Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 31 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)



अपडेट :::139


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मनजोत सिंह के फायर बोलने से कोठी में और कोठी एक आस पास बेशुमार गन्स के दहाड़ने की आवाज़ें गूंजने लग पड़ी थी.. मैं सबके बीच में थे, तो फ़ौरन hi कोई एक्शन नहीं ले सकता था.. मनजोत सिंह और उसके बेटे पागल भी थे वो मेरी ग़ुलामी में नहीं आना चाहते थे.. वो कुछ भी कर सकते थे.. वो किसी भी अपने को शूट कर सकते थे....... घर में औरतें hi तो थी.. और औरतों की वैल्यू तो इन सबब की नज़र में पहले से hi जीरो थी..

महक और मैं पूरी तरह से एक्टिव थे.. एक सेकंड का चांस और बाज़ी फिरसे हमारे हाथ में होती..

मनजोत सिंह ने फायर कहा तो मनोज सिंह ने वो मौका हमे दे दिए..

मनजोत सिंह के फायर बोलते hi मनोज सिंह का धयान 2 सेकंड के लिए मनजोत सिंह की तरफ हो गया... उसी मोके का फायदा उठाते हुए महक ने अपनी शर्ट के अंदर कमर पर कैसा हुआ खंजर निकला और मनोज सिंह के पिस्तौल वाले हाथ की तरफ सीधा करते हुए फ़ेंक दिए..

खंजर, चाकू और पिस्तौल तो हमारे पास हमेशा hi रहते थे. हम हालत इ जुंग में थे तो इमरजेंसी के लिए ये सबब हमारे पास hi रहता था.. खंजर सीधा मनोज सिंह की ट्रिगर वाली ऊँगली पर लगा.. मनोज सिंह की वो ऊँगली hi नहीं कटी. पिस्तौल को थामे बाकी की तीनो उँगलियाँ भी आधी काट कर लटक गईं. वो भयनकर आवाज़ में चीखने लगा. पिस्तौल उसके हाथ गिर पड़ा.. महक वही से फ्लिप करती हुई मनोज के पास जा पोहंची, लेफ्ट हैंड से उसके सर्र के बालों को पकड़ कर राइट हैंड से थप्पड़ उसके गाल पर मारने लगी.. महक रुके बिना की मनोज सिंह पर थप्पड़ों की बारिश कर रही थी.. उसके होंठ फटने लगे, उसके गाल फटने लगे, होंटो और गालो से खून बहने लगा....... महक एक स्ट्रांग लड़की थी.. कैसे वो उसके थप्पड़ सहन कर पाते..

जब मनजोत सिंह के फायर बोलने से बहार भरी गन्स के दहाड़ने की आवाज़ें गूंजने लगी थी. तो चीखो पुकार भी मची थी.. गोलियों के चलने से कोई निशाना भी बना था, किस किस को गोली लगी है.. ये तो हम अंदर वाले नहीं जानते थे.. हमे तो बास अंदर मौजूद अपणु की ज़यादा फ़िक्र थी.. और फिलवक्त किसी से कोई खतरा नहीं रहा था... एक पिस्तौल था वो भी मनोज के हाथ से निकल चूका था..

गोलियां चलने से वो भी चीख पड़ी थी.. महक के एक्शन लेते hi मैंने भी चीख कर सबो नीचे लेट जाने क लिए बोल दिए था... मम्मियां और बहने जो मेरे पास थी.. वो सब डर गई थी, वो फ़ौरन hi नीचे लेट गईं.

मनोज सिंह के हाथ से गिरने वाले पिस्तौल को मनीष उठाने लगा तो महक ने एक किक उसके पेट में मार दी.. हम दो hi अंदर थे तो वो कोशिश किये बिना रह नहीं सकते थे..

मनजोत सिंह भी अपने बेटों को कुछ कर गुजरने क लिए बोल रहा था.. लेकिन साले जब चार मैदान में मेरा कुछ नहीं उखड सके थे.. तो फिर अब तो महक भी मेरे साथ थी और फुल मूड में भी आ गई थी..

सबके सेफ हो जाने के बाद मैं भी आगे बढ़ा और मनजोत सिंह के पास जा पोहंचा.'

बहार से गोलियों की आवाज़ें वैसे hi चल रही थीईई..

विजय:- तुम क्या समझते हो मनजोत सिंह.. बहार मौजूद तुम्हारे आदमी मेरे आदमियों पर काबू प् लेंगे..

मनजोत सिंह जो मुझे ग़ैज़ ो ग़ज़ब से देख रहा था.. वो बोलै

मनजोत सिंह:- बच्चे तुम अभी हमारे बारे में सही से नहीं जानते हो.. ये पूरा इलाका hi मेरा है.. और तुम मुझे मेरे hi इलाके में घुलम बनाने चले हो.. तुम कितने भी आदमी अपनी सुरक्षा में लगा लो. तुम यहाँ से बच कर नहीं निकल सकते..

ये पूरा इलाका hi मेरे एहसानो के बोझ टेल दबा हुआ है.. कोई भी मुझे तुम्हारी ग़ुलामी में जाने नहीं देगा..

महक अपने काम में लगी हुई थी.. महक मनोज और मनीष को एक्सपिरे करने में लगी हुई थी.. अंकित और अतुल में ज़यादा दुम्म ख़म नहीं रहा था.. अब अंदर कोई खतरा नहीं रहा था.. महक ने पिस्तौल को भी एक किक मार कर दूर फ़ेंक दिए था..

खली हाथों से hi वो चरों की धुलाई करने में लगी हुई थी.. महक पूरी फार्म में थी.. और उसके मुकाबले पर सब गंदे जैसे जिस्मों वाले पहलवान थे.. सब के सब अनारी थे लड़ाई में.. कुछ कुश्ती के दो पेच जानते थे.. तो खुद को शेर समझे हुए थे.. महक उनकी वही हेकड़ी निकल रही थी.. बहार का शोर तो था hi अब्ब अंदर से भो मनजोत सिंह के शेरोन की चीखों की आवाज़ें सुनाई देने लगी थी..

विजय:- हमे कभी के इलाके से कभी कोई टेंशन नहीं होती मनजोत सिंह.. हम तो खुद किसी के इलाके में घुस कर उसे मार देने के आदि हाँ.. तुम्हारे जितने भी आदमी हमारी राह में रकावट बनेंगे.. वो सब के सब आज मारे जायेंगे.. तुम ने एक बात का धयान नहीं रखा.. तुम्हारे ऐसा करने से तुम्हारे बेटे भी मर जायेंगे.. फिर तो तुम्हारा नाम लेने वाला भी कोई नहीं रहेगा..

मनजोत सिंह:- नहीं मार सकते थे तुम मेरे बेटो को... इतनी सेंस तो मुझमे भी है बच्चे.. तुम मुझे और मेरे को अपनी रंडी माँ के सामने लेजाना चाहते हो न.. उसके सामने hi मुझे और मेरे बेटों को सदा देना चाहते हो ना.. भूल जाओ तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते.. ये सबब एक खवाब hi बनकर रह जायेगा तुम्हारे लिए..

विजय:- आज तक तो कभी ऐसा नहीं हुआ मनजोत सिंह जो मैंने चाहा हो वो पा न सका.. एक नज़र अपने शेरोन को भी देख लो.. (जूली टीम से) चालू करो सबब सिस्टम........ मनजोत सिंह अपने बेटो को देख कर हैरान रह गया.. चीखे तो वो अपने बेटो की सुन hi चूका था.. लेकिन मुझसे बातों पर वो उस तरफ धयान नहीं दे पाया था.. महक ने उन सब की हालत बहुत hi पतली कर दी थी.. मनजोत सिंह भगा भाग अपने बेटो के पास जा पोहंचा..

जो खून में लत पैट फर्श पर पड़े हुए थे.. महक भी उन्हें किक्स मारने में लगी हुई थी.......... महक बहुत ग़ुस्से में थी.. महक का ग़ुस्सा करना बनता भी था..

सालों ने अपने hi घर की औरतों को खतरे में दाल दिए था. खुद को बचने क लिए सब की जान खतरे में दाल दी थी.. अब्ब बहार गोलियों की आवाज़ें भी काम पद गया थी... दो गार्ड्स अंदर आ घुसे..

मैं उनकी तरफ देखने लगा.. वो मेरे पास आये.

1 गार्ड्स:- सर हमने बहुत से आदमियों को मार गिराया है.. नजाने कहाँ कहाँ से और भी लोग आने शुरू हो गए हाँ.. हमारे भी 7 आदमी ज़ख़्मी हो गए हाँ... 2 की हालत ज़यादा ख़राब है.. अब आगे क्या करना है वो आप हमे बता दें.. हम आपके साथ हाँ, यहाँ लड़ कर अगर मरना भी पड़े तो हमे कोई दिक्कत नहीं होगी.. लेकिन बात कण्ट्रोल से बहार भी हो सकती है..

विजय;- कुछ नहीं होगातुम चिंता मैट करो. जल्द hi पुलिस भी फिरसे आने वाली है. वो सबब संभल लेगी.......... मेरे बात करते hi साईरन की आवाज़ें भी गूंजने लग पड़ी थी..

विजय:- तुम दोनों बहार जाओ और जिनकी हालत ज़यादा ख़राब है.. अपनी साथी डॉक्टर्स को भी साथ ले जा कर उनकी ट्रीटमेंट करवाओ.. अगर ज़यादा खतरनाक सिचुएशन है तो फिर उन्हें हॉस्पिटल के लिए भेज दो..

दोनों बहार चले गए.. तो मैंने जूली टीम को सारा सेटअप पीछे वाले पोरशन में सेट करने को बोल दिए.. मनजोत सिंह अपने बेटों के पास बैठा उनका हाल जान रहा था... किस किसका हल वो जनता एक का हल पूछता तो महक दूसरे की धुलाई शुरू कर देती.. वो चीखता तो मनजोत सिंह उसके पास चला जाता.. महक तीसरे को पीटने लगती..........

मनजोत सिंह ने भी पुलिस साईरन और फिर लाउड स्पीकर पर पुलिस की आवाज़ भी सुन ली थी........ अब कोई गन शोर नहीं मचा रही थी.. पुलिस के रहते आम लोग कैसे अब फायरिंग कर रहे थे... अगर गुंडे भी थे तो मनजोत सिंह क लिए पुलिस से तो पन्गा नहीं ले सकते थे...

सामना में मौजूद टेप को निकल कर मैं महक को रुकने को बोल दिए........ मनजोत सिंह और उसके बेटो के मोहन बंद करने ज़रूरी थे. वो किसी के सामने बक भी सकते थे क मैं श्वेता का बीटा हों.. और कोई भी पुलिस वाला नागराज का आदमी हो सकता था.. और फिर ऐसी बात तो मिंटो में hi पुरे सिटी क्या पूरा देश क्या पूरी दुन्या में फेल जाती हाँ....... अभी मुझे इस बात को छुपाना था... नानी वही सूफी पर थी.. बाकी सब को मैंने उनके वाले पोरशन में भेज दिए... जूली की टीम भी उनके साथ चली गई...

जितनी पावर मेरी बढ़ चुकी थी, मुझे पुलिस की किसी किसम की कोई टेंशन नहीं थी.. और फिर यहाँ हुआ काण्ड भी तो सारा मनजोत सिंह का काढ़ा किया हुआ था..

अगले आधे घंटे में पुलिस की करवाई से हम फ्री भी हो गए थे.. मेरे जो गार्ड्स ज़यादा ज़ख़्मी हुए थे.. उन्हें हॉस्पिटल के लिए भेज दिया गया था.. बाकी बचे हुए गॉर्डस कोठी में और आस पास के इलाके में फेल गए थे..

कम भी पोहंच गया था तो मुझसे कहने लगा क मैं सबको ले कर इस इलाके से निकल जाऊं, अवर्ण यहाँ पर हंगामा होता hi रहेगा.. मैंने एक घंटा बाद जाने का बोल दिए.. एक घंटे तक्क कम ने इलाके को खुद के कण्ट्रोल में लेने का कह दिए.. वो कोई और घटना घाट ते हुए नहीं देख सकता था..

मैदा तो ऐसे मांमले को मज़े से उछलती है.. लेकिन इस घटना में मुझे तो मीडिया ने कुछ नहीं कहा.. हाँ मनजोत सिंह और उसके बेटों की बहुत बेइज़्ज़ती की थी मीडिया ने...

मनजोत सिंह हुए उसके बेटों के मोहन टेप से बंद थे.. किसी को भी पुलिस के सामने बोलने नहीं दिए गया था.. पुलिस भी अब्ब उन्हें भूल चुकी थी.. जब तक सिंह परिवार पावर में था.. तब तक इनका दबदबा था. अब्ब तो सब मेरे घुलम थे तो फिर कोई क्यों सिंह परिवार की सुनता..





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इस समाय हम सबब कोठी के पीछे वाले पोस्टिव में थे. मनजोत सिंह और उसके बेटों के मोहन पर लगी टेप अब्ब उतर चुकी थी.. सब के सब मौजूद थे.. जूली टीम भी मौजूद थी... ये हमारे hi गैंग से जुड़े लोग थे... इनकी कोई टेंशन नहीं थी..

सबके सब ख़ास थे.. किसी पर किसी किसम का कोई शक नहीं था..

सामने एक मल्टीमीडिया स्क्रीन लगी हुई थी और पैलेस में मौजूद सभी स्क्रीन पर नज़र आ रहे थे... माँ मेरी बहने पूजा, शुष्मा दीदी सबसे आगे थी..

बाक़िस अब पीछे बैठे हुए थे.... माँ को सबने पकड़ा हुआ था.. और माँ अपनी माँ को देख रो रही थी.. इस बार मनजोत सिंह और उसके बेटे भी टिटकिटी बंधे माँ को देख रहे थे.. माँ के साथ इतने लोगों को देख रहे थे.. माँ के चेहरे पर चमक को देख रहे थे.. माँ के दुःख और दर्द से उनको कोई लेना देना नहीं था...

वो तो हैरान थे क माँ कैसे ऐसे लगे गुज़र रही थी... बहुत बड़ा हाल जो नज़र आ रहा था.. इतने लोग थे जो माँ के लिए रो रहे थे.. वो सबब शॉकेड न होते तो और क्या करते..

नानी भी स्क्रीन के पास कड़ी हुई माँ के चेहरे पर उँगलियाँ चलते हुए आंसू बहा रही थी..... नानी में इतनी हिम्मत नहीं बची थी क वो कुछ बोल सकती... नानी को एक साइड से मैंने और दूसरी साइड महक ने थमा हुआ था.... हमारे पीछे मामियां और बहने भी थी.... जिनकी हालत सही थी वो भी आंसू बहा रही थी.

जो मेंटली कंडीशन में थी. उन्हें अब्ब भी कोई ज़यादा फर्क नहीं पद रहा था....

ट्रीटमेंट के बाद hi वो कुछ सोचने समझने लायक होने वाली थी..

जब कुछ मिन्ट्स तक सब आंसू बहती रहीं तो माँ कपकपाते लबो से, थरथराते बदन से, आंसुओं से भरे चेहरे से टूटे फूटे लहजे में बोलने लगी

माँ:- mmmmmmmm....mmmmmmmmm....mmmmmmmmmmm..mmmmaaaaa

इतना बोल कर माँ झटके खाने लगी. माँ सालों बाद अपनी माँ को देख प् रही थी.. सालों बाद अपनी माँ का सामना कर प् रही थी.. सालों बाद अपनी माँ की हालत देख कर वो अंदर से टूट टी जा रही थी.. अपनी बूढी और लाघर हो चुकी माँ को देख कर उसका कलेजा छलनी हुआ जा रहा था..

माँ तो टूटे फहुते लहजे में माँ लेफ्ट बोल hi गई थी... पारर नानी वो तो कुछ भी नहीं कह पाई.. वो बस कांपते हाथो से माँ के चेरहे को स्क्रीन पर hi टच किये जा रही थी... लम्स नहीं मिल प् रहा था.. पारर दिल को तो तसल्ली मिल रही थी..

नानी का चश्मा भी उतर चूका था.. नानी की आँखों में आंसू इतने थे क वो सही से देख भी नहीं पा रही थी.. लेकिन अपने जिगर के टुकड़े को देखने क लिए तो दिल की आँखों की ज़रूरत होती है.. बहरी आँखों की नानी को क्या ज़रूरत...

माँ जैसे हालत पूजा, priya,jhanvi,shururi और शुष्मा दीदी की भी थी.. नानी ने शायद अभी उनपर धयान नहीं दिए था.. प्रिय बोल उठी.....

priya:-rote हुए) नानी मैं आपकी श्वेता की बेटी, मुझसे बात नहीं करेंगी क्या...

नानी मुझे भी प्यार करो न.. मई भी तो आप के प्यार के लिए तड़प रही हों..

jhanvi.shruti:- हमे भी आपका प्यार चाहिए नानी.. हम भी आपके लिए कई दिनों से रो रही हाँ.. कई दिनों से तड़प रही हाँ..

शुष्मा दीदी:- मौसी मैं हों आपकी शुशी.. देखो मैं भी अपनी दीदी के पास हों.. ज़ालिमों ने हमे एक दूसरे से दूर कर दिए था.. लेकिन देखो मौसी हम फिरसे मिल गए.

पूजा:- नानी मैं भी आपकी हों.. मैं आपके नवासे की पत्नी.. आपके विज्जउ के पत्नी .. आपकी श्वेता की बहु... मुझे भी आपका प्यार चाहिए नानी.. बोलिये ना नानी. हमे आपकी आवाज़ आपका प्यार चाहिए नानी..

सब नानी को हिम्मत दे रही थी.. माँ भी हिम्मत पकड़ रही थी.. आंसू तो थमने वाले थे नहीं...

माँ:- mmmmmm..maaaaaaaaaaaaaaaa...maaaaaaaaaaaaaaaa..maaaaaaaaaaaaa..firse माँ फूट फूट कर रोने लगी... महक और मेरी आँखों में भी आंसू आये हुए थे..

कैसे कोई ऐसी सिचुएशन में खुद पर काबू प् सकता था...

माँ को अपनी माँ और नानी समेत सबको माँ का हाल दिखाना था.. वो मैं दिखा चूका था.. कोई भी सही से बात कर पाने की हालत में नहीं था..

बात तो अब्ब पैलेस में रहते हुए hi सही से हो सकती थी.. जब सब एक दूसरे में समाये हुए होंगे.. मैंने एक और काम करने पहले से hi सोच रखा था..

महक को इशारा करके मैं नानी को स्क्रीन से कुछ पीछे ले गया..

चरों मामियों को भी नानी के पास आने को कह दिया.. जूली टीम को चेयर्स लाने का भी कह दिए..........

कुछ देर में नानी और ममियां चेयर्स पर बैठ गयी.... नानी ममियां और बहने जो होश में थी.... वो सब आंसू बहती हुई मुझे निहार रही थी..

vijay:-(manjot सिंह और उसके बेटों से) जानते तुम सबब औरत की अज़मत क्या है..

जानते हो उसे कौनसा स्थान दिए गया है... औरत के जैसा मुक़ाम तो हम मर्दों के पास भी नहीं है......... औरत माँ की सूरत में हो, तो उसकी अज़मत दुन्या की हर एक चीज़ से बढ़कर होती है.... औरत बेटी की सूरत में हो.... तो घर जो एक कब्रिस्तान के जैसा होता है... वो किसी गुलिस्तां के जैसे महकने लगता है...

अपने खून को अपनी hi बहु बेटियों को को घर में क़ैद कर के रखा हुआ है तुम सबब ने.. अपनी hi बेटियों की इज़्ज़त को दो कोड़ी कर करके रख दिए है तुम सबब ने..

औरत तो उपरवाले के दिए गए इनामों में से सबसे बढ़ कर एक इनाम है.. माँ के रूप में ममता.. बीवी के रूप में उम्र भर की हमसफ़र.. बेटी के रूप में रेहमत..

पर तुम सबब ... तुम सबब किसी गटर में रहने वाले ग़लीज़ कीड़ों से भी बदतर सोच के मालिक हो.... आज से तुम सबब को एक सजा सुनाई जाती है .. आज से तुम सबब की बची साँसे सिर्फ और सिर्फ औरतों की खिदमत करते हुए गुजरोगे.. उनके तलवे chat'te हुए गुजरोगे..

चलो सबब आगे बढ़ो और अपनी अपनी पत्नियों के पैरों पर गिर पदों.. माफ़ी तो तुम सबब के लिए बिलकुल भी नहीं है.. इंकार की सूरत में भयंकर टार्चर के लिए खुद को तैयार समझो......... chaloooooooooooooooo sabbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbb

keeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee sabbbbbbbbbbbbb apniiiiiiiiiiiiii apniiiiiiiiiiiiiiiiii

patttniyooooooooooonnn keeeeeeeeeee pairrrooooooooooonnnnn meeeeeeeeeeeeeeeeeee

baithooooooooooooooooooooooooooooooooooooo.....................................

मैं परइ आवाज़ में चिल्ला उठा...

किसी ने भी ऐसा नहीं सोचा था.. महक के होंटो पर मुस्कान थी तो बाकी सबब आंसू बहाने छोड़ कर मुझे हैरत से देखने लगे......... मनजोत सिंह और उसके बेटे भी पहले तो हैरान हुए......... फिर वो ग़ुस्से में आने लगे...... मनजोत सिंह को छोड़ कर वो चरों अच्छे खासे ज़ख़्मी थे...... लेकिन साले हरामी खुद को औरतों के क़दमों में गिरता हुआ देख कर वो अपने ज़ख़्म भूल गए थे........

सब के चेहरे लाल होने लगे......

विजय:--- अब्ब से तुम सबब की कोई भी बात नहीं सुनी जायेगी.. जल्दी से सब अपनी अपनी पत्नियों के पैरों में गिर कर अपने किये की माफ़ी मांगें, जो नहीं मिलने वाली.. लेकिन तुम सबब आज से यही काम करोगे... यहाँ से जल्द hi फ्री होकर फिर तुम सबब को आगे की जेल में भी जाना है.... चलो अब्ब देर मैट करो.. वर्ण अपने अगले अंजाम क लिए तैयार रहो......... उसी औरत के पैरों में गिरो जिसे तुम अपने जुटे की नोक पर रखते हो.........

मैंने जूली टीम को इशारा कर दिए.. वो आगे बढे और सबको पीछे से थाम कर आगे धकेलने लगे.. वो छह कर भी इस सजा से नहीं बच सकते थे..

माँ और बाकी सबब जो पैलेस में मौजूद थे , वो हैरान तो थे hi लेकिन मेरे ऐसे करने पर वो खुश भी दिखने लगे थे...

यहाँ मौजूद नानी और मामियों ने भला कब कबि ऐसा सोचा था क उनके ज़ालिम पति कभी उनसे प्यार से बात भी करेंगे.. यहाँ तो वो उनके पैरों में गिर रहे थे... वो हैरत में भी थीई.. और दर्री हुई थी.. वो नहीं जानती थी ऐसे मोके पर कैसे रियेक्ट करना है...

सबब मुझे देखने लगी थीई... हाँ पारर मेरी होशमंद बहनो के चेहरे अब्ब ख़ुशी से चमकने लगे थे.. शुक्र है मेरी कोई तो बहन मेटली तौर पर फिट थी...

जल्द hi जूली टीम मेंबर्स ने उन पांचो को उनकी पत्नियों के पैरों में ला फेंका..

वो बैठ तो गए थे.. पर ग़ुस्से में थे और पैरों को हाथ भी नहीं लगा रहे थे.... मैं महक को देखा..... वो भी तो कोई मौका hi ढूंढ रही थी... उसने अपना खंजर जो वहां से उठा लिया था.. फिरसे अपने हाथ में लिया और मनोज के पीछे जा पोहंची....

महक:- मैं किसी से नहीं कहूँगी क वो अपनी पत्नियों के पैरों को हाथ लगाए. किसी का मैं हो तो वो अपनी पत्नियों के पैरों में गिर पर उससे माफ़ी मांग सकता है.. उसके पैरों को चूम सकता है.. खुद क लिए टार्चर को कम् करवा सकता है.. मैं तो बास अपना काम करुँगी..... और एक बात जो मैंने यहाँ किसी को नहीं बताई.'

वो ये है क मुझे तुम जैसे मर्दों के लुंड काटने में बड़ा मज़ा आता है.. तुम पांच हो तो मुझे लग रहा है क कोई एक मुझसे अपना लुंड चिररवा कर hi मानेगा.. दिल्ली में हुई घटना तो तुम सबब भी जान hi गए होंगे.. महक की बात सुनकर वो शॉकेड हो गए...... वो कुछ बोलने वाले थे.. क महक फिरसे बोल पड़ी

महक:- सही समझे तुम सबब....... मई hi वही लड़की हों, जिसने उन लड़कों के लुंड चिररररर दिए थे.. और तुम्हारे सामने श्वेता का बीटा उर्फ़ स खड़ा है.. जिसके सामने पूरा दिल्ली hi सर्र झुकता है..... तुम जैसे तो सिर्फ स का नाम सुनकर hi मूट देते हाँ... क्यों मनजोत सिंह मैंने सही कहा ना....

महक की अब्ब की बात ने उन सब को अंदर से पूरी तरह से hi हिला कर रख दिए था.. पूरा देश hi तो स को जान गया था.. पूरा देश hi तो महक के मरणमे बारे जानता था..

नानी, मामी और बहनो के सामने भी महक गंदे अंदाज़ में बात करने से नहीं हिचकिचाई थी... इस घर की औरतें कहाँ ऐसे बातें सुन सकती थी.. कैसे किसी लड़की को ऐसे अंदाज़ में बात करते देख सकती थी. पहले तो वो महक को हैरत से देखने लगी.. फिर शर्मा कर अपनी नज़रें फेर लीं.....

मनजोत सिंह उसके बेटों की साड़ी हेकड़ी अब्ब निकल चुकी थीइइइइइइ.... स हुए महक की दहशत क्या है. ये वो जान चुके थे...

फिर क्या था............ मनजोत सिंह को छोड़ कर बाकी चरों ने अपने हाथों को और सर्र को हरकत देनी शुरू कर डीइइइइइइ.. उनके हाथ उनकी पत्नियों के पैरों पर पोहंचे और सर्र भी साथ में hi झुकते चले गए...........

महक ने मनजोत सिंह को dekha..wo वही खड़ा था........... महक उसकी जानिब बढ़ी तो तो मनजोत सिंह भी महक की आँखों वो दिल्ली वाली वीडियो में जैसी दरिंदगी देख चूका था.. वो फिरसे देख कर कांपने लगा..... वो भी अपने बेटों में शामिल अपनी पत्नी मेरी माँ की माँ और मेरी नानी के पैरों में जा पोहंचा...... नानी के पैरों को थम कर सर्र झुका कर वो भी नानी के पैरों के दाल दिए...........

कुछ देर ने महक फिरसे चिल्लाई तो सबब के सबब अपनी अपनी पत्नियों के पैरों में रहते हुए hi माफ़ी मांगने लगे.......

 
थैंक्स भाई..!!

मनजोत सिंह और उसके बेटो के साथ ऐसा होना बनता था.. अभी तो ये सबब शुरुआत है.. एक बार विजू का मिशन पूरा हो जाए .. फिर पैलेस में इन सबब को औरत की इज़्ज़त करना सही से सिखाया जायेगा..

लावारिस भी बहुत अच्छी जा रही है...... सबकी भरपूर सुप्परत और प्यार उसे भी मिल रहा है.. राजा का करैक्टर भी सु स्टोरी में बहुत हट के है.. थैंक्स लावरिस को भी रीड करने क लिए.. यकीनन उसे पढ़ के बहुत मज़ा आएगा आपको..
 
थैंक्स..!!

रेपिस्ट लोग कभी सुधरते नहीं हाँ... हालत बदल जाये तो वो डर कर खुद को कुछ समय क लिए रोक लेते हाँ........ रपे भी एक मर्डर है.. दुन्या से जाने वाला तो हर ग़म से निजात प् hi लेता है.. पारर जिस लड़की का रपे हो जाये वो तो मरते दुम्म तक्क तडपती hi रहती है....... इज़्ज़त से बढ़ कर किसी लड़की क लिए कर क्या हो सकता है...

महक अच्छे से रेपिस्ट को सजा देती है.. रेपिस्ट को छोड़ देना उसकी फितरत में शामिल नहीं है
 


अपडेट :::140


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मनजोत सिंह और उसके बेटो ने अपनी अपनी पत्नियों के पैरों को छो कर माफ़ी मांग ली थी...

कोई भी मुझसे या महक से नहीं दर्रा था.. कोई भी मुझसे श्वेता का बीटा समझते हुए नहीं डरा था.... महक ने जब्ब बताया क मैं स और वो वही लड़की है जिनसे दिल्ली में लड़कों के लुंड काट दिए थे..........

स और महक की दहशत पुरे देश में hi फेल चुकी थी.... इसी दहशत के चलते हमारा काम आसान हो गया था... उस देर बार सब सेटअप ख़तम करके सबको दिल्ली के लिए रवाना कर दिए गया था... एयरपोर्ट तक पुलिस भी साथ में गई थी... वो कोई भी ऐसा वैसा नहीं होने देने चाहती थी...........'

शाम के बाद मैं और महक भी अपनी कोठी में आ गए थे.. उस दुखों भरी कोठी में अब्ब कुछ नहीं रह गया था.. वहां माँ की यादें थी. साडी hi दर्द से भरी हुई थी. और मई वहां रह कर दुखी नहीं होना चाहता था.. इसलिए मैं और महक कोठी पर आ गए थे...'




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अगले दिन मैं और महक पुणे की सैर करने निकल पड़े...

रिवर में सफर करते हुए आगे बढ़ने लगे.. कुछ आगे जा कर एक जगा मंज़र हमें बहुत अच्छा दिखा तो महक और मैं एक दूसरे से मिश्रा करके वही बोट को ले गए... वो सारा एरिया सनसन था. हमारे शिव कोई और नहीं था वहां... और व्यू की तो बात hi अलग थी.... यहाँ आ कर मुझे और महक को बहुत अच्छा लगा..

दिन के 11 बजे का टाइम था.. और शाम का टाइम हम दोनों ऐसे hi घुमते हुए गुज़र देना चाहते थे....

बोट को एक ट्री से बांध दिए गया था... एक दरख़्त की छाओं में हम दोनों hi लेट गए थे... महक और मई लम्बी लम्बी साँसे ले रहे थे.. यहाँ की महकती फ़िज़ा में मौजूद खुशबु को अपने अंदर उतार रहे थे.. फ्रेश हवा थी.. धुप थी आस पास लेकिन यहाँ पर गर्मी नहीं लग रही थी... ठंडी छाओं में थे हम..

बहुत hi मस्त और रोमांचिक माहौल था... महक को खेंच कर मैंने अपने ऊपर लाड लिया.. महक भी हस्ती हुई मेरे ऊपर आ गई.... महक मेरी आँखों में देखती हुई मेरे होंटो पर झुकी और एक हल्का सा किश कर दिया..

mehakl:-bohut hi रोमांचिक प्लेस है ये.. ऐसी बहुत से जागों को मई देख चुकी हों. पर अकेले... कोई साथ में नहीं था... अब तो कोई साथ भी है और जो साथ है वो दिल में भी है.. तो मुझे सब बहुत अच्छा लग रहा है..

विजय:- तो सिर्फ इस जगा को यादगार बना दिए जाये.. इस मिटी की खुशबु में एक खुशबु और भी शामिल कर दी जाए.. मई महका की आँखों में देखते हुए बोलै.. महका की आँखों की चमक बढ़ गई.... महक के बदन में एक लेहेर सी उठती हुई मैंने महसूस की.. महक भी इस माहौल में मुझसे प्यार करना चाहती थी.....

कैसे वो इस माहौल को नज़र अंदाज़ करती, कैसे इस माहौल के मुझसे प्यार न करती.. कैसे इस महल में खुद को गुम्म न करती.. महक की आँखों में भी खुमार उतरने लगा... महक इस बार पुरे मूड में झुकी और मेरे होंटो को अपने होंटो लिए किश करने लगे, महक पुरे मैं से धीरे धीरे में होंटो को चूसने लगी..

इस महकते माहौल में महक के महकते बदन की महक को मैं कैसे फरामोश कर सकता था.. महक भी तो दिल से मुझसे समां जाने क लिए तैयार हो गई थी..

कुछ देर की किश ने हम दोनों को भरपूर मज़ा दिए.. हम दोनों hi आगे बढ़ने के लिए बेताब होने लगे, महक क दूध फूल कर मुझे प्यार करने क लिए उकसाने लगे, महका खुद भी तो यही छह रही थी... ये माहौल भी तो महक के लिए पसंदीदा था.. महक को थम कर मैंने पलट दिए और महक के ऊपर आ कर महक की आँखों पर किश कर दिए.. महक ने अपनी ऑंखें बंद कर ली और होंटो पर एक पायरी सी मुस्कान ले आई.. बारी दोनों आँखों को किश करने के बाद मैंने महक के एक गाल को अपने होंटो मर भर लिया और उसे चूसने लगा.. महक सीईईईई कर उठी.. महक में मस्ती बढ़ने लगी तो मैंने महक के दूसरे गाल का टास्ते भी करना शुरू कर दिए.. महक मेरे एक एक सुपर्ष पर, मेरे एक एक एक्ट पर सिसक उठती थी.. महक के गलों को चूमने छूने के बाद मैंने फिरसे महक के होंटो पर आया, फिरसे महक के होंटो को पीने लगा, महक भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी.. महक की उँगलियाँ मेरे सर के बालों में तो मेरा एक हाथ महक के एक दूध को पकड़ कर दबाने लगा. महक को किश करते हुए मैं महक के दूध को भी दबा रहा था.. महक जल्द hi मूड में आने लगी.. महक के दूध कुछ और भी फूलने लगे..

कुछ देर तक किश चलती रहीम फिर मैं महक के ऊपर से उठा और अपने कपडे उतरने लगा, महक मुझे मुस्कुराती आँखों से देखने लगी.... अंडरवियर भी उतर कर मैंने महक को उठा कर बिठा दिए.. मैंने महक की आँखों में देखते हुए महक की शर्ट उतरने लगा..

महक मुझे अब भी एक क्यूट सी मुस्कान दे रही थी... महक की आँखों की चमक आज हमेशा से बढ़कर थी.. आज महक लड़की से औरत बनने जा रही थी, आज की महक की मुस्कान सबसे अलग थी.. एक ख़ुशी थी महक की आँखों में.. साली शेरनी थी.. उसकी छूट फटने वाली थी.. लेकिन उसकी आँखों में डर कही भी नहीं था..

डर नहीं था.. पारर जब्ब उसकी पहात टी तो दर्द के कारन निकलने वाली महक की चीखों से ये पूरा इलाका गूंजने वाला था... नजाने कभी किसी ने यहाँ आ कर किसी लड़की की सील भी खोली थी या नहीं........ शायद हम यहाँ पर चुदाई करने वाले पहले थे...

महक की शर्ट और ब्रा उतर कर , महक को ऊपर से नंगा करके मैंने फिर लिटा दिए..

महक साली अभी मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी... शर्म नाम की कोई चीज़ उसकी आंखों से नहीं छलक रही थी.. हाँ प्यार बेशुमार और खुमार बेशुमार ज़रूर दिख रहा था..

जंगल के माहौल के महक के महकते दूध जैसे रंगत लिए बूब्स नंगे होकर मेरी आँखों को चुंधिया रहे थे... साला कितना मस्त नज़ारा था.. मैं hi नहीं भर रहा था... मैं कर रहा था क महक क बूब्स hi देखता रहूं......... महक ने hi चुकती बजा कर मुझे वापिस जंगल के माहौल में ला डाला..

महक:- क्यों मजनू की औलाद...... पहली बार देख रहे हो क्या......

विजय:- हाँ सही से तो पहली बार hi देख रहा हों.. साली तू कितनी खूबसूरत है. और तेरे मुम्मे भी कितने जानदार हाँ....... महका मेरी बात पर खिखलीअ कर हस्सन लगी..

मैं महक को हस्ता हुआ छोड़ कर नीचे झुका और महक की पंत को उतरने में लग गया.. बेल्ट खोल कर पंत और चड्डी भी उसकी उतर दी.. अब्ब महक मेरी hi तरह से पूरी नंगी थी..... मैं खड़ा हुआ तो मेरा लुंड महक के सामने झूलने लगा..

विजय;- ये नाग आज तेरी छूट को पहाड़ कर रख देगा महक डार्लिंग..

महक:- देखते हाँ कितना दुम्म है इसके.. जो एक शेरनी की फाड़ने वाला है..

विजय:- बहुत होगा महक जब ये तेरी छूट में घुसेगा तो..

महक:- तुम उसकी चिंता मैट करो. दर्द का और मेरा रिश्ता बहुत पुराण है.. मैं सहन कर लुंगी.. तुम अपने काम जारी रखो..

महक और मई फिर हस्सन लगे.... मैंने नज़र दौड़ाई तो दूर मुझे पहाड़ियां नज़र आने लगी.. डाकरख्त बेहिसाब थे... साला कैसे मस्त माहौल में महक की छूट खुलने जा रही थी.. आज तो मेरे लुंड की लाटरी hi निकल पड़ी थी..

मैं महक के मोहन की तरफ हो लिया.. आज महक को भी पूरा पूरा मज़ा देना था.. आज सारा दिन hi महक को इस माहौल में छोड़ने का मैं कर रहा था.. देखते हाँ महक का स्टैमिना कितना है.. कितनी देर तक मेरा लुंड सहन कर पाती है..

महक के मोहन के बराबर अपने लुंड को ला कर मैं महक की छूट पर झुकता चला गया.. महक साली ने भी मेरे लुंड को थाम लिया और दबा दबा कर चेक करने लगी..

मैं महक की छूट पर पोहंचा और महक की छूट के बालों को चूम कर जीब फेरता हुआ महक की छूट पर आ पोहंचा... महक ने मेरे लुंड को कस कर पकड़ लिया.. महक की छूट उबाल रही थी..... महक इस बार मेरे प्यार के लिए.. मुझसे प्यार से छोड़ने क लिए एडवांस में hi गरम हो चुकी थी... थोड़ा सा चुतरस बहार से भी चमक रहा था.. जो गरम था, उस पानी को चाटने में मुझे बहुत मज़ा आया..

महक भी बेक़रार हुई तो मेरे लुंड को चूमती चाट टी हुई अपने मोहन में लेने लगी.. महक को मूड में देख कर मैंने अपनी एक ऊँगली भी थोड़ी सी महक की छूट में घुसा दी.. और जीब से महक की छूट के दाने को, और लिप्स के अंदर के हिस्से को अच्छे से चाटने लगा........ महक बुरी तरह से मचलने लगी.. महक ने मेरे लुंड को थोड़ा सा अपने मोहन में लिया अरु चूसते हुए बाकी के लुंड को मसलने लगी..

3 मिंट में hi महक बुरी तरह से कांपने लगी.. महक की छूट फुल गरम हो कर भाप छड़ने लगी.. तो मैंने सोचा क महक की छूट का पानी लुंड दाल कर निकला जाए.. वैसे तो वो दो बार निकलवा hi चुकी थी.. अब्ब महक को लुंड की सैर भी करवा दी जाये.. मैं महक के ऊपर से उठ गया.. मेरा लुंड महक के मोहन से निकल गया.. तो महक भी सबब समझते हुए मेरे लुंड को छोड़ कर मुझे तरसी हुई निगाहों से देखने लगी.......... ये रंग मई पहली बार महक के चेहरे पर महक की आँखों में देख रहा था..

विजय;- क्यों मेरी जान की बेचैनी होने लगी है..

महक;- बहुत ज़यादा विजय प्लस कुछ करो.. साला प्यार से करने पर भी अंदर का सेक्स दृफ्स एक्टिवटे हो जाता है.. और तुम भी तो बहुत बड़े कमीने हो.. मेरी छूट को ऐसे चाट रहे थे.. जैसे सूबा ब्रेकफास्ट करके नहीं आये..... हाहाहाहा मैं महक की बात पर हस्सन लगा.... महक भी हस्सन लगी..

विजय:- तो फिर तुम तैयार हो मेरे लुंड क लिए.. तुम्हारी छूट भी तैयार है क्या मेरे लुंड को खुद में सामने क लिए,..

महक:- मैं और मेरी छूट दोनों परसो रात से hi बहुत बेचैन हाँ.. अब्ब तो रहा भी नहीं जा रहा, जल्दी से आगे का काम शुरू करो...... साली मेरी छूट ने भी मुझे बहुत तंग किये रखा है.. आज तो मैं इसका बुरा हशर करवा के hi रहूंगी..

hahahahaha...iske साथ तुम्हारा भी हशर बुरा होने वाला है...

महक:- जानती हों, और तुम बातें अब्ब कम् करो..

मैं महक को देखता हुआ महक के पैरों में आ बैठा.. महक ने खुद से hi अपने पेअर फोल्ड कर लिए.. मैं अपना लुंड लिए महक की छूट के बराबर बैठ.. महक के दोनों पैरों को खोल कर साइड में किया.. अपने लुंड को महक की छूट पर सेट करके छूट के लिप्स में फेरने laga..siiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaa अह्ह्ह्हह्हह विजय कितना अच्छा लग रहा ha,kitna गरम लुंड है तुम्हारा.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ बी गॉड अभी से hi नशा बढ़ने लगा है..

कुछ देर महक की छूट क लिप्स में अपने लुंड को रगड़ने के बाद मैंने अपने लुंड को महक की छूट के छेड़ पर सेट किया.. हल्का सा दबाओ बढ़ाया तो मेरा लुंड महक की थोड़ी सी खुली हुई छूट में अंदर जा घुसा.. लुंड का आधा सुपड महक की छूट में था.. मैंने महक को देखा तो महक आने होंटो पर जीब फेर रही थी.. महक की ऑंखें भी पूरी तरह से लाल थी..

छूट में लुंड को फसा रहने दिया.. ऐसे hi मैं के ऊपर आया.. मेरा लुंड महक की छूट ने भी जकड लिया था.. महक मेरी आँखों में देखने लगी.. महक की आँखों में मुझे बहुत ख़ुशी दिख रही थी.. मैं झुका और महक के होंटो को फिरसे अपने होंटो में भर लिया और किश करने लगा.. महक का एक हाथ मेरे सर्र पर तो दूसरा हाथ मेरी पीठ पर ा पोहंचा.. किश करने से मेरे लुंड का दबाओ भी कुछ बढ़ गया था.. महक को किश करते हुए मैंने एक धक्का दे मारा.. मेरा लुंड महक की छूट की सील को भी तोड़ता हुआ अंदर घुसता चला गया......... महक जो कह रही थी क वो मेरे लुंड को सहन कर जायेगी.. लुंड उसकी छूट की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुसा तो महक ने बदले में मेरे होंटो को काट लिया..

छूट के खुलने का दर्द भला कोई सहन कर पाई है.. महक भी सहन नहीं कर पाई और मेरे होंटो को काट गई.... मैंने महक के होंटो से अपने होंटो को अलग किया तो महक की आँखों में आंसू आ गए थे.. हाहाहाहाहा मई हस्सन लगा..

विजय:- क्यों लगा पता.. छूट खुले तो दर्द सच में hi बहुत होता है..

महक भीगी आँखों से hi बोल पड़ी..

महक:- चीखी तो नहीं nnnnnnnnnnnnnnnnnn....... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मररररर gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii saaaaaaaaaaaaaaaaaleeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

महक के बोलते hi मैंने एक और धक्का मार दिए था.. और इस बार का धक्का बहुत hi जानदार था.. महक की पूरी छूट hi पहात टी चली गई थी..... महका बोलते बोलते चीखने लगी थी. आज सैलून बाद उसे भी माँ याद आ गई थी...........

महक मेरे नीचे तड़पने लगी.. मैंने किया क मेरा लुंड अभी भी कुछ बहार है तो सारा hi सारा दर्द महक को एक hi बार ने देने का सोच कर मैंने एक और करारा ढाका दे mara........aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

जंगल के वेरने में महक की भयानक चीख गूँज उठी...... महक से शायद अपनी लाइफ में पहली बार ये दर्द महसूस किया था.. मैं झुका और महक के दूध को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे को मोहन में ले लिया और स्पीड से दबाने और चूसने लगा..

महक:- साआआअआईईए कमीने आराम से नहीं कर सकता था क्या.? अह्ह्ह्ह माआआ

आज तो मैं मररररररररर hi गई थी..... साला मुझे इतना दर्द दे दिए......... अहह

मैं लगा रहा महक के पत्थर जैसे दूध को दबाने और पीने में.. महक भी तड़पते तड़पते मज़े की दुन्या में गुम्मम होने लगी.. महक के सख्त दूध और भी सख्त होने लगे.. जब मैंने महसूस किया क अब्ब महक नार्मल है तो मैंने अपने लुंड को हरकत देनी शुरू कर दी...... महक फिरसे तड़प उठी.. लेकिन इतना दर्द वो आराम से सहन कर सकती थी.. लुंड को हरकत देते हुए मैं लुंड को बहार खेंचने लगा.. फिर सुपड तक बहार खेंच कर फिरसे अंदर करने लगा.. इस आर मेरी स्पीड नहीं थी. इस बार मई धीरे से कर रहा था.. महक की छूट खुल चुकी थी..... तो अब्ब आराम से hi करना था.. जब तक महक फिरसे पूरी गरम नहीं हो जाती..

कुछ देर में hi महक अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्हह uffffffffff अब्ब असली मज़ा शुरू हुआ है.. वर्ण तो पहले मेरा दुम्म hi निकल गया था... साले तेरा लुंड है भी तो लोहे जैसा.......

महक मज़े में क्या हुआ बद्तमीज़ भी हो गई थी... अब्ब महक को असली मज़ा मिल रहा था.. मेरी शेरनी चुदाई के नशे में डूबने लगी थी.. मैंने भी फिर अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी.. दोनों हाथों को साइड में टिका कर महक की आँखों में देखते हुए महक को स्पीड से छोड़ने लगा.. महक भी मेरी आँखों में देखते हुए अह्ह्ह्ह ओह्ह विज्जू और स्पीड से आठ उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ fuckkkkkkkkkk meeeeeeeeeeeee hardddddddddddd

वीजजजजजूउउउउ siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अहह

महक की छूट फिरसे आग बरसाने लगी थी.. महक मज़े में थी पहली अबार चुद रही थी.. महक का दर्द ग़ायब हुआ तो महक मज़े की इन्तहा तक जा पोहंची ..

कुछ hi देर में महक झटके कहते हुए झड़ने लगी... मैंने भी अपने लुंड को महक की छूट से निकल दिए... और नीचे झुक कर महक की छूट वाले हिस्से को अपने हाथों से उठा कर महक की छूट से छलक रहे रस को पीने लगा... ऐसे माहौल में मुझे इस से बढ़ कोई और चीज़ नहीं मिली.. जिससे मई अपनी पियास बुझा सकता...

महक की साँसे तेज़ चल रही थी. और मैं महक की छूट से बरस रहे रास को पीने में लगा हुआ था..

महक पूरा मज़ा पा चुकी थी.. महक की छूट के रस को पि कर मैं भी पूरा मज़ा लेने लगा..





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शाम तक्क महक की चुदाई चली थी... ये भी याद नहीं रहा क महक की छूट ने कितनी बार पानी छोड़ा.. हर बार मैंने महक की छूट के पानी को अपने पेट में उतार लिया था.. 5 बार मेरे लुंड ने भी पानी निकला था.. वो सारा महक पीती रही थी.. हमारी पियास टाइम से hi बुझ रही थी.. भूक हमें लगी नहीं थी..

हमारी बत्त्र्य शाम तक्क हमारा अच्छा साथ दे गई थी.. महक की मैट मारी गई थी.. लेकिन वो भी ऐसे माहौल का पूरा पूरा मज़ा ले लेना चाहती थी.. इसलिए वो दर्द को भूल कर चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ले रही थी... पहले hi दिन महक ने इतनी चुदाई कर ली थी..... क अब्ब उसे एक महीने तक इसकी ज़रूरत नहीं पड़ने वाली थी..

उसकी छूट बुरी तरह से सूज चुकी थी...

जब मैंने महक से कहा था क गांड की सील भी यही खोल डॉन तो महक ने मुझे एक थप्पड़ मेरे कंधे पर मार दिए था.. और हस्ते हुए बोली थी... शादी की पहली रात के लिए कोई तो सील मेहफ़ूज़ रहने दो...................

मई भी महक की बात पर हस्स दिए था.. महक बहुत खुश थी.. बहुत ज़यादा..

खुश तो मैं भी था.. आज एक शेरनी को भी छोड़ दिए था.. वो भी इस तरह से .. ऐसे तो मैं किसी को भी नहीं छोड़ सका था.. महक जितना स्टैमिना भी तो किसी का नहीं था.. चुदाई की बात अलग थी.. लेकिन महक अंदर से और बहार से बहुत ज़यादा स्ट्रांग भी थी.. इसलिए मेरा इतना साथ दे गई थी..

कोठी पर पोहंचे तो बास फिर एक लम्बी रेस्ट.. महक वैसे तो खुद के दर्द को सहन करके चल फिर सकती थी.. लेकिन उसकी छूट को अच्छी खासी रेस्ट की ज़रूरत थी..

आते hi खाना शाना खा कर हम सो गए थे... सूबा उठ कर देखा तो कई मिस्ड कॉल आई हुई थी..

चेक किया तो नागराज की सबसे ज़यादा थी.. महक टांगों को खोले छूट को हवा लगवाए सो रही थी... महक को एक किश करके मैं बाथरूम में घुस गया था..

फ्रेश होकर एक्सरसाइज करने लगा.. आज महक जल्दी उठने लायक नहीं थी.. मैंने भी उसे सोने दिए..

कल पैलेस में वीडियो कॉल करके वहां का भी सबब जान लिया था..... पैलेस पूरा hi दर्द में डूबा हुआ था.. नानी, ममियां और बहने जब पैलेस में पोहंची थी.. तो सबब की हालत बहुत ख़राब हुई थी..

माँ इस बार सहन नहीं कर पाई थी.. माँ बेहोश भी हो गई थी.. लेकिन डॉक्टर्स की बरवक़्त ट्रीटमेंट की वजा से सब कण्ट्रोल में भी आ गया था सब..

नानी और ममियां सब की हालत बहुत ख़राब थी.. एक आज़ाद लाइफ और फिर माँ को अपने सामने पा कर उन सबब की हालत बहुत ख़राब हुई thi..baad में आने वाली मेरी छोटी दो मामियां वो भी उस घर में रहते हुए माँ के बारे में सबब जान गई थीई.. वो भी माँ से ऐसे मिली थी.. जैसे वो सब माँ को बहुत आरसे से जानती हों...

मेरी ज़यादा तर बहने आधी पागल हो चुकी थी. उसका ट्रीटमेंट शुरू हो चूका था.. अब्ब सब का प्यार और रेगुलर मिलने वाली आज़ादी hi उन्हें जल्दी सेहत याब कर सकती थी... सबब एकदुम्म से तो ठीक होने से रहा..

शेखर भी शामिल था.. वो भी अब्ब से पैलेस में पूरी तरह से इन हो चूका था... कल hi शुष्मा दीदी की माँ पिता उनकी एक बेहेन और एक भाई और भी था.. उन्हें भी पैलेस में बुलवा लिया गया था..

ये मंज़र भी बहुत ज़यादा रिक़्क़त अमेज़ रहा होगा.. मैं वो सबब नहीं देख सका था.. मैं महक के साथ बहार निकल गया था..

लेकिन कल शाम आने के बाद पैलेस में फोन कर दिए था.. दर्द इस बार फिरसे सबका बढ़ा था.. फिरसे सब रोये थी. लेकिन इस बार एक दूसरे को हौसला देने वळून की तादाद भी बढ़ गई थी.. पूरी तरह से कोई भी नहीं सम्भला था.. लेकिन फिरसे एक दूसरे को खुद के सामने पा कर बहुत हौसला भी सबब को मिल गया था..

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मैं महक को रेस्ट के लिए छोड़ कर नागराज के एरिया में जा घुसा...

शाम के बाद का समय था.. नागराज बार बार फोन करके मुझे बुला रहा था.. महक का जाना वहां ज़रूरी भी नहीं था.. और वैसे भी अभी उसकी छूट की हालत भी सही नहीं थी.. तो मैं महक को कोठी पर छोड़ कर वहां जा पोहंचा था..

कुछ गार्ड्स मैं ज़रूर अपने साथ लेकर गया था.. वो एक अलग गाड़ी में मेरे साथ थे.. नागराज का इलाका था तो कुछ भी हो सकता था.. बाकी के गार्ड्स भी उस एरिया के अस पास रहने वाले थे.. एक डिवाइस भी मेरे कालर में छुपी हुई थी... मैं कोई चांस नहीं ले सकता था.. कुछ भी गड़बड़ हो सकती थी...

लेकिन गड़बड़ होने का कोई चांस नहीं था... रेडों उसके सबसे बड़े दुश्मन का अंत हो चूका था.. मेरे बाद वो पुणे सिटी के अकेले बेताज बादशाह थे.. और मैं उन्हें ये बादशाहत देने भी जा रहा था... मेरे पास मनजोत सिंह का पूरा परिवार था.. तो वो सबब कुत्ते बने राल तकपा रहे थे.. जो वो चाह कर भी नहीं कर पाए थे.. अब्ब वो उन्हें होता हुआ नज़र आ रहा था.. माँ के बाद नागराज परिवार के दूसरे मर्द मनजोत सिंह परिवार की किसी और महिला को उठवा कर उसका रपे करके अपना बदला नहीं ले सके थे..

वो कुछ भी और न सोचते हुए अब्ब बास अपने बदले क लिए सोच रहे थे.. ऐसे भी उन सब के दिमाग सही से काम करना छोड़ चुके थे.. चुदाई तो उस घर की आम बात थी.. तो सब मिलकर एक एक दूसरे को दबोच कर चुदाई कर लिया करते थे...

इस समय वो कुछ और सोच पाने की हालत में नहीं रहे थे.. और मैं उन्हें और भी कई पैकेजेस दे कर उनकी बूढी को और भी भरष्ट कर देना चाहता था..

मैं वहां पोहंचा तो सबब साले हरामी मेरा ऐसे सवागत करने लगे जैसे मैं उन सब का इकलौता दामाद हों.....

फूलों से हवाई फायरिंग से मेरा सवागत किया गया था... ये मेरा सवागत नहीं था.. ये खुद की होने वाली बर्बादी का एडवांस में hi जश्न मनाया जा रहा था..

नागराज और उसके दो बेटे सबसे पहले आगे बढे.. सबके सबब गेट के अंदर थे.. लेकिन हवेली के अंदर वाले गेट के बहार खड़े हुए मेरा सवागत कर रहे थे...

नागराज मुझसे बड़ी गरम जोशी से मिला.. फिर उसके दोनों बेटे मुझसे मिले.. फिर उनके बेटो के बेटे मिले.... हैरानी मुझे तब हुई जब नागराज की दोनों पत्नियां, फिर नागराज की पोतियां भी मुझसे गले मिलें.. अपने गरम गरम दूध से मेरा सवागत करने लागीयी.. हैरत थी भी और नहीं भी...'

मछली खुद से hi जाल में फँस रही थी... इशिता भी इस बार मुझे मिली.. इशिता का आग बरसता बदन भी पहली बार मेरे जिस्म से मास्स हो गया था.. मुझे देख के उसका घमंड कही सो गया था..

मई अंदर hi अंदर चहक रहा था.. बहार से तो सब दिखावा hi था.. पर वो सबब मुझे अपने सामने अपनी कोठी में पा के बहुत ज़यादा खुश थे..

 


अपडेट :::141


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कुछ देर वही रस्मी बातें हुई फिर मुझे अंदर चलने क लिए कह दिए गया.. साले हवेली के नौकर साइड में हाथ बंधे खड़े थे.. जैसे मैं किसी रियासत का राजा हों.. और मई आया भी किसी राजा के महल में हों..

अंदर ड्राइंग रूम में पोंछे.. ड्राइंग रूम क्या था.. सालों ने मेरे पैलेस जैसा hi सब बनाया हुआ था.. ये भी एक हाल था. अच्छा खासा बड़ा हाल था.. कई लोगों के बैठने क लिए जगा बनाई गई थी..

बहार से दिखने वाली हवेली अंदर से किसी 5 स्टार होटल के जैसी थी.. सुमित्रा ने मेरा एक हाथ थमा हुआ था.. तो दूसरा हाथ नागराज ने थमा हुआ था.. मुझे बहुत ज़यादा प्रोटोकॉल दे रहे थे..

एक सूफी पर मैं बैठा हुआ था.. दोनों साइड में दोनों बैठे हुए थे... और मुझे देख ख़ुशी का इज़हार कर रहे थे..

सामने के सूफी पर सबब बैठ गए तो मई सब को बारी बारी घोर से देखने लगा.. जिस पर भी मेरी नज़र ठहरती वो मुझे स्माइल देने लगता..

महक के दोनों भाई सुनील और गौरव.. महक की बेहेन इशिता तीनो एक सूफी पर बैठे थे.... तीनो hi मुझे देख स्माइल पास करने लगे.. तीनो hi चेहरों से मुझे घमंडी दिख रहे थे.. घमंडी होते भी क्यों ना..

दन्न साला पुरे महाराष्ट्र का बाप था... जिनका बाप ऐसा हो.. वो सब फिर ऐसे hi हो होने थे........ दोनों भाई थ्री पीेछे ड्रेस में थे.. तो इशिता जींस और स्लीवलेस शर्ट में थी.. ऊपर से आधे बूब्स उसके दिख रहे थे. तो साइड से आधे से भी ज़यादा... दोनों भाई साथ में बैठे थे. लेकिन इशिता को कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था.. ब्रा के नाम पर कुछ नहीं पहना हुआ था.. बास इशिता ने अपने निप्पल्स पर कुछ लगाया हुआ था जिस वजा से उसके निप्पल छुप गए थे.. वानर दूर से hi देख के पता चलता था.. क बूब्स को कवर भी सिर्फ दिखावे क लिए किया गया है..

साथ में महक की माँ अपनी सास विमला के साथ बैठी हुई थी..... मैंने एक गहरी सांस ली........... साली इस हवेली में जितनी भी महिलाएं थी... महक की माँ और दोनों सास.. महक की दोनों चाचियां सबसे ज़यादा सेक्सी शरीर की मालिक थी... बड़े बड़े बूब्स, पूरी तरह से कैसे हुए बूब्स.. आधे नंगे बूब्स, चमक रहे आधे नंगे बूब्स.. किसी ने साड़ी पहनी हुई थी.. तू किसी ने देसुङ्ग वाली पंत शर्ट.. खुली शर्ट से उन सबब के बूब्स उछाल उछाल कर बहार आने क लिए बेताब थे..

उन सबब को देखते हुए मेरे लुंड ने अच्छा ख़ासा झटका खा लिया था.. ये तो अच्छा था क मैंने आज टाइट अंडरवियर पहना हुआ था.. वर्ण मेरा लुंड हरकत करता हुआ बहार से सबको hi दिख जाना था...

महक की कौसिन्स भी आग बरसा रही थी......... साली सबकी सब एक दूसरे से बढ़ कर सेक्सी लग रही थे, गले मिलते समय तो सही से कोई किसी को देख नहीं सका था.. पूरी फॅमिली साथ थी तो किसी से अच्छे से मिल भी नहीं सका था.......

सब की सब आग बरसा रही थी या मुझे रिझाने क लिए सबब एक दूसरे से बढ़कर सेक्सी बन्न गई थी आज ..... शायद नागरज ने घर में सबसे बात कर ली थी... उसकी जो मुझसे बात हुई थी.... चुड़ककर खंडन को भला क्या फर्क पड़ने वाला था..

छोड़ने में तो सब hi एक दूसरे से no 1 होंगी..

साली सुमित्रा पूरी ज़िन्दगी दिन रात चुदती रही थी.. पर उसके बदन की आग अभी भी कम् नहीं हुई थी.. मेरी एक साइड उसके बदन की गर्मी से जलने लगी थी.. शायद वो भी आज तैयारी करके आई थी.. किसी का लुंड लेकर वो झड़ी नहीं थी.. तभी उसके बदन से इतनी आग निकल रही थी.. नागराज ज़रूर अपने पुरे परिवार में सबसे ठंडा बाँदा था...

मेरी एक साइड जल उठी तो दूसरी साइड ऐसे हो गई.. जैसे बर्फ साइड में लगा दी गई हो..

सुमित्रा:- सुरिया बीटा तुमने यहाँ आकर हमारा मान बहुत बढ़ा दिए है.. हमें तो यकीन hi नहीं हो रहा क तुम हमारे घर में हमसे मिलने ए हो.. इतने बड़े आदमी होकर भी हम गरीबो के घर आ कर तुमने हमारा दिल खुश कर दिए है..

नागराज;- सही कहा सुमित्रा तुमने, सुरिया ने हमारी हवेली में अपने कदम पधार कर हमारी हवेली को चार चाँद लगा दिए हाँ.. आज से पहले मुझे कभी भी इस हवेली में इतनी रौनक नहीं दिखी..

अनंत नाग:- हाँ पिता जी आपने सही कहा.. सच में hi आज हमारी हवेली की रौनक बढ़ गई है. आज हमारी हवेली पर पुणे की सबसे अहम शख्सियत पधारी है.... दन्न का छोटा भाई भी चापलूसी से बोल पड़ा... सेल खुद चूतिये थे, और मुझे बना रहे थे.. नहीं जानते थे मैं इन सबब की मैया छोड़ने आया हों.

विजय:- अरे अंग्रेज साब मुझे इतना भी ऊँचा मत चढ़ाएं क उतरना मुश्किल हो जाये.. मई तो अभी इस शहर में आया हों. पारर आप सब तो सालों से पुणे पर राज कर रहे हाँ.. मैंने भी अभी सीखना शुरू किया है.. आप सब तो मुझसे कही बढ़ कर फेमस लोग हाँ.. आप जहाँ भी जायेंगे असल रौनक तो वहां लग जाएगी.. मई तो एक आम सा इंसान हों.. बास एक दो खेल गया और बाज़ी मार ली..

सोनाली:- अरे ऐसे कैसे आप बाज़ी मार गए.. सब देखा था हमने.. आपके जैसा लड़ने वाला तो मैंने अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखा..

माला:- हाँ सोनाली तुमने सही कहा.. क्या धांसू स्टाइल में फाइट की है सुरिया साब ने

इनके जैसे तो कोई लड़ hi नहीं sakta..kaise भगा भगा कर हरा दिया था उन कुत्तों को..

सुनील:- सुरिया तुम एक दुम्म से परफेक्ट फाइटर हो.. लड़ी तो तुमने कुश्ती hi है.. लेकिन मैं देख के समझ गया था. क तुम बहुत अच्छे फाइटर भी हो..

इशिता:- और सुनील तुम शायद ये नहीं जानते क सुरिया को लोगों से रिलेशन बनाने में भी कमल हासिल है.. मेरे क्लब में सब hi तो इसके दीवाने हाँ..

गौरब:- अच्छा तुमने पहले क्यों नहीं बताया क सुरिया क्लब लाइफ में जेता है.. मुझे पहले बताती तो मैं भी सुरिया को ज्वाइन कर लेता..

इशिता;- उस समय तुम सब शादी अटेंड करने मुंबई गए हुए थे.. ये तब्ब की बात है.. वर्ण मैं सब को पहले hi बता देती..

ऐसे hi 1 घंटा वही बैठे बातें होती रही.. कफ और स्नैक्स कहते रहे.. फिर डिनर का टाइम हुआ तो डिनर के लिए उठ खड़े हुए.. डिनर के दौरान भी अच्छी खासी बातें हुई.. सब एक दूसरे से बढ़ कर चापलूसी करने में लगे हुए थे.. भला इस खंडन से बढ़ कर भी कोई हो सकता था.. साले सबब के सबब बदले के चक्कर में पड़े हुए थे..

डिनर के बाद मैंने जाने क लिए कह दिए.. तो सुमित्रा और नागराज ने मुझसे अकेले में मिलने का बोल दिए... महक की बेहेन और कौसिन्स मुझसे अकेले में टाइम बिताना छह रही थी....

पर यहाँ मेरे अकेले का लुंड था. और छूट की तो मंडी लगी हुई थी.. किस किस को मैं टाइम दे सकता था.. पहला चक्कर था तो सबको अलग अलग टाइम तो देने से रहा..

नागराज और सुमित्रा के साथ मैं एक अलग रूम में जा पोहंचा.. नागराज और सुमित्रा मुझे लेके बीएड पर जा पोहंचे.. नागराज कुछ नहीं बोलै वो सुमित्रा को देखने लगा..

सुमित्रा बोल पड़ी..

सुमित्रा:- सुरिया मैं तुम्हे बीटा नहीं कहूँगी. भले hi तुम मुझसे उम्र में बहुत छोटे हो... मुझे ऐसे कहना अब अच्छा भी नहीं लगता.. मई किसी और टाइप की औरत हों.. मैं तुमसे ये पूछना छह रही थी क तुमने जो नागराज से कहा था. तो अब्ब तुम्हारे उस बारे में क्या विचार हाँ..... सुमित्रा अपने दूध को मेरे बाज़ो से जोड़ते हुए बोली..

मैंने सुमित्रा को देखा और फिर उसके दूध को जो मेरे बाज़ो से लगा हुआ था.. सुमित्रा और नागराज हस्सन लगे..

सुमित्रा:- सुरिया तुमने नागराज से कहा था क तुम्हे छूट की बहुत छह है.. मई खुल कर बात करने की आदि हों, नागराज मेरे पति हाँ.. लेकिन हम दोनों का कुछ भी एक दूसरे से छुपा हुआ नहीं है.. तुम कुछ भी और मैट सोचो..

मैंने नागराज को देखा तो

नागराज;- सुरिया यार तुमने खुद hi तो कहा था क तुम मुझसे दोस्तों की तरह से बात करना पसंद करते हो.. तो फिर अब्ब किसी किसम की झिझक महसूस न करो..

विजय:- नागराज जी मैं झिझक महसूस नहीं कर रहा .. और न hi मुझे कभी किसी भी काम में झिझक महसूस होती है... इतनी छूट में लुंड दाल चूका हों, शर्म तो मेरी कबकी ख़तम हो चुकी है.. बास मई ये जानना छह रहा था, क आपकी पत्नी आपके सामने भी सब कुछ कर लेती है.. आप समझ रहे हाँ न मेरी बात..

नागराज हस्ते हुए बोलै

नागराज:- हाँ हाँ सुरिया मैं सब समझ रहा हों.. मुझे सुमित्रा से बहुत प्रेम रहा है, अब्ब भी है. इसकी ख़ुशी क लिए मई कुछ भी कर जाता हों, ये भी मेरे साथ ऐसे hi रहती है... ये भी हर एक मामले में मेरा पूरा पूरा साथ देती है..

विजय:- तो क्या अगर मेरा मैं बने तो मैं आपके सामने भी आपकी पत्नी को छोड़ सकता हों..

सुमित्रा और नागराज मेरी बात पर फिरसे हस्सन लगे, नागराज ने सुमित्रा को इशारा किया तो सुमित्रा फ़ौरन hi कड़ी हो गई, और देर किये बिना hi नंगी होना शुरू हो गई... मई भी ये सब देख कर हैरत का मुज़ाहिरा करने लगा..

सब hi तो मैं जानता था, सुमित्रा रंडी के बारे में... कुछ देर में बास एक पंतय hi रह गई सुमित्रा के बदन पारर

मैं सुमित्रा एक बदन को घूरने लगा.. साली बहुत ज़यादा सेक्सी थी. इस आगे में इतना चुद के भी वो बम थी पूरी बम.. छोड़ने में मज़ा तो आएगा साली कुत्तिया को..

सुमित्रा के शरीर का सराय करने क बाद मैं नागराज को देखने लगा.. फिर नागराज क लुंड को देखने लगा.. वो सुमित्रा को नंगा देख कर भी सोया पड़ा था..

विजय:- नागराज जी आपका लुंड तो सुमित्रा को नंगा देख कर भी खड़ा नहीं हुआ.. फिर आप बदला किसके लुंड से लेंगे.. कैसे छोड़ेंगे मनजोत सिंह के घर की अरुतों और लड़कियों को..

नागराज बेशर्मी से हस्सन लगा

नागराज;- आजकल बाजार में हर चीज़ मिल जाती है.. पल भर में hi किसी मरे हुए का लुंड भी खड़ा कर देती है.. मई तो फिर भी अभी इतना बूढा नहीं हुआ हों.. सुमित्रा को तो रोज़ hi नंगा देखता रहता हों, इसलिए मेरा लुंड खड़ा नहीं हुआ.. अगर छोड़ने का मैं हुआ तो खड़ा भी हो जायेगा..

विजय:- अच्छा ये तो हो गया.. तो अब्ब आप अपनी दुश्मनी के चलते मनजोत सिंह के घर की सभी महिलाओं को छोड़ना चाहते हाँ.. सिर्फ आप hi छोड़ना चाहते हाँ या कोई और भी है आपके घर में, जिसका लुंड उसके काबू में नहीं है, और वो भी आपके जैसे hi अपनी दुश्मनी मनजोत सिंह परिवार से निकलना चाहता था..

नागराज;- मेरे घर के सारे मर्द hi बदला लेना चाहते हाँ.. मेरी सुमित्रा के साथ मनजोत सिंह ने बहुत बुरा किया था.. उसी के चलते हर कोई उस घर की औरतों और लड़कियों को छोड़ना चाहता है...

vijay:-matlab मैं अकेला हों.. और आप के घर के सारे मर्द बदला लेना चाहते हाँ.. ऐसे में तो सौदा अच्छे से नहीं बन पायेगा.. मनजोत सिंह के घर की औरतें और लड़कियां अब्ब मेरी घुलम हाँ.. वो इतने सस्ते में तो नहीं आप सबब को मिल सकती.. बदले में मुझे क्या कुछ मिलेगा.. एक बात मई कह डॉन.. मुझे सिर्फ खालिस दूध पीने की hi आदत है. वो भी घर का .. बहार की मुझे कोई छह नहीं है.. और फिर मेरे लिए किसी चीज़ की कमी भी नहीं है.. उस रात पार्टी में कुछ hello हाय हो गई थी. तो इसी लिए मैं ये सबब बोल रहा हों... और मैंने उस पार्टी में कुछ लड़कियों और औरतों को देख क्र छोड़ने का मैं बना लिया था.. आप समझ रहे हाँ या मैं खुल कर बात करों..

सुमित्रा:- सुरिया तुम झिझक रहे हो.. तो मैं hi तुम्हे सबब बता डॉन.. क तुम क्या सोच रहे हो.. तुम ज़रूर मेरी बहुओं को और मेरी पोतियों को छोड़ने की फ़िराक में हो.

vijay:-haan कुछ ऐसी hi बात है..

नागराज:- सुरिया हमारे घर में लड़की जवान बाद में होती है.. पहले उसकी छूट और गांड की सील खुल जाती है.. सब की सब hi इस काम में माहिर हाँ.. ज़यादा बहार नहीं चूड़ी हाँ...... सब घर में hi ज़यादा मज़ा लेती रहती हाँ.. तुम्हे उसकी टेंशन नहीं लेनी चाहिए..

विजय;- मतलब इशिता भी चूड़ी हुई है.. देखने में तो नहीं लगती.. देखने में तो वो छूट और लुंड की दुन्या से दूर की लड़की लगती है...

नागराज और सुमित्रा दोनों हस्सन लगे..

सुमित्रा;- इशिता की छूट जिस रत खुली थी, उसी रात इशिता को घर के हर मर्द ने एक एक बार छोड़ा था.. बास उसका बाप नहीं था शामिल इस सबब में..

विजय;- मतलब वो क्यों नहीं था, जब सारे घर के hi मर्द शामिल थे तो वो क्यों नहीं शामिल हुआ था..

नागराज:- उसे बहार से बहुत सा माल मिलता रहता है, तो उसे घर में ज़यादा खाने की आदत नहीं है.. पर वो जानता सब कुछ है....

मेरा लुंड खड़ा हो चूका था.. और सुमित्रा को अपना लुंड दिखा कर घायल भी करना था.. और असीर भी..

विजय;- चुदाई का अभी समय नहीं है तो सुमित्रा तुम मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर अपनी क्वालिटी दिखा सकती हो... मैं बना तो एक बार तुम्हारी छूट में दाल कर तुम्हारी छूट का पानी भी निकल डोंगा..

सुमीत्रा;- ये कौनसी बड़ी बात है. तुम्हारा लुंड चूस कर मुझे खुसी होगी..

इतना बोल कर सुमित्रा मेरे सामने बैठी और मेरी पंत की ज़िप खोल कर मेरे लुंड को बहार निकलने लगी.. जैसे जैसे मेरा लुंड बहार निकल रहा था.. सुमित्रा और नागराज की ऑंखें बड़ी होती जा रही थी....

जैसे hi पूरा लुंड बहार निकला तो दोनों के hi मोहन से सीटी निकल गई..

नागराज:- इतना बड़ा लुंड है तुम्हारा.. तो फिर छूट के फैन क्यों न होते तुम.. जो भी एक बार तुम से चुद ले लेगी.. वो तो बार बार तुम से छोड़ने की खवाहिश करेगी..

सुमित्रा तो बास मेरे लुंड को पकड़ा उसकी सख्ती चेक कर रही थी.. सुमित्रा की सांस तेज़ हो गई थी... वो पियासी नज़रं से मेरे लुंड को तक्क रही थी..

सुमित्रा;- आज बहुत सालों बाद ऐसा लुंड हाथ में आया है.. लेकिन इतना मोटा पहले मैंने कबि नहीं देखा.. नागराज आज तो मुझे सच में hi बहुत मज़ा आ जाएगी.. सुमित्रा ने फिर मेरे लुंड को चूमना चाटना शुरू कर दिए..

नागराज मेरा लुंड डेक रहा था तो सुमित्रा मेरे लुंड को हाथो में लिए चूम चाट रही थी... मैंने सुमित्रा के दोनों दूध पकड़ लिए और उन्हें कस कस के डालने लगा.

विजय:- सुमित्रा तो सच में hi बोहत बड़ी रंडी है.. लुंड चूमने चाटने में तो तेरा कोई जवाब hi नहीं है.... इस उम्र में भी तो पूरी एक्सपर्ट बन गई है.. सुमित्रा लगी तो मैं नागराज को देखने लगा

बिजय:- नागराज जी मैं सुमित्रा को रंडी कहा, मेरा ऐसा कहना गलत तो नहीं.. मुझे ये कहना चाहिए या नहीं......

नागराज:- अरे यार चुदाई में जब तक गालियां न दो, चुदाई का मज़ा भी नहीं आता.. और मेरी सुमित्रा तो सच मच hi एक रंडी है.. साली किट्टिया मेरे सामने कइयों के लुंड ले चुकी है... इसमें शर्म की कोई बात नहीं है.. कैसे तुम्हरा मैं करे वैसा तुम बोल सकते हो......

जो थोड़ा बहुत ढीला पत्र मेरे लुंड में था.. वो सुमित्रा ने ख़तम कर दिए था.. कुछ देर बाद सुमित्रा ने मेरे मोठे लुंड को अपने मोहन में लिया और दबा दबा कर छुपे लगाने लगी.. मैं भी सुमित्रा के दोनों निप्पल्स को कस कस के मरोड़ने लगा.. जल्द hi सुमित्रा की बास हो गई. सुमित्रा के दोनों दूध पूरी तरह से फूल गए थे... सुमित्रा ने मेरे लुंड को अपने मोहन से निकला और

सुमित्रा;- मेरी छूट में बहुत आग लग गई है.. तुम अपने मूसल जैसे लुंड से उसे ठंडा कर दो प्लस..........

मैं नागराज को देखने लगा.

विजय:- नागराज जी ये तो कुछ hi देर में लुंड चूस कर छोड़ने क लिए बोल रही है..

नागराज;- तुम्हारे आने की वजा से ये आज सही से चूड़ी नहीं है.. इसलिए ज़यादा बेचिअन दिख रही है..............

विजय;- लेकिन मई अभी चुदाई करने के मूड में नहीं हों.. अभी टाइम ज़यादा लग जायेगा तो मुझे देर हो जाएगी.. और फिर सुमित्रा जैसे रंडी कुत्तिया को आराम से छोड़ने में मज़ा आएगा.. जल्दी जल्दी में क्या ख़ाक मज़ा आएगा..

सुमित्रा:- सुरिया तुम एक बार बास मेरी छूट का पानी निकल दो.. लुंड का सवाद भी मिल जायेगा और छूट पानी भी छोड़ कर ठंडी हो जाएगीइ.

मैंने सोचा क एक बार सुमित्रा की छूट में लुंड दाल hi दिए jaaye..use अपना स्टैमिना भी दिखा दिए जाए.. बदले से हट कर सुमित्रा मेरे लुंड को भी रेगुलर याद करती रहे..

मैं खड़ा हो गया..

विजय:- तो फिर यही बीएड के किनारे घोड़ी बन जाओ... सुमित्रा पंतय उतर कर झट से घोड़ी बन गई.. ........ नागराज जी ज़रा अपनी पत्नी की छूट को चाट कर मुझे दिखाए.. मैं भी तो देखों आप कैसे अपनी पत्नी की छूट चाट ते हाँ...

नागराज:- ये कौनसी बड़ी बात है.. हमेशा hi तो मैं सुमित्रा की छूट चाट ता आ रहा हों... इतना बोल कर नागराज हस्ता हुआ उठा सुमित्रा की छूट पर आया और अपनी काली जीब निकल कर सुमित्रा की छूट चाटने लगा...

सुमित्रा:- आह्ह्ह्हह्ह कुट्ट्टीीीे क्या मस्त छूट chat'ta है तू मेरी... ह्म्म्मम्म अह्ह्ह साडी जीब दाल कुत्ते मेरी छूट में.. और पि जा सारा पानी मेरी छूट का.. चमका दे मेरी छूट की सुरिया के लुंड के लिए...

wahhhhhhhhhh सुमित्रा तो नागराज को कुत्ता बना कर छूट चतवती है... कुछ देर मैं नागराज को देखता रहा........ फिर मैंने नागराज को साइड हटा दिए.......

मैं सुमित्रा क पीछे आया और अपने लुंड को सुमित्रा की छूट पर सेट कर दिए.. मेरी नज़र सामने एक आईने पर पड़ी.. तो मुझे साइड के एक दूर पर कोई खड़ा हुआ दिखा... मैंने घोर किया तो

ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh साले सब मिले हए थी.. दूर के आगे शीशे था.. मतलब डबल दूर था.. शीशे वाला दूर बंद था.. लेकि लकड़ी वाला आधे खुला हुआ था....... और उसमे से इशिता और उसकी कौसिन्स कड़ी हुई सुमित्रा को चुड़ते देखने वाली थी................ पता नहीं कितनी देर से कड़ी थी..

मैं दिल hi दिल में मुस्कुराया.. सुमित्रा की छूट के छेड़ में अपने लुंड को फंसाया.. सुमित्रा की कमर को कस के पकड़ लिया. और पुरे ज़ोर का एक धक्का मार दिए......

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr

gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

सुमित्रा ने लुंड बड़े लिए थे.. लम्बे मोठे लुंड लिए थे.. लेकिन शायद मेरे लुंड जितना मोटा वो सालों बाद ले रही थी.. तो उसकी छूट पूरी नहीं खुली थी.. कुछ तंग हो गई थी............. मेरा जानदार धक्का वो सहन नहीं कर पाई.. मेरा मोटा लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर गहराई तक उतरता चला गया........

सुमित्रा की चीख निकली तो नागरज हस्सन लगा......

नागराज:- वाह सुरिया वाह.. इस आगे में भी तुमने सुमित्रा की चीख निकलवा दी..

विजय:- क्या करों नागराज जी मुझे आराम से छोड़ने की आदत hi नहीं है.. मई हमेशा hi दबा दबा कर छोड़ता हों ...

इतना बोल कर मैं ने सुमित्रा को कस के पकड़ा और अपने लुंड को सुपड तक बहार निकल कर फिरसे एक झाकते में सारा hi अंदर दाल दिए.................

बूढी सुमित्रा की फिरसे चीख निकल गई थी.. मैं नहीं रुका. फिर मैं पररि तूफानी स्पीड से सुमित्रा को छोड़ने लगा..

अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ohhhhhhhhhh marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiii ufffffffffff सीईई

saaaleeeeeeeeee ीत्नीईईईई स्पीड से क्यों छोड़ रहा है................. अह्ह्ह थोड़ा धीर धीरे ........

5 मिंट बाद. सीईईईई hmmmmmmmmmm और तेज़ और तेज़ मेरा छूट के पानी निकलने वाला है............ और तेज़ सुरिया और स्पीड से छोड़ो अपनी रंडी कुत्तिया को...

मैंने आइये में देख रहा था..... वहां कड़ी हुई अपनी छूट में उँगलियाँ करने लगी thieeeeeeeeeeeeee..

मैं भी उनको देखता हुआ सुमित्रा को पूरी स्पीड से छोड़ रहा था.. सुमित्रा की पूरी छूट hi खुल गई थी... छूट क्या थी, पूरा भोसड़ा थीईई.. और उसे और भी भोसड़ा बनाने लगा....... सुमित्रा कुछ भी सोचे बिना पूरी आवाज़ में सिसकियाँ ले रही थी..

कभी मैं बनता तो एक कस के थप्पड़ सुमित्रा के चुत्तड़ पर भी जड़ देता. नागराज साला हरामी कुत्ता तब्ब मुझे वाह वाह बोलता........ "क्या दुमदार चुदाई करते हो सुरिया तुम" ऐसे बोल रहा था नागरज मुझे..

सुमित्रा भी मेरे थप्पड़ खा कर सिसकियों की आवाज़ बढ़ा देती..

जब सुमित्रा झड़ने लगी तो मैंने एक झटके में अपना लुंड उसकी छूट से निकल दिए.. और नागराज को पकड़ कर सुमित्रा की छूट पर कर दिए.. नागराज भी समझ गया था क मैं क्या करने को बोल रहा हों.. नागराज ने फिरसे सुमित्रा के चुत्तड़ पकडे और सुमित्रा की छूट को चाटने लगा..

सुमित्रा मुद कर मुझे देख रही थी...

विजय:- ऐसे मैट देखो रंडी कुत्तिया.. इतना छोड़ तो दिए है तुझे.. ये ट्रेलर था.. पूरा मज़ा तो जब्ब समय मिलेगा तब्ब दिखाऊँगा.. जैसा भरा भरा तेरा जिस्म है.. जितने बड़े बड़े तेरे मम्मी हाँ.. जितनी आग तेरी छूट में लगी है.

उसी हिसाब से अच्छे से टाइम निकल कर तुझे छोडूंगा.. बोल छुड़ेगी मुझसे या नहीं..

ahhhhhhhhhhh नागराज कुत्ते अब्ब तू hi मेरी छूट का पानी निकल दे... सुरिया ने तो मुझे बीच में hi छोड़ दिया....................... फिर वो मुझसे बोली...

सुमित्रा:- क्यों राजा सुरिया जितना तुमने मुझे छोड़ा है. मई तो उतने से hi बहुत खुश हों..... तेरे लुंड की और तेरी पावर मैं जान गई हों...... अब्ब तो पुरे मज़े से और पूरा समय निकल कर छुडोंगी तुमसे...

मैं अपने लुंड को सुमित्रा के कपडे उठा कर साफ़ करने लगा.... सुमित्रा ये सीख कर खुश हो गई थी...... नागराज भी अपनी 3 उँगलियाँ सुमित्रा की छूट में स्पीड से अंदर बहार करते हुए सुमित्रा की छूट चाट रहा था..... सुमित्रा जल्द hi झड़ने लगी..

मैंने नज़र घुमा कर देखा तो वहां अब्ब कोई नहीं खड़ा था.. सब अंदर चली गई थी.. मेरा शो जितना देखना था सबने देख लिया था..

कुछ देर बाद मैं हवेली से निकल रहा था..

बहार मुझे सब छोड़ने आये थे.. इशिता सोनाली और माला की ऑंखें लाल थी.

पूरा परिवार hi बेशरम और चुड़ककर था.. सब hi जानते थे क मैं अंदर सुमित्रा को छोड़ रहा हों.. तो मैंने वही इशिता को पकड़ कर दोबोश लिया.. इशिता मेरी बहन में आई तो मैं इशिता को खुद में कस्ते हुए सबको देखने लगा.....

सबकी आँखों में ख़ुशी थी.. सब के लिए ये सबब नार्मल था..

मैंने इशिता को किश करदी..

विजय:- अगर मई तुम्हे यही छोड़ दो तो क्या तुम मुझसे चुद लोगी.. इशिता तो मेरी चुदाई देख कर पहले से hi गरम थी.. मेरा लुंड देख कर मेरी फैन हो गई थी..

इशिता तेज़ सांस लेते हुए.. मेरा बास चले तो अभ से आपका लुंड निकल कर मोहन में ले लोन.. बड़ा hi दुमदार किसम लुंड है आपका.. अब तो मुझसे रहा नहीं जायेगा.. मुझे तो तब hi चैन मिलेगा. जब मेरी छूट में आपका लुंड उतर चूका होगा.. मैं इशिता का एक दूध दबाने लगा..

विजय:- सुनील तुम अपनी इशिता की छूट की आग सही से बुझाते नहीं हो क्या.. देखो कैसे जल रही है...........

हहहहहहह सुनील हस्सन लगा.. फिर सब भी हस्सन लगे...

सुनील:- सुरिया जो घर hi तंदूर में बना हुआ हो.. तो उस घर में रहने वाले की आग कैसे कम् हो सकती है..

सोनाली:- सुरिया मेरी छूट को छो कर देखो वो भी इशिता की छूट से कम् नहीं जल रही है..

विजय:- तो फिर वहां क्यों कड़ी हो.. आ जाओ कुछ और भड़का दो मैं तुम्हारी छूट की आग को......... बुझा के लिए तो पूरा घर के लुंड hi खड़े हो जायेंगे.. आ जाओ कुछ मज़ा तुम्हे भी दे डॉन....... कोई सैर जब सही समय आएगा तब्ब करा डोंगा..

फिर मैं सोनाली माला से भी छेड़ छड़ करने लगा.. सबके सामने उनके मम्मी, छूट और गांड को छेड़ लगा....

सब खुश भी थे.. मस्ती मज़ाक भी चलता रहा .. रात के 12 के आस पास मई वहां से निकल लिया..........

नागराज का घर नहीं था.. रंडी खाना भी नहीं था... रंडी खाने में भी कुछ रूल्स होते हाँ.. पर वहां कोई रूल नहीं था.... प्यार किसी के भी मैं में नहीं था...

कुछ था तो बास बदले की भावना और सेक्स की आग...... हवस तो उस परिवार में ऐसे थी.. जैसे सब को वो हवस घुट्टी में पीला दी गई हो......

घुट्टी में hi पिलाई गई थी...... वर्ण कैसे सब एक सामान होते.. महक की माँ की बारी नहीं आई थी....... वो कुत्तिया भी मुझे तरसी हुई निगाहों से देख रही थी.

कोठी पोहंचा और फिर महक से लिपट कर सो गया........

अगले दिन से नागराज के परिवार के साथ कुछ और खुलने का मैं था.. क्लब में इशिता को दबा कर छोड़ने का मूड था.. पारर अचानक से पैलेस में एक हंगामा मच गया था... बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई थी....... मुझे और महक को फ़ौरन hi दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ा....





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अपडेट :::142


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बात ख़ुशी की भी थी, लेकिन ख़ुशी अचानक से hi घमी में भी बदल गई थी.. हालत अचानक से hi फिरसे बदल से गए थे...

हुआ ये था क सूबा ब्रेकफास्ट के 1 घंटे बाद माँ, शुष्मा दीदी, पूजा और मेरी बहने एक कमरे में बैठी थी.. उनके साथ मेरी नानी और नानी की बेहेन, मतलब शुष्मा दीदी की माँ बैठी हुई थी..... अचानक से hi माँ की तबियत ख़राब होने लगी.. माँ उठ कर फ़ौरन बाथरूम में घुसी और उलटी करने लगी..

कुछ देर माँ बहार आई तो नानी और नानी की बेहेन ने माँ को ऐसे देखा तो दोनों ने hi माँ को गले से लगा लिया और माँ को कॉंग्रट्स करने लगी...

मतलब फिरसे माँ बनने जा रही थी.. माँ के फिरसे माँ बनने की शुरुआत हो गई थी.. नानी और नानी की बेहेन माँ और पापा के बारे में भी सब जान गई थी.. तो वो समझी क माँ रंजीत के बच्चे को जनम देने वाली है, तो उसी के चलते दोनों माँ किओ बधाई देने लगी. माँ को चूमने लगी..

नानी और नानी की बेहेन के आने से पहले पैलेस का माहौल सारा hi बेशरम बना हुआ था.. कोई भी किसी से किसी के भी सामने कुछ भी कह देता था.. तो सबब को इस की आदत पद चुकी थी... इसी के चलते प्रिय से एक गलती हो गई.. प्रिय ने माँ को माँ बनने की बधाई और साथ hi मेरा नाम भी ले दिए.. माँ भी इस ख़ुशी में सबब भूल गया थी. क उनकी माँ और मौसी भी उनके सामने हाँ तो वो प्रिय के गले से लग कर ख़ुशी सेलिब्रेट करने लगी.. शुष्मा didi,puja, जहान्वी और श्रुति भी इसमें शामिल हो गयी...

शुष्मा दीदी की अचानक से hi नज़र मेरी नानी और अपनी माँ पर पड़ी तो वो शॉकेड हो गइईईई.. उसे याद आ गया क दोनों के सामने अभी कुछ नहीं बोलना था.. लेकिन सब सेलिब्रेशन के चक्कर में सबब भूल गई थी. दीदी ने माँ को कंधे से पकड़ कर दोनों नानियों की तरफ इशारा करने लगी..

माँ ने भी नानी को देखा तो माँ का चेहरा पीला पड़ने लगा... नानी और 2ंद नानी की ऑंखें मारे ग़ुस्से के आग उगलने लगी थी..

बात वही से बिगड़ गई थी.. नानी और 2ंद नानी तो ये जान कर hi मरने वाली हो गई थी.. क उनकी श्वेता अपने hi बेटे के बच्चे की माँ बनने वाली है.. जैसे लाइफ उन सब की वो तो सपने में भी ये नहीं सोच सकती थी...

नानी और नानी 2 ने माँ को बहुत थप्पड़ मारे.. पर शुष्मा दीदी और बाकि सब ने नानी को रोक दिए था.. लेकिन बात बहुत बढ़ गई थी.. दोनों नानियों ने किसी को नहीं बताया था...

मुझे पूजा ने फोरा hi कॉल करके सब बता दिए था...

अब्ब दिल्ली पोहंच कर hi सब सही से जाना जा सकता था.. पैलेस के माहौल को भी वही रहते देखा जा सकता था.. एक न एक दिन ये सब होना hi था.. लेकिन ऐसे अचानक से बात खुलेगी किसी ने भी सोचा नहीं था..





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मैं और महक पैलेस पोहंच चुके थे.. प्लेस में hi महक ने हस्ते हुए कहा था..

महक:- कैसे सामने करोगे अपनी नानी का तुम विज्जू.. कैसे नानियों को मनाओगे.. वो बहुत पुराने ख़यालात की हाँ दोनों.. वो तो कभी खवाब में भी कुछ ऐसा नहीं सोच सकती.. अब्ब वहां चल के मुझे तो बहुत मज़ा आएगा सब देख के.. पहली बार तुम्हारा उतरा हुआ चेहरा देखूंगी..

विजय:- ऐसा कुछ नहीं होने वाला, जैसा तुम सोच रही हों.....

महक:- मतलब इस प्रॉब्लम का हल भी है तुम्हारे पास..

विजय;- अभी तो नहीं है.. पर कोई न कोई सलूशन तो मैं ढूंढ hi लूंगा.. तुम सबब देख जाओ..

दोनों नानियाँ एक hi रूम में बंद हो गई थी.. और सब को अपनी तबियत खराबी का बहाना कर दिए था.. अभी तो सबकी सही से थकन भी नहीं उत्तरी थी.. और चेहरे भी अभी तक मुरझाये हुए थे.. पुणे से लाइ गई सब अभी एक्टिव नहीं थी..

तो नानी के चेहरे को देख कर किसी को शक नै हुआ था..

महक मुझे छेड़ती हुई जूली के पास चली गई थी.. माँ, दीदियां और मेरी बहने एक hi रूम में बैठी हुई थी.. सब टेंशन में थी अब्ब क्या होगा.. मेरे आने का भी सबब जान गई थी..

शाम के बाद का समय था.. डिनर की भी ज़यादा चिंता नहीं थी........ मई, जो मुझे पैलेस में मिला उनसे मिलता हुआ अपने कमरे में जा पोहंचा......... अंदर पोहचते hi मैंने दूर अंदर से लॉक कर दिए था...

मुझे देख माँ बीएड से उतर कर भागती आई और मुझसे लिपट कर रोने लगी...

माँ:- देखो न विज्जू माँ मुझसे नाराज़ हो गई है.. माँ मुझसे बात भी नहीं कर रही.. मा को सबब जान कर बहुत बुरा लगा है.. कैसे मई अब माँ का सामना कर पाऊँगी.. कैसे मैं उन्हें इस सबब क लिए मन पाऊँगी.. वो सब ऐसी लाइफ से बहुत दूर हाँ, वो ये सबब सहन नहीं कर पायेगी....... माँ रट हुए सब बोल रही थी.. माँ हिचकियों में रो रही थी.. माँ का बहुत बुरा हाल था..

सैलून बाद माँ मिली थी. वो भी नाराज़ हो गई थी.... नानी और बाकी सबब को अभी माँ की कहानी मालूम नहीं थी.. ये सबब मेरे सामने hi सबको बताई जाने वाली थी..

बाकी भी बीएड से उतर कर मेरे पास आ गईं. वो सबब भी आंसू बहा रही थी..

प्रिय:- भाई मुझे माफ़ कार्डो.. मुझसे गलती हो गई भाई.. भाई मई भूल गई थी, नानी के सामने मुझे सोच कर बोलना चाहिए था..... मेरी प्रिय मुझसे माफ़ी मांग रही थी.. प्रिय के माफ़ी मांगने पर माँ मुझसे अलग हो गई और अपनी प्रिय को रट देख कर और भी रोने लगी.. मैंने प्रिय को खेंच कर अपने सीने से लगा लिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा..

विजय:- मेरी प्रिय रो रही है... मेरे रहते हुए भी मेरी प्रिय बहादुर नहीं बन्न सकीय..

प्रिय हिचकियाँ लेते हुए..

प्रिय:- भाई नानी माँ से और हम सब से नाराज़ हो गई हाँ. अभी अभी तो हमे नानी मिली हाँ. मुझसे भूल हो गई भाई...

विजय;- न मेरी प्रिय तुमसे कोई भूल नहीं हुई है.. ये सब तो नार्मल है न हमारी लाइफ में.. और ऐसी भूल तो किसी से भी हो सकती है.. तुम खुद को ब्लामे मैट करो.

प्रिय मेरी आँखों में देखने लगी.. प्रिय रट हुए बड़ी अजीब लग रही थी... सालों बाद फिरसे ऐसे प्रिय को रट देख अजीब भी लग रहा था.. पर अंदर hi अंदर कुछ काट भी रहा था...

मैं झुका और प्रिय के होंटो पर अपने होंठ रख दिए.. प्रिय के रोने से आंसू उसके होंटो पर भी आ गए थे.. प्रिय के नमकीन होंटो को मैं चूमने चूसने लगा.. माँ और मेरे और प्रिय के गाल पर हाथ फेरने लगी.. पल भर में hi रोना बंद हो गया था.........

प्यार का टाइम शुरू हो गया था.. मेरे रहते कैसे कोई दुखी रह सकता था.. कुछ देर प्रिय के होंटो का रस पीटा रहा.. मेरी प्रिय शांत होने लगी.. फिर मैंने प्रिय को खुद से अलग किया और सबब को देखने लगा..

माँ को देखा तो माँ अभी भी कुछ ग़म में डूबी हुई थी... पूजा को शुष्मा दीदी को देखा.. जहान्वी और श्रुति को देखा तो वो भी दुखी थी..

मैंने चेहरा लटका कर सबको एक नज़र देखा और फिर अचानक से hi मैं नीचे बैठा और माँ को चूतड़ों से नीचे अपनी बहन में भरते हुए उठ खड़ा हुआ.. और नाचने लगा...

सब मुझे ऐसा करते देख कर हैरान रह गए...

विजय:- माँ बहुत बहुत मुबारक हो माँ.. आप अपने विज्जू के विज्जू को जनम देने वाली हाँ...... ये खबर सुनके मैं बता नहीं सकता क मुझे कितनी ख़ुशी हुई है...... ी लव यू maaaaaaaaaaaa ी लव shwetaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

ी लव यू मेरी डार्लिंग माँ, ी लव यू मेरी डार्लिंग shwetaaaaaaaaaaaaaaaa

सबके सब एक दुम्म शॉकेड हुए और फिर तो सबब hi मुझे मूड में देख के खुश हो गए.. प्रिय, जहान्वी और श्रुति तो मेरे एक एक रंग में जीती थी...

मैं अगर खुश दिखों तो कैसे वो खुश न होती.. पूजा दीदी जो मेरे चेहरे के एक एक रंग को जान जाती थी... जो मेरे दिल में हो. वो एक पल में hi समझ जाया करती थी.. शुष्मा दीदी जो मेरा प्यार प् कर मेरे जैसी हो गई थी...

मेरा रंग बलदा तो सबके रंग बदल गए.. आंसुओं भरी ऑंखें एक दुम्म से तो खुश होने से रही.. पर अब्ब सक की ऑंखें ख़ुशी से चमक उठी थी.. भीगी ऑंखें ख़ुशी से भरपूर चमक लिए हुए थी..

ऐसे hi भीगी आँखों से सबब मिलकर ख़ुशी को सेलिब्रेट करने लगी.. सब नाचने लगी. और मैं माँ को उठाये नाचने लगा.

माँ सर्र नीचे किये मुझे ख़ुशी से देखने लगी मैं भी माँ को देख कर नाच रहा था... कुछ देर ऐसे hi सबब चलता रहा... फिर मैंने माँ को नीचे यत्र और माँ के चेहरे को दोनों हाथों से थाम कर किश करने लगा.. माँ ने भी अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर रख दिए और मुझे किश में साथ देने लगी.. मा के होंटो को पिए काफी दिन हो गए थे..

माँ भी मेरे प्यार के लिए तड़प रही थी.. हमारे होंटो आपस में मिल कर हमारी तड़प को कम् करने लगे.... रूम में मौजूद बाकी सबब क्लैपिंग करने लागींण..

शुष्मा दीदी;- आआआआअह्ह विज्जू तुमने तो पल भर में hi माहौल बदल कर रख दिए... कहाँ तो सबब के होश उड़े हुए थे.. और कहाँ अब्ब सबके अंदर का दुःख दर्द, टेंशन सबब ख़तम कर दिए.......

प्रिय:- ऐसा hi तो है हमारा विज्जउ मौसी...

दीदी;- कितनी बार कहा है मुझे मौसी मैट कहो. फ्यूचर में तो मैं हम सब एक दूसरे की सौतन बनने वाली हाँ.........

priya:-(nautanki करते हुए) मैं तब भी आपकी मौसी hi कहूँगी.... मेरी एक hi मौसी है.. मैं उसे मैं नहीं खो सकती..

दीदी;- मेरी एक बेहेन और भी तो है नाआआआ...

प्रिय दीदी का पूरा पूरा मज़ा ले रही थी

प्रिय:- वो तो हमारी दीदी है.... उसकी आगे भी कम् है तो उसे दीदी hi ठीक है.. आपकी अपनी आगे के हिसाब से मौसी hi सही हाँ.

दीदी;- प्रिय की बच्ची मैं तुम्हे एज्ड लगती हों.. रुक अभी तुम्हे बताती हों....

जहान्वी, श्रुति:- न न मौसी आप हमारी प्रिय को कुछ भी नहीं कहेंगी..

दीदी:- mausiiiiiiiiiiiiiiiii. तुम दोनों भी.... दीदी जहान्वी श्रुति को मौसी बोलते देहक कर हैरान रह गई

जहान्वी, श्रुति:- क्या मारें मौसी, हम तीनो एक hi तो हाँ.. क्यों प्रिय हम तीनो की मौसी एक hi हुई ना...

मैं और माँ किश का मज़ा ले रहे थे. और सब मिलकर नौटंकी करने लगी हुई थी.

पूजा:- सही तो कह रही हाँ तीनो.

दीदी:- पूजा तुम भी...

पूजा:- क्या मई भी..

दीदी;- देख लूंगी तुम सबब को एक बार मेरी शादी हो जाए विज्जउ से.. फिर एक एक को देख लूंगी.. अभी सबब को मैं माफ़ करती हों...... दीदी हस्ते हुए बोली..

ऐसे hi सबब की नौटंकी, मस्ती छेड़ चाहड़ जारी रही.. कितना प्यार बढ़ गया था सबब का आपस में..

मैंने किश तोड़ी और माँ की आँखों में देखने लगा.. माँ भी मेरी आँखों में देखने लगी.. मैंने माँ को अपनी गॉड में उठाया और बीएड पर ला कर लिटा दिए..

माँ ने साड़ी पहनी हुई थी. मैंने माँ को उठा कर बिठा और साडी को माँ के सूंदर बदन से अलग करने लगा.. सब मुझे देखने लगी.. सब बीएड पर साइड में बैठ गई थीई.. कोई कुछ नहीं बोली... बास मुझे देख रही थी..

कुछ देर में माँ के बदन से साड़ी अलग हो गई.. मैंने माँ को फिरसे बीएड पर लिया दिए.. माँ आँखों में ख़ुशी लिए मुझे देख रही थी.. मैं भी माँ को देखने लगा. आगे बढ़ कर के चेहरे पर आया और माँ की दोनों आँखों को चूमने लगा..

सब मुझे देख रही थी. माँ ने अपनी अंकन बंद कर ली.. माँ की आँखों को चूमने के बाद मैं नीचे हुआ और माँ के पेट पर आ गया... सब को एक नज़र देखा और फिर झुकता हुआ माँ के पेट को चूमने लगा..

सबब समझ गईं क मैं माँ के पेट को क्यों चूम रहा हों.. प्रिय माँ के पास पोहंची माँ के सर्र एक नीचे एक तकिया रख दिए.. माँ का सर्र ऊंचा हो गया . माँ भी मुझे अपने पेट पर किश करते हुए देखने लगीं..

सब की आँखों में प्यार बेशुमार उमड़ने लगा था.. मैं धीरे धीरे करके माँ के पेट को चूम रहा था.. मैं hi नहीं भर रहा था.. मेरा पहला बच्चा मेरी hi माँ के पेट में था..

मेरी पहली hi औलाद वहां से निकल कर इस दुन्या में आने वाली थी.. जहाँ से मई निकल कर आया था.. कैसे अजीब और ख़ुशी वाली बात थी.. मेरा अंदर बौह्त ज़यादा झूम रहा था.. ऐसी ख़ुशी मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी..

माँ ने भी नहीं की थिई.. माँ इस से पहले दो बार माँ बन चुकी थी.. पर माँ को माँ बनने की ख़ुशी नसीब नहीं हुई थी....... पहली बार माँ बनने पर माँ के hi अपणु ने माँ से माँ बनने की ख़ुशी छीन ली थी.. दूसरी बार माँ कोठे पर माँ बानी थी.......... वहां माँ बनने की ख़ुशी भला किसी हो सकती thi..parr खुश नसीब भी थी.. जो माँ को प्रिय जैसी बेटी वहां से मिली थी.. वर्ण तो कोठे की पैदाइश कोठे वालियों जैसी hi निकलती है..

कई मिंट तक्क मैं माँ के पेट को चूमता रहा.. प्रिय भी आ कर मुझे ज्वाइन कर चुकी थी... फिर तो जैसे सब ने अपना हिस्सा वसूल करना शुरू कर दिए..

पूजा ौड शुष्मा दीदी भी पीछे नहीं रही थीई...... श्रुति और जहान्वी तो प्रिय का साया थी.. वो प्रिय को देख कर कैसे पीछे रह सकती थी..

20 मिंट तक ये सन चलता रहा..

विजय;- हाँ तो अब्ब मुझे बताओ, अब्ब इस नए उठ चुके तूफ़ान का सामना करने की हिम्मत किस किस में है......

सब hi बोल पदींन.. मुझमे है....... मुझमे hai.......mujhme hai.......mujhme hai.......mujhme hai.......mujhme है.......

विजय:- पहले क्या हुआ था आप सबब को...

माँ:- मई hi घबरा गई थी.. वर्ण ये कोई ऐसी बात भी नहीं थी.. माँ को कैसे भी करके समझा दिए जाता.. ऐसे hi हम परेशां हो गई और अपने स्वामी को भी परेशां कर बैठी..

विजय:- तो फिर इस गलती की सजा मिलनी चाहिए या नहीं.....

शुष्मा दीदी:- विज्जू अपनी माँ को सजा डोज.. तुम्हे शर्म नहीं आएगी..

विजय:- कौन मा.?

दीदी मेरी बात पर हैरान हो गई.. माँ और बाकी सबब मंद मंद मुस्कुराने लगी. दीदी अभी कहाँ पूरी तरह से हमारे रंग में रंगी थी.. उन्हें धीरे धीरे hi सब समझ में आता..

दीदी:- कौन माँ.... दीदी और कौन.. कोई और भी माँ है तुम्हारी...

विजय:- अच्छा तो फिर आपकी दीदी की पेट में जो बच्चा है, वो किसका है..

दीदी:- ऑब्वियस्ली तुम्हारा hi है... इसमें पूछने वाली बात कौनसी है..

विजय;- तो फिर जिसके पेट में मेरा बच्चा हो. वो मेरी क्या हुई..

दीदी:- ohhhhhhhhhhhhhhh.. तो ऐसे बोलो न बाबा.. बात को घुमा क्यों रहे हो..

प्रिय:- दीदी अभी आप हमारे रंग में सही से रंगी नहीं हाँ.

विजय:- प्रिय मेरी जान तो दीदी को भी हमारे रंग में रंगने का इंतेज़ाम करो.. कल करे सो आज कर......

priya,jhanvi,shruti:-- आज करे सो abbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbb... तीनो चीख उठी... पूजा दीदी और माँ भी साथ में शामिल हो गयी..

पूजा:- vijuuuuuuuuuu ीीी lovvvvvvvvvvvvveeeeeee youuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu

क्या मस्त आईडिया diaaaaaaaaaaaa हैई हममममः हम्मम्मम्हा हम्मम्मम्हा पूजा मुझे चूमने लगी.. माँ तो सबकी सरदार थी वो कैसे पीछे रहती.. उनके जन्मे अगर सेर थे तो माँ मेरी श्वेता सवा सेर थी...

श्वेता ने दीदी को पकड़ लिया और कस के अपनी बहन में भर लिया........ दीदी जो ये सबब सुनकर शॉकेड भी थेईईई.. और हैरत में भी डूबी हुई थेईईई..

फिर चरों मिलकर दीदी को नंगा करने में लग्ग गइईईई

दीदी;- yyyyyyyyy..yeeeeeeee...ssssss..sabbbbbbbbb..kkkkkk.. माँ ने दीदी के मोहन को बंद करने क लिए उनके होंटो को अपने होंटो में भर लिया.... दीदी पहड़फड़ाने लगी.

मई साइड में बैठा हुआ सबब को देख रहा था.. ऐसी hi तो लाइफ की कभी कल्पना की थी मैंने.. ये सबब खुशियों भरा, प्यार भरा माहौल था.. इसके मिलने की चाह तो थी.. पर मेरे पास कोई राह नहीं थी.. ऐसे hi समय को पाने की...

सबब ने मिलकर मुझे वो हिम्मत दी थी.. जो शायद मैं खुद में कभी न ला पाटा.. अगर खुद से लाता तो शायद मुझमे वो प्यार न रह पता.. जो अब्ब इस रूम में मुझे दिख रहा थाआआ....

दीदी आज साड़ी ड्रेस में थी.. कैसे भी करके चरों ने मिल कर दीदी को नीचे से नंगा कर दिए...... पंतय तक नहीं रहने दी.. वो भी उतार दी...

दीदी की छूट चमक रही थी.. दीदी तो जैसे आज कल रोज़ hi अपनी छूट के बाल साफ करने लगी थीई. अभी भी उनकी छूट तरह से चिकनी दिख रही थी..

गांड चुत्तड़ो में छुपी हुई थी.. मा ने दीदी को छोड़ दिए.. दीदी माँ से अलग हो कर बैठ गई और लम्बी लम्बी सांस लेने लगी..

मैंने प्रिय को देखा तो मेरी जान प्रिय मेरी आँखों की ज़ुबान समझ गई... प्रिय ने अपनी टीम को देखा तो वो भी समझ गयी... फिर तो तीनो जैसे दीदी पर टूट पड़ी..

दीदी जो अपनी साँस को ठीक कर रही थी.. तीनो ने दीदी को पकड़ा और बीएड पर माँ के साथ लिटा दिए... दीदी ऑंखें फाड़े तेज़ तेज़ सांस लेते हुए तीनो को देख रही theeeeeeeeee... वो कुछ बोल नहीं पा रही थीई... आज का दिन उनके लिए शॉकिंग डे था... जब वो इस रूम में आयी थी.. सबके साथ मौजूद थी. वो क्या जानती थे क आज उनके साथ क्या होने वाला है...

दीदी को बीएड पर लिया कर तीनो कभी दीदी को सीधा लिटटी तो कभी उल्टा.. ऐसा वो दीदी के ऊपर का भी सबब उतरने क लिए कर रही थीई..... जल्द hi दीदी पूरी तरह से नंगी हो गईई....

विजय:- बास अब पीछे हट जाओ सबब...... और सब मिलकर दीदी के जैसी हो जाओ.

फिर क्या था.. दीदी की ऑंखें बड़ी और बड़ी होती गईं... देखते hi देखते सब नंगी होती गाईएन.. माँ के कपडे प्रिय ने अपने हाथों से उतरे थे.. मैं भी अंडरवियर छोड़ कर बाकी असब उतर चूका था..

हमारे रूम का बीएड स्पेशल था.. बहुत बड़ा था.. सब आराम से उसपर समां गए थे..

दीदी:- ये सब क्या ही दीदी.. सबके सब ऐसे क्यों हो गए हाँ.........

माँ;- शुशी क्या कैसे हो गए हाँ. खुल कर बात करो..

दीदी:- क्या मतलब दीदी खुल कर बात करो..

प्रिय:- मौसी aaaaaaaaaaaa............... प्रिय आगे बोलती दीदी ने उसे एक चुटकी काट दी.....

दीदी:- कमीनी तो बाअज़ नहीं आएगी, एक तो मेरे सारे कपडे उतर दिए और फिर मुझे मौसी भी बोल रही है.... कोई अपनी मौसी के साथ ऐसा भी करता है क्या..

माँ:- यही सब तो बताने क लिए सब किया जा रहा है शुशी.. तू अब्ब भी नहीं समझी... तुम हमारी टीम में तब तक पूरी तरह से शामिल नहीं हो जाती.. जब तक तुम भी ज़रा सी भी शर्म बाकी है...

प्रिय:- और जिस दिन आप अपनी साडी शर्म छोड़ कर हमारी hi तरह से बेशरम बन जाएँगी.. उन दिन आप मौसी से दीदी भी बन जाएँगी...

पूजा:- विज्जउ आज सही मौका है.. दीदी की एक सीएल तो खोल hi दो.. पूजा दीदी को देख मज़ा लेते हुए बोली.......

विजय:- मई भी कुछ ऐसा hi सोच रहा हों.. देखो मेरा लुंड कैसे दीदी की छूट को देख कर अंडरवियर को फाड़ने में लगा हुआ है....... सब मेरे लुंड को देखने लगी.. दीदी ने मेरे लुंड को देखा और फिर दोनों हाथों से अपनी छूट को छुपा लिया... दीदी को ऐसा करते देख कर सब ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे..

माँ;- शुशी मेरी जान, आज तो तुम्हारी छूट की खैर नहीं....

पूजा:- नहीं माँ जी आज इसकी गांड में लुंड डालेगा विज्जउ... छूट शादी के बाद सही...

दीदी;- यययययय.. ये तुम सब कैसी बातें कर रहे हो.. मममम... मई अभी कुछ नहीं करने वाली........ भले hi मुझे सब मिलकर मौसी मौसी बोलने लगी..

सब फिरसे हस्सन लगे..

माँ:- न मेरी शुशी आज तो ख़ुशी का दिन है. आज तो तुम्हारी एक सील खुल कर hi रहेगी..

विजय:- आज आप पहले दीदी की छूट को चाट कर मज़ा लें, और दीदी की छूट के मज़े में लाये.. जब तक दीदी की छूट पानी में नाहा नहीं जाती.. तब तक दीदी ऐसे hi करती रहेंगी.......

माँ भी न जाने कबसे अपनी शुशी की छूट को पीने क लिए बेताब थी.. माँ अपनी सुषी की छूट को देख कर होंटो पर ज़ुबान फेरने लगी.. माँ को देख सब हस्सन लगे.. दीदी तो बास सब का चेहरा देखने में लगी हुई थी. दीदी के चेहरे पर पसीने की बूँदें भी चमकने लगी थी. दीदी नंगी हो कर उतना नहीं घबराई थी.. जितना सबके सामने छोड़ने की बात पर... उनकी आधी झिझक तो मैं ख़तम कर hi चूका था..

बास सबके सामने उसके साथ भी ऐसा कुछ होगा. ये उन्हों ने कभी नहीं सोचा था...

माँ ने दीदी क पेअर को पकड़ा और खेंच कर अपनी साइड में घुमा दिए... माँ ने अपनी जीब को होंटो पर फेरने बंद नहीं किया था......... माँ भी पुरे मूड में थिई

कौन कह सकता था क सूबा से माँ टेंशन में थी......... माँ ऐसे दिख रही थी.. जैसे माँ को सालों से कभी कोई ग़म मिला hi न हो..

दीदी अकेली हमसबब में फँसी हुई थी.. वो खुद को हमसे बचा नहीं सकती थी.. वो खुद को बचा कर जाती भी तो कहाँ जाती.....

माँ ने दीदी को सही से बीएड पर लिटा कर उनके पेअर खोल दिए और झुक कर दीदी की छूट पर अपनी जीब रख दी...

दीदी:- ahhhhhhhhhhhhhhhh diiiiiiiiiiidiiiiiiiiiiiiiiiii

माँ की जीब सीढ़ी दीदी की छूट पर जा लगी थी.. दीदी तो आग थी आग.. और उनकी छूट एक भट्ठी.. कैसे दीदी ये सबब सहन कर सकती थी..... जितना दीदी तरसी थी दीदी तो जाने कितने दिनों तक रेगुलर छोड़ने क बाद hi पूरी तरह से शांत होती..

प्रिय माँ के पीछे हुए और माँ की छूट पर ऊँगली फेरने लगी... माँ ने मुद कर प्रिय की देखा और एक स्माइल दे दी.. माँ का मोहन दीदी की छूट के पानी से सना हुआ था...

प्रिय ने एक ऊँगली माँ की छूट में घुसाई और अंदर बहार करने लगी.. जहान्वी और श्रुति भी दीदी की दोनों साइड हुई और दीदी का एक एक दूध अपने कब्ज़े में क्र लिया..

अब्ब मैं और पूआज hi रह गए थे.. पूजा अब्ब वो पूजा नहीं रह गई थी.. वो माँ और मेरी बहनो की टीम में शामिल हो कर फ़ास्ट हो गई थी.... अपने पति से अपनी चुड़क्कड़ टीम से कैसी शर्म...

पूजा ने मेरे उडनेरवेअर को पकड़ कर नीचे कर दिए.. जैसे hi पूजा के हाथ मेरे अंडरवियर से छुए थे मैं घुटनो पर हो गया था..

मेरा लुंड खड़ा था.. सीधा हुआ तो पूजा डार्लिंग ने उसे अपने हाथों में ले लिया.. दबा दबा कर चेक करने लगइईईई... फिर खुद वो घुटनो पर मेरे बराबर हुई और मुझे किश करने लगी.. दोनों हाथों से मेरे लुंड को अचे से मसल भी रही थी मेरी पूजा डार्लिंग..

 


अपडेट :: 143


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ahhhhhhhhhhhhhhhhh hmmmmmmmmmmmmm siiiiiiiiiiiiiiii uffffffffffffff दीदी न करो ना मुझसे सहन नहीं हो रहा है.. आठ ओह्ह्ह मा जहान्वी, श्रुति तुम दोनों तो छोड़ दो मुझे, मा मेरी आग अह्ह्ह अहह ओह्ह्ह सीईईई उम्म्म उफ्फ्फ्फ़ कोई तो मुझे इन सबब से बचाये..

मैं और पूजा किश कर रहे थे.. दीदी माँ और jhanvi,shruti को सहन नहीं कर प् रही थेईईईई.. वो लेस्बियन भी नहीं थी.. इतना के सामने कभी उसके साथ ऐसा नहीं हुआ thaaaaaaaaaaa.. इतनी सब मिलकर उसके बदन के साथ खेल रही थीई..

कुछ देर की किश के बाद मैं और पूजा अलग हुए...

विजय:- कैसा लगा मेरी जान को इतने दिनों बाद अपने पति का प्यार..

पूजा:- बहुत अच्छा लगा मुझे, इतने दिनों बाद अपने पति का प्यार प् के.. दिल खुश हो गया..

विजय:- और मेरी पत्नी की छूट का क्या हाल है.. कितनी बेचैन रही है ये आपके पति की लुंड के बिना...

पूजा झुकी और मेरे लुंड को थोड़ा सा अपने मोहन में लेकर चूस लिया फिर ऊपर हुई मुझे एक किश किया और

पूजा:- मेरे पति की पत्नी की छूट बहुत तदपि है मेरे पति के लुंड क लिए.. अब्ब मेरे पति की पत्नी और पति की पत्नी की छूट दोनों बहुत खुश हाँ..

विजय:- तो फिर अपने पति की पत्नी को और अपने पति की पत्नी की छूट को भी प्यार वसूल करवाओ.. आपके पारी का लुंड भी बहुत बेचैन है.. अपनी पत्नी के प्यार और छूट क लिए..

पूजा डार्लिंग हस्सन लगी फिर मुझे बीएड की एक खली जगा पर धक्का दे दिए और मेरे सर्र की साइड आ कर मेरे लुंड पर झुक गई.. पूजा की छूट मेरे मोहन के बराबर आई तो मैं पूजा चुत्तड़ो को पकड़ कर खोल कर अपनी जीब पूजा की छूट में घुसाने लगा.. पूजा मचल उठी.. गरम छूट और फिर गरम जीब..

मज़ा hi आ गया था....... मेरा लुंड अपने हाथ में थाम कर पहले वो अच्छे से हिलने लगी...

फिर उसे चूमने चाटने लगी.... मैं भी अपनी पियास बुझाने क लिए पूजा की छूट में जीब दाल कर घुआंने लगा.. जिस से पूजा की छूट का पानी मेरी जीब पर लगने लगा.. मैं उस पानी को अपनी अंदर उतरने लगा.... उँगलियों से पूजा की गांड को कुरेदने भी लगा.. पूजा की गांड भी मैं खोल चूका था.. तो मेरी एक ऊँगली बार बार गांड में घुसने का मैं बनाने लगी..

मेरी ऊँगली थी.. तो उसका ख्याल तो मुझे रखना hi था.. अपनी ऊँगली के मैं की बात समझते हुए मैंने उसे पूजा की गांड में उतार दिए.. पूजा ने मेरे लुंड को साइड में किया और

siiiiiiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh थोड़ी सी ऊँगली और डालो न प्लस कितने दिन हो गए हाँ मेरी गांड में कुछ गया नहीं है....

ऊँगली को गांड से निकल कर छूट में दाल कर अच्छे से गीला किया, फिर उसे निकल कर गांड के छेड़ में घुसा दिए.....

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मज़ा आ gayaaaaaaaaaaaa vijjjuuuuuuuuuuu मेरी जाननननननननन

कुछ देर ऐसे hi हम एक दूसरे की छूट और लुंड से खेलते रहे.. पूजा की छूट पानी पानी हो रही थीई.. जितनी आग उनकी छूट में भड़क चुकी थी.. मेरी चुसाई से वो और भी भड़क उठी थी....... मेरी उँगलियाँ और जीब पूरी स्पीड से और महारत से दीदी की छूट गांड और छूट पर चल रही थेईईईई.. दीदी की छूट की सहन शक्ति ख़तम होने लगी....... दीदी ने मेरे लुंड को अपने मोहन से निकला और आहें भरने लगी....... जल्द hi उनकी छूट पानी छोड़ने लगी....... पूजा मेरे लुंड को थामे झटके खाने लागैईईईई..

शुष्मा दीदी की सिसकियाँ तो अपने चरम पर थीई..... अब उनकी सिसकियाँ रंग बदल चुकी theeeeeeeeeeee

दीदी;- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी ओह्ह्ह्हह्ह दीदी ufffffffffff दीदी ..... जहान्वी और कस के पियो मेरे दूध को..... षुरूति तुम भी पियो अपनी दीदी का दुध आह्ह्ह्ह माआ ये मुझे क्या बना तुम सबब ने मिलकर.......... आह्हः सीईईई कभी सोचा भी नहीं था...

मुझे ऐसा मज़ा भी मिल सकेगा.. उम्मम्मम्मम्मः ahhhhhhhhhhh siiiiiiiiiiiiiiii

पूजा रिलैक्स हुई तो मेरे ऊपर से उठ गई, मैं भी उठ कर बैठ गया था..

प्रिय भी माँ की छूट चाट रही थी.. माँ कभी कभी दीदी की छूट से सर्र उठा कर अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह्हह प्रिय मेरी जान अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह करने लगती थी...

मैंने प्रिय को साइड में किया, माँ के पीछे आ कर मैंने प्रिय को देखा तो प्रिय मुझे दन्त दिखते हुए मेरे लुंड को पकड़ कर माँ की छूट के लिप्स के बीच में फंसा कर ऊपर नीचे करने लगी.......

माँ:- आअह्ह्ह मेरे पति का लुंड मेरी बेटी थाम कर मेरे पति की पत्नी की छूट पर रगड़ रही haiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शाबाश बेटी और अच्छे से करो.. श्वेता पीछे मुद कर प्रिय को और मुझे देखने लगी.. प्रिय ने श्वेता की छूट में मेरे लुंड को पकड़ कर हिलाते हुए दूसरे हाथ की ऊँगली को श्वेता की गांड में घुसा..

श्वेता मेरी माँ और भी खुश हो गईई. दीदी भी पानी छोड़ चुकी थी.. जहान्वी और श्रुति फिर भी दीदी के दूध के साथ लगी हुई थी.. दीदी की सांस तेज़ चल रही थीई... माँ दीदी की छूट का पानी पीने लगी..

कुछ देर प्रिय मेरे लुंड और माँ की छूट से खेलती रही.. फिर प्रिय ने मेरे चुत्तड़ पर एक हाथ रख कर मुझे धक्का मारने को बोलै.. मेरा लुंड नहीं छोड़ा था प्रिय..........

मैंने भी देर करना सही नहीं समझा. अब्ब तक्क मेरी लुंड बहुत बेककर हो चूका था किसी भी छूट में जाने क लिए.. उसे माँ की छूट मिली तो वो ख़ुशी ख़ुशी अंदर जाने लगा....

प्रिय ने फिर भी मेरे लुंड को नहीं छोड़ा.. मैं आधे लुज्ड से hi माँ को छोड़ने लगा.. पूजा भी अब तक रिलैक्स हो चुकी थी, वो उठी और मुझे फिरसे किश करने लगी.. पूजा को किश करते हुए मई माँ को छोड़ने लगा..

जब स्पीड बढ़ने लगी, माँ की बेकरारी बढ़ने लगी तो प्रिय ने मेरे लुंड को छोड़ दिए और मेरे पीछे आ कर अपनी दोनों बहन मेरे सीने पर कस ली और मुझे पीछे से एक धक्का मार दिए..

धक्का लगने से मेरा बाकी का बचा हुआ लुंड भी माँ की छूट में उतर गया.......

माँ;- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरे पति, मेरे लाल, तेरा लुंड वही जा पोहंचा है.. जहाँ से तुम निकले थे.. वही आज तुम्हरा होने वाला बच्चा भी है.. तुम अपने बच्चे को चूम कर मुझे छोड़ते रहो.. मुझे बहुत सुकून मिल रहा है मेरे बच्चे.. और हमारा बच्चा भी बहुत खुश है.......

प्रिय मेरे साथ मिलकर धक्के पर धक्का मारने लगी.. मेरा लुंड माँ की रास बहती छूट में फस फस कर अंदर जाने लगा...

माँ तो दीदी की छूट को अब्ब ऐसे hi चाट रही थिई. कुछ देर में माँ ने दीदी की छूट पर से सर्र उठाया और पीछे मुद कर मुस्कान देते हुए बेकरारी दिखते हुए आहें भरने lagiiiiiiiiiii...

मैं लगा रहा, जब तक माँ की छूट ने पानी नहीं छोड़ दिए.... माँ की छूट ने पानी छोड़ा तो मैंने भी माँ को छोड़ दिए..

दीदी अब्ब मुस्कुरा कर मुझे और मेरे लुंड को देख रही थी.. अभी तक दीदी ने सही से किसी की छूट में लुंड को जाते हुए नहीं देखा था.. आज देखा था.. पर उसे सही से नज़र नहीं आ रहा था......... दीदी की छूट शांत थी... तो दीदी अब शर्मा नहीं रही थी..

प्रिय मेरी और दीदी की नज़रों को भांप गई.. प्रिय दीदी के पास जा कर घोड़ी बन गई.. कुछ ऐसे क जब मैं प्रिय की छूट में लुंड दालों तो दीदी को पूरा व्यू देखने को मिले.........

विजय:- दीदी अपने पहले कभी मेरे लुंड को किसी छूट में जाते हुए नहीं देखा है ना.. तो आज आपको ये भी दिखा hi देते हाँ..

दीदी कुछ शरमाई फिर फ़ौरन hi खुद पर काबू पाते हुए बोल पड़ी.

दीदी;- हाँ विजू सच में hi मैंने पहले कभी किसी का घुसते हुए नहीं देखा..

सब फिरसे हस्सन लगी

पूजा:- दीदी आपकी शर्म अभी भी नहीं गई है..

श्रुति:- दीदी की शर्म तब तक नहीं जाएगी जबतक इनकी कोई सील नहीं खुल जाती..

दीदी:- तुम्हे बहुत जल्दी है मेरी सील खुलते देखने की कमीनी कही की..

जानवी:- मौसी यही तो एक चीज़ देखने वाली है.. हर किसी को अलग लग दर्द होता है देखते हाँ... हम देखना चाहती हाँ क आपको कितना दर्द होता है..

दीदी:- जा समय आएगा तब देख भी लेना.. चलो विज्जू अब्ब मुझे सब दिखाओ.. मैं तो अभी से hi एक्ससिटेड होने लगी हों....

प्रिय भी इतनी देर से माँ को चुड़ते देख रही थी.. उसकी ऑंखें भी पूरी लाल थी उसकी छूट भी बह बह कर अपनी बेककारी का ज्ञान दे रही थी..

मैं प्रिय के पीछे हुआ और अपने लुंड को पकड़ कर दीदी को देखने लगा..

वियजय:- दीदी आपको ये सब देखने को तब तक नहीं मिलेगा.. जब तक आप मेरे लुंड को पकड़ कर प्रिय की छूट पर सेट नहीं कर देती..

दीदी:- मैं क्यों करूँ.. अभी मुझे इस सबब से दूर hi रखो..

माँ:- शुशी तो विज्जू का लुंड कई बार थम तो चुकी है.. अब्ब शर्म कैसे.. और कैसी झिझक..

दीदी:- parrrrrrrrrr didiiiiiiiiiiii

माँ:- चलो जल्दी करो अब्ब कोई भी आ कर दूर नॉक कर सकता है.. विज्जु जब से आया है हमारे पास hi है.. कोई उसे ढूंढ़ने भी आ सकता है.. चारो नचार दीदी आगे बढे और मेरे लुंड को थम कर पिरया की छूट पर सेट क्र दिए.. दीदी मेरे लुंड को छोड़ने लगी तो मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिए...

अपने होंटो को किश वाले अंदर से हरकत देने लगा. दीदी भी समझ गई.. दीदी शरमाते हुए अपने होंठ मेरे होंटो के पास लेन लगी.. जैसे hi दीदी के होंठ मेरे होतो के पास ए तो मैंने उन्हें अपने होंटो में भर लिया.. और किश करने लगा...

मेरे होंटो पर पूजा की छूट का रास लगा हुआ था.. दीदी को कुछ अजीब तो लगा पारर वो साइड नहीं हटी.... फिर हमारी किश शुरू हो गई.. प्रिय से सहन नहीं हुआ तो वो खुद से hi पीछे हुई और मेरे लुंड को खुद से थोड़ा सा अपनी छूट में लेकर आगे पीछे होने लगी.. हमे पता चला तो हमने किश तोड़ दी.. दीदी प्रिय को ऐसे करते देख कर हस्सन लगी

एक हाथ से दीदी के एक मुम्मे को दबाते हुए दूसरे हाथ से प्रिय के चुत्तड़ को पकड़ कर मैं धक्के मारने लगा.. मेरा आधे से ज़यादा लुंड प्रिय की छूट में उतरने लगा.... कुछ देर में hi दीदी को न जाने क्या सूजी क मेरा लुंड प्रिय की छूट से निकल कर पाने मोहन में बैठी और पुरे मज़े से चूसने लगी.. प्रिय ने मुद कर देखा तो वो भी खुश हो गई..

कुछ देर दीदी ने मेरे लुंड को अच्छे से चूसा और फिर उसे थाम कर प्रिय की छूट पर सेट कर दिए...

इस बार दीदी ने अपनी एक ऊँगली से प्रिय की गांड को भी कुरेद दिए tha..didi ने मेरे लुंड को छोड़ा और मुझे वाइल्ड किश करने लागींणन्न

दीदी खुल गई थीई.. दीदी को किश करते हुए मैं प्रिय को छोड़ने लगा..

प्रिय के बाद बारी फिर मैंने दीदी को छोड़ कर बाकी सबको छोड़ा.. दीदी के दिल की मानते हुए दीदी के साथ सिर्फ ओरल सेक्स hi किया गया था.. दीदी की शर्म बहुत हद्द तक्क ख़तम हो चुकी थी...... दीदी ने भी सब की छूट का पानी टास्ते किया था....

सब बहुत खुश थे.... कई दिनों बाद सबब मज़े में हो गए थे.. सब एक दूसरे का प्यार प् कर हलके हो गए थे.. अब्ब किसी को आज की हुई घटना को ले के कोई परेशानी नहीं थी.... मैं आ गया था.. तो सब hi ठीक भी कर लेता...



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3 दिन बाद

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तीन दिन दोनों नानियाँ किसी से नहीं मिली... बस अपने रूम में hi रही.. खाना भी वही कहती रही.. शुष्मा दीदी के पिता मिल लिया करते थे दोनों से.. वो भी कम्....

दोनों नानियों ने कुछ दिन अकेले रहने को बोल दिए था.. दोनों बहने थी तो गुज़रे समय के गैप के चलते उनके पास अच्छा बहाना भी था.. दोनों साथ रहना चाहती हाँ, ये बोल दिए था...... और कोई उन्हें डिस्टर्ब न करे, ऐसा आर्डर जारी कर दिए गया था..

मामिययाँ और बहने धीरे धीरे नार्मल हो रही थी.. जो पहले से hi नार्मल थी.. वो भी अभी तक्क इस सबब पर यकीन नहीं कर पाई थीई.. और जो आधी पागल थी.. उनका ट्रीटमेंट चल रहा था.. ज़यादा टर्र उन्हें पैलेस के खुले माहौल में रखा जाता था. उनके सामने पैलेस में मौजूद बच्चे खेलते रहते थे.. उन्हें अच्छा माहौल दिए जा रहा था.. उम्मीद थी जल्द hi फिरसे वो ज़िंदगी की तरफ लौट आने वाली थी..

इन तीन दिनों में मैं होनी टीम के साथ खास कर महक शुष्मि दीदी और जूली के साथ मिलकर बहुत कुछ किया था......

तीन दिन गुज़रे तो शाम से कुछ पहले बेसमेंट में सब को लाया गया........ मुझसे रिलेटेड सब hi बेसमेंट में मौजूद थे.. मनजोत सिंह और उसके बेटे अभी तक नज़र बंद थे.. उनका ट्रीटमेंट करवा कर उन्हें कैद कर लिया गया था... कुछ और अभी उनके साथ नहीं किया गया था..

मनजोत सिंह और उसके बेटे भी बेसमेंट हॉल में मौजूद थे..

बाकि सब भीबड़े से हाल में मौजूद थे.. सब चेयर्स पर बैठे हुए थे.... दोनों नानियाँ भी मौजूद थी.. उन्हें ज़बरदस्ती यहाँ लाया गया था... वो आना नहीं चाहती theee...lekin वो कमज़ोर सी बोधि औरतें कैसे खुद की अकड़ में रह सकती थी.. उन्हें उठा क्र लाया गया था..

बेसमेंट में एक बड़ी मल्टीमीडिया स्क्रीन पूरी hi एक दीवार पर लगी हुई थी... सब हैरत से उसी दिशा में देख रहे थे.. सब हैरान थे क मैं अब्ब्ब उन्हें क्या दिखने वाला हों... मनजोत सिंह और उसके बेटे भी कभी मल्टीमीडिया स्क्रीन को देख कर हैरान थे.. तो कभी बाकी सबब को ख़ास कर माँ को देख कर ग़ुस्से में आये हुए थे... इतना सबब उनके साथ हो चूका था.. फिर भी वो अपनी अकड़ में थे.. अपने अहंकार में थे...

मेरा यानि क स का डर भी था.. पर जैसी सोच रखते हुए सबब ने पूरी उम्र hi बिता दी थी.. वो कैसे खुद को फ़ौरन hi अंदर से बदल लेते... बदलाव उनकी फितरत में hi नहीं था.......... पारर आअज बहुत कुछ बदलने वाला था..

मनजोत सिंह और उसके बेटों की लाइफ में .... और सब के सबब खून के आंसू रोने वाले थे... कुछ ऐसा hi सन आज यहाँ पर दिखाया जाने वाला था..

सब कभी मुझे और कभी स्क्रीन को देख रहे थे.. पापा, हर्ष चौहान, अजित भाई, कारन, राज और अनिल भी मौजूद थे. मेरे गैंग से सिर्फ जूली hi थी.. राजा पार्टी नहीं थी. और न hi उनकी फॅमिली का कोई मेंबर... लकड़ियां और औरतें तो सभी मौजूद थी hi..

कुछ देर में बेसमेंट हॉल लाइट ऑफ हुई, फिर कुछ सेकण्ड्स के बाद मल्टीमीडिया स्क्रीन पर एक वीडियो दिखाई जाने लगी ....

पहले तो वीडियो देख कर सब मुझे देखने lage...aur से इशारा करने लगे.. "ये सबब क्या है" पारर फिर सबका धयान वीडियो सन से खुद से hi अपनी और खेंच लिया....... सबब दुम्म साढ़े वीडियो को देखने लगे.. जल्द hi सब समझ गए क वीडियो में क्या दिखाया जाने वाला है.. सबब पूरी लगन से वीडियो को देखने लगे..

जैसे जैसे वो वीडियो आगे बढ़ रही थी.. सिसकियाँ शुरू हुई. फिर बढ़ती चली गई स्क्रीन पर चल रही वीडियो की आवाज़ बहुत ज़यादा थी.. साउंड बहुत hi ज़बरदस्त था... सिसकियाँ बढ़ी.. उस आवाज़ को फर्क नहीं पड़ा.. वीडियो वौइस् सबकी सिसकियों से बढ़ कर थी...... एक एक शब्द पूरी तरह से समझ आ रहा था...

सिसकियाँ फिर ऐसे बढ़ी क बेसमेंट हाल में फिर सबब hi हलकी आवाज़ में रोने लगे...

जैसे जैसे वीडियो आगे बढ़ रही थी.. सबके रोने की आवाज़ भी बढ़ने लगी थीईई..

हलकी रौशनी में मैंने देखा तो मनजोत सिंह और उसके बेटे भी सिसक रहे थे.. वो भी खुद को रोक नहीं पाए थे... वो भी हलकी हलकी आवाज़ में सिसकियाँ लेने लगे थे........ अभी तो सबब शुरुआत थी.. आगे चल के तो बहुत कुछ होने वाला था..

फिर वीडियो एक ऐसे मुकाम पर ाँ पोहंची.. जहाँ का व्यू देख कर दोनों नानियाँ झटके कहते हुए उठ कड़ी हुई और अपनी अपनी चप्पल उतार कर मनजोत सिंह और उसके बेटो के पास जा पोहंची और फिर चप्पलों से उन सबब को पूरी पावर से पीटने लगी.. वो दोनों रो भी रही थी. और सबको पीट भी रही थी..

मनजोत सिंह और उसके बेटे घुटनो पर बैठे हुए फूट फूट कर रोने लगे....

जुटे तो सबको पद hi रहे थे.. फिर भी वो अपने दोनों गालों पर थप्पड़ मार मार कर रो भी रहे थे.. मनजोत सिंह के रोने की आवाज़ सबसे बढ़कर थी...

पूरा हाल hi ग़म और दर्द में गया था.. हाल में बैठे सब दर्द में डूबे हुए थे.. पुरे हाल में अब सिर्फ रोने की आवाज़ें गूंजने लगी थीई..

फिर अचानक से hi स्क्रीन पर चल रही वीडियो की वौइस् और भी बहुत ज़यादा बढ़ गई.... दोनों नानियाँ, मनजोत सिंह और उसके बेटे भी रट हुए खुद को पीट ते हुए स्क्रीन की तरफ मतवज्जु हो गए.......

इस बार का देखा हुआ सन देख कर तो माँ के परिवार से जुड़े हुए सबब देहल उठे थे.......... वो सोच भी नहीं सकते थे.. क उन्हें कुछ ऐसा भी देखने को मिल सकता था...

इस बार मनजोत सिंह और उसके बेटे फर्श पर झुके और अपने सरों को ज़ोर ज़ोर से फर्श पर मरने लगे.. वो सारे खून में नहाने लगे थे....... पर वो खुद को रोक भी नहीं रहे थे... आज ज़िन्दगी में पहली बार उन्हें अंदर के दर्द का एहसास हुआ था... आज पहली बार उन सबब के सोचने का नज़रिया बदला हुआ था..

जो दिखाया जा रहा था.. वो सहन करने की शक्ति तो किसी अच्छे भले इंसान में भी नहीं हो सकती थी... उस स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली वीडियो को देख कर तो पत्थर भी पिघल कर रेज़ा रेज़ा हो जाए.. ये सबब तो फिर भी एक आम इंसान थे..

दोनों नानियाँ भी नीचे फर्श पर गिर कर दगडेन मार मार रोने लगीं.. एक बार फिरसे वीडियो की आवाज़ डाब कर रह गई.... एक बार फिरसे हाल में दहाड़ें मार मार कर रोने वालियों के रोने की आवाज़ें गूंजने लगी थी....... ऐसी दर्द भरी आवाज़ें कोई भी सहन करने की शक्ति खुद में नहीं पता था...

मुझ समेत हाल में जो भी मर्द था.. वो भी ऊंची ऊंची आवाज़ में रो रहे थे.. हर्ष चौहान जो कभी कभी आँखों में ानुस ले आते थे.. अजित भाई तो रोने के आदि थे hi... पापा जो उस दिन माँ से मिलने के बाद थे... राज और अनिल फिर कारन.. सब के सब आवाज़ में रोने लगे थे.. किसी से भी उस वीडियो का दर्द सहन नहीं हो प् रहा था...

बेसमेंट का हाल रोने वळून के आंसुओं से और मनजोत सिंह और बेटो के सरों से निकलने वाले खून से नहाने लगा था......

लेकिन न तो किसी के आंसू बहने रुके और न hi मनजोत सिंह और उसके बेटो के सरों से बहने वाला खून........ सब रो रहे थे... मनजोत सिंह और उसके बेटे रट हुए अपने सर्र फोड़ रहे थे......

किसी से बदला लेना हो तो उसे अंदर से इतना तोड़ दो.. क वो खुद के अंदर होने वाली टूट फूट से hi पल पल मरता रहे... मनजोत सिंह और उसके बेटो को सजा तो फ्यूचर में मिलती hi रेहनी थी... पारर वो उस सजा को पुरे मैं से झेल नहीं paate..majburi समझते हुए, मुझसे दररते हुए वो सजा झेलते... फिर जैसे hi उन्हें कोई मौका मिलता वो कोई भी चालाकी करते हुए भाग खड़े होते.. या किसी का नुकसान कर बैठते..

उन्हें अंदर से इतना तोड़ देना चाहता था.. क वो अपनी सजा तो से भाग भी न सकें.. और खुद को हर किसम क सजा के लिए तैयार भी रख सकें..

ये मेरी माँ के अपने थे.. सबब को जान से मारा नहीं जा सकता था.. सबब को तोड़ कर सबको ये बताना चाहता था.. क औरत की कदर क्या होती है.. औरत की इज़्ज़त क्या होती. औरत को भी दर्द होता है.. औरत की भी इज़्ज़त होती.. औरत को भी सम्मान दिया जाता है......... औरत को भी ज़िन्दगी के एक एक पल की ख़ुशी को सेलिब्रेट करने का हक़ है....... औरत के भी खवाब होते है.. अरमान होते हाँ.. हसरतें होती हाँ..

मनजोत सिंह और उसके बेटे औरत को कोई वैल्यू नहीं देते थे.. जुटे की नोक पर रखना जानते थे.. आज से ये सबब औरतों के जूतों की नोक पर रहने वाले थे.. सबको ये एहसास करना था.. क जिस औरत को वो अब तक्क दो कोड़ी से भी कमतर गिरदंते ए han..aaj के बाद से औरतों के सामने इंसबब की इज़्ज़त दो कोड़ी से भी काम हो कर रह जायेगी.. आज से उनकी मालिक सिर्फ और शरीफ औरतें hi होंगी.. सब मिलकर सिर्फ और सिर्फ औरत की खिदमत करते हुए अपनी बची साँसे पूरी करेंगे..

माँ को अपने पिता और भाइयों का कभी प्यार नहीं मिला था.. नानी को अपने पति का नहीं मिला था.. अपने पति से सम्मान नहीं मिला था.. ममियों का भी यही हाल था..

वो भी इज़्ज़त और सुकून की ज़िन्दगी भूल चुकी थी.. मेरी बहने जो ये जान hi नहीं पायी थी. एक पिता क्या होता है.. एक पिता का प्यार क्या होता है.. एक दादा का प्यार क्या होता है.. एक आज़ाद लाइफ क्या होती है.. उस आज़ाद लाइफ में अपणु का प्यार मिले तो फिर जिदनागि कितनी हसीं हो जाती है.. वो कुछ भी तो नहीं जान पाई थी.. वो कुछ भी तो हासिल नहीं कर पाई थी.. खुद में खवाब बुनते बुनते वो खुद hi सबब खवाब रेज़ा रेज़ा करके पागल हो गई थीई..

मनजोत सिंह ने और उसके बेटों ने सब से सब कुछ छीन लिया था.. किसी जानवर से भी बदतर ज़िन्दगी जी थी सबने..

अबसे सब औरत की इज़्ज़त क्या होती है.. वो जानेगे.. एक आज़ाद लाइफ क्या होती है वो जानेगे.. दर्द क्या होता है वो जानेगे.. अपणु को ज़ख़्म दे कर सहन करना कितना मुश्किल होता है वो जानेगे..

अपणु से खुशियां छीन कर कैसे लगता है.. अब से वो ये भी जानेंगे.. जो जो वो सबके साथ कर चुके थे.. अब्ब से सबके साथ वो वो होता रहेगा.....

मनजोत सिंह और उसके बेटे अंदर से टूट चुके थे.. उनकी असली सजा अब्ब से शुरू हो चुकी थी..... जबसे पैलेस में आये थे.. वो अपने घमंड में थे.. अपनी अकड़ में hi थे.. वीडियो देख लेने क बाद वो अपना घमंड, अपनी अकड़ भूल चुके थे..

वो फर्श पर सर्र टकरा कर खून बहा कर रो रहे थे....

बाकी सबब भी वैसी hi कंडीशन में थे.. नानियाँ भी नीचे फर्श पर बैठी हुई रो रही थी.. मेरा जो काम था वो हो गया था.. वीडियो भी साडी ख़तम हो चुकी थी....... लेकिन सब अभी भी वैसे के वैसे hi थे....

दर्द फिर से मिला था.. दर्द फिरसे बहुत बढ़ा था.. फिरसे एक बार सबकी सहन शक्ति ख़तम हो गई थी.. फिरसे सब ग़म में डूब गए थे..

 


अपडेट :::144


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बेसमेंट के हाल में सब का hi बुरा हाल था.. जैसा सबको दिखाना था. वो मैं दिखा चूका था.. अब्ब बेसमेंट का सबका काम ख़तम हो गया था..

जूली ने भी लाइट ों कर दी थी... सबके चेहरे आंसुओं से टर्र थे... दोनों नानियाँ उनकी तो हालत देखने वाली थी.. वो माँ थी और एक माँ से बढ़ किसे दर्द हो सकता था..

वीडियो में मैंने माँ की पूरी लाइफ शॉर्टकट में दिखा दी थी...... 1 घंटे की बनाई गई एक फिल्म थी.. जिसमे कोठे की कुछ लड़कियों ने, मेरी बहनो ने, मैंने, कुछ दूसरे पैलेस के ख़ास आदमियों ने किरदार ऐडा किया था...

माँ की कहानी में पापा का किरदार, घर में मनजोत सिंह का किरदार ऐडा किया था.. प्रिय माँ के बहुत करीब रही थी.. प्रिय ने माँ के किरदार को बहुत अच्छे से ऐडा किया था.. माँ की पूरी कहानी खुल कर सबके सामने आ गई थी..

मनजोत सिंह जो औरतों को जुटे की नोक पर रखता था.. उसका किस्सा भी दिखाया गया था.. कैसे उसने सुमित्रा को नंगा करके बस्ती में घुमाया था.. फिर उसके बाद पीयूष ने कैसे माँ को तंग किया. कैसे माँ पापा के करीब हुई.. कैसे माँ के प्रेग्नंट होने के बाद मनजोत सिंह और उसके बेटो ने माँ को पीटा था.. फिर वहां दन्न की एंट्री हुई..

वहां से माँ के निकले जाने के बाद दन्न और उसके घरवळून ने माँ के साथ क्या कुछ किया वो भी दिखाया गया.. उसके बाद कोठे की ज़िन्दगी को भी दिखाया गया.. यही से सब पूरी तरह से टूट गए थे..

मनजोत सिंह और उसके बेटे कभी सोच भी नहीं सकते थे.. क उनके घर की इज़्ज़त को ऐसे मिटटी में भी मिलाया जा सकता है.. वो भी दन्न और नागराज द्वारा..

यही से उन सबब को एहसास हुआ क वो अपने अहंकार और औरत विचारों के चलते कितना गलत कर चुके हाँ..

नानियाँ कैसे ये सबब सहन कर सकती थीईईई.. जूतों से पीट पीट के अपने अंदर की भड़ास निकलने लगी.. लेकिन ऐसी भड़ास भला कभी निकल भी सकती है.. एक शरीफ इज़्ज़तदार घर की बेटी को अपणु ने hi कोठे की ज़ीनत बनने पर मजबूर कर दिए था..

शुशी दीदी के दोनों भाई और पिता भी बहुत रो रहे थे... मनजोत सिंह ने उनके साथ जो किया था.. उसी के चलते वो दुखी तो बहुत थे... पारर माँ की कहानी जान कर वो अपना सबब भूल कर माँ के दर्द में डूब गए थे...

मैं चलता हुआ माँ के पास पोहंचा और माँ को उठा कर अपने गले से लगा लिया.. माँ मेरे गले लग कर फिरसे पूत फूट कर रोने लगी... माँ को दर्द मिले hi इतने थे.. जिसे सहन कर पाना आसान नहीं था..

बेगानो ने तो दिए hi थे.. पारर अपणु ने जो ज़ख़्म जो दर्द दिए थे.. माँ कैसे वो सहन कर पाती..

माँ को सिर्फ मेरा प्यार hi इस दर्द से बहार निकल सकता था.. मेरे होने से माँ को कुछ चैन मिलने लगा.. और माँ का रोना कम् होने लगा... मुझे माँ के पास देख कर सबब मेरे पास इकठे होने लगे... कुछ देर मई माँ को गले से लगाए रहा.. फिर माँ को अपनी गॉड में उठा कर सबके सामने मैं बेसमेंट से बहार जाने लगा..

मेरे पीछे बाकी भी सबब आने लगे.. पीछे कौन रह गया था बेसमेंट में ये मैंने नहीं देखा था... दोनों नानियों को अब्ब अच्छे से एहसास हो गया था...

क उनकी नाराज़गी जायज़ नहीं है.. लेकिन उनके कुछ बोलने से पहले hi मैं माँ को लेकर बेसमेंट से बहार जा चूका था..





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रात के 12 बजे का समय था.. और हम अपने रूम में थे... हमने अपना खाना भी रूम में hi खाया था.. कोई भी हमें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था..

अपर्णा भी हमारे साथ hi थी.. आज वो भी हमारे पास hi रहने वाली थी.. शुष्मा didi,puja माँ और मेरी बहने सबब मौजूद थी.. माँ अब्ब बहुत हद्द तक्क रिलैक्स थी.. माँ को दर्द मिले थे.. तो कई लोगों का प्यार भी मिला था.. मई था मेरी बहने थी.. दिल्ली वाली फॅमिली थी... माँ की दुलारो शुशी दीदी थी.. माँ को दर्द कम् तो होना hi था.. लेकिन पूरी तरह से ख़तम नहीं हो पाया था.. आज माँ के साथ साथ अपर्णा भी मुझसे लिपटी हुई थी.. वो कभी माँ से मस्ती करती तो कभी मुझसे..

अपर्णा माँ को हसना चाहती थी.. माँ भी कैसे अपनी अपर्णा का दिल दुख सकती थी.. माँ अपर्णा के प्यारा को देखते हुए.. अपर्णा के मासूम चेहरे को देखते हुए अपर्णा से दुलार करने लगती थी.. अपर्णा भी किसी बच्ची की तरह से खिलखिलाने लगती थी.. बाकी सबब हमे देख रही थी. कबि वो शामिल हो जाती तो कबि एक दूसरे बातें करने लगती.. कभी वो भी माँ से छेड़ छड़ करने लगती..

12 के आस पास दूर नॉक हुआ तो सब एक दूसरे को देखने लगे.. इस टाइम कौन आ गया हमें डिस्टर्ब करने...

माँ:- जाओ प्रिय बेटी देखो तो कौन है दूर पर..

प्रिय बीएड पार्स कूदि और जा कर दूर ओपन कर दिए.. दूर पर दोनों नानियाँ कड़ी हुई थी.. प्रिय साइड हट कर कड़ी हो गयी.. दोनों नानियाँ अंदर दाखिल हुए तो प्रिय ने फिरसे कुण्डी लगा दी...

दोनों नानियों को अंदर आते देख मैं बीएड से उतर कर नीचे काढ़ा हो गया.. माँ और बाकी सबब भी बीएड से उतर कर कड़ी हो गईं थी..

ये सम्मान था हमारा उनके लिए.. वो हमारे किसी भी मामले में टांग अदने का हक़ नहीं रखती थी.. लेकिन उनका जो सम्मान था वो हम कभी नहीं भूल सकते थे..

बेसमेंट में उन्हें अकेले छोड़ आना अलग बात थी.. लेकिन इस समय वो दोनों हमारे पास आई थी.. मेरी माँ की माँ और मौसी थी.. ईंटे गुस्ताख़ हम कैसे हो सकते थे..

दोनों सर्र झुकाये हुए आगे बढ़ने लगी... मैंने माँ का हाथ थमा और दोनों नानियों की और बढ़ गया..

मैंने माँ की मौसी को गले से लगा लिया तो माँ ने अपनी माँ को गले से लगा लिया.. दोनों नानियाँ फिरसे रोने लगी. माँ की मौसी मुझसे पहले बार मिल रही थी.. नानी से भी मई अभी सही से नहीं मिला था.. पुणे में भी अफरा तरफी का आलम था.. तो जल्दी सब निपटा कर सबको दिल्ली भिजवा दिए था..

विजय:- नानी आप रोयें मैट.. जो होना था वो हो गया... गुज़रा समय फिरसे वापिस भी तो नहीं लाया जा सकता न.... इसलिए गुज़रे समय को भूल कर अब की नयी मिलने वाली खुशियों को सोचना चाहिए... ग़म माँ को मिले हाँ तो आप सबब भी हमेशा से hi खुशियों क लिए तरसती रही हाँ.. हमारी hi तरह से आप सबब भी तो दर्द भरी लाइफ जीते रहे हाँ..

दोनों नानियाँ माँ और मुझसे अलग हुई..

नानी:- श्वेता बेटी तुम्हारे साथ इतना कुछ हुआ मैं तो सोच भी नहीं सकती थी..

नानी 2:- हाँ श्वेता मेरी जान मुझे भी यकीन नहीं हो रहा क तुम एक नर्ग ने रहती रही हो.. इतना दर्द इतनी तकलीफ, न इज़्ज़त रही न सुकून के दो पल मिले..

नानी;- वो भी अपणु के वजा से .. नानी के आंसू नहीं रुक रहे थे..

माँ;- माँ अब्ब जो हुआ उसे भूल जाओ.. अब्ब तो सबब ठीक है ना...

नानी:- नहीं श्वेता अब्ब भी कुछ ठीक नहीं है.. मैं समझ सकती हों, जैसे ज़िन्दगी तुम्हे मिली है.. शर्म ो हाय सबब ख़तम हो के रह गई है.. पर बेटी विज्जू से तुम्हारा ताल्लुक़ मैं सहन नहीं कर सकती.. तुम विज्जू से वैसे सम्बन्ध ख़तम कर दो..

विजय;- नानी आप ऐसी बात क्यों कर रही हाँ.. ऐसा होना मुमकिन नहीं है.. माँ से मैं शादी कर चूका हों.. माँ अब्ब सिर्फ मेरी माँ नहीं है.. माँ अब्ब मेरे लिए श्वेता मेरी पत्नी है.. मेरे बच्चे की माँ बनने जा रही है..

नानी ने मुझे एक खेंच कर चांटा मार दिया.. आंसू उनके रुक गए थे.. अब्ब वो ग़ुस्से में आ गई थी..

नानी:- जानते हो समाज में एक बीटा अपनी माँ से शादी नहीं कर सकता.. फिर शादी तो तुम कर hi चुके हो. एक patni(puja) है तुम्हारी.. तो अपनी माँ से शादी करने की क्या ज़रूरत थी.. जो कुछ पहले हो चूका उसे भूल कर फिरसे एक नयी लाइफ जी जा सकती थी.. लेकिन तुम दोनों का वैसे रिश्ते में बांधना सही नहीं था.. श्वेता को भी तो रंजीत मिल गया था.. तो वो उससे भी तो शादी कर सकती थी.. तुमसे शादी का क्या मतलब.. मुझे ये सबब मंज़ूर नहीं है..

नानी 2:- हाँ श्वेता अब्ब जो हुआ सो हुआ.. अब से तुम दोनों माँ बीटा बन्न कर रहो और

आगे से शारीरिक सम्बन्ध हमेशा क लिए बंद कार्डो....... ऐसा हमारे खंडन में होना मुमकिन नहीं है... माँ बेटे में शारीरिक सम्बन्ध.. छी chhi.mujhe तो ..

माँ, या कोई और नहीं कुछ भी नहीं बोल रहा था.. यहाँ दोनों नानियों से लड़ाई मक़सद नहीं था.. मटर को इस तरह से सोल्वे करना था.. क कही कोई नरागजी या रंजिश बाकि न रहे.. वर्ण जैसे वो बातें कर रही थी. वो छलनी कर रही थी मुझे भी और माँ समेत बाकी सबब को भी..

नानी 2 आगे कुछ बोलती मैं उनकी बात kaat'ta हुआ बोलै..

विजय;- नानी आपके घर से माँ को धक्के मार कर निकल दिए गया था. जब माँ आपके घर से निकली तो माँ का रिश्ता आप सबब से ख़तम हो गया था... बाद में जो लाइफ माँ को मिली.. मई और प्रिय दुन्या में आये तो फिर वही लाइफ हमे भी मिली..

कैसे भी करके मैंने अपने दुम्म में ये नहीं ज़िन्दगी हासिल की है.. नयी ज़िन्दगी की खुशियां हासिल की हाँ.. किसी को भी हम कोई हक़ नहीं देंगे क वो हमारी खुशियों में रुकावट बने.. चाहे वो कोई भी हो... ये हमारी ज़िन्दगी है.. हम अपने हिसाब से जियेंगे.. आर किसी को कोई ऐतराज़ होता है तो वो हमारी ज़िन्दगी से दूर जा सकता है.. माँ और हम सबब पहले भी तो सबब से दूर hi रहे हाँ.. बाद में भी रह लेंगे... पहले भी सालों दर्द सही हाँ.. कुछ और सेह लेंगे.. पारर किसी को भी हमारे मामलात में दखल देने का कोई हक़ नहीं है.. आप को भी नहीं.. आप में से किसी को भी नहीं..

मेरी बात सुनकर दोनों नानियाँ शॉकेड हो गयी, वो फिरसे दुखी हो गयी..

नानी;- मतलब हमे फिरसे दूर जाना पड़ेगा.. अगर हम में से कोई भी तुम सब की ज़िन्दगी में दाखिल दे गए तो तुम उसे खुद से सबसे दूर कर डोज..

विजय;- हाँ नानी ऐसा hi है.. एक बात मैं आपको बता दो.. यहाँ पैलेस पर मौजूद हर एक वियक्ति. चाहे वो लड़की, औरत हो या मर्द वो सबब के सबब बेशरम है.. जैसी लाइफ हमे मिल चुकी है.. उसी हिसाब से शर्म नाम की कोई भी चीज़ हममे नहीं बची है.. माँ सालों तक कोठे पर रह कर चुदती रही है.. (मेरी इस बात पर दोनों नानियों के चेहरे शर्म से लाल हो गए थे) इज़्ज़त गई तो शर्म कहाँ से बचेगी.. शर्म और इज़्ज़त हर रोज़ कभी मेरे सामने तो कभी प्रिय के सामने खतम की जाती रही है.. तो हमे क्या ज़रूरत है, बेशरम होते हुए खुद को शर्म वाला बताते फिरें... जैसी लाइफ हमें मिल चुकी है.. अब्ब सबब में प्यार है.. जिस्म की चाह है.. हवस नहीं है, जिस्म की भूक नहीं.. सब मिलकर अच्छे से रह रहे हाँ.. एक खूबसूरत खुशियों भरी ज़िन्दगी गुज़र रहे हाँ..

तो हम में सिर्फ वही शामिल हो सकता है.. जो बेशरम हो.. हमारे रेहन सहन को हज़म कर सके.. हमसे प्यार करे.. दिल से हमें खुद का माने.. आप सबब क लिए ये सबब नया नया है.. तो आप को ये सबब घालता लगेगा hi.. पारर हमारे लिए, इस पैलेस में रह रहे किसी वियक्ति क लिए भी गलत नहीं है..

आप समाज की क्या बात करती हाँ.. समाज हमे देता hi क्या है.. इज़्ज़त तक्क तो माँ से छीन ली इस समाज ने. इसी समाज के कई ठेकेदार रोज़ कोठों पर जा कर मजबूर, बेबस लड़कियों और औरतों को छोड़ते han..maa को भी ऐसे hi समाजिक वियक्तियों ने हर रत गन्दा kiya.....aur आप कहती हाँ मई हम समाज के साथ चलें... इस समाज के ठेकेदारों ने हमे सिर्फ दर्द hi दर्द दिए हाँ. हमारे लिए कहाँ वो कुछ कर सकते हाँ.. इसलिए हमें समाज से कोई ग़र्ज़ नहीं है.. समाज क लिए तो पहले से hi बहुत कुछ कर रहा हों.. समाज सेवा के मुझे समाज से फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला.. समाज खुद की भलाई नहीं कर सकता वो हमारे बारे कुछ अच्छा कैसे सोच सकता है.... इतना बेहिस और लचर है हमारा समाज..

नानी हम आप को नहीं छोड़ना चाहते.. अगर आप सब को यहाँ रहना मुश्किल लगे तो आप सब को कहीं और शिफ्ट भी किया जा सकता है..

नानी:- चल शुष्मा मैं तो ऐसे माहौल में तुझे नहीं रहने डोंगी.. didi(nani) आप यहाँ रहना चाहे तो रह सकती हाँ.. मैं तो कल hi अपने परिवार के साथ यहाँ से चली जाऊँगी.. खुद hi इसने कह दिए है क पूरा पैलेस hi बेशर्मो से भरा पड़ा है तो मैं कैसे अपनी बेटियों को यहाँ रुकने दे सकती हों..

नानी;- हाँ छोटी तू सही बोल रही है. मेरी कई पोतियां तो यहाँ रह कर इनके जैसी हो जाएँगी.. श्वेता बेटी तुम जैसे चाहो अपनी लाइफ जी सकती हो.. पर मैं और मेरी पोतियां यहाँ नहीं रह सकती.. अपनी बहुओं को भी मई यहाँ से ले जाऊँगी..

माँ झिलकिल नाम आँखों से मुझे देखने लगी.. माँ का सपना था क वो बाकी की पूरी लाइफ अपनी माँ के साथ hi बिताना चाहती हाँ.. माँ कैसे एपीआई माँ को यहाँ से जाता हुआ देख सकती थी...

शुष्मा दीदी मुझे देख रोने लगी thee..mujhe लेके तो वो ढेरों सपने भी देख चुकी थी.. कैसे वो मुझसे दूर हो सकती थी.. दीदी की डाइवोर्स बारे अभी नानियाँ या उनके परिवार वाले नहीं जानते थे...

पूजा मुझे इशारा करने लगी क मैं कुछ तो करों.. प्रिय, जहान्वी और श्रुति भी फिरसे नानी को नहीं खोना चाहती थी..

मैं सब को देख रहा था.. सब के अंदर की फीलिंग को जान प् रहा था.. अभी माँ खुद के कण्ट्रोल में थी. अगर दोनों नानियाँ चली जाती तो माँ इस बार पूरी तरह से टूट जाती.. मिलने वाली खुशियां फिरसे दूर हो जाती... शुष्मा दीदी भी तो टूट जाती ...

माँ बोल padi"vijjuu करते क्यों नहीं" नानी और नानी 2 जाने की बात करने क बाद मेरा और सबका रिएक्शन देख रही थी. वो जाना चाहती थी. पारर शायद वो जल्दी नहीं करना चाहती थी. वो चाहती थी क वो मैं या माँ अपना फैसला, अपनी सोच बदल कर उन्हें रुकने क लिए कह देंगे...

लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं था.. अब्ब एक hi तरिएक था....... मैंने माँ को पकड़ लिया और माँ के होंटो से होंठ जोड़ कर माँ को किश करने लगा.. माँ भी शायद कुछ समझ गई थी.. माँ भी किश में मेरा साथ देने लगी.. माँ अपने पति को कैसे मन कर सकती थी.. मैं और माँ पुरे मूड में आते हुए किश करने लगे.

नानी;- कैसे बेशरम हो गए हाँ दोनों, हमारे सामने hi किश कर रहे हाँ.. कुछ तो हमे रेस्पेक्ट दे देते. हमारे जाने क बाद जो जी में आये करते रहते.. मैंने अच्छे से माँ को किश करके छोड़ दिए..

विजय:- नानी एक बात तो पक्की है क मेरे रहते आप दोनों पैलेस नहीं छोड़ सकती..

नानी 2:- ऐसे कैसे नहीं छोड़ सकते.. यहाँ रह कर मैं अपनी बेटियों को बेशरम बना नहीं देख सकती..

vijay:-nani उसका भी हॉल है मेरे paas..meri बात पर सब मुझे देखने लगीई

नानी:- ऐसा कौनसा हल है तुम्हारे पास..

विजय:- (सबको देखते हुए) आप दोनों को भी......... (रुक कर फिरसे सब को देखने लगा) आप दोनों को भी....... सबकी सांस अटकने लगी.. दोनों नानियों भी सस्पेंस में जकड़ी गईं थी.. बाकी तो सबब खुश थे क शायद मई कोई सलूशन बताने वाला हों...... सलूशन तो मैंने बताने hi वाला था.. पारर सबब को एक झटका ज़रूर लगने वाला था.. किसी को खुसी का तो किसी परेशानी का ..

नानी:- अब्ब बोल भी दो .. क्या बोलने वाले थे तुम.. एक तो आजकल के लड़के पता नहीं क्यों इतना सस्पेंस बढ़ने लगते हाँ...

मैं सबके सामने माँ के दूध को दबाने लगा.. दोनों नानियाँ फिरसे शर्मा गई.. दोनों ने नज़रें फेर लिए..

माँ:- विज्जू अब्ब बता भी दो.. मुझसे भी सस्पेंस बर्दाश्त नहीं हो रहा है..

विजय:- बता तो दिए है....

सबब:- क्या मतलब.? कब बता दिए है तुमने.

विजय:- अभी तो बताया है.... कोई फिर भी कुछ नहीं समझा..

नानी;- विज्जू तुम बोल के नहीं बता सकते ..

नानी2 :- बताते हो या हम जाएँ

विजय:- नहीं बता के सही से समझ नहीं आएगा... मैं करके दिखा सकता हों..

नानी:- चलो करके दिखाओ.. पर जो भी है, जल्दी करो.. बहुत देर हो गई है हमें जाना बह है.. और कोई faissssssssssssssssssssss............... chirrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr oiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa

दोनों नानियों के गले के नीचे से कपडे phat'te चले गए.... सब ये देख कर हैरान रह गयी.. दोनों नानियाँ चीख पड़ी.. पूजा के शिव कोई नहीं समझ सका.. पूजा भाभी भाभी आ कर मेरे गले से लग गई.. फिर मेरा मोहन चूमने लगी..

पूजा;- वजूउउउ यू अरे थे बेस्ट.. क्या दिमाग लड़ाया है.. सच में hi इससे ाचा आईडिया कोई हो hi नहीं सकता...

पूजा के बोलते बाकि भी सब समझ गयी.. और दोनों नानियाँ शॉकेड कड़ी खुद को उअप्र से नंगा देख रही थी..

विजय:- प्रिय. दीदी तुम सबब देख क्या रही हो.. पकड़ो दोनों को बीएड पर दाल दो.. आज दोनों की शर्म ख़तम करके दोनों को अपनी टीम में शामिल करते हाँ.. तब hi सारे मसले हल होंगे.. बस फिर क्या था.. दोनों नानियों के रपे की तैयारी शुरू हो गयी.

मेरी तितलियाँ दीदी और पूजा के साथ मिलकर उन्हें नंगा करने लगी.. अपर्णा जो इतनी देर से कड़ी ये सबब देख रही थी.. वो भी पीछे नहीं रही और वो भी दोनों नानियों को नंगा करने में मदद करने लगी.. कुछ देर दोनों नानियाँ नंगी हो गयी... दोनों नानी को बारी बारी सबने उठा कर बीएड पर दाल दिए..

इतना बड़ा शॉक दोनों नानी को अपनी पूरी लाइफ में नहीं मिला था... शुरू में तो वो चीखी चिल्लाई... बाद में आंसू बहाने लगी.. दोनों अपने दूध और अपनी छूट को अपने हाथो से कवर करने की कोशिश में लगी थिई..

माँ:- माँ और मौसी को छोड़ कर खुद की टीम में शामिल करना सही फैसला है. पर अगर ऐसा करने से काम न बना तो.. सब बर्बाद भी हो सकता है..

विजय:- श्वेता डार्लिंग अपने पति पर भरोसा रखो... चलो अपनी बेहेन को साथ मिला कर आप दोनों अपनी अपनी माँ की छूट छतो..

मैंने जहान्वी को पकड़ लिया.. पूजा तुम षुरूति के साथ मज़ा करो और दोनों नानियों को सबब दिखना चहिये.. दोनों बूढ़ियों को आज इतना गरम करना है क छोड़ने क लिए मचल उठें.. और अपर्णा तुम क्या करने चाहती हो.. आज तुम्हारे सामने ये सबब पहली बार हो रहा है.. किसी काम में हिस्सा लोगी या साइड में बैठ कर तमशा देखोगी

अपर्णा:- विज्जउ भाई तमाशा तो कोठे पर रहते बहुत देख लिया.. आज तो मैं भी सबके साथ मिलकर पूरा पूरा मज़ा लुंगी..

षुरूति:- अपर्णा तुम दोनों नानी में से किसी के मोहन पर अपनी छूट रख कर चटवाने की कोशिश करो देखो वो चाट टी हाँ या नहीं..

अपर्णा:- हहहहहए दीदी कहीं नानी मेरी छूट पर काट hi न ले.. देखो कैसे वो ग़ुस्से से देख रही हाँ..

सबने नानी को देखा तो वो दोनों खुनी आँखों से सबको घूर रही थी.. आंसू तो थे hi आँखों में, पारर ग़ुस्सा भी बहुत था.. कोई न कुछ hi देर ग़ुस्सा ख़तम और वो छूट की आग भड़कना शुरू.

सब के सब कुछ hi देर में नंगे हो गए.. रूम में कई और दूध बल्ब भी जल उठे थे.. रूम की रौशनी और भी बढ़ गई थी.. दोनों नानियाँ ऑंखें पहाड़ पहाड़ कर सबको देख रही थेईईई..

माँ और दीदी ने फिर अपनी अपनी माँ की छूट को अपने मोहन में ले लिया, दोनों नानियाँ बुरी तरह से मचल उठी... दोनों बूढ़ियाँ थी तो दोनों की छूट पर शुरू में कुछ म्हणत ज़यादा करनी पड़ेगी थी.. माँ और दीदी अपनी मेहनत को भूल कर दोनों की छूट में आग लगाने का इंतेज़ाम करने लगी..

बाकी के सबब भी अपने अपने काम में लग गए थे.. मैं भी जानवी को किश करते हुए उसके दूध भी दबा रहा था..

अपर्णा ने कुछ देर वेट किया फिर वो भी नानी के मोहन पर अपनी छूट रख कर बैठ गई.. फोरना hi अपर्णा की चीख भी गूँज गई थी..

विजय;- क्या हुआ

अपर्णा:- भाई नानी ने छूट पर काट लिया था..

विजय:- अब्ब काटे तो अपनी छूट को नानी के मोहन पर दबा कर उसका सांस बंद कर देना.. खुद hi कण्ट्रोल में आ जाएगी..

अपर्णा;- ठीक है भाई..

नानी ने फिरसे अपर्णा की छूट पर नहीं काटा था.. फिरसे काम शुरू हुआ और सबब मिलकर एक दूसरे को गरम करने लगे..

15 मिंट ऐसे hi गुज़र गए थे. सबकी छूट पानी पानी हो चुकी थी.. पारर अभी दोनों नानियों के शिव लुंड किसी के नसीब में नहीं था..

मैंने जहान्वी को किसी के साथ भी मिलकर लेस्बियन के लिए बोल दिए था.. जानवी की छूट की बढ़ी हुई आग मैं नहीं बुझा सकता था.. वो किसे से भी भुजवा सकती थी..

मुझे तो दोनों नानियों को राम करना था.. मैं खड़ा हुआ तो मेरा लुंड पहली दोनों नानियों की आँखों के सामने आ गया था.. अपर्णा भी साइड हट गई थी..

दोनों की ऑंखें मेरे लुंड से हट hi नहीं रही थी. दोनों डर भी गई थी. दोनों ने जब जवान थी तब शायद इतना बड़ा लुंड नहीं लिया था,.. अब तो दोनों बोधियाँ हो गई थी.. उनकी छूट इस आगे में कहाँ इतना बड़ा लुंड ले सकती थी.. वो यही सोच कर डर रही थी...

नानी;- विज्जउ साले कुत्ते कमीने ले जा कही और अपने लुंड को.. खबरदार जो हमारे पास भी आया तो...

दीदी ने अपनी माँ को नहीं छोड़ा था. अभी मेरा लुंड पहले नानी की छूट में जाने वाला था.. उनका नंबर बाद में आना था.. दोनों की छूट ने पानी छोड़ छोड़ कर उनकी छूट को चमका दिए था....

विजय;- नानी आज जितनी मर्ज़ी गलियां दे दो.. मेरा मोटा लुंड आज तो आपकी छूट में जा कर hi रहेगा..

नानी:- देख विज्जू हरामी साले कुत्ते कमीने मैं कहे देती हों, तू मेरे पास मत आना, वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.. मई नानी के ऊपर आया और नानी के दूध पर आते हुए अपने लुंड को पकड़ कर नानी के मोहन पर मारने लगा..

नानी;- नानी कितना वज़नदार है न मेरा लुंड.. कितना सख्त, कितना मोत, कितना लम्बा भी hai..kabhi लिया है इतना बड़ा लुंड.. कभी खुल की चुदाई भी नहीं की होगी आपने..... आपकी छूट भी कभी पुरे मैं से चूड़ी नहीं होगी.. साला कुत्ता मनजोत सिंह तप अपने मज़े के लिए आपको छोड़ता रहा होगा..

नानी के दोनों कंधो पर मेरे घुटने थे.. वर्ण तो नानी मेरे लुंड को पकड़ कर मरोड़ hi देती..

नानी मुझे क़हर बरसाती नज़रों से देख रही थी..

मैं नीचे हुआ और नानी के पैरों को उठा कर नानी की छूट पर अपने लुंड को रख दिए.. नानी को देखा तो नानी की ऑंखें खुड से फटी पड़ी थी..

मैंने माँ को देखा तो

माँ:- शाबाश विज्जू दे दे मज़ा आज मेरी माँ को भी.. खोल दे आज मेरी माँ की छूट को.. बना दे बेशरम मेरी माँ को.. वर्ण ये मुझे छोड़ कर चली जाएगी..

माँ की बात सुनकर मैंने एक थप्पड़ दीदी की गांड पर दे मारा. जो बड़े मज़े से अपनी माँ की छूट चाट रही थी.. नानी 2 अब छूट छतवई का मज़ा ले रही थी. अभी मेरा लुंड उनकी छूट में नहीं जाने वाला था. तो वो चिंतित नहीं थी..

नानी के डर को साइड में रखते हुए नानी के पैरान को कस के पकड़ते हुए मैंने नानी की आँखों में देखता हुए, एक स्माइल देते हुए एक तगड़ा धक्का मार दिए.........

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

नानी की चीख को किसी ने दबाने की कोशिश नहीं की थी.. इस पैलेस में चीखें रूटीन में शामिल थी. डॉन नए रहने वाले आये थे, उनके रूम इतने दूर थे क वो इस चीख को सुन नहीं सकते थे..

मेरा लुंड नानी की छूट में 4" तक उतर गया था.. नानी की चीख तो निकली थी पर नानी की सांस भी उखड गयी थी. नानी इतनी जल्दी नहीं मरने वाली थी.. नानी की सांस को ठीक करने क लिए मैंने एक और धक्का मार दिए.. नानी की सांस ठीक हुई नानी इस बार और भी तड़प उठी.. नानी की छूट भोसड़ा थी... पर बहार से अंदर से तो वो बहुत ज़यादा टाइट थी..

नानी मेरा लुंड अपनी छूट में सहन नहीं कर पाई.. और भयानक अंदाज़ में चीख पड़ी थी... नानी 2 भी दरी दरी अपनी बेहेन को देखने लगी.. वो जानती थी, बाद में उसका नंबर भी लगने वाला है.. बाकी के लुंड को बचा कर क्या करना था मैंने

दाल दिए वो भी नानी की छूट में .......... नानी फिर तड़पती रही और मैं नानी की छूट में लुंड डाले धक्के पर धक्के मारता रहा..

7 मिंट बाद नानी की छूट ने फिरसे गरम होना शुरू कर दिए.. नानी की गरम छूट में मेरा लुंड बिना रुकावट के अंदर बहार होने लगा था. माँ अपनी माँ के दूध पीने में लगी हुई थी.........

जितनी गलियां नानी ने मुझे दी थी.. तौबा नानी तो कही से भी शरीफ औरत नहीं दिख रही थी.. नानी ने वो वो गालियां निकली अपने मोहन से लिखते हुए भी शर्म सी आ जाये..

नानी की छूट रवा हुई तो नानी मज़े में हुई. तब्ब जा के नानी की गलियां ख़तम हुई.. वर्ण तो रूम में नानी की गालियां सुनकर सबके hi कान जलने लगे थे..

मैं किसी पर धयान ने देते हुए नानी को छोड़ने में लगा रहा... नानी की छूट झड़ने वाली हुई तो मैं रुक गया..

नानी मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखने लगी..

मैंने माँ को साइड में हटाया और नानी के ऊपर झुक कर नानी के होंटो पर किश कर दिए.. नानी मुझे बास घूरती रही..

विजय;- नानी छूट का पानी निकलवाना है या नहीं.. अगर नहीं तो मैं अपना लुंड निकल लोन आपकी छूट से..

नानी;- हरामज़ादे ज़यादा नौटंकी मैट कर.. हरामी साले कुत्ते एक तो मुझसे ये सबब कर रहे हो और ऊपर से मसखरी करते हो..

विजय:- आप मुझे कुछ भी कह सकती हाँ.. पर आपको बताना पड़ेगा.. वर्ण मैं सूबा तक्क hi आपको छोड़ता रहूँगा.. कल फिर आपसे चला नहीं जायेगा तो मैं सब को बता डोंगा क सरती रत मेरा लुंड नानी की छूट में रहा है तो नानी को बहुत दर्द हो रहा है..

nani;-sahi कहा था मैंने तो बहुत बड़ा हरामी है कमीने.. एक बुढ़िया को भी चैन से नहीं रहने दिए तुमने.. इस उम्र में मैं चुदती हुई भला अच्छी लगती हों.. चल हट मेरे ऊपर से अगर और नहीं करना है तो..

विजय;- नानी मुझसे बेशरम बन्न कर बात करें... वर्ण मैं अपना लुंड आपकी छूट से निकल कर आपकी गांड में दाल दूंगा..

मेरी बात सुनकर नानी अचानक से hi हस्सन लगी.. नानी के हस्सन पर सब नानी को देखने लगे...

नानी:- विज्जज्जुऊ बीटा.. मैं अपनी बेटी से दूर नहीं रह सकती.. मुझे मेरी श्वेता इस दुन्या में सबसे बढ़कर पायरी है.. पारर मुझे तुम्हरा और श्वेता का जिस्मानी रिश्ता मंज़ूर नहीं था.. कोई भी माँ ऐसा कैसे सोच सकती है.. पारर अब जब तुमने मुझे भी सबमे शामिल कर hi लिया है.. तो मैं अब्ब अपनी शर्म छोडो या न छोडो.. पारर अब्ब तो मैं शर्म वाली नहीं रही हों.. तुमने मेरी छूट को पहाड़ कर मुझे बेहिसाब दर्द दे दिए है.. तो अब्ब जहाँ मैं करे दाल दो.. दर्द तो होगा hi..

पर जाने क्यों मुझे एक सुकून सा भी महसूस होने लगा hai..(apni बेहेन से) क्यों छोटी मैंने सही बोल रही होंगे.. ये सबब कितना गन्दा है. कभी हमने ये सबब सोचा भी नहीं था.. पारर देखो ये सबब हमारे साथ हो चूका है... पारर कितना सुकून दे रहा है हमे..

नानी 2 जो कुछ नहीं बोल रही थी.. वो चुप चाप सबब सहन कर रही थी. माँ तो वो भी पूरा पूरा हासिल क्र पा रही थी. अपनी बेहेन की बात सुनी तो

नानी 2;- हाँ दीदी ऐसा सबब हो हमारे साथ में, तो उससे पहले hi हम मरजाना पसंद करती.. पारर जैसे ये सबब हमारे साथ कर रही han...wo मुझे भी बहुत मज़ा दे रहा है..

विजय;- नानी आप को पता है क शर्म बचा कर सिर्फ अपनी बेटियों को बर्बाद किया जा सकता है.. नानी 2 आप भी तो अपनी शुशी को बर्बाद कर चुकी हाँ..

दोनों;- क्या मतलब.? शुशी कैसे बर्बाद हो सकती है.. वो तो अपने घर मेबहुत खुश है............. दीदी अपना ज़िक्र सुनकर साद हो गई थी... अपनी माँ की छूट उन्हों ने छोड़ दी.. और चेहरे साइड में करके मोहन घुमा कर बाथ गई..

माँ;- मौसी आप तो कुछ भी नहीं जानती.. मेरे विज्जू ने आपकी शुशी को भी बचा लिया है.. वर्ण तो वो ज़रूर किसी दिन सुसाइड कर लेती.

दोनों:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.

माँ;- हाँ मौसी.. आप नहीं जानती, जबसे शुशी की शादी हुई है, शुशी ने कभी अपने पति का प्यार नहीं पाया.. आप को तो ये भी नहीं पता क शुशी का पति नामर्द था.. और शुशी अभी तक्क कुंवारी है..

दोनों;- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

नानी ने मुझे धक्का दिए मैं नानी के ऊपर से साइड हो गया, मेरा आधा लुंड नानी की छूट से निकल गया तो सिचुएशन देखते हुए बाकी का लुंड भी मैंने नानी की छूट से निकल दिए...........

माँ ने दीदी को लिटा दिए.. दीदी के पेअर खोल कर दीदी की छूट के लिप्स भी खोल कर दोनों नानी को दिखने लगी...

माँ;- आप दोनों को पूरी तजुरजा कार हाँ, छूट देख कर hi बता सकती हाँ क सील लगी हुई है या टूट चुकी है..

नानी 2 अपने सीने पर हाथ मारने lagi.."haaye मेरी फूल सी बच्ची इतनी दुखी है, हाय मेरी फूल सी बच्ची के नसीब में वो नामर्द है"

माँ:- मौसी अब्ब चिंता की कोई बात नहीं है.. शुशी ने विज्जु की मदद से इन नामर्द से डाइवोर्स ले ली है... माँ की बात पर दोनों नानियाँ हैरान भी हुई. फ्री दोनों खुश भी दिखने लगी

पहली बार नानी 2 और नानी 2 मुझसे खुश हुई. मुझे गले से लगा कर चूमने लगी.

प्रिय;- नानी अब्ब आप hi बातें.. विज्जू भाई कभी गलत हो सकते हाँ.. देखो सब में प्यार बाँटने क लिए वो क्या कुछ नहीं कर रहे.. अब्ब भी माँ के लिए दीदी क लिए आप दोनों की नज़रों से गिरने का सोचना छोड़ कर एक चांस ले बैठे और आप दोनों के साथ ज़बरदस्ती चुदाई करके आप दोनों को अपने साथ मिलाना चाहते हाँ.. ये बी एक चांस hi था... वर्ण हो सकता था क चुदाई के बाद आप दोनों ग़ुस्सा हो जाती और हमें छोड़ कर चली जाती तो हमारा कितना नुकसान हो जाता.. हमारी ख़ुशी क लिए विज्जू क्या कुछ नहीं कर रहा है..

नानी 2:- कुछ मैट बोल मेरी बच्ची.. हम नादाँ हाँ न . सबब सही से नहीं समझतें.. जब चोट लगे तो एहसास जागता है.. अच्छा किया विज्जू बीटा तुमने जो इस बात को खोल दिए.. वर्ण सच में hi इस रात के बीत जाने के बाद हम शायद यहाँ से चुप चाप चली जाती..

दोनों नानी हालत को समझते हुए नए माहौल में खुद को जम्म करने ल लिए मान गई थी..

फिर दोनों नानियों की जम्म कर चुदाई हुई.. उस रात कोई नहीं सोया.. माँ का सारा दर्द अब्ब जा चूका था.. माँ को अपनी माँ की चिंता थी.. माँ को माँ मिल गई थी..

बाकी सबब तो माँ को पहले से hi मिल चुके थे.. अब्ब माँ के होने से माँ अंदर से पूरी तरह से हरी भरी हो गई थी....

पूरी रात नानी 1 और नानी की छूट से कई बार पानी निकला.. अपर्णा ख़ुशी ख़ुशी दोनों नानियों के मोहन पर अपनी छूट रख कर चटवाने लगी थी.. वो बहुत खुस थी..

एक तो वो हमारी टीम में पूरी तरह से शामिल हो गई थी.. दूसरा उसे बह दो दो नानियाँ मिल गई थी... और जिस किसम की टेंशन पैलेस में क्रिएट हो चुकी थी.. अब्ब वो जाती रही थी............................

बाकी सबब को भी दोनों नानियों के सामने खुल कर मैंने छोड़ा था.. बास शुष्मा दीदी और अपर्णा नहीं चूड़ी थी... अपर्णा का नंबर बाद में था.. दीदी की शादी वाली बात भी दोनों के सामने रख दी गई थी.... तो नानी 1-2 ने शादी तक्क शुष्मा को अपनी दोनों सील बचाये रखने को बोल दिए था...........

ऐसे hi हस्सी ख़ुशी रात बीत गई..




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मैं अचानक से hi पुणे छोड़ कर दिल्ली लौट आया था.. नागराज और उसकी फॅमिली मुझे न प् कर बेचैन हो गई थी.. मैंने भी अपना नंबर कुछ दिनों क लिए बंद कर दिए था.. ये मैंने जान बूझ कर किया था..

नानी 1-2 को चोदे 3 दिन गुज़र चुके थे... एक रात छोड़ कर बाकी की 2no रातें भी दोनों को दबा दबा कर छोड़ा था.. वो कभी भी ऐसे नहीं चूड़ी थी... एक तो सबके सामने दूसरा प्यार से, दुमदार तरीके से.......... दोनों बहुत खुश थी.. पहले दिन दोनों की छूट में बोहत दर्द रहा था.. पारर माँ के पास एशिया बहुत कुछ था छूट क लिए... दोनों नानियों की छूट का दर्द भी जल्दी ख़तम हो गया.. और दोनों की छूट भी टाइट हो गई थी....... दोनों माँ से बहुत खुश थी.. दोनों की छूट की आगे 25 साल कम् हो गई थिई...

मैंने नंबर ों किया तो नागराज के 300+ मिस्ड कॉल थी.. संस का तो अंदाज़ा hi नहीं था.. और भी कई नंबर थे.. जिनसे मिस्ड कॉल और संस ए हुए थे....

मैं महक जूली से मिला.. वही बैठ कर प्लान बनाया और नागराज को कॉल करदी.. मेरा नंबर ट्रेस नहीं हो सकता था.. ये सबब जूली का काम था..

नागराज से बात हुई तो वो बहुत ज़यादा बेचैन दिखने लगा था.. मैंने उसे इमरजेंसी बता दी.. क मुझे अचानक से hi पुणे छोड़ना पड़ा था.. मैं इस समय दिल्ली में था.. ेमरफेंसी के चलते नंबर भी बंद था.. और कल से फिर कुछ दिनों क लिए बंद होने वाला था.. मुझे यूरोप जाना पद रहा था 6 मोनथस क लिए.. वहां मेरी कई बिज़नेस मीटिंग्स थी.. मैंने नागराज को दिल्ली आने क लिए नहीं कहा....

उधर से मोबाइल लाउड स्पीकर पर था.. सब hi कुछ न कुछ बोलने लगे... नागराज और उसके बेटे मुझे रिक्वेस्ट करने लगे क मैं उनके लिए कुछ दिन दिल्ली में hi रुक जाओं. वो सबब यहाँ आना छह रहे थे.. मैंने बहुत उन्हें मन किया क मैं जब 6 मोनथस लेटर दिल्ली में वापिस आऊँगा तो फिर एक पार्टी ारंगे करूँगा, जिसमे उन सबब को स्पेशल इन्विते किया जायेगा..

लेकिन वो साले कुत्ते हरामी मादरचोद खुद hi मेरे बिछाए हुए जाल में आने लगे थे.. मैंने भी काफी देर तक्क उन्हें परेशां किया.. फिर बाद में मान गया क वो सबब आ सकते हाँ.. ये खास तुअर पर कहा था.. क मेरे कुछ दोस्त भी बदले में उन सबब को छोड़ेंगे.... ये सिर्फ नगरक को पक्का करने क लिए कहा था... गैंग की hi एक कोठी का एड्रेस नागराज को बता दिए गया था...

और वो आज hi वहां से निकलने वाले थे..

नागराज के खंडन का कोई छोटा हो या कोई बड़ा सबके सबब दिल्ली के लिए तैयार हो चुके थे.. कुछ मेरी मामियों और बहनो को छोड़ना चाहते थे.. तो कोई मेरी ममियों और बहनो को चुड़ते हुए देखना चाहते थे..

जब वो यहाँ पोहंचेंगे.. तब उन्हें आते दाल का भाव पता चलेगा..

काल एन्ड हुई तो जूली और महक मुझे बधाई देने लगीई.. ऐसे भला बधाई का क्या मज़ा आने वाला था.. वहां से तीनो बेसमेंट में जा घुसे और फिर एक थ्रीसम सेक्स शुरू हुआ.. जो 3 घंटे तक्क चला.. महक के लिए ये भी एक एडवेंचर hi था.

जूली जैसी तो कोई एक्सपर्ट थी hi नहीं.. चुदाई में और लेस्बियन सेक्स में... 3 घंटे के इस खेल का तीनो hi भरपूर मज़ा लेते रहे..





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रत के 8 बजे का टाइम था.. और नागराज पूरी फॅमिली समेत गैंग की एक कोठी में मौजूद था... इस कोठी में ऐसा इंतेज़ाम भी था, क अगर नागराज परिवार के किसी मेंबर्स के

पास या किसी के जिस्म में कोई भी डिवाइस इंजेक्ट है तो हम पता चला कर उसे निकल सकते थे....

लेकिन वो सबब दन्न के बाद एक नंबर के चूतिये थे....... बदले के चक्कर में बूढी से फ़ैल हो गए थे.. इतने बड़े गंगतर होकर भी इंसान की पहचान नहीं कर प् रहे थे............. लेकिन इसमें उनकी भी कोई गलती नहीं थी...... सूरत से मैं एक मासूम सिफत लड़का था.. चुदाई में नागराज परिवार का हम पल्ला था.. इस लिए वो शक नहीं कर पाए.. पुणे इ रहते हमने कुछ ऐसा किया भी तो नहीं था.. जिस बिना पर नागराज परिवार को कोई शक्क हो...

अगर नागराज दिल्ली में आते हुए किसी को बता कर भी आये थे.. तो फिर भी मेरे लिए कोई टेंशन नहीं thiiiiiiiiiiiiiiiiiii... मैं बदले हुए फेस में था... मेरी आइडेंटिटी भी बदली हुई थीइइइइइइइ.. सब पैलेस से दूर थे.. और मेरे इस रूप का पैलेस से कोई कनेक्शन भी नहीं था..

सबको चाय कॉफ़ी पिलाई गई.. डिनर क लिए टाइम था.. तो सबब ने डिनर से पहले चाय या कॉफ़ी लेना पसंद किया था..

चाय कॉफ़ी पीने के 15 मिंट बाद सबब बेहोश हो चुके थे.. मिशन नागराज भी अपने अंजाम की और बढ़ने लगा था...

सबको पहले अचे से नंगा किया गया.. किसी के बदन पर एक सुई भी नहीं छोड़ी गई थीइइइइइ..................

वही से सबको गाड़ियों में भर कर पैलेस लेजाया जाने लगा...



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नेक्स्ट DAY......TIME:09:40:AM


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पैलेस के बेसमेंट में अँधेरा छाया ह्या था.. कोई भी नहीं दिख रहा था.. उसी अँधेरे में दन्न नंगा एक लड़की के तख्ते पर बंधा हुआ था..

दन्न के दोनों पेअर फर्श से 10" ऊपर थे.. दन्न को बेहोशी की हालत में बेसमेंट के एक पोरशन में लाया गया था.. इस पोरशन को स्पेशलय चेंज किया गया था..

इस बार का सिस्टम कुछ हट कर था.. इस बार मैं कुछ और भी हट कर करने की सोच रहा था.. ऐसे कामों में मेरा दिमाग चलता भी बहुत था.......

धीरे धीरे करके दन्न को होश आने लगा.. नाईट विज़न की वजा से मैं महक और जूली दन्न को देख रहे थे...

जैसे hi दन्न को होश आया तो हमने नाईट विज़न उतर दिए.. जूली को बता कर मैं जाने लगा.. मेरे जाने क बाद दन्न वाले पोरशन की लाइट्स को ों कर दिए गया..

महक अपने असली फेस में मौजूद थी. दन्न की नज़र अभी महक पर नहीं पड़ी थी..

जिस तरफ दन्न का चेहरा था.. दन्न के फेस के सामने की पूरी दीवार पर शीशे लगे हुए थे.. दन्न के घर के जिनते मेंबर्स थे.. उल्टे hi छोटे छोटे केबिन बने हुए थे.. और सबको घोड़ी की शेप में 2 फ़ीट ऊंची टेबल पर बढ़ना गया था.. सबब के सबब नंगे hi थे...

दन्न की लेफ्ट साइड में भी केबिन बने हुए थे.. सब केबिन शीशे के थे.. अभी अँधेरा था तो कोई भी नहीं दिख प् रहा था... उन केबिन में दन्न के फ्रेंड्स, पवन एंड पवन फ्रेंड्स और रेखा बाई थी.. रेखा बाई को कुछ अच्छी ट्रीटमेंट दी गई थी.. इतने दिनों में उसकी सेहत भी कुछ बेहतर हो गई थी.. रेखा बाई अब्ब भी बदली हुई thi..us के अंदर का सबब बदल चूका था.. लेकिन उसकी सजा कम् या खतम नहीं होने वाली थी..

जाने कितनी लड़कियां कितने घर आज भी रेखा बाई की वजा से रो रहे थे.. जितनी सजा रेखा बाई क लिए इस दुन्या में लिख दी गई थी.. वो तो उसे मिलकर रेहनी थी.. बाकी ऊपरवाला जाने..

रेखा बाई को अब्ब रपे से कोई ग़र्ज़ नहीं रही थी.. रेखा बाई को एक आदमी चोदे या हज़ारों.. रेखा बाई अंदर से बदल गई थी.. और खुद की सजा क लिए वो तैयार थी.. वो भी नंगी थी... और एक टेबल पर बंधी हुई थी... दन्न एंड पवन फ्रेंड्स भी उन्ही टेबल्स पर बंधे हुए थे...

राइट साइड में भी कुछ केबिन बने हुए थे.. और उन केबिन में मनजोत सिंह और उसके बेटे नंगी हालत में टेबल्स पर बंधे हुए थे..

रपे करने वाला.. इज़्ज़त उतरने वाला .. रपे क लिए हालत को साज़गार बनाने वाला .. इज़्ज़त पामाल करने के लिए किसी को मौका देने वाला भी ऐसी hi सजा कर हक़दार था..

मनजोत सिंह परिवार ने आज तक किसी बहार की औरत की इज़्ज़त नहीं लूटी थी.. पारर अपनी औरतों को तो सालों तक लूटा था.. जबरन छोड़ना भी कोई छोड़ना होता है.. जब मैं बना, लुंड खड़ा किया, औरत की मंशा जाने बिना hi उसकी छूट में उतार दिए..... घर की इज़्ज़तदार औरतें हाँ तो उनके साथ रंडियों जैसा सलूक नहीं करना चाहिए था..

मनजोत सिंह भी आज सजा पाने वळून की लिस्ट में शामिल थे....... पहले मेरा एशिया कोई प्रोग्रम्मे नहीं था.. पारर फिर मुझे लगा क चोट पूरी तरह से लगनी चाहिए..

अंदर पूरी पूरी टूट फूट होनी चाहिए.. असल इज़्ज़त तो औरत की होती है.. माँ की होती है.. बीवी की होती है. बेटी की होती है......... मनजोत सिंह जैसे जो मर्दों के नाम पर एक धब्बा हाँ. ऐसे मर्दों की इज़्ज़त भला कैसे हो सकती थी...

बेसमेंट के hi एक और पोरशन में पैलेस में मुझसे रिलेटेड सबब hi बैठे हुए थे.. सब hi दन्न के बाद नागराज और परिवार के बाकी सबब लोगों के भी मेयर शिकंजे में आ जाने पर बहुत खुश थे.. वो भी दीवार पारर लगी हुई एक बड़ी मल्टीमीडिया स्क्रीन पर सबब देख रहे थे.........

मैं सामने वाले काबिन्स में से एक केबिन में मौजूद था.. नाईट विज़न एक बार फिर मैंने लगा लिए थे.. और मैं जिस केबिन में मौजूद था.. उस केबिन में सुमित्रा मौजूद थी.. काबिन्स में मौजूद सब hi पूरी तरह से होश में थे.. दन्न परिवार, दन्न फ्रेंड्स, रेखा बाई, पवन फ्रेंड्स, मनजोत सिंह और उसके बेटे.. सबके सब होश में थे और दन्न को देख रहे थे.. सब चीख रहे थे.. पर केबिन से बहार किसी की आवाज़ नहीं जा रही थी..

दन्न के साथ साथ सब महक को वहां देख कर भी शॉकेड थे.. वो सोच भी नहीं सकते थे. क महक यहाँ हो सकती है.. मुझे भी अभी शायद नागराज और परिवार वाले नहीं जान पाए थे.. मैं सुमित्रा के पीछे था.......

महक चलती हुई दन्न के सामें जा पोहंची.. दन्न का मोहन बंद नहीं था... वो महक को देख कर भूँकने लगा..

दन्न;- साली कुत्तिया हरामज़ादी, मेरी बेटी हो कर मेरे hi दुश्मन से जा मिली है...

महक:- chich....chich... चीच... दन्न साला कुत्ता हरामज़ादा तो तू खुद है.. कुत्तों से भी बदतर ज़िन्दगी जी है तुमने.. thuuuuuuuuuuuuuuu..... महक ने दन्न के मोहन पर थूक दिए........... अब यकीन हुआ क तू सच में hi एक कुत्ता है.. जिस इंसान की बेटी उसके मोहन पर थूक दे.. तो इसके बाद भी वो खुद को इंसान समझे.. हैरत है..

दन्न महक के थूकने पर और भी ग़ुस्से में आने लगा...... वो कुछ बोलता.. मैंने एक कस के थप्पड़ सुमित्रा के चुत्तड़ पर मार दिए...... बंधी हुई होने की बिना पर सुमित्रा एक चुत्तड़ कैसे हुए थे......... एक धमाके डर आवाज़ हुई और

aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

सुमित्रा चीख पड़ी... सुमित्रा की चीख और थप्पड़ की आवाज़ दन्न ने सुन ली थी..... थप्पड़ मारने से पहले hi मैंने केबिन में मौजूद एक बटन प्रेस कर दिए था...

दन्न चरों और देखने लगा.. पर उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था..

hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha

D..........N..........N........kya देख रहे हो D..........N.................N

..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha..........hahaha

अभी तुम्हे कुछ नहीं दिखाया जायेगा ............hahaha..........hahaha.... अभी सिर्फ तुम्हे सबब सुनाया जायेगा... ..........hahaha..........hahaha........ अभी तो बहुत कुछ कुछ है तुम्हारे मनोरंझण क लिए D.........N.........N

सुमित्रा और बाकी सबब की छूट और गांड रात में hi यहाँ लाते हुए टाइट करदी गई थी........ कोई मर्द था, या कोई औरत... कोई लड़की हो, कोई औरत, या बूढी..

सबकी छूट और गांड एक जेल की मदद से टाइट क्र दी गई थी..... सबकी छूट और गांड पहले से hi अच्छे से खुली हुई थीईई...... मुझे छोड़ने में मज़ा नहीं आने वाला था...... और hi बदला लेने में..... इसलिए को एक बार फिरसे सील बंद के हिसाब से कर दिए गया था..

महक:- हाँ तो दन्न तुमने सुनली होगी वो आवाज़.. मुझे बता सकते हो वो चीख किसकी thiiiiiiiiiiiii...... महक ने अपना खंजर निकला और दन्न के लुंड को हिलने लगी.. महक की दरिंग्डी दन्न बहुत अच्छे से जानता था.. महक के खंजर को अपने लुंड पर पाते hi उसके बदन में झुरझारी सी दौड़ गई थी..

dnn:-mmmmmm...mehak बेटी ये तुम क्या करने वाली हों.. दन्न का ग़ुस्सा मेरे kah-kahun से और महक के खंजर ने रफू चक्कर कर दिए था.. वर्ण शायद वो और भी भूँकता.

महक की अंकों की दरिंदगी भला दन्न से कैसे छुप सकती थी... दन्न तो लोगों की ऑंखें पढ़ने में माहिर था.....

महक:- दन्न उर्फ़ मेरे हरामी डैड........ यही तो मेरा काम है.. तुम जैसो के लुंड काटना......... कहा था न मैंने क हरामियों वाले काम छोड़ दो..... देखा न.. आ गया न समय..... बदल गयी न तुम सब की तक़दीर.. भर गया न घड़ा तुम सब के पापों का..... जैसा बोया था.. अब्ब कांटे का समय ाँ पोहंचा है daddddddddddd.

वीजजजजज्जजूउउउउउउउ खेल शुरू करो.......... दन्न को नेक्स्ट दोसे भी दे दी जाये.

मेरा लुंड था hi बहुत स्पेशल .. छूट और गांड की खुशबु सूंघ कर hi खड़ा हो जाता था.. आज तो फिर भी बदला लेना था.. कैसे मेरा साथ न देता.. और फिर आज तो दन्न परिवार की साडी छूटें और गंदे टाइट हुई पड़ी theeeeeeeeee.. मेरा लुंड खुश क्यों न होता...... मूड में क्यों न आता.. आज तो मई एक एक करके सबब की hi पहाड़ देने वाला था... आज तो मेरे पास पूरा पूरा टाइम भी था....... शाम तक्क तो सबकी hi फट्ट्ट्ट जानी थी....... चुदाई से मई थकने वाला तो था नहीं....

फिर भी मैंने आज पहलवान जी की दी हुई वही पुराणी दोसे डबल करके खा ली थी..

लुंड की तिघटनेस भी पहले से बढ़ गई थीईई.. टाइमिंग भी पहले से बढ़ गई थी.. मज़ा भी पहले से कई गुना बढ़ कर आने वाला था... और थकन भी मुझे नहीं होने वाली thiiiiiiiiiiii.......

आज तो खाना पीना भी चुदाई करते हुए hi होना था.... पैलेस वाले जो सबब बेसमेंट के सेकण्ड्स पोरशन में बैठे मल्टीमीडिया स्क्रीन पर सब कुछ देख रहे थे.... वो सब hi आज सबकी पूरी पूरी पहात जाने तक वही बैठने वाले थे.. वही बैठ कर खाने पीने वाले थे... वही बैठ बाकी के सारे काम करने वाले थे..

बास एक बाथरूम की टेंशन थी.... वो भी पास में hi थाआआआ.. और सबब पहले से hi अपनी अपनी टंकी खली करके बैठे हुए थे..........

कोई इंटरवल नहीं था इस शो में रेगुलर hi शो चलने वाला था.. पूरा पूरा मज़ा भी आने वाला था.......

बास एक गड़बड़ होने वाले थीइइइइइइइ....... कइयों के लुंड तो कइयों की छूट पानी छोड़ देने वाले थे....... चुदाई भले hi बदले क लिए हो... देखते हुए खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहता........ लुंड भी खड़े होंगे और छूट भी बहेगी.....

मेरे लुंड की परफॉरमेंस तो वाकई में hi देखने लायक थी आज्ज..........

मैं अपने लुंड को हूलते हुए पुरे मूड में सुमित्रा के कैसे हुए चुत्तड़ो पर मारने लगा.......................

 
थैंक्स..!!

जिनका रपे हो और फिर सैलून तक उन्हें ग़लीज़ और बदतरीन लाइफ जीने क लिए दे दी जाए तो उनके अंदर के इमोशन सब ख़तम हो कर रह जाते हाँ.. तो पूरी तरह से टूट जाते हाँ...

फिर अगर कोई उनके दिल को छू जाये, और अगर छू वाला कोई अपना, कोई बहुत hi खास हो तो फिर खुद को संभल पाना मुमकिन नहीं रहता.... सालों दर्द भरी लाइफ जीने के बाद अगर कुछ पल प्यार के सुकून के, अपने मेहबूब से मिल सकते हाँ, तो वो उन्हें पाने क लिए कुछ भी कर सकती है..

जितना दर्द शारीरिक और मानसिक वो सेह चुकी होती है.. उसे उस दर्द से निजात पाने क लिए प्यार की ज़रूरत होती है.. जो दिल के करीब हो, बहुत ज़यादा करीब हो, फिर उसका प्यार भी मिल जाए तो कैसे वो पानी ख़ुशी को संभल सकती है..

सेक्स तो लाइफ का एक हिस्सा है.. सेक्स के बिना तो प्यार के सरे रंग भी नहीं देखे जा सकते.. और फिर उसमे अगर इमोशंस भी मिल जाये तो क्या hi बात है..

मुझे भी वो अपडेट लिखने में मज़ा भी आया था, और काफी म्हणत भी करनी पड़ी थी..

बंडल ऑफ़ थैंक्स डिअर. मेरी कोशिश को सराहने क लिए.. आप सबब के प्यार और भरपूर सपोर्ट से hi सबब मुमकिन होता है.. वर्ण ये सब इतना भी आसान नहीं होता.

जो पढ़ने की छह रखते हों, उनके लिए लफ्ज़ खुद से hi बनने लगते हाँ..

कॉल ग्रिल्स के बारे में अगर बात करें तो डिअर...... सबकी लाइफ एक जैसी नहीं होती.. जैसे हम अपने घरों में रहते हुए अपने घरों में माहौल में खुद को पूरी तरह से शामिल करने पर मजबूर होते हाँ.. वहां भी कुछ ऐसा hi सन होता रहता है.. हर लड़की खुद से उस धंदे में शामिल नहीं होती.. कई ऐसी भी होती हाँ, जो उस धंदे से भाग जाना चाहती हाँ... पारर वो अच्छे से जानती हाँ, क समाज में उन जैसियों क लिए कोई जगा नहीं है.... मजबूरन अक्सर कॉल गर्ल्स बन जाती हाँ...

आये दिन कोई न कोई खबर पढ़ने को मिलती रहती है क फलां कोठे से एक कॉल गर्ल भाग गई.. लेकिन फिर जल्द hi वो वापिस भी आ जाती है.. जब पुछा जाए क उसके साथ क्या हुआ..

तो ग़ुस्से से पहात पड़ती है.. "जिस्मो के भूके तो हर जगा पहले हुए हाँ... यहाँ तो फिर भी वो पैसे देकर छोड़ जाते हाँ.. वहां तो ऐतमाद का खून करते हुए ज़बरदस्ती चुद देते हाँ, और पैसे भी नहीं देते"

दुन्या का कोई भी कंट्री हो.. कैसे भी लोग वहां पर रहते हाँ.. हर किसम के लोग हर जगा पर पाए जाए.. शरीफों के घरुन में बुरे तो बुरे लोगन के घरुन में अच्छे संस्कारों वाले पाए जाते हाँ.. ऐसे hi कोठों का मामले भी हुआ करते हाँ..
 
अपडेट ::: 145

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लास्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी......... PART 1/3


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सुमित्रा के कभी एक चुत्तड़ पर मैं अपना लुंड मारता तो कभी दूसरे छुट्टैड पर..

मेरा वज़नदार लुंड सुमित्रा को मज़ा दे रहा था या नहीं ये तो नहीं पता था... पारर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.....

sumitra:-(pehli बार मुझसे बात की) कौन हो तुममम .. और हम सब कहाँ है....

विजय:- मेरी आवाज़ से भी नहीं पहचान पाई तुम मुझे सुमित्रा.... चलो कोई बात नहीं... मेरी आवाज़ से नहीं पहचान पाई तो मेरा लुंड खुद hi तुम्हे मेरी पहचान बता देगा....

इतना बोलै मैंने अपने लुंड को सुमित्रा की टाइट गांड के छेड़ पर सत्ता दिए... सुमित्रा नहीं जानती थी क उसकी छूट और गांड टाइट हो चुकी है.......... पहले hi झटके में मैं सुमित्रा की गांड में लुंड दाल कर सुमित्रा को वो दर्द देना चाहता था... जो सुमित्रा समेत सबको hi हिला कर रखदे.......... जूली भी पहले से hi समझ गई थी........ सुमित्रा की आवाज़ सबब सुन रहे थे.... दन्न भी सिर्फ सुमित्रा की आवाज़ सुन पा रहा था....

सुमित्रा की गांड के छेड़ पर मैंने अपने लुंड के मोठे सुपड को सेट किया.. सुमित्रा के चुत्तड़ और भी खोल दिए...... और फिर पूरी जान लगा कर एक धक्का मार दिए

aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr

gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

सुमित्रा गाला पढ़ कर चीखने लगी.. मेरा लुंड आधा भी नहीं जा सका था सुमित्रा की टाइट गांड में....... इतनी टाइट हो चुकी थी सुमित्रा की गांड.. वर्ण तो पहले एक नार्मल धक्का hi मेरे लुंड को सुमित्रा की गांड की अंतिम सीमा तक पोहंचा देता...

मैं वही रुक गया. और दन्न को देखने लगा...... महक तो थी hi एक्टिव वो समझ गई क मैं एक धक्का मार कर रुक गया हों......

महक:- दन्न अब्ब पहंचा किसकी आवाज़ थीइइइइइइ ये...... महक दन्न की आँखों में देखते हुए बोली..... दन्न पूरा hi हिल कर रह गया था.. वो फटी फटी आँखों से महक को देखने लगा...

दन्न:- mmmmmmm...maaaaaa............. हाहाहा हाहाहाहा हाहाहाहा हाहाहाहा महक दन्न के मोहन से माँ सुनकर हस्सन लगी.......

महक;- कैसा लगा फिर सुमित्रा रंडी कुत्तिया की चीख sunkar...randi hi तो है सुमित्रा.. उसी के रंडी पत्र की वजा से आज ये दिन देखना पद रहा है तुम सब को...... न वो रंडी होती और न ये सब होता.. तुम सबब अपने अपने धंदे समझलते.. सब ऐश की लाइफ जीते.. पारर अब तो ऐश भी ख़तम और लाइफ भी ख़तम..... ये तो अभी ट्रेलर था..... पूरा शो तो अभी बाकी है दन्न.. विज्जू फिरसे शॉट मारो और इस बार बिना रुके hi सेंचुरी मार कर hi दुम्म लेना..... बहुत बड़ी गश्ती है सुमित्रा कुत्तिया.. कुत्तिया तो आज सही से बानी है वो......... उसे भी पूरा पूरा एहसास करा दो क वो सच में hi एक कुत्तिया है....... तुम भी सुन रही हो न सुमित्रा रंडी कुत्तिया....

सुमित्रा:- hhhhhhh.......hhhhaaaaaannnnn...... महक beti....ppp..parr. tttt..tummmmm...yahan कैसे.........

महक:- चलो ये भी बता देती हों.. मैं हों सुरिया की सेक्रटरी माया...... तुम सबब दिल्ली में सुरिया से मिलने आये थे ना.. मनजोत सिंह की फॅमिली को छोड़ने आये थे ना.......... don't वोर्री चुदाई तो आज होगी........ पर तुम सबब की......

दन्न कुत्ते यहाँ पर तेरी माँ hi नहीं है........ यहां पर तेरे घर का हर एक फारद है.... आज तेरे घर की हर एक कुट्टी सच में hi कुत्तिया बानी हुई है...

और तेरे हरामी बाप समेत तेरे भाई तेरे बेटे, तेरे भाइयों के बेटे भी कुत्ते बने हुए हाँ.......... आज उन सबब की भी गांड फटने वाली है...... बड़ा शोक था सबको चुदाई का........ सब मनजोत सिंह के परिवार की औरतों को छोड़ने आये थे.

साले सब के सब गांड फड़वाने आये हाँ...... आज सब के सबब गांडू बनेंगे..

hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......

hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......

आज सबके सब गांडू बनेंगे... वीजजजजूउउउ तुम शो शुरू क्यों नहीं कर रहे.. आज सुमित्रा रंडी को रंडी होने का पूरा पूरा एहसास करवाओ..

विजय:- कैसा लगा सुमित्रा रंडी कुत्तिया हरामज़ादी.. मेरा लुंड लेने hi ै थी न दिल्ली में... दाल दिए है तेरी गांड में.. चल अब्ब मज़ा ले.. और चीख ज़ोर ज़ोर से

एक और ज़ोर का थप्पड़ सुमित्रा के चुत्तड़ पर मारा और बाकी का बचा हुआ लुंड सुमित्रा की गांड में डालने क लिए एक और ज़ोर का धक्का मार दिए...

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

निकालो .दर्द से तड़पते हुए तेज़ साँस लेते हुए.... कुत्ते साले निकालो लुंड को बहार मेरी gaaaaaaaaannnnndddddddddddddddddddddddddd

aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

एक और धक्का मारा और सुमित्रा की गांड पहात टी चली gai.aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh....

मेरा पूरा लुंड सुमित्रा की गांड में जा घुसा.. सुमित्रा के दोनों चुत्तड़ पर मैं थप्पड़ मारने लगा.....

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

aaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaaahhhhhhhhhhhhhh

सुमित्रा की चीखें सुनने से ताल्लुक़ रखती थेईईईई... दन्न का चेहरा पसीने से भीगने लगा था......... फिर क्या था मैं अपना लुंड खेंच कर बाहर निकालता और सुमित्रा की गांड में एक hi झटके में उतार देता..

सुमित्रा:- दन्न कुत्ते हरमाडे मुझे बचा ले इस जानवर से ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

aaaaaaaaiiiiiiiiii नागराज हरामी साले कुत्ते कहाँ छुपा बैठा है मुझे बचाओ इस जानवर से maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

सुमित्रा को मज़ा तो क्या मिलना था. दर्द था, बेहिसाब दर्द था. पूरा लुंड बार बार एक hi झटके में अंदर बहार हो रहा था.. रेगुलर चुदाई चले तो मज़ा भी आता है.. चरम भी बनता है.. लेकिन यहाँ तो झटके पर झाकते लग रहे थे सुमित्रा को..........

मैं 5 मिंट तक्क सुमित्रा को गांड का दर्द देता रहा.. सुमित्रा और दन्न तड़पते रहे.. एक बटन दबा कर मैंने केबिन की लाइट ों कर दी...... दन्न को अपनी माँ केबिन में घोड़ी बानी हुई दिखने लगी........ दन्न बड़े घोर से अपनी माँ को देख रहा हटा..... उसकी आँखों में आंसू नहीं थे........ उसे शायद रोने की आदत नहीं थी.. या अभी वो स्टेज दूर थी....... अभी तो पहली चुदाई थी..... अभी तो शो शुरू हुआ था.....

विजय:- दन्न देख लिया अपनी माँ को.. देख इस उम्र में भी कैसे मस्त जिस्म की मालिक है.. देखो घोर से देखो.. अरे तेरा लुंड अपनी माँ को नंगी देख कर खड़ा क्यों नहीं रहा... साले नामर्द है क्या.. इतनी बड़ी रंडी तेरे सामने नंगी बंधी पड़ी है और तेरा लुंड सोया हुआ है... चल मूड में आ

नहीं आएगा... कोई नहीं मैं hi तुझे मूड में लाता हों....... इतना बोल कर मैंने सुमित्रा की छूट पर अपने लुंड को सेट कर दिए ..सुमित्रा की छूट भी टाइट थी... सुमित्रा समझ गई थी क उसकी गांड की तरह से उसकी छूट को भी टाइट कर दिए गया है....... सुमित्रा का बदन कांपने लगा.. होने वाले दर्द को वो पहले से hi सोच कर कांप रही थी.......

विजय:- जूली नागराज के केबिन का साउंड ओपन कर दो..... उसकी आवाज़ मुझे और दन्न को सुनाऊऊऊऊ... फ़ौरन hi नागराज की आवाज़ सुनाई डीइइइइइइइइ

नागराज:- saaaaaaaaaaleeeeeeee हरामी कुत्ते भोस्डीके.. दल्ले रंडी के बच्चे धोका दिए हैईईईई तुमने हम सबब को रंडी माँ के बच्चे. जैसे तेरी माँ को कोठे पर पोहंचाया था.. वैसे hi सब को फिरसे कोठे पर पोहंचा डोंगा...... तू मुझे जनता नहीं है नागराज हों मई नाहाआगजग्राहाआआज

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii nagrajjjjjjjjjjjjj मुझीीी

bachaaaaaaaaaaaaaaooooooooooooooooooooooooooooooo

नागराज की बोलती बंद करने क लिए मैंने सुमित्रा की छूट भी पहाड़ दी मेरा लुंड आधे से ज़यादा सुमित्रा की छूट में जा घुसा था....... सुमित्रा टेबल पर बड़ी hi परफेक्ट पोजीशन में घोड़ी बानी हुई thiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii कस के मारे हुए एक शॉट में सुमित्रा रंडी की छूट पहात गई thiiiiiiiiiiii.. कहाँ साली रंडी कुत्तिया ने इतना दर्द सहा था.........

नागराज:- नाहीइइइइइइइ छोडूंगा किसी को भी नहीं छोड़ोगे....

मैं सुमित्रा की छूट की भी धज्जियाँ उड़ने लगा.. सुमित्रा चीखने लगी.. दन्न अपनी माँ को चुड़ते हुए देखने लगा.. नागराज कुत्ते की तरह भोंकने लगा..

hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha......

मैं और महक हस्सन लगे..... मेरे धक्के भी पूरी स्पीड से जारी थे.........

5 मिंट बाद मैंने सुमित्रा की छूट से लुंड निकल दिए.............................

विजय:- नागराज कभी गांड में लुंड लिया है क्या तूने.....

नागराज:- kkkkkkkk..kya ..mmmmmmm..matlab है तुम्हारा..

विजय:- आ रहा हों मैं तेरे पास तेरी गांड फाड़ने hahahaha.......hahahaha.......

नागराज:- nnnnnnn..nahi......... rrrrrr...rukkkkk..saa..saaalee...rrrrrrrrrr

सुमित्रा के चुत्तड़ फिरसे लाल करने क बाद मई जा पोहंचा नागराज के केबिन में ..

अभी सुमित्रा को पहली दोसे दी गई थी... उसकी छूट फिरसे टाइट की जाती.. फिरसे उसे छोड़ा जाता.. दन्न को पूरा तोड़ कर फिर सुमित्रा के लिए एक ऐसी सजा मैं सोच चूका था क सुमित्रा बाकी रहती साँसों तक मुझे एक एक सांस पर याद करती... ऐसा hi कुछ सबके साथ भी होने वाला था..

नागराज के केबिन में पोहंचा तो नागराज एक केबिन की लाइट ों कर दी... सुमित्रा की चीखें अभी भी गूँज रही थी..

नागराज मुद कर मुझे देख रहा था.. मेरे लुंड पर लगा हुआ सुमित्रा का खून देख रहा था.. मैंने घोर hi नहीं किया था.. सुमित्रा की टाइट हुई गांड और छूट ने फिरसे खून छोड़ दिए था.. मैंने अपने लुंड को नागराज के चेहरे पर लाया..

विजय;- देख नागराज इसे कहते हाँ लुंड.. कभी देखा है ऐसा लुंड.. एक बार देखा था तुमने वो भी अपनी हवेली पररर.. वो भी मेरा hi लुंड था.. पारर उस दिन के और ाजे के लुंड में बहुत फर्क है.. मोहन खोल और टास्ते करके देख.. तूने कभी लुंड का मज़ा नहीं लिए.. आज लेकर देख... बहुत मज़ा आएगा.. जैसे कुछ देर पहले सुमित्रा ले रही थी...... नागराज जितना भोंक रहा था.. अब्ब उतना hi सेहम गया था. अपनी गांड की बारी आई तो सबब हेकड़ी भूल बैठा था..

विजय:- ले न नागराज मेरे लुंड को मोहन में....... दन्न तू hi कुछ बोल नागराज को... महक अगर दन्न कुछ न बोले तो उसके लुंड को थोड़ा सा चीयर देना..

महक:- थोड़ा सा क्यों विज्जउ. मैं तो आज पूरा hi चीयर देने वाली हों.....

दन्न;- mmmmm..mehak..tt..tum..ppp..pagal हो गई ho..mm .. mai.tumhara...dad..hon..

दन्न दररते अटकते bola........sari हेकड़ी निकल गई थी उसकी.....

महक:- वो सबब बाद में पहले नागराज से बोल वो विज्जू का लुंड अपने मोहन में ले.. जितनी देर karoge..utna hi तुम्हारे लुंड के लिए खतरनाक होगा..... महक ने फिर से दन्न के लुंड को खंजर से हिलना शुरू कर दिए.... जूली साइड में कड़ी हुई मुस्कुरा रही thiiiiiii..julie बास आज शो hi देखने वाली ठीक. या कुछ ऑर्डर्स फॉलो करने वाली थी...

दन्न:- पापा प्लस उसकी बात मान जाओ, वर्ण महक मेरा लुंड काट देगी......

nagraj:-chup कर साला हरामी.. बहुत बड़ा घुंडा बना फिरता है.. खुद को बचा नहीं पाया.. हमें भी यहाँ मरने के लिए बुलवा लिए..

दन्न:- मैंने क्या किया है पापा.. आप सब तो खुद से hi दिल्ली में आये हाँ..

नागराज:- सब तेरी वजा से हुआ है कुत्ते.. तू अगर श्वेता को फ़ौरन hi ढूंढ लेता और श्वेता के बेटे को मार देता तो आज ये दिन न देखने पड़ते..

महक ने हल्का का कट दन्न के लुंड पर लगा दिए... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दन्न चीक पड़ा.. दन्न नागराज को गलियां देने लगा

दन्न:- मान ले मेरी बात रंडी के बच्ची.. मेरी वजा से इतने साल ऐश किये हाँ तुम सब ने आज मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते.. एक लुंड hi तो है.. ले लो मोहन में.. कौनसा मर जाओगे तुममममममममम

नागराज:- क्यों मान लोन मैं तेरी baaaaaaaaaaaa....... नागराज पूरा मोहन खोल कर दन्न से ग़ुस्से में बात कर रहा था. मेरा लुंड पास में hi था.. घुसा दिए नागराज क मोहन me.........nagraj हूँ हूँ करने लगा..

महक हस्ते हुए;- waaaaaaaaahhhhhhhhhh क्या एंट्री मारी है तुमने विजजू बहुत बढ़िया, नागराज के मोहन को ऐसे hi छोड़ो. सारा लुंड दाल दो उसके मोहन में..

मैं भी धक्के पर धक्के मारने लगा.. मेरा मोटा लुंड आसानी से नागराज के मोहन में नहीं घुसा था.. नगराज का मोहन फटने वाला हो गया था.. जितना जा सकता था उतना लुंड मैं नागराज के मोहन में दाल कर धक्के मार रहा था..

कुछ देर में hi नागराज की सांस उखाड़ने लगी तो मैंने एक झटके में hi अपने लुंड नागराज के मोहन से निकल दिए....

नागराज बुरी तरह से खांसने लगा.. मैं नागराज को खांसते छोड़ कर नागराज के पीछे आया अरु अपना लुंड नागराज की गांड के छेड़ पर सेट कर दिए........

विजय:- दन्न नागराज के चेहरे को घोर से देखना.. देखना मेरा लुंड जब उसकी गांड में जायेगा तो उसे कितना मज़ा आएगा.. बोलो देखोगे न.. बोलो saaaaaaaaaaaleeeeeeee

mehakkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkk

महक का नाम सुनते hi दन्न बोल पड़ा

दन्न;- hhhhh..haan ..हाँ.. हाँ. dekhonga...dekhonga..dekhonga. दन्न बोल तो रहा था.. पारर उसकी नज़र महक के हाथ में मौजूद खंजर पर थी.. दन्न के लुंड से कुछ खून भी निकला था.. वो फर्श पर गिर रहा था.... दन्न लटका हुआ था.. बहुत बुरी हालत थी..

विजय:- नागराज दाल डॉन लुंड. खोल डॉन तेरी गांड को भी.....

नागराज;- nnnnnn..vijay बीटा ऐसा ग़ज़ब मैट करना ..... भला मर्दों के साथ भी कोई ऐसा करता है..........

विजय;- hahahaha.......hahahaha.......hahahaha.......hahahaha....... मर्द और वो भी tummmmmmmm......hahahaha.......hahahaha....... नागराज अच्छा मज़ाक कर लेते हो tummmmmmmmmmmm.. चलो आज तुम्हे मर्द क्या होता है वो बताता हों.. तैयार हो जाओ..

नागराज की गांड पर अचे से लुंड जोड़ कर एक धक्का लगा दिए और नागराज भी सुमित्रा की तरह से चीखने लगा.........

aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मैं एक धक्का और maara..nagraj फिरसे चीखा... मैंने एक धक्का और मारा.. नागराज इस बार मरने वाला हो गया.. किसी क़ुरबानी के जानवर की तरह से राडापने लगा....

जूली इशिता के केबिन के साउंड को ओपन करना.............................

विजय:- क्या हाल है इशिता रानी........

इशिता रो रही थी...... वो रट हुए बोली.....

इशिता:- हमारी कोई गलती नहीं है.. तुम अपनी दुश्मनी पापा और दादू से ले सकते हो.. प्लस हमे माफ़ kardo..hamara कोई कसूर नहीं है......

विजय:- दन्न याद है कभी मेरी माँ भी ऐसे hi बोलै करती थी.......... कहा करती थी क "मेरा कोई कसूर नहीं है" तब तुम भी ऐसी hi हिस्सा करते थे.. कहकहे लगाया करते थे.. दन्न का सर्र इस बार झुकता चला गया.

विजय:- नाहीइइइइइइइ दन्न अपना सर्र मैट झुकाऊऊऊऊओ...... julieeeeeeeeeeeeee

फ्रंट के सारे काबिन्स की लाइट्स को ों कार्डो. फिर देखता हों कैसे दन्न का सर्र झुकता है........ नागराज की गांड फाड़ता हुआ मैं दन्न से चीख कर बोल भी रहा था..

सुमित्रा के चीखने की आवाज़ें गूँज रही थी.. नागराज के चीखे की आवाज़ें गूंज रही थी. इशिता की दर्द में डूबी हुई सिसकियाँ गूँज रही thiiiiiiiiiiiiiiiiii

पहले जो माँ के साथ हुआ थाआ.. nagraj,dnn और सुमित्रा के शिव किसी का कोई कसूर नहीं था....... देखा जाये तो वो सजा के हक़दार नहीं थे........ वो खुद की लाइफ में जो चाहे करते फिरें.. मुझे कोई ऐतराज़ नहीं था......

पारर इस बार दिल्ली में आ कर सब ने hi खुदको कसूर वॉर बना लिया था.. सबने hi अपने बाप दादा के नक़्शे क़दम पर चलते हुए मेरी ममियों और मेरी बहनो से बदला लेने की सोच ली थी.. उसी के चलते सब दिल्ली में आये थे.. कोई भी माफ़ी के लायक नहीं था.

नागराज की गांड अच्छी से पहाड़ देने के बाद मैं नागराज के केबिन से भी निकल गया.. जाने से पहले नागराज एक भी चुत्तड़ मैं थप्पड़ मार मार कर लाल कर चूका था.. फिरसे सुमित्रा के केबिन में गया.. वो अभी चीख रही थी.. घोड़ी बानी हुई thi..is पोजीशन में वो बहुत तकलीफ महसूस कर रही थी.. उसकी छूट और गांड फट चुकी थी.. उसके चुत्तड़ लाल पद चुके थे... दर्द था सुमित्रा को बहुत दर्द था.. पारर अभी तो शुरुआत थी..

मैं सुमित्रा के सामने पोहंचाए.. और नागराज की गांड से निकला हुआ लुंड सुमित्रा के मोहन के आगे कर दिए..

विजय;- चल रंडी कुत्तिया हरामज़ादी.. चूस मेरे लुंड को चाट अपने खसम की गार्डन के गंध को.. चमका दे मेरे लुंड को.. मुझे विमला को भी छोड़ना है.. जल्दी कर वर्ण इसे फिरसे तेरी गांड में घुसा डोंगा..

सुमित्रा;- nnnnn..nahi..nahi. अभी मैट ghusaao..pls..bohut दर्द हो रहा है..

विजय:- तो फिर देर क्यों कर रही है चाट और जल्दी से चमका दे मेरे लुंड को...

सुमित्रा गन्दा सा फेस बनाते हुए जीब निकल निकल कर मेरे लुंड को चमकाने लगी.. जब लुंड अच्छे से साफ़ होकर चमक गया.. तो मैं फिरसे सुमित्रा के पीछे आया और फिरसे सुमित्रा के दोनों चुत्तड़ थप्पड़ो से लाल करने लगा..... सुमित्रा फिरसे चीखने लगी.......... दन्न कभी सुमित्रा को देखता तो कभी बाकी के कबीनो में अपणु को देखता.... दन्न कबि सर्र झुका लेता तो कभी महक को तो कबि अपने लुंड को देखने लगता..

सुमित्रा को फिरसे पीट कर मैं कबीनो से बहार निकला और दन्न और महक के पास जा पोहंचा.............. डंण मुझे देख कर डर गया

विजय:- महक दन्न तो मुझे और मेरे लुंड को देख कर डर गया hai..hahahaha...

mehak:-hahahaha... साले को लग रहा है क तुम अब्ब इसे छोड़ने वाले हो.. इसी लिए डर रहा है..

विजय:- दन्न को छोड़ने hi तो आया हों महक डार्लिंग.. बहुत देर से सुमित्रा और नागराज को छोड़ रहा हों, मैं कुछ भरी सा होने लगा है.. चलो कुछ देर किश करते हाँ. फिर डंण की गांड भी फाड़ते हाँ..

महक दन्न को देख कर हस्सन लगी.. खंजर को एक झटका देते हुए दन्न के लुंड की जानिब बढ़ाया ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

महक ने सिर्फ दन्न को झकवा दिए था.. दन्न सच में hi डर गया था.. मैं और महक हस्सन लगे........... फिर हम दोनों में किश शुरू हो गया.. सच में hi दोनों को छोड़ कर मैं भरी भरी सा लगने लगा था... दन्न और काबिन्स में बंद सब लोग हमे देखने लगे.. माँ और बाकी सबब भी हमे hi देख रहे होंगे..

पैलेस पूरा hi बेशर्मो का था.. तो किश में कैसी शर्म.... महक और मैं कुछ मिंट तक्क किश करते रहे.. दन्न बड़े घोर से ये सबब देख रहा था..

किश करके, मैं को हल्का किया फिर अलग हो गए..

महक:- क्यों यही देख रहे हों क तुम्हारे घर की हर छूट घरवळून ने hi खोली है.. मेरी कैसे कोई और खोल सकता है... मेरी किस्मत अछि थी जो मैंने तुम सबब जैसी नहीं बन्न पाई.. वर्ण तो मैं भी कुत्तिया बानी तुम सबब से छुड़ा करती और आज मैं भी तुम सबब में शामिल होती.......

विजय:- पारर तुम सबसे अलग निकली.. और सबसे अच्छी भी तुम hi हो... तुम्हारे जैसी एक भी नहीं है पुरे परिवार में...

महक:- दन्न मैं भी विज्जू से चुद चुकी हों.. मेरी छूट विज्जउ खोल चूका है. जिस छूट में आग लगा कर तुम सब मिलकर छोड़ना चाहते थे.. वो तुम सबब को तो नहीं मिली.. पारर मेरे विज्जू को मेरे प्यार को वो मिल गई हैईईईई..

विज्जू अब्ब्ब आएगी का प्लान मई बताओ.. मुझे कही देखा हुआ एक सन याद आ रहा है.. मैं चाहती हों क तुम भी कुछ वैसा hi सन क्रिएट करो..

विजय:- कैसे.?

महक फिर मुझे बताने लगी.. महक की बात सुनकर मैं खुश हो गया.. महक को फिरसे एक ज़बरदस्त किसम की किश कर दी..

1 घंटे बाद बेसमेंट का सन बदला हुआ था... जूली सच में hi कमल की थी.. क्या कुछ नहीं अर्रंगे कर रखा था जूली ने...

महक के बताये गए क मुताबिक़ मैंने जूली को भी बुला कर सब बता दिए था.. वो पहले hi सब सुन चुकी थी.. जूली ने फ़ौरन hi सबब इंतेज़ाम कर दिए था..

छोटे छोटे टेबल्स को एक राउंड में जोड़ दिए गया था.. दन्न को वेंटर में रखा गया था..... इस बार दन्न लकड़ी के तकते पर बंधा हुआ नहीं था... इस बात दन्न राउंड में रखे गए टेबल्स से 4 फ़ीट ऊंचा बंधा हुआ था.. दन्न घूम फिर सकता था..

उस टेबल पर दन्न की फॅमिली के सभी मेंबर्स बंधे हुए थे... कुछ फैसले पर कुछ और टेबल्स को जोर कर एक सर्किल की सूरत दी गई थी... उस पर बेसमेंट में कैद बाकि सबब थे..........

सब के सब नंगे थे.. सबब के सबब घोड़ी घोड़े बने हुए थे.. सबकी छूट और गांड टाइट की जा चुकी थी..

और मैं राउंड में घूतमा हुआ एक की गांड और छूट पहाड़ कर फ़ौरन hi दूसरे के भी फाड़ने क लिए पोहंच सकता था..

दन्न और बाकि सब ैसिलय घुमा सकते थे.. और वो सबब सर्र घुमा घुमा कर एक दूसरे को देख रहे थे.. सबके सबब दर्रे हुए थे.. सुमित्रा और नागराज की चीखें सब hi सुन चुके थे.. मेरा लुंड भी पुरे जोबन कर था.. वो भी सबकी नज़रों के सामने था............ सब कभी एक दूसरे को तो कभी मुझे और महक को तो कभी मेरे लुंड को देख रहे थे.......

दन्न चाह कर भी अपनी ऑंखें बंद नहीं कर पा रहा था.. सब के मोहन खुले हुए थे और सब मुझसे और महक से माफ़ी मांग रहे थे.. सब के सब सी ज़िल्लत से, इस दर्द से निजात पा लेना चाहते थे..

पारर ये होना पॉसिबल नहीं था.. अभी तो शुरुआत हुई थी.. इज़्ज़त की वैल्यू न करने वाले लोग आज सही से जानेगे क इज़्ज़त और दर्द होता क्या है.....

अगर गलत लाइफ गुज़री जाएगी तो सजा भी मिलेगी... जितने गुनाह किये होंगे, सजा भी उसी हिसाब से मिलेगी.......

फिर शुरू हुआ मेरा तांडव..... फिर शुरू हुई सबकी भयंकर चीखें.. सबकी ऑंखें तो एक hi बार में फट चुकी थी.. पारर छूट और गांड बारी बारी सबकी फट रही थी..... भयंकर चीखें, दर्द भरी चीखें, बेसमेंट में गूँज रही थीईई..

जिसकी चुदाई चल रही होती बाकी सबब दर्रे दर्रे उसको देख रहे होते.. अपनी बारी को सोचते हुए पसीने छोड़ने लगते.. दिन के 3 बजे तक्क सब की hi गांड में पहाड़ चूका था... सबकी गांड के फटने से खून निकल निकल कर टेबल पर और टेबल्स नीचे गिर रहा था...

मनजोत सिंह और उसके बेटो को भी कुछ देर छोड़ कर उनकी गांड खोल दी थी मैंने..

ज़बरदस्ती क्या होती है, अब वो सही से जान गए थे. इज़्ज़त उतरती है तो कितना दर्द शारीरिक और मानसिक हो सकता है. अब्ब वो सही से जान गए थे......

माँ की कहानी जान कर उन्हें कैसे सब सही से पता चल सकता था.. अब्ब सब को सही से पता चलेगा.. अब उन सबब की गांड भी फट चुकी थी.. सब गांड फटने के दर्द से चिल्ला रहे थे...

दन्न की हालत सबसे ज़यादा ख़राब थी... दन्न छुड़ा नै था.. वो सबकी चुदाई देख कर बहुत ज़यादा डर गया था.... इतनी चीखें सुनकर कैसे को वो खुद को सख्त दिल रख सकता था..

जब उसकी आँखों के सामने उसकी माँ की, स्टेप माँ की, पिता की, बीवी, बेटी की, भाइयों की भाभियों की, उनकी बेटियों और बेटो की छूट और गांड फटी थी. तो वो ये सब सहन नहीं कर पाया था...... दन्न इतना दहशत में आ गया था.. इतना डर गया था क उसका मूट hi निकल गया था..

रेखा बाई को मैंने नहीं छोड़ा था.. मेरा लुंड इतना भी बेकार नहीं था क मैं एक बार भी उसकी छूट या गांड में दाल सकूँ.. मुझे रेखा बाई से घिन आती थी.. गटर की नेसल से थी... वो घोड़ी बानी सबको देख रही थी..

सिसक रही थी.. दन्न और सबको बुरे कामों के अंजाम बारे बता रही थी.. खुद क लिए भगवन से माफ़ी मांग रही थी.....

पवन, पवन के दोस्त और दन्न के दोस्त भी नहीं बचे.. आज सब की फट रही थी.. आज सबकी चीखें निकल रही थी. आज सब को ऐसा दर्द मिल रहा था.. जैसा सब को पहले कभी नहीं मिला था...

तीन बजे तक सबको फायदा जा चूका था.. सब दर्द से कराह रहे थे...

महक की माँ, महक की बेहेन, महक के भाई भी नहीं बछ पाए थे .. महक ने खुद उनके चुत्तड़ो पर थप्पड़ बरसाए थे.. महक ने बहुत गलियां दी थी सबको..

बहुत चिल्लाई थी महक सब पर.. महक की maa,behen और भाई महक से रूएस्त कर रहे थे.. और महक हस्ते हुए सबब से कह रही थी..... तब सोचना था.. जब मुझे सेक्स ड्रग दिए जा रहा था.. तब सोचना था, जब सब मिलकर मुझे भी छोड़ने क लिए प्लान बनाने में लगे हुए थे... तब सोचना था. जब पुणे से दिल्ली आने वाले थे.. सब के सब चुदाई और बदले के चक्कर में भागे चले आये थे.. अब्ब भुगतो सब के सब ..... जैसे काण्ड किये हाँ .. वैसी hi सजा तो फिर मिलेगी hi ना..

बेसमेंट में मौजूद सब रेस्ट करने लगे.. माँ वाली साइड में भी इंटरवल चलने लगा था.. सब बहुत खुश थे.. सब बहुत बेचैन भी थे.. मर्दों को साइड में बिठाया गया था.. वर्ण तो बहुत गड़बड़ हो जाती..

पापा, हर्ष chauhan,ajit भाई, अनिल राज का नजाने क्या हुआ था.. कैसी हालत हुई थी सबकी..

जूही फॅमिली इस सबब में शामिल नहीं थी..

2 घंटे बाद सिस्टम फिरसे बदल गया.. इस बार पुरे बेसमेंट में क़ैदी मर्दों के इलावा मैं था. अनिल और राज को भी भेज दिया गया था..

पापा पार्टी को भी भेज दिया गया था.... जो काम अब्ब होने वाला था.. वो सबके देखने लायक नहीं था..

5:45पं का टाइम था ...

दन्न इस बार खुद एक टेबल पर घोड़ी बना हुआ था.. लेकिन वो राउंड में राखी गई टेबल्स के बीच में मौजूद एक टेबल पर था.. दन्न की गांड की भी मुरम्मत कर दी गई थी.. उसकी तिघटनेस भी पहले से बढ़ गई थी..

दन्न फटी फटी आँखों से मुझे, महक को और सब को देख रहा था.. इस बार मनजोत सिंह और उसके बेटे हस्स रहे थे.. वो खुद के लिए दुखी तो थे hi, पारर दन्न के लिए वो खुश भी थे......

पूरी महिला मण्डली हमारे वाले बेसमेंट में ाँ वार्ड हुई...... नंगी कोई भी नहीं था..... ब्लाउज और शार्ट पंत में थी सबकी सबब..

यस सब वही थी जिनको मैं छोड़ चूका था.. या जो छोड़ने वालों की लिस्ट में थी..

शिखा रूपा और शीतल नहीं थी...

अपर्णा, कृति शामिल थी.. दोनों नानियाँ में भी इस टीम में शामिल थी... रानी नताशा भी थी.. मालिकान टीम थी.. मेरी माँ और बहनो की टीम थी.. दीक्षा आंटी नहीं थी.. जो नहीं था वो इस सब बारे नहीं जानता था..

सबकी सब सत्रपों से आरास्ता थी. सबके सत्रपों लुंड 4.5" मोठे और 11" लम्बे थे.. सख्त थे.... खुरदरे थे.. सबसे सत्रपों पर सेक्स ड्रग्स लगाया गया था..

सारे क़ैदी मेरी फीमेल टीम को देख कर शॉकेड हो गए.. उनके बड़े बड़े आर्टिफीसियल लुंड देख कर डांग्ग तो सब hi थे.. पारर डर के मारे उनकी ऑंखें बहार भी आने को थी..

मेरी माँ, मेरी श्वेता डार्लिंग चलती हुई दन्न के पास आई..

माँ:- क्यों दन्न, देख रहे हो मेरे लुंड को....... तुमने क्या समझा था. तुझे भी मेरा विजू hi छोड़ेगा.. तू नहीं जानता दन्न अब तुझे कौन कौन छोड़ेगा.. कैसे कैसे छोड़ेगा.. बहुत सू को बर्बाद किया है ना तुमने .. बहुत सू को कोठे की ज़िन्दगी दी है तुमने.. सालों तक तुम मुझे कोठे पर रख कर छोड़ते रहे हो.. अब्ब से तुम भी बाकि बची साँसे ऐसे hi पूरी करोगे.. अब्ब से तुम्हारी चुदाई का समय शुरू हुआ चाहता है.... हाहाहाहा कैसे लगेगा दन्न तुम्हे जब तुम्हारी गांड खुलेगी..

बहुत दर्द दे दे कर तुम छोड़ा करते थे न मुझे, मई भी आज तुम्हे दर्द डोंगी..

पर तुम्हे मज़ा भी बहुत डोंगी.. मैं सिर्फ ज़ालिम hi नहीं हों.. मैं डायलो भी हों.

तेरा लुंड तो वो कमाल नहीं दिखा पाया.. जो आज मेरा लुंड दिखायेगा..

बोलो धीरे धीरे छोड़ो या स्पीड से... हाहाहाहा

विज्जू बीटा ये तो कुछ hi नहीं रहा.. देखो तो कैसे डरा हुआ है.. आज छोड़ने का समय आया तो दररने लगा.. सालों तक तो बहुत बड़ा सूरमा बन्न कर मुझपर जबर करता रहा है.. मेरी hi जैसी और भी कई होंगी. मेरे hi जैसी और भी कई इस हरामी का शिकार हुई होंगी..

देखो आज खुद शिकार हुआ है. तो कैसे डर रहा है..

विजय:- डरेगा नहीं तो और क्या करेगा श्वेता डार्लिंग... आपका लुंड है hi इतना बड़ा, मेरा लुंड भी इसके आगे कुछ नहीं है.. ये तो दन्न की गांड को पूरा hi पहाड़ देगा..

हाहाहा हाहाहा माँ की बात पर सबब हस्सन लगे.. सब के सब बेशरम बना दिए गए थे... पूजा मेरी टिटियन और बाकि सब भी इस नए रंग में रंग जाना चाहती थी..

एक करैक्टर ख़ास था इस सबब में वो था लाली का जिसका ज़िक्र मई अक्सर hi भूल जाता हों........ वो इन सबब में मौजूद थी.... और पूरी फार्म में भी थीईई .. वो भी अपने सत्रपों लुंड से सबसे बदला लेना चाहती थीइइइइइइ.. खुद की बर्बादी का लाली किसी से भी बदला नहीं ले पाई थी.... जैसे यहाँ टेबल्स पर मौजूद थे. सबब के सबब वो थे, जिनकी वजा से औरतों की ज़िंदगियाँ बर्बाद हो कर रह गई थीईई

ये सबब्ब बहुत hi अजीब था. पारर अब्ब से सत्रपों भी इन सबब की लाइफ में शामिल हो गया था.. अक्सर मेरी टीम में लेस्बियन भी थी. कभी मई टाइम न दे पाया तो वो खुद की बेचैनी को एक दूसरे के साथ मिलकर ख़तम कर सकती थी.. मेरे बिना तो अब्ब वो सबब किसी से छोड़ने वाली थी नहीं... और डेली मई किसी को छोड़ नहीं सकता था.. जैसी लाइफ सबको मिली थी, सब hi तो हर दूसरे दिन बेचैन हो जाती थी.. मेरी वजा से खुद पर कण्ट्रोल भी कर लिया करती थी. पर ऐसे करके वो किसी हद तक खुद की आग को कण्ट्रोल कर सकती थी..

रेखा बाई को छोड़ने का मैं किसी का नहीं था.. लेकिन लाली ने रेखा बाई को hi छोड़ने का मैं बना लिया था..

माँ की बात पर सबब हंस पड़े थे.. और दन्न पीले चेहरे लिए सबब को तो कभी माँ को तो कभी माँ के सत्रपों को देखने लगता था.. वो यहाँ से खिसक भी तो नहीं सकता था..

माँ फिर दन्न के पीछे हुई और दन्न के चुत्तड़ पर एक थप्पड़ मार दिए.. दन्न की चीख निकल गईइइइइइइ....... दन्न समझ गया क उसकी गांड फटने का समय आ गया है तो वो बोल पड़ा

दन्न:- मुझे माफ़ कार्डो श्वेता, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी. पर प्लस तुम मेरे साथ ये सबब मैट करो.......... माँ ने दो दो थप्पड़ और दन्न के दोनों चुत्तड़ो पर मार दिए...

माँ:- ऐसे hi मैं भी सालों तक रोटी गिड़गिड़ाती रही हों दन्न, अब्ब तुम भी रोओगे, गिड़गिड़ाओगे............. नारी को तुम महज़ एक चुदाई की मशीन समझते रहे हो न, बदले के चक्कर में नारी को बर्बाद करके खुद को सूरमा समझते रहे हो नाआ.. मर्द तो तुम कभी थे hi नहीं... अगर होते तो सबका सामना करते.. सबकी आँखों में ऑंखें दाल कर ललकारते.. मर जाते या मार देते तो नाम होता तुम्हारा..

पारर तुम ने खुद को कभी मर्द समझा hi नहीं.. होते तो समझते ना... अगर तुम्हारे अंदर कही भी कुछ ऐसा है, जिसके बल पर तुम खुद को मर्द समझ रहे थे.. वो सबब कुछ मैं आज निकल कर रख दूंगी......

मैं महक और जूली साइड में राखी हुई चेयर्स पर बैठ गए.. अब्ब महिला मंडली का तांडव शुरू होने वाला था. हमारा काम नहीं था... महक या जूली की कोई टेनिसन नहीं थी.... मेरा एक इशारा होता और दोनों मिलकर इससे बड़े बड़े लुंड बांध कर टूट पड़ती............ अभी तो पहला दिन था..... अभी तो खेल शुरू हुआ था..

अभी तो बहुत कुछ बाकी था........ और बहुत लम्बे समय तक चलने वाला था....

सब औरतों को बर्बाद करने वाले थे.. और सबब औरतें मिलकर अपनी बर्बादी का बदला लेने वाली theeeeeeeeee...

सबसे अपनी अपनी गांड सेलेक्ट कर ली.... पहली बारी सरे मर्दों की थीइइइइइ.. उसके बाद औरतों की........ पहले दन्न घर के साडी औरतें अपने मर्दों को और दूसरे मर्दों को औरतों से hi चुड़ते देखने वाली थीईईई...

मेरी तितलियाँ भी पूरी फार्म में thee..koi भी कम् नहीं दिख रही थी.. सब को मर्द बनने का मौका मिल रहा था.. तो बड़े बड़े लुंड लेकर सब खुद को मर्द बनाने में लग गई थी..

माँ ने दन्न की गांड पर सत्रपों लुंड रखा, दन्न की गांड को बिना चिकना किये हुए एक धक्का मार दिआ..... 4.5" लुंड आसानी नहीं जाने वाला था.. माँ को बहुत म्हणत करनी पड़ेगी.. मेहनत तो सबको hi करनी पडेगीइइइइ.. पर आज कोई भी हिम्मत नहीं हारने वाली थी......

माँ ने एक कस के धक्का और मारा...... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दन्न की भयानक चीख गूंज गई.. शायद थोड़ा सा उसकी गांड में उतर गया था....

बाकि भी सब कोशिश में लगी हुई थीइइइइइइइ...

फिर तो सब की चीखो से बेसमेंट के डरो दीवार hi हिल कर रह गए... सबकी फटने लगी.. सब बलि के जानवर की तरह चीखने चिल्लाने लगे.. किसी को भी आज किसी पर रेहम नहीं आने वाला था........

ये सब भी तो सालों तक रोटी बिलक्ति रही थी. कभी किसी ने इन सबब की नहीं सुनी थी.. लाली भी रेखा बाई को ऐसे छोड़ने लगी.. जैसे लाली एक कसाई हो और रेखा बाई एक जानवर........ रेखा बाई की भी भयानक चीखें बेसमेंट में गूंजने लगी..

पूरा पूरा ज़ोर लगा कर थोड़ा थोड़ा करके सबने से hi अपने सत्रपों लुंड अपने अपने टारगेट पर पुरे पुरे फिट कर दिए थे...... फिर तो कोई रुकने का नाम hi नहीं लेने वाली थी....... फिर शुरू हुआ सबका मुश्तर्का चुदाई प्रोग्राम.......

10 मिंट तक्क सबकी भयानक चीखें गूंजती रही.. फिर सबब के सबब नशे में होने लगे....... सब के सब सेक्स की और गांड की आग में जलने लगे...

सबकी बुरी तरह से खुल चुकी थीई.. सब और तेज़ और तेज़ करने को बोल रहे थे..

एक काम और हुआ था.. ड्रग्स के चलते सबके लुंड भी खड़े हो गए थे..

सत्रपों लुंड सबकी गांड में थे... तो धक्के लगने से सबके लुंड खड़े हो कर झूलने लगे थे..

दोनों नानियाँ भी मेरी टीम में थी.. दोनों भी बाकी सबकी तरह से बेशरम बन चुकी थी.. उन्हें अब्ब किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था.. वो भी इस नए रंग में रंग कर पूरा पूरा मज़ा ले रही थी... जितनी उनमे ताक़त थी उसी हिसाब से वो भी अपने नकली लुंड से अपने अपने टारगेट को छोड़ रही थी..

मेरी नानी ने भी मेरे नाना को hi छोड़ना सही समझा था.. और दूसरी नानी ने मनोज सिंह को.........

मेरी प्रिय और जहान्वी महक के दोनों भाइयों को छोड़ रही थिई.. तो षुरूति महक के कजिन को....... भाभी और सोना दन्न के भाइयों को तो मालिकान नागराज को...

पद्मा आंटी मनीष को छोड़ रही थी.. तो बाकि बची दन्न फिरंदस और पवन वगैरा को छोड़ रही थी..

दन्न:- आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ और जोरसे फ़क में लिखे ा डॉग ... दन्न सब भूल कर ड्रग्स के नशे में था.. और आहें भरता हुआ स्पीड से छोड़ने क लिए बोलने लगा...

दन्न के घर की औरतें अपने मर्दों की ऐसी हालत देख कर रो नहीं रही थीईई..

वो अपनी होने वाली हालत को लेके बहुत ज़यादा दरी हुई theeeeeeeeeeeee.. मर्दों की इतनी भयंकर चीखें वो सुन चुकी थीई.. उनके साथ भी कुछ ऐसा hi होने वाला था.........



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आफ्टर 1 मंथ


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दन्न, नागराज उसके बेटे, सुमित्रा, विमला, रेखा बाई सब बेसमेंट में एक बीएड पर पड़े हुए थे.. वो छह कर भी हिल नहीं सकते थे.. हिलने क लिए हाथों और पैरों की ज़रूरत पड़ती है.. वो उनमे से किसी के पास भी नहीं थे...

मतलब सबके दोनों हाथ, दोनों पेअर जड़ों से काट दिए गए थे.... उनके सिर्फ और सिर्फ धड़ hi सलामत थे.......

सबके सब फूकिंग मशीन से चुद रहे थे.. कोई भी दर्द में नहीं था. सबके सब मज़ा ले रहे थे.. सुमित्रा, विमला और रेखा बाई की छूट और गांड में दोनों छेड़ में मचिनी लुंड एक खुद कार निज़ाम के तहत अंदर बहार हो रहे थे........

24 हॉर्स में से सिर्फ 1 घंटे क लिए सबको छोड़ा जाता था.. बाकी के 23 हॉर्स वो सबब छोड़ने क लिए मचलते रहते थे.. सब ऊँची ऊंची आवाज़ में चीखते थे..

हमको छोड़ो ...... हमको छोड़ो ... हमारी आग बुझा दो .... लेकिन कोई भी उनकी सुनने वाला नहीं था...

दन्न भी सबब भूल कर सिर्फ अपनी गांड की चुदाई मांगता था.. उसके दोनों हाथ दोनों पेअर काट दिए गए थे.. उसे इस सब का बहुत ज़यादा दुःख था.. पर जब उसकी गांड में मिर्चें लगती तो वो अपने दुःख को भूल कर

मुझे छोड़ो......... मुझे छोड़ो.......... कोई सुन रहा है मेरी आवाज़ को.......

कोई मशीन को चालू कार्डो..... प्लीसीईईई मेरे लिए कुछ करो... मुझसे गांड की जलन सहन नहीं होती ..........ऐसा hi हाल बाकी सबका भी था................





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15 दिन बाद


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सबको जिओ सेक्स ड्रग्स दिए गया था.. वो टेम्पररी था..

15 दिन बाद सबको ड्रग्स देना बंद कर दिए गया........ सब के होश ठिकाने आ गए थे.. सबको अच्छे से समझ आ गया था क वो सब क्या बन्न चुके हाँ...... वो सबब

गुज़रे 1.5 मंथ से किश मरहले से गुज़र रहे हाँ......... सब एक दूसरे के पास hi थे..... सब एक दूसरे को देख सकते थे.. कुछ ऐसा hi सेटअप किया गया था.....

सब एक दूसरे की आँखों में देखने लगे.... सब की आँखों में आंसू थे...... सबसे बढ़कर दन्न की आँखों में आंसू थे....... इन सब में विमला कुछ हट कर थी.....

वो भी सजा पाने वळून में शामिल थी....

विमला:- हरामज़ादे अब्ब क्यों आंसू बहा रहा है... तेरे जैसे की आँखों में आंसू जचते नहीं हाँ.......... विमला खुद आंसू बहा रही थी..... कब उसने कभी सोचा था.. क एक दिन वो खुद को ऐसी हालत में देखेगी.. कहाँ उसने ये सोचा था. क चुदाई से भरपूर लाइफ जीते जीते वो एक दिन ऐसे भी छुड़ेगी..... न हाथ होंगे न hi दोनों पेअर........

दन्न की अकड़ तो उस दिन hi ख़तम होकर रह गई थी.. जिस दिन वो खुद को श्वेता के शिकंजे में देख चूका था.. वो जान गया था क उसका खेल अब्ब ख़तम हो चूका है.

ऐसे ख़तम हो गए ..... उसने कभी सोचा भी नहीं था..

 
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