Incest यह क्या हुआ - Page 25 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest यह क्या हुआ

राजेश ड्राइंग रूम में बैठ कर माधूरी का इंतजार करने लगा। माधूरी अपने रूम में तैयार होने लगी। जब माधूरी तैयार होकर बाहर निकली। राजेश उसे देखता ही रह गया।

माधूरी _माफ करना राजेश तैयार होने में थोड़ी देर हो गई।

माधूरी _, राजेश कहा खो गए,,,

राजेश जैसे नींद से जागा,,,

राजेश हड़बड़ाते हुवे बोला,,, कही नहीं मैडम,,,

माधूरी, मुस्कुराने लगी।

माधूरी _अब चले, हम लेट हो रहे है,,,

राजेश _हा,

मैम एक बात बोलूं,,,

माधूरी _हा हा, बोलो क्या बात है?

राजेश _आप इस साड़ी में बड़ी खूबसूरत लग रही है।

माधूरी _ओह, शुक्रिया,,

माधूरी ने घर का दरवाजा, बाहर से बंद किया।

फिर दोनो बाइक से धरमपुर के लिए निकल पड़े।

राजेश बाइक को तेज दौड़ाने लगा,,

माधूरी _राजेश, गाड़ी को थोड़ा धीरे दौड़ाना बाबा, मुझे डर लगता है।

राजेश बाइक की स्पीड थोड़ा कम कर दिया।

सॉरी मैम मुझे लगा था की आपको भी दिव्या जी की तरह शायद तेज ड्राइविंग पसंद हो।

माधूरी _अच्छा जी, मतलब तुम ठाकुर की बेटी को अपनी बाइक में बिठा कर घुमाते हो।

मतलब लोग कहते है वो सच है?

राजेश _, लोग क्या कहते है मेरे बारे में, मैम।

माधूरी _यही की तुम्हारे और दिव्या के बीच कुछ चल रहा है। बोलो सच है कि नहीं?

राजेश _नहीं मैम ये सच नहीं है हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं, बस, लोग गलत समझ लेते हैं।

माधूरी _पर धुवा तो तभी उठती है न जब आग लगी हो।

राजेश _लोग कुछ भी बोल देते हैं, लोगों को तो बस बहाने चाहिए किसी पर कीचड़ उछालने का।

माधूरी _मतलब तुम लोगों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है।

राजेश _नहीं मैम।

माधूरी _वैसे दिव्या तो बड़ी खूबसूरत है, पढ़ी लिखी, अपने पैरो मे खड़ी है।

सुना है बड़ी संस्कारी भी है। अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा वान।

तुम दोनो की जोड़ी तो कमाल की लगेगी।

कभी उसके बारे में सोचा नहीं क्या?

राजेश _नहीं मैम, मैने दिव्या जी के बारे में तो ऐसा कभी सोचा नहीं।

माधूरी _हूं, इसका मतलब तुम्हारे दिल में कोई और है। कौन है, मै भी तो जानू, हमारा हीरो किसपे मरता है।

राजेश _छोड़ो न मैम क्या करोगी जान कर!

अच्छा आप बताओ, आपने लव मैरिज की हो या अरेंज मैरिज।

माधूरी _मैने तो अरेंज मैरिज की है।

मेरे मां पिता जी, मेरे सास ससुर को पहले से जानते थे। दोनो परिवारों को रिश्ता अच्छा लगा शादी हो गई।

अब तुम बताओ कौन है वो लड़की जिसपे ये हीरो मरता है!

राजेश _मेरे कालेज में पढ़ती थीं। पर वो मुझसे नाराज़ होकर लंदन चली गई। अब वह लंदन में रहकर पढ़ाई कर रही है।

माधूरी _पर तुम जैसे लड़के को छोड़कर, चली गई। ऐसे क्या बात हो गई?

राजेश _गलती मेरी ही थी? वो मुझ पर बहुत भरोसा करती थीं। मैने उसका भरोसा तोड़ा। वह इस बात को बर्दास्त नहीं कर पाई और हमेशा के लिए लंदन चली गई।

माधूरी _ओह मुझे बड़ा दुख हुआ जानकर।

राजेश, अगर वह हमेशा के लिए लंदन चली गई है तो मैं तो कहती हूं तुम भी नई शुरुवात करो। आखिर जिंदगी किसी के कारण रुक तो नहीं जाती।

तुम अपने लिए कोई नई लड़की ढूंढ लो,,

वैसे मुझे लगता है दिव्या तुम्हे पसंद करती हैं, आखिर एक राजघराने की लड़की तुम्हारे साथ बाइक में बैठ कर घूमना फिरना क्यू पसंद करेगी। उसे अपनी बदनामी का डर नहीं है,,,

इसका मतलब तो यही huwa की वह तुम्हे पसंद करती है।

तुम अपने मन से निशा को हटाकर दिव्या को रख कर, सोंच कर देखो। शायद वो तुमसे कुछ कहना चाहती हो, पर तुम समझ नहीं पा रहे हो।

राजेश _मैम निशा पहले मेरी एक अच्छी दोस्त थी, फिर हम प्यार कर बैठे, वो मुझ पर अटूट भरोसा करने लगी,उसका नतीजा क्या हुआ? उसका दिल टूटा, वो मुझे छोड़ कर चली गई । मैने प्यार के साथ दोस्त को भी खो दिया।

दिव्या एक अच्छी लड़की है, हम अच्छे दोस्त हैं, मै नहीं चाहता की प्यार के चक्कर में एक और दोस्त को खो दू।

माधूरी _मै ये तो नही पूछूंगी की तुमसे ऐसी क्या गलती हुई है की निशा तुम्हे छोड़कर चली गई, पर अब तो तुम अपनी गलती सुधार भी तो सकते हो ।

राजेश _मैम,कुछ चीजे ऐसी होती है जो आदमी के बस में नहीं होता।

माधूरी _लो बात चीत करते करते, पता ही नहीं चला हम धरम पुर पहुंच गए।

वे दोनो बाइक से निर्धारित स्थल पहुंचे, जहां सम्मान समारोह आयोजित किया गया था।

वे समय पर पहुंच गए थे।

कार्यक्रम में कलेक्टर के साथ साथ जिला शिक्षा अधिकारी, सभी चारो विकास खंड के शिक्षा अधिकारी, विभिन्न स्कूलों के आमंत्रित शिक्षक और शाला समिति के पदाधिकारी गण उपस्थित थे।

शिक्षा अधिकारियों ने अपने अपने क्षेत्र के शालाओं में किए जा रहे अच्छे कार्यों को परदे पर दिखाकर वहा मौजूद लोगों को बताने लगे।

अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों एवम नागरिकों को सम्मानित किए जा रहे थे। सूरज प्राथमिक शाला शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयास की सभी ने सराहना किया। माधूरी को कलेक्टर महोदय के हाथो बेस्ट शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया गया, और राजेश को भी शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को सभी के लिए प्रेरणा दायक बताते हुवे सम्मानित किया गया।

कलेक्टर ने राजेश को अवार्ड देते हुए कहा।

यार तुम तो वही हो न जिसने जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में अपने टीम को विजेता बनाया था। सुना है गांव में पुलिस एवम आर्मी भर्ती हेतु प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हो।

राजेश _जी सर आपने सही पहचाना। पर मेरे अकेले के प्रयासों से हम विजेता नही बने थे। बल्कि हमारी टीम को विजेता बनाने में टीम के सभी खिलाड़ियों का बराबर योगदान था।

कलेक्टर _तुम्हारा विचार बहुत अच्छा है। तुम लोगों के लिए प्रेरणा के श्रोत हो,वैसे आगे तुम्हारा लक्ष्य क्या है?

राजेश _सर मै भी आप ही की तरह आईएएस बनकर देश सेवा करना चाहता हूं।

कलेक्टर _ओह , अगर आपके जैसे युवा प्रशासनिक सेवा में आयेंगे तो देश के लिए बड़ी अच्छी बात है।

कार्यक्रम जब समाप्त huwa तो दोपहर के दो बज चुके थे।

राजेश ने बुक की दुकान से कुछ पुस्तके खरीदी।

माधूरी _राजेश, मुझे भूख लगी है चलो किसी रेस्टोरेंट में चलते है।

वे दोनो एक रेस्टोरेंट में गए और डिनर करने लगे।

माधूरी _राजेश आज मैं बहुत खुश हूं। मुझे यह सम्मान तुम्हारे कारण ही मिल पाया।

राजेश _मैम हमे जल्दी से यहां से निकलना चाहिए, मौसम खराब हो रहा है।

माधूरी ने देखा चारो तरफ घने बादल छा गए थे।

दोनो करीब तीन बजे वहा से घर के लिए निकल पड़े।

आधे रास्ते में ही बारिश शुरू हो गई।

माधूरी _ओह बारिश तो शुरू हो गई,,,

हमे कही रुकना चाहिए, नही तो भीग जायेंगे।

राजेश _मैम यहां तो रास्ते के दोनो ओर घने जंगल है, ठहरने के लिए कोई जगह नहीं दिख रहा।

तभी बारिश तेज हो गई और दोनो बुरी तरह भीग गए।

माधूरी _ओह हम तो बुरी तरह भीग गए, अब गाड़ी रोकने से कोई फायदा नही।

कुछ देर चलने के बाद बारिश और तेज हो गई, रास्ता दिखना बंद हो गया।

राजेश _ओह अब तो रास्ता भी नहीं दिख रहा, हमे रुकना ही पड़ेगा।

राजेश ने रास्ते पर एक बड़ा सा बरगद का पेड़ देखा, वह बाइक वही रोक दिया।

राजेश _वैसे पेड़ के नीचे बारिश पर तो रुकना नहीं चाहिए, पर और कोई उपाय नहीं।

दोनो बरगद के नीचे खड़े हो गए।

माधूरी की साड़ी पूरी भीग चुकी थीं उसके शरीर पेसे साड़ी एकदम चिपक गई थीं। वह अपनी साड़ी के पल्लू को निचोड़ने लगी।

वह अपने पैरो के नीचे साड़ी के पानी को निचोड़ने झुकी तभी उसकी पल्लू नीचे गिर गई।

उसकी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां राजेश के आंखो के सामने आ गया।

उसका पानी से भीगा मादक बदन देख कर राजेश के शरीर में हलचल मचने लगा।

माधूरी ने अपनी साड़ी की पल्लू ठीक की,

माधूरी _ये बारिश तो रुक ही नही रही है,,,

बादल गरज रही थी।

तभी एक जोर का धमाका हूवा, ऐसा लगा आसपास बिजली गिरा हो।

माधूरी डर के मारे राजेश से लिपट गई।

माधूरी के लिपटने से राजेश के अंदर रक्त संचार एकदम से बड़ गया।

उसके लिंग में तनाव आने लगा।

माधूरी कुछ देर बाद राजेश से अलग हुई।

वह शर्मिंदगी महसूस करने लगी।

वह सिर झुकाए खड़ी रहीं।

माधूरी _ऐसा लगा की बिजली हमारे ऊपर ही गिर पड़ा है।

इधर राजेश का लंद तन चुका था।

कुछ देर बाद बिजली फिर जोर से कड़का, ओर जोर का धमाका हुआ।

डर के मारे फिर से माधुरी राजेश को जकड़ ली।

इस बार राजेश भी माधुरी को अपनी बाहों में जकड़ लिया।

राजेश का लंद सीधा माधुरी के योनि से टकराया।

उसके शरीर को एक और झटका लगा।

उसकी सांसे तेज हो गई। वह राजेश को खुद से छुड़ाई और दूर खड़ी होकर हापने लगी।

उसने राजेश के पेंट की ओर तिरछी नज़र से देखा।

उसे एक बड़ा उभार नजर आया।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वह बड़ी शर्म भी महसूस कर रही थीं।

तभी राजेश उसके पास आया ,

माधूरी सिर झुका रखी थीं।

राजेश ने उसका चेहरा हाथो से उठाया, और उसकी ओंठो को चूसने के लिए अपना ओंठ समीप लाया, तभी माधुरी खुद को राजेश से दूर करने लगीं। राजेश ने उसका एक हाथ पकड़ लिया।

दोनो की सांसे तेज तेज चल रही थी।

तभी फिर से जोर से बिजली कड़का।

माधूरी फिर से राजेश को जकड़ ली।

राजेश ने माधुरी को जकड़ा, और उसकी पे अपना ओंठ रख चूसना शुरू कर दिया। माधूरी भी राजेश का साथ देने लगीं।

राजेश उसकी ओंठो को चूसने के बाद उसकी गर्दन को चूमने लगा।

माधूरी सिसकने लगी,,,

राजेश उसकी साड़ी के पल्लू को हटा दिया और उसकी खूबसूरत पेट को सहलाते हुए उसकी नाभी को चूमने लगा।

माधूरी भी गर्म होकर सिसकने लगी।

माधूरी खुद को किसी तरह राजेश से छुड़ाकर दूरजाने लगी तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया , माधूरी तेज तेज सांस लेने लगीं।

राजेश ने गीत गाना शुरू कर दिया,,,,,

आज रपट जाए तो हमे न छुड़ैयो,,,,,

राजेश और माधूरी जमीन में लेटकर एकदूसरे से लिपट लिपट कर प्यार कर रहे थे।

तभी राजेश माधुरी के ऊपर आ गया। राजेश ने माधुरी की ब्लाऊज का बटन खोल कर उसको चूची को आजाद कर दिया।

उसकी मस्त बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां देख कर राजेश का लंद और अकड़ गया।

राजेश ने दोनो चुचियों को हाथ से पकड़ कर मसलने और बारी बारी से चूसना शुरु कर दिया।

माधूरी की मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

माधूरी भी बहुत उत्तेजित हो गई थीं उसकी योनि से पानी झरने की तरह बहने से।

इधर राजेश माधुरी की चूची को मसल मसल कर चूसना जारी रखा।

तभी ट्रक की आवाज सुनाई पड़ा,,,

माधूरी, का ध्यान उस ओर गई।

माधूरी _राजेश ट्रक आ रहा है। बस करो।

राजेश, माधूरी के ऊपर से उठ खड़ा हुआ।

माधूरी अपनी ब्लाउज का बटन लगाई।

कपड़े ठीक की।

बारिश थोड़ा कम हो गया था।

माधूरी _राजेश, चलो घर चलते है।

राजेश _ठीक है मैम,,,

जब वे घर पहुंचे 5बज चुके थे।

राजेश _अच्छा मैम अब मैं चलता हूं।

माधूरी _राजेश आओ काफी पीकर जाना। बारिश, रुक जाने दो। फिर चले जाना।

राजेश _पर ऐसे गीले कपड़ों में।

माधूरी _अरे, पहले अंदर तो आओ।

राजेश अंदर गया।

माधूरी _राजेश तुम एक काम करो अपने गीले कपड़े निकाल कर मुझे दे दो, मै इसे वाशिंग मसीन में डाल कर सुखा देती हू।

फिर प्रेस कर दूंगी।

राजेश _पर मैम कही आपके पति आ गए तो गलत समझेंगे।

माधूरी _वो सात बजे से पहले आते नही।

माधूरी ने टावेल लाकर राजेश को दे दिया। और एक लूंगी भी दे दिया।

अपने कपड़े बदलने अपने रूम में चली गई।

राजेश ने अपना कपड़ा उतार, टावेल से शरीर का पानी पोछा और लुंगी पहन लिया।

इधर माधुरी अपने गीले कपड़े उतार दी अपने बदन को तौलिए से पोंछ कर सुगंधित इत्र छिड़क ली। ओंठो पर हल्की सी लिपिस्टिक लगा ली। अपनी बालो को सूखने के लिए खुला छोड़ दी।

वह कमरे से बाहर आई।

नाइटी में काफी सेक्सी लग रही थी।

उसके बड़े बड़े चूचे बाहर आने बेताब लग रहे थे।

राजेश के लंद में फिर तनाव आने लगा।

माधूरी _राजेश तुम चाहो तो बेड रूम में आराम कर सकते हो।

मैं गीले कपड़ों को मशीन में डालकर काफी बनाकर लाती हूं।

राजेश _मैम मै यही ठीक हू।

राजेश ड्राइंग रुम के सोफे में बैठ गया।

इधर माधुरी गीले कपड़ों को सुखाने के लिए मशीन में डाल दी।

फिर वह किचन में काफी बनाने लगी।

राजेश का लंद तन huwa था। वह किचन में गया और माधूरी को पीछे से बाहों में भर लिया।

उसकी बदन की खुशबू को सूंघने लगा।

माधूरी _ अरे काफी तो बना लेने दो, दुध बाहर आ जायेगी।

राजेश ने स्टो बंद कर दिया।

और माधूरी को अपनी ओर घुमा कर उसकी ओंठ चूसना शुरु कर दिया।

ओंठ चूसने के बाद राजेश ने उसकी नाइटी ऊपर कर निकाल दिया। माधूरी नंगी हो गई।

उसकी मदमस्त नंगा बदन देख राजेश का लंद झटके मारने लगा।

राजेश ने उसकी चूची को मसल मसल कर चूसना शुरु कर दिया।

माधूरी के मुंह से मादक सिसकारी निकल कर किचन में गूंजने लगीं।

थोड़ी देर बाद माधुरी राजेश की लूंगी को खीच दी।

उसका लंद देखकर दंग रह गई।

वह नीचे बैठ गई और एक हाथ से लंद को पकड़ कर दूसरे हाथ से अंडकोष सहलाने लगी।

उसके बाद लंद को हाथ से हिलाने लगी।

कुछ देर लंद हिलाने के बाद टोपे को मुंह में भर कर चूसने लगी। लंद को धीरे धीरे मुंह में जितना अंदर ले सकती थीं अंदर ली फिर सकासक चूसना शुरु कर दी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

राजेश उसकी बालो को पकड़ कर लंदको मुंह में अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने माधुरी को ऊपर उठाया और किचन प्लेट को पकड़ा कर झुका दिया ।

नीचे बैठ कर उसकी chut चाटने लगा।

माधूरी को बहुत मजा आने लगा, वह मादक सिसकारी निकालने लगीं।

आह आन,, आई,,, अन,,, उह,,, एं ईई मां,,,

उसकी boor से पानी टपकने लगा।

राजेश उसकी टांगो के बीच खड़ा हो गया।

सपना लंद का टोपा उसकी योनि द्वार पर रख कर एक जोर का धक्का मारा,

लंद boor को चीरकर फुच की आवाज करता huwa अंदर चला गया।

माधूरी कराह उठी।

राजेश ने उसकी चूची पकड़ कर मसला फिर उसकी चूतड सहलाया।

कमर पकड़ कर एक जोर का धक्का फिर मारा लंद का टोपा सीधा बच्चे दानी से टकराया।

माधूरी का पूरा शरीर गन गना गया।

राजेश ने माधुरी की कमर पकड़ कर अब लंद को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

पहले धीरे धीरे फिर अपना स्पीड बढ़ाते गया।

अब माधुरी को दर्द की जगह बहुत मजा आने लगा। वह अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का सहयोग करने लगीं।

राजेश माधुरी की कमर पकड़ कर गप गपा गप लंद पेले जा रहा था।

दोनो को संभोग का अपार सुख मिल रहा था। जिसकी वर्णन करना मुस्किल है।

दोनो chudai के खेल खुलकर खेलने लगे।

लंद माधुरी के योनि में सर सर अन्दर बाहर हो रहा था।

माधूरी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थीं लंद मोटा और लंबा होने के कारण उसकी भगनासा को अच्छी तरह रगड़ खा रहा था।

वह कुछ देर में ही चीखते हुवे झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर दिया।

थोड़ी देर बाद जब माधूरी नार्मल हुई।

लंद को योनि में घुसाए उसे झुका कर आगे चलाते हुवे धीरे धीरे सोफे तक ले गई।

और राजेश माधुरी को सोफे पर लेकर बैठ गया।

माधूरी उसके ऊपर दी। पीठ राजेश के सीने की ओर।

माधूरी की चूची मसलने पीने लगा। कुछ देर बाद बाद माधुरी फिर उत्तेजित हो गई।

वह राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudna शुरू कर दी।

कमरे में फिर से उसकी कामुक सिसकारी गूंजने लगीं।

कुछ देर इसी पोजीशन में उछल उछल कर चुदाती रही जब तक वह थक नही गई।

उसके बाद राजेश राजेश सोफे पर करवट लेकर लेट गया। माधूरी को भी लिटा दिया।

राजेश ने अपना लंद उसकी योनि पर अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद फाक फांक की आवाज करता huwa अन्दर बाहर होने लगा। दोनो को फिर से अपार सुख प्राप्त होने लगा।

राजेश इस पोजिशन में तब तक चोदता रहा जब तक माधुरी झड़ नही गई।

माधूरी के झड़ने के कुछ देर बाद राजेश उसे अपने गोद में बिठा कर फिर ओंठ चूसने लगा। चूची दबाने और चूसने लगा।

जिससे माधुरी फिर गर्म हो गई। सिसकने लगी।

राजेश ने माधुरी की योनि में लंद डाल कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

फिर वह माधुरी को अपने लंद में बिठा कर उठा लिया और हवा में उछाल उछाल कर खड़े खड़े चोदने लगा।

कमरे में माधुरी आह अन आh ,, आई मां आह उह,,,

चीखने लगी।

कुछ देर खड़े खड़े लंद पेलने के बाद राजेश माधुरी को बेडरूम में ले गया।

उसे बेड किनारे लिटा दिया।

माधूरी की टांगो के बीच आकर उसकी योनि में लंद डाल दिया और चूची मसल मसल कर चोदना शुरू कर दिया।

फच फाच गच गाच की आवाज कमरे में गूंजने लगा।

राजेश जोर जोर से धक्का मारने लगा।

फिर अचानक से अपना लंद बाहर निकाल दिया और बेड पर लेट गया।

माधूरी को ऊपर आने का इशारा किया।

माधूरी बेड पर चड गई और लड़ को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि में डाल दिया। फिर उछल उछल कर चुदाने लगी।

उसे राजेश से चुदाने में इतना मजा आ रहा था की जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी।

दोनो chudai के खेल में पूरी तरह खो चुके थे।

राजेश भी पूरे जोश में था।

वह माधुरी की कमर को पकड़ कर अपनी लंद पर पटक पटक कर चोदने लगा।

लंद का टोपा बच्चेदानी से टकराने लगा।

माधूरी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई और फिर झड़ने लगी। वह राजेश के ऊपर ढेर हो गई।

कुछ देर बाद जब वो होश में आई राजेश फिर उसकी योनि चाटना शुरु कर दिया।

जिससे माधुरी फिर गर्म होने लगीं।

जब माधूरी के मुंह से सिसकारी निकलने लगीं।

राजेश ने उसकी कूल्हे के नीचे तकिया लगा दिया। और उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख कर लंद को योनि में ठेल दिया।

इस आसन में योनि की गहराई बड़ गया। लंद पूरे जड़ तक अन्दर बाहर होने लगा जिससे राजेश को बहुत मजा आने लगा।

एक बार फिर दोनो जन्नत की सैर करने लगे।

राजेश तेज तेज चोदने लगा अब वह झड़ने के करीब था।

राजेश माधुरी की चूची मसल कर जोर जोर से चोदने लगा और आह मां आह आह,,

कराहते हुवे वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी योनि में छोड़ने लगा।

जिसका एहसास पाकर माधुरी फिर से एक बार झड़ने लगी।

वह राजेश को जोर से जकड़ ली।

कुछ देर बाद नार्मल हुए और बेड पर लुड़क गए।

माधूरी अपने बेड से उठी, वह ठीक से चल नहीं पा रही थीं उसकी चाल राजेश ने बिगाड़ दी थीं।

उसकी योनि अन्दर से छिल गया था। चलने पर रगड़ खाने से जलन हो रही थीं।

इसकी योनि सूज गई थी। अपनी योनि की हालत पर माधूरी को तरस आने लगीं। और मुस्कुराने लगी।

माधूरी अपनी नाइटी पहनी और राजेश के लिए काफी बना लाई।

माधूरी ने राजेश को काफी ले जाकर दिया जो बेडरूम में अब भी लेटा huwa था।

राजेश बेड से उठा। माधूरी भी बैठ गई दोनो काफी पीने लगे।

राजेश _कैसा लगा?

माधूरी _अब समझ में आया निशा तुम्हे क्यू छोड़ कर चली गई।

इतने देर तक कोई तभी टिक सकता है जब कोई बहुत अनुभवी हो।

मेरी तो हालत ही खराब कर दी।

मैं तुम्हारे कपड़े प्रेस कर लाती हूं।

माधूरी राजेश के कपड़े प्रेस कर सुखा दी और ले आई।

राजेश ने अपना कपड़ा पहन लिया।

राजेश _अब मै चलता हूं।

माधूरी _ठीक है। आज का दिन जिंदगी भर के लिए यादगार रहेगी।

जाते समय माधुरी ने राजेश की गालों को चूम लिया।

राजेश अपना बाइक लेकर चला गया।

पहुंचा तो घर के लोग चिंतित थे।

पदमा _बेटा कहा रह गया था हम लोगों को बड़ी चिंता हो रही थी तुम्हारी,,,
 
धरमपुर जिला जिस संभाग में आता था। उस क्षेत्र में नक्सलियों के कई गुट थे। उन गुटो में सबसे बड़ा गुट भूरा का था। भूरा इस गुट का लीडर था। जैसे की सभी क्षेत्रों में कुछ लोग अच्छे होते है तो कुछ लोग बुरे। भूरा नक्शली इस लिए बना था कि उसे पावर मिल सके। वह अपने पावर का गलत उपयोग कर रहा था। वह लोगों को अपना खौफ दिखाकर, व्यापारियों, ठेकेदारों, अमीरों गांव किसानों से पैसा वसूल करता था। वह एक नंबर का अय्यास था।

वह गांव की खूबसूरत बहु बेटियो को उठवा लेता था।

कुछ दिन उससे खेल कर उसे छोड़ देता था।

उसका एक खास सहयोगी था, जिसका नाम था कल्लू।

भूरा गणेश पुर क्षेत्र में एक्टिव था।

आइए देखते है अभी वहा क्या चल रहा है।

भूराअपना ठिकानों पहाड़ों के बीच घने जंगलों के अन्दर बनाया था। वह टेंट लगाकर रहता था।

भूरा अपने टेंट में खाट पर बैठा था। कल्लू उसके साथ था।

कल्लू,_यार कल्लू, कमांडर के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद। सोचा था कि सेंट्रल कमेटी वाले मुझे इस क्षेत्र का कमांडर बनाएंगे।

लेकिन उन लोगों ने लाखन को यहां भेज दिया।

कल्लू _हा भईया, इस क्षेत्र में जितने भी नक्सली लीडर है, उसमे आप ही के चर्चे ज्यादा है। हमारे गुट ही सेंट्रल कमेटी को वसूली कर ज्यादा पैसा भेजता है। फिर भी आपको कमांडर नही बनाया। सुना है लाखन बड़े वसूलो वाला आदमी है।

उसके चलते हम अपनी मनमर्जी नही कर सकेंगे।

भूरा _भूरा अपने मर्जी का मालिक है, भूरा कल भी अपनी मर्जी का करता था और आने वाले कल भी करेगा। जो भी बीच में आएगा उसे रास्ता से हटा दिया जाएगा। हा हा हा,,,

तभी कुछ नक्सली साथी वहा पहुंचे,,,

साथी _भूरा भईया, बाहर आओ देखो हम क्या लाए है।

भूरा और कल्लू बाहर आया,,,

भूरा _कौन है बे, क्या huwa?

साथी _भईया देखो तुम्हारे लिए दो मस्त चिड़िया लाए है।

उन लोगों ने पास के गांव की दो महिला को उठा लाए थे।

महिलाएं _हमे छोड़ दो, हमे घर जाने दो,,,,, हम आपके हाथ जोड़ते है?

भूरा _हा हा हा हा,,,,

अब इन फुलझड़ियो को कहा से उठा लाया।

साथी नक्सली _भईया गांव की कुछ महिलाएं नदी में नहा रही थीं। उन में दोनो ज्यादा खूबसूरत थी, इसे उठा लाए। आप कह रहे थे न पुराना माल में अब मजा नही आ रहा, नए माल लाओ, तो ले आए आपके लिए नया माल।

भूरा _ हाय क्या माल है? आज तो मजा आ जायेगा।

महिलाओं में एक कुंवारी थी एक शादी सुदा थी।

महिलाएं भूरा का पैर पकड़ लेती है।

भईया हमे जाने दो, हमे छोड़ दो।

एक महिला _मेरा तो ६माह का एक दुध मुहा बच्चा है भईया, मेरा बच्चा भूखा होगा मुझे जाने दो मुझ पर तरस खाओ।

भूरा _हा हा,, घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या?

कुछ दिन हमारे तुम हमारे साथ रहो, हमारा मन बहलाओ। जब हमारा मन भर जाएगा तुम दोनो से

हम तुम दोनो को छोड़ देंगे।

अगर कहना नही मानी तो तुम्हारे परिवार वालो को ठोक देंगे।

इसलिए चुपचाप कुछ दीन हमारे साथ रहो और हमारा मन बहलाओ, उसी में तुम दोनो की भलाई है।

चलो टेंट के अन्दर चलो।

कल्लू _भईया उस पहले वाली,लडकी को क्या करे?

भूरा _जा अपनी टेंट पे लेजा, उसे तू भी मजे कर कुछ दिन। उसके बाद उसे धमका कर गांव छोड़ देना। अगर किसी को कुछ भी बताई तो तुम्हारे परिवार वाले मारे जायेंगे।

कल्लू _ठीक है भईया,,,,

भूरा, उन दोनो महिलाओं को अपने टेंट के अन्दर ले गया।

भूरा _चलो तुम दोनो मेरे साथ।

दोनो महिलाए रोती सुबकती टेंट के अन्दर गई।

टेंट में बिछे खाट पे भूरा लेट गया।

महिलाए, रो एवम सुबक रही थीं।

भूरा _देखो मुझे रोना धोना बिलकुल पसंद नहीं। मै कह रहा हूं वैसे ही करो, नही तो जानती हो न, तेरे पति और तेरे बापू, दोनो को उड़ाने अपने साथियों को भेज दू बोलो।

महिलाए _नही भईया, हमारे परिवार वालो को कुछ मत करना।

भूरा _हूं हूं हूं,,, अब आए न लाइन पे।

ठीक है कुछ नही करेंगे, कुछ दीन हमारा मन बहलाओ तुम दोनो फिर तुम्हे भी छोड़ देंगे।

आओ मेरे आजू बाजू बैठो तुम दोनो।

दोनो भूरा के आजू बाजू खाटमें बैठ गई।

भूरा दोनो के एक एक चूची हाथ में पकड़ कर मसलने लगता है।

भूरा _चलो तुम दोनो अपनी चूची का दर्शन कराओ हमे।

शादी सुदा महिला ने सुबकते हुवे अपनी ब्लाउज की बटन खोलने लगी।

जब चूची बाहर आया, उसकी दूध से भरे बड़ी बड़ी मस्त चूचियां देख कर, भूरा बावरा हो गया।

उसका लंद टनटना गया।

भूरा _हाय क्या मस्त चूचियां है, शाली,

भूरा चुचियों को मसलने लगा उसे चूस कर दुध पीने लगा।

भूरा _ने अपना लंद निकाल लिया। जो काफी बड़ा लग रहा था।

भूरा _तू तो सादी शुदा है मर्दों को कैसे खुश करना है अच्छे से जानती होगी। चल चूस मेरा लंद।

महिला सुबकते हुए लंद चूसने लगी।

भूरा कुंवारी लड़की की चुचियों से खेलने लगा।

जब लंद शख्त हो गया।

भूरा _शादी सुदा महिला से बोला _चल बैठ जा मेरे लंद पे।

शादीशुदा महिला _भईया मुझे छोड़ दो जाने दो।

भूरा _चुप कर साली, भेजू क्या तेरे पति को मरवाने,,, नही न तो जो कह रहा हूं वो कर।

शादी सुदा महिला भूरा के लंद को पकड़ कर अपने योनि पे रख कर बैठे गई। उछल उछल कर chudne लगी।

जब वह थक गई।

उसे अपने ऊपर से उठने कहा।

फिर कुवारी लड़की को खाट पे लिटा दिया।

उसकी boor चाटने लगा।

लड़की सुबकती रही। छोड़ देने के लिए भीख मांगती रही।

भूरा ने अपना लंद कुंवारी लड़की के योनि के छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। एक ही बार में boor fat गया।

लड़की की चीख उठी।

उसके बाद, बुरा लड़की को बेरहमी से चोदता रहा।

उसकी योनि से खून टपकने लगा।

दोनो महिलाओ को बारी बारी से चोदता रहा, उनकी चीखे निकालता रहा जब तक वह झड़ नही गया।

झड़ने के बाद खाट पे लुड़क गया। महिलाए सुबकती रही।

कुछ देर बाद, कल्लू ने आवाज लगाया,,,

कल्लू _भईया बाहर आओ,,

भूरा _क्या बात है कल्लू।

भूरा टेंट से बाहर आया।

कल्लू _भईया, कमांडर ने पत्र भेजा है।

भूरा पत्र खोलकर पढ़ने लगा।

कल्लू _क्या संदेश है भईया?

भूरा _लाखन ने सभी नक्सली लीडर का मीटिंग रखा है। हमे चलना होगा।

भूरा और कल्लू कुछ साथियों को लेकर मीटिंग के लिए निकल पड़े।

जब वे निर्धारित स्थल पर पहुंचे।

अलग अलग गूटो के लीडर भी वहा पहुंच चुके थे।

लाखन का एक सहयोगी था, राघव उसने सभा को सम्बोधित किया।

राघव _मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में जितने भी हमारे गुट है उसके लीडर, मीटिंग में पहुंच चुके है। अब हमे आज का मीटिंग सुरू करना चाहिए।

जैसे की आप सभी को पता होगा। सेंट्रल कमेटी ने लाखन काका को इस क्षेत्र का कमांडर बनाकर भेजा है।

पहले लाखन काका दूसरे राज्य में एक बड़े गुट का लीडर था। आपको समझ और सूझ बूझ को ध्यान में रखकर यहां की नेतृत्व का जिम्मा शौपा है।

आप लोगो से लाखन काका परिचित नहीं है इसलिए पहले आप सभी अपना अपना परिचय दे।

सभी गुट के लीडरो के सहयोगी अपने अपने गुट लीडर का परिचय कराने लगे।

कल्लू _ये है भूरा, इस क्षेत्र के सबसे बड़े गुट का लीडर, जिससे पुलिस वाले भी खौफ खाते है।

भूरा अपने मूंछ पर ताव देने लगा,,,

पुलिस के मोस्ट वांटेड के लिस्ट में सबसे ऊपर है। सरकार ने करोड़ो का इनाम इस पर रखा है।

सभी गुट के लीडरो का परिचय हो जाने के बाद।

लाखन ने सभा को सम्बोधित करना शुरू किया।

लाखन _आज का मीटिंग रखने का उद्देश्य यह था की हम सभी एक दूसरे को जान सके, ताकि हम मिलजुलकर काम कर सके।

मैं वसूलो पर चलने वाला आदमी हूं। जो नियम तोड़ता है वह मुझे पसंद नही। हमने हथियार उठाए है। जल जंगल जमीन और गरीबों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए।

लेकिन मुझे जानकारी मिली है की कुछ लीडर अपने पावर का गलत इस्तमाल कर रहे हैं। गरीबों का रक्षक बनने के बजाए भक्षक बन गए है। गरीबों को लुटा जा रहा है, उसकी बहू बेटियो की इज्जत के साथ खेला जा रहा है। इनकी हरकत से नक्सली के प्रति लोगो में गलत संदेश जाने लगा है। लोगो में आक्रोश बड़ रहा है हमारा जनाधार घट रहा है। याद रखिए हमारी लड़ाई सरकार से है जो यहां के लोगो के जंगल जमीन को छीनकर उद्योग पतियों को देना चाहता है। यहां के जमीदार जो लोगो पर जुल्म ढा रहे हैं हम उनके खिलाफ आवाज उठाने केलिए हमनेयह हथियार उठाया है, लेकिन कुछलोग हमारेनियम कानून के विपरीत काम कर रहे है , ऐसे लोगो से मै कहना चाहूंगा, वे सुधर जाएं। नही तो भविष्य में शिकायत मिलने पर उस लीडर का बहिस्कार कर उससे लीडर पद छीना जायेगा।

मैं समझता हूं मेरी बात सबको समझ आ चुकी होगी।

किसी को कुछ कहना है तो अपनी बात रख सकता है।

मीटिंग समाप्त होने के बाद सभी लीडर अपने अपने के लिए रवाना होने लगे।

लाखन _भूरा तुम मुझसे मिलो।

भूरा अकेले में लाखन से मिला।

लाखन _भूरा, तुम अपने कार्य प्रणाली में सुधार लाओ। मुझे लोगो से तुम्हारी शिकायत मिली है।

भूरा _काका, लगता है मेरे खिलाफ किसी ने आपका कान भरा है। मै तो उसी अनुसार अपना काम कर रहा हूं जो मुझे नक्सली बनते समय सिखाया गया था। फिर भी कोई चूक हो गई होगी उसके लिए मै क्षमा चाहूंगा।

लाखन _मुझे अब तुम्हारी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।

भूरा _जी काका।

उसके बाद,

भूरा और कल्लू दोनो वहा से निकल पड़े।

जाते जाते,,,

भूरा _शाला मुझे पद लीडर से हटाना चाहता है।

इसका तो कोई इंतजाम करना होगा। क्या हम लोग जंगल में मुठ मारते रहेंगे।

इधर सूरज पुर में मधु, स्कूल जाने के लिए आरती के घर आई।

मधु _आरती कहा हो, चलो स्कूल के लिए देर हो रही है।

मधु की आवाज सुनकर, राजेश अपने कमरे से बाहर निकाला।

तभी आरती भी वहा आ गई।

आरती _मै तो कब से तैयार हूं, तुम्हारा ही वेट कर रही थीं।

मधु _नमस्ते राजेश भईया।

राजेश _नमस्ते, कैसा चल रहा है तुम लोगो का स्कूल, कोई समस्या तो नही।

मधु_अच्छा चल रहा है भईया कोई समस्या नहीं।

राजेश _मै कल धरमपुर गया था न, तुम लोगो के लिए बुक लाया हूं।

प्राथमिक शिक्षा में प्रशिक्षण हेतु प्रवेश परीक्षा की तैयारी हेतु।

लो तुम दोनो ये बुक लो और तैयारी करो दो माह बाद एग्जाम है।

आरती और मधु ने राजेश का शुक्रिया किया।

आरती और मधु अपने स्कूल के लिए निकल गए।

इधर हवेली में मुनीम और ठाकुर आपस में चर्चा कर रहे थे।

मुनीम _हुजूर लाखन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए, हमे किसी नक्सली लीडर की मदद लेनी चाहिए।

ठाकुर_तुम ठीक कह रहे हो, मुनीम जी। हमारे किसी आदमी को भेजो। लक्षमण पुर क्षेत्र के नक्सली, गौरा के पास, उसे बोले की ठाकुर ने याद किया है।

मुनीम _जी हुजूर।

मुनीम ने अपने आदमी को, गौरा के पास भेजा।

अगले दिन गौरा, ठाकुर से मिलने के लिए हवेली आया।

ठाकुर _आओ गौरा आओ।

गौरा _ठाकुर साहब बड़े दिनों बाद याद किए, कुछ काम था क्या?

ठाकुर _हा गौरा। हमे तुम्हारी मदद की जरूरत है।

गौरा _ठाकुर साहब कैसी मदद चाहिए गौरा की। आपके आदमी तो हमारी गुट के सदस्यों की संख्या से कही ज्यादा है।

किसी को मरवाना या धमकाना हो तो यह काम तो आपके आदमी भी कर सकता है।

ठाकुर _जो मदद मै आपसे चाहता हूं वो मेरे आदमी नही कर सकते।

गौरा _बोलो, क्या मदद कर सकता हूं मैं आपकी।

ठाकुर _गौरा, हमने सुना है, लाखन तुम्हारे संगठन का कमांडर बनाकर आया है।

गौरा _ठाकुर साहब बिलकुल सही सुना है आपने।

ठाकुर _गौरा, ये लाखन हमारा पुराना दुश्मन है, वह हमे नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचेगा।

हम चाहते है कि तुम लाखन के प्लान के बारे में हमे जानकारी दो।

गौरा _ठाकुर साहब, हम अपने संगठन से गद्दारी नहीं कर सकते।

ठाकुर _देखो गौरा बदले में तुम्हे जो मदद चाहिए, वो तुम्हे मै दूंगा। पुलिस की गतिविधियों के बारे में तुम्हे जानकारी दूंगा, पैसा दूंगा , मै हर तरह से तुम्हारी मदद करूंगा।

गौरा _ठीक है ठाकुर साहब, लेकिन मैं उसी प्लान के बारे में तुम्हे जानकारी दूंगा जो आपको नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया हो।

ठाकुर _ठीक है, गौरा।

मुनीम जी गौरा को नोटो से भरा एक पेटी दो।

मुनीम _जी हुजूर।

मुनीम ने नोटो से भरा एक सूटकेस लाया और गौरा को थमाया।

गौरा _शुक्रिया ठाकुर साहब, अब मुझे इजाजत दीजिए जाने के लिए।

गौरा ठाकुर से इजाजत लेकर चला गया।

कुछ दिन बाद राजेश का आई ए एस का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट भी आ गया।

वह अच्छे अंकों के साथ मुख्य परीक्षा पास कर लिया था।

2माह बाद दिल्ली में इंटरव्यू होना था। जिसकी तैयारी में जुट गया।

इधर आई जी साहब ने ठाकुर को फ़ोन लगाया।

ठाकुर _आई जी साहब बोलो कैसे याद किए इस नाचीज़ को,,,

आई जी _ठाकुर साहब आपको एक बॉडीगार्ड के बारे में बताया था न वह आ गया है। कल आपके घर भेज रहा हूं मैं उसे।

ठाकुर _आई जी साहब ये तो बड़ी अच्छी बात है। शुक्रिया आपका।

अगले दिन बॉडीगार्ड, ठाकुर की हवेली पहुंच गया।

ठाकुर ने उसके रहने के लिए हवेली में ही एक कमरा दे दिया।

रात मे भोजन के समय।

ठाकुर _गीता बेटी, अब तुम्हे कही भी जाना हो तो राजेश की आवश्यकता नहीं है। आई जी साहब ने जो बॉडीगार्ड भेजा है वह तुम्हारे साथ जायेगा।

गीता _पर पिता जी राजेश भी तो मेरी सुरक्षा अच्छे से कर रहा था, फिर नए बॉडीगार्ड रखने की क्या जरूरत थी।

ठाकुर _बेटी आई जी साहब कह रहा था की यह बॉडीगार्ड बहुत ताकतवर और अस्त्र शस्त्र चलाने में माहिर है। उसे एके 47भी दिया गया है तुम्हारी हिफाजत के लिए।

गीता _पर पिता जी,,,

गीता _रहने दो दीदी,,, वैसे भी राजेश का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आ गया है, अब उसे इंटर व्यू की तैयारी करनी चाहिए।

हमे भी उसकी भलाई के लिए सोचना चाहिए। आपके साथ रहेगा तो तैयारी नही कर पायेगा।

गीता _ठीक है छोटी।

इधर शाम के समय मधु, आरती के घर आई।

मधु _भाभी, राजेश भईया है क्या?

पूनम _अरे मधु कुछ काम था क्या राजेश से।

मधु _हा,

राजेश _जाओ, कमरे में है, पढ़ाई कर रहा होगा।

मधु _राजेश भईया,,

राजेश _अरे मधु तुम, आओ बैठो कुछ काम था क्या?

मधु _हा भईया, मै प्रवेश परीक्षा के लिए जो बुक लाए हो उससे तैयारी कर रही थीं। कुछ चीजे है जो समझ नही आ रहा। इसलिए आपसे समझने चली आई।

राजेश _ओह, दिखाओ मुझे, क्या समझ नहीं आ रहा।

आरती किसी काम से बाहर गई हुई थीं।

वह घर पहुंची।

पदमा _अरे तू कहा घूम रही है, तेरी सहेली मधु आई हुई है।

आरती _मधु ,आई है कहा है मधु।

पदमा _राजेश के कमरे में।

आरती राजेश के कमरे में गई।

आरती _अरे मधु, क्या चल रहा है?

मधु _राजेश भईया से जो चीजे समझ नही आ रही थीं उसे समझने आई हूं।

आरती _भइया , मुझे भी कुछ चीजे समझ नहीं आ रही।

राजेश _अरे, जहा भी दिक्कते आती है पूछ लिया कर, मैंने कब मना किया है। और हा तू इधर उधर घूमना बंद कर और अच्छे से तैयारी कर नही तो ताई से तुम्हारी शादी कराने बोल दूंगा।

आरती _न बाबा मुझे शादी नही करना है, अब मैं पढ़ाई पर ध्यान दूंगी।

आरती और मधु राजेश से तार्किक सवालों को हल करने की प्रक्रिया समझने लगी।

रात में भोजन के बाद, जब कीचन में पदमा अकेली थी।

राजेश पीछे से जाकर अपनी बाहों में भर लिया।

पदमा चौंक गई।

पदमा _अरे क्या कर रहा है?छोड़ मुझे किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा।

राजेश _काफी दिन हो गए। आज आपको करने का बड़ा मन कर रहा है?

पदमा _अरे, अभी छोड़ जा किचन से, आ जाऊंगी रात में।

राजेश _सच।

तभी वहां ज्योति पहुंच गई।

ज्योति _अरे राजेश तुम, किचन में कुछ काम था क्या?

पदमा _राजेश को प्यास लगी थीं, पानी मांगने आया था।

राजेश _हा दीदी,, बड़ी,, प्यास लगीं थीं,,,

ज्योति मुस्कुराते हुवे,,

भोजन के बाद पानी नहीं पिया था क्या?

राजेश _पिया तो था, पर पता नही, आज कुछ ज्यादा ही प्यास लगी है।

राजेश किचन से निकल कर अपने कमरे में चला गया।

वह रात में पदमा की आने का इंतजार करने लगा।

पदमा काफी देर बाद आई।

पदमा _अरे सो गया क्या?

राजेश _बड़ी देर कर दी आने में।

पदमा _तेरे ताऊ जी आज लेट से सोए है, क्या करती।

पदमा बेड पे बैठ गई। राजेश उसकी ब्लाउज का बटन खोल कर, उसकी चूचियों को को मसल मसल कर पीना शुरू कर दिया।

पदमा गर्म होने लगी।

राजेश अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।

पदमा, राजेश के लंद को मुंह में लेकर चूसने लगी।

कुछ देर बाद राजेश पदमा की boor चाटने लगा।

जब पदमा पूरी तरह उत्तेजित हो गई।

राजेश पदमा की घोड़ी बना कर।

अपना लंद उसकी योनि में सेट एक जोर का धक्का मारा लंद boor चिर कर एक ही बार में फुच की आवाज करता huwa अन्दर चला गया।

राजेश पदमा की कमर पकड़ कर लंद को योनि में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

दोनो को chudai में बहुत मजा आने लगा।

पदमा कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त करने लगे।

करीब दो घंटे तक दोनो ने chudai का मजा लिया। फिर पदमा राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली गई।

राजेश गहरी नींद में सो गया।

कुछ दिन बाद गणेश पुर में मेला लगने वाला था।

यह मेला प्रतिवर्ष सितंबर माह में आयोजित होता था। जो तीन दिनों का रहता था।

कार्यक्रम का उद्घाटन में मुख्यमंत्री स्वयं आता था। दूर दूर से लोग मेला देखने आते। मेले के उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथो होता था इसलिए इस क्षेत्र के सभी नेता विधायक और सांसद, उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित रहते थे।

जंगल में,,,

लाखन _राघव, आखिर वह दिन आने वाला है जिसका मुझे कब से इंतजार था।

राघव _किस बात का इंतजार था, लाखन काका।

लाखन _ठाकुर से बदला लेने का। जिसके लिए मैंने यह हथियार थामा है।

कुछ दिन बाद यहां गणेश पुर में मेला होने वाला है। मेले में इस क्षेत्र के सभी विधायक, सांसद नेता गण आयेंगे। ठाकुर भी आयेगा। पर इस बार वह बच कर नही जायेगा।

ठाकुर तेरे कर्मो का हिसाब होने का समय अब आ चुका है।

इधर हवेली में रात्रि भोज के समय,,,

गीता _पिता जी अगले सप्ताह गणेश पुर का मेला है उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी आने वाले है। मुझे भी उपस्थित रहना पड़ेगा।

ठाकुर _विधायक होने के नाते मुझे भी वहा जाना पड़ेगा बेटा, अगर वहा नही गए तो, मुख्यमंत्री जी नाराज न हो जाए। सामने चुनाव है, अगर मुख्यमंत्री नाराज हो गए तो टिकट नहीं मिलेगा।

रत्नवती _बेटी गणेश पुर तो धुर नक्सली क्षेत्र है।

वहा तुम्हारा जाना मुझे उचित नहीं लग रहा है।

एक माह पहले तुम पर नक्सलियों ने हमला किया था। वो तो राजेश तुम्हारे साथ था, जो उनकी मंशा को नाकाम कर दिया।

अब तो वह भी तुम्हारे साथ नही है।

गीता _मां, वहा पुलिस और सीआरपीएफ के जवान होंगे, सुरक्षा के लिए।

ठाकुर _बेटी हम साथ में ही चलेंगे। मै आईजीआई साहब से कहूंगा, सीआरपीएफ और पुलिस वालो का बड़ा दल हमारी सुरक्षा में तैनात रहेंगे।

इधर लाखन अपनी योजना को सफल बनाने के लिए भूरा को मिलने के लिए बुलाया।

भूरा लाखन से मिलने उसके निवास क्षेत्र में गया।

भूरा _काका आपने मुझे बुलाया।

लाखन _आओ भूरा, ये तुम्हरा इम्तिहान का समय है।

भूरा _कैसा इम्तिहान काका?

लाखन _हम देखना चाहते हैं तुम में कितना दम है।

भूरा _आप एक मौका दीजिए, फिर आप खुद ही देख लेना भूरा में कितना दम है? बोलो क्या करना है?

लाखन _अगले सप्ताह गणेश पुर का मेला होने वाला है। मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में ठाकुर बालेंद्र सिंह ज़रूर आएगा। मुझे वो जिंदा चाहिए। बोलो ला सकते हो उसे मेरे सामने।ये क्षेत्र तुम्हारे एरिया में आता है। इस लिए मै यह काम तुम्हे सौंप रहा हूं।

भूरा _काका, समझो यह काम हो गया। पर एक शर्त है। यह बात तुम किसी दूसरे गुट को न कहना। और करना क्या है इसका प्लानिंग मै स्वयं बनाऊंगा।

लाखन _ठीक है पर किसी निर्दोष की जान नही जाना चाहिए। मुझे ठाकुर चाहिए वो भी जिंदा।,,,
 
आज गणेश पुर का मेला है। मेला का उद्घाटन मुख्यमंत्री जी के हाथ से होना है। मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में धरम पुर जिले के सभी सत्ता पक्ष के विधायको सांसद और अन्य नेताओं का पहुंचना, जरूरी था। चूंकि सामने चुनाव था, यह इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मेला था, जिसमे दूर दूर से लोग आते है अतः नेताओ को अपने एवम पार्टी का प्रचार प्रसार का एक मौका था।

इधर मेले में गीता और ठाकुर बालेंद्र सिंह भी जाने वाले थे। ठाकुर साहब ने आई जी साहब से कड़ी सुरक्षा की मांग की थी। आई जी साहब ने पूरा आश्वासन दिया था।

इधर भूरा ने नेताओ के काफिले पर हमला करने की पूरी योजना बना ली थीं।

उसने गणेश पुर घाटी के उस जगह को हमले के लिए चुना था। जहा पर सड़क के दोनो ओर जंगल और थोड़ा कम ऊंचाई का पहाड़ था।

वह काफिले पर चारो ओर से हमला करने का योजना बनाया था।

अपनी योजना को इतना गुप्त रखा था की। पुलिस वालो के मुखबिरों तक को इसकी भनक नहीं हो पाई। साथ ही दूसरे गुट के नक्सलियों को भी इसकी कोई सूचना नहीं थी।

उद्घाटन कार्यक्रम दोपहर 2बजे आयोजित था।

गीता और ठाकुर दोनो जाने के लिए तैयारी कर रहे थे।

दिव्या ने राजेश को फ़ोन किया,,

राजेश ने फ़ोन उठाया।

दिव्या _राजेश, कैसे हो?

राजेश _मै ठीक हू दिव्या जी आप कैसी है?

दिव्या _मै भी ठीक हूं। वैसे अभी कर क्या रहे हो?

राजेश _ कुछ नहीं घर में हूं, थोड़ा पढ़ाई कर रहा था।

कुछ काम था क्या?

दिव्या _, तुम्हे तो पता ही होगा आज से गणेश पुर में तीन दिनों का मेला प्रारंभ हो रहा है।

राजेश _हां, भुवन भईया बता रहा था।

दिव्या _आज संडे है, तो मैं कह रही थीं क्यू न हम मेला देखने चलें।

मेरा बडा मन है देखने का।

राजेश _ठीक है दिव्या जी, दोस्त की मन का ख्याल तो रखना पड़ेगा ही।

कितना समय चलना है?

दिव्या _मै 10बजे स्वास्थ्य केंद्र जाऊंगी, वहा से हम गणेश पुर के लिए निकल जायेंगे।

तुम घर आ जाओ , हम यही से मेरे कार से निकलेंगे।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश तैयार होकर, हवेली पहुंचा।

जब राजेश हवेली पहुंचा,सभी नाश्ता कर रहे थे।

वह हाल में बैठ गया।

नौकरानी ने दिव्या को जाकर बताया कि, राजेश बाबू आया है।

ठाकुर _राजेश, वो क्यू आया है?

दिव्या _पिता जी मैंने उसे बुलाया था। आज संडे है तो मैं भी मेला देखने के लिए जाना चाहती हूं।

रत्नवती _बेटी, वो क्षेत्र सेफ नहीं है। तुम्हरा जाना ठीक नहीं है, तुम मत जाओ।

ठाकुर _दिव्या बेटी तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हरा जाना उचित नहीं।

दिव्या _मां, मेरे साथ राजेश जा रहा है न, मेरा बडा मन है, मेरा बडा मन है मेला देखने का। प्लीज

ठाकुर _,, ठीक है, अगर चलना है तो तुम हमारे साथ चलो, हमारी सुरक्षा के लिए, जवान भी होंगे।

गीता _हा, दिव्या पिता जी ठीक कह रहे हैं, तुम हमारे साथ चलो।

दिव्या _दीदी, आप लोगो के साथ जाऊंगी तो मेला में घूम नही पाऊंगी।

मुझे मेला घूमना है।

मां प्लीज मुझे जाने दो न राजेश के साथ।

रत्नवती _अच्छा ठीक है कर लो अपनी इच्छा पूरी।

रत्नवती ने नौकरानी से राजेश को बुलाने कहा, ताकि वह भी नाश्ता कर सके।

नौकरानी ने राजेश से कहा,

नौकरानी _राजेश बाबू, रानी मां आपको बुला रही है।

राजेश अन्दर डायनिंग हाल में गया।

राजेश _नमस्ते, मां जी।

रत्नवती _नमस्ते, राजेश।

ठाकुर _नमस्ते, ठाकुर साहब।

ठाकुर ने कुछ नहीं कहा,,,

नमस्ते, गीता दीदी _नमस्ते राजेश आओ बैठो हमारे साथ लंच करो।

रत्नवती _हा बेटा, आओ बैठो। साथ में लंच करो।

राजेश चेयर पर बैठ गया।

दिव्या _राजेश लो न,

राजेश _दिव्या जी, मै घर से लंच करके आया हूं।

रत्नवती _अरे थोड़ा सा ले लो।

राजेश न चाहते हुए भी, थोड़ा सा लंच लिया।

इधर ठाकुर, लंच करके वहा से चला गया।

रत्नवती _बेटा, गणेश पुर क्षेत्र, नक्सलियों का गड़ है। मै तो दिव्या को जानें से मना कर रही थीं, पर वो जाने के लिए जिद कर रही है। तुम्हे उसकी सुरक्षा का ख्याल रखना होगा।

राजेश _मां जी, आप चिंता बिलकुल न करे। दिव्या जी की जवाबदारी मेरी है।

वैसे गीता दीदी, सुना है आप भी जा रही हो, मेले में,,,

गीता _हा राजेश, वैसे मुझे तो मेला पसंद नही है, उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी आ रहे है तो मुझे भी जाना होगा।

पिता जी और मैं साथ ही निकलेंगे।

सुरक्षा के लिए, कुछ जवान भी हमारे साथ रहेंगे।

राजेश _ओह, ये तो अच्छी बात है।

लंच करने के बाद,,,

दिव्या _राजेश, मै जल्दी आती हूं तैयार होकर, फिर निकलेंगे।

राजेश _ठीक है, दिव्या जी।

दिव्या अपने कमरे में चली गई।

राजेश _गीता दीदी, आप लोग कितना समय निकल रहे हो।

गीता _हम लोग 12बजे यहां से निकल जायेंगे, राजेश।

2बजे तक वहां हमे पहुंचना है।

कुछ देर में ही दिव्या तैयार होकर आई, वह सलवार सूट में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

दिव्या _अच्छा राजेश, चलो चलते है।

दोनो हवेली से बाहर आए,

दिव्या _राजेश, तुम गाड़ी ड्राइव करोगे न की, ड्राइवर को लेकर चलें।

राजेश _दिव्या जी मै कार ड्राइव कर लूंगा।

राजेश और दिव्या कार से निकल गए।

दोनो पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गए।

दिव्या ने वहा भर्ती हुवे पेसेन्ट का पहले हाल चाल जाना, नर्सों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।

फिर वहा से दोनो। ग्यारह बजे

गणेश पुर के लिए निकल गए।

रास्ते में घने जंगल, पहाड़ एवम घांटी पड़ा, प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनद लेते हुए दोनो कब मेला स्थल पहुंचे, समय का पता ही नहीं चला।

करीब दो घंटे मेंवे दोनो मेला स्थल पहुंच गए।

मेला में लोगो की काफी भीड़ थी।

दिव्या _राजेश चलो पहले गणेश मंदिर चलते है वहा, भगवान गणेश जी का दर्शन करते हैं फिर मेला घूमेंगे।

राजेश _ठीक हैं दिव्या जी,,

मंदिर में दर्शन करने के लिए लोगो की कतार लगी थीं।

वे दोनो भी कतार में खड़े हो गए। करीब आधा घंटा के बाद वे उन्हें भगवान गणेश का दर्शन हुवे।

जब वे मंदिर से दर्शन कर निकले,,,

दिव्या _राजेश, तुमने भगवान से क्या मांगा?

राजेश,_इस क्षेत्र के लोगो की सुख शांति और तरक्की।

और आपने क्या मांगा?

दिव्या _मैंने मांगा, हम ऐसे ही दोस्त बनकर रहे कभी हमारा साथ न छूटे।

राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,

राजेश _दिव्या जी ये आपने क्या मांग लिया।

दिव्या _, क्यू, कुछ गलत मांग लिया क्या?

राजेश _नही दिव्या जी बात ऐसी नही है, तुम्हारी शादी हो जायेगी, फिर तुम चले जावोगी, अपने पति के संग, फिर हमारा साथ कहा रहेगा।

दिव्या _ये सब तो मैंने सोचा ही नहीं,,,

मतलब मेरी प्रार्थना अधूरी रहेगी,,,

राजेश _आपको भगवान से ऐसी प्रार्थना नही करनी चाहिए थी, जो पूरी न हो सके।

आप एक काम करो! भगवान गणेश से क्षमा मांग कर, कोई दूसरा मुरादे मांग लो,,

दिव्या _, शायद तुम ठीक कह रहे हो, मुझे भगवान से क्षमा मांग कर दूसरी प्रार्थना करनी चाहिए।

दिव्या ने अपनी आंखे बंद कर ली।

जब उसने अपनी आंखे बंद की, और भगवान गणेश से फिर प्रार्थना की।

हे भगवान, राजेश और मेरी दोस्ती कभी न टूटे बस यहीं प्रार्थना है मेरी।

दिव्या ने अपनी आंखे खोली,,,

राजेश _अब आपने भगवान से क्या मांगा?

दिव्या _यही की हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहें।

राजेश _हा, ये आपने भगवान से सही मांगा।

मैं आपसे वादा करता हूं, दिव्या जी, हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहेगी। चाहे इसके लिए मुझे कितना बडा त्याग भले ही क्यूं न करना पड़े?

दिव्या _शुक्रिया, राजेश।

चलो अब मेला घूमते है।

दोनो मीना बाजार पहुंचे,,,

दिव्या _राजेश, चलो न आकाश झूला में बैठते हैं।

राजेश _न बाबा मुझे डर लगता है आकाश झूले से।

दिव्या, हसने लगी,,,

राजेश तुम्हे डर लगता है?

राजेश _हां, क्या मैं इंसान नही हूं।

दिव्या _, क्या तुम मेरे शौक पूरा करने साथ नही बैठ सकते।

राजेश _दिव्या जी कही ऐसा न हो की आपकी शौंक पूरा करने के चक्कर में मेरे प्राण निकल जाए।

दिव्या _ठीक है, मत बैठो, मै घर जा रही, मुझे नहीं घूमना है मेला।

राजेश _ओ हो, दिव्या जी, तुम भी न, कितनी जिद्दी हो,,, अच्छा चलो, तुम्हारे साथ,, झूले से गिर भी जायेंगे तो कोई डर नहीं,,,

दिव्या खुश हो गई,,,

दोनो झूले पर बैठे,,,

राजेश _दिव्या जी मुझे डर लग रहा है?

दिव्या _राजेश कुछ नही होगा। अच्छा तुम अपनी आंखे बंद कर लो।

राजेश ने अपनी आंखे बंद कर दिया।

झूला घूमना प्रारंभ हुआ।

दो तीन चक्कर के बाद, राजेश का डर जाता रहा। उसने अपनी आंखे खोल दिया।

दिव्या _राजेश बोलो कैसा लग रहा है?

राजेश _दिव्या जी आकाश झूले में तो बहुत मजा आ रहा है? मै बेकार ही अब तक इसमें बैठने से डरता था। शुक्रिया आपका।

दोनो आकाश झूले का मजा लिए। उसके बाद,,,

दिव्या _राजेश चलो, वहा जल परी का शो ढिखाया जा रहा है, चलो न देखते हैं।

दोनो जलपरी देखने लगे।

वहा से निकलने के बाद,

दिव्या _राजेश मुझे भेल पूरी खाना है।

राजेश ने दो प्लेट भेलपुरी ऑर्डर किया।

दिव्या _राजेश यहां तो सर्कस भी आया huwa है, चलो न सर्कस देखते है?

राजेश _, दिव्या जी ये सर्कस तो 3घंटे का शो है। इसे देखेंगे तो मेला पूरा घूम नही पाएंगे।

इधर 12बजते ही गीता और ठाकुर अपने अपने जीप पर बैठ गए। साथ में उसके बॉडी गार्ड।

ठाकुर के साथ, माखन बैठा था। साथ में एक उसके कुछ आदमी भी बैठे थे सुरक्षा के लिए।

जब वे लक्षमण पुर पहुंचे। जवानों की एक टुकड़ी भी उसके आगे और पीछे चलने लगे। जो आई जी के आदेश से ठाकुर की सुरक्षा के लिए लगाया गया था।

वे 2बजे गणेश पुर मेला स्थल पहुंचे गए। सभी विधायक और सांसद वहा पहुंच चुके थे। अब मुख्यमंत्री के आने का इंतजार कर रहे थे।

मेले में एक मंच बनाया गया था। जहां पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने थे।

कुछ देर बाद मुख्यमंत्री जी हेलीकाफ्तर से मेला स्थल पहुंचे।

वहा मेले के समिति द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री द्वारा मेला का उद्घाटन किया गया।

माइक संचालक ने सभी नेताओ को एक एक कर सभा को संबोधित करने के लिए बुलाया।

विधायको ने एवम मंत्री ने अपने सरकार के द्वारा किए गए कामों के बारे में लोगो को बताया। चलाए जा रहे योजनाओं की जानकारी दिया गया, और भविष्य में क्या योजनाएं है इससे भी लोगो को अवगत कराया।

आने वाले चुनाव में अपनी पार्टी को सपोर्ट करने के लिए लोगो से अपील की।

इधर भूरा ने अपने साथियों को भेस बदलकर मेला में भेजा था ताकि वहा क्या चल रहा है कि पल पल की खबर उन्हे मिलता रहे।

फ़ोन के माध्यम से भूरा के साथी, भूरा को पल पल की जानकारी दे रहे थे।

इन सब से बेखबर, दिव्या और राजेश दोनो मेले का आनंद ले रहे थे।

मेले में एक खेल आया था। 6गिलास को एक के ऊपर एक रखा था। एक गेंद से जो 6गिलास को नीचे गिरा देगा। उसे टीवी इनाम पर दिया जायेगा।

बहुत से लोग प्रयास कर रहे थे, पर कोई सफल नही हो पा रहे थे।

दिव्या _राजेश मुझे भी, वह गिलास गिराना है।

राजेश _, भईया जी, हमारी राजकुमारी को भी गिलास गिरानी है बॉल दो,,

दिव्या, ने कई बार प्रयास किया पर वह सफल नही हुई।

दुकानदार मुस्कुराने लगा,,,

दिव्या को बहुत गुस्सा आया,,

दिव्या _राजेश मुझे वो टीवी चाहिए।

राजेश _भईया जी आपका टीवी, मैम को पसंद आ गया है। उसे लाओ हमे दे दो। बदले में इसकी कीमत ले लो।

दुकानदार हसने लगा,,

बाबू जी ये टीवी बिकाऊ नहीं है। ये गिलास गिराओ और इनाम ले जाओ।

दुकानदार हसने लगा।

दिव्या को गुस्सा आया।

दिव्या _राजेश मुझे ये टीवी चाहिए।

राजेश _पर दिव्या जी दुकानदार तो गिलास देने तैयार नहीं,,

कहता है गिलास गिराओ।

दिव्या _तो गिलास गिरा दो,,

राजेश _क्या? ये इतना आसान है क्या? जिसे सुबह से कोई नहीं गिरा पाया है उसे,,

दिव्या _मै कुछ नही जानती, गिलास को गिराओ तभी मैं यहां से जाऊंगी।

राजेश _दिव्या जी ये आपको लगता है मुझसे हो पाएगा।

दिव्या _हां,,

राजेश _और नही huwa तो,,

दिव्या _मै घर नहीं जाऊंगी। जब तक गिलास नही गिरेंगी।

राजेश _दिव्या जी आप तो बिलकुल बच्ची बन गई है?

अब तो कोशिश करनी ही पड़ेगी,,

दो भईया बाल दो,,,

दुकानदार _लो बाबू ये 6बाल लो, अगर तुमने ये छै बालो में भी ये सभी गिलास गिरा दिए तो भी ये टीवी आपकी।

दुकानदार हसने लगा।

राजेश,_ये तो बड़ी अच्छी बात है भाई।

राजेश ने बाल लिया,,

निशाना लगाया,,,

दिव्या हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करने लगी।

राजेश ने निशाना लगाकर तेजी से गिलास को फेका।

एक ही बाल में सभी गिलास हवा में उड़ गए।

एक गिलास तो दुकानदार के मुंह पे लगा। वह अपना मुंह पकड़ कर बैठ गया। सभी दंग रह गए।

लोग ताली बजाने लगे।

दिव्या ने खुशी के मारे राजेश की गालों को चूम लिया।

राजेश दंग रह गया।

दिव्या, ने दुकानदार से ईनाम मांगा।

दुकानदार का मुंह लटक गया था।

उसने टीवी के बदले पैसे देने की बात कही।

दिव्या नही मानी,

हमे टीवी ही चाहिए। ये जो लगाए हो।

आखिर मजबूर होकर दुकानदार को टीवी देना ही पड़ा।

दिव्या ने वह टीवी, वहा पर भीख मांग रहे भिखारी को दे दिया।

दोनो वहा से चले गए,,

राजेश _दिव्या जी ये नही करना था, सबके सामने,,

दिव्या _सॉरी, खुशी में एक्साइटटेट हो गई,,,

अब तो मुझे भी बड़ी शर्म आ रही है, आखिर ये मूझसे कैसे हो गया।

इधर सभी नेता के संबोधन के बाद अंतिम संबोधन मुख्य मंत्री जी का चल रहा था।

संबोधन समाप्त होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री जी कुछ देर रुकने के बाद, हेलीकाफ्टर राजधानी के लिए निकल गए।

उसके बाद सभी विधायक और धरमपुर के सांसद भी अपने गंतव्य की और प्रस्थान करने के लिए। निकल पड़े। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए।

उन सभी को एक साथ वहां से निकलने के लिए कहा गया। आगे पीछे जवानों से वाहन उनकी सुरक्षा में चलने लगे।

इधर भूरा के साथी इस बात की जानकारी। भूरा को दे दिया की नेताओ का काफिला यहां से रवाना हो गया है। आधे घण्टे में वे निर्धारित स्थल पर पहुंच जायेंगे।

भुरा ने अपने साथियों से तैयार रहने के लिए कहा।

वे काफिला का आने का इंतजार करने लगे।

वे सड़क के दोनो ओर पहाड़ पे उगे घने पेड़ में छुपे थे। पहाड़ को काटकर सड़क बनाया गया था।

जैसे ही नेताओ का काफिला यहां पहुंचा।

सड़क पर टिफिन बम लगा दिया था।

उसमे बड़ा धमाका हुआ। जवानों को वाहन पलट गया।

नक्सलियों ने गोली बरसाना सुरू कर दिया।

इधर जवानों ने भी मोर्चा सम्हाला।

ठाकुर के आदमियों ने भी नक्सलियों पर गोली बरसाना सुरु किया।

नक्सलियों ने चारो तरफ से काफिला को घेर कर गोली बरसाना सुरू कर दिया।

नक्सली पेड़ में छुप कर हमला कर रहे थे।

उन्हे ज्यादा नुकसान नहीं हो रहा था। इधर जवान और ठाकुर के आदमी एक एक कर शहीद होने लगे।

क़रीब आधा घंटे तक जवानों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चला, सभी जवान और ठाकुर के आदमी शहीद हो गए।

माखन अंत तक हिम्मत नही हारा, वह लड़ता रहा। फिर भूरा ने उस पर निशाना साधा, और वह भी मारा गया।

गीता का बॉडीगार्ड ने बडा बहादुरी दिखाया पर अंत में वह भी शहीद हो गया।

जब जवानों के तरफ से फायरिंग बंद हो गया। तब भुरा और उसके साथी, सड़क पर आ गए और वाहनों को घेर लिए।

वे वाहनों पर बैठे नेताओ से पूछने लगे तुम कौन हो।

कल्लू _ये तो यहा का सांसद है इसका क्या करना है?

भुरा _ये शाला हमारा विरोधी है, उड़ा दो इसे।

नक्सलियों ने उसे गोली से उड़ा दिया।

उसके बाद विधायको को भी उड़ाने लगे।

गणेश पुर के विधायक को छोड़ दिया, ये हमारा आदमी है। इसे छोड़ दो।

भुरा _ठाकुर किसमे बैठा है ढूंढो?

एक नक्सली ने कहा _भुरा भईया ठाकुर यहां बैठा है।

भुरा उसके पास गया।

भूरा _ठाकुर, अपने हाथ ऊपर कर दो और चुप चाप हमारे साथ चलो।

कल्लू _भईया, इसमें एक लङकी बैठी है, इसका क्या करे। गीता जिला अध्यक्ष,

भुरा वहा आया,,,

वह गीता को देखने लगा,,,

भुरा _बड़ी खूबसूरत है,,,

इसे भी ले चलो, ये हमारा मन बहलाएगी,, हा हा हा हा,,

ठाकुर _नही मेरी बेटी को छोड़ दो,, मै तुम्हारे साथ चलने तैयार हूं, पर मेरी बेटी को छोड़ दो,,

भुरा _छोड़ देंगे, तुम्हारी बेटी को, पर इस पर हमारा दिल आ गया। बड़ी खूबसूरत है तुम्हारी बेटी। कुछ दिन हमारे मन बहलाएगी फिर छोड़ देंगे।

गीता को नीचे उतरने कहा,,

भुरा ने गीता की गालों को हाथ से छुना चाहा।

गीता ने भुरा की गाल पर एक तमाचा जड़ दिया। बदतमीज मुझे हाथ मत लगाओ।

भुरा _साली, अकड़ दिखाती हैं, मुझ पर हाथ उठाती है भुरा पर, तुझे तो ऐसे रगडूंगा। जिंदगी भर किसी और से रगड़ने लायक नहीं रहेगी।

ले चलो साली को।

नक्सली ठाकुर और गीता को अपने साथ जंगल में ले गए साथ में जो साथी उसके घायल हो गए थे उसे भाई अपने साथ ले गए।

इधर दिव्या ने राजेश का चुम्मन लेने के बाद से शर्म से गड़ी जा रही थीं। उसे अब मेले में मन नहीं लग रहा था।

दिव्या _राजेश चलो अब घर चलते है। घर पहुंचते शाम हो जायेगा।

राजेश और दिव्या, वहा से घर के लिए निकल पड़े थे।

जब वे घटना स्थल के पास पहुंचे।

उसने वहा मौजूद लोगो से पूछा क्या हुआ है यहां?

लोगो ने बताया की नेताओ पर नक्सलियों ने हमला कर दिया।

दिव्या पागलों की तरह गीता और ठाकुर को ढूंढने लगीं।

माखन वहा सड़क पर पड़ा huwa था।

वह अंतिम सांस ले रहा था।

दिव्या _माखन, दीदी और पिता जी कहा है? रोते हुए बोली।

माखन आंखे खोला।

माखन लड़खड़ाते जुबाने से बोला, नक्सली दोनो को जंगल में ले गए।

राजेश _किधर ले गए,,

माखन ने उंगली से इशारा कर बताया,, और उसकी सांसे चली गई।

राजेश ने ठाकुर के जीप से हथियार ढूढा, उसे गन और चाकू मिला। वह उसे लें लिया।

राजेश _दिव्या जी, तुम यहीं रुको। पुलिस वाले यहां आएंगे। वो तुम्हे घर तक छोड़ देंगे। मै गीता को लेकर लौटूंगा।

दिव्या _नही, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगी।

राजेश _नही आपकी जान को वहा खतरा हो सकता है, तुम यहीं रुको।

दिव्या _नही, मै साथ चलूंगी। चाहे जो हो जाए।

राजेश, दिव्या को समझाने की कोशिश किया पर वह नही माना।

वह भी राजेश के पीछे पीछे जाने लगीं।

दिव्या _राजेश, यहां देखो। खून के निशान,,,

राजेश _लगता है नक्सली इधर ही गए है,,,

जो नक्सली जख्मी हुए थे उनके खून जमीन पे गिरे हुवे थे। खून के निशान देखकर दोनो जंगल में आगे बढ़ते गए।

वे जंगल में काफी अन्दर तक चले गए।

कही कोई नजर नहीं आ रहा था।

कुछ देर सुस्ताने के बाद वे फिर आगे बढ़े।

घने जंगलों के बीच पहाड़ के नीचे उन्हें टेंट नजर आया।

दिव्या _राजेश वो देखो।

वे दोनो, नक्सलियों के ठिकाने तक पहुंच चुके थे।

राजेश ने देखा टेंट के चारो ओर 500मीटर के सर्कल में कुछ नक्सली पहरा दे रहे थे।

दिव्या _,, राजेश अब क्या करे।

राजेश _अभी हम कुछ नही कर सकते।

हमे रात होने का इंतजार करना होगा।

तब तक हमे यहां से निकलने का रास्ता ढूंढना होगा।

राजेश जंगल में नक्सली के ठिकाने के चारो ओर भागने के लिए रास्ते तलासने लगा।

तभी उसने देखा की ठिकाने से करीब एक km दूर एक नदी बह रही है।

राजेश को भागने का रास्ता मील चुका था।

राजेश _,, हम इस नदी के रास्ते से जायेंगे।

वे दोनो नदी के किनारे पहुंचे।

दिव्या _पर हम नदी से जायेंगे कैसे?

राजेश ने आसपास के पेड़ के डालियों को तोड़ना शुरू कर दिया फिर पेड़ की डालियों को लताओं से बांध कर गठ्ठा बना दिया।

राजेश हम इस गट्ठे पर बैठ कर नदी के रास्ते निकल जायेंगे।

धीरे धीरे रात हो गई।

इधर नक्सली लोग। जो साथी जख्मी हो गए थे। उनका उपचार कर रहे थे। तो कुछ लोग भोजन बना रहें थे।

कुछ लोग पहरा दे रहें थे।

ठाकुर और गीता के दोनों हाथ बांध दिए गए थे।

दोनो को एक टैंट में रखे थे।

टैंट में भुरा आया।

ठाकुर _देखो, भुरा मेरी और तेरी कोई दुश्मनी नहीं है। तुम मुझे और मेरी बेटी को छोड़ दो। बदले में जितना धन कहोगे उतना मेरा साथी तुम्हारे पास छोड़ दिया करेंगे।

भुरा _ठाकुर, मुझे पता नहीं लाखन काका की तुमसे क्या दुश्मनी है। पर उसने मुझे चैलेंज किया था, अपनी ताकत दिखाने। तुम्हे अगवा कर उसके सामने पेस करने।

मुझे कमांडर का विश्वास जीतना था। मै तुम्हे लाखन के हवाले कर दूंगा। फिर लाखन तुम्हे छोड़े या मारे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

वैसे मैं तुम्हे मै छोड़ सकता हूं, अगर तुम्हारी बेटी मेरे साथ खुशी खुशी जंगल में रहने तैयार हो जाए।

भुरा _बोलो दिलरुबा क्या कहती हो।

भुरा ने फिर से गीता को छूने की कोशिश किया।

गीता _कुत्ते मुझे हाथ मत लगाओ। मेरे पास भी आया तो ठीक नहीं होगा।

ठाकुर _, भुरा मेरी बेटी को कुछ मत करो, मै तेरी पैर पड़ता हूं।

भुरा _ठाकुर, भुरा को जो चीज पसंद आ जाती है, उसे हर हाल में पाकर रहता है।

कुछ देर और फड़ फड़ा ले मेरी रानी फिर जंगल में तुम्हारी चीखे निकलेगी।

इधर भोजन बन जाने के बाद, सभी नक्सली भोजन करने लगे।

ठाकुर और गीता को भी भोजन करने के लिए दिया। पर वे नही किए।

इधर भूरा और कल्लू मुर्गा पार्टी करने लगा।

कल्लू _भुरा भईया, शराब के बाद, उन लड़कियों को बुलाऊं क्या जो गांवों से उठा कर लाए थे।

नशा चढ़ने के बाद chut मारने का मजा ही कुछ और है।

भुरा _सच कहा तुमने, लेकिन उन लड़कियों के साथ तुम मजा करो। आज तो मैं उस गीता का सिल तोडूंगा। साली ने भुरा पे हाथ उठाया है न, जाओ उसे यहां लेकर आओ।

कल्लू ने टैंट के आस पास के पहरे दारो से गीता को लाने को कहा।

पहरे दार, गीता को टैंट से घसीटते हुवे। भुरा के टैंट पे ले आया।

कल्लू _लो भईया तुम्हारी बुलबुल तो आ गई। अब तुम मजे करो, मै भी चलता हूं मजे करने।

कल्लू वहा से चला गया।

इधर राजेश ने पहरेदारों को एक एक कर मारना सुरू कर दिया।

एह पहरेदारों पर अचानक से हमला करता और उसका मुंह बंद कर उसका गर्दन घुमा कर तोड़ देता। बिना चीखे उसके प्राण पखेरू उड़ जाते।

उसने अपना कपड़ाउतार कर नक्सली यो का कपड़ा पहन लियाऔर दिव्या को भी पहनने बोल दिया ताकि नक्सलीउसे अपना साथी समझे।

एक एक कर बाहर सर्कलके पहरेदारों को खत्म करने के बाद।

वे अन्दर गए और छुपकर मुआइना करने लगे की ठाकुर और गीता को कहा रखे है।

तभी ठाकुर टैंट से बाहर आया, वह गीता को छोड़ देने गिड़गिड़ा रहा था।

पहरेदार _तेरी बेटी के साथ तो भूरा भईया, सुहागरात मना रहा है , हा हा हा हा,,

पहरेदार उसे धकियाते हुवे अन्दर ले गया।

राजेश को पता चल गया की ठाकुर किस टैंट में है।

इधर सभी नक्सली अपने अपने टैंट में सोने लगे सभी थके हुए थे।

सिर्फ पहरेदार ही बाहर पहरा दे रहें थे।

राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।

वे दोनो ठाकुर के टैंट में गए।

दिव्या _पिता जी,,,

ठाकुर _, बेटी तुम यहां।

दिव्या _हा हम तुम लोगो को बचाने आए है।

दीदी कहा है।

ठाकुर _बेटी, गीता को भूरा के पास ले गए हैं, वो उसके इज्जत के साथ खेलना चाहता है, उसे बचा लो।

राजेश _दिव्या जी तुम ठाकुर को लेकर नदी किनारे पहुंचो मैं गीता दीदी को लेकर आता हूं।

ठाकुर और दिव्या दोनों वहा से छुपतेछूपाते चले गए।

इधर राजेश टैंट के सामने पहरेदार बनकर खड़ा हो गया।

इधर भूरा गीता के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था।

गीता उसका विरोध कर रही थी।

भुरा _अरे आजा मेरी जान क्यू तडफा रही है। यहां तुझे बचाने वाला कोई नहीं है, हा हा हा हा,,

गीता की चीख सुनकर राजेश को पता चल गया, की गीता कहा है।

राजेश उस टैंट की ओर गया। कुछ नक्सली उसे देखे पर राजेश को सपना साथी समझने लगे।

राजेश ने देखा टैंट के बाहर, कुछ पहरेदार है।

जो गीता की सोर सराबे पर हस रहे थे।

राजेश ने मोबाइल की टार्च ऑन किया। झाड़ी में और छिप गया।

पहरेदार _अबे वहां किसी ने टार्च मारी देखो कौन है?

एक पहरे दार वहा गया, राजेश ने उसे खत्म कर दिया।

जब वहां मौजूद पहरेदार को लगा की उसका साथी अब तक आया नही है। एक एक कर उस ओर जाने लगे, राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।

अंत में सिर्फ एक पहरे दार बच गया, राजेश उसके पास जाकर उसे खत्म कर दिया।

इधर भूरा गीता की साड़ी खींचकर अलग कर दिया था।उसे खाट में लिटा कर हाथ खाट से बांध कर, उसकी ब्लाउज को फाड़ने केलिए पकड़ लिया था।

वह उसकी ब्लाउज फाड़ने ही वाला था की राजेश टैंट में घुस गया।

भुरा राजेश की ओर मुड़ कर देखा।

राजेश ने फुर्ती दिखाते हुए, एक भुजा से गर्दन पकड़कर उसका मुंह बंद किया, और दूसरे हाथ से चाकू से उसका गला काट दिया।

भुरा वही ढेर हो गया,,,

उसने गीता के हाथ खोले जो खाट से बंधा था।

गीता राजेश को पहचान नहीं पा रही थीं,,

राजेश _गीता दीदी, मै राजेश हूं

गीता _, राजेश तुम यहां,,

वह राजेश से लिपटकर रोने लगी,,

राजेश _, दीदी, चुप हो जाओ,,, उसके मुंह को बंद कर दिया, हमे यहां से निकलना है।

गीता _पर पिता जी इनके कब्जे में है।

राजेश _,, तुम उसकी चिंता मत करो, ,,

उसे छुड़ा लिए है।

राजेश ने गीता को मरे पड़े पहरेदार का कपड़ा उतार कर गीता को दे दिया।

दीदी इसे पहन लो,,,

राजेश टैंट के बाहर खड़ा हो गया।

गीता अपनी पेटीकोट उतार कर नक्सली ड्रेस पहन ली।

फिर दोनों वहा से छिपते छिपाते नदी की ओर जाने लगे।
 
शुक्रिया आप सभी मित्रो का।
 
राजेश, गीता को लेकर छुपते छुपाते नदी किनारे पहुंचा। जहां दिव्या उन दोनों का इंतजार कर रही थीं।

दिव्या ने गीता को देखते ही गले लगा ली।

दिव्या _दीदी तुम ठीक तो हो न।

गीता _, मै ठीक हूं छोटी, अगर राजेश समय पर नहीं पहुंचता,तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहती।

राजेश _, देखो, बाते बाद में करती रहना। चलो हम दोनों को यहां से निकलना होगा।

राजेश ने पेड़ के टहनियों का जो गठ्ठा बनाया था । उसे नदी में डाला , फिर गीता और दिव्या को बिठा दिया। ठाकुर को भी बैठने के लिए बोल दिया।

ठाकुर भी उसमे बैठ गया।

उसके बाद राजेश उस गट्ठे को धक्का देते हुए। नदी की धार तक ले गया। गठ्ठा नदी की धार में बहने लगा।

राजेश तैरते हुए , गट्ठे को पकड़ लिया।

उसमे तैरने की की कोशिश करने लगा, पर जैसे ही वह गट्ठे पर बैठा, लकड़ी का गठ्ठा पानी में डूबने लगा।

राजेश फिर से पानी में आ गया।

दिव्या _राजेश क्या huwa

राजेश _दिव्या जी, यह गठ्ठा हम चारो का भार नहीं सह पा रहा है। मुझे पानी में ही रहना होगा।

राजेश, गट्ठे का पकड़ा रहा, गठ्ठे के साथ वह भी पानी में बहता रहा।

दिव्या _, राजेश पानी बहुत ही ठंडा है।

अगर तुम ज्यादा देर तक पानी में रहे तो, तुम्हारे स्वास्थ पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।

गीता _हा राजेश, दिव्या ठीक कह रही है।

राजेश _, दिव्या की,मुझे कुछ नहीं होगा, मेरी चिंता मत करो।

उधर नक्सलियों को जब पता चला की ठाकुर और गीता फरार हो गया है, उसका लीडर भूरा मारा गया है, हड़कंप मच गया।

नक्सली,_कल्लू भईया, ये ठाकुर और उसकी बेटी तो बड़े चालक निकले। यकीन नहीं हो रहा ये ठाकुर भूरा जैसे हमारे ताकतवर को ऐसे मार देगा की उसकी चीख भी नहीं निकल पाई।

कल्लू,_मुझे लगता है ठाकुर और उसकी बेटी को बचाने ज़रूर कोई आया होगा। उन लोग अभी आस पास ही होंगे। चप्पा चप्पा छान मारो, साले कही भागने न पाए।

नक्सली रात के अंधेरे में जंगल में छान मारने लगा।

इधर नदी के तेज बहाव में बहते बहते चारो काफी दूर निकल गए।

पर पानी बहुत ठंडा था। राजेश का शरीर ठंडा पड़ने लगा। उसका खून जमने लगा।

इधर news के माध्यम से घटना की खबर पूरे देश में फैल गया।

गृह मंत्रालय मे घटना को लेकर मंत्री और पुलीस अधिकारियों के बीच बैठके होने लगा।

मंत्री ने आई जी को नक्सलियों के खिलाफ कड़े एक्सन लेने और ठाकुर और उसकी बेटी को छुड़ाने का आदेश दिया।

इधर कल्लू और उसके साथियों ने ठाकुर और उसकी बेटी की तलाश में आस पास पूरे जंगल को छान मारा लेकिन वे उसकी पहुंच से काफी दूर निकल गए थे।

इधर राजेश का शरीर ठंडे पानी से अकड़ने लगा।

उसे बेहोशी छाने लगा।

दिव्या को राजेश की बड़ी चिन्ता हो रही थी।

उसने राजेश को कई बार आवाज दिया लेकिन राजेश ने कोई जवाब नही दिया।

उसका पूरा शरीर जमने लगा था। पर सांसे अभी चल रहा था।

दिव्या राजेश के हाथ को पकड़े रखा कही कही उसका हाथ छूट जाता तो राजेश पानी में समा न जाए।

दिव्या _दीदी, राजेश बेहोश हो गया है, हमे जल्दी ही पानी से बाहर निकालना होगा। नही तो अनर्थ हो जाएगा। पिता जी आप कुछ कीजिए।

ठाकुर,_, बेटी हम कर भी क्या सकते हैं अंधेरे में नदी का किनारा भी नहीं दिख रहा है।

तभी नदी का बहाव धीरे धीरे कम होने लगा। शायद नदी पर आगे बांध बना था।

पानी बांध में रुका हुआ था।

तभी दिव्या को कुछ रोशनी दिखाई पड़ा।

दिव्या _दीदी देखो उधर वहा रोशनी दिखाई पड़ रही है। लगाता है वहा कोई है, हमे मदद मांगनी चाहिए।

ठाकुर _बेटा इस घने जंगल में कौन हो सकता है कही नक्सली न हो। हमे खतरा मोल नहीं लेना चाहिए।

गीता _पिता जी जो होगा देखा जाएगा, राजेश ने हमारे लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।

हम उसे ऐसे मरने नही दे सकते।

दिव्या ने आवाज लगाई,,,

दिव्या _कोई है, हमारी मदद कीजिए।

दिव्या की आवाज आदमियों तक पहुंची।

एक आदमी _ये आवाज कैसी?

दूसरा आदमी _नदी के बीच से आ रही है।

उसने टार्च मारी,,,

एक आदमी _कुछ लोग है, जो मदद के लिए पुकार रहे हैं।

दरअसल ये लोग मछली पकड़ने वाली थे जो बांध में रात जाल डालकर मछली पकड़ते थे।

वे दोनों अपना नाव लेकर मदद करने उन लोगों के पास पहुंचे।

दिव्या _कृपया हमारी मदद कीजिए। हम आपके अहसान मंद रहेंगे।

एक आदमी _आइए आप लोग इस नाव में आ जाइए।

दिव्या _पहले राजेश को नाव में डालना होगा, उसका पूरा शरीर ठंडे पानी से अकड़ गया है।

राजेश को पानी से निकालकर नाव में डाला गया।

उसके बाद सभी नाव में सवार होकर किनारे तक पहुंचे।

नदी किनारे एक झोपड़ा बनाया गया था। जिसमे मछली पकड़ने वाले रात बिताते और निगरानी करते थे।

वहा एक खाट था, राजेश को खाट में लिटा दिया गया।

राजेश बेहोश था। उसका शरीर अकड़ गया था।

दिव्या ने जांच किया तो पाया उसकी सांसे अभी भी चल रही है।

दिव्या _, दीदी राजेश की सांस चल रहीं है। हमे इसे गर्मी देना होगा।

दिव्या _दीदी, हमे राजेश के गीले कपड़े उतारने पड़ेंगे।

आदमियों में एक बूढ़ा था, तो एक अधेड़ उम्र का था।

दिव्या ने सभी को बाहर जाने के लिए कहा।

ठाकुर और मछली पकड़ने वाले बाहर चले गए, वे बाहर लकड़ी जलाकर तापने लगे।

इधर दिव्या और गीता ने राजेश के सारे गीले कपड़े निकाल कर अलग कर दिया। उसकी शरीर के गिलेपन को कपडे से पोछा फिर कंबल ओढ़ा दिया।

दिव्या राजेश के पैर के तलवे को रगड़ने लगीं, गीता उसकी हथेली को।

राजेश के खाट के आसपास लकड़ी जलाया गया। ताकि उसका शरीर को गर्मी मिल सके ।

काफी प्रयासों के बावजूद राजेश ने आंखे नही खोली।

दिव्या _राजेश आंखे खोलो, मै तुम्हे कुछ होने नही दूंगी।

गीता _दिव्या, राजेश पर तो कुछ असर ही नहीं पड़ रहा। अब क्या करे?

दिव्या _दीदी मै राजेश को ऐसे मरने नही दे सकती, उसे बचाना ही होगा, चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करनी पड़े।

गीता _हमने सारी कोशिश कर ली, अब और क्या कर सकते हैं।

दिव्या _दीदी मुझे पता है अब क्या करना है? दीदी तुम भी बाहर जाओ।

गीता _दिव्या, तुम ऐसी क्या करने जा रही हो जो मुझे बाहर जाने कह रही।

दिव्या _दीदी, राजेश को जिश्म की गर्मी देना होगा। यही अब अंतिम उपाय है।

गीता _दिव्या ये तुम क्या कह रही हो?

दिव्या_दीदी राजेश ने हमारे लिए इतना कुछ किया है, उसके अहसान के सामने ये कुछ भी नहीं।

दीदी तुम बाहर जाओ। देखना कोई अन्दर नआए।

गीता _ठीक है दिव्या अगर तुम्हरा यही फैसला है तो,,

गीता झोपड़ी से बाहर आई।

आदमियों ने पूछा की बाबू को होश आया।

दिव्या _नही बाबा राजेश अभी भी बेहोश है।

ठाकुर _,, बेटी जो कोशिश करना था कर लिए, अब खुदा की मर्जी के सामने हम कर भी क्या सकते है,शायद राजेश इतने ही दिनों के लिए आया था।

ठाकुर मन ही मन खुश हो रहा था, अच्छा huwa जो रास्ते का कांटा निकल गया साला,,,

इधर दिव्या अपने कपडे उतार कर निर्वस्त्र हो गई। झोपड़ी पर जल रही कंडिल को बुझा दी।और राजेश के सीने को जकड़ कर कंबल ओढ़ ली।

आदमियों ने राजेश की हालात का जायजा लेने, अन्दर जाकर देखना चाहा, पर गीता ने उन्हें रोक दिया।

ठाकुर _क्या huwa बेटी, इन्हे झोपड़ी के अन्दर जाने से क्यों रोक रही हो।

गीता _दिव्या ने किसी को भी अन्दर जाने से मना किया है पिता जी।

ठाकुर _ऐसा क्या उपाय कर रहि है जो दिव्या ने किसी को अन्दर आने से मना की है।

गीता _पिता जी दिव्या एक डॉक्टर है, वो जो भी कर रही होगी, सोच समझ कर कर रही होगी।

इधर दिव्या की जिस्म की गर्मी का प्रभाव राजेश पर पढ़ने लगा।

उसकी शरीर का अकड़न कम होने लगा, शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।

धीरे धीरे राजेश के हाथ पैर में जान आने लगा।

तीन घंटे बाद उसका शरीर सामान्य होने लगा, पर उसका मस्तिष्क अभी निंद्रा की स्थिति में ही था।

धीरे धीर राजेश के शरीर को किसी औरत के जिस्म का अहसास होने लगा।

उसका शरीर गर्म होने लगा उसके लिंग में तनाव आने लगा।

राजेश का मस्तिष्क अभी भी अचेतन अवस्था में था, उसे लगा की उसके भाभी पूनम उसके कमरे में आई है और उससे लिपटी हुई है।

राजेश का लंद तन चुका था। उसने दिव्या को जकड़ लिया।

राजेश जैसे वह सपने में हो,,,,

वह दिव्य को अपनी बाहों में जकड़ कर उसके ऊपर आ गया।

दिव्या की सांसे भी तेज होने लगीं। वह राजेश के साथ निर्वस्त्र सोकर पहले ही गर्म हो चुकी थीं। जब उसे राजेश के खड़े लंद का अहसास huwa उसकी योनि से पानी बहने लगीं थीं।

राजेश जैसे नींद में हो उसने दिव्या को चूमना चाटना शुरु कर दिया, उसकी चूची को चूसने मसलने लगा।

दिव्या सिसकने लगी।

राजेश को लग रहा था कि वह घर में है और उसकी भाभी उसके साथ है।

वह अपना लंद दिव्या के chut पे रखकर दबाव डाला।

लंद chut के अन्दर नहीं जा पा रहा था।

उसने जोर लगा कर धकेल दिया।

लंद boor की झिल्ली फाड़कर अन्दर घुस गई।

दिव्या चीख उठी।

उसकी चीख बाहर बैठे लोगो को सुनाई पढ़ी।

ठाकुर _ये किसी की चीखने की आवाज, क्या huwa है दिव्या को।

ठाकुर झोपड़ी की के अन्दर जाना चाहा।

गीता ने उसे रोक दिया।

गीता _पिता जी, आप रुकिए मैं देखती हूं क्या huwa है? दिव्या ने किसी को अन्दर आने से मना किया है।

इधर गीता ने झोपड़ी के दरवाजे पे बनी छेद से अंदर देखने की कोशिश करने लगी, पर झोपड़ी में अंधेरा होने के कारण उसे कुछ दिखाई नहीं पढ़ा।

पर दिव्या की सिसकारी और चीख से उसे पता चल गया की अन्दर क्या चल रहा है। मतलब राजेश को होश आ गया है, उसे बड़ी खुशी हुई। पर दिव्या ने राजेश की जान बचाने अपनी शील भंग कर दी थीं, इस बात से उसे चिंता होने लगी।

गीता, ठाकुर के पास आ गई।

ठाकुर _क्या बात है बेटी, अन्दर दिव्या ठीक तो है न।

गीता _हा पिता जी दिव्या ठीक है।

इधर मछली पकड़ने वाले कोठाकुर ने अपना परिचय दे दिया था। और यहां से निकलने में मदद करने पर खूब सारा पैसा देने की बाते कहा।

इधर राजेश दिव्या को पूनम समझ कर उसकी chudai करने लगा और स्खलन की ओर बढ़ने लगा।

कुछ देर दर्द का का अनुभव करने के बाद दिव्या को भी राजेश के साथ संभोग में परम सुख प्राप्त करने लगी। वह भी राजेश को जकड़ ली थीं और मुंह से सिसकारी निकालने लगीं।

आखिर कुछ देर बाद राजेश ने एक जोर का धक्का मारते हुवे, अपने लंद से वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी दिव्या के योनि में छोड़ने लगा।

दिव्या जो कई बार झड़ चुकी थीं। राजेश के गर्म वीर्य का अहसास पाकर अंत में एक बार और झड़ गई।

राजेश झड़ने के बाद एक ओर लुड़क गया। और गहरी नींद में चला गया।

गीता _कुछ देर लेटी रही, उसके बाद वह उठी और अपने कपडे पहनकर बाहर आई, सुबह के पांच बज चुके थे।

गीता _दिव्या तुम ठीक तो हो न।

दिव्या _हा दीदी।

गीता _राजेश, को होश आया।

दिव्या _हा दीदी अब वो ठीक है, अभी सो रहा है।

बूढ़ा आदमी _बिटिया , बाबू को होश आया।

दिव्या _हा बाबा अब राजेश ठीक है। अभी सो रहा है।

इधर कल्लू ने वाकी टाकी से लाखन को इस बात की जानकारी दी की भूरा मारा गया। ठाकुर और उसकी बेटी भूरा को मारकर भाग गया।

लाखन ने कहा जो भी huwa वो ठीक नहीं huwa।

सुबह होते ही सीआरपीएफ के जवान न्नक्सलियो पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। अब तुम लोगो का वहा रहना ठीक नहीं है। तुम लोग तत्काल वहा से निकलो।

और सुरक्षित जगह पर पहुंचो।

कल्लू _, पर काका हम कहा जाए।

लाखन _तुम लोग मेरे ठिकाने पर आ जाओ, ये जगह ज्यादा सुरक्षित है।

कल्लू _ठीक है काका हम अभी वहा से निकलते हैं।

कल्लू अपने साथियों के साथ अपने ठिकाने से निकल पड़े।

इधर सुबह सात बजे नींद से जागा।

उसने अपने को झोपड़े में पाया।

रात में क्या huwa उसे याद नहीं था। बस उसे इतना याद था की वह तो गीता दीदी को बचाने के लिए आया था और वे सभी नदी के रास्ते निकल पड़े थे।

उसे अनुभव huwa की कंबल के अन्दर वह बिना कपड़ो के है।

वह खाट से उठ बैठा।

देखा उसका कपड़ा वहा नही है।

उसने आवाज लगाया। कोई है,,,

गीता _लगता है राजेश जाग गया। मै देखती हूं।

गीता _अरे राजेश तुम उठ गए। कैसे हो?

राजेश _, दीदी मै ठीक हूं, मुझे क्या huwa था।हम तो नदी पे थे न, फिर ये झोपड़ी।

गीता _राजेश ठंडे पानी के कारण, तुम्हरा शरीर जम गया था। तुम बेहोश हो गए थे, तो हम तुम्हे झोपड़ी में ले आए।

राजेश _ओह, दिव्या जी कहा है, वो ठीक तो है न।

गीता _हा हम सब ठीक है।

मैं तुम्हारे कपडे लाती हूं तुम उसे पहन लेना। वह मुस्कुराते हुवे वहा से चली गई।

दिव्या ने राजेश का कपड़ा, गीता को दे दिया। उसे राजेश के पास जाने में शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

गीता ने राजेश को कपड़ा दे दिया। जो लकड़ी के आग से सुख चुके थे।

राजेश कपड़ा पहन कर झोपड़े से बाहर आया।

राजेश _दिव्या जी आप ठीक तो है न।

दिव्या _शर्माते हुई, हूं,,

वहा पर मछली पकड़ने वाले में से एक अधेड़ आदमी अपने घर चला गया था।पास में ही उसका गांव था।

ठाकुर , बूढ़ा आदमी से जंगल से बाहर निकलने के रास्ता के बारे में जानकारी ले रहा था, और साथ चलने के लिए कह रहा था।

राजेश _ये बाबा कौन है?

दिव्या _राजेश, बाबा ने कल रात हमारी मदद की।

राजेश _ओह, मुझे तो कुछ भी याद नहीं कल रात क्या क्या huwa?

दिव्या _क्या सच में तुम्हे कुछ याद नहीं कल रात क्या क्या huwa? वह आश्चर्य के साथ निराश होते हुए बोली।

राजेश _मुझे तो बस इतना याद है की हम नदी के रास्ते से निकले थे। नदी के बहाव के साथ आगे बड़ रहे थे।

ठाकुर _देखो, बेटी हमे यहां से अब निकलना होगा। जंगल में ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं।

ये आदिवासी हमे मुख्य सड़क तक ले जाएगा।

चलो हम निकलते है यहां से।

दिव्या _ठीक है पिता जी,,

इधर आई जी के आदेश से जवान, नक्सलियों से जवाबी कार्यवाही करने के लिए। उनके ठिकाने की ओर निकल पड़े थे।

हेलीकाप्टर से भी उसके ठिकाने को ढूंढा जा रहा था।

और आखिर कार उसके ठिकाने तक पहुंचने में जवान कामयाब हो चुके थे।

जवानों ने देखा की नक्सली वहा से भाग चुके हैं। कुछ नक्सलियों की उन्हे लाश मिली। उसमे से भूरा भी था।

जवानों के कमांडर ने यह बात अपने प्रमुख को बताया।

इधर राजेश, दिव्या, ठाकुर और गीता चारों बूढ़े आदमी के पीछे पीछे चलने लगे। तभी उन्हें हेलीकाप्टर की आवाज सुनाई पढ़ी।

हेलीकाप्टर वहा से निकल गया। घने पेड़ के कारण वे इन लोगो को देख नही पाए।

राजेश _लगता है, जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे है। हमे किसी ऊंचे भू भाग पर जाना चाहिए।

जंहा घने पेड़ न हो। ताकि वे हमे देख सके।

वे सभी ऊंचे भाग पर आ गए।

राजेश ने दिव्या का दुपट्टा मांगा।

उसे एक लंबे टहनी से बांध दिया और लहराने लगा।

कुछ देर बाद हेलीकाप्टर फिर उस ओर आया।

दुपट्टे को लहराता huws, हेलीकाप्टर पर बैठा जवान ने देख लिया। उसने पायलेट को वहा नीचे उतारने को कहा।

हेलीकाप्टर जब नीचे उतरा, चारों उसके पास गए।

राजेश ने जवान से बात किया।

जवान नेअपने प्रमुख को बताया की ठाकुर और उसकी बेटी मिल गया है।

आई जी ने उसे उनके कैंपस में लाने को कहा,,

जवान ने सभी को हेलीकाप्टर में बैठने को कहा, लेकिन हेलीकाप्टर में तीन लोग ही बैठ सकते थे।

राजेश ने जवान से कहा की इन तीनो को ले जाओ। मै आ जाऊंगा।बाबा तो है ही मुझे रास्ता बताने।

दिव्या_राजेश मै भी तुम्हारे साथ रुकूंगी। पिता जी और गीता दीदी को ले जाने दो।

इन्हे छोड़कर हमे लेने आ जायेगा।

राजेश _नही दिव्या जी आप जाए,आप मेरी चिंता न करे। मै पहुंच जाऊंगा।

ठाकुर _दिव्या बेटी, राजेश ठीक कह रहा है।

मैं आई जी साहब को बोलूंगा, की हेलीकाप्टर को राजेश को लेने भेज देगा।

दिव्या न चाहते हुए भी जाने मजबूर हो गई।

तीनो को लेकर हेलीकाप्टर उड़ गया।

इधर आई जी के पास पहुंचने के बाद, आई जी ने सारी बातों की जनकारी ली की उनके साथ क्या हुआ।

आई जी ने जवानों को तीनो को घर सुरक्षित पहुंचाने के लिए कहा।

दिव्या ने कहा की राजेश को आ जानें दो फिर हम साथ घर चलेंगे।

आई जी ने कहा की राजेश की चिंता मत करो, वो जवानों के साथ आ जायेगा।

दिव्या और गीता वाहन में बैठ गई।

ठाकुर ने आई जी कहा _आई जी साहब ये राजेश मेरी बेटी के पीछे पड़ा है। साले ने मेरी इज्जत पर कीचड़ उछालने की कोशिश की है। साला दो टकाका लड़का महलों काख्वाब देख रहा है अगर वह जंगल से न लौटे तो मैं आपको मुंह मांगा रकम दूंगा।

आई जी _ठीक है ठाकुर साहब, आप का काम हो जायेगा।

आई जी ने हेलीकाप्टर पर बैठे जवान से कह दिया की। वह लड़का नक्सलियों से मिला huwa है? उसे खत्म कर दो।

हेलीकाप्टर जैसे ही राजेश के पास पहुंचा। जवान राजेश पर गोली बरसानी शुरू कर दिया।

राजेश को समझ नही आया की, उस पर गोली क्यू बरसाया जा रहा है।

राजेश उससे बचते हुए जंगल में जा छिपा।

हेलीकाप्टर से सर्च कर राजेश को खत्म करने की बहुत कोशिश किया, पर राजेश बच निकला। वह घने जंगलों की ओर चला गया।

तभी कल्लू और उसके साथी उस रास्ते से गुजर रहे थे वे हेलीकाप्टर को देखे, उसमे बैठे जवान को किसी पर गोली बरसाते देखे।

कल्लू और उसके साथी छुपे रहें ताकि उसका लोकेशन सीआरपीएफ के जवानों को न मील सके नही तो वे हेलीकाप्टर पर हमला कर सकते थे।

जब जवान काफी देर कोशिश करने के बाद भी, राजेश को मारने में कामयाब नही हो सका। उसकी राइफल की गोलियां खत्म हो गई। वह वापस लौट गया।

हेलीकाप्टर के जाने के बाद,,,

कल्लू और उसके साथी ने राजेश को घेर लिया।

कल्लू _कौन है बे तू, पुलिस वाले तुम प र क्यू गोली चला रहा था।

राजेश _पता नही, शायद वो मुझे नक्सली समझ रहें है?

कल्लू _पर तुम जंगल में आया कैसे?

राजेश _मै दोस्तो के साथ गणेश पुर मेला देखने आया था। मै जंगल में भटक गया।

कल्लू _तू कहा का रहने वाला है।

राजेश _सूरज पुर

कल्लू _क्या तुम सूरज पुर का रहने वाला है,?

कल्लू सोंचने लगा।

नक्सली साथी _कल्लू भईया हो सकता है ये पुलिस वालो का ही आदमी हो, हमे पकड़ने उन लोगो की कोई चाल हो,,,

कल्लू _हूं,,

इसके हाथ बांध दो, और आंखो पर पट्टी बांध दो, इसे काका के पास ले जाते है। वही इसका फैसला करेगा।

कल्लू राजेश को लेकर अपने साथियों के साथ लाखन के पास जाने लगे।

इधर आई जी ने मंत्री को बताया की, हमने भूरा को खत्म कर दिया, उसके कई साथी मारे गए। ठाकुर और उसकी बेटी को भी हमने छुड़ा लिया।

मंत्री खुश हो गया।
 
सभी मित्रो का बहुंत बहुत शुक्रिया
 
आप लोगो ने साथ दिया इसलिए 500 पेज पूरा हो पाया।
 
नक्सली राजेश को लेकर, लाखन के इलाके में पहुंचा।

राघव _कल्लू, यहां पहुंचने में काफी देर कर दिए।

कल्लू _क्या बताए राघव भाई, सीआरपीएफ के जवान हेलीकाप्टर में छान मार रहा है, छुपते छुपाते यहां तक पहुंचे।

राघव _ये युवा कौन है, इसके आंखो में पट्टी क्यू बांधा गया है?

कल्लू _जब हम यहां आ रहें थे तो सीआरपीएफ के जवान इस पर गोली बरसा रहे थे।

राघव _दिखने में तो ये कोई फौजी लगता है इसे यहां क्यूं ले आए। हो सकता है ये पुलिस वालो की कोई चाल हो।

कल्लू _हम इसे यहां लाना तो नही चाहते थे, पर इसने कहा कि ये सूरज पुर का रहने वाला है।

राघव _क्या?

कल्लू _हा,

राघव _मै काका को तुम लोगो के यहां पहुंचने की खबर दे देता हू। तुम लोग इस लड़के की आंखों की पट्टी को अभी मत खोलना। और हा तुम लोग थक गए होगे, जाओ सब आराम करो।

राघव, लाखन के पास उसके टैंट में आया।

राघव _काका, कल्लू अपने साथियों के साथ यहां पहुंच चुके हैं।

लाखन _चलो ठीक है? उन्हे आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई।

राघव _वे पुलिस वालो से छिपते छिपाते यहां पहुंचे है। सभी थक चुके है। मैंने उन लोगों को आराम करने कह दिया है।

लाखन _हूं, अच्छा किया।

राघव _काका, उन लोगो ने एक युवा को अपने साथ पकड़ कर ले आया है। कह रहे थे की पुलिस के जवान उस पर गोली चला रहे थे।

लाखन _तो उसे अपने साथ यहां क्यूं ले आया?

राघव _उन लोगो ने बताया कि युवा, सूरज पुर का रहने वाला है। वह मेला देखने गणेश पुर आया था, जंगल में भटक गया।

लाखन_क्या कहा वह सूरज पुर का रहने वाला है?

राघव _उस लड़के ने तो उन लोगो को यही बताया है।

क्या करना है उस लड़के का?

लाखन _उसे मेरे पास लेकर आओ।

राघव _ठीक है काका।

राघव ने राजेश को लेकर लाखन के पास गया।

अभी भी राजेश की आंखों में पट्टी बंधा था और हाथ बंधे हुए थे।

लाखन _क्या नाम है तेरा?

राजेश _, राजेश

लाखन _दिखने में तो कोई फौजी लगते हो। पुलिस वाले तुम पर गोलियां क्यू चला रहे थे।

राजेश _शायद वो मुझे नक्सली समझ रहें होंगे।

लाखन _क्या तुम सूरज पुर के रहने वाले हो?

राजेश _जी।

लाखन _तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है,?

राजेश _जान कर क्या करोगे?

राघव_देखो तुम हमारे कब्जे में हो, तुम्हे जो भी पूछा जा रहा है उसका सच सच जवाब दो।

राजेश _, और न दू तो।

लाखन_तो हम यही समझेंगे की तुम झूठ बोल रहे हो। तुम एक पुलिस वाले हो और जासूसी करने आए हो।

बताओ, तुम्हारे पिता जी का नाम क्या है?

राजेश _शेखर

लाखन, चौंका,,

लाखन _क्या? तुम शेखर के बेटे हो, मानव प्रसाद का मंझला लड़का

राजेश _, तुम मेरे दादा जी को कैसे जानते हो?

लाखन _ राघव,इसके आंखो की पट्टी खोल दो।

राघव ने राजेश की आंखों की पट्टी खोल दिया।

लाखन ने राजेश के चेहरे को गौर से देखा।

लाखन _तुम्हारी शकल तुम्हारे दादा जी से काफी मिलती है।

राघव इसके इसके हाथ खोल दो। और तुम यहां से जाओ।

राघव ने राजेश का हाथ खोल दिया और वहा से चला गया।

लाखन सिगरेट निकाल कर, जलाया और पीने लगा।

राजेश _क्या तुम मेरे पिता जी को जानते हो।

लाखन _वो मेरा जिगरी दोस्त था।

राजेश _, क्या?

लाखन,_हा, मै भी सूरज पुर का रहने वाला हूं। मै और शेखर जिगरी दोस्त थे।

राजेश,_पर पापा ने आपके बारे में कभी बताया नही।

लाखन _वो क्या बतायेगा? की एक हत्यारा उसका दोस्त है, जो नक्सली बन गया है।

राजेश _क्या, तुमने हत्या किया है?

लाखन _नही मैंने हत्या नही किया है? पर सब यही समझते है?

राजेश _क्या आप बता सकते हैं, आप के साथ क्या huwa है?, आप क्यूं नक्सली बन गए।

लाखन _ठाकुर बालेंद्र सिंह के कारण।

शेखर ने मुझे बताया था कि ठाकुर बालेंद्र सिंह, के कारण।

मैं, शेखर और बिरजू हम तीन मित्र थे। बिरजू ज्यादा पढलिखा नही था वह ठाकुर के हवेली में काम करता था। शेखर पढ़ाई में अच्छा था। कालेज से निकलते ही बैंक में उसकी नौकरी लग गई।

मैं पुलिस बनना चाहता था, उसकी मै तैयारी भी कर रहा था। इधर शेखर की शादी सुनीता भाभी से हुई।

एक दिन शेखर ने मुझे बताया की ठाकुर बालेंद्र सिंह सुनीता भाभी पर बुरी नियत रखता है? वह अकेले में उसे परेशान करता है। मै तो ड्यूटी में चला जाता हूं। तुम अपनी भाभी की उस बालेंद्र सिंह से सुरक्षा करना।

बालेंद्र सिंह के के कहने पर एक दिन सुनीता भाभी को घर में अकेली पाकर, उसके साथी उठा ले जा रहें थे। मैंने उन्हें रोकने का पूरा प्रयास किया।

पर असमर्थ रहा, तब मैं किसी तरह यह बात ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी के पास जाकर, घटना की जानकारी दिया।

वे तत्काल उस खेत में बने झोपड़ी में पहुंचे जहां सुनिता भाभी के साथ, ठाकुर बालेंद्र सिंह जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था।

ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी ने समय पर पहुंच कर भाभी को ठाकुर के हाथो लूटने से बचा लिया।

उसके बाद, बालेंद्र सिंह को गधे में बिठाकर, जूते की माला पहनाकर, बाल मुड़वाकर पूरे गांव में घुमाया गया।

उस घटना के बाद ठाकुर मुझे अपना दुश्मन समझने लगा।

उस घटना के बाद शेखर सुनिता भाभी को लेकर दूर शहर चला गया।

कुछ दिनों के बाद ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी का कुछ लोगो ने हत्या कर दिया।

वे नक्सली भेष में थे। पर मुझे लगता है वे ठाकुर के ही आदमी थे।

राजेश _पर आप पर किसने और किसकी हत्या का इल्जाम लगाया गया ।

लाखन _मेरे दोस्त बिरजू का।

राजेश _क्या?

लाखन _तुमने ठीक सुना।

दरसल, शेखर, लाखन और बिरजू तीनो मित्र थे। बिरजू कम पढ़ा लिखा था वह हवेली में नौकरी करता था।

उसकी शादी बिंदिया से हुई। बिंदिया बहुत ही खूबसूरत थी।

एक दिन ठाकुर बालेंद्र सिंह अपने पिता जी के विधायक चुनाव के प्रचार में। सूरज पुर आया था। बिरजू भी प्रचार में घूम रहा था।

बिरजू ने ठाकुर बालेंद्र सिंह को अपने घर चलने और चाय पानी के लिए कहा तो।

बिरजू हवेली का खास नौकर था तो बिरजू के कहने पर,

ठाकुर बालेन्द्र सिंह बिरजू के घर चाय पानी के लिए रुक गया।

बिरजू की पत्नी, बिंदिया चाय लेकर आई,,,

बिरजू _छोटे ठाकुर ये मेरी पत्नी बिंदिया है।

बिंदिया पैर छुओ, छोटे ठाकुर के,

बिंदिया ने ठाकुर की पैर छूने जैसे ही नीचे झुकी, ठाकुर की नजर बिंदिया की मस्त बड़ी बड़ी चूचियां पर पड़ी जो ब्लाउज से बाहर निकलने बेकरार थे। ठाकुर का लंद तन गया।

बिंदिया ने ठाकुर की नजर को भांप लिया।

वह अपनी पल्लू को ठीक किया और शरमाते हुए, कमर मटकाते कमरे में चली गई।

ठाकुर, बालेन्द्र सिंह बिंदिया को देखता रह गया।

ठाकुर _अरे बिरजू, तुम्हारी लुगाई तो बड़ी खूबसूरत है।

चाय पीकर ठाकुर वहा से चला गया। पर रात को उनके आंखों के सामने बिंदिया की मस्त चूचियां ही झूल रहा था।

एक दिन जब घर में बिंदिया अकेली थी, बिरजू के घर पहुंच गया।

बिंदिया ने दरवाजा खोला।

बिंदिया _छोटे ठाकुर आप।

बालेन्द्र सिंह _मै इधर से गुजर रहा था तो सोचा आपके हाथो की चाय पी लूं, उस दिन आपके हाथो का चाय पी थी, बहुत अच्छी चाय बनाती हो तुम।

बिंदिया _पर वो तो हवेली गया है घर पे नही है।

ठाकुर _ठीक है भाई अगर हमारा यहां अकेले में आना अच्छा नहीं लगा तो हमे चले जाते हैं।

बिंदिया _ नही ऐसी बात नहीं है, आइए न बैठिए।

ठाकुर कुर्सी पर बैठ गया।

बिंदिया _आप बैठिए, मै आपके लिए चाय बना कर लाती हूं।

बिंदिया किचन में चाय बनाने चली गई।

कुछ देर बाद ठाकुर भी किचन में चला गया।

बिंदिया चौंकी,

बिंदिया _ठाकुर साहब, आप यहां क्यूं चले आएं।

ठाकुर _मैंने तुम्हारे लिए कुछ लाया है।

बिंदिया _मेरे लिए,

ठाकुर_ने सोने की कंगन और गले की हार देते हुवे कहा,

ये लो तुम्हारे लिए, मै उस दिन जब तुम्हे पहली बार देखा तो मुंह दिखाई में कुछ दे नही पाया था, तो आज ले आया।

बिंदिया _पर ये तो बहुत कीमती है।

ठाकुर _तुम्हारे हुस्न के आगे तो ये कुछ भी नहीं।

ठाकुर ने बिंदिया को बाहों में भर लिया, जब से तुम्हे देखा है तुम्हरा दीवाना हो गया हूं।

एक बार तुम मेरी बन जाओ, तुम्हे गहनों से लाद दूंगा।

बिंदिया लालच में आ गई,,

बिंदिया _पर ठाकुर साहब किसी को पता चल गया तो मैं बदनाम हो जाऊंगी।

ठाकुर _किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, कोई मुंह खोलेगा तो उस साले को ऊपर पहुंचा दूंगा।

उसके बाद ठाकुर ने बिंदिया को बेडरूम में ले जाकर जी भर कर चोदा।

उसे बिंदिया की chudai करने में बहुँत मजा आया। बिंदिया को भी ठाकुर से चुदाने में मजा आया।

उसके बाद तो बालेन्द्र सिंह मौका पाकर बिरजू के घर आ जाता, और बिंदिया की जमकर chudai करता।

बिंदिया _ठाकुर साहब अगर इसी तरह घर आते रहें तो मैं बदनाम हो जाऊंगी कोई दूसरा रास्ता निकालिए न।

ठाकुर _एक रास्ता है, तुम अपने पति से कहना की दिन भर मै घर में अकेली रहकर बोर हो जाती हूं मुझे भी हवेली में कुछ काम दिलवा दो। उसके बाद फिर हम हवेली में जब चाहे अपनी प्यास बुझा सकेंगे।

बिंदिया को ठाकुर का प्लान अच्छा लगा।

बिंदिया बिरजू को हवेली में काम लगवाने जिद करने लगीं।

बिरजू नही चाहता था की बिंदिया हवेली में काम करे पर उसके जिद के आगे मजबूर हो गया।

बिंदिया भी हवेली में काम करने बिरजू के साथ जाने लगीं।

हवेली में ठाकुर और बिंदिया मौका पाकर अपनी प्यास बुझाने लगे।

जब ठाकुर महेंद्र सिंह और मानव प्रसाद का हत्या huwa तो बिरजू ने हवेली का काम छोड़ दिया। बिंदिया को भी छुड़वा दिया।

इधर ठाकुर लाखन से बदला लेना चाहता था।

इस लिए उसने बिंदिया के साथ मिलकर एक योजना बनाया।

बिरजू की हत्या करने की। और लाखन को फसाने की।

एक दिन रात में जब सभी लोग सो गए थे।

बिंदिया रोते हुवे लाखन के घर गई,,

लाखन _भाभी क्या बात है इतनी रात को क्या हो गया?

बिंदिया _लाखन, पता नही तुम्हारे दोस्त को क्या हो गया है वह खून की उल्टी कर रहा है जल्दी चलो, वह रोते हुवे बोली।

लाखन _बिंदिया के साथ उसके घर गया।

जब लाखन घर पहुंचा तो देखा बिरजू को किसी ने चाकू मार दिया है। वह तड़फ रहा है।

लाखन ने बिरजू को बचाने के लिए चाकू को अपने हाथो से खीच कर बाहर निकाला।

लाखन ने पूछा की किसने चाकू मारा है। बिरजू बता पाता उससे पहले उसने दम तोड दिया।

उसके बाद बिंदिया चिल्लाने लगीं, मेरे पति को मार डाला लाखन ने मेरे पति को मार डाला।

गांव के लोग इकट्ठा हो गए।

बिंदिया ने गांव वालो को बताया की लाखन मुझपे बुरी नियत रखता था वह मुझे अकेली पाकर जबरदस्ती कर रहा था तभी मेरा पति आ गया, उसने लाखन से मुझे बचाने की कोशिश किया तो लाखन ने उसे चाकू मार दिया। मुझे विधवा बना दिया।

गांव वालो के सामने लाखन ने अपनी बात रखनी चाही। तभी वहां पुलिस पहुंच गया। और लाखन को अपने साथ ले गया। ठाकुर ने पुलिस वालो को पहले ही खरीद लिया था।

उसके बाद लाखन ने कोर्ट में अपनी बात रखी। लेकिन जज और वकीलों को भी ठाकुर ने खरीद लिया।

लाखन को उम्र कैद की सजा सुनाया गया। उसे जेल में डाल दिया गया।

एक दिन मौका पाकर लाखन जेल से भाग गया।

वह ठाकुए से बदला लेने के लिए नक्सली बन गया।

इधर बिंदिया बिरजू के मृत्यु के बाद हवेली में ही रहने लगीं।

वह ठाकुर बालेन्द्र सिंह की खास सेविका बन गई।

लाखन ने राजेश को सारी बाते बताया कि किस प्रकार वह नक्सली बनने मजबूर huwa

उसने बताया कि आज अगर ठाकुर भागने में कामयाब नही होता तो वह अपना बदला ले पाता।

राजेश _लाखन काका, अगर आप ठाकुर को मार दोगे तो आपकी बेगुनाही साबित नहीं होगी।

आप बेगुनाह तभी साबित होंगे जब ठाकुर अपना जुर्म कबूल कर लेगा।

लाखन _,, राजेश तुम ठीक कह रहें हो, पर ठाकुर अपना जुर्म कबूल नही करेगा।

राजेश _, काका, ठाकुर ज़रूर अपना जुर्म कबूल करेगा। तुम पर अपने दोस्त की हत्या का जो कलंक लगा है, उस कलंक को हटाना जरूरी है।

बेगुनाह साबित करने में मै तुम्हारी मदद करूंगा।

लाखन _पर तुम ये अकेले कैसे कर पाओगे?

राजेश _काका, भुरा को मैंने ही मारा और ठाकुर उसकी बेटी को मैंने ही छुड़ाया।

लाखन _राजेश ये तुम क्या कह रहे हो?

राजेश _मुझे लगता है मैंने जो किया बिलकुल सही किया।

लाखन _वो कैसे?

राजेश _अगर मै ठाकुर को न बचाता तो आप उसे मार देते। फिर आप अपना बेगुनाही साबित नहीं कर पाते।

भुरा गीता दीदी के साथ जबरदस्ती कर रहा था इसलिए वह मारा गया।

लाखन _भुरा को मैंने भी गलत कार्य करने से मना किया था, पर वो सुधरा नही। आखिर उसकी सजा उसे मिला।

राजेश _काका, मै आपसे वादा करता हूं, आपको बेगुनाह साबित करूंगा।

बिंदिया ही ठाकुर के खिलाफ अपना मुंह खोलेगी।

लाखन _राजेश, तुम्हे किसी भी प्रकार की मेरी मदद की आवश्यकता हो तो मुझ तक खबर भिजवा देना।

मैं और मेरे साथी, तुम्हारी मदद के लिए पहुंच जायेंगे।

राजेश _अच्छा काका अब मुझे चलना होगा, घर वाले मुझे लेकर बड़े चिंतित होंगे।

लाखन _ठीक है राजेश, मै राघव को तुम्हारे साथ भेजता हूं, वह तुम्हे मुख्य सड़क तक पहुंचा देगा।

लाखन ने राजेश को गले लगाया।

फिर राघव को बुला कर राजेश को छोड़ने के लिए भेजा।

राघव ने राजेश को मुख्य सड़क तक छोड़ा, राजेश वहा बस में बैठकर सूरज पुर आया।

उसने फोन कर दिव्या को जानकारी दे दिया की वह घर पहुंच गया है।

जब राजेश घर पहुंचा,,,

पदमा _बेटा तुम कहां थे रात भर, हम कितने चिंतित थे तुम्हे लेकर।

अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो, सुनिता को मैं क्या जवाब देती।

अब के बाद तुम्हे हवेली कभी जाने नही दूंगी। तुम ठाकुर और उसकी बेटियो से दूर ही रहो। इसी में तुम्हारी और हम सबकी भलाई है।

राजेश _ताई, मै बिल्कुल ठीक हूं मुझे कुछ नहीं huwa है, देखो।

भुवन _राजेश, कल रात भर हम में से कोई नहीं सोया है। जो घटना घटित हुआ है नक्सलियों द्वारा, हम तो डर गए थे कही तुम्हारे साथ कुछ गलत न हो गया हो।

तभी सविता भी वहा आ पहुंची।

सविता _राजेश तुम ठीक तो हो न,

राजेश _हां चाची मैं बिल्कुल ठीक हूं। मुझे कुछ नहीं huwa?

सविता _भगवान का लाख लाख शुक्र है, हम सब तुम्हे लेकर बहुत चिंतित थे।

तुम ठाकुर के बेटी के साथ जो थे। जब तुम शाम को नहीं लौटे, तो हमे लगा की तुम्हारे साथ भी कुछ गलत तो नहीं हो गया।

राजेश _अच्छा किसमे है इतना दम जो तुम्हारे भतीजे के साथ कुछ कर सके।

सविता _हा हा, तू तो बडा बहादुर है तुम्हरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

तेरी खबर तो आज लेनी पड़ेगी।

बडा बहादुरी दिखा रहा है।
 
रात में अपडेट देने का कोशिश करूंगा।
 
Back
Top