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कादीर : (मुस्कुराते) साहील.. हमने तो उमीद ही छोड दी थी.. की कभी अबु अम्मी हमे माफ करगे.. मेने बहुत सारी गलतीया की हे.. जीसकी कोइ माफी नही हे..
साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाइअे सब.. वक्त बदलता हे.. मेरे सभी दोस्तोने भी अपनी बहेनसे सादी कीहे.. खुद लखन भैयाने हाल हीमे कीहे.. कुछ गलत नही.. बस आप अपने घर रहेने चले जाओ.. बाकी बताओ.. कैसे चल रही हे अपनी जोब..? सब सेट होगया..?
कादीर : (सायराकी ओर मुस्कुराते) हां भाइ.. वही बता रहा हु.. खाली जोबसे कुछ नही होगा.. मे मेरे कुछ पर्सनल प्रोजेक्ट भी सुरु करना चाहता हु.. लेकीन इनमे टुर भी रहेती हे.. ओर तुम तो जानते हो मे सायराको अकेला नही छोड सकता..
साहील : (मुस्कुराते) क्यु..? बात अगर बीजनेसकी हेतो छोडना ही पडेगा..
कादीर : नही साहील.. बात अगर अेक दीनकी होती तो चला जाता.. यहा तो दो तीन दीन भी लग सकता हे ओर कभी कभी हप्ता भी.. अगर अबु अम्मीके साथ रीस्ता अच्छा होता तो अेक दो दीन मे सायराको वहा छोड देता.. इसीलीये कुछ नया नही कर पा रहा हु..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ मे आपकी प्रोबलेम समज गया.. अगर अैसा हेतो आप सायरा दीदीको हमारे घर छोड सकते हो.. वहा मेरी चार चार बीवीया हे.. टाइम नीकल जायेगा..
कादीर : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आपकी चार चार सादीया होगइ..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. हालहीमे मेने चोथी सादी मेरी बहेनसे करली हे.. क्युकी उनका डीवोर्स हो गया था तो मेने सादी करली..
कादीर : (मुस्कुराते) थेन्क्स भाइ.. मे अेक प्रोजेक्ट कबसे इसी कारण डीले कर रहा हु.. अगर तुम दो तीन दीन यहा तेरी बहेनके साथ रहेने आजाते तो मे काम खतम करके आजाउगा.. तबतक तुम दोनो भाइ बहेन घरकी थोडी पेकींग भी करलेना.. फीर हम वहा चले जायेगे..
सायरा : (खुस होते मनमे सोचने लगी) या खु.. क्या मौका दीया हे आपने.. साहील आजाये तो कीतना अच्छा होगा.. मे ओर साहील दोनो अकेले होगे.. हम जैसे चाहे मस्तीया कर पायेगे.. कास साहील हां कहेदे.. क्युकी इतने दीनोके बादभी कादीरसे तो कुछ हो नही सका.. सायद साहीलसे ही उमीद बंध जाये..
साहील : (मुस्कुराते) अच्छा कब जाना हे आपको..?
कादीर : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या सचमे रुकोगे..? आपको खेतीका काम तो नही रुकेगा..?
साहील : (मुस्कुराते) नही अब वहा चाचा हेना.. सब सम्हालते हे.. तो मे नीकल सकता हु..
कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो अगले सेटरडे आजा.. मे मन्डे दो पहोर तक वापस आजाउगा.. अगर ये प्रोजेक्ट मील गया तो बहुत तगडे पैसे मीलेगे यार..
सायरा : (हसते) कीतने महीने होगये साहीलसे बात नही हुइ.. इसी बहाने उनसे बाते भी हो जायेगी.. ओर पेकींग भी होजायेगी.. भाइ मे अगले शनीवार आपका इन्तजार करुगी.. हो सके तो अगले दीन सामको ही आजाओ..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. तो फीर मे शुक्रवार सामको ही आजाता हु.. बाते करते घरकी पेकींग भी होजायेगी.. ओर आपकी बीजनेस टुर भी हो जायेगी.. आप आओगे तब हम सामान भी सीफ्ट करदेगे..
कादीर : (खुस होते) थेन्कस भाइ.. बस यही घरका सपोर्ट मीस कर रहा हु..
साहील : (मुस्कुराते) अब समजमे आयानां..? भाइ.. बुरा मत मानना.. बस यही सपोर्ट सबाना दीदीको चहीये था.. जो आप अेन्ड वक्तपे सबकुछ छोडकर चले गये..
कादीर : (आंख गीली करते) भाइ सोरी.. बस यही मेने सबसे बडी गलती करदी.. उस लडकीका सपना तोडके आगया.. मे सबसे नजरे मीला पाउगा.. लेकीन सबानासे नही..
साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाओ सब पुरानी बाते.. अब नइ सुरुआत करो..
कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ मे शनीवर सुबहकी टीकीट बुक करलेता हु.. मुजे स्टेशन छोडने भी आजाना..
साहील : (खडा होते कादीरको गले मीलते) ठीक हे भाइ.. टीकीट बुक करलो मे शुक्रवार सामको आजाउगा.. हम चलते हे..
सायरा : (आगे आते) अरे.. अैसे कैसे..? खाना खाकर जाना.. मे अभी बना लुगी..
साहील : (मुस्कुराते) नही दीदी.. वहा लखन भैयाके घर पुनम भाभीने बनालीया हे.. खाना खाकर मे गांव नीकल जाउगा.. फीर तो आना ही हे.. तब खुब दबाके खाउगा.. हें..हें..हें..
सायरा : (हसते) क्या..? पुनम दीदीको भाभी कहेते हो..?
लखन : (मुस्कुराते) हम सारे दोस्त.. जीन्होने अपनी बहेनके साथ सादीया करली हे.. हम सब उनकी बीवीको भाभी ही कहते हे.. आपने भी भाइसे सादी करली हे ध्यान रखना.. हें..हें..हें..
कहा तो सायरा खुब सर्मसार होगइ ओर हसने लगी.. तभी वो साहीलके गले लग गइ.. ओर इस बार थोडा साहीलको ज्यादा भीच लीया.. तो साहीलका खडा लंड सायराको अेक बार फीर चुभने लगा.. लेकीन इस बार सायरा नही हटी.. ओर साहीलके कानमे धीरेसे फुस फुसाइ..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाइअे सब.. वक्त बदलता हे.. मेरे सभी दोस्तोने भी अपनी बहेनसे सादी कीहे.. खुद लखन भैयाने हाल हीमे कीहे.. कुछ गलत नही.. बस आप अपने घर रहेने चले जाओ.. बाकी बताओ.. कैसे चल रही हे अपनी जोब..? सब सेट होगया..?
कादीर : (सायराकी ओर मुस्कुराते) हां भाइ.. वही बता रहा हु.. खाली जोबसे कुछ नही होगा.. मे मेरे कुछ पर्सनल प्रोजेक्ट भी सुरु करना चाहता हु.. लेकीन इनमे टुर भी रहेती हे.. ओर तुम तो जानते हो मे सायराको अकेला नही छोड सकता..
साहील : (मुस्कुराते) क्यु..? बात अगर बीजनेसकी हेतो छोडना ही पडेगा..
कादीर : नही साहील.. बात अगर अेक दीनकी होती तो चला जाता.. यहा तो दो तीन दीन भी लग सकता हे ओर कभी कभी हप्ता भी.. अगर अबु अम्मीके साथ रीस्ता अच्छा होता तो अेक दो दीन मे सायराको वहा छोड देता.. इसीलीये कुछ नया नही कर पा रहा हु..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ मे आपकी प्रोबलेम समज गया.. अगर अैसा हेतो आप सायरा दीदीको हमारे घर छोड सकते हो.. वहा मेरी चार चार बीवीया हे.. टाइम नीकल जायेगा..
कादीर : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आपकी चार चार सादीया होगइ..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. हालहीमे मेने चोथी सादी मेरी बहेनसे करली हे.. क्युकी उनका डीवोर्स हो गया था तो मेने सादी करली..
कादीर : (मुस्कुराते) थेन्क्स भाइ.. मे अेक प्रोजेक्ट कबसे इसी कारण डीले कर रहा हु.. अगर तुम दो तीन दीन यहा तेरी बहेनके साथ रहेने आजाते तो मे काम खतम करके आजाउगा.. तबतक तुम दोनो भाइ बहेन घरकी थोडी पेकींग भी करलेना.. फीर हम वहा चले जायेगे..
सायरा : (खुस होते मनमे सोचने लगी) या खु.. क्या मौका दीया हे आपने.. साहील आजाये तो कीतना अच्छा होगा.. मे ओर साहील दोनो अकेले होगे.. हम जैसे चाहे मस्तीया कर पायेगे.. कास साहील हां कहेदे.. क्युकी इतने दीनोके बादभी कादीरसे तो कुछ हो नही सका.. सायद साहीलसे ही उमीद बंध जाये..
साहील : (मुस्कुराते) अच्छा कब जाना हे आपको..?
कादीर : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या सचमे रुकोगे..? आपको खेतीका काम तो नही रुकेगा..?
साहील : (मुस्कुराते) नही अब वहा चाचा हेना.. सब सम्हालते हे.. तो मे नीकल सकता हु..
कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो अगले सेटरडे आजा.. मे मन्डे दो पहोर तक वापस आजाउगा.. अगर ये प्रोजेक्ट मील गया तो बहुत तगडे पैसे मीलेगे यार..
सायरा : (हसते) कीतने महीने होगये साहीलसे बात नही हुइ.. इसी बहाने उनसे बाते भी हो जायेगी.. ओर पेकींग भी होजायेगी.. भाइ मे अगले शनीवार आपका इन्तजार करुगी.. हो सके तो अगले दीन सामको ही आजाओ..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. तो फीर मे शुक्रवार सामको ही आजाता हु.. बाते करते घरकी पेकींग भी होजायेगी.. ओर आपकी बीजनेस टुर भी हो जायेगी.. आप आओगे तब हम सामान भी सीफ्ट करदेगे..
कादीर : (खुस होते) थेन्कस भाइ.. बस यही घरका सपोर्ट मीस कर रहा हु..
साहील : (मुस्कुराते) अब समजमे आयानां..? भाइ.. बुरा मत मानना.. बस यही सपोर्ट सबाना दीदीको चहीये था.. जो आप अेन्ड वक्तपे सबकुछ छोडकर चले गये..
कादीर : (आंख गीली करते) भाइ सोरी.. बस यही मेने सबसे बडी गलती करदी.. उस लडकीका सपना तोडके आगया.. मे सबसे नजरे मीला पाउगा.. लेकीन सबानासे नही..
साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाओ सब पुरानी बाते.. अब नइ सुरुआत करो..
कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ मे शनीवर सुबहकी टीकीट बुक करलेता हु.. मुजे स्टेशन छोडने भी आजाना..
साहील : (खडा होते कादीरको गले मीलते) ठीक हे भाइ.. टीकीट बुक करलो मे शुक्रवार सामको आजाउगा.. हम चलते हे..
सायरा : (आगे आते) अरे.. अैसे कैसे..? खाना खाकर जाना.. मे अभी बना लुगी..
साहील : (मुस्कुराते) नही दीदी.. वहा लखन भैयाके घर पुनम भाभीने बनालीया हे.. खाना खाकर मे गांव नीकल जाउगा.. फीर तो आना ही हे.. तब खुब दबाके खाउगा.. हें..हें..हें..
सायरा : (हसते) क्या..? पुनम दीदीको भाभी कहेते हो..?
लखन : (मुस्कुराते) हम सारे दोस्त.. जीन्होने अपनी बहेनके साथ सादीया करली हे.. हम सब उनकी बीवीको भाभी ही कहते हे.. आपने भी भाइसे सादी करली हे ध्यान रखना.. हें..हें..हें..
कहा तो सायरा खुब सर्मसार होगइ ओर हसने लगी.. तभी वो साहीलके गले लग गइ.. ओर इस बार थोडा साहीलको ज्यादा भीच लीया.. तो साहीलका खडा लंड सायराको अेक बार फीर चुभने लगा.. लेकीन इस बार सायरा नही हटी.. ओर साहीलके कानमे धीरेसे फुस फुसाइ..









