Incest यह क्या हुआ - Page 23 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest यह क्या हुआ

आखिर, वह दिन आ गया जब भानगढ़ में कबड्डी प्रतियोगिता होना था। जिला स्तर पर यह खेल ठाकुर बालेंद्र सिंह के पुरुखो द्वारा आयोजित किया जाता रहा है,उस परंपरा को ठाकुर बालेंद्र सिंह ने आज भी कायम रखा है।

आज भानगढ़ में लोगो की, खिलाड़ियों की, अधिकारी कर्मचारियों की भीड़ लगी हुई है।

खेल मैदान के आसपास, दुकान सजा huwa है, जिसमे खाने पीने और अन्य सभी प्रकार के चीजे बिकने के लिए सजाया गया है। गांव में जगह जगह प्रवेश द्वार लगाया गया है, पोस्टर बैनर से प्रवेश द्वार को सजाया गया है।

पांच दिवसीय यह खेल आयोजित किया गया है, एक प्रकार से गांव में खेल मेला लगा huwa है।

दूर से आए खिलाड़ियों के लिए ठहरने एवम खाने पीने की व्यवस्था, हवेली द्वारा किया गया है।

जिले में चार ब्लॉक है। लक्ष्मण पुर, धरमपुर, गणेशपुर और अंचलपुर।

प्रत्येक ब्लॉक से 8बेस्ट टीमों के बीच यह प्रतियोगिता होनी है।

पांच दिवसीय इस खेल प्रतियोगिता में पहले दिन 8मैच होने है। पहले दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के टीमों के बीच मैच होनी है। प्रत्येक टीम को एक मौका ही मिलना है अगर वे मैच हारते है तो सीधे बाहर हो जायेंगे। जितने वाला टीम अगले चरण में पहुंच जायेंगे।

पहले दिन 8मैच होने है, आठ विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।

इसी प्रकार दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर के टीमों के बीच मैच खेले जाने है। जिसमे 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचेंगे।

तीसरे दिन धरम पुर और लक्ष्मण पुर के विजई टीमों का मुकाबला, गणेशपुर और अंचल पुर ब्लॉक के विजई टीमों के बीच होना था जिसमे 8मैच खेलें जायेंगे और इन 8 टीमों के बीच मुकाबला 4थे दिन होने है, चौथे दिन 6मैच होंगे और अंतिम पांचवे दिन फाइनल मैच खेला जाएगा। विजेता बनने के लिए किसी टीम को अपने सभी पांच मैच जीतने होंगे।

जितने वाले टीम को 10लाख रुपए इनाम दिए जायेंगे।

आज पहले दिन खेल का उदघाटन होना है, उदघाटन के लिए राज्य के खेल मंत्री को आमन्त्रित किया गया है। ठाकुर बालेंद्र सिंह इस खेल के अध्यक्ष और आयोजक है।

पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के बीच खेला जाना है।

मैदान के तीन और दर्शक दीर्घा बनाया गया है सामने अतिथियों के लिए मंच सजाया गया है।

मंच पर सभी आमन्त्रित अतिथि पहुंच चुके है।

दर्शक दीर्घा पूरी तरह दर्शकों से खचाखच भर गया है। अतिथियों ने मंच के सामने रखे ठाकुर के पूर्वजों की फोटो पार माल्यार्पण किया, उसके बाद बाहर से आए सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। खेल मंत्री और ठाकुर के अभिभाषण के पश्चात उदघाटन मैच शुरू हो गया।

पहला मैच भानगढ़ और चिता पुर के टीम के बीच खेला जाना था। दोनो टीमों के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही सभी दर्शकों ने तालिया बजाकर उनका स्वागत किया।

दोनो टीमों के खिलाड़ी काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वे कबड्डी नही कुश्ती लड़ने के लिए आए हो।

कबड्डी के लिए स्फूर्ती, चालाकी और ताकत तीनो चीजों का होना जरूरी होता है।

अब देखना यहीं था किस टीम के खिलाड़ियों में ये तीनो गुण मौजूद है।

टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी टीम के खिलाड़ी भी मैच देखने, दर्शक दीर्घा में बैठे थे ताकि वह मैच देखकर विजेता टीम के खिलाड़ियों के गुण दोष कमजोरी और मजबूती का अवलोकन कर अपनी योजना बना सके।

राजेश भी अपने टीम के खिलाड़ियों के साथ, दर्शक दीर्घा पर मौजूद था।

मैच रेफरी के सिटी बजाते ही भानगढ़ टीम का एक रेडर विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे विरोधी टीम के खिलाड़ियों को छूने उतर पड़ा, चिता पुर के डिफेंडरों ने रेडर को पकड़ने के लिए बहुत कोशिश किया पर उसे पकड़ नही पाया, और रेडर ने एक खिलाड़ी को टैग कर छूकर अपने पाले में वापस आ गया। भानगढ़ टीम को एक अंक प्राप्त हो गया। टैग किए खिलाड़ी मैदान से बाहर हो गया।

उसके बाद चितापुर का रेडर कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, टैग करने,भानगढ़ टीम के पाले में उतरा, चिता पुर के दर्शक चिल्ला चिल्ला कर अपने गांव के खिलाड़ी का हौसला बढ़ा रहे थे तो भानगढ़ के दर्शक अपने टीम के खिलाड़ियों को रेडर को पकड़ने के लिए उन्हे जोश दिला रहे थे। आखिर भानगढ़ के खिलाड़ी, रेडर को पकड़ने में सफल हो गया, वे चारो तरफ से रेडर को पकड़ कर घेर लिया, रेडर उनसे बच कर वापस नहीं आ सका, और भानगढ़ टीम को एक अंक और मिला, इस प्रकार मैच 20मिनट तक चला, पहले हाफ में भानगढ़ के टीम, चिता पुर के टीम पर भारी पड़ा ।

पहले हाफ में भानगढ़ के टीम ने 10अंको की बढ़त बना ली।

उसके बाद 5मिनट का ब्रेक दिया गया इस दौरान, टीमों के मार्गदर्शक अपने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने लगे।

5मिनट बाद फिर से खेल प्रारंभ huwa दूसरे हाफ में भी भानगढ़ का टीम अपना जोश और ताकत के दम पर चिता पुर के पूरी टीम को आउट कर दिया और बोनस अंक भी प्राप्त कर लिया। और भानगढ़ के टीम भारी अंको के अंतर से मैच जीत लिया।

चिता पुर के खिलाड़ी, और दर्शक काफी निराश हो गए, क्यू की वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। जबकि भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों, और दर्शक काफी उत्साहित थे, अपने टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन देखकर उन्हे लग रहा था कि इस बार भी टूर्नामेंट का विनर हम ही बनेंगे।

ठाकुर भी अपने गांव के टीम का प्रदर्शन देख कर गर्व महसूस करने लगा।

अगला मैच सुरज पुर और जशपुर के बीच खेला जाना था। राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों को आवश्यक दिशा निर्देश, दिया।

कुछ ही देर बाद दोनो टीमों के खिलाड़ी मैदान में उतर चुके थे दर्शकों ने अपनी अपनी टीमों के लिए ताली बजाकर उनका स्वागत किया।

सुरज पुर के खिलाड़ियों ने जोर दार खेल का प्रदर्शन किया अपने विरोधी टीम पर हमेशा दबदबा बनाकर रखा, पहले एवम दूसरे हाफ दोनो में विरोधी टीम के मुकाबले भारी अंक हासिल किए और विरोधी टीम को भारी अंको के अंतर से मैच हराया।

सुरज पुर अगले चरण में पहुंच गया तो जशपुर वाले टूर्नामेंट से बाहर हो गए। सुरज पुर वाले काफी उत्साहित नजर आ रहे थे तो ठाकुर को सुरज पुर वालो का यह प्रदर्शन खटकने लगा।

इसके बाद 6और मैच हुवे।

करीब शाम 6बजे प्रथम दिवस खेल के समापन का घोषणा huwa, इसके बाद सभी दर्शक अपने अपने घर के लिए रवाना हो गए, कुछ अपने टीम के जीत से उत्साहित से तो कुछ अपने टीम को टूर्नामेंट से बाहर होने से निराश थे।

जो अतिथि एवम टीम दूर से आए थे उनके ठहरने खाने पीने की व्यवस्था किया गया था, तो वे भानगढ़ में ही रुक गए।

अगले दिन फिर से सुबह 9बजे से खेल प्रारंभ हो गया दूसरे दिन गणेश पुर और अंचलपुर ब्लॉक के टीमों के बीच मुकाबला huwa, जिसमे कुल 8मैच खेलें गए, 8विजई टीम अगले चरण में पहुंचे। और हारने वाले 8टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गए।

तीसरे दिन, धरमपुर _लक्ष्मणपुर के विजई टीमों का मुकाबला अंचल पुर _ गणेश पुर के विजई टीमों के बीच होना था। अधिकारियों ने चिट के माध्यम से कौन सा टीम किस टीम से भिड़ेगा, इसका घोषणा किया।

तीसरे दिन खेल प्रारंभ होने से पहले ही टीमों को पता चल गया की उसकी भिडंत किस टीम से होनी है।

तीसरे दिन पहला मैच भानगढ़ के टीम का मोतीपुर के साथ होना था।

रेफरी के सिटी बजाते ही खेल प्रारंभ huwa, इस बार भानगढ़ वालो को मोतीपुर के टीम ने कड़ा टक्कर दिया। अन्त में भानगढ़ वाले ही जीते लेकिन मोती पुर वाले टीम ने भानगढ़ वाले टीम के खिलाड़ियों की पसीने छुड़ा दिए।

आज का आखिरी मैच, सुरज पुर और भीमपुर के बीच huwa,

सुरज पुर के खिलाड़ियों ने भीम पुर के खिलाड़ियों को आसानी से हरा कर, अगले चरण में पहुंच गया।

राजेश ने अपने टीम के खिलाड़ियों की बड़ी तारीफ किया और अगले चरण में ऐसे ही जोश बनाए रखने के लिए कहा।

इधर ठाकुर बालेंद्र सिंह आज भानगढ़ के टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश नहीं थे उसने माखन को बुलाया।

माखन _हुजुर आपने मुझे बुलाया।

ठाकुर _माखन तुम तो कह रहे थे कि हमारी टीम, बहुत मजबूत है।

ये तो दूसरे चरण में ही लड़खड़ा गए थे। मुझे नही लगता ये टीम कल मैच जीत पाएगी।

उधर सुरज पुर वालो का खेल देखकर तो ऐसा लग रहा है की इस बार वो जबरदस्त तैयारी करके आए है।

माखन हमारी टीम को मजबूत बनाओ, मैं नही चाहता की सुरज पुर वाले विजेता बने।

माखन _ठाकुर साहब आप चिन्ता न करें हमारी टीम ही, विजेता बनेगी, कल मैं खुद ही मैदान में उतरूंगा।

ठाकुर _ये ठीक रहेगा, माखन मुझे तुम पर भरोसा है तुम मुझे निराश नहीं करोगे।

तीसरे दिन तीसरे और चौथे चरण का मैच होना था।

तीसरे चरण में 8 टीम पहुंचे थे, कुल चार मैच होने थे इसमें विजई टीम के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला जाना था।

अधिकारियों ने चिट ड्रा के माध्यम से यह घोषणा किया की तीसरे चरण में कौन सा टीम किस टीम के साथ भिड़ेगा।

आज भानगढ़ की टीम माखन के आने से काफी उत्साहित और जोश में थे।

तीसरे चरण का पहला मैच भानगढ़ और धावलपुर के बीच होना था।

माखन के मैदान में उतरते ही, दर्शक माखन माखन, चिल्लाने लगे।

रेफरी के सीटी बजते ही खेल प्रारंभ huwa,

धवल पुर का रेडर, भानगढ़ के खिलाड़ियों को टैग करने मैदान में उतरा, वह कबड्डी कबड्डी कहतेहुए खिलाड़ियों को छूने की कोशिश किया।

पर माखन ने उसे दबोच लिया।

वह माखन से स्वयं को छुड़ा नही सका, और अपने पाले में वापस जा नही सका।

उसके बाद माखन स्वयं, विरोधी खिलाड़ियों को टैग करने के लिए मैदान में उतरा, विरोधी टीम के तीन खिलाड़ी उसे पकड़ लिए, लेकिन माखन को अपने पाले में जाने से रोक नही पाए।

तीनो खिलाड़ी मैदान से आउट हो गए।

भानगढ़ वाले माखन माखन, चिल्लाने लगे और तालिया बजाने लगे।

माखन के सामने, धवल पुर के खिलाड़ी टिक नही पाए और अन्त में धवल पुर के टीम बुरी तरह हार गया। भानगढ़ सेमीफाइनल में पहुंच गया।

चौथा मैच सुरज पुर और मानपुर के बीच huwa,

सुरज पुर वालो ने अपने टीम के समर्थन में खुब नारे लगाए।

सुरज पुर और मानपुर के बीच कड़ा मुकाबला huwa और अन्त में सुरज पुर विजई huwa, और सेमीफाइनल में पहुंच गया ।

तीसरे चरण के मैच सम्पन्न होने के बाद, अधिकारियों चौथे चरण के मैच किसके किसके बीच होने है उसका घोषणा किया गया।

1घंटा ब्रेक देने के बाद, सेमीफाइनल मैच का पहला मुकाबला, सुरज पुर और हीरापुर के बीच मैच प्रारंभ huwa, दोनो के बीच कड़ा मुकाबला huwa, और अन्त में बहुत कम अंक के अंतर से सुरज पुर विजई होकर, फाइनल में पहुंच गया।

सेमीफाइनल का दूसरा मैच भानगढ़ और आतंकपुर के बीच huwa,

खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग माखन माखन चिल्लाने लगे। आतंक पुर के खिलाड़ी भी काफी मजबूत न, ताकत वर दिखाई पड़ रहे थे, फिर भी माखन को रोकने में असफल रहे और अन्त में भानगढ़ की टीम ने भारी अंको के अंतर से आतंक पुर के खिलाड़ियों को हरा दिया।

चारो तरफ माखन माखन ही गूंज रहा था। लोग अब कहने लगे थे की इस बार भी भानगढ़ का टीम ही विजेता बनेगी।

इधर सुरज पुर वाले चिंतित नजर आ रहे थे, उन्हे लग रहा था की इस बार भी भानगढ़ वाले ही विजेता बनेंगे।

इधर गांव पहुंचने के बाद सुरज पुर के सभी खिलाड़ी अखाड़े पर एकत्रित हुए ताकि कल की योजना बनाया जा सके।

मोहन _राजेश,कल की मैच हमारे लिए काफी मुस्किल होने वाला है। माखन को पकड़ पाना हम सबके लिए बहुत बड़ी चुनौती है। जब तक वह पकड़ में नहीं आएगा हम मैच जीत नही पाएंगे।

आज के मैच में तो छोटू को भी चोट आया है, उसके पैर में मोच आ गया है। वह ठीक से चल नही पा रहा है।

अब छोटू की जगह आप को ही मैदान में उतरना पड़ेगा। जिससे हमारी टीम के खिलाड़ियों का उत्साह बडेगा।

सभी खिलाड़ियों ने मोहन की बातो का समर्थन किया।

राजेश _अगर आप लोगो को लगता है की मेरे मैदान में उतरने से टीम का हौसला बड़ेगा तो ठीक है कल मैं भी आप लोगो के साथ मैदान में उतरूंगा।

राजेश का फाइनल मैच खेलने की बात, कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गया।

पर गांव वालो का उत्साह नही बड़ा, उन्हे लग रहा था की माखन को शायद ही कोई रोक पायेगा।

इधर जब ठाकुर को पता चला की कल के मैच में राजेश भी खेलेगा।

ठाकुर खुश हो गया,,,

उनके लिए यह एक मौका था, सुरज पुर वालो के साथ साथ राजेश को नीचा दिखाने का।

ठाकुर _मुनीम जी, कल का मैच बड़ा खास है, कल पता चलेगा साले में कितना दम है, बड़ा हीरो बनता फिर रहा है। शाले मेरी बेटी को पाने का ख्वाब देख रहा है?

मुनीम _जी हुजुर, मैच हारते ही शाले की इज्जत सबके सामने उतर जाएगी। उसकी सारी हीरो गिरि उतर जाएगी।

ठाकुर और मुनीम दोनो हसने लगे, हा, हा हा, हा,,,

अगले दिन फाइनल मैच देखने भानगढ़ और सुरज पुर के पूरे गांव वाले अपना काम धाम छोड़कर समय पर पहुंच चुके थे दर्शक दीर्घा में खचाखच भीड़ थी। बैठने के लिए लोगो को जगह नहीं मिल रही थी।

फाइनल मैच देखने के लिए कई अतिथि गण, दूर दूर से आए थे। आज मंच पर ठाकुर का पूरा परिवार मौजूद था।

साथ ही सुरज पुर के सरपंच सविता जी, भी मौजूद थी। जो रत्नवती के बाजू में बैठी थी। रत्नवती भानगढ़ की सरपंच थी तो सविता सुरज पुर की।

आज के मैच में मैन ऑफ द मैच को देने के लिए 2लाख की बाइक भी मंच केसामने रखा गया था।


https://m.youtube.com/results?sp=mAEA&search_query=bike+picture


दिव्या को जैसे ही पता चला की राजेश भी खेल में उतरने वाला है वह खेल देखने बहुत हो गई। वैसे उसे कबड्डी खेल में कोइ खास रुचि नही थी, पर राजेश के खेल में भाग लेने की बात जानकर उत्साहित हो गई, पर वह सोचने लगी राजेश का जख्म तो पूरी तरह ठीक नहीं huwa है। उसे खेल मे उतरना नही था।

आज अतिथियों के द्वारा, ठाकुर के पुरखो के छाया चित्र पर माल्यार्पण के बाद, अतिथियों का स्वागत किया गया।

उसके बाद खेल प्रारंभ करने की अनुमति दिया गया।

दोनो टीम के खिलाड़ियों के मैदान में उतरते ही लोग अपने अपने खिलाड़ियों के सपर्थन में नारे लगाने लगे।

रेफरी ने सीटी बजाई,

सुरज पुर टीम से सबसे पहले मोहन भानगढ़ टीम के खिलाड़ियों को टैग करने, कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, मैदान में उतरा, वह कम से कम एक खिलाड़ी को टैग कर, अपने पाले में लौटना चाहता था,माखन के इशारे पर डिफेंडर्स ने मोहन को घेर लिया, फिर माखन ने मोहन को दबोच लिया।

वह अपने पाले में लौट न सका उसे मैदान से बाहर जाना पड़ा।

मोहन के आउट होने से सुरज पुर को झटका लगा, क्यू की अभी तक जितने भी मैच हुए उसे जितने में मोहन का बड़ा योगदान था।

सुरज के लोग निराश हो गए। तो भानगढ़ वाले उत्साहित,,

इसके बाद भानगढ़ की टीम की ओर से टैग करने के लिए माखन स्वयं आया। लोग माखन माखन चिल्लाने लगे।

माखन कबड्डी कबड्डी बोलते हुवे, विरोधी के पाले में गया, उसने बड़ी फुर्ती दिखाते हुए तीन खिलाड़ियों को टैग करते हुवे, अपने पाले में वापस आ गया।

माखन के समर्थक ताली बजाने लगे।

सुरज पुर के तीन और खिलाड़ी, आउट हो गए।

भानगढ़ की टीम, चार अंक से बढ़त बना लिया।

सुरज पुर टीम के पाले में राजेश सहित सिर्फ तीन खिलाड़ी रह गए थे।

राजेश ने सुरज पुर के एक और खिलाड़ी को विरोधी के पाले में टैग करने के लिए भेजा।

वह खिलाड़ी भी, माखन द्वारा दबोच लिया गया।

सूरजपुर वाली को लगने लगा की, अब मैच जीतना मुस्किल है।

उधर भानगढ़ के कुछ लोग, सुरज पुर वाले को चिढ़ाने लगे।

जब राजेश के कानो तक, कुछ युवाओं की हरकते पहुंची उसे गुस्सा आया।

जैसे ही, भानगढ़ के खिलाड़ी, टैग करने के लिए उसके पाले में आया, वह खिलाड़ी राजेश को टैग करने के लिए अपना हाथ सामने किया।

राजेश ने फुर्ती से उसकी कलाई पकड़ ली।

खिलाड़ी ने अपने को छुड़ाने की कोशिश किया।

राजेश की पकड़ इतनी मजबूत थी की वह छुड़ा न सका, और वह हापने लगा।

भानगढ़ के खिलाड़ी के पकड़ में आते ही, सुरज पुर वालो में जोश आ गया। वे राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

सूरजपुर वालो को एक अंक हासिल होने के साथ मोहन मैदान में लौटा।

उसके बाद मोहन फिर टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में गया, और माखन से सावधान रहते एक खिलाड़ी को टैग करने में कामयाब रहा।

इस प्रकार एक और अंक हासिल हो गया।

माखन ने अपना एक और खिलाड़ी टैग करने के लिए विरोधी पाले पर भेजा,। खिलाड़ी बिना किसी को टैग किए, अपने मैदान में वापस आ गया।

उसके बाद, टैग करने के लिए राजेश स्वयं कबड्डी कबड्डी कहते हुवे, विरोधी के पाले में गया, माखन से सावधानी बरतते हुवे वह, दो खिलाड़ियों को टैग करते हुए। अपने पाले में सुरक्षित वापस आ गया और दो अंक हासिल किया। इसके साथ ही दोनो टीमों के अंक बराबर हो गए।

सुरज पुर वालो में जोश आ गया, उन्हे लगने लगा की इस बार हम कड़ा टक्कर देने जा रहे हैं। राजेश ने उनके उम्मीद बड़ा दिया।

अगले बार माखन, फिर टैग करने आया , मोहन ने स्फूर्ति से उसपर झपट्टा मारा, एक और खिलाड़ी ने उसका साथ दिया पर माखन को रोक पाने में असमर्थ रहा और अपने पाले में सुरक्षित लौट आया,

भानगढ़ फिर से 2अंको की बढ़त बना लिया।

इस तरह मैच चलता रहा, और पहले हाफ में भानगढ़ वाले 4अंको से आगे रह गए थे। और सुरज पुर के पाले में सिर्फ तीन खिलाड़ी मौजूद थे, जबकि भानगढ़ के पाले में सभी खिलाड़ी।

5मिनट का ब्रेक huwa, सभी खिलाड़ी विचार विमर्श करने लगे आगे क्या करना है।

इधर भानगढ़ के लोग आस्वस्त थे की हमारी टीम ही जीतेगी, तो सुरज पुर वाले भी अपने टीम की हौसला बढ़ाने में लगे थे।

दूसरे हाफ में रेफरी के सीटी बजाते ही, माखन, मैदान में उतरा वह एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने पाले में आ गया।

सुरज पुर का एक खिलाड़ी और कम हो गया।

अब राजेश और एक अन्य खिलाड़ी ही रह गए थे। अब राजेश खुद टैग करने के लिए मैदान में उतरा, लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

राजेश को भानगढ़ के खिलाड़ियों ने पकड़ने की कोशिश की पर पकड़ नही पाए राजेश तीन खिलाड़ियों को टैग कर अपने पाले में वापस आ गया, और सुरज पुर टीम को तीन अंक हासिल huwa, और तीन मोहन के साथ दो अन्य खिलाड़ी भी मैदान में वापस आ गया।

सुरज पुर के लोगो में काफी उत्साह आ गया।

भानगढ़ केवल दो अंक से आगे रह गए थे।

उसके बाद मोहन विरोधी टीम के खेमे में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए टैग करने गया। और एक खिलाड़ी को टैग कर वापस अपने मैदान में आ गया।

अब सुरज पुर केवल एक अंक से पीछे रह गया।

माखन, टैग करने के लिए उतरा और उसने दो तीन खिलाड़ियों को टैग करके अपने पाले में आपस आ गया।

मोहन सहित टीम के दो अन्य खिलाड़ी बाहर हो गए।

भानगढ़ 4अंक से आगे हो गया।

माखन आगे योजना बनाया की, कोइ भी राजेश को पकड़ने की कोशिश नही करेगा, उससे बचेगा। ताकि उन्हें अंक हासिल ना हो। और हम जीत सके।

राजेश जब टैग करने गया, तो विरोधी टीम उसे पकड़ने की कोशिश नही किए वे राजेश से बचने लगे।

राजेश को खाली ही जाना पड़ा जिससे समर्थक निराश हो गए।

इधर सुरज पुर के खिलाड़ी एक एक कर आउट होने लगे। सुरज पुर 6अंको से पिछड़ गया।

अब सिर्फ पांच मिनट ही शेष रह गए थे।

इधर सुरज पुर पाले में सिर्फ राजेश शेष रह गया था। जबकि भानगढ़ टीम के पाले में सभी खिलाड़ी।

अब माखन राजेश को टैग करने के लिए, उतरा, उसने ठाकुर की ओर देखा।

ठाकुर ने माखन को इशारा किया की इस बार राजेश को छूकर ही आना।

माखन कबड्डी कबड्डी कहते हुए, राजेश को छूने के लिए आगे बड़ा, इस बार राजेश ने माखन को और अंदर घुसने दिया।

राजेश को छूने के लिए, माखन ने बोनस लाइन तक पहुंच गया।

राजेश ने चीते की तरह माखन पर झपट्टा मारा, और माखन को अपनी भुजा पे दबोच लिया।

माखन ने राजेश की भुजाओं से आज़ाद होने अपनी सारी ताकत झोंक दिया। इधर दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया, क्यू की कबड्डी नही कुश्ती शुरू हो गया था।

राजेश ने माखन को अपनी भुजाओं में दबोचे रखा।

माखन राजेश की भुजाओं से छूटने का काफी प्रयास किया लेकिन अपनी सांस को और अधिक देर तक रोके नहीं रख सका, वह हापने लगा।

लोगो को यकीन नहीं हो रहा था की राजेश ने माखन को अकेले ही पटक दिया।

सुरज पुर वाले राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

उसके बाद राजेश ने टैग करने के लिए, विरोधी टीम के पाले में कबड्डी कबड्डी बोलते हुए दौड़ पड़ा, और बोनस लाइन को छूकर वापस मुढा तभी सभी खिलाड़ियों ने राजेश को पकड़ लिया।

दो खिलाड़ियों ने राजेश के हाथ, दो ने पैर एक ने गर्दन और एक पीछे से पेट पकड़ रखा था।

राजेश ने कबड्डी कबड्डी बोलते हुए, अपना पूरा ताकत लगाया, और आगे बड़ने लगा, पेट पकड़ने वाले अब राजेश के टी शर्ट को पकड़ लिया, राजेश ने जोर लगाया उसका टी शर्ट फैट गया, एक खिलाड़ी पीछे गिर गया।

राजेश का सक्सपैक लोगो के सामने आ गया, सभी अपनी सांसे थामे मैच देख रहे थे।

गीता और दिव्या भी अपनी सांसे थामी राजेश के इस रूप को देखने लगी।

राजेश ने पूरा ताकत लगाते हुवे, अपनी हाथ को छुड़ाया और जमीन पे नीचे गिर कर अपनी हाथ से लाइन को छू लिया।

रेफरी ने सीटी बनाया। क्यों की राजेश ने क्रास लाइन छू लिया था।

चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।

टाइम कीपर ने सीटी बजाया।

खेल का समय भी पूरा हो चुका था , और सुरज पुर ने 2अंक से भानगढ़ के टीम को हरा दिया।

राजेश को लोगो ने भाग कर अपने कंधे में उठा लिया और राजेश बाबू जिंदा बाद के नारे लगाने लगे।

इधर ठाकुर का मुंह लटक गया।

भानगढ़ के लोगो ने भी राजेश का जमकर तारीफ करने लगे। वे भी उसके फैन बन गए।

रत्नवती ने सविता को बधाई दिया, उसके गांव का टीम जो विजेता बन गया था।

उसके बाद जीतने वाले टीम को इनाम देने के लिए बुलाया गया।

रत्नवती ने अपने हाथो से सुरज पुर के टीम को दस लाख का चैक दिया । और उपविजेता बनी भानगढ़ के टीम को गीता ने 3लाख का चेक दिया।

मैन आफ द मैच का घोषणा। किया गया।

लोग राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

ईनाम के लिए राजेश को मंच पर बुलाया गया।

और दिव्या ने राजेश को बाइक की चाबी शौपते हुवे धीरे से कहा, अपनी बाइक पर घुमाने कब ले जा रहे हो मुझे,,,

राजेश ने कहा, जब आप कहे,,

इसके बाद विजेता टीम को आज हवेली में ही रुकना था, क्यू की पुराने नियमो के अनुसार आज विजेता टीम को हवेली में साही भोज दिया जाना था।

शाही भोज में बाहर से आए अतिथि लोग भी मौजूद थे।

ठाकुर किसी आवश्यक काम आ जाने का बहाना बनाकर हवेली से बाहर चला गया।

शाही भोज का नेतृत्व ठकुराइन रत्नवती ने किया।

शाही भोज में खाने पीने, नाचने गाने की व्यवस्था किया गया था।

गांव की सरपंच सविता भी मौजूद थी।

रत्नवती ने राजेश को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बधाई दिया। राजेश ने उसका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

गीता , राजेश के इस प्रदर्शन से आश्चर्य में थी, उसका सिक्स पैक लुक अभी भी उसकी आंखो के सामने आ जा रही थी।

वह राजेश को मैच विनर बनने के लिए बधाई दिया।

गीता _राजेश, तुम तो छुपे रुस्तम निकले। बधाई हो मैच विनर बनने के लिए।

राजेश _थैंक यू दीदी।

गीता _वैसे बहुत अच्छी बॉडी बना रखी है तुमने।

राजेश _आज, तो इसी का चलन है दीदी,,,

गीता _हा वो तो है, मुस्कुराते हुवे बोली,,

दिव्या _सुरज पुर वालो के लिए आज बढ़ी खुशी का दिन है।

आज राजेश इस मौके पर हमे गीत सुनाएगा।

वहा सभी मौजूद लोगो ने, राजेश को गीत के लिए दबाव बनाया।

राजेश _ठीक है पर एक शर्त पर गीता दीदी और दिव्या जी आप दोनो को भी मेरा साथ देना होगा।

सभी के रिक्वेस्ट करने पर दोनो तैयार हो गई।

फिर गीता, दिव्या और राजेश तीनो ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दिया।

रत्नादेवी और सविता साथ ही थी।

रत्ना देवी गीता को बहुत दिनो बाद खुश देख रही थी। उसे नाचते देख आश्चर्य करने लगी।

इधर माखन, को अभी भी यकीन नही हो रहा था की राजेश से वह हार गया। आज तक वह इस क्षेत्र का सबसे ताकत वर पुरुष माना जाता था लेकिन आज राजेश ने उसका क्रेज खत्म कर दिया था। वह काफी गुस्से में था। उसने गुस्से में अपने ही साथी जो राजेश का तारीफ कर रहा था को मार डाला।

और राजेश से बदले की आग में जलने लगा।
 
शाही भोज सम्पन्न होने के बाद सभी अतिथि एवम खिलाड़ी अपने अपने घर के लिए हवेली के लिए रवाना हुए। रात के 12 बज चुके थे।
रत्नवती, सविता से बोली,,,

रत्ना वली _सविता जी, रात काफी हो गई है आज आप यहीं रूक जाइए, कल सुबह चली जाना।

सविता _नही , ठकुराइन। मैं भी घर निकलूंगी । मैंने अपने पति से कहा है कि मैं रात में वापस आ जाऊंगी।

रत्नवती _अच्छा ठीक है, मैं ड्राइवर को बोल देती हूं, वह आपको घर छोड़ देगें।

सविता _ठकुराइन जी, मैं राजेश के साथ चली जाऊंगी, आप मेरी चिन्ता न कर

रत्नवती _हा ये ठीक रहेगा, आखिर राजेश आपका भतिजा है। आपकीसुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी भी है।

तभी वहां पर राजेशपहुंचा ,,,

राजेश _, मां जी, शाही भोज में सच में मजा आ गया। बहुत अच्छी व्यवस्था की थी आपने।

अब हम चलते है, रात काफी हो गई है।

रत्नवती _वो तो ठीक है पर आपलोग चाहो तो आज रात यहीं रूक सकते हो।

राजेश _मां जी सभी लड़के घर जाना चाहते है, घर वाले सबका वेट कर रहे है और कितना दूर है हमारा गांव यहां से, बिल्कुल पास ही है।

रत्नवती _अच्छा ठीक है। पर अपनी चाची को सम्हाल कर ले जाना अपनी बाइक पर रास्ता खराब है।

राजेश _जी आप चिन्ता न करे।

राजेश ने गीता और दिव्या को भी शुक्रिया कहा।

राजेश _गीता दी और दिव्या जी आप दोनो का शुक्रिया।

दिव्या _शुक्रिया किस लिए, हम भी तो जाने!

राजेश _भाई आप दोनो, ने मेरे साथ नृत्य जो लिए, हम सब की इच्छा पूरी की।

गीता _आपने काम ही ऐसा किया है। हम आपको निराश नहीं कर सकते थे।

राजेश _अच्छा, अब हम लो निकलते हैं।

दिव्या _राजेश ठीक है पर आप लोग अपना ख्याल रखना।

राजेश अपने दोस्तो के साथ, बाइक में गांव के लिए निकल पड़े

राजेश , सविता को ईनाम में मिली बाइक पे बिठाक,ए सुरज पुर के लिए निकल पड़ा, पीछे पीछे उनके दोस्त एवम टीम के बाकी खिलाड़ी भी अपनी अपनी बाइक से निकल पड़े।

रास्ते में रोड खराब था,,,

राजेश _चाची, सम्हल कर बैठना, कहीं गिर न जाओ, रोड में जगह जगह गढ्ढा है।

सविता _राजेश तुम ठीक कह रहे हो, पता नही ये रोड कब बनेगा।

राजेश _चाची आप चिन्ता न करे, वो दिन ज्यादा दूर नहीं है, देखना यह रोड ऐसा बनेगा, शहर के रोड से भी बहुत बढ़िया।

सविता _अब तो गांव वालोका भरोसा तुम पर और बड़ गया है।

सविता ने राजेश को अपने दोनो हाथो से उसके सीने को पकड़ लिया, ताकि वह गाड़ी के उछलने से गिर न जाए। जो बाइक उसे इनाम में मिला था उसका पिछे का सीट ऊंचा था। गाड़ी उछलने से वह गिर सकती थी। अतः वह राजेश को अपने दोनो हाथो से अच्छे से उसके सीने पर हाथ रख पकड़ी हुई थी।

तभी राजेश को सामने गढ्ढा देख ब्रेक मारना पड़ता था जिससे, सविता राजेश से एकदम चिपक जाती उसकी चूचियां राजेश के पीठ से दब जाती, यह प्रकिया बार बार होने से सविता, के शरीर में रक्त संचार बड़ गई। वह उत्तेजित होने लगी।

उसके मुंह से आह निकल जाती,,,

राजेश _चाची क्या huwa, कराही क्यू?

सविता _अरे कुछ नही huwa है, तुम सम्हाल कर गाड़ी चलाओ।

घर पहुंचते पहुंचते तो सविता की हालात कुछ ज्यादा ही खराब हो गई।

जब वे घर पहुंचे,, वह दरवाजा खटखटाया,, कुछ देर बाद, उसका पति माधव बाहर आया।

माधव _अरे आ गई, काफी रात कर दी,,

सविता _हां जी, अब रात के प्रोग्राम था तो लेट तो होगा ही,,

राजेश ने अपने चाचा का पैर छूकर , कहा,,

राजेश प्रणाम चाचा जी,

माधव _खुश रह, अरे यार तूने तो कमाल ही कर दिया गांव में तुम्हारे ही चर्चे हो रहे थे, मैं तो पछता रहा हूं आखिर मैच देखने, मैं क्यू नही गया। भुवन ने बताया की कैसे अकेले ही उस माखन को दबोच लिया।

राजेश _चाचा जी ये सब आपके आशीर्वाद के कारण हो पाया।

माधव _ये तुम्हारा बड़प्पन है राजेश, सच पूछो तो तुम असाधारण हो। पहले तो यह बात केवल हमारे गांव के लोग जानते थे अब तो पूरे जिले के लोगो को पता चल गया।

राजेश _अच्छा चाची अब, मुझे इजाजत दीजिए मैं घर के लिए निकलता हूं।

सविता _अरे राजेश, रात काफी हो गई है, घर में सब चुके होंगे।

अब तुम इतनी तात को घर जाकर क्यू सबकी नींद खराब करोगे, आज रात हमारे यहां सो जाओ, वैसे भी यह भी तुम्हारा ही घर है।

माधव _अरे हां यार, तुम आज हमारे घर ही सो जाओ, कल सुबह ही चले जाना। ये भी तुम्हारा ही घर है। मैं तो तुमसे कहता भी रहता हूं रात का खाना यहीं खा लिया करो। पर लगता है तुम तो हमे पराया समझते हो। भैया भाभी कभी आयेंगे तो मैं तुम्हारा शिकायत करूंगा।

राजेश _अरे चाचा जी, मैं आप लोग को अपना नही समझता तो, यहां गांव आता क्या? जैसे ताऊ और ताई जी मेरे लिए है वैसे आप दोनो भी मेरे लिए हो। अब भोजन आपके यहां करू या ताई के यहां मेरे लिए तो दोनो घर समान है।

माधव _अच्छा तो फिर आज रात यहीं रुको, भले कल सुबह चली जाना।

राजेश _अब आप इतना जिद कर रहे हैं तो रुकना ही पड़ेगा।

माधव _ये हुई न बात, अपनी बाइक को घर के अंदर ले आओ।

राजेश ने बाइक को घर के अंदर आंगन में ले आया।

सविता _सुनो जी मैं राजेश के सोने के लिए कमरे को थोड़ा साफ कर देती हूं, तब तक आप दोनो बाते करो।

माधव _ठीक है सविता।

माधव और राजेश दोनो हाल में बैठ कर बाते करने लगे।

माधव _यार जब हम छोटे थे तब बाबू की भाई कबड्डी खेलते थे। सुना है अपनी नेतृत्व में बाबू जी ने भी सुरज पुर को कई बार प्रतियोगिता जिताया था।

लगता है तुम सच में बाबू जी का पुनर्जन्म हो।

दोनो बात चीत कर रहे थे तभी सविता आई,,

सविता _राजेश, कमरे की सफाई हो गई है, जाओ अब तुम कमरे में आराम करो, रात काफी हो गई है।

माधव _हां भई राजेश, अब कल सुबह बात करेंगे, जाओ थक गए होगे, जाकर कमरे में आराम करो।

राजेश _ठीक है चाचा जी।

राजेश कमरे में चला गया।

मकान, शहरो जैसा बनाया गया था, कमरे में अटैच लेट बाथ था।

कमरे में जाने के बाद,,,

कुछ समय बाद सविता टावेल लेकर आई,,,

सविता _राजेश, ये टावेल ले लो, और अपने कपड़े चेंज करलो।

राजेश _थैंक यू चाची।

राजेश ने पैंट और शर्ट उतार, केवल चड्डी में रह गया, उसका बनियान खेल में फट गया था।

वह अपनी कमर पर टावेल, लपेट लिया और बाथरुम में जाकर फ्रेस हो गया, फिर बेड में आकर आराम करने लगा।

इधर सविता भी अपनी साड़ी ब्लाउज,उतार दी और ऊपर से नाइटी पहन ली।

माधव और सविता बेड पे आराम करने लगे।

सविता को अपनी पेंटी पर कुछ गीला पन महसूस हुई, वह अपने एक हाथ से चादर के नीचे अपनी पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर, चेक की सच में उसकी पेंटी गीली हो गई थी।

यह राजेश के बाइक में बैठने से,बाइक में ब्रेक लगाने के दौरान बार बार स्तनों के राजेश के पीठ से दब जाने के कारण, उत्तेजना बड़ जाने के कारण huwa था।

इधर राजेश को नींद नही आ रहा था, दिन भर हुवे घटना क्रम को वह याद कार रहा था, कबड्डी खेल फिर साही भोज, के कारण उसका बदन टीटी रहा था।

इधर कुच ही देर में माधव नींद में खर्राटे भरने लगा।

जबकि सविता को भी आज दिन भर के घटनाक्रम याद आने के कारण नींद नही आ रही थी।

सविता को लेटे करीब एक घंटा हो गया, उसे नींद नही आई थी तो वह यह देखने के लिए अपने कमरे से बाहर आई की राजेश सोया है कि नही, उसे किसी चीज की आवश्यकता तो नही,,,

यह पता करने राजेश के कमरे की ओर, चली गई,,

उसने दरवाजा धकेल कर देख।

राजेश सोया नही था, कमरे का लाइट चालू था।

राजेश ने देखा की उसकी चाची आई है।

राजेश _चाची आप।

सविता _अरे मैं चेक करने आई थी, तू सोया है की नही, तुम तो जग रहे हो। क्यों नींद नही आ रही है क्या?

राजेश _,, हा, चाची।

सविता _पर क्यू?

किसी चीज की आवश्यकता तो नही?

राजेश _चाची एक गिलास, पानी तो लाना।

सविता _ओ हो मैं तो कमरे में पानी रखना ही भुल गई। अभी लाई।

सविता कीचन से पानी का बाटल लेकर आई।

सविता _लो पानी पी लो,,

राजेश ने बाटल से पानी पिया।

राजेश _चाची आप भी अभी तक सोई नही।

सविता _हां, तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी।

राजेश_मेरे बारे में क्या सोच रही थी?

सविता _यहीं की, तुम इस घर में पहली बार रात में रुके हो, नई जगह तुम्हे नींद आ भी रही है की नही।

राजेश _हा, चाची आपने सच कहा, नई जगह नींद नही आती, मुझे तो बहुत डर लगता है?

सविता हसने लगी,,,

सविता _तुम्हे भी डर लगता है, अकेले ही कई पहलवानों को पछाड़ दिए।

राजेश _चाची मुझे नई जगह इंसानों से नहीं भूतो से डर लगता है।

सविता हसने लगी,,,

क्या तुम्हे भूतो से डर लगता है? क्या ये घर तुम्हे भूत बंगला लग रहा है?

राजेश _क्या पता कहीं आस पास भूत हो तो, मेरे सोने के बाद मुझे खा जाएगा, तो ।

सविता _तुम तो छोटे बच्चो की तरह बात कर रहे हो, सविता हसने लगी।

राजेश _हा, भूतो के मामले में छोटा बच्चा ही हूं, जो दिखाई नहीं देता उससे लडूंगा कैसे?

सविता _तो क्या रात भर जागोगे?

राजेश _नींद नही आयेगी तो जगना ही पड़ेगा।

सविता _इस समस्या का कोइ हल तो होगा?

राजेश _है न इसका हल। तुम मेरे साथ सो जाओ, तुम साथ रहोगी तो मुझे डर नहीं लगेगा।

सविता _अच्छा जी, और तुम्हारे चाचा जी को क्या कहूंगी?

राजेश _चाचा जी से कह देना की राजेश को अकेला नींद नहीं आ रहा था, तो मैं उसके साथ सो गई।

सविता _चल हट बदमाश।

राजेश _चाची मेरे साथ सो जाओ न।

सविता _न बाबा, तुम्हारे चाचा जी को पता चला तो मैं उसे जवाब नही दे पाऊंगी मैं।

राजेश _अच्छा सुबह तक नही सो सकती तो कुछ समय तक ही सो जाओ जब मुझे नींद आ जाए तो, अपने कमरे में चली जाना, चाचा जी के पास।

सविता, कुछ सोचने लगी।

राजेश _चाची क्या सोचने लगी?

सविता _कुछ नही, अच्छा ठीक है, अभी तो तुम्हारे चाचा जी गहरी नींद में सोए हुए है। मैं एक घंटे यहीं रूक जाती हूं।

तुम सोने की कोशिश करो।

राजेश _अच्छा मेरे पास बैठो।

सविता बेड किनारे बैठ गई।

सविता _चलो अपनी आंखे बंद कर सोने की कोशिश करो।

राजेश _चाची, पूरा बदन दर्द से टूट रहा है। नींद कहा से आयेगी।

सुनो एक सिगरेट मिलेगा।

सविता _क्या? तुम सिगरेट पीते हो।

मैं तो तुम्हे शरीफ लडका समझता था।

राजेश _वो कभी कभी, ले लेता हूं।

सविता _और क्या क्या करते हो कभी कभी ,मैं भी तो जानू?

राजेश _चाची होगा तो दो ना, आज पीने का मन कर रहा है, पूरा बदन दुख रहा है।

सविता _न, मैं तुम्हे सिगरेट पीने नही दूंगी, इससे अच्छा मैं सरसो तेल से बदन की मालिश कर देती हूं।

मैं अभी सरसो तेल गर्म करके लाती हूं।

सविता कीचन में जाकर सरसो तेल गर्म करके लाती है।

सविता _चलो, तुम पेट के बल लेट जाओ। मैं तुम्हारे पीठ का पहले मालिश कर देती हूं।

राजेश पेट के बल लेट गया। सविता सरसो तेल पीठ में डाली, उसके बाद हाथो से मालिश करने लगी।

राजेश _वाह चाची आपके हाथो में तो जादू है, आपके हाथ लगते ही दर्द गायब होने लगा।

सविता _चलो अब पीठ के बल लेट जाओ, तुम्हारे हाथो की मालिश कर दू।

राजेश पीठ के बल लेट गया। सविता दोनो हाथो की बारी बारी से अच्छे से मालिश करने लगी।

राजेश ।

हाथो की मालिश करने के बाद सविता, के सीने की मालिश करने लगी।

राजेश सविता की ओर देखने लगा। सविता को जब लगा कि राजेश की नजर मुझे घूर रहा है?

सविता _क्या देख रहे हो?

राजेश _चाची तुम बड़ी सुन्दर लग रही हो इस नाइटी में।

सविता _देखो तुम ऐसे न देखो मेरी ओर, मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

राजेश _तो क्या देखू? इन दीवारों को। नजरे तो उसी पर जाएगी न जो खूबसूरत हो।

राजेश _चाची, हमने तुम्हारे गांव का नाम रोशन किया, बोलो किया की नही।

सविता _हूं।

राजेश _तो, तुमने तो हमे इनाम दिया ही नहीं।

सविता _अच्छा, क्या इनाम चाहिए अपनी चाची से।

राजेश _युननन,,,

सविता _, तुम हकला क्यू रहे हो, बोलो क्या ईनाम चाहिए तुम्हे।

राजेश _चाची, डर लगता है कहीं तुम, बुरा तो नही मानोगी।

सविता _अरे नही मानूंगी, बताओ क्या चाहिए अपनी चाची से।

राजेश _एक किस दे दो।

सविता _छी, मैं तुम्हारी चाची हूं, प्रेमिका नही। तुम कुछ और मांग लो।

राजेश _ठीक है हमे जो चाहिए था हमने मांग लिया, आगे आपकी मर्जी, देना है की नही।

सविता _न बाबा, मैं ये काम नही कर सकती।

राजेश _चाची, अब हो गया मालिश, रहने दो जाओ अपने कमरे में आराम करो?

सविता _अरे अभी तो तुम्हारे पैरो की मालिश बांकी है।

राजेश _अब सारा दर्द खत्म हो गया। धन्य वाद मालिश करने के लिए। अब आप जाइए, कहीं चाचा जी उठ गए हो तो,,,

सविता _क्यू नाराज हो गया क्या मुझसे?

राजेश _नही, तो ।

सविता _अभी तो तुम मुझे साथ सोने बोल रहे थे, अब जाने बोल रहे हो,, ।

राजेश _साथ सुलाने का भी क्या फायदा जब एक किस नही दे सकती। इसलिए जाओ, अपने कमरे में।

सविता _हूं, मतलब तुम मुझे अपने साथ सुलाकर किस लेना चाहते थे।

बच्चू, मैं तुम्हे शरीफ लडका समझता था, पर तुम बदमाश निकले।

राजेश _हा, मैं बदमाश हूं, आवारा हूं।

अब जाओ, चाचा जी के पास कहीं उठ न गए हो,,,।

सविता _अच्छा ठीक है, मेरे गालों पर एक किस ले लो, और कोइ दूसरी शरारत न करना।

राजेश _न, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए। आप जाओ।

सविता _अब ले लो बोल रही हूं तो भी नाटक, मुझे नही पता था कि तुम इतने नाराज भी होते हो।

राजेश _चाची जी, मैं आपसे नाराजनही हूं, कृपया अब आप जाइए, मुझे नींद आ रही है।

सविता _अच्छा ठीक है जाती हूं।

सविता राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली गई।

। वहा देखा उसका पति अभी भी नींद में खर्राटे भर रहा था।

सविता, वहा से निकलकर फिर राजेश के कमरे में चली गई।

राजेश _अरे आप फिर वापस आ गई। क्या huwa

सविता _तुम्हारे चाचा जी तो अभी भी नींद में खर्राटे भर रहे है।

राजेश _तो,,

सविता _सोंची, भूतो की डर से तुम रात भर जागते रहे तो तुम्हारी तबियत बिगड़ न जाए।कुछ देर तुम्हारे साथ सो जाती हूं। तुम्हे नींद आने के बाद चलिजाऊंगी।

राजेश _ये तो बड़ी खुशी की बात है।

सविता _पर एक शर्त है।

राजेश _कैसी शर्त?

सविता _तुम मुझसे कोइ सरारत नही करोगे?

राजेश _ठीक है, अब आ जाओ बेड में।

राजेश बेड के एक छोर पे लेट गया।

सविता दूसरे किनारे लेट गई।

और चादर गले तक ओढ़ ली।

सविता _अब मेरे तरफ यू टुकुर टुकुर क्या देख रहे हो।

राजेश _जुल्फे तेरी, चहेरा तेरा।

सविता _मुझे शर्म आ रही है।

राजेश _चलो अब मुझे मेरा ईनाम दो।

सविता _कौन सा ईनाम?

राजेश _वही किस वाली?

सविता _ठीक है, मेरे गालों पे ले लो, न दू तो तुम नाराज हो जाते हो।

राजेश, सविता के करीब आ गया।

हमें तो आपके होंटो पर किस करना है?

सविता _न बाबा, मैं तुम्हारी चाची हूं, प्रेमिका नही।

राजेश _तो कुछ देर के लिए आप मेरी प्रेमिका बन जाओ।

सविता _न, मैं तुम्हारी चाचा को धोखा नही दे सकती।

चलो गाल में ले लो।

सविता ने आंखे बंद कर ली।

राजेश ने उसकी गाल न चूम कर उसकीओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

सविता _ऊ न,,

करतीहुई राजेश को छुड़ाने लगी।

राजेश ने जब छोड़ा,,,

सविता _छी बेशरम आखिर, अपने मन की कर ही ली।

राजेश _या क्या चाची, तुमने ठीक से किस करने नही दी, छुड़ा दी। अब तुम्हे फिर से किस देना होगा। नही तो हम आपसे बात नहीं करेंगे।

सविता _नही बाबा, मैं और नही दे सकती, कहीं आस पास के भूतो न देख लिया तो, तुम्हारे चाचा जी को बता देगें मैं उसे मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _चाची ये तो मैने सोंचा ही नहीं। इसका भी उपाय है मेरे पास। हम ये चादर ओढ़ लेते है फिर भूत नही देख पाएगा हम अंदर क्या कर रहे है? क्यू कैसी रही आइडिया।

सविता _सविता, तुम्हारे पास तो बड़ा दिमाक है।

राजेश, सविता के ऊपर आ गया, और चादर ओढ़ लिया। फिर उसके ओंठ चूसने लगा।

सविता सिसकने लगी।

वह ओंठ चूसने के बाद धीरे धीरे नीचे की ओर बड़ा और गर्दन को, चूमने लगा,

सविता सिसकते हुए बोली _छोड़ा न हो गया।

पर राजेश नही रुका आगे बढ़ता गया।

वह नाइटी का सामने का बटन खोल कर दूदू पीने लगा।

सविता सिसकने लगी।

राजेश अब बस करो हो गया,,

राजेश नीचे गया हाथ ले गया और एक हाथ से उसकी boor को रगड़ने लगा,,,

राजेश वहा नही,,,, वह सिसकते हुवे बोली।

पर राजेश नही रुका, वह पेटीकोट का नाडा खीच दिया। पेंटी गीली होने के कारण सविता ने पेंटी निकाला दी थी,,

राजेश ने, उसकी boor चाटना शुरु कर दिया,,,

सविता _राजेश क्या कर रहे हो, छी वहा गंदा है,, आह उन, आह,,,

राजेश नही रुका वह chut चूसता रहा, सविता की हालात खराब हो गई। वह बहुत उत्तेजित हो गई।

पहली बार कोइ उसकी chut चांट रहा था।

उसे बहुत मज़ा आने लगा। वह सिसकते हुवे राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश ने देर न करते हुवे अपना मोटा लंद उसकी boor के छेद में रखा और उसकी ओंठ चूसते हुवे, लंद का दबाव योनि पर डाला लंद धीरे धीरे सविता की योनि में सामने लगा।

अब राजेश अपनी कमर हिला हिला कर लंद को boor में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

सविता राजेश के पीठ को जकड़ लिया।

उसे भी मजा आ रहा था।

अब राजेश उकडू बैठ गया सविता की टांगो को फैला दिया। और उसकी चूची। मसल मसल कर गप गप चोदने लगा।

सविता के मुंह से मादक सिसकारी निकलकर कमरे में गूंजने लगी।

आह उन, आह, आह मां,,,

राजेश लगातार चोदता रहा,,,

सविता राजेश को जोर से जकड़ ली और झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर, उसकी चूचियों को मसल मसल कर पीने लगा। ओंठ चूसने लगा।

जिससे सविता फिर गर्म हो गई।

उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश फिर से गप गप चोदने लगा।

फिर से सविताआह उह आई मां उन,,, आवाज़ निकालने लगी।

न राजेश छाड़ को फेक दिया और सविता को पलटाकर घोड़ी बना दिया।

राजेश फिर से सविता की कमर पकड़ कर gach gach चोदने लगा। कमरे में fuck fuk की आवाज़, सविता की चूड़ियों की खनक , उसकी मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगा।

राजेश जोर जोर से सविता को चोदने लगा। राजेश का लंद सविता की boor की गहराई में जाकर उसके बच्चे दानी को ठोकने लगा जिससे सविता को अलौकिक आनंद मिलने लगा।

Chudai में ऐसा मजा उसे पहले कभी नही मिला था।

वह अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

राजेश ने उसकी नाइटी निकाल कर फेक दिया।

अब सविता सिर्फ पेटीकोट में थी।

राजेश सविता की दोनो चूचियां पकड़ कर

कर चोदने लगा।

राजेश को सविता को चोदने में एक अलग ही मजा आ रहा था। उसकी boor एकदम टाइट थी, लंद कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

बिल्कुल कुंवारी chut जैसा मजा दे रहा था।

इसके बाद राजेश सविता को कमर से पकड़ कर उठाया और बेड से नीचे उतार दिया, उसे बेड पकड़ा कर घोड़ी बनाकर कस कस कर चोदने लगा।

दोनो स्वर्ग का सैर करने लगे।

सविताको जो आनंद प्राप्त हो रहा था उसकी कल्पना उसने कभी नही की थी,। वह भी राजेश का पूरा साथ देने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर उसे खड़ा कर दिया फिर सविता को अपनी ओर घुमा कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

सविता भी बहुंत गर्म थी, वह भी राजेश की ओंठो को चूसने लगी।

राजेश ने सविता की पेटीकोट भी उतार दिया।

सविता नंगी हो गई।

राजेश ने सविता को बेड किनारे लिटा दिया और फिर से उसकी boor चांटा और अपना लंद उसकी boor में उतार दिया।

वह सविता की दोनो चुचियों को मसल मसल कर चोदने लगा।

कमरे में फिर से सविता की मादक सिसकारियां गूंजने लगी।

सविता को इतना मजा आ रहा था कि वह अपने को न रोक सकी और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर फिर से उसकी ओंठ चूसने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सविता को अपनी गोद में उठा लिया, और अपने लंद को उसकी boor में डाल कर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

सविता राजेश की मर्दानगी की दीवानी हो गई।

कुछ देर हवा में उछाल उछाल कर चोदने के बाद, उसे गोद में उठाकर बेड किनारे बैठ गया, उसके बाद दोनो एक दूसरे का ओंठ चूसने लगे।

राजेश , सविता को कमर उठा उठा कर चोदने लगा। सविता अपनी दोनो हाथ राजेश के गले में डालकर उछल उछल कर चुदने लगी, उसके बाद राजेश बेड पर लेट गया।

सविता उसके लंद पर बैठी रही।

राजेश के कंधे पर, हाथ रख उछल उछल कर चुदने लगी, राजेश भी सविता की कमर पकड़ कर नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर उसका सहयोग करने लगा।

सविता की कामुक सिसकारी और चूड़ियों की खनक कमरे में गूंज रही थी। दोनो को संभोग का परम आनंद प्राप्त हो रहा था।

सविता उछलते उछलते ही इतनी उत्तेजित हो गई, वह फिर से झड़ने लगी वह राजेश की बाहों में ढेर हो गई।

राजेश प्यार से उसकी पीठ को सहलाने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सविता को बेड में लिटा कर खुद उसके ऊपर आ गया।

और उसकी ओंठ चूसने लगा। उसकी चूची पीने लगा।

कुछ देर में ही सविता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सविता की कमर के नीचे तकिया लगा दिया। और अपना मोटा लंद उसकी योनि में डालकर चोदना शुरू कर दिया।

राजेश, सविता को इस पोजिशन में लगातार चोदता रहा। सविता फिर से जन्नत की सैर करने लगी।

आखिर अन्त में राजेश ने कराहते हुवे वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी उसकी योनि में छोड़ने लगा।

सविता को बरसो बाद, अपनी योनि में गर्म वीर्य का अहसास पाकर फिर से झड़ने लगी।

उसकी योनि वीर्य से लबालब भर गई। और टांगो में बहने लगी।

राजेश सविता के ऊपर ढेर हो गया। सविता प्यार से उसका पीठ सहलाती रही।

कुछ देर बाद दोनो सामान्य हुवे।

दोनो थक चुके थे। दोनो जल्द ही नींद के आगोश में समा गए।

दो घंटे बाद सविता की नींद खुली, उसने देखा की रात के 3बज गए थे। वह बेड से उठी, और अपनी कपड़े पहनी। वह राजेश के पास बैठी राजेश सोया huwa था, उसकी बालो को प्यार से सहलाई और माथे पर चुम्बन ली। राजेश नंगा था। उसे चादर ओढ़ा दी।

उसके बाद वह कमरे से निकल कर अपने कमरे की ओर जाने लगी।

वह ठीक से चल नही पा रही थी, उसकी योनी में जलन हो रहा था। उसकी योनि अंदर छिल गई थी ।

वह अपने कमरे में गई। माधव अभी भी सोया huwa था। वह उसके बगल में जाकर ले गई।

जब वह उठी तो सुबह के 6बज चुके थे।

वह बाथरुम में नहाने गई।

उसने अपनी boor की हालत देखी जो सूज गई थी।

वह अपने आप से बोली।

कितना बड़ा लंद है बदमाश का, पूरी हो निचोड़ डाला मुझे। मैं तो इस शरीफ समझता था ये तो बड़ा खिलाड़ी निकला।

Boor की क्या हालत बना दिया है अपने मूसल से।

वह नहाकर निकली अपने कपड़े पहनी फिर माधव के उठाया।

माधव उठ कर फ्रेस हुवा।

और दुकान खोलने चला गया। सविता कीचन में चाय बनाने लगी।

चाय बनाने के बाद वह पहले दुकान में जाकर अपने पति को चाय दी, उसके बाद चाय लेकर राजेश के कमरे मे गई।

राजेश अभी भी सोया था। उसका लंद अभी खड़ा था, पेशाब भर गया था।

सविता _लो इसका तो अभी भी खड़ा है।

वह मुस्कुराने लगी।

वह राजेश को आवाज़ दी।

सविता _महाशय, उठो, सुबह के 7बज गए हैं और कितने देर तक सोते रहोगे।

राजेश ने अपनी आंखे खोला, सामने सविता खड़ी थी।

सविता _महाशय,अरे 7बज गया है, नींद पूरी नहीं हुई है क्या ?

राजेश _अरे चाची, आपने पहले क्यू नही उठाई?

सविता _मैं सोंची रात में लेट से सोए हो तो नींद पूरी नहीं हुई होगी। मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आई थी,वैसे अगर और सोने की इच्छा है तो सो सकते हो।

राजेश _अरे नही चाची। मैं तो 6बजे के पहले ही उठ जाता हूं।

सविता _चलो उठो और फ्रेस हो कर चाय पी लो।

राजेश तो नंगा था। जैसे ही उसने चादर हटाया, उसका खड़ा लंद सविता के आंखो के सामने आ गया।

सविता कमरे से जाने को हुई तो राजेश ने उसकी हाथ पकड़ लिया।

सविता _अरे छोड़ो न क्या कर रहे हो?

राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।

सविता _छोड़ो में, रात में इतना करने के बाद तुम्हारा मन नही भरा है क्या?

राजेश _नही, राजेश ने उसकी गाल में किस करते हुए उसकी कानो में धीरे से कहा चाची चलो न एक बार फिर से करते हैं।

सविता _न बाबा। तूने तो मेरी हालात ही खराब कर दी हैमैं ठीक से चल भी नहीं पा रही। मैं तो तुम्हे शरीफ लडका समझता था, तुम तो बदमाश निकले, कहा से सीखा ये सब।

राजेश _चाची, जानकर क्या करोगी? कहा से सीखा है सब, चलो न एक बार और करते हैं।

सविता _न छोड़ो मुझे,,, बहुत से काम है।

राजेश _अच्छा ठीक है पर तुम्हे मेरी एक इच्छा पूरी करनी होगी।

सविता _, कैसी इच्छा?

राजेश_मुझे पेशाब करवाना होगा।

सविता _छी, तुम कितने गंदे हो, कोइ छोटा बच्चा भी नही कहता की मम्मी मुझे पेशाब करा दो और तुम,

राजेश _, चाची मेरी एक छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते। प्लीज चाची, मान जाओ न।

सविता _तू बड़ा जिद्दी है।

चल बाथरुम में।

राजेश बाथरुम में जाने लगा। उसके पीछे पीछे सविता भी गई।

सविता _बोलो, क्या करना है।

राजेश _पकड़ कर पेशाब कराओ और क्या?

सविता राजेश के पीछे खड़ी हो गई और राजेश का लंद अपने हाथो में पकड़ ली।

सविता _चलो, जल्दी करो।

राजेश _अरे चाची पेशाब ऐसे ही थोड़े ही बाहर आयेगी।

सविता _तो फिर,

राजेश थोड़ा आगे पीछे करो।

सविता _तू बड़ा बेशर्म है और मुझे भी बेशर्म बनाने में लगा है, पता नही कैसे मैं तुम्हारे बातो को मान लेती हूं। सविता राजेश के लंद को हिलाने लगी। राजेश ने जोर लगाया। पेशाब की तेज़ धार निकलने लगा।

पेशाब की धार बंद होने के बाद। सविता ने लंद हिला हिला कर आखिरी बूंद भी निकाल दिया।

उसके बस लंद कुछ नार्मल huwa।

उसके बाद दोनो कमरे में आए।

सविता _, अपने चाची के सामने नंगे ही रहोगे क्या?

राजेश _चाची तुम ही पहना दो ना चड्डी और टावेल।

सविता _हूं, तो यह भी मुझे करना पड़ेगा।

राजेश _हूं।

सविता ने राजेश को उसकी चड्डी पहनाकर टावेल लपेट दिया।

सविता _चलो चाय पी लो ठंडी हो जाएगी।

अपने हाथो से पियोगे या मुझे ही पिलाना पड़ेगा।

राजेश _अरे नही चाची, बहुत हो गया, अब आपको और तकलीफ नहीं दे सकता। मुझे माफ कर दीजिए।

सविता _किस बात के लिए माफी।

राजेश _आपको इतना तकलीफ दिया इसलिए,,

सविता _तू बड़ा शैतान है, पहले कैसे कैसे काम कराता है फिर माफी भी मांगता है।

अच्छा चाय पीकर तो बताओ, चाय कैसी बनी है?

सविता _आप तो पाक कला में निपुण हो चाय तो टेस्टी होगा।

राजेश ने चाय का एक घूंट पिया।

वाह सच में चाची बहुत ही टेस्टी बना है।

वचाची आपसे एक बात पूछनी थी।

सविता _पूछो क्या पूछनी है।

राजेश _अपनी कान पाक तो लाओ।

सविता अपनी कान राजेश के पास ले आया।

राजेश न धीरे से कहा _रात में आपको मजा आया कि नही।

सविता _सविता शर्मा गई।

वह वहा से चली जाने लगी।

राजेश _अरे चाची बताओ न,,,

उसके बाद राजेश, अपना शर्ट पैंट पहना और माधव और सविता से इजाजत लेकर,अपना बाइक लेकर अपने ताऊ जी के यहां चला गया।
 
शाही भोज सम्पन्न होने के बाद सभी अतिथि एवम खिलाड़ी अपने अपने घर के लिए हवेली के लिए रवाना हुए। रात के 12 बज चुके थे।
रत्नवती, सविता से बोली,,,

रत्ना वली _सविता जी, रात काफी हो गई है आज आप यहीं रूक जाइए, कल सुबह चली जाना।

सविता _नही , ठकुराइन। मैं भी घर निकलूंगी । मैंने अपने पति से कहा है कि मैं रात में वापस आ जाऊंगी।

रत्नवती _अच्छा ठीक है, मैं ड्राइवर को बोल देती हूं, वह आपको घर छोड़ देगें।

सविता _ठकुराइन जी, मैं राजेश के साथ चली जाऊंगी, आप मेरी चिन्ता न कर

रत्नवती _हा ये ठीक रहेगा, आखिर राजेश आपका भतिजा है। आपकीसुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी भी है।

तभी वहां पर राजेशपहुंचा ,,,

राजेश _, मां जी, शाही भोज में सच में मजा आ गया। बहुत अच्छी व्यवस्था की थी आपने।

अब हम चलते है, रात काफी हो गई है।

रत्नवती _वो तो ठीक है पर आपलोग चाहो तो आज रात यहीं रूक सकते हो।

राजेश _मां जी सभी लड़के घर जाना चाहते है, घर वाले सबका वेट कर रहे है और कितना दूर है हमारा गांव यहां से, बिल्कुल पास ही है।

रत्नवती _अच्छा ठीक है। पर अपनी चाची को सम्हाल कर ले जाना अपनी बाइक पर रास्ता खराब है।

राजेश _जी आप चिन्ता न करे।

राजेश ने गीता और दिव्या को भी शुक्रिया कहा।

राजेश _गीता दी और दिव्या जी आप दोनो का शुक्रिया।

दिव्या _शुक्रिया किस लिए, हम भी तो जाने!

राजेश _भाई आप दोनो, ने मेरे साथ नृत्य जो लिए, हम सब की इच्छा पूरी की।

गीता _आपने काम ही ऐसा किया है। हम आपको निराश नहीं कर सकते थे।

राजेश _अच्छा, अब हम लो निकलते हैं।

दिव्या _राजेश ठीक है पर आप लोग अपना ख्याल रखना।

राजेश अपने दोस्तो के साथ, बाइक में गांव के लिए निकल पड़े

राजेश , सविता को ईनाम में मिली बाइक पे बिठाक,ए सुरज पुर के लिए निकल पड़ा, पीछे पीछे उनके दोस्त एवम टीम के बाकी खिलाड़ी भी अपनी अपनी बाइक से निकल पड़े।

रास्ते में रोड खराब था,,,

राजेश _चाची, सम्हल कर बैठना, कहीं गिर न जाओ, रोड में जगह जगह गढ्ढा है।

सविता _राजेश तुम ठीक कह रहे हो, पता नही ये रोड कब बनेगा।

राजेश _चाची आप चिन्ता न करे, वो दिन ज्यादा दूर नहीं है, देखना यह रोड ऐसा बनेगा, शहर के रोड से भी बहुत बढ़िया।

सविता _अब तो गांव वालोका भरोसा तुम पर और बड़ गया है।

सविता ने राजेश को अपने दोनो हाथो से उसके सीने को पकड़ लिया, ताकि वह गाड़ी के उछलने से गिर न जाए। जो बाइक उसे इनाम में मिला था उसका पिछे का सीट ऊंचा था। गाड़ी उछलने से वह गिर सकती थी। अतः वह राजेश को अपने दोनो हाथो से अच्छे से उसके सीने पर हाथ रख पकड़ी हुई थी।

तभी राजेश को सामने गढ्ढा देख ब्रेक मारना पड़ता था जिससे, सविता राजेश से एकदम चिपक जाती उसकी चूचियां राजेश के पीठ से दब जाती, यह प्रकिया बार बार होने से सविता, के शरीर में रक्त संचार बड़ गई। वह उत्तेजित होने लगी।

उसके मुंह से आह निकल जाती,,,

राजेश _चाची क्या huwa, कराही क्यू?

सविता _अरे कुछ नही huwa है, तुम सम्हाल कर गाड़ी चलाओ।

घर पहुंचते पहुंचते तो सविता की हालात कुछ ज्यादा ही खराब हो गई।

जब वे घर पहुंचे,, वह दरवाजा खटखटाया,, कुछ देर बाद, उसका पति माधव बाहर आया।

माधव _अरे आ गई, काफी रात कर दी,,

सविता _हां जी, अब रात के प्रोग्राम था तो लेट तो होगा ही,,

राजेश ने अपने चाचा का पैर छूकर , कहा,,

राजेश प्रणाम चाचा जी,

माधव _खुश रह, अरे यार तूने तो कमाल ही कर दिया गांव में तुम्हारे ही चर्चे हो रहे थे, मैं तो पछता रहा हूं आखिर मैच देखने, मैं क्यू नही गया। भुवन ने बताया की कैसे अकेले ही उस माखन को दबोच लिया।

राजेश _चाचा जी ये सब आपके आशीर्वाद के कारण हो पाया।

माधव _ये तुम्हारा बड़प्पन है राजेश, सच पूछो तो तुम असाधारण हो। पहले तो यह बात केवल हमारे गांव के लोग जानते थे अब तो पूरे जिले के लोगो को पता चल गया।

राजेश _अच्छा चाची अब, मुझे इजाजत दीजिए मैं घर के लिए निकलता हूं।

सविता _अरे राजेश, रात काफी हो गई है, घर में सब चुके होंगे।

अब तुम इतनी तात को घर जाकर क्यू सबकी नींद खराब करोगे, आज रात हमारे यहां सो जाओ, वैसे भी यह भी तुम्हारा ही घर है।

माधव _अरे हां यार, तुम आज हमारे घर ही सो जाओ, कल सुबह ही चले जाना। ये भी तुम्हारा ही घर है। मैं तो तुमसे कहता भी रहता हूं रात का खाना यहीं खा लिया करो। पर लगता है तुम तो हमे पराया समझते हो। भैया भाभी कभी आयेंगे तो मैं तुम्हारा शिकायत करूंगा।

राजेश _अरे चाचा जी, मैं आप लोग को अपना नही समझता तो, यहां गांव आता क्या? जैसे ताऊ और ताई जी मेरे लिए है वैसे आप दोनो भी मेरे लिए हो। अब भोजन आपके यहां करू या ताई के यहां मेरे लिए तो दोनो घर समान है।

माधव _अच्छा तो फिर आज रात यहीं रुको, भले कल सुबह चली जाना।

राजेश _अब आप इतना जिद कर रहे हैं तो रुकना ही पड़ेगा।

माधव _ये हुई न बात, अपनी बाइक को घर के अंदर ले आओ।

राजेश ने बाइक को घर के अंदर आंगन में ले आया।

सविता _सुनो जी मैं राजेश के सोने के लिए कमरे को थोड़ा साफ कर देती हूं, तब तक आप दोनो बाते करो।

माधव _ठीक है सविता।

माधव और राजेश दोनो हाल में बैठ कर बाते करने लगे।

माधव _यार जब हम छोटे थे तब बाबू की भाई कबड्डी खेलते थे। सुना है अपनी नेतृत्व में बाबू जी ने भी सुरज पुर को कई बार प्रतियोगिता जिताया था।

लगता है तुम सच में बाबू जी का पुनर्जन्म हो।

दोनो बात चीत कर रहे थे तभी सविता आई,,

सविता _राजेश, कमरे की सफाई हो गई है, जाओ अब तुम कमरे में आराम करो, रात काफी हो गई है।

माधव _हां भई राजेश, अब कल सुबह बात करेंगे, जाओ थक गए होगे, जाकर कमरे में आराम करो।

राजेश _ठीक है चाचा जी।

राजेश कमरे में चला गया।

मकान, शहरो जैसा बनाया गया था, कमरे में अटैच लेट बाथ था।

कमरे में जाने के बाद,,,

कुछ समय बाद सविता टावेल लेकर आई,,,

सविता _राजेश, ये टावेल ले लो, और अपने कपड़े चेंज करलो।

राजेश _थैंक यू चाची।

राजेश ने पैंट और शर्ट उतार, केवल चड्डी में रह गया, उसका बनियान खेल में फट गया था।

वह अपनी कमर पर टावेल, लपेट लिया और बाथरुम में जाकर फ्रेस हो गया, फिर बेड में आकर आराम करने लगा।

इधर सविता भी अपनी साड़ी ब्लाउज,उतार दी और ऊपर से नाइटी पहन ली।

माधव और सविता बेड पे आराम करने लगे।

सविता को अपनी पेंटी पर कुछ गीला पन महसूस हुई, वह अपने एक हाथ से चादर के नीचे अपनी पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर, चेक की सच में उसकी पेंटी गीली हो गई थी।

यह राजेश के बाइक में बैठने से,बाइक में ब्रेक लगाने के दौरान बार बार स्तनों के राजेश के पीठ से दब जाने के कारण, उत्तेजना बड़ जाने के कारण huwa था।

इधर राजेश को नींद नही आ रहा था, दिन भर हुवे घटना क्रम को वह याद कार रहा था, कबड्डी खेल फिर साही भोज, के कारण उसका बदन टीटी रहा था।

इधर कुच ही देर में माधव नींद में खर्राटे भरने लगा।

जबकि सविता को भी आज दिन भर के घटनाक्रम याद आने के कारण नींद नही आ रही थी।

सविता को लेटे करीब एक घंटा हो गया, उसे नींद नही आई थी तो वह यह देखने के लिए अपने कमरे से बाहर आई की राजेश सोया है कि नही, उसे किसी चीज की आवश्यकता तो नही,,,

यह पता करने राजेश के कमरे की ओर, चली गई,,

उसने दरवाजा धकेल कर देख।

राजेश सोया नही था, कमरे का लाइट चालू था।

राजेश ने देखा की उसकी चाची आई है।

राजेश _चाची आप।

सविता _अरे मैं चेक करने आई थी, तू सोया है की नही, तुम तो जग रहे हो। क्यों नींद नही आ रही है क्या?

राजेश _,, हा, चाची।

सविता _पर क्यू?

किसी चीज की आवश्यकता तो नही?

राजेश _चाची एक गिलास, पानी तो लाना।

सविता _ओ हो मैं तो कमरे में पानी रखना ही भुल गई। अभी लाई।

सविता कीचन से पानी का बाटल लेकर आई।

सविता _लो पानी पी लो,,

राजेश ने बाटल से पानी पिया।

राजेश _चाची आप भी अभी तक सोई नही।

सविता _हां, तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी।

राजेश_मेरे बारे में क्या सोच रही थी?

सविता _यहीं की, तुम इस घर में पहली बार रात में रुके हो, नई जगह तुम्हे नींद आ भी रही है की नही।

राजेश _हा, चाची आपने सच कहा, नई जगह नींद नही आती, मुझे तो बहुत डर लगता है?

सविता हसने लगी,,,

सविता _तुम्हे भी डर लगता है, अकेले ही कई पहलवानों को पछाड़ दिए।

राजेश _चाची मुझे नई जगह इंसानों से नहीं भूतो से डर लगता है।

सविता हसने लगी,,,

क्या तुम्हे भूतो से डर लगता है? क्या ये घर तुम्हे भूत बंगला लग रहा है?

राजेश _क्या पता कहीं आस पास भूत हो तो, मेरे सोने के बाद मुझे खा जाएगा, तो ।

सविता _तुम तो छोटे बच्चो की तरह बात कर रहे हो, सविता हसने लगी।

राजेश _हा, भूतो के मामले में छोटा बच्चा ही हूं, जो दिखाई नहीं देता उससे लडूंगा कैसे?

सविता _तो क्या रात भर जागोगे?

राजेश _नींद नही आयेगी तो जगना ही पड़ेगा।

सविता _इस समस्या का कोइ हल तो होगा?

राजेश _है न इसका हल। तुम मेरे साथ सो जाओ, तुम साथ रहोगी तो मुझे डर नहीं लगेगा।

सविता _अच्छा जी, और तुम्हारे चाचा जी को क्या कहूंगी?

राजेश _चाचा जी से कह देना की राजेश को अकेला नींद नहीं आ रहा था, तो मैं उसके साथ सो गई।

सविता _चल हट बदमाश।

राजेश _चाची मेरे साथ सो जाओ न।

सविता _न बाबा, तुम्हारे चाचा जी को पता चला तो मैं उसे जवाब नही दे पाऊंगी मैं।

राजेश _अच्छा सुबह तक नही सो सकती तो कुछ समय तक ही सो जाओ जब मुझे नींद आ जाए तो, अपने कमरे में चली जाना, चाचा जी के पास।

सविता, कुछ सोचने लगी।

राजेश _चाची क्या सोचने लगी?

सविता _कुछ नही, अच्छा ठीक है, अभी तो तुम्हारे चाचा जी गहरी नींद में सोए हुए है। मैं एक घंटे यहीं रूक जाती हूं।

तुम सोने की कोशिश करो।

राजेश _अच्छा मेरे पास बैठो।

सविता बेड किनारे बैठ गई।

सविता _चलो अपनी आंखे बंद कर सोने की कोशिश करो।

राजेश _चाची, पूरा बदन दर्द से टूट रहा है। नींद कहा से आयेगी।

सुनो एक सिगरेट मिलेगा।

सविता _क्या? तुम सिगरेट पीते हो।

मैं तो तुम्हे शरीफ लडका समझता था।

राजेश _वो कभी कभी, ले लेता हूं।

सविता _और क्या क्या करते हो कभी कभी ,मैं भी तो जानू?

राजेश _चाची होगा तो दो ना, आज पीने का मन कर रहा है, पूरा बदन दुख रहा है।

सविता _न, मैं तुम्हे सिगरेट पीने नही दूंगी, इससे अच्छा मैं सरसो तेल से बदन की मालिश कर देती हूं।

मैं अभी सरसो तेल गर्म करके लाती हूं।

सविता कीचन में जाकर सरसो तेल गर्म करके लाती है।

सविता _चलो, तुम पेट के बल लेट जाओ। मैं तुम्हारे पीठ का पहले मालिश कर देती हूं।

राजेश पेट के बल लेट गया। सविता सरसो तेल पीठ में डाली, उसके बाद हाथो से मालिश करने लगी।

राजेश _वाह चाची आपके हाथो में तो जादू है, आपके हाथ लगते ही दर्द गायब होने लगा।

सविता _चलो अब पीठ के बल लेट जाओ, तुम्हारे हाथो की मालिश कर दू।

राजेश पीठ के बल लेट गया। सविता दोनो हाथो की बारी बारी से अच्छे से मालिश करने लगी।

राजेश ।

हाथो की मालिश करने के बाद सविता, के सीने की मालिश करने लगी।

राजेश सविता की ओर देखने लगा। सविता को जब लगा कि राजेश की नजर मुझे घूर रहा है?

सविता _क्या देख रहे हो?

राजेश _चाची तुम बड़ी सुन्दर लग रही हो इस नाइटी में।

सविता _देखो तुम ऐसे न देखो मेरी ओर, मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

राजेश _तो क्या देखू? इन दीवारों को। नजरे तो उसी पर जाएगी न जो खूबसूरत हो।

राजेश _चाची, हमने तुम्हारे गांव का नाम रोशन किया, बोलो किया की नही।

सविता _हूं।

राजेश _तो, तुमने तो हमे इनाम दिया ही नहीं।

सविता _अच्छा, क्या इनाम चाहिए अपनी चाची से।

राजेश _युननन,,,

सविता _, तुम हकला क्यू रहे हो, बोलो क्या ईनाम चाहिए तुम्हे।

राजेश _चाची, डर लगता है कहीं तुम, बुरा तो नही मानोगी।

सविता _अरे नही मानूंगी, बताओ क्या चाहिए अपनी चाची से।

राजेश _एक किस दे दो।

सविता _छी, मैं तुम्हारी चाची हूं, प्रेमिका नही। तुम कुछ और मांग लो।

राजेश _ठीक है हमे जो चाहिए था हमने मांग लिया, आगे आपकी मर्जी, देना है की नही।

सविता _न बाबा, मैं ये काम नही कर सकती।

राजेश _चाची, अब हो गया मालिश, रहने दो जाओ अपने कमरे में आराम करो?

सविता _अरे अभी तो तुम्हारे पैरो की मालिश बांकी है।

राजेश _अब सारा दर्द खत्म हो गया। धन्य वाद मालिश करने के लिए। अब आप जाइए, कहीं चाचा जी उठ गए हो तो,,,

सविता _क्यू नाराज हो गया क्या मुझसे?

राजेश _नही, तो ।

सविता _अभी तो तुम मुझे साथ सोने बोल रहे थे, अब जाने बोल रहे हो,, ।

राजेश _साथ सुलाने का भी क्या फायदा जब एक किस नही दे सकती। इसलिए जाओ, अपने कमरे में।

सविता _हूं, मतलब तुम मुझे अपने साथ सुलाकर किस लेना चाहते थे।

बच्चू, मैं तुम्हे शरीफ लडका समझता था, पर तुम बदमाश निकले।

राजेश _हा, मैं बदमाश हूं, आवारा हूं।

अब जाओ, चाचा जी के पास कहीं उठ न गए हो,,,।

सविता _अच्छा ठीक है, मेरे गालों पर एक किस ले लो, और कोइ दूसरी शरारत न करना।

राजेश _न, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए। आप जाओ।

सविता _अब ले लो बोल रही हूं तो भी नाटक, मुझे नही पता था कि तुम इतने नाराज भी होते हो।

राजेश _चाची जी, मैं आपसे नाराजनही हूं, कृपया अब आप जाइए, मुझे नींद आ रही है।

सविता _अच्छा ठीक है जाती हूं।

सविता राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली गई।

। वहा देखा उसका पति अभी भी नींद में खर्राटे भर रहा था।

सविता, वहा से निकलकर फिर राजेश के कमरे में चली गई।

राजेश _अरे आप फिर वापस आ गई। क्या huwa

सविता _तुम्हारे चाचा जी तो अभी भी नींद में खर्राटे भर रहे है।

राजेश _तो,,

सविता _सोंची, भूतो की डर से तुम रात भर जागते रहे तो तुम्हारी तबियत बिगड़ न जाए।कुछ देर तुम्हारे साथ सो जाती हूं। तुम्हे नींद आने के बाद चलिजाऊंगी।

राजेश _ये तो बड़ी खुशी की बात है।

सविता _पर एक शर्त है।

राजेश _कैसी शर्त?

सविता _तुम मुझसे कोइ सरारत नही करोगे?

राजेश _ठीक है, अब आ जाओ बेड में।

राजेश बेड के एक छोर पे लेट गया।

सविता दूसरे किनारे लेट गई।

और चादर गले तक ओढ़ ली।

सविता _अब मेरे तरफ यू टुकुर टुकुर क्या देख रहे हो।

राजेश _जुल्फे तेरी, चहेरा तेरा।

सविता _मुझे शर्म आ रही है।

राजेश _चलो अब मुझे मेरा ईनाम दो।

सविता _कौन सा ईनाम?

राजेश _वही किस वाली?

सविता _ठीक है, मेरे गालों पे ले लो, न दू तो तुम नाराज हो जाते हो।

राजेश, सविता के करीब आ गया।

हमें तो आपके होंटो पर किस करना है?

सविता _न बाबा, मैं तुम्हारी चाची हूं, प्रेमिका नही।

राजेश _तो कुछ देर के लिए आप मेरी प्रेमिका बन जाओ।

सविता _न, मैं तुम्हारी चाचा को धोखा नही दे सकती।

चलो गाल में ले लो।

सविता ने आंखे बंद कर ली।

राजेश ने उसकी गाल न चूम कर उसकीओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

सविता _ऊ न,,

करतीहुई राजेश को छुड़ाने लगी।

राजेश ने जब छोड़ा,,,

सविता _छी बेशरम आखिर, अपने मन की कर ही ली।

राजेश _या क्या चाची, तुमने ठीक से किस करने नही दी, छुड़ा दी। अब तुम्हे फिर से किस देना होगा। नही तो हम आपसे बात नहीं करेंगे।

सविता _नही बाबा, मैं और नही दे सकती, कहीं आस पास के भूतो न देख लिया तो, तुम्हारे चाचा जी को बता देगें मैं उसे मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _चाची ये तो मैने सोंचा ही नहीं। इसका भी उपाय है मेरे पास। हम ये चादर ओढ़ लेते है फिर भूत नही देख पाएगा हम अंदर क्या कर रहे है? क्यू कैसी रही आइडिया।

सविता _सविता, तुम्हारे पास तो बड़ा दिमाक है।

राजेश, सविता के ऊपर आ गया, और चादर ओढ़ लिया। फिर उसके ओंठ चूसने लगा।

सविता सिसकने लगी।

वह ओंठ चूसने के बाद धीरे धीरे नीचे की ओर बड़ा और गर्दन को, चूमने लगा,

सविता सिसकते हुए बोली _छोड़ा न हो गया।

पर राजेश नही रुका आगे बढ़ता गया।

वह नाइटी का सामने का बटन खोल कर दूदू पीने लगा।

सविता सिसकने लगी।

राजेश अब बस करो हो गया,,

राजेश नीचे गया हाथ ले गया और एक हाथ से उसकी boor को रगड़ने लगा,,,

राजेश वहा नही,,,, वह सिसकते हुवे बोली।

पर राजेश नही रुका, वह पेटीकोट का नाडा खीच दिया। पेंटी गीली होने के कारण सविता ने पेंटी निकाला दी थी,,

राजेश ने, उसकी boor चाटना शुरु कर दिया,,,

सविता _राजेश क्या कर रहे हो, छी वहा गंदा है,, आह उन, आह,,,

राजेश नही रुका वह chut चूसता रहा, सविता की हालात खराब हो गई। वह बहुत उत्तेजित हो गई।

पहली बार कोइ उसकी chut चांट रहा था।

उसे बहुत मज़ा आने लगा। वह सिसकते हुवे राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश ने देर न करते हुवे अपना मोटा लंद उसकी boor के छेद में रखा और उसकी ओंठ चूसते हुवे, लंद का दबाव योनि पर डाला लंद धीरे धीरे सविता की योनि में सामने लगा।

अब राजेश अपनी कमर हिला हिला कर लंद को boor में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

सविता राजेश के पीठ को जकड़ लिया।

उसे भी मजा आ रहा था।

अब राजेश उकडू बैठ गया सविता की टांगो को फैला दिया। और उसकी चूची। मसल मसल कर गप गप चोदने लगा।

सविता के मुंह से मादक सिसकारी निकलकर कमरे में गूंजने लगी।

आह उन, आह, आह मां,,,

राजेश लगातार चोदता रहा,,,

सविता राजेश को जोर से जकड़ ली और झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर, उसकी चूचियों को मसल मसल कर पीने लगा। ओंठ चूसने लगा।

जिससे सविता फिर गर्म हो गई।

उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश फिर से गप गप चोदने लगा।

फिर से सविताआह उह आई मां उन,,, आवाज़ निकालने लगी।

न राजेश छाड़ को फेक दिया और सविता को पलटाकर घोड़ी बना दिया।

राजेश फिर से सविता की कमर पकड़ कर gach gach चोदने लगा। कमरे में fuck fuk की आवाज़, सविता की चूड़ियों की खनक , उसकी मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगा।

राजेश जोर जोर से सविता को चोदने लगा। राजेश का लंद सविता की boor की गहराई में जाकर उसके बच्चे दानी को ठोकने लगा जिससे सविता को अलौकिक आनंद मिलने लगा।

Chudai में ऐसा मजा उसे पहले कभी नही मिला था।

वह अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

राजेश ने उसकी नाइटी निकाल कर फेक दिया।

अब सविता सिर्फ पेटीकोट में थी।

राजेश सविता की दोनो चूचियां पकड़ कर

कर चोदने लगा।

राजेश को सविता को चोदने में एक अलग ही मजा आ रहा था। उसकी boor एकदम टाइट थी, लंद कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

बिल्कुल कुंवारी chut जैसा मजा दे रहा था।

इसके बाद राजेश सविता को कमर से पकड़ कर उठाया और बेड से नीचे उतार दिया, उसे बेड पकड़ा कर घोड़ी बनाकर कस कस कर चोदने लगा।

दोनो स्वर्ग का सैर करने लगे।

सविताको जो आनंद प्राप्त हो रहा था उसकी कल्पना उसने कभी नही की थी,। वह भी राजेश का पूरा साथ देने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर उसे खड़ा कर दिया फिर सविता को अपनी ओर घुमा कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

सविता भी बहुंत गर्म थी, वह भी राजेश की ओंठो को चूसने लगी।

राजेश ने सविता की पेटीकोट भी उतार दिया।

सविता नंगी हो गई।

राजेश ने सविता को बेड किनारे लिटा दिया और फिर से उसकी boor चांटा और अपना लंद उसकी boor में उतार दिया।

वह सविता की दोनो चुचियों को मसल मसल कर चोदने लगा।

कमरे में फिर से सविता की मादक सिसकारियां गूंजने लगी।

सविता को इतना मजा आ रहा था कि वह अपने को न रोक सकी और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर फिर से उसकी ओंठ चूसने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सविता को अपनी गोद में उठा लिया, और अपने लंद को उसकी boor में डाल कर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

सविता राजेश की मर्दानगी की दीवानी हो गई।

कुछ देर हवा में उछाल उछाल कर चोदने के बाद, उसे गोद में उठाकर बेड किनारे बैठ गया, उसके बाद दोनो एक दूसरे का ओंठ चूसने लगे।

राजेश , सविता को कमर उठा उठा कर चोदने लगा। सविता अपनी दोनो हाथ राजेश के गले में डालकर उछल उछल कर चुदने लगी, उसके बाद राजेश बेड पर लेट गया।

सविता उसके लंद पर बैठी रही।

राजेश के कंधे पर, हाथ रख उछल उछल कर चुदने लगी, राजेश भी सविता की कमर पकड़ कर नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर उसका सहयोग करने लगा।

सविता की कामुक सिसकारी और चूड़ियों की खनक कमरे में गूंज रही थी। दोनो को संभोग का परम आनंद प्राप्त हो रहा था।

सविता उछलते उछलते ही इतनी उत्तेजित हो गई, वह फिर से झड़ने लगी वह राजेश की बाहों में ढेर हो गई।

राजेश प्यार से उसकी पीठ को सहलाने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सविता को बेड में लिटा कर खुद उसके ऊपर आ गया।

और उसकी ओंठ चूसने लगा। उसकी चूची पीने लगा।

कुछ देर में ही सविता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सविता की कमर के नीचे तकिया लगा दिया। और अपना मोटा लंद उसकी योनि में डालकर चोदना शुरू कर दिया।

राजेश, सविता को इस पोजिशन में लगातार चोदता रहा। सविता फिर से जन्नत की सैर करने लगी।

आखिर अन्त में राजेश ने कराहते हुवे वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी उसकी योनि में छोड़ने लगा।

सविता को बरसो बाद, अपनी योनि में गर्म वीर्य का अहसास पाकर फिर से झड़ने लगी।

उसकी योनि वीर्य से लबालब भर गई। और टांगो में बहने लगी।

राजेश सविता के ऊपर ढेर हो गया। सविता प्यार से उसका पीठ सहलाती रही।

कुछ देर बाद दोनो सामान्य हुवे।

दोनो थक चुके थे। दोनो जल्द ही नींद के आगोश में समा गए।

दो घंटे बाद सविता की नींद खुली, उसने देखा की रात के 3बज गए थे। वह बेड से उठी, और अपनी कपड़े पहनी। वह राजेश के पास बैठी राजेश सोया huwa था, उसकी बालो को प्यार से सहलाई और माथे पर चुम्बन ली। राजेश नंगा था। उसे चादर ओढ़ा दी।

उसके बाद वह कमरे से निकल कर अपने कमरे की ओर जाने लगी।

वह ठीक से चल नही पा रही थी, उसकी योनी में जलन हो रहा था। उसकी योनि अंदर छिल गई थी ।

वह अपने कमरे में गई। माधव अभी भी सोया huwa था। वह उसके बगल में जाकर ले गई।

जब वह उठी तो सुबह के 6बज चुके थे।

वह बाथरुम में नहाने गई।

उसने अपनी boor की हालत देखी जो सूज गई थी।

वह अपने आप से बोली।

कितना बड़ा लंद है बदमाश का, पूरी हो निचोड़ डाला मुझे। मैं तो इस शरीफ समझता था ये तो बड़ा खिलाड़ी निकला।

Boor की क्या हालत बना दिया है अपने मूसल से।

वह नहाकर निकली अपने कपड़े पहनी फिर माधव के उठाया।

माधव उठ कर फ्रेस हुवा।

और दुकान खोलने चला गया। सविता कीचन में चाय बनाने लगी।

चाय बनाने के बाद वह पहले दुकान में जाकर अपने पति को चाय दी, उसके बाद चाय लेकर राजेश के कमरे मे गई।

राजेश अभी भी सोया था। उसका लंद अभी खड़ा था, पेशाब भर गया था।

सविता _लो इसका तो अभी भी खड़ा है।

वह मुस्कुराने लगी।

वह राजेश को आवाज़ दी।

सविता _महाशय, उठो, सुबह के 7बज गए हैं और कितने देर तक सोते रहोगे।

राजेश ने अपनी आंखे खोला, सामने सविता खड़ी थी।

सविता _महाशय,अरे 7बज गया है, नींद पूरी नहीं हुई है क्या ?

राजेश _अरे चाची, आपने पहले क्यू नही उठाई?

सविता _मैं सोंची रात में लेट से सोए हो तो नींद पूरी नहीं हुई होगी। मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आई थी,वैसे अगर और सोने की इच्छा है तो सो सकते हो।

राजेश _अरे नही चाची। मैं तो 6बजे के पहले ही उठ जाता हूं।

सविता _चलो उठो और फ्रेस हो कर चाय पी लो।

राजेश तो नंगा था। जैसे ही उसने चादर हटाया, उसका खड़ा लंद सविता के आंखो के सामने आ गया।

सविता कमरे से जाने को हुई तो राजेश ने उसकी हाथ पकड़ लिया।

सविता _अरे छोड़ो न क्या कर रहे हो?

राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।

सविता _छोड़ो में, रात में इतना करने के बाद तुम्हारा मन नही भरा है क्या?

राजेश _नही, राजेश ने उसकी गाल में किस करते हुए उसकी कानो में धीरे से कहा चाची चलो न एक बार फिर से करते हैं।

सविता _न बाबा। तूने तो मेरी हालात ही खराब कर दी हैमैं ठीक से चल भी नहीं पा रही। मैं तो तुम्हे शरीफ लडका समझता था, तुम तो बदमाश निकले, कहा से सीखा ये सब।

राजेश _चाची, जानकर क्या करोगी? कहा से सीखा है सब, चलो न एक बार और करते हैं।

सविता _न छोड़ो मुझे,,, बहुत से काम है।

राजेश _अच्छा ठीक है पर तुम्हे मेरी एक इच्छा पूरी करनी होगी।

सविता _, कैसी इच्छा?

राजेश_मुझे पेशाब करवाना होगा।

सविता _छी, तुम कितने गंदे हो, कोइ छोटा बच्चा भी नही कहता की मम्मी मुझे पेशाब करा दो और तुम,

राजेश _, चाची मेरी एक छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते। प्लीज चाची, मान जाओ न।

सविता _तू बड़ा जिद्दी है।

चल बाथरुम में।

राजेश बाथरुम में जाने लगा। उसके पीछे पीछे सविता भी गई।

सविता _बोलो, क्या करना है।

राजेश _पकड़ कर पेशाब कराओ और क्या?

सविता राजेश के पीछे खड़ी हो गई और राजेश का लंद अपने हाथो में पकड़ ली।

सविता _चलो, जल्दी करो।

राजेश _अरे चाची पेशाब ऐसे ही थोड़े ही बाहर आयेगी।

सविता _तो फिर,

राजेश थोड़ा आगे पीछे करो।

सविता _तू बड़ा बेशर्म है और मुझे भी बेशर्म बनाने में लगा है, पता नही कैसे मैं तुम्हारे बातो को मान लेती हूं। सविता राजेश के लंद को हिलाने लगी। राजेश ने जोर लगाया। पेशाब की तेज़ धार निकलने लगा।

पेशाब की धार बंद होने के बाद। सविता ने लंद हिला हिला कर आखिरी बूंद भी निकाल दिया।

उसके बस लंद कुछ नार्मल huwa।

उसके बाद दोनो कमरे में आए।

सविता _, अपने चाची के सामने नंगे ही रहोगे क्या?

राजेश _चाची तुम ही पहना दो ना चड्डी और टावेल।

सविता _हूं, तो यह भी मुझे करना पड़ेगा।

राजेश _हूं।

सविता ने राजेश को उसकी चड्डी पहनाकर टावेल लपेट दिया।

सविता _चलो चाय पी लो ठंडी हो जाएगी।

अपने हाथो से पियोगे या मुझे ही पिलाना पड़ेगा।

राजेश _अरे नही चाची, बहुत हो गया, अब आपको और तकलीफ नहीं दे सकता। मुझे माफ कर दीजिए।

सविता _किस बात के लिए माफी।

राजेश _आपको इतना तकलीफ दिया इसलिए,,

सविता _तू बड़ा शैतान है, पहले कैसे कैसे काम कराता है फिर माफी भी मांगता है।

अच्छा चाय पीकर तो बताओ, चाय कैसी बनी है?

सविता _आप तो पाक कला में निपुण हो चाय तो टेस्टी होगा।

राजेश ने चाय का एक घूंट पिया।

वाह सच में चाची बहुत ही टेस्टी बना है।

वचाची आपसे एक बात पूछनी थी।

सविता _पूछो क्या पूछनी है।

राजेश _अपनी कान पाक तो लाओ।

सविता अपनी कान राजेश के पास ले आया।

राजेश न धीरे से कहा _रात में आपको मजा आया कि नही।

सविता _सविता शर्मा गई।

वह वहा से चली जाने लगी।

राजेश _अरे चाची बताओ न,,,

उसके बाद राजेश, अपना शर्ट पैंट पहना और माधव और सविता से इजाजत लेकर,अपना बाइक लेकर अपने ताऊ जी के यहां चला गया।
 
राजेश जब घर पहुंचा, पदमा ने उसे दरवाज़े पर ही रोक दिया।

पदमा _बेटा वही रुको।

राजेश _क्यू ताई?

पदमा ने अपनी बहु को आवाज़ लगाई।

बहु आरती की थाली लाना।

पुनम _जी मां जी।

पदमा _बेटा तू मैदान जीत के आया है, बड़े बड़े पहलवानों को मात दिया है। ऐसे ही थोड़े अंदर आने देगें।

पुनम ने आरती की थाली लाई।

पदमा ने राजेश का आरती उतारा और माथे पर तिलक लगाया।

राजेश ने पदमा और केशव का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

पदमा _जी ता रह बेटा।

तकेशव _बेटा तूमने न केवल हमारे खानदान का नाम रोशन किया है बल्कि पूरे गांव को गौरांवित किया है।

राजेश _ताई ये सब आपके आशीर्वाद का फल है।

पुनम _देवर जी कौन सा बाइक इनाम में मिला हमे भी तो दिखाओ।

राजेश _भौजी, बाइक बाहर खड़ी है। अभी अंदर लाता हूं। राजेश ने बाइक घर के आंगन में ले आया।

घर के लोग बाइक देखने लगे।

पदमा _अरे बेटा जाओ तुम नहाधोकर फ्रेश हो जाओ। भुवन भी खेत से आता ही होगा।

राजेश नहाधोकार फ्रेश हो गया। कुछ देर बाद भुवन खेत से आया।

भुवन _अरे छोटे तूने तो कल कमाल ही कर दिया। हर तरफ तुम्हारा ही चर्चा है। मेरा तो सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।

राजेश _अरे भुवन भैया तुम साही भोज में क्यू नही रुके।

भुवन _अरे छोटे, खेत में आजकल जानवर कुछ ज्यादा ही परेशान कर रहा है इसलिए मैच देखने के बाद, मैं खेत चला गया।

भुवन नहा धोकर फ्रेश huwa उसके, दोनो साथ में नाश्ता किए।

भुवन _आज तो अखबारों में तुम्हारे बारे में ही छपा है, कैसे अकेले ही फाइनल मैच जिताया। अब तो तुम्हे पूरे जिले के युवा अपना आदर्श मानने लगे हैं।

भानगढ़ वालो का घमंड तुम्हे तोड़ दिया।

ये बाइक तो नई मॉडल की है, चलाने में मजा आ जायेगा।

राजेश _भैया, ये बाइक आप रख लो।

भुवन _अरे नही, ये बाइक मुझ जैसे देहाती को कहा जचेगी। इस पर तो तुम ही जचोगे।

दोनो हसने लगे।

कुछ देर बाद भुवन खेत चला गया और राजेश exam की तैयारी करने लगा।

दोपहर। में पदमा के खेत चले जाने के बाद, पुनम कमरे में आई।

पुनम _देवर जी, आप तो दिखने में भोले भाले लगते हो, पर जिस तरह तुम बिस्तर में अच्छी अच्छी महिलाओं की पानी निकाल देते हो वैसे ही तुमने मैदान भी पहलवानों को पानी पिला दिया, आखिर इतनी ताकत आया कहा से,

राजेश ने पुनम को अपनी गोद में बिठा लिया।

राजेश _ये ताकत तो आप ही से मिला है भौजी।

पुनम _मुझसे।

राजेश हां, तुमसे, रोज अपनी ताजा दूध जो पिलाती थी।

पुनम _चल हट बदमाश कहीं का।

राजेश _क्यू झूठ कहा क्या मैने, मेरी प्यारी भौजी?

राजेश ने पुनम की ब्लाउज का बटन खोला और एक चूची मुंह में भर कर पीने लगा।

पुनम _आह, थोड़ा धीरे। तुम तो बिल्कुल बच्चे की तरह पीते हो।

राजेश _तभी तो ताकत मिलती है।

कुछ देर मसल मसल कर दूध पीने के बाद,,,

पुनम उत्तेजित हो गई। आह उन,,,

पुनम _अब पीते ही रहोगे की कुछ करोगे भी।

राजेश ने पुनम को अपने गोद में उठाया और बेड पे लेट गया।

पुनम उसका लंद चूसने लगी। और राजेश के लंद पर सवार होकर उछल उछल कर चुदने लगी जब तक वह झड़ नही गई।

पुनम झड़ने के बाद अपनी कपड़े ठीक की।

राजेश _ये क्या भौजी अभी तो मेरा huwa नही है।

पुनम _मेरा हो गया, ज्योति दी कहीं आ गई तो वह फिर मुझे डांटेगी। अब चलती हूं।

पुनम वहा से चली गई।

राजेश को मोहन ने कॉल किया, बताया की शाम को सभी को अखाड़े में मिलना है।

अखाड़े के सभी सदस्य, शाम को इकठ्ठा हुवे।

सभी लड़को ने राजेश की तारीफ किया, अगर राजेश नही होता तो भानगढ़ वालो से इस बार भी हम जीत नही पाते।

मोहन _इनाम का रकम क्या करना चाहिए आप सभी अपना अपना राय दीजिए।

सभी लड़को ने अपना अपना विचार रखे कुछ ने कहा, यह इनाम राजेश के कारण ही मिल पाया, राजेश ही फैसला करेगा की इस इनाम के राशि का करना क्या है?

मोहन _हां राजेश, तुम ही बताओ क्या करना है ईनाम की राशि का।

राजेश _मेरा विचार है की, 10लाख रुपए में से 3लाख स्कूल को दान कर दिया जाए।

ताकि लाला जी ने जो जमीन स्कूल को दान दिया है, उसे समतल कर बच्चो के लिए खेल का मैदान बनाया जा सके, मैदान में बच्चो के लिए झूला और फिसलपट्टी बनाया जा सके।

3लाख रूपय से आखाड़ा में आधुनिक जिम का निर्माण किया जाए।

4लाख रुपए को युवा संगठन के खाते में ही रखा जाए ताकि आवश्यकता पढ़ने पर उसका सही उपयोग किया जा सके।

मेरा विचार यह भी है कि क्यू न हम यहां पुलिसएवम आर्मी भर्ती प्रशिक्षण केंद्र खोले।

यहां के अधिकांश युवा पुलिस और आर्मी में जाने के योग्य है लेकिन सही मार्गदर्शन के अभाव में आज बेरोजगार है हमारे युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा तो निश्चित रूप से उनका आर्मी और पुलिस में भर्ती होगा और देश सेवा के साथ साथ घर की आर्थिक स्थिति में सुधार भी होगी।

मोहन _विचार तो अच्छा है राजेश पर, ट्रेनिंग देगा कौन।

राजेश _यहां आसपास गांव में कोई रिटायर फौजी तो होगा।

मोहन _हा पास के गांव में ही है अभी अभी रिटायर huwa है।

राजेश _हम उनसे, मदद लेंगे। वे हमारे युवाओं को ट्रेनिंग देगें।

इसके लिए आवश्यक इसके लिए आवश्यक संसाधन इसी राशि से जुटाए जाएंगे।

मोहन _पर राजेश भैया आपको तो पता हैं हमारा क्षेत्र नक्सल क्षेत्र के अंतर्गत आता है जब नक्सलियों को पता चलेगा की हमने यहां पर पुलिस एवम आर्मी भर्ती हेतु प्रशिक्षण केंद्र खोले है तो वे हमसे नाराज हो जायेंगे।

लोग तो यह भी बताते है की अभि इस क्षेत्र का को नक्सली कमांडर है।वह हमारे गांव का ही है।

राजेश _अगर ऐसा है तो गांव के योग्य बेरोजगार युवाओं को नक्सली बनने से रोकने के लिए, उनका मार्गदर्शन करना और आवश्यक है।

सभी सदस्य राजेश के विचार से सहमत हो गए।

और गांव में पुलिस एवम आर्मी भर्ती एकेडमी खोलने पर प्रस्ताव पारित किया गया।

राजेश मीटिंग से वापस घर लौटा।

भुवन भी खेत से घर आ चुका था।

दोनो आंगन में रखे खाट पे बैठ कर चाय पी रहे थे। तभी राजेश को सविता ने फोन किया।

राजेश ने फोन उठाया।

सविता _राजेश, आज रात यहीं भोजन करना मैं तुम्हारे लिए खाना बना रही हूं।

राजेश _चाची, ताई से पूछना पड़ेगा।

पदमा _क्या huwa बेटा, किसका फोन है?

राजेश _ताई, चाची का फोन है, आज रात का भोजन अपने यहां करने बोल रही है, क्या बोलूं चाची को।

पदमा _अरे बेटा, अब मैं क्या बोलूं? मना तो कर नही सकती, आखिर तुम उसका भी भतीजा हो, चले जाना।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश ने सविता को बताया की वह समय पर आ जाएगा।

सविता शाम ढलते ही राजेश के लिए उसका पसिंदीदा भोजन बनाने लगी।

इधर भुवन अपने दोस्तो के साथ टहलने निकल गया। राजेश अपने कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा।

राजेश रात में निर्धारित समय पर अपने चाचा जी के यहां रात्रि भोज के लिए पहुंच गया।

जब वह दुकान में पहुंचा,,

माधव _अरे राजेश आ गया।

राजेश _हा चाचा जी।

माधव _अच्छा किया।मैं तुम्हे काल करने ही वाला था। तुम्हारी चाची तुम्हारी राह देख रही है।

आज तुम्हारी चाची, तुम्हारे लिए कुछ खास बना रही है।

राजेश _अच्छा जरा मैं भी तो देखूं क्या बना रही है, मेरी प्यारी चाची।

माधव _जाओ, कीचन में होगी तुम्हारी चाची।

राजेश घर के अंदर गया।

वह इधर उधर देखा चाची नही थी। वह कीचन में गया।

सविता, व्यंजन बना रही थी। राजेश चुपके से गया और सविता को बाहों में भर लिया।

सविता चौंकी। वह पीछे मुड़ के देखी।

सविता _अरे बदमाश तू।

राजेश _देखने आया हु, क्या बना रही हो मेरे लिए।

सविता _जब बन जाय तब देख लेना, अभी जाओ, कहीं तुम्हारे चाचा जी आ गए तो, क्या समझेगा?

राजेश _यहीं की अपनी चाची को भतीजा प्यार कर रहा है?

सविता _चल हट बदमाश, तुम्हे तो मैं भोला भाला समझता था, पर तू तो आवारा निकला।

राजेश पीछे से सविता की ओंठ चूसते हुवे उसकी चूची मसलने लगा।

सविता _ऊं उन,,,,

छोड़ो न क्या कर रहे हो, तुम्हारे चाचा जी आ जायेंगे।

हे भगवान तुम्हारा तो फिर से खड़ा हो गया है।

राजेश _जब बाहों में एक खूबसूरत औरत हो तो मर्द का खड़ा होगा ही।

चाची चलो न एक राउंड हो जाए।

सविता _न बाबा, कल का पूरा छिल गया है, अभी भी जलन हो रही है। जब तक ठीक नही हो जाता कुछ नही मिलेगा।

राजेश _अच्छा तो अपने छोटे भतीजे को भूखे ही घर भेजोगे।

सविता _तो कर भी क्या सकते है?

राजेश _मुंह से शांत कर दो।

सविता _छी, मैने कभी गंदी हरकत नही की है?

राजेश _तो अब करलो।

सविता _न बाबा मुझसे नही होगा ये सब।

राजेश _कोशिश तो कर के देखो।

सविता _बोली न मुझसे नही होगा।

राजेश ने सविता को छोड़ दिया, और डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया।

सविता व्यंजन बना कर उसके पास गई ।

सविता _क्यू ,नाराज हो गए क्या मुझसे?

राजेश _नही, चलो मुझे भूख लगी है भोजन लगा दो। मुझे जल्दी जाना भी है।

सविता _अच्छा चलो कीचन में ट्राई करती हूं, पता नही मुझसे क्या क्या करवाओगे।

राजेश _अब रहने दो, मूड नहीं है।

सविता _हूं, इतनी नाराजगी।

सविता ने राजेश को उठाया और खींचते हुवे कीचन में ले गया। फिर उसके पैंट का बटन खोल के उसका लंद चड्डी से बाहर निकाल दिया।

और हिलाने सहलाने लगी।

राजेश का लंद अकड़ने लगा।

सविता ने कभी लंद को मुंह में नही ली थी।

वह राजेश का लंद का सुपाड़ा मुंह में लेकर चूसने लगी। लंद मोटा और लंबा होता गया। राजेश को मजा आने लगा।

राजेश _चाची थोड़ा अंदर।

सविता राजेश का लंद मुंह में और अंदर लेकर चूसने लगी।

राजेश जैसा जैसा बोलते गया सविता वैसे वैसे ही करती गई।

राजेश को बहुत मजा आ रहा था। वह सविता की बाल पकड़ कर लंद को मुंह में अंदर बाहर करने लगा।

और अन्त में सविता के मुंह में ही झड़ गया।

सविता को इसकी उम्मीद नहीं थी। वह सिंक में जाकर, घो घो करते हुवे वीर्य से मुंह से उगलने लगी।

सविता _छी, बदमाश कितना गन्दा है तू, पूरा मुंह में छोड़ दिया।

राजेश _क्यू स्वाद अच्छा नही लगा क्या? विदेश में तो युवतियां बड़े मजे से पी जाती है? कहते है इसे पीने से औरतों की खूबसूरती और बड़ जाती है।

सविता _मुझे नही बढ़ानी है अपनी खूबसूरती।

राजेश _हां आप तो ऐसे ही बहुत खूबसूरत हो।

सविता _चलो हाथ मुंह धो कर डाइनिंग टेबल में बैठो मैं भोजन लगाती हूं।

राजेश _ठीक है चाची। लव यू।

सविता _चल हट बेशरम, मुस्कुराते हुवे बोली।

राजेश हाथ मुंह धोकर खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। सविता ने उसके लिए भोजन लगाया।

राजेश _वाह चाची भोजन से तो बहुत अच्छी खुशबू आ रही है।

सविता _अच्छा, तो खा कर बताओ कैसा बना है?

राजेश भोजन करने लगा और भोजन की तारीफ भी।

सविता उसके बाजू बैठ कर राजेश को खाते हुवे देखने लगी।

राजेश _चाची आप तो इतनी अच्छी हो फिर ताऊ और ताई से अलग घर क्यू बनवाकर रहने लगी, कुछ कारण होगा?

सविता _हूं, भुवन की वजह से।

राजेश _भुवन भैया की वजह से।

सविता _हा भुवन की वजह से, वह बिगड़ गया था, मुझे छुप छुप कर देखता था जब मैं नहाती, कपड़े बदलती और एक बार तो उसने हद ही कर दिया।

जब मैं घर में अकेली थी, अपना कपड़ा बदल रही थी वह पीछे से मुझे जकड़ लिया।

चाची मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं आई लव यू।

मैने उसके गाल पे जोर का तमाचा लगाया।

जब दीदी आई तो मैंने सारी बाते बताई।

उसने भुवन को डांटा।

पदमा दीदी ने कहा की नया नया जवान huwa है। बहक गया होगा, उसे माफ कर दो। यह बात किसी से मत कहना, नही तो खानदान की बहुत बदनामी होगी।

मैने किसी को कुछ नही बताया, पर भुवन सुधरा नही वह उसके बाद भी तांक झांक करता रहा।

उसके बाद मैने तुम्हारे चाचा जी से अलग मकान बनाने के लिए कह दिया। तुम्हारे चाचा जी तो नही मान रहे थे, पर मैने जिद करके यह घर बनवाया।

जब हम लोग इस घर में आए तो पदमा दीदी हमसे नाराज हो गई और हमारे रिश्तों में थोड़ा खटास आ गया।

राजेश _ओह तो ये बात है?

पर भुवन भैया का भी क्या कसूर आप इतनी सुंदर जो हो? भुवन भैया के जगह कोइ भी नया नया जवान लडका हो उसका ध्यान भटकेगा ही।

चाची, पर एक बात समझा नही, आप मेरे कहने पर कल रात साथ में सोने कैसे तैयार हो गई?

सविता _तुम इतने प्यारे जो हो, मैं तुम्हे नाराज नही देख सकती।

तुम तो कोइ जादूगर हो पता नही क्या जादू कर दिया है मुझ पर, तुम्हारी गंदी गंदी बातो को मानने मजबूर हो जाती हूं।

राजेश _अच्छा तो आपको मेरी हरकते अच्छा नही लगता। सच बोलो।

सविता _शर्मा कर अपनी मुंह दोनो हाथो से छिपाने लगी।

फिर राजेश ने उसका हाथ पकड़ा तो वह छुड़ाकर कीचन में भाग गई।

राजेश ने भोजन कर लिया।

राजेश _चाची सच में भोजन बहुत स्वादिष्ट बना था।

अब मैं चलता हूं।

सविता _हूं।

राजेश घर से जाने लगा।

राजेश _चाची मैं जा रहा हूं।

सविता _हूं।

राजेश _ये क्या चाची? ऐसे ही घर भेज रही हो, मुंह मीठा नही करवाओगी।

सविता _मैं अभी मिठाई लाई।

वह कीचन में जाने लगी तभी राजेश ने उसे पीछे से पकड़ लिया।

राजेश _मिठाई खाकर नही तुम्हारे गुलाबी ओंठो का रस पीकर मुंह मीठा करना है।

राजेश _नही न छोड़ो तुम्हारे जी आ जायेंगे।

राजेश ने सविता की ओंठ मुंह में भर कर चूसने लगा।

उसके बाद वह वहा से चला गया।

सविता _ मुस्कुराती हुई,उसे देखने लगी।

अगले दिन सुबह, ज्योति प्रसव पीड़ा शुरू हो गया।

पदमा _अरे बेटा राजेश, लगता है ज्योति को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाना पड़ेगा। उसका प्रसव का समय आ चुका है।

राजेश _ताई मैं अभी दिव्या जी को फोन करता हूं।

वो अभी ड्यूटी पर गई नही होगी।

राजेश ने दिव्या को फोन किया।

राजेश _हेलो दिव्या जी।

दिव्या _राजेश क्या बात है?

राजेश _दिव्या जी ज्योति दीदी का कमर पे दर्द हो रही है।

दिव्या _राजेश लगता है उसका प्रसव का समय आ गया है। देखो तुम लोग घबराओ नहीं।

मै अभी वहा पहुंचती हूं।

दिव्या कुछ देर में अपनी कार लेकर वहा पहुंची।

राजेश _आइए दिव्या जी।

दिव्या _राजेश, ज्योति दीदी कहा है ।

राजेश _जी कमरे में है।

दिव्या कमरे में गई, पदमा वही थी।

दिव्या ने ज्योति का चेक अप किया।

दिव्या _मां जी ज्योति दीदी का प्रसव का समय आ गया है इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ेगा।

पदमा _अब तो सब कुछ आप ही के हाथो में है बिटिया।

दिव्या _मां जी, ज्योति दीदी को कार में बिठाओ और साथ में तुम भी चलो।

दिव्या _ठीक है बिटिया।

दिव्या कमरे से बाहर आया।

राजेश _दिव्या जी सब ठीक तो है न।

दिव्या _राजेश अभी तक तो सब ठीक है, हम दीदी को स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे है।

तभी ज्योति को लेकर पदमा कमरे से बाहर आई।

ज्योति दर्द से कराह रही थी।

उसे किसी तरह कार के सीट में लिटा दिया गया।

पदमा _राजेश बेटा तुम और भुवन बाइक पर आओ, मेरे और ज्योति के कपड़े रख लेना।

राजेश _ठीक है ताई।

करीब 20मिनट में ही कार से वे लक्ष्मण पुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए।

राजेश और भुवन भी कुछ ही देर में वहां बाइक से पहुंचे।

राजेश _ताई, ज्योति दी कहा है ।

पदमा _राजेश, दिव्या बिटिया ज्योति को डिलीवरी रूम में लेकर गई है।

हे भगवान सब अच्छे से हो जाए।

राजेश _ताई तुम चिन्ता न करो सब अच्छा ही होगा।

कुछ देर में दिव्या रूम से बाहर आई।

दिव्या _बधाई हो राजेश, ज्योति दीदी ने लड़के को जन्म दिया है।

पदमा _बेटी सब ठीक तो है न।

दिव्या _हां मां जी जच्चा और बच्चा दोनो ठीक है।

राजेश _धन्यवाद दिव्या जी, आप समय पर आ गई। और सब सम्हाल लिया।

दिव्या _राजेश ये तो मेरा कर्तव्य है।

पदमा _दिव्या बेटी क्या मैं अंदर जा सकती हूं।

दिव्या _हां हां क्यूं नही?

पदमा _भुवन बेटा अपने जीजा जी को फोन कर बता दो, और कहना मिठाई ले कर आए।

भुवन _ठीक है मां।

दिव्या _अच्छा राजेश मैं और मरीजों को देख कर आती हूं। आप लोग बैठो। मैं आती हूं फिर साथ में काफी पियेंगे।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश ने पुनम को फोन कर बता दिया की दीदी ने लड़के को जन्म दिया है। घर में सब खुश हो गए।

कुछ देर बाद राजेश और भुवन भी जच्चा बच्चा को देखने कमरे के अंदर गए।

ज्योति को बधाई दिया।

दिव्या वहा पहुंची।

राजेश _दिव्या जी, दीदी को कितने दिन रखेंगे यहां।

दिव्या _सब कुछ तो नार्मल है,2, 3दिनो में छुट्टी हो जाएगी।

पदमा _राजेश बेटा, तुम्हारा एक्जाम भी अब पास आ गया है, तुम घर जाकर अपनी पढ़ाई करो। भुवन तुम्हे खेत सम्हालना है, तुम भी तुम्हारे जीजा जी जब यहां आयेंगे। तुम भी घर चले जायेंगे।

दिव्या _हा राजेश, कोइ भी समस्या आया तो यहां मैं तो हूं ही, तुम अपनी पढ़ाई पे फोकस करो, तुम्हे कलेक्टर जो बनना है। दिव्या मुस्कुराते हुवे बोली।

राजेश कुछ समय तक वहा और रुका फिर वह घर आ गया। और पढ़ाई करने लगा।

राजेश ने प्रारंभिक परीक्षा उच्चतम अंको के साथ पास कर लिया था। मुख्य परीक्षा के लिए एक्जाम सेंटर केवल राजधानी में ही दिया गया था।

राजेश को मुख्य परीक्षा के लिए राजधानी जाना था।

तीन दिन में ज्योति को अस्पताल से छुट्टी मिल गया।

पदमा उसे लेकर घर पहुंची।

साथ में ज्योति के पति, धीरज भी आया।

राजेश से वह पहली बार मिला।

बात चीत के माध्यम से एक दूसरे को वे अच्छे से जाने।

घर में सभी के राय से बच्चे का जन्मोत्सम कार्यक्रम 15दिन बाद रखने का निर्णय लिया गया, तब तक राजेश का एग्जाम भी हो चुका रहेगा।

आखिर वह दिन आ ही गया जब राजेश को एग्जाम के लिए राजधानी जाना था।

जब वह घर से स्टेशन के लिए निकल रहा था तब ज्योति ने उससे कहा।

राजेश, तुमने कहा था न की जब मैं बच्चे को जन्म दूंगी तो जन्मोत्सव कार्यक्रम में चाची को लेकर आओगे। मैं चाची से एक बार मिलना चाहती हूं।

पदमा _हां बेटा, देवर जी और सुनीता को देखने आंखे तरस गई है। उन्हे एक बार गांव लेकर आना।

राजेश _ठीक है ताई, मां और पापा गांव जरूर आयेंगे। ये मेरा वादा है।

भुवन बाइक लेकर राजेश को स्टेशन छोड़ने चला गया।

राजेश ने सुनीता को फोन कर बता दिया था की आज शाम वह घर आ रहा है। आईएएस की मुख्य परीक्षा देने।

सुनीता ने यह बात, शेखर और स्वीटी को बताई। वे दोनो खुशी से उछल पड़े।

राजेश सुबह ट्रैन पर बैठा, भुवन ट्रैन बिठाकर घर वापस आ गया।

राजधानी पहुंचते राजेश को शाम 5बज गए।

घर में स्वीटी और सुनीता उसके आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।

राजेश जब घर पहुंचा।

स्वीटी ने दौड़ कर उसे गले लगा लिया।

स्वीटी _ओह भैया, आप आ गए।

राजेश _स्वीटी, मेरी प्यारी बहना कैसी है तू?

स्वीटी _मैं बिल्कुल ठीक हूं भैया।

राजेश _मैं भी बिल्कुल ठीक हूं।

भैया आप कितने दिन बाद आ रहे हो क्या हमारी याद नही आती।

राजेश _मैं अपनी प्यारी बहना को कभी भुल सकता हूं।

अच्छा मां कहा है।

स्वीटी _कीचन में है।

स्वीटी ने अपनी मां को आवाज़ लगाया।

मां देखो भैया आ गए हैं।

सुनीता कीचन से बाहर आई।

राजेश ने पैर छूकर प्रणाम।

सुनीता _अरे बेटा तू आ गया। जीता रह बेटा।

राजेश _मां तुम ठीक तो हो न।

सुनीता _मैं ठीक हूं बेटा, पर तुम पहले से कुछ कमजोर लग रहे हो। तुम ठीक तो हो न।

राजेश _मां हर मां को जब भी उसका बेटा बाहर से कुछ दिन बाद लौटता, कमजोर नजर आता है।

सुनीता _बेटा तू थक गया होगा। जाओ पहले फ्रेश हो जाओ। पता नही सुबह से कुछ खाया भी है की नही,मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाती हूं।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश फ्रेश हो गया,कुछ देर बाद सुनीता रूम में आई उसे अपने हाथो से नाश्ता कराने लगी।

सुनीता _अरे बेटा जानते हो तुम्हारे प्रिया दीदी ने लड़के को जन्म दिया है। और तुम्हारे मामी ने भी।

राजेश _क्या ये बड़ी खुशी की बात है।

मां एक खुशखबरी गांव से भी है, ज्योति दीदी ने लड़के को जन्म दिया है।

सुनीता _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

राजेश _मां,ज्योति दीदी बता रही थी जब तुम लोग गांव से यहां आए तो वह सिर्फ चार वर्ष की थी, आप ज्योति दीदी को बहुत प्यार करते थे।

मां वह आपको बहुत याद करती है। उसने मुझसे वादा ली है की उसके बच्चे के जन्म कार्यक्रम में आप लोगो को गांव लेकर आऊ।

आप साथ चलेंगी न।

सुनीता _बेटा ये तुमने कैसा वादा कर लिया। मैं भी उन लोगो को याद करती हूं। पर उस ठाकुर ने जो मेरे साथ दुर्व्यवहार किया था उसे याद करते ही मैं कांप जाती हूं। मुझे आज भी वहा जाने से डर लगता है।

राजेश _मां क्या तुम्हे मेरे बाजुओं पर भरोसा नहीं।

मैं उन आंखो को बाहर निकाल दूंगा जो आपकी ओर बुरी नजर से देखे।

सुनीता _अरे बेटा मुझे तुम पर पूरा भरोसा है पर मैं नही चाहती मेरे कारण गांव में फिर कोइ पंगा हो।

राजेश _मां कोइ पंगा नहीं होगा। तुम बस चलने के लिए राजी हो जाओ।

सुनीता _अब तुमने वादा कर ही लिया है तो मुझे अपने बेटे का मान तो रखनी ही पड़ेगी।

राजेश _थैंक यू मां।

राजेश ने सुनीता को गले लगा लिया।

सुनीता _अच्छा बेटा अब छोड़ो, तुम थक गए होगे आराम करो, कल तुम्हे एग्जाम देने है तैयारी करो।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता वहा से चली गई।

राजेश परीक्षा की तैयारी करने लगा।

अगले दिन सुबह 9बजे नाश्ता करने के बाद अपने पिता और मां से आशीर्वाद लेकर, परीक्षा दिलाने exam सेंटर चला गया।

चूंकि मुख्य परीक्षा में 7पेपर होने थे। राजेश परीक्षा देकर घर आने के बाद फिर से तैयारी में जुट जाता

सुनीता उसकी खाने पीने का अच्छे से ख्याल रखती।इस प्रकार उसने 10दिनो में सात पेपर दिलाए।

आज आखिरी पेपर था।

आज उसने राहत महसूस किया। वह एग्जाम दिलाने के बाद, रास्ते में उसे सुजाता का ऑफीस नजर आया।

उवह पहले ही सुजाता के ऑफीस जाकर उससे माफी मांगना चाहता था। लेकिन परीक्षा के दबाव के कारण वह जा न सका। वह सिर्फ पढ़ाई में ही फोकस करना चाहता था।

आज लास्ट पेपर के बाद वह उससे मिलने के लिए ऑफिस गया।

वह गेट के सामने गया तो सुरक्षा गार्ड ने राजेश को पहचान लिया।

गार्ड _अरे राजेश बाबू आप, बड़े दिन बाद आपका आना huwa।

राजेश _सुजाता मैम है क्या, उससे मिलना था।

गार्ड _मैम तो अंदर है, आप वेटिंग रूम में बैठिए मैं उसकी पर्सनल सिकेटरी को बता के आता हूं कि आप मैम से मिलना चाहते हैं।

राजेश _ठीक है।

गार्ड ने सेकेटरी को बताया की राजेश नाम का लडका मैम से मिलना चाहता है। मैम उसे अच्छे से जानती है। सेकेटरी ने यह बात सुजाता को जाकर बताई।

सेकेटरी, राजेश से मिली उसने राजेश से कहा की मैम अभी कुछ निवेशकों से चर्चा कर रही है जब वह फ्री होगी तब मैं उनको बताऊंगी की आप उनसे मिलना चाहते हैं। तब तक आप वेट कीजिए।

राजेश _कोइ बात नही जी मैं वेट कर लूंगा।

राजेश करीब एक घंटे इन्तजार किया।

वह उस दिन को याद करने लगा जब पिछले बार वह गांव से राजधानी आया था तो सुजाता किस तरह उसके पास आकर लिपट गई थी, और खुब प्यार की । पर आज वह उससे मिलने इन्तजार कर रहा है।

सब समय का पहिया है जो घूम चुका था।

निवेशकों के जाने के बाद , सेकेटरी ने सुजाता को बताया की राजेश नाम का कोइ लडका पिछले एक घंटे से मिलने के लिए आपका इन्तजार कर रहा है।

वह चौंकी,,, उसने सीसीटीवी पर देखा, राजेश वेटिंग रूम में बैठा था।

उसने सेक्रेटरी से कहा, उनसे पूछो क्यू मिलना चाहता है मुझसे?

सेक्रेटरी ने राजेश से जाकर कहा की मैम पुछ रही है की क्या काम से आए हो।

राजेश _जी, बस ऐसे ही,,

सेक्रेटरी _बस ऐसे ही, सुजाता मैम कौन है मालूम है?वह विशाल एवम सुजाता ग्रुप्स की मालकिन है, उनसे मिलने के लिए लोगो को अपॉयमेंट लेना पड़ता है। तुम ऐसे ही उससे मिलने चले आए, जैसे तुम उसके रिश्तेदार हो। अजीब आदमी हो।

राजेश _देखिए मैम मुझे अच्छे से जानती है। आप उनसे कहिए सिर्फ एक बार मैं मिलना चाहता हूं।

प्लीज।

सेक्रेटरी _ठीक है। में मैडम से जाकर कहती हूं।

सीसी टीवी में उन दोनो को सुजात देख और बातचीत को सुन भी रही थी।

सेक्रेटरी ने सुजाता के पास जाकर बोली।

सेक्रेटरी _मैम, वह लडका कह रहा है की आपसे एक बार मिलना चाहता है, आप उसे अच्छे से जानती है।

सुजाता _देखो, उसे जाकर कह दो की, मुझे जरूरी मीटिंग में जाना है, मैं अभी किसी से नहीं मिल सकती।

वो यहां से चला जाए।

सेक्रेटरी _ठीक है मैम।

वह राजेश के पास गई।

सेक्रेटरी _देखो, तुम जो भी हो, अभी आपसे मैडम नही मिलना चाहती, उसके पास तुम्हारे लिए समय नहीं है। वह तुमको यहां से जाने बोली है।

राजेश वहा से मुंह लटका कर, निराश होकर वापस जाने लगा, उसके आंखो मे आंसू भर आया।

सीसीटीवी में सुजाता राजेश को जाते हुवे देखने लगी।

राजेश के जाने के बाद वह, अपनी चेयर पर बैठ कर फुट फुट कर रोने लगी।

कुछ देर बाद, कंपनी के सीईओ, सुजाता से मिलने आया।

विनोद _मैम आज आपकी मीटिंग है, लोग आपका वेट कर रहे हैं।

सुजाता _विनोद जी, आज मेरी तबियत ठीक नहीं है आप की मीटिंग कैंसल कर दो।

विनोद _ठीक है मैम। आप आराम करिए।

इधर राजेश के आंखो में आंसू भर आए थे वह घर जाने के बजाए नदी किनारे चला गया जब वह दुखी रहता था तब नदी किनारे जाकर बैठता था।

वह नदी किनारे बैठ कर अपनी पुराने यादों में खो गया।

उसे आज निशा बहुत याद आने लगी। ऐसे मौके पर वह ही उसे निराशा पन से बाहर निकालती थी।

पर वह भी उससे नाराज होकर जा चुकी थी।

राजेश निशा के साथ जिन जगहों पर समय बिताया था, उन जगहों पर वह जाने लगा, ऐसा लग रहा था जैसे निशा उसका वहा इन्तजार कर रही हो, पर उसे वहां नही पाता, और निराशा हो जाता।

उसकी आत्मा यह गीत गाने लगा, वह इधर उधर भटकने लगा

 
राजेश जब देर तक घर नहीं लौटा तो सुनीता चिंतित हुई। उसने राजेश को काल किया पर उसका मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था।

वह चिंतित होकर, भगत को काल किया शायद वह अपने दोस्तो के पास गया हो आज उसका आखरी पेपर जो था।

इस समय भगत अपने पार्टी के कार्य कर्ताओं के साथ मीटिंग में था।

भगत ने काल उठाया,,,

भगत _प्रणाम मां,

सुनीता _खुश रह बेटा।

भगत _मां जी कुछ काम था क्या? सब ठीक तो है न।

बड़े दिनो बाद याद की।

सुनीता _हां बेटा, मैं ये पूछने फोन लगाई थी कि क्या राजेश तुम्हारे साथ है?

भगत _मां जी, राजेश भाई तो गांव गया है न।

सुनीता _अरे नही बेटा, वो आईएएस का एक्जाम देने शहर आया huwa है न, आज लास्ट पेपर था।

भगत _क्या राजेश भाई शहर में ही है और मुझे बताया ही नहीं।

सुनीता _बेटा पेपर दिलाने के बाद वह दोपहर में ही घर आ जाता था। आज शाम हो गई अभी तक घर नहीं लौटा।

उसका फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है। मुझे बड़ी चिन्ता हो रही है। जरा अपने दोस्तो से पता करो, राजेश कहा है?

भगत _मां जी आप चिन्ता न करे, राजेश भाई जहा भी होंगे सकुशल होंगे, मैं अभी आपको पता करके बताता हूं।

भगत ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा की उन्हे जरूरी काम से जाना है। कल हम लोग बात करेंगे।

सभी लोगो के चले जाने के बाद।

वह मन में सोचता है।

आखिर राजेश भाई गया कहा होगा।

शायद सुजाता मैम के साथ तो नही है।

वह सुजाता को फोन लगाया।

एक बार में काल नही उठाया तो वह दोबारा काल किया।

सुजाता घर आ चुकी थी।

अपने कमरे में आराम कर रही थी, वह राजेश के बारे में ही सोच रही थी। राजेश को लेकर दुखी थी।

सुजाता ने फोन उठाया।

सुजाता _हेलो कौन?

भगत _मैम मैं भगत

सुजाता _भगत तुम, क्यों फोन किए थे?

भगत _मैम मैं ये पूछने के लिए फोन लगाया था कि क्या राजेश आपके साथ है?

सुजाता _नही, क्यू क्या huwa उसे?

भगत _ओ मां जी ने फोन लगाया था, वह चिंतित है कि वह अब तक घर नहीं लौटा, उसका फोन भी बंद बता रहा है।

सुजाता _दोपहर में आया था मुझसे मिलने। मैं उससे नही मिली।

भगत _क्या? आप उनसे नही मिली। मगर क्यू?

सुजाता _यह तुम अपने उस आवारा दोस्त से पूछो। जो किसी का दिल तोड़ने के बाद, उसने मिलने की उम्मीद करता है।

दरअसल, रीता के जन्म दिन पर रीता ने राजेश से जन्म दिन की खुशी में उसकी प्यास बुझाने कहा, राजेश न चाहते हुवे भी वह मजबूर होकर सुजाता से झूठ बोल कर रीता के कमरे में गया और उसका प्यास बुझाया था, पर सुजाता ने दोनो को रंगे हाथो पकड़ लिया था, इससे सुजाता को गहरा सदमा लगा था।

वह राजेश से कभी न मिलने की कसम खा ली थी।

इधर भगत को समझ आ गया था कि सुजाता मैम और भगत के किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया है।

भगत _पर राजेश भाई जा कहा सकता है।

वह उन सभी जगह राजेश को ढूंढने निकल पड़ा जहा वह जा सकता था।

काफी खोज बिन के बाद राजेश का बाइक उसे नजर आया।

भगत _ये तो राजेश भाई का बाइक है, लगता है वह यहीं कहीं है।

वह बाइक मंदिर के पास खड़ा था।

भगत मंदिर में जाकर इधर उधर ढूंढने लगा।

राजेश को अकेला बैठा, उसने दूर से देख लिया। भगत राजेश के पास जाकर उसके बाजू में बैठ गया।

भगत _क्या सोच रहे हो भाई।

राजेश _भगत तुम यहां।

भगत _बस आपको ढूंढता huwa चला आया।

क्या huwa भाई आप कुछ निराश लग रहे हो।

राजेश _कुछ नही यार बस ऐसे ही, तू सुना कैसा चल रहा है तुम्हारा पार्टी का काम।

भगत _बहुत अच्छा चल रहा है भाई, नए नए लोग पार्टी से जुड़ रहे है। भाई तुम शहर आए हुवे हो और मुझे बताया ही नहीं। मुझे ये बात अच्छी नहीं लगी भाई।

राजेश _अरे यार एग्जाम का कुछ दबाव था। सॉरी।

भगत _अच्छा ठीक है। चलो चलते है बड़े दिनो बाद मिले है, चलो दोस्तो के साथ आज पार्टी करते है।

राजेश _अरे नही यार मेरा मूड नहीं है।

भगत _भाई मैं जानता हूं आप सुजाता मैम और निशा को लेकर निराश हो। भाई आपके चेहरे पर ये निराशा पन बिल्कुल ठीक नही लगता।

आप पर तो सैकड़ों लडकिया आज भी मरती है। फिर क्यू उन लोगो के लिए दुखी होते हो जिन्हे आपकी भावनाओं की कोइ कद्र नहीं है।

भाई भुल जाओ उन लोगो को।

राजेश _भगत तू नही जानता गलती मेरी ही है, मैं ही उन लोगो की भावनाओ को नही समझ पाया।

हर औरते एक जैसी नहीं होती।

मैने उनकी भावनाओं के साथ खेला है।

भगत _भाई, अगर ऐसी बात है तो चलो सुजाता मैम के यहां, उसके घर चलते हैं। आप उससे माफी मांग लेना।

राजेश _नही भगत, वह मुझसे मिलना नही चाहती,अब मैं उसके सामने गया तो यह मेरी निर्लजता होगी।

भगत _मां जी ने फोन लगाया था। वह तुम्हे लेकर चिंतित है आप का फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है।

राजेश _ओह एग्जाम सेंटर में मोबाइल स्विच ऑफ कर जमा करा दिया जाता है न, मैं मोबाइल ऑन करना ही भुल गया।

तभी भगत को किसी का फोन आया।

भगत ने फोन उठाया।

फोन भगत के दोस्त निखिल का था।

निखिल _अबे कहा है तू, भूल गया क्या, कब से वेट कर रहा हूं।

भगत _ओह सॉरी यार, ओह हम अभी पहुंचते हैं।

निखिल _हम अभी पहुंचते है, और कौन आ रहा है बे।

भगत _अबे गांव से राजेश भाई आया huwa है। मैं भाई के साथ ही हूं।

निखिल _क्या राजेश भाई आया huwa है, ये तो बड़ी खुशी की बात है, तुम राजेश भाई को लेकर यहां पहुुंचो। मैं तुम लोगो का वेट कर रहा हूं।

भगत _भाई निखिल का फोन था, वही निखिल जिसके फार्म हाउस में हम लोग प्रोग्राम की तैयारी करते थे।वह बहुत बड़ा शॉपिंग मॉल खोला है, आज उसका उद्घाटन है।

मुझे आने को कहा था, मैं तो भुल ही गया था। मैने उसे बताया कि तुम शहर आए हो, वह दोनो का वेट कर रहा है। चलो चलते है।

राजेश _भगत, मेरा कहीं जाने का मन नही कर रहा, तुम जाओ।

भगत _भाई, तुम्हे अकेला छोड़कर, मैं कहीं नहीं जाने वाला।

राजेश _भगत, मेरी चिन्ता मत करो, मैं ठीक हूं, तुम जाओ।

भगत _नही भाई अगर आप नही चलेंगे तो मैं भी नही चलूंगा।

राजेश _भगत तु नही मानेगा, ठीक है चलो।

भगत _भाई रुको एक मिनट, मैं मां जी को फोन कर बता दूं की तुम मेरे साथ हो, वो चिंतित हैं।

भगत ने सुनीता को फोन लगाया,,

सुनीता _बेटा, राजेश का पता चला क्या?

भगत _हां, मां जी वो मेरे साथ ही है।

सुनीता _बेटा राजेश ठीक तो है न।

भगत _हा मां जी राजेश बिल्कुल ठीक है, आप चिन्ता न करे।

मैं राजेश भाई को अपने साथ, हमारे पुराने दोस्त के यहां ले जा रहा हूं, उसने नया शॉपिंग मॉल खोला है, उसका उद्घाटन है। दोस्तो के साथ मिलेगा तो राजेश भाई अच्छा फील करेगा।

सुनीता _क्यू? क्या huwa है राजेश को बेटा?

भगत _huwa तो कुछ नही है मां जी पर वो क्या है न की निशा और सुजाता मैम को लेकर राजेश कुछ अपसेट है।

सुनीता _हे भगवान, अब तक भुल नही पाया है उन लोगो को। फिर क्या किया है उन लोगो ने, मेरे बेटे के साथ।

भगत _कुछ नही मां जी, वो क्या है न कि राजेश भाई सुजाता मैम से मिलने उसकी ऑफीस गया था पर मैम ने मिलने से मना कर दिया।

सुनीता _ओह, राजेश को उसके ऑफीस जाने की क्या जरूरत था? भगत बेटा ज्यादा रात मत करना।

मैं राजेश को लेकर चिंतित हूं।

भगत _मां जी मैं राजेश अब मेरे साथ है आप बिल्कुल भी चिन्ता न करें।

सुनीता ठीक है बेटा।

भगत, राजेश को लेकर निखिल के शॉपिंग मॉल में ले गया, जहां आज उद्घाटन है।

उदघाटन में बड़े बड़े लोगो को इनवाइट किया गया था।

पूजा पाठ हो चुका था, रिबन काटना बांकि था।

निखिल के पिता जी सुजाता और रीता की कंपनी में शेयर होल्डर थे तो दोनो को भी आमंत्रित किया गया था।

रिबन भी सुजाता के हाथो से कटना था। इन सब बातो से भगत और राजेश अनजान था।

जब वे मॉल पहुंचे तो निखिल बहुत खुश हुआ।

राजेश और भगत ने निखिल को बधाई दिया।

वहा मॉल को बहुत अच्छे से सजाया गया था। मेहमानों के खाने पीने और उनके मनोरंजन के लिए संगीत की व्यवस्था भी किया गया था। आर्केस्ट्रा वाले अपनी प्रस्तुति दे रहे थे, मौजूद लोग उसका आनंद ले रहे थे।

कुछ समय के बाद रीता वहा पहुंची।

रीता ने गुलदस्ता भेट कर निखिल के पिता को बधाई दिया। जब वह हाल में गई तो उसकी नजर डाइनिंग टेबल पर बैठे राजेश और भगत पर पड़ी।

भगत ने जब रीता को देखा।

भगत _भाई ये चुड़ैल, यहां भी आ गई।

रीता दोनो के पास पहुंची।

रीता _ओह राजेश तुम यहां, वाट आर सरप्राईज।

वह राजेश के पास जाकर बैठ गई।

रीता _राजेश तुम यहां, तुमने मुझे फोन क्यू नही किया की तुम यहां शहर में हो।

राजेश _वो मेरा एग्जाम था न, मैं उसी पर फोकस कर रहा था, आज ही लास्ट पेपर था।

रीता _ओह राजेश मैं तो तुम्हे पहले भी बोली थी और अब भी बोल रही हूं, ये आई ए एस का चक्कर छोड़ो मेरी कंपनी ज्वाइन करो। मैं कई गुना ज्यादा पैसा दूंगी एक आई ए एस अफसर के तनख्वा से।

पर तुम हो की मानते ही नहीं।

तुम्हे यहां देख कर बता नही सकती मै कितनी खुश हूं।

राजेश, चलो हम यहां से किसी फाइव स्टार होटल में चलते है, कितने दिन बाद हम मिल रहे हैं।

भगत _मैम यदि राजेश भाई यहां से गया तो निखिल, हमारे दोस्त को कितना बुरा लगेगा।

रीता _भगत तुम चुप रहो मैं तुमसे बात नहीं कर रही।

राजेश _मैम भगत ठीक कह रहा है।

रीता _वैसे राजेश मैं कैसे लग रही हूं इस साड़ी में।

भगत _चुड़ैल, उसने धीरे से कहा।

रीता _भगत तुमने कुछ कहा?

भगत _जी मैने कहा कि तुम खूबसूरत और हॉट लग रही हो।

रीता _मैं तुमसे नही राजेश से पूछी हूं।

राजेश _भगत सही कह रहा है।

रीता _ओह थैंक यू।

तभी माइक से अलाउंस huwa, लीजिए दोस्तो हमारे बीच आज के खास मेहमान सुजाता मैम पहुंच चुकी है। सुजाता राजेश कोलेकर आज दुखी थी। वह यहां नही आना चाहती थी, पर उसने पहले आने के लिए सहमति दे दी थी। इसलिए उसे मन न करते हुए भी यहां आना पड़ा।

सुजाता मंच पर गई। सभी ने तालिया बजाकर उसका स्वागत किया। सुजाता ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया।

निखिल का डैड _आइए सुजाता जी, रिबन कांट कर शो रूम का उद्घाटन कीजिए।

सुजाता ने रिबन काटने के लिए आगे बड़ी।

इधर रीता को सुजाता से बड़ी जलन होती थी। वह सुजाता को नीचा दिखाने के लिए ही राजेश के करीब आई थी, पर न चाहते हुवे भी वह राजेश की अच्छाइयों और मर्दानगी की दीवानी हो गई थी।

जिस दिन सुजाता ने राजेश और रीता को उसकी कमरे पकड़ी थी।

रीता को बड़ी सुकुन मिली थी। जैसे उसने सुजाता को हरा दिया हो।

आज फिर सुजाता को जलाने का मौका था।

इधर राजेश और भगत एक दूसरे की ओर देखने लगे।

राजेश _भगत, तुमको पता था मैम यहां आने वाली है।

भगत _न में सिर हिलाया।

सुजाता ने रिबन कांटकर मॉल का उद्घाटन किया। सभी ने तालिया बजाया। सुजाता के साथ लोगो ने शॉपिंग मॉल का अवलोकन किया।

उसके बाद।

निखिल के डैड सुजाता को हाल में ले गया वहां रखे ,डाइनिंग टेबल पर सुजाता को बिठाया और खुद साथ में बैठ गया।

इधर जब से राजेश के साथ, रीता को पकड़ी थी। सुजाता रीता से बात चीत बंद कर दी थी।

रीता ने सुजाता को आवाज़ दी, हाय सुजू, आओ हमारे साथ बैठो।

सुजाता, चौंक कर रीता की ओर देखी।

जब उसने देखा राजेश उसके बाजू में बैठा हुआ है।

उस समय भगत वहा पर नही था, उसके पार्टी से जुड़े कुछ लोग मिल गए थे, उनके साथ चला गया। पार्टी के मुद्दे पर चर्चा करने।

राजेश और सुजाता की नजर एक दूसरे से मिली। राजेश ने नजरे झुका ली।

जबकि सुजाता को एक और सदमा लगा।

शाम को भगत ने उसके पास फोन किया था की राजेश, अभी तक घर नहीं पहुंचा है उसकी मां चिंतित है? उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ बता रहा है।

इसका मतलब ये मेरे ऑफीस से जाने के बाद ये रीता के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा है।

पहले तो बहुत गुस्सा आया, फिर उसका दिल रोने लगा। उसकी आंखो से आंसू बहने लगा।

निखिल के डैड _क्या huwa सुजाता जी आप ठीक तो है न?

सुजाता _जी मैं ठीक हूं।

इधर आर्केस्ट्रा वालो ने गाना शुरू कर दिया,,,,

दुश्मन न करे दोस्त ने जो काम किया है,,,,

वह उस गाने में खुद को महसूस करने लगी,,,

इधर सुजाता की आंखो में आंसू देख रीता को बड़ी राहत मिल रहा था।

राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे?

गाना खतम होते ही सुजाता अपनी आंसू पोंछते हुवे वहा से चली गई।

सुजाता के जाने के बाद, राजेश बहुत दुखी हो गया और उसने वेटर को ड्रिंक लाने को कहा।

रीता के मना करने के बाउजूद शराब को पैग पे पैग पीने लगा। उसने रीता का एक न माना। जब भगत वहा आया तो उसने कई पैग पी लिया था।

भगत ने और पेग पीने से रोका, तब तक देर हो चुका था।

रीता _भगत मैने बहुत मना किया पर राजेश माना नही।

राजेश पर नशा हावी हो गया था वह नशे में बड़बड़ाने लगा। चले जाओ मुझे किसी की जरूरत नही, हां मैं आवारा हूं। मैं किसी के काबिल नहीं।

रीता _ओह भगत, इसे घर छोड़ आओ। नशा कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है।

भगत _राजेश भाई क्या किया आपने? अब मैं मां जी को क्या जवाब दूंगा?

भगत राजेश को सहारा देकर उठाया और रीता अपने बाइक में बिठाकर अपने एक और दोस्त को साथ लेकर राजेश का घर ले गया।

उधर राजेश के घर में सब भोजन कर लिए थे। शेखर और स्वीटी अपने कमरे में आराम कर रहे थे। सुनीता राजेश के आने का वेट कर रही थी।

सुनीता ने जब दरवाजा खोला, उसने देखा राजेश होश में नहीं है, भगत राजेश को पकड़ रखा है।

सुनीता घबरा कर बोली,,,

सुनीता _क्या huwa राजेश को।

भगत _कुछ नही मां जी, थोड़ा सा शराब पी लिया है राजेश भाई ने।

सुनीता _क्या राजेश ने शराब पी लिया है।

हे भगवान, उसकी आंखों में आंसू भर आए।

राजेश चल नही पा रहा था।

उसे भगत किसी तरह उसके कमरे में ले जाकर लिया दिया।

सुनीता पीछे पीछे गई। राजेश की हालात देखकर फफक फफक कर रोने लगी।

राजेश बडबडा रहा था, चले जाओ सब मुझे छोड़ के, मैं आवारा हूं। मुझे किसी की जरूरत नही,,,, लड़खड़ाते आवाज़ में बोल रहा था।

फिर वह आंखे बंद कर सोने लगा।

भगत _सॉरी मां जी, मैं राजेश भाई का ख्याल नही रख सका। ये सब हो जायेगा। सोचा ही नहीं था।

सुनीता _बेटा जो होना था वो तो हो गया। गलती तुम्हारी नही है। गलती तो राजेश ने ही किया है। इन बड़े लोगो से मैने दूर रहने के लिए कहा था। पर ये माना नही, आखिर huwa वही जिसका डर था। काम निकल जाने के बाद छोड़ दिया मेरे बेटे को। सब इस्तेमाल कर रहे हैं मेरे बेटे का।

भगत _सुनीता से इजाजत लेकर चला गया।

उसके जाने के बाद सुनीता राजेश के कमरे में गई। उसके जूते उतारे।

फिर उसे चादर ओढ़ा कर, उसके कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली गई।

वह राजेश की हालात पर चिंतित थी। वह ठीक से सो नहीं सकी।

अगले सुबह जल्दी उठ गई और वह राजेश के कमरे में गई। राजेश अभी भी सोया हुआ था।

वह वहा से निकलकर अपने कमरे में गई और स्नान कर पूजा पाठ कर कीचन का काम सम्हालने लगी।

जब शेखर उठा, वह फ्रेस होकर अखबार पढ़ने लगा।

सुनीता चाय लेकर उसके पास गई।

शेखर _राजेश कल कितना समय आया। अभी तक उठा नही है। सब ठीक तो है न।

सुनीता _ओ रात 10 बजे। आया अपने दोस्त के यहां पार्टी में गया था न। इसलिए देर तक सोया है।

उसने शेखर को कुछ नहीं बताया।

सुबह के 8बज गए, राजेश उठा नही तब सुनीता उसके कमरे में गई।

उसने राजेश को उठाया।

सुनीता _राजेश बेटा, उठो कितना देर तक सोता रहेगा,,, उसने राजेश के बालो पर अपना हाथ फेरा।

राजेश ने अपनी आंखे खोला।

राुनीता _बेटा तू ठीक तो है न।

राजेश _हां मां, थोड़ा सिर में दर्द और शरीर में सुस्ती लग रही है।

सुनीता _बेटा क्यू पी तूने शराब।

राजेश _सॉरी मां।

सुनीता _बेटा क्या जरूरत थी, उस सुजाता की ऑफिस जाने की तुम्हे। वो बड़े लोग है बेटा। ये बड़े लोग, छोटे लोगो का केवल इस्तमाल करना जानते है। और जब काम निकल जाए तो दूध से मख्खी की तरह बाहर निकाल कर फेक देते है।

किसी के भावनाओ से इन्हे कोइ मतलब नहीं।

मुझे कसम दे आज के बाद तू कभी नही जायेगा उनसे मिलने।

मां तुम ठीक कहती हो इन बड़े लोगो को किसी भावनाओ से कोइ मतलब नहीं होता। अब मैं उन लोगो से दूर ही रहूंगा।

सुनीता _बेटा मैं तुम्हारे लिए नींबू पानी लाती हूं तुम पी लो, तुम्हे आराम लगेगा। फिर नहा कर तैयार हो जाओ। नाश्ता तैयार कर रही हूं। पता नही खाया भी है की नही।

सुनीता ने राजेश के लिए नींबू पानी लाया।

राजेश नींबू पानी पीकर थोड़ा आराम कर फ्रेस huwa फिर नहाकर। कीचन में आया उसे जोरो की भूख लगी थी।

सुनीता _मां तू नहा लिया बेटे।

राजेश _हां मां।

मां पापा और स्वीटी कहा है।

बेटा _तुम्हारे पापा तो ड्यूटी पर चला गया और स्वीटी कॉलेज के लिए तैयार हो रही है।

चल तू भी नाश्ता कर ले।

सुनीता ने राजेश के लिए नाश्ता लगाया।

फिर वह अपनी हाथो से राजेश को नाश्ता कराने लगी।

राजेश _मां तू कितनी अच्छी है।

सुनीता _चल झूठा कहीं का, अगर मैं अच्छी होती तो मेमेरी परवाह करता, कल वाली हरकत नही करता।

राजेश _सॉरी मां।

सुनीता _तू बदल गया है।

कैसे पहले तू मेरे आगे पीछे मंडराता था, भुल गया। बात बात में गले लगा लेता था।

पर उस निशा और उसकी मां ने पता नही तुम पर क्या जादू कर दिया है? अपनी मां की परवाह करना छोड़ दिया।

राजेश _अरे मां ऐसे क्यू बोल रही हो। तुम तो मेरी प्यारी मां हो?

सुनीता _अच्छा बेटा मुझे मार्केट जाना है कुछ सामान खरीदने तू चलेगा साथ में।

राजेश _क्यू नही, मां ये भी पूछने की बात है!

सुनीता _अच्छा मैं कीचन का काम निपटाती हूं फिर चलेंगे।

राजेश _ठीक है मां।

तभी वहां स्वीटी आई।

मां मैं कालेज जा रही। बाय भैया।

स्वीटी कालेज चली गई।

कीचन का काम निपटाने के बाद।

तैयार होने के लिए सुनीता अपनी कमरे में गई। वहा से राजेश को आवाज़ लगाई।

राजेश _क्या है मां?

सुनीता _अरे बेटा मैं कौन सा साड़ी पहनु, इसमें से देख कर बताओ।

राजेश _मां कोइ सी भी साड़ी पहन लो, आप पर तो सभी साड़ी जचेगी। तुम इतनी सुंदर जो हो।

सुनीता _चल झूठा कहीं का मैं इतनी सुंदर होती तो उस सुजाता और निशा के लिए देवदास नही बनता।

सुनीता ने एक पारदर्शी साड़ी निकाल ली और एक ब्लाउज जो सामने और पीछे से कुछ ज्यादा ही खुला हुआ था।

सुनीता _अच्छा अब मैं तैयार हो रही हूं जाओ तुम भी कमरे में जाकर तैयार हो जाओ।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता तैयार होने लगी। वह अपनी ओंठो पर लिपिस्टिक भी लगा ली।

जब राजेश तैयार होकर सुनीता के कमरे में आया तो सुनीता को देखता रह गया।

बहुत खूबसूरत हॉट और सेक्सी लग रही थी।

सुनीता _ऐसा क्या देख रहा है re

राजेश _ने सुनीता को पीछे से बाहों में भर लिया और कहा, तुम खूबसूरत और हॉट लग रही हो।

किसी पर बिजली गिराने का इरादा है क्या?

सुनीता _हूं।

राजेश _किस पर मैं भी तो जानू कौन है वो खुशनसीब।

सुनीता _है एक देवदास? जो अपनी मां को भी भुल जाता है।

अब छोड़ो, और मेरी झूठी तारीफ मत करो।

राजेश _अरे मैं सच कह रहा हूं। बड़ी हॉट लग रही हूं। मुझे छोड़ने का मन नही कर रहा है।

सुनीता _अच्छा। तो क्या करने का मन कर रहा है?

राजेश _अपनी हॉट मां को प्यार करने का।

तभी राजेश दोनो हाथो से उसकी चूची मसलने लगा।

सुनीता _अभी कुछ नहीं मिलेगा। मार्केट से आने के बाद सोचूंगी। छोड़ो मुझे।

राजेश _अरे मां एक किस ही दे दो।

सुनीता _उन हूं, अभी कुछ नही।

तभी राजेश के लंद में तनाव आ गया।

मां ऐसे ही चलूंगा क्या !लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे?

सुनीता _अच्छा ठीक है तुम घर में ही रहो, मैं मार्केट से आती हूं ठीक है।

राजेश _ठीक है जाओ, मैं भी जाता हूं । सुजाता के घर,,,

सुनीता _तू तो अपनी मां को ब्लैक मेल करने लगा।

राजेश _आप मजबूर जो कर रही हो।

सुनीता _तुम बहुत समय लेते हो। अभी नही।

राजेश _अरे नही मां जल्दी हो जायेगा।

राजेश सुनीता की ओंठ चूसने लगा। अब सुनीता भी राजेश का साथ देने लगी।
 
सुनीता सच में इस तरह सजी संवरी थी की स्वर्ग की अप्सरा, मेनका लग रही थी। राजेश ने जब सुनीता को ऐसे रूप में देखा तो उससे रहा न गया और वह सुनीता को पीछे से बाहों में भर लिया।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ न।

राजेश _मां आज तो सच में एकदम हॉट लग रही हो। किसी के ऊपर बिजली गिराने का इरादा है क्या?

सुनीता _हां,

राजेश _किसके ऊपर, कौन है वो खुश नसीब मैं भी तो जानू।

सुनीता _है न एक देवदास, जो बड़े लोगो के चक्कर में अपनी मां की परवाह करना छोड़ दिया है।

राजेश, सुनीता की खुले पीठ को चूम लिया, सुनीता सिसक उठी।

सुनीता _क्या कर रहा है?

राजेश _वही जो घर आते ही करना था।

राजेश, सुनीता की गर्दन को चाटने लगा।

सुनीता _आह, मत करना।

सुनीता को अपनी ओर घुमा दिया।

सुनीता पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी। उसकी खूबसूरत बदन पर नाभि, एकदम कयामत ढा रही थी।

राजेश घुटने टेक के नीचे बैठ गया और थोड़ा साड़ी खिसका कर उसकी नाभी, चूम लिया।

सुनीता _नही न बेटा क्या कर रहा है? छोड़ना।

राजेश उसकी सपाट पेट को चाटने लगा और चांटते चांटते ऊपर बड़ा।

सुनीता आंखे बंद कर सिसक रही थी। और प्यार से राजेश की बालो को सहला रही थी।

राजेश ऊपर बड़ा और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया।

फिर उसकी ब्लाउज का बटन खोल कर, उसकी बड़े बड़े खूबसूरत स्तन को आज़ाद कर दिया। सुनीता की चूचक को मुंह में भर कर बारी बारी से चूसने लगा।

सुनीता बहुत अधिक उत्तेजित होने लगी।

वह अपनी आंखे बंद कर सिसक रही थी और प्यार से राजेश के बालो को सहला रही थी।

कुछ देर तक मसल मसल कर चूची निचोड़ने के बाद वह ऊपर की ओर बड़ा और उसकी गुलाबी ओंठो को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

उसके बाद वह सुनीता को पीछे घुमा दियाऔर अपनी बाहों में कस लिया। उसका लंद लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया था। जो सुनीता की गाड़ में धसने लगा।

राजेश _मां सच में तुम दुनियां की सबसे खूबसूरत औरत हो।

सुनीता _चल झूठा कहीं का, सबसे खूबसूरत तो तेरे लिए ओ मां बेटी है जिसके लिए तू कल देवदास बने घूम रहा था।

राजेश ने सुनीता की चूची को अपने हाथो में पकड़ कर मसलने लगा।

सुनीता _चल अब छोड़, बहुत प्यार कर लिया अपनी मां को।

राजेश _मां, बड़ा मन कर रहा है, एक बार करने दो न।

सुनीता _न बाबा, तू बहुत देर तक करता है। चलने में तकलीफ होने लगती है और अभी मार्केट जाना है।

राजेश _क्या मैं ऐसी हालात में मार्केट जाऊं।

राजेश ने सुनीता की एक हाथ अपने लंद पर पकड़ाते हुवे कहा।

सुनीता _तो क्या huwa

राजेश _लोग क्या कहेंगे?

सुनीता _लोग क्या कहेंगे? यहीं कि एक गाय को देख कर सांड पीछे पड़ा है?

राजेश _आपको शर्म नही आयेगी।

सुनीता _गाय के शर्म थोड़े ही आयेगी?

राजेश, सुनीता को अपनी बाहों में और कस लिया, उसकी चूची से खेलने लगा।

सुनीता सिसकते हुवे बोली, अब छोड़ो न।

राजेश _न, बिना डाले मैं नही जाऊंगा।

सुनीता _क्या बिना डाले नही जायेगा?

अपने सांप को तुम्हारे बिल में।

सुनीता _न बाबा तुम्हारा सांप बहुत लंबा और मोटा है। बिल में जाता है तो उसकी दीवारों को छील देता है। जिससे चलने में तकलीफ होती है।

राजेश _मां अब नखरे मत करो। चलो में सांप को थोड़ा प्यार करो।

राजेश अपने पैंट का चैन खोल कर अपने लंद को बाहर निकाल लिया। वह हवा में झटके मार रहा था।

सुनीता ने राजेश के लंद की ओर देखी, और मुस्कुराने लगी।

सुनीता _एक शर्त पर।

राजेश _कैसी शर्त?

सुनीता _तुम उस सुजाता से दूर रहोगे। उससे मिलने नही जाओगे।

राजेश _मां ए कैसी शर्त है?

ससुनीता _मैं बिल्कुल ठीक कह रही हूं। उस सुजाता के चक्कर में तुम शराब पीने लगी हो।

राजेश _मां आओ न इसे मुंह में लेकर प्यार करो, मुझसे रहा नहीं जा रहा।

सुनीता _न, पहले मेरी शर्त को मानना पड़ेगा तभी मुझे भोग पाओगे।

राजेश _ठीक है बाबा, मैं आपका शर्त मानता हूं। मैं खुद होकर अब उसके पास नही जाऊंगा।

सुनीता खुश हो गई। सच।

राजेश _हा सच में।

सुनीता मुस्कुराते हुवे, राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और लंद को हाथ में पकड़ कर पहले सहलाई फिर उसे मुंह में गप से अन्दर भर ली और चूसना शुरु कर दी।

राजेश, सुनीता को लंद चूसते हुवे देखने लगा। प्यार से उसकी बालो को सहलाने लगा।

राजेश _आह मां, बहुत मजा आ रहा है आह,,, आह ऐसे ही, आह,,,

राजेश का लंद सुनीता की मुंह में जाकर और लंबा और मोटा हो गया।

कुछ देर तक मुख मैथुन का आनंद लेने के बाद

राजेश, सुनीता को ऊपर उठाया और उसे अपनी बांहों में उठा लिया। सुनीता राजेश की गर्दन को दोनो हाथो से पकड़ कर। उसकी ओर देखने लगा। राजेश भी सुनीता की आंखो में देखते हुवे उसे बेड पे ले जाकर लिटा दिया। और खुद उसके ऊपर आ गया।

राजे उसकी ओंठ चूसते हुए उसकी गर्दन, फिर उसकी चूची फिर उसकी नाभी चूमते हुए आगे बड़ा।

उसके बाद उसकी पैरो को उठा कर उसकी उंगलियों को चूमने, चाटने लगा।

उसकी पेटीकोट और साड़ी आगे खिसका कर टांगो को चूमते हुवे उसकी रस से भरी योनि तक पहुंचा।

आज ही सुनीता ने अपनी शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से साफ की थी।

सुनीता की रस से भरी मस्त चिकनी योनि को देख कर राजेश का लंद ठुमकी मारने लगा।

राजेश देर न करते हुए सुनीता की योनि को चाटना शुरू कर दिया।

सुनीता बहुत अधिक गर्म हो गई। उसकी boor से पानी बह कर टांगो बहने लगा। जिसे राजेश चाटने लगा।

सुनीता _आह, उन आह,, उन मां,,, बेटा अब बस कर,, आह मां,,, अब बर्दास्त नही कर सकती,, डाल दे अपनी सांप मेरे बिल में।

राजेश सुनीता की दोनो टांगो को फैला दिया और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया।

अपना लंद पकड़ कर सुनीता की योनि द्वारा में रख कार पहले लंद से सुनीता की योनि को कुछ देर रगड़ा।

सुनीता _पागल सी हो गई।

अब और कितना तड़फाएगा अपनी मां को, डालता क्यू नही? सांड कहीं का। चोद अपनी मां को।

नाराज होते हुए बोली।

राजेश _ले मेरी रण्डी मां, आज तो तुम्हे मैं खुब चोदूंगा।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

लंद एक ही बार में boor को चीरता हुआ। अंदर चला गया। उसका टोपा सुनीता की बच्चेदानी से टकराया।

सुनीता _चीख उठी।

आह मां,, मार डाला re, बदमाश एक ही बार में घुसा दिया।

राजेश ने सुनीता की चुचियों को मुंह में भर कर चूसने लगा।

फिर दोनो चुचियों को मसल मसल कर, लंद से boor को चोदना शुरु कर दिया।

योनि एकदम गीली हो चुकी थी।

लंद बिना किसी रोक टोक के सर सर अंदर बाहर होने लगा।

सुनीता कुछ ही देर में स्वर्ग में पहुंच गई।

उसकी मुंह से लगातार कामुक सिसकारी निकलने लगी।

कमरे में उसकी चूड़ियों की खनक गूंजने लगी।

राजेश लगातार चोदता रहा।

राजेश _ले मां ले, बुझा ले अपने बेटे के लंद से, अपनी boor की प्यास। ले मेरी रानी सच में क्या मस्त मॉल है तू तुम्हे तो चोदने का मजा ही कुछ और है।

ले chud अपने बेटे की लंद से।

सुनीता _हा हां, चुदूंगी अपने बेटे से, अपनी boor की प्यास बुझाऊंगी। अपने सांड बेटे को इधर उधर भटकने नही दूंगी। चोद और तेज़ चोद अपनी मां को,,,, आह मां, आह,,,

राजेश _ले मेरी रानी,, ले एक और ले,,

राजेश दना दन चोदता रहा। दोनो स्भोग के परम आनंद को प्राप्त कर रहे थे।

कमरे में फच फच, गच गच की आवाज़ और चूड़ियों की खनक मधुर संगीत उत्पन कर रही थी।

राजेश दूदू को मसल मसल कर बड़ी तेजी से लंद को boor में अंदर बाहर कर रहा था। लंद का सुपाड़ा उसकी गर्भाशय से टकरा रहा था जिससे सुनीता को एक अकल्पनीय, अवरणीय आनंद प्राप्त हो रहा था।

तसुनीता खुद को और ज्यादा देर तक रोक न सकी और राजेश को जोर से जकड़ ली। और चीखते हुए झड़ने लगी।

उसकी हाथ पैर कपकपाने लगे। और आंखो की पुतलियां पलट गईथी।

राजेश चोदना बंद कर दिया। और सुनीता की गालों को चाटने लगा।

कुछ देर बाद सुनीता होश में आई।

सुनीता _चल हो गया, अब उठो।

राजेश _ये क्या? अभी तो मेरा huwa नही है?

सुनीता _मैं जानती हूं, तेरा जल्दी होने वाला नही है। जब तक तू सामने वाली गाय को पांच बार झाड़ नही देता तू झड़ता नही है।

देखो अभी मार्केट जाना है? आने के बाद कर लेना।

राजेश _न, अभी और करना है।

सुनीता _अरे बाबा समझा कर।

राजेश _नही, पहले घोड़ी बनो, एक राउंड और करने दो, फिर।

सुनीता _तू बड़ा जिद्दी है,chut का दीवाना है।

सुनीता, बेड पे घोड़ी बन गई।

राजेश उसके पीछे गया, उसकी मस्त गोरे गोरे चूतड को चाटने लगा।

सुनीता फिर गर्म होने लगी।

सुनीता _अब देर न कर चल डाल दे अंदर।

राजेश ने अपना लंद को उसकी योनि में सेट कर एक जोर का धक्का मारा। लंद फच की आवाज़ करता huwa अंदर चला गया।

राजेश सुनीता की कमर को पकड़ कर धक्का लगाना शुरू कर दिया।

लंद थप थप की आवाज़ करता huwa boor में अंदर बाहर होने लगा।

तभी राजेश का मोबाइल बजा,,,

राजेश chudai में मग्न था।

सुनीता _अरे बेटा, किसका काल हैं देख तो सही,,,

राजेश ने देखा, उसके पापा का फोन था।

राजेश _मां पापा का फोन है। चोदते हुवे कहा,,,

सुनीता _आह उन,,,,, तुम्हारे पापा ने क्यू फोन किया,,, आह, थोड़ा आराम चोद,,, पूरा गर्भाशय को ठोक रहा है तेरा,,,

राजेश _मुझे क्या पता मां क्यू फोन किया है पापा,,, वह लगातार धक्का मारते हुवे कहा।

सुनीता _आह मां,, उन,, आह,,, अरे उठा ले फोन हो सकता है कुछ काम से लगाया हो।

और धक्के मारना बंद कर, नही टू तेरे बाप को पता चल जायेगा। तू उसकी बीबी को ठोक रहा है।

राजेश और जोर जोर से ठोकने लगा,,

राजेश _पता चलने दे, पापा को भी तो पता चले उसकी बीवी कितनी प्यासी है। जो काम उसे करना चाहिए वह उसका बेटा कर रहा है। बेटा अपना फर्ज निभा रहा है।

सुनीता _अब बस कर, और फोन उठा कर बात कर सांड कहीं का। इतना चोदने के बाद भी मन नही भरा तेरा।

राजेश धक्का मारना बंद कर देता है। और काल उठाया।

शेखर _अरे बेटा, तुम्हारी मां कहा है कब से फोन लगा रहा उठा नही रही।

राजेश _अरे पापा, मां तो यहीं है? कुछ काम था क्या?

शेखर _हां बेटा, अपनी मां को फोन देना।

राजेश _ठीक है पापा।

मां लो पापा से बात करो।

सुनीता _फोन लेकर, शेखर से बात करने लगी।

इधर राजेश धीरे धीरे लंद को boor में अंदर बाहर करने लगा।

सुनीता की चूची को मसलने लगा।

शेखर _अरे यार मैं कबसे तुम्हे फोन लगा रहा, रिंग जा रहा है पर तुम उठा नही रही।

सुनीता _ओ क्या है न जी, मेरा मोबाइल कीचन में चार्जिंग में लगा है। मैं अभी बेड रूम में हूं। तैयार हो रही थी। मार्केट जाने के लिए। अब राजेश का एग्जाम हो गया है न तो उसे भी अपने साथ मार्केट ले जा रही हूं। एग्जाम के बाद उसका भी माइंड फ्रेश हो जायेगा।

इधर राजेश थोड़ा तेज़ तेज़ चोदने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था। उसकी मां अपने पति से बात कर रही थी, ऐसे स्थिती में।

सुनीता _क्यू जी कुछ काम था क्या?

शेखर _अरे हां यार मैं कल एक नीली वाली फाइल लाया था न घर उसको मैं ऑफिस लाना भुल गया, बड़ा जरूरी फाइल है। आलमारी में ही होगी फाइल। तभी राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

सुनीता _उई मां,, अरे आराम से नही कर सकता थोड़ा धीरे कर।

शेखर _अरे क्या huwa सुनीता? तुम चीखी क्यू?

सुनीता _अब आपको क्या बताऊं जी, राजेश तो मेरे पीछे ही पड़ गया है। कह रहा है चलो फ़िल्म देखने चलते है! मैं मना कर रही तो, मुझे चिकोटी कांट रहा है।

शेखर _हसने लगा, अभी तक बचपना गया नही है। तभी राजेश एक और जोर का धक्का मारा।

सुनीता _फिर जोर से चीखी।

शेखर _अरे भाई चली जाओ न उसके साथ मूवी देखने। तुम भी घर में ही रहती हो, तुम्हारा भी घूमना फिरना हो जायेगा।

सुनीता _तुम तो जानते हो, मुझे मूवी देखना पसंद नही।

शेखर _अरे उसका मन रखने के लिए चली जाओ।

और हां, वो फाइल राजेश से, मेरे ऑफिस पहुंचा देना।

सुनीता _ठीक है जी।

शेखर _राजेश को फोन देना।

सुनीता ने राजेश को फोन दिया।

राजेश _हा पापा।

शेखर _अरे बेटा, तुम्हारी मां तुम्हे एक फाइल देगी उसे मेरे ऑफिस छोड़ देना।

राजेश _ठीक है पापा।

शेखर _और हां, मैने तुम्हारी मां से कह दिया है वह तुम्हारे साथ फ़िल्म देखने चली जाय।

राजेश _ थैंक यू पापा,वैसे पापा मुझे बहुत मजा आ रहा है? मां को चिकोटी काटने में।

शेखर _बेटा मेरे तरफ से एक और जोर का चिकोटी कांटो अपनी मां को।

राजेश _वो क्यू पापा?

शेखर _वो क्या है न तुम्हारी मां मुझपे हमेशा अपनी हुक्म चलाती रहती है। इसलिए मेरे तरफ से दो तीन और चिकोती कांटो।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश जोर जोर से सुनीता को चोदने लगा।

सुनीता _आ ओह उई मां, चीखने लगी।

राजेश _पापा सुना न मां की चीख।

शेखर हसने लगा,,,

हा बेटा,, ठीक है बेटा अब मैं फोन रखता हूं।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने अब चोदना बंद कर दिया।

सुनीता _बदमाश कहीं का, कितने जोर से धक्का मारा, कहीं तुम्हारे पापा को शक न हो गया हो, मेरी चीखे सुनकर।

राजेश _अरे मां पापा ने ही कहा, जोर से चिकोटि काटने।

सुनीता _अब बंद क्यू कर दिया।

राजेश _अब घर में नही, सिनेमा हाल में करेंगे।

सुनीता _क्या?

राजेश _आप ने ही तो पापा से कहा न हम फ़िल्म देखने जा रहे।

सुनीता _अरे बेटा मैने तो ऐसे ही कह दिया।

राजेश _मां पापा को कह दिया तो अब जाना ही पड़ेगा नही तो उसको सक हो जायेगा।

तुम्हारी चोरी पकड़ी जाएगी। मैं चिकोटी नही। खुदाई कर रहा था तुम्हारे कुंआ की।

सुनीता _अच्छा ठीक है, पर मैं सिनेमा हाल में कुछ करने नही दूंगी कह देती हूं।

राजेश _अच्छा ठीक है। अब चलो देखेंगे।

सुनीता और राजेश अपने अपने कपड़े ठीक किए और शेखर का फाइल लेकर पहले उसका बैंक गए।

बैंक में फाइल शेखर को देने के बाद वे टाकीज निकल गए।

कोइ नई फ़िल्म लगी थी। ज्यादा दर्शक नही थे।

राजेश ने बालकनी का टिकट लिया।

बालकनी में कुछ जोड़े और बैठे थे। मूवी देखने। राजेश और सुनीता पीछे वाली सीट पर बैठ गए।

मूवी शुरू huwa सिनेमा हाल का लाइट बंद कर दिया गया। हाल में अंधेरा होते ही।

कुछ लड़के लडकिया, चूमा चाटी करने लगे। शायद वे मजा करने ही गए थे।

सुनीता _बेटा ये लड़के लडकिया तो यहीं शुरू हो गए।

राजेश _अरे मां ये मूवी देखने नही मजा करने आए है।

आओ न हम भी मजा करते है। मूवी देखते हुवे मजा करने का भी एक अपना मजा है।

सुनीता _न बाबा, कहीं पकड़े गए तो, किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

सुनीता _अरे मां यहां कौन हमे पहचानता है, आओ ना बड़ा मज़ा आएगा।

राजेश ने सुनीता को उठा कर अपने गोद में बिठा लिया और उसकी चूची मसलने लगा।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है, कोई देख लेगा।

राजेश _अरे मां, सभी अपने में मस्त है।

राजेश ने सुनीता की ब्लाउज की बटन खोल दिया और चूची मसलने लगा।

थोड़े ही देर में दोनो गर्म होने लगे।

राजेश का लंद फिर से तन कर खड़ा हो चुका था। और सुनीता की boor फिर पानी छोड़ने लगी थी।

राजेश ने सुनीता को खड़ा किया और अपना पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल लिया सुनीता अपनी पेटीकोट और साड़ी ऊपर उठा दी, पेंटी तो आज पहनी ही नहीं थी।

सुनीता राजेश के लंद पर बैठ गई। लंद boor को फाड़ कर अंदर समा गया।

अब दोनो मूवी देखने लगे साथ में सुनीता थोड़ा ऊपर नीचे हो कर chud भी रही थी। दोनो को बहुत मजा आने लगा।

यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक सुनीता फिर से एक बार झड़ नही गई।

झड़ने के बाद सुनीता अपने सीट पर बैठ गई।

राजेश _अरे मां मेरा अभी huea नही है। आओ फिर से बैठो न।

सुनीता _न बाबा।

राजेश _ठीक है फिर थोड़ा चूस दो।

सुनीता झुक कर राजेश का लंद चूसने लगी।

वहा कुछ लडकिया भी अपने अपने बॉयफ्रेंड का चूस रही थी।

तभी इंटारवेल हो गया।

लाइट ऑन हो गया।

सुनीता सीधी होकर बैठ गई। राजेश के लंद के रपना पल्लू डाल दी।

राजेश ने अपना चैन लगा दिया।

सुनीता _मुझे मूवी नही देखनी, अब चलो यहां से।

वे दोनो सिनेमा हाल से बाहर आ गए।

एक अच्छे से होटल में जाकर लंच किए। फिर वे वहा से मार्केट चले गए, और समान खरीदने लगे।

सामान खरीदने के बाद वे घर आ गए।

शाम के 4बज चुके थे, स्वीटी भी घर आ गई।

रात में भोजन करने के बाद, सभी अपने अपने कमरे में आराम करने लगे।

राजेश को नींद नही आ रहा था, वह झड़ा नहीं था।

उसने सुनीता को मेसेज किया।

राजेश _मां सो गई क्या?

सुनीता, सोई नही थी!

उसने देखा _राजेश का मेसेज है। उसने भी मेसेज कि।

सुनीता _अरे तू अभी तक सोया नही। 10बज चुके है, सो जाओ।

राजेश _अरे मां मुझे नींद नही आ रही।

सुनीता _क्यू?

राजेश _मेरा पप्पू मुझे परेशान कर रहा है?

वो अभी तक झड़ा नहीं है न इसलिए, मां आओ न।

सुनीता _न बाबा, घर में स्वीटी और तुम्हारे पापा है कोइ उठ गया तो।

राजेश _ठीक है फिर मैं रात भर जागता रहूंगा, आप सो जाओ।

सुनीता कुछ देर बाद अपनी बेड से उठी उसने देखा शेखर घोड़े बेच के सो रहा है। वह दबे पांव रूम से निकली और राजेश के कमरे मे घुस गई।

राजेश अपना लंद सहला रहा था वह नंगा ही सोया huea था।

राजेश _मां तुम, आप तो नही आने वाली थी।

सुनीता _अच्छा तो चली जाऊ क्या?

राजेश _अरे न बाबा। अच्छा की आ गई तो देखो, अभी तक अकड़ा हुआ है।

सुनीता दरवाजा बंद की और बेड पर बैठ गई।

फिर राजेश का लंद मुंह में लेकर चूसने लगी।

अपनी नाइटी उतार कर नंगी हो गई। और राजेश के लंद पर बैठ कर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने सुनीता को अलग अलग आसनों में दो घंटे तक चोदा और उसका गाड़ भी मारा।

राजेश _मां, कहा छोड़ूं।

सुनीता _बेटा आज अंदर ही छोड़ो, मैं तुम्हारा पानी अंदर महसूस करना चाहती हूं।

राजेश _कहीं फिर से पेट से हो गई तो।

सुनीता _अरे मैंने आज गर्भनिरोधक गोली खाई है।

राजेश सुनीता को घोड़ी बना कर जोर जोर से धक्का मारते हुवे झड़ने लगा।

झड़ने के बाद दोनो एक दूसरे से लिपट कर सो गए

राजेश के सोने के बाद सुनीता उठी और अपनी नाइटी पहनी।

फिर राजेश को चादर ओढ़ा कर उसकी माथा चूमी।

राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में जाकर सो गई।

सुबह राजेश उठते फ्रेस huwa और कीचन में गया।

सुनीता कीचन में थी।

वह पीछे से राजेश सुनीता को बाहों में भर लिया।

सुनीता _अरे क्या कर रहा है छोड़ ना।

कोइ आ जायेगा।

राजेश _मां प्रिया दीदी फोन लगाई थी। कह रही थी तू शहर आया है और अब तक मुझसे मिलने नही आए। वो मुझसे नाराज है।

आज प्रिया दीदी के घर चलना है वैसे भी हम कल गांव चले जायेंगे।

सुनीता _ठीक है। प्रिया दीदी से कह देना हम 11बजे आयेंगे, वो घर में ही रहे।

राजेश _ठीक है मां, अच्छा मां मैं थोड़ा टहल के आता हूं।

सुनीता _अच्छा ठीक है। जल्दी आना।
 
शुक्रिया आप सभी मित्रों का
 
शेखर के ऑफिस और स्वीटी के कालेज चले जाने के बाद। राजेश और सुनीता दोनो प्रिया के घर जाने के लिए तैयार हो गए।

राजेश _अरे मां और कितना समय लगेगा तैयार होने में, जल्दी करो।

सुनीता _अभी आई।

सुनीता जब तैयार होकर अपने कमरे से निकली।

राजेश देखता रह गया।

सुनीता _ऐसे क्यू घूर रहा है?

राजेश _आज फिर किसी पे बिजली गिराने का इरादा है क्या?

सुनीता _क्यू, ऐसा क्यू पुछ रहा है?

राजेश ने सुनीता की हाथ पकड़ा और खींचकर अपनी बाहों में जकड़ लिया।

सुनीता _अरे, छोड़ ने क्या कर रहा है? कल इतना किए फिर भी मन नही भरा है क्या?

राजेश _पहले ये बताओ, किसके लिए इतनी सजी संवरी हो।

सुनीता _है मेरा एक आशिक।

राजेश _कौन है, जरा मैं भी तो जानू?

सुनीता _है एक आवारा, जो आजकल देवदास बना फिरता है।

राजेश _हूं, तो उस आवारा को अपनी काबू में करने के लिए, ये जलवा दिखा रही हो।

सुनीता _अब जो भी समझो।

राजेश ने सुनीता की खुली पीठ चूमने लगा।

सुनीता सिसक उठी।

सुनीता _क्या कर रहा है, मत कर न।

राजेश _आवारा अपनी आवारगी कर रहा है, और क्या?

सुनीता नही, बाबा अभी नहीं, 11बज चुका है, प्रिया राह देख रही होगी, अब चलो।

राजेश _मां , आओ न एक राउंड करते हैं। बड़ी मस्त लग रही हो। रहा नही जा रहा।

सुनीता _अरे न, जो भी करना है रात में कर लेना। चलो अब।

राजेश अपना लंद मसलता रह जाता है।

सुनीता मुस्कुराने लगती है।

दोनो प्रिया के घर के लिए बाइक से निकल पड़ते हैं।

दोनो कुछ ही देर में प्रिया के घर पहुंच जाते हैं।

दरवाजा का बेल बजते ही।

प्रिया अपने बच्चे को झूला झुला रही थी।

प्रिया _लगता है बुआ और राजेश आ गया। वह खुश होती हुई। दरवाजा खोलने गई।

राजेश _हाय दीदी। राजेश ने प्रिया को पैरो को पकड़ कर ऊपर उठा दिया।

प्रिया _अरे, छोड़ो बदमाश क्या कर रहा है?

प्रिया, राजेश के सीने में मुक्के मारते हुवे कहा।

मुझे नीचे उतारो।

राजेश ने प्रिया को नीचे उतारा।

प्रिया _मुझे तुमसे बात नहीं करनी है?

राजेश _ओह तो दीदी मुझसे नाराज है।

प्रिया ने सुनीता की पैर छूते हुए कहा।

प्रिया _प्रणाम बुआ।

सुनीता _खुश रह बेटी।

घर में प्रिया और नौकारानी ही थी, पिंकी स्कूल गई थी और संजय हॉस्पिटल।

अभी प्रिया हॉस्पिटल नही जा रही थी बच्चे को जन्म दिए अभी एक माह नही huwa था।

राजेश _दीदी, कैसी हो?

राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों में भरते हुवे कहा। तुम तो पहले से और भी ज्यादा निखर गई हो।

प्रिया _छोड़ो मुझे, तुमसे मुझे कोइ बात नही करनी है।

राजेश _ओ हो दीदी, अब नाराजगी छोड़ो भी।

प्रिया _पहले ये बता कितने दिन हो गए, पूरे 6माह, दीदी की याद नही आती तुम्हे।

राजेश _सॉरी दीदी, प्लीज मुझे माफ कर दो, देखो तुम्हारा इस तरह रूठना, मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।

सुनीता _अरे, बेटी माफ कर दो अपने छोटे भाई को।

प्रिया _सिर्फ एक शर्त पर।

राजेश _कैसी शर्त दीदी?

प्रिया _सब जब भी तू शहर आएगा, पहले मुझसे मिलने आएगा।

राजेश _बस इतनी सी बात। लो वादा कार्य हूं अपनी दीदी से।

प्रिया खुश हो गई।

राजेश _दीदी, हमे, भांजे से नही मिलावोगी।

प्रिया _भांज या बेटा।

प्रिया और सुनीता दोनो हसने लगे।

प्रिया _आओ, मिलाती हूं, तुम्हारे बेटे से। हंसते हुए बोली।

बच्चा पालने में सोया था।

प्रिया _देखो, बिल्कुल तुम पर ही गया है। जब तुम बच्चे थे बिल्कुल ऐसे ही दिखते थे। क्यू बुवा?

सुनीता _मुंह बंद कार हसने लगी।

राजेश _दीदी मैं इस उठा कर पा लू।

सुनीता _अरे बेटा, इसे सोने दे अभी, जब उठेगा, तब पा लेना।

प्रिया _कहो तो उठा देती हूं, बाबू देखो तो कौन आया है? तेरा पापा।

सुनीता _अरे बेटी सोने दे ना, वैसे भी अभी हम जा थोड़े ही रहे हैं। कहीं रोने न लगे।

राजेश _हा दीदी, सोने दो मुन्ने को।

प्रिया _राजेश तू मेरे पास बैठ, मुझे तुमसे ढेर सारी बाते करनी है।

राजेश _क्या बाते दीदी?

प्रिया _पहले ये बता, तेरा एग्जाम कैसा गया?

राजेश _बहुत अच्छा दीदी।

प्रिया _बुआ, तेरी सारी खबर मुझे देती रहती है। बच्चू , तू , रात में शराब पीकर आया था, तुम्हे होश भी नहीं था।

राजेश _ये क्या मां, आप दीदी को सब बता दी।

सुनीता _क्यू? नही बताना था, तुम्हारी करतूत, कैसे तू उस मां बेटी के चक्कर में देवदास बना फिरता है?

प्रिया _राजेश, जब निशा को तुम्हारी परवाह नहीं है, फिर क्यू उन लोगो के लिए ऐसी हरकत करते हो, जिससे मां बाप को शर्मिंदा होना पड़े।

मैं तो कहती हूं, भुल जा उन लोगो को और अपने लिए कोइ नई लड़की दिख ले।

दुनियां में लड़की की कमी थोड़े ही है।

प्रिया _दीदी ये आप कह रही हो। आपने भी तो लव मैरिज किया है न ! और आप तो कहती थीं न, निशा मुझसे बहुत प्यार करती है, वो जरूर आएगी लौट के।

प्रिया _, हूं, पहली तो यहीं लगता था, पर इतने दिनो तक वह तुम्हे एक काल भी नहीं की, इससे तो लगता है वह तुम्हे भुल गई।

अब तुम भी उसे भुल कर अपने लिए नई ढूंढ लो, यही ठीक रहेगा।

राजेश _दीदी, अब ढूंढना क्या ,जो किस्मत में लिखी होगी, वो मिल ही जाएगी।

अब मैं ये प्यार, व्यार के चक्कर में नही पड़ूंगा। दिल को बहुत तकलीफ होती है।

प्रिया _अच्छा ठीक है? मैं और बुवा मिलकर तेरे लिए एक अच्छी सी लड़की ढूंढेंगे।

कैसी लड़की चाहिए, तुम्हें।

राजेश _जो आप दोनो को पसंद हो, मुझे भी पसन्द होगा। आप लोगो पर मुझे पूरा भरोसा है।

तभी प्रिया ने नौकारानी को आवाज़ लगाया और कॉफी बनाने के लिए बोली।

प्रिया _अच्छा ये बता, तू वहा गांव में आखिर इतने दिनो तक कैसे रह गया?

बुवा का कहना है कि वहा कोइ सुविधा नही।

राजेश _दीदी, जब वहा के लोग बिना सुविधा के रह सकते है तो मैं क्यू नही?

वैसे कल मां और पापा भी मेरे साथ गांव जा रहे है?

चलो आप भी।

प्रिया _काश जा पाती। पिंकी का स्कूल। हॉस्पिटल। और अब तो मुन्ना भी आ गया।

तभी नौकारानी कॉफी लेकर आ गई।

प्रिया ने नौकारानी से मेहमानों के लिए खाना बनाने के लिए कहा,,,, नौकारानी कीचन में चली गई,,

इधर

सभी कॉफी पीने लगे।

काफी पीने के बाद, आपस में तीनो बात चीत कर ही रहे थे, तभी बच्चा रोने लगा।

सुनीता _लगता है मुन्ने को भूख लगी है।

सुनीता ने मुन्ने को गोद में उठा कर, उसे पुचकारने लगी,,

सुनीता _अ ले, अ ले,, बेटू को भूख लगी है,,,, बेटू दूदू पिएगा,,,,

प्रिया _बुआ मुझे दो बेटू को, दूध पिला देती हूं।

सुनीता ने,,, बच्चे को प्रिया को दे दिया,,,

प्रिया ने बच्चे को गोद में ली लिया, और अपनी ब्लाउज का बटन खोल के चूची बाहर निकाल लिया।

दूध से भरे सुडौल, एवम भारी चूची देख कर राजेश की नजर वही अटक गया।

जब सुनीता ने राजेश को प्रिया की चूची ताड़ते हुवे देखा।

सुनीता _क्या देख रहा है re

राजेश _हड़बड़ा, गया। कुछ भी तो नहीं?

प्रिया _क्या huwa बुवा?

सुनीता _ये सच में बड़ा बदमाश हो गया है, ये तुम्हारी चूची को घूर रहा था।

प्रिया _क्यू, राजेश, क्यू ताड़ रहा था मेरी चूची को।

तुम्हे भी पीना है क्या? हस्ते हुए बोली।

राजेश, सुनीता की ओर देखने लगा।

सुनीता _अब मेरे तरफ क्या देख रहा है?

पीने का मन हो तो पिलो अपनी दीदी का दूदू।

प्रिया और सुनीता हसने लगे।

राजेश _हां, मुझे भी पीना है, दूदू।

सुनीता _क्या, सच में पीना चाहता है?

राजेश _दीदी, पिलाएगी तो पी लूंगा।

सुनीता _तू सच में एकदम बिगड़ गया है। आवारा बन गया है।

प्रिया, ने अपनी दूसरी चूची भी बाहर निकाल लिया,

ले आजा पी ले अपनी दीदी का दूध।

सुनीता _प्रिया, ये क्या कर रही है? नौकरानी आ गई तो क्या समझेगी?

प्रिया _ओह मैं तो भुल ही गई थी।

राजेश चलो मेरे कमरे में, पता नही तू फिर कब आएगा। कर ले अपनी इच्छा पूरी।

प्रिया बच्चे को लेकर, अपने कमरे में चली गई। पीछे पीछे सुनीता और राजेश भी चला गया।

प्रिया बेड में बैठ कर एक चूची मुन्ने को पिलाने लगी।

प्रिया _आजा तू भी, बाप और बेटे दोनो साथ में पिलो दूदू, सुनीता और प्रिया हंसने लगे।

राजेश बेड में लेट गया और अपना सिर प्रिया की गोद में रख कर। उसकी दूसरी चूची मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दिया।

सुनीता खड़ी खड़ी देखने लगी।

सुनीता _ये तो गटक गटक कर पी रहा है बिल्कुल बच्चो की तरह।

प्रिया _बुवा मुझे लगता है, इसे दूध पीने का अनुभव है। बिल्कुल अनुभवी बच्चे की तरह पी रहा है।

सुनीता _कहीं ये गांव में किसी का दूध तो नहीं पीता।

आवारा कहीं बता, तू इस तरह से पीना कहा से सीखा। किसका दूध पीता है तू गांव में,

राजेश _मां, मैं किसका दूध पियूंगा, वहा आप भी ना बड़ी शक्की हो।

सुनीता _अच्छा फिर मेरी कसम खा के बोल, तू सच कह रहा है।

राजेश _मां, तुम भी न एकदम पीछे ही पड़ जाती हो



प्रिया _अरे सच क्या है बता दे, क्यू छुपा रहा है अपनी मां और दीदी से।

राजेश _भाभी का,,

सुनीता _क्या? पुनम का।

राजेश _हूं, दूध चूसते हुए बोला।

सुनीता _लो, ये गांव में भी गुल खिलाने लगा।

किसी को पता चल गया न, तो वहा किसी को हम मुंह दिखा नही सकेंगे।

राजेश _दीदी आपका दूध तो पुनम भाभी के दूध से ज्यादा स्वादिष्ट और मीठा है।

सुनीता _अब तो मुझे गांव जाना ही पड़ेगा, मैं भी तो जानू वहा क्या क्या गुल खिला रहा है ये।

राजेश _इसमें मेरी क्या गलती है? औरते ही मेरे पीछे पागल हो जाती हैं तो मैं क्या करूं?

सुनीता _हा हा, तू तो बड़ा शरीफ है, तू औरतों को मना नहीं कर सकता था?

प्रिया _बुवा, अभी उम्र ही राजेश का खेलने खाने का है। अब औरत खुद ही लाइन देगी तो, मर्द करेगा क्या?

वैसे तो हमारा राजेश बड़ा शरीफ है। क्यू राजेश?

राजेश _हां दीदी।

तभी सुनीता की नजर राजेश के पैंट पर गया।

उसका लंद खड़ा हो चुका था।

पैंट में उभार देख कर सुनीता बोली।

सुनीता _लो देख लो, कितना शरीफ है ये?

प्रिया, को आंखो में इशारा करके बोली।

प्रिया, राजेश के पैंट की ओर देखी,, और मुस्कुराने लगी।

सुनीता _इसका तो, अपनी दीदी का दूदू देखकर ही खड़ा हो गया ।

अपनी भाभी को क्या छोड़ेगा?

राजेश _मैने थोड़े ही किया है, ये तो अपने आप ही हो गया, मैं क्या करूं?

प्रिया हंसने लगी,,

प्रिया _अरे दर्द कर रहा होगा! आज़ाद कर दे इसे।

राजेश ने अपना पैंट का बटन खोल कर, चड्डी खिसका कर अपना लंद बाहर निकाल लिया।

लंद हवा में ठुमकने लगा।

सुनीता _देखो तो कैसे झटके मार रहा है?

प्रिया मुस्कुराते हुवे, एक हाथ से राजेश का लंद सहलाने लगी।

राजेश के दूध पीने से वह भी बहुत गर्म हो गई थी।

प्रिया _बुवा, लगता है इसके घोड़े को भी भूख लगी है?

सुनीता _तो क्या इसे अपने कुवे का पानी पिलाएगी।

प्रिया _राजेश कितने दिन बाद आया है? अब इसकी प्यास तो बुझानी ही पड़ेगी।

सुनीता _प्रिया तू भी न इसे और बिगाड़ रही है।

राजेश _दीदी थोड़ा मुंह में लेकर प्यार करो न।

प्रिया झुक गई और राजेश का लंद मुंह मे भर कर चूसने लगी।

सुनीता, वही पर सिर पकड़ कर बैठ गई।

जैसा भाई वैसा बहन।

कुछ देर लंद चूसने के बाद।

प्रिया करवट लेकर लेट गई। राजेश उसके पीछे लेट गया।

और प्रिया की चड्डी उतार दिया। फिर पीछे से लंद उसकी योनि में सेट कर गच से पेल दिया।

योनि एकदम गीली थी, लंद सरसराता huwa अंदर चला गया।

राजेश अब एक हाथ से प्रिया की चूची मसल रहा था और कमर हिला हिला कर।

लंद को उसकी boor में अंदर बाहर करने लगा।

प्रिया के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

कुछ देर बाद,,

राजेश _मां, अब देखते ही रहोगी या कुछ करोगी भी।

सुनीता _मैं क्या करू?

राजेश ने योनि से लंद को बाहर निकाल लिया।

राजेश _लो थोड़ा चूसो इसे।

प्रिया मुस्कुराने लगी।

सुनीता _चल हट बेशरम, खुद तो बेशरम है मुझे भी बेशरम बनने बोल रही हो।

प्रिया _अरे बुवा, कर दो न इसकी इच्छा पूरी।

सुनीता _न बाबा, मैं नही करती।

राजेश _ठीक है, मैं आज शाम सुजाता के घर जाऊंगा, उसे मनाने।

सुनीता _खबरदार जो उसके घर गया तो।

राजेश _फिर आओ।

सुनीता _बेशरम, मां को ब्लैक मेल करता है!

सुनीता बेड पर बैठ गई और राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी।

प्रिया मुस्कुराने लगी।

कुछ देर लंद चूसने के बाद, लंद को अपने हाथो से प्रिया की योनि में सेट कर दी।

राजेश फिर से प्रिया को चोदना शुरू कर दिया।

इधर मुन्ना दूध पीते पीते सो गया।

सुनीता ने बच्चे को अपने गोद में उठा लिया और नीचे पलना में लिटा दिया।

अब राजेश बेड से उतर गया और प्रिया को घोड़ी बना दिया और लंद boor में डालकर चोदना शुरू कर दिया।

कमरे में प्रिया की मादक सिसकारी और थप थप की आवाज़ गूंजने लगा।

राजेश ने अपना लंद बाहर निकाल लिया।

और सुनीता की ओर घूम गया।

सुनीता, राजेश के लंद को फिर से मुंह में भर कर गप गप चूसने लगी।

राजेश प्यार से उसकी बाल को सहलाने लगी और एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा।

सुनीता भी गर्म हो गई।

कुछ देर लंद चूसने के बाद सुनीता ने राजेश के लंद को पकड़ कर फिर से प्रिया की योनि में सेट कर दिया।

राजेश फिर से प्रिया को चोदना शुरू कर दिया।

प्रिया को बहुत मजा आ रहा था वह ज्यादा देर खुद को रोक न सकी और झड़ने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर दिया अपना लंद बाहर निकाल लिया।

उसका लंद प्रिया की boor का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।

राजेश _मां चलो लेट जाओ।

सुनीता _न बाबा।

राजेश _ठीक है फिर सुजाता के घर जाना ही पड़ेगा।

सुनीता ने राजेश की ओर गुस्से से देखा और बेड किनारे लेट गई।

राजेश ने उसकी पेंटी उतारी और उसकी chut को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता की मादक सिसकारी कमरे में गूंजने लगा।

राजेश देर न करते हुए अपना लंद सुनीता की योनि में सेट कर गप से पेल दिया, लंद boor चीर कर अंदर समा गया।

राजेश सुनीता की ब्लाउज का बटन खोल दिया और उसकी चूची मसलने लगा। और chut पे धक्के मारने लगा।

सुनीता के मुंह से, आह उन,, उई मां,, आई,

निकलने लगा। उसकी चूड़ी खनकने लगी।

सुनीता को इसी पोजीशन में तब तक चोदता रहा जब तक वह झड़ ना गई।

सुनीता के झड़ने के बाद राजेश प्रिया की boor में अपना लंद डालकर gach गच चोदने लगा।

इस प्रकार अलग अलग आसनों में सुनीता और प्रिया को 2घंटे तक चोदता रहा और अन्त में प्रिया की boor में अपना सारा पानी छोड़ दिया।

तीनो। राजेश बेड में लेट गया। दोनो औरते उसकी आजू बाजू भुजाओं में सिर रख कर सुस्ताने लगी।

कुछ देर सुस्ताने के बाद,,,

सुनीता_अरे अब उठो काफी समय हो गया।

प्रिया_नौकरानी ने खाना बना ली होगी। हाथ मुंह धोकर फ्रेस हो जाओ, फिर भोजन करेंगे।

तीनो बेड से उठ कर बाथरुम में फ्रेस हुए और अपने अपने कपड़े पहनने लगे। तीनो chudai करते करते कब नंगे हो गए थे उन्हे पता ही नही चलाकपड़े पहनने के बाद तीनो हाल में आ गए। प्रिया ने नौक्रानी को भोजन लगाने कहा भोजन करने के बाद राजेश और सुनीता कुछ देर और रुक, फिर वहा से घर के लिए निकल पड़े।

कुछ देर बाद स्वीटी भी कालेज से आ गई।

राजेश शाम को भगत से मिलने चला गया ।

और भोजन के समय घर आ गया।

डाइनिंग टेबल में सभी भोजन करते हुए कल सुबह गांव के लिए निकलने के बारे में बातचीत करने लगे।

भोजन करने के बाद सभी अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

सुनीता कीचन का काम निपटाने के बाद अपने बेड पर आराम करने लगी।

कुछ देर बाद राजेश ने मेसेज किया।

राजेश_मां, सो गई क्या?

सुनीता_तू अब तक सोया नही।

राजेश_न, आपका वेट कर रहा हूं।

सुनीता_क्यू? दोपहर में इतना करने के बाद भी मन नही भरा है क्या?

राजेश_न, जितना करो, और करने का मन करता है, मन भरता ही नहीं। आओ न।

सुनीता_थोड़े देर बाद आऊंगी। लगता है तुम्हारे पापा का नींद अभी ठीक से लगा नही है।

राजेश सुनीता के आने का इन्तजार करने लगा।

करीब आधा घंटा बाद वह राजेश के कमरे में आई।

राजेश ने 2घंटे तक फिर जमकर चोदा और अपना पानी उसकी boor में भर दिया।

दोनो थक कर एक दूसरे के बाहों में सो गए। कुछ देर बाद सुनीता उठी और रअपना कपड़ा पहन कर, राजेश को प्यार से उसके माथे को चूम कर उसके कमरे से चली गई।,
 
शुक्रिया आप सभी मित्रो का सपोर्ट के लिए।
 
अगले दिन सुबह वे गांव जाने के लिए, रेलवे स्टेशन पहुंचे। प्रातः 8बजे की ट्रैन थी।

समय पर ट्रैन छूटी। काफी दिनों बाद चारो साथ में ट्रैन में सफर कर रहे थे। स्वीटी तो काफी उत्साहित थी। वह खिड़की के पास बैठ गई। बाहर का नजारा देखने लगी और अपनी मां और पापा को भी मनोरम दृश्य दिखाने लगी।

बीच बीच में स्टेशन आता, राजेश स्टेशन में उतर कर खाने पीने का सामान ले आता। इस प्रकार ट्रैन में सफर करते कब सुबह से शाम हो गया उन्हे पता ही नही चला।

राजेश ने भुवन को फोन कर बता दिया था कि वे शाम 6बजे तक गांव पहुंच जायेंगे।

भुवन समय पर पहुंच गया। अब एक बाइक पर पांच लोग तो बैठ नही सकते थे।

तो टाटा मैजिक चलाने वाले से बात कर ली थी की 4लोगो को सुरज पुर ले जाना है।

शाम 6बजे ट्रैन लक्ष्मण पुर स्टेशन पहुंच गई।

ट्रैन से उतरते ही भगत समान उठाने के लिए दौड़ पड़ा।

शेखर _बेटा कोइ आया है कि नही हमे लेने।

राजेश _पापा, मैने भगत भैया से कह दिया था हम 6बजे पहुंच जायेंगे।

ओ देखो, दौड़ता हुवा, आ रहा है।

भुवन उनके पास पहुंचा।

भुवन _पाए लागू चाचा जी।

शेखर _जीता रह बेटा।

भुवन _पाए लागू चाची।

पहचाना मुझे, मैं भगत।

सुनीता _जीता रह re, कैसे पहचानूंगी re तुझे, तू २साल का था। जब मैं गांव से गई थी। तुम्हारे चाचा तो तुम लोगो की शादी में आए थे। इस लिए तुम्हे पहचान गए।

स्वीटी _नमस्ते भगत भैया।

भुवन_अरे तुम स्वीटी हो न।

स्वीटी _जी, भैया।

भुवन _बड़ी प्यारी हो,।

राजेश _भैया, यहां से गांव जाने के लिए कोइ वाहन की व्यवस्था किया है कि नही।

भुवन_अरे छोटे, मैने टाटा मैजिक वाले से बात कर लिया है। स्टेशन के बाहर खड़ी है।

राजेश _ये अच्छा किया आपने।

भुवन और राजेश, सारे बैग दोनो उठा लिए और वाहन के पास पहुंचे।

टाटा मैजिक पे सारे बैग रख दिए स्वीटी, सुनीता और शेखर टाटा मैजिक पर बैठ गए। राजेश और भुवन बाइक से निकल पड़े।

राजेश और भुवन आगे आगे, टाटा मैजिक पीछे पीछे चलने लगा।

आधे घण्टे में ही वे घर पहुंच गए।

घर वाले बड़ी बेशब्री से इन्तजार कर रहे थे।

जैसे ही वाहन घर के पास पहुंचा। आस पास वाले घरों से निकल पड़े और सुनीता को जानने वालो ने उसे घेर लिया।

सुनीता _अरे काकी कैसी हो?

काकी _अरे बहु, कितने दिन बाद तुम्हे गांव की याद आई। तुम्हे देखने के लिए हमारी आंखे तरस गई थी। वह रोते हुए बोली।

सुनीता _बस तुम लोगो की यादें ही मुझे यहां खीच लाई।

घर के दरवाज़े पर पदमा खड़ी थी।

सुनीता _पैर छूते हुए।

कैसी हो दीदी?

पदमा _मुझे तुमसे बात नहीं करनी है। ऐसा भी कोइ जाता है क्या? तुम्हे याद नही आई। कितने सालो बाद आ रही है। वह गले लगा कर फुट फुट कर रोने लगी।

सुनीता _मुझे माफ कर दो दीदी, मैं मजबूर थी।

शेखर केशव प्रसाद का पाव छूते हुए बोला, कैसे है आप भैया?

केशव _मैं ठीक हूं शेखर तू कैसा है?

शेखर _मैं भी ठीक हूं, भैया।

इधर गांव में हल्ला हो गया की सुनीता आई है।

इस बात की जानकारी माधव को huwa।

माधव ने सविता के पास जाकर कहा,,

अरे सुनती हो!

सविता _अरे क्या हुआ जी, बड़े खुश लग रहे हो।

माधव _लोग बता रहे है कि शहर से भैया भाभी गांव आए है।

सविता _ये तो बड़ी खुशी की बात है। मैने तो मंझली दीदी को अब तक देखा ही नहीं, मुझे भी उससे मिलने की बड़ी इच्छा है।

माधव _अरे चलो फिर भैया के घर चलते हैं उनसे मिलने।

सविता _हां हा क्यू नही? रुको थोड़ा तैयार हो लू। फिर चलते है।

इधर सभी बैग राजेश के कमरे मे रखवा दिया गया, खाट और कुर्सी लगाकर सभी लोग आंगन में ही बैठ गए।

पदमा, परिवार के सभी सदस्यों का सुनीता को परिचय करा रही थी।

पदमा _सुनीता, इसे पहचानो कौन है?

सुनीता _ये, ज्योति जैसी लग रही है?

पदमा _बिल्कुल सही पहचानी, तू जब गई थी तो 4साल की थी।

ज्योति पैर छूते हुवे बोली, चाची आपने मुझे पहचान लिया।

सुनीता _अरे तुम्हे कैसी भुल सकती हूं, अपने प्यारी सी गुड़िया को।

पदमा _सुनीता तुम्हे पता नही है, तुम्हारे जाने के बाद, ज्योति कई दिनों तक ठीक से खाना नही खाई, वह हमेशा रोती रहती, कहती चाची के पास जाना है। पता नही क्या जादू कर दिया था तुमने बच्चो पर।

काफी दिनों बाद संभली।

ज्योति _ये मेरी बेटी मुन्नी है। 4साल की हो गई है।

सुनीता ने मुन्नी को गोद में उठा लिया ये तो बिल्कुल तुम पर गई है। बिल्कुल ऐसी ही लगती थी जब तू छोटी थी।

पदमा _सुनीता, ये है मेरी छोटी बेटी, आरती। इनसे तो पहली बार मिल रही हो। जब तुम गई तो ये पैदा भी नही हुई थी।

आरती _प्रमाण चाची।

सुनीता _जी रह बेटी, तू तो बड़ी प्यारी है। अभी क्या कर रही हैं?

पदमा _इसकी शादी के लिए एक अच्छे लड़के की तलास कर रहे हैं। कोइ अच्छा लडका मिल जाए तो, इसके भी हाथ पीले कर दे। 20की हो गई है।

आरती _मां मुझे शादी नही करनी है, जब देखो मेरी शादी की बात ही करती हो।

सुनीता _क्यू शादी नही करनी चाहती, जरा मैं भी तो जानू।

पदमा _अरे सुनीता, अभी अभी तू आई है, इस लड़की की फालतू बातें सुन के क्या करेगी, बाद में जान लेना और इसे समझा भी देना। शादी कितनी जरूरी है।

तभी पुनम सबके लिए चाय बनाकर लाई।

पदमा _सुनीता, इससे मिलो, भगत की लुगाई। पुनम।

पुनम ने चाय पदमा को पकड़ा कर पहले बड़ो का पैर छुई।

सुनीता _जी ती रह बहु।

अरे दीदी, बहु तो बड़ी सुंदर लाई हो, एकदम चांद का टुकड़ा है बहु।

पुनम शर्मा गई।

सुनीता ने पुनम को गौर से देखा फिर उसका ध्यान उसके बड़े बड़े उरेजो पर गया।

यहीं है पूनम जिसका दूध नालायक पीता है। काफी बड़े बड़े चूचे है इसकी, काफी दूध भरा है इसमें लगता है, सुनीता अपने आप से बोली।

पदमा _अरे सुनीता कहा खो गई, लो चाय लो।

सुनीता _मैं तो बहु की सुंदरता में खो गई थी, सच में बड़ी सुंदर है बहु।

सुनीता ने राजेश की ओर देखा। राजेश समझ गया मां क्यू देख रही है। वह अपना सिर नीचे कर लिया।

सुनीता _अरे दीदी, मैने अपनी बेटी का परिचय तो तुम लोगो से कराया नही।

ये है स्वीटी, मेरी बेटी, अभी कालेज कर रही है। प्रणाम करो बेटी सबका।

स्वीटी सबका पैर छूकर प्रणाम करने लगी।

पदमा _अरे सुनीता, स्वीटी तो तुम पर ही गई है। बड़ी खूबसूरत है।

सुनीता _अरे दीदी, राजेश बता रहा था, माधव ने अलग घर बना लिया है।

पदमा _हां, सुनीता वे अपने नए घर में ही रहते है। छोटी सी बात को लेकर खटपट हो गई, तो वे अलग घर बना कर रहने लगे।

अब जाने वाले को रोका तो नही जा सकता, ओ जहां भी रहे खुश रहे, मैं तो भगवान से बस यहीं प्रार्थना करती हूं।

सुनीता _अरे राजेश बेटा वो बड़ा वाला बैग लेके आना।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता _दीदी, ये शैतान, यहाँ ठीक से तो रहता है न, ये तुम लोगो को परेशान तो नही करता है।

पदमा _सुनीता, तुम्हे पता नही है, राजेश ने गांव वालो की कितनी मदद कर रहा है। लोग तो राजेश को कोइ फरिश्ता मानते हैं।

सुनीता _अच्छा ऐसा क्या कर दिया इसने।

पदमा _अरे इसने क्या नही किया है कोइ एक काम हो तो बताऊं। ये जबसे आया है गांव वालो की समस्या का समाधान कर रहा है।

इसे गांव का सलाहकार बनाया गया है।

शेखर, अपना मूंछ ऐंठते हुवे कहा। आखिर बेटा किसका है?

सभी लोग हसने लगे।

राजेश _लो मां बैग।

सुनीता ने बैग से समान निकाल कर सबको देने लगे, जो शहर से सब के लिए लाए थे।

सुनीता _दी दी, ये साड़ी तुम्हारे लिए।

पदमा _अरे सुनीता, इसकी क्या जरूरत थी।

सुनीता ने सभी के लिए कुछ न कुछ तोफा लाया था, तोफ़ा, पाकर सभी लोग खुश हो गए।

तभी माधव और सविता भी वहा पहुंच गए।

पदमा _लो माधव भी आ गया।

माधव _पाए लागू भैया।

शेखर _अरे खुश रह माधव कैसा है?

माधव _अच्छा हूं भैया।

पाए लागू भाभी ।

सुनीता _सदा खुश रहो देवर जी। अरे माधव, तू तो पहले से काफी मोटा हो गया है re,

राजेश _, मां, चाचा रोज, चाची की हाथो से बना स्वादिष्ट व्यंजन जो खाता है। चाची पाककला में निपुण है।

माधव _भाभी इनसे मिलो, आपकी देवरानी है। सविता ।

सविता _पाए लागू दीदी।

सुनीता _जीती रह। अरे माधव तुमने तो बड़ी सुंदर दुल्हन लाई है। सुना है तुम गांव की सरपंच हो।

सविता _ये तो गांव वालो की मेहरबानी है, दीदी।

सुनीता _और बच्चे दिखाई नहीं दे रहे।

सविता _दोनो बच्चे अपने मामा जी कै घर रहते है दीदी। वही शहर के स्कूल में मैने दाखिला करा दिया है। गांव में तो पढ़ाई का कोइ माहौल ही नही था। न पर्याप्त शिक्षक।

सुनीता _ओह।

सुनीता ने बैग से एक साड़ी निकालकर, सविता को दी।

सविता _लो ये तुम्हारे लिए।

सविता _दीदी इसकी क्या जरूरत थी।

सुनीता _भई पहली बार, मैं अपनी देवर की दुल्हन को देख रही हूं। मुंह दिखाई समझ लो।

लो माधव ये तुम्हारे लिए।

माधव _भाभी, आपने मेरे लिए भी लाई है।

सुनीता _क्यू? अपने देवर के लिए कैसे भुल जाऊंगी।

माधव _शुक्रिया भाभी।

सविता _दीदी आपको पता नहीं, आप लोगो के आने से ये कितना खुश है। जब लोगो से पता चला की आप लोग आए है, यह भागता huwa आप लोगो से मिलने आया है।

माधव _भाभी आप लोगो से मिलने के लिए तरस गया था मैं।

सभी लोग आपस में सुख दुख की बाते करने लगे।

पदमा _आज बड़ी खुशी का दिन है सुनीता। आज हमारा पूरा परिवार एक साथ है।

सुनीता _सही कहा दीदी।

राजेश _भगत भैया कल जन्मोत्सव कार्यक्रम का सारी तैयारी हो गई है न।

भुवन _हां, राजेश, पूरी तैयारी हो चुकी है।

राजेश _सभी को निमंत्रण दे दिए न।

भुवन _जहां तक मेरी जानकारी थी, सबको निमंत्रण दे चुका हूं।

राजेश _दिव्या जी को दिया।

भुवन _नही, उनको तो नही, दे पाया।

राजेश _दिव्या जी ने दीदी के डीलवरी में बड़ी मदद की है , उन्हे निमंत्रण देना जरूरी है।

पदमा _राजेश बेटा तुम फोन करके उसे निमंत्रण दे दो।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश ने दिव्या को काल किया। वह हॉस्पिटल से अभी अभी घर पहुंची थी।

दिव्या _अरे राजेश, बड़े दिनो बाद याद किए। हो गया तुम्हारा एग्जाम।

राजेश _जी दिव्या जी।

दिव्या _कैसा गया, पेपर

राजेश _पेपर तो बहुत अच्छे गए है !

दिव्या _कब आ रहे हो गांव।

राजेश _मैं तो आज ही गांव से आया हूं।

दिव्या _बड़ी खुशी हुई जानकर। अच्छा कल मिलोगे क्या मुझसे? कल सन्डे है न। कहीं घूमने चलते है। तुमने कहा भी था की अपनी नई बाइक पे बिठाकर मुझे घुमाओगे।

राजेश _कल, कल तो मेरे पास समय नहीं है।

दिव्या _क्यू, कुछ काम है क्या?

राजेश _ओ ज्योति दीदी का लडका huwa है ना, उसका कल जन्मोत्सव का कार्यक्रम है।

मैने आपको निमंत्रण देने के लिए ही काल किया था।

दिव्या _ओह कोइ बात नही अगले सन्डे को चलेंगे।

राजेश _दिव्या जी कल आ रही हो न।

दिव्या _तुम बुला रहे हो तो आना ही पड़ेगा।

राजेश _दिव्या जी,मां जी और गीता दीदी को भी लेकर आना।

दिव्या _दीदी और मां तो यहीं है लो बात करलो।

गीता _किसका फोन है दिव्या।

दिव्या _राजेश का लो बात करलो।

राजेश _कैसी हो दीदी?

गीता _मैं अच्छी हूं राजेश, तुम कैसे हो?

राजेश _मैं भी ठीक हूं दीदी। दीदी मैने इस लिए काल किया था की कल हमारे यहां दीदी के लड़के का जन्मोत्सव का कार्यक्रम है, आप लोग आइएगा।

गीता _ओह ये तो बड़ी खुशी की बात है राजेश हम जरूर आयेंगे।

राजेश _शुक्रिया दीदी,अच्छा अब मैं काल रखता हूं।

गीता _, ठीक है, राजेश।

राजेश ने काल रख दिया।

सुनीता _अरे बेटा ये दिव्या कौन है?

पदमा _ओ ठाकुर की छोटी बेटी है सुनीता।

सुनीता _ठाकुर की बेटी है, उसे क्यू बुला रहे हो?

तुम लोग पागल हो गए हो क्या?

पदमा _अरे सुनीता, दिव्या बहुत अच्छी लड़की है वह डॉक्टर है। ज्योति के डीलवरी में बड़ी मदद की है।

पदमा _अरे बहु, चलो सबके लिए भोजन की तैयारी करो। आज माधव और सविता भी यहीं भोजन करेंगी। आज का दिन बड़ा शुभ है।

सविता _पुनम चलो मैं भी तुम्हारी मदद करुंगी।

पुनम _ठीक है चाची जी।

शेखर _अरे माधव, भोजन बनते तक चली हम भी गांव टहलकर आते है।

माधव _ठीक है भैया।

राजेश _भुवन भैया चलो हम लोग भी दोस्तो के साथ टहलकर आते है।

सभी पुरुष लोग, बाहर टहलने चले गए और महिला लोग भोजन की तैयारी करने लगे।

आरती _स्वीटी दीदी, चलो तुम मेरे कमरे में, छोटा बच्चा पाएंगे। और ढेर सारी बाते करेंगे।

स्वीटी _चलो आरती दीदी।

भोजन के समय सभी लोग घर पहुंचे।

पदमा _लो सभी लोग आ गए। चलो सभी हाथ मुंह धो लो। भोजन का समय हो गया है।

पहले पुरुष भोजन के लिए बैठे।

शेखर _वाह भोजन से तो बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है।

माधव _हा ,भैया।

राजेश _पापा लगता है? पापा मुझे तो चाची भाभी और मां तीनो की हाथो की खुशबू इसमें आ रही है।

पदमा _अरे हा तीनो ने मिलकर खाना बनाया है।

सभी ने पेट भर कर खाना खाया।

केशव _बरसो बाद हम तीनो भाई साथ बैठ कर खाना खा रहे है । सच में मजा आ गया।

पुरुषो के भोजन करने के बाद, महिलाए भी भोजन करने लगी।

भोजन करने के बाद।

पपुनम _मां जी कौन कहा सोएगा ये बता देती तो बिस्तर लगा देती।

पदमा _शेखर और सुनीता राजेश के कमरे में सो जायेंगे।

स्वीटी, आरती के साथ सो जाएगी।

अब राजेश बेटा, तू बता कहा सोना चाहेगा।

राजेश _अरे ताई मैं कहीं भी सो जाऊंगा, मेरा क्या? मेरा बिस्तर इसी बरामदे में लगा दो। यहीं सो जाऊंगा।

सविता _अरे राजेश, तू बरामदे में क्यू सोएगा? हमारा घर किस लिए है। चल हमारे साथ, वही सो जाना।

माधव _हां राजेश, तू हमारे यहां सो जाना। वैसे वह भी तो आप ही लोगो का घर है, मैं तो कहता हूं, भैया भाभी आप लोग भी चलिए।

सुनीता _नही माधव, राजेश चला जायेगा सोने। वर्षो बाद मैं इस कमरे में फिर से सोने की अपनी यादें ताजा करना चाहती हूं।वैस तुम लोगो का नया घर कल देखने चले जायेंगे हम लोग।

माधव _सिर्फ देखने नही भाभी वहा कुछ दिन रुकना भी होगा।

माधव _अच्छा भैया भाभी हमे इजाजत दीजिए।

रात काफी हो गई है।

चलो भाई राजेश।

राजेश _जी चाचा जी।

सविता और माधव माधव दोनो अपने घर चले गए।

राजेश भी उनके साथ चला गया।

वहा जाने के बाद, राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सविता कमरे में पानी लेकर आई।

सविता _राजेश, ये जग में पानी रख दिया है, रात में प्यास लगे तो पी लेना।

राजेश _शुक्रिया चाची।

सविता _और तो कुछ नही चाहिए तुम्हे?

राजेश ने सविता को आंख मारा।

सविता _चल हट बदमाश कहीं का। वह शर्माते हुवे अपने कमरे में चली गई।

इधर राजेश का कुछ ही देर में नींद लग गया।

क्यों की ट्रैन की सफर के बाद उसने आराम नही किया था।

कुछ देर में माधव भी नींद में खर्राटे भरने लगा।

सविता ने जब देखा, उसका पति घोड़े बेच कर सोने लगा है।

वह दबे पाव बिस्तर से उठी और राजेश के कमरे की ओर चली। कमरे में जाने के पहले खुद को पहले आईने में देखी और थोड़ा लिपिस्टिक लगा ली। अपने शरीर में थोड़ा सेंट छिड़क ली।

जब कमरे के अंदर गई।

राजेश गहरी नींद मे सोया था।

सविता _लो, ये तो सो गया है। आंखे तो ऐसा मार रहा था जैसे कच्चा खा जाएगा। बदमाश।

वह निराश हो गई।

वह राजेश के बगल में जाकर लेट गई। और राजेश के बालो को प्यार से सहलाने लगी।

राजेश नींद से जागा।

वह पूरी तरह अभी होश में नहीं था। उसने सविता की ओर गौर से देखाअपनी आधे खुले आंखो से।, कौन सोई है मेरे साथ।

राजेश _चाची तुम, यहां क्या कर रही हो?

सविता _देखने आई थी, कहीं तुम्हे आज भी भूतों से डर तो नही लग रहा।

लगता है तुम्हारे मन से भूत का डर चला गया। बेफिक्र सो रहे हो।

सोने से पहले तो मुझे खा जाने वाली नजरो से देखकर आंख मार रहे थे। फिर क्या हुआ?

कहीं तूने, मूठ तो नही मार लिया।

राजेश _छी चाची मैं ये गंदा काम नही करता।

सविता _हां भई तुम्हे ये काम करने की क्या जरूरत? तुम्हारा लेने के लिए तो सब तैयार बैठी है।

क्यों आज मन नही कर रहा क्या तेरा? तुम्हारा तबियत तो ठीक है?

तू। तुम्हारे उम्र के लड़को को तो रात में नींद नही आती, या तो मूठ मार के सोता है या फिर किसी का लेके।

सच बता किसी का लिया है क्या? या मूठ मारा है?

राजेश _चाची दोनो काम नही किया।

सविता _फिर इतनी जल्दी कैसे सो गए?

राजेश _दिन भर के सफर से थक गया था न तो नींद लग गया।

सविता _ठीक है फिर तुम आराम कर मैं चलती हूं।

राजेश _आज तो बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है आपके बदन से।

थोड़ा सूंघने तो दो।

राजेश उसकी गर्दन पर नाक रख कर सूंघने लगा।

राजेश _आह सच में बड़ी मस्त खुशबू है।

सविता मुस्कुराने लगी।

राजेश ने सविता की ब्लाउज का बटन खोलने लगा।

सविता _ये क्या कर रहा है?

राजेश _मुझे दूध पीना है।

सविता _पर इसमें दूध आता कहा है?

राजेश _कोशिश करता हूं शायद आ जाए।

राजेश ब्लाउज का बटन खोल दिया। सविता ब्लाउज को निकाल कर ऊपर से नंगी हो गई।

राजेश, सविता की चूची मसल मसल कर चूसने लगा। उससे दूध निकालने की कोशिश करने लगा।

राजेश ने सविता को इशारा किया।

सविता, राजेश ka लोवर खीच कर अलग कर दिया उसका अंडरवियर भी खीच कर अलग कर दिया।

राजेश का मूसल हाथ में पकड़ लिया पहले थोड़ी देर सहलाई फिर मूठ मारी, राजेश का लंद तन गया। अब राजेश का लंद मुंह में भर कर सका सक चूसने लगी।

राजेश प्यार से उसकी बालो को सहलाने लगा।

मुंह में जाकर लंद और मोटा लंबा हो गया।

सुनीता अपनी साड़ी और पेटिकोट निकाल कर नंगी हो गई।

वह बेड पर चढ़ गई और राजेश का लंद हाथ से पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर बैठ गई।

लंद boor को चीर कर अंदर समा गया।

सविता राजेश की ओंठ चूसने लगी। राजेश उसका साथ देने लगा।

उसके बाद सविता राजेश के सीने में हाथ रख कर लंद के ऊपर नीचे उछलने लगी।

राजेश भी नीचे से सहयोग करने लगा।

सविता के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी, उसकी उसकी चूड़ियों की खनक मधुर संगीत उत्पन करने लगी।

सबिता को संभोग का परम सुख प्राप्त होने लगा। कुछ देर में ही उसकी आंखो की पुतलियां पलटने लगी। वह किसी दूसरी दुनियां में पहुंच गई।

इधर राजेश हाथ से चूची पकड़ कर मसल रहा था।

सविता लंद पर उछल रही थी।

सविता, तब तक राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudti रही जब तक वह झड़ न गई ।

वह राजेश के ऊपर लुड़क गई।

राजेश कुछ देर सविता को अपनी बाहों में जकड़ लिया।

उसके बाद वह सविता को नीचे और खुद ऊपर आ गया।

उसकी ओंठो को चूसने लगा फिर चूमते हुवे वह नीचे की ओर बड़ा। गर्दन पे फिर चुचियों को खुब प्यार किया। फिर नाभी की ओर बड़ा। उसे जीभ से चाटने लगा।

सविता उत्तेजित होने लगी।

राजेश और नीचे गया उसकी योनि की भगनाशा को जीव से कुरेदने लगा।

सविता अत्यंत काम विहिल हो गई,,,

सविता _उई मां, आह,,, उन,,, आई,,,,, आह,

राजेश अब बस कर नही तो मर जाऊंगी,,,, आ मां,,,, अब,,,, डा,,, ल,, दे ,,,राजा,,,,,।

राजेश सविता की कमर के नीचे, तकिया लगा दिया। उसके दोनो टांगो को अपने कंधे में उठा लिया।

फिर लंद को उसकी योनि में लंद एक ही बार में गच से पेल दिया।

और पूरा गहराई तक ठोकना शुरू कर दिया।

लंद पूरे गहराई में जाकर सविता की बच्चे दानी को ठोकने लगा।

सविता जल्द ही जन्नत की सैर करने लगी।

कमरे ने सविता की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक,chudai की फ्च फ्च की आवाज़ फिर मधुर संगीत उत्पन करने लगी।

राजेश इसी पोजीशन में पेलता रहा जब तक सविता एक बार फिर न झड़ गई।

सविता राजेश को बुरी तरह जकड़ ली थी। उसे ऐसा सुख मिल रहा था जिसकी कल्पना कभी नही की थी।

कुछ देर बाद राजेश फिर एक्टिव huwa और फिर से ओंठ चूसा, दूध निचोड़ा, नाभी चांटा boor का भग्नासा को छेड़ा।

सविता फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सविता को घोड़ी बना दिया और उसके कूल्हे को चूम लिया।

सविता सिसक उठी।

राजेश ने boor पे लंद सेट कर एक जोर का धक्का मारा, लंद फच की आवाज़ करता एक ही बार में पूरा अंदर चला गया।

अब राजेश सविता की कमर पकड़ कर थपा थप चोदना शुरू कर दिया।

चोदते समय,, राजेश की नजर सविता की गाड़ पर पड़ा।

राजेश _चाची आपकी गाड़ बड़ी मस्त है।

उसने एक उंगली उसकी गाड़ में घुसा दिया।

सविता _उई मां, क्या कर रहा है कमबख्त, वहा नही, छी गंदा,,, आह मां, नई ना

राजेश _चाची, मुझे गाड़ चोदना है।

सविता _छी, ये कैसा कैसा शौक है तुम्हारा, वहा गंदा होता है।

राजेश _चाची बड़ा मन कर रहा है गाड़ मारने दो।

राजेश गाड़ में उंगली अंदर बाहर करते हुवे कहा साथ में boor की ठुकाई भी जारी था।

सविता _देखो राजेश जिद न करो,मैने सुना जरूर है की कुछ महिलाएं गाड़ मरवाती है। मुझे तो सोच के हैरानी होती है। इतनी सकरी छेद में मोटा लंद जायेगा कैसे?

वैसे भी तुम्हारा तो खुब मोटा है। मेरी सकरी गाड़ में तेरा मोटा लंद जायेगा नही, जबरदस्ती करोगे तो मेरी गाड़ फट जाएगी। बात को समझो।

राजेश _अरे चाची, चला जायेगा न, आप खामोखा डर रही हो, थोड़ा दर्द जरूर होगा फिर अंदर जाने के बाद आपको भी बहुत मजा आएगा, और मुझे भी।

सविता _तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे तुम्हे गाड़ मारने का अनुभव है। क्या तू सच में किसी का गाड़ मारा है।

राजेश _हा।

सविता _हा, किसका गाड़ फाड़ा है re

राजेश _अरे चाची, यह जानकर क्या करोगी, आप तो बस जन्नत का मजा लो। राजेश boor चोदता huwa बोला।

सविता _मुझे डर लग रहा है कहीं कुछ गडबड हो गया तो।

राजेश _अरे कुछ नही होगा चाची, आप खामोखा डर रही है?

राजेश ने चोदना बंद कर दिया,, एक काम करो कीचन में जाकर घी का डब्बा ले आओ। आपकी गाड़ में डाल दूंगा जिससे दर्द कम होगा।

सविता _गाड़ को रहने दे न,boor जितना चोदना है चोद ले।

राजेश _ठीक है फिर गाड़ का मजा लेने मुझे किसी दूसरे के पास जाना पड़ेगा। फिर ये मत कहना। अब तुम मेरे तरफ ध्यान ही नही देते।

सविता _लगता है तू मेरी गाड़ फाड़ के ही मानेगा। तेरे लंद के लिए तो मैं मरने के लिए भी तैयार हूं फिर गाड़ क्या चीज है?

राजेश _ये हुई न बात, जाओ कीचन से घी ले आओ।

सविता बेड से उतरी और नंगी ही कीचन में जाकर घी का डब्बा ले आई।

सविता _लो, देखो एक दम आराम से डालना, मैं रुकने बोलूं तो रुक जाना।

राजेश _अरे चाची, कुछ नही होगा, आप डरिए मत, आपको भी मजा आयेगा, देखना।

राजेश ने सविता को घोड़ी बना दिया और उंगली पे घी लेकर सविता की गाड़ में भरने लगा।

अपना अपने लंद में भी घी चुपड लिया।

अब राजेश boor पे लंद डाल कर gach गच चोदने लगा और गाड़ में उंगली डाल कर उसे फैलाने लगा।

पहले एक उंगली, फिर दो उसके बाद तीन उंगली घुसाने में कामयाब हो गया।

राजेश _चाची अब तैयार हो जाइए।

राजेश ने सविता के मुंह में उसका ब्लाउज ठूस दिया फिर लंद boor से बाहर निकाल लिया लंद boor की पानी और घी से एकदम चिकना हो चुका था।

राजेश लंद का टोपा गाड़ की छेद में रख कर उसे अंदर प्रवेश कराने की कोशिश करने लगा,,,

सविता _राजेश, नही जायेगा, तेरा बहुत मोटा है, बस भी करो।

राजेश नही रुका और गाड़ को उंगली से अच्छे से फैलाया और टोपा को जोर से दबाव बना कर ठेल दिया।

सविता दर्द से कराह उठी।

अब राजेश धीरे धीरे दबाव बढ़ाता गया लंद समाता गया। और सविता को दर्द होने लगा।

अब राजेश लंद को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद धीरे धीरे गाड़ को फैला कर अपनी जगह बनाने लगा।

सविता सविता को बहुत दर्द हो रहा था। पर मुंह में कपड़ा ठूसा huwa था वह चीख न पाई।

राजेश अब गाड़ में लंद को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे स्पीड भी बढ़ाने लगा।

सविता की गाड़ फट चुकी थी, राजेश का लंद अब पूरा अंदर समा चुका था। वह गाड़ को पूरी तरह फैला दिया था। लंद को गाड़ ने बुरी तरह जकड़ लिया था। लंद एकदम कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

राजेश को बहुत मजा आ रहा था।

इधर राजेश ने सविता की चूची मसल मसल कर गाड़ चोदना जारी रखा कुछ देर बाद सविता का दर्द कुछ कम huea उसे भी एक अलग मजा आने लगा। दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था।

राजेश _आज मेरी जान, तुम्हारी गाड़ कमाल की है, इसे मारने में बड़ा मजा आ रहा है बेबी बे,,, आह,, मैं खुद को ज्यादा देर नहीं रोक पाऊंगा, जाने मन,,,, आह मां,, राजेश जोर जोर से गाड़ मारते हुवे झड़ने लगा।

आह बेबी,,, राजेश के लंद से वीर्य निकल कर सविता की गाड़ में भरने लगा।

राजेश सविता की ओंठ चूसा फिर बेड में लुड़क गया।

सविता की गाड़ फट चुकी थी। पर गर्म गर्म वीर्य जब गाड़ में गया तो उसे एक अलग आनद का अनुभव huea।

सविता भी बेड पे ढेर हो गई। कुछ देर दोनो ऐसे ही लेटे रहे। कुछ देर बाद सविता जब उठी तो वो ठीक से चल नही पा रही थी। उसकी गड़ अंदर से छिल गई थी, जलन हो रही थी। गाड़ सूज भी गया था। अपनी गाड़ की हालात देख कर उसे रोना आने लगा।

सविता _नालायक ने पूरा गाड़ फाड़ के रख दिया।

हे राम, बड़ी जलन हो रही है ठीक से चल भी नहीं पा रही, अब लोग पूछेंगे तो क्या जवाब दूंगी।

वह अपनी कपड़े पहनी और किसी तरह चलते हुवे अपने कमरे में जाकर लेट गई।

सुबह जब उठी तो दर्द और बड़ गया था।

शौच करनेरबैठी तो तेज़ दर्द huea ठीक से शौच भी नहीं कर पाई।

वह नहाकर तैयार हुई और कीचन का काम सम्हाले लगी।

जब माधव उठा, और सविता को लगड़ाते हुवे चलते हुए देखा तो पूछा,,

माधव _तुम्हें क्या huwa सविता, लंगड़ा क्यू रही हो।

सविता क्या बताती, कि राजेश ने उसकी गाड़ फाड़ दिया है।

सविता _बाथरुम में पैर फिसल गया जी।

माधव _ज्यादा चोट तो नही आई।

सविता _नही जी, ठीक हो जायेगा, चिन्ता की बात नहीं।

राजेश उठा, और कीचन में गया, उसे पता था चाची को तकलीफ में होगी।

वह सविता को पीछे से बाहों में भर लिया।

राजेश _चाची कैसी हो?

सविता _कमख्त मना किया था पर तू माना नही। दर्द के कारण मैं ठीक से चल नही पा रही।

एबी लोग पूछेंगे तो क्या जवाब दूंगी।

राजेश _अरे चाची आप चिन्ता न करो, कुछ दिनों में सब ठीक हो जायेगा, मैं दर्द की गोली होगा उसे खा लो कुछ राहत मिलेगी।

राजेश ने अपने चाचा से दुकान में जाकर गोली मांग लाया।

सविता वह टैबलेट खा ली।

राजेश _सविता को बाहों में भर कर कहा, सारी चाची मेरे कारण आपको दर्द सहना पड़ रहा है।

आप कहो तो बर्फ से सिकाई कर दू।

सविता _चल हट बेशरम।

इतना होने के बाद भी तुमको मजाक सूझा है।

जा नहा कर तैयार हो जा मैं चाय नाश्ता बना रही हूं।

राजेश ने सविता की गालों को चूम लिया।

फिर नहाने चला गया, जब नहाकर तैयार huwa, नाश्ता बन चुका था।

सविता डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगाई, और माधव को आवाज़ लगा कर बुलाई।

माधव_अब दर्द कैसा है?

सविता _टैबलेट लेने के बाद थोड़ा दर्द थोड़ा कम हुआ।

माधव _अगर समस्या ठीक नही huwa है तो रवि को बुलाकर दिखा लो।

सविता _नही जी, ठीक हो जाऊंगी।

राजेश _चाची आप कहे तो मैं मालिश कर दू कमर की।

सविता _नही, किसी की मदद नही चाहिए।

नाश्ता करने के बाद माधव दुकान में चला गया।

सविता, प्लेट धोने लगी, राजेश ने कीचन में जाकर।

राजेश _चाची नाराज हो क्या मुझसे!

सविता _नही तुम्हारे कारनामे से बहुत खुश हूं!

राजेश _ओह सॉरी न,

सविता _चल हट, मुझे काम करने दे।

राजेश _ठीक है, जा रहा हूं। आप कितने समय आएंगी। ताई के घर। मैं जा रहा हूं तैयारी जो करनी है, जन्मोत्सव का।

सविता _मुझे जाने लायक छोड़ा कहा है?

तुम्हारी ताई और मां पूछेगी क्या huwa है,तो क्या बोलूंगी?

राजेश _मां से बोल देना ये राजेश का किया धरा है?

सविता _ठीक है, मैं यहीं बोलूंगी।

राजेश _क्या सच में यहीं बोलेगी?

सविता _हा हा यहीं बोलूंगी? उन्हे भी तो पता चले उसका बेटा कितना बदमाश है? क्या क्या शौक रखता है?

राजेश _अरे यार सॉरी न, लो कान पकड़ता हूं आज के बाद नही करूंगा।

सविता _क्या नही करेगा?

राजेश _आपको पीछे से।

सविता _तो कहा से करेगा।

राजेश _आप जहा से बोलेगी वहा से।

सविता _अब तू भुल जा, तुम्हे न आगे से मिलेगा न पीछे से।

यहीं तेरी सजा है। कहां कहा तेरी चक्कर में फस गई मैं, अपनी पिछवाड़ा फड़वा बैठी।

राजेश _अच्छा ठीक है आज के बाद, आपको दर्शन नही होंगे।

सविता _किसका दर्शन re,

राजेश_तेरे छोटे भतीजे का।

सविता _मतलब तू यहां नही आयेगा।

राजेश _मैं तो आऊंगा, पर इसका दर्शन नही होगा, आखिरी बार देख लो, राजेश ने अपना लोवर और चड्डी नीचे खिसका कर लंद बाहर निकाल कर दिखाते हुए बोला।

सविता _क्या कर रहा है, तुम्हारा चाचा जी आ गया तो, ऊपर कर बेशरम।

सविता _ठीक है मत कराना दर्शन मैं भी मरी नहीं जा रही। राजेश पैर पैर पटकता huwa वहा से जाने लगा।

सविता _हसने लगी।

बदमाश कहीं का,,,

राजेश, अपने चाचा को समय पर आने को कह कर, अपने ताई के यहां चला गया।

उधर जब घर पहुंचा तो, महिलाए काम में लगी थी, पुरुष लोग आंगन में ही बैठे थे।

भुवन _ अरे राजेश तू आ गया।

पुनम राजेश के लिए चाय ले आओ।

राजेश _रहने दो भैया, चाची के यहां से चाय नाश्ता करके आ रहा हूं।

चलो आज की कार्यक्रम की तैयारी करते है, पंडालवाले अभी तक लगाया नही है।

भुवन _फोन कर दिया है, अभी आता ही होगा।

राजेश _भोजन बनाने वाले आए है की नही।

भुवन _उसे भी फोन कर दिया है बस आ ही रहे होंगे।

राजेश _मां कहीं नही दिख रही।

पुनम _देवर जी वो मां जी के साथ, बाड़ी में सब्जियां तोड़ रही है।

भुवन _राजेश, चलो हम लक्ष्मण पर चलते है कुछ सामान लाने है।

राजेश _ठीक है भैया।

राजेश और भुवन बाइक लेकर समान लाने चले गए।

इधर पंडाल वाले अपना सामान लेकर आ गया। घर के सामने पंडाल लगा दिया गया। लोगो के बैठने के लिए कुर्सियां लगा दिया गया और लाउड स्पीकर में जन्मोत्सव के गीत बजने लगा।

भोजन बनाने वाले भी पहुंच गए, मेहमानों के लिए चाय, नाश्ता बनाने लगे।

घर में धीरे धीरे मेहमान पहुंचने लगे।

सबसे पहले ज्योति के पति और उसके ससुर पहुंचे। केशव और शेखर ने उसका स्वागत किया। घर मेहमानों से भरने लगे।

करीब सुबह 11बजे माधव और सविता भी पहुंच गए।

सविता को लंगड़ाते हुए चलते देख, सुनीता पूछी,,

सुनीता _सविता, ऐसे लंगड़ा कर क्यू चल रही हो क्या huwa

सविता _क्या बताऊं दीदी, सुबह नहाते समय बाथरुम में पैर फिसल गई।

सुनीता _ओह ज्यादा चोंट तो नही आई।

सबिता _पैर में थोड़ा मोच आ गई है।

सुनीता, को सविता के चलने के तरीके से कुछ शक होने लगा, ऐसे तो मैं भी चलती थी जब राजेश ने पहली बार मेरा गाड़ मारा था।

उसी समय भुवन और राजेश भी समान लेकर पहुंचे।

सुनीता _अरे बेटा , थोड़ा इधर आना तो।

राजेद _क्या है मां कुछ काम था क्या?

सुनीता _ये बता, तेरी चाची लंगड़ा के क्यू चल रही है?

राजेश ने सविता की ओर देखा जो कुर्सी पर बैठी थी।

राजेश _मां, ये बात आप मुझसे क्यों पुछ रही हो, चाची से पूछो।

सुनीता _वो तो बता रही थी की बाथरुम में गिर गई।

सच क्या है बता बदमाश कल रात तू उसके घर गया था सोने, कहीं तुमने कुछ गडबड तो नही किया उसके साथ?

राजेश _मैं आप मुझपर सक कर रही हो।

सुनीता _क्यू को तुम्हारा कोइ भरोसा नहीं। बोल सच क्या है?

राजेश _मां, मैने कुछ नही किया, सच।

सुनीता _अच्छा, खा मेरी कसम,

तभी , भुवन ने राजेश को आवाज़ दिया,,,

राजेश _मां, भैया मुझे बुला रहे है मैं आता हूं?

राजेश, सुनीता से पीछा छुड़ाकर वहा से भागा।

सुनीता _ये लडका, पता नही क्या क्या गुल खिला रहा है?

मेहमान लोग आते, उनका स्वागत किया जाता, उसे चाय नाश्ता दिया जाता, बच्चे को पाते और लाय गय तोफे को ज्योती को पकड़ाते, फिर उन्हे भोजन कराया जाता। इस तरह दिनभर कार्यक्रम चलता रहा।

शाम को ठकुराइन अपनी दोनो बेटी गीता और दिव्या के साथ पहुंची।

राजेश ने ठकुराइन को प्रणाम किया।

नमस्ते दिव्या जी, नमस्ते गीता दीदी।

बड़ी खुशी हुई आप लोग आए।

ठकुराइन _अरे राजेश कैसा है तू?

राजेश _मैं ठीक ठीक हूं, मां जी।

आप लोग ठीक है न।

आप लोग अंदर आइए।

राजेश ने तीनो को घर के अंदर ले गया।

राजेश _ताई देखो तो कौन आए है?

पदमा _ठकुराइन, आप लोग, अहो भाग्य जो आप लोग हम गरीब लोगो के घर आए।

आइए बैठिए।

ठकुराइन _पदमा, ऐसा कहकर हमे शर्मिंदा कर रही हो। आप भुल रही हो, इस घर से हमारा पुराना नाता रहा है।

पदमा _जानती हूं, बड़े ठाकुर जब थे तो छोटे बड़े कार्यक्रम में हमेशा आते ही रहते थे। पर समय का कोइ ठिकाना नही कब क्या हो जाए।

बड़े दिनो बाद, ठाकुर परिवार को देखकर, बड़ी खुशी हो रही है।

ठकुराइन _पदमा, मुझे ठकुराइन न बोलकर दीदी बोलोगे तो ज्यादा खुशी होगी।

पदमा _आप तो इस क्षेत्र की रानी है, दीदी कहना, हमे शोभा नही देगा।

ठकुराइन _अरे, मुझे अच्छा लगेगा।

पदमा _आप कह रही है तो ठीक है दीदी।

इनसे मिलो, ये मंझली, सुनीता राजेश की मां।

सुनीता _नमस्ते दीदी।

रत्नवती _तुम राजेश की मां हो, मुझे राजेश ने बताया नही आप यहां आई है।

मैं आपसे मिलना चाहती थी,,

सुनीता _जी मुझसे।

रत्नवती _हां, मैं बहुत पहले ही आपसे मिलना चाहती थी। पर आप गांव छोड़कर शहर चली गई।

सुनीता _कुछ काम था क्या?

रत्नवती _हा, बाद में बात करेंगे।

इनसे मिलो ये दोनो मेरी बेटी है।

ये बड़ी बेटी, गीता है।

गीता ने पैर छूकर प्रणाम किया।

गीता _नमस्ते मां जी।

सुनीता _खुश रहो बेटी।

रत्नवती _और ये मेरी छोटी बेटी दिव्या है!

दिव्या ने सुनीता की पैर छूकर प्रणाम किया।

दिव्या _नमस्ते मां जी।

सुनीता _सदा खुश रहो।

घर वाले बता रहे थे की तू डाक्टर है और ज्योति की डील वरी के समय काफी मदद की।

दिव्या _ये तो मेरा फर्ज है मां जी।

सुनीता _लगता है रत्नादिदी ने तुम दोनो बेटियो को बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं।

रत्नवती _महान तो तुम हो सुनीता, जो राजेश जैसे लड़के की मां हो।

सुनीता _क्यू ऐसा क्या कर दिया उस बदमाश ने।

रत्नवती _अब यहां आई हो तो खुद ही जान जाऊंगी,दूसरो की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। आपने उसे बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं।

बहुत नेक दिल है।

सुनीता _उसकी ज्यादा तारीफ करना ठीक नहीं दीदी।

रत्नवती _पर क्यू?

सुनीता _मैं उसकी मां हूं, उसकी अच्छाई जानती हू तो बदमाशी भी।

रत्नवती _सही कहा, सुनीता तुम उसकी मां हो, हम लोगो से ज्यादा तो आप ही जानोगी उसके बारे में।

पुनम ने उन लोगो के लिए चाय नाश्ता लेकर आई।

चाय नाश्ता करने के बाद, ज्योति को मुन्ने को लेकर बुलाई।

रत्नवती ने बच्चे को अपने गोद में ले ली।

बड़ा प्यारा बच्चे को जन्म दिया है ज्योति ने, ले बहु मेरे तरफ से ये छोटा उपहार।

रत्नवती कुछ देर और वहा रुकी, पदमा, सविता और सुनीता से बातचीत करने करने के बाद, जाने के लिए पदमा से इजाजत मांगी।

पदमा _दीदी आप लोगो का शुक्रिया जो हमारे यहां आकर हमारा गौरव बढ़ाए।

रत्नवती _पदमा ऐसा कहकर मुझे फिर लज्जित कर रही है।

बेटी तुम लोग चलो मैं आती हूं।

गीता _जी, मां।

गीता और, दिव्या चली गई। और गाड़ी में बैठ कर अपनी मां का वेट करने लगी।

अच्छा सुनीता, मैं चलती हूं। हो सके तो पुरानी बातो को भुल जाना। मैं जानती हूं ये आसन नही है। मेरे पति ने तुम्हारे साथ जो भी किया, उसके लिए मैं आपसे माफी मांगती हूं।

सुनीता _दीदी आप नेक दिल है! आपको माफी मांगने की आवश्यकता नही है।

रत्नवती वहा से चली गई।

उसके जाने के बाद,,,

पुनम, सुनीता के पास आकर बोली।

पुनम _चाची कैसी है?

सुनीता _ कौन?

पुनम _ठाकुर की बिटिया।

सुनीता _बड़ी सुंदर और संस्कारी।

पर ऐसे क्यू पुछ रही हो?

पुनम हंसते हुवे बोली, कुछ नही बस ऐसे ही।

सुनीता _तू मुझसे कुछ छिपा रही है, बताओ क्या बात है?

पुनम _गांव वालो का कहना है की राजेश और दिव्या के बीच कुछ गडबड चल रहा है?

सुनीता चौंक गई?

सुनीता _ये तू क्या कह रही है?

पुनम _अब सच क्या है मुझे नही पता, पर लोग जो कहते है वही बताया, आपको, मैं तो इस लिए बता दी की कल कुछ ऊंच नीच हो गया तो, आप ये न बोले की इतना कुछ हो गया मुझे कुछ बताया ही नहीं।

सुनीता _पुनम, तू मजाक कर रही है न मुझसे, बोलो ये झूठ है।

पुनम _मां जी, इसमें झूठ वाली क्या बात है?

सुनीता _हे भगवान,,

सुनीता _आरती बेटा, देखो तो राजेश कहा है उसे मेरे कमरे में भेज।

आरती _ठीक है चाची।

सुनीता कमरे में राजेश का वेट करने लगी।

राजेश कमरे में पहुंचा।

राजेश _मां आपने मुझे बुलाया? कुछ काम था क्या?

सुनीता_हा, ये मैं क्या सुन रही हूं?

राजेश _क्या बात है मां?

सुनीता _तेरे और दिव्या के बीच क्या चक्कर चल रहा है।मुझे सच बता।

राजेश _मां, ये किसने कहा आपसे।

सुनीता _किसी ने भी कहा हो सच क्या है बताओ मुझे? अब तू गांव में नही रहेगा, मेरे साथ शहर जायेगा।

राजेश _मां हम सिर्फ एक अच्छे दोस्त हैं, बस लोग गलत समझते है।

सुनीता _मेरे सिर पे हाथ रख कर बोलो।

राजेश _मां मुझे तेरी कसम, दिव्या और मेरे बीच कुछ भी नही है, हम एक अच्छे दोस्त है।

सुनीता _देख बेटा, जो हमारा दुश्मन है उसी के बेटी से दोस्ती ये ठीक नही है। तुम उन लोगो से मिला जुला मत करो।

राजेश _मां मेरा विश्वास करो ऐसा कुछ भी नही है। तुम तो जानती हूं, निशा की जगह मेरे दिल में कोइ दूसरी, जगह दूसरी जगह नहीं ले सकता।
 
Back
Top