Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 100 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुनम समज गइ.. ओर उसने वही पडी रजाइको अपने मुहमे ठुस दीया.. ताकी उनकी चीख बहार ना नीकले.. लखनने धरेसे लंडको पुस कीया ओर पुनमकी गांडमे घुसाने लगा.. थोडा लंड जातेही लखनने अ‍ेक जटका मारा.. तो पुनमकी चीख उनके मुहमे ही दब गइ.. ओर आंखसे आंसु नीकलने लगे..





वो रुकनेका इसारा करते छटपटाने लगी.. लेकीन येतो लखन था.. वो जानता थाकी लडकीयोको कैसे ट्रीट कीया जाता हे.. क्युकी वो जागृतीकी कइ बार गांड मार चुका था.. ओर लखनने देर ना करते पुनमकी कमरको मजबुतीसे पकडकर अ‍ेक ओर जटका मारा..





अपना आधेसे ज्यादा लंड गांडमे घुसा दीया.. पुनम अपने दोनो हाथ बेडपे पटकने लगी.. ओर लखनको लंड बहार नीकालनेका इसारा करती रही.. लेकीन लखनने मजबुतीसे कमरको पकडे रखा. ओर रुक गया.. वो जुकते अ‍ेक हाथसे पुनमके बुब्सको मसलने लगा..

लखन : (धीरेसे) बस.. बस.. दीदी हो गया.. थोडी देर अ‍ैसे ही रहीये.. अभी दर्द कम हो जायेगा.. मे इसीलीये आपको मना कर रहा था..

पुनम : (मुहसे कपडा हटाते ही) आइ नो भाइ.. मुजे सब पता हे.. आप दर्दकी परवाह मत करो.. थोडी देर अ‍ैसेही रहो.. आखीर मेने सब करदीया.. लखन.. आइ अ‍ेम हेपी..

कुछ देरके बाद पुनमका दर्द कम होगया.. तो उसने लखनको धीरे धीरे सुरु करनेको कहा.. लखन धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमकी गांडको पेलने लगा.. अब पुनमकी दर्द भरी सीसकारीया कामुक भरी सीसकारीयोमे तबदील होने लगी.. वो भी अपनी गांड आगे पीछे करते लखनका साथ देने लगी..





काफी देर गांड ठुकाइके बाद लखनने अपना सारा माल पुनमकी गांडमे ही उडेल दीया.. ओर लखनने लंड नीकाल दीया.. तो पुनमकी गांडका छेद खुला ही रहा.. उनमे थोडासा खुन भी नीकल गया था.. फीर लखनने पुनमको अ‍ेक पेइन कीलर पीलादी..

फीर सुबह तक लखनने पुनमको दो बार ओर चोद लीया.. दोनोने सुबह चार बजे तक सेक्स कीया पुनम पीछेसे करवानेसे चलने लायक नही रही.. लखन उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. फीर नहाकर नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..

लताके लीये कोइ नइ बात नही थी.. सादीकी सुहागरात तो सीर्फ अ‍ेक औपचारीकता थी.. वो ओर देवायत दोनो पहेली बार मीले तबसे सादी होने तक दोनो कइ बार मील चुके थे.. लेकीन पुनम आज दुसरीबार लखनको मील चुकी थी.. ओर उनकी जींदगीमे खुसीओकी बहार आगइ थी..

सुबह लता जल्दीसे उठकर नहाने चली गइ.. उसने देवायतको सोने दीया.. फीर कंपलीट होकर देवायतके बेडके पास चली गइ.. ओर उसने हल्केसे देवायतके होठोको चुमलीया.. देवायत आंख खोलकर उनको पकडता इनसे पहेले ही वो जोरोसे हसते देवायतको ठेंगा दीखाकर नीचे भाग गइ..

नीचेकी ओर सबलोग कंपलीट होकर बैठे थे.. मंजुने मुस्कुराते सृतीको उपरकी ओर इसारा कीया.. तो सृती हसने लगी.. ओर उपर चली गइ.. उसने लखनके रुमका दरवाजा खटखटाया.. तो लखन जाग गया.. पुनम अभी भी घोडे बेचके सो रही थी.. ओर लखनने दरवाजा खोला..

तो सामने सृती मुस्कुरा रही थी.. लखनने उसे हाथ पकडकर अंदर खीचलीया.. ओर दरवाजा वापस बंध करदीया.. सृती लखनके इरादेको समज गइ.. ओर वो इधर उधर भागनेकी कोसीस करती उनसे पहेले ही लखनने उसे अपनी बाहोमे जकड लीया.. ओर बेडपे लेगया..

सृती : (जोरोसे हसते धीरेसे) लखन.. नही.. नही.. मे तो तुम दोनोको जगाने आइ थी..

लखन : (हसते) अ‍ेक बीवीका तो होगया.. अब तु कैसे बच सकती हे.. आजा.. सीर्फ अ‍ेक बार..

सृती : (हसते) छोडो.. नीचे सब तुम दोनोका वेइट कर रहे हे..

लखन : (पीछेसे सारी कमर तक करते) सीर्फ अ‍ेकबार.. अभी हो जायेगा..

सृती : (बेडपे जुकते धीरेसे) बदमास.. आप मानोगे नही.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार..

कहेते सृती बेठपे हाथ टीकाते जुक गइ.. ओर लखनने कमर पकडते पीछेसे सृतीकी सारीको कमर तक उची करदी.. ओर पीछेसे चुतमे लंड घुसा दीया.. फीर जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. सृती मुह बीगाडते कामुक सीसकारीया करने लगी.. ओर हसती रही..





उनकी सीसकारीयोकी आवाजसे पुनमकी आंख खुल गइ.. ओर सृतीकी कुटाइ होते देखकर जोरोसे हसने लगी.. सृतीको अ‍ेक बार जडाके दुसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. ओर लखनने जटसे लंडको खीच लीया.. तो सृतीने अ‍ेक टांग उची करते अपनी चुतपे रुमाल रख दीया ओर चुतको पोछते लखनको मुका मारने लगी..
 
तो लखन हसते हुअ‍े जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर सृती अपनी चुत साफ करते कामुक नजरोसे उनकी ओर देखते हसती रही.. फीर अपनी सारी सही करते पुनमके पास बैठ गइ ओर उनकी आंखोमे देखते हसने लगी.. तो पुनम सरमके मारे सृतीके गले लग गइ.. तो सृती उनकी पीठ सहेलाने लगी..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसी रही सुहागरात..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. पुछो ही मत.. आज मे बहुत खुस हु.. कास मेने भाइको पहेलेसे ही अपना लीया होता.. दोनोने खुब अन्जोय कीया.. भाइने आज मेरी सील खोलदी..

सृती : (जटसे अलग होते खुसीसे देखते) सील खोलदी..? मतलब..? पीछे..?

पुनम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) येस.. अब मुजे कोइ अफसोस नही.. बहुत बहुत खुस हु..

सृती : (हसते) दीदी.. हमारा भाइ बडा ही कमीना हे.. देखना.. अब तो हर बार आपकी पीछेसे लेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. ओर मे उसे खुसी खुसी दुगी.. दीदी.. अब ये तन सीर्फ हमारे भाइका हे.. मे उसे हर खुसी दुगी.. जो वो इसके हकदार हे..

सृती : (गले लगते) ओर मेभी.. दीदी.. हम कीतन खुस हेनां..? कल हम सबको जाना हे.. सहेर.. हमारे घर.. मोम भी आरही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा..? हमारे घर..?

सृती : नही.. उनके घर.. मतलब.. मेरे घर.. कल सबने डीसाइड कीया हे.. मोम.. नीर्मला आंटी.. अब मेरे घर ही रहेगी.. अभी तो उनके साथ भावनादी भी आ रही हे.. फीर वो हमारे साथ आजायेगी..

पुनम : (सामने देखते) तो फीर उनका घर..?

सृती : (मुस्कुराते) मंजु मोमने कहा हे.. वो हमारे जेठ उस घर ओर उनकी दुकानको बेचके सारा पैसा भावनादीको दे रहे हे.. ताकी उनकी जींदगी भी अच्छेसे कटे..

पुनम : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हे.. अब वो भी हमारी जेठानीके साथ हमारी सौतन भी हे.. उसे अब कहा कोइ तकलीफ हे.. वोतो अब हमारे साथ ही रहेगी.. फीर भी मोमने सब सही कीया.. अ‍ेक बात ओर.. हमारे जेठजीने भानु भैयाको यहा जमीन दीला दी हे.. वो अब यही मकान बना रहे हे.. तो भावना दीदीका सहेरमे हमारे साथ रहेना ही बहेतर होगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) हमारे गांवमे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. उनके गांवमे सबकुछ बेचकर इधर आ रहे हे.. क्युकी रामुकाका भी चले गये तो अब हमारे खेतोकी रखवाली भानुभाइ ही करेगे.. ओर साथमे सरलाकाकाी भी..

सृती : (मुस्कुराते) तब तो सरलाकाकी ओर रमा भाभीके मजे हो जायेगे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते धीरेसे) हां.. करनेदो मजे.. कमीनीओ वो भी हममेसे अ‍ेक हे..

सृती : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर आप कंपलीट होजाइअ‍े.. हम नीचे चलते हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही सृतीदी.. मे अभी नीचे जानेके लायक नही हु.. पीछे बहुत दर्द हे.. आज यही आराम करुगी.. अब रातको आपको ओर रजुदीको भी यही आना हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे हम वहा तो साथमे होगे.. आज यहा आप दोनो ही मजे करो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. वो अ‍ेक बार उपर चडते हे तो बहार ही नही नीकालते.. हमे छोडते ही नही.. कल पहेली बार तीन बार करलीया.. तब जाके मुजे छोडा.. आप दोनो साथ होगी तो ठीक रहेगा..

सृती : (मनमे खुस होते) तो फीर ठीक हे.. रजुदीका तो पता नही मे आजाउगी.. फीर हम तीनो खुब मजे करेगे..

कहेते सृती नीचे चली गइ.. दीनमे बहुत कुछ हुआ.. लखनको देखते ही लता सर्मसार होगइ.. उसे दीलके अ‍ेक कोनेमे अपराधबोध महेसुस होने लगा.. वो बार बार लखनकी ओर दया भावसे देखती रही जैसे लखनकी माफी मांग रही हो.. लेकीन लखनने अ‍ेक बार भी लताकी ओर नही देखा..

सृती रजीयाने पुनम ओर उन दोनोकी सब पेकींग करली.. तो नीर्मला भुमीका ओर भावनाने पी अपनी अपनी पेकींग करली.. कल सुबह सबको आश्रमसे होकर सहेर जाना था.. तो दो पहोरको ही खानेके बाद सब आराम कर रहे थे तब मौका देखकर देवायतने नीर्मला ओर भुमीकाको अच्छेसे पेल दीया..

इस रात मंजुला चंदा भावना ओर लता.. सबने देवायतके साथ मजे कीये.. तो दुसरी ओर दया ओर रजीया साथमे सोइ.. इस रात भी लखन पुनम ओर सृतीको देर रात तक चोदता रहा.. फीर सुबह सब जल्दी तैयार होगये.. ओर आश्रमकी ओर नीकल गये..
 
घरपे सीर्फ चंपाकाकी ही रेह गइ.. दो बडी कारमे सबलोग अ‍ेडजेस्ट होकर बैठ गये.. पुनम आज बहुत सरमा रही थी.. आखीर वो अपने ससुराल जो जा रही थी.. तो लता थोडी मायुस दीख रही थी.. क्युकी लखनने अबतक उनके सामने तक नही देखा था.. फीर भी वो अ‍ेक आस भरी नीगाहसे लखनको देखती थी..

सबलोग आश्रम पहोंच गये.. ओर अंदर चले गये.. बाबा सबको अ‍ेक साथ देखकर हसने लगे.. सबने उनको प्रणाम कीया ओर बाबाने सबको आशीर्वाद दीया.. फीर सबलोग बाबाके चरणोमे ही बैठ गये.. आज पुनम ओर लखनको साथ देखकर मुस्कुराने लगे.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बाबा.. अब मेरा काम खतम हुआ.. मेने सारी जीम्वेवारी अब पुनमको देदी हे.. ओर उसे सबकुछ अच्छेसे समजा दीया हे..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटी.. ये तुमने बहुत अच्छा कीया.. देखले.. वक्त कीतना तेजीसे बदल रहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) बाबा.. अब तो गांवमे सबने अ‍ैसे रीस्तोको स्वीकार करलीया हे.. अब तो इनकी चर्चा भी नही होती..

बाबा : (मुस्कुराते) हां.. देखा हे मेने.. अ‍ैसे रीस्तोके सब आदी हो गये हे.. तेरे गांवसे ओर अब तो आजु बाजुके गांवसे बहुत लोग यहा आकर छुपकेसे सादी करवा जाते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बाबा.. देवुकी बाकी थी वो सादीया भी करवा दी हे.. ओर लखन पुनमकी सादी भी होगइ.. अब अगला आदेस क्या हे..?

बाबा : (मुस्कुराते) जानेसे पहेले मे पुनम ओर तुमसे सब बात कर लुगा..

पुनम : (मुस्कुराते) बाबा.. अब चंदा भाभीका कुछ कीजीये.. उसे कहीये अब धिरेनको माफ करदे..

कहा तो चंदा बाबाके पास चली गइ.. ओर उनके पैरोमे जुकते अपने हाथोमे चहेरा छुपाकर जोरोसे फुटफुटके रोने लगी.. सबलोग उनको देखते रहे.. बाबा बडे ही प्यारसे उनके सरको सहेलाते रहे.. उन्होने चंदाको थोडी देर रोने दीया.. फीर पुनमने उसे पानी लाकर पीलाया..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटा.. भुलजा सबकुछ.. ये सब कीस्मतका लीखा हुआ था.. सबकुछ पहेलेसे ही तैय था.. बस तेरा लडका तो सीर्फ अ‍ेक जरीया था..

चंदा : (आंसु पोछते) बाबा.. सबकुछ सीर्फ मेरे साथ ही क्यु..? क्या कमी रेह गइ थी मुजमे..? भर जवानीमे पतीको खो दीया.. इस आदमीने मुजे नइ जींदगी दी.. तो इनकी सीकार अ‍ेक मासुम होगइ.. मे ये सब बोज लेकर कैसे जीयुगी..?

बाबा : (मुस्कुराते) तुजे परीपकव होनेके लीये.. दुख ही इन्सानको मजबुत करता हे सुख नही.. अब इस खानदानके वारीसकी तुजपे जीम्वेवारी हे.. इश्वरने तुमसे अ‍ेक बेटा दुर करदीया तो दुसरा देदीया.. अब इस बच्चेकी जीम्वेवारी सीर्फ तुजपे हे.. इसे पढा लीखाकर इतना काबील बनाओ.. की इनके अंससे वो इस धरतीपे आसके..

चंदा : (सामने देखते) इतनी बडी जीम्वेवारी..? क्या मे इसे सम्हाइ सकुगी..?

बाबा : (मुस्कुराते) हां.. अब इसे तुजे ही सम्हालना हे.. ओर तेरे मार्गदर्शनके लीये तेरी ये होनहार बेटी पुनम हेनां..? ओर फीकर मत कर.. आने वाले दीनोमे तेरी अ‍ेक बहु भी आजायेगी.. जो तेरा साथ देगी..

चंदा : (आस्चर्यसे देखते) मेरी बहु..? कीसकी बहु..?

बाबा : (मुस्कुराते) तेरे बेटेकी बहु.. तु उसे माफ करदे.. सब सही होजायेगा.. बस इतना याद रख अब ये बच्चा सीर्फ तेरी जीम्वेवारी हे.. इसे तु ओर तेरी आने वाली बहु.. अच्छेसे सम्हालोगी.. ओर तेरा जीवन अब सुखमय होगा..

चंदा : (हांमे गरदन हीलाते) ठीक हे बाबा.. अगर आप केह रहेहो तो मे उसे माफ करदेती हु.. लेकीन अब मेरी बेटी सीर्फ पुनम ही होगी.. ओर मे मेरे विजयको अच्छेसे सम्हालुगी..

बाबा : बेटी.. सब हमारे हाथोमे नही होता.. जो भी परीस्थीतीया आये उसे अवसरमे बदलकर खुसीसे स्वीकारके मुकाबला करो.. तेरी लाइफ मे ओर बहुत कुछ होगा.. चंकोच मत करना.. तुम खुस रहोगी.. जीवनका उदेस्य सीर्फ जीम्वेवारी नीभाना नही होता.. सुखका अवसर खोजो.. ओर खुस रहो.. सीर्फ अपने लीये जीयो.. कोइ क्षोभ मत करो..

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे बाबा.. अब मे सीर्फ यही करुगी जो मेरे मनको खुसी दे..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटी.. चीन्ता मत कर.. हमारा लखन बेटा ओर पुनम तुम्हारे साथ हे.. बस.. वो कहे अ‍ैसा करतीजा.. ओर जहा मन लगे वहा आती जाती रहे.. तेरा जीवन बहुत ही आसान होगा..

लखन : (मुस्कुराते) बाबा.. भाभी जहा रहेना चाहे रेह सकती हे.. बस.. उनको अकेली नही रहेने दुगा..

मंजुला : (हसते) बाबा.. ये अपने घर जानेकी बात कर रही थी..

बाबा : (हसते) बेटा अकेले नही रहेना.. तेरा ससुराल हे.. तेरा खयाल रखनेवाले तेरा पती ओर देवर हे.. तेरी बडी बहेन भी हे.. उनके पास रहाकर..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) बाबा.. ये अब सीर्फ मेरा देवर ही नही मेरा दादाम भी होगये हे..

बाबा : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. भुलजा सब रीस्ते नाते.. बस तु खुस रहा कर.. ओर जहा मर्जी हो वहा रहाकर..

फीर बाबा सबके साथ बाते करते रहे तभी भोजनका समय हो गया तो सबको भोजनके लीये भेज दीया.. फीर भोजनके बाद मंजुला ओर पुनम बाबाके कक्षमे चली गइ.. वहा बाबाने पुनमको बहुत कुछ ज्ञान दीया.. ओर भवीस्यके बारेमे बताया..
 
बाबा : पुनम बेटा.. अब सबकुछ तुजे ओर लखनको ही सब सम्हालना हे.. देवु ओर मंजुका कार्य यही खतम होगया.. अब कोइ दुनीयाको छोडके चले जाये सौक मत मनाओ.. वो वापस भी आयेगा.. अब मंजु बीटीयाको भी नया जीवन लेकर वापस आना हे..

पुनम : (मुस्कुराते) जी बाबा.. मोमने मुजे सबकुछ बता दीया हे..

बाबा : (मंजुकी ओर मुस्कुराते) बेटी.. अब तेरा भी जानेका वक्त नजदीक आ रहा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जी बाबा मे रेडी हु.. जीनकी कोखसे जन्म लेना हे वो भी पेटसे हो गइ हे..

बाबा : (मुस्कुराते) पुनम बेटा.. तुमने जो धन देखा हे वो तुम सबके लीये पर्याप्त हे.. लेकीन ये उनका १० परस्ट ही हे जो तुम्हारा हे.. बाकी नाइटी परसन्ट वो ही राजा लायेगा.. अब तुम सब लोग जाओ.. ओर अपनी नइ लाइफको अ‍ेन्जोय करो..

पुनम : (मंजुकी ओर देखकर सरमाते धीरेसे) बाबा.. वो.. वो.. लखन भैयाकी ओर कीतनी सादीया..

बाबा : (बीचमे ही बमत काटते हसते) फीकर मत कर.. देवायतके जीतनी नही होगी.. लेकीन उसे अपने पलुमे बांधकर भी मत रखना.. वो जो भी करे करने दे.. क्युकी आने वाले वक्तमे घरकी सभी ओरतोको वोही सम्हालेगा.. सीर्फ घरकी नही.. बहारकी भी.. जो कुछ उदेस्यसे उनके साथ रीलेशन रखेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. तु लखनकी चीन्ता मत कर.. वो मेरे देवुकी तराह ही हे.. सामको वो तेरे पास ही लोट आयेगा.. वो तेरे प्रती बहुत ही वफादार रहेगा.. इनसे तुम दोनोके प्यारमे कोइ कमी नही आयेगी..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी मोम..

फीर सब लोग बाबाकी इजाजत लेकर वहासे सहेरकी ओर नीकल गये.. ओर सीधे भुमीके घरपे आ गये.. मंजु भावना लता सबने मीलकर घरकी साफ सफाइ करदी.. तबतक लखन सृती ओर पुनम मार्केट चले गये.. ओर वहासे कीराना सब्जीया ओर दुध लेकर आ गये.. इस रात सबने मीलकर खाना खाया..

फीर रातको मंजु चंदा दया ओर लताको लेकर देवायत गांव चला गया.. ओर लखन पुनम सृती रजीया ओर नीलमको लेकर अपने घरपे आगया.. सब लोगोकी लाइफ रुटीन होने लगी.. देवायत गांवमे अपनी चारो बीवीके साथ मजे करते खुस था..

तो यहा लखन पुनम सृती रजीया ओर राधीकाको प्यार करते खुस था.. हां कभी कभी नीलमको चोदनेका मौका मील जाता तो दोनो जमकर चुदाइ कर लेते.. ओर बीच बीचमे भावनाके साथ भी मजे कर लेता.. इस बातसे पुनम सृती ओर रजीयाको भी कोइ अ‍ेतराज नही था..

ओर कभी कभी तीनो मीलकर लखन ओर नीलमको मीलनेका मौका भी देती.. जीसे लखन ओर नीलम भी काफी नजदीक आगये थे.. जब भी लखन नीलमके साथ होता तब नीलम अब लखनके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा व्यवहार करने लगी थी.. वो लखनका बहुत ही खयाल रखती..

अ‍ैसे ही सबकी लाइन पटरीपे आ गइ.. हां लखन रेग्युलर राधीकाको मीलने होस्टेल जरुर जाता.. ओर उनकी जमकर बजाके सामको आजाता.. ओर अ‍ैसे ही अ‍ेक दिन वापस राधीकाको भी उल्टीया होने लगी.. सृतीने उसे चेक कीया तो राधीका लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..

इस बातका राधीकाकी मम्मीको पता चला.. तो उनकी खुसका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर उस रात उनकी मम्मीने सबको अपने घर खानेकी दावतके लीये बुला लीया.. तब लखनकी फेमीलीके साथ नीर्मला भुमीका ओर भावना भी आगइ.. सबने मीलकर खाना खाया..

बस.. सामको सबलोग खाना खाकर चले गये तो उसी रात राधीकाकी मम्मीने देह त्याग कर दीया.. देवायत मंजु चंदा सबलोग आगये.. दयाको भी पता चल गया थाकी राधीका उनकी मौसीकी लडकी हे.. दोनो बहेने मीलकर खुब रोइ..

फीर लखनने दामादके साथ अ‍ेक बेटेका भी फर्ज नीभाया.. लखनने राधीकाकी मम्मीका दाह संस्कार कीया.. ओर साम होते होते सबलोग वापस चले गये.. राधीकाका अब उस घरमे अकेले रहेनेका कोइ मतलब नही था.. ओर लखन पुनम राधीकाको लेकर अपने घर आगये..

इसी बीच सबानाके जानेके दीन साहील ट्रक लेकर अपने दोस्तोके साथ आगया.. लखन यहीसे उनके वहा चला गया.. सब लोग सबानाको छोडने स्टेशन चले गये.. तो पहेली बार सबाना सभी सरम त्यागके साहीलसे लीपट गइ.. फीरोजको लगा दोनो भाइ बहेनके बीच अच्छी पटती हे इसीलीये मील रहे हे..

सबाना : (गले मीलते साहीलके कानमे धीरेसे) मे बेगलोर बुलाउगी तो मीलनेतो आओगेनां..?

साहील : (मुस्कुराते) हां सीर्फ कोल करदेना.. चला आउगा..

सबाना : (मुस्कुराते धीरेसे) मेरे पास आपका नंबर हे.. मे बुथसे फोन करुगी.. लव यु जान..

साहील : (कानमे फुसफुसाते) आइ लव यु टु.. डार्लींग सीस्टर..

फीर सबानाको सबकी हाजरीका अहेसास होते ही साहीलसे अलग हो गइ.. तभी साहीलने उसे अ‍ेक बोक्ष दीया तो सबाना बोक्ष देखते ही बहुत खुस होगइ.. क्युकी साहीलने उसे अ‍ेक आइ फोन मोबाइल गीफ्ट कीया था.. तो सबाना देखते ही खुस हो गइ..
 
फीर सबाना ट्रेनमे बैठ गइ ओर सबको बाय बोलके चली गइ.. सबलोग वापस घरपे आगये.. जरीना बार बार साहीलकी ओर देखकर सरमा जाती.. क्युकी वो अब साहीलको अपना बेटा नही अपना दामाद मानती थी.. फीर भी बार बार उनकी नजर साहीलके पेन्टकी उभारकी ओर चली जाती..

सबने मीलकर फीरोज जरीनाका सब सामान ट्रकमे लोड कर दीया.. ओर लखनको गले मीलकर सबलोग फीरोज जरीनाको लेकर गांव चले गये.. घरकी चाबी फीरोजने साहीलको देदी.. ताकी वो कुछ दीनके बाद सहेर आये तो कादीर ओर सायराको देदे..

इसी बीच सृतीके टांगकी भी प्लास्टर नीकालदी.. अब सृती बीलकुल ठीक हो चुकी थी.. उनकी कार भी कंपलीट होकर आगइ.. ओर उसने फीरसे क्लीनीकपे जाना सुरु करदीया.. उनके पेसन्ट वापस आने लगे.. ओर सृतीकी लाइफ भी धीरे धीरे पटरीपे आगइ.. ओर सब रुटीन हो गया..

तो दुसरी ओर गांव वालोको इकठा करके चारुको भी सरपंच बनादीया.. ओर देवायतके साथ सहेर आकर सब फोर्मालीटी पुरी करदी.. फीर दोनो लखनके घर आगये.. वहा दो पहोरको आराम करते देवायतने चारुको जमकर पेल दीया.. फीर सामको दोनो गांव चले गये..

सहेरमे रमेश ओर जया भी अपना हनीमुन मनाकर वापस आ गये थे.. रमेश फोनसे देवायतके संपर्कमे था.. उसने सहेरमे देवायतकी मददसे अ‍ेक बीजनेस सुरु करदीया था.. उनकी ओर जयाकी लाइफ भी अच्छी चलने लगी थी..

तो दुसरी ओर भानु ओर जीतुलालाके लींगमे भी जडी बुटीकी वजहसे काफी ढीलापन आ गया था.. अब उसे सेक्स करनेके लीये वायग्राकी जरुरत पडने लगी.. इस बातसे भानु परेसान हो गया था.. ओर अ‍ेक दीन मौका मीलते ही वो रमाको लेकर लखनके पास आगया..

रमा सारा दीन घरपे रही.. ओर सृतीसे अपनी प्रेगनन्सी चेक करवाली.. लखन ओर भानु कीसी सेक्सोलोजीस्ट डोक्टरके पास चले गये.. डोक्टरने बानुको बहुत ज्यादा सेक्सके कारण हुआ कहेकर भानुको कुछ दवाइआ लीखकर देदी.. ओर दोनो दवाइ लेकर घर आगये..

सामको नीलम स्कुलसे आइ तो उनके मम्मी पापाको देखकर बहुत खुस हुइ.. ओर भानुने भी नीलमको प्यार दीया.. फीर भानु रमाको लेकर वापस गांव चला गया.. अब गांवमे उनके घरका काम भी सुरु होगया था.. तो रश्मीके घरका काम खतम हो चुकी था..

लेकीन अपने नये घर जानेसे पहेले अ‍ेक दीन रश्मीको लेबर पैइन सुरु होगया.. ओर चारु मंजुको लेकर देवायत रश्मीको सीधा सृतीकी क्लीनीकपे ले गया.. वहा सृतीने उनकी डीलीवरी की.. ओर रश्मीको अ‍ेक प्यारीसी बेटी पैदा हुइ.. तो मंजुने उनका नाम सरीता रख दीया..

वहा उनके पुर्व पतीकी बहेन टीना.. जो उनकी सौतन ओर खास सहेली थी.. वोभी पता चलते ही क्लीनीकपे आ गइ.. उसने सारा दीन रश्मीकी देख भाल की.. अ‍ेक दीन रखके सृतीने उसे छुटी देदी.. तो टीनाने अपने घर रुकनेका बहुत ही आग्रह कीया..

मगर रश्मी नही मानी.. रश्मी जल्दसे जल्द घर जाना चाहती थी.. क्युकी वहा वंदना घरपे अकेली थी.. तो रश्मीने टीनाको अपने घर आनेका आग्रह कीया.. मंजु आज बहुत खुस थी.. क्युकी उनके वीजयके लीये उनकी बहेनोका आना सुरु होगया था..

तो दुसरी ओर डो. सुधीर जो अब वसुधा होगइ थी.. उसने भी धीरे धीरे मुनाके साथ नजदीया बढाना सुरु करदीया था.. अब मुनाकी बहेन बरखाका भी पेट काफी बहार नीकल गया था.. वो अब उनके बापु वीभुके सामने नही आती थी.. वरना उनको पता चल जाता..

अ‍ेक दीन बसंती ओर बरखाने जयश्रीको अपने घरपे बुला लीया.. ओर बसंतीने बातो ही बातीमे जयश्रीका मन जान लीया.. की वो क्या सचमे ब्रीन्दाका रीलशेन अपने पतीसे रखवाना चाहती हे.. ओर जयश्रीने उनको साफ साफ हां कहेदी.. तब बसंतीने जयश्रीको कहा..

बसंती : (मुस्कुराते) ठीक हे जयश्री.. मे ब्रीन्दासे इस बारेमे बात करके उनको श्रीधरके साथ रीलेशनके लीये मनालुगी..

जयश्री : (सरमाते मुस्कुराते) आंटी तब तो आपकी बहुत बुहत महेरबानी.. अब आपके बेटेको अकेले जेलना मेरे बसका नही हे.. ओर उपरसे ये प्रेगनन्सी.. देखो पेट कीतना बहार नीकल गया हे.. ओर उनको रोज चाहीये.. पता नही मुना भाइने सबको कौनसी जडीबुटी पीलादी हे..

बरखा : (मुस्कुराते धीरेसे) अ‍ेय.. इनमे मेरे पतीको दोस मत दे.. सबकी यही इच्छा थी.. देख हमे भी इसको अ‍ैसे ही जेलना पडता हे.. जयश्री मेरी भी हालत तेरे जैसी हे.. इसीलीये तो मम्मीको मुनाके साथ सेट करदीया हे.. अब कोइ दीकत नही हे.. दोनो मां बेटे लगे रहेते हे.. हें..हें..हें..
 
बसंती : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी तेरे चकरमे मेरी हालत खराब करदेते हे वो..?

बरखा : (हसते धीरेसे) मोम.. येतो प्रेगनेन्ट हु इसीलीये.. फीर तो मेभी आप दोनोसे जोइन करुगीनां..

जयश्री : (मुस्कुराते) बस कीसी भी तराह मम्मी मान जाये तो मुजे भी छुटकारा मील जायेगा..

बसंती : (मनमे मुस्कुराते) कमीनी वोतो तेरी सादीसे पहेले ही अपने बेटेसे चुदवाती हे.. तु उनकी दुसरी बीवी हे.. ओर वो कमीनी ब्रीन्दाने भी अपना रसलेशन छुपानेमे बहुत ध्यान रखा..

बरखा : (मुस्कुराते) मोम.. वो साहील भाइके चाचा चाची भी आगये हे.. सुना हे उनकी चाची तो बहुत खुबसुरत हे..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां मेने देखा हे उनको.. बहुत स्वरुप वान हे.. ओर अपना साहील उनका हीतो बेटा हे.. ये तो सलमा बेनने उनको गोद लीया हुआ हे..

जयश्री : (धीरेसे मुस्कुराते) क्या साहीलभाइका भी उनकी अम्माके साथ टाका भीडा हुआ हेनां..?

बसंती : (हसते धीरेसे) हां मुजे भी अ‍ैसा लगता हे.. कमीने सारे के सारे दोस्त अ‍ेक जैसे ही हे.. सबको अपनी मां ओर बहेन ही अच्छी लगती हे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (रीक्वेस्ट करते धीरेसे) आंटी प्लीज.. आप मोमको मना लोनां..

बसंती : (मुस्कुराते) अरे तु फीकर मत कर.. अ‍ेक ही हप्तेमे तु अपनी आंखोसे रीजल्ट देखेगी.. बस.. कुछ उल्टा सीधा देखले तो नाराज मत होना.. उसे खुसी खुसी सेहमती दे देनां..

जयश्री : (हसते) अरे आंटी मेतो कबसे दोनोको अकेलेमे मीलनेका मौका देती हु.. लेकीन वो दोनो तो कुछ आगे ही नही बढते..

बसंती : (मनमे मुस्कुराते) कमीनी.. वोतो अब तेरे सोनेके बाद हर रात अपने बेटेसे जमकर ठुकवाती हे.. ओर तुजे पता भी नही चलता..

बरखा : (सामने देखते) मोम.. क्या सोच रही हो..?

बसंती : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही.. जयश्री तु फीकर मत कर.. समजले तेरा काम होगया..

तो दुसरी ओर देवायतकी सलाहके अनुसार साहील ओर फीरोजने भी अपनी बजंर जमीनको सही करनेका काम सुरु करदीया था.. साहीलने इस काममे उनपे बहुत मजदुर लगा दीये थे.. ओर फीरोज उनकी देखभालमे सब काम करवाता.. ओर साहील अपने खेतोपे ध्यान देता..

साहीलने उनके चाचा फीरोजको देवायतसे भी मीलवाया.. तो देवायतने उनके साथ अ‍ेक दोस्ताना जैसा व्यवहार कीया.. जीसे देखकर फीरोन बहुत ही खुस होगया.. क्युकी देवायतको ही साहील ओर सलमाके लीये फीरोजको मनाना था..

देवायत जब भी फीरोजसे मीलता गांवकी ओर आपसी रीस्तोकी बाते फीरोजसे करने लगा.. जीसे धीरे धीरे फीरोजकी कामाग्नी भी भडकने लगती.. अब उनका अपनी वीधवा भाभी यानीकी सलमाको देखनेका नजरीया भी बदलने लगाथा.. वो अब सलमाको ललचाइ नजरोसे देखता रहेता..

गांवमे आकर फीरोजका खान पान ओर सरीरमे भी काफी सुधार हो गया था.. जीनकी वजहसे फीरोजने दो तीन बार जरीनाको भी जमकर चोद लीया.. जीसे जरीना भी बहुत खुस रहेने लगी.. रातको दोनो मीया बीवी अपने रुममे चले जाते तो सलमा छुपकेसे साहीलके रुममे घुस जाती ओर साहीलकी बीवी होनेका हक अदा करती..

तो दुसरी ओर मुनाका मामा स्कुलका काम चालु होजानेकी वजहसे रेग्युलर लखनके संपर्कमे रहेने लगा.. ताकी उनकी बीवी गीताको सीक्षककी नोकरीपे लगवा सके.. इसके लीये लखनने वीनोदको मुनाके संपर्कमे रहेनेको कहा.. ओर जो भी जरुरी पेपर हो मुनाको देनेके लीये कहा..

वीनोद ओर गीता मुनाको जानते नही थेकी वही उनका भांजा हे.. ओर इसी सीलसीलेमे मुना दो तीन बार वीनोद ओर गीताको मीलने भी गया.. ओर उसने धीरे धीरे गीताका नंबर लेकर उनसे कोन्टेक्टमे रेहेनेको कहेकर उनसे फोनपे बाते करने लगा..

ओर बात चेट तक पहोंच गइ थी.. गीता भी नोकरीकी लालाचमे हर दीन मुनासे चेटसे बात करने लगी.. बात इतनी आगे बढ गइकी गीताको पता ही नही चला मुनाने कब उनको अपनी प्रेमजालमे फसा लीया.. दोनो अब फोनपे प्यार भरी बात भी करने लगे थे..

राधीकाकी मम्मीका सब कार्य लखनने अपने घरपे ही पुरा करदीया.. राधीका अपनी मम्मीके जानेके सदमेसे उभर भुकी थी.. ओर उसने फीरसे होस्टेलपे जान सुरु करदीया था.. लखन उनको छोडने जाता.. ओर उनकी कुटाइ कर लेता.. फीर सामको उनको वापस घर लेआता..

इसी बीच धिरेन ओर नीलमकी कोर्टकी तारीख नजदीक आगइ.. नीलमने लखनसे बात करली.. तो लखनने बहाना बनाकर नीलमको दो दीनकी स्कुलसे छुटी दीलवादी.. ये बात सीर्फ पुनम ओर लखन ही जानते थे.. इस बारेमे लखनने धिरेनसे भी बात करली....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७१

इसी बीच धिरेन ओर नीलमकी कोर्टकी तारीख नजदीक आगइ.. नीलमने लखनसे बात करली.. तो लखनने बहाना बनाकर नीलमको दो दीनकी स्कुलसे छुटी दीलवादी.. ये बात सीर्फ पुनम ओर लखन ही जानते थे.. इस बारेमे लखनने धिरेनसे भी बात करली.... अब आगे

तीनोने अपनी प्लानींग करली.. ओर आखीर वो दीन आगया.. लखन नीलमको लेकर कोर्ट चला गया.. तो नीलमने अपनी फ्रेन्ड दीयाको भी बुला लीया.. धिरेन भी बेन्कका अ‍ेक कलर्क दोस्तको लेकर आगया.. दोनोने कचहरी अधीकारीके सामने दस्तखत कीये..

धिरेनके दोस्तने धिरेनके वीटनेसके तौरपे तो दीयाने नीलमके वीटनेसके तैरपे दस्तखत कीये.. धिरेन ओर नीलमने अधीकारीके सामने अ‍ेक दुसरेको फुलोकी माला पहेनाइ.. फीर धिरेनने नीलमको सोनेकी अंगुठी पहेनाइ.. दोनोने सबका मुह मीठा करवाया.. ओर सादी होगइ..

इसी दौरान नीलम बार बार लखनकी ओर रहस्य भरी कामुक स्माइल करती रही.. जैसे इन नाटकमे उनको बहुत मजा आरहा हो.. पुनम मंजुके अलावा कीसीको पता नही थाकी अब नीलम लखनकी सीक्रेट बीवी होगइ हे.. फीर धिरेन नीलमको लेकर चला गया..

लखनने उसे दुसरे दीन सामको घर छोडनेको केह दीया.. जाते वक्त नीलम हसते हुअ‍े लखनके गले लग गइ.. ओर लखनको थोडा जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तो दीया देखकर हसने लगी.. धिरेन नीलम ओर उनके दोस्तको लेकर चला गया..

तो दीया ओर लखन थोडी देर वही खडे रहे.. दीया अकेली आइ थी.. तो लखनने उसे वापस होस्टेलपे छोडनेकी पेसकस की.. तभी दीयाने हां कहेते लखनको कोफी पीनेके लीये कहा तो दोनो पहेले अ‍ेक कोफी सोपे चले गये.. ओर लखनने ओर्डर दे दीया..

दीया : (सरमाते बातकी सुरुआत करते) जीजु आज नीलु कीतनी खुस लग रही थी हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां उनकी सादी जो हुइ हे.. आपकी सादी कब हे..?

दीया : (सरमाते मुस्कुराते) दो महीनेके बाद.. अ‍ेक हप्ते पहेले ही सगाइ हुइ.. आप आओगेनां..?

लखन : (हसते) जरुर.. अगर इन्वीटेशन दोगी तो जरुर आउगा.. अभी रुममे कौन पार्टनर हे..?

दीया : (सर्मसार होते धीरेसे) कोइ नही.. अकेली हु.. आपको कीतनी बार इन्वीटेशन दीया.. आप आते ही नही.. बस.. मेडमके पास ही बैठे रहेते हे..

लखन : (मुस्कुराते) आपकी मेडम अब मेरी बीवी जो हे.. तो उनकी मौजुदगीमे तो नही आ सकतानां..

दीया : (कामुक स्माइल करते) अब सामको तो आप उनको लेकर घर चले जाते हो.. क्या उनको घर छोडके वापस नही आसकते..? अब होस्टेलमे लडकीया भी कीतनी हे..? सब अ‍ेक्जामके बाद अपने घर चली गइ हे..

लखन : (लखन) तो फीर आप घर क्यु नही जाती..? आपकी सगाइ तो होचुकी हे..

दीया : (सरमाते धीरेसे) बस.. हां अ‍ेक हप्ते पहेले.. आपके बोरेमे नीलेसे बहुत कुछ जाना.. तो सोचा अ‍ेक बार आपसे अच्छेसे मीललु.. आज सामको आओगे..? मेडमको छोडनेके बाद..

लखन : (मुस्कुराते) अगर तेरे फीयान्स या नीलुको पता चला तो..?

दीया : (सरमाते धीरेसे) मेरे फीयान्सकी टेन्शन नही हे.. बस.. आप नीलुको मत बताना.. मेरा आपसे मीलना उनको अच्छा नही लगता..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. वो क्यु भला..?

दीया : (सरमाते धीरेसे) सायद ज्वेलेसी.. क्युकी वो आपको लाइक करती हेनां..? मुजे पता हे आप दोनोके बीच कुछ हे.. क्युकी उसने अपनी पुरी कहानी मुजे बताइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. इस बारेमे वो धिरेनको मत बताना..

दीया : (मुस्कुराते नांमे गरदन हीलाते) नही.. हमारा भी तो सीक्रेट होगा.. आओगेनां आज..?

लखन : (कुछ सोचकर) पका.. फाइनल.. आज सामको हम मीलते हे.. मे राधुको छोडकर आजाउगा.. रुम नंबर..?

दीया : (सरमाते धीरेसे) १०१ सीडीवोके पास वाला रुम.. मे इन्तजार करुगी..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..?

दीया : (सरमाते) हंम.. सीर्फ अ‍ेक बार.. बहुत दीनोकी इच्छा थी.. की अ‍ेक बार आपसे मीलुगी.. तो सोचा मेरी सादी होजाये इनसे पहेले सब मस्तीया करलु..

लखन : (मुस्कुराते) काफी फोरर्वड हो.. अपने फीयान्ससे कीतनी बार मीली हो..?

दीया : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) लगभग हप्तेमे अ‍ेक बार हम दोनो मीलते हे.. पीछले दो सालसे हम रीलेशनमे हे.. बहुच रीच फेमीली हे.. अ‍ेक लौता लडका हे.. ओर खास बात.. मेरी तराह पुरी फेकीली फोरर्वड हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते हसते) तो फीर तुम घर क्यु नही जाती..? कोइ खास वजह..?

दीया : (फीकी मुस्कानसे) घर..? कौनसा घर.. मेरा घर तो ये होस्टेल ही हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक पापा हे.. जो मुजसे बहुत प्यार करते हे.. बाकी सबने मुजसे मुह मोड लीया हे..

फीर दीया लखनको अपनी पुरी स्टोरी सुना देती हे.. दीया अपने फीयान्स ओर उनकी फेमीलीके बारेमे भी बताती हे.. ओर दोनो सामको मीलनेका तैर करके नीकल जाते हे.. लखन दीयाको होस्टेल छोडकर अपने घर आगया तो पुनम उनको घुरने लगी..
 
लखन नीचे ही फ्रेस होगया.. पुनम सबकुछ जानती थी.. राधीका होस्टेलपे थी.. तभी सृती भी कार लेकर आगइ.. ओर आते ही उसने लखनको कीस करलीया ओर दोडकर फ्रेस होने चली गइ.. फीर सब लोग लंच करने बैठ गये.. घरपे सीर्फ लखन ओर उनकी तीन बीवीया ही थे..

पुनम : (खाना परोसते लखनकी ओर मुस्कुराते) जानु.. सब अच्छेसे हो गया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां सुनो सब.. अभी ये बात कीसीको मत बताना.. आज नीलम ओर धिरेनकी सादी कोर्टमे होगइ हे.. ओर मेने नीलुको आजकी रात धिरेनके साथ भेज दीया हे ताकी दोनो अपनी सुहागरमत मना सके..

सृती : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) क्या..? दोनोकी सादी होगइ..? वाव..

रजीया : (मुस्कुराते) वाव की बच्ची खयाल रखना.. ये बात सीर्फ हम चारोके बीच ही रहे.. उनकी मम्मी पापाको पता ना चले.. उनकी पढाइ तक सीक्रेट रखना हे..

लखन : (पुनमकी ओर देखते) दीदी.. सच बताओ.. क्या पढाइ तक नीलु यहा रेह पायेगी..?

पुनम : (मुस्कुरमते) सायद नही.. वोतो यहा रहेना चाहती हे लेकीन धिरेन उनके बीना नही रेह पायेगा..

सृती : (सामने देखते) दीदी.. लेकीन उनकी पढाइ डीस्टर्ब नही होगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. धिरेन उनको पढायेगा.. वो नीलुके पीछे पागल हे.. लेकीन चंदा भाभीकी वजहसे हमे उनको धिरेनके पास भेजना पडेगा..

लखन : (सामने देखते) तो फीर भानु भाइ ओर रमा भाभी..? क्या वो धिरेनको अ‍ेक्सेप्ट करेगे..?

पुनम : (मुस्कुराते) कुछ नही.. वो भानु भाइ थोडा हंगामा करेगे.. लेकीन बडे भैया उनको समजा लेगे.. ओर वैसेभी रमा भाभीको तो कुछ फर्क नही पडता.. उसने तो नीलुको पहेलेसे ही सब छुट देदी हे.. इन्फेक्ट उन्होने तो नीलुको हमारे पतीके साथ रीलेशन रखनेकी भी छुट दी हुइ हे..

सृती : (लखनकी ओर हसते) ओह गोड.. दीदी.. क्या करे.. हमारे भाइ जो इतना हेन्डसम हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (लखनकी ओर कातील मुस्कानसे) सच कहा आपने.. अब मम्मीने जो इनको छुट दीहे.. वरना हमारे सीवा कीसीको देख भी नही पाते.. हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते) धमकी दे रही हो..?

पुनम : (सरारतसे हसते) हां दे रही हु.. बोलो.. क्या करलोगे..?

लखन : (हसते) पहेले खाना खाने दो फीर बताता हु..

पुनम : (जोरोसे हसते) क्या करोगे..?

लखन : (सामने आंख मारते हसते) बस.. देखती जाओ..

ओर लखन खाने लगा.. तो रजीया ओर सृतीभी जाननेके लीये उत्सुक्त थी की लखन खानेके बाद पुनमके साथ क्या करेगा.. दोनो लखनकी ओर देखते हसती रही.. लेकीन पुनमको पुरी तराह अदेंसा हो चुका थाकी लखन क्या करेगा.. वो बहुत ही सर्मसार होने लगी..

ओर फटाफट खाने लगी ताकी खानेके बाद वो लखनसे बच सके.. तभी लखनने खाना खालीया तो पुनम थी जोरोसे हसते खडी होने लगी.. ओर इधर उधर भागनेकी तैयारीया करने लगी.. लेकीन ये तो लखन था.. सबसे दो कदम आगेकी सोचने वाला..

पुनम कही भागे उनसे पहेले ही लखनने पुनमको पकडने जाने लगा ओर पुनम भागने लगी.. तभी लखनने उसे पीछेसे पकड लीया तो पुनम जोरोसे हसते छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. लखन उसे गोदमे उठाकर सोफेकी ओर ले गया.. सृती ओर रजीया खाते हुअ‍े दोनोकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी..





लखनने पुनमको सोफेपे लीटा दीया ओर उनकी सारी कमर तक करदी.. लखनने भी अ‍ेक हाथसे पुनोको दबोचते दुसरे हाथसे फटाफट अपनी पतलुन घुटनो तक करदी.. फीर पुनमके दोनो हाथ पकडकर उनपे लेट गया.. पुनम जोरोसे हसते लखनसे बचनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर लखन पुनमके उपर छागया..

तभी अचानक सृती ओर रजीयाको पुनमकी चीख सुनाइ दी.. क्युकी लखन अपना पुरा लंड पुनमकी चुतमे घुसा चुका था.. ओर लखन कमर हीलाते पुनमको सोफेपे ही चोदने लगा.. कुछ ही देरमे सृती ओर रजीयाको पुनमकी कामुक सीसकारीया सुनाइ दे रही थी..





सृती जटसे पानी पीते हाथ पोछने लगी.. ओर दोनोके पास जाकर सामने बैठ गइ.. वो दोनोकी चुदाइ देखकर हस रही थी.. कुछ ही देरके बाद लखनने पुनमकी चुतको अपने मालसे भर दीया.. ओर लंड नीकालकर हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस गया..
 
पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सोफेपे बैठकर अपनी चुत साफ करने लगी.. तभी उसे खयाल आयाकी सृती सामने बैठी हे.. पुनमने जटसे अपनी सारीको सही करलीया.. ओर सृतीकी ओर देखते सर्मीन्दा होते हसने लगी.. फीर खडी होते लखनको मारनेके लीये बाथरुमकी ओर चली गइ..

पुनम : (जोरोसे दरवाजा खटखटाते) भाइ.. बहार नीकलो.. सरम भी नही आइ.. नीकलो बहार..

लखन : (अंदरसे हसते) दीदी.. अब कुछ मत करना.. वरना फीरसे करुगा.. ओर वो तीनोको भी बता देना.. अब सबको यही सजा मीलेगी..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. हमारे पतीने प्यार पानेका क्या अच्छा आइडीया दीया हे हमे..

रजीया : (जोरोसे हसते) लोजी.. पुनोदी.. इनकी तो मनकी मुराद पुरी होगइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सृतीकी ओर देखते) हां.. ये तो पहेलेसे ही चुदकड हे.. जब हम सबके सामने सजा भुगतेगी तब पता चलेगा..

सृती : (मुह बीगाडते) तो क्या हुआ.. तुम मेरी बहेने ही हो.. ओर वो भाइ हे हमारा.. उनका अपनी बहेनपे इतना हक तो बनता ही हे.. हें..हें..हें..

फीर रजीया कीचनमे काम नीपटाने चली गइ तो पुनम हसते हुअ‍े सृतीके पास आकर बैठ गइ.. ओर दोनो हस हसके अ‍ेक दुसरेसे धीमी आवाजमे फुसफुसाते लखनके बारेमे बाते करने लगी.. अब पुनमके साथ सृती ओर रजीयाको भी पता चल गया थाकी लखनकी सेक्स करनेकी पावर ओर बढ गइ हे..

सृती : (हसते फुसफुसाते) दीदी.. ये सब कैसे..? मतलब.. दीनमे ही.. हमारे सामने..?

पुनम : (सरमातते धीरेसे) दीदी.. येतो बस सुरुआत हे.. हम चारो इनकी बीवीया हे.. तो बीवीयोके सामने कैसी सर्म..? आगे आप तीनोके साथ भी अ‍ैसा होने वाला हे.. ओर कभी हमारे सामने नीलुको भी चोदले तो चोंकीयेगा मत..

सृती : (आस्चर्यसे देखते फुसफुसाते) क्या..? नीलुको भी..? टांगे तोड दुगी इनकी..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर वो कही बहार सेक्स करते हेतो उनको रोकना मत.. वरना हमने उनको सेक्स करनेसे रोका तो ये ओर बेकाबु हो जायेगे.. ओर रातको तो हम सबकी हालत बीगाड देगे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. सच कहा आपने.. अब तो पहेलेसे ही जोसमे हम सबकी हालत बीगाडने लगे हे.. आपने उनको कोनसी जडी बुटी पीलादी हे.. अब तो डर लग रहा हे की कही हमारे बच्चेको कोइ प्रोबलेम ना हो..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) अब तो हम चारो प्रेगनेन्ट हे.. हमे लखन भैयाको बहार सेक्स करनेकी परमीशन देनी ही पडेगी.. वरना हम कीसीके साथ बुरा हो सकता हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे हसते) देखोनां.. पहेलेसे कीतना गध्धे जैसा होगया हे.. लेकीन हमे मजा भी बहुत देते हे.. हम चारोको संतुस्ट करके नीचोड ही लेते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आप फीकर मत करो.. मे ओर मम्मी अभी उसी काममे लगी हुइ हे ताकी हमे कुछ राहत मीले..

सृती : (मुस्कुराते) वो कैसे..?

पुनम : (रहस्य भरी मुस्कानसे) बस.. आप देखती जाओ.. लगता हे चंदा भाभीको सही करनेका वक्त नजदीक आ रहा हे.. आप समज गइनां..

सृती : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या चंदा मौसी..? सचमे..? आपको तो सब पता हे बताइअ‍ेना कैसे..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे फुसफुसाते) दीदी.. अब भाइ उनपे कुछ खास ध्यान नही देते.. वोतो बस लता ओर बहारकी बीवीओपे ज्यादा टाइम देने लगे हे.. उसने चंदा भाभीको लगभग नजर अंदाज करदीया हे.. जीसकी वजहसे उनकी भी कामाग्नी बढ गइ हे.. बस.. इनको तो अब हमारा भाइ ही ठंडा करेगा.. वो अब हमेसाके लीये यहा आ रही हे..

दोनो बाते कर रहीथी तभी लखन धीरेसे बाथरुमका दरवाजा खोलकर उपर भाग गया.. तो पुनम ओर सृती उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. तभी पुनमने सृतीको रजीयाको लेकर उपर आनेको कहा.. फीर सृतीको वही बैठी छोडकर धीरेसे उपर लखनके पास चली गइ.. देखा तो लखन बेडपे आराम कर रहा था..





ओर पुनम दरवाजा खाली बंध करके उनके पास चली गइ.. तो लखनने उनको हाथ पकडकर अपने उपर गीरा दीया ओर पुनमको बाहोमे लेकर चुमने लगा.. पुनम भी लखनका साथ देने लगी.. पता नही आज लखनको पुनमपे बहुत प्यार आरहा था..
 
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्यारसे.. बच्चेका खयाल रखना..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) सोरी दीदी.. तुम मुजे मना क्यु नही करती..?

पुनम : (मुस्कुराते) क्युकी मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. ओर आपकी जरुरतका भी खयाल हे मुजे.. बस.. मेरे साथ ध्यान रखके सेक्स कीया करो.. वरना बच्चीको चोट लगेगी..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. पता नही आज कल मुजे सेक्स करनेका बहुत मन हो रहा हे.. मे कीसीको भी मना नही कर पा रहा हु.. आज क्या हुआ हे सब पता तो चल गया होगा आपको..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो नीलुकी फ्रेन्डने इनवाइट कीया हेनां आपको..?

लखन : (सामने देखते) हां.. लेकीन मे आपकी परमीशनके बगैर जाना नही चाहता.. इनफेक्ट मेने तैय करलीया हे.. जो भी करुगा आपको पुछकर.. मे आपको धोखेमे रखना नही चाहता..

पुनम : (बाहोमे भीचते) लखन.. यही तो आपका प्यार हे.. बस.. कमसे कम मुजे बताके जाया करो.. क्युकी अब आपका मकसद ही यही हे.. जो कभी उस राजाका हुआ करता था.. पहेले ये फर्ज बडे भैया नीभा रहे थे.. अब ये आपको नीभाना हे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. ये सब करनेके बाद गील्टी भी फील होती हे.. की कही मे कीसीके साथ गलत तो नही कर रहा..?

पुनम : (मुस्कुराते गालपे टपली मारते) दीदी नही सीर्फ आपकी पुनो.. आपकी बीवी.. दीदी सीर्फ रातमे आपके साथ बीस्तरपे.. मे आपकी फेन्टासीका पुरा खयाल रखुगी.. ओर आप मेरी.. लखन.. आप गील्टी फील मत करो.. अभी तो बहुत कुछ करना हे आपको..

सृती : (रजीयाके साथ अंदर आते) अरे..? अ‍ैसे ही बैठे हो? हमने सोचा.. हें..हें..हें..

पुनम : ओह.. हम बस बाते कर रहे थे.. तुम दोनो भी आओ..

रजीया : (हसते) रहे.. आराम कर रहे हे..? हमने सोचा अ‍ेक ओर राउन्ट होगा..

पुनम : (हसते) कमीनी क्या सारा दीन हम यही करते हे..? आओ बैठो.. तुम दोनोसे भी कुछ बाते करनी हे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. आप कुछ केह रही थी.. बहुत कुछ करना हे.. मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते) मतलब.. आपकी जींदगीमे अभी बहुत लडकीया ओर ओरत आयेगी.. अपनी काम वासना संतुस्टीके लीये.. तो आपको सभी ओरतोका उसे संतुस्ट करके सन्मान करना होगा.. ओर कुछ सीर्फ आपका अंस चाहती हे.. जो बहुत ही नजदीककी जान पहेचान वाली होगी..

लखन : (सामने देखते) लेकीन येतो गलत हे..

सृती : (साथ देते) हां दीदी.. भाइ बीलकुल सही केह रहे हे.. मे अब हम चारोके अलावा भैयाको कीसी ओरके साथ नही बाट सकती.. ओर उपरसे वो नीलु.. सच कहु तो मुजे ज्वेलेसी फील होती हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. इनको मत रोको.. आगे जाकर हमारे लीये ही तकलीफदेह होगा..

सृती : (मुस्कुराते) कोइ तकलीफ नही होगी.. अगर आप तीनोको प्रोबलेम होगी तो मे भाइको सम्हाल लुगी.. इनको जीतना प्यार चाहीये उतना प्यार दुगी.. लेकीन कीसी ओरके साथ नही बाट सकती..

पुनम : (मनमे) दीदी.. आप नही जानती ये आपका प्यार नही आपकी कीस्मतमे जो लीखा हे वो आपके मुहसे कोइ ओर बुलवा रहा हे.. खैर होनीको मे भी नही टाल सकती..

सृती : (हसते) अरे..? कहा खोगइ आप.. कुछ तो बोलीये..

पुनम : (लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते) ठीक हे.. अभी तो सृतीदी केह रही हे अ‍ैसा करते जाइअ‍े.. आगे देखा जायेगा.. अब थोडी देर सोनेदो.. क्युकी रातमे तो आप हमे सोने दोगे नही..

सृती : (हसते सोते) हां अब ठीक हे.. आज कुछ नया ट्राइ करेगे..

रजीया : (हसते बेडपे आते) आप ही करना.. फीर भी ये मानने वाले नही हे.. फीर दुसरे दीन क्लीनीकपे छुटी.. हें..हें..हें..

सब मस्ती मजाक करते अ‍ेक दुसरेसे लीपटके दो घंटेके लीये सो गये.. सामको रजीयाने सबके लीये चाइ नास्ता बनाया.. चाइ नास्ता करके सृती क्लीनीकपे चली गइ ओर रजीया घरका काम करने लगी.. तो लखन भी बहार नीकलनेकी तैयारीया करने लगा.. जैसे ही वो बहार नीकला पुनम पीछे आगइ..

पुनम : (पीछे बहार नीकलते मुस्कुराते) लखन.. अ‍ेक मीनीट रुकीये.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..

लखन : (कारके पास रुकते) हां दीदी..

पुनम : (पेटमे मुका मारते) कीतनी बार कहा हे दीदी नही.. पुनो कहेकर नही बुला सकते..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी.. बोल पुनो डार्लींग.. क्या काम था..? हें..हें..हें..

पुनम : (खुस होते हसते) हां.. ये हुइना बात.. बस.. अ‍ैसे ही बुलाया करो.. सुनो.. आप सृतीदीका बुरा मत मानना.. आप अपना काम नीपटाकर आना.. आनेमे देर होजाये तो केह देना दोस्तकी पाटीमे गया था..

लखन : (मुस्कुराते) पुनो.. क्या सचमे..?

पुनो : (मुस्कुराते) हां.. दीयाकी इच्छा पुरी करदो.. अ‍ैसे कइओकी इच्छा आपको पुरी करनी हे.. बस.. आज रात आपको सृती दीदीको ज्यादा प्यार करना हे.. जैसे दोनो पहेली बार मीले थे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे डार्लींग.. समज गया..

फीर लखन पुनमको हग करके उनके होंठ चुमकर सीधा होस्टेलपे चला गया.. यहा राधीका लखनको लेकर रुममे चली गइ.. हर दीन रुटीनकी तराह दोनोने प्यार कीया.. फीर दोनो बहार आकर ओफीसमे बैठ गये.. राधीका अब बहुत खुस थी.. उसने लखनके कंधेपे सर रख दीया..

राधीका : (मुस्कुराते) लखन.. आप सब कीतने अच्छे हे.. मुजे मम्मीके जानेका गम ही नही.. सब इतना खयाल रखते हे मेरा.. अब तो पुनो भी आपकी बीवी हे.. आपकी कीतनी केयर करती हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. अब तो हमारी जींदगीमे बहुत कुछ बदल गया हे..

राधीका : (मुस्कुराते) पता हे.. मम्मीको जब पता चलाकी मे पेटसे हु.. तो वो कीतनी खुस थी.. बडे ही सुकुनसे गइ हे..

दोनोही बाते करते रहे तब साम भी होगइ.. लडकीयोने खाना खालीया तो वहा उनको दीया मीली.. राधीकाने दीयाको होस्टेलका खयाल रखनेको कहा.. तभी उपर जाते वकत लखनको कामुक स्माइल करते उपर आनेका इसारा करती गइ.. तो लखनने राधीकाको छोडकर आनेका इसारा कीया ओर लखन राधीकाको घर छोडने चला गया..
 
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