Incest यह क्या हुआ - Page 13 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

राजेश बाथरूम में चला गया। प्रिया दरवाज़ा खोली। सामने पिंकी खड़ी थी।

प्रिया _अरे पिंकी तू आ गई ट्यूशन से।

पिंकी _हां, मॉम आज फिल्म देखने जाना है न तो जल्दी आ गई। पापा हॉस्पिटल से आ गए क्या?

प्रिया _बेटा, तुम्हारे पापा नही जा रहे हैं?

पिंकी _मॉम ये क्या कह रही हो?

प्रिया _हा बेटी कोई kritikal केस आ गया है न तो उसे हॉस्पिटल में रहना जरूरी है।

पिंकी निराश हो गई,,,

पिंकी _मॉम, पापा के पास कभी समय ही नहीं रहता मैने सोँचा था आज खुब इंज्वॉय करेंगे।

प्रिया _बेटा तुम्हे निराश होने की जरूरत नहीं क्यू की हम बाहर घूमने का रहे है और फिल्म देखने भी चलेंगे। तुम्हारे मामा जी के साथ।

पिंकी खुश होते हुए बोली,सच मॉम,,प्रिया _हा बेटा।

पिंकी _मामा कितने बजे आ रहे हैं।

प्रिया _तुम्हारे मामा तो कब के आ चुके हैं, तुम उनसे मिली नही?

पिंकी _मॉम मुझे तो कही दिखाई नही दिया।

प्रिया _हो सकता है वह बाथरूम वगेरह गया हो।

तुम अपने कमरे में जाकर पहले अच्छे से हाथ मुंह धो कर,कोई अच्छी सी ड्रेस सलेक्ट करो, ठीक है फिर मैं तुम्हे भू तैयार कर दूंगी। तब तक मैं भी तैयार हो जाती हूं।

पिंकी _, ओके मॉम, मै अभी ड्रेस लेकर आती हूं।

पिंकी के चले जाने के बाद, प्रिया बाथरूम में गई।

प्रिया _पिंकी चली गई, अब तुम हाल में जाकर वेट करो मैं तैयार होकर आती हूं।

राजेश ने प्रिया को अपने बाहों में भर लियाऔर उसके कानो में कहा,,

राजेश _दी, इस घोड़े का क्या होगा?

प्रिया _ अब तो इस घोड़े को प्यासा ही रहना पड़ेगा।बेचारा,,,, प्रिया ने राजेश के लंड को उसके पेंट के उपर से ही सहलाते हुए बोली,,राजेश _दी, थोडा सा ही पिला दो अपने कुवे का पानी, इसी से काम चला लूंगा।

प्रिया _न बाबा मै रिस्क नहीं ले सकती, पिंकी कभी भी आ सकती है। अब चलो यहां से।

प्रिया ने राजेश को हाथ पकड़कर खींचते हुए रूम से बाहर कर दरवाज़ा बंद कर दी।

राजेश लंड मसलते रह गया।

राजेश हाल में जाकर बैठ गया।

कुछ देर बाद प्रिया तैयार हो कर पिंकी के भी तैयार कर दी, पिंकी तैयार होकर सीधे हाल में आई।

पिंकी _मामा जी मै कैसी लग रही हू इस ड्रेस में।

राजेश _वाह पिंकी तुम तो बहुत क्यूट लग रही हो।

पिंकी _वैसे आप कहा थे मैं जब आई तो आप नही थे।राजेश _मै बाथरूम में था। जोर की लगी थी न।

अच्छा पिंकी बताओ बाहर कहा कहा घूमना है?

पिंकी _मामा जी मुझे पार्क जाना है वहा पर झूला झूलेंगे फिर किसी चौपाटी पर पानी पूरी खायेंगे। फिर वहा से फिल्म देखने जाना है।

राजेश _अच्छा , तुम्हारी जो भी ख्वाइस है वो जरूर पूरी होगी।

अच्छा हम लेट हो रहे हैं, तुम्हारी मॉम कहा है।

पिंकी _ओ तैयार होकर आ रही।

कुछ देर बाद प्रिया जब तैयार होकर आई, तो राजेश देखता रह गया।

प्रिया बहुंत ही खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

प्रिया _कहा खो गया,, राजेश,,

राजेश _तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो, इस साड़ी में।

प्रिया _अच्छा,,,

अब चलो चलते हैं हम लेट हो रहे हैं।

प्रिया ने कामवाली को आवाज दी,,,

कामवाली _जी मैम शाब क्या आपने बुलाया?

प्रिया _देखो हम लोग बाहर घूमने जा रहे हैं, हम खाना भी बाहर खायेंगे। तुम समय पर घर चली जाना और घर का दरवाज़ा बाहर से लॉक कर चाबी गार्ड के पास छोड़ देना।

कामवाली _ठीक है मैम शाब। वैसे मेम साब आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो। काफी दिनों बाद देखा है आपको इतनी सज कर कही जाते।

नही तो आप तो सिर्फ डाक्टर की पोशाक में ही नजर आती हो।

प्रिया _काफी दिनो बाद तो बाहर जा रहे हैं न घूमने। अब हॉस्पिटल जाऊंगी तो ये सब नही पहना सकती।प्रिया _राजेश तुम कार चला लोगे न।

राजेश _हा,दी।

प्रिया _फिर ड्राइवर को लेकर जाने का कोई मतलब नहीं।

गार्ड के पास से कार की चाबी ले लो।

राजेश _जी ,दी।

राजेश ने कार की चाबी गार्ड से ले लिया फिर तीनो निकल गए।

पहले पार्क गए, वहा पर झूला झूले,

पार्क पे लोगो की नजर प्रिया पर ही थी।

राजेश _दी सभी लोगो की नजर आप ही पर टिकी हुई है। सच में आज आप बहुत खूबसूरत और हॉट लग रही हो।प्रिया मुस्कुराने लगी।

पिंकी को झूला झुला ने के वहा बोस्टिंग की भी व्यवस्था थी। बोटिंग का मज़ा लेने के बाद। वे चौपाटी गए। वहा पर पानी पूरी का आनंद लिए।

वहा से वे सीधे वे फिल्म देखने के लिए सिनेमा टाकीज पहुंच गए।

सिनेमा देखकर वे निकले रात के दस बज चुके थे।

प्रिया _राजू किसी अच्छी से होटल पर रुकना, वहा खाना खाकर घर निकलेंगे।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश ने एक अच्छी होटल देखकर कार रोक दिया।

वहा पर तीनो ने अपना पसंदीदा डिस ऑर्डर किया।

और डिनर का आनंद उठाया।

डिनर करने के बाद जब वे घर पहुंचे तो रात के 11बज चुके थे।

पिंकी और प्रिया बहुत खुश थी।

राजेश _पिंकी मज़ा आया की नही।

पिंकी _मामा जी आज बहुत मजा आया ।

राजेश _दी,रात अब मैं घर निकलता हूं। मां वेट कर रही होगी।प्रिया _राजेश रात बहुत हो गई है, तुम आज रात यही रुक जाओ कल सुबह चले जाना। मै बुवा से बात कर लूंगी।

पिंकी _हा मामा जी आज यही रुक जाओ मुझे अभी आपसे बहुत सी बातें करनी है।प्रिया ने सुनिता को काल कियाऔर यह जानकारी दी की राजेश आज रात यही रुक रहा है।

सुनीता _ठीक है प्रिया।

प्रिया ने राजेश को आराम करने के लिए एक कमरा में ले गया।

राजेश तुम यहां सो जाओ। अपने कपड़े चेंज कर लो मैं टावेल दे देती हूं।

प्रिया _पिंकी अब चलो तुम भी अपने कमरे में रात हो गई है सो जाओ।पिंकी _नही मॉम मै मामा जी के पास ही सोऊंगी। मुझे उससे ढेर सारी बातें करनी है।

प्रिया _ये लड़की भी न बड़ी जिद्दी है। बिलकुल कहना नही मानती किसी का।

राजेश _दी रहने दो न पिंकी को जब वो सो जायेगी तो आपके रूम में छोड़ दूंगा।

प्रिया _ठीक है राजेश।

प्रिया अपने कमरे में चली गई।

इधर पिंकी ने राजेश से कहानी सुनाने कहा,,,

राजेश ने परियों की कहानी सुनाई। कहानी सुनते सुनते। पिंकी को नींद आ गई। वह गहरी नींद में सो गई।

राजेश ने प्रिया को काल किया।

राजेश _दी पिंकी सो गई है। उसे ले आऊं क्या?

प्रिया _ठीक है राजेश उसे मेरे ही रूम में लाकर सुला दो।

राजेश ने पिंकी को उठाया और उसे प्रिया के कमरे में ले जाकर सुला दिया।

राजेश _दी मुझे रात में प्यास लगती है पानी बॉटल है क्या?

प्रिया _राजेश तुम चलो मैं पानी लेकर आती हूं।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश अपने कमरे में जाकर अपना पेंट और शर्ट उतार कर टावेल लपेट लिया।

थोडी देर बाद प्रिया कमरे में पानी लेकर पहुंची।

प्रिया अभी भी अपनी कपड़े चेंज नहीं की थी।

राजेश बेड पर लेटा था।

पानी का बाटल टेबल पर रख कर, बेड के किनारे बैठ गई।

प्रिया _थैंक यू राजेश, आज तुम्हारे कारण पिंकी बहुत खुश है। अगर तुम नही होते तो पिंकी को आज भी निराश होना पड़ता।

राजेश बेड पर बैठ गया।

राजेश _दी, थैंक यू क्यू बोल रही हो, ये तो मेरा फर्ज है। भाई अपनी बहन की खुशियों का ख्याल नही रखेगा तो फिर कौन रखेगा? जब भी मेरी जरूरत पड़े मुझे बता देना।। मै हाजिर हो जाऊंगा अपनी दीदी की सेवा में।प्रिया ने राजेश को अपने गले से लगा लिया।

प्रिया _राजेश, मुझे तुमसे यही उम्मीद है।

राजेश ने भी प्रिया को अपनी बाहों मे भर लिया।

राजेश _दी तुम भी कितनी अच्छी हो।

कुछ देर बाहों में लिपटे रहने के बाद।

प्रिया _राजेश, अब छोड़ो मुझे,,,

राजेश _आपके छोटे भाई के बाहों में आपको अच्छा नहीं लग रहा है क्या दी?

प्रिया _रात बहुत हो गई है। और रात के अकेले में एक जवान भाई बहन को ज़्यादा देर तक यू लिपटना ठीक नही।

राजेश _क्यू दीदी? रात में भाई बहन एकदूसरे से लिपट कर प्यार नही कर सकतेक्या?

प्रिया _न, अगर किसी को पता चल गया तो तरह तरह की बाते करते है।

राजेश ने प्रिया की पीठ को चूमते हुए कहा।

कैसी बाते दीदी।

प्रिया _बहुत ही गंदी बातें।

राजेश ने प्रिया को अपनी बाहों में और कसते हुए कहा,, कैसी गंदी बाते दीदी मुझे भी तो बताओ?

प्रिया _न बाबा मुझे शर्म आती है बताने में।

राजेश _दी बताओ न कैसी गंदी बाते करते हैं, मुझसे क्या शर्माना?

प्रिया _लोग कहते है की भाई बहन के बीच कोई गंदा खेल चल रहा है।

राजेश _कैसा गंदा खेल दी, कुछ समझा नही।

प्रिया _अरे, वही जो एक औरत और मर्द के बीच चलता है।

राजेश _हम तो औरत और मर्द है न फिर हमारे बीच वो खेल क्यू नही चल सकता दी।

प्रिया _क्यू की समाज गलत मानता है इस खेल को भाई बहन के बीच।

राजेश _दी, ओर किसी को पता न चले तो, तब तो भाई बहन भी ये खेल खेल सकते है न।

दी, वैसे इस खेल का नाम क्या है बताओ ना,,

प्रिया _न मुझे शर्म आती है।

राजेश _अच्छा मेरे कानों में धीरे से कहो,,

प्रिया _चू, चू,,,

राजेश _क्या चू चू,, दी, ठीक से बोलो।

प्रिया _चू दा ई

राजेश _ठीक से सुना नही दीदी फिर से कहो,,

प्रिया _अरे चूदाई बाबा।

चूदाई शब्द सुनते ही राजेश का लंड तनकर खड़ा हो गया।

इधार इस तरह की बात चित करने से दोनो के बहुन्त मज़ा आ रहा था। दोनो गर्म हो चुके थे।

राजेश _दी सुना है चूदाई करने से बड़ा मजा आता है।

राजेश ने प्रिया को अपनी बाहों मे कस लिया और उसकी पीठ चूमने हुए कहा। तुम तो जीजा जी से chudwati होगी।

प्रिया _हां बहुंत मज़ा आता है।

राजेश _दी मेरा भी मन कर रहा है चूदाई करने का।

मुझे भी चोदने दो ना।प्रिया _क्यू तेरा घोड़ा को फिर से प्यास लगी है क्या?

राजेश _दी ये तो उसी समय से प्यासा है।

प्रिया _हू,,

राजेश _दी अपनी कूवे की पानी से मेरे घोड़े की प्यास बुझाओ न।

प्रिया _तू किसी को बताएगा तो नही की तेरे घोड़े ने अपनी ही बहन के कुंआ का पानी पिया है।

राजेश _न दी, मै क्यू बताऊंगा भला। ये राज तो मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगी।

प्रिया _अच्छा ठिक है फिर, पहले मेरे कुआ में पूरा पानी तो भरने दे।

राजेश ने प्रिया की साड़ी की पल्लू नीचे खींच दिया और ब्लाउज का बटन खोलने लगा।

प्रिया_ रहने दे तुमसे नही होगा,,,

प्रिया स्वयं ही ब्लाउज की बटन खोल दी।

राजेश ने ब्लाउज को प्रिया के शरीर से अलग कर दिया।

और उसके ब्रा के हुक खोल कर चूची को नंगा कर दिया।

चूची के नंगा होते ही, राजेश उस पर टूट पड़ा।

वह दोनो दुदू को मसल मसल कर उसके निप्पल मुंह में भरकर चुसने लगा।

प्रिया के मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

कुछ दूर दुदू चुसने के बाद। राजेश न प्रिया को बेड के नीचे खडा किया और उसकी साड़ी खींचकर उसके शरीर से अलग कर दिया।

प्रिया अब पेटिकोट में थी।

राजेश ने प्रिया के बदन को चूमने चाटने लगा।

प्रिया के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश आगे बढ़ते हुए प्रिया के पेटी कोट का नाड़ा खींच दिया। जिससे पेटी कोट प्रिया के पैरो के नीचे गिर गया।

राजेश ने प्रिया को बेड किनारे लिटा दिया और उसके ऊपर झुक कर उसके पुरे बदन को चूमने चाटने लगा।

राजेश की इस हरकत से प्रिया का बुर पानी से लबालब हो गया।

राजेश पुरे बदन को चूमते हुवे नीचे गया फिर उसने प्रिया की पेंटी को अपनी उंगली डे पकड़ कर टांगो से नीचे खींचते हुवे शरीर से अलग कर दिया।

प्रिया अपनो नंगी chut छिपाने लगी।

राजेश ने प्रिया की हाथ को हटाकर उसकी मस्त फुली उई चिकनी chut को मुंह में भरकर चुसने लगा।

प्रिया की मादक सिसकारी पुरे कमरे मे गूंजने लगी।

आह,, यम,, उई ई ई मां उन,,आई ,,, उन

प्रिया का पूरा शरीर कपकापने लगा वह अपना आपा खो बैठी।

वह बेड से उठी और राजेश की बनियान और टावेल निकाल दी।

उसके सीने के चूमने चाटने लगी।

फिर देर न करते हुए राजेश की चड्डी को भी उतार कर उसे नंगा कर दिया।

चड्डी उतरते ही राजेश का लंड हवा में लहराने लगा।

वह लोहे की तरह कठोर हो गया था। और घोड़े कि लंड की तरह मोटा लम्बा। लंड झटका मार रहा था।

प्रिया नीचे फर्श पर बैठ गई और लंड के अंड कोश को पहली चांटी मुंह में भरकर चुसने लगी फिर लंड का टोपा मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।

धीरे धीरे पुरे लंड को मुंह में भरकर चुसने कोशिश करने लगी।

लंड उसके मुंह में गप गप अंदर बाहर होने लगा।

राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।

वह प्रिया की बालो को पकड़कर लंड चुसवाने का मज़ा लेने लगा।

कुछ देर लंड चुसने के बाद प्रिया फर्श से उठी और बेड किनारे लेट गई। अपनी टांगो को चौड़ी कर दी।

वह बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी। उसे चुदना चाहती थी।

राजेश समझ गया कि प्रिया क्या चाहती हैं वह प्रिया की टांगों के आ गया।

प्रिया को बाहों मे भर कर फिर से उसके ओंठ चुसने लगा।

फिर अपना लंड अपने हाथों में लेकर प्रिया के योनी के मुख रख दिया।

दोनो कूल्हे को पकड़कर एक जोर का धक्का मारा।

लंड का टोपा बुर चीरकर अंदर घूस गया।

प्रिया चीख उठी।

प्रिया _आह मां, मार डालेगा क्या?

राजेश ने प्रिया की चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।

फिर चूसते चूसते ही एक जोर का धक्का और लगाया लंड बुर फाड़कर आधा सेज्यादा अंदर घुस गया।

प्रिया _उई मां, फाड़ ही डालेगा क्या? धीरे धीरे नही डाल सकता।

राजेश प्रिया की सुडौल बडी बडी चुचियों को मुंह में भरकर मसल मसल कर फिर से गर्म कर दिया।

और अपने लंड को बुर में धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

बुर रस से पूरा भरा हुआ था। लंड धीरे धीरे पुरा अंदर घुस गया।

अब राजेश अपनी गति बड़ाने लगा लंड बुर में सर सर अंदर बाहर होने लगा। लंड काफी मोटा था। बुर का भग्नासा अच्छी तरह रगड़ खाने से प्रिया को बहुत मज़ा आने लगा। उसके मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश अब अपना गति और बड़ा दिया।

प्रिया तो जैसे जन्नत में पहुंच गई।

वह भी राजेश का सहयोग करने लगी।

राजेश का जोश और बड़ गया।

अब वह बुर को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया।

लंड बुर में फैच फच की आवाज करता huwa अंदर जाने लगा।

बुर को टोपा प्रिया की बच्चे दानी से टकराने लगा जिससे प्रिया का पूरा शरीर झनझनाहट उत्पन्न होने लगा।

प्रिया को चूदाई में ऐसा मज़ा पहली बार मिल रहा था।

वह अपना होश खो बैठी। और लगाता अपनी मुंह से सिसकारी एवम चीख निकालने लगी।

उई मां आह आह उन आ मर गई रि आह उन आहिई,,प्रिया खुद को रोक न सकी और राजेश को जोर से जकड़ कर झड़ने लगी।

प्रिया _आह मां ई ई मै गई ई ई,,,

राजेश ने चूदाई बंद कर दिया। और उसके ओंठ चुसने लगा।

प्रिया तेज तेज सांस लेने लगी।

चूदाई में ऐसा चरम सुख उसे पहली बार मिला था। वह राजेश की दीवानी हो गई।

राजेश _दी तुम ठीक तो हो न।

प्रिया शर्मा गई।

प्रिया _चलो हटो, मुझे बाथ रूम जाना है।

राजेश प्रिया के उपर से हटकर लेट गया।

प्रिया उठी और बाथरूम की ओर जाने लगी।

राजेश ने प्रिया को बाथरूम जाते हुवे देखा, उस्के मटकते गाड़ को देखकर उसका लंड और तन गया।

वह अपने हाथ से लंड सहलाने लगा।

इधर प्रिया बाथरूम में जाकर मूतने लगी।

मूतने की आवाज सुनकर राजेश से रहा न गया और वह भी बाथरूम में घुस गया।

उसने देखा प्रिया नीचे बैठकर मूत रही है।

उसे मूतता देख राजेश का लौड़ा और अकड़ गया वह अपने हाथ से अपना लौड़ा हिलाने लगा।

प्रिया ने राजेश को पीछे मुड़ कर अपना लंड हिलाते देखा।

प्रिया _अरे तू यहां क्यू आ गया तू बड़ा बेशर्म हो गया है। अपनी दी को मूत करती हुई देख कर लंड हिला रहा है।

राजेश _क्या करू दी रहा न गया?

प्रिया _तू ने तो मेरी मूत ही निकाल दी।

मूत कर जैसे ही उठी राजेश ने उसे वहीं बाहों मे भर कर चूमने चाटने लगा और नीचे बैठ कर उसकी chut चाटने लगा।

राजेश की इस हरकत से प्रिया फिर से गर्म हो गई। और मुंह से सिसकारी निकालने लगी। उसके कुआ में फिर से पानी भर गया था।राजेश ने प्रिया को कमोड पर हाथ रखा कर नीचे झुका दिया और खुद उसके पीछे आ गया। राजेश ने अपना लंड हाथ में लिया और प्रिया की बुर में रखकर जोर का धक्का मारा लंड एक बार में ही बुर फाड़कर फच की आवाज करता huwa अंदर घुस गया।

राजेश प्रिया की कमर पकड़ कर बुर में लंड पेलना शुरू कर दिया।

बाथरूम में प्रिया की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

राजेश प्रिया की बुर को जोर जोर से ठोकने लगा। लंड बुर में फच फ्च गाच गच की आवाज करता अंदर बाहर होने लगा। दोनो फिर से जन्नत में पहुंच गए। प्रिया भी अपनी क़मर हिला हिला कर बुर में लंड लेने लगी।

दोनो चूदाई के परम सुख को प्राप्त कर रहे थे।

राजेश का घोड़ा प्रिया की कूवे मे डुबकी लगा लगा कर पानी पीने लगा। पानी कूवे से छलक कर राजेश के लंड से होता हुआ उसके टट्टो तक पहुंचकर फर्श पर टपक रहा था।

कुछ देर तक इसी पोजीशन में बुर मारने के बाद राजेश कमोड पर बैठ गयाऔर प्रिया की क़मर पकड़कर अपने लंड पर पटक पटक कर चोदने लगा।

प्रिया भी लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

पूरा बाथरूम प्रिया की मादक सिसकारी से गूंज रहा था।

प्रिया ने बाथरूम में इस तरह पहले कभी नहीं chudi थी। उसे भी बाथरूम में इस तरह चुदवाने में खुब मजा आ रहा था।

लंड बुर की अंतिम गहराई तक पहुंच रहा था। जिससे प्रिया को संभोग सुख का जो आनंद मिल रहा था उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

प्रिया का शरीर एक बार फिर अकड़ने लगा, वह जोड़ से चीखते हुए गिर से झड़ गई।

राजेश ने chudai बंद कर दिया।

और उसके पीठ को चाटने लगा।

राजेश प्रिया को उठाकर बेड पर ले जाकर लिटा दिया।

राजेश_दी तुम ठीक तो हो न।

प्रिया राजेश के लंड की ओर देख मुस्कुराने लगी। राजेश का लंड तनकर अभी भी खडा था।

प्रिया _अभी तक तेरे घोड़े की प्यास नही बुझी क्या?

राजेश _मेरे घोड़े को तुम्हारी kuwe का पानी बहुत मीठा लगा। उसका मन अभी तक नही भरा है।

प्रिया _तूने मेरे बुर की क्या हालत कर दी है देखो अब पूरा खोल कर रख दिया। अब मैं इसमें और नही ले पाऊंगी।

राजेश _दी ये क्या कह रही हो मैं अब तक झड़ा नहीं।

प्रिया _तू मेरा गाड़ मार ले।

राजेश _दी ये क्या कह रही। क्या इस घोड़े को तुम्हारी गाड़ ले पाएगा।

वैसे मैंने तुम्हारी बुर चोदते हुए देखा तुम्हारी गाड़ की छेद काफी बडी लाग रही थी, फूल सिर पिचक रही थी। कही ऐसा तो नहीं की जीजा जी आपकी गाड़ मारते है।

प्रिया _हा ये सच है, तुम्हारे जीजा जी मेरी गाड़ मरते हैं। पिंकी के होने के बाद हम जल्दी एक और बच्चा नहीं चाहते थे। तुम्हारे जीजा जी को कंडोम लगा कर चोदने में मज़ा नही आता और मुझे गोली खाना पसंद नहीं। तो तुम्हारे जीजा जी ने गाड़ मारना शुरू कर दिया।

राजेश _दी, चलो फिर मैं भी तुम्हारा गाड़ मारता हूं।

राजेश ने प्रिया पलट दिया और उसकी गाड़ में एक उंगली डाल दिया।

प्रिया _अरे रूको गाड़ ऐसे नही मारा जाता। तुम तो मेरा गाड़ ही फाड़ दोगे।

राजेश _तो फिर दी।

प्रिया_पहले सपने लंड और मेरी गाड़ में कोई चिकनाहट लगाओ।

राजेश _तो तुम ही बताओ जीजा जी क्या लगाते है।

प्रिया _वो तो क्रीम लगाते हैं।

राजेश _तो वह क्रीम लाओ मैं भी लगाकर तुम्हारी गाड़ मारूंगा।

प्रिया _वो तो मेरे बेडरूम में है और पिंकी वहा सो रही है। मै ऐसी हालत में गई और पिंकी उठ गई तो।

राजेश _दी तुम अपनी पेटिकोट और ब्लाउज पहन लो और जाओ।

प्रिया _हा ये ठीक रहेगा।

प्रिया ने अपनी ब्लाउज और पेटीकोट पहन ली और अपने बेडरूम में चली गई।

वहा लाईट ऑन कर क्रीम ढूंढने लगी। आवाज होने से पिंकी की नींद खुल गई।

पिंकी _मॉम तुम क्या ढूंढ रही हो।

प्रिया _अरे नेता तुम उठ गई। ओ नेता मेरा सिर पर थोडा दर्द हो रहा है तो बॉम ढूंढ रही थी। तुम सो जाओ।

पिंकी _मॉम मै तो मामा जी के पास सो रही थी मामा जी कहा है।

प्रिया _बेटा तुम्हारे मामा जी अपने कमरे में सो रहे हैं। तुम्हे वो मेरे कमरे में छोड़ कर गए।

बेटी अब सो जाओ।

प्रिया रूमका लाईट ऑफ कर पिंकी के बगल पर लेट गई और प्रिया को अपने सीने से लगा कर सुलाने की कोशिश करने लगी।

इधर प्रिया पिंकी को सुलाने के चक्कर में खुद ही सो गई क्यू की वह काफी थक चुकी थी।

इधर राजेश प्रिया की आने का इंतजार कर रहा था। काफी देर हो जाने पर भी जब प्रिया नही आई तब अपने क़मर पर टावेल लपेट कर प्रिया के बेडरूम की ओर चला गया।

जब दरवाज़ा खोल कर देखा प्रिया और पिंकी दोनो गहरे नींद में सो रहे थे।

राजेश ने प्रिया को उठाना ठीक नहीं समझा और अपने कमरे में आ कर बाटल पानी पीकर लेट गया। कुछ देर बाद उसका भी नींद लग गया।

सुबह 4 बजे प्रिया की नींद खुली।

प्रिया _पिंकी को सुलाने के चक्कर में मै खुद ही सो गई। राजेश का पता नहीं क्या कर रहा होगा।

वह बेड से उठी और क्रीम लेकर राजेश के कमरे में पहुंची।

राजेश सोया huwa था सुबह का समय वैसे भी लंड खड़ा रहता है।

प्रिया ने राजेश के लंड को पकड़ कर सहलाने लगी और उसको मुंह में लेकर चूसने लगी।

प्रिया की इस हरकत से राजेश का नींद खुल गया।

राजेश _दी कितनी देर लगा दी आने मे,

प्रिया _अरे पिंकी उठ गई थी उसको सुलाने के चक्कर में मै भी सो गई।

प्रिया _देखो क्या लाई हूं। क्रीम को दिखाते हुवे बोली।

राजेश _दी क्या टाइम हु़वा है।

प्रिया _सुबह के चार बज चुके हैं। काम वाली 6बजे आ जाती हैं। उसके आने के पहले अपनी घोड़े की प्यास बुझा लो नही तो बाद में न कहना दीदी ने ख्याल न रखा। ऐसा कहकर प्रिया फिर से लंड चुसने लगी।

राजेश _दी रूको अभी मुझे मूत आई है।

प्रिया _अच्छा चलो फिर बाथरूम में आज मैं तुम्हे मूत कराती हूं। जब तू छोटा था तो एक बार मूत कराई थी। आज फिर मौका मिला है।

राजेश_सच दीदी।

राजेश और बेड से उठ कर बैठ गया और प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया।

पहले अपनी दी को प्यार तो कर लू।

राजेश ने प्रिया की चुकी को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने एवम उसके गर्दन को चूमने लगा।

फिर प्रिया ने स्वयं अपनी ब्लाउज उतार फेकी।

राजेश ने चूची को मुंह में भरकर जी भर कर चूसा।

राजेश का लंड पेसाब से टनटना भी रहा था और उत्तेजित भी हो गया था।

उसे समझ नहीं आ रहा था की पहले चूदाई करे की पेशाब करे।

प्रिया _अरे तुम्हे पेशाब लगी थी न।

चलो करा देती हूं।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश का लंड पकड़कर प्रिया उसे बाथरूम में ले गया और वहां जाकर राजेश के लंड को मूठ मारने लगा।

लंड उत्तेजित था तो मूत निकल नही पा रहा था।

प्रिया _अरे मूतो न राजेश ने प्रिया को एक हाथ से खींचकर अपने से सटा लिया और उसके बोबे दबाने लगा।

प्रिया मूठ मार रही थी।

राजेश के कोशिश करने पर मूत रुक रुक कर बाहर आने लगा जैसे लंड से वीर्य निकल रहा हो।

काफी देर तक इस प्रकार राजेश मुत्ता रहा। उसे प्रिया के हाथ से मूतने में एक अलग ही मजा मिल रहा था।

लंड से पूरा मूत बाहर आने के बाद लंड और तनकर लोहे जैसा सख़्त हो गया।

अब वे दोनो बेड पर आ गए।

प्रिया अपना पेटिकोट उतार कर पूरी नंगी हो गई और राजेश के लंड पर वह क्रीम अच्छे से मलने लगी।

फिर स्वयं बेड को थाम कर झुक गई।

प्रिया _अब देख क्या रहा है भर दे क्रीम मेरी गाड़ पे और उंगली डालकर अच्छे से लगा।

राजेश ने उंगली पर क्रीम लेकर प्रिया की गाड़ के छेड़ में उंगली डाल कर क्रीम को भर दिया।

फिर दो उंगली डालकर गाड़ में अंदर बाहर करने लगा।

प्रिया _अब डाल दे अपना घोड़ा मेरी गाड़ में।

राजेश ने अपना लंड का टोपा गाड़ के छेड़ पर रख कर दबाव डालना शुरु किया।

लंड अंदर जा नही पा रहा था।

राजेश _दी लंड तो अंदर ही नही जा पा रहा।

प्रिया _पहले अच्छे से उंगली चला ले।

राजेश ने पहले एक फिर दो फिर टीन उंगली डालकर कर गाड़ के छेड़ का बड़ा करने का कुछ समय तक कोशिश किया।

फिट लंड का टोपा गाड़ के मुख में रखकर जोर का दबाव डाला लंड का टोपा गाड़ में घुस गया।

प्रिया के मुंह से दर्द से कराहने की आवाज निकल पड़ी।

अब राजेश हल्का हल्का दबाव बनाता huwa लंड को गाड़ में ठेलने की कोशिश जारी रखा। लंड हर प्रयास में कुछ गाड़ के अंदर सरक जाता।

कुछ देर के प्रयास से लंड बुर में आधा घूस गया।

प्रिया की गाड़ में दर्द हो रहा था। इतना मोटा लण्ङ उसके गाड़ में पहली बार जा रहा था।

राजेश प्रिया की चूची को मसल मसल कर उसके पीठ को चूमता रहा।

फिर राजेश ने लंड को हल्का हल्का अंदर बाहर करना शुरू किया।

प्रिया दर्द से कराहने लगी।

राजेश_दी दर्द हो रहा है तो निकाल दू क्या?

प्रिया _नही re निकालना मत तू मेरी परवाह मत कर, लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर।

राजेश ने प्रिया के गाड़ में लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। प्रिया कराह रही थी।

राजेश ने बीना परवाह किए लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। लंड गाड़ के अंदर अपनी जगह बनाने लगा। और आधे से ज्यादा लंड गाड़ में घूस चुका था।

प्रिया को भी दर्द से कुछ राहत मिलने लगी।

तभी राजेश ने अपना लंड गाड़ से बाहर निकाल लिया और क्रीम को गाड़ और लंड में अच्छे से लगाकर फिर से लंड को गाड़में पेल दिया।

चिकनाहट बड़ने से अब लंड गाड़ में आसानी से सरक कर अंदर बाहर होने लगा।

प्रिया को भी दर्द से राहत मिलने लगी। इधर राजेश ने अपना गति बड़ाने लगा।

अब लंड गाड़ में अपने लिए पूरी जगह बना ली थी। प्रिया की गाड़ लंड के हिसाब से पूरी तरह फैल गई थी।

अब राजेश लंड को गाड़ में आसानी से अंदर बाहर करने लगा। राजेश और प्रिया अब दोनो को मजा आने लगा।

प्रिया _कैसा लग रहा है re।

राजेश _दी गाड़ मारने में तो एक अलग ही मजा आ रहा है। कितना कसा कसा अंदर बाहर आ जा रहा है।

दी अब तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा।

प्रिया _न, अब तो मुझे भी मज़ा आ रहा है, थोडा और तेज कर।

राजेश अब तेज गति से गाड़ मारने लगा।

राजेश ने कुछ देर गाड़ मारने के बाद लगा की अगर लगातार गाड़ मारता रहा तो वह जल्दी झड़ जायेगा। वह अभी जल्दी झड़ना नही चाहता था।

लंड गाड़ से निकाल कर बुर में डाल दियाऔर कुछ राहत का सांस लिया।

फिर कुछ देर तक दनादन बुर की चूदाई करने लगा। लंड बुर के पानी से और चिकना हो गया।

इधर प्रिया के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश बुर से लंड निकलकर गाड़ में डाल दिया और गाड़ मारने लगा। इस तरह वह कभी बुर तो कभी गाड़ी बड़ी बारी से मारने लगा। प्रिया को ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया। वह एक बार फिर से झड़ गई।

राजेश ने उसकी बुर को चाटना शुरू किया कुछ देर बुर चाटने से प्रिया फिर गर्म हो गई।

राजेश अब लंड को गाड़ से बाहर निकाल कर बेड पर जाकर लेट गया।

उसका लंड अभी भी झटके मार रहा था।

उसने प्रिया को अपने लंड पर बैठने का इशारा किया।

प्रिया लंड के उपर खड़ी हो गई और नीचे झुककर उसे अपने बुर के छेद में रखकर कर बैठ गई।

फिर लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

कुछ देर बाद वह बुर से लंड निकाल कर गाड़ के छेड़ में रख कर लंड गाड़ के अंदर घुसा दी और उछल उछल कर मादक सिसकारी निकालते हुए चुदने लगी।

कभी बुर तो कभी गाड़ में लंड डालकर उछल उछल कर चुदने लगी। अब राजेश को अपने को रोक पाना मुस्कील हो गया।

वह प्रिया को पेट के लिटा दिया और खुद उपर आ गया।

उसकी गाड़ पे लंड डालकर अब जोर जोर से चोदना शुरू किया। वह झड़ना चाहता था। इसलिए लगातार गाड़ चोदता रहा फिर जोर जोर से आह दी आह आ दी,, ईई ,,,,,,


करके गाड़ में ही झड़ गया।
 
राजेश प्रिया के घर से सीधा जीम चला गया। वहा एक एक घंटा जम कर पशीना बहाने के बाद। अपना घर पहुंचा। जब घर पहुंचा तो सुनिता किचन में काम कर रही थी। राजेश किचन में गया और सुनिता को अपनी बाहों में भर लिया।

सुनीता _आ गया तू।

राजेश _हा मां।

सुनीता _प्रिया और पिंकी को ठीक से घुमाया फिराया की नही।

राजेश _ हा, मां प्रिया दी और पिंकी दोनो बहुत खुश है।

राजेश ने सुनिता के गाड़ में अपना लंड और सटा दिया।

सुनीता _क्या कर रहा है बदमाश अब छोड़ो मुझे, भाभी आने ही वाली होगी कीचन में।

राजेश _आने दो मामी को वह भी देखेगी की मैं अपनी मां को कितना प्यार करता हूं?

सुनीता _अच्छा, भाभी को पता चलेगा न की तू मुझे कैसा प्यार करता है, तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक रहूंगी।

सुमित्रा सच में कीचन में पहुंच गई।

उसकी नजर उन दोनो पर पड़ी। उनको थोडा अजीब सा लगा, मां बेटा का प्यार समझ कर बोली,,

सुमित्रा _बड़ा प्यार हो रहा है मां बेटे के बीच।

सुनीता _देखो न भाभी, कितना बड़ा हो गया है फिर भी बच्चों की तरह हरकत करता है।

अब तुम्ही समझाओ अपनी भांजे को ,की अब ये बड़ा हो गया है और मां से ऐसा न लिपटा करे।

सुमित्रा _देखो राजेश बेटा, तुम्हारी मां ठीक कह रही है। अब तू बड़ा हों गया है। मां से ऐसा लिपटना ठीक नही।

राजेश _क्यू मामी, मै अपनी मां से लिपट कर प्यार क्यू नही कर सकता? मेरी मां है,मैं कैसे भी प्यार करू। मै तो ऐसे ही प्यार करुंगा, मुझे मां से ऐसे प्यार करना बड़ा अच्छा लगता है।

सुनीता _भाभी वे बड़ा जिद्दी हों गया है। पता नहीं कब समझ आएगा इसको।

सुमित्रा _देखो बेटा अब तू बड़ा हों गया है। अगर कोइ बाहर वाला ऐसा लिपट कर अपनी मां को प्यार करते देखेंगे न तो गलत समझेंगे।

राजेश _मामी आप ये क्या कह रही हो? क्या मां को प्यार करना गलत है?

सुमित्रा _अरे बेटा, मां से प्यार करना गलत नहीं पर ऐसा लिपटना गलत है।

सुमित्रा _अब छोड़ा अपनी मां को ओर जाओ नहाकर फ्रेस हो जाओ, तुम्हारा शरीर से पसीने की गंध आ रही है। लगता है आज खुब पसीना बहाया है जिम में।

राजेश _मामी जी जिम में खुब मेहनत करता हूं तभी तो ऐसा बॉडी बनाया है। अपनी भुजा को दिखाते हुए कहा।

सुमित्रा _हू लगता है भगवान ने बॉडी बडी अच्छी दी है पर समझदारी देना भूल गया। सुमित्रा मुस्कुराती हुई बोली।

राजेश _मामी आखिर आप कहना क्या चाहती हो? क्या मुझ में समझ नहीं।

सुमित्रा _अगर समझ होता तो अपनी मामी के सामने अपनी मां से ऐसा लिपटा खड़ा रहता। सुमित्रा अपना मुंह अपनी हाथो से छिपाकर हसने लगी।

सुनीता _अब छोड़ा बेटा देखो तुम्हारी मामी भी अब तुम्हारा मजाक उड़ा रही है।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

राजेश _लो मामी मां को छोड़ दिया। अब तो ठीक है न।

सुमित्रा _हूं, ठीक है पर क्या पता अकेली मांको पाकर फिर से लिपट जाए? वह राजेश का मजाक बनाते हुए बोली।

सुनीता भी मुस्कुरा रही थी।

सुनीता _अब जा बेटा अपने कमरे में और नहा ले यहां रहेगा तो तुम्हारी मामी तुम्हारा मजाक बनाती रहेगी।

राजेश चला अपने कमरे में चला गया।

सुमित्रा _वैसे सुनिता, राजेश को इतनी छूट देना ठीक नही, अब वो जवान हो गया है। अपने से ऐसा लिपटाना ठीक नही।

सुनीता _क्या करू भाभी अब तुम्ही समझाना उसे। मेरा तो सुनता ही नही।

इस तरह वार्तालाप करते हुवे दोनो किचन में नाश्ता बनाने लगी।

नाश्ता करने के बाद शेखर समय पर बैंक चला गया और राजेश स्वीटी के साथ कालेज।

आज स्वीटी जींस और टॉप पहनी थी। उसे देखकर सुमित्रा सुनिता से बोली।

सुमित्रा _सुनिता ये स्वीटी कैसी ड्रेस पहन रखी है? लडको की तरह, तुम्हे बच्चों को इतनी छूट नही देनी चाहिए।

सुनीता _भाभी, आजकल के बच्चे बड़े जिद्दी होते हैं। मां बाप का कहना मानते ही नही।

इधर स्वीटी जानबूझ कर ऐसा ड्रेस पहनी थी।

ताकि वह राजेश से चिपक कर बैठ सके। वह बाइक पर दोनो पैर आजू बाजू कर बैठी थी। वह राजेश को अपनी चूची का एहसास कराना चाहती थी।

वह राजेश से चिपक कर बैठ गई। रास्ते में जब ब्रेकर आता या सामने कोई आ जाता तो राजेश ब्रेक लगाता जिससे उसकी चूची राजेश के पीठ से दब जाता। स्वीटी को मजा आता।

राजेश को भी इसका एहसास होता की स्वीटी कुछ ज्यादा ही चिपक कर बैठी हुई है। उसके पीठ से उसकी चूची दबने का अहसास भी होता, लेकिन वह स्वीटी को ऐसा फिल होने नही दिया।

कालेज में लंच ब्रेक के समय भगत और राजेश दोनो कैंटीन में बैठे थे।

भगत _भाई चलो घर चलते हैं। केमिस्ट्री और फिजिक्स टीचर छुट्टी में कालेज में रहने का कोई फायदा नही।

राजेश _ठीक है बे चलो चलते है।

भगत _एक सप्ताह हो गया है भीमा और उन लड़को की माओ के साथ मजे किए। आज प्रोग्राम बनाओ न।

राजेश _ठिक है मालती को काल लगाओ।

भगत ने मालती को काल किया।

मालती _हैलो

भगत _चाची मै भगत बोल रहा हूं।

मालती _अरे भगत बेटा कैसे हो? बड़े दिन बाद याद किए अपनी चाची को।

भगत _मै तो मजे में हूं चाची! राजेश भाई आपसे बात करना चाहते हैं। लो बात करो।

राजेश _चाची जी कैसी है आप?

मालती _मै तो ठीक हूं, तू कैसा है re, बड़ी दिनो बाद याद आई चाची की। तुम्हारे रोग का इलाज हो गया क्या? अपनी चाची को भूल ही गया। मालती हंसते हुए बोली।

राजेश _अरे नही चाची, उसी के लिए तो काल किया है। आज बड़ा मन कर रहा है चूदाई करने की,तुम तो जानती हो चाची अकेले कि औरत की बस की बात नही है मुझे झाड़ने की। ले आओ अपनी सहेलियों को साथ में।

मालती _बेटा पहली बताए होते तो सब्जी औरते मिल जाती। अब इस वक्त कौन कहा है? आ पाएगी की नही। कुछ कह नही सकती। वैसे सभी तेरे हाथियार से खुदाई करवाने के लिए इंतजार में रहते हैं। उनसे बात करती हूं। देखती हूं कितनी इकट्ठा हो पाती हैं।

राजेश _ठीक है चाची हम लोग आधे घण्टे में कौशिल्या आंटी के घर पहुंच रहे हैं तुम सबको वहीं आने को बोल दो।

मालती _अरे बेटा औरतों को तैयार होने में भी तो थोडा समय लगता है न। सभी एक दूसरे से ज्यादा सुंदर दिखना चाहते हैं। ताकि तुम्हारी नजर उन पर ज्यादा गड़े और टीम उसे अपने घोड़े की सवारी ज्यादा देर तक कराओ।

राजेश _अरे ठीक है थोडा समय लगेगा तो चलेगा पर सबको बोल देना चिकनी होके आने। मुझे जंगल पसंद नही।

मालती _जानती हू बेटा इसीलिए तो पहले ही बोली न की औरतों को तैयार होने में समय लगता है।

राजेश _ठीक है चाची हम इंतजार करेंगे।

मालती _हम भी जल्दी पहुंचने की कोशिश करेंगे?

राजेश ने काल रख दिया।

राजेश _भगत चलो काम हो गया वे कौशिल्या मां जी के घर कुछ समय बाद पहुंच जाएगी।

भगत _भाई ये हुई न बात, आज तो जम कर लेंगे उनकी।

उधर मालती नेसभी औरतों को इसकी जानकारी दी की राजेश ने कौशिल्या के यहां बुलाया है। सभी औरते अपनी सारा काम धाम छोड़ आने को तैयार हो गई। क्यू की राजेश और भगत से बुर और गाड़ चुदवाने में जो मजा उन्हे मिलता था उसे दोबारा प्राप्त करने के लिए तड़पती रहती, राजेश की लंड को याद करके ही उनकी बुर हमेशा गीली रहती। ऐसे में जब मालती ने उन्हे बताया की राजेश ने आज उन्हे बुलाया है। सब की बुर से पानी टपक़ने लगी। वे सभी अपना सारा काम धाम छोड़ आने को राजी हो गई।

मालती _kutiya सभी तैयार हो गई आने के लिए। सभी राजेश की लंड की दासी बन चुकी है। अपने मन में बोली।

इधर राजेश और भगत दोनो कौशिल्या मां जी के घर पहुंच कर आज के प्रोग्राम के बारे में बताए। कौशिल्या भी खुश हो गई।

कैशिल्या खाने पीने की व्यवस्था करने लगी। उन्होंने अंडे सी बनने वाली कई प्रकार के व्यंजन तैयार किए।

धीरे धीरे करके सभी महिलाए घर पहुंचने लगी। सभी बन ठन कर आई थी। सभी लोग हाल में बैठे थे। हाल में पलंग सोफे की व्यवस्था कर लिया गया था। ताकि संभोग के सभी आसनों का मजा लिया का सके।

जब सभी आ गए।

प्रोग्राम शुरु हुआ।

सभी ने पहले खाने पीने का आनंद लिया। फिर राजेश ओर भगत ने औरतों से कहा सभी औरतों को एक से छै तक नंबर दे दिया। और सब से कहा की मैं यह पासा फेक रहा हूं।

पासा में जो भी अंक आयेगा वह नंबर जिसको भी मिला है वह अपन सारा कपड़ा एक एक कर उतारेगी।

सभी सहमत हो गए।

राजेश ने पासा फेका पहला नंबर मालती का लगा।

मालती ने एक एक कर पहली साड़ी फिर ब्लाउस फिर पेटिकोट और फिर ब्रा निकलकर अपनी अंगो का प्रदर्शन किया। अंत में राजेश ने उसे अपने पास बुलाया और उसकी पेंटी अपने हाथो से उतारी, उसकी मस्त चिकनी फुली हुई रस से भरी चूस को देखा तो उसका हथियार कुआ खोदने के लिए तैयार होने लगा। वह उसकी बुर को सहलाया फिर उसको चूम लिया। मालती सिसक उठी।

मालती को भगत के पास भेज दिया।

भगत ने मालती की कुछ देर तक बुर चांटी। मालती एकदम गरम हो गई। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

राजेश ने फिर से पासा फेका फिर जिस औरत का नंबर आया उसने भी वही किया जो मालती ने किया। एक एक कर सभी औरते नंगी हो गई।

उसके बाद औरते राजेश और भगत पर टूट पड़ी, वे दोनो के सारे कपड़े उतार कर नंगा कर दिया।

उसके बाद उन सभी ने राजेश और भगत का लंड बारी बारी से चूसना शुरू किया।

फिर हुवा को खेल, राजेश ने इन औरतों के बुर और गाड़ को अपने हाथियार से खोदना शुरू किया।

हाल औरतों की मादक सिसकारी, चीख एवम चूड़ियों की खनक से गूंजने लगा।

राजेश बेड में लेट गया और एक एक करके महिलाओ को अपने लंड पर बिठाकर जन्नत की सैर कराता और भगत महिला के पीछे जाकर उसकी गाड़ मारता। इस तरह औरतों की बुर और गाड़ की एक साथ खुदाई करता।

जिससे औरतों की चीख एवम मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनक के साथ गच गच फच फाच की आवाज गूंजने लगता, कुछ औरते इस समय राजेश और भगत के लंड से औरतों की बुर से निकलने वाली रस को चाट ता फिर लंड को बुर मेंअपनेहाथ से पकड़कर ठेल देता।

चूदाई का यह घमासान लगभग दो घंटे तक चला। सभी औरते तीन तीन बार झड़ चुके थे तब राजेश और भगत ने उन औरतों के मुंह में अपना पानी छोड़ दिया। सभी उनके वीर्य को मिल बांटकर पी गए।

सभी चूदाई के खेल से थक गए कोई बेड पर तो कोई सोफे पर बैठ कर सुस्ताने लगे।

जब सभी को कुछ राहत मिली तब कौशल्या ने सबके लिए काफी बनाई काफी पीते पीते आपस में चर्चा करने लगे।

राजेश _वैसे तुम्हारे लड़के क्या कर रहे हैं? उनमें कोई सुधार आया की नही।

मालती _कहा राजेश, अभी भी मुझे तो उनमें कोई सुधार नजर नहीं आता दिनभर कहा रहते है पता नही। कोई काम धाम तो है नही, उनके पास।

राजेश _मैने उनके बारे में कुछ सोचा है। अगर आप लोग अपनी सहमति दे।

मालती _बेटा उन लोगो के सुधरने के लिए जरूर कुछ करो। नही तो फिर से आवारागर्दी शुरू कर देंगे।

राजेश _मै सोच रहा हूं क्यू न उन लोगो को बाबा चरमानंद जी का आश्रम भेज दिया जाय। बाबाजी के संगत में रहेंगे तो उनमें कुछ सुधार हो। वे आश्रम की सेवा भी करेंगे।

उन्हे पैसा भी मिलेगा।

मालती _वो तो ठीक है बेटा पर क्या बाबा जी इन आवारा लडको को अपनी आश्रम में रखेंगे। कही वहा भी कोई कांड न कर दे।

सभी महिलाए हसने लगी।

राजेश _उसकी चिंता आप लोग न करें। बाबा जी को मैं खुद ही जाकर मिलूंगा। वे लडको को रखने जरूर तैयार होंगे।

कौशिल्या देवी _पर आश्रम में क्या उनका मन लगेगा।

भगत _आश्रम में जरूर उन लोगो का मन लगेगा, क्यू की एक बडकर एक अप्सराएं सेविका के रूप में जो अपनी सेवा दे रही है।

कौशिल्या देवी _लगता है तेरा भी मन आ गया है उन सेविकाओं पर, कही हमे छोड़कर तू भी तो आश्रम में रहने नही चला जायेगा।

सभी औरते हसने लगी।

भगत _अरे नही मां जी, तुम लोग भी अप्सराओं से कम थोडी हो जो छोड़ कर चला जाऊ। हां तुम लोगो का प्यार ऐसा ही बराबर मिलता रहना चाहिए।

सभी लोग हसने लगे।

कौशिल्या देवी _काफी समय हो गया अब सभी लोग कपड़े पहनो और अपनी घर जाओ नही तो घर वाले ढूंढते यहां न आ जाए।

सभी लोग अपनी जब कपड़े पहन कर चलने लगे तो सभी की चाल बदल चुकी थी जिसे देखकर राजेश हसने लगे।

राजेश _चाची ठीक से चलो नही तो मोहल्ले वाले को पता चल जाएगा की तुम अपनी कुआ बोर दोनो खुदा के आ रही हो।

मालती _उड़ा ले मजाक अपनी चाची की, यहां ठीक से चला नही जा रहा और चाल की बात कर रहा है। बदमाश कही का।

सभी लोग हस पड़े।

इधर स्वीटी कालेज से अकेली घर पहुंची।

सुनीता _ स्वीटी तू अकेली आई है। राजेश कहा है।

स्वीटी _मां भैया का पता नहीं कहा है? मैंने काल किया पर उसका फोन स्वीच ऑफ था। उनके दोस्त बता रहें थे, की वह लंच के समय से ही अपने दोस्त के साथ कही गया है।

सुनीता _ये राजेश भी न। आने दो खबर लेती हूं।

कुछ देर बाद राजेश भी घर आया।

सुनीता _राजेश इधर आओ कहा था, अभी तक?

राजेश _ओ मां मै दोस्ती के साथ था।

सुनीता _दोस्तो के साथ था तो फोन क्यू बंद था तुम्हारा, मुझसे झूठ तो नही बोल रहा न।

राजेश ने सुनिता को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

राजेश _मां आपसे झूठ बोलूंगा क्या?

मै भगत के साथ था। कुछ काम था।

सुनीता _अच्छा ठीक है? जाओ अपने कमरे में फ्रेस हो जाओ मैं नाश्ता बना देती हूं।

राजेश _नही मां मुझे भुख नही।

सुनीता _काफी पिएगा ना।

राजेश _हा ठीक है।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

इधर सुमित्रा जो किचन में ही थी।

सुमित्रा _सुनिता, मुझे तो लगता है कि राजेश झूठ बोल रहा है, और तुम उसकी बातो को मान लेती हो।

सुनीता _भाभी अब जवान लड़के से ज्यादा पूछताछ भी तो नहीं कर सकते न।

सुमित्रा _फिर भी हम उस पर नजर तो रख सकते हैं कही वह कुसंगत में न पड़ जाए।

इधर राजेश अपनी कमरे में जाकर नहाने लगा। नहाना जरूरी था। छः महिलाओ के साथ सेक्स किया था। शरीर की सफाई करना जरूरी था।

इधर सुनिता ने काफी बना ली।

वह राजेश और स्वीटी को कॉफी देने उसके कमरे में जाने लगी तो सुमित्रा ने रोक दिया।

सुमित्रा _दी लाओ मुझे दो बच्चों को मै कॉफी दे आती हूं।

सुमित्रा कॉफी लेकर पहले स्वीटी की कमरे में गई।

सुमित्रा _स्वीटी बेटा क्या कर रही है लो कॉफी पिलो।

स्वीटी _कुछ नही मामी जी आओ बैठो न।

सुमित्रा _कॉफी ठंडी हो जाएगी बेटी मै राजेश को दे दू।

सुमित्रा राजेश के कमरे में चला गया।

राजेश नहाकर ही निकला था और अपने बदन को टावेल से पोंछ रहा था। वह सिर्फ चड्डी में था।

सुमित्रा _राजेश तू अभी नहा नहाया। ये भी नहाने का कोई समय है।

राजेश _मामी आप,।

सुमित्रा _लो कॉफी लाई हूं पिलो।

क्या रोज ही नहाता है क्या इस समय?

राजेश _नही मामी, जरूरत महसूस होती है तो नहा लेता हूं।

सुमित्रा के सामने ही वह टावेललपेट कर चड्डी बदलने लगा।

सुमित्रा _वैसे तू कालेज से लेट क्यू आया, कहा था?

राजेश _मामी बताया तो न मै दोस्त के साथ था।

सुमित्रा _पुरुष दोस्त या महिला दोस्त। मुसकुराते हुवे बोली।

राजेश _मामी आप तो मुझ पर सक करने लगी।

सुमित्रा _अरे जिस तरह तू अपनी मां से लिपटता है न मुझे तुम पर सक होने लगा है। तू कही गलत संगत में तो नही पड़ गया है।

राजेश चड्डी और बनियान पहनकर बेड पर बैठ गया।

राजेश _हा, मामी मै गलत संगत में पड़ गया हूं।

सुमित्रा _तू कुछ गलत काम करके तो नही आया है।

राजेश _मामी मै तो जन्नत का सैर करके आया हूं।

सुमित्रा _यहां जन्नत कहा है जो सैर करने गया था।

राजेश _चाची आप भोली है रहने दो आप नही समझेंगी।

राजेश कॉफी पीने लगा।

सुमित्रा _साफ साफ क्यू नही बता देता, की क्या करने गया था।

राजेश _मामी बताया तो जन्नत की सैर करने गया था। अब और खोल कर तो नही बता सकता आपको, आप मेरी मामी जो हो।

सुमित्रा _अरे मै भी तो जानू तू ऐसा क्या कर के आया है जो अपनी मामी को नही बता सकता। किसी लड़की को घुमाने ले गया था क्या?

राजेश _अच्छा मामी मै इशारे से बताऊ, क्या करके आया हूं।

सुमित्रा _ठीक है बताओ।

पहले बेड पर बैठ जाओ।

सुमित्रा राजेश के बाजू में बैठ गई।

राजेश _तुम मां को तो नही बताओगी न।

सुमित्रा _नही बताऊंगा बाबा ।

राजेश _अच्छा ठीक है इधर देखो।

राजेश ने राजेश ने अपना बाय हाथ की दो उंगली से गोला बनाते हुए कहा,,

आप इसका मतलब समझती हो।

सुमित्रा _ये क्या है? कुछ समझा नहीं।

राजेश ने दाया हाथ के एक उंगली को हिलाते हुए कहा।

आप इसका मतलब समझती है।

सुमित्रा _न, कुछ समझा नहीं।

राजेश _ने फिर एक हाथ के दो उंगलियों से बनी रिंग में दूसरी हाथ के एक उंगली को अंदर बाहर करते हुए कहा,

आप इसका मतलब समझती हो।

सुमित्रा _शर्म से पानी पानी हो गई।

सुमित्राने राजेश के पीठ पर मुक्कामारा

और वह शर्माते हुवे कमरे से जाने लगी

तभी राजेश ने एक हाथ पकड़ कर रोक लिया।

अब तो समझ गई न मै क्या करके आया हूं।

सुमित्रा _छी, तू बहुंत बिगड़ गया। चल छोड़ मुझे। बदमाश कही का।

वह राजेश के हाथ को छुड़ा कर तेजी से कमरे से भागी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

 
सुमित्रा एक संस्कारी, धार्मिक और पतिव्रता स्त्री थी। वह दिखने में बहुत सुंदर थी। हमेशा अपने शरीर को ढक कर रखती थी।उसने अपने पति के सिवाए किसी पराए मर्द की आज तक परिकल्पनाए नही की थी। वह घर के चारदीवारी के अंदर ही रहती थी।राजेश ने आज जो इशारा किया उससे वह बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी। उसकी सांस तेज तेज चलने लगी। जब वह किचन में पहुंचीं। उसकी स्थिति देखकर सुनिता ने पूछा,

क्या हुआ भाभी ऐसे क्यू तुम्हारी सांसे तेज क्यू हो गई है। आपकी तबियत तो ठीक है न।

सुमित्रा _कोइ बात नहीं सुनिता, मै ठीक हू।सुनीता _लो भाभी पानी पी लो।

सुमित्रा पानी पीने लगी।

सुनीता _भाभी कुछ तो बात है। बताओ मुझे क्या हुआ।

सुमित्रा थोडी देर में नार्मल हो गई फिर बोली,,

सुमित्रा _राजेश बड़ा बदमाश हो गया है।

सुनीता _क्यू भाभी क्या हुआ? कही वह आपसे भी तो नही लिपट गया। ये राजेश भी न दिन ब दिन इसकी शरारत बढ़ती का रही है। आने दो उसे अच्छी डाट लगाती हूं।

सुमित्रा _नही re वह मुझसे लिपटा नही।

सुनीता _तो फिर।

सुमित्रा & वह नहा रहा था। जब मैं कॉफी लेकर कमरे में पहुंची।

सुनीता _तो ये बात है। तुम जब वहा पहुंची तो वह नहा रहा थाऔर तुमने उसे नंगा नहाते देख लिया। फिर घबरा कर भागती हुई आई।

सुमित्रा खुल कर नही बता सकी की राजेश ने कितना गन्दा हरकत किया।

सुनीता _दरवाज़ा बंद करके नहाना चाहिए, कमरे में कोई भी आ सकता है। यूज इतना भी नहीं पता, आने दो उसकी खबर लेती हूं।

रात में डिनर के समय जब सभी टेबल पर बैठे थे। सुमित्रा राजेश से बात नही की उससे नजरे चुराने लगी।

अगली सुबह जब राजेश जिम के लिए निकला। वह किचन की ओर गया। कीचन में सिर्फ सुमित्रा थी। सुनिता कुछ और काम से अपने बेडरूम में थी।

राजेश सुमित्रा के पास गया,,

राजेश _, गुडमॉर्निंग मामी।

सुमित्रा ने कोई जवाब नही दिया। अपने काम में लगी रही।

राजेश _मामी, नाराज है क्या हमसे?

कल से नजरे चुरा रही, न बे चीत कार रही।

अगर गलती हो गई हमसे तो माफ कर दो, पर आपका ऐसी नजरे चुराना हमसे बात न करना हमे अच्छा नहीं लगता।

ऐसा कहते हुए राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

सुमित्रा का दिल जोरो से धड़कने लगा।

सुमित्रा _राजेश छोड़ा मुझे, तू बड़ा बदमाश है। मुझसे दूर रहो।

राजेश ने सुमित्रा को अपनी बाहों में और कस लिया।

राजेश _नही मामी पहले तुम बोलो की मुझसे नाराज़ नहीं हो तभी मैं छोडूंगा।

सुमित्रा का दिल जोरो से धड़क रहा था।

सुमित्रा _राजेश, छोड़ो मुझे, आगर किसी ने देख लिया तो क्या समझेंगे? प्लीज छोड़ो बेटा।राजेश _तो बोल दो न कि आप मुझसे नाराज़ नहीं हो। मै छोड़ दूंगा।

सुमित्रा राजेश से पीछा छुड़ाना चाहती थी,,

सुमित्रा_ ठीक है, मैने माफ किया पर तुम मुझसे ऐसा न लिपटना, मुझे पसंद नहीं।

राजेश _ठीक है, मै आपसे नही लिपटुंगा और न ही कल जैसी हरकत करुंगा ठीक है। अब तो नाराज नहीं हो न मुझसे बोलो।

सुमित्रा ने हा में सिर हिलाया।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ते हुए कहा, ये हुई न बात।

ठीक इसी समय सुनीता किचन में पहुंचीं।

सुनीता _बड़ा प्यार हो रहा है मामी भांजे में।

राजेश _गुड मार्निंग मॉम,

सुनीता _गुड मार्निंग बेटा।

राजेश ने सुनिता को अपनी बाहों में जकड़ कर अपना लंड उसके गाड़ में धसा दिया

राजेश _मां अब आप नही थी तो मामी को प्यार करने लगा।

सुमित्रा _सुनिता, तूने राजेश की आदत खराब कर दी है, उसे अपने से चिपका कर।

तुम नहीं थी तो मुझसे ही चिपक गया।सुनीता _तो क्या हो गया भाभी , ?राजेश भी तो आपका बेटा है। वह आपका इकलौता भांजा है। जब तक यहां हो , उसे अपनी मामी से प्यार कर लेने दो फिर पता नही कितने दिनों बाद मिलने का अवसर मिले।

सुमित्रा _न सुनिता ,मुझे ऐसा प्यार नही करना, मुझे बडी शर्म आती है। आप ही करो ऐसा प्यार अपने लाडले से।

राजेश _अच्छा मां, अब मैं चलता हूं।

सुनीता _अच्छा बेटा।

राजेश ने जाते हुवे अपनी मां के गालों पर किस कर दिया।

सुनीता _चल हट बदमाश, सच में तू बिगड़ गया है।

राजेश मुस्कुराते हुवे जिम चला गया।

सुमित्रा _सुनिता, राजेश कुछ ज्यादा ही बिगड़ गया है। देखो न तुम्हे कैसे चूम लिया, जैसे तुम उसकी मां नही बीबी हो।

सुनीता _भाभी, अब क्या करू? जवान लड़के का दिल भी दुखा नही सकती।राजेश जिम से वापस आया और निर्धारित समय पर कालेज चला गया। कालेज से छुट्टी के समय भीमा और उसके दोस्त राजेश से मिले।

भीमा _राजेश भाई मां ने आपसे मिलने कहा था।

राजेश _हां भीमा तुम लोगो की मां काफी चिंतित है तुम लोगो के भविष्य को लेकर। तुम लोगो न मुझे कहा था। कि अब तुम लोग कोई गलत कार्य नही करोगे? मुझे शिकायत का मौका नहीं दोगे।भीमा _राजेश भाई, हम लोग कुछ काम करना चाहते है पर कोई काम नहीं देता क्या करें?

राजेश _तुम्हारे आईएसआई समस्या का समाधान करना चाहता हूं। चलो हम लोग के साथ।

भीमा _कहा चलना है भाई।

राजेश _बाबा का आश्रम, वहां रहकर तुम लोग आश्रम की सेवा करना।

भीमा _पर बाबा जी हमें वहा काम देने तयार होंगे।

राजेश _तुम लोग उसकी चिन्ता मत करो।

राजेश और भगत लडको को लेकर आश्रम की ओर चले गए।

आश्रम में जाकर राजेश ने बाबा से मुलाकात किया।

बाबा _बोलो राजेश कैसा आना हुवा?

राजेश _बाबा मै आपसे एक निवेदन करने आया हूं।

बाबा _कैसा निवेदन राजेश?

राजेश _बाबा मेरे साथ कुछ लड़के आए हुवे है। वे रास्ते से भटके हुए है। उनका भविष्य अंधकार मय है। आपका आशिर्वाद पाकर उनका जीवन धन्य हो जायेगा। आपके सानिध्य में रहेंगे तो, उन्हे भी अच्छे बुरे का ज्ञान होगा। जन सेवा से जुड़ सकेंगे। अपना जीवन सही कार्यों में लगा सकेंगे।उन्हे आप अपनी शरण में ले लीजिए।

बाबा _भटके हुवे लोगो को सही मार्ग दिखाना ही तो हमारा कार्य है। अगर यहां सेवा देने से, रहने से उनका कल्याण होगा तो मैं कैसे मना कर सकता हूं?

उन लडको को बुलाओ।

राजेश ने भगत को उन लडको को बुलाने भेजा। कुछ देर में लडके बाबा के पास पहुंचे।

लडको ने बाबा को प्रणाम किया।

बाबा _क्या तुम लोग यहां आश्रम में रहकर सेवा देने के इच्छुक हो?

भीमा _जी बाबा, अब तो आप के ही शरण में आए हैं। हमे अपनी शरण में ले लीजिए।

बाबा _यहां सेवा देने वालो को आश्रम के नियम कानून का पालन करना पड़ता है। जो नियम को तोड़ता है,उसे आश्रम से जाना पड़ता है। मुझे तुम लोगो से यही उम्मीद है कि यहां रहकर तुम लोग ईमानदारी, निष्ठा पूर्वक, स्रद्धा पूर्वक अपनी सेवा दोगे। यहां के नियमो का पालन करोगे।भीमा _बाबा हम वचन देते है कि आपके बताए मार्गो पर चलेंगे। यहां आश्रम के नियमो के पालन करते हुवे आश्रम की निष्ठा पूर्वक सेवा करेंगे ।

बाबा _आज से तुम लोग मेरे शिष्य हो कल से तुम लोग। यहां आश्रम में रहकर अपनी सेवा दे सकते हो।

राजेश _बाबा आपसे एक और निवेदन है।

बाबा _बोलो राजेश तुम हमसे और क्या ईच्छा रखते हो।

राजेश _बाबा मै चाहता हूं की आपके द्वारा बताया गया समस्याओं के समाधान के उपाय जन जन तक पहुंचे, और वे सपना कल्याण कर सके। दूर दूर तक आपकी ख्याति हो। इसके लिए आप अपना प्रवचन का किसी भक्ति, आस्था चैनल पर सीधा प्रसारण कराए।

बाबा _राजेश, इसकी क्या आवश्यकता है? जिसको मेरी जरूरत होगी,वो दूर से भी मुझसे मिलने आ सकते है।राजेश _बाबा, कई लोग है जिसको आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है पर आपके बारे में जानकारी न होने के कारण, दुख भरे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। टीवी के माध्यम से ऐसे लोग भी आपसे जुड़ सकेंगे। अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर, अपने जीवन को सुखमय बना सकेंगे।

बाबा _ठीक है राजेश अगर तुम लोग सारी व्यवस्थाएं सम्हाल लो तो, टीवी प्रसारण के लिए अपनी सहमती देता हूं।

राजेश _बाबा आप चिन्ता ना करें, सारा मैनेजमेंट ये लडके सम्हाल लेंगे। मै इन लोगो को समझा दूंगा, कि करना क्या है?

बाबा को प्रणाम करके राजेश और भगत, लडको के साथ आश्रम से घर के लिए निकल पड़े।

राजेश _भहत किसी भक्ति चैनल वाले से मिलना पड़ेगा।

भगत _राजेश भाई अपना ग्रुप में एक लड़का है न विक्की उसका मामा भक्ति चैनल पर काम करता है। उनसे बात करें।

राजेश _कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा, हमे विक्की को लेकर उसके मांमां से मिलना पड़ेगा।

भगत _ठीक है भाई।इधर घर में जब राजेश लेट से पहुंचा।

जाते ही अपनी मां को बाहों में भर लिया।

सुनीता _बेटा कहा थ, तुम?

स्वीटी बता रही थीं तुम कालेज से उन लफंगों को जिसने तुम पार हमला किया था, के साथ कही चले गए। सब ठीक तो हैं न।

राजेश _हा मा, सब ठीक है और वो लड़के अब सुधर गए हैं। मै उन लडको को लेकर बाबा जी का आश्रम गया था। वे अब वही रहेंगे और अपनी सेवा देंगे। बाबा जी के सानिध्य में रहकर जनसेवा का कार्य करेंगे।

सुनिता _पर ऐसी क्या मजबूरी थी की जिसने तुम को नुकसान पहुंचाया उसी की मदद करने चला गया।

सुनीता _मां आप ने ही तो सिखाया है की अगर आपके बस में हो तो जरूरत मंद की मदद जरूर करो।

सुनीता _भुख लगी होगी तो कुछ बना दू।

राजेश _भुख तो लगी है मां, आमलेट बना दो।

सुमित्रा वह भी वही पर थी।

राजेश _, मामी जी अभी भी नाराज है क्या मूझसे?

आप चुप क्यू है।

सुमित्रा _मै देख रही हू ,बेटा कि तुम अपनी मां को कैसे बुद्धू बनाते हो।

राजेश _, मतलब आप कहना चाहती हो कि मैं मां से झूठ बोल रहा हूं।

सुमित्रा _अब मुझे क्या पता कि तू सच कह रहा है या झूठ।

सुनीता _भाभी आप तो बेकार मे ही मेरे बेटे पर सक करती हो,,

बेटा अब तुम अपने कमरे में जाकर फ्रेस हो जाओ

मै नाश्ता बनाकार लाती हूं।

राजेश _ठीक है मां।

नाश्ता बन जाने पर,

सुमित्रा _लाओ सुनिता मै दे आती हूं।

सुमित्रा, नाश्ता लेकर राजेश के कमरे में पहुंचीं।

राजेश ने देखा की नाश्ता लेकर उसकी मामी आई है,राजेश _मामी आप,

सुमित्रा _नही आ सकती क्या तेरे कमरे में।

राजेश _आपको आने से किसने मना किया है,? पर जिस तरह से कल कमरे से भागी थी, मुझे लगा था कि अब तुम मेरे कमरे में नही आवोगी।

सुमित्रा _लो नाश्ता कर लो पहले,,

मै तो तुमको ये समझाने आई थी की तु संस्कारी और धार्मिक परिवार से हैं, फिर ये गंदा काम क्यू कर रहा है।? जो तुम कर रहे हो ना वो बिलकुल गलत है। शादी के पहले लड़कियों के साथ सोना, अच्छा लड़के नही करते, ये सब।

राजेश _मामी, तुम भोली हो, अब तुमको कैसे समझाऊं। तुम नही समझोगी।

सुमित्रा _लो अब क्या अच्छा है क्या बुरा? अपनी मामी को ही समझाओगे, मै भाई तो जानू ऐसी क्या बात है जो मै न समझ सकू।

राजेश _मुस्कुराते हुए कहा, कल तो समझाने की कोशिश किया समझ ही नहीं रही थी, और जब समझी तो मुंह छिपाने लगी। राजेश हंसने लगा।

सुमित्रा _तू गंदी हरकत करेगा तो क्या तेरा मुंह देखते बैठी रहूंगी । मै इतनी बेशरम नही। तुम किसी दूसरे तरीके से भी तो समझा सकते थे।

राजेश ने फिर से अपनी दो उंगलियों से गोला बनाकार उसमे एक ऊंगली अन्दर बाहर करते हुए कहा।

अब इसमें अश्लीलता क्या है? ये इशारा तो आजकल सामान्य सी बात है।

सुमित्रा _चल हट बदमाश फिर तू गंदी हरकत करने लगा। देख बेटा ये सब अच्छे लड़के के लिए ठीक नहीं। तू अपना नही तो अपनी मां बाप की इज़्जत का तो खयाल रख।

सुमित्र खड़ी थी,उसे हाथ से खींचकर,

अपनी मामी को अपने गोद में बिठा लिया।

सुमित्रा _अरे छोड़ क्या कर रहा है। छोड़ मुझे बेशरम।

राजेश _ठीक है मामी आज से मैं आपकी हर बात मानूंगा,वहीं करुंगा को आप करोगी। पर,,,

सुमित्रा _पर, क्या बेटा?

राजेश _रोज सुबह मुझे किस करने दोगी।

सुमित्रा _चल हट बेशरम तुमसे तो बाते करनी ही बेकार है।

सुमित्रा _ने राजेश से खुद को छुड़ाने कि पुरी कोशिश करने लगी। पर राजेश उसे और जोर से पकड़ लिया।

अरे छोड़ न बदमाश कही का,,

राजेश _पहले एक किस दो,,

सुमित्रा _मै तेरी बीबी नही,,

राजेश _मां तो देती है।

सुमित्रा _न, मुझे पाप पड़ेंगे तुम्हारे मामा जी का भरोसा नहीं तोड़ सकती।

राजेश _मामी ,मै तो आपको मामी भांजे का प्यार वाला किस करूंगा, पति पत्नी वाला थोडी ,जो मामा जी का भरोसा खो दोगी।

अब दे भी दो जल्दी से।

सुमित्रा _न, बाबा मूझसे नही हो पाएगा अब छोड़ों मुझे।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया, ठीक है जाओ। नही देना है तो मत दो,,,

हम भी वही करेंगे जो हमारा मन लगेगा। हम किसी का नही मानेंगे।

सुमित्रा _तू, तो नाराज़ हो गया re, तू सच में अब से किसी लड़की के साथ शादी से पहले गंदा काम नही करेगा।

राजेश _ठीक है मामी पहले किस तो दो।सुमित्रा__किसी को बताएगा तो नही? नही तो तुम्हारे मामा जी को मुंह नही दिखा पाऊंगी।

राजेश _मामी क्या बात करती हो ऐसी बाते भी कोई किसी को बताई जाती हैं क्या?

सुमित्रा _अच्छा ठीक है पर सिर्फ एक बार करना।

राजेश _ठीक है मामी।

आप अपनी आंखे बन्द कर लो।

सुमित्रा ने अपनी आंखे बन्द कर ली।

राजेश ने उसके चहरे को गौर से देखा।

राजेश ने अपने मन में कहा,, मामी कितनी खूबसूरत हो तुम,,,

वह सुमित्रा की ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।

राजेश की इस हरकत से सुमित्रा की दिल की धड़कन बढ़ गई।

सुमित्रा _आंखे खोली और खुद को राजेश से छुड़ाती हुई बोली,,, छी ये कैसा किस है? तू नही सुधरेगा।

और खुद को राजेश से छुड़ाकर कमरे से भागी। और हांपते हुवे किचन में पहुंचीं।

सुनिता _अब क्या हुआ, भाभी क्या आज भी राजेश को नंगा देख ली क्या?

सुमित्रा _चुप re, ऐसा कुछ नहीं।

सुनीता _फिर ऐसा क्या हो गया ,?जो हांप रही हो!

सुमित्रा _वह मुझे भी तुम्हारी तरह बाहों में भरकर प्यार करना चाहता था मैं भाग के आ गई।

तुमने उसकी आदत बिगाड़ दी है।सुनियाऔर सुमित्रा दोनो मुस्कुराने लगे।अगले दिन शुक्रवार था। बाबा ने सुमित्रा को अनुष्ठान के लिए बुलाया था।

और उसी दिन प्रिया ने सुनिता की भ्रूण का pratishthapan हेतु घर हॉस्पीटल बुलाई थी।राजेश, जब कालेज जाने को huwa तब सुनीता ने उनसे कहा।

सुनिता _बेटा, तू आज कालेज से जल्दी घर आ जाना अपनी मामी को बाबा जी के पास ले जाना आज शुक्रवार है न भूल गया क्या?

राजेश _ठीक है मां, आ जाऊंगा।

दोपहर में राजेश घर आ गया।

सुमित्रा तैयार बैठी थी।

सुनीता _जाओ बेटा अपनी मामी को बाबा जी के पास ले जाओ, इस थैले में सारा सामान है जो बाबा जी ने लाने को कहा था।

सुमित्रा,_सुनिता तुम नही जाओगी साथ में।

सुनीता _भाभी ऐसी अनुष्ठान गुप्त रूप सी की जाती है इसमें ज्यादा लोगो का जाना ठीक नही।

राजेश अपने बाइक से सुमित्रा को बाबा जी के पास ले जाने लगा।

इधर सुनिता भी तैयार होकर हॉस्पिटल निकल गई।

राजेश ने रास्ते में कहा,, मामी आप मूझसे नाराज हो क्या? मूझसे बात नही कर रही ।

सुमित्रा _तुम कल भी गंदी हरकत की नमेरे से।

राजेश _आपके कहने पर तो किया। फिर नाराज़ क्यू?

सुमित्रा _मैने गालों पर किस करने कहा था तुमने तो मेरे ओंठ,, छी मुझे टू कहने में भी शर्म आती है।

सच में बहुंत बिगाड़ गया है तू।

राजेश _पर मामी आज कल तो ऐसे ही किस लेते है।

सुमित्रा _तुम्हारे मामा जी ने तो ऐसा कभी नहीं किया जो हरकत तू की।

राजेश _मामी जी माफ कर दीजिए , मुझे लगा आप नाराज नही होंगी, और ऐसा किस ले डाला।

अब ऐसी किस नही लूंगा बस गालों पर लूंगा ठीक है।

सुमित्रा _न बाबा अब मैं तेरी कोई बात नहीं मानने वाली।

इस प्रकार बातचीत करते हुवे आश्रम पहुंच गए।

आश्रम में जाकर बाबा से मिले बाबा उन्ही लोगो का इंतजार कर रहा था ।

बाबा ने अपनो सेविका को बुलाया और सुमित्रा को स्नान करा, अनुष्ठान के लिए तैयार कर लाने को कहा।

सेविका, सुमित्रा को कमरे के अंदर ले गई। वहा बाथरूम में नहलाई उसकी शरीर की अनचाहे बालों की अच्छे से सफ़ाई की।

सुमित्रा, बहुंत ही शर्मिंदगी महसूस कर रही थी। पहली बार कोई महीला उसकी chut की बाल साफ कर रही थी।chut पे लंबे लंबे घने बाल उग आए थे। न जाने कितने दिनों से वह अपनी बुर की बाल नही बनाई थी।

बालो की सफाई कर उसे अच्छे से नहलाई, उसके पुरे शरीर हल्दी मल दी। कुछ देर बाद यूज फिर नहलाई। उसके शरीर में सुगंधित तेल लगादी ।

बाबा द्वारा मंगाए हुए सफेद साड़ी पहना दी। उसकी बदन पर सिर्फ़ साड़ी ही लिपटा हुआ था। उसकी बाल भी खुले रखे दी।

सेविका ने सुमित्रा को तैयार कर जैसे ही अनुष्ठान कक्ष में लाई।

राजेश अपनी मामी को इस रूप में बस देखता ही रह गया। इस समय सुमित्रा काम की देवी लग रही थी।

उसके बदन की खुशबू पुरे कमरे में भर गया।

सुमित्रा अपने शरीर को हमेशा ढक कर रख ती थी। आज पहली बार सिर्फ एक साड़ी में जब राजेश ने सुमित्रा को देखा तो देखता ही रह गया।

उसे यकीन नही हो था की सामने जो काम कि देवी बैठी है वह उसकी मामी है। जो अपने शरीर को हमेशा कपड़ो से ढकी रहती है, और वस्त्र थोडा भी इधर उधर हो जाए तो उसे तुरंत ठीक करती है।

आज साडी के पल्लू के नीचे उनके उभार से स्पष्ट प्रतीत हो रहा था कि उनके उरोज की गोलाइया, अभी तक बरकरार है। बाहर से ही देखकर लग रहा था कि अंदर का नजारा ऐसा होगा जिसे नामर्द भी देख ले तो वह मर्द बन जाए।

सुमित्रा अपनी अंदर के खजानों को लोगो की नजरो से छुपा के रखती थी।आज अपने को इस अवस्था में पाकर वह भी बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी। वह अपनी अपनी नजरे नीचे करके बाबा के सामने बैठी थी, और बाबा की निर्देशों का पालन करते हुवे, अनुष्ठान क्रिया में लगी हुई थी।

इधर राजेश अपनी आंखो से अपनी मामी की सौंदर्यता का रस पान कर रहा था।

अभी तक राजेश ने अपनी मामी के साथ जो भी हरकत की थी। वह सिर्फ़ एक मजाक था। उसके मन में अपनी मामी के लिए किसी प्रकार की काम वासना नही था। लेकिन आज इस रूप में अपनी मामी को देखकर, उसके मन में अपनी मामी की खूबसूरत गदराइ बदन को देखकर उसकी जिस्म को भोगने की ईच्छा जागृत होने लगी।

करीब एक घंटा तक अनुष्ठान कार्य चलता रहा। एक घंटे तक वह किस प्रकार से दो मर्दों के बीच बैठ कर सुमित्रा ने अनुष्ठान कार्य पूरी की वह ही समझ सकती है। वह एक संस्कारी और पतिव्रता स्त्री थी।

किसी पराया मर्द की बुरी नजर न पड़ जाए इसके लिए वह अपनी वस्त्र को लेकर हमेशा जागरूक रहती थीं।


अनुष्ठान संपन्न होने के बाद बाबा ने अंत में जो निर्देश दिया उसे सुनकर सुमित्रा की पैरो तले जमीन खिसक गई।
 
सुमित्राएक संस्कारी, धार्मिक पतिव्रता स्त्री थी। वह दो मर्दों के सामने अपने शरीर में सिर्फ एक साड़ी लपेट कर बैठना, उनके लिए आसान नहीं था। वह अत्यंत लज्जित महसूस कर रही थी।

वह बाबा के निर्देशों का अनुसरण करते हुवे,किसी तरह बडी मुस्किल से अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद सुमित्रा को जब बाबा ने कहा बेटी ये कामदंड है। ये पंच धातुओं से बना है।

जब सुमित्रा ने उस कामदंड को देखी तो शर्म से गढ़ गई। क्यों कि उस दंड की बनावट लंड जैसा ही था।

बाबा _बेटी इस काम दंड को तुम्हारे क़मर पे नाभि के नीचे बांधना है। तुम खड़ी हो जाओ।

सुमित्रा अपनी सिर को नीचा करके ही बैठी रही, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

बाबा _बेटी क्या सोचने लगी। इस कामदंड को पहनने से तुम्हारे शरीर के अंदर जो विषैले तत्व जमा है जो भ्रूण के विकास में बाधक है वह तुम्हारे शरीर से बाहर निकलेगा और नए हार्मोंस बनेंगे जो गर्भ के विकाश में सहायक होगा। तुम खड़ी हो जाओ मैं इसे तुम्हारे क़मर में बांध देता हूं।

सुमित्रा ने किसी तरह खुद को इसके लिए तैयार की और वह अपने स्थान पर खड़ी हो गई।

बाबा ने कुछ मंत्र बुदबुदाया फिर उस काम दंड पर फूक मारी। कामदांड का एक हिस्सा लंड के टोपा आकृति का था। दूसरे छोर पर एक छेद था जिसमे रेशम का धागा डालकर सुमित्रा के क़मर पर बांध दिया।

बाबा _बेटी तुम इस कामदंड को साड़ी के नीचे कर लो। तुम इस कामदंड को पेटिकोट के नीचे रखना और पेटी कोट के नीचे कोई अंतः वस्त्र न पहनना।

इस कामदंड को रात में सोने से पहले निकालना होगा और अगली सुबह स्नान करने के बाद इसे पहनना होगा।

लेकिन इस काम दंड को तुम अपनी हाथो से नही निकालना, अपसगुण होगा इसे कोइ पुरुष ही निकाल सकता है। हा नहाने के बाद इस काम दंड को प्रणाम कर तुम अपनी हाथ से अपनी क़मर पर बांध सकती हो।

सुमित्रा ने हा में सिर हिलाया।

बाबा _बेटी यह अनुष्ठान सफलता पूर्वक संपन्न हो गया, अब तुम कमरे में जाकर इस साड़ी को निकालकर अपनी पुरानी वस्त्र धारण कर लो। इस साड़ी और सारी पूजन सामाग्री को इकठ्ठा कर नदी में विसर्जित करना है।

सुमित्रा ने बाबा के चरणों को प्रमाण किया।

बाबा _प्रभु तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेगी बेटी।

सुमित्रा, बाबा का आशिर्वाद प्राप्त कर कमरे में चली गई और पहनी हुई साड़ी उतार कर अपनी पुरानी वस्त्र पहन ली पेंटी नहीं पहनी।

इधर राजेश कोने में बैठकर सारी गतिविधियों को ध्यान से देख रहा था।

बाबा _राजेश इन सारी पूजन सामाग्री को थैले में इकठ्ठा करो, इसे घर जाने से पहले नदी में विसर्जित कर देना।

राजेश _ठीक है बाबा।

राजेश ने सारा पूजन सामाग्री थैले में इकठ्ठा किया बाबा ने उसका सहयोग किया।

सुमित्रा ने अनुष्ठान के समय जो साड़ी पहनी थी उसे भी विसर्जन के लिए, राजेश को दे दिया।

बाबा से आज्ञा लेकर राजेश और सुमित्रा दोनों आश्रम से निकल गए।

राजेश ने बाइक को नदी की ओर मोड़ दिया।

सुमित्रा _राजेश हम कहा जा रहें हैं।

राजेश _मामी, हम नदी की ओर जा रहे हैं वहा पूजन सामग्री नदी में विसर्जित करना है।

नदी में पूजन सामग्री प्रवाहित कर ने के बाद वे सीधे घर के लिए निकल पड़े।

इधर सुनिता भी हॉस्पिटल से घर पहुंच चुकी थी। प्रिया ने सुनिता की भ्रूण को निकाल कर अपने गर्भ में डाल लिया। और अपने अंडे को बाहर निकाल ली थी। ताकि उसका उपयोग आईवीएफ के लिए कर सके।

जब सुमित्रा और राजेश घर पहुंचे। सुनिता ने दरवाज़ा खोली।

सुनीता _भाभी कैसा रहा अनुष्ठान, अच्छे से संपन्न हुवा, की नही।

सुमित्रा _हा, सुनिता अनुष्ठान तो अच्छे से संपन्न हो गया पर बाबा ने आगे भी कुछ निर्देश दिए है।

सुनीता _भाभी जब तक कार्य सफल नहीं हो जाता बाबा के दिए निर्देशों का अच्छेसे अनुसरण करना।

तुम लोग थक गए होगे जाओ अपने कमरे में मै चाय बना देती हूं।

राजेश और सुमित्रा दोनों अपने कमरे में जाकर आराम करने लगे।

सुनीता ने चाय बनाकार, सुमित्रा, राजेश और स्वीटी के कमरे में जाकर उन्हें चाय दे आई।

कुछ देर आराम करने के बाद सुमित्रा किचन में सुनिता की मदद करने के लिए बेड से उठी और किचन की ओर जाने लगी।

इधर कामदंड ने अपना काम करना शुरू कर दिया। जैसे ही वह चलने लगती। काम दंड भारी होने के कारण हिलने लगता। उसका टोपा ठीक बुर के मुहाने पर था, टोपा बुर के भगनाशा से टकराता, जिससे सुनिता के शरीर में सिहरन पैदा होने लगी।

किचन में काम करते उठते बैठते झाड़ू लगाने के दौरान। काम दंड घंटी की तरह हिल हिल कर बुर पर ठोकर मारता जिससे सुमित्रा के शरीर में उत्तेजना भरने लगा, उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।

सुमित्रा _हे भगवान, ये काम दंड तो मेरे योनी की पानी ही निकाल दी। ये कैसी परीक्षा है प्रभू?

इधर राजेश अपने कमरे में अपनी मामी के खूबसूरत जिस्म को ही याद कर रहा था।

राजेश _मामी, कितनी खूबसूरत है, एकदम गदराई हुई बदन की। अपनी हुस्न को लोगो से छिपाकर रखती थी, कभी लगने ही नही दिया की अपने वस्त्र के नीचे सेक्स बम छुपा रखी है। यह सब सोंचकर ही उसका लंड तन चुका था वह अपने हाथो से लंड सहलाते हुए, अपनी मामी की कामदेवीरूप को याद करने लगा।

इधर सुमित्रा का हाल भी बिगड़ता जा रहा था। कामदंड के कमाल से सुमित्रा की शरीर में उत्तेजना भर दिया था, वह गर्म हो चुकी थी। उसके बुर से पानी निकलकर उसकी टांगो तक बहने लगी।

रात में सोने के समय बाबा ने कहा था काम दंड को निकालकर सोना है, पर उसे अपनी हाथो से नही निकाल सकती। अपसगुण होगा।

सुमित्रा _हे भगवान, अब मैं क्या करूं? इस कामदंड को निकालने के लिए किसी पुरुष को बोलना पड़ेगा। अब मेरे पति तो यहां है नही, मुझे राजेश को ही कहना पड़ेगा, और कोई चारा नहीं। हे भगवान ये मेरी कैसी परीक्षा ले रहे हो?

सुमित्रा अपने रूम से बाहर निकली , उसने घर का मुआइना किया जब लगा कि सभी लोग सो गए हैं तो वह राजेश की कमरे की ओर गई, राजेश के कमरे में जाने पर,,

राजेश _अरे मामी आप, अभी तक सोई नहीं।

सुमित्रा _राजेश, बाबा ने क्या कहा है तुमको मालुम है न, सोने से पहले कामदंड को निकालना है। इसे किसी पुरुष द्वारा ही निकालने कहा है तुम्हारे मामा जी तो है नही अब कौन निकालेगा इसे।

राजेश _मामी आप चिंता क्यू करती हो,मै निकाल देता हूं।

सुमित्रा _पर तू बड़ा बदमाश है, कोई छेड़ खानी तो नही करेगा।

राजेश _मामी, मै कोई छेड़खानी नही करूंगा, मुझपर विश्वास करो। तुम कहो तो अपनी आंखे बन्द कर लू।

सुमित्रा _ठीक है, चलो मेरे कमरे मे।

राजेश _मामी यही निकाल देता हूं।

सुमित्रा _न बाबा, तुम्हारे कमरे मे कोई आ गया तो मैं बादनाम हो जाऊंगी। कुछ बहाने बनाते भी नहीं बनेगा की मैं यहां क्या करने आई हूं?

राजेश _अच्छा ठीक है मामी आप चलो अपने कमरे में मै आता हूं।

सुमित्रा अपने कमरे मे चली गई और राजेश कुछ देर बाद वहा पहुंचा।

सुमित्रा _बेटा दरवाज़ा बंद कर दो।

राजेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया।

राजेश _बेड के किनारे बैठ गया ।

सुमित्रा तो पुरे बदन को ढक कर कपड़े पहनती थी।

राजेश _मामी, अपनी साडी खोल दो तब धागा दिखाई देगा, तब मैं काम दंड निकाल पाऊंगा।

सुमित्रा _बेटा मुझे शर्म आएगी।

राजेश _मामी, अब मूझसे क्या शर्माना? आज तो सिर्फ एक साड़ी में ही अनुष्ठान में बैठी थी न।

सुमित्रा _न बाबा,मै कितनी लज्जित महसूस कर रही थी मैं ही जानती हूं।

राजेश _मामी अब मेरे सामने लजाओगी तो काम कैसे बनेगा। नही खोलना है तो मैं जा रहा हूं।

सुमित्रा _अरे, रूको, खोलती हूं,,

सुमित्रा ने अपनी साड़ी उतार दी। वह अपने दोनो हाथो से अपनी सीने छिपाने लगी।

राजेश उसके बदन को निहारने लगा, उसकी खूबसूरत बदन को देखकर उसका शरीर गर्म होने लगा।

रेशम का धागा अभी भी पेटिकोट के नीचे था।

राजेश _मामी पेटिकोट थोडा नीचे करो तब धागा दिखेगा।

सुमित्रा _न बेटा मैं पेटिकोट नीचे नही कर सकती।

राजेश _तब तो मुझे हाथ डालकर ही रेशम के धागा को उपर खींचना होगा।

राजेश ने अपना हाथ पेटी कोट के नीचे डाला और धागा को उपर खींच लिया।

सुमित्रा सिहर उठी।

राजेश _क्या huwa मामी।

सुमित्रा _कुछ नही, गांठ को जल्दी खोलो।

राजेश धागे की गांठ खोलने लगा।

सुमित्रा _अरे कितनी देर लगाएगा गांठ खोलने में।

राजेश _मामी गांठ कस कर लगा huwa है।

राजेश ने गांठ खोल दिया फिर वह धागे को पकड़ कर कामदंड को उपर खींचा।chut को रगड़ता huwa kamdand बाहर निकला।

राजेश ने कामदंड को देखा और मुस्कुराने लगा।

सुमित्रा शर्मिंदगी महसूस करने लगी।

राजेश _लो मामी हमने आपका काम कर दिया। उस काम दंड को बेड पर रख दिया।

राजेश _अब हमे भी तो कुछ मिलना चाहिए हमने आपका काम जो किया ।

सुमित्रा _अच्छा, मै भी तो जानू क्या चाहिए तुम्हे।

राजेश _वही एक किस।

सुमित्रा _चल हट बदमाश, फिर बदमाशी करने लगा।

राजेश _मामी एक बात बोलूं।

सुमित्रा _बोलो क्या बात है?

राजेश _आपका बदन बहुत खूबसूरत है।

सुमित्रा _तू, बकवास करना बंद नही करेगा।

राजेश _इसमें बकवास की क्या बात है, जो सच है वही कहा।

सुमित्रा _चलो अब हो गया अपने कमरे मे जाओ।

राजेश _ये क्या बात हुई? काम निकल गया तो तुम कौन?

सुमित्रा _तो क्या चाहिए?

राजेश _कहा न एक किस देदो।

सुमित्रा _तू बदमाशी करता है।

राजेश _नही करुंगा, कसम से।

सुमित्रा _ठीक से सिर्फ एक चुम्मा ओ भी गालों पर।

राजेश _ठीक है। आओ बैठो।

सुमित्रा _कहा।

राजेश _मेरी गोद पर।

सुमित्रा _चुप बेशरम अपनी मामी को अपनी गोद में बिठाएगा।

राजेश _तब तो चुम्मा लेने में मजा आयेगा

राजेश ने सुमित्रा को खीचकर अपनी गोद में बिठा दिया। राजेश का खड़ा लंड का अहसास जब सुमित्रा की गाड़ में हुई उसकी शरीर कपकपा गई।

सुमित्रा _अरे छोड़ न क्या कर रहा है? मै तेरा मामी हू।

राजेश _एक चुम्मा तो दे दो।

राजेश सुमित्रा को अपनी गोद में बिठाकर जकड़ लिया ताकि वह उठ कर भाग न पाए। फिर वह उसकी गालों को चूम लिया।

सुमित्रा _चल छोड़ अब हो गया।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया।

सुमित्रा राजेश के गोद से उठ गई।

सुमित्रा _अब जाओ, बहुत हो गया बदमाशी,

राजेश जब खड़ा huwa तो उसके लोवर के अंदर तंबू बना था जिसे देखकर सुमित्रा शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _थैंक्यू मामी चुम्मा के लिए।

राजेश अपना लंड सहलाता कमरे से चला गया।

अगली सुबह सुमित्रा स्नान कर पूजा पाठ किया फिर, काम दण्ड को फिर से पहन लिया।

इधर राजेश सुबह उठकर जिम जाने तैयार huwa।

किचन में जाकर अपनी मां को जकड़ लिया।

राजेश _गुड मार्निंग मॉम।

सुनीता _गुड मार्निंग बेटा।

तभी राजेश ने वही पर खड़ी अपनी मामी के पिछवाड़े पे चुटकी कांट ते हुवे, गुडमॉर्निंग मामी कहा।

सुमित्रा ने गुस्से से राजेश की ओर देखा।

सुमित्रा _गुड मार्निंग बदमाश कही का।

राजेश कुछ देर अपनी मां को बाहों में भरकर बातचीत कर जिम के लिए निकल गया।

इधर सुमित्रा की हालत कामदंड ने फिर से खराब कर दी। चलने फिरने झुकने, और बैठते समय कामदंड हिल हिल कर सुमित्रा की बुर पर ठोकर मारता, जिससे सुमित्रा न चाहते हुवे भी उत्तेजित होने लगी। उसकी बुर से पानी बहना सुरू हो गया। वह अपने आप में ही काफी शर्मिंदगी महसूस करने लगी।

इधर राजेश स्वीटी के साथ कालेज चला गया।

कालेज में छुट्टी के बाद भगत और कालेज में साथ पड़ने वाले विक्की के साथ वह भक्ति चैनल, पर प्रसारण के लिए बातचीत करने चला गया।

चैनल के डायरेक्टर से बातचीत कर प्रसारण हेतु एक घंटे का समय निर्धारित किया। प्रसारण के लिए चैनल वाले को पैसे देने थे। उसके लिए भी चैनल वाले se सहमति बनाया।

आश्रम में जाकर बाबा,भीमा, और लडको के साथ एक बैठक रखा।

प्रवचन के दौरान बीच बीच में लोगो के समस्या के समाधान के उपाय बताना है। साथ ही अगर किसी को इससे लाभ huwa तो पत्र लिखकर इसकी जानकारी बाबा जी को देना है।

सभी लडको और भीमा अन्य सेवक सेविका को उनकी जिम्मेदारी बता दिया गया।

पहला प्रवचन जिसका सीधा प्रसारण भक्ति चैनल पर किया जाना था, उसका रूपरेखा तैयार कर लिया गया।

काफी रात हो गई थी। बाबा के कहने पर राजेश और भगत ने आश्रम में ही भोजन करने तैयार हो गया। इधर सुनिता ने राजेश को काल किया,

सुनीता _बेटा तू कहा है?

राजेश _मां मै कुछ जरूरी काम से हू। मुझे आने में लेट होगी। मै खाना यहीं आश्रम में ही खाऊंगा।

राजेश और भगत ने आश्रम में ही भोजन किया।

आश्रम से जब, राजेश घर आया तो रात के 11बज चुके थे।

सुनीता ने दरवाज़ा खोला।

सुनीता _बेटा इतनी रात तक बाहर रहना ठीक नही क्या काम आ गया था जी इतनी देरी हो गई?

राजेश _मॉम, बाबा के प्रवचन का सीधा प्रसारण अब चैनल पर होगा, उसी सिलसिले मे लेट हो गया।

सुनीता _बेटा तुमको क्या लेना देना है?

राजेश _मां मै चाहता हु की बाबा द्वारा बताए समस्या समाधान के उपाय सब जरूरत मंद को मालूम हो।

सुमित्रा _अच्छा ठीक है? अब जाओ अपने कमरे में आराम करो रात बहुत हो गई है।

इधर सुमित्रा का हाल तो बहुत बुरा था। सुबह से ही कामदंड ने उसकी योनी से पानी बहाना जारी रखा था। पेटी कोट की सामने हिस्सा गीला हो गया था।

राजेश की आने की आहट जब huwa तो उसने राजेश की कमरे की ओर दौड़ लगाई।

सुमित्रा _आ गया तू, कहा रह गया था re। फिर किसी के साथ गंदा काम तो नही कर के आया।

राजेश _ओ हो मामी तुम भी न। इतना सक करना भी ठीक नहीं।

सुमित्रा _तुम इतनी बदमासी जो करते हो इसलिए सक होता है।

अच्छा चलो मेरे कमरे में।

राजेश _क्यू मामी?

सुमित्रा _क्यू भूल गया क्या?

राजेश _राजेश ने सुमित्रा को पीछे से अपनी बाहों मे भर लियाऔर कहा,, नही मामी जी मै कैसे भूल जाऊंगा।

पर मेरी भी एक शर्त माननी पड़ेगी।

सुमित्रा _किस गालों पर नही ओंठो पर देना होगा। बोलो मंजूर है।

सुमित्रा _न, बिलकुल नहीं।

राजेश _तो फिर मैं भी आपकी मदद नहीं करूंगा।

सुमित्रा _तू अपनी मामी को ब्लैक मेल कर रहा है।

ठीक है मत करों मेरी मदद, छोड़ों मुझे।

सुमित्रा के आंसू निकल गए।

राजेश _अपनी मामी को रोता देख कहा, मामी जी मै तो मजाक कर रहा था। आप रोइए मत प्लीज।

सुमित्रा फिर रोने लगी,,,

राजेश _राजेश ने सुमित्रा को अपनी ओर घुमा कर कहा ,मामी आप रोइए मत मैं आपसे वादा करता हूं आप जो कहेंगे मै वही करूंगा ,बीना किसी बदमाशी के , बिना किसी शर्त के मै वादा करता है आपसे।

आप चलो मैं आता हूं।

राजेश कुछ समय के बाद सुमित्रा के रूम में गया।

सुमित्रा ने अपनी साड़ी उतार दी। राजेश ने हांथ पेटिकोट के नीचे ले जाकर रेशम के धागे को पकड़ कर उपर किया फिर गांठ छोड़कर कामदंड को बाहर निकाल दिया।

राजेश _मामी अब मैं चलता हूं।

सुमित्रा _क्यू मदद के बदले इनाम नही चाहिए क्या?

राजेश _मामी, रहने दो, मुझे तुम्हारा रोना पसंद नहीं, अब मैं चलता हूं।

सुमित्रा _तू तो एकदम शरीफ बन गया re, पहले पता होता कि तुम मेरे रोने से बदमाशी नही करोगे तो, इतनी दिनों तक तुम्हारी बदमाशी नही झेलनी पड़ती। और वह हसने लगी।

राजेश मुंह लटकाकर जाने को huwa

सुमित्रा _अरे तू तो नाराज़ हो गया, अच्छा बाबा ले ले किस जहां लेना है।

राजेश _तुम रोवोगी तो नही।

सुमित्रा _न।

राजेश ने सुमित्रा को अपनी ओर खींचकर बाहों में भर लिया, फिर उसको आंखों में देखता huwa उसकी ओंठ को अपनी अपनी मुंह में भरकर चुसने लगा।

सुमित्रा की शरीर में करेंट दौड़ गया। उसकी बुर की हालत तो पहले से ही खराब थी।

कुछ देर ओंठ चुसने से सुमित्रा का पूरा बदन कपकपा गया।

राजेश ने सुमित्रा को छोड़ दिया। सुमित्रा राजेश से नजर नहीं मिला पा रही थी।

राजेश अपने कमरे मे चला गया।

इधर सुमित्रा ने अपनी बुर पर उंगली ले जाकर देखा राजेश की हरकत से उसकी बुर में फिर से बाढ़ आ गई थी।

आज दिन भर उसकी बुर से पानी बह बह कर सुख रही थी, जिसके कारण सुमित्रा की बुर खुजा रही थी। जैसे ही वह अपनी उंगली बुर पे ले गई खुजली और बड़ गई। वह अपनी बुर खुजाने लगी। खुजाते खुजात्रे कब उसकी एक उंगली उसकी बुर में चली गई उसे पता ही नहीं चला, वह सुबह से ही गर्म थी। उसे उंगली डालकर बुर में अंदर बाहर करना बहुत अच्छा लगाने लगा, धीरे धीरे वह अपनी उंगली की गति बढ़ाती गई और एक स्थिति ऐसी आई की वह अपनी हाथ पैर से बेड को भींचते हुए झड़ गई, तब उसे कुछ राहत महसूस हुई।

जब उसे होश आया तब यह सोचकर की उसने कितनी गंदी हरकत की है, छी, उसे अपने आप पर बहुत शर्मिंदगी महसूस होने लगी। आज से पहले वह ऐसी हरकत कभी नही की थी।

कामदंड ने उसे एक प्यासी महीला बनाने में तुला huwa था।

अगली सुबह स्नान कर सुमित्रा ने कामदंड अपनी कमर पर फिर बांध ली। उनका फिर से वही हाल huwa, उनकी हालत दिन ब दिन और ज्यादा खराब हो रहा था।

बाबा ने सही कहा था यह काम दंड शरीर में जमे तत्वों को बाहर निकलेगा और नया हार्मोंस पैदा करेगा।

आज तो उसकी बुर में खुजली ज्यादा बड़ गई थी। वह बार बार अपनी बुर खुजाती जिससे उसकी खुजली और बड़ जाती।

न जाने क्यूं वह राजेश के कालेज से आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।

जब राजेश ने कालेज से आकर अपनी मां को बाहों मे भर लिया।

सुनीता _आ गया मेरा बेटा।

राजेश _हा मां।

सुनीता _आज तू समय पर आ गया बेटा।

राजेश _मां, रोज रोज तुम्हारा दिल दुखाना ठीक नही न इसलिए।

सुनीता _अपनी मां का बड़ा खयाल है तुम्हे।

राजेश _मेरी मां इतनी प्यारी जो है, खयाल तो रखना पड़ेगा

सुमित्रा वही बाजू पर खड़ी थी।

सुमित्रा _हा भई यहां तो सब मां के दीवाने है मामी को तो कोई पूछने वाला नहीं।

राजेश ने झट से अपनी मां को छोड़कर अपनी मामी को बाहों में जकड़ लिया।

राजेश _मामी आप ऐसा क्यू बोल रही हो हम तो आपके भी दीवाने है।

सुमित्रा _रहने दो, झू ठा प्यार न दिखाओ।

राजेश _मेरा प्यार आपको झूठा क्यू लग रहा है।

सुमित्रा _क्यू की अगर तुम मेरे दीवाने होते तो मेरे कहने से पहले ही चिपक जाते।

सुनीता हसने लगी।

सुनीता _भाभी, राजेश डरता है की कही तुम बुरा न मान जाओ। तुम्हे ये सब ठीक नही लगता न इसलिए।

सुमित्रा _अब तुम लोगो को देख देखकर मेरी भी आदत बिगड़ रही है।

सुमित्रा के शरीर में जो हारमोंश बन रहा था ये उसी का कमाल था जो सुमित्रा को पुरुष सानिध्य के लिए उकसा रही थी। उसे राजेश बाहों में जकड़ना अच्छा लग रहा था।

इधर राजेश भी गर्म हो गया था, उसका लंड तन गया। सुमित्रा को जब राजेश के लंड का एहसास huwa तो उसकी बुर पे पानी की धार और बड़ गई।

राजेश _मामी, आप कहे तो ऐसे ही चिपका रहूंगा आपसे जब तक घर में रहूंगा।

सुमित्रा _मै तो तैयार हू चिपकाने, तुम्हारी मम्मी को शायद पसंद न आए।

राजेश _क्यू मां आप बुरा तो नहीं मानोगी अगर मामी को अपने सीने से लगा कर रखा रहूंगा तो।

सुनीता _अरे मुझे क्यूं बुरा लगने लगा, आखिर मामी भांजे के प्यार से मुझे कोई जलन नही होगी।

बेटा तुम्हारी मामी जितनी देर तक चाहे तुम उसे प्यार करो, मुझे कोई आपत्ति नही।

तभी पीछे से आवाज आई, पर मुझे आपत्ति है।

ये आवाज स्वीटी की थी।

स्वीटी _भैया, अपना सारा प्यार तुम दोनो पर ही लूटा रहा है। अपनी छोटी बहन का तो कोई ख्याल ही नही।

स्वीटी _मम्मी, तुम भैया से बोलो वह भी मूझसे वैसे ही प्यार करे, जैसे तुम लोगो से कर रहा है।

सुनीता _अरे, स्वीटी तू छोटी है, तेरा भाई अपनी अपनी छोटी बहन से ऐसे प्यार थोड़े ही करेगा।

स्वीटी _तो ठीक है, मै छोटी हू तो अपनी गोद में बिठा कर तो प्यार कर सकता है।

इधर राजेश ने अपनी मामी को छोड़ दिया।

सुनीता _ये लड़की भी न, चल जा अपने कमरे में पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दे।

बेटा अब तुम भी जाओ अपने कमरे में फ्रेस हो जाओ मैं कॉफी बना कर लाती हूं।

राजेश _ठीक है मां। राजेश अपने रूम में चला गया।

सुनीता _स्वीटी, तू यहां खड़ी खड़ी क्या देख रही है, जा तू भी अपने कमरे में।

स्वीटी अपनी पैर पटकती हुई अपने कमरे में जाने लगी। राजेश का प्यार पाने में सबसे बड़ी बाधक उसकी मां ही लग रही थी।

इधर काफी बन जाने के बाद राजेश सुमित्रा बोली,,

सुनीता दो मै काफी ले जाती हूं।

ट्रे में काफी रखकर पहले वह स्वीटी के कमरे मे गई।

सुमित्रा _लो स्वीटी, काफी पी लो।

स्वीटी _मुझे नही पीना कोई कॉफी ले जाओ।

सुमित्रा _अच्छा मेरी बच्ची नाराज है।

स्वीटी _देखा न मामी मां मुझे किस तरह डांटती रहती है।

सुमित्रा _बेटा, वो तुम्हारे भलाई के लिए ही तुमको डांटती है। अभी तू बच्ची है। तुम्हारी मां डरती हैं कही तू भी गलत संगत में न पड़ जाए। बेटा तो बिगड़ चुका है।

स्वीटी _मामी आप कैसे जानती हो कि भैय्या बिगड़ चुका है।

सुमित्रा _राजेश आए दिन घर लेट से आता है। क्या क्या बहाने बनाता है? और देखा नही तुम्हारी मां से कैसे लिपटता रहता है। ये सब बताता है कि वह बिगड़ चुका है।

लो ये कॉफी पिलो और अपनी मां की बातो का बुरा न माना करो।

सुमित्रा ने स्वीटी को कॉफी देकर राजेश के कमरे में चली गई।

राजेश टी शर्ट और लोवर में था।

सुमित्रा_ राजेश को काफी देते हुई बोली , क्यू re आज तो बड़ा जल्दी घर आ गया। कोई मिली नही क्या?

राजेश ने काफी को बाजू में रखते हुए अपनी मामी को खिंचकर अपनी गोद में बिठा लिया।

राजेश _अब घर में ही दो खूबसूरत आइटम हों तो बाहर कौन मुंह मारे? तुम ही तो कहती हो न कि बाहर मुंह मारने से परिवार की बदनामी होगी।

सुमित्रा _अरे छोड़ मुझे, कही किसी ने देख लिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी, कहेगी किचन में मन नहीं भरा तो कमरे मे आकर गोद में बैठ गई। क्या हम तुम्हे आइटम लगते हैं?

राजेश _कौन कहता है कि आप बूढ़ी हो गई हो। मुझे तो ऐसा लगता है कि आप अभी अभी जवान हुई हो। सुमित्रा _सच में तू बहुत बिगड़ गया है। बुढ़िया भी तुम्हे जवान लगती हैं।

राजेश _मामी आज तो मैं आपकी हाथो से कॉफी पीऊंगा।

सुमित्रा _अच्छा बड़ा बदमाश है re तू।

राजेश _क्या करू, आपको देखकर बदमाशी करने का मन कर रहा है। मामी पिलाओ न कॉफी।

सुमित्रा को भी राजेश के गोद में बैठना अच्छा लग रहा था। ये सब कामदंड की वजह से हो रहा था। जो उसकी बुर की हालत खराब कर दी थी उसे पुरुष सानिध्य की आवश्यकता महसूस हो रही थी।

इधर राजेश का लंड तनकर खड़ा हो गया था। जिसका अहसास सुमित्रा को भी हो रहा था।

सुमित्रा _वह राजेश को काफी पिलाते हुए बोली,अच्छा ये बता तो कितनो के साथ गंदा काम कर चुका है?

राजेश _, जो भी देने तैयार हो।

सुमित्रा _क्या? बदमाश कही का, किसी के साथ भी करने को तैयार हो जाता है।

राजेश _हा,अगर तुम्हारी जैसी हो तो।

सुमित्रा _, मतलम तू मौका मिले तो मुझे भी नही छोड़ेगा।

राजेश _आप मौका तो दो।

सुमित्रा _चल हठ, मै अपनी पतिव्रता धर्म नष्ट नहीं कर सकती। वह राजेश की गोद से उठ कर जाने लगी। राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

राजेश _मामी एक किस तो दो,

सुमित्रा _न तू बड़ा बदमाश है।

राजेश _प्लीज मामी दो न एक किस

सुमित्रा _न अभी नही, रात में,,

और वह कमरे से मुसकुराते अपनी क़मर मटकाते हुवे चली गई।

राजेश ने उसे जाते हुए देखा, और अपना लंड सहलाने लगा।

राजेश _अपनी मामी में आए बदलाव देखकर, अपने लंड से कहा।बेटा लगता है आज रात तुम्हे चांस मिलने वाला है।



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कामदंड के प्रभाव के कारण धीरे धीरे शरीर की भुख सुमित्रा के पतिव्रता धर्म पर भारी पड़ती जा रही थी।

दिन ब दिन उसकी यौन इच्छा बढ़ती ही जा रही थी।

इधर राजेश को भी लगने लगा कि आज रात को मामी चांस दे सकती है यह सोचकर उसका लंड तनकर लम्बा और मोटा हो गया था। वह रात होने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा।

इधर सुमित्रा को भी राजेश से चिपकने उनके आस पास रहने, लिपटने की इच्छा हो रही थी।

काम दंड अपने कार्य पर लगा हुआ था, चलते, झुकते बैठते, वह बुर को ठोकता जिससे सुमित्रा की बुर पानी छोड़ने लगती।

उसकी बुर की खुजली बड़ती ही जा रही थी।उसे भी लगने लगी की रात जल्दी हो जाए,ताकि राजेश , उसकी क़मर पे बंधा,कामदंड निकालने के बाद अपनी गोद में बिठा ले।

शाम को,उसके खड़े लंड को अपनी गाड़ के नीचे महसूस कर उसकी उत्तेजना और बड़ गई थी।

किसी तरह मुस्किल से दोनो के लिए समय बीता और वह समय भी आ गया जब, रात में सुमित्रा राजेश के कमरे मे पहुंची,,

सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर खड़ी हो गई,,

सुमित्रा _राजेश, बेटा चलो मेरे कमरे मे,,, कामदंड निकाल दो।

राजेश इसी पल का इंतजार कर रहा था।

राजेश _जी मामी, आप चलिए, मै आता हूं।

राजेश,अपनी मामी के कमरे में जाने से पहले, अपनी पिता जी और स्वीटी के कमरे का मुआइना कर लिया कही कोई जग तो नही रहा,,

जब वह पूरी आश्वस्त हो गया कि घर के बांकी सभी लोग सो गए हैं, तब वह अपनी मामी के कमरे मे घुसा,,

इस समय सुमित्रा बेड में लेट कर उसी के आने का इंतजार कर रही थी।

सुमित्रा _राजेश, आने में लेट कर दिया?

राजेश _ओह मामी मै देखने गया था की घर के बांकी लोग सो गए हैं कि नही।

सुमित्रा _आज क्यू गया? पहले तो नही जाता था।

राजेश _क्यू की मामी आज मैं तुम्हे कुछ ज्यादा देर तक प्यार करना चाहता हूं।

सुमित्रा _अच्छा, लेकिन ऐसी कोई हरकत न कर देना जिससे बाद में मुझे शर्मिंदा होना पड़ जाए।

राजेश _मामी अगर आपको मूझसे डर लग रहा है तो मैं चला जाता हूं।

सुमित्रा _अरे तू चला जायेगा, तो कामदंड निकालेगा कौन।

राजेश _अच्छा ठीक है चलो निकाल देता हूं।

सुमित्रा बेड से उठी और अपनी साडी निकाल कर अलग कर दी।

राजेश बेड किनारे बैठा देख रहा था।

सुमित्रा, उसके पास आई और पीछे घूम कर बोली लो, निकाल दो।

राजेश ने उसकी पेटी कोट के अंदर अपना हाथ डालकर रेशम की धागे का गठान ढूंढा।

सुमित्रा राजेश का हाथ उसके क़मर पर पड़ते ही सिसक उठी।

राजेश _क्या huwa मामी,

सुमित्रा _कुछ नही,re तू जल्दी गांठ खोल।

राजेश _मामी थोडा पेटिकोट नीचे करो गांठ दिख नही रहा।

सुमित्रा _क्यू मुझे शर्मिंदा करने पर तुला है मुआ। देखो वही पर होगा।

राजेश ने हांथ क़मर के अंदर और ज्यादा डाल कर, उसके कूल्हे की तरफ ले गया।

सुमित्रा फिर से सिसक उठी,,

राजेश के पकड़ में गांठ नही आया।

राजेश _मामी पेटिकोट ढीला करो।

सुमित्रा _लगता है तू मुझे आज पथभ्रष्ट करके ही दम लेगा।

सुमित्रा अपनी पेटिकोट की नाडा की गांठ खोल कर नाडा पकड़ ली।

सुमित्रा _ले अब ठीक से ढूंढ, वही कही होगा?

राजेश ने हाथ और अंदर डालकर ढूंढा।

सुमित्रा के शरीर उत्तेजना से भरने लगा। उसकी सांसे तेज हो गई।

राजेश मामी गांठ मिल गया।

राजेश ने रेशम की धागे को पेटी कोट से उपर खीचा और उसकी गांठ खोलने लगा।

सुमित्रा _पेटिकोट के नाडा पकड़ी हुई थी।

राजेश ने गांठ खोलकर कामदंड निकाल दिया।

फिर बेड में बैठ कर सुमित्रा को अपनी गोद में बिठा लिया।

सुमित्रा _अरे छोड़ मुझे।

राजेश _क्यू, तुम्हारी मदद करने का ईनाम नही दोगी।

सुमित्रा _क्या चाहिए, तुझे।

राजेश _वही किस।

सुमित्रा ने अपनी गाल राजेश की ओर कर दिया। ले, लेले किस।

राजेश _न ,आज मैं बहुत देर तक किस करूंगा।

सुमित्रा एक हाथ से अपनी पेटिकोट की नाडा पकड़े राजेश की गोद में बैठी थी।

सुमित्रा को भी राजेश की गोद में बैठ कर बहुत अच्छी महसूस कर रही थी। आखिर उसकी शरीर की भुख जो बड़ चुकी थी।

राजेश ने उसे घुमाकर अपनी गोद में बिठा लिया।

अब दोनो के चेहरे आमने सामने थे।

राजेश का खड़ा लंड सुमित्रा की बुर में चुभने लगी, जिससे वह और उत्तेजित हो गई।

अब राजेश ने अपनी मुंह में सुमित्रा की ओंठ को भरकर चूसना शुरू कर दिया।

सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। सोचने समझने की क्षमता उसमे अब न रही, उसके उपर हवस हावी हो गई।

राजेश ने सुमित्रा की को अपने बाहों में भरकर सीने से चिपका लिया।

सुमित्रा भी राजेश को जोर से जकड़ ली।

अब राजेश ने सुमित्रा की गर्दन को चूमना चाटना शुरू कर दिया। सुमित्रा अपनी आंखे बन्द कर सिसक रही थी।

राजेश ने अब सुमित्रा को अपनी गोद में उठा कर खड़ा हो गया और सुमित्रा को बेडकेकिनारे पर लिटा दिया।

सुमित्रा, राजेश की ओर देखने लगी।

राजेश ने उसके ऊपर झुक कर उसकी ओंठ चुसने लगा। फिर किस करते हुवे नीचे जाने लगा। वह उसकी खूबसूरत बदन को चाटने लगा।

सुमित्रा राजेश की हरकतों से अत्यंत काम विहिल हों गई।

इधर राजेश सुमित्रा की खूबसूरत नाभी को चुसने लगा।

सुमित्रा, आह, उन करते हुए राजेश की बाल पकड़ कर सहलाने लगी।

फिर राजेश ने वो किया जिसके बारे में सुमित्रा ने कल्पना भी नही की थी।

राजेश ने शुमित्रा की पेटिकोट खिंचकर अलग कर दिया।

सुमित्रा के उपर इस समय हवस हावी हो गई थी।

वह कोई विरोध न कर सकी।

राजेश नीचे झुका और सुमित्रा की मस्त फुली हुई चिकनी एकदम गोरी chut को पहले हाथ से सहलाया फिर जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

सुमित्रा सोंची नही थी की राजेश ऐसी हरकत कर सकता है।

जैसे ही राजेश ने बुर चूसना शुरू किया सुमित्रा की शरीर में झन झनाहट पैदा होने लगी। उसकी आंखों की पुतलियां पलटने लगी।

वह हवस में इतनी अंधी हो चुकी थी कि वह राजेश को रोक नहीं सकी केवल उसके मुंह से दबी दबी आवाज आई,नही ईई,,,बेटा,,, आ,, आ,, ये कैसी ई ईई मां गंदी ई ई,,, हरक,,,,,

आह मां,,, मत,,,, क,,,,,, र,,, आह,, मां।

राजेश ने उसकी बुर की भग्नाशा को मुंह में भरकर जब चूसना शुरू किया तो सुनिता का बदन कपकपाने लगी,, उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो गई। वह अपनी हाथो से बेड को भींचने लगी अपनी होंठ को दांतो से चबाने लगी। ऊ आ ई ई,,, की आवाज उसकी मुंह से निकल रही थी।

वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकीऔर चीखते हुए झड़ने लगी।

वह अपनी होश खो बैठी थी।

राजेश को समझ में आ गया था की उसकी मामी झड़ गई है।

राजेश _मामी तुम ठीक तो हो न,

सुमित्रा तो होश में नही थी। कोई जवाब नही दी। राजेश ने उसे हिलाया।

राजेश _मामी तुम ठीक तो हो। आंखे खोलो।

राजेश ने बाथरूम पे जाकर पानी लाया और उसके मुंह पी छिड़का।

पानी पड़ते ही सुमित्रा आंखे खोली, वह राजेश की ओर देखने लगी।

वह अपनी हालत देखी जो सिर्फ़ ब्लाउज पहनी थी। वह राजेश के सामने नीचे से नंगी थी।

वह उठी और अपनी साडी से अपने बदन को ढक ली।

वह बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।

सुमित्रा _छी, तुमने मेरे साथ कितनी गंदी हरकत की जानवरो की तरह। छी मैने तुम्हे रोका भी नहीं हे भगवान,,, ये मुझे क्या हो गया था।

राजेश _मामी ये आप क्या कह रही हो,,

अभी तो आप मजे ले रही थी।

सुमित्रा _चुप कर बदमाश कही का, अपनी मामी के साथ गंदी हरकत करते तुम्हे शर्म नही आई।

हवस का भूत उसके सिर से जा चुका था।

वह बहुत लज्जित महसूस कर रही थी।

हे भगवान, मै हवस में अपनी पतिव्रता धर्म भंग कर डाली,,, वह रोने लगी।

राजेश _मामी, आप रो क्यू रही?

सुमित्रा _इतना सब होने के बाद भी पूछ रहा है। क्या हुआ है। तुम्हे शर्म नही आ रहा, अपनी मामी के साथ इतनी गंदी हरकत करके ।

राजेश _मामी मुझे माफ कर दो, मै बहक गया था।

सुमित्रा _तुम्हारी माफी मांगने से मेरी उतरी इज्जत वापस तो नही आ जायेगी।

चल जा मेरे सामने से,।

गंदा कही का।

राजेश को अपनी मामी की बात बुरी लगी।

वह चुपचाप सुमित्रा के कमरे से निकल गया।

उसका खड़ा लंड भी सिकुड़ कर चूहा बन गया था।

वह अपने बेड पर लेट कर सोचने लगा की, उसे ये सब नही करना चाहिए था। अब वह सोच लिया की आगे वह मामी के साथ कुछ नहीं करेगा।

इधर सुमित्रा कुछ देर आंसू बहाने के बाद सोचने लगी की इसमें राजेश को ही सारा दोष देकर ठीक नही किया। आखिर वह भी तो उसकी हरकतों का विरोध नही की।

लगता हैं वह नाराज हो गया।

अगली सुबह राजेश जब सोकर उठा। जिम जाने के लिए तैयार हुआ और जाने लगा किचन में उसकी मां और मामी काम कर रही थी।

वह दूर से ही बोला

राजेश _गुड मार्निंग मां ,

सुनीता _गुड मार्निंग बेटा।

सुनीता को आश्चर्य huwa की राजेश ने आज शरारत नही किया।

राजेश और बिना कुछ बोले वहा से चला गया।

राजेश जब जिम से आया सीधे अपने कमरे मे चला गया।

वह नहाकर तैयार होकर नाश्ता किया किसी से ज्यादा बात चीत नही किया।

वह कालेज चला गया।

सुनीता _भाभी, पता नही आज राजेश को क्या हो गया है?

कालेज से आने दो मै उससे पूछूंगी, कोई बात है क्या?

इधर सुनिता समझ चुकी थी की राजेश को उनके व्यवहार से बुरा लगा है।

उसे भी अब अच्छा नहीं लग रहा था।

राजेश जब शाम को घर आया,

वह सीधा अपने रूम में चला गया।

सुनीता _भाभी मुझे लगता है कोई बात है?राजेश से पूछना पड़ेगा, आखिर उसका चहेरा उतरा हुआ क्यू है?

सुमित्रा _सुनिता, लाओ काफी काट्रे मुझे दो , मै पूछती हूं आखिर बात क्या है?

सुनीता _ठीक है भाभी?

सुनीता_काफी लेकर राजेश के कमरे मे गई।

राजेश अपनी मामी को देखकर चुप ही रहा।

सुमित्रा _राजेश की ओर काफी आगे बढ़ाते हुवे, लो कॉफी पी लो।

वह बेड के किनारे बैठ गई।

राजेश _मुझे काफी पीने का मन नहीं।

सुमित्रा _क्यू? काफी तो तुम्हे पसंद है। नाराज़ हो आपनी मामी से।

राजेश ने कुछ नहीं बोला,,,

सुमित्रा _अपनी मामी से नाराज़ हो,, उसने फिर पूछा।

राजेश _नही।

सुमित्रा _राजेश मै जानती हूं कल मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा बरताव किया। उसके लिए मुझे माफ कर दो। मैने सारा दोष तुम पर ही डाल दिया।

राजेश _नही मामी, गलती मेरी ही थी। मुझे आपके साथ गंदी हरकत नही करनी चाहिए थी। आप तो भोली भाली है, मुझे ये सब नही करना चाहिए था।

मुझे माफ कर दीजिए।

सुमित्रा _अच्छा अब जो huwa उसे भूल जाओ। लो काफी पिलो।

आओ मै अपने तुम्हे अपनी हाथो से पिला दू।

राजेश के सिर को सहलाते हुवे उसे प्यार से काफी पिलाने लगी।

कॉफी पी लेने के बाद राजेश ने अपनी मामी को धन्यवाद दिया।

सुमित्रा, मुस्कुराते हुवे कमरे से चली गई।

राजेश अपने पढाई में लग गया।

सुमित्रा घर के कामों में।

रात में भोजन के समय राजेश को मुस्कुराते , देख सुनीता को अच्छा लगा।

सुनीता _भाभी, राजेश को शाम को आपने कुछ घुट्टी पिलाई क्या जो अब खुश दिख रहा है।

सुमित्रा _अरे कुछ बातो को लेकर मूझसे नाराज था।

मैंने उसकी नाराजगी दूर करदी।

सुनीता _भाभी ये आपने अच्छा किया, मुझे राजेश का उतरा चेहरा देखकर दिनभर चैन नहीं पड़ता।

सुमित्रा _सुनिता तुम चिंता न करो, देखना राजेश पहले जैसे, कल सुबह उठते ही तुम्हे बाहों मे भर लेगा,,,

सुनीता _भाभी तुम भी न।

रात में सोने से पहले सुमित्रा ने घर की अच्छे से मुआइना की देखी की सब सो गए की नही फिर वह राजेश की कमरे की ओर गई।

कमरे में जाकर,,

सुमित्रा _अरे बेटा सो गया क्या?

राजेश की नींद लग गई थी।

सुमित्रा की आवाज सुनकर नींद खुली, वह सामने देखा,मामी खड़ी थी।

राजेश _राजेश, मामी आप, सोई नहीं अभी तक।

सुमित्रा _अरे बेटा, भूल गया क्या? बाबा ने कहा है काम दंड निकालकर सोना है।

चलो तुम्हे मेरी मदद करनी है।

राजेश _ओ, हां, मै तो भूल ही गया था।

आप चलो मैं आता हूं।

राजेश कुछ देर बाद सुमित्रा के कमरे में पहुंचा।

सुमित्रा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। वह साड़ी निकाल कर बेड पर लेटी थी।

राजेश _मामी आओ मै कामदंड निकाल दू।

सुमित्रा, ने अपनी पेटी कोट की नाडा खोल कर पेट के बल,पीठ उपर करके लेट गई।

लो बेटा निकाल दो कामदंड को।

राजेश बेड किनारे बैठ गया, उसने अपनी मामी की नंगी कूल्हे को देखा, तो उसका शरीर गरमाने लगा।

राजेश ।

राजेश ने रेशम की धागे को पकड़ा और उसकी गांठ खोलने लगा।

कुछ देर बाद,,

सुमित्रा _क्या huwa बेटा गांठ नही खुल रही है क्या?

राजेश _मामी, गांठ कस गया है।

सुमित्रा _बेटा, जल्दी कर, मै ज्यादा देर तक तेरे सामने कूल्हे उघाड़कर कर लेट नही पाऊंगी, मुझे बडी शर्म आ रही।

राजेश ने जब सुमित्रा की मासल, गुदाज, गोरी गोरी चूतड और उसकी गाड़ की छोटी छेद को देखा तो, न चाहते हुए भी।उसका लंड तनकर खड़ा हो गया।

राजेश किसी तरह अपने को काबू में रखते हुए।

धागे की गांठ खोला। धागे की गांठ खुलते ही वह कामदंड को खींचा, काम दण्ड सुमित्रा की बुर से दबा होने के कारण निकला नही।

सुमित्रा _अरे रूको, मै सीदी होती हू, तब निकलेगा।

सुमित्रा सीधी होकर लेट गई।

सुमित्रा की बुर राजेश के आंखों के सामने था।

राजेश का मन तो कर रहा था की वह सुमित्रा की बुर चाट ले, पर कल की गलती दोहराना नही चाहता था। वह किसी तरह अपने पर काबू रख कर काम दण्ड को निकालकर उसे उचित जगह पर रख दिया। और बेड से उतरने लगा।

सुमित्रा _ने राजेश का हाथ पकड़कर रोक दिया।

सुमित्रा _अरे, क्या huwa आज मामी को किस नही करेगा?

राजेश _मामी आप नाराज़ हो जाती हो।

सुमित्रा _अरे नही होऊंगी, बाबा, जहां किस लेना है लेलो।

राजेश खुश हो गया। वैसे तो वह पहले से गर्म हो चुका था। मामी की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलने पर उसका लंड और लम्बा और मोटा हो गया।

राजेश अपनी मामी के ऊपर लेट गया और उसकी ओंठ का रस चुसने लगा।

राजेश _मामी तुम सच बहुत रसीली लो।

सुमित्रा _पी लो न रस किसने रोका है।

राजेश ने उसकी गरदन को चूमा फिर नीचे ब्लाउज पर नजर गया। उसे अपनी मामी की चुचियों का दीदार करने का मन हुआ, वह उसकी बटन खोलने लगा।

बटन खुलते ही सुमित्रा की बड़ी बड़ी, गोरी गोरी सुडौल चूचियां देख कर राजेश से रहा न गया और वह उसकी निप्पल को मुंह में भरकर दबा दबा कर पीने लगा।

सुमित्रा के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।

जी भरकर चूची मसल मसल कर पीने के बाद राजेश बेड पर खडा हो गया। राजेश एक एक करके अपने सारे कपड़े निकाल कर नंगा हो गया।

जब सुनिता की नजर राजेश के खड़े लंड पर पड़ी तो उसकी लम्बाई मोटाई देखकर दंग रह गई।

राजेश नीचे बैठ गया और सुमित्रा की नाभी चूसते हुए धीरे धीरे नीचे गया, फिर उसकी मस्त फुली हुई रस भरी गोरी गोरी chut को सहलाने लगा।

सुमित्रा सिहर उठी, वह अपनी आंखे बन्द कर। अपनी ओंठ को दांतो से दबाने लगी।

राजेश ने सुमित्रा की पेटिकोट को उसकी पैरो से अलग कर दिया।

अब सुमित्रा भी पूरी तरह नंगी हो गई।

राजेश ने सुमित्रा की क़मर को ऊपर उठाया और उसके नीचे तकिया लगा दिया।

जिससे उसकी बुर ऊपर आ गया।

राजेश सुमित्रा की टांगें फ़ैला दिया और खुद उसके बीच आकर उकडू बैठ गया।

राजेश ने सुमित्रा की ओर देखा वह हवस की आग में जल रही थी। उसने लंड का टोपा बुर की छेद पर सेट किया और एक जोर का धक्का मारा।

सुमित्रा _दर्द से चीख उठी।

बुर गीली होने के कारण, लंड बुर को चीरकर आधा अंदर चला गया था

सुमित्रा _बेटा दर्द कर रहा है।

राजेश ने सुमित्रा चूची के निप्पल को , अपनी मुंह में भरकर चुसने लगा , उसे मसलने लगा।

जिससे सुमित्रा फिर गर्म हो गई।

राजेश ने फिर अपने लंड को बाहर खिंचकर एक जोर का धक्का मारा लंड जड़ तक घूस कर बच्चे दानी से टकराया

सुमित्रा फिर चीख उठी,,

सुमित्रा_मां, मारा डाला रे, कमबख्त, रहम खा अपनी मामी पर घोड़े जैसा लंड जड़ तक घुसा दिया, मै औरत हूं कोई घोड़ी नही।

राजेश _मामी, आपको तो मैं घोड़ी समझकर ही चोदूंगा

क्या मस्त मॉल तू। अब देखना कैसे मैं तुम्हे अपने घोड़े में बिठाकर जन्नत की सैर कराता हूं।

अब राजेश लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया

लंड ने जल्दही बुर में अपनी जगह बना लिया। बुर तो एक दम गीली थी। अतः वह लंड को पूरी तरह निगल गई। लंड के बुर में अंदर बाहर होने से सुमित्रा को दर्द की जगह मजा आने लगा।

अब राजेश भी अपनी गति बढ़ाते हुए तेज तेज चोदना शुरु किया। लंड बुर में सर सर अंदर बाहर होने लगा। राजेश ने अपनी दोनो हाथों से चूची पकड़ कर मसल मसल कर चूदाई करना जारी रखा।

सुमित्रा तो जैसे जन्नत में पहुंच गई। चूदाई में ऐसा मज़ा उसे आज तक नही आया।

जब राजेश लंड को बुर में गच से पेलता लंड का टोपा सीधा बच्चेदानी से टकरा जाता, जिससे सुमित्रा की शरीर झनझना उठती।

वह संभोग के अथाह सुख को प्राप्त करने लगी। सुमित्रा राजेश की कमर को पकड़ कर राजेश को अपनी बुर के अंदर घूस जाने के लिए उसकी मदद करने लगी। कमरे में, सुमित्रा की मादक सिसकारी आह,, उह,, उन आई मां,, उन, के साथ बुर और लंड के बीच होने वाली लड़ाई से फच फ्च गाच गच की आवाज और सुमित्रा की चूड़ी और कंगन की खनकने की आवाज आपस मे मिलकर एक मधुर धुन उत्पन कर रहे थे।

राजेश को भी सुमित्रा को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था।

सुमित्रा की बुर अभी भी कुंवारी लड़कियों की बुर की तरह टाइट थी। बुर से पानी झरने की तरह बहकर सुमित्रा की टांगों से होता huwa बिस्तर पर गिर रहा था।

दोनो ही अपना वजूद भुलकर स्वर्ग में चले गए थे।

राजेश जो अब तक सुमित्रा की टांगें फ़ैला कर चोद रहा था अब वह उसकी टांगो को अपने कंधे में डालकर जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया।

सुमित्रा को उसका पति कभी ऐसा नहीं चोदा था। उसे गजब का आनंद मिलने लगा जिसकी वह कभी परिकल्पना तक नहीं की थी।

इधर राजेश लगातार दनादन चूदाई करना जारी रखा। सुमित्रा अपनी दोनो हांथी से बेड को भींच ली और चीखते हुए झड़ने लगी।

वह झड़कर बेहोश सी हो है।

राजेश चोदना बंद कर सुमित्रा की ओंठ मुंह में भरकर चुसने लगा ।

कुछ देर बाद,

राजेश _मामी आप ठीक तो हैं न,,

सुमित्रा _हा में सिर हिलाई।

इधर राजेश का लंड अभी भी बुर के अंदर घुसा था।

सुमित्रा _राजेश अब बस करो, मै थक गई।

राजेश_पर मामी, मेरा अभी huwa नही ।

सुमित्रा_लाओ इसे मै हाथ से शांत कर देती हूं।

राजेश न चाहते हुए भी अपना लंड अपनी मामी के बुर से बाहर निकाल लिया। और बेड पर लेट गया।

सुमित्रा _फिर नाराज़ हो गया क्या re

राजेश _नही मामी। मै आपसे नाराज नही हु।

सुमित्रा उठी और राजेश के क़मर जाकर बैठ गई और उसके खड़े लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।

काफी देर तक हिलाने के बाद भी पानी नहीं निकला तब

सुमित्रा _अरे तेरा पानी तो छूट ही नही रहा बाबा, मेरा हांथ भी दुखने लगा।

राजेश _मामी, आज कल की लड़किया मर्दों को दूसरे तरीके से झाड़ता है!

सुमित्रा _और क्या तरीका है re मै भी तो जानू।

राजेश _अच्छा ये बताओ मैने कल आपकी चूसा तो कैसा लगा?

सुमित्रा _चुप बदमाश।

राजेश _मजा आया था न, सच बोलो।

सुमित्रा _चुप बेशर्म कही का। सुमित्रा शर्माने लगी।

राजेश _आपकी आंखे बता रही है कि आपको बहुत मजा आया। वैसे ही जब महीला पुरुष लंड मुंह में लेकर चूसती है तब पुरुष को बहुत मज़ा आता है और वह जल्दी झड़ जाता है।

सुमित्रा _छी, आज कल की लड़किया कितनी गंदी हो गई है।

राजेश _मामी तुम भी चूसो न।

सुमित्रा _न बाबा मै ऐसा गंदा काम नही कर सकती।

राजेश _कोशिश करके तो देखो। मैने आपको मजा दिया न फिर आपकी बारी आई तो मुकर रही हो।

सुमित्रा _अरे मैने कभी किया नहीं ऐसा।

राजेश _कोशिश तो करो देखना आपको भी अच्छा लगने लगेगा।

सुमित्रा _पर तुम्हारा इतना बड़ा है मुंह में नही आ पाएगा।

राजेश _जितना ले सकती हो ले लो।

सुमित्रा _पहले अपने घोड़े को पानी से धो लो बाबा, इसमें मेरा पानी लगा huwa है।

राजेश _ठीक है चलो आप ही धो देना।

सुमित्रा और राजेश दोनो बाथरूम में चले गए।

वहा सुमित्रा ने राजेश के लंड को साबुन लगा लगाकर अच्छी तरह धोया।

फिर टावेल से पोछी और दोनो बेडरूम में आ गए।

राजेश खड़ा रहा और सुमित्रा नीचे बैठ कर लंड को पकड़ ली और पहले हिलाईउसके बाद उसके सुपाड़े को चांटी।

कुछ देर बाद वह सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसी।

राजेश _मामी थोडा अंदर लो।

सुमित्रा ने थोडा अंदर लेकर चूसना शुरू की।

राजेश _आह मामी अब हुई न बात। ऐसे ही चूसती रहो बड़ा मजा आ रहा है।

सुमित्रा राजेश केआधे लंड को मुंह में भरकर चुसने लगी।

राजेश उसके सिर को पकड़ कर हल्के हल्के मुंह में लंड ठेलने लगा।

उसे बड़ा मजा आ रहा था।

राजेश _आह मामी सच में तुम बहुत अच्छी चूस रही हो लग ही नहीं रहा की पहली बार चूस रही हो।

थोडा और अंदर लो।

सुमित्रा जितना लंड को मुंह में अंदर ले सकती थी अंदर लेकर ग्लैप ग्लप, चुसने लगी।

राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।

चूस मेरी जान आह क्या मस्त चूस रही है तू, आह बहुत मजा आ रहा है,

अब राजेश को खुद को रोक पाना मुस्किल होने लगा।

कुछ देर लगातार सुमित्रा द्वारा आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेकर चूसने से वह खुद को रोक न सका और सुमित्रा के सिर पकड़कर।

आह मां आह,, आह, मै गया,, आह मामी,,,

सारा वीर्य सुमित्रा के मुंह में ही छोड़ दिया।

पूरा मुंह वीर्य से भर जाने पर किसी तरह वह अपने को छुड़ाई तब राजेश ने एक पिचकारी उसके चेहरे और आखरी पिचकारी उसकी चूची पर मारी।

सुमित्रा सीधा बाथरूम की ओर भागी।

वह खो खो करते हुए, वीर्य को मुंह से उगलने लगी, फिर भी कुछ वीर्य उसके पेट में चला गया। पहली बार वह किसी पुरुष का वीर्य पी थी।

उसने आईने में अपने अपने को देखा पूरा वीर्य से नहा डाली थी। पुरे शरीर को पानी से साफ कर बेडरूम में आई।

सुमित्रा _छी, कितना गन्दा हो गया है तू, बता नही सकता था की तेरा आने वाला है, पूरा मुंह में ही झड़ गया। राजेश से नाराज़ होते हुए बोली,

राजेश _मामी, वीर्य को पी लेना था न तुमको, आज कल की औरते तो वीर्य पीना पसंद करती हैं।

डाक्टर भी कहते हैं वीर्य पीने से औरत की खूबसूरती ओर जवानी दोनो बड़ती है। वैसे मेरे वीर्य का स्वाद कैसा लगा?

सुमित्रा _चुप कर बेशरम।

राजेश हसने लगा।

सुमित्रा _चल अब जल्दी अपने कपड़े पहन और जा यहां से कही कोई देख लिया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश ने अपना कपड़ा पहना और अपने कमरे मे चला गया।

इसके बाद अगली रात राजेश ने सुमित्रा को घोड़ी बना कर जमकर चोदा, और अंत में अपना वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया।

अब राजेश रोज रात को सुमित्रा की अलग अलग आसन में जमकर चूदाई करता।

सुमित्रा भी दिनभर कामदंड के प्रभाव से गर्म रहती और रात में राजेश से जमकर चुदाती। वह राजेश के लंड की गुलाम बन गई थी।

अब वह बन ठन कर रहने लगी। कपड़े भी ऐसे पहनने लगी जिससे उसकी अंग राजेश को दिखे और राजेश उसकी ओर आकर्षित हो। एक दिन किचन में,

सुनीता _भाभी, क्या बात है, आप तो दिन ब दिन जवान और खूबसूरत होती जा रही हो।

सुमित्रा शर्मा गई,,,

सुमित्रा _अरे अब शहर में आने के बाद यहां की औरतों को देखकर मुझ में भी बदलाव आ रहा है।

सुमित्रा _सच में भाभी तुम तो पहले से काफी खूबसूरत हो गई हो, भैया आपको देखेंगे तो खुश हो जाएंगे।

सुमित्रा _मुसकुराते हुवे बोली,चल हठ, अब तू भी मुझे छेड़ने लगी।

एक दिन राजेश और सुमित्रा दरवाज़ा बंद करना भूल गए और दोनों चूदाई में मस्त थे। सुमित्रा की मादक सिसकारी पुरे कमरे मे गूंज रही थी।

इतिफाक से सुनिता की नींद खुल गई। वह किचन की ओर गई ही थी की कुछ आवाजे उसके कानो मे पड़ी जब वह उस आवाज को सुनकर उस ओर गई जिधर से आवाजे आ रही थी। जब वह सुमित्रा के रूम के पास पहुंची तो लगा की आवाज अंदर से आ रही हैं।

वह दरवाजा थोडा धकेली, दरवाज़ा खुल गया अंदर का नजारा देख कर उसके पाव तले जमीन खिसक गई।

राजेश सुमित्रा को घोड़ी बना कर दना दन चोद रहा था।

सुमित्रा बेड पर घोड़ी बनी थी उसकी नजर दरवाजे की तरफ ही थी।

राजेश और सुमित्रा दोनों की नजर सुनिता पर पड़ी।

दोनो की हालत खराब हो गया।

 
सुनीता जब सुमित्रा और राजेश को सेक्स करते देखी वह दंग रह गई।

इधर सुमित्रा और राजेश की नजरे जब सुनिता पर गई। दोनो की हालत खराब हो गया। दोनो बिल्कुल नग्न होकर। सेक्स का खेल खेल रहे थे।

राजेश अपनी मां को सामने देखते ही चूदाई बंद कर दिया।

सुमित्रा तेजी से बेड से नीचे उतरी और अपनी साडी उठाकर अपनी शरीर को ढकने लगी।

राजेश और सुमित्रा दोनों का सेक्स का नशा उतर चुका था।

राजेश का लंड ढीला पड़ गया।

इधर सुनिता रूम से बाहर आई और अपनी माथा पकड़कर हाल में रखी सोफे पर जाकर बैठ गई।

सुमित्रा _राजेश, सुनिता ने सब देख लिया, हे भगवान अब मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रही। अब मैं सुनिता के सामने कैसे जाउंगी।

राजेश _मामी, तुम घबराओ मत, सब ठीक हो जायेगा।

सुमित्रा _अब क्या ठीक होगा राजेश, जो नई होना था वो तो हो गया। मै हवस में अंधी होकर अपनी मर्यादा भूल गई।

अब मैं सुनिता का सामना नहीं कर सकूंगी।

हे भगवान, अब मैं क्या करूं?

राजेश _मामी आप चिंता न करें? और हिम्मत से काम ले। आप मां के पास जाए और सब सच बता दें।आगे जो भी होगा देखा जाएगा।

सुमित्रा अपनी साड़ी पहनी और कामदंड लेकर हाल में आ गई।

सुमित्रा _सुनिता, मुझे माफ़ को, मै हवस में अंधी हो गई थी।

सुनीता _भाभी, राजेश का तो समझ में आता है, वह एक जवान लड़का है। उसे तो बस मौका चाहिए। पर तुम तो एक संस्कारी, धार्मिक और पतिव्रता नारी थी, आपसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मै सपने में भी नही सोच सकती थी, कि आप ऐसी हरकत भी कर सकती है।

सुमित्रा _सुनिता, ये सब इस कामदंड की वजह से है।

सुनीता _क्या, कामदंड?

सुमित्रा _हां सुनिता कामदंड।उस दिन अनुष्ठान संपन्न होने के बाद , बाबा ने मेरी क़मर पे नाभी के नीचे यह कामदंड बांधा था, और कहा था कि इस काम दंड को रात में सोने से पहले निकाल देना पर इस कामदंड को कोई पुरुष ही निकाल सकता है।

अब आपके भैया तो यहां है नही इसलिए यह कामदंड को राजेश से निकलवाती हूं और सुबह स्नान के बाद इसे फिर से पहन लेती हूं।

इस कामदंड ने मेरी अंदर छुपी औरत के जगा दिया और मुझे इतना मजबूर कर दिया कि मैं अपनी मर्यादा भूल गई। अपनी पतिव्रता धर्म भूल गई। और यह पाप करने के लिए मजबूर हो गई।

सुनीता _भाभी आप अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए बाबा कि झूठी सहारा ले रही हैं।

सुमित्रा _अगर मेरी बाते झूठी लग रही है तो ये कामदंड कल सुबह अपनी नाभी के नीचे बांध लेना, फिर मूझसे बात करना। अभी मैं आपसे कुछ बाते बोलूं तो वह आपको झूठ ही लगेगी।

यह बोलकर कामदंड को वही छोड़कर सुमित्रा अपने कमरे में चली गईं।

इधर सुनिता उस कामदंड को अपने हाथों में लेकर देखने लगी जो पंच धातुओं से बना वजनी कामदंड बिलकुल लंड जैसा दिख रहा था।

कामदंड को लेकर सुनिता अपनी कमरे मे चली गई और कामदंड को आलमारी में रख दी।

सुबह वह उठ कर स्नान करने के बाद, भाभी सच बोल रही है या झूठ,यह जानने के लिए उसने कामदंड को अपने नाभि के नीचे बांध ली।

सुनीता सामान्य दिनों की तरह पूजा पाठ करने के बाद किचन में जाकर काम करने लगी।सुमित्रा भी स्नान करने के बाद किचन में आ गईऔर सुनिता की मदद करने लगी।

सुमित्रा _सुनिता, अभी तक मूझसे नाराज हो क्या?

सुनीता कुछ नही बोली।

सुमित्रा _क्या तुमने वह कामदंड पहनी?

सुनीता _हूं।

सुमित्रा _अब तुमको खुद ही पता चल जाएगा कि मैं झूठ बोल रही थी या सच।

इधर राजेश सुबह उठकर अपनी मां और मामी को दूर से ही गुड मॉर्निंग बोलकर जिम चला गया।

सुमित्रा और सुनिता अपने काम में लग गई।

इधर कामदंड भी अपना काम शुरू कर दिया। सुनिता जब चलती, उठती, बैठती, झुकती तो वह सुनिता की बुर पर चोट करता जिससे सुनिता सिहर उठती।

धीरे धीरे वह उत्तेजित होने लगी और उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।

शाम तक उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई।

उसकी बुर का पानी बह बह कर सूखने से खुजली करने लगी और वह सुमित्रा से छिप छुपा छुपा कर खुजाने लगी।

एक बार सुमित्रा ने सुनिता को बुर खुजाते देख ली, वह हसने लगी।

सुमित्रा, सुनिता को छेड़ते हुए बोली।

सुनीता, सब ठीक तो है न।सुनीता , शर्मा गई।

सुमित्रा _अब तो आपको पता चल गया होगा कि मैं झूठ नहीं बोल रही थी।

सुनीता _भाभी आप शायद, सही है।

सुमित्रा _चलो, अच्छा huwa जो यह जान गई की मैं कल जो भी बोली सच थी। नही तो मै आपसे मुंह दिखाकर बात करने के लायक नहीं रहती।

इधर राजेश और कालेज से घर आया।

और अपनी मां से जाकर लिपट गया।

सुनीता _सिहर उठी।

राजेश _मां क्या बनाने की तैयारी चल रही है।

सुनीता _अरे बेटा, छोड़ों मुझे जाओ अपने मामी से चिपको।

राजेश _क्यू, आपसे क्यू नही?

सुनीता _क्यू कि मूझसे ज्यादा, आपकी मामी को ज्यादा जरूरत है तुम्हारे प्यार की।

राजेश ने सुनिता को और कस लिया। उसका लंड खड़ा हो गया था जो सुनिता की गाड़ को दबा रहा था।

सुनीता को राजेश का खड़े लंड का एहसास हुआ तो उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। क्यू की वह कामदंड के प्रभाव से पहले से ही उत्तेजित थी। उसकी पूरा शरीर कपकपाने लगी।

इधर सुमित्रा मुस्कुरा रही थी।

सुमित्रा _अरे, मुआ सारा प्यार अपनी मां पर ही लुटाएगा की अपनी मामी का भी कुछ ख्याल रखेगा।

सुनीता, को भी राजेश से चिपक कर बहुत अच्छा लग रहा था, उसका मन कर रहा था कि राजेश उससे ऐसा ही चिपका रहे।

सुनीता _भाभी, लगता है मां बेटे की प्यार से आपको जलन हो रही है।

सुमित्रा _अरे मै क्यू जलने लगी? राजेश तुम्हारा बेटा है, तुम्हारा उस पर पहले हक है। मै तो कह रहि थी की मां से जी भर जाय तो अपनी मामी का भी खयाल कर लेना।

राजेश _मामी, आज तो मेरा मन मां को जी भर कर प्यार करने की हो रहा है।

सुमित्रा _तो करो न, कौन तुम्हे रोक रहा है। अगर कहो तो मैं यहां से चली जाती हूं। फिर कर लो जी भर कर प्यार अपनी मां को। वैसे भी लगता है आज तुम्हारी मां को भी बड़ा मन है आज अपने बेटे पर प्यार लुटाने की।

राजेश _नही मामी, मै तो आपके सामने ही प्यार करुंगा ,अपनी मां को।

राजेश का लंड और तन गया जिसका एहसास सुनिता को हुई, वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई। राजेश ने अपनी मां को और कसते हुए जैसे ही एक हाथ से अपनी मां की पेट को सहलाया, सुनिता अपने को ना रोक सकी, वह किचन की प्लेट को अपनी मुठ्ठी में भींचते हुए,आह मां, उई ऊं की आवाज़ करते हुए झड़ गई।

इधर सुमित्रा और राजेश दोनो घबरा गए।

राजेश ने अपनी मां को छोड़ दिया,

राजेश _मां क्या हुआ तुम ठीक तो हो न,,

कुछ समय बाद सुनिता होश में आई।

सुनीता _हां, बेटा मैं ठीक हूं अब जा अपनी कमरे में, जाकर पढ़ाई कर।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश, चला गया।

सुमित्रा _सुनिता, क्या huwa चीखी क्यू? कही तू झड़,,,

सुनीता _चुप करो भाभी न बिलकुल शर्म हया सब भूल गई हो,,,

सुमित्रा _मुसकुराते हुवे, क्या करू सुनिता बाबा का कामदंड और तुम्हारे बेटे की हरकतों ने मुझे निर्लज बना दिया है?

एक बार झड़ने के बाद भी रात होते तक कामदंड के प्रभाव से सुनिता फिर से बहुत गर्म हो गई थी।

रात में जब सभी भोजन कर लिए। सुमित्रा और सुनिता दोनो किचन में बर्तन धो रही थी।सुमित्रा _सुनिता, रात में सोने से पहले कामदंड को निकालना है तुम्हे याद है न।

सुनीता _हा भाभी।

सुमित्रा _शेखर भाई साब से याद से निकलवा लेना।

सुनीता _भाभी ये क्या कह रही हो?अगर उसने पूछा कि ये क्या है तो मैं क्या जवाब दूंगी, न बाबा मुझे जवाब देते नही बनेगा।

सुमित्रा _तब तो तुमको भी राजेश की मदद लेनी पड़ेगी। एक काम करना,भैया के सो जाने के बाद, तुम राजेश के कमरे में जाकर यह कामदंड निकलवा लेना।

सुनीता _ठीक है भाभी।

जब शेखर सो गया, सुनिता राजेश के कमरे में गई।

राजेश को बताया की भाभी सच बोल रही है कि झूठ यह जानने कामदंड को वह पहन रखी है जिसे तुम्हे निकालनी है।

राजेश ने वह कामदंड सुनिता की क़मर से निकाल दिया।

सुनीता ने कामदंड को पकड़कर सुमित्रा के कमरे मे चली गईं।

सुनीता _भाभी, लो रखो अपना कामदंड।

सुमित्रा _अरे सुनिता, उतरवा ली क्या राजेश से?

सुनीता _हा भाभी।

सुमित्रा _अरे, एक दो दिन और पहन के देखो आज तो पहला दिन है।

सुनीता _न बाबा, अब मेरे अंदर अब और इतनी शक्ति नही की मैं इसे और पहन सकू।

सुमित्रा _देखा न भाभी यह कामदंड का शरीर पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

सुनीता शर्मा गई।

सुमित्रा _वैसे कामदंड निकालते समय राजेश ने तुम्हारे साथ कोई छेड़छाड़ तो नही की।सुनीता _नही ,भाभी पर ऐसा क्यो?

सुमित्रा _मेरी क़मर से निकालते वक्त तो बड़ा शरारत करता था ।

सुनीता _अच्छा भाभी अब मैं चलती हूं k

सुनीता अपनी कमरे में चली गईं।

सुनीता के जाने के बाद सुनित्रा, राजेश की कमरे की ओर जाने लगी।

वहा पहुंचने पर,,

राजेश _मामी तुम।

सुमित्रा _क्यू re, कामदंड निकालते वक्त तुमने अपनी मां के साथ कोई शरारत नही की मेरे साथ तो बीना किए मानता नहीं।

राजेश ने, सुमित्रा को अपनी गोद में बिठा लिया, और उसकी चूची मसलते हुए कहा,,राजेश _डर था कही मां को बुरा लग गया तो,,

इधर राजेश ने सुमित्रा की ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया।

सुमित्रा _अरे मुआ ये क्या कर रहा है?

राजेश _हाय, आपकी दुदू पीने का मन कर रहा है।

सुमित्रा _अरे, तुम्हारी मां का दुदू पीने का मौका मिला था उसे तो खो दिया,, अब फिर मेरे पीछे पड़ गया।

राजेश _गुस्सा होते हुए बोला,

अगर मेरी हरकते तुम्हे अच्छी नहीं लग रही है तो जाओ,

उसने, सुमित्रा को अपनी गोद से उतारने की कोशिश किया।

पर सुमित्रा गोद से उतरी नही।

सुमित्रा _अले, अले तू तो नाराज़ हो गया। मै तो मजाक कर रही थी।

वैसे तूने मेरी भी आदत खराब कर दिया है जब तक तुमसे अपना दुदू जी भर कर चुसवा न लू मुझे भी नींद नहीं आता। ले चूस ले मेरे दुदू,

सुनीता ने अपनी ब्लाउज निकाल दिया।

राजेश उसकी चुचियों पर टूट पड़ा।

सुमित्रा _अरे बाबा, तू तो ऐसा टूट पड़ा जैसे वर्षो से भूखा हो। आराम से करो मैं कही भागी नहीं जा रही।

राजेश ने जी भर कर सुमित्रा की चूची मसल मसल कर चूसा। फिर वह अपना लोवर नीचे खींच कर नंगा हो गया।

राजेश _ले मेरी जान, जरा मेरी गन्ना चूस।

सुमित्रा ने राजेश का लंड मुंह में भरकर चुसने लगी।

राजेश का लंड और लम्बा मोटा, लोहे की तरह सख्त हो गया।

फिर राजेश ने सुमित्रा की साड़ी खिच कर अलग कर दिया।

उसे बेड किनारे लिटा दिया उसकी पेंटी खिंचकर निकाल दिया।

उसकी पेटी कोट ऊपर उठा कर क़मर तक ले गया। उसकी मस्त फुली हुई गोरी चिकनी बुर को मुंह में भरकर चुसने लगा।

और जब सुमित्रा अत्यंत काम विहिल हो गई वह बोली,,

सुमित्रा _, बेटा अब बस कर, अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा। डाल दे अपने सांप को मेरे बिल में। अपने कपकपाते हुवेऑटो से बोली।

राजेश ने अपना साप को हाथ से पकड़ा और उसे बिल का रास्ता दिखाया।

बिल मिलते ही राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, साप सरसराता हुवा, बिल के अंदर चला गया।

सुमित्रा सिसक उठी।

आह, मांआई,,,

अब राजेश ने एक और धक्का मारा तो साप जड़ तक बिल में जा चुका था

राजेश कुछ देर अपनी मामी की खूबसूरत जिस्म पर से चिपक कर उसकी ओंठो को पीने लगा।

कुछ देर ओंठो का रस चुसने के बाद वह शुरू कर दिया खेल जो दोनो को स्वर्ग में ले गया।

राजेश ने भचा भच सुमित्रा को चोदना शुरु कर दिया।

सुमित्रा के मुंह से आह, मां ई, ऊ,, आह मैया रि,, ई,, जैसी मादक आवाज निकलते लगी कमरे में उसकी चुड़िओ की खनकने खन खन और लंड का बुर में आने जाने से, फ्च फाच, गच गाच की मधुर संगीत कमरे में गूंजने लगे।इधर सुनिता अपने कमरे मे आकर सोने की कोशिश करने लगी, पर उसी बुर की पानी जो निकल निकल कर सुख गई थी, उसके कारण उसकी बुर पे खुजली बड़ गई थी। वह चादर के अंदर से बुर में अपनी हाथ ले जाकर खुजाने लगी। वह जितना खुजाती, बुर की खुजली और बड़ जाति, धीरे धीरे वह अपनी उंगली से भगनाश को छेड़ने लगी जिससे वह और भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।उसे कल का सीन याद आ गई , कैसे राजेश अपनी मामी को पलंग पर घोड़ी बनाकार चोद रहा था। उस सीन को याद कर वह और बेचैन हो गई। उससे रहा न गया क्यू की उसके शरीर के अंदर की हवस जग चुका था। अब वो क्या कर रही है उसे खुद होश नही रहा।

वह सीधे राजेश के कमरे की ओर चली गई।

राजेश के कमरे की दरवाज़ा अंदर से बंद था।

अंदर राजेश बेड में पीठ के बल लेटा था और सुमित्रा उसके लंड पर उछल उछल कर chud रही थी।

दोनो जन्नत की सैर कर रहें थे। संभोग की असीम आनन्द को प्राप्त कर रहे थे।

कमरे में खन खन गच गच फच fach, आह उई मां आह उन,की आवाज गूंज रही थी।

तभी किसी की दरवाज़ा खटखटाने की आवाज दोनो के कानो पे पड़ी ।

दोनो चौंक गए। दोनो चूदाई बंद कर दिए।

सुमित्रा _राजेश, कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है।

हे भगवान हम फिर फस गए।

राजेश _मामी आप घबराव मत, आप सारे कपड़े बेड के नीचे डाल दो और बाथरूम में चली जाओ मैं देखता हूं।

राजेश ने अपना लोवर और टी शर्ट पहना फिर दरवाज़ा खोला।

दरवाज़ा खुलते ही,,

राजेश _मां आप, इस वक्त।

राजेश _माफ करना बेटा, लगता है तुम सो गए थे। पर क्या करू पीठ दर्द के कारण मुझे नींद नहीं आ रही। तुम्हारे पापा तो नींद में खर्राटे भर रहा है मैं उसे जगाना उचित नहीं समझी।

अगर तुम कहो तो मैं वापस चली जाती हूं।

राजेश _अरे नही मां ये कैसी बातें कर रही है आप। आपके लिऐ तो मेरे कमरे की दरवाज़ा हर वक्त खुला रहेगा। आइए अंदर।

सुनीता बेड पर जाकर बैठ गई।

बेटा मेरे पीठ पर बड़ा दर्द हो रहा है मैं बॉम लेके आई हू जरा अच्छे से मालिश कर दो।

राजेश _ठीक है मां,दो बॉम मुझे लगा दू।

सुमित्रा ने राजेश को बॉम दे दिया।

राजेश _मां अपनी पीठ दिखाओ मै बॉम लगा देता हूं।

सुनीता _बेटा पहले दरवाज़ा तो बंद करदे, कोई आ जाएगा तो गलत समझेगा।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया।

सुनीता ने अपना पीठ राजेश की ओर करते हुए कहा लो बेटे बॉम लगा कर अच्छे से मालिश कर दो।

राजेश! ने बॉम लगाना चाहा पर ब्लाउज सामने आ गया।

सुनीता _अरे बेटा, ब्लाऊज के कारण बॉम ठीक से लगा नही पाएगा, मै एक काम करती हूं, ब्लाऊज निकाल देती हूं, फिर अच्छे से लगा देना।

सुमित्रा अपनी ब्लाउज निकाल दी, ब्रा नही पहनी थी। ब्लाऊज निकलते ही उसकी सुडौल और बड़ी बड़ी चूचियां देखकर राजेश का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया।

सुनीता _अरे क्या देख रहा है रि पहली बार देख रहा है क्या?

राजेश _अरे नही मां आपके दुदू है ही इतने मस्त की इससे नजर ही नही हटती।

राजेश से रहा न गया वह चुचियों पर टूट पड़ा।

सुनीता _अरे बदमाश तू फिर शुरू हो गया।

राजेश ने सुनिता की मस्त चूचियों को अपने हाथों से मसल मसल कर पीने लगा।

सुनीता सिसकने लगी। गर्म तो वो पहले से ही थी।

उसकी बुर की पानी की धार और बड़ गया।

असल में सुनिता, राजेश से चुदने ही आई थी वह राजेश को सीधा कह नही सकती थी की बेटा मुझे चोद कर ठंडा करो मुझे चुदने का बड़ा मन है, इसलिए वह पीठ दर्द का बहाना बनाई।

राजेश सुनिता की चूची को जी भर कर मसल मसल कर चूसा। इधर सुनिता ने अपना हाथ राजेश के लोवर के अंदर ले गई। और उसके खड़े लंड पर हाथ चलाने लगी।

तभी राजेश अपना लोवर नीचे कर नंगा हो गया। और अपनी मां की आंखों में इशारा किया।

सुनीता समझ गई वह राजेश के लंड के नीचे बैठ कर, राजेश की लंड चुसने लगी।

राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।

तभी सुनीता की पैर सुमित्रा की साड़ी पर पड़ी। साड़ी का कुछ हिस्सा बेड के निचे से बाहर आ गया था।

सुनीता का ध्यान उस और गई।

उसने उसे पकड़ कर देखा।

सुनीता _ये तो साड़ी है, किसकी साड़ी है? राजेश, बेटा ये किसकी साड़ी है।

राजेश _मां अब तुमसे क्या छुपाना, ये मामी की साड़ी है।

उसे रात में नींद नहीं आ रही थी तो वह मूझसे चुदने मेरे कमरे मे आई। जब तुम दरवाज़ा खटखाई तो वह मूझसे chud रही थी।

सुनीता _अच्छा तो ये बात है, कहा छिपी है।

सुमित्रा _सुनिता, मै यहां हूं।

सुनीता _भाभी, आज तो आपने कामदंड नही पहनी फिर भी चुदने आ गई।

सुमित्रा _क्या करू सुनिता, राजेश का लंड लेने की आदत हो गई है। बीना chude नींद नहीं आ रही थी।

तो यहां चुदने आ गई।

पर तुम यहां कैसे?

सुनीता _तुम्हारे कामदंड ने मेरी भी हालत खराब कर दी, मुझे यहां आने पर विवश कर दिया। तुम सच कह रही थी। काम दंड के ने मेरी बुर पर ऐसा प्रहार किया की, जब तक मेरी भुख मिटेगी नही मुझे चैन नहीं आएगी।

राजेश के पापा तो रोज थक कर सो जाता है उससे कुछ होता नहीं। इसलिए मजबूर होकर अपने ही बेटे के पास बहाने बनाकार आने मजबूर हो गई।

सुमित्रा _मै समझ गई सुनिता, मै भी एक औरत हूं, जब हवश की आग सताती है तो सब रिश्ते नाते जलकर भस्म हो जाती हैं।दोनो की समस्या एक ही है, और उसका समाधान है राजेश।

बेटा, अब तुमको ही हमारे इस शरीर के भुख को शांत करना पड़ेगा।

राजेश _मै तो आप दोनो की सेवा करने लिए सदैव तैयार हूं।

सुमित्रा भी नीचे बैठ गई और राजेश की लंड को मुंह में भरकर चुसने।

सुनीता राजेश की अंडकोष चाटने लगी।

सुनीता और सुमित्रा बारी बारी से राजेश का लंड चुसने लगी, फिर सुमित्रा सुनिता के पीछे गई और सुनिता को बुर चाटना शुरू कर दी।

सुनीता चौकते एवम सिसकते

हुए बोली _भाभी ये क्या कर रही है आप?

सुमित्रा _अरे सुनिता, असली मजा तो chut चटवाने से मिलता है।

और वह ग्लेप ग्लाप अपनी जीव से सुनिता की chut चाटने लगी।

इधर सुनिता सिसक् भी रही थी और राजेश का लंड भी चूस रही थी।

तीनो अपने बचे खुचे कपड़े उतार कर नंगे हो गए।

सुनीता _आह मां, उन , भाभी अब बस करो अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा।

सुमित्रा चूसना बंद कर दी।

सुमित्रा _राजेश लो बेटा, डाल दे अपना मूसल अपनी मां की बुर में बुझा दे इसकी प्यास।

राजेश अपनी मां के मुंह से लंड निकाल कर सुनिता के पीछे चला गया सुमित्राने राजेश कालंड पकड़ा और लंड सुनिता के बुर के छेद पर सेट कर दिया। राजेश ने बुर में लंड डालकर भचा भच चोदना शुरू कर दिया।

पूरा कमरा सुनिता की मादक सिसकारी और चीख से गूंजने लगी। इधर सुमित्रा नीचे बैठ कर एक उंगली से अपनी बुर रगड़ रही थी और अपनी जीव से सुनिता की बुर की पानी जो राजेश के अंडकोष से होकर नीचे टपक रहा था, उसे चांट रही थी।

इधर राजेश सुनिता को घोड़ी बना कर, तेज गति से भच भच चोद रहा था।

सुनीता और राजेश दोनो जन्नत में पहुंच गए थे। संभोग के असीम आनद को प्राप्त कर रहे थे। राजेश जोश में आकर और जोर जोर से गच गच चोदना शुरू कर दिया।

सुनिता ज्यादा देर तक अपने को रोक न सकी और और जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।

आह मां मै गई re,, आह माई,,,

राजेश ने बुर ठोकना बंद कर दिया और वह भी सुस्ताने लगा।

फिर राजेश न सुनीता के बुर से लंड निकाल लिया और सुमित्रा को बेड के किनारे लिटा दिया। और कुछ देर उसकी बुर चाटने के बाद अपना लंड बुर में गच से पेल दिया, उसकी दोनो टांगें अपनी कंधे पे रख कर दना दन चोदना शुरू कर दिया।

लंड का टोपा बच्चेदानी को ठोक रहा था। पूरा कमरा सुमित्रा की चीख और कामुक सिसकारी से गूंजने लगा।

इधर सुनिता होश में आई, राजेश ने अपने पास बुलाया फिर अपना लंड सुमित्रा के बुर से बाहर निकाल दिया, सुनिता ने राजेश का लंड अपनी मुंह में भरकर ग्लप ग्लैप चुसने लगी। फिर लंड को अपने हाथों से सुमित्रा के बुर के छेद पर सेट करने को थी की राजेश ने कहा

मां लंड को गाड़ के छेद में रखो मैं मामी की गाड़ मारूंगा।

सुमित्रा _ बेटा, क्या कह रहा है गाड़ भी कोई मारने की चीज है।

राजेश _मामी शायद आपको पता नहीं आज कल की लड़किया गाड़ मराना पसंद करती हैं। एक बार आप भू मरा कर देखो आपको भी बहुत मज़ा आयेगा।

सुमित्रा _न बाबा मुझे नही करना ऐसा गंदा काम।

सुनीता _बेटा तुम्हारा इतना मोटा और बड़ा है गाड़ की छेद इतनी सकरी, कैसे जा पाएगा इसके अंदर, और कौन ले पाएगा अपनी गाड़ में इतना बड़ा लंड।

राजेश ने बिना सोचे जोश में कह दिया, प्रिया दी तो लेती है।

सुनीता _बेटा, तू ये क्या कह रहा है।

राजेश हड़बड़ा गया ओ नो ये मेरे मुंह से क्या निकल गया।

सुनीता _क्या तूने प्रिया के साथ, भी,,

सुमित्रा _सुनिता, ये लड़का तो पूरा बिगड़ गया है, अपनी बहन का भी ले डाला।

सुनीता _अब चुप चाप खड़ा क्यू है बोलता क्यू नही।

राजेश _ओ मां, मै उस दिन प्रिया दी के घर रुका था न तो हम दोनो बहक गए।

सुनीता _तूने प्रिया के साथ जबरदस्ती तो नही किया?

राजेश _नही मां, जो भी किया, उसकी सहमति से किया। दीदी खुद होकर अपनी गाड़ मरवाई।

बता रही थी की उसे गाड़ मरवाने की आदत है, पिंकी के होने के बाद फिर से गर्भ ने ठहर जाए करके जीजू प्रिया दी के गाड़ मारने लगे।

सुनीता _हूं दिखने में तो बडी भोली लगती है प्रिया,,

सुमित्रा _अरे तुम और मैं भी तो भोली थी पड़ गए न इस मुआ के चक्कर में।

प्रिया _वह भी बेचारी इसके चक्कर में आ गई होगी।

अब बस करो अपनी राम कहानी मेरी बुर में आग लगी है उसे बुझा।

राजेश ने फिर से सुमित्रा के बुर में लंड फिर गच से ठेल दिया। और जोर जोर ठोकना शुरू कर दिया।

सुमित्रा तो स्वर्ग में पहुंच गई।

सुमित्रा _आज, चोद बेटा और जोर से चोद फाड़ दे अपनी मामी की chut निगोडी दिनभर बहुत परेशान करती है।

राजेश और जोर जोर से ठोकने लगा।

सुमित्रा _आह, माई,, उन,,, आह गई रि उन मां,,

जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर अपनी मां की ओंठ चूसना शुरू कर एक हाथ से उसकी योनी सहलाने लगा। जिससे सुनिता फिर गर्म हो गई।

राजेश बेड पर जाकर पीठ के बल लेट गया।

उसका लंड हवा में लहरा रहा था। वह अपने लंड को एक हाथ से सहलाते हुए दूसरे हाथ से अपनी मां को इशारा कर ऊपर बुलाया।

सुनीता बेड के ऊपर चढ़ गई और लंड के सिध में दोनो पैर फ़ैला कर खड़ी हो गई। फिर नीचे बैठी लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपने बुर की छेद में रखकर बैठ गई।

लंड बिना किसी अवरोध के बुर में समाहित हो गया।

सुनीता लंड पर पहले धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगी।

जब उसको मजा आने लगी तोअपना गति बड़ाने लगी। राजेश ने अपनी मां की चूची मुंह में भरकर चुसने लगा।

फिर वह अपनी मां की क़मर को अपने हाथों से पकड़ कर, अपनी क़मर उठा उठा कर सुनिता का बुर में लंड अंदर लेने में सहयोग करने लगा।

दोनो को फिर से बहुत मजा आने लगा।

सुनीता अब जोर जोर से लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश भीं क़मर को पकड़कर अपनी लंड में पटक पटक कर सुनिता को चोदने लगा।

दोनो गिर से जन्नत में पहुंच गए।

सुनीता के मुंह से लगातार कामुक सिसकारी और चीख निकलने लगी। इधर सुमित्रा दोनो की चूदाई देखकर फिर गर्म हो गई थी, वह अपनी बुर को अपनी हाथो से सहला रही थी, उंगली अंदर बाहर करने लगी।

इधर सुनिता उछल उछल कर लंड को बुर में ले रही थीं।

पर ज्यादा देर तक अपने को रोक न पाई और फिर झड़ने लगी। राजेश ने सुनिता को अपनी सीने से लगा कर उसकी पीठ सहलाने लगा।

कुछ देर बाद सुनिता एक और लुड़क गई। वह बुरी तरह थक चुकी थी।

इधर राजेश का लंड अभी भी, खड़ा था। उसने अपनी मामी को ऊपर आने का इशारा किया।

सुमित्रा ऊपर आई और राजेश की ओर पीठ कर उसकी लंड को अपने बुर में सेट कर बैठ गई।

लंड एक बार फिर सुमित्रा के बुर में समाहित हो गया।

अब राजेश ने सुमित्रा की क़मर पकड़कर अपने लंड उसकी बुर में अंदर बाहर करना शुरू किया।

सुमित्रा भी अपनी क़मर को आगे पीछे लंड बुर में लेने लगी।

धीरे धीरे राजेश ने अपना गति बढ़ाया।

सुमिता फिर से स्वर्ग की सैर करने लगी वह भी अब अपने कूल्हे को राजेश के लंड पर पटक पटक कर चुदने लगी।

राजेश और सुमित्रा के मुंह से आह, ऊ,, उई मां,, आई,, आह,

राजेश आह, बहुत मजा आ रहा मेरी जान आह, ऊ और उछल, ले ले पूरा आह क्या मस्त मॉल है तू, आह। मां को चोदने के बाद सबसे ज्यादा मज़ा तुमको चोदने में आता है।

सुमित्रा _मै तो तेरी गुलाम हो गई re कितना मजा देता है तू, पूरा जन्नत की सैर करा देता है,, आह मां आई उन,,,

कुछ देर इसी पोजीशन में ठोकने के बाद राजेश उठ गया और सुमित्रा बेड पर घोड़ी बन गई।

राजेश अपना लंड बुर में डाल कर गच गच चोदने लगा।

सुमित्रा _चोद बेटा और जोर से चोद आह माई,,,

फाड़ दे मेरी chut आह,, डाल दे अपना बीज मेरी बुर में, अगर मर्द है तू तो बना दे अपने बच्चे की मां। मिटा दे मुझ पर बाज का लगा कलंक,,,,

सुनीता उठ कर बैठ गई।

सुनीता _चोद बेटा और चोद अपनी मामी को अगर तूने मेरी दूध पिया है तो छोड़ दे अपना बीज, भाभी की कोख में, बना दे अपने बच्चे की मां।

राजेश अपनी मां की बात सुनकर और जोश में आ गया और सुमित्रा की बुर तेज गति से चोदने लगा।

राजेश _आह मामी, ले chud मेरे से, ले, एक और ले ले,, आह, बन जा मेरे बच्चे की मां,, आह मां मै गया।

सुनीता राजेश की पीठ सहलाने लगा।

इधर राजेश ने अपना सारा वीर्य सुमित्रा के कोख में भर दिया गर्म गर्म वीर्य को अपनी गर्भ में जाने का एहसास पाकर सुमिता फिर से एक बार झड़ गई।

तीनो बुरी तरह थक चुके थे।

राजेश बेड पर लेट गया और सुनीत, सुमित्रा दोनो उसके आजू बाजू उसके कंधे पर सिर रख कर सो गए।

अचानक सुनिता की नींद खुल जाती है वह घड़ी की ओर देखि तो सुबह के 4बज चूके थे।

सुनीता _भाभी उठो सुबह के चार बज गाए।

सुमित्रा_सोने दे न सुनिता।

सुनीता _भाभी चलो अपने कमरे में वहा जाकर सो जाना, यहां रुकना ठीक नही, चलो उठो।

सुनीता ने सुमित्रा को जबरदस्ती उठाया।

राजेश की नींद भी खुल गई।

सुनीता _अरे बेटा तू भी उठ गया, तू सो जा बेटा,,

इधर सुमित्रा और सुनिता दोनो अपनी अपनी कपडे पहन कर अपने कमरे में चली गई।

कुछ दिन बाद प्रिया ने सुनिता को फ़ोन किया।

प्रिया _बुआ, चाची को ले आना उसका कुछ चेक अप करना है।

सुनीता _ठीक है प्रिया हम 12, बजे पहुंच जाएंगे।

सुनीता और सुमित्रा दोनों आटो से हॉस्पिटल पहुंच गए।

प्रिया के केबिन में जाकर उससे मिली।

प्रिया _चाची मैने आपको कहा था की आपका मासिक धर्म जैसे ही सुरू हो उसके 3दिन बाद हॉस्पिटल आना तुम्हारी जांच होगी और दवाइया लेनी होगी। पर इतने दिन हो गए आपने मासिक धर्म के बारे में मुझे जानकारी नहीं दी।

सुनीता _हा, भाभी, आपने बताया नही।

सुमित्रा _क्या बताऊंगी सुनिता, मेरी तो मासिक धर्म इस माह समय पर आया ही नहीं है एक सप्ताह हो गए।

प्रिया _क्या? पर पहले तो आपका मासिक पीरियड समय पर आता था तो इस बार लेट कैसे हो गया।

सुमित्रा _पता नही बेटी इस बार कैसे लेट हो गया।

ठीक है चलो मेरे साथ कुछ टेस्ट करते है।

प्रिया ने सुमित्रा की गर्भाशय की जांच किया वह चौंक गई, यह जानकर की उसकी चाची पेट से है।

जांच कर लेने के बाद,

सुनीता _बेटी, सब ठीक तो हैं न।

प्रिया _बुआ, चाची पेट से है।

सुमित्रा और सुनिता दोनो चौंक गई।

सुमित्रा और सुनिता दोनो एक दूसरे का मुंह देखने लगे।

प्रिया _चाची, चाचा जी तो गांव में है फिर ये चमत्कार हुआ कैसे?

सुनीता _अब तुमसे क्या छुपाना बेटी ये सब उस बाबा और राजेश का किया धरा है।

सुमित्रा और सुनिता ने सारी बातें प्रिया को बता दिया।

प्रिया हसने लगी,,,

लो अब आईवीएफ की जरूरत ही नहीं पड़ी। राजेश ने तो कमाल कर दिया।

गजब की मर्दानगी है उसमे।

सुनीता _हा हा जानते है तुमने भी देखि है उसकी मर्दानगी।

प्रिया चौकते हुवे,,

क्या, बुवा ये आप कह रही हो,,

सुमित्रा _मुआ ने जोश में सब बक दिया।

प्रिया _राजेश से मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मिलने दो मुझे, फिर बताती हूं,,

सुमित्रा _अरे अब छोड़ों भी huwa सो huwa अब तो तीनो ही राजेश की रखैल बन गए हैं,,, अब एक दुसरे से क्या छिपानाऔर घबराना?

तीनो हसने लगे।

सुनीता _पर प्रिया हम भैय्या से क्या कहेंगे?

प्रिया _अरे बुवा हम चाचा जी से कह देंगे की आईवीएफ द्वारा चाची गर्भ धारण की, उसके वीर्य का सैंपल लेने कल बुला लेते है फिर बाद मे उसे कह देंगे की आपका वीर्य में शुक्राणु की गतिशीलता कम थी इसलिए राजेश की सुक्राणु के इस्तमाल किया गया।


तीनो फिर हसने लगे,,
 
अगले दिन प्रिया ने सतपाल सिंह को हॉस्पिटल बुला लिया, और वीर्य का सेंपल उससे ले लिया गया। सतपाल सिंह शेखर के घर आया, एक दिन वहा रुका और दुसरे दिन अपना घर चला गया।



इधर चर्मानंद बाबा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती ही जा रही थी।टीवी पर उसका प्रवचन का सीधा प्रसारण आने लगा। शुरु में तो अपने कार्यक्रम का प्रसारण पैसे देकर करना पड़ा, अब कार्यक्रम इतना लोकप्रिय हो गया था कि टीवी वाले खुद ही बाबा जी की संस्था को पैसे देने लगे।

प्रवचन के दौरान बाबा लोगो को उनकी समस्या का समाधान बताते, जिन लोगो को बाबा के उपाय से लाभ होता वह बाबा को पत्र लिखते, पत्र के प्रवचन में पड़ा जाता।

प्रवचन के देखने और सुनने वाले बहुत प्रभावित होते।

संस्था को लोग खुब दान देने लगे।

राजेश और भगत समय समय पर आश्रम जाता और वहा आगे की कार्योजना बनाते, संस्था के सेवादार राजेश के मार्गदर्शन में चलते।

आश्रम में आने वाले लोगो की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। सेवक सेविकाओं की संख्या बड़ने से आश्रम का विस्तार आवश्यक हो गया, नई जमीनें खरीदा गया, कुछ लोग अपनी जमीनों को स्वयं ही आश्रम को दान कर दिए, और आश्रम में नए नए निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया।

इधर कालेज में खेल प्रतियोगिता का डेट निर्धारित हो गया। खेल में भाग लेने के इच्छुक,जितने भी स्टूडेंट थे। वे जी जान से इसकी तैयारी में जुट गए।

इधर राजेश की मामी सुमित्रा को पेट से हुवे तीन माह हो गए। प्रिया ने जब जांच में पाया की गर्भ का विकास सही ढंग से हो रहा है तो सुमित्रा से कहा की मामी अब तुम गांव जा सकती हो, पर बीच बीच में आकर जांच कराती रहना और दिये गए सलाह को ध्यान में रखना।

सतपाल सिंह, सुमित्रा को गांव ले गया, और बीच बीच में चेक अप के लिए हॉपिटल ले आता।

इधर सुमन का गर्भ भी पांच माह का हो चुका था। उसकी पेट बड़ गया था।अब वह कालेज से छुट्टी ले ली। राजेश कालेज से छुट्टी के बाद कभी कभी उससे मिलने चला जाता, कोई जासूस राजेश पर नजर रखा huwa था।

कालेज में खेल प्रतियोगिता का डेट निर्धारित होने के बाद राजेश भी तैयारी में लग गया।

इधर रोहन की मां तो कब से इस पल का इंतजार कर रही थी, कब खेल प्रतियोगिता हो रोहन खेल में सबसे अच्छा परफॉर्मेंस कर बेस्ट स्टूडेंट का खिताब अपना नाम करे ताकि निशा का दिल जीत सके और वह निशा को अपनी बहु बना सके, फिर सुजाता को नीचा दिखाने का उसे मौका मिले, अभी सुजाता उद्योगपति क्षेत्र में सबसे पावर फूल महिला बनी हुई थी, रीता भी पावर फूल थी, पर नंबर २थी, जिसके कारण विभिन्न मौका पर रीता अपने को अपमानित महसूस करती, वह निशा को अपनी बहु बनाकार सुजाता को नीचा दिखाना चाहती थी, वैसे तो सुजाता और रीता दोनो दोस्त थे लेकिन रीता सुजाता से जलती थी।

बाहर से तो वह सुजाता से मीठी मीठी बातें करती थी पर अंदर से वह जलती रहती थी।

रीता ने सुजाता से निशा को अपनी बहु बनाने की बात भी कह दी थी। सुजाता ने रीता से कहा था कि रोहन तो अच्छा लड़का है और तुम मेरी सहेली हो अगर निशा तुम्हारे घर की बहु बने तो मुझे खुशी होगी, पर निशा से पूछनी पड़ेगी, वह क्या चाहती हैं?

मै यह फैसला अपनी बेटी पर थोपना नही चाहती।

एक दिन सुजाता ने रात में डिनर के समय यह बात निशा को यह बात बताई की रोहन की मां रीता तुम्हे अपनी घर की बहु बनाना चाहती है।

निशा ने कहा कि मां अभी क्या मेरी शादी करने की उम्र है? अभी तो मुझे और पड़ना है एमबीए करना है, कम्पनी में आपका हाथ बटाना है।

सुजाता ने कहा, अरे बेटी ये जो कुछ भी है तुम्हारा ही तो है तुम शादी के बाद भी सब सम्हाल सकती हो।

निशा ने कहा नही मां मैने शादी के बारे में अभी कुछ नही सोचा है, और न ही मुझे सोचना है।

सुजाता ने पूछा, कही ऐसा तो नहीं की तुम किसी और को पसंद करती हो,,

निशा _नही मां ऐसा कुछ नही है।

सुजाता _ठीक है, बेटी अगर तुम्हारा विचार बदल जाए तो बताना।

रीता ने सुजाता से पूछा की तुमने शादी के बारे में निशा से बात की।

सुजाता ने कहा कि हां, निशा अभी शादी करना नही चाहती । वह अपनी पढ़ाई पूरी कर बिजनेस सम्हालना चाहती है।

रीता मुझे लगता है की रोहन ने निशा का दिल नहीं जीता है, क्यू कि जब कोई लड़की किसी लड़के को पसंद करने लगती हैं तो वह उस लड़के से शादी की बात सुनकर शर्मा जाती है।

अगर तुम चाहती हो निशा तुम्हारी बहु बने तो रोहन से कहो की वह निशा के दिल जीते ।

तबसे रीता यह चाहती है की रोहन इस साल स्टूडेंट ऑफ द ईयर का खिताब जीते ताकि रोहन निशा का दिल जीत सके।

इसके लिए रोहन भी कालेज में निशा के सामने अच्छा बनने का प्रयास करता, वह भी स्टूडेंट ऑफ द ईयर बनने के लिए पिछले छै माह से तैयारी में लगा हुआ था। रीता ने इसके लिऐ एक ट्रेनर भी रखा huwa था जो रोहन को रोज सुबह शाम अभ्यास कराता।

रीता और रोहन के मंसूबों पर सबसे बङा बाधक राजेश बना हुआ था जो लगातार दो वर्षो तक बेस्ट स्टूडेंट का खिताब अपने नाम किया था। इस बार सबको यही उम्मीद थी की इस वर्ष भी यह खिताब राजेश ही जीतेगा ।

इधर रीता काम दाम दण्ड भेद चाहे जो भी तरीका अपनाना पड़े वह हर हाल में रोहन को बेस्ट स्टूडेंट बनाना चाहती थी। इसके लिए उसने राजेश के पीछे जासूस भी लगा रखा था। जो राजेश की गतिविधियों पर नजर रखता और रीता को राजेश खबर देता।

इधर निशा और सीमा लंच ब्रेक के समय कैंटीन में राजेश और भगत से मिलती।

सीमा को निशा के व्यवहार से लगता की वह राजेश को चाहती है। पर निशा हमेशा यही कहती की मुझे और प्यार, न बाबा मुझे इन चीजों में कोई इंट्रेस्ट नही। मै तो उन लोगो से इस लिऐ मिल लेती हूं क्यू की वे अच्छे है और कालेज के नाम को आगे ले जाने के लिए उन दोनो का काफी योगदान रहा है।

अब देखते है आगे क्या होता है।

निशा अपने घर में सोई हुई थी, सुबह उसके उठने से पहले ही विशाल और सुजाता उसके कमरे में पहुंचे,,,

सुजाता _उठा मेरी बच्ची, आज तो खास दिन है, हमारे लिए, कितनी देर तक सोती रहेगी।

सुजाता ने बडी प्यार से निशा के बालो को सहलाते हुए बोली।

निशा ने आंखे खोली,,

निशा _मॉम डैड आप दोनो इतनी सुबह।

सुजाता _हम दोनो अपनी बच्ची को जन्म दीन की शुभकामनाएं देने आए है। आज तुम्हारा जन्म दिन है जन्म दिन मुबा रखो मेरी बच्ची। सुजाता ने निशा की माथा चूमते हुए प्यार से बोली।

निशा _थैंक यू मॉम,थैंक यू डैड आप दोनो मुझे कितना प्यार करते हो? हर साल सबसे पहले मुझे विश करते हो।

सुजाता _अब तुम्हारे सिवा हमारा है ही कौन बेटा, तुम तो हमारी जान हो।

निशा _लव यू मॉम,लव यू डैड,

सुजाता एवम विशाल _लव यू टू बेटा।

सुजाता _अच्छा बताओ तुम्हे आज क्या गिफ्ट चाहिए।

निशा _मॉम मेरे पास सब कुछ है, मुझे और कुछ नहीं चाहिए। बस आप दोनो का आशिर्वाद चाहिए।

सुजाता _वो तो सदैव, तुम्हारे साथ है, बेटा। आज तुम्हारे पापा ने शाम के पार्टी रखी है, तुम अपने सभी दोस्ती को आमन्त्रित कर देना।

निशा _मॉम मुझे तो ये पार्टी वगेरा ज्यादा पसन्द नहीं आप तो जानती है।

सुजाता _हा, बेटा पर हम अपनी खुशी के लिए, यह पार्टी रखे हैं।

हा चलो नहाकर तैयार हो जाओ, हमे मन्दिर जाना है फिर अनाथ आश्रम,वहां के बच्चों के लिए मिठाई और कपडे बाटने है।

निशा _ओके मॉम, जानती हूं हर साल तो जाते है अनाथ आश्रम।

निशा नहा कर तैयार हो गई ।

सीमा को पता था जन्म दिन के बारे में, उसने सुबह उठते ही काल कर निशा को जन्म दिन की बधाई दी।

निशा ने उसे बताया की हमे मन्दिर और अनाथ आश्रम जाना है तुम तैयार होकर आ जाओ।

सीमा तैयार होकर निशा के घर पहुंच गई।

सीमा _अरे, निसा आज तो तुम बिलकुल चांद की टुकड़ा लग रही हो।

सुजाता _हां बेटी सीमा सच कह रही है। मेरी बेटी को किसी की नजर न लगे।

बेटी चलो अब मन्दिर के लिए लेट हो रहे हैं।

वे सभी मन्दिर गए, वहा पूजा अर्चना करने के बाद वहा पर बैठें फकीरों को अन्न दान किया फिर वहा से अनाथ आश्रम चले गए। वहा पर बच्चों को मिठाई और कपडे वितरित किया।

घर आकार वे सभी नाश्ता किए। सुजाता ऑफिस चली गईं। निशा और सीमा कालेज।

निशा के डैड घर पर ही रहते थे, उसका स्वास्थ्य खराब रहता था। कम्पनी की सारी जिम्मेदारी सुजाता ही सम्हालती थी।

सुजाता ने अपनी दोस्तो और कम्पनी के खास कर्मचारियों को निशा के बर्थ डे पार्टी में इन्वाइट किया।

इधर जब सीमा और निशा कालेज पहुंचीं। जैसे ही निशा क्लास में घुसी उसके ऊपर फूलो की बारिश होने लगी। हैप्पी बर्थडे निशा की की गूंज कमरे में गूंजने लगी।

ब्लैक बोर्ड पर भी, हैप्पी बर्थडे निशा लिखा huwa था।

क्लास के सभी स्टूडेंट ने निशा के जन्म दिन की बधाई दी।

निशा को अच्छा लगा। निशा बोली,

निशा _वैसे ये सब आइडिया किसका था?

रोहन सामने आया, और बोला _भई हमारे सिवाय और किसका हो सकता है।

निशा _तो ये तुम्हारा आइडिया था।

रोहन _कैसा लगा? सरप्राइज।

निशा _अच्छा था।

रोहन _थैंक यू।

वैसे क्लास के सभी स्टूडेंट्स पार्टी चाहते हैं। अगर आप कहे तो पार्टी मेरे तरफ से,,,

सीमा _इसकी आवश्यकता नहीं, निशा के घर शाम को पार्टी है।

निशा _हा, आप सभी पार्टी में जरूर आना।

सभी लोग खुश हो गए।

लंच ब्रेक के समय राजेश और उनके दोस्तो को पार्टी में इन्वाइट करने के लिए सीमा और निशा कैंटीन पहुंचीं।

भगत _अरे निशा जी आइए बैठिए।

सीमा _राजेश कही दिख नही रहा।

भगत _उसे कुछ काम था, तो घर चला गया।

कॉफी पियेंगी आप लोग।

सीमा _नही आज मन नहीं है।

हम लोग आप लोगो को इन्वाइट करने आए है आज निशा का जन्म दिन है।

शाम को निशा के घर पार्टी है।

सभी ने निशा को जन्म दिन की बधाई दी।

सीमा _राजेश को भी लेकर आ जाना सभी लोग समय पर।

भगत _जी, बिल्कुल जी, निशा जी की जन्म दिन की पार्टी है,हम जरूर आयेंगे ।

सीमा _अच्छा हम लोग चलते हैं।

भगत _ठीक है जी, पार्टी में मिलते है।

भगत ने राजेश को फोन कर बताया कि आज निशा का जन्म दिन है। आज निशा जी के घर पार्टी रखा गया है जिसमे हम सबको इन्वाइट किया है।

शाम को तैयार रहना पार्टी में चलना है।

राजेश _अरे यार जाने के बारे में मै कुछ कह नहीं सकता, आप लोग निकल जाना, देखता हू समय निकल गया तो आने की कोशिश करूंगा।

दर असल राजेश प्रिया के घर पर था। आज प्रिया और समीर की शादी की सालगिरह थी तो उसकी तैयारी पे लगा huwa था।

शाम को भगत और उनके दोस्त तैयार होकर निशा के घर जाने को एक जगह एकत्र हुए। राजेश से बात करने पर राजेश ने अपनी व्यस्तता के बारे में बताया।

समय निकल पाया तो कोशिश करूंगा आने की।

भगतऔर उसके दोस्त निशा के घर निकल पड़े।

उधर निशा के घर सभी मेहमान एक एक कर पहुंचने लगे। सुजाता और विशाल मेहमानो के स्वागत में लगे हुवे थे। इधर सीमा और निशा कमरे में तैयार हो रही थी।

भगत और उनके दोस्त निशा के घर पहुंचे, वे सुजाता और विशाल से मिले,

सुजाता _अरे भगत राजेश नही आया क्या?

भगत _मैम, राजेश अपने किसी जरुरी काम में व्यस्त हैं, फिर भी समय निकल पाया तो आने की कोशिश करने की बात कही है।

सुजाता _ओह ठीक है। तुम लोग जाओ पार्टी एंजॉय करो।

कुछ देर बाद रीता अपने पति और रोहन के साथ पहुंची।

सुजाता और विशाल ने हाथ जोड़कर उन लोगो का स्वागत किया।

रीता _अरे सुजाता, तू तो मेरे गले मिल।

सुजाता और रीता गले मिली।

रीता ने सुजाता के कानो में बोली,, तु तो आज इस साड़ी में बहुत सुंदर हॉट लग रही है। सबकी नजर तुम्ही पर है। लौंडे भी जवान लड़कियों को छोड़ कर तुम्ही को घूर रहे है।

सुजाता _चुप कर बेशरम आते ही फिर शुरू हो गई।

रीता _अरे मै सच कह रही,मजाक नहींकर रही।

वैसे हमारी निशा बिटिया कहा है।

सुजाता _वो तैयार हो रही है बस आते ही होगी।

कुछ देर बाद निशा तैयार होकर नीचे आई।

लोगो को लगा की सचमुच में कोई अप्सरा स्वर्ग से उतर रही हो।

सभी ने निशा की जन्म दिन की बधाई और शुभकामनाएं दी।

जब भगत और उनके दोस्त निशा और सीमा से मिले। सीमा ने पूछा,,

सीमा _राजेश कहा है?

भगत _सीमा जी राजेश किसी जरुरी काम में व्यस्त हैं उसने कहा है कि अगर समय निकल पाया तो आने की कोशिश करूंगा।

सीमा और निशा के चेहरे पर कुछ निराश के भाव पैदा हो गए।

सीमा न राजेश को फोन लगाया।

राजेश व्यस्त था काल नही उठा पाया।

सीमा _राजेश तो काल भी नहीं उठा रहा है।

इधर रोहन और उसके दोस्तो ने निशा को जन्म दिन की बधाई दिया रोहन ने कहा कि आज वह बहुत खूबसूरत लग रही हो।

निशा ने थैंक यू, कहा।

पार्टी रूम में जब भगत और रीता आमने सामने आए।

भगत _हेलो आंटी कैसी है आप?

रीता _मै तो ठीक हूं, वैसे तेरा दोस्त कही नजर नहीं आ रहा बङा समझता है अपने आप को।

भगत _वो भी आ जाएंगे, पहले हमसे तो बात कर लीजिए, अच्छे से।

रीता _मै फालतू लोगो से बात नही करती, यह बोलते हुए वह मुंह मोड़कर चली गई।

इधर राजेश ने देखा सीमा का काल आया है। उसने सीमा को काल लगाया।

सीमा ने देखा की राजेश का काल है, वह तुरंत काल उठाई _

राजेश _सीमा जी काल किए थे क्या?

सीमा _राजेश कहा हो आप, आपको पता है न की आज निशा का जन्म दिन पर पार्टी रखा गया है, अब तक पहुंचेनही हो।

राजेश ने अपनी व्यवस्तता के बारे में बताया।

निशा _समय निकाल कर आने की कोशिश करो निशा को अच्छा लगेगा।

राजेश_मै कोशिश कर रहा हूं, पर कह नही सकता की निश्चित तौर पर आ पाऊंगा की नही। तुम निशा को मेरी तरफ़ सी जन्म दिन की ढेर सारे शुभकामनाएं दे देना।

इधर प्रिया के घर में भी सारे महमान आ चूके थे, सभी लोगो ने प्रिया और राजेश को शादी की सालगिरह की बधाई दिया।

प्रिया को लगा की राजेश कुछ अपसेट दिख रहा है ओर बार बार घड़ी की ओर देख रहा है।

वह राजेश को कोने में ले गया,,

प्रिया _क्या बात है बता? मै कब से देख रही हूं, तेरा ध्यान कही और है।

राजेश _दी, कुछ भी तो नही, वैसे आज आप बहुत सुंदर लग रही हो लहंगा और चोली में।

प्रिया _देखो बात को घुमाने की कोशिश मत करो और बताओ, बात क्या है?

राजेश _दी आज मेरे कालेज की एक दोस्त का जन्म दिन है, उसने पार्टी रखी है। मै नही गया तो उसे बुरा लगेगा।

प्रिया _अच्छा तो ये बात है।

राजेश _दीदी मैने दोस्तो से कह दिया है कि मैं नही आ पाऊंगा, अपनी दीदी की पार्टी छोड़कर। आप टेंशन न लो।

प्रिया _अगर खास दोस्त हो तो तुम जरूर जाओ। मै नही चाहती की मेरा भाई मेरे कारण कल अपनी दोस्तो को जवाब न दे सके, उनसे नजरे न मिला सके।

चलो, मै केक जल्दी काट देती हूं फिर केक खाकर तुम अपने दोस्त की पार्टी में चले जाना, उन्हे बधाई देकर कुछ समय बाद आ जाना।

राजेश _ओह दी आप कितनी अच्छी हो। राजेश प्रिया को अपने गले से लगा लिया।

प्रिया के कहने पर समीर और प्रिया ने शादी की सालगिरह पर केक काटा, एक दुसरे को खिलाया फिर राजेश को खिलाया।

राजेश ने भी प्रिया और समीर को केक खिलाकर उन्हे सालगिरह कि बधाई एवम सुभकमनाए दिया।

सुनीता और शेखर भी वहा मौजूद थे जो मेहमानो का ख्याल रख रहे थे।

प्रिया _राजेश अब तुम जाओ और जल्दी आ जाना।

राजेश _जाने लगा।

सुनीता _बेटा कहा जा रहा है, पार्टी छोड़कर।

राजेश _ओह मां मै अभी आया कुछ काम है।

इधर सभी लोग निशा के द्वारा केक काटने का इंतजार कर रहे थे।

सुजाता _, बेटा, केक काटने का समय हो गया, सभी लोग इंतजार कर रहे हैं। सभी मेहमान भी आ गए हैं। फिर देरी क्यू?

निशा _मां थोड़ा और रुकते हैं।

पता नही उसकी आंखे न चहते हुवे भी किसका इंतजार कर रही थी?

इधर सीमा राजेश का इन्तजार कर रही थी।

कुछ देर बादसीमा बोली,,

सीमा _, निराश होते हुए,निशा, लगता है जितना मेहमान आने वाले थे, आ गए लगता है अब कोई नही आने वाला , तुम केक कांटो।

सीमा ने निशा की ओर चाकू बढ़ाया।

निशा ने सीमा की ओर सवालिया निगाहों से देखते हुए चाकू अपने हाथो में लेकर केक काटने लगी।

सभी न ताली बजा कर निशा को बर्थ डे विश किया।

फिर पार्टी में नाच गाना का कार्यक्रम शुरू huwa।

वहा पर उपस्थित कालेज के स्टूडेंट्स डांस करने लगे। निशा को पता नही कुछ अच्छा नहीं लग रहा था, वह ऊपर कमरे में जाने लगी, तभी पार्टी हाल में राज राज राज की आवाज गूंजने लगी।

फिर पार्टी रूम में सन्नाटा छा गया।

राजेश ने एक चेयर पे बैठकर गिटार बजाना शुरू किया।

निशा के पाव सीढ़ी पर ही जम गए।

गिटार की मधुर धुन में वह कही खो सी गई।

फिर फिर वहा पर बुलाए गए आर्केस्ट्रा वालो बजाना शुरू किया और राजेश ने गाना,,,

चांद तारे, फूल सबनम तुमसे अच्छा कौन है।

कोई रुत हो कोई मौसम, तुमसे अच्छा कौन है।

राजेश के साथ सीमा डांस करने लगी।

इधर निशा सीडी से नीचे उतरने लगी,,

सभी लोग राजेश और सीमा के साथ देने लगे।

इस गीत के बाद निशा की तारीफ में कुछ ओर गीत गाए ।

इस दौरान सुजाता को मंच पर नृत्य के लिए राजेश ने आमन्त्रित किया।

सुजाता ने भी राजेश के साथ जमकर नृत्य की और राजेश के साथ निशा की तारीफ में गीत गाने में भी साथ दी।

पूरे हाल में उत्साह का माहौल था।

इधर रीता को पता नही क्यू सुजाता से जलन महसूस हो रही थी?

इस उम्र में भी एक जवान लड़के का नृत्य एवम गायन में ताल में ताल मिलाकर साथ दे रही थी और सभी लोग तारीफ में खुब ताली बजा रहे थे।

वह भी राजेश के साथ कुछ देर मंच पर नाची, पर उसे उतनी ताली नहीं मिली ।

करीब एक घंटे तक नाचने गाने का प्रोग्राम चला फिर राजेश ने निशा को जन्मदिन की बधाई दिया और कहा की सॉरी में जल्दी में कोई गिफ्ट नही ला पाया।

सीमा _राजेश, आप आ गए वही गिफ्ट है हमारे लिए।

राजेश ने सीमा और निशा को जाने की अनुमति मांगा और बताया की उसकी दी की शादी की सालगिरह है।

निशा ने जाने की अनुमति दी।

राजेश, सुजाता के पास गया।

राजेश _मैम अब मैं चलता हूं, आपने बहुत अच्छा साथ दिया। थैंक्स ।

सुजाता _राजेश, थैंक्स तो मुझे कहना चाहिए, निशा की जन्म दिन कि पार्टी में रंग भरने के लिए।

राजेश _मैम मैने कहा कुछ किया लोग तो आपके नृत्य पर ताली बजा रहे थे। सबकी नजर तो आप पर ही थी।

वैसे एक बात बोलूं आप बुरा तो नही मानोगी,,

सुजाता _बोलो, मैं बुरा नहीं मानूंगी,,

राजेश _आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं, लगता ही नही कि आप निशा की मां है,आप तो उसकी बडी बहन लगती है।

सुजाता _शर्माते हुवे बोली, चल झूठा कही का।

राजेश अपने दोस्तो से मिलकर वहा से चला गया।

इधर जब राजेश प्रिया शादी के शालगिराह की पार्टी में पहुंचा, लोग नाच रहे थे कुछ खाना खा रहें थे।

राजेश ने डीजे पर एक अच्छा धुन बजवाया फिर स्वयं नाचा साथमें प्रिया और समीर को भी नचवाया।

राजेश के आने के बाद यहां भी पार्टी में रंग भर गया।

काफी देर रात तक पार्टी चला।

धीरे धीरे मेहमान घर जाने लगे।

जब लगभग सभी मेहमान घर चले गए। सुनिता और शेखर ने भी प्रिया और समीर से घर जाने की इजाजत मांगी।

इजाजत लेने के बाद सुनिता ने राजेश से कहा बेटा तुम आज रात यही रुक जाओ। यहां बचे काम निपटाकर कल सुबह आ जाना।

राजेश _ठीक है मॉम।

राजेश कुछ बचे काम को निपटाने में लग गया।

समीर के दोस्तो ने उसे पिला दिया था। वह भी अपने कमरे में जाकर खर्राटे भरने लगा। पिंकी भी सो गई थी।

प्रिया राजेश के पास आकर बोली।

प्रिया _राजेश, रात बहुत हो गई है तुम भी कमरे में जाकर सो जाओ। बचा काम कल सुबह देख लेंगे।

राजेश _ठीक है दी।

राजेश कमरे में गया उसका शरीर पसीना पसीना हो चूका था।

राजेश अपना सारा कपड़ा निकाल दिया और सिर्फ चड्डी में था वह नहाया फिर टावेल से शरीर को पोछा और उसे लपेट लिया।

कुछ देर बाद प्रिया कमरे में पहुंचीं।

प्रिया _राजेश पानी लाई हूं। कुछ और चाहिए क्या?

राजेश _न दी।

प्रिया बेड पर बैठ ते हुवे बोली,,

राजेश, थैंक्स तुमने आज दिनभर कितनी मेहनत की शादी की सालगिरह को यादगार बनाया।

राजेश _मै अपनी प्यारी दी के लिए इतना नही करूंगा। ये तो मेरा फर्ज है।

प्रिया _अच्छा ये तो बताओ, ऐसा कौन सा खास दोस्त था जो पार्टी छोड़कर गया। कोई लड़की है क्या?

राजेश _दी ये आप क्या कह रही हो, ऐसी कोई बात नहीं।

प्रिया _अरे मुझसे क्या छिपाना अगर कोइ हो तो मुझसे शेयर कर सकते हो।

राजेश _जरूर दी, अगर ऐसा कुछ बात हो तो मैं जरूर आपसे शेयर करूंगा।

प्रिया _अच्छा अब मैं चलू।

राजेश _दी क्या मैं अपने बच्चे से प्यार कर लू, कैसा है मेरा होने वाला बच्चा।

सुनीता की भ्रूण को प्रिया ने अपने गर्भ में प्रतिस्थापित कर ली थी ।

प्रिया _अरे अभी तो सिर्फ़ 4माह का huwa है।

प्रिया अभी भी लहंगा और चोली में थी ।

प्रिया बेड के किनारे खड़ी थी, राजेश इसके पेट को चूम कर कहा,,

दी, थैंक यू जो मेरे बेटे को अपने गर्भ में पालने के लिए।

राजेश ने प्रिया को बाहों में भर लिया।

प्रिया राजेश की बालो को सहलाते हुए कहा।

प्रिया _क्या मै अपने भाई के लिए इतना नही कर सकती। वैसे उपकार तो तुमने मुझ पर किया है re, मुझे भी एक और बच्चा चाहिए था हम कब से कोशिश कर रहे थे।

तुमने मेरी यह इच्छा पूरी कर दी।

प्रिया इस समय लहंगा और चोली में बहुत हॉट लग रही थी।

राजेश _दी आ सच में तुम लहंगाऔर चोली में खूबसूरत और हॉट लग रही हो ।

प्रिया _यह बात तो कई बार बोल चूके हो। लगता है तुम्हारा इरादा ठीक नही है।

राजेश _राजेश ने प्रिया की नाभि पे चुम्बन लेते हुए कहा,दी तूझसे प्यार करने का मन कर रहा है।

प्रिया _हूं तो ये बात है, इसलिए बार बार तारीफ कर रहें हो मेरी।

प्रिया _मतलब मेरी कुआ की पानी फिर से पीना चाहता है। प्रिया हंसते हुए बोली।

राजेश _आप जो पिला दो।

प्रिया _न बाबा मै कुवा की पानी नहीं पिला सकती तुम्हे । तुम्हारा बहुत बङा है। पूरा अंदर तक ठोकते हो। मेरा गर्भ को नुकसान पहुंच सकता है।

राजेश _दी तुम ठीक बोल रही हो। होने वाले बच्चे का सेफ्टी ज्यादा जरुरी है।

प्रिया _वैसे,गाड़ से काम चलाएगा तो बोलो।

राजेश_इससे बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव तो नही पड़ेगा ना।

प्रिया _आराम से धीरे धीर करेगा तो कुछ नहीं होगा।

राजेश ने प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया।

और उसके ओंठ चुसने लगा।

फिर उसकी चोली और ब्रा खोल दिया।

उसकी चुचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

प्रिया सिसकने लगी।

प्रिया _मुझे पता है।

राजेश _क्या दी!

प्रिया _यही की तुझे दूध पीना पसंद है।

मैंने देखी थी किस तरह तुम रेखा की दुदू गटक गटक कर पी रहे थे। कुछमाह और रूको फिर मेरे स्तनों में दूध भर जाएंगे। उसके बाद अपनी दूध पीने की इच्छा पूरी कर लेना।

राजेश _सच दी, मै तो रोज ही दुध पीऊंगा।

पर दी सारा दूध मै जाऊंगा तो मेरा बच्चा भूखा रह जायेगा। पहले बच्चे को पिलाना फिर बच जायेगा वो मै पियूंगा।

प्रिया _अपने होने वाले बच्चे का बड़ा खयाल है तुम्हे।

राजेश _आखिर मै उसका बाप हूं, खयाल तो रखना पड़ेगा।

राजेश अब खडा हो गया।

प्रिया ने उसका टावेल खोल दिया।

राजेश पूरा नंगा हो हो गया।

प्रिया राजेश की land को मुंह में भरकर चुसने लगी। ग्लैप ग्लैप,,,

राजेश को बहुत मज़ा आने लगा।

राजेश का लंड एकदम लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया।

प्रिया ने कमरे के आलमारी से क्रीम निकाली और राजेश के लंड पर अच्छे से लगा लिया। फिर अपनी गाड़ में भी क्रीम अच्छे से लगा दी।

प्रिया घोड़ी बन गई, और बोली,

अब देख क्या रहा है re, चल जल्दी कर,,

राजेश ने अपना लंड हाथ से पकड़ा और फिर प्रिया के गाड़ के छेद पे रख हल्का दबाव डाला। लंड को टोपा गाड़ के अंदर चला गया।

राजेश ने धीरे धीरे कर आधे से अधिक लंड गाड़ में घुसा दिया।

फिर उसने गाड़ मारना शुरु किया।

कमरे में प्रिया की मादक सिसकारी और हल्की चीख गूंजने लगी।

आह मां उन,, आई आह मारा डाला re इतना मोटा लण्ङ पूरा गाड़ में घुसा दिया,, हाय रब्बा मर गई मैं।

अरे थोडा आहिस्ता आहिस्ता मार ये chut नही गाड़ है। हाय रब्बा ये तो मेरे गाड़ को भोसड़ा बना के ही छोड़ेगा

इधर राजेश को भी गाड़ मारने में जन्नत का मज़ा आने लगा।

हाय मेरी जान, तुम्हारी गाड़ कितनी टाइट है, तुम्हारी गाड़ मारने का मज़ा ही कुछ और है सच में बहुत मज़ा आ रहा है।

राजेश करीब आधा घंटा तक जमकर गाड़ मारने के बाद वह प्रिया के गाड़ में ही झड़ गया।

प्रिया को चलने उठने में गाड़ पे दर्द महसूस किया। वह लड़खड़ा कर चलने लगी। राजेश ने पूछा,,

क्या huwa दी आप ठीक तो है न।

प्रिया _तुमने तो पूरा मेरा गाड़ ही सूजा कर रख दी।

अब सो जाओ मैं भी चलती हूं।

राजेश _ओके दी, बाई गुड नाईट।

प्रिया _गुड नाईट टू यू।

प्रिया भी अपने कमरे में जाकर सो गई।

 
सुजाता को रात में फिर वही सपना दिखाई देता, चारो तरफ पानी ही पानी सब कुछ डूब गया है वह किसी मंदिर की कलस को पकड़ी हुई हैं और खुद को बहने से बचाई हुई है, वह मदद के लिए पुकार रही है, वहा मदद करने वाला कोई नहीं।

तभी एक हेलीकॉप्टर आता हुवा दिखाई देता है, हेलीकाफ्तर उसके ऊपर आकर रुक जाता है। हेलीकाफ्तार से एकफौजी ,रस्सी की बनी सीडी के सहारे उतरता है और सुजाता की ओर हांथ बढ़ाता है, सुजाता अपना हाथ आगे बढ़ाती है, फौजी सुजाता की हाथ को पकड़कर ऊपर खींचता हैऔर सुजाता को लेकर हेलीकाफ्तर उड़ जाती हैं। जब सुजाता उस फौजी की सकल देखती है तो वह दंग रह जाती है। क्यों कि वह सकल राजेश का था।

तभी सुजाता कि नींद खुल जाती है वह लंबी लंबी सांस लेने लगती। अपने बाजू देखती है विशाल सोया हुआ था।

सुजाता _हे भगवान या सब सपना था, मैने फिर वही सपना देखा। पता नही क्या होने वाला है, मुझे ऐसी सपना क्यू आ रही है।

सुजाता पानी पीकर फिर से सोने की कोशिश करती है।

इधर राजेश प्रिया के घर से जब अपना घर पहुंचा , सुनीता किचन में काम कर रही थी। राजेश किचन में जाकर अपनी मां को बाहों मे भर लिया।

राजेश _गुड मॉर्निंग मां।

सुनीता _गुड मॉर्निंग बेटा, आ गया प्रिया के घर से सारा काम निपटाकर।

राजेश _हां मां।

सुनीता _अब जाओ बेटा नहाकर तैयार हो जाओ, तुम्हे कालेज के लिए लेट हो रहा हैं।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में चला जाता है।

कालेज जाने के लिए इधर आज स्वीटी जो ड्रेस पहनी थी। उसमे वह बहुंत खूबसूरत लग रही थी।

जब स्वीटी और राजेश कालेज पहुंचे, स्वीटी अपनी क्लास में जा रही थी तभी रास्ते में रोहन और उसके दोस्त रास्ते में खड़े थे।

रोहन _हाई स्वीटी।

स्वीटी _हाई।

रोहन _स्वीटी आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।

स्वीटी _ओह थैंक्स।

स्वीटी अपने क्लास में चली गई।

रोहन के दोस्त _भाई, स्वीटी बहुत ही खूबसूरत और हॉट हैं, पर किसी को भाव नहीं देती।

रोहन _अबे, एक बार मुझे बेस्ट स्टूडेंट का खिताब अपने नाम करने दे, फिर देखना निशा को अपनी वाइफ और स्वीटी को रखैल बनाऊंगा।

रोहन के दोस्त _भाई अगर ऐसा हो गया न तो राजेश उनके दोस्त अपना मुंह छिपाते फिरेंगे।

रोहन _हां, बे ऐसा ही होगा।

इज बार मुझे स्टूडेंट ऑफ द ईयर बनने सी कोई नही रोक सकता।

रोहन के दोस्त _भाई आपकी तैयारी देखकर तो यही लगता है कि इस बार यह खिताब आप ही जीतोगे लेकिन ये राजेश दो बार यह खिताब जीत चुका है और उसे कम आंकना ठीक नही।

रोहन _इस बार उसे हारना ही पड़ेगा।

कालेज प्रशासन ने आज से दो दिन बाद तीन दिवसीय खेल प्रतियोगिता की घोषणा कर दिया गया था।

को खेल होने थे वो इस प्रकार से हैं।

प्रथम दिवस, 100मीटर दौड़,200 मीटर दौड़, 400मीटर दौड़, 1500मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, भाला फेंक,, बास्केट बॉल।

दूसरे दिन, साइकिलिंग, बैडमिंटन, टेनिस, चेस, वालीबाल , गोला फेंक, डिस्क थ्रो।

अंतिम दिवस, फुटबाल

फुटबाल के लिए 4टीम बनाए गए थे और चारो टीम के बीच तीसरे दिन प्रतियोगिता होनी थी। इस मैच के दौरान, अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को लेकर कालेज का एक फुटबाल टीम बनाया जाना था जो इंटर कालेज फुटबाल टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए कालेज से भेजा जायेगा। विगत 2वर्षो से इंटर कालेज फुटबाल टूर्नामेंट का खिताब इस आर के कालेज को मिला था, यह खिताब जितना सभी कालेज के लिए गर्व की बात थी, सभी कालेज इस खिताब को प्राप्त करना चाहते हैं। जो कालेज इस खिताब को जीतता उसका रुतबा बढ जाता था।

सभी स्टूडेंट खेल की तैयारी में जुट गए थे। राजेश भी तैयारी में जुटा था

। रीता , ट्रेनर विजय से कहा, विजय कैसा चल रहा हैं रोहन की तैयारी।

विजय _मैडम, रोहन की तैयारी बहुत अच्छी है इस बार देखना रोहन सबसे आगे रहेगा।

रीता _गुड, इस बार मैन ऑफ द टूर्नामेंट, रोहन को ही बनना हैं।

आखिर वह दिन आ गया, आज से प्रतियोगिता शुरू होना हैं।

राजेश कालेज जाते समय सुनीता से,

राजेश _मां आज से खेल प्रतियोगिता शुरू होने जा रहा है, मुझे आशीर्वाद दो की मैं अच्छा प्रदर्शन कर सकू।

सुनीता _बेटा मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ हैं। मुझे पूरा विश्वास है तुम जरूर अच्छा प्रदर्शन करोगे।

राजेश अपनी मां से आशीर्वाद लेकर, कॉलेज चला गया।

कालेज के प्रांगण में मंच सजाया गया था, जहां अतिथियों के द्वारा खेल का शुभारंभ किया जाना था।

आज खेल का शुभारंभ करने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में, औद्योगिक क्षेत्र की सबसे पावर फूल महिला, सुजाता एंड विशाल ग्रुप की मालकिन सुजाता को बुलाया गया था। सभी अथिति और स्टूडेंट सभा में उपस्थित हो चुके थे।

सबसे पहले, छात्रों के द्वारा स्वागत गीत गाया गया। कॉलेज के प्राचार्य ने सुजाता को गुलदस्ता भेट किया।

फिर कालेज के छात्र संघ के अध्यक्ष होने के नाते अतिथियों की स्वागत के लिए भगत का नाम मंच संचालक द्वारा अलाउंस किया गया।

भगत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

पिछले दो सालों से मैन ऑफ द टूर्नामेंट एवम, बेस्ट स्टूडेंट, रहने के कारण राजेश को भी सुजाता की स्वागत करने के लिए मंच पर बुलाया गया।

राजेश ने गुलदस्ता लेकर सुजाता के पास स्वागत के लिए पहुंचा।

राजेश _नमस्ते मैम, मुख्य अथिति के रूप में आपका स्वागत हैं।

सुजाता _थैंक यू राजेश, मुझे उम्मीद है कि इस बार भी तुम खेले में अच्छा प्रदर्शन करोगे।

राजेश _थैंक यू मैम।

मंच संचालक द्वारा, सुजाता को सभा को सम्बोधित करने का निवेदन किया,,

सुजाता ने सभा को सम्बोधित किया,,, उसने कहा,

खेल हमारे जीवन का हिस्सा है । इससे व्यक्ति का शारीरिक एवम मानसिक विकास होता है।

यह खिलाड़ियों के लिए अच्छा भविष्य और पेशेवर जीवन का क्षेत्र प्रदान करता है।

खेल हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है क्योंकि वे हमे समयबद्ध ता ,धैर्य, अनुशासन, समूह में कार्य करना और लगन सिखाते हैं।

यदि हम खेल का नियमित अभ्यास करे तो हम अधिक सक्रिय और स्वस्थ्य रह सकते है।

आज के खेल में भाग लेने वाले सभी छात्र छात्राओं को मैं अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभ कामनाएं देती हूं। सभी प्रतिभागी अच्छी खेल भावना के साथ खेल।खेल में हार जीत तो लगी रहती है, हार के लिए हमे निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्यू कि ये आपके लिए अंतिम अवसर नही है आगे भी अवसर मिलेंगे जिसके लिए अपनी मेहनत लगन से अच्छे प्रदर्शन कर सकते हो, एक बार पुनः आप सभी को शुभकामनाएं देते हुए अपनी वाणी को विराम देतीहूं।

इसके बाद सुजाता मैदान मे गई और भाला फेंक कर खेल का शुभारंभ की, और इसी के साथ खेल प्रारंभ हुआ।

सबसे पहले 100मीटर दौड़ होना था।

प्रतिभागी के साथ उसके सपोर्टर भी मैदान मे पहुंच गये, और अपने अपने पसंदीदा प्रतिभागी का नाम चिल्ला चिल्ला कर उसका हौसला बढ़ाने लगे।

सुजाता भी राजेश को दौड़ते हुवे देखने के लिए एक्साइटेड थी वह मंच पर बैठ कर मैच देखने लगी, निशा सीमा और स्वीटी, भगत भी अपने अपने दोस्तो के साथ दर्शक दीर्घा में बैठे कर राजेश का सपोर्ट कर रहे थे।

इधर रोहन के दोस्त भी, रोहन रोहन रोहन करके चिल्लाने लगे।

सिटी बजते ही दौड़ शुरू हो गया।

सभी प्रतिभागी अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ लगाया।

दौड़ मे राजेश प्रथम स्थान और रोहन उससे कुछ सेकंड पीछे रह गया।

वह द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

इसी प्रकार 200मीटर दौड़ 400मीटर दौड़ 1500मीटर सभी दौड़ में राजेश प्रथम एवम रोहन बहुत कोशिश करने के बाद भी द्वितीय स्थान पर रहा।

सुजाता, राजेश के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हुईं।

खेल का मैदान राजेश और रोहन का नाम गूंज रहा था। इधर पल पल की सारी जानकारी रीता ले रही थी और वो काफी निराश हो रही थी।

दौड़ के बाद, लम्बी कूद, ऊंची कूद, भाला फेंक huwa इसमें भी राजेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और रोहन द्वितीय स्थान पर रहा।

उसके बाद बास्केट बाल प्रतियोगिता huwa जिसमे इसमें भगत का टीम जीत गया। भगत मैन ऑफ द मैच रहा। राजेश और रोहन दोनो इसमें भाग नही लिए थे क्यू की किसी एक समूह खेल में ही भाग लेना था।

आज का खेल सम्पन्न हुवा। आज के खेल में राजेश सबसे आगे रहा सभी विजेताओं को सुजाताने मेटल देकर सम्मानित किया , और बधाई दी।

वैसे सुजाता ज्यादा देर तक रुकती नहीं पर राजेश को खेलता देख पता नही वह क्यू रुकी रही।

इधर रीता बहुत टेंशन में थी, उसे लगने लगा की अगर उसने कुछ नहीं किया तो कल के खेल का भी यही परिणाम आएगा।

अगले दिन जैसे ही , राजेश कालेज पहुंचा। खेले प्रारंभ होने मे एक घंटा का समय था। राजेश के मोबाइल में किसी का काल आया।

राजेश मैने तुमारे व्हाट्सएप पर एक फोटो भेजी हैं जरा उसे देखो फिर काल करो।

राजेश ने व्हाट्सएप पर वह फोटो देखा, राजेश उस फोटो में सुमन के ओंठो को किस कर रहा था।

राजेश को फिर काल आया।

राजेश _राजेश, ये कैसा मजाक है,।

अनजान_मेरे पास तुम्हारे और सुमन की और भी गंदी तस्वीरे भी हैं, जो किसी ने देख लिया तो,,,समझ रहे हो ना की मैं क्या कहना चाह रही।

राजेश _तुम आखिर चाहती क्या हो।

अनजान महिला _मैं चाहती हू की फार्म हाउस में मुझसे मिलो अभी, वही अच्छे से बात करेंगे, नही तो,,, औरत हसने लगी।

राजेश _ठीक हैं एड्रेस बताओ, मैं आता हूं।

अनजान औरत ने एड्रेस बताई और बोली की अकेले ही आना अपने दोस्तो को मत लाना।

राजेश अपनी बाइक लेकर पहुंच गया बताए पते पर फार्म हाउस।

वहा गार्ड ने गेट खोला। राजेश अंदर गया। फार्म हाउस पे अंदर देखा तो कोई नजर ही नहीं आ रहा था। फार्म हाउस में बने आलीशान बंगला के अंदर जब गया। कोई नजर ही नहीं आया।

राजेश ने उस नंबर पर काल किया, अनजान औरत ने काल उठाया और कहा आ गए तुम हाल मे बैठो मैं आती हूं।

राजेश हाल मे बैठ कर इंतजार किया थोड़ी देर मे एक महिला आई।

राजेश उस महिला को देख कर चौंक गया। वह महिला कोई और नहीं रोहन की मां रीता थी।

राजेश _मैडम आप।

आपने मुझे काल किया था।

रीता _ हा राजेश।

राजेश _आप चाहती क्या हैं?

रीता _मैं चाहती हू की आ की खेल में तुम रोहन से पीछे रहो। मैं चाहती हू की रोहन आज का बेस्ट परफॉर्मर रहे।

ये चेक हैं मैंने साइन कर दी हैं, तुम इसमें जितना भी रकम भरना चाहो भर सकते हो।

राजेश _देखो मेरी मां के भी कुछ सपने हैं। मैं उसकी अरमानों का गला नही घोट सकता।

रीता _ओह मुझे पता चला हैं की तुम्हारी मां तुम्हे i,a, एस अफसर बनाना चाहती है।

तुम आई ए एस अफसर बनकर कितना कमा लोगे। यही कुछ एक से दो लाख महीना।

मैं तुम्हे कालेज पास होने की बाद अपनी कंपनी में बड़ा पद दूंगी। किसी आई ए एस अफसर से तिगुना वेतन। तुम मेरा कहना मान लो।

राजेश _मैं पैसे या पद के लालच मे अपनी मां की सपने से समझौता नहीं कर सकता।

रीता _राजेश, मैं तो तुम्हारी भलाई के लिए कह रही हूं। मुझे दूसरा रास्ता अपनाने में मजबूर न करो।

राजेश _आप चाहे जो भी कर ले, मै झुकूंगा नही।

रीता _ठीक है तो देखो।

रीता ने टीवी ऑन किया उसमे, 5मिनट का वीडियो चलाया। जिसमे सुमन और राजेश सेक्स कर रहे थे।

राजेश दंग रह गया।

रीता मुस्कुराने लगी।

रीता _राजेश, अगर तुमने मेरा कहना नही माना तो मेरा एक बटन दबाते ही कालेज के स्टूडेंट्स के मोबाइल में ये वीडियो पहुंच जाएगी। स्टूडेंट्स आज तुम्हारा कालेज के खेल नही सुमन और तुम्हारा सेक्स का खेल देखेंगे। और ये पता चल जायेगा की सुमन के होने वाले बच्चे की बाप तुम हो।

तुम तो एक लड़के हो शायद कोई फरक न पड़े। पर सुमन के ऊपर क्या बीतेगी।

वह तो बेचारी शर्म से आत्महत्या कर लेगी।

राजेश _आप ऐसा नहीं कर सकती।

रीता _मै कुछ भी कर सकती हूं, अपने बेटे की लिए।

वैसेपता चला हैं, तुम्हे बड़ी उम्र की औरते काफी पसंद हैं,

रीता ने राजेश का चहेरा अपनी ओर करते हुवे बोली।

रीता _देखो मेरी तरफ, मै सुमन से ज्यादा खूबसूरत और हॉट हू। अगर तुमने मेरा कहना मां लिया तो ये खूबसूरत जिस्म तेरी, रीता ने अपनी साड़ी की पल्लू हटाते हुवे बोली।

राजेश ने उसे धकियाते हुवे कहा नही चाहिए मुझे तुम्हारा जिस्म, मै तुम्हारा कहना नही मानूंगा, चाहे जो भी कर लो।

रीटा _तो ठीक है राजेश जाओ, एबी देखो मैं क्या करती हूं, मै आ के पहले खेल में जैसे ही रोहन से जीते तो ये वीडियो वायरल जो जाएगी।

राजेश वहा से चला गया जाते हुए वह यही सोच रहा था कि वह क्या करे? कही रिया नई सच मे विडियो वायरल कर दिया तो स्टूडेंट्स उसका मजाक बनाएंगे और कही वह सचमुच में आत्महत्या न कर ले।

उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करे।

और जब वह कालेज पहुंचा उसके दोस्त ढूंढ रहे थे कहा चला गयाथा, भगत ने पूछा।

राजेश _, कुछ काम था, यार।

भगत _भाई तेरा मुड कुछ उखड़ा huwa लग रहा है कुछ बात हैं क्या?

राजेश _नही यार सब ठीक है।

कुछ समय बाद खेल प्रारंभ huwa

पहला खेल साइकल दौड़ huwa सिटी बजते ही प्रतिभागी के बीच साइकिल रेस शुरू huwa।सभी तरफ राजेश और रोहन रोहन गूंजने लगा।

राजेश आगे था,पर

जैसे हीअंत मे जब फैसले की घड़ी आई , राजेश पीछे हो गया और रोहन जीत गया।

सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए, किसी से ये बात पच नहीं रही था की राजेश रोहन से पिछड़ गया।

यह बात जन रीता तक पहुंची वह खुश हो गई आखिर वह अपनी चाल में कामयाब हो ही गई।

इधर भगत, निशा सीमा और स्वीटी भी हैरान थी।

भगत ने राजेश से पूछा भाई ये कैसे हो गया? आप आगे चल रहे थे फिर अचानक से पीछे।

राजेश _रोहन ने मुझसे ज्यादा तैयारी किया है, इसमें आश्चर्य करने की बात नहीं।

इसके बाद आज जितने भी खेल हुवे उसमे रोहन आगे रहा और राजेश उससे जानबूझ कर पिछे रहा।

राजेश के सभी दोस्तो में मायूसी छा गई।

जबकि रोहन के दोस्त में उत्साह चरम में पहुंच गया और वे राजेश के दोस्तो को चिढ़ाने लगे।

राजेश के दोस्त अपनी गुस्सा को काबू में रख कर उनकी ताना सुनते रहें।

इधर स्वीटी और राजेश घर में जब पहुंचे उनके चहरे लटके हुवे थे।

दोनो सीधे अपने रुम में चले गए।

सुनिता, को अजीब लगा वह सीधे राजेश के रुम में गई।

सुनिता _बेटा, आज क्या huwa बताया नही, मेरे बेटा जरूर आज भी बेस्ट परफॉर्मर रहा होगा, क्यू कुछ बताता क्यू नही।

राजेश के आंखो मे आंसू आ गए।

सुनिता _राजेश के आंखो में आंसू देखकर, विचलित हो गई।

सुनिता _बेटा क्या huwa? तुम्हारे आंखो में आंसू।

राजेश _मै आज हार गया मै, मुझे माफ करदो मै ने तुम्हे निराश किया। वह सुनिता के कंधे पर सिर रख कर आंसू बहाने लगा।

सुनिता _मुझे यकीन नहीं हो रहा, जरूर कोई बात होगी। बताओ मुझे, क्या huwa है?

राजेश ने सारी बाते बता दिया किस तरह रीता ने

उसे ब्लैक मेल किया।

सुनिता बोली, बेटा तुमने ठीक किया, वो लोग पैसे वाले हैं, पैसे के दम पर कुछ भी कर सकते हैं।

उनसे उलझना ठीक नहीं।

मुझे तुम पार गर्व है बेटा तुम्हे निराश होने की जरूरत नहीं।

अगले दिन फुटबाल मैच होना था, सुनिता ने राजेश से कालेज जाने से मना कर दिया।

सुनिता _बेटा तुम ये खेलकूद छोड़ो, ये लोग तुम्हे नुकसान भी पहुंचा सकते है। वैसे हारना ही है तो इससे अच्छा खेलो ही मत, तुम आज घर में ही रहकर आराम करो।

राजेश के दोस्तो ने राजेश को फोन किया, फोन सुनिता ने उठाया, सुनिता ने कहा की राजेश की तबियत ठीक नहीं है वह आज खेल में भाग नही लेगा।

इधर भगत को लगा की कुछ तो गड़बड़ huwa है भाई के साथ।

उधर रोहन के दोस्त भगत और उसके दोस्त को चिढ़ाने लगे, कहा गया तुम्हारा भाई, हारने के डर से भाग गया क्या?

उधर निशा और सीमा को भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है। वह भी मायूस थी।

फुटबाल खेल निर्धारित समय में सुरु हूवा। और रोहन के टीम ने बाकी सभी टीम को हरा दिया और रोहन आज फिर बेस्ट परफॉर्मर रहा।

इधर आज रोहन के दोस्त जश्न मना रहे थे। रीता बहुत खुश थी।

जबकि राजेश, सुनिता और उसके दोस्त मायूस।

 
रात में राजेश को रीता का फोन आया , राजेश काल उठाना तो नही चाहता था ,पर काल उठाया।

राजेश _आप जो चाहती थी वह तो हो गया? अब और क्या चाहती हो?

रीता _हंसते हुवे,राजेश, तुम्हारा, मुझसे नाराज होना लाजिमी है, पर क्या करे? अपनी मकसद पर कामयाब होने के लिए, सब करना जरूरी था। खैर छोड़ो। मै तुमसे बहुत खुश हूं। मैने तो तुम्हें शुक्रिया कहने के लिए फोन किया था । तुम्हे कभी पैसा या और किसी चीज की जरूरत पड़े तो मेरा द्वार हमेशा तुम्हारे लिए खुले रहेंगे।

राजेश _मुझे कुछ नहीं चाहिए,आपसे।

रीता _आदमी को कब किसकी जरूरत पड़ जाए, कह नही सकते। कभी जरूरत पड़े तो याद करनाऔर हसते हुवे फोन काट दी।

इधर सुनिता राजेश के कमरे में उसी समय पहुंची थीं।

सुनिता _किसका फोन था बेटे?

राजेश _उसी औरत की जिसने तुम्हारे सपने के पूरा होने में बाधक बन गई है।

सुनिता _बेटा, उस औरत से तुम उलझो मत, ऐसे लोग बहुत खतरनाक होते हैं। अपनी मकसद पूरी करने के लिए, कुछ भी कर सकते हैं,और मै नही चाहती की मेरे बेटे को कुछ नुकसान पहुंचे। जो huwa उसे भूल जाओ। मुझसे वादा करो की तुम उन लोगो से उलझोगे नही।

राजेश _पर मां तुम्हारी सपनो का क्या होगा?

सुनिता _बेटा मेरा सपना तुम्हे बड़ा अफसर बनते हुवे देखने का है। ये खेल वेल छोड़ो और पढ़ाई में ध्यान दो। रात बहुत हो गई है अब सो जाओ बेटा।

सुनिता राजेश के माथे को चूम कर, कमरे में चली गई।

खेल प्रतियोगिता संपन्न होने के कारण अगले दिन कालेज में छुट्टी था। भगत ने राजेश को काल कर बताया कि आज बाबा ने आश्रम में बुलाया है।

राजेश ने यह बात अपनी मां को बताया, सुनिता से इजाजत लेकर वह भगत के साथ आश्रम चला गया।

जब वह भगत से मिला तो भगत ने राजेश से जानना चाहा की आखिर बात क्या है कल भी वह कालेज नही आया, खेल में भाग लेने, लेकिन राजेश उसको बता भी नही सकता था कि रीता ने ब्लैक मेल किया है। वह भगत को से यह बात छुपा दिया और ऐसा बर्ताव करने की कोशिश की, रोहन न अच्छा प्रदर्शन किया इस लिए वह पिछे रह गया, पर निराशा की भावना उसकी शक्ल पर साफ झलक रहा था। जिसे भगत महसूस कर पा रहा था, पर वह राजेश से जिद कर पूछ भी नही सकता था।

जब वे आश्रम पहुंचे,

वहा लोगो की भारी भीड़ थी, जब से बाबा जी का प्रवचन टीवी पर प्रसारित हो रहा था तब से दिन प्रतिदिन आश्रम में लोगो की भीड़ बढ़ती जा रही थी। जब आश्रम में भीमा को पता चला कि राजेश आया है वह मिलने चला आया। वह आश्रम की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी को सौंपा गया था। उसके बिना इजाजत के आश्रम में कोई आ नही सकता था।

जब वह राजेश और भगत से मिला।

भगत _भीमा, क्या हाल चाल है? आश्रम में आकर खुश तो हो न।

भीमा _बस आप लोगों की कृपा है भाई, हम सभी लड़के यहां बहुत खुश है।

भगत _, हमे खुशी हुई, यह जानकर।

तीनो चर्चा कर ही रहे थे तभी एक सेविका आई।

भीमा ने सेविका से कहा की जाओ बाबा जी को खबर दे दो की राजेश भाई और भगत आए है।

सेविका ने सभा हाल में गई जहा सैकड़ों की संख्या में लोग बाबा जी से मिलने पहुंचे थे, कुछ लोग कमरे के अंदर थे। बाबा जी उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे थे।

सेविका ने यह खबर सभा हाल में मौजूद सेविका को दी जो लोगों को एक एक कर बाबा जी के कमरे में उनसे मिलने भेज रहे थे।

राजेश और भगत की आने की खबर कमरे के अंदर जाकर बाबा जी को दिया।

बाबा जी ने कहा की राजेश कोआने को कहो।

यह खबर सेविका ने जाकर भीमा को बताया।

राजेश बाबा जी से मिलने सभ हाल में गए।

वहा पूजा रुम के बाहर मौजूद सेविका ने उन्हें अंदर जाने को कहा।

राजेश कमरे की अन्दर गए, बाबा जी को राजेश ने प्रणाम किया।

बाबा जी ने राजेश को बैठने कहा,,

कमरे मे बाबा जी के सामने बैठे दम्पत्ति अपनी समस्या के समाधान के उपाय, बाबा जी से पाकर, बाबा जी से आशीर्वाद लेकर चले गए।

बाबा ने राजेश से कहा,,

बाबा _राजेश, मुझे भगत ने फोन कर बताया कि खेल प्रत्योगिता में तुम्हारे साथ कुछ गलत huwa है, और तुम निराश हो इसलिए मैंने तुम्हे यहां बुलाया।

राजेश _बाबा जी कुछ बाते ऐसी होती है की आदमी चाह कर भी दूसरो को नही बता सकता की उनके साथ क्या huwa है।

बाबा _ देखो राजेश जीवन में तरह तरह के संघर्षों का सामना आए दिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है। जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते है, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उसका साथ नहीं देता। हर सफल इंसान की जिंदगी में एक संघर्ष की कहानी जरूर होती है।

मैंने तुम्हारा हाथ देखा है, तुम्हे जीवन में अभी और कई मुस्किलो का सामना करना पड़ेगा।

एक दिन ऐसी भी परिस्थितिया भी निर्मित होगी, जब तुम्हे अपनो से दूर जाना पड़ेगा। तुम्हारे अपने ही तुम्हे ठुकरा देंगे ।

तुम अपने को अकेला महसूस करने लगोगे।

लेकिन तुम घबराना नहीं जो भी होगा,वो अच्छे के लिए ही होगा, एक दिन सारी बाधाओं को पार कर तुम सफल होगे, और तुमसे रूठे लोग फिर से तुम्हे मिलेंगे।

बेटा तुम अपना कर्म करो,बाकी ईश्वर पर छोड़ दो, निराशा पन को जीवन में कभी हावी मत होने देना ।

राजेश _बाबा क्या मां भी मुझे ठुकरा देगी?

बाबा _बेटा कौन कौन ठुकराएगी ये मत पूछो।

नही तो ये जानकारी तुम्हे कमजोर बना देगा।

बाबा _राजेश, मै देख पा रहा हूं,

तुम्हारे अंदर गजब की क्षमता है तुम सारी मुस्किलों को पार कर एक दिन सफल होगे और फिर से ठुकराए हुए लोग तुम्हे अपनाएंगे।

राजेश दिन ब दिन यहां लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। तुम आज रुककर यहां की मैनेजमेंट देखो। मै लोगों से मिलने के बाद तुमसे मिलता हूं।

राजेश _ठीक है बाबा।

राजेश ने बाबा जी से आशीर्वाद लेकर कमरे से चला गया। वह भगत और भीमा के पास पहुंचा।

भगत _क्या huwa भाई सब ठीक तो है न?

राजेश _सब ठीक है भगत। चहरे पर थोड़ा उदास प्रकट करते हुए कहा,,

भीमा _भाई कोई बात है क्या? आपून कुछ काम आ सका तो बताना, जान भी हाजिर रहेगा, आपके लिए।

राजेश _अरे नही भीमा, मुस्किलो से मुझे अकेले ही लड़ना है।

भगत _भाई तू ऐसा काहे सोचता है, तुम कभी अपने को अकेला मत समझना, हम हमेशा तेरे साथ है, मर जायेंगे पर साथ नहीं छोड़ेंगे।

ये तीनो आपस में चर्चा कर रहे थे। तभी आश्रम के प्रबंधक कुछ लोगों के साथ उनके पास आए।

प्रबंधक _राजेश ये लोग बाबा जी के भक्त है ये दूसरे राज्य के रहने वाले है। ये लोग चाहते हैं की उनके राज्य में भी बाबा का एक आश्रम हो।

आश्रम बन जाने से वहा रहने वाले बाबा के लाखो भक्तो के लिए एक ठिकाना और बाबा से मिलने का सुविधा मिल सकेगा। बाबा जी समय समय पर वहा जाकर प्रवचन एवम लोगों की समस्या का समाधान कर देंगे।

राजेश _वो तो ठीक है, पर वहा जमीन चाहिए उसके लिए, धन भी लगेगा। अभी तो इसी आश्रम में विस्तार का काम चल रहा है।

बाबाकेअनुयायी_राजेश, बेटा धन एवम जमीन की चिंता आप न करे वो सब हम लोगों छोड़ दीजिए। वहा कई लोग आश्रम के लिए जमीन दान देने और लाखो अनुयाई है जो धन से मदद करने तैयार है बस इसके लिए बाबा जी की सहमति की आवश्यकता है।

राजेश_ठीक है मैं बाबा जी से इसके लिए बात करूंगा, उम्मीद है वो इसके लिए सहमति दे देंगे।

अनुयायि _शुक्रिया बेटा।

राजेश और भगत ने आज आश्रम में रुक कर यहां चल रहे सारे कार्यों का अवलोकन किया, और आवश्यक दिशा निर्देश दिया।

बाबा, लोगो से फुर्सत मिलने के बाद, राजेश और भगत से मिले।

राजेश _बाबा , यहां लोगों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है, मुझे लगता है आश्रम का विस्तार करने के बाद भी एक दिन ऐसा आने वाला है कि लोगों का भीड़ को नियंत्रित करना मुस्किल हो जाएगा।

बाबा _मुझे भी लगता है राजेश, इसके लिए क्या सोंचा है तुमने।

राजेश _इसके लिए तो अब एक ही उपाय है बाबा, अन्य राज्यो में आश्रम का निर्माण करे।

वहा जाकर आप प्रवचन करेंगे उनकी समस्या का समाधान करेंगे तो यहां लोगों की भीड़ कम हो जायेगी ।

बाबा _पर उसके लिए जमीन और धन,,

राजेश _इसकी व्यवस्था, आपके भक्त ही करने तैयार है।

बाबा _ठीक है राजेश तुम जो करोगे अच्छा ही करोगे, मुझे तुम पार भरोशा है।

बाबा,भगत,राजेश, भीमा ओर आश्रम का प्रबंधक आश्रम के विकास, के बारे में चर्चा करते रहें। प्रबंधक ने जानकारी दिया की हमारे खजाने में कितनी राशि है और कितना धन रोज प्राप्त हो रहा है।

राजेश ने भीमा से कहा की यहां की सुरक्षा में विशेष ध्यान रखना होगा कोई भी असामाजिक तत्व आश्रम में प्रवेश न कर सके। और यहां की सेविकाओं की सुरक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है।

सभी सेवादारो को आश्रम के नियमो का कड़ाई से पालन करने को कहे।

कोई भी सेविका किसी भी सेवादार पर जबरदस्ती करने की शिकायत की तो उस पर तुरंत एक्शन होना चाहिए, ।

भगत _पर भाई भूख तो सबको लगती है पुरुष या गिर औरत, और इस भूख को ज्यादा से तक दबा कर नही रख सकते।

बाबा _मैंने इसीलिए नियम बनाया था की कोई भी सेवादार और सेविका अपनी सहमति से अपनी शारीरिक भूख मिटा सकते हैं। लेकिन किसी के साथ जबरदस्ती को बर्दास्त नही किया जाएगा और उसे तत्काल आश्रम से बाहर कर दिया जाएगा।

राजेश _, बाबा जी आपने बिल्कुल सही नियम बनाया है। भीमा इस नियम का कड़ाई से पालन होना चाहिए!

भीमा _भाई आप बेफिक्र रहे।

रात में सभी ने साथ में भोजन किया। तभी बारिश शुरू हो गई।

बाबा ने कहा की राजेश तेज बारिश हो रही है,आज रात यही रूक जाओ कल सुबह चले जाना।

भीमातम राजेश और भगत के लिए सोने की व्यवस्था करो।

भीमा _जी बाबा।

राजेश ने सुनिता को आश्रम में रुकने के बारे में बताया।

भीमा एक बड़ा सा कमरा में सोने की व्यवस्था कर दिया। दो बेड थे इसके अलावा नीचे पांच गद्दा भी लगा दिया।

भगत _अबे ये पांच गद्दा किस लिए लगाए।

भीमा _अरे भाई हम लोग भी आज यही सोएंगे आप दोनो के साथ। बाते करेंगे।

राजेश _अरे भीमा, सुनो।

भीमा _क्या है भाई?

राजेश _, सिगरेट मिलेगा?

भीमा _भाई आप और सिगरेट?

राजेश _आज पीने का मन कर रहा है।

भीमा _भाई अपने कुछ लड़के कभी कभार छुपकर पीते हैं, उनके पास होगा तो पूछता हूं।

भीमा अपने दोस्तो से सिगरेट लेकर आया।

भीमा _लो भाई।

राजेश _सिगरेट, पीने लगा।

भगत भीमा से बोला।

पता है राजेश भाई सिगरेट कब पीता है।

भीमा _नही।

भगत _अच्छा देखो भाई के तरफ़, कुछ दिखाई दिया।

भीमा _मुझे तो कुछ दिख नही रहा भैया।

भगत _, राजेश भाई की शकल को देखो वो कुछ उदास लग रहा है।

भीमा _वो तो है,, पर हम कर क्या सकते हैं?

भगत _अबे भाई को खुश करने के लिए कुछ कर, उसकी उदासी मुझसे देखी नही जाती।

भीमा _पर भैया मैं राजेश भाई को खुश कैसे कर सकता हूं?

भगत _अच्छा ये बता यहां तो एक से बढ़कर एक खूबसूरत सेविकाएं है किसी को पटाया है कि नही।

भीमा _भगत भाई क्या कह रहे हो राजेश भाई को पता चल गया तो मुझे लात मारके आश्रम से बाहर निकलवा देगा।

भगत _आश्रम के नियम तो पता है ना किसी के साथ जबरदस्ती करने पर ही यहां से लात मारकर भगाया जाएगा। सहमति से करने पर नही।

अब बता, क्या सैकड़ों सेविकाओं में तुमकोअब तक कोई नही मिला जो तुमको अपनी मर्जी से दे, धिक्कार है तेरी मर्दानगी पर।

भीमा _भाई मुझे अपमानित न करो,हम सब की दो दोतीन तीन के साथ सेटिंग है।

भगत _अब आया ना लाइन पे।

सुनो आज रात भाई को खुश करने की लिए व्यवस्था करो।

भीमा _ये क्या कह रहे हों भाई राजेश भाई अगर बुरा मान गए तो।

अरे तुम कह देना भगत भाई ने कहा है, मै सब सम्हाल लूंगा।

भीमा _कितना लाना है?

भगत _कितनी आ सकती है?

भीमा _हम सबकी तो दो दो तीन तीन के साथ सेटिंग है बोलने पर कोई मना नहीं करेगी।

भगत _ठीक है सबको बुला लो।

भीमा _पर भैया एक साथ इतने को,,

भगत _अब एक एक के साथ हम लोग लगे रहेंगे भाई के लिए कमसे कम चार तो चाहिए।

भीमा _क्या राजेश भाई चार को झेल पाएंगे? चौकते हुवे कहा।

भगत _अभी तक उसका दिमाक देखा है आज तू उसकी मर्दानगी देखना।

_अब जाओ सभी लेकर आओ, हसीनाओं को।

भीमा और उसके दोस्त चले गए अपनी अपनी सेटिंग की हुई सेविकाओ को लाने।

राजेश बाबा जी के पास कुछ काम से चला गया।

कुछ देर बाद वे सभी लड़के आ गए।

भीमा _राजेश भाई कहा है।

भगत _अबे खाली हाथ आ गए,,

भीमा _भाई, आ जाएंगी सब, सब्र तो रखो।

कुछ समय के बाद एक से बढ़कर एक खूबसूरत लड़कियां कमरे में आ गई।

भगत _अबे ये तो सिर्फ दस है।

भीमा _भाई तीन का अभी मासिक धर्म चल रहा है।

भगत _ठीक है।

कुछ देर बाद , राजेश पहुंचा।

जब राजेश ने सेविकाओं को देखा

राजेश _भगत, ये सब सेविकाएं, यहां क्यू आई है?

भगत _भाई आज आप उदास है न तो ये सभी आपकी उदासी दूर करने आई है।

राजेश _इन लोगों को जबरदस्ती तो नही ले आए।

भीमा _नही भाई, ये सभी अपनी मर्जी से आई हैं, आप पूछ लो इनसे।

राजेश ने लड़कियों से पूछा।

क्या भीमा सही कह रहा है?

सेविकाएं _राजेश बाबू, हम लोग अपनी मर्जी से आई हैं। अब औरत हो या पुरुष पेट की भूख के साथ साथ शरीर को भी भूख लगती है न।

राजेश _देखो, तुम लोग चली जाओ, मुझे अभी भूख नहीं है।

भगत _भाई अगर आपका मन नहीं है तो आप आराम करो, हमे अपनी भूख मिटाने दो।

राजेश _हूं, तो सीधा सीधा ये क्यू नही बोलता कि मेरे लिए नही अपनी भूख शांत करने के लिए बुलाए हो इन्हे।

राजेश बेड पर बैठ गया।

भगत _ठीक है भाई आप अगर नही चाहते की हम इंजॉय करे तो इन्हे वापस भेज देते हैं।

राजेश _तुम सभी इंजॉय करना चाहते हो तो करो।

भगत _धन्यवाद भाई।

भगत ने सेविकाओं से अपने कपड़े उतारने को कहा,

सेविकाएं अपनी अपनी साड़ी उतारने लगी।

सभी की उम्र 25से 32के बीच थी।

सभी सेविकाएं अब साड़ी और पेटीकोट में थी।

भगत _सभी अपना ब्लाउज भी उतारो।

सभी सेविकाएं अपनी ब्लाउज खोलने लगी।

इधर भीमा और उनके दोस्त फर्श पर बिछे गद्दे पर बैठ कर सेविकाओं को नंगी होते देख रहे थे।

सभी सेविकाएं अपनी पेटीकोट भी उतार दी। अब वे सिर्फ ब्रा और पेंटी में राह गई थी।

सभी सेविकाएं काफी हॉट लग रही थी। सभी लड़के अपना land सहलाने लगे।

भगत _अब अपनी ब्रा भी उतार दो।

सभी लड़कियां जब अपनी ब्रा खोली तो उनकी सुंदर सुडौल बड़ी बड़ी मस्त चूचियों को देखकर सभी लड़कों का land तनकर खड़ा हो गया।

सभी लड़कियों ने लडको की नजरो को देखा जो उनकी चुचियों को ही घूरते पाया तो वे शर्म से अपने हाथो से चूचियां छिपाने लगी।

भगत हसने लगा।

भगत _अबे अब तुम लोग क्या देख रहे हो, एक एक को इनकी पेंटी उतारो और chut चाटना शुरू करो।

सभी लड़के एक एक लड़कियों का पेंटी उतार कर उसकी chut चाटना शुरु कर दिया।

कमरे में लड़कियों की मादक सिसकारी गूंजने लगी।

राजेश का ध्यान भी उन लड़कियों की ओर गया, जो सिसक रही थी।

उस दृश्य के देख कर उसका शरीर भी गरमाने लगा।

उसने एक सिगरेट निकाला और पीने लगा।

सिगरेट की नशा, और लड़कियों की मादक सिसकारी से राजेश का land तनकर खड़ा हो गया।

जब राजेश ने लड़कियों की ओर देखा तो उनकी सकल में रीता नजर आने लगा।

राजेश के गुस्सा आने लगा।

एक लड़की जो घोड़ी बनी थीं, भगत पीछे से उसकी chut चांट रहा था।

राजेश गुस्से से उठा और अपनी पैंट का चेन खोल कर land बाहर निकाल दिया और उस लड़की के मुंह में डाल दिया।

वह लड़की राजेश को रीता लग रही थी।

राजेश _चूस साली,kutiya कही की।

वह लड़की राजेश का land मुंह में भरकर चूसने लगी।

राजेश ने उसकी बालो को मुठ्ठी में भींच लिया।

भगत यह देखकर खुश हो गया।

कुछ लड़कियां खड़ी देख रही थी, अपनी हाथो से अपनी बूर सहला रहीं थी।

भगत _अब तुम लोग खड़ी खड़ी क्या देख रही हो जाओ भाई का कपड़ा उतारो खड़ी लड़कियां राजेश पर टूट पड़ी।

सभी ने मिलकर राजेश को नंगा कर दिया।

उसकी पहलवानी बॉडी और मोटा तथा लंबा land को न केवल लड़कियां बल्कि सभी लड़के आश्चर्य से देखने लगे।

लड़किया ऐसा land पहली बार देख रही थीं।

सभी के शरीर में एक अलग ही रोमांच भर गया।

इधर राजेश की नजरो में सभी लड़कियां रीता लग रही थी, उसे बहुत गुस्सा आ रहा था।

सभी लड़कियों के मुंह में बारी बारी से land डालकर अन्दर बाहर करने लगा।

चूस साली,kutiya वह रीता को गाली दे रहा था।

अब राजेश एक सेविका को उठाया और उसे बेड के किनारे लिटा दिया अन्य लड़किया राजेश के शरीर से चिपकी जा रही थी। उसे सहला रही थी।

राजेश ने लड़की की टांग फैला दिया और अपना land पकड़कर उसकी बूर में सेट कर एक जोर का धक्का मारा। लड़की चीख उठी। क्यू की land बूर को फाड़कर एक ही बार में आधे से ज्यादा अन्दर घुस गया। राजेश ने उस सेविका की चूची को पकड़ा और land थोड़ा खीच कर एक ओर धक्का मारा, ले साली और चीख जोर से।

लड़की के मुख से दर्द से एक ओर चीख निकल गया। सभी लड़के और भगत chut चाटना बंद कर, राजेश की ओर देखने लगा।

भाई को हो क्या गया है? जैसे

किसी की गुस्सा उतार रहा हो।

अब राजेश ने अपना land बाहर खीच कर, भचा भच चोदना शुरु किया लड़की दर्द से शुरू शुरु में चीख रही थीं। पर धीरे धीरे योनि पूरा फेल गया और लड़की के बूर पानी फेकना शुरू किया तो लड़की की चीख सिसकारी में बदल गया।

राजेश का land बूर की भगनासा को अच्छी तरह रगड़ रहा था। जिससे सेविका को मजा आने लगा।

अब राजेश ने लड़की की टांगे अपनी कंधे में डाल दी और गच गच चोदने लगा।

Land का टोपा सेविका की गर्भाशय के ठोकने लगा। सेविका के पूरे शरीर में कम्पन पैदा होने लगा।

सेविका आंखे बंद कर जन्नत में पहुंच गई ऐसा मजा उसे आज तक नही मिला था।

वह राजेश को जकड़ ली।

राजेश उसे दनादन चोदता रहा।

सेविकाके राजेश अपने घोड़े में बिठाकर जन्नत की सैर करा रहा था। सेक्स में ऐसा आनंद की कल्पना भी उस लड़की ने नही की थी।

कमरा उसकी मादक सिसकारी से गूंज रहा था। सभी की नजरे राजेश की chudai पर टिकी थीं।

इधर लड़की ने अपने को ज्यादा देर तक रोक न सकी और राजेश को जोर से जकड़ कर, चीखते हुवे झड़ने लगी।

राजेश ने अपना land बूर से बाहर निकाला, ओर एकअन्य सेविका के मुंह में डाल दिया, बारी बारी से लड़किया land चूस रही थी।

इधर भगत एक सेविका की बूर चांट रहा था उसे राजेश के पास भेजी।

राजेश ने उसे बेड के सहारे घोड़ी बना दिया। एक सेविका ने उसका land हाथ से पकड़ कर उसकी बूर पर सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का लगाया land बूर चीरकर अन्दर चला गया। लड़की चीख उठी। राजेश अपना land खींचा और फिर जोर का धक्का मारा, और चीख साली, उसे लड़कियों में रीता ही नजर आ रहा था।

उसने भगत को सिगरेट जलाने कहा।

भगत ने सिगरेट जला कर राजेश को दिया।

राजेश ने सिगरेट का कस लगाते हुए, भच भच चोदने लगा। कुछ देर दर्द से कराहने के बाद सेविका को मजा आना शुरू हुआ।

कुछ ही समय में कमरा उस लड़की की मादक सिसकारी से गूंजने लगी।

यह लडकी भी ज्यादा देर तक खुद को न रोक सकी और झड़ने लगी। उसकी बूर फूलने पिचकने लगी हाथ पैर कपकपाने लगी।

राजेश अपना लैंड निकाला और फिर दूसरी सेविका ने उसे अपने मुंह में भर लिया।

कुछ देर land चूसवाने के बाद लडकी के मुंह से land निकाल कर एक अन्य लडकी को अपने गोद में उठा लिया और अपना land बूर के छेद में रख कर उसके कूल्हे को पकड़कर अपने land में पटक पटक कर खड़े खड़े चोदता रहा। वह इस आसन में लडकी को तब तक चोदता रहा, जब तक वह लडकी झड़ नही गई।

राजेश बेड पर जाकर लेट गया।

उसका land हवा में लहरा रहा था। उसने एक सेविका को उस land पर बैठने कहा। सेविका बेड पर चडकर राजेश के land को पकड़कर अपने बूर की छेद पर रख कर बैठ गई, फिर धीरे धीरे राजेश के land में उछल उछल कर चुदाने लगी।

राजेश उस लडकी की बड़ी बड़ी चूचियां दबा दबा कर चूसने लगा।

फिर वह लडकी की कमर पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर चोदने लगा।

इधर सभी लड़के राजेश की चोदने की कला और जोश देखकर खुद को रोक न सका और एक लडकी को गद्दे में ले जाकर अलग अलग आसनों में चोदने लगा।

पूरा कमरा लड़कियों की चीख,मादक सिसकारी उनकी चूड़ियों कि खनक, फच फच गच गच की आवाज से गूंजने लगा।

इधर राजेश बारी बारी से सभी लड़कियों को अपने land में बिठाकर जन्नत की सैर करा रहा था।

भगत भी एक लडकी की गाड़ मार रहा था।

अब सभी लड़के लड़कियों की अदला बदली कर अलग अलग आसनों में chudai करने लगा।

सभी के ऊपर हवस छाया huwa था। सभी ने जमकर chudai का मजा लिया।

एक एक करके सभी लड़के झड़ने लगे।

सब लडको के झड़ जाने के बाद, लड़किया राजेश के पास जाकर उसके पास बैठ कर उसके शरीर को सहला रहीं थी, उसके झड़ने का इंतजार करने लगी।

राजेश अभी भी एक सेविका को kutiya बनाकर दनादन चोद रहा था, अब राजेश ने खुद को रोक पाने में अपने को असमर्थ पाया और अपना land को

बाहर निकाल कर जोर से आह,, आह,,, मां,, आह, करते हुए वीर्य कीलंबी लंबी पिचकारी सभी लड़कियों के चहरे पर उसके चूची पर छोड़ने लगा।

लड़किया उसका वीर्य को चाट चाट कर पी गई।

राजेश बेड पर जाकर लेट गया।

सभी लड़के एवम लड़किया राजेश की मर्दाना ताकत देखकर दंग रह गए थे।

आज इस ग्रुप सेक्स से सभी लड़के एवम लड़कियों को गजब की संतुष्टि मिला था।

लड़किया तो राजेश की दीवानी हो गई थी। राजेश से चुदाने में जो मजा उन्हें आया उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था।

भगत _अब सभी लड़कियां अपनी अपनी कपड़े पहनकर एक एक कर अपने कमरे में चली जाओ।

सभी लड़कियां अपनी कपड़े पहनकर कमरे से चली गई।

सभी लड़के थक चुके थे।

वे सभी कुछ ही देर में गहरी नींद के आगोश में चले गए।

सुबह उठकर राजेश और भगत बाबा जी से मिलकर घर निकल गए।

कालेज के लिए राजेश और स्वीटी तैयार होकर अपनी मां से आशीर्वाद को बताकर कालेज के लिए निकल गए।

कालेज मेंआज कई लड़किया रोहन को खेल में बेस्ट परफॉर्मेंस की लिया बधाई दे रहे थे।

जब स्वीटी वहा से गुजरी,

रोहन _हेलो स्वीटी।

स्वीटी _हेलो ।

रोहन _सभी लड़किया मुझे बधाई दे रहे हैं, तुम नही दोगी।

स्वीटी _ओह , क्यू नही, बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए बहुत बहुत बधाई, पहली बार भैया को किसी ने पीछे छोड़ा। तुम बधाई के पात्र हो।

रोहन _थैंक यू।

लंच के समय कैंटीन में छोटी सी पार्टी रखी है तुम आना, मुझे खुशी होगी।

स्वीटी _देखती हू।

स्वीटी अपनी क्लास में चली गई।

इधर रोहन के दोस्त,,

भाई स्वीटी तो अब लाइन में आने लगी है। अब निशा को देखना पड़ेगा,,

रोहन _अरे वो भी आ जाएगी लाइन पर धीरे धीरे,,

अभी एक दो माह बाद इंटर कालेज फुटबाल टूर्नामेंट होगा , उसके बाद देखना सारी लड़किया लाइन में आ जाएगी।

मेरे साथ घूमने फिरने बात करने में अपनी शान समझेंगी।

 
राजेश ओर भगत अपने दोस्तो के साथ कैंटीन में बैठा था। तभी भगत ने कैंटीन के मालिक से पूछा।

भगत _आज कैंटीन को को बड़ा सजाया जा रहा हैक्या बात है सरदार जी?

कैंटीन के मालिक _अरे भगत तुम लोगों को नही मालूम क्या?आज रोहन ने लंच के समय पार्टी रखी है। अपनी सफलता की खुशी में।

भगत _ओह।

तभी कुछ देर मे वहा पर रोहन और उसके दोस्त कैंटीन में तैयारी देखने पहुंचे।

रोहन _ओय पापे जी, तैयारी अच्छे से चल रही है न, शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए।

कैंटीन मालिक _लडके सब तैयारी कर रहे हैं जी, शिकायत का मौका नहीं आयेगी।

तभी रोहन की और उसके दोस्तो की नजर राजेश और उसके दोस्तो पर पड़ी,,,

भाई देखो, राजेश और उनके दोस्तो को कैसा मुंह उतरा हुआ है। सभी हसने लगे।

रोहन, राजेश और भगत के पास गया,,

रोहन _हेलो राजेश !

राजेश _ओह, हेलो रोहन। आओ बैठो।

बधाई हो बेस्ट परफॉर्मर बनने के लिए।

रोहन _ओह, थैंक यू।

हमने अपनी सफलता की खुशी में छोटी सी पार्टी रखी है, आप लोग भी शामिल होइए।

राजेश _ओह थैंक्स।

पर माफ करना, पर कैंटीन में जगह इतनी नही है कि बहुत अधिक लोग यहां पर आ सके।

अधिक लोग आ गए तो भीड़ के कारण अव्यवस्था हो सकती है, जिससे पार्टी का मजा खराब हो जायेगा।

और हम नही चाहते की तुम्हारा मजा खराब हो इसलिए अपने खास दोस्तो को बुलाइए।

रोहन _आप रहोगे तो पार्टी में और मजा आ जायेगा, आप तो पार्टी में रंग जमाते हो।

रोहन के दोस्त हसने लगे।

भगत को गुस्सा आया,,

भगत _भाई ने क्या कहा समझ नहीं आया क्या? कही हम लोग पार्टी में आ गए न, तो रंग में भंग पड़ जायेगा। इसलिए यह ख्याल छोड़ दो टी ही बेहतर है।

रोहन _भाई, आप नाराज क्यू हो रहे? आपकी मर्जी आना है कि नही।

रोहन और उसके दोस्त हंसते हुए वहा से चले गए।

क्लास की बेल लगने पर राजेश और इसके दोस्त अपनी अपनी क्लास में चले गए।

लंच के समय वे सभी लोग जिसको रोहन ने पार्टी में आमंत्रित किए थे, सभी कैंटीन में जाने लगे।

इधर स्वीटी जाना तो नही चाहती थीं पर उसकी सहेलियों ने काफी जिद की, इस लिया वह भी चली गई।

भगत ने राजेश से कहा,चलो भाई घर चले है।

कौशील्या मां जी पूछ रही थीं, काफी दिन हो गया राजेश आ नही रहा है? कही हमे भूल तो नहीं गया।

राजेश _नही, यार आज जाने के मन नहीं, तुम जाओ।

मैं भी घर निकलता हूं।

भगत _ठीक है भाई।

भगतऔर राजेश दोनो कालेज से अपने अपने घर को निकले।

इधर निशा और सीमा के क्लास के दोस्तो ने पार्टी पे चलने की जिद की, पर सीमा और सुमन ने जाने से इंकार कर दिया।

क्लास के सभी स्टूडेंट्स पार्टी में चले गए।

सीमा _हम लोग घर चले।

निशा _राजेश से मिलना चाहिए, पता नही वह कैसा फिल कर रहा होगा?

सीमा ने भगत को काल की।

भगत ने काल उठाया।

भगत _हां, सीमा जी बोलिए।

सीमा _तुम लोग कहा हो।

भगत _सीमा जी मैं तो अपना घर आ गया हूं, और राजेश भी अपना घर चला गया।

सीमा _अच्छा, ठीक है।

सीमा ने यह बात निशा के बताई की राजेश घर चला गया है।

सीमा _अब क्या करे?

निशा_ चलो उनके घर चलते है उनसे मिलने।

सीमा _ये क्या कह रही हो, आंटी ने मना किया है ना बिना बताए कही भी जाने से।

निशा _ओह, मैं अब इतनी छूटी बच्ची भी नही रही, अब राजेश का घर ही का रहे, उसकी लिए भी बताना होगा क्या मॉम को।

सीमा _आंटी को मुझ पर पूरा भरोसा है, इसी लिए तो मुंझे तुम्हारे पीछे लगा रखी है तुम्हारी सुरक्षा के लिए।

मैं आंटी से बात नहीं छुपा सकती।

निशा _तो ठीक है, अब से मुझसे बात ही मत करना। तू मेरी सहेली नही मॉम की चमची है।

निशा मुंह फुलाकर बैठ गई।

सीमा _लो मेमसाब तो मुंह फुलाकर बैठ गई।अच्छा ठीक है बाबा, मैं हारी चलो चलते हैं।

सीमा_निशा,राजेश का घर का एड्रेस तो पता नही।

निशा _भगत से पुछ लो।

सीमा और निशा दोनो कार में बैठ गए और ड्राईवर को गाड़ी चलाने कहा।

सीमा ने भगत को काल किया और राजेश के घर का पता पूछा।

बताए पते के अनुसार ड्राइवर को आगे बढ़ने का निर्देश दिया।

आखिर वे राजेश के घर तक पहुंच ही गए।

सीमा ने घर के बाहर लगी बेल बजाई।

इस समय सुनीता अपनी बेडरूम में आराम कर रही थी।

सुनिता _इस समय कौन हो सकता है?

सुनिता ने दरवाजा खोली, सामने दो लड़कियो को देख, उन्हें पहचानने की कोशिश करने लगी।

सीमा _नमस्ते मां जी ।

सुनीता _नमस्ते, माफ करना मैंने तुम लोगों को पहचाना नहीं।

सीमा _हम राजेश के कालेज के दोस्त है, राजेश घर पर है क्या? हमे उनसे काम था।

सुनिता _ओह, राजेश की दोस्त हो, पर राजेश तो कालेज गया है?

सीमा _क्या वह कालेज से आया नही है?

सुनिता _नही।

सीमा _पर हमने तो उसके दोस्त से पूछा तो उन्होंने बताया की राजेश घर चला गया।

सुनिता _ क्या? पर वह तो घर पहुंचा नही है।

सीमा _हा।

सुनिता _तब तो वह कहीं रास्ते पर ही होगा। तुम लोग अन्दर आओ ,थोड़ा इंतजार करो, मैं पता करती हूं वो कहा है।

सीमा _जी आंटी ।

निशा ओर सीमा दोनो सोफे पर जाकर बैठ गए।

सुनिता _वैसे तुम लोगों का नाम क्या है?

सीमा _जी मेरा नाम सीमा है।

और ये निशा है।

सुनिता राजेश को फोन किया।

राजेश ने काल नही उठाया।

सुनिता ने फिर काल की,,

ये लड़का भी न काल उठा क्यू नही रहा?

जब सुनिता ने राजेश को चौथी बार काल की राजेश ने काल उठाया।

दरसल राजेश घर के लिए ही निकला था पर रास्ते में उसका मूड घर जाने का नही हु़वा तो वह नदी पर बना घांट की ओर चला गया।

वहा नदी किनारे एक पेड़ के नीचे , नदी की बहते पानी को देखते हुए,किसी सोच में खोया था।

सुनिता _बेटा तू कहा है? काल उठा क्यू नही रहा था।

सुनो तुमसे मिलने तुम्हारे दोस्त आए हैं, सीमा और निशा।

राजेश _क्या? मां उनसे कह दो कि वे कल कालेज में मिले।

सुनिता _पार तू है कहा?

राजेश _मां जहां भी हूं ठीक हूं और आ जाऊंगा घर समय पर।

सुनिता _ठीक है बेटा।

सुनिता ने सीमा और निशा से कहा, बेटी राजेश कह रहा है कि तुम लोगों को कल कालेज में मिलने के लिए।

वैसे कुछ अर्जेंट काम था क्या?

सीमा _नही मां जी इतना जरूरी भी नही था।

अच्छा हम लोग चलते है।

सुनिता _रुको, बेटी मैन बात चीत में आप लोगों से चाय वगैरा के लिए पूछा ही नहीं। क्या लेंगी?

सीमा _मां जी रहने दो, फिर कभी पी लेंगे।

अच्छा हम लोग चलते है।

सुनिता _ठीक है बेटी।

सीमा निशा से बोली, राजेश कहा है अभी पता चल जायेगा।

मैं काल करती हू, तुम्हारे मोबाइल पर वह एप है ना जिससे किसी का लोकेशन पता चलता है, उसे ऑन करो।

सीमा ने राजेश को काल की, इधर निशा ने उसके लोकेशन पता की, और राजेश का लोकेशन पता चल गया।

निशा _राजेश का लोकेशन तो घांट की ओर है।

सीमा ने ड्राइवर से कार को नदी के घांट की ओर ले जाने को कहा,,

घांट पर जाकर उसने राजेश की बाइक को खड़ा पाया।

सीमा _निशा, राजेश की बाइक तो यहां पर खड़ा है पर राजेश कही दिखाई नही दे रहा।

निशा _वो देखो, वहा, पेड़ के नीचे,,

सीमा और निशा राजेश के पास पहुंची और राजेश के आजू बाजू जाकर बैठ गई,,,,

राजेश कही खोया था,,,

निशा _राजेश, कहा खोए हो।

राजेश का ध्यान टूटा,

राजेश _आप लोग यहां,

निशा _लगाया है तुम तो अपना दोस्त समझते ही नहीं।

राजेश _नही निशाजी, ऐसी कोई बात नहीं।

सीमा _फिर हमसे कल मिलने की बात क्यू कही, मां जी से।

राजेश _ओह, सीमा जी,आज मेरा मन अच्छा नही लग रहा था तो इधर चला आया। यहां बड़ा सकून लग रहा है। मैं कुछ समय यहां और बैठना चाह रहा था।

तभी वहां से एक नाव आया जो यात्री को उस पार से इस पार ला रहा था। उस नाव पर एक धुन बज रहा था।

नदिया चले, चले रे, धारा।

चंदा चले, चले re तारा।

तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा।

जीवन कही भी ठहरता नही है।

आंधी से तूफान से डरता नहीं है।

तू न चलेगा तो चलदेगी राहें।

मंजिल को तरसेंगी तेरी निगाहे।

तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा,,,

निशा _राजेश, ये धुन तुम सुन रहे हो।

ये जीवन नदी के धारा के समान है, जो कभी ठहरता नही। इस जीवन में कै उतार चढ़ाव आयेंगे। पर हमे चलना होगा।

और मुझे पूरा विश्वास है तुम्हे तुम्हारी मंजिल जरूर मिलेगी।

तुम्हे निराश होने की जरूरत नहीं है।

सीमा _हा राजेश, निशा ठीक कह रही है, जो huwa उसे भूलकर आगे बड़ो।

सीमा और निशा ने सच्चे दोस्त की तरह राजेश को जो huwa उसे भूलकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

करीब एक घंटे तक वहा पर समय बिताने के बाद निशा ने कहा, चलो वहा चौपाटी में जाकर काफी पीते हैं।

तीनो ने चौपाटी पे जाकर काफी पी , उसके बाद सीमा और निशा ने राजेश से जाने की इजाजत मांगी।

राजेश भी घर के लिए निकल गया।

इधर कालेज में रोहन के दोस्तो ने पार्टी खूब इंजॉय किया। रोहन ने स्वीटी को डांस करने के लिए फोर्स किया, पर स्वीटी ने मना कर दी।

रोहन औरउसके दोस्त स्वीटी की साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते थे क्यों की उन्हें पता था कि यह बात अगर राजेश और उनके दोस्तो को पता चल गया तो उसकी खैर नहीं होगी।

जब स्वीटी घर पहुंची तो सुनिता ने switi से बोली

सुनिता _स्वीटी, इधर आना।

स्वीटी _क्या है मां?

सुनिता _तुम सीमा और निशा को जानती हो।

स्वीटी _हा मां। पर क्या huwa? उनके बारे में क्यों पूछ रही हो।

सुनिता _वे दोनो राजेश से मिलने घर आई थीं।

स्वीटी _क्या?

सुनिता _वे कैसी लडकी है?

स्वीटी _मां, निशा यहां की सबसे अमीर घर की लडकी है। वह सुजाता एंड विशाल ग्रुप की मालकिन की।

सुनिता _क्या?

स्वीटी _हा, मां।

सुनिता _कही राजेश के साथ कोई लफड़ा तो नही है?

स्वीटी _पता नही, पर इनके व्यवहार से तो लगता है कि निशा और राजेश भाई के बीच कोई खिचड़ी पक रही है।

सुनिता _हे,भगवान।

स्वीटी अपने कमरे में चली गई।

कुछ देर बाद राजेश आया।

सुनिता उसके लिए काफ़ी ले कर उसके कमरे में गई।

सुनिता _बेटा, कहा था।

राजेश _मां, दोस्तो के साथ।

सुनिता _बेटा, निशा और सीमा नाम की लडकी तुमसे मिलने आई थीं।

स्वीटी बता रही थी कि निशा अमीर घर की लडकी है।

राजेश _हा मां तो क्या हुआ, वे अच्छे दोस्त हैं।

सुनिता _बेटा, ये अमीर घर की लड़कियो से तुम दूर ही रहो, हम गरीब लोग है।

ये अमीर घर की लड़किया, गरीबों का इस्तमाल कर धोखा दे देती है, तुम मुसीबत में फस सकते हो।

राजेश _मां, तुम जैसे सोंच रही हो ऐसा कुछ नही है। निशा और सीमा अच्छे दोस्त है, बस और कुछ नहीं।

सुनिता _ऐसा कुछ नहीं है तो ठीक है बेटा, मैं तो तुम्हे सावधान कर रही थी।

इधर निशा और सीमा घर जाते हुवे,,,, सीमा ने स्वीटी से बोली,

सीमा _वाह, मैम साब, पहले तो राजेश के सामने मुंह नही खुलती थी आज तो बड़ी ज्ञानी बनकर ज्ञान बांट रही थी।

देखो अगर राजेश के लिए तुम्हारे मन में कुछ है तो इजहार कर दो नही तो बाद में कहीं पछताना न पड़ जाए।

निशा _तुम फिर शुरू हो गई। ऐसा कुछ नहीं है। मैं किसी से प्यार? राजेश अच्छा लड़का है, वह उदास था इस लिए दोस्त होने के नाते, उसे समझाना जरूरी था।

सीमा _अच्छा, ठीक है। मेरे लिए रास्ता छोड़ रही हो तो,, धन्यवाद।

स्वीटी _मतलब, मैं समझी नहीं।

सीमा _अगर, तुम कहो तो मैं प्रपोज कर दू।

निशा चुप रहीं,,

सीमा _चुप क्यू हो गई?

तुम्हारी खामोशी को क्या समझूं? ठीक है,इस सत्र के अंत तक तुम उसे प्रपोज न की तो मैं कर दूंगी ।

 
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