Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 101 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

फीर छोडकर कामका बहाना बनाकर घरसे नीकल गया.. ओर सीधा होस्टेलपे आगया.. वो कुछ देर ओफीसमे बैठा.. जब लडकीयोका सोर कम होगया तो धीरेसे उपर चला गया.. लोबीमे कोइ नही था.. तो लखन धीरेसे दीयाके कमरेमे घुस गया.. ओर दरवाजा बंध कर दीया..

तो दुसरी ओर आज सारा दीन धिरेन नीलमको लेकर अपने नये घरमे ही पडा रहा.. वो कही दीनोसे नीलमको नही मीला था तो नीलमको मीलनेके लीये पागल होरहा था.. दो पहोरको खाना खाकर वो नीलमको लेकर अपने कमरेमे घुस गया.. देखा तो पुरा बेड फुलोसे सजा हुआ था..





नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. लगता हे तुमने पहेलेसे ही सब तैयारीया करके रखी हे..

धिरेन : (नीलमको बाहोमे भीचते) ओर नही तो क्या..? मुजे पता था आज हमारी सादी होजायेगी.. कीतना इन्तजार करवाया हे तुमने.. चल आजा.. अब तो कल सामको ही हम रुमसे बहार नीकलेगे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) अभी रात तो होने दो.. आज हमारी सुहागरात हे.. मे पुरी रात यही हु..

धिरेन : (गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेजाते) सुहागरात नही.. अब तो पहेले सुहागदीन होगा फीर हमारी सुहागरात होगी.. मेने सब तैयारीया करके रखी हे आजा..

नीलम : (मनमे हसते) कमीने मेरी सुहागरात तो कबसे हो चुकी हे.. मेरे लखनके साथ.. तुमतो बस मेरी केरीयरका अ‍ेक जरीया हे.. मे मेरे लखनसे प्यार करती हु.. ओर उनकी ही बीवी हु..

धिरेन : (बेडपे लीटाते हसते) क्या सोच रही हो..?

नीलम : (हसते) धिरेन.. सोच रही हु आखीर हमारा सपना पुरा होगया.. लखन जीजुने अपना वादा बखुबी नीभाया.. वो कीतने अच्छे हेनां..? पुनोदीके साथ इतना कुछ होनेके बावजुद भी हमारा साथ दीया..

धिरेन : हां नीलु.. भलेही हम दोनोका रीस्ता टुट गया हो.. लेकीन उसने दोस्तीका रीस्ता कभी नही तोडा.. मे इनकी बहुत इजत करता हु.. चल बातोके लीये तो पुरा दीन पडा हे.. अभी मुजे अपनी बीवीको प्यार करना हे..

फीर धिरेन लगभग नीलमके उपर टुट ही पडा.. उसने आज वायग्रा खाइ हुइ थी.. नीलमने जुठमुठका चीखने चीलानेका नाटक कीया.. क्युकी लखनके साथ चार दीन सेक्स करवाते उनकी चुत लखनके लंडके साइज हो चुकी थी.. धिरेनको भी थोडा ढीलापन महेसुस हो रहा था..





धिरेन : (थोडा डरते) नीलु.. ये थोडी ढीली लग रही हे.. कुछ डालती हो क्या..?

नीलम : (थोडा जेंपते) धिरेन.. मुजपे सक कर रहे हो क्या..?

धिरेन : (जज्ञसे) अरे नही नही.. मे तो बस..

नीलम : (जुठ बोलते) तो ढीली ही लगेगीनां.. अ‍ेक तो मेरे उपर इतनी पाबंधी.. ओर गांव भी गइ थी तो तुम्हारे बीना मन ही नही लग रहा था.. तो बस.. वो.. खीरेकी आदत.. सोरीनां..





धिरेन : (जोरोसे कमर हीलाते चोदते) नी..लु.. तु कुछ उल्टा सीधा मत डाला कर.. मुजे फोन कर देती.. मे कुछ जुगाड कर लेता.. वैसे तो कोइ दीकत नही हे.. बस.. पुछ रहा था..

नीलम : (कमर उछालते) धिरेन.. मे सीर्फ तुमसे प्यार करती हु.. इसीलीये तो मेने हमारे बीचका काटा नीकाल दीया.. ताकी हम सादी कर सके.. ओर देखो.. आज हम दोनोकी सादी भी होगइ..

नीलमने बडे ही आसानीसे धिरेनको समजा दीया.. ओर धिरेन उसे जोरोसे चोदे ही जा रहा था तो नीलम बीच बीचमे चीखने चीलानेका नाटक करती ओर धिरेनको धीरेसे चोदनेके लीये मनते करती.. तो धिरेन भी खुस था.. वायग्राकी वजहसे धिरेनने नीलमको दो बार चोद लीया..





फीर नीलम बेडसे उतरके थोडा लंगडाते चलने लगी.. तो धिरेनने उसे खुस होते गोदमे उठालीया.. तो नीलमने उनके गालको चुम लीया.. फीर साम होते ही दोनोने वही खाना मंगवालीया.. दोनो वापस बेडपे आकर अपनी सुहागरात मनाने लगे..

तो इधर दीयाके रुमसे उनकी हल्कीसी चीखनेकी आवाज आ रही थी.. जो उनकी चीखे रुममे ही दब गइ.. दीयाकी आंखमे आंसु थे.. लखन दीयाके दोनो पैर अपने कंधेपे रखते दीयाको जोरोसे चोद रहा था.. दीया पहेली बार दो दो बार जड चुकी थी ओर लखन अभी भी उसे चोदे ही जा रहा था..





लखनने बीना लंड बहार नीकाले दीयाको दो बार चोद लीया.. तो लखनकी स्टेमीना देखकर दीया भी बहुत खुस होगइ.. उसने तैय कीया थाकी सादीसे पहेले वो अ‍ेक बार जरुर लखनसे चुदवायेगी.. लेकीन आज लखनकी स्टेमीना देखकर उनका मन बदल गया..

उसने उनकी सादीके बाद मोका मीलेगा तो दुसरी बार भी लखनसे मीलनेका वादा लीया.. ओर लखनको सादीमे आनेका बहुत आग्रह भी कीया.. फीर लखन घरपे आगया.. तो पुनम उनकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी.. फीर सबने मीलकर डीनर कीया..





उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी दो दो बार जमकर बजाइ.. फीर सृतीको लगातार तीन बार जमकर चोदलीया ओर बाथरुममे भी खडे खडे सृतीकी चुतका भुरता बनादीया.. तो सृतीकी हालत बीगड गइ.. फीर पुनमको जमकर दो बार पेला.. ओर उनसे चीपकके सो गया.. तब कीसीको पता नही थाकी लखनका लंड अब भी पुनमकी चुतमे हे.. दोनो अपने वादेके मुताबीक सो गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७२

उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी दो दो बार जमकर बजाइ.. फीर सृतीको लगातार तीन बार जमकर चोदलीया ओर बाथरुममे भी खडे खडे सृतीकी चुतका भुरता बनादीया.. तो सृतीकी हालत बीगड गइ.. फीर पुनमको जमकर दो बार पेला.. ओर उनसे चीपकके सो गया.. तब कीसीको पता नही थाकी लखनका लंड अब भी पुनमकी चुतमे हे.. दोनो अपने वादेके मुताबीक सो गये.... अब आगे

रात ओर दुसरे दीन भी धिरेन आराम करते करते नीलमको चोदता रहा.. फीर सामके चार बजे वो नीलमको फीरसे जल्द मीलनेका वादा लेकर घरके पास छोडकर चला गया.. नीलम आरामसे चलकर घरमे आगइ.. तो रजीया ओर पुनमको देखकर खुब सरमाइ ओर हसने लगी..

पुनम : (हाथ पकडकर सोफेपे बैठ गइ) हां नीलु.. क्या हुआ..? उनको सक तो नही हुआ..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. होना क्या था.. जैसे आपने कहा था अ‍ैसा ही कीया.. तो सक कहासे करेगा..? कमीनेने पुरी रात गोलीया खा खाकर सोने नही दीया.. मेतो इतनीसी नुनीके साथ खेलते खेलते तंग होगइ..

पुनम : (हसते धीरेसे) अरे मजा भी तो कीया तुमने..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) अरे क्या खाक मजा कीया..? अब तो उनका अंदर कुछ फील भी नही हो रहा.. बस.. माथे चडा नही ओर कुछ ही देरमे खतम.. अभी भी अ‍ैसा ही हे.. जो बात जीजुमे हे वो उनमे कहा..? अब तो जुजीके आलावा कीसीसे मीलनेका मन ही नही होता..

पुनम : (मुस्कुराते) कमीनी तुमने अपने जीजुसे मांग भरवाइ हे फीर भी जीजु..? चल कोइ बात नही.. इधर तेरा पहेला पती तो हेही.. तुजे पता नही तेरी जींदगीके कौन आयेगा.. वो सब फीर कभी बताउगी.. अभी समय नही हे.. जा आराम कर..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. उसने मुजे फीरसे मीलनेको कहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां तो क्या हुआ..? तु हर सेटरडे सन्डे उनके पास चली जाना ओर उनको केहना तुजे संन्डे सामको इधर छोडदे..

नीलम : (मुस्कुराते) लेकीन.. कभी मम्मी पापा इधर आगये तो..?

पुनम : (मुस्कुराते) वो मे सब सम्हाल लुगी.. तब तुजे उनके पास नही भेजुगी..

नीलम : (हसते) जी दीदी.. सब समज गइ..

तो उधर गांवमे भी देवायत मंजु लता ओर दयाकी लाइफ अच्छेसे गुजरने लगी.. लेकीन चंदा देवायतसे भावनात्मक लीहाजसे काफी दुर हो चुकी थी.. सेक्स ना मीलनेकी वजहसे वो बैचेन रहेने लगी थी.. उनका बहुत मन कर रहा था.. लेकीन देवायत उनको कभी कभार ही चोदता था.. क्युकी अब वो विजयको लेकर अलग दुसरे रुममे सोने लगी थी..

तो इधर बसंतीने ब्रीन्दाको जयश्रीसे हुइ बात बतादी.. जीसे सुनकर ब्रीन्दा बहुत खुस हुइ.. ओर हसने लगी.. फीर बसंतीने बरखा मुनाके साथ मीलकर जो प्लान बनाया था.. इस बारेमे बसंतीने ब्रीन्दाको बता दीया.. फीर दोनोने कुछ ओर बाते की.. ओर बात लखनपे आगइ..

बसंती : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनी.. श्रीधर जयश्रीकी सादीमे तो तुमने खुलकर उसे नीमंत्रण दीया था.. तो फीर बादमे कुछ बात हुइ की नही..?

ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) हा..ये.. क्या बताउ.. वो कीतना हेन्डसम हेनां..? उनमे कीतना आकर्सण हे.. मेतो उनको देखते ही अपना कंट्रोल खो देती हु.. मे ये भी भुल जाती हुकी श्रीधर मेरा पती हे.. ओर वो उनका दोस्त.. बस.. दुबारा मीलनेका मौका ही नही मीला..

बसंती : (जोरोसे हसते धीरेसे दबी आवाजमे) तु पकी वाली रंडी होगइ हे.. लगता हे तुजे मौका मीला तो तु जरुर उनसे चुदवा लेगी.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते धीरेसे) ओर नही तो क्या..? देखा नही उनका कीतना बडा हे..? बसंती जींदगीका हर मजा लेना चाहीये.. मेतो कहेती हु तुजे भी मौका मीले तो तुभी अ‍ेक बार उनसे चुदवाले.. क्या पता हमारी कीस्मतमे उनका ही अंस लीखा हो..

बसंती : (सरमाते धीरेसे) नही.. मुजे नही चुदवाना उनसे.. तुही चुदवाले.. मेरे लीये तो मेरा मुना ही ठीक हे.. वो आज भी मेरी हालत खराब कर देता हे.. बस.. अ‍ेक बार उनसे सादी होजाये..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सादी..? अब जयश्री खुद चाहती हेतो श्रीधरसे सादीतो करनी ही पडेगी..

बसंती : (मुस्कुराते) कमीनी इसीलीये तो यहा आइ हु.. तु अ‍ेक बार जयश्रीसे बात तो करले..

दोनो सादीके बारेमे बात करने लगी.. ब्रीन्दा बडी दुवीधामे थी.. की वो सामनेसे जयश्रीसे कैसे बात करे.. फीर दोनोने मीलकर इस बारेमे जयश्रीसे खुलकर बात करनेका फैसला कीया.. इस वक्त श्रीधर भी घरपे नही था.. तो बसंतीने जयश्रीको जोरोसे आवाज देकर बुलाया.. तो जयश्री आगइ..
 
बसंती : (मुस्कुराते) आओ जयश्रीबेटा.. इधर बैठ.. हमे तुमसे कुछ बात करनी हे..

जयश्री : (सरमाते मुस्कुराते) जी आंटी.. कहीये..

बसंती : (मुस्कुराते) देखो बेटा.. जो तुम चाहती थी इस बारेमे मेने ब्रीन्दासे बात करली हे..

ब्रीन्दा : (आस्चर्य भावसे) बेटा.. ये बसंती क्या बोल रही हे..? तुमने उसे कुछ कहा हे..?

जयश्री : (नजरे चुराते सर्मीन्दा होते) जी मम्मीजी.. आप तो जानती हे सभी दोस्तोने कुछ जडीबुटीया ली हे.. ओर अब तो हमारे गांवमे भी अ‍ैसा बहुत कुछ होने लगा हे.. तो..

ब्रीन्दा : (सामने देखते) हां तो..?

जयश्री : (थोडा गभराते) सोरी मम्मी.. मेने सोचा आप अकेली हो.. अभी भी आपकी उमर नही हे.. तो.. तो.. मेने सोचा.. मुनाभाइ ओर बसंती आंटीकी तराह आप भी.. भैयाके साथ..

ब्रीन्दा : (सामने देखते) तु जानती भी हे तु क्या बोल रही हे..? मानाकी गांवमे अब ये सब आम बात हे.. ओर तुजे मेरे अकेलेपनका खयाल भी हे.. तो मे कीस हेसीयतसे मेरे बेटेके साथ सबंध रखु..? कही तु पागल तो नही होगइ..?

बसंती : (जोरोसे हसते) कमीनी क्यु बच्चीको डरा रही हे.. सीधे सीधे हां बोल देनां.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (हसते) कमीनी थोडी देर चुप नही बैठ सकती..? देख कैसे गभरा रही हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) जयश्री तु फीकर मत कर.. ये राजी हे.. हम तुमसे मजाक कर रहे थे..

जयश्री : (खुस होते हसते) क्या..? मम्मी राजी हे..? थेन्क्स गोड..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बेटा.. अभी इतना भी खुस मत हो.. अ‍ेक बातका जवाब दे मुजे..

जयश्री : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी.. कहीये..

ब्रीन्दा : (सामने देखते) चल मानले मे भी बसंतीकी तराह अपने बेटेसे रीलेशन रखलु.. लेकीन कीस रीस्तेसे..?

जयश्री : (सामने देखते) मतलब..? मे.. मे कुछ समजी नही..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बेटा.. मानाकी हम सबकी कुछ जरुरते हे.. ओर मे श्रीधरसे रीलेशन भी रखलु.. लेकीन कीस रीस्तेसे..? क्या तुम चाहती हो मे उनकी अ‍ेक रखैल बनके रहु..?

जयश्री : (जटसे सरमाते) अरे नही नही.. आप भी उनसे सादी कर लीजीये..

ब्रीन्दा : (मनमे) अब तुजे कैसे कहु.. सादीतो हम दोनोने पहेले ही करली हे.. हमने सुहागरात भी मनाली हे ओर हम तीन चार बार हनीमुनपे भी गये हे.. हमारा पती आज भी हर दीन मेरी ठुकाइ कर रहा हे.. बस.. मे सब तेरे मुहसे सुनना चाहती थी..

बसंती : (हसते) कमीनी क्या सोच रही हे.. अब तो हां कहेदे..? देख बच्ची कैसे गभरा रही हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सादी..? नही इनकी कोइ जरुरत नही हे.. बस.. तुम सीर्फ अ‍ेक बार श्रीधरको कहेदे.. हमारे मंदीरके सामने वो मेरी मांग भरदे.. ओर मुजे मंगलसुत्र पहेनादे मे तैयार हु..

जयश्री : (मनमे खुस होते) जी मम्मी.. मे उनसे बात कर लुगी..

ब्रीन्दा : (सामने देखते) लेकीन बेटा अ‍ेक समस्या हे.. यहा गांवमे तो कोइ प्रोबलेम नही हे.. लेकीन अ‍ैसी बाते ज्यादा दीन छीपती नही.. अगर बडी दीदी ओर जीजुको पता चलातो तुम क्या करोगी..?

जयश्री : (सामने देखते द्नढतासे) मोम.. उन्होने आपके साथ कीया क्या वो सही था..? ओर हमे कौनसा गांवमे ढंढोरा पीटना हे.. जो भी होगा सीर्फ इस चार दीवारोके अंदर.. अगर उनको पता भी चलेतो गभरानेकी कोइ बात नही.. मे आपके साथ हु.. सबको मे नीपट लुगी..

ब्रीन्दा : (हाथ फैलाते) बडी बहादुर बच्ची हे.. आजा मेरी बच्ची..

कहातो जयश्री ब्रीन्दाके गले लग गइ.. तो ब्रीन्दाने हसते बसंतीकी ओर देखते आंख मारदी.. फीर बसंती अपने घर चली गइ.. जब रातको श्रीधर घरपे आया तो जयश्रीने नोटीस कीयाकी आज ब्रीन्दा श्रीधरको देखते बहुत ही सरमा रही थी.. फीर रातमे दोनो बीस्तरपे आगये.. तभी..





जयश्री : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक बात पुछनी थी..?

श्रीधर : (बाहोमे भीचते) हां बोलनां डार्लींग.. कीस बारेमे..?

जयश्री : (सरमाते सामने देखते) मुना भाइ ओर बसंती आंटीके बारेमे..

श्रीधर : (सामने देखते) क्या..?

जयश्री : (जुठ बोलते) आपको पता हेनां वो दोनो मां बेटे रीलेशनमे हे.. आपने मुजे बताया क्यु नही..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) ओह.. हां.. मेने सोचा बरखाभाभी तेरी सहेली हे तो तुजे सब पता होगा..

जयश्री : (सामने दखते) बसंती आंटीका तो पती भी हे.. फीर भी उसने अपने बेटेके साथ रीलेशन रखा..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) बेबी.. तुजे पता नही हे.. की अब वीभु अंकल बसंती आंटीको वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. इसीलीये अ‍ेक बार बसंती आंटी कही ओर भटक गइ थी.. हमारे भानुभाइके साथ..

जयश्री : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? भानुभाइके साथ..? वो लखन भैयाके साले..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां.. वोही.. इसीलीये बरखाभाभीने बसंती आंटीको सही रास्तेपे लानेके लीये उनको मुनाके साथ रीलेशन रखनेको राजी करलीया.. ताकी उनको बहार मुह मारनेकी जरुरत नापडे.. ओर वैसे भी हम सबने जडीबुटी खाइ हे.. तो दो ओरतोको आसानीसे सम्हाल सकते हे..
 
जयश्री : (मुस्कुराते बात रखते) तो सोचो यही सीचुअ‍ेशन अब हमारे घरपे आगइ हे..

श्रीधर : (गभराते सामने देखते) मतलब..?

जयश्री : (गलेमे हाथ डालते) मतलब ये की जनाब.. अब हमारी मम्मीजी अकेली हे.. पापासे डीवोर्स हो गया हे.. इनकी इतनी उमर भी नही हे.. ओर आपतो जानते हो.. अ‍ेक बार सादी होजाये तो हम ओरते उनके बीना नही रेह सकती.. जो हमारी नीड हे..

श्रीधर : (आस्चर्यसे देखते) तुम कहेना क्या चाहती हो..?

जयश्री : (मुस्कुराते) कुछ नही.. बस.. आपको आगाह कर रही हु.. अगर बीना पतीके हमारी मम्मीजीका भी पैर इधर उधर फीसल गया तो..?

श्रीधर : (जटसे बेडपे बैठते) अरे नही नही.. अ‍ैसा नही हो सकता.. मे उस कुतेको मार डालुगा..

जयश्री : (मुस्कुराते) कीसीको मारनेकी जरुरत नही हे.. क्युकी अभी तो अ‍ैसा कुछ हुआ नही हे.. लेकीन भवीस्यमे क्या होगा पता नही.. अ‍ैसा होभी सकता हे..

श्रीधर : (सामने देखते धीरेसे) यु आर राइट.. तो हम क्या करे..?

जयश्री : (मुस्कुराते धीरेसे) हमे कुछ अ‍ैसा करना पडेगा.. जीसे साप भी मरजाये ओर लाठी भी ना टुटे..

श्रीधर : (सामने देखते) मतलब..? मे कुछ समजा नही.. साफ साफ बोलो..

जयश्री : (धीरेसे नजरे चुराते) भाइ.. क्या.. हमारे घरपे भी अ‍ैसा नही हो सकता..?

श्रीधर : (मनमे खुस होते पर जाहीर नही होनेदीया) कैसा..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) बसंती आंटी ओर मुना भैयाके जैसा..

श्रीधर : (आस्चर्यसे देखते) अरे.. तुम कही पागल तो नही होगइ..? वो मां हे मेरी..

जयश्री : (थोडी सखतीसे) अच्छा..? तो फीर मे कौन थी..? साहील भाइ ओर सलमा आंटी कौन हे..? मुना भाइ ओर बसंती आंटी कोन हे..? ओर तुम सब दोस्तोने अपनी बहेनसे ही सादी की हेनां..?

श्रीधर : (सांत लहेजेमे धीरेसे) सुनो.. सुनो.. बेबी.. मे मानता हु अब हमारे गांवमे कोइ रीस्ते नाते नही रहे.. लेकीन मे तुमसे बहुत प्यार करता हु.. सीर्फ तुम्हारे बारेमे सोचता हु.. इसीलीये..

जयश्री : (बाहोमे आते) आइ नो भाइ.. मुजे पता हे आप मुजे धोखा देना नही चाहते.. लेकीन मे सामनेसे केह रही हुनां..? क्युकी अब आपको जेलना मुज अकेलीका काम नही हे.. ओर उपरसे ये बच्चा.. देखो.. मेरा पेट कीतना बहार नीकल गया हे.. ओर आपको रोज चाहीये..

श्रीधर : (मनमे बहुत खुस होते) डार्लींग.. तेरी बात तो सही हे.. लेकीन मम्मी..? वो इस बातके लीये कभी नही मानेगी..

जयश्री : (गालको सहेलाते) मानलो.. अगर वो इस बातके लीये मान गइ तो..? मे उसे मनाउगी.. (मनमे) मेरे चुदकड भाइ हां बोलदे.. वो पहेलेसे ही मान गइ हे..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) कभी नही मानेगी.. ओर अगर मान जाये.. ओर तुजे कोइ प्रोबलेम नही हे तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

जयश्री : (सामने देखकर मुस्कुराते) भाइ.. तो मानलो वो मान गइ हे.. सीर्फ आप हां कहेदो.. बाकी सब मे सम्हालुगी..

श्रीधर : (आस्चर्यसे) क्या..? वो मान गइ हे..? क्या सचमे..?

जयश्री : (मुस्कुराते) हां.. बस आप हां कहेदो.. उनकी सीर्फ अ‍ेक ही सर्त हे..

श्रीधर : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या..?

जयश्री : (मुस्कुराते) बस इतना ही.. की अ‍ेक बार हमारे मंदीरके सामने उनकी मांग भरदो.. ओर उनको मंगलसुत्र पहेनादो.. ताकी ये रीस्ता नाजायज ना कहेलाये..

श्रीधर : (खुस होते) आइ कान्ट बीलीव.. यकीन नही होता मम्मीने अ‍ैसा कहा हे.. क्या तुम दोनो सौतन बनके साथ रहोगी..?

जयश्री : (हसते) कीतने कमीने हो.. देखो मनमे कैसे लडु फुटने लगे.. हम साथ क्या अ‍ेक ही बीस्तर साजा करेगी.. फीर आप हम दोनोको ठोकते रहेना.. कमसे कम मम्मीके आजानेकी वजहसे मुजे कुछ राहत तो मीलेगी..

श्रीधर : (हसते) ठीक हे.. मे रेडी हु.. कब करनीहे सादी..?

जयश्री : (हसते अ‍ेक मुका मारते) नइ चुतके लीये कीतने उतावले हो रहे हो.. कल सुबह करले..?

श्रीधर : (हसते) ठीक हे.. तु अ‍ेक बार मम्मीसे बात करले.. मे रेडी हु..

जयश्री : (हसते बहारकी ओर जाते) अभी मम्मीको बताकर आती हु..

श्रीधर : (जयश्रीको जाते हुअ‍े देखकर हसते मनमे) कीतनी खुस हो रही हे.. अब तुजे क्या बताउ वो ओलरेडी तेरी सौतन हे.. ओर हम दोनो रोज बीस्तर गरम करते हे.. बस.. तुजे बतानेकी देर थी.. अब हम दोनो खुलके चुदाइ कर सकेगे.. ओर वो भी तेरे सामने अ‍ेक ही बीस्तरमे..

इधर जयश्री खुस होते र्बीन्दाके रुमकी ओर चली गइ.. ब्रीन्दा अपना नाइट गाउन पहेनकर सोनेकी तैयारी कर रही थी.. वो कभी अपना दरवाजा लोक नही करती थी ताकी देर रात श्रीधर उनके कमरेमे आसके.. जयश्री धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर चली गइ.. तो ब्रीन्दा उसे देखते ही..
 
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बोल.. कुछ काम था..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मम्मीजी.. वो.. वो मान गये हे.. पुछ रहेहे कब सादी करनी हे..

ब्रीन्दा : (हसते) अच्छा..? तु बता.. कब करनी हे..

जयश्री : (दोडकर हग करते) मोम.. थेन्क्स.. कल सुबह कैसा रहेगा..?

ब्रीन्दा : (मनमे खुस होते) कल ही..? इतनी जल्दी..? उनको जल्दी हे या तुजे..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मोम.. उनको नही मुजे जल्दी हे.. आपतो जानती हे वो जडीबुटीकी वजहसे दो दो बार.. ओर मे प्रेगनेन्ट हु.. तो अब बहुत तकलीफ होती हे.. प्लीज..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हंम.. बसंती केह रही थी कमीने सभी दोस्तोने वो जडीबुटी ली हे.. कोइ बात नही.. हम सुबह सादी कर लेगे..

जयश्री : (मुस्कुराते) मोम.. थेन्क्स.. आइ लव यु..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते हाथ थामते) बेटी.. थेन्क्स तो मुजे कहेना चाहीये.. क्युकी तुमने हमारी जरुरतोका खयाल रखा.. अगर मे कही भटक जाती तो हमारी बहुत बदनामी होती.. ओर उनमेसे तुमने मुजे बचा लीया.. बस.. सीर्फ अ‍ेक ही खयाल रखना..

जयश्री : (मुस्कुराते) जी.. क्या..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बस इतना.. की ये बात हम तीनोके अलावा बहार ना जाये.. तेरे मम्मी पापाको भी पता ना चले.. वरना हमारी बहुत बदनामी होगी.. ओर ये घरकी बात घरमे ही रेह जायेगी..

जयश्री : (मुस्कुराते हग करते) येस मोम.. प्रोमीस.. बहार कीसीको पता नही चलेगा.. ओर हां.. कल मम्मीका फोन आया था.. वो मुजे ओर भैयाको अपने घर खानेपे बुला रही थी..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां तो क्या हुआ.. श्रीधरको कहेना तुजे लेजाये.. तुजे उनसे गीला सीकवा रखनेकी कोइ जरुरत नही हे.. ओर वैसे भी वो सबकी माफी मांग चुकी हे.. ओर मेरे खयालसे तुजे अभी इस हालतमे बाइकपे सफर नही करना चाहीये.. तु समज रही हेनां..?

जयश्री : (मुस्कुराते) जी मोम..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) ओर सुन.. श्रीधरको बोलदे सुबह जल्दी जाकर बाजारसे दो फुलोका हार ले आये.. बाकी मेरे पास मंगलसुत्र हे.. तुम उनकी चीन्ता मत करना.. श्रीधरको कहेना वोही पहेनादे.. अब जा बहुत रात हो चुकी हे..

जयश्री : (हसते बहारकी ओर जाते) मोम.. कल रात तैयार रहेना.. अपनी सुहागरातके लीये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते) चल हट बदमास कहीकी.. (जाते ही मनमे) अब तुजे कैसे बताउ.. जब वो पढता था तब ही हम अपनी सुहागरात मना चुके हे.. ओर हनीमुन भी मना चुके हे.. बस.. अब तो हमारे प्यारकी नीशानी इस दुनीयामे लानी हे.. सीर्फ तेरे बच्चेके आनेका इन्तजार हे..

जयश्रीके जाते ही ब्रीन्दा कातील मुस्कानसे हस पडी.. क्युकी सांती ब्रीन्दा बरखा सबने मीलकर प्लान बनाकर बडी ही चालाकीसे ओर आसानीसे खुद जयश्रीके मुहसे इस रीलेशनको स्वीकार करनेके लीये मना लीया था.. ओर इस रात श्रीधर जयश्री ओर ब्रीन्दा बहुत खुस थे..





श्रीधरने खुसीके मारे जयश्रीको दो बार पीछेसे जमकर चोद लीया ओर चोद चोदके पीछवाडा भी लाल करदीया.. जयश्रीकी हालत खराब करदी.. अब जयश्री मां बेटेके मीलनके बाद जल्दसे जल्द अपनी मां वृंन्दाके पास जाना चाहती थी.. इस रात श्रीधर ब्रीन्दाके पास नही गया..

क्युकी उसे पता था की कल ब्रीन्दाके साथ सुहागरात होगी.. ओर वोभी बीना डर.. खुलके.. दुसरे दीन सुबह तीनो कंपलीट होगये.. श्रीधर जल्दीसे दो फुलहार लेकर आ गया.. ब्रीन्दाने सबसे छुपकर बसंतीको फोन करके अपने घर बुला लीया..

जयश्रीने श्रीधर ओर ब्रीन्दाको जबरदस्तीसे सादीका जोडा पहेनाया.. जयश्रीने ब्रीन्दाका हल्कासा मेकअप भी करदीया.. ब्रीन्दा आज श्रीधरसे बहुत ही सरमा रही थी.. वो नजरे चुराते श्रीधरकी ओर देखते हसती रही.. ओर चारो मंदीरके सामने आगये..





ब्रीन्दा ओर श्रीधरने मीलकर मंदीरमे दीया जलाया.. फीर र्बीन्दाने श्रीधरके गलेमे फुलोकी माला पहेनाइ.. ओर श्रीधरने भी ब्रीनोके गलेमे हार डाल दीया.. आखीर ब्रीन्दाने श्रीधरको वही मंगलसुत्र दीया जीसे पहेले ही श्रीधर उनको पहेना चुका था.. अब वो सबके सामने खुलकर पहेनने वाली थी..





फीर श्रीधरने ब्रीन्दाकी मांग भी भरदी.. खुद जयश्रीने दोनोको पती पत्नीकी कसमे खीलवाइ.. तो श्रीधर ओर ब्रीन्दा दोनो ही मनमे हस रहे थे.. दोनोको इस नाटकमे बहुत ही मजा आ रहा था.. फीर चारोने अ‍ेक दुसरेका मुह मीठा करवाया ओर होलमे आकर बैठ गये.. तभी..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) हां तो आंटी.. अब आप ओर मुना कब सादी कर रहे हे..? आपको भाभी कहेनेका बडा मन कर रहा हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) बस.. कैसे..? अभी बरखाके बापु भी हे.. तो..

श्रीधर : (मुस्कुराते) आंटी.. मेरी बात मानीये.. आप कही बहार जाकर मंदीरमे सादी कर लीजीये.. मुजे नही लगता अंकल अब ज्यादा दीन..

ब्रीन्दा : (सामने देखते) शुभ शुभ बोलो.. क्या बोल रहे हो..?

श्रीधर : (थोडा गंभीर होते) ओह.. मतलब आपको मुनाने कुछ नही बताया.. सोरी..

बसंती : (थोडी चीन्तासे) नही.. बेटा तुजे मेरी कसम.. बता क्या हुआ तेरे अंकलको..?

श्रीधर : (असहजातेसे) आंटी.. वो.. वो कल अंकलको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. तो मे ओर मुना वो डो.वसुधा दीदीको दीखाने गये थे.. तो उसने मुनासे बातकी.. लेकीन आप चीन्ता मत करना उसने अंकलको दवाइआ देदी हे.. वो ठीक होजायेगे..

बसंती : (थोडी चीन्तासे) हे भगवान.. मुना कुछ केहता भी नही..

ब्रीन्दा : अरी क्यु चीन्ता कर रही हे.. तुम चीन्ता करोगी इसीलीये नही बताया होगा.. ओर वैसे भी अ‍ेक दीन तो येसब फेइस करना ही था.. मुना हेना.. सब सम्हाल लेगा..

श्रीधर : (मुस्कुराते) आंटी.. सीर्फ मुना नही हम सब हे.. आप चीन्ता मत करो..

फीर खाना खानेके बाद बसंती जटसे अपने घर चली गइ.. तो जयश्रीने श्रीघरको कुछ फुल लानेको भेज दीया.. ताकी सुहागरातके लीये सेज सजा सके.. आज ब्रीन्दा श्रीधरको रीस्पेक्टसे बुलाने लगी.. तो श्रीधर ओर जयश्रीको भी थोडा अजीब लगा..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. आप मुजे आप आप कहेते क्यु बुला रही हे..? मे आपका बेटा हु..

जयश्री : (हसते) हां मम्मीजी.. सुननेमे कुछ अजीब लगता हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) जयश्री.. पहेले ये मेरा बेटा था.. अब पती होगया हे.. तो पतीको रीस्पेक्ट देना जरुरी हे.. हां.. बहार वालोके सामने ठीक हे.. लेकीन अब हम तीनोकी हाजरीमे मे इसे अ‍ैसेही बुलाउगी..

श्रीधर : (हसते) लेकीन मेरी चाहत कभी मेरी बीवी नही थी.. हमेसा बहेन ओर मां ही थी.. तो मे आपको मम्मी ही कहुगा.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (हसते पीठमे मुका मारते) तुम भी कीतने कमीने हो.. बीलकुल मुनाकी तराह.. वो भी बसंतीको अ‍ैसे ही बुलाता हे..

जयश्री : (हसते) क्या बसंती आंटी आपको सब कुछ बता देती हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां वो कमीनी मेरी पकी सहेली जो हे.. बेटा अब तुजे भी अपना खयाल रखना पडेगा.. देख जयश्रीका पेट कीतना नीकल गया हे.. डीलीवरीका समय भी नजदीक आ रहा हे..

जयश्री : (धीरेसे) मोम.. मे सोच रही थी.. अब आप दोनोकी सादी तो हो गइ हे.. तो मे कुछ दिन मम्मीके पास चली जाउ..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां वैसे भी तेरी पहेली डीलीवरी हे.. तो अपने मायके मे ही होती हे.. हम अगले हप्ते तेरी गोद भराइकी रस्म करेगे.. फीर अपनी मम्मीके घर चली जाना.. मे ओर हमारे पती उधर आते जाते रहेगे..

जयश्री : (मनमे खुस होते) थेन्कयु मोम.. लव यु..

इस रात जयश्रीने अपने हाथोसे ब्रीन्दाका बेड सजाया.. आज पुरी रात श्रीधर ओर ब्रीन्दाने खुलकर.. बीना डर अपनी सुहागरात मनाइ.. पुरी रात श्रीघर वायाग्रा खाकर ब्रीन्दाको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा.. दोनोने सुबह पांच बजे तक प्यार कीया.. ओर अ‍ेक दुसरेसे नंगेही चीपकके सो गये..





तो दुसरी ओर मुना ओर उनकी मामी गीता भी चेटपे बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. दोनो हल्कीसी मजाक.. मुना कभी उसे नोनवेज चुटकुला भेज देता.. ओर गीताको मौका मीलते ही दोनो फोनपे खुलकर बाते करने लगे.. ओर बात इतनी आगे बढ गइ की अ‍ेक दुसरेके साथ फ्लर्ट भी करने लगे..

तो गांवमे डो. वसुधा भी मुनाके साथ खुलकर बाते करने लगी थी.. जीस तराह वो डो. सुधीर था ओर मुनासे खुलकर बाते करके अपने आपको संतुस्ट करनेको कहेता.. बस.. सीर्फ यही अ‍ेक बाकी रेह गया था.. लेकीन अभी तक उसने मुनासे अपनी पहेचान छुपाके रखी थी..

लेकीन अ‍ेक दो बार लखन मुनाको मीलने क्लीनीकपे गया तो वसुधाका मन लखनको देखकर भी भटकने लगा था.. वो लखनका चहेरा देखते ही उनकी ओर आकर्सीत होने लगी थी.. ओर दुसरी बार लखन मीलने गया तो वसुधा उनसे बाते करते मेल जोल बढाने लगी..
 
दीन बीतने लगे.. अब रश्मी भी अपने नये घरमे जा चुकी थी.. वो ओर वंदना साथ ही रहेने लगी थी.. तो चारु कभी कभी नीशाको लेकर अपने पुराने घरपे रहेती.. उन दोनोको देवायतका प्यार मीलता रहा.. ज्यादातर वो नीशाके घरपे वसुधाके साथ ही रहेने लगी.. जीसे वसुधा भी बहुत खुस थी..

चारुने अब सरपंचका काम बहुत अच्छी तराह सम्हाल लीया था.. ओर इनकी सुज बुजसे गांवको काफी फायदा भी मीलने लगा.. तो गांव वालेभी उनके कामकी सराहना करते थे.. अ‍ैसा लगता था पुरे गांवमे वुमन पावर चल रहा था.. स्कुल ओर होस्पीटलके काममे भी बहुत तेजी आगइ थी.. सब काम जल्दीसे पुरा होने लगा था..

चारुका ज्यादातर काम जो सहेरमे पंचायतकी ओफीसका था वो लखन ही कर देता था.. जीसे लखनकी पंचायतकी ओफीस ओर कलेक्टरकी ओफीसमे बहुत सी जान पहेचान हो चुकी थी.. ओफीसमे सबको पता चल गया था.. की ये लखन बडे ठाकुरके छोटे भाइ हे..

तो सब लखनको छोटे ठाकुर करते बुलाते ओर उनकी बहुत रीस्पेक्ट करते.. इसी बीच कामके सीलसेलेमे तीन चार बार धृवके पीताजीसे भी मुलाकात हुइ.. धृवके पीता भी लखनको अच्छी तराह पहेचानते थे.. ओर उपरसे अपने बेटेका धृवका खास दोस्त..

फीर देजायत ओर लखनके प्रयाससे भीमा भी गांवका सरपंच होगया.. जीसे भीमा बहुत खुस होगया.. ओर लखनकी भीमाके साथ ओर घनीस्टता बढ गइ.. जबभी लखन गांव जाता कभी कभी बीच रास्तेमे भीमाको उनके घर मीलकर जाता.. तो भीमाकी बीवी पायल बहुत खुस हो जाती..

भीमा उस बातसे अंजान थाकी उनकी बीवी पायल ओर लखनके बीच रीलेशन सुरु होगया हे.. अ‍ेक दीन भीमा दो दीनके लीये बहार गावमे था तब पायलने लखनको अपने घर बुला लीया.. ओर उसी दीन दोनोके बीच सारीरीक सबंध स्थापीत होगये..





उस दीन पायल बहुत चीखी चीलाइ.. लेकीन उसने लखनके साथ वो संतुस्टी हासील करली जो कभी भीमा ओर धिरेन नही दे पाये.. फीर तो जब भी मौका मीलता पायल लखनको बुला लेती ओर अपनी प्यास बुजा लेती.. ओर नतीजेके फल स्वरुप वो लखनसे प्रेगनेन्ट होगइ..

भीमा भी पायलसे बहुत प्यार करता था.. जब उसे पता चला पायल पेटसे हे तो बहुत खुस हुआ ओर पुरे गांवमे लडु बाटे.. लेकीन इस बातकी असली वजह सीर्फ लखन ओर पायल ही जानते थे.. ओर जानते थे मंजु ओर पुनम.. मतलब.. वीजयके लीये अ‍ेक ओर लडकीका इन्तजाम..

देवायत भी हप्तेमे अ‍ेक बार सहेर आता ओर सीधा नीर्मला भुमी ओर भावनाके पास चला जाता.. वो अपने पतीका फर्ज अदा करते तीनोको संतुस्ट करता.. पुरा दीन तीनोकी चुदाइ करके सामको गांव वापस चला जाता.. वो नीशा चारु ओर वंदना रश्मीका भी अ‍ैसे ही खयाल रखता..

तो दुसरी ओर लखन पुनम ओर सृतीके बीच प्यार ओर गहेरा होगया.. लेकीन लखनके दुसरी ओरतोके साथ रीलेशनसे सृती उनसे नाराज हो जाती.. ओर पुनम उनको समजाती.. लेकीन लखन तो सीर्फ पुनमकी बाते ही मानता.. ओर उनको पुछकर सबकी प्यास बुजाता..

लखन दीनमे राधीका तो रातमे रजीया सृती ओर पुनमकी जमकर ठोकते हालत बीगाडता.. ओर अ‍ैसे ही अ‍ेक दीन मस्तीया करते अ‍ेक गेम खेलने लगे.. जीनमे राधीका सामील नही हुइ.. गेममे जो जीतता उसे लखनके साथ चुदाइ करनी थी.. ओर इस खेलमे सृती कइ बार जीती..





इस रात लखनने सृतीको पांच बार जबरदस्त तरीकेसे सबके सामने चोद लीया.. ओर सृतीकी हालत बीगड गइ.. रातमे तो कुछ नही हुआ ओर दीनमे भी सभी देरसे उठे ओर चाइ नास्ता करके अपने अपने कामपे लग गये.. राधीका होस्टेल तो सृती क्लीनीकपे जा चुकी थी..

सृती अपने पेसन्टको देख रही थी.. तभी उसे अचानक अपने नीचे गीलापन पहेसुस हुआ जो कुछ गर्म लग रहाथा.. उसने देखा तो उनकी चेरकी पुरी सीट खुनसे लथबथ थी.. सृती बहुत कुछ समज थइ.. ओर उसने पेसन्टको बहार जानेको कहेकर फोरन अपनी दोस्त भावीकाको फोन करके बुला लीया..

फीर बेल बजाकर नर्सको ओपरेशनकी तैयारीया करनेको कहेते खुद मुस्कीलसे ओपरेशन थीअ‍ेटरमे चली गइ.. ओर सिटपे लेट गइ.. फीर उसने लखनको फोन करके जल्दीसे क्लीनीकपे आनेको केह दीया.. नर्स स्टाफको भी पता चल गयाकी कुछ तो गडबड हे..

वो सभी लोग दोडधाम करते सब तैयारीया करने लगी.. अ‍ेक नर्स सृतीको पेड लगाते खुन रोकनेकी कोसीस करने लगी.. काफी खुन बेह गया.. जीसे सृती अपना होस खोने लगी.. तभी उसे जटसे अंदर आती भावीका नजर आइ.. ओर सृती बेहोस होगइ.. रास्तेपे अ‍ेम्ब्युलन्स इमरजन्सीकी आवाज लगाते दोड रही थी.. पीछे लखन सबको फोन करते कार दोडा रहा था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७३

वो सभी लोग दोडधाम करते सब तैयारीया करने लगी.. अ‍ेक नर्स सृतीको पेड लगाते खुन रोकनेकी कोसीस करने लगी.. काफी खुन बेह गया.. जीसे सृती अपना होस खोने लगी.. तभी उसे जटसे अंदर आती भावीका नजर आइ.. ओर सृती बेहोस होगइ.. रास्तेपे अ‍ेम्ब्युलन्स इमरजन्सीकी आवाज लगाते दोड रही थी.. पीछे लखन सबको फोन करते कार दोडा रहा था.... अब आगे

जब सृतीको होस आया तो वो आइ.सी.यु.मे थी.. उनके चहेरेपे ओक्सीजन मास्क लगा हुआ था.. उनको बहुत ही कमजोरी महेसुस हो रही थी.. अ‍ेक पल तो वो सब देखती रही.. तभी उसे धीरे धीरे करते सब याद आने लगा.. की उनकी तबीयत कैसे बीगड चुकी थी..

सृतीने आजु बाजु नजर घुमाइ.. तो बाजुमे उनका हाथ थामे पुनम बैठी थीे.. सृतीको होंसमे आते देखते ही उनकी आंखसे हर्षके आंसु नीकल गये.. ओर उसने जोरोसे आवाज करते डोक्टरको बुलाया.. तो अ‍ेक डोक्टर दोडकर आगइ.. ओर उसने भावीकाको बुला लीया..

भावीकाने उनको चेक कीया ओर उनके मुहसे राहतकी मुस्कान आगइ.. उसने सृतीको ओक्सीजन मास्क पहेना दीया.. ओर वही बैठ गइ.. उनकी आंख गीली होगइ.. वो सृतीका हाथ थामते मुस्कुराती रही.. सृतीने दरवाजेकी ओर देखा..

तो बहार खीडकीसे कांचकी दुसरी ओर मंजु नीर्मला भुमीका देवायत राधीका रजीया नीलम सबलोग खडे अंदरकी ओर उत्सुक्तासे देख रहे थे.. तभी सृतीको समज आयाकी परीस्थीती बहुत गंभीर हो गइ थी.. सृतीकी नजर लखनको ढुंढने लगी.. लेकीन लखन कही नही दीखाइ दीया तब पुनमकी ओर देखते धीरेसे..

सृती : (कमजोरीसे धीरेसे) दी..दी.. ल..ख..न..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) फीकर मत करो.. यही हे..

भावीका : (हसते) कमीनी तेरा लखन कही नही गया.. इधर ही हे.. आराम कर रहा हे..

सृती : (हल्केसे मुस्कुराते) आ..रा..म.. क्या हुआ..?

भावीका : (मुस्कुराते) वो सब बादमे.. पहेले थोडा आराम करले.. बादमे बताउगी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अगर आपको अ‍ेतराज ना होतो सबको अ‍ेक बार सृती दीदीको देखना हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां लेकीन इनसे बाते मत करना.. दो दो करके सब लोग देखलो..

फीर दो दो करके सबलोग मास्क पहेनकर सृतीको देखने आये.. सृती सबके सामने मुस्कुराती रही.. लेकीन भुमीका ओर मंजुके सामने उनके आंसु नीकल गये.. क्युकी वो खुद डोक्टर थी तो जानती थी की उनके साथ क्या हुआ हे.. उनको देखकर भुमीकाकी आंखसे आंसु नीकल गये..

नीर्मला : (भुमीकाको सम्हालते) भुमी.. इनके सामने आंसु मत बहाओ.. अब कोइ खतरा नही हे.. हमारे लीये यही बहुत हे.. चल बहार..

फीर भावीकाने सृतीको अ‍ेक इन्जेक्शन दीया.. जीसे कुछ ही देरमे सृती नींदकी आगोसमे चली गइ.. फीर वो ओर पुनम मुस्कुराते बहार आगये.. ओर सबको बताया की अब सृती खतरेसे बहार हे तो सबने राहतकी सास ली.. फीर पुनम लखनके पास चली गइ.. जो अ‍ेक बेडपे आराम कर रहा था..

दरसल सृती जब बेहोस हुइ उसी वक्त भावीकाके पीछे लखन भी आगया था.. भावीकाने सृतीको देखकर केसकी गंभीरता समजी.. ओर वो अ‍ेम्ब्युलन्सका इन्तजाम करनेके लीये जटसे बहार आइ तो उसने लखनको देखा ओर उसे इन्तजाम करनेको कहेकर अंदर चली गइ..

उसने सृतीका ट्रीटमेन्ट वही सुरु करदीया.. ओर छोटासा ओपरेशन करके खुनको रोक लीया.. सृती अब भी बेहोस थी.. उनको ओक्सीजन मास्क लगाया हुआ था.. फीर अ‍ेम्ब्युलन्स आगइ तो सृतीको भावीकाने अपनी होस्पीटल सीफ्ट कर दीया..

ज्यादा खुन बेह गया था.. तो भावीका सृतीको खुन चढानेके लीये दोडधाम ओर फोन करती रही.. लेकीन सृतीके गृपका खुन कही नही मील रहा था.. तबतक पुनम भावना नीर्मला रजीया सबलोग आ चुके थे.. ओर पुनमने फोन करके मंजुसे भी बात करली थी..

भावीकाने पुनमको अपनी समस्या बताइकी सृतीका खुन नही मील रहा.. तो पुनमने उसे लखनका खुन चेक करनेको कहा.. ओर भावीकाने लखनके खुनकी जांचकी.. ओर लखनका खुन मेच होगया.. भावीकाके चहेरेपे राहत छलक उठी.. उसने वही लखनका खुन नीकालना सुरु करदीया..
 
फीर कुछ प्रोसेसके बाद सृतीको लखनका खुन चढाया.. ओर कुछ ही घंटोके बाद सृतीको होस आगया.. तबतक रातके तीन बज चुके थे.. कीसीको पता नही थाकी सृती चौदा घंटे तक बेहोस रही.. ओर खुन नीकालनेकी वजहसे लखनको भी थोडी कमजोरी महेसुस हो रही थी..

इसीलीये उनको कोफी बीस्कीट खीलाकर कुछ घंटे आराम करनेके लीये कहा गया.. साम होनेसे पहेले देवायत भानु ओर मंजु भी गांवसे आगये थे.. पुनम लखनके रुममे आगइ.. ओर दरवाजा बंध करके लखनके पास चली गइ ओर उनको जोरोसे लीपट गइ..

पुनम : (खुसीसे मुस्कुराते) लखन.. हमारी सृतीको होंस आगया हे.. वो खतरेसे बहार हे..

लखन : (पुनमको बाहोमे भीचते खुसीसे) क्या सचमे..? थेन्क गोड..

पुनम : (मुस्कुराते) लखन.. अब आपको कैसा लग रहा हे..? आप ठीक तो हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही हुआ.. आइ अ‍ेम फाइन.. लेकीन दीदीको क्या हुआ था..?

पुनम : (अलग होते उनकी आंखोमे देखते धीरेसे) मीसकेरीज.. मतलब.. उनका बच्चा गीर गया..

लखन : (आंखसे आंसु टपक गये) मगर कैसे..? उनकी वजह मे हुनां..? मतलब.. ज्यादा सेक्स..

पुनम : (नामे गरदन हीलाते) नही.. अपने आपको दोसी मत मानो.. क्युकी ये सब तो होना ही था.. क्युकी ये सब उसने ही तैय कीया था..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते) मतलब.. जीस दीन उसे भुमीआंटी ओर बडे भैयाके बारेमे पता चला तब ही उसने तैय करलीया थाकी हम मां बेटी अ‍ेक ही इन्सानके बच्चेकी मां नही बनेगी.. ओर वो इस बारेमे गंभीरतासे सोच भी रही थी.. ओर ये हादसा होगया..

लखन : (सामने देखते) लेकीन भैयाका अंस जरुरी थानां..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. सीर्फ मेरे.. भावना भाभी.. ओर लताके लीये जरुरी था.. बाकी अब जडी बुटीकी वजहसे आप भी इतना सक्षम होगये होकी आप हममेसे कीसीको भी प्रेगनेन्ट कर सकते हो..

लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको भी..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. मुजे भी.. अगर आप चाहोगे तो हम हमारा बच्चा पैदा करेगे.. लेकीन मेरी बेटीके आनेके बाद..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) आप क्या चाहती हो..?

पुनम : (जोरोसे भीचते) नही भाइ.. मुजे आपका प्यार ही काफी हे.. मे नही चाहती मेरी दोनो बेटीया कीसी गलत इन्सानका सीकार होजाये.. अ‍ेक ही काफी हे.. फीर भी आपकी इच्छा होगी तो हम जरुर हमारा बच्चा पैदा करेगे..

लखन : (बालोको सहेलाते) नही दीदी.. मुजे पता हे आपको सब पता चल जाता हे.. मे नही चाहता हमारे बच्चेके साथ भी कुछ गलत हो.. हम अ‍ैसे ही खुस हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. फीकर मत करो.. सृतीदी.. ओर भावना भाभी आपके बच्चे पैदा करेगी.. फीर नीलु भी हे.. ओर कुछ घरकी ओर बहारकी लडकीया ओर ओरते भी होगी.. जो आपके अंसको पाना चाहती हे.. फीर हमारी राधुदीदी रजुदीदी ओर रमा भाभी भीतो हे..

लखन : (सर सहेलाते) दीदी क्या ये सब सही हे..?

पुनम : (अलग होते सामने देखकर मुस्कुराते) हां लखन.. ये बात आपको अभी समजमे नही आयेगी.. आगे चलकर आपको सब पता चल जायेगा.. सीर्फ इतना याद रखो.. की मोममे आपको क्या कहा हे..? की सबकी भावनाओका सन्मान करो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. ये कैसा सन्मान हे..? मुजे पता हे इस सन्मानका मतलब क्या हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) नही भाइ.. यहा सन्मानका मतलब मजे करना या सीर्फ सेक्स करना नही हे.. उनको संतान सुख देना हे.. ओर ये कमीनी भी तो यही चाहती हे.. जो कलसे ही आपके उपर नजर गडाये बेठी हे.. बस.. इस बातका सृती दीदीको पता नाचले.. वो बहुत जलतीहे इनसे..

लखन : (हसते) कौन..?

पुनम : (हसते) ये सृतीदीकी डाक्टरनी फ्रेन्ड.. ओर आपके दोस्तकी बीवी.. भावीका..

लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? भावीका भाभी..? लेकीन धृव तो बच्चा देनेमे सक्षम हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी हे जो भावीका नही चाहती की धृवसे बच्चा हो..

लखन : (आस्चर्यसे) लेकीन क्यु..?

पुनम : (मुस्कुराते) वो जब मीलोगे तब पता चलेगाकी क्यु.. वो बहुत कुछ जानती हे..

दोनो बाते कर रहेथे तभी सबलोग रुममे आगये.. तो पुनम सरमाकर मुस्कुराते खडी होगइ.. ओर मंजु मुस्कुराते लखनके पास आकर बैठ गइ.. फीर प्यारसे लखनके सरको सहेलाती रही.. तो भुमीकाने भी लखनको गले लगा लीया.. ओर आंसु बहाने लगी..
 
भुमीका : (गाल सहेलाते) बेटा.. तुमने मेरी सृतीको बचा लीया.. उनको नइ जींदगी दी हे.. वरना उनका क्या होता..? क्युकी उनकी सहेलीने बताया खुन नही मील रहा था..

लखन : (हसते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हो..? वो बीवी हे मेरी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते अ‍ेक मुका मारते) भाभीके बच्चे.. अपनी हरकतोसे बाज नही आओगे.. ठीक हे.. आजसे तु मेरा पका वाला देवर.. अब देखना मे तुजे कोइ अपना दामाद बामाद नही मानुगी..

लखन : (हसते) पका.. डन..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) देवर वाली.. भाभी बनोगी तो देखना फस जाओगी.. हें..हें..हें..

लखन : (देवायतकी ओर देखते) भैया.. अब आप सबको लेकर हमारे घर चले जाइअ‍े.. सबलोग कुछ आराम बाराम करलो.. मे ओर पुनोदी यहा हे.. अब कोइ चीन्ताकी बात नही हे..

भुमीका : (जोरोसे पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. अब तुम दोनोकी सादी होगइ हे.. अबतो उसे दीदी बुलाना छोडदे..

लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. लगता हे अभी आपको पुरी तराह हमारे खानदानके बारेमे पता नही हे.. आप अ‍ेक बार भैयासे पुछ लेनां.. हें..हें..हें..

भुमीका : (दांत पीसते मुका मारते) नही पुछना आपके भैयासे.. मे सब जानती हु.. तुम दोनो भाइ अ‍ैक जैसे ही हो.. चलो नीरु.. ये लडका तो बीलकुल बीगड गया हे..

देवायत : (हसते) भुमी.. लखनके सामने तेरी दाल गलने वाली नही हे.. चल घर..

लखन : (हसते) भाभी.. सबलोग हमारे घरपे ही चली जाओ..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटे सबलोग वही आ रही हे.. अगर कुछ काम होतो फोन करना..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मे ओर लखन यही रुके हे..

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. जो खतरा था सब टल गया.. हम सुबह जल्दी आयेगे..

लखन : (मुस्कुराते) ओके मोम.. हमारी चीन्ता मत करना.. आरामसे आना.. सबको गुड नाइट..

कहा तो सबलोग लखनको गुड नाइट करते चले गये.. देवायत ओर भानु दो कारसे सबको लेकर लखन वाले बंगलेपे चला गया.. ओर देर रात होनेकी वजहसे सबलोग अलग अलग कमरेमे सोगये.. तो इधर स्पेसयल रुम था.. तो पुनम ओर लखन अ‍ेक साथ नींदकी आगोसमे चले गये..

रात मे जाते वक्त भावीका लखनसे बात करना चाहती थी लेकीन जैसे ही रुममे आइ लखन ओर पुनम अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे गहेरी नींद सो रहे थे.. तो भावीका दोनोको देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध करके अपने घर चली गइ..

सुबह छे बजे पुनम लखनको सोता हुआ छोडकर सृतीके पास चली गइ.. तो सृती जाग चुकी थी.. कलसे उनकी तबीयत आज बहुत ही बेटर थी.. तबतक भावीका भी आ चुकी थी.. ओर आते ही उसने सृतीको चेक करलीया.. ओर वही पुनमके पास बैठ गइ..

भावीका : (हसते धीरेसे) हां तो कुती अब कैसा लग रहा हे..? सब ओके..?

सृती : (हसते धीरेसे) कमीनी सुबह सुबह तो गालीया मत दे.. पुनो दीदी यही हे..

भावीका : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही यार.. वोभी तो हमारी ननंद ही हे..

सृती : (थोडा जीजकते धीरेसे) नही भावु.. अब वो मेरी ननंद नही हे.. हम दोनो बहेन हो चुकी हे..

भावीका : (आसचर्यसे देखते धीरेसे) ननंद नही हे..? बहेन हो चुकी हे..? मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) मतलब.. हम दोनो सौतने हे.. हमारे लखन भैयाकी बीवीया..

भावीका : (आसचर्यसे चोंकते) व्होट..? मतलम तुमने तेरे देवरसे सादी करली..? कब..?

सृती : (मुस्कुराते) जब तुमसे अपनी प्रेगनन्सी चेक करवाने आइ थी तब मेरा डीवोर्स हो चुका था.. तब मे ओर लखन ओलरेडी रीलेशनमे थे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे.. ओर मेने लखनसे सादी करली हे.. ओर हाल ही मे पुनम दीदीकी भी सादी हुइ हे..

भावीका : (हसते) हां.. धृव केह रहे थे.. की वो पुनम दीदीसे प्यार करते थे.. तो हो गइ सादी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. हम होटेलमे मीले तब हम हमारी सादीकी खरीदी करने ही आये थे..

भावीका : (हसते) ग्रेट यार.. तुम अ‍ेक रोयल फेमीलीसे हो ओर तुम सब आपसमे ही भाइ बहेन सादी करते हो.. कीतना रोमांचकारी हे.. कास मेरा भी कोइ भाइ होता.. तो मेभी उनसे सादी कर लेती..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) भावु.. अ‍ेक सच ओर बतादु.. मे भी लखनकी बहेन हु.. मेरे ओर लखनके पीता अ‍ेक ही हे.. मेरी मम्मी मेरे असली पीताकी मुह बोली बहेन थी.. ओर मेरे पालक पीता बच्चे देनेमे सक्षम नही थे.. तो मम्मीने राखीके तोहफेमे अपनी कोख भराइ मांगली..
 
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