Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 103 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

कादीर : (मुस्कुराते) साहील.. हमने तो उमीद ही छोड दी थी.. की कभी अबु अम्मी हमे माफ करगे.. मेने बहुत सारी गलतीया की हे.. जीसकी कोइ माफी नही हे..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाइअ‍े सब.. वक्त बदलता हे.. मेरे सभी दोस्तोने भी अपनी बहेनसे सादी कीहे.. खुद लखन भैयाने हाल हीमे कीहे.. कुछ गलत नही.. बस आप अपने घर रहेने चले जाओ.. बाकी बताओ.. कैसे चल रही हे अपनी जोब..? सब सेट होगया..?

कादीर : (सायराकी ओर मुस्कुराते) हां भाइ.. वही बता रहा हु.. खाली जोबसे कुछ नही होगा.. मे मेरे कुछ पर्सनल प्रोजेक्ट भी सुरु करना चाहता हु.. लेकीन इनमे टुर भी रहेती हे.. ओर तुम तो जानते हो मे सायराको अकेला नही छोड सकता..

साहील : (मुस्कुराते) क्यु..? बात अगर बीजनेसकी हेतो छोडना ही पडेगा..

कादीर : नही साहील.. बात अगर अ‍ेक दीनकी होती तो चला जाता.. यहा तो दो तीन दीन भी लग सकता हे ओर कभी कभी हप्ता भी.. अगर अबु अम्मीके साथ रीस्ता अच्छा होता तो अ‍ेक दो दीन मे सायराको वहा छोड देता.. इसीलीये कुछ नया नही कर पा रहा हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ मे आपकी प्रोबलेम समज गया.. अगर अ‍ैसा हेतो आप सायरा दीदीको हमारे घर छोड सकते हो.. वहा मेरी चार चार बीवीया हे.. टाइम नीकल जायेगा..

कादीर : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आपकी चार चार सादीया होगइ..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. हालहीमे मेने चोथी सादी मेरी बहेनसे करली हे.. क्युकी उनका डीवोर्स हो गया था तो मेने सादी करली..

कादीर : (मुस्कुराते) थेन्क्स भाइ.. मे अ‍ेक प्रोजेक्ट कबसे इसी कारण डीले कर रहा हु.. अगर तुम दो तीन दीन यहा तेरी बहेनके साथ रहेने आजाते तो मे काम खतम करके आजाउगा.. तबतक तुम दोनो भाइ बहेन घरकी थोडी पेकींग भी करलेना.. फीर हम वहा चले जायेगे..

सायरा : (खुस होते मनमे सोचने लगी) या खु.. क्या मौका दीया हे आपने.. साहील आजाये तो कीतना अच्छा होगा.. मे ओर साहील दोनो अकेले होगे.. हम जैसे चाहे मस्तीया कर पायेगे.. कास साहील हां कहेदे.. क्युकी इतने दीनोके बादभी कादीरसे तो कुछ हो नही सका.. सायद साहीलसे ही उमीद बंध जाये..

साहील : (मुस्कुराते) अच्छा कब जाना हे आपको..?

कादीर : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या सचमे रुकोगे..? आपको खेतीका काम तो नही रुकेगा..?

साहील : (मुस्कुराते) नही अब वहा चाचा हेना.. सब सम्हालते हे.. तो मे नीकल सकता हु..

कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो अगले सेटरडे आजा.. मे मन्डे दो पहोर तक वापस आजाउगा.. अगर ये प्रोजेक्ट मील गया तो बहुत तगडे पैसे मीलेगे यार..

सायरा : (हसते) कीतने महीने होगये साहीलसे बात नही हुइ.. इसी बहाने उनसे बाते भी हो जायेगी.. ओर पेकींग भी होजायेगी.. भाइ मे अगले शनीवार आपका इन्तजार करुगी.. हो सके तो अगले दीन सामको ही आजाओ..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. तो फीर मे शुक्रवार सामको ही आजाता हु.. बाते करते घरकी पेकींग भी होजायेगी.. ओर आपकी बीजनेस टुर भी हो जायेगी.. आप आओगे तब हम सामान भी सीफ्ट करदेगे..

कादीर : (खुस होते) थेन्कस भाइ.. बस यही घरका सपोर्ट मीस कर रहा हु..

साहील : (मुस्कुराते) अब समजमे आयानां..? भाइ.. बुरा मत मानना.. बस यही सपोर्ट सबाना दीदीको चहीये था.. जो आप अ‍ेन्ड वक्तपे सबकुछ छोडकर चले गये..

कादीर : (आंख गीली करते) भाइ सोरी.. बस यही मेने सबसे बडी गलती करदी.. उस लडकीका सपना तोडके आगया.. मे सबसे नजरे मीला पाउगा.. लेकीन सबानासे नही..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ भुल जाओ सब पुरानी बाते.. अब नइ सुरुआत करो..

कादीर : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ मे शनीवर सुबहकी टीकीट बुक करलेता हु.. मुजे स्टेशन छोडने भी आजाना..

साहील : (खडा होते कादीरको गले मीलते) ठीक हे भाइ.. टीकीट बुक करलो मे शुक्रवार सामको आजाउगा.. हम चलते हे..

सायरा : (आगे आते) अरे.. अ‍ैसे कैसे..? खाना खाकर जाना.. मे अभी बना लुगी..

साहील : (मुस्कुराते) नही दीदी.. वहा लखन भैयाके घर पुनम भाभीने बनालीया हे.. खाना खाकर मे गांव नीकल जाउगा.. फीर तो आना ही हे.. तब खुब दबाके खाउगा.. हें..हें..हें..

सायरा : (हसते) क्या..? पुनम दीदीको भाभी कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हम सारे दोस्त.. जीन्होने अपनी बहेनके साथ सादीया करली हे.. हम सब उनकी बीवीको भाभी ही कहते हे.. आपने भी भाइसे सादी करली हे ध्यान रखना.. हें..हें..हें..

कहा तो सायरा खुब सर्मसार होगइ ओर हसने लगी.. तभी वो साहीलके गले लग गइ.. ओर इस बार थोडा साहीलको ज्यादा भीच लीया.. तो साहीलका खडा लंड सायराको अ‍ेक बार फीर चुभने लगा.. लेकीन इस बार सायरा नही हटी.. ओर साहीलके कानमे धीरेसे फुस फुसाइ..



 
सायरा : भाइ.. शुक्रवारको जल्दी आजाना.. हम बाते करते खुब मजे करेगे.. अकेले आना..

साहील : (मुस्कुराते कानमे फुृसफुसाते) ठीक हे भाभी.. आजाउगा.. मस्तीके लीये तैयार रहीयो..

सायरा : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभीके बच्चे.. अ‍ेक बार आना तब बताउगी.. फीर बार बार इस भाभीको मीलने आते होकी नही.. सेतान कहीका..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. आकर बताउगाकी ये सैतान कैसा हे.. हें..हें..हें..

कहा तो सायरा जटसे साहीलसे अलग होगइ.. ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते साहीलको सोक्ट होते देखती रही.. उसे उमीद नही थीकी साहील उनको भाभी कहेगा.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर साहीलकी ओर देखते सरमके मारे मुस्कुराती रही..

फीर साहील ओर लखन वहासे नीकल गये.. आते वक्त साहील बहुत खस था.. क्युकी उनके मनमे सायराको लेकर कुछ अलग ही प्लान चल रहा था.. अब वो सायराको अपनी बडी बहेन नही.. लखनके कहेनेपे उनको अ‍ेक ओरतकी तराह देख रहा था.. तो सायराके मनमे भी अ‍ेक प्लान चल रहा था..

लखन : (रास्तेमे हसते) कमीने क्या हस रहा हे.. कुछ समजा..?

साहील : (हसते) भाइ.. जैसा आपने कहा था वैसाही नीकला.. ये कमीनी तो पहेलेसे दो कदम आगे हे.. क्या मस्त गदराया माल हो गइ हे..

लखन : (हसते) हां.. मेने भी देखा.. कैसे तेरे पेन्टके उभारको ललचाइ नजरोसे देखते हस रही थी.. लगता हे कादीर भाइने इनपे बहुत महेनत कीहे.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) हां.. जबसे स्कुलमे पढ रही थी.. ओर जवानीके देहलीजपे कदम रखा था.. भाइ तबसे उनकी ले रहा हे.. तकरीबन चार सालसे तो पका.. तभीतो अ‍ैसा सेक्सी माल लग रही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. तेरा ये माल बीलकुल रेडी हे.. अगर वो थोडीसी भी हीन्ट दे तो आगे बढ जाना.. लेले अपने प्यारका बदला.. ये भी उसी खेतकी पेदाइस हे..

फीर साहील लखन बात करते वापस होस्टेलपे पहोंच गये.. वहासे दोनो राधीकाको लेकर घरपे आ गये.. फीर सब फ्रेस होगये ओर खानेके लीये बैठ गये.. पुनम साहीलकी ओर हसते उनको खाना परोसने लगी.. क्युकी वो सब जानती थी.. फीर खाना खानेके बाद साहील गांव चला गया..

साहील सहेर आया उसी सुबह देवायत साहीलके खेतोपे चला गया.. तो फीरोज देवायतको देखते ही खुस होगया.. ओर दोनोके लीये चाइ मंगवाइ.. फीर दोनो खटीयापे बैठकर गांवकी बाते करने लगे.. ओर देवायत धीरे धीरे करते फीरोजको सब सचाइ बताने लगा..

लेकीन देवायतको पता नही थाकी फीरोज गांवके बारेमे काफी कुछ जान चुका था.. अब गांवके अ‍ैसे नायायज रीस्ते उसे बहुत पसंद आने लगे थे.. ओर वो खुद अपनी बीवी जरीनाकी हप्तेमे कमसे कम तीन बार ठुकाइ करने लगा था..

ओर कीसीको पता भी नही चलाकी खेतोपे उसने अ‍ेक मजदुरनको भी सेट करलीया था.. जब भी मन करता.. कुछ कामके बहाने उसी मजदुरको ट्युबवेल वाली रुममे बुला लेता.. ओर उनकी ठुकाइ कर लेता.. अब तो अपनी वीधवा भाभीके उपर भी डोरे डाल रहा था..

अब फीरोज देवायतके साथ बाते करते काफी खुल गया.. तो देवायतने धीरे धीरे बातोमे लपेटते उनको बता दीयाकी इतने सालोसे सलमा अकेली थी तो उनसे भुल होगइ हे.. ओर उसने ये भी समजा दीयाकी इनमे सलमाकी कोइ गलती नही हे ये सब हालातकी वजहसे हुआ हे इसीलीये उनको सलमाकी दुसरी सादी घरके ही पुरुषके साथ कर देनी चाहीये..

पहेले तो सलमाके साहीलसे प्रेगनेन्ट होनेकी बात सुनकर मनमे गुस्सा आने लगा था.. लेकीन साहीलका उनपे बहुत अहेसान था तो कुछ सोचकर चुप रहा.. फीर घरमे ही सादीकी बात सुनकर फीरोजके मनमे ये सोचकर लडु फुटने लगे.. की चलो.. अब बीवीके साथ उनकी भाभीको भी चोदनेका मौका मीलेगा..

ये सोचते फीरोनका हथीयार ठुमके मारने लगा.. फीरोजको गांवकी बाते सुनकर गांवके बदलावकी नइ व्यवस्था पसंद आने लगी.. ओर उसे देवायतकी बात सच लगने लगी.. वो असमजमे फस गयाकी अपने दीलकी बात देवायतसे कैसे कहे.. आखीर उसने हींमत करते देवायतसे ये बात कहे दी..

फीरोज : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आपकी बात सच हे.. अकेलापन कीसीको भी भटका सकता हे.. मुजे सलमा भाभीके बच्चेसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. घरके ही मर्दका हे.. अगर आपको कोइ प्रोबलेम ना होतो फीर मे ही उनसे सादी करलेता हु..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आप..? मेतो साहीलके बारेमे सोच रहा था.. आप इस उमरमे दो बीवीया सम्हाल पाओगे..?

फीरोज : (मुस्कुराते) हां क्यु नही..? हमारे मेतो चार चार बीवीया होती हे.. ओर साहील तो अभी बहुत छोटा हे.. भले ही दोनोसे गलती होगइ हो.. लेकीन सलमा भाभी उनकी मां भी हे.. तो मांसे नीकाह कैसे..? तो मे सोच रहा हुकी मेही भाभीसे सादी करलु..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे तो फीर.. घरपे बात करलो ओर सलमा भाभीसे जल्द सादी करलो..

बात करके देवायत अपने खेतोपे चला गया.. देवायत भी असंमजमे फस गया की यहा तो दाव ही उल्टा पड गया.. भानु अपना मकान देख रहा था.. ओर कारीगरको जरुरी सुचना दे रहा था.. अ‍ैसे ही साम ढल गइ तो देवायतने फुरसतमे लखनको फोन कीया.. ओर फीरोजसे हुइ सारी बात बतादी.. जो लखन पहेलेसे ही सब जानता था..
 
लखनने साहीलको फोन करके सबकुछ बता दीया.. उस रात सबके सोजानेके बाद सलमा छुपकेसे साहीलके पास सोने चली गइ.. इस रात साहीलने जमकर सलमाको दो बार चोद लीया.. ओर सलमाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोड दीया.. फीर सलमा साहीलके सीनेपे सर रखते सीना सहेलाने लगी.. ओर साहीलसे बात करने लगी..





सलमा : (मुस्कुराते फुसफुसाते) साहील.. आज आपको क्या होगया था.. कमसे कम हमारे बच्चेका खयाल तो रखते.. देखो मेरी हालत खराब करदी.. पुरा बदन दर्द कर रहा हे.. कुछ गोली बोली तो नही खाइ थी..?

साहील : (सरको सहेलाते) नही सलमा.. कुछ बात ही अ‍ैसी हे जीसे सुनकर मुजे बहुत गुस्सा आ रहा हे..

सलमा : (मुस्कुराते) जानु.. अ‍ैसी क्या बात हे जो आपको परेसानी हो रही हे.. मुजे बताइअ‍े.. फीर मुजे भी आपको कुछ बताना हे..

साहील : (सामने देखते) क्या..? पहेले तुम बताओ.. फीर मे बताता हु..

सलमा : (सीनेको सहेलाते) साहील.. लगता हे जरीनाको मेरी प्रेगनन्सीके बारेमे कुछ सक हो गया हे..

साहील : (अचानक देखते) क्या..? पर कैसे..?

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) क्या कैसे..? अब देखो पेट कीतना बढ गया हे.. ये बात हम कबतक उनसे छुपाते..? अभी तो मेने बातको जुठ कहेते टालदी.. लेकीन मेने उसे कसम खीलवाइ हे.. की अभी इस बारेमे वो फीरोज भाइसे बात नही करेगी.. आप लखन भैयाको बोलो वो ठाकुरजीसे बात करले.. ताकी आगे कोइ हंगामा खडा ना हो..

साहील : (मुस्कुराते) सलमा.. अब तुजे जरीना चाचीसे इतना डरनेकी जरुरत नही हे..

सलमा : (सामने देखते) जरीनासे डरनेकी जरुरत नही हे..? मतलब..?

साहील : (मुस्कुराते) आज मे सहेर गया था.. सायरा दीदीको चाबी देने.. मे ओर लखन साथ ही थे.. ओर तुजे तो पता हे पुनम भाभीको सबकुछ पता चल जाता हे.. तो उसने लखन भैयाको ये बात बतादी..

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) कौनसी बात..?

साहील : (कातील मुस्कानसे) हे अ‍ेक राजकी बात.. बहुत गहेरी.. सुन.. इस राजसे हम दोनोका रास्ता आसान हो जायेगा.. तुम इसे हथीयारकी तराह इस्तेमाल करना.. अब ध्यानसे सुन..

कहेते साहील सलमाको कादीर ओर जरीनाके बारेमे सबकुछ बता देता हे.. वो मां बेटेके बारेमे सुनकर सलमा भी सोक्ट हो जाती हे.. फीर साहील सलमाको पुरा प्लान समजा देता हे.. ओर उनको फीरोज चाचाके साथ सादीके बारेमे भी बता देता हे.. जीसे सुनकर सलमा बेचैन होने लगी..

सलमा : (आंसु बहाते) साहील.. मे आपसे सादी करना चाहती हु.. फीरोज भाइसे सादी नही कर सकती..

साहील : (सरको सहेलाते) ठीक हे सलमा.. मेभी तुजे कीसी ओर मर्दके साथ नही बाट सकता.. लेकीन अ‍ेक बात तैय हे..

सलमा : (सामने देखते) क्या..?

साहील : (मुस्कुराते) अगर हम दोनोने सादी करली.. ओर चाचाको मना कर दीया तो अ‍ेक बात पकी हे.. जो सबानाकी सादी मुजसे कभी नही करवायेगे..

सलमा : (जोरोसे चीपकते) या खु.. ये क्या मुसीबत हे..? नही नही.. अ‍ैसा कभी होने नही दुगी.. आपको सबाना जरुर मीलेगी.. अगर अ‍ैसी बात हेतो मे फीरोन भाइसे सादी कर लुगी..

साहील : (सरको चुमते) सलमा.. मे तुजे खोना नही चाहता.. मुजे सबाना नही तुम चाहीये..

साहीलका इतना प्यार देखते सलमाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो गहेरी सोचमे डुब गइ.. तभी उनके दीमागमे कुछ आइडीया आया.. ओर उसने अब घरकी सारी मर्यादा पार करनेकी सोचली.. फीरोजके लीये मनमे बदलेकी भावना आगइ.. ओर उसने कुछ तैय करलीया..

सलमा : (सामने देखते) साहील.. आपको सबाना भी मीलेगी.. ओर हम दोनोका रीस्ता भी कायम होगा.. अब सब कुछ आप मुजपे छोड दीजीये..

तो दुसरी ओर आज फीरोजभी देवायतसे बात करके बहुत खुस था.. ओर आज अलग ही मुडमे था.. वो भी इस वक्त जरीनाकी जबरदस्त चुदाइ करते उनके सीनेपे ढेर होते अभी भी पडा था ओर जरीना उनके बालोको सहेला रही थी.. तभी फीरोजने अपना सर उचा कीया ओर जरीनाके होठोको चुमने लगा..



 
जरीना : (सरमाते धीरेसे) फीरोज.. आज आपको क्या हो गया था जो इतने जोसमे कर रहे थे..?

फीरोज : (मुस्कुराते) जरीना.. मुजे तुमसे कुछ बताना हे.. आज बडे ठाकुर हमारे खेतोपे आये थे..

जरीना : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? बडे ठाकुर..? कीस लीये..?

फीरोज : (थोडा संकोचमे) जरीना.. उसने अ‍ेक बात कही.. बताया.. की सलमा भाभी.. मतलब.. वो पेटसे हे..

जरीना : (सामने देखते) क्या..? तो उनको भी सब पता हे..? मुजे सक तो हुआ था लेकीन उसने बातको टालदी.. लेकीन कीससे..? ये नही बताया..?

फीरोज : (सामने देखते धीरेसे) बताया.. लेकीन मे इसे गलत नही मानता.. क्युकी भाभी इतने दीनोसे वीधवा हे.. अकेली हे.. उनकी भी कुछ इच्छाये होगी.. तो गलती होगइ होगी..

जरीना : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्या..? ये आप बोल रहे हे..? लेकीन कीससे हुइ..?

फीरोज : (धीरेसे) हां मे बोल रहा हु.. अब यहा आकर बहुत कुछ पता चला मुजे.. ओर बडे ठाकुरकी बात सुनकर मुजे कुछ बुरा भी नही लगा.. क्युकी यहा हर घरमे अ‍ैसा रीस्ता पनप रहा हे.. तो भाभीसे गलती हो गइ.. हमारे साहीलसे.. तो बडे ठाकुर भाभीकी सादीकी बात करने आये थे..

जरीना : (सामने देखते) तो क्या आप भाभीकी सादी हमारे साहीलसे करवाना चाहते हे.?

फीरोज : (थोडा जीजकते) अरे नही नही.. वो तो उनसे बहुत छोटा हे.. ओर दोनो मां बेटे भी हे.. तो इनसे क्या करवाउगा..

जरीना : (सामने देखते) तो फीर आप भाभीकी सादी कीससे करवाना चाहते हे..?

फीरोज : (थोडा जीजकते जुठ बोलते सरमाते) वो बडे ठाकुर केह रहेथे की मेही भाभीसे सादी करलु.. ताकी घरकी बात घरमे ही रेह जाये..

जरीना : (आस्चर्यसे थोडा डरते) ये आप क्या बोल रहे हे..? अपनी भाभीसे सादी करोगे..?

फीरोज : (धीरेसे समजाते) तो क्या हुआ.. कीसीना कीसीको इनको सम्हालना ही होगा तो फीर मे क्यु नही..? वैसे भी हमारेमे चार चार सादीया तो होती ही हे..

जरीना : (सामने देखते थोडे सख्त लहेजेमे) हां.. होती हे लेकीन हमारे खानदानमे नही.. ओर मे..? फीर मेरा क्या होगा..? मे ये होने नही दुगी.. केह देती हु आपसे..?

फीरोज : (थोडा चीडते गुस्सेमे) क्या बक रही हो..? घरकी परीस्थीतीको पहेले समजो.. समजे बीना ही गुस्सा करने लगी..

जरीना : (गुस्से देखते) तो गुस्सा तो करुगीनां..? आपको अपनी भाभीसे सादी करनेमे सरम नही आती..? मे ये होने नही दुगी..

फीरोज : (सामने देखते थोडा सख्तीसे) क्या होने नही दुगी..? तुम क्या चाहती हो..? की मे उन मां बेटीकी सादी करदु..? मानलो साहीलसे ओर मुजसे सादी नही करती.. तो तुम चाहती होकी भाभी यहा वहा कही ओर मुह मारती फीरे.. फीर उस बच्चेका क्या..? इनसे तो अच्छा हेकी मेही उनसे सादी करलु..

जरीना : (सख्तीसे देखते) फीर भी मे आपसे भाभीसे सादी नही करने दुगी..

फीरोज : (नजरे चुराते सख्तीसे) देखो.. मान जाओ.. वरना मुजे मजबुरन कोइ दुसरा फेसला ना करना पडे.. मे भाभीसे सादी तो करके ही रहुगा..

जरीना : (आस्चर्यसे थोडा डरते) दुसरा फैसला..? बताओ कैसा फैसला.. मे भी तो सुनु..

फीरोज : (नजरे चुराते) छोडना.. मुहसे नीकल गया..

जरीना : (बेडपे जटसे बैठ गइ) नही फीरोज.. आज तो बता ही दो आप कीस फैसलेकी बात कर रहे हो.. मेभी तो सुनु..

फीरोज : (सामने देखते) देख जरीना.. अगर तुम मुजे भाभीसे सादी करनेको रोकोगी तो मुजे.. मजबुरन.. त..ला..क..

जरीना : (थोडी सख्तीसे) ओ..ह.. तो तुम भाभीके लीये मुजे तलाक दोगे..? ठीक हे.. देदो तलाक.. फीर देखना मे भी कीसी ओरसे सादी करती हु की नही.. मत भुलो अब इस गांवकी क्या परंपरा हे.. मुजे भी इस गांवके बारेमे सब पता हे.. ओर आपसे तो ज्यादा.. आप कुछ नही करपाओगे..

फीरोन : (थोडा सांत होते) अरे नाराज मत हो.. बस.. अ‍ैसे ही मुहसे नीकल गया.. ओर तुजे थोडीना छोड रहा हु.. दोनो साथमे मीलकर रहेना.. वैसे भी तुम दोनोमे अच्छी पटती हे..

जरीना : (सामने देखते मनमे) फीरोज.. आज तुमने मेरा दील तोड दीया.. मेरा भरोसा खो दीया.. वो भी भाभीके लीये.. ठीक हे करलो सादी.. मे भी देखती हु..

फीरोज : (सामने देखते) जरीना.. क्या देख रही हे..? कुछ सोच रही हे..?

जरीना : (सामने देखते) कुछ नही.. अ‍ेक बात बताओ.. क्या आपको अ‍ैसे रीस्ते पसंद हे..? मतलब.. इस गांवमे जो हो रहा हे..

फीरोज : पहेले सब गलत लगता था.. लेकीन ठाकुर साहेबकी बात सुनकर सब सही लगने लगा.. हम रीस्ते नातेको अहेमीयत देते कीतनी ओरतोकी जींदगीसे खीलवाड कर रहे थे.. इनसे तो अच्छा हे सब अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे हो रहा हे.. देखो सब यहा कीतने खुस हे.. इसीलीये मे चाहता हु तुम अ‍ेक बार भाभीसे बात करलो.. आज यहा भाभीके अलावा कोइ वीधवा या त्यक्ता नही हे..
 
जरीना : (भारी मनसे) ठीक हे मे बात कर लुगी.. लेकीन अ‍ेक बातका मुजे जवाब चाहीये..

फीरोज : (सामने देखते) कीस बातका..?

जरीना : अगर आप रीस्ते नातेको नही मानते तो फीर हमारी सायरा ओर कादीरने जो कीया उसमे क्या गलत था..?

फीरोज : (सामने देखते) लेकीन वो दोनो तो सगे भाइ बहेन हे..

जरीना : (फीकी मुस्कानसे) वाह.. इस गांवमे भी कइ सगे भाइ बहेनने सादीया करली हे.. इनपे तो आपको कइ अ‍ेतराज नही हे.. आपको दुसरे रीस्तेमे भी कोइ अ‍ेतराज नही तो फीर इस रीस्तेको क्यु नही मानते..?

फीरोज : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) मे इसे गलत मानता था.. लेकीन बडे ठाकुरकी बात सुनकर मे भी इसे रीस्तेको मानने लगा हु.. ठीक हे.. अब मुजे कादीर ओर सायराके रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

जरीना : तो क्या आपने उन दोनोको माफ कर दीया..?

फीरोज : (सामने देखते) हां.. माफ कर सकता हु.. अगर भाभीकी सादी मुजसे होजाये.. तुम भाभीसे बात करलो.. ओर उनको मनाओ.. कहोकी सब बडे ठाकुरने कहा हे.. वो मान जायेगी..

जरीना : (अजीब नजरोसे देखते) अगर वो नही मानी तो..?

फीरोज : (थोडा गुस्सेसे) अरे मान जायेगी.. अ‍ेक बार उनसे बात तो करलो.. तुजे उनको मनाना ही होगा..

जरीना : (मनमे) कीतना कमीना इन्सान हे.. मेरे कादीरके साथ नाजायज रीस्तेसे मे कीतना बुरा मानती थी.. लेकीन अब नही.. अगर मेरा पती अ‍ैसा कर सकता हे तो फीर मे क्यु नही..? लेकीन अब कादीरसे तो कभी नही मीलुगी.. उस हरामजादा भी अपने बापकी तराह हे.. बेवफा..

दोनो बाप बेटेसे होता तो कुछ नही ओर दो दो ओरते रखने नीकले हे.. कमीना कैसे मेरी बेटीका सपना तोडके गया हे.. इनसे तो अच्छा मेरा साहील हे.. भले ही उसने भाभीके साथ गलत कीया.. मगर हम सबकी जीम्वेवारी तो नीभाता हे.. मेने सही हाथोमे सबुका हाथ दीया हे..

फीरोजकी बात सुनकर जरीना सोचमे पड गइ.. उसे फीरोजपे बहुत गुस्सा आने लगा.. क्युकी अब फीरोजकी उमर भी होगइ थी.. ओर वो जरीनाको भी ठीकसे संतुस्ट भी नही कर पा रहा था.. फीर भी हप्तेमे तीन बार उनके साथ सेक्स करता तो जरीना बहुत खुस थी..

लेकीन अब उनकी जींदगीमे सौतनके रुपमे सलमाका आना.. ओर उसे सलमासे बात करनेका फोर्स करना.. जरीनाको तलाककी धमकी देना.. बतलब.. जरीना समज चुकी थीकी फीरोज सलमाको पहेलेसे ही पसंद करता हे.. ओर उनकी जींदगीसे दुर जा चुका हे.. फीर भी उसे सलमासे बात तो करनी ही पडेगी..

दुसरे दीन सुबह सब अ‍ेकठे चाइ नास्ता कर रहे थे तब जरीना फीरोजके उपर नजर गडाये बेठी थी.. वो देख रही थी कैसे चाइ नास्ता करते फीरोज सलमाकी ओर वासना भरी नजरोसे देख रहा था.. तो सलमा भी सब बाते जान चुकी थी तो वो भी फीरोजकी मुस्कानसे थोडी असहज हो रही थी..

लेकीन इन सबके बीच साहील बडे ही आरामसे चाइ नास्ता कर रहा था.. क्युकी उसने अपनी सब योजना सलमाको बतादी थी ओर इस काममे सलमा उनका साथ दे रही थी.. आज पहेली बार चोर नजरोसे वो जरीनाको देख रहा था.. लेकीन अ‍ेक असली मा या चाचीकी हेसीयतसे नही बल्की अ‍ेक ओरतकी हेसीयतसे..

तो जरीना अ‍ेक दम पतली ओर सेक्सी दीख रही थी.. आज उसे पहेली बार फीरोज ओर कादीरसे जलन होने लगी.. क्युकी इतना सेक्सी माल फीरोजके पास था.. जो इनका स्वाद अपना बडा बेटा कादीर भी ले चुका था.. साहीलका हथीयार जरीनाको देखते जटके मारने लगा..

जरीनाको रातमे ही पता चल गयाकी अब उनका पती फीरोज उनसे दुर जा रहा हे तो उनको फीरोजसे नफरत होने लगी.. लेकीन उनके मनमे कुछ ओर ही मनसुबे जन्म लेने लगे.. जीनकी वजहसे आज जरीना भी चोर नजरसे साहीलके पेन्टके उभारको देखती रही.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तो साहील ओर फीरोज अपने खेतोपे चले गये.. ओर सलमा जरीना सब काम नीपटाने लगी.. जरीनाको लगाकी यही समय हे सलमासे बात करनेका....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७६

जरीनाको रातमे ही पता चल गयाकी अब उनका पती फीरोज उनसे दुर जा रहा हे तो उनको फीरोजसे नफरत होने लगी.. लेकीन उनके मनमे कुछ ओर ही मनसुबे जन्म लेने लगे.. जीनकी वजहसे आज जरीना भी चोर नजरसे साहीलके पेन्टके उभारको देखती रही.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तो साहील ओर फीरोज अपने खेतोपे चले गये.. ओर सलमा जरीना सब काम नीपटाने लगी.. जरीनाको लगाकी यही समय हे सलमासे बात करनेका.... अब आगे

लेकीन जरीनाकी सलमासे बात करनेकी हींमत नही हो रही थी.. तो दुसरी ओर सलमाने भी ठान लीया थाकी अगर इस बार जरीनाने बात करनेकी पहेलकी तो वो जरीनाको सब कुछ सचाइ बता देगी.. क्युकी साहीलके माध्यमसे जरीनाका कुछ राज सलमाको भी पता चल गया था..

तो उसने ओर साहीलने मीलकर अ‍ेक योजना बनाली थी.. की अगर फीरोजकी ओर सादीका प्रस्ताव आया तो तो उसे जरीनाको कैसे अपनी टीममे सामील करना था.. ताकी भवीस्यमे उन दोनोका रीस्ता अ‍ैसे ही कायम रेह सके.. ओर आखीर जीरनाने बात करनेकी हीमंतकी.. तभी काम करते धीरेसे..

जरीना : (धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. मुजे फुरसतमे आपसे कुछ बात करनी हे..

सलमा : (सामने देखते) अच्छा..? बोलना क्या बात करनी हे.. घरमे सीर्फ हम दोनो हीतो हे..

जरीना : (थोडा जीजकते) दीदी.. यहां..? हम अंदर बैठकर आरामसे बात करगेनां..

सलमा : (सामने देखते) अच्छा कोइ सीरीयस बात हे क्या..? कोइ बात नही ये थोडा काम नीपटाकर अंदर चलते हे.. फीर आरामसे बैठकर बात करते हे..

फीर सलमा ओर जरीनाने फटाफट सब काम नीपटा लीया इसी बीच जरीना बार बार चोर नजरसे सलमा ओर उनके पेटकी ओर देखती रही.. तो सलमाको भी अंदाजा होगया थाकी जरीना कीस बारेमे बात करना चाहती हे.. उसे पता थाकी फीरोजके द्वारा सादीका प्रस्ताव आया होगा..

फीर दोनो काम खतम करके सलमाके रुममे चली गइ.. ओर सलमाने उसे अपने पास बेडपे बीठा दीया.. वोही बेड जहा सलमा ओर साहीलने कइ राते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे रंगीन की थी.. जरीना सलमासे बात करनेके लीये जीजक रही थी.. तो आखीर सलमाने बातकी सुरुआत की..

सलमा : (मुस्कुराते) हां जरीना.. बोल क्या बात करनी थी..

जरीना : (मुस्कुराते) दीदी.. आपका पेट काफी बढ गया हे.. अ‍ैसा लगता हे आपके पेटमे बच्चा पल रहा हे.. हें..हें..हें..

सलमा : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्या सचमे अ‍ैसा दीखता हे..?

जरीना : (मुस्कुराते) हां सचमे..

सलमा : (अ‍ेक नजरसे देखते) जरीना.. तुजे क्या लगता हे..? सच बताना..

जरीना : (नजरसे चुराते धीरेसे) दीदी.. मे क्या बताउ..? अ‍ैसा लगता हे आप सचमे प्रेगनेन्ट हे..

सलमा : (जरीनाका हाथ पकडते अपने सरपे रखते) जरीना.. मेरी कसम खा.. आज इस कमरेमे जो भी बात होगी तुम अपने तक सीमीत रखेगी..

जरीना : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) क्या..? मगर.. दीदी.. ठीक हे.. मे कसम खाती हु.. लेकीन अ‍ैसी क्या बात हे जो आप कसम खीलवा रही हे..?

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) जरीना.. क्युकी आज कुछ सचाइ मे तुजे बताना चाहती हु.. वादा कर ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

जरीना : (सीरीयस मुहसे सामने देखते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. वादा करती हु.. बताइअ‍े..

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) हां जरीना.. तुमने सही पहेचाना.. मे प्रेगनेन्ट ही हु..

जरीना : (सोक्ट होते धीरेसे) क्या..? दीदी.. ये आप क्या बोल रही हे..? क्या सचमे..?

सलमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां सचमे.. तुम तो जानती हो.. अ‍ेक अकेली वीधवा ओरतको मर्दके बीना जींदगी बीताना कीतना मुस्कील हे.. फीर ओरत चाहे कोइ भी हो.. उनकी भी कुछ जरुरते होती हे.. बस.. मुजसे भी गलती होगइ..

जरीना : (सोक्टसे सामने देखते) जानती हु दीदी.. लेकीन कीसके साथ..? कौन हे वो..?

सलमा : (फीकी मुस्कानसे) क्या फर्क पडता हे..? की वो कौन हे.. बस.. हम ओरतो को तो अपनी आग बुजानेके लीये सीर्फ अ‍ेक मर्द ही चाहीये.. ओर अगर मर्द आपके मुताबीक तगडा ओर दमदार हथीयार वाला मील जाये तो ये गलतीया बार बार होने लगती हे.. बस.. इसी गलतीका फल भुगत रही हु..

जरीना : (सामने देखते) अ‍ैसा कोन मर्द हे जो आपको इतना भा गया..? ओर आप बार बार गलतीया करने वीवस होगइ.. इस गांवका मर्द हे क्या..? जो इस बच्चेका बाप हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां जरीना.. जबसे इस गांवमे ये नये रीस्तोकी परंपरा सुरु हइ हे तो ज्यादातर ओरते ओर लडकीया बहार की बजाये घरमे ही रीस्ते बनाती हे.. जो हम इसे सेइफ मानती हे.. मेरे इस बच्चेका बाप गांवका कोइ ओर नही.. हमारे ही घरका मर्द हे..

जरीना : (सोक्ट हुअ‍े सुनते) क्या..? घरका मर्द..? मतलब.. हमारा सा..ही..ल..?

सलमा : (मुस्कुराते) हा जरीना.. हमारा साहील.. मेरा बेटा.. अब हम यहा अ‍ैसे कोइ रीस्ते नातेको नही मानते.. बस अ‍ेक ही रीस्तेको देखते हे.. अ‍ेक मर्द ओर अ‍ेक ओरतका रीस्ता.. वोभी इस मक्सदसे.. की गांवमे कोइ भी ओरत त्यक्ता या वीधवा नही रहेनी चाहीये..

जरीना : (सामने देखते) लेकीन दीदी ये तो गलत हे.. अ‍ेक मां ओर बेटेके बीच ये सब..?

सलमा : (अ‍ेक नजरसे देखते) जरीना.. क्या ये सब तुम केह रही हो..? क्या सचमे मां ओर बेटेका रीस्ता गलत हे..?

कहातो अ‍ेक पलके लीये तो जरीना चोंक गइ.. उसे लगा की कही सलमाको उनके ओर कादीरके बीचके रीस्तोके बारेमे पता तो नही चल गया.. क्युकी वो खुद अ‍ैसे रीस्तोमे रेह चुकी थी.. ओर जरीनाको कादीर सायराके रीस्तोके बारेमे उसे पता चल गया था..
 
जीनकी वजहसे कादीर सायराको लेकर घर छोडके चला गया.. वरना आज भी दोनो अ‍ैसे रीस्तोमे बंधे होते.. जरीनाको कुछ कुछ सक होने लगा.. की सलमाको उनके ओर कादीरके बारेमे सायद पता चल गया हे.. वो अ‍ेक नजरसे सलमाको सोक्ट होते देखती रही..

सलमा : (सामने देखते) जरीना.. कहा खो गइ..? बताना अ‍ैसे रीस्ते गलत हे..?

जरीना : (थोडी हडबडाते नजरे चुराते) दीदी.. मुजे क्या पता..

सलमा : (सामने देखकर मुस्कुराते) जरीना.. अ‍ैसे गभरा मत.. मुजे तेरे ओर कादीरके बारेमे सबकुछ पता हे.. ओर मे इसे गलत भी नही मानती.. क्युकी यहा सभी अ‍ैसे रीस्तोमे बंधे हुअ‍े हे..

जरीना : (डरते रुहासी आवाजमे आंसु आगये) दी..दी.. कैसे..? कीसने बताया आपको..?

सलमा : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) छोडना जरीना.. क्या करेगी जानकर..? कुछ राज राज ही रहेने देना चाहीये.. मे जानती हु जीस तराह मुजसे गलती होगइ उसी तराह तुमसे भी होगइ..

जरीना : (हाथोमे चहेरा छुपाते फुटफुकर रोने लगी) दी..दी.. मुजे माफ करदो.. मे भटक गइ थी..

सलमा : (पीठ सहेलाते) नही जरीना.. मे इसे गलत नही मानती.. तुम सोचो.. तुम्हारा तो पती भी था.. जो तुजे कभी कभी सारीरीक सुख देता होगा.. लेकीन मे तो अकेली थी.. वीधवा हु.. तो क्या मुजसे गलती नही हो सकती..?

जरीना : (रोते सुबकते) दी..दी.. तो मे क्या करती..? अ‍ेक तरफ उनके उपर घरकी जीम्वेवारी.. दुसरी ओर मेरी सबुका डोक्टर बननेका सपना.. आपके देवर दो दो सीफ्टमे सोलाह सोलाह घंटे काम करते थे.. बस.. खाना खाया ओर थकके सो जाते.. इसमे हम कहासे मीलते..?

सलमा : (सामने देखते) तो क्या तुम दोनो कभी नही मीलते थे..?

जरीना : (सुबकते धीरेसे) मीलते थे.. लेकीन बहुत ही कम.. वो छुटीयोमे भी सोते रहेते.. मुस्कीलसे महीनेमे अ‍ेक बार मीलनेका मौका मीलता.. तो मे क्या करती..? आप ही कहो.. कोइ ओरत अ‍ेक अ‍ेक महीने तक बीना पतीके रेह सकती हे..? बस.. तो मे नादानी कर बैठी..

सलमा : (पीठ सहेलाते) मन छोटा मत कर जरीना.. बस.. यहीसे गलतीया होजाती हे.. तेरा तो पती भी था.. ओर मे अ‍ेक वीधवा..

जरीना : (अपने आंसु पोछते) दीदी.. मे आपकी सीचुअ‍ेशन समज सकती हु.. बस.. इसी वजहसे मुजसे भी गलती होगइ.. कादीर मेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखने लगा था.. अ‍ेक बीवीकी तराह.. मेरी हर जरुरतको वो पुरी करता.. पता ही नही चला हम दोनो कब करीब आगये.. बस.. अ‍ेक दीन उसने मुजे ब्लेकमेइल करके जबरस्तीकी..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) जबरदस्ती..? मतलब.. रेप..? जरीना.. बता कैसा ब्लेकमेइल..?

जरीना : दीदी.. अब आपसे कुछ जुठ नही बोलुगी.. सब सच बताती हु.. अ‍ेक दीन हाथसे उंगली कर रही थी.. ओर छुटते वक्त मेरे मुहसे उनका नाम नीकल गया.. तब मुजे कहा पताथाकी वो छुपकर मेरा वीडीयो बना रहा था.. बस.. उसी वीडीयो दीखाकर मुजसे जबरदस्तीसे फीजीकल हो गया..





सलमा : (मुस्कुराते) ओह.. तभी..? फीर..?

जरीना : (फीकी मुस्कानसे) दीदी.. फीर क्या..? फीर तो आये दीन मुजसे मीलन करने लगा.. ओर मे डरके मारे चुपचाप सहेन कर लेती.. फीर तो मुजे भी इनकी आदत होगइ.. जब मुजे मीलन करनेका मन होता उसे इसारेसे रुममे बुला लेती ओर अपनी आग बुजा लेती..

सलमा : (मुस्कुराते) कीतने दीनो तक दोनोने मजा कीया..?

जरीना : (सामने देखते) कीतने दीनो तक..? दीन तो छोडो ये कहो कीतने महीनो तक हम अ‍ेक दुसरेको मीलते रहे.. फीर तो हम दोनोके बीच अ‍ेक मीया बीवी जैसा रीस्ता होगया था.. ओर ये रीस्ता तबतक चला जब अ‍ेक दीन घरकी सफाय करते मुजे सायराकी अलमारीसे गर्भनीरोधक गोलीया ओर कादीरके कमरेसे कोन्डम नही मीले..

सलमा : (मुस्कुराते) हां उस दीन मे वहा आइ थी तो तुमने बताया था..

जरीना : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. मेरे जेठजीको देखने हम दोनो यहा गांव आये थे तब ही कादीर ओर सायरा पहेली बार फीजीकल हुअ‍े.. ओर दुसरे दीन दोनोने नीकाह भी करलीया था.. दोनोके बीच चकर तो कइ महीनोसे चल रहा था.. लेकीन दोनोको रंगे हाथ पकडा उसी सुबह दोनो चले गये..

सलमा : (मुस्कुराते) तो क्या तबतक कादीर तुम दोनो मां बेटीके साथ..

जरीना : (सरमसे नजरे जुकाते) हां दीदी.. मुजे तो पता ही नही थाकी कमीना हम मां बेटी दोनोके साथ खीलवाड कर रहा हे.. नाही मुजे सायराके बारेमे पता चलने दीया.. ओर नाही सायराको मेरे बारेमे.. इतना कमीना इन्सान था वो..

सलमा : (मुस्कुराते) ओर अब..? देखो फीरोजभाइकी सेहत भी अब यहा आकर काफी अच्छी होगइ हे.. अब दोनो कीतनी बार मीलते हो..?

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. अब तो हप्तेमे तीन बार मीलने लगे हे.. पता नही यहा आकर वो अ‍ैसे क्यु हो गये..

सलमा : (मुस्कुराते) क्या वो अब तुजे संतुस्ट कर पाते हे..?

जरीना : (नांमे गरदन हीलते धीरेसे) नही दीदी.. अब उमरकी वजहसे पहेले वाला जोस नही रहा.. हर बार प्यासी छोड देते हे.. लेकीन फीर भी अ‍ेक सुकुन मीलता हे.. कमसे कम हम दोनो हप्तेमे तीन बार मील तो रहे हे.. ओर आप दोनो..?
 
सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. तुम तो जानती हो.. साहील बहुत छोटा था ओर तेरे जेठजी थे तबसे ही साहील मेरे साथ सोता हे.. फीर तेरे जेठजी चल बसे.. तो साहील ही मेरा अ‍ेक मात्र सहारा था.. ओर पता ही नही चला वो कब जवान होगया.. फीर भी हम मां बेटे दोनो साथ सोते थे..

जरीना : (मुस्कुराते) अच्छा साथ सोते थे इसीलीये दोनोसे गलती होगइ..?

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. उनको मुजसे चीपकके सोनेकी आदत हे.. तब मुजे क्या पता थाकी वो नींदमे मेरे साथ क्या हरकते कर रहा हे.. फीर तो इनकी हरकतोसे मुजे भी मजा आने लगा.. ओर अ‍ेक दीन दोनो ही कामाग्नीमे जल रहे थे ओर हमारे बीच सबकुछ हो गया..





जरीना : (मुस्कुराते) क्या अब भी दोनो मीलते हो..?

सलमा : (मुस्कुराते) हां जरीना.. तुमसे जुठ नही बोलुगी.. फीर तो हर रात ये सब होने लगा.. ओर आज भी हर रात हम दोनो मीलते हे.. अ‍ेक मीया बीवीकी तराह.. हम साथ ही सोते हे.. अब तो मेने साहीलको ही अपना पती मान लीया हे.. अब पता चला कमी मुजमे नही तेरे जेठमे थी..

जरीना : (मुस्कुराते) तो क्या आप इस बच्चेको जन्म दोगी..?

सलमा : (सामने देखते) हां क्यु नही..? मे मेरे साहीलकी नीशानी इस दुनीयामे लाउगी.. हमारे प्यारकी नीशानी.. जरीना मे ओर साहील अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. ओर मे आज भी उनके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा व्यवहार करती हु.. साहील मेरा पतीकी तराह बहुत खयाल रखता हे..

जरीना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. हमारे साहीलका पेन्टमे ही कीतना बडा दीख रहा हे.. क्या उनका सचमे इतना बडा हे..?

सलमा : (सरमाते मुस्कुराते) हां जरीना.. अ‍ेक अ‍ेक खास दोस्त हे.. मुनाभाइ.. जडीबुटीके बारेमे बहुत जानते हे.. उसीने सभी दोस्तोको जडीबुटीका कोर्ष करवाया हे.. तबसे अ‍ैसा हो गया हे.. उनको रोज चाहीये.. वो चार चार घंटेतक थकते भी नही हे.. पहेली बारमे तो बहुत मजे देता हे लेकीन दुसरी बार उनको जेलना इतना आसान नही हे.. मेरी चीखे आज भी नीकलवा देता हे..

जरीना : (आस्चर्यसे मुहपे हाथ रखते) क्या..? दो दो बार..?

सलमा : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे दो बार तो बीना नीचे उतरे ही हमारी मुनीयाको अपने पानीसे भर देता हे.. ओर वोभी बीना बहार नीकाले.. ओर जनाबको तीसरी बार भी चाहीये.. ओर मना ना करोतो पुरी रात मुजे ठोकते रहेते हे.. ओर सुबह तक हमारी हालत बीगाड देता हे.. वो कभी थकते ही नही..





जरीना : (आस्चर्यसे देखते) या खु.. क्या इतनी ताकात..? आपके देवर ओर कादीरतो अ‍ेक ही बारमे ढेर हो जाते हे.. ओर कइ बार मुजे अ‍ैसे ही प्यासी छोड देते हे.. फीर मुजे उंगलीसे अपने आपको सांत करना पडता हे..

सलना : (सरमाकर मुस्कुराते) मेरा साहील अ‍ैसा नही हे.. वोतो अ‍ेक ही बारमे मुजे तीन तीन बार जडा देता हे.. ओर दुसरी बारमे तो मुजे पुरी नीचोड लेता हे.. इतना ताकतवर होगया हे.. कभी मौका मीले तो ट्राइ करना.. हें.. हें.. हें..

जरीना : (सर्मसार होते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) दीदी कैसी बाते कर रही हो.. वो बेटा हे मेरा..

सलमा : (सामने देखते) ओर कादीर..? क्या वो तेरा सगा बेटा नही था..? जरीना अब तुम इस गांवमे आगइ हो.. यहा रीस्तोकी कोइ अहेमीयत नही हे.. भुलजा सब रीस्ते नाते.. बस.. इतना सोच साहील अ‍ेक मर्द हे ओर तुम अ‍ेक ओरत.. जींदगी आसान होजायेगी..

जरीना : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) क्या दीदी.. आप भीनां..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. अ‍ैसे सरमा मत.. मे सच केह रही हु.. इतना मत सोच.. कहोतो मे साहीलसे बात करु..?

जरीना : (सर्मसार होते मु्कुराते) अरे नही नही.. अभी नही.. ठीक हे दीदी.. इस बारेमे बादमे कभी सोचुगी..

सलमा : (मुस्कुराते) अब बता.. क्या बात करने आइ थी मुजसे..?

जरीना : (थोडी हीचकीचाते) दीदी.. वो.. वो.. कल.. गांवके बडे ठाकुर साहब आपके देवरको मीलने आये थे.. लगता हे गांवमे सबको पता हेकी आप प्रेगनेन्ट हे..

सलमा : (बेफीकर होते) हां तो..? इनमे क्या छुपाना.. अ‍ेक दीन तो सबको पता चल ही जायेगा.. ओर अब अ‍ैसे रीस्तोसे गांवमे कीसीको फर्क नही पडता.. मुजे भी नही.. क्युकी यहा हर घरमे अ‍ैसे रीस्ते पनप रहे हे.. खुद बडे ठाकुरके घरपे भी.. ओर हालहीमे खुद छोटे ठाकुरने उनकी त्यक्ता सगी बहेनसे सादी करली हे..

जरीना : (मुस्कुराते) हां.. हमारे घर आये थे.. साहीलके अच्छे दोस्त हेनां..? लखनजी.. पता चला उनके घरमे बहेनसे सादी करनेकी परंपरा हे.. इसीलीये तो यहा कोइ त्यकता ओर वीधवा नही रही..

सलमा : (मुस्कुराते) हां सही कहा तुमने.. अच्छा ये बता.. क्या केह रहे थे बडे ठाकुर..?

जरीना : (मुस्कुराते) दीदी.. केह रहेथे की अब आपकी सादी करवादेनी चाहीये.. क्युकी आपके पेटमे बच्चा पल रहा हे..

सलमा : (सब पताथा फीर भी) तो फीर क्या कहा फीरोज भाइसाहेबने..? मेरी प्रेगनन्सीके बारेमे कुछ नही कहा..?

जरीना : (नजरे चुराते धीरेसे) वो.. वो.. कहा.. कहेते थे अकेली थी तो गलती होगइ.. ओर आपके देवरने आपको माफ करके सब स्वीकार करलीया..

सलमा : (मुस्कुराते) क्या..? माफ भी करदीया..? इतनी जल्दी..? बीना कोइ बात.. तो क्या वो मेरी ओर साहीलकी सादीके लीये मान गये..?
 
जरीना : (जटसे) अरे नही नही.. (नजरे चुराते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो खुद आपसे सादी करना चाहते हे..

सलमा : (चोंकनेका नाटक करते) क्या..? नही नही.. अ‍ैसा नही हो सकता.. जरीना तुम जानती होनां मे साहीलसे कीतना प्यार करती हु.. ओर ये बच्चा भी उसीका हे.. तो मे फीरोजभाइसे सादी कैसे कर सकती हु..?

जरीना : (आंग गीली करते) दीदी.. मे जानती हु.. मेने रातमे उनको बहुत समजाया.. लेकीन वो मानथे ही नही.. ओर आपसे सादी करनेके लीये डटे रहे.. कहते थे आपने उनसे सादी नही कीतो वो मुजे तलाक दे देगे.. उसने मुजे धमकी दीहे दीदी.. प्लीज.. आप मान जाओ..

सलमा : (सामने देखते) क्या..? तुजे तलाककी धमकी दी..? कही वो पागल तो नही हो गये..? लेकीन जरीना.. ये कैसे हो सकता हे.. मे साहीलसे प्यार करती हु..

जरीना : (सामने देखते) जानती हु मे.. अगर आप साहीलसे प्यार करती हे तो फीर मेरी सबानाका क्या..? आप ही साहीलके लीये रीस्ता लेकर आइ थीनां..?

सलमा : (थोडी हीचकीचाते) हां.. हां.. लेकीन जरीना हम दोनो कब तक..? मतलब.. पुरी जींदगी तो साहीलका साथ नीभा नही सकतीनां..? उनके लीये भी हमउर्म लडकी चाहीये.. जो जींदगी भर उनका साथ नीभा सके.. ओर कल अगर वो डोक्टर बन गइ ओर मेरे साहीलके साथ सादीके लीये इन्कार करदीया तो..?

जरीना : (सामने देखते) नही दीदी.. मेरी सबु अ‍ैसी नही हे.. वो भी साहीलसे बहुत प्यार करती हे.. ओर उसने साहीलके साथ सादी करनेका वादा भी कीया हे.. ये मुजे मालुम हे..

सलमा : (आंख गीली करते) जरीना.. तुमने तो मुजे उलजनमे डाल दीया हे.. मे साहीलका साथ नही छोड सकती.. मेरा साहील मेरे बगैर टुट जायेगा..

जरीना : (हाथ थामते) दीदी.. जानती हु मे.. प्लीज.. मान जाइअ‍ेनां.. ये हम सबकी जींदगीका सवाल हे.. हम दोनो मीलकर साहीलको मनायेगे.. अगर आपने मना कीया तो वो मुजे तलाक दे देगे.. तो फीर मे कहा जाउगी..?

सलमा : (नाटक करते) नही नही.. जरीना.. मे अ‍ैसा नही होने दुगी.. कुछ अ‍ैसा रास्ता नीकालो जो हम सबके लीये फायदे मे हो.. कुछ तो करना पडेगा..

जरीना : (हीचकीचाते धीरेसे) दीदी.. मे क्या सोचु..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आ रहा.. आप ही कुछ सोचीयेना..

सलमा : (सोचनेका नाटक करते धीरेसे) जरीना.. क्या कुछ अ‍ैसा नही हो सकता..? की साप भी मरजाये.. ओर लाठी भी ना टुटे..

जरीना : (थोडी हीचकीचाते धीरेसे) हां दीदी.. हो सकता हे.. अगर आप मानो तो..?

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) क्या..?

जरीना : (धीरेसे नजरे जुकाते) दीदी.. क्या अ‍ैसा नही हो सकता.. की आप अपने देवरसे सादी भी करलो.. ओर साहीलके साथ छुपकर रीस्ता भी.. म..त..ल..ब..

सलमा : (मनमे खुस होते) अरे नही नही.. मे दो मर्दोके साथ..? नही नही.. मुजे सोचने दो..

जरीना : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. कुछ सोचीये जो हम सबके लीये फायदेमे हो.. अगर दो मर्दोके साथ रीस्ता रखले तो क्या प्रोबलेक हे.. मेने भी रखा था.. बाप बेटे दोनोके साथ..

सलमा : (सामने देखते) हो सकता हे.. लेकीन क्या तु इसके लीये राजी हे..? तुजे बुरा नही लगेगा..?

जरीना : (सामने देखते) बुरा..? इनमे बुरा क्यु लगेगा..? क्या सीर्फ मर्दोको ही चार सादीया करनेका अधीकार हे हम ओरतोको नही..? मेरे भी बाप बेटे दोनोसे रीलेशन रखा था.. कीसीको पता नही चला..

जरीना : (अपना पासा फेकते) ठीक हे जरीना.. लेकीन मेरी दो सर्ते हे.. अ‍ेक तेरे लीये.. ओर अ‍ेक मेरे साहीलके लीये.. ओर ये फीरोज भाइसे बात मनवानेका हमारे पास अच्छा मौका हे..

जरीना : (सामने देखते) क्या..? मुजे आपकी सभी सर्त मंजुर हे..

सलमा : (सामने देखते) क्या मंजुर हे..? पहेले मेरी बात तो पुरी सुनलो..

जरीना : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. बोलीये..

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) पहेली सर्त.. अगर फीरोज भाइ अपनी सबानाकी सादी साहीलसे करवायेगे तो मे सादीके लीये राजी हु..

जरीना : (हसते) ओर दुसरी सर्त भी मुजे मालुम हे.. आप सादीके बाद भी साहीलसे रीस्ता रखोगी.. यहीनां..? हें..हें..हें..

सलमा : (कातीलाना मुस्कुराते) नही जरीना.. ये तुमने सीर्फ आधी बात कही हे.. मेरे साहीलको हर रात प्यार चाहीये.. अगर मे फीरोजभाइसे सादी करलु.. तबतो मे रातमे तुम दोनोके साथ सोउगी.. तो मेरे साहीलको सम्हालेगे कौन..? इसीलीये दुसरी सर्त तुम्हारे लीये हे..

जरीना : (आस्चर्यसे देखते) मेरे लीये..? वो भी बता दीजीये..
 
सलमा : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) सुन.. दुसरी सर्त.. तेरे लीये.. अगर मे फीरोज भाइसे सादी करलु.. तो सीर्फ मे ही नही.. तुजे भी हमारे साहीलको सम्हालना होगा.. मतलब.. तुम भी साहीलके साथ रीस्ता रखोगी.. ताकी मे फीरोजभाइके साथ रहु तो तुम मेरे साहीलको..

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही नही.. दीदी ये कैसी सर्त हे आपकी..?

सलमा : (धीरेसे मुस्कुराते) जरीना.. सोच साहील हम दोनोको वो खुसी दे सकता हे जो तेरा पती तुजे कभी नही दे सकता.. मेरा साहील हम दोनोको सम्हालनेमे सक्षम हे.. हम दोनोमो खुस रखेगे.. हम खुब मजे करेगे..

जरीना : (सरमाते हसते) दीदी.. फीर भी अ‍ेक डर लग रहा हे.. कभी इनको पता चल गया तो..?

सलमा : (मुस्कुराते हाथ थामते) अरे नही लगेगा.. क्या आज तब कादीर ओर तेरे बारेमे कीसीको पता चला..? नहीनां..? तो फीर क्यु डर रही हे..? मेरे साहीलका वो बहुत बडा हे.. हम दोनो खुब मजे करेगे.. अगर दोनो सर्त मंजुर हेतो बता मे फीरोज भाइसे नीकाह करनेके लीये रेडी हु..

जरीना : (मनमे खुस होते) दीदी.. बात तो आपकी सही हे.. ओर मेरे पास आपकी बात ना माननेका कोइ चारा भी नही हे..

सलमा : (सामने देखते) जरीना.. मे तुमसे सर्त माननेके लीये फोर्स नही कर रही.. जो भी होगा सीर्फ तेरी मरजीसे होगा.. कोइ जबरदस्ती नही.. तो हमे इस बारेमे फीरसे सोचना होगा..

जरीना : (हाथसे बाजी फीसलते जटसे) अरे नही नही.. मेरे कहेनेका वो मतलब नही था.. ठीक हे मे तैयार हु.. ओर सबुके लीये मे आज इनसे बात करती हु.. मुजे यकीन हे वो मान जायेगे..

सलमा : (हसते) अपने पतीको अच्छा जानती हो..?

जरीना : (हसते) हां.. सब मर्द अ‍ेक जैसे ही कमीने होते हे.. ये सर्त भी साहीलने रखी होगी.. सबको नइ चुत चाहीये.. देखा नही सुबह.. आपके देवर आज आपको कैसे देख रहे थे.. जैसे अभी के अभी आपको कच्चा चबा जाये..

सलमा : (मुस्कुराते बुब्सपे हाथ रखते) पता हे मुजे.. सबको नइ चुत चाहीये.. तो वो मान जायेगे.. ओर तुम भी बहुत खुबसुरत हो.. अ‍ेकदम पतली.. गोरी.. तेरे चुचे भी बहुत मस्त हे.. देखना मेरा साहील तो तुजे बीस्तरमे नंगी देखकर पागल होजायेगा.. वो भी तुजे बहुत पसंद करता हे.. ठहेर मे दरवाजा बंध करके आती हु..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या ये बात साहीलने आपको कही..?

सलमा : (दरवाजा बंध करते मुस्कुराते) नही.. हम ओरते हे.. हमे मर्दकी आंखोमे देखते सबकुछ पता चल जाता हे..

कहेते सलमा बहार गेट बंध करते रुममे आजाती हे.. ओर रुमका दरवाजा भी बंध कर लेती हे जीसे देखकर अ‍ेक पलके लीये तो जरीना भी गभरा जाती हे.. ओर उसे कुछ गलत होनेका अंदेसा होगया.. सलमा आते ही जरीनाके पास बैठ गइ ओर उनको अपनी बाहोमे भरते उनके होठोको चुमने लगी..





तो जरीना असहज महेसुस करने लगी.. ये उनकी जींदगीका पहेला अनुभव था जो सलमा उनके साथ कामाग्नीमे जलते लेस्बीयन खेल रही थी.. फीर तो कुछ देरके बाद जरीनाको भी मजा आने लगा.. वोभी अपने चुचे मसलवाकर मदहोस होने लगी.. ओर सलमाका साथ देने लगी..





उसने भी हीमत करते सलकाके बुब्सको थाम लीया.. ओर उनके होठोको चुमते अपना मुह खोल दीया.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेके मुहमे जुबान खुसाते पेच लडाने लगी.. ओर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगी.. फीर कुछ ही देरेमे दोनो नंगी अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ चुमा चाटी करते खेलने लगी..





सलमा : (मदहोसीमे) जरीना.. अपनाले मेरे साहीलको.. वो हम दोनोको बहुत मजे करवायेगा..

जरीना : (मदहोसीमे बडबडाते) हां दीदी.. जब पहेली बार गले मीला तब मुजे नीचे बहुत चुभा था.. तबसे मे उनका देखनेके लीये पागल हो रही हु.. मे साहीलके साथ रीलेशन रखुगी..

कहेते दोनो अ‍ेक दुसरेकी चुतको रगडने लगी.. आजसे जरीना ओर सलमाकी जींदगी बदल चुकी थी.. दोनोके अ‍ेक दुसरेकी चुतके साथ खुब खेला ओर अंतमे दोनो अ‍ेक दुसरेका पानी नीकालके संतुस्ट होगइ.. तब जरीना खुब सरमाइ.. ओर सलमा हसने लगी..





जरीना : (हसते कपडे पहेनते) ठीक हे दीदी.. अब मे कीसी भी हालमे आपके देवरको सबानाके लीये बनाउगी.. बस हम दोनोके बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये..

सलमा : (मुस्कुराते साडी पहेनते) अरे तु फीकर मत कर.. मे इन मर्दोको अच्छी तराह जानती हु.. अगर पता चल भी गया तो मे सब सम्हाल लुगी.. सबकी नब्स मेरे हाथ मे हे..

फीर दोनो अपने अपने कामपे लग गइ.. तो दुसरी ओर फीरोज भी सलमाके साथ सादीकी बातसे बहुत अक्साइटेड था.. उनका हथीयार बार बार सलमाके बारेमे सोचते खडा हो जाता.. ओर अ‍ेक बारतो खेतीकी रुममे जाकर उन मजदुरनको बुलाकर ठोक भी लीया.. जीन्हे वो पहेले भी कइ बार चोद चुका था..

आज सलमाने भी बहुत ही चतुराइसेअ‍ेक साथ दो तीर मारे.. उसने साहीलके लीये सबानाका हाथ भी फीरोजसे मांग लीया ओर साहीलके लीये अ‍ेक नइ चुतका इन्तजाम भी करलीया.. ताकी खुद फीरोजसे सादीके बाद साहीलसे रीलेशन रख सके साथमे उसने जरीनाको भी इस खेलमे सामील करलीया..
 
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