Incest यह क्या हुआ - Page 10 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

🎉🎉🎉यह क्या हुआ के सभी पाठको को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं🌺🌺💃💃🕺🕺
 
गार्डन में आराम कर लेने के बाद, सुनिता बोली,,

सुनिता_शशि और उर्मिला चलो अब घर चलते हैं, हमे घर भी निकलना है। चलो बच्चों बहुत झूला झूल लिए।

शशि _दीदी मै कह रही थी, आज रुक जाते। पता नही इसके बाद हम कब मिले, या फिर मुलाकात ही न हो।

उर्मिला _हां, दीदी आज हमारे साथ रह लो, पता नही फिर कब मुलाकात होगी। कल सुबह ही निकल जाना।

चंचल, पायल, सोनी _हां, बडी आज रुक जाओ न।

स्वीटी _मां, सब इतने जिद कर रहे हैं, रुक जाते है न कल सुबह निकलेंगे।

सुनिता _पर कल तो, तुम लोगो को कालेज जाना हैऔर तुम्हारे पापा को ड्यूटी पर।

स्वीटी _मां, तो क्या huwa एक दिन छुट्टी ले लेंगे।

सुनिता_तुम्हारे पापा से पूछना पड़ेगा। वैसे हम रुक कर करेंगे क्या? जो देखना था वो तो देख लिए।

उर्मिला _दीदी, पास में ही हमारा फार्म हाउस है जो स्टाप डेम से लगा huwa है। चलो न हमारा फार्म हाउस देख लो।

शशी _हां, दीदी चलो न हमारा फार्म हाउस देखने।

सुनिता _ पहले स्वीटी के पापा को पूछना पड़ेगा, उसे छुट्टी मिलेगी की नही।

शेखर _सुनिता, अब आराम कर लिए हो तो चलते हैं, हमे घर भी निकलना है।

उर्मिला _सुनो जी, सभी लोग आज रुकने के लिए जिद कर रहे हैं। क्या आपको कल छुट्टी नही मिल सकती।

शेखर _सुनिता, बच्चे क्या चाहते है? आख़िर कल उन्हें भी तो कालेज जाना है।

सुनिता _स्वीटी तो आज रुकना चाहती है। राजेश से पूछना पड़ेगा।

बेटा राजेश इधर आना। राजेश अपनी मां के बुलाने पर पास आया।

राजेश _क्या बात है मां?

सुनिता _बेटा सभी लोगो की यही ईच्छा है की हम आज यही रुके और कल सुबह घर निकले।

तुम्हे कोई दिक्कत तो नही।

राजेश _मां, कितने दिनों बाद तो घूमने आए है, अगर आप लोगो की ईच्छा रुकने की है तो मैं तो हमेशा यही रुक जाऊ।

सभी लोग हंसने लगे।

तो यह तय हो गया कि आज रात यही रुक कर कल सुबह घर के लिए निकलेंगे।

इनके फैसले से वहा मौजूद सभी लोग बहुत खुश हो गए।

सुनिता _सुनो जी, शशि बता रही है कि पास में ही इनका फार्म हाउस है वहाचलने के लिए जिदकर रही है , चलो वही चलते हैं।

मोहनलाल _हा भाई साहब चलो हमारा फार्म हाउस भी देख लो।

शेखर _आप सभी की ईच्छा है तो चलो भई, फार्म हाउस ही चलते है।

सभी लोग कार में बैठकर फार्म हाउस के लिए निकल पड़े।

जब वे फार्म हाउस पहुंचे , फार्म हाउस का लोकेशन आस पास का नज़ारा दिखने लायक था, चारो तरफ पहाड़, बहती हुई नदी, जिस पर स्टाप डेम बना था। जिस में पानी लबालब भरा हुआ था। सभी लोग वहां का नजारा देखकर मंत्र मुग्ध हो गए।

स्वीटी _वाउ , यहां का नज़ारा तो बहुत सुंदर है।

फार्म हाउस का गेट बन्द था।

मोहनलाल ने वहा के चौकीदार, को गेट खोलने के लिए आवाज दिया।

चौकीदर ने गेट खोला।

जब वे सभी अंदर गए तो वहां कोई नजर नहीं आया। मोहन लाल ने चौकीदार से पूछा, अरे हरिया, कोई नजर नहीं आ रहा, मजदूर लोग कहा गए है।

आज काम पर कोई नही आया क्या?

और गिरधर कहा है? गिरधर यहां का इचार्ज था, जो फार्म हाउस का सारा काम देखता था।

हरिया _मालिक, मजदूर लोग सुबह जल्दी आ गए थे काम पर ओर जल्दी चले गए छुट्टी लेकर, सभी मेला देखने जाना चाहते थे।

गिरधर बाबू भी चाले गए।

अच्छा ठीक है।

फार्म हाउस बहुत बड़ा था। फार्म हाउस में कई प्रकार के शाक सब्जियां , गोभी, टमाटर, मूली, भिड़ीं, करेला, कद्दू, बन्द गोभी, बैगन शिमला मिर्च आदि, फलों में अमरूद, केला, पपीता, आम, नींबू, अनार के पेड़ लगे थे, जिन पर फल लगे हुवे थे।

सुनिता _वाह, उर्मिला तुम्हारे फार्म हाउस में तो सभी प्रकार के शाक सब्जियां है। आप लोगो को तो बाजार से खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती होगी।

उर्मिला _हां, दीदी हम लोगो को सब्जी लेने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां जैविक खाद का उपयोग करते हैं, रसायनिक खाद का नही।

सुनिता _ये तो बहुत अच्छी बात है। शहरो में तो केमिकल युक्त शाक सब्जी एवम फल बिकता है। लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

आप लोगो को तो शाक सब्जियां एवम फल ताजे और शुद्ध खाने को मिल ते है।

शेखर _हा मोहन लाल जी, सुनिता सही कह रही है। आप लोग तो किस्मत वाले हो भई।

स्वीटी _भैया, देखो तो कितना बड़ा बड़ा अमरूद फला huwa है। पपीता भी। पेड़ पर पका केला तो पहली बार देख रही हूं।

शशि सुनो जी चौकीदार को बोल दू कुछ खाने के लिए फल तोड़ने। और काल दीदी लोग जब घर जाएंगे तो ले जाने के लिए भी फल, और सब्जियां तुड़वा देना।

मोहनलाल _शशी, ये भी कहने की बात है। मै चौकीदार को बोल अभी बोल देता हूं।

उर्मिला _शशि, पहले फॉर्म हाउस को अच्छे से घूम लेते है फिर फल का आनद लेंगे।

फार्म हाउस में 20x 20वर्ग फिट का एक बड़ा टंकी बनाया गया था जिसकी ऊंचाई4: 50फीट था। जिसमे मोटर पंप से पानी भरा जाता था। टंकी फूल हो जाने पर पानी ओवर फ्लो होकर खेत में जा रहा था।

टंकी को स्विमिंग पूल की तरह डिजाइन किया गया था। मन लगने पर मदन एवम मोहन लाल की फैमली फार्म हाउस में आकर नहाने का आनंद लेते थे।

स्वीटी _वाउ, ये पानी की टंकी तो स्विमिंग पूल की तरह बनाया गया है। कितना साफ़ पानी है।

सोनी तुम लोग तो इसमें नहाते होगे।

सोनी _हा दीदी, कभी कभी हम यहां नहाने का मज़ा लेते हैं।

स्वीटी _पानी को देखकर तो मेरा नहाने का मन कर रहा है। क्यू भइया आप क्या कहते हो नहाए क्या?

राजेश _पर हम कपड़े तो लाए नही।

सुनिता _switi कल तो खूब नहाई हो झरने के पानी में, तुम्हारा मन नहीं भरा है क्या?

उर्मिला _बच्चों का मन है तो नहाने दो न दीदी बार बार मौका तो नही मिलता।

सुनिता _पर कपडे भी तो नही लाए हैं।

उर्मिला _तुम उसकी चिन्ता मत करो, मै राजू को भेज दूंगा घर, दुकान से सबके लिए नए कपड़े। ले आयेंगे।

मोहनलाल के मोबाइल पर मदनलाल का कॉल आया।

मोहनलाल ने काल उठाया।

मोहन लाल _बोलो भैया , कैसे काल किए हो?

मदनलाल _एजेंट को चेक देना है। तुम्हारे दस्तखत चाहिए।

मोहन लाल _आना जरूरी है क्या? भैय्या।

मदन लाल _हा, अभी तुम लॉग कहा हो।

मोहनलाल _भैया अभी तो हम लोग फार्म हाउस में है।

मदनलाल _ एक काम करो, उन लोगो को बता दो की अर्जेंट काम आ गया है। इसलिए जाना पड़ेगा। भाई साहब को सपने साथ ले आओ हमारा दुकान और शो रूम भी देख लेगा।

मोहनलाल _ठीक है भइया।

मोहन लाल ने इसकी जानकारी शेखर और सुनिता को दिया।

मोहनलाल _शशि मै और भाई साहब कार सेघर निकल रहे हैं। ड्राइवर को भेज दूंगा, वह कार ले आयेगा।

शशि _सुनो जी मैं कह रही थी की तुम राजू और चौकीदार को भी ले जाओ। लडकियो का यहां नहाने का मन है। सबके लिए कपड़े ले आयेगा। साथ ही लंच का समय भी होने वाला है। घर में खाना बन गया होगा तो,कार से खाना यहीं भेज देना। चौकीदार राजू की मदद करेगा।

मोहनलाल _ठीक है भई, चलो भाई साहब, चलो राजू बेटा।

राजेश _चाचा जी राजू के हेल्प के लिए मैं भी चलू क्या?

मोहनलाल _ राजेश बेटा तुम यही रहो, महिलाओं के हिफाजत के लिए किसी एक मर्द का रहना यहां जरूरी है। तुम यही रहो।

शेखर _मोहनलाल जी ठीक कह रहे है बेटा तुम यही रहो और सबकी हिफाजत करना।

राजेश _ठीक है पापा।

अब राजू मोहनलाल, शेखर, और चौकीदार, चारो घर के लिए निकल पड़े।

अब फार्म हाउस में तीनो महिलाएं, चारो लड़किया और राजू रह गए।

स्वीटी _चाची, राजु को आने में कितना समय लगेगा?

शशि _कम से कम एक _डेढ़ घंटा लगेगा ही।

स्वीटी_क्यू न हम उनकेआने तक नहाने का मज़ा ले। राजु जब आयेगा तो खाने फॉर्म हाउस में लंच करने का मज़ा लेंगे।

चंचल, पायल, सोनी _हा दीदी, बिलकुल ठीक कह रही हो।

सुनिता _पर स्वीटी, कपड़े तो है नही जिसे तू पहनकर नहायेगी।

स्वीटी _मां, यहां पर गैर है ही कौन, जो हमें नहाते हुए देखे, मैं तो ब्रा और पैंटी में नहाऊंगी।

सुनिता _बेशरम कही की तू अपने भाई के सामने ब्रा और पैंटी पहनकर नहाएगी। तुम्हे शरम नही आएगी।

स्वीटी अपने मन में, कैसे सती सावित्री बन रही है , कल तुम्हे शर्म नही आ रही थी अपने ही बेटे से रण्डी की तरह सिसक सिसक कर चुद्ते हुवे। चुदक्कड कही की। मै तो भइया को अपना बदन दिखा कर नहाऊँगी। भइया को भी पता चले की अब मैं छोटी बच्ची नही, चुदवाने लायक हो गई हू।

स्वीटी _मां, भाई ही तो है। कोई पराया तो नही, इसमें शर्माने की क्या बात है?

उर्मिला _दीदी नहाने दो न, बच्चों को अब अपने भाई से क्या शर्माना। मै तो कहती हू चलो हम भी ब्रा और पैंटी में नहाते हैं। मज़ा आएगा, यहां कोई पराया मर्द तो है नही जिससे शर्माए।

उर्मिला को भी राजेश को अपना जिस्म दिखाने का मौका मिल रहा था। इसे वह कैसे जाने देती।

शशि _हा, दीदी चलो न हम भी ब्रा पेंटी में नहाते है।

सुनिता _न बाबा, मूझसे यह नही हो पायेगा। तुम्ही लोग नहाओ।

स्वीटी _इसे कहते हैं त्रिया चरित्र, इन लोगो के सामने तो ऐसे दिखा रही है जैसे बहुंत संस्कारी हो, लगता ही नहीं की कल रात अपनी chut में अपने बेटे का land ले रही थी। अपने मन में बोली।

Switi _मां तुम्हे नही नहाना है तो मत नहाओ, हम तो नहायेंगे। तुम हमें नहाते देखो। और हमारे कपडे की रखवाली करो। कही कोई बंदर आकर हमारे कपडे न ले जाए नही तो हमें नंगी ही घर जाना होगा।

सभी लोग हंसने लगे।

सुनिता को सभी पर गुस्सा आया।

तुम्हे तो घर में बताऊंगी। मां की मजाक उड़ा रही है।

इधर राजेश इन लोगो की बातो का मज़ा ले रहा था।

वह भी उर्मिला और शशि को ब्रा पेंटी में देखने उत्सुक था।

राजेश _भई, आप लोग क्या पहनकर नहाओगी तुम लोग जानो मै तो अपना अंडरवियर पहनकर नहाऊंगा। राजेश अपना कपड़ा उतारते हुवे बोला।

कुछ ही देर में वह सिर्फ अंडर वियर में था। उसका गठीला शरीर देखकर सभी मोहित हो गए।

शभी दोनो औरतों और लड़कियों को राजेश के शरीर को घूरते देख सुनिता अपने मन में बोली, देखो तो कैसे घूर रही हैं सब मेरे बेटे के शरीर को देखकर। जैसे मेरे बेटे को खा ही जायेगी। मुझे तो इन रंडियों की इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा।

राजेश अब सीधे टंकी में चढ़ने के सीढी पर चडकर वहा से टंकी में चिल्लाते हुवे छलांग लगा दिया। ऊ हू हू,,,,,

राजेश _अब देख क्या रहे हो, आ जाओ तुम लोग भी।

स्वीटी _चलो चाची,चंचल, पायल, और सोनी, निकालो तुम लोग भी अपने कपड़े, नहाने का मज़ा लेते है।

सभी लोग अपने कपडे निकालकर अपने शरीर से अलग कर दिया और सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई। सभी लोग एक दूसरे के शरीर को देखकर मुस्कुराने लगे।

राजेश ने जब शशि, उर्मिला और चारो लड़कियों को सिर्फ ब्रा और पैंटी में देखा तो उसके land का बुरा हाल हो गया।

Land पानी के अदंर तनकर खड़ा हो गया।

अच्छा huwa Jo वह पहले ही पानी के अदंर आ गया। नही तो उसके land की हालत सब को पता चल जाता।

इधर सुनिता को सभी पर बहुत गुस्सा आ रहा था। उसे लग रहा था की ये लोग मेरे राजेश को पटाना चाहते हैं। इन लोगो के इरादे ठीक नही लग रहे थे। पर वो इन लोगो की हरकतों को देखने के अलावा कुछ कर भी नही सकती थी।

एक एक करके सभी टंकी के अदंर उतरने लगी। राज तो इन लोगो की खूबसूरत बदन को देख कर बहुत अधिक गर्म हो गया। न चाहते हुवे भी उसका हांथ पानी के अदंर उसके land par चला गया। और उसे सहलाने लगा।

राजेश _शाली सब एक से बढ़कर एक है। औरते तो रंभा, मेनका और उर्वशी, स्वर्ग की अप्सराये लग रही। और लड़किया तो परी से कम नहीं।

ऐसा लग रहा है की मैं जन्नत में आ गया हू। पर मुझे इन लोगो से दूर रहना पड़ेगा नही तो मेरे land का हालात इनको पता चल जाएगा।

उर्मिला की नितंब को देखकर राजेश ने मन में कहा क्या मस्त चूतड है शाली की, पीछे से लेने में मजा ही आ जायेगा।

इधर सुनिता ने जब राजेश की नजरो को देखा जो इन औरतों और लड़कियों की जवानी का आंखो से रसपान करता। तो अपना माथा पीट ली।

कही ये सांड पानी में ही इन गायों के उपर न चढ़ जाए। हे भगवान मै क्या करू। ये शशि तो है ही चुदक्कद अपने भतीजे से chudwati है।

इधर सभी लोग नहाने का मज़ा लेने लगे, एक दूसरे के उपर पानी फेकने लगे।

एक दूसरे को पकड़ा पकड़ी करने लगें। एक दूसरे को चिकोटि काटते, जल क्रीड़ा का मज़ा लेने लगे।

राजेश उन लोगो से दूर रहने की कोशिश करता रहा।

कुछ देर ऐसी ही खेल खेलने के बाद।

स्वीटी _चलो हम सभी एक खेल खेलते है।

उर्मिला _कैसा खेल?

स्वीटी _किसमे कितना है दम।

शशि _ये कैसा खेल।

स्वीटी _राज भइया को उठाकर जो महिला या औरत इस छोर से उस छोर तक जितना अधिक दूर तक ले आयेगा ,वह जीत जाएगी।

पायल _पर दीदी राजेश भइया तो बहुत भारी होंगे उसे हम कैसे उठा पाएंगे।

स्वीटी _अरे, नही रि पानी में तो सब हल्के हो जाते हैं। तुम मुझे उठा कर देखो।

पायल स्वीटी को उठाकर देखी , स्वीटी को आसानी से उठा ली।

पायल _अरे हा दीदी, तुम तो आसानी से उठ गई।

स्वीटी जानबूझकर ऐसा खेल खेलना चाहती थीं कि उन्हें राजेश से चिपकने को मिले।

स्वीटी _चाची, तुम लोग तैयार हो की नही खेल खेलने या अपनी हार मान लो।

उर्मिला _नही बीना खेले मै हार मानने वाली नही।

पर जीतने वाली की मिलेगी क्या?

राजेश _अच्छा मै भी तो देखू तुम लोगो में कितना दम है। अगर जीत गई तो मैं जीतने वाली जो कहेगा वही करूंगा।

देखता हूं मैं भी कौन मुझे मेरी जगह से हटाकर अपने साथ ले जा सकने की ताकत रखती है।

Switi _लो राजेश भइया ने तो हमको चैलेंज दे दिया।

अब क्या तैयार हो, चैलेंज के लिए।

सभी ने हा कहा,

तो ठीक है, हम उम्र के हिसाब से ट्राई करेंगे, पहले वो जायेगी जिसकी उम्र कम हो और बाकी लोग उसकी उत्साह वर्धन करेंगे, ताली बजाकर।

जाओ पायल तुम पहले जाओ।

अभी तुमने मुझको जैसे पकड़कर उठाई, भइया को भी उठाना और उसे उठाकर ले आना।

उर्मिला शशि और switi अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। ताकि वह राजेश से चिपक सके।

इधर सुनिता इन लोगो की हरकतों को देख रही थी। और गुस्सा कर रही थी। पर ये लोग मना करने पर भी कहा मानने वाले थे, वह मन मसोस कर रह गई।

 
एक एक कर सभी ने कोशिश किया पर कोई कामयाब नही हुवे।

सुनिता को पता चल गया था कि ये लडकिया राजेश से चिपकर मजा ले रहे हैं। उसे गुस्सा आ रहा था।

सुनीता _राजेश को उठाना तुम लोगो की बस की बात नही, अब यह खेल बंद करो राजू और चौकीदार आता ही होगा।

Switi _मां, मुझे लगता है कि तुम्हे बहुंत जलन हो रही है। हमे यह खेल खेलते देख। अगर तुममें दम है तो मैदान में आ क्यू नही जाती।

सुनिता _अगर मै आ जाऊ और जीत जाऊ तो क्या ये खेल बंद कर दोगे बोलो।

Switi _हां, ठीक है दिखाओ अपना दम। हम भी तो देखे कितना दम है आपमें।

अब सुनिता भी, अब अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट को उतार फेकी और ब्रा पेंटी में आ गई। उसकी खूबसूरती देखकर सब दंग रह गए।

उर्मिला _इस उम्र में भी दीदी का बदन, जवान लड़कियों को मात दे रही है? कितना खूबसूरत बदन है, काम की देवी रति से कम नहीं लग रही।

राजेश तो पहले से ही अपने मां के बदन का दीवाना था।

वह अपनी मां के हुस्न का आंखो से रसपान करने लगा। मन में बोला, सच में मां के जैसा बदन तो किसी का नही।

सुनीता अब पानी के टंकी में उतर गई और राजेश की ओर बढ़ने लगी। सभी लोग खामोशी से देखने लगें।

सुनिता _क्यू बेटा, लडकियो पर तो अपनी खूब ताकत दिखाया अब अपनी मां पर दिखा।

राजेश _मां, आप कहो तो, अपनी हार स्वीकार कर लूं।

सुनीता _न बेटा, ऐसा न करना। मुझे भी दिखाना है की मै भी तुम्हारी मां हूं।

राजेश _तो, ठीक है मां, आप भी आजमा कर देख लो।

सुनिता राजेश के पीछे गया, और दोनो हाथो से राजेश की क़मर को पकड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश की, पर राजेश ने भी अपना पैर पानी के नीचे पूरी ताकत से जमा रखा था।

पीछे से कोशिश करने पर वह कामयाब न हुई। अब वह सामने आ गई। सामने आकर जैसे ही वह राजेश के क़मर कूल्हे को दोनो हाथो से पकड़कर उपर उठाने की कोशिश की उसका शरीर राजेश से चिपक गई। जिससे सुनिता को राजेश का खड़ा land का पता चल गया, अब सुनिता मुस्कुराने लगी।

राजेश _क्या huwa, मां, नही हो पा रहा आपसे।

उधर सभी अपना मुंह बन्द कर हंसने लगे।

सुनिता, मुसकुराते हुवे एक हाथ से पानी के साथ राजेश के लग को पकड़ ली और उसके अंडकोष को सहलाने लगी।

राजेश _मां, ये क्या कर रही हो।

सुनिता _क्यू, बच्चू अब दिखा अपनी ताकत

अब सुनिता, राजेश के पीछे गया और एक हाथ राजेश के टांगों के नीचे ले जाकर उसके land को पकड़कर उपर ताकत लगाया।

राजेश _मां छोड़ो, दर्द कर रहा। राजेश अपना शरीर ढीला छोड़ दिया, और उपर उठ गया।

सुनिता धीरे धीरे राजेश को दूसरे किनारे तक ले गई।

सभी, अचरज भरी नजरो से दिखने लगें।

सुनिता _जीत चुकी थी।

राजेश _मां ये चीटिंग है।

सुनिता _अच्छा मैने क्या चीटिंग की है बताओ सबको।

राजेश _किसी को बता न सका।

सुनिता _मै जीत गई, अब शर्त के अनुसार ये खेल बंद करना होगा।

स्वीटी, उर्मिला और शशि का मुंह उतरा huwa था। कितना अच्छा मौका था राजेश से चिपकने का, सुनिता ने अरमानों पर पानी फेर दिया।

सुनिता _अब निकलो सभी पानी से, बहुत नहा लिए।

स्वीटी _मां, राजु को कपडे तो ले आने दो, तब तक तुम भी नहाने का मज़ा ले लो।

सुनिता _राजेश बेटा तुम बाहर निकलो, और थोडा धूप में खड़ा हो जाओ, फिर अपना कपड़ा पहन लेना, जब राजू आ जाए तो, कपडे हमे लाकर दे देना।

राजेश _पर मां अंडर वियर इतनी जल्दी सूखेगा कैसे?

सुनिता _बिना अंडर वियर के पैंट पहन लो, घर में जाकर, अंडर वियर पहन लेना।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश जब पानी से बाहर निकला तो सभी की नजर उसके अंडर वियर पर ही थी।

उसका land अभी भी अकड़ा huwa था। पायल, चंचल और सोनी तीनो राजेश के खड़े land को देखकर शर्म से पानी पानी हो रही थी ये वही land है, जिसपर राजेश ने उसे बिठा कर जन्नत की सैर कराया था।

शशि, उर्मिला और स्वीटी पछता रही थी की राजेश से चिपकने को नही मिला।

इधर सुनिता मुस्कुरा रही थी की वह स्वीटी को राजेश से चिपकने से रोक दी।

राजेश थोड़ी देर धूप में खड़ा होने के बाद अपना अंडर वियर निकाल कर अपना कपड़ा पहन लिया। कुछ समय बाद राजू और चौकीदार भोजन और कपडे लेकर आ गए।

राजेश उन लोगो के पास जाकर भोजन के बर्तन डिब्बों एवम बर्तन को फार्म हाउस में बने कमरे में रखने में मदद किया फिर राजू के द्वारा लाए गए अंतर्वस्त्र को लेकर अपने साथ ले गया जहां मां चाची और बहन नहा रही थी। अब सभी टंकी से बाहर आकर अपना पेंटी ब्रा चेंज कर कपड़ा पहन लिए। और थोड़ी देर धूप में खड़ा होकर अपनी बाल सुखाए। फिर फार्म हाऊस में बने कमरे में चले गए। वहा जाकर वे लंच की तैयारी करने लगें। लंच के लिए काफी सारी व्यंजन बनाया गया था।

व्यंजनों के डिब्बों के ढक्कन खोल दिए गए।

सभी लोग थाली लेकर अपनी पसंद की चीजों को निकालकर भोजन का आनंद लेने लगे।

भोजन की सभी तारीफ करने लगें।

वे खाफी थक गए थे सभी को जोरो की भूख लगी थी, सभी ने भोजन का जमकर लुप्त उठाया।

भोजन करने के बाद , उर्मिला ने चौकीदार से कहा जाओ, कुछ फल और सब्जियां तोड़ दो। कल दीदी लोग जब घर जाएंगे तो ले जाएंगे।

राजेश _मां मै और राजू भी चलते है, फल तोड़ने, बताओ किसको कौन से फल खाना है?

स्वीटी _भैया मेरे लिऐ तो अमरूद लाना।

और मां के लिए लंबा और मोटा केला, मां को लंबा और मोटा केला खाना बहुत पसंद है? क्यू मां?

सुनिता _ये क्या कह रही है? तुमने कब देखी, मुझे लंबा और मोटा केला खाते। झूठी कही की।

शशि और उर्मिला हसने लगी।

राजेश _मुझे लगता है सभी औरतो को लंबा और मोटा केला पसन्द है सभी के लिए केला ले आते हैं। और लड़कियों के लिए अमरूद।

राजू तुम्हे क्या पसंद है?

राजू _भइया मुझे तो पपीता बहुंत पसन्द है। राजू अपनी मां की चूची की ओर देखते हुवे कहा।

राजेश _ठीक है, हम सभी फल ले आते है जिसको जो पसंद है खा लेना।

सुनिता _हा, ये ठीक रहेगा।

राजू और राजेश सभी प्रकार के फल तोड़कर ले आए वे सभी फल का आनद लेने लगे। पेड़ का पका फल शहरों में मिलता कहा है। पेड़ पर पका फल का स्वाद ही कुछ अलग होता है?

चौकीदर भी सब्जियां, फ़ल तोड़कर ले आया उसे उर्मिला ने गाड़ी में रखने को कह दिया। राजेश ने घड़ी पर समय देखा 4बज चुके थे।

सुनिता _चलो, अब हमें यहां से निकलना चाहिए।

अब वे सभी कार में बैठकर घर के लिए निकल पड़े।

घर पहुंचने के बाद देखा घर में नौकर लोग ही थे मोहनलाल, मदनलाल और शेखर तीनो दुकान में थे।

इधर सभी थके हुवे थे फार्म हाउस से आने के बाद, सोफे पर बैठ गए।

उर्मिला _सभी थके हुवे है, चलो सभी अपने कमरे में जाकर थोडा आराम कर लेते है।

दीदी आओ मै आपको आपका कमरा दिखा दू।

राजू _राजेश भइया चलो आप मेरे रूम में हम दोनो आराम करेंगे।


सोनी _स्वीटी, दीदी चलो तुम मेरे कमरे में, हम दोनो मेरे कमरे मे आराम करेंगे।

चंचल _नही, स्वीटी दीदी मेरे कमरे में आराम करेगी।

सभी लड़किया झगड़ने लगी।

स्वीटी _अरे, यार आपस में झगड़ो मत, किसके रूम का बेड बड़ा है चलो हम चारो वही आराम करेंगे।

सभी लड़किया खुश हो गए।

सोनी _दीदी मेरे रूम में चलते हैं। सभी रूम में जाकर आराम करने लगें।

कुछ देर बाद मोहनलाल और शेखर भी आ गए वे भी रूम में जाकर आराम करने लगे।

शशि _आ गए आप, कहा थे आप लोग,

लंच किए हो की नही।

मोहनलाल _ हा, हमलोग घर आकार लंच कर लिए थे।तुम लोगो को फार्म हाउस में मजा आया की नही!

शशि _हा, जी वहां तो सभी लोगो को बहुत मजा आया।

शशि मोहनलाल से _सुनो जी मैं कह रहि थी की डिनर में अगर राजेश के पापा और राजेश नॉनवेज खाते होंगे तो चिकन या मटन या मछली मंगा लेते। और भाई साहब से पूछ लेते कही ड्रिंक चलता हो तो उसका भी व्यवस्था कर लेना।

मोहनलाल _वाह, तब तो आज मज़ा आ जायेगा, कितने दिनों बाद तुम नॉनवेज खाने और डपीने की इजाजत दे रही हो। आज तो पार्टी करेंगे।

शशि _अरे घर में मेहमान नवाजी करने के लिऐ इजाजत दे रही हू। नही तो तुम्हारा पीना खाना मुझे बिलकुल पसन्द नही। पीने के बाद तो तुम किसी लायक रहते नही घोड़े बेच कर सो जाते हो।

मोहन लाल _हा, ये तो है भई। पर बड़े दिनों से इच्छा थी मेरे खाने पीने की।

उधर उपर में राजू और राजेश चर्चा कर रहे थे।

राजू _भाई,मुझे तो सबके साथ नहाने का मौका ही नही मिला आप तो खूब मजे किए होंगे।

राजेश _मज़ा तो आया पर, पुरा मजा नही ले पाया।

राजू _कोई बात नहि भाई, आ रात में खूब मजा करेंगे?

राजेश _वो कैसे?

सब के सोने के बाद चाची और मां हमारे कमरे में आएगी। फिर जैसे मज़ा लेना है ले लेना। मुझे भी आपसे सीखने को मिलेगा।

राजेश _अगर ऐसा है तो, फिर आज की रात तो यादगार बन जायेगा। एक साथ दो दो का मज़ा।

इधर उर्मिला सभी को चाय पीने के लिए, सभी को बुलाने, नौकरानी को भेजी, कुछ ही देर में सभी लोग चाय के लिए हाल में एकत्र हो गए।

सभी लोग चाय का आनंद लेने लगे। चाय पीने के बाद।

सोनी _स्वीटी दी चलो न, हम मेला घूमने चलते है, वहा झूले का मज़ा लेंगे। चंचल और पायल भी जाने के लिए जिद की।

उर्मिला _बच्चो का मन है तो, राजेश और राजू आप लोग इन लोगो को मेला ले जाओ। डिनर के समय घर आ जाना।

राजेश _ठीक है चाची।

राजू और राजेश स्वीटी, चंचल, पायल और सोनी मेला घूमने चले गए।

उर्मिला _दीदी आप लोग नॉनवेज खाते है कि नही।

सुनिता _मै और स्वीटी नॉनवेज नही खाते राजेश और उसका पापा कभी कभी नानवेज में चिकन, मछली अंडा या चिकन खा लेते है।

उर्मिला _हमारे घर में भी ऐसा ही है।

मर्द लोग ही ये सब कभी कभी खाते हैं, महिलाये नही।

नॉनवेज उपर के कीचन में ही नौकर लोग बनाते है।

और वे लोग उपर ही जाकर खा लेते है।

उर्मिला ने बाजार से नौकर को अंडा, चिकन और मछली लाने के लिए बोल दिया।

महिलाए डिनर की तैयारी में लग गए।

मोहन लाल और शेखर टहलने के लिए निकल गए।


जब डिनर का समय huwa तो सभी लोग घर पहुंच गए।

मदन लाल भी शो रूम बन्द कर घर आ गया।

राजेश, राजू और लड़किया भी मेले में इंजॉय करके घर आ गए।

उर्मिला _अपने पति से बोली, जाओ जी आप लोगो का डिनर की व्यवस्था उपर किया गया है भाई साहब को उपर ले जाकर आप लोग डिनर करो।

सभी पुरुष उपर चले गए।

मोहन लाल ने डाइनिंग टेबल पर विस्की, बीयर की बोतल रख दी। शेखर से बोला।

भाई साहब आप क्या लेंगे।

शेखर _भाई मैं तो वैसे पीता नही हूं पर, दोस्तो के जिद करने पार बीयर पी लेता हूं।

मोहनलाल _ठीक है भाई साहब आप बीयर का मज़ा लीजिए।

मोहनलाल ने शेखर के लिए गिलास में बीयर डाला और अपने और मदनलाल के लिए विस्की।

नौकर ने चखने के लिए चीकन, मछली और अंडा टेबल पर लगा दिया। राजू और राजेश दुसरे टेबल पर बैठ कर भोजन करने लगें बड़े दिनो बाद वे भी चीकन, मछली और अंडा का आनंद लिया।

इधर मदनलाल ,शेखर और मोहनलाल तीनो पीने और खाने का मज़ा लेने लगे। काफी दिनों बाद उन्हें पीने को मिला था।

उनकी पत्नियां पीने से मना करती थी। आज तो उन्ही लोगो ने इजाजत दी थी। जी भर कर पीने लगे।

उन तीनो पर नसा हावी हो गया।

इधर भोजन करने के बाद राजू और राजेश दोनो राजू के रूम में चले गए।

नीचे महिलाए भी डिनर कर लिए।

मदन लाल, शेखर और मोहनलाल काफी देर तक भोजन कर लेने के बाद भी बाते करते रहें। फिर वे तीनों भी लड़खड़ाते कदमों के साथ नीच जाकर अपने अपने रूम में चले गए, नौकर ने उनकी मदद की।

महिलाए भोजन कर लें ने के बाद देर तक बात चीत करती रही। फिर वे भी सोने के लिए अपने अपने रूम में चले गए।

चारो लड़किया एक ही रूम में सोने चली गई।

इधर राजेश के उपर अंडे की गर्मी चढ़ना शुरू huwa उसका land एकदम सख्त हो गया।

वह अपने land को सहलाते हुए कहा, राजू ये चाची लोग कब आयेंगे।

राजू _भाई सब्र करो आते ही होंगे वे दोनो।

राजू ने अपनी मां को मैसेज किया, मां और कितनी देर लगेगी आने में राजेश भाई से सब्र नहीं हो रहा।

उर्मिला ने जब मैसेज पढा तो वह खुश हो गई बेटा बस थोड़ी देर में आ रहे हैं।

इधर मदनलाल और मोहन लाल नसे में बेसुध होकर सो रहे थे।

उर्मिला और शशि दोनो अपनी रूम से निकल कर हाल में आ गई।

उर्मिला _शशि, देवर जी सो गया क्या।

शशि _वो टू नसे में बेशूद होकर सो रहे हैं।

उर्मिला _तुम्हारे जेठ का भी वही हाल है।

शशि _तो चले मोटे और लम्बे land ka मजा लेने।

दोनो मुस्कुराते, हुवे उपर जाने लगी।

इधर राजेश का land यह सोचकर की आज दो खूबसूरत बदन को एक साथ भोगेगा, सोंचकर हवा में ठुमकने लगा था। राजेश अपने land को सहलाते हुवे उन दोनो के आने का इंतजार करने लगा।
 
जब शशि और उर्मिला दोनो सीढ़ी पर चढ़ रही थी तभी पीछे से आवाज़ आई, शशि।

ये आवाज़ सुनिता की थी।

उर्मिला और शशि ने पीछे मुड़कर देखा, सुनिता उनके ही ओर आ रही थी।

शशि _दीदी, ये सुनिता दीदी तो लगता है हमारा सारा प्लान चौपट कर देगी, अब क्या करे।

जब सुनिता उनके पास आई,,,

उर्मिला _दीदी अब तक आप सोई नहीं।

सुनिता _नींद नही आ रही थी, तो थोडा टहलने का मन किया, इतने में आप लोग आप दिखाई दी।

शशि _दीदी, हमे भी नींद नहीं आ रही थी, तो खुली हवा खाने, ऊपर छत पर जा रहे थे।

चलो आप भी हमारे साथ, छत पे।

सुनिता को शुरू से ही शशि पर सक था की रात में ये राजेश के साथ गड़बड़ न करे इसलिए सो नही पा रही थी।

अब तीनो छत पे चले गए। छत पर ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। मकान के गार्डन पे कई खुशबूदार फूल वाले पेड़ लगे थे। जिनकी महक तीनो औरतों को पुरुष सानिध्य के लिए उकसा रहे थे।

शशि _उर्मिला दीदी, फूलो की कितनी अच्छी खुशबू आ रही है। मुझे तो मेरे सुहागरात का दिन याद आ गई। उस दिन ऐसे ही फूलो से सुहागरात की सेज को आपने ही तो सजाया था।

उर्मिला _हा re याद है मुझे। वो फूल मैने ही मंगवाया था, तुम्हारी और देवर जी की सुहागरत की सेज के लिए। अपने हाथो से सजाया था।

शशि _आज फिर से मन था, पहले रात की तरह रोमांस करने की, पर वो तो नसे में बेशुद होकर सो रहे हैं।

सुनिता, दी मुझे आपसे एक बात पूछनी थी, आप हमसे बड़ी है क्या अच्छा, क्या बुरा को हमसे ज्यादा बेहतर समझती है। क्या आप मेरे सवालों की जवाब देंगी?

सुनिता _क्या बात पूछनी है पूछो, अगर मै आपके सवालों का जवाब दे पाऊं तो बड़ी खुशी होगी।

शशि _दी, यदि किसी महिला का शरीर पुरूष संसर्ग के लिए तड़प रही हो। और उसका पति उस महिला की इच्छाएं पूरी न कर सके, तो उस महिला को क्या करना चाहिए। ऐसे में महिला को दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए की परिवार के मान मर्यादा के लिऐ जिंदगी भर अपनी इच्छाओं को दबाकर जीना चाहिए जो की काफ़ी मुस्किल होता है।

सुनिता _एक महिला के लिए तो परिवार की मान मर्यादा ही सब कुछ होना चाहिए। यदि इसके लिए उसे अपनी इच्छाओं को दबाकर जीना पड़े तो भी।

शशि _और अगर दीदी बीच का कोई ऐसा रास्ता निकल जिससे बाहर परिवार की बदनामी भी न हो और औरत की इच्छा भी पूरी हो जाए तो क्या उस महिला का उस रास्ता को अपनाना गलत है?

सुनिता _पाप तो आख़िर पाप होता है, चाहे घर के बाहर करे या भीतर। पर परिस्थिति कुछ ऐसी बन जाय की हम उस रास्ते पर चलना पड़े तो, सब कुछ तकदीर पे छोड़ना ही बेहतर है।

शशि _बस,यही सुनना चाहती थी दीदी मैं।

सुनिता _मै जानती हू, की तुम भी,,

सुनिता यह कहते हुए रुक गई,,

शशि _क्या जानती हो दीदी रुक क्यू गई बोलो?

उर्मिला _मैने कल जंगल में तुम्हे राजू के साथ देखा था।

शशि _क्या?

सुनिता _हा

शशि _पर आप वहा कैसे?

सुनिता ने सारी बातें बता दी की वह और राजेश कैसे वहा पहुंचे थे।

शशि ने अपने राजू और उर्मिला के बीच बने संबंध के बारे में सारी बातें बता दी।

सुनिता आश्चर्य से सारी बातें सुनती रही।

शशि _दीदी, एक बात और है जिसके बारे में आपको पता नही होगा।

सुनिता _कौन सी बात।

शशि _राजेश ने उस दिन मेरे साथ जबरदस्ती किया था।

सुनिता _शशि, ये तुम क्या कह रही हो। तुम झूठ बोल रही हो।

शशि _दीदी मै सच कह रही हू। राजेश ने हमें ब्लैक मेल कियाऔर मुझे मजबूरी में उनके साथ संबंध बनाना पड़ा।

सुनिता _नही, मै ये नही मान सकती, मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता। मै ये नही मान सकती। राजेश किसी महिला के साथ जबरदस्ती, नही तुम उस पर झूठा इल्जाम लगा रही हो।

शशि _नही दीदी ये सच है ।

सुनिता से रहा न गया, वह तेज कदमों के राजू के कमरे की ओर जाने लगी।

शशि _दीदी कहा जा रही हो रूको।

सुनिता नही रुकी और वह तेजी से राजू के कमरे की ओर जाने लगी।

उर्मिला और शशि दोनो उसको रोकने की नाकाम कोशिश करते हुवे उसके पीछे पीछे जाने लगी।

राजू का कमरा खुला था वह अदंर घुस गई।

वह अदंर जाकर राजेश को आवाज़ दी। राजेश

राजेश अपनी मां की आवाज़ सुनकर बेड से उठ गया।

राजेश _क्या huwa मां, तुम यहा।

सुनिता _मत कहो, अपनी गंदी जुबान से मुझे अपनी मां।

राजेश _पर मां बात क्या है?

सुनिता _क्या, तुमने शशि और राजू को ब्लैकमेल कर शशि के साथ जबरदस्ती किया, बोलो जवाब दो।

शशि और उर्मिला भी सुनिता के पीछे खड़े थे। शशि पछता रही थी की यह बात उसने सुनिता को क्यू बताई।

राजेश, शशि की ओर देखने लगा।

शशि अपना सिर नीचे कर के खड़ी थी।

सुनिता _बोलो, जवाब दो, इधर उधर क्या देख रहे हो।

क्या तुमने शशि के साथ जबरदस्ती की।

बोलो।

राजेश _मां, मूझसे गलती हो गई मैं बहक गया था।

मुझे माफ़ करदो।

सुनिता _अपना माथा पकड़कर कमरे पर रखे सोफा पर बैठ गईऔर रोने लगी।

हे भगवान ये सुनने के पहले मैं मर क्यू नही गई। मेरे संस्कार में क्या कमी रह गई थी।

तुमने एक औरत को ब्लैकमेल कर, उसके साथ जबरदस्ती किया।

सुनिता, रोने लगी।

राजेश उसके पैर पकड़कर माफी मांगने लगा।

मां, मुझे माफ़ कर दो, मूझसे गलती हो गई।

सुनिता _मुझे मत छुओ अपने गंदे हाथो से, और मत बोलो मुझे अपनी मां। मै सपने में भी नही सोच सकती थी, की तुम ऐसी हरकत कर सकते हो।

क्या माफी मांगने से तुम्हारे पाप धुल जाएंगे।

उर्मिला _दीदी उसे माफ़ कर दो, जवानी के जोश में वह ऐसा गलती कर बैठा। इसने राजू और शशि की जान भी तो बचाया।

सुनिता _नही, उर्मिला नही, इसने बहुत बड़ा गुनाह किया है।,जो माफी लायक नहीं है। ये शशि का दोषी है। इसे सजा मिलनी ही चाहिए।

शशि _ दी,जवानी में गलती हो जाती है। मैने राजेश को माफ कर दिया है।

सुनिता _नही शशि, इसनेकोई छोटाअपराध नहीं कियाहै , इसने तुम्हारा बलात्कार किया है।ये तुम्हारा गुनाह गार है इसे कड़ी से कड़ी सजा दो। तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।

शशि _दी तुम यहीं चाहती हो न की मैं राजेश को उसके किए की सजा दू।

सुनिता _हा, इसे कड़ी से कड़ी सजा दो।

शशि _तो ठीक है ,दीदी इसने राजू के सामने मेरे मेरे साथ जबरदस्ती किया था, आज मैं और दीदी तुम्हारे सामने इसके साथ जबरदस्ती करेंगे। यही इसकी सजा है।

राजू वही पर खड़ा था, वह भी सोच रहा था कि ये क्या हो गया, आज प्लान मजा करने का था। पर ये तो सजा की बात हो रही है।

उर्मिला _राजू बेटा तुम नीचे जाओ और सोफे में आराम करना, तुम बाद में आना।

राजू _ठीक है मां।

राजू वहा से चला गया।

उर्मिला _दी, अगर तुम यहीचाहते हो की राजेश को हम सजा दे, तो ठीक है। तुम्हारे सामने हम उसको सजा देंगे, उसके साथ जबर्दस्ती करेंगे। जैसे शशि के साथ इसने किया था। और वह शशि की ओर देखकर, बोली।

शशि देख क्या रही हो निकाल दो इसके सारे कपडे।

शशि राजेश की ओर आगे बड़ी।

राजेश _मां, रोको इन्हे।

सुनिता, खामोश रही और अपना सिर पकड़कर सोफे में बैठकर आंसू बहाने लगी।

इधर शशि ने राजेश का टी शर्ट निकालने लगी। उर्मिला ने उसका लोवर निकाल कर अलग कर दिया।

राजेश _मां, रोको इन्हे।

सुनिता _तुम्हारी, यही सजा है, तुमने एक औरत की मजबूरी का फायदा उठाया है। अब ये भी वही करेंगे जो तुमने शशि के साथ किया था। मर गई तुम्हारी मां। मै सोच भी नही सकती की मेरा बेटा ऐसा कर सकता है। शशि तुम्हारे जो जी में आए उसके साथ करो मै नही रोकूंगी।

सुनिता सुबकने लगी।

उर्मिला और शशि मुस्कुराने लगी, आख़िर सुनिता खुद ही राजेश के साथ कुछ भी करने की इजाजत दे रही थी।

शशि ने अब राजेश का बनियान भी निकाल दिया। अब राजेश सिर्फ चड्डी में था।

उसे भी उर्मिला ने अपने दोनो हाथों से खींचकर नीचे कर दिया।

राजेश का land सिकुड़ा huwa था।

उर्मिला ने जब राजेश के land को देखा,,,,

उर्मिला_शशि इसका तो , चूहा लग रहा है तुम तो कह रही थी इसका काफी लंबा और मोटा है।

शशि _दीदी अभी ये मुरझाया huwa है।

क्यू राजेश, कल तो तेरा मेरे साथ जबर्दस्ती करने के लिए खूब लंबा और मोटा होकर सांप की तरह फुफकार रहा था, आज क्या हुवा?

उर्मिला _शशि,कोई बात नही अभी इस चूहे को सांप बना देते हैं।

उर्मिला और शशि दोनो राजेश के पैरो के नीचे फर्श पर बैठ गई।

और राजेश के land को बारी बारी से मुंह में लेकर चूसने और उसके अंड कोश को सहलाने लगी।

इधर राजेश का ध्यान अपने मां पर था जो आंसू बहा रही थी।

काफी देर तक land चुसने एवम सहलाने के बाद भी जब राजेश का land खड़ा नही huwa तब,,

उर्मिला _शशि इस पर तो कुछ असर ही नही हो रहा है।

शशि _दीदी, अभी ये चूहा सांप बनकर फुफकार मारेगा, पहले इसको उसका बिल दिखाना पड़ेगा। चलो अपना कपड़ा उतारो और चूहे को बाल दिखाओ।

अब दोनो औरते एक एक करके अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटी कोट फिर ब्रा और अंत में पेटिकोट निकाल दी, और फिर शशि ने राजेश के सिर को अपनी ओर करते हुवे बोली,, इधर देख re अपनी मां की ओर क्या देख रहा है।

साब तुम्हारा ही किया धरा है जो उसकी ये आज हालात है।

अब इधर ध्यान दे, ये चूची जिसे कल तुम खूब मसल मसल कर चूसा था।

चल आज फिर इसे पी। और राजेश के सिर को अपने चूची पर दबाकर,चूचक को मुंह में डाल दिया।

इधर उर्मिला, ने राजेश के land को मुंह में लेकर फिर से चूसना शुरू कर दिया

इधर राजेश शशि की चूची को चूस जरुर रहा था। पर उसका ध्यान अपनी मां पर ही लगा huwa था जिसके कारण उर्मिला और शशि के काफी कोशिश करने के बाद भी राजेश का land खड़ा ही नहीं huwa

उर्मिला _शशिइसका तो चूहा का चूहा ही है। खडा ही नहीं हो रहा। तुम तो इसकी मर्दाना ताकत की काफी तारीफ कर रहि थी, पर मुझे तो राजेश नामर्द लग रहा है देखो न दो दो खूबसूरत औरते इनके सामने नंगी खड़ी है जिसे देखकर नामर्द भी मर्द बन जाए, पर इसके नुनु पर तो कुछ असर ही नही huwa था।

शशि _राजेश, आज तुम्हे क्या हो गया है, कल तो बड़ी ताकत दिखा रहे थे। कही कल कोई दवाई तो नही खा ली थी आज क्या huwa तुम्हारी मर्दानगी को।

उर्मिला _शशि, रहने दो इससे कुछ नही होने वाला, इससे अच्छा तो हमारा पति है जो हमारी आग को बुझा तो नही सकते पर बड़ा तो सकते हैं , इससे तो यह भी नही हो सकता।

तुम बेकार में ही इसकी मर्दानगी कि तारीफ कर रही थी।

इधर सुनिता राजेश के बारे में ये सब सुनके बहुत अपमानित महसूस कर रही थी।

उर्मिला _सुनिता, दी मुझे लगता है राजेश को इलाज की जरूरत है। राजू नामर्द है,,

सुनिता का सब्र टूट गया,,

सुनिता _चुप हो जाओ,, मेरा बेटा नामर्द नही

अब खडा होकर मेरी तरफ अपनामुंह लटका कर क्या देख रहा है। अपनी मां की और कितनी बेज्जती कराएगा, अगर मेरी दुध पिया है तो इन रंडियों की chut फाड़और इतना चोद कि कल चलने फिरने लायक न रहें।

राजेश अपनी मां की बात सुनकर जोश से भरने लगा।

वह दोनो हाथो से उन दोनो औरतों की बालो को पकड़कर उपर उठाया।

और स्वयं अपने दोनो पैर फर्श पर रखकर अपनी टांगे चौड़ी कर बेड के किनारे बैठ गया, दोनो औरतों को अपनी एक एक जांघ पर बिठा दिया, अपने हाथो से दोनो कि एक एक चूचियां पकड़कर मसलने लगा।

फिर वह उर्मिला सिर पकड़कर उसका मुंह अपनी ओर किया और उसके ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।

उर्मिला के मुंह को जी भर के चुसने के बाद शशि ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।

जी भरकर होंठ चूसने के बाद राजेश ने उन दोनो को खडा किया और उन दोनो के खूबसूरत बदन लो गौर से देखने लगा, वह अपने दोनो हाथ से दोनो के मस्त चिकनी फुली हुई गोरी गोरी chut को अपने हाथो से सहलाने लगा।

उन दोनो के खूबसूरत बदन को देखकर राजेश का शरीर गर्माने लगा धीरे धीरे उसके land के नशों में खून भरने लगा, उसके land पर तनाव आने लगा।

अब राजेश दोनो औरतों के बड़ी बड़ी मस्त चूचियों को अपने हाथों से मसकर उसके चुचक को मुंह में भरकर चुसने लगा। उर्मिला और शशि दोनो के मुंह से सिसकारी निकलने लगी। दोनो के chut से रस बहना शुरू हो गया।

राजेश _देखना है न मेरी ताकत, तो चूसो मेरा land

उर्मिला और शशि फर्श पर बैठ गई। राजेश का आधा खडा land को उर्मिला अपनी मुंह में भर ली और चूसने लगी जबकि शशि राजेश के गोटे को सहलाने लगी।

दोनो को इस हरकत से राजेश उत्तेजित हो गया। उसका land तनकर लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।land उर्मिला के मुंह में नही समा रहा था।

राजेश के land की लंबाई और मोटाई को देखकर उर्मिला का मुंह खुली की खुली रह गई।

हे भगवान इतना बड़ा, वे तो chut ka कबाड़ा कर देगा।

उर्मिला राजेश के land को kutiya बन कर चाटने लगी। राजेश ने शशि को इशारा किया।

शशि समझ गई राजेश क्या कह रहा है।

शशि, उर्मिला के पीछे जाकर उसकी chut को चाटने लगी। उर्मिला के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी। वह अपनी chut से पानी छोड़ने लगी। जिसे शशि पी पी कर चाटने लगी।

अब राजेश ने उर्मिला को ऊपर उठाया और उसे बेड पर झुका दिया। उर्मिला बेड पकड़कर kutiya बन गई।

राजेश शशि के ओंठ चुसने लगा, एक हांथ से उर्मिला के chut सहलाते हुवे उर्मिला के कूल्हे के पीछे खडा हो गया।

अब शशि ने राजेश के land को पकड़कर उसे पहले चूसा फिर उसे उर्मिला के chut के छेद पर भिड़ा दिया ।

राजेश ने उर्मिला के chut पर एक धक्का मारा,land का टोपा उर्मिला की बुर के अंदर चला गया।

अब राजेश उर्मिला के क़मर को पकड़कर एक जोर का धक्का मारा,land बुर को चीरता हुआ आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।

उर्मिला जोर से चीख पड़ा।

इधर सुनिता केदिल को उर्मिला की चीख सुनकर कुछ ठंडक मिला,,kutiya मेरे बेटे को नामर्द कह रही थी। अब पता चलेगा मेरा बेटा क्या है?

इधर राजेश राजेश झुककर उर्मिला के चूची को पकड़कर मसलने लगा, जिससे उर्मिला को अच्छा लगने लगा अब राजेश अपने land को थोडा बाहर खींचा और एक जोर का धक्का मारा land बुर को फाड़कर जड़ तक अंदर घुस गया।

उर्मिला फिर से जोर से चीख पड़ी, उई मां, मर गई re, उसके आंखों से आंसू निकल आए।

राजेश धीरे करो, मेरा बुर फट गया।

Land का टोपा उर्मिला के बच्चेदानी से टकराया।

अब राजेश अपने क़मर को हिलाकर धीर land को बुर में kअदंर बाहर करने लगा। और एक हाथ से शशि की चूची मसलते हुए उसके ओंठ चुसने लगा।

धीरे धीरे उर्मिला को मजा आने लगी और उसके chut से पानी बहने लगा। जिससे land अब आसानी से अंदर बाहर होने लगा।

राजेश ने अपना स्पीड बढ़ा दी अब राजेश को भी उर्मिला को चोदने में मज़ा आने लगा।

वह उर्मिला को जोर जोर से चोदने लगा।

राजेश का land उर्मिला के बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा।

उर्मिला तो जैसे जन्नत में पहुंच गई। land उसके बुर के हर हिस्से को अच्छे से रगड़ रहा था। जिससे उर्मिला को असीम आनन्द मिल रहा था। ऐसी आनद की वह कल्पना भी नहीं की थी।

उसके मुंह से लगातार कामुक सिसकारी निकल रही थी। जो पुरे कमरे मे गूंज रही थी।

पर उर्मिला अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और वह कुछ ही देर में चीखते हुए झड़ने लगी। उई मां मै गई re,, राजेश मै गई,,,,,, आह मां,,,,,,,

उर्मिला आनद के मारे बेहोश सी हो गई।

 
अभी तक आपने पढ़ा किस तरह उर्मिला, राजेश से chudi, उर्मिला राजेश के लंबे और मोटे land से chudkar झड़ गई और आनद के मारे बेशुध सी हो कर बेड पर लुड़क गई। इधर राजेश का land उर्मिला के बुर में डुबकी लगाकर और लंबा मोटा हो गया था। वह साप की तरह फुफकार मार रहा था।

राजेश ने शशि को अपने बाहों में भर कर उसके ओंठ चुसने लगा, फिर उसकी चूची पीने लगा। उसे मसलकर दूध निकालने की कोशिश करने लगा।

राजेश शशि के सिर को पकड़कर नीचे बैठने का इशारा किया, शशि नीचे बैठकर राजेश के जोश में ठुमकते land को हाथ में लेकर उसके अंड कोश को चाटने लगी और एक हाथ से land सहलाने लगी, राजेश के land को मुंह में लेकर चूसने लगी।

इधर सुनिता शशि की हरकतों को देख रही थी। राजेश ने सुनिता की ओर देखा जो राजेश की ओर ही देख रही थी। दोनो की नजरे मिली सुनिता शर्मा गई। अपने सिर को निचे कर दी।

राजेश _मां, देखो मेरी ओर शरमाओ मत इन औरतों ने तुम्हारा अपमान किया है तुम्हारे बेटे को नामर्द कहा है देखो अब मैं कैसे इन दोनो की chut फाड़ता हू।

राजेश अपने land को शशि के मुंह में अंदर बाहर करने लगा और कुछ देर बाद उसके मुंह से land निकाल दिया।

शशि को बेड के किनारे पीठ के बल लिटा दिया फिर उसके बुर को अपने मुंह में लेकर चाटने लगा उसके भग्नाशा को मुंह में भरकर चुसने चाटने लगा।

शशि आंड के मारे चीखते हुए अपना सिर पटकने लगी।

राजेश ने बुर चूसना बन्द कर अपने land अपने हाथो में लेकर शशि के बुर के छेद पर भिड़ा दिया। और एक जोर का धक्का मारा। land बुर को फाड़कर फचकी आवाज़ करता huwa सरसराता huwa आधे से ज्यादा अंदर घुस गया।

शशि चीख उठी। इधर सुनिता के दिल को ठंडक मिली। सुनिता राजेश और शशि की ओर देखने लगी।

राजेश ने शशि के चूची को मुंह में भरकर चुसने लगा। कुछ देर दुध चूसने के बाद वह अपना land बुर में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

शशि को भी मज़ा आने लगी। अब राजेश धीरे धीरे अपना गति बढ़ाने लगा। वह शशि के दोनो चूची को अपने हाथों से मसल मसल कर land को बुर में गपागप पेलने लगा।

शशि के मुंह सी आनद के मारे सिसकारियां निकलने लगी। राजेश को भी chudai में मजा आने लगा।

राजेश एबी शशि के क़मर को दोनो हाथो से पकड़कर अपना land बुर में दनादन पेलने लगा। कमरे मे फच fach गच गच, शशि की चूड़ियों की खन खन खन खनकने की और सिसकने की आनंद में चीखने की आवाज़ गूंजने लगी।

इन आवाजों को सुनकर उर्मिला फिर से गरम हो गई। और वह राजेश के पिछे खड़ी होकर उसके पीठ चूमने लगी, एक हाथ से अपने chut सहलाने लगी। एक हाथ से राजेश के अंडकोष को सहलाने लगी जो राजेश की बुर की खुदाई कर रहा था।

राजेश ने chudai बंद कर दिया और उर्मिला को उठाकर शशि के ऊपर झुका कर kutiya बना दिया। शशि और उर्मिला दोनो एक दूसरे के ओंठ चुसने लगी। इधर राजेश ने अपना खड़ा land शशि के बुर को ठोकने के बाद बाहर निकाल कर उर्मिला के बुर में ठेल दिया।

और उर्मिला के बुर को गचा गच चोदने लगा। कुछ देर उर्मिला के बुर को ठोकने के बाद वह उर्मिला के बुर से land बाहर निकाल दिया और शशि के बुर में ठेलकर बुर चोदने लगा, बारी बारी से दोनो की बुर चोदकर खुद जन्नत को सुख भोगने एवम उन दोनो औरतों को भी जन्नत की ओर कराने लगा।

राजेश अब शशि के बुर को लागातार जोर जोर से चोदने लगा, जिससे शशि बर्दास्त न कर सकी और चीखते हुए जोर से उर्मिला को पकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश ने अपना land शशि के बुर से बाहर निकाल कर बेड पर जाकर लेट गया। उसका लम्बा और मोटा लण्ङ सीधा खडा होकर हवा में लहरा रहा था। वह अपनी land को सहलाते हुए उर्मिला को उसके ऊपर बैठने को बैठने का इशारा किया।

उर्मिला खड़ा होकर, रजेश के क़मर के दोनो ओर अपना एक एक पैर करके land के सीध में खडा हो गई। फिर नीचे झुककर राजेश के लौड़ा को अपने हाथो में लेकर उसको टोपा अपने बुर के मुख में रख कर निचे बैठने लगी।land बुर को फाड़कर फिर से पुरा जड़ तक समा गया। उसका land उर्मिला के गर्भसाय से टकराया जिससे उर्मिला सिसक उठी।

राजेश ने उर्मिला के दोनो चूची को अपने हाथों में लेकर उससे खेलने लगा।

अब उर्मिला धीरे धीरे राजेश के land को अपने बुर में अंदर बाहर करने लगी।

राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया। वह भी अपना क़मर ऊपर उठा कर उर्मिला का सहयोग करने लगा।

उर्मिला को भी अब मज़ा आने लगा, वह अब land पर उछलने की गति बड़ाने लगी।

उर्मिला आनद में सिसकते हुए अब जोड़ जोर से land के ऊपर उछलने लगी।

राजेश और उर्मिला दोनो अपना सुध बुध खोकर, हवस का खेल खेलने लगे।

कमरे मे उह, आह आह,, उह,, उई मां आई,,,,,

आह, ऊं,,,, ई,,,, आनंद में कराहने एवम सिसकने की आवाज़

उर्मिला के boor से पानी झरने की तरह बह रहा था जिसके कारण

फ़च फाच, land me बुर जाने तथा, चूड़ियों की खन खन खनकने की आवाज़ फिट से कमरे में गूंजने लगी।

इन दोनो की chudai का खेल देखकर सुनिता भी गर्म हो गई और उसके बुर से पानी बहने लगी।

इधर शशि भी फिर से गर्म होने लगी वह अपने उंगली हाथ से बुर सहलाने लगी।

राजेश और उर्मिला का धुवाधार chudai जारी था। राजेश का land उर्मिला के बुर को चीरता हुआ उसका टोपा उर्मिला के गर्भाशय को ठोक रहा था।

जिसके कारण एक अद्भुत आनंद उर्मिला को मिल रहा था। वह स्वर्ग में पहुंच गई थी।

अपना होश खोकर land के ऊपर जोर जोर से उछल उछल कर chud रही थी।

इस समय यदि उसका पति भी आ जाता तो भी वह chudna बंद नही करती क्यू की ऐसा सुख, मज़ा उसे आज तक नही मिला था।

वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। जुड़ा देर तक वह अपने को रोक न सकी और फिर से चीखते हुवे झड़ते हुवे बेहोश सी हो को राजेश के ऊपर लुड़क गई।

राजेश ने कुछ देर उसे बाहों में भर कर सहलाया फिर उसे अपने बाजू में लिटा दिया।

अभी राजेश झड़ा नहीं था।

इधर शशि फिर से गर्म हो चुकी थी वह राजेश के land को चूसने लगी।

कुछ देर land चुसने के बाद शशि भी राजेश के land को पकड़कर उसे अपने chut के छेद पर रख कर उसके ऊपर बैठ गई।land जड़ तक बुर में समा गया।

अब एक बार फिर राजेश और शशि के बीच घमासान chudai सुरू हो गया।

शशि और राजेश अपना सुध बुध खोकर। इस खेल को खेलने लगे।

राजेश का तो आज लाटरी ही लग गया था दो दो खूबसूरत बदन की औरतों को एक साथ भोगने का सुख मिल रहा था वह भी इस पल को जी भर कर जी रहा था।

वह भुल ही गया था की उसकी मां सुनिता उनका यह खेल सोफे पर बैठ कर देख रही है।

इधर सुनिता भी बहुत गर्म हो चुकी थी इन लोगो का नंगा खेल देखकर।

वह अपने chut को लागातार सहलाने लगी उसकी chut के पानी से उसकी पेंटी पुरी गीली हो गई थी।

इधर शशि,राजेश के land पर जोर जोर सेउछल उछल कर chud रही थी। उनके मुंह से,, ऊं,, मां,, आई,, ई,,आ,,,, उन,,,, ई,,

राजेश भी अपना क़मर ऊपर उठा उठा कर शशि के ताल में ताल मिलाकर उसकी साथ दे रहा था। दोनो किसी दूसरी दुनिया मे पहुंच गए थे। और बेशूध होकर हवस का खेल खेल रहे थे।

राजेश का land शशि के बुर के हर हिस्से को अच्छी तरह रगड़ रहा था। जिससे शशि को अधभूत आनंद मिल रहा था।

इधर उर्मिला होश में आ चुकी थी और फिर से गर्म होने लगी। सुनिता तो हवस में अपनी उंगली अपने बुर में डाल कर अपने भग्नासा के रगड़ने लगी।

शशि जोर जोर से उछल उछल कर chunda जारी रखी थी। जोर जोर से सिसकारी निकाल निकाल करchud रही थी। शशि भी ज्यादा देर तक खुद को रोक न सकी और वह भी जोर से चीखते हुए झड़ने लगी। ओर राजेश के ऊपर लुड़क गई। राजेश ने उसे बेड पर बाजू में लिटा दिया। राजेश के एक ओर उर्मीला और दूसरी ओर शशि बेसुध पड़ी थी।

उर्मिला तो फिर से गर्म हो गई थी।

राजेश अभी झड़ा नहीं था वह जल्दी झड़ना चाहता था। वह उर्मिला के ऊपर या गया, और उसके ओंठ चुसने लगा।

उसकी चूची पीने लगा, उसे पीने, मसलने लगा।

उसके बदन को चूमते चाटते हुए उर्मिला के बुर को चाटने लगा। जिससे उर्मिला सिसकने लगी।

वह धीरे धीरे बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।

अब राजेश बेड पर लेट गया, उर्मिला को अपने ऊपर खींच लिया। उर्मिला राजेश के land को चूसने लगी।

राजेश बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया।

राजेश ने उर्मिला को land पर बैठने का इशारा किया।

उर्मिला राजेश की ओर पीठ करके राजेश के लौड़े पर बैठ गया, राजेश ने अपना land हाथ म लेकर उर्मिला को थोडा पीछे झुकाया जिससे राजेश को उर्मिला ककी बुर का छेद दिखाई देने लगा। राजेश ने अपना land उर्मिला के बुर के छेद पर रख कर उसके कमर को पकड़कर land पर दबाया land सरसराता huwa बुर के अंदर चला गया।

राजेश बहुत जोश में था। वह उर्मिला के कमर को पकड़कर उसे आगे पीछे करते हुए land को बुर में अंदर बाहर करने लगा।land, बुर में अंदर बाहर होता huwa राजेश को दिखाई दे रहा था जिससे राजेश और जोश में आ गया ।

राजेश अब उर्मिला को उसके कमर को हाथो से पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर चोदना शुरु कर दिया।

उर्मिला भी काफी उत्तेजित हो कर राजेश का सहयोग करने लगी। वह भी अपनी कमर को ऊपर नीचे कर चुदवाने का मज़ा लेने लगी।

एक बार फिर दोनो जन्नत की सैर करने लगें।

कमरे में फिर से सिसकने, आनद में कराहने और चूड़ियों के खनकने की आवाज़ गूंजने लगी।

इधर सुनिता राजेश और उर्मिला की chudai का खेल देखकर ओर ज्यादा उत्तेजित होकर उपने बुर को उंगली से जोर जोर से रगड़ने लगी।

इधर राजेश झड़ने केकी स्थिति में आ गया था। वह उर्मिला के कूल्हे को अपने land में पटक पटक कर जोड़ जोर से चोद रहा था।

उर्मिला और राजेश दोनो अपना होश खो चुके थे और पागलों की तरह हवस का खेल खेलने लगे।

उर्मिला की बुर से पानी लागातार बहने से land पूरा गीला होकर बीना किसी रोक के गपा गप अंदर बाहर हो रहा था।

राजेश land को बुर में गप गप अंडर बाहर होता huwa देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया और खुद को रोक न सखा और एक जोर का धक्का लगा कर जोर जोर से कराहते हुवे झड़ने लगा। आह,, आह मां ,, आह,,,

राजेश की कराहने की आवाज़ सुनकर सुनिता भी अपने को न रोक सकी और वह भी झड़ने लगी।

इधर राजेश अपने land से वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी उर्मिला की बुर में छोड़ने लगा।

गर्म वीर्य का गर्भाशय में जाने का एहसास आनंद से उर्मिला अपने को न रोक पाई और फिर झड़ने लगी।

सभी chudai के खेल से थक गए थे। बेड में लेटकर सुस्ताने लगे। उर्मिला और शशि दोनो एक एक और राजेश के कंधे पे अपना सिर रखकर लेट गए। राजेश दोनो के पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा।

इधर सुनिता भी झड़ कर सोफे पर अपनी आंख बंद कर सुस्ताने लगी।
 
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सुनिता जब होश में आई तो अपनी हालत देखकर लज्जित महसूस करने लगी। छी अपने ही बेटे और पराई औरतों के मौजूदगी में इतनी गंदी हरकत वह कैसे कर सकती है?

वह बहुत ही लज्जित होने लगी और वह बिना एक पल और ठहरे वह रूम से बाहर निकल कर अपने कमरे मे चली गई।

राजेश अपनी मां को जाते देखा पर वह कुछ न बोला।

इधर उर्मिला और शशि भी होश में आ चुके थे।

उर्मिला _सच में राजेश तुमने आज मुझे ऐसा शारिरिक सुख दिया है कि जिसकी मैंने आज तक कल्पना भी नहीं की थी। तुमने मेरा दिल जीत लिया re,

शशि _मैंने कहा था न दीदी, राजेश में जबरदस्त मर्दाना ताकत है? मै तो राजेश से पहली बार जब chudi तभी से उसकी दीवानी हो गई हू।

राजेश _तुम दोनो भी गजब की मॉल हो, तुम दोनो ने भी मुझे खूब जन्नत की सैर कराया है? मुझे भी तुम दोनो को भोगने में बड़ा मजा आया।

इधर जब राजू जो नीचे सोफे पर बैठ इंतजार कर रहा था की कब उनका बुलावा आए, उसने सुमन को सीढ़ी से उतरकर अपने कमरे मे जाते देखा तो वह और इंतजार न कर सका। वह सीधे ऊपर अपने कमरे मे चला गया।

जब राजू ऊपर कमरे में पहुंचा तो उसने देखा उसकी मां और चाची दोनो नंगी राजेश के आजू बाजू बेड पर लेटी है। उन लोगो को नंगे देखकर उत्तेजित हो गया।

राजू _लगता है आप लोगो ने मेरे बगैर ही chudai कर ली, मैने तो आज चारो मिलकर chudai करने का प्लान बनाया था, पर सुमन आंटी ने सब चौपट कर दिया।

शशि, उर्मिला और राजेश तीनो हसने लगे।

राजेश _अब क्या करे यार, किस्मत में जो होना था हो गया।

राजू _पर मेरा chudai करने का बड़ा मन है।

उर्मिला _पर बेटा हम लोग बुरी तरह थक चुके हैं। देखो राजेश ने हमारी बुर की क्या हालात बना दिया है।

राजू, उर्मिला और शशि की बुर को देखने लगा।

बुर सूज गया था, उसका मुख तो ऐसा खुला था जैसे औरत का बुर जब बच्चे को जनने के बाद खुल जाता है।

वह बुर की हालत देखकर निराश हो गया।

राजू _पर मां मेरा बड़ा मन है देखो मेरा land कैसे खडा है।

उर्मिला _बेटा अब कर भी क्या सकते है? पर तुम निराश न हों हम चूस कर तुम्हारा land को शांत कर देंगे, आ इधर आ मेरे पास

राजू उर्मिला के मुंह के पास जाकर खडा हो गया। उर्मिला _बेटा अपना पेंट तो निकालो।

राजू अपना पेंट और चड्डी निकालकर फेंक दिया। उसका land हवा में लहरा रहा था।

उर्मिला ने राजेश के land को अपने मुंह में भरकर चुसने लगी।

इधर राजेश और शशि उर्मिला को land चूसते हुए देखने लगें।

उर्मिला द्वारा कुछ देर land चुसवाने के बाद, राजू शशि के तरफ चला गया। शशि राजू के land को चूसने लगी। कुछ देर बाद राजू ने शशि के मुंह में वीर्य की पिचकारी छोड़ना शुरू कर दिया।

राजू के झड़ने के बाद उसका land सिकुड़कर छोटा हो गया।

उर्मिला _अच्छा राजेश अब हम लोग चलते हैं। अब तुम लोग भी आराम करो।

शशि और उर्मिला दोनो अपनी साडी पहनकर,कमरे से बाहर निकल कर अपने अपने कमरे में चले गए।

राजू _राजेश भाई, तुम्हे तो खूब मजा आया होगा?मेरे जाने के बाद क्या huwa,?

राजेश _हा, यार तुम्हारी मां और चाची ने खूब मजा दिया। क्या गजब का मॉल है तुम तो किस्मत वाले हो जो इनका रोज लेते हो।

राजेश, राजू को बताने लगा की उसके जाने के बाद क्या क्या हुआ?
 
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