Incest यह क्या हुआ - Page 27 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

अगले दिन सुबह राजेश देर तक सोया था।

सुनिता राजेश के कमरे में गई।

सुनिता _अरे बेटा काफ़ी देर तक सोया है तबियत तो ठीक है न।

प्यार से राजेश के बालो को सहलाते हुए बोली।

राजेश ने अपनी आंखें खोला।

राजेश _मां आप,,

सुनिता _आज काफ़ी देर तक सोया है तो चिंता हुई तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना।

राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं मां।

राजेश ने अपने दोनो बांहे सुनिता के गले में डाल दिया।

राजेश _सुनिता को चूमने की कोशिश करने लगा।

राजेश _अरे छोड़ क्या कर रहा है। सुबह सुबह ही बदमासी शुरू।

चलो उठो फ्रेस हो जाओ।

सुनिता ने राजेश की चादर को खींचा।

चादर के खींचते ही। उसकी नजर राजेश के लंद पर गया।

सुनिता,_हे भगवान तुम्हारा तो सुबह सुबह खड़ा हो गया है।

राजेश मुस्कुराते हुवे।

ये तो सुबह रोज ही खड़ा रहता है मां।

राजेश बेड से उठ कर बैठ गया।

सुनिता कमरे से जानें को मूढ़ी तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

सुनिता ने पीछे मुड़कर देखा।

राजेश ने खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। और सुनिता की चूची मसलने लगा।

सुनिता _अरे छोड़ न , देखो सुबह सुबह ही ये ठीक नहीं, छोड़ो मां।

राजेश _मां मुझे जोरो की पेसाब लगीं है।

सुनिता _तो जाओ बाथरूम में जाकर पेशाब करो, मुझे क्यू अपने घोड़े पे बिठा लिया।

राजेश _मां आज आप मुझे पेशाब करा दो न।

सुनिता _छी बेशरम तू छोटा बच्चा है जो पेंट उतार कर सुसु कराऊंगी।

राजेश _मै तो तुम्हरे लिए अभी भी छोटा बच्चा हूं न।

सुनिता, हसने लगी,,,

हा हां तू तो बहुत छोटा है तेरा नुनु अभी मात्र एक इंच का है। चल अपने राजा बेटे को सुसु करा देती हूं। नही तो पेंट गिला कर देगा मेरा राजा बेटा।

सुनिता हंसने लगीं।

राजेश _मां मेरी मजाक उड़ा रही हो।

सुनिता _मजाक नही उड़ा रही, तुम्हे आइना दिखा रही, जब बेटे की ऊंचाई बाप के बराबर हों जाय तो मां को अपने बेटे के सामने पल्लू छिपा के रखना चाहिए। तू तो अपने बाप से भी ऊंचा हो गया है तुम्हारा नुनु बाप दोगुना हो गया है, और कह रहा है सुसु कराओ, चल छोड़ मुझे, कमबख्त कही का।

राजेश _नही, एक बार करा दो न सुसु। जब मेरा हाथ फ्रैक्चर huwa था उस समय कराती थी। उसे आनंद को मैं फिर से महसूस करना चाहता हूं।

सुनिता _तू बड़ा गंदा, हो गया है कैसी कैसी शौंके पालने लगा है। अब तेरी शादी करवानी पड़ेगी फिर अपनी बीवी के हाथो ही सुसु करना।

राजेश _मां मान जाओ न नही तो मैं अपना हाथ फिर से फ्रैक्चर कर लूंगा, फिर करवाना ही पड़ेगा।

सुनिता _चुप बदमाश कही का, फिर कभी फ्रैक्चर वाली बात मत कहना।

चल तेरी इच्छा पूरी कर देती हूं।

सुनिता राजेश काहाथ पकड़ के अपने साथ, बाथरूम ले गया।

सुनिता राजेश के पीछे खड़ी हो गई।

सुनिता _चलो सुसु करो।

राजेश का लंद तन कर खड़ा था।

राजेश _मां पहले नुनु को तो पकड़ो नही तो पेशाब इधर उधर कही भी गिरने लगेगा।

सुनिता ने राजेश का लंद, आगे हाथ ले जाकर पकड़ लिया। और उसे सही दिशा दिखाया ताकि पेशाब, सही जगह गिरे।

सुनिता _लो अब जल्दी करो।

राजेश ने जोर लगाया पर लंद में तनाव के कारण पेशाब बाहर नहीं आया।

सुनिता _क्या हुवा बाबा जल्दी करो।

राजेश _मां जोर तो लगा रहा हूं पर पेशाब बाहर नही आ रहा है।

सुनिता हंसने लगीं,,,

नुनु खड़ा रहेगा तो पेशाब कहा से आएगा।

राजेश _मां थोडा नुनु को हिलाओ न तब शायद, पेशाब बाहर आए।

सुनिता _हूं तेरी सब चाल समझती हूं बच्चू।

सुनिता राजेश के लंद को हिलाने लगी।

एक हाथ से अंडकोष सहलाने लगीं।

सुनिता _अब जोर लगा।

राजेश ने फिर जोर लगाया, इस बार पेशाब की तेज धार निकली और बाथरूम की दीवार पर चर र,,

की आवाज के साथ गिरने लगीं।

कुछ देर बाद पेशाब की धार रुक गई। सुनिता फिर लंद को हिलाई,,

राजेश ने फिर जोर लगाया फिर से पेशाब की तेज धार दीवार पर गिरने लगा।

सुनिता मुस्कुराने लगीं। राजेश को बहुत मजा आ रहा था।

इस तरह यही प्रक्रिया तब तक चलती रहीं जब तक राजेश के मूत्राशय का एक एक बूंद बाहर नही निकल गया।

पेशाब कर लेने के बाद भी राजेश का लंद खड़ा ही था।

सुनिता _और कितने देर तक करेगा?

राजेश _बस हो गया मां।

सुनिता _, चल अब तू नहा ले तभी ये बैठेगा।

राजेश _, मां मुझे नहला दो न।

सुनिता _अब तेरा कुछ ज्यादा नही हो रहा।

मुझे नाश्ता बनाना है।

सुनिता वहा से निकल कर स्वीटी के कमरे मे गई।

सुनिता _स्वीटी बेटा तुम ठीक तो हो न, अभी तक उठी नही है। प्यार से उसकी बालो को सहलाते हुए पूछी।

स्वीटी _मां पीछे बड़ा दर्द कर रहा है। ठीक से चल नहीं पा रही।

सुनिता _दिखा मुझे देखू, क्या हाल है तेरी,,,

स्वीटी _मां, मुझे शर्म आयेगी।

सुनिता _कल तो बड़ी उछल उछल कर ले रही थी अपनी पिछवाड़े में अपने भाई के तब तो शर्म नहीं आ रही थी।

अब दिखाने में शर्म आ रही हैं।

चल दिखा मुझे।

सुनिता ने स्वीटी को पकड़ कर घोड़ी बना दिया।

फिर उसकी नाइटी ऊपर उठा कर उसकी गाड़ को चेक करने लगीं।

सुनिता _हाय राम ये तो पूरा सूज गई है।

पता नही तू कैसे ले पा रहीं थी। पूरा हालत बिगाड़ के रख दिया है, कमबख्त ने।

मैं बर्फ से सिकाई कर क्रीम लगा देती हूं। फिर टैबलेट दूंगी उसे खा लेना। हमे दोपहर में तुम्हारे मामा के यहां भी निकलना है। वहा ठीक से रहना, किसी को कोई शक न हो।

सुनिता फ्रिज से बर्फ निकाल लाई और स्वीटी की गाड़ की सेकने लगी। उसके बाद उसमे क्रीम लगा दी। स्वीटी को राहत मिली।

सुनिता ने उसे दर्द की टैबलेट खाने को दी।

इधर राजेश नहाकर फ्रेश हो गया।

कुछ देर स्वीटी आराम की फिर वह भी नहाकर फ्रेश हो गई।

शेखर और राजेश दोनो नाश्ता करने लगे।

शेखर _आज स्वीटी नही आई नाश्ता करने,,,

राजेश _हा मां, स्वीटी कहा है?

सुनिता _उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं वो मेरे साथ करेगी, नाश्ता तुम दोनो कर लो।

आपको ऑफिस भी निकलनी है। 1 बजे छूटी लेकर आ जाना जी। हमे भईया के घर जाना है।

शेखर _हा याद है भई याद है, आ जाऊंगा छुट्टी लेकर।

वैसे भी कल संडे है। छूटी रहती है, दो एक दिन और ले लूंगा।

सुनिता _राजेश बेटा प्रिया को फोन कर दो उससे कहना, 1बजे तैयार रहे।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ने प्रिया को काल किया।

राजेश _प्रिया दी क्या कर रही हो?

प्रिया _कुछ नही बस जानें की तैयारी ही कर रही थी।

राजेश _गुड, दीदी मां कह रही है हम 1बजे निकलेंगे।

प्रिया _राजेश, मुझे बड़ी टेंशन हो रही है।

मैं पिता जी का सामना कैसे कर पाऊंगी। यही सोच सोच कर मेरी हालत खराब हो रही।

राजेश _दीदी आप टेंशन मत लो मै हूं न। सब ठीक होगा।

प्रिया _तुम्हरे कारण ही तो हिम्मत कर पा रही, गांव जानें की, देखो राजेश, तुम सब सम्हाल लोगे न।

राजेश _दीदी, तुम्हे मुझ पर भरोसा नहीं क्या?

प्रिया _तुम पर भरोसा नहीं होता तो जाति क्या?

राजेश _दी आप बस जानें की तैयारी करो, ये न सोचों की मामा जी का सामना कैसे करोगी?

वैसे जीजू जा रहे की नही।

प्रिया _उसको अभी ले जाना ठीक नहीं, पहले मैं ही हो आती हूं। पता नही मुझे देखकर पिता जी की प्रतिक्रिया कैसी होगी?

राजेश _अच्छा ठीक है दी।

प्रिया _अच्छा सुनो, तुम एक बजे के पहले घर आ जाना, हम सब एक ही कार में चलेंगे। बड़ी वाली कार में सभी आ जायेंगे।

राजेश _अच्छा ठीक है दी।

मैं समय पर पहुंच जाऊंगा।

सुनिता _क्या बोली बेटा, प्रिया?

राजेश _मां, दी बोली की एक ही कार में चलेंगे, सब मुझे दी अपने घर बुलाए है, बोल रही थी बडी कार में सभी आ जायेंगे।

सभी साथ में ही चलेंगे।

सुनिता _ठीक है बेटा तुम 12बजे प्रिया और बच्चो को ले आना।

कुछ देर बाद सुनिता स्वीटी के कमरे में गई।

सुनिता _कैसा है अब दर्द कुछ आराम मिला।

स्वीटी _हां मां आप ने जो दवाई मलहम लगाई उससे काफ़ी आराम मिला।

सुनिता _अब चलो तुम भी नहा कर तैयार हो जाओ और नाश्ता कर लो।

राजेश और तुम्हारे पापा नाश्ता कर चुके हैं।

स्वीटी _ठीक है मां।

12बजने के बाद, राजेश प्रिया के घर पहुंचा।

राजेश ने दरवाज़ा का बेल बजाया।

नौकरानी ने दरवाज़ा खोला।

राजेश _दीदी कहा है?

नौकरानी _वो तो कमरे में बच्चो को तैयार कर रही है।

राजेश, प्रिया के कमरे की ओर गया ।

राजेश _दी, कहा हो? हो गया तैयारी?

प्रिया _अरे राजेश तुम आ गए।

पिंकी को तैयार कर रही थी। सारा सामान पैक हो चुका है।

राजेश _अरे पिंकी इस ड्रेस में तो बड़ी प्यारी लग रही है।

पिंकी _थैंक यू मामा जी। मामा जी मां कह रही है की हम नाना जी के घर जा रहे हैं।

प्रिया _नाना जी के घर जानें के बात से पिंकी बड़ी खुश हैं।

राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

हमारा भांजा रेडी huwa है की नही।

प्रिया _उसे भी तैयार कर दी है, अभी दुध पिलाई थी, वो सो रहा है।

राजेश _ओह,,

प्रिया _राजेश तुम ड्राइवर से कार की चाबी लेकर, कार निकालो फिर ये बैग कार में रख दो तब तक मैं भी रेडी होती हूं।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश कार निकालने चला गया इधर प्रिया अपने कमरे में तैयार होने लगी।

राजेश पार्क से कार बाहर निकाला फिर सामान को ले जाकर गाड़ी के डिक्की डाला।

कुछ देर बाद राजेश प्रिया को आवाज लगाया।

राजेश _दीदी और कितना समय लगेगा?

प्रिया _बस हो गया, एक मिनट इधर आना।

राजेश कमरे में गया।

राजेश _क्या बात है दी?

प्रिया _देखो तो,मै ठीक तो लग रहीं हूं न इस साड़ी में।

राजेश _wow दी सच में तुम तो इस साड़ी में कमाल की लग रही हो।

राजेश ने प्रिया को पीछे से बाहों में भर लिया।

प्रिया _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? पिंकी आ जाएगी।

राजेश _दी सच में तुम कमाल की लग रही हो? एक किस तो दे दो।

प्रिया _न पिंकी, कभी भी आ जायेगी। छोड़ो,,

राजेश ने प्रिया के गर्दन को चूमने चाटने लगा।

दीदी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है आपके बदन से।

प्रिया _अरे छोड़ो न, समझा करो पिंकी आ जायेगी।

तभी कमरे में पिंकी की आने की आहट हुई।

राजेश ने प्रिया को छोड़ दिया।

प्रिया हसने लगी।

पिंकी _मम्मी, भाई को उठाओ न वो भी तो जायेगा नाना के घर।

प्रिया _अरे नही बेटा बाबू को मत उठाओ नही तो रोना शुरू कर देगा। ओ अपने मन से उठेगा।

राजेश _अब चलो दी हम लेट हो रहे हैं।

प्रिया _हां, मै बाबू को गोद में ले लेती हूं।

प्रिया ने नौकरानी को आवश्यक निर्देश दी।

फिर

सभी कार में जाकर बैठे।

राजेश कार को अपने घर की ओर दौड़ा दिया।

कुछ ही देर में वे घर पहुंचे।

सुनिता ने दरवाज़ा खोला

सुनिता _आ गए तुम लोग, तुम्ही लोगो का राह देख रहे थे।

प्रिया _बच्चो को तैयार करते थोडा लेट हो गया, बुआ।

सुनिता _मुन्ना सो गया है क्या? दिखाओ मुझे।

प्रिया _ये अभी इसका अभी सोने का समय है, न तो मैने इसको उठाया नही , मुन्ने को सुनिता को पकड़ाते हुए बोली।

सभी अंदर गए सोफे पर बैठ गए। शेखर भी आ चुका था, वो भी कमरे से तैयार होकर बाहर निकला।

सुनिता _राजेश बेटा सारा सामान कार में डाल दो।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ने सारा सामान कार में डाल दिया।

सुनिता _प्रिया, कुछ खाकर निकले हो कि नही गांव पहुंचते शाम हो जाएगी।

स्वीटी कमरे से बाहर आई।

हाई दी कैसी हो, इस साड़ी में तो बहुत प्यारी लग रही हो।

प्रिया _थैंक क्यू,

तुम भी इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो।

प्रिया _बुवा अभी तो कुछ खाने का मन भी नहीं कर रहा।

रास्ते में ही कुछ खा लेंगे।

सुनिता _अच्छा ठीक है।

चलो अब हमें निकलना चाहिए।

सभी लोग घर से निकले,

सुनिता _किसको कहा बैठना है?

देख लो।

राजेश कार ड्राइव किया।

जब वे पहुंचे तो शाम हो चुकी थी।

गांव में राजेश के मामा मामी उन्ही लोगो के आने का इंतजार कर रहे थे।

उनके पहुंचने की खबर सुनकर सभी खुश हो गए।

राजेश _नमस्ते मामा जी।

सत्जन सिंह _अरे आओ मेरे शेर।

राजेश ने सत्जन सिंह के पैर छुए,,

सत्जन सिंह _अरे यार पैर मत छुओ गले लगो।

सुना है कुछ दिनों में कलेक्टर बनने वाले हो।

राजेश _आपका आशीर्वाद रहा तो, ज़रूर बनूंगा मामा जी।

सत्जन _अरे यार मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है।

वैसे दिखने में तो एकदम फौजी लगता है। बड़ी अच्छी बॉडी बनाई है, लगता हैं सुबह खूब मेहनत करते हो।

राजेश _ये सब तो आप से ही सीखा है मामा जी। मै जब भी यहां आता था, आप दोनो मामा को सुबह दंड बैठक लगाते देखता था।

तो मैंने भी ठान लिया था की मै भी अपने मामा जी की तरह सुबह कसरत कर अपनी बॉडी बनाऊंगा।

सत्जन सिंह _तो सुबह तैयार रहना, कुस्ती करने के लिए। मै भी तो देखूं मेरा भांजा कितना ताकत वर है।

राजेश _अरे मामा जी मै भी देखना चाहूंगा आख़िर इस उम्र में भी आप कितनी ताकत रखते हैं।

तभी शेखर वहा पहुंचा।

क्या बाते हो रही है भई मामा भांजे के बीच।

सत्जन _अरे आओ शेखर आओ।

भांजे की बॉडी देखकर, भांजे से कुश्ती लड़ने की इच्छा हो गई। कल सुबह हम दोनो की कुस्ती होगी। तुम मौजूद रहना।

शेखर _अरे बिल्कुल देखेंगे भई, आखिर हमें भी तो देखना है इस उम्र में आप जवान को हरा पाते हैं की नही, जवानी में तो आप अच्छे अच्छे पहलवानों को पानी पिला देते थे। दोनो हंसने लगे।

सत्जन सिंह _वैसे तुम्हारा बैंक का काम कैसा चल रहा है।

शेखर _वैसा ही जैसे पहले, बैंक से घर फिर घर से बैंक, बस ऐसे ही जिंदगी निकल रहीं है। 25सालो से।

उधर प्रिया अपनी मां सावित्री से मिली।

सावित्री ने प्रिया को देखते ही गले लगा।

सावित्री _मेरी बच्ची कैसी है तू।

क्या तुम्हे तुम्हारी मां की कभी याद नहीं आई।

प्रिया रोने लगी।

प्रिया _मां ये क्या कह रही हो, ऐसा भी कोई दिन रहा होगा जब मैने आप लोगो को याद न किया हो,,

मै आप लोगो से मिलने के लिए तड़प रही थी मां, पर बाबू जी का सामना करने की हिम्मत मुझमें नहीं थी।

प्रिया की छोटी बहन सुप्रिया भी आई थी। वह भी दो लड़कियो की मां बन चुकी थी।

प्रिया _छोटी कैसी है तू?

सुप्रिया , प्रिया के गले से लिपट गई।

प्रिया _दी आप कैसी है?

आप ठीक तो है न।

प्रिया _मै तो बिल्कुल ठीक हूं मेरी बहना। मै जिंदगी भर आभारी रहूंगी तुम्हारी।

इस घर की मान मर्यादा को तुमने ही तो बचाया।

प्रिया _ये तो मेरा फर्ज था दी।

आज मैं आपको यहां देख कर कितना खुश हूं बता नहीं सकती दी।

प्रिया ने अपने पिता जी को दूर से देखा।

सुप्रिया _दी जाओ दी, बापू से मिलो,,

प्रिया _मुझे बापू के सामने जानें की हिम्मत नही हो रही छोटी।

सावित्री _बेटी, तुम्हारे बापू बाहर से जीतने कठोर है अंदर से उतने ही मुलायम है।

मैं जानती हूं, वो तुमसे अब भी बहुत याद करते है। मैने कई बार तुम्हारी फोटो को अकेले में देखते हुए देखा है।

जाओ बेटी,,

मां की बातो को सुनकर, प्रिया के अंदर कुछ हिम्मत आया।

वह अपने पिता की ओर आगे बडी।

जैसे ही वह उसकी पैर छूना चाही सत्जन सिंह दूर हट गया और वहां से अपने कमरे में चला गया।

सभी लोग इस घटना को देख रहे थे।

प्रिया, रोने लगी।

राजेश ने प्रिया को गले लगा लिया।

राजेश _दी चुप हो जाओ, सब ठीक हो जायेगा। मै हूं न। मुझ पर भरोसा रखो।

सुनिता _प्रिया, चुप हो जा बेटा, मै भईया से बात करूंगी। वो तुम्हे माफ कर देंगे।

सावित्री भी रो रही थी।

सतपाल सिंह, छोटा मामा।

अपनी पत्नी से।

अब देखते ही रहोगे की मेहमानों को उनका कमरा भी दिखाओगी।

सुमित्रा ने सभी लोगो को उनका कमरा दिखाया।

राजेश को एक अलग कमरा दिया गया।

सुमित्रा राजेश को कमरा दिखाने ले गई।

सुमित्रा _राजेश ये रहा तुम्हारा कमरा।

राजेश _तुम आराम करो, किसी चीज की जरूरत हो तो बताना।

राजेश _मामी ये बताओ अपनी बैग कहा रखूं।

सुमित्रा _यहां अलमारी में रख दो।

सुमित्रा अलमारी को खोल कर दिखाया।

राजेश उसके पीछे गया।

सुमित्रा की चूतड पर चिकोटी काट दी।

सुमित्रा _उई मां, बदमाश कितनी जोर से चिकोटि कांटी।

राजेश _मानी की बच्ची, सब भूल गई क्या?

मैं कब से देख रही हूं मुझे तू इग्नोर कर रही है।

राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर कहा।

भूल गई क्या अपने भांजे का प्यार, मामी तू मतलबी निकली।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया और पलंग पर लेट गया।

सुमित्रा हसने लगी।

सुमित्रा _तो तू चाहता है की मै तुम्हे देखते ही, मेरा प्यारा भांजा आ गया करके सबके सामने तेरे गोद में बैठ जाती।

सुमित्रा _बेड किनारे बैठते हुवे बोली।

बोलो क्या चाहते हो तुम?

राजेश _मामी सच में बच्चे को जन्म देने के बाद तो तुम एकदम से गदरा गई हो।

सुमित्रा _चल हठ बेशरम कितनी गंदी बातें बोलता है अपनी मामी से।

तभी राजेश ने सुमित्रा को अपने ऊपर खींच लिया।

सुमित्रा _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? कोई आ जाएगा। मुझे घर से निकलवाएगा क्या?

राजेश _कितने दिन हो गए तुम्हारे लिए हुवे।

आज तुम मस्त लग रही हो, एकदम गदरा गई हो, आज रात तुम मेरे कमरे में आवोगी।

सुमित्रा _पागल हो गया है क्या?

घर में इतने लोग है और मुझे रात में अपने कमरे मे बुला रहा है।

राजेश _मै तुम्हारा इन्तजार करूंगा।

सुमित्रा _न छोड़ो मुझे मै नही आ सकती।

अब छोड़ो भी नहीं तो भांडा अभी फूट जायेगा ।

राजेश ने पकड़ ढीली कर दी।

सुमित्रा खुद को छुड़ाकर, हंसते हुए भागी।

फिर दरवाजे के पास जाकर पलटी राजेश को जीभ दिखाकर चिढा ने लगी।

राजेश को गुस्सा आया।

राजेश _मामी की बच्ची, रुक अभी सबक सिखाता हूं।

सुमित्रा वहा से भाग गई।

राजेश अपना पैंट शर्ट चेंज कर दिया। कमरे में बाथरूम था नही।

बाथरूम घर के पीछे बनाया गया था।

राजेश फ्रेश होने घर के पीछे गया। बाथरूम पक्का था। 4लेट बाथ बना huwa था।

बाथरूम आधुनिक ढंग से बनाया गया था जैसे शहरों में होती है।

राजेश बाथरूम में फ्रेश होकर हाल में आया।

वहा अन्य लोग भी मौजूद थे।

सुप्रिया राजेश के लिए चाय पकौड़े लेकर आई।

सुप्रिया _लो राजेश चाय पकोड़ा लो।

राजेश _थैंक यू दी।

सुप्रिया _वैसे जब तुम छोटे थे तो गोल मटोल थे। प्रिया दी तो तुम्हे गोलू गोलू करके बुलाती थी। अब तो तू बडा स्मार्ट हो गया है रि। एकदम हीरो की तरह लगता हैं। काफ़ी अच्छी बॉडी बना रखी। लगता है रोज कसरत करते हो।

राजेश _दी एक बात कहूं।

सुप्रिया _हा हा बोलो।

राजेश _पहले जब मैं आता था तब तुम बिल्कुल पतली दुबली लगती थी।

अब तो एकदम खूबसूरत लगती हो। बिल्कुल प्रिया दी की कॉपी।

सुप्रिया शर्मा गई,,,

सुप्रिया _अच्छा,,

राजेश _लगता ही नहीं की आप दी बच्चो की मां हो, अब भी कुंवारी लगती हो।

सुप्रिया _चुप बेशरम।

अच्छा ये पकोड़ा कैसा लगा?

राजेश _बहुत स्वादिष्ट, जायकेदार।

सुप्रिया _अच्छा ये बता, प्रिया दी तो तुम्हारे शहर में ही रहती हैं उसके घर में तो तू आता जाता तो होगा ही।

राजेश _, हां, मै तो दीदी के हॉस्पिटल भी जाता हूं।

सुप्रिया _अच्छा, वहा क्या करता है? राजेश _दीदी से कुछ काम रहता है तो,,,

प्रिया _मामी बता रही थी दीदी तो शहर की बहुत बड़ी नामी डॉक्टर है।

शहर में बडा नाम है उनका, और यहां देखो बिलकुल सामान्य औरतों की तरह व्यवहार कर रही है।

राजेश _यही तो खासियत है दीदी की, जरा भी घमंड नहीं है उसके अंदर।

अच्छा दी मामी ने मेरे बारे में कुछ नही बताया आपको।

सुप्रिया _बताया न,

राजेश _क्या?

सुप्रिया _यही की तू बडा बदमाश है? कई लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घूमती है।

राजेश _बस, यही बताया आपको।

सुप्रिया _हुं।

तभी पिंकी वहा पर मौजूद सभी बच्चो को लेकर राजेश के पास आ गई।

पिंकी _मामा जी चलो न खेलते हैं।

राजेश बच्चों के साथ खेलने लगा।

सुनिता अपनी भाभी सावित्री से।

सुनिता _भाभी कल की सारी तैयारी हो गई है न।

सावित्री _वैसे तो सारी तैयारी हो चुकी है, सुनिता।

पर तू एक बार देख ले कोई, चीज छूट तो नही गया है।

कुछ देर बाद सुमित्रा राजेश के पास आया, गोद में उसका बच्चा था।

सुमित्रा _अरे राजेश, तुमने मुन्ना को देखा है कि नही।

राजेश _नही मुझे तो किसी ने दिखाया ही नहीं।

सुमित्रा _ये लो देख कर बताओ ये किस पर गया है।

राजेश ने बच्चा अपने गोद में ले लिया।

राजेश _मामी मुन्ना तो बड़ा प्यार है।

पर ये किस पे गया है, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा।

सुमित्रा हंसने लगीं।

सुमित्रा ने राजेश के कान में धीरे से फुसफुसाते हुवे कहा, तुम पर,,

राजेश इधर उधर देखने लगा,,,

ये मामी तो मुझे पिटवा देगी।

सुमित्रा _क्या huwa जानकर ख़ुशी नहीं हुई।

राजेश _तू रात में आना तब बताऊंगा, कितनी खुशी हुई।

फुसफुसाते हुए कहा।

तभी वहां सतपाल सिंह पहुंच गया ।

सतपाल सिंह _क्या फुसुर फुसुर हो रही है मामी और भांजे के बीच भई।

राजेश _मामा, मै मामी से कह रहा था कि मुन्ने को बड़े मामा की तरह स्ट्रॉन्ग बनाना आख़िर यह इस घर की वारिस जो है।

सतपाल सिंह _हा भई ये तो है।

वैसे मुन्ना काफ़ी स्ट्रॉन्ग है। देखो कैसे हाथ पैर हिला रहा है।

औरते रात्रि भोज की तैयारी में लग गई। पुरुष लोग कल की तैयारी पे बातचीत करने लगे।

मेहमानों के स्वागत में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

रात में सभी लोगो ने एक साथ भोजन किया।

पुरषो के भोजन के बाद महिलाओं ने भी भोजन कर लिया।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

राजेश ने सुमित्रा को रात को कमरे में आने को कहा था।

पर सुमित्रा ने मना कर दिया था।

राजेश सोने की कोशिश करने लगा। उसे लगा की मामी शायद ही आयेगी।

उसे नींद आ गई।

रात के करीब 1बजे सुमित्रा राजेश के कमरे में चुपके से आई।

राजेश ने दरवाज़ा खुला रखा huwa था। क्या पता मामी आ जाए।

सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर देखी तो राजेश सो रहा था।

सुमित्रा _लो रात में आने को कहकर मेरी नींद खराब करके खुद सो रहा है महाशय।

सुमित्रा ने राजेश का लोवर नीचे खींच कर अंडर वियर भी नीचे कर लंद बाहर निकाल दिया।

फिर अपने में लेकर चूसने लगी।

राजेश का नींद खुल गया।

राजेश _अरे मामी तुम कब आई।

सुमित्रा _बदमाश मुझे बुलाकर खुद चैन की नींद सो रहाहै।

राजेश _मामी मुझे लगा तुम नही आयेगी।

सुमित्रा _हूं, नही आती तो बाद में शिकायत करते मामी ने ठीक से खातिर दारी नही की।

राजेश का लंद तनकर खड़ा हो चुका था।

सुमित्रा _सुन जो करना है जल्दी कर, मेरे पास ज्यादा समय नहीं तुम्हरे मामा जी उठ गए न तो तमाशा हो जजायेगी।

राजेश उठ कर बैठ गया।

सुमित्रा को अपने पास बिठा लिया।

राजेश _मुझे तो आपकी दुध पीने है, जरा चख कर तो देखू आपका दुध कैसा है?

राजेश ने सुमित्रा कीचोली का बटन खोल दिया। बड़ी बड़ी दुध से भरी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।

मामी, आपकी चूंची तो एकदम बड़ी बड़ी हो गई है, लगता हैं इसमें खूब दुध भरा है।

राजेश ने सुमित्रा की चूची का निप्पल ऊंगली से दबाया।

दुध की तेज धार निकल कर उसके चेहरे पर पड़ा। सुमित्रा हसने लगी।

राजेश ने चूचक मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

वह दुध गटक गटक कर पीने लगा।

सुमित्रा भी गर्म होने लगी।

उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

राजेश एक हाथ सुमित्रा के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और boor को रगड़ने लगा।

सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो कर मादक सिसकारी निकालने लगी।

सुमित्रा _, राजेश मेरे पास ज्यादा समय नहीं है जल्दी करो प्लीज।

राजेश सुमित्रा को बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।

फिर उसकी पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठा दिया। पेंटी को नीचे खींचकर निकाल दिया।

राजेश ने chut में ऊंगली डाल कर देखा एक दम गीली थी।

उसने अपना लंद का सुपाड़ा छेद पर रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद boor चीरकर आधे से ज्यादा अंडर घुस गया।

सुमित्रा चिहुंक उठी।

राजेश ने फिर एक करारा शार्ट मारा, लंद boor में जड़ तक घुस गया। लंद का टोपा सुमित्रा की बच्चेदानी से टकराया।

सुमित्रा फिर चिहुंक उठी।

उसके बाद राजेश ने लंद को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

वावह सुमित्रा की कमर पकड़ कर गपागप chodna

सुरु कर दिया।

Chudai में दोनो को बहुत मजा आने लगा।

सुमित्रा कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी। कमरे मे सुमित्रा की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक तथा फुक फुक की आज गूंज रही थी ।

सुमित्रा की boor से पाणी झरने की तरह बह रहा था।

कदोनो को संभोग में आपार सुख प्राप्त हो रहा था।

राजेश कुछ देर इसी पोजीशन में चोदने के बाद। उसे बेड किनारे लिटा दिया। टांगों को फैला कर लंद एक ही धक्के ने जड़ तक घुसा दिया

और चूची मसलते हुए कस कस कर धक्के लगाने लगा।

कमरे में फिर से मादक सिसकारी गूंजने लगा।

सुमित्रा दो बार झड़ चुकी थी।

राजेश अब बेड पे लेट गया। उसका लंद हवा में लहरा रहा था।

सुमित्रा को ऊपर आने का इशारा किया।

सुमित्रा बेड के ऊपर आ गई और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी boor में डाल कर बैठ गई।

राजेश ने उसकी चूंची पकड़ लिया।

सुमित्रा उछल उछल कर chudna सुरू कर दी। राजेश भी जोश में था वह भी सुमित्रा की कमर पकड़ कर नीचे से कमर उठा उठा कर लंद को boor की गहराई में ले जानें की कोशिश करने लगा।

कमरे में दोनो की ऊ आह ऊ आह की आवाजे गूंजने लगी।

कुछ ही देर में सुमित्रा फिर झड़ कर राजेश के ऊपर लुड़क गई।

जब वह होश में आई वह बेड से उतरी,,

सुमित्रा _राजेश अब बस करो , काफ़ी देर हो गई है। तुम्हारे मामा जी उठना जाए।

राजेश_पर मामी मेरा अभी huwa नहीं है।

सुमित्रा _तुमारा बस चले तो रात भर लेते रहोगे।

न बाबा अब मैं और नही रुक सकती।

सुमित्रा पेंटी पकड़ कर कमरे से बाहर निकल गई।

राजेश लंद हिलाता रह गया।

राजेश _ये मामी तो खुद मज़े लेकर मेरी नींद उड़ा कर चली गईं। शाला अब ऐसे में नींद कहा से आयेगी।

अब क्या करूं?

राजेश ने सोचा क्यूं न प्रिया दीदी से बात करे शायद वो मान जाए।

राजेश ने देखा 2बजने वाला था।

उसने प्रिया को काल किया।

प्रिया गहरे नींद में सो रही थी। पहले तो उसे पता नही चला किसी ने काल किया है।

राजेश ने फिर काल किया।

प्रिया की नींद खुली।

इतनी रात को किसका फोन है?

उसने फोन चेक किया। राजेश का काल, इस वक्त।

उसने काल उठाया।

राजेश _दी,,

प्रिया _राजेश इस वक्त, क्या बात है?

राजेश _दी मुझे नींद नहीं आ रही। शायद नई जगह है इसलिए। तुम्हारे पास कोई दवा है क्या? नींद आने की।

प्रिया _राजेश, नींद की दवा लेना अच्छी बात नहीं, तुम कोशिश करो, सोने की।

राजेश _दी कब से कोशिश कर रहा हूं। पर नींद आ ही नहीं रही है।

प्रिया _अच्छा ठीक है मैं ठंडे तेल से तेरी सिर की मालिश कर देती हूं, उससे फर्क पड़े।

राजेश _राजेश ठीक है दी, आ जाओ। प्रिया ने देखा बच्चे गहरी नींद में सो रहे हैं।

प्रिया ठंडे तेल की सीसी लेकर राजेश के कमरे में गया।

राजेश अपना शरीर को चादर से ढक लिया था।

राजेश _दी शरीर में गर्मी बहुत बड़ गई है। ठंडे तेल से मालिश कर दो। तो शायद राहत मिले।

प्रिया ने राजेश के ऊपर से हटाया।

उसने देखा राजेश तो नंगा है उसका लंद अकड़ा huwa है।

प्रिया _ये क्या है re?

_तुम्हे मालिश नही chut की जरूरत है।

सीधा बोल नही सकता था, तेरा बडा मन है सेक्स का, नींद नहीं आ रही है।

राजेश _दी मै सच बता देता तो आप आती क्या?

प्रिया _न, एक तो ऐसे ही पिता जी मुझसे नाराज़ ऊपर से किसी ने पकड़ लिया तो,,,,

न बाबा ना मैं जा रहीं अपने कमरे में।

राजेश _ठीक है दीदी आप जाओ, राजेश करवट लेकर लेट गया।

प्रिया _हूं, नाराज हो गया क्या?

अच्छा ठीक है, चल नाराज मत हो अपनो दीदी से।

प्रिया राजेश को सीधा की और उसका लंद पकड़ ली।

प्रिया _अरे तेरे लंद पर तो अजीब सा गंध आ रहा है किसी की boor मार रहा था क्या?

राजेश _हूं

प्रिया _किसकी?

राजेश _छोटी मामी की । वो मुझे अधूरा छोड़ कर भाग गई।

प्रिया _हूं तो ये बात है?

चल मेरी chut चांट के गर्म कर मुझे।

अपनी नाईटी उतार कर बेड पर लेट गई।

राजेश उसकी टांगो के बीच आकर उसकी boor पे मुंह डाल कर चाटने लगा।

प्रिया गर्म हो गई।

वह राजेश को लिटा कर उसके लंद पर बैठ गई और उछल उछल कर चुदाने लगी।

कमरे में दोनो के मुंह से उह आह ऊ आह निकलने लगा।

दोनो को बहुत मजा आने लगा।

कुछ देर में ही प्रिया झड़ गई।

उसके बाद राजेश ने प्रिया को घोड़ी बना दिया और उसकी गाड़ मारने लगा।

वह कभी boor तो कभी गाड़ में लंद डालकर प्रिया की ठुकाई करने लगा और अंत में प्रिया की गाड़ में झड़ गया।

दोनो कुछ देर इक दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गए।

कुछ देर बाद प्रिया उठी और अपनी नाईटी पहन कर जाने लगीं।

जब वह राजेश के कमरे से निकली तो सुप्रिया ने उसे निकलते देख ली,,,,

 
जब सुप्रिया ने प्रिया को राजेश के कमरे से बाहर निकलते देखी। वह सोच में पड़ गई, आख़िर इतनी रात को राजेश के कमरे में दीदी क्यू गई थी।

दरसल सुप्रिया की बड़ी लड़की को पेशाब लगी थी। उसको पेशाब कराने के लिए वह उठी थी। लड़की को आंगन के मोरी के पास ही पेशाब करने बिठा दी और उसके पीछे खड़ी थी। तभी उसे दरवाज़ा खुलने का आहट सुनाई पढ़ी, उसका ध्यान उस ओर गया।

जब प्रिया राजेश के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई।

लड़की के पेशाब कर लेने के बाद, उसे लेकर कमरे में चली गईं। बेड पर लेट कर वह यही सोचने लगी की आख़िर इतनी रात को दीदी राजेश के कमरे में क्यों गई थी।

फिर सोंची हो सकता है राजेश को किसी चीज की जरूरत पड़ी होगी। वह यही सोचते सोचते सो गई।

इधर सत्जन सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह उठ कर घर के आंगन में कसरत करने लगा।

स्घर के सभी महिलाएं उठ चुके थे।

सत्जन सिंह _अरे ये भांजा अभी तक उठा नही क्या, वो तो आज मेरे साथ कुश्ती लड़ने वाला था। अभी तक उठा नही।

सुप्रिया वही खड़ी थी।

अरे सुप्रिया बेटा देखो तो, यू भांजा, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रहा था मुझे कुश्ती में हरा देगा।

भूल गया क्या? जरा याद तो दिलाओ उसे। बॉडी तो बड़ी अच्छी बना रखी है। इतनी देर तक सोता है तो कसरत कितना समय करता है।

सुप्रिया _पिता जी मै अभी राजेश को बुला कर लाती हूं।

सुप्रिया राजेश के कमरे के पास गई। रात में कमरा अंदर से बंद नहीं किया था।

सुप्रिया को रात में प्रिया राजेश के कमरे में क्यू गई थी यह जानने की जिज्ञासा थी वह बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदर घुस गई।

जब वह अंदर गई तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

राजेश बिलकुल नंगा था। उसका लंद भी सुबह सुबह प्रतिदिन की तरह खड़ा हुआ था।

सुप्रिया, की नजर जब राजेश के लंद पर पड़ी तो, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

बाप re कितना बडा है।

ये तो नंगा ही लेटा है। इसका मतलब दीदी रात में राजेश से चुदने आई थी। हे भगवान।

तभी राजेश ने करवट लिया।

सुप्रिया घबरा गई।

वह कमरे से बाहर निकल गई।

फिर दरवाज़ा खटखटाया ।

राजेश का नींद खुल गया।

राजेश ने देखा वह रात में नंगा ही सो गया था।

वह तेजी से उठा और अपना कपड़ा पहनने लगा।

सुप्रिया _अरे कितने देर तक सोता रहेगा उठो।

बाहर से बोली।

राजेश _कोन आ गई,मै आ रहा हूं। राजेश ने आवाज दिया।

राजेश ने कपड़े पहन कर दरवाज़ा के पास गया, दरवाज़ा तो पहले ही खुला huwa था।

राजेश _अरे दीदी तुम।

सुप्रिया _पिता जी ने भेजा है तुम्हे बुलाने, कह रहा था कि कितने देर तक सोता रहेगा।

राजेश _ओह मामा जी उठ गए क्या?

सुप्रिया _वो कसरत कर रहे हैं? तुम्हारा वेट कर रहे हैं कुश्ती लड़ने के लिए। सुप्रिया हसने लगी।

पर मुझे नही लगता तुम कुश्ती में पिता जी को हरा पाओगे।

राजेश _क्यू?

सुप्रिया _रात भर कुश्ती लड़कर थक जो गए होगे, धीर से फुसफुसाते हुवे बोली।

राजेश _दीदी, आपने क्या कहा?

सुप्रिया _अरे कुछ नहीं मैन ये कहा, तुम्हारी सकल तो ऐसी लग रही है जैसे तुम रात भर जगे हो, किसी के साथ कुश्ती लड़े हो। अब सुबह सुबह पिता जी के साथ मुझे नहीं लगता तुम, कुश्ती लड़ पाओगे।

राजेश _, दीदी, तुमने अभी मेरा पावर देखा कहा है। जिस दीन देखोगी न मेरा फैन बन जावोगी।

सुप्रिया _अच्छा मै भी देखना चाहूंगी कितना पावर है तुझमें।

राजेश _अच्छा दी तुम चलो, मै फ्रेस होकर आता हूं।

सुप्रिया _जल्दी आना।

राजेश फ्रेश होने बाथरूम चला गया।

वहा से सीधे आंगन में पहुंचा जहां, सत्जन सिंह कसरत कर रहा था।

सतजन सिंह _आ गया बरखू दार,

राजेश _नमस्ते मामा जी।

सत्जन सिंह _उठने लेट हो गए, नौजवान। चल पहन ले लंगोट और उतर जा मैदान में। दिखाओ सबको कितनी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में ।

राजेश _मामा जी, मैने कभी लंगोट पहना नही।

चड्डा चलेगा, वैसे भी लंगोट में मुझे शर्म आयेगी।

घर के लोग मुझे देख कर हसेंगे।

सत्जन सिंह _अरे यार तू मर्द होकर लड़कियों की तरह शर्मा रहा है। अगर कुश्ती लड़ना है तो लंगोट तो पहनना पढ़ेगा बेटा।

सतपाल पहना दो भांजा को लंगोट।

सतपाल _आओ राजेश।

राजेश को सतपाल सिंह एक कमरे में ले गया। और उसे लंगोट पहना दिया।

राजेश लंगोट पहन कर बाहर निकलने में शरमा रहा था।

वह शर्माते हुवे आंगन में पहुंचा।

घर की सभी महिलाए, राजेश को लंगोट में देखकर मुंह छिपाकर हसने लगीं।

सुप्रिया _बॉडी तो बहुत अच्छी है, देखते है ताकत है की नही, वैसे लंगोट में बिल्कुल बंदर लग रहा है।

सुप्रिया की बात सुनकर, सभी हसने लगे।

राजेश _मामा जी सभी मेरा मजाक उड़ा रहे हैं।

सतजन सिंह _अरे यार, मर्द को औरतों की बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

चल आ जा मैदान पे, हो जाए दो दो हाथ।

सतपाल सिंह रेफ्री बन गया।

राजेश _मामा जी देखते है इस उम्र में भी आपके पास कितना ताकत है। आप तैयार हो जाइए, मुझ्से हारने के लिए।

सतपाल सिंह _ये हुई मर्दों वाली बात चल आ जा मैदान पे।

राजेश मैदान पे आ गया।

सभी लोग दोनो की कुश्ती देखने लगे।

कभी राजेश आगे बढ़ता, कभी सत्जन सिंह तभी सत्जन सिंह ने अपना चाल चला। और घुमाके राजेश को चीत कर दिया।

सतपाल सिंह ने सिटी बजाया।

राजेश हार गया।

सत्जन सिंह,_बरखुदार तुम तो कमजोर निकले एक ही बार में चीत हो गया।

सभी लोग सत्जन सिंह के लिए ताली बजाने लगे।

सुप्रिया _, क्यू बड़ी बड़ी बाते कर रहा था। एक ही बार में चीत हो गया। बेचारा।

सुप्रिया chidane लगी।

सतजन सिंह _बरखु दार कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, दीमाक की भी जरूरत पड़ती है।

राजेश _मां मां जी एक बार और मौका दो, अबकी बार हरा दूंगा।

शुप्रिया _रहने दे और कितनी बेजजती कराएगी अपनी।

सतजन सिंह _अरे आजा, कर ले अपनी ईच्छा पूरी।

राजेश फिर मैदान में आ गया।

दोनो के बीच फिर कुश्ती शुरू हो गया।

कुछ ही देर में राजेश फिर चित हो गया।

सभी लोग मुंह छिपा कर हसने लगे।

राजेश फिर से एक और मौका मांगा। पर राजेश सत्जन सिंह को हरा न सका।

सुनिता _बस बस अब रहने दे, अपने मामा जी को तू हरा नही पाएगा।

राजेश _मामा मैंने आपसे हार मान लिया।

सत्जन सिंह _बरखु दार, जानते हो तुम क्यू हार रहे। तुम इस लिए हार रहे हो की, तुम सामने वाले को चीत करने पे ज्यादा ध्यान दे रहे थे, जबकि पहलवान को अपनी सुरक्षा पर पहले ध्यान देना है और जब सामने वाले थकने लगे तो मौका देखकर उस पर अटैक करना है।

चलो मैं तुम्हे सिखाता हूं।

सत्जन सिंह ने राजेश को कुछ तकनीक सिखाए।

सावित्री _अब बस भी करो जी, आज घर में कार्यक्रम है। कुछ देर में मेहमानों की आने की सिलसिला शुरू हो जाएगा।

तैयारी भी करनी है। वैसे भी राजेश कुश्ती सीखकर करेगा क्या? उसे तो कलेक्टर बनना है। कुश्ती थोड़ी लड़नी है।

सतपाल सिंह _तुम्हारी मामी ठीक कह रहा है भांजा। इतना पर्याप्त है तेरे लिए। वैसे भी गांव में कल कुश्ती प्रतियोगिता होनी है। पहलवानों को कुश्ती लड़ता देख, बहुत कुछ तुम्हे सीखने को मिलेगा। तुम भी चलना,कुश्ती देखने।

राजेश _ज़रूर मामा जी।

इसकेे बाद घर के सभी लोग नहा धोकर तैयार हो गए। घर के कार्यक्रम की तैयारी में लग गए।

कुछ देर बाद सुप्रिया के पति गांव पहुंचा।

सुप्रिया _राजेश ये है तुम्हारे जीजू।

राजेश _नमस्ते जीजू, ये क्या जीजू आप अभी आ रहे हो, घर का दामाद हो, तैयारी की जिम्मेदारी तो घर की दामाद की होती है ना, और आप ही पीछे रह गए।

जीजा जी _अरे यार क्या करे? सरकारी नौकरी है। बड़ी मुस्किल से एक दिन की छूटी मिली है।

वैसे शादी के समय तुझे देखा था। तू छोटा था। अब तो एकदम जवान और स्मार्ट हो गया है यार।

वैसे क्या कर रहा है अभी।

सुप्रिया _राजेश, आई ए एस का इंटरव्यू देकर कुछ दिन पहले ही आया है दिल्ली से।

जीजा जी _ओह ये तो बड़ी अच्छी बात है, बहुत बहुत शुभकामनाएं भई हमारे तरफ से, इंटर व्यू में तुम ज़रूर सफल हो।

राजेश _शुक्रिया जीजू।

धीरे धीरे सभी मेहमानों का आना शुरू हो गया।

सत्जन सिंह _कोई पंडित जी को फोन करो भाई, सारे मेहमान आ गए। आने में और कितना समय लगेगा।

सतपाल सिंह ने पंडित जी को फोन किया।

पंडित जी ने कहा की बस कुछ ही देर में वह पहुंचने वाला है।

कुछ ही देर में पंडित जी पहुंच गया।

पंडित जी ने पूजा पाठ शुरू किया।

पूजा पाठ संपन्न होने के बाद, मुन्ने का कुंडली देखा।

पंडित जी _मुखिया जी, मुन्ने का नाम अ अक्षर से निकल रहा है। क्या नाम रखना है मुन्ने का।

सत्जन सिंह _मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो उसके माता पिता का है। वही बताएंगे।

सतपाल सिंह _ये क्या भईया, आप घर के बड़े है, मुन्ने का नाम रखने का अधिकार तो आप का ही है।

राजेश _हां मामा जी, छोटे मामा जी सही बोल रहे है। कोई अच्छा सा नाम सुझाइए मुन्ने का।

सत्जन सिंह _तुम लोगो की यही ईच्छा है तो आज से मुना अर्जुन के नाम से पुकारा जायेगा।

सभी लोग ताली बजाने लगे।

राजेश _वाह मामा जी बहुत अच्छा नाम सुझाया है आपने।

उसके बाद सभी मेहमानों को भोजन कराया गया।

शाम होते होते आस पास के मेहमान तो अपने अपने घर जानें लगे। दूर से आए मेहमान रात वही रुक गए।

सुबह होते ही शेष बचे मेहमान भी, अपने अपने घर के लिए निकल गए।

सुप्रिया का पति भी, एक ही दिन की छूटी लेकर आया था वह भी चला गया।

शाम को 4बजे गांव में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।

विजेता पहलवान को 2लाख रुपए इनाम रखा गया था। आस पास एवम दूर दूर से भी पहलवान कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे।

सतजन सिंह खुद एक पहलवान था। गांव का मुखिया भी था।

उसी के अध्यक्षता में यह प्रतियोगिता आयोजित किया गया था।

सतपाल सिंह _भईया, लड़के लोग बुलाने आए थे। प्रतियोगिता की सारी तैयारी हो चुकी है।

सत्जन सिंह _चलो हम चलते है। घर के सभी पुरुष सदस्य, कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयारी करने लगे।

सुप्रिया _पिता जी, मुझे भी देखनी है कुश्ती। सुनिता बुआ चलो न हम भी चलते है।

सुनिता _भईया, क्या हम भी देखने जा सकते है।

सतजन _अगर तुम लोगो की ईच्छा हो तो, जा सकती हो।

शुप्रियां, और सुनिता बच्चों को लेकर कुश्ती देखने के लिए जाने की तैयार करने लगी।

सभी लोग तैयार हो कर साथ में, प्रतियोगित स्थल पहुंचे।

प्रतियोगिता स्थल पर महिलाओं बच्चों और पुरुषो की बहुत भीड़ थी।

पास के गांव वाले मुखिया का नाम नाथू सिंह था।

वह भी अपना पहलवान लेकर आया huwa था।

पिछले बार नाथू सिंह और सत्जन सिंह के लड़को के बीच ही अंतिम मुकाबला huws था। जिसमे सत्जन सिंह के लड़के विजेता बने थे।

नाथू राम इस बार सतजन सिंह के लड़को को कुश्ती में हराकर, उसे नीचा दिखाना चाहता था। पिछले बार वह बहुत अपमानित महसूस किया था। उसका बदला लेना चाहता था। इस बार एक से बढ़ कर एक पहलवान लेकर आया huwa था। एक तो उसका बेटा था शेरा जो काफी खूंखार लग रहा था।

नाथू सिंह माइक लेते हुए कहा,,,

सत्जन सिंह इस बार मेरे लड़को को कोई हरा नही पाएगा।

विजेता मेरे लड़के ही बनेंगे।

सतजन सिंह _रहने दो सत्जन सिंह, पिछले बार भी तुमने यही कहा था। पर देखा न तुमने मेरे लड़को ने तुम्हारे पहलवानों की क्या दुर्गति की।

नाथू सिंह _सब याद है मुझे सतजन सिंह, इस बार मेरे लड़के पिछले अपमान का बदला लेने आए है। वो देखो मेरा बेटा सेरा।

अगर कोई मेरे बेटे शेरा का तुम्हरे लड़के हरा देंगे तो मैं अपना मूछ मुड़ा दूंगा।

अब तुम बोलो अगर मेरे लड़के तुम्हरे पहलवानों को हरा देंगे, तो क्या तुम अपना मूछ मुड़वाओगे।

सतजन _देखो नाथू सिंह खेल को खेल भावना की तरह लो। इसमें किसी किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं होना चाइए।

नाथू सिंह,_सत्जन सिंह इसका मतलब तुमने अभी से हार मान लिया। हा हां हा

सत्जन सिंह डरपोक है।

सत्जन सिंह _नाथू सिंह, सतजन सिंह डरपोक नही है। ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है अगर मेरे लड़के हारे तो मैं अपना मूछ मुड़वा दूंगा।

सतपाल सिंह _भईया ये आप क्या कह रहे है?

सतजन सिंह _छोटे, सामने वाले ने मुझे चैलेंज दिया है। मै पीछे नहीं हट सकता।

सतपाल सिंह _पर भइया इस बार उसके पहलवान कुछ ज्यादा ही मजबूत लग रहे है।

नाथू सिंह _अब आएगा खेल का असली मजा।

मैं तो सतजन सिंह का मूछ अपने हाथो से साफ करूंगा। नाथू सिंह के छोटे भाई ने कहा,हा हा हा,, उसके साथी लोग हसने लगे।

इसके बाद मंच पर नारियल तोड़ा गया। सतजन सिंह ने खेल प्रारंभ करने का आदेश दिया।

नाथू सिंह _ये है मेरा बेटा शेरा, सतजन सिंह अपने पहलवानों को भेजो। मेरा शेरा अकेला ही काफी है सबसे निपटने के लिए।

सतजन सिंह ने अन्य गांव से आए हुए सभी पहलवानों को पहले मौका दिया, शेरा को हराने के लिए।

शेरा बहुत ताकत वर और चालक था।

उसने सभी पहलवानों को एक एक कर चीत कर दिया और सभी की हालत खराब कर दी।

उसकी ताकत देखकर गांव वाले चिंतित होने लगें। उधर नाथू सिंह के साथी बहुत उत्साहित थे। शेरा शेरा शेरा,,,,

करके शोर मचा रहे थे।

नाथू सिंह _सतजन सिंह, शेरा ने तो अन्य गांव से आए सभी पहलवानों को हरा दिया है, अब तुम अपने पहलवानों को भेजो,, हा हा हा हा,,

सत्जन सिंह के आदेश पर, उसके लड़के एक एक करके मैदान में शेरा से भिड़ने के लिए उतरे, शेरा नेको हराने के लिए बहुत कोशिश किया। लेकिन शेरा ने सभी को चीत कर , सबकी हालत खराब कर दी।

गांव के सभी लोग दुखी हो गए।

नाथू सिंह _हा हा हां हा,,,

सतजन सिंह, और कोई बचा है क्या? तुम्हारे पहलवान, तुम्हारे पहलवान तो सब नामर्द निकले, किसी ने शेरा को हरा नही पाया।

हा हा हा हा,,,

सतजन सिंह, शर्त के मुताबिक अपनी मूंछ हमे दे दो,,,

छोटे जाओ सत्जन सिंह का मूंछ लेकर आओ।

ठीक है भईया,, हां हा हा,,,,

नाथू सिंग का छोटा भाई छुरा लेकर सतजन सिंह के पास आ गया।

हा हां हा हा, सतजन सिंह यह मूछ मुझे dede , सुनिता सुप्रिया, शेखर सतपाल सिंह को कुछ समझ नही आ रहा था , क्या करे? सतजन सिंह का ही नहीं पूरे गांव वाले अपमानित महसूस करने लगें थे।

सतजन सिंह अपनी आंखें बन्द कर लिया।

इधर नाथू सिंह का भाई छुरा लेकर, हाथ आगे बढ़ा रहा ही था की, राजेश ने हाथ रोक लिया।

राजेश _, मामा की मान सम्मान को मिट्टी में मिलाने से पहले, मुझसे निपटना होगा।

राजेश ने एक जोर का मुक्का मारा नाथु सिंह के भाई का, चकरा कर वही गिर गया।

नाथु सिंह _अरे छोर तू कौन होता है। रोकने वाला। अगर इतनी ही ताकत है तो शेरा से क्यू नही लड़ लेता।

राजेश,_, हां हां लडूंगा मैं, पर मेरे होते हुवे मामा जी के इज्जत पर आंच नहीं आने दूंगा।

नाथु सिंह _तो उतर जा मैदान पर।

सतजन सिंह _राजेश, तू नही लड़ पाएगा उस शेरा से, मत जा, कर लेने दो नाथु सिंह को अपनी ईच्छा पूरी।

राजेश _नही मामा जी मै ऐसा होने नहीं दूंगा।

इधर शेखर सुनिता और सतपाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? एक तरफ तो खानदान की इज्जत दूसरी ओर बेटा।

राजेश _मामा जी मुझे आशीर्वाद दो।

सतजन सिंह न चाहते हुवे भी राजेश की जिद पर मजबूर होकर, विजई होने का आशीर्वाद दिया।

राजेश मैदान पर कुश्ती के अखाड़े में उतर गया।

गांवों वाले खामोश थे पता नही क्या होगा।

नाथु सिंह के आदमी शेरा शेरा सोर मचा रहे थे।

सुनिता आंखें बन्द कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी।

राजेश और शेरा का घमासान युद्ध शुरू huwa। कभी शेरा भारी पड़ता तो कभी राजेश। राजेश का खेल देखकर गांव वालों में भी जोस आ गया।

वे भी राजेश राजेश चिल्लाने लगे।

धीरे धीर शेरा थकने लगा। राजेश ने चीखतेहुए , अपना पूरा ताकत लगाया और शेरा को अपने कंधो में उठा लिया। सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे।

राजेश ने शेरा को घुमा कर जमीन पर पटक दिया।

कुछ छन के लिए शेरा बेहोश हो गया।

शेरा हार चुका था।

सभी लोग राजेश राजेश शोर मचाने लगे।

सुप्रिया _बुआ आंखें खोलो, राजेश जीत गया।

सुनिता ने जब देखा राजेश जीत गया है उसकी आंखो में आंसू भर आए।

शेरा के हारने के बाद नाथु ने अपने दूसरे पहलवान को मैदान में उतार दिया।

बांकि पहलवानों में शेरा जैसी ताकत नहीं था। राजेश ने एक एक करके सभी पहलवानों को धूल चटवा दिए।

गांव वालों ने राजेश को कंधो में उठा लिया। चारो तरफ राजेश राजेश गूंजने लगा।

नाथु सिंह मुंह छिपाने लगा।

सतपाल ने उसे पकड़ लिया।

नाथु सिंह कहा छिप रहा है। छुरा लाओ re इसका मूछ मुड़ना है।

सतजन सिंह _छोटे छोड़ दो उसको, खेल को खेल भावना की तरह ही खेलना चाहिए। किसी की मान सम्मान को ठेस पहुंचाना खेल भावना नहीं। नाथु सिंह ने सतजन सिंह से माफी मांगा।

राजेश को मंच पर ले जाया गाया।

सत्जन सिंह ने उसे फूलों की हार पहना कर गले से लगा लिया।

सतजन सिंह _यार तूने तो कमाल कर दिया।

सुनिता की आंखों से आंसू बह रहे थे।

राजेश ने अपने पिता और छोटे मामा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दोनो ने उसे गले से लगा लिया।

अंत में वह अपनी मां के पास गया।

सुनिता रो रही थी।

राजेश _मां तुम रो क्यू रही हो?

सुनिता _ये तो खुशी के आंसू है पगले। तूने अपने मामा की मान मर्यादा को बचा लिया बेटा मुझे तुम पर गर्व है। सुनिता राजेश को अपनी बाहों में भर लिया।

उसके बाद राजेश को गांव के का एक चक्कर घुमाया गया। सभी नाच रहे थे राजेश की जयकार लगा रहे थे।

इधर घर का नौकर घर आकर घटना की सारी जानकारी, सावित्री और सुमित्रा को दी।

वे पूजा की थाली सजाकर राह देखने लगे।

गांव भ्रमण के बाद, जुलूस सत्जन सिंह का घर पहुंचा।

सावित्री, सुमित्रा और प्रिया पूजा की थाली लेकर, दरवाजे पर खड़ी थी।

सावित्री ने सत्जन सिंह की आरती उतरना चाही।

सतजन सिंह _, मेरी नही राजेश की आरती पहले उतारो। योद्धा यही है।

सावित्री ने राजेश की आरती उतारी राजेश ने अपने मामी से आशिर्वाद लिया।

सभी की आरती उतारने के बाद। सतजन सिंह नेगांव वालो से हाथ जोड़कर शुक्रिया कहते हुए अपने अपने घर जानें को कहा। गांव वाले अपने अपने घर चलें गए।

इधर राजेश कुश्ती लड़ते लड़ते काफी थक चुका था।

वह लंगड़ा रहा था। उसे शरीर में काफी दर्द हो रहा था।

सत्जन सिंह राजेश को उसके कमरे में ले जाया गया।

प्रिया उसकी उपचार करने लगी।

राजेश के कपड़े उतार दिया गया। वह सिर्फ उंडर वियर में था।

गीले कपड़े से उसके पूरे शरीर को पोछा गया।

फिर उसके शरीर को गर्म सरसो के तेल से मालिश किया गया। सभी महिलाए राजेश की सेवा में लगी थी।

प्रिया ने राजेश को कुछ दर्द निवारक गोली दिया।

कुछ देर बाद राजेश बेहतर महसूस करने लगा।

रात्रि भोजन के समय सुनिता ने राजेश के कमरे में ही अपने हाथो से उसे भोजन कराया।

सतजन सिंह ने राजेश के पास जाकर पुछा?

तू ठीक तो है न मेरा शेर,

राजेश _हा मामा जी मै बिल्कुल ठीक हूं।

सतजन सिंह ने सभी को भोजन करने के लिए कहा।

सभी लोग भोजन करने लगें।

सतजन सिंह _देखो राजेश को उसके कमरे में रात में अकेला छोड़ना ठीक नहीं। तुम में से कोई एक रात में राजेश के कमरे में ही सो जाना। उसे किसी चीज की जरूरत पड़ी तो।

सुनिता _मै सो जाऊंगी, आज राजेश के कमरे में।

सतजन सिंह _हाये ठीक रहेगा।

सभी लोग रात में राजेश का हाल चाल पूछकर। अपने अपने कमरे में सोने को चले गए।

कमरे में सुनिता, प्रिया रुकी हुई थी। तभी सुमित्रा राजेश के लिए दुध लेकर आई।

प्रिया _चाची, राजेश को गाय की जगह मां की दुध की जरूरत है इससे उसके शरीर को ज्यादा लाभ होगा।

सुमित्रा _क्यू नही, दीदी इजाजत दे तो अपनी दुध पीला दू।

सुनिता _पीला दो न तो, अगर मेरा बेटा को मां की दुध से ज्यादा लाभ मिलेगा तो मैं भला मना क्यों करूंगी।

पहले दरवाज़ा बंद कर दो कोई आ न जाए।

प्रिया ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।

सुमित्रा ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। और चूचे बाहर निकाल दिया।

सुनिता _राजेश बेटा अपनी मामी की दुध पिलो इससे तुम्हे जल्दी आराम मिलेगा।

राजेश ने सुमित्रा की चुचियों को पकड़ लिया और फिर मसल मसल कर बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया।

सुनिता _अरे प्रिया तुम्हारा भी तो दुध, आता है न। राजेश को सुमित्रा का दुध कम न पड़ जाए तू भी पिला दे अपनी दुध।

प्रिया _जी बुवा।

प्रिया ने भी अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया। राजेश अब बारी से दोनो की चूचे मसल मसल कर चूसने लगा दुध गटक गटक कर पीने लगा।

तभी प्रिया ने देखा राजेश के अंडरवियर काफी ऊपर उठ गया है, उसका लंद खड़ा हो गया है। वह मुस्कुराने लगी।

प्रिया _बुवा देखो तो राजेश का घोड़ा तो इसके घायल होने के बाद भी दौड़ने को तैयार है।

सुनिता _तुम जैसे घोड़ी की चूचे देखेगा तो होगा ही। तीनो महिलाए हसने लगी।

प्रिया _बुआ राजेश का अंडर वियर उतार दो , राजेश को दर्द कर रहा होगा।

सुनिता ने राजेश का अंडर वियर, उतार दिया उसका मोटा और लम्बा लिंग हवा में में लहराने लगा।

तीनों औरते देखकर मुस्कुराने लगी। प्रिया _बुवा, सेक्स भी दर्द निवारक होता है। आदमी सेक्स के समय अपना सारा दर्द भूल जाता है।

सेक्स से मर्द को दर्द से जल्दी राहत मिलता है। हमे राजेश को सेक्स सुख भी देना चाहिए।

सुनिता राजेश के लंद को सहलाने लगी, फिर अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी।

इधर राजेश दोनो औरतों का चूची पी रहा था।

सुनिता उसका लंद चूस रही थी।

तीनों औरते राजेश का लंद देखकर और चूची मसलने से गर्म हो चुकी थी।

सुनिता ने अपनी सारे कपड़े उतार फेकी। वह राजेश के लंद को chut में रख कर बैठ गई, फिर हल्के हल्के उछल उछल कर राजेश को सेक्स का मजा देने लगी और खुद मजा लेने लगी। कुछ देर बाद जब वह झड़ गई तो, सुमित्रा नंगी हो गई और राजेश के लंद पर उछल उछल कर उसे सेक्स सुख देने लगी और खुद मजा लेने लगी। इस तरह तीनो महिलाए बारी बारी से राजेश केलंद का सवारी कर चुदने लगी। राजेश को भी तीनो महिलाओं को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना सारा दर्द भूल गया, अब वह तीनो महिलाओं को अलग अलग आसनों जमकर चोदने लगा, खुद भी मजा लेने लगा और औरतों को भी मजा देने लगा। कमरे में चारों की सिसकारी गूंज रही थी,, आह उह आह उह आह। उह। आह। उह। आह उह आह, उह,,,,,

करीब दो घंटे तक तीनो औरतों को जमकर बजाया।

उसके बाद तीनों को अपनी वीर्य से नहला दिया।

राजेश थक चुका था। वह गहरी नींद में सो गया।

सुमिता और प्रिया दोनो अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चली गईं। सुनिता राजेश से लिपट कर उसके बाजू में सो गया।

सुबह सुनिता जल्दी उठ कर नहाकर पूजा पाठ की और घर के काम में सहयोग करने लगी।

इधर सतजन सिंह उठ कर राजेश केकी हाल चाल पुछने उसके कमरे में गया।

सतपाल और शेखर भी वहां पहुंचा।

सतजन सिंह _, अब कैसी तबियत है यार तेरी।

राजेश _, मै बिल्कुल ठीक हूं, मामा जी। कल रात मां मामी और प्रिया दी ने बहुत अच्छी सेवा की।

सुमित्रा भी वहा खड़ी थी वह शर्मा गई।

सत्जन सिंह _यार तुमने तो कल कमाल ही कर दिया, हमारी घर की मान मर्यादा को बचा लिया।

राजेश _ये तो मेरा फर्ज था मामा जी।

सतजन सिंह _यार तू इतना ताकत वर है, फिर तुम कल सुबह मुझसे कुश्ती में कैसे हार गए।

राजेश _भला मै अपने मामा जी से कैसे जीत सकता हूं।

सभी लोग हसने लगे।

सतजन सिंह _यार तूने मेरा दिल जीत लिया। हम सबको तुम पर गर्व है।

राजेश _मामा जी मुझे आपसे कुछ चाहिए।

सतजन सिंह _अरे बोल भांजे क्या चाहिए तुम्हे, तुम्हरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है।

राजेश _मामा जी एक बार आप प्रिया दीदी को माफ कर दो, वो आपसे बहुत प्यार करती है।

सज्जन सिंह _, राजेश, क्या तुम्हे लगता है मैं प्रिया से प्यार नहीं करता। ऐसा एक दिन भी नही रहा होगा जब मैं प्रिया को याद नही किया होऊंगा।

शायद, अपनी झूठी शान को बचाने के चक्कर में कभी, उससे मिलने की कोशिश नही किया।

पर आज तुमने मेरी आंखें खोल दिया है। अब चाहे कोई कुछ भी कहे, मुझे किसी की परवाह नही।

सज्जन सिंह ने प्रिया को पुकारा, प्रिया वही खड़ी थी।

प्रिया _पिता जी।

सज्जन सिंह _मुझे माफ कर दो बेटी।

प्रिया _नही पिता जी माफी तो मुझे मांगनी चाइए, मैने आपक दिल दुखाया।

दोनो एक दूसरे से गले लग कर रोने लगे।
 
राजेश अपने कमरे में आराम कर रहा था। तभी प्रिया उसके लिए नाश्ता लेकर आई।

राजेश अब कैसे फिल कार रहे हो?

राजेश _मै बिल्कुल ठीक हूं दी।

प्रिया _चलो नाश्ता कर लो।

राजेश अपने बेड सेउठ कर बैठ गया।

प्रिया _थैंक यू, राजेश

राजेश,_किस बात के लिए दी।

प्रिया _तुम्हारी वजह से पिता जी ने मैरी गलती के लिए क्षमा कर दिया। अगर तुम नहीं होते तो ये संभव नहीं हो पाता। सच में तुम कमाल के हो।

I Love you राजेश।

राजेश,_i love you टू दी।

प्रिया राजेश का ओंठ चूसने लगी।

राजेश भी प्रिया की ओंठ चूसने लगा।

उनके बीच जबरदस्त किसिंग सीन चल ही रहा था कि सुप्रिया, चाय और पानी का ट्रे लेकर कमरे में आई।

वह दोनो को एक दूसरे की ओंठो को चूसते हुए, आश्चर्य से देखने लगी।

तभी राजेश की नजर सुप्रिया पर गया। राजेश ने प्रिया को अपने से दूर किया।

तभी प्रिया को नजर, सुप्रिया पर गई।

प्रिया,_अरे छोटी तू कब आई।

सुप्रिया _,, जस्ट अभी दी।

बड़ा प्यार हो रहा है भाई बहन के बीच।

प्रिया,_अरे छोटी मै तो राजेश को शुक्रिया का रहा था, उसने पिता जी की नाराजगी दूर कराई।

सुप्रिया _हां भई ये तो राजेश के कारण ही संभव हो पाया। मै चाय और पानी लेकर आई हूं। चलो राजेश जल्दी नाश्ता ख़त्म करके। चाय पी लो, नही तो चाय ठंडी हो जाएगी।

राजेश,_,, जी दी।

प्रिया _अच्छा राजेश अब मै चलती हूं। घर जानें की तैयारी भी तो करनी है।

राजेश _ठीक है दी।

प्रिया वहा से चली गईं।

सुप्रिया _ हूं, बडा रोमांस हो रहा था, भाई बहन के बीच।

राजेश _वो दीदी मुझसे बहुत प्यार करती है न,i

सुप्रिया _वो तो है, जब से आय हो दोनो का प्यार देख रही हूं।

राजेश _दीदी मै समझा नही।

सुप्रिया _ हम भी तुम्हारी बहन है, पर हमसे आप प्यार नही करते?

राजेश _दीदी, ये आप क्या कह रही है?

हम आपसे भी उतना ही प्यार करते है जितना प्रिया दी से।

सुप्रिया _चल झूठा कही का।

हमे तो एक बार भी गले नही लगाया।

राजेश _आपने हमे मौका ही कब दिया?

सुप्रिया _मौका मिले तो हमें भी वैसे ही प्यार करोगे जैसे प्रिया दी से करते हो।

राजेश _हा क्यू नही? मै भला भेद भाव क्यू करूंगा?

सुप्रिया _,, अच्छा ठीक है, मै भी देखना चाहूंगी, मौका मिलने पर कितना प्यार करते हो मुझे।

अभी तो मैं चलती हूं।

सुप्रिया, नाश्ता प्लेट, कप और गिलास, उठा कर ले गई। राजेश ने चाय नाश्ता कार लिय था।

इधर सुनिता शेखर स्वीटी और प्रिया घर जानें के लिए तैयारी कर रही थी।

सावित्री ने कुछ दिन और रुकने के लिए कहा,

सुनिता _भाभी, तुम तो जानती हो इनको तो बैंक से छुट्टी बड़ी मुस्किल से मिलती है।

सावित्री _हूं वो तो है? प्रिया बेटी तुम कितने दिनों बाद आई हो तुम कुछ दिन और रुक जाओ।

प्रिया _मां, सुबह से ही hospital से बार बार फोन आ रहा है, कुछ डिफिकल्ट केस आया हूवा है। मुझे भी जाना होगा।

कुछ दिनों बाद मैं और आ जाऊंगी। आप लोगो से मिलने।

सावित्री _सभी लोग जा रहे हो कोई तो कुछ ओर रुक जाओ।

सत्जन सिंह _हा भाई, सावित्री ठीक कह रही हैं। तुम लोगो के जानें के बाद घर सुना सुना लगेगा।

सुप्रिया _पिता जी, दीदी को रोक नहीं सकते, उसे हॉस्पिटल सम्हालनी है। बुआ को भी रोक नहीं सकते फूफा जी को बैंक से और छुट्टी मिल नही सकती। स्वीटी को भी कालेज जाना है।

बच गया राजेश, वह तो रुक सकता है। उसके पास तो अभी कोई काम नहीं है।

सुनिता_पर वह अकेला, यहा रहकर करेगा क्या? वह ज्यादा दिन रहेगा तो बोर हो जाएगा।

सतपाल सिंह _दीदी मै और भईया कल परसों 5 दिनो के लिए सामाजिक अधिवेशन के कार्यक्रम में जायेंगे।

समाजिक अधिवेशन इस बार समाज प्रमुख का चुनाव होना है।

इसलिए मेरा और भईया दोनो का जाना जरूरी है। राजेश हमारे आते तक ठहर जाता तो अच्छा रहता।

सतजन सिंह _हा सुनिता, छोटे ठीक कह रहा है। राजेश हमारे आते तक यहां रुक जाता तो अच्छा रहता।

सुनिता _अगर ऐसी बात है तो, मै राजेश को बोलूंगी। वह कुछ दिन यही रुक जाए।

सुप्रिया खुश हो गई।

सुनीता , राजेश के कमरे में गई।

राजेश _मां जानें की तैयारी हो गई क्या? मेरे भी कपड़े पैक कर दो।

सुनिता _बेटा, तुम्हारे मामा कह रहे थे की परसो वे दोनो भाई, कुछ दिनों के लिए जरूरी काम से बाहर जा रहे है। घर में सिर्फ महिलाए ही रह जायेंगी।

तो हम लोग चाह रहे हैं की तुम कुछ दिन यही रह जाओ। जब तुम्हारे मामा आयेंगे तो तुम शहर आ जाना।

राजेश _ओह पर मां मुझे सूरज पुर जाना था। वैसे भी मैं यहां बोर हो जाऊंगा।

सुनिता _अरे बेटा एक सफ्ताह की तो बात है, और यहां तुम्हारी, छोटी मामी तो है ही तुम्हारा ख्याल रखने।

रोज ताजी दूध पीने को मिलेगा।

सुनिता हंसते हुए बोली।

राजेश _ठीक है मां आप चाहती है तो रुक जाता हूं।

सुनिता _हा, एक बात सुन, ज्यादा इधर उधर घूमना मत, और किसी से लड़ाई झगड़ा मत करना।

राजेश _ठीक है मां।

मेरा प्यारा बेटा, सुनिता ने राजेश को गले से लगा लिया।

तभी राजेश को मस्ती सूझी उसने सुनीता को कस कर अपने बाहों में जकड़ लिया।

उसकी चूंची राजेश के सीने से एकदम से दब गए। सुनिता _अरे क्या कर रहा है छोड़ न, कोई आ जाएगा बदमाश।

राजेश _सारी मां।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

भोजन करने के बाद, सुनिता स्वीटी शेखर और प्रिया अपने बच्चों को लेकर सबसे इजाजत लेकर घर निकल गए।

अगले दिन सुबह राजेश अपने को बिलकुल फिट महसूस किया।

वह सुबह उठ कर। फ्रेश होकर आंगन में आ गया। जहां सतजन सिंह और सतपाल सिंह कसरत कर रहे थे।

सतजन सिंह _अरे आओ मेरे शेर, लगता हैं अब तुम बिल्कुल ठीक हो गए हो।

राजेश _हां मामा जी, अब मैं अपने को बिलकुल फिट महसूस कर रहा हूं इसलिए आपके साथ, कसरत करने चला आया।

सतजन सिंह _ये तो बड़ी अच्छी बात है।।

सुप्रिया राजेश को कसरत करते हुए देखने लगी।

तभी सावित्री आई।

सावित्री, _अगर तुम लोगो का कसरत हो गया हो तो, जाकर नहा लो, नाश्ता तैयार हो गया है।

सत्जन सिंह _चलो यार अब नहाते है, नही तो तुम्हारी मामी फिर चिल्लाएगी।

तीनों घर के पीछे चले गए। सतज़न सिंह को बाथरूम में नहाना पसन्द नहीं था। वह पीछे ट्यूबवेल में नहाता था।

राजेश भी वहीं ट्यूब वेल में नहाने लगा।

नहाने के बाद, के बाद वे नाश्ता किए।

नाश्ता करने के बाद सत्जन सिंह ग्राम पंचायत में बैठक रखा गया था, वहां जानें के लिए तैयार हो गया।

सतजन सिंह _अरे भांजे, तू यहां रहकर क्या करेगा, चल तू भाई मेरे साथ, तुम्हारा भी टाइम कट जायेगा।

राजेश _ठीक है मामा जी।

राजेश तैयार होकर सत्जन सिंह के साथ चला गया।

सतपाल सिंह भी तैयार होकर, खेत चला गया।

आज से मजदूर खेत में काम करने के लिए आने वाले थे।

दोपहर में भोजन के समय वे सभी घर पहुंचे। भोजन करने के बाद तीनों घर में ही आराम करने लगें।

कुछ देर आराम करने के बाद सतपाल सिंह फिर खेत चला गया। मजदूर लोग ठीक से काम कर रहे हैं की नही देखने।

इधर शाम को सत्जन सिंह और राजेश दोनो टहलने निकल गए।

रात में भोजन के बाद, सभी अपने कमरे मे सोने चले गए।

सतपाल सिंह के सो जानें के बाद, सुमित्रा नंदन राजेश के कमरे में चुपके से आई।

राजेश ने अलग अलग पोजीसन में आधे घंटे तक चोदा। सुमित्रा तीन बार झड़ चुकी थी।

वह राजेश को अधूरा छोड़ कर ही कमरे से भाग गई।

राजेश लंद सहलाता रह गया।

राजेश _अरे यार ये मामी तू मुझे अधूरे में ही छोड़ कर भाग जाती है। साला रात अब कैसे कटेगी। मुझे कोई दूसरा जुगाड करना ही पड़ेगा नही तो रोज का यही किस्सा होगा।

अगले दिन सुबह से ही सतपाल सिंह और सतजन सिंह दोनो समाजिक अधिवेशन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 5दिनो के लिए बाहर चले गए।

इधर खेत में मजदूर लोग काम करने आ रहे थे। उसे देखने के लिए सावित्री खेत जाने के लिए तैयारी हुई।

राजेश _मामी आप कहां जा रही है।

सावित्री _अरे बेटा मै खेत जा रही हूं, खेत में मजदूर लोग अभी काम करने आ रहे है, देखने के लिए जाना पड़ेगा, नही तो सिर्फ टाइम पास करेंगे। उन पर नजर रखनी पड़ती है।

राजेश _अरे मामी चलो मै भी चलता हूं वैसे भी यहां रहकर क्या करूंगा?

सावित्री _अच्छा चलो।

खेत घर से ज्यादा दूर नहीं था। वे पैदल ही चले गए।

जब वे पहुंचे।

कुछ मजदूरन वहा पहुंच चुके थे।

सावित्री _अरे तुम लोग अभी तक काम शुरू नही किए हो, इतना देर हो गया। चलो काम में लग जाओ।

एक मजदूरं _अरे काकी, अभी तो सभी मजदूर पहुंच रहे हैं, थोडा राहत तो लेने दो।

वैसे ये तो वहीं बाबू है न जिसने सारे पहलवानों को धूल चटाया था। पहलवानी छोड़कर बेचारा खेत में क्या करने आया है?

सावित्री_तुम लोगो का दर्शन करने आया है, कलमुही कही की, फालतू बाते बंद कर और काम सुरु करो।

मजदूरण काम करना शुरू कर दी।

करीब 12, _13 गांव की औरते थी, कोई जवान तो कोई अधेड़, अलग अलग उम्र की।

मजदूर लोग काम करने लगें और खेत के मेड पर खड़े हो कर सावित्री उन पर नजर रखने लगी। राजेश भी बाजू में खड़ा था।

कुछ देर बाद एक और मजदूरन खेत में पहुंची।

अरे पारो तू अभी आ रही है, ये कोई आने का समय है।

पारो _काकी माफ करना बच्चा रो रहा था दुध पीने के लिए। उसे दूध पिलाने लग गई।

एक मजदूरन _, बच्चे को दुध पिला रही थी या पति से कुआ खुदा रही थी।

सभी औरते हसने लगीं।

सावित्री _चुप करो छिनारो, जवान लडका सामने खड़ा है और शर्म नहीं आती गंदी भाषा बोलते हो।

सभी औरते चुप हो गई।

सावित्री _पारो तु जल्दी आया कर काम में कल लेट करेगी तो खेत में घुसने नहीं दूंगी, हा।

पारो _जी काकी।

पारो भी काम में जुट गई।

सभी औरते झुक कर काम कर रही थी। उसके चूचे सामने झूलने लगे।

एक जवान लड़के को सामने देखकर कुछ औरते मजा लेने के लिए, अपनी साड़ी की पल्लू और हटा दिया। ताकि राजेश की नजर उसके चूचे पर जाए।

पारो _अरे काकी ये बाबू तो आपका भांजा है न जिसने सारे पहलवानों को पटकनी दी थी।

दिखने में तो बडा भोला लगता है। लगता ही नहीं इसने बड़े बड़े पहलवानों को पानी पिला दिया।

क्या नाम है बाबू का?

सावित्री _क्यू जानकर क्या करेगी?

इसके साथ कुश्ती लड़ेगी क्या?

पारो _अरे काकी, भले ही बाबू ने बड़े बड़े पहलवानों को धूल चटाया हो पर मुझे नही लगता हमसे ये ज्यादा देर टिक पाएगा।

सावित्री _चुप कर छिनार कही की, जवान लौंडा देखा नही की मुंह से लार टपकाने लगी। और ये अपनी साड़ी की पल्लू ठीक से ठीक कर।

सामने जवान लडका खड़ा है और पुरा दुकान खोल रखी है।

सभी औरते हसने लगी।

सावित्री _अरे राजेश बेटा, जाओ तुम जाकर झोपड़ी में आराम करो। यहां खड़े रहोगे तो ये कलमुही लोग गंदी हरकत करेंगे।

राजेश झोपड़ी में चला गया।

खाट में लेटकर, मोबाइल चलाने लगा।

कुछ देर बाद, पारो बोली,

ओ हो बड़ी प्यास लगी है। अरे काकी मैं पानी पीकर आती हूं।

झोपड़ी में ही पानी का दो तीन मटका रखा huwa था। खाने की चीजे भी मजदूर लोग झोपड़ी में ही रखते थे। और दोपहर को झोपड़ी में आकर घर से लाया भोजन करते थे।

पारो को प्यास लगी थी,,,

सावित्री _घर से आए ज्यादा समय नहीं huwa है ओर प्यास लगने लगी, तेरी कामचोरी मैं अच्छे से समझती हूं।

पारो_अरे काकी मैं सच कह रही, बड़ी प्यास लगी है।

सावित्री _अच्छा ठीक है, जा जल्दी पीकर आ जाओ। और सुन वहा एक पानी का डिब्बा रखा होगा, उसमे पानी भर ले आना, और किसी को प्यास लगी हो तो पी लेगी।

पारो _ठीक है काकी।

पारो झोपड़ी में गई।

झोपड़ी के बाहर मटका रखा था।

अंदर राजेश खाट में लेटा मोबाइल पर गाना सुन रहा था।

पारो _, अरे बाबू, गाना सुन रहे हो?

राजेश _अरे भौजी तुम यहां।

पारो _मै तो यहां पानी पीने आई थी बडी प्यास लगी थी।

वैसे गांवों में चारों ओर तुम्हारी ताकत के ही चर्चे हो रहे है। लग कह रहे थे, बड़ी ताकत है तुम्हारी भुजाओं में।

कभी औरतों के साथ कुश्ती लड़े हो।

राजेश _नही भौजी, मै औरतों के साथ कुश्ती नही लड़ता।

पारो _अरे शादी के बाद तो अपनी मेहरारू के साथ कुश्ती लड़ोगे न।

राजेश _अरे भौजी मै भला अपनी लुगाई से भला क्यू कुश्ती लड़ने लगा।

पारो खिलखिला कर हंसने लगी।

तू तो एकदम भोंदू है re

अच्छा ये बता इसका मतलब समझता है?

पारो एक हाथ की दो ऊंगली से रिंग बनाकर दूसरे हाथ की एक ऊंगली अन्दर बाहर करते हुवे बोली।

राजेश _नही, क्या होता है इसका मतलब, तुम ही बता दो।

पारो _नही बाबा काकी को पता चलेगा तो मुझे डांटेगी, इस्का मतलब तुम अपनी मामी से ही पूछना। पारो हसने लगी।

तू तो एकदम भोंदू है। केवल शरीर में ताकत रहने से क्या होगा? असली कुश्ती मर्द के साथ नही औरत के साथ होती है और जो औरत को कुश्ती में हरा दे वही असली मर्द होता है। तुम्हे तो मुठ मारना क्या है?, ये भी पता नहीं होगा।

पारो हसने लगी।

राजेश _ भौजी,तुम क्या बोल रही हो मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है?

पारो,_अगर तुम ये सब सीखना या जानना चाहते हो तो मैं तुम्हे सीखा सकती हूं। ये चीजे शादी के बाद तुम्हारा बहुंत काम आयेगा।

राजेस्_अच्छा तो सीखा दो न, अभी।

पारो _अभी नही बुद्ध, ये चीजे अकेले में सिखाया जाता है। अभी तो कोई भी आ जायेगा, वैसे भी तुम्हारी मामी, गुस्से में होगी की इतनी देर मैं यहां क्या कर रही।

अच्छा मै चलती हूं।

पारो वहा से चली गईं।

सावित्री _अरे कलमुही, तू पानी पीने गई थी की जवान लौंडे से boor मरवाने गई थी। क्या कर रही थी इतनी देर तक।

सभी औरते हसने लगी।

पारो _अरे काकी तुम्हारा भांजा तो एकदम भोंदू है भोंदू, वो क्या मेरा boor मरेगा। उसे तो ये भी नही पता, मुठ मारना क्या होता है?

यहां तो बच्चा बच्चा मूठ मारता फिरता है।

सावित्री _रण्डी कही ये क्या बक रही है तू।

पारो,_काकी मै बक नही रही, सच कह रही हूं।

अपने भांजे को कुछ सिखाओ।

इस उम्र में तो अकेले में जवान लौंडे, मोबाइल में नंगी वीडीयो देखते हैं, वह तो गाना सुन रहा था।

सावित्री _छीनार कही कि ज़रूर तू उसके साथ गंदी हरकत की होगी।

पारो _काकी कोशिश तो की थी कुछ करने की पर तेरा भांजा तो एकदम भोंदू है। बड़े बड़े पहलवानों को हराने से क्या फायदा, जब जवान औरत उसके सामने चूची निकाल कर खड़ी हो और उसके पैजामे में कोई हलचल न हो।

वहा मौजुद सभी महिलाए हसने लगी।

एक औरत _पारो तू क्या सच कह रही है?

पारो _नही तो क्या मैं झूठ कह रही हूं।

औरत _तब तो काकी तुम्हारे भांजे को एक औरत से शिक्षा लेने की शख्त जरूरत है।

पारो को भेज दो झोपड़ी में सब सीखा देगी।

सभी महिलाए खी खी करने लगी।

सावित्री _चुप करो बेशर्मों, मेरे भांजे से तो दूर ही रहना तुम लोग।

उसे बिगाड़ने में तुले हुए हो।

अब काम में ध्यान दो, बहुत हो गई तुम लोगो की बकचोदी।

सभी महिलाए सावित्री की गुस्सा देखकर, चुप हो गई और काम करने लगी।

कुछ देर बाद,,,

सावित्री _तुम लोग जल्दी जल्दी काम करो, मै आकर देखूंगी कितना काम किए हो।

सावित्री वहा से चली गईं और झोपड़ी में आ गई।

राजेश मोबाइल पर गाना सुन रहा था।

सावित्री _अरे बेटा क्या कर रहा है?

राजेश _कुछ नही ताई बस गाने सुन रहा था।

सावित्री _ये पारो तुम्हे परेशान तो नही कर रही थी।

राजेश _भौजी मुझसे क्या बोल रही थी मुझे तो उसकी बाते कुछ समझ ही नहीं आई, मामी।

सावित्री _वो ज़रूर तुमसे कोई गंदी बाते की होगी , कमिनी कही की।

राजेश,, _, गंदी बाते कैसी गंदी बातें ताई।

सावित्री _,, अरे छोड़ो बेटा उस कलमुहि के बाते।

राजेश _मामी मुझे आपसे कुछ पूछना था।

सावित्री _,, पूछो बेटा क्या पूछना है?

राजेश _, अच्छा मामी इसका मतलब क्या होता है?

राजेश ने एक हाथ से रिंग बनाकर उसमें दूसरे हाथ की एक ऊंगली अन्दर बाहर करते हुए कहा।

सावित्री, शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _मामी बताओ न इसका मतलब क्या होता है?

सावित्री _, ये गंदे इशारे तुम्हे कहीं वो कलमुही तो नही बताई।

राजेश _हां मामी, और मैंने जब कहा की इसका मतलब क्या होता है मुझे नहीं पता तो मुझ पर हंसने लगी। और मुझे भोंदू बोलने लगी।

मामी क्या होता है, बताओ न इसका मतलब, राजेश ने उंगलियों से फिर इसारे करते हुवे पूछा।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रहीं थी।

राजेश _, मामी आप तो शर्माने लगी।

सावित्री _अरे बेटा, ऐसी गंदी इशारे मत करो, मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

राजेश,_मामी इसमें शर्म की क्या बात,?

और हा मुझे भौजी ने एक और बात पूछी।

सावित्री,_और क्या पूछी उस कलमुहि ने।

राजेश _उसने मुझसे पूछी की मूठ मारते हो कि नही।

मामी ये मूठ मारना क्या होता है?

सावित्री, शर्म से गढ़ी जा रही थी।

राजेश _मामी बताओ न?

जब मैने भौजी से कहा की मुझे नही पता तुम ही बता दो।

तो कहने लगी की अपनी मामी से पूछना और अगर तुम्हारी, मामी नही बताई तो मुझसे अकेले में मिलना मै तुम्हे सब बता और सीखा दूंगी।

सावित्री,_, अरे बेटा तू उस कलमुहि के भूल कर भी मत जाना, वह तुम्हे बदनाम कर देगी।

राजेश _अरे मामी आप तो कुछ बता ही नही रही है तो मुझे मजबूरी में उसके पास जाना ही पड़ेगा न।

वह मुझे भोंदू बोल बोल कर हस रही थी, मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगा।

मैं जानना चाहता हू इस इशारे और मूठ मारने का मतलब क्या होता है?

सावित्री _अरे बेटा ये दोनो चीजे बड़ी गंदी होती है। मै तुम्हारी मामी हूं, मै इन चीजों के बारे में कैसे बताऊं, मुझे बड़ी शर्म आयेगी। छी बेटा तुम इन चीजों को भूल जाओ।

राजेश _, ठीक है मामी आप नही बता सकती तो रहने दो मै पारो भौजी से पूछ लूंगा।

सावित्री _अरे बेटा तू लगता है तू नही मानेगा। मुझे बेशर्म बना के ही मानेगा।

अच्छा सुन ,,

लड़के लोग अपने नुनु को अपने हाथ से हिलाते हैं उसे मूठ मारना कहते है।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रहीं थी वह अपनी मुंह छिपाने लगी।

राजेश _पर मामी पेशाब करते समय तो नुनु को तो मैं भी हिलाता हूं, इससे अंदर रुका पुरा पेशाब बाहर आ जाता है। ये क्या? बात हुई, क्या इसे ही मुठ मारना कहते हैं।

सावित्री _तू सच में बुद्धू है।

राजेश _तो ठीक से बताओ न तो।

सावित्री _जब लडके अपने नुनु को लगातार बार बार हिलाता है तो पेशाब नही उसका सफेद पानी बाहर आता है।

राजेश _मामी, ये सफेद पानी क्या होता है?

क्या मेरे भी हिलाने से सफेद पानी बाहर आएंगे।

सावित्री शर्म से गड़ी जा रही थी, वह अपनी मुंह छिपाकर शर्माते हुवे बता रही थी।

सभी लडके के निकलते है।

राजेश _पर मामी लडके अपने सफेद पानी बाहर क्यू निकालते है।

सावित्री _क्यू की ऐसा करने से उन्हें बड़ा मजा आता है।

राजेश_अच्छा, मामी मैं भी हिलाकर देखू?

सावित्री _, चुप बेशरम मेरे सामने ही हिलाएगा क्या?

राजेश _तो फिर!

सावित्री _रात में अकेले में हिला कर देखना? हा ऐसा करते समय ध्यान रखना कोई देखे मत नही तो तेरा मजाक उड़ाएंगे।

राजेश_अच्छा, ठीक है आज रात को मैं भी हिलाकर देखता हूं, सफेद पानी बाहर निकलता है कि नही।

सावित्री _अब मजदूरों के भोजन का समय हो गया है।

वे आ रहीं होंगी।

अब ये सब बाते बंद कर।

राजेश _ठीक है मामी।

कुछ देर बाद, औरते भोजन करने, झोपड़ी में आई।

पारो,_क्या चल रहा है मामी और भांजे के बीच में।

सभी औरते हसने लगीं।

सावित्री _चुप कर कलमुही कहीं की।

राजेश बेटा जा तू घर जा, भोजन कर लेना।

मैं अपने लिए भोजन लेकर आई थी।

राजेश _ठीक है मामी।

सावित्री _और बेटा तुम घर में ही आराम करना, यहां आयेगा तो ये कलमुही तुझे फिर परेशान करेगी।

राजेश _ठीक है मामी।

पारो _अरे काकी, काहे भेज रहे हो, बाबू को, हम लोग लाए हैं न खाना, मिल बांटकर खा लेंगे। यहां रहेगा तो बेचारा को कुछ सीखने को मिलेगा।

सभी औरते हसने लगी।

सावित्री _चुप कर बेशर्मों।

बेटा तू जा।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश खेत से घर आ गया।

सुमित्रा _अरे राजेश तू आ गया। चल हाथ पैर धोकर आ जा मै तेरे लिए खाना लगाती हूं।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश भोजन करने के बाद अपने कमरे में आराम करने लगा।

शाम के समय सुप्रिया चाय लेकर कमरे में पहुंची।

सुप्रिया _राजेश उठो चलो चाय पिलो।

राजेश _अरे दीदी, मामी आ गई क्या खेत से।

सुप्रिया _नही आ रही होगी।

सुप्रिया _अच्छा राजेश, मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।

राजेश _, हा बोलो दीदी क्या बात?

सुप्रिया ,, ये प्रिया दीदी के पति दीदी को खुश नही रखते क्या?

राजेश _क्यू दी ऐसे क्यों पूछ रहे हो, जीजू तो बड़े अच्छे है।

वो क्या है न कि जीजू डॉक्टर है तो हॉस्पिटल में ही थोडा ज्यादा बीजी रहते है।

वैसे प्रिया दीदी को तो वह बहुत चाहते है।

सुप्रिया _एक और बात पूछनी थी तुमसे।

राजेश _हा दीदी पूछो न तो, संकोच क्यों कर रही हो?

सुप्रिया _परसो रात मैंने दीदी को तुम्हारे कमरे से निकलते हुए देखा था।

और सुबह जब मैं तुम्हारे कमरे में आई तो तुम बिना कपड़ो के थे।

इन सबका मतलब मै क्या समझू?

राजेश _दी, वो क्या है न कि,,,

दी अब छोड़ो न तुम भी किन बातों को लेकर बैठ गई।

सुप्रिया _कब से चल रहा है सब, मै भी तो जानू।

राजेश _दी ये सब जानकर क्या करोगी?

रहने दो न। ये बात किसी से कहना मत, नही तो बदनामी हो जाएगी।

सुप्रिया _ठीक है मुझे क्या? पर,,

राजेश _पर क्या दी!

सुप्रिया _उस दिन तुम दीदी के साथ जो किसिंग कर रहे थे, वो मेरे साथ भी करना होगा।

राजेश _दी आप मुझे ब्लैक मेल कर रही हो।

सुप्रिया _अब जो समझो।

सुप्रिया, राजेश के क़रीब आकर बैठ गई।

और अपनी ओंठ राजेश की ओंठो पर रख दी।

राजेश की ओंठ को चूसना शुरू कर दी।

कुछ देर बाद राजेश ने भी उसकी ओंठ को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा।

सुप्रिया राजेश से लिपट गई।

राजेश ने भी उसे अपनी बाहों मे कस लिया।

दोनो एक दूसरे की ओंठो को पागलों की तरह चुसने लगे।

तभी दोनो को किसी की आने की आहट हुई।

दोनो अलग हो गए।

सुप्रिया मुस्कुराते हुए, कमरे से बाहर चली गईं।

सावित्री, खेत से घर आ चुकी थी।

रात में राजेश के कमरे में सुमित्रा फिर आई।

राजेश उसे आधे घण्टे तक जमकर चोदा। खुद संतुष्ट होकर,

सुमित्रा, राजेश को अधूरा छोड़ कर फिर भाग गई।

ये मामी तो बड़ी मतलबी निकली। अब दूसरा जुगाड करना ही पड़ेगा। नही तो रात भर, लंद सहलाकर ही गुजारनी पड़ेगी।

राजेश ने अपना लंद को बाथरूम में जाकर अच्छे से धोया।

फिर टावेल से अच्छे से पोछा।

वह सावित्री के कमरे की ओर चला गया।

उसने धीरे से दरवाज़ा खटखटाया।

सावित्री की पूरी तरह लगी नही थी।

सावित्री _इतनी रात को कौन दरवाज़ा खटखटा रहा है।

अपने बेड से उठ कर दरवाज़ा खोली।

सावित्री _अरे राजेश तुम इतनी रात को,,

राजेश _हा मामी मैं!

मामी तुम झूठी हो।

सावित्री _क्यू क्या huwa?

राजेश _, पहले अंदर तो आने दो एफआईआर बताऊं।

सावित्री ने इधर उधर झांका, चारों तरफ सन्नाटा था।

सावित्री _अच्छा आओ, बताओ क्या हुआ?

राजेश _मामी आपने कहा था न नुनु हिलाने से लड़को का सफेद पानी बाहर निकलता है?

मैं आधे घंटे से हिला रहा हूं, मेरा तो कुछ नहीं निकला।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _आप झूठी हो!

सावित्री _तुमने ठीक से किया नही होगा? शर्माते हुवे बोली।

राजेश _तो आप ही देख लो, और बताना ठीक से हिला रहा हूं कि नही।

राजेश अपना लोवर और चड्डी नीचे खिसका कर लंद बाहर निकाल लिया।

सावित्री, की नजर जब राजेश के लंद पर पढ़ी तो, आश्चर्य में पड़ गई। मुरझाया huwa लंद इतना बड़ा है तो खड़ा होने के बाद, कितना बडा लगता होगा।

राजेश लंद को मुठियाने लगा।

सावित्री देखने लगी।

राजेश _मामी देखो मैं ठीक से कर रहा हूं न।

सावित्री _थोडा, हाथ को आगे पीछे तेज तेज चलाओ। शर्माते हुए अपनी मुंह छिपाते हुए बोली।

राजेश _मामी आप ही सीखा दो न कैसे हिलाना है?

सावित्री _चुप बेशर्म, किसी को पता चल गया तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _मामी, कैसे किसी को पता चलेगा यहां कमरे में हम दोनों ही तो है।

सावित्री _अगर तुमने किसी से कह दिया तो।

राजेश _अपने भांजे पर भरोसा नहीं है।

सावित्री _भरोसा तो है पर डर लगता है?

राजेश _मामी, तुम मुझ भरोसा करो, मै यह बात किसी से नहीं कहूंगा। तुम बस मेरा सफेद पानी बाहर निकालकर, दिखाओ, मुझे देखना है कैसा होता है सफेद पानी।

सावित्री _तुम किसी को बताना नही, हा,,

राजेश _तुम भरोसा रखो, और जल्दी करो।

सावित्री ने, राजेश के लंद को कपकपाते हुए हाथो से पहले पकड़ी, फिर धीरे धीरे सहलाने लगी।

जानना हाथ लगते ही राजेश के नशों में खून की रफ्तार तेज हो गया, धीर धीर लंद बडा होने लगा।

राजेश _मामी ये तो कमाल हो रहा है, देखो तो आपके हाथ लगते ही नुनु कैसे बडा हो रहा है।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

सावित्री अब राजेश के लंद को मुठ्ठी में भर कर आगे पीछे हिलाने लगी।

राजेश का लंद तनकर पुरा खड़ा हो गया।

राजेश _मामी, आह सच में बहुत मजा आ रहा है, थोडा तेज तेज हिलाओ।

आपने सच कहा था, मुठ मारने मे लड़को को मजा आता है।

हां, ऐसे ही और थोडा तेज, हा बहुत अच्छा लग रहा है।

सावित्री शर्म से गड़ी हुई थी। एक हाथ से मुंह छिपाते हुवे दूसरे हाथ सी लंद हिला रही थी।

राजेश का लंबा और मोटा लण्ङ देखकर, वह अपनी योनि में वर्षो बाद गिला पन, महसूस करने लगी।

447 वर्ष की उम्र हो जानें के बाद भी अभी तक उसका मासिक धर्म बंद नहीं हुआ था।

हर माह समय पर उसका मासिक धर्म आ जाता था।

सतजन सिंह ने पिछले बार कब चोदा था उसे याद नही रहा।

आज राजेश का लंबा और मोटा लण्ङ हाथ में लेते ही उसकी boor पानी छोड़ने लगीं।

काफी देर तक हिलाने के बाद भी राजेश का वीर्य बाहर नही आया।

सावित्री _सच में इसका बीज तो बाहर ही नहीं निकल रहा।

राजेश _मामी देखा न, आप झूठ बोल रही थी। कोई सफेद पानी बाहर नही आ रहा।

सावित्री _पता नही re, तेरा बीज मतलब सफेद पानी कैसे बाहर नही आ रहा।

राजेश _क्या कहा आपने? बीज

क्या इसे यूज बीज कहते हैं?

सावित्री _शर्म से पानी हो गई।

हूं।

राजेश _अच्छा मामी अब बस करो, लगता है मेरे अंदर बीज नही है।

अच्छा अब तुम इस इशारे का मतलब बताओ। एक हाथ के ऊंगली से रिंग बनाकर दूसरे हाथ की ऊंगली को अंदर बाहर करते हुए दिखाया।

इस इशारे को देखते ही, सावित्री की boor से पानी की धार फूट पड़ा।

वह शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _मामी बताओ न इसका मतलब क्या है? तुम शर्मा क्यू रही हो।

सावित्री _छी, मुझे बड़ी शर्म आ रही हैं, मै इसका मतलब नहीं बता पाऊंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है मत बताओ कल मैं पारो भौजी से पूछ लूंगा।

सावित्री _नही बेटा, वो गंदी औरत है, उससे तुम कुछ मत पूछना वो तुझे बदनाम कर देगी।

राजेश _अच्छा ठीक है फिर तुम बताओ।

सावित्री _वो क्या है न कि इस इशारे का मतलब होता है न,,, कि,,,, मरद अपनी नुनु को,,,, औरत के,,, नूनी में,,, डालकर अन्दर बाहर करता है,,, यह बड़ी मुस्किल से बोल पाई, और दोनो हाथो से अपनी चेहरा छिपा ली, उसे बड़ी शर्म आ रही थी।

राजेश _,, ओह, तो इसका ये मतलब है। पर मामी लोग ऐसा क्यो करते हैं?

सावित्री _अरे सच में तू भोंदू है,,,

ऐसा करने से मरद का बीज औरत के गर्भ में जाता है। औरत मां बनती हैं।

राजेश _ओ हो तो ये बात है। मुझे अब पता चला।

मामी तब तो शादी से पहले सबको ये अच्छे से आना चाहिए।

मामी मुझे भी सिखाओ न, नूनी में नुनु कैसे बाहर करना है।

सावित्री _छी चुप कार बेशरम, मै तुम्हारी मामी हूं। मामी के साथ ये सब नहीं करते।

राजेश _ठीक है, मै पारो भाभी के साथ सीखूंगा, वो बोली है सीखना हो तो मुझे बता देना।

सावित्री _अरे बेटा, वो बदनाम औरत है और तूझे भी बदनाम कर देगी। उस से मिलना भी मत।

राजेश _तो तुम मना क्यों कर रही हो सिखाने से।

सावित्री _मुझे बड़ी शर्म आयेगी। हाथो से मुंह छिपाते हुए शर्माते हुवे बोली।

राजेश _अरे मामी अपने भांजे से क्या शर्माना।

तुम्हारे सामने नंगा खड़ा हू, मुझे तो शर्म नहीं आ रही है।

सावित्री _, किसी को पता चल गया तो, किसी को मुंह नही दिखा पाऊंगी।

राजेश _अरे मामी, यहां हम दोनों के अलावा है कौन? यह बात कैसे किसी को पता चलेगा।

सावित्री _तू खा कसम मेरी पहले तू ये बात किसी को बताएगा नही।

राजेश _मामी मुझे तुम्हारी सिर की कसम मै यह बात किसी को नहीं बताऊंगा।

सावित्री _, सुन लाईट को बंद करदे पहले। नही तो मुझे तुम्हारे सामने बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _अच्छा ठीक है। पर एकदम अंधेला में तो कुछ सीख नही पाऊंगा। थोड़ी रोसनी तो, रहने दो।

सावित्री _अच्छा ठीक है।

सावित्री ने अलमारी से मोम बत्ती निकाला और उसे जला कर कमरे में रखे स्टूल पर रख दिया।

उसके बाद सावित्री अपनी चढ़ी उतार दी। वह साड़ी पहनी हुई थी।

वह बेड किनारे लेट गई।

राजेश का लंद तो पहले ही तना हुआ था।

अपनी बड़ी मामी को चोदने का सोंच कर लंद झटके मारने लगा।

सावित्री _अपनी टांगे खोल दी, राजेश उसकी टांगो के बीच आ गया।

सावित्री की boor में घने बाल थे। योनि द्वार दिखाई नहीं दे रहा था।

राजेश _मामी आपके तो घने बाल है। नुनु को डालना कहा है।

सावित्री शर्म से पानी पानी हो गई।

वह अपनी हाथो से राजेश का लंद पकड़ ली, और अपनी योनि के छेद में सेट की।

सावित्री _थोडा धक्का लगा। शर्माते हुए, धीर से बोली।

राजेश ने एक करारा शॉट मारा।

लंद एक ही बार में boor चीरकर आधा अन्दर घुस गया।

सावित्री की boor एकदम गीली थी।

सावित्री सिसक उठी। आह माई।

थोडा आराम से,,,

राजेश _अब क्या करू मामी, नुनु तो आधा अन्दर घुस गया गया। अपको दर्द huws क्या?

सावित्री _अब थोडा नुनु बाहर निकाल कर फिर धक्के मार। धीर से फुसफुसाते हुए बोली।

राजेश ने लंद बाहर खींचा फिर एक जोर का धक्का मारा।

लंद का टोपा सीधा सावित्री के बच्चे दानी से टकराया।

सावित्री चिहुंक उठी।

राजेश _,, क्या huwa मामी। दर्द हो रहा है क्या?

सावित्री _न में सिर हिलाया।

राजेश _अब क्या करू मामी।

सावित्री _अब तू, नुनु को अंदर बाहर करता रह।

शर्माते हुवे धीरे से बोली।

राजेश ने अब अपने लंद को boor में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

राजेश _, आह मामी, इसमें तो बहुत मजा आ रहा है।

आह,,

मन कर रहा है कि ऐसा ही नुनु को तुम्हारी नूनी में अन्दर बाहर करता रहूं।

इधर, सावित्री को भी बहुत मजा आने लगा।

राजेश का लंबा लंद उसकी बच्चेदानी को ठोक रहा था। लंद मोटा होने के कारण योनि की भगनाशा अच्छी तरह रगड़ खा रहा था।

जिसके कारण, सावित्री को संभोग का परम सुख प्राप्त होने लगा। जिसकी कल्पना उसने कल्पना नहीं की थी।

रकमरे में उसकी मादक सिसकारी, ऊं आह,, उह,,,, चूड़ियों की खनक खन खन,,, फ़च फ्च की आवाज गूंजने लगा।

राजेश को भी अब बहुत मजा आ रहा था। वह भी जोश में आ चुका था।

वह सावित्री की दूदू को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा और दनादन boor चोदने लगा।

सावित्री तो जन्नत की सैर कर रही थी।

वह खुद ही अपनी ब्लाउज की बटन खोल कर अपनी दूदू को आजाद कर दी।

उसकी बड़ी बड़ी चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।

राजेश चुचियों को मुंह में भर कर चूसने लगा।

और गपागप boor में लंद डालने लगा।

सावित्री भी मस्ती में होस खो बैठी थी। वह राजेश की कमर पकड़ कर आगे पीछे करने लगी।

दोनो chudai के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे। मजे में दोनो के मुंह से,,,

आह उह,,, आह,,,, उह,, आह,, उह,,,,,

निकल रहे थे।

तभी सावित्री खुद को रोक न सकी और राजेश को कसकर जकड़ ली और झड़ने लगी।

झड़ते समय उसे वह आनंद मिला जिसकी कल्पना तक उसने नही की।

राजेश chudai छोड़कर सावित्री की चूची चूसने लगा।

फिर वह अपना सावित्री की ओंठ चूसने लगा।

सावित्री कुछ ही देर में फिर गर्म हो गई।

राजेश ने सावित्री को बेड से उठा कर खड़ा किया और बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया।

उसके टांगो के बीच आकर एक ही धक्के में लंद को उसकी योनि में जड़ तक अन्दर घुसा दिया।

सावित्री चिहुंक उठी।

अब राजेश ने सावित्री की कमर पकड़ कर गच गच चोदना शुरु कर दिया।

एज बार फिर से कमरे में सावित्री की मादक सिसकारी, चूड़ियों की खनक खन खन,, और फच फ्च की आवाज गूंजने लगा।

दोनो फिर से जन्नत में पहुंच गए थे।

राजेश लगातार तेज तेज चोदे जा रहा था।

सावित्री को बहुत मजा आ रहा था।

तभी राजेश ने chudai बंद कर दिया।

सावित्री नही चाहती थी की राजेश रुके उसे बहुत मजा मिल रहा था।

सावित्री _राजेश रुक क्यू गया? धक्का लगा तेज तेज,, रुक मत।

राजेश _नही मामी, पहले बताओ, आ रहा है कि नही। आप कुछ बता नहीं रही है।

सावित्री _, मुझे शर्म आ रही, बोलने में ,,

राजेश _, तो सिर हिला कर बता दो।

क्या तुम्हे मजा आ रहा है।

सावित्री _, हां में सिर हिलाया।

राजेश _और धक्के मारू।

सावित्री _, हा में सिर हिलाया।

राजेश के मेरी रानी मुझे भी तुम्हे चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है। ले लंद अपनी योनि में।

ले ले अपने भांजे के लंद का मजा।

राजेश फिर तेज तेज चोदने लगा। फिर से कमरे में दोनो की उह आह उह आह, की आवाजे गूंजने लगी।

राजेश रुका औरअपना लंद बहार निकाल लिया।

वह अपना शर्ट उतार कर नंगा हो गया।

राजेश _, मामी तुम भी अपना कपड़े उतार दो मुझे तुम्हे बिना कपड़ो के देखना है।

सावित्री _न मुझे शर्म आयेगी।

राजेश _, देखो मैं भी तो नंगा हू।

नही तो मैं अपने कमरे में जा रहा हु।

मैं और धक्के नही मरूंगा।

सावित्री इतनी चूदास हो गई थी, की वह एक बार फिर झड़ कर परम सुख को प्राप्त करना चाहतीं थी, जो एक बार राजेश ने उसे दिया था।

वह अपनी साडी निकाल दी।

अपनी ब्लाउज खोलकर फेक दिया। अपनी चूची दोनो हाथो से छुपाने लगी।

राजेश उसे बाहों में भर लिया। जी भर कर उसकी ओंठ चूची को चूसने चाटने लगा।

सावित्री फिर मदहोश हो गई।

राजेश ने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। सावित्री एकदम नंगी हो गई। वह शर्म से गड़ी जा रहीं थी अपने हाथ से अपनो शरीर छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।

राजेश ने सावित्री को बेड पर चढ़ा दिया और घोड़ी बना दिया।

अब पीछे से लंद योनि में डालकर, फिर से चोदना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में कमरा फिर से दोनो की सिसकारी से गूंजने लगी।

सह ऊ आह उह,,,,

अब राजेश अपना लंद फिर से बाहर निकाल कर बेड पर नीचे लेट गया।

उसका लंद सावित्री की boor का पानी पीकर खूब लंबा और मोटा हो गया था।

उसकी boor रस की चिकनाई से चमक रहा था।

राजेश _मामी, लंद को मुंह में लेकर चूसो, और मुझे मजा दो।

सावित्री _, आज्ञाकारी पत्नी की तरह लंद को मुंह में भर कर चूसना चाटना शुरु कर दी।

राजेश _, चलो अब बैठ जाओ लंद के ऊपर।

सावित्री, मदहोश और चूदास थी वह राजेश की हर बात मान रही थी। वह राजेश के लंद को अपनी योनि में सेट की और उस पर बैठ गई।

राजेश ने उसकी कमर पकड़ लिया।

सावित्री अब लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

राजेश भीअब कमर को उठा उठा कर लंद को योनि की गहराई में पहुंचाने लगा।

दोनो एक बार फिर जन्नत की सैर करने लगें।

दोनो के मुंह से आह उह,, आह उह,,,

निकलने लगा।

सावित्री एक बार फिर झड़ने की स्थिति में आ गई।

राजेश उसकी कमर पकड़कर पटक पटक कर चोदने लगा।

सावित्री अपनी चरम अवस्था में पहुंच गई।

वह राजेश लिपट कर चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश उसके पीठ सहलाने लगा।

कुछ देर बाद राजेश सावित्री के ऊपर आ गया। उसकी योनि को चाटना शुरु कर दिया।

सावित्री चिहुंक उठी, उसके पति ने कभी योनि नही चाटा था।

योनि चटवाने में उसे असीम आनंद का अनुभव होने लगा।

उसकी मुंह सी मादक सिसकारी और boor से रस की धार बहने लगी।

अब राजेश सावित्री के कमर की नीचे तकिया लगा दिया।

ओर और उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल दिया। फिर लंद को योनि में रख कर एक जोर का धक्का मारा लंद का टोपा सीधा सावित्री के बच्चेदानी से टकराया।

सावित्री का सरीर गन गना गया।

अब राजेश सावित्री की चूची पकड़ कर तेज तेज धक्के लगाने लगा।

दोनो को संभोग का अपार सुख मिलने लगा।

राजेश इस पोजीसन में लगातार चोदता रहा झड़ने की स्थिति में पहुंच गया । वह तेज तेज़ चोदने लगा और आह मां आह, करके करहत्ते हुए सावित्री की योनि को अपनी बीज से भरने लगा।

सावित्री अपनी boor में गर्म गर्म वीर्य का अहसास पाकर, उसे अद्भुत आनंद का अनुभव huwa और एक बार फिर से झडने लगी।

दोनो बुरी तरह एक दूसरे से जकड़े हुए थे। कुछ देर बाद दोनो को होश आया।

राजेश, सावित्री के बाजू में लुड़क गया।

जब स्थिति नार्मल huea तो सावित्री अपनी स्थिति देख कर काफी शर्मिंदगी महसूस हुई।

वह बेड से उठी और कपड़े पहनने लगी।

राजेश उसे मुस्कुराते हुए लंद सहलाने लगा।

कपड़े पहनने के बाद,,

सावित्री _, तू बडा बदमाश निकला रि, तूने भोंदू बनने का नाटक किया।

पता नही तू कितनी औरतों के साथ कर चुका है।

बोलो नाटक क्यों किया तूने।

राजेश _, अरे मामी, अगर नाटक नही करता तो क्या तुम मुझे देती।।

सावित्री _पर ये तूने ठीक नहीं किया, तूने मेरी पतिव्रता भंग कर दिया।

राजेश _सॉरी मामी। क्या अपको मजा नही आया।

सावित्री _, बात मज़े की नही, मर्यादा की है। जो तूने तोड़ने पर मजबूर कर दिया।

राजेश_सारी मामी मुझे लगा की आपको अच्छा लगेगा।

पर शायद मै गलत था।

सावित्री _,,, इससे पहले कोई आ जाए, मै किसी को मुंह दिखाने लायक न रहूं।तुम कपड़े अपने कमरे में जाओ।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश अपना कपड़ा पहन लिया।

मुंह लटकाकर कमरे से चला गया।

राजेश को लगा की उसे मामी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था।

वह यही सोचता huws बेड पर लेटा ही था कि कब नींद लगी पता ही नहीं चला।

अगले दिन सुबह सावित्री और राजेश के बीच ज्यादा बातचीत नहीं huwa।

सावित्री खेत चली गईं।

राजेश घर में ही रह गया।

सावित्री जब घर में आई तो, सुमित्रा ने उसे बताई की राजेश को पता नही आज क्या हो गया है।

उस्का चेहरा उतरा हुआ है।

रात में भी राजेश ने थोडा सा भोजन करके उठ गया।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

रात के क़रीब 12बजे, राजेश के कमरे में कोई आई।

राजेश ने देखा,,

उसकी बड़ी मामी आई है।

राजेश,,, _मामी आप इस समय।

सावित्री _क्यू तेरा मुंह क्यूं उतरा हुआ है, सुबह से।

राजेश _आप नाराज हैं न, मैने आप को दुखी कर दिया। सारी मामी।

सावित्री,_अब जो huwa उसे भूल जा।

राजेश _क्या आपने मुझे माफ कर दिया।

सावित्री _हू।

राजेश _थैंक यू।

मामी।

राजेश ने सावित्री को अपनी बाहों में भर लिया।

सावित्री _, हू हू, ये कर रहा है।

राजेश _,, ओह सॉरी मामी।

राजेश सावित्री को छोड़ दिया।

सावित्री हसने लगीं।

सावित्री _अच्छा अब में चलती हूं।

सावित्री जानें लगी, तभी वह दरवाजे के पास जाकर रुक गई।

पीछे मुड़कर बोली,

वैसे कल मुझे भी, बहुत मजा आया। शर्माते बोली।

राजेश _तो आज फिर से करे।

सावित्री,_तुम्हारी मर्जी,

कहकर सावित्री, मुस्कुराते शर्माते, कमर matkaate अपने कमरे में चली गई।

राजेश, खुश हो गया।

वह कुछ देर बाद सावित्री के कमरे मे गया। कमरा खुला रखी थी। राजेश के आने का इन्तजार रही थी।

इस बार राजेश ने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने देखा आज सावित्री की boor एकदम चिकनी थी।

राजेश का लंद एकदम लंबा मोटा हो गया। चिकनी boor देखकर। राजेश ने उसकी boor चांट चांट कर उसके सरीर में chudas भर दिया।

अब वह आज्ञा कारी पत्नि की तरह राजेश से चुदाने लगी। तरह तरह आसन में राजेश ने सावित्री को जमकर भोगा और अंत में उसकी योनि को अपनी बीज से भर दिया।

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अगले दिन, पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम था। सावित्री तो खेत चली गईं।

सुमित्रा _अरे सुप्रिया।

सुप्रिया _जी चाची क्या बात है?

सुमित्रा _पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम रखा गया है। वहा जाना पड़ेगा। चल जल्दी नहाकर तैयार हो जाओ।

सुप्रिया _चाची, घर में इतने सारे काम पढ़े है। कपड़े भी धोने के लिए निकाल रखे है। आप चली जाओ। घर भी तो देखना पड़ेगा।

सुमित्रा _अच्छा ठीक है। मै ही चली जाती हूं।

सुप्रिया _चाची, बच्चो को तैयार कर देती हूं। उन्हे भी साथ में ले जाना।

सुमित्रा _अच्छा ठीक है, पर जल्दी कर।

सुप्रिया _ठीक है चाची।

सुप्रिया ने बच्चों को नहला कर तैयार कर दिया।

सुमित्रा बच्चो को लेकर, पड़ोसी के यहां चली गईं।

राजेश टहलने के लिए निकला था, वह घर ही जा रहा था की रास्ते में सुमित्रा मिली।

राजेश _अरे मामी, बच्चो को लेकर कहा जा रही हो।

सुमित्रा _पड़ोसी के यहां पूजा का कार्यक्रम है, मै वही जा रही हूं। सुप्रिया घर में है। किसी चीज की जरूरत हो तो उसे बता देना।

राजेश _ठीक है मामी।

राजेश घर पहुंचा, दरवाज़ा खटखटाया।

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला।

सुप्रिया _आ गया टहलकर।

राजेश _हां दी, मामी रास्ते में मिली थी, बता रही थी की वह पड़ोसी के यहां पूजा में शामिल होने जा रही है।

सुप्रिया _हा, राजेश मै नहाने जा रही हूं।तुम्हे कुछ चाहिए क्या?

राजेश _नही दी।

सुप्रिया, बाथरूम चली गईं वह, कपड़ा धोने लगी फिर नहाने, लगी।

इधर राजेश हाल में बैठकर टीवी देखने लगा।

इधर सुप्रिया नहाने के बाद,

अपने कमरे में आकर, कपड़े पहनने लगी।

कुछ देर बाद सुप्रिया को आवाज लगाई।

सुप्रिया _राजेश थोडा इधर आना।

राजेश हाल में बैठा था। सोफे से उठ कर सुप्रिया के कमरे के पास गया।

राजेश _दी क्या आपने मुझे बुलाया।

सुप्रिया _हा, अंदर आना।

राजेश जब अंदर गया तो देखा, सुप्रिया, सिर्फ पेटीकोट में थी और ब्रा की हूक लगाने की कोशिश कर रही थी।

राजेश _दी, क्या बात है दी।

सुप्रिया _देखो न मेरी ब्रा की हूक नही लग रही है। मेरी मदद कर दो।

सुप्रिया राजेश की ओर पीठ करके खड़ी थी। वह सिर्फ पेटीकोट में थी। उसका बैक पुरा ओपन था। उसका गोरा बदन दमक रहा था।

राजेश का शरीर गर्माने लगा।

सुप्रिया _क्या huwa re,,,

राजेश _ कुछ नहीं दी।

सुप्रिया _फिर हूक लगा क्यू नही रहा।

राजेश ने ब्रा का हुक लगाने की कोशिश किया।

सुप्रिया की बदन की मादक खुशबू, राजेश को उत्तेजित करने लगा।

राजेश _दी आपकी ब्रा तो टाइट है, हूक लग नही रहा। कोई दूसरी ब्रा पहन लो।

सुप्रिया _ओह लगता है तुम्हारे जीजू, गलत साइज के ब्रा ले आया। या फिर मैं मोटी हो गई हूं।

राजेश _दी आप तो बिलकुल परफेक्ट है कही से भी मोटी नहीं लगती।

सुप्रिया _चल झूठा कही का।

राजेश _दीदी मै सच कह रहा हूं। आप का बदन एकदम सुंदर और हॉट है।

राजेश ने सुप्रिया को पीछे से बाहों में भरते हुए कहा।

सुप्रिया _ अच्छा ऐसी क्या खास है मुझमें।

राजेश _आपके तो सारे चीज खास है।

राजेश ने सुप्रिया को अपनी ओर घुमा दिया।

ये आंखें, लंबे लंबे बाल, ये शराबी ओंठ।

ये उन्नत स्तन, ये गहरी नाभी। सच में आप स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं।

सुप्रिया, हसने लगीं।

सुप्रिया _बस कर बस, झूठी तारीफ कर, मुझे चने की झाड़ में न चढ़ा।

राजेश _मै सच कह रहा हूं दी, आप सच में बहुत खूबसूरत और हॉट हो।

राजेश _दी आप इजाजत दे तो एक किस कर लूं।

सुप्रिया _कहा

राजेश _आपकी, नाभी पे।

आपकी नाभी काफी आकर्षक है।

राजेश नीचे घुटनों पे खडा हो गया।

और सुप्रिया की नाभी को किस किया।

सुप्रिया आंखें बंद कर सिसक उठी।

राजेश ने सुप्रिया की आंखों में देखा। सुप्रिया, राजेश की आंखों में देखने लगी।

राजेश सुप्रिया को देखते हुए, उसकी नाभी चाटने लगा।

सुप्रिया आंखें बंद कर सिसकने लगीं।

तभी राजेश उठ खडा हुआ।

राजेश _सॉरी दी मै बहक गया था।

राजेश कमरे से जानें लगा, तभी सुप्रिया तेजी से दौड़ी और राजेश को पीछे से पकड़ कर लिपट गई।

सुप्रिया _जिस्म में आग लगा कर कहा जा रहा है? अब तो इसआग को तुम्हे बुझाना ही पड़ेगा।

राजेश सुप्रिया की ओर घुमा,

राजेश ने सुप्रिया की आंखो में देखा। सुप्रिया ने आंखें झुका ली।

राजेश ने सुप्रिया की सिर को ऊपर उठाया और उसकी दोनो आंखो को प्यार से चूमा।

सुप्रिया आंखें बंद कर रखी थी।

राजेश ने अपना ओंठ, सुप्रिया की ओंठ के ऊपर रख दिया।और ओंठ चूसने लगा।

सुप्रिया भी राजेश की ओंठ चूसने लगी।

धीरे धीरे राजेश नीचे बडा। उसकी गर्दन को चूमने चाटने लगा।

सुप्रिया सिसकने लगी।

राजेश फिर आगे बडा। सुप्रिया की ब्रा को खीच कर निकाल दिया।

गोरे गोरे मस्त सुडौल चूचियां, राजेश के सामने आ गया।

राजेश का लंद टनटना गया।

राजेश ने सुप्रिया की चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा। उसे मसल मसल कर, दुध निकालने की कोशिश करने लगा।

सुप्रिया सिसक रही थी। उसकी boor में पानी भर रिसने लगा।

अब राजेश नीचे गया और उसकीसपाट पेट को चूमने चाटने लगा।

गहरी नाभी को चूम लिया।

सुप्रिया एक दम गर्म हो गई।

मादक सिसकारी निकालने लगीं, प्यार से राजेश की बालो को सहलाते लगी।

तभी राजेश नीचे बडा।

सुप्रिया की पेटीकोट की नाडा खीच दिया।

पेटी कोट सुप्रिया के पैरो में गिर गया।

सुप्रिया पेंटी नहीं पहनी थी।

सुप्रिया शर्म से अपनी हाथो से योनि को ढकने लगी।

राजेश ने सुप्रिया के हाथ हटाकर उसकी योनि का दीदार किया।

सुप्रिया की योनि मस्त फूली हुई, एकदम चिकनी, शायद आज ही बाल साफ की थी।

उसकी रसीली boor देखकर राजेश का लंद लंबा और मोटा होकर झटके मारने लगा।

अब प्रिया राजेश का कपड़ा उतारते चली गईं।

जब उसने राजेशकच्छा उतारा, तो राजेश का लंद देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

वह आश्चर्य से राजेश के लंद को देखने लगी।

राजेश _क्या huws दी।

सुप्रिया _तुम्हारा, काफी बडा है।

राजेश _क्यूं, जीजू का इससे छोटा है क्या?

सुप्रिया _उसका तो इसका आधा है।

राजेश _कही डर तो नही गई।

सुप्रिया _मै दो बच्चे निकाल चुकी हूं, पहली बार होता तो ज़रूर डर जाती।

सुप्रिया राजेश का लंद पकड़ कर उसे सहलाने लगी उसकी अंडकोश चाटने लगी।

फिर टोपा को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश को बहुत मजा आने लगा वह सुप्रिया की बाल सहलाने लगा।

अब सुप्रिया, राजेश के लंद को जितना हो सके मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश हवा में उड़ने लगा।

आह दी तुम मस्त लंद चूसती हो बडा मजा आ रहा है।

राजेश जोश में आकर सुप्रिया की मुंह में लंद अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद राजेश ने सुप्रिया को ऊपर उठाया और बेड पर लिटा दिया।

अब राजेश सुप्रिया की टांगो को फैला दिया। उसकी योनि को चाटने लगा।

सुप्रिया हवा में उड़ने लगी।

राजेश उसकी भगनासा को जीभ से कुरेदने लगा।

सुप्रिया के शरीर आग धधकने लगी।

उसका पुरा शरीर चुदाशा हो गया।

सुप्रिया _राजेश अब डालदो प्लीज, मुझसे बर्दास्त नही हो रहा, सिसकते हुवे बोली।

राजेश अपना लंद सुप्रिया की योनि में रखा फिरboor को लंद से घिसा।

सुप्रिया _और मत तड़फाओ डाल दो,,, प्लीज,

राजेश ने टोपा छेद में रखा और एक जोर का धक्का लगाया।

सुप्रिया चीख उठी। लंद boor चीरकर आधा अन्दर घुस गया था।

राजेश अब सुप्रिया की ओंठ चूसने लगा। उसकी चूची से खेलने लगा फिर धीरे धीरे लंद योनि में अदंर बाहर करने लगा।

योनि लंद के अंदर अपनी जगह बनाने लगा। धीरे धीरे लंद boor में पुरा अदंर समा गया।

राजेश तेज तेज चोदने लगा।

सुप्रिया को chudai में इतना मजा आ रहा था जिसकी कल्पना भी उसने नही की थी।

लंद भगनासा को अच्छी तरह रगड़ रहा था।

सुप्रिया स्वर्ग में पहुंच चुकी थी

इधर राजेश को भी सुप्रिया को चोदने में एक अलग मजा आ रहा था ।

उसकी boor एकदम कसा कसा लग रहा था।

जिससे उसको चोदने में बड़ा मजा आ रहा था।

सुप्रिया बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। लंद पूरे गहराई नाप रहा था। सुपरिया की बच्चेदानी को ठोक रहा था।

जिससे सुप्रिया को एक अलौकिक कामसुख प्राप्त हो रहा था। वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकी और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश चोदना बंद कर दिया। उसकी ओंठ चूसने लगा

कुछ देर बाद, राजेश फिर से योनि चांटकर सुप्रिया को गर्म कर दिया।

सुप्रिया को घोड़ी बना दिया, और चोदना शुरु कर दिया ।

दोनो फिर से जन्नत की सैर करने लगें।

कमरे में फच फच, गछ गाछ की आवाज, दोनो की मादक सिसकारी आह उह आह उह, की आवाज गूंजने लगा।

सुप्रिया की boor की रस से राजेश का लंद एकदम गीला हो गया था। लंद के ऊपर सुप्रिया की boor का मक्खन लगा huwa दिखाई पड़ रहा था।

राजेश सुप्रिया की कमर पकड़ कर तेज तेज चोदने लगा, दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

काफी देर तक इसी पोजीशन में संभोग करने के बाद राजेश ने लंद को boor से निकाल लिया। और बेड पर लेट गया, राजेश ने सुप्रिया को ऊपर आने का इशारा किया।

सुप्रिया बेड पर चढ़ गई और राजेश के लंद को अपनी योनि में रखकर बैठ गई।

राजेश सुप्रिया की चूची से खेलने लगा।

सुप्रिया अब लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

कमरे में फिर से दोनो की आह उह आह उह गूंजने लगी।

दोनो इसी पोजीशन में तब तक खेलते रहे जब तक सुप्रिया फिर से न झड़ गई।

सुप्रिया, राजेश के सीने से लग कर सुस्ताने लगी।

सुप्रिया ने देखा राजेश अभी तक झड़ा नहीं है उसका पति तो उसके झड़ने के पहले ही किनारा लग जाता है।

वह राजेश की मर्दानगी, देख दंग थी।

सुप्रिया _राजेश, अब मैं थक गई । अब थोडा ब्रेक लेते हैं।

राजेश _ठीक है दी।

सुप्रिया _राजेश तुम चाय पियोगे।

राजेश _दी ऐसे समय में चाय नही, नमकीन खाना चाहिए।

सुप्रिया _अच्छा, बडा अनुभव रखता है।

ठीक है मै कुछ नमकीन तक कर लाती हूं।

सुप्रिया, कीचन में नमकीन तलने लगी, वह बिलकुल नंगी थी।

राजेश भी किचन में आ गया।

सुप्रिया _अरे तू क्यू यहां आ गया।

राजेश _दी रहा नही जा रहा, तुम्हे चोदना है।

सुप्रिया _जानती हू तू अब तक झड़ा नहीं है।

सुप्रिया झुक गई।

ले डाल दे मेरी boor में।

राजेश ने अपना लंद सुप्रिया की योनि में सेट कर धक्का मारा लंद इक ही बार में boor चीरकर अंदर घुस गया।

राजेश कमर पकड़ कर गच गछ चोदने लगा।

सुप्रिया नमकीन तलने लगी।

सुप्रिया की कामुक सिसकारी किचन में गूंजने लगी।

राजेश की नजर सुप्रिया की गांड़ पे गया।

राजेश _दी आपकी गाड़ तो सकरी लग रही है। क्या जीजू आपकी गाड़ नही मारते।

गाड़ पे एक ऊंगली डालते हुए कहा।

सुप्रिया _पोर्न वीडियो में देखकर मुझे भी गाड़ मराने की इच्छा तो होती है। पर तुम्हारे जीजू में इतना दम नहीं की वो गाड़ मार सके।

गाड़ मारने के लिए दमदार लंद होना चाहिए। जो गाड़ को खोल सके।

राजेश _दी क्या मैं आपकी यह इच्छा पूरी कर दू।

सुप्रिया _पर तेरा लंद तो कुछ ज्यादा ही मोटा है। मेरे सकरी गाड़ में घुस पाएगा।

बहुत दर्द होगा।

राजेश _हूं वो तो है। पर अगर थोडा दर्द सह सकती हो तो आपकी ईच्छा पूरी कर दू।

एक ऊंगली को घुसाते हुवे कहा।

सुप्रिया _क्या प्रिया दी गाड़ मराती है।

राजेश _जीजू तो दीदी के गाड़ का दीवाना है।

वो तो बस गाड़ ही मारता है।

सुप्रिया _अच्छा, तुमने भी दीदी का गाड़ मारा है क्या?

राजेश _हां। पहले उसकी boor मारता हू, फिर उसकी गाड़ मारकर झड़ जाता हूं।

सुप्रिया _ओह, तो मेरा भी गाड़ मारकर मेरी इच्छा पूरी कर दो। मै भी तो जानू कैसा लगता है गाड़ मराने में।

राजेश _दी घर में घी तो होगा।

सुप्रिया _ने घी का डब्बा कीचन से निकाल कर दिया।

राजेश _चलो दी तुम्हारे कमरे मे चलते है।

दोनो किचन से निकल कर बेड रुम में आ गए।

राजेश ने सुप्रिया को बेड पर घोड़ी बना दिया।

फिर ऊंगली में घी डालकर उसकी गाड़ में भरने लगा।

राजेश ने एक ऊंगली गाड़ में घुसा कर अदंर बाहर किया, कुछ देर बाद दो ऊंगली, फिर तीन ऊंगली डाल कर गाड़ की मासपेशियों को फैलाने लगा।

सुप्रिया चीख न सके उसके लिय उसने उसके मुंह में उसकी ब्रा ठूस दिया।

काफी देर तक ऊंगली से गाड़ चौड़ी करने के बाद, राजेश ने लंद में ढेर सारा घी चुपड कर उसका टोपा उसकी गाड़ की छेद में डालने की कोशिश करने लगा।

सुप्रिया _राजेश मुझेलगता है अदंर नही जायेगा। तुम्हारा बहुत मोटा है।

राजेश _दी, आप गाड़ को थोडा ढ़ीली करो।

और दर्द सहने को तैयार रहो।

अबकी बार राजेश ने जोर का दबाव डाला।

लंद का टोपा कुछ अंदर सरका।

राजेश ने फिर दबाव डाला।

लंद फिर कुछ सरका।

फिर एक जोर का दबाव डाला। सुप्रिया जोर से चीखना चाही।

उसे तेज दर्द huwa लंद का टोपा गाड़ फाड़कर घुस चुका था।

राजेश ने सुप्रिया की चूची मसला, पीठ चूमा।

उसकी पीठ सहलाया।

फिर लद और गाड़ पर तेल डाला।

और दबाव बनाया।

लंद फिर कुछ आगे सरका, सुप्रिया के आंसू निकल आए।

राजेश ने दबाव डालना जारी रखा लंद कुछ और आगे सरक गया।

अब राजेश लंद को थोडा खींचा फिर अंदर धकेला इस प्रकार लंद धीरे धीरे आगे सरकता गया।

सुप्रिया दर्द से छटपटा रही थी । देखते ही देखते

राजेश का लंद आधा , घुस गया।

अब राजेश लंद को गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद गाड़ को फैलाते चला गया। और एक स्थिति ऐसा आया आधा से ज्यादा लंद गाड़ में घुस चुका था।

राजेश ने अब लंद कोगाड़ में थोडा तेज अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

सुप्रिया अभी भी दर्द से छटपटा रही थी ।

सुप्रिया की गाड़ फैलता गया। राजेश उसकी गाड़ में तेल डालता गया।

अब सुप्रिया का दर्द कम होने लगा।

गाड़ फैलता गया।

राजेश का लंद अब गाड़ में काफी गहराई तक घुस गया था।

सुप्रिया को गाड़ मराने में दर्द के साथ अब मजा भी आ रहा था

धीरे धीरे राजेश अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

राजेश ने अपना लंद गाड़ से निकाल कर उसकी boor में डाल दिया और boor मारने लगा ।

सुप्रिया सिसकने लगीं। जोश में आने लगी तभी राजेश लंद को boor से निकाल कर फिर गाड़ में डाल दिया, और गाड़ मारने लगा।

कुछ देर गाड़ मारने के बाद फिर लंद को boor में डाल कर चोदने लगा।

इस प्रकार प्रिया को भी अब मजा आने लगा।

उसे यकीन नही हो रहा था की इतना मोटा लण्ङ को उसकी गाड़ ने निगल लिया है।

अब वह भी मस्ती में आ गई।

राजेश कभी गाड़ तो कभी boor की खुदाई करता रहा। इसी बीच सुप्रिया फिर से झड़ गई।

दोनो हाल में आ गए।

सुप्रिया कीचन में गई और राजेश के लिए, नमकीन खाने को ले आई। दोनो नमकीन खाने लगे। जिससे दोनो की उत्तेजना फिर बड़ गई।

राजेश ने सुप्रिया को सोफे पर करवट लेकर लिटा दिया खुद उसके पीछे लेट गया।

फिर पीछे से उसकी योनि में लंद डालकर चोदने लगा। सुप्रिया फिर सिसकने लगी।

कुछ देर boor मारने के बाद, राजेश ने लंद को उसकी गाड़ में डाल दिया। और गाड़ मारने लगा।

इस तरह फिर गाड़ औरboor की ठुकाई होने लगी।

कुछ देर बाद

राजेश सोफे पर बैठ गया, सुप्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया दोनो एक दूसरे की ओंठो को चूसते लगे।

उसके बाद सुप्रिया राजेश का लंद अपनी boor में डालकर उछलने लगी। कुछ देर बाद वहलंद को गाड़ में डाल दी। राजेश नीचे से कमर हिला हिला कर गाड़ मारने लगा।

इस तरह दोनो संभोग के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

अंत में राजेश ने अपना सारा वीर्य सुप्रिया की गाड़ में भर दिया।

उसकी गाड़ से वीर्य टपक कर, फर्स पर गिरने लगा।

दोनो बेड रुम में आ गए और एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

सुप्रिया _राजेश उठो, चाची किसी भी वक्त आ सकती हैं ।

सुप्रिया, बेड से उतरी तो वह ठीक से चल नहीं पर रही थी, उसकी boor और गाड़ दोनो फट चुकी थी।

राजेश _क्या huws दी।

सुप्रिया _बडा दर्द कर रहा है।

राजेश _पहली बार गाड़ मरवाई हो न इस लिए।

सुप्रिया बाथरूम गई और वहां से फिर से नहाकर आई।

फिर अपना कपड़ा पहनने लगी।

राजेश उसी को देख रहा था।

सुप्रिया _राजेश क्या देख रहे हो, अब उठो भी मामी और बच्चे कभी भी आ सकते है।

राजेश बेड से उठा और सुप्रिया को बाहों में भर लिया।

सुप्रिया _इतना करने के बाद तुम्हारा मन नही भरा है क्या?

राजेश _न और करने का मन कर रहा है।

सुप्रिया _अब मै देने की स्थिति में नहीं हूं, आगे पीछे दोनो तुने फाड़ दिया है।

चलो अपने कपड़े पहन लो।

राजेश _आप ही पहना दो, उतारी तो आपने ही थी।

सुप्रिया _अच्छा तो उतारूंगी भी मैं और पहनाऊंगी भी मैं। हंसते हुवे बोली।

राजेश _हां,

सुप्रिया _और क्या करना पड़ेगा।

राजेश _मेरे लंद को चूसकर साफ भी करना पड़ेगा।

सुप्रिया _सब नही किया तो,,

राजेश _ फिर मामी के आते तक यही रहूंगा, नंगा और मामी जब आयेगी तो बोल दूंगा।

दीदी ने मुझे लूट लिया।

सुप्रिया _क्या? तू बडा बदमाश निकला।

सुप्रिया ने राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसी उसे चांतकर साफ की फिर, उसे कपड़े पहना दी।

सुप्रिया _अब तुम जाओ, मै भी कीचन में जाकर खाना बनाती हूं।

राजेश _दी एक किस तो दे दो।

राजेश ने सुप्रिया को बाहों में भर कर उसकी ओंठ को चूसने लगा।

सुप्रिया _अब जा यहां से बदमाश, राजेश वहा से निकल कर अपने कमरे मे चला गया और आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सुमित्रा बच्चो के साथ घर पहुंची।

जब उसने देखा की सुप्रिया लंगड़ा कर चल रही है उसने पूछा

सुमित्रा _सुप्रिया तू लंगड़ा के क्यू चल रही है? क्या huwa

सुप्रिया _चाची बाथरूम में नहाते समय पैर फिसल गया।

सुमित्रा _कही ज्यादा चोंट तो नही आई।

सुप्रिया _नही चाची, पैरो में थोडा मोच है, ठीक होजाऊंगी डरने की कोई बात नही।

सुमित्र को सुप्रिया के चलने फिरने के ढंग से कुछ सक huwa

सुमित्रा _राजेश कहा हैं कही दिख नही रहा।

सुप्रिया _वो अपने कमरे में आराम कर रहा है।

सुमित्रा राजेश के कमरे मे गई।

राजेश _अरे मामी आप कब आई?

सुमित्रा _थोड़ी देर पहले। मुझे तुमसे कुछ पूछना था।

राजेश _हा मामी पूछो न।

सुमित्रा _ये सुप्रिया क्यू लंगड़ा कर चल रही है? क्या किया उसके साथ?

राजेश _मुझे क्या पता मैने तो कुछ नहीं किया?

क्या huwa दीदी को?

सुमित्रा _ज्यादा भोला मत बन, जब तुमने पहली बार मेरी गाड़ मारी थी तो मैं भी ऐसे ही लंगड़ा कर चलती थी। कही तुमने उसके साथ जबरदस्ती तो नही किया?

राजेश _नही मामी, मै भला कैसे जबरदस्ती कर सकता हूं वो भी दीदी के साथ, वो तो दीदी की ही ईच्छा से huwa जो भी huwa, उसे प्रिया दीदी और मेरे बीच

संबंधों का राज , पता चल गया था।

सुमित्रा _क्या?

राजेश _हा मामी।

सुमित्रा _ओह, देखो इन संबंधों के बारे में सावित्री दीदी को पता नही चलना चाहिए।

राजेश _जी।

सुमित्रा _और सुन, आज मेरी भी गाड़ मराने की ईच्छा हो रही है। रात में मेरे कमरे में आ जाना। मै तुम्हारे कमरे में नही आऊंगी। कही सुप्रिया न आ जाए।

राजेश, सुमित्रा को खीच कर अपनी गोद में बिठा लिया।

राजेश _कहो तो अभी मार दू। वैसे इस साड़ी में पटाखा लग रही हो।

सुमित्रा _चुप बेसरम। छोड़ कोई आ जाएगा।

वह खुद को राजेशसे छुड़ाकर भागी।

इधर खेत में पारो,

पारो _अरे काकी आज राजेश बाबू नही आया।

सावित्री _क्यों रि राजेश के आने न आने से तुम्हे क्या मतलब,तुम अपनी काम पर ध्यान दो।

पारो _अरे काकी, मै तो यू ही पूछ रही थी। वैसे आपने कल उसे कुछ सिखाया की नही।

सभी महिलाए हसने लगी।

सावित्री _अरे कलमुही, मै उसकी मामी हू, मै क्यों उसे सिखाने लगीं।

पारो _अरे काकी राजेश बाबू को तुम नहीं सिखाई टू, उसे आज यहां ले आती हम लोग सीखा देते। बेचारे का बडा काम आता। सभी महिलाए हसने लगीं।

सावित्री _चुप कर छीनार कही की। लगता है तेरी boor में बड़ी खुजली हो रही है जवान लंद लेने के लिए।

पारो _अरे चाची मैं टी राजेश बाबू के भलाई के लिए ही कह रही थी। वैसे मुझे क्या, अगर भोंदू ही बना रहना है तो कोई कर भी क्या सकता है?

सावित्री _चुप कर मेरा भांजा भोंदू नही है।

पारो _अरे काकी s

जिसे मूठ मारने का मतलब बताओ क्या होता है वो भोंदू नही तो क्या होशियार है।

सावित्री अपने मन में बोली,,

रण्डी, लगता है तेरी boor राजेश से फडवाना ही पड़ेगा, तभी तू मानेगी। नही तो राजेश की बेज्जती करती ही रहेगी।

सावित्री _ठीक है कल के आऊंगी राजेश को खेत में सीखा देना उसको।

सभी महिलाए आश्चर्य करने लगी।

पारो _, क्या सच कह रही हो काकी। हमे राजेश बाबू को सिखाने की अवसर दोगी।

सावित्री _हा हा कर लेना अपनी हडरते पूरी।

सभी महिलाए खुश हो गई।

सावित्री _सुनो तुम लोग जिसको भी राजेश को कुछ सीखाना है, वो कल अच्छे कपड़े पहनकर और शरीर की अच्छे से साफ सफाई करके आना।

सभी महिलाओ को यकिन ही नहीं हो रहा था की ये बाते सावित्री बाई बोल रही है।

शाम के 5 बजते ही सभी महिलाएं घर के लिए निकल पढ़ी ।

सावित्री भी घर पहुंची।

उसने सुमित्रा से राजेश के बारे में पूछा, सुमित्रा ने बताया की राजेश टहलने के लिए गया है।

शाम को करीब 7बजे राजेश घर में पहुंचा, वह हाल में बैठकर टीवी देखने लगा ।

तभी वहां पर सावित्री आई।

सावित्री _अरे राजेश बेटा कहा गया था

कही नही मामी बस थोडा टहलने गया था।

राजेश _अच्छा मामी खेत का काम कैसा चल रहा है, मजदुर औरते ठीक से काम कर रही है की नही।

सावित्री _सब एक नंबर की छिनार औरते है, पर मुझे भी कान लेना आता है। सब तुम्हारे बारे में पूछ रही थी आपका भोंदू भांजा आज क्यू नही आया।

राजेश _अच्छा, फिर क्या बोली?

सावित्री _बोल दी हूं उन लोगो को कल आयेगा। उसे सिखाने के लिए तुम लोग मरी जा रही हो, कल ले आऊंगा उसे सिखा देना जो सीखा देना उसे जो सिखाना है उसे।

बेटा कल तू मेरे साथ खेत चलना, उन औरतों को अच्छा सबक सिखाना, ताकि किसी का मजाक उड़ाना भूल जाए। और बता देना तू भोंदू नही कुछ और है।

राजेश _भोंदू नही तो क्या हूं मामी जी मै, जरा मै भी तो जानू।

सावित्री _अब क्या है तू, ये मुझसे बेहतर और कौन जानेगा, सावित्री शर्माते हुवे बोली। तुम उन औरतों को अच्छी सबक सिखाना। फाड़ के रख देना उन छीनारो को।

राजेश _जो आज्ञा मामी जी। जो आप कहे। जाओ बेटा फ्रेश हो जाओ, फिर मैं खाना लगाती हूं।

राजेश _ठीक है मामी जी।

भोजन करने के बाद राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

घर की सभी औरते भोजन करके घर का काम निपटा कर सोने चली गईं।

रात में राजेश, सुमित्रा के कमरे मे गया।

सुमित्रा उसी का इन्तजार कर रही थी।

राजेश ने जाते ही उसकी चूंची को जमकर निचोड़ा फिर गाड़ मारने लगा

इधर सावित्री भी राजेश का अपने कमरे में आने की इन्तजार कर रही थी।

जब जेकाफी समय हो गया, राजेश उसके कमरे में नही आया, तो वह सोंचि कही, राजेश की नींद तो नही लग गई। वह सोने की कोशिश करने लगी पर उसे नींद नहीं आई, उसकी boor राजेश से चुदने के लिए तड़प रही थी।

वह मजबूर होकर राजेश के कमरे में गई, पर राजेश कमरे में नही था।

सावित्री _ये मुआ कहा चला गया।

वह घर के पीछे बाथरूम में जाकर देखी कही बाथरूम तो नही गया है?

पर राजेश उसे नही मिला।

ये मुआ आधी रात को कहा चला गया। वह इधर उधर ढूंढने लगी।

जब वह सुमित्रा के कमरे के पास से गुजर रही थी तो उसे कुछ आवाजे, महसूस हुई।

वह दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश करने लगी।

उसे औरत की सिसकने की आवाज सुनाई पड़ी।

सुमित्रा _हे भगवान, कही ये कमबख्त सुमित्रा की chudai तो नही कर रहा है।

वह अपने कमरे में जानें को हुई पर उसकी chut मेंआग लगी थी ।

वह दरवाजे को पीटी।

सुमित्रा और राजेश दोनो घबरा गए।

सुमित्रा _इतनी रात को कौन हो सकता है?

राजेश तुम पलंग के नीचे छिप जाओ मै देखती हूं।

राजेश _नही मामी मै नही छिपूंगा।

सुमित्रा _क्या कह रहा है तू?

राजेश _हा मै ठीक कह रहा हूं जो होगा देखा जायेगा। तुम दरवाज़ा खोलो।

सुमित्रा दरवाज़ा खोली।

सुमित्रा _अरे दीदी आप इतनी रात को कुछ काम था क्या?

सुमित्रा _अरे छोटी मै राजेश के कमरे में गई थी उसे किसी चीज की जरूरत तो नही पता करने, पर वो अपने कमरे में नही है।

मैने उसे इधर उधर बहुत ढूंढा वो नही मिला, पता नही वह इतनी रात को कहा चला गया। मुझे बड़ी चिंता हो रही उसकी।

कही वह तुम्हारे कमरे में तो नही आया।

सुमित्रा को समझ नहीं आया की वह क्या बोले?

पर वह झूठ भी नहीं बोलना चाहती थी।

सुमित्रा _वो क्या है न दीदी, राजेश को नींद नहीं आ रही थी तो मुझसे बात चीत करने मेरे कमरे में आ गया ।

सावित्री _ओह मै तो डर गई थी, की वह कहा चला गया इतनी रात को।

सुमित्रा _अच्छा एक काम करो उसे मेरे कमरे में भेज दो, मै उसे लोरी सुनाऊंगी, फिर उसे अच्छे से नींद आ जायेगी ।

सुमित्रा _ठीक है दीदी ।

सावित्री अपने कमरे मे चली गईं।

सुमित्रा _राजेश दीदी ने तुम्हे अपने कमरे मे बुलाया है?

राजेश _क्या?

सुमित्रा _मेरी प्यास अभी बुझी नही है मुझे और chudna है अभी तुमसे।

राजेश _, अच्छा तो मामी को बोल देना था न की राजेश को मैं लोरी सुना कर सुला दूंगी, आप चिंता न करे।

सुमित्रा _मैने तो तुम्हे उसके कमरे में भेजने के लिए हा कह दिया है।

अभी तो मैं ठीक से झड़ी नहीं हु, तुम चले जावोगे तो मुझे नींद नहीं आएगी।

राजेश _मामी, तुम चिंता न करो, मै कोई उपाय करूंगा,,,
 
सावित्री अपने कमरे में जाकर राजेश की आने का इंतजार करने लगी।

सुमित्रा _राजेश, अब क्या होगा? मुझे लगता है कि सावित्री दीदी को सब पता चल गया।

क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में वैसे भी आज मुझे देर तक करवाने का मूड था सब गुड गोबर हो गया।

राजेश _मामी आप चिन्ता मत करो। तुम तैयार रहना। जैसे ही मैं आवाज लगाऊंगा कमरे में आ जाना।

सुमित्रा _क्यू दीदी के कमरे में जाकर मै क्या करूंगी?

राजेश _थ्रीसम करेंगे और क्या?

वैसे भी मैं 2/3दिन ही यहां रहूंगा फिर अपना घर चला जाऊंगा। मेरी याद आयेगी फिर सारी रात जागती रहोगी।

आज हम थ्रीसम करेंगे। फिर जब भी मेरी याद आयेगी तुम और बड़ी मामी एक दूसरे की प्यास बुझा लेना।

सुमित्रा _इसका मतलब तुम सावित्री दीदी का भी भोग लगा लिए।

राजेश _मुस्कुराने लगा।

सुमित्रा _हे भगवान, पर ये सब huwa कैसे? सावित्री दीदी तो धार्मिक संस्कारी और पतिव्रता स्त्री है वह किसी गैर मर्द के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती फिर तुमने उसे राजी कैसे किया।

राजेश _अरे मामी छोड़ो न जानकर क्या करोगी?

अच्छा मै जा रहा हूं बड़े मामी के कमरे में तुम तैयार रहना।

राजेश सुमित्रा के कमरे से निकल कर सावित्री के कमरे में चला गया।

सावित्री _कब से चल रहा है तेरे और सुमित्रा के बीच।

राजेश _क्या ? मै समझा नही।

सावित्री _ज्यादा भोले मत बनो। मैंने सुमित्रा की सिसकारी सुनी।

बताओ सच सच।

राजेश _जब इलाज के लिए, शहर गई थी तब।

सावित्री _इसका मतलब, उसके बच्चे का असली बाप तू है।

राजेश _छोटे मामा में ही कमी थी, उसके बीज मे वो क्षमता नही था कि वो छोटे मामी को मां बना सके।

तो मैंने उसकी मदद की।

क्या मैंने ठीक नहीं किया?

सावित्री _क्या ये बात किसी और को मालूम है?

राजेश _हा, प्रिया दी और मां को पता है।

सावित्री _ओह, ये बात किसी बाहर वाले को पता नही चलनी चाहिए। नही तो बड़ी बदनामी होगी।

राजेश _जी।

अच्छा अब मैं चलता हूं।

सावित्री _क्यों, मन भर गया क्या मुझसे?

राजेश _जी यह जानने के बाद शायद आपका मूड खराब हो गया हो।

सावित्री _पता नही, तुमने क्या जादू कर दिया है, बेड पर सोते ही, तेरा घोड़ा याद आने लगता है। ऊपर से सुमित्रा की सिसकारी सुनकर आग और भड़क गई है।

आज मुझे जमकर चोद।

सावित्री ने राजेश की लोवर खिसका कर उसका लंद बाहर निकाल लिया और उसका लंद पकड़ कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश, प्यार से उसकी बालों को सहलाने लगा। सावित्री

लंद चूसते चूसते कही खो गई।

राजेश _मामी कहा खो गई।

सावित्री होश में आई।

सावित्री _मै कुछ सोच रही थी।

राजेश _क्या सोचने लगीं।

सावित्री _सुप्रिया बता रही थी कि उसकी सास उसे ताने मारती रहती है।

राजेश _क्यूं?

सावित्री _उसका कोई लडका नही है न इस कारण।

राजेश _तो लडके के लिए दीदी और जीजू और प्रयास क्यों नहीं करती।

सावित्री _उन लोगो ने दो बार और प्रयास किया था, पर जांच में पता चला की वे भी लड़किया है तो उसकी सास ने तीन माह में ही बच्चे गिरा दी।

राजेश _ओह।

सावित्री _ज्यादा गर्भपात कराने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए डॉक्टर ने और गर्भ पात न कराने की सलाह दी है। इसलिए उन दोनो ने अब उम्मीद छोड़ दी।

राजेश मै सोच रही हूं कि क्यू न तुम सुप्रिया को एक बच्चा दो?

राजेश _मामी ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _मेरी बेटी को कोई ताना मारे, ये मुझे बर्दास्त नही होता जबकि मेरी बेटी की कोई गलती नही है। लडका या लड़की होना ये तो पुरष पर निर्भर करता है न। औरतों पर नही।

तुम ज्यादा दिन तो यहां रुकोगे नही। इसलिए मैं सोच रही हूं की क्यू न आज से ही शुरू करे।

राजेश _पर क्या दीदी इसके लिए तैयार होगी।

सावित्री _मै उसे मनाऊंगी।

तुम तैयार हो न।

राजेश _अगर आप दोनो, तैयार हो तो पर मेरी एक शर्त है।

सावित्री _कैसी शर्त?

राजेश _आपके सामने ही, उसके गर्भ में अपना बीज डालूंगा।

सावित्री _ये कैसी शर्त है, मेरे सामने ही।

राजेश _हा और सुमित्रा मामी भी साथ होगी।

सावित्री _ये कैसा हो सकता है?

राजेश _हो सकता है, अगर आप चाहे तो।

सावित्री _पर सुमित्रा की सामने मौजुद रहने की क्या जरूरत है, मै रह जाऊंगी।

राजेश _मेरी इच्छा है, क्या मेरी इच्छा के लिए ये आप नही कर सकती।

वैसे भी, छोटी मामी की इच्छा अभी पूरी नही हुई थी आपके कारण, मुझे उसे बिना संतुष्ट किए ही, आना पड़ा।

वो साथ में रहेगी तो, मै तीनो को ठंडा कर पाऊंगा। और सभी चैन से सो पाएंगे।

सावित्री _पर अपनी बेटी के सामने मै नंगी नही हो पाऊंगी।

सुप्रिया क्या सोचेगी मेरे बारे में, उसकी मां जो सती सावित्री बनी फिरती थी वो रण्डी निकली।

न बाबा मै उसके सामने नही कर पाऊंगी।

मैं शर्म से मर ही जाऊंगी।

राजेश _अरे मामी, अपनी ही बेटी के सामने चुदने में आपको डबल मजा आयेगा।

सावित्री _न बाबा न मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _ठीक है फिर रहने दो, मुझे नही बनना है सुप्रिया दीदी के बच्चे का बाप।

सावित्री _तू समझ क्यू नही रहा है? मै सुप्रिया के सामने नही chud पाऊंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है, तुम मत chudna पर साथ में रहना।

सावित्री _ठीक है। तुम सुमित्रा को बुला लो। मै सुप्रिया को लेकर आती हूं।

सावित्री अपने कमरे से निकल कर सुप्रिया के कमरे के पास जाकर दरवाज़ा खटखटाया।

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोली।

सुप्रिया _मां, आप इस समय, कुछ काम था क्या?

सावित्री _हा बेटी, बच्चे सो गए क्या?

सुप्रिया _हा, दोनो सो रहे हैं।

सावित्री _इधर आओ, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

सावित्री और सुप्रिया दोनो हाल में आ गए।

सुप्रिया _क्या बात है मां?

सावित्री _बेटी, क्या तुम्हारी सास तुम्हे अब भी ताना देती है, लडका पैदा न कर पाने को लेकर।

सुप्रिया _मां, ये सब बातें इतनी रात को क्यों पूछ रही हो।

सावित्री _हा बेटी, तुम्हे अजीब तो ज़रूर लग रहा होगा, पर मै तुम्हारी खुशियां चाहती हूं, मै नही चाहती की मेरी बेकसूर बेटी को कोई ताना मारे।

सुप्रिया _मां, आप कहना क्या चाह रही हो?

सावित्री _बेटी, लड़की या लडका पैदा करना, पुरुषो के ऊपर होता है, औरतों के ऊपर नही, दामाद जी और तुमने चार बार कोशिश की, मुझे लगता है कि दामाद जी में लडका पैदा करने की क्षमता नही है, बार बार गर्भपात कराने से तुम्हारे जान पर भी बन सकती हैं।

सुप्रिया _तो क्या सकते हैं मां? हमारे बस में तो कुछ है नही।

सावित्री _बेटी, दामाद जी के बस में भले ही न हो पर तुम्हारे बस में है, अगर तुम चाहो।

सुप्रिया _मै कुछ समझा नही मां?

सावित्री _बेटी मै चाहती हु,तुम किसी और के साथ एक बार कोशिश करके देख लो, शायद लडका हो जाय।

सुप्रिया _मां, ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _हा बेटी, काफी सोचने के बाद मैंने ये तुम्हे सलाह देने की सोंचा है।

सुप्रिया _पर मां मैं किसी और से बच्चा पैदा करू,ये मुझसे नही हो पाएगा।

सावित्री _अरे बेटी कब तक अपनी सास की ताना सुनती रहेगी, तुम्हारी सास गर्भपात करा करा कर तुम्हारी जान ही ले लेगी। तुम मेरी सलाह मान लो।

सुप्रिया _मां वैसे इसकी क्या गारेंटी है जिसके साथ मै सोऊंगी, उससे लडका ही होगा।

सावित्री _क्यों की वह लडका पैदा कर चुका है?

सुप्रिया _कौन है वो, जिसके साथ मुझे सोने को बोल रही हो, मै भी तो जानू।

सावित्री _तुम्हारा भाई।

सुप्रिया _मेरा भाई, मै समझा नही। तुम किसकी बात कर रही हो।

सावित्री _अरे राजेश, और कौन है, तेरा भाई।

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _हां मै चाहती हूं की तुम राजेश से बच्चा पैदा कर लो।

सुप्रिया _मां आप तो कह रही थी, वो एक लडके का बाप है?

राजेश का तो अभी शादी नहीं हुई है।

सावित्री _बाप बनने के लिए क्या शादी होना जरूरी है?

सुप्रिया _मतलब , राजेश ने किसीदूसरी की औरत को पेट से किया? मै भी तो जानू, वो किसके बच्चे का बाप है?

सावित्री _तुम्हारी, चाची के,,

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _तुम्हारे चाचा के बीज में बच्चा पैदा करने की क्षमता नही था, तो सुमित्रा ने राजेश का मदद लिया। मै चाहती हूं, तुम भी राजेश से लडका पैदा कर लो।

सुप्रिया मुस्कुराने लगी।

वह अपने आप से कहने लगी,,

ये राजेश तो छुपा रुस्तम निकला, मतलब ये प्रिया दीदी के साथ साथ चाची का भी बजा रहा है।

हे भगवान मै तो पहले से ही सोच रही थी की क्यू न मै राजेश से लडका पैदा करने की कोशिश कर लूं।

पर डर रही थी किसी को पता न चल जाए। अब तो मां खुद ही कह रही है।

मै राजेश की बच्चे की मां बनूंगी, इससे अच्छी बात तो और हो ही नहीं सकती।

सावित्री _बेटी क्या सोचने लगी।

सुप्रिया _पर मां क्या राजेश इसके लिए तैयार होगा।

सावित्री _, मैने राजेश से बात कर ली है। वो तैयार है पर उसकी एक शर्त है।

सुप्रिया _कैसी शर्त मां।

सावित्री _वो चाहता है की, जब तुम दोनो एक दूसरे के क़रीब आओ तो उस समय मैं और तेरी चाची भी मौजुद रहे।

सुप्रिया _क्या?

मतलब शैतान, चाची और मां के सामने ही मेरी लेना चाहता है, वह अपने मन में बोली।

सावित्री _बेटी फिर क्या सोचने लगी?

सुप्रिया _मां, मुझे बड़ी शर्म आयेगी, मै आपके और चाची के सामने ही कैसे राजेश के साथ सो पाऊंगी?

सावित्री _शर्म तो मुझे भी बहुत आयेगी बेटी, पर कमबख्त की यही ईच्छा है।

अब मजबूरी है।

सुप्रिया सुबह ही राजेश से chudi थी, जिसका दर्द अभी गया नही था।

अब जब उसे उसे पता चला कि वह अपनी मां और चाची के सामने ही राजेश से चुदेगी यह सोचकर उसे शर्म तो आ रही थी। पर उसकी boor में फिर से पानी रिसना शुरू हो गया।

उधर राजेश ने सुमित्रा को सारी बाते बता दी थी।

सुमित्रा और राजेश सावित्री के कमरे में इन्तजार कर रही थी।

सुप्रिया और सावित्री दोनो कमरे में पहुंची।

राजेश और सुमित्रा दोनो पहले से मौजूद थे।

राजेश _मामी क्या दीदी तैयार है मेरे बच्चे की मां बनने के लिए।

सावित्री _खुद ही पूछ लो।

सुप्रिया _मां तुम भी न, शर्म से पानी पानी होते हुए बोली।

राजेश _दीदी तो शर्माने लगी।

सावित्री _सुप्रिया की हां है।

राजेश _तो शुरू करे।

सुमित्रा _हां, पहले तुम अपने कपड़े उतारो।

राजेश अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।

उसका तना huwa लंद झटका मारते हुए सबके सामने आ गया।

सुमित्रा _तेरा घोड़ा तो पहले से और लंबा और मोटा लग रहा है re, कही अपनी बहन को मां बनाने का सोच कर तो और ज्यादा फूल कर, ठुमक तो नही रहा।

सुप्रिया शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _हा मुझे भी लगता है। मेरा नुनु दीदी को मां बनाने के लिए ज्यादा मोटा और लंबा हो गया है।

सुमित्रा _चल सुप्रिया तू भी उतार दे अपने कपड़े और दिखा दे अपनी गुफा अपनी भाई को, ताकि वहा घुस कर तेरी कोख में अपना बीज डालकर अपना पानी निकाल सके।

सुप्रिया _चाची तुम भी न,

सावित्री और सुमित्रा हसने लगी।

सुप्रिया _मां मै अपने कपड़े नही उतारूंगी। आप लोगो के सामने मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

सुमित्रा _

अरे लडका पैदा करना है तो शर्म छोड़नी पड़ेगी।

सावित्री _अच्छा ठीक है, तू अपना नाइटी पहनी रह, अपनी पेंटी उतार दे।

सुप्रिया अपनी पेंटी, खिसका कर उतार दी।

सुमित्रा _चल अब घोड़ी बन जा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया _चाची आप भी न।

सुमित्रा _अरे झुकेगी तभी तो तुम्हारे गुफा में राजेश घुसेगा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया बेड पकड़ कर घोड़ी बन गई।

सुमित्रा ने उसकी नाइटी ऊपर उठा दिया।

सुमित्रा _दीदी, अब शुरू हो जाओ, राजेश का घोड़ा को तैयार करो, गुफा में घुसने के लिए। मै गुफा को तैयार करती हूं।

सावित्री राजेश के पैरो के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर चूसने लगी।

इधर सुमित्रा, सुप्रिया की chut चाटने लगी।

जिससे सुप्रिया सिसकने लगीं।

राजेश नीचे झुक कर सावित्री की ब्लाउज के ऊपर से ही चूची मसलने लगा।

जिससे सावित्री गर्म होने लगी।

राजेश _मामी खोल दो न अपनी ब्लाउज। तुम्हारी चूंची से खेलना है मुझे।

सावित्री गर्म हो गई थी वह अपनी ब्लाउज निकाल दी।

राजेश नीचे झुक कर उसकी चूची मसलने लगा।

राजेश _छोटे मामी तुम भी अपने सारे कपड़े उतार दो, मुझे तुम्हारे दूध पीना है।

सुमित्रा, एक एक कर अपनी सारे कपड़े उतार दी और पूरी नंगी हो गई।

फिर से वह सुप्रिया की boor चाटने लगी।

सुमित्रा _सावित्री दीदी अब राजेश का घोड़ा सुप्रिया की गुफा में डाल दो।

सावित्री ने राजेश का लंद पकड़ कर उसे सुप्रिया की boor में सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

लंद boor चीरकर आधा से ज्यादा अदंर समा गया।

सुप्रिया _उई मां,

सावित्री _क्या huwa बेटी?

सुप्रिया _मां देखो न बदमाश ने एक ही बार में पुरा घुसा दिया।

सावित्री हसने लगी।

अब राजेश सुमित्रा को अपने पास खीच लिया और उसकी चूची को मुंह में भर कर चूसते हुए।

सुप्रिया को चोदना शुरु कर दिया।

उसका लंद सुप्रिया की boor में गपा गप अदंर बाहर होने लगा।

यह दृश्य देखकर सावित्री उत्तेजित हो गई और अपने कपडे उतार कर नंगी हो कर अपनी हाथ boor खुजाने लगी।
 
सभी मित्रों का शुक्रिया।
 
उस रात राजेश ने सुप्रिया, सुमित्रा और सावित्री को जमकर चोदा। तीनो औरते नंगी होकर राजेश से रात भर chudi राजेश ने अन्त में अपना बीज सुप्रिया की योनि में छोड़ दिया।

अगले दिन खेत जाने से पहले राजेश और सुप्रिया को बुलाकर कहा की, राजेश 3_4 दिन ही और यहां रुकेगा इसलिए जितनी बार हो सके तुम लोग संबंध बनाओ । ताकि सुप्रिया पेट से हो जाए।

अब राजेश और सुप्रिया दिन में भी chudai करने लगें।

रात में तीनो औरते राजेश से जी भरकर चुदाते और अंत में राजेश अपना बीज सुप्रिया के boor में छोड़ देता ताकि वह पेट से हो जाए।

इस तरह 3रोज और गुजर गए।

अगले दिन राजेश के दोनो मामा घर आ गए।

सतपाल सिंह ने बताया की भईया को फिर से समाज का अध्यक्ष चुन लिया गया है, सभी लोग खुश हुवे।

उस रात प्रिया सब के सो जानें के बाद चुपके से राजेश के कमरे में गई और जमकर chudi

अगले दिन राजेश अपना बैग लेकर अपने घर के लिए निकल पड़े, सभी ने उसे कुछ दिन और रुकने के लिए कहा, पर राजेश ने काम का बहाना बनाकर अपने घर के लिए निकल पड़ा।

सतपाल सिंह उसे कार से बस स्टैंड छोड़ने के लिए गया। राजेश बस से अपने घर राजधानी के लिए निकल पड़ा।

जब वह घर पहुंचा तो शाम हो चुका था।

सुनीता कीचन में काम कर रही थी।

राजेश अपना बैग सोफे पर रखी और चुपके से किचन में गया और पीछे से सुनिता को अपनी बाहों मे भर लिया।

सुनीता चौंक गई।

सुनीता _अरे तू आ गया।

राजेश _हा मां।

सुनीता _अरे छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने राजेश को खुद से अलग किया।

राजेश _क्यू मां क्या हुआ?

सुनीता _ऐसे ही।

राजेश ने फिर से सुनिता को बाहों में भर लिया, नाराज हो क्या मुझसे?

सुनीता ने फिर से राजेश को अपने से अलग किया।

सुनीता _अरे कहा न, मुझसे दूर रहो। दूर रहकर बात करो।

राजेश _, क्या बात है मां? मुझसे कोई गलती हुई है क्या?

सुनीता _नही, तुमसे कोई गलती नही हुई है।

राजेश _फिर मुझे अपने से क्यू दूर कर रही हो?

सुनीता _क्यों की अभी मैं गंदी हूं?

राजेश _मै समझा नही।

सुनीता _औरतों को जो हर माह प्रॉब्लम आती है न, वो वाली प्रॉबलम है मुझे, सुनिता शर्माते हुए बोली।

राजेश _ओह, आपका मासिक धर्म चल रहा है।

सुनीता _चुप बेशरम मां के सामने गंदी बातें करता है।

राजेश फिर से सुनिता से लिपट गया,

मां इसमें गंदी वाली क्या बात है, ये तो नार्मल है।

सुनीता _न न, दूर रहो मुझसे, ऐसे समय में एक मर्द को औरत से दूर रहना चाहिए।

तुम्हारे मामा लोग, समाजिक अधिवेसन से लौट आए।

राजेश _हा मां, मामा जी फिर अध्यक्ष चुने गए हैं।

सुनीता _ये तो बड़ी खुशी की बात है।

राजेश _मामा मामी तो बड़े जिद कर रहे थे और रुकने के लिए।

बड़े मुस्कील से आने दिए।

सुनीता _अरे, तो और रुक जाना था कुछ दिन। तुम्हारी छोटे मामी तुम्हारा ख्याल नही रख रही थी क्या?

राजेश _नही मां, मामी तो बड़े अच्छे से ख्याल रख रही थी।

सुनीता _अच्छा फिर क्यों चले आए।

राजेश सुनिता से फिर लिपट गया।

आपकी याद आ रही थी।

सुनीता _चल झूठा कही का।

और छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने, खुद को राजेश से छुड़ाते हुए कहा।

जा अब अपने कमरे में जाकर फ्रेश होकर आराम कर, तू सफर से थक गया होगा।

मै काफी बनाकर लाती हूं।

राजेश अपने कमरे में गया फ्रेश होकर नहाया फिर अपने कमरे मे आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सुनिता काफी लेकर उसके कमरे में आई।

सुनीता _, लो बेटा काफ़ी पिलो।

राजेश _मां बैठो न।

सुनीता _न, बताया था न, अभी मैं अशुद्ध हूं।

राजेश,_मां तुम भी न, एक दम पुराने खयालात की हो।

सुनीता, वहा से चली गई।

राजेश कॉफी पीने के बाद। अपने कपड़े पहन लिए और फिर किचन में पहुंचा।

राजेश _मां मै दोस्तों से मिलने जा रहा हूं।

सुनीता _कुछ ही देर तो huwa है आए हुवे, आराम करना छोड़कर दोस्तों से मिलने जा रहे हो।

भोजन के समय तक घर आ जाना।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश बाइक लेकर भगत से मिलने उसके पार्टी कार्यालय पहुंचा। वहा भगत के साथ उसके पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजुद थे।

भगत _अरे राजेश भाई, तुम कब आए, अपने मामा के यहां से।

राजेश_आज ही आया यार घर में बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे मिल हूं।

भगत _भाई अच्छा किया, आपको देख कर बड़ी खुशी हुई।

भगत न अपने कार्यकर्ताओं से कुछ बात चीत किया फिर कल मिलने को कहा।

भगत,_, सॉरी भाई सामने चुनाव आने वाली है बस उसी की तैयारी चल रही है।

राजेश _कोई बात नही यार। मुझे तो खुशी हो रही है। तुमको बीजी देख के।

भगत _चलो भाई कहा चले कही टहलने।

राजेश _कही भी।

भगत ने राजेश को नदी किनारे ले गया, शहर की शोर शराबा से दुर। नदी किनारे गार्डन बना था।

वहा बेंच पर बैठ गए।

भगत _भाई, निशा जी का कोइ फोन या मैसेज आया क्या?

राजेश _नही यार, वो मुझे भूल चुकी है। निशा जी को ऐसा लड़का चाहिए जो उसके प्रति वफादार हो। कितनी औरतों के साथ मैने संबंध बनाए हैं, मुझे खुद को याद नही। मै उसके लायक नहीं।मैने दोनो मा बेटी का बहुत दिल दुखाया है। अब तो सुजाता मैम भी मूझसे नफरत करती है।

सुजाता मैम से मैने कह दिया है कि आज के बाद मैं कभी उसके सामने नही आऊंगा।

मेरा तो इस शहर में अब रहने का भी मन नही करता।

यहां रहता हूं तो , पुरानी बाते याद आने लगती है। देखो वहां पर मै और निशा जी बैठ कर घंटो समय बिताया करते थे। ओ पल याद आती है तो दिल को बडा दर्द होता है। इसलिए मैं कल ही सूरज पुर के लिए निकल जाऊंगा।

भगत _मै समझ सकता हूं भाई आपकी हालत। भाई मुझे पुरा यकिन है निशा जी तुम्हे भूली नहीं होगी। और मुझे लगता है वह एक दिन जरूर आएगी।

राजेश _वह आ भी गई तो क्या होगा भगत। मैने तो अपनी गलती सुधारी नही है।

बल्कि मौका मिलते ही, हवस के खेल में डूब जाता हूं। वो मेरे सामने आएगी, तो मैं उससे नजर मिलाने के लायक नहीं हूं।

राजेश और भगत कुछ समय वहा और बिताया फिर वे दोनो वहा से चले गए।

राजेश जब घर पहुंचा तो, शेखर अपने ड्यूटी से आ चुका था। दोनो ने एक दूसरे का हाल चाल पूछा।

सुनीता _राजेश बेटा जाओ अपने कमरे में फ्रेश होकर आ जाओ, तब तक मैं खाना लगाती हूं। स्वीटी अपने कमरे मे होगी उसे भी भोजन के लिए बुला लेना।

राजेश _ठीक है मां।

सभी भोजन के लिए, डायनिंग टेबल पर बैठ चुके थे। सुनिता ने सबको भोजन परोशी।

आज राजेश का पसंदीदा भोजन बना था।

सुनीता _राजेश बेटा क्या huwa, ठीक से भोजन नहीं कर रहा है। कुछ खोया खोया सा है। क्या बात है। सुनिता ने राजेश के बालो को प्यार से सहलाते हुए कहा।

राजेश _कुछ नही मां।

सुनीता _मै तेरी मां हूं। तुम्हारे चेहरे की भावो को अच्छी तरह पढ सकती हूं।

राजेश _मां मै कल सुरज पुर वापस जा रहा हूं।

सुनीता _बेटा, अभी तो गांव से लौटे हो, कुछ दिन बाद चले जाते।

स्वीटी _हा भईया, आज ही गांव से आए हो फिर जानें की बात कर रहे हो।

सुनीता _वैसे भी बेटा, मुझे तुम्हारा सुरज पुर जाना अच्छा नही लगता, मुझे तुम्हारी चिंता लगी रहती हैं।

तुम्हे अब वहां जानें की क्या जरूरत? अब तो तुम्हारा इंटरव्यू भी हो गया है कुछ दिनों में रिजल्ट भी जारी हो जायेगा।

शेखर _हां बेटा तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हे अब यही रहना चाहिए। वैसे भी तुम्हारा आईएएस में चयन होने के बाद, तुम्हे ट्रैनिंग के लिए बाहर जाना पड़ेगा। फिर पता नही तुम्हारी पोस्टिंग कहा होगी।

इसलिए तुम यहीं रहो।

राजेश _नही पिता जी, मेरा सुरज पुर जाना जरूरी है। वहा के लोगो को मुझसे काफी उम्मीदें है। गांव की स्थिति तो आप जानते ही हैं। गांव से फोन भी आया था, कब आ रहे हो?

सुनीता _बेटा कल ही जानें की क्या जरूरत है कुछ दिन रुक कर चले जाते।

राजेश _नही मां मैं कल ही जाऊंगा। वैसे भी इस शहर में मेरा मन नही लगता।

सुनीता _मै जानती हूं, उस लङकी को तुम अब तक भूल नहीं पाए हो।

बेटा उसे तुम भूल जाओ, उसी में हम सबकी भलाई है। ये बड़े लोगो की न तो दोस्ती अच्छी होती है न दुश्मनी। मैने तुम्हे बार बार चेताया था , बड़े घर की लड़की से दुर रहने के लिए, पर तुमने माना नही, अगर तुमने मेरा कहा माना होता तो आज तुम्हारा दिल नही टूटता।

खैर जो huwa सो huwa, अब तुम अपने लिए कोई दूसरी लड़की ढूंढ लो, ताकि उस निशा की याद तुम्हारे दिल से निकल जाए।

शेखर _हा राजेश तुम्हारी मां ठीक कह रही है।

निशा _भईया, आपको तो कोई भी लड़की मिल जाएगी। उस निशा में रखा क्या है भूल जाओ उसे।

उसे पता नही वो किस हीरे को छोड़कर गई है।

सुनीता _तुम्हे कोई लड़की पसंद आए तो मुझे बता देना, मै उससे तुम्हारी शादी की बात करूंगी।

भोजन करने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए।

सुनीता, कीचन का काम निपटाने के बाद राजेश के कमरे में पानी का बॉटल लेकर गई।

सुनीता _बेटा सो गया क्या?

राजेश _नही मां , कुछ काम था क्या?

सुनीता _, ओ पानी बॉटल लेकर आई थी।

और किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _नही मां।

सुनीता _अच्छा ठीक, अब मैं भी अपने कमरे में सोने जा रहीं हूं। तुम भी सो जाओ।

राजेश की बालो के सहलाते हुए बोली।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता अपने कमरे में चली गईं।

राजेश, बीते दिनों को याद कर रहा था। एक साल में कितना कुछ बदल गया है।

उसे आज नींद नहीं आ रही थी।

वह अपने बेड से उठ कर, अपने आलमारी से सिगरेट का पैकेट निकाला और अपने कमरे से निकल कर,

छत पर चला गया।

वह सिगरेट जलाया और पीते हुए छत से, सड़क पर चल रहे वाहनों को देखने लगा। किसी विचार में मग्न।

उधर सुनिता को राजेश के चेहरे के भाव देखकर पता था। वह आज कुछ उदास है। इसलिए उसे भी नींद नहीं आ रही थी।

वह यह जानने के लिए की राजेश सोया है कि नही वह अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश कमरे में नही मिला तो वह इधर उधर ढूंढने लगी।

जब घर में कही नही मिला तो वह छत पर गई।

छत पर उसे राजेश सिगरेट पीता छत से बाहर झांकते पाया।

सुनीता _राजेश बेटा, तुम छत पर क्या कर रहे हों? नींद नहीं आ रही क्या? और ये क्या? तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _मां, आप। आप यहां क्यों आ गई?

सुनीता _वो तुम्हारे कमरे में गई थी, तू सोया है कि नही देखने। मुझे पता था की आज तू कुछ उदास है।

राजेश,_मां मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं छत पर चला आया।

सुनीता _तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _ओह सॉरी मां, राजेश ने सिगरेट को बुझाया और छत से फेक दिया।

सुनीता _क्या बात है बेटा? क्या सोच रहे थे।

राजेश _कुछ भी तो नहीं मां।

सुनीता _मै तुम्हारी मां हूं सब समझती हूं।

सच बात तो ये है की जब तुम इस शहर में रहते हो तो निशा के साथ बिताए पल तुम्हे सताने लगती है।

तुम्हे इस तरह उदास देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता।

राजेश _सॉरी मां।

राजेश,सुनिता के गले लग कर कहा।

सुनीता _बेटा ये सिगरेट वगैरा मत पिया कर ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

राजेश _जानता हूं मां।

सुनीता _रात बहुत हो चुकी है, नीचे चलो, अपने कमरे में।

मै तुम्हारे सिर की मालिश कर दूंगी, फिर तुम्हे अच्छी नींद आएगी।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश और सुनिता दोनो छत से नीचे आ गए।

सुनीता _बेटा तुम अपने कमरे में चलो मै कीचन से तेल लेकर आती हूं।

राजेश अपने कमरे में चला गया। और बेड पर लेट गया। कुछ देर बाद सुनिता उसके कमरे में तेल लेकर आई।

वह राजेश के बालो में तेल लगाकर मालिश करने लगी।

सुनीता _कैसा लग रहा है।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

सुनीता _बेटा तुम अपने शर्ट और लोवर भी उतार दो, मै तुम्हारे हाथ और पैरों की भी मालिश कर देती हूं, इससे तुम्हे अच्छा फील होगा और जल्दी नींद आयेगी।

राजेश _मां, रहने दो न क्यों तकलीफ उठा रही हो, मेरा हाथ पैर की, आप मालिश करे मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

_सेवा तो मुझे आपकी करना चाहिए।

सुनीता _कर लेना जब मैं बीमार पढूंगी। अभी तो तुम्हे मेरी मदद की जरूरत है। चलो उतारो अपने टी शर्ट। सुनिता ने राजेश के टी शर्ट को ऊपर खीच कर अलग कर दिया।

फिर उसे हाथ पीठ सीने को मालिश करने लगी।

सुनीता _तुम अपने लोवर को भी उतार दो बेटा, मै पैरों की भी मालिश कर देती हूं। तुम्हे अच्छा महसूस होगा।

सुनीता ने राजेश के लोवर को नीच की , राजेश अब सिर्फअंडरवियर में था।

सुनीता राजेश के पैरो की मालिश करने लगी।

पैरो की मालिश के बाद टांगो की भी मालिश की।

राजेश _ आपका मासिक धर्म चल रहा है आपको आराम करना चाहिए था, मेरी सेवा कर रही हो।

सुनीता _तू जागता रहेगा, तो क्या मैं चैन से सो सकूंगी।

राजेश _आप मेरी इतनी चिंता करती हो।

सुनीता _अब बाते बंद करो और सोने की कोशिश करो। लगता हैं तुम्हे अभी भी नींद नहीं आ रही।

लगता है तुम्हारे घोड़े की भी मालिश करनी पड़ेगी तभी तुम्हे नींद आयेगी।

राजेश _आप की मर्जी।

सुनीता ने राजेश का अंडरवियर भी खीच कर उतार दिया।

और तेल लगाकर उसके घोड़े की मालिश करने लगी।

सुनीता की हाथ लगते ही। राजेश का लंद तन कर खड़ा हो गया।

सुनीता उसके लंद पर तेल लगा कर मालिश करने लगी।

लंद और मोटा होकर एकदम कठोर हो गया।

राजेश _ये क्या मां, पहले तो मुझे नींद नहीं आ रही थी, अब तो आपने घोड़े को भी जगा दिया। अब जब तक घोड़ा सोएगा नही मुझे नींद नहीं आएगी।

सुनीता _जानती हूं। जब तक तुम्हारा घोड़ा उल्टी नही करेगा, तुम्हे नींद नहीं आएगी।

राजेश _घोड़े को उल्टी कराने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। तुम तो जानती हो इतनी आसानी से यह घोड़ा उल्टी नही करता। वैसे भी तुम्हारा मासिक धर्म चल रहा है। आपने घोड़े को जगाकर मुसीबत मोल ली।

सुनीता, राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी। उसके अंड कोश सहलाने लगी।

वैसे सुनिता की भी हालत खराब हो चुकी थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती है। ऊपर से राजेश का लंद उसके हाथो में था। उसका मासिक स्राव और बड़ गया।

वह पैड पहनी थी, एकदम गीला महसूस कर रही थी।

पर ऐसी अवस्था में सेक्स करने से मना किया जाता है, इन्फेक्शन का खतरा जो रहता है। इसलिये वह भी आज तक ऐसी अवस्था में कभी सेक्स नहीं कीथी।

सुनीता ने काफी देर तक लंद चूसा पर लंद का पानी नहीं निकाल पाई।

सुनीता _लगता है मैने तुम्हारे घोड़े को जगाकर गलती कर दी। तुम्हारा पानी तो निकल ही नहीं रहा है।

राजेश _मां, अब तो ये नाग तभी उल्टी करेगा जब आपके बिल में जायेगा ।

सुनीता _न बाबा, अभी मैं अशुद्ध हूं, अभी मैं इसे अपने अदंर नही ले सकती।

राजेश _तो अपनी सकरी बिल में ले लो वो तो अशुद्ध नही है।

सुनीता _तुम्हारा कोई भरोशा नही कही बड़े बिल में डाल दिया तो,,, तुम्हे इन्फेक्शन हो सकता है।

क्या तेरे पास कंडोम है।

राजेश _हा, आलमारी में रखा था, पता नही कब जरूरत पड़ जाए।

सुनीता _ठीक है, तू अलमारी से कंडोम निकाल लो, तब तक मैं आती हूं।

सुनीता बाथरूम में गई और अपने अपनी नाईटी उतार कर अपनी पेंटी के अदंर जो पैड लगाई थी उसे निकाल दी। पैड रक्त स्राव से गीली हो चुकी थी। सुनिता नहाई और अपनी chut को अच्छे से ऊंगली डाल कर साफ की। अपने शरीर पर साबुन लगा कर, नहाई।

फिर तौलिए से पोंछ कर। नंगी ही बाहर आई।

राजेश से इत्र मांगी,

राजेश _अरे मां आपके बदन से तो ऐसे ही बड़ी अच्छी खुशबू आती है इत्र लगाने की क्या जरूरत।

जो कहा है वो करो। राजेश ने अलमारी से इत्र निकाल कर दे दिया।

सुनीता अपने पूरे बदन पर इत्र छिड़की।

चूंकि मासिक धर्म के समय औरत के शरीर से एक अलग गंद आती हैं जो कुछ पुरुषो को अच्छा लगता है तो कुछ को यह गंध पसंद नही आता।

सुनीता _दो कंडोम मुझे।

राजेश ने सुनिता के हाथ में कंडोम पकड़ा दिया।

सुनीता राजेश के लंद को मुंह में लेकर फिर से चूसी, उसके बाद कंडोम निकाल कर लंद पर चढ़ा दी।

राजेश ने सुनिता को खडा किया और उसे जकड़ लिया फिर उसकी ओंठ चूसने लगा।

उसकी गर्दन चूमने लगा। धीर धीर नीचे बडा और उसकी चूची मसलने लगा, निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता तो पहले ही बहुत गर्म थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती थी, वह पहली बार ऐसी अवस्था में चुदने वाली थी,। राजेश की हरकतों से उसकी योनि का स्राव और बड़ गया।

राजेश ने कुछ देर तक उसकी खूबसूरत नाभी और पेट को खूब चूमा चांटा।

उसके बाद सुनिता को बेड पकड़ा कर झुका दिया।

सुनीता की योनि को देखा, उसकी योनि एकदम गीली थी कुछ लाल स्राव नजर आया। एक अलग गंध पाकर उसका लंद और शख्त हो गया।

राजेश ने लंद योनि में रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद एक ही बार में सर सराता huwa अंदर घुस गया।

सुनीता सिसक उठी।

ऐसी अवस्था में बच्चेदानी का द्वार खुला रहता है।

राजेश एक और धक्का मारा लंद का टोपा बच्चेदानी के अदंर तक घुस गया।

सुनीता को एक अलग ही अहसास हुआ। जैसा लंद पुरा पेट में घुस गया हो।

राजेश अब सुनिता की कमर को पकड़ कर, लंद को योनि में अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद फाच फैच की आवाज करता huwa पूरी जड़ तक अन्दर बाहर होने।

सुनीता जन्नत में पहुंच गई।

वह मासिक धर्म के समय पहली बार chud रही थी। ऐसी अवस्था में उसकी सेक्स इच्छा काफी बड़ जाती थी। आज ऐसी अवस्था में राजेश से चुदने में दोगुना आनंद मिल रहा था। जिसकी कल्पना उसने नही की थी।

उसकी मादक सिसकारी पुरे कमरे में गूंजने लगी।

इधर लंद, मासिक धर्म के रक्त और boor का पानी से सन गया। कुछ रक्त तो नीचे टपकने लगा।

सुनीता को इतना मजा आ रहा था किखुद ही अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

कुछ ही देर में सुनिता झड़ गई।

राजेश उसे बेड किनारे लिटा कर उसकी ओंठ चूसने लगा उसकी चूचियां दबाने लगा। निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता ने अपनी टांगे खोल दी। वह फिर चुदने तैयार थी।

राजेश उसके टांगो के बीच पोजीसन सम्हाल लिया।

राजेश ने एक ही धक्के में लंद को फिर से जड़ तक अन्दर घुसा दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश ने सुनिता की चूची को पकड़ कर तेज तेज धक्का लगा कर चोदना शुरु कर दिया।

सुनीता फिर से स्वर्ग में पहुंच गई।

कमरे में दोनो की आह उह आह उह की आवाज गूंजने लगी।

मासिक धर्म का स्राव और बड़ गया था, स्राव बेड पर टपकने लगा।

दोनो को chudai के खेल में बहुत मजा आ रहा था। सुनीता राजेश को अपने अंदर पुरी तरह समा लेना चाहती थी।

कमरे में उसकी मादक सिसकारी आह उन आई माई,

चूड़ियों की खनक खन खन खन खन,,

फ्च फ्च फच की आवाज गूंजने लगीं।

राजेश _मां आपको मजा तो आ रहा है न, ऐसी अवस्था में चुदने से कही दर्द तो नहीं हो रहा है।

राजेश चोदना बंद कर के पूछा।

सुनीता _तू रुक मत, बहुत मजा आ रहा है, जमकर चोद मुझे, ऐसा मजा आज से पहले कभी नहीं मिला।

चोद मुझे,,

फाड़ दे अपनी मां की chut

सुनीता चीखते हुए बोली।

राजेश _ले शाली रण्डी,chud मेरे लंद से,,

सबके सामने तो बड़ी संस्कारी बनती हैं, मेरे लंद के नीचे आते ही रण्डी बन जाती है।

बूरचोदी साली।

सुनीता _हा हा मै रण्डी हूं, मै तेरी रखैल हूं। तू ही मेरा असली मरद है, तेरा बाप तो मेरी प्यास बुझा नही पाता,चोद अपनी औरत को, दिखा अपनी ताकत फाड़ दे मेरी chut , भड़वे।

राजेश और तेज तेज चोदने लगा।

राजेश _ले बुरचोदी साली, तेरी chut की सारी आग आज मैं निकालता हूं।

ले एक और ले,

जोर जोर से धक्के लगाते हुए कहा।

सुनीता _थोड़ा और दम लगा भड़वे, फाड़ मेरी chut, दिखा अपनी ताकत, मेरी दुध का कर्ज चुका तू,,,

फाड़ दे chut साले मेरी boor बहुत परेशान करती है मुझे, अगर तू मेरा बेटा है तो आज बुझा दे इसकी सारी प्यास। सुनिता चीखते हुए बोली।

राजेश _लगा तो रहा हूं धक्के साली, तेरेboor के अदंर घुस जाऊं क्या? छीनाल कही को।

सुनीता _मादर चोद भड़वे, और तेज चोद मै आनी वाली हूं।

राजेश _ले साली kutiya, हरामजादी, ले chud मेरे लंद से

राजेश तेज तेज चोदने लगा।

तेज धक्के से कंडोम फट गया।

राजेश रुक गया।

रसुनिता _क्या huwa re रुका क्यू? तेरा पानी निकल गया क्या?

राजेश _मां कंडोम फट गया।

सुनीता _फटने दे तू, रुक मत चोद मुझे। फाड़ मेरी chut मादरचोड मै आने वाली था, सारा मूड खराब मत कर।

राजेश _ले साली बेटा चोद कही की ले अब तो राजेश ने कंडोम को निकाल फेका और एक ही धक्के में फिर से लंद को योनी में जड़ तक घुसा दिया।

फिर तेज़ तेज धक्के मारने लगा।

दोनो इतने जोश में थे कि उसके मुंह से क्या निकल रहा है दोनो को होश नही था।

पुरी चादर सुनिता की रक्त स्राव से गीली हो गई।

कमरे में सुनिता की मादक सिसकारी चीखने तो कभी सिसकने तो कभी गाली निकलती।

दोनो को संभोग का अद्भुत आनंद मिल रहा था।

और सुनिता एक बार फिर झड़ गई। वह राजेश से कस कर लिपट गई।

राजेश भी उसके सीने से लग कर सुस्ताने लगा।

कुछ देर सुस्ताने के बाद।

राजेश _तुम ठीक तो हो न मां।

सुनीता _हूं।

बेटा अब जल्दी करो मै काफी थक गई हूं।

राजेश ने अपने लंद पे लगा खून साफ़ किया और अपने आलमारी से चिकनाई वाली क्रीम निकाल कर, अपने लंद पर लगाया और सुनिता की गाड़ में भर दिया।

सुनीता को घोड़ी बनाकर उसकी गाड़ में लंद डालकर चोदना शुरु कर दिया।

वह तब तक गाड़ मारता रहा जब तक वह झड़ नही। गया उसे लगा की वह झड़ने वाला है तो लंद को गाड़ से निकाल कर योनि में डाल दिया और तेज तेज चोदने लगा।

अपनी वीर्य से सुनिता की गर्भाशय को पुरी तरह भर दिया। क्यू की वह जानता था ऐसी अवस्था में पेट से होने की संभावना नहीं की बराबर होती है।

Chudai से दोनो थक चुके थे। सुनिता राजेश के बाहों में कुछ देर लेटी रही फिर, जब वह उठी तो देखा की चादर उसके रक्त स्राव से गंदा हो गया है। वह चादर को बेड से निकाल दी। फिर राजेश को नहलाई और खुद नहाई।
 
अगली सुबह राजेश उठता है वह कीचन जाता है। सुनिता कीचन में काम कर रही होती है।

राजेश उसे पीछे से बाहों में भर लेता है।

राजेश _गुड मॉर्निंग मां।

सुनीता _गुड मॉर्निंग बेटा।

राजेश सुनिता की एक चूची मसलकर गालों में किस कर देता है।

सुनीता _क्या कर रहा है? लगताहै रात कल रात तुम्हारा मन नहीं भरा है । अरे छोड़ों तुम जानते हो न अभी मेरा माहवारी चल रहा है।

राजेश_हूं , पर कल तो दी थी न।

सुनीता _तो , ऐसी अवस्था में रोज रोज ठीक नहीं। समझा करो।

राजेश _ पर आपको भी तो खूब मजा आया था।

सुनीता _तो, देखा न पुरा चादर खराब हो गया था। वैसे भी ऐसी अवस्था में करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

राजेश _कंडोम है न।

सुनीता _वो तो फट गया था।

राजेश _आप ही ने तो कहा था तेज़ तेज़ करने के लिए। राजेश फुसफुसाते हुवे बोला।

वैसे मैं कुछ सोच रहा था?

सुनीता _क्या?

राजेश _यही कि कल रात, मेरे कमरे का चादर खराब huwa था। आज आपके कमरे का चादर खराब करते हैं।

सुनीता _चल हट बेशरम।

राजेश ने अपना लंद सुनिता की गाड़ में धसा दिया।

सुनीता _छोड़ न क्या कर रहा है? समझा कर, अभी मुझसे दूर रह। वैसे तुम तो आज गांव जानें वाले थे। कितने समय की ट्रेन है।

राजेश _रात 10 बजे की। घरसे रात का भोजन करके निकलूंगा।

तो क्या इरादा है ?

सुनीता _किस बारे में?

राजेश _चादर खराब करने के बारे में। राजेश फुसफुसाते हुवे कहा।

सुनीता _चल हट बेशरम,,,

कल रात गलती हो गई, उसे फिर से नही दोहराना।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

राजेश _, ठीक है मुझे क्या?

वहा गांवों में तो मेरे ख्याल रखने के लिए, भाभी और ताई है, सोचा था जानें से पहले, आपकी इच्छाए पुरी कर दू।

सुनीता _हा हा वहा जानें को बेताब हो, यहां तुम्हे तुम्हे दुध पीने को नही मिल रहा है? वहा जायेगा तो ताजा दुध पीने को मिलेगा।

राजेश _मुझे कुछ जलने की बू आ रही है?

सुनीता _मै क्यू जलने लगी? अब का हाल में मै काफी लेकर आती हूं।

राजेश, हाल में चला गया। शेखर वहा बैठ कर अखबार पड़ रहा था।

दोनो बातचीत करने लगे।

कुछ देर बाद सुनिता काफी लेकर पहुंची।

सभी कॉफी का आनद लेने लगे।

काफी पीने के बाद।

राजेश _मां मै थोडा टहल कर आता हूं।

सुनीता _, ठीक है। जल्दी आ जाना।

राजेश _ठीक है।

राजेश गार्डन चला गया वहा कुछ एक्सरसाइज किया।

वो घर लौट रहा था, तभी सुनिता का फोन आया।

राजेश _क्या बात है मां? मै रास्ते में ही हूं,,,

सुनीता _बेटा वो ,,, ले आना,,,

झिझकते हुवे बोली,,,

राजेश _वो क्या मां?

सुनीता _वो,,, अब कैसे कहूं,,,, तू समझ न,,,

राजेश _अब आप बोलो गी नही तो कैसे समझूंगा

सुनीता _, वो, जो कल रात फट गया था? झिझकते हुए बोली।

राजेश _ओह आप कंडोम कि बात कार रही हो। राजेश हंसते हुए कहा।

सुनीता शर्मा गई।

पर मां कंडोम का क्या करोगी?

आप तो आज मना कर रही थी न। कहीं आपका मूड तो मैं बदल गया। वैसे भी कल आपको खूब मजा आया। कैसे जोश में आकर गंदी गंदी गालियां बक रही थी।

सुनीता_चुप बेशरम।

राजेश _अच्छा मां मैं वो लेके आता हूं।

सुनीता _क्या वो?

राजेश _, वहीं जो कल फट गया था।

सुनीता,,_अच्छी ब्रांडेड वाली लाना, फटनी नही चाहिए।

राजेश _आप चिन्ता न करें? अच्छी ब्रांडेड वाली लाऊंगा। पुरा दिन लेने पर भी नहीं फटेगा। हसने लगा।

सुनीता _चुप बेशरम।

सुनीता ने काल कांट दिया।

राजेश मेडिकल दुकान गया और अच्छी ब्रांडेड वाली कंडोम खरीद लिया।

वह घर पहुंचा तो सुनिता कीचन में काम कर रही है। वह पीछे से जाकर लिपट गया।

सुनीता _अरे आ गया तू।

राजेश,_हां मैं ये लो आपकी अमानत। एक दम ब्रांडेड वाली है।कंडोम को उसकी हाथ में थमाते हुए कहा।

सुनीता _चुप बेशरम, ये कर रहा है?, तुम्हारे पापा न देख लिया कांडोम तो, इसे अपने पास रख।

और नहाकर तैयार हो जाओ नाश्ता का समय होने वाली है।

राजेश अपने कमरे मे जाकर फ्रेस होकर नहाया, स्वीटी कमरे में आई।

स्वीटी _भईया मां नाश्ता के लिए बुला रही है।

राजेश,_बस अभी आया।

राजेश टी शर्ट और लोवर पहन कर, हाल में पहुंचा।

शेखर और स्वीटी दोनो नाश्ता करने इन्तजार कर रहे थे।

सुनीता ने तीनो के लिए नाश्ता लगाया।

तीनो नाश्ता करने लगे।

शेखर _कल गांव जानें के बारे में बोल रहे थे। बेटा क्या तुम सच में आज गांव का रहे हो।

राजेश _हा पास रात को 10बजे की ट्रेन है।

शेखर _,,, इतनी जल्दी जानें कि क्या जरूरत, कुछ दिन सुर रुक जाते यहां।

स्वीटी _हा भईया कुछ दिन और रुक जाते।

राजेश _यहां रहकर भी क्या करुंगा पापा, वहा गांव में मेरी आवश्यकता है, आपने तो देखी है न वहा की स्थिति, गांवों के लोगो को मुझसे काफी उम्मीदें हैं की मै गांव के विकास के लिए कुछ करुंगा।

शेखर _पर बेटा उस ठाकुर, से तुम दूर ही रहना। वो तुम्हे नुकसान पहुंचा सकते हैं ।

राजेश _पापा आप चिंता न करें वह ठाकुर मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा। पुराना हिसाब भी तो अभी बाकी है। उसकी करनी की सजा भी तो अभी देनी है ।

इस तरह बात चीत करने हुवे वे नाश्ता करने लगे।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपने ड्यूटी पर चला गया। कुछ देर बाद स्वीटी भी कालेज चली गई।

इधर सुनिता किचन के काम निपटा रही थी।

राजेश किचन में गया और सुनिता को बाहों मे भर लिया।

सुनीता _अरे छोड़ों न क्या कर रहा है?

राजेश _पापा और switi तो चले गए, अब सुरु करे।

सुनीता _न बाबा अभी मुझे बहुत से काम है।

अभी जाओ अपने कमरे में। इन्तजार करो।

राजेश _अरे मां देखो ने कैसा अकड़ गया है, ये ज्यादा इन्तजार नहीं कार पाएगा। राजेश ने अपना लोअर खिसका कर लंद के बाहर निकाल कर दिखाते हुवे कहा।

सुनीता _कल तो खूब मजा लिए थे इसने। खूब डुबकी लगाई था मेरे बाढ़ के पानी में। ये तो फिर तैयार हो गया है डुबकी लगाने।

राजेश _हां, अब चलो, अपनी गुफा में इसे प्रवेश करा कर इसको फिर मजे दो।

सुनीता _न बाबा अभी बहुत काम है। तब तक इसे इन्तजार करने कहो। तुम अपने कमरे में जाकर अभी आराम करो और इसे भी आराम करने दो। मै मेसेज करूंगी तब आना ।

राजेश _अच्छा ठीक है। मै जा रहा हूं।

सुनीता _अच्छा सुनो, वो कांडोम मुझे दे दो।

राजेश ने अपने लोवर से कांडोम के पैकेट निकाला और सुनिता को थमा दिया।

राजेश अपने कमरे में जाकर इन्तजार करने लगा। अपने लंद को तेल सी मालिश करने लगा।

इधर सुनिता किचन का काम निपटा लेने की बाद, बाथरूम में जाकर एक बार फिर नहाई।

अपनी शरीर की सफाई की और फिर अपने शरीर पर इत्र छिड़की। उसने चोली और घाघरा पहन ली। अपने गहने आलमारी से निकाल कर शृंगार करने लगी।

वह दुल्हन की तरह लग रही थीं।

अपने बेड पर नई सफेद चादर डाल दिया। और बेड में बैठ कार घूंघट डाल ली। फिर राजेश को मैसेज कर दी कमरे में आने के लिए।

राजेश अपने खड़ा लंद मसलते हुवे कमरे में पहुंचा।

दरवाज़ा खुला था, राजेश अदंर गया।

उसने देखा, बेड पर कोई दुल्हन घूंघट डाल कर बैठी है।

राजेश आश्चर्य प्रकट किया।

राजेश, सुनिता के सामने जाकर बैठ गया।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से पकड़ कर घूंघट उठाया।

सुनीता की सुंदरता देखकर राजेश मंत्र मुग्ध हो गया। सुनिता आंखें बंद कर ली थी।

राजेश _मां सच में कितनी खूबसूरत हो तुम।

उसने उसकी माथे को चूम लिया।

सुनीता ने आंखें खोली।

वे एक दूसरे की आंखो में देखा।

राजेश ने सुनिता की ओंठ के चूसना शुरु कर दिया। सुनिता राजेश से लिपट गई।

राजेश ने सुनिता को अपनी गोद में बिठा लिया।

उसकी चुनरी हटाई।

उसकी चोली को खोल कर अलग कर दिया।

राजेश ने एक एक कर सुनिता के सारे गहने उतारे।

सुनीता ने भी राजेश का टी शर्ट उतार दिया।

उसके बाद राजेश ने सुनिता को अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी ओंठ गले को चूमने चाटने लगा।

सुनीता सिसकने लगी ।

उसकी चूची चूसने लगा।

कुछ देर बाद राजेश बेड पर लेट गया। सुनिता उसके ऊपर थी।

सुनीता राजेश की ओंठ चूसने लगी। उसके सीने को चूमने लगी।

फिर वहा आगे बडी और राजेश के लोअर के निकाल कर चड्डी भी उतार दिया। अब वह बिलकुल नंगा था।

सुनीता राजेश के लंद चूसना सुरु कर दी।

राजेश प्यार से उसकी बालों को सहलाते हुवे। लंद चुसाई का मजा लेने लगा।

राजेश का लंद खूब लंबा और मोटा हो गया।

सुनीता _नई तकिए के नीचे रखे कांडोम का पैकेट निकाला और कांडोम को राजेश की लंद पर चढ़ा दिया।

Sunita बेड पर खड़ी हो गई। वह घाघरे की डोरी खोल दी। घाघरा राजेश के ऊपर गिर गया।

राजेश उसे पकड़ कर चूम लिया और साइड रख दिया।

सुनीता की एकदम चिकनी और रसभरी chut देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

सुनीता

लंद को अपने हाथ में लेकर अपनी योनि द्वार मे रख कर बैठ गई।

लंद सरसराता huwa गप से पुरा योनि के अंदर चला गया।

राजेश जन्नत मे पहुंच गया। सुनिता सिसक उठी।

सुनीता सिर्फ घाघरे में थी।

सुनीता ने राजेश के सीने पर दोनो हाथ रख कर लंद पर धीरे धीरे उछलना शुरू की।

लंद boor में फच फच की आवाज करता huws अदंर बाहर होने लगा।

सुनीता को माहवारी के समय उसकी सेक्स ईच्छाबढ़ जाती थी। ऐसी अवस्था में कल राजेश से चुदने में उसे दोगुना आनद मिला था।

इस आनद को फिर से महसूस करने के लिए वह फिर से आज राजेश से चुदने का मन बना ली थीं, यह जानते हुए भी कि ऐसी अवस्था में सेक्स करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

वह अपनी आंखें बन्द कर उछलने कि गति को बढ़ाने लगी।

लंद बिना किसी रुकावट के अदंर बाहर हो गए था।सुनिता को संभोग का परम आनंद की अनुभूति हो रही थी।

वह सिसकते हुवे, लेंड पर उछल रही थी। उसकी योनि से लाल रंग का द्रव्य बाहर निकल कर लंद को भिगो कर उसके अंडकोष से होता huws चादर में टपकने लगा।

कमरे में सुनिता की चूड़ियों कि खनक खन खन खन ,,, उसकी मादक सिसकारी

आह उह आह उह,,,,

फच फ्च की आवाज गुंज रही थी।

राजेश भी सुनिता की चूची मसलते हुए नीचे से कमर हिला हिला कर लंद को boor में गहराई तक पहुंचाने की कोशिश में लगा था।

सुनीता इतनी अधिक उत्तेजित होकर गई की खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी वह राजेश की ऊपर लुड़क गई। राजेश उसे अपनी बाहों में जकड़ कर पीठ सहलाने लगा।

कुछ डर बाद राजेश सुनिता के ऊपर आ गया। उसकी ओंठ चूसने लगा। फिर चूची मसलते हुए निपल चूसने लगा।

सुनीता फिर से गर्म हो गई।

राजेश उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया और अपना लंद पकड़ कर एक ही बार मेंफुच से अंदर कर दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश अब सुनिता की चूची मसलते हुए सुनिता की kuwe की खुदाई सुरू कर दिया।

राजेश के धक्के से लंद का टोपा उसकी गर्भाशय के अदंर तक दखल देने लगा।

सुनीता को अपार आनंद की अनुभूति होने लगी वह बहुत अधिक गर्म हो गई और मुंह से अनाप शनाप बकने लगी।

आह उह चोद चोद, अपनी मां को आह मां आह,,, फाड़ दे मेरी chut , और जोर से चोद,, मादर चोद

आह

राजेश _ले शाली, रण्डी chud अपने बेटे के लंद से

ले एक और ले

साले छीनार, लडखोर कही की।

सुनीता _हा हा मै लंदखोर हूं । मुझे तुम्हारा लंद चाहिए, और अदंर डाल, भड़वे,,,

राजेश _चुप साली,boor chodi kutiya डाल तो रहा हूं। और कितना अदंर घुसू तेरे पेटमें घुस जाऊं क्या? राजेश जोर जोर से चोदने लगा।

सुनीता _हा हा घुस जा मेरे पेट के अदंर, भूल गया तू इसी पेट के अदंर था तू और इसी boor से बाहर निकला है जिसे तू चोद रहा है, फाड़ के घुस जा अंदर,,,, मादर चोद

राजेश साली तेरी तो आज फाड़ के रहूंगा,, ले साली,,,

राजेश के तेज तेज धक्के से कडोम फिर फट गया।

राजेश _चोदना बंद कर दिया।

सुनीता _रुक क्यों गया भड़वे, झड़ गया क्या?

राजेश शाला कडोम फिर फट गया।

सुनीता _रुक मत चोदता रह, मै झड़ने वाली हूं,,,

राजेश ने तेज तेज चोदना शुरु कर दिया।

कमरे में सुनिता की मादक सिसकारी, चूड़ियों की खनक फच फच की आवाज गुंज रही थी।

राजेश और तेज तेज चोदने लगा सुनिता राजेश से लिपट कर चीखते हुए झड़ने लगी।

कुछ देर दोनो वैसे ही लेटे रहे।

कुछ देर बाद राजेश ने फिर से सुनिता को चूम चांट कर गरम कर दिया फिर उसे घोड़ी बना दिया।

राजेश ने कंडोम निकाल कर लौड़े में थूक लगाया और सुनिता की गाड़ में डाल दिया।

कुछ देर गाड़ मारने के बाद लंद को योनि में डाल कर गपागप चोदने लगा।

सुनीता फिर जन्नत में पहुंच गई।

राजेश सुनिता को kutiya बनाकर तब तक चोदता रहा जब तक वह झड़ नही गई।

सुनीता थक चुकी थी।

सुनीता _अब बस कर मैं थक गई, मुझे खाना भी बनाना है।

अब बाद में करना।

बेड का चादर सुनिता के माहवारी खून से गंदा हो गया था। उसे हटा दी फिर दोनो ने बाथरूम में जाकर नहाने लगे, इसी बीच राजेश ने सुनिता नल की टोटी पकड़ा कर झुका दिया और लंद उसकी योनि में घुसा कर गच गच चोदने लगा।

फिर कमोड में बैठ कर सुनिता को अपनी गोद में बिठा लिया।

सुनीता उछल उछल कर चुदने लगी, जब तक वह एक बार फिर।झड़ न गई।

सुनीता नंगी ही कीचन मे जाकर काम करने लगी राजेश बेड पर लेट आराम करने लगा।

उसका लंद अभी भी खड़ा हुआ था।

कुछ देर बाद राजेश कीचन में गया और सुनिता को कीचन में ही चोदने लगा।

फिर किचन स्लैब में बिठाकर उसकी टांगो के बीच आ गया और चोदना शुरू कर दिया।

जब तक सुनिता फिर से झड़ी नहीं उसे किचन में ही रगड़ता रहा।

उसके बाद राजेश हाल में आकर सोफे में लेट गया।

सुनीता ने भोजन तैयार कर राजेश को उठाया।

दोनो भोजन के लिए डायनिंग टेबल पर बैठे।

राजेश सुनिता को खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।

अपना लंद उसकी योनि में डाल दिया।

फिर दोनो भोजन करते रहे और राजेश हल्का हल्का कमर हिला कर उसे चोदता भी रहा। दोनो को बहुँत मजा आ रहा था।

भोजन कर लेने के बाद, सुनिता बर्तन धोने लगी। राजेश सोफे पर बैठ कर वेट करता रहा।

किचन का काम निपटाकर सुनिता, राजेश के पास आई।

राजेश ने सुनिता को अपने गोद में बिठा करउसकी चूची मसलने लगा उसे गर्म कर दिया। सुनिता राजेश के लंद में बैठ कर उछल उछल कर फिर चुदने लगी।

सुनीता एक बार में झड़ गई।

दोनो फिर से बेड रुम में जाकर आराम करने लगे।

कुछ देर बाद राजेश ने फिर से सुनिता को गर्म किया।

सुनीता राजेश के लंद को boor में डालकर उछलने लगी।

राजेश ने सुनिता को बेड किनारे लिटा दिया और उसके टांगो के बीच आकर उसकी चूची पकड़ कर फिर ठुकाई करने लगा।

अंत में राजेश सुनीता की boor में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। दोनो थक चुके थे। एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

4बजने पर,,

सुनीता उठी और अपने कपड़े पहन कर कॉफी बनाने चली गईं। कॉफी बनाकर कमरे में लाई।

सुनीता _राजेश बेटा उठो,,,

राजेश _क्या huwa मां।

सुनीता _स्वीटी की कालेज से आने का समय हो चुका है!

राजेश _मां स्वीटी को तो पता है न हमारे संबंधों के बारे में।

सुनीता _तुम्हे मेरे रुम में इस हालात में देखेगी न तो मुझे ताना मारेगी की खुद टू भईया के साथ मजा करती हो और मुझे मना करती हो, इसलिए कपड़े पहनकर अपने कमरे में जाओ।

राजेश बेड से उठा बाथरूम में फ्रेस होकर अपना कपड़ा पहना।

सुनीता और राजेश दोनो साथ में काफी पिए, फिर राजेश अपने कमरे में चला गया।

थोड़ी देर बाद switi कालेज से आई।

इधर राजेश अपने जानें की तैयारी शुरू कर दिया।

अपना सामान पैक करने लगा।

रात में भोजन करने के बाद, राजेश सुनिता की पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _अपना ख्याल रखना बेटा और फोन करते रहना।

राजेश _ठीक है मां

शेखर और switi उसे स्टेशन छोड़ने के लिए गए।

रात्रि 10बजे उसकी ट्रेन आई, राजेश शेखर से आशिर्वाद लेकर ट्रेन से गांव के लिए निकल पड़ा।

जब ट्रेन लक्ष्मण पर पहुंचा तो सुबह हो चुकी थी।

भुवन राजेश को लेने के लिए स्टेशन पहुंचा दोनो बाइक से सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।

जब सुरज पुर पहुंचा तो राजेश को कुछ बदला बदला महसूस होने लगा।

वे दोनो घर पहुंचे।

भुवन _मां देखो तो राजेश आ गया।

पदमा _अरे राजेश बेटा तू आ गया।

राजेश ने पैर छूकर प्रणाम किया।

पदमा _घर में सब ठीक तो हैं न

राजेश _हा ताई, सब ठीक है।

पदमा _अरे आरती, राजेश का बैग उसके कमरे में छोड़ हा।

आरती राजेश का बैग उसके कमरे में छोड़ने आई।

पूनम _अरे देवर जी आप आ गए।

राजेस _हां भाभी, आप कैसी हो?

पूनम _मै तो ठीक हूं देवर जी बस आपके आने का ही इंतजार कर रहे थे।

पदमा _अरे बहु जाओ राजेश के लिए चाय नाश्ता वगैरा बना दो।

पूनम _जी मां जी।

पदमा _बेटा तुम्हारा इन्टर व्यू कैसा गया?

राजेश _इंटरव्यू तो अच्छा गया है ताई उम्मीद है मेरा चयन हो जायेगा।

पदमा _ये तो बड़ी खुशी की बात है बेटा।

राजेश _आरती तुम्हारा स्कूल कैसा चल रहा है?

आरती _बहुत अच्छा भईया।

राजेश _ताई ज्योति दीदी दिखाई नहीं रही।

पदमा _बेटा, और कितनी दिनो तक मायका में रहेगी? दामाद जी उसे लेने आए थे। वह अपने घर चली गई।

बेटा तुम ट्रेन की सफर से थक गए होगे, जाओ पहले नहा लो फिर नाश्ता करके अपने कमरे मे आराम करना। बाते तो होती रहेगी।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश कमरे में जाकर अपना कपड़ा चेंज किया फिर नहाने के लिए घर के पीछे चला गया।

वहा नहाकर आया।

भुवन और राजेश दोनो ने साथ नाश्ता किया।

भुवन _अच्छा राजेश अब तुम आराम करो मै खेत निकलता हूं।

राजेश अपने कमरे मे चला गया।

कुछ देर बाद पूनम उसके कमरे मे आई।

राजेश _भाभी जी क्या हाल चाल है गांव का।

पूनम _हमारी हालचाल नही पूछोगे देवर जी, आप तो शहर जाने के बाद अपनी भाभी को बिलकुल भूल ही गए थे। फोन से हालचाल भी नहीं पूछते।

पूनम रूठते हुए बोली।

राजेश _सॉरी भाभी, वो क्या है न कि यहां नेटवर्क का इशू रहता है।

पूनम _देवर जी आपको पता है तुम्हारी दिव्या जी अपनी नौकरी छोड़कर यहां से चली गई।

राजेश _क्या? भाभी ये तुम क्या कह रही हो?

पूनम _क्या आपको सच में पता नहीं।

राजेश _सच में भाभी मुझे इस बारे में पता नहीं। पर नौकरी छोड़कर क्यू गई।

पूनम _लोग कहते है की आगे पढ़ाई करने वह विदेश चली गईं है, पर सच क्या है किसी को पता नहीं।

राजेश दिव्या जी ने मुझे इस बारे में बताया क्यों नहीं।

पूनम _वो तो आपकी अच्छी दोस्त थी, मुझे लगा आपको बताया होगा।

उसके जाना किसी को अच्छा नहीं लगा। कितनी अच्छी थी दिव्या जी।

राजेश ने दिव्या को काल किया।

उसका मोबाइल लगे नही पाया।

पूनमी_क्या huwa देवर जी?

राजेश _दिव्या जी से संपर्क नही हो पा रहा है?

भाभी मुझे हवेली जाना पड़ेगा।

पूनम _पर देवर जी आप अभी तो आए हो।

राजेश _दिव्या जी अगर आगे की पढाई के लिए विदेश जाना चाहती तो वो मुझसे जिक्र जरूर करती, उसने मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया।

बात क्या है जानने के लिए मुझे हवेली जाना ही पड़ेगा, वो मेरी अच्छी दोस्त है वो मुझे बिना बताए कैसे जा सकती हैं?

मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है!

राजेश अपना कपड़ा पहन कर बाइक लेकर हवेली के लिए निकल पड़ा।

जब वह हवेली पहुंचा,,,

ठाकुर के आदमी _रानी मां आपसे मिलने, राजेश आया है।

ठाकुरभी वहा था!

ठाकुर _वो शाला यहां क्या करने आया है। उस शाले को तो आज मैं गोली से उड़ा दूंगा।

रत्नावती_ये आप क्या कह रहे है? राजेश को कुछ huwa तो जो बाते आप सब से छिपाए है वो जग जाहिर हो जायेगा।

क्यों की लोगो को पहले ही लगता है कि दिव्या और राजेश के बीच कुछ चल रहा है।

अब राजेश को मार दो ge , और दिव्या भी अचानक से कही चली गईं हैं तो लोगो को कुछ गडबड होने का अंदेशा हो जायेगा।

इसलिए उसे कोई नुकसान न पहुंचाना।

गीता _पिता जी मां ठीक कह रही है।

ठाकुर _ठीक है, पर उस साले को कुछ भी बाते सच न बताना दिव्या कहा है? और उसे यहां से जल्दी बाहर भेजो। उस साले की शकल से मुझे नफरत हो गई है।

ठाकुर _पिता जी आप भूल गए हैं की राजेश ने ही हम दोनो की जान बचाई है।

ठाकुर _मुझे पता होता की उनके अहसानों की बदले मुझे इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी तो मैं खुद को गोली मार लेता, उससे मदद नहीं लेता।

ठाकुर _सुनो जी आप यहां से जाइए, आप यहां रहोगे तो मामला और बिगड़ जायेगा।

ठाकूर _ठीक है मै जा रहा हूं।
 
राजेश हवेली के अंदर गया।

रत्नवती _अरे राजेश बेटा आओ, बैठो।

राजेश _नमस्ते मां जी।

नमस्ते दी।

गीता _कैसे हो राजेश?

राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं दी। आप लोग जैसे है?

रत्नवती _ हम लोग भी अच्छे हैं बेटा।बेटा तुम तो दिल्ली गए, थे न।

राजेश _हा , मां जी।

आज ही सुबह दिल्ली से लौटा।

गीता _, राजेश तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा?

राजेश _बहुत अच्छा दी।

गीता _ये तो बड़ी अच्छी बात है, अब कुछ दिनो बाद तुम आई ए एस अफसर बन जाओगे।

रत्नवती ने नौकरों से राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहा।

राजेश _मां जी, घर से चाय नाश्ता करके आया हूं, रहने दीजिए।

मां जी ओ दिव्या जी दिखाई नहीं दे रही है।

रत्नवती और गीता दोनो एक दूसरे के मुंह ताकने लगे।

क्या बोले उन्हे समझ नही आ रहा था?

राजेश _ओ भाभी बोल रही थी कि दिव्या जी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इस्तीफा दे दिया है।

गीता _ओ हां, क्या है न कि वो आगे डाक्टरी की पढाई और करना चाहतीं थी,,,,,

तो,,,, वह,,,

मां तुम बताओ न,,,

रत्नवती _वो बेटा, दिव्या आगे पढ़ाई के लिए,,,,,

रत्नवती भी बोल नही पाई।

गीता _वो राजेश, दिव्या आगे की पढाई के लिए रूस चली,,,,,

राजेश _क्या, दिव्या रूस चली गईं?

पर उसने तो मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया था, इस बारे में।

गीता _वो क्या है न कि उसने ये योजना अचानक से बनाई। अब तुम दिल्ली में थे इंटरव्यू के लिए तो वो तुम्हे डिस्टर्ब करना नही चाहती थी।

राजेश _ओह,

राजेश का मन उदास हो गया।

अच्छा दी,मै चलता हूं।

दिव्या जी का कोइ काल या मेसेज आए तो मुझे काल करने के लिए कहना।

रत्नवती _बेटा कॉफी वगैरा तो लेते जा।

राजेश _नही मां जी, मुझे ईच्छा नही हो रही है कॉफी पीने की, अच्छा मां जी मुझे इजाजत दीजिए।

रत्नवती _ठीक है बेटा, हवेली आते जाते रहना। दिव्या नही है तो क्या? हम तो है।

राजेश _जी।

राजेश वहा से चला गया।

उसका मन उदास हो गया।

वह बाइक लेकर सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।

इधर हवेली में।

गीता _मां राजेश से झूठ बोल कर मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।

रत्नवती _बेटा मुझे भी, जब राजेश को सच पता चलेगा तो हम उनसे नजर नहीं मिला पाएंगे।

गीता _मां मै तो कहती हूं हम राजेश को सब सच बता देते हैं? जो होना होगा देखा जाएगा।

रत्नवती _पर बेटी, दिव्या ने तो मना की है न कुछ बताने। और तुम्हारा पिता वो तो राजेश के नाम से ही चिड़ता है, मारने या मरने में उतारू हो जाता है।

पता नहीं आगे क्या होगा?

रत्नवती _हे भगवान मेरी बेटी की जिंदगी में जो तूफान आया है, उससे उसे तू ही निकाल सकता है प्रभु। उसकी जिंदगी में जो कांटे आए हैं।

उसे तू ही हटा सकता है।

इधर राजेश गांव पहुंचने के पहले जो शिव का मंदिर था, वहा बाइक रोक दिया।

वह मंदिर के सीढ़ी में बैठ कर सोच में डूब गया।

उसे दिव्या के साथ बिताए पल याद आने लगा।

मंदिर का पुजारी उसके पास आया।

पुजारी _अरे राजेश बेटा तुम, क्या बात है बेटा कुछ उदास लग रहे हो।

राजेश _हा बाबा, आज मैं दूसरी बार उदास huwa हू। आज फिर मुझे मेरा एक सच्चा दोस्त मुझे छोड़ कर चली गईं।

बाबा _बेटा, तुम प्रभु के दरबार में आए हो, तुम सच्चे मन से प्रभु से प्रार्थना करो। तुम्हे छोड़कर जाने वाले जरूर तुमसे फिर से मिलेंगे। तुमने सबके भलाई के लिए काम किया है। प्रभु तुम्हारी जरूर सुनेंगे।

जाओ बेटा, प्रभु के चरणों में जाकर प्रार्थना करो।

राजेश मंदिर के ऊपर चढ़ा, वह घंटी बजाया, फिर उसने ईश्वर से प्रार्थना किया,

हे प्रभु, तुमने निशा को तो मुझसे दूर कर दिया, इसमें गलती मेरी ही थी इसलिए आपसे कभी शिकायत नहीं की।

पर दिव्या वह भी मुझे बिना बताए, मुझसे दूर चली गईं,,, लगता है आप मुझे मेरे बुरे कर्मो की सजा दे रहे है। जिन्हे मै अपना सच्चा दोस्त समझता हूं उसे आप मुझसे छीन लेते हैं। मेरे बुरे कर्मों की सजा देने का अच्छा तरीका निकाला है आपने। निशा की याद सताती थी इस लिय मैं शहर छोड़ आया, अब यहां भी आपने दिव्या जी को मुझसे दूर कर दिया, अब मैं कहा जाऊ प्रभु,,,

राजेश घुटने के बल बैठ कर प्रभु के सामने हाथ जोड़ लिया। उसकी आंख भर आया था।

पुजारी _उठो बेटा, प्रभु पार विश्वास रखो।

वो जरूर सब ठीक कर देंगे।

राजेश कुछ देर मंदिर में और रुका। फिर वह घर आ गया।

घर आया और किसी से कुछ बात किए, अपने कमरे जाकर लेट गया।

पूनम उसके कमरे में आई।

पूनम _क्या huwa देवर जी, उदास लग रहे हो?

राजेश _भाभी तुमने जो बताता था वो सच है दिव्या जी यहां से चली गईं हैं।

पूनम _तुम उसके चले जाने से दुखी हो।

राजेश _दिव्या जी मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी भाभी।

पूनम _देवर जी आप चिन्ता न करो, मै आपकी सारी उदासी दूर कर दूंगी।

चलो पहले खाना खा लो।

राजेश _भाभी मुझे भूख नहीं है।

पूनम _देखो देवर जी, तुम्हारे भूखे रहने से दिव्या जी वापस तो नही आ जायेगी न।

अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नही खाऊंगी, कह देती हूं हा।

राजेश _मेरे कारण आप क्यों भूखी रहेंगी भाभी।

पूनम _अच्छा मेरी चिंता है तो चलो भोजन कर लो।

राजेश _अच्छा, चलो मै आता हूं।

पूनम _ये हुई न बात। अच्छा तुम हाथ मुंह धोकर किचन में आओ, मै खाना लगाती हूं।

राजेश _जी।

राजेश हाथ मुंह धोकर कीचन में गया, पूनम ने भोजन परोसा।

राजेश _ताई नही दिख रही।

पूनम _खेत में कुछ काम ज्यादा है न तो, वह खेत चली गईं। आरती स्कूल गई है।

राजेश थोड़ा सा भोजन किया।

पूनम _देवर जी और लो न, बस थोड़ा सा ही खाएं हो।

राजेश _न भाभी, पेट भर गया।

राजेश भोजन करके अपने कमरे में जाकर लेट गया।

पूनम भी भोजन करने के बाद कीचन का काम निपटाकर राजेश के रूम मे आया।

पूनम _देवर जी आपको किसी चीज की जरूरत तो नही है।

देवर जी कहा खोए हो,,,

राजेश _की भाभी आपने कुछ कहा,,,

पूनम _तुम फिर किसी सोच मे डूब गए।

कही तुम दिव्या से प्यार करने तो नही लगे थे।

राजेश _भाभी प्यार तो सिर्फ एक बार होता है न।

पूनम _क्यू? एक बार क्यो? इंसान को जीवन में कई बार प्यार हो सकता है? तुम्हारी हालत देख कर तो यही लगता है कि तुम दिव्या जी को प्यार करते हो।

राजेश _दिव्या से मुझे प्यार है कि नही ये तो मैं नही जानता भाभी लेकिन वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी। और उसका इस तरह जाना, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

पूनम _ठीक है देवर जी, तुम आराम करो किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज देना।

शाम के समय राजेश अपने चाचा चाची से मिलने चला गया।

राजेश _नमस्ते चाचा जी।

माधव _अरे राजेश, खुश रह, यार तू कब आया।

राजेश _जी आज सुबह ही।

माधव _और इंटरव्यू कैसा गया?

राजेश _बहुत अच्छा चाचा जी।

माधव _भईया भाभी कैसे है?

राजेश _मां और पापा दोनो अच्छे है।

माधव_राजेश, तुम्हारी चाची रोज तुम्हारी ही बाते करती रहती हैं जाओ उससे मिल लो।

सविता किचन में काम कर रही थी।

राजेश चुपके से गया और उसके पीछे खड़े होकर उसकी आंखो को को अपनी हाथ से बंद कर दिया।

सबिता चौंक गई।

कौन हो छोड़ों मुझे,,

राजेश ने हाथ हटाया।

सबिता _अरे राजेश तू, तू कब आया।

राजेश _जी आज सुबह।

सबिता _तू सुबह का आ चुका है और अभी मिलने आया। तुम्हे तो मेरी परवाह ही नहीं।

राजेश _सॉरी चाची।

सबिता _और सुना कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?

राजेश _जी बहुत अच्छा।

सबिता _और घर में सब कैसे है?

राजेश _सब अच्छे से है?

सविता _तू तो वहा जाने के बाद अपनी चाची को बिलकुल भूल ही गया था re

न कोई फोन न कोई खोज खबर। मुझे तो लग रहा था कि तू गांव वापस आएगा ही नहीं।

राजेश _चाची मै आप लोगो को कैसे भुल सकता हूं?

आप लोगो की याद आते ही चला आया।

सबिता _चल झूठा कही का।

राजेश _चाची, कैसा चल रहा है आपका पंचायत का काम।

सबिता _बस पहले जैसा ही, सब लोग तुम्हे याद कर रहे थे। अब तू आ गया है तो कुछ छोटी छोटी समस्या है पर अब तू आ गया है तो सब ठीक हो जाएगा।

तू काफी पिएगा की चाय।

राजेश _जी काफी बना दीजिए।

सबिता काफी बनाने लगी, दोनो आपस में बात चीत करने लगें।

सबिता _लो काफी पियो।

राजेश _थैंक यू चाची।

राजेश काफी पीने लगा।

राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं, दोस्तो से मिलना है।

सबिता _ठीक है पर सुन रात का भोजन यही करना, मै तेरा पसंद का भोजन बनाऊंगी।

राजेश _ठीक है चाची।

सबिता _तू कुछ भूल रहा है।

राजेश _क्या?

सबिता _तू तो कुछ ही दिनो मे सब कुछ भूल ही गया re

सविता नाराज होते हुए बोली।

राजेश उसके पास गया और उसकी गाल को चूम लिया।

सबिता शर्मा गई।

राजेश _अब चलु।

सबिता _हूं।

राजेश गांवों के दोस्तों से मिलने चला गया। दोस्तो से गांव का हालचाल जाना।

रात का भोजन सबिता के घर किया। सबिता ने उसके लिए उसका पसंद का भोजन बनाया था। भोजन करने के बाद वह घर आया। अगली सुबह उठ कर वह आर्मी प्रशिक्षण केंद्र गया।

वह वहा चल रही ट्रेनिंग का जायजा लिया। दोपहर में वह स्कूल गया।

माधुरी राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।

स्कूल की पढाई का अवलोकन किया।

अगले दिन वह ग्राम पंचायत के मीटिंग में शामिल huwa, बैठक में गांव की समस्याओं पर चर्चा किया गया। राजेश ने समाधान हेतु अपना सुझाव दिया।

इस तरह कुछ दिन निकल गया।

राजेश अकेले में दिव्या को बहुत मिस करता था।

उनके साथ बिताए हुए पलों को याद करता था।

इधर आश्रम में दिव्या, ने अपने त्याग, समर्पण औरव्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था।

रात में जब राजबती और दिव्या जब भोजन करने के बाद बेड पर आराम कर रही थी।

राजवती _बेटी, यहां के लोग तुमसे बहुत प्रेम करने लगें है अपनी त्याग समर्पण और व्यवहार से तुमने कुछ ही दिनो मे सबका दिल जीत लिया है।

मै तुम्हारे आने के पहले बहुत चिंतित थी बेटी।

दिव्या _किस बात के लिए नानी।

राजवती _बेटी मै चिंतित थी की मेरे बाद इस आश्रम का क्या होगा। कोन सम्हालेगा इसे। मै भगवान से हमेशा प्रार्थना करती थी। इस आश्रम का वारिश के लिए। बेटी भगवान ने मेरी सुन ली। उसने तुम्हे यहां भेजा।

बेटी तुम मुझसे वादा करो, मेरे जाने के बाद, इस आश्रम को तुम सम्हालोगी।

दिव्या _नानी क्या आपको लगता है कि इतने बड़े आश्रम को मैं सम्हाल पाऊंगी।

राजवती _तुम्हारी काबिलियत देखकर ही मेने यह फैसला लिया है बेटी मेरे बाद तुम ही यहां की नई माता बनोगी।

एक दिन राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा था। वह उस स्थान पर गया था। जहा दिव्या के साथ समय बिताया था।

वह रोड किनारे अपना बाइक रख कर।

वह उन स्थानों पर आगे बढ़ता गया। जहां दिव्या के साथ समय बिताया था।

शाम के समय गीता जिला कार्यालय से घर आ रही थी।

उसने राजेश का बाइक रोड किनारे खडा देखा उसने ड्राइवर को बाइक रोकने के लिए कहा।

गीता _ये तो राजेश का बाइक है, इस सुन सान जगह पर राजेश क्या कर रहा है!

वह अपने वाहन से उतरी और राजेश को इधर उधर ढूंढने लगी।

राजेश नदी किनारे बैठा हुआ था।

वह दिव्या को याद कर रहा था, उसके साथ जो गीत गाया था वो पल उसे याद आ रही थी।
 
आप सभी मित्रो का शुक्रिया, अगला अपडेट कल आयेगा।
 
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