Incest पहाडी मौसम - Page 15 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

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जब रानी घर पर वापस आई कैसे पता चला कि उसका भाई उसके लिए कपड़े लेकर आया है। सुनैना रानी को कपड़े दिखाने लगी कपड़े देखकर रानी बहुत खुश हो गई,,,, अपने भाई से मिले बिना ही नहाने के लिए चली गई क्योंकि आज के लिए उसका दिन बहुत खास था आज नदी पर फिर से कुंवर जो आने वाला था आज उसकी कुंवर से मुलाकात होने वाली थी,,,, उसे जाता हुआ देखकर सुनैना के मन में बहुत अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे,,,वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर सच में कभी रानी ने उन दोनों को संभोग रत अवस्था में देख ली तो क्या होगा और ऐसे हालात में सूरज ने जो कदम उठाने को कहा है अगर ऐसा कदम उठा लिया तब तो घर में लाज शर्म मान मर्यादा सब कुछ खत्म हो जाएगा अपने मन में उतरे सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोली कि वैसे भी अब घर में लाज शर्म रह कहां गई है,,, अपने ही बेटे के साथ चुदाई का सुख प्राप्त करके रिश्तो की दीवार को वह खुद ही गिरा चुकी है अगर ऐसे में सच में रानी उन दोनों कोई समस्या में देख लेगी तो गजब हो जाएगा,,, ऐसे हालात से निपटने के लिए सूरज ने जो उपाय बताया था वही एक ईसका असली इलाज था।

फिर भी खाना बनाते हुए सुनैना सच में पड़ गई थी कि अगर इसके लिए रानी तैयार नहीं हुई तो क्या होगा ऐसे हालत में तो वह अपनी ही बेटी की नजर में गिर जाएगी,,,, नहीं नहीं अगर ऐसा हुआ तो गजब हो जाएगा रोटी बनाते समय सुनैना अपने मन में उसे ख्याल से अंदर ही अंदर घबरा गई थी,,, उसे लगने लगा था कि आज नहीं तो कल मां बेटे दोनों पकड़े ही जाएंगे बाहर किसी को भले कानों कान खबर तक नहीं होगी लेकिन घर के अंदर तो कभी ना कभी रानी की नजर पड़ ही जाएगी,,,, तब तो गजब हो जाएगा रानी क्या सोचेगी,,,, यह सब सोच कर सुनैना अपने आप से ही बोली नहीं अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मुझे सूरज से दूरी बनाकर रखनी होगी जो कुछ होना था हो गया लेकिन अब इससे ज्यादा नहीं होने दूंगी,,,, (ऐसा वह अपने मन में सोच कर तवे पर फूली हुई रोटी को उतार कर दूसरी रोटी उसे पर चढ़ा दी और फिर अपने आप से ही बोली।) लेकिन क्या अब तु सूरज के बिना रह पाएगी,,, एक मां होने के नाते भले ही तो अपनी गलती को दोबारा नहीं दोहराएगी लेकिन एक औरत होने के नाते क्या तू अपने आप को रोक पाएगी अपनी भावनाओं को काबू में कर पाएगी जिस तरह का सुख तुझे अपने बेटे से मिला है क्या तू उसे सुख से नजर हटा पाएगी क्या तेरा बदन नहीं चाहेगा उसे तरह का सुख फिर से प्राप्त करने के लिए अभी तो तू अपने बेटे से ठीक तरह से मजा भी नहीं ले पाएंगे अभी तो शुरुआत है और ऐसे में तू अपने आप पर काबू कैसे कर पाएगी अपने बेटे का ख्याल आते ही तेरे बदन में हलचल होने लगती है, टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस का बहाव शुरू हो जाता है ऐसे में तो अपने आप को कैसे संभाल पाएगी और अगर तू अपने बेटे से इस तरह के संबंध को नहीं भी बनती है तो भी तेरे मन में उठ रही जवानी की उम्र को कैसे संभाल पाएगी ऐसे हालात में मुमकिन है कि तू किसी गैर मर्द के साथ संबंध बना बैठेगी और किसी गैर मर्द के साथ एक बार तेरा संबंध बन गया तो समझ में बदनाम होने की नौबत आ जाएगी,,, और तब तु क्या करेगी,,,, अभी तो चलो अपने बेटे के साथ संबंध बना रही है घर की चार दिवारी के अंदर घर की बात घर में ही रह जाएगी। अगर तेरी बेटी ने भी अपनी आंखों से देख ली तो भी वह इतनी तो समझदार है कि घर की इज्जत को बाहर नहीं उठा लेगी लेकिन फिर भी उसके मन में एक बात की कसक रह जाएगी कि वह कभी सोची नहीं होगी कि वह अपनी मां को ही समझता में देखेगी,,, और अगर इसके बावजूद भी घर में पहले जैसा माहौल बनना चाहती है तो तुझे अपने बेटे की बताई युक्ति पर काम करना ही होगा,,, रानी को कि ईस खेल में शामिल करना होगा, और तुझे क्या लगता है रानी इस खेल में शामिल होने से इनकार कर देगी यह तेरी बोल है रानी पूरी तरह से जवान हो चुकी है अंदर ही अंदर उसकी भावनाएं भड़क रही होगी और ऐसे में तुम दोनों को चुदाई का मजा लेते देखकर उसकी भी भावनाएं एकदम से प्रज्वलित हो जाएगी और तेरे प्रस्ताव को वह ठुकरा नहीं पाएंगे ऐसे में तुम लोग कहीं फायदा है घर की बात घर में ही रह जाएगी और तू जब चाहे तब जमाने का मजा ले सकेगी।

(अपनी मां की बात सोचते हुए तवे पर की रोटी कब जल गई उसे पता ही नहीं चला जब उसमें से जलने की गंध आई तब वह एकदम से चौंक गई,,, और वह तवे पर से रोटी को उतार कर एक तरफ रख दी और फिर अपने मन की बात के बारे में सोचने लगी क्योंकि उसे लग रहा था कि उसकी मन सच कह रहा है और अपने मन से संतुष्टि भरा जवाब पाकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और खुशी-खुशी खाना बनाने लगी,,,,, खाना बनाते बनाते रानी नाहा कर आ गई और उसने वही कपड़े पहनी थी जो सूरज ने उसके लिए खरीद कर लाया था उसे कपड़े में रानी सच में रानी की तरह लग रही थी यह देखकर सुनैना बहुत खुश हुई और खुश होते हुए बोली।)

अरे वह रानी तू तो एकदम रानी की तरह लग रही है,,,।

सच मां,,,,, (अपनी कुर्ती को दोनों हाथ से पकड़ कर अपनी मां के सामने गोल-गोल घूमते हुए वह बोली उसके चेहरे पर की खुशी बता रही थी कि वह इस कपड़े को पहनकर कितनी खुश है. )

तो क्या मैं तुझसे झूठ बोलुंगी,,,, सूरज तेरा कितना ख्याल रखना है,,,,।

अरे हां मैं तो भैया के बारे में पूछना भूल ही गई भैया कब आए और कहां है,,, (सूरज का जिक्र होते ही एकदम से रानी सूरज के बारे में पूछने लगी तो उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली)

अपने लिए कपड़े पाकर तू तो अपने भाई को ही भूल गई,,,,, सुबह ही आया है लेकिन अभी आराम कर रहा है,,,,,।

तब तो जाने दो मैं बाद में मिल लूंगी मैं जा रही हूं अपनी सहेलियों को कपड़े दिखाने,,,।(इतना कहकर बच्चा नहीं पाती थी कि उसे आवाज देते हुएसुनैना बोली)

अरे रुक रुक,,,, बाद में चली जाना थोड़ा काम तो कर ले,,,,,,।

अरे मां में बाद में सारे काम कर लूंगी बस,,,, अभी मुझे जाने दो,,,,,।

अच्छा जा लेकिन जल्दी चली आना,,,,,।

ठीक है मां,,,, (वैसे भी रानी के पास अभी बहुत समय था क्योंकि दोपहर में नदी पर जाना था क्योंकि दोपहर में नदी पर कोई नहीं होता इस समय तो कोई ना कोई नदी पर होगा ही,,,,, रानी कपड़े दिखाने के लिए अपनी सहेली के पास चली गई और सुनैना खाना बनाने में व्यस्त हो गई,,, देखते ही देखते सूरज सर पर आ चढ़ा था। अपनी सहेलियों को अपना नया कपड़ा दिखाकर रानी घर पर वापस आ चुकी थी उसका दिल बेताब था कुंवर से मिलने के लिए,,,, इसलिए वह जल्दी-जल्दी खाना खाकर बाकी के काम करना शुरू कर दी अभी भी सूरज अपने कमरे में सो रहा था वैसे भी रानी सूरज के पास जाना नहीं चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह सूरज के पास गई तो सूरज इतनी मेहनत से पहने हुए कपड़ों को पल में ही उतार कर उसे नंगी कर देगा और फिर उसके साथ मनमानी करने लगेगा और वह इस समय ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि नहा कर वह एकदम अच्छे से तैयार हुई थी और अगर अपने भाई के कमरे में गई तो वह सारा काम बिगाड़ देगा,,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा खाना खाकर पड़ोस में समय व्यतीत करने के लिए चली गई और सारे काम निपटाकर रानी नदी की ओर जाने के लिए तैयार हो गई,,,,, जिस तरह से रानी बेताब थी कुंवर से मिलने के लिए कुंवर भी उतना ही बैठा था रानी से मिलने के लिए रानी को वहां दो-तीन मुलाकात में ही पागलों की तरह चाहने लगा था वैसे उसके मन में रानी को लेकर कोई गंदे विचार नहीं थे। वह रानी को सच्ची मोहब्बत करने लगा था,,,, तू अपनी बहन से कुछ पैसे लेकर रानी के लिए खाने का सामान लेना चाहता था क्योंकि कुंवर जानता था की रानी को समोसे और जलेबी बहुत पसंद है इसलिए वह अपनी बहन की कमरे की तरफ तैयार होकर जा रहा था ,,,। अपनी बहन के कमरे के पास पहुंचते ही अंदर से जोर-जोर से चिल्ला कर बात करने की आवाज आ रही थी यह आवाज कुंवर के जीजा मतलब की राजा साहब की थी,,,, अंदर क्या हो रहा है यह देखने के लिए कुंवर धीरे-धीरे अपनी बहन के कमरे के खिड़की के पास पहुंच गया खिड़की हल्की सी खुली हुई थी,,,,, इसी तरह से एक दिन पहले भी वह अपनी बहन के साथ अभद्र व्यवहार होते हुए देखा था ,,,, इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अपनी बहन को तकलीफ में देखकर उसका दिल बहुत दुखता था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था। आज वह देखना चाहता था कि आज किस बात पर बहस हुई है,,,। इसलिए वह धीरे-धीरे खिड़की के पास पहुंच गया था और अंदर नजर दौड़ा कर देखा तो कुछ ही देर में उसे अंदर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देने लगा,,,,,।

उसने देखा कि राजा साहब बिल्कुल निर्वस्त्र अवस्था में बिस्तर के नीचे खड़ा होकर इधर-उधर घूम रहा था और जोर-जोर से उसकी बहन पर चिल्ला रहा था उसके बदन पर बिल्कुल भी कपड़ा नहीं था और जिस तरह से वहां इधर-उधर चल रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड भी हवा में लहराता हुआ हिल रहा था,,,,, कुंवर ने देखा कि उसकी बहन ब्लाउज और पेटीकोट में बिस्तर पर बैठी हुई थी डरी सहमी सी,,,,, कुंवर को समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहां खड़ा रहे या वहां से चला जाए वैसे तो अपनी बहन से पैसे के लिए आया था लेकिन अंदर का माजरा दर्दनाक था जिसे देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कैसे हालात में वह अपनी बहन से कैसे पैसे मांगेगा तभी उसके कानों में उसकी जीजा की आवाज सुनाई दी।

हरामजादी अपनी गांड मुझे नहीं देखी तो किस देगी जब मांगता हूं तब बहाना करती है तेरी बुर ले लेकर में उब गया हुं,,,,, आज मुझे तेरी गांड चाहिए बहुत मटका मटका कर घूमती है महल में,,,,,,।

यह आप क्या कह रहे हैं,,, मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता,,,, आखिरकार तुम्हें हर तरह से सुख देने के लिए तो मैं हमेशा तैयार रहती हूं फिर छोटी सी चीज के लिए जीद क्यों कर रहे हैं,,,, (सहमी हुई आवाज में कुंवर की बहन मतलब रानी साहिबा बोली,,,,, इतने से कुंवर को समझ में आ गया था कि आखिरकार माजरा क्या है,,,, कुंवर का जीजा उसकी बहन के जिस अंग को पानी के लिए इतना तड़प रहा था कुंवर भी अच्छी तरह से जानता था कि यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं है लेकिन कुछ कर नहीं सकता था उसकी बहन की बात सुनकर राजा साहब चिल्लाते हुए बोला।)

छिनार जब छोटी सी चीज है तो दे क्यों नहीं देती,,,,।

आप भी जानते हैं कि मैं क्यो इनकार कर रही हूं,,,,।

कुछ नहीं होगा सरसों का तेल लगाकर डालूंगा बड़े आराम से चला जाएगा,,,।

बिल्कुल भी नहीं एक बार इसी तरह से आपने किया था 10 दिन तक लंगडा कर चल रही थी,,, मुझे माफ करो मैं अंदर नहीं रह सकती चाहे तो जितनी देर उतनी देर यहां पर कर सकते हो,,, (ऐसा कहते हुए कुंवर की बहन अपने दोनों टांगें खोलकर अपनी पेटीकोट को कमर तक उठा दी जिससे खिड़की में खड़े कुंवर को उसकी बहन की गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई देने लगी,,,, कुंवर अपनी बहन को ही सस्ती में नहीं देखना चाहता था इसलिए शर्मा कर वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया,,,,, उसकी हरकत पर राजा साहब अपने घंटे को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,।

टांगे किसी और के सामने फैलाना मेरे सामने तो तू घोड़ी बन जा मुझे तेरा पिछवाड़ा चाहिए,,,,।

नहीं मैं नहीं दे सकती मुझे बहुत दर्द देता है आपका बहुत मोटा और लंबा है,,,।

हरामजादी मुझसे बहस करती है मेरा समय खराब कर रही है न जाने कौन सी वह मनहुस घड़ी थी, जो मैं इस महल की रानी बनाकर तूझे लाया तू ऐसे नहीं मानने वाली,,,, (इतना कहने के साथ ही राजा साहब अपनी बीवी के साथ ही जबरदस्ती करने लगा और देखते ही देखते हो उसकी पेटीकोट को उसकी कमर तक उठाकर उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से ढेर सारा खूब अपने लंड को सुपाड़े और अपनी बीवी के गांड के छेद पर लगाकर उसे अपनी बीवी की गांड में डालने की कोशिश करने लगा कुंवर यह सब नहीं देखना चाहता था लेकिन न जाने क्यों वह अपनी बहन की बेबसी को अपनी आंखों से देखता रहा,,, एक कमजोर औरत भला एक जालिम मर्द का मुकाबला कैसे कर सकती है देखते ही देखते राजा साहब कुमार की बहन पर पूरी तरह से छा गया और उसकी खबर पकड़ कर अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,,, रानी साहिबा की चीख बता रही थी कि उसे कितना दर्द हो रहा था,,, कुंवर लाचार था वह ऐसे हालात मैं भी अपनी बहन की मदद नहीं कर सकता वह अपनी बहन की बेबसी को और ज्यादा देखा नहीं सका और अपने कमरे में आ गया,,,, अपने जीजा की हरकत से अंदर ही अंदर घुट रहा था,,,, लेकिन वह जानता था कि वह कर भी कुछ नहीं सकता था एक तो वैसे ही वह अपने बहन के ससुराल में था और अपने जीजा के टुकड़ों पर पल रहा था। लेकिन फिर भी उसके मन के एक कोने से आवाज आ रही थी कि उसे अपनी बहन की मदद करना चाहिए ऐसे नरक से उसे निकालना चाहिए लेकिन कैसे यह उसके समझ के बाहर था। व्हाट इस कमरे में था वहां भी उसकी बहन की रह रहकर चीखने की आवाज आ रही थी। लेकिन कुछ देर बाद सब कुछ शांत हो गया,,, फिर भी कुंवर की हिम्मत नहीं हो रही थी जो अपने कमरे से निकलकर अपनी बहन के कमरे तक चल जाए क्योंकि उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था अपने आप से ग्लानी हो रही थी,,,।

फिर अपने मन में सोचने लगा कि आखिरकार उसका जीजा उसकी बहन के साथ जो मर्जी आए वह कर सकता है वह उसकी बीवी है ऐसे में उसकी बहन को ही चाहिए कि वह ऐसे हालात में समझदारी से काम ले,,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर कल उसकी शादी रानी के साथ हो जाती है और वह उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए आनाकानी करेगी तो उसे भी तो गुस्सा आएगा ऐसे में घर में क्लेश बढ़ने लगेगा,,,,, मन में उठे इस तरह के ख्याल के बावजूद भी उसे कहीं ना कहीं लग रहा था कि जो इज्जत उसकी बहन को मिलनी चाहिए थी वह इस घर में नहीं मिल रही थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आज उसे रानी से मिलने भी जाना था धीरे-धीरे समय बीतता चला जा रहा था। वह हिम्मत करके अपने कमरे से बाहर निकला पर अपनी बहन के कमरे की तरफ जाने लगा। उसका भी जरूरत है उसे समझ में नहीं आया था कि अपनी बहन का सामना कैसे कर पाएगा क्योंकि जो कुछ भी उसकी बहन के साथ हुआ था वह अपनी आंखों से देखा था। लेकिन फिर भी वह देखते कुछ अपनी बहन के कमरे के दरवाजे तक पहुंच गया दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था,,,, वह अपनी बहन के सामने ऐसा जताना चाहता था कि जैसे उसे कुछ मालूम ही नहीं है इसलिए अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए वह एकदम से अपनी बहन के कमरे में दाखिल होता हुआ बोला।

दीदी क्या कर रही हो तुम,,,?

(उसकी बहन बिस्तर पर बैठी हुई थी उसके बदन पर ब्लाउज और पेटी कोट ही था,,,,, उसकी आंखों से आंसू बह रही थे। अपनी बहन को रोता हुआ देखकर वह जान बुझ कर अनजान बनता हुआ बोला,,,)

क्या हुआ दीदी तुम रो क्यों रही हो,,,?

(इतना सुनकर उसकी बहन का दर्द फुट पड़ा और वह जोर जोर से रोने लगी,,,, यह देखकर कुंवर बोला,,)

क्या हुआ दीदी तुम रो क्यों रही हो क्या हुआ मुझे बताओ,,, (इतना सुनकर वह और ज्यादा रोने लगी कुमार को तो मालूम था कि उसकी बहन क्यों रो रही है क्योंकि उसके जीजा ने उसकी गांड मार कर गया था,,, लेकिन वह खुलकर बोल नहीं सकता था । बार-बार पूछने पर वह सिर्फ इतना बोल पाई,,)

मुझे यहां से ले चल मैं यहां नर्क में और नहीं रहना चाहती,,,, मेरा दम घुटता है यहां,,,,।

लेकिन हुआ क्या दीदी यह तो बताओ,,,,।

तेरा जीजा इंसान नहीं शैतान है दुनिया की नजर में सिद्ध बना रहता है लेकिन मैं जानती हूं कि वह कितना बड़ा हारामी है,,,,।(वह रोते हुए बोल रही थी,,, कुंवर को फिर से समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह जानता था कि उसकी बहन किस लिए ऐसा बोल रही है,,, फिर भी पूछ नहीं सकता,,, फिर भी बात अपनी बहन को शांत्वना देते हुए बोला,,,/)

लेकिन हुआ क्या है दीदी यह तो बताओ,,,

मैं कुछ बात नहीं सकती बस इतना कह सकती हूं कि यह घर मेरे लायक बिल्कुल भी नहीं है,,,,।

ठीक है अगर मैं यहां से तुम्हें ले सकता हूं मां पिताजी के वहां तो वह लोग भी तो पूछेंगे ना हुआ क्या है,,? तुम उन लोगों को क्या बताओगी गांव को क्या बताओगी समाज को क्या बताओगी,,,,, 10 दिन 20 दिन 15 दिन 6 महीना जैसे-जैसे समय गुजरता जाएगा वैसे-वैसे लोग तुम पर उंगली उठाने शुरू कर देंगे कि आखिरकार अपने पति का घर छोड़कर यहां पर क्यों आए हो ऐसा भी तो कह सकते हैं कि हो सकता है किसके पति में से निकाल दिया हो क्योंकि लोगों का मुंह तो हम बंद नहीं कर सकते ना।

(अपने भाई की बात उसे अच्छी तरह से समझ में आ रही थी वह दुनिया की रीति रिवाज को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि अगर इस तरह से वह घर छोड़कर अपने मायके चली गई तो कुछ दिन तक तो ठीक रहेगा लेकिन उसके बाद लोग बातें बनाना शुरू कर देंगे,,, समाज में तरह-तरह की बातें करना शुरू हो जाएगी वह कैसे उन लोगों का जवाब दे पाएगी और वैसे भी समाज में यह प्रचलन है कि लड़की का असली घर ससुराल होता है ससुराल में चाहे जैसे भी हो उसे अपना जीवन गुजार देना चाहिए फिर अपने मन में सोचने लगी कि आखिरकार हिम्मत करके वह अपने मन को अपने पति के बारे में बता दीजिए तो उसकी मां उसका ही दोष निकालेगी क्योंकि हर हाल में अपने पति की सेवा करना और उसे खुश रखना ही पत्नी का धर्म होता है। पत्नी के संपूर्ण बदन पर पति का पूरा हक होता है वह जब चाहे जैसे चाहे वैसे उसके बदन से मजा ले सकता है। यह सब सोच कर वह अपनी किस्मत पर ही रोने लगी क्योंकि वह जानती थी कि समाज उसकी आवाज को उसकी बात को कभी नहीं समझ पाएगा इसलिए हालात से समझौता करना ही उसके पक्ष में था,,,। अपनी बहन के सामने कुंवर ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाया क्योंकि इस समय वह केवल पेटीकोटर ब्लाउज में ही थी वह धीरे से कमरे से बाहर निकल गया उसके पास कुछ पैसे थे आज उनसे ही उसे संतोष मानना था,,,,।

रानी के लिए समस्या और जलेबी खरीद कर रहा नदी पर पहुंच चुका था पहले से ही रानी नदी पर उसका इंतजार कर रही थी। कुंवर को देखते ही बहुत खुश हो गई लेकिन जानबूझकर गुस्से का नाटक करते हुए दूसरी तरफ मुंह घुमा कर बैठ गई। कुंवर जैसे ही रानी के पास पहुंचा हुआ मुस्कुरा कर बोला।

देखो रानी मैं आ गया,,,।

बहुत अच्छा किए जो आ गए वरना तो मुझे लग रहा था कि आज आने वाले ही नहीं हो,,,,।

भला ऐसे कैसे हो सकता है कि तुम बुलाओ और मैं ना आऊं,,,।

बस बातें बनाने करेंगे तुम्हें जरा भी एहसास है कि मैं कितनी देर से यहां पर तुम्हारा इंतजार कर रही हुं ।(नाराज होते हुए रानी बोली कुंवर कुछ बोलने वाला था कि तभी उसकी नजर रानी के नए वस्त्र पर पड़े और वह एकदम से उत्साहित होता हुआ बोला।)

अरे रानी,,,(रानी की कलाई पकड़ कर और उसकी हरकत पर रानी केतन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि पहली बार कुंवर ने उसकी कलाई थामा था,,, उसकी कलाई पकड़ कर रोना उसे अपने सामने ठीक से खड़ी करता हुआ बोला,) अरे वह इन कपड़ो में तो तुम स्वर्ग से उतरी हुई कोई परी लग रही हो...(इतना सुनते ही रानी मां ही मन प्रसन्न होने लगी लेकिन फिर भी अपने चेहरे पर झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

चलो रहने दो देर से आए हो इसलिए ऐसा कह रहे हो ताकि मैं नाराज ना रहूं,,,।

अरे मेरी रानी तुम नाराज रहो नाराज होने के बाद तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो लेकिन जो कुछ भी मैं कह रहा हूं तुम्हें खुश करने के लिए नहीं कह रहा हूं बल्कि मैं सच कह रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो किसने खरीदा यह कपड़े।

मेरे भैया ने शहर से लाए हैं,,,।

शहर से,,,!(शहर का नाम सुनकर कुंवर एकदम से आश्चर्य जतातें हुए बोला,,,)

हां शहर से हमारे मुखिया जी है ना मेरे भैया होने के लिए काम करते हैं तो शहर गए थे वहीं से लेकर आए हैं।

ऊमममम बहुत बढ़िया मुझे भी शहर घूमना है लेकिन कोई ले जाने वाला नहीं है,,,।

तुम चिंता मत करो जब मेरे भैया अगली बार शहर जाएंगे तो मैं उनसे कह दूंगी कि तुम्हें लेते जाए,,,,,।

क्या तुम्हारे भैया मुझे ले जाएंगे।

आखिरकार जीजा जो हो और साले का तो हक बनता है जीजा को घुमाना,,,,,।

(रानी यह बात खुद ही कहकर खुदाई शर्मा गई और भाग कर दूर पेड़ के पास जाकर खड़ी होगी कुंवर जानता था कि इस समय रानी शर्मा गई है इसलिए धीरे से उसके पास गया और बोला)

क्या सच में हम दोनों की शादी हो पाएगी,,,।

क्यों नहीं हो पाएगी देखना मैं जब यह बात अपनी मां और अपने भैया से बताऊंगी तो वह लोग झट से तैयार हो जाएंगे,,, लेकिन क्या तुम अपने घर वालों से शादी के बारे में बात कर पाओगे।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी तरफ से एकदम हां है।

(यह बात सुनकर दोनों हंसने लगे वह दोनों काफी खुश थे वहीं पेड़ की छांव में बैठकर दोनों समोसे और जलेबी खाने लगे देखते ही देखते शाम हो चली थी,,,, कुंवर के जाने का समय हो गया था रानी को भी अपने घर पहुंचना था कुंवर अगली बार मिलने का वादा करके जाने वाला था की रानी एकदम से भाव भिभोर होकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और कुंवर कहां पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उसके होठों पर चुंबन जड़ दी,,,,, रानी के लिए तो यह रोज की बातें थी लेकिन कुंवर के लिए यह पहली मर्तबा था वह एकदम से रानी की हरकत पर मस्त हो गया दोनों के होंठ आपस में सटे हुए थे,,,, कुंवर अपने कामुक को भावनाओं पर काबू करना अच्छी तरह से जानता था वह दूसरों लड़को की तरह बिल्कुल भी नहीं था लेकिन उससे पहले ही वह अपनी बहन के कमरे में जिस तरह का दृश्य देखा था भले ही वह दृश्य थोड़ा पीड़ा दायक था भावनाओं को लेकर लेकिन फिर भी मदहोश कर देने वाला दृश्य था क्योंकि उसने अपनी बहन की कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखा था राजा साहब के टनटनाए हुए लंड को देखा था और अपनी बहन की गांड कैसे अपनी घुसते हुए लंड को देखकर उसकी भावनाएं थोड़ी सी इस समय प्रज्वलित हुई थी और वह भी उत्तेजना में आकर रानी के कमर पर हाथ रखकर उसे पर अपनी हथेली का दबाव बना लिया था। दोनों के होठ अभी भी आपस में सटे हुए थे इस बीच रानी को एकदम साफ महसूस हुआ कि उसकी दोनों टांगों के बीच कुंवर का लंड ठोकर मारने लगा है,,, रानी अपने भाई के साथ मजे ले लेकर पूरी तरह से खेली खाई लड़की बन चुकी थी इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू करना अच्छी तरह से जानती थी खास कर ऐसे अवसर पर वह जानती थी कि उसके पास समय का अभाव है और इतनी जल्दी वह कुंवर के सामने अपनी जवानी परोसने नहीं चाहती थी वह अपनी हरकतों से कुंवर को और तड़पाना चाहती हूं इसलिए अगले ही पल वह एकदम से कुंवर से अलग हो गई। कुंवर भी उसे रोक नहीं पाया हालांकि उसे मजा आ रहा था और वह आगे बढ़ना चाहता था। फिर भी वह इस समय कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं था दोनों मुस्कुरा रहे थे एक दूसरे को देखकर।

और फिर रानी ही कदम पीछे ले ली और अपने गांव की तरफ जाने लगे वह बार-बार पीछे मुड़कर कुंवर को देख रही थी। कुंंवर वही खड़ा था रानी को आज कुंवर के पजामे में उसका तना हुआ लंड महसूस हुआ था उसका उभार एकदम साफ दिखाई दे रहा था। इन सब बातों से रानी अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे की आंखों से ओझल होने लगे कुंवर भी अपने महल की तरफ निकल गया था। कुछ दिन ऐसे ही गुजरने लगे सूरज अपनी मां को तड़पाने के लिए उसके साथ संबंध नहीं बना रहा था वह देखना चाहता था कि जिस तरह से हुआ तड़पता है उसकी मां भी तड़पती है कि नहीं दूसरी तरफ उसकी मां को अपने बेटे का व्यवहार अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि रोज रात को अपने बिस्तर पर सूरज का इंतजार करती थी उसे रह नहीं जाता था और वह करवटें बदलकर रात गुजार देती थी। मिलन के पहले की यही तड़प तो आपसी प्रेम को और संबंध को और भी ज्यादा गहरा बनाता है,,,,, धीरे-धीरे गर्मी का महीना खत्म हो रहा था और बरसात का महीना शुरू होने वाला था उसके पहले सुनैना अपने बेटे से घर का राशन भरवा लेना चाहती थी क्योंकि बारिश में बड़ी दिक्कत हो जाती थी और राशन लेने के लिए सूरज बाजार पहुंच चुका था। वह राशन ले रहा था इस बीच उसकी नजर एक औरत पर बराबर बनी हुई थी क्योंकि वह बाजार में इस तरह से घूम रही थी मानो जैसे वह पहली बार इंसान को देख रही हो वह साधारण सी साड़ी पहनी हुई थी लेकिन उसकी खूबसूरती बेमिसाल थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अकेले ही बाजार में आई थी सूरज राशन का सामान ले चुका था और राशन का सामान उसे राशन वाले की दुकान पर ही रख दिया था ताकि जाते समय उसे अपने साथ में ले जाए और धीरे-धीरे उसे औरत की तरफ आगे बढ़ रहा था यह जानने के लिए कि आखिरकार वह अकेली है या कोई और भी साथ में है और वह है कौन क्योंकि उसकी गतिविधि सूरज को थोड़ी शंकास्पद लग रही थी। वह सड़क के बीचो-बीच खड़ी होकर इधर-उधर देख रही थी तभी सूरज को दूर से एक बेलगाम घोड़ा जोकी देखने में जंगली ही लग रहा था वह बड़ी तेजी से दौड़ता हुआ इस सड़क पर आगे बढ़ रहा था यह देखकर सूरज एकदम से घबरा गया क्योंकि वह जानता था कि अगर वह औरत अपनी जगह से नहीं हटी तो घोड़े की टक्कर में उसे चोट लग जाएगी।

घोड़ा जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था सूरज के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह जोर-जोर से उसे औरत को हटाने के लिए बोलने लगा लेकिन वह सुन ही नहीं रही थी आखिरकार सूरज को आगे बढ़ाना पड़ा और आखिरी मौके पर वह उसे औरत को बड़ी रफ्तार से लेकर सड़क के दूसरी तरफ लुढ़क गया,,,,, घोड़ा तो तेज गति से आगे निकल गया। लेकिन उस औरत को बचाने के चक्कर में उस औरत को लेकर नीचे गिर गया लेकिन नीचे गिरते हुए भी उसे औरत को बचा लिया क्योंकि वह पीठ के बल सड़क की दूसरी तरफ गिरा था और उसने इस तरह से उस औरत को थामे हुए था कि वह औरत उसके ऊपर गिरी पड़ी थी। जल्द ही सूरज को एहसास हुआ कि वह किस अवस्था में है उसके ऊपर एक खूबसूरत औरत पसरी पड़ी थी उसके बड़े-बड़े खरबूजे ब्लाउज में होने के बावजूद भी उसकी छाती पर अपना दबाव बनाए हुए थे और आनंद खाने में गिरने की वजह से उसके ब्लाउज के ऊपर का बटन टूट गया था जिससे उसकी हाथी चूचियां उसकी छाती पर पानी भरे गुब्बारे की तरह लौटी हुई थी। यह सब कुछ अचानक हुआ था इसलिए उसे औरत को बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कभी ऐसा हुआ क्या हुआ एक जवान लड़के के ऊपर लेटी हुई थी उसकी मदद कर देने वाली जवानी सूरज के गठीले बदन पर पसरी हुई थी,,,, सूरज कुछ खूबसूरत औरत का खूबसूरत चेहरा एकदम करीब से देखा तो उसे देखा ही रहेगा ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई चांद का टुकड़ा हो और वह औरत सूरज को अच्छी तो देखते ही रह गई दोनों की आंखें आपस में टकरा रही थी दोनों उठने का नाम नहीं ले रहे थे वैसे भी सूरज उठ नहीं सकता था क्योंकि उसके ऊपर वह खूबसूरत औरत लेटी हुईथी। लेकिन तभी वहां पर एक नौजवान लड़का है जो की देखने से ही अच्छे घर का लग रहा था। वह एकदम से उसे औरत का हाथ पकड़ कर उठाते हुए बोला।

अरे दीदी यह क्या हो गया,,,? उठो तुम्हें चोट तो नहीं लगी,,,,!(इसे कहते हुए वह उस औरत को हाथ पकड़ कर उठा दिया,,, यह देखकर सूरज उसे नौजवान लड़के के सामने अपना हाथ उठा कर आगे बढ़ाया और वह नौजवान लड़का सूरज का भी हाथ पकड़ कर उसे सहारा देकर खड़ा किया दोनों कुछ बोल पाते इससे पहले ही सूरज बोला)

अपनी बहन को समझाओ की बीच बाजार में सड़क पर इस तरह से लापरवाह होकर नहीं चला जाता अभी घोड़े ने अपना काम कर दिया होता।

क्या दीदी तुम भी तुम्हें ठीक से चलना नहीं आता। अगर यह भाई साहब ना होते तो आज अनहोनी हो जाती,,,।

मेरे होते हुए अनहोनी नहीं हो सकती वैसे मेरा नाम सूरज है और मेरे पास के हीं गांव का रहने वाला हूं,,,,।

मुखिया के गांव के,,,!(एकदम खुश होता हुआ वह बोला,,, क्योंकि वह जानता था की रानी के भाई का नाम सूरज है और जिस तरह का उसने यहां पर दिलेर दिखाया था उसे पूरा यकीन हो गया था कि यही रानी का भाई है और वह ऐसा कोई बेहतर नहीं करना चाहता था जिससे सूरज की नजर में उसकी इज्जत खराब हो इसलिए वह बहुत खुश नजर आ रहा था और बड़े अच्छे से सूरत से बात करने लगा)

हां मुखिया के गांव का,,,,,,

जी मेरा नाम कुंवर है,,, और यह मेरी बहन है रानी राजा साहब को तो आप जानते हैं।

राजा साहब वह जमीदार,,,,

जी हां मेरी बहन उनकी ही बीवी है,,,।

( यह सुनते ही सूरज एकदम से एक कदम पीछे हो गया और एकदम हाथ जोड़ते हुए नमस्कार करते हुए बोला)

ओहहह हो रानी साहिबा,,,, अगर मुझसे कोई गुस्ताखी हुई हो तो माफ करना यह सब आपकी जान बचाने के लिए ही मैंने किया था,,,,(सूरज राजा साहब का अच्छी तरह से जानता था उसे मालूम था कि अगर जिस तरह से उसने रानी साहिबा को अपनी बाहों में लिया था जो कि उसकी जान बचाने के लिए यह सब किया था फिर भी अगर राजा साहिब ने समझने में देर की तो उसके लिए आफत आ सकती थी।)

कोई बात नहीं तुम्हारी बहादुरी से मैं बहुत प्रसन्न हूं। (वह खुश होते हुए बोली उसे खुश होता हुआ देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

मुझे समझ में नहीं आ रहा कि आप रानी साहिबा होने के बावजूद भी इतने साधारण वस्त्र में बाजार में क्या कर रही है।

आप नहीं समझोगे,,,,।(कुंवर मुस्कुराते हुए बोला इस बात पर कुंवर की बहन भी मुस्कुरा दी तो यह सब देखकर सूरज फिर से बोला)

अगर आप लोग समझाओगे तो जरूर समझ में आ जाएगा।

(सूरज की बात सुनकर कुंवर की बहन बोली)

देखो सूरज रानी साहिबा होने की वजह से इस तरह से मुझे खुले में और वह अकेले घूमने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं है अगर मैं अच्छे वस्त्र पहन कर आती तो शायद जिस तरह से सब कुछ सामान्य चल रहा है उसे तरह से सामान्य बिल्कुल भी नहीं चलता और वैसे भी चोर लुटेरों का डर हमेशा बना रहता है,,, हो सकता है मुझे अकेली देखकर डाकू मुझे अगवा करके ले जाए या फिर मेरे गहने लूट कर मुझे मार भी सकते हैं इसलिए मैं अकेले कभी नहीं आ पाती और सच कहूं तो मैं पहली बार ईस बाजार में आई हूं घूमने के लिए,,,,।

और ऐसा क्यों हो सकता है कि आप किस तरह की हरकत की वजह से राजा साहब आपसे नाराज हो जाए।

यही तो बात है राजा साहब 10 दिन के लिए कहीं बाहर गए हैं और इसीलिए तो मौका देखकर हम भाई बहन बाजार घूमने आए हैं।

(यह सुनकर सूरज बहुत खुश हुआ और सबसे ज्यादा खुशियों से बात की थी कि वह इतने बड़े घरों ने की खूबसूरत औरत को अपनी बाहों में लेकर लेटा हुआ था,,,,, सूरज खुश होता हुआ बोला)

कोई बात नहीं आओ मैं आप लोगों को बाजार घुमा देता हूं,,,(इतना कहकर सूरज उन दोनों को बाजार घूमने लगा और दोनों को बाजार की ताजी गरमा गरम जलेबी और समोसे भी खिलाएं,,, सूरज के आकर्षक रुप और उसके गठीले बदन को देख कर रानी साहिबा सूरज पर मोहित होने लगी थी वह सूरज को देखकर बार-बार मुस्कुरा दे रही थी सूरज की रानी साहिबा को देखकर मुस्कुरा दे रहा था लेकिन जाकर उसकी नजर उसके ब्लाउज पर चली जा रही थी क्योंकि ब्लाउज का एक बटन टूटा होने की वजह से उसकी जवानी आधी से ज्यादा दिखाई दे रही थी। लेकिन इस बात पर कुंवर की बहन बिल्कुल भी गौर नहीं कर रही थी सूरज तो उसकी मदद करने वाली जवानी से पूरी तरह से आकर्षित हो गया था वह कुछ ज्यादा ही गोरी चिट्टी थी और अपने मन में इस बात की कल्पना कर रहा था कि अगर यह औरत उसके सामने पुरे वस्त्र उतार कर नंगी खड़ी हो जाए तो उसकी तो किस्मत बन जाए। सूरज उन दोनों से बहुत सारी बातें इधर-उधर की कर रहा था कुंवर भी सूरज से खुलने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि आने वाले समय में सूरज उसका साला बनने वाला था और साले को खुश करना उसकी जिम्मेदारी थी। देखते देखते शाम ढलने लगी और भाई बहन दोनों सूरज से मुस्कुरा कर विदा लिए, सूरज उन दोनों को जाता हुआ देखता रहा और जब राशन लेने के लिए राशन की दुकान की तरफ आगे बढ़ने लगा तो उसकी नजर सड़क के दूसरी तरफ गई जहां पर वहां रानी साहिबा को लेकर गिरा था वहीं पर काम का झुमका गिरा हुआ था वह तुरंत वहां गया और कान के झुमके को उठा लिया कान का झुमका इतना खूबसूरत था कि उसे यकीन हो गया कि यह झुमका रानी साहिबा का ही है दूसरी मुलाकात के लिए यह बहाना बहुत अच्छा था इसलिए खुश होता हुआ वह उसे झुमके को अपने कुर्ते की जेब में रख लिया और राशन का सामान लेकर अपने घर की तरफ निकल गया।
 
आज का दिन सूरज के लिए और कुंवर और उसकी बहन के लिए भी बहुत अच्छा था। क्योंकि सूरज आज एक ऐसी शख्सियत को अपनी बाहों में भर लिया था जिसके बारे में कभी वह कल्पना भी नहीं कर सकता था वैसे तो जिन-जिन के साथ उसका संबंध बना था वह उसकी कल्पना के परे ही थे लेकिन राजा साहब की बीवी की बात कुछ ओर थी,,,, सूरज जब तक घर नहीं पहुंच गया तब तक उसके बारे में ही सोचता रहा राजा साहब की बीवी के लिए भी आज का अनुभव बेहद यादगार था। एक तो वह सूरज की हिम्मत और उसकी बहादुरी पर पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी और उसके मोहक रूप का आकर्षण उसके मन में बस गया था। पहली बार ऐसा लग रहा था कि वह किसी मर्द के प्रति आसक्त हुई थी,,,, और कुंवर के लिए तो यहां पर यादगार बन गया था क्योंकि अभी तक उसने रानी के भाई को कभी देखा नहीं था बस उसके बारे में सुना ही था और आज देख कर उसकी बहादुरी को अपनी आंखों से देखकर उसे लगने लगा था कि सूरज के साथ भविष्य में बहुत मजा आने वाला है,, वैसे भी वह सूरज के साथ दोस्ती मेलजोल बढ़ाना चाहता था ताकि सूरज की नजर में कुंवर हमेशा एक अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान बना रहे और वैसे भी कुंवर अच्छे व्यवहार वाला ही था।

राशन लेकर सूरज घर पर पहुंच चुका था शाम ढल चुकी थी,, खाना बना रही थी और पास में ही बैठकर रानी सब्जी काट रही थी। राशन को एक तरफ रखकर वह हाथ मुंह धो कर चारपाई को ठीक रसोई के सामने खींचकर उस पर बैठ गया और गहरी सांस लेता हुआ बोला,,।

आज खाने में क्या बन रहा है,?

सब्जी रोटी,,,, (सुनैना कुछ बोलती इससे पहले रानी ने जवाब दे दी यह सुनकर वह अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,,, वह सूरज की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)

क्यों तुझे क्या खाना था मालपुआ,,,!

हां बिल्कुल जिस तरह से मैं मेहनत करता हूं शाम को रोज मालपुआ मिल जाए तो मजा ही आ जाए,,,,।

अब भैया रोज मालपुआ तो नहीं बन सकता ना देखेंगे किसी दिन बना होगा तो मां बना देगी,,,।

लेकिन बनाती कहां है मां,,, बस देखा दाल चावल सब्जी रोटी,,,,, यह भी कोई खाना हुआ,,,,!

क्यों यह खाना नहीं हुआ सभी लोग तो यही कहते हैं रोज तुझे ही सिर्फ मालपुआ चाहिए,,,,,।

मुझे रोज मिले तो मैं रोज रगड़ डालुं(अपनी मां की तरफ देखते हुए शरारत अंदाज में सूरज बोला,,,, सुनैना कम नहीं थी, मर्दों की रसभरी बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझते थे वह समझ गई थी कि सूरज किस बारे में बात कर रहा है,,,,, इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

रोज मालपुआ खाने के लिए दम होना चाहिए,,,, एक दो बार में ही हालत खराब हो जाएगी और तू रोज रगड़ने की बात कर रहा है।

मेरे में कितना दम है यह तुम अच्छी तरह से जानती हो ना बस एक बार मौका देकर देखो रोज बनाओगी रोज मालपुआ हजम कर जाऊंगा क्योंकि मुझे मालपुआ बहुत अच्छा लगता है।

अच्छा तो क्या अच्छा लगता है तुझे मालपुआ में जो इतना पागल हुआ जा रहा है उसे खाने के लिए।

ऊममममम ,,,,, मालपुआ में जो बात है वह किसी में नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है एक तो वह कचोरी की तरह पूरी हुई होती है और बीच से उसका रस टपकते रहता है,,,, ऊममममम देखकर ही मेरे मुंह में पानी आ जाता है,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से मालपुआ के संदर्भ में सुनकर सुनैना की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी क्योंकि वह मालपुआ का नाम लेकर बुर के बारे में बात कर रहा था,,, वैसे भी तीन-चार दिन गुजर चुके थे सूरज ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था और इसीलिए सुनैना का बहुत मन कर रहा था उससे चुदवाने के लिए,,,, रानी अपने ही काम में व्यस्त थी,,, मौका देखकर गर्मी का बहाना करते हुए सुनैना अपनी साड़ी को घुटने तक ऊपर उठा दी और टांगों को हल्का सा खोल दी ताकि उसकी दोनों टांगों के बीच सूरज की नजर पड सके। और ऐसा ही होगा सूरज अपनी मां की हरकत को देख रहा था और जैसे ही उसने अपनी साड़ी को घोषणा करके उठाकर अपने टांगों को हल्का सा मोली सूरज की नजर अपने आप ही उसकी दोनों टांगों के बीच अंदर तक पहुंचाने की कोशिश करने लगी लेकिन लालटेन की पीली रोशनी उसके पेटिकोट के अंदर तक नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए सूरज भी बस इतना ही देख पा रहा था जितने तक लालटेन की पीली रोशनी पहुंच रही थी लेकिन इतना भी सुनैना के लिए बहुत था क्योंकि वह अपने बेटे का ध्यान अपनी तरफ करने में कामयाब हो गई थी। वह अपने बेटे से बोली।)

बारिश का महीना शुरू होने वाला है। कहीं घर में पानी टपकना ना शुरू हो जाए इसलिए थोड़ा बहुत मरम्मत करना बाकी है ऐसा कर कल ही मरम्मत कर दे।

अरे कल क्यों मन कहे तो इसी समय मरम्मत कर दुं,,,।(सूरज मुस्कुराते हुए भोला और उसकी मां भी समझ गई वह किस बारे में बात कर रहा है इसलिए वह शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा ली अपने आप को काम में व्यस्त करने का नाटक करते हुए बोली,,)

नहीं नहीं रात को नहीं रात को कुछ समझ में नहीं आएगा और तू कामबिगाड़ देगा।

अरे मैं तुम भी कैसी बातें कर रही हो। मरम्मत रात को भी हो सकती है मैं तो टटोलकर ही काम चला लूंगा कहो तो अभी मरम्मत कर दुं।

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,, अभी कुछ नहीं करना है,,,, खाना बनने वाला है खाना खाकर सो जा।

हां यह तुमने ठीक कहीं वैसे भी दिन भर की थकान से रात को नींद बहुत अच्छी आती है।

ऊमममम तू बस नींद लेने के लिए ही बना है तेरी उम्र के लड़के रात दिन जागते हैं काम करते हैं,, और एक तू है कि बस सोता ही रहता है।

( सूरज अपनी मां की लाचारी को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि तीन-चार दिन उसने अपनी मां पर ध्यान नहीं दिया है इसलिए उसकी मां उसके साथ शिकायत कर रही है बस यही तो वह देखना चाहता था उसे आज अपनी मन में एक औरत की तड़प दिखाई दे रही थी जो एक मर्द के साथ संबंध बनाने के लिए ललाईत थी,, इस बात से सूरज मैन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था और प्रसन्न होते हुए बोला)

कहो तो मैं भी दिन भर रात भर जागता रहूं लेकिन रात भर जाग कर करूंगा क्या रात को काम करने जैसा होता क्या है,,,,?

(रानी अपनी जगह से उठकर बाहर पानी लेने के लिए चलेगी और उसके जाते ही अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए सुनैना बोली)

मर्द रात को ही काम करते हैं और असली मर्द वही होता है जो रात भर जाकर काम करता है बाकी सब बेकार होते हैं अब तू ही अंदाजा लगा लेकिन तू बेकार वाला मर्द है या सचमुच का मर्द है।

यह तो तुम ही बता सकती हो कि मैं कैसा मर्द हुं,,,,,।

मैं क्या जानू कि तू कैसा मर्द है यह तो बताया नहीं जाता साबित किया जाता है। (अपने बेटे से नजर बचाकर वह मुस्कुराते हुए अपने मन की बात बता रही थी)

लगता है ठीक तरह से मर्दानगी देख नहीं पाई हो,,, तुम्हें असली मर्दानगी दिखानी होगी,,,।

दिखा दे तुझे रोका किसने है,,,,,।

(बातचीत आगे बढ़ पाती ईससे पहले ही रानी पानी लेकर आ गई,,, और फिर इस तरह की बात करने का मौका नहीं मिला,,तीनों खाना खाने बैठ गए सुनैना खाना खाने के लिए बैठने से पहले अपने ब्लाउज के ऊपर का दो बटन खोल चुकी थी ताकि अपने बेटे को अपनी जवानी दिखा सके,,,,, सुनैना यह सब करना नहीं चाहती थी लेकिन तीन-चार दिनों की दूरी है उसे मजबूर कर दिया था यह सब करने के लिए वह अपने बेटे को रिहाना चाहती थी ताकि आज की रात जी भर कर वह उसकी जवानी पर बरसे,,, तीनों बैठकर खाना खाने दे तभी सूरज की नजर अपनी मां पर पड़ी शाडी का पल्लू कंधे से नीचे सरका हुआ था और सूरज को अपनी मां की मदद कर देने वाली छाती एकदम साफ दिखाई दे रही थी रानी दोनों के बीच में बैठी हुई थी इसलिए वह अपनी मां की तरफ देखा नहीं पा रही थी ऊपर के दो ब्लाउज के बटन खुले होने की वजह से सुनैना की आधी से ज्यादा चूचियां एकदम से लालटेन की पीली रोशनी में उजागर हो रही थी जिसे देखकर सूरज के पजामे में हलचल हो रही थी,,,, खाना खाते समय सूरज अपनी मां की चूचियों को देख रहा था और सुनैना अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, दोनों की नजरे आपस में टकराई तो सूरज उत्तेजना के मारे अपने होंठ को अपने दांत से काटकर इशारा करने लगा कि वह कितना तड़प रहा है उसके साथ संबंध बनाने के लिए,,,, सुनैना भी रानी से नजर बचाकर एक हाथ अपनी पेटीकोट में डालकर अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी बर को मसलते हुए मदहोश कर देने वाला चेहरा बनाते हुए अपने मन की मनसा को जता रही थी आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी। जिस तरह की तड़प सूरज अपनी मां के चेहरे पर देखना चाहता था वही तड़प उसे देखने को मिल रही थी वह समझ गया था कि उसकी मां कितनी चुदवासी है।

थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,,,, रानी बर्तन साफ करने के लिए बैठ गई थी और सुनैना पेशाब करने के लिए घर से बाहर निकल गई थी अपनी मां को बाहर जाते हुए देखकर सूरज भी मौका देखकर अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया,,,,, सुनैना घर के बगल सटे हुए जगह के पीछे की तरफ चली गई थी जहां पर अक्सर वह पेशाब करने के लिए जाती थी ,,, उसे नहीं मालूम था कि उसके पीछे-पीछे सूरज भी आ रहा है वह थोड़ी दूर झाड़ियां के पास पहुंचकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर सूरज के लंड को खड़ा होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा। वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठी इससे पहले ही सूरज पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,,,युं एकाएक पीछे से पकड़े जाने की वजह से सुनैना एकदम से घबरा गई और पीछे नजर घुमा कर देखने लगी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वह अपने बेटे की बाहों में है वह निश्चित हो गई,,,,, वह कुछ कह पाती इससे पहले ही सूरज अपनी मां को पीछे से बाहों में भरने से पहले अपने पजामी को घुटनों तक नीचे खींच दिया था जिसकी वजह से उसका नंगा लंड गांड की दरार में फंसकर कर इधर-उधर रगड़ खाने लगा था। मोटे तगड़े लंड की रगड़ से सुनैना मदहोश होने लगी और कुछ बोल ही नहीं पाई और सूरज ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाता हुआ बराबर अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था सुनैना मदहोश होने लगी थी उत्तेजित होने लगी थी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि चार दिन बाद जो यह मिलन हो रहा था वह इसकी खुशी को बात नहीं सकती थी बस अपनी हरकतों से जाहिर कर सकती थी और वह ऐसा कर भी रही थी अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल पीछे से घूमाते हुए अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे की हरकत का मजा ले रही थी,,, सूरज को भी अपनी मां की तरफ से यह प्रतिक्रिया काफी लुभावनी लग रही थी उसे मजा आ रहा था वह उत्तेजना में जोर-जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था।

सहहहहह,,,, आहहहहहह,,,,,ऊममममम सससससुरज बेटे,,,,,ऊमममममममम ,,,,,,, कहीं रानी आ गई तो,,,,,,,।

अभी नहीं आएगी अभी वह बर्तन मांज रही है उसे समय लगेगा तब तक हम अपना काम निपटा लेंगे,,,।

यहां,,,,,सहहहहहहहह ,,,,,,,,,, मेरे कमरे में आना,,,,, दरवाजा खुला रखूंगी,,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,,।

लेकिन मेरा तो अभी मैं तुम्हारी लेने की,,,,,, तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,।

ऊमममममम सहहहहहहहह मैं भी तो पागल हुए जा रही हूं इसीलिए तो कह रहा हूं कमरे में आना बहुत अच्छे से दूंगी,,,,,,सहहहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,।

लेकिन अभी मेरा बहुत मन कर रहा है तुम्हारा लेने का,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां को घुमा दिया जिसकी वजह से दोनों का चेहरा आमने-सामने हो गया और सुनैना कुछ समझ पाती से पहले ही अंकित अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को पकड़ कर उसे ऊपर उठाकर अपनी कमर से लपेट दिया,,,, जिससे सुरज का टनटनाया लंड सुनैना की बुर के ईर्द-गिर्द ठोकर मारने लगा वह बुर के अंदर अपने आप घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन असफल हो जा रहा था। क्योंकि उसे सुनैना का गुलाबी छेद समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी सुनैना की पनीयाई बुर की वजह से उसका सपाट मैदान पूरी तरह से फिसलन भरा था। जिससे बार-बार गुलाबी छेद के पास आकर भी सूरज के लंड का सुपड़ा फिसल जा रहा था और सुनैना तड़प जा रही थी। सूरज से भी रहा नहीं जा रहा था, सूरज अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसका रसपान करते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले गया और अपने लंड को पकड़ कर अपने मोटे सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद से सटा दिया,,,, गर्माहट भरे सुपाड़े को अपनी भट्टी की तरह तपती हुई बुर पर महसूस करके सुनैना पानी पानी हो गई खुद ही उसकी कमर आगे पीछे होने लगी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी लेकिन बिना सूरज के सहकार के सुनैना के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था इसलिए सूरज अपने हाथ से ही अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में हल्का सा प्रवेश कराते हुए अपने दोनों हथेलियां को अपनी मां के पिछवाड़े पर रख दिया और उसे अपनी तरफ खींचता हुआ अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर में उतर जाने दिया,,,,।

सूरज का मोटा तगड़ा गरम लंड,, बुर की अंदरूनी व्याधियों को एक तरफ धकेलते हुए अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता चला जा रहा था और अपने बेटे के लंड की हरकत की वजह से सुनैना गदगद हुए जा रही थी देखते ही देखते सूरज का मोटा तगड़े लंड का सुपड़ा सुना के बच्चेदानी तक पहुंच गया जिसकी वजह से सुनैना का मुंह खुला का खुला रह गया और सूरज अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से थामे हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया,,,,, चार दिनों बाद एक बार फिर से सुनैना को जन्नत का मजा मिल रहा था सुनैना एकदम मदहोश हुए जा रही थी अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे के हर एक धक्के का आनंद ले रही थी,,,, मौके की नजाकत को सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी बहन बर्तन साफ कर रही थी किसी भी वक्त हुआ बर्तन साफ करके पेशाब करने के लिए इधर आने वाली थी इसलिए सूरज बिना रुके अपनी कमर की रफ्तार को रोके बिना अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,, अपनी मां को छोड़ने की रफ्तार तेज गति से सूरज कर रहा था सुनैना के मुंह से कोई शब्द फुट नहीं रहे थे और अगर कोई शब्द निकल भी रहा था तो उन शब्दों में कंपन इतना था कि वह क्या कहना चाह रही है उसे समझ पाना बड़ा मुश्किल था। बाकी कुल मिलाकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी पर छा चुका था और अपनी मां की बेलगाम जवानी पर काबू कर चुका था। अपनी मां के भारी भरकम पिछवाड़े को दोनों हाथों से थाने हुए जिस तरह से सूरज धक्के पर धक्का लगा रहा था सुनैना अपने बेटे की मर्दानगी की और उसकी कलाबाजी को देखकर गदगद हुए जा रही थी,,,, सूरज किसी भी तरह से पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था। और फिर देखते ही देखते मां बेटे दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी दोनों के बदन की आंकड़े बढ़ने लगी दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे जिसके चलते सूरज ने अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से और ज्यादा कस के दबोच लिया और रह रहकर चोर चोर से धक्के लगाने लगा अपनी मां की बुर में इतनी जोर से धक्के लगा रहा था कि मानो बुर में डालकर वह अपने लंड को गांड से बाहर निकाल देगा हर एक धक्का सुनैना के बच्चेदानी है पर ठोकर मार रहा था वह एकदम करते हुए जा रही थी पानी पानी हुए जा रही थी और फिर देखते ही देखते सूरज का गम लव सुनैना की गुलाबी बुर में गिरने लगा इस मदहोश कर देने वाले पल में सुनैना भी झड़ने लगी मां बेटे दोनों एक साथ झड़ रहे थे।

अपनी मां की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के साड़ी से उसे सांप की और फिर अपने पजामे को ऊपर खींच लिया,,,, सुनैना संतुष्ट हो चुकी थी तृप्त हो चुकी थी लेकिन उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह सूरज को वहां से जाने के लिए क्योंकि अब किसी भी वक्त रानी वहां आ सकती थी इसलिए सूरज भी वहां रुकना ठीक नहीं समझा और वहां से चला गया अपने बेटे के जाते हैं सुनैना पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और फिर पेशाब करने के बाद वजह से ही बाहर निकली तब तक देखी कि दरवाजे से रानी बाहर निकल रही थी वह अपने मन में सोचने लगी कि सही समय पर उसने सूरज को वहां से हटा दी वरना रानी को शक होने लगता,,,,, पास में ही गुसलखाना था सुनैना उसमें जाकर हाथ मुंह धोने लगी और रानी पेशाब करने के लिए चली गई थोड़ी देर बाद सुनैना अपने कमरे में पहुंच चुकी थी लेकिन कमरे में पहुंचकर उसने अपने दरवाजा बंद नहीं की थी दरवाजा बंद करने के बावजूद उस पर कुंडी नहीं लगाई थी क्योंकि उसे यकीन था कि सूरज उसके कमरे में जरूर आएगा,,, सूरज अपनी मां की चुदाई करने के बाद अपनी बहन के कमरे में भी नहीं गया था वह सीधा अपने कमरे में जाकर सो गया था,,,,,।

सुबह होने में अभी कुछ समय बाकी था बड़ी जोरों की पेशाब लगने की वजह से सूरज की आंख खुली तो वह देखा कि वह अपने कमरे में ही सो रहा था जबकि वह अपनी मां के कमरे में जाना चाहता था लेकिन कुछ देर के लिए अपने चारपाई पर लाकर इंतजार कर रहा था और न जाने कब उसकी आंख लग गई थी। वह उठकर चारपाई पर बैठ गया और अपने कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो अभी अंधेरा था वह धीरे से अपनी मां के कमरे की तरफ देखा दरवाजा बंद था वह देखना चाहता था कि उसकी मां रात को उसका इंतजार कर रही थी कि नहीं इसलिए दरवाजे के पास जाकर दरवाजे को पड़कर हल्का सा अंदर की तरफ धक्का दिया तो दरवाजा अपने आप खुल गया और उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,, क्योंकि रात भर उसकी मां दरवाजा खुला रख कर उसका इंतजार कर रही थी। अपनी मां के कमरे में ना जाकर के वाहन धीरे से घर के बाहर आ गया पेशाब करने के लिए क्योंकि बड़े जोरों की पेशाब लगे होने की वजह से वह अपनी मां के साथ हम बिस्तर होना नहीं चाहता था क्योंकि ऐसे में उसकी मां चुदाई में नहीं लगता बार-बार उसकी मां पेशाब करने को जाने को करता इसलिए वह पहले इस काम को निपटाना चाहता था और पेशाब करने के बाद वह धीरे से घर में दाखिल हुआ धीरे से दरवाजा बंद किया ताकी रानी की आंख ना खुल जाए,,, और एक बार तसल्ली करने के लिए वह अपनी बहन के कमरे के पास गया और उसके दरवाजे को भी धीरे से अंदर की तरफ धक्का दिया तो वह भी खुल गया यह देखकर उसके होठों पर फिर से मुस्कान तैरने लगी क्योंकि मां बेटी दोनों रात भर चुदवाने के लिए तैयार थी,,,। वह धीरे से दरवाजे की कड़ी लगा दिया ताकि रानी इस समय बाहर निकलना चाहे तो निकल ना पाए और उसे पता चल जाए की रानी जाग गई है और वह सही समय पर अपने कमरे में चला जाए,,,,,।

सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक तौर पर उसका लंड कुछ ज्यादा ही टनटनाया हुआ था,,, वह जल्दी से अपनी काम के कमरे के पास गया और धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर की तरफ देखने लगा बिस्तर पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई,, क्योंकि उसकी मां घुटनों को मोड कर लेती हुई थी वह गहरी नींद में सो रही थी और उसकी साड़ी सरक कर उसकी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हो गई थी जिसकी वजह से उसकी मोटी मोटी गोरी जांघें एकदम साफ दिखाई दे रही थी जो की लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी,,,, ऐसी हालत में अगर उसे कोई भी देखा तो बिना कहे उसका लंड खड़ा हो जाता और यहां तो सूरज का लंड पहले से ही खड़ा था। कुछ देर तक वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर मस्त होता रहा लेकिन उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी जिसके साथ वह मजा लेने वाला था। सूरज बिना आवाज की अपनी मां की चारपाई के करीब आगे बढ़ने लगा वह तो बेसुध होकर सो रही थी अपने ही बेटे के इंतजार में करोड़ बदलकर कब सो गई उसे खुद को पता नहीं चला,,,, अपनी मां की मोटी मोटी नंगी जांघों को देखकर सूरज की आंखों में हवस की चमक बढ़ती जा रही थी देखते देखते वह अपनी मां के करीब चारपाई पर बैठ गया,,, उसकी मां को बिल्कुल आभास तक नहीं हो रहा था कि उसके कमरे में उसका बेटा सुबह के पैर में घुस आया था। और वैसे भी सुबह के पैर में कुछ ज्यादा ही नींद लगती है नींद गहरी हो जाती है और इसी अवस्था में सुनैना भी नींद का आनंद ले रही थी। वैसे तो सूरज भी इस पहर में गहरी नींद में सो जाता था लेकिन आज की बात कुछ और थी।

सुनैना गहरी गहरी सांस ले रही थी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसकी मोटी मोटी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लोटी हुई थी,,, जो की सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और यह सब देखकर सूरज का हौसला बुलंद हो रहा था उसका धैर्य जवाब दे रहा था उसे रहा नहीं गया और वह उत्तेजना से अपने सूखे गले को अपने ही थुक से गिला करने की कोशिश करते हुए अपनी मां की मोटी मोटी जांघों पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा,,,,, इस तरह की हरकत करते हुए सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने को उतारू था। लालटेन की पीली रोशनी में सुनैना की मदहोश कर देने वाली जवानी चमक रही थी। सूरज पहले भी अपनी मां की गदराई जवानी का भोग लगा चुका था लेकिन हर बार एक नया अनुभव उसे अपनी मां से मिल रहा था। आज उसके लिए पहला मौका था जब वह किसी की चुदाई करने के लिए सुबह के पहर में अपने कमरे से बाहर निकला था और वह कोई और नहीं बल्कि उसकी मां थी जो की गहरी नींद में सो रही थी,,, उत्तेजना से सूरज की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की मोटी जांघों पर अपनी हथेली रखकर उसे सहला रहा था,,, और अपनी मां को जगाने की कोशिश कर रहा था,,,, लेकिन वह बेसुध होकर गहरी नींद में सोई हुई थी और फिर सूरज ने अपनी मां को जगाने का एक नया तरीका खोज निकाला,,,, वह धीरे से फिर से चारपाई से उठकर खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गया,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था कमरे के अंदर सोई हुई सुनैना अर्धनग्न अवस्था में थी वैसे तो उसके बदन पर पूरे कपड़े थे लेकिन अस्तव्यवस्त हालत में जिसकी वजह से उसकी गर्म जवानी झलक रही थी जिसे देखकर सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था। सूरज के सांस गहरी चल रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत लेटी हुई थी जिसकी टांगे मुड़ी हुई थी और साड़ी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हुई थी,,,, धीरे से सूरज सुनैना के बिस्तर पर चढ़ गया बिल्कुल भी आवाज किए बिना क्योंकि वह जानता था कि ऐसे हालात में अगर उसकी मां की नींद खुल गई तो वह घबरा जाएगी,,,, और हो सकता है कि वह शोर मचा दे इसलिए वह अपनी मां को काबू में करने का नया उपाय खोज लिया था।

देखते देखते वह बिस्तर पर चढ़कर अपनी मां की दोनों टांगों को धीरे से खोल दिया टांगों को खोलते ही सुनैना की गुलाबी पर एकदम से झलकने लगी जिस पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी,,,, सब कुछ लालटेन की पीली रोशनी में साफ-साफ दिखाई दे रहा था ज्यादा मसक्कत करने की जरूरत नहीं थी,,,, सूरज नजर भर कर अपनी मां की गुलाबी बुर को देख रहा था,,,,, जोकि रात को सोने से पहले इसके अंदर अपना लंड डालकर पानी पानी कर दिया था। सूरज एक नजर अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा जो कि सोते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और फिर धीरे से अपने प्यास होठों को अपनी मां की लसलसाई बुर की तरफ आगे बढ़ाने लगा जैसे-जैसे सूरज के होंठ सुनैना की बुर की तरफ आगे बढ़ रहे थे वैसे-वैसे उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,,, और फिर अगले ही पल सूरज के प्यासे होठ एकदम से उसकी मां की गर्म बुर पर स्पर्श होने लगे,,, लेकिन अभी भी सुनैना पर बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह गहरी नींद में सोई हुई थी उसे नहीं मालूम था की चोरी चुपके उसका बेटा उसके कमरे में दाखिल होकर उसकी जवानी का रस चाटने वाला है,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बर पर रगड़ता रहा लेकिन नींद में होने के बावजूद भी उसका खूबसूरत बदन उसकी गुलाबी बुर अंकित के जवान होठों की हरकत की प्रतिक्रिया दे रही थी। उसमें से मदन रस का बहाव हो रहा था,,, गहरी नींद में होने की वजह से भले ही अपने बेटे की कामुक हरकत की वजह से सुनैना का बदन ऊपरी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है लेकिन अपने आप ही उसके अंदरूनी हिस्सों से सूरज को बराबर सहकार मिल रहा था। सूरज अपनी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस को चाटना शुरू कर दिया,,,, और इस बार सुनैना के बदन में हलचल महसूस होने लगी,,, उसका बदन गनगनाने लगा। और अब सूरज रुकने वाला नहीं था। पागलों की तरह अपने होठों को एकदम से खोलकर अपनी मां के संपूर्ण बुर के आकार को अपने मुंह में भर लिया, और उसे एकदम से नोचने लगा,,,, इतने से सुनैना की नींद खुल गई और वह एकदम से घबरा गई,,,, वह लेटे-लेटे ही पीछे हटना चाहती थी लेकिन सूरज दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थामे हुए था जिसे वह ऊपर की तरफ सरक नहीं पाई,,, सूरज अपना कार्य जारी रखे हुए था सुनैना की सांस उखड़ चुकी थी वह घबराई हुई अपनी टांगों के बीच देख रही थी लेकिन जैसे ही उसे हिसाब सुबह की उसकी टांगों के बीच कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा सूरज है तब उसकी जान में जान आई।

धत् मैं तो डर गई,,,, कि यह कौन आ गया,,?

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,, मैं रात भर तेरा इंतजार कर रही थी अब जाकर तू आया है,,,,, कितना समय हो रहा है,,,,।

सुबह होने वाली है,,,(जवाब देने के लिए सूरज कुछ पल के लिए अपने मुंह में से अपनी मां की बुर को छोड़ दिया और इतना कहने के बाद फिर से अपनी हरकत को आगे बढ़ाने लगा लेकिन सुबह होने की बात सुनते ही,,,, वह एकदम से घबरा गई और बोली,,,,।

रानी कहां है,,,?

घबराओ मत अभी सुबह होने में काफी समय बाकी है अभी बाहर अंधेरा ही है,,,,,(इतना कहने के लिए सूरज ने फिर से अपनी मां की बुर को अपने मुंह से बाहर निकाला और फिर इतना कहने के बाद तुरंत मुंह में भरकर चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुनैना फिर से मदहोश हो गई और गहरी सांस लेते हुए बोली)

मैं तो डर ही गई थी,,,,,,, और तुझे अभी समय मिला रात भर दरवाजा खुला छोड़ कर सोई झांकने तक नहीं आया अभी कैसे आ गया,,,,,, चल अब आ गया है तो अच्छे से चाट,,,,, रात को जल्दबाजी में पीछे से काम निपटा दिया,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,,,(सुनैना एकदम मदहोश होती हुई अपनी दोनों टांगों को और ज्यादा खोलकर अपने दोनों हाथ को अपने बेटे के सर पर रख दी और अपनी बुर पर उसके होठों का दबाव बढ़ने लगी और खुद भी अपनी कमरको ऊपर की तरफ उचकाने लगी,,,,,, खटिया पर सुनैना की मदहोशी एकदम साफ झलक रही थी,,,,, सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से सूरज अपनी मां को मस्त करता रहा और खुद भी मजा लेता रहा,,,, और फिर धीरे से अपनी मां की टांगों के बीच से हटाओ और घुटनों के बल ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, सुनैना को आप एहसास हुआ कि उसका बेटा पूरी तरह से निर्वस्त्र था मतलब साथ था कि वह उसके कमरे में आकर बहुत कुछ किया था,,,, देखते ही देखते सूरज अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रगड़ने लगा अपने बेटे का इशारा समझ कर वह धीरे से अपने लाल लाल होठों को खोल दिया और अपने बेटे के सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से सूरज एकदम से मदहोश हो गया,,,,, उसके मुंह से भी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी उसे बड़ा मजा आ रहा था। अपनी मां से लंड चुस्वाने के साथ वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी मां की बुर पर हथेली से जोर-जोर से रगड़ रहा था गर्म कर रहा था और उसकी हरकत का जवाब देते हुए सुनैना अपने मुंह को आगे पीछे करके अपने बेटे को मजा दे रही थी।

लालटेन की पीली रोशनी पर्याप्त थी इस कमरे को रोशन बनाने के लिए क्योंकि सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था यह सिलसिला कुछ देर तक इसी तरह से चलता रहा। लेकिन अब समय आ गया था चुदाई करने का क्योंकि अब सूरज से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और धीरे-धीरे समय आगे भी बढ़ रहा था कुछ ही देर में उजला होने वाला था इसलिए सूरज एकदम से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया, जिससे सुनैना की भारी भरकम आधी गांड सूरज की जांघों पर आ गई और सुनैना की बुर सूरज के लंड के बेहद करीब आ गई,,, सुनैना की गुलाबी बर को देखकर सूरज का लंड सलामी भरने लगा वह अपने आप ही ऊपर नीचे होकर हिल रहा था और सच में ऐसा लग रहा था कि जैसे अपनी मां की जवानी देखकर वह सलामी दे रहा हो,,,, गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देख कर सूरज अपनी अकेली को एक बार अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ज़ोर से दबोचते हुए बोला।

सहहहहह बहुत गर्म बुर है तेरी,,,,सहहहहहह ऊमममममम आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा और उसे पर हथौड़े की तरह सुपाड़े का वार करने लगा जिससे सुनैना एकदम से मदहोश होने लगी,,, और फिर देखते ही देखते अपने लंड को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराने लगा,,,, लालटेन की पीली रोशनी में यह मनमोहन रूप और भी ज्यादा उत्तेजक लग रहा था सुनैना भी अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देख रही थी जैसे-जैसे लंड बुर के अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे सुनैना के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे कभी दर्द की रेखाएं खींच जाती तो कभी उत्तेजना और मदहोशी की आभा से पूरा चेहरा तमतमा उठता,,,, धीरे-धीरे करके सूरज अपने समुचे लंड को अपनी मां की बुर में डाल दिया था,,, और फिर अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सूरज अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,,, अभी शाम ढलने के बाद ही खाना बनाते समय ईसी कसमकस में थी कि इस रिश्ते को आगे बढ़ाया जाए या इसे यहीं खत्म कर दिया जाए,,,, सुनैना जानती थी कि आप उसे अपने आप पर काबू नहीं हो पाएगा इसलिए वह अपने मन की बात सुनी थी और इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की ठान ली थी और नतीजा यह था कि सुबह-सुबह ही वह अपने बेटे से चुदाई का सुख भोग रही थी। हर धक्के का मजा लूट रही थी,,, अभी तक सूरज अपनी मां की ब्लाउज का बटन नहीं खोला था बस ऐसे ही वह अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था लेकिन धक्के लगाते समय वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था जिसका पहले से ही दो बटन खुला हुआ था।

ब्लाउज के सारे बटन खोलते ही सुनैना की नंगी जवानी एकदम से लहराने लगी जिसे सूरज अपने दोनों हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते सुनैना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी लेकिन हीरोइन की बात यह थी कि वह अपनी सिसकारी की आवाज को दबाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी,,, बल्कि बड़ी आनंदित होकर वह शिसकारी भर रही थी। सूरज के हर एक धक्के में उसे मजा मिल रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुई जा रही थी सुबह-सुबह ही आज उसका पूरा दिन बन गया था। मदहोशी में डूबा हुआ सूरज जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था। उसने बहुत सी औरतों की चुदाई किया था लेकिन जो सुख उसे अपनी मां को चोदने में मिलता था वह सुख उसे किसी और औरत में बिल्कुल भी नहीं मिलता था वरना उसकी बहन का भी दरवाजा खुला हुआ था लेकिन वह जवानी से भरी हुई अपनी बहन को नहीं चोदा और अपनी मां के कमरे में आ गया क्योंकि वह जानता था कि यहां पर ही असली सुख मिलने वाला है और असली सुख ले भी रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला अपने बेटे की बात मानते हुए सुनैना पलट गई और घुटनों के बल होकर घोड़ी बन गई उसकी लहराती हुई बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगाता हुआ सूरज फिर से अपने लंड को अपनी मां के बुर में डाल दिया और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाने लगा और यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर दिया और अपनी मां को संतुष्ट करने के बाद उसका खुद का पानी निकल गया,,,, सुबह-सुबह ही मां बेटे दोनों दिन की शुरुआत चुदाई से किए थे दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे सूरज चारपाई से नीचे उतरा और बाहर की तरफ देखा तो धीरे-धीरे उजाला हो रहा था वह जल्दी से अपने कपड़े पहनकर बिना कुछ बोले अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया और धीरे से जाकर अपनी बहन के कमरे के दरवाजे की कड़ी खोल दिया और फिर अपने कमरे में आकर ले लिया क्योंकि इतनी सुबह उठने की उसकी आदत नहीं थी बहुत जरूरी काम होता था तभी वह सुबह उठता था और अगर उसे पेशाब ना लगा होता तो इतना मज़ा वह सुबह-सुबह नहीं ले पाता,,, लेकिन अपने कमरे में आते ही सबसे पहले वह रानी साहिबा के कान के झुमके को दीवार में बनी दरार में छुपाने लगा क्योंकि वह भूल चुका था कि उसके कुर्ते की जेब में रानी साहिबा का झुमका है जो कि अपनी मां के कमरे में कपड़ा उतारते समय झुमका वहीं गिर गया था अच्छा हुआ कि उसकी मां की नजर नहीं पड़ी थी। वरना वह अपनी मां के सवालों का क्या जवाब देता क्योंकि यही तो एक बहाना था रानी साहिबा से दोबारा मुलाकात करने का और वैसे भी राजा साहब अभी घर पर नहीं थे यह बात रानी साहिबा खुद बताई थी यही सही मौका था उससे मेलजोल बढ़ाने का वैसे तो इस मेल जोल में खतरा भी बहुत था लेकिन एक बात तो अच्छी तरह से जानता था कि डर के आगे जीत है। झुमके को छुपा कर वह फिर से खटिया पर लेट गया।
 
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