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- Dec 5, 2013
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ब्रीन्दा : (मुस्कुराते पास सटकर खीसकते) लेकीन वेकीन कुछ नही.. तो फीर अपनी मंजुमोमके आदेशका पालन करो.. समजलो ये मेरी भावना हे.. तो क्या आज थोडीसी फीस वसुल करोगे..? देखो घरपे सीर्फ हम दोनो ही हे.. कही दीनोसे मीलनेकी इच्छा थी.. मेरी इच्छाका सन्मान करो..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. येतो मेरे दोस्तको धोखा देना हुआनां..?
ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कुराते जांग सहेलाते) कोइ धोखा नही.. मेरी भी इच्छा हे.. ओर आपका दोस्त भी कोइ दुधका दुला हुआ नही हे.. क्या मे नही जानती वो बार बार सहेर उनकी बीवीको मीलने क्यु जाता हे..? वो भी अपनी सासको ठोकने जाता हे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको सब पता हे..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) ओर नही तो क्या.. डीलीवरीके दीन ही उनकी चाल बदल चुकी थी.. ओर वो श्रीधरको कैसी ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. क्या मे इतनी नासमज दीखती हु आपको..?
लखन : (सामने देखते) तो फीर आपने श्रीधरको रोका क्यु नही..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बदलेकी भावनासे.. कमीनीने मेरे पतीको मुजसे अलग करदीया हे.. उसे भी पता चले की असली मर्द कैसा होता हे.. ओर मेरे पतीसे भी अैसा बदला लुगी की वो सब जानते हुअे भी कुछ नही करपायेगा.. अब चलीये.. आज सब पैसे वसुल करलीजीये..
लखन : (मुस्कुराते ठीक हे भाभी.. लेकीन मे ये सब पैसे वसुल करनेके लीये नही करुगा.. सीर्फ ओरतोके सन्माकी बात होगी.. ओर वो भी सीर्फ अेक बार..
ब्रीन्दा : (मनमे खुस होते) अरे हां बाबा.. कोइ बात नही.. अेक बार दो बार वो हम बादमे डीसाइड करेगे.. मुजे पता हे आप अेक ही बारमे काम तमाम कर देते हे.. ओर अभी अेक हप्ते पहेले ही मेरा पीरीयड खतम हुआ हे.. तो ये सही समय हे.. मुजे आपपे यकीन हे मेरा काम होजायेगा..
लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? आप सचमे अैसा चाहती हो..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां.. मे चाहती हु हम दोनोकी नीशानीको मे जन्म दु.. चलीये.. अब देर मत कीजीये.. ओर हां.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. समज गयेनां..?
कहेते ब्रीन्दा लखनको हाथ पकडकर अपने बेडरुममे ले गइ.. कुछ ही देरके बाद ब्रीन्दा जोरोसे चीखते अपने दोनो पैर बेडपे पटक रही थी.. उनकी आंखसे आंसु बेह रहे थे.. कुछ ही देरमे ब्रीन्दाकी दर्द भरी चीखे कामुक सीसकारीगोमे तब दील होगइ..

ढाइ घंटेके बाद लखन बहार नीकला तो ब्रीन्दा लंगडाते उसे दरवाजे तक छोडने आगइ.. दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर अेक दुसरेके होंठ चुम लीये.. फीर दुबारा मीलनेका वादा करते ब्रीन्दाने लखनको वीदा कर दीया.. फीर दरवाजा बंध करके अेक पेइन कीलर खाली..
फीर वापस लंगडाते बेडरुममे चली गइ.. ओर बेसुध्ध जैसी हालतमे सो गइ.. लखनने बीना नीचे उतरे ब्रीन्दाकी तीन बार घमासान चुदाइ करली थी.. ओर अेक बार बाथरुममे भी खडे खडे चोद लीया.. आज ब्रीन्दाकी सारी कशर लखनने पुरी करदी.. जो श्रीधरकी सादीसे ही लखनको मीलनेका प्लान बना रही थी..
दुसरी ओर लखन घरपे आगया.. तबतक देवायतभी आ चुका था.. ओर चंदामे इतना सुधार देखकर बहुत खुस था.. फीर सबलोग खाना खाने अेकठे बैठ गये.. मंजुने नीलमको घर जानेके लीये बोला तो नीलमने सरमाके मना करदीया.. कुछ देर आराम करके लखन खेतोपे चला गया..
तो भानु खटीया पे लेटे लेटे बीडी पी रहा था.. लखनको देखकर हसने लगा.. ओर सही होकर बैठ गया.. लखनने उनका ओर घरका हाल चाल पुछा.. फीर मकानके बारेमे पुछा तो मकान आधेसे ज्यादा बन चुका था.. ओर खेतोके सामने ही दीखता था.. फीर लखन भानु वही चले गये..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मकानतो बहुत बडा ओर बडीया बनवा रहे हो.. कबतक होजायेगा..?
भानु : (मनमे खुस होते) बस.. तीन महीनेमे कंपलीट हो जायेगा.. भाइ.. सब आप लोगोकी बदौलत हो रहा हे.. वरना इतना बडा मकानके बारेमे तो सोच भी नही सकता..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. आप खेतोमे महेनत भीतो इतनी करते हो.. खैर छोडो ये सब बाते.. पहेले ये बताइअे हम दोनो वो डोक्टरको दीखाने गये थे.. कुछ फर्क पडा..?
भानु : (मुस्कुराते) अरे बहुत फर्क पडा.. बस.. धीरे धीरे सुधार हो रहा हे.. अब तो तैय करलीया हे.. सीर्फ रमा.. ओर रीटा.. ओर कोइ नही..
लखन : (मुस्कुराते) अब भी रीटा..? हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. येतो मेरे दोस्तको धोखा देना हुआनां..?
ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कुराते जांग सहेलाते) कोइ धोखा नही.. मेरी भी इच्छा हे.. ओर आपका दोस्त भी कोइ दुधका दुला हुआ नही हे.. क्या मे नही जानती वो बार बार सहेर उनकी बीवीको मीलने क्यु जाता हे..? वो भी अपनी सासको ठोकने जाता हे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको सब पता हे..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) ओर नही तो क्या.. डीलीवरीके दीन ही उनकी चाल बदल चुकी थी.. ओर वो श्रीधरको कैसी ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. क्या मे इतनी नासमज दीखती हु आपको..?
लखन : (सामने देखते) तो फीर आपने श्रीधरको रोका क्यु नही..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बदलेकी भावनासे.. कमीनीने मेरे पतीको मुजसे अलग करदीया हे.. उसे भी पता चले की असली मर्द कैसा होता हे.. ओर मेरे पतीसे भी अैसा बदला लुगी की वो सब जानते हुअे भी कुछ नही करपायेगा.. अब चलीये.. आज सब पैसे वसुल करलीजीये..
लखन : (मुस्कुराते ठीक हे भाभी.. लेकीन मे ये सब पैसे वसुल करनेके लीये नही करुगा.. सीर्फ ओरतोके सन्माकी बात होगी.. ओर वो भी सीर्फ अेक बार..
ब्रीन्दा : (मनमे खुस होते) अरे हां बाबा.. कोइ बात नही.. अेक बार दो बार वो हम बादमे डीसाइड करेगे.. मुजे पता हे आप अेक ही बारमे काम तमाम कर देते हे.. ओर अभी अेक हप्ते पहेले ही मेरा पीरीयड खतम हुआ हे.. तो ये सही समय हे.. मुजे आपपे यकीन हे मेरा काम होजायेगा..
लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? आप सचमे अैसा चाहती हो..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां.. मे चाहती हु हम दोनोकी नीशानीको मे जन्म दु.. चलीये.. अब देर मत कीजीये.. ओर हां.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. समज गयेनां..?
कहेते ब्रीन्दा लखनको हाथ पकडकर अपने बेडरुममे ले गइ.. कुछ ही देरके बाद ब्रीन्दा जोरोसे चीखते अपने दोनो पैर बेडपे पटक रही थी.. उनकी आंखसे आंसु बेह रहे थे.. कुछ ही देरमे ब्रीन्दाकी दर्द भरी चीखे कामुक सीसकारीगोमे तब दील होगइ..

ढाइ घंटेके बाद लखन बहार नीकला तो ब्रीन्दा लंगडाते उसे दरवाजे तक छोडने आगइ.. दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर अेक दुसरेके होंठ चुम लीये.. फीर दुबारा मीलनेका वादा करते ब्रीन्दाने लखनको वीदा कर दीया.. फीर दरवाजा बंध करके अेक पेइन कीलर खाली..
फीर वापस लंगडाते बेडरुममे चली गइ.. ओर बेसुध्ध जैसी हालतमे सो गइ.. लखनने बीना नीचे उतरे ब्रीन्दाकी तीन बार घमासान चुदाइ करली थी.. ओर अेक बार बाथरुममे भी खडे खडे चोद लीया.. आज ब्रीन्दाकी सारी कशर लखनने पुरी करदी.. जो श्रीधरकी सादीसे ही लखनको मीलनेका प्लान बना रही थी..
दुसरी ओर लखन घरपे आगया.. तबतक देवायतभी आ चुका था.. ओर चंदामे इतना सुधार देखकर बहुत खुस था.. फीर सबलोग खाना खाने अेकठे बैठ गये.. मंजुने नीलमको घर जानेके लीये बोला तो नीलमने सरमाके मना करदीया.. कुछ देर आराम करके लखन खेतोपे चला गया..
तो भानु खटीया पे लेटे लेटे बीडी पी रहा था.. लखनको देखकर हसने लगा.. ओर सही होकर बैठ गया.. लखनने उनका ओर घरका हाल चाल पुछा.. फीर मकानके बारेमे पुछा तो मकान आधेसे ज्यादा बन चुका था.. ओर खेतोके सामने ही दीखता था.. फीर लखन भानु वही चले गये..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मकानतो बहुत बडा ओर बडीया बनवा रहे हो.. कबतक होजायेगा..?
भानु : (मनमे खुस होते) बस.. तीन महीनेमे कंपलीट हो जायेगा.. भाइ.. सब आप लोगोकी बदौलत हो रहा हे.. वरना इतना बडा मकानके बारेमे तो सोच भी नही सकता..
लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. आप खेतोमे महेनत भीतो इतनी करते हो.. खैर छोडो ये सब बाते.. पहेले ये बताइअे हम दोनो वो डोक्टरको दीखाने गये थे.. कुछ फर्क पडा..?
भानु : (मुस्कुराते) अरे बहुत फर्क पडा.. बस.. धीरे धीरे सुधार हो रहा हे.. अब तो तैय करलीया हे.. सीर्फ रमा.. ओर रीटा.. ओर कोइ नही..
लखन : (मुस्कुराते) अब भी रीटा..? हें..हें..हें..



