Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग… - Page 2 - SexBaba
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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

निशा थोड़ा शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं केहती. फिर वहां थोड़ी देर बैठ के चाय पीकर वो अपने घर को निकल जाती है और सोचती है की वो भी एक अच्छे घर में ही जायेगी…

8th Update – जन्मदिन

कुछ दिन ऐसे ही गुज़र जाते है और सब अपने काम में लग जाते है. निशा और दीपू के आखिर परीक्षा भी नज़दीक आ जाते है तो वो दोनों भी अपनी पढाई में लग जाते है. वहीँ दिव्या भी अपनी सोच में रहती है और वसु भी दिव्या को टाइम देती है क्यूंकि उसे भी पता था की मामला उतना आसान नहीं है. आगे जो भी फैसला होगा उससे सब की ज़िन्दगी बदलने वाली थी.

गनीमत से दोनों के परीक्षा हो जाते है और दोनों ही काफी खुश थे की दोनों अच्छे नंबर्स से परीक्षा पास कर जाएंगे और उसके बाद दीपू को दिनेश के साथ उसके बिज़नेस में भी हाथ बटाना था.

परीक्षा ख़तम होने के २ दिन बाद दीपू का जन्मदिन था. घर में सब शान्ति छायी रहती है. जन्मदिन के सुबह ही दीपू के नाना, नानी और बाकी रिश्तेदार उसको फ़ोन कर के जन्मदिन की बधाई देते है और उन सब को उनके घर आने को कहते है. वसु कहती है की वो लोग जल्दी ही उनसे मिलने आएंगे.

दोफहर को दीपू जब बाहर अपने दोस्तों से मिलने के बाद घर आता है तो उसे एक अच्छा सरप्राइज मिलता है. तीनो घर को अच्छे से सजाते है और दीपू के लिए एक केक का भी इंतज़ाम करते है. दीपू ये देख कर एकदम खुश हो जाता है क्यूंकि उसे इस बारे में थोड़ी भी भनक नहीं थी. घर में हॉल में केक सजा के रखा हुआ था लेकिन उसे कोई दीखता नहीं है. घर आ कर दीपू सब को आवाज़ देता है तो कोई नहीं बाहर आता. फिर थोड़ी देर बाद तीनो एकदम सज धज के जैसे की आज उनकी शादी है वैसे सज कर आते है. दीपू उनको अपनी आँखें फाड़ कर देख रहा होता है. निशा एक सेक्सी सलवार कमीज पहन के आती है जो उसके बदन पे एकदम चिपका हुआ था और उसके ठोस चूचियां और बहार को निकली गांड पूरे उभार में साफ़ दिख रहे थे.

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निशा दीपू के पास आकर धीरे से उसके कान में कहती है की ये उसके लिए सरप्राइज है और उस तरफ देखो जहाँ वसु और दिव्या भी ऐसे ही सेक्सी और ट्रांसपेरेंट साडी में सज कर आती है तो दिव्या भी एकदम सज के आती है. तीनो ही एकदम ऊपर से उत्तरी हुई अप्सराएं लग रही थी. दिव्या ऐसे रूप में आएगी ऐसा वसु को पता नहीं था. दिव्या को देख कर वसु उसे पूछती है तो दिव्या कहती है की ये दीपू को उसकी तरफ से जन्मदिन का तोहफा है और वो कहती है की बहुत सोच समझ कर उसने ये फैसला लिया है की वो दीपू से शादी करने को राज़ी है.

वसु: तू सोच समझ कर ही ये फैसला लिया है न?

दिव्या: हाँ… और ये बात बोल कर शर्मा जाती है और अपना मुँह झुका कर धीरे से हस्ती है

इतने में निशा भी उन सब को देख कर कहती है की वो भी उन सब से एक बात कहना चाहती है. सब एक साथ पूछते है की क्या बात है?

तो निशा कहती है की वो दिनेश को चाहने लगी है. दिनेश ने उसे propose किया है और उसने उसका proposal accept कर लिया है और वो उससे शादी करना चाहती है.

उसकी बात सुनकर सब बहुत खुश हो जाते है और वसु उन दोनों को अपने गले लगा लेती है और प्यार से उसके गाल को चूम कर कहती है की वो बहुत खुश है की वो (दिव्या ) उसकी बहु बनने वाली है. तो निशा भी बहुत खुश हो जाती है और उसकी माँ से कहती है की मौसी आपकी कैसे बहु हो सकती है.. वो तो आपकी सौतन बनने वाली है और ऐसा कहके दोनों हस देते है तो दिव्या शर्म से पानी पानी हो जाती है. दीपू ये सब मजे से देख रहा होता है और उसे अपनी किस्मत पर विश्वास नहीं होता की इतनी सुन्दर और सेक्सी औरत उसकी बीवी बनने वाली है. सब लोग दीपू के केक काटने की तैयारी करते है तो वसु किचन में जाती है कुछ लाने को.. तो दीपू भी उसके पीछे चले जाता है और उसको पीछे से बाहों में भर के.. उसपे नाभि पे हाथ रख कर उसके कुरेदते हुए कान में कहता है की मौसी तुम्हारी बहु नहीं बल्कि उनकी सौतन बनने वाली है. वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कहती है चुप कर.. क्या क्या बातें कर रहा है.

दीपू: वसु को पलटा कर उसकी आँखों में देख कर कहता है की वो सही कह रहा है.

तुम सब लोगों ने मुझे बहुत अच्छा suprise दिया है तो मैं भी आपको एक suprise दूंगा. वसु अपनी आँखें बड़ी करके दीपू के तरफ देखती है तो उसको दीपू की आँखों में चमक दिखती है

इतने में किसी के आने की आवाज़ आती है तो दोनों अलग हो जाते है और फिर सब हॉल में आकर अच्छे से केक को सजा कर दीपू को केक काटने को कहते है.

दीपू निशा से कहता है: क्या तुम दोनों को भी मेरी बीवी के रूप में अपनाओगे? मैं जानता हूँ की माँ भी एक आदमी के लिए तरसती है और वो वसु की तरफ देख कर आँख मारते हुए कहता है की उसने कई बार अपनी माँ को खुद को ऊँगली करते हुए देखा है.

ये बात सुन कर निशा कहती है: तू भी?

दीपू: तू भी का क्या मतलब है?

निशा: मैंने भी माँ को देखा है.

दीपू: क्या देखा है?

निशा: वही जो तू कह रहा है. मैंने भी माँ को कई बार... और ऐसा कहते हुए रुक जाती है और वो अनकही बात सब समझ जाते है.

जब निशा ये बात बोलती है तो वसु का चेहरा और गाल सब शर्म के मारे एकदम लाल हो जाते है और अपनी आँखें नीचे कर लेती है.

दिव्या: वाह भाई इतना सब हो गया है और मुझे किसीने बताया भी नहीं?

दीपू: ये बात किसी को नहीं पता.. मैंने तो चुपके से माँ को देखा था. बोलो मेरी बात मंजूर है?

निशा हाँ में सर हिला देते है और कहते है की इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है? लेकिन क्या मम्मी पापा (उसका मतलब नाना, नानी से था ) मान जाएंगे इसके लिए?

दीपू: तुम उसकी चिंता मत करो. मुझे पता है माँ सब संभल लेगी और उनकी हाज़िर में ही मैं इन दोनो से शादी करूंगा. दोनों वसु की तरफ देखते है तो वो अपना सर झुकाये खड़ी रहती है.

निशा:अब बहुत हो गया.. जल्दी से केक काट भाई..बहुत भूक लगी है. आज तो तेरे लिए माँ ने बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया है तो जल्दी करो.

वसु: मैं ही नहीं छोटी ने भी मेरी मदत की है खाना बनाने में.

निशा: हाँ बात भी सही है. अपने होने वाले पति के लिए इतना तो बनता है ना.. और ऐसा कहते हुए निशा दिव्या को देख कर आँख मार देती है.

दीपू केक काटता है तो वसु एक केक का टुकड़ा लेकर उसको खिलाने लगती है तो दीपू मना कर देता है.

वसु उसको पूछती है क्यों तो दीपू एक शरारत भरे अंदाज़ में कहता है

दीपू: आपको याद है मैंने क्या कहा था जब हम खंडहर से आ रहे थे और एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे. वसु उस दिन के हुए बातों को याद करती है और अपनी आँखें बड़ी करती हुई दीपू की तरफ देखती है तो दीपू कहता है मैंने उस दिन जो कहा था आज वही होगा.

निशा: क्या कहा था?

दीपू वसु से कहता है की ये केक का टुकड़ा आप मुझे अपने मुँह से खिलाओगे. जब वसु को ये बात समझ में आती है तो वो मना करती है लेकिन दीपू नहीं मानता और आखिर में वसु वो केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेकर आगे बढ़ती हैं और अपने मुँह का टुकड़ा दीपू को खिलाती है तो दीपू भी वो टुकड़ा अपने मुँह में लेता है.

वसु: लो खा लिया ना.. अब मुझे छोड़.

दीपू: अभी कहाँ खाया है? देखो आपके होंठ पे अभी भी टुकड़ा है और ऐसा कहते हुए दीपू फिर से अपने होंठ आगे करते हुए वसु के होंठ पे रख के इस बार चूमते हुए वो केक का टुकड़ा अपने मुँह में लेता है.

ज़ाहिर सी बात है की जब दोनों के होंठ मिलते है तो दीपू वो केक के टुकड़े को खा कर अपनी जुबां फिर से वसु के मुँह में डालता है और वो एक किस में बदल जाता है. किस पहले धीरे होता लेकिन दीपू को पता था तो वो अपनी पूरी जुबां वसु के मुँह में डालता है और देखते ही देखते किस एकदम गहरा और प्रगड़ हो जाता है.

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निशा और दिव्या दोनों मजे से देखते रहते है और उन दोनों को देख कर इनकी भी सांसें भारी हो जाती है और दोनों भी बहुत उत्तेजित हो जाते है और उन्हें पता भी नहीं चलता की उनकी चूत से पानी निकलना शुरू हो जाता है.

दीपू और वसु जब किस कर रहे होते तो वसु की मस्त चूचियां दीपू के सीने में दब जाती है और उत्तेजना के मारे उसके निप्पल भी एकदम तन जाते है और एकदम कड़क और नुकीले हो जाते है जो दीपू के छाती पे चुब्ते हुए दीपू को समझ आता है.

किस करते वक़्त दीपू अपना हाथ वसु के पीछे ले जाकर उसकी गांड को ज़ोर से दबाता है तो वसु की सिसकी उसके मुँह में ही रह जाती है. ५ मं के लम्बे किस के बाद दोनों अलग होते है तो दीपू कहता है.. अब केक कुछ मीठा लग रहा है.

जब दीपू ऐसा कहता है तो वो देखता है की केक का कुछ हिस्सा वसु के मुँह से गिर कर उसके सीने में पड़ा रहता है तो वसु उसे निकालने की कोशिश करती है तो दीपू मना करता है और कहता है की वो निकालेगा. दीपू झुक कर वसु की साडी का पल्लू निकल कर वो केक का टुकड़ा जो उसके ब्लाउज पे पड़ा हुआ था उसे अपनी जुबां से चाटता हुआ साफ़ करता है और ऐसा करते वक़्त वो उसकी निप्पल को भी चूम लेता है और धीरे से काटता है क्यूंकि वो बहुत नुकीले लग रहे थे. वसु का दिल अब बहुत ज़ोर से धड़कता रहता है और हलके दिखावे गुस्से से दीपू को अलग कर देती है.

वसु: और कितना केक खायेगा? बाकी दोनों भी तो है. उन्हें भी तो तुझे केक खिलाना है.

दीपू फिर से वसु को अपनी बाहों में लेकर इस बार प्यार से उसके होंठ चूमते हुए अलग कर देता है.

अब निशा की बारी थी तो निशा पहले से ही उन दोनों को देख कर एकदम गरम हो गयी थी और वो भी इस बार बिना दीपू एक बताये अपने हाथ में ले कर दीपू को खिलाती है. दीपू भी मजे से निशा के हाथ से केक खा लेता है और फिर निशा उसके माथे को चूम कर जन्मदिन की बधाई देती है.

जब आखिर में दिव्या की बारी आती है तो दिव्या एकदम शर्मा जाती है.

दिव्या (उन दोनों को देख कर पहले ही गरमा गयी थी और उसके पैंटी भी पूरी तरह से गीली हो गयी थी )भी वैसे ही करती है तो इस बार दीपू उसको चूमते वक़्त उसकी चूचियों को ज़ोर से दबा देता है. ये देख कर दोनों (वसु और निशा) एक गहरी सास लेते है तो दिव्या भी गरम हो जाती है और अपनी आँखें बड़ी करती हुई दीपू की तरफ देखती है तो दीप कहता है की ये तो कुछ भी नहीं है और सब को आँख मार देता है तुमने मुझे मेरे जन्मदिन पे गिफ्ट दिया था तो ये मेरे तरफ से तुम्हारे गिफ्ट को स्वीकारना है.

दिव्या भी बाकी दोनों की तरह दीपू को अपने मुँह से केक खिलाती है तो दीपू भी केक खाने के बहाने उसकी जुबां को पूरी चूस लेता है और दोनों भी एक गहरे किस में डूब जाते है.

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दीपू दिव्या को किस करते हुए एक हात से चूची दबाता है तो वो दुसरे हाथ से केक का एक टुकड़ा लेकर उसके पेट और कमर पे मलता है. दीपू जान भूझ कर अनजान बनते हुए कहता है की केक तुम्हारे पेट पे लग गया है. दिव्या को पता था की क्या होने वाला है तो वो कहती है की वो साफ़ कर लेगी लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. दीपू अपने घुटनों पे बैठते हुए दिव्या की साडी को कमर से निकालता है और फिर से अपनी जुबां से चाटता है और ऐसे ही चाटते हुए उसकी गहरी नाभि को भी चूम कर चाटता है और अपनी जुबां उसकी गहरी नाभि में दाल कर चूमते हुए धीरे से काटता भी है.

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दिव्या की सांसें बहुत गहरी हो जाती है और आहें भरते हुए उसका पेट अपनी नाभि पे दबा देती है और उत्तेजना में कहती है की वो क्या कर रहा है.

दीपू: मैं तो केक खा रहा हूँ और आपकी पेट पे जो टुकड़ा पड़ा हुआ है उसे साफ़ कर रहा हूँ और ऐसा कहते हुए हस देता है और पूरी तरह से उसकी नाभि को चाट कर पेट एकदम साफ़ कर देता है.

दीपू को वहां नाभि के पास एक तिल दीखता है जो उसे और सेक्सी बना रहा था तो वो दिव्या से कहता है की वहां उसका तिल उसे और भी सेक्सी बना रहा है और फिर से उसे वहां चूम लेता है.

दीपू को ऐसा करते हुए देख दोनों वसु और निशा की चूतें भी गीली हो जाती है और पानी रिसने लगती है.

फिर सब अच्छे से साफ़ कर के सब लोग एक दुसरे को केक खिलाते है और फिर खाना खा कर अपने कमरे में दोपहर को सोने चले जाते है.

जाने से पहले दीपू कहता है की शाम को दिनेश और उसकी माँ घर आने वाले है क्यूंकि उसने उन दोनों को बुलाया है. उसे उस वक़्त ये पता नहीं था निशा और दिनेश के बारे में. उसने अपने जन्मदिन पर उन्हें बुलाया था.

वसु: अच्छा किया जो तूने उन्हें बुलाया है. निशा के बारे में भी बात कर लेते है.

कमरे में सोते वक़्त वसु दिव्या से पूछती है की वो खुश है क्या.. आज जो भी हुआ.

दिव्या: शायद हाँ… मुझे भी अभी अपनी ज़िन्दगी में आदमी की कमी महसूस होती है. दीपू को मैंने ऐसे ही हाँ नहीं किया.. वो तेरा बेटा ज़रूर है लेकिन उसमें मैं अच्छे लड़के की छवि देखती हूँ. मैंने देखा है की दीपू भी हम सब को बहुत प्यार करता है. मैं बहुत दिनों से दीपू को देख रही हूँ और इतना तो मैं कह ही सकती हूँ की वो मेरे लिए और मैं उसके लिए ही बने है. … लेकिन पता नहीं कैसे ये सब होगा. तो दिव्या वसु की और पलट कर कहती है दीपू सब देख लेगा लेकिन पहले तुम्हे माँ बाबूजी को बताना है.

वसु: हाँ इस बारे में उनसे जल्दी ही बात करती हूँ. तुम्हारे खातिर उन्हें मानना ही होगा और ऐसा कहते हुए हस देती है. तो दिव्या कहती है की अगर वो लोग मान गए तो मैं तुम्हारी बहु नहीं बल्कि हम दोनों सौतन हो जाएंगे और ऐसा कहते हुए दिव्या वसु के होंठ चूम लेती है.

वसु: ऐसा मत कर.. पहले ही मैं बहुत गीली हूँ और तू मुझे और उकसा रही है.

दिव्या: मेरा भी यही हाल है और ऐसा कहते हुए वो वसु का हाथ पकड़ कर अपनी टांगों के बीच रख देती है और साडी पेहेन्ने के बावजूद वसु का हाथ गीला हो जाता है.

दिव्या: देख रही है मैं भी उतनी ही गीली हूँ जितना तुम. अब तक मैंने दो बार अपनी पैंटी बदली है लेकिन ये साला पानी निकलते ही रह रहा है.

वसु: मेरा भी कुछ ऐसे ही हाल है और दोनों फिर एक दुसरे को ऐसे ही ऊँगली करते हुए नींद में चले जाते है.

शाम को दिनेश और उसकी माँ रितु उनके घर आते है तो उन दोनों को देख कर सब खुश हो जाते है और फिर दोनों दीपू को जन्मदिन की बधाई देते है. दिनेश डीपू को गले लगा कर उसको कहता है जन्मदिन मुबारक हो यारा. दीपू भी एकदम बहुत खुश हो जाता है. फिर सब चाय पीने लग जाते है तो दिनेश रितु की तरफ देख कर इशारा करता है. रितु भी समझ जाती है और फिर अपने गले तो थोड़ा ठीक कर के वसु से कहती hai..

रितु: बहनजी, मुझे आपसे एक बात करनी है अगर आपकी इज़ाज़त हो तो.

वसु: अरे, इसमें मेरी इज़ाज़त की क्या बात है? जो बात कहना है कह दीजिये क्यूंकि वसु को मालूम था की रितु क्या बात कहते वाली है.

रितु थोड़ा संभल कर कहती है की उसका बेटा दिनेश उसकी बेटी निशा से बहुत प्यार करता है और वो निशा का हाथ अपने दिनेश के लिए मांगने आयी है और वो निशा को अपनी बहु बनाना चाहती है.

वसु: ये तो एकदम अच्छी बात है बहनजी. वैसे मुझे निशा ने इस बारे में बताया था और हम ही इस बारे में आपसे बात करना चाहते थे.

इस बात पर दोनों दिनेश और निशा शर्मा जाते है और दोनों अपनी आँखें नीचे कर लेते है.

वसु: यह तो बहुत ख़ुशी की बात है और वो दिव्या से कहती है की मिठाई लाये तो दिव्या किचन से मिठाई लाती है तो वसु रितु को मिठाई देती है और वैसे ही रितु भी वसु के साथ करती है तो दोनों एक दुसरे के गले मिलते है. गले मिलने पर दोनों की मस्त ठोस चूचियां एक दुसरे से टकराते है जिसे दोनों महसूस करते है. दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुराते है लेकिन कुछ नहीं कहते. रितु का तो वसु को पता नहीं था लेकिन आज सुबह हुए घटनाओं से वसु की चूत अभी भी गीली ही थी और उत्तेजना में थी लेकिन अपने आप को ज़ाहिर नहीं करती.

इन दोनों को पता नहीं था लेकिन दिनेश की तेज़ नज़रें दोनों को देख लेती है (वो एकदम होशियार और तेज़ दिमाग का लड़का था) और कुछ सोचने लगता है लेकिन कुछ नहीं कहता.

वसु: हम मेरे माँ पापा के घर जल्दी ही जा रहे है और वहां इन दोनों के बारे में पूछ कर आपको बताती हूँ.

रितु: जी ये तो अच्छी बात है.

वसु: वैसे आपके घर में और कौन कौन है?

रितु: ज़्यादा कोई नहीं है. इसके पिता तो बहुत पहले ही चल बसे है, मेरे सास, ससुर, माँ, बाप कोई नहीं है और मैं बिज़नेस को संभाल रही हूँ. मैं चाहती हूँ की दिनेश और दीपू जल्दी ही बिज़नेस को संभाले तो मैं थोड़ा आराम कर लून.

वसु: अच्छा कहा आपने.. मेरा मतलब है की अब दिनेश भी काम करने लायक हो गया है और दीपू भी उसकी मदत करेगा और आपको आराम करना चाहिए.

जैसे मैंने कहा हम कुछ दिनों में मेरे घर जा रहे है तो उनसे बात करके इन दोनों की शादी का तारिक फिक्स करवाती हूँ.

रितु: ये ठीक है. जब भी तारिक और समय फिक्स हो जाए तो बता दीजिये. हम भी अपनी तरफ से काम करना शुरू कर देंगे. और फिर ऐसे ही बातें कर के रितु और दिनेश वसु का बनाया हुआ स्वादिष्ट खाना खा कर अपने घर निकल जाते है और यहाँ पर भी सब भी ख़ुशी से सब लोग अपने आने वाले दिन के बारे में सोचते हुए अपने कमरे में जाकर सो जाते है.

वहीँ रितु के घर में दोनों भी खुश थे और अपने कमरे में सोने चले जाते है. रितु को नींद नहीं आ रही थी तो वो वसु के साथ हुए हादसे को याद कर रही थी की कैसे दोनों की चूचियां एकदम से टकरा गयी लेकिन दोनों को बुरा नहीं लगा. ये सब सोचते हुए ना जाने कब उसका हाथ अपनी साडी के अंदर दाल कर पैंटी को सरका कर अपनी चूत मसलते रहती है

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और मन में बड़बड़ाती है.. ये चूत और आग मुझे सोने नहीं देगी. पता नहीं कब मुझे थोड़ी शान्ति मिलेगी. वहीँ दिनेश को भी लगता है की उसकी माँ भी बहुत तड़प रही है और उसे कुछ करना चाहिए...
 
Bhai, Pg 63 pe naya (latest) update diya hai. dekhe, padhe aur comment kaa intezaar hai..

Gokb Ek number Raj Sharma Deepaksoni
 
Bhai, बहुत दिनों बाद आप मेरी कहानी पे आये हो. धन्यवाद और शुक्रिया. आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा...

Lord xingbie
 
9th Update: (Introduction of new Characters)

अगली सुबह दीपू भी सुस्ताते हुए उठता है और फ्रेश हो कर किचन में जाता है तो आज देखता है की दिव्या चाय बना रही है. दीपू दिव्या से पूछता है की माँ कहाँ है तो वो कहती है की आज वो जल्दी उठ गयी है तो चाय बनाने आ गयी है. दीपू दिव्या के पीछे जा कर खड़ा हो जाता है और उसे पीछे से बाहों में लेकर उसके गले को चूमते हुए उसकी मस्त चूची को दबाते हुए कहता है कल उसे केक खाने में बहुत मजा आया.

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उसकी चूची दबने से दिव्या बहक जाती है लेकिन फिर अपने आप को संभाल कर दीपू से कहती है.

दिव्या: दीपू मेरी एक बात मानेगा क्या?

दीपू: क्या मौसी?

दिव्या: येही की ये जो तू कर रहा है ना थोड़े दिन रुक जा शादी तक. शादी के बाद जितना दबाना है मैं तुझे रोकूंगी नहीं. दीपू को भी लगता है की वो थोड़ा जल्दी कर रहा है तो वो उसके कान में हाँ कह देता है और कहता है की आप सही कह रही हो. मैं भी जल्दी नहीं करना चाहता.. बस ऐसे ही मजे ले रहा था..लेकिन अब सब शादी के बाद और कहता है शादी के बाद तो रोज़ दबाएगा और उसकी लेगा तो दिव्या कहती है की मैं भी उतनी ही उतावली हूँ और हस देती है.

दीपू अपना हाथ ले जाकर उसके पेट के ऊपर रखता है तो कहता है ये ठीक नहीं है. दिव्या को समझ में नहीं आता की दीपू क्या कह रहा है तो दिव्या पलट कर दीपू को देखते हुए सवालिया नज़रों से पूछती है तो दीपू हस देता है और फिर अपने घुटनों पे आकर उसकी साडी को कमर से पकड़ कर ३ इंच नीचे सरकाता है तो उसकी साडी भी थोड़ा नीचे हो जाती है जिस वजह से उसके गहरी नाभि नज़र आती है.

उसकी नाभि को देख कर दीपू दिव्या की आँखों में देखकर कहता है बस एक बार लेकिन इसके बाद सिर्फ शादी के बाद और ऐसा कहते हुए उसपे एक गहरा किस करता है तो दिव्या की जैसे सांस रुक जाती है और मदहोशी में दीपू से कहती है की और ना कर.. वरना बहक जायेगी और वो अपना काम नहीं कर पाएगी तो दीपू हस देता है और फिर खड़ा हो जाता है.

इतने में वहां वसु आ जाती है और दोनों को देख कर कहती है की क्या हो रहा है?

दिव्या: देखो ना दीदी ये क्या कर रहा है.. वसु दिव्या से पूछती है तो दिव्या अपनी साडी पे इशारा कर के कहती है की इसने मेरी साडी नीचे खसका दी है और नाभि के नीचे बाँधने को कह रहा है.

दीपू: दोनों को देख कर.. मेरी होने वाली बीवी थोड़ी सेक्सी दिखनी चाहिए ना ख़ास कर के घर में.. इसीलिए ऐसा किया तो वो वसु को आँख मार देता है.

वसु: चुप कर.. अभी कुछ हुआ भी नहीं और तू हमें अपनी बीवी बोल रहा है.

दीपू: मुझे पता है की आप नाना नानी को मना लोगी और आखिर में जो हम सब के भाग्य में लिखा है वही होने वाला है.

वसु: हाँ बात भी सही है.

दीपू: वैसे एक बात कहूँ तुम दोनों से..

वसु; बोल ना इसमें झिजाहकने की क्या बात है..

दीपू: मैं चाहता हूँ की जब हमारी शादी हो जाए तो हम सब घर में खुल के रहे और ना ही कोई हिचखीचत हो.

वसु: मतलब?

दीपू: मतलब ये की बातें ख़ास तौर पे कमरे में खुल के हो.. नाकि झिझक के साथ खासकर के जब हम एक दुसरे के करीब आएंगे और एक होंगे जैसे हमारे गुप्तांगो के वर्णन के बारे में , इत्यादि..

दीपू जब ये बात दोनों को बोलता है तो दोनों अपना मुँह खुला का खुला रखते है और अपनी नज़रें झुका लेते है.

दीपू हस्ता है और दिव्या की गांड दबाते हुए कहता है

दीपू: मौसी अभी मैं आपको मौसी ही कहूंगा.. लेकिन शादी के बात नाम से पुकारूंगा. तो मौसी आपको पता है ना की सुहागरात में क्या होता है और दिव्या को आँख मार देता है.

दिव्या कुछ नहीं कहती तो दीपू कहता है.. मैं येही कह रहा था की शर्माना छोड़ दो तो सभी को मज़ा आएगा.

दिव्या: हाँ, समझ में आया है

दीपू: चलो अच्छी बात है. अगर पता नहीं है तो अपनी बेहन से पूछ लेना और दोनों को आँख मार के वहां से बाहर निकल जाता है.

उसके जाने के बाद वसु कहती है की दीपू अब बहुत ठरकी हो गया है तो दिव्या कहती है क्यों नहीं वो तो जवान है और उबलता हुआ खून है और जब दो गदराये बदन की औरतें उसकी बीवी बनेगी तो वो ठरकी तो होगा ही.

वसु: हाँ तू सही कह रही है. वैसे तू भी कम नहीं है उसके साथ जो मजे ले रही थी मेरे आने से पहले और हस देती है.

दिव्या भी मजाक में: मेरी जगह तू होती तो शायद तू और भी कुछ ज़्यादा ही कर लेती उसके साथ और वसु की गांड में हल्का सा चपत मारती है.

वसु: आउच.. चल हट और जल्दी से चाय बना. इतने में निशा भी वहां आ जाती है और सुस्ती लेते हुए वो भी चाय मांगती है.

फिर सब लोग चाय पीकर अपने काम में लग जाते है. फिर सब कुछ २ दिन तक शांत रहता और लोग अपने काम में बिजी रहते है. २ दिन बाद वसु के पिताजी का वसु को फ़ोन आता है और वो दिव्या के बारे में चिंता जताते है.

पिताजी: बेटा , कैसी हो?

वसु: मैं ठीक हूँ पिताजी.. आप और मम्मी कैसे है? भाई कैसा है? भाभी कैसी है?

पिताजी: सब ठीक है बेटा, तुझे तो पता है मुझे और तेरी मम्मी को एक ही बात की चिंता सताये रहती है. अब हमारी उम्र भी हो गयी है. अगर उसकी की शादी हो जाए तो हम गंगा नाहा ले.

वसु कुछ सोचती है और कहती है की पिताजी मुझे इसके बारे में आप और मम्मी से बात करनी है..मैं और छोटी २ दिन में आपके पास आते है और फिर सब बातें करते है.

पिताजी: ठीक है आ जाओ. तुम सब का इंतज़ार करेंगे.

नए पात्र:

नाना: उनकी उम्र हो गयी है.. बूढ़े हो गए है और अब वो अपनी आखरी चरण में है. बस उनको दो ही चिंता है की वो जाने से पहले अपनी बेटी दिव्या की शादी हो जाए और अपने वारिस को भी देखे क्यूंकि उसके लड़के को कोई औलाद नहीं थी. लेकिन अब उनकी तबियत खराब हो रही है और उन्हें इन दोनों में से कोई भी बात जल्दी बनते नज़र नहीं आ रही थी. इसी वजह से वो हमेशा चिंता में रहते है जिसके चलते उनकी हालत रोज़ ख़राब हो रही है.

नानी: उनका भी यही हाल है.. ये भी अब बूढ़ी हो गयी है और अब वो घर में ही रहती है. इन दोनों के ४ बच्चे है.

२ को तो आपने देख ही लिया है (वसु और दिव्या)

बेटा मनोज : ३५ साल. इसकी शादी हो गयी है. वो एक केमिकल कंपनी में काम करता है. शादी होकर ५ साल हो गए है लेकिन कोई बच्चा नहीं है.

मीना: ये मनोज की पत्नी है. 26 साल फिग: ३४/३०/४० - ये भी मस्त कामुक महिला है और हमेशा गरम रहती है. उसे दुःख है की उसका पति अब उसे संतुष्ट नहीं कर पाता क्यों की उसका पति का अब खड़ा नहीं होता है. शादी के १- २ साल दोनों ने बहुत मजे किये थे और सोचा था की तीसरे साल वो बच्चा जनेगी. लेकिन एक दिन कंपनी में काम करते वक़्त उसके पति को चोट लग गयी थी. तब से उसमें दम नहीं था जो मीना चाहती थी.

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दोनों में थोड़ा उम्र में गैप था लेकिन उनकी वो दोनों एक दुसरे को (शादी से पहले) पसंद करते थे तो दोनों की शादी हो गयी.

कविता: 44 Yrs - ये मीना की माँ है. विधवा है और उसका घर मीना के घर के पास ही है.

कविता: ३४/३०/४०

उम्र 42 है लेकिन अभी भी 35 से ज़्यादा दिखती नहीं है. ये मस्त बदन की मालिक है…उठे हुए भरी चूचियां और सब से जान लेवा उसकी उभरी हुई गांड जो लोगों को उत्तेजित करने से रोकती नहीं थी. .. चाहे जवान हो या फिर बूढ़े.. सब उसको देख कर आहें भारते थे.

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उसकी शादी जल्दी हो गयी थी और उसे मीना भी जल्दी ही पैदा हो गयी थी. वो भी एकदम भरे बदन की मालकिन है. वसु की तरह अपने जवानी पे चरम पे है लेकिन इसे संतुष्ट करने वाला कोई नहीं है. उसका पति मरने से पहले कुछ पैसे रखे थे. और उसके मरने के बाद इन्शुरन्स कंपनी से भी अच्छे पैसे मिले थे. उसी से वो गुज़ारा करती है. वो भी चाहती है की वो भी जल्दी नानी बन जाए लेकिन अभी तक वो बन नहीं पायी. उसकी हमेशा से ही इच्छा थी की वो और बच्चों की माँ बने लेकिन समय से पहले ही उसका पति मर गया और वो बाहर मुँह नहीं मारना चाहती थी. ये बात मीना को भी पता था की उसकी माँ और बच्चे चाहती थी (कविता ने उसे बताया था).. लेकिन ना ही वो हो पाया और ना ही वो नानी बन पा रही है जिससे दोनों थोड़े दुखी थे.

और आखरी में सबसे छोटी लड़की जिसका नाम रानी था. जैसा उसका नाम था वो भी एकदम महारानी की तरह दिखती थी. सुन्दर हसमुख चेहरा और अपनों का ख्याल रखने वाली.वो भी एक मस्त बदन की मालिक थी. ३२/३०/४०. उसके चुके थोड़े छोटे थे लेकिन एकदम सुडोल और हमेशा तने रहते थे. उसकी गांड भी जान लेवा थी. वो अपनी बेहन दिव्या से पहले शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन सब के कहने पे उसे शादी करनी पड़ी. वो बगल के गाँव में ही रहती है. उसकी शादी के एक साल में ही एक लड़की पैदा हुई थी लेकिन किस्मत उसे धोका दे गयी. वो लड़की पैदा होते ही कुछ complications की वजह से वो ज़्यादा दिन रह नहीं पायी और भगवन के घर चली गयी.

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रानी को इस हादसे से बहुत ज़्यादा झटका लगा और उसे इस पर से उभरने में बहुत समय लगा लेकिन समय और किस्मत के साथ उसने भी समझौता कर लिया और अपने पति के साथ ही रहती है लेकिन अभी भी वो बहुत चाहती थी की वो फिर से माँ बने. उसका पति भी चाहता था लेकिन पहले बच्चे के हादसे से वो मानसिक तौर पे बहुत घायल हो गया. रानी भी कामुक होने की वजह से वो भी दिन रात बिस्तर पे बहुत तड़पती थी. शायद ये उसके भाएगा में लिखा था.

लता: 32 Yrs.. ये दीपू की बुआ है. तलाक शुदा है और अपने भाई ( दीपू के चाचा) के साथ रहती है. चंचल है. ये भी भरे हुए बदन की मालिक है. इसकी शादी हो गयी थी लेकिन ये मस्त चुड़क्कड़ है. इसका पति शराबी था और ये लता जैसी कामुक और चुड़क्कड़ औरत को संतुष्ट नहीं कर पाता क्यूंकि वो हमेशा शराब में ही डूबा रहता था. लता से रहा नहीं गया और उसे छोड़ कर अपने भाई के पास आ गयी और वक़्त के साथ उसने उसको तलाक दे दिया और अपने कामाग्नि में जलती रहती है.

लता: ३४/३०/४०

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रामु: ये दीपू के चाचा है और दुसरे गाँव में काम करता है. अच्छे स्वाभाव का है और उसके भाई (दीपू का बाप) के मरने के बाद वो वो हमेशा वसु और बाकी सब से भी तालुकात बनाये रखा है और उनके हाल चाल की जानकारी रखता है.

राखी: ये रामु की पत्नी है. ३० साल की है और उसको एक छोटा लड़का है. उसे भी एक- दो और बच्चों की और चाहत है लेकिन रामु मना करता है. इसकी वजह से वो थोड़ा दुखी है. शादी से पहले वो थोड़ी पतली थी लेकिन बच्चा होने के बाद उसका भी बदन भर गया है. वो भी बहुत सेक्सी दिखती है. उठे हुए चूची मस्त गांड और हमेशा अच्छे से सज धज के रहने की इसकी ख्वाइश रहती है.

राखी: ३४/३०/४०

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आगे देखते है ये सब लोग कहानी में कैसे जुड़ते है... या फिर कौन और कब कोई दीपू के नीचे आता है :)
 
10th Update:

नाना के घर

दो दिन बाद वसु उसे घर में फ़ोन कर के बताती है वो दिव्या और उसकी बेटी निशा आ रहे है. जब उसके नाना दीपू के बारे में पूछते है तो वसु कुछ बहाना बना कर कह देती है की वो अपने दोस्तों के साथ बाहर गया हुआ है और फिर तीनो वसु के पिताजी के घर के लिए निकल जाते है.

२- ३ घंटे की सफर के बाद तीनो घर पहुंच जाते है. उसके माँ बाप तीनो को देख कर बहुत खुश हो जाते है. तीनो उनके पेअर छु कर आशीर्वाद लेते है. उसके पिताजी मीना और रानी को भी बताते है की उनकी बेहने आ रही है तो वो लोग भी उनसे मिलने वहां आ जाते है. वसु और दिव्या अपनी बेहन और भाभी को मिलकर बहुत खुश होते है और फिर सब से गले मिलते है.

निशा भी उन सब को देख कर बहुत खुश हो जाती है और सब के गले लगती है.

मीना वसु के गले लग कर कहती है की आप तो दिन ब दिन जवान दिख रही हो. .. क्या राज़ है?

वसु: चुप कर. ..कुछ भी बोलती रहती है.

मीना: अरे मैं तो सही कह रही हूँ. तुम दोनों (निशा की तरफ देख कर) माँ बेटी नहीं बल्कि बेहन लग रही हो और हस्ते हुए आँख मार देती है.

फिर सब लोग एक दुसरे के हाल चाल पूछने के बाद आराम करते हुए बातें करते है तो इतने में उसके पिताजी पूछते है वसु से की उसको क्या बात करनी है? वसु कहती है की रात को वो लोग सब आराम से बात करेंगे क्यूंकि बात थोड़ी गंभीर है. सब लोग मान जाते है और फिर सब अपने कमरे में आराम करने चले जाते है. उनका घर बड़ा था और सब के लिए अलग अलग कमरे थे.

शाम को मीना सब के लिए चाय बनाती रहती है तो वसु किचन में जा कर उससे बात करने लगती है.

वसु: क्यों मीना कैसे चल रहा है? सब ठीक तो है ना? भाई कैसा है? तू हमें खुश खबर कब दे रही है?

वसु ये बात जब कहती है तो मीना का चेहरा एकदम उतर जाता है और रोने की सूरत बना लेती है.

वसु उसको देख कर घबरा जाती है और पूछती है की क्या हुआ? मीना एकदम रोनी जैसी सूरत से कहती है की होना क्या है? आपके भाई अपने काम से थके हारे होते है और फिर सो जाते है. मैं बहुत कोशिश करती हूँ की बेहलाओं… जगाओं... लेकिन वो कुछ नहीं कर पाते और मैं प्यासी ही रह जाती हूँ और अपने आप को संतुष्ट करते रहती हूँ.

वसु: ये कब से हो रहा है?

मीना: जब से उनको काम करते वक़्त कंपनी में चोट लगी थी तब से ऐसे है और धीरे से वसु से कहती है की अब तो उनका खड़ा भी नहीं होता.

वसु ये बात जान कर अपना मुँह खोले मीना को देखती रहती है और फिर अपने आपको संभालते हुए कहती है की तू चिंता मत कर.. भगवान के घर धेर है अंधेर नहीं.

वसु : तुम लोग बच्चा क्यों नहीं गोद ले लेते?

मीना नहीं दीदी.. मुझे गोद नहीं लेना है.. स्वय से माँ बनना और अपनी कोख में बच्चा पालना.. ये तो आपसे बेहतर कोई नहीं जाता. आप तो २ बच्चों की माँ हो. आपको तो सब पता है.

वसु: हाँ ठीक कह रही हो. बच्चों को कोख में पालना..उसका आनंद ही कुछ और है लेकिन चलो देखते है. मैं मनोज से बात करती हूँ.

मीना : बात करना लेकिन उन्हें ये मत बताना की हम दोनों के बीच भी बात हुई है लेकिन मुझे नहीं लगता की बात करने से कोई हल निकलने वाला है.

वसु: तू चिंता मत कर. मैं सब देख लूंगी.

इतने में चाय बन जाता है और सब आराम से चाय पीते हुए बात करते है. उतने में उसका भाई मनोज भी आ जाता है और वो भी सब को देख कर बहुत खुश हो जाता है और सब के गले लगता है. रात को जल्दी ही सब लोग खाना खा लेते है क्यूंकि उनके माँ बाप को जल्दी ही सोने की आदत थी.

दिव्या की बात

सब लोग खाना खा कर उसके पिताजी के कमरे में चले जाते है जहाँ सब लो इक्कट्ठा हो जाते है. मनोज, मीना, दिव्या, निशा, रानी और उनके माँ बाप.

पिताजी: तो बोलो बेटा क्या कहना चाहती थी जो तू फ़ोन पे नहीं बता सकती थी.

वसु: सब की तरफ देखते हुए कहती है.. आपको पता है की हम लोग छोटी (दिव्या ) के लिए लड़का ढूढ़ रहे है लेकिन अब तक नहीं मिला तो मुझे भी चिंता होने लगी तो मैंने छोटी की जनम कुंडली हमारे गाँव के में एक बाबा को दिखाया था. ये वही बाबा है जिन्होंने दीपू की जान बचायी जब वो छोटा था. शायद ये बात आप को भी याद हो.

पिताजी: हाँ याद है. तो बाबा ने क्या कहा?

वसु; बाबा ने छोटी की जनम कुंडली देखीं और कहा की इसमें कोई दोष है. ये बात जान कर सब को धक्का लगता है और मीना पूछती है की कैसा दोष? यह बात रानी और मनोज भी पूछते है.

वसु: ये दोष की वजह से ही अब तक इसकी शादी नहीं हुई है. ये बात जान कर सब लोग थोड़ा दुखी होते है तो इतने में वसु कहती है की बाबा ने इस दोष का इलाज भी बताया है जिससे उसकी दोष का कोई असर नहीं होगा और उसकी शादी हो सकती है.

सब एक साथ: क्या इलाज है?

वसु सब की तरफ देखती है और सबसे ज़्यादा अपने माँ बाप की तरफ देख कर कहती है की इसके दोष का इलाज ये है की इसकी शादी अपने घर में ही करनी है. सब लोग ये बात जान कर दंग रह जाते है और कहते है की ये कैसे मुमकिन है.. वसु फिर आगे कहती है की अगर छोटी की शादी बाहर हुई तो उसका पति मर जाएगा और वो जल्दी ही विधवा हो जायेगी और दुखों के पहाड़ में बाकी की ज़िन्दगी गुजारेगी.

उसके माँ बाप को कुछ समझ नहीं आता और अपना सर पकड़ कर एक दुसरे को देखते हुए रो रहे थे. बाकी सब का भी यही हाल था लेकिन वो लोग इस बात को मन्नने के लिए तैयार नहीं थे और कहते है की शायद ये झूट है .

पिताजी: इस उम्र में अभी यही देखना बाकी रह गया हम दोनों को और ऐसा कहते हुए फिर से रोते है.

वसु उनके पास जाकर उनका हौसला बढ़ाती है और कहती है की उसे उस बाबा पे बहुत भरोसा है और उन्होंने अब तक हो भी बात उनके ज़िन्दगी के बारे में बताया था वो सब सच निकला.

वसु फिर कहती है की एक काम करते है. आपको दुविधा है तो हम उसकी कुंडली यहाँ के अपने जो जान पहचान के ज्योतिषी को दिखाते है और देखते है की उनकी क्या राय है? ये वही ज्योतिषी है ना जो हम सब की कुंडली भी बनायी थी और मनोज की शादी की भी उन्होंने हाँ कहा था. अगर वो कुछ अलग कहते है तो फिर हम सोचते है आगे क्या करना है. बाकी सब को भी ये बात सही लगती है और हाँ कह कर कहते है की कल ही ज्योतिषी के पास जा कर दिव्या की कुंडली वहां दिखाते है.

वसु: जाने से पहले मैं एक बात कहना चाहती हूँ.

पिताजी: क्या?

वसु: यही की अगर यहाँ के ज्योतिषी भी वही बात कहते है जो दुसरे बाबा ने कहा है तो मैं छोटी की शादी अपने ही परिवार में करूंगी. वसु की बात सुन कर सब सोच पे पढ़ जाते है और उनके पिताजी कहते है की दुनिया क्या कहेगी की घर के आदमी ने ही दिव्या से ही शादी की है.

वसु: कहने वाले कहते रहेंगे.. लेकिन मेरे लिए आपकी ख़ुशी और छोटी का घर बसना ज़रूरी और ज़्यादा मायने रखता है ना की दुनिया वाले क्या कहेंगे. और वैसे भी मैं देख रही हूँ की इसकी चिंता में आप दोनों की तबियत भी खराब हो रही है. मैं चाहती हूँ की आप के रहते ही इसकी शादी हो जाए.

पिताजी: कौन है अपने परिवार में जो इससे शादी करेगा?

वसु: ये सब बातें बाद में. .. पहले हमें कल ज्योतिषी के घर जा कर एक बार फिर से कुंडली दिखा कर आते है. आगे कौन क्या. .. तब सोचेंगे.

फिर सब लोग कमरे से निकल कर अपने कमरे में जाने लगते है तो मीना पूछती है वसु से की वो मजाक तो नहीं कर रही है.

वसु: मीना की तरफ देख कर... तुझे क्या लगता है की ऐसी बात मैं मजाक में करूंगी? तुमने देखा है ना की बाबा (पिताजी) कितने चिंतित है दिव्या की शादी को ले कर तो मैं मजाक क्यों करूंगी. मीना वसु की तरफ देख कर हाँ में सर हिला देती है और फिर सब अपने कमरे में चले जाते है सोने के लिए.

कमरे में सोते दिव्या वक़्त वसु से पूछती है की आगे क्या होगा? तो वसु कहती है की तू चिंता मत कर. सब ठीक हो जाएगा. मुझे पता है की तू दीपू को भी चाहने लगी है. वसु की ये बात सुन कर दिव्या वसु को देखने लगती है तो वसु कहती है.. ऐसे ना देख मुझे. मैंने तेरी आँखों में उसके लिए प्यार देखा है तो ये नाटक बंद कर और उसके गाल को हलके से चिमटी काटी है तो दिव्या थोड़ा शर्मा जाती है.

वहीँ दुसरे कमरे में मनोज और मीना भी इस बारे में बात करते रहते है की जाने आगे क्या होगा और यहाँ के ज्योतिषी भी वही बात कहेंगे तो.

मीना: अपने परिवार में और कौन है जो दीदी से शादी कर सकता है?

मनोज: पता नहीं यार.. देखते है कल क्या होता है.

मीना फिर मनोज के होंठों को चूमती है और उसके लंड को पकड़ कर खड़ा करने की कोशिश करती है लेकिन वो नहीं हो पाता तो फिर से मीना गरम हो कर प्यासी ही सो जाती है.

दो दिन बाद सब लोग मंदिर जाते है और फिर भगवान का दर्शन कर के वहां से ज्योतिषी के पास मिलने जाते है जब वो थोड़ा अकेला होता है. उनसे बातचीत करके वसु के पिताजी दिव्या की जनम कुंडली उनको देते है और कहते है की ज़रा वो कुंडली को पढ़ कर बताये की क्या लिखा है उस (दिव्या) के लिए. ज्योतिषी वो कुंडली लेकर कहते है की उन्हें एक दिन का समय दे. वो कुंडली को अच्छे से पढ़ कर कल बताएँगे. वैसे भी मैंने ये कुंडली पहले भी पढ़ी है जब ये छोटी थी लेकिन मैं फिर से इसे एक बार देखता हूँ.

उस टाइम वसु भी ज्योतिषी से कहते है की उसकी कुंडली भी एक बार देख ले. ज्योतिषी कहते है की उसकी कुंडली कहाँ है तो वसु अपने पर्स में से अपना वो कुंडली दे देती है जो उसके गाँव में बाबा ने बनाया था. ज्योतिषी वो कुंडली लेकर दोनों को पढ़ कर वो कल बताएँगे ऐसा वो कहते है.

सब लोग मान जाते है और फिर उनका आशीर्वाद लेकर घर के लिए निकल जाते है ये कहते हुए की सब कल आएंगे.

घर आ कर रानी वसु से पूछती है की उसने अपनी कुंडली क्यों दी है? और वो कुंडली उसने कहाँ से बनवायी थी. वसु को पता था की उसने वो कुंडली क्यों दी है लेकिन कुछ नहीं कहती और कहती है की कल तक वो सब रुक जाए.

लोग घर वापस आ जाते है लेकिन सब को उनके माँ बाप के चेहरे पे चिंता साफ़ झलक रही थी. वसु कहती है की उन्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है और आगे जो भी होगा अच्छा ही होगा. उस दिन भी रात को सब अपने कमरे में सोने जाते है और कल की ही तरह आज भी मीना तड़पते हुए सो जाती है. अगले दिन सुबह जब वो काम कर रही होती है तो उसका चेहरा उखड़ा हुआ होता है. वसु पहचान जाती है और जब वो दोनों अकेले होते है तो वसु उसका कारण पूछती है तो मीना कहती है की को बहुत दिनों से प्यासी ही सो रही है. वसु को उसकी हालत पे दया आती है और कहती है की वो इस बारे में सोच कर कुछ करेगी.

दुसरे दिन फिर सब लोग ज्योतिषी के पास जाते है और पूछते है. ज्योतिषी उनसे कहते है की उनकी बेटी दिव्या की शादी में देरी हैं क्यूंकी उसकी कुंडली में दोष है और वो वही बात कहते है जो वसु के गाँव के बाबा कहते है की उसकी शादी उसके परिवार के सदस्य से ही होगी और अगर बाहर हुआ तो वो विधवा हो जायेगी. जब ज्योतिषी वो बात कहते है तो उसके माँ बाप एक दुसरे को देखते है जैसे पूछ रहे हो की और क्या कर सकते है.

पिताजी: और कोई इलाज नहीं है क्या? घर के सदस्य से करेंगे तो दुनिया क्या कहेगी.. की हमने घर में ही शादी कर दी है.

ज्योतिषी: आपकी बात तो सही है. अगर घर में शादी नहीं कर सकते तो मैं कहूंगा की वो बिन ब्याही ही रहे. बाहर शादी कर के विधवा होने से अच्छा है की वो आपके साथ ही रहे.

वसु: और आपने मेरा कुंडली पढ़ा है क्या? ज्योतिषी एक बार वसु की तरफ देखते है ये सोचते हुए की उन्हें पता है वसु क्यों उसके बारे में पूछ रही है.

ज्योतिषी: हाँ मैंने पढ़ा है लेकिन मुझे क्यों लगता है की तुम्हे सब पहले से ही पता है. ज्योतिषी जब ये बात वसु से कहते है तो बाकी सब को कुछ समझ नहीं आता. सिर्फ वसु और दिव्या को ही इस बात का मतलब पता था.

वसु: फिर भी मैं आपसे ही सुन्ना चाहती हूँ.

उसके माँ बाप भी उनसे पूछते है तो ज्योतिषी कहते है की वो जो बात कहेंगे उनको आश्चर्य होगा लेकिन होना वही है और ऐसा होने से ही सब की भलाई है.

माँ- बाप: ऐसा क्या लिखा है?

ज्योतिषी: मैंने आपकी बड़ी बेटी की कुंडली भी देखीं है और उसमें से मैं ये ज़रूर बता सकता हूँ की आप दोनों बेटियों की ज़िन्दगी एक साथ जुडी हुई है.

पिताजी: मतलब?

ज्योतिषी: मतलब ये की आपकी दूसरी बेटी की जहाँ शादी होगी वही आपकी बड़ी बेटी की भी शादी होगी. पिताजी: ये कैसे हो सकता है? वो तो विधवा है.

ज्योतिषी: क्यों विधवा फिर से शादी कर के घर नहीं बसा सकते क्या?

पिताजी: मतलब?

ज्योतिषी: मतलब ये की आपकी बड़ी बेटी की भी दूसरी शादी होगी और दोनों एक ही आदमी से शादी करेंगे. और इसी में आप सब लोगों की भलाई है. मैं इतना ही कह सकता हूँ की उनकी शादी होने के बाद वो सब ख़ुशी से अपनी ज़िन्दगी बिताएंगे.

सब लोग एक दुसरे का चेहरा देख कर और कुछ नहीं कहते और उनके माँ बाप के आँखों से आंसूं निकलते रहते है .

सब लोग ज्योतिषी से आशीर्वाद लेकर अपने घर आ जाते है. दिव्या जब ये बात सुनती है तो उसके मन में लड्डू फूटते है क्यूंकि उसे पता था की वसु उनके माँ बाप को मना लेगी की वो लोग उसकी शादी दीपू से कर दे क्यूंकि वो भी अब दीपू को चाहने लगती है ख़ास कर के उसके जन्मदिन के बाद जब उसने उसको बहुत उत्तेजित कर दिया था. और वैसे भी दिव्या उनके साथ बहुत दिनों से रह रही थी और उसको लगा की दीपू जैसा लड़का ही कोई उकसा जीवन साथी हो. उसका स्वभाव, बातचीत करने का ढंग, etc ये सब उसके मन को भा जाता है जिससे उसपर भी लगाव आ जाता है उसे.

वापस घर आने के बाद वसु सब से कहती है की वो रात को इस बारे में बात करेंगे क्यूंकि बात थोड़ी गंभीर है और सब को सोचने के लिए वक़्त भी चाहिए. अभी वो सब आराम करे और फिर सब दोपहर को खाना खा कर आराम करते है और मनोज अपने काम के लिए निकल जाता है.

रात को खाना खा कर सब उनके पिताजी के कमरे में जमा हो जाते है. तब तक मनोज भी आ जाता है.

वसु: हाँ पिताजी, आप ने भी सुन लिया ना की ज्योतिषी ने क्या कहा है. मुझे पता है की आपको बहुत चिंता है उसके बारे में और मैं भी चाहती हूँ की वो भी शादी कर ले.. वैसे भी अभी उसकी भी उम्र हो रही है और ज़्यादा देर करना सही नहीं होगा. उसे भी एक पारिवारिक जीवन का सुख पाने का अधिकार है और मैं भी यही चाहती हूँ.

पिताजी: तेरी बात तो सही है लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा है.

वसु: मुझे पता है ये बहुत सोचने वाली बात है.. लेकिन इन सब से ज़्यादा मुझे आप दोनों की तबियत और ख़ुशी की चिंता है और मैं चाहती हूँ की कुछ और बुरा होने से पहले (मन में सोचती है की आप के जाने से पहले) मैं आप दोनों के चेहरे पे संतुष्टि देखना चाहती हूँ की अपनी छोटी की शादी हो गयी है.

पिताजी: तुम सही कह रही हो बेटा. हमें भी उसकी ही चिंता लगी रहती है. तेरी माँ ज़्यादा कुछ नहीं कहती लेकिन मुझे पता है की उसको भी बहुत फ़िक्र है. लेकिन सवाल ये है की अपने परिवार में कौन है जिसकी छोटी से शादी कर सकते है और जो तुमसे भी शादी कर ले ..ऐसा कहते हुए वो सब की तरफ नज़र डालते है.

वसु चुप रहती है और देखना चाहती थी की और किसी का नाम आएगा क्या. मीना, मनोज और रानी भी एक दुसरे की तरफ देखते है लेकिन कोई कुछ नहीं कहता क्यूंकि उन्हें समझ में नहीं आता की किस्से शादी की जा सकती है. (मीना और वसु को पता था की मनोज में वो दम नहीं है.. मीना वैसे ही परेशान थी और दिव्या से शादी कर के उसे भी परेशानी हो सकती थी) आखिर में वसु सब की तरफ देख कर कहती है की वो एक लड़के के बारे में सोच रही है और ये बात कह कर चुप हो जाती है.

माँ: कौन है बेटा तेरी ज़ेहन में?





वसु थोड़ा ड्रामा करते हुए अपने गले को ठीक करते हुए कहती है की उसे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर दिव्या की शादी दीपू से की जाए तो…….
 
Rajeev bhai, kahan chale gaye? Bahut dinon se nahi aaye ho :)

rajeev13
 
वसु थोड़ा ड्रामा करते हुए अपने गले को ठीक करते हुए कहती है की उसे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर दिव्या की शादी दीपू से की जाए तो…….

अब आगे. ..

11th Update:


माँ: क्या कह रही हो बेटा? वो तो अभी पढाई कर रहा है. इतनी छोटी उम्र है. तो सोच समझ के ही कह रही है ना?

माँ: और तू क्या चाहती है की मेरा पोता ही मेरा दामाद बने? तुम दोनों का पति बने?

वसु: हाँ माँ.. जब से मैंने इसकी कुंडली हमारे बाबा में दिखाई थी तब से मेरी नज़र में सिर्फ वो ही है. छोटी हमारे घर में बहुत दिनों से रह रही है और उसने भी दीपू को अच्छे से देखा है. ऐसा नहीं है की वो कोई बाहर का लड़का है जिसके बारे में हमें पता नहीं है.

अभी उसकी पढाई हो गयी है और वो अपने दोस्त के साथ बिज़नेस भी करने वाला है.

मैंने इस बारे में बहुत सोचा है और इस बारे में अकेले में निशा से भी बात की है. वो भी कहती है की वो मौसी को अपनी भाभी बनाना चाहती है और ऐसा कहते हुए वसु हस देती है. सब निशा की तरफ देखते है तो निशा भी हाँ में सर हिला देती है.

पिताजी: वो तो ठीक है लेकिन क्या दीपू मान जाएगा?

वसु: आप उसकी चिंता मत करो. उसको मनाना मेरा काम है.

वसु; तो क्या मैं ये समझू की आप सब राज़ी है की छोटी की शादी दीपू से कराई जाए?

माँ और पिताजी: थोड़ा सोचने का समय दे बेटा. बात उतना आसान नहीं है जितना तू कह रही है.

इतने में उसके पिताजी को बहुत ज़ोर से खासी होती है और छाती में दर्द होता है. मीना तुरंत दौड़ कर किचन से उनके लिए पानी लाती है. उन्हें पानी पीला कर आराम करने को कहते है और फिर उन्हें सुला देते है.

वसु कहती है की वो रात को उन्हें पास ही सोयेगी तो ये बात सब मान जाते है और फिर वसु को छोड़ कर सब अपने कमरे में चले जाते है सोने के लिए.

मीना मनोज से बात करती है की बड़ी दीदी सही कर रही है क्या?

मनोज: जब सब कुछ इतना हो गया है और छोटी दीदी को भी कोई आपत्ति नहीं है तो शायद हमें मान लेना चाहिए. इसके अल्वा मुझे और कोई रास्ता भी नज़र नहीं आता.

आखिर में मीना भी मान जाती है क्यूंकि मनोज की बात भी उसे सही लगती है.

अगले दिन सुबह सब उनके कमरे में जाते है तो उनके पिताजी सो रहे होते है. वसु कहती है की उनकी तबियत अभी थोड़ी ठीक है लेकिन उन्हें आराम करने की ज़रुरत है.

फिर मनोज ऑफिस जाने से पहले वसु को कमरे से बाहर बुलाता है. वसु उसके साथ बाहर आती है तो पूछती है की क्या बात करनी है.

मनोज: रात को मैं और मीना ने इस बारे में बात किया है और मुझे आपकी बात सही लगती है. और वैसे भी अभी पिताजी की हालत भी ठीक नहीं है. तो उनके रहते हुए ही छोटी दीदी की शादी हो जाए तो अच्छा है.

वसु: सही कह रहे हो मनोज. मैं भी यही चाहती हूँ. देख रहा हैं ना तू की उनकी हालत भी अभी ठीक नहीं है. मनोज हाँ से सर हिला देता है और फिर अपने ऑफिस चला जाता है.

फिर सब लोग अपने काम में लग जाते है और उनके माता पिता को आराम करने को कहते है. शाम को फिर जब मनोज भी ऑफिस से आ जाता है तो सब फिर उनके पिताजी के कमरे में इकठ्ठा होते है.

वसु फिर बात दिव्या की बात करती है तो कोई कुछ नहीं कहता. सब लोगों को और कोई रास्ता नहीं दिखता तो हाँ कह देते है. उनके माता पिता भी आखिर मान जाते है और वो भी हाँ कर देते है. तो वसु भी कहती है की वो दीपू से बात कर के उसे वहां बुला लेगी.

फिर सब लोग बात मान लेते है और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के अपने कमरे में सोने चले जाते है. आज वसु के पिताजी की तबियत थोड़ी ठीक रहती है तो उसके माता पिता को सुला कर वो भी अपने कमरे में सोने चली जाती है.

उस दिन सुबह दीपू दिनेश के घर जाता है तो दोनों बात करते है की उन्हें उनके माँ के पास जा कर उनके काम को समझना है और जल्दी ही उनके बिज़नेस को और आगे बढ़ाना है.

तो दोनों ऋतू के ऑफिस चले जाते है जो वहां काम कर रही होती है. जब दोनों उसके पास जाते है तो उन दोनों को देख कर एकदम खुश हो जाती है और उनसे मिलने के लिए वो भी अपने केबिन से आती है.. उस वक़्त ऋतू एकदम सुन्दर और अच्छी साडी पहने रहती है लेकिन उस अच्छे कपड़ों में भी एकदम सेक्सी लग रही थी. जब वो चल कर उनके पास आती है तो उसकी मस्त बड़ी चूचियां ब्लाउज में एकदम तने हुए दीखते है और हिलते भी है जिसकी नज़र दीपू पे पड़ जाती है लेकिन वो एकदम सामान्य रहता है और ख़ुशी से ऋतू से मिलता है. फिर वो अपने ऑफिस में काम करने वाले सबको बुलाती है और कहती है की अब से ये दोनों ही यहाँ के मालिक है और उन सब को उनकी बात माननी पड़ेगी क्यूंकि वो लोग अब उसके बिज़नेस की देखभाल करेंगे. सब लोग मान जाते है और अपने काम में लग जाते है.

तीनो ऋतू के रूम में आते है और फिर चाय पीते हुए ऋतू से उसके काम के बारे में जानते है.. की वो क्या करती है कंपनी का एकाउंट्स कौन देखता है सामान कहाँ से आते है इत्यादि.

दोनों काम को अच्छे से समझने की कोशिश करते है. ये उन दोनों के लिए पहली बार था तो थोड़ा समझ आता है और थोड़ा नहीं. इन सब के बीच ऋतू दीपू को निहारे जा रही थी. दीपू भी एक बार उसको देखता है लेकिन फिर अनदेखा कर देता है की शायद वो गलत सोच रहा है. फिर २- ३ घंटे वहां रह कर दोनों निकल जाते है.

दोनों फिर मस्ती करते हुए निकल कर एक होटल जा कर चाय पीते हुए आगे और क्या करना है, कैसे काम को बढ़ाना है ..ऐसे बात करते है और फिर दोनों अपने घर निकल जाते है.

रात को ऋतू घर आती है और फिर दोनों ऋतू और दिनेश खाना खाते वक़्त उसके काम के बारे में दिनेश को बताती है. फिर दोनों ऐसे ही और बातें कर के खाना ख़तम कर के दोनों अपने कमरे में सोने चले जाते है. ऋतू को नींद नहीं आती है तो वो दीपू के बारे में सोचती है की वो कितना हैंडसम है अच्छा लम्बा लड़का एकदम नीली आँखें, घुँघरालु बाल और एकदम हट्टा कट्टा बदन… और उसके बारे में सोचते हुए अनजाने में ही उसका हाथ Nighty के अंदर घुसा कर अपनी चूत मसलते रहती है. थोड़ी देर बाद जब उसे अहसास होता है तो वो सोचती है की वो ऐसे क्यों सोच रही है.. लड़का तो उसके लड़के का दोस्त है और उसकी माँ भी उसकी अच्छी दोस्त है. उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए.. लेकिन फिर उसका मन भटकता है और सोचती है की लड़का जवान है जो हर लड़की उसके ऊपर मर मिटेगी.. ऐसे ही दुविधा में रहते हुए उसे नींद आ जाती है. (उसे क्या पता था की आगे जाकर उसकी ज़िन्दगी एकदम बदल जायेगी.)

वहीँ दीपू के घर रात को वसु दीपू को फ़ोन करती है.

वसु: दीपू मैं माँ पिताजी से बात कर ली है. वो तेरी शादी छोटी से करने को राज़ी हो गए है. अब तो तू खुश है ना?

दीपू: हाँ और ना भी.

वसु: मतलब?

दीपू: मतलब ये की जब मैं आपसे भी शादी करूंगा तो तभी बहुत खुश कहूंगा.

वसु: पिताजी उसके लिए भी मान लिए है. अब तो खुश है ना?

दीपू: हाँ और हस देता है.

दीपू: मुझे बताना कब आना है.. मैं आ जाऊँगा.

वसु: ठीक है. ये लो..तुम्हारी होने वाली बीवी तुमसे बात करने के लिए मरी जा रही है और ऐसा कहते हुए वो दिव्या को देख कर आँख मारती है और फ़ोन उसे दे देती है.

दिव्या फ़ोन पे: कहिये..

दीपू: ये कहिये क्या लगा रखा है मौसी?

दिव्या: अब तो मुझे मौसी मत बुलाया करो.

दीपू: नहीं शादी होने तक तो मैं आपको मौसी ही कहूंगा और उसके बाद जो मेरे मन में आये वो कहूंगा.

दिव्या: मतलब?

दीपू: यही की जानू जान.. ऐसे.. या फिर अगर मेरा मूड रहा तो मौसी भी..

दिव्या हस देती है और कहती है जैसा आपका मन करे मेरे शहज़ादे.

दिव्या फिर फ़ोन निशा को देती है तो निशा पहले दीपू को चिढ़ाती है और उसे बधाई देती है और पूछती है की वो तो अब खुश है ना.

दीपू: और नाना नानी कैसे है? उनकी तबियत कैसी है?

निशा: दोनों अभी ठीक है. कल उनकी हालत थोड़ी बिगड़ गयी थी लेकिन आज ठीक है.

दीपू: चलो अब सो जाओ. बहुत रात हो गयी है. अच्छा एक बार मौसी को फ़ोन देना तो निशा दिव्या को फ़ोन देती है.

दिव्या: हाँ क्या हुआ?

दीपू: मस्ती और शरारत से: हुआ कुछ नहीं. बस यही कहना चाहता था की अब आप रोज अपने होने वाले सुहागरात की याद में अपने रात बिताना.

दिव्या शर्मा जाती है ये बात सुनकर और कहती है की तुम बहुत शरारती हो रहे हो.

दीपू: क्यों, मैंने कुछ गलत कहा क्या? शादी के बाद तो सुहागरात होगी ना. क्यों तुम्हे नहीं चाहिए क्या?

दिव्या: शर्माते हुए, नहीं मैंने ऐसा कब कहा? मुझे भी उसका बहुत इंतज़ार है.

दीपू: तो उसे याद करते हुए सो जाओ और कल्पना करते रहो की उस रात हम क्या करेंगे. और वो दिव्या को फ़ोन में किस करता है और और कहता है की उसे भी एक चुम्मा दो तो दिव्या मना करती है. दीपू कहाँ मानने वाला था.. उसे मस्ती सूझती है तो वो दिव्या को फ़ोन को स्पीकर on करने को कहता है. दिव्या को समझ नहीं आता तो वो फ़ोन का स्पीकर on कर देती है.

स्पीकर के on होते ही दीपू उसकी माँ से कहता है..

दीपू: माँ हो क्या?

वसु: हाँ हूँ. .. बोल. ..

दीपू: देखो ना तुम्हारी सौतन मेरी बात नहीं मान रही है. वसु दिव्या की तरफ देख कर इशारे से पूछती है की दीपू क्या कह रहा है तो दिव्या शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे कर लेती है.

वसु: क्यों क्या हुआ?

दीपू: तुम ही पूछ लो उससे तो वसु दिव्या से पूछती है तो दिव्या ना करती है. वसु फिर से दीपू से पूछती है तो दीपू कहता है की मैं यहाँ अकेला हूँ और उसे फ़ोन में एक चुम्मा मांग रहा हूँ तो वो मना कर रही है. वसु ये बात सुनके ज़ोर से हस्ती है और कहती है की तू बहुत शरारत करने लगा है तो दीपू कहता है की ये शरारत सुहागरात में बहुत महंगे पड़ेगा और वो भी हस देता है.

वसु दिव्या से कहती है की तू क्यों उसे परेशान कर रही है? बेचारा अकेला है तो वो जो मांग रहा है उसे देदे. दिव्या शर्माते हुए वसु से फ़ोन लेकर उसको एक अच्छा चुम्मा देती है और कहती है की अब खुश? दीपू को फिर मस्ती सूझती है और कहता है की नहीं.. तो अब इस बार वसु पूछती है की अब क्या हुआ? तो दीपू कहता है की वसु भी उसे ऐसे ही फ़ोन पे चुम्मा दे तो इस बार दिव्या वसु को देख कर फ़ोन उसको देती है तो वसु भी फिर दीपू को फ़ोन पे एक अच्छे से चुम्मा देती है.

दीपू: निशा सो गयी है क्या?

वसु निशा को देखती है तो वो सो जाती है तो दीपू को हाँ में जवाब देती है.

वसु: क्यों?

दीपू फिर वसु से कहता है की फ़ोन दिव्या को दे. दिव्या फ़ोन ले कर क्या कहना है अब?

तो दीपू भी फ़ोन पे एक किस देता है और कहता है की ये किस आपके( दिव्या) के होंठों पे. ये बात सुन कर दिव्या एकदम शर्मा जाती है. दीपू फिर से दो बार और किस करता है और कहता है ये आपकी चूचियों पे. फिर एक और किस करता है और कहता है ये किस ख़ास है. दिव्या पूछती है की क्या ख़ास है तो दीपू कहता है की ये स्पेशल किस आपकी टांगो के बीच ..दिव्या जब ये बात सुनती है तो कहती है ऐसी बात क्यों कर रहे हो … मुझे कुछ हो रहा है.. तो दीपू उनको याद दिलाता है की जब वो लोग कमरे में होंगे तो उनके बीच शर्म नहीं होने चाहिए. मुझे पता है आप लोग शरमाओगे तो ये समझ लो की अभी ये आपके लिए प्रैक्टिस है और फ़ोन पे ही हस देता है.

दिव्या भी शर्मा जाती है और दीपू और कुछ कहने से पहले दिव्या बात को पलट देती है और कहती है की रात बहुत हो गयी है और फिर फ़ोन कट कर देती है. ये सब बातें सुन कर वसु और दिव्या दोनों बहुत उत्तेजित हो जाते है और उनकी चूत भी गीली हो जाती है.

थोड़ी देर बाद दीपू फिर फ़ोन करता है और पूछता है की उसे वहां कब आना है तो वसु कहती है की वो कल उसे फ़ोन कर के बता देगी की कब आना है. और फिर सब अपने यादों में सो जाते है.

दीपू ये सोचते हुए की आगे वो क्या करेगा उनके साथ और ये दोनों की दीपू उनके साथ सुहागरात में क्या करेगा...

अगले सुबह: सब उठ कर अपना काम करते है और वसु सब से कहती है की उसने दीपू से बात कर ली है और वो मान गया है. थोड़ा झूट बोलते हुए कहती है की उसे दीपू को मनाने में बहुत समय लगा लेकिन वो मान गया है.

वसु: अब हमें ज्योतिषी की फ़ोन कर के बुलाना चाहिए और पूछना है की अच्छी तारिक कब है शादी के लिए.

वसु फिर ज्योतिषी की फ़ोन कर के घर में बुलाती है. ज्योतिषी घर आते है तो वसु उनसे उनकी शादी की बात करती है और उनसे पूछती है की किस दिन का महूरत अच्छा है शादी के लिए. ज्योतिषी फिर से दोनों की कुंडली देखते है और कहते है की ४ दिन के बाद का महूरत अच्छा है. वसु फिर से ज्योतिषी के बारे में उसकी और दीपू की बात करती है तो ज्योतिषी फिर से दोनों की कुंडली देख कर कहता है की उन दोनों की शादी एक दिन बात अच्छी होगी.. याने पांचवे दिन.

वसु फिर उनसे निशा के बारे में पूछती है तो ज्योतिषी कहते है की उसकी शादी भी जल्दी ही हो जायेगी.

सब लोग उनकी बात मान लेते है और कुछ खान पान के बाद वो निकल जाते है.

नानी: बेटी तारिक बहुत नज़दीक है हमें तैयारी करने के लिए समय भी तो चाहिए.

वसु: मैं नहीं चाहती की हम किसी बाहर वाले को बुलाये.. सिर्फ अपने घर वाले ही होंगे और कोई नहीं.

नानी: मतलब?

वसु: पिताजी की तबियत भी ठीक नहीं है तो मैं चाहती हूँ की हमारी शादी घर में ही हो. मैं पुजारी से बात कर लूंगी. बस उसके चाचा, चाची, बुआ, रानी का पति और माजी (मीना की माँ) को बुलाएंगे..और किसी को नहीं.

नानी: देखो बेटा जैसा तुम्हे सही लगे.

वसु हाँ में सर हिला देती है और फिर डीपू को फ़ोन कर के २ दिन बाद आने को कहती है... और उससे कहती है की वो किसी को कुछ नहीं बताये ख़ास कर के दिनेश को और चुप चाप वहां आ जाए…
 
वसु हाँ में सर हिला देती है और फिर डीपू को फ़ोन कर के २ दिन बाद आने को कहती है... और उससे कहती है की वो किसी को कुछ नहीं बताये ख़ास कर के दिनेश को और चुप चाप वहां आ जाए…

अब आगे ..

12th Update: शादी

अगले दिन वसु बाकी सब को फ़ोन कर के घर बुलाती है. वो लोग वजह पूछते है तो कहती है की जब वो यहाँ आएंगे तो उन्हें वजह बताएगी.

सबसे पहले दीपू आ जाता है और आने के बाद सबसे पहले वो अपने नाना नानी के पास जाता है.

दीपू अपने नाना के घर आने से पहले दिनेश से कहता है की वो अपने नाना के घर जा रहा है क्यूंकि उनकी तबियत ठीक नहीं है और उसकी माँ ने उसे बुलाया है. दिनेश भी थोड़ा चिंता जताते हुए ठीक है यार जा.. सब ठीक हो जाएगा. कोई फ़िक्र मत कर .. अगर तुझे किसी चीज़ की ज़रुरत पड़ेगी तो फ़ोन कर देना. मैं आ जाऊँगा. ठीक है?

दीपू: ज़रूर यार.. अगर ज़रुरत पड़ी तो तुझे फ़ोन कर दूंगा. चल अब चलता हूँ मैं

दिनेश: और कब तक आएगा?

दीपू: पता नहीं यार वहां की हालत देख कर मैं तुझे फ़ोन करता हूँ और फिर ऐसे ही थोड़ी बात कर के दीपू अपने नाना के घर निकल जाता है.

दीपू अपने नाना नानी को देख कर उनके पाँव छु कर आशीर्वाद लेता है. वो देखता है की उन दोनों की हालत बहुत ख़राब हो चुकी है. दीपू को देख कर उसकी नानी उसे आशीर्वाद देते हुए पूछती है..

नानी: क्या मैं अपने पोते को आशीर्वाद दूँ या अपने होने वाले दामाद को.. और थोड़ा मुस्कुरा देती है.

दीपू: नानी आप भी ना.. मैं हमेशा आपका पोता ही हूँ और रहूंगा. और रही बात दामाद की तो उन दोनों को देख कर कहता है की आप चिंता मत कीजिये. मैं आपकी दोनों बेटियों को बहुत प्यार दूंगा और दोनों को बहुत खुश रखूंगा. नानी ये बात सुन कर उसकी आँखों में १- २ बूँद आंसूं आ जाते है तो दीपू आंसूं पॉच कर अपने नानी को गले लगा लेता है और वैसे ही अपने नाना को भी गले लगा लेता है.

फिर वो बाहर आकर अपनी माँ को देखता है तो वो भी खुश हो जाती है और उसे गाला लगा लेती है.

वसु: आ गया मेरा बेटा.. और उसका माथा चूम लेती है. दीपू उसको गले लगा कर धीरे से उसके कान में: आपका बेटा नहीं बल्कि होने वाला पति और उसको देख कर आँख मार देता है. वसु भी समझ जाती है और थोड़ा शरमाते हुए अपने आँखें झुका लेती है. दीपू को दिव्या दिखाई नहीं देती तो वसु से मजाक में पूछता है की अपनी सौतन नहीं दिख रही है.. कहाँ चली गयी. वसु भी देखती है तो उसे दिखती नहीं तो कहती है यहीं कहीं होगी.

फिर बाद में उसके चाचा रामु, चाची , राखी, बुआ लता और फिर मीना की माँ कविता.. सब वहां आ जाते है.

सब लोग ख़ास कर के महिलायें दीपू को देख कर एकदम खुश हो जाते है और सब उसे अपने गले लगा लेते है क्यूंकि अभी तक उन्हें पता नहीं था की सब लोग एक साथ वहां कैसे आ गए है. .

लता दीपू को गले लगा कर तू तो बहुत बड़ा हो गया है रे और कितना आकर्षक दिख रहा है. जब वो दीपू को अपने गले लगा लेती है तो उसकी बड़ी चूचियां दीपू के सीने में डाब जाती है जिनका अहसास दोनों को होता है. दीपू कुच्च नहीं कहता और चुप हो जाता है.

वैसे ही हाल उसका कविता के साथ भी होता है. दीपू जब कविता को देखता है तो मन में सोचता है माँ जी तो एकदम मस्त माल की तरह दिख रही है. उसकी गांड तो कहर धा रही है.

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कविता उसको देख कर पूछती है की वो क्या सोच रहा है तो दीपू अपने होश में आकर कुछ नहीं कहता. कविता भी उसको गले लगा लेती है और उसकी ठोस चूचियां भी उसके सीने से टकराती है. दीपू भी गले लगते वक़्त धीरे से अपने हाथ पीछे ले जाका उसकी गांड को दबा देता है जिसका अहसास कविता को भी होता है. वो बिना किसी के देखे दीपू को बड़ी कामुकता से देखती है लेकिन कुछ नहीं करती.

दीपू: माँ जी आप तो बहुत जवान दिख रही हो. लगता नहीं की आप मेरी मामी की माँ हो.. आप दोनों तो एकदम बेहन लगती हो. कविता ये बात सुन कर शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

रात को सब लोग खाना खा कर इकट्ठा होते है तो लता पूछती है की क्या बात है की सब को उन्होंने बुलाया है. वसु सब पे नज़र डालती है और कहती है की दिव्या की शादी दीपू से होने वाली है. ये बात सुनकर सब के होश उड़जाते है और सवालिया नज़र से वसु दिव्या और दीपू को देखते है. तो वसु फिर सब को पिछले दिनों हुए बातों के बारे में सब बताती है और कहती है की उनके माँ पिताजी की हालत और बिगड़ने से पहले ही वो उनकी शादी कराना चाहती है. बात वहां तक ठीक था लेकिन जब उनको पता चलता है की वसु भी शादी करेगी तो उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहता लेकिन फिर आखिर में सब मान जाते है क्यूंकि सब पहले से ही तय हो गया था और वैसे भी इन बातों में दीपू के नाना नानी की सहमति भी थी. और ख़ास कर के जब सब लोग उन दोनों की हालत देखते है तो सब मान जाते है और अब बहुत देर भी हो गयी थी और शादी की तैयारी में लग जाते है.

अगले २ दिन तक सब अपने कामों में व्यस्त रहते है लेकिन दिव्या चालाकी से दीपू से बचती रहती है. आखिर में दीपू दिव्या को अकेले में पकड़ ही लेता है और उसको एक कमरे में ले जाकर दीवार से सटा हुए कहता है

दीपू: क्यों मैं आके २ दिन हो गए है और अब तक एक बार भी नहीं मिली तुम. दिव्या शर्मा के अपनी आँखें नीचे करते हुए कहती है की मुझे शर्म आ रही है. दीपू धीरे से उसके कान में कहता है की तुम्हे ये शर्म बहुत महंगी पड़ेगी. दिव्या को ये बात समझ नहीं आती तो अपनी नज़र उठा के दीपू को देखती है तो दीपू हस के कहता है मेरा मतलब है तुम ऐसे ही शरमाओगी तो सुहागरात में तुम्हे बहुत महंगी पड़ेगी.

उस रात को तुम्हे सोने नहीं दूंगा याद रखना. दिव्या भी हस देती है और कहती है की वो भी उस पल का इंतज़ार करेगी. दीपू दिव्या को किस करने जाता है तो दिव्या कहती है १- २ दिन और रुक जाओ ना फिर मैं भी आपको कभी नहीं रोकूंगी.

दीपू को भी ये बात सही लगती है और मन में सोचता है की जब वो इतने दिन रुक गया है तो १- २ दिन और सही और दिव्या को छोड़ देता है. दिव्या वहां से जाने लगती है तो दीपू फिर से उसको पकड़ लेता है और हलकी आवाज़ में कहता है

दीपू: तुम वहां सब साफ़ और चिकनी रखना. दिव्या को समझ नहीं आता तो पूछती है क्या? दीपू हस देता है और अपना हाथ उसके साडी के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर रख कर.. यहाँ..

दिव्या एकदम शर्मा जाती है और उसको चिढ़ाते हुए वहां से भाग जाती है.

पहली शादी: दीपू और दिव्या की

आखिर में वो दिन आ जाता है जब पहले दीपू और दिव्या की शादी होने वाली थी. घर की सब महिलाएं दिव्या को अच्छे से सजाती है. सजाने के बाद दिव्या अपने आप को आईने में देखती है तो वो बहुत सुन्दर दिखती है जैसे कोई अप्सरा ऊपर से उतर के आयी हो. उसको देख कर उसकी नानी और वसु उसकी नज़र उतारते है और कहते है की वो बहुत सुन्दर लग रही है और प्यार से उसका माथा चूम लेते है.

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वहीँ दुसरे कमरे में दीपू भी एकदम तैयार हो जाता है और वो भी दूल्हे के भेष में एकदम हैंडसम और सुन्दर लग रहा था.

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सब महिलाएं दिव्या को सजा कर जब दीपू के कमरे में आकर उसको देखते है तो सब की आँखें खुश से बड़ी हो जाती है क्यूंकि दीपू वैसा लग ही रहा था. लता और कविता दोनों उसको देख कर अपने मन में सोचते है की वो कितना सुन्दर लग रहा है और काश उन्हें को इस उम्र में ऐसा कोई लड़का मिल जाए तो वो भी अच्छे से जी सकेंगे. वो दोनों अलग अलग ऐसी बातें सोचते रहते है और उन्हें पता भी नहीं चलता की उसको देख कर उनकी चूते पानी छोड़ देती है. जब उन्हें इस बात का एहसास होता है तो दोनों हस देते है और फिर चुपके से बिना किसी के दिखे बाथरूम जा कर अपने आप को साफ़ कर के फिर से दीपू के पास आ जाते है.

वहीँ मीना भी कुछ ऐसा ही सोचती है. मन में सोचती है लड़का तो बहुत स्मार्ट और हैंडसम है.. एकदम चिकना और प्यारा... काश इसके मामा भी ऐसा होता. लड़का इतना सुन्दर है लेकिन क्या उसका “सामान” भी ऐसा होगा क्या? फिर जब उसको थोड़ा होश आता है तो सोचती है की वो क्यों ऐसी बातें सोच रही है? लेकिन फिर उसका मन कहता है.. क्या करून.. ये साली जवानी भी ऐसी ही है. इसके मामा मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते और मैं तड़पती रह जाती हूँ.

इतने में पुजारी भी आ जाते है और फिर शादी का कार्यक्रम शुरू होता है और फिर समय पे दीपू दिव्या को देखते हुए उसका हाथ पकड़ता है और फिर उसकी मांग भर देता है और पूरे रस्मों के साथ शादी हो जाती है दोनों की.

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शादी के बाद दोनों सब से आशीर्वाद लेते है. नाना नानी उनको आशीर्वाद देते हुए.. सदा सुखी रहो कर के उनको आशीर्वाद देकर उनको गले लगाते हुए उनका माथा चूम लेते है. ऐसे ही वो सब से आशीर्वाद लेते है और पुजारी भी अपना काम ख़तम कर के निकल जाते है. निकलने से पहले कहते है की वो कल भी इसी वक़्त आ जाएंगे.

शादी के बाद सब बहुत खुश होते है और सब दिव्या की टांग खींचते है की आखिर वो अब सुहागन हो गयी है. कविता उसको अकेले में ले जाकर उसके चेहरे को अपने हाथ में लेकर: तुम तो एकदम गुड़िया दिख रही हो बेटा और उसको प्यार से गाल पे चूम लेती है और कहती है की वो जल्दी से उसे खुश खबर भी दे और उसे (भी एक तरफ से) नानी बना दे.

दिव्या ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

वहीँ बाकी सब भी उसके साथ छेड़खानी करते रहते है. सब फिर खाना खाने के बाद दोपहर को उनके नाना नानी सो जाते है. बाकी सब ये सोचते है की उनकी सुहागरात कब होगी तो कविता कहती है की पहले दीपू और वसु की भी शादी हो जाए. कल इस समय तक दोनों भी बंधन में जुड़ जाएंगे तो फिर सुहागरात के बारे में सोचते है. सब इस बात को मान जाते है और उस दिन दोनों दीपू और दिव्या अलग कमरों में सो जाते है.

दोनों अपनी अपनी सोच में रहते है.. जहाँ दीपू सुहागरात के बारे में सोचता है तो उसका लंड एकदम तन जाता है तो वहीँ दिव्या की भी बुरी हालत होती है ..लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाते और उत्तेजित हो जाती है.

दूसरी शादी: दीपू और वसु की

दुसरे दिन फिर सब वसु को तैयार करते है और वसु भी कल दिव्या की तरह सज कर एकदम सुन्दर लगती है.

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उसको देख कर सब भी बहुत खुश हो जाते है और उसे भी बधाई देते है.

दोपहर को फिर पुजारी आते है और आज के दिन दीपू और वसु की शादी करवाते है. दोनों भी बंधन में बंद जाते है और उनके नाना नानी से आशीर्वाद लेते है.

वसु भी आज एकदम खुश हो जाती है की एक तो पहले उसकी बेहन की शादी हो गयी और वो भी फिर से सुहागन बन गयी है.

इस बार लता उसकी टांग खींचती है और कहती है की वो उसे जल्दी ही दादी बना दे तो वसु हस कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. वहीँ मीना और रानी भी दोनों से कहती है की वो भी जल्दी ही मौसी बनना चाहती है और हस देती है.

आज वसु के माता पिता बहुत खुश थे की आखिर में उनकी बेटी दिव्या की शादी हो गयी है और वो चैन से अपनी बाकी के दिन गुज़ार सकते है. ये बात वसु भी जान लेती है और जब वो दोनों दोपहर को खाना खाने के बाद सोने जाते है तो वसु भी उनके साथ जाती है.

वसु: माँ पिताजी आप खुश तो हो ना?

पिताजी: हाँ बेटी अब मेरी चिंता थोड़ी दूर हो गयी है. भगवान् के पास जाने से पहले मेरी यही इच्छा थी. अब पूरी हो गयी है.

वसु: आप चिंता मत कीजिये. दीपू उसको बहुत खुश रखेगा.

माँ: बेटी तू तो खुश है ना?

वसु: हाँ मैं भी खुश हूँ. सोचा नहीं था की मैं फिर से सुहागन बन जाऊँगी. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है? मुझे पता है दीपू हम सब को बहुत खुश रखेगा. आप चिंता मत कीजिये.

पुजारी भी खाना खा कर जाने लगते है तो लता उनसे पूछती है की उनकी सुहागरात कब करा सकते है.. तो पुजारी कहते है की कल दीपू और दिव्या की और उसके बाद दिन दीपू और वसु की. ये बात सुनकर सब मान जाते है और फिर पुजारी अपने घर निकल जाते है.

फिर घर की बड़ी औरतें लता और कविता कहते है की आज भी दोनों वसु और दिव्या अलग सोयेंगे. और कल दीपू और दिव्या और परसों दीपू और वसु... ऐसा कहते हुए हस देते है क्यूंकि वहां पे सब को इसका मतलब पता था......
 
फिर घर की बड़ी औरतें लता और कविता कहते है की आज भी दोनों वसु और दिव्या अलग सोयेंगे. और कल दीपू और दिव्या और परसों दीपू और वसु... ऐसा कहते हुए हस देते है क्यूंकि वहां पे सब को इसका मतलब पता था......

अब आगे....

13th Update: पहली सुहागरात (Mega Update)

अब दोनों शादियां हो गयी थी लेकिन फिर भी दीपू (और वसु और दिव्या) को अलग सोना पड़ा लेकिन उन्हें पता था की सबर का फल मीठा होता है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई. खैर वो दिन आ ही गया याने… दीपू और दिव्या का सुहागरात. दिन में घर में बहुत हलचल थी.. सब लोग रात की तैयारी कर रहे थे और बीच बीच में घर के लोग दीपू और दिव्या की टांग भी खींच देते थे की क्या करना है कैसे करना है इत्यादि.

रात को खाना खाने के बाद नाना नानी सो जाते है. क्यूंकि उनकी तबियत ठीक नहीं थी और उन्हें जल्दी सोने की आदत भी थी. एक कमरे में मीना और कविता दिव्या को अच्छे से सजा रही थी.

.दिव्या एक सेक्सी सी लाल साडी पहनी हुई थी और उसी रंग का टाइट ब्लाउज जिसमें उसकी आधे से ज़्यादा चूचियों बाहर को निकली हुई थी. मीना उसको ऐसे देख के कहती है की तुम बहुत सेक्सी लग रही हो और आज तो दीपू की हालत ख़राब होने वाली है. दिव्या ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और झूठे गुस्से से मीना को चुप रहने को कहती है. दिव्या अपने आप को आईने में देख कर शर्मा जाती है और मीना को बुला कर धीरे से उसके कान में कहती है की उसकी चोली तो बहुत छोटी है और उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुई है और उसके ब्लाउज में से ही उसके एकदम तने हुए निप्पल्स भी दिख रहे थे.

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मीना: धीरे से दिव्या के कान में.. तो क्या हुआ? वैसे भी जब आप दीपू के साथ रहोगे तो ये (और ऐसा कहते हुए वो दिव्या के दोनों मस्त चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ते हुए) खुलना ही है ना तो ब्रा की क्या ज़रुरत है और उसे आँख मार देती है.वैसे आपने पैंटी पहनी है ना या फिर सिर्फ पेटीकोट?

दिव्या भी ये बात सुन कर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

दोनों फिर मिल कर दिव्या को अच्छे से सजा देते है और उसे कमरे में बिठा देते है.

वहीँ दुसरे कमरे में लता और राखी भी दीपू को सजने में मदत करते है. अपने आप को शेव करके बालों को अच्छे से सजाना और फिर उसे भी कमरे में भेज देते है.

जब दीपू कमरे के पास पहुँचता है तो दरवाजे पर दोनों मिल जाते है तो रानी उसको धीरे से कहती है की भाभी का ख़याल रखना और ज़्यादा दर्द मत देना उसको और प्यार से उसके गाल को खींचते हुए दोनों दीपू को कमरे में भेजते है तो फिर दीपू भी अंदर जा कर दरवाजा बंद कर देता है. जब दीपू कमरे में जाता है तो देखता है की कमरा एकदम अच्छे से सजा हुआ है और बिस्तर के बीच में दिव्या अपनी घूंघट ओढ़े हुए बैठी है.

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दीपू भी अंदर का नज़ारा देख कर एकदम खुश हो जाता है और वो भी दिव्या के बगल में बैठ जाता है. दीपू को देख कर दिव्या उठती है और बगल में रखे दूध का ग्लास लेकर दीपू को कहती है की उसे पी ले. दीपू जब दिव्या को देखता है और देखता है की उसकी आधे से ज़्यादा चूचियां ब्लाउज से बाहर निकली है तो शरारत से कहता है की मुझे तो ये दूध पीना है और उसकी चूचियों की तरफ इशारा करता है. दिव्या भी समझ जाती है और शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती. फिर दोनों ग्लास का दूध पी लेते है और दीपू दिव्या को बगल में बिठा के कहता है

दीपू: तुम खुश तो हो ना?

दिव्या भी दीपू को देखते हुए: मैं बता नहीं सकती मैं कितना खुश हूँ और इसमें दीदी का भी बहुत बड़ा हाथ है. दीपू: सही कहा.. अगर माँ नहीं होती तो ये सब नहीं होता.

दिव्या: हाँ.

दीपू: तो मुझे अपनी मंज़ूरी का इनाम तो दे दो. दिव्या को समझ नहीं आता तो आँखों से दीपू को पूछती है. दीपू अपनी जुबां से अपने होंठ गीले करता है तो दिव्या समझ जाती है लेकिन शर्म के मारे कुछ नहीं करती.

दीपू दिव्या से कहता है: तुम्हे पता हैं ना जब हम घर में थे और मेरे जन्मदिन में मैंने क्या कहा था? दिव्या उस दिन को याद करते हुए हाँ कहती है तो दीपू कहता है जब हम कमरे में होंगे तो एकदम खुल के रहना. कोई गन्दी बातें नहीं लेकिन अपनी झिझक बंद करना. मैं यही चाहता हूँ और जितना तुम खुल कर रहोगी तो तुम्हे और मुझे भी उतना ही मजा आएगा.. दिव्या भी उसको देख कर हाँ में सर हिला देती है तो दीपू कहता है की वह इनाम खुद ले लेगा और दिव्या को पकड़ कर अपने होंठ दिव्या के होंठ पे रख देता है और उसे चूमता है.

ये पहला किस धीरे से शुरू होता है जहाँ दोनों एक दुसरे के होंठों को छूते है लेकिन जल्दी ही ये किस एकदम प्रगढ़ और गीला हो जाती है और दीपू दिव्या के होंठों पे टूट पड़ता है और उसका रास पीने लगता है.

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दिव्या भी पूरा उसका साथ देती है और वो भी दीपू के होंठ पे टूट पड़ती है. इस प्रगढ़ चुम्बन में दोनों की जुबां एक दुसरे से मिलती है एक दुसरे का लार आदान प्रदान करते है. दोनों एक दुसरे को छोड़ने को तैयार नहीं थे और ये किश लगभग ५- ६ मिनट तक चलता है. दोनों फिर जब अलग होते है तो दोनों की आँखों में प्यार और लालसा दीखता है और वहीँ दिव्या के होंठ के लाल लिपस्टिक भी गायब हो जाती है. दीपू अपनी जुबां को अपने होंठ पे फेरते हुए तुम तो बहुत मीठी हो और एकदम गीली भी. दिव्या भी इस बात पे शर्मा जाती है.

दीपू मस्ती में कहता है की कमरे में बहुत गर्मी है (जब की कमरे में AC चल रहा था). दिव्या दीपू की तरफ देखती है तो दीपू दिव्या को अपने गले से लगा कर कहता है तुम्हे गर्मी नहीं लग रही है क्या? दिव्या ना में कहती है तो दीपू उसे आँख मार के कहता है की उसे तो लग रही है और इसीलिए अपने कपडे उतार देने चाहिए. दिव्या को जब ये बात समझ आती तो एकदम शर्मा जाती है और कहती है की उसे अब समझ में आया.

तो फिर दीपू पहले उसे गहने उतार देता है और जो गहने वो उसके बदन से अलग करता है तो वहां उसको चूमता है. गाला, नाक, माथा, गाल.. सब जगह से गहने निकालते वक़्त वहां वाहन किस करता है. दिव्या भी अब इस रंग में रंगने लगती है और वो भी उत्तेजित होने लगती है और उसका नतीजा ये होता है की उसकी चूत रस बहाना शुरू कर देती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

दीपू उसके पूरा गहने को निकल कर जब वह ब्लाउज देखता है तो उसके मुँह में पानी आ जाता है क्यूंकि उसकी चूचियां उसे उकसा रही थी. उसको देख कर दीपू उसे धीरे से दबाते हुए कहता है की इसमें तो बहुत रस भरा है. आज पूरा रस पी जाऊँगा.

दिव्या: हाँ मेरे पति देव अब ये सब तुम्हारा ही है और जितना रस पीना है पी लेना. मैं तुम्हे मना नहीं करूंगी. लेकिन ये सब करने से पहले में एक बात पूछना चाहती हूँ. बोलो वो काम पूरा करोगे क्या?

दीपू: क्यों नहीं जान.. पूछ के तो देखो. अगर मेरे बस में हुआ तो ज़रूर पूरा करूंगा.

दिव्या थोड़ा शर्माते हुए दीपू को गले लगा कर उसके कान में कहती है: मुझे ना.. मुझे ना.. और रुक जाती है. दीपू: बोलो तो सही..

द्विया: मुझे एक छोटा दीपू चाहिए तुमसे..बोलो दोगे क्या?

दीपू ये बात सुन कर हस देता है और कहता है: तुम्हे छोटा दीपू चाहिए तो मुझे छोटी दिव्या चाहिए.

दिव्या ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है तो दीपू उसके मजे लेते हुए कहता है की वो तो सोच रहा था की एक क्रिकेट टीम ही बना देते है.. ६ दीपू और ६ दिव्या और उसको आँख मार देता है. दिव्या ये बात सुनकर आप तो एकदम गंदे बात कर रहे हो.

दीपू: इसमें गन्दा क्या है? तुम्हे एक दीपू चाहिए तो मुझे बहुत सारे चाहिए.

फिर दीपू उसको देखते हुए उसकी चूची ज़ोर से दबा देता है तो दिव्या के मुँह से आह...आह... आवाज़ निकलती है और कहती है की थोड़ा धीरे दबाओ ना.. कहीं भाग नहीं जा रहे है.

दीपू: इसको देख कर रहा नहीं जाता और फिर से दबाते हुए उसका ब्लाउज भी नकाल देता है और दिव्या ऊपर से पूरी नंगी हो जाती है.

दीपू: उसकी चूची को पीते हुए इसमें तो बहुत रस है. पीने में मजा आ रहा है. दिव्या फिर अपना हाथ दीपू के सर पे रख कर उसको अपनी चूचियों पे दबा देती है और कहती है की पूरा पी जाओ. दीपू भी पहले एक चूची और फिर दुसरे चूची को दबा कर दोनों निप्पल्स को काटते हुए मजा लेता है और साथ में दिव्या को भी मजा देता है.

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दीपू: उसकी चूची को मुँह में लेते वक़्त तुम्हारे निप्पल्स तो एकदम तने हुए ठोस हो चुके है.

दिव्या: क्यों नहीं होंगे. तुम तो इन्हे चूस चूस कर काट काट कर मुझे भी तो जन्नत की सैर करा रहे हो.. तो एकदम तन जाएंगे ना और दिव्या ऐसा कहते हुए हस देती है.

दीपू: उसकी चूची को चूसते हुए: वैसे इसमें से दूध पीने में बड़ा मजा आएगा. इसमें दूध कब आने वाला है? (दीपू को ये बात पता था फिर भी शरारत से दिव्या को पूछता है).

दिव्या दीपू को देखते हुए तुम्हे पता नहीं है क्या?

दीपू: बताओ ना..

दिव्या: इसमें दूध तब आएगा जब छोटा दीपू आएगा.

दीपू: फिर तुम मुझे अपना दूध पिलाओगी ना?

दिव्या: नहीं मैं तो अपने छोटे दीपू को ही दूध पिलाऊंगी. तुम्हे क्यों?

दीपू जान बूझ कर बुरा मुँह बनाता है तो दिव्या हस देती है और कहती है जब छोटे दीपू को पिलाऊंगी तो बड़ा दीपू कैसे पीछे रह सकता है? तुम भी जी भर के पी लेना मेरा दूध और उसके मुँह को अपने चूची से हटाते हुए झुक कर उसके होंठों को चूमते हुए…ठीक है ना?

दीपू: अब ठीक है.

दिव्या: फिर से उसका सर पकड़ कर अपने चूची पे रख देती है और दीपू फिर से उसकी चूचियों को चूसने लग जाता है.

इसी बीच दिव्या भी उत्तेजित होते हुए उसे पता भी नहीं चलता और झड़ जाती है और अपना पूरा पानी निकाल देती है जिससे उसकी पैंटी पूरी गीली हो जाती है और उसके चेहरे पे एकदम शान्ति चा जाती है.

दीपू दिव्या को देख कर.. कितना रस है इनमें.. दिव्या शर्मा जाती है और उसके कान में कहती है.. एक और जगह भी बहुत रस है.

दीपू समझ जाता है लेकिन दिव्या को थोड़ा खुल कर बोलने का इशारा करता है तो दिव्या भी अपनी शर्म छोड़ कर उसके कान में कहती है.. मेरी चूत में भी बहुत रस है. ये बात सुनकर दीपू कहता है: ये सही हुआ ना.. ऐसे ही खुल कर बात करोगी तो तुम्हे भी बहुत मजा आएगा. दिव्या भी उत्तेजित होकर हाँ में सर हिला देती है.

दीपू उसकी चूचियों को पीते हुए अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी साडी और पेटीकोट भी निकल देता है और इसमें दिव्या भी अपनी गांड उठा के उसकी मदत करती है साडी और पेटीकोट निकालने में. दिव्या अब सिर्फ एक छोटे पैंटी में रह जाती है जो सिर्फ उसके चूत के होंठों को ढाका हुआ था और बाकी पूरी चूत उसकी छोटी पैंटी में दिख रही थी जो की पूरा गीला हो गया था. दीपू फिर उसकी चूचियों को छोड़ कर नीचे की तरफ सरकता है और उसकी गहरी नाभि को भी चूमता और चाटता है. दिव्या आंहे भर्ती हुई दीपू का सर अपनी नाभि पे घुसा देती है और दीपू भी बड़े मजे से उसकी नाभि पर टूट पड़ता है. दिव्या की तो जैसे जन्नत की सैर हो रही थी.

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दीपू फिर नीचे जाते हुए उसकी गुदाज़ जाँघों को चूमते हुए पैंटी को देखता है जो पूरी गीली दिखती है. दीपू से भी रहा नहीं जाता और वो गीली पैंटी के ऊपर ही उसकी चूत को चूम लेता है. दिव्या आह... आह... करते हुए अपने हाथ से चादर को थाम लेती है. दीपू फिर उसकी पैंटी भी निकल देता है तो देखता है की उसकी चूत एकदम रस से भरी हुई एकदम चिकनी दिखती है. इस पोजीशन में दीपू दिव्या को देखता है तो पता है की उसकी जाँघे फैली हुई है और उसकी उठी हुई चूचियां गहरी नाभि और साफ़ चिकनी चूत एकदम साफ़ दिख रही है

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दीपू: दिव्या को देखते हुए तुम्हारी चूत तो एकदम मस्त है.. एकदम खाने लायक.

दिव्या: तो खा जाओ ना.. मना कौन कर रहा है.. और फिर दीपू उसकी चूत को चूसने लग जाता है.. ऊपर से नीचे तक अच्छे से चाटता है और इसी बीच वो अपनी २ उंगलियां उसकी चूत में दाल देता है. उसकी उंगलियां बड़ी मुश्किल से उसकी चूत में जाती है क्यूंकि दिव्या को कुंवारी थी.

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५ minute तक दीपू अच्छे से उसकी चूत को चाटता है और इसी बीच दिव्या भी उत्तेजित होते हुए झाड़ जाती है और अपना पूरा पानी निकाल देती है जिसे दीपू बड़े चाव से पी जाता है.

दीपू फिर उसके ऊपर आकर उसको एक गहरा चुम्बन देता है जिसे दिव्या भी पूरे जोश के साथ उसका साथ देती है. दोनों की जीभ एक दुसरे से टकराती है और फिर दीपू कहता है: कैसा लगा तुम्हे?

दिव्या: मतलब?

दीपू: मैं पूछ रहा था कैसा लगा तुम्हे तुम्हारा रस?

दिव्या ये जान के एकदम शर्मा जाती है और कहती है की अच्छा था और थोड़ा खट्टा भी.

दीपू: सही कहा.. और अब से इसकी आदत डाल लो. तुम्हे और भी रस चकने को मिलेगा.

दिव्या: मतलब?

दीपू: हस देता है (क्यूंकि उसके मन में पता था की आगे क्या होने वाला है) और कहता है.. अगर तुम्हे छोटा दीपू चाहिए तो पहले अपने इस नन्हे दीपू को प्यार करो और ऐसा कहते हुए दीपू भी अपने कपडे निकल देता है और वो भी नंगा हो जाता है.

दिव्या दीपू के बड़े लंड को देख कर एकदम चक्र जाती है जो अभी तक पूरा तना नहीं हुआ था लेकिन खड़ा ज़रूर था क्यूंकि अब तक दीपू उसके मजे ले रहा था.

दिव्या: मैंने अब तक कभी नहीं किया है ये.

दीपू: उसके कान में. ..मैंने भी अब तक चूत चूसा नहीं था.. लेकिन मैंने तुम्हारी चूत चूसी है ना और तुम्हे भी बहुत मजह आया. तो इसलिए अब अपने इस छोटे महाराज को भी चूस कर खड़ा कर दो..

दिव्या: उसको देख कर ठीक है कहती और उसका लंड अपने मुँह में लेने की कोशिश करती है. लंड थोड़ा बड़ा था तो ठीक से ले नहीं पाती तो दीपू उसके सर को पकड़ कर एक झटका देता है तो उसका आधा लंड दिव्या के मुँह में चला जाता है. ऐसा करने से दिव्या अपनी आँखें बड़ी करती हुए उसे देखती है तो दीपू हस कर फिर से एक और झटका मारता है तो उसका पूरा लंड दिव्या के मुँह में चला जाता है. और दीपू खुद ही १- २ बार अपने लंड को उसके मुँह से आगे पीछे करता है और रुक जाता है.

दिव्या को फिर समझ आता है और वो भी उसे तरह उसके लंड को पूरा मुँह में लेने की कोशिश करती है और आखिर में उसका पूरा लंड मुँह में लेकर अच्छे से चूसना शुरू कर देती है. दीपू उसको देखते हुए.. ये सही है और अच्छे से चूसो. अब दिव्या को भी मजा आने लगा था और वो भी बड़ी शिद्दत से दीपू का लंड चूसने लग जाती है. वो उसके लंड को कुछ अपने थूक से और कुछ अपनी जुबां से पूरा गीला कर देती है और अब उसका लंड पूरा तन जाता है और काफी लम्बा भी हो जाता है.

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दिव्या अपने मुँह उसके लंड से निकल कर उसको देखती है तो उसे थोड़ा डर लगता है की ये इतना बड़ा हो गया है. वो दीपू की तरफ देख कर ये तो पूरा बड़ा हो गया है और मेरी चूत को फाड़ देगा. वो दीपू के लंड को चूसते हुए अपने एक हाथ से अपनी चूत को भी मसलते रहती है.

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दीपू: वैसे तुम बड़े अच्छे से लंड चूस रही थी. एकदम मजा आ गया. मैं तो जैसे जन्नत में ही पहुँच गया था.

अब दिव्या भी उत्सुक हो जाती है और कहती है.. अब मुझसे रहा नहीं जाता. कुछ करो ना. दीपू को भी लगता है की अब समय आ गया है तो वो दिव्या को बिस्तर पे सुला देता है और उसके पैरों के बीच आ जाता है.

दिव्या: अब और देर ना करो. अब डाल दो और मुझे औरत बना दो. दीपू भी हस्ते हुए.. क्या डालूँ और कहाँ डालूँ. दिव्या भी समझ जाती है और कहती है की अपना लम्बा लंड मेरी चूत में डाल दो और मुझे औरत बना दो. अच्छा सुनो..

दीपू: हाँ.

दिव्या: सुनो पूरा एक बार में ही डाल देना.

दीपू: लेकिन तुम्हे दर्द होगा. दिव्या: जानती हूँ. ये दर्द तो एक दिन होना ही था तो पूरा एक साथ डाल कर एक बार ही दर्द होगा.

दीपू: सही कहा.. पहले थोड़ा दर्द होगा लेकिन बाद में पूरा मजा भी आएगा.

दीपू भी तैयार हो जाता है और अपने लंड को उसकी चूत पे रगड़ते है और फिर उसको देखते हुए लंड को चूत पे रखते हुए पूरे ज़ोर से झटका मारता है और उसका ८ इंच का मोटा लंड एक बार में पूरा अंदर चले जाता है.

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दिव्या ये झटका सेहन नहीं कर पाती और पूरे ज़ोर से आह... आह... मर गयी रे मैं तो… कहते हुए चिल्लाती है. उसकी ज़ोर की आवाज़ पूरे घर में सुनाई देती है.

दिव्या की ज़ोर के आवाज़ सुन कर सब के मन की बात:

वसु: ये तो गयी आज..

कविता: इतनी बड़ी आवाज़.. बाप रे..इतनी आवाज़ तो मैंने भी अपनी सुहागरात में भी नहीं निकाली थी.

मीना: लगता है दीदी तो गयी. दीपू का इतना बड़ा है क्या? अगर है तो काश इसके मामा का भी इतना बड़ा होता.

लता: दीपू का इतना बड़ा है क्या? अगर है तो ऐसे लंड से चुदने में मज़ा आएगा.

राखी: इतना तो मैं भी कभी नहीं चीखी.

निशा: इतना दर्द होता है क्या? पता नहीं मेरा कैसा होगा दिनेश के साथ..

रानी: काश.. मेरा पती भी ऐसा कुछ करता मेरे साथ तो मैं फिर माँ बन जाती

इस झटके से दिव्या की आँखों में आंसूं आ जाते है. दीपू को भी उसका अहसास था तो झुक कर उसके आंसूं पोछते हुए प्यार से उसके होंठों को चूमते हुए कहता है.. अब हो गया है. जो दर्द होना था वो हो गया है. बस थोड़ी देर सबर कर लो.

दिव्या भी अपने रुआंसी चेहरे से हाँ में सर हिला देती है और कहती है की वो कुछ ना करे और ऐसे ही रहे. दीपू को भी सही लगता है और उसके होंठों को चूमते हुए ऐसे ही अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसाए रहता है.

५ मिनट बाद दिव्या को थोड़ी राहत मिलती है तो दीपू को देख कर हलके से इशारा करती है तो दीपू भी समझ जाता है और फिर अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगता है. दिव्या को थोड़ी जलन हो रही थी लेकिन कुछ देर बाद वो नार्मल हो जाती है और दीपू को फिर से इशारा करती है तो फिर दीपू भी जान लेता है और फिर मस्त तरीके से अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए मस्त चुदाई करने लग जाता है.

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अब दिव्या को भी मजा आने लगता है और वो भी पूरा साथ देती है दीपू का. ५ minute तक दीपू ऐसे ही मस्त चोदता रहता है. दिव्या भी मस्त हो जाती है और उसे पता भी नहीं चलता और वो भी मस्ती में फिर से एक और बाद झड़ जाती है. जब उसके चेहरे पे शान्ति आ जाती है तो दीपू से कहती है की अब तक उसका हुआ नहीं है क्या?

दीपू: अरे जान ये तो शुरुवात है. फिर दीपू उसको उठाता है और वह खुद बिस्तर पे लेट जाता है और दिव्या को अपने ऊपर ले लेता है. दिव्या अब उसके लंड को अपनी चूत में लेकर उछलते रहती है और दीपू अपने हाथ से उसकी चूची दबाते रहता है.

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उसे भी इस पोजीशन में बहुत मजा आता है और अगले १० मं तक ऐसे ही चुदती है और फिर से एक और बार झड़ जाती है. वो दीपू को देखते हुए.. सुनो ना.. मुझे अब फिर से दर्द हो रहा है ऐसे. तो दीपू उसे ऊपर से उठा के कहता है की घोड़ी बन जाओ.

दिव्या को समझ नहीं आता तो उससे पूछती है तो दीपू उसे समझाता है और वो घोड़ी बन जाती है और दीपू फिर से अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल कर पेलने लगता है. इस पोजीशन में उसको दिव्या की गांड बहुत अच्छी लगती है तो उसे छोड़ते हुए झुक कर उसकी चूची को दबाते हुए उसके कान में कहता है.. जानू तुम्हारी गांड तो क़यामत लग रही है. कब डौगी?

दिव्या: जानू तुमने तो मुझे कुछ देर पहले आगे की मेरी सील तोड़ी है और वो मैं सेहन नहीं कर पायी. गांड में डालोगे तो कल मैं ठीक से चल नहीं पाऊँगी और वैसे भी इस घर में ठीक नहीं है. जब हम अपने घर जाएंगे तो मैं इसके बारे में सोचूंगी.

दीपू को भी बात सही लगती है और फिर से दिव्या को पेलने लगता है और १० मं की दमदार चुदाई के बाद कहता है की उसका भी होने वाला है तो दिव्या कहती है की वो उसकी चूत में ही झड़ जाए. कल में दवाई ले लूंगी. उसकी चिंता मत करो. आज की रात मुझे पूरा एहसास लेना है. दीपू भी हाँ कर देता है और फिर २- ३ तेज़ झटके मारते हुए दिव्या की चूत में ही झड़ जाता है काफी पानी (वीर्य) उसकी चूत में डालता है. कुछ वीर्य उसकी चूत से भी बाहर आ जाता है.

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दिव्या इतना दीपू का रस देख कर.. बाप रे.. इतना गाढ़ा और ज़्यादा रस. अगर कल मैं दवाई नहीं ली तो फिर जल्दी ही छोटा दीपू आ जाएगा. इस बात पे दीपू भी हस देता है और कहता है की कल दवाई ले ले.

दोनों की चुदाई ऑलमोस्ट एक घंटे तक चलती है और दीपू भी एकदम थक जाता है और वो पलट कर बिस्तर पे आ जाता है और दिव्या को अपनी बाहों में ले लेता है.

दीपू: मजा आया क्या?

दिव्या: बता नहीं सकती कितना मजा आया. पता नहीं में कितनी बार झड़ी हूँ. वैसे एक बात पूछूं?

दीपू: हाँ पूछो. दिव्या: तुमने मुझे इतने पोजीशन में चोदा है. इन पोसिशन्स के बारे में तुम्हे कैसे पता है?

दीपू दिव्या की तरफ देख कर उसको आँख मारते हुए ब्लू फिल्म्स का देखने का नतीजा है.

दिव्या उसकी बात सुनकर अपना मुँह खोले उसे देखती है और प्यार से उसकी छाती पे हल्का सा मुक्का मारती है और कहती है तुम तो बड़े चालु निकले और हस देती है. फिर दोनों ऐसे ही बातें करते है और फिर दीपू दिव्या से कहता है की बाथरूम में जाकर साफ़ करके आते है. दिव्या भी हाँ कहती है और उठ कर चलने की कोशिश करती है तो गिर जाती है. दीपू उसको देख कर हस देता है और फिर दिव्या को अपनी गोद में उठा कर दोनों बाथरूम चले जाते है.

बाथरूम में दोनों एक दुसरे को अच्छे से साफ़ करते है जहाँ दीपू दिव्या की चूची को अच्छे से धोता है और फिर से २ minute तक उसकी चूची चूसता है. दिव्या भी आंहें भरने लगती है लेकिन कहती है की वो आज बहुत थकी हुई है तो दीपू भी मान जाता है उसकी चूत को भी अच्छे से साफ़ करते हुए मस्ती में २ उंगलियां उसकी चूत में डाल कर २ minute तक पेलता है और इन्ही २ मं में दिव्या की चूत फिर से गीली हो जाती है.

लेकिन दीपू को फिर याद आता है और अपनी उंगलियां निकल कर दिव्या के सामने ही अपनी उंगलियां चाट लेता है.

दिव्या ये देख कर एकदम शर्मा जाती है और ऐसे ही दिव्या भी दीपू का लंड अच्छे से साफ़ करती है और दीपू का लंड भी तन जाता है लेकिन कुछ नहीं करता. दोनों फिर कमरे में आकर एक दुसरे की बाहों में समाते है.

दीपू मस्ती में कहता है एक और राउंड हो जाए?

दिव्या: ना बाबा… मैं तुम्हारे इस डंडे को झेल नहीं पाऊँगी. दीपू हस देता है और कहता है आज तो ठीक है लेकिन जब हम घर जाएंगे तो मैं कुछ नहीं सुनने वाला हूँ और फिर तुम्हे भी इसकी आदत डाल लेनी पड़ेगी. दोनों एक दुसरे की बाहों में रहते है और ना जाने कब दोनों को नींद आ जाती है और दोनों चैन की नींद में खो जाते है....

Note: Hope to get more and max comments & Likes on this mega post. Had to think a lot for this update. Thanks.
 
ckkhandu, kabhi kabhi story update pe comment bhi kar diya karo bhai... :)

ckkhandu
 
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