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उनकी सरहद आधा मील दूर उस जगह से शुरू होती थी, जहाँ विशालकाय बूढा बरगद का दरख़्त था, उसकी जानकारी मुझे थी।
मैं जी जान लगाकर उसी तरफ भाग खड़ा हुआ, अब मुझे कुछ भयानक किस्म की परछाईयां पीछा करते नजर आ रही थी। ये परछाईयां मुझे भयभीत करके घेरने का प्रयास कर रही थी... पहले इनकी रफ़्तार काफी थी और कुछ मुझसे आगे जा पहुंचे थे, ऐसा होने पर मैं तुरंत रास्ता बदल लेता था। बाद में इनकी रफ़्तार धीमी पड़ गई और एक समय ऐसा भी आया जब ये सारे के सारे रुक गये।
बरगद के वृक्ष से एक फर्लांग दूर वे सहमकर खड़े हो गये और वहीं से नाना प्रकार की अवाजें निकालने लगे।मैं जानता था ऐसी शक्तियां सिर्फ भय से इंसान को मारती है। मेरी निडरता ने ही मेरे प्राणों की रक्षा की थी।
चांदनी बहुत बेजान सी हो गई थी।
मैं हाँफता हुआ बरगद के वृक्ष के नीचे रुक गया। अब मैं बेतालों की छत्रछाया में था। वे मुझे तरह-तरह के लालच दे कर बुला रहे था।
अब मेरा काम शुरू हुआ।
मैंने खंजर की नोक से एक गोल दायरा खींचा और कलेजी उसके बीच रख दी, फिर उसके बाईस टुकड़े कर दिए, मैंने उनका हिस्सा बाँट दिया था। अब जरूरत इस बात की थी की कौन अपना हिस्सा लेने पहले आता है।
अब मैं उन्हें बुलाने लगा। वे तमाशगीर की तरह दूर खड़े थे। अचानक उनमे से एक आगे बढ़ा , तुरंत दो ने पकड़कर पीछे खींच लिया। फिर उनमे झगडा सा होने लगा, अचानक एक छूटकर भागा... और दौड़ता हुआ मेरी तरफ आया।
फिर तो एक के बाद एक सभी दौड़ पड़े।
वे उस घेरे के पास आये।
जैसे ही वे बरगद के नीचे आये, मैंने अचरज से भरा दृश्य देखा। सहसा युद्ध के नगाड़े बजने लगे और बरगद पर लटके बेताल सीमा रक्षक उन बाईसों पर टूट पड़े। आकाश पर झुरमुरों के ऊपर असंख्य शोले तैरते नज र आए जो इसी तरफ लटक रहे थे। जान पड़ता जैसे बेताल फ़ौज आ गई है।
वहां बाकायदा युद्ध शुरू हो गया और मैं अपने मार्ग पर चल पड़ा। बड़ी भयानक आकृतियां उस स्थान पर उभरती जा रही थी... तलवार भालों की चमक नजर आ रही थी। बाईसों जिन्न जमकर संघर्ष कर रहे थे।
मैं जी जान लगाकर उसी तरफ भाग खड़ा हुआ, अब मुझे कुछ भयानक किस्म की परछाईयां पीछा करते नजर आ रही थी। ये परछाईयां मुझे भयभीत करके घेरने का प्रयास कर रही थी... पहले इनकी रफ़्तार काफी थी और कुछ मुझसे आगे जा पहुंचे थे, ऐसा होने पर मैं तुरंत रास्ता बदल लेता था। बाद में इनकी रफ़्तार धीमी पड़ गई और एक समय ऐसा भी आया जब ये सारे के सारे रुक गये।
बरगद के वृक्ष से एक फर्लांग दूर वे सहमकर खड़े हो गये और वहीं से नाना प्रकार की अवाजें निकालने लगे।मैं जानता था ऐसी शक्तियां सिर्फ भय से इंसान को मारती है। मेरी निडरता ने ही मेरे प्राणों की रक्षा की थी।
चांदनी बहुत बेजान सी हो गई थी।
मैं हाँफता हुआ बरगद के वृक्ष के नीचे रुक गया। अब मैं बेतालों की छत्रछाया में था। वे मुझे तरह-तरह के लालच दे कर बुला रहे था।
अब मेरा काम शुरू हुआ।
मैंने खंजर की नोक से एक गोल दायरा खींचा और कलेजी उसके बीच रख दी, फिर उसके बाईस टुकड़े कर दिए, मैंने उनका हिस्सा बाँट दिया था। अब जरूरत इस बात की थी की कौन अपना हिस्सा लेने पहले आता है।
अब मैं उन्हें बुलाने लगा। वे तमाशगीर की तरह दूर खड़े थे। अचानक उनमे से एक आगे बढ़ा , तुरंत दो ने पकड़कर पीछे खींच लिया। फिर उनमे झगडा सा होने लगा, अचानक एक छूटकर भागा... और दौड़ता हुआ मेरी तरफ आया।
फिर तो एक के बाद एक सभी दौड़ पड़े।
वे उस घेरे के पास आये।
जैसे ही वे बरगद के नीचे आये, मैंने अचरज से भरा दृश्य देखा। सहसा युद्ध के नगाड़े बजने लगे और बरगद पर लटके बेताल सीमा रक्षक उन बाईसों पर टूट पड़े। आकाश पर झुरमुरों के ऊपर असंख्य शोले तैरते नज र आए जो इसी तरफ लटक रहे थे। जान पड़ता जैसे बेताल फ़ौज आ गई है।
वहां बाकायदा युद्ध शुरू हो गया और मैं अपने मार्ग पर चल पड़ा। बड़ी भयानक आकृतियां उस स्थान पर उभरती जा रही थी... तलवार भालों की चमक नजर आ रही थी। बाईसों जिन्न जमकर संघर्ष कर रहे थे।