Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 3 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

उधर बाकी लोगों ने भी खाना खा लिया था और अपने अपने रूम में चले गए, कुसुम ने बर्तन साफ किये और बाकी छोटा मोटा काम खत्म करके रूम में आ गयी,

कुसुम कमरे के अंदर दाखिल हुई तो कमरे में कुछ अजीब सी स्मेल फ़ैल गयी।

आज मेरी दो तीन दिनों से दबी वासना बाहर निकल चुकी थी और मै जनता था कि अगर ये वासना शांत न कि तो दोबारा कहीं मै कुछ गलत न कर दू,

कुसुम ने कमरे के अंदर आकर अपनी साड़ी उतारी और नाइटी पहनने लगी, वो अक्सर सोते समय अपनी ब्रा उतार देती है सो उसने अपनी ब्रा भी निकाल दी

रात के ग्यारह बज चुके थे, मै बेड पर लेटा हुआ कुसुम का ही इंतजार कर रहा था। जैसे ही कुसुम बेड पर आई मैने पीछे से अपनी बीवी को कस कर पकड़ लिया ।

कुसुम - हटिये जी, आप क्या हरकत कर रहे है।

मै उठा और मैने दरवाजे पे कुंडी लगा दी और फिर कुसुम को गले लगाकर उसे वो ही नाइटी दी जो मैने मॉल में उसके लिए खरीदी थी। कुसुम नाइटी देख कर बेहद खुश हो गयी।

कुसुम - वाओ इतनी अच्छी नाइटी, ये तो बहुत मंहगी होगी।

मै कुसुम की चूचियों को सहलाते हुए) हाँ मंहगी है लेकिन तुम्हारे लिए इसकी कीमत कुछ नहीं है। दीमापुर से तुम्हारे लिए कुछ न लाऊँ ऐसा हो सकता है?

और उसे बिस्तर पे पटक कर उसे चूमने लगता है।

कुसुम - क्या कर रहे हो जी छोडो न।। आप इतने जल्दी शुरू हो जाते हो।

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मै कुसुम की चूचि ब्लाउज से बाहर निकाल कर चुसने लगा।

मैने कहा कुसुम तुमने रिंकी के कपड़े देखे - उसके टॉप पसंद आये?

कुसुम - हाँ टॉप तो पसंद आए, लेकिन रिंकी का टॉप ज्यादा टाइट हो रही है। अब तो उसे वापस भी नहीं कर सकते। मुझे पता था, आपकी गलती नहीं है उसने वही पहनकर चेक किया नही होगा इसलिए उसे तो टाइट होगी ही। मै उसको सिलाई करके थोड़ा ढीला कर दूँगी।

मैने कहा - ठीक है। चलो अच्छा हुआ अगर जीन्स टाइट हो जाती तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता था।

कुसुम मुझसे बोली

अरे लड़कियों के जीन्स में - अगर जीन्स का साइज पता भी होता तब भी मुश्किल होती। जीन्स तो हमेशा वही पहनकर चेक करना जरूरी है वैसे भी रिंकी ने अपनी जीन्स मुझे पहनकर नही दिखाई है और अगर जीन्स भी छोटी हुई तो उसके जांघो के ऊपर जाएंगी ही नही। उसकी जाँघें बहुत मोटी और कमर पतली है। 36 के कमर वाली जीन्स में उसके हिप्स नहीं आ पाता। हिप्स के लिए अलग से ४० साइज देखना पड़ती है।

कुसुम मुझसे बोली आपने एक काम अच्छा किया कि रिंकी को अंडर गारमेंट दिलवा दिये।

मैने थोड़ा जिजहकते हुए कहा कुसुम तुम्हे कैसे पता कि रिंकी ने अपने लिए अंडर गारमेंट भी खरीदे हैं।

रिंकी के अंडर गारमेंट ढीले हो गये थे और बहुत दिनों से मुझसे कह रही थी, तो मैने ही उससे कहा था अगर दिमापुर में समय मिले तो शॉपिंग कर लेना पापा के साथ। तो मैने अभि पूछा तो रिंकी ने ही बताया।

मैने कहा तुमने देखे उसके अंडर गारमेंट। कुसुम बोली आप भी क्या पागलपंती वाला सवाल पूछने लगते है अरुण आप जब अपनी नयी चड्डी बनियान लाते है तो क्या सब को दिखाते फिरते है। वैसे भी अंडर गार्मेंट देखने दिखाने की चीज होती है क्या।

मै मन ही मन सोचने लगा कुसुम देवी अगर तुमने अपनी बिटिया की पैंटी देख ली होती तो तुम जरूर पगला जाती है।

कुसुम बोली अब क्या हुआ। क्या सोच मे पड़ गये।

मै कुसुम को अपनी सफाई देते हुए बोला

मैने रिंकी को बोला भी था अपनी मम्मी के साथ खरीद लेना पर वो एक ना मानी।

कुसुम बोली इसमें बुराई क्या है वैसे भी उसके अन्डर्गर्मेन्ट्स भी सारे पुराने हो गये थे और कुछ की इलास्टिक भी ढीली हो गयी है। मैने कुछ फेंक भी दिये।

मैने हल्का सख्ती से कहा - फेंक दिया क्यों?

कुसुम मेरे गाल दबाते हुए बोली रिंकी के अंडर्गारमेंट मै तो नहीं पहन सकती न। कहाँ रिंकी का ब्रा साइज ३४ है और मेरा ३६ ।

फिर कुसुम थोड़ी सीरियस होकर बताने लगी आपको तो पता है शादी से पहले हमारी पैसे कि कमी के कारण मै और जूली अपनी प्रीति दीदी के ब्रा पैंटी पहन लेते थे। प्रीति दीदी और जीजाजी जब भी घर आते तो प्रीति दीदी अपनी ब्रा पैंटी जानबूजकर छोड़ जाति थी। मै तो बस भगवान से ये दुआ करती थी कि मेरी रिंकी बेटी को use किये हुए ब्रा पैंटी ना पेहनने पड़े।

मै कुसुम की बातो को सुनकर थोड़ा सा बुरा फील कर रहा था, मुझे ऐसे कुसुम को नही बोलना चाहिए था।

मैने फिर से माहौल को रोमांटिक और गर्म करते हुए कुसुम से कहा तुम्हारी साइज क्या है (कुसुम के चूचि दबाते हुए)

कुसुम - आआह्ह्ह जोर से मत दबाओ।। मेरी साइज भी 36 है। हम तीनो में सबसे बड़ा साइज जूली का है। कुसुम मुस्कराते हुए बोली)

मेरा लंड सख्त होता जा रहा था और मै कुसुम के ऊपर चढ़ कर अपना लंड उसकी चुत पे दबाता रहा। मुझे जूली के बारे में बात करना अच्छा लग रहा था, ख़ास कर उसके बूब्स के साइज के बारे में। मैने हिम्मत करते हुए कुसुम से कहा)

- मेरे पास आओ २ दिन से मैंने तुम्हारी चूचि को हाथ नहीं लगाया। इधर आओ कुसुम मैं तुम्हारी चूचि मसल कर जूली के बराबर कर देता हूँ। (मैने डरते-डरते कुसुम से जूली के बूब्स के बारे में जिक्र किया। मै देखना चाहता था की कुसुम मेरी इस बात पे ग़ुस्सा करती है या नहीं)

कुसुम मेरी बात सुन कर जरा सा भी रियेक्ट नहीं कर रही थी जैसे कोई आम बात हो) वो मुझसे बोली नहीं मुझे इससे बड़ा नहीं चहिये। जूली मुझसे लम्बी है तो उसपे उसके बड़े बूब्स सूट करते है।

मैने जब कुसुम के मुह से जूली के बूब्स के बारे में सुनकर मुझे यकीन हो गया था की कुसुम मेरी बात पे कोई भी नेगेटिव रिएक्शन नहीं दे रही थी। मै पूरी तरह उत्तेजित हो कर कुसुम की पेटीकोट और पेंटी नीचे कर अपना लंड कुसुम की चुत पे रगडने लगा।

और अपना लंड कुसुम की चूत में पेल कर कस कर चोदने लगा। मेरे दिमाग में जूली की 36D साइज के बूब्स और रिंकी के ४० साइज के हिप्स घूम रही थी। मै पूरी तरह से एक्साईटेड होकर कस के धक्के मारने लगा।

कुसुम दर्द से कराहते हुए बोली - आह आज तो आप बहुत जोश में लग रहे हो।

मैने कुसुम की बात मज़ाक में उडा दी और कुसुम को जोर-जोर से चोदने लगा। कुसुम भी दो दिनों से प्यासी थी।वह भी गांड उठाके चुदवाने लगी। मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी।कुछ देर के बाद मैने कुसुम को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गीली चूत में अपना मूसल डाल के पेलने लगा।

लगभग 20 मिनट के घमासान के बाद मै और कुसुम साथ साथ झड़ गए, मेरे वीर्य का मिश्रण कुसुम की चुत से होता हुआ बेडशीट के ऊपर टपक रहा था, हम दोनों अभी भी बुरी तरह हांफ रहे थे, और मेरा लंड अभी भी कुसुम की चुत में ही घुस था, पर हम दोनो की वासना सन्तुष्ट हो चुकी थी, इसलिए हम दोनों नंगे ही चुत में लंड घुसे हुए एक दूर की बाहों में मजे से सो गए।

आज तीन दिन बाद कुसुम और मैने सम्भोग किया था, कुसुम तो इस असीम आंनद को पाकर गहरी नींद के आगोश में चली गई थी, पर मेरे मन मे अब भी उथल पुथल मची हुई थी, मैने सोचा था कि अपनी पत्नी कुसुम के साथ सम्भोग करने से मेरा मन और लोडा दोनों शांत हो जायेगे पर वो कहते है ना

"" सेक्स वो आग है जो एक बार करने से बुझती नही बल्कि भड़क जाती है,""

और यही मेरे साथ भी हो रहा था , मेरे दिमाग के घोड़े लगातार दौड़े जा रहे थे और हर बार उसे एक ही मंज़िल पर लेकर जाते - " मेरी बेटी रिंकी "

मैने तुरंत अपने दिमाग को झटका दिया ताकि रिंकी का ख्याल मेरे दिमाग से निकल जाए पर हर बार मेरी आँखों के सामने ट्रेन की वो हसीन रात का नज़ारा घूम जाता, आखिर किसी तरह अपने मन को शांत करके मै नींद लेने की कोशिश करने लगा।

कुसुम को चोदने के बाद मै अपनी चादर ओढ़ने लगा। कुसुम भी मेरे सीने से चिपकर सो गयी।

जारी है.......
 
Thanks.

भाई समंदर के अंदर तो उतरो, किनारे से गहराई नाप रहे हो??? ये जो तुम उमर का हिसाब जाँच रहे हो, वो परिचय है, वर्तमान जीवन का.....!

कहानी के अंदर उम्र के सही आंकड़े मिल जायेंगे...

ना मिले तो फिर मै हू ना..... जनम कुंडलिया है मेरे पास सबकी.......

टेंशन ना लो...... एंजॉय कर पढ़िये।

Again Thanks....
 
अध्याय --- 8----

--------- जैसी करनी वैसी भरनी ---------------

कुसुम को चोदने के बाद मै अपनी चादर ओढ़ने लगा। कुसुम भी मेरे सीने से चिपकर सो गयी।

कहते है सेक्स के बाद बड़ी अच्छी नींद आती है और इसीलिए सुबह जब मेरी आंख खुली तो घड़ी की सुई 8 बजा रही थी, मैने अपने आस पास नज़र दौड़ाई तो कुसुम बेडरूम से जा चुकी थी, मै रोज की तरह फ्रेश होने के लिए बाथरूम में गया और लगभग 1 घण्टे में कॉलेज जाने के लिए बिल्कुल रेडी हो गया ,अब सिर्फ नाश्ता करना ही बाकी रह गया था।

मै ब्रेकफास्ट करने के लिए हॉल में गया तो वहां का नज़ारा देख मेरे माथे पर शिकन की लकीरें उभर आई...रिंकी पहले से ही वहाँ पर बैठी नाश्ता कर रही थी ...रिंकी ने आज जानबूझकर स्कर्ट पहन रखी थी जो उसके उसके घुटने से थोड़ी सी ही ऊपर थी ...उसकी पीठ मेरी तरफ थी.....

" नाश्ता कर लीजिए" कुसुम किचन से निकलती हुई मुझको देख बोली

" चलिए आइए इधर, मैं अभी आपके लिए प्लेट लगाती हूँ....."

मै टेबल की तरफ बढ़ने लगा......एक बार फिर मेरा दिल धक धक करने लगा..... मेरे हाथ पांव फूलने लगे...... मै धीरे धीरे चलता हुआ टेबल की तरफ आया और जाकर अपनी सीट पर बैठ गया......मेरी नज़र अभी भी नीचे की ओर झुकी हुई थी......

दूसरी तरफ रिंकी ठीक मेरी साइड वाली सीट पर बैठी थी, आज रिंकी ने पहले से ही डिसाइड कर रखा था कि सुबह अपने पापा के सबसे पहले दीदार जरूर करेगी, और इसीलिए वो सुबह 6 बजे ही जग गयी थी ,

मुझको अपने पास बैठा देखकर रिंकी के होठों पर कुटिल मुस्कान उभर आई,

"गुडमार्निंग पापा..." रिंकी बड़ी सी मुस्कान अपने चेहरे पे बिखेरते हुए बोली,

वो अपनी पहली चाल पर आगे बढ़ने लगी थी

"अम्म गुड़....मॉर्निंग...... बेटी...."

मैने बिल्कुल सकपकाते हुए नज़रे झुकाकर ही उत्तर दिया,

पर इधर रिंकी को अपने लिए बेटी शब्द सुनकर जाने क्यों बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा था , उसे तो रिंकी सुनना भी पसंद नही था, रिंकी तो चाहती थी कि उसके पापा उसे दोबारा डार्लिंग कहकर बुलाये, पर अभी उसकी मम्मी कुसुम के रहते ऐसा करना उसे ठीक नही लगा,

मैने सम्भलकर जवाब देते हुए कहा, अब भी रिंकी से नज़रे नही मिलाई थी

कुछ देर हम दोनों के बीच थोडी शांती रही जिसे रिंकी ने अपने सवाल से तोड़ते हुए मुझसे पूछा" पापा.....आप मेरी पढ़ाई के बारे में नही पूछोगे क्या....मम्मी तो हमेशा पूछती रहती है, पर आपने तो एक बार भी नही पूछा.....आप मुझसे नाराज है क्या" रिंकी ने अपनी चाल में हुक्म का इक्का चल दिया था, उसे पता था कि नाराज़गी की बात सुनकर मै तुरंत उसकी बात का जवाब दूंगा और हुआ भी ठीक वैसा ही,

मैने तुरन्त रिंकी की ओर देखते हुए कहा "नाराज़, नहीं तो , मैं भला तुमसे नाराज़ क्यों होने लगा, वो तो बस मुझे थोड़ा टाइम नही मिला इसलिए मैं तुमसे नही पूछ पाया

मैने फिर रिंकी से पूछा पापा मम्मी कहा है। रिंकी बोली दादा दादी मंदिर गये है मंदिर से वापस आने वाले होंगे।

कुसुम भी आकर हमारे साथ बैठ गयी, और मुझसे मुस्करा कर प्यार से बोली सुनिये जी आज आपकी साली साहिबा जूली को लड़के वाले देखने आ रहे है और उसकी सगाई है, इसलिए मैने रिंकी को आज स्कूल जाने से रोक लिया और मैने भी आज आगनबाड़ी केंद्र से छुट्टी ले ली है।

जूली की ये खबर सुनते ही मुझे मन ही मन बहुत बुरा लगा मुझे खुशी नही हुई और पता नही मुझे क्या हुआ और मै एकदम से जोर से बोल पड़ा कुसुम तुम क्या चाहती हो मै भी अपनी कॉलेज से छुट्टी ले लू। कुसुम तुम्हे पता वैसे भी तुमसे शादी के बाद मै मुश्किल से पूरे महीने में दस दिन भी कॉलेज में पढाने नही गया हू। मै एक काम करता हूँ हमेशा के लिए ही छुट्टी ले लेता हूँ।

इतना सुनकर कुसुम मुझसे तम तमाते हुए बोली अरुण तुम आदमी हो कि पजामा ।

मेरी पूरी बात सुने बिना ही ऐसे उछल पड़े जैसे पिछवाडे में आग लग गयी हो।

पहले मेरी पूरी बात तो सुन लिया करो, मै तुम्हे छुट्टी लेने की नही बोल रही हूँ। मै खुद की बात कर रही हूँ कि मै और रिंकी आज अपनी मम्मी पापा के घर जा रहे है। और आप शाम को आ जाना।

""जैसी करनी वैसी भरनी का first result""

कुसुम की बात सुनकर रिंकी एकदम से कुसुम से बोल पड़ी मम्मी mind your langugage. मम्मी please respect my पापा।

रिंकी की बात सुनकर कुसुम बोली रिंकी shut your mouth and listen to me carefully अपने पापा की परी हो तो परी बनकर रहो पापा की पत्नी मत बनो, समझी। दो दिन से dimapur क्या होकर आई हो, तेरे बहुत पंख निकल आये है। बहुत बदतमीज हो गयी है। बड़े छोटे का लिहाज नहीं रहा तुझे।

मैने कुसुम से कहा जरा धीरे बोलो वो बेटी है हमारी गुस्से में क्या बक रही हो ये भी नही सोच रही हो।

कुसुम अब मुझ पर भड़क गयी अरुण एक बात मुझे समझ नही आ रही है तुमने

पता नही मेरी फैमिली के सभी लोगो पर क्या जादू कर दिया है की मेरी पापा, मम्मी, बहन और अब बेटी सब के चहेते बन गए हो।

तभी मेरे मम्मी पापा आ गये, और हमें झगड़ता देख मेरी मम्मी कुसुम से बोली बहू क्या हुआ क्यो चिल्ला रही हो।

तो रिंकी बीच में बोली मम्मी ने पापा को पजामा कहा और मैने उनसे ऐसा बोलने से रोका तो मुझे सुनाने लगी।

पजामा शब्द सुनकर मेरे पापा जोर जोर से हसने लगे। Hahahaha

और मुझसे बोले अरुण बेटा अगर बहू ने पजामा कह दिया तो तुम बहू से पजामी कह देते, पजामा की पत्नी पजामी।

पापा की बातें सुनकर हम सब की हसी निकल पड़ी और सब हसने लगे, hahahahaha.

मेरी मम्मी ने कुसुम से कहा बहू अब बताओ क्या हुआ था। कुसुम ने सारी बात बता दी।

मेरी मम्मी मुझसे बोली बेटा अरुण तुम्हे बहू की पूरी बात सुनकर ही बोलना चाहिए।

खैर अब मै तुमसे बोल रही हूँ शाम को कुसुम के मायके चले जाना ऐसे शुभ काम में घर के रिश्तेदार को जाना चाहिए। वैसे भी तुम दामाद हो और तुम्हारा भी फर्ज अपने साली के लिए एक अच्छे लड़के को चुनने में उसकी मदद करना।

मै और कुसुम शांत थे पर मेरा मुह गुस्से से फूला था ये देखकर मेरे पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे साथ लेकर घर से बाहर निकल आये। और मुझे समझाते हुए बोले।

अरुण बेटा मै तुम्हे आज अपने तजुर्बे से कुछ बताता हूँ। बेटा कुसुम तेरी पत्नी है उसने अपनी जिंदगी में बहुत गरीबी, दुख देखे हैं, इसलिए उसकी सवेंदना, भावना, मान सम्मान छोटी छोटी सी बातों पर आहत हो जाती है और उसे गुस्सा आ जाता है, गुस्से में वो ये भूल जाती है कि वो क्या कह रही है और किससे कह रही है। और अगले ही पल कुसुम का गुस्सा गायब हो जाता है,

वैसे कुसुम बहुत अच्छी बेटी, बहू, मम्मी और पत्नी है वो दिल की साफ है जो बोलती है सच और मुह पर बोलती है, अपने दिल और पेट में कोई बात नही रखती है। मै दावे के साथ कहता हूँ कि भगवान ना करे अगर तुम पर कभी कोई मुसीबत आ जाये तो कुसुम तेरी साथ हमेशा खड़ी रहेगी।

अरुण बेटा शायद तुम सोचते कुसुम बहू attitude, and ego वाली लड़की है लेकिन सच तो यह है कि वो एक आत्म स्वाभिनि लड़की है बिल्कुल अपने पापा की तरह।

बेटा गरीबी और बेबसी हर किसी को ऐसा बना देती है, मै कुसुम के पापा बहुत सालों से जानता हूँ, वो हमारी बिरादरी के ही थे, मेरे ऑफिस में जो peon था उससे उनकी दोस्ती थी। ऐसे में मै उनकी खबर मुझे मिलती रहती थी।

कुसुम के पापा ने अपने बच्चो को पालने में बहुत कष्ट उठाये है, एक दो बार वो मुझे मिले तो मैने कहा तुम तंबाकू कम खाया करो जिससे कुछ पैसे बच जाया करे तो कुसुम के पापा बोले धामी सर मै तंबाकू कम ही खाता हूँ पर जब जरूरत होती है तब ही मुह में डाल लेता हूँ और पैसे बचाने के लिए ही खाता हूँ, तंबाकू खाने से मुझे बहुत फायदे हैं। क्योकि बाजार में बिकने वाली चीज खाने का मन होते हुए भी मै नही खा सकता हूँ क्योकि मेरे पास उतने पैसे नही है, और कोई मुझे वो चीज अपने पैसे से खिलाना चाहे तो उसके अहसान से बच जाता हूँ क्योकि मै अपने मुह में तंबाकू होने की बात करके मना कर देता हूँ। यहाँ तक मै अपने दोस्तो के साथ जब भी मेला वगेरा जाता हूँ तो तंबाकू मुह में डाल लेता हूँ जिससे अगर दोस्त कुछ खाये पिये तो और तो उन्हे मुझे खिलाना नही पड़े क्योकि मेरे पास पैसे नही सबके खाने के पैसे देने के लिए ।

धामी सर मै अपने बच्चो को कभी जल्दी जगने के लिए नही बोलता क्योकि वो जितना देर तक सोयेंगे उतना कम खायेंगे, और कोई पूछता है तो बोल देता हूँ बच्चे सुनते नहीं है।

अरुण बेटा गरीबी हर किसी को चिड़चिड़ा बना देती है और कुसुम भी ऐसी है, सबसे बड़ी बात ये है कि तुम दोनों की शादी काफी ज्यादा उम्र 35 में हुई है और ये उम्र वैसेही पति पत्नी के झगड़े की उम्र की शुरुआत होती है। तेरी मम्मी और मेरे झगड़े की शुरुआत इसी उम्र में हुई थी।

अरुण हमेशा हर आदमी की गरीब होने का कारण उसके फैमिली के बड़े बुजुर्गो के लिये गये गलत फैसले । ये बुड्ढे अपनी जिद और चूतियापा की वजह से business में, जमीन जायदाद के बटवारे में ऐसे गलत dicision और फैसले लेते है कि उनकी औलाद और उनकी आने वाली पीढी ताउम्र गरीबी और दरिद्रता में जीने के लिए मजबूर हो जाती है।

अरुण तुझे याद है तेरी मम्मी का कुसुम का आये दिन पति व्रत पूजा करने के लिये झगडा होता था, और एक दिन मैने तुम्हारी मम्मी को भी कुसुम बहु के real character के बारे में बताया कि कुसुम मेरी बहू लाखों में एक है और मेरी लाडली प्यारी नातिनि करोड़ो में एक है, उन दोनों के हमारे घर में आने से घर खुशियों से भर गया है।

मुझे अपने पापा की बातें सुनकर अपने आप से गिल्टी फील हो रही थी, मै समझ गया था कुसुम के इस कड़क attitude और चिड़चिड़े nature की वजह उसके मायके के दुख और गरीबी थी जिसे मुझे अब हर हाल में दूर करना है और me अपने आपको proud फील करने लगा मेरी पत्नी कुसुम पर।

मै और पापा वापस घर के अंदर आ गये मै एक नये आशिक की तरह अपनी पत्नी कुसुम के चेहरे की तरफ चोरी चोरी देख रहा था। वो dining tabale पर खड़ी खड़ी प्लेट उठा रही थी, और मेरी मम्मी से हस हस कर बातें कर रही थी, कुसुम के गालो को चूमती उसके बालों की दो लटे जिन्हे कुसुम बार बार अपने हाथो से अपने कान में दबा रही थी। ये scene देखकर मेरे दिल में अजीब सी बेचैनी हो रही थी। मुझे अपने कानों में फिल्मी गाने सुनाई देने लगे

इक अजब सी दिल में हसरत होती है तुमको देखकर,

चाहे इसको चाहत समझो होती है तुमको देखकर,

तभी मेरी मम्मी ने मुझे इस दीवानों वाली नींद से जगाया और बोली अरुण अब क्या कॉलेज नही जाना, देर नही हो रही है।

मै बोला हा बस निकलता हूं, और मै अपना बैग उठाकर बाइक स्टार्ट करने लगा तभी कुसुम ने मुझे पीछे से आवाज दी.... सुनिये जरा

हाय मै उसकी इस मीठी सी आवाज सुनकर वही खड़ा रह गया और उसके चेहरे की तरफ देखने लगा..... कुसुम बोली funtion garden मे है। मै उसके गोरे से मासूम चेहरे की तरफ देख रहा था, कुसुम की छोटी सी नाक की सोने की चमकती nose ring उसके गुलाबी लिपिस्टक लगे होंठो से निकलते शबद मुझे सुनाई नही दे रहे थे।

उसने अपने हाथ मेरे बालों पर फेरेते हुए कहा हो सके तो जल्दी आना मै इंतजार करूँगी, बस इतना ही सुनाई दिया और मै सीधा कॉलेज के लिए निकल गया।

दोपहर के तीन बजने वाले थे, मैं घर जाने के लिए जैसे ही खड़ा होने वाला था कि मेरा मोबाइल बजने लगा, मैने देखा मेरी साली प्रीति (कुसुम की बड़ी बहन जो नर्स थी और जिसकी शादी उसी डॉक्टर से हुयी थी जिसके साथ कुसुम के पापा ने रंगरेलिया मनाते हुए देखा था) का फोन था।

"" पूरी दुनिया में कितना भी धर्मात्मा, पत्नी व्रता, शरीफ जादा, भला मानुस और किसी भी उम्र का आदमी हो पर जब उसकी साली, साली का नाम या साली का फोन आते ही वो अपने सब दर्द, गम, टेंशन भूल जाता है और साली से बातें करते ही उसके अंदर एक नई तरन्गे उम्नगे और ठरक फूटने लगती है। ""

मेरी हालत भी वैसी हो गयी थी, मैने फोन उठाकर हैलो बोला सामने से फोन में प्रीति ने जब मुझे जीजू कहकर पुकारा तो मै भी अपने सारे कांड, गिल्टी भूल गया।

प्रीति - नमस्ते जीजू

"" हमारे यहाँ डॉक्टर की पत्नी को डॉक्टरनी, मास्टर की पत्नी को मास्टरनी और कलेक्टर की पत्नी को कलेक्टरनी बोला जाता है ""

मैं - नमस्ते डॉक्टर साहिबा आज हमें कैसे याद किया

प्रीति - (शरमाते हुए) बस याद आ गयी तो मन किया की चलो अपने प्यारे जीजू से कुछ बाते की जाये वैसे आप तो हमें कभी याद ही नहीं करते अरे हाँ आप का हमसे कोई काम तो नहीं है ना!

मैं - (प्रीति की ऐसी बाते सुन चौंकते हुए) क्यों जी ऐसी क्या बात हुयी जो आप ऐसे कह रही है क्या हमने आप से कहा है या हमारे हाव भावों से ऐसा प्रतीत हुवा की हमें आप से कुछ काम होगा तो ही आप से बात करेंगे नहीं तो नहीं करेंगे

प्रीति - अरे जीजू शायद मेरी बात से आप को बुरा लगा मगर क्या आप को नहीं लगता की आप मुझे सच मैं भूल गए है (और प्रीति हँसाने लगाती है)

मैं - (कुछ परेशान होते हुए) यार मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की मैं क्या भूल गया हूँ अरे कुछ समझ में आये इस तरह से बात करो ना

प्रीति - क्या जीजू आप को जूली ने कुछ बताया नहीं क्या?

मैं - लेकिन किस बारे मैं?

प्रीति - अरे बाबा क्या उसने नहीं बताया आज के बारे में?

मै एकाएक जूली की सगाई की बात भूल गया ।

मैं - नही तो, मेरी उससे बात नही हुयी है अब पहेलिय बुझाना बंद करो और तुम ही बतावो की आज क्या ख़ास बात है जो आप ने हमें फ़ोन करने की जेहमत उठाई और हमें यूँ परेशान किया इतना उलझी बाते कर के

प्रीति - पहले तो हम आप से माफी मांगते है अगर आप को बुरा लगा हो तो

मैं - नहीं मेरे कहने का ये मतलब नहीं था लेकिन मैं सच कह रहा हूँ की मेरी और जूली की कुछ दिन से बात ही नहीं हुयी शायद वो मुझ से कुछ नाराज है

प्रीति - तभी मैं कहूं की जूली इतनी उदास क्यों है कल से क्या कुछ झगडा हुवा है क्या आप दोनों मैं कहे तो मैं आप की मदद कर सकती हूँ

मैं - हाँ यार वो मैंने कुछ बोल दिया था कुछ दिन पहले, तो वो नाराज हो गयी है पर तुम मेरी मदद क्यों करोगी इस बात में? तुम्हे भी तो गुस्सा होना चाहिए था इस बात पर की मेरा जूली से झगडा हुवा है मुझपे इतनी मेहरबानी करने की वजह क्या मुझसे से कुछ चाहिए क्या?

प्रीति - चाहिए भी और नहीं भी हाँ अगर आप चाहे तो मैं आपकी मदद कर दूँगी

मैं - चलो ठीक है तो कर दो मदद पर ये कैसे संभव है?

प्रीति - वो बात आप मुझपे छोड़ दीजिये बस आप को एक काम करना होगा

मैं - बोलिए क्या करना होगा आप जो कहेंगी वो करने के लिए तैयार हूँ मैं चाहे तो मैं आप से प्रोमिस करता हूँ

प्रीति - ठीक है तो प्रोमिस है आप को घर आना होगा अभी।

मैं - अभी! आज कुछ खास है क्या?

प्रीति - अरे मैं बातो बातों में भूल गयी आपको आज जूली की सगाई है और मैंने आप को यही बताने के लिए फ़ोन किया है

मैं - सबसे पहले जूली को ढेर सारी शुभकामनाये और मैं बिना भूले आज शाम को आ जाऊंगा

प्रीति - शुक्रिया जीजू अब मैं फ़ोन बंद करती हूँ मुझे बहोत सारी तैयारियां करनी है

मैने थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा

मैं - अगर तुम्हे कुछ मदद चाहिए तो मैं अभी आ सकता हूँ

प्रीति - ठीक है तो आ जाईये मैं आप का इन्तजार करती हूँ

इतना बोल प्रीति ने फ़ोन बंद कर दिया और कॉलेज से ही direct में तैयार हो के कुसुम के घर की तरफ चल दिया

जाते जाते मुझे एक ख्याल आया क्यों ना कुछ मिठाई ली जाए तो मैं एक मिठाई की शॉप में चला गया मैंने उस शॉप से रस मलाई ली और कुसुम की घर की और चल दिया।

"" अगर हमें कोई जान से ज्यादा प्यार करता है और वो अपना तन मन हमें सोपने के लिए तैयार हो, और हम उसको ingnore करे। और एक दिन उसकी सगाई या शादी की खबर मिले तो बहुत दुख होता हैं ""

मुझे अपनी प्यारी साली जूली अपनी मुठी में से रेत की तरह फिसलती हुयी लग रही थी।

सच कहु तो मुझे जूली की सगाई की खबर खंजर की तरह चुभ रही थी। मुझे बहुत बुरा लग रहा था और ना जाने मेरे मन में बहुत सारे जूली के लेकर गंदे ख्यालात आ रहे थे।

मै रास्ते भर ये सोच रहा था कि मेरे पास जूली को भोगने का मौका था। और वो मुझे इतना चाहती है, प्यार करती है। उस दिन कैसे मुझे प्यासी नजरो से देख रही थी। मुझे उसकी प्यास बुझा कर अपना जीजा का फर्ज निभाना था।

प्रीति भी फोन पर बता रही थी कि जूली भी दुखी और उदास है, जिस लड़की की सगाई हो रही हो वो उदास नही हो सकती।

क्या जूली ने प्रीति को बता दिया है ,

क्या जूली मेरा इंतजार कर रही है,

क्या जूली और प्रीति ने मिलकर कोई प्लान बनाया है।

क्या जूली और मेरा आज सगाई समारोह से पहले मिलन समारोह हो सकता है।

ऐसे ही सवालों के साथ मै कुसुम के घर पहुँच गया।

घर जाते ही प्रीति ने दरवाज़ा खोला जैसे ही मैंने उसे देखा मेरा मूह खुला का खुला रह गया प्रीति ने जो कपडे पहने थे उसे देख मैं हैरान ही रह गया उसने सिर्फ एक टॉप पहना हुवा था जो उसकी जांघों को भी छुपा नहीं पा रहा था शायद उसने अंदरसे कुछ पहना भी नहीं था क्यों की उसके टॉप के उपरसे ही मुझे उसके उरोजों के तने हुए काले चुचक साफ़ दिख रहे थे और टॉप के आगे कोई बटन भी नहीं था और उसके टॉप से उसके उरोजों के बीच की दरार दिख सकती थी और उसके उरोजों के कुछ कुछ दर्शन भी हो रहे थे।

मुझे ऐसा देखते देख प्रीति कुछ शरमा गयी और अन्दर भाग गई वो जब भाग रही थी तो उसके कुल्हे बहुत ही थिरक रहे थेऔर भागते वक़्त मुझे उसका टॉप कुछ ऊपर सा हो गया तो मुझे उसके नग्न कुल्हे दिख गए और उसके निचे शायद उसने कुछ पहना नहीं था क्या लग रही थी मैं ये सब देख इतना उत्तेजित हो गया की मेरा पप्पू तम्बू बना के पेंट में खड़ा हो गया ये तो अच्छा हुवा की प्रीति ने ये सब नहीं देखा

मैं जब अन्दर गया तो प्रीति की आवाज़ आ गयी

प्रीति - जीजू दरवाज़ा बंद कर लीजिये घर मैं कोई नहीं है सब लोग गार्डन में गए हुए है और जूली की सगाई का प्रोग्राम वही है

उसकी यह बात सून मेरे शरीर में रोंगटे खड़े हो गए जैसे तैसे मैंने दरवाजा बंद कर लिया और उसे कहा-

मैं - प्रीति तुम कहा हो

प्रीति - अन्दर हूँ

मैं - क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ

प्रीति - आइये न आप को किस ने रोका है

मैं - अगर सब लोग गार्डन में गए थे तो मुझे इतनी जल्दी कैसे बुला लिया

मैं ये बोलते बोलते अन्दर दाखिल हुवा वो अभीभी उसी टॉप में बैठी कुछ काम कर रही थी उसे देख मेरे पप्पू ने फिर से हरकत करनी शुरू कर दी इस वक़्त प्रीति मेरे पेंट की तरफ ही देख रही थी मेरी हालत देख वो मन में ही हस रही थी और वो बोल पड़ी

प्रीति - मुझे क्या पता था की आप सच में इतने जल्दी आ जायेंगे मुझे लगा था आप शायद एक घंटे बाद आयेंगे। नहीं तो मैं तैयार हो रही थी इतने में आप आ गए

मैं - लेकिन दरवाज़ेपे अगर कोई और होता और तुम्हे इस हालत में देखता तो उसका क्या होता

प्रीति - वही होता जो अभी आप का हाल है

हस्ती हुयी बोली।

मैं - याने तुमने जान बुझ कर ऐसे कपडे पहने है मुझे उत्तेजित करने के लिए

प्रीति - जैसे आप ठीक समझे मैं तो सच में तैयार हो रही थी मैं अभी नहाने जा रही थी

मैं - तो अब तुम्हे किस ने रोका है जावो नहा के आ जावो मैं रुकता हूँ हाँ जाते वक़्त टीवी शुरू कर देना

मै रास्ते भर जूली के भोगने का प्लान बनाता हुआ आया था लेकिन सब उल्टा हो गया तो मैने सोचा जूली नही तो प्रीति सही पर आज साली भोग लगाकर अपने जीजाजी होने का फर्ज निभाऊँगा। वैसे भी प्रीति भी फूल लाइन दे रही है।

प्रीति - ठीक है मैं अभी आती हूँ नहा के

ऐसे बोल वो उठ गयी और टीवी शुरू करने के लिए रिमोट खोजने लगी रिमोट शायद निचे रखा हुवा था तो उसे उठाने के लिए वो जैसेही झुकी मुझे उसकी खुली गांड के फिरसे दर्शन हो गए इस बार मैं अपने पर काबू ना प् सका और सीधे जाके उसे मैंने पीछे से पकड़ लिया जैसे उसे इस अचानक हमले से कुछ ऐतराज़ नहीं था तो वो कुछ बोली नहीं सिर्फ हँसी

प्रीति - जीजू मैं कुसुम नहीं हूँ किसीने देख लिया तो क्या सोचेगा की कैसा दामाद है जो अपनी साली से ऐसे बेशर्मोकी तरह चिपक गया है

मैं - अब यहाँ कोई नहीं है तो किसीके कुछ कहने का सवाल ही नहीं उठता वैसे जिसके पास ऐसी ख़ास साली हो वो जीजा तो बेशरम ही होगा

मैंने जब उसे पकड़ा था तो मेरा हाथ उसके पेट पे था उसने भी अपना हाथ मेरे हाथ पे रख दिया।

वो हिचकियाँ लेने लगी, मैंने प्रीति को खींचा और उसके बराबर बैठ गया, उसके गले में बाजू डाल अपनी तरफ खींचा-

मेरे हाथ को अपने पेट से हटाते हुए वो चिहुक् कर बोली जीजू अब बहुत हो गया मजाक ये मजाक का मजा हम दोनों के लिए सजा बने इससे पहले अब आप garden में जाओ मै आपको वही मिलती है। हम दोनों ही शादी शुदा और एक एक जवान बेटी के मम्मी पापा है, हमारी इस जीजा साली के मजाक की हद खतम होने से हमारे परिवार भी तबाह हो सकते है।

मुझे प्रीति की आवाज में हल्की सी सख्ती दिखी।

मै समझ गया ज़ैसे को तैसा वाली बात सच हो रही है, क्योकि उस दिन जब मैने जूली को इसी तरह से अपने से दूर किया था, ठीक वैसा ही आज प्रीति ने मेरे साथ सलूक किया।

"" इसे ही कहते है खड़े लंड पर धोखा देना "

""जैसी करनी वैसी भरनी का second result""

इतने में मेरा फ़ोन बजा- कुसुम का फोन था

अरे आप निकले कि नही, कहा हो, यहाँ garden में आना है प्रोग्राम शुरू होने वाला है।

मैने कहा बस पांच मिनिट में आता हू।

और मै सीधा garden में पहुँच गया।

जारी है.....
 
एक बार फिर से दिल से शुक्रिया..... इतनी अच्छी तरह कहानी के rivew के लिए। Positive riview कहानी में लिखने के लिए जो उत्साह का संचार करते है उसे शब्दो में लिखा नही जा सकता है।

एक एक charecter की गहराई को समझना हर शख्श की काबिलियत नही है।

आप जैसे redars का प्यार पाकर वाकई कहानी को लिखने का मजा दुगुना हो गया है।

बहुत बहुत धन्यवाद....
 
इतने में मेरा फ़ोन बजा- कुसुम का फोन था

अरे आप निकले कि नही, कहा हो, यहाँ garden में आना है प्रोग्राम शुरू होने वाला है।

मैने कहा बस पांच मिनिट में आता हू।

और मै सीधा garden में पहुँच गया।

मुझे मेरे ससुर garden के गेट पर मिल गये। मैने उनके पैर छूकर पूछा पापा ये सब इतनी जल्दी और अचानक से क्यो कर दिया। वो मुझसे बोले बेटा अरुण वो डॉक्टर दामाद है उन्होंने ये रिश्ता बताया है और जूली की सगाई जिस लड़के से हो रही है वो उनके कजिन uncle का लड़का है और उसकी मेडिकल शॉप है उन्होंने ही रिश्ता फिक्स किया है. ये सगाई एकदम साधारण तरीके से और कम लोगों की उपस्थिति में होनी थी. इस में सिर्फ़ घर के खास लोग बुलाए गए है, और पूरा खर्चा वो ही कर रहे है। और मेरे ससुर मुझे garden के अंदर ले गये।

मै अंदर पहुँचकर अपनी certified पत्नी मतलब प्यारी कुसुम और प्यासी बेटी रिंकी को ढूढ़ने लगा।

तभी मेरी नजर कुसुम पर पड़ी।

मेरी बीवी कुसुम माल की तरह बन-ठन कर बैठी थी. उसने गुलाबी रंग की नेट वाली साड़ी के साथ डीप नेक वाला ब्लाउज पहना हुआ था. इस ब्लाउज में से उसके आधे से ज्यादा लगभग साठ प्रतिशत दूध दिख रहे थे, सिर्फ़ निप्पल दिखना बाकी रह गए थे. कुसुम अपने पसंदीदा गुलाबी रंग की साड़ी में वह बला की खूबसूरत लग रही थी।

लंबे काले घने रेशमी बाल, होंठो पर डार्क गुलाबी लिपिस्टक, होंठो के हल्का सा ऊपर छोटा सा काला तिल कुसुम के होंठो को कामुक बना रहे थे, उसके इन्ही कामुक होंठो को देखकर मेरे मुह में पानी आ गया, उसके माथे पर लगी गुलाबी बड़ी सी तिलक जैसी डिजाइन वाली चमकीली बिंदी, कानों में हिलते हुए बड़े से झुमके, उसके गोरे चेहरे की छोटी सी नाक में चमकती सोने की गोल nose ring कुसुम के चेहरे पर चार चंद लगा रही थी।

मेरी शादी में मेरी मम्मी के द्वारा अपनी बहू को दिया गया कुसुम के गले में चमकता हुआ बड़ा सा सोने का नेकलेस उसके स्तनों की घाटियों पर चमक मारता हुआ स्तनों के अंदर जाने का रास्ता दिखा रहा था।

गर्मी के कारण पसीने की वजह से उसका ब्लाउज भीग गया था जिसकी वजह से उसके अंदर की गुलाबी रंग की ब्रा नजर आ रही थी। जो कि बड़ा ही मनमोहक लग रहा था।

कुसुम कि चिकनी गोरी पतली कमर में साड़ी में दबा हुआ मोबाइल फोन उसकी कमर को देखने के लिए आकृषित कर रहा था।

कुसुम कमर के नीचे साड़ी को कुछ हद तक टाइट ही लपेटती है जिससे कि उसके कमर के नीचे का गांड का घेराव कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ नजर आ रहा था । ईस तरह से साड़ी पहनने की वजह से उसके अंगों का उभार और कटाव साड़ी के ऊपर भी उभर कर सामने आ रहा था। जिसे देख कर हर मर्द ललचा रहा था कुसुम अपने बालों की लटकती हुई दो लटो को सवारने मे लगी हुयी थी।

कुसुम पूरी तरह से तैयार होने के बाद बेहद खूबसूरत नजर आ रही थी अगर ऐसे में कोई भी इंसान देख ले तो उसके मन में कुसुम को पाने की लालसा जाग जाए।

मैं अपनी बीवी कुसुम का ये कामुक रूप देख कर एकदम से गर्मा गया. लेकिन मुझे मालूम था कि अभी इसे हाथ लगाना भी सम्भव नहीं है.

इसलिए मैंने उसे आंखों से ही आँख मारकर मस्त दिख रही हो का नॉटी style में इशारा किया।

मेरी बीवी कुसुम ने मेरी तरफ देखा और आंख मार कर एक सेक्सी कातिल मुस्कुराहट भाव से मुस्कुरा दी. मैं समझ गया कि इसने मेरी चेहरे का रंग देख कर जान लिया है कि मैं उसे आँखों से ही चोद रहा हूँ.

फिर हम दोनों पास पास आ गये, उसने मुझसे कहा ऐसे आँखों से मत देखो ऐसा लगता है कि अभी खा जाओगे मुझे। मुझे हसी आ गयी और मैने कहा अपनी बीवी को देख रहा हूँ किसी और की नही ।

तभी पीछे से मेरी आँखों को किसी ने अपने नरम और मुलायम हाथो से बंद कर दिया।मुझे अपनी बंद आँखों में ही किसी लड़की का अहसास हो रहा था, उसके बदन से निकलने वाली perfume की खुशबू मुझे रोमांचित कर रही थी। एक मिनिट बाद उसने मेरी आँखों से अपनी उंगलियों को हटाया तो मैने पीछे मुड़कर देखा तो मेरे तोते उड़ गये।

मेरे सामने एक काली पार्टी-ड्रेस पहने हुए,

मेरी साली प्रीति खड़ी थी। उसकी ड्रेस का कपड़ा सिल्की सा था, जिसे देखते ही मै तड़प गया. ड्रेस में क्लीवेज थोड़ा सा गहरा था (इतना ज्यादा भी नहीं कि कुछ दिखे) जिससे प्रीति की क्लीवेज-लाइन का थोड़ा सा आभास मिल रहा था और ड्रेस की लंबाई भी स्कर्ट या हॉट-पैंट्स के मुकाबले कम थी. पर सबसे ज्यादा उत्तेजक बात यह थी कि ड्रेस के चिकने कपड़े ने प्रीति के बदन से चिपक कर उसके उभारों को तो निखार ही दिया था लेकिन साथ ही उसकी ब्रा-पैंटी की आउटलाइनस् भी साफ़ नज़र आ रहीं थी.

तो जीजू? कैसी लग रही हूँ मैं? ये ड्रेस ली थी मैंने... प्रीति ने चहक कर पूछा.

'अच्छी है...' मै ऊपर से नीचे तक उसे देखते हुए बोला, प्रीति को हल्की सी लाज भी आई पर वह खड़ी रही.

उसकी गोरी-गोरी बाँहें और जांघें देख मुझे थोड़ी देर पहले घटना याद आ गई थी।

मै मन ही मन सोचने लगा

'ओह्ह मैं तो भूल ही गया था कि कितनी चिकनी है ये कमीनी...’प्रीति का ड्रेस उसके घुटनों से थोड़ा ऊपर तक का था.

हालांकि प्रीति कुसुम से बड़ी थी लेकिन दिल्ली में रहने और टेंशन फ्री लाइफ के कारण कुसुम से उम्र में छोटी दिख रही थी।

फिर दोनों बहनो कुसुम और प्रीति ने एक दूसरे को देखकर खुशी से खिल उठी, प्रीति तो कुसुम की तारीफ करते नही थक रही थी।

कुसुम के लिए भी एक तरह से यह बड़ी फक्र वाली बात थी, क्योंकि अगर किसी औरत की तारीफ एक मर्द करता है तो वह अलग बात होती है,,,,, क्योंकि मर्द अपने फायदे के लिए ही औरत की तारीफ करता है,,,, उसी औरत से जब अपने मतलब की कोई चीज चाहिए रहती है तभी वह औरत की तारीफ करता है। लेकिन एक औरत जब किसी औरत की तारीफ करें तो जरुर उस औरत में कोई न कोई बात जरुर होती है जो दूसरी औरतों को भी आकर्षित करती है। इसलिए कुसुम प्रीति की बातें सुनकर प्रसन्नता से गदगद हो हो रही थी।

प्रीति मुझसे बोली

'जीजू हमारी पिक्स तो क्लिक कर दो इन ड्रेसेस में प्लीज...फ्रेंड्स को भेजूंगी और जलाऊँगी... हीही...' प्रीति ने अपना फोन मेरी तरफ बढ़ाया.

लेकिन मैने उसके बोलते ही अपना फोन, जो अभी मेरे हाथ में ही था, का कैमरा ऑन कर लिया था. प्रीति अपना पोज़ बनाते हुए बोली,

'अच्छा फिर मुझे सेंड कर देना पिक्स बाद में...'

'हम्म...’ मै उसका फोटो खींचते हुए मन में बोला. चिड़िया पिंजरे में आ बैठी है.

प्रीति के पोज बनाते हुए हिलने डुलने से

जबकि उसकी ड्रेस का कपड़ा उसके बदन से चिपकना शुरू हुआ था (क्योंकि चिकने मैटेरियल से बने कपड़े में बदन से होने वाले घर्षण से ऐसा होता है). जिसे देखकर फोटो खींचते वक्त मेरा हाथ एक बार काँप गया .

दोनों सेक्सी बहनो कुसुम और प्रीति की फोटो खीचने के चक्कर में मै अपनी प्यारी बार्बी डॉल रिंकी को भूल गया और एकाएक मुझे याद आया तो मैने कुसुम से पूछा वो रिंकी किधर है दिख नही रही है, कुसुम बोली वो नही आई है, सब आपकी ही गलती है ना सुबह से मुझसे झगडा करते और ना ही मै उसको डांटती। मेरी बेचारी फूल सी प्यारी बेटी अपनी मम्मी से ही रूठ कर घर में अपनी दादी के पास रह गयी।

कुसुम की बात सुनकर प्रीति बोली अरे कुसुम इसमें हम पैरेंट्स की कोई गलती नही है, आजकल के बच्चे जिद्दी हो गये। मेरी बेटी मिनी भी तेरी रिंकी की उम्र की है, वो भी नही आई है उसे नानी के घर में अच्छा नही लगता है बोलती है नानी के घर में privacy नही है बस एक छोटा सा कमरा है और मुझे अलग रूम में रहना सोना अच्छा लगता है, मै नानी के घर में सबके सामने रातभर मोबाइल नही चला पाती और वो भी नही आई है।

प्रीति कुसुम से भावुक होकर बोली हम तीनों बेहनो ने अपने पापा मम्मी के साथ एक ही छोटे से कमरे में पूरी बचपन से लेकर जवानी निकाल दी और एक दूसरे के कपड़े पहनकर ना जाने कितने ऐसे फंक्शन attend किये थे।

प्रीति कुसुम को सीने से चिपका कर बताने लगी कुसुम मै अब भी वो दिन नही भूली हू।

आज हमारे पास इतनी खूबसूरत ड्रेस है, लेकिन एक समय था जब हमारे पास सिर्फ एक ही सुंदर ड्रेस होती है और जब कही से किसी funtion का invitation आता था तो हम दोनों बहनो का मुह उतर जाता था। और एक दूसरे का मुह देखकर सोचते थे की सुंदर ड्रेस कौन पहनकर जायेगा। जूली और रिंकू तो छोटे थे पर हम दोनों जवानी की देहलीज पार कर चुके हम उम्र थे

तब हमारे पापा advise देते थे कि तुम दोनों में से पहले प्रीति वो सुंदर ड्रेस पहनकर अपनी मम्मी और रिंकू के साथ चली जाये और वापस आकर वो ही ड्रेस पहनकर कुसुम और जूली मेरे साथ चले।

प्रीति की बात सुनकर कुसुम भी बोली हम तीनो बहनो को अपने पापा से कभी कोई शिकायत नही की। और कभी भी कोई शिकायत नही करेंगे। हम तीनो बहनो को अपने पापा पर गर्व है और हम उनका कर्ज कभी नही उतार सकते है। हम उनकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकते है।

ये हमारी बेटियां क्या समझेगी। कुसुम और प्रीति दोनों की आँखों में हल्के से आँसू आ गये।

मैने दोनों के मुरझाये हुए चेहरे देखकर माहौल को खुशनुमा बनाते हुए कहा अब यही खड़ी रहोगी या अंदर मुझे नये साढू से भी मिलवाओगी।

प्रीति, कुसुम मुझे अंदर लड़के वालो के कमरे में ले गयी मेरा परिचय करवाने के लिए, हम करीबी होने के कारण मैं उसके साथ उसके कमरे में चला गये। प्रीति और कुसुम बाकी औरतों में बैठ गयी.

मै अपने डॉक्टर साढू के साथ बैठ गया

मेरे डॉक्टर साढू प्रीति के पति कुर्ता पजामा पहने हुए खड़े थे, प्रीति और उसके पति डॉक्टर साहब की उम्र में 15-18 साल का अंतर था इसका कारण ये था कि प्रीति उनकी दूसरी पत्नी थी और दोनों ने ही अपनी मर्जी से love maarige की थी।

शायद इसलिए प्रीति आज 38 साल की खूबसूरत नवयोवना नजर आ रही थी और उसके पति डॉक्टर साहब 60 की उम्र के बुजुर्ग नजर आ रहे थे।

लेकिन मेरे ससुर के एक अच्छे दामाद का फर्ज मेरे डॉक्टर साढू ने ही निभाया है, उन्होंने अपनी शादी प्रीति से की, फिर अपनी साली कुसुम की शादी मेरे जैसे handsome, पढ़े लिखे लड़के जो goverment college में प्रोफेसर है, से करवाई, और अब छोटी साली जूली की शादी अपने कजिन छोटे भाई से करवा रहे है, जो एक मेडिकल शॉप चलाता है।

वाकई सच्ची में प्रीति के पति, मेरे डॉक्टर साढू एक आदर्शवादी भले व्यक्ति है, मै उनका ही अहसान मानता हूँ उन्ही की वजह से मुझे कुसुम जैसी खूबसूरत पत्नी मिली है।

थोड़ी देर बाद मैने देखा कि मेरा डॉक्टर साढू (प्रीति का पति)कुछ परेशान सा है. प्रीति ने पूछा- क्या हुआ? तो वो बोला- प्रीति मेकअप वाला नहीं आ पाया, उसका एक्सीडेंट हो गया है.

मैं मज़ाक़ में बोल पड़ा- बस्स इतनी सी बात … मेरी बीवी कुसुम और तेरी साली ने मेकअप करने का का कोर्स किया है … तू कहे तो उससे मेकअप करने को बोल दूं?

मेरी बात को प्रीति और उसने गम्भीरता से ले लिया और बोला- अच्छा हुआ कुसुम सब जानती हैं. मैं कुछ सामान बैग में लाया हूँ. प्लीज़ कुसुम से मेरे भाई और अपने होने वाले नये साढू का मेकअप करने बोल दो.

अब मैं फंस गया … मेरी पत्नी कुसुम कि सगी बहन और मेरी साली की सगाई का मामला था, तो इस कारण से मैं भी उसे मना नहीं कर पाया.

मैंने कुसुम को आवाज़ दी और उसे साढू की परेशानी बता दी.

वो बोली- मैं मेकअप करना जानती तो हूँ … पर मैंने आज़ तक किसी लड़के का मेकअप नहीं किया है. साडू बोला- अरे कुसुम … आज सगाई का मैटर है … आपसे जैसा ठीक लगे … आप बस कर दो.

कुसुम ने मेरी तरफ देखा, मैंने उसे हां में इशारा कर दिया.

""जैसी करनी वैसी भरनी का third result""

मैने और कुसुम ने जब जूली के होने वाले पति को देखा तो हम दोनों का मुह खुला रह गया। और मै दबी हसी हस्ते हुए बोला ये तो गंजा है, इसके बाल ही नही है।

कुसुम मुझसे बोली चुप करो, बहुत हो गया लड़के का उम्र , रंग, नैन, नक्स तो ठीक है, बस बाल ही नही है, वैसे भी आजकल बाल झड़ने की बीमारी बहुत फैल रही है। बेचारे अच्छे handsome 70% लड़को के बाल झड़ने की वजह से गंजे हो गये है।

मैने कहा कुसुम बस एक फ़ायदा है

जब शादी के बाद जूली से झगडा होगा तो उसके बाल नही होने की वजह से बच जायेगा।

फिर कुसुम ने उसका मेकअप करना शुरू कर दिया.

कुसुम ने उस के गालों पर क्रीम लगाना शुरू कर दिया. मैं उसी रूम में उस के बाजू में बैठ गया.

काफी सारे लोग बार बार रूम में आ-जा रहे थे तो मेरी नजरें कुसुम की तरफ से हट गईं.

मैं मोबाइल में टाइम पास करने लगा और ये भूल गया कि मेरी बीवी कुसुम माल की तरह सजकर आई है … तो मेरा होने वाला साढू भी इसका मजा लेगा .

कुछ देर बाद मुझे ध्यान आया तो मैंने कुसुम की तरफ देखा.

मेरी बीवी कुसुम भी अपने मम्मों को बिल्कुल उसके चेहरे पर लगा लगा कर उसका मेकअप कर रही थी.

ये बात आप खुद सोचिये कि एक खुले ब्लाउज में से कोई औरत अपने दूध किसी मर्द के चेहरे के करीब लाकर दिखाएगी तो उस मर्द का क्या हाल होगा.

खैर मेरी नज़र पड़ी तो मैंने देखा कि वो कुर्सी पर बैठा था और मेरी बीवी कुसुम झुककर एक हाथ उसकी जांघ पर रख कर … तो दूसरे हाथ से उसके गालों को मसल मसल टचअप कर रही थी.

मैंने सोचा कि होने वाला साढू है … ये अपनी सगाई में थोड़े ही कुछ ऐसा वैसा सोचगा.

पर मुझे अब अपने आप पर गुस्सा आ रहा था। सब मेरी ही गलती थी मुझे जो ज्यादा मुह चलाने की आदत है और इसी वजह से बिना कुछ सोचे समझे अपनी सुंदर बीवी को उस गंजे के गालों पर हाथ फेरने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुसुम सच कहती है मुझे ज्यादा ही अपनी मास्टरी झाड़ने की सजा मिल रही है।

""जैसी करनी वैसी भरनी का fourth result""

मैंने ये सब देखा और अनदेखा करके दरवाजे के पास आ गया. और गुस्से में जानबूजकर कमरे में आते हुए मैंने नीचे रखे एक पानी के गिलास को लात मार दी. गिलास के गिरने की आवाज़ से दोनों दूर हट गए.

मैंने खुद के कपड़े ठीक करने का ऐसा नाटक किया जैसे मैंने ग्लास देखा ही नहीं.

मैंने साढू से कहा- भाई कितना मेकअप थोपेगा … अपनी साली और मेरी पत्नी को भी शादी का मज़ा ले लेने दे. वो मेरी बीवी कुसुम को हंसते हुए देख कर बोला- आप वाकयी बहुत अच्छा मेकअप करती हैं …

वो मेरे सामने कुसुम को आंख मारते हुए चला गया. कुसुम भी मुस्कुरा दी. शायद कुसुम मुझे दुनिया का सबसे चूतिया पति मान रही थी.

उसकी बात पर मैं कुछ कह पाता कि वो उठ कर अपने घरवालों के साथ चला गया.

कुसुम ने अपने बैग से लिपस्टिक निकाली और अपने होंठों पर लाली लगा कर मेरे सामने अपनी अपनी कमर मटकाती हुई बाहर के लिए चल दी.

मैं भी बाहर आ गया.

जल्दी ही सगाई कि तैयारीयां शुरू हो गयी

जब जूली को गार्डन में लाया गया तो मैं उसे देखता ही रह गया उसने गुलाबी रंग की साडी पहनी थी जो सेमी ट्रांसपेरेंट थी उसने साडी को नाभी के थोडा सा नीचे तक पहना था जिसकी वजहसे उसकी कमर के दीदार हो रहे थे उसपे मैचिंग कलर का "V" शेप का ब्लाउज पहना था मगर उस ब्लाउज में से उसके उभारोंके बीचमे से उसका क्लीवेज दिख रहा था और क्या गजब का क्लीवेज दिख रहा था ।

मेरी नज़र तो हट ही नहीं रही थी उसने बाल खुले छोड़े थे जिस वजहसे कुछ जुल्फे उसके चेहरेपे आ रही थी जो उसे परेशान कर रही थी और वो बार बार उसे पीछे किये जा रही थी उसने अपने लबों पर हलके गुलाबी कलर की लिपस्टिक लगायी थी गालोंपे हल्का गुलाबी फाउंडेशन लगाया था हाथोंमे गुलाबी कलर की चूड़ीयां पहनी थी

उसके इस लिबास को मैं भूल नहीं सकता मैं उसे तब तक देखता रहा । फिर वो स्टेज पर बैठी रसम शुरू हो गयी घर की औरतोंने उन दोनों का तिलक किया बाद में एक दुसरे को रिंग पहना दी इस तरह से जूली की सगाई हो गई इसके बाद जूली कमरे के अन्दर चली गई।

मै और कुसुम साथ साथ ही बैठे थे,

मैंने देखा कि मेरी बीवी कुसुम अपने पल्लू को काफी गिराए हुए बैठी थी जिससे कुसुम की नेट की साड़ी से अन्दर दिखने वाले बोबे दिखा रहे थे.

और मेरा साढू स्टेज से अपनी होने वाली बीवी को छोड़ कर मेरी बीवी को ताड़े जा रहा था.

तभी वहा फंक्शन के फोटो निकालने वाला फोटो ग्राफेर् सभी मेहमानों के फोटो निकालने के लिए आ गया। उसे देखकर कुसुम मुझसे बोली अरुण फोटो वाले को उधर थोड़ा ले चलो हम लोग अपनी अच्छी सी फोटो खिचवाते है।

मैने फोटो वाले से बात करके कुसुम के साथ थोड़ा भीड़ से दूर फोटो खिचवाने आ गया।

कुसुम ने उससे पहले सिंगल फोटो खिचने को बोली कि मेरा सिंगल फोटो खींचो… फिर हम दोनो का खींच लेना… वो बोला ठीक हे और मे साइड वही बेठ गया और वो मेरी बीवी कुसुम को एक साइड पर खड़ा करके उसके पीछे का सीन लेने लगा. फिर उसने मेरी बीवी को कहा की आप बीच मे आ जाए और खड़े केसे रहना हे वो बताने लगा।

उसने पहले तो मेरी बीवी के हाथ को छुआ फिर उसे कहा बस ऐसे ही खड़े रहना फिर वो फोटो खिचने लगा लेकिन कुसुम के बाल, गाल से लग रहे थे तो फोटो नही अच्छा आ रहा था फिर वो कुसुम के पास जाकर उसके हाथ से बाल को साइड पर कान के पीछे करने लगा ऐसे करते कभी कभी वो मेरी बीवी के गाल को छू लेता था.

लेकिन मुझ को बहुत गुस्सा आ रहा था।

इसी तरह उसने दो चार बार हाथ लगा दिया गाल पर. ऐसे ही उसने एक फोटो ले ली, फिर उसने मुझे कहा की आप भी आ जाए. आप दोनो का ले लेता हूँ… फिर उसने मुझे कुसुम के पीछे खड़ा रखा और मेरा एक हाथ कुसुम के बोब्स और दूसरा हाथ जांघ पर रखवाया वो ऐसे करके मेरी बीवी के बोब्स और जांघ को छू लिया था. वो भी बहुत खुश नज़र आ रहा था.

फिर उसने हम दोनो के एक तस्वीर खीच ली. कुसुम के साड़ी का पल्लू पीछे की तरफ था तो उसने कहा के मेडम ये आप आगे ले लोगे तो बहुत अच्छा फोटो आएगा… आपका फोटो मे बेठे हुए पोज़ मे ले लेता हूँ…

कुसुम ने कहा ठीक हे… फिर उसने मेरी बीवी को कैसे बैठना हे वो बताया और हाथ को पकड़ कर कहा रखना हे वो भी बताया. उसने पहले कुसुम का एक हाथ पकड़ कर उसके बोब्स के पास ले गया ओर वहा पर हाथ रखवाया और इसी तरह उसने लेफ्ट बोब्स को तोड़ा दबा लिया. फिर उसने दूसरा हाथ हाथ गाल पर रखने को कहा और गाल को छू लिया. बाद मे उसने कुसुम का फोटो खींच लिया.

फिर वो मेरे करीब आ गया और उस फोटो जो डिजिटल केमरा से खीचा था वो मुझको दिखाने लगा. इसी दोरान कुसुम उसके पीछे खड़ी थी और फोटो देख रही थी और वो कुसुम के बोब्स को कोहनी से छू रहा था.

मैने उससे पूछा फोटो कब मिलेंगे तो

फिर उसने दो दिन बाद इस funtion के साथ कहा.

मै और कुसुम जाकर फिर से कुर्सी पर बैठ गये।

मै और कुसुम जाकर फिर से कुर्सी पर बैठ गये।

कुछ देर बाद प्रीति अपनी शादी शुदा ननंद और जूली की कुंवारी कुछ सहेलियों के साथ और ज्यादा सज धज कर आई और आते ही शुरू हो गई- आप तो बड़े अकड़ू हैं? आपकी साली जूली के लिए आपके पास समय ही नहीं है, मुझे पता है आपकी बीवी खूबसूरत है लेकिन वो तो हमेशा आपके साथ रहने वाली है लेकिन साली के दर्शन तो ससुराल आने पर ही होंगे !

मैंने हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बैठाया और बोला- क्या हुआ मुझे पूरी बात तो बताओ। तो वो बोली आप सबसे मिल लिए लेकिन आपकी छोटी साली साहिबा जूली देवी से तो आप मिले नही। जिसकी वजह से ये सब फंक्शन हो रहा है।

मैने कहा

देखो, प्रीति ! साली तो आधी घरवाली होती है इसलिए शुरू का आधा दिन मेरी बीवी कुसुम के लिए था और अब बचा हुआ आधा दिन सिर्फ और सिर्फ आपके और जूली के लिए है, मैं कोशिश करूँगा कि आप और जूली दोनों के दिल की हर ख्वाहिश को पूरा करूँ वो भी आप दोनों की तसल्ली होने तक !

तो प्रीति ने कहा- देख लीजिये? आपने मेरी और जूली की हर ख्वाहिश को पूरा करने का वादा किया है ! पीछे मत हटना?मैंने कहा- अजी हम तो सिर्फ आगे ही बढ़ते हैं ! पीछे हटना तो हमने सीखा ही नहीं ! आप दोनों तो सिर्फ अपनी ऊँगली हमें पकड़ा दीजिये बाकी तो हम खुद पकड़ लेंगे।

तो वो मुस्कुरा कर बोली- काफी बदमाश लगते हैं? खैर, अभी आप और कुसुम यहाँ मत बैठो चलो मेरे साथ जूली से मिलवाती हू।

अब मुझे लगा कि मामला पट सकता है।

जारी है।
 
Hahahahaha

बहुत बहुत शुक्रिया

दरसल अरुण अपनी सालियों के चक्कर में अपनी कुसुम से थोडासा ध्यान कम दे रहा था।

इसलिए सावधानी हटी दुर्घटना घटी। पर इसमें भी अरुण की गलती थी अरुण की बिना पूरी बात सुने साढू को नही बताना था कि कुसुम ने ब्यूटी पालर का कोर्स किया है। इसी वजह से ये हुआ।

कुसुम भी सुबह उसको ये ही समझा रही थी कि बीच में बोलने की गंदी आदत है। बार बार masstri झाड़ना बंद करो

खैर

अरुण और कुसुम के रिश्ते की डोरी अभी तक

प्यार और

विश्वास के धागे से बंधी है

लेकिन उनकी किस्मत उन

दोनों की कुंडली में लिखी है।

अगर कुसुम पति व्रत पूजा शुरु कर दे

तो अनहोनी को taala

जा सकता है।
 
Right.

अभी शादी को महिना भर हुआ है, और लड़की का chrecter कब बदले ये वो तो खुद नही जानती।

कितनी लुगाई होती है, शादी बच्चे होने के बाद affair करती है।

जैसे जैसे लड़की की इच्छा पूरी होती है, farmaish और शौक बढ़ती है।

KUSUM गरीबी हालात की वजह से इच्छा दबाये हुयी होगी।

अब सुख मिलने लगा, तो इच्छा बाहर आने लगी। Rang बदलने लगा, औरत की दूसरी जवानी भी आती है। ये तो सुना ही होगा।
 
Nice.

गरीब फैमिली की बेटी के साथ कम वक्त में तलक, विधवा जैसी, घटना होती हैं तो चिड़चिड़ि, जिद्दी हो जाना human nature है और जब वो

सेल्फ depandt, खुद कमाने लगे तो वो किसी की भी नही सुनती और ना ही दब कर रहना पसंद करती है।

KUSUM लड़की उम्र में शादी नही की अरुण से। बल्कि एक औरत के रूप में की है, उम्र के हिसाब से फीलिंग्स बदलती है, वो बाबू सोना वाली नही है।

माँ बहन एक कर दे उनमे से है।

और मै यहाँ तक samjta हु अभी कुसुम ने कोई भी ऐसा काम नही किया है जो charta पर शक पैदा करे।

Saagai का maahoul hai, इतना हँसी मजाक चलता है, makeup के लिए अरुण ने ही बोला था।

फोटो वाले तो हरामी होते ही है,

KUSUM भी ठीक है अपनी जगह और अरुण konsa doodh का धुला है
 
शायद आपने ठीक से पढ़ा नही है, अरुण की शादी भी हो चुकी थी, वो भी सेकंड हैंड माल है, दूसरी भी बड़ी मुश्किल से हुयी है, उसके स्टूडेंट की हो चुकी थी शादिया, सब मजाक उड़ाते थे, जैसे तैसे कुसुम मिली उसके साथ हाथपायी करे तो लोंडे को जो वीकेंड पर सुख मिल जाता हैं, वो भी ना मिलेगा।

KUSUM शादी के लिए राजी नही थी, उसके पापा ने जबरदस्ती कराई दूसरी शादी, उसकी वजह जवान नातिन भी तो हो रही थी, कुसुम के पापा ने अपना फर्ज निभाया।

शादी ब्याह में तो बोल्ड ड्रेस, कूल mind रख कर ही एंजॉय kar सकते है, वो ही कुसुम कर रही है, कोनसी साढ़ू के साथ उसका affair था।

साली जीजा है मजाक banta hai.
 
"

अरुण की जगह कोई और मर्द हो तो उसकी गांड पे लात मार मायके भेज दे जिससे 4 दिन में अ

औरत को अकल आ जाये कि आदमी के लिए पत्नी कितना सेक्रिफाइस करती है। कितना प्यार से रखती है। उसका भरोसा न टूटे उसके लिए कुछ भी कर जाती है।""

इससे फायदा क्या होगा???

भाई pls sorry पहले बोल रहा हूँ.... आपकी शादी हुयी या नही मुझे नही पता.... लेकिन शादी शुदा लाइफ में झगड़े होते है, आपने सुना होगा जोरू का गुलाम

इसका मतलब ये है, कि बीबी झगड़ालू है, खामोशी से रहो, तो बिस्तर पर मजे देते रहेगी ज्यादा बहस ना करो। अरुण भी लंगोट का कच्चा है।

कहानी को पढ़ते रहिये, इसी तरह अपना प्यार देते रहिये, ..... वादा करता हूँ आपको निराश नही होने दूंगा, अभी तो शुरुआत है.... पति पत्नी के रिश्ते की गहराई में उतरने की...... बहुत कुछ है बांकी
 
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