Incest पहाडी मौसम - Page 15 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

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जब रानी घर पर वापस आई कैसे पता चला कि उसका भाई उसके लिए कपड़े लेकर आया है। सुनैना रानी को कपड़े दिखाने लगी कपड़े देखकर रानी बहुत खुश हो गई,,,, अपने भाई से मिले बिना ही नहाने के लिए चली गई क्योंकि आज के लिए उसका दिन बहुत खास था आज नदी पर फिर से कुंवर जो आने वाला था आज उसकी कुंवर से मुलाकात होने वाली थी,,,, उसे जाता हुआ देखकर सुनैना के मन में बहुत अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे,,,वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर सच में कभी रानी ने उन दोनों को संभोग रत अवस्था में देख ली तो क्या होगा और ऐसे हालात में सूरज ने जो कदम उठाने को कहा है अगर ऐसा कदम उठा लिया तब तो घर में लाज शर्म मान मर्यादा सब कुछ खत्म हो जाएगा अपने मन में उतरे सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोली कि वैसे भी अब घर में लाज शर्म रह कहां गई है,,, अपने ही बेटे के साथ चुदाई का सुख प्राप्त करके रिश्तो की दीवार को वह खुद ही गिरा चुकी है अगर ऐसे में सच में रानी उन दोनों कोई समस्या में देख लेगी तो गजब हो जाएगा,,, ऐसे हालात से निपटने के लिए सूरज ने जो उपाय बताया था वही एक ईसका असली इलाज था।

फिर भी खाना बनाते हुए सुनैना सच में पड़ गई थी कि अगर इसके लिए रानी तैयार नहीं हुई तो क्या होगा ऐसे हालत में तो वह अपनी ही बेटी की नजर में गिर जाएगी,,,, नहीं नहीं अगर ऐसा हुआ तो गजब हो जाएगा रोटी बनाते समय सुनैना अपने मन में उसे ख्याल से अंदर ही अंदर घबरा गई थी,,, उसे लगने लगा था कि आज नहीं तो कल मां बेटे दोनों पकड़े ही जाएंगे बाहर किसी को भले कानों कान खबर तक नहीं होगी लेकिन घर के अंदर तो कभी ना कभी रानी की नजर पड़ ही जाएगी,,,, तब तो गजब हो जाएगा रानी क्या सोचेगी,,,, यह सब सोच कर सुनैना अपने आप से ही बोली नहीं अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मुझे सूरज से दूरी बनाकर रखनी होगी जो कुछ होना था हो गया लेकिन अब इससे ज्यादा नहीं होने दूंगी,,,, (ऐसा वह अपने मन में सोच कर तवे पर फूली हुई रोटी को उतार कर दूसरी रोटी उसे पर चढ़ा दी और फिर अपने आप से ही बोली।) लेकिन क्या अब तु सूरज के बिना रह पाएगी,,, एक मां होने के नाते भले ही तो अपनी गलती को दोबारा नहीं दोहराएगी लेकिन एक औरत होने के नाते क्या तू अपने आप को रोक पाएगी अपनी भावनाओं को काबू में कर पाएगी जिस तरह का सुख तुझे अपने बेटे से मिला है क्या तू उसे सुख से नजर हटा पाएगी क्या तेरा बदन नहीं चाहेगा उसे तरह का सुख फिर से प्राप्त करने के लिए अभी तो तू अपने बेटे से ठीक तरह से मजा भी नहीं ले पाएंगे अभी तो शुरुआत है और ऐसे में तू अपने आप पर काबू कैसे कर पाएगी अपने बेटे का ख्याल आते ही तेरे बदन में हलचल होने लगती है, टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस का बहाव शुरू हो जाता है ऐसे में तो अपने आप को कैसे संभाल पाएगी और अगर तू अपने बेटे से इस तरह के संबंध को नहीं भी बनती है तो भी तेरे मन में उठ रही जवानी की उम्र को कैसे संभाल पाएगी ऐसे हालात में मुमकिन है कि तू किसी गैर मर्द के साथ संबंध बना बैठेगी और किसी गैर मर्द के साथ एक बार तेरा संबंध बन गया तो समझ में बदनाम होने की नौबत आ जाएगी,,, और तब तु क्या करेगी,,,, अभी तो चलो अपने बेटे के साथ संबंध बना रही है घर की चार दिवारी के अंदर घर की बात घर में ही रह जाएगी। अगर तेरी बेटी ने भी अपनी आंखों से देख ली तो भी वह इतनी तो समझदार है कि घर की इज्जत को बाहर नहीं उठा लेगी लेकिन फिर भी उसके मन में एक बात की कसक रह जाएगी कि वह कभी सोची नहीं होगी कि वह अपनी मां को ही समझता में देखेगी,,, और अगर इसके बावजूद भी घर में पहले जैसा माहौल बनना चाहती है तो तुझे अपने बेटे की बताई युक्ति पर काम करना ही होगा,,, रानी को कि ईस खेल में शामिल करना होगा, और तुझे क्या लगता है रानी इस खेल में शामिल होने से इनकार कर देगी यह तेरी बोल है रानी पूरी तरह से जवान हो चुकी है अंदर ही अंदर उसकी भावनाएं भड़क रही होगी और ऐसे में तुम दोनों को चुदाई का मजा लेते देखकर उसकी भी भावनाएं एकदम से प्रज्वलित हो जाएगी और तेरे प्रस्ताव को वह ठुकरा नहीं पाएंगे ऐसे में तुम लोग कहीं फायदा है घर की बात घर में ही रह जाएगी और तू जब चाहे तब जमाने का मजा ले सकेगी।

(अपनी मां की बात सोचते हुए तवे पर की रोटी कब जल गई उसे पता ही नहीं चला जब उसमें से जलने की गंध आई तब वह एकदम से चौंक गई,,, और वह तवे पर से रोटी को उतार कर एक तरफ रख दी और फिर अपने मन की बात के बारे में सोचने लगी क्योंकि उसे लग रहा था कि उसकी मन सच कह रहा है और अपने मन से संतुष्टि भरा जवाब पाकर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और खुशी-खुशी खाना बनाने लगी,,,,, खाना बनाते बनाते रानी नाहा कर आ गई और उसने वही कपड़े पहनी थी जो सूरज ने उसके लिए खरीद कर लाया था उसे कपड़े में रानी सच में रानी की तरह लग रही थी यह देखकर सुनैना बहुत खुश हुई और खुश होते हुए बोली।)

अरे वह रानी तू तो एकदम रानी की तरह लग रही है,,,।

सच मां,,,,, (अपनी कुर्ती को दोनों हाथ से पकड़ कर अपनी मां के सामने गोल-गोल घूमते हुए वह बोली उसके चेहरे पर की खुशी बता रही थी कि वह इस कपड़े को पहनकर कितनी खुश है. )

तो क्या मैं तुझसे झूठ बोलुंगी,,,, सूरज तेरा कितना ख्याल रखना है,,,,।

अरे हां मैं तो भैया के बारे में पूछना भूल ही गई भैया कब आए और कहां है,,, (सूरज का जिक्र होते ही एकदम से रानी सूरज के बारे में पूछने लगी तो उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली)

अपने लिए कपड़े पाकर तू तो अपने भाई को ही भूल गई,,,,, सुबह ही आया है लेकिन अभी आराम कर रहा है,,,,,।

तब तो जाने दो मैं बाद में मिल लूंगी मैं जा रही हूं अपनी सहेलियों को कपड़े दिखाने,,,।(इतना कहकर बच्चा नहीं पाती थी कि उसे आवाज देते हुएसुनैना बोली)

अरे रुक रुक,,,, बाद में चली जाना थोड़ा काम तो कर ले,,,,,,।

अरे मां में बाद में सारे काम कर लूंगी बस,,,, अभी मुझे जाने दो,,,,,।

अच्छा जा लेकिन जल्दी चली आना,,,,,।

ठीक है मां,,,, (वैसे भी रानी के पास अभी बहुत समय था क्योंकि दोपहर में नदी पर जाना था क्योंकि दोपहर में नदी पर कोई नहीं होता इस समय तो कोई ना कोई नदी पर होगा ही,,,,, रानी कपड़े दिखाने के लिए अपनी सहेली के पास चली गई और सुनैना खाना बनाने में व्यस्त हो गई,,, देखते ही देखते सूरज सर पर आ चढ़ा था। अपनी सहेलियों को अपना नया कपड़ा दिखाकर रानी घर पर वापस आ चुकी थी उसका दिल बेताब था कुंवर से मिलने के लिए,,,, इसलिए वह जल्दी-जल्दी खाना खाकर बाकी के काम करना शुरू कर दी अभी भी सूरज अपने कमरे में सो रहा था वैसे भी रानी सूरज के पास जाना नहीं चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह सूरज के पास गई तो सूरज इतनी मेहनत से पहने हुए कपड़ों को पल में ही उतार कर उसे नंगी कर देगा और फिर उसके साथ मनमानी करने लगेगा और वह इस समय ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि नहा कर वह एकदम अच्छे से तैयार हुई थी और अगर अपने भाई के कमरे में गई तो वह सारा काम बिगाड़ देगा,,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा खाना खाकर पड़ोस में समय व्यतीत करने के लिए चली गई और सारे काम निपटाकर रानी नदी की ओर जाने के लिए तैयार हो गई,,,,, जिस तरह से रानी बेताब थी कुंवर से मिलने के लिए कुंवर भी उतना ही बैठा था रानी से मिलने के लिए रानी को वहां दो-तीन मुलाकात में ही पागलों की तरह चाहने लगा था वैसे उसके मन में रानी को लेकर कोई गंदे विचार नहीं थे। वह रानी को सच्ची मोहब्बत करने लगा था,,,, तू अपनी बहन से कुछ पैसे लेकर रानी के लिए खाने का सामान लेना चाहता था क्योंकि कुंवर जानता था की रानी को समोसे और जलेबी बहुत पसंद है इसलिए वह अपनी बहन की कमरे की तरफ तैयार होकर जा रहा था ,,,। अपनी बहन के कमरे के पास पहुंचते ही अंदर से जोर-जोर से चिल्ला कर बात करने की आवाज आ रही थी यह आवाज कुंवर के जीजा मतलब की राजा साहब की थी,,,, अंदर क्या हो रहा है यह देखने के लिए कुंवर धीरे-धीरे अपनी बहन के कमरे के खिड़की के पास पहुंच गया खिड़की हल्की सी खुली हुई थी,,,,, इसी तरह से एक दिन पहले भी वह अपनी बहन के साथ अभद्र व्यवहार होते हुए देखा था ,,,, इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अपनी बहन को तकलीफ में देखकर उसका दिल बहुत दुखता था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था। आज वह देखना चाहता था कि आज किस बात पर बहस हुई है,,,। इसलिए वह धीरे-धीरे खिड़की के पास पहुंच गया था और अंदर नजर दौड़ा कर देखा तो कुछ ही देर में उसे अंदर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देने लगा,,,,,।

उसने देखा कि राजा साहब बिल्कुल निर्वस्त्र अवस्था में बिस्तर के नीचे खड़ा होकर इधर-उधर घूम रहा था और जोर-जोर से उसकी बहन पर चिल्ला रहा था उसके बदन पर बिल्कुल भी कपड़ा नहीं था और जिस तरह से वहां इधर-उधर चल रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड भी हवा में लहराता हुआ हिल रहा था,,,,, कुंवर ने देखा कि उसकी बहन ब्लाउज और पेटीकोट में बिस्तर पर बैठी हुई थी डरी सहमी सी,,,,, कुंवर को समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहां खड़ा रहे या वहां से चला जाए वैसे तो अपनी बहन से पैसे के लिए आया था लेकिन अंदर का माजरा दर्दनाक था जिसे देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कैसे हालात में वह अपनी बहन से कैसे पैसे मांगेगा तभी उसके कानों में उसकी जीजा की आवाज सुनाई दी।

हरामजादी अपनी गांड मुझे नहीं देखी तो किस देगी जब मांगता हूं तब बहाना करती है तेरी बुर ले लेकर में उब गया हुं,,,,, आज मुझे तेरी गांड चाहिए बहुत मटका मटका कर घूमती है महल में,,,,,,।

यह आप क्या कह रहे हैं,,, मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता,,,, आखिरकार तुम्हें हर तरह से सुख देने के लिए तो मैं हमेशा तैयार रहती हूं फिर छोटी सी चीज के लिए जीद क्यों कर रहे हैं,,,, (सहमी हुई आवाज में कुंवर की बहन मतलब रानी साहिबा बोली,,,,, इतने से कुंवर को समझ में आ गया था कि आखिरकार माजरा क्या है,,,, कुंवर का जीजा उसकी बहन के जिस अंग को पानी के लिए इतना तड़प रहा था कुंवर भी अच्छी तरह से जानता था कि यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं है लेकिन कुछ कर नहीं सकता था उसकी बहन की बात सुनकर राजा साहब चिल्लाते हुए बोला।)

छिनार जब छोटी सी चीज है तो दे क्यों नहीं देती,,,,।

आप भी जानते हैं कि मैं क्यो इनकार कर रही हूं,,,,।

कुछ नहीं होगा सरसों का तेल लगाकर डालूंगा बड़े आराम से चला जाएगा,,,।

बिल्कुल भी नहीं एक बार इसी तरह से आपने किया था 10 दिन तक लंगडा कर चल रही थी,,, मुझे माफ करो मैं अंदर नहीं रह सकती चाहे तो जितनी देर उतनी देर यहां पर कर सकते हो,,, (ऐसा कहते हुए कुंवर की बहन अपने दोनों टांगें खोलकर अपनी पेटीकोट को कमर तक उठा दी जिससे खिड़की में खड़े कुंवर को उसकी बहन की गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई देने लगी,,,, कुंवर अपनी बहन को ही सस्ती में नहीं देखना चाहता था इसलिए शर्मा कर वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया,,,,, उसकी हरकत पर राजा साहब अपने घंटे को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,।

टांगे किसी और के सामने फैलाना मेरे सामने तो तू घोड़ी बन जा मुझे तेरा पिछवाड़ा चाहिए,,,,।

नहीं मैं नहीं दे सकती मुझे बहुत दर्द देता है आपका बहुत मोटा और लंबा है,,,।

हरामजादी मुझसे बहस करती है मेरा समय खराब कर रही है न जाने कौन सी वह मनहुस घड़ी थी, जो मैं इस महल की रानी बनाकर तूझे लाया तू ऐसे नहीं मानने वाली,,,, (इतना कहने के साथ ही राजा साहब अपनी बीवी के साथ ही जबरदस्ती करने लगा और देखते ही देखते हो उसकी पेटीकोट को उसकी कमर तक उठाकर उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से ढेर सारा खूब अपने लंड को सुपाड़े और अपनी बीवी के गांड के छेद पर लगाकर उसे अपनी बीवी की गांड में डालने की कोशिश करने लगा कुंवर यह सब नहीं देखना चाहता था लेकिन न जाने क्यों वह अपनी बहन की बेबसी को अपनी आंखों से देखता रहा,,, एक कमजोर औरत भला एक जालिम मर्द का मुकाबला कैसे कर सकती है देखते ही देखते राजा साहब कुमार की बहन पर पूरी तरह से छा गया और उसकी खबर पकड़ कर अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,,, रानी साहिबा की चीख बता रही थी कि उसे कितना दर्द हो रहा था,,, कुंवर लाचार था वह ऐसे हालात मैं भी अपनी बहन की मदद नहीं कर सकता वह अपनी बहन की बेबसी को और ज्यादा देखा नहीं सका और अपने कमरे में आ गया,,,, अपने जीजा की हरकत से अंदर ही अंदर घुट रहा था,,,, लेकिन वह जानता था कि वह कर भी कुछ नहीं सकता था एक तो वैसे ही वह अपने बहन के ससुराल में था और अपने जीजा के टुकड़ों पर पल रहा था। लेकिन फिर भी उसके मन के एक कोने से आवाज आ रही थी कि उसे अपनी बहन की मदद करना चाहिए ऐसे नरक से उसे निकालना चाहिए लेकिन कैसे यह उसके समझ के बाहर था। व्हाट इस कमरे में था वहां भी उसकी बहन की रह रहकर चीखने की आवाज आ रही थी। लेकिन कुछ देर बाद सब कुछ शांत हो गया,,, फिर भी कुंवर की हिम्मत नहीं हो रही थी जो अपने कमरे से निकलकर अपनी बहन के कमरे तक चल जाए क्योंकि उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था अपने आप से ग्लानी हो रही थी,,,।

फिर अपने मन में सोचने लगा कि आखिरकार उसका जीजा उसकी बहन के साथ जो मर्जी आए वह कर सकता है वह उसकी बीवी है ऐसे में उसकी बहन को ही चाहिए कि वह ऐसे हालात में समझदारी से काम ले,,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर कल उसकी शादी रानी के साथ हो जाती है और वह उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए आनाकानी करेगी तो उसे भी तो गुस्सा आएगा ऐसे में घर में क्लेश बढ़ने लगेगा,,,,, मन में उठे इस तरह के ख्याल के बावजूद भी उसे कहीं ना कहीं लग रहा था कि जो इज्जत उसकी बहन को मिलनी चाहिए थी वह इस घर में नहीं मिल रही थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आज उसे रानी से मिलने भी जाना था धीरे-धीरे समय बीतता चला जा रहा था। वह हिम्मत करके अपने कमरे से बाहर निकला पर अपनी बहन के कमरे की तरफ जाने लगा। उसका भी जरूरत है उसे समझ में नहीं आया था कि अपनी बहन का सामना कैसे कर पाएगा क्योंकि जो कुछ भी उसकी बहन के साथ हुआ था वह अपनी आंखों से देखा था। लेकिन फिर भी वह देखते कुछ अपनी बहन के कमरे के दरवाजे तक पहुंच गया दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था,,,, वह अपनी बहन के सामने ऐसा जताना चाहता था कि जैसे उसे कुछ मालूम ही नहीं है इसलिए अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए वह एकदम से अपनी बहन के कमरे में दाखिल होता हुआ बोला।

दीदी क्या कर रही हो तुम,,,?

(उसकी बहन बिस्तर पर बैठी हुई थी उसके बदन पर ब्लाउज और पेटी कोट ही था,,,,, उसकी आंखों से आंसू बह रही थे। अपनी बहन को रोता हुआ देखकर वह जान बुझ कर अनजान बनता हुआ बोला,,,)

क्या हुआ दीदी तुम रो क्यों रही हो,,,?

(इतना सुनकर उसकी बहन का दर्द फुट पड़ा और वह जोर जोर से रोने लगी,,,, यह देखकर कुंवर बोला,,)

क्या हुआ दीदी तुम रो क्यों रही हो क्या हुआ मुझे बताओ,,, (इतना सुनकर वह और ज्यादा रोने लगी कुमार को तो मालूम था कि उसकी बहन क्यों रो रही है क्योंकि उसके जीजा ने उसकी गांड मार कर गया था,,, लेकिन वह खुलकर बोल नहीं सकता था । बार-बार पूछने पर वह सिर्फ इतना बोल पाई,,)

मुझे यहां से ले चल मैं यहां नर्क में और नहीं रहना चाहती,,,, मेरा दम घुटता है यहां,,,,।

लेकिन हुआ क्या दीदी यह तो बताओ,,,,।

तेरा जीजा इंसान नहीं शैतान है दुनिया की नजर में सिद्ध बना रहता है लेकिन मैं जानती हूं कि वह कितना बड़ा हारामी है,,,,।(वह रोते हुए बोल रही थी,,, कुंवर को फिर से समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह जानता था कि उसकी बहन किस लिए ऐसा बोल रही है,,, फिर भी पूछ नहीं सकता,,, फिर भी बात अपनी बहन को शांत्वना देते हुए बोला,,,/)

लेकिन हुआ क्या है दीदी यह तो बताओ,,,

मैं कुछ बात नहीं सकती बस इतना कह सकती हूं कि यह घर मेरे लायक बिल्कुल भी नहीं है,,,,।

ठीक है अगर मैं यहां से तुम्हें ले सकता हूं मां पिताजी के वहां तो वह लोग भी तो पूछेंगे ना हुआ क्या है,,? तुम उन लोगों को क्या बताओगी गांव को क्या बताओगी समाज को क्या बताओगी,,,,, 10 दिन 20 दिन 15 दिन 6 महीना जैसे-जैसे समय गुजरता जाएगा वैसे-वैसे लोग तुम पर उंगली उठाने शुरू कर देंगे कि आखिरकार अपने पति का घर छोड़कर यहां पर क्यों आए हो ऐसा भी तो कह सकते हैं कि हो सकता है किसके पति में से निकाल दिया हो क्योंकि लोगों का मुंह तो हम बंद नहीं कर सकते ना।

(अपने भाई की बात उसे अच्छी तरह से समझ में आ रही थी वह दुनिया की रीति रिवाज को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि अगर इस तरह से वह घर छोड़कर अपने मायके चली गई तो कुछ दिन तक तो ठीक रहेगा लेकिन उसके बाद लोग बातें बनाना शुरू कर देंगे,,, समाज में तरह-तरह की बातें करना शुरू हो जाएगी वह कैसे उन लोगों का जवाब दे पाएगी और वैसे भी समाज में यह प्रचलन है कि लड़की का असली घर ससुराल होता है ससुराल में चाहे जैसे भी हो उसे अपना जीवन गुजार देना चाहिए फिर अपने मन में सोचने लगी कि आखिरकार हिम्मत करके वह अपने मन को अपने पति के बारे में बता दीजिए तो उसकी मां उसका ही दोष निकालेगी क्योंकि हर हाल में अपने पति की सेवा करना और उसे खुश रखना ही पत्नी का धर्म होता है। पत्नी के संपूर्ण बदन पर पति का पूरा हक होता है वह जब चाहे जैसे चाहे वैसे उसके बदन से मजा ले सकता है। यह सब सोच कर वह अपनी किस्मत पर ही रोने लगी क्योंकि वह जानती थी कि समाज उसकी आवाज को उसकी बात को कभी नहीं समझ पाएगा इसलिए हालात से समझौता करना ही उसके पक्ष में था,,,। अपनी बहन के सामने कुंवर ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाया क्योंकि इस समय वह केवल पेटीकोटर ब्लाउज में ही थी वह धीरे से कमरे से बाहर निकल गया उसके पास कुछ पैसे थे आज उनसे ही उसे संतोष मानना था,,,,।

रानी के लिए समस्या और जलेबी खरीद कर रहा नदी पर पहुंच चुका था पहले से ही रानी नदी पर उसका इंतजार कर रही थी। कुंवर को देखते ही बहुत खुश हो गई लेकिन जानबूझकर गुस्से का नाटक करते हुए दूसरी तरफ मुंह घुमा कर बैठ गई। कुंवर जैसे ही रानी के पास पहुंचा हुआ मुस्कुरा कर बोला।

देखो रानी मैं आ गया,,,।

बहुत अच्छा किए जो आ गए वरना तो मुझे लग रहा था कि आज आने वाले ही नहीं हो,,,,।

भला ऐसे कैसे हो सकता है कि तुम बुलाओ और मैं ना आऊं,,,।

बस बातें बनाने करेंगे तुम्हें जरा भी एहसास है कि मैं कितनी देर से यहां पर तुम्हारा इंतजार कर रही हुं ।(नाराज होते हुए रानी बोली कुंवर कुछ बोलने वाला था कि तभी उसकी नजर रानी के नए वस्त्र पर पड़े और वह एकदम से उत्साहित होता हुआ बोला।)

अरे रानी,,,(रानी की कलाई पकड़ कर और उसकी हरकत पर रानी केतन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि पहली बार कुंवर ने उसकी कलाई थामा था,,, उसकी कलाई पकड़ कर रोना उसे अपने सामने ठीक से खड़ी करता हुआ बोला,) अरे वह इन कपड़ो में तो तुम स्वर्ग से उतरी हुई कोई परी लग रही हो...(इतना सुनते ही रानी मां ही मन प्रसन्न होने लगी लेकिन फिर भी अपने चेहरे पर झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

चलो रहने दो देर से आए हो इसलिए ऐसा कह रहे हो ताकि मैं नाराज ना रहूं,,,।

अरे मेरी रानी तुम नाराज रहो नाराज होने के बाद तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो लेकिन जो कुछ भी मैं कह रहा हूं तुम्हें खुश करने के लिए नहीं कह रहा हूं बल्कि मैं सच कह रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो किसने खरीदा यह कपड़े।

मेरे भैया ने शहर से लाए हैं,,,।

शहर से,,,!(शहर का नाम सुनकर कुंवर एकदम से आश्चर्य जतातें हुए बोला,,,)

हां शहर से हमारे मुखिया जी है ना मेरे भैया होने के लिए काम करते हैं तो शहर गए थे वहीं से लेकर आए हैं।

ऊमममम बहुत बढ़िया मुझे भी शहर घूमना है लेकिन कोई ले जाने वाला नहीं है,,,।

तुम चिंता मत करो जब मेरे भैया अगली बार शहर जाएंगे तो मैं उनसे कह दूंगी कि तुम्हें लेते जाए,,,,,।

क्या तुम्हारे भैया मुझे ले जाएंगे।

आखिरकार जीजा जो हो और साले का तो हक बनता है जीजा को घुमाना,,,,,।

(रानी यह बात खुद ही कहकर खुदाई शर्मा गई और भाग कर दूर पेड़ के पास जाकर खड़ी होगी कुंवर जानता था कि इस समय रानी शर्मा गई है इसलिए धीरे से उसके पास गया और बोला)

क्या सच में हम दोनों की शादी हो पाएगी,,,।

क्यों नहीं हो पाएगी देखना मैं जब यह बात अपनी मां और अपने भैया से बताऊंगी तो वह लोग झट से तैयार हो जाएंगे,,, लेकिन क्या तुम अपने घर वालों से शादी के बारे में बात कर पाओगे।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी तरफ से एकदम हां है।

(यह बात सुनकर दोनों हंसने लगे वह दोनों काफी खुश थे वहीं पेड़ की छांव में बैठकर दोनों समोसे और जलेबी खाने लगे देखते ही देखते शाम हो चली थी,,,, कुंवर के जाने का समय हो गया था रानी को भी अपने घर पहुंचना था कुंवर अगली बार मिलने का वादा करके जाने वाला था की रानी एकदम से भाव भिभोर होकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और कुंवर कहां पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उसके होठों पर चुंबन जड़ दी,,,,, रानी के लिए तो यह रोज की बातें थी लेकिन कुंवर के लिए यह पहली मर्तबा था वह एकदम से रानी की हरकत पर मस्त हो गया दोनों के होंठ आपस में सटे हुए थे,,,, कुंवर अपने कामुक को भावनाओं पर काबू करना अच्छी तरह से जानता था वह दूसरों लड़को की तरह बिल्कुल भी नहीं था लेकिन उससे पहले ही वह अपनी बहन के कमरे में जिस तरह का दृश्य देखा था भले ही वह दृश्य थोड़ा पीड़ा दायक था भावनाओं को लेकर लेकिन फिर भी मदहोश कर देने वाला दृश्य था क्योंकि उसने अपनी बहन की कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखा था राजा साहब के टनटनाए हुए लंड को देखा था और अपनी बहन की गांड कैसे अपनी घुसते हुए लंड को देखकर उसकी भावनाएं थोड़ी सी इस समय प्रज्वलित हुई थी और वह भी उत्तेजना में आकर रानी के कमर पर हाथ रखकर उसे पर अपनी हथेली का दबाव बना लिया था। दोनों के होठ अभी भी आपस में सटे हुए थे इस बीच रानी को एकदम साफ महसूस हुआ कि उसकी दोनों टांगों के बीच कुंवर का लंड ठोकर मारने लगा है,,, रानी अपने भाई के साथ मजे ले लेकर पूरी तरह से खेली खाई लड़की बन चुकी थी इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू करना अच्छी तरह से जानती थी खास कर ऐसे अवसर पर वह जानती थी कि उसके पास समय का अभाव है और इतनी जल्दी वह कुंवर के सामने अपनी जवानी परोसने नहीं चाहती थी वह अपनी हरकतों से कुंवर को और तड़पाना चाहती हूं इसलिए अगले ही पल वह एकदम से कुंवर से अलग हो गई। कुंवर भी उसे रोक नहीं पाया हालांकि उसे मजा आ रहा था और वह आगे बढ़ना चाहता था। फिर भी वह इस समय कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं था दोनों मुस्कुरा रहे थे एक दूसरे को देखकर।

और फिर रानी ही कदम पीछे ले ली और अपने गांव की तरफ जाने लगे वह बार-बार पीछे मुड़कर कुंवर को देख रही थी। कुंंवर वही खड़ा था रानी को आज कुंवर के पजामे में उसका तना हुआ लंड महसूस हुआ था उसका उभार एकदम साफ दिखाई दे रहा था। इन सब बातों से रानी अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे की आंखों से ओझल होने लगे कुंवर भी अपने महल की तरफ निकल गया था। कुछ दिन ऐसे ही गुजरने लगे सूरज अपनी मां को तड़पाने के लिए उसके साथ संबंध नहीं बना रहा था वह देखना चाहता था कि जिस तरह से हुआ तड़पता है उसकी मां भी तड़पती है कि नहीं दूसरी तरफ उसकी मां को अपने बेटे का व्यवहार अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि रोज रात को अपने बिस्तर पर सूरज का इंतजार करती थी उसे रह नहीं जाता था और वह करवटें बदलकर रात गुजार देती थी। मिलन के पहले की यही तड़प तो आपसी प्रेम को और संबंध को और भी ज्यादा गहरा बनाता है,,,,, धीरे-धीरे गर्मी का महीना खत्म हो रहा था और बरसात का महीना शुरू होने वाला था उसके पहले सुनैना अपने बेटे से घर का राशन भरवा लेना चाहती थी क्योंकि बारिश में बड़ी दिक्कत हो जाती थी और राशन लेने के लिए सूरज बाजार पहुंच चुका था। वह राशन ले रहा था इस बीच उसकी नजर एक औरत पर बराबर बनी हुई थी क्योंकि वह बाजार में इस तरह से घूम रही थी मानो जैसे वह पहली बार इंसान को देख रही हो वह साधारण सी साड़ी पहनी हुई थी लेकिन उसकी खूबसूरती बेमिसाल थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अकेले ही बाजार में आई थी सूरज राशन का सामान ले चुका था और राशन का सामान उसे राशन वाले की दुकान पर ही रख दिया था ताकि जाते समय उसे अपने साथ में ले जाए और धीरे-धीरे उसे औरत की तरफ आगे बढ़ रहा था यह जानने के लिए कि आखिरकार वह अकेली है या कोई और भी साथ में है और वह है कौन क्योंकि उसकी गतिविधि सूरज को थोड़ी शंकास्पद लग रही थी। वह सड़क के बीचो-बीच खड़ी होकर इधर-उधर देख रही थी तभी सूरज को दूर से एक बेलगाम घोड़ा जोकी देखने में जंगली ही लग रहा था वह बड़ी तेजी से दौड़ता हुआ इस सड़क पर आगे बढ़ रहा था यह देखकर सूरज एकदम से घबरा गया क्योंकि वह जानता था कि अगर वह औरत अपनी जगह से नहीं हटी तो घोड़े की टक्कर में उसे चोट लग जाएगी।

घोड़ा जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था सूरज के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह जोर-जोर से उसे औरत को हटाने के लिए बोलने लगा लेकिन वह सुन ही नहीं रही थी आखिरकार सूरज को आगे बढ़ाना पड़ा और आखिरी मौके पर वह उसे औरत को बड़ी रफ्तार से लेकर सड़क के दूसरी तरफ लुढ़क गया,,,,, घोड़ा तो तेज गति से आगे निकल गया। लेकिन उस औरत को बचाने के चक्कर में उस औरत को लेकर नीचे गिर गया लेकिन नीचे गिरते हुए भी उसे औरत को बचा लिया क्योंकि वह पीठ के बल सड़क की दूसरी तरफ गिरा था और उसने इस तरह से उस औरत को थामे हुए था कि वह औरत उसके ऊपर गिरी पड़ी थी। जल्द ही सूरज को एहसास हुआ कि वह किस अवस्था में है उसके ऊपर एक खूबसूरत औरत पसरी पड़ी थी उसके बड़े-बड़े खरबूजे ब्लाउज में होने के बावजूद भी उसकी छाती पर अपना दबाव बनाए हुए थे और आनंद खाने में गिरने की वजह से उसके ब्लाउज के ऊपर का बटन टूट गया था जिससे उसकी हाथी चूचियां उसकी छाती पर पानी भरे गुब्बारे की तरह लौटी हुई थी। यह सब कुछ अचानक हुआ था इसलिए उसे औरत को बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कभी ऐसा हुआ क्या हुआ एक जवान लड़के के ऊपर लेटी हुई थी उसकी मदद कर देने वाली जवानी सूरज के गठीले बदन पर पसरी हुई थी,,,, सूरज कुछ खूबसूरत औरत का खूबसूरत चेहरा एकदम करीब से देखा तो उसे देखा ही रहेगा ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई चांद का टुकड़ा हो और वह औरत सूरज को अच्छी तो देखते ही रह गई दोनों की आंखें आपस में टकरा रही थी दोनों उठने का नाम नहीं ले रहे थे वैसे भी सूरज उठ नहीं सकता था क्योंकि उसके ऊपर वह खूबसूरत औरत लेटी हुईथी। लेकिन तभी वहां पर एक नौजवान लड़का है जो की देखने से ही अच्छे घर का लग रहा था। वह एकदम से उसे औरत का हाथ पकड़ कर उठाते हुए बोला।

अरे दीदी यह क्या हो गया,,,? उठो तुम्हें चोट तो नहीं लगी,,,,!(इसे कहते हुए वह उस औरत को हाथ पकड़ कर उठा दिया,,, यह देखकर सूरज उसे नौजवान लड़के के सामने अपना हाथ उठा कर आगे बढ़ाया और वह नौजवान लड़का सूरज का भी हाथ पकड़ कर उसे सहारा देकर खड़ा किया दोनों कुछ बोल पाते इससे पहले ही सूरज बोला)

अपनी बहन को समझाओ की बीच बाजार में सड़क पर इस तरह से लापरवाह होकर नहीं चला जाता अभी घोड़े ने अपना काम कर दिया होता।

क्या दीदी तुम भी तुम्हें ठीक से चलना नहीं आता। अगर यह भाई साहब ना होते तो आज अनहोनी हो जाती,,,।

मेरे होते हुए अनहोनी नहीं हो सकती वैसे मेरा नाम सूरज है और मेरे पास के हीं गांव का रहने वाला हूं,,,,।

मुखिया के गांव के,,,!(एकदम खुश होता हुआ वह बोला,,, क्योंकि वह जानता था की रानी के भाई का नाम सूरज है और जिस तरह का उसने यहां पर दिलेर दिखाया था उसे पूरा यकीन हो गया था कि यही रानी का भाई है और वह ऐसा कोई बेहतर नहीं करना चाहता था जिससे सूरज की नजर में उसकी इज्जत खराब हो इसलिए वह बहुत खुश नजर आ रहा था और बड़े अच्छे से सूरत से बात करने लगा)

हां मुखिया के गांव का,,,,,,

जी मेरा नाम कुंवर है,,, और यह मेरी बहन है रानी राजा साहब को तो आप जानते हैं।

राजा साहब वह जमीदार,,,,

जी हां मेरी बहन उनकी ही बीवी है,,,।

( यह सुनते ही सूरज एकदम से एक कदम पीछे हो गया और एकदम हाथ जोड़ते हुए नमस्कार करते हुए बोला)

ओहहह हो रानी साहिबा,,,, अगर मुझसे कोई गुस्ताखी हुई हो तो माफ करना यह सब आपकी जान बचाने के लिए ही मैंने किया था,,,,(सूरज राजा साहब का अच्छी तरह से जानता था उसे मालूम था कि अगर जिस तरह से उसने रानी साहिबा को अपनी बाहों में लिया था जो कि उसकी जान बचाने के लिए यह सब किया था फिर भी अगर राजा साहिब ने समझने में देर की तो उसके लिए आफत आ सकती थी।)

कोई बात नहीं तुम्हारी बहादुरी से मैं बहुत प्रसन्न हूं। (वह खुश होते हुए बोली उसे खुश होता हुआ देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

मुझे समझ में नहीं आ रहा कि आप रानी साहिबा होने के बावजूद भी इतने साधारण वस्त्र में बाजार में क्या कर रही है।

आप नहीं समझोगे,,,,।(कुंवर मुस्कुराते हुए बोला इस बात पर कुंवर की बहन भी मुस्कुरा दी तो यह सब देखकर सूरज फिर से बोला)

अगर आप लोग समझाओगे तो जरूर समझ में आ जाएगा।

(सूरज की बात सुनकर कुंवर की बहन बोली)

देखो सूरज रानी साहिबा होने की वजह से इस तरह से मुझे खुले में और वह अकेले घूमने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं है अगर मैं अच्छे वस्त्र पहन कर आती तो शायद जिस तरह से सब कुछ सामान्य चल रहा है उसे तरह से सामान्य बिल्कुल भी नहीं चलता और वैसे भी चोर लुटेरों का डर हमेशा बना रहता है,,, हो सकता है मुझे अकेली देखकर डाकू मुझे अगवा करके ले जाए या फिर मेरे गहने लूट कर मुझे मार भी सकते हैं इसलिए मैं अकेले कभी नहीं आ पाती और सच कहूं तो मैं पहली बार ईस बाजार में आई हूं घूमने के लिए,,,,।

और ऐसा क्यों हो सकता है कि आप किस तरह की हरकत की वजह से राजा साहब आपसे नाराज हो जाए।

यही तो बात है राजा साहब 10 दिन के लिए कहीं बाहर गए हैं और इसीलिए तो मौका देखकर हम भाई बहन बाजार घूमने आए हैं।

(यह सुनकर सूरज बहुत खुश हुआ और सबसे ज्यादा खुशियों से बात की थी कि वह इतने बड़े घरों ने की खूबसूरत औरत को अपनी बाहों में लेकर लेटा हुआ था,,,,, सूरज खुश होता हुआ बोला)

कोई बात नहीं आओ मैं आप लोगों को बाजार घुमा देता हूं,,,(इतना कहकर सूरज उन दोनों को बाजार घूमने लगा और दोनों को बाजार की ताजी गरमा गरम जलेबी और समोसे भी खिलाएं,,, सूरज के आकर्षक रुप और उसके गठीले बदन को देख कर रानी साहिबा सूरज पर मोहित होने लगी थी वह सूरज को देखकर बार-बार मुस्कुरा दे रही थी सूरज की रानी साहिबा को देखकर मुस्कुरा दे रहा था लेकिन जाकर उसकी नजर उसके ब्लाउज पर चली जा रही थी क्योंकि ब्लाउज का एक बटन टूटा होने की वजह से उसकी जवानी आधी से ज्यादा दिखाई दे रही थी। लेकिन इस बात पर कुंवर की बहन बिल्कुल भी गौर नहीं कर रही थी सूरज तो उसकी मदद करने वाली जवानी से पूरी तरह से आकर्षित हो गया था वह कुछ ज्यादा ही गोरी चिट्टी थी और अपने मन में इस बात की कल्पना कर रहा था कि अगर यह औरत उसके सामने पुरे वस्त्र उतार कर नंगी खड़ी हो जाए तो उसकी तो किस्मत बन जाए। सूरज उन दोनों से बहुत सारी बातें इधर-उधर की कर रहा था कुंवर भी सूरज से खुलने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि आने वाले समय में सूरज उसका साला बनने वाला था और साले को खुश करना उसकी जिम्मेदारी थी। देखते देखते शाम ढलने लगी और भाई बहन दोनों सूरज से मुस्कुरा कर विदा लिए, सूरज उन दोनों को जाता हुआ देखता रहा और जब राशन लेने के लिए राशन की दुकान की तरफ आगे बढ़ने लगा तो उसकी नजर सड़क के दूसरी तरफ गई जहां पर वहां रानी साहिबा को लेकर गिरा था वहीं पर काम का झुमका गिरा हुआ था वह तुरंत वहां गया और कान के झुमके को उठा लिया कान का झुमका इतना खूबसूरत था कि उसे यकीन हो गया कि यह झुमका रानी साहिबा का ही है दूसरी मुलाकात के लिए यह बहाना बहुत अच्छा था इसलिए खुश होता हुआ वह उसे झुमके को अपने कुर्ते की जेब में रख लिया और राशन का सामान लेकर अपने घर की तरफ निकल गया।
 
आज का दिन सूरज के लिए और कुंवर और उसकी बहन के लिए भी बहुत अच्छा था। क्योंकि सूरज आज एक ऐसी शख्सियत को अपनी बाहों में भर लिया था जिसके बारे में कभी वह कल्पना भी नहीं कर सकता था वैसे तो जिन-जिन के साथ उसका संबंध बना था वह उसकी कल्पना के परे ही थे लेकिन राजा साहब की बीवी की बात कुछ ओर थी,,,, सूरज जब तक घर नहीं पहुंच गया तब तक उसके बारे में ही सोचता रहा राजा साहब की बीवी के लिए भी आज का अनुभव बेहद यादगार था। एक तो वह सूरज की हिम्मत और उसकी बहादुरी पर पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी और उसके मोहक रूप का आकर्षण उसके मन में बस गया था। पहली बार ऐसा लग रहा था कि वह किसी मर्द के प्रति आसक्त हुई थी,,,, और कुंवर के लिए तो यहां पर यादगार बन गया था क्योंकि अभी तक उसने रानी के भाई को कभी देखा नहीं था बस उसके बारे में सुना ही था और आज देख कर उसकी बहादुरी को अपनी आंखों से देखकर उसे लगने लगा था कि सूरज के साथ भविष्य में बहुत मजा आने वाला है,, वैसे भी वह सूरज के साथ दोस्ती मेलजोल बढ़ाना चाहता था ताकि सूरज की नजर में कुंवर हमेशा एक अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान बना रहे और वैसे भी कुंवर अच्छे व्यवहार वाला ही था।

राशन लेकर सूरज घर पर पहुंच चुका था शाम ढल चुकी थी,, खाना बना रही थी और पास में ही बैठकर रानी सब्जी काट रही थी। राशन को एक तरफ रखकर वह हाथ मुंह धो कर चारपाई को ठीक रसोई के सामने खींचकर उस पर बैठ गया और गहरी सांस लेता हुआ बोला,,।

आज खाने में क्या बन रहा है,?

सब्जी रोटी,,,, (सुनैना कुछ बोलती इससे पहले रानी ने जवाब दे दी यह सुनकर वह अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,,, वह सूरज की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)

क्यों तुझे क्या खाना था मालपुआ,,,!

हां बिल्कुल जिस तरह से मैं मेहनत करता हूं शाम को रोज मालपुआ मिल जाए तो मजा ही आ जाए,,,,।

अब भैया रोज मालपुआ तो नहीं बन सकता ना देखेंगे किसी दिन बना होगा तो मां बना देगी,,,।

लेकिन बनाती कहां है मां,,, बस देखा दाल चावल सब्जी रोटी,,,,, यह भी कोई खाना हुआ,,,,!

क्यों यह खाना नहीं हुआ सभी लोग तो यही कहते हैं रोज तुझे ही सिर्फ मालपुआ चाहिए,,,,,।

मुझे रोज मिले तो मैं रोज रगड़ डालुं(अपनी मां की तरफ देखते हुए शरारत अंदाज में सूरज बोला,,,, सुनैना कम नहीं थी, मर्दों की रसभरी बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझते थे वह समझ गई थी कि सूरज किस बारे में बात कर रहा है,,,,, इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

रोज मालपुआ खाने के लिए दम होना चाहिए,,,, एक दो बार में ही हालत खराब हो जाएगी और तू रोज रगड़ने की बात कर रहा है।

मेरे में कितना दम है यह तुम अच्छी तरह से जानती हो ना बस एक बार मौका देकर देखो रोज बनाओगी रोज मालपुआ हजम कर जाऊंगा क्योंकि मुझे मालपुआ बहुत अच्छा लगता है।

अच्छा तो क्या अच्छा लगता है तुझे मालपुआ में जो इतना पागल हुआ जा रहा है उसे खाने के लिए।

ऊममममम ,,,,, मालपुआ में जो बात है वह किसी में नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है एक तो वह कचोरी की तरह पूरी हुई होती है और बीच से उसका रस टपकते रहता है,,,, ऊममममम देखकर ही मेरे मुंह में पानी आ जाता है,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से मालपुआ के संदर्भ में सुनकर सुनैना की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी क्योंकि वह मालपुआ का नाम लेकर बुर के बारे में बात कर रहा था,,, वैसे भी तीन-चार दिन गुजर चुके थे सूरज ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था और इसीलिए सुनैना का बहुत मन कर रहा था उससे चुदवाने के लिए,,,, रानी अपने ही काम में व्यस्त थी,,, मौका देखकर गर्मी का बहाना करते हुए सुनैना अपनी साड़ी को घुटने तक ऊपर उठा दी और टांगों को हल्का सा खोल दी ताकि उसकी दोनों टांगों के बीच सूरज की नजर पड सके। और ऐसा ही होगा सूरज अपनी मां की हरकत को देख रहा था और जैसे ही उसने अपनी साड़ी को घोषणा करके उठाकर अपने टांगों को हल्का सा मोली सूरज की नजर अपने आप ही उसकी दोनों टांगों के बीच अंदर तक पहुंचाने की कोशिश करने लगी लेकिन लालटेन की पीली रोशनी उसके पेटिकोट के अंदर तक नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए सूरज भी बस इतना ही देख पा रहा था जितने तक लालटेन की पीली रोशनी पहुंच रही थी लेकिन इतना भी सुनैना के लिए बहुत था क्योंकि वह अपने बेटे का ध्यान अपनी तरफ करने में कामयाब हो गई थी। वह अपने बेटे से बोली।)

बारिश का महीना शुरू होने वाला है। कहीं घर में पानी टपकना ना शुरू हो जाए इसलिए थोड़ा बहुत मरम्मत करना बाकी है ऐसा कर कल ही मरम्मत कर दे।

अरे कल क्यों मन कहे तो इसी समय मरम्मत कर दुं,,,।(सूरज मुस्कुराते हुए भोला और उसकी मां भी समझ गई वह किस बारे में बात कर रहा है इसलिए वह शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा ली अपने आप को काम में व्यस्त करने का नाटक करते हुए बोली,,)

नहीं नहीं रात को नहीं रात को कुछ समझ में नहीं आएगा और तू कामबिगाड़ देगा।

अरे मैं तुम भी कैसी बातें कर रही हो। मरम्मत रात को भी हो सकती है मैं तो टटोलकर ही काम चला लूंगा कहो तो अभी मरम्मत कर दुं।

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,, अभी कुछ नहीं करना है,,,, खाना बनने वाला है खाना खाकर सो जा।

हां यह तुमने ठीक कहीं वैसे भी दिन भर की थकान से रात को नींद बहुत अच्छी आती है।

ऊमममम तू बस नींद लेने के लिए ही बना है तेरी उम्र के लड़के रात दिन जागते हैं काम करते हैं,, और एक तू है कि बस सोता ही रहता है।

( सूरज अपनी मां की लाचारी को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि तीन-चार दिन उसने अपनी मां पर ध्यान नहीं दिया है इसलिए उसकी मां उसके साथ शिकायत कर रही है बस यही तो वह देखना चाहता था उसे आज अपनी मन में एक औरत की तड़प दिखाई दे रही थी जो एक मर्द के साथ संबंध बनाने के लिए ललाईत थी,, इस बात से सूरज मैन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था और प्रसन्न होते हुए बोला)

कहो तो मैं भी दिन भर रात भर जागता रहूं लेकिन रात भर जाग कर करूंगा क्या रात को काम करने जैसा होता क्या है,,,,?

(रानी अपनी जगह से उठकर बाहर पानी लेने के लिए चलेगी और उसके जाते ही अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए सुनैना बोली)

मर्द रात को ही काम करते हैं और असली मर्द वही होता है जो रात भर जाकर काम करता है बाकी सब बेकार होते हैं अब तू ही अंदाजा लगा लेकिन तू बेकार वाला मर्द है या सचमुच का मर्द है।

यह तो तुम ही बता सकती हो कि मैं कैसा मर्द हुं,,,,,।

मैं क्या जानू कि तू कैसा मर्द है यह तो बताया नहीं जाता साबित किया जाता है। (अपने बेटे से नजर बचाकर वह मुस्कुराते हुए अपने मन की बात बता रही थी)

लगता है ठीक तरह से मर्दानगी देख नहीं पाई हो,,, तुम्हें असली मर्दानगी दिखानी होगी,,,।

दिखा दे तुझे रोका किसने है,,,,,।

(बातचीत आगे बढ़ पाती ईससे पहले ही रानी पानी लेकर आ गई,,, और फिर इस तरह की बात करने का मौका नहीं मिला,,तीनों खाना खाने बैठ गए सुनैना खाना खाने के लिए बैठने से पहले अपने ब्लाउज के ऊपर का दो बटन खोल चुकी थी ताकि अपने बेटे को अपनी जवानी दिखा सके,,,,, सुनैना यह सब करना नहीं चाहती थी लेकिन तीन-चार दिनों की दूरी है उसे मजबूर कर दिया था यह सब करने के लिए वह अपने बेटे को रिहाना चाहती थी ताकि आज की रात जी भर कर वह उसकी जवानी पर बरसे,,, तीनों बैठकर खाना खाने दे तभी सूरज की नजर अपनी मां पर पड़ी शाडी का पल्लू कंधे से नीचे सरका हुआ था और सूरज को अपनी मां की मदद कर देने वाली छाती एकदम साफ दिखाई दे रही थी रानी दोनों के बीच में बैठी हुई थी इसलिए वह अपनी मां की तरफ देखा नहीं पा रही थी ऊपर के दो ब्लाउज के बटन खुले होने की वजह से सुनैना की आधी से ज्यादा चूचियां एकदम से लालटेन की पीली रोशनी में उजागर हो रही थी जिसे देखकर सूरज के पजामे में हलचल हो रही थी,,,, खाना खाते समय सूरज अपनी मां की चूचियों को देख रहा था और सुनैना अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, दोनों की नजरे आपस में टकराई तो सूरज उत्तेजना के मारे अपने होंठ को अपने दांत से काटकर इशारा करने लगा कि वह कितना तड़प रहा है उसके साथ संबंध बनाने के लिए,,,, सुनैना भी रानी से नजर बचाकर एक हाथ अपनी पेटीकोट में डालकर अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी बर को मसलते हुए मदहोश कर देने वाला चेहरा बनाते हुए अपने मन की मनसा को जता रही थी आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी। जिस तरह की तड़प सूरज अपनी मां के चेहरे पर देखना चाहता था वही तड़प उसे देखने को मिल रही थी वह समझ गया था कि उसकी मां कितनी चुदवासी है।

थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,,,, रानी बर्तन साफ करने के लिए बैठ गई थी और सुनैना पेशाब करने के लिए घर से बाहर निकल गई थी अपनी मां को बाहर जाते हुए देखकर सूरज भी मौका देखकर अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया,,,,, सुनैना घर के बगल सटे हुए जगह के पीछे की तरफ चली गई थी जहां पर अक्सर वह पेशाब करने के लिए जाती थी ,,, उसे नहीं मालूम था कि उसके पीछे-पीछे सूरज भी आ रहा है वह थोड़ी दूर झाड़ियां के पास पहुंचकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर सूरज के लंड को खड़ा होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा। वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठी इससे पहले ही सूरज पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,,,युं एकाएक पीछे से पकड़े जाने की वजह से सुनैना एकदम से घबरा गई और पीछे नजर घुमा कर देखने लगी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वह अपने बेटे की बाहों में है वह निश्चित हो गई,,,,, वह कुछ कह पाती इससे पहले ही सूरज अपनी मां को पीछे से बाहों में भरने से पहले अपने पजामी को घुटनों तक नीचे खींच दिया था जिसकी वजह से उसका नंगा लंड गांड की दरार में फंसकर कर इधर-उधर रगड़ खाने लगा था। मोटे तगड़े लंड की रगड़ से सुनैना मदहोश होने लगी और कुछ बोल ही नहीं पाई और सूरज ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाता हुआ बराबर अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था सुनैना मदहोश होने लगी थी उत्तेजित होने लगी थी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि चार दिन बाद जो यह मिलन हो रहा था वह इसकी खुशी को बात नहीं सकती थी बस अपनी हरकतों से जाहिर कर सकती थी और वह ऐसा कर भी रही थी अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल पीछे से घूमाते हुए अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे की हरकत का मजा ले रही थी,,, सूरज को भी अपनी मां की तरफ से यह प्रतिक्रिया काफी लुभावनी लग रही थी उसे मजा आ रहा था वह उत्तेजना में जोर-जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था।

सहहहहह,,,, आहहहहहह,,,,,ऊममममम सससससुरज बेटे,,,,,ऊमममममममम ,,,,,,, कहीं रानी आ गई तो,,,,,,,।

अभी नहीं आएगी अभी वह बर्तन मांज रही है उसे समय लगेगा तब तक हम अपना काम निपटा लेंगे,,,।

यहां,,,,,सहहहहहहहह ,,,,,,,,,, मेरे कमरे में आना,,,,, दरवाजा खुला रखूंगी,,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,,।

लेकिन मेरा तो अभी मैं तुम्हारी लेने की,,,,,, तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,।

ऊमममममम सहहहहहहहह मैं भी तो पागल हुए जा रही हूं इसीलिए तो कह रहा हूं कमरे में आना बहुत अच्छे से दूंगी,,,,,,सहहहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,।

लेकिन अभी मेरा बहुत मन कर रहा है तुम्हारा लेने का,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां को घुमा दिया जिसकी वजह से दोनों का चेहरा आमने-सामने हो गया और सुनैना कुछ समझ पाती से पहले ही अंकित अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को पकड़ कर उसे ऊपर उठाकर अपनी कमर से लपेट दिया,,,, जिससे सुरज का टनटनाया लंड सुनैना की बुर के ईर्द-गिर्द ठोकर मारने लगा वह बुर के अंदर अपने आप घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन असफल हो जा रहा था। क्योंकि उसे सुनैना का गुलाबी छेद समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी सुनैना की पनीयाई बुर की वजह से उसका सपाट मैदान पूरी तरह से फिसलन भरा था। जिससे बार-बार गुलाबी छेद के पास आकर भी सूरज के लंड का सुपड़ा फिसल जा रहा था और सुनैना तड़प जा रही थी। सूरज से भी रहा नहीं जा रहा था, सूरज अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसका रसपान करते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले गया और अपने लंड को पकड़ कर अपने मोटे सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद से सटा दिया,,,, गर्माहट भरे सुपाड़े को अपनी भट्टी की तरह तपती हुई बुर पर महसूस करके सुनैना पानी पानी हो गई खुद ही उसकी कमर आगे पीछे होने लगी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी लेकिन बिना सूरज के सहकार के सुनैना के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था इसलिए सूरज अपने हाथ से ही अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में हल्का सा प्रवेश कराते हुए अपने दोनों हथेलियां को अपनी मां के पिछवाड़े पर रख दिया और उसे अपनी तरफ खींचता हुआ अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर में उतर जाने दिया,,,,।

सूरज का मोटा तगड़ा गरम लंड,, बुर की अंदरूनी व्याधियों को एक तरफ धकेलते हुए अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता चला जा रहा था और अपने बेटे के लंड की हरकत की वजह से सुनैना गदगद हुए जा रही थी देखते ही देखते सूरज का मोटा तगड़े लंड का सुपड़ा सुना के बच्चेदानी तक पहुंच गया जिसकी वजह से सुनैना का मुंह खुला का खुला रह गया और सूरज अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से थामे हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया,,,,, चार दिनों बाद एक बार फिर से सुनैना को जन्नत का मजा मिल रहा था सुनैना एकदम मदहोश हुए जा रही थी अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे के हर एक धक्के का आनंद ले रही थी,,,, मौके की नजाकत को सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी बहन बर्तन साफ कर रही थी किसी भी वक्त हुआ बर्तन साफ करके पेशाब करने के लिए इधर आने वाली थी इसलिए सूरज बिना रुके अपनी कमर की रफ्तार को रोके बिना अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,, अपनी मां को छोड़ने की रफ्तार तेज गति से सूरज कर रहा था सुनैना के मुंह से कोई शब्द फुट नहीं रहे थे और अगर कोई शब्द निकल भी रहा था तो उन शब्दों में कंपन इतना था कि वह क्या कहना चाह रही है उसे समझ पाना बड़ा मुश्किल था। बाकी कुल मिलाकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी पर छा चुका था और अपनी मां की बेलगाम जवानी पर काबू कर चुका था। अपनी मां के भारी भरकम पिछवाड़े को दोनों हाथों से थाने हुए जिस तरह से सूरज धक्के पर धक्का लगा रहा था सुनैना अपने बेटे की मर्दानगी की और उसकी कलाबाजी को देखकर गदगद हुए जा रही थी,,,, सूरज किसी भी तरह से पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था। और फिर देखते ही देखते मां बेटे दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी दोनों के बदन की आंकड़े बढ़ने लगी दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे जिसके चलते सूरज ने अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से और ज्यादा कस के दबोच लिया और रह रहकर चोर चोर से धक्के लगाने लगा अपनी मां की बुर में इतनी जोर से धक्के लगा रहा था कि मानो बुर में डालकर वह अपने लंड को गांड से बाहर निकाल देगा हर एक धक्का सुनैना के बच्चेदानी है पर ठोकर मार रहा था वह एकदम करते हुए जा रही थी पानी पानी हुए जा रही थी और फिर देखते ही देखते सूरज का गम लव सुनैना की गुलाबी बुर में गिरने लगा इस मदहोश कर देने वाले पल में सुनैना भी झड़ने लगी मां बेटे दोनों एक साथ झड़ रहे थे।

अपनी मां की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के साड़ी से उसे सांप की और फिर अपने पजामे को ऊपर खींच लिया,,,, सुनैना संतुष्ट हो चुकी थी तृप्त हो चुकी थी लेकिन उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह सूरज को वहां से जाने के लिए क्योंकि अब किसी भी वक्त रानी वहां आ सकती थी इसलिए सूरज भी वहां रुकना ठीक नहीं समझा और वहां से चला गया अपने बेटे के जाते हैं सुनैना पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और फिर पेशाब करने के बाद वजह से ही बाहर निकली तब तक देखी कि दरवाजे से रानी बाहर निकल रही थी वह अपने मन में सोचने लगी कि सही समय पर उसने सूरज को वहां से हटा दी वरना रानी को शक होने लगता,,,,, पास में ही गुसलखाना था सुनैना उसमें जाकर हाथ मुंह धोने लगी और रानी पेशाब करने के लिए चली गई थोड़ी देर बाद सुनैना अपने कमरे में पहुंच चुकी थी लेकिन कमरे में पहुंचकर उसने अपने दरवाजा बंद नहीं की थी दरवाजा बंद करने के बावजूद उस पर कुंडी नहीं लगाई थी क्योंकि उसे यकीन था कि सूरज उसके कमरे में जरूर आएगा,,, सूरज अपनी मां की चुदाई करने के बाद अपनी बहन के कमरे में भी नहीं गया था वह सीधा अपने कमरे में जाकर सो गया था,,,,,।

सुबह होने में अभी कुछ समय बाकी था बड़ी जोरों की पेशाब लगने की वजह से सूरज की आंख खुली तो वह देखा कि वह अपने कमरे में ही सो रहा था जबकि वह अपनी मां के कमरे में जाना चाहता था लेकिन कुछ देर के लिए अपने चारपाई पर लाकर इंतजार कर रहा था और न जाने कब उसकी आंख लग गई थी। वह उठकर चारपाई पर बैठ गया और अपने कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो अभी अंधेरा था वह धीरे से अपनी मां के कमरे की तरफ देखा दरवाजा बंद था वह देखना चाहता था कि उसकी मां रात को उसका इंतजार कर रही थी कि नहीं इसलिए दरवाजे के पास जाकर दरवाजे को पड़कर हल्का सा अंदर की तरफ धक्का दिया तो दरवाजा अपने आप खुल गया और उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,, क्योंकि रात भर उसकी मां दरवाजा खुला रख कर उसका इंतजार कर रही थी। अपनी मां के कमरे में ना जाकर के वाहन धीरे से घर के बाहर आ गया पेशाब करने के लिए क्योंकि बड़े जोरों की पेशाब लगे होने की वजह से वह अपनी मां के साथ हम बिस्तर होना नहीं चाहता था क्योंकि ऐसे में उसकी मां चुदाई में नहीं लगता बार-बार उसकी मां पेशाब करने को जाने को करता इसलिए वह पहले इस काम को निपटाना चाहता था और पेशाब करने के बाद वह धीरे से घर में दाखिल हुआ धीरे से दरवाजा बंद किया ताकी रानी की आंख ना खुल जाए,,, और एक बार तसल्ली करने के लिए वह अपनी बहन के कमरे के पास गया और उसके दरवाजे को भी धीरे से अंदर की तरफ धक्का दिया तो वह भी खुल गया यह देखकर उसके होठों पर फिर से मुस्कान तैरने लगी क्योंकि मां बेटी दोनों रात भर चुदवाने के लिए तैयार थी,,,। वह धीरे से दरवाजे की कड़ी लगा दिया ताकि रानी इस समय बाहर निकलना चाहे तो निकल ना पाए और उसे पता चल जाए की रानी जाग गई है और वह सही समय पर अपने कमरे में चला जाए,,,,,।

सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक तौर पर उसका लंड कुछ ज्यादा ही टनटनाया हुआ था,,, वह जल्दी से अपनी काम के कमरे के पास गया और धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर की तरफ देखने लगा बिस्तर पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई,, क्योंकि उसकी मां घुटनों को मोड कर लेती हुई थी वह गहरी नींद में सो रही थी और उसकी साड़ी सरक कर उसकी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हो गई थी जिसकी वजह से उसकी मोटी मोटी गोरी जांघें एकदम साफ दिखाई दे रही थी जो की लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी,,,, ऐसी हालत में अगर उसे कोई भी देखा तो बिना कहे उसका लंड खड़ा हो जाता और यहां तो सूरज का लंड पहले से ही खड़ा था। कुछ देर तक वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर मस्त होता रहा लेकिन उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी जिसके साथ वह मजा लेने वाला था। सूरज बिना आवाज की अपनी मां की चारपाई के करीब आगे बढ़ने लगा वह तो बेसुध होकर सो रही थी अपने ही बेटे के इंतजार में करोड़ बदलकर कब सो गई उसे खुद को पता नहीं चला,,,, अपनी मां की मोटी मोटी नंगी जांघों को देखकर सूरज की आंखों में हवस की चमक बढ़ती जा रही थी देखते देखते वह अपनी मां के करीब चारपाई पर बैठ गया,,, उसकी मां को बिल्कुल आभास तक नहीं हो रहा था कि उसके कमरे में उसका बेटा सुबह के पैर में घुस आया था। और वैसे भी सुबह के पैर में कुछ ज्यादा ही नींद लगती है नींद गहरी हो जाती है और इसी अवस्था में सुनैना भी नींद का आनंद ले रही थी। वैसे तो सूरज भी इस पहर में गहरी नींद में सो जाता था लेकिन आज की बात कुछ और थी।

सुनैना गहरी गहरी सांस ले रही थी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसकी मोटी मोटी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लोटी हुई थी,,, जो की सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और यह सब देखकर सूरज का हौसला बुलंद हो रहा था उसका धैर्य जवाब दे रहा था उसे रहा नहीं गया और वह उत्तेजना से अपने सूखे गले को अपने ही थुक से गिला करने की कोशिश करते हुए अपनी मां की मोटी मोटी जांघों पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा,,,,, इस तरह की हरकत करते हुए सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने को उतारू था। लालटेन की पीली रोशनी में सुनैना की मदहोश कर देने वाली जवानी चमक रही थी। सूरज पहले भी अपनी मां की गदराई जवानी का भोग लगा चुका था लेकिन हर बार एक नया अनुभव उसे अपनी मां से मिल रहा था। आज उसके लिए पहला मौका था जब वह किसी की चुदाई करने के लिए सुबह के पहर में अपने कमरे से बाहर निकला था और वह कोई और नहीं बल्कि उसकी मां थी जो की गहरी नींद में सो रही थी,,, उत्तेजना से सूरज की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की मोटी जांघों पर अपनी हथेली रखकर उसे सहला रहा था,,, और अपनी मां को जगाने की कोशिश कर रहा था,,,, लेकिन वह बेसुध होकर गहरी नींद में सोई हुई थी और फिर सूरज ने अपनी मां को जगाने का एक नया तरीका खोज निकाला,,,, वह धीरे से फिर से चारपाई से उठकर खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गया,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था कमरे के अंदर सोई हुई सुनैना अर्धनग्न अवस्था में थी वैसे तो उसके बदन पर पूरे कपड़े थे लेकिन अस्तव्यवस्त हालत में जिसकी वजह से उसकी गर्म जवानी झलक रही थी जिसे देखकर सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था। सूरज के सांस गहरी चल रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत लेटी हुई थी जिसकी टांगे मुड़ी हुई थी और साड़ी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हुई थी,,,, धीरे से सूरज सुनैना के बिस्तर पर चढ़ गया बिल्कुल भी आवाज किए बिना क्योंकि वह जानता था कि ऐसे हालात में अगर उसकी मां की नींद खुल गई तो वह घबरा जाएगी,,,, और हो सकता है कि वह शोर मचा दे इसलिए वह अपनी मां को काबू में करने का नया उपाय खोज लिया था।

देखते देखते वह बिस्तर पर चढ़कर अपनी मां की दोनों टांगों को धीरे से खोल दिया टांगों को खोलते ही सुनैना की गुलाबी पर एकदम से झलकने लगी जिस पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी,,,, सब कुछ लालटेन की पीली रोशनी में साफ-साफ दिखाई दे रहा था ज्यादा मसक्कत करने की जरूरत नहीं थी,,,, सूरज नजर भर कर अपनी मां की गुलाबी बुर को देख रहा था,,,,, जोकि रात को सोने से पहले इसके अंदर अपना लंड डालकर पानी पानी कर दिया था। सूरज एक नजर अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा जो कि सोते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और फिर धीरे से अपने प्यास होठों को अपनी मां की लसलसाई बुर की तरफ आगे बढ़ाने लगा जैसे-जैसे सूरज के होंठ सुनैना की बुर की तरफ आगे बढ़ रहे थे वैसे-वैसे उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,,, और फिर अगले ही पल सूरज के प्यासे होठ एकदम से उसकी मां की गर्म बुर पर स्पर्श होने लगे,,, लेकिन अभी भी सुनैना पर बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह गहरी नींद में सोई हुई थी उसे नहीं मालूम था की चोरी चुपके उसका बेटा उसके कमरे में दाखिल होकर उसकी जवानी का रस चाटने वाला है,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बर पर रगड़ता रहा लेकिन नींद में होने के बावजूद भी उसका खूबसूरत बदन उसकी गुलाबी बुर अंकित के जवान होठों की हरकत की प्रतिक्रिया दे रही थी। उसमें से मदन रस का बहाव हो रहा था,,, गहरी नींद में होने की वजह से भले ही अपने बेटे की कामुक हरकत की वजह से सुनैना का बदन ऊपरी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है लेकिन अपने आप ही उसके अंदरूनी हिस्सों से सूरज को बराबर सहकार मिल रहा था। सूरज अपनी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस को चाटना शुरू कर दिया,,,, और इस बार सुनैना के बदन में हलचल महसूस होने लगी,,, उसका बदन गनगनाने लगा। और अब सूरज रुकने वाला नहीं था। पागलों की तरह अपने होठों को एकदम से खोलकर अपनी मां के संपूर्ण बुर के आकार को अपने मुंह में भर लिया, और उसे एकदम से नोचने लगा,,,, इतने से सुनैना की नींद खुल गई और वह एकदम से घबरा गई,,,, वह लेटे-लेटे ही पीछे हटना चाहती थी लेकिन सूरज दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थामे हुए था जिसे वह ऊपर की तरफ सरक नहीं पाई,,, सूरज अपना कार्य जारी रखे हुए था सुनैना की सांस उखड़ चुकी थी वह घबराई हुई अपनी टांगों के बीच देख रही थी लेकिन जैसे ही उसे हिसाब सुबह की उसकी टांगों के बीच कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा सूरज है तब उसकी जान में जान आई।

धत् मैं तो डर गई,,,, कि यह कौन आ गया,,?

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,, मैं रात भर तेरा इंतजार कर रही थी अब जाकर तू आया है,,,,, कितना समय हो रहा है,,,,।

सुबह होने वाली है,,,(जवाब देने के लिए सूरज कुछ पल के लिए अपने मुंह में से अपनी मां की बुर को छोड़ दिया और इतना कहने के बाद फिर से अपनी हरकत को आगे बढ़ाने लगा लेकिन सुबह होने की बात सुनते ही,,,, वह एकदम से घबरा गई और बोली,,,,।

रानी कहां है,,,?

घबराओ मत अभी सुबह होने में काफी समय बाकी है अभी बाहर अंधेरा ही है,,,,,(इतना कहने के लिए सूरज ने फिर से अपनी मां की बुर को अपने मुंह से बाहर निकाला और फिर इतना कहने के बाद तुरंत मुंह में भरकर चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुनैना फिर से मदहोश हो गई और गहरी सांस लेते हुए बोली)

मैं तो डर ही गई थी,,,,,,, और तुझे अभी समय मिला रात भर दरवाजा खुला छोड़ कर सोई झांकने तक नहीं आया अभी कैसे आ गया,,,,,, चल अब आ गया है तो अच्छे से चाट,,,,, रात को जल्दबाजी में पीछे से काम निपटा दिया,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,,,(सुनैना एकदम मदहोश होती हुई अपनी दोनों टांगों को और ज्यादा खोलकर अपने दोनों हाथ को अपने बेटे के सर पर रख दी और अपनी बुर पर उसके होठों का दबाव बढ़ने लगी और खुद भी अपनी कमरको ऊपर की तरफ उचकाने लगी,,,,,, खटिया पर सुनैना की मदहोशी एकदम साफ झलक रही थी,,,,, सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से सूरज अपनी मां को मस्त करता रहा और खुद भी मजा लेता रहा,,,, और फिर धीरे से अपनी मां की टांगों के बीच से हटाओ और घुटनों के बल ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, सुनैना को आप एहसास हुआ कि उसका बेटा पूरी तरह से निर्वस्त्र था मतलब साथ था कि वह उसके कमरे में आकर बहुत कुछ किया था,,,, देखते ही देखते सूरज अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रगड़ने लगा अपने बेटे का इशारा समझ कर वह धीरे से अपने लाल लाल होठों को खोल दिया और अपने बेटे के सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से सूरज एकदम से मदहोश हो गया,,,,, उसके मुंह से भी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी उसे बड़ा मजा आ रहा था। अपनी मां से लंड चुस्वाने के साथ वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी मां की बुर पर हथेली से जोर-जोर से रगड़ रहा था गर्म कर रहा था और उसकी हरकत का जवाब देते हुए सुनैना अपने मुंह को आगे पीछे करके अपने बेटे को मजा दे रही थी।

लालटेन की पीली रोशनी पर्याप्त थी इस कमरे को रोशन बनाने के लिए क्योंकि सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था यह सिलसिला कुछ देर तक इसी तरह से चलता रहा। लेकिन अब समय आ गया था चुदाई करने का क्योंकि अब सूरज से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और धीरे-धीरे समय आगे भी बढ़ रहा था कुछ ही देर में उजला होने वाला था इसलिए सूरज एकदम से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया, जिससे सुनैना की भारी भरकम आधी गांड सूरज की जांघों पर आ गई और सुनैना की बुर सूरज के लंड के बेहद करीब आ गई,,, सुनैना की गुलाबी बर को देखकर सूरज का लंड सलामी भरने लगा वह अपने आप ही ऊपर नीचे होकर हिल रहा था और सच में ऐसा लग रहा था कि जैसे अपनी मां की जवानी देखकर वह सलामी दे रहा हो,,,, गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देख कर सूरज अपनी अकेली को एक बार अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ज़ोर से दबोचते हुए बोला।

सहहहहह बहुत गर्म बुर है तेरी,,,,सहहहहहह ऊमममममम आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा और उसे पर हथौड़े की तरह सुपाड़े का वार करने लगा जिससे सुनैना एकदम से मदहोश होने लगी,,, और फिर देखते ही देखते अपने लंड को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराने लगा,,,, लालटेन की पीली रोशनी में यह मनमोहन रूप और भी ज्यादा उत्तेजक लग रहा था सुनैना भी अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देख रही थी जैसे-जैसे लंड बुर के अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे सुनैना के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे कभी दर्द की रेखाएं खींच जाती तो कभी उत्तेजना और मदहोशी की आभा से पूरा चेहरा तमतमा उठता,,,, धीरे-धीरे करके सूरज अपने समुचे लंड को अपनी मां की बुर में डाल दिया था,,, और फिर अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सूरज अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,,, अभी शाम ढलने के बाद ही खाना बनाते समय ईसी कसमकस में थी कि इस रिश्ते को आगे बढ़ाया जाए या इसे यहीं खत्म कर दिया जाए,,,, सुनैना जानती थी कि आप उसे अपने आप पर काबू नहीं हो पाएगा इसलिए वह अपने मन की बात सुनी थी और इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की ठान ली थी और नतीजा यह था कि सुबह-सुबह ही वह अपने बेटे से चुदाई का सुख भोग रही थी। हर धक्के का मजा लूट रही थी,,, अभी तक सूरज अपनी मां की ब्लाउज का बटन नहीं खोला था बस ऐसे ही वह अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था लेकिन धक्के लगाते समय वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था जिसका पहले से ही दो बटन खुला हुआ था।

ब्लाउज के सारे बटन खोलते ही सुनैना की नंगी जवानी एकदम से लहराने लगी जिसे सूरज अपने दोनों हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते सुनैना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी लेकिन हीरोइन की बात यह थी कि वह अपनी सिसकारी की आवाज को दबाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी,,, बल्कि बड़ी आनंदित होकर वह शिसकारी भर रही थी। सूरज के हर एक धक्के में उसे मजा मिल रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुई जा रही थी सुबह-सुबह ही आज उसका पूरा दिन बन गया था। मदहोशी में डूबा हुआ सूरज जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था। उसने बहुत सी औरतों की चुदाई किया था लेकिन जो सुख उसे अपनी मां को चोदने में मिलता था वह सुख उसे किसी और औरत में बिल्कुल भी नहीं मिलता था वरना उसकी बहन का भी दरवाजा खुला हुआ था लेकिन वह जवानी से भरी हुई अपनी बहन को नहीं चोदा और अपनी मां के कमरे में आ गया क्योंकि वह जानता था कि यहां पर ही असली सुख मिलने वाला है और असली सुख ले भी रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला अपने बेटे की बात मानते हुए सुनैना पलट गई और घुटनों के बल होकर घोड़ी बन गई उसकी लहराती हुई बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगाता हुआ सूरज फिर से अपने लंड को अपनी मां के बुर में डाल दिया और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाने लगा और यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर दिया और अपनी मां को संतुष्ट करने के बाद उसका खुद का पानी निकल गया,,,, सुबह-सुबह ही मां बेटे दोनों दिन की शुरुआत चुदाई से किए थे दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे सूरज चारपाई से नीचे उतरा और बाहर की तरफ देखा तो धीरे-धीरे उजाला हो रहा था वह जल्दी से अपने कपड़े पहनकर बिना कुछ बोले अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया और धीरे से जाकर अपनी बहन के कमरे के दरवाजे की कड़ी खोल दिया और फिर अपने कमरे में आकर ले लिया क्योंकि इतनी सुबह उठने की उसकी आदत नहीं थी बहुत जरूरी काम होता था तभी वह सुबह उठता था और अगर उसे पेशाब ना लगा होता तो इतना मज़ा वह सुबह-सुबह नहीं ले पाता,,, लेकिन अपने कमरे में आते ही सबसे पहले वह रानी साहिबा के कान के झुमके को दीवार में बनी दरार में छुपाने लगा क्योंकि वह भूल चुका था कि उसके कुर्ते की जेब में रानी साहिबा का झुमका है जो कि अपनी मां के कमरे में कपड़ा उतारते समय झुमका वहीं गिर गया था अच्छा हुआ कि उसकी मां की नजर नहीं पड़ी थी। वरना वह अपनी मां के सवालों का क्या जवाब देता क्योंकि यही तो एक बहाना था रानी साहिबा से दोबारा मुलाकात करने का और वैसे भी राजा साहब अभी घर पर नहीं थे यह बात रानी साहिबा खुद बताई थी यही सही मौका था उससे मेलजोल बढ़ाने का वैसे तो इस मेल जोल में खतरा भी बहुत था लेकिन एक बात तो अच्छी तरह से जानता था कि डर के आगे जीत है। झुमके को छुपा कर वह फिर से खटिया पर लेट गया।
 
मां बेटे दोनों मजे लूटना शुरू कर दिए थे सूरज तो अपनी मां से पूरी तरह से खुल चुका था लेकिन सुनैना अभी भी अपने बेटे के सामने थोड़ा शर्म दिखाती थी क्योंकि वह पहल नहीं कर पाती थी,,, लेकिन फिर भी जो सुकून से अपने बेटे से मिल रहा था इस तरह का अशोक उसे अपने पति से भी नहीं मिला हालांकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका पति दिन रात उसकी चुदाई करता रहता था लेकिन फिर भी जो दिखती का एहसास उसे अपने बेटे से मिल रहा था ऐसा एहसास उसे अपने पति से नहीं मिल पाया था हालांकि संतुष्ट करने में उसका पति भी पूरी तरह से मर्द ही था फिर भी एक कमी सी थी जो कमी उसका बेटा पूरा कर रहा था। सुबह-सुबह ही जिस तरह की चुदाई सूरज ने उसकी किया था उससे वह झाड़ू लगाते समय अपनी कमर पर हाथ रखकर झाड़ू लगा रही थी क्योंकि उसकी कमर थोड़ा-थोड़ा दर्द दे रहा था। अपनी मां को इस तरह से झाड़ू लगाता देखकर रानी बोली,,,,।

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क्या हुआ मां कमर दुख रही है क्या,,,?

हां पता नहीं क्यों आज बहुत कमर दुख रही है,,, (सुनैना तो जानती थी कि उसकी कमर किस कारण से दुख रही है लेकिन वह अपनी बेटी से तो कह नहीं सकती थी ना कि सुबह-सुबह तेरे भाई ने चोद कर गया है इसलिए दुख रही है,,,,, अपनी मां की बात सुनकर रानी बोली,,,)

तुम रहने दो मां मैं झाड़ू लगा देता हूं आराम कर लिया करो लेकिन तुम हो कि मानती नहीं,,, (ऐसा कहते हुए रानी अपनी मां के हाथ से झाडू ले ली और लगने लगी सुन ना मुस्कुराते हुए खटिया पर बैठ गई और अपने मन में ही बोली अब तुझे कैसे बताऊं कि यह असली आराम करने का नतीजा है,,,,, देखते ही देखते रानी पूरे आंगन में झाड़ू लगा दी और झाड़ू लगाने के बाद वह अपनी मां से बोली,,,,)

तुम आज रहने दो मैं खाना बना देता हूं इसके बाद में तुम्हारी मालिश कर दूंगी तो तुम्हें आराम मिल जाएगा,,,।

नहीं नहीं मालिश करने की कोई जरूरत नहीं है,,,, ऐसे ही आराम मिल जाएगा,,,।

ऐसे कैसे आराम मिल जाएगा तुम बस बहाना बनाती रहती हो और दिन भर दर्द में रहती हो मुझे ऐसा देखा नहीं जाता आखिरकार एक ने एक दिन मुझे इस घर से जाना ही है फिर उसके बाद तुम्हारा ख्याल कौन रखेगा,,,,,।

(रानी की बात सुनकर सुनैना मन ही मन मुस्कुरा रही थी क्योंकि साथ दिखाई दे रहा था कि रानी को उसकी कितनी फिक्र थी फिर भी वह अपनी बेटी की बात सुनकर बोली)

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हमममम यह बात तो है अब कुछ ही साल में तेरी शादी हो जाएगी तो अपने घर चली जाएगी तो मेरी सेवा करने के लिए किसी को तो आना पड़ेगा तू तो बार-बार आ नहीं सकती इसलिए सूरज की ही शादी करनी पड़ेगी ताकि उसकी बीवी मेरी सेवा कर सके,,,,।

कुछ भी हो मां एक बहू एक बेटी की तरह कभी सेवा नहीं कर सकती इसलिए रहती हूं जब तक हूं तब तक सेवा करवा लो चली गई तो फिर,,,,,

ओहहह बहुत शादी करने का मन हो रहा है तेरा,,,,।

(अपनी मां की इस बात पर रानी शर्मा गई वह कुछ बोल नहीं पाई,,,,, बस बर्तन इधर-उधर करने लगी और रसोई बनाने की तैयारी करने लगी और यह देखकर सुनैना फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) तू रहने दे खाना बनाने को मैं बना लूंगी तो बाकी का काम संभाल ले यह तो रोज का है,,, (इतना कहकर वह अपने मन में ही बोली तेरा भाई मुझे छोड़ने वाला नहीं है रोज मेरी चुदाई करेगा)

नहीं रहने दो मैं आज खाना बना लेती हूं तुम आराम करो खाना बनाने के बाद में तुम्हारी मालिश कर दूंगी सरसों के तेल से तुम्हें अच्छा लगेगा और आराम मिल जाएगा,,,, वैसे भी अब बरसात का समय आ गया है खेतों में काम बढ़ जाएगा,,, धान लगाना पड़ेगा तब तो झुक कर ही काम करोगी ना और कमर में आराम नहीं रहेगा तो कैसे काम चलेगा,,,,।

(अपनी बेटी की बात सुनकर सुनैना फिर से अपने मन में बोली,,,, वह तो बरसात आएगी तब झुकना पड़ेगा लेकिन तेरा भाई तो रोज मुझे झुका रहा है उसका क्या,,,,, रानी के जीते के आगे सुनैना को हार मानना पड़ा वह खटिया पर ही बैठी रह गई,,, खटिया पर ही नीम की दातुन पड़ी थी जिसे लेकर वह अपना दांत साफ करने लगी,,,, सूरज अपने कमरे से कब चला गया था किसी को पता ही नहीं चला था... सूरज के मन में भी आज रानी साहिबा से मिलने का मन कर रहा था क्योंकि जब से उसने बाजार में रानी साहिबा की खूबसूरत चेहरे का दर्शन किया था तब से उसकी आंखों के सामने रानी साहिबा यही घूम रही थी उसकी मुस्कान उसके बोलने की अदा उसके हंसने की आवाज सब कुछ सूरज को पागल बना रही थी... रानी साहिबा की कोठी बाजार की दूसरी तरफ थी इसलिए सूरज घर से जल्दी निकल गया था ताकि आराम से रानी साहिबा के घर पहुंच सके वैसे भी अब मौसम थोड़ा बेईमान हो रहा था रह रहे कर बादल छा जा रहे थे तो रह रहकर बदल छंट जा रहे थे ऐसा लग रहा था कि अब बरसेगा तब बरसेगा लेकिन अभी तक बरसात शुरू नहीं हुई थी सूरज के मन में यह भी चिंता थी कि अभी घर के छत की थोड़ी मरम्मत करनी थी वरना बरसात में पूरे घर में पानी टपकता था। सूरज खेतों में से होता हुआ बाजार की तरफ आगे बढ़ रहा था क्योंकि रानी साहिबा की कोठी से पहले बाजार ही आता था,,,,, चलते हुए ही वह नीम का दातुन करके अपने दांत की सफाई कर लिया था । वह गांव पर करने ही वाला था कि तभी सामने से सोनू की मां आई हुई दिखाई दी वह सौच करके आ रही थी,,,, सूरज को देखते ही वह एकदम खुश हो गई क्योंकि बहुत दिन हो गए थे सूरज से मुलाकात हुए,,,, वह गांड मटकाते हुए सूरज के पास आई और मुस्कुराते हुए बोली,,,।

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क्या हुआ बबुआ आजकल तो दर्शन ही नहीं दे रहा है।

मेरे दर्शन के लिए तड़प रही हो क्या चाची,,,।

ऐसा बोल रहा है कि जैसे तुझे कुछ पता ही नहीं है जो आप तूने मेरे बदन में लगाया है वह भड़कती ही रहेगी या उसे बुझाएगा भी,,,,,।

अभी तक तृप्त नहीं हुई हो चाची,,,,।

बिल्कुल भी नहीं रे तूने तो मेरे बदन में आग लगा दिया है,,,,,।

कहो तो अभी बुझा दुं,,,

(सूरज की यह बात सुनकर सोनू की मां का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा वह इधर-उधर देखते हुए बोली)

यहां पर,,,,!

तो क्या,,,, यही तुम्हारी चुदाई कर दुं,,,,,(सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

नहीं नहीं यहां तो लोग आते जाते हैं किसी की नजर पड़ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

तो तुम जहां बोलो,,,,,।

(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची इधर-उधर देखने लगी और उसे तुरंत एक टूटी हुई झोपड़ी दिखाई दी और वह हाथ का इशारा करते हुए एकदम उत्साहित होते हुए बोली)

चल उस झोपडी के अंदर,,,,,,।

चलो मुझे क्या है मुझे तो बस पानी निकालना है,,,,।

और मुझे मुझे क्या बच्चे पैदा करना है मुझे भी पानी निकालना है इस उम्र में मैं तेरे बच्चे की मां नहीं बन सकती,,,,।

बनने को तो अभी भी तो मेरे बच्चे की मां बन सकती हो एक मौका देकर देखो एक ही बार में तुम्हें जुड़वा बच्चों की मां ना बना दिया तो कहना,,,।

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ना बाबा ना इस उम्र में नहीं,,,

इस उम्र में चुदवा सकती हो बच्चे पैदा नहीं कर सकती,,,,,।

अरे हां बच्चे से याद आया,,, सोनू की चाची पेट से है मैं तो इस बात को सुनकर बहुत खुश हुई मुझे तो लग रहा था कि उसके कोई औलाद ही नहीं होगी चलो देवर जी कुछ तो लायक निकले नहीं तो मुझे लग रहा था कि बिना औलाद के हीं रह जाएंगे,,,।

अरे चाची यह तो बहुत खुशी की बात है,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची के पेट में किसका बच्चा है इसलिए वह बहुत खुश हो रहा था क्योंकि बिना शादी किए वह बाप बनने वाला था,,, एकदम उत्साहित होते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) वैसे चाची कौन सा महीना चल रहा है,,,

सातवां महीना चल रहा है,,,,,।

(इतना सुनकर सूरज अपनी मन में ही बोला मतलब की शुरू की चुदाई में हीं वह पेट से हो गई थी चलो अच्छा हुआ उसकी मेहनत रंग तो लाई,,,, वैसे भी सोनू की चाची को बच्चा चाहिए था और मजा भी ,,,)

चलो अच्छी बात है तब तो जल्द ही मिठाई खाने को मिलेगी,,,,।

तू चिंता मत कर पूरे गांव को खाना खिलाऊंगी,,,।

और कहीं तुम पेट से हो गई तो,,,,,

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धत् हरामी,,,,,,।

(सूरज जब सोनू की मां से बात कर रहा था तभी उसकी नजर पेड़ पर पड़ी चौकी काफी घने झाड़ियों के बीच था वहां पर सोनू छुप कर यह सब देख रहा था और सारी बातों को सुन रहा था,,,, सूरज को सारा माजरा समझ में आ गया सोनू अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा था क्योंकि उसे औरतों को पेशाब करते हुए और सोच करते हुए देखने की आदत थी इस आदत की वजह से ही आज वह इस मकान पर पहुंच चुका है कि रोज कोई ना कोई चोदने को मिल जाती थी,,, सूरज को पिछली बात याद आ गई थी जब सोनू ने उसे चोरी छुपे अपनी चाची का पिछवाड़ा दिखाया था तब से ही सूरज के मन में औरतों के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था और आज वह सबसे बड़ा चुडक्कड़ बन गया था,,,,, सूरज समझ गया था कि आज भी है अपनी चाची को नहीं बल्कि अपनी मां को चोरी छुपे देखने के लिए आया था उसकी नंगी गांड को देखने आया था,,,, सोनू को देखते ही सूरज का शैतानी दिमाग बड़ी तेजी से काम करने लगा और वह मजा लेने के लिए बोला,,,)

चाची तुम मुझे चुदवाने के लिए यहां पर आई हो कहीं इस बात की खबर सोनू को पड़ गई तो क्या होगा,,,।

धत् ऐसा नहीं होगा,,,,।

नहीं मैं सिर्फ बात कर रहा हूं कि अगर तुम्हें चुदवाते हुए उसने अपनी आंखों से देख लिया तो अपने मन में क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में,,,,।

अरे कुछ नहीं सोचेगा वह बेवकूफ है,,।

नहीं नहीं बेवकूफ तो नहीं है,,,, मेरा दोस्त भी तो है समझदार है ‌।

समझदार होता तो अब तक अपनी चाची की चुदाई कर दिया होता लेकिन वह एकदम बेवकूफ है तभी तो उसकी चाची उसे दी नहीं वरना वह तुम्हारी ही उम्र का है तुम्हारे जैसा ही होना चाहिए लेकिन सब बेकार है,,,,।

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(सोनू की मां को बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि उसका बेटा पेड़ के पीछे चेक कर उसे देख भी रहा है और उसकी बातों को सुन भी रहा है और शायद अब वह अपने आप से घ्रणा भी करने लगेगा क्योंकि उसे एहसास होने लगा होगा कि वाकई में उसे क्या बनना चाहिए और वह क्या बन गया है चाहे जो भी हो इस समय सुरज सोनू को दिखा दिखा कर मजा लेना चाहता था ‌। सोनू की मां की बात सुनकर सूरज बोला,,)

नहीं चाची ऐसी बात नहीं मौका मिलता तो वह क्यों नहीं ऐसा करता उसे मौका ही नहीं दे रही होगी तो कैसे कुछ कर पाएगा मेरी बात मानो तुम्ही उसे एक बार मौका दे दो फिर देखो वह तुम्हारी बुर का कैसे भोसड़ा बनाता है,,,,।

धत् मादरचोद,,,,, बकवास बंद कर,,,, मैं मां होतर उससे बोलूं टांगे खोल कर ले मेरी मार ले,,,,।

(इतना सुनकर सूरज हंसने लगा और हंसते हुए बोला)

अभी तुम ही तो कह रही थी कि वह बेवकूफ है और जब मैं कह रहा हूं उसे मौका दो तो मुझे डांट रही हो।

चल अब दांत मत दिखा मेरी बुर में आग लगी हुई है चल जल्दी से झोपड़ी में,,,,।

चलो मेरी रानी,,(एकदम से सोनू की मां के करीब आकर अपना एक हाथ जोड़ से पिछवाड़ा पर मरते हुए अपनी उंगली को साड़ी के ऊपर से ही सोनू की मां की गांड में डालने की कोशिश करते हुए) रोका किसने है,,,,,,,(सूरज की हरकत को सोनू अपनी आंखों से देख रहा था और जरूर यह सब देखकर उसके तन बदन में आग लग गई होगी,,, सूरज की हरकत से सोनू कि मैं एकदम से मतवाली होते हुए बोली)

सूरज और सोनू की मां

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उंगली नहीं रे अपना लंड डाल दे पूरा,,, चल जल्दी चल,,,,(इतना कहते हुए सोनू की मां सूरज का हाथ पकड़ कर झोपड़ी की तरफ ले जाने लगी और सूरज तिरछी नजर से सोनू की तरफ देखने लगा सोनू को नहीं मालूम था कि सूरज उसे देख लिया है इस खेल में आप सूरज कुछ ज्यादा ही मजा देने वाला था सोनू को दिखा दिखा कर क्योंकि उसका पहला मौका था जब वह किसी बेटे के सामने उसकी मां की चुदाई करने जा रहा था,,,, पीछे पीछे सूरज था और आगे आगे सोनू की मां की जय सूरज का हाथ पकड़ कर घनी झाड़ियों के बीच से रास्ता बनाते हुए झोपड़ी के पास जा रही थी,,, सूरज चोरी छुपे पीछे भी देख ले रहा था कि सोनू आ रहा है कि नहीं और सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगी थी क्योंकि सोनू भी पीछे-पीछे आ रहा था उसे देखकर सूरज अपने मन में सोचा कि देखो कैसा बेटा है अपनी मां की चुदाई देखने के लिए आ रहा है,,,, थोड़ी देर में झोपड़ी के पास पहुंच चुके थे सोनू कि मैं फिर भी तसल्ली करने के लिए इधर-उधर नजर घुमा कर देखने लगी कि कहीं कोई उन्हें देख तो नहीं रहा है और तसल्ली कर लेने के बाद सूरज का हाथ पकड़े हुए ही वह झोपड़ी में प्रवेश कर गई वह यह नहीं जानती थी कि उसे भले दूसरा कोई ना देख रहा हो लेकिन उसका बेटा उसे देख रहा था उसकी बात सुन रहा था और अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां सूरज को लेकर के झोपड़ी के अंदर क्या करने गई है इसलिए तो उसकी उत्सुकता और उसके साथ दोनों बढ़ती चली जा रही थी,,,,, झोपड़ी में प्रवेश करते ही सूरज ने देखा कि बाहर से झोपड़ी के अंदर देखे जाने के लिए बहुत सारी जगह थी इसलिए वह एक मिलन से झोपड़ी में जाते ही सोनू की मां को अपनी ओर खींचकर अपनी बाहों में जकड लिया,,, और उसके होठों पर चुंबन करना शुरू कर दिया थोड़ी ही देर में,,, सूरज को आहट सुनाई दी जो कि यह आहट किसी और कि नहीं बल्कि सोनू की चहल कदमी की थी। इसलिए सूरज की आंखों की चमक बढ़ गई थोड़ी देर में सूरज को सोनू की परछाई नजर आने लगी जो झोपड़ी के दूसरी तरफ से अंदर देखने की कोशिश कर रहा था और जल्द ही सूरज को एहसास हो गया कि सोनू ने वह जगह ढूंढ लिया है जिससे वह अपनी मां की बेशर्मी भारी चुदाई देखने जा रहा था,,,,।

सोनू की मां और सूरज

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सोनू अपनी मां को अपने दोस्त की बाहों में देखकर गदगद हुए जा रहा था उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था इस समय उसे गुस्सा आना चाहिए था लेकिन जिस तरह से उसकी यह सब देखने की आदत हो चुकी थी , उसे इन सब में मजा आने लगा था देखकर ही वह उत्तेजित हो जाता था मदहोश हो जाता था और इसलिए आज अपनी मां को सूरज की बाहों में देखकर वह उत्तेजना से भरा जा रहा था। लेकिन आज पहला मौका था जब हुआ अपनी मां को इस स्थिति में देख रहा था। सोनू को अंदर देखता हुआ पाकर सूरज अपने दोनों हथेलियां साड़ी के ऊपर से ही सोनू की मां की गांड पर ले गया और उसे जोर-जोर से दबाने लगा,,,,,एक बेटे के सामने उसकी मां के साथ सूरज पहली बार रंगरलिया मना रहा था ऐसा करने में सूरज को अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था। सूरज पागलों की तरह जोर-जोर से साड़ी के ऊपर से ही सोनू की मां की भारी भरकम गांड पर शपथ लगाते हुए उसे मसल रहा था जब आ रहा था इस तरह की हरकत से सोनू की मां भी मदहोश में जा रही थी वह सोनू को कस के अपनी बाहों में जकड़ी हुई थी,,, देखते ही देखते सूरज सोनू की आंखों के सामने उसकी मां की साड़ी को ऊपर उठा रहा था वाकई में इस तरह का नजारा देखकर किसी भी बेटे को गुस्सा आ जाए लेकिन सोनू को बिल्कुल भी गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां उसके ही दोस्त के साथ इस तरह से मजे लेगी देखते ही देखते सूरज में सोनू की मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया और उसकी नंगी गांड पर अपनी हथेलियां घूमने लगा जिसे देखने भर से सोनू को उत्तेजना का भूत सवार हो जाता था आज वह अपने दोस्त को अपनी मां की गांड को दबाते हुए मसलते हुए देख रहा था और वह भी नंगी गांड को यह सब देख कर सोनू का खुद का लंड खड़ा हो गया था।

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सहहहहह आहहहहहह,,,,, चाची मेरी रंडी अच्छा हुआ तो मुझे यहां मिलकर मेरी रानी सुबह से मेरा लंड खड़ा था,,,,, अगर तू नहीं मिलती तो मुझे दिला कर काम चलाना पड़ता है अच्छा हुआ मुझे हिलाने से फुर्सत मिल गई,,,,,सहहहहह आहहहहह आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा।ऊममममम मेरी चाची बहुत गर्म जवानी है तेरी।

बना दे मेरी बुर का भोसड़ा तेरे लिए ही तो लाइ हुं,,, अब सोनू के पापा के काम किया चीज नहीं देगी क्योंकि उनके हथियार अब काम नहीं करता इसलिए तो तेरे पास आता हूं मुझे मस्त कर दे मेरे राजा,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह ,,,,, दिखा तेरा लंड साड़ी के ऊपर से है मेरी बुर पर ठोकर मार रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की मां अपना हाथ सूरज के लंड पर रख दी पजामी के ऊपर से ही वहपूरी तरह से अपनी औकात में दिखाई दे रहा था,,, सोनू की मन नहीं जानती थी की चोरी छिपे उसकी काम लीला को उसका बेटा अपनी आंखों से देख रहा है,,,, देखते देखते वह अपनी घुटनों के बल बैठ गई,, सोनू की मां से रहा नहीं जा रहा था,,,, सूरज भी अपने आप को सोनू की मां के हाथ सौंप दिया था क्योंकि वह सोनू को उसकी मां की बेशर्मी दिखाना चाहता था वह यह दिखाना चाहता था कि उसकी मां कितनी बड़ी छिनार है,,,, और सोनू देख भी रहा था और समझ भी रहा था सोनू अभी तक अपनी मां को बहुत सीधी-सादी औरत समझता था लेकिन अपनी आंखों से देख कर उसे यकीन हो गया था कि उसकी मां सीधे पान का नाटक करती है बाकी उसके अंदर एक छिनार औरत छिपी हुई है,,,,, सोनू अपनी आंखों से देख रहा था कि उसकी मां अपने हाथों से सूरज के पजामी को घुटनों से खींचकर उसके मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,,,,, यह देखकर सोनू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,,, सूरज कर नजरों से सोनू की तरफ टूटी हुई झोपड़ी में मस्त हुआ जा रहा था,,,, सूरज और ज्यादा मजा लेने के लिए सोनू की मां से बोला।

सोनू की मां और सूरज

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सहहहहह आहहहहहह मेरी जान मेरी रंडी बहुत मस्त चुस्ती हो तुम पूरा गले तक लेकर चूसो मत कर दो मुझे एकदम छिनार हो तुम,,,, तुम्हारे छीनर पन के बारे में अगर तुम्हारा बेटा जान गया तो तुम्हारे ऊपर चढ़े बिना रह नहीं पाएगा,,,,सहहहहहह आहहहहह मेरी जान कहां थी तू अब तक पहले मिल गई होती तो पहले ही चोद चोद कर तुझे मस्त कर देता।सहहहहह आहहहहहह(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी कमर पर हाथ रखकर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया. ,,,, यह सब देखकर सोनू का इतना तो समझ में आ गया था कि यह आज का नहीं बल्कि पहले से यह सब चल रहा है क्योंकि जिस तरह से दोनों आपस में खुले हुए थे सोनू समझ गया था की दोनों का चक्कर बहुत पहले से चल रहा है वही चुतिया है जो समझ नहीं पाया,,,, सोनू अपने मन में यही सोच रहा था कि गांव के सामने कितना सीधा बना रहता है कोई से देखकर का नहीं सकता की औरतों के मामले में इतना तेज है लेकिन जो कुछ भी आंखों के सामने दिखाई दे रहा है उसे देखकर इतना तो सोनू समझ ही गया था कि यह बहुत बड़ा मादरचोद है,,,, सुनो अपनी मां को देख रहा था तो मजे लेकर घुटनों के ऊपर बैठकर सूरज के लंड को बड़े आराम से मुंह के अंदर तक ले रही थी और उसे चूस रही थी,,,,सुरज थोड़ी-थोड़ी देर पर अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर ब्लाउज के ऊपर से ही सोनू की मां की चूची को दबा दे रहा था जिससे सोनू की मां को थोड़ा सा दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन मजा बहुत मिल रहा था। कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे,,, सोनू की मां की बुर में आग लगी हुई थी,,, जी भरकर चुसाई करने धीरे से सोनू की मां अंकित के मोटे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाली, यह सब सोनु अपनी आंखों से देख रहा था,,, उसकी सबसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह पूरा का पूरा गले तक उतार कर मजा ले रही थी। देखते ही देखते सोनू घुटनों में फंसे पजामे को उतार कर एकदम नंगा हो गया,,,।

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सोनू की मां का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और उसे फिर से अपनी बाहों में लेकर उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देते हैं और उसकी नंगी चूचियां पके हुए पपाया की तरह झूल रही थी जिसे सूरज अपने हाथों से पकड़ कर जोर से दबाना शुरू कर दिया सोनू की मां मदहोश हो जा रही थी सूरज पीछे से सोनू की मां को बाहों में लेकर उसकी जोर जोर से दबा रहा था,,,,,।

सहहहहहह कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,,।

सहहहहह ऊमममममम बहुत अच्छा लग रहा है मेरे राजा,,,,,,सहहहहह आहहहल और जोर-जोर से दबा,,,,,,,।

क्यों चाचा जी नहीं दबाते क्या,,,?

चाचा जी दबाते तो तेरे पास आने की जरूरत ही क्या थी।,,,,,,,

लगता है अब उनका लंड खड़ा नहीं होता।

सही कहा तूने मैं खड़ा करते-करते थक जाती हूं लेकिन खड़ा होने का नाम ही नहीं लेता अच्छा हुआ कि मुझे तु मिल गया मेरी जवानी की प्यास तो बुझा देता है,,,,,।

वह तो मेरी जान जब से तुम मुझे मिली हो सच में मेरे लंड के लिए राहत हो गई है वरना हिला हिला कर काम चलाना पड़ता था।(ऐसा कहते हुए सूरज पीछे से सोनू की मां की बड़ी-बड़ी गांड पर अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी कमर हिलाई जाकर रगड़ रहा था जिसकी वजह से सोनू की मां की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी और अपनी भारी भरकम गांड को सूरज की लड़की पर गोल-गोल घुमा रही थी यह सब सोनू देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,, पर वह भी अपनी आंखों के सामने इस तरह के मनोहर दृश्य को देखकर खुद का पायजामा नीचे करके अपने लंड को बाहर निकल गया था जो की सूरज के मुकाबले आधा भी नहीं था,,,,, और उसे जोर-जोर से पकड़ रहा था मसल रहा था हिला रहा था। सूरज पागलों की तरह उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था दबा रहा था चुचीया इतनी बड़ी थी कि उसकी हथेली में ठीक तरह से आ नहीं रही थी फिर भी सूरज सोनू की मां की जवानी पर भारी पड़ रहा था,,,, सूरज का लंड सोनू की मां की बुर में घुसने के लिए तैयार हो चुका था,,,, इसी तरह से ही वह सोनू की मां को झुकने के लिए बोला और वह झुक गई,,,, सोनू की मां की भारी भरकम गांड को देखकर सूरज चोर नजरों से सोनू की तरफ देखा सोनू पागलों की तरह अपनी मां की नंगी गांड को ही देख रहा था,,, शायद यह सोनू के लिए पहला मौका था जब वह इतने करीब से अपनी मां की नंगी गांड को देख रहा था। सूरज अपने लंड को हिलता हुआ आगे बढ़ा और धीरे से थोड़ा सा और उसकी मोटी मोटी जांघों को खोल दिया जिससे उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ नजर आने लगी,,, उसकी गुलाबी बर देखकर जो की मदन रस से पूरी तरह से भीग चुकी थी सूरज बोला।

क्या बात है मेरी रंडी बहुत पानी बहा रही है तेरी बुर,,,,,।

हरामजादे तेरा लंड देखकर पानी छोड़ रही है जल्दी से इसे अंदर डाल दे मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

अभी लो मेरी रानी,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज ने अपने मोटे तगड़े लंड को ही कई बार में सोने की मां की बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया बर की अंदरूनी गर्मी को महसूस करके सूरज एकदम मदहोश होता हुआ बोला,) सहहहहह आहहहहह आहहहहहहहह मेरी छम्मक छल्लो बहुत गर्म बुरी तेरी,,,,,,आहहहहह मजा आ रहा है मेरी जान,,,(धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाते हुए) कभी अपने घर पर भी बुला कर चुदवा ईत्मीनान से इतना मजा दूंगा की जिंदगी भर याद रखेगी,,,,,,आहहहहहह सर इस उम्र में भी एकदम कसी हुई हो रही तेरे पास मुझे पूरा यकीन है कि सोनू का बाप तेरी जी भर कर कभी चुदाई नहीं कर पाया।

आहहहह आहहहहहह ऊमममममम मेरे राजा तू एकदम सच कह रहा है सोनू के बाप में तो दम ही नहीं है,,,,आहहहह आहहहहहह ,,,,,, मेरा भी बहुत मन करता है तुझे अपने कमरे में ले जाकर के रात भर तेरे साथ मजा लूं लेकिन क्या करूं सोनू की चाची रहती है ना लेकिन तु चिंता मत कर 10 12 दिनों में वह अपने मायके जाने वाली है बच्चा पैदा करने के लिए,,,।

ओहहह हो तब तो मजा ही मजा आ जाएगा मेरी जान )जोर-जोर से धक्के लगाते हुए) लेकिन चाचा जी उनके रहते में यह सब कैसेकर पाऊंगा,,,

तो चिंता मत कर मेरे राजा वह दूसरे कमरे में रहते हैं मैं अपने कमरे में अकेले ही रहती हूं ।

ऊममममम तब तो मजा ही मजा आ जाएगा मेरी जान देखना सुबह तक तुम्हें कपड़े पहने नहीं दूंगा नंगी रखूंगा,,,,,,।

(दोनों के बीच की अश्लील बातें दोनों के संभोग को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे और यह सब सोनू अपने कानों से सुन रहा था और अपनी आंखों से देख रहा था उसे एहसास हो रहाथा कि उसकी मां कितनी बड़ी छिनार है,,,, इस उम्र में लंड के लिए तड़प रही है,,, मन में इस तरह की भावनाएं उमड़ने के बावजूद भी सोनू अपनी मां के छिनर पन का आनंद ले रहा था,,, उसे बड़ा मजा आ रहा था यह सब देखने में उसे अच्छा लग रहा था कि सूरज उसकी मां की जमकर चुदाई कर रहा था उसकी मां की मोटी मोटी जांगे और सूरज की कई हुई कसरती जांघों क्या आपस में टकराने से एक अलग ही धुन सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर सोनू इतना मगन हो गया था कि अपनी मां की चुदाई देखकर अपने हाथ से ही अपना हीला रहा था,,,, सूरज रुकने का नाम नहीं ले रहा था सूरज का घोड़ा अब अपनी रफ्तार पकड़ लिया था हर एक धक्के में सोनू की मां को आनंद ही आनंद मिल रहा था,,,, जमकर चुदाई करने के बाद दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे जैसे ही सोनू की मां को एहसास हुआ कि वह झड़ने वाली है उसके मुंह से जोर-जोर से शिसकारी की आवाज निकालने लगी जिसे सुनते ही सोनू अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और वह झड़ने लगा,,,,,, और सूरज पूरी तरह से सोनू की मां पर काबू करते हुए उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था उसके धक्के इतने तेज थे कि सोनू की मां की भारी भरकम गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई शांत तालाब में कंकर फेंक दिया हो। यह सब देख कर सोनू को भी बहुत मजा आ रहा था देखते ही देखते सोनू की मां झड़ने लगी और थोड़ी देर बाद सूरज भी उसकी मां की बुर में अपना गरम लावा डालना शुरू कर दिया,,,,,।

अब सोनू का वहां रुकना उचित नहीं था इसलिए वह धीरे से दबे पांव पीछे हट गया और घर आ गया,,,, सोनू की मां भी खुश होती हुई अपने घर की तरफ चल दी और सूरज अपनी किस्मत पर इतराते हुए रानी साहिबा के घर की तरफ आगे बढ़ गया,,,, दूसरी तरफ रानी खाना बना चुकी थी लेकिन अभी नहाई नहीं थी क्योंकि उसे अपनी मां की मालिश करना था और उसकी मां भी नहीं नानी थी खाना बनाने के बाद वह सरसों के तेल को कटोरी में लेकर चूल्हे में बची आग पर उसे रख दी और उसे हल्का गर्म करने लगी यह देखकर सुनैना मुस्कुराते हुए बोली,,,,।

तू मानने वाली नहीं है।

तुम आराम नहीं कर सकती तो मैं इतना तो कर ही सकती हूं तुम्हारे लिए,,,,, कमरे में चलोगे या यहीं पर चादर बिछा दुं,,,,,।

चादर नहीं चटाई बिछा दे चादर गंदी हो जाएगी,,,,।

ठीक है मैं अभी चटाई लेकर आती हूं,,,(इतना कहकर वह घर के अंदर चली गई,,, और चटाई लेकर आई उसे आंगन में ही बिछा दी,सुनैना खटिया से नीचे उतरकर चटाई पर बैठ गई और रानी सरसों के तेल को गर्म करके उसे चिमटी से पकड़ कर चटाई के पास लाकर रख दी और अपनी मां से बोली,,,।

तुम पेट के बल लेट जाओ मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूं,,,,।

(रानी की बात मानते हुए सुनैना पेट के पास लेट गई उसकी चिकनी कमर रानी की आंखों के सामने थी रानी थोड़ा सा तेल अपनी हथेली में लेकर अपनी मां की कमर पर लगाने लगी उसकी मालिश करने लगी,,,, रानी की अकेली उसकी मां की कमर पैर फिसल रही थी जब जब रानी की हथेली कमर के निचले भाग पर जाती तब तब सुनैना को गुदगुदी होने लगती थी वह कसमसा जाती थी,,,,, यह देखकर रानी बोली,,)

क्या हुआ यहां ज्यादा दुख रहा है क्या,,?

दुख तो सब जग रहा है लेकिन गुदगुदी भी लग रही है थोड़ा आराम से,,,,।

अब इससे ज्यादा कितना आराम से मालिश करुं,,,, तुम्हारी साड़ी खराब हो रही है अगर साड़ी खोल दो तो और अच्छे से मालिश कर पाऊंगी,,,,।

तेरी जीद ना चाहते हुए भी पूरा करना पड़ता है,,,,(ऐसा कहते हुए सुनैना धीरे से उठकर अपनी शाडी को खोलने लगी और देखते ही देखे अपनी साड़ी को उतार कर बगल में रख दी,,,, अब वह अपनी बेटी के सामने साया और ब्लाउज में थी,,,, पल भर के लिए रानी अपनी मां की खूबसूरती को देख रही थी इस उम्र में उसके अंगों का उभार और बनावट लाजवाब था। साड़ी को खोलकर सुनैना फिर से पेट के बल लेट गई,,,,, रानी फिर से अपनी मां की कमर की मालिश करने लगी इस बार थोड़ा दबाव देकर मालिश कर रही थी,,,, सुनैना अच्छी तरह से जानती थी कि यह कोई काम करने की वजह से कमर दर्द नहीं कर रही थी बल्कि उसके बेटे की मेहनत की वजह से उसकी कमर दर्द कर रही थी लेकिन फिर भी रानी जिस तरह से मालिश कर रही थी उसे मजा आ रहा था अच्छा लग रहा था इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई,,,,,, थोड़ी देर बाद रानी अपनी मां के पैर के तलवों की मालिश करना शुरू कर दी,,,,, यह देखकर सुनैना बोली,,,)

अब यह क्या कर रही है तू,,,,?

तलवे में मालिश करने से ज्यादा आराम मिलता है,,,,,

मिल रहा है ना आराम,,,।

मिल तो रहा है लेकिन तु खामखां परेशान हो रही है,,,।

अरे इसमें कौन सी परेशानी मुझे अच्छा लग रहा है तुम्हारी सेवा करने में तुम कुछ मत बोलो बस मेरी मालिश का मजा लो,,,,, तुम्हें पता है मेरी सहेली अपनी मां की रोज मालिश करती है उसी को देखकर मुझे भी लगता है कि तुम्हारी सेवा मुझे करनी चाहिए क्योंकि कल को मैं अपने घर चली जाऊंगी तो सच में तुम्हारी सेवा कौन करेगा,,,‌

बात तो तु सही कह रही है,,,,, चल कोई बात नहीं कर ले मालिश ,,,,,।

(सुनैना भी खुश थी अपनी बेटी की बात सुनकर और उसके द्वारा मालिश से रानी अपनी मां के पैरों को घुटनों से उठाकर उसके तलुवे की मालिश कर रही थी जिसकी वजह से उसका पेटिकोट उसकी घुटनों में जाकर इकट्ठा हो गया था और उसकी नंगी मोटी मोटी पिंडलियां एकदम साफ दिखाई देने लगी थी जिसे देखकर रानी पल भर के लिए मोहित हो गई और अपनी मां से बोली,,)

मां तुम्हारी पिंडलियां कितनी मांसल और खूबसूरत है देखने में कितनी अच्छी लग रही है सच में तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,।

(अपनी बेटी की बात सुनकर वह कुछ बोल नहीं रही थी बस मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,, थोड़ी देर तक पिंडली की मालिश करने के बाद वह अपनी मां से बोली ,,,)

आप पीठ के बल लेट जाओ तुम्हारी घुटनों की मालिश कर दुं,,,,,,।

(मुस्कुरा कर सुनैना अपने बेटी के कहे अनुसार पीठ के बल लेट गई इस अवस्था में उसकी उन्नत चुचिया ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी अपनी अाभा बिखेर रही थी,,, रानी की नजर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों करती की हुई थी जो की गहरी सांस लेने के वजह से दोनों चुचिया बड़े ही मादक लय में उपर नीचे हो रही थी,, जिसे देखकर रानी के तन बदन में कुछ कुछ हो रहा था उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में उसकी मां इस उमर में भी बेहद आकर्षक और गठीले बदन की मालकिन है। सुनैना को एहसास हो गया था कि उसकी बेटी की नजर उसके कौन से अंग पर है इसलिए सुनैना के होठों पर हल्की मुस्कान थी और तभी दोनों की नजरे आपस में टकराई दोनों को समझ पाती से पहले इतनी तेज हवा हवा का झोंका आया कि सुनैना की पेटीकोट में हवा भरने की वजह से वह एकदम से कमर के ऊपर तक उठ गई जिसकी वजह से रानी की आंखों के सामने उसकी मां का वह खूबसूरत नंगा उजागर हो गया इसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थे यह सब एकदम अचानक से हुआ था हवा के झोंके में सुनैना की पेटीकोट को ऊपर तक उठा दिया था जिसकी वजह से उसकी कचोरी जैसी खुली हुई गुलाबी पर एकदम से रानी की आंखों के सामने दिखाई देने लगी और यह सब इतना अचानक हुआ था,,,, की सुनैना को बिल्कुल भी समय नहीं मिला अपनी पेटीकोट को ठीक करने का।

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हवा के तेज झोंके से जो नजारा रानी की आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर रानी एकदम भौंचक्की रह गई, क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि उम्र इस पड़ाव पर किसी की बुर इतनी खूबसूरत दिखती होगी,,, पल भर के लिए वह अपनी मां की गुलाबी बुर को देखते ही रह गई थी,, अभी तक उसे ऐसा ही लगता था कि उसकी ही बुर खूबसूरत है लेकिन अपनी मां की बर देखने के बाद उसकी यह सोच पूरी तरह से बदल गई थी,,,, खूबसूरत लगने जैसा क्या नहीं था सुनैना की बुर में,,, हल्की उत्तेजना के चलते कचोरी की तरह खुली हुई दिख रही थी हल्के-हल्के कल रेशमी बाल गोरी गोरी गुलाबी बुर की शोभा को बना रही थी बीच से गुजरती हुई पतली दरार लगता ही नहीं था कि यह दो बच्चों की मां है ऐसा लग रहा था कि जैसे यह सुनैना की कुंवारी बुर है दो बच्चों के जन्म का संकेत बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा था इसलिए तो रानी की आंखों की चमक बढ़ गई थी अपनी मां की बुर देखकर हवा का वह एक तेज झोंका रानी के गुरुर को तोड़ने के लिए काफी था,,, ।

हाय दईया,,,,,, यह क्या है मां,,,,?

धत्,,,, हारामी,,,, (तुरंत शर्मा कर सुनैना दोनों हाथों से अपनी पेटिकोट को नीचे करते हुए अपनी गुलाबी बुर को ढंक ली,,,,)

अरे यह क्या कर रही हो देखने तो दो,,,, (ऐसा कहते हुए रानी फिर से अपनी मां की पेटिकोट ऊपर उठाने की कोशिश करने लगी लेकिन सुनैना शर्मा के मारे अपने दोनों हाथों से पेटिकोट को पकड़ ली और ऊपर सरकाने नहीं दि,,,,, अपनी बेटी को डांटते हुए बोली,,,)

जरा भी शरम है तुझको,,,,।

अरे इसमें कैसी शर्म में तो देखने के लिए कह रही हूं,,,।

क्यों देखी नहीं है क्या,,,?

तुम्हारी तो पहली बार देख रही हूं तभी तो मैं हैरान हूं,,,।

हैरान क्यों है सबके पास ऐसी ही है,,,, तेरे पास भी ऐसी है,,,, (उठ कर बैठते हुए सुनैना बोली,,, )

वह तो है ही लेकिन तुम्हारी बहुत ही अलग है इतनी खूबसूरत तो मैं आज तक नहीं देखी,,,,,, (बेझिझक रानी ने अपनी मां से बोली,,,, रानी के मुंह से अपनी बुर की खूबसूरती के बारे में सुनकर सुनैना गदगद हो गई,,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बेटी उसकी बुर की तारिफ करेगी एक जवान लड़का बुर की तारीफ करें तो बात कुछ समझ में आता है क्योंकि मर्दों के लिए अक्सर बर एक ख्वाब सा होता है लेकिन एक लड़की जो कि खुद इतनी खूबसूरत है वह एक औरत की बुर की तारीफ करें तो इसमें जरूर कोई खास बात होगी इसलिए सुनैना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

धत् इसमें कौन सी खास बात है,,,, सबके पास ऐसी ही होती है,,,, तुझे ही ना जाने क्यों लग लग रही है,,,।

नहीं मन सच कह रही हूं तुम्हारी सबसे अलग इतनी खूबसूरत तो मैं आज तक नहीं देखी होगी इस उम्र में इतनी फूली हुई गुलाबी हल्के हल्के बालों से भरी हुई और दरार तो देखो,,,, ऊफफफ,,,,।

तू बेशर्म होती जा रही है क्या सबकी देख रखी है क्या,,,?

सबकी तो नहीं लेकिन चार-पांच लोगों की देख चुकी है,,,।

कहां,,,, कहां देख ली,,,, (आश्चर्य से अपनी बेटी की तरफ देखते हुए)

अरे जब हम लोग सौच करने के लिए मैदान जाते हैं तो वहां एक दूसरे की देख ही लेते हैं,,,

ओहहहहह क्या सच में मेरी सबसे अलग है,,,।

बिल्कुल सबसे अलग है,,,,।

(रानी की बात सुनकर सुनैना की हालत खराब हो रही थी उसके बदन में कुछ-कुछ होने लगा था,,,, लेकिन अपने आप पर काबू करते हुए वह बोली)

चल रहने दे मुझे बहुत भूख लगी है ला खाना परोसकर ला और तू भी खा ले,,, अभी तो नहाना भी बाकी है,,,,।

मैं भी कहां नहाई हुं,,, मुझे भी तो नहाना है,,, (ऐसा कहते हुए रानी अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और सीधा रसोई घर की तरफ आगे बढ़ गई लेकिन खाना परोसने से पहले अपने हाथ को पानी से धोने लगी और फिर दो थाली में खाना परोस कर मां बेटी दोनों साथ में बैठ गए खाना खाने के लिए,, दूसरी तरफ सोनू की मां की चुदाई करके सूरज मैन ही मन प्रसन्न होता हुआ रानी साहिबा के कोठी की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, और सोनू की चाची के बारे में सोच रहा था वह जानता था कि सोनू पिताजी मजा भी लेना चाहती थी और मन भी बनना चाहती थी एक साथ उसका दोनों काम हो गया था उसे मजा भी भरपूर मिला था और उसकी गोद भी भर गई थी,,, जितनी खुशी उसे और उसके परिवार को थी इतनी ही खुशी सूरज को भी हो रही थी क्योंकि जाने अनजाने में सूरज अब बाप बनने वाला था पहले ही समाज की नजर में यह पाप था। और यह पाप की दुनिया की नजर में आने वाला नहीं था क्योंकि पाप तभी पाप होता है जब दुनिया को उसके बारे में पता चलता है तो सूरज जानता था कि इस बारे में किसी को पता नहीं चलेगा दुनिया की नजर में पहले ही सोनू के चाचा को सोने वाले बच्चों के पिता कहलाएंगे लेकिन यह बात सिर्फ सूरज और सोनू की चाची ही जानती थी कि उसके बच्चे का बाप कौन है,,,,, सोनू की मां पेट से है इस बारे में जानकार सूरज की खुशी का ठिकाना नहीं था उसे अपने आप पर अपनी मर्दानगी पर गर्व होने लगा था। और इस बात का अलग ही रोमांच था क्या जिसने एक बेटे के सामने उसकी मां की चुदाई किया और बेटा भी ऐसा की अपनी मां की चुदाई देख कर क्रोधित होने की जगह उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, सूरज जानता था कि बारे में सोनू से जरूर चर्चा होगी और चर्चा में मजा भी बहुत आएगा,,,।

यही सब सोचता हुआ वह रानी साहिबा के कोठी की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,, बार-बार वह अपने कुर्ते की जेब में रखे हुए रानी साहिबा के झुमके को देख ले रहा था,,, झुमके के प्रति सूरज कुछ ज्यादा ही श्रद्धा भाव से देख रहा था क्योंकि रानी साहिबा से दोबारा मुलाकात करने में यह झुमका ही जरिया बना हुआ था,,,, जितनी खुशी उसे इस बात की थी कि वह रानी साहिबा से मिलने जा रहा है उतना ही डर उसे लगा हुआ था कि कहीं यह सब बात राजा साहब को पता ना चल जाए कि उसकी पीठ पीछे उसकी बीवी गांव के नौजवान लड़के से मिलती है वरना उसकी खैर नहीं है,,, सूरज के लिए यह मुलाकात एक तरह से जानलेवा ही था क्योंकि राजा साहब को जरा से भी भनक सूरज के लिए जिंदगी और मौत का सवाल बन सकता था लेकिन इस बात की खुशी थी कि राजा साहब अभी अपनी हवेली पर नहीं था पर 10 दिनों के लिए कहीं बाहर गया हुआ था। थोड़ी देर बाद बाजार में सूरज पहुंच गया था,,,, इतना चलने की वजह से उसे थोड़ा थकान महसूस हो रहा था और वह अपनी थकान दूर करने के लिए एक छोटी सी समोसे की दुकान पर बैठ गया और समोसा खरीद कर खाने लगा,,, बाजार में उसके पहचान का कोई दिखाई नहीं दे रहा था और वह चाहता भी यही था कि कोई उसे बाजार में ना देख पाए,,, थोड़ी देर सूरज वहीं बैठा रहा और फिर इसके बाद हेड पंप से पानी पीकर वह फिर से अपनी मंजिल की ओर निकल गया,,,, थोड़ी देर बाद वह कोठी के सामने खड़ा था,,,। राजा साहब की कोठी कुछ ज्यादा ही बड़ी थी जिसे सूरज देखता ही रह गया था। और फिर धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश कर गया,,,, प्रवेश द्वार पर कोई दरबान नहीं था,,,, इस बात से सूरज को हैरानी हो रही थी,,,, लेकिन वह नहीं जानता था कि अक्सर कोठी के प्रवेश द्वार पर कोई दरबान नहीं रहता था,,, कभी कभार कुछ देर के लिए दरबान खड़े भी होते थे, तो उन्हें दूसरे काम भी करने पड़ते थे जिसकी वजह से कोठी का प्रवेश द्वार लगभग बिना दरबान के ही रहता था।

देखते ही देखते सूरज कोठी के अंदर प्रवेश कर गया,,,, लेकिन इस बात से वह परेशान था कि वह इतनी बड़ी कोठी में रानी साहिबा को कहां ढूंढेगा,,,, कुछ लोग कोठी के अंदर अपने-अपने काम में लगे हुए थे वह लोग सूरज की तरफ देख भी रहे थे लेकिन कोई कुछ पूछ नहीं रहा था शायद इसलिए क्योंकि वह भी उन जैसा गांव वाला ही था और उन लोगों को ऐसा ही लग रहा था कि अभी यहां काम करने वाला है और यही बात सूरज के लिए बचाव का काम कर रही थी क्योंकि ऐसा कोई भी सख्स रानी साहिबा से बिना इजाजत के नहीं मिल सकता था। कोई जान पहचान वाला परिवार वाला या फिर दूर दराज का रिश्ते वाला हो तो बात अलग है लेकिन गांव वाले बिना काम के नहीं मिल सकते थे। देखते ही देखते सूरज अंदर की तरफ जाने लगा,,, सूरज की किस्मत तेज थी क्योंकि सामने ही रानी साहिबा हाथ में पानी की बाल्टी लिए हुए जा रही थी। उसने तो सूरज को नहीं देखी थी लेकिन सूरज में उसे देख लिया था इसलिए खुश होता हुआ आवाज लगा कर बोला।

रानी साहिबा,,,,, रुकिए,,,,।

(इतना सुनकर वह एकदम से रुक गई और दरवाजे की तरफ देखने लगी तो वहां सूरज खड़ा था सूरज को देखते ही वह उसे पहचान ली और मुस्कुराने लगी, और एकदम उत्साहित होते हुए बोली,,)

सूरज तुम,,,,, यहां कैसे,,,?

आपकी कीमती चीज लौटाने आया हूं,,,।

कीमती चीज,,,(आश्चर्य से सूरज की तरफ देखते हुए वह बोली)

हां कीमती चीज,,,, आपके लिए शायद एकदम मामूली चीज होगी लेकिन हम लोगों के लिए तो बेहद कीमती चीज है,।

क्या है लेकिन यह तो बताओ मुझे तो नहीं मालूम कि मेरी कौन सी कीमती चीज तुम्हारे पास है,,,,।

अभी दिखाता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपने कुर्ते की जेब में रखें हुए झुमके को बाहर निकाला और हाथ में लहराते हुए रानी साहिबा की आंखों के सामने दिखने लगा झुमका देते हुए रानी साहिबा की आंखों की चमक बढ़ गई और वहां एकदम से पानी भरी बाल्टी को नीचे रखकर सूरज की तरफ आगे बढ़ते हुए बोली)

ओहहहहह मेरा झुमका,,,, मैं इस बारे में कुंवर से बात कर रही थी कि होना हो मेरा झुमका वही बाजार में गिर गया,,,,,, और देखो यह तुम्हारे हाथ लग गया,,,,(इतना कहते हुए वह सूरज के करीब आ गई और सूरज के हाथ से अपने झुमका को ले ली,,, और अपनी हथेली में रखकर वह खुश होते हुए उसे देखने लगी तभी सूरज की नजर उसके कान पर पड़ी जो कि दोनों कान सुने थे यह देखकर सूरज बोला।)

दोनों झुमका गिर गया था क्या,,,?

नहीं नहीं गिरा तो एक ही था लेकिन एक नहीं पहन सकते ना इसलिए दूसरे को भी निकाल दी अब मिल गया है तो दोनों पहन लूंगी,,,, लेकिन एक बात मुझे समझ में नहीं आ रही है कि तुम्हें झुमका मिल गया फिर भी तुम इसे वापस लौटा दिए इसे रख भी तो सकते थे और शायद तुम्हारी जगह कोई और होता तो रख ही लेता,,,,।

मैं दूसरों की तरह नहीं हूं,,,, गरीब हुं, लेकिन ईमानदार हुं,,, तभी तो यहां आया हूं देने के लिए,,,,,,।

तुमने बहुत अच्छा किया क्योंकि यह झुमका मेरी मां ने मुझे दी थी इसलिए मुझे ज्यादा पसंद है,,,,,। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि कैसे तुम्हारा शुक्रिया अदा करुं,,,

कुछ करने की जरूरत नहीं है आप खुश हैं तो मैं खुश हूं,,,,।

(सूरज कि ईस बात पर रानी साहिबा मुस्कुरा दी,,, उसे सूरज की बात बहुत अच्छी लग रही थी,,,, वह एक टक सूरज को देखती ही रह गईंं,,,, यह देखकर सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर ऐसा ही रहा तो उसका काम जल्द बन जाएगा,,,,, सूरज थोड़ी देर बाद बोला,,,)

राजा साहब दिखाई नहीं दे रहे,, है!(जानबूझकर इधर-उधर देखते हुए सूरज बोल तो उसकी बात सुनकर वह बोली)

बताई तो थी 10 12 दिनों के लिए बाहर गए हैं,,,,, अभी यहां कोई नहीं है,,,,, एक काम करो तुम मेरे कमरे में चलो,,,,,, झुमका मिलने की खुशी में तुम्हारा मुंह मीठा करवाती हुं,,,,।

(उसकी यह बात सुनते ही सूरज के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसका मन खुशी से झूमने लगा और वह उत्साहित होता हुआ बोला।)

हां चलो यह तो बड़ी किस्मत की बात है मैं भी तो देखूं रानी साहिबा का कमरा कैसा होता है,,,,

(सूरज की साहजिक बात सुनकर वह फिर से मुस्कुरा दी और आगे आगे चलने लगी,,,,, वह सीढ़ियां चढ़ रही थी और पीछे-पीछे सूरज सीढ़ियां चल रहा था एक-एक सीढ़ियां चढ़ते समय जब वह अपने कदम ऊपर उठती तो उसकी गोलाकार गांड एकदम से उभार लेकर बाहर निकल आती जिसे देखकर सूरज के पजामे में हलचल होने लगी,,,,, दो-चार सीढ़ियां चढ़कर मुस्कुराते हुए जब रानी साहिबा ने पीछे नजर घुमा कर देखी तो एकदम से उसका मन सन्न से करके रह गया। क्योंकि उसे एहसास हो गया कि सूरज उसकी गोलाकार नितंबों को देख रहा था जो कि कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी। पल भर के लिए वह शक पका गई लेकिन जल्दी से एहसास हो गया कि भले ही वह इस समय रानी शारदा है लेकिन सबसे पहले वह एक औरत है एक औरत की खूबसूरती मर्दों के लिए सर्वप्रथम होती है,,,,, यह सोचकर उसकी सांसे थोड़ी गहरी चल रही थी,,, देखते ही देखते वह सीढ़ियां चढ़ गई और सूरज को अपने कमरे में लेकर आई,,,,, कमरे में दाखिल होते ही सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई क्या गजब का सजावट से भरा हुआ कमरा था दो बड़े-बड़े आदम कद आईने थे जिसमें इंसान का पूरा अक्स दिखाई देता था,,,,, हर तरफ सजावट का सामान रखा हुआ था बीच में बिस्तर का बड़ा सा लकड़े का बना हुआ उस पर नरम नरम गद्दे बिछाए हुए थे,,,, इस तरह का बिस्तर तो सूरज पहली बार देख रहा था वरना आज तक उसने सिर्फ खटिया ही देखता आ रहा था,,, शहर में शेठ जी की बीवी को भी उसने खटिया पर ही चोदा था। नरम-नरम बिस्तर को देखकर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि जब रानी साहिबा पूरे कपड़े उतार कर नंगी होकर बिस्तर पर टांगे खोल कर लेती होगी तो इसकी लेने में राजा साहब को कितना मजा आता होगा,,,,,,,, यह सब सो कर सूरज के तन बदन में हलचल मच रही थी सामने ही बड़ी सी खिड़की खुली हुई थी जिस पर परदे लगे हुए थे और ठंडी हवा का झोंका पर्दे को लहरा रहा था। सूरज तुरंत खिड़की के पास गया और पर्दे को हटाकर खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा।

क्या खूबसूरत नजारा था ठंडी ठंडी हवा,,, सूरज का मन एकदम प्रफुल्लित हो गया खिड़की से नजर भी गजब का दिखाई दे रहा था चारों तरफ लहराते खेत दूर छोटी-छोटी पहाड़ियां,,,, यह सब देखकर सूरज खुश होता हुआ बोला।

रानी साहिबा आपकी जिंदगी सच में बहुत अच्छी है देखो तो सही यही बैठे-बैठे खूबसूरत नजारा देखा जो मन में आए वह करो,,,,,,।

(सूरज कैसी बात सुनकर रानी साहिबा हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

तुम्हें क्या लगता है मेरी जिंदगी बहुत अच्छी है क्या कोठी अच्छा कैमरा पैसा गहना क्या यही सब जिंदगी को बेहतर बनाते हैं क्या यह सब इंसान को सुख दे सकते हैं जो सुख उसे मिलना चाहिए।

जरूर रानी साहिबा आपको नहीं मालूम लेकिन हम लोगों को तो यही सब अच्छी और असली जिंदगी लगती है जहां तक पहुंच पाना हम लोगों की बस की बात नहीं है,,,,।

तुम नहीं समझ पाओगे अच्छा रुको मैं तुम्हारा मुंह मीठा करा दूं,,,।

नहीं नहीं रहने दीजिए कोई जरूरत नहीं है।

नहीं ऐसा कैसे हो सकता है तुमने मेरे जीवन की सबसे बेसिक कीमती चीज मुझे लौटाई है आज तुम जो मांगोगे वह मैं तुम्हें दे दूंगी इसलिए इंकार मत करो,,,।

(रानी साहिबा की इस बात पर सूरज अपने मन में ही बोल रानी साहिबा आज तुम अपनी बुर मुझे दे दो चोदने के लिए और मुझे कुछ नहीं चाहिए,,,,, सूरज जैसा अपने मन में ही बोला क्योंकि वास्तविकता यही थी कि सच में ऐसा बोलने की हिम्मत सूरज में नहीं थी क्योंकि वह ऐसा बोलने के बाद अपना अंजाम अच्छी तरह से जानता था,,,, रानी साहिबा अलमारी के पास गई और अलमारी खोलकर उसमें से एक बर्तन निकाली जिस पर ढक्कन लगा हुआ था,,,, और ढक्कन को खोलकर बर्तन को सूरज के पास लाई और उसके सामने बर्तन करते हुए बोली।)

लो ले लो इस समय में तुम्हें सिर्फ यही दे सकती हूं।

(यह बात सुनकर सूरज फिर से अपने मन में बोल रानी सही बात है तो तुम बहुत कुछ सकती हो लेकिन पता नहीं क्यों दे नहीं रही हो,,,, अपने मन में ऐसा कहते हुए सूरज बर्तन में हाथ डालकर मिठाई का टुकड़ा ले लिया और बोला)

बहुत-बहुत शुक्रिया रानी साहिबा,,,,(और इतना कहकर मिठाई खाने लगा मिठाई खाते हुए वहां रानी साहिबा की जवानी से भरी हुई छातियो की तरफ देख रहा था,,,, और जैसे ही रानी साहिबा क्या ध्यान इस ओर गया वह तुरंत अपने साड़ी को व्यवस्थित करने लगी,, मिठाई खाते हुए सूरज बोला।)

एक बात तो पूछना भूल गया आप बाल्टी में पानी लेकर कहां जा रहे थे हो सकता है हमें आपको परेशान किया हूं इसके लिए माफी मांगता हूं।

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो नहाने के लिए जा रही थी,,,।

ओहहहहह देखी ना मैं कह रहा था ना कि मैं आपका समय बर्बाद कर दिया।

कुछ बर्बाद नहीं हुआ है बल्कि मुझे तो अच्छा लग रहा है तुमसे बातें करने में क्योंकि इतनी बड़ी कोठी में मुझसे बात करने वाला यहां कोई नहीं है सिवाय मेरे भाई के लेकिन वह भी इधर-उधर घूमता रहता है।

ऐसा क्यों आप तो रानी साहिबा है किसी से भी बात कर सकती हैं आपका तो समय अच्छी तरह से व्यतीत हो जाना चाहिए फिरआप ऐसा कैसे कह रही है।

हमममम शादी का लड्डू दूर से ही अच्छा लगता है दुनिया नहीं जानती कि मैं किस तरह का जीवन जी रही हूं मेरे जीवन में बहुत दुख है।

आपके जीवन में दुख है,,, मुझे तो विश्वास ही नहींहोता।

मुझे मालूम इस महल जैसे कोठी की चमक दमक देख कर किसी को इसके अंदर का अंधेरा नहीं दिखाई देता,,,,।

(रानी साहिबा की यह बात सुनकर सूरज का दिमाग बड़ी तेजी से दौड़ने लगा वह अपने मन में सोचने लगा कि कहीं यह अपने पति से असंतुष्ट तो नहीं है कहीं ऐसा तो नहीं की राजा साहब से देखने में ही राजा जैसे ही बाकी एक औरत को खुश नहीं कर पाते हैं क्या ऐसा भी हो सकता है की कहानी राजा का किसी और औरत के साथ चक्कर तो नहीं है यही हो सकता है वरना महल में जीने वाली औरत क्यों कहेगी कि वह अंदर से दुखी है,,,, गहरी सांस लेता हुआ सूरज खिड़की से बाहर देखते हुए बोला,,,)

मैं समझ नहीं पा रहा हूं आपकी बातें सुनकर मेरा दिमाग घूमने लगा है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि महलों में रहने वाली रानी भी दुखी हो सकती है।

सब कुछ हो सकता है सूरज यह दुनिया बड़ी जालीम है।

लेकिन आपको कौन सा दुख है अगर बताएंगी तो हो सकता है कि मैं आपके दुख को दूर करने की कोशिश कर सकूं,,,।

नहीं तुमसे नहीं हो पाएगा,,,,,,। लेकिन फिर भी मैं तुम्हें एक छोटा सा उदाहरण देती हुं,,,,(खिड़की से बाहर उंगली से इशारा करते हुए) तुम हो छोटी-छोटी खूबसूरत पहाड़ियां देख रहे हो!

हां,,,,

और अगर तुम्हारा मन करे वहां जाने का तो क्या तुम जाओगे या किसी के डर से उस बारे में सोचोगे भी नहीं,,,,।

नहीं तो मैं जरूर जाऊंगा अगर कोई जगह मुझे खूबसूरत लगती है तो मैं उस जगह पर जरूर जाता हूं कोई रोकने वाला नहीं कोई रोकने वाला नहीं।

बस यही तो मैं नहीं जान सकती,,,, कहने को सिर्फ मेरा नहीं साहिब हूं लेकिन अपने मन से ना तो कहीं जा सकती हूं ना घूम सकती हूं ना किसी से बात कर सकती हूं यह है मेरी असली जिंदगी,,, यह जो कमरा तुम्हें सपनों का महल लग रहा है यह मेरे लिए किसी कैद खाने से कम नहीं है बस दिन पर बैठे रहो गुमसुम,,,,।

(सूरज को सारी बातें समझ में आ गई थी वह समझ गया था की रानी साहिबा का दुख क्या है वह एकदम से उत्साहित होता हुआ बोला)

चलना चाहोगी पहाड़ी पर,,,,,।

क्या,,,?

घूमना चाहोगी जहां मन करे वहां।

जरूर लेकिन कैसे,,,!

तुम बस हां कहो मैं तुम्हें ले चलता हूं वैसे भी राजा साहब है नहीं मैं तुम्हें पूरा गांव घुमा देता हूं।

लेकिन,,,,,।

लेकिन बेकिन छोड़ो पहले यह बताओ कोई ऐसा रास्ता है यहां से जाने का ताकि किसी की नजर हम दोनों पर ना पड़े,,,,।

है घर के पीछे का रास्ता लेकिन तुम इतनी मुसीबत मोल क्यों ले रहे हो राजा साहब को पता चल गया तो बहुत मुसीबत आ जाएगी।

राजा साहब तो है नहीं तब डरना कैसा,,,,,।

चलो मेरे साथ में लेकर चलता हूं लेकिन रास्ता बताओ यहां से निकलने का,,,,,।

(सूरज किस तरह की बातें सुनकर रानी साहिबा का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक ही मुलाकात में वह इस लड़के पर कैसे भरोसा कर ले लेकिन फिर भी इस समय उसके पास सूरज पर भरोसा करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था जिसका एक मजबूत कारण यह था कि झुमका उसके पास था फिर भी वह उसे लौटाने के लिए आया था यही उसकी ईमानदारी का जीता जाता सबूत था,,,, गहरी सांस लेते हुए रानी साहिबा कुछ देर तक ढेर सारी बातों को सोच रही थी फिर उसके मन में आया कि 10 दिन के लिए राजा साहब से ही नहीं क्यों ना थोड़ा सा खतरा मोल ले लिया जाए,,, इतना सोच कर बता तैयार हो गई और आगे आगे चलने लगी देखते ही देखते रानी साहिबा सच में घर के पीछे वाले रास्ते से उसे कोठी के बाहर लेकर आई कोठी के बाहर आते ही सूरज ने देखा कि चारों तरफ हरियाली छाई हुई थी,,,, जंगली घास इतनी उगी हुई थी और इतनी लंबी-लंबी हो गई थी कि उनके बीच से जाने पर दूर-दूर से दोनों कोई देख नहीं सकता था,,,,, सूरज का दिल भी जोरो से धड़क रहा था कोठी के बाहर आते ही सूरज आगे आगे चलने लगा और रानी साहिबा पीछे-पीछे।
 
सूरज राजा साहब की बीवी को लेकर एक नए सफर की ओर निकल चुका था,,, राजा साहब 10 12 दिनों के लिए कहीं गया हुआ था जिसका पूरा फायदा उठाते हुए सूरज उसकी बीवी के साथ पहाड़ी पर झरने की तरफ जा रहा था,,,,, आगे आगे सूरज था और पीछे-पीछे राजा साहब की बीवी चल रही थी,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि पहली बार हुआ इस तरह के कदम उठा रही थी किसी अनजान लड़के के साथ ऐसी जगह पर जा रही थी जहां पर जाना उसका ख्वाब था उसकी आंखों के सामने ही वह ख्वाब होते हुए भी वह कभी पूरा नहीं कर पाई थी इसलिए अपने पति के गैरहाजरी में वह अपना ख्वाब पूरा कर लेना चाहती थी,,,, फिर भी मन में घबराहट थी। क्योंकि अगर किसी ने उसे यहां देख लिया और राजा साहब को बता दिया तो गजब हो जाएगा वैसे ही राजा साहब अपनी बीवी से चिढ़ता ही रहता था,,,, घनी झाड़ियां को दोनों हाथों से दूर करते हुए और रास्ता बनाते हुए सूरज राजा साहब की बीवी की तरफ देख भी नहीं बोला,,,,।

आपको डर तो नहीं लग रहा है ना रानी साहिबा,,,।

नहीं,,,, किस बात का डर मुझे डर नहीं लग रहा है,,, (वैसे तो वह अंदर ही अंदर डरी हुई थी लेकिन फिर भी सूरज के सामने यह जताना नहीं चाहती थी इसलिए ना डरने का नाटक करते हुए वह बोली रानी साहिबा के जवाब से सूरज खुश होता हुआ बोला)

यह हुई ना बात रानी साहिबा इंसान को कभी डरना नहीं चाहिए डरने से ही इंसान बहुत से अनुभव को महसूस नहीं कर पाता और जिंदगी अधूरी रह जाती है जैसा कि अब तक तुम्हारी थी तुम थोड़ी सी हिम्मत दिखाई तो शायद अपने आप ही पहाड़ी तक पहुंच जाती अपने तरीके से जिंदगी जीती।

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तुम जैसा सोच रहे हो जिंदगी इतनी सबके लिए सही नहीं होती,,,,,। जिंदगी जीने का सबका अलग-अलग तरीका होता है और मैं इस गांव की लड़की नहीं बहू हूं इसलिए मर्यादा में रहना पड़ता है और राजा साहब की बीवी हूं इसलिए तो और संभाल कर रहना पड़ता है।

हां यह बात तो है लेकिन यह भी तो है कि आप अगर राजा साहब को अपने मन की इच्छा बताती तो वह आपको जरूर पहाड़ी तक ले जाते जहां कहती वहां ले जाते,,,,।

(सूरज की बातों पर सुनकर पल भर के लिए रानी साहिबा के मन में आया कि वह सब कुछ सूरज से बता दे कि वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं है फिर किसी तरह से अपनी भावनाओं पर काबू करके वह अपने मन की बात को मन में ही लिए रह गई और बात को घुमाते हुए बोली।)

बात तो सही है लेकिन,, राजा साहब थोड़े गुस्से वाले इंसान है इसलिए मैंने कभी कहीं नहीं है और वैसे भी जरूरत भी नहीं पड़ी वह तो आज राजा साहब नहीं है तो ,,,,,,,।

हमममम सोच रही हो थोड़ा मजा ले लिया जाए,,,,।

(सूरज की बात सुनकर वह कुछ बोली नहीं बस हंसने लगी तभी चलते-चलते सूरज एकदम से दोनों हाथ फैला कर रानी साहिबा को रुकने का इशारा किया,,,,, रानी साहिबा की अपने आप को रोकते-रोकते एकदम से उसकी पीठ से सट गई और तुरंत अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

क्या हो गया,,,!

वह देखो,,,(हाथ के इशारे से थोड़ी दूरी पर दिखाते हुए)

बाप रे इतना लंबा और मोटा सांप,,,

हां,,,, इस जंगल जैसी जगह पर न जाने कितने ही ऐसे सांप बिच्छू घूम रहे होंगे इसलिए थोड़ा संभल कर चलना ऐसा ना हो कि कोई अनहोनी हो जाए और लेने के देने पड़ जाए,,,।

तुम तो मुझे डरा रहे हो,,,,।

डरा नहीं रहा हूं बस आगाह कर रहा हूं,,,, संभाल कर चलोगी तो सुरक्षित रहोगी ‌।

(उस बड़े से सांप को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,,,, उसके जाते ही सूरज फिर से आगे की तरफ बढ़ गया और उसके पीछे-पीछे रानी साहिबा भी चलने लगी अब रानी साहिबा की नजर नीचे जमीन पर इधर-उधर घूम रही थी,,,,, वह दोनों काफी दूर निकल आए थे यहां का नजारा भी खूब गजब का था ऐसा लग रहा था इस जगह पर कोई आता ही नहीं था चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़,,,, कोई ऐसा फल बाकी नहीं था जो यहां पर ना हो चीकू अमरूद अंगूर की लताएं,,, पपाया,,,,, देख कर ही रानी साहिबा के मुंह में पानी आ रहा था। चलते चलते सूरज दो अमरुद तोड़ लिया था और एक अमरूद रानी साहिबा को थमा दिया था रानी साहिबा भी बेझिझक हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के हाथ से अमरुद ले ली और उसे खाने लगी,, अमरूद लेते समय उंगलियों का स्पर्श सूरज को रोमांचित कर गया था,,,, दोनों अमरूद खाते-खाते आगे बढ़ रहे थे बीच-बीच में छोटे-छोटे तालाब जो कि बड़े खूबसूरत दिखाई दे रहे थे उन तालाबों को देखकर रानी साहिबा बहुत खुश हो रही थी,,,,,, रानी साहिबा के चेहरे पर खुशी देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि एक औरत को कैसे प्रसन्न किया जाता है और एक औरत को कैसे प्राप्त किया जाता है धीरे-धीरे उसे प्रसन्न करके खुश करके औरत के मन में अपने लिए जगह बनाना यह सूरज को अच्छी तरह से आता था। और वैसे भी इस जंगल जैसी जगह में एक खूबसूरत औरत का साथ पाकर सूरज अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था उसे बड़ा ही अच्छा लग रहा था,,,,, मन ही मन उसे भोगने की लालसा और भी ज्यादा प्रज्वलित होती जा रही थी,,, सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि रानी साहिबा जब पूरे कपड़े उतार कर नंगी होती होगी तो राजा साहब उसे देखकर ही मस्त हो जाता होगा रोज उसकी लेता होगा कितना खुश किस्मत है राजा साहब,,, लेकिन इस बात से अनजान था की रानी साहिबा की चुदाई उसके पिताजी भी कर चुके थे चोरी-छिपे रात के अंधेरे का फायदा उठाकर रानी साहिबा के कमरे में घुस गए थे और बिना किसी शोर शारदा के बिना कुछ बोले रहनी साहिब की टांगें खोलकर उसके गुलाबी पर में अपना लोहे जैसा लंड उतार कर रगड़ कर चुदाई कीए थे।

तुम पहले भी इधर आ चुके हो क्या,,,?

नहीं तो मैं पहली बार इधर आ रहा हूं मैं जानता नहीं था कि यहां इतनी खूबसूरत जगह है वरना इधर जरूर आता,,,,,, लेकिन ऐसी जगह पर जंगली जानवरों का डर रहता है,,,,, इस जगह से मैं बिल्कुल अनजान हूं इसलिए मन में थोड़ा डर भी रहता है कि सामने कौन सा जानवर मिल जाएगा।

तुम फिर से मुझे डरा रहे हो,,,,।

डरा नहीं रहा हूं मैं सिर्फ बता रहा हूं किसी भी अनजान जगह पर जाते समय पूरी तरह से चौकन्ना रहना चाहिए,,,,।

और यहां अगर कोई जंगली जानवर आ गया तो मैं तो गई समझ लो,,,,।

ऐसे कैसे रह नहीं जाएगा मैं हूं ना मेरे रहते हुए कोई जानवर तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता,,,, जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं निश्चिंत रहो,,,,,।

ऊमममम कहे तो ऐसे रहे हो जैसे बहुत हिम्मत वाले हो,,,,।

खाने से नहीं होता रानी साहिबा दिखाने से होता है,,,, बहुत लोग बातों के जादूगर होते हैं लेकिन सही समय पर दुम दबाकर भाग जाते हैं मैं उनमें से नहीं हूं, मौका आने पर मैं साबित कर सकता हूं,,,,,।

चलो यह तो वक्त ही बताएगा,,,,।

(रानी साहिबा को सूरज से बात करने में बड़ा मजा आ रहा था पहली बार कोई ऐसा लड़का मिला था जिससे बात करके रानी साहिबा को खुशी मिल रही थी और न जाने क्यों सूरज पर हुआ इतना यकीन कर पा रही थी उसे अंदर ही अंदर डर तो लग रहा था लेकिन सूरज की मौजूदगी में उसे पूरा विश्वास था कि सूरज उसकी रक्षा कर सकेगा,,,,,, एक जगह पर आम का पेड़ देखकर रानी साइबर रुक गई आम का पेड़ बहुत ही विशाल था और उसे पर इतने आम लगे हुए थे कि रानी साहिबा देखती रहेगी सूरज भी हैरानी से उसे पेड़ पर देख रहा था क्योंकि एक ही पेड़ में इतने सारे आम उसने आज तक नहीं देखा था इसलिए वह रानी साहिबा के पास खड़ा होकर बोला।)

गजब का पेड़ है रानी साहिबा पुर गांव में ऐसा पेड़ मैंने कभी नहीं देखा एक ही पेड़ में इतने सारे आम लगे हैं देखो तो सही,,,, ऐसा लग रहा है कि पूरे बगीचे का हम एक ही पेड़ में लगा हो,,,।

तुम सच कह रहे हो सूरज मैं भी यही देख रही हूं और हम भी देखो कितने बड़े-बड़े हैं,,, मेरा तो मन इसे तोड़ने को कर रहा है,,,,, रुको मैं अभी तोड़ती हूं,,,(ऐसा कहते हुए रानी साहिबा ढेला लेकर पेड़ पर मारने लगी ताकि आम टूट सके लेकिन उसके इस तरह से ढेला करने से आम टूट नहीं रहा था यह देखकर सूरज मैन ही मन मुस्कुरा रहा था क्योंकि रानी साहिबा की यह सादगी सूरज को अंदर तक मदहोश कर गई थी,,, ढेला उठाने के लिए नीचे झुकना और झुकाने की वजह से उसके गोलाकार नितंबों का आकार इस कदर लाजवाब ढंग से बड़ा हो जाता था कि सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पता था उसका मन करता था कि पीछे से जाकर उसे पकड़ ले लेकिन किसी तरह से अपने आप पर काबू किए हुए था और ढीला मरते समय उसके ब्लाउस में हो रही हड़कंप को देखकर सूरज अपने पजामे में होने वाली हरकत को रोक नहीं पा रहा था,,,, रानी साहिबा बार-बार प्रयास कर रही थी लेकिन इसका प्रयास सफल नहीं हो रहा था और सूरज दोनों हाथ बांधे उसे ही देख रहा था सूरज के मन में खुराफात चल रहा था,,,, बहुत प्रयास करने पर भी जब रानी साहिबा से एक भी आम नहीं टूटा तो वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

ऐसे ढेला मारने से आम टूटने वाला नहीं है,,,,।

फिर कैसे टूटेगा यह आम मेरे मुंह में पानी आ रहा है,,,,,,(बार-बार प्रयास करने की वजह से वह थक गई थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी गहरी गहरी सांस लेने की वजह से उसके ब्लाउज का आकार बढ़ रहा था घट रहा था यह सब देखकर सूरज मदहोश हुआ जा रहा था,,,, वह मुस्कुराते हुए बोला)

रुको मैं बताता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ यही सूरज रानी साहिबा के करीब जाने लगा और वह कुछ समझ पाती ईससे पहले ही,,, सूरज पीछे से दोनों हाथों में उसकी मोटी मोटी जांघों को जकड़ कर उसे उठाने लगा यह देखकर वह घबराते हुए बोली।)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो,,,, में गिर जाऊंगी,,,।

नामुमकिन रानी साहिबा,,,, आपको मैं गिरने नहीं दूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज रानी साहिबा को उठा लिया और वह एकदम आम के करीब पहुंच गई यह देखकर सूरज बोला)

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अब तोड़ो जितना तोड़ना है,,,,(कुछ पल के लिए रानी साहिबा घबराई हुई थी लेकिन जब उसने देखी कि सूरज बड़े आराम से उसे उठाया हुआ है तब वह थोड़ा निश्चित होने लगी फिर धीरे से अपना हाथ ऊपर करके बड़े-बड़े आम को तोड़ने लगी उसे अच्छा लग रहा था और वह निश्चित हो गई थी उसे यकीन हो गया था कि सूरज उसे गिराएगा नहीं,,, कम से कम आठ दस अाम रानी साहिबा ने तोड़कर उसे नीचे गिरा दिया,,,, और बोली।)

बस अब मुझे नीचे उतारो,,,,।

अरे नहीं रानी साहिबा और तोड़ना है तो तोड़ लो,,,।

नहीं नहीं बस हो गया,,,,।

देख रही हो रानी साहिबा आप आम तोड़ते तोड़ते थक गई लेकिन मैं तुम्हें उठाए हुए नहीं था था अगर मुझे इसी तरह से शाम तक भी घूमना रहे तो भी में नहीं थकुंगा,,,,।

नहीं नहीं मैं थक गई हूं मुझे नीचे उतारो,,,,,(रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली और मन ही मन सूरज की हिम्मत का दाद दे रही थी,,,,, सूरज की मुस्कुराना इतनी खूबसूरत औरत को उठाए हुए वह अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था लेकिन उसके मन में शरारत सूझ रही थी एक खूबसूरत औरत के सामने और उत्तेजित हो चुका था पजामे में उसका लंड खड़ा होकर तंबू की शक्ल धारण कर लिया था,,,, वह रानी साहिबा को उतरते समय अपने बदन से इतना ज्यादा सटा के उसे नीचे उतर रहा था कि जैसे ही उसकी गोलाकार गांड उसके पजामी के अग्रभाग पर पहुंची तो तुरंत ही उसके लंड की रगड़ रानी साहिबा की गांड पर होने लगा भले हुए साड़ी पहनी हुई थी लेकिन साड़ी पहनी होने के बावजूद भी तंबू की शक्ल में सूरज का लंड एकदम बराबर रानी साहिबा की गांड में दस्त हुआ और रगड़ हुआ महसूस हो रहा था और यह रगड़ यह चुभन रानी साहिबा महसूस करते ही दंग रह गई आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,, क्योंकि उसे साफ महसूस हो रहा था कि सूरज का लंड साड़ी पहनी होने के बावजूद भी उसकी गांड की दरार में धंसता हुआ महसूस हो रहा था,,,, रानी साहिबा इतनी नादान नहीं थी वह अच्छी तरह से समझती थी कि यह चुभन किस चीज की है क्योंकि राजा साहिब में उसे हर एक आसन में चुदाई कर चुका था उसे अच्छी तरह से वाकिफ कर चुका था कि मर्द औरत के बीच किस तरह का रिश्ता होता है इसलिए रानी साहिबा सूरज के तंबू की चुभन को महसूस करके अनजाने में ही गदगद हुए जा रही थी,,,, सूरज भी कम शैतान नहीं था वह रानी साहिबा को नीचे उतारते हुए जैसे ही उसकी गांड उसके लंड के करीब पहुंची थी वह कुछ पल के लिए इस अवस्था में रानी साहिबा को उठाया नहीं गया था ताकि रानी साहिबा उसके लंड की चुभन को अच्छी तरह से महसूस कर सकें और यह एहसास कर सके की सूरज क्या चाहता है।

सूरज मुस्कुराते हुए रानी साहिबा को नीचे जमीन पर उतार चुका था,,,, और तुरंत नीचे झुक कर आम को बिनने लगा था उसके पास शाम को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं था इसलिए तीन आम से ज्यादा उसके दोनों हथेलियों में नहीं आ रहा था। रानी साहिबा शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थे सूरज समझ गया था कि उसका काम बन गया है,,,,, और उसे इस बात का एहसास भी हो रहा था की रानी साहिबा तिरछी नजरों से उसके पजामे की तरफ देख रही थी जो कि अभी भी तंबू बना हुआ था,,,,, सूरज को जैसे ही एहसास हुआ कि रानी साहिबा उसके लंड की तरफ देख रही है और उसके पजामे में बने तंबू को देख चुकी है तो वह अंदर ही अंदर और भी ज्यादा मत होने लगा लेकिन वह आसानी से ज्यादा शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए वह तुरंत आम के पेड़ की जड़ों पर बैठ गया और बोला,,,,।

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और कुछ देर यही बैठकर खा लेते हैं,,,, मुझे लग रहा है कि आम मीठे हैं,,,,,।(इतना कहकर वह दो आम को वही नीचे रखकर एक आम को खाना शुरू कर दिया जैसे ही उसने आम को खाना शुरू किया उसे एहसास हो गया कि आम बहुत ही स्वादिष्ट और मीठे थे वह एकदम से रानी साहिबा से बोला,,,)

वह रानी साहिबा मुझे लगता नहीं था कि आम इतने स्वादिष्ट होंगे लेकिन यह सब आपकी करामात है,,,।

मेरी करामात वो कैसे,,,?

अपने अपने हाथों से तोड़ी होना इसलिए आम और ज्यादा स्वादिष्ट हो गए हैं।

(इतना सुनते ही रानी साहिबा शर्मा गई,,,,, और बिना कुछ बोले भाभी ठीक उसके सामने ही बड़े से पत्थर पर बैठ गई और आम खाने लगी लेकिन आम खाते हुए उसके मन में ढेर सारी बातें चल रही थी सूरज के लंड की रगड़ को अपनी गांड पर महसूस करके वह पूरी तरह से अनजाने में ही गदगद हो गई थी उसे एहसास हो गया था कि सूरज के पजामे में कोई मामूली हथियार नहीं था,,,,, लेकिन वह इस बात को नहीं समझ पा रही थी कि वह खड़ा क्यों हो गया था क्योंकि एक औरत होने के नाते उसे मर्दों की फितरत के बारे में अच्छी तरह से मालूम था कि मर्द का लंड कब खड़ा होता हैं,,, इसलिए रानी सब अपने मन में सोच रही थी कि क्या सूरज उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है अगर उत्तेजित न होता तो उसका लंड खड़ा ना होता उसके लंड का खड़ा होने का मतलब ही यही है कि वह चुदवासा है उत्तेजित है,,, और यह मर्द के साथ तभी होता है जब एक औरत की उपस्थिति हो और इस समय यहां जंगल में उसके सिवा दूसरी कोई औरत सूरज के समीप नहीं थी इसका मतलब यही था कि सूरज उसकी वजह से ही उत्तेजित हुआ है जहां एक तरफ यह बात सोचकर उसे अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ उसका मन प्रफुल्लित हो रहा था,,,,। यही सब सोचते हुए वह आम का मजा ले रही थी,,,, आम वाकई में स्वादिष्ट थे,,,,,, इसलिए आम को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दबाकर चूसते हुए रानी साहिबा बोली,,,)

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तुम सही कह रहे हो सूरज आम बहुत स्वादिष्ट हैं,,,,।

मैं हमेशा सही कहता हूं रानी साहिबा आम है भी तो बहुत बड़े-बड़े,,,(रानी साहिबा की छाती की तरफ देखते हुए सूरज बोला और रानी साहिबा सूरज की नजरों को पहचान गई थी इसलिए धीरे से अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने का नाटक करते हुए बोली)

मैंने तो इतने बड़े-बड़े आम कभी नहीं देखे,,,, हमारे खुद के बगीचे में इतने बड़े आम नहीं है,,,।

वह तो मैं देख ही रहा हूं,,,,(रानी साहिबा की छाती की तरफ देखते हुए)

क्या ,,,,?

मेरा मतलब है मैं राजा साहब के आम के बगीचे को देखा हुं वहां के भी आम इतने बड़े-बड़े नहीं है,,,,, सोचने वाली बात है रानी साहिबा जिस पेड़ से लोगों को खाने के लिए आम मिलता है होगा हम बड़े-बड़े नहीं है और जिस पेड़ को किसी ने कभी देखा भी नहीं है उसमें देखो इतने बड़े-बड़े आम लगे हुए कोई मतलब नहीं है बस यह पंछियों के लिए है।

बात तो तुम सही कह रहे हो,,,, भगवान सबका ठिकाना बना ही देते हैं यहां पर पंछियों के लिए खाने के लिए इतने अच्छे-अच्छे आम है ताकि पंछी लोग कभी भूखे ना रहे,,,,।

हमममम,,,

(दोनों ने दो-दो आम खाए इतने में हीं उन दोनों का पेट भर गया वह दोनों कुछ देर तक वहीं बैठे रहे क्योंकि धूप बढ़ने लगी थी,,,, और फिर कुछ देर बाद दोनों चलने के लिए तैयार हो गए सूरज रानी साहिबा से बोला)

बाकी के आमों का क्या होगा,,,?

होगा क्या लेकर भी तो नहीं जा सकते,,,, कुछ रखने के लिए नहीं है,,,, इन्हें छोड़ो यही आगे चलते हैं देख तो सही आगे क्या है पहाड़ी तो दिखाई दे रही है,,,,।

हां पहाड़ी तो दिखाई दे रही है,,,,, बहुत ही खूबसूरत नजारा भी है,,,,, चलो चलकर देखते हैं,,,,(इतना कहकर सूरज फिर से चल दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) सही कहूं तो रानी साहिबा मुझे आपके साथ बड़ा मजा आ रहा है मेरा सौभाग्य है कि मैं इतने बड़े जमींदार की बीवी के साथ घूम रहा हूं,,,,।

हमममम इसको तुम भाग्यशाली होना कहते हो,,,।

जरूर,,,, मेरे लिए तो यह किसी सपने से काम नहीं है। सच कहूं तो राजा साहब की किस्मत बहुत तेज है जो तुम्हारी जैसी बीवी मिली इतनी खूबसूरत सुशील,,,,।

(सूरज अपनी बातों के जान में रानी साहिबा को पूरी तरह से फंसा रहा था वह जानता था कि औरत के नाम के बीच पहुंचने का रास्ता उनकी तारीफ से ही शुरू होता है और सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर रानी साहिबा भी गदगद हुए जा रही थी)

चलो रहने दो,,,, खूबसूरत सुशील यह सब बनी बनाई बातें हैं,,, ऐसा कुछ भी नहीं है भगवान ने जैसा मुझे बनाए हैं मैं वैसे ही हूं।

खूबसूरत सुशील,,,,, (एकदम से सूरज बोला)

खूबसूरत और सुशील तुम्हें कहां से लगती हूं मैं खूबसूरत,,,, (चलते-चलते एकदम से रानी साहिबा रुक गई और अपनी कमर पर दोनों हाथ रखते हुए सूरज की तरफ देखते हुए पूरी सूरज भी रानी साहिबा को देखकर रुक गया और,,, बोला,,,)

चांद को नहीं मालूम कि वह खूबसूरत है और चांद कभी अपने मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ नहीं करता वैसे आप हो इसीलिए मैं आपको सुशील कह रहा हूं क्योंकि आपको मालूम है कि आप खूबसूरत है लेकिन अपने मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ करना पसंद नहीं करोगी कभी अपने आप को आईने में गौर से देखना किसी चांद से कम नहीं लगती हो,,,,।

(अपने लिए इस तरह के शब्दों में खूबसूरती की तारीफ सुनकर रानी साहिबा खुशी से गदगद हुई जा रही थी क्योंकि आज तक इस तरह से उसकी खूबसूरती की तारीफ उसके पति ने भी नहीं किया था,,, खूबसूरती का मतलब उसके पति के लिए बस इतना ही था कि बिस्तर पर कभी टांगे फैला लो तो कभी घोड़ी बन जाओ,,,, बस इतनी सही मतलब था कभी दो मीठे बोल नहीं बोला था इसलिए तो सूरज के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर रानी साहिबा को बहुत अच्छा लग रहा था,,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अब एक अंक की खूबसूरती की तारीफ करूंगा तो तुम्हारा खूबसूरत बदन बुरा मान जाएगा,,,, बस इतना समझ लो की किसी कलाकार की कल्पना हो,,, एक शिल्पकार जब पत्थरों को काट काट कर आकर देता है तो वह कितना खूबसूरत दिखाई देता है बस वही शिल्पी कर की कला हो ,,,,,, बहुत खूबसूरत हो,,,, (इतना कहते हुए सूरज रानी साहिबा की आंखों में देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई और रानी साहिबा शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दी और यह देखकर सूरज आगे बढ़ गया और पीछे पीछे रानी साहिबा मुस्कुरा कर शर्माते हुए चलने लगी,,,, रानी साहिबा के पैरों में बड़ी पायल की घुंघरू इस सन्नाटे में बहुत ही मधुर धोनी पैदा कर रही थी और यह पायल के घोड़े की मधुर ध्वनि सूरज के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा रहा था चूड़ियों की खनक पायल की झनक सब सूरज को मदहोश बना रहा था। लेकिन इतना वह जरूर समझ गया था कि बस थोड़ी सी मेहनत करने की और दे रही है और ज्यादा देर नहीं लगेगी उसे रानी साहिबा की टांगों के बीच आने के लिए,,,,, क्योंकि अभी तक उसकी एक भी हरकत की वजह से रानी साहिबा को गुस्सा नहीं आया था और ना ही उसकी कोई हरकत उसे बुरी लगी थी यहां तक की सूरज में अपने लंड की चुभन उसकी गांड पर अच्छी तरह से महसूस करवा चुका था लेकिन इस पर भी रानी साहिबा को बिल्कुल भी क्रोध नहीं आया था बल्कि रानी साहिबा का चेहरा देखकर सूरज को एहसास हो रहा था कि उसे उसकी हरकत अच्छी लग रही थी,,,,,, रानी साहिबा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही थी कि तभी पगडंडी के दूसरी तरफ,,,, झाड़ियों में सुरसुराहट की आवाज सुनाई दी उस आवाज को सुनकर रानी साहिबा एकदम से चौंक गई,,,, सूरज ने भी उसे आवाज को सुना था और वह एकदम से रुक गया था वह समझ गया था कि कोई जंगली जानवर है इसलिए फिर से दोनों हाथ फैला कर रानी साहिबा को अपने पीछे आने का इशारा किया और रानी सजदा एकदम से उसके पीठ से सट गई उसके कंधों को पकड़कर झाड़ियों की तरफ देखने लगी,,,, ।

मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज पेड़ के पास पड़ा हुआ मोटा सा पेड़ से नीचे गिरा हुआ सूखा हुआ डंडा उठा लिया सूरज जानता था कि यह मजबूर डंडा नहीं था लेकिन फिर भी अपनी हिफाजत के लिए इस समय इतना ही काफी था,,,, झाड़ियों के बीच की सुरसुराहट बढ़ती जा रही थी,,,, यह देखकर राजा साहब की बीवी घबरा रही थी वह डर के मारे सूरज से बोली,,,।

क्या है सुरज,,,! मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,।

डरो मत मैं हूं ना,,,,, कुछ तो है,,,, यही तो देखना है कि है क्या,,,,,? तुम इधर-उधर मत जाना मेरे पीछे ही रहना,,,,,

(सूरज इस तरह से रानी साहिबा को चौकन्ना रहने के लिए कह रहा था,, रानी साहिबा और ज्यादा घबरा रही थी वह कस के सूरज के कंधों को पड़ी हुई थी और उसकी पीठ से एकदम से सात गई थी जिसकी वजह से उसकी गोलाकार तनी हुई चूचियां सूरज की पीठ पर चुदाती हुई महसूस हो रही थी ऐसे घबराहट भरे माहौल में भी सूरज रानी साहिबा की मदहोश कर देने वाली चुचियों का आनंद ले रहा था,,,,,, सूरज हाथ में डंडा लिए हुए पूरी तरह से तैयार था तभी एकदम से झाड़ियां में से सियार निकल आया जिसे देखते ही रानी साहिबा के तो होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई ऐसा नहीं था कि सूरज घबराए नहीं था अपने सामने बड़े सियार को देख कर उसकी भी हालत खराब हो गई थी लेकिन फिर भी वह हिम्मत नहीं आ रहा था क्योंकि उसके हाथ में पड़ा था डंडा था लेकिन रानी साहिबा सूरज से बोली,,,।)

हाय दइया सियार है,,,,, अब तो गए सूरज,,,,।

तुम चिंता मत करो रानी साहिबा,,,,, हऐई,,, सहहहहह। हटटटटट,,,, हटटटटटटट,,,,, (सूरज उसे भगाने के लिए अपने मुंह से आवाज निकलने लगा लेकिन वह सियार अपने सामने दो इंसान को देखकर गुस्से से भर गया था क्योंकि उसने अभी तक इस जगह पर इंसानों को कम ही देखा था और जितने को भी देखा था उनके ऊपर हमला कर दिया था,,,,, सूरज उसे हटाने के लिए जितनी आवाज निकल रहा था बस यार इतना ज्यादा गुररआ रहा था उसके बड़े-बड़े दांत देखकर सूरज की भी हालत खराब हो गई थी,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि अगर एक बार इसका दांत बदन के किसी भी हिस्से पर पड़ा तो 500 ग्राम जितना मांस नोच इसलिए उसके मन में घबराहट भी थी और रानी साहिबा की तो हालात पूरी तरह से खराब हो गई थी वह तो सूरज उसके साथ था वरना अपने सामने सियार को देखकर रानी साहिबा मूत देती,,,, सूरज समझ गया कि इतनी आसानी से यह सियार जाने वाला नहीं है,,,, वह हवा में लकड़े को इधर-उधर घूमाने लगा लेकिन इससे भी सियार पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह धीरे-धीरे सूरज की तरफ आगे बढ़ रहा था जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था सूरज की सिटी,,,, पिट्टी गुम हो रही थी,,,,,, धीरे-धीरे वह सियार आगे बढ़ता चला रहा था,,,, राजा साहब की बीवी के बदन में कंपन होने लगी थी वह घबरा रही थी कांप रही थी,,,,, वह सियार दोनों पर हमला करने के फिराक में था तभी वह कर से आगे बड़ा की तभी सूरज फुर्ती दिखाता हुआ उसे सुखे लकड़ी को इतनी जोर से घुमाया की उसका निशान सीधा सियार के मुंह पर लगा और सियार एकदम से नीचे गिर गया,,,,,,, उसके नीचे गिरते ही सूरज ने फिर से लकड़े का प्रहार उस पर किया,,,, सियार को समझ में आ गया था कि यहां से भागना ही उचित है और सूरज उस पर लकड़े का और प्रहार करता इससे पहले ही वह उठकर फिर से झाड़ियों में भाग गया,,,, उसके जाते ही रानी साहिबा को न जाने क्या सोचा वह एकदम से सूरज के गले लग गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,, सूरज के तो मानो अरमान पूरे हो रहे हो वह एकदम से मचल उठा,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि रानी साहिबा के मन में इस समय क्या चल रहा था क्योंकि उसने उसकी जान बचाई थी।

गहरी चलती सांसों की गति के साथ ब्लाउज में कैद रानी साहिबा की चूचियां सूरज की छाती पर अपने होने का एहसास करा रहे थे,,,, सूरज धीरे से अपने दोनों हाथ को रानी साहिबा की पीठ पर रख दिया और हल्के-हल्के सहलाते हुए बोला।

घबराने की कोई बात नहीं है सियार चला गया है,,,,,,, मेरे होते हुए आपको कुछ नहीं होगा,,,,,।

(रानी साहिबा अभी भी जोर-जोर से सांस ले रही थी,,,, क्योंकि उसने बड़े करीब से अपनी मौत को अपने सामने देखी थी और सूरज ने हिम्मत दिखाते हुए उसकी मौत का मुंह मोड़ दिया था,,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से खड़े रहे सूरज अपनी अरमानों को पूरा करता रहा पेट पर से उसकी हथेली कब रानी साहिबा की चिकनी कमर पर पहुंच गई यह रानी साहिबा को भी पता नहीं चला लेकिन रानी साहिबा सूरज की हरकत से पूरी तरह से गनगना गई थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, वह धीरे से सूरज की बाहों से अलग हुई अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए घबराए हुए स्वर में बोली,,)

सियार चला गया ना,,,।

चला नहीं गया भाग गया,,,, मैंने कहा था ना कि मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा,,,,,,।

(रानी साहिबा का दिल अभी भी जोरों से धड़क रहा था वह जिस तरह से घबरा कर उसके गले लगी थी रानी साहिबा खुद शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और धीरे से अपनी निगाह को सूरज के पजामे की तरफ की तो फिर से उसके होश उड़ गए क्योंकि उसके गले लगने की वजह से सूरज का लंड फिर से खड़ा हो गया था यह देखकर ना चाहते हुए भी रानी साहिबा की टांगों के बीच की पतली दरार में अजीब सी हलचल होने लगी,,, गहरी सांस लेते हुए वह सूरज से बोली,,,)

अब हमें वापस चलना चाहिए,,,

(यह सुनकर सूरज हैरान हो गया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इतनी जल्दी रानी साहिबा वापस घर के लिए लौटे क्योंकि उसे विश्वास हो गया था कि थोड़ी और मेहनत की जाए तो रानी साहिबा उसे वह सब कुछ देगी जो राजा साहब को देती है इसलिए सूरज एकदम से बोला,,,)

यह क्या कह रही हो रानी साहिबा मेरे होते हुए घबराने की जरूरत नहीं है सामने ही पहाड़ी दिख रही है वहां चलकर थोड़ा रुक कर चलते हैं क्योंकि वहां झरने के पानी में मुझे नहाना है,,,।

क्या उधर झरना भी है,,,?

हां लग तो रहा है,,,, क्योंकि पानी की किसने की आवाज सुनाई दे रही है।

हां आवाज तो आ रही है,,,,।

फिर चलो यहां तक आई हो तो थोड़ा और सही वैसे भी राजा साहब तो घर पर ही नहीं घर पर जाकर करोगी क्या थोड़ा घूम फिर कर मजा ले लो,,,।

मजा तो ले लो लेकिन जंगली जानवर परेशान कर रहे हैं,,,।

मैं हूं ना कुछ नहीं होने दूंगा,,,,।

(सूरज के मुंह से इतना सुनकर रानी साहिबा मुस्कुराने लगी,,,,,, और इस बार वह खुद आगे आगे चलने लगी और सूरज पीछे-पीछे चलते समय रानी साहिबा की गोलाकार गांड ऊंची नीची पगडंडी की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे ऐसा लग रहा था कि रानी साहिबा के साड़ी के अंदर कोई दो बड़े-बड़े तरबूज ठुंस दिया हो,,,, सूरज मदहोश हुआ जा रहा था रानी साहिबा की थोड़ा बहुत उत्तेजित हुए जा रही थी क्योंकि बार-बार वह सूरज के पजामे की तरफ देख ले रही थी जिसकी वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी थी,,,, चारों तरफ घनी झाड़ियां बड़े-बड़े पेड़ छोटे-छोटे खूबसूरत फूलों के पौधे इस जगह को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहा था जैसे-जैसे दोनों पहाड़ी के करीब जा रहे थे वैसे-वैसे पानी गिरने की आवाज तेज होती जा रही थी रानी साहिबा को भी यकीन हो गया था कि जरूर यहां पर झरना है। रानी साहिबा और तेजी से आगे की तरफ बढ़ने लगी और फिर थोड़ी दूर जाने के बाद जो नजर आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर रानी साहिबा के साथ-साथ सूरज भी दंग रह गया बड़ी पहाड़ी के नीचे छोटी पहाड़ी और उसे पैसे नीचे गिरता हुआ झरने का पानी इतना खूबसूरत नजर लग रहा था कि सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई इतना आश्चर्य से सूरज आज तक केवल औरतों की टांगों के बीच ही देखा था लेकिन पहली बार हुआ कुदरत का नजारा देख रहा था इससे पहले भी सूरज झरने में नहाने का मजा ले चुका था और वह अभी अपनी बहन के साथ लेकिन यह झरना उसे झरने से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत था। रानी साहिबा तो खुशी से पागल हो जा रही थी वह एकदम से सूरज की तरफ देख ले रही थी तो कभी झरने की तरफ देख ले रही थी वह अपने खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर पा रही थी।

बाप रे रानी साहिबा सच कह रहा हूं मैं आज तक इतना खूबसूरत झरना नहीं देखा और यह सब आपकी बदौलत है आप यहां आने के लिए ना कहती तो शायद में कुदरत की इतनी खूबसूरत नजारे को अपनी आंखों से देखा नहीं पाता।

मैं भी सूरज बहुत खुश हूं,,,, अच्छा हुआ कि तुम मुझे यहां लेकर आए,,,,, मैं तो यह सब सिर्फ सपने में ही देखा करती थी लेकिन आज हकीकत में अपनी आंख से देख कर मैं बता नहीं सकती की कितनी खुश हूं,,,।

सच में रानी साहिबा मजा आ गया,,, (आगे बढ़ते हुए सूरज बोला पीछे-पीछे धीरे-धीरे रानी साहिबा भी बढ़ रही थी कुछ देर तक दोनों खड़े होकर झरने के पानी को देखते रहे जोर से हवा का झोंका बार-बार पानी के बूंद को उन दोनों के शरीर पर गिरा दे रहा था जिससे दोनों के बदन में ठंडक फेल जा रही थी। सूरज का दिमाग बड़ी तेजी से कम कर रहा था वह जानता था कि ईतना अच्छा मौका उसे दोबारा मिलने वाला नहीं है और यह भी जानता था कि बार-बार रानी साहिबा उसके पजामी की तरफ देख रही थी तो जरूर उसके मन में कुछ ना कुछ चल रहा होगा वह रानी साहिबा को किसी बहाने से अपना मोटा तगड़ा लंड दिखाना चाहता था,, क्योंकि उसे अपनी मर्दाना अंग पर पूरा भरोसा था कि इसे देख लेने के बाद औरत अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं रह पाती,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद वह रानी साहिबा से बोला,,,,।)

रानी साहिबा इतना ठंडा पानी और झरना देखकर तो मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

क्यों,,,? (आश्चर्य जताते हुए रानी साहिबा बोली)

क्योंकि मेरा मन नहाने को कर रहा है,,,

लेकिन कपड़े कहां है,,,?

यही तो सोच रहा हूं,,,,, आप साथ में ना होती तो अब तक में कब तक कुद गया होता कपड़े उतार कर,,,,,।

कपड़े उतार कर,,,(आश्चर्य से सूरज की तरफ देखते हुए रानी साहिबा बोली और सूरज ने इस तरह की बात जानबूझकर किया था क्योंकि वह रानी साहिबा के मन में इस बात को उतारना चाहता था कि वह कपड़े उतार कर नंगा नहाना चाहता है इसलिए वह बोला)

बिल्कुल,,,,, एक काम करो रानी साहिबा तुम दूसरी तरफ मुंह घुमा कर खड़ी हो जाओ,,,।

सच में,,,, लेकिन तुम करने क्या वाले हो,,,।

कपड़े उतारने वाला हूं,,,(इतना कहने के साथ ही रानी साहिबा के सामने ही वह अपना कुर्ता उतारने लगा कुर्ता उतरते ही इसकी चौड़ी नंगी छाती को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में अजीब सी अच्छा लगने लगी,,,, रानी साहिबा को एहसास हो रहा था कि सूरज का बदन कसरती था,,,,,,, कुर्ता उतार लेने के बाद सूरज रानी साहिबा की तरफ देखते हुए बोला,,,)

मुंह घुमाओ ना दूसरी तरफ,,,,,।

(अब रानी साहिबा के मन में भी शर्त सुझने लगी थी,,, वह मुस्कुराते हुए बोली)

अगर नहीं घुमाऊं तो,,,,

तो क्या,,,, तुम्हारे सामने कपड़े उतार कर पानी में कूद जाऊंगा,,,,।

इतनी हिम्मत,,,,,

आपने अभी मेरी हिम्मत देखी कहां है,,,।

चलो नहीं घूमाती मैं भी तो देखु तुम्हारी हिम्मत,,,,,(दोनों हाथ आपस में बात कर रानी साहिबा खड़ी हो गई और सूरज को देखने लगी सूरज के तनबदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, रानी साहिबा किस तरह की बात की वजह से सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी जिसकी वजह से उसके लंड का आकार बढ़ने लगा था रानी साहिबा की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

देखो फिर मुझे दोष मत देना कि मैं आपके सामने कपड़े उतार दिया,,।

नहीं दूंगी,,,,।

चलो फिर क्या है जब आपको ऐतराज नहीं है तो मुझे कैसा एतराज होगा,,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपने पजामा की डोरी को खोलने लगा यह देखकर रानी साहिबा के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे लग रहा था कि सूरज मजाक कर रहा है लेकिन वह सच में रानी साहिबा के सामने नंगा होना चाहता था और यह उसके मन की भी बात थी क्योंकि वह जानता था की रानी साहिबा के सामने नंगा होने के बाद रानी साहिबा की नजर उसके मोटे तगड़े लंड पर जरूर पड़ेगी और एक औरत होने के नाते मोटे तगड़े लंड को देखकर उसके मन में भी कौतूहल जागेगा,,,, और फिर सूरज भी बिल्कुल भी देर ना करते हुए रानी साहिबा की आंखों के सामने ही अपनी पजामा एक झटके से नीचे खींच दिया और जैसे ही पजामा उसके घुटनों तक आया उसका मोटा तगड़ा लंड एकदम से आजाद होकर लहराने लगा जिसे देखते ही रानी साहिबा की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,, वह पल भर के लिए झलक भर सूरज के लंड को देखते रही और फिर शर्म के मारे अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली यह देखकर सूरज मैन ही मन मुस्कुराने लगा और पैजामा को दोनों हाथों से अपने पैरों से बाहर निकाल कर एकदम नंगा हो गया और झरने के गिरने से इकट्ठा हुए पानी में कूद गया जो की एक बड़ा सा तालाब जैसा था,,,,, सूरज बड़े मजे लेकर झरने के पानी में नहा रहा था वह पूरी तरह से नंगा था इस बात पर रानी साहिबा को बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था अगर वह अपनी आंखों से ना देखी तो शायद किसी के कहने पर वह विश्वास नहीं कर पाती उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सूरज किस प्रकार का लड़का है,,,,।

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वह उसकी इच्छा भी पूरी करने के लिए उसे इतनी दूर लेकर आया उसकी रक्षा भी कर रहा है और उसकी मौजूदगी में उत्तेजित भी हो रहा है रानी साहिबा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जिस तरह का नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी वह नजारा देखकर उसकी हालत एकदम से खराब हो गई थी अपने पति के लैंड को ही वह मर्दों का सबसे बड़ा लंड समझती थी लेकिन इस समय उसकी आंखों के सामने सूरज का लंड नजर आया थाजो की पूरी तरह अपनी औकात में आकर खड़ा था और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके पति से काफी लंबा और मोटा था,,, इस तरह के अद्भुत मादकता भरे नजारे को देखकर ना चाहते हुए भी रानी साहिबा की बुर पानी छोड़ रही थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था सांसों की गति अभी भी बड़ी तेजी से चल रही थी वह सूरज को देख रही थी सूरज नहाने का मजा ले रहा था और बार-बार उसकी तरफ ही देख रहा था,,।

पानी बहुत ठंडा हैरानी साहिबा बहुत मजा आ रहा है अगर आपको तैरना आता है तो आप भी आ जाओ,,,,,आहहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,,,ओहहहहह हो,,,,,(सूरज खुशी के मारे जोर-जोर से चिल्ला रहा था,,,,, लेकिन रानी साहिबा के तन बदन में आग लगी हुई थी,,,, रानी साहब अपने पति के बारे में सोच रही थी जो कि आज तक उसके खुशी का बिल्कुल भी परवाह नहीं किया था चाहे दैनिक जीवन में हो सांसारिक जीवन में हो या फिर बिस्तर पर हो सब तरह से सिर्फ अपनी मनमानी किया था वह सिर्फ अपना सुख खोजता था,,,, उसे अच्छी तरह से याद था कि उसके पति के द्वारा किया गया संभोग से कितना दर्द देता था क्योंकि वह संभोग में भी मनमानी करता हुआ बस अपनी प्यास बुझा देता था और करवट लेकर सो जाता था या फिर कमरे से बाहर चला जाता था कभी भी उसने उसकी इच्छा पूछने की जरूरत नहीं समझा इसलिए इस समय न जाने क्यों रानी साहिबा का मन बहक रहा था,,,, उसने आज तक मर्यादा के बाहर जाकर कोई ऐसा कार्य नहीं की थी जिससे उसकी बदनामी हो लेकिन आज उसका मन बहक रहा था सूरज को देखकर उसका चंचल मन उड़ने को कर रहा था मजा लेने को कर रहा था और वह बार-बार सूरज के लंड के बारे में सोच रही थी कि अगर इतना मोटा लंड किसी औरत की बुर में जाएगा तो औरत को मजा आएगा या दर्द होगा,,,,। यही सब सोच भी रही थी और सूरज की तरफ देख भी रही थी सूरज बार-बार उसे पानी में उतरने के लिए प्रेरित कर रहा था क्योंकि सूरज जानता था अगर वह एक बार पानी में उतर गई तो किसी न किसी बहाने से वह उसे अपनी बाहों में भर लेगा और उसे पूरा विश्वास था कि जो नजर उसने कुछ देर पहले रानी साहिबा को दिखाया था उसे नजारे को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में आग लग गई होगी,,,,, वातावरण की गर्मी और जवानी की गर्मी दोनों रानी साहिबा को परेशान कर रहे थे वह भी झरने के पानी में नहाना चाहती थी वह भी खुले में लेकिन जवानी के दिनों से और जब से उसका विवाह हुआ था तब से अपनी इच्छाओं का गला घोट करवा है को ठीक है चार दिवारी में अपना जीवन गुजर रही थी कभी आनंद के साथ वह अपना जीवन नहीं थी इसलिए आज वह अपने मन की कर लेना चाहती थी,,,,, सूरज दूसरी तरफ मुंह करके तैरते हुए दूसरी तरफ जा रहा था और तभी राजा साहब की बीवी एक बड़े से पत्थर के पीछे गई और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,, सूरज उसे पलट कर देख भी नहीं पाया और वह छम्म से जाकर झरने के पानी में कूद गई और जैसे ही वह पानी में गोरी उसकी आवाज के साथ सूरज उसे तरफ देखने लगा तो वह खुशी के मारे झूम उठा क्योंकि तलाब में रानी साहिबा भी नहा रही थी। पानी काफी ठंडा था जो कि इस भरी दुपहरी की गर्मी में ठंडक देने के लिए पर्याप्त था।

सूरज तैरता हुआ रानी साहिबा के करीब जा रहा था क्योंकि उसे अभी तक यह नहीं मालूम था की रानी साहिबा कपड़े पहने हुए पानी में कूद गई है या कपड़े उतार कर लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ की रानी साहिबा के बदन पर वस्त्र का रेशा तक नहीं है पर एकदम से खुशी से झूम उठा उत्तेजना से पानी के अंदर ही उसका लंड ठुनकी मारने लगा,,,,, वह रानी साहिबा के करीब गया जैसे-जैसे सूरज उसके करीब आ रहा था वैसे-वैसे शर्म के मारे रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि वह पूरी तरह से नंगी थी और ऐसे में एक जवान लड़की का उसके करीब आना उसके बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था तकरीबन 1 मीटर की दूरी पर स्थिर होकर सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

आप सारे कपड़े उतार कर,,,।

(सूरज का बस इतना कहना था की रानी साहिबा मुस्कुरावदी और उसकी मुस्कुराहट ने सारे सवाल के जवाब स्पष्ट कर दिए,,,,, खुशी के मारे सूरज का लंड दर्द करने लगा था,,,, सूरज बार-बार रानी साहिबा के करीब जाने लगा रानी साहिबा जी तरफ जाती पीछे पीछे सूरज भी उसी तरफ चल देता और जाते-जाते वह इतना करीब पहुंच जाता कि उसका नंगा लंड रानी साहिबा की नंगी गांड पर रगड़ खाने लगता और यह एहसास रानी साहिबा के तन बदन में चुदास की लहर भरने के लिए काफी था,,,, ऐसा बार-बार हो रहा था और सूरज ऐसा जानबूझकर कर रहा था,,,, रानी साहिबा जब तैरते हुए तालाब के बड़े से पत्थर के तरफ जा रही थी तो सूरज भी बड़ी तेजी से तैरता हुआ एकदम से रानी साहिबा से सट गया और इस बार सूरज का मोटा तगड़ा लंड पानी की चिकनाहट प्रकार रानी साहिबा की गांड की दरार में एकदम से रगड़ खाने लगा,,, यह एहसास रानी साहिबा को पानी पानी कर दिया था हालत तो सूरज की भी खराब हो गई थी क्योंकि वह रानी साहिबा की बुर में अपना लंड डालना चाहता था,,, रानी साहिबा को लगने लगा था कि अब वह अपने आप ऊपर से काबू को बैठेगी और किसी भी समय सूरज के लंड को अपनी बुर में ले लेगी,,,, वह मुंह से तो कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन उसका चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था सूरज को एहसास हो रहा था की रानी साहिबा क्या चाहती है,,,,, रानी साहिबा पानी में तैरते हुए कल आपके किनारे बड़े से पत्थर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर पानी में ही खड़ी हो गई और ठीक सूरज भी उसके पीछे उसी अवस्था में खड़ा हो गया जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी जामुन के बीच से होता हुआ नीचे से उसकी बुर पर दस्तक देने लगा था यह एहसास रानी साहिबा को अपने मर्यादा से नीचे गिरने के लिए कमजोर बना रहा था वह गहरी सांस लेते हुए बड़े से पत्थर को दोनों हाथों से पकड़ कर स्थिर खडी थी। ठीक उसके पीछे सूरज खड़ा था और अभी दोनों हाथों को बड़े से पत्थर पर रखा हुआ था जिससे इस अवस्था में रानी साहिबा उसकी आगोश में थी और सूरज का लंड दोनों टांगों के बीच से उसकी बुर पर नीचे से ठोकर लग रहा था जिससे रानी साहिबा एकदम से रोमांचित हुए जा रही थी,,,,।

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रानी साहिबा अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी,,,, क्योंकि रानी साहिबा का धैर्य जवाब दे गया था,,,, तभी उसने हल्के से अपनी टांगों को थोड़ा सा और खोल दी यह एहसास सूरज को अच्छी तरह से महसूस हुआ,,,, और यही मौका बिल्कुल सही था रानी साहिबा को अपनी आगोश मे लेकर दबाने का और इस मौके का सूरज पूरी तरह से फायदा उठाता हुआ एकदम से रानी साहिबा के बदन से सट गया और अपने दोनों हथेलियों को आगे की तरफ लाते हुए, एकदम से पुरानी साहिब की दोनों चूचियों पर अपनी हथेली लगती है और उसे हल्के से दबाते हुए अपने होठों को रानी सागर के गर्दन पर रखकर गहरी सांस लेने लगा सांसों की गर्मी और हथेलियों के दबाव को रानी साहिबा बर्दाश्त नहीं कर पाई और एकदम से पिघलने लगी गहरी सांस लेते हुए वह अपने मन की इच्छा को इशारे से ही जाहिर करने लगी,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा की उत्तेजक गहरी सांस ही उसकी सारी कहानी को बयां कर रही थी सूरज समझ गया था की रानी साहिबा क्या चाहती है सूरज पागलों की तरह उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए अपने हथेलियों का दबाव चुची पर बढ़ाने लगा,,, रानी साहिबा की दोनों चुचीया जवानी से भरी हुई थी जिसे दबाने में सूरज को बहुत मजा आ रहा था,,,,, जवाब में रानी साहिबा के मुंह से केवल शिसकारी की आवाज फूट रही थी।

सहहहहहहहह सहहहहहहवआहहहहहहह ऊमममममममम ,,,।

(रानी साहिबा के मुंह से इस तरह की आवाज को सुनकर सूरज का हौसला बढ़ने लगा सूरज नीचे से अपने लंड को बराबर से उसकी बुर पर रगड़ता हुआ उसकी चूचियों से खेलने लगा,,,, सूरज कभी सोचा नहीं था कि राजा साहब की बीवी के साथ उसे मजा लेने का मौका मिलेगा,,,, जंगल में झरने के अंदर वह पूरी तरह से राजा साहब की बीवी की जवानी का रस नीचोड रहा था।,,,,, सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की खूबसूरत नंगे बदन पर अपने होंठ से दस्तखत कर रहा था,,,, रानी साहिबा ठंडे पानी में भी गर्म होने लगी थी सूरज पानी के अंदर ही धीरे से उसके कंधों को पकड़कर उसे अपनी तरफ घूमा लिया,, और रानी साहिबा के उत्तेजना से तमतमाए खूबसूरत चेहरे की तरफ देखने लगा दोनों की आंखें आपस में तक रहे और रानी साहिबा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली लाल लाल गुलाब की पंखुड़ी जैसे उसके होंठ उत्तेजना से थरथरा रहे थे जिसे काबू में करने के लिए सूरज अपने होठों को उसके होंठ पर रखकर उसके नाजुक होठों को अपने मुंह में भर लिया और उसके होठों का रसपान करते हुए पानी के अंदर ही अपने दोनों हथेलियां को उसकी चिकनी पीठ से नीचे की तरफ ले जाते हुए उसके नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाते हुए उसे अपने बदन से सटा दिया ऐसी अवस्था में सूरज का कठोर अंग उसकी बुर की दरार पर जबरदस्त रगड़ खाने लगी जिससे रानी साहिबा का पूरा वजूद हचमचाने लगा वह मदहोश होने लगी मत होने लगी और एकदम से अंगूर के लता की तरह सूरज के बदन से लिपट गई। रानी साहिबा की सरकार से सूरज के मन की रही सही शंका भी दूर हो गई,,, सूरज और पागलों की तरह उसे अपनी बाहों में चक्कर उसके नितंबों को दोनों हाथों से दबाते हुए उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,, अब सूरज से रहने जा रहा था सूरज पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और जब अपने लंड पर उसे रानी साहिबा की हथेली का कसाव महसूस हुआ तो वह एकदम से पागल हो गया अब वह पानी के अंदर नहीं पानी के बाहर मजा लेना चाहता था क्योंकि पानी के अंदर रहकर वह रानी साहिबा के खूबसूरत बदन से जी भर कर मजा नहीं ले पा रहा था,,,, इसलिए वह रानी साहिबा से बोला,,,)

चलो पानी के बाहर,,,, आज तुम्हें मस्त कर देता हूं,,,,(सूरज की ईस बात रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई,,,, और सूरज कल आपके बाहर आ गया हुआ पूरी तरह से नंगा था उसका लहराता हुआ लंड देखकर रानी साहिबा के होश उड़ गए क्योंकि यह बहुत कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा दिखाई दे रहा था एक झलक सूरज के लंड की तरफ देखकर वह फिर से अपनी नजर को नीचे झुका ली सूरज ने अपना हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा को पानी से बाहर निकलने में मदद किया और जैसे ही रानी साहिबा पानी से बाहर आई वह फिर से उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबाते हुए मजा लेने लगा अब सूरज रुकने का नाम नहीं लेना चाहता था देखते ही देखते वह रानी साहिबा की दोनों चूचियों को बारी बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,, रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा है सूरज की हर एक हरकत उसे आनंदित कर दे रही थी,,,, उसे एहसास होने लगा था कि सूरज उसके पति से भी ज्यादा और अच्छे तरीके से उसके बदन से खेल रहा था वरना उसका पति तो केवल उसके बदन को निचोडता बस था। लेकिन सूरज उसके बदन से दिल से प्यार कर रहा था इसलिए तो रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,,,।

तुम बहुत खूबसूरत हो रानी साहब मैंने आज तक तुम्हारी जैसी औरत नहीं देखा जो कपड़े उतारने के बाद ही इतनी खूबसूरत दिखती हो,,,,।(रानी साहिबा कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म से अपनी नजर के नीचे झुका ली,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम्हारी दोनों चुचिया बिल्कुल उस पेड़ के आम की तरह एकदम गोल गोल,,,,सहहहहहह( हथेली में लेकर चुची को दबाते हुए) तुम्हारी चुचीया आज बहुत मजा देने वाली है,,,।(और इतना कहने के साथ हैं हल्के से चुची को दबाते हुए अपने मुंह को चुची की तरफ ले गया और अपने होंठों के बीच चुची को भरकर पीना शुरू कर दिया,,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा एकदम से मदहोश होने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी और सूरज बारी बारी से से उसकी दोनों चूचियों को पीना शुरू कर दिया,,, रानी साहिबा को इतना मजा मिल रहा था कि पूछो मत जिंदगी में ऐसा लग रहा था की पहली बार वह मर्द के साथ होने का एहसास कर रही थी क्योंकि पहले रात से ही उसे कभी नहीं लगा कि उसका पति उसे अच्छी तरह से प्यार करता है,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से उसकी दोनों चुचियों का मजा लेता रहा लेकिन बीच-बीच में अपनी हथेली को उसकी कोमल बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से मसलकर उसका पानी निकालने से पीछे नहीं हट रहा था। और सूरज की यही हरकत उसे पानी पानी कर दे रही थी,,,, लगातार रानी साहिबा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी और वह खुलकर इस तरह की आवाज ले रही थी क्योंकि जंगल में उसकी शेषकारी की आवाज सुनने वाला वहां सूरज के सिवा और कोई नहीं था,,,, रानी साहिबा कभी सोची नहीं थी कि गांव के लड़के के साथ वह इस तरह से मजा लुटेगी,,, और शायद यह भी नहीं सोची थी कि गांव का लड़का उसे इतना मजा देगा।

सूरज पूरी तरह से रानी साहिबा पर छा जाना चाहता था इसलिए उसे बड़े से पत्थर का सहारा देकर खड़ी कर दिया था और धीरे से अपने घुटने के बाद नीचे बैठ गया था क्योंकि वहां पर बड़े-बड़े पत्थर थे एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में दबोच कर उसके होठों का रसपान करते हुए सूरज धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ला रहा था उसकी गर्दन में उसकी छाती उसकी चूचियों से होता हुआ उसकी गहरी नाभि पर चुंबन करते हुए सूरज अपनी जीभ को अपने होठों को उसके बदन से सरकाते हुए उसकी नाजुक गुलाबी बुर की तरफ नीचे उतरता चला जा रहा था,,,, उसकी जीभ और उसके दहकते हुए होंठ उसकी बुर की ऊपरी हिस्से के रेशमी बालों के झुरमुट पर पहुंच चुके थे जिससे रानी साहिबा के बदन में झनझनाहट होने लगी थी सूरज की हरकत से रानी साहिबा समझ गई थी कि सूरज क्या करने वाला है क्योंकि इस तरह से राजा साहब उसकी बुर की चटाई बहुत बार कर चुके थे लेकिन इतना मजा नहीं आया था,,, आज वह देखना चाहती थी कि सूरज क्या गुल खिलाता है,,,, औरतों को खुश करने के मामले में सूरज दूसरे मर्दों से एक कदम आगे था इस बात को रानी साहिबा नहीं जानती थी लेकिन चल रही है उसे सूरज एहसास करने वाला था क्योंकि अगले ही फल सूरज के प्यासे हो रानी साहिबा की थाती हुई बुर पर स्पर्श हुई और सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की बोर की चढ़ाई करना शुरू कर दिया उसमें से मदन रस का फवारा फूट रहा था रानी साहिबा अपनी आंखों को बंद करके सूरज के बालों को दोनों हाथों से पकड़ कर वहां उसके मुंह का दबाव अपनी बुर पर बनाए हुए थी,,, बुर चटाई में औरतों को मजा देने मे वह बिल्कुल भी पीछे हटता नहीं था। वह पागलों की तरह सनी साहिब की बुर को चाट रहा था और रानी साहिबा मत हो जा रही थी देखते-देखते रानी सब अपनी टांग उठा कर उसे सूरज के कंधे पर रख दी और दोनों हाथों से उसका सर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दी इस तरह से वह अपनी बुर से सूरज के मुंह को चोद रही थी। रानी साहिबा के सरकार से सूरज काफी प्रभावित हुआ था और रानी साहिबा खुद अपनी हरकत से हैरान थी क्योंकि आज तक उसने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत नहीं की थी लेकिन हर सूरज के साथ वह इतनी आनंदित हो गई थी कि अपने आप ही उसकी कमर आगे पीछे हो रही थी।

सूरज रानी साहिबा का मजा और ज्यादा बढ़ाने के लिए अपनी दो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर की मलाई चाट रहा था जिससे ईरानी साहिब की मस्ती चरम पर पहुंच चुकी थी उसके बदन की अकड़न बढ़ने लगी थी और देखते ही देखते वह कस के सूरज को पकड़ ली और झड़ने लगी,,,, सूरज की मुंह में उसकी बुर से निकला हुआ मदन दास का फवारा बह रहा था और सूरज रानी साहिबा की बुर से निकलने वाले मदन रस की एक-एक बूंद को नीचे नहीं गिरने देना चाहता था इसलिए वह गले के नीचे घटक रहा था उसे पी रहा था उसके नमकीन रस का स्वाद ले रहा था यह देखकर रानी साहिबा गदगद हुए जा रही थी। सूरज अपनी जीभ से ही चटाई करके रानी साहिबा को झाड़ दिया था इस बात से रानी साहिबा भी काफी प्रभावित हुई थी सूरज धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रानी साहिबा की आंखों में देखते हुए बोला।

कैसा लगा रानी साहिबा,,,।

(रानी साहिबा कुछ बोली नहीं बस शर्म से नजर नीचे झुका ली और फिर सूरज अपने दोनों हाथों को रानी साहिबा के कंधे पर रखकर उसे पर दबाव बनाते हुए उसे नीचे की तरफ बैठने लगा देखते देखते रानी साहिबा अपने घुटनों के ऊपर नीचे बैठ गई और सूरज अपने लंड को हाथ में पकड़ कर लहराता हुआ उसके सुपाड़े को रानी साहिबा के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, रानी साहिबा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था लंड की गर्माहट उसे मदहोश कर रही थी,,, विवाहित होने के नाते और वासना से भरे पति के कारण इतना तो रानी साहिबा को अनुभव हो ही चुका था कि अब उसे क्या करना है,,, इसलिए वह बिना झिझक अपने लाल लाल होठों को खोल दी और सूरज अपने लंड को उसके मुंह में प्रवेश कर दिया रानी साहिबा को जितना होना रहता था वह सारा हुनर उसने सूरज के लंड पर आजमाना शुरू कर दी थी,,, सूरज मस्त होता जा रहा था अपनी आंखों को बंद करके वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया था और रानी साहिबा अपने होठों का कम लंड पर बढ़ाकर उसे बुर के कसाव का मजा देने की कोशिश कर रही थी। सूरज के मोटे लंड से रानी साहिबा का पूरा मुंह भरा हुआ था बड़ी मुश्किल से हुआ उसे अपने मुंह में लेकर चूस रही थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी कमर हिलता रहा और रानी साहिबा को मजा देता रहा फिर धीरे से वह अपने लंड को रानी साहिबा के मुंह से बाहर निकाल लिया,,,,, रानी साहिबा की सांस अटक रही थी इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकला वह खुलकर सांस लेने लगी,,,,, अब रानी साहिबा को चोदने का समय आ गया था इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए और नीचे बड़े-बड़े पत्थर होने की वजह से सूरज रानी साहिबा का हाथ पकड़ कर उसे हरी हरी घास के करीब लाया और उसे पीठ के बल लेटा दिया रानी साहिबा का दिल जोरो धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी कि अब क्या होने वाला है। सूरज मुस्कुराता हुआ है रानी साहिबा की दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा और दोनों हथेलियां को नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी कमर को पकड़कर उसकी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया और फिर धीरे से उसकी बुर में अपने लंड को प्रवेश कराने लगा,,, बरकी चिकनाहट पकड़ लंड बड़े आराम से बुरे के अंदर प्रवेश कर तो जा रहा था लेकिन रानी साहिबा को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सूरज का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा था क्योंकि उसे हल्का-हल्का दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन लंड की रगड उसे पूरा मस्त कर दे रही थी। जैसे-जैसे लंड बुर के अंदर प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे रानी साहिबा के चेहरे का रंग बदलता जा रहा था उसके हाव-भाव बदलते जा रहे थे कभी दर्द का एहसास हो रहा था तो कभी आनंद ही आनंद की रेखाएं उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी देखते ही देखते सूरज मेहनत करते हुए अपने पूरे लंड को रानी सहेली की बुर में डाल दिया और रानी साहिबा से बोला,,,,)

देखो रानी साहिबा मेरा पूरा लंड तुम्हारी बुर की गहराई में खो गया है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर रानी साहिबा अपने हाथ की दोनों को हानि का सहारा लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठे और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थित कर दी और वहां का नजारा देखकर वाकई में वह आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो चुका था यह देखकर रानी साहिबा उत्साहित होते हुए बोली)

बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है सूरज तुम्हारा लंड मेरे पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है लेकिन मैं तुम्हारे लंड को अपनी बुर में ले लूंगी इस बात से मेरा मन आसंकित था लेकिन देखो बढ़िया आराम से तुम्हारा लंड मेरी बुर की गहराई में खो गया है,,,,।

बिल्कुल रानी साहिबा आखिर आप है भी तो रानी साहिबा किसी से कम थोड़ी ना है,,, अब देखो मेरा कमाल,,,,(रानी साहिबा की अश्लील बातों से सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी और सूरज बिल्कुल भी देर ना करते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था वह रानी साहिबा की चुदाई करना शुरू कर दिया था हर एक धक्के से रानी साहिबा साथी आसमान पर पहुंच जा रही थी उसने आज तक ऐसी चुदाई का मजा नहीं ली थी इसलिए वह मजे ले लेकर सूरज से चुदवा रही थी सूरज उसकी चुदाई करने में बिल्कुल भी कसर नहीं बाकी रख रहा था,,, हर एक धकके साथ रानी साहिबा की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लहर उठती थी जिसे सूरज अपने हाथों से पकड़ कर दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,,, राजा साहब की बीवी को जितना मजा मिल रहा था वह उसके जीवन का सबसे सर्वोत्तम सुख था वह कभी सोचा नहीं थी कि उसे इस तरह का सुख कभी मिल पाएगा क्योंकि पति से तो उसे सुख नहीं मिल पा रहा था बल्कि पति से दुख ही मिल रहा था लेकिन आज सूरज ने उसे चुदाई का असली सुख से वाकीफ करवाया था,,,, सूरज उसकी चूचियों को दबाता हुआ उसकी चूचियों को मुंह में लेकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था जिससे रानी साहिबा आनंदित हो उठती थी,,,, रानी साहिबा इस बात से भी है क्रांति की काफी देर हो गया था सूरज के लंड को खड़ा हुए लेकिन अभी तक उसके लंड ने पानी नहीं छोड़ा था,,, सूरज का हर एक धक्का उसे अपने बच्चेदानी पर ठोकर मारता हुआ महसूस हो रहा था जैसा कि आज तक उसे अपने पति से भी महसूस नहीं हुआ था,,,।

कुछ देर तक सूरज इसी तरह से रानी साहिबा की चुदाई करता रहा और फिर तेरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे घोड़ी बनने को बोल दिया रानी साहिबा घोड़ी बनने का मतलब को अच्छी तरह से जानती थी वह जल्दी से घुटनों और हाथ की कोहनी के बाल हो गई और अपनी गोलाकार गांड को हवा में लहराने लगी,,,, गोरी गोरी गांड देखकर सूरज से रहने की और उसकी गांड पर दो चार चपत लगा दिया जिससे उसकी गोरी गोरी गाल टमाटर की तरह लाल हो गई और फिर धीरे से उसकी गुलाबी बुर अपना लंड डालकर फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,, सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की चुदाई कर रहा था रानी साहिबा पसीने से तरबतर हो चुकी थी इतनी देर में उसका पति दो बार झड़ गया होता लेकिन सूरज था कि झड़ने का नाम नहीं ले रहा था आखिरकार दोनों चरम पर पहुंचने लगे रानी साहिबा कि सीसकारी की आवाज जोर-जोर से निकालने लगी और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे सूरज के लंड का फवारा सीधा उसके बच्चेदानी पर पड़ रहा था जिससे रानी साहिबा गदगद हुए जा रही थी। कुछ देर तक सूरज रानी साहिबा पर ही लेट रहा और रानी साहिबा की घोड़ी बनी गहरी सांस लेते हुए अपने आप को दुरुस्त करने में लगी रहे और फिर धीरे से सूरज ने अपने लंड को रानी साहिबा की बुर से बाहर निकाला।

सूरज गहरी सांस लेता हुआ पास में ही बैठ गया था रानी साहिबा के चेहरे पर संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे वह सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे,,,,, धीरे-धीरे होने वाली थी दोनों को मालूम था कि घर पहुंच कर पहुंचते हैं तेरा हो जाएगा वैसे तो उन दोनों का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था यहां से जाने का लेकिन समय को देखते हुए दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे और फिर उन दोनों को घर पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो चुका था,,,,, घर पर पहुंचे तो कुंवर अपनी बहन का इंतजार कर रहा था अपनी बहन को सूरज के साथ देखकर हुआ है एकदम उत्साहित होता हुआ बोला।

तुम दोनों जन कहां से आ रहे हैं मैं कब से इंतजार कर रहा हूं आखिर बिना बताए कहां चली गई थी,,,,।

(सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें लेकिन वह कुछ बोलता है इससे पहले ही रानी साहिबा बोल उठी )

अरे उस दिन मेरे कान का झुमका नहीं मिल रहा था ना,,,।

हां,,,,,,

सूरज को इस बात का पता चला तो होगा मुझे लेकर बाजार गया था और उन दोनों ने वहां काफी देर तक ढूंढने के बाद देखा मेरा झुमका मिल गया,,,,(झुमके को कान में पहने हुए ही वह अपने भाई को दिखाने लगे तो उसका भाई भी झुमका देखकर खुश हो गया क्योंकि वह जानता था कि यह जनता उसकी मां का दिया हुआ था और खुश होता हुआ बोला,,,)

तुमने तो कमाल कर दिया सूरज,,, तुम समझ नहीं पाओगे कि मैं कितना खुश हूं,,,,, इसके बदले में मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या दुं,,,,।

मैं भी तो यही कह रही थी रात हो गई है मैं सूरज से कह रही थी कि यहीं रुक जाओ मेरे बगल वाला कमरा खाली पड़ा है रात को वहीं रुक जाना,,,,, आज की रात हमारे घर की मेहमान नवाजी का मजा लेते जाओ।

लेकिन घर पर,,,,।

अरे कोई बात नहीं कह देना कि काम पड़ गया था।

दीदी ठीक कह रही है रुक जाओ,,,।

चलो ठीक है इतना कहते हो तो मैं रुक जाता हूं,,,(सूरज भी रात को रुकना नहीं चाहता था क्योंकि जो मजा रानी साहिबा ने उसे दी थी वह भी अधूरा ही था पूरा मजा लेना बाकी था और आज की रात रुकता हुआ है रानी साहिबा की जवानी का रस पूरी तरह से निचोड़ लेना चाहता था)
 
रानी साहिबा का आमंत्रण सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था। और यह आमंत्रण कोई भोज प्रसंग या रेन बसेरा का नहीं था बल्कि बहुत प्रसंग और रेन बसेरा के आड़ में संभोग प्रसंग का नेता था जिसे सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था,,, क्योंकि इस तरह क्या आमंत्रण बहुत ही किस्मत वाले को ही मिलता है और इस समय सूरज किस्मत का धनी था क्योंकि आए दिन रोज उसे कोई ना कोई खूबसूरत औरत अपना खूबसूरत जवान समर्पित कर दे रही थी और रानी साहिबा की तो बात ही अलग थी वह बड़े जमींदार की बीवी थी और ऐसे जमीदार की बीवी को चोदने का सिर्फ कल्पना ही किया जा सकता है हकीकत में किस्मत का साथ होना जरूरी है। और इस समय किस्मत का साथ सूरज के साथ था। कुंवर और उसकी बहन बहुत खुश नजर आ रहे थे। कुंवर को यह आवाज तक नहीं था कि सूरज उसकी बहन के बीच बहुत कुछ घटित हो चुका है वह तो इसे एक मेहमान के तौर पर ही देख रहा था जो की कान का झुमका देकर बहुत बड़ा उपकार किया था लेकिन इस उपकार के बदले में कुंवर की बहन में अपनी जवानी सूरज के कदमों में न्योछावर कर दी थी इस बात का अंदाजा कुंवर को बिल्कुल भी नहीं था।

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सूरज के रुकने की वजह से आज भोजन में खीर पुरी दो तरह की सब्जी और मिठाई का प्रबंध किया गया था अभी भोजन का समय नहीं हुआ था और सूरज को कुंवर उसके कमरे में लेकर गया था जहां पर आज उसे रात रुकना था ‌।

कैसा लगा सूरज आपको यह कमरा,,,, (वैसे तो कुंवर अच्छी तरह से जानता था कि आज नहीं तो कल सूरज उसका साला बनने वाला है और वह कुंवर से बड़ा था इसलिए उसे भैया कहने का मन कर रहा था लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू किया हुआ था क्योंकि वह सूरज के मन में शंका नहीं होने देना चाहता था कि कुंवर और उसकी बहन के बीच कुछ चल रहा है,,,,)

बहुत अच्छा मैं कभी सोचा नहीं था कि मैं इस तरह के आलीशान कमरे में रात रुकूंगा,,,, (खिड़की से बाहर देखा हुआ सूरज बोल खिड़की के बाहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत आचारों तरफ दूर-दूर तक खेती खेत दिखाई दे रहे थे आसमान में चांद अपनी चांदनी बिखेर रहा था। कुंवर भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा हुआ बहुत खुश था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर सूरज को खुश कर लिया तो वह खुशी-खुशी अपनी बहन का हाथ उसके हाथ में दे देगा,,,,, सूरज की बात सुनकर कुंवर बोला)

मुझे भी यह नजारा बहुत अच्छा लगता है मैं घंटे बैठकर अकेले ही यह सब देखता रहता हूं,,,,।

अच्छा जीवन है तुम्हारा ,,,,(कुंवर की तरफ देखकर सूरज बोला)

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मुझे तो ऐसा नहीं लगता,,, बस आजादी है आजादी तो तुम्हें भी है कहीं भी घूम सकते हो कहीं भी आ सकते हो जा सकते हो मेरे और तुम्हारे जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है,,,।

(कुंवर की आवाज सुनकर सूरज कुछ बोला नहीं बस मुस्कुराने लगा कुछ देर तक और दोनों की बातचीत चली,,,, भोजन का समय हो गया था भोजन करने के लिए रानी साहिबा खुद कमरे तक आई और अपने भाई और सूरज दोनों को भोजन करने के लिए बुलाकर ले गई,,,, तीनों साथ मिलकर भोजन कर रहे थे इस बीच भोजन करते हुए सूरज की नजर बार-बार रानी साहिबा पर चली जा रही थी रानी साहिबा के समीप रहकर उसकी काम भावना बार-बार जागरूक हो रही थी और यही हाल रानी साहिबा कभी था वह अपने भाई के सोने का इंतजार कर रही थी लेकिन अभी इसमें बहुत समय था क्योंकि अभी तो तीनों भोजन कर रहे थे,,,, रानी साहिबा को इस बात कहे संस्था की सूरज में जो बात थी वह उसके पति में नहीं थी उसका पति उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाता था जिससे उसे बिल्कुल भी आनंद नहीं आता था लेकिन सूरज एक मर्द की तरह औरतों के साथ संबंध बनाता था जिसमें वह पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी। पहली बार की चुदाई में ही सूरज ने रानी साहिबा को पूरी तरह से अपना दीवानी बना दिया था। दोनों एक दूसरे को कनखियो में देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे,,, भोजन करते हुए रानी साहिबा सूरज से बोली,,,)

अरे सूरज,,,, थोड़ा और खीर लो,,,,

नहीं नहीं बस इतना काफी है मेरे लिए,,,।

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अरे ऐसे कैसे,,,, थोड़ा तो और लेना पड़ेगा,,, (इतना कहते हुए रानी साहिबा खुद बर्तन में से बड़ा चम्मच भरकर खीर सूरज की थाली में गिराने लगी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) आज की रात तुम हमारे मेहमान हो और हमारे वहां मेहमान को भगवान मानते हैं बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रखते,,,,,.

रानी साहिबा यह तो आप लोगों का बड़प्पन है वरना हम लोग आपके मेहमान नवाजी के लायक कहां,,,।

कैसी बात कर रहे हो सूरज हमारे और तुम्हारे में कोई फर्क नहीं है मैं तो तुम्हें अपना बड़ा भाई की तरह मानता हूं,,,,,,

हां कुंवर सच कह रहा है ,,,, 2 दिन की मुलाकात में ऐसा लगता ही नहीं है कि तुम कोई पराए हो अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे तुम अपने ही हो,,,,,।

यह सुनकर तो रानी साहिबा मेरा दिल गद गद हो गया ,,,,, मैं कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े खानदान से मुझे इतनी इज्जत मिलेगी,,,,।

हमारे साथ रहोगे तो इसी तरह से मौज करोगे।

यह बात है तब तो हादसे में आप लोगों का हो गया जब भी मेरी जरूरत पड़े तब मुझे बुला लेना,,,, मैं हमेशा आप लोगों का साथ दूंगा,,,,।

वादा,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

पक्का वादा सूरज की यही खासियत है एक बार वादा कर लेता है तो जान दे देता है लेकिन अपना वादा नहीं तोड़ता,,,,

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हमममम यह हुई ना बात पहली बार कोई सच्चा साथी मिला है,,,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,, रोशनी के लिए चारों तरफ लालटेन चल रही थी जिसकी पीली रोशनी में रानी साहिबा का खूबसूरत मुखड़ा और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था,,,, थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,, सूरज के लिए जो कमरा नियुक्त किया गया था सूरज इस कमरे में चला गया और खिड़की के पास कुर्सी पर बैठकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रहा था वह बड़ी बेसब्री से रानी साहिबा का इंतजार कर रहा था क्योंकि पेट की आज तो भोजन से शांत हो चुकी थी लेकिन की आग बुझाने के लिए जवानी से भरी हुई औरत का साथ होना जरूरी था जो कि अभी उसके पास नहीं थी लेकिन कुछ ही देर में बिस्तर पर उसका साथ देने के लिए तैयार हो रही थी रानी साहिबा भी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी कुंवर के सो जाने का,,,,, वैसे भी नौकर लोग अपनी-अपने में जाकर सो गए थे लेकिन कुंवर कुछ देर सूरज से बात करने के लिए रानी साहिबा से पूछ कर सूरज के कमरे में गया था,,,, कुंवर को अपने कमरे में आज देखकर सूरज को मन ही मन बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकता था ना चाहते हुए भी थोड़ी देर तक कुंवर से इधर-उधर की बातें करता रहा और फिर कुंवर को नींद आने लगी,,, कुंवर आलस मरोड़ते हुए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और सूरज से बोला,,)

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मुझे तो बहुत नींद आ रही है मैं सोने जा रहा हूं अब तुम भी सो जाओ रात काफी हो चुकी है,,,,।

मुझे भी नींद आ रही है,,,, दिनभर ईधर उधर घूम कर थक गया हूं,,,,,, (सूरज भी जम्हाई लेता हुआ बोला,,,, कुंवर कमरे से बाहर जा चुका था सूरज धीरे से दरवाजे के पास आए और दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन अंदर से कड़ी नहीं लगाया क्योंकि उसे पूरा विश्वास था की रानी साहिबा जरूर उसके कमरे में आएगी क्योंकि वह भी कुंवर के जाने का इंतजार कर रही होगी और वैसे भी रानी साहिबा का कमरा उसके बगल में ही था,,,, सूरज फिर से गरम आहे भरता हुआ खिड़की के पास जाकर बैठ गया और बाहर का नजारा देखकर रानी साहिबा का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा इस बार उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा जल्द ही दरवाजा खोलने की आवाज के साथ सूरज दरवाजे की तरफ देखने लगा तो देखा रानी साहिबा इधर-उधर देखते हुए उसके कमरे में प्रवेश कर रही थी पर जैसे ही कमरे में प्रवेश की वह दरवाजा बंद करके दरवाजे की कड़ी लगा दी,,,,,, रानी साहिबा को देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, क्योंकि एक जमींदार की खूबसूरत बीवी आधी रात को उसके कमरे में उससे चुदवाने के लिए आ रही थी,,,, रानी साहिबा को देखकर खुश होता हुआ सूरज बोला,,,)

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बड़ी देर लगा दी कब से इंतजार कर रहा हूं,,,, ।

क्या करूं कुंवर जाग रहा था,,,, मैं भी तो तुमसे मिलने के लिए कब से बेकरार थी।

इतनी बेकरारी किस लिए रानी साहिबा दिन में ही तो जमकर चुदवाई थी,,,,।

(चुदवाई वाली बात सूरज के मुंह से सुनकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई,,,, क्योंकि रानी साहिबा आपके कदम भले ही बैठ गए थे लेकिन वह मर्यादा में रहने वाली औरत थी,,, पति की बेरुखी की वजह से उसके कदम लड़खड़ा गए थे अगर उसे उसका पति अच्छी तरह से समझता तो शायद वह सूरज के साथ कभी भी संबंध नहीं बनाती लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता था कि पति ने उसे एक खिलौना ही समझा था अगर उसे एक औरत समझकर के साथ प्यार करता है तो शायद वह तन से प्यासी ना रही थी और सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए वह प्रेरित ना होती। इसलिए वह सूरज से बोली,,,)

धत् इस तरह की बात मत किया करो मुझे शर्म आती है,,,,।(ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे सूरज के करीब पहुंच गई रानी साहिबा कि यह अदा सूरज को एकदम से भा गई वह तुरंत रानी साहिबा का हांथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

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हाय मेरी रानी तुम्हारा इस तरह से शर्माना ही तो मेरी जान ले लेता है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह रानी साहिबा को अपनी गोद में बैठा लिया रानी साहिबा की एकदम दर्द हो गई उसके होठों के करीब ले गई सूरज में एकदम से उसके होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी,,, सूरज के पास पर्याप्त समय था इसलिए वह किसी के प्रकार की जल्दबाजी दिखाने नहीं चाहता था क्योंकि आज की रात वह राजा साहब की बीवी की जवानी के साथ जी भरकर खेल लेना चाहता था,,,, लाल-लाल होठों को चूसते हुए वह ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया था,,, सूरज को रानी साहिबा के लाल लाल होंठ चूसने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था रानी साहिबा भी दिल खोलकर सूरज पर अपनी जवानी लूटा रही थी,,, उत्तेजना के मारे ब्लाउज में कैसे रानी साहिबा की चूची का कद बढ़ने लगा था वह धीरे-धीरे कठोर होना शुरू हो गए थे,,,, रानी साहिबा जिस तरह से सूरज की गोद में बैठी हुई थी सूरज के पजामे के अंदर उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है जो कि अब पूरी तरह से खड़ा होकर रानी साहिबा की गांड में चुभने लगा था,, रानी साहिबा सूरज के लंड की चुभन को अपनी गांड की दरार में अच्छी तरह से महसूस कर रही थी ‌। यह चुभन उसे पानी पानी कर रहा था वह सूरज की गोद में कम से रही थी उसकी भारी भरकम गोलाकार गांड सूरज की गोद में इधर-उधर हो रही थी जिसकी वजह से बार-बार सूरज का लंड पजामे में होने के बावजूद भी उसकी गांड के दरार में घुसने का प्रयास करने लगता था,,, यह देखकर सूरज चुंबन को तोड़ते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला।)

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देख रही हो रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारी मैदान में दौड़ने के लिए कितना बेताब है,,,,।

देख रही हूं और महसूस भी कर रही हूं अपने घोड़े को थोड़ा संभालो समय आएगा तो अपने आप मैदान का द्वार खोल दिया जाएगा इतनी तड़प अच्छी नहीं है,,,।

अब कर भी कर सकते हैं रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारे मैदान का दीवाना हो गया है जब तक तुम्हारे मैदान की घास नहीं खाएगी तब तक इसका पेट नहीं भरेगा,,,,।

तब तो अपने घोड़े को कह दो कि थोड़ा और इंतजार कर ले क्योंकि उसे पर पानी पड़ेगा तो घास और हरी हो जाएगी तब खाने में और ज्यादा मजा आएगा,,,,।

हाय मेरी रानी मेरा घोड़ा अगर मेरी बात समझता तो इतना बेताब ना होता,,, मेरा घोड़ा पर लगा में है कहीं भी इसका इनाम फिसल जाता है,,,।

बेलगाम घोड़े ही मुझे ज्यादा पसंद है मुझे मालूम है कि बेलगाम घोड़े पर कैसे काबू पाया जाता है,,,,,।

कैसे काबू पाया जाता है,,, जरा बताना तो मेरे घोड़े को,,,,,।

सूरज और रानी साहिबा

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धीरे-धीरे पता चल जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही रानी साहिबा फिर से सूरज के होठों को अपने होंठ में ले ली और होठो का रसपान करना शुरू कर दी,,,, सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो चुका था धीरे से अपने दोनों हाथों को फिर से चुची पर ल गया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया माहौल पूरी तरह से गर्म होता चला जा रहा था,,,,, वातावरण में गर्मी बिल्कुल भी नहीं थी खिड़की से चल रही ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने का भरपूर प्रयास कर रही थी लेकिन रानी साहिबा की गर्म जवानी वातावरण की ठंडक को जवानी की आग में झुलसा दे रही थी,,,, कुछ देर तक इसी तरह से दोनों का चुंबन और स्तन मर्दन का कार्य चलता रहा रानी साहिबा की बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी जिससे उसका पेटिकोट गीला हो चुका था,,, अब रानी साहिबा ईस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,,, रानी साहिबा जैसा अपने मन में सोची थी ठीक उसी तरह से सूरज उसकी सोच के मुताबिक आगे बढ़ रहा था बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखाना था और यही चाहती थी उसकी चुदाई करके या तो लेट गया होता या तो कमरे से बाहर निकल गया होता लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था इतनी देर से अपनी गोद से लेकर सिर्फ उसकी जवानी से ऊपर ही ऊपर से खेल रहा था फिर भी वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था ,,,, रानी साहिबा कोई इस बात का एहसास हो रहा था कि सूरज को औरत के जिस्म से खेलना अच्छी तरह से आता है,,,,, चुंबन को तोड़ते हुए रानी साहिबा धीरे से सूरज की गोद से उठकर खड़ी हो गई,,,,, सूरज गहरी सांस लेता हुआ रानी साहिबा को देखता रहा और रानी सागर मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखते हुए मादक चाल चलते हुए खिड़की पर आकर खड़ी हो गई,,,, खिड़की से ठंडी ठंडी हवा का झोंका पूरे कमरे को ठंडक दे रहा था जिसमें रानी साहिबा के रेशमी बाल की लहर रहे थे रानी साहिबा खिड़की पर हाथ रखकर खड़ी थी और नजर पीछे की तरफ घूमा कर सूरज की तरफ देख रही थी सूरज भी मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देख रहा था,,, लेकिन सूरज की नजर चेहरे पर काम रानी साहिबा की गोलाकार गांड पर ज्यादा टिकी हुई थी,,,,।

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इसलिए मौका देखकर रानी साहिबा अपनी गोलाकार गांड को गोल-गोल करके हल्के घूमाना शुरू कर दी ,, कश्मीरी साड़ी में रानी साहिबा की मदहोश कर देने वाली गांड कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुई थी जिसे देखकर सूरज का मन देखने लगा वह मदहोश होने लगा था उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंच चुकी थी और वह तुरंत कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड पर रखकर सहलाने लगा और उस पर चपत लगाने लगा,,,, सूरज की हरकत से मदहोश होती हुई रानी साहिबा अपनी गांड को और पीछे की तरफ उभार कर खड़ी हो गई,,,, और अपनी हाथ की कोनी को खिड़की पर रखकर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी रानी साहिबा की यह आधा देखकर सूरज से रहा नहीं किया और सूरज अपनी जगह से उठकर खड़ा हो जा खड़ा होते ही पजामे में उसका तंबू एकदम से नजर आने लगा जिसे देखकर रानी साहिबा मुस्कुरा दी और बोली।

तुम्हारा घोड़ा तो पागल हुआ जा रहा है,,,,।

इसमें इसकी गलती नहीं है रानी साहिबा,,,,(एकदम पुरानी साइकिल के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर) जब आंखों के सामने इतनी मस्तानी घोड़ी,,(दोनों हाथ से गांड पर चपत लगाते हुए) देखेगा तो घोड़ा तो पागल होगा ही,,,, ।

ऊमममम यह बात है,,,, घोड़े को पता होना चाहिए की मस्तानी घोड़ी तैयार है,,,,।

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पता है तभी तो,,,, घोड़ी की सवारी करने के लिए तैयार हो गया है,,,,, बहुत मस्त पिछवाड़ा है रानी साहिबा तुम्हारा कसी हुई साड़ी में तो जान ले लेती है,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने दोनों हाथों को रानी साहिबा के आगे की तरफ लाया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से चूचियों पर हथेली रखते हुए चूचियों को दबाते हुए रानी साहिबा को सीधी खड़ी कर दिया और पीछे से उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी चूची को दबाते हुए गरदानों पर चुंबन की बारिश कर दिया साड़ी का पल्लू पहले ही कंधे पर से नीचे गिर चुका था सूरज पागल हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी बाहों में जवानी से भरी हुई औरत कसमसा रही थी,,, सूरज रानी साहिबा को पागल किया जा रहा था रानी साहब अपनी गांड की दरार में सूरज के तंबू को महसूस करके उसकी रगड़ से पागल हुए जा रही थी उसकी बुर लगातार पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,, सूरज लगातार चूचियों को दबाता हुआ धीरे से रानी साहिबा के कान में बोला,,,।)

बाहर देख रही हो कितना खूबसूरत नजारआ है रात को ऐसा नजारा देखते हुए चुदाई करने का मजा ही कुछ और है,,, तुम तो रोज मजे ले लेकर राजा साहब से चुदवाती होगी,,,,,।

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सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,, तुम्हारे जैसा साथी हो तो ऐसे नजारे को देख कर चुदवाने का मजा आता है,,,, राजा साहब तुम्हारी तरह प्यार नहीं कर पाए वह तो बस लटके और चढ़ गए पानी निकला और निकल गए,,,,।

(रानी साहिबा की यह बात सुनकर सूरज को हंसी आ गई,,,,, यह देखकर रानी साहिबा बोली)

मेरी हालत पर तुमको मजाआ रहा है,,,।

मजा नहीं आ रहा जिस तरह से तुम बोले इसलिए हंसी आ गई और वैसे भी मुझे विश्वास नहीं होता कि राजा सारी इतनी खूबसूरत औरत के साथ सिर्फ मनमानी करते होंगे मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हें जी भरकर बिस्तर पर प्यार करते होंगे।

अगर ऐसा होता तो मैं अंदर से प्यासी ना होती तुम्हारे साथ जिस्मानी ताल्लुकात ना बनाई होती,,,,।

(सूरज इस बात से अंदर ही अंदर खुश हो रहा था कि राजा साहब रानी साहिबा को जिस्मानी सुख नहीं दे पाते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करके चला जाता है लेकिन इस बारे में इस समय बहस करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था सूरज मजा को किरकिरा नहीं करना चाहता था इसलिए बात का रुख बदलते हुए बोला,,)

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छोड़ो वो सब आज की रात तो तुम मेरे साथ हो आज देखने में तुम्हें ऐसा मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(ऐसा कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की चूचियों पर से अपना हाथ हटाकर धीरे से अपने हाथ को साड़ी के ऊपर ले आया और साड़ी को दोनों तरफ से दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया रानी साहिबा फिर से उत्तेजना से गदगद होने लगी और सूरज फिर से रानी साहिबा के गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया सूरज के होठ जहां-जहां पडते थे वहां-वहां से रानी साहिबा गनगना जाती थी,,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी और सूरज अपनी हरकतों से उसकी हालत को और ज्यादा खराब करता चला जा रहा था अभी तक सूरज ने रानी साहिबा के बदन को ऊपर से ही टटोला था अभी तो उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी करना बाकी था। देखते देखते सूरज रानी साहिबा की साड़ी को कमर तक उठा दिया था उसकी नंगी गांड चांदनी रात और लालटेन की पीली रोशनी के मिले-जुले रंग में और भी ज्यादा खूबसूरत और और भी ज्यादा चमक रही थी सूरज दोनों हाथों रानी साहिबा की गांड की दोनों फांकों को पकड़ कर जोर-जोर से दबोच कर मसल शुरू कर दिया,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोश होता हुआ बोला)

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ओहहहहह मेरी रानी मैं तो पागल हो जाऊंगा कितनी खूबसूरत गांड है तुम्हारी,,,,ऊमममममम झरने के पास तो जी भर कर तुम्हारे जिस्म से खेल नहीं पाया था लेकिन अब नहींछोडूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और रानी साहिबा की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दबाने लगा , दबोचने लगा मसलने लगा जैसे हो सकता था उसे तरह से सूरज रानी साहिबा की नंगी गांड से मजा ले लेना चाहता था,,,,, रानी साहिबा भी मस्त होते हुए अपनी गांड का सूरज के हाथों में दे दी थी एक तरह से वह अपनी जवानी को सूरज के दोनों हाथों में परोस दी थी,,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था,,, सूरज कभी सोचा भी नहीं था की रानी साहिबा के साथ वह कभी संबंध बन पाएगा रानी साहिबा की चुदाई करना उसके नसीब में लिखा भी था यह बात सूरज कभी नहीं जानता था लेकिन आज उसे अपनी किस्मत पर गर्व महसूस हो रहा था लिखने वाले ने भी बड़ी फुर्सत से उसकी किस्मत बनाया था गांव की हर एक खूबसूरत औरत उसकी ही गोद में आकर गिर रही थी,,,,, रानी साहिबा की नंगी गांड की दोनों आंखों को दोनों हाथों से पड़कर उसे लगभग फैलाते हुए उसने देखा तो रानी साहिबा की गांड का छोटा सा छेद और उसकी गुलाबी घड़ी एकदम साफ नजर आ रही थी,,, अपनी आंखों के सामने खूबसूरत औरत के दो-दो छेद को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाए और एकदम से अपने होंठ को गांड की दरार में ले जाकर के उसे पर चुंबनों की बौछार कर दिया,,, सूरज की कामातुर कर देने वाली हरकतों से मदहोश होकर रानी सरकार के मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज के सिवा और कुछ नहीं निकल रहा था। सूरज पागलों की तरह गांड की दरार में अपने होठों को डालकर चूम रहा था चाट रहा था और जैसे ही सूरज के होंठ उसकी गांड के छेद के ऊपर पहुंचे और सूरज ने जैसे ही उसे पर चुंबन लेना शुरू किया रानी साहिबा उतेजना से गन गना गई,,,,, वह कभी सोची नहीं थी कि सूरज उसकी गांड के छेद पर चुंबन करेगा,,,, सूरज भी अच्छी तरह से जानता था कि उसके होठ रानी साहिबा के किस अंग पर हैं और उसने यह भी महसूस कर लिया था कि उसे पर होठ रखने से रानी साहिबा के बदन में कंपन होने लगा था।

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इसलिए ईस कंपन को महसूस करके, सूरज धीरे से अपनी अजीब को बाहर निकाल कर उसकी गांड के भूरे रंग के छेद पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू कर दिया,,,, इस अद्भुत एहसास में रानी साहिबा पूरी तरह से डूबने लगी वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी इसलिए अपने संपूर्ण वजूद को अपने पैर के अंगूठे पर स्थिर करके वह और ऊपर उठ जा रही थी लेकिन सूरज उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे अपने काबू में किए हुए था वह पागलों की तरह रानी साहिबा की गांड को चाटना शुरू कर दिया था नीचे गुलाबी छेद से उसका मदन रस रसमलाई की तरह टपक रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से रानी साहिबा की गांड को चाटता रहा,,,, लेकिन गांड के छेद को देखकर सूरज के मन में बहुत से ख्याल आ रहे थे वह रानी साहिबा की गांड के छेद का जायजा लेना चाहता था,,,, इसलिए कहा रानी साहिबा को और ज्यादा उत्तेजित करने के हतु अपनी तो उंगली को एक साथ रानी साहिबा की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और गांड की चटाई जारी रखा,,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा के तन बदन में आग लगने लगी वह पागल होने लगी उसके मुख से सिसकारी की आवाज और ज्यादा तेज हो गई लेकिन वह जानते थे कि उसकी सिसकारी की आवाज इस समय और कोई सुन नहीं सकता क्योंकि वह खिड़की के पास खड़ी थी और खिड़की खेत,,,, की तरफ खुलती थी बाकी सबके कमरे रानी साहिबा के कमरे से काफी दूर थे,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी साहिबा को इस समय उसकी बुर में लंड महसुस होना चाहिए था लेकिन सूरज और तो की संगत में अच्छी तरह से पक्का खिलाड़ी बन चुका था और यह बात उसे अच्छी तरह से मालूम थी कि कब लंड को बर के अंदर डालना है इससे पहले वह औरत को काफी हद तक तड़पा देता था। झरने के पास सूरज नहीं जल्दबाजी दिखाते हुए रानी साहिबा की बुर में लंड पेल दिया था क्योंकि सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी उसे समय भावनाओं में बह चुकी थी लेकिन किसी भी वक्त अगर वह अपने आप में हो जाती और उसे लगने लगता है जो कुछ भी हो रहा है गलत हो रहा है तो सूरज दोबारा उसके साथ चुदाई का सुख भोग नहीं पता इसलिए वह जल्दबाजी दिखाता हुआ रानी साहिबा की बुर में लंड डाल दिया था क्योंकि एक बार मर्यादा की दीवार गिर जाए तो वह कभी खड़ी नहीं होती।

सूरज और रानी साहिबा

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रानी साहिबा को अत्यधिक उत्तेजित और तड़पा लेने के बाद सूरज धीरे से रानी साहिबा की बुर से अपनी उंगली निकाल कर, रानी साहिबा की गांड के छेद में उंगली डालने का प्रयास करने लगा लेकिन जैसे ही उसने उंगली को रानी साहिबा की गांड में प्रवेश कराने की कोशिश किया रानी साहिबा एकदम से अपनी गांड को सीकोड कर आगे की तरफ गांड को खींच ली और बोली,,,,।

ना,,,,,,, उसमें नहीं,,,,, तुम्हारा कुछ ज्यादा ही मोटा लंबा है,,,,,।

इसकी मोटाई से डर गई,,,, मजा भी तो ज्यादा देता है,,,।

मैं जानती हूं लेकिन गांड में नहीं बुर में चाहे जितना डाल लो,,,,,।

( रानी साहिबा की बात का सम्मान करते हुए सूरज अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड से पीछे खींच लिया और वैसे भी वह समझ गया था की रानी साहिबा की गांड में दम नहीं था उसके लंड कुछ दिखाना उंगली रखते ही उसे एहसास हो गया था की रानी सा की गांड का छेद को ज्यादा ही छोटा था जबरदस्ती करने को तो सूरज कर सकता था लेकिन उसके बाद सूरज के लिए नुकसान था क्योंकि यह सिलसिला वह आगे भी चलने देना चाहता था अपनी गलती से वह इस रिश्ते को यहीं खत्म कर लेना नहीं चाहता था इसलिए रानी साहिबा की बात मानकर वह मुस्कुराहट कर खड़ा हो गया और रानी साहिबा को अपनी तरफ घूमा कर उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया,,, ब्लाउज का बटन खोलते हुए सूरज बोला,,,)

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जैसी आपकी मर्जी रानी साहिबा हम तो आपके गुलाम हैं जैसे चाहे वैसे उपयोग कर लो जबरदस्ती करने वाले नहीं है,,,,,(और मुस्कुराता हुआ धीरे-धीरे रानी साहिबा के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया रानी साहिबा सूरज की बात से बहुत खुश हुई क्योंकि सूरज रानी साहिबा की इज्जत करता था जल्दबाजी या जबरदस्ती नहीं करता था यह बात सूरज की रानी साहिबा को बहुत अच्छी लगी थी और यही फर्क था राजा साहिब में और सूरज में कि इतने वर्षों के बाद भी राजा साहब रानी साहिबा के दिल में अपने लिए जगह नहीं बन पाया था और सूरज एक ही दिन में रानी साहिबा पर छा चुका था,,,,, ब्लाउज के सारे बटन खोलने के बाद सूरज धीरे से ब्लाउज को उसकी बाहों से उतार कर नीचे फेंक दिया,,,, रानी साहिबा कमर के ऊपर कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी क्योंकि साड़ी अभी भी कमर में इकट्ठा हुए नितंबों के उभार की वजह से टिकी हुई थी रानी साहिबा की दोनों चूचियों को देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था और सूरज दोनों हाथ आगे बड़ा कर रानी साहिबा की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला,,,,)

यह तो हमारे मुखिया जी के बगीचे के दशहरी आम की तरह है बहुत खूबसूरत और रसीले,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की एक चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया और रानी साहिबा एकदम से गनगना गई,,,,, सूरज बिल्कुल भी कसर बाकी रखना नहीं चाहता था इसलिए बारी-बारी से रानी साहिबा की दोनों चीजों को मुंह में लेकर पी रहा था दबा रहा था, जिस तरह से सूरज बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को पी रहा था उसे खेल रहा था रानी साहिबा को सूरज की हरकत काफी प्रभावित कर गई थी दोनों चुचियों में से किसी भी चुची के साथ वह जात्ती नहीं कर रहा था दोनों को बराबर का हक दे रहा था,,,, सूरज की हरकतों से मदहोश होकर रानी साहिबा से रहने की और वह अपना हाथ आगे बढ़कर पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ कर दबाना शुरूकर दी,,,, इस समय सूरज का लंड और भी ज्यादा मोटा और लंबा महसूस हो रहा था जिससे रानी साहिबा की बुर पानी पानी हो रही थी,,,, सूरज एक हाथ से अपने पजामे को नीचे कर दिया जिससे रानी साहिबा उसके नंगे लंड से खेल सके,,, नंगा और ग्राम लंड हाथ में आते ही रानी साहिबा की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह जिस तरह से सूरज के लंड से खेल रही थी अपनी हथेली में लेकर दबा रही थी सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसे क्या चाहिए इसलिए वह कुछ देर और रानी साहिबा की चूचियों को पीने के बाद धीरे से रानी साहिबा के कंधे पर दोनों हाथ रखकर उसे दबाव देता हुआ नीचे की तरफ झुकने लगा और रानी साहिबा देखते ही देखते झुकने लगी और अपनी नंगी गांड को खिड़की से सटाकर सूरज के मोटे कपड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी सूरज पागल हुआ जा रहा था,,, रानी साहिबा की हरकतों का आनंद लेते हुए सूरज अपने हाथ को आगे बढ़कर रानी साहिबा की नंगी गांड पर चपत लगाता हुआ मजा ले रहा था,,,

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रानी साहिबा सूरज के लंड को चुस चुस कर उसकी धार को बढ़ा रही थी,,,,, उसे अपनी बुर के लिए तैयार कर रही थी,,,,, सूरज दोनों हाथों से रानी साहिबा की गांड को पड़कर उसे दबोच रहा था मसल रहा था उसे पर चपत लगा रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सबको साथ दिखाई दे रहा था और वैसे भी आसमान में चांदनी रात छाई हुई थी जिसकी रोशनी खिड़की से अंदर की तरफ आ रही थी और सब को साफ दिखाई दे रहा था रोशनी में रानी साहिबा के जिस्म के साथ खेलने का मजा ही कुछ और था सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ रानी साहिबा के मुंह को चोद रहा था,,, सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए रानी साहिबा के मुंह में ठीक तरह से समा नहीं रहा था लेकिन फिर भी रानी साहिबा पूरी कोशिश किए हुए थी,,, सूरज जिस तरह से अपनी कमर हिला रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड का सुख रहा है उसके पहले के अंदर तक पहुंच जा रहा था जिससे रानी साहिबा को सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी जो आनंद मिल रहा था उसकी अपेक्षा यह तकलीफ बहुत कम थी। रानी साहिबा सूरज को भी पूरी तरह से खुश करने में लगी हुई थी ऐसा नहीं था कि लंड मुंह में लेकर चूसने में उसे मजा नहीं आ रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा मन कर रहा था कि वह लंड को मुंह से बाहर ही ना निकाले,,, लेकिन खेल को आगे बढ़ाना था इसलिए सूरज ने धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा के मुंह से बाहर खींच लिया और गहरी सांस लेता हुआ बोला।

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बहुत मस्त चुसती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने कुर्ते को उतारने लगा और देखते ही देखते रानी साहिबा के सामने एकदम नंगा हो गया नंगा होने के बाद सूरज का बदन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था लालटेन की पीली रोशनी में इसकी चौड़ी छाती देखकर रानी साहिबा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी,,,,, सूरज की टांगों के बीच उसका मोटा तगड़ा लंड छत की तरफ मोटा ही खड़ा था उसकी मोटाई और लंबाई वाकई में आकर्षक थी,,, अपनी कमर से साड़ी को खोलते हुए रानी साहिबा सूरज के मोटे तगड़े लंड को ही देख रही थी जो कि सूरज बार-बार उस पर अंगूठा रखकर उसे हिला दे रहा था,,,, साड़ी को खोल कर एक तरफ रखने के बाद जैसे ही रानी साहिबा अपने पेटिकोट की डोरी पर अपनी उंगली रखी वैसे ही सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,)

तुम मेहनत क्यों करती हो रानी साहिबा यह तो मेरा काम है कपड़े उतारने का,,,(पर इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की पेटिकोट की दूरी को अपनी उंगलियों में फंसा कर जोर से खींच लिया और पेटिकोट की डोरी खुल गई पेटिकोट की डोरी खुलते ही कमर पर बंधी हुई पेटिकोट ढीली पड़ गई लेकिन नितंबों के उभार पर टिकी हुई थी जिसे सूरज अपने हाथों से उंगलियों का सहारा लेकर पेटीकोट को कमर के इर्द गिर्द से ढीला करने लगा और जैसे ही पेटिकोट हिली हुई सूरज ने कमर से ही पेटीकोट को नीचे छोड़ दिया पेटिकोट भर भरा कर रानी साहिबा के कदमों में जाकर सूरज की तरह रानी साहिबा भी कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लालटेन की पीली रोशनी में दोनों का बदन सोने की तरह चमक रहा था,,,, रानी साहिबा की नंगी होते ही सूरज उसका हाथ पकड़ कर फिर से उसे अपनी तरफ खींचकर बाहों में भर लिया। और अपनी दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखें जोर-जोर से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया नंगी हो जाने के बाद सूरज का नंगा लंड उसकी बुर के मुहाने पर ठोकर मारने लगा और यह ठोकर रानी साहिबा को मदहोश कर रही थी रानी साहिबा से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे से अपना हाथ सूरज के लैंड पर रख दिया और उसके सुपाडे को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर रगड़ना शुरू कर दी रानी साहिबा की हरकत को देखकर सूरज समझ गया था की रानी साहिबा लंड को बुर में लेना चाहती है लेकिन सूरज अभी कुछ और जाता था रानी साहिबा को और तड़पाना चाहता था इसलिए वह तुरंत रानी साहिबा को अपनी गोद में उठा लिया और चलते हुए उसे ले जाकर के उसके नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, रानी साहिबा का दिल जोरों से धडक कर रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, रानी साहिबा को लग रहा था कि सूरज जब उसकी चुदाई करेगा लेकिन वह नहीं जानती थी कि सूरज औरत को पूरी तरह से तड़पनेा के बाद ही उसकी बुर में लंड डालता था,,, सूरज धीरे-धीरे घुटनों के पास नरम गद्दे पर आगे बढ़ता हुआ देखते-देखते उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी टांगों को थोड़ा सा और खोलकर उसकी गुलाबी बुर की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा यह देखकर रानी साहिबा शर्म से अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,, रानी साहिबा का शर्माना देखकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और वह रानी साहिबा के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए अपने प्यास होठों को तुरंत उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से सटा दिया,,,,,,।

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सूरज की हरकत पर रानी साहिबा के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,

सहहहहहहहह सहहहहहहवआहहहहहहह,,,,,।

(इस आवाज को सुनकर सूरज और ज्यादा मदहोश हो गया और रानी साहिबा की बुर को पूरी तरह से मुंह में भरकर उसे चूसना और चाटना शुरू कर दिया रानी साहिबा की बुर पहले से ही उत्तेजना से पानी छोड़ रही थी उसके मदन रस के नमकीन स्वाद को पकड़ सूरज एकदम से पागल हो गया उसकी मोटी मोटी जांघों म को दोनों हथेलियां में दबोच कर और ज्यादा फैलाते हुए जितना हो सकता था उसमें अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, सूरज की यह हरकत रानी साहिबा के होश उड़ा रही थी,,,, रानी साहिबा को मजा आ रहा था वह उत्तेजना से बिस्तर पर तड़प रही थी ना सर पटक रही थी सूरज बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह पूरे जोश के साथ रानी साहिबा की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, सूरज बुर के उपर अपनी जीभ घूमा रहा था उसके रेशमी झांट के बाल को भी मुंह में लेकर चूस रहा था। उत्तेजना से रानी साहिबा बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी और सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पड़कर उसे स्थिर किए हुए था देखते ही देखते रानी साहिबा का बदन अकड़ने लगा उसके मुंह से सिसकारी की आवाज बड़ी तेजी से निकलने लगी और फिर उसकी बुर से भर भरा कर मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, लेकिन सूरज रानी साहिबा की बुर से अपने होंठ को बिल्कुल भी अलग नहीं किया,,, रानी साहिबा की बुर से निकलने वाली मदन रस की एक बूंद को सूरज अपनी जीभ से चाट चाट कर अपने गले के अंदर उतारता चला गया,,, बिना चुदवाए ही रानी साहिबा झड़ चुकी थी,,,, सूरज अपनी जीभ की ही कलाबाजी दिखाकर उसका पानी निकाल दिया था,,,।

सूरज धीरे से अपने होठों को रानी साहिबा की बुर से अलग किया उसके हाथ से रानी साहिबा के मदन रस की धार टपक रही थी जिसे देखकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान थी संतुष्टि का एहसास था उसका चेहरा उत्तेजना से तम तमा रहा था,,,, रानी साहिबा की गहरी चलती सांस के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज मुस्कुरा रहा था सूरज होठ पर अपनी जीभ फिराता हुआ बोला,,,)

बहुत नमकीन पानी है तुम्हारा,,,,।

धत्,,,,,,,(रानी साहिबा फिर से शरमाते हुए बोली सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

अब आएगा असली मजा अब देखना कैसे मेरा लंड तुम्हारी बुर में जाता है आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,।

आराम से कहीं राजा साहब को पता ना चल जाए कि उनकी गैरहाजरी में उनकी रानी किसी और राजा की दीवानी हो गई है,,,,।

पता चलता है तो चल जाए मैं किसी से डरता नहीं ऐसा होगा तो मैं तुम्हें भगा कर ले चलूंगा किसी और देश में,,,,।

अच्छा बच्चु यह बात है,,,,।

बच्चु मत कहो चोद कर तुम्हें बच्चे की मां बना सकता हूं,,,,।

ओहहह क्या बात है इतना गुरूर है तुम्हें अपनी मर्दानगी पर,,,,।

असली मर्दानगी तुमने देखी कहां हो,,,।

तो दिखाओ मेरे राजा यह रानी भी मेरे राजा की मर्दानगी देखने के लिए तड़प रही है,,,,(रानी साहिबा जानबूझकर सूरज इस तरह की बात कर रही थी उसे उकसाकर उसे जबरदस्ती चुदाई की अपेक्षा जो रखती थी और सूरज भी उसकी बात में मस्त होकर उसके दोनों टांगों को खोलकर उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी जांघों पर चढ़ा दिया और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी बुर मदन रस के कारण पानीयाई आई हुई थी,,,, इसलिए सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसके बुरे में जाने में ज्यादा समय नहीं दिया वैसे भी शाम को ही हुआ रानी साहिबा की बुर में अपना लंड डाल चुका था इसलिए उसे रानी साहिबा की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका था। धीरे-धीरे करके सूरज अपने पूरे लंड को रानी साहिबा की बुर में उतार चुका था,,,, एक बार पूरा लंड बुर में घुस जाने के बाद सूरज मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देखने लगा रानी साहिबा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके बच्चेदानी तक पहुंच गया था इसलिए वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी। सूरज को पूछने की जरूरत नहीं थी कि बुर में लंड गहराई तक घुसा है कि नहीं क्योंकि रानी साहिबा का चेहरा सब कुछ बता रहा था।

Suraj aur Rani Sahiba

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दोनों टांगों को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसे फैला कर रखे हुए सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया रानी साहिबा की चुदाई शुरू हो चुकी थी जैसे-जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था वैसे-वैसे रानी साहिबा के चेहरे के हाव भाव बदलते जा रहे थे सूरज की कमर की रफ्तार बढ़ती जा रही थी धीरे-धीरे वह रानी साहिबा की चुदाई बड़ी तेजी से करना शुरू कर दिया था हर धक्के के साथ रानी साहिबा के होश उड़ जा रहे थे क्योंकि हर एक धक्का रानी साहिबा की बच्चेदानी से जाकर टकरा जा रहा था,,,, वैसे भी सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। बिना कहे उसकी गहराई तक बच्चेदानी तक पहुंचना जायज था,,,, लेकिन रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,, सूरज उसकी दोनों टांगों को फैलाए हुए जी जान से मेहनत कर रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,, लेकिन सूरज अभी भी टिका हुआ था रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी उसकी बुर के धागे खुल चुके थे वह कभी सोच नहीं थी कि कोई इस तरह से भी चुदाई करता होगा इतनी रगड और तेज तर्रार उसे अपने पति के साथ भी महसूस नहीं हुई थी। बेरहमी से चोदने में सूरज राजा साहब से एक कदम आगे था लेकिन दोनों में फर्क था क्योंकि राजा साहब औरतों की कदर नहीं करता था और सूरज औरत का सम्मान करता था औरत की जरूरत को पूरा करता था और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि औरत को कैसे मजा आता है इसीलिए तो बड़ी बैरहमी से चुदवाने के बाद भी रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,,,, सूरज की कमर बड़ी तेजी से हटाई थी इतनी रफ्तार उसने राजा साहब में भी कभी नहीं देखी थी लेकिन मजा भी उतना ही आ रहा था उसकी गर्मा गर्म सिसकारी की आवाज भी ठीक से मुंह से नहीं निकल पा रही थी क्योंकि सूरज उसे अपनी बाहों में कस लिया था और उसके होठों पर अपनी होंठ रखकर उसके लाल-लाल होठों पर आसमान करते हुए अपनी कमर को बड़ी तेजी से हिला रहा था। एक बार फिर से रानी साहिबा का बदन अकडने लगा वह झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी यही हाल सूरज का भी था सूरज भी अपने चरम पर पहुंच चुका था इसलिए एकदम से उसे अपनी बाहों में दबोचता हुआ अपनी कमर को जोर से पटकन शुरू कर दिया और फिर देखते ही देखते 10 15 धक्के बाद दोनों भल भला कर झड़ने लगे।

कुछ देर तक सूरज रानी साहिबा पर ही लेता है क्या और फिर जैसे ही दोनों की सांसे दुरुस्त हुई सूरज धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा की बुर से बाहर निकाला लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी वह खड़ा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे लेकिन रानी साहिबा को बड़ी जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,,, रानी साहिबा धीरे से बिस्तर से नीचे उतर गई और एक चादर को अपने बदन पर लपेटने लगी तो सूरज चादर को खींच लिया और बोला।

अभी तो सारी रात मजा करना है,,, अभी से कहां जा रही हो।

मुझे जाना पड़ेगा क्योंकि रोका नहीं जा रहा है,,,।

(रानी साहिबा का बदन कसमसा रहा था वह बार-बार अपने पैर के अंगूठे पर खड़ी हो जा रही थी यह देखकर सुरज समझ गया कि उसे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है और वह मुस्कुराता हुआ बोला,,)

ऐसा कहो ना की मुतने जाना है,,,।

धत्,,,,, ऐसा कहने में मुझे शर्म आती है।

नंगी होकर चुदवा रही हो तब शर्म नहीं आ रही है।

तू बड़ा बेशर्म है इस तरह की बातें करेगा तो फिर दोबारा कभी तुझे करने नहीं दूंगी।

नहीं नहीं ऐसा मत करना रानी साहिबा मैं अपनी गलती के लिए क्षमा मांगता हूं तुम्हारे बिना तो अब मेरा दिल नहीं लगेगा चलो मैं तुम्हें लेकर चलता हूं कहां चलना है,,,,,।

कपड़े तो पहन लेने दे,,,।

इतनी रात को कोई जाग नहीं रहा होगा,,,, ऐसे ही चलते हैं मजा आएगा,,,,।

नहीं नहीं कोई देख लिया तो,,,।

कोई नहीं देखेगा रानी साहिबा चारों तरफ अंधेरा ही तो है आ जाओ मेरे साथ,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज बिस्तर से नीचे उतरा और आगे आगे चलने लगा हुआ भी पूरी तरह से नंगा था रानी साहिबा भी पूरी तरह से नंगी थी सूरज को इस तरह से चला देखकर उसका भी हौसला बढ़ने लगा और वह भी सूरज के पीछे-पीछे चलने लगी सूरज ने धीरे से बिना शोर के दरवाजा खुला और बाहर इधर-उधर देखने लगा चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था अंधेरा छाया हुआ था इसलिए बिना दिक्कत के हुआ कमरे से बाहर निकल गया उसके पीछे-पीछे रानी साहिबा भी कमरे से बाहर निकल गई वह पूरी तरह से नंगी थी उसे अजीब सा एहसास हो रहा था सूरज ने धीरे से बोला,,,)

किस तरफ चलना है,,?

(रानी साहिबा बिना कुछ बोले उंगली के इशारे से ही दूसरी तरफ इशारा करने लगी और सूरज मुस्कुरा कर आगे आगे चलने लगा और रानी साहिबा पीछे-पीछे नंगेपन के हिसाब से उसके बाद में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, देखते देखते सूरज एक खुली छत के पास पहुंच गया जहां पर एकदम अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से हल्का उजाला दिखाई दे रहा था,,, दूसरी तरफ खेत ही खेत दिखाई दे रहे थे यहां पर किसी की नजर पहुंचने वाली नहीं थे सूरज समझ गया था कि यहीं पर पेशाब करती है रानी साहिबा इसलिए वह रानी साहिबा से बोला,,,)

यही बैठ जाओ रानी साहिबा,,,।

तुम्हारे सामने,,,,!

तो क्या हुआ मैं भी तो देखो रानी साहिबा कैसे पेशाब करती है,,,,।

धत् मुझे शर्म आती है,,,।

शर्माओगी तो एक अच्छा खासा अनुभव हाथ से निकल जाएगा,,,,।

(सूरज की आवाज सुनकर रानी साहिबा भी उसकी बात मानते हुए दो कदम आगे गई और सूरज के सामने ही बैठ गई और पेशाब करने लगी जैसे ही बुर से सिटी की मधुर ध्वनि सूरज के कान में पड़ी सूरज समस्या की रानी साहिबा पेशाब कर रही है वह इस पल के अनुभव में उत्तेजना में मदहोश होने लगा,,, उसे रहा नहीं दिया और भाभी रानी साहिबा के बगल में जाकर खड़ा हो गया और पेशाब करने लगा पुरानी साहिब अपने पास में ही सूरज को खड़े होकर पेशाब करता देखकर एकदम से मदहोश होने लगी मस्त होने लगी,,, रानी साहिबा के लिए यह एक अलग ही अनुभव था उसने आज तक इस तरह की हरकत अपने पति के सामने नहीं की थी लेकिन सूरज के सामने वह विवस हो गई थी क्योंकि सूरज ने जिस तरह का आनंद उसे दिया था इसलिए सूरज की हर एक बात मानना जरूरी हो गया था और उसे विश्वास हो गया था कि सूरज जो कुछ भी कहता है उसमें उसके लिए मजा ही मजा है,,,, सूरज पेशाब कर चुका था लेकिन इसलिए सूरज बिना कुछ बोल रानी साहिबा का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और पास के ही दीवार से सटाकर एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी जांघ को अपने कंधे पर रखकर उसकी बुर पर अपनी होंठ लगा दिया जिस पर अभी पेशाब की बूंदे लगी हुई थी लेकिन बिल्कुल भी परवाह किए बिना सूरज उसकी बुर को चाटने शुरू कर दिया और यह देखकर रानी साहिबा एकदम से गड़बड़ हो गई क्योंकि सूरज इसकी बुरे से निकलने वाली पेशाब की बुंद को चाट रहा था जो कि उसके रेशमी बाल के गुच्छों पर लगा हुआ था,,,,, रानी साहिबा उसे रोक नहीं पाई क्योंकि उसकी हरकत इतनी कामातुर कर देने वाली थी की रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई गरमा गरम सिसकारी लेने लगी,,, सूरज पूरी तरह से रानी साहिबा पर छा चुका था हर एक पल हर एक क्षण उसे मजा ही मजा दे रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह से रानी साहिबा की बुर चाटने के बाद सूरज भी चुदवासा हो गया था वह धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रानी साहिबा को दीवार के सहारे घूमारर खड़ी कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड को अपनी तरफ खींच लिया सूरत से रहने जा रहा था सूरज अपने मोटे-मोटे लंड को एक बार फिर से उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया। और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक की दोनों एक साथ झड़ नहीं गए रानी साहिबा कभी सपने कभी नहीं सोची थी कि गांव के लड़के के साथ उसे इतना मजा आएगा गांव का लड़का एक ही दिन में उसे पूरी तरह से छिनार बना दिया था झरने के पास घर के अंदर और घर के बाहर हर जगह मौका मिलते ही सूरज उसकी बुर में लंड डाल दे रहा था। दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र रहे थे बाहर चुदाई करने के बाद वालों कमरे में आ गए और यह सिलसिला सुबह तक चलता रहा सुबह होने वाली थी तभी रानी साहिबा अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे में चली गई और सुबह सूरज को जगाने के लिए कुंवर को भेजी किसी को खनखन खबर तक नहीं पड़ी की रानी साहिबा रात भर सूरज के साथ मिलकर कौन सा गुल खिलाई थी। सुबह भी खातेदारी करने के बाद रानी साहिबा सूरज को रोकने के लिए बोल रही थी क्योंकि जो मजा सूरज उसे दे रहा था रानी साहिबा सपने में भी नहीं सोची थी कि ऐसा सोचो से मिलेगा अभी भी राजा साहब है को 8 दिन जैसा रह गया था आने में और वह सोच रही थी कि हिंदी में वह जी भर कर अपनी जिंदगी जी ले,,, इसलिए वह बोली,,,,।

यही रुक जाते तो अच्छा था जब तक राजा साहब नहीं आ जाते,,,,।

रुक तो जाता है रानी साहिबा लेकिन घर पर भी मुझे काम है बारिश आने वाली है मुझे छत की मरम्मत करनी है,,,,।

ओहहह यह बात है,,,,,।

तब तो तुम्हें जाना ही होगा रुको,,,,,, तुमने जो ईमानदारी दिखाई है उसके बदले में तुम्हें इनाम तो मिलना चाहिए क्यों कुंवर ठीक कह रही हो ना मैं,,,।

हां दीदी तुम एकदम ठीक कह रही हो भला आजकल के जमाने में कौन ऐसा होगा जो सोने का झुमका मिलने पर भी वापस कर देगा,,,,।

रुको मै अभी आती हूं,,,(इतना कहकर वहां घर के अंदर गई और थोड़ी देर में वापस आई उसके हाथ में कुछ रुपए थे वह सूरज को देते हुए बोली,,,)

अब बिल्कुल भी इंकार मत करना यह मेरी तरफ से मेहमान नवाजी है क्यों कुंवर,,,।

दीदी बिल्कुल सही कह रही है सूरज भैया यह तो तुम्हें लेना ही होगा,,,,,,,,।

ठीक है अब आप दोनों कह रहे हो तो हमें ले लेता हूं लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा है शर्मिंदा कर दिया आप लोगों ने।

शर्मिंदा होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है और आते रहना छत की मरम्मत हो जाए तो एक बार जरूर यहां के चक्कर लगाना तुम्हारे लिए इस हवेली के दरवाजे हमेशा खुले हैं क्यों कुंवर,,,,

बिल्कुल दीदी एक ही दिन में न जाने कैसा रिश्ता हो गया है की मन ही नहीं मानता कि तुम्हें जाने दे।

मन तो मेरा भी नहीं मानता लेकिन घर पर मेरी जरूरत है मैं जरूर आऊंगा,,,(इतना कहकर सूरज हवेली से बाहर निकल गया एक अद्भुत अनुभव लेकर)।
 
सूरज की खुशी का ठिकाना न था जो उसने एक ही दिन में प्राप्त किया था उसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था सबसे बड़े जमींदार की औरत की चुदाई करना वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसके भाग्य में होगा लेकिन ऐसा लग रहा था कि गांव की सारी औरतें उसके नीचे आने के लिए ही बनी है। रानी साहिबा की रात भर चुदाई करके सूरज पूरी तरह से तृप्त हो चुका था,,, उसकी चुदाई करके उसे एहसास हो गया था कि उसके पति ने उसे सिर्फ अपनी संतुष्टि के लिए ही उसके साथ शरीर संबंध बनाया था वरना राजा साहब का शरीर देखकर लगता नहीं कि वह किसी औरत को संतुष्ट न कर सके लेकिन जो कुछ भी था वह सब कुछ सूरज की आंखों के सामने था और यह बात रानी साहिबा ने अपने मुंह से बोली थी कि उसे राजा साहब से संतुष्टि नहीं मिली थी इसलिए तो वह रात भर जी खोलकर सूरज से चुदवाती रही। रानी साहिबा के कहे।

अनुसार सूरज उसके घर पर रुकना चाहता था और मजे लेना चाहता था लेकिन घर पर जाना जरूरी था क्योंकि घर पर वह किसी को बता कर नहीं आया था,,,, इसलिए उसका जाना जरूरी था,,,, खेतों में मजदूरी और काम करने के पैसे तो मिलते थे लेकिन उसे चुदाई करने के पैसे मिले थे रानी साहिबा ने अपने भाई के सामने झूठ-मुठ का यह कहकर उसे पैसे दी थी कि वह इतना कीमती और उसकी मां की निशानी झुमके को उसे वापस किया था जबकि बात कुछ और ही थी सूरज को मिलने वाला पैसा उसके द्वारा रानी साहिबा को दिया गया शरीर सुख की संतुष्टि के बदले में इनाम था जिसे सूरज ने शहर्स स्वीकार कर लिया था।

घर पर पहुंचते ही सुनैना सवालों की झड़ी लगा दी,, क्योंकि वह रात भर करवट बदल बदल कर सूरज का इंतजार करती रही लेकिन सूरज उसके कमरे में नहीं आया ,,, वैसे तो वह सुबह से ही गायब था दिन भर घर पर नहीं आया था लेकिन वह सोच रही थी कि हो सकता है रात को वह घर पर वापस आ जाए इसलिए वह उसका खाना थाली में निकाल कर दूसरी थाली से ढक कर रसोई में रख दी थी और बड़ी बेचैनी से बड़ी तड़प के साथ अपने बेटे का इंतजार कर रही थी क्योंकि उसकी दोनों टांगों के बीच पतली दरार में तूफान मचा हुआ था जिसे उसका बेटा अपने मुसल से शांत कर सकता था लेकिन लेकिन सुबह हो गई लेकिन सूरज नहीं आया था इसलिए तो सूरज को देखते ही वह गुस्से से आग बबूला हो गई थी।

कहां था रात भर,,,,,!

क्यों क्या हो गया,,,?(सूरज मुस्कुराते हुए बोला उसे अपनी मां के चेहरे पर बेबसी और तड़प एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह अपनी मां के गुस्से की वजह अच्छी तरह से जानता था,,, सूरज को मुस्कुराते हुए देख कर सुनैना और ज्यादा गुस्सा हो गई और बोली)

जैसे तू जानता ही नहीं की क्या हो गया,,,,!

बताओगी तब ना पता चलेगा,,,,।

तुझे मेरी आंखों में नहीं दिखाई देता,,,, की रात भर में तेरे लिए कितना तड़पी हूं तेरा इंतजार करते-करते सुबह हो गई,,,,, क्यों तड़पाता है मुझे,,, क्या मेरी जज्बात के लिए तेरे दिल में बिल्कुल भी कदर नहीं है,,,, यही सब करना था तो मेरे तन बदन में क्यों आग लगाया क्यों मेरे बदन की दबी हुई चिंगारी को भड़काया,,,,,,।

मैं सब समझता हूं लेकिन क्या करूं राजा साहब के वहां काम आ गया था,,,,(इतना कहकर सूरज अपने कुर्ते के चेक में हाथ डालकर पैसे निकाल कर अपनी मां के सामने हथेली में दिखाता हुआ बोला) यह देखो रात भर काम करने के पैसे मिले हैं,,,,, ले लो,,।

तुझे क्या मैं पैसे की भूखी लगती हूं,,,(अपने बेटे की हथेली की तरफ देखते हुए सुनैना की आंखों में आंसू थे सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां बड़ी बेचैनी से रात भर उसका इंतजार करती रही और वह किसी गैर की बाहों में मौज उड़ाता रहा अपनी मां को रोता हुआ देखकर सूरज आगे पड़ा और अपनी मां के आंसू को अपनी हथेलियों से पोछता हुआ बोला,,)

इसमें रोने वाली कौन सी बात है,,,, बारिश का महीना शुरू होने वाला है आप काम उतना मिलेगा नहीं इसलिए सोचा कि जितना मिल रहा है उतना कर लुं काम आएगा,,,,।

तू भी अपने बाप की तरह काम करते-करते अपने बाप की तरह निकल जाएगा,,,(ऐसा कहते हुए सुनैना जोर-जोर से रोने लगी इतना तो सूरज समझ गया था कि घर में रानी मौजूद नहीं थी इसीलिए उसकी मां इस तरह से बातें कर रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि रात भर वह अपनी मां की सेवा नहीं कर पाया था इसलिए उसकी मां उससे गुस्सा थी और उसे इस बात का डर भी था कि कहीं उसका बेटा अपने ही आप की तरह आवारा निकल कर घर छोड़कर ना चला जाए क्योंकि अभी शुरू शुरू में काम के पीछे भागता था घर का रास्ते के पीछे परेशान रहता था लेकिन धीरे-धीरे बाहर की हवा लगते ही वह घर बीवी बच्चों को छोड़कर किसी गैर औरत के चक्कर में पड़ गया और यही चिंता सुनैना को भी थी लेकिन इस समय अपनी मां की आंखों में अपने लिए तड़प और सीधा देखकर सूरज की उत्तेजना बढ़ने लगी थी और वैसे भी रानी घर पर नहीं थी और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि वह अपनी मां को कैसे मना सकता है,,, इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला,,,,)

लगता है महारानी को सेवा की जरूरत है,,,।

मुझे कोई सेवा नहीं करवानी तेरे से तो बिल्कुल भी नहीं,,,।

तो क्या दूसरो से चुदवाओगी,,,,।

(अपने बेटे की बात से सुनैना और ज्यादा गुस्सा हो गई और बोली)

जरूर चुदवाऊंगी,,, अब में भी अपने लिए जिऊंगी,,, तू ही एक मर्द है क्या पूरे गांव में बहुत से मरद मिल जाएंगे बस एक बार टांग खोल दी तो देखना मर्द की लाइन लग जाएगी,,,,।

मेरे होते हुए मेरी रानी किसी और से कैसे चुदवाएगी,,,,,।

चुदवाऊंगी,,,,जरुर चुदवाऊंगी तेरे पर ही मोहर थोड़ी ना लगी है।

किससे चुदवाओगी एक बार तुम भी जानती हो तुम्हारी बेलगाम जवानी पर लगाम करने वाला मार दे यहां क्या 40 50 गांव में भी ढुंढोगी तो मेरे सिवा कोई मिलने वाला नहीं है,,,,,(यह जानते हुए की रानी घर पर नहीं है इसलिए सूरज अपनी मां को चोदने के लिए उतावला हुआ जा रहा था,, और वह यह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां का गुस्सा शांत करने का यही तरीका भी है इसलिए वह अपनी मां के सामने बात करते हुए अपनी कुर्ते को उतारना शुरू कर दिया यह देखकर सुनैना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,, अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना बोली,,,)

तुझे क्या लगता है कि तेरे पास ही गधे का लंड है गांव में बहुत सी मर्द होंगे जिसके पास तेरे जैसा क्या तेरे से भी अच्छा हो और मोटा होगा,,,, कोई ना कोई तुम ही जाएगा मेरी जवानी पर लगाम लगाने वाला,,,।

कोई नहीं मिलेगा रानी मेरे सिवा पुरे गांव में,,,(कुर्ते को उतारकर एक तरफ रखना हुआ मां बेटे दोनों आंगन में खड़ी थी इसलिए हल्की सुनहरी धूप सूरज की छाती पर पड़ते ही इसकी चौड़ी छाती चमकने लगी जिसे देखकर सुनैना के टांगों के बीच हलचल होने लगी,,,,)

तूने क्या सबका खोल खोल कर देखा है किसका कितना बड़ा है,,,।

देखा तो नहीं हूं लेकिन मुझे पक्का यकीन है,,,(अपने पजामा को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे करतेहुए) मेरे जैसा मोटा तगड़ा लंड किसी के पास नहीं है तभी तो इसे देखकर तुम्हारी बुर पानी पानी हो जाती है,,,(एकदम से अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़ कर उसे मुठीयाते हुए सूरज बोला,,,,, सूरज की हरकत पर ना चाहते हुए भी सुनैना की नजर उसके मोटे तगड़ी लंड पर चली गई,,,,, और फिर जानबूझकर ऊपर नजर को दूसरी तरफ घूम ले अपनी मां की अदा देखकर सूरज मुस्कुराने लगा और आगे बढ़ते हुए बोला,,)

क्यों मेरी जान नजर क्यों दूसरी तरफ घूमा रही हो तुम्हारे काम की चीज है,,,।

मेरे काम की बिल्कुल भी नहीं है हाथ से हिला कर काम चला ले मैं कोई और ढूंढ लूंगी,,,,।

ऐसे कैसे मेरी जान,,,(ऐसा कहता हुआ सूरज अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसकी मां उसकी बाहों की पकड़ से छुटने की कोशिश करने लगी लेकिन सूरज कस के पकड़े हुए था और साड़ी के ऊपर से ही सूरज का मोटा तगड़ा लैंड सुनने के बुरे पर ठोकर मारने लगा जिसका एहसास सुनैना को हो रहा था ना चाहते हुए भी सूरज की हरकत से सुनैना मदहोश हुए जा रही थी क्योंकि बार-बार अपने बेटे के लंड की ठोकर को अपनी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर महसूस करके वह अपने काबू के बाहर होती जा रही थी,,,,)

छोड़ मुझे मुझे तेरे साथ कुछ भी नहीं करवाना,,, जा जाकर काम कर,,,, अपने आप की तरह फिर किसी और औरत के चक्कर में पड़ जाना और वापस घर मत आना,,,,

ऐसे कैसे हो सकता हैं मेरी जान,,, तुम्हारी बुर इतनी हंसी नहीं की दिन रात मेरी आंखों के सामने तुम्हारी बुर ही दिखाई देती है,,,,आहहहहह आज तो नहीं छोडूंगा तुमको,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी मां को अपनी गोद में उठा दिया सुन ना उसे रोकते रह गई लेकिन वह रुकने का नाम नहीं लिया क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां की गुस्से को कैसे शांत करना है और अभी तक की हरकत की वजह से सुनैना के तीन बदन में खुद आग लगी हुई थी वह तो ऊपर से रूठने का दिखावा कर रही थी अंदर से वह यही चाहती थी कि जल्द से जल्द सूरज अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डाल दे,,,, सूरज से गोद में उठाए हुए अपने कमरे में ना ले जाकर के अपनी मां के ही कमरे में ले जाने लगा वह पैर पटकती रह गई लेकिन सूरज नहीं माना और वैसे भी घर में रानी नहीं थी और बाहर दरवाजे पर कड़ी लगाकर सूरज ने दरवाजा बंद कर दिया था अगर रानी आ भी जाती तो उन दोनों को पता चल जाता,,,,, अपनी मां के कमरे में ले जाकर के वह अपनी मां को चारपाई पर पटक दिया चारपाई पर सुनैना के गिरने से चारपाई चरमराने लगी,,,यह देख कर सुनैना बोली,,,)

खटिया मत तोड़ देना,,,,

तुम्हारी गिरने से तो खटिया नही टुटेगी लेकिन आज मेरी चुदाई से तुम्हारी खटिया जरूर टूट जाएगी आज ऐसा पेलूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,।

चल बड़ा आया,,,, खटिया तोड़ने वाला,,,,।

देख नहीं रही हो कैसा टनटना रहा है,,,(अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए) तुम्हारी बुर में जाने के लिए तड़प रहा है याद देखना तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,,।(इसे कहते हुए सूरज एकदम से चारपाई पर चढ़ गया और अपनी मां के कंधे पर से साड़ी को पकड़ कर उसे एकदम से झटक कर दूर कर दिया और ऐसा करने से सुनैना की लाजवाब भरी हुई छाती एकदम से उजागर हो गई जो की ब्लाउज में कैद चुचिया गहरी सांस लेने की वजह से ऊपर नीचे हो रही थी,,, ब्लाउज का ऊपर वाला बटन खुला हुआ था जिससे चुचियों का ज्यादातर हिस्सा बाहर की तरफ दिखाई दे रहा था यह सब देखकर सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगे और वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ लिया उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, अपने बेटे की हरकत से मस्त होकर सुनैना अपनी आंखों को बंद कर ली थी अब वह किसी भी प्रकार का विरोध नहीं कर रही थी क्योंकि तुझे जानती थी कि अगर मजा लेना है तो साथ देना पड़ेगा विरोध नहीं किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए साथ और सहकार की जरूरत होती है ना कि विरोध की इस बात को सुनैना अच्छी तरह से जानती थी। सूरज पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों पर ब्लाउज के ऊपर से टूट पड़ा था उसका लंड इतना ज्यादा उत्तेजना से कड़क हो चुका था कि मानो उसकी नसे फट जाएगी लेकिन सूरज को इस बात का कैसा सो रहा था कि जिस तरह से उसका लंड टनटनाया हुआ है आज उसकी मां की बुर में जाकर

खलबली मचा देगा,,,,,,,,, सुनैना के चेहरे का रंग सुर्ख गुलाबी होने लगा था उत्तेजना और मदहोशी में वह चुदवासी हुए जा रही थी,,,ं सूरज अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलते हुए बोला।

क्यों मेरी जान आज से तुम्हारी चूचियों को ज्यादा ही पड़ी लग रही है ऐसा लग रहा है कि ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएंगी,,,,।

तो फट जाने दे ब्लाउज ,बटन क्यों खोल रहा है,,,,।

तुम्हारे ब्लाउज मुझे बहुत खूबसूरत लगता है इसलिए मैं नहीं चाहता कि यह फट जाए इसलिए तुम्हारा ब्लाउज का बटन खोल रहा हूं वैसे भी ब्लाउज के ऊपर से ज्यादा मजा नंगी चूचियों को दबाने में आता है,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी मां के ब्लाउज का बटन बारी-बारी से खोलने लगा और देखते-देखते वहां अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज के दोनों पट को अलग कर दिया सुनैना की मदद कर देने वाली दोनों चूचियां सीना ताने सूरज की आंखों की चमक बढ़ा रही थी सूरज गहरी सांस लेता हुआ एक पल के लिए अपनी मां की चूची को देखा और फिर दोनों हथेलियां को दोनों चुची पर रखकर उन्हें एकदम से दबोच लिया,,, सूरज की यह पकड़ थोड़ी दर्द भरी थी इसलिए सुनैना के मुख से हल्की कराहने की आवाज फूट पड़ी लेकिन उसने सूरज को रोकना या रुकने के लिए ना बोलकर उसे आगे बढ़ाने दी क्योंकि वह जानती थी कि ऐसे हालात में सूरज को रोकना मुनासी बिल्कुल भी नहीं था और वह अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसे अच्छी तरह से संतुष्टि का एहसास कराता है मजा देता है वह जानता है कि उसे कैसे खुश करना है इसलिए सूरज को ऐसे मौके पर रोकना उचित नहीं था हल्का दर्द जरूर हुआ था लेकिन उससे ज्यादा उसे आनंद की प्राप्ति भी हुई थी।

सूरज बारी-बारी से दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था,,, सूरज की खुद की हालत खराब हो रही थी रात भर रानी साहिबा की चुदाई करने के बाद भी उसकी उत्तेजना बरकरार थी एक औरत के प्रति उसका आकर्षण बिल्कुल भी काम नहीं हुआ था और यहां तो चारपाई पर कोई दूसरी औरत नहीं उसकी मां थी उसके बारे में उत्तेजना से पागल हुआ जा रहा था इसलिए वह अपनी मां की खूबसूरत पसंद से खेलने का एक भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था,,,, देखते देखते सूरज अपनी मां की गोरी गोरी चूचियों को जोर-जोर से दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,,, और अपनी मां सेमुस्कुराते हुए बोला।

देखो तो ऐसा लगता ही नहीं कि तुम्हारी छाती पर च है ऐसा लग रहा है कि जैसे बड़े-बड़े टमाटर लटक रहे हो,,,,।

बड़ा बेरहम है तु रात भर की कसर अभी निकाल लेगा क्या,,,,,।

मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है घर की जिम्मेदारी न होती रानी की शादी के लिए पैसे कटते न करने होते तो मैं रात भर दिन भर तुम्हारी बुर में लंड डालकर पड़े रहता तुम्हें शिकायत का मौका नहीं देता,,,,।

(सुनैना अपने हालात को अच्छी तरह से समझती थी इसलिए सूरज की बात पर वह जवाब नहीं दे पाई बस शांति से पड़ी रही और अपने बेटे की हरकत का मजा लेते रही,,,,, सूरज अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया वह बड़े अच्छे से अपनी मां की च पिता था ऐसा तो वह बचपन में जब छोटा था तब भी अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर उसका दूध नहीं पी पाया था लेकिन अब पूरी तरह से जवान होने के बाद अपनी मां की चूची को अच्छे से पी रहा था,,, और शायद इसलिए की तब वह छोटा था अपनी मां की चूची को मुंह से लगाकर वह अपने पेट की भूख को शांत करता था लेकिन जवान होने के बाद वह अपनी जवानी के भूख को शांत करने के लिए अपनी मां की चूची पी रहा था और अपनी मां को मजा दे रहा था सूरज की हरकत से सुनैना की बुर में मदहोशी का रस घुलने लगा था पूरे उफान में बहने लगा था,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी मां की चूची को पिता रहा लेकिन अब आगे बढ़ने का समय आ गया था वह धीरे से अपनी मां की चूची से अपना मुंह हटाया और गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ देखने लगा जो की उत्तेजना से तप रहा था,,,, फिर अपनी नजर को अपनी मां की नाभि के नीचे की तरफ ले गया अभी भी कमर के नीचे वह वस्त्र में थी उसकी साड़ी उसके बदन से लिपटी हुई थी और सूरज अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की साड़ी को खोलना शुरू कर दिया और सुनैना भी अपने बेटे का साथ देते हुए बार-बार अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठने रही थी देखते-देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को खोलकर चारपाई के नीचे फेंक दिया इस समय वह खटिया पर केवल पेटीकोट में लेटी हुई थी क्योंकि ब्लाउज को सुनैना अपनी बाहों से अलग करके पहले ही कमर के ऊपर नंगी हो चुकी थी,,,,।

पेटिकोट के आगे वाला भाग पूरी तरह से गिला हो चुका था और एकदम साफ दिखाई दे रहा था अपनी मां के गीलेपन को देखकर सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

आज तो बहुत पानी छोड़ रही है मेरी जान लगता है बुरे में तूफान उठ रहा है शांत करना जरूरी हो गया है,,,।

रात भर का तूफान अपने अंदर समेट कर रखी थी जो कि अब एकदम से टूट पड़ा है,,,,, तभी तो इतना गीला हो रहा है,,,।

चिंता मत कर मेरी छम्मक छल्लो तेरे तूफान को शांत करने का तरीका मुझे मालूम है,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी मां की पेटिकोट की डोरी को पकड़कर झटके से खींच लिया और उसकी पेटीकोट को ढीला कर दिया सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था जिस तरह से सूरज से रानी जान और छम्मक छल्लो कहकर संबोधन कर रहा था यह सब सुनकर सुनैना शर्म और उत्तेजना से पानी पानी हो रही थी उसकी बुर और ज्यादा पानी छोड़ रही थी,,,, सूरज अपनी मां की पेटिकोट पकड़कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा और उसका साथ देते हुए सुनैना भी अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए ऊपर की तरफ उठा दे और जैसे ही सूरज ने अपनी मां की पेटीकोट को नीचे खींचकर उसके पैरों से अलग किया सुनैना पूरी तरह से नंगी हो गई,,, सूरज की आंखों की चमक और हवस दोनों बढ़ गई वह अपनी मां के नंगे जिस्म को देखकर पागल हुआ जा रहा था,,,, सुबह का समय इसलिए सब कुछ और भी ज्यादा साफ दिखाई दे रहा था नंगी होने के बाद सुनैना की खूबसूरती में चार चांद लग जाता था इस बात का एहसास सूरज को अच्छी तरह से था,,, अपनी मां की पानी पानी हुई बुर पर हथेली रखकर उसे मसलते हुए सूरज बोला,,,)

सहहहहहह तू तो एकदम गीली हो गई है रे,,,सहहहहह और गरम भी है आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,,,ऊमममममममम,,(ऐसा कहते हुए सूरज उत्तेजना के मेरी अपनी मां की गुलाबी बुर को अपनी हथेली में दबोच लिया मानो के जैसे कोई गुलाब के फूल को अपनी हथेली में तरबूज कर उसका रस निचोड़ रहा हो,,,,,, सुनैना की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी क्योंकि सूरज की हरकत और उसकी बातें सुनकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वह उसका बेटा है ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अनजान मर्द उसके साथ बिस्तर पर मजा ले रहा है क्योंकि सूरज की बातें बेटे वाली बिल्कुल भी नहीं होती थी तु तड़ाक बुर भोसड़ा रंडी छिनार जैसे शब्दों का प्रयोग करके वह सुनैना को महसूस ही नहीं होने देता था कि उसकी चुदाई करने वाला शख्स उसका बेटा है,,, ऐसा लगता था कि चारपाई पर उसके साथ मजा लेने वाला उसका आदमी या कोई प्रेमी है,,,, इसलिए तो सुनैना का मजा तो गुना हो जाता था और मजे लेकर के अपने बेटे के साथ चुदवाती थी,,,,,,, अगले ही पल सूरज अपने प्यासे होठों को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रखकर एकदम से मदहोश होकर चाटना शुरू कर दिया,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुनने एकदम से मदहोश हो गई और तुरंत अपनी दोनों टांगों को और ज्यादा खोल दी,एक टांग दीवार से ऊपर की तरफ सटा दी और दूसरी टांग को चारपाई के नीचे रख दी वह पूरी तरह से अपने बेटे को मजा देना चाहती थी,,, सूरज भी अपनी मां को मजा देने के लिए पूरी तरह से अपनी मां की बुर पर टूट पड़ा उसकी बुर से निकलने वाला मदन रस उसके चेहरे को पूरी तरह से गिला करने लगा। उसके होंठ नाक गल सब कुछ मदन रस में भीग गया लेकिन वह पीछे नहीं हटा,,, आज एक जुनून उसके अंदर भरा हुआ था वह अपनी मां को पूरी तरह से मस्त कर देना चाहता था ऐसी चुदाई करना चाहता था कि सच में उसकी बुर का भोसड़ा बन जाए,,, सुनैना भी रानी की गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए जोर-जोर से शिसकारी भर रही थी,,,, सूरज की हर एक हरकत पर उसकी शिसकारी की आवाज बढ़ती जा रही थी जिसे सुनकर सूरज का हौसला बढ़ता जा रहा था,,,,।

कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी मां की बुर की चुसाई करता रहा लेकिन अब उसका लंड भी तड़प रहा था बुर में जाने के लिए,, इसलिए वह धीरे से उठा और गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देखने लगा सूरज का पूरा चेहरा उसकी मां के मदन रस में डूबा हुआ था जिसे देखकर सुनैना शर्म से पानी पानी हो गई वह कुछ बोल नहीं पाई सूरज ने पास में पड़ी अपनी मां की पेटीकोट को उठाया और उसे अपना मुंह पोंछने लगा वह जिस तरह से बैठा था उसका लंड एकदम से ऊपर नीचे होकर हील रहा था जिसे देखकर

सुनैना से रहने की और वह अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ली उसकी गरमाहट उसकी मोटाई और लंबाई कुछ ज्यादा ही महसूस हो रही थी इसलिए सुनैना गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

बाप रे तेरा तो कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो गया है ऐसा लग रहा है,,,।

बुर की प्यास देखकर इसकी लंबाई बढ़ती और घटती है और तुम्हारी बुर की प्यास को ज्यादा यह इसलिए कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो गया है यही तो इसका कमाल है,,,,।

तब तो तेरा लंड जादू वाला है,,,,।

बिल्कुल अब इसकी ताकत और ज्यादा बढ़ जाए इसलिए ईसे मुंह में ले लो,,,,, ताकि आज तुम्हारी बुर में जाकर ऐसा मजा दे कि तुम जिंदगी भर याद रखो,,,।

(अपने बेटे की बात सुनते ही सुनैना धीरे से अपने लाल लाल होठों को। खोल दी और सूरज अपने हाथ में अपना लंड पड़कर अपनी मां के होठों से सटा दिया और सुनैना धीरे से उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी कुछ देर तक सुनैना भी अपने बेटे के लंड को मस्त करती रही उसकी धार बढ़ाती रही,,,, सुनैना की बुर में आग लगी हुई थी जल्द से जल्द वह चाहती थी कि उसका बेटा अपने लंड को उसकी बुर में डाल दे,,,, और इस बात को सूरज भी अच्छी तरह से समझ रहा था वह धीरे से अपनी मां की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाला और और अपनी मां के दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा अपनी मां की भारी भरकम गांड को अपनी जांघों पर चढ़ाकर वह अपने लंड की सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद से सटा दिया और फिर करारा झटका लगाया बुर की चिकनाहट पाकर सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से सुनैना की बुर में प्रवेश करने लगा,,,, देखते ही देखते सुनैना को अपने बच्चेदानी पर अपने बेटे के लंड का ठोकर महसूस होने लगा,,,, सुनैना मदहोश हुए जा रही थी पागल हो जा रही थी वह कभी सोच नहीं थी कि उसका बेटा इतनी गजब की चुदाई करेगा एक रात की कसम इस तरह से निकालेगा सूरज इतनी तेज धक्के लगा रहा था कि सुनैना का पूरा वजूद हाजमाचा जा रहा था साथ ही चारपाई चरमरा जा रही थी चारपाई से चरर मरर की आवाज आ रही थी। एसी गजब की चुदाई देखकर सुनैना अपने आधे अधूरे शब्दों में अपने बेटे से बोली क्योंकि सूरज की धक्के इतनी तेज और जबरदस्त हो रही थी ताकत से भरे हुए थे कि सुनैना से कुछ बोला नहीं जा रहा था।

थोड़ा धीरे से बेटा तू तो चारपाई तोड़ देगा और आज मेरी बुर को भोसड़ा बना देगा याद रख बाद में तुझे इसी बुर में लंड डालना है कहीं भोसड़ा बन गया तो तुझे मजा नहीं आएगा,,,।

मेरी चिंता मत कर छिनार,,,, भोसड़ा बन गया तो अभी तुझे इतना ही मजा दूंगा मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है,,,, आज तो तेरी खटिया टूटी समझ ले,,,,आहहहहह आहहहह ले पूरा अंदर ले,,, पागल हो रही थी ना मेरे लंड के लिए अब झेल मुझे,,,,।(ऐसा कहते हुए सूरज और जोर से अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया ऐसा नहीं था कि सुनैना को मजा नहीं आ रहा था सुनैना को बहुत मजा आ रहा था वह तो आपने पूरे जीवन में इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी आज वह सातवें आसमान में उड़ रही थी ऐसी चुदाई उसने कभी महसूस नहीं की थी और ना कभी देखी थी और ना ही कभी सुनी थी लेकिन उसके बेटे ने आज दिन में उसे तारे दिखा दिया था,,,, अपनी बुर का भोसड़ा बनने की चिंता से बिल्कुल भी नहीं थी चिंता थी तो उसे अपनी खटिया की,,, क्योंकि सूरज के तेज धक्को से खटिया के चारों पाए हीलने लगे थे,,,, लेकिन इस बात की चिंता सूरज को बिल्कुल भी नहीं थी वह मजा ले रहा था और मजा दे रहा था बस उसकी आंखों के सामने उसकी मां की मदद कर देने वाली जवानी थी और उसकी गुलाबी बुर जिसमें अपना लंड डालकर वह हचमचा रहा था,,,, अपने बेटे से सुनैना की सारी नाराजगी दूर हो चुकी थी लेकिन वहां अपने बेटे को बार-बार धीरे-धीरे चोदने के लिए कह रही थी।

धीरे से कर मेरे लाल खटिया टूट जाएगी,,,।

टूट जाने दे भोसड़ा चोदी आज मैं भी तो देखूं तेरे भोसड़े में कितना दम है,,,,

अपना दम दिखाने के चक्कर में तु मेरी खटिया तोड़ देगा,,,,,आहहहह आहहहहहह ऊममममम (खटिया की चिंता के बीच सुनैना मजा लेना नहीं भुल रही थी हर धक्के के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौटने लग रही थी जिसे देखकर सूरज की चमक और प्यास दोनों बढ़ जा रही थी और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी मां की बड़े-बड़े दशहरी हमको पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे बार किसी घोड़ी का लगाम अपने हाथों में लेकर उस पर काबू किए हुए हैं,,,,, सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी और चारपाई के चारो पाए हच मचा रहे थे,,,, सूरज को भी लग रहा था कि उसके तेज धक्को से चारपाई टूटने वाली है लेकिन वह अपने मजे में बिल्कुल भी कमी होने देना नहीं चाहता था इसलिए वह अपनी मां को तुरंत अपनी बाहों में भर लिया और जोर-जोर से तक के लगाना शुरू कर दिया,,, सुनैना कुछ इस बात का डर था वही हुआ अगले ही पल सूरज के तेज धक्को के साथ खटिया का एक पाया टूट गया और वहां एकदम से नीचे जमीन पर आ गई लेकिन उसे चोट नहीं लगी क्योंकि सूरज उसे अपनी बाहों में पकड़ कर संभाले हुए था लेकिन देखने वाली बात यह थी कि सूरज अपने धक्के को बिल्कुल भी नहीं रोका था।

देख मैं तुझे बोल रही थी ना खटिया टूट जाएगी,,,।

मैं भी तो यही बोल रहा था मेरी छम्मक छल्लो की आज भले खटिया टूट जाएगी लेकिन तेरी चुदाई नहीं रुकेगी छिनार।

अरे मादरचोद में सोऊंगी कहां,,?

मेरे लंड पर लेट जाना, छिनार,, चिंता मत कर तेरी बुर में लंड डालकर मैं अपनी बाहों में लेकर सारी रात आराम से तुझे सुलाऊंगा,,,,,,(खटिया टूट जाने के बावजूद भी नीचे गिर जाने के बावजूद भी सूरज अपने कमर को हिलाना नहीं छोड़ा था वह अभी भी अपनी मां की बुर में अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था,,, अपने बेटे की ताकत को देखकर वाकई में सुनैना का सीना गर्व से और ज्यादा चौड़ा हो गया था,,,,,,)

चल रहने दे रानी पूछेगी कैसे टूट गया तब क्या जवाब दूंगी कि तेरे भाई से चुदवा चुदवी कर टूट गया,,,,

जो सच है वही बता देना कह देना कि मेरा मोटा लंड बुर में घुस गया था ,,,, और ना तो मैं झेल पाई और ना मेरी खटिया,,,,।

धत् मादरचोद,,,,।

मादरचोद तो तूने मुझे बना दी रंडी अपनी बड़ी-बड़ी गांड दिखा दिखा कर,,,,, मैं कभी सोचा नहीं था कि तेरी बुर में लंड डालकर मजा लूंगा लेकिन तेरी जवानी मुझे पागल कर दी मुझे मजबूर कर दी तुझे चोदने के लिए,,,।

मजा तो आ रहा है ना तुझे,,,।

मजा तो तो बहुत देती है,,,,आहहहहहह आहहहहहह देख कितना मजा दे रही है,,,,,आहहहहहह (अपने लंड को जोर-जोर से अपनी मां की बुर में डालते हुए सूरज बोला अब दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी थी दोनों का वजन अकड़ रहा था,,,, दोनों अपने चरम पर पहुंच चुके थे और फिर देखते ही देखते सूरज अपनी मां को अपनी बाहों में कस के जोर-जोर से धक्के लगना शुरू कर दिया और फिर देखते-देखते मां बेटे दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,, थोड़ी देर में वासना का तूफान शांत हो चुका था सूरज अपनी मां की बुर में से अपना लंड निकाल कर धीरे से उठकर खड़ा हो गया सुनैना को अपने बेटे से चुदाई करवाने में बहुत मजा आया था लेकिन टूटी हुई चारपाई को देखकर वह अपने बेटे से बोली,,,।

खटिया तो टूट गई अब मैं कहां लेटुंगी,,,?

चिंता मत करो मैं बना दूंगा लेकिन जब तक नहीं बन जाती तब तक चटाई पर लेट जाना,,,,।

तुझे तो बस मजा लेना है मेरे लिए तो दिक्कत हो गई ना,,,,,।(टूटी हुई चारपाई से धीरे से उठते हुए सुनैना बोली)

मैं बना दूंगा कोई दिक्कत की बात नहीं है,,,(कपड़े पहनते हुए सुरज बोला तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,, दस्तक की आवाज सुनकर सूरज जल्दबाजी दिखाता हुआ अपनी मां से बोला,,,) जल्दी से उठकर कपड़े पहन लो लगता है रानी आ गई।
 
बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्त

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धन्यवाददोस्तधन्यवाद दोस्त

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