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यात्रियों से बस पूरी तरह से खचाखच भरी हुई थी,,,देर में पहुंचने के कारण सुगंधा और उसके बेटे को बस में बैठने की जगह बिल्कुल भी नहीं मिली थी,,, सुगंधा के भाई के घर सिर्फ यही एक बस जाती थी अगर आज यह बस छोड़ जाती तो आज का प्रोग्राम रद्द करना पड़ता और उन्हें कल फिर से यही बस पकड़नी पड़ती,,, लेकिन गनीमत था कि सुगंधा और उसके बेटे कोबस की टिकट मिल गई थी और बैठने के लिए नहीं बल्कि खड़े रहने की सुविधा तो उन्हें मिल ही गई थी वैसे बस के बीचों बीच खड़े रहने वाले वह दोनों अकेले नहीं थे बहुत से लोग थे जिन्हें बस में सिर्फ खड़े रहने भर की जगह मिली थी।,,,
पान की दुकान पर खड़े होकर पान खा रहा ड्राइवर कंडक्टर के इशारे का इंतजार कर रहा था।गर्मी का महीना होने के नाते बस के अंदर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए और ज्यादा गर्मी का एहसास हो रहा था सुगंध बस के पीछे-पिक खड़ी थी और उसके आगे कुछ औरतें खड़ी थी और सुगंधा के ठीक पीछे अंकित खड़ा था। दूसरों की तरह सुगंधा और उसका बेटा भी बस के चलने का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और अगर बस चलना शुरू हो जाती तो , हवा लगने लगती और थोड़ी राहत मिल जाती लेकिन किसी को भी नहीं मालूम था कि बस कब चलेगी इसीलिए सब लोग अपने आप से ही हवा लेने की कोशिश कर रहे थे कुछ और से साड़ी के पल्लू से हवा ले रही थी तो कुछ लोग अपने हाथ में किसी भी सामान से हवा लेने की कोशिश कर रहे थे।
अरे यार चलाओ बस को कितनी गर्मी लग रही है,,,।(पीछे बैठे एक बुजुर्ग यात्री ने बस को चलने के लिए कंडक्टर से बोल तो उसकी बात को सुनकर कंडक्टर बोला,,)
अरे हां चाचा जी बस थोड़ी ही देर में बस चलने वाली है,,,।
लेकिन कब चलेगी देख रहे हो गर्मी से हालत खराब है एक तो बस पूरी तरह से भरी हुई है और ऊपर से यह गर्मी और ज्यादा परेशान कर रही है।
अरे चाचा जी हम भी जानते हैं बस थोड़ी देर और रुक जाओ,,,।(उसे बुजुर्ग यात्री के साथ-साथ सभी को समझाते हुए कंडक्टर ने बोला,, तो दोबारा किसी ने बस चलने के लिए उससे बोला ही नहीं क्योंकि सबको मालूम था कि थोड़ी देर में बस चलने वाली है,,,,)
मुझे पता होता मम्मी ईतनी भीड़ होती है बस में तो मैं कभी नहीं आता,,,।
इसलिए तो कह रही थी कि जल्दी से तैयार हो जा लेकिन तुझे तो हीरो बनकर जाना है थोड़ा जल्दी आ गया होता तो बैठने की जगह तो मिल जाती धीरे-धीरे आने की वजह से ही हम लोगों को खड़े होकर जाना पड़ रहा है,,,(सुगंधा ऊपर की रेलिंग को पकड़करअपने बेटे से बोली और उसकी बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि वह जानता था कि उसकी वजह से ही देर हुई है उसे नहीं मालूम था कि बस में इस तरह कीभीड़ हो जाती है क्योंकि उसके लिए बस का सफर यह पहली बार का था,,,)
अरे मुझे क्या मालूम था कि बस में इतनी भीड़ हो जाती है,,,।
तेरे मामा के वहां बस यही एक बस जाती है अगर और भी बस जाती तो शायद इतनी भीड़ न होती,,, आप कर भी क्या सकते हैं बस इंतजार कर,,, ड्राइवर पता नहीं कहां चला गया है,,,।(ड्राइवर की खाली सीट की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,अगर ड्राइवर की सीट पर कोई बैठा होता तो शायद उसे इतनी जान होता कि आप गाड़ी चलने वाली है लेकिन ऐसा नहीं था कुछ देर तक इसी तरह से ड्राइवर की सीट खाली रही,,, अंकित भी बार-बार ड्राइवर की सीट की तरफ ही देख रहा था उससे ही गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बस में कहीं पर भी थोड़ी सी जगह नहीं रह गई थी बैठने के लिए जहां पर तीन बैठने चाहिए वहां चार बैठे हुए थे। बस की हालत को देखते हुए अंकित समझ गया था कि बैठने की जगह अब मिलने वाली नहीं है,,,।
लेकिन तभी कंडक्टर ड्राइवर को आवाज लगाया और ड्राइवर की पान की दुकान से पान चबाते हुआबस के अंदर प्रवेश किया और ड्राइवर की सीट पर जाकर बैठ गया ड्राइवर की सीट पर ड्राइवर को बैठा हुआ देखकर सुगंध और अंकित के साथ-साथ बस में सभी यात्री के चेहरे पर राहत के भाव नजर आने लगे क्योंकि उन्हें एहसास हो गया कि अब बस चलने वाली है वैसे भी बस में बैठे-बैठे तकरीबन आधा घंटा गुजर गया था।
ड्राइवर को देखते ही बस में एक दूसरे से सभी लोग बोलने लगे कि अब बस चलने वाली है चिंता मत करो। और इस बात को सुगंधा भी दोहराते हुए बोली।
चिंता मत कर अब बस चलने वाली है।
(सुगंधा का इतना कहना था कि ड्राइवर ने बस को स्टार्ट कर दिया और उसकी आवाज से पूरा माहौल खुशी से जो हम उठा क्योंकि इस समय बस के स्टार्ट होने की आवाज ही लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव ला रही थी क्योंकि काफी देर से सबको इसी का इंतजार था और बस स्टार्ट होते ही ड्राइवर ने गैर बदला और बस का पहिया आगेबढ़ गया लेकिन आगे बढ़ते ही जो लोग सतर्क थे वह तो बच गए लेकिन जो सतर्क नहीं थे वह आगे की तरफ लुढ़क गई और आगे की तरफ अंकित भी लुढ़क गया और सीधा जाकर अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया।,,,,
पल भर में हीअंकित को एहसास हो गया कि आगे का सफर कैसा जाने वाला है क्योंकि वह जिस तरह से अपनी मां के बदन से सटा था,,,पूरी तरह से उसके भारी भरकम गोलाकार ने तंबो से उसके आगे वाला अंग एकदम से जाकर चिपक गया था और अपनी मां की गांड से सटते ही पल भर में ही अंकित का लंड जो की पूरी तरह से सुसुप्त अवस्था में था तुरंत ही उसमें रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा और वह खड़ा होने लगा,,,, सुगंधा भी आगे की तरफलेकिन आगे भीड़ थी इसलिए अपने आप को वह संभाल ली थी और वैसे भी वह बस के ऊपर की रेलिंग को पकड़े हुए थे इसलिए वहअपने आप को पूरी तरह से नियंत्रित कर दी थी लेकिन अंकित पूरी तरह से नियंत्रण हो गया था तन से भी और अब मन से भी,,,।
पहली बार इस तरह से अंकित का अपने ऊपर सट जाना सुगंधा समझ सकती थी कि बस के चलने की वजह से ऐसा हुआ था लेकिन जब दूसरी बार ड्राइवर ने ब्रेक मारा था तब फिर से अंकित इस तरह से अपनी मां के बदन से चिपक सा गया था और इस बार उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और पेट में तंबू बनाया हुआ था और वह सीधा जाकर उसकी मां की भारी भरकम गांड की दरार के बीचों बीच घुस गया था और तब जाकर सुगंधा को इस बात का एहसास हुआ कि उसके बेटे का लंड उसकी गांड में चुभ रहा था,,, और यह एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा करने लगा था लेकिन अगले ही पर अंकित अपने आपको फिर से संभाल लिया था,,,,।
बस मुख्य सड़क पर दौड़ रही थी,,, लेकिन बस के साथ-साथ सुगंधा और उसके बेटे का मन भी बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,,,अंकित बार-बार अपने पेट की तरफ देख रहा था जिसमें तंबू बना हुआ था और अपनी मां की भारी भरकम उभरी हुई गांड की तरफ देख रहा था जो उसके तंबू से मात्र दो अंगुल की दूरी पर ही था वह जानता था कि बस में हल्का सा भी धक्का लगने पर वह सीधा उसकी मां की गांड से टकरा जाएगाइसीलिए वह अपने आप को संभाले हुए था और बार-बार अपने इधर-उधर देख ले रहा था कि कहीं कोई उसकी तरफ देखा तो नहीं रहा है लेकिन सब अपने में ही मगन थे,,,।
सुगंधा की हीम्मत नहीं हो रही थी कि पीछे मुड़कर अंकित की तरफ देख ले क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह मुड़कर अंकित की तरफ देखेगी तो शायद उसके बेटे कोअपनी गलती का एहसास हो जाएगा और वह अपने बेटे को उसकी गलती का एहसास नहीं करना चाहती थी जो कि उस गलती हो नहीं रही थी बल्कि अनजाने में सब कुछ हो जा रहा था और इस अनजाने में हुई गलती का आनंद सुगंध को भी प्राप्त हो रहा था,,,, बस में सभी इधर उधर की बात करके अपना समय व्यतीत कर रहे थेकिसी का भी ध्यान ना तो अंकित की तरफ था और ना ही सुगंधा की तरफ,,, अंकित बार-बार अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ देख ले रहा था उसे इस समय अपनी मां की गांड पर को भगाने लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मां खुद अपनी गांड उसकी तरफ करके उसे ललचा रही हो,,,।
अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि ऐसा मौका इस दोबारा मिलने वाला नहीं है भले ही वह कुछ ज्यादा ना कर पाए लेकिन बस के अंदर भीड़ भड़का फायदा लेते हुए वह इतना तो कर ही सकता है कि अपने लंड को अपनी मां की गांड से सटाकर उसकी गर्मी को महसूस कर सकता है। अंकित को इस बात का भी एहसास था कि दो बार वह अपनी मां से सट चुका था,,,पहली बार ना सही लेकिन दूसरी बार सताने पर उसे पूरा विश्वास था कि उसके लिए पेट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड में धंस गया था जिसका एहसास उसकी मां को भी हुआ होगा,,, लेकिन वह कुछ बोली नहीं इसका मतलब साफ था कि वह भी यही चाहती है,,,,।
सुगंधा के मन में यही सब चल रहा था सुगंध भी अपनी गांड के बीचो-बीच अपनी बेटी के लड्डू को महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे पूरा विश्वास था कि उसकी गांड के बीचों-बीच चुभने वाला अंग कोई और चीज नहीं बल्कि उसके बेटे का लंड ही था और वह अपने मन में सोच कर इस बात से गदगद हुए जा रही थी कि जब साड़ी और पेंट में होने के बावजूद भी उसके बेटे का लंड इतने आराम से उसकी गांड के बीचों-बीच चुभ सकता है तो खुला दौर मिल जाने पर वह तो पूरी तरह से हाहाकार मचा देगा।सुगंधा भी बड़ी बेशबरी से इंतजार कर रही थी कि दोबारा उसके बेटे का लंड उसकी गांड से सट जाए,,,लेकिन बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी ड्राइवर के द्वारा ब्रेक लगाने का कोई अवसर नहीं मिल रहा था इसलिए ना चाहते हुए भी अपनी मनसा को अपनी युक्ति की शक्ल देकरसुगंधा इस बार जान बुझ कर अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को पीछे की तरफ ठेल दी और अपने बेटे के लंड से सट गई,,,।
अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आया अंकित पूरी तरह से आश्चर्य सेमदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी मां ने हरकत ही कुछ ऐसे की थी अंकित अपने दिमाग पर पूरा जोर दे रहा था कि वाकई में ड्राइवर ने ब्रेक लगाया कि नहीं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था बिना ब्रेक लगा है उसकी मां पीछे की तरफ अपनी गांड को दे मारी थी जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां भी यही चाह रही थी जैसा कि वह चाह रहा था अपनी मां की इस तरह की मदहोशी और उसकी उत्तेजना और उसका उतावलापन देखकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की ज्वाला फूटने लगी वह मदहोश होने लगा,,, सुगंधा की हरकत पर एक बार फिर सेअंकित के पेंट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड से टकरा गया था,,,, और यह टक्कर दोनों के तन बदन में आग लगा रही थी,,, हालांकि सुगंधा की कोशिश पूरी तरह से सफलतापूर्वक पूरी नहीं हुई थी क्योंकि ऐसे में उसके बेटे का लंड सिर्फ उसकी गांड से टकराया भर था उसके अंदर घुस नहीं था।
लेकिन फिर भी सुगंधा के लिए भी इतना काफी था क्योंकि इतने से भी उसकी गुलाबी बुर पानी छोड़ रही थी,,,अंकित तो गहरी गहरी सांस ले रहा था बस की भीलवाड़ा में कोई उन दोनों की तरफ देखा नहीं रहा था और यही मौका भी था दोनों के लिए अपनी मंजिल तक पहुंचने का,,,,। सुगंधा मन ही मन में उत्तेजित भी हो रही थी और मुस्कुरा भी रही थी। और अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही अंकित से बोली,,,।
तुझे कोई दिक्कत तो नहीं हो रहा है ना,,,!
नहीं बिल्कुल भी नहीं,,, बस कितना देर लगेगा पहुंचने में,,,।
बस की रफ्तार पर है जितनी जल्दी पहुंचा दे लेकिन फिर भी काफी समय लग जाएगा।
(अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर अंकित अपने मन में ही बोला काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए और अपने मन में सुगंधा भी यही बात को दोहरा रही थी वह भी इस सफ़र से अत्यधिक उत्तेजित और उत्साहित हो रही थी,, वैसे तो घर पर दोनों के बीच काफी कुछ हो चुका था लेकिन इस कदर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि दोनों अपनी सीमा को पूरी तरह से लांघ कर एकाकार हो जाए,, लेकिन आज का यह सफर दोनों की उम्मीद की किरण का सफर था ,,,क्योंकि दोनों के बीच इस तरह का मिलन हो रहा था दोनों के अंगों का स्पर्श हो रहा था यह स्पर्श या मिलन दोनों को एक बिस्तर पर ले जाने के लिए काफी था,,,।
सुगंधा अपनी गांड को आगे लेने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी वह तो मन में यही सोच रही थी कि अंकित भी कुछ हरकत करें और आगे बढ़े ताकि उसके पेट में बना तंबू साड़ी को चीरता हुआ उसकी गांड के बीचों बीच धंस जाए,,, लेकिन तभी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा और दोनों के मन की बात पूरी होने लगी उसके ब्रेक मारते ही अंकित भी एकदम आगे की तरफलुढ़क गया और इस बार उसके पेंट में बना तंबू सीधे-सीधे उसकी मां की गांड के बीचोबीच धंसता हुआ,,, सीधे जाकर उसके गुलाबी द्वार पर ठोकर मारने लगा,,, जैसे ही सुगंधा कोअपने बेटे का लंड अपने गुलाबी द्वार पर ठोकर मारता हुआ महसूस हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई,,,क्योंकि उसे उम्मीद से दुगना मिला था,, वह कभी सोची नहीं थी कि इस अवस्था में साड़ी पहनी होने के बावजूद भी और उसके बेटे का लंड पेंट में होने के बावजूद भी सीधे उसकी बुर पर ठोकर मारेगा,,,।
इससे ही सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड कितना दमदार है,,, बस में ऐकाएक ब्रेक लगी थी बस एक जगह पर रुक गई थी,,,,,, शायद किसी यात्री को लेने के लिए रुकी थी क्योंकि बाहर दो औरतें खड़ी थी,,, सुगंधाबिना अपने आपको अपने बेटे से अलग किए हुए हैं खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगी और वाकई में बस उन दोनों के लिए ही रुकी थी जब वह दोनों बस में चढ़ने लगी तो पीछे बैठे बुजुर्ग ने फिर से आवाज लगाई,,,।
अरे यार कंडक्टर बस तो पहले से ही भरी हुई है और तुम फिर से यात्री चढ़ा रहे हो,,,।
तो क्या हो गया चाचा देख नहीं रहे हो इतनी दोपहर में दौड़ते आखिर जाएंगी कहां,,,,।
(इतना कहकर कंडक्टर इन दोनों की भी टिकट काटने लगा और उसके चढ़ते हीअंकित जो कि अपनी मां से थोड़ा अलग होने की सोच ही रहा था लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल था क्योंकि बस में दो यात्री और चढ़ जाने की वजह से थोड़ी सी जगह वह भी खत्म हो चुकी थी,,, अब तो अंकित चाहता तो भी पीछे अपने पैर नहीं ले सकता था और इस तरह से वह अपने लंड को भी अपनी मां की गांड से अलग नहीं कर पा रहा था,,,.
सुगंधा भी मदहोश हुए जा रही थी सुगंधा भी बस में दो यात्री के चढ़ जाने की वजह से हालात को समझ रही थी,,, और अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि दो औरतों और चढ़ गई बस में अब उसका बेटा चाहेगा भी तो उससे अलग नहीं हो पाएगा,,,इस बात की खुशी सुगंधा के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उत्तेजना से उसका चेहरा एकदम लाल भी हो चुका था सुगंधा भी तो उधर देख ले रही थी कि कहीं कोई हम दोनों को देखा तो नहीं रहा लेकिन किसी का भी ध्यान में दोनों की तरफ बिल्कुल भी नहीं थी इस समय भी सुगंधा की गांड में उसके बेटे का लंड घुसा हुआ था,,। सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी की काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए। और अंकित भी यही चाह रहा था।
उन दोनों औरतों को बस में चढ़ते ही बस फिर से आगे की तरफ बढ़ गई लेकिन अब ना तो सुगंधा अपने आप को अपने बेटे से अलग कर सकती थी ना अंकित,,, दोनों बस की भीड़ में एकदम सटे हुए थे,,,, हालांकि गर्मी सेहालत खराब थी लेकिन फिर भी बस के चलने की वजह से हवा लग रही थी जिसे उन दोनों के साथ-साथ सभी को राहत महसूस हो रही थी,, इस सफर का असली मजा तो मां बेटे ही ले रहे थे,,, सुगंधा को अपनी बुर के द्वार पर अपनी बेटे का लंड एकदम सटा हुआ महसूस हो रहा था,,, और इस अवस्था में वह सोच रही थी कि कहां से उसके लंड और उसकी बुर के बीच साड़ी और पेंट ना होता तो,,, दमदार लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,,।
सुगंधा और उसका बेटा दोनों हालात को अच्छी तरह से समझ रहे थे,,,घर में दोनों के बीच जो कुछ भी होता था आज उससे कहीं ज्यादा दोनों के बीच हो रहा थाक्योंकि दोनों का अंग एक दूसरे के उसे अंग से स्पर्श हो रहा था जिससे संभोग क्रिया की शुरुआत होती है और यही तो दोनों चाहते ही थे दोनों के मन की मुराद पूरी हो रही थी,,,, रह रहकर सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो जा रही थी,वह जानती थी कि जब उसकी हालत खराब हो रही थी उसके बेटे की क्या दशा होती होगी इसलिए वह फिर से अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली,,,।
कोई दिक्कत तो नहीं आराम से खड़ा है ना,,,।
हां मम्मी कोई दिक्कत नहीं आराम से खड़ा हूं,,,(इस बात को बोलकर अंकित अपने मन में सोचने लगा की खास इससे ज्यादा बोलने की उसकी हिम्मत होती तो इस समय अपनी मां से बोल देता की और तो खड़ा ही लेकिन उसका लंड भी खड़ा है तुम अपनी साड़ी ऊपर उठा लो तो ज्यादा मजा आए,,, लेकिन ऐसा कहने की उसकी हिम्मत नहीं हुई,,,लेकिन जिस तरह का आनंद उसे मिल रहा था वह बात नहीं सकता था और ना यह बता सकता था कि इस समय क्या हो रहा है क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां को भी सब कुछ मालूम है,,,, अगर वह अनजान होती तो शायद मोटे तगड़े लंड की चुभन से अनजान बिल्कुल भी ना होती,,।
अंकित अत्यंत उत्साहित और उत्तेजित हो चुका था मन तो उसका कर रहा था कि दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थाम ले और हल्के हल्के से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर ली हालांकि उसे संभोग क्रिया का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इतना तो जानता ही था की चुदाई कैसे होती है क्योंकि वह अपनी आंखों से राहुल और उसकी मां की चुदाई देख चुका था।,, भीड़भाड़ की वजह से अंकित एकदम से अपनी मां से सात गया था वह इस कदर अपनी मां सेचिपका हुआ था कि उसकी मां का पिछवाड़ा पूरी तरह से उसके बेटे के आगे वाले भाग से चपक सा गया था मानो कि जैसे दोनों के बीच संभोग क्रिया हो रही हो,,, और ऐसे हालात में सुगंधा कोअपने बेटे की नाक में से निकलती गहरी सांस अपनी कनपटी पर महसूस हो रही थी जिसकी वजह से हुआ और उत्तेजित हुए जा रही थी और उसकी बर पानी पानी हो रही थी।
हालात पूरी तरह से बेकाबू हुआ जा रहा था अपनी मां की गांड की खुशबू पाकर अंकित का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह कड़क हो चुका था,,, ऐसा लग रहा था कि अगर सुगंध पेंटि ना पहनी होती तो इस समय साड़ी सहित अंकित का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया होता,,,वह तो गनीमत था कि सड़क एकदम समतल थी और बड़े आराम से बस चली जा रही थी अगर ऊपर खबर होता तो शायद इस समय जो एहसास दोनों को होता वह पूरी तरह से दोनों का पानी झाड़ने में सहायक हो जाता,,,।
इसी तरह से मां बेटेआधा सफर से ज्यादा तय कर चुके थे काफी समय हो गया था दोनों को खड़ेरहते लेकिन जिस तरह का हालात दोनों के बीच उत्पन्न हुआ था उसे देखते हुए दोनों को बिल्कुल भी थकावट नहीं लग रही थी बल्कि दोनों बेहद उत्साहित थे,,, रह रहकर सुगंधा अपने पिछवाड़े को पीछे की तरफ दे मार रही थी,,,और अपनी मां की हरकत को देखते हुए अंकित भी थोड़ी छूट चाट लेते हुए और हिम्मत दिखाते हुए अपनी कमर को आगे से मार रहा थाऔर सुगंध को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि उसके बेटे ने कौन सी हरकत किया है और मन ही मां अपने बेटे की हरकत से उत्साहित हुए जा रही थी।
दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप नहीं हो रहा था लेकिन दोनों के अंग बहुत कुछ कह रहे थे,,, एक तरह से दोनों के अंग दोनों की बोलती को बंद किए हुए थे,,, और ऐसे हालात में खामोश रहना हीं सबसे ज्यादा उचित रहता है,,,अंकित अपने मन में सोच रहा था कि काश इस तरह से अपनी मां की चूची पकड़ने का फिर मौका मिल जाता तो और कितना ज्यादा मजा आता ,,,क्योंकि वह ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ था और उसे अपनी मां की चूची दिखाई दे रही थी क्योंकि उसकी लंबाई उसकी मां से थोड़ी सी ज्यादा थी और उसकी मां की चूचियों के बीच की पतली गहरी खाई भी दिखाई दे रही थी जिसमें डूब जाने का उसका मन कर रहा थाबस के ही स्कूलों के साथ-साथ उसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी चूचियां भी रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी जिसे देखने में उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था।
तभी अचानक एक बार फिर से ड्राइवर ने ब्रेक मारा और इस बार,, अंकित का हाथ एकदम से उसकी मां की कमर पर आ गया और जिसे अपने आप को संभालने के लिए अंकित ने अपनी मां की कमर को थाम लियाऔर उसका लंड इस पर कुछ ज्यादा ही अंदर घुसता हुआ पेंटी सहित उसकी मां की गुलाबी बुर की दोनों पत्तियों को हल्का सा खोलकर अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा और उसी पर अचानक रुक भी गया,,, इस बार सुगंधा अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई,,,क्योंकि बहुत देर से वह अपनी उत्तेजना को दबाए हुए थे लेकिन इस बार तो उसके बेटे के लंड ने सारी मर्यादा को सारी दीवारों को तोड़ कर आगे बढ़ चुका था,,,वह कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से खड़े-खड़े उसके बेटे का लंड उसकी बुर की इतने करीब पहुंच पाएगा हालांकि कुछ देर पहले ठोकर तो मार ही रहा था लेकिन पेंटी सहित अंदर तक घुस आएगा इस बारे में कभी सोच नहीं थी,,,,।
इसलिए तो उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी थी जिसे उसके बेटे ने एकदम साफ तौर पर सुना था और उसकी शिसकारी की आवाज सुनकर उसे राहुल की मां याद आ गई थी जब चुदवाते समय इसी तरह की आवाज उसके मुंह से निकल रही थी,,,, ड्राइवर ने इसलिए तेज ब्रेक लगाया था क्योंकिजब कच्ची सड़क शुरू हो गई थी वह बरखबर ऊपर नीचे होते हुए बस को जाना था और यह हालत इस तरह का अवसर दोनों मां बेटे को कभी मिलने वाला नहीं था क्योंकि जैसे ही आगे बस बढ़ने लगी उसमेंहलचल बढ़ने लगी बस हिलने लगी और उसके हिलने की वजह से दोनों का शरीर भी हीलने लगा और बार-बारअंकित का लंड सुगंधा की बुर पर ठोकर मारने लगा मानो के जैसे उसे चोदने की तैयारी कर रहा हो,,,।
जैसे-जैसे बस आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे दोनों की हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी और अब तो बस जिस तरह से कच्ची सड़क पर चल रही थी अब अंकित को अपनी मनमानी करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी वह इस गति का फायदा उठा रहा था बस की चाल की गति के साथ-साथ अपनी कमर की भी गति से वह खेल रहा था। सुगंधा को साफ एहसास हो रहा था कि उसका बेटा अपनी कमर हिला रहा था मानों जैसे कि उसकी चुदाई कर रहा हो और अपने बेटे की ईस हरकत से वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,ऐसा नहीं था कि अंकित मनमानी अपनी कमर हिला रहा था वह मौका देखकर जैसे ही गाड़ी हिचकोले खाती वैसे ही अपनी कमर को दे मरता था अपनी मां की गांड पर और यह उसकी यह हरकत इतनी अद्भुत और मदहोश कर देने वाली थी किसुगंधा की ओर से पानी निकलने लगा था वह एकदम से झड़ने लगी थी और झड़ने समय उसके चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा था वह किसी तरह से अपने चेहरे के हाव-भाव को छुपा कर इस तरह से खड़ी रही लेकिन उसका पानी निकल गया था।
लेकिन इस दौरान भी अंकित ज्यो का त्यों बना हुआ था,,, वह अभी भी बरकरार था लेकिनमंजिल आ चुकी थी बस एक जगह खड़ी हो गई और धीरे-धीरे सभी यात्री नीचे उतरने लगे जैसे तैसे करके अंकित बस से नीचे उतरा क्योंकि उसके पेंट में अभी भी तंबू बना हुआ था और जहां पर बस रुकी हुई थी वहां पर जंगली झाड़ियां थी इसलिए वहसभी से नजर बचाकर तुरंत झाड़ियां के बीच चला गया और वहां पेशाब करने लगा था कि उसके पेट में बना तंबू एकदम शांत हो सके,,,, और जब वाकई में सब शांत हो गया तो वह धीरे से अपनी मां के पास आयाजो कि वही खड़ी थी लेकिन उसकी मां शर्म के मारे अपनी नजर अंकित से नहीं मिल पा रही थी और धीरे से एक मिठाई की दुकान पर जल्दी और मिठाई खरीद कर अपने भाई के घर की तरफ जाने लगी जहां से उसके भाई का घर 10 मिनट की ही दूरी पर था।
पान की दुकान पर खड़े होकर पान खा रहा ड्राइवर कंडक्टर के इशारे का इंतजार कर रहा था।गर्मी का महीना होने के नाते बस के अंदर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए और ज्यादा गर्मी का एहसास हो रहा था सुगंध बस के पीछे-पिक खड़ी थी और उसके आगे कुछ औरतें खड़ी थी और सुगंधा के ठीक पीछे अंकित खड़ा था। दूसरों की तरह सुगंधा और उसका बेटा भी बस के चलने का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और अगर बस चलना शुरू हो जाती तो , हवा लगने लगती और थोड़ी राहत मिल जाती लेकिन किसी को भी नहीं मालूम था कि बस कब चलेगी इसीलिए सब लोग अपने आप से ही हवा लेने की कोशिश कर रहे थे कुछ और से साड़ी के पल्लू से हवा ले रही थी तो कुछ लोग अपने हाथ में किसी भी सामान से हवा लेने की कोशिश कर रहे थे।
अरे यार चलाओ बस को कितनी गर्मी लग रही है,,,।(पीछे बैठे एक बुजुर्ग यात्री ने बस को चलने के लिए कंडक्टर से बोल तो उसकी बात को सुनकर कंडक्टर बोला,,)
अरे हां चाचा जी बस थोड़ी ही देर में बस चलने वाली है,,,।
लेकिन कब चलेगी देख रहे हो गर्मी से हालत खराब है एक तो बस पूरी तरह से भरी हुई है और ऊपर से यह गर्मी और ज्यादा परेशान कर रही है।
अरे चाचा जी हम भी जानते हैं बस थोड़ी देर और रुक जाओ,,,।(उसे बुजुर्ग यात्री के साथ-साथ सभी को समझाते हुए कंडक्टर ने बोला,, तो दोबारा किसी ने बस चलने के लिए उससे बोला ही नहीं क्योंकि सबको मालूम था कि थोड़ी देर में बस चलने वाली है,,,,)
मुझे पता होता मम्मी ईतनी भीड़ होती है बस में तो मैं कभी नहीं आता,,,।
इसलिए तो कह रही थी कि जल्दी से तैयार हो जा लेकिन तुझे तो हीरो बनकर जाना है थोड़ा जल्दी आ गया होता तो बैठने की जगह तो मिल जाती धीरे-धीरे आने की वजह से ही हम लोगों को खड़े होकर जाना पड़ रहा है,,,(सुगंधा ऊपर की रेलिंग को पकड़करअपने बेटे से बोली और उसकी बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि वह जानता था कि उसकी वजह से ही देर हुई है उसे नहीं मालूम था कि बस में इस तरह कीभीड़ हो जाती है क्योंकि उसके लिए बस का सफर यह पहली बार का था,,,)
अरे मुझे क्या मालूम था कि बस में इतनी भीड़ हो जाती है,,,।
तेरे मामा के वहां बस यही एक बस जाती है अगर और भी बस जाती तो शायद इतनी भीड़ न होती,,, आप कर भी क्या सकते हैं बस इंतजार कर,,, ड्राइवर पता नहीं कहां चला गया है,,,।(ड्राइवर की खाली सीट की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,अगर ड्राइवर की सीट पर कोई बैठा होता तो शायद उसे इतनी जान होता कि आप गाड़ी चलने वाली है लेकिन ऐसा नहीं था कुछ देर तक इसी तरह से ड्राइवर की सीट खाली रही,,, अंकित भी बार-बार ड्राइवर की सीट की तरफ ही देख रहा था उससे ही गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बस में कहीं पर भी थोड़ी सी जगह नहीं रह गई थी बैठने के लिए जहां पर तीन बैठने चाहिए वहां चार बैठे हुए थे। बस की हालत को देखते हुए अंकित समझ गया था कि बैठने की जगह अब मिलने वाली नहीं है,,,।
लेकिन तभी कंडक्टर ड्राइवर को आवाज लगाया और ड्राइवर की पान की दुकान से पान चबाते हुआबस के अंदर प्रवेश किया और ड्राइवर की सीट पर जाकर बैठ गया ड्राइवर की सीट पर ड्राइवर को बैठा हुआ देखकर सुगंध और अंकित के साथ-साथ बस में सभी यात्री के चेहरे पर राहत के भाव नजर आने लगे क्योंकि उन्हें एहसास हो गया कि अब बस चलने वाली है वैसे भी बस में बैठे-बैठे तकरीबन आधा घंटा गुजर गया था।
ड्राइवर को देखते ही बस में एक दूसरे से सभी लोग बोलने लगे कि अब बस चलने वाली है चिंता मत करो। और इस बात को सुगंधा भी दोहराते हुए बोली।
चिंता मत कर अब बस चलने वाली है।
(सुगंधा का इतना कहना था कि ड्राइवर ने बस को स्टार्ट कर दिया और उसकी आवाज से पूरा माहौल खुशी से जो हम उठा क्योंकि इस समय बस के स्टार्ट होने की आवाज ही लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव ला रही थी क्योंकि काफी देर से सबको इसी का इंतजार था और बस स्टार्ट होते ही ड्राइवर ने गैर बदला और बस का पहिया आगेबढ़ गया लेकिन आगे बढ़ते ही जो लोग सतर्क थे वह तो बच गए लेकिन जो सतर्क नहीं थे वह आगे की तरफ लुढ़क गई और आगे की तरफ अंकित भी लुढ़क गया और सीधा जाकर अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया।,,,,
पल भर में हीअंकित को एहसास हो गया कि आगे का सफर कैसा जाने वाला है क्योंकि वह जिस तरह से अपनी मां के बदन से सटा था,,,पूरी तरह से उसके भारी भरकम गोलाकार ने तंबो से उसके आगे वाला अंग एकदम से जाकर चिपक गया था और अपनी मां की गांड से सटते ही पल भर में ही अंकित का लंड जो की पूरी तरह से सुसुप्त अवस्था में था तुरंत ही उसमें रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा और वह खड़ा होने लगा,,,, सुगंधा भी आगे की तरफलेकिन आगे भीड़ थी इसलिए अपने आप को वह संभाल ली थी और वैसे भी वह बस के ऊपर की रेलिंग को पकड़े हुए थे इसलिए वहअपने आप को पूरी तरह से नियंत्रित कर दी थी लेकिन अंकित पूरी तरह से नियंत्रण हो गया था तन से भी और अब मन से भी,,,।
पहली बार इस तरह से अंकित का अपने ऊपर सट जाना सुगंधा समझ सकती थी कि बस के चलने की वजह से ऐसा हुआ था लेकिन जब दूसरी बार ड्राइवर ने ब्रेक मारा था तब फिर से अंकित इस तरह से अपनी मां के बदन से चिपक सा गया था और इस बार उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और पेट में तंबू बनाया हुआ था और वह सीधा जाकर उसकी मां की भारी भरकम गांड की दरार के बीचों बीच घुस गया था और तब जाकर सुगंधा को इस बात का एहसास हुआ कि उसके बेटे का लंड उसकी गांड में चुभ रहा था,,, और यह एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा करने लगा था लेकिन अगले ही पर अंकित अपने आपको फिर से संभाल लिया था,,,,।
बस मुख्य सड़क पर दौड़ रही थी,,, लेकिन बस के साथ-साथ सुगंधा और उसके बेटे का मन भी बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,,,अंकित बार-बार अपने पेट की तरफ देख रहा था जिसमें तंबू बना हुआ था और अपनी मां की भारी भरकम उभरी हुई गांड की तरफ देख रहा था जो उसके तंबू से मात्र दो अंगुल की दूरी पर ही था वह जानता था कि बस में हल्का सा भी धक्का लगने पर वह सीधा उसकी मां की गांड से टकरा जाएगाइसीलिए वह अपने आप को संभाले हुए था और बार-बार अपने इधर-उधर देख ले रहा था कि कहीं कोई उसकी तरफ देखा तो नहीं रहा है लेकिन सब अपने में ही मगन थे,,,।
सुगंधा की हीम्मत नहीं हो रही थी कि पीछे मुड़कर अंकित की तरफ देख ले क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह मुड़कर अंकित की तरफ देखेगी तो शायद उसके बेटे कोअपनी गलती का एहसास हो जाएगा और वह अपने बेटे को उसकी गलती का एहसास नहीं करना चाहती थी जो कि उस गलती हो नहीं रही थी बल्कि अनजाने में सब कुछ हो जा रहा था और इस अनजाने में हुई गलती का आनंद सुगंध को भी प्राप्त हो रहा था,,,, बस में सभी इधर उधर की बात करके अपना समय व्यतीत कर रहे थेकिसी का भी ध्यान ना तो अंकित की तरफ था और ना ही सुगंधा की तरफ,,, अंकित बार-बार अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ देख ले रहा था उसे इस समय अपनी मां की गांड पर को भगाने लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मां खुद अपनी गांड उसकी तरफ करके उसे ललचा रही हो,,,।
अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि ऐसा मौका इस दोबारा मिलने वाला नहीं है भले ही वह कुछ ज्यादा ना कर पाए लेकिन बस के अंदर भीड़ भड़का फायदा लेते हुए वह इतना तो कर ही सकता है कि अपने लंड को अपनी मां की गांड से सटाकर उसकी गर्मी को महसूस कर सकता है। अंकित को इस बात का भी एहसास था कि दो बार वह अपनी मां से सट चुका था,,,पहली बार ना सही लेकिन दूसरी बार सताने पर उसे पूरा विश्वास था कि उसके लिए पेट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड में धंस गया था जिसका एहसास उसकी मां को भी हुआ होगा,,, लेकिन वह कुछ बोली नहीं इसका मतलब साफ था कि वह भी यही चाहती है,,,,।
सुगंधा के मन में यही सब चल रहा था सुगंध भी अपनी गांड के बीचो-बीच अपनी बेटी के लड्डू को महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे पूरा विश्वास था कि उसकी गांड के बीचों-बीच चुभने वाला अंग कोई और चीज नहीं बल्कि उसके बेटे का लंड ही था और वह अपने मन में सोच कर इस बात से गदगद हुए जा रही थी कि जब साड़ी और पेंट में होने के बावजूद भी उसके बेटे का लंड इतने आराम से उसकी गांड के बीचों-बीच चुभ सकता है तो खुला दौर मिल जाने पर वह तो पूरी तरह से हाहाकार मचा देगा।सुगंधा भी बड़ी बेशबरी से इंतजार कर रही थी कि दोबारा उसके बेटे का लंड उसकी गांड से सट जाए,,,लेकिन बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी ड्राइवर के द्वारा ब्रेक लगाने का कोई अवसर नहीं मिल रहा था इसलिए ना चाहते हुए भी अपनी मनसा को अपनी युक्ति की शक्ल देकरसुगंधा इस बार जान बुझ कर अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को पीछे की तरफ ठेल दी और अपने बेटे के लंड से सट गई,,,।
अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आया अंकित पूरी तरह से आश्चर्य सेमदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी मां ने हरकत ही कुछ ऐसे की थी अंकित अपने दिमाग पर पूरा जोर दे रहा था कि वाकई में ड्राइवर ने ब्रेक लगाया कि नहीं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था बिना ब्रेक लगा है उसकी मां पीछे की तरफ अपनी गांड को दे मारी थी जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां भी यही चाह रही थी जैसा कि वह चाह रहा था अपनी मां की इस तरह की मदहोशी और उसकी उत्तेजना और उसका उतावलापन देखकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की ज्वाला फूटने लगी वह मदहोश होने लगा,,, सुगंधा की हरकत पर एक बार फिर सेअंकित के पेंट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड से टकरा गया था,,,, और यह टक्कर दोनों के तन बदन में आग लगा रही थी,,, हालांकि सुगंधा की कोशिश पूरी तरह से सफलतापूर्वक पूरी नहीं हुई थी क्योंकि ऐसे में उसके बेटे का लंड सिर्फ उसकी गांड से टकराया भर था उसके अंदर घुस नहीं था।
लेकिन फिर भी सुगंधा के लिए भी इतना काफी था क्योंकि इतने से भी उसकी गुलाबी बुर पानी छोड़ रही थी,,,अंकित तो गहरी गहरी सांस ले रहा था बस की भीलवाड़ा में कोई उन दोनों की तरफ देखा नहीं रहा था और यही मौका भी था दोनों के लिए अपनी मंजिल तक पहुंचने का,,,,। सुगंधा मन ही मन में उत्तेजित भी हो रही थी और मुस्कुरा भी रही थी। और अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही अंकित से बोली,,,।
तुझे कोई दिक्कत तो नहीं हो रहा है ना,,,!
नहीं बिल्कुल भी नहीं,,, बस कितना देर लगेगा पहुंचने में,,,।
बस की रफ्तार पर है जितनी जल्दी पहुंचा दे लेकिन फिर भी काफी समय लग जाएगा।
(अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर अंकित अपने मन में ही बोला काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए और अपने मन में सुगंधा भी यही बात को दोहरा रही थी वह भी इस सफ़र से अत्यधिक उत्तेजित और उत्साहित हो रही थी,, वैसे तो घर पर दोनों के बीच काफी कुछ हो चुका था लेकिन इस कदर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि दोनों अपनी सीमा को पूरी तरह से लांघ कर एकाकार हो जाए,, लेकिन आज का यह सफर दोनों की उम्मीद की किरण का सफर था ,,,क्योंकि दोनों के बीच इस तरह का मिलन हो रहा था दोनों के अंगों का स्पर्श हो रहा था यह स्पर्श या मिलन दोनों को एक बिस्तर पर ले जाने के लिए काफी था,,,।
सुगंधा अपनी गांड को आगे लेने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी वह तो मन में यही सोच रही थी कि अंकित भी कुछ हरकत करें और आगे बढ़े ताकि उसके पेट में बना तंबू साड़ी को चीरता हुआ उसकी गांड के बीचों बीच धंस जाए,,, लेकिन तभी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा और दोनों के मन की बात पूरी होने लगी उसके ब्रेक मारते ही अंकित भी एकदम आगे की तरफलुढ़क गया और इस बार उसके पेंट में बना तंबू सीधे-सीधे उसकी मां की गांड के बीचोबीच धंसता हुआ,,, सीधे जाकर उसके गुलाबी द्वार पर ठोकर मारने लगा,,, जैसे ही सुगंधा कोअपने बेटे का लंड अपने गुलाबी द्वार पर ठोकर मारता हुआ महसूस हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई,,,क्योंकि उसे उम्मीद से दुगना मिला था,, वह कभी सोची नहीं थी कि इस अवस्था में साड़ी पहनी होने के बावजूद भी और उसके बेटे का लंड पेंट में होने के बावजूद भी सीधे उसकी बुर पर ठोकर मारेगा,,,।
इससे ही सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड कितना दमदार है,,, बस में ऐकाएक ब्रेक लगी थी बस एक जगह पर रुक गई थी,,,,,, शायद किसी यात्री को लेने के लिए रुकी थी क्योंकि बाहर दो औरतें खड़ी थी,,, सुगंधाबिना अपने आपको अपने बेटे से अलग किए हुए हैं खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगी और वाकई में बस उन दोनों के लिए ही रुकी थी जब वह दोनों बस में चढ़ने लगी तो पीछे बैठे बुजुर्ग ने फिर से आवाज लगाई,,,।
अरे यार कंडक्टर बस तो पहले से ही भरी हुई है और तुम फिर से यात्री चढ़ा रहे हो,,,।
तो क्या हो गया चाचा देख नहीं रहे हो इतनी दोपहर में दौड़ते आखिर जाएंगी कहां,,,,।
(इतना कहकर कंडक्टर इन दोनों की भी टिकट काटने लगा और उसके चढ़ते हीअंकित जो कि अपनी मां से थोड़ा अलग होने की सोच ही रहा था लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल था क्योंकि बस में दो यात्री और चढ़ जाने की वजह से थोड़ी सी जगह वह भी खत्म हो चुकी थी,,, अब तो अंकित चाहता तो भी पीछे अपने पैर नहीं ले सकता था और इस तरह से वह अपने लंड को भी अपनी मां की गांड से अलग नहीं कर पा रहा था,,,.
सुगंधा भी मदहोश हुए जा रही थी सुगंधा भी बस में दो यात्री के चढ़ जाने की वजह से हालात को समझ रही थी,,, और अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि दो औरतों और चढ़ गई बस में अब उसका बेटा चाहेगा भी तो उससे अलग नहीं हो पाएगा,,,इस बात की खुशी सुगंधा के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उत्तेजना से उसका चेहरा एकदम लाल भी हो चुका था सुगंधा भी तो उधर देख ले रही थी कि कहीं कोई हम दोनों को देखा तो नहीं रहा लेकिन किसी का भी ध्यान में दोनों की तरफ बिल्कुल भी नहीं थी इस समय भी सुगंधा की गांड में उसके बेटे का लंड घुसा हुआ था,,। सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी की काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए। और अंकित भी यही चाह रहा था।
उन दोनों औरतों को बस में चढ़ते ही बस फिर से आगे की तरफ बढ़ गई लेकिन अब ना तो सुगंधा अपने आप को अपने बेटे से अलग कर सकती थी ना अंकित,,, दोनों बस की भीड़ में एकदम सटे हुए थे,,,, हालांकि गर्मी सेहालत खराब थी लेकिन फिर भी बस के चलने की वजह से हवा लग रही थी जिसे उन दोनों के साथ-साथ सभी को राहत महसूस हो रही थी,, इस सफर का असली मजा तो मां बेटे ही ले रहे थे,,, सुगंधा को अपनी बुर के द्वार पर अपनी बेटे का लंड एकदम सटा हुआ महसूस हो रहा था,,, और इस अवस्था में वह सोच रही थी कि कहां से उसके लंड और उसकी बुर के बीच साड़ी और पेंट ना होता तो,,, दमदार लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,,।
सुगंधा और उसका बेटा दोनों हालात को अच्छी तरह से समझ रहे थे,,,घर में दोनों के बीच जो कुछ भी होता था आज उससे कहीं ज्यादा दोनों के बीच हो रहा थाक्योंकि दोनों का अंग एक दूसरे के उसे अंग से स्पर्श हो रहा था जिससे संभोग क्रिया की शुरुआत होती है और यही तो दोनों चाहते ही थे दोनों के मन की मुराद पूरी हो रही थी,,,, रह रहकर सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो जा रही थी,वह जानती थी कि जब उसकी हालत खराब हो रही थी उसके बेटे की क्या दशा होती होगी इसलिए वह फिर से अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली,,,।
कोई दिक्कत तो नहीं आराम से खड़ा है ना,,,।
हां मम्मी कोई दिक्कत नहीं आराम से खड़ा हूं,,,(इस बात को बोलकर अंकित अपने मन में सोचने लगा की खास इससे ज्यादा बोलने की उसकी हिम्मत होती तो इस समय अपनी मां से बोल देता की और तो खड़ा ही लेकिन उसका लंड भी खड़ा है तुम अपनी साड़ी ऊपर उठा लो तो ज्यादा मजा आए,,, लेकिन ऐसा कहने की उसकी हिम्मत नहीं हुई,,,लेकिन जिस तरह का आनंद उसे मिल रहा था वह बात नहीं सकता था और ना यह बता सकता था कि इस समय क्या हो रहा है क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां को भी सब कुछ मालूम है,,,, अगर वह अनजान होती तो शायद मोटे तगड़े लंड की चुभन से अनजान बिल्कुल भी ना होती,,।
अंकित अत्यंत उत्साहित और उत्तेजित हो चुका था मन तो उसका कर रहा था कि दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थाम ले और हल्के हल्के से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर ली हालांकि उसे संभोग क्रिया का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इतना तो जानता ही था की चुदाई कैसे होती है क्योंकि वह अपनी आंखों से राहुल और उसकी मां की चुदाई देख चुका था।,, भीड़भाड़ की वजह से अंकित एकदम से अपनी मां से सात गया था वह इस कदर अपनी मां सेचिपका हुआ था कि उसकी मां का पिछवाड़ा पूरी तरह से उसके बेटे के आगे वाले भाग से चपक सा गया था मानो कि जैसे दोनों के बीच संभोग क्रिया हो रही हो,,, और ऐसे हालात में सुगंधा कोअपने बेटे की नाक में से निकलती गहरी सांस अपनी कनपटी पर महसूस हो रही थी जिसकी वजह से हुआ और उत्तेजित हुए जा रही थी और उसकी बर पानी पानी हो रही थी।
हालात पूरी तरह से बेकाबू हुआ जा रहा था अपनी मां की गांड की खुशबू पाकर अंकित का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह कड़क हो चुका था,,, ऐसा लग रहा था कि अगर सुगंध पेंटि ना पहनी होती तो इस समय साड़ी सहित अंकित का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया होता,,,वह तो गनीमत था कि सड़क एकदम समतल थी और बड़े आराम से बस चली जा रही थी अगर ऊपर खबर होता तो शायद इस समय जो एहसास दोनों को होता वह पूरी तरह से दोनों का पानी झाड़ने में सहायक हो जाता,,,।
इसी तरह से मां बेटेआधा सफर से ज्यादा तय कर चुके थे काफी समय हो गया था दोनों को खड़ेरहते लेकिन जिस तरह का हालात दोनों के बीच उत्पन्न हुआ था उसे देखते हुए दोनों को बिल्कुल भी थकावट नहीं लग रही थी बल्कि दोनों बेहद उत्साहित थे,,, रह रहकर सुगंधा अपने पिछवाड़े को पीछे की तरफ दे मार रही थी,,,और अपनी मां की हरकत को देखते हुए अंकित भी थोड़ी छूट चाट लेते हुए और हिम्मत दिखाते हुए अपनी कमर को आगे से मार रहा थाऔर सुगंध को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि उसके बेटे ने कौन सी हरकत किया है और मन ही मां अपने बेटे की हरकत से उत्साहित हुए जा रही थी।
दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप नहीं हो रहा था लेकिन दोनों के अंग बहुत कुछ कह रहे थे,,, एक तरह से दोनों के अंग दोनों की बोलती को बंद किए हुए थे,,, और ऐसे हालात में खामोश रहना हीं सबसे ज्यादा उचित रहता है,,,अंकित अपने मन में सोच रहा था कि काश इस तरह से अपनी मां की चूची पकड़ने का फिर मौका मिल जाता तो और कितना ज्यादा मजा आता ,,,क्योंकि वह ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ था और उसे अपनी मां की चूची दिखाई दे रही थी क्योंकि उसकी लंबाई उसकी मां से थोड़ी सी ज्यादा थी और उसकी मां की चूचियों के बीच की पतली गहरी खाई भी दिखाई दे रही थी जिसमें डूब जाने का उसका मन कर रहा थाबस के ही स्कूलों के साथ-साथ उसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी चूचियां भी रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी जिसे देखने में उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था।
तभी अचानक एक बार फिर से ड्राइवर ने ब्रेक मारा और इस बार,, अंकित का हाथ एकदम से उसकी मां की कमर पर आ गया और जिसे अपने आप को संभालने के लिए अंकित ने अपनी मां की कमर को थाम लियाऔर उसका लंड इस पर कुछ ज्यादा ही अंदर घुसता हुआ पेंटी सहित उसकी मां की गुलाबी बुर की दोनों पत्तियों को हल्का सा खोलकर अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा और उसी पर अचानक रुक भी गया,,, इस बार सुगंधा अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई,,,क्योंकि बहुत देर से वह अपनी उत्तेजना को दबाए हुए थे लेकिन इस बार तो उसके बेटे के लंड ने सारी मर्यादा को सारी दीवारों को तोड़ कर आगे बढ़ चुका था,,,वह कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से खड़े-खड़े उसके बेटे का लंड उसकी बुर की इतने करीब पहुंच पाएगा हालांकि कुछ देर पहले ठोकर तो मार ही रहा था लेकिन पेंटी सहित अंदर तक घुस आएगा इस बारे में कभी सोच नहीं थी,,,,।
इसलिए तो उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी थी जिसे उसके बेटे ने एकदम साफ तौर पर सुना था और उसकी शिसकारी की आवाज सुनकर उसे राहुल की मां याद आ गई थी जब चुदवाते समय इसी तरह की आवाज उसके मुंह से निकल रही थी,,,, ड्राइवर ने इसलिए तेज ब्रेक लगाया था क्योंकिजब कच्ची सड़क शुरू हो गई थी वह बरखबर ऊपर नीचे होते हुए बस को जाना था और यह हालत इस तरह का अवसर दोनों मां बेटे को कभी मिलने वाला नहीं था क्योंकि जैसे ही आगे बस बढ़ने लगी उसमेंहलचल बढ़ने लगी बस हिलने लगी और उसके हिलने की वजह से दोनों का शरीर भी हीलने लगा और बार-बारअंकित का लंड सुगंधा की बुर पर ठोकर मारने लगा मानो के जैसे उसे चोदने की तैयारी कर रहा हो,,,।
जैसे-जैसे बस आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे दोनों की हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी और अब तो बस जिस तरह से कच्ची सड़क पर चल रही थी अब अंकित को अपनी मनमानी करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी वह इस गति का फायदा उठा रहा था बस की चाल की गति के साथ-साथ अपनी कमर की भी गति से वह खेल रहा था। सुगंधा को साफ एहसास हो रहा था कि उसका बेटा अपनी कमर हिला रहा था मानों जैसे कि उसकी चुदाई कर रहा हो और अपने बेटे की ईस हरकत से वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,ऐसा नहीं था कि अंकित मनमानी अपनी कमर हिला रहा था वह मौका देखकर जैसे ही गाड़ी हिचकोले खाती वैसे ही अपनी कमर को दे मरता था अपनी मां की गांड पर और यह उसकी यह हरकत इतनी अद्भुत और मदहोश कर देने वाली थी किसुगंधा की ओर से पानी निकलने लगा था वह एकदम से झड़ने लगी थी और झड़ने समय उसके चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा था वह किसी तरह से अपने चेहरे के हाव-भाव को छुपा कर इस तरह से खड़ी रही लेकिन उसका पानी निकल गया था।
लेकिन इस दौरान भी अंकित ज्यो का त्यों बना हुआ था,,, वह अभी भी बरकरार था लेकिनमंजिल आ चुकी थी बस एक जगह खड़ी हो गई और धीरे-धीरे सभी यात्री नीचे उतरने लगे जैसे तैसे करके अंकित बस से नीचे उतरा क्योंकि उसके पेंट में अभी भी तंबू बना हुआ था और जहां पर बस रुकी हुई थी वहां पर जंगली झाड़ियां थी इसलिए वहसभी से नजर बचाकर तुरंत झाड़ियां के बीच चला गया और वहां पेशाब करने लगा था कि उसके पेट में बना तंबू एकदम शांत हो सके,,,, और जब वाकई में सब शांत हो गया तो वह धीरे से अपनी मां के पास आयाजो कि वही खड़ी थी लेकिन उसकी मां शर्म के मारे अपनी नजर अंकित से नहीं मिल पा रही थी और धीरे से एक मिठाई की दुकान पर जल्दी और मिठाई खरीद कर अपने भाई के घर की तरफ जाने लगी जहां से उसके भाई का घर 10 मिनट की ही दूरी पर था।