुत है, जब्ब लुंड बच्चेदानी से टकराता है तो एक अलग hi चार्म मिलता है, आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह.. मुझे वो चरम पाना है विज्जउ

विजय:- खून निकलने लगेगा भाभी मेरा लुंड आपकी साड़ी छूट hi पहाड़ देगा.. फिर सारा दिन चलोगी कैसे.. और अजित भाई को क्या बताओगी.. उन्हें कोई शक हो गया थो..

मैंने अपने धक्को की स्पीड कुछ बढ़ा hi थी, भाभी मत पर उछाल रही थी. उनके मम्मी उछालते हुए एक अलग hi दृश्य दिखा रहे थे... भाभी के मस्त फूल चुके बूब्स मुझे बहुत खूबसूरत दिखाई दे रही थे... पता नहीं नीचे से भाभी की छूट कैसा मंज़र पेश कर रही होगी.... ज़रूर ये सबब भी देखने वाला होगा...

भाभी:- खून निकलता है तो निकलने दो, अभी तो तुम मेरी गांड फाड़ने की बात कर रहे थे, तब्ब भी मेरा खून निकलेगा. वो भी बहुत ज़यादा... अभी छूट से थोड़ा बहुत निकलता है तो निकलने दो.. अह्ह्ह्हह हाई कितना सवाद आ रहा विज्जउ तेरे मोठे गधे जैसे लौड़े से.. मैंने तो सोचा भी नहीं था, तेरे लुंड से इतना मज़ा भी मुझे मिलेगा.. आज सही से मेरी छूट की दीवारों पर किसी लुंड की रगड़ हो रही है.. क्या बताओं विज्जू कैसे कैसे नज़ारे मुझे दिख रहे हाँ.. मैं हवाओ में उड़ने लगी हों.. ऐसे नज़ारे क लिए तो जितना भी दर्द मुझे सहना पड़े मैं तो सहूंगी hi,.. और तू अजित की टेंशन न ले वो मैं सबब संभल लुंगी.. अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह सीईई मेरी छूट में आग लग गई है, इसे तेज़ तेज़ ढक्कू से ठंडा करो.. हाय विज्जू अपनी भाभी की छूट को पूरा पहाड़ दो.. अपनी भाभी को और भी मज़ा दे न..

विजय:- भाभी अजित भैया से घोड़ी बन्न कर कभी चूड़ी हो..

भाभी:- हाँ कई बार, घोड़ी बन्न कर लुंड घुसे तो मज़ा hi कुछ और होता है, तू रुख और अपने लुंड को बहार निकाल.. मैं घोड़ी बनती हों.. मैं तो बड़ा हो रहा है, गन्दी गन्दी बातें भी करूँ.. पारर तेरे सामने चुड़ते हुए सबब अजीब भी लग रहा है.. मज़ा भी आ रहा है...

मैंने अपना लुंड भाभी की छूट से निकला.. भाभी क ऊपर से उठा भाभी फ़ौरन hi घोड़ी बन गई.. अपने पैरों को खुद hi ज़रूरत क हिसाब से खोल लिया.. मैं भाभी की गांड और छूट को पीछे से देखने लगा..

सूरज मेरे सामने से निकल रहा था, तो भाभी की छूट और गांड पर सूरज की धुप डायरेक्ट नहीं पद रही थी.. मैंने भाभी को पलटने का कह दिया..

सूरज उसीधा भाभी की आँखों की तरफ था.. भाभी को भी अपनी गांड सूरज की तरफ करने से कुछ रहत मिलती.. भाभी के शरीर से बह रहा पसीना ऊपर से धीरे धीरे बढ़ रही धुप भाभी को कुछ डिस्टर्बेंस हो रही थी..

पर छूट की आग उन्हें इस सबब से बचा भी रही थी.. हम दोनों के hi जिस्मो ने पसीना बहाना शुरू कर दिया था..

भाभी की गांड सूरज की तरफ हुई तो मई साइड में हो गया और भाभी की छूट और गांड को सूरज की रौशनी में देखने लगा..

सूबा सूबा छूट को देखना वो भी छोड़ते हुए, कितना मज़ा आता होगा, ऐसा दृश्य देखने में.. मेरे अंदर गहराइयो तक्क सुरूर की लेहेर दौड़ गई.. भाभी के बड़े बड़े छुट्ट्कड़ 39" साइज क तो होंगे hi.. बड़े चुत्तड़ ने भाभी की गांड के छेड़ को छुपाया हुआ था.. हाय कितना मज़ा आएगा भाभी की गांड के छेड़ में लुंड डालते हुए.. सूबा का टाइम था तो मैंने जल्दी से भाभी क छूट और गांड का नज़ारा करने लगा..

भाभी की छूट का छेड़ मेरे मोठे लुंड की वजा से अच्छा ख़ास खुल चूका था.. पर गांड क गांड का बंद छेड़ मुझे उकसा रहा था, क मैं सुजय भी जल्दी hi खोल डॉन...

मैंने भाभी के चुत्तड़ को खोल कर भाभी की गांड के छेड़ को देखा, इस आगे में भी भाभी की गांड का छेड़ ब्लैक नहीं हुआ था.. भाभी की अगंद को देख के मैं भाभी की गांड को छाते बिना रह नहीं पाया.. मई भाभी की गांड पर झुका और अपनी जीब निकाल कर भाभी की गांड क छेड़ पर रख कर चाटने लगा..

भाभी:- हाई उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह विजु क्यों मेरी जान निकलना चाहते हो..

मई भाभी के चुत्तड़ो को दोनों हाथो से पकड़ कर साइड में खेंचते हुए भाभी की गांड को चाटने लगा, भाभी किन सिकियाँ तेज़ होने लगीई.. भाबी तो पहले चार्म क करीब थी.. लुंड निकलने से वो कुछ ठंडी हो गई थीं.. गांड पर मेरी जीब लगते hi भाभी फिर से तड़पने लगी, उनकी छूट ने फिरसे भल भल पानी छोड़ना शुरू कर दिया..

कुछ देर मैं भाभी की गांड का टास्ते चखता रहा..

फिर मैं सीधा हुआ और भाभी की छूट में 2 उँगलियाँ दाल कर भाभी को छोड़ने लगा.. दूसरे हाथ से मैं अपने लुंड को भी मसल रहा था.. मेरा लुंड फुल मूड में आ चूका था, मेरे खुरदरे हाथों में वो और भी अकड़ने लगा..

मैंने अपने लुंड को भाभी की छूट में फंसाया, भाभी की कमर को कस के पकड़ा, एक हल्का धक्का मारा तो मेरा लुंड भाभी की छूट में 4" तक चला गया..

भाभी की छूट 6-7" तक्क खुल चुकी थी, मेरा लुंड भाभी बच्चेदानी के करीब पोहंच चूका था..

अब्ब मैंने अपने बाकी लुंड को एक hi बार में भाभी की छूट में उतरना का सोच लिया.. भाभी की कमर को कस के पकड़ते हुए मैंने एक करारा शॉट मार दिया..

भाभी:- aiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiii..

भाभी जोरसे चीखी...

विजय:- भाभी किसी को अपनी चीखें सुनाने का इरादा है क्या.. मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ता. पारर आप को टेंशन होगी....

भाभी:- तू मुझे छोड़ विज्जू.. मुझे भी किसी की कोई टेंशन नहीं है, सीखा और रूपा भी तेरा लुंड लेना चाहती हाँ, तो मैं तेरा लुंड लेते हुए क्यों झिजकों.. तेरे लुंड ने मेरी बच्चेदानी को ठोकर मार दी है,, विज्जू मैंने जैसा सुना था, ये तो उससे भी बढ़कर मज़ा दे रहा है, ऐसा लग रहा है, जैसे मैं खुशबुओं के पानी में घुसल कर रही है, और मेरे आस पास का सारा hi मंज़र महक रहा है, खुशियां मन रहा है, जिसे देख मुझे वो सुकून मिल रहा है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.. अब्ब तू मेरे छूट की तदाब तोड़ चुदाई कर... ऐसे जैसे कोई किसी रंडी की छूट मारता है..

मैं भी भाभी की बातें सुनकर और भी ज़यादा जोश में आने लगा था.. मुझे तो सभी ने छुड़ाए की लत्त लगा hi दी थी.. मैंने भी आओ देखा न ताओ, मैं खड़ा हुआ और झुक कर खुद को भाभी क ऊपर जुखाते हुए भाभी को धुवां धार छोड़ने लगा..

अब मेरा लुंड भाभी की छूट से भी ऊपर था.. मैंने भाभी के कंधो को पकड़ लिया और पुरे रिधम से भाभी की छूट में अपने लुंड को घुसाने ला..

मेरा लुंड सुपड तक्क बहार आता और एक hi झटके में सीधा जा कर भाभी की बच्चे दानी पर ठोकरें मारने लगा...

हम दोनों को hi ऐसे चुदाई से भरपूर आनंद आने लगा..

मेरे लुंड की बॉल्स भाभी की छूट के निचले हिस्से से जोरसे टकरा रहे थे.. भाभी की सिसकियाँ बहुत तेज़ हो चुकी थी...

पर यहाँ कोई सुनने वाला नहीं था... मेरा लुंड भाभी की छूट की दीवारों को चीरा है अंदर बहार होने लगा.. भाभी की छूट मेरे लुहड़ के हिसाब से फिट होने लगी......

अह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह हाईए विज्जउ और तेज़ मई गई, मेरी छूट का पानी अब्ब नहीं रुकने वाला.. भाभी सिसकियाँ लेते हुए एक बार फिरसे अपने चार्म क करीब पोहंच गयी.

कुछ hi देर में भाभी ने झटके खाने शुरू कर दिए.. भाभी के बदन से पसीना टपक टपक कर मत पर गिरने लगा..

भाभी मेरी धुवां धार चुदाई सहन नहीं कर पाई, और झटके लेते हुए जड़ने लगीं..

भाभी ने अपना सर्र नीचे दाल दिया.. मैंने अपने लुंड को भाभी की छूट से निकला.. भाभी के पैरों को मत पर बिछाया.. उनके चूतड़ों को पकड़ कर उनकी छूट को फिरसे खोला और अपने लुंड को उनकी छूट पर सेट करते हुए मैंने भाभी के ऊपर चढ़ गया.. मैं एक धक्का मारा तो मेरा लुंड भाभी की पानी छोड़ चुकी छूट में अंदर घुसता चला गया..

भाभी झाड़ चुकी थी. पर मेरा अभी आधा सफर hi हुआ था.. मुझे भी अब्ब अपने लुंड का पानी भाभी की छूट में उंडेलना था.. मई भाभी के ऊपर चढ़ा और अपने लुंड को गहराई तक भाभी की छूट में घुसा कर पूरी स्पीड से थोड़ी सी कम् स्पीड में छोड़ने लगा.. मत नरम था तो भाभी को ज़यादा परेशानी नहीं हुई..

मैं फिर भाभी की तेज़ चल रही सांसो को नज़र अंदाज़ करते हुए छोड़ने लगा..

इस पोजीशन में भी मुझे भाभी को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था.. ऐसे hi मैं भाभी को 5 मिंट तक्क छोड़ता रहा.. इस बीच भाभी की सांस कुछ बहाल हुई तो भाभी की छूट मेरे लुंड की रगड़ से एक बार फिरसे गरम होने लगी..

गीली छूट में मेरा लुंड भागता हुआ अंदर बहार हो रहा था..

कुछ दे राउर गुज़री तो भाभी ने एक बार दिरसे सिसकना

शुरू कर दिया...

भाभी:- हाय विज्जउ तुमने आज मुझे कितना मज़ा दे दिया है, सूबा जब्ब मैं उठी थी तो मुझे क्या पता था, क मेरी आज की सूबा इतनी हसीं होने वाली है,

कैसा नज़ारा है ना विज्जु पैलेस की छत तेज़ धुप से चमक रही है, और तुम्हरा लुंड शिद्दत से मेरी छूट में उतर रहा है.. हाय मरजावण इतनी मज़ा आ रहा है, क्या बताओ.... और छोड़ अपनी भाभी को विज्जू, करदे ख़तम अपनी भाभी की सालों की आग को ठंडा..

ऐसे hi सिसकियाँ में भाभी एक बार फिरसे झाड़ गई.. मई इसी पोजीशन में भाभी को छोड़ता रहा.. मैं तो थकने वाला था नहीं.. भाभी पहले बार इतना मोठे लुंड से और वो भी इतनी धुवां धार चुदाई से, वो थकने लगी थी... जैसे hi उनकी सांस बहाल हुई...

भाभी:- विज्जू अब्ब अपना लुंड निकाल ले, मई उलटी लेती लेती थक गई हों, मेरे चुत्तड़ भी तुम्हारे लगने वाले धक्कों से लाल पद गए होंगे.. तू नीचे लेट अब्ब मैं देती हों तुम्हे पूरा मज़ा..

मैंने भाभी की छूट से लुंड निकला, भाभी कड़ी हुई तो मैं लेट गया, मेरा लुंड सीधा आसमान को सलामी देने लगा..

भाभी सीढ़ी हुई तो उनकी छूट का दो बार का निकल चूका पानी उनकी जांघों पर बहने लगा.. भाभी ने अपने एक ऊँगली पर उसे लगा कर अपने मोहन में लेकर अपनी फिंगर को चूसने लगी..

भाभी:- विज्जू मेरी छूट का पानी तो बहुत टेस्टी है....

विजय:- हाँ टेस्टी तो होगा hi.. निकला भी तो बड़ी म्हणत से है ना, और म्हणत से निकला पानी स्वादिष्ट तो होगा hi..

भाभी हस्ते हुए अपने पैरों को मेरे साइड में करते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट को सेट करने लगीं..

एक हाथ से भाभी ने मेरे लुंड को पकड़ा.. अपनी छूट पर सेट किया, और फिर वो धीरे धीरे करके नीचे बैठने लगीं.. मेरा लुंड धीरे धीरे करके उनकी छूट में जाने लगा.. जब्ब सारा लुंड की छूट में चला गया तो भाभी मेरे लुंड पर उप्पर नीचे होने लगीं.. मैंने भाभी क हिल रहे बूब्स को घोर से देखने लगा..

भाभी ने मुझे अपने बूब्स को ताड़ते हुए देखा तो मेरे मोहन पर जखउख्ते हुए अपना एक दूध मेरे मोहन कर ऊपर कर दिया.. नीचे से उनकी गांड उठ गई तो मैंने अपने हाथ उनके चुत्तड़ो पर रख दिए.... मैंने भाभी क चुत्तड़ो को कस कस के बढ़ाने लगा.. साथ hi मैंने अपना मोहन भी खोल लिया था, भाभी का एक निप्पल मेरे मोफङ में आया तो मैं उसे चूसने लगा.. भाभी ने अपनी उछाल कूद की स्पीड बढ़ा दी थी..

मई भी अब्ब पुरे मूड में था, भाभी की गांड ऊपर हुई तो मैंने भी नीचे से अपने लुंड को भाभी की छूट घुसना शुरू कर दिया..

कुछ मिंट ऐसे hi हम लगे रहे.. फिर अचानक से hi भाभी सीढ़ी और मेरे लुंड पर पुरे जोश से ऊपर नीचे होनी लगी थी, मुझे भाभी की गरम छूट से hi महसूस हो गया था क भाभी फिरसे गरम हो रही हाँ, इस बार शायद वो अपने पानी के साथ मेरा भी पानी निकलना चा रही थीं..

मेरे लुंड भी फुल भी झड़ने क मूड में आने लगा..

भाभी की स्पीड बढ़ती गई तो मेरे लुंड की नसें भी फूलने लगीं.. मेरे अंदर से खून मेरे लुंड में इकठ्ठा होना शुरू हो गया..

मेरे अंदर तरंगें सी दौड़ने लगीं... मैंने भाभी क बूब्स को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया..

भाभी एक बार फिरसे सिकियाँ लेते हुए मेरे लुंड पर उछलने ालगीं..

भाभी भी जहदने वाली थी और मई भी, जल्द hi वो स्टेज भी आ गई, जब मेरे लुंड का पानी लुंड क सुपड क करीब पोहंच गया.. अब्ब सारा मज़ा मेरे लुंड के सुपाद तक जा पोहंचा था.. करंट के झटके मेरे लुंड को लगने लगे.. और अंदर का पानी भाभी की छूट में उतरने laga..bhabhi की स्पीड और भी तेज़ हो गई थी,, मेरे लुंड क सारा पानी पिछकारियों की सूरत में भाभी की बच्चेदानी कर गिरने लगा... गरम पानी जैसे hi भाभी की बच्चेदानी ने महसूस किया, भाभी भी चीखते हुए मेरे ऊपर आ गिरी..

भाभी की भी छूट ने भी फिरसे पानी छोड़ दिया था.... हम दोनों की hi साँसे बहुत तेज़ चल रही थीं..

भाभी बहुत थक गई थीं,, और मेरा आज का वर्कआउट बहुत अच्छे से हो गया था, इतना तो मुझे एक्सरसाइज करके सुकून नहीं मिलता तन्हा, जितना आज सूबा सूबा चुदाई करके मिला था...

कुछ देर में हमारी साँसे रूटीन पर आएं.. तो मैंने भाभी को साइड में किया और खड़ा हो कर वार्मअप करने लगा.. पूरा बदन hi पसीना छदो रहा था..

मैं नंगा hi पैलेस की छत क चक्कर लगाने लगा.. भाभी मुझे hi देख रही थी.. मैं पैलेस की छत से पैलेस का व्यू देखने लगा.. पैलेस में गहमा गहमी शुरू हो चुकी थी.. मैं वही पे खड़ा होकर पैलेस की साइड में बने हुए रूम को देखने लगा.. वहां रह रही कोठे की महिलायें कही कही मुझे दिख रही थीं... मैंने फिर पुरे पैलेस में hi अपनी नज़र दौड़ाई तो मुझे मेरी तितलियाँ भी पार्क में दिखने लगीं.. उन्हों ने शायद मुझे देख लिया था, वो वही से मुझे इशारा करने लगीं.. मैं भी "आता हों" का इशारा करने लगा.. वो भी रिलैक्स हो गईं.. अब्ब मुझे जल्द hi नीचे जाना था.. कही देरी होने पर कोई ऊपर न आ जाए..

मैं चलता हुआ भाभी के पास पोहंचा..

विजय:- भाभी कपडे पहन लो, या फिरसे चुदाई करने का मैं है...

भाभी:- वजूउउ मैं की क्या पूछते हो, मैं तो थकन होने के बावजूद भी रुकने को नहीं मानता.. मैं तो है क जितनी तदपि हों, उल्टा तो चुद hi लून tumse..parr इतना चुद नहीं सकती, न तो टाइम है, और न hi अभी और छोड़ने का स्टैमिना.

विजय:- तो फिर अब्ब नीचे चलते हाँ.. पार्क में प्रिय और बाकि मुझे बुला रही हाँ.. इतना बोल कर मैं अपनी निक्कर और शर्ट पहनने लगा.. सूबा सूबा अंडरवियर की कोई ज़रूरत नहीं थी.. और लुंड भी अब्ब शांत था, किसी को दिख भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है...

भाभी ने भी फटाफट अपने कपडे पहने और कुछ hi देर में हम नीचे जा रहे थे..

भाभी जितनी खुश थी. उतनी hi उनकी हालत ख़राब थी.. अब्ब वो अपने रूम में तो जाने से रही.. अपनी बेटिओं में से किसी के रूम में या मेरे रूम में जाएंगी फ्रेश होने..




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अपडेट ::: 99

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ब्रेकफास्ट क बाद मैं भी फेस चेंज करके पैलेस से बहार निकल गया.. गाडी वही थी, जो मैंने बुगाटी कार को ब्लास्ट करने क बाद उसे की थी.. पहले मैंने अनुष्का के कॉलेज वाली साइड से गुजरने का मैं बनाया.. जब मई वहां से गुजरने लगा तो मुझे सभी स्टूडेंट्स कल वाले टॉपिक डिसकस करते हुए दिखे..

अलग अलग एक्सप्रेसशन सभी क चेहरों पर थे.. स्टूडेंट्स भी तो अक्सर हरामी होते हाँ.. वो भी अपने मैं में गंदे विचार लिए कॉलेज में पड़ने आते हाँ..

सभी एक जैसे नहीं होते.. कुछ ऐसे इंसिडेंट से डर जाते हाँ, कोई इसे अच्छा समझते हाँ. तो कोई खुद को कुछ आरसे क लिए रोक लेते हाँ, फिर जब्ब ऐसा कोई काण्ड गुज़रे 2-4 महीने बीत जाते हाँ तो फिरसे अपने रंग में वापिस आने लगते हाँ, ऐसे स्टूडेंट्स क लिए मुझे बहुत कुछ सोचना था..

दिल्ली में बने हुए कोठे पर रह रही मजबूर लड़कियों को भी वहां से निकलना था, गैंग के बनते hi पहला काम मुझे यही करना था, जितनी लड़कियों की इज़त मेहफ़ूज़ की जा सकती है, वो मई कर लेना चाहता था.. फिर उनमे मुझे जो लड़कियां अपने मतलब की लगीं उन्हें मई अपनी गैंग में शामिल कर लूंगा.. उनका कोई आगे पीछे तो होगा नहीं, वो भी खुद को स्त्रिओंग बना कर खुद क लिए सर्वाइव क्र सकेंगी.. और उन्हें जीने का मक़सद भी मिल जाएगा..

ज़रूरी नहीं क गैंग में रहने वाली लड़कियां सभी लड़ाई के लिए hi हों.. और भी लोगों की सेवा करने के, लोगों को सपोर्ट करने, लोगों की सुरक्षा करने के तरीके होते हाँ..

अपन अंदर की आग को ठंडा करने क लिए हर किसी क लिए किसी का खून बहाना भी ज़रूरी नहीं होता..

अपने अंदर की आग को, लोगों की भलाई करके भी ठंडा किया जा सकता है, जो खवाब खुद के कभी पुरे न हो सकें, वहीँ दुसरो के खवाब पुरे करके अंदर की आग को ठंडा किया जा सकता है...

ऐसे हरजो तरीके मुझे पता था.. बास मुझे अपनी गैंग क लिए शुरुआत में कुछ लोगों की ज़रूरत भी..

एक दो दिन में जेल वाला काण्ड भी मैं करने वाला था...

गैंग को खड़ा करने में मैं देर नहीं करना चाहता था.. जितनी जल्दी गैंग तैयार होगी उतनी hi जल्दी लोगों का भला किया जा सकता था.. और कोठों पर फँसी हुई लड़कियों की इज़्ज़त मेहफ़ूज़ होगी...

पैसों की भी साती टेंशन सालों के लिए ख़तम हो चुकी थी.. और भी कई ऐसे क्रिमिनल्स थे, जिनके पास ढेरों पैसा था.. वो सारा पैसा अब्ब मेरा होने वाला था..

मेरा मैं था क, मई अगर दिल्ली को क्राइम फ्री नहीं कर सकता, तो मुझे एक ऐसी गैंग ज़रूर बना लेनी चाहिए, जिससे क्रीम का ग्राफ बहुत हद्द तक डाउन हो सके, ऐसी गैंग बनानी थी, जो लोगों को भरपूर सपोर्ट दे सके.. ऐसी गैंग बनानी थी, जो हुकूमत बदल भी जाए तो गैंग कभी ख़तम न हो..

ऐसी hi सोचों में मैं राजा पार्टी क पास पोहंच गया.. वहां मई विजय बन कर जा रहा था, न के स....

गुरनाम को सबब बताया जा सकता था, पारर अभी उसे स के बारे में नहीं बता सकते थे.. गुरनाम पर किसी किसम का कोई शक नहीं था.. पर गैंग को चलने क लिए मुझे कई आम रूटीन से हट कर प्लान बना कर चलना था.. राजा गैंग भी कभी अपनी असली शकल में किसी क सामने नहीं आने वाली थी.. वो गुरनाम हो या कोई और....

गुरनाम को सबब तो पता लग hi जाना था, पारर असल फेस अभी उसके सामने नहीं लाया जा सकता था... पैलेस में भी गुरनाम की फॅमिली अलग रहती थी.. हमारी वाली साइड में उसका आना जाना नहीं था....

गैंग क बनते hi राजा गैंग भी अंडरग्राउंड रह कर सारे काम करेगी, फ्रंट पर गुरनाम और गृणाम जैसे और लोगों को रखा जाएगा.. गुरनाम और गुणराम जैसों के मारे जाने की सूरत में बैकअप बना जाने वाला था..

ये गैंग सिर्फ समाज सेवा के लिए थी, और समाज सेवा के लिए किसी की भी जान खतरे में पद सकती थी.. मुझ समेत राजा पार्टी में से कोई भी मारा जा सकता था..

कभी भी किसी के भी जाने से गैंग को कोई फर्क न पड़े, ऐसी गैंग बनानी थी मुझे, मई भी न रहूं पर गैंग हमेशा रहे.. कुछ ऐसा hi मेरा मंत्र था..

कैसे करना है ये तो स्टेप बी स्टेप hi सोचा जा सकता था..

सबब ने hi मेरा अच्छे से सवागत किया... मुझे गुरनाम से मिलाया गया.. गुरनाम से मिल कर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई..

राजा:- अच्छा हुआ विजय तुम आ गए.. हमे गुरम क एक दोस्त को भी ढूंढ़ना है, गुरनाम क कहने के मुताबिक़ वो गैंग क लिए बहुत hi फेरफेक्ट इन्सान है..

विजय:- अच्छा ऐसा है, तो उसकी इन्फो इकठे करो, फिर उसे ढूंढ भी लेंगे.. पहले वो कहाँ था, क्या करता था.. लास्ट इन्फो उनके बारे में जो है, वो सबब कलेक्ट करो.. सबब मिलकर उनसे ढूंढ लेंगे.. अब्ब तो दिल्ली में सबब hi ठीक हो चका था.. पूरा गंध एक बार तो ख़तम हो गया है.. पर अब्ब कई और छोटे मोठे लोग अपनी गैंग को खड़ा करने की कोशिश करेंगे.. और सभी लोगों को या तो मार दो.. उनके पास से माल मिलने के चांस हों तो उसे बंदी बनाओ..

फार्महाउस को और भी hi hi-tech बनाओ.. शहर में जो अड्डे पास पास हाँ, उनके नीचे से सुरंगे खुदवाओ, पारर सबब सेक्रेटली होना चाहिए.. अगर कभी हमारे किसी भी बेस पर कही से भी हमला हो तो वहां से बच निकलने के पुरे पुरे चान्सेस होने चाहिए..

सब मेरी बात सुनकर जोश में आ गए..

उदय:- भिड़ो क्या मस्त आईडिया है ये.. ऐसे सुरंगो का जाल तो हमारे पास होना hi चाहिए.. और फिर हमारी गैंग हमेशा hi वर्किंग में rahe,uske लिए भी ये बेस्ट आईडिया है..

गुरनाम से मेरा इंट्रो हुआ था, राजा पार्टी क एक मेंबर क हिसाब से.. मई भी सभी में शामिल होकर उन के जैसा hi हो गया था.. राजा पार्टी में मई सबसे सीनियर था, ऐसा शो करवाया गया था... स हर वक़्त hi राब्ते में नहीं रहता.. वो कब्ब और किस्से राब्ता करे, ये कोई नहीं जानता.. पैलेस के अंदर और फार्महाउस पारर स से राब्ता करने क लिए स्पेशल इंतेज़ाम है.. मुझसे ऊपर और कौन है, ये भी गुरनाम को नहीं बताया गया था..

गुणराम:- विजय तुमने सही कहा, हमें गैंग के सेफ्टी क लिए सुरंगो का जाल बिछाना hi होगा, लेकिन ये सबब कुछ ख़ास लोगों को हुई पता होना chahiye..sabhi गैंग में शामिल लोगों को इस सब का पता नहीं होना चाहिए. हर एक पारर पूरा पूरा भरोसा नहीं किया जाएगा..

राजा:- ऐसा hi होगा गुरनाम.. अभी तो हम शुरूआती प्लानिंग कर रहे हाँ, जब टाइम आएगा तो बाकी का भी सोच समझ कर और मिल बैठ कर किया जाएगा...

विजय:- गुरनाम तुम्हारे अपने मैं में जो जो भी प्लान हों वो सभी नोट कर लेना.. पहले सब इधर उधर का सेट हो जाए.. फिर आगे का lahe-amal तय करते हाँ..

शहर में बन्न रहे नए गैंग्स और दन्न के आदमियों पर पूरी नज़र रखो. ज़रूर उसके आदमी आस पास में मौजूद होंगे. कोई दिखे तो उसे किडनैप करके बाक़िओं का भी पूछो और फिर सभी को ऊपर पोहंचा दो..

उदय:- ऐसा hi होगा मेरे ीरर्र.. हम यहाँ हाँ hi इसी लिए.. सब पर hi हमारी नज़र है, अभी बास 1 अध् दिन में पुलिस का काम ख़तम हो जाएगा.. तो हम भी अपना काम शुरू कर देने..

फिर सभी मुझे अब्ब तक्क की साड़ी डिटेल बताने लगे.... 2 घंटे उनके साथ बैठ कर मई निकल गया..

आज मेरा पहलवान जी से मिलने का मैं होने लगा, वर्ण तो मई बहुत मसरूफ हो गया था.....

मैं वही से सीधा पहलवान जी क पास जा पोहंचा.. वो अखाड़े पर नहीं मिले, तो मैं उनके घर जा पोहंचा.. वो मुझे देख कर बहुत खुश हुए.. मुझे अपनी फॅमिली से भी मिलवाया, बड़ा प्यार मुझे दिया गया.. 2 घंटे वही बिता कर पहलवान जी की दुआएं लेता हुआ वहां से भी निकल लिया..

मई पैलेस क लिए रोड पर गाडी दौड़ाये जा रहा था.. क मेरे नंबर पर कॉल आने लगी.. कॉल महक की टी..

महक:- क्या विजय तुम तो दिल्ली पोहंच कर मुझे बुहल hi gaye..itni भी क्या मसरूफियत के किसी की खैर खरियत से जाओ, कुछ और न सही यही पूछ लेता है, मैडम कब तक आ रही हो दिल्ली में.

विजय:- है है है है है.. हाँ सॉरी मुझे पूछना चाहिए था.. पर ऐसा होना ज़रूरी भी नहीं.. यहाँ पैलेस में आ कर 2 दिन रहो. दो क्या 1 hi दिन में सबब समझ आ जाएगा.. यहाँ मेला लगा हुआ है. अक्सर किसी और तरफ धयान देने का टाइम भी नहीं बचता.. फ्री और और भी तो बहुत से काम हाँ मुझे.. तुम आ जाओ फिर हमहेशाही साथ रहेंगे..

महक:- हाँ, तुम भी सही कह रहे हो.. जैसी सिचुएशन बानी हुई है, कुछ ऐसा hi होना चाहिए.. अच्छा खैर मई ये बताने वाली थी, क मई आज शाम की फ्लाइट से आ रही हों.. सोचा तुम्हे बता डॉन..

vijay:-(chehakte हुए) वाह मतलब पैलेस की रौनक और भी बढ़ने वाली है.. एक हुसैन की मलिका और आने वाली है पैलेस ने....

महक:- है है है है.. मई कहा हुसैन की मलिका.. तुम हो न किसी रियासत के शहज़ादे..

vijay:-to फिर एक मलिका की और शहज़ादे की दोस्ती बड़ी अजीब होगी.. तुम प्रिंसेस बन्न कर आना.. प्रिंस और प्रिंसेस मिलकर खूब धमाल मचाएंगे दिल्ली में..

महक:- चलो तुम्हारे लिए मई प्रिंसेस भी बन्न जाती हों, पारर तुम भी प्रिंस बने रहना.. जितनी दासियाँ तुम्हारे आस पास हाँ, कही वो तुम्हे प्रिंस के मुक़ाम से हटा कर कही जोगी hi न बना दें.. है है है है है..

महक को भी इस सबब का अंदाज़ा था, क मेरा आस पास कितनी लड़कियां हाँ.. वो भी मज़े लेने लगी..

विजय:;- है है है वो जो सभी दासियाँ हाँ, तुम उन सबब की प्रिंसेस बनकर आ जाओ, प्रिंस और दाइयों के पास प्रिंसेस न हो तो पैलेस का नाम ख़राब होता है...

महक:- हाँ आ तो रही इसी आज.. देखते हाँ प्रिंस के पास प्रिंसेस क लिए कितना टाइम बचता है..

विजय:- तुम आओ तो सही, फिर देखा ये प्रिंस तुम्हारे लिए क्या करता..

महक:- चल ठीक है, फिर शाम को मिलते हाँ.

विजय:- सुनो महक.

महक:- हाँ विजय बोलो अब क्या.?

विजय:- तुम अपनी असल सूरत में hi देहि आ रही हो..

महक:- हाँ तो क्या मुझे सूरत बदल कर आना चाहिए..

विजय:- हाँ दन्न भी अब्ब दिल्ली में sar-garam होने वाला है, तो उसके आदमी तुम्हे यहाँ ज़रूर ढूंढ लेंगे..

माहक:- एक यही काम तो मैंने नहीं सीखा, कभी पहले इस तरफ धयान hi नहीं गया, पर अब मुझे लग रहा है क मुझे ये भी सीखना होगा..

विजय:- तुम यहाँ पोहंचो सही, मई तुम्हे सबब सीखा डोंगा..

महक:- ok तो फिर अब्ब मई कॉल कट करती हों, आने की तैयारी भी करनी है..

विजय:- ok bye......

महक से बात करके अच्छा लगा, उसके आने से रौनक और भी बढ़ जायेगी. मज़ा आएगा सबब को भी और महक को भी..

मैं महक से फोन पर बिजी था तो मैंने गाडी को रोड से उतार कर कच्चे में दाल दिया था.. वही छोटे मोठे इलाकों से गुज़रता हुआ मई जा रहा था.. रास्ते में एक स्कूल वन को रोक कर मच लोफर टाइप लड़के वन के ड्राइवर से बदतमीज़ी कर रहे थे..

वहां पोहंच कर मैंने गाडी रोक दी.... गाडी से नीचे उतरा और उनके पास जा पोहंचा.. मेरी नज़र गाडी क अंदर बैठी हुई लड़कियों पर पड़ी.. एक लड़की रो रही थी, दूसरी लड़की बहुत ज़यादा दर्री हुई थी..

3 लड़के थे, जो दो बाइक्स पर थे, और बाइक्स को वन के आगे खड़े किया हुआ था, वन के ड्राइवर को तीनो मिलकर पीठ रहे थे.. वन का ड्राइवर भी कम् नहीं था, पारर वो लड़ाई वाला आदमी नहीं था, सेहत अच्छी थी, फिर भी डाटा हुआ था..

मई वहां पोहंचा और एक लड़के को सर्र के बालों से पकड़ कर सड़क पार्स नीचे कच्चे में उछाल दिया, वो उड़ता हुआ दूर जा गिरा, उसकी चीख सुन के दोनों लड़के रुक गए.. अपने दोस्त का हल देख कर दोनों ने ड्राइवर को छोड़ दिया..

दोनों में से कोई बोलता मैं ने दोनों को hi एक एक मुक्का जबड़े पर मार दिया.. दोनों के hi 2-4 दांत टूट गए, उनके मोहन से खून निकलने लगा... वो भी चीखते हुए अपने मोहन कर हाथ रख कर गिरने वाले खून को अपनी हथेली में इकठा करने लगे..

ड्राइवर के भी मोहन से खून निकल रहा था.. उसकी शर्ट पहात चुकी थी..

विजय:- भाई साब ये सबब क्या है, ऐसे क्यों बीच सड़क में बाइक रोकी है इन कुत्तों ने..

ड्राइवर को मेरे आने से हौसला मिला तो उसने पहले तो खुद की सांस ठीक की, फॉर मुझे बताने लगा..

ड्राइवर:- ये साले हरामी रोज़ hi वन का पीछा करते हाँ, लड़कियों को छेड़ते हाँ. गंदे गंदे कमेंट करते हाँ. इनमे एक ज़मींदार का लड़का है, खुद को हीरो समझता है.. गाडी में मेरी बेटी भी है, उसके साथ ये बहुत ज़यादा गन्दा बोलते हाँ... साब मई गरीब आदमी हों, पारर बगैरत नहीं..

विजय:- ठीक है तुम जाओ.. मई इन्हे देख लेता हों.. ड्राइव मुझे थैंक्स बोल कर चला गया...... गाडी के जाते hi वो तीनो लड़के भी कुछ रिलैक्स हो गए थे.. ऐसे टुच्चे लड़कों से मुझे लड़ने की क्या ज़रूरत थी.. ये भी तो गंदगी का hi हिस्सा थे, जो मई साफ़ करता फिर रहा था.. इनको छोड़ दिया तो ये अब्ब और भी ज़यादा उस ड्राइवर को और उसकी बेटी के साथ दूसरी लड़कियों को परेशां करते फिरेंगे...

मई गाड़ी में आया, गाडी से पिस्तौल निकला और तीनो को सर्र में एक एक गोली उतार दी.. मेरे हाथ में पिस्तौल देखते hi उनकी माँ चुद गई थी.. वो मुझसे लड़ने क लिए खुद को तैयार कर चुके थे, मई अकेला था, और पहले मैंने उन्हें मौका दिए बिना hi पीट डाला था, मुझे अकेला और समझ कर लड़ने क लिए रेडी हो चुके थे... मुझे क्या ज़रूरत थी इनके साथ लड़ कर खुद को जांचने की.. सीधा hi तीनो को ऊपर पोहंचा दिया..

खास कम् जहाँ पाक

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मैं गाडी में पोहंचा और फिर ऐसे hi इलाके घूमता हुआ पैलेस जा पोहंचा.. 3 बजने वाले थे... आज काफी बहार घूम फिर लिया था..

गुरनाम से और पहलवान जी से मिलकर अच्छा लगा था.. अंदर का मौसम और भी खुशगवार हो गया था..

सिटींग हाल में hi शुष्मा दीदी माँ के साथ बैठ हुई थीं.. मई दोनों के बीच में जा के बैठ गया..

दोनों ने मुझे गाल पर किश कर दिया..

माँ:- आ गया मेरा बीटा घूम फिर कर..

दीदी:- कैसा है मेरा भाई..

विजय:- हाँ ये आपने सही कहा, मैं आपका भाई hi हों, शुक्र है आपने मुझे बीटा नहीं कहा.. मेरी बात पर दीदी हस्सन लगीं.. माँ और बाकी सबब भी हस्सन लगे...

हाल में मालिकान, पद्मा आंटी, दीक्षा आंटी, सोना आंटी और जूही माँ बैठी हुई थीं.. वो भी मेरी बात के मज़े लेने लगी..

दीदी:- बीटा तो तू मेरा है. इस में क्या शक है. अगर हम कल न मिले होते तो मई तो तुम्हे मौसी बनकर hi दिखती.... दीदी मेरे गाल खेंचते हुए बोली..

विजय:- दीदी अब्ब गाल खेंचे से काम नहीं चलेगा.. अब्ब तो मुझे आपका पूरा प्यार चाहिए.. कल वाली शर्म तो अब्ब हमेशा क लिए ख़तम हो गई है..

दीदी मेरे गालों को चूतमि हुई बोली

दीदी:- अब्ब मई क्यों शर्म करने लगी.. इतना पायरा भाई जैसा बीटा मिला है मुझे.. मेरा दिल में जो दर्द और ग़म था, वो अब्ब दीदी क मिल जाने से कम् हो गया है, अब्ब मई भी अपनी लाइफ जीने लगेंगी.. अब्ब मुझे किसी की कोई परवा नहीं रहेगी..

माँ:- और रेहनी भी नहीं चाहिए... शुशी मेरी लाडो, गुज़रा समय वापिस नहीं आता, पारर जो मिल जाए उसे ख़ुशी ख़ुशी बिताना चाहिए...

दीदी:- हाँ दीदी अब्ब मई आप सबब क साथ मिलकर बाकी की ज़िन्दगी ख़ुशी ख़ुशी बिताऊँगी.... दीदी बोलते हुए कही खयालो में जाने लगीं..

मैंने दीदी को अपने गले से लगा लिया.. उनके गालो को चूमने लगा.. दीदी की आँखों से अचानक से hi फिरसे आंसू आने लगे..

दीदी को भी बहुत दर्द झेलने पड़े होंगे.. दीदी भी अंदर से बहुत दुखी होंगी... मई दीदी के गालों को चूमता हुआ दीदी की पीठ को सहलाने लगा..

मा:- मैट रो मेरी शुशी, देख भगवन ने हमे मिला कर खुशियां भी तो दी हाँ ना.. अभी तो तुम हमारे दर्द को सही से नहीं जानती.. देख हम भी तो अपने दर्द को भूल कर खुश रहने लगे हाँ.. तू भी ग़म करना छोड़ दे.. मेरा विज्जू है न, सबब ठीक करदे गए.. इसके प्यार में बड़ी ताक़त है.. विज्जू अपनी दीदी को अंदर कमरे में ले जा, और इसे अपना प्यार दे..

मैंने दीदी को अपनी गॉड में उठा लिया और अंदर किसी खली कमरे की तरफ चल दिया.. मुझे दीदी को किसी ख़ास रूम में ले जाना था... दीदी को मैंने गॉड में उठाया तो दीदी कुछ देर के लिए सटपटाई थी, पारर फिर जल्द hi शांत भी हो गई थी, एक तो दीदी मुझे अच्छे से जान गई थी, दूसरा मई दीदी की बेहेन का बीटा था, दीदी ने खुद को जल्द hi इस सबब क लिए तैयार कर लिया था.. वर्ण कहाँ दीदी किसी की गॉड में जाने वाली थी.. दीदी कुछ और hi टाइप की थीं..

मई भी तो अलग टाइप का था... खूब जमने वाली थी मेरी दीदी से.. टकरा बड़ा ज़ोर का होने वाला था मेरा और दीदी का.. दीदी जितना इस सबब से दूर रहती थीं, मई उतना hi सबब के पास रहता था.. अभी दीदी कहाँ जानती थी, हमारी लाइफ के सीक्रेट्स.. उन्हें क्या पता क हम सबब कितने बेशरम लोग हाँ...

अंदर रूम में पोहचते hi मैंने दीदी को बीएड पर लिटाया और दूर को आदर से लॉक कर दिया.. दीदी उठ कर बैठ गई थी.

मई दीदी क पास पोहंचा.. आंसू बहने से दीदी का चेहरा और भी चमकने लगा था.

ख़ुशी क भाव भी चेहरे को चमका देते हाँ, तो कभी कभी दर्द के भाव भी चेहरे को एक अलग चमक दे जाते अहं.. दीदी चेहरा झुकाये हुए दर्द में बैठी थीं.. दीदी ने अपनी कमीज सामने से ठीक कर ली थी.. दीदी ने अपने दोनों पेअर गहतनो से मोड़ कर पीछे किये हुए थे.. दीदी के एक पेअर की एधि उनकी गांड क नीचे थी.

मई दीदी क पास पोहंचा.. और दीदी को तंग करने लगा..

विजय:- दीदी ऐसे क्यों सर्र झुकाये बैठी हुई हाँ.. न तू आप दुल्हन हाँ और न hi मई आपका दूल्हा.. दूर अंदर से लॉक है, पारर आज हमारी सुहागरात भी नहीं है, ऐसे तो वो बैठती हाँ जिन्हे अपनी सुहातरात की ेक्ससटेमँत और टेंशन होती है ..... दीदी ने झट से अपना चेहरा उठा लिया और मुझे हैरत से देखने लगी.. मेरी ऐसी बात ने दीदी का मंद पल भर में hi डाइवर्ट क्र दिया था..

दीदी ने मुझे एक हल्का सा थप्पड़ मार दिया.. ग़ुस्से वाला नहीं. उन्हें मेरी बात सुन कर बहुत ज़यादा शर्म आने लगी थी.. वो शॉकेड तो हुई hi थी मेरी बात सुनकर.. पर शर्म ज़यादा आ गई थी उनके चेहरे पर..

दीदी:- भाई तुम कितने गंदे हो अपनी मौसी अपनी दीदी से ऐसे बात भी कोई करता है क्या.. तौबा कितना गन्दा गन्दा बोलते हो तुम..

मैंने दीदी को पकड़ कर अपनी बहन में भर लिया और फिरसे उनकी पथ सहलाने लगा.. दीदी ममेरी बहन से अलग नहीं हुई.. वो भी मेरी पीठ को सहलाने लगी..

विजय:- दीदी ऐसी ओपन बातें आप किसी क साथ नहीं करती क्या..

दीदी:- पागल हो क्या, ऐसी बातें तो गंदे लोग करते हाँ. मई क्यों किसी से ऐसी बातें करने लगी.. मुझे बहुत शर्म आयति है भाई ऐसी बातों से.. कॉल भी जब तुमने मुझे अपने गले से लगाया था, तो मेरे अंदर का हाल बहुत बुरा होने लगा था.. मई हमेशा से hi ऐसी बातों से और ऐसे कामो से दूर hi रही हों, मुझे ऐसा सबब करना अच्छा भी नहीं लगता, मेरी नेचर भी कुछ हट कर है..

फिजिकली अततःच्मेंट भी मेरी किसी से नहीं रही है..

विजय:- अपने भाई क लिए अपनी नेचर को चेंज नै करेंगी आप.. आपके भाई को आप प्यार भी तो चाहिए न दीदी.... दीदी ने मेरे बालों को पकड़ कर खेंचा और मेरी आँखों में देखने लगी..

दीदी:- तुम्हे शर्म नहीं आएगी अपनी दीदी से गन्दा प्यार करते हुए.. दीदी क होंटो पर एक शरमीली मुस्कान थी..

विजय:- प्यार भी कभी गन्दा होता है क्या दीदी.. प्यार जब भी दिल से किया जाए, वो जिस्मानी हो कर भी जिस्मानी नहीं रहता, क्या आप इस बात पर बिलीव करती हाँ..

दीदी:- हाँ भाई ते तो तुमने सही कहा, पारर जिसने कभी कोई ऐसा रास्ता न चुना हो, उसके लिए ये सबब आसान नहीं रहता.. और मुझे अभी ऐसे प्यार की छह भी नहीं है.. मुझमे शर्म ज़यादा है.. और मुझे इस सबब से दूर भी रहना है.

विजय:- तो आज उसी शर्म को कुछ कम् करते हाँ..

दीदी:- नहीं ना भाई, प्लीज मुझे बख्श दो... किसी और की शर्म कम् करो. मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो..

विजय:- ठीक है आपको कुछ दिनों क लिए बख्श देता हों, पारर आपको एक छोटा सा काम करना पड़ेगा..

दीदी:- वो क्या.?.......... दीदी झटसे बोली..

मैं अपने होंटो पर जुबां फेरने लगा.. दीदी समझ गई एक हाथ से मेरे सर्र के बालों को पकड़ कर झंझोड़ने लगी और दूसरे हाथ से हलके हलके चाटने मेरे गाल पर लगाने अलगी.. उनकी ऑंखें शर्म से लाल होने लगी थी.. अभी वो ऐसी बातों की भी आदि नहीं थी.. कहाँ मई उन्हें किश करने की बात कर रहा था.... दीदी ने मुझे जल्द hi छोड़ दिया.. और शर्माती हुई चेहरा साइड में घुमा लिया..

मई दीदी क एक गाल पर उँगलियाँ फेरने laga..mera चेहरा दीदी के चेहरा के पास होने लगा तो दीदी ने अपने हाथ से मेरे चेहरे को साइड में हटा दिया, और मुझे देखे बिना hi सर्र ना में हिलने लगी..

मैंने दीदी को बीएड पर ज़बरदस्ती लिटा दिया.. दीदी सटपटाने लगी. मई दीदी क ऊपर आ गया, दीदी की हालत और भी पतली होने लगी, उनकी सांस तेज़ चलने लगी.. उनके बूब्स मेरे सीने से टकराने लगे. लेकिन उनका धयान अपने बूब्स पर नहीं गया वो मेरी किश की बात से hi अंदर से पूरी तरह से हिल गई थीं..

दीदी जो अपनी पूरी लाइफ में पहले कभी किसी क गले नहीं लगी थीं. अपने पति क शिव अपने बदन को किसी को छूने भी नहीं दिया, दो hi दिनों में कोई उनकी लाइफ में आया और उन्हें पहले दिन गले से लगा लिया, और दूसरे दिन उन्हें किश करने की बात करने लगा...

दीदी ऐसी सिचुएशन को फेस करना नहीं जानती थी.. उन्हें इस सबब की आदत जो नहीं थी.. उनके दिल की धड़कन किसी ढोल बीट क जैसे सुनाई देने लगी थी..

दीदी का चेहरा पसीने से टर्र होने लगा.. दीदी जानती थी क मैं उन्हें किश नहीं करूँगा, फिर भी वो ऐसी सिचुएशन को फेस नहीं कर पा रही थी..





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अपडेट ::: 100


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मेरी दीदी थी और मौसी भी, मुझे उनसे पूरा प्यार करने का हक़ था.. एक तो मेरी माँ की बेहेन थी, दूसरा वो माँ से मिलती जुलती भी थी.. माँ hi की तरह से वो बहुत खूबसूरत भी थीं..

मई तो उन्हें माफ़ी देने वाला नहीं था, पारर उनके साथ सबब धीरे धीरे प्यार से करूँगा, उनके मासूम दिल को दुखी तो नहीं कर सकता था.... मैं दीदी क ऊपर झुका और दीदी के माथे पर अपने होंठ रख दिए दीदी क माथे को मई चूमने लगा, माथे को चूमने क बाद मई दीदी की दोनों आँखों को चूमने लगा.. दीदी की हालत सोच सोच कर बिगड़ने लगी थी क अब्ब मई उनके होंटो पर किश करूँगा.. वो मुझे अब्ब धकेल नहीं रही थी.. अपने हाथो को भी बीएड पर दाल दिया था उन्हों ने, मुझसे वो भाग भी तो नहीं सकती थी..

अपनों से कोई भाग कर जाए भी कहाँ जाए..

दीदी की दोनों आँखों को चूम कर मई दीदी क दोनों गालों पर किश करने लगा, दीदी के दिल की धड़कन कुछ और भी बढ़ गई.. दीदी के बूब्स मेरे सीने में बहुत अच्छे से डब्ब चुके थे.. उनकी हीट मुझे बहुत अच्छे से फील हो रही थी, दीदी अंदर से देहक रही थी..

कुछ देर मई बारी बारी करके दीदी क दोनों गालों को चूमने लगा.. फिर मैंने अपना चेहरा ऊपर उठा दिया.. दीदी क बूब्स पार्स मैंने अपना वज़न कम् नहीं किया था.. और न hi मैंने नज़र नीचे करके दीदी के क्लीवेज देखे थे.. दीदी को रेस्पेक्ट देनी, उन्हें प्यार की तरफ भी लाना था.. पर उनके सम्मान में मैं कोई फर्क नहीं आने देना चाहता था.. दीदी मेरे लिए भी तो माँ hi थीं.. माँ की बहने माँ hi तो होती है..

दीदी ने अपने ऑंखें बंद की हुई थी, वो तेज़ सांस ले रही थी, उनके चेहरे पर पसीने की बूँदें चमकने लगी थीं. पारर मैंने उन्हें नहीं पिया, अभी दीदी को टाइम देना था, इस सबब क लिए.. अभी दीदी क अंदर का ग़म बहार निकलना था..

मैंने कुछ और नहीं किया तो दीदी ने डरते डरते अपनी ऑंखें खोल दीं..

मई दीदी की आँखों में देख रहा था.. दीदी भी मेरी आँखों में देखने लगी, और इस बार दीदी को मेरी आँखों में वो दिख गया जो उन्हों ने कल देखा था.. दीदी कुछ देर मेरी आँखों में डूबी रहीं.. फिर एक लम्बी सांस लेते हुए बोली

दीदी:- मैं भी कितनी स्टुपिड हों कल की साड़ी बातें भूल कर आज जो तुम करने का कह रहे थे, उसे सोच कर hi दररने लगी.. कल तुम्हारे बारे में सबब समझ भी तो लिया था मैंने... दररने वाली तो कोई बात थी hi नहीं..

विजय:- तो अब्ब मई आपको किश कर लूँ.... मई दीदी को छेड़ने लगा..

दीदी:- (मज़ा लेते हुए) हाँ अपनी मौसी को किश कर सकते हो तुम... दीदी भी अब्ब मेरे रंग में रंगने लगी थी..

विजय:- मौसी क्यों, दीदी क्यों नहीं..

दीदी:- मौसी से कुछ श्रम आ जाती है, दीदी से नहीं.. अगर मई दीदी hi रही तो तुम मुझे माफ़ी नहीं देने वाले.. अगर मौसी बानी रही तो तुम मुझे किश नहीं करोगे..

विजय:- अरे दीदी मैंने कहा तो था क मुझे किसी से शर्म नहीं आती.. और आप अभी इस पैलेस के माहौल को जानती भी तो नहीं है.. यहाँ रहते हुए सभी की शर्म ख़तम हो जाती है... आप तो ये भी नहीं जानती माँ से अपने माँ बाप के घर से निकलने के बाद माँ क साथ क्या हुआ था..

दीदी:- हाँ कल ख़ुशी का दिन था, तो किसी ने भी अपनी पुराणी और दर्द भरी यादों को नहीं दोहराया था.. आज मेरा मैं था क मई सबब जान लोन.. दीदी की बातों से मुझे लगने लगा है क जैसे दीदी की लाइफ में भी कोई बहुत बड़ा तूफ़ान आ कर गुज़र चूका है.. क्या हुआ था भाई दीदी क साथ...

दीदी को बताने क लिए मुझे फिरसे वही कोठे के माहौल में लौटना था. फिरसे दर्द भरी दास्ताँ को अपने अंदर दोहराना था.. दीदी को भी कोई ग़म था, तो दीदी को माँ और अपने ग़म बता कर उनके ग़म को कम् करना था.....

मैं दीदी क ऊपर से उठा और बीएड पर लेट गया.. मई छत की तरफ देखने लगा, धीरे धीरे मेरी ऑंखें नम्म होने लगी. माँ सही कह रही थी, यादें जब भी आती हम सहन करना मुमकिन नहीं रहता...

ज़ालिम लोग किसी की लाइफ क कितने hi साल छीन लेते हाँ, उनकी खुशियां भरे सैलून में दर्द hi दर्द और ज़ख़्म ज़ख़्म भर देते हाँ... माँ की पूरी जवानी hi कोठे की नज़र हो गई थी, सालों टाक माँ कोठे की दुन्या से बहार नहीं निकल पाई थी.. पूरी जवानी hi एक कोठे पर रहते गुज़र दी थी..

दिन रात बास चुदती hi रहती थी, कितना दर्द सहा था माँ ने... और मैंने कितना दर्द सहा था, अपनी माँ को नंगा किसी के नीचे लेते हुए देख कर.. कितना मुश्किल होता था तब्ब सबब सहन करना.. कैसी आग जल उठती थी मेरे अंदर..

कैसे कैसे दिन काटे थे वहां, एक एक दिन एक एक साल के बाबर था हमारा.. एक लम्बी दर्द भरी लाइफ मैंने और मेरी माँ बहनो ने वहां रहते गुज़री थी..

मेरी आँखों से आंसू निकल निकल कर मेरे कानो से होते हुए नीचे बीएड पर गिरने लगे.. दीदी शायद मुझे हैरत से देख रही थी, शायद उन्हों ने मुझे कुछ कहा भी होगा, पारर मई तो यहाँ था hi नहीं..

दीदी कुछ देर बाद मेरे ऊपर आ गए.. मुझे आवाज़ देने लगी.. पारर मई जिस दुन्या में जा पोहंचा था, वहां से लौटना इतना भी आसान नहीं था.. वहां गुज़रे सालों की यादें थी hi इतनी भयानक क उन्हें सोचते हुए hi इंसान किसी काम का नहीं रहता.. मई चाहे जितना भी मज़बूत बन जाऊं, पारर रहूँगा तो एक इमोशनल इंसान hi..

दीदी ने जब देखा क मई यादों से बहार नहीं आ रहा हों, तो दीदी अचानक से मेरे चेहरे पर झुक गयी और मेरे आँखों को चूमने लगी. मुझे कुछ एहसास हुआ, दीदी की भी आँखों ने बरसना शुरू कर दिए था.. दीदी भी आंसू बहते हुए मुझे चूम रही थीं.. धीरे धीरे मेरी आँखों को चूमने क बाद दीदी मेरे गालों पर आई और मेरे गालों को चूमने lagee,didi मेरे गाळून को चाट भी रही थीं..

ये दीदी का वो प्यार था, जो माँ को मुझसे था, मई दीदी का भी तो बीटा था, उनकी स्पेशल दीदी का बीटा.... मई अब्ब उनका भी तो लाडला बन्न चूका था..

दीदी क प्यार ने मेरे दर्द को कुछ कम् कर दिया.. मैंने ऑंखें खोल कर दीदी को देखा तो दीदी आँखों में आँखों लिए मुझे देख रही थी..

didi:-(bheegi आवाज़ में) भाई इतना दर्द दीदी ने और तुम सबब ने सहा है, क तुम जैसे मर्द को भी रुला दिया... मई तो समझ रही थी, क मेरा ग़म बहुत बड़ा है, पारर तुम्हारे दर्द क आगे तो मेरा दर्द कुछ भी नहीं है.. भाई मुझमे हिमत नहीं रही क मैंने तुमसे सबब हक़ीक़त जान सकूँ..

मैंने दीदी को बीएड पर पलट दिया.. और उनके ऊपर आ गया.. दीदी क गालों को चूमने हुए मैंने भी दीदी क गालों को चाट लिया.. दीदी मुझे देखने लगी पारर इस बार उनकी आँखों में शर्म नहीं थी, बास प्यार था...

विजय:- दीदी आपका जानना ज़रूरी है, आपके बाद माँ क घरवळून का जानना ज़रूरी है, अभी बहुत कुछ है करने क लिए, आगे बहुत से दर्द हाँ.. आप को तब्ब भी तो सबब पता चलेगा hi ना... तो आप अब्ब जान कर तब्ब के लिए खुद को मज़बूत बना लें.. मुझे भी सबब पता नहीं है.. माँ क साथ असल में हुआ क्या था.. पारर इतना तो पता है क माँ क साथ बहुत गलत किया गया था..

माँ क साथ जिसने भी गलत किया था, मई उन्हें सजा दूंगा, माँ भी उन्हें सजा देंगी.. तब्ब हो सकता है, आपको उनके साथ होने वाला बर्ताव अच्छा न लगे.. इसलिए आप का अभी से सबब जानना ज़रूरी है, माँ की बाद की ज़िन्दगी के बारे में मई आपकी बता देता हों, बाकी का आप माँ से पूछ लेना..

मैंने अपनी ऑंखें एक बार फिरसे बंद कीं.. मैं थोड़ा सा नीचे आया और दीदी के क्लीवेज पर अपना चेहरा रख दिया. दीदी को इस बार कोई बाद फीलिंग या शर्म नहीं आई, अब्ब माहौल बदल गया था, दीदी का हाथ मेरे सर्र पर आया तो मैं दीदी को, शुरू से लेकर सबब का सबब hi बताने लगा.. जैसे जैसे मैं बोलता जा रहा था, दीदी का रोना बढ़ता गया... फिरि दीदी की चीखें निकलने लगीं.. दीदी अपना सर्र पटखते हुए लेफ्ट राइट में घूमने लगीं..

जैसी मोहब्बत दीदी को माँ से थी, दीदी क तो दिल पर छुरियां hi चल गई थी.. दीदी ज़ारो कतार रोने लगीं..

मैं दीदी के ऊपर से उठ कर एक बार फिरसे बीएड पर लेट गया.. मैं दीदी को चुप नै करवाना छटा था, दीदी के अंदर सा ग़ुबार निकलना ज़रूरी थी, माँ के दर्द के साथ उनके अपने दर्द को भी कुछ रहत मिल जायेगी...

जितना दर्द था, टाइम भी उतना hi लगने वाला था..

रूम में आये हुए हमें 2.5 घंटे बीत चुके थे.. दीदी को मैंने माँ से रिलेशन का छोड़ कर सबब बता दिया था.. वो दीदी क रिलैक्स होने क बाद मैं बताने वाला था. ये भी फ़ौरन hi दीदी का जानना ज़रूरी था..

दीदी क आंसू जब ख़तम हुए तू उनकी बिना आंसुओ की चीखें शुरू हो गए थी..

इस बार मैं दीदी क ऊपर आया और दीदी के होंटो को अपने होंटो में ले लिया.. मैं धीरे धीरे करके दीदी के होंटो को चूसने लगा, धीरे धीरे करके शांत होने लगी.. जब्ब दीदी शांत हुई तो मैंने दीदी क होंटो को छोड़ दिया.. दीदी की आँखों बंद थी..

पारर अब्ब उनके चेहरे पर दर्द कम् था.. कोई शर्म भी नहीं थी मेरे उनके होंटो पर किश करने की वजा से.. शायद अब्ब दीदी भी सबब समझ गई थी..

जितना दर्द था दीदी की लाइफ में, मेरे किश ने दीदी को सुकून तो ज़रूर दिया होगा.. दीदी के होंटो की लिपस्टिक बिगड़ गई थी.. कुछ मेरे होंटो पर चिपक गई थी.

कुछ देर में दीदी ने ऑंखें खोलें, मेरी आँखों में देखने लगीं,

दीदी:- भाई दीदी ने कितना दर्द सहा है, मई तो सोच भी नहीं सकती थी क दीदी के साथ इतना बुरा किया गया है, भाई दीदी पर किये गए ज़ुल्म क चलते तुम किसी को भी माफ़ मैट करना, जिसकी जितनी गलती है उन्हें उससे बढ़ कर सजा देना.

vijay:-didi सजा तो मई ज़रूर डोंगा.. वो भी सब के सामने.. बहुत भयानक अंजाम होने वाला है सभी का.. आप अपनी सुनाएँ आपको क्या ग़म है..

दीदी को अपना ग़म याद आया तो वो फिर से दुखी हो गई, मैंने धीरे से एक बार फिरसे दीदी के होंटो पर किश कर दी..

दीदी ने मुझे देखा और फिर मेरे होंटो पर लगी हुई लिपस्टिक देखि तो उनका चेहरा एकदुम्म से लाल हो गया..

didi:-(sharamate हुए) भाई तुम बाज़ नहीं आये ना, मुझे भी अपने जैसे कर दिया ना, मुझे भी गन्दी बना दिया.. दीदी अपने होंटो पर उल्टा हाथ फेरते हुए शरमाते हुए बोली..

विजय:- दीदी एक बात और भी है, जो आपके लिए जानना ज़रूरी है. वैसे तो आपको सब जल्द hi पता भी चल जाता, पारर मई खुद से आपको बताना चाहता हों.

दीदी:- वो क्या भाई.

दिनय:- दीदी आप तो अब्ब सबब hi जान गई हाँ क माँ की कोठे पर रहते क्या हालत हो गई थी..

दीदी:- हाँ भाई, दीदी के साथ सच में बहुत गलत हुआ है, पारर अब्ब तो वो सबब ख़तम हो गया है ना..

विजय:- दीदी वो सबब ख़तम होक भी ख़तम नहीं हुआ है..

दीदी:- क्या मतलब.?

विजय:- दीदी मई खुल क बात करूँगा, मुझे शर्मा कर बात करने की आदत नहीं है, वर्ण मई लफ़्ज़ों को घुमा कर भी आपसे बात कर सकता हों, पर मुझे आदत पद चुकी है...

दीदी:- भाई तुम बताओ वो बात, जैसे भी बतानी है, मई कोशिश करुँगी, क मुझे बुरा न लगे तुम्हरे खुल कर बताने से...

विजय:- दीदी कोठे पर रहते माँ के साथ जैसे रोज़ रोज़ सेक्स होता रहा है ना, तो माँ न चाहते हुए भी उस सबब की आदि हो गई हाँ.. और माँ दर्द झेलते झेलते भी मुझे अपने मैं मंदिर में बसा चुकी हाँ, मेरे भी अब्ब माँ से फिजिकली रिलेशन बन्न चुके हाँ, अपनी तीनो बहनो से भी बन्न चुके हाँ.. और यहाँ पैलेस में रहने वाली सभी महिलायें भी मुझे अपना सबब कुछ सूंप देना चाहती हाँ, इसीलिए मई कहता हों क मुझे अब्ब शर्म नहीं आती....

माँ से मई अब्ब जल्द hi शादी भी करने वाला हों.. ये सबब जाना आपके लिए ज़रूरी है...

दीदी ने मुझे अपने ऊपर से धक्का दिया.. मैं बीएड पर जा गिरा, दीदी झट से उठी मेरे पेट पर बैठी और मुझे थप्पड़ मारने लगीं...

मेरे दोनों गाल लाल कर दिए दीदी ने...

दीदी:- भाई तुम इतने गंदे भी हो सकते हो मैं सोचा भी नहीं था.. तुम कैसे दीदी से ये सबब कर सकते हो, अपनी बहनो से, और फिर इतनी और भी हाँ, जिनके साथ तुम रिलेशन में हो.. छी भाई ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था.. मैंने दीदी को अपने ऊपर से गिरा लिया, दीदी की आँखों में लालजी आ गई थी, दीदी क लिए ये सबब सुन्न कर सहन नहीं कर पाई थी..

दीदी की लाइफ एक नार्मल लाइफ थी, जहाँ सेक्स सिर्फ हस्बैंड वाइफ में होता है, हमारे लिए लाइफ नार्मल नहीं रही थी, इन्सेस्ट हमारी लाइफ में पूरी तरह से शामिल हो चूका था..

दीदी मुझसे छूटने लगी, अगर मैंने अभी दीदी को छोड़ दिया और दीदी चली जसएगी, हो सकता है माँ से भी बुरा बोल बैठे, और पैलेस छोड़ कर चली जाएँ... फिर जल्द hi वो सबब समझ कर गुलिटी में चली जाएंगी. और मैं ऐसा होने नहीं देना चाहता था..'

मैंने दीदी को झुकाया और उनके होंटो को एक बार फिरसे अपने होंटो में ले लिया , और इस बार मैं दीदी क होंटो को थोड़ा कस के चूस रहा था.. दीदी को भी कुछ कुछ मज़ा देना tha,unhe भी मेरे रंग में ढालना पड़ेगा. वर्ण वो सबब से दूर रहने लगेंगी..

दीदी अलग टाइप की थी, वो इस सबब से दूर रहने की आदि थीं, पर मैं दीदी को भी अपने जैसा बना लेना चाहता था..

दीदी इस बार बुरी तरह से सतपनाते लगीं.. पर मैं दीदी को छोड़ने वाला नहीं था, मैंने किश करते हुए hi दीदी को बीएड पर पलट दिया और और उनके ऊपर आते हुए दीदी को पुरे जोश से किश करने लगे, दीदी तड़पने लगे, दीदी खुद को मुझसे छुड़वाने के लिए जी जान से कोशिश करने लगी.. कई बार मेरे लुंड की रगड़ उनकी छूट पर भी हुई.. न तो दीदी रुकी और न hi मई...

कुछ देर में दीदी थक गई या दीदी को भी मज़ा आने लगा.. पारर अब्ब दीदी मुझे नहीं रोक रही थीं, मुझे किश में साथ भी नहीं दे रही थीं.. नीचे से मेरा लुंड भी दीदी की छूट पर चुभ रहा था, वो थोड़ा सा जागने लगा था, पारर मई उसे जागने नहीं देने वाला था..

मई दीदी के चेहरे को थामे हुए दीदी को किश करने लगा, दीदी को सांस लेने में परेहनी होने लगी तो मैंने दीदी को छोड़ दिया.. दीदी की ऑंखें बंद थी..

कुछ देर में दीदी ने मुझे देखा. उनकी आँखों में एक अलग hi रंग था.. दीदी को ये सबब अच्छा भी लगा था, और बुरा भी..

दीदी:- भाई तुमने ये सही नहीं किया, मुझे किश नै करनी चाहिए थी तुम्हे..

दीदी के क्लीवेज को घूरते हुए..

विजय:- अभी तो मुझे वहां भी किश करनी है, मुझे आज hi आपसे सारा प्यार करना पड़ेगा..

दीदी:- पागल हो क्या, ये कौनसा तरीका है प्यार करने का.

विजय:- तो क्या ये हवस है.. आप को लगता है मुझे आपके जिस्म की भूक है.

didi:-(satpata गई) नहीं मैंने ये कब्ब कहा.

विजय:- तो फिर आपको माँ और बहनो से मेरे रिलेशन पर परेशानी क्यों, क्या उनके दिल की मैं नहीं मान सकता.. हमे जैसा माहौल मिला है, माँ को हमेशा hi तो नंगा किसी न किसी के नीचे लेते देखा है, अब्ब आप hi बताएं, हम कहाँ गलत हाँ, हम सबब उस माहौल के आदि हो गए हाँ.. आप को दुखी नहीं होना चाहिए..

माँ से रिलेशन हमारी मज़बूरी नै है दीदी, वो तो हमारे दिल की आवाज़ है, हमारे दिल की चाहत है, माँ अनगिनत लोगों से सेक्स कर चुकी हाँ, तो मेरे साथ वो प्यार भरा मिलान भी नहीं कर सकती क्याआ.. मेरी बेहनेजो अब्ब दुन्या के किसी मर्द के पास नहीं जाने वाली... क्या वो सबब ऐसे hi अंदर hi अंदर तड़पती रहेगी.. हम सबब तो बचपन से hi सबब करते आ रहे हाँ.. वहां क माहौल में रहते हुए खुद पर काबू भी तो नहीं रहता. हमें दर्द hi इतने मिले थे, दीदी क हम एक दूसरे के प्यार में गुम्म होकर ऐसे बन्न गए.. बचपन से hi ये सबब करते आ रहे हाँ .. सरे खवाब तो पचपन से hi बुन्न लिए गए थे..

दीदी:- सॉरी भाई मैं खुद पर काबू भूल कर तुम्हे थपप्पड़ मार बैठी.. दीदी अपने कान पकड़ कर सॉरी बोलने लगीं...

विजय:- दीदी ऐसे तो माफ़ी नहीं मिलेगी..

दीदी:- तो फिर कैसे मिलेगी माफ़ी, मुझे मेरे भाई से..

विजय:- दीदी आपको भी मुझे अपने मैं से किश करनी पड़ेगी..

दीदी:- नहीं भाई ये मुझसे नहीं होगा.. मई कैसे अपने मैं से तुम्हे किश कर सकती हों, बताया तो था न तुम्हे क मैं इस लाइन की नहीं हों.. कभी भी मेरी लाइफ ऐसे रुख पर नहीं चली..

विजय:- दीदी हम कौनसा लवर वाली फीलिंग्स में डूब क किश करेंगे.. ये तो हमारा प्यार है..

दीदी:- फिर भी भाई..

विजय:- मान लो दीदी वर्ण मई और भी आगे बढ़ने लगूंगा..

दीदी:- नहीं.. नहीं.. तुम आगे मैट बढ़ना.. mmmmmm..mai तरय करती हों..

दीदी क चेहरे का रंग फिरसे लाल हो गया था.. इस बार कुछ ज़यादा hi लाल पद गया था दीदी का चेहरा.. वो अपनी लाइफ में पहली बार किसी को किश करने जा रही थी.. दीदी के चेहरे के के हिस्से थरथाने लगा था...

विजय:- चलें फिर जल्दी करें.. बहुत टाइम हो गया है किसी क दरवाज़ा खटखटाने से पहले hi आप मुझे किश करदें.

दीदी क पास मैंने कोई चारा नहीं छोड़ा था, दीदी को मुझे किश करनी hi पड़ेगी.. मैं दीदी क ऊपर से हैट पर बीएड पर लेट गया..

दीदी खुद में हिमत जुटती हुई मेरे ऊपर आणि लगी, दीदी की कम्पन बढ़ने लगी.

दीदी के होंठ फड़फड़ा रहे थे.. दीदी की ऑंखें मारे शर्म के झुकी हुई थीं..

दीदी मेरे चेहरे पर झुकी . अपनी ऑंखें बंद कीं और मेरे होंटो पर अपने होंटो ला कर रख दिया, दीदी क बदन में कपकपी बढ़ने लगे. दीदी ने किश नहीं किया, दीदी तेज़ सांस लेने लगीं.. जो मेरी नाक से टकरा रही थी..

मैंने अपने हाथ दीदी की पीठ पर रख दिए और दीदी की पीठ को सेहलनए लगा..

कुछ देर दीदी ऐसे hi मेरे होंटो पर अपने होंटो को रखे rahi,didi के होंटो की हीट से मेरे होंठ जलने लगे थे.. दीदी हिम्मत करके अपने होंटो को कुछ हरकत देने लगी..

दीदी क दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी, ये उनकी लाइफ का पहला ऐसा मौका था, जब को किसी को अपने मैं से किश कर रही थी.. शायद उनका मैं नहीं था, ज़बरदस्ती थी, पारर वो कर तो रही थी..

मैंने दीदी की हेल्प की, दीदी को धीरे धीरे किश करने लगा.. कुछ देर में दीदी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया.. तो मैं रुक गया, दीदी भी रुकी, पारर फिर जल्द hi दीदी मेरे होंटो पर किश करने लगी.. दीदी के बूब्स पहूल कर मेरे सीने पर डब्ब रहे थे..

धीरे धीरे दीदी कुछ फ़ास्ट हुई..

3 मिंट में hi दीदी ने अपने होंटो को अलग कर लिया, वो मेरे ऊपर hi हैट गयी बीएड पर लेटकर तेज़ सांस लेने लगीं.

कुछ देर बाद दीदी ने अपना सर्र उठाया तो उनकी आँखों में शर्म और चमक बढ़ गई थी..

दीदी:- भाई कर दिया ना तुमने अपनी दीदी को गन्दा.. मैंने पहले ऐसा कभी नहीं किया...

विजय:- क्यों दीदी जीजू आपको किश नहीं करते क्या..

दीदी:- भाई उस कुत्ते का नाम यहाँ मैट लो, अभी मई उसका ज़िक्र नै सुन्ना चाहती.. मुझे अपने भाई से प्यार करना है.

विजय:- सच दीदी आप मुझसे और भी प्यार करना चाहती हाँ..

didi:-(didi मुझे फिरसे पीटने लगी) भाई तुम फिरसे गन्दा सोचने लगे.. सिर्फ किश करने से hi प्यार का इज़हार होता है क्या? और भी तरीके हाँ प्यार करने के...

मई भी दीदी को छेड़ hi रहा था, धीरे धीरे करके दीदी खुलने लगी थी..

मुझे अचानक से hi याद आया क आज तो महक आ रही है. उसे भी लाना है पैलेस में. उसका चेहरा भी बदलना है..

ये सबब याद आते hi मैंने दीदी को बता दिया क मुझे अभी अपने एक दोस्त से मिलने जाना है..

दीदी मुझे मायूसी से देखने अलगी..

दीदी:- भाई अभी मेरा मैं नहीं भरा..

मैंने दीदी को फिरसे अपने ऊपर खेंच लिया और दीदी को किश करने लगा, इस बार दीदी भी मेरा साथ देने लगे.. कुछ देर दीदी को किश करने के बाद मेरा हाथ अचानक से hi दीदी क बूब्स पर चला गया, मैंने दीदी का दूध दबा दिया..

दीदी को एक झटका लगा, दीदी मुझसे अलग हुई मुझे एक थप्पड़ मार दिया, कुछ प्यार से, कुछ ग़ुस्से से..

दीदी:- भाई ज़यादा गन्दा न करो मुझे, बास किश पर hi गुज़ारा करो.. और जैसा तुमने बताया था, तो सबब तुम से गन्दा काम करती हाँ, तो तुम ऐसा सबब उनके साथ hi करना मेरे साथ नहीं.. चलो अब्ब चलते हाँ तुम्हे अपने दोस्त से मिलने भी जाना है...

मैं जाने लगा तो..

दीदी:- गंदे भाई अपना मोहन तो साफ़ करलो, वहां मेरी लिप... इसके आगे दीदी से नहीं बोलै गया..

मैंने भी अब्ब दीदी को ज़यादा तंग नहीं किया.... मैं बाथरूम में घुस गया और अपने चेहरा वाश करने के बाद दीदी को bye बोल कर रूम से बहार आ गया..

मेरे जाने क बाद दीदी ख़ुशी ख़ुशी बाथरूम में घुस गयीं और खुद को आईने में देखते हुए शर्माने लगीं... साथ hi एक पायरी सी मुस्कान भी उनके चेहरे पर थी..

दीदी अपने होंटो पर जीब फेरते हुए बड़े गौरसे खुद को आईने में देखने लगीं..

दीदी:- गन्दा भाई मुझे भी अपने रंग में रंग लिया, मई जो कभी किसी से ऐसी बात नै करती थी, मुझे किश कर दिया, वो भी ईंटे वाइल्ड तरीके से..

हाय कितना सुकून मिला है मुझे भाई के किश से.. कितना अच्छा लगा था, जब्ब भाई ने मुझे किश किया था... काश भाई अभी ना जाता, और हम ऐसे ी घंटों किश करते रहते. कबके सोये हुए मेरे अरमान जगा दिए भाई ने, काश भाई इससे भी आगे ...

नहीं.. नहीं.. ये मई क्या सोचने लगी, मई ऐसा कुछ नहीं करने वाली.. मई कैसे अपने भांजे से ये सबब करने की सोचने लगी.. क्या मई भी गन्दी होने लगी हों..

हाय पारर कितना मज़ा था ना ऐसा सबब कुछ करने में.. कभी ऐसा मौका मेरी लाइफ में आया hi नहीं...

खुद को आईने में देखते हुए... ये मैं क्यों दोहरी सोचें में गुम्म होने लगी, मई तो ऐसी कभी नहीं थी.. प्यार का ऐसा नशा मुझपर कबसे असर अंदाज़ होने लगा.




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अपडेट ::: 101

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7 बजने वाले थे, मई एयरपोर्ट पर महक को रइवे करने के लिए मौजूद था.

कुछ देर के वेट के बाद मुझे महक आती hi दिखी.. उसके साथ कोई और नहीं था, महक अकेली hi आई थी.. टाइट फिटिंग वाली जींस और शर्ट में महक क्या ग़ज़ब की दिख रही थी, चलते हुए उसके जिस्म की लचक एक एक अंग को खूबसूरती की इन्तहा तक्क पोहंचा रही थी, चश्मा लगाए महक आस पास मौजूद लोगों के दिलों धड़कन रोक देने पर तुली हुई थी, उसके खुले बाल उसके चश्मे के आगे आ रहे थे, और महक उन्हें अपने एक हाथ से हटा कर सामने देखते हुए चल रही थी.. दूसरे हाथ में बैग थामे महक चलती हुई आस पास के लोगों पर बिजलियाँ गिरा रही थी..

बेपनाह हुसैन, ऊपर से कमाल का ऐटिटूड, मेरे अंदर भी कोई लेहेर सी उठने लगी, मैंने पहले महक को किसी और नज़र से नहीं देखा था, पारर आज महक को देख कर मेरे अंदर भी कहीं घंटियां सी बजने लगी थी..

महक बेनियाज़ी से चलती हुए मेरे पास से गुजरने लगी तो मुझे कुछ होश आया..

मैंने महक को आवाज़ दी, मेरा चेहरा चंग था, मुझे इस रूप में महक में पहले कभी नहीं देखा था.. महक मुद कर मुझे देखना लगी........ महक मुझसे कुछ पूछने hi वाली थी, क महक की नज़र मेरी आँखों पर पद गई.

महक ने मुझे सरप्राइज कर दिया..

महक:- hi विजय, हाउ अरे यू?

विजय:- ोोोू तुमने मुझे कैसे पहचान लिया..

महक:- है है है मैं महक हों.. मुझसे किसी का छुप पाना मुमकिन नहीं है, और वैसे भी मई कुछ भी जल्दी भूलती नहीं हों, तुम्हारा चेहरा hi बदला है, ऑंखें नहीं.. यही तो है सबसे बड़ी पहचान तुम्हरी, नीली ऑंखें.. जिनमे बहुत गहराई है.. चलें अब्ब या यही खड़े रह क्र साड़ी बातें करनी हाँ..

विजय:- हाँ हाँ चलो.. एक तो तुम ऐसे क़यामत ख़ेज़ हुलिए में मेरे सामने आ गई हो, और ऊपर से डीएलओगे भी बोल रही हो, तुम्हे ऐसे रूप में देख कर तो किसी को होश hi नहीं रहेगा.. आस पास देखो कैसे सबब तुम्हे दीदे पहाड़ पहाड़ कर देख रही हाँ...

महक हस्ते हुए आस पास मौजूद लोगों को देखने लगी.. फिर एक आदमी पर नज़र पड़ते hi, जो किसी को फोन कर रहा था..

महक:- विअज्य चलो जल्दी से, यहाँ मुझे दन्न का आदमी दिखा है, वो किसी से फोन पर बात कर रहा है, ज़रूर ये अपने बॉस को बता रहा होगा, और बॉस आगे दन्न को बताये.. महक तेज़ तेज़ चलते हुए बोली..

मैं भी मोके की नज़ाकत को समझते हुए महक के साथ तेज़ तेज़ चलने लगा.. कुछ hi देर में हम पार्किंग में जा पोहंचे और गाडी में बैठ कर तेज़ी से रोड पर आ गए..

महक मेरे साथ hi फ्रंट सीट पर बैठी थी, वो साइड मिरर से पीछे देख रही थी..

महक:- यहाँ उनके और भी आदमी हाँ. ज़रूर दन्न के फ्रेंड्स भी आज hi दिल्ली आ रहे होंगे, और एब उन्हें रइवे करने आये होने...

मैंने गाडी चलते हुए hi राजा को कॉल मिला दी और उसे सबब बता दिया..

महक:- एक गाडी आ रही है हमारे peeche..maine भी मिरर से पीछे आने वाली गाड़ी को देखा.. जो बहुत hi स्पीड से हमें फॉलो कर रही थी..

विजय:- ये हमें क्या फॉलो करेंगे.. इनमे इतनी हिम्मत कहाँ..

महक:- भूल कर भी ऐसा न सोचना.. दन्न अगर यहाँ अपना धंदा सेट करना छह रहा है, तो वो पहले अपने आदमी दिल्ली में भेजेगा.. अब तक्क कितने आदमी दिल्ली में आ चुके हाँ, हम नहीं जानते..

एक गाडी अगर हमारे पीछे है तो सामने से भी वो हमें घेर सकते हाँ.. दन्न के पास बहुत बड़ी फ़ौज है.. एक फोन कॉल और कराये के आदमी भी हमारे पीछे लग सकते han..delhi में 3 गैंग्स ख़तम हुए हाँ सारे गनसगतर नहीं.. अभी तो दिल्ली 30% भी साफ़ नहीं हुआ...

मुझे भी महक की बातें सही लग रही थी.. महक का एक्सपेरिंस भी मुझसे ज़यादा था, मई तो अभी कुछ दिन हुए इस फील्ड में आया था, महक तो सालों से पुरे वर्ल्ड में घूम रही है...

10 मिंट hi हुए थे क एक खली जगा पर आते hi पीछा करने वाली गाडी से फायरिंग शुरू हो गई..

महक:- देखा अब्ब उन्हें आगे से भी सुप्परत मिलने का ामकान है, ये फायरिंग सिर्फ हमें उलझने क लिए है.. जल्द hi वो हमें घेरने की कोशिश करेंगे..

मई गाडी में hon,to सीधे गोली नहीं मारेंगे.. टायर पंक्चर कैरङ्गे, या हमे भी लड़ने पर मजबूर करेंगे.. लड़ने से हमारी स्पीड कम् होगी तो. तो दूसरों को भी हम तक्क जल्दी पोहचने में आसानी बन जायेगी..

महक की बात सुनते hi मैंने गाडी की स्पीड बढ़ानी शुरू करदी.. एक्सेलरेटर पर दबाओ बढ़ा तो गाडी हवा से बातें करने लगी.. पीछे वाली गाडी बहुत पीछे रह गई थी, अब्ब फिर से रश वाला एरिया आ गया था, तो पीछे से फायरिंग भी रुक गई..

हमें एयरपोर्ट से निकले हुए 20 मिंट होने वाले थे.. पैलेस एयरपोर्ट से 45 मिंट की दूरी पर था..

और मई सीधा पैलेस नहीं जाने वाला था, किसी को भनक भी नहीं पड़ने दे सकता था मई, क महक का कोई कनेक्शन पैलेस में रहने वळून से है..'

राजा पार्टी भी मुसलसल राब्ते में थी.. वो भी सबब जान रहे थे.. वो भी निकल चुके the..maine गाडी को शंकर के एक अड्डे की तरफ मोड़ दिया.. वहां तक पोहचने में भी 20 मिंट लगने वाले थे..

पास क किसी और एरिया में अभी मुझे सही से पता नहीं था, क हमारे प्रॉपर्टी है या नहीं..

महक;- तुम कहाँ जाने वाले हो, अभी पैलेस जाने की सोचना भी मत..

विजय:- हाँ मई भी पैलेस नहीं जा रहा, अभी तुम्हारा फेस चेंज करना है, उसके बाद hi हम पैलेस जायेंगे.. मुझे भी उस आदमी ने इस रूप में देख लिया होगा, मुझे भी अब्ब इस चेहरे को बदलना पड़ेगा..

गाडी में सबब सामान था जिस से फेस चेंज किया जा सकता था..

महक:- वो सामने देखो कोई गाडी आ रही है, तुम्हारे दोस्तों की तो नहीं है वो गाडी..

विजय:- नहीं वो अभी इस रूट पर नहीं आये हाँ.

वो गाड़ी बहुत स्पीड से हमारे पास आ रही थी, अभी कुछ टाइम था उसे आने में, मुझे उस गाड़ी के पीछे एक और गाड़ी भी आती यही दिखी.

दूसरी और भी कई गाड़ियां थी आस पास .. फिर भी मई समझ गए क ये दन्न क होंगे.. अभी उनसे उलझने का टाइम नहीं था.. महक को भी सेफ करना था.. वेपन्स को भी हाथ में लेने में टाइम लगता.. रश वाला एरिया था तो उनसे भीड़ भी नहीं सकते थे..

सामने एक क्रॉस रोड भी था, तो मैंने गाडी को साइड वाले रोड पर मोड़ दिया.. तीनो गाड़ियां अब हमारे पीछे लग चुकी थीं..

महक:- अभी हमारे लिए इनसे बच निकलना आसान नै है, तुम गाडी को स्पीड से भगाओ.. ये इलाका ऐसा है क हम उनसे लड़ भी नहीं सकते, किसी मासूम की जान पर खतरा बन्न जाएगा.. और रात का समय है तो किसी राह चलते को ज़यादा नुकसान का खतरा hai..humen जल्द hi कोई ऐसी जगा ढूंढ़ने होगी जहाँ हम सेफ रह आकर उनका मुक़ाबला कर सकें. ऐसे तो ये हमें नहीं निकलने देंगे..

पीछे वाली गाइयाँ भी बहुत स्पीड से आ रही थीं.. वो भी सभी गाड़ी चलने में एक्सपर्ट थे..

महक की मानते हुए मैं साइड में भी देख रहा था. कोई ऐसी जगा जहाँ सेफ रह कर हम उनसे लड़ सकें..

कुछ आगे बढे तो रोड की एक साइड में खली एरिया शुरू हो गया..

विजय:- या एरिया कैसा रहेगा महक..

महक:- हँ, खूब अँधेरा तो यहाँ बहुत है, और यहाँ इनसे मुकाबला भी किया जा सटका है, कार में क्या कुछ है लड़के क लिए..

विजय:- कार फुल वेपन्स से भरी हुई है. इमरजेंसी के लिए सब hi मौजूद है.

महक:- तो फिर सोचना क्या.. घुमाओ गाडी और करते हाँ इनका सामना.

मैंने रोड से गाडी उतारी और खली मैदान में गाड़ी दौड़ाने लगा. ज़मीन पक्की थी और गाड़ी की लाइट में सबब hi क्लियर दिख रहा था.. कुछ आगे मुझे कुछ दरख्त दिखे, मैं तेज़ी से उसी तरफ जाने लगा, मैंने गाड़ी की लाइट डिम कर्ली थी..

मेरे पीछे hi तीनो गाड़ियां भी मैदान भी आ गई थी..

मैंने दरख्तों को क्रॉस किया और गाडी की बहरी लाइट्स को बंद कर दिया, एक बटन दबाया तो गाड़ी की बैक सीट ऊपर उतनी शुरू हो गई.

महक ने भी सबब देख लिया था.. अंदर से नज़ारा देख कर महक बोली

मेहम:- खूब तो गन्स तो सभी लेटेस्ट hi हाँ.. और क्या कुछ है इसमें..

महक पिछली सीट पर गई और अंदर से एक टोर्च निकल कर ुनाय ों कर लिया.. मैंने गाडी के अंदर की लाइट भी ऑफ कर डीएन.. टोर्च की रौशनी काम थी, हमे दूर से नहीं देखा जा सकता था..

मई भी पिछली सीट पर आया.. और एक सुब मशीन गन उठा कर उसका मैगज़ीन उसके साथ आत्ताच किया..

विजय:- महक इसे टेस्ट करो, इसकी आवाज़ भी कम् है और इसकी मर भी बहुत ज़बरदस्त है.... महक मशीन गन हाथ में ले कर देखने लगी..

महक:- हँ.. रुस्सियन मेड है, मुझे भी ये बहुत पसंद है..

मैंने एक छोटी गन उठाई.. वो लाइट वेट गन थी.. एक मशीन गन भी मैंने अपने कंधे से लटका ली.. और फिर हम दोनों गाडी से बहार आ गए... आगे एक जगा ऊँचाई थी, तो हम वही चले गए..




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दन्न को जैसे hi पता चला क महक दिल्ली में देखि गई है, तो अपने आदमियों से कनेक्टेड होगया.

दन्न के आदमी जो दन्न पहले hi वो दिल्ली में भेज चूका था.. उन्हें महक के पीछे लगा दिया. महक को अगर थोड़ा सा ज़ख़्मी भी करना पड़े तो वो पीछे न हटें, पर उसे कैसे भी करके अपने कब्ज़े में लें.. जैसे hi वो महक पर काबू प् लें, उसे फ़ौरन hi बेहोश कर दिया जाए..

दन्न ने और भी कई गुंडों को कॉन्ट्रैक्ट देकर महक क पीछे लगा दिया.. दन्न इस बार महक को खोना नै चाहता था..

दन्न मुसलसल hi महक का पीछा कर रहे गुंडों से राब्ते में था.. दन्न को एक एक पल ली रिपोर्ट मिल रही थी.. वो बड़ा हैरान हुआ था, महक के साथ किसी लड़के का सुन कर..

फिर जब्ब महक और लड़के गाडी में बैठ कर मैदान में जा पोहंचे तो दन्न को एक झटका लगा..

दन्न:- वो ज़रूर तुम सबब से लड़ने का प्लान बना रहे होंगे.. तुम सबब खुद को सेफ रखते हुए और उनके प्लान को समझते हुए आगे बढ़ो.. देखो मई एक बार फिरसे कह रहा हों क महक इस बार नज़रों से ओझल नहीं होनी चाहिए, वर्ण तुम सबब का मई बहुत बुरा हशर करूंगा.. मुझे महक हर हाल में चाहिए..

दन्न का आर्डर सुन कर सभी डर गए, वो जानते थे क दन्न बड़ा हरामी बॉस है, वो अगर किसी को धमकी दे दे, तो सामने वाले की खैर नहीं रहती..

3 गाड़ियों में टोटल 13 गुंडे थे.. उनमे एक लीडर था.. जिसका नाम था रंगा..

रंगा:- तुम सबब भी बॉस की बात सुन चुके हो, इस बार महक मैडम हमारे हाथ से नहीं निकलने चाहिए.. वो है भी बहुत डेंजरस, उसे पकड़के क लिए हमें अपनी जान भी गंवानी पद सकती है, इस लिए सभी सावधानी से उसे ढूंढो.. उसे थोड़ा सा ज़ख़्मी भी करना पड़े तो कर देना.. पर जिसे भी वो दिखे बाकी सभी को वो बता दे, पारर इस बार वो हमें चमकता दे कर निकलने न पाए.. सब फेल जाओ 3-3 के ग्रुप में आगे बढ़ो.. एक बार फिरसे कह रहा हों धयान से सबब करना है, वर्ण अपनी मौत क ज़िम्मेदार तुम खुद होंगे..

एक गुंडा:- बॉस हमें टोर्च ों करने की परमिशन है क्या..

रंगा:- स्टुपिड गाडी से नाईट विज़न निकलो, उससे अँधेरे में देख सकोगे.. हर बात बतानी पड़ती है तुम सबब गधों को..

सबब गुंडे गाडी में रखे हुए अँधेरे में देखने वाले चश्मे उठा कर अपनी आँखों पर लगाने लगे..

सेल स्टुपिड गुंडे इस बार मरने वाले थे.. नाईट विज़न जहाँ फायदेमंद है, वही आँखों के लिए इन्तेहाई मुज़ार भी है.. विज्जू क पास रौशनी बरसाने वाली गन थी.. और रौशनी बढ़ जाने की वजा से नाईट विज़न जिस ने लगाईं होगी, उसकी ऑंखें हमेशा क लिए देखने से महरूम हो जाने वाली थी..




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मैंने गाडी से ब्लैक गॉगल्स भी उठा लिए थे.. महक भी इन सबब चीओं को जानती थी..

माहक:- वजय तुमने तो साड़ी hi काम की चीज़ें गाडी में राखी यही है, इस लाइट गन से किसी को भी पल भर में अँधा किया जा सकता है, हमें मशीन गन से गोलियां बरसने की ज़रूरत hi नहीं पड़ेगी... अगर उन स्टुपिड गुंडों ने नाईट विज़न चश्मे उसे किये तो, वो तो वैसे hi मारे जायेंगे..

विजय:- है है है मैं ऐसे hi काम करता हों, झट में hi मैदान साफ़ कर देना मेरी आदत है.... क्यों खुद को घंटों तक हलकान किया जाए.. खुद के दुम्म को जांचने क लिए और भी कई तरीके हाँ... ज़रूरी तो नहीं क हर किसी से फेस 2 फेस आमना सामना किया जाए.. अपनी एनर्जी को बचते हुए, जितना को साफ़ क्र सको करते रहो..

महक:- हाँ तुम सही कह रहे हो, ऐसी सिचुएशन में सभी को फोरि मार देना चाहिए.. अकेला आदमी अगर शेर बनने की कोशिश में मारा जाए, तो उसे कौन शेर कहेगा.. सभी उसे स्टुपिड hi कहेंगे.. हर जुंग हाथ और पैरों से लड़नी भी ज़रूरी नहीं होती, दमाग से जुंग करना ज़यादा अच्छी बात है, टाइम भी बच जाता है, और कचरा बी जल्द साफ़ हो जाता..

विजय:- हँ.. लगता है वो आगे बढ़ने लगे हाँ.... इतना बोल कर मैंने नाईट विज़न से देखा तो 40 मीटर पर वो चरों मुख्तलिफ दिशा में जा रहे थे.. उनके ज़यादा दूर होने से पहले hi मैं उन्हें ठंडा कर देना चाहता था..

मैंने नाईट विज़न को उतारा.. और ब्लैक गूगल आँखों पर सजा लिए..

विजय:- महक लाइट फायर करने वाला हूँ. तुम भी अपनी आँखों की सेफ्टी कर लो..

महक:- ok.......... फिर महक ने भी एपीआई आँखों पर चश्मा लगा लिया.. मैंने रौशनी गन को गुंडों वाली साइड करके आस्मां की तरफ कर दिया.. और अपना सर्र नीचे करते हुए फायर कर दिया.. फिर होते hi मैंने अपने चश्मे के ऊपर अपने दोनों हाथ रख लिए............ इस गुण की रौशनी बहुत hi खतरनाक थी.. ऐसी रौशनी आर्मी वाले बॉर्डर पर दुश्मनो के लिए इस्तेमाल करते हाँ... इस रौशनी को खली आँखों से देखने वाला पल भर hi अँधा हो जाता है, रौशनी की पावर इतनी थी, क आँखों को देखने से महरूम तो कर hi देती, पारर सबब से भयंकर जो इसका रिजल्ट था, वो ये था, क आँखों में पीछे इतना दर्द फील होता है क उसे सहन करने की शक्ति किसी इन्सान में नहीं है, वो दर्द से तड़पने लगता है..

मैंने अपने दोनों हाथ आँखों रखते हुए महक को भी ऐसा करने का कह दिया था, मुझे इस रौशनी का एक्सपेरिंस तो नै था, पर मई कोई चांस नहीं लेना चाहता था.

रौशनी फायर हुई तो ब्लैक चश्मे के ऊपर हाथ होने के बावजूद भी मुझे ऐसा लगा, जैसे किसी ने मेरे सर्र के ऊपर 1000 वट पावर का बल्ब रोशन कर दिए हो.. ये रौशनी 10 सेक् के लिए होती थी, 5 सेक् में मद्धम होते हुए ख़तम हो जाती थी..

रौशनी होते हे मुझे गुंडों की भयंकर चीखे सुनाई देने लगी.. उनकी चीखों से ऐसा लगने लगा जैसे कोई उनके गले काट रहा हो, वो भी धीरे धीरे..




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जैसे hi रौशनी गन फायर हुई तो रंगा चीख पड़ा..

रंगा:- अपने चश्मे उतार लो.. और कोई भी आसमान की तरफ न देखा.. इतना बोलते हुए रंगा ज़मीन पर गिर पड़ा.. और अपने चेहरे को ज़मीन में एक हिसाब से गढ़ hi दिया रंगा ने.... रंगा तो सबब जानता था... पर दूसरे इस सबब को सही से समझ नहीं पाए, एक दो ने चश्मे उतार कर एक दूसरे को देखा, बाकी चश्मे लगे हुए hi एक दूसरे को सवालिया नज़रों से देखने लगे.. रंगा ने ऐसा क्यों कहा..

जल्द hi सभी को पता भी चल गया क रंगा ने ऐसा क्यों कहा था....

अचानक से hi आस्मां से रौशनी बरसने लगी, इतनी शदीद रौशनी जैसों हज़ारों सूरज उनके सर्र पर उतर आये हों.. किसी में भी रौशनी को सहन कर पाने की शक्ति नहीं थी.. सभी को ऐसा लगने लगा,. जैसे कोई उनकी आँखों में पिघले हुए लोहे की सलाखें उतार रहा हो, सभी नीचे गिर कर माहि बे अब की तरह तड़पने लगे....

रंगा ने अपना इंतेज़ाम तो बढ़िया किया था, पारर वो भी अँधा हो चूका tha,itni रौशनी उससे भी बर्दाश्त नै हुई थी.. उसे दर्द तो कम् हुआ था, पारर वो देखने लायक नहीं रहा था,....

दन्न फोन पर चीख रहा था, उसे भी अपने गुंडों की चीखे सुनाई दे रही थीं.. कोई भी दन्न को जवाब देने की हालत में नहीं रहा था..




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भयंकर रौशनी ख़तम हुई तो मैंने हाथ हटा कर ब्लैक चश्मा भी उतार दिया.. महक भी चश्मा उतार रही थी..

महक:- इसकी रौशनी तो कुछ ज़यादा hi थी.. मैंने पहले भी ऐसी लाइट गन को देखा है, पारर इतनी खतरनाक पहले कभी नहीं देखि..

vijay:-chalo अब्ब उन्हें दहकते हाँ........ हम गाडी की तरफ वापिस आये.. गाड़ी में बैठे, उसे स्टार्ट किया और गुंडों की तरफ बढ़ गए...

जब हम वहां पोहंचे तो कुछ गुंडे अभी भी तड़प रहे थे, तो कई सहन न कर पाते हुए बेहोश हो चुके थे..

महक:- मुझे दन्न के कुत्तों को ज़िंदा छोड़ने की आदत नहीं है, मुझे इन सबब को मारना पड़ेगा.. बहुत दिनों से हाथो में खुजली हो रही है, मिटाये बगैर मुझे चैन नहीं आएगा..

मई महक को मुस्कुरा कर देखने लगा.. महक ने अपनी साइड का शीशा निचे किया और महसीने गन से गिरे पड़े गुणतां पर गोलियां बरसाने लगी..

एक एक करके महक ने सभी को मार दिया... हम वहां से जाने वाले थे, क महक की नज़र एक गुंडे पर पड़ी जो बाकी गुंडों से अलग पड़ा हुआ था, वो आँखों पर हाथ रखे हुए था..

महक:- विजय गाडी रोकना. और वहां कुछ मैट बोलना ज़रूर दन्न किसी से राब्ते में hoga..use हमारे कनेक्शन का पता नहीं चलना चाहिए.... मैंने गाडी रोकी तो महक नीचे उतर कर आखरी गुंडे की तरफ बढ़ गई..

मई भी महक से थोड़ा सा hi पीछे था.. महक ने मुझे गाडी की रौशनी उस गुंडे की तरफ मारने को कहा... मैंने गाडी तो नहीं घुमाई, गाड़ी क अंदर से टोर्च निकाल कर उसे ों किया और महक को दे दी..

महक ने मुझसे टोर्च लेकर उसे गुंडे के चेहरे पर मारा.. और फिर उसे देखते hi वो उछाल पड़ी....

महक:- वाह वाह क्या बात है दन्न का पलटो कुत्ता रंगा मेरे सामने ज़मीन पर लेता एड़ियां रगड़ रहा है...

रंगा भी जान गया क महक उसके पास hi है.

ranga:-(ankhon पर हाथ रखे हुए hi) मैडम हमारा क्या कसूर है, हम तो बॉस के आर्डर को फॉलो कर रहे थे.. हम आपको मारने तो नहीं आये थे..

महक:- chich..chich..chich..chich.... महक रंगा का मज़ाक उड़ाते हुए.... वाह रंगा दन्न के आर्डर को फॉलो कर रहे थे.... कुत्ते जो ठहरे तुम दन्न के, तलवे तो उसके चाटोगे hi..

रंगा:- मैडम आप कुछ भी कह len..hamari औकात hi कितनी hai..ranga नमक हलाली शो करते हुए बोलै

महक:- ये तुमने सही कहा रंगा, तुम्हारी औकात hi क्या है, तुम तो कुत्ते हो दन्न के.. और दन्न के कुत्तों की औकात हो भी कैसे सकती है... गन्दी नाली के कीड़े हाँ सबब के सबब, और दन्न खुद भी तो कुत्ता है, साला मादरचोद..

दन्न भी महक की बातें सुन रहा था.. वो चीख पड़ा..

दन्न:- (चीखते हुए) mehakkkkkkkkkkkkkkkkk तुम अपनी साड़ी हदें भूलती जा रही हो..

महक को भी दन्न की आवाज़ सुनाई तो वो ख़ुशी ख़ुशी रंगा के पास मौजूद फोन को उठा कर दन्न से बात करने लगी.

माहक:- क्या बा है दन्न को तो बड़ा एक्टिव निकला, मई अभी दिल्ली पोहंची भी नहीं और उसके कुत्ते मेरे पीछे पद गए.. मान गए दन्न तुम्हे..

दन्न:- महक मैट भोलो क तुम मेरी बेटी हो.

महक:- बेटी, थूऊ है तुमपर अपनी hi बेटी को सेक्स ड्रग्स दे दिए, कोई बाप ऐसा भी करता है क्या. अपनी hi माँ और बीवी को किसी और से चुड़ते देख कर भी शर्म नहीं आती, और अब्ब अपनी बेटी को भी किसी के सामने नंगा करना चाहते ho..DNN मई अब्ब तुम्हरी बेटी नहीं रही.. और एक बात, अब्ब जल्द तुम्हरा साम्राज्य ख़तम होने वाला है, जल्द hi मैं तुम्हारा नाम ो निशाँ मिटा कर लोगों के सरों से तुम जैसे शैतान का साया ख़तम कर डोंगी.. बास कुछ दिन की ज़िन्दगी और जी ले...

दन्न:- बहुत बोल चुकी तो, मुझे कोई शोक नहीं है तेरी छूट में आग लगाने का, और न hi मैंने कभी सोचा था क तेरी छूट में अपना लुंड डालूंगा.. पारर अब्ब तुमने मुझे मजबूर कर दिए है, अब सबसे पहले मई hi तुम्हारी छूट की सील खोलूँगा.. और मेरा हक़ भी है, तू मेरे hi लुंड की वजा से इस दुन्या में आई है, तो पहले मई hi तुम्हारी छूट की ओपनिंग करुगा.. अब्ब तुम बच सकती हो तो बच के दिखाओ मुझसे, जहाँ जाओगी तुम मुझे पाऊँगी.. जल्द hi तुम मेरे लुंड के नीचे होगी..

महक को एक बार तो शॉक लगा पारर फिर वो पागलों की तरह से हस्सन लगी..

महक:- दन्न मेरा भी एक वडा है तुझसे, तेरा लुंड मई hi काटूंगी, बड़ा मान रहा है ना तुझे अपने लुंड par,apni पावर पर, जल्द hi तेइ पावर ख़तम होने वाली है, और तेरा लुंड तो मई थोड़ा थोड़ा करके काटेगी, लुंड काटने में तो मई वैसे hi स्पेशलिस्ट हों.. एक लुंड को दर्जनों लुंड में तब्दील करना मुझे बहुत अच्छे से आता है.. कोई शक हो तो अपने आदमियों से पूछ लेना.. अब्ब कही और जा के भोंक मेरे पास तेरी बकवास सुनने क लिए टाइम नहीं है..

इतना बोल कर महक ने फोन ज़मीन पर खेंच मारा और फिर उसे अपने पैरों से कुचलने लगी...

देखा तुमने विजय कैसा था मेरा बाप, हरामी साला कुत्ता बास्टर्ड... मैं उसे सिस्का सिस्का कर मारोगी..

विजय:- अब्ब इस रंगा का भी कुछ कार्डो.. एक अंधे को ज़िंदा रख कर क्या करना है हमें..

महक:- विजय तुम्हे पता है, मेरी माँ रंगा के लुंड की बहुत बड़ी फैन है.. बहुत उछाल उछाल कर रंगा का लुंड अपनी छूट में लेती है... बहुत बड़ी रंडी है साली कुत्तिया.. किसी दिन मई उनकी छूट को hi चीयर डालूंगी... न रहेगी छूट.. न hi वो किसी के आगे उसे खोल के लुंड ले पाएगी..

इतना बोल कर महक ने महसीने गन की बची हु सभी गोलियां रंग के लुंड पर चला दीं.. रंगा अँधा तो था hi अब्ब मरने से पहले वो नामर्द भी हो चूका था..

कुछ देर बाद हम फिरसे गाड़ी में बैठे अपने ठिकाने की तरफ बढ़ रहे थे...




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अपडेट ::: 102


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हम ठिकाने पर पोहंचे तो महक कुछ भी बोले अंदर घुस गयी फ्रेश होने क लिए.. पुरे रास्ते महक खामोश hi रही थी..

दन्न जैसा भी था..

था तो उसका बाप hi, जैसी सोच दन्न महक क बारे में रखता था, महक के लिए उसे सहन करना आसान नहीं था, दन्न की बातों ने महक को बहुत अपसेट कर दिया था..

महक ने अपने hi खून से बग़ावत करदी thi...apne hi खून से दुश्मनी करना, फिर अपने hi खून को इस दुन्या से हमेशा क लिए मुक्त कर देने का सोचना.. बहुत बड़ी बात थी...

महक से मेरी फ्रेंडशिप तो थी, पर मैं अभी महक के दर्द को पूरी तरह से नहीं बाँट सकता था.. अभी हममे कुछ फासले थे.. महक आम लड़कियों से हट कर थी..

और जैसे बातें महक ने दन्न से की थी. ऐसी बातें तो मई भी कभी किसी से न करून.. महक एक अलग दुन्या की बासी थी.. उसे उसके हिसाब से hi हैंडल करना पड़ेगा..

मेरे दिल में अभी महक के लिए दूसरी फीलिंग नहीं आई थीं.. महक का ऐटिटूड भी किसी क अंदर फीलिंग्स को जागने नहीं देता था.. महक का ऐटिटूड मर्दो जैसा था.. या किसी खूंखार दरिंदे जैसा..

महक की फिगर को देख कर इमेजिन करते हुए लुंड तो खड़ा किया जा सकता था, पारर दिल की फीलिंग्स अभी नहीं जाएगी थी..

महक फ्रेश होकर आई, तो उसके चेहरे पार्स पहले वाले भाव ख़तम हो चुके थे. महक तोअतालली फ्रेश थी..

महक मुझे देखने लगी और मैं महक को..

महक:- विजय होता है ऐसा भी, होते हाँ कई ऐसे लोग, जिनकी औलाद अपने पैदा करने वळून की दुश्मन बन्न जाती है.. मई दुन्या में अकेली तो नहीं हों, और भी कई होंगी या होंगे मेरे जैसे, मुझे वक़्ती तौर पर ग़ुस्सा आता है, फिर मई जल्द hi नार्मल भी हो जाती हों..

विजय:- हाँ वो तो मैं देख hi रहा हों.. पहले जैसा अब्ब कुछ भी नहीं दिख रहा तुम्हारा चेहरा पर..

महक:- अब्ब मुझे जल्दी से पैलेस जाना है, मई सबब से मिलने क लिए बहुत बेचैन हों..

1 घंटे बाद हम फिरसे पैलेस क लिए निकल रहे थे.. महक का और खुद का हल्का सा चेहरा चेंज किया था.. हमें पहचानने वाले मारे गए थे.. तो ज़यादा की ज़रूरत नहीं समझी मैंने.. बाकी का पैलेस में पोहंच महक का चेहरा अच्छे से चेंज कर लूंगा...

और अगर दन्न के हमारे पीछे कुछ और गुंडों को भी लगा दिया है तो वो अब्ब हमें नहीं ढूँढ सकते थे.

9 बजे क करीब हम पैलेस में पोहंचे....

गाडी पैलेस में पोहंची तो सबब को खबर हो गई.. जब्ब हम सिटींग हाल में पोहंचे तो सभी महिला मण्डली वही मौजूद थी..

सबब महक का वेलकम करने क लिए कड़ी हो गईं.. महक भी सबब को देख कर खुश हो गई.

मैंने जाते हुए माँ को महक क बारे में बता दिया था... और माँ ने शायद सबको hi को बता दिया था..

सबसे पहले माँ आगे बढ़ी और महक के चेहरे को चूमते हुए अपने गले से लगा लिया..

माँ:- बहुत hi सूंदर है मेरी बच्ची, भगवन बुरी नज़र से बचाये..

priya:-(maza लेते हुए) हाँ माँ दीदी तो मुझसे भी ज़यादा सूंदर है, वर्ण मई तो समझ रही थी, क मुझसे बढ़ कर कोई सूंदर नहीं है..

प्रिय की बात से सभी हस्सन लगे... माँ के बाद जूही माँ, जूही और कारन आगे बढे... जूही मी ने भी महक को ढेर सारा प्यार दिया, जूही महक से ऐसे मिली जैसे अपनी सगी बेहेन से मिल रही हो.. कारन भी महक के गले मिला..

एक एक करके सभी महक से मिले.. सबब hi जानते थे क महक दन्न की बेटी है, पर कोई भी महक से उस हिसाब नै मिला ..

सबब ऐसे महक से मिले जैसे महक उन्ही में से एक है.. महक इतना प्यार देख कर कुछ िम्प्शनल होने लगी.. माँ ने झट से महक को अपने गले से लगा लिया.. और फिर महक को अपने पास hi बिठा लिए..

माँ:- महक बेटी सच्चे लोग मिले तो मैं को जो ख़ुशी मिलती है उसे सहन करना मुमकिन नहीं होता.. और जब्ब कभी ऐसा मौका आये तो अपने अंदर की फीलिंग्स और खुशियों को दबाना नहीं चाहिए.. तुम्हे देख कर लग रहा है जैसे तुम अंदर से बहुत hi मज़बूत लड़की हो... मज़बूत तो मेरा विज्जू भी बहुत है महक बेटी.. पारर वो भी दर्द में रोने लगता है, मर्द होकर रोटा है.. तुम तो फिर भी लड़की हो.. खुद के दर्द को अपने अंदर दबाओ मैट, मुझे अपनी hi माँ समझो, मुझे तुम्हारे बारे कुछ कुछ पता है, तुम भी खुद को अकेली hi समझती हो न इस दुन्या में... अब्ब से तुम हम सबब में से एक हो...

जूही माँ भी महक को अपनी जूही समझने लगी थी, वो भी महक के दूसरी साइड में बैठ गई और महक को अपने सीने से लगा लिया.. महक के लिए अब्ब खुद कर काबू नहीं रहा था.. वो चाहते कितनी भी मज़बूत थी अंदर से पारर ऐसी सीटूशन में खुद पर कैसे काबू बाटी..

इतना प्यार तो किसी पत्थर दिल को मिले तो वो भी पिछल जाए..

महक तो फिर भी एक फूल थी, ऊपर से उनके खुद पर सख्ती का खोल चढ़ाया हुआ था..

इतना प्यार भरा केमिकल मिलने की वजा से वो खोल धीरे धीरे करके सारा hi पिघल गया और महक ने रेगुलर आंसू बहाने शरू कर दिया..

माँ महक की पीठ को सहलाने लगी.. जूही माँ महक के सर्र को चूम रही थी.. महक जूही माँ क गले लगी रो रही थी...

महक को जूही माँ पहले भी मिली थी, तो महक क दिल में तब्ब से hi हलचल शुरू हो गई थी..




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दन्न अकेला hi अपने कमरे में मौजूद था, उसके सभी दोस्त दिल्ली के लिए निकल चुके थे.. महक से बात करके वो बहुत hi तिलमिलाया हुआ था..

इतना ग़ुस्सा उसे महक पर पहले कभी नहीं आया था.. जितना आज आ रहा था.

दन्न जैसा भी था, पारर वो महक के लिए मैं में चुदाई विचार नहीं लाया था, पारर धीरे धीरे महक के बाद बेहेवियर ने दन्न की सोच को बदलना शुरू कर दिया था.. दन्न को बास इस बात का सबसे ज़यादा ग़ुस्सा था क एक तो महक सबबहार वळून को छोड़ दिया था, दूसरा वो जहाँ भी जाती दन्न और अपने घरवळून को गालियां देने लगती थी.. दन्न के गैंग के आदमी कही भी दीखते महक उसे मार देती थी..

ऐसी बातों से दन्न की सोच बदलते लगी थी.. दन्न से बढ़ आकर ग़रूर किस्मे था, वो भी अब्ब इस बात को अपनी आना का मसला मान चूका था, अब्ब भी दन्न को महक को छोड़ने की चाह नहीं थी, बास वो अपनी बेटी का घमंड खुद से बढ़ा हुआ नहीं देख सकता था..

दन्न ने अपने बच रहे दिल्ली में मौजदू गुंडों को महक के लिए काम पर लगा दिया.. फ़ौरन hi 100+ गुंडों को दिल्ली जाने क लिए भी बोल दिया... उसके जितने भी कनेक्शंस थे दिल्ली में दन्न ने सभी से कह कर पैसों का लालच दे कर या बाद में सपोर्ट देने का लालच देकर उन सभी को भी महक के पीछे लगा दिया..

दन्न अब्ब महक को माफ़ करने के मूड में नहीं था.. कुछ दिनों बाद वो खुद भी तो दिल्ली में जाने वाला था.. पहले जो दन्न दिल्ली के हुए काण्ड की वजा से जाने से कटरा रहा था, अब्ब महक के दिल्ली में होने की वजा से खुद को दिल्ली जाने से नहीं रोक पा रहा था..

दन्न महक को ढूंढ़ने क लिए जल्द से जल्द दिल्ली जाना चाहता था.. बास एक दो दिन में उसके फ्रेंड्स खुद को दिल्ली में सेट कर लें फिर दन्न भी दिल्ली क लिए रवाना होने का प्लान बनाने में लग गया था..




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सभी डिनर के बाद पैलेस के पार्क में चेयर्स पर एक दायरे की शकल में बैठी कॉफ़ी से लुत्फ़ अन्दोज़ हो रहे थे..

महक अब्ब बहुत ज़यादा चहक रही थी.. अभी महक माँ और जूही माँ क बीच में बौठि हुई थी..

माँ hi एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसकी कमी हमेशा इंसान को सबसे ज़यादा रहती है. माँ के प्यार के लिए हर कोई हमेशा hi तड़पता रहता है, महक को ऐसा प्यार कभी नहीं मिला था, महक बहुत खुश थी.

महक सभी को अपनी लाइफ के एडवेंचर्स लाइफ के किस्से सुना रही थी.. और सुनंने वालियां सभी ऑंखें फाड़े महक को देखते हुए उसकी बातें सुन रही थी... जैसी बातें महक कर रही थी, किसी को यकीन नहीं आ रहा था..

महक की बातें और सभी के रिएक्शन देख कर मैंने जूली को एक संस टाइप कर दिया.. संस में जूली को मैंने कुछ इंतेज़ाम करने क लिए कह दिया था.. जूली फ़ौरन hi काम कर लग गई थी..

40 मिंट बाद जूली का रिप्लाई आया क सारा सेटअप रेडी है..

मैं खड़ा हुआ और एक ताली बजाई, महक चुप हुई तो सबका धयान मेरी और हुआ.. सब मुझे देखने अलगे..

विजय:- आप सबब यहाँ से उठें, मैं आपको कुछ दिखाना चाहता हों, महक तुम भी उठो बाकी की बातें बाद में कर लेना..

सब मेरी बात सुनकर हैरान तो हुए. किसी ने कुछ नहीं पूछा, सबब उठ खड़े हुए..

हम चलते हुए पैलेस की बैक साइड में आ गए.. वहां का नज़ारा देख कर सब हैरान रह गए..

गैंग बनाने की त्रय्यारी चल रही थी, तो बहुत सा सामान भी खरीद लिया गया था.. उसी सामान में से किसी को काम में लाते हुए मैंने महक के स्टंट देखने का अर्रंगे करवाया था जूली से कह के..

पैलेस की बैक साइड में 20 फ़ीट ोंचा एक लोहा का पाइप लगा हुआ था.. जो पैलेस की दीवार से 15 फ़ीट बहार था.. बहार भी उसे एक लोहे के रोड से जोड़ा हुआ था..

सेण्टर में रस्सियां लटकी हुई थीं.. महक उसे देखते हुए hi सबब समझ गई, वो मुझे मुस्कुराती नज़रों से देखने लगी..

बाकी सबब ये देख कर बहुत हैरान थे..

विजय:- चलो महक अब्ब इन सब की हैरानी दूर कार्डो..

महक ने एक बार सबब को देखा और फिर भागते हुए लटक रही रस्सियां की तरफ बढ़ी.. रस्सियां ज़मीन से 7 फेट की ऊँचे पर लटक रही थी..

महक जैसे hi रस्सियों के पास पोहंची उसने एक जम्प लगाईं और 8 फ़ीट पर पोहंच कर महक ने दोनों रस्सियों को थाम लिया, महक बहुत स्पीड से रस्सियों की मदद से ऊपर जाने लगी.. ऊपर जा कर महक ने लोहे के रोड को पकड़ लिया और रस्सियों को छोड़ दिया..

महक सबब को देखते हुए रोड को पकडे आगे पीछे झूलने लगी.. महक धीरे धीरे करके स्पीड बढ़ा रही थी...

नीचे खड़े हुए सभी महक को देख कर शॉकेड थे.. टीवी पर तो सभी ने ये सबब देखा hi था.. पारर लाइव में वो सबब पहली बार देख रहे थे..

महक के टैलेंट पर मुझे कोई शक नहीं था, फिर भी महक के नीचे 3 आदमी खड़े थे, अगर नीचे गिरती है तो वो उसे थाम लेंगे..

महक रोड पर झूलती हुई रोड के ऊपर से घूम गई, 2-3 चाकर महक ने रोड के गिर्द लगाए.. फिर वो रोड पर अपने हाथो की मदद से कड़ी हो गई.. महक के पेअर आस्मां की तरफ थे..

लेडीज पार्टी महक को ऐसा करते देख कर हैरान तो थी hi, पर वो सबब दरी हुई भी थी, कही महक गिर ना जाए.. उसे कुछ हो न जाए, कही वो सर्र के बल न गिर पड़े..

महक कुछ देर रोड पर उलटी कड़ी रही, फिर अचानक से hi महक ने रोड को छोड़ा और बगैर किसी सपोर्ट के नीचे ज़मीन की और सर्र के बॉल आने लगी,...

सभी महिला मण्डली ने चीखना शुरू कर दिया, सभी समझ गए क महक का अब्ब कुछ नहीं बचने वाला. जैसे वो नीचे गिर रही है, उसका सर्र नीचे फर्श पर लगेगा और महक का सर्र कई हिस्सों में बैठत जायेगा..

10 फ़ीट पारर आटे hi महक ने अपने हाथ खोले और दोनों रस्सियों को थाम लिया.. एक झटका लगा, और महक रस्सियों पर लटक गई.. फिर महक ने रस्सियों को अपने पैरों में लपेटा और अपने हाथ छोड़ कर फिरसे नीचे झूल गई.. एक बार फिरसे चीखन गूँज गईं..

लेडीज पार्टी ऐसा स्टंट भला लाइव कैसे देख सकती थी.. महक ने कुछ देर सभी को अपने स्टंट दिखाए. सबब को अच्छे से इंटरनैन किया, फिर वो नीचे उतर आई.. सभी लेडीज शॉकेड कड़ी महक को देख रही थी..

वो जान hi नहीं पाएं क ये इंटरनेंमेंट का प्रोग्राम था, या सभी के दिल की धड़कन को रोकने वाला..

महक चलती हुई सभी क पास पोहंची और मुस्कुराते हुए सभी को देखने लगी..

माँ:- महक बेटी तुमने तो मेरे दिल की धड़कन hi रोक दी थी. मई तो समझी थी.

जूही माँ:- क महक अब्ब नहीं बचेगी..

महक मुस्कुराती हुई सब को देखने लगी.. महक को इस सबब में बहुत मज़ा आ रहा था..

विजय:- आ गया आप सबब को यकीन, चलो अब्ब फिरसे पार्क में चलते हाँ, या महक से कहूं क वो कुछ और आप सबब को दिखाए..

सबब:- नहीं नहीं हमें कुछ और नहीं देखना.. हमें महक की एक एक बात का यकीन आ गया है..

मैं और महक हस्सन लगे.. सबब फिरसे पार्क की तरफ बढ़ चले..




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रात सभी बहुत देर तक बातें करते रहे थे.. फिर सबब hi सोने चले गए थे..

महक लाली से भी बहुत अच्छे से मिली थी, लाली को नयी और अच्छी लाइफ के लिए कंजरेटस भी किया..

मेरी आज की रात किसी से चुदाई की रात नहीं थी, आज की रात मैं भी रेस्ट करना छह रहा था..

सूबा मेरी आँख जल्दी खुल गई, माँ पर मेरी नज़र पड़ी तो माँ की निघ्त्य ऊपर हो सुखी थी, माँ ने पंतय तो पहनी नहीं हुई थी, माँ नीचे से नंगी थी, माँ की नाईट उनके पेट तक्क आई हुई थी..

माँ की निघ्त्य को ऊपर देख कर मुझे मस्ती सूजने लगी.. मैं उठा और माँ के पैरों को खोल कर माँ की छूट को चाटने लगा.. मेरा लुंड बिना किसी देरी के खड़ा हो गया था.. सूबा सूबा चुदाई में कितना मज़ा है, वो तो मैं कल hi जान गया था.

माँ कुछ हिली तो ज़रूर, पर उठी नहीं थी.. मैंने भी अपनी निक्कर उतारी. अपनी तीलियों को देखा और फिर माँ की छूट पर अपने लुंड को सेट करते हुए माँ के ऊपर झुक गया. माँ की छूट कुछ तो मैंने गीली कर दी थी, कुछ लुंड के घुसते hi गीली हो जायेगी..

माँ के ऊपर आते hi मैंने अपने लुंड को माँ की छूट में पुश किया तो वो थोड़ा सा अंदर घुस गया.. माँ की भी आंख खुल गई मुझे खुद के ऊपर देख कर माँ खुश हो गई.. माँ ने मेरे चहरे को चूम लिया..

माँ:- विज्जू बीटा सूबा सूबा अपनी माँ पर प्यार आ रहा है..

विजय:- नहीं इस बार माँ पर नहीं अपनी फ्यूचर वाइफ पर प्यार आ रहा है..

maa:-(khush होते हुए) क्या कहा तुमने विज्जू, एक बार फिरसे कहना..

विजय:- यही क मैंने सोच लिया है क पूजा दीदी से शादी से पहले मैं आपसे शादी करूँगा..

माँ:- सच बीटा, ये तो मेरे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी होगी... मुझे भी तुम्हारी पत्नी बनने की बड़ी छह है.. मेरा दिल मुझे बता रहा है, मैं इसी महीने तुम्हारे बच्चे की माँ बन्न जाऊँगी. बास तुम मुझसे जल्दी शादी कर लो..

मेरे सारे दर्द ख़तम हो जाएंगे.. मेरी मांग सालों से सूनी है बीटा..

विजय:- ok मेरी डालरिंग बीवी जी..

माँ बहुत खुश हुई और मेरे चेहरे को अपने हाथो में थाम कर चूमने लगी.. नीचे से मैंने अपने लुंड पर दबाओ बढ़ा कर उसे माँ की छूट में उतरने लगा.. धीरे धीरे करके वो सारा hi माँ की छूट में घुस गया.. माँ की छूट के साइज मेरे लुंड के हिसाब से खुल चूका था, माँ मुझे किश करने लगी और मैं माँ की छूट में लुंड घुसा कर अंदर बहार करने लगा, जल्द hi माँ की किश वाइल्ड होने लगी..

धक्कों की स्पीड बढ़ी, तो माँ की किश करते हुए तेज़ सांस की आवाज़ भी गूंजने lagi..bed की आवाज़ भी बढ़ने लगाई तो तीनो तितलियाँ बीएड की आवाज़ से उठने लगी.. मुझे माँ को छोड़ते देख कर खुश हो गईं और उठ कर बैठ गईं.. और हम माँ बेटे की चुदाई को देखे लगीं..

माँ की छूट ने गरम होना शुरू किया तो माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मुझे तेज़ धक्के मारने का कह दिए.. मैंने भी माँ की छूट में अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी.. कुछ देर में hi माँ की सिसकियाँ तेज़ हो गए..

अगले 5 मिंट में मैंने माँ को पूरी स्पीड से छोड़ा माँ की छूट ने पानी छोड़ दिया.. तो माँ ने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया... माँ ने मुझे तीनो की तरफ इशारा कर दिया..

मैं माँ का इशारा समझ गया.. एक बार तीनो की छूट मारने क बाद मैंने फिरसे तीनो को नहीं पूछा था.. अभी मेरी और माँ की चुदाई देख कर तीनो फिरसे बेचैन हो गई थी..

मैंने प्रिय को पकड़ कर किश करना शुरू कर दिया.. जहान्वी और श्रुति भी अपनी निघ्त्य उतार चुकी थी. वो मुझसे चुदाई होने का सुन कर खुश हो गई थीं..

प्रिय भी पुरे मैं से अपनी भाई का प्यार पाने लगी, प्रिय मुझे किश में साथ देने अलगी, कुछ देर हमने किश की, फिर मैंने अपनी प्रिय को बीएड पर लिया दिया.

प्रिय बीएड पर लेट कर मुझे प्यार से देखने लगी. प्रिय भी अपनी निघ्त्य उतार चुकी थी..

सूबा सूबा नींद के खुमार की वजा से मेरी प्रिय का चेहरा बहुत चमक रहा था. मैंने प्रिय के पैरों में बैठा तो प्रिय ने अपने पेअर खुद hi खोल दिया अरु अपनी बाहें भी मेरे लिए खोल दें, जो इस बार का इशारा था, क मैं अपना लुंड प्रिय की छूट में दाल कर उसकी बहन में समां जाओ.. मैं अपनी प्रिय को कैसे इंकार कर सकता था..

मैंने अपने लुंड को प्रिय की छूट पर सेट किया एक धक्का मारा तो मेरा लुंड प्रिय की थोड़ी से गीली और टाइट छूट में समता चला गया, मेरा लुंड माँ की छूट के पानी में नहाया हुआ था, तो उसे प्रिय की छूट में घुसने में कोई दिक्कत नहीं हुई, हां मेरी प्रिय को दर्द ज़रूर हुआ था, पर वो सहन कर गई..

मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा लुंड 7" प्रिय की छूट में जा घुसा.. मैं अपनी प्रिय की बहन में समां गया, प्रिय मुझे किश करने लगी, मैंने अपने बाकी के लुंड को भी प्रिय की छूट में उतार दिया, जो सीधा प्रिय की नन्ही सी बच्चे दानी से जा टकराया..

मैं प्रिय को किश करते हुए प्रिय को छोड़ने लगा.. कुछ देर में प्रिय भी वाइल्ड होने लगी.. सूबा की खुमारी भी अलग किसम की होती है..

मैं प्रिय को किश करते हुए अपने लुंड को पूरी स्पीड से प्रिय की छूट में उतरने लगा, प्रिय की टाइट छूट मेरे लुंड की ज़ोरदार दर रगड़ सेह न पाई अरु जल्द hi पानी छोड़ने लगी.. प्रिय ने मुझे किश छोड़ा और सिसकियाँ लें अलगी..

प्रिय:- हाय विज्जू सीईई उफ़ सूबा सूबा hi मज़ा करवा दिया अपनी प्रिय को, और जोरसे मेरे भाई... हममममः माँ

मैं तेज़ी से प्रिय को धक्के मार रहा था, प्रिय अपने निप्पल पकड़ पर खेंचने लगी. प्रिय भी कुछ देर में चीखते हुए झाड़ गई..

जहान्वी को मैंने पकड़ कर कुछ देर किश किया और फिर जहान्वी को भी जम्म कर छोड़ा उसका भी पानी निकल कर मैंने षुरूति को भी ठंडा कर दिया.. सूबा सूबा चारों की छूट मार के मैंने चरों को फ्रेश कर दिया, मेरा लुंड अभी नहीं झाड़ा था, मैंने बीएड पर माँ को देखा तो माँ बीएड पर नहीं थी, माँ बाथरूम में घुसी हुई थी, मैं बीएड से नीचे उतरा और नंगा hi लुंड को हवा में लहराता हुआ बाथरूम में घुस gaya..maa शावर के नीचे कड़ी हुई नाहा रही थी.. मैं माँ के पीछे गया और माँ की गांड की दरार में लुंड घुसते हुए माँ के दोनों दूध पकड़ लिए..

माँ मुझे देख कर खुश हो गई.. माँ ने शावर का प्रेशर कम् किया..

माँ:- मेरे बेटे का लुंड अभी ठंडा नहीं हुआ क्या.?

विजय:- माँ ये आज आपकी छूट में hi झड़ना चाहता है, इसी लिए ठंडा नहीं हुआ..

माँ:- ऐसा क्या.. तो फिर देर मैट करो और अपने लुंड को दाल दो अपनी माँ की छूट में.. वो भी तो हर दुम्म तेरा लुंड लेने के मूड में रहती है..

विजय:- तो माँ अपनी छूट को मेरे लुंड क लिए पोजीशन में लाओ ना..

माँ हस्ती हुई आगे को झुक गई, मैंने माँ के चुत्तड़ो को पकड़ थोड़ा पीछे किया, खुद को थोड़ा सा बेंड किया और अपने लुंड को माँ की छूट पर सेट करते हुए धक्का मार दिया. माँ की छूट कुछ सूख चुकी थी, पारर मेरा लुंड तो मेरी तितलियों की छूट के पानी से सना हुआ था.. मेरा लुंड माँ की छूट में स्लिप होता हुआ आगे जाने लगा.. माँ कुछ और भी झुक गई. माँ ने टोंटी को कस के पकड़ लिया था... मैं माँ की छूट में लुंड डाले धक्के मारने लग, पारर को इस तरह से खड़ा रहने में परेशानी होने लगी..

मैंने माँ को खड़ा किया और अपना लुंड माँ की छूट से निकल कर माँ को सीधा किया..

मैंने माँ को एक पेअर को पकड़ उठा दिया, उसे अपने हाथ में hi रहने दिया.. माँ ने मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट से लगाया, माँ ने मेरे लुंड को नहीं छोड़ा.. मैंने धक्का मारा तो मेरा लुंड माँ की छूट में घुसता चला गया.. माँ ने मेरे लुंड को छोड़ा और मेरे कंधे पर अपने हाथ रख दिए....

मैं इसी पोजीशन में माँ को छोड़ने लगा, धीरे धीरे मेरा लुंड माँ की छूट में सारा hi चला गया..

माँ:- विज्जू बीटा सूबा सूबा चुदाई में कितना मज़ा आता यही ना...

विजय:- हाँ माँ कल भाभी को छत पर छोड़ा था, तो अब्दा मज़ा आया था..

माँ:- तुमने मतली को छोड़ लिया, मुझे क्यों नहीं बताया..

विजय:- कल टाइम नहीं मिला, भाभी तो छोड़ लिया था, सोना आंटी को छत पर कल सूबा खुश कर दिया था, सोएं आंटी क साथ मैंने ओरल सेक्स करके उनको खुश कर दिया था.. वो भी बहुत खुश हाँ मुझसे..

माँ:- बहुत अच्छे विज्जू बीटा, ऐसे hi सभी को खुश करता रह.. सभी बहुत दुखी हाँ अंदर से तेरा थोड़ा सा प्यार प् के सबब बहुत खुश हो जाती हाँ..

मैं देख रही हों, पद्मा और मालिकान भी बहुत खुश हाँ दो दिन से.. उनके साथ भी किया है तुमने..

विजय:- हाँ माँ, अभी दोनों की झिझक कुछ काम की है, लुंड सिर्फ अभी भाभी की छूट में डाला है, आज अगर टाइम मिला तो दोनों को छोड़ डोंगा..

मैं माँ से बातें करते हुए अपने धक्कों की स्पीड भी बढ़ा चूका था, मेरा लुंड अब्ब झड़ने वाला था.. तो माँ भी समझ गई, माँ ने मुझसे और कुछ नहीं पूछा, बास मुझे रिधम के साथ अपनी छूट मारने का पूरा पूरा मौका दे रही थी.. माँ की छूट में पानी छोड़ना शुरू कर दिया.. कितनी जल्दी माँ की छूट से पानी निकलने लगा था..

मेरा लुंड चार्म क करीब पोहंचा तो माँ की सिसकियाँ फिरसे शुरू हो गईं..

माँ:- विजजूउ बीटा मेरा भी फिरसे होने वाला है.. और भी तेज़ तेज़ करो.. पूरा लुंड दाल क्र धक्के मारो.. सीईई अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह

मेरा लुंड के जहदने का टाइम हुआ तो मेरे धक्के माँ से सहन नहीं हुए माँ खड़े खड़े थकने लगी थी, पारर अब्ब किसी और पोजीशन का टाइम नहीं था..

कुछ hi देर में मेरे और माँ के जिस्म ने झटके खाने शुरू कर दिए..

माँ की छूट झड़ने वाला हुई तो माँ ने अपनी छूट को टाइट करलिया, जिस वजा से मेरा लुंड माँ की छूट में फस फस कर जाने लगा.. माँ की छूट के टाइट होने से मेरा लुंड जल्द hi अपना कण्ट्रोल खोने अलग, और एक झटके में माँ की छूट की गहराई में अपना लावा उगलने लगा..

मैं और माँ दोनों hi हांपने लगे थे.. मैंने माँ का पेअर छोड़ दिया और माँ को अपने गले से लगा लिया.. माँ मेरे गले से लगते हुए अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगी ..




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अपडेट ::: 103

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फ्रेश होकर मैंने अपने कपडे पहने और रूम से निकल गया था..

मेरा आज का प्रोग्राम कुछ और था.. मैं अपने रूम से निकला और सीधा पूजा दीदी क रूम में जा घुसा.. रूम अंदर से लॉक नहीं था.. अभी तक्क तीनो hi सो रही थीं.. पूजा दीदी सेण्टर में सो रही थी, रानी लेफ्ट में तो नताशा दीदी राइट साइड में सो रही थी..

मैंने रानी और नताशा दीदी की छूट पर अपने हाथ रख कर चेक किया.. वो अभी भी कुछ कुछ फूली हुई थी.. मेरे हाथ लगाने से उन्हें कुछ दर्द महसूस हुआ, वो कुछ हिली ज़रूर थी पर उठी नहीं..

मैं बीएड पर पूजा दीदी क ऊपर आया, अपने हथु पर वज़न दाल कर उन्हें किश करने लगा, पूजा दीदी बहुत hi मासूम सी सूरत बनाये मीठी सी मुस्कान देते हुए सो रही थी.. शायद वो कोई सपना देख रही थीं.. सपना में ज़रूर वो मुझे hi देख रही होंगी..

मैं धीरे धीरे पूजा दीदी के शबनमी होंटो को पीने लगा, पूजा दीदी ने मुझे नींद में hi रिस्पांस देना शुरू कर दिया.. शायद दीदी खवाब में भी मुझे hi किश कर रही थीं..

मैंने दीदी को किश करना छोड़ दिया, पर पूजा दीदी क होंटो नहीं रुके, दीदी अपने होंटो को चलते हुए मुझे किश करने लगी, मुझे दीदी पर बहुत प्यार आने लगा, दीदी खवाब में भी मेरे लिए तरस रही थी, कितनी चाह से दीदी मुझे प्यार कर रही थी..

दीदी की स्पीड नहीं बढ़ी, वो उसी अंदाज़ में धीरे धीरे मेरे होंटो को पीने लगीं.. मैंने अपने होंठ दीदी के होंटो से अलग कर दिए.. तो दीदी के फेस एक्सप्रेशन चेंज होने लगे, दीदी बुरा सा मोहन बनाने लगी.. जैसे उनसे उनकी मन पसंद चीज़ छीन ली हो किसी ने.. मैंने फिरसे दीदी के होंटो पर अपने होंठ रखे तो दीदी खुश हो गाएं और मेरे होंटो को चूसने लगे..

मैंने फिरसे दीदी के होंटो को छोड़ा तो दीदी फिरसे hi नींद में अपना चेहरा बिगड़ने लगीं..

मैंने दीदी के गालों पर काट लिया, तो दीदी को दर्द हुआ तो उनकी आंख खुल गई, वो मुझे देख कर हैरान नहीं हुई, बास इतना hi कहा..

पूजा:- विज्जउ काटो मैट.. बास मुझे किश करने do.kitna मज़ा आ रहा है तुम्हे किश करने में.

मैंने फिरसे दीदी क गालों को काटा, दीदी ने थोड़े से ग़ुस्से से मुझे देखा..

विजय:- दीदी क्या खवाब देख रही हो... मेरी बात सुनकर दीदी मुझे कुछ हैरत से देखने अलगी.. वो अभी भी उसी कंडीशन में थीं.

मैंने दीदी क ऊपर से उठा, उन्हें अपनी बहु में भरा.. और फिर ऐसे hi उठाये हुए उन्हें बाथरूम में ले गया.. वहां पोहचते hi मैंने दीदी को खड़ा कर दिया,

दीदी अब्ब तक्क खवाबो की दुन्या से बहार आ चुकी थीं.. वो बहुत हैरान हुई थें मुझे अपने सामने देख कर, वो जिसे खवाब समझ रही थी, वो हक़ीक़त था..

विजय:- हैरान होना छोड़ें और जल्दी से फ्रेश होकर बहार आएं, आज हम बहार घूमने चलते हाँ...

पूजा दीदी मेरी बात सुनकर खुश हो गयी.. मैंने कपडे पहने हुए थे कहीं भीग न जाएँ, इसलिए मैं बहार आ गया..

मई रूम से भी बहार आ गया, सिटींग हाल में बैठ कर दीदी का वेट करने लगा.. आधे घंटे बाद दीदी मुझे आते हुए दिखें.. दीदी बहुत खूसबसुरत दिख रही थी, मेरे साथ बहार जा रही थी, तो अपना बेस्ट साड़ी ब्लाउज पहना हुआ था, थोड़ी देर में hi वो किसी हूर से कम् नहीं दिख रही थी...

दीदी:- विज्जू आज तुम क्या सूजी, जो मुझे घूमने का मैं बना लिया..

विजय:- दीदी कभी आप के साथ कहीं बहार नहीं गया ना, मैं तो जाने कब्ब से था, पारर पहला कभी टाइम नहीं मिला.. वैसे आप खवाब में मेरे साथ क्या कर रही थी..

पूजा दीदी शर्मा गईं..

दीदी:- तुम सबब समझते तो हो, फिर क्यों पूछ रहे हो..

विजय:- वैसे आप खवाब में मुझे किश बहुत hi प्यार से कर रही थी..

दीदी:- किश तो मैं तुम्हे हर बार hi प्यार से करती हों.... दीदी मुझे ऑंखें दिखती हुई बोली.. अब्ब उनकी शर्म धीरे धीरे कम् होने लगी थी... कोई आस पास नहीं था, तो वो अपने रंग में वापिस लौटने लगी थीं..

विजय:- हाँ ये तो है.. इतना बोल कर मैंने दीदी को अपनी बहन में भर लिया... दीदी फिरसे कुछ शर्मा gai....jabse शादी की बात हुई थी, उनके रंग भी पल पल बदल रहे थे... मैंने दीदी को गालों पर किश कर दिए, दीदी ने अपनी ऑंखें बंद कर लीं.. मैं दीदी के होंटो पर किस नहीं कर सका, अभी बहार जा रहे थे, जो होंटो पर किश से लिपस्टिक ख़राब हो जाती..

कुछ देर मैं दीदी को अपनी बहन में लिए रहा, फिर हम दोनों hi एक दूसरे की बहन में बहन डाले बहार को चल दिए..

विजय:- दीदी बाइक पर चलें या गाडी पर..

दीदी:- बाइक पर सही रहे गए.. सूबा सूबा बाइक पर जाने में मज़ा आएगा.. ठंडी हवा में बाइक पर जाना, वो भी तुम्हारे साथ, सच में आज बहुत मज़ा आने वाला है...

मैंने बाइक ली और दीदी को बाइक पर बिठा कर पैलेस से बहार निकल गया..

दीदी अपने दोनों पेअर दोनों साइड में करके मेरे बीचे बैठी थी. दीदी ने अपने बूब्स मेरी पीठ से सताए, अपनी दोनों बहन मेरे गिर लपेट दीं, दीदी फुल मज़े में थीं, दीदी शर्म और झिझक वाली फीलिंग्स में नहीं थीं.. अभी कोई उन्हें देख कर छेड़ने वाला नहीं था.. तो वो अपनी फार्म में वापिस आ चुकी थीं..

आज मेरे साथ पैलेस वाली दीदी नहीं, टाउन वाली दीदी बाइक पर बैठी थी.

मैं बाइक को मैं रोड पर दाल दिए, बाइक की टंकी फुल थी, पेट्रोल की टेंशन नहीं थी.. मैंने बाइक को सिटी से बहार भगा दिया.. सूरज निकल चूका था..

मैं बाइक को शहर से बहार ले जा रहा था, शहरी लाइफ तो देख देख के बोर हो गया था. मैंने बाइक को विलेज एरिया में लेजाने का सोचा..

दीदी:- थैंक्स विज्जू मज़ा आए गया, आज पहली बार मैं तुम्हरे साथ ऐसे बाइक पर बैठी हों, 2-3 बार अपनी एक फ्रेंड के साथ बाइक पर घूमी हों, उसके बाद सालों बाद आज बाइक की सवारी का मज़ा ले रही हों.. थैंक्स तुमने मुझे फिरसे वही दिन लौटा दिए..

विजय:- ये मैंने आपके लिए नै किया ये तो मैंने अपने लिए किया है, मुझे भी तो ऐसी लाइफ जीनी है.. प्यार तो मेरे लिए अब्ब आम हो चूका है.. अब्ब मुझे उसी प्यार को भरपूर तरीके से पाना है.. एक एक के प्यार को पुरे मैं से महसूस करना है..

दीदी:- हाँ ये तुमने सही कहा.. मेरा भी कुछ ऐसा hi मैं है.. प्यार के सारे रंग hi हमें देखने चाहिए.. डिफरेंट पल्सेस पर घूमने से अंदर के रंग भी बहार आने लगते अहं, एक hi जगा पर रहने से वो रंग अंदर कही डब्ब कर रह जाते हाँ.. जैसे आज तुम मुझे बहार लाये हो तो मुझे सबब बहुत अच्छा लग रहा है.. तुम्हारा साथ भी है, तो मुझे बहुत मज़ा मिल रहा है.

विजय:- अब्ब कैसे फीलिंग्स ा रही हाँ, भाई वाली या लवर वाली..

दीदी:- भाई वाली अब्ब कहाँ रही, अब्ब तो साड़ी फीलिंग्स लवर वाली hi रह गईं हाँ..

विजय:- दीदी कहाँ ले जाओ आपको..

दीदी:- विज्जू पहले कहीं मुझे रोड पे किसी ढाबे पार्स नाश्ता करवाओ, मेरा बड़ा मैं हो रहा है, कुछ हट के करने का.. पहले कभी ऐसे किसी का मज़बूत सहारा लिए कभी निकली नहीं ना, तुम्हरे रहते मुझे बहुत सुकून hai,to ये समय मई बहुत खुश गवार गुज़ारना चाहती हों.. दो तीन जगा पर रुक कर हम थोड़ा थोड़ा खाएं पिएंगे.. अब्ब निकले हाँ तो 3 घंटे से पहले मई तो वापिस पैलेस नहीं जाने वाली... मैंने एक चित लिख कर रानी और नताशा क लिए छोड़ दी है.. किइस को कुछ बताने की ज़रूरत भी नहीं है...

विजय:- वाह ये भी खूब रही.. बहार जाने का सुनते hi आपका दमाग भी चलने लगा..

मैंने चश्मा लगे हुआ था, तेज़ रफ्तारी की वजा से दीदी के बाल हवा में लहरा रहे थे.. दीदी ने चश्मा नहीं लगाया था.. उन्हें हवा से कोई पेरशानी भी नहीं हो रही थी..

मेरे कंधे पर वो अपनी चीन टिकाये हुए मेरे अपनी बौहन में कैसे हुए वो सामने hi देख रही थी. दीदी इस सबब को भरपूर एन्जॉय कर रही थी..

हमें पैलेस से निकले हुए 20 मिंट होने वाले थे..

दीदी:- मैं भी तो कबसे ऐसा hi कोई मौका चंद रही थी, अकेले में तुम्हरे साथ टाइम बिताने क लिए.. थैंक्स जो तुमने मुझे वो टाइम दे दिया.. विज्जू सूबा की ठंडी हवा कितनी सुकून दे रही है ना..

विजय:- हाँ दीदी सूबा की ठंडी हवा बहुत मज़ा दे रही है.. आप जो मेरे साथ हाँ, तो इस सबब का मज़ा भी कुछ बढ़ गया है.. वर्ण तो हमें खुल कर इस सबब को एन्जॉय करने का टाइम hi नहीं मिला..

कुछ आगे मुझे एक रोड किनारे नाश्ते वाला दिखा तो मैंने बाइक स्लो करदी.. दीदी ने भी रोड किनारे छोटे से ढाबे को देख चुकी थी, दीदी मचलने लगी..

दीदी:- हाय विज्जउ यही रोड पर बैठ कर नाश्ता करने में कितना मज़ा आएगा, मेरे मोहन में अभी से hi पानी आने लगा है...

मैंने बाइक साइड में करके रोक दी.. दीदी झट से बाइक पार्स उतर गयी..

didi:-(kisi बच्ची के जैसे मचलते हुए) विज्जू मुझे इस ढाबे वाले के पास से बहुत बढ़िया से खुशबु आ रही है.. चलो जल्दी करो.. मुझसे नहीं रहा जा रहा..

मैं दीदी को ऐसे खुश खुश देख कर मुस्कुराने लगा.. मैंने दीदी का हाथ पकड़ा और ढाबे वाले के पास जा पोहंचा.. वहां 4 लोग और भी थे.. ढाबे वाले ने हमें देखा, उसके के पास एक लड़का भी था, ढाबे वाला खुद hi हमारी तरफ आ गया..

ढाबे wala:-(ladke को आवाज़ लगते हए) राजू बीटा वो टेबल साइड में लगा dena..(fir हमसे) जी बीटा क्या सेवा करूँ मई आपकी.

दीदी:- चाचा जी आपके पास से मुझे बहुत मस्त खुशबु आ रही है.. ज़रूर कुछ तो खास है आपके पास.

चाचा:- हाँ बिटिया रानी, तुम्हरी चची ने ये सबब बनाया है, तो मस्त खुशबु तो आएगी hi...

दीदी:- वाह चची बनती हाँ, फिर तो ज़रूर सबब बहुत मज़े का होगा.. क्या क्या है आपके पास खाने क लिए..

चाचा ने सबब बताया तो दीदी क मोहन में कुछ ज़यादा hi पानी आने लगा. दीदी चटखारे लेने lagi..paani तो मेरे मोहन में भी आने लगा था..

didi:-(uchhalte हुए) चाचा जी सबब थोड़ा थोड़ा ले आएं मुझे सबब टास्ते करना है.. बहुत सालों से इस सबब के लिए मेरा मैं बहुत मचल रहा था.... मैं और चाचा दीदी की बात पर हस्सन लगे..

मैं और दीदी टेबल के गिर्द राखी चेयर्स पर बैठ गए..

मैंने दीदी को देखने लगा, दीदी मुझे न देखते हुए चाचा जी को देख रही थी, जो एक ट्रे में सबब सजा रहे थे, दीदी अपनी जीब अपने होंटो पर फेरने लगीं, दीदी से रहा नहीं जा रहा था, वर्ण वो यहाँ से उठती और झपट कर वो ट्रे अपने हाथ में लेती और झट से टेबल अपर वापिस आ कर उस पर टूट पड़तीं..

चाचा जी ने भी शायद दीदी की बेताबी नोट कर ली थी, वो भी जल्दी hi सबब ट्रे पर रखने लगे.. जब सबब होगया तो खुद hi ट्रे लेकर हमारे पास आ गए..

जैसे hi चाचा ने ट्रे टेबल पर रखा तो लड़का पानी का जग और दो ग्लास भी ले आया.. हमें तो एक hi गिलास चाहिए था.. खैर कोई बात नहीं..

चाचा और लड़का चले गए तो दीदी ट्रे पर झुक कर सभी खाने की खुशबु लेने लगी.. सूबा सूबा चटपटे नाश्ते की खुशबु थी hi बहुत मज़ेदार.. मेरे तो मोहन में hi पानी भरने लगा था.. दीदी कुछ देर खुशबु को अपने अंदर उतरती रही, फिर मुझसे पूछे बिना hi सबब पर टूट पडी..

2-4 निवाले लेने क बाद दीदी ने भरे मोहन से hi मुझे खाने क लिए कहा, मैं भी हस्ता हुआ नाश्ता करने लगा...

हर चीज़ hi बहुत आला थी, कहने में बहुत मज़ा आ रहा था.. हम दोनों hi चटखारे लेते हुए खाने लगे..

दीदी सीई सीईई करते हुए फटाफट खाने में लगी रही...

नाश्ता करने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.. ऐसी जगहों पर खाने से किसी 5 स्टार होटल में से बढ़कर मज़ा आता है..

दीदी ने कहा था क रास्ते में रुक रुक कर थोड़ा थोड़ा करके जगा बदल बदल कर खाएंगी.. पारर जैसा नाश्ता उनके सामने ला कर दीदी तो किसी और तरफ धयान दे hi नहीं सकती थी, दीदी पूरा मज़ा लेते हुए पेट भर कर खाने में लगी हुई थीं..

नाश्ता में saag(spanich) था, दो किसम की चटनी थी, जिसका टास्ते कमाल का था. सलाद था, मक्की की रोटी भी थी, रोग़नी नान भी था, तो कैसे दीदी कही और ध्यान दे सकती थीं..

दीदी ने कहा था क वो थोड़ा थोड़ा करके सबब टास्ते करेंगी.. पर जैसे वो खा रही थे, जल्द hi पूरी टेबल खली होने वाली थी..

मैं खा कम् रहा था, दीदी को देख ज़यादा रहा था.... दीदी किसी बच्ची के जैसे दिख रही थीं.. कुछ फासले पर बैठे हुए लग भी दीदी को देखने लगे थे, पारर जब मैंने उन्हें ऑंखें दिखाएँ तो वो अपने काम में लग गए थे.. चाचा ने भी उन्हें अपने काम से काम रखने को कह दिया था.. चाचा भी नीस बाँदा था...

20 मिंट लगे नाश्ते में, और टेबल पर रख हुआ सबब hi दीदी के पेट में उतर चूका था... दीदी को तब होश आया और फिर वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी..

मैंने पॉकेट से रुमाल निकल कर दीदी को दिया दीदी ने अपने मोहन को साफ़ किया.

दीदी:- विज्जउ बहुत मज़ा आया है मुझे.. हाय कितने सालों बाद ये सबब खाने को मिला है.. ऐसा सबब खाने क लिए तो कब से मचल रही थी..

विजय:- तो कभी घर पर बना लेना ऐसा hi कुछ..

दीदी:- ऐसा खाना हर कोई नहीं बना सकता विजू, चची के हाथ में बहुत टास्ते है... जैसा चची ने बनाया है, ऐसा हर कोई नहीं बना सकता..

विजय:- तो शादी पर चची को भी बुला लेंगे...

दीदी:- नहीं ना, उन्हें क्यों ज़ेहमत देनी नै, वैसे भी ऐसा खाना कभी कभी खाने में ज़यादा मज़ा आता है...

कुछ देर बैठ कर हमने बाइक पर बैठकर निकल गए,....

इस बार दीदी ने मुझे और भी प्यार से कस लिया था, इस बार दीदी मेरी गर्दन पर हलके हलके किश बी कर रही थी.. दीदी को नाश्ते में मज़ा आया तो दीदी मुझे किश कर अपना मज़ा डबल करने लगी थी

ऐसे hi हम 2 घंटे तक्क घुमते रहे दिर वापसी क लिए मुद गए...

दिल्ली शहर में वापिस से दाखिल हुए तो

दीदी:- विज्जू फिर कब्ब मुझे लेकर जाओगे.. पैलेस में जाने का मैं तो नहीं हो रहा, डिल छह रहा है, ऐसे hi तुम्हे बहन में भर के सारा दिन hi घूमती रहूं... कितना मज़ा आया ना आज..

विजय:- निकलेंगे ना दीदी, बास एक बार सबब ठीक हो जाए, फिर तो रोज़ hi ऐसे घूमने जाया करेंगे..

दीदी:- ी लव यू विज्जू तुम्हारे साथ ज़िन्दगी जीने में कितना मज़ा है ना..

विजय:- मेरे भी तो मज़े हाँ ना दीदी, मुझे भी तो आपका साथ बहुत पायरा लगता है.. अच्छा दीदी मुझे माँ से भी शादी करनी है तो..

दीदी:- क्या, सच में तुम माँ से शादी करने वाले हो.

विजय:- हाँ दीदी मैंने सोच लिया है माँ से भी जल्द hi शादी कर लेनी चाहिए, माँ मेरे बच्चे की माँ भी बनने की खवाहिश दिल में पाले हुए हाँ.. माँ तो पूरी तैयारी कर रही हाँ, वो तो इसी महीने मेरे लुंड से प्रेग्नेंट होने के मूड में हाँ..

दीदी:- हहहहए माँ भी तुमसे चुद के बाकी का सबब भूल गई हाँ, विज्जू तुम्हारा प्यार पाए बिना कोई कैसे रह सकता है, और फिर माँ की कोई भी खवाहिश गलत भी तो नहीं है ना. माँ के दिल की तुम भी फ़ौरन hi सबब मान लिया करो.. माँ को कभी कोई ग़म ना आने दिया करना.. माँ खुश होती हाँ तो कितनी पायरी लगती हाँ ना..

विजय:- हाँ दीदी वही तो सोचता रहता हों, क माँ के लिए सबब से खास क्या हो सकता है, तो मुझे लगा क माँ से शादी करूँगा तो माँ को बहुत बड़ी ख़ुशी

मिलेगी.. माँ भी तो अधूरी हाँ ना.. माँ की मांग हमेशा से hi तो सूनी है, माँ को भी एक मंगलसूत्र की ज़रूरत है..

दीदी:- विज्जू माँ क लिए बहार खतरा है तो तुम माँ से पैलेस में hi शादी करना, कही बहार मैट लेकर जाना माँ को, एक छोटी सी गलती बहुत कुछ बर्बाद कर दिया करती है...

विजय:- हाँ दीदी मैं भी सबब समझता हों, माँ का चेहरा भी बदल कर मैं माँ को बहार ले जा सकता हों, पारर मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता.. जब तक माँ के दुश्मन हाँ मई माँ को कही बहार तो नहीं ले जा सकता..

ऐसे hi बातों में हम पैलेस पोहंच गए...... मैंने बाइक सीधे पैलेस के मैं बिल्डिंग के पास ले कर रोक दी..

दीदी बाइक से उत्तरी और मुझे किश करके अंदर भाग गयी.. मैं भी बाइक साइड में लगता हुआ अंदर जाने लगा...

8 से ऊपर का टाइम हो छुअक था.. अब्ब तक्क तो सब्बने ब्रेकफस्ट भी कर लिया होगा..




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