आज का दिन सूरज के लिए और कुंवर और उसकी बहन के लिए भी बहुत अच्छा था। क्योंकि सूरज आज एक ऐसी शख्सियत को अपनी बाहों में भर लिया था जिसके बारे में कभी वह कल्पना भी नहीं कर सकता था वैसे तो जिन-जिन के साथ उसका संबंध बना था वह उसकी कल्पना के परे ही थे लेकिन राजा साहब की बीवी की बात कुछ ओर थी,,,, सूरज जब तक घर नहीं पहुंच गया तब तक उसके बारे में ही सोचता रहा राजा साहब की बीवी के लिए भी आज का अनुभव बेहद यादगार था। एक तो वह सूरज की हिम्मत और उसकी बहादुरी पर पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी और उसके मोहक रूप का आकर्षण उसके मन में बस गया था। पहली बार ऐसा लग रहा था कि वह किसी मर्द के प्रति आसक्त हुई थी,,,, और कुंवर के लिए तो यहां पर यादगार बन गया था क्योंकि अभी तक उसने रानी के भाई को कभी देखा नहीं था बस उसके बारे में सुना ही था और आज देख कर उसकी बहादुरी को अपनी आंखों से देखकर उसे लगने लगा था कि सूरज के साथ भविष्य में बहुत मजा आने वाला है,, वैसे भी वह सूरज के साथ दोस्ती मेलजोल बढ़ाना चाहता था ताकि सूरज की नजर में कुंवर हमेशा एक अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान बना रहे और वैसे भी कुंवर अच्छे व्यवहार वाला ही था।
राशन लेकर सूरज घर पर पहुंच चुका था शाम ढल चुकी थी,, खाना बना रही थी और पास में ही बैठकर रानी सब्जी काट रही थी। राशन को एक तरफ रखकर वह हाथ मुंह धो कर चारपाई को ठीक रसोई के सामने खींचकर उस पर बैठ गया और गहरी सांस लेता हुआ बोला,,।
आज खाने में क्या बन रहा है,?
सब्जी रोटी,,,, (सुनैना कुछ बोलती इससे पहले रानी ने जवाब दे दी यह सुनकर वह अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,,, वह सूरज की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)
क्यों तुझे क्या खाना था मालपुआ,,,!
हां बिल्कुल जिस तरह से मैं मेहनत करता हूं शाम को रोज मालपुआ मिल जाए तो मजा ही आ जाए,,,,।
अब भैया रोज मालपुआ तो नहीं बन सकता ना देखेंगे किसी दिन बना होगा तो मां बना देगी,,,।
लेकिन बनाती कहां है मां,,, बस देखा दाल चावल सब्जी रोटी,,,,, यह भी कोई खाना हुआ,,,,!
क्यों यह खाना नहीं हुआ सभी लोग तो यही कहते हैं रोज तुझे ही सिर्फ मालपुआ चाहिए,,,,,।
मुझे रोज मिले तो मैं रोज रगड़ डालुं(अपनी मां की तरफ देखते हुए शरारत अंदाज में सूरज बोला,,,, सुनैना कम नहीं थी, मर्दों की रसभरी बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझते थे वह समझ गई थी कि सूरज किस बारे में बात कर रहा है,,,,, इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)
रोज मालपुआ खाने के लिए दम होना चाहिए,,,, एक दो बार में ही हालत खराब हो जाएगी और तू रोज रगड़ने की बात कर रहा है।
मेरे में कितना दम है यह तुम अच्छी तरह से जानती हो ना बस एक बार मौका देकर देखो रोज बनाओगी रोज मालपुआ हजम कर जाऊंगा क्योंकि मुझे मालपुआ बहुत अच्छा लगता है।
अच्छा तो क्या अच्छा लगता है तुझे मालपुआ में जो इतना पागल हुआ जा रहा है उसे खाने के लिए।
ऊममममम ,,,,, मालपुआ में जो बात है वह किसी में नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है एक तो वह कचोरी की तरह पूरी हुई होती है और बीच से उसका रस टपकते रहता है,,,, ऊममममम देखकर ही मेरे मुंह में पानी आ जाता है,,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से मालपुआ के संदर्भ में सुनकर सुनैना की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी क्योंकि वह मालपुआ का नाम लेकर बुर के बारे में बात कर रहा था,,, वैसे भी तीन-चार दिन गुजर चुके थे सूरज ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था और इसीलिए सुनैना का बहुत मन कर रहा था उससे चुदवाने के लिए,,,, रानी अपने ही काम में व्यस्त थी,,, मौका देखकर गर्मी का बहाना करते हुए सुनैना अपनी साड़ी को घुटने तक ऊपर उठा दी और टांगों को हल्का सा खोल दी ताकि उसकी दोनों टांगों के बीच सूरज की नजर पड सके। और ऐसा ही होगा सूरज अपनी मां की हरकत को देख रहा था और जैसे ही उसने अपनी साड़ी को घोषणा करके उठाकर अपने टांगों को हल्का सा मोली सूरज की नजर अपने आप ही उसकी दोनों टांगों के बीच अंदर तक पहुंचाने की कोशिश करने लगी लेकिन लालटेन की पीली रोशनी उसके पेटिकोट के अंदर तक नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए सूरज भी बस इतना ही देख पा रहा था जितने तक लालटेन की पीली रोशनी पहुंच रही थी लेकिन इतना भी सुनैना के लिए बहुत था क्योंकि वह अपने बेटे का ध्यान अपनी तरफ करने में कामयाब हो गई थी। वह अपने बेटे से बोली।)
बारिश का महीना शुरू होने वाला है। कहीं घर में पानी टपकना ना शुरू हो जाए इसलिए थोड़ा बहुत मरम्मत करना बाकी है ऐसा कर कल ही मरम्मत कर दे।
अरे कल क्यों मन कहे तो इसी समय मरम्मत कर दुं,,,।(सूरज मुस्कुराते हुए भोला और उसकी मां भी समझ गई वह किस बारे में बात कर रहा है इसलिए वह शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा ली अपने आप को काम में व्यस्त करने का नाटक करते हुए बोली,,)
नहीं नहीं रात को नहीं रात को कुछ समझ में नहीं आएगा और तू कामबिगाड़ देगा।
अरे मैं तुम भी कैसी बातें कर रही हो। मरम्मत रात को भी हो सकती है मैं तो टटोलकर ही काम चला लूंगा कहो तो अभी मरम्मत कर दुं।
नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,, अभी कुछ नहीं करना है,,,, खाना बनने वाला है खाना खाकर सो जा।
हां यह तुमने ठीक कहीं वैसे भी दिन भर की थकान से रात को नींद बहुत अच्छी आती है।
ऊमममम तू बस नींद लेने के लिए ही बना है तेरी उम्र के लड़के रात दिन जागते हैं काम करते हैं,, और एक तू है कि बस सोता ही रहता है।
( सूरज अपनी मां की लाचारी को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि तीन-चार दिन उसने अपनी मां पर ध्यान नहीं दिया है इसलिए उसकी मां उसके साथ शिकायत कर रही है बस यही तो वह देखना चाहता था उसे आज अपनी मन में एक औरत की तड़प दिखाई दे रही थी जो एक मर्द के साथ संबंध बनाने के लिए ललाईत थी,, इस बात से सूरज मैन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था और प्रसन्न होते हुए बोला)
कहो तो मैं भी दिन भर रात भर जागता रहूं लेकिन रात भर जाग कर करूंगा क्या रात को काम करने जैसा होता क्या है,,,,?
(रानी अपनी जगह से उठकर बाहर पानी लेने के लिए चलेगी और उसके जाते ही अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए सुनैना बोली)
मर्द रात को ही काम करते हैं और असली मर्द वही होता है जो रात भर जाकर काम करता है बाकी सब बेकार होते हैं अब तू ही अंदाजा लगा लेकिन तू बेकार वाला मर्द है या सचमुच का मर्द है।
यह तो तुम ही बता सकती हो कि मैं कैसा मर्द हुं,,,,,।
मैं क्या जानू कि तू कैसा मर्द है यह तो बताया नहीं जाता साबित किया जाता है। (अपने बेटे से नजर बचाकर वह मुस्कुराते हुए अपने मन की बात बता रही थी)
लगता है ठीक तरह से मर्दानगी देख नहीं पाई हो,,, तुम्हें असली मर्दानगी दिखानी होगी,,,।
दिखा दे तुझे रोका किसने है,,,,,।
(बातचीत आगे बढ़ पाती ईससे पहले ही रानी पानी लेकर आ गई,,, और फिर इस तरह की बात करने का मौका नहीं मिला,,तीनों खाना खाने बैठ गए सुनैना खाना खाने के लिए बैठने से पहले अपने ब्लाउज के ऊपर का दो बटन खोल चुकी थी ताकि अपने बेटे को अपनी जवानी दिखा सके,,,,, सुनैना यह सब करना नहीं चाहती थी लेकिन तीन-चार दिनों की दूरी है उसे मजबूर कर दिया था यह सब करने के लिए वह अपने बेटे को रिहाना चाहती थी ताकि आज की रात जी भर कर वह उसकी जवानी पर बरसे,,, तीनों बैठकर खाना खाने दे तभी सूरज की नजर अपनी मां पर पड़ी शाडी का पल्लू कंधे से नीचे सरका हुआ था और सूरज को अपनी मां की मदद कर देने वाली छाती एकदम साफ दिखाई दे रही थी रानी दोनों के बीच में बैठी हुई थी इसलिए वह अपनी मां की तरफ देखा नहीं पा रही थी ऊपर के दो ब्लाउज के बटन खुले होने की वजह से सुनैना की आधी से ज्यादा चूचियां एकदम से लालटेन की पीली रोशनी में उजागर हो रही थी जिसे देखकर सूरज के पजामे में हलचल हो रही थी,,,, खाना खाते समय सूरज अपनी मां की चूचियों को देख रहा था और सुनैना अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, दोनों की नजरे आपस में टकराई तो सूरज उत्तेजना के मारे अपने होंठ को अपने दांत से काटकर इशारा करने लगा कि वह कितना तड़प रहा है उसके साथ संबंध बनाने के लिए,,,, सुनैना भी रानी से नजर बचाकर एक हाथ अपनी पेटीकोट में डालकर अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी बर को मसलते हुए मदहोश कर देने वाला चेहरा बनाते हुए अपने मन की मनसा को जता रही थी आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी। जिस तरह की तड़प सूरज अपनी मां के चेहरे पर देखना चाहता था वही तड़प उसे देखने को मिल रही थी वह समझ गया था कि उसकी मां कितनी चुदवासी है।
थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,,,, रानी बर्तन साफ करने के लिए बैठ गई थी और सुनैना पेशाब करने के लिए घर से बाहर निकल गई थी अपनी मां को बाहर जाते हुए देखकर सूरज भी मौका देखकर अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया,,,,, सुनैना घर के बगल सटे हुए जगह के पीछे की तरफ चली गई थी जहां पर अक्सर वह पेशाब करने के लिए जाती थी ,,, उसे नहीं मालूम था कि उसके पीछे-पीछे सूरज भी आ रहा है वह थोड़ी दूर झाड़ियां के पास पहुंचकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर सूरज के लंड को खड़ा होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा। वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठी इससे पहले ही सूरज पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,,,युं एकाएक पीछे से पकड़े जाने की वजह से सुनैना एकदम से घबरा गई और पीछे नजर घुमा कर देखने लगी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वह अपने बेटे की बाहों में है वह निश्चित हो गई,,,,, वह कुछ कह पाती इससे पहले ही सूरज अपनी मां को पीछे से बाहों में भरने से पहले अपने पजामी को घुटनों तक नीचे खींच दिया था जिसकी वजह से उसका नंगा लंड गांड की दरार में फंसकर कर इधर-उधर रगड़ खाने लगा था। मोटे तगड़े लंड की रगड़ से सुनैना मदहोश होने लगी और कुछ बोल ही नहीं पाई और सूरज ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाता हुआ बराबर अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था सुनैना मदहोश होने लगी थी उत्तेजित होने लगी थी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि चार दिन बाद जो यह मिलन हो रहा था वह इसकी खुशी को बात नहीं सकती थी बस अपनी हरकतों से जाहिर कर सकती थी और वह ऐसा कर भी रही थी अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल पीछे से घूमाते हुए अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे की हरकत का मजा ले रही थी,,, सूरज को भी अपनी मां की तरफ से यह प्रतिक्रिया काफी लुभावनी लग रही थी उसे मजा आ रहा था वह उत्तेजना में जोर-जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था।
सहहहहह,,,, आहहहहहह,,,,,ऊममममम सससससुरज बेटे,,,,,ऊमममममममम ,,,,,,, कहीं रानी आ गई तो,,,,,,,।
अभी नहीं आएगी अभी वह बर्तन मांज रही है उसे समय लगेगा तब तक हम अपना काम निपटा लेंगे,,,।
यहां,,,,,सहहहहहहहह ,,,,,,,,,, मेरे कमरे में आना,,,,, दरवाजा खुला रखूंगी,,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,,।
लेकिन मेरा तो अभी मैं तुम्हारी लेने की,,,,,, तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,।
ऊमममममम सहहहहहहहह मैं भी तो पागल हुए जा रही हूं इसीलिए तो कह रहा हूं कमरे में आना बहुत अच्छे से दूंगी,,,,,,सहहहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,।
लेकिन अभी मेरा बहुत मन कर रहा है तुम्हारा लेने का,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां को घुमा दिया जिसकी वजह से दोनों का चेहरा आमने-सामने हो गया और सुनैना कुछ समझ पाती से पहले ही अंकित अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को पकड़ कर उसे ऊपर उठाकर अपनी कमर से लपेट दिया,,,, जिससे सुरज का टनटनाया लंड सुनैना की बुर के ईर्द-गिर्द ठोकर मारने लगा वह बुर के अंदर अपने आप घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन असफल हो जा रहा था। क्योंकि उसे सुनैना का गुलाबी छेद समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी सुनैना की पनीयाई बुर की वजह से उसका सपाट मैदान पूरी तरह से फिसलन भरा था। जिससे बार-बार गुलाबी छेद के पास आकर भी सूरज के लंड का सुपड़ा फिसल जा रहा था और सुनैना तड़प जा रही थी। सूरज से भी रहा नहीं जा रहा था, सूरज अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसका रसपान करते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले गया और अपने लंड को पकड़ कर अपने मोटे सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद से सटा दिया,,,, गर्माहट भरे सुपाड़े को अपनी भट्टी की तरह तपती हुई बुर पर महसूस करके सुनैना पानी पानी हो गई खुद ही उसकी कमर आगे पीछे होने लगी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी लेकिन बिना सूरज के सहकार के सुनैना के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था इसलिए सूरज अपने हाथ से ही अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में हल्का सा प्रवेश कराते हुए अपने दोनों हथेलियां को अपनी मां के पिछवाड़े पर रख दिया और उसे अपनी तरफ खींचता हुआ अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर में उतर जाने दिया,,,,।
सूरज का मोटा तगड़ा गरम लंड,, बुर की अंदरूनी व्याधियों को एक तरफ धकेलते हुए अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता चला जा रहा था और अपने बेटे के लंड की हरकत की वजह से सुनैना गदगद हुए जा रही थी देखते ही देखते सूरज का मोटा तगड़े लंड का सुपड़ा सुना के बच्चेदानी तक पहुंच गया जिसकी वजह से सुनैना का मुंह खुला का खुला रह गया और सूरज अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से थामे हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया,,,,, चार दिनों बाद एक बार फिर से सुनैना को जन्नत का मजा मिल रहा था सुनैना एकदम मदहोश हुए जा रही थी अपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे के हर एक धक्के का आनंद ले रही थी,,,, मौके की नजाकत को सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी बहन बर्तन साफ कर रही थी किसी भी वक्त हुआ बर्तन साफ करके पेशाब करने के लिए इधर आने वाली थी इसलिए सूरज बिना रुके अपनी कमर की रफ्तार को रोके बिना अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,, अपनी मां को छोड़ने की रफ्तार तेज गति से सूरज कर रहा था सुनैना के मुंह से कोई शब्द फुट नहीं रहे थे और अगर कोई शब्द निकल भी रहा था तो उन शब्दों में कंपन इतना था कि वह क्या कहना चाह रही है उसे समझ पाना बड़ा मुश्किल था। बाकी कुल मिलाकर वह अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी पर छा चुका था और अपनी मां की बेलगाम जवानी पर काबू कर चुका था। अपनी मां के भारी भरकम पिछवाड़े को दोनों हाथों से थाने हुए जिस तरह से सूरज धक्के पर धक्का लगा रहा था सुनैना अपने बेटे की मर्दानगी की और उसकी कलाबाजी को देखकर गदगद हुए जा रही थी,,,, सूरज किसी भी तरह से पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था। और फिर देखते ही देखते मां बेटे दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी दोनों के बदन की आंकड़े बढ़ने लगी दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे जिसके चलते सूरज ने अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से और ज्यादा कस के दबोच लिया और रह रहकर चोर चोर से धक्के लगाने लगा अपनी मां की बुर में इतनी जोर से धक्के लगा रहा था कि मानो बुर में डालकर वह अपने लंड को गांड से बाहर निकाल देगा हर एक धक्का सुनैना के बच्चेदानी है पर ठोकर मार रहा था वह एकदम करते हुए जा रही थी पानी पानी हुए जा रही थी और फिर देखते ही देखते सूरज का गम लव सुनैना की गुलाबी बुर में गिरने लगा इस मदहोश कर देने वाले पल में सुनैना भी झड़ने लगी मां बेटे दोनों एक साथ झड़ रहे थे।
अपनी मां की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के साड़ी से उसे सांप की और फिर अपने पजामे को ऊपर खींच लिया,,,, सुनैना संतुष्ट हो चुकी थी तृप्त हो चुकी थी लेकिन उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह सूरज को वहां से जाने के लिए क्योंकि अब किसी भी वक्त रानी वहां आ सकती थी इसलिए सूरज भी वहां रुकना ठीक नहीं समझा और वहां से चला गया अपने बेटे के जाते हैं सुनैना पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और फिर पेशाब करने के बाद वजह से ही बाहर निकली तब तक देखी कि दरवाजे से रानी बाहर निकल रही थी वह अपने मन में सोचने लगी कि सही समय पर उसने सूरज को वहां से हटा दी वरना रानी को शक होने लगता,,,,, पास में ही गुसलखाना था सुनैना उसमें जाकर हाथ मुंह धोने लगी और रानी पेशाब करने के लिए चली गई थोड़ी देर बाद सुनैना अपने कमरे में पहुंच चुकी थी लेकिन कमरे में पहुंचकर उसने अपने दरवाजा बंद नहीं की थी दरवाजा बंद करने के बावजूद उस पर कुंडी नहीं लगाई थी क्योंकि उसे यकीन था कि सूरज उसके कमरे में जरूर आएगा,,, सूरज अपनी मां की चुदाई करने के बाद अपनी बहन के कमरे में भी नहीं गया था वह सीधा अपने कमरे में जाकर सो गया था,,,,,।
सुबह होने में अभी कुछ समय बाकी था बड़ी जोरों की पेशाब लगने की वजह से सूरज की आंख खुली तो वह देखा कि वह अपने कमरे में ही सो रहा था जबकि वह अपनी मां के कमरे में जाना चाहता था लेकिन कुछ देर के लिए अपने चारपाई पर लाकर इंतजार कर रहा था और न जाने कब उसकी आंख लग गई थी। वह उठकर चारपाई पर बैठ गया और अपने कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो अभी अंधेरा था वह धीरे से अपनी मां के कमरे की तरफ देखा दरवाजा बंद था वह देखना चाहता था कि उसकी मां रात को उसका इंतजार कर रही थी कि नहीं इसलिए दरवाजे के पास जाकर दरवाजे को पड़कर हल्का सा अंदर की तरफ धक्का दिया तो दरवाजा अपने आप खुल गया और उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,, क्योंकि रात भर उसकी मां दरवाजा खुला रख कर उसका इंतजार कर रही थी। अपनी मां के कमरे में ना जाकर के वाहन धीरे से घर के बाहर आ गया पेशाब करने के लिए क्योंकि बड़े जोरों की पेशाब लगे होने की वजह से वह अपनी मां के साथ हम बिस्तर होना नहीं चाहता था क्योंकि ऐसे में उसकी मां चुदाई में नहीं लगता बार-बार उसकी मां पेशाब करने को जाने को करता इसलिए वह पहले इस काम को निपटाना चाहता था और पेशाब करने के बाद वह धीरे से घर में दाखिल हुआ धीरे से दरवाजा बंद किया ताकी रानी की आंख ना खुल जाए,,, और एक बार तसल्ली करने के लिए वह अपनी बहन के कमरे के पास गया और उसके दरवाजे को भी धीरे से अंदर की तरफ धक्का दिया तो वह भी खुल गया यह देखकर उसके होठों पर फिर से मुस्कान तैरने लगी क्योंकि मां बेटी दोनों रात भर चुदवाने के लिए तैयार थी,,,। वह धीरे से दरवाजे की कड़ी लगा दिया ताकि रानी इस समय बाहर निकलना चाहे तो निकल ना पाए और उसे पता चल जाए की रानी जाग गई है और वह सही समय पर अपने कमरे में चला जाए,,,,,।
सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक तौर पर उसका लंड कुछ ज्यादा ही टनटनाया हुआ था,,, वह जल्दी से अपनी काम के कमरे के पास गया और धीरे से दरवाजा खोलकर अंदर की तरफ देखने लगा बिस्तर पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई,, क्योंकि उसकी मां घुटनों को मोड कर लेती हुई थी वह गहरी नींद में सो रही थी और उसकी साड़ी सरक कर उसकी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हो गई थी जिसकी वजह से उसकी मोटी मोटी गोरी जांघें एकदम साफ दिखाई दे रही थी जो की लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी,,,, ऐसी हालत में अगर उसे कोई भी देखा तो बिना कहे उसका लंड खड़ा हो जाता और यहां तो सूरज का लंड पहले से ही खड़ा था। कुछ देर तक वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर मस्त होता रहा लेकिन उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी जिसके साथ वह मजा लेने वाला था। सूरज बिना आवाज की अपनी मां की चारपाई के करीब आगे बढ़ने लगा वह तो बेसुध होकर सो रही थी अपने ही बेटे के इंतजार में करोड़ बदलकर कब सो गई उसे खुद को पता नहीं चला,,,, अपनी मां की मोटी मोटी नंगी जांघों को देखकर सूरज की आंखों में हवस की चमक बढ़ती जा रही थी देखते देखते वह अपनी मां के करीब चारपाई पर बैठ गया,,, उसकी मां को बिल्कुल आभास तक नहीं हो रहा था कि उसके कमरे में उसका बेटा सुबह के पैर में घुस आया था। और वैसे भी सुबह के पैर में कुछ ज्यादा ही नींद लगती है नींद गहरी हो जाती है और इसी अवस्था में सुनैना भी नींद का आनंद ले रही थी। वैसे तो सूरज भी इस पहर में गहरी नींद में सो जाता था लेकिन आज की बात कुछ और थी।
सुनैना गहरी गहरी सांस ले रही थी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसकी मोटी मोटी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लोटी हुई थी,,, जो की सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और यह सब देखकर सूरज का हौसला बुलंद हो रहा था उसका धैर्य जवाब दे रहा था उसे रहा नहीं गया और वह उत्तेजना से अपने सूखे गले को अपने ही थुक से गिला करने की कोशिश करते हुए अपनी मां की मोटी मोटी जांघों पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा,,,,, इस तरह की हरकत करते हुए सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने को उतारू था। लालटेन की पीली रोशनी में सुनैना की मदहोश कर देने वाली जवानी चमक रही थी। सूरज पहले भी अपनी मां की गदराई जवानी का भोग लगा चुका था लेकिन हर बार एक नया अनुभव उसे अपनी मां से मिल रहा था। आज उसके लिए पहला मौका था जब वह किसी की चुदाई करने के लिए सुबह के पहर में अपने कमरे से बाहर निकला था और वह कोई और नहीं बल्कि उसकी मां थी जो की गहरी नींद में सो रही थी,,, उत्तेजना से सूरज की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की मोटी जांघों पर अपनी हथेली रखकर उसे सहला रहा था,,, और अपनी मां को जगाने की कोशिश कर रहा था,,,, लेकिन वह बेसुध होकर गहरी नींद में सोई हुई थी और फिर सूरज ने अपनी मां को जगाने का एक नया तरीका खोज निकाला,,,, वह धीरे से फिर से चारपाई से उठकर खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गया,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था कमरे के अंदर सोई हुई सुनैना अर्धनग्न अवस्था में थी वैसे तो उसके बदन पर पूरे कपड़े थे लेकिन अस्तव्यवस्त हालत में जिसकी वजह से उसकी गर्म जवानी झलक रही थी जिसे देखकर सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था। सूरज के सांस गहरी चल रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत लेटी हुई थी जिसकी टांगे मुड़ी हुई थी और साड़ी कमर के ईर्द-गिर्द इकट्ठा हुई थी,,,, धीरे से सूरज सुनैना के बिस्तर पर चढ़ गया बिल्कुल भी आवाज किए बिना क्योंकि वह जानता था कि ऐसे हालात में अगर उसकी मां की नींद खुल गई तो वह घबरा जाएगी,,,, और हो सकता है कि वह शोर मचा दे इसलिए वह अपनी मां को काबू में करने का नया उपाय खोज लिया था।
देखते देखते वह बिस्तर पर चढ़कर अपनी मां की दोनों टांगों को धीरे से खोल दिया टांगों को खोलते ही सुनैना की गुलाबी पर एकदम से झलकने लगी जिस पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी,,,, सब कुछ लालटेन की पीली रोशनी में साफ-साफ दिखाई दे रहा था ज्यादा मसक्कत करने की जरूरत नहीं थी,,,, सूरज नजर भर कर अपनी मां की गुलाबी बुर को देख रहा था,,,,, जोकि रात को सोने से पहले इसके अंदर अपना लंड डालकर पानी पानी कर दिया था। सूरज एक नजर अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा जो कि सोते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और फिर धीरे से अपने प्यास होठों को अपनी मां की लसलसाई बुर की तरफ आगे बढ़ाने लगा जैसे-जैसे सूरज के होंठ सुनैना की बुर की तरफ आगे बढ़ रहे थे वैसे-वैसे उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,,, और फिर अगले ही पल सूरज के प्यासे होठ एकदम से उसकी मां की गर्म बुर पर स्पर्श होने लगे,,, लेकिन अभी भी सुनैना पर बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह गहरी नींद में सोई हुई थी उसे नहीं मालूम था की चोरी चुपके उसका बेटा उसके कमरे में दाखिल होकर उसकी जवानी का रस चाटने वाला है,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बर पर रगड़ता रहा लेकिन नींद में होने के बावजूद भी उसका खूबसूरत बदन उसकी गुलाबी बुर अंकित के जवान होठों की हरकत की प्रतिक्रिया दे रही थी। उसमें से मदन रस का बहाव हो रहा था,,, गहरी नींद में होने की वजह से भले ही अपने बेटे की कामुक हरकत की वजह से सुनैना का बदन ऊपरी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है लेकिन अपने आप ही उसके अंदरूनी हिस्सों से सूरज को बराबर सहकार मिल रहा था। सूरज अपनी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस को चाटना शुरू कर दिया,,,, और इस बार सुनैना के बदन में हलचल महसूस होने लगी,,, उसका बदन गनगनाने लगा। और अब सूरज रुकने वाला नहीं था। पागलों की तरह अपने होठों को एकदम से खोलकर अपनी मां के संपूर्ण बुर के आकार को अपने मुंह में भर लिया, और उसे एकदम से नोचने लगा,,,, इतने से सुनैना की नींद खुल गई और वह एकदम से घबरा गई,,,, वह लेटे-लेटे ही पीछे हटना चाहती थी लेकिन सूरज दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थामे हुए था जिसे वह ऊपर की तरफ सरक नहीं पाई,,, सूरज अपना कार्य जारी रखे हुए था सुनैना की सांस उखड़ चुकी थी वह घबराई हुई अपनी टांगों के बीच देख रही थी लेकिन जैसे ही उसे हिसाब सुबह की उसकी टांगों के बीच कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा सूरज है तब उसकी जान में जान आई।
धत् मैं तो डर गई,,,, कि यह कौन आ गया,,?
सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,,, मैं रात भर तेरा इंतजार कर रही थी अब जाकर तू आया है,,,,, कितना समय हो रहा है,,,,।
सुबह होने वाली है,,,(जवाब देने के लिए सूरज कुछ पल के लिए अपने मुंह में से अपनी मां की बुर को छोड़ दिया और इतना कहने के बाद फिर से अपनी हरकत को आगे बढ़ाने लगा लेकिन सुबह होने की बात सुनते ही,,,, वह एकदम से घबरा गई और बोली,,,,।
रानी कहां है,,,?
घबराओ मत अभी सुबह होने में काफी समय बाकी है अभी बाहर अंधेरा ही है,,,,,(इतना कहने के लिए सूरज ने फिर से अपनी मां की बुर को अपने मुंह से बाहर निकाला और फिर इतना कहने के बाद तुरंत मुंह में भरकर चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुनैना फिर से मदहोश हो गई और गहरी सांस लेते हुए बोली)
मैं तो डर ही गई थी,,,,,,, और तुझे अभी समय मिला रात भर दरवाजा खुला छोड़ कर सोई झांकने तक नहीं आया अभी कैसे आ गया,,,,,, चल अब आ गया है तो अच्छे से चाट,,,,, रात को जल्दबाजी में पीछे से काम निपटा दिया,,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,,,(सुनैना एकदम मदहोश होती हुई अपनी दोनों टांगों को और ज्यादा खोलकर अपने दोनों हाथ को अपने बेटे के सर पर रख दी और अपनी बुर पर उसके होठों का दबाव बढ़ने लगी और खुद भी अपनी कमरको ऊपर की तरफ उचकाने लगी,,,,,, खटिया पर सुनैना की मदहोशी एकदम साफ झलक रही थी,,,,, सूरज भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से सूरज अपनी मां को मस्त करता रहा और खुद भी मजा लेता रहा,,,, और फिर धीरे से अपनी मां की टांगों के बीच से हटाओ और घुटनों के बल ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, सुनैना को आप एहसास हुआ कि उसका बेटा पूरी तरह से निर्वस्त्र था मतलब साथ था कि वह उसके कमरे में आकर बहुत कुछ किया था,,,, देखते ही देखते सूरज अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रगड़ने लगा अपने बेटे का इशारा समझ कर वह धीरे से अपने लाल लाल होठों को खोल दिया और अपने बेटे के सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से सूरज एकदम से मदहोश हो गया,,,,, उसके मुंह से भी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी उसे बड़ा मजा आ रहा था। अपनी मां से लंड चुस्वाने के साथ वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी मां की बुर पर हथेली से जोर-जोर से रगड़ रहा था गर्म कर रहा था और उसकी हरकत का जवाब देते हुए सुनैना अपने मुंह को आगे पीछे करके अपने बेटे को मजा दे रही थी।
लालटेन की पीली रोशनी पर्याप्त थी इस कमरे को रोशन बनाने के लिए क्योंकि सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था यह सिलसिला कुछ देर तक इसी तरह से चलता रहा। लेकिन अब समय आ गया था चुदाई करने का क्योंकि अब सूरज से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और धीरे-धीरे समय आगे भी बढ़ रहा था कुछ ही देर में उजला होने वाला था इसलिए सूरज एकदम से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया, जिससे सुनैना की भारी भरकम आधी गांड सूरज की जांघों पर आ गई और सुनैना की बुर सूरज के लंड के बेहद करीब आ गई,,, सुनैना की गुलाबी बर को देखकर सूरज का लंड सलामी भरने लगा वह अपने आप ही ऊपर नीचे होकर हिल रहा था और सच में ऐसा लग रहा था कि जैसे अपनी मां की जवानी देखकर वह सलामी दे रहा हो,,,, गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देख कर सूरज अपनी अकेली को एक बार अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ज़ोर से दबोचते हुए बोला।
सहहहहह बहुत गर्म बुर है तेरी,,,,सहहहहहह ऊमममममम आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा और उसे पर हथौड़े की तरह सुपाड़े का वार करने लगा जिससे सुनैना एकदम से मदहोश होने लगी,,, और फिर देखते ही देखते अपने लंड को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराने लगा,,,, लालटेन की पीली रोशनी में यह मनमोहन रूप और भी ज्यादा उत्तेजक लग रहा था सुनैना भी अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देख रही थी जैसे-जैसे लंड बुर के अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे सुनैना के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे कभी दर्द की रेखाएं खींच जाती तो कभी उत्तेजना और मदहोशी की आभा से पूरा चेहरा तमतमा उठता,,,, धीरे-धीरे करके सूरज अपने समुचे लंड को अपनी मां की बुर में डाल दिया था,,, और फिर अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सूरज अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,,, अभी शाम ढलने के बाद ही खाना बनाते समय ईसी कसमकस में थी कि इस रिश्ते को आगे बढ़ाया जाए या इसे यहीं खत्म कर दिया जाए,,,, सुनैना जानती थी कि आप उसे अपने आप पर काबू नहीं हो पाएगा इसलिए वह अपने मन की बात सुनी थी और इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की ठान ली थी और नतीजा यह था कि सुबह-सुबह ही वह अपने बेटे से चुदाई का सुख भोग रही थी। हर धक्के का मजा लूट रही थी,,, अभी तक सूरज अपनी मां की ब्लाउज का बटन नहीं खोला था बस ऐसे ही वह अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था लेकिन धक्के लगाते समय वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था जिसका पहले से ही दो बटन खुला हुआ था।
ब्लाउज के सारे बटन खोलते ही सुनैना की नंगी जवानी एकदम से लहराने लगी जिसे सूरज अपने दोनों हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते सुनैना के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी लेकिन हीरोइन की बात यह थी कि वह अपनी सिसकारी की आवाज को दबाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी,,, बल्कि बड़ी आनंदित होकर वह शिसकारी भर रही थी। सूरज के हर एक धक्के में उसे मजा मिल रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुई जा रही थी सुबह-सुबह ही आज उसका पूरा दिन बन गया था। मदहोशी में डूबा हुआ सूरज जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था। उसने बहुत सी औरतों की चुदाई किया था लेकिन जो सुख उसे अपनी मां को चोदने में मिलता था वह सुख उसे किसी और औरत में बिल्कुल भी नहीं मिलता था वरना उसकी बहन का भी दरवाजा खुला हुआ था लेकिन वह जवानी से भरी हुई अपनी बहन को नहीं चोदा और अपनी मां के कमरे में आ गया क्योंकि वह जानता था कि यहां पर ही असली सुख मिलने वाला है और असली सुख ले भी रहा था।
कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला अपने बेटे की बात मानते हुए सुनैना पलट गई और घुटनों के बल होकर घोड़ी बन गई उसकी लहराती हुई बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगाता हुआ सूरज फिर से अपने लंड को अपनी मां के बुर में डाल दिया और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाने लगा और यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर दिया और अपनी मां को संतुष्ट करने के बाद उसका खुद का पानी निकल गया,,,, सुबह-सुबह ही मां बेटे दोनों दिन की शुरुआत चुदाई से किए थे दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे सूरज चारपाई से नीचे उतरा और बाहर की तरफ देखा तो धीरे-धीरे उजाला हो रहा था वह जल्दी से अपने कपड़े पहनकर बिना कुछ बोले अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया और धीरे से जाकर अपनी बहन के कमरे के दरवाजे की कड़ी खोल दिया और फिर अपने कमरे में आकर ले लिया क्योंकि इतनी सुबह उठने की उसकी आदत नहीं थी बहुत जरूरी काम होता था तभी वह सुबह उठता था और अगर उसे पेशाब ना लगा होता तो इतना मज़ा वह सुबह-सुबह नहीं ले पाता,,, लेकिन अपने कमरे में आते ही सबसे पहले वह रानी साहिबा के कान के झुमके को दीवार में बनी दरार में छुपाने लगा क्योंकि वह भूल चुका था कि उसके कुर्ते की जेब में रानी साहिबा का झुमका है जो कि अपनी मां के कमरे में कपड़ा उतारते समय झुमका वहीं गिर गया था अच्छा हुआ कि उसकी मां की नजर नहीं पड़ी थी। वरना वह अपनी मां के सवालों का क्या जवाब देता क्योंकि यही तो एक बहाना था रानी साहिबा से दोबारा मुलाकात करने का और वैसे भी राजा साहब अभी घर पर नहीं थे यह बात रानी साहिबा खुद बताई थी यही सही मौका था उससे मेलजोल बढ़ाने का वैसे तो इस मेल जोल में खतरा भी बहुत था लेकिन एक बात तो अच्छी तरह से जानता था कि डर के आगे जीत है। झुमके को छुपा कर वह फिर से खटिया पर लेट गया।