Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 74 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

झड़ने के बाद अंकित अपनी नानी के बगल में पसर गया था,,, और गहरी गहरी सांस ले रहा था अंकित की नानी बहुत खुश थी,,, पहली बार उसे ऐसे मर्द से पाला पड़ रहा था जो उसके धागों को पूरी तरह से खोल दिया था,,,,,,,, दोनों गहरी गहरी सांस ले रहे थे अंकित की नई की गहरी चलती सांस के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां के ऊपर नीचे हो रही थी जिस पर अंकित की नजर बनी हुई थी वह एक बार झड़ चुका था लेकिन लंड की अकड़ बरकरार थी,,, वह धीरे से अपना हाथ अपनी नानी की चूची पर रख दिया और उसे फिर से दबाना शुरू कर दिया अंकित की नानी अंकित के खड़े लंड को देखकर बोली,,,।

झड़ जाने के बाद भी तेरा खड़ा रहता है सच में तु असली मर्द है,,,।



तो क्या नानी झड़ जाने के बाद लंड ढीला पड़ जाता है क्या,,,(अपनी नानी की चूची को जोर-जोर से दबाते हुए बोला)

तो क्या एक बार पानी निकलने के बाद वह एकदम से ढीला पड़ जाता है,,,,, और उसके खड़े होने में थोड़ा समय लगता है लेकिन तेरा तो पानी निकालने के बाद भी खड़ा ही रहता है,,,(अपना हाथ अंकित के लंड पर रखते हुए बोली,,,, अपनी नानी की बातें और उसकी हरकत को देखकर अंकित उसकी चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

सच में नानी तुम बहुत मजा देती हो,,, अगर तुम नहीं सिखाती तो मैं तो कुछ जान ही नहीं पता मुझे कुछ आता ही नहीं था।

लेकिन तू तो सब कुछ बहुत जल्दी सीख गया,,,।

यह सब तुम्हारी मेहरबानी है नानी लेकिन मजा आया बहुत मजा आया,,,,।

मुझे भी बहुत मजा आया,,,,,(घड़ी की तरफ देखते हुए जिसमें दो बज रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) देख 2:00 बज गया है सच में जिससे भी तेरी शादी होगी वह बहुत खुश नसीब होगी,,,।

ऐसा क्यों,,,?



क्योंकि तू उसकी जमकर चुदाई करेगा और औरत को यही सुख सबसे ज्यादा चाहिए पैसे गहने घर द्वार यह सब तो चलता ही रहता है लेकिन औरत की असली खुशी सिर्फ चुदाई में मिलती है और तेरे जैसा मर्द मिल जाए तो औरत के तो बारे न्यारे हो जाए,,।

तो मैं भी चलूं क्या तुम्हारे साथ गांव रोज मजा करेंगे,,,।

मैं भी यही सोच रही थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि तृप्ति को तैयार कर चुके हैं मैं तो अपनी फैसले पर ही अपने आप पर गुस्सा कर रही हूं तृप्ति की जगह मुझे तुझे ले जाना चाहिए था,,,, अगर तू मेरे साथ चलता तो बहुत मजा आता,,, गांव में चारों तरफ हरियाली है हरियाली हर जगह मजा करते हैं खेत में कल्याण में तालाब में जहां गाय भैंस बांधते हैं वहां,,, नल पर सच में बहुत मजा आता ट्यूबवेल में नहाते हुए मजा करते,,,।

नई जिस तरह से तुम बता रही हो सच में मेरा चलने का मन कर रहा है लेकिन अब कुछ हो नहीं सकता क्योंकि अगर मैं भी चलूंगा तो मम्मी अकेली हो जाएगी ऐसा नहीं हो सकता कि सब लोग साथ चले,,,,।

नहीं अब इस तरह से एका एक चलने की तैयारी कैसे कर सकते हैं,,, चल कभी शादी ब्याह पड़ेगा या अगली गर्मी की छुट्टी में सब साथ में चलेंगे,,,।

सच में नानी बहुत मजा आएगा,,



मजा तो बहुत आएगा,,,, अब मुझे बड़े जोरो की पेशाब लगी है,,,, मुझे उठने दे,,,,(ऐसा कहकर वहां बिस्तर से उठने लगी तो अंकित खुद जल्दी से उठकर बिस्तरसे नीचे आ गया और उसकी नानी कुछ कहती कुछ समझ पाती ईससे पहले ही वह अपनी नानी को बिस्तर पर से ही अपनी गोद में उठा लिया,,,, अंकित की नानी के लिए यह बेहद अद्भुत था वह अपने नाती की ताकत पर गर्व महसूस कर रही थी और मुस्कुरा रही थी लेकिन फिर भी उसे डर लग रहा था इसलिए वह बोली,,,)

अरे रहने दे उतार नीचे कहीं गिर गई तो चोट लग जाएगा,, गजब हो जाएगा,,,,,,,,(थोड़ा सा घबराते हुए वह बोली)

ऐसे कैसे गिर जाओगी यूं ही नहीं कसरती शरीर बना कर रखा हूं,,, ऐसा लगता है कि उसी दिन के लिए कसरत करके मेहनत किया था आज सभी समय आ गया है,,,,(अंकित उसी जगह पर खड़े-खड़े ही अपनी नानी से बोला,,, उसकी नानी का दिल जोरो से धड़क रहा था, क्योंकि चाहे जो हो भले ही वह न जाने कितनी मर्दों के साथ सारे संबंध बन चुकी थी लेकिन किसी ने भी उसे गोद में नहीं उठाया था और वह भी इस तरह से तो बिल्कुल भी नहीं,,, उसके जीवन में अंकित पहले मर्द था जो उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि का एहसास भी कर रहा था और कार्य क्षमता का परिचय देते हुए अपनी मर्दाना ताकत का सही उपयोग करते हुए उसे गोद में उठा लिया था,,,, अंकित की नई अपनी भारी भरकम शरीर को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि इस तरह से गोद में उठा पाना अंकित जैसे लड़कों के लिए तो वाकई में मुमकिन कार्य नहीं है लेकिन इसे नामुमकिन कार्य को अंकित ने मुमकिन बना दिया था इसलिए तो अंकित के मर्दाना ताकत से उसकी नानी की छाती गर्व से गदगद हुए जा रही थी,,,



अंकित अपनी नानी के खूबसूरत चेहरे को देखकर मुस्कुरा रहा था और उसकी नानी अंकित को देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित भी पूरी तरह से नंगा था और उसकी नानी भी बिना कपड़ों की थी,,,, अभी-अभी अंकित अपनी नानी की चुदाई करके अपना पानी निकल चुका था लेकिन अपनी नानी को गोद में लेने से ऐसा लग रहा था जैसे एक बार फिर से उसकी उत्तेजना वापस लौट रही थी और लंड पूरी तरह से ढीला पड़ता इससे पहले ही वह फिर अपनी औकात में आने लगा था,,, और ऊपर की तरफ मुंह उठने लगा था जिससे उसका छुपाना उसकी नानी की गांड पर स्पर्श कर रही थी उसके पीठ पर रगड़ खा रही थी,, अंकित की नानी अंकित के लंड के स्पर्श से फिर से गर्म होने लगी थी,,,,,

अंकित के लिए यह सब कुछ नया नया था,, और अभी-अभी सुबह जवान हुआ था इसलिए उसका खून ज्यादा गर्म था वह बार-बार उससे ही सो जा रहा था उसकी नानी उसके आगे ढीली पड़ जा रही थी लेकिन अंकित अपनी हरकतों से अपनी नानी को फिर गर्म कर दे रहा था,,,, अंकित उसी तरह से अपनी नानी को गोद से में उठाए हुए दरवाजे की तरफ जाने लगा,,,, अंकित की नानी को इस बात का डर लग रहा था कि कहीं उसका वजन न संभाल पाने के कारण वह कहीं नीचे ना गिरा दे इसलिए बार-बार उसे नीचे उतरने के लिए बोल रही थी लेकिन वह बिल्कुल भी अपनी नानी की बात नहीं मान रहा था क्योंकि उसे अपनी भुजाओं पर पूरा विश्वास था देखते ही देखते हो वह दरवाजे तक पहुंच चुका था लेकिन इस बीच उसका लंड बार-बार उसकी नानी की पीठ से रगड़ खाकर अपनी औकात में आ चुका था यह एहसास अंकित की नानी को भी हो रहा था तभी तो वह भी गरम होती जा रही थी,,,, अंकित दरवाजे पर पहुंचकर अपनी नानी से मुस्कुराते हुए बोला,,,।



तुम दरवाजा खोलो नानी,,,।

(अंकित की हरकत से उसकी नानी की मदहोश हो चुकी थी वह पूरी तरह से अपनी नाती का गुलाम बन चुकी थी इसलिए गोद में बैठे-बैठे ही वह अपने दोनों हाथ का सहारा लेकर दरवाजे की कड़ी खोल दी,,,, दरवाजा खोलने लगी और साथ में यह भी हिदायत देने लगी की,,,)

देखना बिल्कुल भी शोर मत मचाना किसी की नींद ना खुल जाए,,,,।

बिल्कुल भी नहीं खुलेगी नानी,,,,,।

(कल इसी तरह से पेशाब करने जाते समय अंकित घबरा रहा था लेकिन आज उसकी नानी को थोड़ा डर महसूस हो रहा था एक ही रात में सब कुछ बदल गया था अंकित उसके साथ पूरी तरह से खुल चुका था एक असली मर्द की तरह उसके साथ पेश आ रहा था,,, और इतना कहने के साथ ही अंकित कमरे से बाहर निकाल कर अभी भी उसकी नानी उसकी गोद में थी अपनी नानी को गोद में उठाने पर और वह भी लग्न अवस्था में उसे काफी उत्तेजना का एहसास हो रहा था उसे मजा आ रहा था,, और इस समय उसे अपनी नानी का वजन बिल्कुल भी महसूस नहीं हो रहा था क्योंकि अंकित खुद उत्तेजित अवस्था में था पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था,,, और देखते ही देखते हैं अंकित घर के कोने में पहुंच गया जहां पर कल दोनों पेशाब किए थे,,, वहां पहुंचते ही अंकित अपनी गोद में से अपनी नानी को नीचे उतारने लगा,,, उसकी नानी उसकी गोद से नीचे उतर चुकी थी,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,,।



और वह तुरंत अंकित की आंखों के सामने ही बैठकर पेशाब करने लगी पेशाब करते समय अंकित की नानी की खूबसूरती और उसकी कामुकता पूरी तरह से बढ़ जाती थी इस अवस्था में अगर कोई अंकित की नानी को देख ले तो वाकई में उसका लंड ईस नजारे को देखकर ही पानी फेंक दे,,, बुर से निकल रही सिटी की आवाज,,, सुनकर अंकित की हालत खराब होने लगी उसके कानों में इस मधुर ध्वनि के पडते ही वह पूरी तरह से बेकाबु होने लगा उसकी मदहोशी एकदम से बढ़ने लगी,,, और वह अपनी नानी की आंखों के सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलता हुआ पेशाब करने लगा इस नजारे को अपनी बेहद करीब देखकर उसकी नानी की बुर पकोड़े की तरह फूलने लगी मदहोश होने लगी,,,, और वह अगले ही पल एक हाथ अपनी बर पर रखकर दूसरे हाथ को अंकित के लंड पर रख दी,,, और उसे कसके दबा दी जिससे कुछ देर के लिए अंकित की पेशाब एकदम से रुक गई और फिर वह वापस अपनी हथेली के कसाव को लंड पर से ढीला करने लगी और वापस पेशाब छुटने लगी,,, ऐसा वह बार-बार कर रही थी जिससे अंकित का पेशाब रुक-रुक के बाहर निकल रहा था लेकिन अपनी नानी की हरकत पर अंकित की मदहोशी और उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी,,,,।



थोड़ी देर में हम किसकी नानी के बुर से सिटी की आवाज कमजोर पडने लगी और कुछ देर बाद एकदम से बंद हो गई इसका मतलब साफ था कि वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन अंकित के लंड से अभी भी रह रहकर पेशाब निकल रही थी,,, अंकित तो पागल हुआ जा रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी उसका लंड फिर से तैयार था उसकी नानी की बुर में घुसने के लिए लेकिन इससे पहले अंकित की नई अपने लाल लाल होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी,,,, ओहहहहह नानी,, अपनी नानी की हरकत पर एकदम से अंकित के मुंह से मदहोशी भरी आवाज निकल गई,,, वह पूरी तरह से मस्त होने लगा था,,,, घर के बाहर सड़क की स्ट्रीट लाइट की रोशनी दरवाजे की दरार से अंदर तक हल्की रोशनी बिखेर रही थी,,, जिसमें सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था अंकित अपनी नानी की हरकत को देखकर एकदम चुदवासा हुआ जा रहा था,,,,।



कुछ देर तक अंकित की नई अंकित को इसी तरह से खुश करती रही और जब अंकित से बर्दाश्त नहीं होगा वह खुद ही अपनी नानी का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और दीवार से सटा दिया उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपने सिधान पर लेने लगा,,, और अगले ही पल अंकित अपने लंड को अपनी नानी के गुलाबी छेद में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया अंकित के लिए यह बेहद हिम्मतवाला कार्य था,,, क्योंकि अंकित पहली बार अपने मन से किसी औरत की चुदाई कर रहा था वैसे तो वह बीती रात को ही यह सब अपनी नानी से ही सीखा था और आज अपनी नानी को उसके सिखाए गए हुनर का करतब दिखा रहा था,,, जो की बेहद लाजवाब था।

Ankit or uski naani



अंकित का हर एक धक्का उसकी नानी के बच्चेदानी तक पहुंच रहा था अंकित का लंड रगड़ रगड़ के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंकित तो दोनों हाथों से अपनी नानी की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिला रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था वह आनंदित हो जा रहा था वह जानता था कि इस तरह का मौका अब ना जाने कब मिलेगा इसलिए वह इस मौके का भरपूर फायदा उठा लेना चाहता था,,,, अंकित की नई तो मानो जैसे हवा में उड़ रही हो इस तरह का शो कुछ नहीं इससे पहले कभी नहीं भौजी थी भले ही कई मर्दों के साथ उसके जिस्मानी तालुका थे लेकिन इस तरह का सुख आज तक किस्मत में नहीं दिया था वह पूरी तरह से दोस्त होती चली जा रही थी,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कल का लौंडा रगड़ रगड़ कर उसका पानी निकाल रहा था,,,, तकरीबन 30 मिनट की घमासान चुदाई के बाद अंकित अपनी नानी के साथ ही झड़ गया,,,, यह बेहद अद्भुत फल था उसकी नानी पूरी तरह से मत हो चुकी थी अंकित धीरे से अपने लंड को अपनी नानी की बुर से बाहर खींच लिया,,,,।

दोनों दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे दोनों अपनी-अपनी हसरत को एक दूसरे से पूरी कर रहे थे अंकित तो पूरी तरह से सपनों की दुनिया में खो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह जो कुछ भी हो रहा है यह हकीकत है या कोई सपना या उसकी कोई कल्पना लेकिन यह ना तो कोई कल्पना थी और नहीं कोई सपना,, जो कुछ भी था वह पूरी तरह से हकीकत था लेकिन यह सब कुछ अंकित की सोच के परे था दो-तीन दिन पहले ही वह सिर्फ अपनी मां के बारे में सोचता था और उसके जीवन में केवल सुमन और राहुल की मां ही आई थी जो की ऊपर ऊपर से थोड़ा बहुतउसे आनंद प्रदान की थी,,,, लेकिन उसकी नानी उसके जीवन में जाकर उसके जीवन को पूरी तरह से बदल दी थी एक ही रात में उसे पूरा मर्द बना दी थी एक औरत को कैसे खुश किया जाता है यह हुनर उसे सिखा दी थीं और इस हुनर का सही उपयोग करके आ जाओ अपनी नानी की बुर का भोसड़ा बना रहा था,,,,।



एक बार फिर से चुदाई का आनंद लेकर दोनों अपने कमरे में आ चुके थे और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिए थे लेकिन अभी भी नींद दोनों की आंखों से कोसों दूर थी कमरे में ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी दूरी और रोशनी में अंकित की नई का नंगा बदन अपनी मदहोशी भरी आभा बिखैर रहा था,,,, अंकित किरानी बिस्तर पर बैठकर अंकित को देख रही थी अंकित अभी भी दरवाजे के पास खड़ा था और उसका लंड दो बार की चुदाई के बाद हल्का सा झूल गया था,,, लेकिन अंकित की नानी अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित का लंड इस अवस्था में भी बुर में घुसेगा तो पूरी तरह से संतुष्ट करने के बाद ही बाहर आएगा,,,, अंकित की नई घड़ी की तरफ देखी तो 3:30 का समय हो रहा था,,, 2 दिन से दोनों सोए नहीं थे और वह दोनों इस बात का अच्छी तरह से समझ गए थे कि जो सोवत है वह खोवत है,,, और वाकई में अगर अंकित और उसकी नानी नींद को प्रधान्य देते तो शायद इस तरह का सुख कभी नहीं भूल पाए लेकिन उन दोनों ने नींद को त्याग कर भोग पर ध्यान केंद्रित किया तभी तो जवानी का मजा लूट रहे थे,,,,।

अंकित जानता था कि अभी भी दोनों के पास काफी समय है और आज की ही रात है कल की रात तो उसकी नानी ना जाने कहां होगी इसलिए वह आज की रात पूरी तरह से अपनी नानी के नाम कर देना चाहता था,,,, इसलिए अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए अपनी नानी के पास आता हुआ बोला,,,।



क्या नई तुम्हें नींद तो नहीं आ रही है ना,,,।

अरे हरामि जिसका तेरे जैसा नाती हो भला उसको नींद कैसे आएगी,,,।

तुम सच कह रही हो नानी और जिसकी नानी तुम्हारी जैसी हो भला ऐसे नाती को नींद कैसे आएगी,,,।

हरामी,,, पक्का मादरचोद बनेगा,,,,।

(अपनी नानी की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,,, अंकित अपनी नानी को उसके बताए अनुसार दो-तीन आसन से चोद कर सुख प्राप्त कर लिया था लेकिन अभी अपनी नानी पर एक आसन आजमाना बाकी था,,, जिस आसन को वह राहुल के घर देखा था वही आसन वह अपनी नानी पर आजमाना चाहता था,,,, अंकित अपनी आंखों से देखा था कि राहुल के लंड के ऊपर उसकी मां चढ़ी हुई थी और अपनी गांड जोर-जोर से पटक रही थी,,, और इसी तरह से अंकित भी अपनी नानी के साथ करना चाहता था,,,, जिस तरह से अंकित अपना लंड हिला रहा था एक बार फिर से उसमें खून का दौरा बढ़ने लगा था और उसका कड़कपन पहले की तरह होने लगा था,, यह देख कर अंकित की नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

हाय दैया क्या खाता है रे,,,, तेरा तो अभी भी खड़ा है,,,,,।



तुम्हारे जैसी बुर के लिए लंड को हमेशा खड़ा रहना पड़ेगा,,,

अच्छा तो तुम मेरे लिए लंड को खड़ा किया है,,,।

यहां और कोई है क्या,, सिर्फ तुम्हारे लिए,,,,(लंड को हिलाते हुए अंकित बोला,,,)

लेकिन मैं तो एकदम थक गई हूं,,,,।

बस एक बार और फिर सो जाना,,,,(इतना कहने के साथ एक बार फिर से वह अपनी नानी के करीब आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया वह बिस्तर पर बैठी थी और वह पलंग के पास खड़ा था और इस तरह से अपने बाहों में अपनी नानी को भरकर उसके लाल-लाल होठों पर चुंबन करने लगा और उसे लेकर बिस्तर पर पसर गया लेकिन अगले ही पल वह फुर्ती दिखाता हुआ अपनी नानी को एकदम से अपने ऊपर ले लिया,,, उसकी इस हरकत से उसकी नानी एकदम से हक्की बक्की रह गई,,,, अंकित कुछ देर तक इस तरह से अपनी नानी को अपनी बाहों में लेकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे सहलाता रहा तो बता रहा और उसका लंड बार-बार नीचे से उसकी बुर में घुसने की कोशिश करता रहा,,, अंकित की नानी थकी होने के बावजूद भी अंकित की हरकत से एक बार फिर से गर्म होने लगी और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अंकित के लंड को पकड़ कर अपनी बुर में डालने की कोशिश करने लगी,,, यही तो अंकित चाहता था,,,,।

Ankit or uski naani



देखते देखते अंकित की नानी घुटनों के ऊपर बैठ गई और अपनी गांड को अंकित के लंड पर रखकर एक हाथ से लंड पकड़ कर उसे अपने गुलाबी छेद पर सटाने लगी,,, और जैसे ही गुलाबी छेद पर उसके लंड का सुपाड़ा स्पर्श हुआ अंकित की नई अपनी भारी भरकम गांड का दबाव अंकित के लंड पर बढ़ाने लगी और देखते ही देखते अंकित का लंड बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ घुसने लगा,,, अंकित के लिए यह पल बेहद मदहोश कर देने वाला था,, अंकित पागल हो जा रहा था उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी देखते-देखते अंकित की नई उसके लंड पर बैठकर उसके पूरे लंड को अपनी बुर की गहराई में छुपा ली थी,,,,, अंकित यह देखकर पूरी तरह से दंग रह गया था,,, अंकित अपनी नानी को देख रहा था और उसकी नानी अंकित को देख रही थी इस अवस्था में अंकित की नई कई बार मजा ले चुकी थी इसलिए उसे मालूम था कि क्या करना है,,, और देखते ही देखते हो अपनी बारी भर काम गांड को अंकित के लंड पर पटकना शुरू कर दी।



अपनी नानी की हरकत से अंकित बावला हुआ जा रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी नानी जिस तरह से अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पटक रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी हरकत से उसकी कामुक क्रियाओ,,, पेड़ पर लटके दशहरी आम की तरह झूल रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह तुरंत अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी नानी के दोनों चूचियों को थाम लिया था,,, और उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,, अंकित की नई अपनी गांड पटकने की रफ्तार को धीरे-धीरे बढ़ा रही थी और ऐसे हालात में,,, लंड और बुर के मिलन से एक अद्भुत ध्वनी उत्पन्न हो रही थी,,,। फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गुंज रहा था,,, इस क्रिया को करने में अंकित की नानी को भी बहुत मजा आ रहा था वह भी बड़ी जो उसके साथ जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी और हर बार अंकित का लंड पूरी तरह से उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था।

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फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगी और अंकित की रानी इस अवस्था में उसके ऊपर एकदम से पसर गई,,,,, झड़ने के बाद अंकित इस अवस्था में अपनी नानी की चिकनी पीठ पर अपनी हथेली रखकर उसे सहलाता रहा उसकी नानी एकदम से थक चुकी थी और इसीलिए कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला अंकित भी अपनी नानी को नहीं जागना चाहता था और इसीलिए उसकी पीठ को सहलाते सहलाते वह भी सो गया,,, सुबह जब अंकित की नई की आंख खुली तो देखी कि वह तो अभी भी अंकित के ऊपर थी और अंकित सो रहा था और उसे महसूस हुआ कि अंकित का लंड अभी भी उसकी बुर में घुसा हुआ था,,, अंकित को देखकर उसकी नानी मुस्कुराने लगी और उसके माथे पर चुंबन कर दी जिससे अंकित की भी नींद खुल गई। दोनों उठकर अपने कपड़े पहन कर अपने आप को एकदम व्यवस्थित कर लिए,,।

आज तृप्ति को भी अपनी नानी के साथ गांव जाना था उसका मन तो नहीं कर रहा था लेकिन वह भी गांव को देखना चाहती थी एक बार घूमना चाहती थी क्योंकि अपनी जानकारी में अभी तक वहां अपने गांव नहीं गई थी,,, सुगंधा रास्ते के लिए दोनों के लिए खाना तैयार कर ली थी 10 12 घंटे का सफर था और बस से जाना था,,,, और बस रात को 9:00 की थी सब कुछ तैयार हो चुका था वैसे तो सुगंधा तृप्ति को इस तरह से अकेले उसकी नानी के साथ जाने नहीं देना चाहते थे लेकिन वह भी बहुत कुछ सोच रही थी उसके मन में बहुत से ख्याल चल रही थी और उन ख्यालों के चलते सुगंधा को तृप्ति को गांव भेजना ही था,,,। दोनों को छोड़ने के लिए अंकित को बस स्टॉप तक जाना था और यहां से बस स्टॉप तकरीबन 20-25 मिनट की दूरी पर थी जहां पर जाने के लिए ऑटो करना पड़ता था।

मुख्य सड़क पर आकर वहां से औटो पर तीनों बैठ गए रास्ते भर तृप्ति से नजर बचाकर अंकित की रानी बार-बार उसके पेंट के आगे वाले भाग पर अपना हाथ रख दे रही थी जिसे अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,,,, अंकित की नानी अपनी हरकतों से अंकित को पूरी तरह से उत्तेजित कर दी थी और अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसकी बड़ी बहन तृप्ति यह सब ना देख ले ,,,, रह रहे कर अंकित की नानी जोर से पेट के ऊपर से ही उसका लंड दबा दे रही थी जिसे अंकित की हालत खराब हो जा रही थी,, अंकित की नानी पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी इस बात का ऐहसास अंकित को हो गया था,,,और निश्चित दूरी तय करने के बाद ऑटो बस स्टॉप पर पहुंच गया था,,, बस स्टॉप शहर के छोर पर था जहां से बस ढेर सारी शहर और गांव की तरफ जाती थी यह बस स्टॉप शहर से थोड़ा बाहर होने की वजह से अगल-बगल जंगली झाड़ियां उगी हुई थी,,,, बड़े-बड़े पेड़ चारों ओर छाए हुए थे वैसे तो यहां का नजारा भी थोड़ा बहुत गांव की तरह ही लगता था लेकिन यह एकदम शहर से सटा हुआ था इसलिए गांव कहना मूर्खता ही थी,,, बहुत से लोग बस स्टॉप पर इकट्ठा हुए थे,,, क्योंकि गर्मियों का महीना था और स्कूल कॉलेज में छुट्टी हो चुकी थी इसलिए लोग अपने-अपने गांव की तरफ जा रहे थे,,, अंकित बस काउंटर पर से अपनी नानी के गांव की दो टिकट ले लिया था,,, बस लगी हुई थी लोग धीरे-धीरे अंदर बैठ रहे थे अपनी जगह पर अंकित भी टिकट लेकर और सामान लेकर आगे आगे चलने लगा और पीछे-पीछे उसकी नानी और तृप्ति चलने लगी,,,।

थोड़ी ही देर में अंकित उचित स्थान पर तृप्ति और अपनी नानी को बैठा दिया था उसका जाने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि रास्ते में जिस तरह की हरकत उसकी नानी ने की थी वह पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अभी भी बस को चलने में 20-25 मिनट का समय था और वह बस से नीचे उतर कर अपने लंड की अकड़ को कम करने के लिए पेशाब करने के लिए चला गया,,, वहीं पर यात्रियों के लिए छोटा सा बाथरूम बना हुआ था जिसमें लोग पेशाब कर रहे थे लेकिन ठीक उसके पीछे अंधेरा और जंगली झाड़ियां थी अंकित बाथरूम में ना जाकर के उसके पीछे जाकर वहां का मुआयना करने लगा और पेशाब करने लगा थोड़ी देर में उसे एहसास होने लगा कि पीछे यहां पर कोई नहीं आ रहा था और चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था यह देखकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह तुरंत पेशाब करने के बाद वापस पास में चढ़ गया और अपनी नानी से बोला,,,,।

नानी 10 12 घंटे का सफर है अगर बाथरूम का उपयोग करना चाहो तो कर सकती हो,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी नानी को इशारा करके नीचे उतरने के लिए कह रहा था,,, और उसकी अंकीत के ईसारे को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,, लेकिन तृप्ति से भी पूछना जरूरी था इसलिए उसने तृप्ति से धीरे से पूछी तो तृप्ति इनकार कर दी और उसकी इनकार को सुनकर अंकित की नानी के चेहरे पर प्रसन्नता के भावना चलने लगे वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और औपचारिकता निभाते हुए अंकित से बोली,,,,)

अभी कितना समय है बस को चलने में,,।

बस 20 मिनट जैसा है,,,,।

चल तब तो ठीक है कुछ खाने को भी ले लूंगी,,,

लेकिन नानी मम्मी ने तो खाने के लिए दी है ना,,,(तृप्ति बीच में बोल पड़ी)

तो क्या हो गया कुछ और खरीद लूंगी खाते हुए चलेंगे,,,।

ठीक है नानी अगर हो तो समोसे ले लेना,,,(खुश होते हुए तृप्ति बोली)

ठीक है मैं खरीद लूंगी तु यहीं पर बैठ कर सामान का ध्यान रखना ऐसे में सामान चोरी हो जाता है,,,(अंकित की नानी जानबूझकर तृप्ति को सामान चोरी होने का डर बता रही थी ताकि वह बस से नीचे ना उतरे,,,, और इतना कह कर वह अंकित के साथ बस से नीचे उतर गई,,,, बस से थोड़ी दूरी पर जाने के बाद अंकित की नानी मुस्कुराते हुए अंकित से बोली,,,)

तेरे मन में चल क्या रहा है,,,।

क्या करूं नानी ऑटो में तुमने मेरी हालत खराब कर दी मेरा लंड है कि बैठने का नाम नहीं ले रहा है,,,,।

वह सब तो ठीक है लेकिन यहां करेंगे कैसे कोई जगह तो दिखाई नहीं दे रही है जहां पर आराम से कर सके,,,।

तुम चिंता मत करो नई में जगह देखने के बाद ही तुम्हें लेकर आया हूं,,,।

बहुत चालाक हो गया है तू,,,, पक्का मादरचोद बनेगा,,,,।

(अंकित की नई बार-बार उसे मादरचोद बनाने पर जोर दे रही थी उसे इस बात की आशंका थी कि उसके जाने के बाद उसके और उसकी बेटी के बीच जरूर कुछ होने वाला है,,, थोड़ी देर में अंकित अपनी नानी को लेकर बाथरूम के पीछे वाले जगह पर पहुंच गया जहां पर चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,, इस जगह को देखकर अंकित की नानी मन ही मन प्रसन्न तो हो रही थी और इस बात से और खुश हो रही थी कि उसका नाती एक ही रात में एकदम हरामी बन चुका था अब जगह का भी प्रबंध करना सीख गया था,,,, समय ना बर्बाद करते हुए अंकित तुरंत अपनी नानी का हाथ पकड़ा और उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा और अपने दोनों हाथों से साड़ी के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,,, अपने नाती किस तरह की हरकत से उत्तेजित होते हुए वह बोली,,,।

अरे बेवकूफ इन सब में समय बर्बाद मत कर कहीं ऐसा ना हो कि हम दोनों चुदाई करते रहें और तृप्ति को लेकर बस निकल जाए,,,(ऐसा कहते हुए अंकित की नानी अंकित की बाहों में से अलग होने लगी,,,, और तुरंत अपनी साड़ी को पकड़ कर एकदम से कमर तक उठा दे और अपनी नंगी गांड अंकित के सामने परोस दी वैसे तो चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन इतना तो दिखाई दे रहा था कि अंकित की आंखों के सामने क्या है वह तुरंत अपनी पेंट का बटन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल दिया जो की काफी देर से तड़प रहा था,,, और तुरंत अपने लंड को अपनी नानी की बुर में डाल दिया और जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह जानता था कि उन दोनों के पास समय वाकई में बहुत कम है।

खेतों में नदी के किनारे तालाब में कहीं जगहो पर अंकित की नानी चुदाई का मजा लूट चुकी थी लेकिन आज पहली बार वह बस स्टॉप पर इस तरह से अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपने ही नाती से चुदवा रही थी,,,, अंकित अपने धक्को में किसी भी प्रकार की कमी महसूस होने नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अंकित की नानी मस्त हुए जा रही थी,,,, अंकित के ताबड़तोड़ तेज प्रहार की वजह से अंकित की नई अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी और आगे की तरफ लुढ़क जा रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह गिर ना जाए लेकिन अंकित उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर संभाले हुए था और अपनी कमर हिला रहा था और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झढ गए,,,,।

अंकित की नानी चुदवाने के बाद वहीं बैठकर पेशाब करने लगी,,,, पेशाब करने के बाद वह अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके वापस बस स्टॉप पर आ गई और मिठाई की दुकान पर कुछ मिठाई और समोसे खरीदने लगी,,,, अंकित की नई थोड़ी मिठाइयां और समोसे खरीद कर अंकित को दे दी थी और फिर वापस बस में बैठ गई थी बस में बैठने के बाद थोड़ी देर में बस चालू हो गई और उसकी नानी मुस्कुराते हुए अपने गांव की तरफ चल दी,,,।
 
अंकित अपनी नानी और अपनी बड़ी बहन को बस में बैठ कर अपने घर वापस लौट आया था एक अद्भुत अनुभव के साथ,,, जो कुछ भी हुआ था उसे अंकित को बहुत कुछ सीखने को मिला था,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी नानी एकदम छिनार होगी उसका व्यवहार एकदम रंडियों की तरह होगा, लेकिन अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि अगर उसकी नानी रंडी और छिनार की तरह न होती तो शायद उसे इतना अद्भुत सुख कभी नहीं मिल पाता,,, उसकी नानी के छीनरपन में ही उसे एक अद्भुत अनुभव मिला था जिस अनुभव के चलते हैं किसी भी औरत पर अपना वर्चस्व कायम कर सकता था। वैसे तो उसका पूरा ध्यान उसकी खुद की मां पर पूरा वर्चस्व कायम करने पर लगा था,,, नानी को संतुष्ट कर लेने के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ चुका था। लेकिन फिर भी वह अपनी मां के साथ किस तरह से आगे बढ़ेगा यही सोच रहा था।



घर पर पहुंचा तो देखा उसकी मां दरवाजे पर खड़ी होकर बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी अपनी मां को दरवाजे पर इस तरह से खड़ी देख कर उसके मन में उसके कल्पना का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा और वह अपने मन में सोचने लगा की काश ऐसा दिन है कि उसकी मां इसी तरह से अधनंगी या पूरी तरह से नंगी होकर बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार करें,,, और वह दरवाजे से ही उसे गोद में उठाकर उसके कमरे में ले जाए और बिस्तर पर उठाकर पटक दे और फिर उसे जी भर कर प्यार करें ऐसा ख्याल मन में आते ही बदन में उत्तेजना कि सीरहन सी फैलने लगी,,, वह जानता था कि यह सब ख्याली पुलाव है लेकिन अगर उसकी नानी कुछ दिन और रूकती तो उसकी यह कल्पना हकीकत में बदल जाति।

घर पर पहुंचते ही उसकी मां तो दरवाजा खोलकर ही दरवाजे पर खड़ी होकर उसके आने का इंतजार कर रही थी वह बोली,,,।

ठीक से तो बैठ गई ना,,,

हां मम्मी दोनों आराम से बैठ गए,,,।

तू इतनी जल्दी आ गया,,,।

जल्दी कहां 2 घंटे लग गए,,,।

बस चली गई थी या सिर्फ बैठा कर आ गया,,,।

बस के जाने के बाद ही आया हूं,,, कल सुबह तक तो दोनों गांव भी पहुंच जाएंगे,,,।

चलो अच्छा हुआ,,,, आराम से पहुंच जाएंगे मेरा तो मन नहीं लग रहा है पहली बार तृप्ति को अपने से दूर गांव भेज रही हूं,,,।



मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा है,,,(घर में प्रवेश करते हुए अंकित बोल और खास करके उसे अपनी नानी के लिए अच्छा नहीं लग रहा था वह जानता था कि अगर उसकी नानी होती तो आज की रात फिर से रंगीन हो जाती,,, लेकिन एक बात की तसल्ली अंकित के मन में थी कि अब वह और उसके मन दोनों घर पर अकेले ही होंगे,,, और यही तसल्ली सुगंधा को भी थी,,,, अगर उसका आकर्षण अपने बेटे की तरफ ना होता तो शायद वह तृप्ति को अकेली गांव जाने ही ना देती,,, मन के लालच ने उसे मजबूर कर दिया था तृप्ति को अपने से दूर गांव भेजने के लिए क्योंकि उसे भी घर में अपने बेटे के साथ अकेलापन चाहिए था। सुगंधा भी घर में प्रवेश करके दरवाजा बंद कर दि और कड़ी लगा दी,,, घर में काफी खालीपन लग रहा था,, जिसका एहसास दोनों का अच्छी तरह से हो रहा था,,,।



तू हाथ मुंह धो ले मैं खाना लगा लेती हूं,,,।

ठीक है मम्मी,,,(इतना कहकर अंकित हाथ मुंह धोने के लिए बाथरूम चला गया और उसकी मां किचन में खाना लगाने के लिए चली गई थोड़ी ही देर में वह अपने हाथ में दो थाली लेकर आई और अंकित के साथ खाना खाने लग गई,,, लेकिन इस समय उसके मन में अंकित को लेकर किसी भी प्रकार का आकर्षण या वासना का एहसास नहीं हो रहा था क्योंकि समय उसका पूरा ध्यान तृप्ति पर था,,,, अंकित के मन में ऐसा था कि खाना खाने के बाद टीवी देखते हुए अपनी मां से कुछ इधर-उधर की बातें करेगा और नसीब अच्छी रही तो कुछ देखने को मिल जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ खाना खाने के तुरंत बाद उसकी मां बोली।

बर्तन सुबह में माजूंगी,,, आज बहुत थक गई हूं जा रही हूं सोने तु भी समय पर सो जाना,,,,।

(सुगंधा की यह बातें अंकित के अरमानों पर पानी फ़िर दिए थे वह कुछ देर अपनी मां के जाने के बाद वहीं बैठना और फिर वह भी धीरे से अपने कमरे में चला गया और सोने की तैयारी करने लगा आज उसे अपने कमरे में अच्छा नहीं लग रहा था उसका खुद का कमरा उसे काटने को दोड़ रहा था,,, क्योंकि अपने कमरे में प्रवेश करते हैं अपने बिस्तर को देखते ही उसे अपनी नानी याद आने लगी थी दो दिन में उसकी नानी उसके बेहद करीब आ गई थी,,, यह यू कह लो कि उसकी नानी अंकित के लिए बहुत कुछ बन गई थी दोस्त प्रेमीका पत्नी सब कुछ,,, बिस्तर पर पड़ी सिलवटें रात की मधुर कहानी कह रही थी क्योंकि सुबह कमरे से निकलने के बाद अंकित रात को ही अपने कमरे में प्रवेश किया था और रात को जिस तरह से बात नहीं नहाने की घमासान चुदाई किया था उसकी निशानियां अभी तक उसके बिस्तर पर दिखाई दे रही थी जगह-जगह उसे धब्बे दिखाई दे रहे थे और वह अच्छी तरह से जानता था कि वह धब्बे किसके हैं,,,,।



आखिरकार मन महसूस कर वह बिस्तर पर लेट किया और अपनी नानी के बारे में ही सोचता रहा,, उसे कब नींद आ गई उसे खुद को पता नहीं चला,,, बड़ी सवेरे सुगंधा की नींद टूट चुकी थी वह जाग गई थी पहले तो उसे सब कुछ सामान्य लगा लेकिन जैसे उसे एहसास हुआ की तृप्ति घर पर नहीं है वह अपनी नानी के साथ गांव गई है तो वह एकदम से उठकर बिस्तर पर बैठ गई घर में तृप्ति के न रहने से सुगंध को भी अजीब सा एहसास हो रहा था लेकिन बहुत ही जल्दी वह स्वस्थ हो गई वह अपने मन को दिलासा देने लगी कि जो कुछ भी उसकी मां कह रही थी वह सच ही है ,,,गांव जाकर वहां का रहन सहन सीख जाएगी तो उसके लिए अच्छा होगा अब किस्मत का क्या भरोसा हो सकता है कि उसकी शादी गांव में ही हो जाए अगर वह गांव को अच्छी तरह से समझ नहीं पाई की तो शादी के बाद का जीवन बड़ा मुश्किल हो जाएगा इसलिए उसकी मां ने जो कुछ भी किया वह सही कीया। ऐसा सोचकर वह अपने मन को तसल्ली देने लगी। उसके चेहरे पर ताजगी दिखाई दे रही थी,,, वह कुछ देर तक बिस्तर पर इस तरह से बैठी रह गई और जब दीवार की तरफ देखी तो घड़ी में 4:30 का समय हो रहा था सुबह होने में अभी भी समय वैसे तो यह समय सुबह का ही था लेकिन चारों तरफ अंधेरा ही था,,,।



सुगंधा के मन में अनेक विचार चल रहे थे अभी स्कूल की छुट्टी भी थी और उसके पास कुछ ज्यादा करने के लिए काम नहीं था तो वह सोची थोड़ा योग कर ले और अपने बदन को थोड़ा और कस ले, क्योंकि उसे लगने लगा था कि उसका पेट थोड़ा बाहर आ रहा है और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह अपनी खूबसूरती और अपने बदन की बनावट को अच्छी तरह से समझती थी इसलिए उसे लगने लगा था कि उसे थोड़ा योग कसरत करना चाहिए ताकि उसका शरीर ज्यादा बढ़ ना पाए और शरीर योग की वजह से और भी ज्यादा कसा हुआ और चमकीला आकर्षण बन जाए,,, आखिरकार औरतों के पास उसके खूबसूरत बदन के सिवा होता ही क्या है मर्दों को आकर्षित करने के लिए,,,, ऐसा सोच कर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और वह धीरे से अपनी बिस्तर पर से नीचे उतर गई,,,,, ट्यूबलाइट की स्विच दबाकर वह कमरे में पूरी तरह से रोशनी फैला दी और आईने में अपने खूबसूरत शक्ल को देखने लगी लेकिन इस समय सो कर उठने की वजह से बाल बिखरे हुए थे चेहरा तो खूबसूरत लगी रहा था लेकिन योग्य रूप में नहीं था इसलिए धीरे से कंगी लेकर वह अपने बाल को संभालने लगी और उसे धीरे से जुड़े के रूप में गोल-गोल बांध ली और फिर अपने चेहरे को देखने लगी बाल की एक लट उसके गालों पर लहरा रही थी जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे,,,।



वह मुस्कुराते हुए अपने कमरे से बाहर निकली,,, और सीढ़ियां चढ़ने लगी अगले ही पल वह अपनी छत पर थी सुबह का समय होने की वजह से बड़ी शीतल हवा दे रही थी जो उसके बदन में ठंडक प्रदान कर रही थी खुली हवा में सांस लेने में उसे भी बहुत राहत महसूस हो रही थी और वैसे भी गर्मी का समय था इसलिए छत पर उसे अच्छा महसूस हो रहा था वह अपने मन में सोच रही थी कि गर्मी के महीने में छत पर ही सोना चाहिए इतनी अच्छी हवा बह रही है वरना पंखे की हवा भी गर्मी के महीने में कुछ असर नहीं करती,,, सुगंधा पूरे छत पर इधर-उधर चक्कर लगाने लगी थी एक तरह से वह अपने छत पर ही मॉर्निंग वॉक कर रही थी और से अच्छा भी लग रहा था नंगे पैर छत की फर्श और भी ज्यादा ठंडक प्रदान कर रही थी कुछ देर तक सुगंध इसी तरह से छत पर चक्कर लगाती रही,,,, दूर-दूर तक अंधेरा ही छाया हुआ था हालांकि जगह-जगह पर नाइट बल्ब जल रहे थे जिससे पता चल रहा था कि उस स्थान पर कोई घर है,,, वैसे भी सुगंधा की छत दूसरी चोटो की अपेक्षा थोड़ी बड़ी थी और लंबी भी बाकी की छत सुगंधा की छत से नीचे ही थी और ऐसे में सुगंधा सबकी छत पर नजर रख सकती थी लेकिन अंधेरा होने की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।



कुछ देर तक मॉर्निंग वॉक करते-करते वह थोड़ा थक गई थी इसलिए रुक गई और गहरी गहरी सांस लेकर अपनी स्थिति को व्यवस्थित करने लगी,,, वह अपनी मां के बारे में सोच रही थी उसकी मां जिस तरह की हिदायत उसे दे रही थी उसमें झूठ की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी वह सच ही बोल रही थी शायद वह घर के अंदर एक मर्द और पुरुष की स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकती थी उनका कहना ठीक ही था कि उसका इस तरह से कपड़े बदलना या बेफिक्र होकर पेशाब करने बैठ जाना यह आदत घर में जवान लड़के के होते हुए बाद गंभीर स्वरूप ले लेती है भले ही वह जवान लड़का उसका खुद का सगा बेटा क्यों ना हो। सुगंधा अपनी मां की कहानी-कहानी बातों के बारे में सोच रही थी और फिर अपने आप से ही मुस्कुराते हुए बोली।



मैं भी तो यही चाहती हूं जैसा मेरी मां मुझे समझ रही थी वैसा सब कुछ थोड़ा-थोड़ा मेरे साथ भी तो होता है और ऐसा नहीं है कि मेरा बेटा मुझे चोरी छुपे देखने की कोशिश करता है बल्कि मैं खुद उसे सब कुछ दिखाने के लिए तैयार रहती हूं और किसी ने किसी बहाने अपने अंगों का प्रदर्शन उसके सामने करती ही रहती हूं,,, अपने आप से ही इस तरह की बात करते हुए उसे उत्तेजना महसूस हो रही थी। सुगंधा अपनी मां की कही गई बात के बारे में सोच रही थी कि अगर ऐसा ही चला रहा तो उसका खुद का जवान लड़का उसके ऊपर चढ़ जाएगा और शायद दूसरे घरों में यही सब होता है तभी तो उसकी मां इस तरह की उसे हिदायत दे रही थी और हिदायत देते हुए एक उदाहरण भी दे रही थी जो उसके गांव में हो चुका था,। और सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि अगर उसकी मां उसे उदाहरण दे रही थी तो हो सकता है कि यह ऐसा ही चलता रहा था उसके भी घर में वही सब होगा जिसके लिए उसकी मां उसे समझा रही थी। और वैसे भी अंकित पूरी तरह से जवान हो चुका है उसे भी तो इस उम्र में औरतों के प्रति आकर्षण होता ही है यह तो वह अच्छी तरह से जानती है उसे बुर की भी जरूरत पड़ती होगी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए इसका एहसास भी सुगंधा को अपने कमरे में हो चुका था जब वह गहरी नींद में सो रही थी और उसकी नींद का फायदा उठाते हुए अंकित उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपने हाथों से स्पर्श करके मजा ले रहा था और अपने होठों को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर उसके मदन रस का स्वाद भी लिया था अपने मन में इस तरह का ख्याल आते ही सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना से गनगना गई,,,।



काफी देर तक वह अपनी मां और अपने बेटे के बारे में सोचती रही धीरे-धीरे अंधेरे की गहराई काम हो रही थी सूरज अपने समय पर निकलने वाला था और सुगंधा योग कर रही थी,,, योग करने के बाद वह थोड़ा हल्का-फुल्का कसरत करने लगी लेकिन तभी अंकित की भी नींद खुल गई और वह अपनी मां के कमरे में देखा तो उसका दरवाजा खुला हुआ था और दरवाजा अंदर से बंद था उसे लगा कि उसकी मां बाथरूम गई होगी लेकिन बाथरूम का भी दरवाजा खुला हुआ था तब वह खुद ही धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ता हुआ छत की तरफ जाने लगा और जैसे ही छत पर पहुंचा तो देखा उसकी मां कसरत कर रही थी,,, वह खड़ी थी और हाथ ऊपर करके आगे की तरफ झुकने वाली थी उसकी पीठ अंकित की तरफ थी अंकित खड़ा होकर अपनी मां को देखने लगा,,,, सुगंधा के बदन पर गाउन था वह रात को साड़ी निकाल कर गाउन पहन कर सोई थी,,,, अंकित उत्सुकता के साथ अपनी मां को देख रहा था वह बिल्कुल भी आवाज नहीं कर रहा था नहीं तो उसकी मां कसरत नहीं करती,,,।



अंकित को साफ दिखाई दे रहा था उसकी मां अपने हाथों पर करके धीरे-धीरे झुक रही थी और जैसे-जैसे वह झुक रही थी उसके नितंबों का घेराव गाउन में भी बढ़ता जा रहा था और यह देखकर अंकित उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, और देखते ही देखते सुगंध पूरी तरह से झुक गई और अपने पैर के अंगूठे को अपने हाथ की उंगलियों से पड़कर गहरी गहरी सांस लेते हुए सांस को रोक दी अंकित यह सब पीछे खड़ा देख रहा था इस समय जिस मुद्रा में उसकी मां थी बेहद गजब की मुद्रा थी उसकी मां की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी नजर आ रही थी,,,, अंकित का मन कर रहा था कि इसी समय अपनी मां के पीछे चला जाए और उसका गाउन कमर तक उठा कर ईसी अवस्था में पीछे से उसकी चुदाई करना शुरू कर दे,,, और वैसे भी एक औरत की जबरदस्ती चुदाई कैसे की जाती है यह सब कुछ उसकी नई सीखा कर गई थी और एक औरत को खुश करने की कला अंकित समझ गया था उसे पूरा विश्वास था कि अगर उसकी मां इस समय मौका दे तो वह उसे भी पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है,,,,।



लेकिन इस समय वह कुछ भी कर सकते की स्थिति में नहीं था वह सिर्फ अपनी मां को देख सकता था इस पल का फायदा नहीं उठा सकता था क्योंकि इतनी भी उसमें हिम्मत नहीं थी भले ही वह मिलने की चुदाई कर चुका था संभोग सुख को महसूस कर चुका था एक औरत के पूरे अंदर से कितनी गर्म होती है और लंड के अंदर जाने पर लंड की क्या स्थिति होती है यह सब कुछ बात समझ चुका था,, लेकिन कुछ कर नहीं सकता था भले ही वह अपनी नानी के साथ संभोग सुख प्राप्त कर चुका था लेकिन अभी भी उसका ज्ञान अधूरा था,,, अभी संपूर्ण रूप से उसे संभोग कला में महारत हासिल करना बाकी था,,, क्योंकि अभी तो उसका पल सिर्फ एक छिनार से पड़ा था जो किसी भी तरह से सिर्फ संभोग सुख प्राप्त करना चाहती लेकिन अभी बेलगाम घोड़ी को काबू करना बाकी था और एक बेलगाम घोड़ी को काबू करना मतलब लोहे के चने जबाने जैसा था,,, और वह बेलगाम घोड़ी थी सुगंधा जवानी से भरी हुई,, भले ही वह दो जवान बच्चों की मां थी लेकिन बरसों पहले ही उसके पति का देहांत हो जाने की वजह से,,, बरसों से उसकी जवानी कोरी पड़ी थी जिस पर उसके पति के सिवा अभी किसी के भी दस्तखत नहीं हुए थे।

और अंकित की नई तो कागज का वह पूर्जा बन चुकी थी,,, जिस पर आए दिन किसी के भी दस्तखत हो ही जाते थे,,,, सुगंधा की बुरनुमा जमीन वर्षों से बंजर पड़ी थी,,, उस पर बिल्कुल भी खेती नहीं हुई थी,,, सुगंधा का खेत जुतना बाकी था,, अब उसके खेत की जुताई कैसे होती है यह देखने वाली बात थी,,, सुगंधा की बेलगाम जवान को काबू कार्पण अंकित के बस में था या नहीं यह आने वाला समय ही बताने वाला था लेकिन न जाने क्यों सुगंधा को अपने बेटे पर पूरा भरोसा था,,, उसे पूरा यकीन था कि,, जिस दिन भी इस घोड़ी की सवारी उसका बेटा करेगा सीधा मंजिल पर ही जाकर रुकेगा,,,।

सुगंधा अपनी मस्ती में कसरत कर रही थी,,, वह इस तरह से झुकी हुई थी उसकी बड़ी-बड़ी गाना गाऊन में भी अपना आकार अपना प्रभाव बिखेर रही थी,,, यह मदहोश कर देने वाला नजारा देखकर अंकित से रहा नहीं क्या और वह धीरे से अपनी मां के करीब पहुंच गया और बोला,,,।

क्या बात है मम्मी आज का कसरत की जा रही है,,,।

(सुगंधा को इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था कि अंकित उसके बेहद करीब पहुंच गया है इसलिए वह उसकी आवाज सुनकर एकदम से डर गई थी और एकदम से उठकर खड़ी हो गई थी और अंकित को अपने पास खड़ा देखकर उसकी जान में जान आई थी और वह अपनी सांसों को व्यवस्थित करते हुए बोली,,)

बाप रे मैं तो डर ही गई थी,,,।

क्यों क्या हुआ,,,?

तेरे आने की जरा भी आहट नहीं हुई,,,, बोल नहीं सकता कि मैं आ रहा हूं,,,,।

अरे मम्मी तो इसमेंक्या हो गया,,,!

इसमें क्या हो गया मेरी पूरी हालत खराब हो गई देख मेरे दिल की धड़कन,,,(इतना कहने के साथ ही अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को अपनी छाती से लगा ली,,,) कितनी जोर-जोर से धड़क रहा है,,,,,(अंकित तो अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से हैरान हो गया था उसकी हथेली पूरी तरह से उसकी दुनिया चूचियों के बीच थी हल्के से ऊपरी सतह पर जहां से चुचियों का उभार शुरू होता था,,, और वैसे भी गाउन पहनने के बावजूद भी गांव में से भी उसकी दोनों चूचियों के बीच की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसे पर ही अंकित की हथेली थी अंकित की तो हालात पूरी तरह से खराब हो गई,,,,, अंकित भी एकदम मन लगाकर अपनी मां की दिल की धड़कन को सुनने लगा और साथ ही उसकी चूचियों की नरमाई को महसूस करने लगा,,,, सुगंधा भी थोड़ी बहुत घबराहट की वजह से गहरी गहरी सांस ले रही थी जिससे उसकी चुचियों का उठाव और बैठाव दोनों अंकित को अपनी हथेली पर साफ महसूस हो रहा था पल भर में अंकित के पेंट में तंबू बनने लगा ,,,,

सुगंधा को भी एहसास हुआ कि वह डर के मारे जल्दबाजी में शर्म जनक हरकत कर दी है,,,, अब इस स्थिति से कैसे निपटा जाए उसके बारे में सोचने लगी क्योंकि वह खुद अपने बेटे की हथेली को अपने हाथ में लेकर अपने सीने से लगाए हुए थी,,,, सुगंधा अपने बेटे के चेहरे की तरफ देख रही थी उसके चेहरे पर हवाई उड़ रही थी उसके चेहरे पर उत्तेजना एकदम साफ झलक रहा था सुगंधा इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह की वह हरकत की है उसका बेटा क्या उसकी जगह कोई भी होता तो उसका लंड खड़ा हो जाता है और जब उसके मन में ख्याल आया तो अपने आप ही उसकी नजर अंकित के पेंट की तरफ चली गई और वाकई में उसे जगह पर हल्का-हल्का तंबू बनना शुरू हो गया था यह देखकर तो सुगंधा की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में कंपन होने लगा,,, उसकी बुर से उत्तेजना के मारे मदन रस टपकने लगा,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए अपनी भावनाओं को काबू में करते हुए सुगंधा धीरे से अपने बेटे की हथेली को अपनी छाती पर से हटाती हुई बोली,,,)

चोरी छुपे मत आया कर बता दिया कर,,,।

अरे मम्मी मुझे क्या मालूम कि तुम एकदम से डर जाओगी और वैसे भी यह कसरत,,,,, क्यों,,,?(अंकित हैरान होते हुए बोला और उसकी बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

क्यों तुझे नहीं लगता कि मुझे कसरत करना चाहिए,,,।

नहीं ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता,,,।

मेरे बगल में तुझे बदलाव दिखाई दे रहा है,,,(ऐसा कहते हुए वह अपने दोनों हाथों को फैला दी और अपने बेटे को ठीक से अपना बदन दिखाने लगी जो कि गाऊन में छुपा हुआ था,,,,,, अपनी मां को इस तरह से देखकर वह बोला,,,)

थोड़ा पीछे घूमो,,,,

(अंकित की बात मानते हुए सुगंधा पीछे की तरफ घूम गई,,, जिससे उसका पिछवाड़ा अंकित की तरफ हो गया अपनी मां का भरा हुआ पिछवाड़ा देखकर अंकित का मन कर रहा था कि एकदम से उसके पीछे सात जाए और अपने पेट में बना तंबू उसकी गांड पर रगड़ रगड़ कर अपना पानी निकाल दे,,,, वह कुछ देर तक अपनी मां के मातबस कर देने वाले पिछवाड़े को देखता रहा जो की गाउन में होने के बावजूद भी अपने आकार को उपसा रहा था,,,, नजर भर कर देखने के बाद वह बोला,,,,)

मुझे तो कोई बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है,,,।

अरे बुद्धू तुझे नहीं लग रहा है लेकिन मुझे मालूम है मेरा पेट हल्का-हल्का बाहर निकल रहा है मुझे अच्छा नहीं लग रहा है इसलिए मैं योग और कसरत कर रही हूं,,,।

मुझे तो तुम अभी भी एकदम फिट लग रही हो एकदम कसा हुआ बदन तो है,,,,(अंकित जानबूझकर अपनी मां के सामने कसे हुए बदन जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,,, और सुगंधा ने भी अपने बेटे के द्वारा कहे गए इन शब्दों पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दी थी और इस शब्द को सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि यह भी एक तरह से उसके हुस्न की तारीफ ही थी,,, फिर भी एकदम मासूम बनते हुए वह बोली)

क्या कसा हुआ सब कुछ ढीला ढीला हो गया है,,, इसलिए तो मुझे चिंता हो रही है कहीं ऐसा ना हो जाए कि मैं जल्दी बूढी हो जाऊं,,,।

क्या बात कर रही हो मम्मी कभी आईने में अपने आप को अच्छी हो 20 साल की लड़कियां भी तुम्हें देख कर शर्मा जाए,,,,।

(अपनी नानी के साथ किए गए संभोग का ही नतीजा था कि वह धीरे-धीरे अपनी मां के सामने भी खुल रहा था और सुगंध भी अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर हैरान थी और वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली)

20 साल की लड़की मुझे देखकर क्यों शर्मा जाएगी,,,,।

तुम्हारी खूबसूरती,,, तुम्हारे बदन की बनावट उसकी कसावट तुम्हारी लंबाई,,, सच में तुम किसी फिल्म की हीरोइन लगती हो,।

(अपने बेटे किस तरह की रोमांटिक बातों को सुनकर वह मस्त हुए जा रही थी उसका दिल एकदम गदगद हुआ जा रहा था फिर भी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए वह बोली,,,)

चल रहने दे बातें बनाने को फिल्म की हीरोइन लगती हुं,,,,, जब सड़क पर चलती हूं तो कोई देखता भी नहीं है,,,(सुगंधा थोड़ा इतराते हुए बोली उसकी यह अदा अंकित को उत्तेजित कर रही थी और वह अपने मन में बोला तुम्हें क्या मालूम मम्मी तुम जब सड़क पर चलती हो तो सब की नजर तुम्हारी च और तुम्हारी गांड पर रहती है कितनी कसी हुई लगती है सच में तुम्हारे बारे में सोच कर कितनों का लंड खड़ा हो जाता होगा और कितने तो अपने हाथ से हिला कर पानी निकाल देते होंगे,,,, अंकित एक टक अपनी मां को देख रहा था,,, यह देखकर सुगंध थोड़ा शर्मा गई और अपने आप को व्यवस्थित करते हुए बोली,,,)

अगर मैं फिल्म की हीरोइन जैसी दिखती तो कोई तो मुझे देखता,,,, ऐसा तो कुछ भी नहीं होता,,,।

(अंकित अपनी मां की बात सुनकर अपने मन में सोचा अगर कोई देखे तो उसकी आंख ना नोच लुं अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता कि उसकी मां को कोई गंदी नजर से देखें लेकिन फिर भी बात बनाते हुए वह अपनी मां से बोला,,,)

यह तो तुम्हें लगता है लेकिन आते जाते सच कहूं तो लोग तुम्हें ही देखते हैं,,,।

तुझे कैसे मालूम,,,!

अरे मुझे मालूम है,,,,(अंकित के मन में भी कुछ और चल रहा था इसलिए अपनी बात को थोड़ा नमक मिर्च लगाकर बोल रहा था)

कैसे मालूम है बता,,,,,,

जब तुम सड़क पर जाती हो तो अपनी नुक्कड़ पर चाय की दुकान नहीं है,,,।

हां,, है,,,,।

वहीं पर सभी प्रकार के आदमी बैठे रहते हैं एक दिन में भी वहीं बैठा था और इस समय तुम सब्जी लेने के लिए जा रही थी तभी उनमें से एक आदमी बोला,,,।

बाप रे इतनी खूबसूरत औरत ऐसा लगता है कि जैसे मेरे सामने कोई फिल्म की हीरोइन जा रही है,,,।

क्या सच में,,,,,(सुगंधा एकदम उत्साहित होते हुए बोली,,,)

तो क्या मैं ठीक उसके पीछे बैठा था उसे नहीं मालूम था कि सामने जो औरत जा रही है उसका बेटा भी है और मालूम है उसने क्या कहा,,,,?

क्या कहा,,,,?

उसने कहा कि,,,, अगर मैं इसके बारे में जानता होता तो अपने घर वालों को उसके घर भेज कर शादी की बात कर लेता,,,,।

क्या,,,,(एकदम उत्साहित और हंसते हुए) सच में उसने ऐसा कहा क्या उसे नहीं मालूम कि मेरे दो बच्चे हैं मैं शादीशुदा हूं,,,,.

उसे क्या मालूम और वैसे भी तुम ऐसी लगती ही हो एकदम कसा हुआ बदन लगता है नहीं कि तुम दो बच्चों की मां हो तभी तो कहता हूं कि 20 साल की लड़की भी तुम्हारे सामने अपनी भरेगी,,,,।

और क्या कहा उसने,,,,।

और क्या कहेगा मैं तो वहां से उठ कर चला गया वैसे तो मेरा मन कर रहा था कि दो थप्पड़ लगा दु,,, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोक कर वहां से चला बना क्योंकि मैं अब ईससे ज्यादा नहीं सुनना चाहता था,,,,‌

इससे ज्यादा मतलब,,,!

अरे जब वह इतना कुछ बोल रहा था तो और कुछ भी बोल सकता था कुछ गंदी बातें भी बोल सकता था जो मुझे सुनी नहीं जाती इसलिए मैं वहां से चलता बना और तुम कह रही हो कि मैं देखने लायक नहीं हूं,,,,।

अरे कसम से मुझे लगता है कि मेरा पेट बाहर निकल रहा है,,,,।

अच्छा कोई बात नहीं अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारा पेट बाहर निकल रहा है तो कल से हम दोनों दौड़ने चलेंगे सुबह-सुबह बस और यह सब कसरत करने से पेट अंदर नहीं जाएगा अगर निकल रहा होगा तो थोड़ा चलोगी थोड़ा दौड़ोगी तभी सही होगा,,,।

तु ठीक कह रहा है जब तक स्कूल की छुट्टी है तब तक कसरत कर लेती हूं और जैसा तू कह रहा हूं अगर 1 महीने और कैसे कर लूंगी तो मेरा शरीर और आकर्षक हो जाएगा ना।

बिल्कुल,,,(अंकित बातों ही बातों में आज बहुत कुछ बोल देना चाहता था लेकिन किसी तरह से अपने आप को रोक ले गया था,,,, उसका दिल बड़ी जोर से धड़क रहा था अपनी मां से इस तरह की बातें करके और उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू भी बन गया था,,, और वह नहीं चाहता था कि इस समय उसकी मां की नजर उसके पेंट में बने तंबू पर पड़े इसलिए ज्यादा बहस नहीं करना चाहता था लेकिन वह समझ गया था कि अब धीरे-धीरे बात बन जाएगी,,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अब जल्दी से नहा धोकर नाश्ता तैयार कर दो चल ठीक से खा नहीं पाया था बहुत जोरों की भूख लगी,, है,,,,।

मैं भी तृप्ति की वजह से कुछ खा नहीं पाई थी कुछ खाने का मन ही नहीं कर रहा था लेकिन आज मुझे भी भूख लगी है,,,, चल जल्दी से कुछ बना देती हूं,,,,।

(ऐसा कहकर दोनों छत से नीचे उतरने लगी आज दोनों के बीच बहस कुछ रोमांटिक मुद्दे पर हो रही थी जिसके चलते दोनों के बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी दोनों उत्तेजित भी हो रहे थे लेकिन अंकित ही इस मुद्दे को यहीं खत्म कर दिया था न जाने क्यों वहां आगे बढ़ने से डर रहा था भले ही इतनी हिम्मत दिखा लिया था लेकिन फिर भी उसे इस बात का डर था की कही उसकी कही गई बातें उसकी मां को झूठी ना लगे,,, क्योंकि इन सब के बारे में वह कुछ ज्यादा सोच विचार कर नहीं रखा था इसलिए वह इस मुद्दे को यहीं खत्म करके बहुत अच्छे से अपने मन में तैयारी करने के बाद फिर से अपनी मां से इसी तरह से बातचीत का दौरा आगे बढ़ाना चाहता था,,,,,)....
 
रात जैसे तैसे करके गुजर गई आज की रात ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिस से मां बेटे दोनों बेहद करीब आ सके,,,,, सुबह के 5:00 बज रहे थे,, सुगंधा की नींद जल्दी खुल चुकी थी वह धीरे से अपने बिस्तर पर से नीचे उतरी और अपने कमरे के बाहर आ गई बाथरूम जाने के बाद वह हाथ मुंह धोकर फ्रेश हो गई,, आज उसे अपने बेटे के कहीं अनुसार पैदल चलना था थोड़ा दौडना था ताकि उसका बदन और भी ज्यादा आकर्षक बन सके,, अंकित के कमरे पर जाकर दरवाजे पर दस्तक देने लगी,,, थोड़ी ही देर में दस्तक की आवाज सुनकर अंकित की भी नींद खुल गई लेकिन नींद में होने की वजह से ऐसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह बोला।

कौन ,,,,,

अरे मैं हूं,,,,, भूल गया आज दौड़ने चलना है,,,,।

(इतना सुनते ही अंकित की नींद एकदम से उड़ गई वह बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और जल्दी से दरवाजा खुला तो देखा दरवाजे पर उसकी मां खड़ी थी जो की एकदम तरोताजा दिखाई दे रही थी यह देखकर वह बोला,,,)

तुम तो बहुत खूबसूरत लग रही हो,,,,,, रुको मैं भी तैयार हो जाता हूं,,,,(इतना कहकर वह तुरंत बाथरूम में चला गया वह जानबूझकर अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ किया था क्योंकि वह इतना तो समझ गया था कि वह औरत क्या सुनना चाहती हैं क्या सुनना पसंद करती है,,,, सुगंधा भी हैरान थी अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर लेकिन अपने बेटे के मुझे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह फुले नहीं समा रही थी,,, और वैसे भी सुबह-सुबह वह अपनी साड़ी को कमर में खोंस ली थी और अपने रेशमी बालों की गुच्चो का जुड़ा बना ली थी और इसकी लत उसके गोरे गाल पर लहरा रही थी वाकई में इस समय सुगंधा कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखाई दे रही थी,,,, थोड़ी देर में हाथ मुंह धो कर अंकित भी फ्रेश हो गया और फिर दोनों घर से बाहर निकल गए लेकिन घर में कोई न होने की वजह से सुगंधा घर में ताला लगा दी थी ताकि कोई चोर चोरी ना कर सके।

सुबह का समय होने की वजह से बहुत ही शीतल हवा बह रही थी जो गर्मी के महीने में बदन को शीतलता प्रदान कर रही थी,, पर वैसे भी सुबह का समय कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखाई देता है अभी सूरज निकला नहीं था इसलिए चारों तरफ अंधेरा ही था लेकिन सड़क पर की स्ट्रीट लाइट जल रही थी और ईक्का दुक्का लोग जॉगिंग करते हुए नजर आ रहे थे,,, जिनमें औरतें भी थी लड़कियां भी थी,,, सुगंधा औरतों के मोटे बदन को देखकर समझ गया था कि इन लोगों को जोगिंग करने की जरूरत क्यों पड़ती होगी लेकिन पतली और तो लड़कियों को देखकर भी इतना तो समझ में आ रहा था कि यह लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति कितने जागरूक है,,,, मोटी औरतों को देखकर सुगंधा के मन में भी ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,, उनमें से अपने मन में उठ रहे एक सवाल को अपने बेटे के सामने ही प्रस्तुत करते हुए बोली,,,,।

बाप रे और से सच में अपने शरीर का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखते देखो तो सही कितनी मोटी है ठीक से चला भी नहीं जा रहा है,,,।(जल्दी-जल्दी अपने कदम को आगे बढ़ते हुए सुगंधा बोली,,)

सब तुम्हारी तरह जागरूक थोड़ी होते हैं मुझे लगता है कि वह औरत तुमसे कम उम्र की होगी लेकिन उसके शरीर के हिसाब से वह कितनी बड़ी लग रही है अगर वह भी तुम्हारी तरह जागरूक होती तो वह भी आज तुम्हारी तरह दिखती,,,, एक तरफ वह औरतें हैं जो अपने शरीर का ख्याल नहीं रखती और एकदम मोटी हो गई है और एक तरफ तुम हो जो कसा हुआ बदन होने के बावजूद भी ऐसा महसूस कर रही हो कि मेरा पेट बाहर निकल रहा है,,,(अंकित अपनी मां के पेट की तरफ देखते हुए बोला जो कि एकदम चिकना और सपाट नजर आ रहा था बस हल्का सा बाहर निकला हुआ था और उसकी नाभि एकदम साफ दिखाई दे रही थी अपने बेटे की बात सुनकर वह भी अपने पेट की तरफ देखने लगे उसे भी एहसास हो रहा था कि उसकी गहरी ना अभी एकदम साफ दिखाई दे रही थी लेकिन फिर भी वह इस समय अपनी नाभि को अपने बेटे की नजर से बिल्कुल भी छुपाने की कोशिश नहीं की और उसकी बात सुनकर बोली,,)

अरे सच में मेरा पेट बाहर निकला हुआ है पहले ऐसा नहीं था,,,(जल्दी-जल्दी तेज कदम आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,,,)

लेकिन मम्मी तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम्हारा पेट बाहर निकल गया है मुझे तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा है,,,।

अरे तुझे क्या मालूम तु क्या देखता रहता है क्या,,,?

तो क्या मैं तुम्हें देखा नहीं हूं क्या,,, तुम्हें भी अच्छी तरह से याद होगा कि मैं तुम्हें देखता हूं कि नहीं,,,(अंकित दो अर्थ वाली बात कर रहा था उसकी मां भी अपने बेटे की बात को अच्छी तरह से समझ रही थी वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसे बहुत बार दे नग्न अवस्था पूर्ण नग्न अवस्था और तो और उसे पेशाब करते हुए भी देख चुका है लेकिन फिर भी जानबूझकर वह ऐसा बोल रही थी,,, अपने बेटे की बात का मतलब अच्छी तरह से समझते हुए सुगंधा बोली,,,)

अरे जानती हूं तो बहुत बार देख चुका है लेकिन फिर भी मेरा शरीर है मुझे तो समझ में आता होगा ना कि मेरा शरीर बढ़ा है कि नहीं बढ़ा,,,,

चलो कोई बात नहीं अगर ऐसा है तो सही हो जाएगा और तुम और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देने लगोगे अपनी उम्र से 10 साल कम,,,।

सच में,,,

तो क्या अभी भी तुम अपनी उम्र से 10 साल कमी लगती हो कोई कह नहीं सकता कि तुम्हारे दो दो जवान बच्चे हैं,,,।

अच्छा तो यहबात है,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली उसे अपने बेटे की बातें बड़ी अच्छी लग रही थी दोनों बात करते-करते तकरीबन आधा किलोमीटर की दूरी तय कर चुके थे,,,, रास्ते में जॉगिंग करते हुए बहुत लोग दिखाई दे रहे थे ज्यादातर औरतें और औरतों का शरीर को ज्यादा ही मोटा उनकी बड़ी-बड़ी गांड की तरफ देख कर सुगंधा अपने मन में सोचती कि अगर वाकई में वह भी अपने शरीर का ख्याल ना रखती तो शायद उसका भी यही हाल हो जाता,,, अभी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि तभी एक औरत की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,,)

मम्मी मैं तो सोच करेंगे घबरा जाता हूं कि अगर तुम भी उस औरत की तरह हो जाती तो कैसा होता तुम्हारी खूबसूरती तो एकदम बेकार हो जाती।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा भी सूरज की तरफ देखने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

ज्यादा से ज्यादा क्या हो जाता सिर्फ खूबसूरती चली जाती ना,,,।

किसी बात से कर रही हो मम्मी उसका पिछवाड़ा देखी हो,,,,(अंकित जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहा था और उसकी मां भी उसके मुंह से पिछवाड़ा शब्द सुनकर गनगना गई थी,,, क्योंकि उसे भी एहसास होने लगा था कि अंकित भी औरतों की गांड की तरफ देखता है,,, चलते फिर कुछ देर की खामोशी के बाद अपने शब्दों को पूरा करते हुए अंकित बोला,,,) कितना भारी भरकम है और तुम्हारा,,,,(इतना कह कर वह एकदम से खामोश हो गया,,,, ऐसा हुआ जानबूझकर किया था वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या कहती है लेकिन उसकी बातें सुनकर सुगंधा मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि वह उसऔरत के साथ-साथ उसकी भी गांड के बारे में बात कर रहा था लेकिन खुलकर बोल नहीं पाया था इसलिए उसकी अधूरी बात को सुगंधा पूरी करवाने हेतु बोली।)

तुम्हारा,,, मतलब कि मेरा,,,मेरा कैसा है,,,,।

(अंकित अच्छी तरह से समझ गया था कि अब धीरे-धीरे आगे बढ़ना है अपनी मंजिल को प्राप्त करना है अगर वह इसी तरह से शर्माता रहा तो महिना गुजर जाएगा और त्रप्ति भी वापस आ जाएगी सब कुछ नहीं हो पाएगा इसलिए वह थोड़ा हिम्मत उठाकर बोला,,,)

तुम्हारी तो बहुत खूबसूरत है उसका उठाव उसका उभार एकदम लाजवाब,, है,,,,।(सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइट के नीचे खड़े होते हुए अंकित बोला क्योंकि वह दोनों चलते-चलते काफी दूर तक आ चुके थे तकरीबन 1 किलोमीटर की दूरी दोनों ने तय कर लिया था और यह कुछ ज्यादा ही था पहले दिन के लिए,,,, सुगंधा भी वहीं पर रुक गई थी अपने बेटे की बात सुनकर उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी क्योंकि वह वाकई में खुले तौर पर ना सही लेकिन उचित शब्दों का प्रयोग करके उसकी गांड की तारीफ कर रहा था,,, सुगंधा मुस्कुरा रही थी और अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

अच्छा तुझे औरत के पिछवाड़े के उठाव और उभार के बारे में ज्यादा मालूम पडने लगा है।

नहीं है सब कुछ भी नहीं है लेकिन औरतों का पिछवाड़ा उसे औरत की तरह तो बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए क्योंकि कितना भद्दा लगता है,,,।

तो किसकी तरह होना चाहिए,,,,(सुगंधा एकदम मुस्कुराते हुए बोली,,, अंकित अपनी मां के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी मां क्या सुनना चाहती है इसलिए वह भी हिम्मत जुटा कर बोला,,,)

तुम्हारी तरह,,,, सच कहता हूं औरतों का पिछवाड़ा तुम्हारी तरह होना चाहिए ,,,, एकदम आकर्षक और खूबसूरत,,,( तिरछी नजर से अपनी मां की गांड की तरफ देखते हुए बोला सुगंधा भी अपने बेटे के मुंह से अपनी गांड की तारीफ सुनकर भाभी नजर पीछे करके अपने नितंबों के उभार को देखकर मुस्कुराने लगी,,,,, और फिर वह एकदम सहज होते हुए बोली,,,)

अब क्या करना है आगे बढ़ना है या पीछे जाना है,,,,।

अभी सुबह होने में थोड़ा समय है थोड़ा आगे ही चलना चाहिए लेकिन दौड़ते हुए दौड़ तो लोगी ना साड़ी में,,,,।

वैसे कभी दौड़ी तो नहीं लेकिन कोशिश करूंगी,,,।

ठीक है ज्यादा जोर से नहीं भागना है आराम से ऐसा लगना चाहिए कि भाग रही है लेकिन चलने जैसा ही होना चाहिए वरना कहीं गिर गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,।

ओहहह मेरी बहुत फिक्र है,,,।

होगी क्यों नहीं,,, इतनी खूबसूरत मम्मी जो है,,,, और जिसके पास इतनी खूबसूरत मम्मी होगी बेटे को तो ख्याल रखना ही होगा,,,।

(अंकित बड़ी चतुराई से बहुत कुछ भूल गया था और उसकी मां भी उसकी बात को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए तो उसकी बात सुनकर उसके बदन में हलचल सी होने लगी थी,,, क्योंकि एक औरत की ख्वाहिश यही होती है कि उसे भी कोई बेइंतहा चाहने वाला हो उसकी फिक्र करने वाला हो,, उसे ढेर सारा प्यार करने वाला है और अब सुगंधा को लगने लगा था कि उसकी आंखों के सामने जो मर्द खड़ा है वही एक दिन उसे बहुत प्यार देगा,,,, अभी भी अंधेरा छाया हुआ था सड़क की स्ट्रीट लाइट का भी उपयोग प्रकाश के लिए हो रहा था,,, सुगंधा को पहली बार ऐसा लग रहा था कि वाकई में लोग अपने स्वास्थ्य के लिए इतने जागरुक है,,,, मां बेटे दोनों तैयार हो चुके थे आगे बढ़ने के लिए,,,, और फिर अंकित धीरे से अपना कदम आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे दौड़ने लगा उसके साथ उसकी मां भी दौड़ने लगी इस तरह से दौड़ने का सुगंधा के लिए पहला मौका था खास करके शादी के बाद क्योंकि ऐसी कोई जरूरत ही नहीं पड़ी थी कि उसे दौड़ना पड़े,,,,।

इस तरह से दौड़ते हुए उसे अपने जवानी के दिन याद आ जाए जब वह कॉलेज में जाया करती थी ऐसे ही एक दिन कॉलेज जाने में उसे देर हो गई थी बस छूट गई थी और वह एक हाथ में बैग लिए हुए दौड़ते दौड़ते ही कॉलेज की तरफ जा रही थी,,, और इस तरह से उसे दौड़ते हुए देखकर रास्ते में कई लोग कई कई तरह की बातें बना रहे थे उनमें से कुछ उसका हौसला बढ़ा रहे थे तो कुछ गंदी फब्तियां भी शामिल थे जिसे सुनकर उसे समय तो उसके कान खड़े हो गए थे उसने कभी सोचा नहीं था कि उसके बारे में लोग इस तरह की भी बातें करेंगे आज भी उसे अच्छी तरह से याद है जब वह दौड़ते हुए जा रही थी तो,,, उसे देखकर खास करके दौड़ते समय उसकी गांड के घेराव को देखकर जो की दौड़ते समय उनमें ज्यादा थिरकन हो रही थी,,, उसे देखकर एक लड़का बोला था,,, वाह क्या गांड है कसम से एक रात के लिए मिल जाए तो दोनों टांगें फैला कर इसकी गांड मार लुं,,, यह शब्द जैसे ही उसके कानों में पड़े थे वह एकदम से स्तब्ध रह गई थी पल भर के लिए तो उसके मन में आया कि वापस लौटकर उस लड़के के गाल पर दो-तीन थप्पड़ लगा दे लेकिन इतनी हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, जैसे तैसे करके सुगंधा उस लड़के की बात को सहन कर गई थी लेकिन जैसे ही अपने कॉलेज के गेट पर पहुंची थी तो गेट पर खड़ा जमादार जो कि अधेड़ उम्र का था,,, वह भी उस पर गंदी फब्ति कसते हुए बोला ।

वाह क्या गांड है साली की,,, अगर मिल जाए तो इसकी बुर नहीं बल्कि गांड मारने में ही मजा आएगा,,,,, यह शब्द जैसे ही उसके कान में पड़े थे उसके तो होश उड़ गए थे,,, क्योंकि वह चौकीदार उसके बाप की उम्र का था और वह कभी सपने में नहीं सोचे थे कि इस उम्र के आदमी भी लड़कियों को देखकर लार टपकाते होंगे,,,, उसकी बात सुनकर सुगंधा दौड़ते हुए ही पीछे नजर घुमा कर देखी थी और उसे चौकीदार की नजरों को जब वह अपनी गांड के इर्द-गिर्द घूमता हुआ महसूस की तो वह मारे शर्म के पानी पानी हो गई थी,,, उसके मन में हुआ कि उसे चौकीदार की शिकायत प्रिंसिपल को कर दे लेकिन फिर वह अपने मन में सोचने लगी की प्रिंसिपल को जाकर वह बोलेगी क्या किन शब्दों में शिकायत करेगी क्योंकि इस तरह के असली शब्दों का प्रयोग कभी अपने जुबान पर नहीं की थी,,, और फिर काफी सोच समझने के बाद वह कुछ बोली नहीं और अपनी क्लास रूम में चली गई।

वह दिन था और उसके बाद आज का दिन है जब वह दौड़ रही थी वैसे तो जवानी के दिनों में उसके बाद में कुछ ज्यादा ही फुर्ती थी और बदन भी छरहरा था इसलिए भागने में बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आती थी लेकिन अब समय बदल चुका था उम्र के हिसाब से अब वह ज्यादा तेज नहीं तोड़ सकती थी लेकिन फिर भी काम चलाने के लिए वह धीरे-धीरे दौड़ लगा रही थी,,,, दौड़ लगाते हुए अंकित अपनी मां को ही देख रहा था वह तिरछी नजर से अपनी मां के ब्लाउज की तरफ देख रहा था क्योंकि भागने की वजह से उसके घर पहुंचे जैसी चूचियां उछल रही थी और अंकित को साफ एहसास हो रहा था कि उसकी मां ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,, इसलिए उसके दोनों कबूतर एकदम बेकाबू हो चुके थे ब्लाउज की कैद से बाहर निकलने के लिए,,, अपनी मां की वह चलती हुई चूचियों को देखकर अंकित अपने मन में सोच रहा था कि नानी की चूचियों की तरह उसे अपनी मां की भी चूचियों को दबाने का मौका मिल जाता तो कितना मजा आता,,,। ऐसा सोचता हुआ वह मस्त हुआ जा रहा था,,, सुगंधा भी जब तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देखी तो उसकी नजर को अपनी चूचियों के ईर्द गिर्द ही पाई तो वह एकदम से गनगना गई,,,।

वह अंदर ही अंदर एकदम खुश होने लगी थी क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि दौड़ने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी,,, और उसे अभी मालूम था कि यह सब उसके ब्रा ना पहनने की वजह से हो रहा था,,,, अपने बेटे की नजर के बारे में जानने के बावजूद भी वह अपनी चूचियों के उछाल को बिल्कुल भी रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी बल्कि वह उसी लय में आगे बढ़ रही थी,,, और अपने मन में सोच रही थी कि काश उसके ब्लाउज के सारे बटन टूट जाए और उसकी चूची एकदम से आजाद हो जाए एकदम नंगी हो जाए और उसका बेटा उसे अपने दोनों हाथों से थाम कर उसे ब्लाउज में वापस भरने की कोशिश करें और उसे जोर-जोर से दबाकर मजा ले,,,।

लेकिन यह सिर्फ उसकी सोच थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों का भारत के ब्लाउज के छोटे-छोटे बटन पर टिका हुआ था जो की मजबूती से एक दूसरे से हाथ मिलाकर बड़ी-बड़ी चूचियों के भार से ब्लाउज के बांध को टूटने से बचा रहे थे,,,, यह तो चुचियों का हाल था लगे हाथ अंकित अपनी मां के भारी भरकम गांड के भूगोल के बारे में भी समझ लेना चाहता था उसे अच्छी तरह से देख लेना चाहता था इसलिए अपनी मां से बात करते हुए बोला,,,।

कैसा लग रहा है मम्मी,,,?

आज तो बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा लग रहा है कि मेरे जवानी के दिन लौट आए हो,,,।

जवानी के दिन गए ही कब थे मम्मी तो वापस आने का सवाल ही नहीं उठता,,, तुम पर तो जवानी पूरी तरह से छाई हुई है या युं कह लो की जवानी तुम पर पूरी तरह से मेहरबान है,,,,।

(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, और उसे अपने बेटे की बातों में एक मर्दाना अंदाज चालक रहा था जो एक मर्द एक औरत के साथ बातें करते हुए शब्दों का प्रयोग करता है,,, अंकित की बातों से सुगंधा बहुत खुश थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

क्या बात है आज तो तो फिल्मी हीरो की तरह मेरी तारीफ पर तारीफ कर रहा है।

क्योंकि तुम तारीफ के लायक हो अभी तक मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ करने के लिए लेकिन बहुत हिम्मत उठाकर तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं और यह बात तुम्हें भी अच्छी तरह से मालूम होगा कि वाकई में तुम कितनी खूबसूरत हो,,,,(अंकित अपनी मां की चूचियों की तरफ देखते हैं बोला और जब-जब सुगंध अपने बेटे की नजर को अपनी चूचियों के इर्द-गिर्द घूमती हुई पाती थी तब तब उसके बदन में सुरसुराहट सी होने लगती थी।,,, सुगंधा अपनी बेटी की बात सुनकर खुश हो रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही क्योंकि उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं है लेकिन उनकी धीरे से अपनी मां से एक कदम पीछे हो गया था क्योंकि वह अपनी मां का पिछवाड़ा देखना चाहता था उसकी भारी भरकम गांड को दौड़ते समय कैसी दिखाई देती है यह देखना चाहता था। और शायद इसका एहसास सुगंधा को भी हो गया था,,, इसलिए वह बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी अपने बेटे के साथ दौड़ने की,,, वह इस तरह से अपने बेटे से कदम आगे ही थी,,

अंकित को अब सब कुछ स्ट्रीट लाइट की रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, अंकित की मां की गांड दौड़ते समय कुछ ज्यादा ही उछल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह खुद अंकित को इशारा कर रही हो कि लपक कर दोनों हाथों से उसे थाम ले,,,, कसी हुई साड़ी में सुगंधा की गांड कहर ढा रही थी,,, अंकित दौड़ते हुए अपनी मां की गांड को देखकर मत हो जा रहा था वाकई में उसकी मां की गांड उसने अब तक जितनी भी औरतों को देखा था उनमें से सबसे ज्यादा खूबसूरत गांड उसकी मां की ही थी,,,। अंकित तो देखता ही रह गया था सुगंधा को भी अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा क्या देख रहा होगा इसलिए वह चलते हुए तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देखी तो एकदम से खुश हो गई क्योंकि जैसा वह सोच रही थी वैसा ही हो रहा था उसका बेटा उसकी गांड को ही देख रहा था,,,, तभी उसे एहसास हुआ की उसके पास से एक आदमी दौड़ता हुआ निकला जो कि उसकी तरफ ही देख रहा था,,,, और फिर तो ऐसे कई लोगों को उसने देखी जो उसे ही देख रहे थे,,, इस बात का एहसास अंकित को भी हो रहा था और वह अपनी मां की खूबसूरती से गर्व महसूस कर रहा था,,,। लेकिन इस बात का एहसास हुआ अपनी मां को करना चाहता है इसलिए वह फिर से अपनी मां के साथ दौड़ने लगा और दौड़ते हुए अपनी मां से बोला,,,,।

देख रही हो मम्मी आते जाते सभी लोग की नजर तुम पर ही है,।

नहीं तो मुझे तो नहीं लग रहा है,,,(सुगंधा जानबूझकर अनजान बनने का नाटक करते हुए बोली और तभी अंकित सामने से आ रहे हैं एक आदमी की तरफ इशारा करते हुए बोला)

वह देखो सड़क की दूसरी तरफ से जो आदमी आ रहा है तुमको ही देख रहा है,,,,।

(सुगंधा धीरे-धीरे दौड़ते हो उसे आदमी की तरह देखने लगी और वाकई में वह आदमी उसे ही देख रहा था और तभी एक आदमी फिर से उसके बगल से आगे निकल गया और उसे देखकर कर अंकित बोला)

देख रही हो यह भी तुम्हें देखता हुआ निकल गया,,,,, जो आगे से आ रहे हो तुम्हारी छाती की तरफ देख रहा है और जो पीछे से आ रहा है और तुम्हारे पिछवाड़े की तरफ देख रहा है,,,(अंकित पूरी तरह से सोच समझकर मौके की नजाकत को देखते हुए ही इस तरह की बात कहा था इस तरह के शब्दों का प्रयोग किया था वह जानता था कि इस समय उसकी मां भी मस्त हो रही है इसलिए वह कुछ बोलेगी नहीं,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित की बातों से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी और अंकित की बातों में पूरी तरह से सच्चाई थी इस बात का एहसास सुगंधा को भी था अच्छी तरह से जानती थी मर्दों की फितरत को आगे से आते समय वह चुचई की तरफ देखते हैं और पीछे से गांड की तरफ,,,,।

दौड़ते दौड़ते दोनों काफी दूर तक आ चुके थे और अब धीरे-धीरे उजाला भी हो रहा था,,,, इसलिए सुगंधा एक जगह पर रुक गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसकी सांसों की गति उसकी चूचियों में हलचल मचा रही थी और उसकी यह हलचल अंकित की नजरों से छुपी नहीं थी,,,। गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।

काफी दूर आ गए हैं पहले दिन के लिए यह तो बहुत ज्यादा ही हो गया है बातों ही बातों में कहां से कहां पहुंच गए पता ही नहीं चला,,,।

सच कह रही हो मम्मी तुम्हारे साथ दौडने में मुझे भी बहुत मजा आया,,,।

मजा तो आया लेकिन साड़ी में दौड़ने में दिक्कत होती है खुलकर दौड़ नहीं सकते,,,।

तो तुम भी उसे औरत की तरह,,,(सामने सड़क से जा रही है एक औरत की तरफ इशारा करते भेजो ढीला पाजामा और कुर्ता पहने हुए थी) कपड़े पहन कर दौड़ा करो आराम रहेगा और अच्छा भी लगेगा,,,।

तू सच कह रहा है लेकिन इस तरह से कपड़े पहन कर घर से निकलने में बड़ा अजीब लगेगा आस पड़ोस के लोग देखेंगे तो क्या बोलेंगे,,,।

अरे इसमें क्या बोलेंगे बहुत से लोग पहनते हैं अच्छी नहीं जॉगिंग करते समय कितनी औरतें पहनी हुई थी क्योंकि इसमें आराम रहता है,,,।

बात तो तु सही कह रहा है,,, चल देखेंगे अब घर चलते हैं,,,,।

(इतना कहकर दोनों बातें करते हुए कब घर पहुंच गए पता ही नहीं चला)
 
तृप्ति के गांव जाने के बाद अंकित और उसकी मां के लिए हर एक रात बेहद मधुर होती जा रही थी,,,हर एक रात को कुछ ना कुछ एक दूसरे को देखने दिखाने का मौका मिल रहा था और यह मौका उन दोनों के जीवन का सबसे अद्भुत पल होता जा रहा था,,, हर एक पल में मधुरता मादकता मदहोशी छाई हुई थी,,,अंकित अपनी मां को बाहों में लेकर उसके होठों पर चुंबन करके अपने मन की मनसा को दर्शा चुका था अगर उसकी मां उससे अलग ना हुई तो शायद दोनों मंजिल तक पहुंच जाते,,, एन मौके पर सुगंधा क्यों अपने पैर पीछे खींच ली यह सुगंधा को भी समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि सुगंधा भी तो यही चाहती थी,,,, शायद यह मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते की वजह से हुआ था क्योंकिसुगंधा अपने बेटे के साथ एकाकार होना चाहती थी एक औरत के रूप में लेकिन जब कभी भी दोनों के बीच ऐसा कुछ होता है तबन जाने क्यों सुगंधा के अंदर से औरत अलग हो जाती है और वह एक मां के रूप में सामने होती है जिसकी वजह से वह अपने बेटे के साथ कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो जाती है।



लेकिन एक चुंबन से वह समझ गई थी उसका बेटा भी वही चाहता है जैसा कि वह चाहती है। इसलिए वह बहुत खुश थी,,, और चुंबन करने की वजह भी वह खुद बताई थी इसलिए उसके बेटे को एक मौका मिल गया था इस तरह से चुंबन करने का जिसके चलते उसने रात में छत पर अपने बेटे को अपनी लंबी गांड के दर्शन कर रही थीऔर सुबह जब उठी तो उसके लंड को अपनी गांड के बीचों बीच महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, जिसके चलते वह कुछ देर तक उसी तरह से लेटी रह गई थी,,, और आज तो उसे कुर्ता पजामा पहनकर दौड़ने में बहुत अच्छा लग रहा था वह अपने बेटे पर उसकी नजरों पर गौर कर रही थी वह उसके खूबसूरत बदन को ही निहार रहा था,,, पजामे में उसकी गांड और ज्यादा बड़ी लग रही थीजिसे अंकित प्यासी नजरों से देख रहा था और आगे एक बटन नीचे होने की वजह से उसके चूचियों के बीच की गहरी पतली लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी जिसके बारे में उसका बेटा खुद पहनते समय जिक्र कर चुका था और इसमें कोई आपत्ति नहीं है यदि जता दिया था,,, और खुद चूचियों को प्यासी नजरों से देखकर मस्त हो रहा था,,, अपने बेटे की इस तरह की नजर से सुगंधा बार-बार मदहोश हो रही थी।



जोगिंग करने के बाद मां बेटे दोनों घर पर पहुंच चुके थे,,,,,,, चाय नाश्ता और खाना बना लेने के बाद वह घर की सफाई में लग गई थी,,,,, कुछ देर तक अंकित अपने कमरे में ही आराम कर रहा थालेकिन बहुत देर से अपनी मां को ना देखने के बाद बहुत धीरे से अपने कमरे से बाहर निकाला और अपनी मां के कमरे में पहुंच गया तो देखा उसकी मां कमरे की सफाई कर रही थी यह देखकर वह बोला,,,।

यह क्या कर रही हो मम्मी,,,?

अरे बहुत दिन हो गए थे कमरे की सफाई नहीं की थी तो सोची चलो आज कमरे की सफाई ही कर लुंं।

चलो मैं भी तुम्हारा हाथ बंटा लेता हूं,,,(इतना कहकर वह भी सफाई काम में लग गया,,, सुगंधा उसे इस तरह से काम करते देखकर मन ही मन में मुस्कुरा रही थी लेकिन तभी उसके दिमाग में कुछ और चलने लगा उसे याद आया की अलमारी में उसने मां बेटे वाली कहानी वाली किताब रखी हुई है जो वह किसी भी तरह से अपने बेटे को दिखाना चाहती थी ताकि उसका बेटा हुआ कहानी को पड़े और उसके मन में मां बेटे के बीच के रिश्ते को लेकर कुछ-कुछ और ऐसा वह पहले भी कर चुकी थी लेकिन शायद सुगंधा को लगता था कि उसका बेटा उस किताब पर ध्यान नहीं दिया था,,, इसलिए आज मौका अच्छा थाआज वह किसी भी तरह से अपने बेटे को वह किताब दिखाना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,)



तू यह सब रहने दे तू अलमारी की सफाई करना उसमें बहुत सारी किताबें पड़ी है तो एक जगह पर रख दे वह सब रद्दी हो चुकी है कबाड़ी वाले को बेचने के काम आएगी,,,।

ठीक है मम्मी मैं अभी अलमारी साफ कर देता हूं,,,,(इतना कहकर अंकितअलमारी खोलकर अलमारी की सफाई करने लगा उसमें ढेर सारी किताबें रखी हुई थी जिन्हें देख-देख कर वह एक तरफ रख रहा था और जरूरी किताब को एक तरफ रख रहा था तिरछी नजर से सुगंधा अपने बेटे की तरफ देख रही थी वह देखना चाहती थी कि वह किताब उसके हाथ लगती है तब वह क्या करता है,,,, कुछ देर तक अंकित अलमारी की सफाई करता रहा लेकिन वह किताब उसे नहीं मिली थी तब उसे याद आया कि वह किताब तो उसने ड्रोवर के अंदर रखी थी,,, इसलिए वह तुरंत बोली,,,)

नीचे अगर सफाई हो गई हो तो ड्रोवर भी देख लेना,,, बहुत रद्दी किताबें पड़ी है,,, सब बेच दूं तो,,, कचरा कम हो जाए,,,।

मम्मी तुम सच कह रही हो तुम्हारी अलमारी में काम से ज्यादा तो बेकार की चीजे पड़ी है,,,,।(इतना कहते हुए वह अंदर से जूनी पुरानीतीन-चार ब्रा निकाला जो कि हर एक जगह से फटी हुई थी और उसे अपने हाथ में लेकर अपनी मां के सामने दिखने लगा उसे देखकर सुगंधा शर्म से पानी पानी हो गई और बोली,,,)

अरे यह क्या दिख रहा है मैं यह सब नहीं पहनती ये तो बहुत पुरानी है फटी हुई है,,,,।

इसलिए तो बता रहा हूं इसे पहनना भी नहीं,,,।

क्यों,,,?

अरे इतनी खूबसूरत औरत हो और फटी ब्रा पहनोगी तो कितना खराब लगेगा,,,,।

खूबसूरत,,,,(मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली,,)



तो क्या खूबसूरत है ही तो हो मेरा बस चलता तो रोज तुम्हें नए कपड़े पहनाता लेकिन क्या करूं अभी कमाता नहीं हूं नहीं इसलिए मजबूर हूं,,,,।

तो कमाना शुरू कर दे फिर रोज मेरे लिए नए कपड़े लेकर आना,,,।

मैं भी यही सोच रहा हूं अगर कमाता होता तो रोज तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आता,,,,,,।

तेरे पापा भी मेरे लिए रोज कुछ ना कुछ लेकर ही आते थे,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को अनायास ही अपने पति की याद आ गई थी और अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

तो क्या हुआ मम्मीमैं भी तुम्हारे लिए रोज गिफ्ट लेकर आऊंगा पापा नहीं है तो क्या हुआ मैं तो हूं ना,,,।

(अंकित अपनी मां को दिलासा देते हुए बोल रहा थालेकिन उसकी इस भावुकता में एक सारे एक आकर्षक और एक पति के द्वारा पूरी करने वाली शारीरिक जरूरत भी शामिल थी जिसे वह इशारे में अपनी मां को समझा रहा था और शायदशब्दों के द्वारा दिए गए थे सारे को उसकी मां अच्छी तरह से समझ रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा उसे एक पति की तरह शारीरिक सुख भी जरूर देगा इसलिए मुस्कुराते हुए बोली,,,)



मुझे पूरा यकीन है कि तु एकदीन तेरे पापा की ही तरह मेरी सारी जरूरतें पूरी करेगा,,,,(सुगंधा के द्वारा भी यह एक इशारा ही था,,,, और इस ईशारे को अंकित समझने की कोशिश कर रहा था और फिर से वह अलमारी की सफाई करना शुरू कर दिया,,,, देखते ही देखते वह अलमारी के ड्रोवर को खोल दियाऔर उसमें से बेकार की वस्तुओं को निकाल कर एक तरफ रखना लगा और तभी अंदर की तरफ जब हाथ डाला तो उसे वही किताब मिल गई और वह ड्रोवर में से उस किताब को बाहर निकाल कर,,,देखने लगा सुगंधा अपने बेटे की हरकत को तिरछी नजर से देख रही थी उसके हर एक हाव-भाव को देख रही थी,,, अंकित के हाथों में वह किताब आते ही उसके मुख्य पृष्ठ को देखकर अंकित के चेहरे का भाव बदलने लगा था उसे याद आ गया था कि इस किताब को वह पहले भी पढ़ चुका था औरअपनी मां के बारे में सोच रहा था किस तरह की किताब क्या हुआ सच में पढ़ती होगी अगर पढ़ती होगी तो उन्हें भी एक मां बेटे के बीच का रिश्ता इसी तरह से दिखाई देता होगा इस बात को सोचकर वह काफी खुश हुआ था,,, और इस समय भी उसके मन में यही सब चल रहा था वह धीरे से उसे किताब के पन्नों को पलटने लगा जिसमें कुछ रंगीन गंदे चित्र भी छुपे हुए थे और मां बेटे के बीच की कहानी भी थी,,,सुगंधा तिरछी नजर से अपने बेटे की हरकत पर बराबर नजर रखी हुई थी उसके चेहरे पर प्रश्न है क्या भाव नजर आ रहे थे जब उसने देखी कि उसके बेटे के हाथ में वही किताब लग गई है जिसे वह दिखाना चाहती थी लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि उसका बेटा उस किताब को पहले भी पढ़ चुका था,,,,।

Sugandha ka khwab



मां बेटे दोनों के दिल की धड़कन तेज होने लगी थी अपनी मां से नजर बचाकर वह किताब के पन्नों को पलट कर उसमें लिखी गई कहानी के शब्दों को जल्दी-जल्दी पढ़ रहा था तभी उसकी आंखों के सामने कहानी का कुछ भाग लिखा हुआ नजर आया जिसे पढ़कर उसका लंड एकदम से टन्ना गया,,,,।

मम्मी की बड़ी-बड़ी गांड ट्यूब लाइट की दूरी और रोशनी में चमक रही थी मैंने कभी अपनी मां को पेशाब करते हुए नहीं देखा था,, लेकिन पहली बार जब अनजाने में ही मेरी नजरमां पर पड़ी तो मैं देखता ही रह गया पहली बार मां की नंगी गांड मेरे लिए किसी अजूबे से काम नहीं थी और वह भी मम्मी पेशाब कर रहे थे उनकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम कसी हुई थी,,,, मां ने साड़ी कमर तक उठाकर पेशाब कर रही थी जिसकी वजह सेकमर के नीचे का पूरा भाग दिखाई दे रहा था उनके पेशाब की आवाज किसी मधुर ध्वनि की तरह मेरे कानों में पड़ रही थी जिसे सुनकर मैं पागल हुआ जा रहा था मैं दीवार के पीछे से यह सब नजर देख रहा था मां को इस बात का अहसास तक नहीं था कि मैं उन्हें इस हालत में देख रहा हूं,,,,मेरी टांगों के बीच अजीब सी हलचल हो रही थी जिसे महसूस करके बदन में मस्ती से चढ रही थी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं।

Sugandha ki kalpna



इतना पढ़कर तोअंकित की हालत एकदम से खराब होने लगी उसका दिल जोरो से धड़कने लगा हालांकि वह अपनी मां को बहुत बार पेशाब करते हुए देख चुका था लेकिन कहानी में पहली बार इस तरह का वर्णन पढ रहा था जिसे पढ़कर उसके बाद में सुरसुरी से दौड़ने लगी थी,,, पल भर में उसके मन में ढेर सारे सवालढेर सारे विचार जन्म लेने लगे वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसकी मां इस तरह की किताब अपनी अलमारी में रखी है तो इस तरह की कहानी भी पढ़ती होगी उसे मां बेटे के बीच के रिश्ते के बारे में अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा कि एक कमरे के अंदर मां बेटे अगर अकेले रह रहे हो तो उन दोनों के बीच क्या होना संभव है यही सोचकर उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह उसकी किताब के बारे में अपनी मां से जिक्र करना चाहता था लेकिन इसके लिए उसे काफी हिम्मत जुटाना थाऔर तिरछी नजर से काम करते समय सुगंधा अपने बेटे को देख रही थी उसकी हरकत को देख रही थी,,,, सुगंधा मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि किताब में लिखी हुई कहानी उसके बेटे कोपसंद आ रही थी जिसमें वह रुचि ले रहा था तभी तो वह सब कुछ भूल चुका था तभी उसका ध्यान भंग करने के लिए उसकी मां बोली,,,)

क्या हुआ जल्दी-जल्दी कर जल्दी से काम खत्म करना है अभी मैं नहाई भी नहीं हूं कपड़े भी धोना है,,,।



हां मम्मी कर रहा हूं लेकिन यह तुम्हारी अलमारी में मुझे क्या मिला है,,,?

क्या मिला है,,,?(सुगंधा अनजान बनते हुए बोली)

कोई किताब है लेकिन यह कोई स्कूल की किताब नहीं है,,,,।

क्या ऐसी कौन सी किताब आ गई कोई मैगजीन होगी सरस सलिल जैसी,,,।

नहीं मम्मी ऐसी तो कोई भी मैगजीन नहीं है,,,,।

ला अच्छा मुझे दिखा तो ऐसी कौन सी किताब मेरे अलमारी में आ गई जिसके बारे में मुझे पता नहीं है,,,।

लो तुम ही देख लो,,,, मैं तो इसके पन्ने पलट कर देखा बहुत गंदी कहानी है,,,(अपनी मम्मी की तरफ घूम कर उसे वह गंदी किताब उसके हाथ में थमाते हुए वह बोला,,,सुगंधा भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस गंदी किताब को अपने हाथ में ले ली और उसके मुख्य पृष्ठ को देखकर एकदम से जानबूझकर शर्मिंदगी का नाटक करते हुए बोली,,,)

हाय दैया यह तुझे कहां मिल गई रे,,,,।



तुम्हारी अलमारी में और कहां बहुत गंदी किताब है,,,।

यह तो मैं भी जानती हूं कि बहुत गंदी किताब है,,,।

तो क्या तुमने ईसको पढ़ी हो,,,

मेरी अलमारी में है तो पढी ही होंऊंगी,,,, लेकिन तूने क्या पढ़ लिया जो एकदम हैरान हो गया है,,,,(किताब के पन्नों को पलटते हुए और वो भी अपने बेटे के सामने वह बोली,,,)

क्या बताऊं मम्मी मुझे तो बताते भी शर्म आ रही है क्या ऐसी भी किताबें होती हैं मैं तो पहली बार देख रहा हूं,,,।

मैं भी पहली बार देखी थी तब मैं भी तेरी तरह हिरण हो गई थी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह की भी किताबें होती है और इस तरह की कहानी भी होती है जब पहली बार तेरे पापा लेकर आए थे,,,।

पापा लेकर आए थे,,,,(अंकित हैरान होता हुआ बोला क्योंकि वह किताब नहीं लग रही थी)

हां तेरे पापा लेकर आए थे लेकिन खरीद कर नहीं लाए थे यह किताब के साथ दो-तीन किताबें और थी जो कि तेरे पापा के दोस्त ने उन्हें पढ़ने के लिए दिया था,,,, और तब से यह किताब घर पर ही पड़ी थी लेकिन बस एक ही बची है,,,।

तो क्या पापा इस तरह की कहानी पढ़ते थे,,,,।

नहीं उन्हें लगा कि कोई नोवल होगा कोई जासूसीलेकिन जब पढ़ने लगे तो वो भी हैरान हो गए मैं भी उनके साथ ही बैठी थी तो मेरी नजर भी पड़ गई और मैं भी हैरान हो गई,,,, वैसे तु क्या पढ़ लिया जो तेरी हालत खराब हो गई,,,,।



नहीं जाने दो मुझसे तो बताया भी नहीं जाएगा,,,, इस तरह की कहानी तो मैं पहली बार पढ़ रहा हूं,,,

लेकिन बता तो सही ,,,,।

अरे कैसे बताऊं मुझे तो शर्म आती है,,,,।

इसमें शरम कैसी जो पड़ा है बता दे वैसे तो सबकुछ सामने ही है,,,, और तु कोई चोरी छुपे तो पढ़ा नहीं,,, वैसे तो पूरी किताब ही गजब की है लेकिन तू कौन सी लाइन पढ़ लिया जो तेरी हालत खराब हो गई बात भी दे,,,,,(सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को उकसा रही थी बताने के लिएऔर अंकित भी समझ रहा था कि उसकी मां क्या सुनना चाह रही है इसलिए वह अपने मन में सोचा कि जब उसे कोई एतराज नहीं है तो भला हुआ क्यों शर्मा की चादर ओढ़ कर इतने अच्छे मौके को अपने हाथ से गंवा दे,,,,। इसलिए वह हीम्मत करके अपनी मां से बोला,,,)

जो पढ़ा वह तो मेरे दिमाग को एकदम सन्न कर दिया,,,,,।

पढ़ा क्या यह तो बता,,,,,(सुगंधा लालायित हुए जा रही थी अपने बेटे के मुंह से उस गंदी किताब के शब्द को सुनने के लिए,,,,,, अपनी मां की उत्सुकता देखकर अंकित के मन में भी प्रसन्नता हो रही थी इसलिए वह हिम्मत दिखा कर बोला ,,,)



लाओ में पढ़कर ही बता दु ऐसे तो मुझसे बताया नहीं जाएगा,,,(अंकित अपनी मां की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला सुगंधा भी मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत अपने हाथ मिली हुई किताब को आगे बढ़कर अपने बेटे को थमा दी और अंकित उस किताब को लेकर उसके पन्ने पलटने लगा और जो शब्द उसने पढे थे वह बोलने लगा,,,,)

मम्मी की बड़ी-बड़ी गांड ट्यूब लाइट की दुधिया रोशनी में चमक रही थी मैंने कभी अपनी मां को पेशाब करते हुए नहीं देखा था,, लेकिन पहली बार जब अनजाने में ही मेरी नजरमां पर पड़ी तो मैं देखता ही रह गया पहली बार मां की नंगी गांड मेरे लिए किसी अजूबे से काम नहीं थी और वह भी मम्मी पेशाब कर रहे थे उनकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम कसी हुई थी,,,, मां ने साड़ी कमर तक उठाकर पेशाब कर रही थी जिसकी वजह सेकमर के नीचे का पूरा भाग दिखाई दे रहा था उनके पेशाब की आवाज किसी मधुर ध्वनि की तरह मेरे कानों में पड़ रही थी जिसे सुनकर मैं पागल हुआ जा रहा था मैं दीवार के पीछे से यह सब नजर देख रहा था मां को इस बात का अहसास तक नहीं था कि मैं उन्हें इस हालत में देख रहा हूं,,,,मेरी टांगों के बीच अजीब सी हलचल हो रही थी जिसे महसूस करके बदन में मस्ती सी चढ रही थी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। मम्मी की बुर से लगातार पेशाब की धार फूट रही थी उसमें से मधुर संगीत नहीं कर रही थी और उसे मधुर संगीत ने मेरे लंड को खड़ा करने में बिल्कुल भी समय नहीं लियामैं अपनी मां की नंगी गांड को देख रहा था वह पेशाब कर रही थी और मेरा हाथ अपने आप पेंट के ऊपर से मेरे लंड को दबा रहा था,,,,।

सुगंधाकी तड़प



(अंकित इस कहानी को पढ़ते समय अपनी मां की तरफ तिरछी नजर से देख ले रहा था जैसे वह उसके हवाओं को देख रही थी वैसे ही अंकित भी अपनी मां के चेहरे के हाव भाव को देखने की कोशिश कर रहा था,,,, अंकित के मुंह से निकले एक-एक शब्द मदहोशी से भरे हुए थे जो उसकी मां के कानों में घुलकर उसे मस्त कर रहे थे।यह देखकर अंकित को भी आनंद आ रहा था और वह बड़ी दिलचस्पी दिखाकर कहानी को आगे पढ़ रहा था,,,,।)

मम्मी निश्चिंत होकर पेशाब कर रही थी,,,,और उसे देखना और वह इस हालत में शायद संभावना होता अगर 2 दिन पहले ही बाथरूम का दरवाजा टूट कर अलग ना हो गया होता उसकी रिपेयरिंग करना बाकी था और उसेबाथरूम से निकाल कर दूसरी तरफ दिए थे इसलिए बाथरूम पूरी तरह से बेपर्दा हो चुका था और इसीलिए मुझे यह खूबसूरत नजारा देखने का मौका मिला,,,,मुझे पहली बार एहसास हुआ की मम्मी कितनी खूबसूरत है उसकी गांड कितनी खूबसूरत है उसका गोरा रंग उसे और भी कितना ज्यादा सेक्सी बनाता है,,,,,मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मम्मी कितना पेशाब करती है बड़ी देर से उसकी बुर से पेशाब की धार फुटते जा रही थी,,, मन तो कर रहा था कि मैं भी बाथरुम में घुस जाऊं और पीछे से मम्मी की बुर में लंड डाल दु और उनकी चुदाई कर दुं,,, लेकिन डर इस बात का था कि कहीं मम्मी शोर ना मचा दे,,,, किसी को पता चल गया तो क्या होगा लेकिन इतना तो मुझे मालूम था कि मम्मी को भी इसी चीज की जरूरत है क्योंकि बरसों से उन्होंने अपनी जवानी को संभाल कर रखी थी,,,, मैं 10 साल का था तभी पापा गुजर गए थे तब से मम्मी अकेले ही थी,,,, घर में बस में मम्मी और मेरी दो बड़ी बहनें,,, मम्मी की गदराई जवानी देखकर मुझे मालूम था उन्हें मोटे तगड़े लंबे लंड की जरूरत थी,,,,,(जब यह लाइन अंकित ने पढा तो तिरछी नजर से अपनी मां की तरफ देखने लगा अंकित को एहसास हुआ कि उसकी मां उसकी पेंट की तरफ देख रही थी और जब उसने गौर किया तो वाकई में उसके पेट में तंबू सा बन गया था लेकिन अंकित अपने पेट में बने तंबू को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था और आगे की लाइन पढ़ने लगा,,,)

अप से ही मजा लेती हुई सुगंधा



मेरा लंड पेंट से बाहर आने के लिए तड़प रहा था और मम्मी की बुर में जाने के लिए मचल रहा था मम्मी की तरफ से बस इशारा आना बाकी थाअगर इसी समय ऐसा हो जाता तो मैं मम्मी को बाथरूम में हीं जमकर चुदाई कर देता,,,इतना तुम्हें जानता था कि अगर मम्मी मौका देती तो मैं मम्मी की जवानी कर रहा था अपने लंड से मुझे छोड़ देता उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करने का दम मेरे में बहुत था बस मम्मी के इसारे की देरी थी,,,,,।

बस बस रहने दे बाप रे इतनी गंदी कहानी मैं तो कभी सोची भी नहीं थी,,,,(बीच में ही अंकित को रोकते हुए सुगंधा बोली तो अंकित अपनी मां की तरफ देखते हुए अाशचर्य से बोला,,,)

लेकिन तुमने तो पढ़ी हो ना,,,।

अरे पूरी किताब थोड़ी पढी हूं तेरी ही तरह एक दो पन्ने ही पढ़ी हूं,,,,,,।

सच में बहुत गंदी किताब है ना मम्मी मेरी तो हालत खराब हो गई,,,,।

ला ईस किताब को मुझे दे,,,, इसे तो रद्दी में बेचने में भीबदनामी हो जाएगी किसी को पता चल गया कि जिस घर से यह किताब बेची गई है तो गजब हो जाएगा,,,।

सही कह रही हो मम्मी,,,(इतना कहते हुए अंकित उसे किताब को अपनी मां की तरफ बढ़ा दिया और उसकी मां उसे किताब को अपने हाथ में लेकर बिस्तर के नीचे रख दी,,,, और अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,,,)

जल्दी से अब सफाई कर इस किताब ने तो मेरे पसीने छुड़ा दिए,,,,।

सच कह रही हो मेरी भी हालत खराब कर दिया इस किताब ने,,,,(ऐसा कहते हुए वह फिर से आलमारी साफ करने लगा,,,, लेकिन इस कहानी को पढ़ने के बाद मां बेटे दोनों के मन में उथल-पुथल चल रही थी अब उन दोनों के पास बात करने के लिए इस कहानी को लेकर बहुत सारे मुद्दे थे,,,, और अंकित भी अपनी मां से इस तरह की बातों की शुरुआत करना चाहता था इस कहानी को लेकर बहुत सारी बातें सवाल उसके मन में चल रहे थे।)
 
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