Incest यह क्या हुआ - Page 22 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

वापस आते समय जब वे लक्ष्मण पुर पहुंचे,,

ज्योति _राजेश, देखो वो सामने मेडिकल है, वहा से कोइ अच्छी सी मलहम लेलो, ताकि उसे लगाने से छिली हुई त्वचा जल्दी ठीक हो सके।

राजेश _ठीक है दीदी,,

राजेश ने मेडिकल दुकान के सामने गाड़ी रोक दिया।

राजेश ने मेडिकल से एक क्रीम ले लिया जिसे लगाने से कटी हुई त्वचा जल्दी ठीक हो सके।

मेडिकल से दवाई लेने के बाद वे घर के लिए निकल पड़े जब वे भानगढ़ पहुंचे तो लोग उन्हें घूर रहे थे उनके मन में कई तरह के प्रश्न उठ रहे थे ये कार तो ठाकुर के बेटी की है फिर इसे कौन चला रहा है और बाजू में बैठी महिला कौन है! जब वे अपने गांव पहुंचे तो गांव वाले भीअपने मन में सवालिया निशान लगाए उन्हे देखने लगे।

राजेश _दीदी आप घर के अंदर चलो, मैं कार दिव्या जी को वापस करके आता हूं।

ज्योति _ठीक है राजेश।

राजेश कार लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चला गया।

वहा कार की चाबी देने दिव्या के रूम में गया।

दिव्या _अरे आ गए छोड़ कर दीदी को।

राजेश _जी दिव्या जी, धन्यवाद दिव्या जी,

दिव्या _अरे इसमें धन्यवाद की क्या बात? यह तो मेरा फर्ज था।

उसने चपरासी को बुलाया और दो कॉफी मंगवाया।

दिव्या _राजेश तुम्हारे निशा का क्या हाल चाल है, कोइ फोन वगैरा आया था।

राजेश _नही दिव्या जी, मुझे नही लगता कि वो मुझे भुल गई।

दिव्या _पर मुझे लगता है कि वो एक दिन जरूर वापस आयेगी।

चपरासी ने कॉफी लाया, दोनो काफी पीने लगे।

कॉफी पीने के बाद,,

राजेश _अच्छा दिव्या जी अब मैं चलता हूं।

दिव्या _ठीक है राजेश, अब मेरा भी घर जाने का समय हो गया है।

राजेश अपना बाइक लेकर घर आ गया जब वह घर पहुंचा।

पदमा खेत से घर आ चुकी थी।

पदमा _आ गया राजेश बेटा।

राजेश _हां ताई, आप कब आई खेत से, और भुवन भैया कहा है?

पदमा _मैं भी अभी आई बेटा, खेत में कुछ काम ज्यादा है तो भुवन थोडा लेट से आएगा।

वैसे क्या कहा डाक्टर ने ।

राजेश _डाक्टर ने कहा की सब ठीक हैकुछ दवाई दी है उसे रोज लेने को कहा है, दीदी ने तो बताया ही होगा।

पदमा _हां।

राजेश _वैसे दीदी कहा है?

वो वो कीचन में बहू के साथ है।

पदमा _अच्छा बेटा जाओ तुम भी फ्रेस होकर थोड़ा आराम कर लो।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश अपने कमरे में जाकर कपड़ा चेंज किया फिर पीछे बाड़ा में बने बाथरुम में जाकर फ्रेस हो गया। अपने में जाकर आराम करने लगा।

पदमा _अरे बहू जाओ, राजेश को चाय दे दो,,

पुनम _ठीक है मां जी।

ज्योति _पुनम, दो राजेश को मैं चाय दे आती हूं। तुमने मुझ से वादा किया है न की तुम राजेश से अब दूर रहोगी।

राजेश के कमरे में जाने की बात हो तो तुम नही मैं जाऊंगी? क्यों की मुझे तुम पर कोइ भरोसा नहीं, वहा फिर से तुम शुरू हो गई तो,,

पुनम _ठीक है दीदी।

ज्योति राजेश के कमरे में चाय लेकर गई,,,

राजेश _अरे, दीदी तुम,,,

ज्योति _क्यू मैं नही आ सकती?

राजेश _नही, ऐसी बात नही चाय हमेशा भौजी ही लेकर आती थी ना इसलिए,,,

ज्योति _हूं, मैने उसे मना कर दिया है, तुम्हारे कमरे में आने के लिए, पता नही तुम लोग घर की मान मर्यादा छोड़कर फिर कब शुरू हो जाओ।

इसलिए अब चाय या और कोइ चीज तुम्हे देनी हो तो तुम्हे मै दूंगी।

लो चाय पी लो।

राजेश बेड से उठ बैठा और चाय की प्याली लेते हुए कहा, धन्यवाद दीदी।

राजेश _वैसे दीदी आज आपको कैसा लगा?

ज्योति _क्या?

राजेश _वही, कार में घूमना, फिर ढाबे में खाना।

दीदी _बहुत अच्छा, और तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया, मेरा इच्छा पूरा करने के लिए।

राजेश _दीदी, ये तो कुछ भी नही और कोई ईच्छा हो तो मुझे बता देना, मैं आपकी सारे इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करूंगा।

ज्योति _,, ठीक है।

अच्छा ये बताओ, तुमने मलहम लगाया की नही। अभी भी जलन हो रही है क्या?

राजेश _दीदी, जलन तो हो रही है, ठीक होने में समय तो लगेगा ही।

दिव्या _दवाई लगाई की नही।

राजेश _नही दीदी।

आप लगा दो न,,

ज्योति _चल हट बेशरम मैं क्यूं लगाऊं। मैं पुनम और तेरी तरह बेशरम नही।

राजेश _वो तो मैं इसलिए कह रहा था की आपने जब चोट पर अपना थूक मला था न तो आधा दर्द ऐसे ही दूर हो गया था। जब अपने हाथो से मलहम लगाओ गी तो देखना दो दिनों में ही ठीक हो जायेगा।

ज्योति _पर मुझे बड़ी शर्म आयेगी, और किसी ने देख लिया तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _अच्छा तो रात में लगा देना जब सब सो जाए।

ज्योति _ठीक है, सोचूंगी।

ज्योति वहा से चली गई।

कुछ देर बाद भुवन घर आया। राजेश और भुवन दोनो, टहलने के लिए चले गए।

वहा से आने के बाद भुवन रात का भोजन कर खेत चला गया। राजेश अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।

घर के सभी लोग भोजन करने के बाद अपने कमरे में आराम करने लगे।

आज राजेश के कमरे में दूध का गिलास लेकर पुनम की जगह ज्योति आई।

ज्योति _क्या कर रहे हो, लो दूध पी लो,,

राजेश _शुक्रिया दीदी।

जब ज्योति जाने को हुई।

राजेश _दीदी, आप दवाई लगाने वाली थी।

ज्योति _मुझसे नही हो पाएगा, तुम खुद ही लगा लो,, पुनम अभी कीचन में ही है वो यहां आ गई तो, वो क्या सोचेगी?

न बाबा, मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है, दीदी रहने दो।

ज्योति वहा से चली गई।

कीचन का काम निपटा कर पुनम और ज्योति दोनो अपने कमरे में सोने चले गए।

कुछ देर बाद ज्योति ने क्या सोंचा पता नही, वह आरती की ओर देखी जो गहरी नींद में सो रही थी उसकी बेटी भी उसके साथ सो रही थी। वह धीरे से उठी और अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे की ओर चली गई।

उसने कमरे में जाकर देखा राजेश अभी भी पढ़ाई कर रहा था।

वह कमरे में प्रवेश किया।

राजेश _अरे दीदी तुम।

ज्योति _हां, वैसे आना तो नही चाहती थी, पर सोचा पता नही तुमने दवाई लगाया भी की नही, कहीं जख्म और न बड़ जाए।

राजेश _दवाई तो अब तक नही लगाई दी।

ज्योति _अच्छा ये लोवर और अंडरवियर निकाल लूंगी लपेट लो, मैं दवाई लगा देती हूं। जल्दी करो कहीं कोइ उठ न जाए।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश ने अपना लोवर और चड्डी निकाल दिया और एक लूंगी लपेट लिया।

और बेड पर लेट गया।

ज्योति _, दो मलहम लगा देती हूं।

राजेश ने मलहम ज्योति को दे दिया।

ज्योति ने मलहम अपने उंगली पर ले लिया।

ज्योति _लूंगी हटाओ।

राजेश ने अपना लूंगी हटा दिया।

लंद ज्योति के आंखों के सामने आ गया।

वह संकोच करती हुई एक हाथ से लंद को पकड़ी और कटी हुई जगह को देखने लगी।

कटी जगह पर उंगली से मलहम लगा कर मालिश करने लगी।

ज्योति के मुलायम हाथो का स्पर्श पाकर लंद में तनाव आने लगा।

ज्योति की दिल की धड़कन बढ़ने लगी।

देखते ही देखते लंद एकदम तन कर खड़ा हो गया।

ज्योति शर्म से पानी पानी हो गई।

वह उठ कर जाने लगी।

राजेश _क्या huwa दीदी, थोड़ी देर और मालिश कर दो।

ज्योति को वहा और रुकने की हिम्मत नही हुई। वह अपने कमरे में चली गई। उसकी दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी।

वह अपने बेड पर सोने की कोशिश करने लगी। पर उसकी आंखो के सामने राजेश का मोटा और लम्बा लंद ही नजर आ रहा था।

उसे अपने योनि में गीला पन महसूस huwa वह अपने उंगली ले जाकर boor पर फेरा तो पता चला उसकी boor बुरी तरह गीली हो गई है।

वह रुकी नही और राजेश की लंद को इमेज करके अपनी उंगली से boor को रगड़ती रही और कुछ ही देर में झड़ने लगी।

उसे आत्मग्लानि महसूस होने लगी।

छी ये मैंने क्या किया? अपने ही छोटे भाई का लंद याद कर boor रगड़कर झड़ गई। पर झड़ने के बाद उसे बहुत अच्छा महसूस होने लगी।

कुछ देर बाद वह भी गहरी नींद में सो गई।

अगले दिन राजेश सुबह नाश्ता करने के बाद। स्कूल के समिति वालो के साथ शाला विकास के लिए फंड इकट्ठा करने, गांव में भ्रमण करने लगा।

वह जिसके घर भी जाता, राजेश का सम्मान करते, उसकी बातो को ध्यान से सुनते और अपनी क्षमता अनुसार शाला को दान करते।

इधर जब ज्योति का नहाने का समय huwa, वह पुनम को अपने पास बुलाकर बोली,,

पुनम _क्या बात है दी कुछ काम था क्या?

ज्योति _कैसे कहूं, मुझे तो शर्म आ रही है?

पुनम _अरे दीदी मुझसे क्या शर्माना बोलो क्या बात है?

ज्योति _कल हम चेक अप के लिए डाक्टर के पास गए थे न, तो डाक्टर ने जब मेरे वहा पर बाल देखी तो उसे साफ़ करने बोली है, नही तो इन्फेशन का हो सकता है।

क्या तुम्हारे पास रेजर है? ज्योति शर्माते हुए बोली।

पुनम _दीदी इसमें शर्माने की क्या बात है। पर आपने कभी रेजर का उपयोग किया है?

ज्योति _नही।

पुनम _दीदी , पहली बार रेजर का उपयोग करो तो कटने का डर रहता है। कहीं कट गया तो परेशानी में पड़ जावोगी।

ज्योति _ओह तो क्या करू?

पुनम _अगर तुम कहो तो तुम्हारी बालो को मैं साफ़ कर दूंगी।

ज्योति _पर मुझे बहुत शर्म आयेगी।

पुनम _ओह दीदी, तुम भी न, देखो अभी तुम नहा लो। दोपहर में जब मां खेत चली जाएगी। आरती भी अपनी सहेली के घर चली जाती हैं, उस समय मैं तुम्हारे बालो को साफ़ कर दूंगी।

ज्योति _मुझे तो सोच के भी बड़ी शर्म आ रही है।

पुनम _दीदी शर्माना छोड़ो और मैने जैसा कहा है वैसा करो, पुनम मुस्कुराते हुवे बोली।

ज्योति नहाने चली गई। दोपहर में राजेश घर आया और भोजन किया सभी ने भोजन किया, पदमा खेत चली गई।

राजेश कुछ देर आराम करने के बाद फिर से गांव में शाला के लिए फंड इकट्ठा करने चला गया।

आरती भी अपनी सहेली के घर चली गई। ज्योति ने मुन्नी को भी अपने साथ ले जाने कहा।

अब घर में केवल पुनम और ज्योति ही रह गई।

पुनम _दीदी, चलो मेरे कमरे में चलते है। मैं तुम्हारे बाल साफ़ कर दूंगी।

ज्योति और पुनम दोनो कमरे में आ गए।

पुनम ने अलमारी से सेविंग करने का सामान निकाल लिया जिससे भुवन अपना दाढ़ी बनाता था।

पुनम _दीदी आप बेड के किनारे लेट जाओ।

ज्योति _मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

पुनम _दीदी अब मुझसे क्या शर्माना। आपको पता है मैं अपनी बाल कभी कभी तो भुवन से साफ़ कराती हूं।

ज्योति _क्या?

तू सच में बड़ी बेशरम है। पुनम हसने लगी।

पुनम _उससे बाल बनवाने में बड़ा मज़ा आता है।

उसे तो चिकनी boor ही पसंद है। और,,

ज्योति _और क्या?

पुनम _और राजेश को भी।

चलो अब लेट जाओ। ज्योति शर्माते हुवे बेड किनारे लेट गई। और अपनी दोनो टांगे फैला दी।

पुनम _दीदी अपनी साड़ी और पेटिकोट तो हटाओ।

ज्योति ने शर्माते हुवे अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठा दिया।

जब पुनम ने ज्योति की boor पे घने जंगल देखा।

पुनम _दीदी ये क्या इतना घना जंगल, आपका गुफा तो दिखाई ही नही दे रहा।

ज्योति _चुप कर बेशरम,,,

पुनम ने बालो पर क्रीम लगाया और ब्रश चलाया। फिर रेजर पर नया ब्लेड लगाकर बालो को साफ़ करने लगी।

ज्योति को बड़ी शर्म आ रही थी, गुदगुदी भी हो रही थी।

ज्योति _अरे बेशरम जल्दी करो और कितनी देर लगेगी।

पुनम _बस दीदी हो गया।

पुनम ने धीरे धीरे करके पूरे बालो को साफ़ कर दिया।

एक बार बाल साफ़ करने के बाद फिर से योनि के आस पास ब्रश चलाया, तो ज्योति सिसकने लगी, आए उन

पुनम _क्या huwa दीदी, मुस्कुराते हुवे पूछी।

ज्योति _कुछ नही तू जल्दी कर।।

पुनम ने योनि को एक बार फिर रेजर चला कर साफ़ किया।

पुनम _दीदी आपकी बुरिया तो बहुत खुबसूरत लग रही है। एकदम फूली हुई मस्त चिकनी। ज्योति _चुप कर बेशरम।

ज्योति की boor एकदम गीली हो गई थी। जब पुनम ने देखा तो समझ गई कि ज्योति गर्म हो गई है।

वह ज्योति को और गर्म करना चाहती थी।

उसने ज्योति की boor को चाटना शुरू कर दिया।

ज्योति सिसक उठी,,

वह सिसकते हुवे बोली,, आह मां, आह,,

अरे क्या कर रही है बेशरम, ऐसा मत कर, पर पुनम नही मानी और चांटती रही।

ज्योति बहुत गर्म हो गई। अब उसे बहुत मज़ा आने लगा।

आह मां आई, आह,,

वह पुनम की सिर को योनि में और दबा दिया,,

और कुछ ही देर में चीखते हुए झड़ने लगी।

पुनम ने उसकी boor की पानी को चांटते हुवे कहा,,

दीदी आपकी boor का पानी का स्वाद तो एकदम मजेदार है?

ज्योति _छी बेशरम तू कितनी गंदी है।

पुनम _दीदी सच बोलो क्या तुम्हे मजा नही आया?

ज्योति _छी ऐसा भी कोइ करता है?

पुनम _लगता है आपका पति आपका बुरिया नही चांटते।

भुवन तो बिना चांटे घुसता ही नही।

ज्योति _क्या?

पुनम _हां, और,,

ज्योति _और,, क्या ?

पुनम _और राजेश तो और मस्त चांटता है।

ज्योति _क्या, राजेश भी।

पुनम _दीदी अपनी बुरिया को तो देखो कैसा चमक रहा है? कहीं एक बार राजेश ने देख लिया तो दीवाना हो जायेगा।

ज्योति _चुप कर बेशरम, तू तो शर्म हया सब बेच खाई है है। और सुन तू राजेश से दूर ही रहना, नही तो मां को सब सच बता दूंगी। तू क्या गुल खिला रही है।

पुनम ने अपने मन में बोली,, दीदी जब तुम्हे पता चलेगा न कि तुम्हारी मां क्या गुल खिला रही है तब देखूंगी तू क्या करेगी?

ज्योति _तुमने कुछ कहा?

पुनम _नही, तो।

दीदी अब मां जी के आने का समय हो गया है। अब तुम अपने कमरे में जाओ।

ज्योति बेड से उठी और अपने कमरे में चली गई।



रात में ज्योति, दूध का गिलास लेकर फिर राजेश के कमरे में गई।

ज्योति _लो, दूध पी लो।

राजेश _शुक्रिया दीदी।

जब ज्योति जाने लगी।

राजेश _दीदी, आज आवोगी न मलहम लगाने।

ज्योति शर्मा गई,, अपने हाथो से लगा लेना।

राजेश _ठीक है दीदी, पर मैं तो इसलिए कह रहा था की कल आपने जो क्रीम लगाकर मालिश की थी उससे काफी राहत मिला, एक दो दिन मे जख्म बिल्कुल ठीक हो जायेगा। लगा देती तो,,

ज्योति _ठीक है देखूंगी,,,

रात में जब ज्योति ने देखा कि सभी सो गए है वह चुपके से उठी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।

वह राजेश के कमरे में गई।

राजेश पहले से ही लूंगी पहन कर बेड पर लेट कर ज्योति के आने का इन्तजार कर रहा था।

राजेश _लो दीदी, क्रीम लो।

राजेश ने लंद के ऊपर से लूंगी हटा दिया।

ज्योति का दिल जोरो से धड़क रहा था।

लंद पहले से ही खड़ा huwa था।

ज्योति ने लंद को एक हाथ से पकड़ कर कटे हुए जगह को देखा, चोंट पहले से काफी ठीक हो गया था।

उसने कटे भाग पर क्रीम लगा कर मालिश करने लगी।

ज्योति के हाथो का स्पर्श पाते ही लंद और शख्त होकर ठुमकने लगा। जिसे देख कर ज्योति शर्म से पानी पानी हो गई। और वह कमरे से जाने लगी,,

राजेश _दी क्या huwa, कितना अच्छा लग रहा था, थोड़ी और मालिश कर देती तो,,,

ज्योति रुकी नही उसका दिल जोरो से धड़क रहा था वह अपने कमरे में चली गई, वह सोने की कोशिश करने लगी पर राजेश का लंद उसके आंखो के सामने नजर आ रहा था। उसकी chut का हाल भी बहुत बुरा हो गया था।

वह अपनी उंगली से chut की पानी बाहर निकाल कर शांत की और सो गई।

पर इधर राजेश का लंद खड़ा था, बड़े मुस्किल से वह सो पाया।

अगली रात फिर वही huwa।

ज्योति राजेश के लंद पर मालिश की, और बोली,,

ज्योति _अब तो तुम्हारा जख्म बिल्कुल ठीक हो गया है। कल से मालिश की जरूरत नही पड़ेगी ।

राजेश _हा दीदी ये तो आपके हाथो का कमाल है जो जख्म इतना जल्दी ठीक हो गया।

आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेरी मदद करने के लिए।

ज्योति मालिश करके वहा से चली गई। और राजेश के लंद को इमेज कर अपनी chut रगड़ कर सो गई।

अगले दिन रात में दूध लेकर ज्योति, राजेश के कमरे में फिर पहुंची।

ज्योति _लो राजेश दूध पी लो।

राजेश _थैंक यू दी।

ज्योति _अब तो तुम्हारा जख्म बिल्कुल ठीक हो गया है। अब तो मुझे आने की जरूरत नही है न, ज्योति ने मुस्कुराते हुवे बोली।

राजेश _हां दीदी।

अब तो चोट बिल्कुल ठीक हो गया है। तुम्हारी मालिश से। अब तो आप मालिश करने नही आएंगी।

ज्योति _हां

राजेश _दीदी अच्छा होता आज आखरी बार और अच्छे से मालिश कर देती।

आप मालिश करती हो तो बड़ा अच्छा लगता है।

ज्योति _न बाबा, अब मैं नही आऊंगी। किसी को पता चला तो मैं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

ज्योति वहा से चली गई।

रात में ज्योति सोने की कोशिश करने लगी पर उसके आंखो के सामने राजेश का लंद ही नजर आ रहा था। वह बहुत गर्म हो चुकी थी। वह अपने उंगली से boor को राहत पहुंचाने में लग गई। पर पता नही उसे क्या huwa वह न चाहते हुवे भी, अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे में पहुंच गई।

राजेश सोने ही वाला था, ज्योति जब कमरे में पहुंची।

राजेश _दीदी आप। आज तो आप नही आने वाली थी।

ज्योति _मैं सोंचि की आज आखरी बार मालिश कर दू। अगर तुमको नही करानी है तो जा रही हूं।

राजेश _अरे दीदी ये तो बड़ी खुशी की बात है। आ जाओ, आज अच्छे से मालिश करना आखिरी बार है।

पर क्रीम से नही।

ज्योति _फिर किस्से।

राजेश _सरसो तेल से। आप जाओ।

ज्योति _नही बाबा, ऐसे ही कराले। दीदी सरसो तेल से मालिश करने से ज्यादा लाभ होता है।

ज्योति _अच्छा।

राजेश _हां।

ज्योति _ठीक है मैं कीचन से सरसो तेल ला रही हूं।

राजेश खुश हो गया।

कुछ देर में ज्योति सरसो एक कटोरी में सरसो तेल गर्म करके ले आई। ज्योति गर्म हो चुकी थी वह न चाहते हुवे भी ये सब कर रही थी। उसके शरीर का हवस जाग चुका था।

वह राजेश के कमरे में पहुंचा और दरवाजा बंद कर दिया।

राजेश बेड पर लेट गया और अपना लूंगी निकाल दिया। ऊपर ती शर्ट पहना था नीचे से नंगा हो गया। उसका लंद हवा में लहरा रहा था।

उसे देख कर ज्योति की योनि से चिपचिपा पानी बहना शुरू हो गया।

राजेश _लो दीदी अब अच्छे से मालिश कर दो।

ज्योति ने सरसो का तेल कटोरी से अपने हाथ में डालकर उसे लंद पर चुपडा और मालिश करने लगी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

राजेश _दीदी बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसे ही मालिश करती रहो दीदी आह।

राजेश का जोश बढ़ता जा रहा था उससे रहा न गया और एक हाथ से ज्योति चूची ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा।

ज्योति चौंकी, पर उसे भी अच्छा लगने लगा उसने कोइ विरोध नही किया।

राजेश का हिम्मत और बड़ गया, उसने ब्लाउज का बटन एक एक कर खोल दिया और चूची को ब्लाउज से आज़ाद कर दिया।

ज्योति की दूध से भरे मस्त बड़ी बड़ी सुडौल स्तन को देख कर राजेश के लंद ने झटका मारा।

जिसे ज्योति ने अपने हाथो में महसूस किया।

वह तेल लगा लगा कर बहुत अच्छे तरीके से लंद और अंडकोष की मालिश करने लगी।

इधर राजेश ने चूची को मसलना जारी रखा।

कुछ देर चूची मसलने के बाद राजेश ने एक चूची मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

ज्योति सिसक उठी।

वह बहुत उत्तेजित हो गई।

ज्योति की चुचियों को बारी बारी से चूसने लगा।

कुछ देर बाद,,,

राजेश दीदी अब बस करो,, ज्योति ने मालिश करना बंद कर दिया।

राजेश उठ कर बैठ गया।

वह दोनो हाथो से चूची पकड़ कर बारी बारी पीने लगा।

ज्योति प्यार से उसके बालो को सहलाने लगी और सिसकने लगी।

राजेश ने ज्योति की आंखो में देखा। ज्योति शर्मा गई।

राजेश ने उसकी ओंठो को मुंह में भर कर चूसने लगा।

ज्योति तेज़ तेज़ सांसे लेने लगी।
 
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि किस तरहज्योति काम ज्वर से तड़प रही थी। वह काम के वशीभूत होकर राजेश के कमरे में गई और सरसो के तेल से राजेश के लंद की मालिश करने लगी।

राजेश जोश में आकर ज्योति की चुचियों से खेलने लगा। जिससे ज्योति और अधिक गर्म हो गई।

राजेश आगे बड़ा और ज्योति की ओंठो को मुंह में भर कर चूसने लगा, ज्योति भी साथ देने लगी।

राजेश ज्योति की चुचियों को जी भर कर चूसने के बाद वह ज्योति को बेड के किनारे लिटा दिया और उसकी पेटीकोट साड़ी को ऊपर चढ़ा दिया जिससे ज्योति की मस्त चिकनी, फूली हुई रसभरी fuddi राजेश के आंखों के सामने आ गया।

राजेश देर न करते हुए ज्योति की chut को चाटना शुरु कर दिया। ज्योति हवा में उड़ने लगी। काम का ऐसा सुख उसे अभी तक नही मिला था जो अब मिल रहा था। कमरे में उसकी सिसकारियों गूंजने लगी।

राजेश उसकी boor के भगनाशा को जीव से कुर्दने लगा। ज्योति बर्दास्त नही कर सकी। वह हवस में चीखने लगी।

उसकी आवाज़ बाजू कमरे में सो रही पुनम तक पहुंच गई। वह अपने बेड से उठ कर कमरे से बाहर निकल कर पता करने की कोशिश करने लगी आवाज़ कहा से आ रही है।

इधर ज्योति को बर्दास्त न huwa तो वह कपकपाते आवाज़ में बोली,,

ज्योति _राजेश अब बस करो, मुझसे बर्दास्त नही हो रहा,,,, मेरी,,,प्यास,,,, बुझाओ,,,,,

राजेश ने ज्योति की बात सुन कर देर ने करते हुवे। अपना मोटा सांप निकाला और ज्योति के बिल में ठेल दिया। सांप सरसराता huwa बिल में घुस गया।

राजेश ज्योति की कमर को दोनो हाथो से पकड़ कर ज्योति की कुंआ से पानी निकालने के काम में जुट गया।

राजेश का लंद फुच फुच की आवाज़ करता huwa ज्योति के boor में अंदर बाहर होने लगा।

ज्योति को संभोग का वह सुख प्राप्त हो रहा था जिसकी उसने कभी कल्पना तक नही की थी।

उनकी मादक सिसकारी कमरे कमरे में गूंजने लगी। उसकी चूड़ियां खन खन खनकने लगे।

राजेश को भी ज्योति की boor चोदने में एक अलग ही मजा आ रहा था।

वह ज्योति की fuddi में गहराई तक लंद पहुंचाकर। चोदे जा रहा था।

इधर पूनम को पता चल गया की राजेश की कमरे में chudai चल रही है।

पर राजेश किसको चोद रहा है, हो सकता है मां जी हो।

यह जानने के लिए की अंदर मां जी ही है ताकि अगर मां जी हो तो वो भी अंदर जा कर मजा ले सकती है पहले वह आरती के कमरे की ओर गई। उसने देखा दरवाजा अंदर से बंद नही थोड़ा दरवाजा धकेल कर देखी, ज्योति बिस्तर पे नही थी।

पुनम चौंकी।

क्या दीदी राजेश से chudwa रही है।

उसके चहरे पर मुस्कान आ गई।

चलो अब किसी से डरने की जरूरत नही, अब तो दीदी के सामने ही राजेश से चुदवाऊंगीं ।

उसकी boor से पानी बहकर उसकी पेंटी को भिगाने लगा।

उसका मन किया की वह भी राजेश के कमरे में जाकर chudai का मजा ले फिर सोची नही अभी जाना ठीक नही उसे राजेश से आज जी भर कर chud कर उसका गुलाम बनने दो, अभी गई तो मामला बिगड़ सकता है।

वह अपने कमरे में गई और राजेश के लंद को इमेज कर अपनी उंगलियां boor में डालकर, उसे शांत करने की कोशिश करने लगी।

इधर राजेश ज्योति की जमकर chudai कर रहा था। ज्योति दो बार झड़ चुकी थी।

राजेश ने ज्योति को बेड से उतार कर उसे बेड पकड़ा कर झुका दिया और पीछे से लंद को उसकी boor ने गच से पेल दिया।

उसकी कमर को पकड़कर गपा गप लंद boor में अंदर बाहर करने लगा। दोनो स्वर्ग की सैर कर रहे थे।

ज्योति तो राजेश के मर्दानगी की दीवानी हो गई। वह भी अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

राजेश ने ज्योति के सारे कपड़े एक एक करके निकाल कर पूरी नंगी कर दिया और खुद नंगा हो गया।

ज्योति को घोड़ी बनाकर, अपने लंद से उसकी boor की गहराई नापने लगा।

इसी पोजीशन में राजेश ने ज्योति को तब तक चोदा जब तक वह फिर से न झड़ गई।

ज्योति के झड़ने के बाद राजेश ने उसे बेड पर लिटा दिया और फिर उसकी boor चांटकर उसे गर्म किया, वह उसके बाजू लेट गया, फिर ज्योति को करवट के बल लिटा कर उसकी एक टांग उठा कर लंद को boor में gach से पेल दिया, और लंद को boor में गगपागप पेलने लगा।

राजेश लगातार इसी पोजीशन में ज्योति को चोदता रहा और उसकी boor में अपना वीर्य छोड़ दिया।

जब ज्योति को अपनी boor में गर्म गर्म वीर्य का अहसास हुआ तो वह फिर से झड़ गई।

दोनो थक चुके थे।

दोनो कुछ देर सुस्ताने लगे। जब ज्योति होस में आई। उसके ऊपर से हवस का भूत उतरी तो, उसे अपनी हालात देख शर्मिंदगी महसूस होने लगी। वह राजेश से नज़रे न मिला सकी। वह बेड से उतरी और अपने कपड़े पहनने लगी।

राजेश उसे कपड़े पहनता देखने लगा, और मुस्कुराने लगा। एक हाथ से अपना लंद मुठियाने लगा।

कपड़े पहनने के बाद ज्योति एक नजर राजेश को देखी जो उसी को देख कर अपना लंद मुठिया रहा था और मुस्कुरा रहा था। ज्योति शर्म से पानी पानी हो गई। वह तुरंत वहां से भाग कर अपने कमरे में चली गई।

इधर पुनम भी अपनी उंगली से खुद को झाड़ ली। और सो गई।

ज्योति भी अपने कमरे में जाकर गहरी नींद में सो गई।

सुबह राजेश उठा और अखाड़े पर चला गया।

सुबह जब पुनम और ज्योति अकेले में थे, पुनम ने ज्योति से कहा।

पुनम _दीदी, एक बात बताऊं।

ज्योति _हां बताओ, क्या बात है?

पुनम _मुझे ने कल रात राजेश के कमरे से किसी की सिसकने की आवाज़ आ रही थी।

ज्योति डर गई,, कहीं पुनम को पता तो नही चल गया।

ज्योति _राजेश के कमरे में कौन जायेगा। इतनी रात को, आरती तो मेरे कमरे में ही थी। ये तुम्हारा वहम होगा या तुम सपने देखी होगी।

पुनम _हो सकता है दीदी, ये कोइ सपना ही हो,,, वह मुस्कुराने लगी

जबकि ज्योति अपनी नजरे चुराने लगी।

राजेश अखाड़े से आने के बाद घर में नाश्ता किया और स्कूल समिति के सदस्यों के साथ फंड इकट्ठा करने चला गया।

इधर ठाकुर की हवेली मे,,,

मुनीम _ठाकुर साहब एक बात बतानी थी आपको।

ठाकुर _क्या बात है मुनीम जी?

मुनीम _ठाकुर साहब, हमारे लड़के बता रहे थे की दिव्या बिटिया की गाड़ी को राजेश चला रहा था। गांव वालो में तरह तरह की बाते हो रही है।

ठाकुर _क्या बक रहा है?

मुनीम जी _ठाकुर साहब मैं तो वही बता रहा हूं जो गांव में चर्चे हो रहे हैं।

मैने तो पहले ही कहा था ये राजेश के आने के बाद से मुझे कुछ भय सा लगता है, ऐसा न हो आपकी इज्ज़त पे लोग,,,,,

ठाकुर _मुनीम जी, अपनी जुबान सम्हालो,,

मुनीम _ठाकुर साहब मैने आपका नमक खाया है आपकी इज्ज़त पर कोइ आंच न आए इसलिए आगाह करना मेरा फर्ज है,,,

ठाकुर _हूं,,,, इस साले का कुछ करना पड़ेगा।

उस गांव के लाला जी को, यहां बुलाओ,,,

मुनीम _ठीक है ठाकुर साहब,,,

मुनीम जी ने लाला जी को फोन लगाया,,

लाला _अरे मुनीम जी, बड़े दिनो के बाद याद किया कुछ काम था क्या?

मुनीम _ठाकुर साहब तुम्हे बुला रहे हैं हवेली में।

लाला _ठाकुर साहब याद कर रहे है, किस काम के लिए याद किया है ठाकुर साहब ने।

मुनीम जी _ये तो हवेली आने के बाद ही ठाकुर साहब तुमको बताएंगे?

लाला _अच्छा ठीक है मुनीम जी ठाकुर साहब से कहना, मैं अभी आ रहा हवेली पे।

लाला जी जो इस समय अपने घर पर थे अपने राशन की दुकान खोलने के लिए निकल रहे थे।

ठालाला की बीबी ललिता,, बोली

ललिता _क्या बात है जी, किसका फोन था।

लाला _मुनीम जी का फोन था, कह रहा था कि ठाकुर साहब ने हवेली पे बुलाया है, मैं हवेली जा रहा हूं। कोइ पूछे तो कह देना कुछ काम से शहर गया है। किसी को बताना मत, मैं हवेली जा रहा हूं।

ललिता _ठीक है जी।

लाला जी कुछ लूना लेकर ठाकुर की हवेली पहुंचा।

लाला _पाय लागू ठाकुर साहब।

ठाकुर _आओ मुनीम जी।

लाला _ठाकुर साहब , कहिए मुझ तुच्छ आदमी को कैसे याद किया हुजूर।

ठाकुर _लाला जी, तुम्हे तो पता है तुम्हारे गांव में शहर से एक लडका आया है।

लाला जी _कहीं आप राजेश के बारे में तो नही कह रहे हुजूर।

ठाकुर _हां, मैं उसी के बारे में कह रहा हूं।

साला हवा में बहुत उड़ रहा है। मुझे तकलीफ पहुंचा रहा है।

लाला _जानता हूं हुजूर।

ठाकुर _लाला जी, उस साले को रास्ते से हटा ने के लिए, तुम्हारी मदद की जरूरत है।

लाला _ठाकुर साहब आप अपने आदमियों से कहकर उसे रास्ते से ऐसे ही हटा सकते हैं। फिर मेरी मदद की क्या आवश्यकता पड़ गई।

ठाकुर _मुनीम जी सामने चुनाव आने वाला है, हम नही चाहते की हमारे क्षेत्र में किसी तरह का बवाल हो,,

मुनीम _तो बताइए हुजूर मैं भला आपकी क्या मदद कर सकता हूं।

वैसे भी आपकी मुझ पर कृपा है, आपने ही राशन की दुकान ठेके पर दिलाया है।

मुनीम जी _देखो मुनीम जी, मैं चाहता हूं की गांव वाले राजेश को ठीक उसी तरह गांव से निकाले जैसे उसने मेरा मुंह काला कर गधे में बिठाकर निकाला था। अगर तुमने यह काम कर दिया तो मुंह मांगा रकम मिलेगा।

लाला _पर हुजूर ये होगा कैसे?

ठाकुर _मैंने सब सोच लिया है लाला, क्या करना है?

सुना है की साला, स्कूल के लिए फंड इकट्ठा करने तुम्हारे घर घर जा रहा है।

लाला _बिल्कुल सही सुना है हुजूर।

ठाकुर _सुनो लाला, जब राजेश चंदा के लिए तुम्हारे घर आए, तो तुम कहना, राजेश तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो, मेरे लिए खुशी की बात होगी जो, मैं आप लोगों की मदद कर सकूं। मैं शाला को एक लाख रुपए दान दूंगा।

पर राजेश मुझे भी तुम्हारी एक मदद की जरूरत है। तुम्हारी बेटी 12वी की परीक्षा में रुकी हुई है न।

लाला _जी हुजूर, वह गणित विषय में रुकी हुई है। एक माह बाद पूरक परीक्षा होनी है।

ठाकुर _तुम राजेश से कहना तुम्हारी बेटी लज्जो को घर में ट्यूशन पढ़ाने को, जब वह तुम्हारे घर आए तो, अपनी बीवी, बहू और बेटी को उसे अपने जाल में फसाने कहना, और उचित मौका मिलने पर राजेश पर इज्जत लूटने का इल्जाम लगा दे।

लाला _हुजूर, मैं समझ गया, आपने क्या योजना बनाया है?

ठाकुर _मुनीम जी, लाला जी को २लाख रुपए दे दो।

मुनीम जी ने लाला जी को 2लाख रुपए दे दिए।

ठाकुर _मुनीम जी यदि तुमने मेरा काम कर दिया तो 3लाख और मिलेंगे।

लाला _शुक्रिया हुजूर, आपके काम हो जायेंगे।

ठाकुर अपने मूछ ऐंठते हुए हसने लगा।

अब लाला जी के परिवार के बारे में जानते है।

लाला जी का उम्र 50वर्ष।

उसकी पत्नि ललिता 45वर्ष।

उसकी बड़ी बेटी जिसकी उम्र 26वर्ष जिसकी शादी हो चुकी है।

उसके बाद उसका बेटा, ललित उम्र 24वर्ष।

उसकी पत्नि कुसुम 22 वर्ष एक बच्चे।

छोटी बेटी,, लज्जो 19वर्ष

लज्जो 12की परीक्षा में गणित विषय में पूरक आई है।

लाला रंगीन मिजाज का आदमी है। वह गांव की गरीब बहु बेटियो के गरीबी का फायदा उठाकर, न जाने, कितनो का यौन शोषण किया है।

लाला जी ने तो अपने बहु कुसुम को भी नही छोड़ा।

जब अपने लड़के ललित के शादी के लिए, कुसुम को देखने पहली बार उसके घर गया।

कुसुम जब चाय लेकर आई, तो लाला जी कुसुम की खूबसूरती को देखता रह गया।

कुसुम उसके दिल में उतर गया।

ललित से शादी के बाद कुसुम जब अपने ससुराल आई।

लाला जी उसे पाने का सपना देखने लगे।

वह चोरी छुपे, कुसुम के अंगो को देखा करता।

वह अकेले में सोचता रहता की बहु को कैसे पाया जाय।

लाला ने ललित के लिए लक्ष्मण पुर में मोबाइल का दुकान खोल दिया था।

ललित सुबह 9बजे ही दुकान के लिए निकल जाता था और रात को वह 9बजे घर आता था।

लाला जी गांव में राशन दुकान चलाता था । एक नौकर रखा था जो लोगो को राशन देता था।

ललिता और कुसुम दोनो मिलकर घर का काम सम्हालते थे लज्जो स्कूल जाता था।

लाला जी गरीब बहु बेटियो को मुफ्त में राशन देने के नाम पर फसाता था और अपने गोदाम में ले जाकर उसका यौन शौषण करता था।

लाला कुसुम को पाने का हसरत पाल रखा था वह उसे पाने के लिए योजना बना रहा था।

ललित के शादी के 4माह बाद ही, उसके मामा के लड़के की शादी होना था।

लाला ने कुसुम को पाने की योजना बनाया।

ललिता को अपने भतीजे की शादी में 4दिन पहले ही जाना था।

लाला जी बाथरुम में फिसल जाने का नाटक किया।

लाला जी _अरे, मर गया,re आह,,,

ललिता दौड़ते हुवे आई।

ललिता _क्या huwa ललित के बापू,,

लाला _अरे भाग्यवान देख नही रही हो क्या huwa है, अब देखती रहेगी की उठाएगी भी, हे भगवान बड़ा दर्द हो रहा है, मेरी टांग में बड़ा दर्द हो रहा है। मैं उठ नही पा रहा।

ललिता ने अपने बेटे ललित को पुकारा, ललित दौड़ता huwa आया।

ललित _क्या huwa मां?

ललिता _बेटा, तेरे बापू फिसलकर गीर गया, उसे उठकर कमरे में ले चलो।

ललित और उसकी मां ने लाला को सहारा देकर उठाया और उसके बेड पे ले जाकर लिटा दिया।

ललिता _बेटा गांव के डाक्टर रवि को बुलाओ ।

ललित ने रवि को फोन कर बुलाया।

रवि, लाला के घर पहुंचा।

रवि ने पूछा क्या हुआ?

लाला _बेटा बाथरुम में नहाकर निकल रहा था की पैर साबुन पर चला गया, फिसल कर गिर गया।

टांग और कमर पर दर्द हो रहा है बेटा, उठ नही पा रहा।

रवि ने लाला की कमर और टांग को दबाकर देखा।

लाला जानबूझकर दर्द से कराहा।

रवि को लाला पर कुछ शक तो huwa फिर भी उसने लाला की कमर पर मालिश करने के लिए तेल और खाने के लिए दवाई दे दिया।

ललिता ने तेल से लाला की कमर और टांगो की मालिश करने लगी।

ललिता _हे भगवान ये घटना अभी होना था।

लाला _क्यू, कोई घटना तुम्हे बताकर होगा क्या?

ललिता _अजी, कल हमे मायका जाना था। भतीजे की शादी जो हो रही हैं। अब क्या होगा।

लाला _अरे ललित की मां तुम उसकी चिन्ता मत करो तुम चली जाओ। और लज्जो को भी ले जाओ।

ललिता _पर तुम्हारा देखभाल कौन करेगा?

लाला _बहु और ललित है न मेरा देखभाल करने, बारात के दिन ललित चला जायेगा।

तब तक मैं भी कुछ ठीक हो जाऊंगा।

ललित _हां मां बापू ठीक कह रहे हैं।

अगले दिन, ललिता और लज्जो दोनो मामा के लड़के की शादी में जाने तैयार हो गए।

लाला _बेटा ललित तुम भी दुकान जा रहे हो उधर ही अपने साथ अपनी मां और बहन को भी ले जाओ उसे ट्रैन बिठा देना।

ललित _ठीक है बापू।

ललिता, लज्जो दोनो को लेकर ललित स्टेशन के लिए निकल पड़े।

इधर घर में अब कुसुम और लाला ही रह गए।

कुसुम _ससुर जी, आपको कुछ चाहिए तो नही, मैं नहाने जा रही।

लाला _नही बहु, मुझे अभी कुछ नही चाहिए। तुम जाओ नहा लो।

जब कुसुम नहाने के लिए बाथरुम में घुस गई और दरवाजा बंद कर दी।

लाला चुपके से बेड से उठ कर बाथरुम के पास चला गया जो घर के आंगन में बना था।

वह बाथरुम के अंदर का नजारा देखना चाहता था।

बाथरुम का दरवाजा लकड़ी से बना था। उस पर एक छेद था।

लाला उस छेद से अंदर का नजारा देखने लगा।

बाथरुम में जाने के बाद कुसुम पहले अपनी साड़ी उतारी फिर फिर ब्लाउज खोलने लगी जिसे देखकर लाला की दिल की धड़कन बढ़ गया।

और जब ब्लाउज उतार दी तो कुसुम के गोरे गोरे मस्त चूचे देख कर लाला का लंद खड़ा हो गया।

वह अपने लंद को मसलने लगा।

कुसुम बाथरुम में बैठकर कपड़े धोने लगी।

कपड़े धोने के बाद वह साबुन मल मल कर नहाने लगी।

वह अपनी पेटीकोट भी उतार दी।

उसकी मस्त चिकनी chut देखकर लाला अपना लंद हिलाने लगा।

इधर कुसुम अपनी chut में साबुन मलने लगी।

लाला जी अपने आप से बोला,, आह क्या माल है साली इसे खाने में तो बहुत मजा आएगा।

वह अपने बहु को नंगी नहाते देख, मुठ मारने लगा और कुछ देर में अपना पानी दरवाज़े पर ही गिराकर अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया।

बिस्तर पर लेट कर आगे की योजना बनाने लगा।

कुसुम नहाने के बाद के बाद अपने कमरे में जाकर, तैयार हुई।

उसके बाद वह लाला के कमरे में आई।

कुसुम _बाबू जी, आपको कुछ चाहिए क्या?

लाला _बहु, एक गिलास पानी ले आओ।

कुसुम गिलास में पानी लेकर आई और लाला को देने लगी।

कुसुम _लो बाबू जी, पानी पी लो।

कुसुम ने उसे सहारा देकर बिठाया।

लाला जी पानी पीने लगा।

लाला जी _शुक्रिया बहु।

तुम्हे मेरे कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।

कुसुम _बाबू जी इसमें परेशानी कैसी ये तो मेरा फर्ज है।

लाला जी ने देखा कुसुम ने जी साड़ी पहन रखी थी उसमें वो काफी खुबसूरत लग रही थी।

लाला _अरे बहु एक बात कहूं?

कुसुम _तुम तो इस साड़ी में बहुँत सुंदर लग रही हो

कुसुम शर्मा गई।

बाबू जी आपको कुछ और चाहिए तो बता देना मैं भोजन कर रही हूं, आप भी कुछ खायेंगे क्या?

लाला _नही बहु, अभी तो तुम्हारी सास खिलाके गई है जाओ तुम खा लो।

कुसुम ठीक है, बाबू जी।

कुसुम भोजन करने के बाद अपने कमरे में जाकर आराम करने लगी।

आराम करके जब उठी।

वह लाला के कमरे में गई ।

कुसुम _बाबू जी कुछ चाहिए क्या? लाला _बहु, अब कैसे कहूं?

कुसुम _कहिए न बाबू जी, क्या बात है!

लाला जी _बहु, वो पेशाब लगी थी।

अब ललित या तुम्हारी सास तो है नही,,,

कुसुम _बाबू जी, चलो मैं सहारा देकर तुम्हे बाथरुम तक ले जाती हूं।

लाला _बहु, अच्छा तो मुझे नही लग रहा पर क्या करू मजबूरी है।

कुसुम _कोइ बात नही बाबू जी चलिए, उठिए।

कुसुम ने लाला को सहारा देकर उठाया। लाला नाटक दर्द करने का नाटक किया फिर लंगड़ाते हुवे वह कुसुम के सहारे बाथरुम पहुंचा।

वह दरवाज़े के पास खड़ा हो गया। कुसुम पीछे से पकड़ी हुई थी।

कुसुम _लो बाबू जी आप पेशाब कर लीजिए।

लाला _ठीक है बहु।

लाला ने लूंगी हटाया और अपना कच्छा नीचे कर लंद बाहर निकाल कर मूतने लगा।

कुसुम को बड़ी शर्म आ रही थी।

और लाला को बड़ा मज़ा।

मूतने के बाद।

लाला _बहु हो गया, अब ले चलो।

लाला को सहारा देकर फिर बेड तक लाकर लिटा दिया

लाला _शुक्रिया बहु।

कुसुम _बाबू जी अब मैं घर का काम कर रही हूं कुछ काम हो तो बताना।

रात में जब ललित घर आया तो अपने लाला से पूछा।

ललित _बाबू जी, अब तुम्हारे पैर कैसे है?

लाला _कल से बेहतर है बेटा।

ललित _आज तुम्हे कोइ परेशानी तो नही हुई।

लाला _नही बेटा, बहु ने बहुत अच्छे से देखभाल कि है,बहु बहुत अच्छी है, हम किस्मत वाले है जो ऐसी बहु मिली है।

कुसुम अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई।

अगले दिन ललित, लाला को नहाकर खाना खिलाकर, कुसुम को बापू का देखभाल कहना कहकर दुकान चला गया।

जब कुसुम नहाने के लिए बाथरुम गई।

लाला फिर से अंदर का नजारा दरवाज़े के छेद से देखकर अपना लंद हिलाया और दरवाज़े पर अपना पानी गिराकर, कमरे में आकर लेट गया और आगे क्या किया जाए, सोचने लगा।

कुसुम नहाने के बाद अपने कमरे में जाकर तैयार हुई और लाला जी के पास गई।

कुसुम _बाबू जी, कुछ चाहिए क्या?

लाला _नही बहु तुम जाओ खाना खा लो।

भोजन करने के बाद फिर कमरे में आई।

कुसुम _बाबू जी मैं कमरे में आराम करने जा रही कुछ काम हो तो आवाज़ लगाना।

लाला _बहु, पेशाब लगी थी।

कुसुम _अच्छा चलो,,

कुसुम ने सहारा दे कर लाला को उठाया और बाथरुम ले गया, दरवाज़े पर खड़ा कर दिया पीछे से पकड़ी रही। लाला ने लूंगी हटाया और अपना कच्छा नीचे कर लंद बाहर निकाल कर मूतने लगा।

मूतने की आवाज़ कानों पर पड़ते ही कुसुम शर्माने लगी।

मूतने के बाद लाला कुसुम के सहारे बेड तक आया और फिर लेट गया।

लाला _बहु,

कुसुम _जी बाबू जी।

लाला _कुछ नही रहने दो।

कुसुम _बहु कहिए न संकोच मत कीजिए।

लाला _बहु, दोपहर में एक बार और मालिश हो जाता तो जल्दी टांगो में जल्दी सुधार होता।

कुसुम _ठीक है बाबू जी मैं आराम करने के बाद उठूंगी तो एक बार आपके पैरों की मालिश कर दूंगी।

लाला _बहु तुम कितनी अच्छी हो पिछले जन्म में मैने जरूर कोइ अच्छा कार्य किया रहा होगा जो तुम जैसी बहु मिला।

कुसुम _अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई।

कुसुम आराम करने के बाद जब अपने बेड से उठी वह सीधा लाला के कमरे में आई।

कुसुम _बाबू जी चलो मैं आपकी पैरो की मालिश कर देती हूं।

लाला खुश हो गया।

कुसुम बेड किनारे बैठ गई और अपनी हाथो में तेल लगाकर लाला के पैरो की मालिश करने लगी।

मालिस करते हुवे जांघ की ओर बड़ने लगी।

नर्म मुलायम हाथ का अहसास पाकर साथ ही, जब मालिश करते हुवे कुसुम नीचे झुकी उसकी मस्त चूचियों के दीदार से लाला का लंद खड़ा हो ने लगा। इधर लूंगी सरकाकर कुसुम मालिश करते हुवे लाला की टांगो कीजांघ की ओर बढ़ने लगी। इधर लाला का लंद खड़ा होने से लूंगी के ऊपर बड़ा सा उभार बन गया था।

जब मालिश करते हुवे कुसुम की नजर लूंगी के ऊपर बनी उभार पर गई तो वह समझ गई की ससुर जी का खडा हो गया है।

वह शर्म से पानी पानी हो गई, फिर भी धड़कते दिल से वह मालिश करने लगी।

लाला को बहुत मजा आ रहा था।

कुसुम को और ज्यादा देर तक मालिश करने की हिम्मत नही हुई और उठ कर चली गई।

लाला ,अपनी चाल में कामयाब होता देख बहुत खुश था।

रात में ललित आया और लाला से उनका हालचाल पूछा।

लाला ने अपनी बहु की जमकर तारीफ की।

कुसुम _अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई।

अगले दिन लाला ने कुसुम को फिर से दोपहर में मालिश कर देने के लिए कहा,,,

कुसुम अपनी ससुर की बात टाल नही सकी और दोपहर में आराम करने के बाद फिर से कुसुम अपने ससुर के कमरे में गई और बेड किनारे बैठ कर हाथो में तेल लगाकर पैरो को मालिश करते हुए आगे बढ़ने लगी।

उसने तिरछी नजर से ऊपर की ओर देखा कहीं ससुर जी का लंद आज भी तो खड़ा नही हो गया है।

लाला का लंद सच में फिर से खड़ा हो गया था।

कुसुम शर्माते हुवे धड़कते दिल के साथ पैरो की मालिश करते हुवे जांघो तक गई।

लूंगी के ऊपर काफी बड़ा उभार हो गया था।

कुसुम तिरछी नजरों से उसे देखती थी।

लाला कुसुम को जाल में फसते देख बहुत खुस हो, गया।

कुसुम कुछ देर जांघ की मालिश करने के बाद वहा से शर्माते हुवे चली गई। अगले दिन भी वही huwa। लाला ने अपने जांघो जी मालिश करवाया।

ललिता की भतीजे का आज बारात जाने वाला था।

लाला _बेटा आज तो तेरे मामा के लड़के का बारात जायेगा। उसमें शामली होना जरूरी है तुम आज अपने मामा के घर चले जाओ।

ललित _ठीक है बाबू जी।

जाते समय ललित ने कुसुम से कह दिया की वह बापू का अच्छे से ख्याल रखे।

ललित के जाने के बाद, आज तो लाला बहुत खुस था आखिर वह दिन आ गया जिसका उसे कब से इन्तजार था।

आरती नहाने के बाद जब अपने कमरे में जाकर तैयार हुई और लाला के कमरे में पूछने आई की उसे किसी चीज की जरूरत तो नही है,,,

लाला _बहु तुम बहुत सुंदर लग रही हो।

कुसुम शर्मा गई।

लाला _बहु मुझे तुमसे कुछ काम था, आओ बैठो।

कुसुम बेड किनारे बैठ गई। बहु तुम्हारी सेवा से मैं बहुत खुश हूं अब तो मैं लगभग ठीक हो गया हूं।

ये सब तुम्हारी मालिश और सेवा के कारण है जो जल्दी ठीक हो गया। बहु मैं तुम्हे कुछ देना चाहता हूं।

कुसुम _क्या बाबू जी।

लाला अपने बेड से कुसुम का हाथ पकड़ कर उठा और आलमारी के पास गया।

आलमारी में रखे एक बॉक्स से उसने एक सोने का हार निकाला और उसे कुसुम को दे ते हुए कहा।

ये मेरी प्यारी बहु के लिए,

कुसुम _बाबू जी सोने की हार,, ये तो काफी कीमती है।

लाला _तुमने मेरी इतनी देखभाल की न उसका इनाम है। जरा पहन कर तो दिखाओ इसे, मैं भी तो देखूं तुम इसे पहनने के बाद कैसी लगती हो।

कुसुम खुश हो गई, वह आईने के सामने जाकर सोने की हार पहन ली,,

कुसुम _वाह, बहु तुम तो बिल्कुल चांद की टुकड़ा लग रही हो, मेरी बहु को किसी की नजर न लगे। उसने कुसुम की माथे को चूम लिया।

कुसुम शर्मा गई।

लाला _जाओ बहु, अब तुम भोजन करलो।

कुसुम _भोजन करने चली गई।

लाला का लंद बेचैन था, वह अकड़ गया था। उसने अपने लंद को मसलते हुए कहा, अब तुम्हे और तड़पना नही पड़ेगा, अब जल्द ही तुम्हारी इच्छा पूरी होने वाली है।

कुसुम कीचन में जाकर भोजन कर ली, वहा का काम निपटाकर लाला के कमरे में आई।

बाबूजी आपको कुछ चाहिए तो नही, मैं कमरे में आराम करने जा रही।

लाला _अरे बहु, आओ थोड़ा मेरे पास तो बैठो।

तुमसे कुछ पूछना था।

कुसुम बेड किनारे बैठते हुवे कहा।

कुसुम _बोलो बाबू जी क्या कहना है आपको।

लाला _बहु तुम्हारी और ललित की शादी को 4माह हो गए। अभी तक कोई खुशखबरी नही सुनाई। ललित और तुम्हारे बीच सब ठीक तो है न। कोइ समस्या हो तो मुझे बता सकती हो।

जब मेरी शादी हुई थी टी पहले मां ही तुम्हारी सास को बच्चा ठहर गया था। तुम्हारे और ललित के बीच कोई गड़बड़ तो नही।

कुसुम शर्माते हुए, नही बाबू जी कोइ समस्या नहीं।

लाला _ओह, तो कहीं तुम लोग, बच्चा रोकने का कोइ तरीका तो नही अपना रहे।

कुसुम शर्माते हुवे न में सिर हिलाई।

लाला _चलो तब तो ठीक है। आज नही तो कल बच्चा हो जायेगा।

बहु मैं कह रहा था कि आराम करने से पहले एक बार मालिश कर देती।

कुसुम _ठीक है बाबू जी।

कुसुम ने तेल हाथो में लगा कर। अपनी ससुर के पैर की मालिश शुरू की।

कुछ देर बाद कुसुम नेचोर नजर से देखा कहीं ससुर का लंद फिर से तो खड़ा नही हो गया।

लाला के टांगो के बीच बड़ा उभार देख कर वह समझ गई की ससुर जी का लंद फिर खड़ा हो गया है।

वह शर्माने लगी, उसके दिल का धड़कन बढ़ गया। वह धीरे धीरे लाला के टांगो की ओर आगे बड़ी।

लाला का लंद कच्छा के अंदर ठुमक रहा था।

जब मालिश करते हुवे कुसुम का हाथ जांघ तक पहुंची।

लाला ने कुसुम का हाथ पकड़ लिया। उसकी हाथ पकड़ कर अपने लंद के ऊपर रख दिया।

लाला _बहु, आज इसकी भी मालिश कर दो, कुछ दिनों से परेशान कर रखा है।

कुसुम शर्म से गड़ने लगी। वह हाथ हटाने लगी। लाला हाथ को पकड़े रखा।

लाला _बहु क्या अपनी ससुर के लिए इतना नही कर सकती।

कुसुम _बाबू जी मुझे बड़ी शर्म आयेगी।

अरे मैं अभी तुम्हारी शर्म दूर कर देता हूं।

लाला ने अपना लूंगी निकाल दिया और कच्छा नीचे कर के लंद बाहर निकाल दिया।

उसका लंद खड़ा होकर झटके मार रहा था।

कुसुम ने तिरछी नजर से लंद को देखा उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।

लाला _बहु, करो न मालिश, बड़ा परेशान कर रखा है कुछ दिनों से। तुम्हारी मालिश से इसको बड़ा आराम मिलेगा।

कुसुम _बाबू जी, किसी को पता चल गया तो, बड़ी बदनामी होगी।

लाला _अरे ये बात सिर्फ हम दोनों के बीच रहेगी, वैसे भी हम दोनों के अलावा यहां है कौन?

चलो मुझे और मत तड़पाओ।

कलाला ने कुसुक के हाथ को लंद पर रख दिया।

कुसुम ने लंद को सहलाने लगी।

लाला _आह बहु, बहुत अच्छा लग रहा है।

कुसुम ने तेल हाथ में लेकर लंद की मालिश शुरू कर दी।

लाला _आंखे बंद कर कहा, आह बहु बहुत अच्छा लग रहा है थोड़ा तेज़ तेज़ हाथ चलाओ।

कुसुम ने लंद को अपने मुठ्ठी में लेकर, तेज़ तेज़ मुठ मारना शुरू कर दी।

लाला का लंद उसके पति के लंद से बड़ा और मोटा था, उसे मुठ मारने में शर्म तो आ रही थी पर उसे भी अच्छा लगने लगा।

वह लगातार हाथ बदल बदल कर मुठ मारने लगी, लाला आंखे बंद कर मुठ मरवाने का मजा लेने लगा। और कुछ देर बाद लाला के लंद ने वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी मारने लगी।

लाला _आह आह, करके कराहते हुवे झड़ने लगा।

लाला के झड़ने के बाद, कुसुम अपने कमरे में भाग गई और बेड में सोकर अभी अभी हुई घटना के कारण, तेज़ तेज़ सांस लेने लगी।

उसकी कच्छी भी गीली हो चुकी थी उसने उंगली से कच्छी को चेक किया।

उसके आंखो के सामने अभी भी ससुर का लंद दिखाई दे रहा था। जो उसके पति के लंद से बड़ा और मोटा था।

वह जब सो कर उठी तो शाम हो गया था।

उसे ससुर जी के कमरे में जाने की हिम्मत नही हुई। वह कीचन का काम करने लगी।

लाला ने अपने कमरे से आवाज़ लगाया, बहु बहु,,,

कुसुम कीचन से कमरे में आया,,

कुसुम _शर्माते हुवे धीरे से कहा क्या बात है बाबू जी?

लाला अरे देखो तो, अब मैं अपने पैरो से खड़ा हो सकता हूं चल सकता हूं, ये सब तुम्हारी मालिश का कमाल है!

बहु तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।

लाला ने कुसुम का हाथ पकड़ कर कहा।

कुसुम शर्मा कर अपना सिर नीचे कर ली।

लाला _अच्छा बहु मैं बाहर जा रहा हूं, कुछ लाना है क्या?

लाला बाहर गया और टहल कर रात में लौटा, उसने खाने के लिए कुछ मिठाईयां ले आयाथा उसे कुसुम को दे दिया।

कुसुम _बाबू जी आप हाथ मुंह धोकर तैयार हो जाओ, मैं खाना लगाता हूं।

लाला _ठीक है बहु।

लाला, खाना खा कर सोने चला गया।

कुसुम भी भोजन कर कीचन का काम निपटा कर सोने चली गई।

कुसुम के आंखों के सामने अभी भी ससुर का लंद नजर आ रहा था। उसे नींद नही आ रही थी।

इधर लाला का लंद फिर से खड़ा हो चुका था।

उसे तो रात का ही इन्तजार था।

वह अपने कमरे से उठ कर बहु के कमरे की ओर गया और दरवाजा खटखटाया,

कुसुम अभी सोई नही थी, वह दरवाजा खोली।

कुसुम _ससुर जी आप इस समय।

लाला _हा बहु मुझे नींद नही आ रही थी। देखो ने मुझे ये फिर से परेशान कार रखा है।

इसकी मालिश कर फिर से शांत कर दो।

लाला ने अपना लंद दिखाते हुए कहा,,

कुसुम शर्माने लगी,,

लाला ने कुसुम का हाथ पकड़ कर कमरे के अंदर ले गया और अपना लूंगी और कच्छा निकाल कर बेड पर लेट गया।

लाला _आओ बहु।

कुसुम का हाथ पकड़ कर अपने लंद पर रख दिया।

कुसुम लंद सहलाने लगा।

लाला एक हाथ, कुसुम की चूची पर ले जाकर उसे मसलने लगा।

कुसुम तो पहले ही गर्म थी, ससुर की हरकत से वह सिसकने लगी।

लाला समझ गया की अब बहु को भी मजा आ रहा है। उसने उसकी ब्लाउज का बटन खोल दिया ओर उसकी चूची से खेलते लगा ।

कुसुम सिसकने लगी

लाला कुसुम की चूची मुंह में भर कर चूसने लगा।

वह कुसुम को अपने गोद में बिठा लिया।

और दूध को मुंह में भर कर चूसने लगा ।

कुसुम सिसकने लगी।

कुछ देर बाद बेड पर कुसुम को लिटा कर लाला उसके ऊपर आ गया और उसकी गालों को चूमने लगा। गर्दन को चूमते हुवे आगे बड़ा फिर उसकी पेट को चाटने लगा। उसकी साड़ी को खीच कर अलग कर दिया।

अब सिर्फ पेटीकोट में रह गई थी।

लाला कुसुम की पैर चूमते हुए टांग की ओर आगे बड़ा। कुसुम जोर जोर से सिसकने लगी।

लाला कुसुम की कच्छी को उतार दिया।

उसकी मस्त चिकनी chut देख कर पागल हो गया, वह chut को पागलों की तरह चाटने लगा ।

कुसुम हवा में उड़ने लगी।

लाला देर न करते हुवे अपना लंद का टोपा कुसुम के boor के छेद में रखा और एक जोर का धक्का मारा लंद boor चीरता huwa अंदर चला गया। कुसुम चीख उठी।

उसके बाद लाला ने उस रात कुसुम को अलग अलग आसनों में जी भर कर चोदा।

कुसुम को भी अपने ससुर की chudai से बहुत मजा आया। उसका पति तो उसके झड़ने से पहले ही झड़ जाता था ।

उस रात के बाद दोनो ससुर और बहु को जब भी मौका मिलता दोनो अपनी प्यास बुझाने लगे

और एक माह बाद कुसुम को गर्भ ठहर गया।

उसने 9माह बाद एक लड़की को जन्म दिया।
 
लंदन में निशा और सीमा ने कालेज में एडमिशन ले ली। वे कालेज जाने लगे। कालेज से आने के बाद वे पढ़ाई के साथ साथ अपने फूफा जी के से बिजनेस के गुर सीखने लगे।

एक दिन कालेज के कैंटीन में दोनो कॉफी पी रहे थे। तभी एक लडका उन दोनो के पास आया।

लडका _हाय।

आप लोगो ने मुझे पहचाना,,

सीमा _तुम तो हमारे क्लास में ही हो न,,

लडका _जी आपने सही कहा।

लडका _मेरा नाम आर्यन है। आप दोनो इंडियन है? मुझे इंडियन बहुत अच्छे लगते है।

मैं आप लोगों को जब देखा तभी से बात करना चाहता था।

सीमा _पर आप लोगो को इंडियन क्यू पसंद है।

आर्यन _इसका एक कारण है, मेरे डैड एक इंडियन है, मेरे डैड यहां पढ़ाई करने के लिए दिल्ली से यहां आए थे, कालेज में ही उसे मेरी मोम जो एक इटालियन है से प्यार हो गया।

सीमा _फिर।

आर्यन _मेरे डैड पढ़ाई पूरी होने के बाद यहीं रहकर अपना बिजनेस शुरू किया। और आज यहां का सबसे कामयाब बिजनेस मैन है।

सीमा _ओह।

आर्यन _आप दोनो यहां नई है, अगर कोइ मदद की जरूरत हो तो मुझे बताना, मुझे खुशी होगी। वैसे आप लोग कहा रहती है।

सीमा _ये मेरी सहेली निशा है?

आर्यन _हाई निशा जी।

निशा उसकी ओर देख कर थोड़ी झूठी मुस्कान ला दी।

सीमा _निशा की बुवा यहां रहती है हम उन्हीं के यहां रहते हैं।

आर्यन _ओह।

क्या हम दोस्त बन सकते है?

सीमा _माफ करना, हम लोग लड़को से दोस्ती नही करते। वैसे भी आप हमारे ली एक अंजान ही है।

आर्यन _ओह, जानता हूं इंडियन बहुत संस्कारी होते हैं, पर मैं ऐसा लडका नही हूं, जिसे दोस्त बनाकर आप लोगो को पछताना पड़े। मेरी मोम एक इटालियन जरूर है, पर मैं अपने बाप पर गया हूं। और मोम भी इंडियन रीति रिवाज को मानते हैं। उन्हे भी इंडियन पसंद है तभी शायद उसने मेरे डैड से प्यार की और उससे शादी भी।

तभी क्लास की घंटी लग जाती है।

निशा _बेल लग चुकी है, सीमा अब हमे चलना चाहिए।

आर्यन _हां हा, क्यू नही?

तीनो क्लास की ओर चले गए।

कुछ दिनों तक अवलोकन करने के बाद सीमा को लगा की आर्यन सच में एक अच्छा लडका है।

सीमा, आर्यन और निशा एक साथ उठने बैठने लगे।

निशा बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही बात चीत करती थी।

एक दिन आर्यन ने सीमा से पूछा।

आर्यन _सीमा, आपसे कुछ पूछना था।

सीमा_बोलो क्या पूछना है?

आर्यन_ये निशा जी, काफी शांत स्वभाव की है, बहुत कम बात करती है।

सीमा _हां वो ऐसे ही है?

आर्यन _पर मुझे पता नही क्यू, उसकी खामोशी मुझे कुछ और ही लगता है? ऐसा लगता है जैसे उसके अंदर कोइ दर्द छुपा हो।

सीमा _ऐसी कोई बात नही! ये आपका वहम है।

आर्यन _हो सकता है, यह मेरा एक वहम ही हो।

तभी निशा, जो बाथ रूम गई थी। वहा आ जाती है।

वे तीनों क्लास की ओर चले जाते है।

कालेज से घर आते समय सीमा , निशा से कहती हैं?

सीमा _निशा तुम फाइनली बताओ, तुम राज को भूलना चाहती हो की, उसे एक मौका और देना चाहती।

निशा _अचानक ये क्या सवाल करने लगी।

सीमा _क्यू की तुम्हारा लटका हुआ चेहरा, मुझे अच्छा नहीं लगता। आज तो आर्यन भी पुछ रहा था।

निशा _क्या पुछ रहा था?

सीमा _तुम्हारा चेहरा देखकर, उसे ऐसा लगता है कि तुम् अपने अंदर कोइ दर्द छुपा रखी हो। देखो कब तक ऐसी चेहरा बनाकर घूमेगी।

मुझे भी अब तुम्हारा लटका हुआ चेहरा देखा नही जाता। मुझे लगता है कि राज को तुम भुल नही पाओगी। इसलिए उसे तुम सुधरने का एक मौका देदो।

निशा _नही, मैं उस रंडीबाज को और मौका नहीं दे सकती।

सीमा _फिर, मुंह लटका कर क्यू रहती हो।

निशा _अब भूलने की कोशिश कर रही हूं न? कुछ समय तो लगेगा। निशा चीखते हुए बोली।

सीमा _ओके बाबा सॉरी, मैं तो तुम्हे बस हंसते मुस्कुराते हुवे देखना चाहती हूं, इसलिए बोल पड़ी।

वे दोनो घर पहुंच जाते हैं।

इधर राजेश स्कूल समिति के सदस्यों से मिलकर गांव में फंड इकट्ठा करने में लगा था।

वे फंड इकट्ठा करते, लाला जी के राशन दुकान में पहुंचे।

राजेश _नमस्ते लाला जी।

लाला _अरे राजेश बाबू। आइए बैठिए।

राजेश _लाला जी आपको तो पता ही होगा की हम गांव में घर घर क्यू जा रहे है?

लाला _अरे राजेश बेटा मुझे सब पता है? लगता है गांव का उद्धार आपने हाथो लिखा है। तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो बेटा।

राजेश _धन्यवाद, लाला जी।

लाला जी, आप तो काफी सम्पन्न है आपसे कुछ ज्यादा मदद की कुछ ज्यादा ही उम्मीद है?

लाला जी _गांव की बच्चो को अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिए मैं भी कुछ मदद कर सकूं यह तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात होगी बेटा।

राजेश _, ये तो बड़ी अच्छी बात है लाला जी।

लाला ने अपने नौकर से सभी के लिए पास के चाय की दुकान से चाय लाने को कहा।

राजेश _लाला जी, चाय बहुत पी लिए है, चाय को रहने दीजिए मत मंगाइये।

लाला _राजेश बेटा, पहली बार आ दुकान आए हो, ऐसे कैसे रहने दू।

बिना चाय पीए जाने नही देगें, हा।

लाला ने नौकर को चाय लाने भेज दिया।

राजेश _बोलिए लाला जी कितनी की मदद लिख दू।

लाला _राजेश बेटा, मैं स्कूल को पूरे एक लाख की मदद देने के लिए तैयार हूं, पर उसके लिए तुम्हे भी मेरी मदद करनी पड़ेगी?

राजेश _कैसी मदद लाला जी?

लाला _अब क्या बताऊं तुम्हे बेटा, मेरी बेटी लज्जो, 12वो की परिणाम में गणित विषय में पूरक आ गई है। सुना है तुम यूनिवर्सिटी में टॉप किए हो, मेरी बेटी को एक माह ट्यूशन पढ़ा देते तो वह पास हो जाएगी। तुमसे बढ़ी उम्मीद है बेटा। क्या तुम मेरी मदद कर करोगे?

राजेश _लाला जी, मैं लज्जो की गणित विषय में मदद करने तैयार हूं। दोपहर में एक घंटा पढ़ा दूंगा। घर भेज देना।

लाला _अरे बेटा, लड़की जात है वह कहा अकेली पढ़ने किसी के घर जाएगी। तुम ही आ जाना घर एक घंटा पढ़ा देना।

राजेश _ठीक है लाला जी मैं कल से ही दोपहर बाद एक घंटा लज्जो को पढ़ाने आ जाऊंगा।

लाला _ठीक है राजेश बेटा, मैं एक लाख रुपए जब तुम ट्यूशन पढ़ाने आओगे तो ।

राजेश _ठीक है लाला जी।

चाय पीने के बाद, जाने की इजाजत लेकर राजेश और उसके साथी वहा से चले गए।

इधर लाला अपनी चाल को कामयाब होता देख अपने मूछ को ऐंठने लगा।

शाला समिति के सदस्यों ने राजेश से कहा,,

राजेश, ये लाला तो एक नंबर का कमिना इन्सान है। फिर पता नही एक लाख देने कैसे तैयार हो गया? मुझे तो घोर आश्चर्य हो रहा है। कहीं उसकी कोइ चाल तो नही।

राजेश _कैसी चाल हो सकती है?

सदस्य _राजेश बाबू, तुम उसके घर जाओगे लाला के यहां तो सम्हल कर रहना, लाला की कोइ चाल न हो।

राजेश _हूं, अगर लाला की कोइ चाल होगी तो उसे भी देख लेंगे?

अब किसके घर चलना है?

वैसे भी अब लोगो के दोपहर का भोजन का समय हो गया है।

सदस्य _ राजेश बाबू, ये डाक्टर रवि का घर है? रवि क्लिनिक पर नही है वह घर आया होगा।चलो यहीं चलते हैं इसके बाद आज का काम हो जायेगा। कल निकलेंगे।

राजेश _अच्छा ठीक है।

एक सदस्य ने घर का दरवाजा खटखटाया।

इधर रवि घर के अंदर अपने कमरे में अपनी मां रजनी का गाड़ मार रहा था।

रजनी, के मुंह से दर्द से कभी चीख तो आनद में कभी सिसकारी निकल रहा था। आह उन,, आई,, मा,,,,,

आ,, अरे बेटा थोड़ा धीरे कर,,,

रवि _आह, आह,, बहुत मजा आ रहा है मां,,, क्या मस्त गाड़ है आपकी,,,

रजनी को घोड़ी बनाकर दनादन पेल रहा था।

तभी दोनो को दरवाजा खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ी।

रजनी _बेटा कोइ दरवाजा खटखटा रहा है।

रवि _साला कौन आ गया मजा खराब करने?

रवि ने अपने लंद को रजनी के गाड़ से बाहर निकाल लिया। वह हवा में झटके मारने लगा।

रवि _मां तुम जाकर देखो शाला कौन आया है? उसे भगा देना साले को और जल्दी आना? अभी huwa नही है मेरा। अपना लंद हिलाते हुए कहा।

रजनी, रवि को लंद हिलाते हुए देखी और मुस्कुराते हुवे बोली। मैं ऐसे ही जाऊंगी क्या नंगी? मुझे साड़ी पहनने में समय लगेगा।

तुम अपना टावेल लपेट लो और जा कर देखो कौन है।

रवि ने अपना चड्डी पहनकर टावेल लपेट लिया। और बनियान पहनते हुवे,,,

रवि _अरे आ रहा हूं भैया, थोड़ी देर सब्र भी नही कर सकते।

रवि ने दरवाजा खोला,,,

राजेश _नमस्ते रवि भैया,,,

रवि _राजेश तुम , अरे आवो भाई,, आओ अंदर आओ।

रवि राजेश और उनके साथियों को बैठक कक्ष में ले गया।

रवि _अरे यार रवि, बोलो कैसे आना huwa?

अरे मां देखो तो कौन आया?

रजनी _कौन है बेटा? कमरे से बाहर निकलते हुए बोली।

रवि _ये राजेश है?

रजनी _अरे बेटा, राजेश को कौन नहीं जानता।

राजेश _नमस्ते मां जी।

रजनी _नमस्ते बेटा।

तुम लोग बैठो मैं चाय बनाकर लाती हूं।

रवि _अरे मां राजेश पहली बार हमारा घर आया है? कुछ खाने के लिए हो तो ले आओ।

ठीक है बेटा।

एक सदस्य _अरे रवि भैया हम कबसे, दरवाजा खटखटा रहे थे । लगता है आप सो रहे थे हमने आपके नींद में बाधा डाल दी।

रवि _अभी अभी भोजन करके आराम ही कर रहा था। बोलो राजेश कैसा आना huwa।

राजेश ने रवि को घर उनके घर आने का प्रयोजन बताया।

रवि _यार राजेश जो तुम कर रहे हो ना, हर कोइ नही कर सकता। तुम कोइ साधारण बंदा नही हो।

रवि ने राजेश को अपनी क्षमता अनुसार मदद करने का भरोसा दिलाया।

रजनी ने चाय और नमकीन लेकर आई। चाय और नमकीन का मजा लेने के बाद।

राजेश ने रवि से जाने की इजाजत मांगा।

रजनी के पैर छूकर कहा _अच्छा मां जी हमलोग चलते है?

रजनी _खुश रहो, बेटा, अरे राजेश बेटा तुम तो रवि के दोस्त हो आता रहा करो घर।

राजेश _जी मां जी, जरूर आऊंगा।

राजेश और शाला समिति के सदस्य गण घर चले गए।

इधर रवि राजेश को बाहर तक छोड़ा और दरवाजा बंद कर घर के अंदर गया।

रजनी का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गया।

रवि ने अपना टावेल और चड्डी निकाल दिया।

रजनी को अपना लंद चूसने कहा।

रवि बेड पर लेट गया था। रजनी बेड पर चढगया और रवि का लंद मुंह में भर कर चूसने लगी।

कुछ देर में ही लंद फिर से शख्त हो गया।

रवि ने रजनी को लंद पर बैठने कहा।

रजनी ने रवि का लंद अपने हाथो से पकड़ कर अपनी boor के छेद में रख कर बैठ गई।

लंद सरसरा ता huwa अंदर चला गया।

अब रजनी रवि के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी। रवि रजनी की ब्लाउज खोल दिया और रजनी की चूची मसल मसल कर पीते हुवे नीचे से कमर उठा उठा कर लंद को boor में गहराई तक ले जाने की कोशिश करने लगा।

दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त करने लगे।

आइए अब जानते है की रवि और उसकी मां, रजनी के बीच संबंध कैसे बने?

रेखराज रवि के पिता उम्र 47वर्ष।

रजनी उम्र 43 वर्ष।

रवि, रजनी का बेटा 24वर्ष।

रति, रजनी की बेटी 22वर्ष। शादी हो चुकी हैं।

रमा, रजनी की छोटी बेटी 17वर्ष, अभी पढ़ाई कर रही है।

रजनी एक खुबसूरत संस्कारी महिला थी।

रमा के जन्म के बाद वह और बच्चा नही चाहती थी इसलिए उसने कापर टी लगवा ली थी।

रवि के पिता जी, रिखराज खेत का काम सम्हालते है। अभी भी हस्ट पुष्ट है।

अभी भी वह सप्ताह में दो बार रजनी को चोदता था।

रजनी हर 5साल बाद अपना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपना कापर टी बदलवाती थी। जब वह 42की हुई तब, यह सोच कर की अब मुझे गर्भ नही ठहरेगा।

उसने कापर टी निकलवा दी।

उसका नतीजा ये हुआ कि उसे गर्भ ठहर गया।

जब उसे मासिक धर्म समय पर नही आया तो वह एक माह और वेट की फिर भी जब उसे मासिक धर्म नही huwa तो वह समझ गई की वह पेट से हो गई।

6माह पहले की ही बात है।

वह अपनी जब पेट से हुई तो वह यह बात अपने पति को बताया।

रजनी _अजी सुनते हो?

रेखराज _क्या है रवि की मां।

मुझे लगता है कि मैं पेट से हूं। मुझ दो माह से मासिक धर्म नही huwa है।

रेखराज _ये तो बड़ी खुशी की बात है? देखा ने मेरी मर्दानगी को।

रजनी _रहने दो तुम्हारी मर्दानगी।

मुझे तो बड़ी शर्म आ रही है लोगो को पता चलेगा तो हसेंगे। रवि और रमा पर ताने मारेंगे?

रेखराज _हूं, ऐसी बात है तो बच्चे गिरवा दो।

रजनी _मैं भी यहीं सोच रही थी।

मैं सुबह ही काकी से लक्ष्मण पुर के किसी डाक्टर के पास ले जाने के लिए बोलूंगी।

अगली सुबह रजनी ने पड़ोस की काकी को बताया। उसे किसी डाक्टर के पास ले जाने को बोली,,,

काकी _अरे बहु, घर में डाक्टर के रहते तुम्हे बाहर जाने की क्या जरूरत?

रजनी _काकी तुम क्या कहना चाहती हो मैं समझी नही।

काकी _अरे देखो वो फुलवा है ना कुछ माह पहले वो भी पेट से हो गई थी। वो भी मेरे पास ही आई थी किसी डाक्टर के पास जाने के लिए।

मैं उसे अपना रवि के पास ले गई। रवि ने कुछ जांच किया। फिर उसे कुछ दवाई दिया।

एक सप्ताह में ही सब ठीक हो गया।

घर में डाक्टर के रहते, बाहर जाने की क्या जरूरत? मैं तो कहती हूं की तुम भी रवि को ही दिखा लो।

रजनी _ताई ये तुम क्या कह रही हो, रवि मेरा बेटा है।

उसे ये सब कैसे बता पाऊंगी? मुझे शर्म नही आयेगी। न बाबा मैं रवि के सामने नही जा पाऊंगी?

काकी _अरे रवि, तुम्हारा बेटा है तो क्या हुआ वह डाक्टर भी है। दूसरो का इलाज करता है तो क्या अपनी मां का इलाज नही करेगा?

अब जरा ये सोचो अगर रवि से ये बात छुपाई और कुछ ऊंच नीच हो गया और रवि को यह बात पता चल गया, तो वह तुमसे सवाल नही पूछेगा की यह बात उनसे क्यू छुपाई।

रजनी _काकी, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा।

काकी _अरे बहु, ज्यादा सोचो मत तुम रवि से बोल नही पावोगी तो मैं रवि को सब बात अच्छे से बता दूंगी। फिर वह तुम्हे दवाई दे देगा।

रजनी _काकी मुझे तो अभी से बड़ी शर्मिंदगी महसूस होने लगी है मैं रवि के सामने कैसे जाउंगी।

काकी _अरे तुम इलाज कराते तक भुल जाना की रवि तुम्हारा बेटा है। यह सोचना की वह एक डाक्टर से बात कर रही है। अच्छा मैं दोपहर में आऊंगी। जब रवि घर में दोपहर को भोजन करने आएगा। रमा भी स्कूल चली जाती है।

रेखराज भी खेत गया होगा।

तुम चिन्ता करना और शर्म करना छोड़ो।

रजनी _काकी मेरी इज्जत तो अब आपके ही हाथो में है।

दोपहर में रवि भोजन करने घर आया।

वह भोजन करके अपने कमरे में थोड़ा आराम करने लगा।

तभी काकी, रजनी के घर पहुंच गई।

काकी _बहुरिया, रवि घर में है न।

काकी _हां काकी, वह अपने कमरे में है?

काकी रवि के कमरे की ओर चली गई।

जब वह कमरे में पहुंची,,

काकी _अरे रवि बेटा क्या कर रहा है?

रवि _अरे काकी, आप, मैं थोड़ा आराम कर रहा था। कुछ काम था क्या? आओ बैठो।

रवि अपने बेड पर बैठ गया, काकी भी बाजू में बैठ गई।

काकी _हां बेटा मैं कुछ बताने आया था?

रवि _बोलो काकी , क्या बात है?

काकी _बेटा, ये बात तुम्हारी मां के बारे में है?

रवि _क्या huwa मां को ?

रजनी दरवाज़े के पीछे से बाते सुन रही थी बड़ी शर्म महसूस कर रही थी।

काकी _बेटा, तुम्हारी मां पेट से है? इस उम्र में मां बनेगी तो लोग हसेंगे, यह सोचकर बच्चा गिराना चाहती है। वह सुबह मेरे पास आई थी किसी डाक्टर के पास ले जाने बोल रही थी।

मैने कहा, अपने रवि के होते दूसरे की पास जाने की क्या जरूरत?

बेटा वह तुम्हारी मां है न अब ऐसी बात तुमसे कहने में शर्मिंदगी तो महसूस करेगी ही। इसलिए मैं यह बात तुम्हे बताने आई हूं।

जैसे फुलवा का इलाज किया था न वैसे ही तुम अपनी मां की समस्या का समाधान कर दो, बेचारी बहुत चिंतित है।

रवि _काकी, ये तुमने अच्छा किया? की यह बात तुमने मुझे बतादी। काकी आप जो कह रहे हो, वैसा ही होगा? मैं मां की समस्या का समाधान कर दूंगा। मेरे पास तो आए दिन गांव की महिलाए अपनी अपनी समस्या लेकर आते रहते है? दूसरी महिलाओं की समस्या दूर कर सकता हूं तो अपनी मां की क्यू नही।

काकी _ठीक है बेटा, अब मैं चलती हूं जो, बताना था वो तो बता दी।

काकी _ठीक है काकी।

जाते समय काकी रजनी से बोली,,

काकी _बहुरिया, तुम्हे चिन्ता करने की कोइ जरूरत नही, रवि सब ठीक कर देगा, मैने सब बता दिया है।

रजनी _पर काकी मुझे बड़ी शर्म आ रही,,

काकी _अरे, अब शर्म छोड़ो, शर्म करेगी तो इलाज कैसे होगा? रवि जो भी पूछे उसे सही सही बता देना,, अब मैं चलती हूं।

काकी के जाने के बाद।

रवि रजनी के पास आया।

रवि _मां, इसमें शर्माने की कोइ बात नही, ये सब नार्मल है! मैं कुछ दवाई दे दूंगा। सब ठीक हो जायेगा।

रवि _मां पहले तो यह कंफर्म करना पड़ेगा की तुम पेट से हो की नही।

एक काम करो ये प्लास्टिक का डब्बा ले जाओ और इसमें अपनी थोड़ा पेशाब ले आओ।

उसी से जांच हो पाएगा की, तुम पेट से हो की नही।

रजनी, पेशाब लाने की बात सुनकर शर्म से पानी पानी हो गई।

रवि, डिब्बे को वही पास में रखे टेबल पर रख दिया। और सोफे पर बैठ गया।

रजनी डिब्बे को उठाई और बाथरुम में जाकर अपनी पेशाब भरकर ले आई। उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।

डब्बे को लाकर टेबल पर रख दी।

रवि ने प्रेगनेंसी किट अपने बैग से निकाला और एक ड्रॉप से रजनी की पेशाब को लेकर प्रेगनेंसी किट पर कुछ बूंद डाला।

रिपोर्ट पॉजिटिव आया।

रजनी, वही खड़ी हो कर सब देख रही थी, वह बहुत लज्जा महसूस कर रही थी।

रवि _मां, रिपोर्ट तो पॉजिटिव है तुम सच में पेट से हो।

अब यह जानना जरूरी है की कितने माह का गर्भ है। क्यू की ३माह से ज्यादा का गर्भ huwa तो दवाई से मुस्कील हो जायेगा।

आपको पिछला मासिक धर्म कब आया था।

रजनी शर्मा रही थी, बोल नही पा रही थी,,

रवि _मां शर्माओगी तो इलाज कैसे होगा? तुम यह सोचो की मैं तुम्हारा बेटा नही डाक्टर हूं,,

रवि की बात सुनकर रजनी को कुछ हिम्मत huwa

रजनी _ओ दो माह पहले,,

रवि _ओह तो इसका मतलब है लगभग ढाई माह हो गया।

मां तुम चिन्ता मत करो दवाई से ठीक हो जाएगा।

रवि ने अपने कमरे में जाकर आलमारी से गोली निकाल लाया।

रवि _मां ये लो, ये दो प्रकार की गोली है। इस गोली को रात में सोने से पहले खानी है। और इस गोली को अंदर रखनी है?

रजनी _बेटा, ये गोली का क्या करना है,,, झिझकते हुए बोली,,

रवि _इसे अंदर रखना है।

रजनी _कहा पर बेटा। समझी नही, झिझकते हुवे बोली।

रवि _मां इस गोली रात को सोते समय अपनी योनि में डालकर रखना है?

योनि शब्द सुनते ही, रजनी शर्म से पानी पानी हो गई।

रवि _अच्छा मां रात में तुम्हारे कमर में दर्द भी हों सकता है, ये जो स्वाभाविक है, ये दर्द की गोली खा लेना, दर्द कम हो जाएगा।

मां एक बात और पूछनी थी, तुम मासिक धर्म के समय क्या पहनती हो?

रजनी शर्म के मारे बता नही पर रही थी।

मां मैं जानता हूं गांव की महिलाए तो सूती कपड़ा उपयोग करती है।

रुको मां,,,

रवि अपने कमरे में जाकर आलमारी से सैनिटरी नैपकिन एक पैकेट निकाल लाया।

मां ये सैनिटरी नैपकिन है इसे अपनी कपड़े की जगह लगाना। ऐसे समय में खून बहुत निकलेगा। ये नैपकिन खून सोंख लेगा। गीला पन महसूस हो तो नैपकिन बदल लेना।

रजनी _पर,,

रवि _पर क्या मां? शरमाओ मत, पूछो क्या पूछना है?

रजनी _इसे उपयोग कैसे करते है कभी उपयोग नही की।

रवि_मांमां अपनी एकात कच्छी हो तो दो,,

रजनी शर्म से पानी पानी हो गई।

रवि_मां, अब शर्म छोड़ो भी, जाओ ले आओ, कच्छी।

रजनी अपने कमरे में गई और अलमारी से एक कच्छी लाकर टेबल पर रख दी।

रवि ने कच्छी उठाया और उसके अंदर एक पैड सेट करते हुवे कहा।

मां इस प्रकार नैपकिन सेट कर रात में सोने से पहले पहन लेना।

रजनी शर्म के मारे चुप ही रही।

रवि _मां मुझे एक बात और बतानी थी।

योनि के आस पास बाल ज्यादा हो तो उसे साफ़ कर लेना।

क्यों की ज्यादा बाल रहने पर खून उसमें चिपक जाता जिससे इफेक्शन होने का डर रहता है।

तुम जाकर अपने कमरे में सफाई कर लो। नही तो रमा स्कूल से आ जाएगी।

रजनी शर्म से पानी पानी हो रही थी।

रवि _अच्छा का साफ़ करने के लिए क्या उपयोग करती हो?

रेजर से करती होगी, गांव की महिलाए तो रेजर का ही उपयोग करती है?

तुम चाहो तो मेरे पास क्रीम है, उसका उपयोग कर सकती हो?

रजनी _नही बेटा रेजर ही ठीक रहेगा। शर्म से पानी पानी होते हुवे बोली।

रवि _अच्छा ठीक है मां जाओ अब अपने कमरे में जाकर सफाई कर लो। मैं भी अब क्लिनिक जा रहा हूं।

रवि क्लिनिक चला गया।

और रजनी अपनी योनि की बालो की सफाई में लग गई। उसे अभी भी बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

जब शाम को रेखराज आया, तो पूछा की डाक्टर के पास गई थी।

रजनी _हां, डाक्टर ने कुछ दवाई दी है? रात में खाने को।

हा रात में आप अलग खाट लगाकर सोना।

रेखराज _ठीक है।

रात में भोजन करने के बाद, रेखराज और रमा अपने कमरे में जाकर सो गए।

रजनी कीचन आंगन में बर्तन धो रही थी।

रवि पास जाकर कहा।

रवि_मां सोने से पहले मेरे कमरे में आना।

रजनी बर्तन धोने के बाद सोने से पहले रवि के कमरे में गई।

रजनी _ओ बेटा तुमने बुलाया था, संकोच करती हुई बोली,,

रवि _हां मां, जो दोपहर में बताया था सब याद है ना।

रजनी ने शर्माते हुवे हा में सिर हिलाई।

रवि _अच्छा ठीक है, कोइ समस्या हो तो मुझे बताना।

रजनी, शर्माते हुवे अपने कमरे में चली गई।

अपने कमरे में जाने के बाद गोली को खाने के लिए अलमारी से निकाल ली और नैपकिन, कच्छी को भी।

पर उसे समझ नही आया की रवि ने किसे खाने और किसे अंदर डालने कहा है।

रजनी न चाहते हुवे भी रवि के कमरे में गई।

रवि _अरे मां, कोइ समस्या है क्या?

रजनी _बेटा किसे खाना है भुल गई, शर्माते हुवे बोली।

रवि _दिखाओ गोली को।

रजनी ने दोनो गोली दे दी।

रवि _मां इसे खा लेना और इसे अंदर डाल लेना।

रजनी शर्मा गई।

वह गोली लेकर अपने कमरे में जाने को हुई,,

रवि _मां सुबह नैपकिन बदल लेना।

रजनी शर्माते हुवे अपने कमरे में चली गई।

रेखराज आज बरामदे में ही खाट लगाकर सो गया था।

रजनी ने खाने की गोली खा ली और लेट कर अंदर डालने की गोली अंदर डाल कर नैपकिन के साथ कच्छी पहन ली।

धीरे धीरे दवाई ने असर दिखाना शुरू किया और आधी रात से बील्डिंग होना शुरू हो गया।

उसकी कमर में दर्द होने लगा तो दर्द की गोली भी खा ली।

सुबह उठी तो नैपकिन गीली हो चुकी थी। वह नैपकिन बदल ली।

उसे सुबह काफी दर्द महसूस, हो रहा था, उसकी शरीर गर्म हो गया था।

रवि सुबह उठते ही अपने मां के कमरे में गया।

रवि _मां तुम ठीक तो हो।

हरजनी _हां, बेटा, पर कमर दर्द कर रहा है और बुखार जैसा लग रहा है।

रवि _मां तुम आराम करो। मैं रमा को बोल दूंगा आज स्कूल न जाए। घर का काम सम्हाले।

रमा स्कूल नही गई घर का काम सम्हाली, रजनी आराम करने लगी।

समय समय पर पैड बदलती रही।

दो दिन बाद उसे ठीक लगा।

रमा भी स्कूल चली गई।

दोपहर में जब, रवि घर आया।

रवि _मां, अब दर्द तो नहीं है?

रवि _नही बेटा, पर वो रक्तस्राव अभी भी हो रहा है।

रवि _मां रक्तस्राव तो कुछ दिनों या हफ्तों तक हो सकता है।

नैपकिन को समय समय पर बदलती रहना।

और कोइ समस्या तो नही।

रजनी _नही, बेटा।

एक सप्ताह बाद।

दोपहर में रवि ने पूछा,,

रवि _मां रक्त स्राव अभी भी हो रहा है क्या?

रजनी _बेटा, अभी भी थोड़ा थोड़ा हो रहा है। बेटा नैपकिन खतम हो गया है? और है क्या?

रजनी की शर्म अब थोड़ा कम हो गया था।

रवि _हा मां, रुको मैं अभी देता हूं।

रवि ने अलमारी से एक पैकेट और दे दिया।

एक सप्ताह इसी तरह चलता रहा।

रजनी की शर्म भी कम होने लगी।

रदो सप्ताह बाद _मां अब भी रक्तस्राव तो नही हो रहा है न।

रजनी _नही बेटा।

रवि _, मां एक बार और चेक करना पड़ेगा, कई महिलाओं का ठीक से साफ़ नही huwa रहता है। गर्भाशय में इन्फेक्शन फैलने का डर रहता है। अगर ठीक से साफ़ न huwa हो तो और गोली खानी पड़ती है।

रजनी डर गई,,,

रवि मां चेक करने पड़ेंगे?

ररजनी _कैसे चेक बेटे?

रवि _वो, योनि चेक करना पड़ेगा अंदर ब्लड तो नही रुका हुआ है।

रजनी शर्म से पानी पानी हो गई,,

रक्या huwa मां,,

रवि _बेटा मुझे बड़ी शर्म आयेगी?

रवि मां तुम अपनी आंखे बंद कर लेना, बस थोड़ा समय ही लगेगा।

चलो मेरे कमरे में।

रजनी न चाहते हुवे, वह रवि के कमरे में चली गई।

रवि _मां तुम लेट जाओ।

रजनी संकोच करते हुवे लेट गई और अपनी आंखे बंद कर दी।

ररवि ने अपने हाथ में दस्ताना पहना फिर,,

मां अपनी कच्छी निकालो,,

रजनी ने शर्माते हुवे अपनी कच्छी निकाल दी।

रवि _थोड़ा टांगे चौड़ी करो।

रजनी ने अपने आंखे बंद कर दी। और टांगे चौड़ी रजनी शर्म से पानी पानी हो रही थी और उसकी दिल की धड़कन तेज़।

पता नही अब क्या होगा?

रवि ने जब रजनी की मस्त फूली हुई चिकनी boor देखा तो उसका land न चाहते हुए भी तन गया।

रवि अपनी दो उंगलियां रजनी के योनि में डालकर चेक करने लगा।

रजनी के मुंह से सिसक निकलने वाली थी जिसे उसने दबाए रखा।

रवि अपनी उंगलियों को गहराई तक डालकर बाहर निकाला तो उस पर कुछ ब्लड नजर आया।

रवि _मां अभी पूर्ण रूप से सफाई नही huwa है मैं तुम्हे एक गोली और देता हूं।

आज रात खा लेना।

फिर पूरी तरह साफ हो जाएगा।

रजनी बेड से उठी और शर्म के मारे वह कमरे से चली गई।

रात में रवि ने रजनी को गोली देते हुए खा लेने के लिए कहा।

रजनी ने गोली सोने से पहले खा ली।

गोली के प्रभाव से कुछ दिनों तक और रक्तस्राव huwa।

एक सप्ताह बाद,,,

रवि दोपहर में रजनी से पूछा,,

मां अब कैसा है?

रक्त स्राव बंद huwa

रजनी _शर्माते हुवे हा बेटा, अब तो रक्त स्राव बिलकुल बंद हो गया है। अब मैं बिल्कुल अच्छी महसूस कर रही हूं।

रवि _मां, एक बार फिर से चेक कर लेते है?

चलो कमरे में।

रजनी राजेश के कमरे में गई और बेड पे जाकर लेट गई और अपनी कच्छी उतार दी।

रजनी की शर्म अब कम हो गया था।

राजेश ने हाथ में दस्ताना पहन कर,,

रवि _मां टांगे चौड़ी करो,,

रजनी शर्मा कर टांगे चौड़ी कर दी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।

राजेश ने एक बार फिर रजनी की मस्त फूली चिकनी chut देखा तो फिर से न चाहते हुवे उसका लंद तनकर झटका मारने लगा।

रवि ने दो उंगली योनि में डालकर जांचना शुरू कर दिया।

इस बार रजनी अपनी सिसकारी नही रोक पाई।

रवि _क्या huwa मां, दर्द हो रहा है क्या?

रजनी _नही बेटा।

शर्म से पानी पानी होते हुए बोली।

रवि ने उंगली बाहर निकाल कर देखा,,

रवि _मां, अब तो गर्भसाय पूरी तरह साफ हो गया है।

रजनी उठ कर बैठ गई। और अपनी कच्छी पहन कर। कमरे से चली गई।

उसे बहुत शर्म महसूस हो रही थी।

वह अपने कमरे मे जाकर लेट गई।

कुछ दिन बाद दोपहर में,,,

रवि _मां तुमसे कुछ बात कहनी थी?

रजनी क्या बात है बेटा?

रवि _मां, अब आप ध्यान रखना कहीं फिर से गर्भ न ठहर जाए। बार बार बच्चा गिराने से शरीर कमजोर हो जाता है।

रजनी _बेटा मैं तो तुम्हारे बापू को मना करती हूं वो मानते ही नहीं।

रवि _मां, बापू का मन करता होगा? आखिर कब तक वह अपने को रोक पायेगा।

तुम कोइ उपाय कर लो।

ये लो मां बापू से कहना की संबंध बनाने से पहले ये पहन ले।

रवि ने कंडोम का पैकेट रजनी को देते हुए कहा,,,

रजनी _ये क्या है बेटा?

रवि _मां ये कंडोम है!

रजनी _पर इसका करना क्या है?

मां मेरे कमरे में आओ तुम्हे बताता हूं।

रजनी रवि के पीछे पीछे कमरे में चली गई।

बेड में दोनो बैठ गए।

रवि ने कंडोम का पैकेट से एक कंडोम निकाला और उसे फाड़कर रजनी को दिखाया।

रजनी _बेटा ये तो कोइ गुब्बारा लग रहा है।

रवि _हा ये गुब्बारे जैसा ही है? पर फुलाने वाला नही, लगाने वाला है?

रजनी _पर इसे उपयोग कैसे करना है?

रवि _हां इसका उपयोग थोड़ा सावधानी से करना पड़ता है।

इसे संबंध बनाने से पहले बापू के लिंग में चढ़ा देना। संबंध बनाने के बाद बापू का पानी इस कंडोम के अंदर ही रह जायेगा, गर्भ में नही जायेगा। और तुम्हे गर्भ नही ठहरेगा।

अधिकांस लोग गर्भ ठहरने से बचने के लिए गर्भ निरोधक के रूप में इसका उपयोग करते है?

रजनी शर्म से गड़ी जा रही थी।

रजनी _पर बेटा इसे मुझे अपने हाथो से पहनना पड़ेगा, मुझे बहुत शर्म आयेगी, तुम्हारे बापू क्या समझेंगे?

रवि _बापू को बोल देना स्वास्थ्य केंद्र में नर्स ने ये दिया है और उपयोग करना सिखाया है?

मां इसे लगाते समय ध्यान रखना अंदर हवा न भर जाए नही तो कंडोम फट जायेगा।

रजनी _बेटा, इसे कैसे लगाना है, बता देते तो,,,,

रवि _अच्छा ठीक है, तुम्हे सीखा देता हूं इसे इसे उपयोग कैसे करना है? पर तुम शर्माना मत,,

रजनी ने हा में सिर हिलाया,,,

रवि ने अपना टावेल निकाल कर अपना कच्छा भी उतार दिया।

रवि का लंद खड़ा huwa था, रजनी की नजर जब उसके लंद पर गया तो वह शर्म से पानी पानी होने लगी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

रवि _मां देखो कंडोम कैसे लगाना है।

रजनी राजेश के लंद की ओर देखने लगी जो उसके पति के लंद से थोड़ा बड़ा और मोटा था।

रवि _, मां, चलो अपने हाथो से कंडोम चढ़ाओ।

रजनी _बेटा, मुझे शर्म आ रही,,,

रवि _मां, यहां हम दोनो के सिवा है कौन?

मैने भी तो आपके योनि में उंगली डाल कर जांच किया, चलो लगाओ,

रजनी ने कंडोम को रवि के बताए अनुसार लंद पर चढ़ा दिया।

रवि _मां अब तो आपको कंडोम चढ़ाना, आ गया।

अब कंडोम में लिंग का पानी गिरने के बाद सावधानी से कंडोम को बाहर निकालना होता है। फिर कंडोम को बांध कर उसे सही जगह फेकना होता है?

रवि _मैं आपको अच्छे से सीखा ही दू।

लिंग का पानी गिरने के बाद इसे सावधानी से निकलना कैसा है?

रवि ने लंद पर कंडोम लगाकर मुठ मारना शुरू कर दिया।

वह रजनी, रवि को मुठ मारते हुवे देखने लगी,, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी। रवि को मजा आ रहा था।

जब से उसने अपनी मां की मस्त फूली हुई चिकनी chut देखा था। उसके मन में पाप आ गया था।

उसे अपने मां के सामने मुठ मारने में मजा आ रहा था।

रवि _मां क्या आप ऐसे ही देखती रहोगी?

पानी निकालने में मेरी मदद करो?

रजनी शर्म से गड़ी जा रही थी, वह कांपते हाथो से रवि के लंद को पकड़ लिया और उसे धीरे धीरे हिलाने लगी।

रवि _मां थोड़ा तेज़ तेज़ करो,,

रजनी ने अपनी हाथो की गति बढ़ा दी।

रवि_आह, बड़ा अच्छा लग रहा है मां, हा ऐसे ही,,, हा और तेज़,,,

रजनी तेज़ तेज़ मुठ मारने लगी।

रवि _मां, मेरा पानी छूटने वाला है, थोड़ा और तेज़,,, आह आह,,

रवि का पानी छूटने लगा,,,

कंडोम में सारा पानी भर गया, कंडोम नीचे लटकने लगा। लिंग भी अब ढीला हो गया।

रवि _मां देखो अब इसे कैसे निकालना, एवम बांधना है।

रवि ने लिंग से कंडोम निकाल दिया और उसे बांध कर दिखाया।

रवि _मां अब तो आप सब कुछ अच्छे से सीख गई होगी? अब बापू का जब मन करे उसे कंडोम पहना देना, बिना कंडोम के उससे दूर ही रहना।

रजनी शर्माते हुवे अपने कमरे में चली गई।

रात में जब रमा और रेखराज भोजन करने के बाद, अपने कमरे में चले गए।

रवि रजनी के पास जाकर कहा,,,

रवि _मां, तुम्हे याद है ना जो दोपहर को सिखाया था,,,

रजनी शर्मा गई,,,

रजनी अपने कमरे में गई, आज फिर रेखराज ने रजनी को chudai के लिए कहा,,

रेखराज _रमा की मां, अब और कितना दिन तड़पाओ गि, मुझे आज तो देदो,,,

रजनी _ठीक है जी, पर तुम्हे भी मेरा कहना मानना होगा।

गर्भ न ठहरे इसके लिए उपाय करना होगा?

रेखराज _कैसा उपाय?

रजनी ने रेखराज को कंडोम के बारे में बताया।

रेखराज कंडोम का उपयोग करने तैयार हो गया।

रजनी ने संभोग से पहले रेखराज के लिंग पर कंडोम चढ़ा दिया।

कंडोम लगा कर करने में रेखराज को उतना मजा नही आया फिर भी chut न मिलने से अच्छा है कंडोम लगा कर ही मिल जाए।

अगले दिन दोपहर में रवि भोजन के बाद अपने कमरे में लेता था,,

उसने रजनी को आवाज़ दिया।

रजनी कमरे में आई।

रजनी _क्या बात है बेटा?

रवि _मां, आओ बैठो।

कैसा रहा कल रात में, बापू ने पहली बार कंडोम का उपयोग किया है? क्या बोल रहा था?

रजनी शर्मा गई !

रवि _मां बताओ न,,

रजनी _वो बेटा, तुम्हारा बापू कह रहा था कि कंडोम लगाकर करने से ज्यादा मजा,,, नही,,,

रवि _हा, कुछ लोगो को कंडोम से करने में मजा नहीं आता। फिर भी गर्भ से बचने के लिए कुछ तो समझौता करना पड़ेगा ही। वैसे तुमको अच्छा लगा कि नही,,,

रजनी _धत बदमाश,,, रजनी शर्म से अपना चेहरा छिपा ली।

रवि _मां, इसमें शर्माने की क्या बात है? मां मुझे तुमसे कुछ कहना था?

कल तुमने मेरी मुठ मारी थी न तो बहुत मजा आया था। उसे याद करके मेरा लिंग फिर अकड़ गया है। आज फिर मुठ मार के शांत कर दो।

रजनी _न, मुझेसे नही होगा?

रवि _पर क्यू?

रजनी _मुझे बहुत शर्म आती है?

रवि _इसमें शर्माने की क्या बात यहां हम दोनो ke सिवा है कौन?

रवि ने अपना टावेल और चड्डी उतार दिया।

उसका लंद रजनी के आंखों के सामने हवा में लहराने लगा।

रजनी का दिल फिर जोरो से धड़कने लगा,,,

रवि ने रजनी का हाथ पकड़ कर अपने लंद पर रख दिया।

रजनी मुठ मारना शुरू कर दी। पहले धीरे धीरे उसके बाद तेज़ तेज़।

रवि को बहुत मजा आ रहा था। रवि जोश में आकर एक हाथ से रजनी के दूध मसलने लगा।

रजनी भी गर्म होने लगी।

रवि _मां बहुत अच्छा लग रहा है और थोड़ा तेज़ तेज़ करो?

रवि _आह,, आह,, मां और थोड़ा तेज़,, आह,

मां, अब बस करो,,

अब आप लेट जाओ,,,

रजनी _पर क्यू बेटा?

मुझे आपका एक बार फिर चेक अप करना है?

रजनी _पर बेटा तुमने तो कहा था, बिल्कुल साफ़ हो गया है?

रवि _हा, पर क्या पता, कुछ अंदर रह गया हो, बीच बीच में चेक करता रहना पड़ेगा।

चलो लेट जाओ।

रजनी _लेट गई और अपना कच्छी उतार दी।

रवि बेड पर चढ़ गया और रजनी के दोनो टांगे चौड़ी कर दिया।

पहले उंगली को boor में डालकर अंदर बाहर किया जिससे रजनी सिसकने लगी। उसकी boor पानी छोड़ने लगी।

रवि ने देखा उसकी मां गर्म हो चुकी है

वह अपना खडा लंद पकड़कर उसका टोपारजनी के योनि मुख पर रख कर एक करारा धक्का मारा लंद एक ही बार में आधा से ज्यादा अंदर चला गया।

रजनी के मुंह से हल्का चीख निकल पड़ी

राजेश ने एक और धक्का लगा दिया जिससे लंद पूरी तरह boor में समा गया।

रजनी आंखे बंद कर लेती रही।

रवि ने चोदना शुरू कर दिया।

लंद को boor में गपागप अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

रजनी को बहुत मजा आने लगी वह अपने मुंह से मादक सिसकारी निकालने लगी।

वैसे तो रवि ने गांव की कई औरतों को चोद चुका था, पर अपने मां को चोदने में उसे बड़ा मज़ा आ रहा था

वह रजनी के ब्लाउज के बटन खोलने लगा।

बटन नही खुला तो, रजनी ने स्वयं ही अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

जिसे देखकर रवि समझ गया की मां अब पूरी तरह जोश में आ गई है और मजा ले रही है।

रवि ने रजनी की चुचियों को अपनी हाथ से मसल मसल कर चूसने लगा। और साथ ही chudai भी जारी रखा, रजनी का मजा दो गुना हो गया।

वह नीचे से कमर उठा उठा कर रवि की मदद करने लगी।

दोनो की संभोग का अपार सुख प्राप्त हो रहा था ।

रजनी को जो मजा रवि से आ रहा था, ऐसा मजा तो उसका पति जब नया नया शादी huwa था तब देता था।

रजनी खुद को ज्यादा देर तक नही रोक सकी और झड़ने लगी।

रवि ने chudai जारी रखा और तेज़ तेज़ धक्के लगाते रहा।

जैसे ही वह झड़ने की स्थिति में पहुंचा अपना लंद बाहर निकाल लिया, और रजनी के चूची में ही झड़ने लगा, एक दो पिचकारी तो रजनी के चेहरे पर भी गिरा।

रजनी _को बड़ी शर्म आ रही थी।

वह बेड से उठी और सीधे बाथरुम में गई। कपड़े से स्तनों और चेहरे पर लगा वीर्य साफ करने लगी।

इधर रवि गहरी नींद में सो गया।

रजनी ने देखा की रवि के क्लिनिक जाने का समय हो चुका है? फिर भी सोया हुआ है? वह उसे उठाने के लिए गई।

रजनी _रवि, बेटा उठो क्लिनिक नही जाना है क्या?

रवि नींद से जागा,,

अपनी मां की ओर देखा,,

रजनी शर्म के मारे अपने कमरे में चली गई।

रवि मुस्कुराने लगा।

रवि तैयार होने के बाद रजनी के कमरे में गया।

रजनी अपनी बाल बना रही थी।

रवि ने पीछे से रजनी को अपनी बाहों में भर लिया?

रजनी _छोड़ो क्या कर रहा है?

रवि _अपनी मां को प्यार? तुमको आज मजा आया की नही।

रजनी _ये गलत है? अगर किसी को पता चल गया तो मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

रवि _मां, ये राज सिर्फ हम दोनो के बीच रहेगा, किसी को कुछ पता नही चलेगा?

रवि _अब जाते हुए एक चुम्मा तो दे दो।

रवि ने रजनी को अपनी ओर घुमा दिया।

और उसकी ओंठो को चूम लिया।

रजनी ने राजेश को धकेलते हुवे कहा,,

रजनी _चल हट बेशरम।

रात में रेखराज ने फिर कंडोम लगाकर चोदा।

अगले दिन दोपहर में जब भोजन करने रवि घर आया।

रवि ने घर पहुंच ते ही रजनी को बाहों में भर लिया।

रजनी _अरे बेटा क्या कर रहा है छोड़ो मुझे?

रवि _मां चलो न करते हैं? बड़ा मन कर रहा है?

रजनी _न, ये पाप है? छोड़ो मुझे।

रजनी ने रवि को अपने से दूर कर दिया।

रवि मुंह लटका कर, अपने कमरे में चला गया।

रजनी ने भोजन करने बुलाया,,

रवि ने चुपचाप भोजन किया,,, और अपने कमरे में चला गया।

रजनी _मुस्कुरा रही थी,,,

रवि अपने कमरे में सोने की कोशिश करने लगा,,,

तभी रजनी भोजन कर बर्तन धोने के बाद उसके कमरे में पहुंची।

रजनी _हूं, नाराज है क्या मुझसे?

रवि _चुप चाप लेटा रहा।

रजनी _लगता है तुम नाराज हु, अच्छा मैं भी जा रही अपने कमरे में सोने! अगर कुछ चाहिए तो मेरे कमरे में आ जाना।

और मुस्कुराते हुवे अपनी कमर मटकाती हुई अपने कमरे में चली गई।

रवि, ने अपनी मां द्वारा कहीं बात सुना की कुछ चाहिए तो मेरे कमरे में आ जाना, वह खुश हो गया।

कुछ देर बाद रवि अपने कमरे से निकल कर अपने मां की कमरे की ओर गया।

कमरे की दरवाजा बंद था।

उसने दरवाजा खटखटाया,,

रजनी ने दरवाजा खोली,,

रजनी _अरे क्या huwa

रवि _ आपने कहा था की कुछ जरूरत हो तो कमरे में आ जाना।

रजनी _हां, क्या चाहिए?

रवि _दूध पीना था?

रजनी _तुम बैठो मैं दूध गरम करके लाती हूं।

ररजनी जब जाने को हुई तो रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया। मुझे ये वाली दूध पीने है।

रजनी को खींचकर अपनी गोद में उठा लिया और बेड बैठ गया।

उसके बाद उसकी ओंठो को चूसने लगा।

उसकी ब्लाउज को निकाल फेका और स्तनों को मसल मसल कर पीने लगा।

रजनी बहुत गर्म हो गई उसकी मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।

रवि ने रजनी की साड़ी निकाल फेका अब वह सिर्फ पेटीकोट में थी।

रवि में रजनी को बेड किनारे लिटा कर उसकी chut चाटने लगा।

पहली बार chut चटवाने में उसे बहुत मज़ा आया उसके बाद रवि ने रजनी को लंद चूसना सिखाया।

रजनी बहुत अच्छे ढंग से लंद चूसने लगी।

उसके बाद रवि ने रजनी को घोड़ी बनाकर, जमकर चोदा।

और जब वह झड़ने को huwa तो अपना लंद बाहर निकाल कर रजनी की चुचियों और चेहरे पर अपना वीर्य छोड़ने लगा।

अब हर रोज दोपहर में रजनी और रवि chudai का खेल खेलने लगे। और मजा लेने लगे।

एक दिन रवि ने रजनी से कहा,,,

रवि _मां, तुम कहती हो ना की कंडोम लगाकर करने से बापू को मजा नही आता उसका एक उपाय है, जिससे गर्भ भी नही ठहरेगा और बापू को खुब मजा भी आयेगा।

रजनी _वो कैसे बेटे?

रवि _आओ तुम्हे एक वीडियो दिखाता हूं।

रजनी वीडियो देखने लगी। जिमसे एक मर्द कई मर्द औरतों की गाड़ मार रहा था।

रजनी उसे देखकर आश्चर्य में पड़ गई।

रवि _मां कुछ समझ में आया।

रजनी _पर बेटा, उसमें तो बड़ा दर्द होगा?

रवि _शुरू शुरू में होगा उसके बाद ठीक हो जायेगा।

रवि ने अपने आलमारी से एक क्रीम निकाल कर अपने लंद और रजनी के गाड़ में भर दिया, पहले उंगली को गाड़ में डालकर उसे फैलाने की कोशिश किया फिर अपना लंद उसकी गाड़ में उतार ही दिया। रजनी को बहुत दर्द huwa, पर धीरे धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। उसकी गाड़ का छेद फैल गया अब।

रवि रोज ही पहले chut मारता फिर गाड़।

रजनी को भी ज्यादा मजा आने लगा। अब वह रेखराज को बिना कंडोम के ही गाड़ मरवाता।

रेखराज को भी गाड़ मारने में ज्यादा मजा आ ता। अब वह सिर्फ गाड़ ही मारता।

रवि पहले boor चोदता उसके बाद आखरी में गाड़ मारकर झड़ जाता।

कभी कभी रवि जी रात में चोदने का मन होता तो रेअपने बापू के सोने के बाद, अपने कमरे में आने की कह देता, रजनी रेखरज के सोने के बाद रवि के कमरे मे चला जाता, और घंटो chudai का मजा लेने के बाद अपने कमरे में आ जाती।
 
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अगले दिन स्कूल में शाला विकास समिति का बैठक रखा गया। बैठक में बताया गया की हमारे पास लगभग 5लाख रुपए, एकत्र हो चुके है।

सदस्य _राजेश बाबू, अब आप बताइए आगे क्या करना है?

राजेश _5 कक्षा है तो 5 शिक्षक होना चाहिए। माधुरी मैडम, शाला का मैनेजमेंट एवम अध्यापन कार्य की निगरानी करेगी। और शिक्षको को आवश्यक मार्गदर्शन करेगी।

इसलिए हमे पांच नए शिक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए। स्कूल में चपरासी भी नही है। हमे एक ऐसे व्यक्ति की भी नियुक्ति करनी चाहिए जो स्कूल की साफ सफाई करे।

इसके लिए न्यूनतम मानदेय पर विचार करना चाहिए।

हमारे पास लगभग 5लाख राशि है। हम प्रेत्येक शिक्षक को 5000रुपए मासिक मानदेय देगें। इस प्रकार स्टॉफ पर साल भर में 360000 रुपए खर्च होंगे।

शेष बचे रुपए से स्कूल का रंग रोगन और भौतिक संसाधन पर खर्च किया जाए।

कल गांव में मुनादी कराया जाए जो पड़े लिखे महिलाए है जो शाला में पढ़ाने के इच्छुक है वे अपना आवेदन प्रधान अध्यापिका के पास 2दिनो में जमा कर दे। इसकी जानकारी शाला और पंचायत के सूचना पटल पर भी चस्पा कर दिया जावे।

सभी सदस्यों ने राजेश के बातो पर अपनी सहमति दिया।

बैठक समाप्त होने के बाद राजेश घर लौटा।

दोपहर का भोजन करने के बाद कुछ समय अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया।

उसे याद आया की उसे तो आज लाला के घर जाना है। उसकी बेटी को ट्यूशन पढ़ाने।

वह पुनम को जानकारी देकर की वह लाला के घर जा रहा है। उसकी बेटी को ट्यूशन पढ़ाने वह 2घंटे

में घर आ जायेगा, घर से लाला के घर की ओर निकल पड़ा।

इधर लाला ने अपनी पत्नि और बहु कुसुम को बुलाकर बता दिया,,

लाला _तुम दोनो को पता है कि ठाकुर साहब ने मुझे हवेली क्यू बुलाया था?

ललिता _नही जी मैं तो आपको पूछना ही भुल गई, क्यू बुलाया था ठाकुर ने आपको हवेली पर।

लाला _ठाकुर साहब, राजेश को गांव से बेइज्जती करके भगाना चाहता है?

कुसुम _पर क्यू ससुर जी, राजेश और ठाकुर की क्या दुश्मनी है?

लाला _राजेश बाबू गांव वालो की भलाई के लिए काम कर रहा है और ठाकुर नही चाहता की इस गांव का कोइ भलाई हो।

ललिता _ओह, ये बात है, पर आपको क्यू बुलाया था।

लाला _ठाकुर साहब ने एक प्लान बनाया है!

कुसुम _कैसा प्लान? ससुर जी।

लाला _ठाकुर साहब ने प्लान बनाया है कीमैं राजेश को, लज्जो को ट्यूशन पढ़ाने घर बुआऊ। फिर तुम दोनो उसे अपनी जाल में फंसाओ और मौका देखकर उस पर इज्जत लूटने की कोशिश करने का इल्जाम लगा दो।

फिर गांव वाले उसे बेइज्जत कर गांव से निकाल देगा। अगर हम कामयाब हो गए तो ठाकुर साहब 5लाख रुपए देगा।

ललिता _पर गांव के लोग तो उस छोरे पर बहुत विश्वास करते हैं। क्या गांव वाले हमारा कहना मानेंगे।

वैसे भी तुम पर तो लोग भरोसा नहीं करेंगे। और यदि लोगो को सच पता चल गया तो हमको ही गांव से बेदखल कर देगें।

लाला _जानता हूं, पर हमे खतरा मोल लेना ही पड़ेगा। ये राशन दुकान तो ठाकुर साहब के मेहरबानी से ही चल रहा है। अगर उसका कहा नही माना तो ठेका किसी और को दिला देगा।

कुसुम _ससुर जी आप चिन्ता मत करो, मैं राजेश बाबू को ऐसे फसाऊंगी की गांव वालो को मानना ही पड़ेगा, की राजेश ने मेरा इज्जत लूटने की कोशिश किया है।

लाला हस्ते हुवे कहा,,

लाला _आखिर तुम दोनो हो ही इतनी सुंदर राजेश तो क्या कोइ भी तुम्हारे जाल में फंस जायेगा।

ललिता _पर जी राजेश, मेरी जाल में कैसे फसेगा?

लाला _अरे मेरी जान आज कल के नौजवानों को ज्यादा उम्र की औरतें ज्यादा पसंद आता है? क्या पता राजेश भी उनमें से एक हो। वैसे भी आज भी तुम बड़ी कयामत लगती हो।

तुम दोनो प्रयास करो, जिसके भी जाल में फंसे काम बनना चाहिए।

हा हा हा हा,,,

वो आज दोपहर को आने वाला है! ट्यूशन पढ़ाने, लज्जो कहा है?

ललिता _वो टीवी के सामने बैठ कर कोइ कार्यक्रम देख रही है।

लाला _अच्छा उसे बता दो आज उसे ट्यूशन पढ़ाने राजेश आ रहा है, तैयार रहे।

ललिता _ठीक है जी।

ललिता ने लज्जो को इस बात की जानकारी दी की राजेश बाबू तुम्हे ट्यूशन पढ़ाने आने वाले है तुम तैयार हो जाओ।

लज्जो _ठीक है मां।

कुसुम और ललिता भी, तैयार हो गई, वे दोनो ऐसी साड़ी और ब्लाउज पहन ली जिससे वे खुबसूरत और सेक्सी लगे।

कुछ देर बाद राजेश लाला के घर पहुंचा, वह दरवाजा खट खटाया।

ललिता _बहु, लगता है राजेश बाबू आ गया, जाओ दरवाजा खोल दो।

कुसुम दरवाजा खोलने गई।

राजेश _नमस्ते भाभी जी।

कुसुम _नमस्ते जी।

राजेश _वो लाला जी ने लज्जो को ट्यूशन पढ़ाने घर बुलाया था।

कुसुम _हां हा, ससुर जी ने बताया था, आइए न बाबू जी अंदर आइए।

कुसुम अपनी गांड़ मटकाते हुवे, अंदर जाने लगी।

राजेश भी उसके पीछे पीछे चला गया।

ललिता _आओ राजेश बेटा, लज्जो के बापू ने बताया था की आज तुम ट्यूशन पढ़ाने आने वाले हो।

आओ बैठो।

राजेश घर के बरामदे पर रखी कुर्सी पर बैठ गया।

ललिता _अरे बेटा यहीं पढ़ाओगे की लज्जो की कमरे में।

राजेश _अरे, मां जी बरामदा ही ठीक रहेगा। एकात टेबल होगा तो यहां लगा दीजिए।

ललिता _बेटा टेबल तो लज्जो के कमरे में ही है। वही बैठकर पढ़ा देना।

राजेश _राजेश _मां जी मुझे लगता है ये बरामदा ही ठीक रहेगा!

ललिता _अच्छा ठीक है बेटा जैसी तुम्हारी इच्छा।

टेबल को बरामदे में लाया गया।

लज्जो _नमस्ते मास्टर जी।

राजेश _हंसते हुवे कहा, मुझे मास्टर नही भैया कहो।

ललिता _अरे, बहु राजेश के लिए। चाय तो बना दो।

कुसुम _ठीक है मां जी।

राजेश _अच्छा लाजो तुम मुझे एक कॉपी दो, उसमें मैं तुम्हे कुछ सवाल दूंगा उसे तुम हल कर दिखाओ, इससे मैं समझ पाऊंगा की गणित में कहा दिक्कत है?

लज्जो _ठीक है भैया?

उधर कुसुम कीचन में चाय बनाने लगी!

और राजेश लाजो को पढ़ाने लगा।

ललिता कीचन में गई।

ललिता _बहु, सुनो।

कुसुम _जी मां जी।

ललिता _जल्दबाजी में कोइ कदम मत उठाना। कहीं तुम्हारी गलत हरकतों से राजेश को खराब न लगे और वह कल से आना बंद कर दे।

कुसुम _मां जी, आप चिन्तामत करो, मैं उसे धीरे धीरे अपनी जाल में फसाऊंगा।

कुसुम चाय बनाकर राजेश के पास गई,

कुसुम _लो राजेश बाबू चाय लो, और बताओ चाय कैसी बनी है?

राजेश ने चाय का कप उठाया, और एक चुस्की लेकर कहा,, वाह भाभी सच में चाय बहुत अच्छी बनी है?

कुसुम _शुक्रिया राजेश बाबू।

राजेश _अरे भाभी जी, आप राजेश बाबू की जगह देवर जी भी कह सकती है? वैसे भी ललित भैया मुझसे बड़े है।

कुसुम _अगर ऐसी बात है तो आजअब मैं आपको देवर जी ही कहूंगी?

वैसे यहां मेरे कोइ देवर नही है, मुझे भी देवर मिल जायेगा।

ललिता _अरे चलो ये अच्छा huwa मेरे बहु को एक देवर मिल गया।

ललिता _अच्छा बेटा अब तुम लोग पढ़ाई में ध्यान दो, हम लोग भी घर का काम निपटाते है कोइ जरूरत हो तो बता देना।

राजेश _ठीक है मां जी।

कुछ देर बाद कुसुम झाड़ू लगाने बरामदे में आई और झाड़ू लगाने लगी।

झाड़ू लगाते समय वह ऐसे झुकी थी की उसकी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां, बाहर से साफ साफ स्पष्ट रूप से दिखे।

गोरे गोरे मस्त सुडौल चूचियां जो आधे से ज्यादा साफ साफ ब्लाउज के बाहर से दिख रही थी, को हिलाते हुवे झाड़ू लगाने लगी। ताकि राजेश की नजर उस पर पड़े और वह उत्तेजित हो।

वह राजेश के आसपास झाड़ू लगाने लगी और तिरछी नजरों से राजेश की ओर देखने लगी।

पर राजेश ने उसका ध्यान नहीं दिया।

झाड़ू लग जाने के बाद, ललिता पोछा लगाने के लिए आई, बरामदे में राजेश के आस पास ऐसे पोछा लगाने लगी जिससे राजेश उसके मस्त स्तनों को अच्छे से देख सके।

पर राजेश ने उस पर ध्यान नहीं दिया।

इधर राजेश ने सवालों के माध्यम से यह जान लिया की लाजो को गणित में कहा दिक्कत है, 2घंटे पढ़ाने के बाद वह अभ्यास कार्य देकर वहा से चला गया।

उसके जाने के बाद,,,

कुसुम _मां जी आज तो राजेश ने हम पर ध्यान ही नही दिया?

ललिता _अरे बहु , आज पहला दिन है, कब तक हमारी ओर मर्द की नजरों से नही देखेगा?

हमे कुछ दिनों तक धैर्य से काम लेना होगा, और योजना बनाना होगा।

शाम के समय घर में राजेश और भुवन आंगन में खाट लगाकर बैठे थे। कुसुम चाय लेकर आई।

घर के सभी लोग उपस्थित थे केशव प्रसाद को छोड़कर।

आरती _राजेश भैया, गांव में मुनादी huwa है की स्कूल में पढ़ाने की इच्छुक व्यक्ती अपना आवेदन स्कूल में जमा करे। भैया मैं स्कूल में पढ़ाना चाहती हूं, पर मां मना कर रही है। आप ही समझाइए न मां को।

पदमा _राजेश बेटा इसके लिए, लड़का देख रहे कोई अच्छा लडका मिले तो, हम इसका हाथ पीला कर ना चाहते है । शादी के योग्य हो गई है कब तक घर में बैठी रहेगी।

राजेश _भुवन भैया तुम्हारा क्या विचार है इस मामले में।

भुवन _मैं भला इस मामले में क्या बोलूं? तुम ज्यादा अच्छे से बता सकते हो।

राजेश _आरती, तुम आवेदन देना चाहती हो वो तो ठीक है पर आवेदन देने से ही तुम्हारा चयन हो जायेगा, इसकी कोइ गारेंटी नही, पता नही कितने आवेदन आयेंगे, उन्हे से समिति को जो ज्यादा योग्य लगेगा उसका चयन करेगा।

तुम अपना आवेदन जमा कर दो।

और ताई, रही बात आरती की शादी की, अगर योग्य लडका मिल जाता है तो ग्रीष्मावकाश की छूटी में आरती की शादी कर देगें। इसमें एक फायदा और है की जब आरती स्कूल में पढ़ाने जाएगी तो योग्य लडका जल्दी पसंद कर आरती र सुंदर भी है, दिन भर इधर उधर घूमने से तो अच्छा ही है वह स्कूल में पढ़ाए।

पदमा _ठीक है बेटा जैसे तुम्हारी इच्छा।

आरती _शुक्रिया भैया।

राजेश _अरे पहले अपना आवेदन तो स्कूल में में जमा कर दो, वैसे कितने मार्क्स है तुम्हारे 12वी में।

आरती _भैया मैं 12वी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हूं, मैं तो कालेज की पढ़ाई भी करना चाहती थी पर मां ने मना कर दिया।

राजेश _ताई, आरती को कालेज की पढ़ाई करने देना था जब उसकी इच्छा थी तो।

पदमा _अरे बेटा लड़की जात कहा वह शहरो में रहकर अकेली पढ़ाई करती, कुछ ऊंच नीच हो गया तो, आए दिन नए नए समाचार सुनने को मिलता है।

राजेश _आरती तुम अपना आवेदन जमा कर दो देखते हैं, तुम्हारा चयन होता है कि नही।

गांव की इच्छुक शिक्षित बहु और बेटियों ने अपना आवेदन स्कूल में जमा किया। लड़को ने जब पता चला की सिर्फ 5000 ही दिए जायेंगे, तो वे आवेदन नही लगाए वैसे भी लड़के काम करने के लिए शहर जाते थे।

दो दिन बाद फिर से स्कूल में बैठक रखा गया।

राजेश, ने माधुरी मैडम से पूछा की कितने आवेदन प्राप्त हुवे है।

माधुरी मैडम _कुल 20आवेदन प्राप्त हुवे है शिक्षक के लिए और स्वीपर के लिए 3आवेदन मिला है।

इनका चयन किस प्रकार करना है, इस पर विचार आप सभी विचार कीजिए।

राजेश _मेरिट सूची बनाइए, और सभी आवेदकों को बुलाया जाए। सभी को पहले अच्छे से उनके कार्यों की जानकारी दिया जाए, उसके बाद जो कार्य करने के इच्छुक हो उन्ही के आवेदन पर विचार किया जाय और, एक मेरिट सूची बनाकर, योग्य का चयन किया जाय।

राजेश की बातो का सभी ने सहमति व्यक्त किया।

अगले दिन सभी आवेदकों को स्कूल बुलाया गया।

आवेदकों को माधुरी मैडम ने उसके जिम्मेदारी कार्य एवम अनुसान के बारे में बताया। जो आवेदक सहमत नही है, जिन्हे लगता है की वे जिम्मेदारी अच्छे से नही निभा सकते वे अपना आवेदन वापस ले सकते है।

2महिलाओं ने अपना नाम वापस ले लिया।

अब 18आवेदकों में से 12वी की कक्षा, में मार्क्स,कालेज की पढ़ाई और अनुभव को ध्यान में रखकर एक मेरिट सूची बनाया गया।

माधुरी मैडम द्वारा चयनित आवेदकों के नामों की घोषणा किया गया।

चयनित आवेदकों में,अनिता , ममता, नीरा, मधु, और आरती। ये सभी शादी सुदा औरते थी केवल आरती को छोड़कर।

उसी प्रकार स्वीपर से जो 5वी कक्षा उत्तीर्ण हो और उनका व्यवहार कार्य कुशलता को ध्यान में रखते हुए, भोला का नाम चयन किया गया जो शादी सुदा था।

सभी चयनित शिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन देकर कल से उन्हें 10बजे स्कूल आने को कहा गया।

स्कूल खुलने से पहले, माधुरी मैडम को इन चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना था।

आरती जब घर पहुंची तो वह बहुत खुश थी।

आरती और उसकी सहेली मधु दोनो का चयन huwa था। मधु की शादी हो चुकी थी, वह एक बच्चे की मां भी थी। उसका पति शराबी था जो रोज मधु से मारपीट करता था। मधु अपनी मां बाप की अकेली संतान थी। जब मधु के मां और बापू ने देखा की मधु तकलीफ में है, तो एक बार जब मधु मायका आई तो उसके मां बाप ने उसे फिर से ससुराल नही भेजा।

जब राजेश घर पहुंचा,,,

आरती _शुक्रिया भैया, आज मैं बहुत खुश हूं।

राजेश _शुक्रिया किस लिए।

आरती _मुझे स्कूल में पढ़ाने का मौका जो दिए, और मधु को भी।

राजेश _अरे तुम दोनो योग्य थी, तुम दोनो के 12वी में अच्छे मार्क्स हैं। तुम दोनो के चाल चलन और व्यवहार भी अच्छे है, इसलिए तुम दोनो का चयन किया गया, इसमें मेरी कोइ सिफारिस नही।

आरती _सच भैया।

राजेश _हां, समिति वालो ने तुम लोगो पर भरोसा किया है की तुम लोग अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य को अच्छे से निभा पाओगे। तुम लोग उनके भरोसा बनाए रखना।

आरती _भैया मैं लगन और ईमानदारी से काम करुंगी, समिति को निराश नहीं करुंगी।

राजेश _गुड।

अगले दिन 10बजे आरती के घर मधु आई।

मधु _नमस्ते राजेश भैया।

राजेश _नमस्ते मधु। स्कूल जा रहे हो।

मधु _हां राजेश भैया ओ माधुरी मैडम बुलाई है न हमे ट्रेनिंग देगी।

राजेश _हां, मेरे ही सलाह पर तुम लोगो को ट्रेनिंग दिया जा रहा है। बड़े अच्छे से सीखना जो भी मैडम बताएगी।

मधु _जी राजेश भैया।

तभी आरती आई।

आरती _राजेश भैया मैं साड़ी में कैसी लग रही, पहली बार पहनी हूं साड़ी।

राजेश _आरती, तुम तो साड़ी में म्योचोर और खूबसूरत लग रही हो। क्यू मधु?

मधु _हां, आरती, तू तो बड़ी खूबसूरत लग रही है साड़ी में।

आरती _अच्छा भैया अब हम लोग चलते हैं।

राजेश _अच्छा ठीक है।

राजेश अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।

कुछ देर बाद, राजेश को दिव्या का फोन आया।

दिव्या _राजेश कैसे हो?

राजेश _मैं अच्छा हूं दिव्या जी, आज अचानक कैसे याद की। आप ठीक तो हैं न।

दिव्या _हां मैं भी ठीक हूं, वो इसलिए याद की, कि आज गीता दीदी का जन्म दिन है, शाम को पार्टी है, मैं चाहती हूं की तुम आओ। वैसे तो तुम आते नही घर।

राजेश _ठीक है दिव्या जी ।

दिव्या _ठीक है मैं तुम्हारा वेट करुंगी।

दोपहर में राजेश लाला जी के घर गया, लाजो को ट्यूशन पढ़ाने जन्हा, ललिता और कुसुम ने अपने अपने तरीको से राजेश को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश किया।

और प्रयास जारी रखा।

लाला जी के घर से वापस आने के बाद,,

शाम को जब भुवन घर आया,,,

राजेश _अरे भुवन भैया, आज हमे हवेली चलना है? आज गीता जी का जन्म दिन है, दिव्या जी ने आने को कहा है?

भुवन _अरे राजेश, तुम ही जाओ, मुझे तो बड़े बड़े लोगो के बीच कुछ अजीब सा लगता है।

तभी ज्योति वहा पहुंची,,,

ज्योति _देखो राजेश, ये दिव्या जी से दूरी बनाकर रखो तो ही अच्छा है, ये ठाकुर कुछ गलत समझ बैठा तो तुम्हे नुकसान पहुंचा सकता है।

तभी वहा पदमा भी आ गई।

पदमा _हा, बेटा तुम्हारी दीदी ठीक कह रही है? ठाकुर की हवेली से दूर ही रहो तो ठीक है, ये कब दुश्मनी निकाल ले इसका कोइ भरोसा नहीं।

राजेश _पर दीदी, दिव्या जी को मैने हां कह दिया है अगर मै नही गया तो उसे बुरा लगेगा।

ठाकुर भले ही शैतान हो लेकिन दिव्या जी, गीता जी और उसकी मां ठकुराइन ये तीनो बहुत अच्छे है।

पदमा _ठीक है बेटा अगर जाना ही चाहते हो तो अकेले नही जाने दूंगी, भुवन और उसके दोस्तो को भी साथ ले चलो।

ठाकुर के आदमियों ने कुछ किया तो ये लोग तुम्हारी मदद तो करेंगे।

राजेश _मुझे दिव्या जी से पूछना पड़ेगा।

राजेश ने दिव्या को फोन लगाया।

दिव्या _बोलो, राजेश तुम आ रहे हो ना पार्टी में,,

राजेश _ओ दिव्या जी ताई कह रही है की अकेले मत जाओ।

दिव्या _क्यू, तुमको भी डर लगता है क्या? तुम तो अकेले दस पर भारी हो, हंसते हुवे बोली।

राजेश _वो ताई को डर लगता है, मुझको नही दिव्या जी ताई कह रही थी की जाना है तो अपने साथ दोस्ती को भी ले जाओ, अकेले जाने नही दूंगी।

दिव्या _ओह, तो ऐसी बात है तो अपने दोस्तो के साथ आ जाओ, मैं पहरेदार को बोल दूंगी, राजेश और उसके दोस्त आए तो उनसे सवाल जवाब मत करना, उन्हे अंदर आने देना ठीक है।

राजेश _ठीक है जी।

भुवन ने अपने दोस्त, रवि और विमल को फोन कर इस बात जानकारी दी की हमे हवेली जाना है।

पहले वे भी चौंके पर जब सारी बाते बताई तो दोस्ती के लिए तो जान भी हाजिर है कहते हुवे जाने को तैयार हो गए।

रात को आठ बजे चारो गुलदस्ता लेकर हवेली पहुंचे।

हवेली को आज बड़े अच्छे से सजाया गया था, जब में हवेली के मुख्य गेट पर पहुंचे तो ठाकुर के आदमियों ने उन्हें रोका।

राजेश ने दिव्या को फोन लगाया, दिव्या ने ठाकुर के आदमियों से उन्हे अंदर आने देने के लिए कहा।

राजेश और उसके दोस्त अंदर गए। पार्टी में बड़े बड़े लोग आए हुवे थे, नेता, अधिकारी और व्यापारी, ठाकुर के रिश्तेदार, दोस्त।

जब मुनीम ने राजेश को देखा,,

मुनीम ने, ठाकुर से कहा,,

लो ये भी पहुंच गया,,

ठाकुर ने राजेश की ओर देखा,,

ठाकुर _इसको मैने तो नही बुलाया था।

मुनीम _ठाकुर साहब आपने नही, हो सकता है दिव्या बिटिया ने बुलाया हो।

राजेश और उसके दोस्त ठाकुर के पास पहुंचे।

राजेश _नमस्ते ठाकुर साहब,,

ठाकुर _नमस्ते, भई तुमने तो जो हमारी बिटिया पर अहसान किए थे उसका ईनाम ले चुके हो, फिर आज क्या लेने आए हो।

राजेश _ठाकुर साहब, मैं ईनाम लेने नही, मैं तो गीता दीदी को उनके जन्म दिन पर शुभकामनाएं देने आया हूं। अगर आपको अच्छा नही लगा तो मैं चला जाता हूं। दिव्या जी पूछेगी तो कह दूंगा ठाकुर साहब को मेरा वहा जाना अच्छा नही लगा तो मैं चला आया।

ठाकुर _दिव्या को कुछ बोलने की जरूरत नही, अब आ गए हो तो पार्टी इंजॉय करो।

राजेश _धन्यवाद ठाकुर साहब।

राजेश और उसके दोस्त वहा से दूसरी जगह चले गए।

उसके जाने के बाद,,

ठाकुर _ये शाला बहुत ही चालक है, साले ने मेरी कमजोरी पकड़ ली है।

मुनीम _ठाकुर साहब, मैने तो पहले ही कहा है? जब से लडका यहां गांव आया है मुझे एक भय लगने लगा है।

ठाकुर _पर तुम्हे भय क्यू लग रहा है?

मुनीम _कहीं हमारे सारे राज, इस लड़के को पता चल गया तो, आप तो जायेंगे, आपके साथ मैं भी जाऊंगा।

ठाकुर _मुनीम जी,,, ठाकुर ने चीखते हुए कहा,,

मुनीम _माफ करना मालिक,,,

ठाकुर _उस लाला के बच्चे से कल बात करना, क्या कर रहा है वो?

इधर गीता के कमरे में ठकुराइन आई।

रत्नावती _अरे बेटा तैयार हो गई तो चलो , वहा हाल में मेहमान तुम्हारा वेट कर रहे है?

गीता अपने कमरे में तैयार हो रही थी।

दिव्या _वाह दीदी आज तो इस साड़ी में कमाल की लग रही हो।

गीता _तू भी बड़ी प्यारी प्यारी लग रही है।

दिव्या _चलो दीदी अब पार्टी हाल में चलते हैं।

दोनो पार्टी हाल में जाने लगते है।

पार्टी हाल में जाने के बाद सभी मेहमान, गीता को बधाई देते है, उन्हे गुलदस्ता भेंट करते हैं।

इधर दिव्या राजेश को ढूंढती है, वे एक कोने में दोस्तो के साथ होते हैं।

दिव्या _अरे तुम लोग, यहीं खड़े रहोगे की दीदी को शुभकामनाएं भी दोगे।

राजेश _हां दिव्या जी, चलो चलते है?

वैसे दिव्या जी इस ड्रेस में काफी खूबसूरत लग रही है बिल्कुल राजकुमारी की तरह।

दिव्या _शुक्रिया। दिव्या मुस्कुराते हुए बोली।

राजेश और उसके दोस्त गीता के पास पहुंचे।

दिव्या _दीदी, देखो कौन आया है?

गीता _ओह, राजेश।

राजेश _गीता दीदी, आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं। गुलदस्ता भेट करते हुवे, कहा।

गीता _आप सभी का शुक्रिया।

दिव्या _राजेश, सिर्फ शुभकामनाएं देने से काम नहीं चलेगा।

राजेश _तो, फिर,,

दिव्या _कोइ अच्छी सी गीत गाकर दीदी को शुभकामनाएं देना होगा।

तभी वहा रत्नवती पहुंची,,

राजेश _नमस्ते मां जी,,

रत्नवती _अरे राजेश बेटा, जीता रह, अच्छा लगा तुम यहां आए।

रत्नवती _बेटी, चलो अब केक कांटो।

गीता ने केक काटा, सभी ने ताली बजाकर गीता को बधाई दिया।

तभी दिव्या ने माइक में कहा,,,

यहां पर उपस्थित, जितने भी हमारे मेहमान है उन सब को बताना चाहती हु की राजेश दीदी को अपने शब्दो में गीत के माध्यम से शुभकामनाएं देना चाहते हैं। सभी ताली बजाकर उनका स्वागत करे,,,

सभी मेहमान ताली बजाने लगे।

दिव्या ने राजेश को माइक पकड़ा दिया,,

राजेश ने गीत गाना, शुरू किया,,,ए

राजेश की गीत सुनकर सभी ने जमकर तालियां बजाईं।

गीता ने गाने के लिए राजेश को शुक्रिया कहा।

नाचने गाने के बाद सभी भोजन किए। खाने पीने की व्यवस्था किया गया था।

खाने पीने के दौरान ठाकुर का दोस्त ठाकुर गजेंद्र सिंह, ठाकुर से कहा,,

गजेंद्र सिंह _यार बालेंद्र, तूने कहा था कि तुम गीता बिटिया को मेरे बेटे से शादी करने के लिए मना लोगे।

हम तो कब से इन्तजार कर रहे है।

बालेंद्र सिंह _अरे यार, मैं भी चाहता हूं की गीता बिटिया, तुम्हारी घर की बहु बने। पर बिटिया शादी करना ही नहीं चाहती। अब उसके साथ जबरदस्ती तो नही कर सकता।

तुम्हे तो पता ही है न कालेज के समय वह किसी लड़के को पसन्द करती थी।

जब पता चला तो मैने उसे रास्ते से हटवा दिया।

उस लड़के के जाने के बाद गीता बिटिया ने ता उम्र शादी न करने का फ़ैसला कर लिया है। मैं उसे समझा सकता हूं जबर दस्ती तो नही कर सकता।

इतने दिनो तक धीरज रखा है तो कुछ दिन और रखो



गजेन्द्र सिंह _यार, ठीक है जहां इतने दिनो इन्तजार किए एक दो साल और सही।

अब जानते है की आखिर huwa क्या था?

दरअसल, जब गीता कालेज की पढ़ाई कर रही थी। उसे अपने ही क्लास के एक लडका जिसका नाम कबीर था, उससे प्यार हो गया। कबीर एक होनहार लडका था। उसका पिता जी एक सरकारी स्कूल का हेडमास्टर था।

इधर जब गीता का कालेज पूरा huwa

ठाकुर ने उसकी शादी, अपने दोस्त ठाकुर गजेंद्र सिंह से तय कर दिया।

एक दिन गीता को, ठाकुर को बताया कि बेटी मैने तुम्हारी शादी ठाकुर गजेंद्र सिंह के साथ तय कर दिया है, और वे लोग कल घर इसी सिलसिले में बातचीत करने आने वाले है। तब गीता ने कहा की अभी मुझे शादी नही करनी है।

बालेंद्र सिंह _पर बेटी, लडका अच्छा है, राजघराने का है? अच्छा रिश्ता मुस्किल से मिलता हैऔर शादी तो एक दिन करनी ही है, फिर अभी क्यू नही। तुम्हारी पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है। कुछ और बात तो नही।

गीता _पिता जी, मैं किसी और लड़के को पसन्द करती हूं।

ठाकुर _अरे बेटी अगर ऐसी बात है तो मुझे पहले ही बता देती।

तुमने अपने लिए कोइ अच्छा ही चुना होगा।

क्या करता है लड़के का पिता जी।

गीता _सरकारी स्कूल में हेडमास्टर है।

ठाकुर _ओह, तुम एक काम करो। उन लोगो को एक दिन भोजन के लिए हवेली बुलाओ। फिर हम शादी की बात करेंगे?

गीता _क्या सच में पिता जी।

ठाकुर _हां, हां हम अपने बेटी के खिलाफ भी जा सकते हैं क्या? जिसमे तुम्हारी खुशी,उसमे हमारी भी खुशी ।

गीता _पिता जी आप कितने अच्छे हो, मुझे तो लगा था जब आपको पता चलेगा तो आप नाराज होंगे।

ठाकुर _हम अपने बिटिया से भी भला नाराज हो सकते हैं?

तुम, उन लोगो को संडे को भोजन के लिए आमन्त्रित करो।

गीता _ठीक है पिता जी।

गीता के वहा से जाने के बाद।

मुनीम _ये क्या ठाकुर साहब, आप एक हेडमास्टर के लड़के को अपना दामाद बनाएंगे। लोग आप पर हसेंगे।

ठाकुर ने अपने आदमियों से माखन, अपने खास आदमी को बुलाने कहा।

कुछ देर बाद माखन पहुंचा।

माखन _ठाकुर, साहब आपने मुझे बुलाया।

ठाकुर _आओ माखन आओ।

माखन _कुछ काम था। ठाकुर साहब।

ठाकुर _माखन, संडे को कुछ लोग हमारा मेहमान बनकर भोजन करने हवेली आने वाले है। हमारी इज्जत पर कीचड़ उछालने। वो हवेली नही पहुंचना चाहिए।

माखन _मैं समझ गया, ठाकुर साहब, हवेली पर कीचड़ उछालने वाले, हवेली तक नहीं पहुंच पाएंगे।

संडे को गीता, कबीर और उसके घर वालो को बेशब्री से इन्तजार कर रही थी, लेकिन वे हवेली नही पहुंचे।

पता चला की जिस गाड़ी से वे आ रहे थे उसका भिडंत किसी ट्रक से हो गया और गाड़ी खाई पे गीर गया। परिवार का कोइ भी सदस्य जीवित नही बचा।

इस घटना के बाद गीता टूट सी गई।

समय के साथ कुछ ठीक हुई तो उसने कभी शादी न करने का फ़ैसला लिया और राजनीति में जाएगी।

ठाकुर गीता को बीच बीच में शादी कर लेने के लिए कहते लेकिन, वो अपने फैसले पर अडिग रही।

पार्टी खतम होने के बाद राजेश और उसके दोस्त दिव्या से इजाजत लेकर घर पहुंचे।

पदमा, पुनम और ज्योति जग रही थी।

वे चिंतित थे की हवेली में सब ठीक तो होगा।

जब राजेश और भुवन घर पहुंचे तो उन लोगो ने चैन की सांस ली।

भुवन पार्टी के बारे में पूछने के बाद सभी अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

आज काफी दिनों बाद भुवन घर में सो रहा था।

भुवन, पुनम को अपनी बाहों में लेकर उसकी चूची मसलना सुरू कर दिया।

इधर आज पदमा अकेली सोई थी। उसका पति आज खेत में ही सोया था।

काफी दिन हो गए थे राजेश से चूदे।

वह अपने कमरे से उठ कर राजेश के कमरे की ओर गई।

कमरे में जाने के बाद,,

राजेश का नींद अभी लगा नही था,,

राजेश _ताई आप इस समय कुछ काम था क्या?

पदमा _हां बेटा ओ कमर पे दर्द है थोड़ा तेल से मालिश कर देते तो,,

राजेश _अच्छा ठीक है, लाओ तेल मालिश कर देता हूं।

पदमा _बेटा आज तो तुम्हारे ताऊ जी खेत में सोया है चलो, मेरे कमरे में वही मालिश कर देना।

राजेश _अच्छा, आप अपने कमरे में चलो मैं आता हूं।

पदमा _ठीक है बेटा।

राजेश कुछ समय बाद पदमा के कमरे में चला गया।

इधर कुछ देर बाद ज्योति, पेशाब करने के लिए कमरे से बाहर आई और आंगन के मोरी के पास मूतने लगी। तभी उसकी कानो में कुछ आवाजे सुनाई पड़ी। उसने आवाज़ को ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगी।

उसे लगा की आवाज़ तो मां की कमरेसे आ रही है।

वह पदमा की कमरे की ओर गई।

उसे किसी महिला की चीखने और सिसकने की आवाज़ सुनाई पड़ी वह समझ गई की अंदर क्या चल रहा है!

ज्योति _पर बापू तो खेत में सोया है तो मां के साथ कौन है?

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा। वह यह जानने के लिए की अंदर कौन है। दरवाज़े पर सुराख ढूंढी और अंदर का दृश्य देखने लगी, अंदर का दृश्य देख कर उसके पैरो तले जमीन खिसक गई, इस समय पदमा घोड़ी बनी थी और राजेश, पीछे से उसका गाड़ मार रहा था।

पदमा _दर्द से चीख रही थी तो मजे में सिसक भी रही थी।

उसे अपनी मां पर गुस्सा आया, फिर वह सोची वह भी तो राजेश से chud चुकी है।

पर मां, इस उम्र में भी,,,, कैसे जवान औरतों की तरह chud रही है,, उसे गुस्सा भी आ रहा था और वह उत्तेजित भी होने लगी और न चाहते हुवे भी उसने अपनी boor खुजाना शुरू कर दी।

राजेश और पदमा को अलग अलग आसनों में chudai करते हुए देखने लगी। राजेश के झड़ने के पहले ही वह झड़ गई।

ज्योति अपनी boor खुजाते हुवे झड़ जाने के बाद। वहा नही रुकी और अपने कमरे में जाकर सोने की कोशिश करने लगी।
 
शाला विकाश समिति को प्राप्त दान से स कूल का रंग रोगन कराया गया, पेंटर बुलाकर दीवारों पर शिक्षण सामाग्री संबंधी आकर्षक पेंटिंग कराया गया।शौचालय अनुपयोगी हो गया था, उसे मरम्मत कराया गया। शाला के लिए आवश्यक भौतिक संसाधन,ग्रीन बोर्ड,बच्चो के बैठने के लिए टाट पट्टी, शिक्षको के लिए साड़ी, ताकि एकरूपता बनी रहे, धरम पुर से जाकर खरीदा गया। शाला प्रांगण में पेड़ पौधे रोपे गए। स्कूल खुलने से पहले सारी तैयारियां कर लिया गया।

वह दिन आ ही गया, आज स्कूल खुलने जा रहा था।

आज स्कूल में शाला प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम में पालकों एवम गांव के प्रमुख लोगो को आमन्त्रित किया गया था।

सुबह 10बजे सभी लोग स्कूल परिसर में शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में उपस्थित हो चुके थे।

स्कूल काफी आकर्षक रूप से सजाया गया था।

स्कूल का पूरा रूप ही बदल दिया गया था। सभी लोगो ने राजेश की जमकर तारीफ किया।

कार्यक्रम में शाला में नए प्रवेश लेने वाले बच्चो का स्वागत अथितियो के द्वारा किया गया।

सरपंच जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चे हमारे भा भविष्य है, इन्हे विद्यालय में अच्छी शिक्षा और संस्कार मिलनी चाहिए।

इसके लिए सिर्फ शिक्षक ही नहीं पालकों और गांव के जिम्मेदार लोगो को मिलकर काम करना होगा।

राजेश ने कहा _शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बच्चो का सर्वांगीण विकास करना है, इसके लिए हम सबको अपना योगदान करना होगा, वैसे आप सभी लोग प्रसंसा के पात्र है आज स्कूल में शिक्षको की नियुक्ति, शाला में जो बदलाव नजर आ रहा है, यह आप सभी की सहभागिता से ही संभव हो पाया है, आगे भी इसी प्रकार आप लोगो का सहभागिता आवश्यकता रहेगी। सभी बच्चो को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिलने के साथ साथ अन्य गतिविधियों में भी उनकी प्रतिभा निखारना होगा, तभी बच्चो का सर्वांगीण विकास होगा, इसके लिए शिक्षको के साथ साथ पालकों और गांव के प्रमुख लोगो को मिलकर साथ काम करना होगा।

अन्त में माधुरी मैडम ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और जनसहयोग की लिए धन्यवाद किया।

आज बच्चो के मध्यान्ह भोजन में पकवान बनाए गए थे। उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों ने बच्चो के साथ, मध्यान्ह भोजन किया।

सरपंच और समिति के सदस्यों ने मध्यान्ह भोजन संचालक समूह को मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने का निर्देश दिया और समिति द्वारा मध्यान्ह भोजन केलिए समिति द्वारा बनाए गए मेनू का पालन करने कहा गया।

दोपहर में राजेश लाजो को ट्यूशन पढ़ाने लाजो के घर गया।

वह घर के बरामदे में लाजो को ट्यूशन पढ़ाने लगा,,,

राजेश _लाजो, तुम्हारे परीक्षा को २ ही दिन शेष रह गया है। लगभग एक माह पूर्ण होने को है, मुझे ट्यूशन पढ़ते मुझे लगता है की गणित में जो भी तुम्हे दिक्कतें थी, उसे मैने दूर कर दिया है। पुस्तक में जो भी सवाल दिए गए हैं उसे तुम अच्छे से कर भी पा रही हो, अगर तुम्हे लगता है की कुछ टॉपिक जो तुम्हे कठिन लगा हो हम दो दिनों तक उसी टॉपिक पर फोकस करते हैं

लाजो _राजेश भैया, पहले मुझे गणित सबसे कठिन विषय लगता था, लेकिन आपने लगभग एक मां तक जो मार्ग दर्शन किया है उससे मैं गणित विषय को समझ पाई, गणित विषय को लेकर मेरे अंदर डर था वह निकल गया। अब गणित मेरा प्रिय विषय बन गया है। मुझे पूरा विश्वास है कि मैं पूरक परीक्षा में बहुत अच्छा कर पाऊंगी।

राजेश _लाजो, तुमने, एक माह तक बहुत मेहनत की है, तुम जरूर पूरक की परीक्षा में बहुत अच्छा प्रदर्शन करोगी।

तभी कुसुम अपनी रोती हुई बच्ची को दूध पिलाते हुवे। राजेश के पास आकर बोली।

देवर जी कोइ आपके जैसे हमे भी मास्टर मिला होता तो हम भी अपनी पढ़ाई पूरी कर लिए होते।

इस समय अपनी ब्लाउज की पूरे बटन खोल दी थी। उसके एक स्तन का निप्पल अपनी बच्ची के मुंह मे दे रखी थी।

कुसुम _देवर जी, मेरी बच्ची को थोड़ा पकड़ोगे क्या मैं, तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं, मां जी कुछ काम से बाहर गई है, और बच्ची को बिस्तर पे लिटा दो तो रोने लगती है।

राजेश _क्यू नही भाभी, लाओ मुझे दो गुड़िया को।

कुसुम राजेश की ओर झुकी, उसकी मम्मे राजेश की आंखो के सामने झूलने लगे।

कुसुम मुस्कुरा रही थी।

राजेश ने जब बच्ची को पकड़ा तो, बच्ची ने एक स्तन की निप्पल मुंह में दबा रखी थी, कुसुम ने निप्पल को खींचा।

निप्पल मुंह से छूटते ही दूध की एक पिचकरी निकली जो जो सीधे राजेश के चेहरे पर पड़ा।

बड़े बड़े दूध से भरे स्तन राजेश के सामने झूल रहे थे। राजेश का शरीर गर्मा गया।

इधर लाजो मुस्कुराते हुवे, वही पर अपनी ब्लाउज की बटन बंद करने लगी।

राजेश का लंद न चाहते हुए भी खड़ा हो चुका था।

कुसुम अपनी गांड़ मटकाते हुवे, कीचन में चाय बनाने चली गई।

राजेश बच्ची को अपने गोद में लेकर प्यार से पुचकारने लगा।

तभी, बच्ची ने राजेश के ऊपर सुसु कर दी।

राजेश _ओ हो,

कुसुम _क्या huwa राजेश।

रराजेश _भाभी, देखो न गुड़िया ने सुसु कर दी।

कुसुम और लाजो दोनो हसने लगे।

कुसुम _ओ, तुम्हारे तो कपड़े गीले हो गए।

राजेश तुम एक काम करो, मां जी घर के पीछे कुएं पर घर के चादर धो रही है, तुम जाकर अपने पैंट शर्ट निकाल कर मां जी को दे दो, वह धो देगी और सुखा देगी। अभी तो तेज़ धूप है जल्दी सुख भी जायेगा।

राजेश _भौजी रहने दो, घर में जाकर, कपड़े निकाल दूंगा।

कुसुम _देवर जी कपड़ो से बदबू आयेगी। लो ये लूंगी पहन लेना और ये टावेल से अपने सरीर ढक लेना।

राजेश _लाजो, तुम जो सवाल दिया है उसे हल करो मैं, अपने कपड़े मां जी को देकर आता हूं।

लाजो _ठीक है भैया।

राजेश घर के पीछे गया, उसने देखा की ललिता कुएं के पास कपड़े धो रही थी।

वह पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहनी हुई थी।

ललिता _अरे बेटा तू यहां।

राजेश _मां जी, बच्ची को अपने गोद में लिया था।

बच्ची ने मेरे कपड़े पे सुसु कर दी।

ललिता _ओहो बेटा, दे मुझे अपने कपड़े, मैं धो कर सुखा देती हूं, तेज़ धूप है जल्दी सुख जायेगा।

राजेश _ठीक है मां जी। राजेश ने अपने शर्ट और पैंट निकाल कर ललिता को दे दिया और लूंगी लपेट लिया।

राजेश _अच्छा मां जी अब मैं चलता हूं।

ललिता _अरे बेटा, सुनो।

राजेश _क्या है मां जी?

ललिता _अरे बेटा, इन चादरों को निचोड़ने में मेरी मदद करेगा?

राजेश _ठीक है मां जी।

ललिता _बेटा, मैं तुम्हारे शर्ट पैंट भी धो देती हूं, फिर एक साथ सुखा देगें। तुम थोड़ा रुको।

ललिता कपड़े धोने लगी। उसकी चूचियां ब्लाउज से बाहर साफ साफ दिखाई दे रहे थे, और कपड़े धोते समय काफी हिल रहे थे, ऐसा दृश्य देख कर तो बूढ़े का भी लंद खड़ा हो जाए राजेश तो जवान मर्द था।

ललिता तिरछी नजरों से राजेश को देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।

कपड़ा धोने के बाद,

ललिता _आओ बेटा, इन कपड़ो को निचोड़ने में मेरी मदद करो।

राजेश और ललिता चादर के एक एक छोर पकड़ कर उसे निचोड़ने लगे।

निचोड़ते समय ललिता के बड़े बड़े स्तन राजेश के आंखों के सामने झूलने लगे।

राजेश का लन्ड लूंगी के अंदर खड़ा हो चुका था। ललिता ने जब राजेश के लूंगी में बड़ा सा उभार देखा तो वह मुस्कुराने लगी।

कपड़ा निचोड़ कर सुखा देने के बाद।

राजेश _अच्छा मां जी अब मैं चलता हूं।

ललिता _बेटा, एक काम और कर देते, चादर धोने से के बाद मुझे नहाना पड़ेगा, मेरे पीठ पर थोड़ा साबुन लगा देते तो अच्छा होता, वो क्या है की वहा तक हाथ नही पहुंच पाता।

राजेश _मां जी किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा।

ललिता _अरे बेटा, यहां मेरे और तेरे सिवा कोई नही है। जल्दी हो जायेगा।

राजेश _मां जी मैं भाभी को भेज देता हूं। वो लगा देगी।

ललिता _अरे बेटा, वो बच्ची को पकड़ी होगी। तू इतना डर क्यू रहा है?

ललिता ने अपने ऊपर एक बाल्टी पानी डाल दी, उसके बाद राजेश को साबुन देते हुए बोली,, लो बेटा मल दो मेरे पीठ पर।

राजेश ने साबुन अपने हाथ में लेकर ललिता के पीठ में मलने लगा।

ललिता _अरे बेटा, मैं ये ब्लाउज निकाल देती हूं।

तुम पूरे पीठ पर अच्छे से मल दो।

ललिता ने अपना ब्लाउज निकाल कर अलग कर दिया।

लो बेटा अब अच्छे से लगा दो।

राजेश ने ललिता के पूरे पीठ पर साबुन अच्छे से मल दिया।

राजेश _लो मां जी मैने साबुन अच्छे से लगा दिया, अब मैं चलता हूं।

ललिता _धन्यवाद बेटा।

राजेश जाने लगा तभी,

ललिता _अरे बेटा रुको,, हसने लगी,,

राजेश_क्याhuwa मां जी

ललिता_अरे बेटा, ऐसी हालात में जाओगे, लाजो के सामने, वह क्या समझेगी।

ललिता ने राजेश के लूंगी की ओर इशारा करते हुवे कहा।

राजेश_शर्मिंदा हो गया।

ललिता_अरे बेटा इसमें शर्मिंदा होने की क्या बात है।

जब एक मर्द एक औरत के साथ ऐसी अवस्था में हो तो तो मर्द का खड़ा होना नार्मल बात है।

पर ऐसी हालात में लाजो के पास जाओगे तो वो क्या समझेगी। जाओ बाथरुम में जाकर मुठ मारकर शांत कर लो।

राजेश_मां जी मैं मुठ नही मारता।

ललिता_ये तो बड़ी अच्छी बात है। आओ मुझे दिखाओ, मैं शांत कर देती हूं।

राजेश_नही मां, जी रहने दीजिए।

ललिता_अरे बेटा, लगता है तुम शर्मा रहे हो मैं भी तो तुम्हारे पास बिना ब्लाउज के हूं। चलो दिखाओ अपना,

ललिता जबरदस्ती राजेश के लंद को लूंगी के ऊपर से पकड़ लिया, और राजेश के चड्डी नीचे कर लंद बाहर निकाल दिया। राजेश मना करता रहा पर नही मानी।

ललिता राजेश के लंद को आश्चर्य से देखने लगी, इतना बड़ा और मोटा लंद पहली बार देख रही थी।

ललिता_अरे बेटा, तुम्हारा तो बहुत बड़ा है।

ललिता राजेश के लंद को पकड़ कर मुठ मारने लगी।

फिर उसको मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी।

राजेश का लंद और सख्त हो गया।

ललिता कभी राजेश के गोंटे को चांटती तो कभी उसके लंद चुस्ती,।,

इधर, काफी देर होने के बाद भी जब राजेश नही आया तो कुसुम भी घर के पीछे चली गई, आखिर क्यों इतना समय लग रहा है?

जब वहा जाकर देखी की की उसकी सास राजेश का लंद चूस रही है। वह मुस्कुराने लगी,,, आखिर सासु मां ने राजेश को फसा ही लिया।

कुसुम _मां जी क्या कर रही हो?, छी आपको शर्म नही आ रही ऐसी हरकत करते हुए।

ललिता _अरे बहु तुम।

कुसुम _हां मैं, ये सब क्या है?

ललिता _अरे बहु अब तुम्हे क्या बताऊं, राजेश से कहा की मेरे पीठ पर साबुन मल दे।

राजेश ने साबुन लगाया। पर मुझे ऐसी हालात में देखकर बेचारे का खड़ा हो गया।

वह ऐसे ही जाने लगा तो मैने कहा की ऐसी हालात में लाजो के सामने जाओगे तो लाजो क्या समझेगी।

मैने कहा बाथरुम में जाकर मुठ मारलो, तो राजेश ने कहा की मैं मुठ नही मारता।

तो मैंने सोचा बेचारे की मैं ही मदद कर देती हूं। आखिर उसके इस हालात के कारण मैं ही तो हूं, यह सोंचकर।

कुसुम _ओह ऐसी बात है? पर मां जी ऐसे लंद चूसोगी तो बहुत समय लग जायेगा, राजेश को झड़ने में।

ललिता _अच्छा तो तुम ही बताओ कैसे चूसने से जल्दी झड़ेगा।

कुसुम _अच्छा ठीक से देखना, कैसे चूसना चाहिए?

कुसुम राजेश के लंद के नीचे बैठ गई।

कुसुम _हाय दईया इतना बड़ा।

ये तो पूरा मुंह में नही आ पाएगा।

कुसुम _मां जी तुम राजेश के टट्टो को चूसो मैं उसका लंद चूसती हूं। इससे वह जल्दी झड़ जाएगा।

ललिता, राजेश की tatto को तो कुसुम उसके लंद को चूसने लगी।

राजेश अपना आंखे बंद कर लिया और कुसुम की बाल पकड़ कर अपना लंद अंदर बाहर करने लगा।

करीब आधे घंटे तक लंद चुसाई चलता रहा।

ललिता और कुसुम दोनो बारी बारी चूसते रहे।

अन्त में राजेश ने कुसुम के मुंह में अपना सारा पानी छोड़ दिया।

राजेश, बरामदे में आया। लाजो ने सारा सवाल हल कर लिया था।

राजेश ने चेक किया, सारा सवाल सही हल की थी।

राजेश _तुमने तो सारे सवाल एकदम सही हल की हो लाजो।

लाजो खुश हो गई।

राजेश ने कुछ और सवाल हल करने दिया।

इधर कुसुम और ललिता बहुत खुश थी राजेश को अपने जाल में फसता देख।

कुसुम _मां जी, आखिर राजेश हमारी जाल में फंस ही गया।

दोनो हसने लगे।

ललिता _बहु अब हमारे पास समय नहीं है, जो भी करना है दो दिनों में ही करना होगा। क्यों कि लाजो की परीक्षा के बाद राजेश घर आएगा नही।

कुसुम _हां मां जी।

शाम को जब लाला घर आया। लाला ने ललिता और कुसुम को अपने कमरे में बुलाया।

लाला _ठाकुर साहब का फोन आया था, वे नाराज हो रहे थे। कह रहा था कि लाला जी अब तक तुमने काम नही किया है। अगर जल्द काम नहीं किया तो अगली बार तुम्हे राशन का ठेका नही मिलेगा?

अब जो भी करना है कल ही करो, अब हमारे पास समय नहीं है।

कुसुम _बाबू जी मैने एक प्लान बनाया है।

लाला _कैसा प्लान बहू?

कुसुम ने अपना प्लान बताया।

प्लान सुनकर, लाला और ललिता दोनो खुश हो गए।

तीनो हसने लगे।

लाला _, राजेश अब तुम्हारा खेल ख़त्म। अब तुम्हे गांव से बेइज्जत करके निकाला जाएगा।

प्लान के मुताबिक अगले दिन।

ललिता _लाजो बेटी, आज हमे लक्ष्मण पुर चलना है। २दिन बाद तुम्हारे बुवा के घर जाना है न उसके लड़के का लडका huwa है, जन्मोत्सव का कार्यक्रम है। हमे कुछ सामान खरीदने है, तुम भी अपने लिए कपड़े खरीद लेना।

लाजो _पर मां मुझे, परीक्षा की तैयारी करनी है। और दोपहर में राजेश भैया भी आ जायेंगे ट्यूशन पढ़ाने।

ललिता _अरे बेटी, राजेश के आने के पहले हम आ जायेंगे।

लाजो _मां, तुम ललित भैया के साथ चले जाओ ना, मेरे पास कपड़े है।

ललिता _अरे बेटी, तुम्हारे भैया के साथ तो चली जाऊंगी। फिर आने के दुकान बंद कर फिर से उसे घर आना होगा मुझे छोड़ने।

इससे अच्छा, चलो तुम्हारे स्कूटी पे चलते है। तुम भी अपने पसंद की सूट खरीद लेना। और गहने भी।

लाला _हां बेटी तुम्हारी मां ठीक कह रही है। कल रविवार है दुकानें बंद रहेगी। परसो तुम्हारी परीक्षा है। अगले दिन ही तुम लोगो को दीदी के घर जाना है। समय ही नहीं है, तुम लोग आज ही शहर जा कर खरीदी कर लो।

लाजो _पर हम लेट हो गए और राजेश भैया आ गए तो।

कुसुम _राजेश बाबू आयेंगे तो बोल दूंगी, तुम शहर गई हो कुछ खरीदी करने। थोड़ा इंतज़ार कर लो आती होगी।

आखिर लाजो को उन लोगो का कहना मानना पड़ा और लाजो, ललिता को लेकर शहर चली गई।

इधर प्लान के मुताबिक लाला अपनी राशन के दुकान में नौकर को छुट्टी दे दिया, वह भी काफी दिनों से छुट्टी मांग रहा था। उसे कुछ घरेलू काम निपटाना था।

दोपहर में राजेश लाला के घर पहुंचा।

घर में कुसुम अकेली थी।

कुसुम _अरे देवर जी आप आ गए। कुसुम अपने

राजेश _भाभी, लाजो कहा है?

कुसुम _अरे देवर जी, मां जी और लाजो शहर गई है कुछ सामान खरीदने।

राजेश _अच्छा, तो मैं चलता हूं बाद में आऊंगा।

कुसुम _अरे देवर जी, लाजो नही है तो क्या मैं तो हूं? उन लोगो के आने तक हमसे बतिया लो।

हमे आपको कुछ बताना था।

राजेश _क्या भाभी?

कुसुम _मैं बच्ची को सुला के आती हूं, तब बताती हूं।

कुसुम बच्ची को अपने कमरे में ही सुला दी और ब्लाउज के बटन को लगाए बिना ऐसे ही बरामदे में आ गई।

आगे क्या होगा, अगले अपडेट में जानेंगे,,,,,,,
 
अभी तक आपने पड़ा, किस तरह लाला ने राजेश को अपने जाल में फसाने का प्लान बनाया है।

जब राजेश दोपहर में लाला के घर गया तो उसे घर में कोइ नजर नहीं आया, उसने लाजो को आवाज़ पुकारा,,,

कुसुम अपने कमरे में अपनी बच्ची को दूध पिला रही थी। वह अपनी बच्ची को दूध पिलाते हुए कमरे से बाहर आई उसकी ब्लाउज खुले हुए थे उसकी चूची एकदम नंगी थी। एक चूची बच्ची पी रही थी।

कुसुम _अरे देवर जी तुम आ गए।

राजेश _लाजो घर में नही है क्या?

कुसुम _अरे देवर जी, लाजो तो मां जी के साथ शहर गई है, कुछ सामान खरीदने।

राजेश _अच्छा, मैं चलता हूं भाभी, जब लाजो आ जाएगी तो फोन करने के लिए कहना मैं आ जाऊंगा।

कुसुम _अरे देवर जी अब आ गए ही तो और कहा जाओगे। उन लोगो के आने तक हमसे बतियालो।

रुको हम बच्ची को सुलाकर आते है?

कुसुम अपनी बच्ची को सुलाकर वापस आई।

कुसुम _देवर जी मैं आपके लिए चाय बना दू।

राजेश _भाभी, यूं अकेले हम दोनो का घर में रहना ठीक नहीं। मैं चलता हू।

कुसुम की ब्लाउज अभी भी खुला huwa था।

वह राजेश के गले में अपनी बाहें डाल कर बोली।

कुसुम _क्यूं देवर जी मैं आपको अच्छी नहीं लगती क्या? आप डर काहे रहे हो।

हाय जब से तुम्हारा हथियार देखा है, बेचैन हूं। रात में ठीक से सो नहीं पाया। सारी रात करवट बदलती रही। ऐसा हथियार पहली बार देखा है। ऐसा मौका बार बार नही मिलता।

राजेश _भाभी ये गलत है, ललित भैया तो बड़े अच्छे है, उन्हे आपको धोखा नही देना चाहिए। मुझे जाने दो।

कुसुम _मेरे तरफ अच्छे से देखो, क्या मैं खूबसूरत नही? बोलो,,

राजेश _भाभी आप तो बहुत सुंदर है,, और,,

कुसुम _और क्या देवर जी?

राजेश _और काफी गर्म भी,, पर अपने अच्छे पति को धोखा देना ठीक नहीं, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।

कुसुम _मेरे पति तो है पर बिस्तर में कमजोर है, बहुत जल्दी ढेर हो जाते हैं। हाय क्या बॉडी है तुम्हारी, एकदम हीरो लगते हो, और तुम्हारा हथियार भी किसी अंग्रेजी फ़िल्म के हीरो के हथियार के टक्कर का है। कल मैंने देखा कितनी देर तक चूसने के बाद तुम झड़े तुम्हारे भैया तो मुंह में लेते ही झड़ जाता है। देवर जी एक बार मेरी प्यास बुझा दो । एक असली मर्द से चुदाने में कैसा मजा आता है मैं महसूस करना चाहती हूं। क्या तुम अपनी भाभी की इतनी सी इच्छा पूरी नहीं करोगे।

देखी मेरे दूध से भरे चूचे क्या तुम्हे आकर्षित नही करते।

बोलो।

राजेश _भौजी आपके चूचे तो कमाल के है, हर कोइ इसे पीना चाहे, पर मुझे ये ठीक नही लग रहा।

कुसुम _जानते हो, देवर जी एक सच्चा मर्द कौन होता है? एक सच्चा मर्द वही है जो एक प्यासी औरत की प्यास बुझाए, मैं आपसे प्रणय निवेदन कर रही हूं। मेरे ये चूचे तुम्हे दूध पिलाने बेताब है, बेकार में समय न गवाओ।

कुसुम ने राजेश के ओंठ को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरु कर दिया।

एक हाथ से राजेश का land सहलाने लगा।

कुसुम की हरकत से राजेश भी गर्म होने लगा, आखिर वह भी मर्द है, सेक्सी गर्म औरत अपनी चूचे खोल ओंठ चूस रही थी आखिर कब तक वह अपने को रोक पाता, वह भी कुसुम का साथ देने लगा

कुछ देर तक एक दूसरे का ओंठ चूसने के बाद। कुसुम ने राजेश का सिर पकड़ कर अपनी चूचों पर झुका दिया।

राजेश ने अपना कुसुम की चूंची मुंह में लेकर चूसने लगा मसल मसल कर दूध पीने लगा।

कुसुम सिसकने लगी, कुछ देर दूध पिलाने के बाद कुसुम नीचे बैठ गया और राजेश के पैंट का चैन खोल कर उसका लंद बाहर निकाल लिया, फिर उसे मुंह में लेकर चूसने लगी।

इधर राशन दुकान में लाला जी गांव के लोगो को राशन बांट रहा था। दुकान में शक्कर खत्म हो गया।

लाला जी ने गांव वालो से कहा, दुकान में शक्कर खत्म हो गई है। शक्कर की बोरी घर में रखा huwa है।

नौकर आज छुट्टी में है, नही तो घर से शक्कर की बोरी मंगा लेता। देखो आप लोग शक्कर कल ले जाना।

कुछ लोगो ने कहा _लाला जी हम रोज रोज, राशन लेने नही आ सकते हमे भी रोजी मजदूरी करने जाना पड़ता है, आज ही दे देते तो अच्छा होता।

लाला _अगर ऐसी बात है तो चलो मेरे घर आप लोगो को वही शक्कर दे दूंगा।

गांव वाले _ठीक है लाला जी चलिए आप के घर से ही शक्कर उठा लेते है।

वहा मौजूद सभी लोग लाला के घर की ओर जाने लगे।

इधर कुसुम राजेश का लंद चूस कर लम्बा और मोटा कर दिया।

वह राजेश को वही बरामदे में ही पीठ के बल लिटा दिया। फिर अपनी चड्डी उतार दी और राजेश के लंद को पकड़ कर उसे अपनी योनि के मुख पर रख कर बैठ गई।

राजेश का लंद सरसराता huwa अंदर चला गया।

कुसुम राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudne लगी।

वह तब तक उछलती रही जब तक वह झड़ न गई। झड़ने के बाद वह राजेश की बाहों में कुछ देर पड़ी रही उसके बाद वह राजेश को फिर चूमने लगी। वह राजेश को अपने ऊपर ले ली और खुद नीचे हो गई।

तभी लाला जी गांव के लोगो को लेकर घर पहुंच गया।

कुसुम को उनके आने की आहट सुनाई पड़ी।

वह बचाओ बचाओ,, करके चिल्लाने लगी, वह अपनी हाथ पैर चलाने लगी।

राजेश को छुड़ाने की कोशिश करने लगी,,

गांव वाले वहा पहुंचे,, दोनो को आपत्ति जनक हालात में देखे,

कुसुम चीख चिला रही थी, छोड़ दो मुझे,, कोइ बचाओ मुझे इस जानवर से,,,

राजेश को कुछ समझ नहीं आ रहा था की भाभी को अचानक क्या हो गया।

राजेश, कुसुम को छोड़कर खड़ा हो गया।

कुसुम उठी और भागते हुवे लाला जी से लिपट गई।

कुसुम _बाबू जी अच्छा हो गया जो आप आ गए नही तो, राजेश मेरा इज्जत लूट लेता,,,।

गांव वाले भी अचंभित थे, कि राजेश ऐसा कर सकता है। उसे तो गांव का मसीहा समझते थे और गांव की बहु के साथ, छी इतनी गंदी हरकत।

लाला _गांव वालो आप सभी ने देखा न ये राजेश मेरी बहु के साथ कितनी गंदी हरकत कर रहा था। अगर हम लोग यहां नही आते तो ये हवस के पुजारी मेरे घर की इज्जत को लूट लेता, ऐसे हवसी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

गांव वाले एक दूसरे का मुंह देखने लगे। उन्हे समझ नहीं आ रहा था।

की वे क्या कहे? राजेश की हरकत से वे भी सदमे में थे।

लाला _मुझे इंसाफ चाहिए, इस हवस के पुजारी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

भाईयो चलो सरपंच की यहां, उनसे इंसाफ मांगते है।

राजेश, वहा से चला गया, और गांव की मंदिर पर जाकर बैठ गया। किसी सोच में डूब गया।

इधर लाला कुसुम और गांव के लोग सरपंच के घर पहुंच गए।

कुसुम रो रही थी,,

सरपंच _क्या बात है, तुम लोग इकट्ठा होकर क्यू यहां आए हो? लाला जी ये तुम्हारी बहु है न क्यों रो रही है ये।

लाला जी _सरपंच जी, ये दुखियारी, रो रही है क्यू की किसी ने इसकी इज्जत लूटने की कोशिश किया है?

सरपंच _कुसुम किसने तुम्हारे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश किया।

कुसुम रोते हुए बताने लगी,,,

राजेश ने मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की, अगर गांव वाले समय पर नही आते तो मैं किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहती।

सरपंच _क्या? राजेश ने ऐसा किया?

लाला _सरपंच जी हमे इंसाफ चाहिए। राजेश को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, उसने मेरे घर की इज्जत को लूटने की कोशिश किया है?

सरपंच ने वहा उपस्थित लोगो से पूछा,,

सरपंच _क्या लाला जी जो कह रहा है वो सच है, क्या तुम लोगो ने भी राजेश को कुसुम के साथ जबरदस्ती करते देखा है।

एक महिला बोली,,

महिला _हां, सरपंच जी, हमे तो अभी भी अपनी आंखों पर यकीन नही हो रहा है, पर ये सब हमने अपनी आंखो से देखा। कुसुम खुद को राजेश की चुंगल से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और राजेश इसके साथ जबरदस्ती करने की।

लाला _सरपंच जी, हमे इंसाफ चाहिए।

तभी वहा राजेश के चाचा भी पहुंच गया। लोगो ने उन्हे राजेश के हरकतों के बारे में बताया। राजेश के चाचा माधव प्रसाद राजेश को लेकर चिन्ता में पड़ गए।

लाला _सरपंच जी आप खामोश क्यूं है? क्या इसलिए की अपराधी आपका भतीजा है? आपको हमे इंसाफ देना होगा? अपराधी को सजा मिलनी ही चाहिए क्यों भाईयो?

कुछ लोगो ने लाला का समर्थन किया।

सरपंच _अगर राजेश ने अपराध किया है तो उसकी सजा उसे जरूर मिलेगी।

आज रात पंचायत का बैठक रखा जाएगा। इंसाफ वही होगा।

अभी आप लोग अपना घर जाइए।

सभी लोग अपना घर लौट गए।

लाला, और कुसुम जब घर पहुंचे तो लाजो और ललिता घर आ चुके थे।

ललिता _अजी, तुम बहु को लेकर कहा गए थे।

कुसुम _रोते हुवे बोली, मां जी राजेश ने मेरी इज्जत लूटने की कोशिश किया, अगर गांव वाले समय पर नही आते तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहती। वह अपनी सास से लिपट कर रोने लगी।

लाला _हम सरपंच के पास, इंसाफ मांगने गए थे।

ललिता _मुझे तो राजेश के नियत पर पहले ही शक था, पहले ही दिन से हम पर बुरी नियत रखता था आज मौका मिला तो फायदा उठाना चाहता था।

लाजो _राजेश भैया ऐसा नहीं कर सकता। जरूर आप लोगो को कोइ गलत फहमी huwa है।

कुसुम _मैं भी राजेश तुम्हारी तरह अच्छा लडका समझती थी और उससे हसी ठिठोली कर लेती थी, पर वह एक हवसी निकला, मुझे अकेला पाकर मुझ पर टूट पड़ा।

वह दिखावटी रोने लगी।

ललिता _बहु, चुप हो जाओ, राजेश को उसकी करतूत की सजा जरूर मिलेगी।

लाजो अपने कमरे में जाकर, लेट गई, और सोचने लगी की राजेश भैया ये आपने क्या किया?

लाजो के जाने के बाद, तीनो अपने चाल को कामयाब होते देख बहुत खुश हो गए।

इधर यह बात, की राजेश ने कुसुम की इज्ज़त लूटने की कोशिश किया, पूरे गांव में जंगल में आग की तरह फैल गए।

गांव के सभी लोग चिंतित हो गए, कोइ आया था जो गांव की भलाई करने, लोगो को उनसे काफी उम्मीद थी। पार इस घटना ने सबको चिन्ता में डाल दिया।

जब भुवन और उसके घर वालो को इस बात का पता चला तो वे राजेश को ढूंढने लगे।

भगत को किसी ने बताए की वह मंदिर में बैठा है।

पदमा _भगत बेटा जाओ राजेश को घर ले आओ, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, पता नही अब क्या होगा?

भुवन मां मैं तुम चिन्ता न करो, मुझे तो लाला की कोइ चाल लगता है? अगर ऐसा huwa तो साले को में नही छोडूंगा।

मैं राजेश को लेकर आता हूं।

राजेश मंदिर पहुंचा।

भुवन_राजेश, गांव वाले क्या कह रहे हैं, एक बार कह दो की ये सब झूठ है, मैं उस साले लाला को छोडूंगा नही।

राजेश _भैया, गलती मुझसे हुई है, मैं भाभी को अकेला पाकर बहक गया था।

भुवन _राजेश ये तू क्या कह रहा है?

राजेश _हां भैया ये सच है!

भुवन _राजेश, तुम चिन्ता मत करो, तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा। चलो घर चलो, घर वाले तुम्हे लेकर बहुत चिंतित हैं।

राजेश भुवन के साथ घर चला गया।

घर जाने के घर के सभी लोग, इकट्ठा हो गए।

पदमा _राजेश बेटा, ये गांव वाले क्या कह रहे हैं? तुम पर कुसुम ने जबरदस्ती करने का इल्जाम लगाया है? क्या सच में तुमने उसके साथ जबरदस्ती किया है?

राजेश खामोश रहा!

पदमा _बेटा बोलता क्यूं नही?

भुवन _मां राजेश वैसे भी परेशान हैं? उससे सवाल पूछकर उसे और परेशान मत करो। जाओ सभी अपने काम करो। जो होगा रात पंचायत में देख लेंगे! मैं राजेश को कुछ नही होने दूंगा।

राजेश तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो।

में दोस्तो से मिलकर आता हूं।

राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा, इधर भुवन, अपने दोस्तो के पास जाकर राजेश को इस मुसीबत से कैसे बाहर निकाला जाए, पर दोस्तो से राय लेने, लगा।

इधर चाय लेकर पुनम, राजेश के कमरे में पहुंची।

पुनम _देवर जी, क्या सच में तुमने कुसुम के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, अगर ये सच है तो मेरे दिल को बहुत ठेस लगेगा।

तुम्हे करने की इच्छा हो रही थी, तो हम लोगो से बोलते, मैं, मां जी और ज्योति दी, तुम्हे मना करते क्या?

क्या जरूरत थी, कुसुम के साथ जबरदस्ती करने की।

राजेश _सॉरी भाभी, मैं बहक गया था।

पुनम _सॉरी बोलने से क्या बिगड़ी बात बन जाएगी, हम लोगो के दिल को जो ठेस लगा है, हम बता नही सकते। पता नही पंचायत क्या फ़ैसला सुनाएगा।

राजेश _पंचायत जो भी फ़ैसला सुनाएगा वो तो मानना पड़ेगा।

आखिर शाम सात बजते ही सभी लोग पंचायत भवन में इकट्ठा होने लगे।

जब सभी लोग इकट्ठा हो गए, पंचायत की कार्यवाही शुरू की गई।

सरपंच _आज का बैठक क्यू रखा गया है? आप सभी को पता होगा?

लाला जी ने इल्जाम लगाया है कि राजेश ने उसकी बहु के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश किया है। वह पंचायत से इंसाफ चाहता है।

पंचायत के बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा,,

कुसुम बेटी _तुम्हारे साथ क्या हुआ है, पंचायत को सारी बाते सच सच बताओ।

कुसुम _राजेश, लाजो को ट्यूशन पढ़ाने पिछले एक माह से हमारे घर आता था। हमे क्या पता था कि इनके नियत में खोट है। आज जब वह ट्यूशन पढ़ाने घर आया तो माजी और लाजो शहर गई हुई थी।

मैं घर में अकेली थी।

मैने राजेश से कहा कि घर में अभी कोइ नही है मैं अकेली हूं तुम बाद में आना जब लाजो आ जाए।

तब राजेश ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया, और कहा भाभी, मैं तुमसे प्यार करता हूं।

तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।

मैने कहा की देवर जी मैं किसी और की अमानत हूं। मैं एक पतिव्रता नारी हूं।मैं अपनी पति के सिवा किसी और मर्द के बारे में सोच भी नहीं सकती।

पर राजेश नही माना, बोला, भाभी ऐसा मौका बार बार नही मिलता। अगर तुम मुझे अपनी मर्जी से करने नही दोगी तो तुमसे जबरदस्ती करूंगा।

मैने उसने हाथ पैर जोड़े की यहां से चला जाए, और मुझे छोड़ दे पर वह नही माना और मुझसे जबरदस्ती करने लगा। तभी घर में बाबू जी और कुछ गांव वाले घर पहुंच गए, तब मेरी इज्जत बच पाई, नही तो मैं आज किसी को अपनी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती। कुसुम रोने लगी।

लाला _राजेश ने मेरे घर की इज्जत को लूटने की कोशिश किया है, हमे पंचायत से इंसाफ चाहिए।

एक पंच _लाला जी कौन कौन लोग थे जिसने राजेश को आपके बहु के साथ जबरदस्ती करते देखा है।

लाला _बहुन्त से लोग थे जी, बताओ भाई, आप सभी ने देखा कि नही राजेश को जबरदस्ती करते।

पंच _अच्छा मंगलू तुम बताओ तुम ये बताओ की लाला के घर क्यू गए थे और उसके घर में क्या देखा।

मंगलू _जी हम लोग राशन लेने लाला जी के दुकान गए थे। पर दुकान में चीनी खत्म हो गया है। चीनी की बोरी घर में रखा है, नौकर आज छुट्टी में है, लाला जी ने चीनी कल ले जाने को कहा, तब हममें से कुछ ने कहा की हमे भी रोजी मजदूरी करने जाना होता है हम रोज राशन लेने नही आ सकते तब लाला जी ने कहा कि अगर ऐसा है तो मेरे घर चलो वही से चीनी ले जाना तब हम सभी लाला जी के साथ उसके घर चले गए।

जब हम लाला जी के घर पहुंचे तो लाला की बहु चीख चिल्ला रही थी, मदद मांग रही थी। राजेश लाला के बहु के ऊपर था। लाला की बहु खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।

लाला _अब तो आप लोगो ने सुन लिया न, अब इस हवस के पुजारी को कड़ी से कड़ी सजा दो।

सरपंच _राजेश, तुम्हे कुछ कहना है इस बारे में।

राजेश _नही, सरपंच जी, मुझे कुछ नही कहना है।

सरपंच _इसका मतलब क्या तुम अपना जुर्म कबूल करते हो।

लाला _अरे भाई, चोर से पूछोगे कि क्या उसने चोरी किया है? तो क्या वो हा बोलेगा।

अब फालतू समय खराब न किया जाए। ओर इस अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिया जाय।

सरपंच _इस मामले में किसी को कुछ बोलना है?

भुवन,_अगर पंचायत की इजाजत हो तो मैं कुछ कहना चाहता हूं।

बूढ़ा पंच _क्या कहना चाहते हो, अपनी बात रख सकते हो।

भुवन _मुझे ऐसा लगता है की राजेश के साथ कुछ धोखा huwa है? पर वह कुछ कहना नही चाहता।

राजेश ने गांव के भलाई के लिए बहुत से कार्य किए है उसका हम गांव वालो पर अहसान है। राजेश भी एक इन्सान है और जवान है, ऐसी उम्र में गलती हो जाती है। राजेश ने गांव के भलाई के लिए जो काम किए है उसे ध्यान में रखते हुए उसे एक मौका देना चाहिए।

क्यू भाईयो?

भुवन के दोस्तो और अधिकांस लोगो ने भुवन की बातो का समर्थन किया।

लाला _इंसाफ सबके लिए एक समान होना चाहिए जी। तुम इस लिए उसके पक्ष में बोल रहे हो क्यू की अपराधी तुम्हारा भाई है, और सरपंच का भतीजा है?

अगर पंचायत से इंसाफ नहीं मिला तो पंचायत पर विश्वास कौन करेगा। फिर सभी लोग अपनी मनमानी करेंगे। कुछ अच्छे काम करने की आड़ में बहु बेटियो की इज्जत से खेलेंगे।

सरपंच _सभी पक्षों की बातो को हमने ध्यान से सुन लिया है अब कुछ समय के बाद पंचायत अपना फ़ैसला सुनाएगी।

तब तक आप सभी से आग्रह है की शांति बनाए रखे।

कुछ देर तक पंचायत के सभी सदस्य आपस में विचार विमर्श किए। उसके बाद किसी फैसले पर पहुंचे।

सरपंच _देखिए, पंचायत ने दोनो पक्षों की बातो पर विचार विमर्श करने के बाद जी फ़ैसला लिया है वह यह है कि राजेश ने कुसुम के साथ जबरदस्ती किया है इसलिए जैसे आप सभी को पता है की किसी महिला के साथ जबरदस्ती करने वाले का मुंह काला कर उसे गधे पर बिठाकर गांव से सदा के लिए निकाल दिया जाता है, राजेश को भी वही सजा मिलनी चाहिए किंतु राजेश ने गांव की भलाई के लिए जो किया है उसे भी भुलाया नहीं जा सकता, अतः पंचायत ने फ़ैसला लिया है कि, राजेश का मुंह काला कर उसे गधे पर नही बिठाया जायेगा, परंतु राजेश को इस गांव को छोड़कर सदा के लिए जाना पड़ेगा।

तभी वहा पर लाजो पहुंची,,,

लाजो _रुकिए सरपंच जी, राजेश को सजा सुनाने से पहले मेरी बातो को भी सुन लिया जाए।

लाला _लाजो बेटी तुम, तू यहां क्या करने आई है। जाओ घर जाओ।

लाजो _सरपंच जी, पंचायत के सामने अपनी बात रखना चाहती हूं।

सभी लोग लाजो की ओर देखने लगे, और उनके मन में प्रश्न उठने लगे की आखिर लाजो क्या कहने आई है।

सरपंच _लाजो तुम क्या कहना चाहती हो? अपनी बात बिना किसी डर के रखो।

लाजो _सरपंच जी मैं यह बताने आई हूं की राजेश भैया बेकसूर है।

सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए।

सरपंच _ये तुम कैसे कह सकती हो कि राजेश बेकसूर है।

लाजो _दरअसल यह मेरे मां बाबूजी और भाभी की चाल थी, राजेश भैया को फसाने की।

यह बात राजेश भैया को भी पता था की मेरी मां और भाभी उसे फसाना चाहते हैं।

लाला _सरपंच जी लगता है मेरी बेटी को किसी ने डराया धमकाया है वह अभी बच्ची है उसकी बातो को न सुनी जाए।

सरपंच _लाजो, तुम क्या कहना चाहती हो, सारी बाते अच्छे से बताओ।

लाजो _मैने एक दिन, मां बाबू जी और भाभी की बाते सुन ली थी की वे राजेश भैया को फसाना चाहते हैं, राजेश भैया को मैने यह बात बताई थी। मैने उनसे कहा भी था कि वह ट्यूशन पढ़ाने मेरे घर न आए मैं ट्यूशन पढ़ाने न आए।

राजेश भैया ने कहा कि मुझे भी इन लोगो की हरकत संदिग्ध लगता है पर तुम्हे मेरी मदद की जरूरत है। इसलिए मैं तुम्हे ट्यूशन पढ़ाना बंद नही करूंगा। आखिर मैं भी देखना चाहता हूं कि ये लोग किस हद तक जा सकते है।

लाला _लगता है राजेश ने मेरी बेटी को बहलाया फुसलाया है, इनकी बातो को नही मानना चाहिए।

सरपंच _लाजो क्या तुम्हारे पास कोइ सबूत है की इन लोगो ने राजेश को फसाना चाहते थे।

लाजो _हां, मेरे पास सबूत है, मैने इन लोगो की बातो को मोबाइल पर रिकार्ड की है।

मुझे लगा था की राजेश भैया के साथ कुछ गलत न हो इसलिए मैंने इन लोगो की बातो को रिकार्ड कर लिया। आप लोग सुन सकते हो।

सरपंच _मोबाइल में जो बाते रिकार्ड है उसे पंचायत को सुनाया जाए।

लाजो ने अपना मोबाइल पे रिकार्ड को चलाने लगी।

रिकार्ड चलाए जाने के बाद स्पष्ट हो गया की किस तरह राजेश को फसाने का प्लान लाला और बीबी, उसकी बहु ने बनाया।

सरपंच _ला ला जी अब आपको कुछ कहना है?

भुवन _अब ये लाला क्या कहेगा, इसे हमारे हवाले करो, साले की जमकर धुलाई करेंगे। भुवन लाला की गर्दन पकड़ लिया।

सरपंच _भुवन छोड़ो, लाला जी को नही तो पंचायत के अवमानना समझकर तुम्हारे खिलाफ कार्यवाही करेगा।

भुवन ने लाला को छोड़ दिया।

सरपंच _लाला जी, तुमने राजेश पर झूठा इल्जाम लगाया है, तुम्हे पता है ना कि झूठे इल्जाम लगाने वाले को भी वही सजा मिलती है जो अपराधी को।

लाला _सरपंच जी मुझे माफ कर दीजिए, मुझसे गलती हो गई।

सरपंच _अब तो पंचायत ही फैसला करेगी की तुम्हे क्या सजा दिया जाय?

भुवन _फ़ैसला सबके साथ समान होता है जी, इन सबका मुंह काला कर गांव से निकाला जाए।

बूढ़ा पंच _लाला, आखिर तुम राजेश को फसाना क्यू चाहते थे।

लाला खामोश रहा।

लाजो _बापू क्या बताएंगे, मैं बताती हूं, ऐसा ठाकुर के कहने पर किया गया। क्यू की ठाकुर राजेश को अपना शत्रु समझता है उसे गांव से निकालना चाहता है।

सरपंच _लाला जी पहले भी कुछ महिलाओं से शिकायत मिली थी की तुम गरीब महिलाओं का फायदा उठाते हो, पर तुम्हारे खिलाफ कोइ सामने नही आया इसलिए तुम बचते रहे।

अब जो अपराध आपने किया है उसके लिए तो आपको सजा मिलेगी ही,,,

सरपंच _राजेश तुम सब जानते हुवे भी अब तक खामोश हो, तुम्हे अब भी कुछ नहीं कहना है।

राजेश _मैं जानता था कि मुझे लाला फसाना चाहता है पर अगर मैं यह बात पहले ही आप लोगो को कह देता तो हो सकता है आप लोग मेरी बात नही मानते, और मेरे पास कोइ सबूत भी नहीं था, मैं लाजो को अपनी मां और बाबू जी के खिलाफ बोलने के लिए भी नही कह सकता था। इसलिए मैं चुप रहा।

जहा तक लाला जी को सजा देने की बात है तो अगर आप लोग मेरा सम्मान करते हैं तो इन्हे छोड़ दिया जाए।

मैं यह जानते हुए भी की लाला जी ने अब तक जो किया है बहुत गलत किया है, पर लाला जी का भी इस गांव की को अभी जरूरत है।

लाला _राजेश बेटा, मैं तुम्हे फसाना चाहता था फिर भी तुम मुझे बचाना चाहते हो, सच में तुम इन्सान नही कोइ फरिस्ते हो। मुझे सजा मिलनी ही चाहिए मैने सच मैं एक बहुत बड़ा अपराध किया है। गरीब महिलाओं का भी फायदा उठाया है। मैं पापी हूं।

मुझे पंचायत जो भी सजा देगी मुझे मंजूर होगा।

पंचायत के सदस्यों ने आपस में विचार विमर्श किया। कुछ देर बाद सरपंच ने फ़ैसला सुनाया।

सरपंच _लाला जी ने अपना अपराध कबूल लिया है। पर राजेश ने पंचायत से उसकी अपराध क्षमा कर देने का निवेदन किया है।

राजेश के निवेदन पर विचार करते हुए लाला और उसके परिवार को माफ किया जाता है परंतु भविष्य ने लाला जी को लेकर कोइ शिकायत आता है तो उसे गांव छोड़कर जाना होगा।

लाला राजेश के कदमों में गीर कर उससे क्षमा मांगने लगा और सबके सामने उसने वादा किया की आगे वह कोइ गलत कार्य नही करेगा। साथ ही उसने घोषणा किया की स्कूल से लगी उसकी पांच एकड़ जमीन वह स्कूल को दान करेगा।

उसके बाद सभी लोगो ने राजेश बाबू की जय के नारा लगाने लगे।

सभी लोग अपने अपने घर चले गए।

घर जानेके बाद पदमा ने राजेश का आरती उतारा, मेरे बेटे को किसी नजर न लगे। मेरे बेटे के पीछे बहुत से दुश्मन पड़े हुवे है।

घर के सभी लोग खुश थे।

अगले दिन राजेश फिर दोपहर में लाला जी के घर पहुंचा, आज आखिरी दिन था कल लाजो की परीक्षा थी।

राजेश _लाजो आज, मां जी और भाभी दिखाई नही दे रहे है।

लाजो _भैया दोनो कमरे में आराम कर रहे है?

राजेश _आज माहौल कुछ ठंडा ठंडा लग रहा है, आज आखिरी दिन है इतने दिनो तक मुझे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अपने अंगो का प्रदर्शन किया। मुझे गर्म किया आखिरी दिन,,, मजा नही आ रहा है।

लाजो _भैया, तो बुला लो ना भाभी को माहौल गर्म करने, हंसते हुए बोली,,

लाजो _भाभी ओ भाभी,,

कुसुम कमरे से बाहर आई,,

राजेश _अरे भाभी आप हमसे नाराज हो क्या?

कुसुम _नही देवर जी हम अपने किए पर शर्मिंदा है न इसलिर आपके सामने नही आना चाहते थे ।

राजेश _अरे भाभी जो huwa उसे भुल जाओ।

आज हमारे लिए चाय नही बनाओगी।

कुसुम _अभी बनाती हूं देवर जी।

राजेश _पर आज हम गाय की दूध वाली चाय नही पियेंगे।

कुसुम _तो,

राजेश _आज तो आपकी दूध की चाय पियेंगे, राजेश ने कुसुम को अपनी गोद पर बिठा लिया।

कुसुम शर्माने लगी,,

राजेश _लाजो जाओ गिलास लेकर आवो, भाभी का दूध निकालेंगे ।

लाजो _अभी लाई भैया।

आगे अगले अपडेट में,,,
 
राजेश ने कुसुम को अपने गोद में बिठा लिया और लाजो से कहा।

राजेश _लाजो, भाभी का दूध निकालने के लिए गिलास तो लेकर आओ।

लाजो _अभी लाती हूं भैया।

राजेश _अरे तुम रुको, मां जी कहा है उनसे कहो, तुम सवाल बनाओ ।

लाजो _मां, कहा हो,, राजेश भैया बुला रहे है?

ललिता अपने कमरे में आराम कर रही थी वह बाहर आई।

ललिता _क्या है बेटी?

लाजो _मां, राजेश भैया एक गिलास मंगा रहे हैं। भाभी का दूध निकालने। आज राजेश भैया भाभी की दूध से बना चाय पीना चाहते हैं।

राजेश _मां जी, अगर हम भाभी की दूध से बना चाय पीए तो आपको एतराज तो नही।

ललिता _बेटा अब मैं क्या बोलूं, जैसे आपको अच्छा लगे।

राजेश _अच्छा, तो फिर भाभी की दूध निकालने में मेरी मदद करो। जाओ कीचन से गिलास लेकर आओ।

ललिता, मुस्कुराते हुवे, कीचन में गई और एक गिलास लेकर आई।

इधर राजेश ने कुसुम का ब्लाउज निकाल दिया था। उसकी चूची एकदम नंगी हो गई थी।

राजेश ने दोनो चुचियों को अपने हाथो से पकड़ कर उसकी चूचक को दबाया। दूध की फौवारा निकलने लगा।

ललिता दूध को गिलास में इकट्ठा करने लगी।

राजेश कुसुम की चुचियों को मसल मसल कर दूध निचोड़ने लगा।

कुसुम राजेश की हरकत से एक दम गर्म हो गई। उसे मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

उसकी boor पानी छोड़ने लगी।

जब गिलास पूरा भर गया।

राजेश _लो भई गिलास तो पूरा भर गया। पर दूध तो अभी भी निकल रहा है।

अब बचे हुए दूध को मैं पी लेता हूं।

राजेश बारी बारी से कुसुम की चूची मसल मसल कर पीने लगा।

कुसुम की हालात खराब होने लगी।

राजेश _भाभी अब जाओ और ये दूध का गिलास ले जाओ, और एक बढ़िया सी चाय बना लाओ।

कुसुम राजेश की गोद से उठ गई और गिलास लेकर शर्माती हुई कीचन में चली गई।

राजेश _मां जी जब तक, चाय नही बन जाता आप मुझे अपना दूध पिला दो।

ललिता _अरे बेटा, मेरे कहा दूध आते हैं? शर्माते हुए बोली।

राजेश _आओ मां जी कोशिश करते हैं, कोशिश करने से हो सकता है दूध आ जाए। क्यों लाजो?

लाजो _हां मां, राजेश भैया ठीक कह रहे है? राजेश भैया को कोशिश तो करने दो।

राजेश ने ललिता को अपने गोद में बिठा लिया और उसकी ब्लाउज निकाल फेका।

और ललिता की बड़े बड़े मम्मे दबा दबा कर चुचक को चूसने लगा।

ललिता _सिसकने लगी। वह उत्तेजित होने लगी।

लाजो _भैया मां की दूध आ रहा है क्या?

राजेश _नही, अभी तक तो नही, फर दूदू चूसने में मज़ा आ रहा है।

माजी की दूदू बड़े मस्त है।

लाजो _हा भैया मां के दूदू तो काफी बड़े बड़े है मेरे से दोगुने।

लाजो _भैया क्या आप मेरे भी चूसेंगे?

राजेश _, क्यू, तुम्हे भी मन कर रहा क्या चुसाने का।

लाजो _हूं। लाजो अपनी दोनो हाथो से अपनी चूची मसलने लगी।

राजेश अच्छा _आओ मेरे गोद पे बैठो, तुम्हारे भी चूस देता हूं।

लाजो _मां, अब तुम भैया की गोद से उठो मुझे बैठने दो।

ललिता राजेश की गोद से उठ गई।

लाजो अपनी कुर्ती और ब्रा उतार दी। और राजेश के गोद में बैठ गई।

राजेश ने लाजो की दूदू जो मीडियम साइज के थे मसलते हुवे कहा।

लाजो, तुम्हारे बूब्स तो एकदम कड़े हैं।

लगता है तुम पहली बार दबवा रही हो।

लाजो _हां राजेश भैया इसके पहले कभी नही मसलवाई।

लाजो को उत्तेजना महसूस होने लगी, उसकी मुंह से सिसक नकलने लगी। राजेश ने उसके चूचक मुंह में भर कर चूसने लगा।

लाजो की boor में पानी भरने लगा।

इधर राजेश का लंद भी तनकर लंबा और मोटा हो गया था।

लाजो _भैया, मेरी कूल्हे पे कुछ चुभ रहा है।

राजेश _अरे लाजो तुम लोगो की मस्त चुचियों का रसपान करने से मेरा नुनु बड़ा और मोटा हो गया है, आजाद होने के लिए छटपटा रहा है।

लाजो _अगर ऐसी बात है तो कर दो ना उसे आज़ाद, क्यू तकलीफ दे रहे हो बेचारे को।

राजेश _अच्छा ठीक है, तुम ही आज़ाद करदो उसे।

राजेश लाजो को गोद से उतार दिया और खड़ा हो गया।

लाजो ने राजेश के पैंट पर लगे बेल्ट खोलने लगी और उसकी पैंट का बटन खोल नीचे खींच दिया।

उसके बाद राजेश की चड्डी को नीचे खिसकाया।

राजेश के लंद देखकर लाजो का होश उड़ गए।

लाजो _भैया, इतना बड़ा, ये तो घोड़े का लंद लग रहा है। लाजो अपने हाथ से लंद को नापने लगा।

राजेश _मां जी अब देख क्या रही हो, चलो काम में लग जाओ।

ललिता राजेश के लंद के नीचे बैठ गई। लाजो भी बैठी हुई थी।

ललिता ने लंद पकड़ कर पहले प्यार से सहलाई फिर मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश को मजा आने लगा।

राजेश _आह, उन, थोड़ा और अंदर लो,,,, हा ऐसे ही मस्त चूस रही हो आह,,

लाजो _मां मुझे दिखाओ मैं भी चूस कर देखू।

लाजो ने राजेश का लंद मुंह में लेकर चूसने की कोशिश की। आधा ही मुंह में ले पा रही थी।

वह ललिता जैसे चूसी थी, उसी तरह वह भी चूसने लगी।

लाजो _भैया आपका तो और मोटा और लंबा हो रहा है।

तभी कुसुम भी वहा आ गई।

राजेश _अरे भाभी चाय बन गया क्या?

कुसुम _अरे देवर जी चाय बनाने में थोड़ा समय है।

राजेश _अच्छा, चाय को बाद में पियेंगे आओ सब मिलकर मजा करते है, ऐसा मौका फिर नही मिलने वाला।

कुसुम भी राजेश के लंद के नीचे बैठ गई अब बारी बारी तीनो राजेश के लंद को चूसने लगी उसके गोटे को चाटने लगी।

कुसुम उठी और राजेश के शर्ट बनियान भी उतार कर पूरा नंगा कर दिया।

राजेश _अरे भाई मुझे नंगा करके आप लोग कपड़े में हो चलो तुम लोग भी प्राकृतिक अवस्था में आ जाओ।

ललिता _तुम्हारे कपड़े हम उतारे है तो, हमारे कपड़े तुम उतारो।

राजेश _ठीक है,

राजेश ने ललिता की साड़ी का पल्लू पकड़ा और खींचने लगा, ललिता गोल गोल घूमने लगी।

ललिता की साड़ी राजेश के हाथ में आ गया।

राजेश ने साड़ी को सूंघा, फिर फर्श में फेक दिया। उसके बाद कुसुम की साड़ी खींचकर निकाल दिया।

राजेश ने ललिता को बाहों में भर कर ओंठ चूसने लगा ललिता भी साथ देने लगी, राजेश ने ललिता का पेटीकोट का नाडा खीच दिया। उसका पेटीकोट पैर पे गिर गया।

राजेश ने एक उंगली। ललिता की boor में डाल कर अंदर बाहर करने लगा। ललिता सिसकने लगी। राजेश की उंगली ललिता की boor के पानी से भीग गया।

इधर लाजो और कुसुम अपनी अपनी boor रही थी।

राजेश ने ललिता को अपनी बाहों में उठाया और उसे टेबल पे लिटा दिया।

और ललिता की boor चाटने लगा। ललिता आनंद में हाथ पैर कपकपाने लगी।

राजेश _लाजो मेरा, लंद पकड़ कर अपनी मां की boor के छेद में डालो।

लाजो ने राजेश का लंद पकड़ा और उसे अपनी मां के boor के छेद में रख दी।

लाजो _भैया, आपका तो बहुत बड़ा और मोटा है छेद तो छोटा लग रहा है जाएगा कैसे?

कुसुम _अरे ननद जी देखना राजेश का लंद को सासु मां कैसे निगलती है।

राजेश ने ललिता की कमर को पकड़ कर एक जोर का धक्का मारा लंद सरसराता huwa आधा अंदर चला गया। ललिता चीख उठी।

लाजो आश्चर्य से देखने लगी, एक ही धक्के में आधा लंद boor के अंदर।

अब राजेश ने एक दूसरा प्रहार किया। लंद जड़ तक boor में समा गया। लेकिन लंद का टोपा ललिता के बच्चेदानी से टकराया।

वह फिर से चीख पड़ी।

लाजो, आश्चर्य से देख रही थी boor ने पूरा लंद निगल लिया था।

अब राजेश ललिता की चूची पकड़ कर दनादन,boor चोदना शुरू कर दिया।

ललिता की मादक सिसकारी, चूड़ियों की खनक और लंद की boor में आने जाने से उत्पन आवाज़, फच फाच, बरामदे में गूंजने लगी।

लाजो आश्चर्य से देख रही थी तो कुसुम अपनी boor रगड़ रही थी। वह अपनी सास को चुद्ते देख बहुत गर्म होने लगी।

इधर राजेश का लंद ललिता की भगनासा को रगड़ते हुवे पूरे गहराई तक अंदर आने जाने से उसे संभोग का परम सुख प्राप्त हो रहा था।

ऐसा आनद उसे पहली बार मिल रहा था।

उसकी chut से पानी बहकर टेबल पर टपकने लगा।

लाजो _भैया मां तो मूत रही है।

कुसुम _ये मूत नही मां जी की boor की पानी है जब औरत को बहुत मजा आता है तो ऐसे ही पानी छोड़ती है।

राजेश गपागप लंद boor में पेले जा रहा था फिर अचानक से लंद बाहर निकाल लिया।

लाजो _भैया आपका लंद तो boor का पानी पीकर और लंबा और मोटा हो गया।

कुसुम, राजेश के लंद को चूसने लगी, उसके बाद फिर से ललिता की boor में डाल दी।

राजेश फिर से चोदने लगा।

इस बार लगातार चोदते रहा, कुछ देर में ही ललिता चीखते हुए झड़ने लगी।

लाजो डर गई।

लाजो _मां तुम ठीक तो हो ना,,,

कुसुम _मां जी बिलकुल ठीक है, वह झड़ गई है न, इस आनद में उसके मुंह से चीख छूट गई।

राजेश ने चोदना बंद किया और लंद boor से बाहर निकाल दिया।

अब कुसुम को टेबल पकड़ा के झुका दिया। और उसकी टांग चौड़ी कर उसके बीच आ गया।

राजेश ने कुसुम की योनि के छेद में लंद रख कर एक जोर का झटका मारा, लंद boor को चीरकर अंदर चला गया। कुसुम चीख उठी।

राजेश ने लाजो को अपने पास खींचा और उसकी ओंठ चूसते हुए, दनादन कुसुम को चोदना शुरु कर दिया।

कमरे में कुसुम की मादक सिसकारी और फ्च फ़च की आवाज़ गूंजने लगा।

अब राजेश दोनो हाथ से कुसुम की कमर पकड़ी कर गपागप लगातार boor चोदता रहा जब तक कुसुम झड़ नही गई।

कुसुम के झड़ने के बाद राजेश ने अपना लंद उसकी boor से बाहर निकाल लिया।

लाजो को लंद चूसने का इशारा किया।

लाजो राजेश के लंद को मुंह में लेकर चूसने लगी। राजेश उसकी बाल पकड़ लिए और लंद को मुंह में ठेलने लगा।

अब राजेश ने ललिता को टेबल से उठा कर घोड़ी बना दिया और दनादन तब तक चोदते रहा जब तक वह झड़ नही गई।

फिर कुसुम को टेबल में लिटा कर उसकी जमकर ठुकाई किया, और उसे एक बार और झाड़ा।

राजेश ने अपना लंद कुसुम के boor से बाहर निकाला।

लाजो उसे चूसने लगी।

राजेश _चलो अब हम बेड पर चलते है।

सभी लाला जी के कमरे में आ गए। राजेश बेड में जाकर पीठ के बल लेट गया।

और ललिता को लंद पर बैठने का इशारा किया

ललिता पलंग के ऊपर चढ़ गई और राजेश के लंद को पकड़ कर अपनी boor के छेद में रख कर बैठ गई।

लाजो ये सब देख रही थी। उसकी हालात भी खराब हो चुकी थी उसकी चड्डी गीली हो चुकी थी। वह भी अपनी सलवार उतार कर नंगी हो गई।

कुसुम ने लाजो की boor को चाटना शुरु कर दी।

इधर ललिता राजेश के लंद के ऊपर उछल उछल कर चुदाने लगी।

कमरे में ललिता की मादक सिसकारी चूड़ियों की खनक गूंजने लगी।

कुछ देर में ही ललिता फिर से झड़ कर राजेश की बाहों में लुड़क गई।

राजेश ने उसे साइड किया और कुसुम को इशारा किया कुसुम लाजो की कुंवारी chut चाटना बंद कर पलंग के ऊपर चढ़ गई और राजेश के लंद को हाथ से पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर बैठ गई।

राजेश ने कुसुम की कमर को पकड़ कर अपनी कमर नीचे से हिला हिला कर, कुसुम की योनि में लंद को अंदर बाहर करने लगा।

कुसुम सिसकने लगी।

उसके बाद राजेश, कुसुम की कमर पकड़ कर अपने लंद पर पटक पटक कर चोदना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में कुसुम भी फिर से झड़ कर राजेश की बाहों मे ढेर हो गई।

राजेश ने उसे दूसरे साइड लिटा दिया।

कुसुम राजेश और ललिता तीनो पलग पर लेटे थे।

राजेश के लंद अभी भी खड़ा था।

लाजो _भैया, अब मुझे चोदो।

राजेश _लाजो, तू अभी कुंवारी है मेरी लंद को नही झेल पाएगी। तेरी boor फट जाएगी तुम्हे दर्द होगा।

तुम्हे कल परीक्षा भी दिलानी है।

ललिता _बेटी राजेश ठीक कह रहा है, तू नही ले पाएगी।

कुसुम _boor तो एक दिन फटनी ही है। राजेश से चुदाने का मौका बार बार नही मिलेगा, लाजो तुम अपना सिल राजेश से ही तुड़वा लो।

लाजो_हा, भैया भाभी ठीक कह रही है, मुझे आपसे ही अपनी सील तुड़वानी है।

प्लीज मेरा सिल तोड़ो न।

राजेश _तुम्हारी सिल तोड़ने से पहले मां जी और भाभी का सिल तोडूंगा।

कुसुम _पर देवर जी हमारी सिल तो पहले ही टूट गई है।

राजेश ने कुसुम की गाड़ में उंगली घुसा कर कहा इसकी सिल तोड़नी है।

कुसुम _हाय दिया, इतना मोटा लंद इतनी सकरी, रास्ते में थोड़े ही जायेगा, हमारी तो गाड़ फट जाएगी।

राजेश _हूं, पहले मां जी के फाड़ेंगे उसकी गाड़ चौड़ी है, वो आराम से ले लेगी।

ललिता _न बाबा मैं नही ले पाऊंगी, बहुत दर्द होगा।

राजेश _लाजो, जाओ कीचन से घी का डब्बा ले आओ और इन दोनो की गाड़ में भर दो।

लाजो, कीचन से घी का डब्बा ले आय।

राजेश बेड से उठा और ललिता को घोड़ी बनाकर उसकी गाड़ में उंगली से घी अंदर डाल दिया और अपने लंद पर भी घी चुपड़ दिया।

ललिता _बेटा, मैं नही ले पाऊंगी, गाड़ मत मारो।

Boor चोद लो।

राजेश _boor बहुत चोद लिया अब तो गाड़ का मजा लेना है।

राजेश ने पहले उंगली डालकर गाड़ का छेद चौड़ा किया फिर अपना लंद धीरे धीरे करके आखिर ललिता के गाड़ में उतार ही दिया।

अब राजेश धीरे धीरे लंद को गाड़ में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

ललिता दर्द से बिलबिलाने लगी, पर धीरे धीरे दर्द कम होता गया और अब उसे गाड़ मरवाने में मजा आने लगा।

इधर राजेश एक उंगली कुसुम की गाड़ में डालकर अंदर बाहर कर रहा था तो दुसरी तरफ ललिता की गाड़ भी बजा रहा था।

अब राजेश ललिता की गाड़ से लंद निकाल कर कुसुम की गाड़ में घुसाने की कोशिश में लग गया और अन्त में कामयाब भी हो गया। इसके बाद राजेश, बारी बारी कुसुम और ललिता की गाड़ मारने लगा।

दोनो को गाड़ मरवाने में एक अलग ही मजा आ रहा था।

लाजो _राजेश भैया, अब मेरी भी सिल तोड़ तो,, अब मुझे रहा नही जा रहा।

राजेश _ठीक है, तुम पलंग में लेट जाओ।

लाजो पलंग पर लेट गई।

राजेश, गाड़ मारना बंद कर, पलंग पर चड गया, उसके बाद वह लाजो को अपनी गोद में बिठा कर उसकी ओंठो को जी भर कर चूसा। उसकी मम्मे मसले, चूसे फिर उसे बेड पर लिटा दिया।

उसकी कमर के नीचे तकिया रख दिया। उसकी टांगे फैला कर बीच में आ गया।

कुसुम राजेश के लंद को पकड़ कर लाजो की कुंवारी boor के मुख पर रख दिया।

अब राजेश ने लाजो की ओंठ को अपनी मुंह में भर लिया और अपना लंद का दबाव योनि में डालने लगा।

लंद धीरे धीरे योनि में सरकने लगा।

जब लंद सरकना बंद किया राजेश ने एक जोर का दबाव डाला, लंद boor की झिल्ली तोड़कर अंदर चला गया।

लाजो चीखना चाही पर राजेश ने उसकी मुंह अपने मुंह में भर लिया था।

वह चीख न सकी, उसकी आंखों में आसूं भर गया।

कुछ देर वैसे ही राजेश लेटा रहा, कुछ देर बाद वह अपना लंद थोड़ा बाहर खींचा, फिर धीरे से धकेला।

राजेश लाजो की चूची से खेलने लगा।

लाजो का दर्द कम होने लगा अब राजेश अपने लंद को लाजो की योनि में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया, कुछ देर दर्द करने के बाद अब लाजो को भी मजा आने लगा।

इधर राजेश के लंद में लाजो की झिल्ली फटने से खून निकल रहा था। ललिता एक कपड़ा लाकर राजेश की लंद और लाजो की boor को साफ की उसके बाद राजेश ने फिर से लाजो के boor में लंद डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया।

लाजो को अब दर्द के बजाय मजा आने लगा, उसकी मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगी

उसकी boor से पानी बहने लगा।

कुछ ही में उसके हाथ पैर कपकपाने लगे और वह चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

लाजो फूल से कली बन चुकी थी।

इधर राजेश का भी अब आने वाला था।

राजेश _अब मेरा भी आने वाला है, किसके में छोड़ूं।

कुसुम _देवर जी मेरे अंदर छोड़ो, ताकि इस घर तुम्हारे जैसे मर्द पैदा हो सके।

राजेश ने लाजो के boor से अपना लंद निकाल कर कुसुम को घोड़ी बनाकर, उसकी boor में डाल कर गाच गैच, चोदना शुरू कर दिया।

और कुछ देर में आज,,, आह, मां,,, आह,

करते हुए झड़ने लगा। वह वीर्य कि लंबी लंबी पिचकारी कुसुम के गर्भ में छोड़ने लगा।

गर्म गर्म वीर्य से अपनी योनि को महसूस करके, एक अद्भुत सुख को प्राप्त करते हुवे कुसुम फिर से झड़ गई।

राजेश झड़ने के बाद पलंग पर लेट गया। लाजो उससे चिपक कर चूमने लगी।

उसे अपने सीने से लगा ली।

कुछ देर सभी सुस्ताने के बाद अपने अपने कपड़े पहनने लगे।

कुसुम और ललिता की गाड़ फट चुकी थी जिससे उन्हें चलने में तकलीफ हो रही थी। फिर भी आज तीनो बहुत खुश थे राजेश से जो सुख उन्हे मिला था कभी उसकी कल्पना तक नही की थी।

संभोग का परम आनंद जिसे शब्दो मे बया नही किया जा सकता, राजेश से उन्हे मिला था।

राजेश इस खेल का महारथी बन गया था, औरत को कैसे खुश करना है, कैसे मैदान में लंबे समय तक डटे रह सकते है, सब कुछ सीख लिया था।

राजेश को भी इन तीनो औरतों को चोदने में एक अलग ही मजा आया था ।

पर हर chudai के बाद उसे लगता था कि वह अच्छा नही कर रहा है, वह निशा से दूर होता जा रहा है।

अब निशा के सामने क्या मुंह लेकर जायेगा? सच में वह एक आवारा बन चुका है।

ऐसा आवारा, अगर निशा उसे अपना भी ले तो वो उसे अकेली झेल नही पाएगी। वो तो फूलो जैसे नाजुक है, मैं एक लौह पुरुष। मेरे झड़ते तक वह टिक नही पाएगी ।

ये मैंने अपने को क्या बना डाला, एक काम पुरुष।

राजेश जब जोश में आता तो, सब भुल जाता और न चाहते हुए वह काम देव बन जाता, जिसका एक मात्र उद्देश्य औरत को जन्नत का सैर कराने रह जाता। उसे अधिक से अधिक काम सुख देना, जिससे वह उसका गुलाम बन जाय। और होता भी यहीं था जो औरत राजेश से एक बार chuda लेती फिर उसे दूसरे से चुदाने में मजा नही आता।

वह औरत बस राजेश को एक बार और पाने की ख्वाब सजाती रहती।

उस दिन राजेश ने कुसुम की दूध से बना चाय पिया, और कुसुम को कल की परीक्षा के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। फिर घर आ गया।

अपनी परीक्षा की तैयारी करने लगा।

इधर निशा राजेश को भूलने की कोशिश करने लगी।

आर्यन, सीमा और निशा एक बीच दोस्ती बढ़ने लगी।

एक दिन आर्यन ने सीमा को बताया कि वह निशा को प्यार करने लगा है, पर उससे कहने की हिम्मत नही हो रही है।

सीमा _ये मुश्किल है?

आर्यन _क्या मुश्किल है, मैं समझा नही।

सीमा _यहीं, निशा के मन में प्यार जगाना।

आर्यन _पर, क्यू सीमा?

सीमा _क्यू की वह किसी और से प्यार करती है?

आर्यन _किसी और से प्यार करती है? किस्से?

कौन है वो खुशनशीब।

सीमा _आर्यन छोड़ो, उसे जानकर करोगे क्या?

वैसे भी निशा उसकी सकल देखना नही चाहती?

आर्यन _कभी कहती हो, निशा किसी और से प्यार करती है फिर कहती हो निशा उसका सकल देखना नही चाहती। ये कैसी पहेली है?

सीमा _आर्यन, तुम एक अच्छे लड़के हो, निशा का ख्याल छोड़ दो। यहीं तुम्हारे लिए अच्छा होगा?

आर्यन _सीमा आखिर बात क्या है? सब सच बताओ।

सीमा _दरअसल बात ये है की निशा राजेश से प्यार करती थी, या कहूं अभी भी करती हैं, पर वह उस लड़के को भुल जाना चाहती है, पर मुझे लगता है वह भुल नही पाएगी।

आर्यन _तुम्हारी बाते तो मुझे कुछ समझ नही आ रही, जब निशा किसी से प्यार करती है तो उसे भूलना क्यू चाहती है?

सीमा _क्यू की उस लड़के ने निशा को धोखा दिया!

आर्यन _कैसा धोखा?

सीमा _उसने दूसरे लडकियों के साथ संबंध बनाएं। इस बात की जानकारी निशा को हुई तो यह सदमा बर्दास्त करना उसके लिए मुस्किल था। वह इंडिया छोड़ दिया और लंदन चली आई।

आर्यन _ओह तो ये बात है? तब तो उसे मेरी जरूरत है? ताकि उस लड़के को भुल सके।

सीमा _अभी वह उसे भूली नही है? अगर तुम अभी उसे प्रपोज करोगे तो हो सकता है दोस्ती ही तोड़ दे।

इसलिए अगर तुम उसे प्रपोज करना चाहते हो तो धीरे धीरे उसका दिल जीतो, और जब तुम्हे विश्वास हो जाए की निशा तुम्हे न नही कहेगी। तुम उसे प्रपोज करो।

आर्यन _सीमा तुम ठीक कह रही हो, निशा को अब मैं प्रपोज करने से पहले उसका दिल जीतूंगा। अच्छा ये तो बताओ की आखिर उस लड़के में ऐसी क्या बात थी की निशा उससे प्यार करने लगी।

सीमा _ये पूछो क्या खास बात नही थी? सब लडकिया उस पर मरती थी।

रआर्यन _क्या, सब लडकिया?

तुम भी?

सीमा _मैने कहा न सब लडकिया?

निशा तो लड़को से दूर भागती थी, उन्हे लड़के पसंद नही थे पर राजेश की अच्छाइयों ने उसके लिए निशा के दिल में अपने लिए जगह बना ली।

आर्यन _आखिर उस लड़के में ऐसी क्या खास बात है? मैं भी एक बार उससे मिलना चाहूंगा।

सीमा _पर उसके लिए तुम्हे इंडिया जाना पड़ेगा।

आर्यन _मौका मिला तो जरूर जाऊंगा।

सीमा जी अब मैं पहले, निशा जी का दिल जीतूंगा उसके बाद, उसे प्रपोज करूंगा?

सीमा _हा ये ठीक रहेगा!।

इधर दिव्या, ने राजेश को फोन किया?

दिव्या _राजेश, कैसे हो?

राजेश _मैं ठीक हूं दिव्या जी। आप कैसी है?

दिव्या _मैं भी ठीक हूं?

राजेश _दिव्या जी कुछ काम था क्या?

दिव्या _नही कुछ खास नही? तुम्हारी दीदी की तबियत कैसी है? कुछ प्रोब्लम तो नही।

राजेश _नही दिव्या जी वो तो बिल्कुल ठीक है?

दिव्या _, उसकी डील वरी का समय पास आ गया है। तुम लोगो को उसका खास ध्यान रखना होगा। जरूरत पड़े तो मुझे काल करना। मैं गाड़ी भिजवा दूंगी। अपनी दीदी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले आना। कोइ रिस्क मत लेना।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

दिव्या _वैसे राजेश आज दोपहर में क्या कर रहे हो?

राजेश _जी, वैसे तो मैं अपनी परीक्षा की तैयारी करता हूं और तो कोइ काम नही है।

दिव्या _दरअसल मुझे मुवी देखे बहुत समय हो गई है, पता चला कि एक अच्छी मूवी आई है तो देखने का मन है पर यहां तो कोइ दोस्त हैं नही जिसके साथ मैं मूवी देखने जाऊं? क्या तुम चलोगे मेरे साथ मुवी देखने।

राजेश _पर दिव्या जी आपकी तो ड्यूटी रहती हैं न।

दिव्या _आज सन्डे है न तो आज दो बजे तक ही ड्यूटी करुंगी वैसे तो सन्डे को छुट्टी रहती है फिर भी कुछ जटिल केश के लिए जाना पड़ता है।

राजेश _ओह, तब तो ठीक है।

पर ठाकुर साहब को पता चलेगा कि आप मेरे साथ मूवी देखने गई हो, तब। आपको डांट पड़ेगी।

दिव्या _मैं अब इतनी बच्ची भी नही हूं कि एक मूवी देखने के लिए भी खुद फ़ैसला न ले सकू। वैसे मैने मां से बात कर ली है और वह मान गई है। वैसे भी पिता जी अभी राजधानी गए हुवे है। अभी विधानसभा सत्र चल रहा है न।

राजेश _पर गीता दी के साथ भी जा सकती थी।

दिव्या _दी को मूवी पे कोइ इंट्रेस्ट नही। वैसे भी अब वह राजनीति से जुड़ गई है जहा भी जाती है कार्यकर्ता घेर लेते है।

राजेश _ओह, ये बात है? तो फिर ठीक है दिव्या जी चलते है मूवी देखने। पर लक्ष्मण पुर में तो सिनेमा घर है नही।

दिव्या _धरम पुर में तो है न यहां से 50km दूर, एक घंटा तो जाने में ही लगेगा।

हम 2बजे निकलेंगे, 3बजे से मूवी सुरू होगी। 7बजे तक घर आ जायेंगे।

राजेश _ठीक है जी।

दिव्या _एक काम करना, तुम 10 बजे मेरे साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चलना वही से हम मूवीदेखने चलेंगे।

राजेश_ठीक है दिव्या जी।

राजेशने जब घर के लोगो को इस बारे में बताया कि वह दिव्या जी के साथ मूवी देखने जा रहा है।

पदमा _बेटा, ये ठाकुर तुम्हे गांव से भगाना चाहता है, वह तुम्हे दुश्मन समझता है और तुम उसकी बेटी के साथ मूवी देखने जा रहे।

ठाकुर की बेटी को मना कर देना चाहिए था।

राजेश _ताई अगर उसे मना करता तो उसे अच्छा नही लगता।

पदमा _बेटा, क्या ठाकुर अपने बेटी को तुम्हारे साथ मूवी देखने भेजेगा।

राजेश _अभी तो ठाकुर, राजधानी गया huwa है?

पदमा _जब आयेंगे तो पता तो चलेगा ही।

राजेश _दिव्या ने कहा है की उसकी मैं ने इजाजत दी है।

ताई आप बेकार ही चिन्ता कर रही है। दिव्या जी ठाकुर को समझा लेगी।

राजेश 10 बजे बाइक से हवेली पहुंच गया।

वहा पर दिव्या उसी के आने का इन्तजार कर रही थी।

जब वह हवेली पहुंचा।

दिव्या _राजेश तुम आ गए। मैं तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी।

राजेश _मुझे लेट तो नही हो गया।

दिव्या _नही तुम बिलकुल सही समय पर आए हो।

तभी वहा गीता भी आ गई,,

राजेश _नमस्ते गीता दीदी।

गीता _नमस्ते राजेश कैसे हो?

राजेश _मैं बिल्कुल ठीक हूं दीदी, आप कैसी है?

गीता _मैं भी बिल्कुल ठीक हूं।

राजेश _दीदी आप भी क्यू नही चलती मूवी देखने?

गीता _नही राजेश, अगर मैं मूवी देखने गई तो, कार्यकर्ता पीछे पड़ जायेंगे। मूवी देखने का मजा खराब हो जायेगा। तुम लोग जाओ।

तभी वहा ठकुराइन भी आ गई,

रत्नवती_अरे राजेश बेटा तुम आ गए।

राजेश ने पैर छूकर प्रणाम किया।

राजेश_हा, मां जी, आप कैसी है।

रत्नवती_मैं ठीक हूं बेटा तुम कैसे हो?

राजेश_मैं भी बिल्कुल ठीक हूं। मां जी।

रत्नवती_बेटा, तुम दिव्या की हिफाजत करना। मैं उसे तुम्हारी जिम्मेदारी पे भेज रही हूं।

, राजेश _मां जी आप बिल्कुल चिन्ता मत करो, दिव्या जी सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी है।

दिव्या _अच्छा मां अब हम लोग चलते है।

अरे बेटी राजेश कितनी दिन बाद आया है उसे चाय नाश्ता तो कर लेने दो।

राजेश _, मां जी मैं चाय नाश्ता घर से करके आया हू।

रत्नवती _अच्छा तो काफी बनवा देती हूं, तुम्हे तो काफी पसंद है ना।

राजेश _, अच्छा ठीक है मां जी आप जिद कर रही है तो, काफी पीकर निकलेंगे।

नौकरानी ने कुछ देर बाद काफी लेकर आई सभी लोग काफी पिए।

दिव्या _अच्छा मां हम चलते है।

रत्नवती _ठीक है बेटी।

दिव्या _दीदी हम लोग चलते हैं।

गीता _ठीक है, छोटी, तुम दोनो अपना ख्याल रखना।

राजेश तुम लोग मूवी खत्म होते ही घर के लिए निकल जाना।

राजेश _ठीक है दीदी।

राजेश अपना बाइक हवेली में ही छोड़ दिया।

दिव्या _राजेश, कार तुम चलाओ, ड्राइवर को ले जा कर क्या करेंगे?

राजेश ने कार ड्राइव किया और दोनो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चले गए वहा पर दिव्या कुछ मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी लिया और आवश्यक काम निपटाई।

उसके बाद दोनो 1: 30बजे धरम पुर के लिए निकल पड़े।

राजेश _दिव्या जी आखिर मूवी कौन सी लगी है?

दिव्या _सैयारा

राजेश _ये तो कोइ रोमांटिक मूवी है न।

दिव्या _हां, लोगो को मूवी को काफी पसंद आ रही है। काफी अच्छी चल रही हैं मूवी तो मैंने भी देखने का मन बनाया।

दिव्या _क्या तुम्हे रोमांटिक मूवी पसंद नही।

राजेश _पसंद है, दिव्या जी।

रास्ते पर कई जगह पहाड़ पर्वत झरने, प्राकृतिक दृश्य नजर आ रहे थे।

दिव्या _राजेश देखो तो कितनी मनोरम दृश्य है, गाड़ी रोको न।

राजेश ने गाड़ी रोक दिया।

दिव्या प्राकृतिक सौंदर्यता को देखकर गीत गाने लगी।

गीत गाने के बाद वे कार से धरम पुर के लिए निकल पड़े। जब वे सिनेमा हॉल पहुंचे 3बजने वाले थे टिकट के लिए लोगो की लंबी कतारें लगी थी।

दिव्या ने एडवांस में टिकर बूक करा ली थी।

वे सिनेमा हॉल के अंदर गए।

कुछ देर बाद मूवी शुरू हुआ,,,

लोगो ने तालिया बजाना शुरू किया। लव स्टोरी लोगो को काफी पसंद आ रही थी।

मूवी में जब हीरोइन हीरो को छोड़कर चली जाती है,,,

सभी दर्शक भावुक हो जाते है।

राजेश को निशा याद आने लगती है, उसकी आंखों से आंसू बहने लगता है।

जब इंटरवेल होता है, सिनेमा हॉल की लाइट ऑन हो जाता है।

दिव्या राजेश की ओर देखती है, उसके आंखो में आंसू,,,

दिव्या _राजेश, तुम रो रहे हो,,,

राजेश की आंखो से आंसू और तेज बहने लगता है।

दिव्या, राजेश को अपने गले से लगा लेती है।

राजेश, दिव्या के गले लिपट कर रोने लगता है।

दिव्या _राजेश तुम निशा को मिस कर रहे हो,,,

राजेश _ओ मुझे एक फोन नही की,, राजेश रोते हुवे कहा,,,

दिव्या _ओह राजेश, अगर निशा तुमसे सच्चा प्यार की होगी, तो एक दिन जरूर तुम्हारे जिंदगी में लौटेगी।

मुझे तुम्हे ये मूवी दिखाने लाना ही नहीं था। सॉरी,,

अब बस करो,,

राजेश _ओ नही लौटेगी, मेरे पास,,, मैने उसका दिल दुखाया है।

दिव्या _राजेश चलो हमे यह मूवी नही देखनी।

वह राजेश को लेकर सिनेमा हॉल से बाहर निकल आई।

दिव्या _राजेश मुझे तो बड़ी भूख लगी है? चलो किसी अच्छे से ढाबे में खाना खाते हैं।

राजेश लोगो से किसी अच्छे ढाबे का पता पूछता है

उसके बाद वे दोनो खाना खाते है।

दिव्या राजेश का मन बहलाने, आस पास देखने लायक जगह पर राजेश को ले जाती है।

फिर वे 6बजते ही वहा से घर के लिए निकल पड़ते हैं।

दोनो हवेली पहुंचते है तो रात के 8बज चुके होते है।

रत्नवती _बेटा मूवी कैसी थी?

दिव्या _बड़ी अच्छी मूवी थी मां, क्यू राजेश?

राजेश _हा मां जी।

राजेश _अच्छा दिव्या जी अब मुझे चलना चाहिए, घर वाले राह देख रहे होंगे।

रत्नवती _अरे बेटा, खाना खाकर जाना।

गीता _हां राजेश, खाने का समय हो चुका है तुम ऐसे नही जा सकते।

राजेश को आखिर उन लोगो का कहना मानना पड़ा।

चारो, भोजन करने लगे।

रत्नवती_बेटा, भोजन पसंद आया की नही।

राजेश _बहुत अच्छा लगा मां जी, धन्यवाद आप लोगो ने मुझे इतना सम्मान दिया।

रत्नवती _अरे बेटा इस घर की खुशियां तुम्हारी वजह से तो है, अगर उस दिन तुम दिव्या कि मदद नही किया होता तो इस में अंधेरा छा जाता।

तुम्हारा अहसान हम नही भुल सकते।

राजेश _मां जी मैने कोइ अहसान नहीं किया है, ये तो मेरा फर्ज था, अगर दिव्या जी की जगह कोइ और होता तो भी मैं उसकी मदद करता।

रत्नवती _यहीं तो तुम्हारी अच्छाई है बेटा, तुम आदमी देखकर उसकी मदद नही करते।

राजेश _अच्छा मां जी अब मैं चलता हूं, घर वाले परेशान होंगे।

रत्नवती _ठीक है बेटा, हवेली आता जाता रहा करो।

दिव्या _मां मैं राजेश को छोड़कर आता हूं।

दिव्या राजेश को छोड़ने चली गई।

राजेश _अच्छा, दिव्या जी मैं चलता हूं।

दिव्या ने हां में सिर हिलाया।

राजेश को जाती हुवे देखने लगी,,,

वह राजेश के मन ही मन चाहने लगी थी, यह जानते हुए भी कि राजेश निशा को प्यार करता है।
 
जब राजेश, घर लौट रहा था, तब रास्ते में कुछ नकाब पोश रास्ते में उसे रोका। राजेश ने गाड़ी रोक दिया।

राजेश _कौन हो तुम लोग?

नकाब पोश _हम कौन है ये जानकर क्या करोगे बे, चल जो भी तेरे पास है सब हमे दे दे।

राजेश _ओ हो तुम लोग लुटेरे हो।

नकाब पोश _तू, यहीं समझ ले। चल निकाल अपना पर्स, मोबाइल, घड़ी जो भी तेरे पास है।

राजेश _अगर न दू तो ।

नकाब पोश _सीधी से निकाल दे नही तो जान से जायेगा।

एक नकाब पोश ने राजेश का कालर पकड़ने की कोशिश किया।

राजेश ने एक मुक्का मारा।

नकाब पोश दूर जा गिरा।

नकाब पोश _मारो साले को,,

नकाब पोशो ने राजेश पर लाठी से हमला शुरू कर दिया।

राजेश ने भी उसका जमकर मुकाबला किया।

राजेश को भारी पड़ता देख एक नकाब पोश ने चाकू निकाल लिया। और राजेश पर पीछे से वार किया।

राजेश उसी समय घूम गया, चाकू उसके भुजा पर लगा।

जिससे राजेश के भुजा से खून बहने लगा।

राजेश क्रोधित हो गया।

वह जो भी नकाब पोश उसके पकड़ में आता, उसे बुरी तरह पिटना शुरू कर दिया।

राजेश का रौद्र रूप देख, सभी हमला वर कांपने लगे।

चाकू मारने वाले की हाथ पैर तोड़ दिया।

हमला वरो को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।

ये हमला वर ठाकुर के आदमी थे।

दरसल मुनीम को जब पता चला की दिव्या के साथ राजेश मूवी देखने धरमपुर गया है, इस बात की जानकारी उसने फोन से ठाकुर को दिया।

ठाकुर _बोलो मुनीम जी, क्या बात है हवेली में सब ठीक तो है न।

मुनीम _अब क्या बताऊं ठाकुर साहब, यहां सब ठीक होता तो आपको फोन करता क्या?

ठाकुर _मुनीम जी घुमा फिरा कर बात मत करो, बोलो क्या huwa है हवेली में।

मुनीम _दिव्या बेटीआज राजेश को लेकर सिनेमा देखने गई है। वो भी बिना ड्राइवर के।

ठाकुर _मुनीम जी, ये क्या बोल रहे हो।

मुनीम _सच बोल रहा हूं ठाकुर साहब, जल्द कुछ कीजिए इसके पहले की हवेली की इज्जत कोइ मिट्टी में मिला दे।

ठाकुर _अब बहुत हो गया, इस साले का कुछ करना पड़ेगा।

मुनीम _ठाकुर साहब आप बोले तो मैं एक आइडिया दू।

ठाकुर _बोलो मुनीम, क्या कहना चाहते हो।

मुनीम _क्यू न आज रात हम, उसे रास्ते से हटा दे।

ठाकुर _अभी सामने चुनाव है, अगर लोगो को पता चल गया की मैने राजेश को मरवाया है तो पार्टी वाले मुझे टिकर नही देगें।

मुनीम _ठाकुर साहब, आप पर कोइ शक नहीं करेगा आप तो अभी कई दिनों से राजधानी में है।

आज रात जब राजेश अपने बाइक से घर लौटेगा। रास्ते हमारे आदमी को लुटेरे बनकर उन्हे रोकेंगे।

और उसे पीट पीट कर मार देगें उसके पास जो भी समान होगा, उसे लूट लेंगे।

लोग यहीं समझेंगे, लुटेरों ने राजेश को मारा है।

ठाकुर _ठीक है मुनीम जी, पर सब सावधानी से करना, मेरा नाम नही आना चाहिए।

मुनीम _ठाकुर साहब आप चिन्ता मत कीजिए किसी को शक नहीं होगा ये सब आपने करवाया है।

उसके बाद मुनीम ने अपने आदमियों को लेकर, रात में रास्ते के किनारे छिप गए।

वैसे भी रात में रास्ता सुनसान हो जाता है।

जब उन्हें कोइ बाइक की रोशनी दिखाई पड़ी।

मुनीम ने अपने आदमियों को बाइक रोकने के लिए रास्ते पे खड़ा कर दिया।

स्वयं पेड़ के पीछे छिपा हुआ था।

राजेश और ठाकुर के आदमियों के बीच जब, फाइट huwa, राजेश ने ठाकुर के आदमियों को बुरी तरह पीटा, वे अपनी अपनी जान बचाकर भागने लगे।

मुनीम भी छुपते छुपाते वहा से भाग गया।

कुछ देर बाद ठाकुर ने मुनीम को फोन लगाया।

ठाकुर _क्या huwa मुनीम जी काम huwa की नही?

मुनीम _ठाकुर साहब, ये राजेश तो चालक के साथ, ताकतवर भी निकला।

उसने तो हमारे ही आदमियों को बुरी तरह पीटा है, हमारे आदमियों को ही अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। कुत्ते की तरह पीटा है हमारे आदमियों को। उसका रौद्र रुप देखकर तो अब क्या बताऊं आपको, मेरी भी मूत निकलने को आ गई थी।

ठाकुर _मुनीम जी, ये क्या बक रहे हो।

मुनीम _मैं सच कह रहा हूं, ठाकुर साहब।

पर आप घबराइए मत, उसे पता नही चला की हमला करने वाले हमारे आदमी थे।

इधर राजेश बाइक लेकर घर पहुंचा।

घर के लोग उसके आने का इन्तजार कर रहे थे।

पदमा _अरे बेटा आ गया।

राजेश _हां, ताई।

तभी पदमा ने राजेश के कपड़े में खून देखा।

पदमा घबराते हुए पूछी _अरे बेटा तुम्हारे कपड़ो पे ये खून कैसा?

राजेश _कुछ नही ताई रास्ते पर कुछ लुटेरों ने मुझे लूटना चाहा, मैने मना किया तो उसने मुझ पर हमला कर दिया।

पुनम _हे भगवान, तुम्हारे भुजा से तो बहुत खून निकल रहा है।

राजेश का कपड़ा भी धूल मिट्टी से सना हुआ था। उसके शरीर पर भी डंडे लगे थे जिसके निशान उभर आए थे।

घर के सभी लोग बहुत घबरा गए।

पदमा _हे भगवान, अरे कोइ डाक्टर को बुलाओ।

केशव _मैं अभी रवि को बुलाकर लाता हूं।

इधर हवेली में दिव्या, अपने कमरे में बेड पर लेट कर आज दिन भर जो घटना क्रम हुवे उसे याद कर रही थी। और उस पल को जब राजेश उसके सीने से लगा huwa था को याद कर मुस्कुरा रही थी।

उसे लगा की राजेश से पूछना चाहिए की वह घर सकुशल पहुंचा कि नही।

उसने राजेश को काल किया,,,

पुनम ने काल उठाया,,,

पुनम _कौन बोल रही हो?

दिव्या _जी, मैं दिव्या बोल रही हूं, हवेली से,,,

आप कौन बोल रही है?

पुनम _छोटी राजकुमारी जी आप,मैं उसकी भाभी बोल रही हूं जी, वह रूवासी होकर बोली।

दिव्या जी _भाभी, क्या huwa

पुनम _कुछ लोगो ने रास्ते में राजेश पर चाकू से हमला कर दिया, बहुत खून बह रहा है, वह रूवासी सुबकते हुए बोली।

दिव्या घबरा गई।

वह तुरंत अपनी नाइटी उतारी और सलवार सूट पहन ली । वह फर्स्ट एड बॉक्स लेकर अपनी मां के रूम में जाकर आवाज़ दी।

दिव्या _मां, मां,,

रत्नवती _क्या huwa बेटी?

दिव्या _मां मैं सुरज पुर जा रही हू,।

रत्नवती _बेटी इतनी रात को, क्या huwa है?

दिव्या _मां रास्ते में राजेश पर कुछ लोगो ने चाकू से हमला कर दिया, उसके उपचार के लिए मुझे जाना होगा।

रत्नवती _पर बेटा, इतनी रात को अकेली जाना।

दिव्या _मां मेरा जाना जरूरी है?

रत्नवती _ने माखन को फोन लगाया।

कुछ देर में ही माखन पहुंच गया।

माखन _रानी मां आपने मुझे बुलाया।

रत्नवती _हा माखन, दिव्या सुरज पुर जा रही है।

तुम कुछ आदमियों को लेकर उसके पीछे जाओ। उसकी सुरक्षा के लिए।

माखन _ठीक है रानी मां, आप चिन्ता न करें।

दिव्या अपनी कार में ड्राइवर के साथ सुरज पुर के लिए निकल पड़ी।

उसके पीछे पीछे माखन कुछ और आदमियों को लेकर जीप में निकला।

कुछ ही देर में वह सुरज पुर पहुंच गई।

गांव का एक व्यक्ति दिखाई पड़ा उसको राजेश के घर ले जाने कहा।

वह भी घबरा गया, ये तो ठाकुर के आदमी है।

ये राजेश के बारे में क्यू पुछ रहे हैं।

कहीं यू राजेश को नुकसान पहुंचाने तो नही आए है।

उसने कहा, मुझ नही पता राजेश कहा रहता है?

माखन _साले इसी गांव में रहता है और मालूम नही तुझे, राजेश का घर, खोपड़ी फोड़ू क्या तेरी? उस व्यक्ति के कालर पकड़ते हुए कहा।

उस व्यक्ति ने कहा _मुझे मत मारो, वो उधर है राजेश का घर, उंगली से इशारा करते हुवे कहा।

माखन _चल बे जीप में बैठ, उसके घर तक चल।

वह आदमी न चाहते हुए भी जीप में बैठ गया और राजेश का घर ले गया।

दिव्या अपनी कार से उतरी ।

दिव्या _माखनके पास जाकर बोली, तुम लोग बाहर ही रहना मेरे आते तक।

माखन _जी छोटी मालकिन।

जब दिव्या अंदर गई। उसने देखा राजेश घर के बरामदे में कुर्सी पर बैठा है घर के सभी लोग उसे चारो ओर से घेरे हुए है।

रवि वहा पहुंच गया था। वह चाकू से लगा जख्म को देख रहा था।

जब दिव्या वहा पहुंची तो सभी लोग उसकी ओर देखने लगे।

राजेश _दिव्या जी आप यहां, इतनी रात को,,,

दिव्या _राजेश, क्या huwa है तुम्हे?

राजेश _कुछ नही huwa है दिव्या जी, देखो न घर के लोग खमोखा परेशान हो रहे हैं। बस मामूली जी चोट आई है, पर आपको किसने बताया कि मुझे चोंट लगी है। आपको इतनी रात में नही आना चाहिए था।

दिव्या _राजेश, मैने तुम्हे काल किया था कि तुम घर पहुंचे की नही, भाभी ने बताया कि तुम पार कुछ लोगो ने रास्ते में हमला कर दिए।

दिखाओ मुझे कितनी चोटें आई हैं।

पदमा _बेटी, देखो न पूरा कपड़ा खून से सन गया है।

रवि _दिव्या जी, मैने खून की सफाई की पर खून अभी भी बह रहा है।

दिव्या _ओह माई गॉड, काफी बड़ा कट गया है, और गहरा भी।

भाभी पहले एक बाल्टी में पानी और एक साफ तौलिया लाओ।

पुनम _जी, अभी लाई।

दिव्या _राजेश तुम अपना सारा कपड़ा उतार अंडर वियर के ऊपर ये तौलिया लपेट लो।

पुनम ने बाल्टी में पानी और एक तौलिया

रवि ने राजेश के सारे कपड़े उतारने लगे।

राजेश _अरे यार ये क्या कर रहा है? क्यू सबके सामने मेरी इज्जत उतार रहा है।

रवि ने राजेश के सारे कपड़े उतार दिए उसके अंडर वियर के ऊपर एक तौलिया लपेट दिया।

उसके बाद दिव्या ने राजेश की पूरे शरीर को गीले कपड़े से अच्छे से साफ करने लगी।

पीठ पर कुछ डंडे के निशान भी पड़े थे।

एक दो पेट और सीने पर भी।

दिव्या _राजेश आखिर वो कौन लोग थे, जिसने तुम पर हमला किया।

दिव्या _कुछ लुटेरे लोग मुझे लूटना चाहते थे मैने विरोध किया तो मुझ से हमला कर दिया, वैसे मैने भी उन्हें अच्छा सबक सिखाया है? आज के बाद वे किसी और को लूटने की हिम्मत नहीं करेंगे।

दिव्या ने चाकू से बने जख्म को देखा।

दिव्या _काफी लंबा कट गया है।

इसमें टांके लगाने पड़ेंगे।

उसने अपने प्राथमिक उपचार किट से, टांका लगाने की सामग्री निकाली।

दिव्या _रवि , तुम्हे तो टांका लगाना आता होगा।

रवि _हां, दिव्या जी।

दिव्या ने राजेश का बाह पकड़ा, रवि टांका लगाने लगा।

टांका लगाने के बाद उस पर दवाई लगाकर दिव्या ने पट्टी बांध दी।

जिससे खून बहना बंद हो गया।

रवि _राजेश तुमने तो टांका लगाते समय अप भी नही किया। बहुत हिम्मती हो।

दिव्या _इसकी हिम्मत को मैं अच्छी तरह जानती हूं।

दिव्या ने जहा जहा चोट लगी थी सभी जगह मलहम लगाई।

और राजेश को कुछ टैबलेट खाने को दी। ताकि दर्द कम हो जाए।

उदिव्या _राजेश, अब चलो तुम अपने कमरे में, आराम करो।

जख्म ठीक होने में कुछ दिन लगेंगे इसलिए इज हाथ से अभी कोइ भारी चीज मत उठाना।

पदमा _बेटी हम राजेश का पूरा ख्याल रखेंगे, इसे कोइ भारी चीज उठाने नही देगें।

पुनम और दिव्या राजेश को उठाकर उसके कमरे में ले गए।

राजेश को बेड पर लिटा दिया।

राजेश _दिव्या जी, अब आपको घर के लिए निकालना चाहिए, काफी रात हो गई है! मां जी चिंतित होगी।

दिव्या _ठीक है मैं चली जाऊंगी, पहले ये बताओ, अभी कैसे फील कर रहे हो।

राजेश _मैं अब बिल्कुल ठीक हूं। आपका शुक्रिया दिव्या जी। और सॉरी।

दिव्या राजेश के पास कुर्सी पर बैठ गई,,,

दिव्या _ये सॉरी किस लिए?

राजेश _मेरे कारण आपको रात में तकलीफ उठाना पड़ा।

तभी ठकुराइन का फोन दिव्या के मोबाइल पर आता है।

रत्नावति _बेटी, राजेश कैसा है?

दिव्या _मां राजेश बिल्कुल ठीक है, थोड़ा जख्म जरूर है पर जल्दी ठीक हो जायेगा।

रत्ना वति _चलो,जानकर अच्छा लगा, राजेश को ज्यादा चोटें नही आई है , वह ठीक है। बेटी अब तुम भी घर आ जाओ रात काफी हो गई है।

दिव्या _ठीक है मां।

मैं कुछ देर में ही निकलती हूं।

दिव्या ने पुनम को कुछ दवाई और मलहम दे दी, जिसे समय पर लगाने और खिलाने को बोली। और कुछ हिदायत दी।

पुनम _आप, जैसे बताई मैं ध्यान रखूंगी छोटी राजकुमारी जी।

दिव्या _भाभी आप मुझे राजकुमारी न बोला करे, वह हंसते हुवे बोली। मेरा नाम ले सकती हो।

पुनम _आप तो इस क्षेत्र के राजकुमारी ही हो, आपका नाम लेते अच्छा नही लगेगा, छोटी राजकुमारी जी।

दिव्या _भाभी आप मेरा नाम ले सकती हो मुझे बुरा नही लगेगा।

_अच्छा राजेश, अब तुम आराम करो। मैं चलती हूं।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

दिव्या _भाभी तुम राजेश का ख्याल रखना कोइ भी समस्या हो तो मुझे काल करना।

पुनम ने हां में सिर हिलाया।

दिव्या जब घर जाने लगी,,,

पदमा _बेटी , कोइ घबराने की बात तो नही।

दिव्या _नही, मां जी, घबराने की कोइ बात नही, राजेश का जख्म कुछ दिनों में ठीक हो जायेगा।

अच्छा अब मुझे इजाजत दीजिए, मैं चलती हूं।

पदमा _ठीक है बेटी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मुझे तो अब भी यकीन नही हो रहा, राजकुमारी इतनी रात को मेरे घर इलाज करने आई है। आपकी मां ने सच में बहुत ही अच्छे संस्कार दिए है।

दिव्या _मैं एक डाक्टर भी हू, मेरा फर्ज है मरीज का इलाज करना। डॉक्टरी की पढ़ाई की ही किस लिए।

पदमा _ये तो तुम्हारा बड़प्पन है बेटी।

पउसके बाद दिव्या वहा से घर के लिए निकल गई, पीछे पीछे माखन भी अपने साथियों के साथ निकल पड़े।

रवि _अच्छा मां जी अब मैं भी घर निकलता हूं।

पदमा _ठीक है बेटा, पर राजेश का हालचाल पूछने आते रहना।

रवि _बिल्कुल मां जी मैं आता रहूंगा। आप चिन्ता न करें राजेश जल्दी ठीक हो जायेगा।

इपदमा _अब चलो सभी, अपने अपने कमरे में जाकर सो जाओ।

मैं राजेश के कमरे में आज सो जाती हूं, नीचे बिस्तर लगाकर,पता नही रात में उसे किसी चीज की जरूरत हो तो।

केशव _हा, ठीक कह रही हो आज तुम राजेश के कमरे में ही बिस्तर लगाकर सो जाओ।

सभी अपने अपने कमरे में सो गए और पदमा राजेश के कमरे में पलंग के नीचे बिस्तर लगाकर।

पदमा जब सुबह उठी तो राजेश सो रहा था।

पदमा राजेश के माथे को चूम ली। और प्यार से उसकी बाल को सहला कर, मुस्कुराते हुवे चली गई।

इधर सुबह होते ही यह बात जंगल में आग की तरह फैल गई की राजेश पर कल रात कुछ लोगो ने हमला किया है।

जिससे उसको चोटें आईं हैं।

जब सविता को पता चला, तो वह तुरंत अपने पति माधव के साथ राजेश को देखने पदमा के घर पहुंच गई।

पदमा ने दरवाजा खोली।

पदमा _अरे छुटकी तुम, आओ अंदर आओ।

बड़ी दिनो बाद घर की याद आई।

माधव _प्रणाम भाभी।

पदमा _कैसा है देवर जी

माधव _हम अच्छे है भाभी।

पदमा _आओ देवर जी।

आओ बैठो।

सविता _जानती हूं दीदी आप मुझसे नाराज है।

पदमा _सविता अब छोड़ो उन बातो को।

सविता _दीदी जब पता चला कि राजेश पर कल रात कुछ लोगो ने हमला किया है, हम से रहा नही गया हम देखने चले आए, अभी कैसा है राजेश?

पदमा _ठीक है, अभी सोया है। वैसे तो सुबह इतने समय उठ जाता है पर हो सकता है दवाई के असर के कारण,,,

सविता _दीदी, आप हमे रात में ही फोन करके बता सकती थी, हमे तो आप बिल्कुल पराया ही समझने लगी आप।

पदमा _अरे छुटकी, रात काफी हो गई थी, इसलिए किसी को खबर नही की।

सविता _दीदी हम राजेश से मिल सकते हैं।

पदमा _क्यों नही, आओ,,

सविता और माधव पदमा के पीछे पीछे जाने लगे।

पदमा, राजेश के बाल सहलाती हुई बोली।

पदमा _अरे राजेश बेटा, आंखे खोलो देखो कौन आया है तुमसे हालचाल पूछने।

राजेश ने आंखे खोला, सामने सविता और माधव को देखा।

राजेश _अरे चाचा और चाची, इतनी सुबह आप दोनो यहां,,

राजेश उठने की कोशिश करने लगा।

सविता _अरे बेटा लेटा रह।

जैसे पता चला तुम पर कुछ लोगो ने हमला किया है हमसे रहा नही गया हम दौड़े चले आए।

राजेश _चाची मुझे कुछ नही huwa है, मैं बिल्कुल ठीक हूं।

माधव _अरे बेटा, आखिर कौन लोग थे जिसने तुम पर हमला किया? तुमने उसे पहचाना।

राजेश _चाचा जी, वे नकाब पोश थे, वे मुझे लूटने के लिए आए थे जब मैने विरोध किया तो उन लोगो ने मुझ पर हमला कर दिया।

सविता _ ये भुजा पर पट्टी कैसी?

पदमा _चाकू से हमला किया है? उन पापियों ने। बहुत सा खून बह गया मेरे बेटे का।

राजेश _अरे ताई, तुम्हारा बेटा इतना कमजोर नही है, मैने भी सालो को ऐसा पीटा है की फिर कभी किसी को लूटने से पहले सौ बार सोचेगा।

सविता _अच्छा राजेश तुम आराम करो, अब हम लोग चलते हैं।

पदमा _अरे छुटकी तुम लोग बड़े दिन बाद आए हो चाय पीकर जाना।

अरे बहु,, कहा हो,,

पुनम अपने कमरे से बाहर निकली,,

पुनम _क्या huwa मां जी?

पदमा _देखो तो कौन आए हैं?

पुनम _अरे चाचा चाची आप दोनो, पान्यलागु।

सविता _जी ती रह, बहु।

पदमा _अरे बहु बहुत दिनों बाद घर आए है तुम्हारे चाचा चाची उनके लिए चाय तो बना दो।

पुनम _जी मां जी।

सविता _दीदी ज्योति भी तो आई हुई है न? दिखाई नहीं दे रही।

पदमा _आरती और ज्योति दोनो अपने कमरे में सो रही होगी।

अरे बहु दोनो को उठाओ तो कब तक सोती रहेगी, दोनो।

पुनम _दोनो को उठाने उसके कमरे में गई।

कुछ देर बाद ज्योति और किरण दोनो कमरे से बाहर आए।

ज्योति _अरे चाचा, चाची, आप दोनो,

दोनो के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सविता_अरे ज्योति कितना माह चल रहा है तुम्हारा।

ज्योति शर्मा गई।

पदमा _9वा माह पूरे होने को है। बस अच्छा से निपट जाए, भगवान से यहीं प्रार्थना करते है।

सविता _हूं।

तभी वहा आरती भी आ गई।

आरती _प्रणाम चाचा जी, प्रणाम चाची।

माधव _खुश रह बेटी।

आरती _कैसा, चल रहा है तुम्हारा स्कूल का काम?

आरती _जी, चाची, बहुत अच्छा।

तभी पुनम चाय लेकर आई।

पदमा _अरे बहु, राजेश को भी चाय डी देना।

पुनम _जी मैं जी।

चाय पीने के बाद,,,

माधव _अच्छा भाभी अब हमे इजाजत दीजिए, दुकान खोलनी है?

आरती _हां, दीदी अब हम चलते है? आप भी हमारे घर बैठने आया करो? आप तो कभी आई ही नहीं।

पदमा _ठीक हैं छुटकी, कभी आऊंगी।

माधव और सविता चले गए।

इधर सभी लोग अपने अपने काम में लग गए।

आज राजेश, आखाड़ा पर नही गए। वहा मोहन और उसके दोस्तो को जब पता चला कि राजेश को चोंट लगी है। कुछ दिनों बाद कबड्डी प्रतियोगिता शुरू होना है, वे चिंतित हो गए।

वे सोच में पड़ गए कि लगता है इस बार भी खिताब जितने का सपना अधूरा रह जायेगा।

इधर घर में कुछ देर बाद भुवन, खेत से पहुंचा।

उसे घर आते समय, लोगो ने बता दिया कि राजेश पर हमला huwa है।

वह भागते हुए घर पहुंचा।

भगत _मां, मां,, कहा हो, ये मैं क्या सुन रहा हूं, कल रात राजेश पर किसी ने हमला किया है? कहा है राजेश, वह ठीक तो है न!

पदमा _हा बेटा, राजेश ठीक है, घबराने की कोइ बात नही। राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा है!

भुवन राजेश के कमरे में गया।

राजेश _अरे भुवन भैया आ गए खेत से।

भुवन _वो सब छोड़ो, पहले ये बताओ तुम ठीक तो हो।

भुवन _भैया मैं बिल्कुल ठीक हूं कुछ नही huwa है मुझे।

भुवन _फिर ये पट्टी क्यू लगी है?

राजेश _अरे थोड़ा खरोच आया है भैया, जो जल्दी ठीक हो जायेगा।

भुवन _मां मुझे रात में इस घटना की जानकारी क्यू नही दी।

पदमा _अरे बेटा, तू घबरा न जाए इसलिए तुमको नही बताया।

भुवन _राजेश आखिर कौन लोग थे जिसने तुम पर हमला किया।

राजेश _कुछ लुटेरे थे भैया, जो मुझे लूटना चाहते थे मैने विरोध किया तो मुझ पर हमला कर दिया।

भुवन _तुमने उन लोगो को पहचाना नही।

राजेश _नही भैया वे नकाब लगाए हुवे थे।

भुवन _राजेश अब तुम अकेले बिल्कुल नहीं जाओगे। मुझे लगता है कुछ लोग तुम्हे नुकसान पहुंचाना चाहते है?

राजेश _कौन मुझे नुकसान पहुंचाना चाहेगा भैया? बिना सबूत के किसी पर सक करना ठीक नहीं।

भुवन _हूं, कौन लोग थे जिसने तुम पर हमला किया यह पता लगा कार रहुंगा।

राजेश तुम आराम करो।

भुवन कमरे से बाहर आ गया।

भुवन _मां मुझे तो लगता है ये काम ठाकुर का है?

पदमा _इस ठाकुर का हम बिगाड़ भी क्या सकते हैं बेटा, अगर उसने ऐसा करवाया होगा तो,,

भुवन _हम चुप बैठेंगे नही अगर ऐसा huwa है तो,,,

पदमा _मुझे तो बड़ी चिन्ता हो रही है बेटा,,

तुम पता नही, रात को ठाकुर की बिटिया राजेश का इलाज करने आई थी?

आखिर इतनी रात को, एक लड़की कैसे आ सकती है इलाज करने, एक राजकुमारी होकर।

भुवन _क्या, दिव्या जी आई थी, रात को राजेश का इलाज करने?

पदमा _हां बेटा, यहीं तो चिन्ता का विषय है।

राजेश और दिव्या की निकटता बढ़ती जा रही है!

हो सकता है यह बात ठाकुर को पता चल गया हो,,,

भुवन _हूं, ये तो बड़ा चिन्ता का विषय है।

पदमा _हमे कुछ करना होगा? नही तो ये ठाकुर फिर से राजेश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

भुवन भी चिंतित हो गया,,,

इधर ठाकुर ने मुनीम को फोन लगाया।

मुनीम _बोलिए, ठाकुर साहब।

ठाकुर _अबे वहा का माहौल क्या है? किसी को सक तो नही हुआ? की हमला हमने करवाया है।

मुनीम _ठाकुर साहब, आप चिन्ता न करे? मैने दूसरे गांव से आदमी बुलवाए थे।

यहां के लोगो को पता नहीं चल सकेगा कि हमला करने वाले कौन थे।

कुछ लोगो को जो ज्यादा चोटें आई है उसे धरम पुर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने बोल दिया हूं।

ठाकुर _ये अच्छा किया तुमने।

मुनीम _पार हुजुर, हमारी चिन्ता और बड़ गई है।

ठाकुर _क्यों, क्या हुआ?

मुनीम _दिव्या बेटी को जैसे ही पता चला कि राजेश पर हमला huwa है?

दिव्या बेटी, रात में ही राजेश के इलाज करने सुरज पुर चली गई।

ठाकुर _मुनीम जी, ये क्या कह रहे हो।

मुनीम जी _ये सच है ठाकुर साहब।

दिव्या बिटिया और राजेश के बीच बढ़ती निकटता को नही हटाया तो,,,,

आप किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे?

ठाकुर _मुनीम जी जुबान सम्हाल कर बात करो। ठाकुर चीखते हुए कहा?

मुनीम _माफ करना, ठाकुर साहब। पर हवेली की इज्जत की चिन्ता मुझे भी है आखिर जो कुछ मेरे पास है आपने ही तो दिया है।

ठाकुर _आज बरसो बाद किसी ने मुझे चैलेंज किया है? बस सही मौका मिलने दो फिर खेल खत्म साले की।

मुनीम _मौका तो मिला था, ठाकुर साहब, उल्टा हमारे आदमी ही पिट कर आ गए। साले में बहुत ताकत है।

और चालाकी तो आप जानते ही हैं!

ठाकुर _हूं, इसके लिए कुछ नया सोचना पड़ेगा।

मैं दो दिन बाद भानगढ़ पहुंच रहा हूं, फिर सोचेंगे क्या करना है?

इधर दिव्या अपनी ड्यूटी में जाने से पहले, राजेश से मिलकर उसके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेना चाहता था।

वह निकलने ही वाली थी तभी,,

रत्नावती _अरे बेटी, आज जल्दी जा रही ड्यूटी।

दिव्या_हा मां मैं पहले सुरज पर जाऊंगी, राजेश का स्वास्थ्य कैसा है? पता करने फिर स्वास्थ्य केंद्र।

रत्नवती _अच्छा बेटी रुको मैं भी चलती हूं।

दिव्या _ठीक है मां।

रत्ना वती और दिव्य दोनो कार सी सुरज पुर के लिए निकल पड़े।

गांव के लोग उन्हें आश्चर्य से देखने लगे।

जब वे घर पहुंची।

पदमा, चौंकते हुवे बोली,,

पदमा _ठकुराइन आप,,,

ठकुराइन _हा, वो राजेश का हाल चाल पूछने आई थी कैसा है वह अभी?

पदमा _आइए न अंदर आइए, ये तो हमारे लिए बड़ी गर्व की बात है आप यहां आई,,

दिव्या बिटिया की उपकार है जो रात में ही इलाज करने आ गई। और सही समय में इलाज की। नही तो हम लोग तो बहुत घबरा गए थे।

आओ मैं आपको राजेश से मिलाती हूं।

पदमा, रत्नवती को लेकर राजेश के कमरे मे गई पीछे दिव्या भी गई।

पदमा _देखो बेटा कौन आया है?

राजेश _अरे मां जी आप?

रत्ना वती _कैसे हो राजेश? जब मुझे दिव्या ने बताया कि तुम पर कुछ लोगो ने हमला किया है तब से चिंतित थी, इस लिए मिलने चली आई।

राजेश _मां जी मैं बिल्कुल ठीक हूं, पर ये लोग मेरा सुनते ही नहीं मुझे बेड से उठने भी नही दे रहे। कहते है तुम आराम करो।

दिव्या जी आप ही समझाइए इन लोगो को।

दिव्या _पहले मुझे चेक तो करने दो, तब पता चलेगा की तुम ठीक हो की नही।

दिव्या मुस्कुराते हुए बोली।

राजेश _हा हा चेक करके देख लीजिए।

दिव्या राजेश का चेकअप करने लगी।

दिव्या,_मां जी आप लोग थोड़ा बाहर जाएंगी क्या मैं राजेश का थोड़ा चेक अप कर लूं।

पदमा _ठीक है बेटी।

पदमा और रत्नवती _दोनो कमरे से बाहर चली गई।

दिव्या ने राजेश का चादर पकड़ कर खींचा।

राजेश _दिव्या जी ये आप क्या कर रही हैं? मैं सिर्फ अंडरवियर मे हूं।

दिव्या _तो, चेक तो करनी पड़ेगी, जहां जहां चोटें लगी है। चलो दिखाओ मुझे। रात में तो मलहम लगाई थी न।

राजेश _रात की बात और थी।

दिव्या _तो, अब क्या बात हो गई?

राजेश _मुझे शर्म आएगी।

दिव्या _हसने लगी।

_पर क्यू?

राजेश _बस ऐसे ही।

दिव्या _हूं, चलो, मुझसे शर्माना बंद करो और चादर हटाओ।

दिव्या ने जोर लगाकर चादर हटा दिया।

राजेश सिर्फ चड्डी में था।

दिव्य ने दिन में जब सेक्स की फौलादी बॉडी देखी तो मोहित होने लगी,,

राजेश _दिव्या जी कहां खो गई,,,

दिव्या, शर्मा गई,,

दिव्या _ओह कुछ नहीं?

दिव्या राजेश के शरीर पर लगे चोट को हाथ से सहलाते हुए पूछी दर्द है क्या?

राजेश _दर्द तो था पर आपके हाथ लगते ही दर्द कहा गया पता नही?

दिव्या जी आपके हाथो में तो जादू है?

दिव्या _मुझसे बदमाशी कर रहा है? मुस्कुराते हुए बोली।

राजेश _नही दिव्या जी सच कह रहा हूं।

दिव्या _वैसे तुमने बहुत अच्छी बॉडी बनाई है? तभी तो दस दस लोगो पर अकेले भारी पड़ता है।

दिव्या _मैं मलहम लगा देती हूं।

राजेश _जैसे आप उचित समझे, पर मुझे नही लगता की मलहम लगाने की जरूरत है।

दिव्या _हां, तुम्हारा शरीर तो चट्टान से बना है न, मलहम की जरूरत नही।

दिव्या हाथ में मलहम लेकर राजेश के बदन पर मलने लगी।

मलहम लगाने के बाद,,

दिव्या _अब कैसे महसूस कर रहे हो।

राजेश _बिल्कुल अच्छा नही?

दिव्या _पर क्यू? अभी तो बोल रहे थे कि मेरे हाथ लगते ही। सारे दर्द दूर हो गए।

राजेश _दर्द तो दूर हो गया पर आपसे सेवा कराते मुझे अच्छा नही लग रहा।

दिव्या _पर क्यू?

राजेश _क्यू की मैं आपकी बहुत इज़्जत और सम्मान करता हूं?

दिव्य _पार मैं तो एक डाक्टर हूं न सेवा करना मेरा फर्ज है।

राजेश _डॉक्टर तो हो पर यहां की राजकुमारी भी तो हो।

दिव्या _मैं कोइ राजकुमारी नही, अगर खुद को राजकुमारी समझती तो डाक्टर क्यू बनती?

मुझे तो लोगो की मदद करना अच्छा लगता है?

राजेश _ये तो आपका बड़प्पन है, दिव्या जी।

दिव्या _हूं, अब मैं चलती हूं? तुम आज घर मे ही आराम करना।

भाभी को मैं समझा दूंगी, तुम्हे समय पर टैबलेट देने के लिए। और मलहम के लिए।

दिव्या _मैं कल फिर आऊंगी।

राजेश _ठीक है जी।

उसके बाद दिव्या पुनम को राजेश का देखभाल के लिए निर्देश देकर अपनी मां के साथ वहा से चली गई।

स्वास्थ्य केंद्र जाने के बाद मरीजों का हालचाल पूछी। उसके बाद वह अपने केबिन में पहुंची।

चारोओर घने बादलछाए थे।

तेज़ हवाएं चलने लगी।

दिव्या कमरे की खिड़की से बाहर झांक कर देखी।

कुछ पानी की बूंदे उस पर पड़ी।

वह खिड़की बंद की औरजाकर अपनी चेयर पर बैठ कर कुछ सोचने लगी।

दिव्या रात मे ठीक से सो नहीं पाई थी, उसकी नींद लग गई।

वह सपने देखने लगी,,,

सपने में वह राजेश के साथ नदी के किनारे घूमने गई है, चारो ओर घने बादल छाए हुए हैं,,

बारिश में दोनो भीग जाते है फिर एक झोपड़ी में चले जाते हैं।

फिर दोनो गीत गा रहे है,,,
 
दो दिन राजेश घर में ही रहा, घर वालो ने उसे कहीं जाने नही दिया। तीसरे दिन सुबह उठा,,,

पदमा _अरे बेटा आज जल्दी उठ गया।

राजेश _टाई आज मैं अखाड़े पर जा रहा हूं।

पदमा _अरे बेटा अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुवे हो,, अभी अखाड़े पर मत जाओ।

राजेश _ताई अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। घर में ही रहा तो और बीमार हो जाऊंगा।

पदमा _पर बेटा, भुजा पर जो जख्म है वो तो अभी ठीक नहीं huwa है न।

भुवन _हां राजेश, मां ठीक कह रही है। भुजा का जख्म अभी ठीक नहीं huwa है ऐसे में अखाड़े में वजन उठाना ठीक नहीं है।

राजेश _भुवन भैया मैं इसका ख्याल रखूंगा।

दरासल मोहन मुझसे मिलने आया था, बता रहा था की मुझे चोट लगने के बाद हमारे टीम के युवा चिंतित हो गए हैं।

आपको टू पता है कि,अभी गांव के युवा कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं, मैं देखना चाहता हूं, तैयारी कैसी चल रही है। कुछ दिनों में प्रतियोगिता होनी है।

भुवन _हां , वो तो है, हर बार हमारा गांव भानगढ़ वालो से हार जाती है। लड़के बता रहे थे तुम्हारे आने से हमारी टिम बहुत मजबूत हो गई थी , पर लगता है हमारी गांव की किस्मत ही खराब है।

हमारी टिम के युवाओं का उत्साह बढ़ाने की आवश्यकता है, अभी वे तुम्हे लेकर चिंतित होंगे।

राजेश _इसी लिए मैं जाना चाहता हूं, बताना चाहता हूं की हमारी टिम मेरे बिना भी प्रतियोगिता जीत सकता है।

उनमे आत्मविश्वास जगाना जरूरी है।

भुवन _ठीक है राजेश, जाओ और युवाओं में आत्मविश्वास भरो।

राजेश अखाड़ा के लिए निकल गया जब वहां पहुंचा।

लड़के कबड्डी की तैयारी कर रहे थे। जब लड़को ने राजेश को देखा,वे खुश हुवे।

सभी लड़को ने राजेश से उनके स्वास्थ्य के बारे मे पूछा।

राजेश ने बताया कि मैं बिल्कुल ठीक हूं, पर भुजा का जख्म भरने में कुछ समय लगेगा।

मोहन जो अखाड़े का प्रमुख था, वह बोला,,,

मोहन _राजेश, तुम्हारे आने के बाद, हमारे लड़के बहुत उत्साहित थे उन्हें यकीन था की इस बार प्रतियोगिता हम ही जीतेंगे।

पर तुम पर हमला होने के बाद हमारे युवाओं में निराशा घर कर गया है। इन्हे इस निराशा पन से तुम ही निकाल सकते हो,,,

राजेश ने सभी लड़को को अपने पास बुलाया, और उन्हें समझाया।

राजेश _दोस्तो, तुम सभी बहुत अच्छे खेल का प्रदर्शन कर रहे हो, मैने तुम लोगो के साथ रहकर अनुभव किया है हमारी टीम किसी भी विरोधी टीम को हराने का दमखम रखता है। हमारे टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी है, खिलाड़ियों की कमी नही है हमारे पास, मेरे फिट न होने से हमारे उत्साह और आत्मविश्वास में कोइ कमी नही होनी चाहिए।

लड़को ने कहा _पर राजेश भाई हमारे साथ मैदान में उतरते तो हमारा उत्साह दोगुना हो जायेगा।

राजेश _ठीक है मैं अतरिक्त प्लेयर के रूप में रहूंगा, जहां मुझे लगेगा की किसी टीम के विरुद्ध मेरा उतरना जरूरी है, मैं तुम लोगो के साथ मैदान में उतरूंगा।

सभी लड़के खुश हो गए।

मोहन _राजेश आज हमे कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का चयन कर लेना चाहिए। अब समय बहुत कम रह गया है।

राजेश _ठीक है आज, जीतने भी युवा तैयारी कर रहे है उनका दो टीम बनाते है और उनके बीच प्रतियोगिता कराते है, जो बेस्ट खेल का प्रदर्शन करेगा, उन्हे लेकर टीम का चयन करेंगे।

सभी युवाओं ने राजेश की बातो का समर्थन किया।

उसके बाद सभी युवाओं को लेकर दो टीम बनाया गया।

उनके बीच प्रतियोगिता कराया गया।

टिम के सदस्यों को बदल बदल कर तीन बार मैच कराया गया।

अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का क्रमबद्ध सूची तैयार किया गया, वैसे तो कबड्डी के मैदान में 7खिलाड़ी उतरते है।

दस खिलाड़ियों का चयन किया गया। तीन अतिरिक्त खिलाड़ी का चुनाव जिसका प्रयोग आवश्यकता पढ़ने पर किया जाएगा। उन खिलाड़ियों में राजेश भी शामिल था।

राजेश सुबह 6 बजे आया था टिम का चयन करते आज, 10बज गया था।

जब वह घर पहुंचा,,,

भुवन खेत जा चुका था।

पदमा _अरे बेटा आज आने में देर कर दी।

राजेश _हा ताई, आज कबड्डी टीम का चयन करना था तो लेट हो गया।

भुवन भैया खेत चला गया क्या?

पुनम _हां देवर जी, उसने काफी देर तक तुम्हारा इन्तजार किया।

अब जाओ तुम भी नहा लो, फिर मैं नाश्ता लगाती हूं।

राजेश _ठीक है भौजी।

इधर हवेली में ठाकुर राजधानी से आ चुका था।

ठाकुर _मुनीम जी क्या हाल चाल है यहां का, लोगो को हम पर सक तो नही huwa कि राजेश पर हमला हमने करवाया है!

मुनीम _नही हुजुर, किसी को कोइ शक नही huwa

राजेश पर हमला करने के लिए हमारे दूसरे गांव के आदमियों को बुलाया था।

ठाकुर _ये तुमने अच्छा किया।

मुनीम _पर हुजुर, ये राजेश तो चालक के साथ ताकतवर भी निकला, साले ने हमारे आदमियों को कुत्ते की तरह पीटा है, जब कालू ने उसपर चाकू से हमला किया तो शाला शेर की तरह दहाड़ने लगा, हमारे आदमियों पर भारी पड़ गया। हमारे आदमियों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।

ठाकुर _मुनीम, बंद करो अपनी बकवास। तुम हमारे दुश्मन को तारीफ कर रहे हो, वो भी मेरे सामने।

मुनीम _हुजुर मैं, उसकी तारीफ नही कर रहा, जो सच है वही बता रहा।

हुजुर आपको एक और बात बतानी थी।

ठाकुर _क्या है? बको,

मुनीम _दिव्या बिटिया, और राजेश बाबू के बारे में गांव के लोग, तरह तरह के बाते करने लगे है?

ठाकुर _मुनीम जी, अपनी बकवास बंद करो,,,

मुनीम _गुस्ताकी माफ हुजूर, मैं वही बता रहा जो सच में है।

ठाकुर _ शाला एक बार बच गया, पर बार बार नही बचेगा। हवेली की इज्जत पर पहले भी एक लड़के ने हाथ डालनेकी कोशिश की थी, उसका अंजाम तो तुम जानते हो, क्या huwa था,?

मुनीम_जी हुजुर !

ठाकुर _इस साले का अंजाम भी वैसा ही होगा।

मुनीम _पर हुजुर, ये सीधा साधा भोला भाला लडका नही है? ये चालाक और ताकत वर है। जब से ये गांव आया है तभी मुझे एक भय सा लगने लगा है?

ठाकुर _वो इसलिए कि इसका सकल उसके दादा मानव प्रसाद से मिलता है। इसलिए तुम डरते हो,,

मुनीम _आपने सही कहा हुजूर। कहीं हमारे राज खुल न जाए।

ठाकुर _तुम बेकार ही डर रहे हो मुनीम जी, उस लड़के में इतना दम नहीं, जो ठाकुर बालेंद्र से टकरा सके। वो तो मैं एक बार चुनाव हो जाए, फिर साले को उसी के गांव में ही लोगो के सामने गोली से उड़वा देगें।

अब इन बातो को छोड़ो, ये बताओ कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी शुरू की है की नही।

कुछ दिन ही शेष रह गए है?

इस बार पिछले वर्षो से ज्यादा भव्य आयोजन होना चाहिए, क्योंकि सामने चुनाव है।

कलेक्टर से बोलकर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी खेल के आयोजन में ड्यूटी लगवा दो।

बाहर से आने वाले खिलाड़ियों, अतिथियों, के रहने खाने पीने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

मुनीम _आप निश्चिंत रहिए हुजूर, पिछले साल से इस साल भव्य आयोजन होगा।

ठाकुर ने अपने आदमी से माखन को बुलाने कहा,,,

कुछ देर में माखन पहुंचा,,

माखन _ठाकुर साहब, आपने मुझे बुलाया।

ठाकुर _आओ माखन, ये बताओ हमारे गांव के कबड्डी टीम की तैयारी कैसी चल रही है?

हर साल की तरह इस साल भी हमारी टीम ही विजेता बननी चाहिए।

माखन _ठाकुर साहब, हमारे लड़के प्रतियोगिता के लिए बिल्कुल तैयार है। हमारे टीम के आगे कोइ भी टीम टिक नही पाएंगे। इस बार भी हमारी टीम ही विजेता बनेगी।

ठाकुर _तुम खुद ही लड़को को ट्रेनिंग दे रहे हो न।

माखन _जी ठाकुर साहब।

मुनीम _हुजुर, लोगो से मुझे एक और बात की जानकारी मिली है।

ठाकुर _कैसी बात?

मुनीम _सुना है राजेश भी कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है?

ठाकुर _क्या?

मुनीम _पर उसकी भुजा में चाकू लगी है? इतनी जल्दी पूरी तरह ठीक होना मुस्किल है, पता नही वह खेल में उतरेगा की नही। अगर उतरता है तो सुरज पुर वालो को इस बार हराना आसान नहीं होगा।

ठाकुर _माखन,सूरजपुर वालो को किसी भी कीमत पर यह प्रतियोगिता जितनी नही चाहिए।

चाहे कुछ भी हो जाए।

माखन _ठाकुर साहब आप बेफिक्र रहिए, अगर जरूरत पड़ा तो मैदान में मैं खुद उतरूंगा।

ठाकुर _तब तो इस बार का प्रतियोगिता और खास होने वाला है, देखते है साले में कितना दम है?

कुछ देर बाद, ठाकुर का आदमी आया, उसने ठाकुर को बताया कि गंगू नाम का कोइ आदमी आपसे मिलने आया है।

ठाकुर _मुनीम, ये गंगू कौन है?

मुनीम _हुजुर, ये पास वाले गांव का किसान है। जो आपके पुरखो द्वारा दी गई जमीन पर खेती करता है। पिछले तीन सालो से लगान नही चुका पाया है। मैने उसे लगान देने या फिर अपना घर खाली करने के लिए कह दिया था ताकि घर बेच कर लगान वसूल किया जा सके, इस लिए आपसे मिलने के लिए आया होगा।

ठाकुर _ठीक है, भेजो उसे।

ठाकुर का आदमी गंगू को लेकर ठाकुर के पास पहुंचा।

गंगू _ठाकुर साहब, मुझ पर दया कीजिए आप मेरा घर नीलाम मत कीजिए, हम बेघर हो जायेंगे। मैं अपने परिवार को लेकर कहा जाऊंगा। मुझे थोड़ा और समय दीजिए, मैं आपका सारा लगान चुका दूंगा।

ठाकुर _देखो गंगू, मुनीम जी का कहना है कि तुमने तीन सालो से लगान जमा नही किया है। पहले भी तुम्हे मुनीम जी ने मुहलत दिया होगा।

गंगू _दिया था मालिक पर क्या करू? पिछले तीन सालो से उतना फसल ही नहीं हो पाया और मंहगाई तो आप जानते ही है कितनी बड़ गई है। पर इस बार आपका सारा लगान चुका दूंगा। आप मुझे बेघर मत कीजिए। मुझ पर दया कीजिए।

ठाकुर _देखो गंगू, अगर मैने तुम पर रहम किया तो सारे किसान धीरे धीरे लगान देना बंद कर देगें। तुम्हे और मुहलत नही दिया जा सकता।

गंगू _मालिक, रहम कीजिए मेरी बेटी की सगाई हो चुकी है अगर हम बेघर हो गए तो रिश्ता टूट जायेगा।

ठाकुर _लो तुम्हारी बेटी की शादी भी तय हो गई है, अब तुम्हे तो पैसों की और भी जरूरत होगी कैसे लगान चुकाओगे।

अब तुम्हे किसानी छोड़कर मजदूरी करनी चाहिए। किसानी करना तुम्हारी बस की बात नही।

अब जाओ यहां से मेरा समय खराब मत करो।

ठाकुर के आदमी ने उसे खदेड़कर हवेली से बाहर कर दिया।

मुनीम _मालिक, मैं गंगू के घर गया था, इसकी बेटी बड़ी खूबसूरत है। इसकी बीवी के साथ तो आप सुहागरात मना ही चुके है। आप कर रहे थे न कि कुंवारी chut मारे काफी दिन हो गए।

ठाकुर _अगर ऐसा है तो जुगाड जमाओ। अगर बात बन जाए, सामने चुनाव है, हो हंगामा नही होना चाहिए।

मुनीम _ये आप मुझ पर छोड़ दीजिए हुजूर।

मुनीम जी शाम के समय गंगू के घर गया।

फुलवा _मुनीम जी आइए बैठिए।

मुनीम _देखो फुलवा अब तो तुम लोगो के पास कोइ रास्ता नही बचा है लो इस फार्म में गंगू का अंगूठा लगवा दो।

फुलवा गंगू की पत्नि _ये कैसा फार्म है मुनीम जी।

मुनीम _ये स्टांप पेपर है इसमें लिखा है कि तुम लोग अपना घर ठाकुर साहब के नाम कर रहे हो क्यों की तीन वर्षो से लगान जमा नही कर पा रहे हो, लाखो का लगान बकाया है।

फुलवा _मुनीम जी हम पर रहम कीजिए, हम बेघर होकर कहा जायेंगे।

मुनीम _ये तुम्हारी समस्या है अब भला मैं क्या कर सकता हूं।

फुलवा _मुनीम जी, मेरी बेटी नीरू की शादी होने वाली है। अगर हम बेघर हुवे तो उसका रिश्ता टूट जायेगा। कुछ उपाय हो तो बताइए, हम आपके हाथ जोड़ते है।

मुनीम _देखिए अब मैं इसमें क्या कर सकता हूं? मैं तो खुद ही एक मुलाजिम हूं। जो भी कर सकते है ठाकुर ही कर सकते हैं। गंगू तो गया था ठाकुर के पास। उसने तो और समय देने से मना कर दिया है?

फुलवा _मुनीम जी कुछ तो उपाय होगा।

मुनीम _उपाय तो है, पर तुम चाहो तो,शायद बात बन जाय।

फुलवा _क्या उपाय है मुनीम जी,,,

मुनीम _देखो फुलवा, तुम नीरू बिटिया को लेकर ठाकुर साहब के पास जाओ, नीरू बिटिया तो बड़ी सुन्दर है, अगर ठाकुर साहब ने अपना हाथ नीरू बिटिया के सर पे रख दिया न, तो ठाकुर साहब सारा लगान माफ कर देगें, और नीरू बिटिया की शादी का खर्च भी ठाकुर साहब ही उठाएंगे।

फुलवा _मुनीम जी, मैं समझ गई तुम क्या कहना चाहते हो। मेरा घर बिकता है तो बिक जाने दो, पर मैं अपनी बेटी उस ठाकुर को नही सौंप सकती।

मुनीम _मैने तो उपाय बताया, आपने कहा तो, कोइ जबरदस्ती तो है नहीं, आगे आपकी मर्जी, इस पेपर पर गंगू का अंगूठा लगवा देना, मैं कल आऊंगा, पेपर लेने।

मुनीम वहा से चला गया। फुलवा चिंतित हो गई।

मुनीम और फुलवा की सारी बाते, नीरू दरवाजे के पीछे खड़ी होकर सुन रही थी।

मुनीम के जाने के बाद नीरू फुलवा के पास आई।

नीरू _मां, मैने सारी बातें सुन ली है।

अगर मैं आप लोगो के काम आ सकू तो ये मेरे लिए खुशी की बात होगी। मैं ये घर बिकने नही दूंगी।

फुलवा _बेटी तुम भोली हो, कुछ नही जानती। वह ठाकुर बड़ा हरामि है।

वह तुम्हे कुत्ते की तरह नोचेगा।

मैं तुम्हे उस कुत्ते के हवाले नही कर सकती।

नीरू _मां , ये घर जमीन सब चले जाने के बाद, पता नही हमारी मजबूरी का फायदा उठाकर कितने लोग हमे नोचने की कोशिश करेंगे, उससे अच्छा है, मुनीम का कहना मान ले।

फुलवा _बेटी, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा, हे भगवान ये कैसी परीक्षा ले रहे हो?

नीरू _मां, हो सकता है,मेरे किस्मत में ठाकुर से लूटना ही लिखा हो ।

फुलवा _पर तुम्हारे बापू इसके लिए, नही मानेंगे।

नीरू _मां, बापू को बताने की जरूरत नही।

हम कल सुबह चलेंगे ठाकुर के पास ।

अगले दिन सुबह दस बजे फुलवा और नीरू दोनो हवेली जाने के लिए तैयार हो गई।

गंगू _अरे तुम दोनो कहीं जा रही हो क्या?

फुलवा _देखो जी, हम ठाकुर से मिलने जा रहे है, हो सकता है, हमारी याचना सुन कर, ठाकुर को हम पर दया आ जाए, तुम बच्चो का ख्याल रखना।

गंगू _उस ठाकुर के पास जाने का कोइ फायदा नही , वह तुम लोगो की नही सुनेगा।

फुलवा _ एक बार कोशिश करके देखने में क्या बुराई है,?शायद हम पर दया आ जाए।

फुलवा नीरू को लेकर हवेली चली गई।

ठाकुर के आदमी ने ठाकुर को बताया कि कोइ महिला आई है, आपसे मिलना चाहती है साथ में उसकी बेटी भी है।

ठाकुर _ठीक है, उसे भेजो।

फुलवा, नीरू के साथ ठाकुर के पास आई।

फुलवा _नमस्ते मालिक, फुलवा ने हाथ जोड़कर ठाकुर को प्रणाम किया।

ठाकुर _कौन हो तुम लोग?

फुलवा _मालिक मैं गंगू की पत्नि हूं, और ये मेरी बेटी है।

ठाकुर ने नीरू को गौर से देखा और मुस्कुराने लगा।

ठाकुर _बोलो क्या बात है?

फुलवा _मालिक आपको तो मालूम है कल मेरा पति आपके पास आया था।

ठाकुर _हां, देखो तुम लोगो को लगान चुकाने और समय नही दिया जा सकता । मैने गंगू को साफ साफ कह दिया था।

फुलवा _मालिक हम पर दया कीजिए एक मौका और दे दीजिए। अगर घर और जमीन चली गई तो हम कहा जायेंगे। मेरी बेटी की सगाई हो चुकी है। अगर उन लोगो को पता चला की हम बेघर हो गए हैं तो रिश्ता तोड़ देगें।

ठाकुर _छोरी क्या नाम है तुम्हारा।

नीरू _जी, नीरू।

ठाकुर _तुम तो बड़ी सुंदर हो। क्या उम्र है तुम्हारी।

फुलवा _अभी, 18की हुई है मालिक अच्छा रिश्ता आया तो शादी तय कर दी।

पर आगे मेरे बेटी का भविष्य आपके ही हाथो में है मालिक, मेरी बेटी का भविष्य खराब होने से बचा लीजिए।

ठाकुर _देखो मैं नही चाहता की आपके बेटी का रिश्ता टूटे, हम सारा लगान माफ कर देगें और नीरू की शादी का खर्च भी हम उठाएंगे।

पर बदले में तुम मां बेटी को हमारी सेवा करनी होगी।

फुलवा _आप जैसा कहें हम तैयार है मालिक।

ठाकुर _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

अरे नीरू तुम तुम दूर क्यू खड़ी हो आओ हमारे पास आओ।

फुलवा _जाओ बेटी।

नीरू ठाकुर के पास गई।

ठाकुर ने नीरू का हाथ पकड़ कर कहा,,

अरे तुम तो बड़ी प्यारी लड़की हो, आओ मेरे गोद में बैठो।

ठाकुर ने नीरू को अपनी गोद में बिठा लिया।

ठाकुर _तुम तो शर्मा रही हो, हमसे नजरे मिलाओ।

अब तो तुम्हारी शादी होने वाली है!

बड़ा किस्मत वाला है तुम्हारा होने वाला पति, इतनी खूबसूरत बीबी जो मिल रही है।

वैसे तुमको पता है न शादी के बाद औरत को क्या क्या काम करने होते है?

फुलवा क्या क्या सिखाई हो, नीरू को, अब इसकी शादी होने वाली है।

फुलवा _जी मालिक घर का सारा काम करने आता है। खाना तो बहुत अच्छा बनाता है मेरी बेटी।

ठाकुर _ये तो बड़ी अच्छी बात है?

पर सिर्फ अच्छा खाना बनाने से, पति खुश नहीं रहता, तुम नीरू को पति को कैसे खुश रखना है वो तो नही सिखाई होगी।

फुलवा _जी मालिक।

ठाकुर _कोइ बात नही, हम सीखा देगें। क्यू नीरू सीखोगी न मुझसे, पति को कैसे खुश करना है।

नीरू शर्म से अपनी दोनो हाथो से चहरे छिपाने लगी।

ठाकुर ने अपने आदमी को बुलाया और बिंदिया को बुलाने को कहा।

कुछ देर बाद बिंदिया आई,,

बिंदिया _ठाकुर साहब आपने मुझे याद किया।

ठाकुर _आओ बिंदिया आओ,,,

ये फुलवा और नीरू दोनो मां बेटी को हमारे फार्म हाउस में ले जाओ, आगे क्या करना समझ गई होगी?

बिंदिया _जी मालिक, बिंदिया मुस्कुराते हुवे बोली।

आओ नीरू, चलो फुलवा तुम दोनो मेरे साथ चलो, ठाकुर साहब बाद में आयेंगे।

बिंदिया, फुलवा और नीरू को लेकर फार्म हाउस पहुंची । ठाकुर के आदमी ने उन्हें जीप में फार्म हाउस तक पहुंचाया।

वहा जाने के बाद।

फार्म हाउस, ठाकुर के अय्याशी का अड्डा था, अय्याशी का सारा सामान फार्म हाउस में मौजूद था।

फार्महाउस के अंदर आलीशान बंगला था।

बिंदिया ने फुलवा और नीरू को बंगले के अंदर ले गई।

बिंदिया _चलो पहले तुम दोनो बाथरुम में जाकर नहालो।

फुलवा _बिंदिया दीदी, हम घर से नहाकर आए है।

बिंदिया _ठीक है, पर शरीर की अच्छे से सफाई की हो की नही ठाकुर साहब को जंगल बिलकुल पसन्द नही।

बिंदिया _मां, ये किस जंगल की बात कर रही है।

बिंदिया हसने लगी।

अरे बिटिया औरतों के दो टांगो के बीच जो जंगल उग आते हैं न मैं उसकी बात कर रही हूं। तुम्हारे तो अभी ज्यादा घने नही होंगे।

बिंदिया हसने लगी। नीरू शर्मा गई।

बिंदिया _चलो तुम दोनो अपने जंगलों की सफाई कर लो। ये क्रीम है, इससे सफाई अच्छी होती है, पर तुम लोग इसका उपयोग कभी की नही होगी, इसलिए मैं तुम लोगो की मदद करुंगी, ठाकुर साहब इसी लिए तो मुझे भेजा है।

नीरू _बिंदिया चाची, आप बता दो हमे इसका उपयोग कैसे करना है, आप करोगी तो हमे बड़ी शर्म आएगी।

बिंदिया _अरे बिटिया, मैं कोइ मर्द थोड़े हूं, जो मुझसे शर्माएगी।

वैसे नहाना तो मुझे भी है और सफाई मुझे भी करनी है। अब चलो अपनी अपनी कपड़े उतारो एसऔर बाथरुम में घुस जाओ।

बिंदिया उन दोनो का शर्म दूर करने पहले अपने कपड़े उतारी और नंगी हो गई।

अब जल्दी करो, देख क्या रहे हो?

बिंदिया को नंगी देख नीरू और फुलवा की शर्म कुछ कम हुआ।

फुलवा भी नंगी हो गई।

नीरू ब्रा और कच्छी में रह गई।

बिंदिया _अरे बिटिया इसे भू उतार दो, हम दोनो भी तो नंगी है, फिर क्या शर्माना।

बिंदिया ने अपनी मां फुलवा की ओर देखा, फिर सिर नीचे कर अपनी ब्रा और कच्छी उतार कर दोनो हाथो से अपनी योनि ढकने लगी।

बिंदिया हसने लगी,,

बिंदिया _अब चलो बाथरुम में।

बाथरुम में ले जाकर बिंदिया ने अनचाहे बालों को क्रीम लगाकर निकालना सिखाया। तीनो ने अपनी शरीर के अनचाहे बालों को क्रीम लगाकर हटाया फिर साबुन लगा कर अच्छे से मल मल कर नहाया।

नहाने के बाद, तीनो बाथरुम से बाहर आए। शरीर पर सुगंधित तेल लगाए।

बिंदिया ने नीरू को पहनने के लिए दुल्हन का ड्रेस दिया।

फुलवा को भी एक अच्छी साड़ी दे दी।

तीनो कपड़े पहन कर सजने सवरने लगे।

बिंदिया स्वयं तैयार होने के बाद, नीरू को दुल्हन की तरह सजाने लगी।

कुछ देर बाद ठाकुर साहब फार्म हाउस पहुंचा। अपने साथ खाने पीने का सामान लेकर आया था।

एक बड़ा सा कमरा। जिसमे नरम मुलायम गद्दे बिछे थे। उसमें ठाकुर ने फुल बिखेर कर, तकिए के सहारे लेट कर बिंदिया को आवाज़ लगाया।

ठाकुर _बिंदिया और कितने समय लगेंगे तुम लोगो को तैयार होने में।

बिंदिया _थोड़ा सब्र कीजिए हुजूर बस होने वाला है।

थोड़ी देर बाद, बिंदिया नीरू को लेकर ठाकुर के पास पहुंची, साथ में पीछे पीछे फुलवा भी आई।

ठाकुर अपने हाथ में मोंगरे की माला लपेटा huwa था उसे सूंघने लगा।

बिंदिया नीरू को ठाकुर के सामने बिठा दिया, नीरू घूंघट में थी।

बिंदिया और फुलवा भी नीरू के आजू बाजू बैठ गई।

बिंदिया ने शराब की बोतल खोली और ठाकुर के लिए पेग बनाने लगी।

ठाकुर ने जो खाने पीने का सामान लाया था उसे प्लेट पर सजा दिया।

ठाकुर एक हाथ से चिकन लेग पीस उठाकर चबाने लगा तो दूसरे हाथ से शराब का पेग लेकर पीने लगा।

फुलवा और नीरू खामोश बैठी रही।

ठाकुर _अरे तुम लोगो को भी भूख लगी होगी, तुम लोग भी कुछ खा लो।

बिंदिया _मालिक पहले दुल्हन का घूंघट तो उठाइए।

ठाकुर ने नीरू का घूंघट उठाया।

नीरू सिर झुका ली थी, उसे अपनी हाथ से ऊपर उठाया।

ठाकुर _सच में बड़ी खूबसूरत दुल्हन है।

ठाकुर ने अपनी जेब से एक अंगूठी निकाला और नीरू के हाथ को चूमकर अंगूठी पहना दिया।

ये मुंह दिखाई का तोहफा है।

ठाकुर ने नीरू को अपनी बाहों में भर कर अपने गोद में बिठा लिया।

बिंदिया ने अंगूर का दाना नीरू के मुंह में डाला।

बिंदिया _नीरू बिटिया ये अंगूर का दाना , हुजूर तुम्हारे मुंह से अपने मुंह में लेकर खायेगा।

ठाकुर ने नीरू के मुंह को अपने मुंह में भर लिया।

बिंदिया _बिटिया, अंगूर का दाना हुजूर के मुंह में छोड़ो।

नीरू ने अंगूर का दाना ठाकुर के मुंह में छोड़ दिया।

ठाकुर _अंगूर का दाना चबाते हुवे कहा, अंगूर बहुत मीठा है।

इस तरह चार खाने पीने की चीजे नीरू के मुंह में बिंदिया डालने लगी और ठाकुर नीरू के मुंह को अपने मुंह में भर कर, चीजे खाने लगा।

ठाकुर अपने हाथो से फुलवा और बिंदिया को भी खिला रहा था और स्वयं नीरू के मुंह से चीजे लेकर खा रहा था।

नीरू को ये सब चीजें अजीब लग रहा था पर उसे भी मज़ा रहा था।

कुछ देर इसी तरह चलता रहा जब पेट भर गया।

ठाकुर ने नीरू की ब्लाउज उतार कर अलग कर दिया। उसकी चूची मुंह में भर कर चूसने लगा।

नीरू सिसकने लगी।

नीरू लहंगा में थी। ठाकुर ने अपना कुर्ता उतार दिया वह पजामा में रह गया। उसका लंद तन चुका था जो नीरू को चुभ रहा था।

ठाकुर ने फुलवा और बिंदिया से कहा _तुम दोनो भी अपनी अपनी साड़ी पेटीकोट ब्लाउज उतार दो।

बिंदिया और अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई।

ठाकुर अपने दोनो हाथो से फुलवा और बिंदिया की chut सहलाने लगा।

ठाकुर नीरू को गोद से उतार दिया। और खड़ा होकर अपना पजामा और कच्छा उतार दिया।

नीरू ठाकुर के लंद को देखने लगी।

बिंदिया ठाकुर के लंद को पकड़ कर सहलाने लगी।

बिंदिया _अरे बिटिया, लगता है तुम पहली बार लंद देख रही हो, आओ पकड़ कर देखो लंद कैसा होता है।

नीरू ठाकुर के लंद को हाथ में लेकर देखने लगी।

बिंदिया _इसे मुंह में भर कर चूसने से पुरुषो को बहुत मजा आता है, उसका ढीला लंद खड़ा होकर शख्त हो जाता है।

चलो अब तुम्हारी मां तुम्हे चूसना सिखाएगी।

बिंदिया _फुलवा, अपनी बेटी को सिखाओ, लंद कैसे चूसा जाता है?

फुलवा ठाकुर के लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी।

बिंदिया _चलो बेटी अब तुम चूसो। अभी तुम्हारी मां ने दिखाया न कैसे चूसना है?

नीरू लंद चूसने लगी, जिस तरह उसकी मां ने लंद चूस था।

चलो अब तुम मां बेटी बारी बारी से लंद चूसो।

फुलवा और नीरू दोनो बारी बारी से लंद चूसने लगे।

ठाकुर का लंद और लंबा, मोटा हो गया।

बिंदिया _बेटी ये लंद जब औरत के योनि में जाता है न तो औरत को बहुत मजा देता है और अपना पानी औरत के गर्भ में छोड़कर उसे बच्चा देता है।

लंद से पानी निकालने के कई तरीके है, उन्ही तरीको को तुम्हे सीखना है। जो औरते इस खेल में पारंगत होती है उसका पति उसे बहुत खुश रहता है।

ठाकुर साहब और तुम्हारी मां मिलकर तुम्हे इस खेल में पारंगत करेंगे।

ठाकुर ने फुलवा को गद्दे पे लेटने को कहा, फुलवा लेट गई।

ठाकुर ने फुलवा की chut चाटना शुरु कर दिया। फुलवा सिसकने लगी।

नीरू यह सब आश्चर्य से देख रही थी।

बिंदिया _बेटी, ठाकुर साहब का लंद अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मां की योनि में रखो।

अब ठाकुर साहब तुम्हारी मां की chudai करेगा।

बिंदिया ने ठाकुर का लंद एक बार अच्छे से चूसा,

बिंदिया _लो बेटी अब इस लंद को पकड़ कर अपनी मां की योनि में रख दो।

नीरू ने लंद पकड़ा और उसे अपनी मां की योनि में रख दिया।

ठाकुर ने एक जोर का धक्का मारा, लंद योनि को फाड़कर एक ही बार में अंदर चला गया।

फुलवा चीख उठी

उसके बाद ठाकुर ने फुलवा की दोनो स्तनों को मसल मसल कर, लंद को boor में पेलना शुरू कर दिया।

धीरे धीरे फुलवा को मजा आने लगा, वह भी ठाकुर का साथ देने लगी और अपने मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

बिंदिया _बेटी, ये आवाजे कोइ औरत तभी निकालती है जब उसे मजा आता है, ठाकुर से चुदाने में तुम्हारी मां को बहुत मजा आ रहा है।

ठाकुर फुलवा को लगातार चोदता रहाजब तक वह झड़ न गई।

फुलवा के झड़ने के बाद, ठाकुर ने अपना लंद उसकी योनि से बाहर निकाला, फुलवा की boor का पानी पीकर वह और लंबा मोटा हो गया था।

बिंदिया _चलो बेटी अब तुम लेट जाओ, ठाकुर साहब अब तुम्हारा सील तोड़ेंगे।

तुम्हे पहले दर्द तो होगा फिर बहुत मजा आएगा।

नीरू लेट गई।

ठाकुर ने उसका लहंगा ऊपर उठाया और उसकी कच्छी उतार दिया। उसके कूल्हे के नीचे तकिया रख दिया और नीरू की chut चाटने लगा।

नीरू सिसकने लगी, उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

कुछ देर chut चाटने फुलवा को लंद चूसने कहा।

फुलवा ठाकुर का लंद चूसने लगी।

बिंदिया _फुलवा अब ठाकुर का लंद नीरू के boor पे रखो, अब उसकी सील तोड़ने का समय आ गया है।

फुलवा _मालिक, थोड़ा आराम से करना मेरी बेटी बड़ी नाजुक है।

ठाकुर _हम ख्याल रखेंगे, तुम्हारी बेटी का, चलो अब इसे योनि पे रखो।

फुलवा ने ठाकुर का लंद नीरू के योनि में रख दिया।

ठाकुर ने नीरू के ऊपर लेट गया और उसकी मुंह को अपनी मुंह में भर कर चूसने लगा। और धीरे धीरे लंद का दबाव योनि में डालता गया।

लंद योनि की झिल्ली फाड़कर अंदर चला गया।

नीरू दर्द से चीख पड़ी।

ठाकुर नीरू का मुंह चूसने लगा और लंद को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।

धीरे धीरे दर्द कम होता गया और नीरू को भी मजा आने लगा, उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

ठाकुर को कुवारी chut मारने में बड़ा मजा आने लगा।

वह नीरू की चूची को मसल मसल कर चूसने लगा और साथ में गप गप चोदने लगा।

नीरू को chudai में बहुत मजा आने लगा वह अपना सारा दर्द भुल गई, औरआनद मे चीखते हुवे झड़ने लगी।

उसके बाद ठाकुर बिंदिया को kutiya बनाकर चोदने लगा, फिर फुलवाको उसके बाद नीरू को घोड़ी बना कर ठोकने लगा।

अपना सारा पानी, नीरू के boor में छोड़ दिया।

फुलवा _ये क्या किया मालिक, कहीं नीरू पेट से हो गई तो।

ठाकुर _अरे तो क्या huwa अगले माह तो इसकी शादी है न।

एक राउंड के बाद चारो सुस्ताने लगे।

एक घंटा बाद ठाकुर दूसरे राउंड के लिए तैयार हो गया। उसने पहले राउंड के बाद लंद खड़ा करने का दवाई खा लिया था।

दूसरे राउंड में उसने नीरू और फुलवा को अलग अलग आसनों में जमकर चोदा और अन्त में नीरू के boor में एक बार फिर झड़ गया।

चारो फिर थक चुके थे, कुछ देर सुस्ताने के बाद सभी अपने अपने कपड़े पहनने लगे।

ठाकुर ने फुलवा को नोटो की एक गड्डी देते हुए कहा।

तुम दोनो मां बेटी ने मुझे खुश कर दिया, ये लो ईनाम इन्हे रख लो और हा मेरा मन फिर कभी किया तो मैं तुम लोगो को बुलाऊंगा। तुम दोनो आ जाना।

इसके बाद ठाकुर वहा से चला गया।

ठाकुर का आदमी, फुलवा और नीरू को उसके घर छोड़ दिया।

गंगू _बड़े देर कर दी तुम दोनो ने आने में, क्या कर रही थी वहा पर।

फुलवा _ठाकुर, ने हम पर दया किया और लगान माफ कर दिया। उसने यह पैसा भी दिया है इससे हम नीरू की शादी अच्छे से कर सकेंगे।

गंगू _इतने सारे पैसे। आखिर ठाकुर क्यों देगें।

मुझे सब सच बताओ,,

ऐसा क्या किया तुम लोगो ने जो ठाकुर ने लगान माफ कर दिया और इतने सारे पैसे भी दिए है।

कहीं तुम दोनो ने अपना मुंह काला तो नही करा आई,,

फुलवा _हा हां हम ने ठाकुर के साथ सोकर आए है। हमारे पास कोइ और चारा था क्या?

अगर उसका कहना नही मानते तो दर दर का ठोकर खाने मजबूर हो जाते।

गंगू _हे भगवान ये तुम लोगो ने क्या किया? गंगू रोने लगा,,

गंगू ने अपने आंसू पोंछ पोछते हुवे, ठाकुर को श्राप दिया।

ठाकुर मैं तुम्हे श्राप देता हूं, जिस तरह से तुमने मेरी बेटी और अपनी पत्नि को अपना रखैल बनाया है, कोइ तुम्हारे बेटियो और पत्नि को भी रखैल बनाएगा।

तब तुम्हे दूसरो का दर्द पता चलेगा।
 
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