Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 8 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

कुसुम मेरे पीठ से पूरी तरह लिपट कर बोली एक बात कहु

मै हाँ बोलो

“जान सच में वो बहुत हैंडसम है ,आज उसके साथ ही लंच किया ,पूरे ऑफिस की लडकिय उसकी दीवानी है ..सोच रही हु राज से दोस्ती कर ही लू .”

उसने आखिरी लाइन को थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा था लेकिन मेरे लिए इतना भी काफी था। ये समझने के लिए कि कुसुम पहले जैसी घमण्डी, गुस्से वाली नही रही, उसके बदले हुए स्वभाव को देखकर मुझे बहुत खुशी हुयी।

मै बोला तुम उससे ज्यादा lift मत दो बस। अपने काम से काम रखो। वो अपने आप ही समझ जायेगा यहाँ दाल नही गलने वाली।

बातें करते हुए हम घर के पास पहुँच गए। वहा दो तीन फल के ठेले लगे हुए थे। मै अपनी बाइक एक ठेले के पास रोक कर खड़ा हो गया और ठेले वाला बड़ी डबल मीनिंग में बोला भाई साहब ये देखो पके बड़े बड़े पपीता आप के हाथो में नही समायेंगे। और आपको पसंद भी आयेंगे।

"" स्त्रियाँ एक किताब की तरह होती है, जिन जिन नजरों से वो होकर गुजरती है... वो नजरे अपने अपने विवेक के अनुसार अपनी अपनी समीक्षाएं लिखती है ""

मै उस ठेले वाले की चेहरे की तरफ देख रहा था, वो कुसुम के ब्लाउस के clevage में से दिख रहे बड़े बड़े स्तनो की घाटी देखकर मंद मंद मुस्कुराते हुए बोल रहा था।

""कुसुम कमर से तो पतली है पर उसके उरोज (मम्मे) पूरे भरे भरे और तने हुए है। कोई भी देखने वाले की नजर कुसुम के चेहरे के बाद सबसे पहले उसके दो फुले हुए गुम्बजों (मम्मों) पर मजबूरन चली ही जाती है। उसके तने हुए ब्लाउज में से वह इतने उभरते , की मेरी बीबी के लिए उन्हें छिपा के रखना असंभव है और इसी लिए काफी गेहमागहमी करने के बाद उसने अपने बूब्स छुपाने का विचार छोड़ दिया। क्या करें वह जब ऐसे हैं तो लोग तो देखेंगे ही। ""

""कुसुम की पतली फ्रेम पर उसके दो गुम्बज को देखने से कोई भी मर्द अपने आप को रोक ही नहीं पायेगा ऐसे उसके भरे हुए सुडोल स्तन है। कुसुम उन्हें किसी भी प्रकार से छुपा नहीं पाती है। मैंने उसे बार बार कहा की उसे उन्हें छुपा । आखिर में तंग आकर उसने उन्हें छुपाने का इरादा ही छोड़ दिया। उसका बदन लचीला और उसकी कमर से उसके उरोज का घुमाव और उसके नितम्ब का घुमाव को देख कर पुरुषों के मुंह में बरबस पानी आ जाना स्वाभाविक है।""

कुसुम ने उसके हाथो से पपीता लेकर मुझे दिखाने लगी।

मैने कुसुम के हाथों से पपीता लेकर ठेले वाले से बोला ये तो पिलपिले और मुलायम है, थोड़े कड़क और टाइट कसे हुए दो।

इतने में कुसुम जगह और माहौल को नजर अंदाज कर हस्ती हुयी बोल पड़ी आपके हाथ की पकड़ कमाल है कोई भी टाइट चीज को अपने मजबूत हाथो से दबा कर मुलायम कर देते है।

मै थोड़ा सा अपने आप में शर्मा सा गया, ठगा सा महसूस करने लगा और कड़क आवाज में बोला ठीक ठीक है अब जल्दी से लो और घर चलो।

फिर हम घर की ओर चल दिये, घर के नीचे पहुँच कर मै बाइक स्टैंड पर खड़ी कर रहा था कि कुसुम बोली सुनिये मुझे ऑफिस से आज ऑफिशियल जोइनिंग लेटर मिला है उसकी फोटो कॉपी (xerox) करना है, चलिए वो सामने कि शॉप पर करवॉ लेती हूँ।

मैने कहा चलो, शॉप ऊँची थी, और वहा कुछ स्कूल के टीन एज के लड़के खड़े हुए थे । और उनके हाथों में क्रिकेट के bat थे वो आपस में बड़ी जोर शोर से हँस कर हँसी मजाक कर रहे थे।

कुसुम आगे आगे अपनी कमर नागिन की तरह बलखाती हुयी चल रही थी, मै उसके पीछे था, कुसुम के पारदर्शी ब्लाउस में पसीने की वजह से उसकी लाल रंग की ब्रा साफ साफ नजर आ रही थी।

""अपनी पत्नी और सड़क पर चलती औरतों को देख कर मुझे एक चीज़ समझ आई कि भले औरत खुबसूरत न हो, तब भी यदि उसने पारदर्शी ब्लाउज पहना हो जिससे उसकी ब्रा दिखती हो या फिर उसका ब्रा स्ट्रेप दिख रहा हो, तो आदमियों की नज़र सिर्फ उसकी ब्रा पर ही अटक जाती है. इसलिए बहुत सी लुगाईया आजकल जब भी घर से बाहर निकलती है तो पारदर्शी ब्लाउज पहनकर ही जाती है. क्योंकि उनमे यदि खूबसूरत औरत बनने में कोई कमी रह भी जाए तो भी किसी भी आदमी का उस पर ध्यान ही नहीं जाता. वो तो बस उसकी ब्रा को ही देखते रह जाते है !""

कुसुम अपनी कमर में घुसाये हुए मोबाइल फोन और मस्त मस्त बड़े बड़े नितंबो को हिलाते हुए चल रही थी, उसके हिलते हुए कूलहो या गांड को देखकर मुझे अजीब सी छिछोरो वाली फीलिंग्स आ रही थी।

ज्यादातर कुसुम साडी पहनकर ही बाहर निकलती है। उसे जीन्स पहनना टालती है क्यूंकि उसकी लचिली जाँघें, गाँड़ और चूत का उभार देख कर मर्दों की नजर उसी के ऊपर लगी रहती है। जब कभी कुसुम जीन्स या लेग्गीन पहनती थी तो कुसुम बड़ी ही अजीब महसूस करती है क्यूंकि सब मर्द और कई औरतें भी कुसुम की दोनों जाँघों के बिच में ही देखते रहते है।

भले ही वो मेरी पत्नी है पर मै ठरक से भरा हुआ उसका ठरकी पति जो हू।

हम शॉप पर पहुँच गये, कुसुम ने बैग में से पेपर निकाल कर शॉप वाले लड़के को देते हुए बोली इसकी फोटो कॉपी करना है। शॉप पर एक युवा नौजवान लड़का xerox मशीन पर काम करते हुए हल्की सी मुस्कान देते हुए बड़ी ही flirt वाली अदा से दिवर्थी अंदाज में बोला। भाभीजी आगे और पीछे दोनों तरफ से करवाना है या आगे से ही काम चल जायेगा।

कुसुम बोली वैसे तो आगे से काम चल जायेगा पर तुम पीछे से भी करो कोई प्रोब्लॉम् नही मुझे।

मै अपनी पत्नी कुसुम और उस लड़के की डबल मीनिंग बातें मूक दर्शक की तरह चुप होकर सुन रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि ये कुसुम फोटो कॉपी करवा रही है या गांड मरवा रही है।

हँसी भी आ रही थी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

कुसुम xerox शॉप वाले की दुकान पर रखे स्टूल पर बैठ गयी और मै बहार उन स्कूल के नई उम्र के लौंडो के से हल्का सा दूर खड़ा हो कर उनके मजाक भरी गप्पे सुनने लगा।

लेकिन आज वह जो बातें मजाक मजाक में इन लड़कों के मुंह से सुन रहा था ऐसी बातें मैने आज तक कभी भी अपने कानों में नहीं सुनी थी । एक लड़का उन लड़कों से बोला।

क्या यार आज तुम लोग इस तरह से क्यों बैठे हुए हो मैं तो क्रिकेट खेलने आया था लेकिन तुम लोग क्रिकेट ना खेल कर बस ऐसे ही बैठे हुए हो।

( उसकी बातें सुनकर उनमें से एक लड़का बोला)

हां यार कर भी क्या सकते हैं क्रिकेट खेलने तो हम भी आए थे लेकिन गेंद ही खो गई,,,,,,,,

यार सारा मूड ऑफ हो गया वह बोला,,,,,,)

कोई बात नहीं तो क्या हुआ( दूसरे लड़के की तरफ उंगली से इशारा करते हुए) अपनी रोहित की मम्मी है ना इसके दोनों बड़े बड़े गेंद कब काम आएंगे,,,,, उनसे ही एक दिन के लिए उधार मांग लेते हैं दबा दबा कर खेलेंगे हम सब,,,,( तभी उसकी बात सुनकर जिसको वह बोल रहा था वही रोहित हंसते हुए बोला।)

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

तेरी दीदी के पास भी तोे दो गेंदे है मस्त-मस्त चलो ऊनसे ही मांग लेते हैं। ( रोहित की बात सुनकर लफंगे जैसा दिखने वाला मोहन बोला।)

यार मांग तो लु लेकीन मेरी दीदी कि दोनों गेंदे छोटी छोटी है उनसे क्रिकेट खेलने में मजा नहीं आएगा मजा तो तेरी मम्मी की दोनों गेंदों में आएगा जब मैं उनको अपने हाथों में भरकर अपने कपड़े पर रगड़ते हुए बॉलिंग करुंगा।

( उसकी बात सुनते ही सभी लड़के और मै भी हंसने लगा और वह लड़का भी हंसने लगा।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

जिसको वह उसकी मम्मी के बारे में कह रहा था। तभी दूसरे लड़के ने उनमें से ही एक लड़के के बारे में संबोधित करते हुए बोला।

यार रोहित की मम्मी को छोड़ अपने राहुल की मम्मी को देख कितनी बुड़ी बुड़ी चुचीयां है और कपड़े तो ऐसे पहनती है जैसे कि दूसरों को ललचा रही हो। कसम से जब भी देखता हूं तो मेरा तो लंड खड़ा हो जाता है।

( ऊस लड़के की बात सुनकर मेरी तो हालत खराब होने लगी मैने इस तरह की खुली और गंदी बातें कभी भी नहीं सुनी थी। लेकिन आज सोसाइटी के ऐसे अच्छे लड़कों के मुंह से ऐसी गंदी बातें सुनकर मै दंग हो गया था। लंड खड़े होने की बात से तो मेरे पेंट मे भी सुरसुराहट सी महसूस होने लगी थी।)

तभी वह लड़का बोल पड़ा जिसकी मम्मी के बारे में दूसरे लड़के ने इतनी गंदी बात कही थी।)

तेरी मम्मी को भी तो देखकर मेरा भी हाल यही होता है, तेरी मम्मी भी जब गांड मटकाते हुए चलती है तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है देखना एक दिन किताब लेने के बहाने तेरे घर आऊंगा तो तेरी मम्मी को चोद कर जाऊंगा।

( उसकी बात सुनकर एक बार फिर से सभी ताली मार के हंसने लगे ।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

और बड़े आश्चर्य की बात यह थी कि जिसके बारे में यह सब बातें हो रही थी वह भी ईन लोगों की हंसी में शामिल हो जाता था। सभी लोग एक दूसरे की मम्मी के बारे में गंदी बातें कर के मजे ले रहे थे।

मै तो आश्चर्य से खड़ा होकर ऊन लौंडो की बातें सुन रहा था और अजीब-अजीब से ख्याल मेरे मन में आ रहे थे। मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो पा रहा था कि आजकल के स्कूल के नयी उम्र के लड़के एक दूसरे की मम्मी के बारे में ऐसी गंदी बातें भी करके मजा लेते होंगे।

तभी उनमें से एक लड़के ने दूसरे लड़के को खामोश खड़ा हुआ देखकर बोला।

यार शौर्य तु क्यों खामोश खड़ा है तू भी तो कुछ बोल।

( तभी बीच में दूसरा लड़का बोल पड़ा)

यारों क्या बोलेगा दूसरों की मम्मी की बात सुनकर उसे अपनी मम्मी याद आ गई होगी। ( उस लड़की की बात सुनकर शौर्य को गुस्सा आ गया वह उसे अपनी हद में रहने के लिए बोला लेकिन वह नहीं माना।)

अच्छा दूसरों की मम्मी की गंदी बात सुनकर तो तू खूब मजा ले रहा था और अपनी मम्मी की बारी आई तो गुस्सा करता है। ( उस लड़के के सुर में सुर मिलाता हुआ दूसरा लड़का बोला।)

हां यार शौर्य यह बात तो सच है पूरी सोसाइटी में तेरी मम्मी जैसी सेक्सी दूसरी कोई औरत नहीं है। मुझे पता है जब तेरी मम्मी सोसाइटी से गुजरती है तो सभी की नजरें तेरी मम्मी पर टिकी होती है। तेरी मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियां बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड देखकर तो सब का लंड खड़ा हो जाता है। ( इतना सुनते ही शौर्य गुस्सा करने लगा और उस लड़के को चुप रहने को बोला लेकिन वह लड़का कहां मानने वाला था।)

यार गुस्सा क्यों करता है सही बात तो है तेरी मम्मी को चोदने के लिए तो ना जाने कितने लोग तड़पते रहते हैं। और सच कहूं तो तेरी मम्मी की गंदी बातें सोच सोच कर मैंने ना जाने कितनी बार लंड हिला कर मुठ मारा हुं।

( उस लड़के की बात सुनकर सभी लोग ठहाका मार कर हंसने लगे।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

अपनी मम्मी के बारे में ऐसी गंदी बातें सुनकर शौर्य की उस लड़के से हाथापाई शुरु हो गई । दे तेरी कि दे। तेरी माँ का भोसड़ा, मादरचोद, भोसड़ी वाले, बहन के लोडे और भी गंदी गंदी गालिया। एक दूसरे को क्रिकेट के बल्ले से मारने लगे।

हंगामा बढ़ता देख मै उन लड़को का बीच बचाव करने लगा बड़ी मुश्किल से मैने उन दोनों को छुड़ाया और उनको अलग अलग कर दिया। और शौर्य गुस्से में अपने घर की तरफ जाने लगा।)

शोर शराबे की आवाज सुनकर कुसुम भी शॉप से बहार आ गयी थी उसकी नजर मुझे लडाई में बीच बचाव करते हुए देखकर खुश हो गई और मुझसे बोली वाह प्रोफेसर साहब कमाल कर दिया, आपको ही बोलते है पक्का मास्टर।

मैने कहा कुसुम मैडम दस साल का अनुभव है। कुसुम बोली ठीक है प्रभू अब चलो xerox कॉपी हो गयी।

सीढ़ी से उतरते उतरते कुसुम का आँचल उसके सीने से फिसल गया, और उसका ब्लॉउज़ और उसके बीच उसके बड़े स्तनों के बीच की गहराई उस वक्त साफ दिख रही थी। शायद कोई और दिन होता, या कुसुम ने ऑफिस नया नया जॉइन नही किया होता जिससे बन संवर के नही जाती और कुसुम ने पुशअप ब्रा न पहनी होती तो वो गहराई और उसके स्तन शायद छिप जाते मगर आज नहीं। कुसुम को शायद अंदाजा हो गया था कि उसका आँचल फिसल गया है।

"" उन लौंडो ने भी अपनी मम्मी को भी कई बार देखा था कि वो कैसे अपने आँचल को समय समय पर अपनी उंगलियों से उठाकर ब्लॉउज़ को ढंकती थी।""

कुसुम ने भी वही किया। शायद शॉप पर खड़े लड़को ने अब तक कुसुम के ब्लॉउज़ को न देखा हो, उसके स्तनों को नोटिस न किया हो। मै मन ही मन सोचने लगा। मगर शायद तब तक देर हो चुकी थी। उन लड़को के चेहरे की उडी हुई रंगत ये साफ बता रही थी।

इधर मैने कुसुम में एक नई बात महसूस करी थी कि उसको नए लड़के बहुत अच्छे लग रहे थे, क्योकि अक्सर मेरी बीवी कुसुम जैसी देसी भाभिया जब भी किशोरवय लड़के को देखती है, उनकी दबी कुचली सेक्स इच्छाए जाग उठती है और इस बात को लेकर मै बहुत ही परेशान हो रहा था |

आखिर हम बाहर के सब काम निबटा कर घर पहुँच गए।

मम्मी और कुसुम किचन में चलि जाती है।

फिर सब मिल कर खाना खाते है।

तभी मम्मी की मोबाइल की रिंग बजती है।

मम्मी कॉल पिक्क करती है

कॉल कुसुम की मम्मी की थी।

अपनी समधिन की बात सुन कर बहुत खुश होती है मै और कुसुम एक साथ बोल कौन है।

बहू तेरी मम्मी है।

उनके घर जूली की शादी के लिए हमें इनवाइट कर रही है कार्ड पोस्ट कर दिया है।

कुसुम अपनी मम्मी से बात करती है और अपने आने की बात बोल कर फ़ोन मुझे देती है। मै भी अपनी सास से बात करते हुए फोन कट कर देता हूँ।

कुसुम तेरी मम्मी तो ४-५ दिन पहले आने की बोल रही है कब चलना है।

कुसुम : पागल हो गये हो क्या कौन जायेगा मैं नहीं जा रही। अभी ऑफिस जॉइन किये हुए तीन दिन ही हुए है, ऑडिट रिपोर्ट बनानी है।

मै: वो तुम्हारी छोटी बहन की शादी में बुला रही है ।

कुसुम: एक बार मना किया न और अगर जाऊँगी तो उसी दिन आ जाउँगी।

मम्मी: बेटा अरुण एक काम कर तुम अभी निकल जाओ। तुम्हारी भी बहुत कॉलेज की छुटिया हो चुकी है, और फिर से तुम्हे अपनी साली की शादी में और छुट्टी लेनी पड़ेगी वैसे भी बहू सही कह रही है, उसकी अभी नयी नयी नौकरी है, छुट्टी ज्यादा लेना ठीक नहीं होगा, मै और बहू उसी दिन आ जायेंगे। और रिंकी बेटी भी अकेली है, जरा उसके बारे में सोचो मेरी प्यारी फूल सी बच्ची ना जाने किस हाल में होगी..... पूरे घर के काम, पढाई, अकेली कर रही होगी! अरुण बेटा अपनी पत्नी और मम्मी की चिंता छोड़ तू अपनी रिंकी बेटी के बारे में सोच कितना प्यार करती है तुझसे..... तेरी बीबी से भी ज्यादा तेरी बेटी चाहती है तुझे.... उसका ख्याल भी तुझे ही रखना है.... समझा...??

इतने दिन हो गये तूने एक भी बार अपनी बेटी रिंकी से फोन पर बात की है, उसको whats up पर मैसेज ही भेज कर उसका हाल चाल पूछा है क्या.....??? कुसुम तो बेचारी अपनी नई नौकरी के काम की टेशन में भी रोज एक दफा रिंकी से बात कर लेती है। तेरी कुछ जिम्मेदारी है कि नही, तू तो फ्री है अभी.... तेरा भी तो फर्ज बनता है कुछ अपनी बेटी रिंकी के लिए..... या यू ही रिंकीया का पापा बना फिर रहा है।

" मम्मी की बातें सुनकर मै सोच में पड़ गया, आखिर वो सच कह रही थी, मै अपनी बेटी को सच में भूल गया था और मैने इतने दिनों में उसे एक भी बार काल तो दूर मैसेज तक नही किया था "

इतने मै कुसुम ताना देकर हस्ती हुयी मुझसे बोली.... "महाराज कब से कह रही हूँ बीबी का पल्लू छोड़ कर आप अब अपनी बेटी पर भी जरा ध्यान लगाओ"""

हाहा हाहा हाहा हाहा

मै -- कुछ सोचते हुए ठीक है। कल का रिजर्वेशन मैं करा देता हूँ। और उससे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट अपनी अफसर बीवी की बात मानना है।

रात होते-होते मेरा आवेग थोड़ा कम हुआ, मै कमरे से निकलकर छत पर चला गया और कुसुम कमरा और बिस्तर ठीक करने लगी, लेकिन मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही बात थी — ‘आइ केम थिंकिंग अबाउट रिंकी…एंड हिज़ ...........’ रिंकी के बदन और उफनती जवानी का ख़याल आते ही मै नए सिरे से सिहर उठा था. मै जैसे-तैसे करके नीचे कमरे में आया और खाना खा कर वापस फिर से लेट गया. कुछ देर लेटे रहने के बाद मैने अपने सिरहाने रखे फ़ोन को टटोला.

आज की रात मै धड़कते दिल के साथ जगा हुआ था मेरे मन में एक उपाहपोह की स्थिति थी, कि क्या मै अपनी बेटी को मैसेज करू या न करू. जब रात के 11 बजने में कुछ ही मिनट रह गए तो मैने कांपते हाथों से अपने फ़ोन में एक मेसिज टाइप किया,

“ my dear rinki how are you ”

" I miss you.

इधर रिंकी ने पाया कि दो नए मेसेज आए हुए थे, एक बार फिर उसका बदन तप उठा, उस को उस रात देर तक नींद नहीं आयी, और वह एक बार फिर अपने पापा के ख़यालों में खो गयी थी. अगले कुछ पल रिंकी की हालत बेहद ख़राब रही, अचानक अपने अंदर जगी इस आग को बुझाने का उसका हर प्रयत्न विफल रहा. हर बार वह अपने आप को कोसते हुए अगली बार ऐसा ना होने देने का प्रण करती और हर बार अपनी इच्छाओं के सामने बेबस हो जाती. इसी तरह रात जब उसकी कामिच्छा अपने चरम पर थी तो वह मस्ती में सिसकती-सिसकती बोल पड़ी,

‘उम्ह्ह्ह्ह्ह पापाऽऽऽऽऽऽऽ…..पापाऽऽऽऽऽऽऽ…उम्मा पापा…स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ …’

और जब उसे होश आया तो उसकी ग्लानि की कोई सीमा नहीं थी. ‘ओह गॉड, ये मुझे क्या होता जा रहा है? पापा …उम्मम्म…क्यूँ मैं पापा के बारे में ही सोचती रहती हूँ?

जब रात के १२ बजने में कुछ ही मिनट रह गए तो रिंकी ने कांपते हाथों से अपने फ़ोन में एक मेसिज टाइप किया,

"" I am fine my dear papa. "

" I miss you too "

पर फिर जब उसने कुछ देर सोचा तो उसे लगा कि हो सकता है उसके पापा यह रिप्लाई कर दें,

“Thank You rinki ”

यह सोच कर उसका मन थोड़ा खिन्न हो गया था, उसने एक दो बार फिर ट्राई किया और आख़िर एक बड़ा सा मेसेज लिखा.........

"" पापा आज शाम होने को आयी थी। आज ना जाने क्यों मुझे घर में अकेला-अकेला लग रहा था। वो मौसम होता है ना, आंधी के बाद वाला। खुला आसमान, ठंडी हवा, आसमान का रंग हल्का सा केसरी, और मेरी मदहोशी और पागलपन को बढ़ता हुआ। दादाजी अभी बहार डोल रहे होंगे। बाई नीचे किचिन में खाने की तैयारी में लीन होगी। मैं अकेली हूँ, मेरा मन अकेला है, मेरा शरीर अकेला है, और मैं अकेला नहीं रहना चाहती।

मुझे अपनी धड़कन का बढ़ना महसूस हो रहा है। मानो कोई ज़ोर-ज़ोर से मेरे शरीर के अंदर से मेरे दिल के दरवाज़े को बजा रहा हो और चीख रहा हो, “आज, आज, आज, आज!” जब मुझसे रुका नहीं गया तो मैंने धीरे से अपने कदम पापा आपके बेडरूम की तरफ बढ़ा दिये। मम्मी की अलमारी में से एक पुराना सूटकेस निकाला और वापस अपने कमरे में आकर अपने बिस्तर पर रख दिया। हौले से मैंने दरवाजे के बाहर झाँका और रुक-रुक के बिना आवाज़ किये अपना दरवाज़ा बंद कर के उसकी कुण्डी लगा दी।

अब मैंने हौले से अपने शीशे में झाँका और और अपने हाथ से अपने बालों को अपने कान के पीछे कर अपनी चुन्नी को पकड़ लिया। अपनी आँखों में मुझे भूख दिख रही थी और अपने होठों पे प्यास। मेरे होंठ सूखे थे। हलके से मैंने अपने होंठ को अपने दांतों के बीच में दबाया और अपनी चुन्नी को फर्श पर धकेल दिया। शीशे में मुझे मैं नहीं, एक मच्छली दिख रही थी, जिसे पानी चाहिए था।

शाम का हर पल मुझे पागल कर रहा था। अपनी कुर्सी पर पड़े बैग को मैंने अपने मेज़ पर टिका दिया और कुर्सी पर बैठ कर धीरे से उस सूटकेस को खोला। मेरी सांसें बढ़ने लगीं और दिल की दीवारों को तोड़ वो बहार निकल ही आया था। मैंने आहें भरते हुए अपने होठों को अपनी जीभ से साफ किया और थूक सटका। फिर अपने दरवाजे की ओर देखा और अपना हाथ को सूटकेस में पड़े काले अंडरवियर पर रख दिया।

कपडा अभी भी नम था। हौले से मैंने उसे उठाया और चेहरे पर लगा लिया। धक् धक् , धक् धक् , धक् धक! अपनी बंद आँखों से मुझे बस अपना धड़कता हुआ दिल दिख रहा था और उसकी धड़कन में से उठने वाला नाद जो बार बार एक ही नाम बोल रहा था, “पापा, पापा, पापा, पापा, पापा!” कपडे की नमी मुझे मदहोश कर रही थी। मदहोश छोटा शब्द है। मैं उसे अपने चेहरे पर लगा कर पागलपन और तड़प के बीच घडी की सुई की तरह झूल रही थी जो किसी भी पल पापा को घर लाती होगी।

मैं कुर्सी से उठ कर अपने पलंग पर कूद गयी। आहिस्ता से मेरा हाथ अपने कुर्ते को उठाने लगा। यहाँ मेरी जीभ ने पहली बार उस सुगंध को छुआ था, वहां मेरा हाथ उस सुगंध को वहां ले जाना चाहता था जहाँ अभी बस मेरी तन्हाई बस्ती थी। जिस गति से मैंने अपने कुर्ते को उठा कर अपने सलवार के नाड़े को खोला बस उसे ही शायद कपडे फाड़ना कहते हैं। अपना थूक मैंने उस अंडरवियर पर लगाया और उसे चाटने लगी।

मेरी आँखें बंद थी। अपनी सलवार मैंने नीचे धकेल दी और अपनी पैंटी के इलास्टिक को उठा कर अपने हाथ को धीरे धीरे नीचे ले जाने लगी। पता नहीं क्यों मेरे पैर हिलने लगे और मेरे कानों में अजीब से मचलने वाली गर्मी निकलने लगी। अब आंखें बंद रखना मेरे लिए मुश्किल हो गया। मुझे अपनी आँखों से अपनी बेशर्मी मह्सूस करनी थी। शब्दों में वो वेग कहाँ जो उस स्वाद को बयां कर पाएं।

मेरी जीभ उस स्वाद को महसूस कर रही थी। थोड़ा नमकीन, कुछ ऐसा जैसे संतरा छीलने पर उसकी पहली महक। पहले मैं उस कपडे को सुकून से अपने मुहं में भिगो लेती, दूसरी ओर से अपनी ऊँगली उस चड्डी में डालकर यूं चूसती जैसे मेरे पापा को लंड हो। और उसका स्वाद मेरे मुहं में घुल जाता। फिर में उस नम कपडे को अपनी आँखों पर रख लेती और मंदे से अपने गीले हाथ से अपने मम्मों को दबाती।

ना जाने कितनी बार इस कपडे को पापा के रस का स्पर्श हुआ होगा, कितने ही रोज़ पापा ने इससे उतारा होगा और मम्मी को अपना प्यार दिया होगा। क्या ये दरवाज़ा है उनके प्यार का? अपनी आँखों से मेरी नाक तक और नाक के रास्ते मेरे होठों से रगड़ता हुआ वो गीला कपडा यूँ मेरी गर्दन तक जाता जैसे मुझे मेरे पापा की गर्मी में, उनकी प्यार में, उनकी मर्दानी खुशबू में रंग रहा हो, और उसकी लेहेर बिजली की तरह मेरे पूरे शरीर में दौड़ जाती जो बार-बार मेरी हाथ को मेरे पैरों के बीच धकेलती।

मेरी कल्पना में मेरे पापा मेरे ऊपर अपने वज़न को डाल कर मेरे होठों को अपने होठों से चूस रहे हैं। उनका हाथ मेरे बालों को सेहला रहा है और मेरी आँखों में अपनी आँखें डाल के वो वासना से तृप्त मुस्कान का दीदार मुझे करा रहे हैं। उनका गर्म हाथ मेरी कमर को थाम के मेरे स्तनों की ओर बढ़ रहा है जो उनकी छाती के बोझ के नीचे दबे हैं।

मेरी कल्पना में मेरे पापा अपनी जीभ निकाल कर मेरे होठों को चाटता है और मेरे गालों को, मेरी आँखों को चूमता है, और उसके चेहरे की खुरदरी त्वचा मेरे चेहरे से रगड़ती है। वो मेरी कल्पना में मेरे कानों में अपनी भारी-गहरी आवाज़ से बोलता है, “ रिंकी, मुझे अपना बना ले, सनम।” और जोर से अपने लंड से धक्का देता है; मेरे पैरों को अपने पैरों से दबा लेता है।

जैसे ही मेरी ऊँगली ने मेरे भग-शिशन को छुआ, मैंने उस अंडरवियर को अपने मुहं में भर लिया और कल्पना करने लगी कि यही कपडा पापा के लंड को सहलाता होगा। यही शायद कभी-कभी नींद में उनके रस को अपने अंदर भर लेता होगा, इसी कपडे से लग कर उनके अंडे वो रस बनाते होंगे जो मुझे पीना हैं, जिसने मुझे बनाया है, जिससे मैं हूँ। ऐसा क्या है जो इस कपडे को नसीब हो सकता है लेकिन मुझे नहीं?

कैसा लगा होगा मेरी मम्मी को मेरे पापा की छाती पर लेटना, मेरे पापा के हाथों को अपने शरीर को छूने देना। पापा के लंड को अपने हाथों में भरना, पापा के होठों से अपने होठों को मिलाना, उसकी खाल का स्पर्श, उसके होठों का एहसास अपने निप्पल्स पर, उसके चेहरे को अपने बालों में ढक लेना, उसकी जीभ को अपने होठों से चूसना और अपने मुहं में भर लेन। कैसा लगा होगा मेरी मम्मी को मेरे पापा का गरम लंड अपने बूब्स में रगड़ना।

मेरी मम्मी अक्सर कहती है मैं बड़ी हो रही हूँ, पर मैं इतनी बड़ी क्यों नहीं हो रही कि वो कर सकूं जो मेरे पापा ने उन्हे करने दिया, और उसको किया। अपने मुहं से निकाल कर मैंने उस चड्डी को अपनी ब्रा में धकेल दिया और उसकी नर्माहट मुझे अपने बूब्स पर महसूस होने लगी मानो पापा ने अपने हाथों को अपने थूक से नहला के मेरे स्तन को पकड़ लिया हो। मेरी ऊँगली मेरी फुद्दी को यूं सेहला रही थी, कि मेरे पैर जोर-जोर से मेरे पलंग के गद्दे में गढ़ने लगे।

पैर के ऊपर पैर। यहाँ मेरी आँखों में पापा की कामुकता इतनी समां गयी के एक आंसूं मे्रे गोर चेहरे से होते हुआ मेरे होठों पे आ गिरा जो पापा का नाम दोहरा रहे थे। कैसा लगता होगा मेरी मम्मी को मेरे पापा की गोदी में सोना। कैसा लगता होगा मेरी मम्मी को मेरे पापा के कन्धों पर अपना सर रखना और पापा का हाथ थाम कर उस खुशनुमा चेहरे को देख कर मुस्कुराना। थाम लेना उस पल को और फिर कल दोबारा से उसे जीना।

मैं इतनी मचल गयी की ज़ोर से मेरा पैर मेरे पलंग के पाए में टकराया और ना जाने कैसे पास रखी मेज पर रखी चाय कि प्याली नीचे गिर गयी और बहुत तेज़ आवाज़ हुई… … गरम चाय ने मेरा पैर तो जला दिया मगर अभी जिंदगी में बहुत मोड़ और पड़ाव बाकी हैं पर मुझे पता नहीं आपको ये अपनी नादान रिंकी की फीलिंग्स पसंद आएगी या नहीं।

पापा मैंने पहले कभी प्रेम कहानियां नहीं पढ़ीं, पर मेरा कौमार्य मुझसे कहता है की मेरे शब्द आपके अंदर की आग को हवा देंगे। पापा अगर मुझे लगा की आपको मेरे शब्द पसंद आये तो उम्मीद करुँगी की आपको मेरा दिल भी पसंद आएगा। मेरा दिल अकेला है और मेरा शरीर कुंवारा। पापा जिस दिन आप वापस आयेंगे आप मेरे दिल का स्पर्श करेंगे। अपना ख्याल रखियेगा। - आपकी राह देखती "रिंकी".......,

उस मेसेज को पढ़-पढ़ कर ही रिंकी की अंगड़ाई टूट रही थी. रात के एक बजने में सिर्फ़ कुछ ही सेकंड बचे थे, रिंकी ने डर के मारे एक बार मेसेज एप बंद कर दिया. पर फिर हड़बड़ाते हुए जल्दी से एप वापस खोला और सेव हुए मेसेज के सेंड बटन को दबा दिया. सिर्फ़ इतना सा करने के साथ ही रिंकी एक बार फिर तड़पते हुए तकये में मुँह दबा कर आनंदित चीतकारें मारने लगी,

‘पापाऽऽऽऽऽऽ, उम्ममा… पापा…उन्ह्ह्ह्ह…’

मै जगा हुआ था कुसुम बाथरूम में थी. तभी मेरी नज़र अपने फ़ोन पर गयी, जिसकी नोटिफ़िकेशन लाइट जल रही थी. यह सोच कर कि देखें किसने मेसेज किया हैं मैने फ़ोन उठा कर देखा. सिर्फ़ एक ही मेसेज था.

मेसेज पढ़ते ही मेरा बदन शोला हो उठा था. मै कुछ समझ नहीं पा रहा था क्या करू, मेरे माथे पर पसीने की बूँदें छलक आयीं थी. तभी कुसुम बाथरूम से निकल आयी, मैने आनन-फ़ानन में फ़ोन एक तरफ़ रख दिया और लेट गया.

कुसुम आकर मेरे बग़ल में लेट गयी. मै कल वापस जाने वाला था सो कुसुम ने मुझको को कुछ सुख देने का सोचा था, लेकिन एक दो बार जब मैने कुसुम के उकसावे का जवाब नहीं दिया तो वह चुपचाप लेट कर सोने लगी.

कुछ देर बाद जब मै आश्वस्त हो गया कि कुसुम सो चुकी है तो मैने एक बार फिर अपनी जवान बेटी का रूख किया. मेरा लंड अब तन चुका था. रिंकी का मेसेज काफ़ी उत्तेजक था, मै मेसेज देखते ही यह तो नहीं समझ सका था कि रिंकी ने ऐसा मेसेज क्यूँ किया लेकिन उसके पीछे दबी बात मुझे समझ ज़रूर आ गयी थी. लेकिन मै इस बात को आगे नही बढाना चाहता था सो मैने रिंकी को रिप्लाई ही नही किया,

उधर रिंकी फ़ोन के पास पड़ी आहें भर रही थी जब मेरा कोई रिप्लाई नही आया. तो उसका सारा नशा उतर गया.. ‘क्या पापा सच में बदल चुके है? और मैं ही ऐसी गंदी बातें सोचने लगी हूँ?’ रिंकी अंतर्द्वंद्व से घिर चुकी थी, उसने अपने आप को ऐसा क़दम उठाने के लिए कोसा और शर्म से पानी-पानी हो गयी

.इधर रात में मै भी ये सोचकर परेशान था कि " रिंकी ने ऐसा मेसेज क्यों किया?

इस तरह सोचते सोचते ही मैरी आंखे भारी होने लगी थी। पर कोई फैसला न कर पाने की वजह से आखिरकार हारकर मै चुपचाप सो गया।

जारी है.......
 
बहुत बहुत अभिनंदन आभार.....

सादर प्रणाम,

पारिवारिक व्यस्तता और जिम्मेदारियों की वजह से आपके शब्दों की बारिश की बूँदे मेरी कहानी के आँगन में बरसने में कुछ विलंब हुआ, लेकिन इस बार के रिव्यू में रीडर की पसंद/नापसंद के बारे में जो बताया वो मुझे समझ आने लगा है। यहाँ रीडर incest रिलेशन पर लिखी कहानी पढ़ना ज्यादा पसंद करते है। लेकिन कभी ये नही सोचते है कि incest relation वास्तविक रूप से इतना आसान नही होता हैं। या तो ये रिश्ते किसी हादसे/एसिडेंटली पनप जाते है या फिर ऐसे रिश्तों को बनाने में इंसान सौ बार सोचता है।

मै यहाँ वास्तविक रूप से एक शादीशुदा जोड़ा जो दूसरी बार शादी कर और उम्र में पूर्ण रूप से परिपक्व होने के बाद भी हालातों और जज्बातो में फँसकर किस तरह रिश्तों की मर्यादा को लाँघ गये उस पर विस्तरत रूप से लिख रहा हूँ। लेकिन रीडर को सब जल्दी से चाहिए। यहाँ रीडर उन दर्शको की तरह है जो nagnta और सौंदर्य में भेद नही जानते है। जिन्हे अश्लीलता और कामुकता का आनंद नही पता। रोमांस और वासना का फर्क नहीं कर सकते है। प्यार और परवाह की समझ नही है।

राजकपूर साहब की फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम (जीनत) राम तेरी गंगा मैली (मंदान्किनि) मेरा नाम जोकर जैसी में स्त्री के नग्न बदन को दिखाया गया तो वो सौंदर्य की तरह था.. फिरोज खान साहब ने वही जीनत को फिल्म कुरबानी में नग्न दिखाया वो रोमांस, था।

खैर आखिर में आपको सस्नेह धन्यवाद...
 
इस तरह सोचते सोचते ही मैरी आंखे भारी होने लगी थी। पर कोई फैसला न कर पाने की वजह से आखिरकार हारकर मै चुपचाप सो गया।

अल सुबह,गर्मी की है, मैने कूलर के साथ पंखे के परों को भी कष्ट दिया हुआ था। इतवार (रविवार) का दिन , मै "पिछवाड़ा " उल्टा करके सो रहा था, आधा चद्दर मैने अपने मुह तक कोना पकड़ के खींची हुई है,और बाकी चद्दर पैरों की लंबाई तक फस्सीं हुई, बे तरबी से सिकुडी हुई कराह रही थी।

खैर

कुसुम प्रवेश करती हैं कमरे में चाय लेकर ,सारे ठट कर्मों से निवृत् हो कर मतलब फ्रेश हो कर (सुबह के 8 बज चुके हैं) ,

और चुपचाप बेड के पास पड़ी कुर्सी पर पसर के पैर बेड के कौने तक फैलाकर चाय की चुस्सिकियाँ लेते हुए, अपने फैवरेट शगल में व्यस्त अरे वही अपना इंस्टा रील वीडियो और गाने (comedy) वो भी शुद्ध भोजपुरी मे..........

कुकुकू कूक कूक कू******मुर्गवा मोबाइल बाटे***** चोलिया में बोलत बाटे,,, दिन रात करा करे कुहा कुहू,,,, के दा ssssss ना खाइले रे मुर्गवा कुहू रे कू हू........

((अब आप सोच रहे होंगे ये क्या था?? बात दर असल ये है, की मुझ को कोई भी अलार्म की टोन असर नहीं करती थी, और न ही मुझको जगाने में --कामयाब रहती थी, (चूंकि कुसुम पहली पोस्टिंग आगनबॉडी में थी वहा उसकी साथ काम करने वाली ज्यादतर सहेलिया "जिला बस्ती" की थी, (अरे वही निरहुआ, रविकिशन और मनोज तिवारी का इलाका) ये गाना ही वहाँ के DJ का सरताज था))

हाँ ये कर्कश मगर मजेदार गाना बजते ही

मै तो जैसे सेही का काँटा मेरे खुद के पिछवाड़े में लग गया हो,,,,,,,,,ऐसे उठा????????

मै : क्या हैं ये चिल्लाते हुए इसके बाद "नींद की भाषा" में परग्रहियों की तरह बड़बड़ाया हा नहीं तो!!!!!!!! चैन से मुझ को कभी नहीं सोने देती हो??????? हा नहीं तो!!!!!, खुद की नौकरी में तो कोई टेंशन है नहीं, आराम से बैठी रहती हो..... आज छुट्टी के दिन सुबह सुबह मुझसे लड़ने के मूड में हो क्या..??????

अब आया कुसुम को गुस्सा, उसकी भृकुटियाँ (भवें ) तन चुकीं थी, बोली मैंने तो सिर्फ जगाने के लिए इतना मस्त "मुर्गवा" लगाया था। लेकिन देखो न कौन है लड़ने के मूड में?? पत्नियाँ कभी लड़ने के मूड में नहीं रेहतीं, हमेशा पति रहते हैं। हम तो सिर्फ उनका भला ही सोचते हैं, और वो इसे उल्टा ले लेते हैं।

मै कुसुम का ये रूप देखकर डर के मारे फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया।

(आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ, बाथरूम में साबुन, शैंपू, सब है, shaving क्रीम भी)

आज वापस अपने घर जाना था तो मै फ्रेश होकर दाढ़ी बना कर बाथरूम से निकला। मुस्कुराते हुए और मस्त अंगडाई लेकर (ताकि कुसुम समझ जाये की इन चिकनी बगल के पीछे मेरे प्यारे गोरे चिट्टे dove साबुन का बलिदान है) देखो न तुम्हारा dove साबुन shaving क्रीम से भी बेहतर और मुलायम shave बनाता है???

कुसुम: क्या?????? फिर से????? वो झट से बाथरूम में साबुन का विसरा देख कर कराह कर बोली ई ई ई ई ई ई ई ई उसकी घृणा वाली चीख निकल गयी, और आँखें चौडी हो गयीं,scene देख कर उसके साबुन का postmartum के बाद विसरा बिखरा पड़ा था।

कुसुम गुस्से में अतिदेव (अथार्थ पतिदेव)

म म मेरा मतलब पतिदेव, तुम हर चीज की अति कर देते हैं, इसलिए मैं तुमको अब से "अति देव" ही बोलूँगी। देखो तुमने मेरे साबुन को बालों में लपेट दिया? अति देव देखो आज भी shave और "बगल के बाल" मेरे साबुन को लगा लगा कर बनाएं हैं!!!! मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है।

कोई न डार्लिंग तुम शैंपू से नहा लेना वैसे भी वो fiama di wilis वाले तुम्हारा

" चूतिया काट" कर तुम्हे शैंपू से नहलाते हैं और तुम उसे कुछ अलग body wash समझ कर खरीद लाती हो। मेरी प्यारी समझदार "ब्यूटी कांसियस बीवी" बेचारी शैंपू से नहाती है........मै पानी लगे बालों को सेट करते हुए बोला।

ये सुन कर कुसुम का चेहरा तो बस फक !!! हैं .... क्या बॉडीवाश् को शैंपू बोल रहे हो ????????

मैने मुस्की मारते कुछ कुछ उसे चिढ़ाते हुए smile दी।

दोबारा मेरा साबुन मत छूना, वरना तुम्हारी खैर नहीं,,,,,,,,,, कुसुम के चेहरे का जियो ग्राफिया पठारी हो चुका था, eyebrows बिलकुल चीनी लडाकों की मुद्रा में

कनपटीयों तक पहुँच चुकी थी।।

मै मुस्कुराते हुए बोला कुसुम के गाल खीचते हुए बोला हाय मेरा chinese गुस्सा

( Chinese गुस्सा इसलिए की हो सकता है हफ़्तों/ महीनों चले और हो सकता है अभी खत्म हो जाए)

तभी मन्दिर से मम्मी वापस आ गयी।

कुसुम... अरुण तुम दोनों सुबह सुबह फिर से शुरु हो गये.. मम्मी हम पति पत्नी की बहस को आखिरी चरण में खतम करने की नसीहत देते हुए बोली।

मम्मी अब आप ही बताओ? अगर कोई आपके प्यारे साबुन से बगल के बाल बना कर उसको बालों से लपेट देगा? तो क्या आप लड़ोगे या चिल्लाओगे नहीं??? और फिर कहोगे की बीवीयाँ झगडा करती रहती हैं? कुसुम मम्मी से बच्चो की तरह मेरी शिकायत करती हुयी बोली।

मम्मी ने मुझ पर ममतामयी डाँट लगाई और कुसुम से बोली बहू अब नाश्ता लगा दे।

ब्रेकफास्ट करते हुए, कुसुम के बनाये बथुए के पराठों की तारीफ करते हुए मै हास्य पूर्ण व्यंग कसते बोला.......अरे वाह!!! क्या हरियाली वाले पराठे हैं, आज तो मैं तृप्त हो गया !!

ये सुनकर आखिर सब की हँसी निकल पड़ी। हाहा हाहा हाहा

सुबह के नौ बजने वाले थे मेरी मम्मी बोली बेटा अरुण आज दोपहर को हमारे जो रिश्तेदार है उन्होंने गृह प्रवेश में आने का न्यौता दिया है, चल थोड़ी देर हम सभी भी होकर आते है। मैने कुसुम की ओर देखा कुसुम अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालो को आखिरी स्वरुप दे रही थी की तभी मम्मी की आवाज़ आयी की तैयार हुई की नहीं, सब लोग आ चुके होंगे ज्यादा देर नहीं करते अब।

कुसुम तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली हो गया बस और कमरे से बाहर निकल गयी। मै और मम्मी तैयार थे रिश्तेदार के यहाँ जाने के लिए। मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और मम्मी कुसुम के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।

वो दोनों कुछ बोलते हुए चल रहे थे पर में किन्ही और ख्यालो में था,

दस मिनट के बाद ही हम रिश्तेदार के मकान के सामने खड़े थे, अंदर काफी चहल पहल थी, कार्यक्रम का माहौल बन चूका था। एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगो के लिए व्यवस्था थी।

वहाँ की मेरी मम्मी कि भाभिया दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने बहू और बेटियों, सहेलियों के साथ, इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद हमने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।

अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरते बैठी बातों में मशगूल थी, हमारे आते हैं उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए। कुछ औरते बातों में मग्न थी कुछ ने खाने की तैयारी कर ली थी। पता चला पूजा आरती का कार्यक्रम शाम 5 बजे होने वाला हैं।

तभी मेरी मम्मी की बड़ी भाभी जो रिश्ते में मेरी मामी लगती है हमारे पास आ गयी उनकी उम्र मेरी मम्मी से कुछ ज्यादा थी दिखने में वो दादी की तरह लग रही थी। मम्मी और कुसुम को अपने साथ कमरे में ले गयी।

मैं अपने पुराने दिनों और विचारो में खो गया और दोपहर होने वाली थी, अब तक आधी औरते और पुरुष खाना खा चुके थे। शायद शाम 5 बजे पूजा की तैयारी में, मगर मेरी हवन पूजा पाठ में रुचि नहीं थी, भीड़ भरा औरतों का माहौल देख कर मुझे शर्म आ रही थी। मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतो के पाँव बचाते हुए बाहर निकला। घर की छत का मुआयना करके वापस नीचे आ गया।

मुझे देखते ही कुसुम भी उठ कर बाहर आ गयी फिर मैने पूछा की तुम खाना खा चुकी।

फिर उसने 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया। मैंने उसे समझाया की इस भीड़ में तुम आराम नही कर सकती। कुसुम कुछ सोचने लगी। उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया इन लोगों ने मेहमानों का एक विशेष प्रबंध किया हैं ।

घर की छत पर। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ, और पूछा छत पर तो बहुत गर्मी होगी।

मुझे और कुसुम को टेंशन में बातें करते देख मेरी मम्मी हमारे पास आ गयी, हमने उन्हे पूरी बात बता दी मम्मी बोली यहाँ छत पर आराम करने में कोई प्रॉब्लम नही है, पर बेटा तुझे शाम सात बजे ट्रेन पकड़ना है तो इससे अच्छा हम अपने घर चलते हैं, वैसे भी ढाई बजने वाले है।

कुसुम बोली मम्मी ये ही ठीक रहेगा, हम तीनों अपने घर की ओर निकलने से पहले मम्मी ने कहाँ कि भाभी को बोल ना तो पड़ेगा। और हम तीनो अंदर कमरे में चले गए।

मम्मी अपनी भाभी मतलब मेरी मामी से घर जाने की बात करने लगी मगर मामी मान नही रही थी, फिर मम्मी ने मामी को ये बताया कि सात बजे अरुण कि ट्रेन है उसे वापस अपने घर जाना है पापा के पास नागालैंड। तो उन्होंने मम्मी को रुकने के लिए बोला और मुझे कुसुम को जाने की अनुमति दे दी। और मम्मी से एकदम से खुश हो बोली अरे दीदी आपने ये मुझे बता कर बहुत अच्छा किया । मम्मी ने पूछा क्यो ऐसा क्या हुआ?

मामी बोलि अपने सुनील की पत्नी आपकी बहू को भी सुबह नागालैंड अपने मायके जाना है, मै बहुत परेशान थी अकेली कैसे जायेगी??

मम्मी बोली क्यो सुनील कहाँ है??

मामी बोली अरे वो तो shhiping co. में जॉब करता है चार पांच महीने में एक बार आता है। बस अगले महीने आ जायेगा तो बहू को वापस ले आयेगा। बातो बातों में ही मामी ने अपनी बहू को आवाज देकर बुला लिया। मैने जब मामी की बहू को देखा तो देखता ही रह गया।

सुनील की बीबी सुनीता करीब ३५ की होते हुए भी २५ साल की ही दिख रही थी। खान पान पर कडा नियत्रण और नियमित व्यायाम और योग के कारण उसने अपना आकार एकदम चुस्त रखा था। सुनीता का चेहरा वयस्क लग ही नहीं रहा था। उसके स्तन परिपक्व होते हुए भी तने और कसे हुए थे। उसके स्तन शायद ३४ + और स्तन सी कप साइज के थे। सुनीता की कमर का घुमाव और उसकी गाँड़ इतनी चुस्त और लचीली थी की गजब की सेक्सी लग रही थी।

मै उसकी तरफ आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था, तभी शायद कुसुम ने मेरी नजर को पढ़ लिया और मम्मी को इशारा करते हुए हँस दी। मम्मी कुसुम का इशारा समझ कर बोली बेटा अरुण जेठ है तु !! सुनील तुझसे छोटा है, और कल इसको भी अपने साथ ले जाना।

मै तो अंदर से बड़ा खुश था मै एक आँख मारते हुए मजाक में बोला अभी जेठ (may) का ही महिना चल रहा है।

हाहा हाहा हाहा

हाँ मम्मी ये तो अच्छा हुआ चलो सफर में अब बोरियत नही होगी। मै सुनीता से बोला आप साढ़े छे बजे तक रेड्डी मिलना मै आपको पिक कर लूंगा। फिर मामी के घर से निकल कर मै और कुसुम अपने किराये के घर में आ गये।

मैं पंखे को निहारते हुए सोच रहा था कि तीन घंटे बाद वैसे भी जाना है पता नही कितने दिनों के इंतजार के बाद यह खूबसूरत फल खाने को मिलेगा मुझे। और अगर मेरे जाने के बाद मेरे इस खूबसूरत फल को कोई और खाने लगा तो फिर मेरा क्या होगा।

नही नही ये नही हो सकता, मेरी कुसुम मुझे धोख़ा नही दे सकती, वो किसी गैर मर्द के साथ सोना तो दूर उसके बारे में सोच भी नही सकती है। लेकिन कुसुम के दिल, मन में क्या है इसका पता कैसे लगाया जाये, और अगर कोई और होगा भी तो उसने झूठ बोल दिया कोई नहीं है तो...??? कोई धाँसू आईडिया मिले जिससे वो झूठ ना बोले जो बोले सच बोले मगर कैसे???? क्योकि कोई भी चूतिया पति सिर्फ अपने मन में आये चूतियापे वाली सोच का जबाब अपनी पत्नी से किसी गैर मर्द के साथ सम्बधो / इच्छा की बात पूछकर अपनी खुशहाल जीवन में जहर नही घोलेगा।

मै और मेरी ठरकी सोच को कुसुम हमेशा प्रणाम कर दूर भागती है, वो किचिन में मेरे लिए रास्ते के लिए पूड़ीया बना रही थी। तभी मेरे हवशी मन में विचार आया कि जो लड़किया/लुगाईया अपने मोबाइल में सेक्सी, पोर्न कहानिया/फिल्म देखती है वो चुदड़कड होती हैं।

इसलिए मैने कुसुम के मन में क्या है उस बारे सोचते हुए मोबाइल में एक लिंक खोल कर ग्रुप सेक्स वीडियो देखा जैसे मैने वीडियो चालु किया तो उस वीडियो में एक शादी शुदा जोड़ा अपने दो मित्रों के साथ कोई हिल स्टेशन जाते हैं। संयोग वश उन्हें एक ही कमरे में रुकना पड़ता है। वहाँ वह शादी शुदा जोड़ा की बीबि को कम कपड़ों में देखते हैं।

दो पलंग एकसाथ जुड़े हुए होते हैं और रात को शादी शुदा जोड़ा पति अपनी पत्नी से लिपट कर सोता हैं तभी रात को अचानक ही शादी शुदा जोड़ा उत्तेजित हो जाता है और पति पत्नी से चोदने की रट लगाने लगता है। आखिर में पत्नी पति की बात मानकर कपडे पहने हुए ही अपना घाघरा ऊंचा करके उसे चोदने देती है।

शादी शुदा जोड़ा ने कोई परवाह नहीं की कमरे में दोनों मित्र उन दोनों को नंगा चोदते हुए देख रहे थे। वो दोनों मित्र शादी शुदा जोड़ा को उछृंखलता से चोदते हुए देखते हैं।

पत्नी अपने पति से चुदवाने में मग्न होती हुई अपनी आँखें बंद करके मजा लेती हैं तब उसका पति दोनों मित्रों को आँख मार कर इशारा करता है और फिर एक मित्र उसकी पत्नी की जाँघों पर हाथ रखता है। उसे देख कर दुसरा मित्र उस की पत्नी के स्तन दबाने लगता है। दोनों में होड़ लगती है और उससे पहले की पत्नी अपने पति के खेल को समझे, दोनों मित्र फुर्ती से उसकी बीबी के ऊपर चढ़कर उसे चोदने लगते हैं। पत्नी समझ जाती हैं; पर जैसे असहाय है ऐसा ढोंग करके अपनी आँखें बंद करके इसका मजा लेती हैं और बाद में बिंदास होकर (अपने पति की इजाजत जो मिल गयी) अलग अलग तरीके से दोनों मित्रो के साथ पति को चोदती है और तीनों से चुदवाती है।

ऐसे कई तरह से एक साथ एक ही समय में एक का लण्ड चूसना, एक से चूत चुदवाना, और एक से गांड मरवाना, चूँचियों को चूसना और निप्पलों को काटना इत्यादि होता है और आखिर में दोनों मित्र और पति पत्नी की मुह, गांड और चूत में अपना वीर्य निकालते हैं।

उस वीडियो को देखकर मेरी तो हवा निकल गयी। जब मै ही इतना हैरान था, तो इसको कुसुम को दिखाना तो नामुमकिन सा लग रहा था। पर मुझे एक बात अच्छी लगी की मैने वही वीडियो चुना जिसमें पति के सामने पत्नी दूसरे से चुदवाती हैं।

मेरे अंतर्मन ने कहा "तुम निश्चिंत रहो। कुसुम से कहो की कहीं से एक वीडियो मिला है। वह थोड़ा सेक्स के बारेमें है और उसे सिर्फ बीबी के साथ ही देखना है ऐसा कहा गया है। पहले तो कुसुम थोड़ी ना नुक्कड़ करेगी, की यह अच्छा नहीं लगता, पर फिर वह इसे देखती रहेगी और आखिर में तुम खुद देख लेना क्या होता है।"

थोड़ी देर बाद मेरे दिमाग में एक आईडिया आया और मैने कुसुम को अपने पास बिस्तर पर बुलाया यह बात कह डाली। मैने उस से कहा की ये वीडियो देखो ये थोड़ा सा अश्लील है। उसे आश्चर्य हुआ जब कुसुम वीडियो देखने के लिए तैयार हो गयी। शायद उसे पता नहीं था की वह क्या देखने वाली थी।

जैसे मैने वीडियो चालु किया और पति पत्नी के रोमांस के सिन आये तो मेरी प्यारी बीबी और करीब बैठ गयी और मेरी टाँगों के बिच हाथ डालकर मेरे ढीले लण्ड को टटोलने लगी। जब पति पत्नी की चुदाई के दृश्य आये तो वह मेरा लण्ड पाजामे में से निकाल कर उसे फुर्ती से हिलाने लगी।

जैसे जैसे परदे पर दृश्य ज्यादा उत्तेजित होने लगे, अपना साड़ी सहित पेटीकोट ऊपर कर कुसुम ने मेरा हाथ उसमें डाला। मैने महसूस किया की मेरी बीबी की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसमें से उसका रस रिस रहा था। मै समझ गया की कुसुम मुझ से उँगलियों से चुदवाना चाहती है।

पर जब कुसुम ने देखा की दोनों मित्र शादी शुदा पत्नी को उसके पति की सहमति पर चढ़कर उन्हें चोदने लगे थे तो उससे रहा नहीं गया वह मुझ से चिपक गयी जैसे वह यह सब देखने से डर गयी हो। तब मैने अपनी उत्तेजित खूबसुरत पत्नी को अपनी बाहों में लिया और उसे यह कह कर प्यार जताने लगा की देखो जानूं यह सब होता रहता है। इसका आनंद लो। एन्जॉय करो।"

मेरे बार बार आश्वासन देने से और अत्यंत उत्तेजक भड़कीले सिन के कारण मै और कुसुम दोनों का उन्माद बढ़ता जा रहा था। जब मैने कुसुम के कपडे उतार कर कुसुम की चूत में उंगलिया डाल कर उसे उकसाना शुरू किया तो वह एकदम उत्तेजित हो गयी उसका पानी कई बार छूट गया। मैने कभी भी अपनी बीबी को इतनी बार निढाल होते हुए नहीं देखा। सिसकरिया लेते हुए हुए वह बोल रही थी, " अरुण ऐसा कभी नहीं हो सकता। यह गलत है।"

तब मैने कुसुम से कहा, "जानू, इस दुनिया में सारी अच्छी चीजें या तो या गलत, या असामाजिक, या तो कानूनी दृष्टि से अवैध मानी जाती है। पर होता सब कुछ है।"

वीडियो खतम होने के बाद मैने सहज रूप में ही अपनी बीबी कुसुम से पूछा वीडियो कैसा लगा तो कुसुम ने कहा, "देखो, सोचने में तो यह बड़ा लुभावना लगता है; और तुम जो चाहे कहो, पर ऐसा वास्तव में हो नहीं सकता। मेरे साथ तो कतई नहीं। गैर मर्द के बारे में तो तुम सोचना भी मत। मैं कोई ऐसी वैसी औरत नहीं हूँ। कमाल करते हो। तुमने क्या सोचा की मैं किसी भी गैर मर्द से ऐसे ही चुदवाने के लिए तैयार हो जाउंगी? नहीं जी नहीं, यह नहीं हो सकता।"

मै अपनी प्यारी बीबी कुसुम की बात सुनकर खुश हो गया। मुझे लगा की मेरा प्लान काम कर गया और मेरी बीबी ने अपने मन में छिपी सच्चाई को बता दिया था। मै सोच में पड़ गया। तब अचानक मुझे कुसुम की दो बातें सूचक लगी।

पहले तो कुसुम ने कहा "देखने में तो यह सब लुभावना लगता है।" इसका मतलब यह हुआ की कुसुम को दो मर्दों से चुदवाने वाली बात लुभावनी लगी।

दुसरा जब कुसुम ने यह कहा की , "मैं कोई ऐसी वैसी औरत नहीं हूँ जो किसी भी गैर मर्द से ऐसे ही चुदवाने के लिए तैयार हो जाउंगी।" इसका मतलब कुसुम ने यह कहा की वह किसी ऐरे गैरे से चूदवाने के लिए नहीं तैयार होगी और वह वैसे ही नहीं मानेगी। वह एक इज्जतदार औरत है और अपनी इज्जत आसानी से किसी ऐरे गैरे के साथ दाव पर नहीं लगा सकती।

पर जो कुसुम ने नहीं कहा वह यह था की अगर कोई ख़ास व्यक्ति हो तो वह तैयार हो सकती है और उसे काफी मनाना भी पडेगा। शायद बातों बातों में ही कुसुम ने मना करते हुए भी इशारा कर ही दिया की वह मान सकती है। उसे किसी और से चुदवाना लुभावना तो लगता है लेकिन वह आसानी से मानने वाली नहीं है। उसके पीछे काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। सबसे ज्यादा सूचक कुसुम ने यह इशारा किया की वह किसी साधारण व्यक्ति को अपना सर्वस्व समर्पण नहीं करेगी।

जारी है........
 
हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा

हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा हाहा

हँसी नही रोक पा रहा हूँ, हँस हँस के आँखों में आँसू आ गये....

एक बार आपसे रूबरू मिलकर आशीर्वाद लेना चाहता हूँ.... 🙏🙏🙏

शायद आपको याद होगा मैने एक बार किसी थ्रेड पर लिखा था "" संजू vr जी, संपूर्ण सत्य है "

ये रिव्यू उसी का प्रमाण है, क्योकि अरुण के वास्तविक चरित्र को आपने पहचान लिया है, अरुण सिर्फ

सिर्फ सोचता ही रहता है, उसने अपने ख्यालो की अलग दुनिया बना ली, शायद उसकी वजह उसका अकेलापन वो भी ठरक से भरा हुआ, उसके खाली दिमाग मे अलग अलग फैंटेसी जनम लेती रहती है, उसे भी पता है होना जाना कुछ नहीं है, बस ख्याली पुलाव पकाने में खुश है।

वैसे कहानी के बीच में ये लिखा है "" जेठ (may) का महिना चल रहा है, 11 महीने देवर के एक महिना जेठ का होता है।

तो जेठ जी सुनीता को छोड़ते वक्त छेड़ने के हकदारी तो है 😜😜😜😜😂😂😂

बस इसी तरह अपने अनमोल शब्दों की बारिश करते रहिये।

शुक्रिया
 
सबसे ज्यादा सूचक कुसुम ने यह इशारा किया की वह किसी साधारण व्यक्ति को अपना सर्वस्व समर्पण नहीं करेगी।

कुसुम के मुह से गैर मर्द के साथ संबंध वाली बात सोचकर मेरे अंतर्मन में संवाद शुरु हो गया, दिल और दिमाग आपस में बातें करने लगे........

दिल कह रहा था.... .......हवस की भट्टी, ज्यादा दिन तक गर्म नहीं रहती......अच्छी बात है। इसमें बुरा क्या मानना....????

प्यार करना कोई बुरी बात थोड़ी है, नफरत करना बुरी बात है, कर लेने दो पत्नी को

अपनी मनमर्जी वो भी तो अनुभव लेकर "अच्छा या बुरा"

एक दिन शांति के साथ बैठ जाएगी, समाज को वो खुद ही जवाब दे देगी

पत्नी के लिए तुम बुरे क्यों बनते हो. . ???

वो गाना नहीं सुना (प्यार बांटते चलो)

एक फूल के कई माली हो, तो वह जल्दी से मुरझाता नही, तुम भी किसी से प्यार कर लो, प्यार जिंदगी है, प्यार बंदगी है

किसी को किसी कुत्ते से प्यार हो जाये तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता...... मगर किसी दूसरे इंसान से हो जाये, तो सहन नहीं होता ?????? वाह प्रोफेसर साहब वाह.......

तभी गाने की आवाज आने लगी...

चूम लू होंठ तेरे दिल की ये ख्वाइश है.......!

ये मेरे मोबाइल की रिंगटोन अचानक से बज उठी, मैने फोन देखा मेरी मम्मी का फोन था। हैलो अरुण बेटा क्या कर रहे हो, मम्मी सामने से बोली...???

"कभी कभी झूठ बोलना जरूरत बन जाती है "

मै : कुछ नहीं मम्मी आराम कर रहा हूँ... क्यो क्या हुआ कोई काम था..????

मम्मी : अरुण तेरी मामी तुझे और बहू को बुला रही है हवन शुरु होने वाला है..!

मै : लेकिन मेरी ट्रेन है सात बजे की.. मै कैसे आ सकता हू, पैकिंग भी करनी है..!

मम्मी : वो ही तो बताने के लिए तुझे फोन किया सुनीता बहू ने मोबाइल में ट्रेन की लाइव लोकेशन देखकर बताई है कि ट्रेन चार घंटे देरी से चल रही है। मतलब रात 11 बजे तक आयेगी। इसलिए तू और कुसुम अब यहाँ आ जा, तेरी मामी जिद कर रही है अगर तुम दोनों यहाँ हवन में बैठोगे तो उन्हे भी अच्छा लगेगा...!!

मै कुसुम की आँखों के इशारे की सहमति लेकर मम्मी हम आते है, और बिना चुदाई किये फ्रेश होकर वापस मामी के घर चले गये।

मामी के घर शाम की पूजा पाठ, खाना पीना खतम होते होते 9 बज गये। एक बार फिर मैने ट्रेन की लाइव लोकेशन चेक की तो ट्रेन और चार घंटे लेट दिख रही थी। मैने स्टेशन मास्टर को फोन किया तो पता चला कि रास्ते में मालगाड़ी के दो पहिये उतर गये थे ट्रैक की मरम्मत होते होते रात के दो तीन बजेंगे और ट्रेन सुबह पांच बजे तक आयेगी।

मैने सारी बात मम्मी और कुसुम को बताई तो मम्मी बोली चलो फिर रात अपने घर ही सोते है और मामी से विदा लेकर हम तीनों अपने घर आ गये।

किराये के घर में कमरा बहुत छोटा सा है, अब हम सोने के लिए गद्दे adjust करके

मम्मी ने कुसुम को अपने साथ गद्दे पर सोने का निमंत्रण देते हुए बोली आजा बहू हम दोनों एक साथ सोते है।

दोपहर का आधा अधूरा काम पूरा करने की नियत से मैने मम्मी की नजर बचा कर आँख से इशारा करते हुए हुए कुसुम को ना कहने को कहा। कुसुम भी मुझे आँखों के इशारे से कामुक भरी मुस्काते हुयी बोली मै आपकी बात क्यों मानु? मैं वही करुँगी जो मैं चाहती हूँ। मैं कुसुम का इशारा समझ तो रहा था वो शायद मम्मी से कहना चाहती थी मेरी इच्छा आपके साथ सोने की नहीं बल्कि अपने पति के साथ है।

मै एक कोने में लेट गया और मम्मी और कुसुम एक गद्दे पर लेट गयी।

फिलहाल कुसुम ने मना कर दिया, पता नही मुझे वो भी शायद यही चाहती थी।

वो और मम्मी अब आपस में कुछ बातें कर रहे थे। और हंस रहे थे। मैं मन ही मन कुढ़ रहा था इसको तो जैसे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ रहा था।

मैं चुपचाप अपनी किस्मत को कोस रहा था।

मुझे उसके मजाक अब सजा लग रहे थे।

मै सोचने लगा क्या में फिर आज होटल चला जाऊ, अब यहाँ रुकने का क्या फायदा। थोड़ी देर के बाद उन दोनों की बातें शांत हो गयी थी। कुसुम भी अब पलट कर सो गयी और मेरी आँख लग गयी।

अचानक कुसुम की आँखें खुली, मै उसके गद्दे पर था और पीछे से चिपक कर सोया था। मेरे हाथ उसके वक्षो के ऊपर थे।

उसने थोड़ा पलटकर देखा मै था। वो तुरंत उठ बैठी और एक निगाह मम्मी पर पर डाली, मम्मी गहरी नींद में थी। ना चाहते हुये भी कुसुम ने मुझे इशारों में समझाया कि वहाँ मम्मी हैं और मुझे वापिस अपनी बिस्तर पर जाना चाहिए।

वो एक शरारती मुस्कान के साथ मुझे नज़रअंदाज़ कर रही थी। मैने उसे फिर से लेटा दिया और धीमे से कहने लगा मम्मी अब इतनी जल्दी नहीं उठेगी।

मैं बोला वैसे भी अगले 3-5 घंटे तक का ही समय है, सुबह पांच बजे जाना है मुझे। क्या तेरे लिए इतना वक़्त काफी हैं। कुसुम ने शरमाते हुए कहाँ ये आपकी इच्छा और कैपेसिटी पर निर्भर करता है, आप में दम हो तो सुबह तक भी कर सकते हैं। इतना सुनते ही मैने उसके वक्षो को फिर से भींच लिया।

अब मुझे कही न कही यकीन हो गया कि मेरी आज की रात फ़ालतू नहीं जाएगी। मैने उसकी साड़ी ऊपर से हटा दी, और एक हाथ से ब्लाउज के हुक खोलने लगा। फिर ब्लाउज निकाल कर रख दिया। अब मै उसके डिज़ाइनर ब्रा पर हाथ फिराते हुए मजे ले रहा था।

शायद उसको यह बहुत पसंद आया था। आता भी क्यों नहीं, उसकी डिज़ाइन और रंग ही इतना कामुक था किसी को भी ललचाने के लिए। मुझे वो इतना पसंद आया कि उसे खोलने की कोशिश भी नहीं की।

अब मेरे हाथ नीचे की और गए और साड़ी को पेटीकोट से अलग कर दिया। अब तो जैसे मुझे इसमें महारत हासिल हो गयी थी। अब बारी उसके पेटीकोट की थी।

उसने नाड़ा खोल कर पेटीकोट निचे खिसकाते हुए पैरो से निकाल दिया। अब मै कुसुम नीचे के डिज़ाइनर अंतवस्त्र को घूर रहा था। मेरा पैतरा काम कर रहा था। शायद ऐसे अंतवस्त्र पहले कभी नहीं देखे थे। मै उनपर हाथ फिराने लगा।

कुसुम को लगा मै उन वस्त्रो को लेटने की वजह से सही ढंग से नहीं देख पा रहा हू। वो उठी और मूर्ति की तरह अलग अलग मुद्राये बनाती गयी और अपने बदन को उन अंतवस्त्रों के साथ नुमाइश करके मुझे उत्तेजित करने लगी।

मेरी हंसी अब और चौड़ी हो गयी और जैसे लार टपकाने लगा। मै तुरंत उसके समीप आया और घुटनो के बल बैठ गया। उसके वेक्स किये हुए टांगो पर अपने हाथ फिराने लगा। चिकनी टांगो पर मेरे हाथ फिसलते जा रहे थे। इन चिकने टांगो के स्पर्श से मुझे मजा आने लगा।

मेरी नजर पास में सो रही मम्मी पर पड़ी और अगर मम्मी ने कुछ देख लिया तो मेरा क्या होगा।

इस बार उसने अपने पैर को मेरे सैनिक के सामने भेजा और मेरे लोवर के अंदर डाल के धीरे धीरे सहलाना शुरू किया फिर अपने पैर उंगलियों के बीच रखकर फिर से अपना पसंदीदा खेल शुरू किया अब मेरा लॅंड कड़क हो चुका था पर अब उसे अगले दौर का खेल खेलना था तो मैने कुसुम को आँखों से छत पर चलने का इशारा किया उसने कोई जवाब नही दिया तो मैने अपने लोवर उपर किया और उठ कर छत पर आ गया और उसका इंतेज़ार करने लगा करीब पाँच मिनट इंतेज़ार करने तक जब वो नही आई तो मुझे लगा की शायद वो अभी उसके लिए तय्यार नही यही सोचकर मैं मुड़कर वापस जाने को ही था की दरवाज़ा खुला सामने कुसुम थी और थी उसकी वो कातिल मुस्कान। हाथ में चटाई और तकिया पकड़े।

वो मुड़कर छत से नीचे की ओर झांकने लगी तभी मैने जाकर उसे पीछे से ही दबोच लिया और उसके चूचों को पूरी ताक़त से दबाने लगा मेरा लॅंड उसके नितंबों की दरार मे घुसने की नापाक कोशिश कर रहा था और मैने उसकी गर्दन पे हल्के से चूमा और फिर कान के पीछे चूमा और उसके बाद उसकी गर्दन पे अपने होठों से चुंबनों की बरसात कर दी, वो मूडी मेरी आँखों मे देखा हल्के से मुस्कराई और फिर अपने गुलाबी होठों को मेरे होठों पे रख दिया हम दोनो एक दूसरे से लिपटकर किस करने लगे ।

मैने अपनी ज़बान उसके मुख की गहराइयों मे अंदर डाल दी और उसकी ज़ुबान भी मेरा होठों के भीतर आ गयी मैने पाँच मिनट तक उसके गुलाबी होठों का अमृत पिया इस बीच मेरे हाथ उसके शरीर के उतार चढ़ावों मे बेतहाशा सैर करते रहे कभी उसकी पीठ पर और कभी उसके नितंबों पे,

मैं उसकी तरफ बढ़ा और उसको चटाई पर लिटा कर उसकी चूचियों पर टूट पड़ा, मैने दोनो हाथों मे एक-एक चूची पकड़ कर पहले कसकर दबाया और फिर बाएँ निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा और बीच बीच मे दाँत से काट लेता था जिससे उसकी सिसकारी निकल जाती थी और दाएँ निप्पल को अपनी उंगलियों और अंगूठे से नोचने लगा।

उसके शरीर मे करंट दौड़ गया उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूचियों पे दबाना शुरू कर दिया और अपने दोनो पैरों से मुझे जकड़ लिया फिर मैने दाएँ स्तन को चूसना और बाएँ को मसलना शुरू किया ये सिलसिला कुछ 15 मिनट तक चला उसके गोरे स्तन सुर्ख लाल हो गये और उसके स्तनों पर मेरे दाँतों के निशान बन गये थे, ।

इसी बीच मैने उसकी जांघों को चूमना शुरू किया मैने उसकी चूत को इतने करीब से देखा उसमे से एक उत्तेजक सी महक आ रही थी जिसकी वजह से मै अनायास ही उसकी तरफ खिचा चला गया और जीभ डालकर कर उसके काम रस को उसकी चूत से चाटने लगा इसकी वजह से कुसुम मदमस्त हो उठी और उस का शरीर हल्का सा काँप गया मैं अपनी ज़बान और गहराइयों तक ले जा कर उसके कसैले मादक चूत रस का पान कर रहा था और और वो इससे मस्त हो कर सिसकारियाँ ले रही थी ।

थोड़ी देर बाद उसका शरीर अकड़ गया और वो मेरे मुँह पर ही झड़ गयी मैने भी पूरी मस्ती से उसका कामरस पिया, और उसके उपर आकर किस करने लगा और उसके चूचे हाथों से मसलने लगा, वो भी मुझे मेरे कमर से पकड़कर अपनी ओर खींचने लगी, मैं समझ गया वो अब तय्यार है, ।

मैने उसे दोनों हाथ के पंजो और घुटनो के बल बैठने को कहा डॉगी स्टाइल में। उसके डॉगी बनते ही मै घुटनो के बल उसके पीछे आया और एक झटके में अपना लिंग अंदर उतार दिया। तेजी से अंदर बाहर झटके मारता हुआ मै आवाज़े निकाल रहा था। लिंग इतना अंदर घुस गया की कुसुम की भी सिसकिया निकलने लगी।

थोड़ी ही देर में हमको वही चिर परिचित पानी के छपकने की आवाज़े आने लगी। मेरी अब अपनी एक टांग को फोल्ड करके पंजो के बल आ गया और दूसरी अभी भी घुटनो के बल थी।

इससे मेरी झटको की ताकत दुगुनी हो गयी थी जिससे मेरी योनी के अंदर की पहुंच और गहरी हो गयी। थोड़ी ही देर में मेरा योनी के अंदर घमासान शुरू हो चूका था। झील के पानी में जैसे तेजी से बार बार डंडा मारने पर जो आवाज़े आती हैं वैसी आवाज़े योनि में अंदर से आ रही थी।

अब कुसुम अपने चरम तक पहुंच रही थी, कुसुम मेरा नाम बड़ी कामुकता से लिए जा रही थी हाय हाय अ अ अ अरुण हम यह भी भूल चुके थे की मेरी सगी मम्मी और उसकी सास नीचे कमरे में सोई हुई थी।

हाय हाय अ अ अ अरुण नाम लेने से मेरा जोश ओर बढ़ गया था। झटके मारना जारी रखते हुए मैने एक हाथ से उसका वक्ष दबोच लिया। कुसुम पूरा छूटने ही वाली थी की मैने फिर लिंग बाहर निकाल दिया। उसे थोड़ा बुरा लगा।

मैने उसे अब बिस्तर पर सीधा लेटाया और दोनों पाँव चौड़े कर दिए। उसके ऊपर लेट गया। कुसुम ने अपना हाथ नीचे किया और मेरा लिंग पकड़ कर अपने योनी के अंदर कर दिया। हमारी मशीन एक बार फिर शुरू हो गयी। हम दोनों चरम प्राप्ति की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। मैंने अपनी दोनों टांगो को उठाते हुए उसकी कमर पर लपेट दिया।

इधर मम्मी की नींद टूटी, उन्हे चिंता थी कि उनका बेटा यानी कि मुझे सुबह चार बजे जाना है और वो जल्दी उठ कर खाने के लिए कुछ बनाना चाहती थी।

"" दुनिया में सबसे प्यार भरा रिश्ता माँ और बेटे का होता है, बेटे के exam हो तो माँ खुद जल्दी उठ कर उसे पढ़ने के लिए जगाती है, बेटा अगर देर रात तक घर आये तो खुद जागती है, और आज उनका बेटा सुबह जल्दी जा रहा है तो मम्मी की आँख अपने आप ही खुल गयी "''

जैसे ही मम्मी ने करवट बदल कर देखा तो कि उनका बेटा और बहू अपने बिस्तर पर नही है। आखिर वो मेरी मम्मी थी वो समझ गयी थी उनका बेटा और बहू रात्रि के दो बजे क्या कर रहे होंगे। पर उनके मन में सवाल ये था कि कहाँ कर रहे होंगे???

मम्मी पेशाब करने के बाद अपने साड़ी ब्लाउस ठीक कर छत की सीढ़ी की तरफ आई, छत से आती आवाजो पर ध्यान दिया, वो आवाजे उन्हे जानी पहचानी लगी। लेकिन जब मम्मी के कानो में कामुक सिसकारियों की आवाज पड़ी तो कदम ठिठक गए |

""जो गलतिया अक्सर मिडिल क्लास फैमिली के छोटे से एक कमरे के घर में रहने वाले बच्चे अपनी मम्मी पापा को संभोग करते हुए देखकर करते है, वो ही गलती मेरी मम्मी अपने सगे बेटे और बहू को संभोग करते हुए देखने की ललक से करते हुए बढ़ती चली जा रही थी। ""

"" मम्मी जानती है ये पाप है, उन्हे ऐसा नही करना चाहिए लेकिन अपनी जिस्म में भरी वासना, प्यास और हसरते जो बांकी थी उस वजह से वो अपने दिल, दिमाग और पैरों पर काबू नही कर पायी। ""

भले ही मम्मी को सेक्स किये सालो गुजर गए हो लेकिन सेक्स की मादकता से भरी सिसकारियां जैसे ही उसके कानो में पड़ी वो समझ गयी, छत पर जरुर कुछ चल रहा है | आश्चर्य और सतर्कता से वो छत की तरफ बढ़ने लगी, जैसे जैसे वो छत की तरफ बढती जाती, सिसकारियो की आवाज तेज होती जाती ।

जब वो छत की अंतिम सीढ़ी के पास पंहुची, तो मम्मी ने जो भी आँखों से देखा उस पर उन्हे यकीन नहीं हुआ |

मै कुसुम की योनी के अंदर की गहराइयों में डूबता हुआ कही खो गया था पर मेरी गति लगातार बढ़ती जा रही थी। यह संकेत था मेरे और कुसुम की चरम के नजदीक पहुंचने का। मैने अपना लॅंड उसकी चूत की दरार पर रखा और उस पर हल्का सा भर दिया तो उसका सिर अंदर समा गया,

अब मैने थोड़ा सा धक्का दिया तो लॅंड करीब 2 इंच से ज़्यादा अंदर चला गया मैने, अगला धक्का मैने पूरी ताक़त से दिया तो लॅंड लगभग पूरा ही अंदर चला गया वो दर्द से कराह उठी, मैने उसको किस करना जारी रखा ताकि उसकी चीख ना निकल जाए उसके आँखों से आसू निकल आए, मैं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो कर उसे होठों पर किस करता रहा थोड़ी देर बाद उसने अपनी कमर हिलाकर इशारा किया की वो तय्यार है मैने धीरे धीरे धक्के देने शुरू किए वो भी कूल्हे उठा उठाकर मेरा साथ देने लगी फिर मैने धक्के तेज कर दिए, करीब 10 मिनट के बाद वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लॅंड की सवारी करने लगी, 15 मिनट इस पोज़ीशन मे चदाई करने के बाद चरम प्राप्ति पर कुसुम मुँह से कुछ ज्यादा ही जोर से निकल गया- ओ अ अ अरुण !

मै भी तेज आहें निकलते हुआ छूट गया, हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर झकड़ लिया। हम दोनों ऐसे ही निश्चेत पड़े रहे।

अब मैंने उठने की कोशिश की तो उसने फिर मुझे झकड़ लिया। मुझे भी यह पसंद आया। अब हम दोनों एक दूसरे से अलग नहीं होना चाहते थे। अभी तीन घंटो में कुछ समय बाकी था। मेरा लिंग अब नरम पड़ कर अपने आप प्रवेश द्वार से बाहर आ गया था।

अब कुसुम उठी और अपने बिखरे हुए कपडे सँभालने लगी। अपने नीचे के अंतवस्त्र को पहने लगी, मैने तुरंत कुसुम से छीन कर उसे एक तरफ रख दिया और उसे पीठ के बल लेटा कर अपने मुँह से उसके निप्पल को चूसने लगा। उसे मजा आने लगा।

मै अपना एक हाथ बराबर उसके शरीर पर घुमा रहा था। बारी बारी से अब मै उसे होठों पर चुम रहा था कभी निप्पल पर। कुसुम भी मेरी पीठ और पुठ्ठो पर अपने हाथों का प्यारा स्पर्श कर फिरा रही थी। हम कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे के शरीर का आनद लेते रहे।

उसने मेरे कान के पास आकर धीरे से कहा ‘आइ लव यू अरुण’ मैने भी उसके माथे पे चूमते हुए कहा ‘आइ लव यू टू कुसुम’

उधर मम्मी अपने सगे बेटे और बहू की कामलीला अपनी नंगी आँखों से बुत बनकर खड़ी खड़ी देख रही थी, जो शायद उन्हे नही देखनी चाहिए थी वो पुराने ख्यालों कि वो अच्छी तरह से जानती है कि ---

"" किसी भी इंसान को स्नान, भोजन और चोदन हमेशा परदे की आड़ में करना चाहिए ""

लेकिन मम्मी अपने अंदर भरी हुई कामवासना की आग में सब भूल गयी और इस मर्यादा के परदे को हटाकर सब मौन रहकर देख रही थी। मम्मी के मन में अंर्तनवंद् का जोर से तूफान उठ रहा था।

ये द्रश्य देखकर मम्मी को अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था | मेरा बेटा और बहू इस तरह भी संभोग करके इतनी आनंद की अनुभूति करते है। मेरे बेटे को संभोग के बारे में इतना सब कुछ कैसे पता है ??

ये मेरा बेटा जिसकी उमर 36 के पार होने वाली है इतनी देर तक इतनी जोर से, जोश से, इस उम्र में यह सब कैसे करता है ?

मेरा बेटा तो एकदम जवान 18-20 की उम्र के लड़के की तरह खड़ा हो कर, बैठे हुए, इतने जोश से नये आसन के साथ संभोग कैसे कर सकता है ?

इसके पापा तो इस उमर पर ठंडे पड़ गये थे, दो मिनिट से ज्यादा तो कभीभी टिक नही पाये?? उनका गुप्तांग भी ठीक से उठता नही था, उनके अंग में ढीला पन अपनी जगह बना चुका था, और तो और मेरे हाथ लगाने पर ही पानी छोड़ देता था और मुरझा कर शांत हो जाता था।

मेरे बेटे अरुण को ये सब करने के बारे में कैसे पता चला ? वो एक स्त्री को काम सुख देने की हर कला में कितना निपुण है, मेरी बहू कुसुम के चेहरे को देखकर लगता है वो पूरी तरह संतुष्ट होकर थक गयी है जबकि अरुण अभी भी रुकने का नाम नही ले रहा है आखिर कैसे????

ऐसे कई सवाल मम्मी के दिमाग में बिजली की तरह कौंध गए | वो सदमे में थी और उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था जो वो देख रही है वो सच है |

अब काफी समय हो चूका था और हम सोती हुई मम्मी की नींद के साथ और रिस्क नहीं लेना चाहते थे। कुसुम ने लेटे हुए पास पड़े अपने दोनों अंतवस्त्र डिजाइन वाले ब्रा और पैंटी हाथो में ले लिए। और मै फिर से उसकी ओर घूरने लगा। कुसुम ने मुझसे smile देते हुए पूछा क्या करू, ऐसे ही रहु,। मैने भी शरारत से सर हां में हिला लिया।

और मैने कुसुम की चूची में दांत गडा दिये | कुसुम के मुहँ से दर्द भरी सिसकारी निकल गयी - आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् |

इस बार ये नजारा देख मम्मी भी गरम हो चली, उनका शरीर भी उत्तेजना के आवेश में आने लगा, लेकिन तभी उन्होंने खुद को सयम करते हुए, बच्चो को रोकने की ठानी |

""मम्मी के लिए मै और कुसुम उनके बच्चे ही तो है""

तभी मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।

मम्मी ने तेज आवाज में खाँसा और वापस सीढ़ियों से कमरे की तरफ तेजी से चली गयी | मम्मी के खांसने की आवाज सुनते ही!!!

हम दोनो उठे कपड़े पहने मैने समय देखा रात के 3 बज रहे थे.

कुसुम ने अपना ब्लाउस तेजी से नीचे किया और झट से चटाई से उठकर बैठ गयी और मुझ को दूर ठेल दिया | हम दोनों चटाई पर इधर उधर लुढ़क गए और जब तक मम्मी नीचे जा चुकी थी, कुसुम बाल सही करके खड़ी हो गयी | मै चटाई पर इधर उधर लुढकने के बाद उठकर खड़ा हो गया |

मै और कुसुम सर झुकाकर जमींन की तरफ देखने लगे | ये सब मेरे और कुसुम के लिए बहुत ही शर्मनाक था |

कुसुम खड़ी खड़ी हल्की हल्की शर्म महसूस कर रही थी, | लेकिन मन में संतोष भी था, की मम्मी ने बिना कुछ कहे वापस नीचे जाकर अपनी एक अच्छी संस्कारी मम्मी और सास होने का अपना फर्ज निभाया |

मैने कहा लग गए लोडे हो गया काम??? माँ चुद गयी??? ये सुनकर कुसुम की हंसी निकल गयी। और हस्ती हुयी बोली माँ नही बहू चुद गयी, उसने मुझे शर्ट की गले से पकड़ा और अपनी और खिंच कर मेरे होठों पर चुम्बन कर दिया।

हम कुछ सेकंड तक एक दूसरे के होठों का रस लेते रहे। अब कुसुम पूरी थक चुकी थी, उसकी उबासी निकली और इसी विचार के साथ जो हो गया सो गया।

पहले वो नीचे गयी फिर उसके थोड़ी देर बाद मैं नीचे गया,

नीचे पहुँच कर मैने कमरे के दरवाजे की तरफ देखा तो दंग रह गया, पूरे कमरे में धुँआ भरा हुआ था।

जारी है।
 
पहले वो नीचे गयी फिर उसके थोड़ी देर बाद मैं नीचे गया,

नीचे पहुँच कर मैने कमरे के दरवाजे की तरफ देखा तो दंग रह गया, पूरे कमरे में धुँआ भरा हुआ था।

मै जल्दी से कमरे के अंदर गया और मै और कुसुम हम दोनो अपने अपने बिस्तरों मे एक दूसरे की तरफ़ करवट लेकर एक दूसरे की आँखों मे देखते हुए बैठ गये।

"बादशाह हुआ करते थे हम भी, बेगम मिली है तब से जोकर हो गये है..... "

मम्मी किचिन में पूडी बना रही थी। जिसकी वजह से पूरे कमरे में धुँआ भर गया था, उन्होंने शायद कल की कुसुम के हाथ की बनी वासी पूड़ी की जगह ताजी पूड़ी बनाना उचित जाना होगा।

मम्मी ने किचिन में से ही मुझे आवाज दी बेटा अरुण सवा तीन बजने वाले है, मैने पानी भी गर्म कर दिया है जल्दी से फ्रेश हो जा फिर तुझे मामी के घर सुनील की बहू को भी लेने जाना है।

मै बोला ठीक है, मैने कुसुम की ओर देखा हम दोनो ही बड़े अचंभे में थे कि मम्मी एकदम नॉर्मल react कर रही है जैसे कुछ हुआ ही नहीं और उन्होंने कुछ देखा ही नही था।

मैंने तोलिया उठाई और लैट्रिन कि ओर चल दिया मेरे चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी थी क्योकि मेरे और कुसुम के बीच सेक्स कई बार हुआ पर आज रात की संभोग क्रिया ने इस छत को और रात को हमेशा के लिए यादगार बना दिया.

मै कपड़े निकालकर लैट्रिन में बैठ गया पर सभोग करके वीर्य निकल जाने के बाद पेट तो पूरा खाली था जिससे प्रेसर बन ही नहीं रहा था, पर लैट्रिन का होना भी जरूरी है, ऊपर से आँखों में अब नींद भी भर आई थी और मै बैठे बैठे थोड़ी देर पहले गुजरा हुआ हसीन वक्त के बारे में आँख बंद कर सोचने लगा।

पर जैसे ही आँख बंद की तो मम्मी का चेहरा आ गया और मेरे मन बहुत से सवाल उठने लगे।

मम्मी सीधे छत पर आ गयी या छुप छुप के सीढ़ियों के दरवाजे की ओट से हमें देख रही थी |

मतलब क्या मम्मी हमें पहले से देख रही थी? कही हमें देखकर वो.....

नही नही - अरुण साले तेरी मम्मी है कुछ तो लिहाज रख।

मै अपने आप से ही हगते हुए मन ही मन सवाल जबाब करने लगा।

फिर मम्मी हमें छुप छुप कर क्यों देख रही थी इसका मतलब है वो हमें देखकर उत्तेजित हो रही थी, काफी दिनों से अकेले रहने के कारन वो कुंठित हो गयी है | खुद अकेली है इसलिए दूसरो का सेक्स देखती है और एन्जॉय करती है | मैने मम्मी को मोबाइल में कामिनी आंटी के भेजे गए पोर्न वीडियो क्लिप देखते हुए भी उस दिन देखा था।

अचानक से मेरी आंखे खुल गयी - अबे साले बेटा अरुण मम्मी चुदासी है और कोई बात नहीं |

नही नही.....तू क्या सोच रहा है अरुण, साले.........ये गलत है |

मम्मी तेरे बाप की धर्म पत्नी है उनकी सेक्स पूर्ति का अधिकार सिर्फ पापा का है।

हो सकता है पापा अब भी उन्हें चोदते हो, लेकिन मम्मी को देखकर लगता नहीं कि वो संतुष्ट होती होगी |

मुझे इस बारे में मम्मी पापा दोनों से बात करनी पड़ेगी और ज्यादा हो तो कुसुम से बोलूँगा कि मम्मी से एक बार उनकी सेक्स desire और शरीरिक जरूरत पर बात करे।

अरुण बेटा - तू मरेगा और कुसुम को भी मरवाएगा |

नही नही नही ये मैंने तय कर लिया है | कि अपनी मम्मी को इस तरह तड़पते हुए नही देख सकता मुझे या कुसुम को उनसे बात करनी ही होगी????

अगर कुसुम नही मानी तो मै ख़ुद मम्मी के पास आँखों में आंसू लेकर जाउगां, उनसे छत पर हुई घटना के लिए माफ़ी मांगूगा, उनसे रिक्वेस्ट करूगां की मुझे जीवन के रहस्य बताये, मै उन्हें इमोशंस से ब्लैकमेल करूगां, ।

क्योकि ये बात पापा से पूछना बड़ा शर्मिन्द्दगी भरा होगा |

मै अहसास करवा के रहूगां की मै मम्मी की किन किन बातो से अनजान रह गया हूँ, और मै मम्मी की वो कमी पूरी कर सकता हूँ मुझे बेटे वाले रिश्ते, को भूलकर एक दोस्त समझ कर उनके दिल में होने वाली हर गुप्त बात के बारे में बता सकती है |

तभी बड़ी जोर से लैट्रिन के दरवाजे की बजने के साथ साथ कुसुम की आवाज आई, अरे महात्मा अब बाहर निकल आओ अंदर आधे घंटे से बैठ कर क्या तपस्या कर रहे हो????? जल्दी करो मुझे भी जोर से टट्टी आ रही है।

ये सुनकर मैरी हँसी छूट गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै बाहर निकल आया कुसुम छत पर टेहल रही थी, मैने उससे पूछा बड़ी जोरों से लगी है, कंट्रोल नही होता तो इतना खाती क्यो हो??? कुसुम पाद मारती हुयी बोली चुप करो। बहुत बोलते हो।

मुझे बड़ी जोरों से हँसी आ गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मैने हस्ते हुए कहा कुसुम अब खड़ी खड़ी पाद मत मारो जाओ हग आओ, फिर मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। वो बोली जा रही हूँ, थोड़ा प्रेशर और बनने दो।

मै बोला कुसुम एक काम है करोगी???

क्या काम??? कुसुम मेरे पास आकर खड़ी हो कर बोली।

मै ---- तुम मम्मी से बात करो उन्होंने आज कुछ ऐसा तो नही देख लिया जो उन्हे नही देखना चाहिए था और अगर देखा है तो क्यो??? मुझे लगता है मम्मी को अंदर ही अंदर कुछ प्रॉब्लम है। तुम उनकी बहू के साथ साथ एक औरत भी हो अगर तुम उनसे इस मैटर पर बात करो तो बढ़िया रहेगा।

कुसम् हस्ती हुयी बोली जैसा आप सोच रहे हो वैसा नही है, मम्मी ठीक है, उन्हे कोई प्रॉब्लम नही है और मैने अभी उनसे बात करी है वो खुद शर्मिंदा है वो बोल रही थी कि वो हमें जगाने आई थी, आपको अभि जो जाना है उसके लिए। और वो जब आई मै उस समय हम सेक्स नही कर रहे थे, मै अपनी ब्लाउस पहने हुए बैठी थी। तुम भी अपना चादर से ढके हुए थे।

मै--- मतलब

कुसुम मेरे गाल नोचते हुए मेरे बुद्धू बलम मम्मी ने हमारी नंगी फिल्म नही देखी वो जब तक आई फिल्म खतम हो चुकी थी।

मै बोला मुझे विश्वास नहीं है हो रहा है।

कुसुम लैट्रिन मे घुसते हुए बोली तो एक काम करो जाकर अपनी मम्मी से खुद पूछ लो ???? ? ?

कुसुम की बात सुनकर मुझे कुछ तसल्ली तो हुयी पर मन मान नही रहा था तो काफी सोचने के बाद मैने dicision लिया कि मम्मी से ख़ुद मै पूछ लेता हूँ आखिर वो मेरी मम्मी है उनके सुख दुख की चिंता करना मेरा फर्ज है। वैसे भी कुसुम किसी की, feelings को ज्यादा serious नही लेती है। वो अपने आप से ही ज्यादा मतलब रखती है।

कुसुम के लैट्रिन में घुसने के बाद मै भी नीचे कमरे में डरते डरते दबे पाँव अंदर आ गया, मम्मी किचिन में फोन पर बात कर रही थी! ! उनके बातें करते हुए मै समझ गया दूसरी ओर कामिनी आंटी है और मम्मी उन्ही से बात कर रही थी। मम्मी मेरे लिए रास्ते में खाने के लिए और पापा के लिए भी कुछ नास्ता बना रही थी!!!

मम्मी का फोन लाउड speaker पर था इसलिए मुझे कामिनी आंटी की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी।

तभी मम्मी ने अभी हाल ही घटना का जिक्र कामिनी आंटी से करने लगी....

कुछ देर बाद मम्मी ने कामिनी आंटी को फ़ोन पर छत पर जो कुछ हो रहा था वो सब बता दिया |

कामिनी आंटी ने आश्चर्य प्रकट करते हुए मम्मी से कहा - --- तुम मजाक तो नहीं कर रही हो, क्या तुमने सच में देखा है |

"""मैने अंदाजा लगाया की इसका मतलब ये है की मम्मी पहले से ही छत पर दरवाजे की ओट से झांक रही थी और मै और कुसुम जो भी कर रहे थे वो सब मम्मी ने कुछ देर रूककर देखा होगा |""""

मम्मी - हाँ और कामिनी आंटी से तुम्हे यकीन नहीं हो रहा मुझे भी नहीं हो रहा था, लेकिन ये सच है मेरा बेटा अरुण बहू की चूची चूस रहा था, उसके स्तन दबा रहा था और उसकी जांघो के बीच सहला रहा था और इसमे कुसुम भी साथ दे रही थी | अरुण ने तो कुसुम की चूची और स्तन पर दांत भी गडाए |

कामिनी आंटी माफ़ी से मांगते हुए बोली – मै माफ़ी चाहती हूँ बात ही ऐसी है की यकीन होना मुश्किलहै।

अरुण पढ़ा लिखा है और बहू भी समझदार है वो इस खुले में छत पर ऐसा नहीं करेंगे तुम्हारा बेटा और बहू दोनों ही बड़े संस्कारी है। हो सकता है अरुण अब वापस आ रहा है तो बहू उदास हो रही होगी और अरुण प्यार से उसे गले लगा कर समझा रहा होगा। और तुम्हे अंधेरे में दूर से ठीक से दिखा नही होगा।

मम्मी थोड़ी नाराज होती हुई कामिनी आंटी से बोली - ओफ़ ओ हे कामिनी अब मै तुमको कैसे बताऊ मैंने तो अरुण की चड्डी तम्बू की तरह तनी देखि है | और तो और वो बहू की चूत चाटने के बारे में भी पूछ रहा था |

अपने बेटे की वर्तमान स्थिति को देखकर मै इतना तो समझ ही गई थी कि मेरा बेटा अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रहा है तभी तो उसका लंड भी इस कदर टंनटनाकर खड़ा था। अरुण की स्थिति से मै अपने पति की स्थिति का अनुमान लगाते हुए एक अजीब सी उलझन महसूस कर रही थी क्योंकि मुझे इतना जरूर मालूम था कि,,, शुरू के दिनों में जब भी कभी उत्तेजित अवस्था में अरुण के पापा मुझसे प्यार करते थे तब,,,,,

मुझ को अच्छी तरह से याद है कि उस समय उत्तेजना की वजह से जब भी अरुण के पापा के लंड में तनाव आता था तो उनका अंडर वियर इस हद तक तंबू नहीं बना पाता था। बल्कि लंड वाले स्थान पर बस हल्का सा उभरा हुआ नजर आता था।

मेरी हालत पूरी तरह से खराब थी मेरी उत्तेजना का कोई ठिकाना ना था और मैने आज तक इस तरह की उत्तेजना अपने बदन में कभी महसूस नहीं की थी हां एसी उत्तेजना मुझे तभी महसूस होती थी जब मै अपने पति के साथ बिस्तर पर होती थी लेकिन जिस तरह से,,,, मै अपने बिस्तर पर पति के होने के बावजूद भी प्यासी रह जाती थी इस समय भी मेरा हाल ऐसा ही है मेरी उत्तेजना का कोई भी तोड़ नहीं है। अरुण का चड्डी में टनटनाया हुआ लंड मुझे बुरी तरह से परेशान किए हुए है।

ये सुनकर कामिनी आंटी थोड़ी serious हो गयी - और मम्मी से बोली ठीक तुमने बता दिया ये भी अच्छा किया अब परेशान न हो लेकिन तब तक तुम इस बारे में अपने बेटे और बहू से infact किसी और से कोई बात नहीं करना इतनी रिक्वेस्ट है मेरी | बेवजह लोग बाते बनायेगें नहीं तो | और हाँ एक बात और तुम अपनी बहू कुसुम पर कोई सख्ती मत करना, आखिर वो भी तुम्हारी बच्ची ही तो है |

मम्मी ने फ़ोन रखा और वो हल्की हल्की शर्म महसूस कर रही थी, आखिर चूत लंड और चूची जैसे शब्दों के साथ उन्होंने कामिनी आंटी से बात की | लेकिन उनके मन में संतोष भी था, की उन्होंने कामिनी आंटी की एक पक्की सहेली होने के नाते अपना फर्ज निभाया |

अगर वो कामिनी आंटी को अपने बहू और बेटे की आँखों देखी संभोग करते हुए नँगी फिल्म के बारे में नहीं भी बताती तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था, लेकिन उन्होंने जो भी किया उसको उनको संतोष था | इसी विचार के साथ वो खाने को टिफिन में पैक कर किचिन से बाहर आ गयी |

"" मै मम्मी की इस हरकत से ये बात समझ गया औरतो के पेट में कभी भी कोई भी बात, कैसी भी बात हो नही पचती, कोई भी औरत कोई भी राज अपने सीने में छिपा कर नही रख सकती, चाहे उस राज या बात से उसका फायदा हो या नुकसान वो बिना कुछ सोचे समझे सब कुछ उगल देती है """"

मम्मी ने मुझे देखा और नॉर्मल react करते हुए बोली तेरा टिफिन पैक हो गया है अब जा जल्दी नहा ले।। मैने कहा अभी ठंड है घर पहुँच कर नहाऊंगा अभी आप चाय दे दो।

मै और मम्मी दोनों आराम से फर्श पर बैठ गए और चाय पीने लगे, मै बस सिप मार रहा था और सुनिश्चित कर रहा था की मम्मी कुछ बोलना शुरु करे | जैसे ही मम्मी ने मुझसे नॉर्मल होकर मुझसे कहा बेटा कुछ प्रॉब्लम है क्या इतना चुप क्यों है | जाने का मन नही है क्या???

मैने बड़े प्यार से मम्मी से बात करी, और बड़ी सावधानी से हर वो सवाल पूछ लिया जो मुझे पूछना चाहिए था | मुझे पता था मम्मी झूठ नहीं बोलेगी, मम्मी ने ईमानदारी से जो कुछ भी मै, अपनी पत्नी कुसुम के साथ कर रहा था सब बता दिया लेकिन मम्मी ने एक बात जोर देकर और कसम खाकर कही कि जब में छत पर आई तब

बहू का ब्लाउस बिलकुल ठीक था | मैने उसको अभी बताया है यकीन नही है तो बहू को अभि आ जाने दे उससे तेरे सामने पूछवा देती हूँ।

"" पता नही मम्मी पूरी सच्चाई मुझसे और कुसुम से क्यो छिपा रही थी """

हालांकि मुझे अपनी मम्मी से इस तरह की बात करना मुझे गलत लग रहा था | लेकिन मन में जो तूफान और सवाल उठ रहे थे उनके जबाब मिलना भी मेरे लिए बहुत जरूरी था इसलिए मै थोड़ा सा बिना झिझके शर्म, मर्यादा और मम्मी बेटे के रिश्ते को भूलकर मम्मी से पूछने लगा????

मम्मी तुम मुझे और कुसुम की हरकतों को काफी देर से छत पर दरवाजे की ओट लेकर देख रही थी न...

मम्मी एकदम हडबडाते हुए-तुम क्या बकवास कर रहे हो अरुण , लगता है तुम्हारा दिमाग खराब है | नींद पूरी नही हुई है इसलिए.......

मै भी serious होकर ही बोला ---- -नहीं..... तुम्हे अच्छी तरह से पता है मै आपसे क्या पूछ रहा हूँ | आपने कामिनी आंटी को फ़ोन पर कहा की बहू का ब्लाउस ऊपर था और उसके दोनों स्तन बिन्कुल नग्न थे, अरुण एक एक निप्पल मुहँ में लेकर चूस था और बीच में बहू के स्तन को मसला भी था |

लेकिन कुसुम ने मुझे बताया जब आप छत पर आई थी तब कुसुम के स्तन पुरे तरह से ब्लाउस से ढके थे | इससे मै इस निष्कर्ष पर पंहुचा की आप छत पर बहुत देर से झांक रही थी,

मैने मम्मी की आँखों में आँखे डालकर बड़े प्यार से समझते हुए कहा मम्मी इससे मै एक और निष्कर्ष पर पंहुचा कि तुम बेहद अकेली हो और तुमारा मन और शरीर वासना की आग में जल रहा है | इसलिए अंतरवासना की तलब ने तुमारा ये हाल कर दिया है।

मम्मी बहुत आसान है एक मर्द की तलाश करना जो तुम्हे प्यार करे, बस तुम ईमानदार रहो एक औरत के रूप में तुम चाहती क्या हो....??सब उसे सौंप दो, वह सब जो तुम्हे औरत बनाती है, बड़े बालों की खुशबू, स्तनों के बीच की कस्तूरी, और तुम्हारी वो सब स्त्री भूख......

सबसे बड़ी बात ये कि कामिनी आंटी जो आपको whatsup पर पोर्न क्लिप भेजती है उन्हे देखकर आपका दिमाग इतना खराब हो गया है कि अब आप अपने सगे बेटी और बहू के शरीरिक संबंध स्थापित करते हुए देखने की ललक से छिप कर झाँक रही हो और अपनी काम वासना की कुंठा को मिटाने की असफल कोशिश कर रही हो |

""मैने ये बेहद ही विनम्र भाषा में बोला था –

मम्मी पहले से ही वासना के नशे में धुत थी ऊपर से मेरे विनम्रता से बोले गए शब्दों ने पता नहीं क्या जादू किया, मम्मी मेरे कंधे पर सर रखकर बेतहाशा रोने लगी | मम्मी को भी नहीं पता था कि मेरे शब्दों में क्या जादू था कि सालो से मम्मी के अन्दर दबी भावनाए, कुंठा, हताशा निराशा, सब आंसुओं के डगर बाहर निकलने लगी |

कुछ देर बाद खुद को काबू करते हुए, आंसुओं से भरी आँखों से मुझे देखते हुए- बोली--- मुझे नहीं पता अरुण बेटा, मै क्या कहू, मुझे नहीं पता मुझे क्या चाहिए पता नही मै बिगड़ रही हूँ या ख़तम हो रही हूँ, दिल मेरा अब किसी भी बात पर बहस नही करना चाहता। थक सी गयी हू समझा समझा कर अब जो मुझे जैसा समझे........ दिल अब किसी को समझाना नही चाहता।""

मम्मी की आँखों में आँसू देखकर मेरी आँखे भी भर गयी मै भावुक होते हुए मम्मी से बोला --- मम्मी तुम्हे कुछ कहने की जरुरत नहीं है, तुम्हे बस खुद को प्यार करने की जरुरत है जिससे तुम्हे खुसी मिले वो करो, अपने शरीर के सुख के लिए तुम्हे जो करना पड़े करो | क्या सही है क्या गलत है, दुनिय क्या सोचेगी, लोग क्या कहेगे ये सब फालतू की बातो पर अपना दिमाग मत लगाओ |

"" औरत का पाप फूल की तरह होता है, जो पानी में डूबता नही, बल्कि तैरकर मुह से बोलता है। मर्दो का पाप पथरो की तरह पानी में डूब जाते है, किसी को कानों कान खबर नही लगती ""

इतना कहकर मैने मम्मी को गले लगा लिया और मम्मी भी जोर से मुझसे से लिपट गयी, मै, मम्मी की बांह के ऊपर सिरे पर हलके हलके हाथो से सहलाने लगा |

मम्मी भी मुझे टाइट हग करती है। और प्यार से चूमती है... " पुरुष चूमते है तब वे सुख में होते है, स्त्री चूमती है उन्हे जब वे दुख मे होते है "

और मेरे कान मैं धीरे से कहती है ।

" बस यही फर्क है तेरे और मेरे जीने में "

तभी अचानक से कुसुम आ गयी और मुझे और मम्मी को एक दूसरे को आलिंगन में लिपटे हुए देख हँसने लगी धन्य हो आप दोनों माँ बेटे और धन्य है आपका प्यार!!!अरे मेरी प्यारी सासु माँ आपका बेटा कही विदेश नही जा रहा है, अपने घर जा रहा है अपने पापा के पास और आप दोनों की आँखों में ऐसे आँसू निकल रहे हैं जैसे प्रेमी प्रेमिका बिछड़ने पर रोते है।

"" कुसुम इस बात से अंजान कि मेरे और मम्मी के बीच क्या बातें हुयी मजाक करती हुयी हँस रही थी """

फिर वो आकर मेरी मम्मी से लिपट गयी और बोली मम्मी आप इतनी टेंशन ना लो इन्हे जाने दो मै भी आपकी बेटी हू और आपकी इतनी सेवा करूँगी कि आप अपने बेटे को भूल जाएगी।

मम्मी बोली मुझे किसी से सेवा मेवा नही करवानी चल हट अब बहुत टाइम हो गया अरुण को अब निकलना है।

और खड़ी हो जाती है

मै ममी और कुसुम दोनो की ऑंखों में देखते हुए।

सोच में से निकलते हुए है जा रहा हू।

बाय।

मम्मी: बाय पहुच कर कॉल करना।

मै:ओके बाय।

और चला जाता हू।

मम्मी सोचते हुए ये क्या हो रहा है वो बातें जो मुझे अपने पति से करनी चाहिए वो मैं अरुन से कर रही हू और शर्मा जाती है।

मैने बाइक उठाई और मम्मी के बारे में सोचते हुए होटल वाले को उसकी बाइक वापस करने के लिए होटल की ओर चल दिया।

बाइक चलाते हुए रह रह कर मै मम्मी के बारे में सोच रहा था मेरी आँखों के सामने मेरे अतीत के पुराने दिन याद आने लगे।

पापा मम्मी को अकेला छोड़कर साल साल भर के लिए नौकरी पर चले जाते थे, एक दो साल में दो तीन दिन के लिए घर आते थे!!!तब से लेकर अब तक मम्मी ने ही माँ और बाप बनकर मुझे इतना बड़ा किया था |और शायद मेरी अभी तक की जिंदगी में सबसे ज्यादा करीब में मम्मी के ही रहा हू।

मै जब बड़ा हुआ और जवानी मेरे अंदर फूटने लगी या यू कहे कि मैने जबसे होश संभाला है और मुझे आदमी और औरत के शरीर के अंतर और दोनों की जिस्मो के बीच होने वाली जरूरतों को समझा तब से मैने बहुत बार अपनी मम्मी को रात को उठ उठ कर अकेलेपन की वजह से तड़पते हुए, करवटे बदलते हुए, बिलखते हुए, और रोते हुए देखा है।

""एक कुंवारी लड़की के अकेलेपन से ज्यादा बुरा खतरनाक और भयानक एक शादीशुदा लड़की का अकेलापन होता है, उसका अकेलापन,तन्हाई, उसे हमेशा खाने को दोड़ती है और वो औरत अपनी जिंदगी एक शादीशुदा विधवा बनकर जीती है, ""

अभी हाल ही में कुछ साल पहले की बात जो मुझे आज भी याद है जिसे मैं कभी नही भूल सकता हूँ जब मेरी पहली पत्नी सुहागरात की रात बिना मेरे साथ संभोग किए अपनी आशकी के चक्कर में मुझे शादी के पहले दिन ही छोड़ कर चली गई थी और मै शर्म, अकेलेपन के कारण डिप्रेशन में चला गया था।

और मै लोगों के तानो "" अरुण कि बीवी सुहाग रात की रात को ही भग गयी, अरुण का खड़ा नही हुआ होगा, अरुण का छोटा होगा, अरुण का पानी चूत देखते ही निकल गया होगा, अरुण का ढीला होगा, अरुण हिजडा है, अरुण गांडू है, अरुण gay है, अरुण गांड मरवाता है, अरुण औरत को खुश नही कर सकता है, अरुण की बीवी सुहागरात की रात को अरुण के खड़े लंड पर लात मार के भग गयी। अरुण दुनिया का पहला लड़का है जिसने अपनी सुहागरात अपने हाथ से अपना लंड हिला कर मुठ मार के मनाई थी।

मुझे बुरा भी लगता और झूठी हसी भी आती कह तो सच रहे हैं, पर मै अंदर ही अंदर कुड़ता रहता।

यहाँ तक मेरे खास दोस्त जिनके साथ जब कभी मै ड्रिंक वगेरा करता वो भी मजा लेकर कहते अरुण तू चूतिया था अपनी सुहाग रात को मुझे लेकर चलता तेरा नाम हो जाता और मेरा काम हो जाता।

मेरे साथ के स्टाफ वाले कलिग सब लड़के और लड़किया मुझे सिम्पैथी देते हुए कहते दुनिया में सबसे बदनसीब इंसान अगर है कोई है तो अरुण है, भला सुहागरात के दिन जिसकी बीवी लात मार दे उससे बदनसीब कौन हो सकता है। मुझे उनकी सिम्पैथी गाली जैसी लगती।

उन सभी के हर जोक, चुटकुले, और मजाक शुरू किसी से भी हो पर खतम मुझ पर और मेरी सुहागरात पर आकर खतम होता।

इनसे भी गंदी बातें सुन सुन कर मै बहुत टूट गया था । लेकिन हद तो तब हो गयी जब एक दिन मेरे पापा से बहस के समय पापा ने मुझसे गुस्से में कह दिया था कि कैसा मर्द है, अपनी बीवी को तो सुहाग रात की रात मर्द बनकर काबू कर नही पाया और मुझसे बहस करता है।

पापा के मुह से ये सुनकर मेरा आत्म हत्या करने का मन कर रहा था।

तब मेरी मम्मी ने पापा को डान्ते हुए एक दोस्त बनकर मेरा साथ दिया, मुझे motivate किया, मुझे फिर से जीने की इच्छाये दी, मेरी मम्मी ने एक बार से मुझे दूसरी अपनी कोख से ना सही पर अपने प्यार से विश्वास से दोबारा जनम दिया था। और कसम खाई कि मै अपने बेटे अरुण की एक बार फिर शादी करके दुनिया के साथ साथ पापा का भी मुह बंद कर दूँगी।

मेरी पहली बीबी के छोड़ के जाने के पहले भी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही लेकिन जितना मै आकर्षित अपनी मम्मी की तरफ होता था उतना किसी लड़की की तरफ नहीं होता था | मैने कई बार अपने दिल की बात मम्मी को बताने की सोची लेकिन हर बार पीछे हट गया | अपने पापा की जवान पत्नी और अपनी सगी मम्मी से इस तरह की बात करना मुझे गलत लगा |

मम्मी ने कई बार मेरी दूसरी लड़कियों से रिलेशन शिप बनाने को कहा लेकिन किसी भी लड़की से इतना लगाव नहीं हुआ की उसको मै अपनी बना लू |

अपनी मम्मी की खातिर मैने एक दो बार समझौता करने के कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली |

जब भी मम्मी को देखता एक बार ये ख्याल जरुर आता की मै अपने दिल की बात मम्मी से कह दू |

"बढ़ती हुई उम्र के साथ वो और खूबसूरत हुई जा रही हैं खामोश खड़ी हुई भी लगती हैं जैसे कोई गजल गुनगुना रही हो गजब नजाकत से बक्शा है खुदा ने, लगता है जैसे हर एक मोहब्बत की दास्तान बस उन्ही के लिए लिखी गई हो।""

आखिर मै भी अकेला था और मम्मी भी शादीशुदा होने के बाबजूद अकेली थी | पिछले 15 सालों से पापा मम्मी अलग अलग सोते थे, वो दोनों सिर्फ नाम के पति पत्नी थे, उन दिनों के बीच झगडा ज्यादा और बातें कम होती, शायद इसकी वजह मै था, या फिर मम्मी पापा की सोच, ख्वाइश, जरूरत, इच्चाए या उम्र का अंतर।

मेरी मम्मी खूबसूरत है, भरा पूरा शरीर है हालाँकि मेकअप नहीं लगाती फिर भी बच्चे से बूढ़ा जो भी एक बार देख लेता है फिर नजरो से ओझल होने तक उनको ही देखता रहता है |

मै कभी कभी शादी पार्टी में जब ड्रिंक पीकर धुत होता था तब अकसर मेरी मम्मी की बांहों में सिमट के घर आता था और ऐसा मैं जानबूझकर करता था | जब भी मेरी मम्मी मुझे कार में बैठाती, मै नीद के बहाने अपना सर मेरी मम्मी के सीने पर रख देता और छोटे बच्चे की तरह सोने का नाटक करने लगता,हालाँकि इतना करीब होने के बावजूद भी मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई की मेरी मम्मी के सीने से सर उठाकर उनके चेहरे तक ले जाये और उनके रसीले ओठ चूम ले | ।

साल दर साल इसी तरह गुजरते रहे, दिल की तमन्ना दिल के कोने में ही दबी रह गयी | शायद मेरी मम्मी भी मेरा साथ चाहती थी लेकिन रिश्तो की मर्यादा लोकलाज और खुद की बनायीं इमेज में मेरी मम्मी कि सारी खवाइश दब गयी | | कभी खुद की बनायीं लक्ष्मण रेखा लांघी ही नहीं |

मेरी मम्मी सिर्फ मेरे पापा की बीबी नहीं थी बल्कि मेरी सबसे बड़ी फैंटेसी थी जिसके लिए मै अलग अलग लडकियों को देखकर अपनी फैंटेसी पूरा कर पाने की खीझ मिटाता था | और अपनी इसी फैंटेसी को पूरा करने के लिए मै कुसुम को देखने गया था, और कुसुम में मुझे अपनी मम्मी की छबि, दिखाई दी और हमारी शादी हो गयी।

या यू कहे कि दूसरी शादी हो गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

लेकिन मुझे आज की घटना के बाद लगने लगा है, मेरी मम्मी इतने साल अकेले रहने के कारण क्या वो सेक्सुअली अवसाद में तो नहीं चली गयी | मेरी मम्मी ने कई सालो से सेक्स नहीं किया है और कामिनी आंटी के जरिये वाहट्सप् पर भेजे गए पोर्न क्लिप ज्यादा देखने की वजह से सेक्सुअल चीजो को लेकर कुंठित हो गयी है |

अपने बेटे और बहू को आवाज देकर खासने से पहले काफी देर तक झांक कर उनकी फन एक्टिविटी को सेक्स बता रही है | लगता है मेरी मम्मी को सेक्स की तलब है, उनको चुदाई चाहिए | लेकिन अगले पल ही मेरे दिमाग में सवाल आया ये मै कैसे कर सकता हूँ? क्या ये एक बेटे का फर्ज है? क्या मै अपनी पत्नी कुसुम के आँखों में दुख के आँसू भर कर, मम्मी की सालों से सूखी

आखों में खुशी के आँसू ला सकता हूँ??

मुझे कुछ समझ नही आ रहा है मै क्या करू????

जारी है.....
 
आभार, अभिनंदन, आपके शब्दों को पढ़कर जो अनुभूति होती है उसका वरन मै अपने शब्दों में कतई नही कर सकता... आपके रिव्यू हर लेखक की कहानी को दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार से अलंकृत कर देते है।

जोकर और गुलाम में अंतर होता है, अरुण को जोकर की उपाधि इसलिए दी गई है कि वो सिर्फ एक हास्य बिंदु बन कर रह गया है अपनी बीबी की नजरों में, कुसुम गंभीर हालत में भी उसका मजाक बना कर हस्ती है।

औरत का जो राज है वो मै यहाँ हास्य के साथ लिखना चाहता हूँ....

""

औरत जब अपने बिल में मर्द का सांप उतरने देती है,

तभी उसको पता चलता है, मर्द का खड़ा होना, मर्द के साथ खड़े रहने से भी ज़्यादा ज़रूरी है।""

😂😂😂😂😜😜😜😜

धन्यवाद इसी तरह मनोबल बढ़ाते रहिये
 
अध्याय --- 15 ----

------------ ""थोड़ी सी बेवफ़ाई "" ------------

मै बाइक ले कर होटल पहुँच गया और होटल मैनेजर बाइक सौंप कर थैंक्स बोलकर टैक्सी से मामी के घर सुनील की बहु सुनीता को पिक करने के लिए चल दिया। थोड़ी देर में मै मामी के घर पहुँच गया, और इधर उधर की बातें करने लगा।

मैंने मामी को कहा की मामी आप सुनीता को बुलाये ट्रेन का टाइम होने वाला है, मामी बोली अरे बेटा तुझे तो सब पता है आजकल की बहू बिटिया तैयार होने में कितना टाइम लगती है ऊपर से मेरी बहू सुनीता तो रात से तैयारी में लग गयी, चेहरे पर उबटन लगाया ताकि चेहरा ओर खिल जाए। फिर अपने पुरे शरीर का वैक्सीन किया ताकि सारे अनचाहे बाल निकल कर त्वचा चिकनी हो जाये।

मै मामी की बातें मुस्करा कर सुन रहा था,

आज तो समय भी जैसे धीरे धीरे बीत रहा था। जब किसी का बेसब्री से इंतज़ार होता हैं तो समय ऐसे ही परीक्षा लेता हैं।

कहने को सुनीता से मेरा रिश्ता जेठ और बहू का था, लेकिन मै सुनीता को सुनील से शादी से पहले जानता था, क्योकि वो हमारे शहर की ही रहने वाली है, यहाँ उसकी ससुराल है, एक ही जाति बिरादरी के होने की वजह से शादी से पहले अक्सर मेरा सामाजिक और धार्मिक फंक्शन पर सुनीता की फैमिली से मेल मिलाप होता था।

शादी से पहले भी सुनीता काफी सूंदर लगती थी, मासूम ज़्यादा और सेक्सी कम | सुनीता कि हाइट 5 फीट 6 इंच है, लंबे काले बाल, नशीली आँखें और गोरा-गोरा रंग, पतला शरीर, वजन में केवल 54 किलो। दुबले-पतले शरीर के बावजूद बड़े-बड़े चूतड़ और गोल-गोल भारी चूचे । भले ही मैंने सुनीता को कभी गंदी नजरो से नहीं देखा था, पर मुझे इस बात का अंदाजा था कि वो ड्रेस के अंदर कितनी आकर्षक और सेक्सी होगी ।

दस मिनिट बाद एक बार फिर से मामी जी की चिर परिचित आवाज़ सुनाई दी, तैयार हो गयी क्या सुनीता।

बस दो मिनिट मम्मी आई, और मै बैग लेकर दरवाजे पर खड़ा हो कर मामी से बात करने लगा, तभी सामने से सीढ़ियों से उतरती हुई सुनीता पर मेरी नजर पड़ी।

मैंने महसूस किया कि सुनीता थोड़ी परेशान सी और दुखी थी । वह बहुत-बहुत सुस्त और किसी दबाव में लग रही थी | उसने एक भारी साड़ी पहनी हुई थी और सिर को अच्छे से ढक रखा था । सेक्सी शरीर तो छोड़ो, उसका चेहरा भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था । सुनीता को शादी से पहले मॉडर्न कपडे पहनने कि आदत थी पर उसकी सास या मामी ने उसे कभी भी साड़ी के अलावा कुछ भी पहनने नहीं दिया ।

उसकी शकल देखते हुए, अचानक से मेरा ध्यान उसकी छाती पर गया, उसकी छाती

बहुत ही बड़ी और भारी लग रही थीं ।

लेकिन उसकी ब्लाउस को देख कर ये तो कह सकता था की सुनीता पहले से अधिक सुंदर और सेक्सी हो गयी है । मैंने पिछले दो सालों में सुनीता को नहीं देखा था ।

साड़ी ब्लाउस में सुनीता के सुंदर चेहरे और सेक्सी शरीर को देखते-२ मेरा लौड़ा बुरी तरह से टन्ना गया |

सुनीता के ससुराल वाले मतलब मेरी मामी मामा थोड़े पुराने जमाने के हैं |

ज्यादातर सुनीता को अपनी सास के साथ घर पर और अपने कमरे में ही समय बिताना पड़ता था ।

इसलिए जब मेरे साथ जाने का प्लान बना तो सुनीता अंदर ही अंदर बहुत खुश थी | उसे तो जैसे जेल से रिहाई मिल रही थी | लेकिन उसकी सास की अनुमति के बिना जाना संभव नहीं था |

मै सुनीता को देखता ही रह गया ।

तभी मामी मेरा ध्यान भंग करते हुए सुनीता से बोली बहुत देर लगा दी अरुण कब से इंतजार कर रहा है।

इतनी तैयारियों में ध्यान ही नहीं रहा कि कब वो समय हो गया आपका मुझे कब से इंतज़ार था। सुनीता मुस्कुराती हुई बोली।

सुनीता ने मामी से एक महीने कि अनुमति मांगी। मेरी बातों ने उन्हें प्रभावित किया और उन्होंने उसे अनुमति दे दी, लेकिन केवल पंद्रह और बीस दिनों के लिए | सुनीता के पास उनकी बात मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था ।

मामी ठीक ठीक है अब आराम से जाओ पहुँच जाओ तो फोन कर देना। अरुण तुम्हारा जेठ है तो सिर पर पल्लू ढक कर रखना । अरुण बेटा इसका ठीक से ख्याल रखना, मैने मामी से नमस्ते किया और हम ऑटो मे बैठकर स्टेशन के लिए चल दिये।

मै रिश्ते में सुनीता का जेठ था तो उससे ज्यादा बात ना करते हुए चुप हो कर बैठा था। थोड़ी देर बाद सुनीता बोली भाई साहब आप इतने चुप चुप क्यों बैठे है। कुसुम जेठानी की याद आ रही है। या फिर जेठानी जी बातें करने से मना किया है, सुनीता मेरी फिरकी लेते हुए हस्ती हुयी बोली।

"" दूसरे की लुगाई और अंग्रेजी दवाई आदमी के शरीर पर तुरंत असर करती है ""

मै सुनीता से अटकते हुए बोला नही स स स सुनीता ऐसी बात नही है, चुटकी लेते हुए बोला मै रिश्ते में आपका जेठ हू और जेठ अपने छोटे भाई की बीवी के साथ ज्यादा बातें करे तो रिश्ते की मर्यादा टूट सकती है।हा अगर हम देवर भाभी होते तो हँसी मजाक कर सकते है, सुनीता हँसी और बोली अब ये सब नही चलता है। और वैसे भी साल में एक महिना जेठ का आता है।

ये सुनकर मेरी हँसी निकल गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

और बताओ तो मै आपको क्या बोलू भाभी या बहू। सुनीता बोली सबसे पहले तो मुझे आप मत बोलो मै आपको जब से जानती हू जब मेरी शादी भी नही हुयी थी, आप मुझे सुनीता ही बोलो।

हम ट्रेन स्टेशन पहुँच गए । ट्रेन पहले से प्लेटफार्म पर खड़ी थी । मैने स्लीपर श्रेणी के डिब्बे में आरक्षण करवा रखा था और हम उस पर चढ़ गए। हमारा कंपार्टमेंट के अगले दरवाजे पे ही शौचालय था। चूंकि हमारा अंतिम डिब्बे था इसलिए काफी छोटा था | नीचे एक तरफ एक लंबी सीट और ऊपर एक लंबी बर्थ थी । एक तरफ एक छोटी सी खिड़की थी और उसके विपरीत तरफ एक डिब्बे का दरवाजा था ।

चूंकि डिब्बे का फर्श बहुत गंदा था, इसलिए सामान को ऊपरी बर्थ पर रखा, जिससे बर्थ भर गया। तो नीचे की एकमात्र सीट मेरे और सुनीता के लिए रह गयी थी | ट्रेन ने सीटी दी और जब ट्रेन चल पड़ी और प्लेटफॉर्म आँखों से औझल हो गया तब सुनीता के चहेरे पे पहली बार मुस्कराहट दिखी |

सुनीता अंगड़ाई लेते हुए अपने दोनों हाथों को फैलाया और मुस्कुराते हुई बोली "भाई साहब! क्या मैं इन कपड़ों को बदल दूं "

"ठीक है, सुनीता ! तुम कपड़े बदल लो, मैं टॉयलेट हो कर आता हूँ | दरवाजा अंदर से बंद कर लो और मैं बाहर खड़ा रहूँगा । जब तुम्हारा काम हो जाए तो तुम दरवाजा खोल देना," मैंने उससे कहा।

"ओ.के. मेरे प्यारे भाई साहब!" उसने मस्ती भरे लहज़े से कहा ।

सुनीता की तो बोली ही बदल गयी थी | जब तक वह घर से निकल कर ट्रेन में नहीं चढ़ी थी, तब तक सुनीता बहुत चुप-चुप और शांत थी । वह बात नहीं कर रही थी या चेहरे पर कोई हावभाव नहीं दिखा रही थी । और अब, किसी चंचल हसीना कि तरह सब बंधन से मुक्त हो गई थी । मैं टॉयलेट के दरवाजे के बाहर खड़ा हो गया । थोड़ी देर बाद सुनीता ने दरवाजा खोला । जैसे ही मैंने सुनीता को देखा तो मैं चकित रह गया ।

सुनीता ने साड़ी बदल कर एक टाइट फिटिंग वाली सलवार कमीज पहन ली थी । यह सलवार कमीज शिफॉन की क्रीम रंग की थी और पारदर्शी भी थी | ऐसे लग रहा था मानो उसने साड़ी के साथ लाज और शर्म भी उतार दी हो | अब सुनीता कोई भयंकर पटाखा लग रही थी | उसने अपने लंबे काले बाल खुले छोड़ दिए थे। मेकअप भी कर लिया था | होंठों पे गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगा रही थी । उसके लाल होंठ रस से भरी चेरी की तरह लग रहे थे । मैं उसके सामने हैरान खड़ा सुनीता को लिपस्टिक लगाते देख रहा था ।

सुनीता अब पहले की तरह पतली नहीं रही थी | उसके अंगों पर थोड़ी चर्बी चढ़ गयी थी, लेकिन सही जगह पर | सबसे ज़्यादा उसकी छाती पर। उसकी छाती अब बड़ी और भारी लग रही थी । उसके बोबे जो पहले सेब की तरह लगते थे अब बड़े होकर नारियल के आकार के हो गए थे | पारदर्शी ड्रेस से, उसकी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी । ब्रा बहुत अच्छे इलास्टिक की बनी होगी, कोई लोकल ब्रा होती तो फट ही जाती |

इतने बड़े बड़े बोबों को संभालना कोई आसान काम थोड़ा न है | उसकी कमीज पूरी तरफ से स्ट्रेच हो रखी थी, एक-२ टांका खींचा हुआ था, जैसे अब फटा की तब | और तो और उसकी कमीज का गला इतना गहरा था की आधे से ज्यादा चूचे बाहर आने को थे, क्या मस्त क्लीवेज दिखाई दे रहा था |

मैं बेमन से अपनी नज़रें बोबों से हटा के निचे की तरफ देखने लगा | पारदर्शी शर्ट से उसका सपाट सफेद गोरा पेट और गहरी नाभि साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थे | नीचे उसने क्रीम कलर की ही सलवार पहनी हुई थी । और उसने जो ऊँची हील की सैंडल पहनी हुई थी, सेंडल पहन के तो वो मुझ से भी लम्बी लग रही थी | मुझे याद नहीं कि मैं अपने कजिन छोटे भाई कि बीवी को कितनी देर तक कामुक नजर से घूरता रहा | हो सकता है की कुछ सेकंड ही देखा हो पर मेरे लिए तो जैसे समय रुक गया था |

"" उमर में बड़ी है लेकिन हरकतो से कच्ची लग रही थी... अब चाहे जैसी हो मुझे अच्छी लग रही थी ""

मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था। मेरा लंड इतना टाइट था कि जैसे अंडरवियर फाड़ से बाहर आ जायेगा | मेरी पैंट से लंड का बड़ा सा उभार दिखाई दे रहा था | मेरा लण्ड अब मेरे नियंत्रण में नहीं था । मैं कर भी क्या सकता था ? अपनी कजिन छोटे भाई कि बीवी की बेकाबू जवानी, उसका सेक्सी स्लिम शरीर, बड़े चूचे, विशाल चुस्त गांड , सामने पाकर मेरा लंड मेरे काबू में नहीं रहा था | मैं जल्दी से सीट पर बैठ गया ताकि मेरे लंड का उभार कजिन छोटे भाई कि बीवी को दिखाई न दे जाये, लेकिन उसके चेहरे से पता लग रहा था की उसने देख लिया था |

वह मुस्कुराई और थोड़ा सा खांसी | उसकी आवाज़ सुन के मैं तन्द्रा से बहार आया |

वो बोली, "क्या हुआ, भाई साहब? तुम ऐसे देख रहे हो जैसे तुमने कभी लुगाई नहीं देखी ।"

हह मममम! नहीं ....... ! मेरा मतलब है, देखी तो बहुत है, लेकिन इतनी सुंदर लुगाई कभी नहीं देखी | मुझे नहीं पता था की आप अब इतनी सुंदर लगने लगी हो |" ना जाने कैसे मैंने अचानक से बोल दिया |

सुनीता बोली "ओहो, अच्छा जी, इतना मस्का लगाने की ज़रुरत नहीं है | मैंने ये ड्रेस आपको सुंदर दिखने के लिए नहीं पहनी है | वो यो मुझे ऐसे कपडे पहनने का मौका नहीं मिलता | आपके छोटे भाई ने पिछले साल मुझे ये ड्रेस दिलवाई थी, तभी से पहनना चाह रही थी, लेकिन सास आपकी मामी के सामने कभी हिम्मत ही नहीं हुई | भाई साहब अब तो ये ड्रेस थोड़ी टाइट हो गयी है, क्या करूँ, मोटी भी तो हो गयी पहले से | देख ना कितनी तंग हो गयी है |"

"हम्म्म्म" मेरे मुंह से इतना ही निकला |

वो बोली, मैं बहुत खुश हूं कि मैं आपके साथ भाई साहब घर जा रही हूँ, |"

ट्रेन अपनी रफ्तार मे दोड़ रही थी, पूरी सुबह खिल चुकी थी, सूरज की तेज रोशनी से अब गर्मी महसूस होने लगी।

अभी तक हमारे चैंबर में कोई सवारी नही आई, ट्रेन लगभग खाली सी थी, शायद कम दूरी कि ट्रेन होने की वजह से।

उस दिन बहुत गर्मी थी | बाहर का तापमान लगभग 45 डिग्री होगा | हवा तो चल रही थी, लेकिन वो भी गरमा-गरम | मुझे बहुत पसीना आ रहा था । और उसके ऊपर से कजिन छोटे भाई कि बीवी सुनीता की उफनती जवानी | अब और बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं बचने के लिए जल्दी से उठा और उससे कहा कि बहुत गर्मी हो रही है | पूरा सफर गर्मी में ही करना पड़ेगा |

फिर मैं पैंट्री कार में गया और हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स ले के तकरीबन दस मिनट के बाद वापस आया ।

सुनीता खिड़की के पास बैठी मोबाइल देख रही थीं। मैंने उसे पेप्सी दी और सामने की सीट पर बैठ गया ताकि चुपचाप सुनीता को ताड़ सकूँ । सुनीता को भी बहुत पसीना आ रहा था। उसकी पारदर्शी कमीज उसके शरीर से चिपक गयी थी | ब्रा ना होती तो बिलकुल "राम तेरी गंगा मैली" की मंदाकनी बन जाती | उसका ये रूप देख कर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा | गरम लंड के सामने कोल्ड ड्रिंक भी फ़ैल हो गयी, लंड ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा था |

उसके शरीर से ध्यान हटाने के लिए मैंने सुनीता से बातचीत शुरू कर दी। उसके मम्मी, पापा, स्टडीज, सास बहू, मेरी पत्नी कुसुम आदि बातों के बाद आखिरकार हम मूवीज पे पहुँच गए ।

उसने मुझसे पूछा, "भाई साहब, आप मूवीज देखते हो या नहीं?"

"हाँ, देखता तो हूँ, लेकिन ज़्यादा नहीं, कुछ खास-खास | मेरा मतलब है, जिस मूवी के reviews अच्छे हों "सही है भाई साहब, फिर हम कुछ देर तक चुपचाप बैठे रहे।

कुछ देर की खामोशी के बाद सुनीता बोली भाई साहब आप बड़े भाग्यशाली है जो कुसुम जेठानी जैसी सर्व गुण सम्पन पत्नी मिली है।

सुनीता की सर्वगुणसम्पन पत्नी वाली बात सुनकर मेरे अंदर का प्रोफेसर जाग गया और मै उसे एक सर्वगुणसम्पन स्त्री पर एक लंबा सा लेक्चर पेलने लगा.....

सुनो सुनीता कोई स्त्री सर्वगुणसम्पन नहीं होती********

1 यदि मैं एक सीधी-सादी स्त्री का चुनाव करता तो मुझे यह मानना पड़ेगा कि वह मुझ पर निर्भर रहेगी।

2 यदि मैं खूबसूरत लड़की चुनता तो मेरे खर्चे भी बढ़ेंगे |

3 यदि मैं एक कामकाजी स्त्री को प्राथमिकता देता तो यह भी तय है कि घर के सारे काम वह नहीं कर पाएगी।

4 यदि वह गृहिणी होगी तो स्वाभाविक है कि वह धनार्जन नहीं करेगी ।

5 यदि मैं महान स्त्री चुनता तो उसकी दृढ़ता और कठोरता के साथ भी मुझे निर्वाह करना होगा।

6 यदि मैं वीर स्त्री का चुनाव करता तो यह मानना पड़ेगा कि उसके अपने भी कुछ विचार होंगे।एक स्त्री की कुछ अच्छी विशेषताएं जाहिर करतीं हैं कि वह कौन है और उसे क्या सबसे हटकर मौलिक बनाता है।

किसी ने सही कहा है कि "सर्वगुणसम्पन्न स्त्री एक ही nation में मिलती .., …वह है imagination.😃"

वास्तव में "कभी किसी को मुकम्मल जीवनसाथी नहीं मिलता,दोनों एक दूसरे की कमियों को अपनी खूबियों से पूरा करके मुकम्मल बनते हैं।"

यह बात उम्र बढ़ने के साथ जिनको समझ में नहीं आती,वे सारी जिन्दगी एक दूसरे से उलझते रहते है।

मेरा लंबा चौड़ा लेक्चर सुनकर सुनीता खामोश हो गयी और थोड़ी देर बाद...

"ओह्ह्ह्हह्हह ... कितनी गर्मी है | मुझे तो आलस आ रहा है | भाई साहब, क्या मैंने थोड़ी देर के लिए नींद ले लूँ? " थोड़ी देर बाद सुनीता ने कहा। और बोली मुझे तकिया लगा कर सोने की आदत है अगर मै आप कि गोद में सर रख कर थोड़ी देर सो लू।

मै कुछ बोल पाता उससे पहले वह कह कर उठ गई। मैं उठ कर खिड़की के पास बैठ गया। बिना कुछ कहे तुरंत सुनीता ने अपना सिर मेरी गोद में रख दिया वह सोने लगी |

मेरी हालत बहुत टाइट हो गयी थी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और अब तो सुनीता का सर बिलकुल मेरे लंड के ऊपर आ गया था | उसके बदन का मेरे पैरों पे गरम-२ स्पर्श, मेरे हाथों में उसके रेशमी बाल, १० इंच से भी कम दुरी पे पारदर्शी शर्ट से झांकती उसकी लगभग नंगी छातीयां, उसके शरीर से आती परफ्यूम और पसीने की मिलीझुली मदहोश कर देने वाली गंध से मेरा लंड खुली हवा में सांस लेने की लिए तड़पने लगा | लंड की हालत ऐसी थी की अगर बाहर निकल की सिर्फ दो-तीन बार हिला भी लेता तो इतने में ही मेरा माल निकल जाता |

मेरा लंड बहुत दमदार है, लम्बा और बहुत मोटा | मेरा लंड सुनीता के सर को मेरी गोदी से उठाने में लगा हुआ था | अचानक से मेरे लंड में एक लहर सी आयी और लंड ने सुनीता के सर को झटके से हल्का सा उछाल दिया | सुनीता को कुछ पता नहीं चला, शायद नींद थोड़ी गहरी हो गयी थी | उसको पता ही नहीं चला की उसके जवान जेठ का हब्शी लंड उसके सर से साथ खेल रहा है |

अब सुनीता की साँसे गहरी और लयबद्ध चल रही थी, उसी लय के साथ उसके बोबे भी ऊपर-नीचे हो रहे थे | उसकी पारदर्शी शर्ट पसीने से लथपथ हो कर उसके अंगों से चिपक गयी थी | उसका शरीर पूरी तरह से दिखाई दे रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे उसने सिर्फ ब्रा पहन रखी हो । उसके बोबे इतने गोर थे के उनमें से उसकी नीली-हरी नसें भी दिखाई दे रही थी | मेरा दिल कर रहा था की अभी उसकी कमीज फाड़ कर उसके बोबों की गहरी घाटी में अपना मुंह घुसा दूँ | लेकिन मुझे हर हाल में अपने अंदर के जानवर को बाहर आने से रोकना था।

उसके पसीने की गंध अब शायद बढ़ गयी थी, अब उससे और ज्यादा पसीना आ रहा था | शायद नींद में सभी को ज़्यादा गर्मी लगती है और पसीना आता है | महिलाओं का पसीना भी किसी परफ्यूम की तरह ही होता है | जो भी हो सुनीता के पसीने की नमकीन गंध बहुत ही मदहोश करने वाली थी | पसीने की बूंदे उसकी गर्दन, कन्धों और बोबों पे चिपकी हुई दिखाई दे रही थी | दिल कर रहा था की कुत्ते की तरह जीभ निकल के उसका सारा पसीना चाट जाऊं |

तभी अचानक से सुनीता ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और मेरी तरफ करवट ले ली | उसने मुझे वैसे ही पकड़ा हुआ था जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी माँ से लिपटा होता है | उसके हाथ का स्पर्श बहुत गरम था | अब इस नयी पोजीशन में उसका बायां मुम्मा मेरे पेट से चिपक गया था | उसके मुम्मे का स्पर्श बहुत ही मस्त था | और तो और अब उसकी पारदर्शी कमीज से उसकी पसीने से लथपथ कांख बिलकुल साफ़ दिखाई दे रही थी |

बड़े आश्चर्य की बात थी की सुनीता के कांख में गहरे काले-२ बाल थे | कांख में अगर बाल हों तो बहुत पसीना आता है, सुनीता से आती हुई पसीने की गंध सबसे ज़्यादा उसकी कांख से ही आ रही थी | आज की मॉडर्न लड़कियां अपनी कांख बिलकुल सफाचट रखती हैं, लेकिन शायद वो ये नहीं जानती की कांख के बाल कितने सेक्सी दीखते हैं | बाकि सब का तो पता नहीं लेकिन मैं कांख के बालों का दीवाना हूँ | लड़कियों की काखों में बाल होना बहुत ही कामुक होता है और कामोन्माद को बढ़ाता है। लेकिन आजकल, लड़कियों को अपनी त्वचा पर बाल नहीं रखना चाहती | अपनी कजिन छोटे भाई की बीवी की काखों में बाल देख के मुझे बहुत खुशी हुई, मेरा लंड और भी टाइट हो गया |

अब और बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए नामुनकिन हो गया था, मैं थोड़ा सा झुका और अपनी नाक को, जितना हो सकता था उतना, सुनीता की काखों के पास ले गया | मैं बता भी नहीं सकता, ये सब मेरे लिए कितना नशीला और कामुक था | ऐसा लग रहा था की उसका मुम्मा और मोटा होके मुझे बुला रहा था | मेरा लंड अंडरवियर फाड़ के बाहर आने को मचल उठा था, ऐसा लग रहा था कि लंड अभी फटेगा । आखिरकार में अपना हाथ धीरे से उसके मुम्मों पे रखने के लिए उठाया |

जैसे ही मैंने अपना अपना हाथ उठा के उसके सीने की तरफ बढ़ाया, सुनीता ने अपनी आँखें खोल दीं । मैंने तुरंत अपना हाथ अपने बालों पर ऐसे घुमाया जैसे मैंने अभी-अभी अपने बालों को हिलाने के लिए ही उठाया हो।

"कितनी देर से सो रही हूँ? अरे यार कितनी गर्मी है ......... मैं तो पसीने से पूरी तरह नहा ली हूँ .... ये शर्ट पूरी गीली हो गयी है, मैं इसे बदल लेती हूँ | ," सुनीता उठते हुए बोली |

सुनीता ने मुझे ऊपर की बर्थ से बैग उतारने को कहा | मैंने बैग उतार दिया | सुनीता अपने पर्स में बैग की चाबी तलाश करने लगी | उसने बहुत ढूंढी लेकिन नहीं मिली।

मैंने सुनीता से कहा, "कहीं आप चाबी घर पे तो नहीं भूल आये?"

"नहीं भाई, मैंने अभी तो कपडे चेंज किये हैं| साडी भी बैग में रखी थी। उसके बाद बैग लॉक करके शायद से चाबी पर्स में ही तो रखी थी|," उसने जवाब दिया ।

मैंने कहा, "फिर कहाँ जा सकती है? मैं ढूंढ़ता हूँ, शायद सीट के नीचे ना गिर गयी हो |"

मैं नीचे झुक गया और सीट के नीचे झाँकने लगा । जमीन पर बहुत गंदगी पड़ी थी लेकिन चाबी कहीं नहीं दिख रही थी । मैं थोड़ा और झुक के ध्यान से देखने लगा । अचानक से मुझे सीट के निचे, एक कोने में चाबी दिखाई दी | मैंने सोचा की अगर मैं सुनीता को चाबी दे देता हूँ तो सुनीता कपडे चेंज कर लेंगी और इतना सेक्सी शो ख़तम | ना ना ।

मैंने उठ के सुनीता से कहा," सुनीता, चाबी तो नहीं मिल रही | अभी कुछ काम चला लो, जब घर आने वाला होगा तब दोनों मिल के चाबी अच्छे से ढून्ढ लेंगे, अभी छोड़ो, गर्मी से वैसे भी कुछ काम करने का मन नहीं हो रहा |"

ओके", फिर से हम दोनों वापस सीट पर बैठ गए।

"भाई साहब सीरियसली, बहुत गर्मी लग रही है | मैं इस गर्मी और पसीने से मरी जा रही हूँ? " सुनीता बोली ।

अब मैं क्या कहूं मन ही मन सोच रहा था की अगर गर्मी ना होती तो अपनी कजिन छोटे भाई की बीवी के सेक्सी बदन का जलवा कैसे देखने को मिलता |

"ओह्ह्ह्हह ..... | मुझे पूरा सफर इस पसीने से भीगी ड्रेस में ही करना होगा | अब क्या कर सकते हैं ..... एक ये फैन, चल रहा है की हिल रहा है ..... जब ठीक से चलता ही नहीं तो लगाने की भी क्या ज़रुरत थी |", सुनीता ने परेशान होते हुए कहा |

सच में अगर आप कहो तो मैं इस अखबार से आपको हवा कर देता हूँ," में अपने बैग पड़ी एक पुराना अखबार उठाते हुए कहा ।

"ओहो, क्या बात है, अपने छोटे कजिन भाई कि बीवी की इतनी सेवा ......... अभी रहने दे भाई साहब .... बता दूंगी जब सेवा करवाने का मन होगा," उसने हँसते हुए कहा | वैसे भी कुसुम जेठानी को पता चल गया तो आपके हाथ ही नही बचेंगे कुछ भी हिलाने के लिए ये बात उसने एक नॉटी style में बोली।

कुछ समय बाद सुनीता ने मेरी तरफ देखा और कहा, "आपको कितना पसीना आ रहा है भाई साहब| देख कैसे पसीने से भीग गया है |"

मैं: तो कर भी क्या सकता हूँ ?

सुनीता : उतार दो क्यों इतनी मोटी कमीज पहन रखी है? उतार दो कमीज को |

सच पूछो तो मैं भी यही सोच रहा था और अब तो सुनीता ने भी कह दिया | बढ़िया था, सुनीता सही लाइन पे जा रही थी | मैंने जल्दी से शर्ट निकाल दी।

मेरे हष्ट-पुष्ट शरीर देखकर सुनीता की आँखें चमक उठीं। उसने कहा, "क्या बात है भाई साहब, बॉडी तो मस्त बना रखी है | एकदम मरदाना, वाह"

मैं: चलो अच्छा है, आपको मेरी बॉडी पसंद आयी |

सुनीता: मुझे फिट लोग ही पसंद हैं | एक आपके छोटे भाई सुनील हैं, तोंद फुलाए पेटूमल लगते हैं |

मैं: तो आप बोला करो ने उन्हें जिम जाने के लिए

सुनीता (धीमी आवाज़ में): हाँ, वो और जिम, कुछ होता-हवाता तो है नहीं उनसे ....

सुनीता: ओह्ह उफ् गर्मी ने तो जान ही निकाल दी जरा फ्रेश होकर आती हू, और वाश रूम में चली गई।

मैं खिड़की से बाहर के नजारा देखने लगा। मेरी आँखों में अब नींद भर आई थी, मैने अपनी आँखे बंद कर ली।

"ये मुई नायलॉन की ब्रा इतनी देर से मेरे बदन को काट रही थी।", वो अपने बैग में ब्रा रखते हुए बोली |

उसकी आवाज सुनकर जब मैने अपनी आँखें खोलीं और उसकी तरफ देखा।

ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, क्या नज़ारा था | सुनीता के सीने से ब्रा गायब हो गई थी | उसके गोरे-२, बड़े-२ विशाल मुम्मे उसकी पारदर्शी, थोड़ी गीली शिफॉन शर्ट से साफ़-२ दिखाई दे रहे थे | ब्रा के बिना उसके मुम्मे और भी बड़े लग रहे थे | गोरे गोरे मुम्मे के बीच में डार्क चॉकलेट रंग का निप्पल साफ दिखाई दे रहा था । उसके निप्पल बिलकुल कड़क लग रहे थे और उनकी शेप ऊपर से साफ़-२ दिखाई दे रही थी ।

मैं अपनी कजिन छोटे भाई की जवान बीवी को लगभग ऊपर से नंगा देख कर बुरी तरह से मदहोश हो गया | ऐसा लग रहा था जैसे मेरा कड़क लंड किसी भी पल में झड़ जाएगा । ये नज़ारा देख के मेरा पूरा शरीर गरम हो गया और मुझे पहले से भी ज़्यादा पसीना आने लगा | मेरा दिल कर रहा था की अभी लंड बाहर निकाल के उसके मुम्मे पे मुठ गिरा दूँ | लेकिन, क्या कर सकता था, आखिर जेठ बहू का रिश्ता था | मैं मन को समझा के बैठ गया |

सुनीता मेरी हालत से बेखबर दिख रही थी, उसके चेहरे पे कोई भाव नहीं थे, बस हल्का सा मुस्कुरा रही थी|

ब्रा ही क्यों, पूरी नंगी हो जा ना सुनीता", मैंने मन में सोचा |

हम फिर से पहले वाली पोजीशन में आ गए | वो पहले की तरह खिड़की के पास बैठ गयी और आँखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगी।

ब्रा निकालने के बाद सुनीता के बोबे बिलकुल साफ़ दिखाई दे रहे थे | तकरीबन 25 % बोबे तो वैसे ही कमीज से बाहर थे और जो 75 % अंदर भी थे वो भी उस पसीने से भीगी पारदर्शी कमीज से नंगे ही प्रतीत हो रहे थे | उसके उभरे हुए निप्पल उसकी ड्रेस में अलग से खड़े हुए स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे थे | उसके पसीने ही उग्र गंध मेरे नथुनों में समा रही थी |

उसके नंगे बोबे, खड़े निप्पल, पसीने से लथपथ शरीर मेरी आँखों और लपलपाती जीभ से केवल कुछ फुट की दूरी पर थे । मैं अत्यधिक उत्तेजित हो चूका था | मैं मन ही मन प्रार्थना कर रहा था कि कहीं मेरा वीर्य छूट न जाये | अगर ऐसा हुआ तो मैं मर ही जाऊंगा | सुनीता को पता चल जायेगा | वो शायद मुझसे नफरत करने लग जाये, शायद मुझसे फिर कभी बात ना करे | ये विचार आते ही मैं घबरा गया था।

मेरे काखों में भी बहुत बाल हैं, मुझे काखों से बाल साफ़ करना अच्छा भी नहीं लगता | एक तो मौसम इतना गरम था और उस पर गरमा-गरम जवानी, मुझे भी बहुत पसीना आ रहा था | पहले तो शायद मेरे पसीने की गंध शर्ट की वजह से रुक रही थी, लेकिन अब तो मैंने शर्ट भी उतार दी थी | मेरे पसीने की गंध पूरे कम्पार्टमेंट में फ़ैल रही थी |

मुझे यकीन था कि सुनीता सो रही थी और उसे मेरे पसीने की गंध का पता नहीं चला होगा | माना की मेरे पसीने की गंध तेज थी लेकिन सुनीता भी इस बात में पीछे नहीं थी | उसके पसीने की महक मुझे पागल कर रही थी । मैं सुनीता को टंग बाथ देना चाहता था, उसके पूरे शरीर को चाटना चाहता था | मुझे विश्वास था की उसके पसीने में शराब से भी ज़्यादा नशा होगा | मेरा लंड बुरी तरह से सख्त हो चूका था और उसमें से थोड़ा सा पानी भी निकलना शुरू हो गया था | मुझे लग रहा था कि कहीं मेरी पैंट गीली ना हो जाये, लेकिन मैं कर भी क्या सकता था, ये मेरे नियंत्रण में नहीं था ।

यह सब मेरे लिए किसी कामुक सपने की तरह था |

तभी ट्रेन एक झटके के साथ रुक गई कोई स्टेशन आ गया था।

मैं: सुनीता, अभी तो बहुत भूख लगी है | मैं कुछ खाने को लेके आता हूँ,

सुनीता: हाँ भाई साहब, पहले पेट पूजा, फिर काम दूजा .. या फिर काम पूजा ये बात उसने जोर देते हुए बोली।

मैं हँसते हुए प्लेटफॉर्म की और जाने लगा | मैं गुनगुनाते हुए जा रहा था और सोच रहा था की सुनीता की कैसे चुदाई करूँगा .....

""वो कहावत है ना जब किस्मत में दण्ड तो भुगत बहन के लंड ""

वापस आया तो सामने वाली बर्थ पर एक बुजुर्ग दंपति जो शायद अस्थमा के मरीज थे अपना सामान सेट कर रहे थे। वो बुजुर्ग बहुत ही बीमार से नजर आ रहे थे, उनकी हालत देखकर मेरी काम उत्तेजना गायब हो गयी और मै और सुनीता शांत होकर बैठ गये।

फिर सेक्स की उमीद तो छोड़ो हमने कुछ खाया भी नही और उस बुजुर्ग परिवार को sympathy देते रहे।

तीन घंटे बाद हमारा स्टेशन आ गया। सुनीता का भाई उसका प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहा था और हम अपने अपने घर की ओर चल दिये।

शायद जो हुआ अच्छा हुआ क्योकि मै अपनी प्यारी पत्नी कुसुम से एक छोटी सी बेफवाई करने से बच गया।।।

जारी है........
 
KLPD, अरुण की नियति बन गयी है, जिससे वो दिल लगाता है, वो ही KLPD कर बीच में छोड़ देता है। 😂😂😂

(जब भी उसे लगता है कि मंजिल अब मात्र दो कदम की दूरी पर है तभी कुछ न कुछ ऐसा होता है कि मंजिल दो कदम नही बल्कि दो सौ हजार किलोमीटर दूर जैसा लगने लगता है।)

आपने ये भले ये बात कहानी के संदर्भ में लिखी है, लेकिन ये कटु सत्य है, अरुण के वास्तविक जीवन का भी यही हाल है, "" अरुण ने जिससे प्रेम, विश्वास ज्यादा किया उसने ही साथ छोड़ दिया ""

आगामी update से KLPD से निकल कर अरुण की दिशा और दशा बदलने वाले है, या यू कहे कहानी का उद्देश्य, मूल स्वरूप शुरु होने वाला, एक पति, पत्नी और बेटी की त्रिकोणीय प्रेम कहानी का आगाज होने वाला है, हालाँकि ये कहानी मैने दूसरी साइट पर भी अधूरी लिखी थी, और उसमे दो तीन update आगे के लिखे हुए है, जिन्हे मै जरूरत पड़ने पर ही यहाँ उपयोग में लाने की कोशिश करूँगा।

इसी तरह अपना आशीर्वाद देते रहिये।

धन्यवाद........
 
तीन घंटे बाद हमारा स्टेशन आ गया। सुनीता का भाई उसका प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहा था, सुनीता को अपने पहने हुए कपड़ो में जिसमें पसीने से भीगे होने की वजह से उसके काले निप्पल साफ साफ नजर आ रहे थे। और उसे अपने भाई के सामने शायद असहज महसूस हो रहा था इसलिए रेलवे स्टेशन के बाथरूम में जाकर उसने कपड़े बदल लिए।

सुनीता जब वापस बाथरूम से आई तो मै और उसका भाई दोनों जाने के लिए तैयार खडे थे, सुनीता ने हरे रंग का ढीला सा पूरी बाँह का कुर्ता सलवार सूट पहना हुआ था जिस पर दुप्पटा डाल रही थी। सुनीता बोली जेठ जी लाओ मुझे बैग दे दो। मैने सुनीता के हाथ में बैग दिया उसके हाथ की मेहंदी चमक रही थी सुनीता ने उंगली में अँगूठी पहनी हुयी थी।

सुनीता का घर और मेरे घर का एक ही रूट है, जिसकी दूरी स्टेशन से लगभग 5-6 किलोमीटर है, (हालांकि सुनीता का घर मेरे घर से एक किलोमीटर पहले ही पड़ता है।) और ऑटो रिक्शा वाले मुह भर के अनाप शनाप किराया मांगते है, मतलब जितने पैसों में एक शहर से दूसरे पहुँच गए, उससे ज्यादा पैसों में रेलवे स्टेशन से अपने घर पहुँचने में खर्चा करना पड़ता है। इस वजह से मैने सुनीता और उसके भाई को रोडवेज (सरकारी) सिटी बस में साथ चलने को कहा... और उन दोनों ने भी सहमति दे दी।

फिर हम सब बस स्टैंड पहुँचकर बस में बैठ गए। बस में पीछे की सीटें से एक आगे वाली सीटें खाली थी, सुनीता मुझसे कहा जेठ जी पीछे नही बैठेगे तो मैने ने कहा बस 25-30 मिनिट का सफर है बैठ लो। तो मै और सुनीता एक साथ और उसका भाई हमारे पीछे वाली सीट पर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद बस चल दी ज्यादा भीड़ नही थी सब सीटें पर सवारी बैठी थी। मै सुनीता को देखकर मुस्करा रहा था, सुनीता ने पूछा क्या हुआ जेठ जी....??? मैने कहा अब तुम एक आदर्श संस्कारी, बहू लग रही हो हाथों में मेहंदी ऊँगली में अंगूठी, सब सादा सिंपल हरा कुर्ता सलवार सूट मजा आ गया।

सुनीता ने कुछ कहा तो नही बस एक कातिल मुस्कान दी। फिर मै अपने मोबाइल पर फेसबुक, WhatsUP ओपन कर मैसेज पोस्ट देखने लगा, सुनीता भी मेरे मोबाइल में देख रही थी ।

सुनीता और मेरे हाथ एक दूसरे से चिपके हुए रगड़ रहे थे, थोड़ी देर बाद सुनीता ने एक हाथ मेरे कंधे पर रख लिया, और मोबाइल में देख रही थी, सुनीता का हाथ मेरा कंधे रखने से मेरी बाहें अब सुनीता के स्तनों से चिपक गयी। बस के हिलने से मेरी बाहें सुनीता के स्तनों से थोड़ी थोड़ी रगड़ रही थी।

मुझे मजा आ रहा था, मैं भी धीरे धीरे जानबूझकर अपनी कोहनी सुनीता के दूध से हल्के से दबाने लगा। सुनीता मोबाइल में ही देख रही थी, 2-3 मिनिट तक मै अपनी कोहनी से सुनीता के दूध दबाता रहा। तभी सुनीता ने मेरे कंधे से हाथ हटा लिया और सीधी बैठ गयी, जिससे मेरी कोहनी अब सुनीता की बाँह से टच होने लगी। मै भी अपने हाथ सीधे करके बैठ गया फिर से मेरे और सुनीता की बांह आपस में चिपक गयी।

तभी बस रुकी और एक दो सवारी उतर गयी।

बस फिर चलने लगी, पांच मिनिट बाद मोबाइल की बैटरी बीस परसेंट बची तो मैने मोबाइल अपनी जेब में रख लिया। सुनीता बार बार अपना दुपट्टा से मुह पोछ रही थी उसे गर्मी लग रही थी, थोड़ी देर तक सुनीता सीधी बैठी रही, फिर उसने अपने हाथ आगे वाली सीट के ऊपर रख दिया। और खिड़की के बाहर देख रही थी, मै भी खिड़की से बाहर देख रहा था, तभी एक साइड से मेरी नजर सुनीता के कुर्ती में हिलते हुए स्तनों पर पड़ी।

मेरे अंदर कामुत्तेजना होने लगी तो मैने फिर से कोहनी से हल्के से दबाना शुरु कर दिया, दो मिनिट तक में सुनीता के दूध कोहनी से दबाता रहा। तभी सुनीता फिर से हिली और फिर से अपने दुपट्टे से मुह पोंछ कर दुपट्टा से अपने दूधों को ढक लिया और सीधी बैठ गयी।

एक दो मिनट बाद सुनीता फिर हिली और धीरे से बड़बड़ाती हुयी बोली बहुत गर्मी हो रही है, और अपना दुपट्टा adjust करते हुए अपने हाथ फिर से आँगे वाली सीट के ऊपर रख लिए और बस की खिड़की की तरफ देखने लगी, खिड़की में से हवा जोर से आ रही थी जिससे सुनीता का दुप्पटा उड़ रहा था। मुझे फिर से सुनीता के कुर्ते में हिलते हुए दूध दिखने लगे, मैने सुनीता की तरफ देखा वो बाहर खिड़की में देख रही थी, मैने अपने हाथों को मोड़ लिया और सुनीता के दूध पर उंगली से छूने लगा, धीरे धीरे मै उंगली को सुनीता के दूध में हल्के से दबाने लगा,

दो मिनिट तक मै सुनीता के दूध को उंगली से दबाता रहा। तभी सुनीता फिर से हिली, मैने अपनी उंगली वापस हटा ली। पर इस बार सुनीता ने अपने हाथ आँगे वाली सीट से नही हटाये, मैने फिर से सुनीता के दूध को उंगली से दबाना शुरु कर दिया, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, तो मैने हिम्मत करके अपने पूरे हाथ के पंजे को सुनीता के दूधों पर रख दिया, थोड़ी देर तक मैने हाथ को ऐसे ही रखा रहने दिया, बस के हिलने की वजह से सुनीता के दूध हिल रहे थे, मेरा लंड मेरे जीन्स में एकदम टाइट हो गया था, और निकलने को बेचैन हो रहा था।

दो मिनिट बाद मैने हल्के से सुनीता के दूध को दबाना शुरु कर दिया सुनीता के दूध एकदम tight थे, मैने सुनीता के दूध को आज पहली बार छुआ था, मैं मन ही मन सोचने लगा की सुनीता के सीने से लग कर दूध पी लू। सुनीता के दूध को दबाते हुए मेरे हाथ सुनीता के निप्पल पर पहुँच गए, सुनीता के निप्पल एक दम कड़क और खड़े हुए थे। मैने सुनीता के निप्पल को जैसे ही दबाया तो तो अचानक से सुनीता ने आगे वाली सीट के ऊपर से हाथ हटा लिए और सीधी बैठ गयी।

मेरा हाथ सुनीता के दूध पर और मेरी उंगली में दूध के निप्पल थे। सुनीता ने अपने बांह से मेरे हाथ को दूध पर दबा लिया, और अपने हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। ये देखकर मुझे अंदर से और उत्तेजना आने लगी, मै सुनीता के दूध और निप्पल को सेहलाता हुआ दबाने लगा, हालांकि मै सुनीता के दूध कुर्ती के कपड़े के ऊपर से ही दबा रहा था, पर मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे सुनीता के नंगे दूध और निप्पल मेरे हाथ में हो। तभी सुनीता ने मेरी जांघो से हाथ हटाया और अपने दुपटे से मुह पोछने लगी, और मुह पोछकर दुपट्टा ऊंचा कर स्तनों पर ढक लिया और वापस हाथ मेरे जांघ पर रख लिया।

मै सुनीता के दूध और निप्पल दबा दबा कर सहलाने लगा, तभी मुझे अपनी जांघो पर सुनीता की उंगलियाँ मेरे लंड पर छूती हुयी महसूस होने लगी, मुझे मन ही मन खुशी होने लगी सुनीता को भी मजा आ रहा है। सुनीता भी उत्तेजित हो गयी है। मै सुनीता के दूध और निप्पल अब बिना डरे हुए बड़े प्यार से हरे कुर्ती में सेहलाते हुए दबाने लगा और सुनीता अपने हाथ की मेहंदी लगी हुयी उँगलियों से मेरे लंड को जीन्स के ऊपर से सेहलाते हुए दबा रही थी।

सुनीता जीन्स के ऊपर से ही मेरे लंड के सिरे को पकड़ रही थी, बार बार ऐसा करने से मेरा लंड जीन्स में अकड़ने लगा। मैने सुनीता की तरफ देखा वो इधर उधर देख रही थी, मेरे लंड को कभी वो नोचती तो कभी जोर से मसकने लगती। मेरे हाथ भी सुनीता के वक्षों पर जोर जोर से चल रहे थे, मै सुनीता के दूध के निप्पल को जैसे ही दबाता तो सुनीता मेरे लंड के सिरे को नोच ने लगती। तभी सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया, तो मै चोंक गया पर सुनीता अपने दूसरे दूध पर रख दिया और धीरे से बोली इसे भी और अपने दुपट्टे से ढक दिया।

मुझे बहुत आनंद आ रहा था, मेरा लंड जीन्स में खड़ा होकर अलग से चमक रहा था, सुनीता की मेहंदी लगी उंगलियाँ मेरे जीन्स के ऊपर से ही लंड पकड़ने को ऐसे चल रही थी मानो वो लंड पर भी मेहंदी का रंग लगाना चाह रही हो। तभी सुनीता की उंगलियाँ ने मेरे जीन्स की जिप खोलने की कोशिश करने लगी।

""आप लोगो को पता ही होगा जीन्स की जिप थोड़ी छोटी होती है, उसमे बैठ कर खड़ा हुआ मोटा लंड निकालना मुश्किल है।""

सुनीता ने काफी कोशिश की पर जिप नही खुली, तो सुनीता बड़बड़ाते हुए धीरे से बोली ये जिप क्यो नही खुल रही है। मै चुप रहा, मुझे सुनीता की आँखों में कामवासना साफ साफ दिख रही थी, तभी सुनीता ने मेरे लंड को एक चांटा सा मारा मगर प्यार से, सुनीता की नजर बस में सब जगह घूम रही थी वो ये देखने की कोशिश कर रही थी कही कोई देख ना रहा हो। पर बस वैसे भी खाली थी और हम लोग पीछे से एक आगे की सीट पर थे।

5-6 मिनिट तक मै और सुनीता एक दूसरे के अंगों को दबाते हुए, सेहलाते हुए कामक्रीड़ा करते रहे, जैसे सुनीता का मन मेरा लंड जीन्स में से बाहर निकालने को बेचैन हो रहा था, वैसे मेरा मन भी सुनीता के दूध को हरे कुर्ते में से निकालने को तड़प रहा था। मैने सुनीता के कुर्ता के ऊपरी साइड से अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से फुसफुसाइ इधर हाथ मत डालो कुर्ता फट सकता है।

फिर मैने सुनीता के दूध दबाते हुए उसके कुर्ता को ऊपर खींचने लगा, पर कुर्ता उसके नितंबो और चूतड़ के नीचे दबा होने से ऊपर नही हो रहा था। मैने सोचा ये भी मुश्किल है तो मैने सुनीता की सलवार के ऊपर से सुनीता की चूत पर हाथ ले जाकर दबाने लगा तो सुनीता ने अपनी जांघो मे मेरे हाथ को दबा लिया, मुझे और मजा आने लगा फिर मैने सुनीता की चूत में उंगली डालने की कोशिश की तो सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वापस अपने दूध पर रख दिया। मैं सुनीता के दूध दबाने लगा, थोड़ी देर दूध दबाने के बाद मैने सुनीता के कुर्ता को फिर से ऊपर खीचा तो सुनीता धीरे से बोली क्या कर रहे कुर्ता फट जायेगा।

सुनीता बोली ऐसे ही कर लो तो मैने कहा प्लिज़ सुनीता एक बार दूध दिखा दो ना, सुनीता बोली नही ऐसे ही कर लो पर मै नही माना और सुनीता से फिर बोला बस एक बार दिखा दो अच्छी सुनीता। तो सुनीता कुछ सोचने के बाद इधर उधर देखा और मेरे हाथ अपने वक्ष स्थल से हटा दिये। मैने सोचा इसे क्या हो गया। तभी सुनीता धीरे से खड़ी हुयी और अपने कुर्ता को ऊपर कमर तक उठा कर बैठ गयी जिससे कुर्ता उसके नितंबो के नीचे से हट गया। मैने तुरंत ही सुनीता के कुर्ता को नीचे की साइड से ऊपर उठा दिया मेरी आँखों के सामने सुनीता का एक बड़ा सा मम्मा दूध का आ गया। सुनीता ने कुर्ता के नीचे ब्रा नही पहनी थी। मैने एक बच्चे की तरह सुनीता के दूध को दबाने लगा।

सुनीता का दूध का निप्पल एक दम सीधा खड़ा हुआ था जो की एक मोटी और बड़ी सी बेर की गुठली की तरह कड़क और तनी हुयी थी। सुनीता के हाथ मेरे जीन्स के ऊपर से लंड को दबा रहे थे, 5-6 मिनिट तक मै सुनीता के दूध और निप्पल को रगड़ रगड़ कर दबाता हुआ सेहला रहा था। और सुनीता मेरे लंड के सिरे को मुट्ठी में भर कर मसीज रही थी।

सुनीता बस की खिड़की से बाहर देख रही थी, तभी मैने सुनीता के कुर्ता के अंदर हाथ डालकर सुनीता के दूसरे दूध को कुर्ता में से बाहर निकालने के लिए अपना हाथ आगे किया। अचानक से सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ कर नीचे कर दिया और अपना कुर्ता भी खिसका कर नीचे कर लिया। और मेरे जीन्स के ऊपर से लंड पर से भी हाथ हटा लिया। मै सोचने लगा क्या हो गया सुनीता को, तभी पीछे से सुनीता के भाई की आवाज आई चलो उठो स्टॉप आ गया।

मैने खिड़की में बाहर देखा तो सच में सुनीता का घर आ गया था। मै मन ही मन सोचने लगा मै कितना बड़ा चूतिया हू सिर्फ सुनीता के दूध दबाने में ही पूरा दिमाग लगा रहा था जबकि सुनीता कितनी इंटेलिजेंट है पूरी बस में इधर उधर देखते हुए कितनी सफ़ाई से अपने कपड़े ठीक कर के बैठी है। कोई सपने में भी नही सोच सकता है की मेरे और सुनीता के बीच इस आधे घण्टे के सफर में क्या हुआ।

जारी है........
 
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