Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग… - SexBaba
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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

hotaks

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Dear Friends,

My last story "Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala", you all gave lots of support and love for it.

I am starting a new story and hope to receive similar support, comments and encouragement from all of you.

This is my 2nd attempt and as usual taking inspiration from my friends Rajizexy, komaalrani vakharia Pitaji, dhalchandarun etc..(sorry not mentioning many others whose stories I follow). All their stories have gained immense popularity and some are masterpieces.

I may not replicate their success but just an honest attempt. And last but not the least...

इस बार मैं कहानी हिंदी में लिखूंगा. होप आप सब का भरपूर प्यार मिलेगा मेरी इस कहानी पर...
 
Disclaimer: This is purely a fictional story based on writers thoughts and imagination and nothing to do with reality. This story is just for entertainment purposes..so, story padhiye aur mazaa lijiye..nothing more nothing less. All the names are fictitious and plucked out of thin air.

ये कहानी एकदम काल्पनिक है और इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है. ये कहानी लेखक की सोच है और इसको इसी उद्देश्य से देखना और लेना है. नाम भी पूरे काल्पनिक है और लेखक के मन में जो नाम याद आये उसे इस कहानी में लिया गया है. ये कहानी सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए है और इसके अलावा और कुछ नहीं. धन्यवाद.

One more thing:


I am a bit busy now a days with my work. So, I can post only 1 update in a week due to my work constraints. Incase my work load reduces, I will try to post more updates..but as of now pls expect 1 update per week. Hope you all understand. Thank you.

Intro and 1st update

ये एक ऐसे लड़के की रंगीन कहानी है जिसपर उपरवाले का आशीर्वाद उनपर बहुत था..

याने लड़का एकदम स्मार्ट, होशियार, एकदम गोरा और हसमुख चेहरा और सब को प्यार से देखने वाला..और सब से बड़ी बात…उसका लंड जो एकदम लम्बा और मोटा था…जो भी (औरत/लड़की) एक बार उसको देख ले..उसपर मर मिट्टी थे…

तो चले..चलते है रोमांस और सेक्स से भरपूर कहानी की और..

पात्र परिचय

बाप - नहीं है

वसुधा - ४२ Yrs (हीरो की माँ)..लेकिन लगती ३५ के आस पास..एकदम अपने आप को मेन्टेन किये हुए है…

Fig : ३४/३०/४०…एकदम कामुक औरत लेकिन एकदम संस्कारी..और अपने बच्चो से बहुत प्यार करती है..

(लोग इसे प्यार से वसु बुलाते है)

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निशा - २३ Yrs (बेटी/हीरो की बेहन) …अपनी माँ पर गयी है..तगड़ा माल..हसमुख चेहरा…और सब से ख़ास बात..उसकी एकदम ठोस और कड़क बूब्स और उठी हुई गांड..जो किसीको भी दीवाना बना दे…और अपने हीरो को भी.. और वो भी अपने भाई पे मरती है …Fig: ३४/३०/४०

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दीपक - २० Yrs…हीरो…अपनी माँ और बेहन को बहुत प्यार करने वाला…स्मार्ट हैंडसम…लंड साइज: 8.5 inch और बहुत मोटा…जो औरतों और लड़कियों को खुश करने में एकदम माहिर है.. घर वाले इसे प्यार से दीपू बुलाते है

दिव्या - ३५ Yrs (हीरो की मौसी) (वसु की छोटी बेहन) …लेकिन लगती ३० के आस पास....रंग थोड़ा सावला है…इसकी कुंडली में थोड़ा दोष है..जिसकी वजह से अब तक इसकी शादी नहीं हुई है और वसुधा के साथ ही रहती है..एकदम कड़क माल…मस्त उभरे हुए चूचे और उठी हुई गांड …अपनी जवानी को लुटाने के लिए तैयार है..लेकिन अब तक कोई उसे लूटने वाला (पति) नहीं मिला..ये भी अपनी बेहन की तरह कामुक है लेकिन अपनी वासना को दबा के राखी हुई है..फिग: ३२/३०/३८

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और भी बहुत पात्र आएंगे स्टोरी में..जिनका जीकर बाद में होगा..

और इन सब में एक ख़ास बात…(जो इनको बाद में पता चलता है)..इन तीनो की कमर पे..नाभि से थोड़ा हटके..इनको सब को एक तिल था …जो उनको बहुत आकर्षक और कामुक बनाता था..

ये कहानी जब शुरू होती है जब वसु १८ साल की थी और पढाई करते वक़्त उसे एक लड़के से प्यार हो गया था…दोनों में सच्चा प्यार था…लेकिन दोनों के घर वालों को ये पसंद नहीं था…तो दोनों ने घर से भाग कर शहर आकर शादी कर ली और अपना घर बसा लिया..वसु के माँ बाप अच्छे पैसे वाले थे. उन्हें लगा था की वो लड़का वसु को बेहला फुसला कर पैसे की वजह से उसे भगा ले गया है.

दोनों में बहुत प्यार था…वक़्त बीत-ता गया और और शादी के तीन साल में ही वसु ने पहले लड़की (निशा) और फिर एक लड़का (दीपू) को जनम दिया …

जब दोनों के घर वालों को पता चला तो फिर भी वो खुश नहीं थे..लेकिन वक़्त के साथ उन्होंने समझौता कर लिया था…और उहने ख़ास कर के वसु के माँ बाप जिन्हे समझ आया की दोनों में सच्चा प्यार था और नाकि पैसों के लिए और उन्हें माफ़ कर दिया था और दोनों को अपना भी लिया था… आखिर में दोनों के माता पिता जो दादा, दादी और नाना, नानी जो बन गए थे.

वसु के सास ससुर उम्र के चलते भगवान के घर चल दिए. उनके जाने से दोनों बहुत दुखी थे लेकिन क्या कर सकते थे. ये तो एक दिन सब के साथ होना ही है.

वसु और उसका परिवार (जिसमें उसके माँ, बाप, भाई, बेहन, भाभी थे …उनका परिचय बाद में दिया जाएगा.) बहुत खुश थे..और अपनी ज़िन्दगी ख़ुशी से जी रहे थे..

Flashback..

दीपू जब जब छोटा था ..तो वो बहुत बीमार पढ़ गया…काफी इलाज भी करवाया था..लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं था..

वसु और उसके पति (पति का नाम नहीं ले रहा हूँ…क्यूंकि उसका इस कहानी में ज़्यादा रोल नहीं है) ने डॉक्टर्स को भी दिखाया और इलाज करवाया लेकिन दीपू की हालत में सुधार नहीं हुआ.. उसकी हालत बहुत ख़राब हो गयी थी और उसके बचने की उम्मीद भी काम नज़र आ रही थी.

वसु के पति को उसके एक दोस्त ने बताया था की शहर से बाहर थोड़ी दूर में एक खंडहर है जहाँ एक ग्यानी बाबा रहते है..लोग उन्हें बहुत मानते है…लोग उन्हें ग्यानी इसीलिए कहते थे की उन्हें सच में बहुत ज्ञान था और हमेशा लोगों का भला ही करते थे ..और कभी कभी लोग ऐसी हालत में उनके पास भी जाते है..

वसु को लगता है की उन्होंने दीपू के इलाज के लिए सब को दिखाया है…कुछ सुधार नहीं हुआ..तो वो वहां पर जाकर उस बाबा को एक बार दिखाने में कोई हर्ज़ नहीं है…क्या पता..शायद वो ही कुछ उपचार बता दे..

वसु का पति अपने काम में बहुत व्यस्त रहता है तो वो वसु को ही उस बाबा के पास जाने को कहता है. तो वसु दीपू को लेकर उस खंडहर जाती है जहाँ बाबा अपनी आँख बंद कर के ध्यान में रहते है. वसु उनको देख कर प्रणाम करती है और फिर जब बाबा उनको देखते है और वहां आने का कारण पूछते है. वसु उसे बताती है की उसका बेटा बहुत बीमार है और उन्होंने डॉक्टर्स को भी दिखाया है लेकिन फिर भी वो ठीक नहीं हो रहा है.

बाबा दीपू को अपनी गोद में लेकर उसे देखता है तो उसकी आँखों में एक चमक दिखती है जो उसने बहुत काम लोगों में देखा था. बाबा उसकी ओर देखते हुए कुछ मंत्र पढता है और फिर कुछ जड़ी बूटी देते है और कहता है की ये जड़ी बूटी उसे खिला देना.. वो जल्दी ही ठीक हो जाएगा..

बाबा दीपू को वसु को देते वक़्त हस्ते है तो वसु पूछती है की आप क्यों हस रहे हो?

बाबा: अगली बार जब आओगी तो बताऊंगा.. हो सके तो इस बार उसकी कुंडली लाना और ऐसा कहते हुए फिर से वो बाबा अपने ध्यान में लग जाते है.

वसु: हमारे पास तो उसकी कुंडली है नहीं और ना ही बनवाया है…क्यों? कुछ गड़बड़ लग रहा है क्या?

बाबा: नहीं…तो एक काम करो..मुझे इसके जनम का टाइम और डेट दे दो..मैं ही कुंडली बनवाता हूँ..

वसु: एक बात पूछूं?

बाबा: हां पूछो..

वसु: मेरी एक बेटी भी है और मैं चाहती हूँ की आप मेरी बेटी का भी जनम कुंडली बना दो..

वसु बाबा को दोनों का टाइम और तारिक दे देती है और फिर उनसे विदा हो कर जल्दी ही उनसे फिर से मिलने का वादा कर के घर के लिए निकल जाते है..

एक हफ्ते के अंदर बाबा की दी हुई जड़ी बूटियों से दीपू की हालत में सुधार होता है और फिर एक और हफ्ते के अंदर ही दीपू पूरा ठीक हो जाता है.. और वह हर बच्चे की तरह जो इस उम्र में होते है खेलने में और शरारत करने लगता है

वसु और उसके पति दोनों बहुत खुश हो जाते है और वसु कहती है की उन्हें बाबा से मिलना है. .. वसु का पति कहता है की वो काम में व्यस्त है वो आज भी उसके साथ नहीं जा पायेगा तो वो ही खुद दीपू को बाबा के पास ले जाए

वसु बाबा से अकेले ही मिलने जाती है..क्यूंकि उन्होंने कहा था की अगर दीपू ठीक हो जाएगा तो वो उनसे ज़रूर मिलने आएंगे..

वसु फिर से खँडहर जाती है तो देखती है की बाबा अपनी आँखें बंद कर के अपने ध्यान में एकदम मगन है. जब उनकी आँखें खुलती है तो सामने वसु को पाते है तो फिर से उनके चेहरे पे हसी आ जाती है.

वसु: बाबा जब मैं पिछली बार आयी थी तो आप तब भी हसे थे और आज मुझे देख कर फिर से हस रहे हो. कुछ गड़बड़ है क्या?

बाबा: नहीं ऐसा कुछ नहीं है

वसु फिर उन्हें दीपू के बारे में बताती है और उनका बहुत धन्यवाद करते है की उन्होंने दीपू को ठीक कर दिया है..

बाबा दोनों को आशीर्वाद देते है और फिर कहते है.. जब से तुम यहाँ से गयी हो तो मैंने दोनों की कुंडली बनायी है और तब से तुम्हारे लड़के के बारे में ही सोच रहा हूँ.

वसु: ऐसा क्यों? कुछ बात है क्या जो आप इसपर इतना ध्यान दे रहे हो और सोच रहे हो?

बाबा: मेरे पास बहुत लोग आते है लेकिन इसके चेहरे पे जो आकर्षक है वो आज तक मैंने किसी में नहीं देखा.

वसु: उनको प्रणाम करके ऐसा क्या है उसके चेहरे पे?? कुछ गलत है क्या? क्या लिखा है उसकी कुंडली में?

बाबा : तुम बहुत भाग्यशाली हो …तुम्हारा लड़का आगे जा कर बहुत होनहार होगा …..लोगों के काम आएगा…और लोग भी उसकी बहुत मदत करेंगे..

बाबा: लेकिन…

End of Flashback..
 
बाबा : तुम बहुत भाग्यशाली हो …तुम्हारा लड़का आगे जा कर बहुत होनहार होगा …..लोगों के काम आएगा…और लोग भी उसकी बहुत मदत करेंगे..

बाबा: लेकिन…

अब आगे...

वसु: क्या??

बाबा: इसके ज़िन्दगी में बहुत सी लडकियां और औरतें आएँगी…

वसु: मतलब?

बाबा: तुम्हारे बालक तो प्रेम के पुजारी है

वसु: मैं समझी नहीं

बाबा: याद है जब तुम पिछली बार आयी थी तो मैंने तुम्हारे बेटे को गोद में लिया था और कुछ मंत्र भी पढ़े थे.

वसु: हाँ.

बाबा: उस वक़्त मैंने तुम्हारे बालक के हाथ की लकीर भी देखी थी. अभी तुम्हारा बालक छोटा है और लकीरें अभी बन रही है और आगे जाकर ये लकीरें और भी अच्छे रूप में आएगी. उसका “शुक्र पर्वत” भी बहुत अच्छा है.

वसु: ये “शुक्र पर्वत” क्या है?

बाबा: यह शब्द हस्तरेखा विज्ञान में इस्तेमाल होता है और हथेली में अंगूठे के नीचे के उभार को दर्शाता है जो प्रेम सौंदर्य और कला जैसे गुणों का प्रतीक माना जाता है. बाबा ऐसा कहते हुए वसु का हाथ पकड़ कर उसे वो जगह दिखाता है जिसे शुक्र पर्वत कहते है.

दुनिया में ऐसे बहुत लोग होंगे जिसका शुक्र पर्वत और हाथ की लकीरें अच्छी होगी... इसमें कोई शक नहीं है... लेकिन लेकिन तुम्हारा बालक सब से अलग है.

तुम्हारे बालक को ना चाहते हुए भी बहुत लोगों से प्यार होगा और शायद तुमसे भी..और बहुत सारे लोग भी तुम्हारे बालक के प्यार में पागल हो जाएंगे और इस पर मर मिटेंगे..पहले तो तुम्हे आश्चर्य होगा..लेकिन बाद में तुम खुद ही इस बात को मान लोगी की जो भी हो रहा है..अच्छे ले लिए ही हो रहा है.. क्यूंकि तुम सब लोगों के चेहरे पे जो ख़ुशी देखोगी उससे तुम्हे बहुत गर्व होगा क्यूंकि तुम्हे ये पता होगा की उनके चेहरे पे ख़ुशी तुम्हारे लड़की की वजह से हुई है और ये भी है की तुम्हारा लड़के की ज़िन्दगी में तुम्हारे घर वालों के साथ ही शादी होगी.. एक नहीं लेकिन बहुत लड़कियां उसकी बीवी बनेगी.

बाबा: एक और बात.. तुम्हारा लड़का बहुत बच्चों का बाप बनेगा और सब की ज़िन्दगी में ढेर सारी खुशियां लाएगा.

वसु: मैं कुछ समझी नहीं..

वसु: ये कैसे हो सकता है? ये तो समाज के खिलाफ है.. दुनिया वाले क्या कहेंगे की इसने घर के लोगों से ही शादी कर ली है?

बाबा: मैं जानता हूँ की ये शायद समाज के नियमो के खिलाफ है लेकिन वक़्त, ज़रूरतें और प्यार का ऐसा मेल आएगा की तुम्हारा बालक घर के लोगों से ही शादी करेगा

बाबा: अभी तुम्हे समझ में नहीं आएगा…वक़्त के साथ साथ तुम सब समझ जाओगी..

बाबा: एक और बात..

वसु: क्या?

बाबा: इसके ज़िन्दगी में जितनी भी लडकियां आएगी…काफी लोगों के कमर में एक तिल होगा…ऐसा मुझे लगता है…अब मुझे ये तो पता नहीं की ऐसे कौन लोग है..लेकिन ऐसा हो सकता है…

वसु: क्या सच में?

बाबा: हाँ..

वसु: और मेरी बेटी का कुछ बता सकते हो क्या?

बाबा: तुम्हारी बेटी भी तुम्हारी तरह ही है…रंग, रूप और काम में…लेकिन वो भी तुम्हारी तरह अपने परिवार के लोगों को बहुत प्यार करेगी और इसकी ज़िन्दगी भी खुशाली से ही रहेगी…हाँ…ये तो कहने की ज़रुरत नहीं है इसके जीवन में कुछ उतार चढ़ाव आएगी.. जैसे हर किसीके जीवन में आता है..लेकिन जल्दी ही उनसे उभर के भी आ जायेगी..

वसु बाबा की बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है (ख़ास कर के निशा के बारे में.) क्यूंकि उसकी भी उम्र हो रही थी और उसका शादी भी करना था...(उसे और सब को ये पता नहीं था की निशा के मन में क्या है और वो क्या कहने वाली है) और उन्हें प्रणाम कर के उनसे विदा ले लेते है और अपने घर की और निकल जाती है..

घर आने के बाद वसु का पति वसु से पूछता है तो वसु कहती है की बाबा ने बताया है की तुम्हारा लड़का बहुत होशियार और होनहार होगा आगे जा कर लेकिन दीपू के शादी की बात नहीं बताती..

उनकी ज़िन्दगी काफी अच्छी चल रही थी. .. वसु अपने बेटों को बहुत प्यार करती है. और उसका पति भी वसु और बच्चों की बहुत अच्छी देखभाल करता है और रात को रोज़ वसु को चुदाई का मजा भी देता है.

दीपू और निशा जब दोनों जवानी के देहलीज़ पे कदम रखते है तो एक दिन अचानक से उनके बाप को दिल का दौरा पढ़ जाता है और उसे हॉस्पिटल में भर्ती कर देते है.. वसु की हालत बहुत ख़राब हो जाती है.. और रो रो कर उसका हाल बुरा हो जाता है ..डॉक्टर्स भी कहते है की हार्ट अटैक बहुत तेज़ हुआ है और उनके बचने का कोई चांस नहीं है.

दीपू के पापा को जब लगता है की उसके बचने का कोई चांस नहीं है तो वो तीनो को अपने पास बुलाता है

दीपू का हाथ पकड़ कर कहता है : बेटा लगता है मेरे जाने का वक़्त आ गया है.. मेरे जाने के बाद तुम अपनी माँ और बेहन का अच्छे से ख़याल रखना. तुम्हारी माँ बहुत दुःख झेली है . तुम्हारे दादा, दादी, नाना और नानी के खिलाफ हमने शादी की थी.

मैंने भी बहुत दुनिया देखीं है...कहने वाले हमेशा से कहते रहेंगे.. और ताने मारते रहेंगे लेकिन तुम उनकी चिंता मत करो और याद रखना मुश्किल समय में तुम्हे अपने ही काम आने वाले है ना की ये समाज..

दीपू कहता है … आप चिंता मत करो पिताजी. .. माँ और निशा को मैं अच्छे से देखभाल करूंगा और उन्हें कोई दुःख नहीं दूंगा.. आप को कुछ नहीं होगा. बस जल्दी से ठीक हो कर घर आ जाईये. हम सब आपका इंतज़ार कर रहे है घर आने के लिए.

वसु से: तुम भी अपने दोनों बच्चों को बहुत प्यार देना. .. हम दोनों की प्रेम की निशानी है

वसु ये सब बातें सुनकर बहुत रो रही थी.. वसु भी अपने पति से कहती है की उन दोनों को बहुत प्यार देगी और एक अच्छा इंसान बनाएगी

फिर कुछ देर बाद वसु अपने बच्चों को बाहर भेज देती है और उसके पति के पास आती है और थोड़ा असमँझ में रहती है.

उसका पति धीरे से उससे पूछता है की क्या हुआ है.. ऐसे क्यों खड़ी हो?

वसु कुछ सोचती है और फिर धीरे से उसे कहती है....मैं तुम्हे एक बात बताया नहीं है.

क्या?

वसु: तुम्हे पता है ना की मैं बाबा के पास गयी थी और बाबा से मैंने दीपू की कुंडली के बारे में पुछा था

हाँ

वसु: मैंने तुम्हे पूरी बात नहीं बतायी. ..

क्या नहीं बताया?

वसु: यही की बाबा ने दीपू के बारे में और भी कुछ बताया था. ..

क्या बताया था ..

वसु: हम बहुत भाग्यशाली है की दीपू आगे जा कर एक होनहार लड़का होगा और वो सब बातें जो बाबा ने वसु से कहा था वो उसके पति को बताती है.

वसु का पति उसकी पूरी बात सुनकर थोड़ा आश्चार्य हो जाता है लेकिन फिर से कहता है की अच्छी बात है. .. शायद अब मैं ज़्यादा दिन ना रहूँ लकिन दीपू तुम्हे और निशा की अच्छी देखभाल करेगा. .. मुझे इससे ज़्यादा और क्या चाहिए?

वैसे भी उसमें तुम्हारे ही गुण है.

वसु: मतलब?

धीरे से वसु को अपने पास बुला के: वो तुम्हारी तरह एकदम सुन्दर होगा जैसे पुजारी ने बताया था…तुम बिस्तर में जितनी जंगली बनती हो और मुझे तो पूरा थका देती हो, शायद तुम्हारा बेटा भी वैसे ही हो.. और हस देता है.

वसु: चुप रहो तुम.. ये भी कोई समय है ऐसी बातें करने का..

मुझे पूरा विश्वास है की तुम जितनी अच्छी हो हमारे बच्चे भी उतने ही अच्छे होंगे और तुम्हारी देखभाल करेंगे ख़ास कर के दीपू. तुम उसकी चिंता मत करो और अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनने में मदत करो. मुझे और कुछ नहीं चाहिए.

वसु ये सब सुनते हुए उसकी आँखों में आंसू आ जाते है और उसके पति को अच्छे से गले लगा लेती है. इतने में डॉक्टर आ जाता है और कहता है की और ज़्यादा बात करना उनके सेहत के लिए अच्छा नहीं है और वसु को बाहर भेज देता है.

अगले दो दिन में उसकी हालत में कोई सुधार नहीं होता और फिर और तीसरे दिन उसकी मौत हो जाती है.

वसु को बहुत ज़ोर का झटका लगता है..उसके पती की मौत की खबर सुन कर उसके घर वाले भी उनसे मिलने आतें है. .. नाना, नानी, मामा, मामी ,चाचा, चाची और सभी बहुत दुःख भी थे. ..

(इन सब characters kaa introduction बाद में समय आने पर दूंगा)

घर में दुःख छा जाता और वसु की हालत बहुत ख़राब हो जाती है. .. लेकिन उसे सब धैर्य देते है और उसे संभालते है

कुछ दिनों बाद घर के सब कार्य करने के बाद सब लोग वापस अपने घर चले जाते है. .. जाते वक़्त वसु के माता पिता वसु की छोटी बेहन दिव्या को उसके पास रहने को कहते है. .. वसु मना करती है लेकिन वो मानते नहीं है और कहते है की दिव्या उसके साथ ही रहेगी और उसके बच्चों को भी देखभाल में उसकी मदत करेगी.

वसु भी आखिर में मान जाती है और दिव्या भी उनके साथ रहने लगती है.

दिव्या भी इसी तरह से इस परिवार में जुड़ जाती है.

आगे देखते है क्या होता है….
 
Friends, I have created an index (sort of) in the 1st page. Will keep updating that Index as and when I post the update.
 
वसु भी आखिर में मान जाती है और दिव्या भी उनके साथ रहने लगती है.

दिव्या भी इसी तरह से इस परिवार में जुड़ जाती है.

अब आगे ….

वक़्त गुज़रता है. .. वसु जिसकी उम्र अभी ३५ + थी. .. अपने जवानी के आग में जलती रहती है. .. क्यूंकि वो अपने जवानी के शिकार पे थी और उसकी आग बुझाने के लिए उसका पती नहीं था. लेकिन वो अपनी जवानी को बरकारार रखती है और अपने आपको अच्छे से संभालती है. .. मोटी नहीं लेकिन एकदम गदराया हुआ बदन..बच्चे भी बड़े होने लगते है और वो भी होनहार साबित होते है. वसु की बेटी निशा भी एकदम अपनी माँ पर जाती है और वो भी एकदम सुन्दर और अच्छे बदन की मालिक बन जाती है. उसका बेटा दीपू भी बहुत स्मार्ट और हैंडसम नज़र आता है. ..

वक़्त के साथ साथ अब दोनों कॉलेज जाने लगते है अपनी पढाई के लिए (दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ने जाते है) .. और साथ ही घर का माहौल भी थोड़ा बदल जाता है और सब एक दुसरे के साथ थोड़ा फ्री और प्यार से रहते है.

दोनों पढाई में बहुत अच्छे थे, होशियार थे और हर बार अव्वल नंबर से पास होते थे.

घर में सभी में हसीं मजाक भी चलता है और कभी कभी एक दुसरे को प्यार से छेड़ते भी है.

देखते देखते दिव्या भी अब उस घर में सब से खुल कर रहने लगती है और उसका बदन भी गदरा जाता है. वो भी एक मस्त माल के रूप में निखार जाती है.

दीपू कॉलेज में अपने दोस्तों के साथ मस्ती में रहता है और उनकी सांगत में रहते हुए उसे भी अब चुदाई का ज्ञान आ जाता है. .... दोस्तों से लड़कियों के बारे में बातें करना.. कभी कभी दोस्तों के घर जाकर उनके साथ मौज मस्ती करना और ब्लू फिल्म्स भी देखना जो हर लड़का उस उम्र में करता है.. दीपू भी वही सब करता है लेकिन वो हमेशा अपने limit में रहता है.

वो हैंडसम था तो उस पर कॉलेज की कई लडकियां भी लाइन मारती है लेकिन फिलहाल वो उनपर ज़्यादा ध्यान नहीं देता.. इसी प्रकार से निशा भी खूबसूरत थी तों उसपर भी कॉलेज के काफी लड़के उसपे मरते है लेकिन वो किसी को घास नहीं देती..

एक दिन कॉलेज में कुछ लड़के निशा को ताड़ते हुए गंदे सा कमैंट्स करते है और उससे छेड़खानी करने लगता है. दीपू और उसका एक अच्छा दोस्त देखते है और उन्हें कहते है की वो निशा से दूर ही रहे. .. उन्ही में उनकी भलाई है. एक लड़का कुछ ऐसे ही गंदे कमैंट्स फिर से करता है तो दीपू को बहुत गुस्सा आता है और उसे पकड़ कर 2-4 मुक्के मार के उसकी हालत ख़राब कर देता है. ये सब निशा के सामने ही होता है.

दोनों फिर कॉलेज से घर आ जाते है और दोनों भी नार्मल तरीके से ही घर में रहता है

Btw, वसु का पति अच्छे से मेहनत कर के १ बडा घर लिया था. .. सभी उसी में रहते है. एक कमरे में वसु और दिव्या और दोनों भाई बेहन अलग कमरे में रहते थे.

रात को निशा सोते वक़्त आज की घटनाओं के बारे में सोचती है. उसे अब धीरे से दीपू के दोस्त के ऊपर ध्यान देती है. वो भी निशा को भाने लगता है. वो भी दीपू की तरह एकदम गोरा अच्छे कद काठी का लड़का था और वो भी दीपू की तरह एकदम स्मार्ट और हैंडसम… नीली आँखे. .. एकदम फुर्तीला बदन और एकदम आकर्षक चेहरा.

दीपू के दोस्त का नाम दिनेश है. उसके परिवार का परिचय बाद में होगा.

निशा भी दिनेश को याद कर के थोड़ा चहल उठती है और वो ना चाहते हुए भी अपना हाथ पाजामे में दाल कर पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत रगड़ने लगती है और बड़बड़ाती है

दो मिनट बाद जब निशा अपना हाथ निकलती है तो देखती है की उसका हाथ उसके चूत रस से एकदम भीगा हुआ है.. अपना हाथ अपने नाक के पास लाकर सूंघते हुए शर्मा जाती है.. और ऐसे ही ख्यालों में रहते हुए सो जाती है

वहीँ दीपू अपने कमरे में बेखबर हुए अपने पढाई के बारे में सोच कर सो जाता है.

ऐसे ही एक दिन दोनों नाश्ता कर रहे थे तो दीपू निशा को छेड़ता है और चिढ़ाता है तो निशा अपने मौसी ( दिव्या) से कहती है..

देखो ना मौसी कैसे दीपू मुझे चिढ़ा रहा है आप कुछ कहती क्यों नहीं

दिव्या: बेटा मैं क्यों उसे कुछ कहूँ. .. तुम्हे लगता है की वो तुम्हे चिढ़ा रहा है लेकिन मैं तो ये देख रही हूँ की तुम दोनों एक दुसरे को कितना प्यार करते हो

उसकी छेड़खानी में भी प्यार झलक रहा है और ऐसा कहते हुए दिव्या हस देती है और दोनों को नाश्ता परोस देती है.

नाश्ता करने के बाद दीपू दिव्या को गले लगा लेता है तो दिव्या भी उससे गले लग जाती है. गले लगते वक़्त दिव्या की ठोस चूची दीपू के सीने में दब जाती है और जिसका एहसास दीपू को भी होता है. आज ये पहली बार था जब दीपू को भी एहसास होता है की उकसी मौसी कितनी कड़क माल है. लेकिन दीपू सामान्य रहता है और दिव्या को गले लगाते हुए उसे धन्यवाद देता है की उसने दीपू और निशा की छेड़खानी में प्यार देखा है.

दोनों नास्ता कर के कॉलेज के लिए निकल जाते है

दिव्या वसु से कहती है..वसु मैं कितनी खुश हूँ की तुम लोगों के प्यार ने मुझे मेरे ग़म को भुला दिया है

वसु भी प्यार से दिव्या का गाल सहलाते हुए..तू चिंता क्यों करती है दिव्या.. देखना एक दिन तुझे भी ऐसा पति मिलेगा जो तुम्हे जी जान से प्यार करेगा

वसु थोड़ा पीछे हैट के दिव्या को देखती है और कहती है.. कोई नपुंसक ही होगा जो तुझे देखे और अपना लंड ना हिलाये.. अगर मैं तेरा पति होती तो अब तक तुझे ढेर सारे बच्चों की माँ बना देती और उसे आँख मार देती है.

दिव्या.. छी.. ऐसी भी कोई बातें करता है क्या..तू कब से ऐसी बातें करने लग गयी है.

वसु: क्या करून.. मैं भी तो तेरी तरह ही थोड़ी जल रही हूँ और वैसे भी मैंने क्या गलत कहा है. देख तू इतनी गदरायी हुई है और ऐसा कहते हुए वसु दिव्या की चूचि को पकड़ कर दबा देती है.. जिससे दिव्या के मुँह से आह्हः की सिसक निकलती है

वसु: देखा एक बार चूचि मसली तो तेरी ये हालत है. जब कोई तुझ पर चढ़ेगा तो तेरी क्या हालत होगी. ये बात सुन कर दिव्या शर्मा जाती है और दोनों ही ऐसी कामुक बातें करते हुए अपना समय निकल लेते है..

जवानी के पहली झलक

एक दिन दीपू नहाने के लिए बाथरूम जाता है तो वहां पर एक बाल्टी में कपडे रखे हुए थे. वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता और अपने कपडे निकल कर उस बाल्टी में डाल देता है. तब उसकी नज़र बाल्टी में पड़े एक पैंटी पे नज़र आती है. पैंटी एकदम छोटी और थोड़ा ट्रांसपेरेंट था. ये पहली बार था की उसने कोई पैंटी देखी थी. उस को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाता है और उसे उठाते हुए वो गौर से उसे देखता है. उसे देखते हुए उसके लंड में हलचल होती है और लंड खड़ा होने लगता है और देखते ही देखते लंड एकदम तन कर पूरे फॉर्म में आ जाता है और पूरा तन जाता है. वो पैंटी को अपनी नाक के पास लाता है और उसे सूंघने लगता है. पैंटी थोड़ी गीली और लसदार लगती है उसे और उसे सूंघते हुए अपने लंड को हिलाते हुए मूठ मारने लगता है और सोचता है की ये पैंटी किसकी होगी जिसकी मेहक उसे पागल और दीवाना बना रही थी.

ये उसके जीवन में पहली बार था जब वो एक पैंटी को देख कर मूठ मार रहा था. उसे बहुत मजा आता है और करीब २ मिनट में ही झड जाता है (क्यूंकि ये उसका ऐसा पहला मौका था की उसने किसीकी पैंटी देखी थी इसीलिए जल्दी ही झड़ जाता है) और देखता है की वो काफी वीर्य निकलता है और वो वीर्य एकदम गाड़ा था.

उसके चेहरे पे हसीं आती है और वो वीर्य को साफ़ करते हुए नहा कर बाहर आता है. आज वो पहली बार तीनो को देखता है तो उसके देखने का नजरिया बदल जाता है. वो देखता है की तीनो एकदम कड़क माल है ..तीनो की उठी हुई चूचियाँ , गदराया हुआ बदन और सब से एहम बात उनकी उठी हुई गांड.

दीपू अपने ज़ज़्बातों को अपने पे काबू रख कर अपना काम करता है और वो भी कॉलेज के लिए निकल जाता है.

कुछ दिन बाद फिर से कॉलेज में कुछ लड़के निशा से बतमीज़ी करते है तो इस बार दीपू का दोस्त दिनेश उनको चेतावनी देता है और उन्हें छोड़ देता है. निशा ये सब देख कर दिनेश को मन ही मन चाहने लगती है. उसे लगता है की दिनेश उसी के लिए बना है भले ही वो उस के भाई का दोस्त था.

लेकिन उसे अब ये पता नहीं था की दिनेश उसके बारे में क्या सोचता है.

उस दिन रात को खाना खाने के बाद जब वसु और दिव्या सो जाते है तो निशा धीरे से दीपू के कमरे में जाती है तो इस वक़्त अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था.

निशा इस वक़्त एक लूज़ टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन कर रूम में आती है. दीपू उसे देखता है तो देखता ही रह जाता है क्यूंकि उस टी शर्ट में उसके मम्मे एकदम साफ़ झलक रहे थे ख़ास कर के उसके निप्पल्स जो एकदम तने हुए थे और वो शॉर्ट्स में उसकी चिकनी जांघें एकदम सेक्सी लग रही थी और उसे देख कर धीरे से सीटी मारते हुए कहता है…

क्या बात है. आज इस कमरे में कैसे आना हुआ? दीपू उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहता है.. क्या बात है? तू तो बहुत सेक्सी लग रही है

निशा दीपू के बात से थोड़ा शर्मा जाती है और दीपू के पास आकर उससे कहती है

निशा: मेरी एक मदत करेगा?

दीपू: तू बोल तो सही.

निशा: थोड़ा हड़बड़ाते हुए.. कहती है की उसे उसके दोस्त दिनेश का नंबर चाहिए

दीपू: क्यों?

निशा: अरे यार एक बार देना... मैं उससे बात करती हूँ. दीपू जब ये बात निशा से सुनता है तो थोड़ा निराश हो जाता है लेकिन वो निराश अपनी चेहरे पे नहीं लाता. .. क्यूंकि निशा को उन कपड़ों में देख कर दीपू का भी मन ललचा जाता है.

दीपू: ठीक है मैं उससे एक बार पूछ कर तुझे देता हूँ. ठीक है?

निशा: हाँ ठीक है.

दीपू: वैसे क्या बात है जो तुझे उसका नंबर चाहिए.. कहीं प्यार व्यार का लफड़ा तो नहीं है?

निशा: तू भी ना... फ़ालतू की बात मत कर. जितना तुझसे मदत मांगी हूँ उतना करना यार. आज तू नहीं था तो कुछ लड़के फिर से मुझे छेड़ रहे थे तो दिनेश ने उन सब को फिर से धमकाया और अपनी हद में उनको रहने को कहा. तो एक बार तो उससे बात करना बनता है ना.

दीपू: ठीक है. निशा फिर उसपर झुक कर उसके गाल पे एक प्यार से चुम्मा देती है और कहती है ये मेरी मदत करने के लिए और वहां से अपनी गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली जाती है.

दीपू उसकी मटकती हुई गांड को देख कर आहें भरता है लेकिन कुछ नहीं कर पाता. उसे भी लगता है की वो उसकी बेहन है तो ऐसे ख़याल उसके मन में नहीं आना चाहिए. लेकिन जब उसे वो बाथरूम में पैंटी और मूठ मारने की बात याद आती है तो हस देता है और सोचता है की उसकी मटकती गांड को देख कर ऐसे ख्याल तो आएंगे ही.

अगली सुबह जब दोनों नाश्ता कर रहे होते है तो दीपू निशा से कहता है की वो उसे आज दिनेश का नंबर दे देगा.

इतने में उनकी माँ नाश्ता देकर किचन में जाती है. दीपू अपनी नज़र उठाये वसु को देखता रह जाता है क्यूंकि वो भी अपनी बड़ी गांड मटकाते हुए किचन में चली जाती है. उसके चूतड़ काफी मस्त और भरे थे, जिसकी वजह से काफी थिरकन होती थी। निशा जब ये देखती है तो अपनी कोहनी से दीपू को हल्का सा मारते हुए कहती है..कहाँ देख रहा है तू? दीपू भी अपने आपे से बहार आता है और कुछ नहीं कहते हुए अपना नाश्ता करने लग जाता है.

उस दिन कॉलेज में निशा अपने सहेलियों के साथ गप्पे मार रही थी और तभी वहां दीपू और दिनेश भी आ जाते है लेकिन थोड़ा दूर बैठते है. ये पहली बार था जब दिनेश और निशा की आँख मिलती है.

निशा उसको देख कर Hi बोलती है. दीपू ये सब देख और सुन रहा था.

दिनेश भी Hi बोलता है लेकिन वो ज़्यादा ध्यान नहीं देता.

दीपू को देख कर निशा की दोस्त धीरे से कहती है की दीपू कितना स्मार्ट और हैंडसम है. अगर वो उसका बॉयफ्रेंड होता तो उसे ले कर कहीं भाग जाती और खूब मस्ती करती.

निशा: सिर्फ मस्ती ही करती? उसकी एक और दोस्त: नहीं रे मस्ती नहीं मैं तो उस पे चढ़ जाती और अपनी जवानी उसपे लुटाती.

निशा:क्यों तूने अब तक कितने से चुदवा लिया है?

दोस्त: नहीं रे मैं तो अब तक कुंवारी हूँ और अपने हाथों से ही काम चला रही हूँ.

उस दिन कॉलेज में और कुछ नहीं होता और रात को खाने के बाद दीपू निशा को इशारा करता है की वो उसके कमरे में आये. निशा है देती है. दिव्या उन्दोनो को धीरे से बात करते हुए देख कर कहती है की क्या खुसुर फुसुर हो रही है दोनों के बीच में. दोनों इस बात को टाल देते है और कहते है की कॉलेज की कुछ बातें कर रहे है.

रात को निशा फिर से दीपू के कमरे में ऐसे ही सेक्सी कपड़ों में आती है तो फिर से दीपू की जान हतेली पे आ जाती है लेकिन वो फिलहाल कुछ नहीं करता.

निशा: हाँ बोल किस लिए बुलाया है.

दीपू: तूने ही तो दिनेश का नंबर माँगा था न… तो ये ले और उसे दिनेश का नंबर दे देती है. निशा खुश हो जाती है और फिर से दीपू के गाल पे किस कर के उसे थैंक्स बोल के अपनी गांड मटकाते हुए निकल जाती है.

आगे देखते है उन सब का क्या हाल होने वाला है...
 
Friends,

i have started a new story. Hope you can find time and read and provide your comments as well. Index also provided/updated on 1st page.

Gurdep Shetan DEVIL MAXIMUM Raja thakur Deepaksoni Gokb TharkipoMax DREAMBOY40 motaalund sunoanuj kasi_babu only_me Dhakad boy

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Incest - मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Dear Friends, My last story "Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala", you all gave lots of support and love for it. I am starting a new story and hope to receive similar support, comments and encouragement from all of you. This is my 2nd attempt and as usual taking inspiration from my...

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दीपू: तूने ही तो दिनेश का नंबर माँगा था न… तो ये ले और उसे दिनेश का नंबर दे देती है. निशा खुश हो जाती है और फिर से दीपू के गाल पे किस कर के उसे थैंक्स बोल के अपनी गांड मटकाते हुए निकल जाती है.

अब आगे...

माँ और बेटे में पनपता प्यार

एक दिन जब सब घर में होते है तो दीपू निशा को चिढ़ाने के बहाने से कहता है

दीपू: तू बहुत मोटी होती जा रही है (जो की सच नहीं था ) ..( वो मोटी नहीं थी लेकिन उसका बदन गदराया हुआ ज़रूर था ).

निशा उसकी इस बात से चिड़ जाती है और दीपू को मारने के लिए बढ़ती है. तभी वहां उनकी मा वसु आ जाती है और उन्हें डाट ते हुए कहती है की क्या बचपना कर रहे हो तुम दोनों. जब निशा उसे मारने आती है तो दीपू देखता है की उसकी चूचियां उसके टी शर्ट में मस्त उछाल रहे है और ये दृश्य उसके लिए बहुत कामुक नज़र आता है. दीपू दौड़ कर वसु के पीच छुप जाता है और अनजाने में अपना हाथ वसु की कमर पे रख देता है और वसु को थोड़ा आगे सरकाता है और पीछे से निशा को चिढ़ाते रहता है. ऐसा करते वक़्त दीपू अनजाने में वसु की कमर पे हाथ ज़ोर से दबाता है तो वसु को चिमटी जैसे लगता है. वसु को इसका एहसास होता है और आह्हः कर के दीपू से कहती है की वो क्या कर रहा है और उसके क्यों चिमटी काट रहा है. दीपू सॉरी कहता है और उसका ध्यान निशा के तरफ कर देता है.

वसु भी प्यार से दोनों को अलग करती है और दोनों को अपने पास बुला कर दोनों को गले लगा लेती है और कहती है तुम दोनों में और घर में ऐसे ही प्यार रहे. दोनों भी वसु को गाला लगा लेते है और दोनों भी वसु के गाल को प्यार से चूम कर ऐसे ही छेड़खानी करते हुए निकल जाते है. उन दोनों को देख कर वसु को भी बहुत ख़ुशी होती है और फिर उसका ध्यान अपनी कमर पे जाता है जहाँ दीपू ने उसे चिमटी काटा था.

वसु अपने कमरे में जाती है क्यूंकि उसके कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था.

वसु: (दीपू के बारे में) ये भी ना..इतना बड़ा हो गया है लेकिन बचपना नहीं गया है. वसु कमरे में आईने के सामने जा कर अपनी साडी को कमर से अलग कर के देखना चाहती है की उसे कहाँ दर्द हो रहा है. अपनी साडी को थोड़ा नीचे कर के अपनी नज़र कमर पे डालती है. वहां पे एक छोटा सा निशान बन जाता है. वो फिर वहां पे झंडू बाम लगा लेती है और अपनी साडी को ठीक करने लगती है. तभी उसे अपनी कमर पे नाभि के पास एक तिल नज़र आता है. वो तिल को देखती रह जाती है और उसे बाबा की बात याद आती है की दीपू के ज़िन्दगी में बहुत लोग आएंगे और उसकी शादी ऐसे लोगों से होगी जिनकी कमर पे तिल की निशानी है.

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वसु इस बात का ध्यान आते ही अपने आप को झंझोर लेती है और उसे लगता है शायद वो एक वेहम है और दीपू उससे कैसे शादी कर सकता है.

वसु जब ये बात सोचती है तो वो अपने आप को फिर से एक बार आईने में देखती है तो पाती है की वो अभी भी बहुत सुन्दर दिखती है. चेहरा एकदम खिला हुआ सा. अपने बदन को देखती है तो पाती है की उसका बदन अभी भी एकदम सुडौल है. मस्त हसमुख चेहरा, भरी हुई चूचियां, एकदम पतली कमर.. उस पर गहरी नाभि और नाभि के बगल में तिल, और एकदम बहार को निकली हुई गांड.. इस रूप में वो एकदम कोई अप्सरा जैसे लगती है ..

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वसु अपने आप को देख कर मुस्कुरा देती है और वहां से चले जाती है.

ऐसे ही एक दिन रात को जब सब खाना खा कार सो जाते है तो करीब १२ बजे दीपू को प्यास लगती है तो वो पानी पीने के लिए किचन में जाता है. पानी पी कार जब वो अपने कमरे में जा रहा होता है तो उसे वसु के कमरे में थोड़ी रौशनी नज़र आती है. दीपू सोचता है की आदी रात को माँ कमरे में क्या कार रही है जो की वहां से रौशनी आ रहा है तो वो चुपके से बिना कोई आवाज़ किये दरवाज़े पे जाता है और धीरे से खोलता है तो दरवाज़ा खुल जाता है. वो माँ को कुछ कहने ही वाला था की अंदर का नज़ारा देख कर उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और उसके पाजामे में तम्बू बन जाता है क्यूंकि अंदर का नज़ारा ही कुछ ऐसा था. उसकी माँ वसु अपनी नाइटी को अपनी जाँघों तक उठा कर अपनी पैंटी को सरका कर अपनी चूत में ऊँगली करते हुए धीरे से बड़बड़ाती रहती है.

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वो अपने पति को याद करते हुए एक हाथ से अपनी चूत को ऊँगली करते हुए दुसरे हाथ से अपनी एक चूची दबाती रहती है. वहीँ बगल में उसकी बेहन दिव्या मस्त घोड़े बेच कर सो रही होती है. वसु को पता नहीं चलता और ये पूरा नज़ारा दीपू देख कर एकदम उत्तेजित हो जाता है. वो वहां पर तब तक रहता है जब तक वसु ऊँगली कर के झड़ नहीं जाती.

वसु अपना पानी निकल कर एकदम सुकून पाती है और बडबाति है की ये निगोड़ी चूत भी ठीक से सोने नहीं देती और हर वक़्त लंड चाहती है. कमरे में एकदम सन्नाटा रहने की वजह से दीपू को ये बात सुनाई देती है. वसु उठ कर अपने कमरे में बाथरूम में चली जाती है और दीपू भी दरवाज़ा बंद कर के वो भी दुसरे बाथरूम में जाता है और अपनी माँ को याद करते हुए मूठ मार के वो भी हल्का हो जाता है और फिर वो भी कमरे में आ कर सो जाता है.

अगली सुबह दीपू उठ कर फ्रेश हो कर रात की बात याद करते हुए किचन में जाता है तो वहां वसु सब के लिए चाय बना रही होती है. दीपू वहां दरवाज़े पे खड़े हो कर अपनी माँ को निहारता रहता है. वो अब उसकी माँ को एक माँ नहीं बल्कि एक औरत के रूप में देख रहा था और पाता है की उसकी माँ कितनी गदरायी हुई है. मैक्सी में भी उसके बदन के कटाव एकदम सही में नज़र आते है. ठोस बहार को निकली हुई चूचियां एकदम तने हुए निप्पल बहार को निकली गांड. ये देख कर उसका लंड भी खड़ा हो जाता है और वो जा कर पीछे से अपनी माँ को गले लगा लेता है और उसके गाल और गर्दन पे चुम्मा देते हुए गुड मॉर्निंग कहता है.

वसु को दीपू का खड़ा लंड अपनी गांड पे महसूस होता है लेकिन वो अनजान रहती है.

वसु: क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है अपनी माँ पे.

दीपू: क्यों प्यार नहीं आएगा क्या? तुमको याद है मैंने पिताजी से क्या कहा था... की मैं तुम सब को प्यार दूँ. उसके पती की बात सुनकर वसु थोड़ा भावुक हो जाती है और पलट कर दीपू को देख कर आंसू निकल जाते है तो दीपू उसकी आँखों में देखते हुए.. क्या हुआ माँ? मैं हूँ ना.... तुम सब की देखभाल करने के लिए और उसके आंसू पोछ कर उसके माथे को प्यार से चूमता है. वसु भी दीपू को गाला लगा कर प्यार से उसे भी चूमती है.

दीपू भी अब मन बना लेता है की वो माँ को खूब प्यार देगा और उसके बाप की कमी नहीं महसूस होने देगा उसको.

दिन ऐसे ही गुज़रते रहते है. दोनों कॉलेज जा कर और घर आ कर अपनी पढाई पे ध्यान देते है और रात को कभी कबार मस्ती भी कर लेते है और वहीँ दीपू भी अपनी माँ को प्यार देते रहता है और जब ही मौका मिलता है तो उसे चूमते भी रहता है. दिव्या भी ये सब देखती रहती है और एक दिन जब दोनों ( दीपू और निशा) कॉलेज जाते है तो दिव्या वसु को छेड़ी है.

घर में Sexy घटनाएं

एक दिन दीपू रोज़ की तरह सुबह नहाने के बाद टॉवल बाँध कर अपने कमरे में बाल बना रहा होता है तो उस वक़्त वसु दीपू को पुकारते हुए उसके कमरे में आती है. दीपू अपनी धुन में बाल बनाते हुए अपनी माँ की आवाज़ सुनता है तो आईने में उसे कमरे में देख कर पलट जाता है (बात करने के लिए). लेकिन ठीक उसी वक़्त दीपू का टॉवल निकल कर गिर जाता है और नंगा हो कर ऐसे ही वसु को देखता है. वसु की नज़र भी ठीक उसी वक़्त उसके झूलते हुए लंड पे जाती है जो नार्मल होने पर भी बहुत मोटा और लम्बा लग रहा था. वो वैसे ही उसके लंड को देख रही होती है और दीपू को जब ये एहसास होता है तो जल्दी से अपना टॉवल उठा कर अपने आप को धक लेता है. वसु भी बिना कुछ कहे वहां से चली जाती है.

उस दिन रात को सोते वक़्त वसु को सुबह का वाक्या को याद करते हुए अपने मन में सोचती है.. कितना बड़ा लंड है मेरे बेटे का. इसीलिए उस दिन उसका लंड मेरी गांड पे छु रहा था. अगर नार्मल ही ऐसा है तो फिर जब वो पूरा खड़ा होगा तो और कितना बड़ा होगा. और मन में सोचती है की जो भी उसके नीचे आएगी वो उसे मस्त संतुष्ट कर देगा. वो भी वासना की आग में जल रही थी और ना जाने क्या क्या सोच रही थी. थोड़ी देर बाद जब उसे होश आता है तो उसे थोड़ा ग्लानि होता है और सोचती है की वो अपने बेटे के बारे में ऐसा कैसा सोच सकती है.

जब से ये हादसा होता है तब से दीपू के मन में भी वसु को लेकर सोच बदल जाती है. एक दिन जब सब घर में ही रहते है तो बहार बारिश हो रही होती है. वसु दीपू को आवाज़ लगा कर कहती है की बालकनी में कपडे सुखाने के लिए डाले है तो उन्हें वहां से निकल ले वरना वो कपडे फिर से भीग जाएंगे और वो उन कपड़ों को उसके कमरे में रख दे. दीपू भी भाग कर बालकनी से पूरे कपडे निकल कर वसु के कमरे रखता है. वो पलट कर जाने ही वाला होता है तो वो देखता है की कपड़ों के ढेर में २- ३ छोटी और पारदर्शी पैंटी पड़ी हुई है. वो फिर से एक नज़र दरवाज़े पे डाल कर देखता है की कोई नहीं है तो वो दो पैंटी को उठा कर फिर से अपनी नाक के पास ले जाकर उनको फिर से सूंघता है और अपना एक हाथ से अपने लंड को निकल कर वो पैंटी को सूंघते हुए अपना लंड हिलाते रहता है. वो जानता था की इस वक़्त मूठ मारना ठीक नहीं होगा.. इसीलिए सिर्फ हिलाते रहता है लेकिन फिर भी उसका लंड एकदम तन जाता है और पूरा खड़ा हो जाता है.

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उसे भी खूब मजा आता है. वो अपने एक अलग ही दुनिया में खो जाता है. उसे पता भी नहीं चलता जब उसकी बेहन और माँ दोनों कमरे में कपडे ठीक करने के लिए आते है. दोनों जब दीपू को ऐसा करते हुए देखते है तो वसु कहती है..

वसु: क्या कर रहा है तू इनके साथ?

दीपू उसकी बात सुन कर एकदम चकरा जाता है और हड़बड़ी में पैंटी गिराते हुए अपने लंड को अंदर करते हुए कुछ नहीं कहता और बिना कुछ कहे वहां से निकल जाता है. निशा ये सब देख कर मन में मुस्कुराती है और अपनी माँ से कहती है..

निशा: लगता है दीपू की शादी जल्दी ही करनी पड़ेगी.

वसु: चुप कर.. क्या कह रही है? देखा नहीं वो अभी क्या कर रहा था? वैसे भी उसके पहले तेरी शादी करनी है. ठीक है? तू उससे बड़ी है और मैं पहले तेरी शादी करवाउंगी.

निशा: देखा है. वैसे भी लड़के इस उम्र में ये सब करना नार्मल है माँ.

वसु: थोड़ा छिड़ कर.. तू उसकी तरफदारी क्यों कर रही है? वो गलत कर रहा था.

निशा: शायद हां या शायद ना.

वसु: मतलब?

निशा: मतलब ये की जैसे मैंने कहा था ये सब नार्मल है.और वैसे माँ.. एक बात बताओं.. कॉलेज में बहुत सारी लडकियां इसपर मरती है. मेरे ही कुछ दोस्त इस पर एकदम लट्टू है.. कहती है क्या हैंडसम है तेरा भाई. अगर मेरा ऐसा कोई भाई होता तो कितना अच्छा होता.

वसु: वो तो ठीक है लेकिन अब जो हुआ गलत हुआ.

निशा: तुम समझी नहीं माँ.. मैंने अभी जो बात बतायी है तुझे सेंसर कर के बताया है और उसे आँख मार देती है.

वसु: तू कहना क्या चाहती है?

निशा: येही की मेरे दोस्त कह रहे थे की दीपू जैसा कोई उनका भाई होता तो कब तक वो सब उनके नीचे आ जाती. तू तो जानती है.. आजकल ऐसी बातें सब करते है.

वसु: चल जल्दी काम कर.. और हाँ.. दीपू से पहले तेरी शादी करनी है. निशा ये बात सुनकर मना कर देतीं है और ना में सर हिला देतीं है

उस दिन रात को निशा दीपू के कमरे में आती है और पूछती है की वो सुबह क्या कर रहा था. दीपू उसे देख कर कुछ नहीं कहता तो निशा माहौल को थोड़ा हल्का करने के लिए दीपू से कहती है की आजकल तो लड़के ऐसे ही करते है और कोई शर्माने की बात नहीं है.

दीपू उसकी बात सुन कर उसे देख कर कहता है तुझे बुरा नहीं लगा क्या?

निशा: हाँ थोड़ा लगा लेकिन फिर मुझे भी पता है की तुम्हारी उम्र के लड़कों में शायद ऐसा ही होगा. दीपू उसकी तरफ नज़र उठा कर देखता है तो निशा भी आँख मार देती है और फिर धीरे से उसकी गोद में बैठ कर उसको गले लगा कर उसके माथे पर किस देती है और शरारती अंदाज़ में पूछती है की तूने वो पैंटी तो सूंघे है लेकिन वो किसके है तुझे पता क्या?

दीपू भी... क्या यार तू भी कैसे बात करती है... मुझे कैसे पता चलेगा?

तो चल पता कर और मुझे बता.. और ऐसा कहते हुए वो अपनी पाजामे की जेब से एक पैंटी निकल कर उसके सामने लहराती है. दीपू उसे देखते ही रह जाता है और झट से वो पैंटी पकड़ने की कोशिश करता है.

निशा: जनाब को बहुत जल्दी है.. दीपू भी हस देता है और फिर से वो पैंटी लेने की कोशिश करता है.

दीपू वो पैंटी को देख कर कहता है की वो बहुत सेक्सी जालीदार और छोटी है.

निशा: नहीं इतनी जल्दी तुझे मिलने वाली है. दीपू उसे आस भरी नज़र से देखता है तो निशा को उस पर दया आ जाती है और उसके बालों में अपना हाथ घुमा कर वो पैंटी उसे दे देती है और कहती है की कल तक तुम्हे पता करना है की ये किसकी है और अगर सही पता किया तो फिर एक इनाम तुझे... ऐसा कहते हुए निशा फिर से उसको आँख मार देती है और दीपू से अलग होकर अपनी गांड मटकाते हुए वो अपने कमरे में चली जाती है.

निशा के जाने के बाद दीपू फिर से उस पैंटी को अपनी नाक के पास रख कर उसे फिर से सूंघता है और मन में सोचता है की किसकी है जो इतनी अच्छी खुशबू आ रही है. वो इसी ख्यालों में रहते हुए अपना लंड निकल कर फिर से हिलाने लगता है और जब उसे महसूस होता है की उसका माल गिरने वाला है तो वो झट से बाथरूम में जा कर अपना माल निकल लेता है और देखता है की उसका माल एकदम गाढ़ा और बहुत सारा निकला है.

और फिर अपने बिस्तर पे आकर गहरी नींद में सो जाता है.

अगले दिन सुबह जब दीपू उठ कर फ्रेश हो कर किचन में जाता है तो देखता है की उसकी माँ चाय बना रही है. वो दरवाज़े पे खड़े हो कर उसकी माँ को निहार रहा था. उसकी उठी हुई चूचियां गोरा बदन और बहार को निकली गांड को देखता रहता है. वसु उसको देख लेती है लेकिन कल के हुए हादसे को लेकर कर अभी भी थोड़ा गुस्से में थी और उसी अंदाज़ में दीपू से कहती है वो वहां क्या कर रहा है और उसे क्यों घूर रहा है.

दीपू: मैं तो चाय के लिए आया था. आपने क्या सोचा?

वसु: तू हॉल में बैठ जा.. मैं चाय लेकर आती हूँ.

थोड़ी देर बाद वसु चाय लेकर आती है तो उतने में बाकी दोनों (निशा और दिव्या) भी आ जाते है और सब मिलकर चाय पीते है. निशा देखती है की उसकी माँ अभी भी रूठी है और उसके चेहरे पे गुस्सा अभी भी नज़र आ रहा है. निशा धीरे से दीपू को इशारा कर के उसे उसके कमरे में भेज देती है और निशा उसकी मम्मी के पास जा कर उससे पूछती है की गुस्सा क्यों कर रही हो?

वसु: तू ना अपने भाई की तरफदारी मत कर. तूने देखा नहीं कल क्या किया था उसने? उसकी बात सुनकर दिव्या पूछती है की क्या बात हुई है जो उसे पता नहीं.

निशा उसे बता देतीं है की कल क्या हुआ है. दिव्या भी थोड़ा आश्चर्य से उन दोनों को देखती रह जाती है.

वसु: (दिव्या से) और ये उसके लाडले भाई की तरफदारी कर रही है.

निशा: तो उसमें गलत क्या है? उसके बाद सब अपने काम में लग जाते है और दीपू और निशा कॉलेज निकल जाते है.

उनके जाने के बाद घर में जब सिर्फ वसु और दिव्या रह जाते है तो वसु का उखड़ा मूड देख कर दिव्या कहती है की जो हुआ उसे भूल जाओ. दीपू का बचपना मान कर उसे माफ़ कर दे.

वसु: बचपना कहाँ दिव्या.. २१ साल का हो गया है और तू उसे बच्चा कह रही है. सुन कल मैं उसके कमरे में गयी थी और वो नहा कर एक टॉवल में था. मैं जब उसके कमरे में गयी और उसे पुकारा तो उसका टॉवल खुल गया और मैं उसके लंड को देख कर दांग रह गयी.

दिव्या: क्यों ऐसा क्या देख लिया.

वसु: उसका मुरझाया हुआ लंड भी बहुत बड़ा लग रहा था और तू उसे बच्चे कहती है.

दिव्या: क्या? तूने उसका लंड भी देखा और मुझे तूने बताया भी नहीं (उन दोनों में बहुत करीब रिश्ता था और दोनों एक दुसरे को सब बाते share करते है )और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु को आँख मार देती है. वसु भी थोड़ा हल्का सा हस्ते हुए... चुप कर और फिर दोनों अपना काम करने में लग जाते है.

आगे क्या होता है जल्दी ही आगे रोमांचकारी अपडेट के साथ..
 
दिव्या: क्या? तूने उसका लंड भी देखा और मुझे तूने बताया भी नहीं (उन दोनों में बहुत करीब रिश्ता था और दोनों एक दुसरे को सब बाते share करते है )और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु को आँख मार देती है. वसु भी थोड़ा हल्का सा हस्ते हुए... चुप कर और फिर दोनों अपना काम करने में लग जाते है.

अब आगे ....

5th Update: माँ और बेटे का नोक झोक जारी..

उधर कॉलेज में निशा भी अपने दोस्तों के साथ गप्पे मारते रहती है तो वहां दीपू आ जाता है. उसे देख कर उसकी दोस्त सब आहें भर्ती है जो निशा देख लेती है और अपनी कोहनी से उनको हल्का मार देती है. निशा भी दीपू को देख कर मन में सोचती है.. मेरे दोस्त गलत नहीं है. कितना हैंडसम और प्यारा लग रहा है.

कॉलेज में शाम को घर आते वक़्त निशा दीपू से पूछती है.. कल मैंने जो तुझे दिया था.. पता किया क्या?

दीपू: कहाँ टाइम ही नहीं मिला तो कहाँ से पता चलता.. और ऐसे ही छेड़खानी बातें करते हुए दोनों घर आ जाते है. घर आने के बाद दिव्या आज पहली बार दीपू को एक “मर्द” के रूप में देख रही थी (वसु की बात याद कर के). वो भी देखती है की दीपू भी काफी बड़ा हो गया है और कितना स्मार्ट एंड हैंडसम है. वो मन में सोचती है की काश कोई ऐसा लड़का/ आदमी भी उसकी ज़िन्दगी में होता तो कितना अच्छा होता.

वसु दिव्या को देख लेती है और समझ जाती है की दिव्या क्या सोच रही है. रात को जब सब अपने कमरे में होते है तो वसु दिव्या से कहती है

वसु: मैंने देखा है आज तो दीपू को कैसे देख रही है. तू चिंता मत कर.. तू अब तक अकेली है.. शायद ऊपर वाले ने तेरे लिए एक अच्छा आदमी सोच रखा है. पता है तेरी उम्र हो रही है.. लेकिन क्या पता.. देर आये सो दुरुस्त आये.. ये बात सुन कर दिव्या की आँखों में भी आंसूं आ जाते है तो वसु उसे अपने सीने से लगा लेती है.

दिव्या के रोने से उसके आंसूं गिर कर वसु के ब्लाउज पे गिर जाते है जिससे उसका ब्लाउज थोड़ा गीला हो जाता है. जब वसु को थोड़ा गीला पैन महसूस होता है तो देखती है की उसका ब्लाउज सच में ही गीला हो गया है. वसु दिव्या को छेड़ते हुए.. देख तूने क्या किया? मेरा ब्लाउज गीला कर दिया. दिव्या उसे देख कर है देतीं है और कहती है ठीक है मैं सूखा देतीं हूँ.

वसु: कैसे?

दिव्या: ऐसे.. और कहते हुए अपनी जीब से उसकी ब्लाउज को चाट लेती है. ऐसा करने से वसु के मुँह से हलकी सिसकारी निकल जाती है और दिव्या से कहती है की वो क्या कर रही है.

दिव्या: तुम्हारा ब्लाउज सूखा रही हूँ.

वसु: कोई ऐसे करता है क्या?

दिव्या: क्या करूं?

दिव्या: तुम्हारी बड़ी और भारी चूचियां देख कर रहा नहीं गया और ऐसा कहते हुए दिव्या अपने दोनों हाथ को वसु की चूची पे रख कर उनको मसलते हुए अपनी जीभ से ब्लाउज को चाट लेती है. वसु भी आहें भरने लगती है और दिव्या का सर अपनी चूचियों पे दबा देतीं है.

और ठीक उसी वक़्त दीपू भी वसु से कुछ बात करने के लिए उसके कमरे में आता है तो दोनों की बात सुनकर वो दरवाज़े पे ही रुक जाता है और उनकी बातें सुनता है.

वसु: तुझे पता है.. मुझे तुम्हारे जीजाजी का खालीपन महसूस होता है. काश आज वो यहाँ होते तो इनका पूरा रस निचोड़ लेते. वो तो इसपर खूब मरते थे.. कहते थे की इनमें बहुत रस है और चूस चूस कर हम दोनों को बहुत मज़ा देते थे वसु फिर से दिव्या का सर अपने सीने पे दबा देतीं है. आहें भरते हुए वसु पाती है की उसकी पैंटी भी भीग रही है लेकिन वो दिव्या को कुछ नहीं बताती. ५ मिनट बाद जब दिव्या अपना सर उठा कर वसु को देखती है और कहती है तेरे चूचक तो बहुत नुकीले और खड़े हो गए है.

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वसु: होंगे नहीं क्या? तू जो इनको चूसे और चाटे जा रही है.

दोनों की फिर से आँख मिल जाती है जिनमें बहुत प्यार, तरस और आस भरी हुई थी और अब वसु से भी रहा नहीं जाता और दोनों एक दुसरे को देखते हुए अपने होंठ जोड़ लेते है और एक गहरे प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है.

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वसु: तू चिंता मत कर. तुझे भी अच्छे और ऐसे प्यारे दिन मिलेंगे भले ही थोड़े देर से ही. ऊपर वाले पे भरोसा रख

दिव्या: उसी उम्मीद से तो जी रही हूँ.

वहीँ बाहर दीपू निशा की दी हुई पैंटी (जो उसके पयजामे की जेब में थी ) को फिर से निकल कर सूंघते रहता है और सोचता है की वो जालीदार पैंटी किसकी होगी (उसके मन में एक बार ये ख्याल भी आता है की ये उन दोनों में से किसीकी भी हो सकती है )और फिर कमरे में बातें सुन कर और पैंटी को देख कर फिर से अपना लंड हिलाने लगता है और इस बार वो बहुत उत्तेजित हो जाता है और अपना रस वहीँ दरवाज़े पे ही निकल देता है और कुछ बूंदे वही ज़मीन पर भी गिर जाती है ..वो इतना खोया हुआ था की बाथरूम जाने का भी टाइम नहीं था. जब वो झड़ जाता है तो उसे अपने गलती का एसएस होता है तो वो जल्दी से एक पुराना कपडा लाकर साफ़ दरवाज़ा साफ़ कर देता है लेकिन अँधेरे में उसे पता नहीं था की कुछ बूंदे वहां ज़मीन पर भी गिरी हुई है.

वहां से फिर अपने कमरे में चले जाता है और मीठी यादों में सो जाता है. और वही वसु और दिव्या भी सो जाते है.

अगले दिन सुबह वसु उठ कर फ्रेश हो कर अपने कमरे से निकलती है तो दरवाज़े पे उसके पैर पे कुछ सूखा और गाढ़ा चीज़ उसे लगता है. वो झुक कर उसे देखती है तो सोचती है की ये क्या है.. उसे समझ मैं नहीं आता है. अब तक घर में सब सो रहे थे तो वो लाइट जला कर देखती है की वो क्या चीज़ है जो अब तक उसके घर में कभी नहीं हुआ था. लाइट जला कर देखती है तो उसे सब समझ में आ जाता है की ये तो वीर्य की बूंदे है. उसे भी इस बारे में काफी ज्ञान था क्यूंकि वो भी अपने पति का लंड मुँह में लेकर उसे भी मस्त कर देती थी और ऐसा करते वक़्त वैसे ही बूंदे ज़मीन पे गिर जाती थी.

वसु सोच में पड़ जाती है की ये बूंदे वहां कैसे आयी और उसे ये बात सोचने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता की ये काम दीपू का ही होगा क्यूंकि इस घर में सिर्फ वो ही तो एक मर्द था..

वो अपने माथे पे हाथ रख कर सोचती है की क्या करूँ इस लड़के का जो रोज़ ऐसे काम कर रहा है..

दीपू उठ कर फ्रेश हो कर किचन में जाता है तो वसु वहां चाय बना रही होती है. दरवाज़े पे खड़े हो कर दीपू वसु को निहारता रहता है. वसु उसे देख कर कुछ नहीं कहती और उसको फिर भी गुस्सा आ रहा था. दीपू वसु के पास जा कर.. क्यों माँ.. अभी भी गुस्से में हो क्या?

वसु: नाराज़गी से.. तू जो काम कर रहा था तो गुस्सा नहीं होउंगी क्या?

दीपू: मैंने ऐसा क्या किया की आप इतना गुस्सा कर रहे हो? वसु कुछ नहीं कहती तो दीपू कुछ सोचता है और वसु के पास आकर धीरे से उसके कान में कहता है.. मैं करू तो बुरा और आप करो तो एकदम ठीक?

वसु को ये बात समझ नहीं आती तो पलट कर दीपू की तरफ देखती है. दीपू अपने आप को थोड़ा सँभालते हुए कहता है.. मैं २ दिन पहले रात को पानी पीने यहाँ आया था और जब वापस अपने कमरे में जा रहा था तो आपके कमरे से कुछ आवाज़ आयी. दीपू जब ये बात कहता है तो वसु की आँखें बड़ी हो जाती है. उसे समझ आ जाता है की दीपू क्या कहने वाला है फिर भी वो कुछ नहीं कहती.

दीपू फिर आगे कहता है.. मैं कमरे में झाँक कर देखा आपको.. और ऐसा कहते हुए रुक जाता है क्यूंकि वो वसु का रिएक्शन देखना चाहता था.

वसु अपनी आँखें बड़ी करती हुई दीपू को देखे जा रही थी. वसु को समझ आ जाता है की दीपू ने क्या देखा है.

वसु: तुझे शर्म नहीं आयी की तू मेरे कमरे में झाँक रहा था. दीपू भी हस्ते हुए.. शर्म कैसे? मैंने जो देखा तो उससे तो मैं और भी उत्तेजित हो गया और नतीजा ये हुआ जो आपने अगले दिन देखा था. वैसे वो पैंटी किसकी थी?

वसु अब दीपू से आँखें नहीं मिला पा रही थी. दीपू समझ जाता है और कहता है..

वैसे कल रात को मैं आपके पास आ रहा था कुछ बात करने के लिए लेकिन फिर से दरवाज़े पे रुक गया और अंदर की बातें भी सुन ली. आप और मौसी धीरे से बात कर रही थी लेकिन सन्नाटा होने की वजह से मुझे सब सुनाई दिया. दीपू ऐसा कहते हुए रुक जाता है और वसु को देखता है. वसु अब दीपू से आँखें नहीं मिला पा रही थी.

दीपू: आप जो कर रही थी.. उसमें कोई बुराई नहीं है. मैं तो अभी अपनी जवानी के देहलीज़ पे कदम रखा है.. आप तो अपनी जवानी के चरम में हो.. तो आपने जो किया है उसमें कोई गलत नहीं है. आप अपने आप को ही देखो.. जो भी आपको देखेगा तो बावला हो जाएगा. इतना कैसा हुआ बदन है आपका.. और दीपू उसको आँख मार देता है.

दीपू: वैसे एक बात पूछूं?

वसु अपनी आँख उठा कर दीपू को देखती है तो दीपू कहता है जैसे आपने कहा था की आपको भी एक साथी की ज़रुरत महसूस हो रही है तो अगर आप चाहो तो फिर से शादी कर सकते हो. मुझे और निशा को कोई समस्या नहीं होगी. मैं उसे समझा दूंगा.

दीपू के ये बात सुनकर वसु एकदम दांग रह जाती है और कहती है की तूने ऐसे बात कैसे की?

दीपू: क्यों नहीं? कल जो आप दोनों बात कर रहे थे तो मेरी बात में बुरा क्या है?

वसु अपने आप को थोड़ा ठीक करते हुए कहती है की उसकी ऐसी कोई सोच नहीं है और वो उन दोनों (दीपू और निशा) से बहुत खुश है और उन दोनों को छोड़ कर कहीं और नहीं जाना चाहती.

वसु को भी लगता है की अब बात आगे जा चुकी है और वो बात बदलने की कोशिश करती है. इतने में निशा और दिव्या भी आ जाते है और दोनों को देख कर.. क्या बातें हो रही है माँ बेटे के बीच? दोनों एक दुसरे को देखते है और कुछ नहीं कहते. फिर सब चाय पी कर अपने काम में लग जाते है और फिर दीपू और निशा कॉलेज के लिए निकल जाते है और वसु और दिव्या घर में अपना काम करती रहती है.

कॉलेज में सब नार्मल ही रहता है और निशा की सहेलियां दीपू पे डोरे डालती रहती है तो निशा दिनेश पे डोरे डालती रहती है.

रात को जब सब खाने पे मिलते है तो निशा कहती है की दीपू का जन्मदिन जल्दी ही आने वाला है.

निशा: कैसे उसका जन्मदिन मनाया जाए?

दीपू इस बात पे कुछ नहीं कहता लेकिन वसु और दिव्या कहती है की कुछ सोच कर मनाते है. इससे आगे और बात नहीं होती और सब खाना खा कर अपने कमरे में सोने चले जाते है. दीपू भी अपने मोबाइल में कुछ देखता रहता है तो इतने में निशा फिर से उसके कमरे में आती है और इस बार वो अपने दोनों पैर दीपू के बगल में रख कर उसकी गोद में बैठ जाती है और फिर उसके गाल को चूमते हुए कहती है.. क्या चाहिए तुझे तेरे जन्मदिन पर?

दीपू: कुछ नहीं (लेकिन उसके मन में बहुत सारी बातें चल रही थी आज सुबह उसके और वसु के बीच जो बातें हुई थी)

निशा फिर से एक बार उसको चूम के कमरे से निकल जाती है और जब वो अपने कमरे में जा रही होती है तो देखती है की उसकी माँ के कमरे से रौशनी आ रही है. जिज्ञासा वर्ष वो उसकी माँ के कमरे में झाँक कर डेक्टि है तो उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और मुँह खुला का खुला रह जाता है. अंदर का नज़ारा देख कर निशा अपना हाथ अपने पैंटी में दाल के ऊँगली करने लग जाती है क्युकी अंदर नज़ारा ही कुछ ऐसा था. जहाँ दिव्या सोई हुई थी वसु इस वक़्त अपनी तन की आग में जल रही थी और वो ना चाहते हुए भी दीपू के लंड के बारे में सोच कर अपनी चूत में ऊँगली कर रही होती है और धीरे से बड़बड़ाते रहती है. निशा ये दृश्य देख कर उसके चेहरे पे हसीं आ जाती है और मन में सोचती है “जैसी माँ वैसी बेटी “..

फिर वापस अपने कमरे में जा कर वो भी ऊँगली करते हुए सो जाती है.

अगले दिन सुबह वसु किचन में चाय बना रही होती है तो दीपू आकर उसको पीछे से बाहों में भर कर उसके गले को चूमता है और कहता है की अब भी वो दीपू से नाराज़ है. उस वक़्त दीपू का सुबह में खड़ा लंड सीधा वसु के गांड में चुबता है तो वसु धीरे से सिसकी लेते हुए कहती है दीपू क्या कर रहा है... थोड़ा पीछे हटना

दीपू को पता था लेकिन फिर भी पूछता है क्यों..

वसु कुछ नहीं कहती और थोड़ा शर्मा जाती और जब दीपू उसके गले को चूमता है तो एक हलकी से सिसकी लेते हुए कहती है.. क्या कर रहा है तू.. मत कर.. मैं तेरी माँ हूँ.

दीपू: हाँ जानता हूँ.. लेकिन उसके पहले आप एक औरत हो जिसकी ज़रूरतें भी है और ऐसा कहते हुए दीपू वसु को अपनी तरफ घुमा कर उसकी आँखों में देखते हुए कहता है.. आप अभी भी बहुत सुन्दर हो.. ये बात आपको भी पता है.. अभी भी आप बहार जाओगी तो लोगों की लाइन लग जायेगी आपको निहारते हुए.. वसु कुछ नहीं कहती और अपनी आँखें नीचे करते हुए शर्मा जाती है.

वसु: तू जल्दी से अपनी पढाई पूरी कर ले और एक अच्छी नौकरी देख ले.. तेरे लिए जल्दी ही लड़की ढूंढ कर तेरी शादी कर दूँगी.

दीपू: नहीं. .. दीपू उसकी आँखों में गहरी तरह से देख कर कहता है की मैंने लड़की देख ली है शादी के लिए और शादी उसी से ही करूंगा. वसु थोड़ा आश्चर्य होते हुए..

दीपू: वो बात छोडो. .. मेरी शादी से पहले निशा की शादी भी करनी है. याद है ना..

दीपू फिर से वसु की तरफ देख कर इसमें शर्माने की क्या बात है? जो कह रहा हूँ सही तो कह रहा हूँ . वसु का चेहरा पकड़ कर उसको देखते हुए अपने होंठ बढ़ाता है तो वसु उसे रोक देती है और कहती है की ऐसा ना करे और अपना चेहरा घुमा लेती है.

दीपू: अरे मैं तो आपके गाल चूम रहा था. आपको क्या लगा? वसु कुछ नहीं कहती तो दीपू कहता है की जो आप सोच रहे हो (होंठों पे किस करना) वो करू क्या?

वसु कुछ नहीं कहती और उसे कुछ याद आता है और उसे थोड़ा अलग कर के कहती है की उसे हमेशा उसकी बेहन दिव्या की फ़िक्र है की अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है. जब उसकी शादी हो जायेगी तो वो दीपू के बारे में सोचेगी और ये भी कहती है की वो पढाई कर के पहले एक अच्छी नौकरी कर ले. दीपू कुछ नहीं कहता और वहां से जाने लगता है तो वसु फिर सोच कर कहती है..

वसु: सुन दीपू

दीपू: हाँ कहो..

वसु: सुन गाँव के बाहर एक खंडहर है और वहां एक बाबा रहते है जिसे मैं और तेरे पिताजी बहुत मानते है. हम दोनों जा कर एक बार छोटी (दिव्या) की कुंडली एक बार दिखा कर आते है और पूछते है की उसकी ज़िन्दगी में क्या लिखा है क्यूंकि अब तक उसकी शादी नहीं हुई है और मुझे भी थोड़ी चिंता है. अगर उसकी शादी हो जाती भले ही उसकी उम्र थोड़ा ज़्यादा है तो मेरे मन को बहुत शांति मिलेगी. और तेरे नाना और नानी भी अपनी बाकी ज़िन्दगी शान्ति से बिता पाएंगे.

(वसु और उसके परिवार का परिचय जल्दी ही आएगा)

दीपू इस बात से कुछ नाराज़ हो जाता है की वो अभी भी उन जैसे लोगों की बात मानते है लेकिन फिर भी वो मान जाता है उसकी माँ को दुखी ना करे और कहता है की जब भी जाना है तो उसे बता देना और वो उसे वहां ले जाएगा.

वसु को अभी ये पता नहीं था की बाबा के पास जाने के बाद एक बड़ा बम फटने वाला है....
 
वसु को अभी ये पता नहीं था की बाबा के पास जाने के बाद एक बड़ा बम फटने वाला है.

अब आगे ..

6th Update

थोड़ी देर बाद निशा और दिव्या भी आ जाते है और सब लोग चाय पीते हुए बातें करते है और फिर सब अपने काम में लग जाते है. दीपू और निशा कॉलेज चले जाते है और दिव्या और वसु घर के काम में busy हो जाते है.

उस दिन घर में वसु थोड़ा अपनी सोच में गुमसुम रहती है. दिव्या उससे पूछती है तो वसु कहती है की उसे दिव्या की चिंता सताये जा रही है. उसकी उम्र हो रही है और अब तक उसकी शादी नहीं हुई है. दिव्या कहती है की इस बारे में ज़्यादा ना सोचे और जो कुछ उसके भाग्य में लिखा है वही होगा.

वसु दिव्या को देख कर कहती है की तुझ जैसी लड़की को कौन ठुकरा सकता है. देख अपने आप को.. इतनी सुन्दर और भरा हुआ बदन है फिर भी रिश्ते आ नहीं रहे ह और जो भी आ रहे है सब ठुकरा देते है कोई बहाने से. इस बार दिव्या कुछ नहीं कहती और दोनों अपने काम में लग जाते है.

वसु कहती है की उसके माँ बाप और बाकी रिश्तेदारों को भी उसकी चिंता लगी है. कहती है की २ दिन पहले ही उसकी माँ ने उसे फ़ोन किया था और वो दिव्या के बारे में भी पूछ रही थी और चिंता जाता रही थी.

दो दिन बाद रविवार को जब छुटी था तो वसु दीपू से कहती है की वो लोग उस दिन खंडहर जाएंगे और बाबा से मिलकर आते है. ये बात निशा और दिव्या को पता नहीं था. (की किस लिए वो दोनों खंडहर जा रहे है). रविवार था तो दोनों भी उनके साथ चलने की ज़िद करते है तो वसु किसी तरह दोनों को उस दिन मना कर देती है. दोनों खंडहर के लिए निकल जाते है.

खंडहर पहुँच कर दोनों बाबा से मिलते है.

वसु: नमस्ते बाबा जी.. पहचाना क्या हमें? बाबा की अभी थोड़ी उम्र हो गयी थी लेकिन फिर भी उनका मन अभी भी बहुत तेज़ चलता था और उनकी याददाश्त भी एकदम सही था. वो वसु को पहचान लेता है और कहता है की उन्होंने पहचान लिया है लेकिन वक़्त के साथ साथ वो (वसु) भी बड़ी हो गयी है लेकिन उसने पहचान लिया था

बाबा: बोलो कैसे आना हुआ? फिर से कोई समस्या आ गयी है क्या?

वसु: जी ऐसा ही कुछ है और फिर वसु दिव्या के बारे में बताती है और फिर उसकी जनम कुंडली निकाल कर बाबा को देती है.

वसु: बाबा जी ज़रा देखिए ना इसके जीवन में क्या लिखा है? उसकी उम्र हो रही है लेकिन अब तक शादी नहीं हुई है और जो भी सम्बन्ध आते है तो वो लोग उसे ठुकरा देते है.

इन सब में दीपू एकदम शांत रहता है और कुछ नहीं कहता. बाबा जब वो दिव्या की कुंडली देखते रहता है तो उसकी नज़र दीपू पे पड़ती है और वसु से पूछता है तो वसु कहती है की वो उसका बेटा है जिसे उनके पास लेकर आयी थी जब वो छोटा था और कुछ बिमारी से उलझ रहा था. दीपू ये बात सुनकर आश्चर्य हो जाता है और सवालिए नज़र से वसु की तरफ देखता है.

बाबा: हाँ मुझे याद है. तुम्हारा लड़का बड़ा हो गया है और बहुत सुन्दर भी दिख रहा है.

फिर बाबा दिव्या की कुंडली देखता है और कहता है उसे कुछ समय दो और फिर ध्यान से कुंडली देखने लग जाता है.

बाबा: तुम्हारी बेहन कहाँ रहती है?

वसु: हमारे साथ ही रहती है.

बाबा: कब से?

वसु: काफी सालों से जब से (दीपू की तरफ देख कर) इसके पिताजी गुज़र गए . क्यों? क्या हुआ?

बाबा: कुछ समय बाद कुछ सोचते हुए वसु से पूछते है की क्या उसने (वसु ने) अपनी कुंडली भी लायी है क्या? वसु इस बात से थोड़ा आश्चर्य हो जाती है लेकिन कहती है की उसने अपनी कुंडली नहीं लायी है.

बाबा: कल तुम फिर से आ जाना और इस बार अपनी कुंडली भी ले आना.

वसु: बाबा हम तो काफी पुराने लोग है. मेरे पास तो मेरी कुंडली भी नहीं है. शायद मेरे माँ पिताजी के पास हो सकती है. ज़रा एक minute ठहरना. मैं एक बार उनसे पूछ कर बताती हूँ.

वसु फिर बाहर चले जाती है और अपनी माँ से फ़ोन पे बात करती है. उसकी माँ कहती है की उसकी कुंडली तो है लेकिन कहाँ रखा है उसे याद नहीं और ढूंढने में बहुत वक़्त लग जाएगा.

वसु फिर वापस आकर यही बात बाबा को बताती है. बाबा फिर कुछ सोचते रहते है तो इतने में वसु कहती है..

वसु: बाबा मैं एक बात पूछ सकती हूँ?

बाबा: हाँ ज़रूर क्या पूछना है.. यही ना की मैं तुम्हारी कुंडली क्यों मांग रहा हूँ?

वसु: हाँ

बाबा: मैं शायद बता सकता हूँ लेकिन अगर एक बार तुम्हारी कुंडली देख लेता तो फिर पक्का बता सकता हूँ.

वसु: क्या बता सकते हो?

बाबा: यही की शायद तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारी बेहन के साथ जुडी हुई है

वसु: मैं समझी नहीं.

बाबा: अच्छा मुझे तुम अपनी तारिक और समय बता दो. मैं ही फिर से तुम्हारी कुंडली बना देता हूँ.

वसु उन्हें अपनी जनम की तारीक और समय बताती है तो बाबा फिर ध्यान देकर उसकी कुंडली बनाते है और फिर उसे वो दे देते है.

बाबा: वैसे एक बात पूछूं?

वसु: हाँ

बाबा: जब तुम पहली बार मुझसे मिलने आयी थी तो क्या सोच कर आयी थी?

वसु: यही की हमने आपके बारें में गाँव में बहुत सुना था और ये भी पता चला था की आप बहुत समझदार और गुणवाणी हो और लोगों का भला ही सोचते हो और लोगों को आप पे बहुत भरोसा है.

बाबा: ठीक है.. तो तुम्हे क्या लगता है मेरे बारे में?

वसु: यही की गाँव वालों ने आपके बारे में जो कहा था वो एकदम सही है.

बाबा: तो ये लो अपनी कुंडली और चाहे तो अपने घर में भी इसे दिखा देना. मुझे पता है की इसमें कोई गलती नहीं निकाल पायेगा.

वसु: वो अपने पास रख कर बातें आगे बढ़ाती है और कहती है की हाँ इतना मुझे पता चला है जब हमने इसकी (दिव्या की) कुंडली हमारे गाँव में दिखाई थी की इसके कुंडली में कुछ दोष है और इसीलिए अब तक इसकी शादी नहीं हुई है

वसु: क्या उसका कोई इलाज नहीं है? ज़िन्दगी भर वो बिन भ्यायी (और कुंवारी) ही रहेगी क्या?

बाबा: तुम सही कह रही हो.

वसु: तो फिर इसमें मेरी कुंडली से क्या बात है?

(जब ये सब बातें दोनों में हो रही थी तो दीपू बस वहां चुप चाप खड़े हो कर उनकी बातें सुन रहा था ).

बाबा: बताता हूँ

बाबा: फिर से अच्छे से कुंडली को पढ़ने के बाद कहता है की इलाज तो है लेकिन थोड़ा मुश्किल है. वसु ये बात सुनकर थोड़ा खुश हो जाती है और कहती है की कितना भी मुश्किल क्यों ना हो उस वो कोई ना कोई उपाय ढूंढ लेगी.

बाबा: तुम जो कह रही हो उतना आसान नहीं है.

वसु: फिर भी बताइये क्या इलाज है.

बाबा: जैसे मैं सोच रहा हूँ अगर वैसा है तो फिर तुम्हे ही इसका इलाज करना है

बाबा: बाबा वसु की आँखों में देखता है और कहता है की दिव्या की शादी किसी अपने घर वाले से ही करने से उसका दोष निकल जाएगा. अगर वो बाहर किसी और से शादी करेगी तो तो बहुत जल्दी विधवा हो जायेगी और उसकी ज़िन्दगी भी बहुत मुश्किल होगी और नरक बन जायेगी. अगर तुम उसकी खुशाली चाहती हो तो उसकी शादी अपने किसी घर वाले से ही करवाना वरना क्यूंकि वो यहीं इस घर में ही खुश रह सकती है. अगर बाहर किसी और के घर चली गयी (शादी कर के) तो उसे बहुत दुःख झेलना पड़ेगा..

बाबा की ये बात सुनकर दोनों वसु और दीपू एकदम दांग रह जाते है और दोनों कुछ नहीं कहते.

वसु अपने आप को संभालते हुए कहती है की ये तो बड़ी मुश्किल बात है क्यूंकि उसे पता था की उसके घर में शादी के उम्र का लड़का सिर्फ दीपू ही है उसके परिवार में और कोई नहीं.

वसु: मेरे परिवार में सिर्फ मेरा बेटा ही है (दीपू की तरफ इशारा कर के) यही एक लड़का है जो की शादी के उम्र का है.

बाबा: मैंने ये नहीं कहा की लड़का बड़ा या छोटा हो.. बस इतना ही की तुम्हारे परिवार से ही हो. वसु जानती थी की उसके परिवार के बाकी मर्द ज़्यादा काम के नहीं है और सिर्फ दीपू ही है जो उससे शादी कर सकता है और उसे खुश रख सकता है.

वसु: आपने जो कहा मैं समझती हूँ लेकिन इसमें मेरी कुंडली कहाँ से आ गयी?

बाबा: बात ये है की तुम्हारी बेहन की ज़िन्दगी तुम से जुडी हुई है.

वसु: मतलब?

बाबा: मतलब ये की तुम्हारी बेहन की शादी तुम्हारे घर में जिससे होगी उसी से तुम्हारी शादी भी होगी. मैं यही पक्का करना चाहता था.. इसीलिए तुम्हारी कुंडली के बारे में पूछ रहा था

बाबा: मुझे पता है की तुम विधवा हो लेकिन दुनिया में बहुत ऐसे लोग है जो विधवा से फिर से सुहागन बन गए. तुम्हारे ज़िन्दगी में भी कुछ ऐसा हो सकता है.

वसु ये बात सुनकर एकदम दांग रह जाती है और यही हाल दीपू का भी था. बाबा जब ये बात कहते है तो दीपू एकदम अपनी आँखें बड़ी करते हुए दोनों को देखता रहता है.

वसु : आपने जो कहा मुझे समझ नहीं आ रहा है और मेरे घर में सिर्फ मेरा ही बेटा है जो मेरी बेहन से शादी करने के लायक है. लेकिन मैं कैसे उससे शादी कर सकती हूँ?

वसु: मेरी अब उम्र हो रही है.

बाबा: अगर तुम्हे बुरा नहीं लगे तो अभी तुम्हारी कितनी उम्र है?

वसु: ४० +

बाबा: तुम अपनी जवानी के शिकर पे हो और शायद तुम्हे भी पता होगा की दुनिया में ऐसे बहुत लोग है जिनकी उम्र तुम से भी ज़्यादा है लेकिन फिर से शादी कर के अच्छे से घर बसा लेते है.

बाबा: और वैसे तुम्हे याद होगा जब तुम बहुत सालों पहले मेरे पास आयी थी और मैंने क्या कहा था तुम्हारे बेटे के बारे में ?

वसु: जी याद है.

बाबा: तो जो होना है वही हो के रहेगा. ना तुम ना मैं बदल सकते है. ये तो किस्मत का खेल है जो उपरवाले ने ही ऐसा बना के भेजा है.

इतने में दीपू को कुछ समझ नहीं आता और दोनों बाबा और वसु से पूछता है की बाबा ने उसके बारे में क्या बताया था.

वसु इस बात को टालने की कोशिश करती है लेकिन दीपू नहीं मानता और बाबा से पूछता है. बाबा एक बार वसु की तरफ देख कर एक गहरी सास लेकर कहता है.. जब तम छोटे थे तो तुम्हारी माँ मेरे पास आयी थी और मैंने ही तुम्हारी कुंडली बनायी है. उस वक़्त ही मैंने उन्हें बताया था की तुम बहुत सुन्दर और होशियार लड़के के रूप में उभर आओगे और तुम्हारी ज़िन्दगी में बहुत औरत आएँगी जो की तुम्हारे परिवार से भी होगी और तुम्हारी एक से ज़्यादा बीवियां होगी. बाबा जब ये बात दीपू से कहता तो दीपू अपनी आँखें फाड़े दोनों को देखता है और इशारे से वसु से पूछता है. वसु भी इशारे में हाँ कह देती है.

बाबा: मेरी पहली बात तो सच है. तुम दिखने में बहुत सुन्दर हो और शायद तुम बुद्धिमान भी हो.

दीपू मन में सोचता है की ये सब क्या हो रहा है लेकिन अपने आप में वो थोड़ा संभल के रहता है और कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाता जो बाबा भी देख लेते है

वसु: तो आपको क्या लगता है? और कोई रास्ता नहीं है क्या?

बाबा: मैंने जो बताया है वही एक सही रास्ता है अगर तुम अपनी बेहन की खुशाली चाहती हो तो और फिर बाबा अपने ध्यान में लग जाते है जो वसु के लिए इशारा था की आगे ऐसा ही कुछ होना है.

थोड़ी देर बाद दोनों वसु और दीपू बाबा का आशीर्वाद लेकर वहां से चले जाते है. रास्ते में दोनों एकदम चुप कर के चलते रहते है और दोनों के मन में बहुत सारी बातें घूमती रहती है.

रास्ते में उन्हें एक सुनसान जगह दीखता है जहाँ कोई नहीं रहता तो दीपू वसु का हाथ पकड़ कर वहां ले जाता है.

वसु: तू मुझे कहाँ ले जा रहा है?

दीपू: मुझे आपसे बात करनी है. ये मैं उन दोनों के सामने नहीं कर सकता. चलो वहां पेड़ के नीचे बैठते है और बात करते है. वसु को पता था की दीपू क्या बात करने वाला है लेकिन वसु को भी ये बात सही लगती है और उसके साथ उस जगह पे चल देती है जहाँ कोई नहीं था.

वो दोनों वहां पेड़ के पास पहुँचने पर एक अच्छी जगह देख कर बैठ जाते है.

दीपू फिर वसु को अपनी तरफ घुमा कर कहता है.. माँ. ..जो भी बाबा ने कहा है क्या वो सच है? वसु को अब लगता है की झूट बोलने में कोई फायदा नहीं है और दीपू को सब सच बता देना चाहिए क्यूंकि उसे भी अब लगता है की दीपू बड़ा और समझदार हो गया है.

वसु: हाँ बेटें, बाबा ने जो भी कहा है सच कहा है और उसे सब बता देती है जब वो छोटा था जब वो बाबा से मिलने आयी थी. दीपू सब जान कर उसकी तरफ देखता है और कहता है की बाबा जो कह रहे है शायद वो सच हो.

वसु: मतलब?

दीपू: आपको याद है मैंने २ दिन पहले क्या कहा था आपसे.. रोज़ रात को आप जो करती हो लेकिन दीपू कहता है की उसे इसमें कोई परेशानी नहीं है और जैसे बाबा ने कहा आप हो ही इतनी सुन्दर और भले ही आप ४० से ज़्यादा हो लेकिन फिर भी ३५ के नज़दीक नज़र आती हो और ये बात कहते हुए हस देता है

दीपू: मैं चाहता हूँ की मौसी भी अपनी ज़िन्दगी पूरी ख़ुशी से जिए और अगर उसके लिए मुझे उनसे शादी करनी है तो मुझे जोई ऐतराज़ नहीं होगा. अगर वो हाँ कहे और इसके लिए राज़ी हो जाए तो मुझे भी ख़ुशी होगी की वो भी खुश रह सके.

दीपू फिर एक शरारती हसी के साथ उसकी जाँघों के बीच नज़र ले जाकर कहता है आप तो अपने आपको शांत करने में रहती हो तो फिर मौसी का क्या हाल होगा और आँख मार देता है.

दीपू: याद है आपको २ दिन पहले मैंने ही आपसे कहा था की आप शादी कर लो. लेकिन आप मानी नहीं. लगता है उपरवाले ने जैसे आपको और मौसी का रिश्ता बनाया है शायद वैसा ही रिश्ता आपका और मेरा होगा.

वसु: मतलब?

दीपू: मतलब ये की हम दोनों की ज़िन्दगी भी एक साथ ही जुडी हुई है

वसु दीपू के मुँह से ये बात सुन कर एकदम से शर्मिंदा हो जाती है और उसका चेहरे एकदम लाल हो जाता है. दीपू कहता है की शर्माने की कोई बात नहीं है. मुझे आप, मौसी और निशा से बहुत प्यार है और ये प्यार मुझसे कोई नहीं चीन सकता. मेरे लिए इस दुनिया में आप लोगों से बढ़कर और कोई नहीं है.

हमारे रिश्तेदारों में अब तक किसीने हमारे बारे में जान- ने की कोशिश नहीं की की हम कैसे है क्या कर रहे है.. वसु: नहीं बेटा तेरे नाना और नानी हमेशा फ़ोन करते रहते है और हम सब की जानकारी लेते रहते है. तुम दोनों के कॉलेज की वजह से हम वहां नहीं जा पा रहे है.. लेकिन जल्दी ही चलते है.

दीपू: वैसे माँ एक बात पूछनी थी.. जब बाबा ने कहाँ की मौसी की शादी अपने घर में ही हो तो आपने क्यों कहाँ की मैं ही अपने परिवार में ऐसा लड़का हूँ जो उससे शादी कर सकता हूँ. बाकी और क्यों नहीं?

वसु: बेटा , जब हम वहां जाएंगे तो तुझे पता चल जाएगा. मैं अभी कुछ नहीं बता सकती.

दीपू: ठीक है लेकिन फिर आपने मौसी की बात का कुछ सोचा है क्या?

वसु: नहीं. . मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा है की ये कैसे हो सकता है. तेरे नाना नानी से तो बात करनी ही पड़ेगी और बाकी घर वालों से भी बात करनी पड़ेगी.

दीपू अपनी नज़र घुमा के देखता है की वहां कोई नहीं है और सब सुनसान है तो वो वसु का चेहरा अपनी तरफ घुमा के उसकी आँखों में देखते हुए कहता है की अगर बाबा की बात सही है और मेरी बहुत बीवियां होगी तो उनमें एक आप भी होगी.

जब से बाबा से बात हुई थी भले ही वक़्त ज़्यादा नहीं हुआ था लेकिन फिर भी वसु को लगता है की उसे भी अपनी ज़िन्दगी पूरी जीना का अधिकार है और बाबा की बात मन में बहुत बार याद आता है की दीपू की बीवियां ज़्यादा होगी और अपनी बेहन के बारे में भी सोचती है और पिछले कुछ दिनों में जो भी घटना हो रही थी... धीरे धीरे उसका मन भी दीपू की तरफ जाने लगता है. (ये सब जब दोनों खंडहर से निकल कर आ रहे थे तो वसु की सोच उसी तरफ आ रही थी)

इस बात पे वसु को शर्म आती है और अपनी नज़रें झुका लेती है और कुछ नहीं कहती तो दीपू कहता है की इस बात पे एक किस्सी हो जाए और अपने होंठ उसके होंठ के पास ले जाता है तो वसु मना कर देती है की ये जगह बहार है और कोई देख सकता है. ये बात सुनते ही दीपू के चेहरे पे हसी आ जाती है और वो दूर जो जाता है.

चलो ठीक है.. अभी नहीं लेकिन मेरे जन्मदिन पर तो मुझे मना मत करना और ऐसा कहते हुए आँख मार देता है और वसु फिर से शर्मा जाती है.

अच्छा आज जो बाबा से बात हुआ है उसका क्या?

वसु; मतलब?

दीपू: मतलब ये की घर में बताना है क्या?

वसु: हाँ मुझे लगता है बताना ही पड़ेगा और वैसे भी ये बात बता कर छोटी से भी तो जान- ना है ना की उसकी क्या इच्छा है.

दीपू: ठीक कह रही हो. ये बातें जितना छुपा के रखेंगे उतना ही आगे मुश्किल हो सकता है.

दोनों फिर कुछ देर ऐसे ही वहां बैठे रहते है और फिर कुछ देर के बाद दोनों वहां से निकल कर अपने घर चले जाते है....
 
दीपू: ठीक कह रही हो. ये बातें जितना छुपा के रखेंगे उतना ही आगे मुश्किल हो सकता है.

दोनों फिर कुछ देर ऐसे ही वहां बैठे रहते है और फिर कुछ देर के बाद दोनों वहां से निकल कर अपने घर चले जाते है.

अब आगे ..

7th Update

घर जाने के बाद दोनों निशा और दिव्या पूछते है की इतना देर क्यों हुआ.. वसु कहती है की रात को वो उन सब से बात करेगी. दोनों एक दुसरे को देखते है जैसे कह रहे हो की आखिर बात क्या है जो रात में बताने वाली है. लेकिन दोनों कुछ नहीं कहते और सब अपने काम में लग जाते है.

रात को खाना खाने के बाद सब साफ़ सफाई करने के बाद वसु सब को अपने कमरे में बुलाती है और दीपू को भी आने को कहती है.

दोनों बड़ी उत्सुकता से कमरे में जाते है बिना जाने की एक धमाका होने वाला है ख़ास कर के दिव्या के ऊपर!!

निशा: बोलो ना आज इतना क्यों देर हुआ और आपने क्यों कहा की रात को बात करेंगे. वसु फिर एक नज़र दीपू को देखती है तो वो हाँ में सर हिला देता है. वसु अपना गाला थोड़ा ठीक कर के कहती है.. मैं जो कह रही हूँ उससे तुम दोनों को झटका लो लगेगा ही लेकिन फिर सोच समझ कर जवाब देना और अगर ना भी दिया तो कोई गलत नहीं है लेकिन मैं जो अभी बात कहने वाली हूँ सिर्फ फिलहाल हम चारों के बीच ही रेहनी चाहिए.

वसु को इतना सीरियस बात बोलने पे दोनों निशा और दिव्या एक दुसरे को देखते है और हाँ में सर हिला देते है. वसु: तो बात ये है की आज हम दोनों खंडहर गए थे और एक बाबा से मिले थे.

वसु: और बाबा को तुम्हारी कुंडली दिखाई थी. ये वही बाबा है जिनसे हमने और ऐसा कहते हुए दीपू और निशा की और देखते हुए कहती है की तुम दोनों की कुंडली भी बनवायी थी. उन पे हम दोनों बहुत मानते हे और जब दीपू छोटा था और उसकी जान को खतरा था तो उन्होंने दवाई देकर उसकी जान बचाई थी.

वसु: बाबा तुम्हारी कुंडली देख कर उन्होंने बताया है की कुछ दोष है तुम्हारे कुंडली में और इसीलिए तुम्हारी अब तक शादी नहीं हुई है. दिव्या थोड़ा आश्चर्य से वसु को देखती रहती है.

वसु: बाबा ने इस दोष से छुटकारा पाने के लिए इलाज भी बताया है लेकिन दिक्कत यहीं है.

निशा: क्या दिक्कत है?

वसु: उन्होंने बताया है की अगर तुम अपने ही कोई घर वालो से शादी करोगी तो ये दोष चला जाएगा और ये भी कहा की अगर तुम्हारी शादी कहीं बहार होती तो तुम्हारा पति मर जाएगा और तुम विधवा हो जाओगी और तुम्हारी ज़िन्दगी बहुत कठिन और नरक हो जायेगी. वसु ये सब एक सांस में कहती है और दिव्या की तरफ देखते रहती है.

दिव्या ये जान कर बहुत दुखी हो जाती है और उसका चेहरा उतर जाता है क्यूंकि उसे पता था की उसके परिवार में उससे कोई शादी नहीं करेगा.

वसु: मुझे पता है ये बहुत दुःख की बात है लेकिन बाबा ने इसका भी इलाज बताया है. दिव्या जब ये बात सुनती है तो तुरंत कहती है क्या? वसु फिर से एक गहरी सांस लेकर कहती है की मैंने तुम्हारी पूरी बात अब तक बतायी नहीं.

दोनों: और क्या बात है?

वसु: बात ये है की दीपू की कुंडली में ये है की उसकी एक से ज़्यादा बीवियां होगी और वो बहुत भाग्यशाली भी है. उसके जीवन में बहुत से औरतें आएगी जिन्हे वो बहुत प्यार देगा और उसे भी बहुत प्यार मिलेगा.

दिव्या: इसका मेरे शादी से क्या तालुक है?

वसु: मैं चाहती हूँ की तू दीपू से शादी कर ले. तेरी भी उम्र हो रही है और हम सब को तेरी बहुत चिंता है. मम्मी पापा रोज़ तेरे बारे में पूछते रहते है और कहते है की वो लोग जाने से पहले तुझे सुहागन के रूप में देखना चाहते है.

वसु: एक और बात…

दिव्या: क्या?

वसु: बात ये है की मेरी ज़िन्दगी भी तुम्हारे साथ ही जुडी हुई है. इसे किस्मत समझो या ऊपर वाले की दया की तुम भी हमारे साथ बहुत दिनों से रह रही हो.

दिव्या: ये तो मैंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था की मेरा तुम्हारे साथ रहना तुम्हारी ज़िन्दगी से तालुक रकता है. माँ पिताजी ने मुझे यहाँ इसीलिए रहने को कहा था की जब जीजाजी गुज़र गए तो तुम्हे मेरे रहने से कुछ सहायता मिल जाए और तुम्हारी ज़िन्दगी में जो दुःख आये थे तुम उससे थोड़ा संभल जाओ

वसु: तेरी बात सही है. बाबा ने मेरी कुंडली भी बनायी और उन्होंने साफ़ कहा है की हम दोनों की ज़िन्दगी एक दुसरे से जुडी हुई है और जहाँ तेरी शादी होगी वहीँ मेरी भी शादी होगी. ऐसा कहते हुए वसु रुक जाती है और निशा और दिव्या की तरफ देखती है की उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी.

दिव्या: क्या कह रहो हो दीदी? तुम फिर से शादी करोगी?

निशा: क्या फिर से आपकी शादी होने वाली है?

वसु: मेरा भी तुम्हारी तरह ही reaction था जब बाबा ने ये बात कही थी. लेकिन फिर उन्होंने कहा की मेरे से भी ज़्यादा उम्र की औरतें जिनका तलाक हो जाता है वो भी दुबारा शादी कर लेते है और सुखी ज़िन्दगी जीते है. और फिर कहा की तुम्हारी उम्र इतना ज़्यादा भी नहीं है की तुम दुबारा शादी नहीं कर सकती. और फिर सबसे बड़ी बात.. ये की तुम शादी कर के फिर से एकदम सुखी ज़िन्दगी जियोगी.

दिव्या: वैसे ये बुरी बात नहीं है क्यूंकि मैं भी जानती हूँ की तुम्हे भी एक मर्द की ज़रुरत है जो तुम्हारी अच्छी देख बाल कर सके.

निशा: मौसी ठीक कह रही है माँ.. देखो ना तुम्हारी उम्र ही क्या है? तुम्हे भी अच्छे से जीना का अधिकार है और कितने दिन ऐसे रहोगी? हम दोनों भी तो अब बड़े हो गए है. कब तक हमारी चिंता में जीती रहोगी?

वसु: दिव्या से ..इस बारे में मैंने भी बहुत सोचा है .. तू तो जानती है की तेरा भाई में अब वो बात नहीं है और खुद अपनी बीवी याने हमारी भाभी को ठीक से नहीं देखते जिनकी चिंता माँ बाबूजी को भी है.

इतना कह कर वसु चुप हो जाती है. कमरे में एकदम सन्नाटा छा जाता है और कोई कुछ नहीं कहता.

इन सब बातों में दीपू एकदम चुप रहता है और कुछ नहीं कहता. इतने में निशा कहती है.. माँ एक बात बतानी थी आपसे.. जब आपने हमसे इतनी सारी बातें बतायी है तो मैं भी कुछ कहना चाहती हूँ.

वसु: हाँ, कहो

निशा: यही की अगर अपने घर में सिर्फ दीपू ही है जो मौसी और तुमसे शादी कर सकता है तो इससे और अच्छी बात क्या हो सकती है? देखो ये कितना सुन्दर और होशियार हो गया है. मुझे पता है की ये तुम दोनों को बहुत अच्छे से देखेगा और प्यार भी करेगा.. और ऐसा कहते हुए निशा दीपू की तरफ देख कर है देती है.

वसु को इस बात का थोड़ा एहसास था इसीलिए वो कुछ नहीं कहती और चुप रहती है.

दीपू माहौल को थोड़ा हल्का करने के लिए कहता है.. बहुत सीरियस बातें हो गयी है. मैं फ्रिज से cool drinks लाता हूँ और सब पीते है और ऐसा कहते हुए वो उठ कर किचन में चला जाता है. उसका एक और मक़सद था की वो उन तीनो को अकेले थोड़ा टाइम दे क्यूंकि अभी कुछ देर पहले लोगों की ज़िन्दगी बदलने वाले बातें हुई थी

दीपू थोड़ी देर में सब के लिए कूल ड्रिंक्स लाता है तो सब पीते है लेकिन कोई कुछ ज़्यादा बात नहीं करता क्यूंकि सब के मन में कुछ ना कुछ बातें चल रही थी.

कुछ समय बाद वसु आखिर में कहती है.. चलो रात हो गयी है सो जाते है. जाने से पहले छोटी सुन मैंने जो तुझसे पुछा है मुझे बताना. कोई जल्दी नहीं है. तेरा जो फैसला होगा उससे ही बात आगे बढ़ेगी. ठीक है? और तेरे फैसले पे ही मेरा भी फैसला होगा.

दिव्या: अभी भी वो थोड़ा गुमसुम रहती है. अचानक वसु के पूछने से अपने आप को संभाल कर ठीक है कहती है. फिर सब अपने कमरे में सोने चले जाते है.. अपनी अपनी सोच को लेकर..

दिव्या रात भर आज हुए बातों के बारे में सोचती रहती है और ना जाने क्यों उसे वसु की बात सही लगती है की वो दीपू से शादी कर के खुश रहेगी. पिछले २० सालों में इस घर में बीते हुई बातें और घटनाएं याद करती है और सोचती है की दीपू सच में एक अच्छा लड़का है भले ही वो मुझसे छोटा है लेकिन एकदम अच्छे स्वभाव का और हम सबसे कितना प्यार करता है . दीपू दिखने में बहुत सुन्दर था.. उसकी झील सी नीली आँखें अच्छा बदन और होशियार भी. उसके बारे में सोचते हुए ना जाने कब उसका हाथ अपनी टांगों के बीच चला जाता है और साडी के ऊपर से ही चूत को रगड़ते रहती है और ना जाने कब उसे नींद आ जाती है.

कुछ दिन ऐसे ही गुज़र जाते है लेकिन उनमें ज़्यादा इस बारे में बात नहीं होती.

निशा और दिनेश का मिलना:

कुछ दिन पहले (खंडहर में जाने से पहले कुछ दिन) जब दीपू ने निशा को दिनेश का नंबर दिया था..

निशा एक दिन रात को दिनेश को फ़ोन करती है.

निशा: दिनेश?

दिनेश: हाँ मैं दिनेश बोल रहा हूँ.. आप कौन? दिनेश के पास निशा का फ़ोन नंबर नहीं था.

निशा: मैं निशा दीपू की बेहन.

दिनेश: ओह..Hi... कैसी हो? कैसे मुझे याद किया?

निशा: कुछ नहीं ऐसे ही फ़ोन किया. तुम्हे थैंक्स बोलने के लिए तुमने जो मुझे कॉलेज में उन शरारतियों से बचाने के लिए.

दीपू: इसमें क्या है? वो लड़के बदतमीज़ी कर रहे थे तो मुझे बीच में आना ही पड़ा.

निशा: और सुनाओ.. कैसे हो? कल हम कॉफ़ी के लिए मिले क्या? लेकिन कॉलेज से बाहर.. नहीं तो मेरी दोस्त सब मेरी टांग खींचेगे..

दिनेश: ठीक है मिलते है.

अगले दिन दोनों बाहर कॉफ़ी पीने के लिए बाहर एक होटल जाते है. होटल काफी अच्छा था और कॉफ़ी थोड़ी मेहेंगी भी थी उस होटल में. निशा: इतने मेहेंगे होटल में आने की क्या ज़रुरत थी? और कहीं थोड़ा चल लेते. दिनेश: पहली बार तुम मेरे साथ आ रही हो तो फिर छोटे होटल कैसे जाते?

निशा ऐसे ही बात को आगे बढ़ाते हुए.. आगे क्या सोचा है?

दिनेश: मतलब? मैं समझा नहीं.

निशा: अरे मेरे कहने का मतलब था की अब studies भी ख़तम होने को आ रहे है तो आगे क्या करने का इरादा है?

दिनेश ये बात सुन कर थोड़ा आश्चर्य हो जाता है और निशा की तरफ देखते हुए कहता है की तुम्हे दीपू ने कुछ नहीं बताया क्या?

निशा भी आश्चर्य हो कर.. नहीं.. उसने मुझे कुछ नहीं बताया.

दिनेश: दीपू को तो मालूम है.

निशा: मतलब?

दिनेश: यही की कॉलेज ख़तम होने के बाद मैं अपनी मम्मी का बिज़नेस में हाथ बताऊंगा. हमारा बिज़नेस है तो मम्मी चाहती है की अब मैं बिज़नेस सम्भालूं और वो थोड़ा आराम करे.

निशा: दीपू ने तो मुझे कुछ नहीं बताया इस बारे में.

दिनेश: मैंने दीपू को ये भी बताया है की वो भी मेरे साथ मेरे बिज़नेस में काम कर सकता है और दोनों हमारी बिज़नेस को आगे बढ़ाएंगे.

निशा: वैसे कौन सा बिज़नेस है तुम्हारा?

दिनेश: कपड़ों का है. छोटा ही है लेकिन दिन अच्छे निकल जाते है. मैं और दीपू मिल कर बिज़नेस को और बढ़ाना चाहते है.

निशा: ये तो बड़ी अच्छी बात है. तुम्हारे घर में और कौन है?

दिनेश: मैं और मम्मी ही रहते है. पापा नहीं है.. जब मैं छोटा तो तो वो गुज़र गए.

निशा: सॉरी मुझे पता नहीं था.

दिनेश: कोई नहीं.

फिर ऐसे ही बातें करने के बाद दोनों होटल से निकल जाते है.

उस दिन रात को खाना खा कर जब सब अपने कमरे में सोने जाते है तो निशा दीपू के कमरे में आती है. दीपू उस वक़्त वो भी अपने मोबाइल में कुछ देख कर सोने की तैयारी कर रहा था तो निशा अपनी गांड मटकाते हुए उसके पास आती है. दीपू उसे देख कर.. क्या बात है आज यहाँ कैसे?

निशा: तूने बताया नहीं की पढाई करने के बाद तू अपने दोस्त दिनेश के साथ उसके बिज़नेस में उसका हाथ बताएगा?

दीपू: तुझे किसने बताया?

निशा: तू बताएगा नहीं तो मुझे पता नहीं चलेगा क्या?

दीपू: मतलब जनाब दिनेश से मिली हो आज..

निशा: हाँ आज उससे मिली थी और हम कॉफ़ी पीने गए थे.

दीपू: क्या बात है? मुझे क्यों नहीं बुलाया? मैं भी आ जाता

निशा: वो सब छोड़.. बात सही है क्या?

दीपू: हाँ, दिनेश ने सही कहा है. तुझे अपने दोस्तों से फुरसत मिले तो पता चले ना. मैं उसकी माँ रितु आंटी से भी मिला हूँ और उन्होंने भी कहा है की हम दोनों मिलकर उसके बिज़नेस को आगे बढ़ा सकते है

निशा: ये तो बहुत अच्छी बात है. चलो तू भी जल्दी सेटल हो जा. तुझे भी तो शादी करना है ना.. और ऐसा कहते हुए निशा दीपू को आँख मार देती है.

दीपू: मेरे से पहले तो तेरी शादी होगी.

निशा:देखते है

फिर दोनों ऐसे ही और कुछ बातें करते है और निशा अपने कमरे में चली जाती है और दीपू भी फिर सो जाता है.

फिर दोनों (दिनेश और निशा) के बीच में हर रोज़ बातें होती रहती है और दोनों के बिना जाने एक दुसरे के करीब आ जाते है. फिर एक दिन दिनेश निशा को propose करता है तो निशा भी खुश हो जाती है और हाँ कह देती है..

दिनेश भी एकदम खुश हो जाता है और कहता है की वो उसे अपनी माँ से मिलाना चाहता है. निशा को दीपू ने बताया था उसे माँ के बारे में तो वो भी उनसे मिलना चाहती थी. एक दिन दिनेश निशा को घर लेकर जाता है और उसकी माँ से मिलाता है.

New Character: रितु (दिनेश की माँ) - ४० Yrs ...लेकिन लगती ३५ के आस पास..एकदम अपने आप को मेन्टेन किये हुए है…उसकी जल्दी शादी हो गयी थी और वसु के माफिक शादी के एक साल में ही दिनेश पैदा हो गया था.

Fig : ३४/३०/४०…एकदम कामुक औरत लेकिन एकदम संस्कारी.. मस्त उठे हुए चूचे, गहरी नाभि और बाहर को निकली हुई गांड और दिनेश और अपने बिज़नेस (जो उसने अपने पति के मरने के बाद संभाला था) पर ही ध्यान देती है.

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दिनेश को कभी पता नहीं चला की उसकी माँ भी बहुत कामुक औरत है और अपने आप को ही संतुष्ट करती रहती है.

उसकी माँ को देख कर निशा भी मन में सोचती है की ये भी उसकी माँ की तरह एकदम सुन्दर औरत है. निशा उसको देख कर उसके पाँव छूती है और आशीर्वाद लेती है.

रितु: दिनेश तुम्हारे बारे में बताया था की तुम दीपू की बेहन हो. अच्छा हुआ आज मुलाक़ात हो ही गयी. मैं ही इसे कह रही थी की एक बार तुझे भी घर ले आये. तेरा भाई तो यहाँ बहुत बार आया हुआ है .निशा थोड़ा शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं केहती. फिर वहां थोड़ी देर बैठ के चाय पीकर वो अपने घर को निकल जाती है और सोचती है की वो भी एक अच्छे घर में ही जायेगी…
 
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