जब शशि और उर्मिला दोनो सीढ़ी पर चढ़ रही थी तभी पीछे से आवाज़ आई, शशि।
ये आवाज़ सुनिता की थी।
उर्मिला और शशि ने पीछे मुड़कर देखा, सुनिता उनके ही ओर आ रही थी।
शशि _दीदी, ये सुनिता दीदी तो लगता है हमारा सारा प्लान चौपट कर देगी, अब क्या करे।
जब सुनिता उनके पास आई,,,
उर्मिला _दीदी अब तक आप सोई नहीं।
सुनिता _नींद नही आ रही थी, तो थोडा टहलने का मन किया, इतने में आप लोग आप दिखाई दी।
शशि _दीदी, हमे भी नींद नहीं आ रही थी, तो खुली हवा खाने, ऊपर छत पर जा रहे थे।
चलो आप भी हमारे साथ, छत पे।
सुनिता को शुरू से ही शशि पर सक था की रात में ये राजेश के साथ गड़बड़ न करे इसलिए सो नही पा रही थी।
अब तीनो छत पे चले गए। छत पर ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। मकान के गार्डन पे कई खुशबूदार फूल वाले पेड़ लगे थे। जिनकी महक तीनो औरतों को पुरुष सानिध्य के लिए उकसा रहे थे।
शशि _उर्मिला दीदी, फूलो की कितनी अच्छी खुशबू आ रही है। मुझे तो मेरे सुहागरात का दिन याद आ गई। उस दिन ऐसे ही फूलो से सुहागरात की सेज को आपने ही तो सजाया था।
उर्मिला _हा re याद है मुझे। वो फूल मैने ही मंगवाया था, तुम्हारी और देवर जी की सुहागरत की सेज के लिए। अपने हाथो से सजाया था।
शशि _आज फिर से मन था, पहले रात की तरह रोमांस करने की, पर वो तो नसे में बेशुद होकर सो रहे हैं।
सुनिता, दी मुझे आपसे एक बात पूछनी थी, आप हमसे बड़ी है क्या अच्छा, क्या बुरा को हमसे ज्यादा बेहतर समझती है। क्या आप मेरे सवालों की जवाब देंगी?
सुनिता _क्या बात पूछनी है पूछो, अगर मै आपके सवालों का जवाब दे पाऊं तो बड़ी खुशी होगी।
शशि _दी, यदि किसी महिला का शरीर पुरूष संसर्ग के लिए तड़प रही हो। और उसका पति उस महिला की इच्छाएं पूरी न कर सके, तो उस महिला को क्या करना चाहिए। ऐसे में महिला को दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए की परिवार के मान मर्यादा के लिऐ जिंदगी भर अपनी इच्छाओं को दबाकर जीना चाहिए जो की काफ़ी मुस्किल होता है।
सुनिता _एक महिला के लिए तो परिवार की मान मर्यादा ही सब कुछ होना चाहिए। यदि इसके लिए उसे अपनी इच्छाओं को दबाकर जीना पड़े तो भी।
शशि _और अगर दीदी बीच का कोई ऐसा रास्ता निकल जिससे बाहर परिवार की बदनामी भी न हो और औरत की इच्छा भी पूरी हो जाए तो क्या उस महिला का उस रास्ता को अपनाना गलत है?
सुनिता _पाप तो आख़िर पाप होता है, चाहे घर के बाहर करे या भीतर। पर परिस्थिति कुछ ऐसी बन जाय की हम उस रास्ते पर चलना पड़े तो, सब कुछ तकदीर पे छोड़ना ही बेहतर है।
शशि _बस,यही सुनना चाहती थी दीदी मैं।
सुनिता _मै जानती हू, की तुम भी,,
सुनिता यह कहते हुए रुक गई,,
शशि _क्या जानती हो दीदी रुक क्यू गई बोलो?
उर्मिला _मैने कल जंगल में तुम्हे राजू के साथ देखा था।
शशि _क्या?
सुनिता _हा
शशि _पर आप वहा कैसे?
सुनिता ने सारी बातें बता दी की वह और राजेश कैसे वहा पहुंचे थे।
शशि ने अपने राजू और उर्मिला के बीच बने संबंध के बारे में सारी बातें बता दी।
सुनिता आश्चर्य से सारी बातें सुनती रही।
शशि _दीदी, एक बात और है जिसके बारे में आपको पता नही होगा।
सुनिता _कौन सी बात।
शशि _राजेश ने उस दिन मेरे साथ जबरदस्ती किया था।
सुनिता _शशि, ये तुम क्या कह रही हो। तुम झूठ बोल रही हो।
शशि _दीदी मै सच कह रही हू। राजेश ने हमें ब्लैक मेल कियाऔर मुझे मजबूरी में उनके साथ संबंध बनाना पड़ा।
सुनिता _नही, मै ये नही मान सकती, मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता। मै ये नही मान सकती। राजेश किसी महिला के साथ जबरदस्ती, नही तुम उस पर झूठा इल्जाम लगा रही हो।
शशि _नही दीदी ये सच है ।
सुनिता से रहा न गया, वह तेज कदमों के राजू के कमरे की ओर जाने लगी।
शशि _दीदी कहा जा रही हो रूको।
सुनिता नही रुकी और वह तेजी से राजू के कमरे की ओर जाने लगी।
उर्मिला और शशि दोनो उसको रोकने की नाकाम कोशिश करते हुवे उसके पीछे पीछे जाने लगी।
राजू का कमरा खुला था वह अदंर घुस गई।
वह अदंर जाकर राजेश को आवाज़ दी। राजेश
राजेश अपनी मां की आवाज़ सुनकर बेड से उठ गया।
राजेश _क्या huwa मां, तुम यहा।
सुनिता _मत कहो, अपनी गंदी जुबान से मुझे अपनी मां।
राजेश _पर मां बात क्या है?
सुनिता _क्या, तुमने शशि और राजू को ब्लैकमेल कर शशि के साथ जबरदस्ती किया, बोलो जवाब दो।
शशि और उर्मिला भी सुनिता के पीछे खड़े थे। शशि पछता रही थी की यह बात उसने सुनिता को क्यू बताई।
राजेश, शशि की ओर देखने लगा।
शशि अपना सिर नीचे कर के खड़ी थी।
सुनिता _बोलो, जवाब दो, इधर उधर क्या देख रहे हो।
क्या तुमने शशि के साथ जबरदस्ती की।
बोलो।
राजेश _मां, मूझसे गलती हो गई मैं बहक गया था।
मुझे माफ़ करदो।
सुनिता _अपना माथा पकड़कर कमरे पर रखे सोफा पर बैठ गईऔर रोने लगी।
हे भगवान ये सुनने के पहले मैं मर क्यू नही गई। मेरे संस्कार में क्या कमी रह गई थी।
तुमने एक औरत को ब्लैकमेल कर, उसके साथ जबरदस्ती किया।
सुनिता, रोने लगी।
राजेश उसके पैर पकड़कर माफी मांगने लगा।
मां, मुझे माफ़ कर दो, मूझसे गलती हो गई।
सुनिता _मुझे मत छुओ अपने गंदे हाथो से, और मत बोलो मुझे अपनी मां। मै सपने में भी नही सोच सकती थी, की तुम ऐसी हरकत कर सकते हो।
क्या माफी मांगने से तुम्हारे पाप धुल जाएंगे।
उर्मिला _दीदी उसे माफ़ कर दो, जवानी के जोश में वह ऐसा गलती कर बैठा। इसने राजू और शशि की जान भी तो बचाया।
सुनिता _नही, उर्मिला नही, इसने बहुत बड़ा गुनाह किया है।,जो माफी लायक नहीं है। ये शशि का दोषी है। इसे सजा मिलनी ही चाहिए।
शशि _ दी,जवानी में गलती हो जाती है। मैने राजेश को माफ कर दिया है।
सुनिता _नही शशि, इसनेकोई छोटाअपराध नहीं कियाहै , इसने तुम्हारा बलात्कार किया है।ये तुम्हारा गुनाह गार है इसे कड़ी से कड़ी सजा दो। तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।
शशि _दी तुम यहीं चाहती हो न की मैं राजेश को उसके किए की सजा दू।
सुनिता _हा, इसे कड़ी से कड़ी सजा दो।
शशि _तो ठीक है ,दीदी इसने राजू के सामने मेरे मेरे साथ जबरदस्ती किया था, आज मैं और दीदी तुम्हारे सामने इसके साथ जबरदस्ती करेंगे। यही इसकी सजा है।
राजू वही पर खड़ा था, वह भी सोच रहा था कि ये क्या हो गया, आज प्लान मजा करने का था। पर ये तो सजा की बात हो रही है।
उर्मिला _राजू बेटा तुम नीचे जाओ और सोफे में आराम करना, तुम बाद में आना।
राजू _ठीक है मां।
राजू वहा से चला गया।
उर्मिला _दी, अगर तुम यहीचाहते हो की राजेश को हम सजा दे, तो ठीक है। तुम्हारे सामने हम उसको सजा देंगे, उसके साथ जबर्दस्ती करेंगे। जैसे शशि के साथ इसने किया था। और वह शशि की ओर देखकर, बोली।
शशि देख क्या रही हो निकाल दो इसके सारे कपडे।
शशि राजेश की ओर आगे बड़ी।
राजेश _मां, रोको इन्हे।
सुनिता, खामोश रही और अपना सिर पकड़कर सोफे में बैठकर आंसू बहाने लगी।
इधर शशि ने राजेश का टी शर्ट निकालने लगी। उर्मिला ने उसका लोवर निकाल कर अलग कर दिया।
राजेश _मां, रोको इन्हे।
सुनिता _तुम्हारी, यही सजा है, तुमने एक औरत की मजबूरी का फायदा उठाया है। अब ये भी वही करेंगे जो तुमने शशि के साथ किया था। मर गई तुम्हारी मां। मै सोच भी नही सकती की मेरा बेटा ऐसा कर सकता है। शशि तुम्हारे जो जी में आए उसके साथ करो मै नही रोकूंगी।
सुनिता सुबकने लगी।
उर्मिला और शशि मुस्कुराने लगी, आख़िर सुनिता खुद ही राजेश के साथ कुछ भी करने की इजाजत दे रही थी।
शशि ने अब राजेश का बनियान भी निकाल दिया। अब राजेश सिर्फ चड्डी में था।
उसे भी उर्मिला ने अपने दोनो हाथों से खींचकर नीचे कर दिया।
राजेश का land सिकुड़ा huwa था।
उर्मिला ने जब राजेश के land को देखा,,,,
उर्मिला_शशि इसका तो , चूहा लग रहा है तुम तो कह रही थी इसका काफी लंबा और मोटा है।
शशि _दीदी अभी ये मुरझाया huwa है।
क्यू राजेश, कल तो तेरा मेरे साथ जबर्दस्ती करने के लिए खूब लंबा और मोटा होकर सांप की तरह फुफकार रहा था, आज क्या हुवा?
उर्मिला _शशि,कोई बात नही अभी इस चूहे को सांप बना देते हैं।
उर्मिला और शशि दोनो राजेश के पैरो के नीचे फर्श पर बैठ गई।
और राजेश के land को बारी बारी से मुंह में लेकर चूसने और उसके अंड कोश को सहलाने लगी।
इधर राजेश का ध्यान अपने मां पर था जो आंसू बहा रही थी।
काफी देर तक land चुसने एवम सहलाने के बाद भी जब राजेश का land खड़ा नही huwa तब,,
उर्मिला _शशि इस पर तो कुछ असर ही नही हो रहा है।
शशि _दीदी, अभी ये चूहा सांप बनकर फुफकार मारेगा, पहले इसको उसका बिल दिखाना पड़ेगा। चलो अपना कपड़ा उतारो और चूहे को बाल दिखाओ।
अब दोनो औरते एक एक करके अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटी कोट फिर ब्रा और अंत में पेटिकोट निकाल दी, और फिर शशि ने राजेश के सिर को अपनी ओर करते हुवे बोली,, इधर देख re अपनी मां की ओर क्या देख रहा है।
साब तुम्हारा ही किया धरा है जो उसकी ये आज हालात है।
अब इधर ध्यान दे, ये चूची जिसे कल तुम खूब मसल मसल कर चूसा था।
चल आज फिर इसे पी। और राजेश के सिर को अपने चूची पर दबाकर,चूचक को मुंह में डाल दिया।
इधर उर्मिला, ने राजेश के land को मुंह में लेकर फिर से चूसना शुरू कर दिया
इधर राजेश शशि की चूची को चूस जरुर रहा था। पर उसका ध्यान अपनी मां पर ही लगा huwa था जिसके कारण उर्मिला और शशि के काफी कोशिश करने के बाद भी राजेश का land खड़ा ही नहीं huwa
उर्मिला _शशिइसका तो चूहा का चूहा ही है। खडा ही नहीं हो रहा। तुम तो इसकी मर्दाना ताकत की काफी तारीफ कर रहि थी, पर मुझे तो राजेश नामर्द लग रहा है देखो न दो दो खूबसूरत औरते इनके सामने नंगी खड़ी है जिसे देखकर नामर्द भी मर्द बन जाए, पर इसके नुनु पर तो कुछ असर ही नही huwa था।
शशि _राजेश, आज तुम्हे क्या हो गया है, कल तो बड़ी ताकत दिखा रहे थे। कही कल कोई दवाई तो नही खा ली थी आज क्या huwa तुम्हारी मर्दानगी को।
उर्मिला _शशि, रहने दो इससे कुछ नही होने वाला, इससे अच्छा तो हमारा पति है जो हमारी आग को बुझा तो नही सकते पर बड़ा तो सकते हैं , इससे तो यह भी नही हो सकता।
तुम बेकार में ही इसकी मर्दानगी कि तारीफ कर रही थी।
इधर सुनिता राजेश के बारे में ये सब सुनके बहुत अपमानित महसूस कर रही थी।
उर्मिला _सुनिता, दी मुझे लगता है राजेश को इलाज की जरूरत है। राजू नामर्द है,,
सुनिता का सब्र टूट गया,,
सुनिता _चुप हो जाओ,, मेरा बेटा नामर्द नही
अब खडा होकर मेरी तरफ अपनामुंह लटका कर क्या देख रहा है। अपनी मां की और कितनी बेज्जती कराएगा, अगर मेरी दुध पिया है तो इन रंडियों की chut फाड़और इतना चोद कि कल चलने फिरने लायक न रहें।
राजेश अपनी मां की बात सुनकर जोश से भरने लगा।
वह दोनो हाथो से उन दोनो औरतों की बालो को पकड़कर उपर उठाया।
और स्वयं अपने दोनो पैर फर्श पर रखकर अपनी टांगे चौड़ी कर बेड के किनारे बैठ गया, दोनो औरतों को अपनी एक एक जांघ पर बिठा दिया, अपने हाथो से दोनो कि एक एक चूचियां पकड़कर मसलने लगा।
फिर वह उर्मिला सिर पकड़कर उसका मुंह अपनी ओर किया और उसके ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।
उर्मिला के मुंह को जी भर के चुसने के बाद शशि ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।
जी भरकर होंठ चूसने के बाद राजेश ने उन दोनो को खडा किया और उन दोनो के खूबसूरत बदन लो गौर से देखने लगा, वह अपने दोनो हाथ से दोनो के मस्त चिकनी फुली हुई गोरी गोरी chut को अपने हाथो से सहलाने लगा।
उन दोनो के खूबसूरत बदन को देखकर राजेश का शरीर गर्माने लगा धीरे धीरे उसके land के नशों में खून भरने लगा, उसके land पर तनाव आने लगा।
अब राजेश दोनो औरतों के बड़ी बड़ी मस्त चूचियों को अपने हाथों से मसकर उसके चुचक को मुंह में भरकर चुसने लगा। उर्मिला और शशि दोनो के मुंह से सिसकारी निकलने लगी। दोनो के chut से रस बहना शुरू हो गया।
राजेश _देखना है न मेरी ताकत, तो चूसो मेरा land
उर्मिला और शशि फर्श पर बैठ गई। राजेश का आधा खडा land को उर्मिला अपनी मुंह में भर ली और चूसने लगी जबकि शशि राजेश के गोटे को सहलाने लगी।
दोनो को इस हरकत से राजेश उत्तेजित हो गया। उसका land तनकर लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।land उर्मिला के मुंह में नही समा रहा था।
राजेश के land की लंबाई और मोटाई को देखकर उर्मिला का मुंह खुली की खुली रह गई।
हे भगवान इतना बड़ा, वे तो chut ka कबाड़ा कर देगा।
उर्मिला राजेश के land को kutiya बन कर चाटने लगी। राजेश ने शशि को इशारा किया।
शशि समझ गई राजेश क्या कह रहा है।
शशि, उर्मिला के पीछे जाकर उसकी chut को चाटने लगी। उर्मिला के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी। वह अपनी chut से पानी छोड़ने लगी। जिसे शशि पी पी कर चाटने लगी।
अब राजेश ने उर्मिला को ऊपर उठाया और उसे बेड पर झुका दिया। उर्मिला बेड पकड़कर kutiya बन गई।
राजेश शशि के ओंठ चुसने लगा, एक हांथ से उर्मिला के chut सहलाते हुवे उर्मिला के कूल्हे के पीछे खडा हो गया।
अब शशि ने राजेश के land को पकड़कर उसे पहले चूसा फिर उसे उर्मिला के chut के छेद पर भिड़ा दिया ।
राजेश ने उर्मिला के chut पर एक धक्का मारा,land का टोपा उर्मिला की बुर के अंदर चला गया।
अब राजेश उर्मिला के क़मर को पकड़कर एक जोर का धक्का मारा,land बुर को चीरता हुआ आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।
उर्मिला जोर से चीख पड़ा।
इधर सुनिता केदिल को उर्मिला की चीख सुनकर कुछ ठंडक मिला,,kutiya मेरे बेटे को नामर्द कह रही थी। अब पता चलेगा मेरा बेटा क्या है?
इधर राजेश राजेश झुककर उर्मिला के चूची को पकड़कर मसलने लगा, जिससे उर्मिला को अच्छा लगने लगा अब राजेश अपने land को थोडा बाहर खींचा और एक जोर का धक्का मारा land बुर को फाड़कर जड़ तक अंदर घुस गया।
उर्मिला फिर से जोर से चीख पड़ी, उई मां, मर गई re, उसके आंखों से आंसू निकल आए।
राजेश धीरे करो, मेरा बुर फट गया।
Land का टोपा उर्मिला के बच्चेदानी से टकराया।
अब राजेश अपने क़मर को हिलाकर धीर land को बुर में kअदंर बाहर करने लगा। और एक हाथ से शशि की चूची मसलते हुए उसके ओंठ चुसने लगा।
धीरे धीरे उर्मिला को मजा आने लगी और उसके chut से पानी बहने लगा। जिससे land अब आसानी से अंदर बाहर होने लगा।
राजेश ने अपना स्पीड बढ़ा दी अब राजेश को भी उर्मिला को चोदने में मज़ा आने लगा।
वह उर्मिला को जोर जोर से चोदने लगा।
राजेश का land उर्मिला के बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा।
उर्मिला तो जैसे जन्नत में पहुंच गई। land उसके बुर के हर हिस्से को अच्छे से रगड़ रहा था। जिससे उर्मिला को असीम आनन्द मिल रहा था। ऐसी आनद की वह कल्पना भी नहीं की थी।
उसके मुंह से लगातार कामुक सिसकारी निकल रही थी। जो पुरे कमरे मे गूंज रही थी।
पर उर्मिला अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और वह कुछ ही देर में चीखते हुए झड़ने लगी। उई मां मै गई re,, राजेश मै गई,,,,,, आह मां,,,,,,,
उर्मिला आनद के मारे बेहोश सी हो गई।