सुगंधा को बहुत जोरों का बुखार चढ़ा हुआ था,,, अंकित को इसकी जानकारी होते ही हो अपनी मां को दवा खाना लेकर जा रहा था,,,,, बुखार कुछ ज्यादा ही था तभी तो सुगंधा को चलने तक की ताकत नहीं थी,,, त्रप्ती घर पर नहीं थी,,, वैसे भी कुछ दिनों से उसका घर पर होना ना होना एक बराबर था क्योंकि वह संदीप के ही ख्यालों में खोई रहती थी,,, संदीप सेवा बढ़ चुकी थी संदीप उसे छोड़कर दूसरे शहर जा चुका था लेकिन फिर भी तृप्ति थी कि उसकी याद में पागल हो रही थी,,,, लेकिन जैसे तैसे करके वह धीरे-धीरे इस दुख से निकलने की कोशिश कर रही थी,,,।
तृप्ति के गैर मौजूदगी में अंकित को ही अपनी मां को दवा खाना ले जाना पड़ा,,,, कुछ दूर तक चलने के बाद ऑटो रिक्शा देखते ही उसे हाथ देकर अंकित ने रोका,,,, और फिर दोनों उसमें बैठकर दवा खाने के लिए निकल गए,,,,, बार-बार अंकित अपनी मां के सर पर हाथ रखकर उसके बुखार की जांच पड़ताल कर रहा था वाकई में उसका माथा बहुत ज्यादा गर्म था,, लेकिन ऐसी हालत में भी अंकित की नजर अपनी मां की चूचियों पर चली जा रही थी जो की अस्त-व्यस्त हालत में उसकी चूचियों की दरार एकदम साफ नजर आ रही थी,,,। बहुत दिनों बाद घर में किसी की तबीयत इस तरह से खराब हुई थी,,,, इसलिए अंकित थोड़ा चिंतित भी था,,,।
थोड़ी ही देर में,,, दवाखाना आ गया था ऑटो वाला ठीक दवा खाने के सामने रोक दिया,,,, अंकित धीरे से अपनी मां को सहारा देकर नीचे उतरा और उसे ऑटो वाले का किराया देकर अपनी मां की बांह पकड़कर दवा खाने में ले जाने लगा दोपहर का समय होने की वजह से दवा खाने में कोई दूसरा मरीज नहीं था इसलिए तुरंत ही नंबर आ गया था,,,। यह दवाखाना घर के थोड़ी ही दूरी पर था और अक्सर सुगंधा यहीं से दवा ले जाया करती थी और उसे आराम भी हो जाया करता अंकित भी अपनी मां के साथ दो-तीन बार यहां पर आ चुका था इसलिए उसे मालूम था कि ऐसे हालात में उसकी मां को कहां ले जाना चाहिए,,,।
अंकित अपनी मां को सहारा देकर धीरे-धीरे डॉक्टर के केबिन में ले गया डॉक्टर अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ था जब अंकित अपनी मां को सहारा देकर कुर्सी पर बैठने जा रहा था तब उसकी मां की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया था और उसकी भारी भरकम छातियां एकदम से उजागर हो गई थी जिस पर डॉक्टर की नजर पड़ते ही उसकी लार टपकने लगी थी,,, डॉक्टर तो सुगंधा की मदहोश कर देने वाली छातिया को देखता ही रह गया,,,वह एकदम प्यासी नजरों से सुगंधा को देख रहा था,,, उसकी नजरों से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे आज तक कुछ नहीं थी खूबसूरत औरत देखा ही नहीं था,,,,।
और वैसे भी सुगंधा का गठीला बदन था ही इतना आकर्षक की कोई भी देखा तो बस देखता ही रह जाता था भारी भरकम,,, तो बिल्कुल भी नहीं कह सकते थे हां लेकिन पूरा बदन जवानी के गुच्छे से भरा हुआ था,,,, एक तरह से सुगंधा जवानी से लदी हुई थी,,,। अंकित भी डॉक्टर की नजर को अच्छी तरह से देख रहा था उसे भी पता था कि डॉक्टर उसकी मां की चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा है,,, लेकिन न जाने क्यों अंकित ने भी कुछ पल के लिए अपनी मां की साड़ी के पल्लू को ठीक करने की शुध नहीं लिया,,, अंकित जानबूझकर डॉक्टर को अपनी मां की जवानी के दर्शन करवा रहा था और मन ही मन प्रसन्नता के साथ गर्व का अनुभव भी कर रहा था,,, इसलिए की अभी भी उसकी मां की जवानी भरतार थी अभी भी उसकी मां किसी के भी लंड को खड़ा कर देने में पूरी तरह से सक्षम थी,,,। सुगंधा की हालत थोड़ी खराब थी उसे चक्कर भी आ रहा था इसलिए उसे अपने कपड़े की बिल्कुल भी शुध नहीं थी वरना वह कहीं भी जाती थी तो सबसे पहले अपनी साड़ी का पल्लू भी व्यवस्थित करती थी कि कहीं से कुछ दिख तो नहीं रहा है लेकिन आज उसकी बेसुधी का डॉक्टर पूरा फायदा उठा रहा था अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,।
वैसे भी सुगंधा की चूचियां बड़े-बड़े खरबुजा की तरह थी,, जॉकी सुगंधा के ब्लाउज में ठीक तरह से समा नहीं पाती थी और पूरी तरह से उजागर हो जाती थी और यही आकर्षण मर्दों को पूरी तरह से सुगंधा का दीवाना बनाने में काफी होता था और इस समय डॉक्टर की भी यही हालत हो रही थी,,,, डॉक्टर के मुंह में पानी आ रहा था,,, अंकित को पूरा विश्वास था कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर डॉक्टर का लंड खड़ा हो गया होगा,,,,,, चूचियों के दर्शन कि समय मर्यादा समाप्त हो चुकी थी,,, इसलिए अंकित अपनी मां के साड़ी के पल्लू को व्यवस्थित करने लगा अंकित को ऐसा करते देख डॉक्टर को भी जैसे होश आया हो वह धीरे से बोला,,,।)
क्या हुआ है इन्हें,,,,?
सर ,,, दो-तीन दिनों से थोड़ी तबीयत खराब थी आज जब मैं घर पर पहुंचा तो बदन तप रहा था तो मैं यहां लेकर आ गया,,,।
हममम,,,, रुको चेक कर लेते हैं,,,,(इतना कहकर इस डॉक्टर ने अपने गले में से आला निकाला,,,, और अंकित की तरफ देखने लगा,,,, अंकित की तरफ देखते हुए उसे डॉक्टर ने अाला को कान में लगाया और अंकित से बोला,,,)
बेटा थोड़ा पल्लू नीचे करना तो,,, बुखार चेक कर लु,,,,।
(डॉक्टर की बात सुनकर अंकित थोड़ा सदमे में था क्योंकि वह जानता था की औरतों को उनका बुखार चेक करते समय डॉक्टर अक्सर उनकी पीठ की तरफ आला लगाते हैं ,, लेकिन यह डॉक्टर तो छाती पर आला लगाना चाहता है इसी बहाने वह मां की चूचियों को देखना चाहता है और स्पर्श करना चाहता है,,,, कुछ पल के लिए अंकित के मन में आया कि डॉक्टर को ऐसा करने से इनकार करते और बोले की औरतों को तो पीठ पर अाला लगाकर चेक किया जाता है,,, लेकिन अंकित अपने मन में सोचा उसकी आंखों के सामने वह डॉक्टर भला इससे ज्यादा क्या कर पाएगा क्योंकि अंकित भी एक खूबसूरत जवान औरत के सामने एक मर्द की स्थिति कैसी होती है उसे अच्छी तरह से बाकी और अच्छी तरह से जान रहा था कि डॉक्टर की हालत खराब हो रही है और इसमें उसे गर्व महसूस हो रहा था इसलिए डॉक्टर की बात मानते हुए वह अपनी मां की साड़ी का पल्लू पकड़ कर थोड़ा सा नीचे किया,,,,। और ऐसा करने में अंकित भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था क्योंकि उसकी आंखों के सामने भी उसकी मां की भारी भरकम चूचियां ब्लाउज में कैद एक दम साफ नजर आ रही थी।।।
साड़ी का पल्लू एक बार फिर से नीचे होते ही डॉक्टर का दिल भी जोरों से धड़कने लगा उसकी भी हालत खराब होने लगे उसकी आंखों के सामने एकदम गोरा मक्खन जैसा बदन नजर आ रहा था जिसकी मादक चूचियों की भारी भरकम गहरी लकीर एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, सुगंधा को तो जैसे मानो होश ही नहीं था,,,, वह आंखों को बंद करके बस गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे उठ बैठ रही थी और यह देखकर तो अंकित के साथ-साथ उस डॉक्टर की भी हालत खराब हो रही थी,,,, सुगंधा की मदहोश कर देने वाली बड़ी-बड़ी चूचियों को ब्लाउज में कैद देखकर डॉक्टर तो जैसे होश ही खो बैठा वह बिना पलक झपके सुगंधा की छातियों को ही देख रहा था,,,, अंकित कभी डॉक्टर को तो कभी अपनी मां की छातियों की तरफ देख रहा था,,,, फिर धीरे से अंकित ने बोला,,,,।
आला लगाइए सर,,,,।
(अंकित की बात सुनते ही जैसे डॉक्टर होश में आया हो वह एकदम से हड़बड़ाते हुए बोला)
हं,,,,,हंंं,,,,,(और इतना कहने के साथ ही डॉक्टर में आला को हाथ में लेकर सुगंधा की छाती पर लगा दिया डॉक्टर इतना चालाक था कि वह आला को,,, चूचियों के गोलार्ध की सतह के ऊपरी हिस्से पर लगाने की जगह वह चूचियों के उभरे हुए हिस्से पर लगा रहा था और जानबूझकर अपनी उंगलियों को मोड़कर सुगंधा की चूचियों की नरमाहट को स्पर्श कर रहा था अंकित सब कुछ देख रहा था लेकिन कुछ बोल नहीं पा रहा था,,,,। अगर बोलना चाहता तो भी क्या बोलना क्योंकि डॉक्टर ऐसी वैसी हरकत तो कर नहीं रहा था चाहे जैसे भी वह उसकी मां का बुखार ही चेक कर रहा था,,,,, चूचियों को स्पर्श करने के बहाने लगभग 5 मिनट तक वह चूचियों पर आल्हा लगाकर उसके ऊपर नीचे होते हुए जाकर को अपनी आंखों से देखकर गर्म होता रहा और फिर धीरे से बोला,,,)
मलेरिया का असर दिखाई दे रहा है,,,, पेशाब की जांच पड़ताल करनी पड़ेगी,,,,,।
(पेशाब की जांच पड़ताल वाली बात सुनते ही,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, अंकित डॉक्टर से बोला,,,)
सर पेशाब की रिपोर्ट के लिए तो पैथोलॉजी जाना पड़ेगा,,,।
नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है यहीं पर सब हो जाता है,,,, यहीं पर पेशाब और ब्लड का टेस्ट हो जाएगा,,,,।
ठीक है,,,, लेकिन जाना कहां है,,,,?
बाहर ही बाथरूम में,,,, वहीं पर परखनली भी होगी उसी में ले लेना,,,,।
ठीक है डॉक्टर ,,,, (इतना कहते ही अंकित अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे कुर्सी पर से उठाने लगा,,, सुगंधा को चक्कर जरूर आ रहा था लेकिन वह जानते थे कि डॉक्टर क्या कह रहा है इसलिए वह भी धीरे-धीरे अपने बेटे का सहारा लेकर दवा खाने में ही बने बाथरूम की तरफ जाने लगी,,, अंकित जैसे ही अपनी मां को डॉक्टर के केबिन से लेकर बाहर निकाला डॉक्टर लंबी सांस भरते हुए अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही दबाने लगा,,, और अपने मन में ही बोला क्या औरत है यार,,,,।
अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को सहारा देकर उसे बाथरूम में ले आया बाथरूम का दरवाजा खोलकर धीरे से वह अपनी मां को बाथरूम में लेकर आया वही पास में ही,,,, परखनली रखने के लिए ड्रोवर बना हुआ था उसमें से एक परखनली को ले लिया और उसे अपनी मां को देते हुए बोला,,,..
इसमें पैसाब का सैंपल लेना है जांच के लिए,,,,।
(सुगंधा अपने हाथ में उस परखनली को तो ले ली थी,,, लेकिन उसे चक्कर आ रहा था,,, और परखनली अपनी मां को थमा कर अंकित बाथरूम से बाहर जाने लगा तो उसे रोकते हुए सुगंधा बोली,,,)
तु मत जा मुझे चक्कर आ रहा है,,,,।
(और अपनी मां की यह बात सुनकर तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसका लंड खड़ा होने लगा यह सोचकर ही वह उत्तेजित हुआ जा रहा था की दवा खाने में बाथरूम में वह अपनी मां के साथ कैसे उपस्थित रह सकता है जब उसकी मां पेशाब कर रही हो,,, लेकिन वह भी अपनी मां की हालत को समझता था वह जानता था किसकी मां को चक्कर आ रहा है उसकी तबीयत खराब है ऐसे में वह लड खडा कर गिर सकती थी और चोट लग सकता था,,, इसलिए उसे वहां खड़ा रहना जरूरी था लेकिन एक बार वहां देख लेना चाहता था कि कहीं-कहीं देखा तो नहीं रहा है वैसे तो जब वह दवा खाने में आया था तो कोई भी नहीं था और इस समय भी कोई नहीं था लेकिन फिर भी वहां धीरे से दरवाजा खोलकर इधर-उधर देखने लगा लेकिन कोई नहीं डॉक्टर अपनी केबिन में बैठा हुआ था इसलिए जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और ना चाहते हुए भी वह अपनी मां से बोला,,,)
जल्दी से कर लो,,,,,।
(अंकित की बात सुनते ही सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी ऊपर की तरफ उठने लगी और जैसे-जैसे उसकी साड़ी ऊपर की तरफ पड़ रही थी उसकी गोरी चिकनी टांग मांसल जांघ सब कुछ उजागर होता चला जा रहा था और यह सब देखकर अंकित का लंड फटने के कगार पर आ गया था,,, एक हाथ से वह साड़ी कमर तक उठे खड़ी थी पीछे से सुगंध का पिछवाड़ा नजर आ रहा था वह आसमानी रंग की चड्डी पहनी थी जिसे वह एक हाथ से नीचे करने की कोशिश कर रही थी लेकिन कर नहीं पा रही थी,,,, सुगंधा बुखार की हालत में अपने होश में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए जब अंकित ने देखा कि उसकी मां अपनी चड्डी नहीं उतर पा रही है तो खुद अपना हाथ आगे बढ़कर दोनों हाथों से अपनी मां की चड्डी को उतारने लगा यह बेहद अद्भुत संयोग था ऐसा वह कल्पना में कई बार कर चुका था लेकिन आज हकीकत में करना पड़ रहा था लेकिन घर के कमरे में नहीं बल्कि दवा खाने की बाथरूम में और वह भी इस स्थिति में जहां पर चाह कर भी अंकित मजा नहीं ले सकता था लेकिन फिर भी अपनी मां की नंगी गांड देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था वह अपने हाथों से अपनी मां की चड्डी को नीचे जांघों तक सरका दिया था,,,, और बोला,,,)
अब जल्दी से बैठकर पेशाब कर लो और परख नली में सेंपल ले लो,,,,।
(अंकित की बात सुनकर सुगंधा धीरे से बैठने लगी बैठने में भी उसे दीवाल का सहारा लेना पड़ रहा था उसका बदन पूरी तरह से टूट रहा था दर्द कर रहा था सर भी दर्द कर रहा था और चक्कर भी आ रहा था,,, सुगंधा पेशाब करने के लिए बैठ गई थी और थोड़ी देर में उसकी बुर से पेशाब की धार की सीटी की आवाज सुनाई देने लगी जिसे सुनकर अंकित की हालत खराब होने लगी उसका लंड एकदम से उबाल करने लगा हुआ पागल हुआ जा रहा था,,, वैसे तो वह अपनी मां को पेशाब करते हुए पहले भी देख चुका था लेकिन आज का हालात कुछ और था आज वह बाथरूम में जरूर अपनी मां के साथ था और उसकी मां ठीक उसके सामने बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन यह नजारा सहज नहीं था क्योंकि यह नजारा दवा खाने के अंदर था इसलिए चाहते हुए भी अंकित इस मौके का फायदा नहीं उठा सकता था लेकिन वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था,,,।
जहां एक तरफ अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वहीं दूसरी तरफ उसके मन में घबराहट भी थी कि कहीं कोई आ ना जाए ,,, अंकित ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा था और उसे एहसास हो रहा था कि उसकी मां उसे परखनली को अपनी बुर पर लगाई हुई थी जिसे पेशाब की धार गिर रही थी,,,, मौका होने के बावजूद भी अंकित ठीक तरह से अपनी मां की नंगी गांड को नहीं देख पा रहा था क्योंकि उसे जल्दी से बाथरूम से बाहर निकल जाना था क्योंकि अगर ऐसी हालत में कोई आ जाता तो वह क्या बताता एक औरत के साथ वह खुद बाथरूम के अंदर क्या कर रहा है भले ही वह इस समय बीमारी की हालत में अपनी मां के साथ था लेकिन फिर भी,,,, यह बिल्कुल भी सहज नहीं था।
सुगंधा परखनली में पेशाब का से,पल ले चुकी थी और धीरे से खड़ी होने लगी,,, लेकिन फिर से वह अपनी चड्डी पहनने में असहज थी और इस बार भी अंकित है उसकी मदद करते हैं चड्डी भी जैसे उतारा था वैसे ही पहना दिया,,, थोड़ी देर में परखनली को अपने हाथ में लेकर अंकित बाथरूम से बाहर आ गया और डॉक्टर के केबिन में चला गया डॉक्टर इशारे से उसे परखनली को एक कोने पर रखने के लिए बोला और अंकित ने ठीक वैसा ही किया तब तक धीरे-धीरे चलते हुए सुगंधा डॉक्टर के केबिन में आकर कुर्सी पर बैठ चुकी थी,,,,।
अपनी प्रिसक्रिप्शन बुक में मरीज का नाम लिखकर वह दवा लिख रहा था और बोला,,,,।
वैसे तो लक्षण मलेरिया के ही नजर आ रहे हैं और मेरा अनुमान है कि मलेरिया ही है तुम दो-तीन घंटे बाद आकर रिपोर्ट ले जाना मैं उसके हिसाब से दवा दे दूंगा लेकिन इस समय बुखार की दवा सुई लगा देता हूं थोड़ा आराम हो जाएगा और शाम को आकर रिपोर्ट ले जाना और दवा भी ले लेना,,,।
ठीक है डॉक्टर जैसा आप ठीक समझे,,,,।
लेट जाइए,,, (सुगंधा की तरह मुखातिब होता हुआ डॉक्टर बोला तो अंकित खुद अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे कुर्सी से उठने लगा और,,,, लंबे से टेबल की तरफ ले जाने लगा,,,, सुगंधा धीरे से टेबल पर बैठ गई वह सोच रही थी कि डॉक्टर उसे हाथ में सी लगाएगी तब तक डॉक्टर भी सिरिंज में दवा भरकर टेबल के पास आ चुका था लेकिन सुगंध अभी भी बैठी हुई थी इसलिए डॉक्टर बोला,,,,।
इंजेक्शन भारी है हाथ पर लगाऊंगा तो हाथ बहुत ज्यादा दर्द करेगा इसलिए कमर के नीचे लगाना पड़ेगा तुम लेट जाओ,,,,।
(डॉक्टर की चालाकी को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था अब उसका इरादा उसकी मां की गांड देखने को था उसको स्पर्श करने का था,,, लेकिन फिर भी मामला इलाज का था इसलिए अंकित अपनी मां को लेट जाने के लिए बोला उसकी मां धीरे से पेट के बल लेट गई,,,, अंकित को इस बात का डर था की कही डॉक्टर उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसकी मां की गांड पर इंजेक्शन ना लगे लेकिन ऐसा करना डॉक्टर को भी उचित नहीं लग रहा था क्योंकि ऐसा करने पर हो सकता था उसकी बदनामी हो जाए इसलिए वह धीरे से अपने हाथों से ही सुगंधा की कमर के नीचे वाली साड़ी और पेटीकोट के हिस्से को हल्के से अपनी उंगली को पेटिकोट के अंदर डालकर उसे पकड़ा और धीरे से नीचे की तरफ खींचने लगा जिससे नितंबों का उभारदार गोलाई नजर आने लगा,,, और एक खूबसूरत औरत की नंगी गोरी गोरी गांड देखकर डॉक्टर की हालत खराब हो गई और अंकित ने जब उसके पेंट की तरफ देखा तो उसके भी होश उड़ गए क्योंकि उसके पेट में तंबू बन रहा था, डॉक्टर की हालत को देखकर अंकित अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसकी मां के लिए आई होती तो वह अब तक अपना लंड उसकी मां की बुर में डाल दिया होता इलाज करने के बहाने,,,,।
धीरे से डॉक्टर उस उभारदार गोलाई पर सुई लगाने लगा,, नितंबों में हल्के से सुई प्रवेश करने पर सुगंधा को हल्का सा दर्द महसूस हुआ और फिर धीरे-धीरे सिरिंज की सारी दवा उसके नितंबों में उतर गई,,, और फिर डॉक्टर आनंद लेने के हेतु सी वाली जगह पर अपनी हथेली रखकर उसे ज़ोर से गोल-गोल घूमाते हुए मसलने लगा जैसा कि अक्सर डॉक्टर सुई लगाने के बाद ऐसा ही करते हैं, ,,।
अब जा सकते हो लेकिन शाम को जरूर आ जाना,,,
ठीक है डॉक्टर,,,,।
(और फिर अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को दवाखाने से बाहर ले गया और ओटो में बैठकर अपने घर आ गया,,,, डॉक्टर की दी हुई दवा खिलाकर वह अपनी मां को सोने के लिए बोल दिया और सुगंधा भी दवाई खाकर,,, सोने लगी।।)