Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 16 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०९

कहा तो भुमी देवायतके गले लगतेही उनके होठ चुम लेती हे.. फीर दोनोही प्यार भरी बाते करते अपने फ्युचरकी प्लानींग करते वहा काफी देर तक बैठे रहे.. फीर उठकर कारकी ओर चलने लगते हे.. तब दोनोही सहेरकी ओर वापस नीकल गये.. वहा सहेरमे पहोंचतेही देवायतने अ‍ेक बडी आलीसान होटेलकी ओर कारको जाने दीया.. तब पुरे रास्ते भुमीका सीर्फ देवायतको देखती ही रही.. आज वो देवायतको अपनी आंखोमे बसालेना चाहती थी.. उसे अबभी यकीन नही हो रहाथा.. की कोइ लडका उसे इतना प्यार भी कर सकता हे....अब आगे

ओर दोनो होटेलमे आकर रुक गये.. तब भुमीकातो होटलकी ओर देखती ही रेह गइ.. ये सहेरकी बडीही सानदार ओर मंहेगी आलीसान होटेल थी.. यहा सीर्फ रइसजादे ही आते थे.. भुमीको डर लगने लगाकी कही यहा उसे कोइ पहेचान नाले.. ओर वो देवायतके पास आकर उनका हाथ बाजुसे थामकर खडी होगइ.. ओर देवायतकी ओर देखती रही तभी देवायतने उसे आंखोके इसारेसे तसली दे दी.. फीरभी भुमीने कहा..

भुमीका : देवु.. यहा..? येतो बहुत महंगी होटेल हे.. यहा हमे कोइ देखना ले.. चलोना हम कही ओर चलते हे.. येतो बडे लोगोके लीये हे..

देवायत : भुमी.. आज दुनीयाकी सबसे खुबसुरत बीवी मुजे मीली हे.. यहा तुमसे बडा कोइ नही होगा.. अब तुजे कीसीसे डरनेकी जरुरत नही हे.. तुम मेरी बीवी हो.. ओर सस्ता महेगा अब सब मुजे देखना हे.. तुजे फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. (धीरेसे कानमे) बस देखना.. आज हमारी सुहागरातेमे मे सब वसुल करलुगा.. तुम तैयार रहेना.. हें..हें..हें..

कहातो भुमीका अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर मुह घुमाकर सरमके मारे मुस्कुराती रही.. फीर देवायतके सीनेमे अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह सर छुपालेती हे.. तो देवायत उसे अपनी बाहोमे कसके भीच लेता हे.. दोनोही अंडर पार्कींगमे थे वहा कोइ नही था.. ओर देवायत भुमीको अ‍ेक दिवालके सहारे लेगया.. ओर वहा उनको दिवालके सहारे खडा करते उनके दोनो हाथ दिवालसे सटाकर पंजेसे पकड लीया..





ओर देवायतने भुमीके होठोपे अपने होंठ रख दीया.. तब भुमी आंख बंध करके मदहोस होगइ.. ओर देवायतको लीपकीस करते उनका साथ देने लगी.. दोनोही थोडा मुह खोलके अ‍ेक दुसरेके होठोके रसको पीने लगे.. भुमीकाकी चुत अ‍ेक बार फीर उतेजनाकी वजहसे हरकतमे आगइ.. तभी देवायतने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते भुमीकी चुतको दबोच लीया.. तो भुमीका आहे भरते उछलने लगी.. ओर जोरोसे देवायतको बाहोमे भीच लीया..

भुमीका : (लडखडाती कामुक आवाजमे हसते) आउच.. देवु.. बस.. बस.. यहा नही.. कोइ देख लेगा.. घर चलो.. अब मे आपकी बीवी हु.. आप जैसे प्यार करना चाहे कर सकते हो.. पर यहा नही.. प्लीज.. मे कंट्रोल नही करपाउगी..

देवायत : (भुमीकी आंखोमे देखते) देखना फीर मुकर मत जाना.. तुजे सुबह तक प्यार करता रहुगा.. भुमी.. तुजे हमारी सुरागरात जींदगीभर याद रहेगी.. तुजे चोद चोदके तेरी हालत बीगाड दुगा..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते मुस्कुराते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो.. पहेले घरतो चलो.. फीर देखते हे.. अबतो आपकी पत्नी हु.. मनाभी नही कर सकती.. आप बहुत गंदे हो.. चलोना कही ओर चलते हे.. वरना घर चलो मे खाना बना लुगी.. देवु.. मे घर जाना चाहती हु..

देवायत : (हसते) नही मतलब नही.. ओर ये कबसे आप आप क्या लगा रखा हे..?

भुमीका : (देवायतकी आंखोमे तीरछी नजरसे देखते) अब आप मेरे पती हो.. जबभी हम दोनो अकेले होगे मेतो आपसे आप ही हुगी.. हां सबके सामने ठीक हे.. हम बुआ भतीजे वाला व्यवहारही करेगे.. चलीये..

कहेते दोनोही अंदरकी ओर जाने लगे तब भुमीकानेभी सब सरमको त्याग दीया.. ओर वो देवायतके हाथोमे हाथ फसाकर उनके साथ अ‍ेक पत्नीकी तराह उनसे सटकर चलने लगी.. ओर दोनो होटेलके अंदर आ गये.. तब वहा म्युजीक बज रहाथा ओर कइ कपल डांस कर रहेथे.. तो कुछ काउन्टरपे खडे होकर सराब पी रहेथे तो अ‍ेक साइडमे कुछ लोग फेमीलीमे बैठकर खाना खा रहे थे.. भुमीका सब देखतेही दंग रेह गइ..

तभी अ‍ेक ब्युटीफुल लेडी दोनोके पास आगइ.. ओर दोनोको मे आइ हेल्प यु.. कहेकर बाते करने लगी.. तब देवायतने उनसे कुछ बाते करली तब वो लेडी दोनोको अ‍ेक खाली टेबलके पास लेगइ.. ओर दोनोको वही बीठा दीया फीर कुछ ओर्डर लेकर चली गइ.. खाना आता तबतक देवायत भुमीको जबरदस्ती लेकर स्टेजपे चला गया.. ओर भुमीकाकी कमरमे हाथ डालकर डांन्स करने लगा तब भुमीका बहुतही सरमाइ..





भुमीका : (देवायतके कंधेपे सर रखते डांस करते) देवु.. मे यहा पहेली बार आइ हु.. अ‍ैसा प्यार मुजे कभी नही मीला.. आप मुजे पहेले क्यु नही मीले..?

देवायत : (कमरमे हाथ डालते डांस करते) भुमी.. मेनेतो सपनेमे भी नही सोचाथा की तुम मुजे मीलोगी.. ओर हम सादी करेगे.. मुजेतो आजभी ये अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. की तुम अभी मेरी बाहोमे हो.. आइ लव यु भुमी.. मे जींदगीभर तेरा साथ नही छोडुगा आइ प्रोमीस..

भुमीका : (देवायतके कंधेपे सर रखते) देवु.. आइ लव यु टु.. सोचातो मेनेभी नही था.. पता नही.. फीरभी जबसे आपको पहेली बार देखा तबसेही मे आपकी ओर खीची चली आइ.. मेभी वादा करती हु.. मेभी आपका साथ कभी नही छोडुगी.. अबतो हम जन्मो जन्मके लीये साथ जुड गये हे..

उधर वहा दोनोने प्यारभरी बाते करते काफी वक्त साथमे डांस कीया.. तभी उनके टेबलपे खाना आगया तो देवायत भुमीकाको लेकर वापस टेबलपे आगया.. ओर दोनो खाना खाने लगे.. आज भुमीका बहुत ही खुस लग रही थी.. अ‍ैसी होटेलमेतो वो नरेशके साथ या किशनके साथ भी नही आइथी.. ओर अपने इस नये पतीको पाकर वो अपने आपको धन्य समजने लगी.. ओर दोनोने डीनर करलीया तब देवायतने सब बील पे करदीया ओर कार लेकर घरकी ओर नीकलने लगे..

तब भुमीकाके दिलकी धडकन तेज होने लगी.. आखीर वो वक्त आही गया.. जीनके लीये भुमीका कबसे इन्तजार कर रही थी.. वोतो समजतीथी की आज देवुको बुला लुगी ओर उसे अ‍ेसे रीजाउगी की वो तभी उनकी चुदाइ करले.. ओर पुरी रात देवायतसे चुदवाती रहुगी.. यही सब सोचते उन्होने बहुत प्लानींग करली थी.. लेकीन आजतो देवायतने उनकी सोचके मायने ही बदल दीये.. सच्चा प्यार क्या होता हे.. आज देवायतने भुमीको अहेसास करवा दीया.. ओर वो हमेसाके लीये देवायतको समर्पीत होगइ..

पुरे रास्ते भुमी देवायतको देखती रही.. उसे पताही नही चलाकी कब उनका घर आगया.. देवायतने कार रोककर मेइन गेइट खोल दीया.. ओर अपनी कारको अंदरकी ओर लेली फीर दोनोही कारसे उतर गये.. भुमी वही कारके पास खडी रही ओर देवायत उनके पास आगया..तब देवायत भुमीको अपनी बाहोमे भर लेता हे ओर उनके गलेमे मुह डालके चुमने लगता हे तो भुमीकाभी मदहोस होने लगी.. ओर उसने देवायतसे कहा..





भुमीका : (लडखडाती आवाजमे) ओह.. दे..वु.. यहा बहार नही.. कोइ उपरकी मंजीलसे हमे देख लेगा.. आप गेइट बंध करके अंदर आजाओ.. वही आपका इन्तजार कर रही हु..

देवायत : (हसते) यस डार्लींग.. तुम जाओ मे अभी आया.. आज तुमको छोडने वाला नही हु..

कहातो देवायत हसते हुअ‍े भुमीसे अलग होगया तो भुमी भी डांर्लींग सुनकर सर्मसार होते मु्सकुराने लगी.. ओर अपने धरकी ओर जाने लगी.. तबतक देवायतभी गइटको बंध करने चला गया.. ओर उसने गइट बंध करके लोक भी लगा दीया.. तबतक भुमीका घरका ताला खोलकर अंदर जा चुकी थी.. ओर देवायत चलके घरके अंदरकी ओर जाने लगा.. जैसेही होलमे पहोंचातो वहा कोइ नही था..

ओर भुमीके रुमका दरवाजा हल्कासा खुलाथा.. देवायत धीरेसे होलका दरवाजा बंध करके लोक कर देता हे.. ओर भुमीके रुमकी ओर चला जाता हे.. फीर धीरेसे दरवाजेको धका मारते अंदर देखता हे तो भुमीका अपने सब मोर्डन कपडे नीकालके सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे अलमारीसे नाउट गाउन नीकाल रहीथी.. ओर देवायत धीरेसे उनके पीछे चला गया.. ओर भुमीको पीछसे अपनी बाहोमे भरलीया..

तब भुमीको अपने पेटमे देवायतका हाथ महेसुस होतेही वो सब समज गइ.. उनकी दिलकी धडकन बढ गइ ओर आंख बंध करते मदहोसीमें अपना सर पीछे डालते देवायतके कंधेपे रख देती हे.. तो देवायतभी भुमीके कंधेपे सर रखते उनके गलेको चुमने लगता हे.. तब भुमीका सरीर कांपने लगा.. ओर जटसे पलटकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके सीनेमे सर छुपा लेती हे.. उनकी चुतमे फडफडाह होते खुजली होने लगी..

भुमीको अ‍ैसा लगने लगाकी देवायत उसे अभीके अभी अपनी चुतमे लंड डालके चोदकर मसल दे.. उनकी चुतसे लगातार तरल पानीका रीसाव होने लगा.. ओर वो देवायतको उतेजनाकी वजहसे कसके बाहोमे भीच लेती हे.. आज वो बीलकुल नीसब्द हो चुकी थी.. आज वो अपने आपको किशनके बाद उनके बेटे देवायतको पुर्ण समर्पीत कर चुकी थी.. आज वो कइ सालो बाद अपने रुममे अ‍ेक मर्दके साथ अकेली थी.. जो उसे बाहोमे भरके खडाथा..

देवायत दोनो हाथोसे भुमीके गालोको अपनी हथेलीमे थाम लेता हे.. ओर भुमीकी आंखोमे देखते लगता हे.. तो भुमीभी अ‍ैसेही देवायतकी आंखोमे लगातार देखती रही.. देवायतको भुमीकी आंखोमे अपने लीये बेसुमार नीर्दोस प्यार नजर आ रहाथा.. आज भुमी सचमे अ‍ेक मासुम लडकीकी तराह दीख रही थी.. आज देवायतने फीरसे भुमीको अपनी जवानीकी ओर धकेल दीया था.. देवायतसे उसे हर तरेह का प्यार मील रहाथा.. नरेश किशनके बाद आज देवायत तीसरा मर्द था जो उनका पती था..





आज भुमी अ‍ेक बार फीर तीसरी बार सादीके बंधन मे बंध चुकी थी.. जो अपनी सुहागरात मनानेके इन्तजार मे थी.. तभी अचानक देवायतने भुमीको अपनी गोदमे उठालीया.. तो भुमी खुब सरमाइ ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालते उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती ही रही.. तो देवायतभी उनकी आंखोमे देखते थोडी देर भुमीको गोदमे लेकर खडा रहा.. फीर धीरेसे चलते भुमीकाको लेकर उनके बेडकी ओर चल पडा..

दोनो लगातार अबभी अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देख रहेथे.. ओर देवायतने भुमीको धीरेसे अपने बेडपे लीटा दीया.. तभी भुमीनेभी देवायतका हाथ पकड लीया.. ओर अपनी ओर खीचने लगी.. तो देवायत उनकी कमरके पास बैठ गया ओर भुमीके सरपे जुकने लगा.. तो भुमीने अपनी आंखे बंध करली.. उनके दोनो गुलाबी होंठ फडफडाने लगे.. ओर देवायतके होठोसे मीलनेके लीये तडपने लगे..

ये वही बेड था जहा उसने पहेले नरेशके साथ सुहागरात मनाइ थी.. फीर किशनके साथ ओर अब उनके बेटे देवायतके साथ अपनी सुहागरात मनाने जा रहीथी.. यही बेडपे राखीके तोहफे के बदलेमे अपनी गोद भरनेके लीये किशनको तीन दिन तक प्यार करनेको मजबुर कीया था.. ओर बादमे किशनके साथ कइ राते रंगीन कीथी.. जब नरेश गुजर गया तब भुमी किशनकी बीवी बनकर उनका बीस्तर गरम करती रही..

देवायत : (होंठ चुमते) भुमी डार्लींग क्या सोच रही हे..?

भुमीका : (सरमाते मुस्कराते ना मे गरदन हीलाते) कुछ नही.. देवु.. अ‍ैसा लग रहा हे मे आज पहेली बार अपनी सुहागरात मना रही हु.. आपने तो मेरे प्यारके मायने ही बदल दीये.. आपने आज मुजे अपनी कोलेज वाली जवानीका अहेसास करवा दीया..

देवायत : (गाल चुमते) नही भुमी.. अभी तुजे जवानीका अहेसास करवाना तो बाकी हे.. मुजे तुमसे पुरी रात ओर कलका पुरा दिन तुजे प्यार करना हे..

कहातो भुमी सर्मसार होकर मुस्कुराने लगी.. ओर देवायत भुमीकी कमरमे अपना पैर डालके चड गया.. तो भुमीने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तभी देवायत उनके गलेमे मुह डालकर गलेको चुमने लगा.. ओर भुमीका आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. देवायत गलेको चुमने गाल चुमने लगा.. फीर भुमीकी आंखोमे चुमते उनके सरकोभी चुमलीया.. ओर आखीर भुमीके होंठोपे अपने होठ रख दीये..





देवायत लगातार भुमीके होठ चुम रहाथा तो भुमीनेभी अपने होंठ थोडा खोलते अपनी जीभ थोडीसी नीकालते देवायतके होंठ चुमने लगी.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ अपनी जीभके पेच लडाते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. जैसे कोइ अमृत पी रहे हो.. ओर देवातत होंठ चुमते अ‍ेक हाथसे भुकीके बुब्सको ब्राके उपरसेही मसलने लगा.. तो भुमीभी मदहोस होकर सीसकारीया करने लगी.. ओर देवायतके होंठ जोरोसे चुसने लगी..





भुमीकी चुत उतेजनाकी वजहसे फडफडाते हरकतमे आगइ.. चुतके दोनो होस्ट अंदर बहार होते पानी छोडते रहे.. तभी अचानक देवायत भुमीको बाहोमे भरते पलट जाता हे.. ओर भुमीको अपने उपर लीटा देता हे.. तबभी भुमी लगातार देवायतके होठोको चुसती रही.. तो देवायतने दोनो हाथ भुमीकी पीठमे लेजाते उनके ब्राके हुकको खोल दीया.. तब भुमीकी ब्रा ढीली होते देवायतके सीनेपे गीर गइ..

इस बातका भुमीको पताही नही चला.. ओर देवायत फीरसे भुमीको पलटते उनके उपर छा गया.. तब भुमीकी ब्रा नीकलके बेडपे गीर गइ.. तबभी भुमी मदहोस होकर देवायतको लगातार चुमची रही.. तो देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. ओर आखीर भुमीके बुब्सको अपने मुहमे लेलीया.. वो भुमीके बुब्सकी नीपलको चुमने लगा.. तभी भुमीको अपने सीनेमे नंगेपनका अहेसास होगया..





ओर वो सरमाते सीसकारीया करते देवायतका सर पकडते अपने बुब्सपे दबाने लगी.. देवायत बारी बारी दोनो बुब्सको मसलते चुमता रहा.. तो बीच बीचमे बुब्सकी नीपलको अपने दातोसे खीच लेता.. तब भुमी हल्के मीठे दर्दसे सीसकारीया करने लगती.. आज वो देवायतके प्यारके समुंदरमे गोते लगाने लगी.. अब भुमीसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे..

ओर वो अचानक देवायतकी आंखोमे देखते देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी.. ओर देवायतका सर्ट नीकाल दीया तब वो देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलनेकी कोसीस करने लगी.. तभी देवायतने उनकी मददकी ओर भुमीके उपरसे हटकर पेन्टको नीकाल दीया.. अब देवायत सीर्फ नीकरमे रेह गया.. तो भुमीभी सीर्फ अपनी पेन्टीमे रेह गइ.. ओर वो अ‍ेकदम सर्मसार होते देवातकी चडीमे उनके विसाल लंडको इमेजींग करने लगी..

भुमी वापस देवायतको अपने उपर चडनेका इन्तजार करते सरमके मारे उनसे नजरे चुराने लगी.. आज वो मासुम कलीकी तराह सरमा रहीथी.. ओर देवायतने अपनी चडीभी नीकालदी.. तब भुमीने तीरछी नजरोसे देवायतका लंड देख लीया.. ओर वो मुह फाडतेही गभरा गइ..

क्युकी देवायतका लंड उनकी समजसे कही ज्यादा लंबा ओर मोटा था.. तभी देवायतने भुमीकी चडीमे उंगलीया फसाकर चडीको नीकालने लगा तो भुमी अपनी कमरको उची करते देवायतको चडी नीकालनेमे मदद की.. ओर देवायत भुमीके पैरके बीच आगया..

भुमी : (सरमाते धीरेसे) दे..वु.. अब आजाओनां.. येतो बहुत बडा हे.. मुजे कुछ होगातो नही..?

देवायत : (हसते) अरे कुछ नही होगा.. बस आज तुजे जनतकी सैर करवाके हर तराहसे तृप्त कर दुगा..

कहेते देवायत भुमीके पैरके बीच जुक गया तो भुमीने दोनो पेर मोडकर थोडे फैला दीये.. वो समज गइकी देवायत क्या करना चाहता हे.. तभी देवायतने भुमीकी चुत सहेलाते अपना मुह चुतपे लगा दीया.. ओर भुमीकी चुतकी पंखडीयोको अपने होठोसे दबाते खीचने लगा.. तो भुमीने दोनो हाथोसे चदरको पकडलीया.. ओर वो तीलमीलाते जोरोसे सीसकारीया करते छटटाने लगी..





अ‍ैसा ओरल सेक्स आजतक उनके साथ ना कभी नरेशके कीयाथा ओर नाही किशनने.. भुमी आज सचमे अपने आपको स्वर्ग मे सैर करते महेसुस कर रहीथी.. उनके लीये ये सब ज्यादा बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. वो जल्दसे जल्द देवायतकी आगोसमे समा जाना चाहती थी.. ओर अचानक कांपने लगी.. ओर अपनी आधी आंख उपर चडाते मदहोसीमे अपनी कमरको जटके देते सातवे आसमानमे चली गइ..

अ‍ेक अदभुत अनुभुती करते आधी आंख चडाते आनंदकी अनुभुती करने लगी.. तब उनकी चुतसे अ‍ेक पानीका फवारा नीकल गया.. ओर थोडी देरके बाद वो सांत होगइ.. तब उसे होस आयाकी देवायत उनकी चुतमे जीभ डालके चुतके दानेसे छेडछाड कर रहा हे.. ओर वो सर्मीन्दा होने लगी.. उसने तीरछी नजरसे देवायतकी ओर देखा तो देवायत उनकी चुतको चाटते साफ कर रहाथा.. तब वो खुब सरमाइ..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. ये आप क्या कर रहे हे..? वो गंदा होता हे.. अ‍ैसा मत कीजीये..

देवायत : (सामने देखते) नही भुमी.. येतो मेरी भुमीका अमृत हे.. पीनेदे मुजे.. आज तुजेभी अपना अमृत पीलाउगा.. आज तुजे हर तराह तृप्त करदुगा..

कहातो भुमी सर्मसार होगइ.. तभी देवायतने अपना वही पडे नेपकीनसे मुह पोछ लीया.. ओर भुमीके उपर आगया.. तो भुमीने सरमाते देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठ चुमने लगी.. भुमीके तनमे वासना हावी हो चुकीथी.. वो अब जल्दसे जल्द देवायतसे मीलन करना चाहती थी.. ओर उसने सब सरम त्यागके होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते देवायतका लंड पकड लीया..

ओर मुठीमे पकडते होले होले सहेलाने लगी.. तो देवायतभी उनके होंठको चुमते नीचेकी ओर मुह लेकर भुमीके बुब्स मुहमे लेकर चुसने लगा.. ओर दुसरे बुब्सको दबाते मर्दन करने

लगा.. तब भुमीका अ‍ेकदम कामातुर होगइ.. ओर देवायतके लंडको पकडते अपनी चुतपे घीसने लगी.. तभी देवायत भुमीको बाहोमे भीचते पलट गया तो भुमी देवायतके उपर आगइ ओर सरमके मारे देवायतके गलेमे मुह छुपाते कहेने लगी..

भुमीका : (कामुक आवाजमे धीरेसे) दे..वु.. प्लीज.. अब बरदास्त नही होता.. कुछ कीजीयेनां..

देवायत : (हसते) हंम.. क्या करु..? वोही तो कर रहा हु.. क्या कुछ ओर करना हे..?

भुमीका : (सर्मसार होते) देवु.. प्लीज.. मत तडपाइओ मुजे.. जैसे आपकोतो पताही नही.. आपकीतो दो दो सादी होगइ हे.. तो समज जाइअ‍ेनां.. क्यु तंग कर रहे हे..

देवायत : (होंठ चुमते) मुजे पता हे.. फीरभी तुजे बताना पडेगा.. की तुजे कैसे प्यार करना हे.. ओर मेरी दो सादी होगइ हे..? मेनेतो सीर्फ मंजुसे सादी की हे.. आज तुमसे दुसरी सादी हुइ हे..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही.. आपने मुजे दो कहाथा.. मेरे साथ तीसरी सादी हे.. ओर इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभी कुछ कीजीयेनां.. क्यु मुजे बेसर्म बना रहे हो..? जैसे आपको कुछ पताही नही..

देवायत : (गाल चुमते) भुमी प्यारतो कर रहा हु.. बता तुजे कीस तरेहका प्यार चाहीये..?

भुमीका : (सर्मसार होते थोडे गुस्सेमे) मुजे नही पता.. आपकी जो मरजीमे आये करो.. मेरी कहा सुनते हो..?

देवायत : (हसते होंठ चुमते) अरे मेरी रानी गुसा मत करो.. बस देखती जाओ आजतो तुजे जनतकी सेर करवाना हे.. इनसे पहेले मेरी बीवीसे थोडा प्यारतो करलु.. फीरतो सुबह ही तेरे उपरसे उतरुगा..

भुमीका : (सर्मसार होते) आप बहुत नोटी हो.. लगताहे मुजेभी बेसर्म कर दोगे.. कीस तराह प्यार करना चाहते हो..? मुजेभी तो पता चले..

देवायत : (हसते) भुमी.. चल मेरे उपर ही घुमजा.. इसे सीक्स नाइन पोजीसन कहेते हे.. तुजे मुहमे लेना हे.. ओर उसे लोलीपोपकी तराह चुसना हे.. क्या अ‍ैसा कभी कीया हे..?

भुमीका : (सरमाते हसते) छी.. कीतने गंदे हे आप.. ये कोइ मुहमे लेनेकी चीज हे..? देवु.. प्लीज आप अ‍ैसेही मेरे उपर आजाइअ‍ेना.. मुजेतो वोही प्यार चाहीये.. मे आपके लीये बहुत तडपी हु.. मेने अ‍ैसा कभी नही कीया..

देवायत : भुमी सीर्फ अ‍ेक बार ट्राइ करले.. इनमे कुछ नही होता.. तुजे बहुत मजा आयेगा.. अगर तुजे अच्छा नही लगातो हम नही करेगे.. बस सीर्फ अ‍ेक बार.. प्लीज.. मेरी खातीर..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) गंदे कहीके.. मुजे पता हे आप बहुत जीदी हो.. मानोगे नही..

कहेते भुमीका देवायतकी कमरपे बैठ गइ.. ओर प्यारसे देवायतके गालपे अ‍ेक चपत लगाते घुमते देवायतके लंडके उपर जुक गइ.. तो देवायतने भी उनकी कमरको पकडते अपने मुहकी ओर खीच दीया.. तब भुमीका सर्मसार होगइ. ओर धीरेसे अपनी जीभ नीकालते लंडको टच कराने लगी.. तो लंडके अंदरसे तरल पानी नीकल रहाथा.. जो भुमीकाको नमकीनसा लगा.. ओर उसने धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया..





फीर आहीस्तासे लंडको अंदर बहार करने लगी.. तभी उसे अपनी चुतपे देवायतकी जीभ महेसुस हइ.. ओर वो उतेजीत होते पागल होने लगी.. ओर लंडको थोडा जोरोसे अंदर बहार करने लगी.. भुमीकाकोभी अब अच्छा लगने लगा.. वो जोरोसे पुरा लंड मुहमे लेकर अंदर बहार करने लगी.. तो देवायतभी चुतमे जीभ डालके चुतके दानेको छेडने लगा तो भुमीका ओर कामातुर होगइ.. ओर लंडको मुहमे लेकर जोरोसे चुसने लगी..

देवायतको भुमीका का मुह बहुत गरम लगने लगा उनका लंड तनके लोहेकी रोडकी माफीक सख्त होगया.. तो कुछही देरमे भुमीका सरीर कांपने लगा वो अ‍ेक बार फीर जडनेकी कगारपे थी.. ओर देवायत अपनी कमरको उछालते भुमीके मुहको जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछही देरमे लंड ओर चुतने अपना कंट्रोल खोदीया ओर अ‍ेक दुसरेके मुहमे जडने लगे.. भुमीका अपना मुह हटाती इनसे पहेलेही देवायतके लंडसे अ‍ेक जोरोकी पीचकारी नीकलके भुमीकाके गलेमे उतर गइ.. ओर भुमीका मुहसे लंड नीकालकर खांसने लगी..

वो देवायतके उपरसे जटसे उतर गइ ओर बाथरुमकी ओर भागने लगी.. तो देवायतभी उनके पीछे चला गया.. अंदर जाते देखातो भुमीका गेन्डीमे उ.. उ.. करते उबका करने लगी.. फीर अपना मुहमे पानी लेकर बाहर थुकने लगी.. तो देवायत वही उनके पीछे खडे रहेते उनकी पीठ सहेलाते हस रहाथा.. जब भुमीने मुह साफ करलीया तो पलटके देवायतके सीनेमे मुका मारने लगी.. तो देवायतने हसते हुअ‍े उसे बाहोमे भीच लीया..

भुमीका : आप बहुत कमीने हो.. देखा..? आपका पानी मुहमे चला गया.. कोइ अ‍ैसा करता हे..?

देवायत : (भुमीको गोदमे उठाते) डार्लींग इसे पानी नही अपने पतीका अमृत कहेते हे.. चलो अब मेरी बीवीको खुस कर देता हु.. आज तो तुजे पका पहेली बारमे ही प्रेगनेन्ट कर दुगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सर्मसार होते सीनेमे मुह छुपाते हसते) क्या प्रेगनेन्ट कर दुगा..? अरे बाबा ध्यान रखना.. मे सृतीको क्या मुह दीखाउगी..? अच्छा कीया याद दीला दीया.. मेरे पासतो आइपील भी नही हे..

देवायत : (बेडपे लीटाते) अरे सृतीको मे समजादुगा.. तु उनकी फीकर मत कर.. ओर तुजे कल मेडीकलसे आइपील लाकर दे दुगा खा लेना.. लेकीन सोच.. हमारा बच्चा कैसा होगा.. उसेभी डोक्टर बनाउगा..

चुमीका : (देवायतको अपने उपर खीचते) देवु.. प्लीज अभी नही.. हम सृतीकी सादीके बाद कुछ सोचेगे..

देवायत : (हसते गाल चुमते) नही भुमी.. मेतो मजाक कर रहाथा.. मुजे तेरी इजतका खयाल रखना हे..

भुमीका : (हसते बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. आप कीतने अच्छे हो..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) हंम.. बुच बुच.. बेबी.. आइ लव यु टु.. बस अ‍ैसेही खुस रहा कर.. चल अब तुजे जनतकी सेर करवाता हु.. तैयार होजा आज सुबह तक तुजे सोने नही दुगा..

कहातो भुमी सर्मसार होने लगी.. भुमीका आज बहुत खुस थी.. देवायतने उसे अपना लंड चुसवाकर कीतना प्यारा अहेसास करवा दीया था.. वो बहारसे गुसे होनेका नाटक कर रहीथी.. लेकीन अंदरसे मनही मन खुस होगइ थी.. उसे देवायतका पानी पीना बहुत अच्छा लगा.. ओर वो देवायतको पीठके बल लीटाते उनके पैरके बीच आगइ.. ओर फीरसे लंडको सख्त करनेके लीये धीरेसे लंडको सहेलाते देवायतके होंठ चुमने लगी.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते लंडको चाटने लगी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११०

कहातो भुमी सर्मसार होने लगी.. भुमीका आज बहुत खुस थी.. देवायतने उसे अपना लंड चुसवाकर कीतना प्यारा अहेसास करवा दीया था.. वो बहारसे गुसे होनेका नाटक कर रहीथी.. लेकीन अंदरसे मनही मन खुस होगइ थी.. उसे देवायतका पानी पीना बहुत अच्छा लगा.. ओर वो देवायतको पीठके बल लीटाते उनके पैरके बीच आगइ.. ओर फीरसे लंडको सख्त करनेके लीये धीरेसे लंडको सहेलाते देवायतके होंठ चुमने लगी.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते लंडको चाटने लगी....अब आगे





लेकीन भुमीको नही पताकी ये देवायत कौन हे.. वो देवायतको भी किशनसे कंपैयर कर कर रहीथी.. भुमीको नही मालुमकी बाबाकी दी हुइ जडी बुटीकी वजहसे देवायतमे अ‍ेक साथ दस ओरतोको संतुस्ट करनेकी क्षमता थी.. उनका लंड जडनेके बावजुद भी दुसरी ओरतको चोदनेके लीये हमेसा तैयार ही रहेता.. लेकीन देवायत भुमीको उक्साते उनकी सारी सरम दुर करना चाहता था.. इसीलीये भुमी जोभी कर रहीथी उसे करने दे रहाथा.. तबतक वो भुमीके बुब्सके साथ खेलते मसलता रहा.. तभी..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे कामुक्तासे) दे..वु.. प्ली..ज.. अब ओर बरदास्त नही होगा.. आपका दमदार लंडसे चोदलो मुजे.. मे आपके लंडको अपनी योनीमे लेना चाहती हु.. मेरी बरसोकी प्यासको बुजादो.. जबसे आपके लंडके बारेमे सुना तबसे आपके लंडसे चुदवानेके लीये मे तरस रही हु.. आइअ‍े मेरी प्यास बुजा दीजीये.. बस यही सुनना चाहते थेनां आप..? आखीर आपने मुजे बेसर्म करही दीया..

कहातो देवायत हसते हुअ‍े भुमीको अपनी बाहोमे भीच लेता हे ओर पलटजाता हे.. भुमीका अब देवायतके नीचे लेटी हुइथी.. ओर उसने सरमाते अपने दोनो पैर थोडा घुटनोसे मोडकर फैला दीये.. तभी देवायत उनके बुब्सको मसलते चुमने लगा ओर उपरकी ओर सरकते पुरी तराह भुमीपे छा गया.. वो भुमीके होठोको चुमते उनकी गरदनको चुमने लगा.. तो भुमी मदहोसीमे पागल जैसे होने लगी..

तभी भुमीकाको अपनी चुतपे देवायतका सख्त लंड चुतपे ठोकर मारते महेसुस हुआ.. देवायतका लंडभी आज नइ चुतको देखकर अपने बीलमे घुसनेके लीये मचल रहाथा.. ओर आखीर उसने अपने बीलका रास्ता ढुंढ ही लीया.. तभी भुमीको अपनी चुतकी सुराखमे देवायतका सख्त लंड महेसुस होते ही वो जोरोसे आंख बंध करते देवायतको बाहोमे कसते उनके होठोको जोरोसे चुमने लगी..

वो आने वाले अगले पलके लीये तैयार होगइ.. उनकी चुत जोरोसे फडफडाते हरकतमे आते वोभी लंडको नीगलनेके लीये तैयार होगइ.. ओर पानी छोडते देवायतके लंडको भीगोने लगी..

आखीर देवायतने अपनी कमरको अ‍ेक जटका मरवाते लंडको चुतपे पुस कर दीया.. तो आधा लंड भुमीकी चुतमे चला गया.. ओर भुमीकी आंख बडी होगइ.. ओर वो होंठ छुडाते जोरोसे चीख पडी.. उनकी आंखसे आंसेुंओकी धारा बहेने लगी.. ओर वो दोनो हाथोसे चदर पकडते मुहको इधर उधर करते छटपटाते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. जैसे उनकी चुतमे कीसीने गरम लोहेका गरम सरीया घुसा दीया हो..

भुमीका दो दो लंडको अपनी चुतमे ले चुकीथी.. किशनसे पहेली बार चुदवाते वो बेहोस हो चुकीथी.. जब तक किशन वहा आता जाता रहा तबतक वो किशनके बडे लंडसे चुदवा रहीथी.. जीनकी वजहसे वो देवायतके लंडको वो हल्केमे ले रहीथी.. लेकीन उनको नही पताथाकी इतने सालोसे वो चुदाइके बीना रही जीनकी वजहसे उनकी चुतमे थोडासा कसाव आ चुकाथा.. ओर देवायतका लंड किशनसे थोडा बडा था..

जैसेही देवायतका लंड थोडा भुमीकी चुतमे घुसा.. तो भुमीका अ‍ेक कुआरी लकडीकी तराह चीखने चसलाने लगी.. जैसे आज वो अपनी चुतमे पहेली बार लंड ले रही हो.. ओर आखीर चीलाती भी क्यु ना हो.. देवायतका लंड अपनी चुतमे लेना कोइ आसान बात नही था.. अ‍ेकतो बाबाकी जडीबुटी.. ओर उपरसे खुद कामका अंस.. जीनकी वजहसे उनका लंड नोर्मलसे थोडा लंबा ओर मोटाथा..





भुमीका : (चीखते) उउउइइइइ..मां....नही..नहीइइइ दे..वु.. इसे बहार नीकालो.. नही चुदवाना मुजे.. आह..इइइइइ..सीससइइइइइ..मररर गइइइ में... देवु.. प्लीज.. नुही चुदना मुजे.. मुजपे रहेम करो.. आपने क्या घुसा दीया.. देवु ..मे मर जाउगी.. मत करो.. उइइइ..मां.. बचालो मुजे..

देवायत : (बुब्स चुमते कमर पकडकर पैरोके बीच बैठते) भुमी.. होसमे आओ.. कुछ नही होगा.. क्या पहेली बार चुदवा रही हो..? कुछ नही होगा.. चुप होजाओ..

भुमीका : (रोते उनके सामने देखते) देवु.. आपका ये बहुत बडा हे.. मे इसे जेल नही पाउगी.. ये बहुत बडा हे.. मेरी चुत फट जायेगी.. रहेम करो मुजपे.. मुजे नही चुदवाना..

देवायत : (थोडा गुसेमे) भुमी सांत होजाओ.. वरना मे चला जाउगा.. तुम छोटी बच्ची थोडीनां हो.. जो इतना चीलाती हो.. पहेली बार कर रही हो क्या..? अगर मोटा हे तो अभी दर्द चला जायेगा.. बस सांत होजाओ..

देवायतने जानेकी बात कहीतो भुमी दर्द होनेके बावजुदभी थोडी सांत होगइ.. अभीतो आधाही लंड चुतमे गयाथा.. तब देवायतको ओर देर करना मुनासीब नही लगा.. ओर उसने पुरी तैयारीके साथ भुमी कुछ समजे इनसे पहेलेही अपनी कमरको अ‍ेक जोरोका जटका देदीया.. पुरा लंड भुमीकी चुतमे घुस गया.. तो भुमी जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. ओर देवायतने अ‍ैसेही बैठे भुमीको कमरसे पकडकर अपने लंडके नजदीक खीच लीया..





फीर हाथके बल थोडा उचा होते जोरोसे कमर हीलाते भुमीको बेहोसीमे ही चोदने लगा.. ताकी भुमीको दर्दभी महेसुस नाहो.. ओर उनकी चुतभी अपने लंडसे अ‍ेडजेस्ट हो जाये.. वो भुमीको लगातार जोरोसे कमर हीलाते चोदेही जा रहाथा तो भुमी बेहोसीमे भी आहे भरते चुदवाने लगी.. ओर उनके दोनो बुब्स देवायतके हर धकेके साथ तालमेलमे उछलते रहे.. देवायत काफी देर तक भुमीको अ‍ैसेही चोदता रहा.. उनका लंड अब बडी आसानीसे भुमीकी चुतमें अंदर बहार जाने लगा..

तभी भुमीको होस आने लगा तो देवायत उनपे जुक गया.. ओर पुरा लंड भुमीकी चुतमे घुसाते रुक गया.. वो भुमीके होंठोपे कीस करने लगा.. तभी भुमीने धीरेसे आंख खोलदी.. उनकी आंखोसे अबभी आंसु बेह रहेथे.. तब भुमीको अहेसास हुआकी उनका दर्द काफी कम होगया हे.. ओर वो धीरेसे देवायतकी पीठमे हाथ रखते देवायतको अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर उनकी पीठको सहेलाने लगती हे..

देवायत : (हसते) डार्लींग.. क्या दर्द कम हो गया..?

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. देवु कीतना दर्द हो रहाथा.. अ‍ैसा लगा आपने मेरी चुतको फाड दीया हे.. अ‍ैसा दर्दतो मुजे नरेशनेभी हमारी सुहागरातमे नही दीयाथा.. क्या वो.. पुरा अंदर हे..?

देवायत : (हसते होंठ चुमते) बुच.. हां भुमी.. तुमने मेरा पुरा लंड अपनी चुतमे लेलीया हे.. अब तुजे कभी दर्द नही होगा.. बस अब हमेंसा जनतकी सैर करोगी.. आज हमारे नये जीवनकी ओर हमारे नये रीस्तोकी सुरुआत हो चुकी हे.. क्या तुम हमारे इस नये रीस्तेसे खुस तो होना..?

भुमीका : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मेरे देवु.. ये आप क्या बोल रहे हे..? खुस..? अरे बाबा मेतो बहुत खुस हु.. आपने हमारे प्यारका इजहार पहेले क्यु नही कीया..? क्यु इतनी देर लगादी..? मेतो कबसे आपकी हो चुकी हु.. ओर आज लीगल आपकी बीवी होगइ.. अबतो आपही मेरी आखरी मंजील हो.. बस मुजे कभी मत भुलना.. मे जींदगीभर आपकी होना चाहती थी.. जो आज होगइ.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. आइ लव यु टु.. तो सुरु करे..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. धीरेसे करना.. अब दर्द नही हे.. आज मुजे अपनी आगोसमे समालो.. मे आज आपके अंदर समा जाना चाहती हु.. मेने क्या सोचाथा ओर क्या होगया.. आजसे ये भुमी आपकी अमानत होगइ हे.. मुजे आपके अंदर समालो.. मे अपने आपको आपसे पुर्ण समर्पीत करती हु..

कहातो देवायत भुमीकी ओर देखताही रेह गया.. उसे भुमीकी ये प्रार्थना कुछ जानी पहेचानी लगी.. ओर वो सोचने लगा.. की भुमीने अ‍ैसा क्यु कहाकी मेने क्या सोचाथा ओर क्या होगया.. तो भुमीने क्या सोचाथा..? देवायतके मनमे कइ प्रस्न आने लगे.. लेकीन अभी इसके बारेमे चर्चा करना व्यर्थ था.. ओर वो भी भुमीके अंदर समा जाना चाहता था.. ओर वो धीरे धीरे कमर हीलाते भुमीको चोदने लगा..





तब भुमीभी सातवे आसमानपे मदहोस होते चली गइ.. वो आधी आंख चडाते मजेसे देवायतके हर धकेको महेसुस करने लगी.. कुछही देरमे दोनोने अपनी चुदाइकी रफ्तार पकडली.. भुमी अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगी.. जीस भुमी थोडी देर पहेले लंड नीकालनेकी मनते कर रहीथी वोही भुमी अब चाहने लगीकी देवायतका लंड उनकी चुतसे कभी बहारही ना नीकले.. वो आहे भरते सीसकारीया करने लगी..

आज प्यारकी अ‍ेक नइ परीभासा भुमीकी समजमे आगइ थी.. सहेरके रातके सनाटेमे अ‍ेक छोटीसी हवेलीके अ‍ेक बंध कमरेमे काम ओर रती अपनी मौजुदगीका अहेसास दीलवाते भुमी ओर देवायतके उपर प्यारके फुलोके बाण बरसा रहेथे.. जीनकी वजहसे कमरेमे प्यारका तुफान चुदाइका भवंडर बनके तांडव मचा रहाथा.. दोनोही अपनी मदहोसीमे चुदाइका आनंद ले रहेथे.. ओर आज भुमी असली मायनोमे अपनी सुहागरात मना रहीथी..





दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके जोरोसे चुदाइमे लीप्त थे.. अब तक भुमी दो बार जड चुकी थी.. वो जबभी जडती देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर आखीर तुफान थंभनेका वक्त आही गया.. देवायत अचानक भुमीको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. तब भुमीभी समज जाती हे ओर वोभी देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर दोनोके होंठ लीपलोक हो जाते हे.. तो देवायत पुरा लंड भुमीकी चुतमे घुसा देता हे..

तभी भुमीको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका लंड टकराते महेसुस हुआ ओर देवायतने भुमीकी बच्चेदानीपे अपने गरम लावेकी बौछार करदी.. तो भुमीकोभी अंदर अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ ओर वो परम आनंदमे उतेजनासे कांपने लगी.. देवायतके साथ वोभी अ‍ेक बार फीरसे जडने लगी.. प्यारका तुफान सांत होगया.. देवायत भुमीके सीनेपे ढेर होगया.. तो भुमी उनकी पीठ सहेलाने लगी..





दोनोही अपनी मंजीलको पाकर अपनी सांसको दुरस्त करने लगे.. दोनोही पुरे पसीनेसे भीग चुकेथे.. तब भुमीको अहेसास हुआकी वो आज सचमे देवायतके तगडे लंडसे चुदवा चुकी हे.. तो वो बहुतही सर्मसार होगइ.. आज देवायतने बरसोके बाद फीरसे उनको अपनी जवानीका अहेसास दीलवा दीया था.. जैसे भुमीका सचमे अ‍ेक कच्ची कली हो.. भुमीको अहेसास होने लगाकी सही मायनोमे आजही उनका कौमार्य भंग हुआ हो.. देवायत अभीभी भुमीकी चुतमे लंड घुसाके उनके उपर पडाथा.. ओर दोनो बाते करने लगे..





भुमीका : (सरमाते धीरेसे देवायतका बाल सहेलाते) देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. मेरी कही महीनोकी तम्मना आपने पुरी करदी.. आखीर मेने आपको पा ही लीया.. कास.. सीर्फ हम दोनोही पती पत्नी होते.. हमारे बच्चे होते..

देवायत : (होंठोपे चुमी देते) भुमी.. इस बारेमे कभी मौका मीलेतो मंजुसे पुछ लेना.. पता नही लेकीन वो आज कल सबके बारेमे बहुत कुछ जान जाती हे.. मुजे कहेती हे हम सभी लोग कोइ सामनन्य मानवी नही हे.. हो सकताहे इसी जन्ममे हमाराभी बच्चा आ जाये..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. मे सृतीको क्या मुह दीखाउगी.. ओर मंजु..? अगर वो हमारे बोरेमे जान गइतो..? देखना बाबा.. मे हमारे रीस्तेको सबसे छुपाकर रखना चाहती हु..

देवायत : (आंखोमे देखते) भुमी तु मंजुकी चीन्ता मत कर.. वो कुछ नही कहेगी.. उस्े मेरे कीसीभी रीस्तेसे कोइ आपती नही.. बस मुजे तुमसे कुछ जानना हे.. तुमने बीचमे कुछ बात कहीथी.. अगर तुम बताना चाहोतो बता सकती हो..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) क्या..? देवु.. अब मे आपकी बीवी हु.. अ‍ैसे रीक्वेस्ट मत करो.. जोभी पुछानाहो बीन्दास्त पुछलो.. कहो मेने क्या कहाथा..?

देवायत : (हसते गाल चुमते) अ‍ेकतो.. ये कहाथा.. की मेने क्या सोचाथा ओर क्या हो गया.. पहेले इनके बारेमे बताओ.. की तुमने पहेले क्या सोचाथा..?

भुमीका : (सरमाते) ओह.. देवु.. आपने वोभी सुनलीया..? वो मेने अपनी सृतीके लीये कहाथा.. आपको पता हे.. जब आप ओर सृती छोटे थे.. तब मेने ओर नरेशने सृतीका रीस्ता आपके साथ करनेका तैय कीयाथा.. लेकीन हमे नही पताथाकी आपके बापु ओर राजीवने मंजु ओर आपके रीस्तेको तैय करलीया था.. ओर हमे सृतीकी सादी कही ओर करनी पडी.. लेकीन आज भाग्य देखो.. सृतीकी जगाह आज हम दोनोने सादी करली.. बस इसीलीये अ‍ैसा कहाथा.. तो दुसरी बात..?

देवायत : (हसते) ओह.. तुमने अ‍ैसा क्यु कहाकी मेरी तेरे साथ दुसरी नही तीसरी सादी हे..? तुम मेरे बारमे क्या जानती हो..? जो अ‍ैसा कहा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे आंखोमे देखते) देवु.. प्लीज.. बुरा मत मानना.. मुजे आपके बारेमे सब पता हे.. ओर यकीन मानो.. मुजे इनसे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. क्युकी आपतो आजभी अ‍ेक राजा हो.. तो कइ सादीया करना लाजमी हे.. क्या.. आप..आप.. अब आपसे कैसे कहु..? कही नाराज ना होजाओ..

देवायत : (होंठ चुमते) नही भुमी.. तु मेरी बीवी हे.. जोभी बोलनाहो बीन्दास्त बोल.. मे नाराज नही हुगा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. वो.. क्या.. आप अपनी सासके साथ.. आइ मीन.. आप नीमुके साथभी रीलेशनमे हेना..? उनसे मेरी आपके बारेमे बात हुइ थी.. जब हम दोनो कइ सालोके बाद पहेली बार मीलेथे.. तब आप मंजुके साथ उनकेही घरमे सेक्स करते पकडे गये थे.. वो आपकी पहेली बीवी हेनां..?

देवायत : (हसते) हंम.. हां.. जीस तराह मुजे तुमसे प्यार होगया.. उसी तराह नीमु ही मेरा पहेला क्रस थी.. ओर अ‍ेक दीन हम दोनो मील गये.. तबसे हमारे बीच पती पत्नी वाला रीलेशन चल रहा हे.. ओर मंजु मेरी दुसरी बीवी.. लेकीन दुनीयाकी नजरोमे मेरी पहेली बीवी.. ओर आज तुम तीसरी.. तो क्या तुजे दुख नही हुआ.. की मेने अ‍ेक अ‍ैयास आदमीसे सादी करली.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. बल्की मे ओर नीमुतो अपने आपको भाग्यशाली समजते हे.. की आप हमे पतीके रुपमे मील गये.. वेसेभी आपकीतो कइ सादीया होगी.. ओर अ‍ेक बात.. हमे कहा कीसीके सामने ढंढेरा पीटना हे.. बस हम दोनोही आपकी सीक्रेट वाइफ बनके रहेगी.. लेकीन देवु आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे..

देवायत : (होंठ चुमते) क्या..?

भुमीका : देवु.. मे हम दोनोका रीस्ता अभी कीसीके सामने उजागर करना नही चाहती.. नीमुके सामनेभी नही.. आप समज गयेनां..? मे जींदगीभर अ‍ैसेही आपकी सीक्रेट वाइफ बनके रहेना चाहती हु.. जीसके बारेमे सीर्फ हम दोनोकोही पता हो.. तीसरा नही.. बस वही मेरी बिनंती हे.. आप कीसीको मत कहेना..

देवायत : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. हम दोनोके रीस्तेके बारेमे मेरी ओरसे कीसीको पता नही चलेगा.. बस..? अबतो खुस.. लेकीन कही तु प्रेगनेन्ट हो गइ तो..? हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते देवायतके सीनेमे मुका मारते) देवु आप बहुत कमीने हो.. हें..हें..हें.. बाबा मुजे बहुत खयाल रखना पडेगा.. आप कीतना पानी नीकालते हो.. अभीभी नीचे भरा हुआ लगता हे.. लगता हे सुबह मुजे आइपील लेनी पडेगी वरना आपतो मुजे आज सचमे प्रेगनेन्ट कर दोगे.. हें..हें..हें.. क्या सचमे आपका मुजे प्रेगनेन्ट करनेका मन हे..? तो सृतीकी सादीके बाद हम कुछ सोचेगे..

देवायत : नही भुमी.. मुजे तेरी इजतके साथ खीलवाड नही करना.. मेतो मजाक कर रहाथा.. बस अ‍ैसेही हम दोनो प्यार करते रहेगे.. लेकीन मुजे आगेका नही पता.. मेरी मंजु सब जानती होगी..

भुमीका : (देवायतको बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. आइ लव यु.. अब अ‍ैसेही रहेना हे क्या..?

देवायत : (हसते) हां.. अब मुजे सुबह ही तेरे उपरसे उतरना हे.. आज पुरी रात तुजे अ‍ैसेही चोदता रहुगा..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) आप बहुत नोटी हो.. सुबह तकतो मेरी हालत खराब होजायेगी.. फीर सृतीको क्या जवाब दुगी..? बाबा मुजे सुबह आइपील लाकर देना.. आज बहुत खतरा हे.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही फीरसे मस्ती करने लगे.. ओर मस्ती कब चुदाइमे तब्दील होगइ.. पताही नही चला.. दोनोके बीच अ‍ेक बार फीर धमासान चुदाइ होने लगी.. इस बार देवायत भुमीको सामने बीठाकर चोदने लगा.. तो भुमीमी अपनी कमर हीला हीलाके चुदाइका आनंद लेती रही.. देवायतने उसे इस बारभी दो बार जडा दीया.. ओर अंतमे दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे बैठे ही चीपक गये.. ओर साथमे जड गये..









सुबह चार बजे तब देवायत बीना लंड बहार नीकाले भुमीको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा.. अ‍ेक बार आमने सामने बैठकर तो अ‍ेक बार भुमीको अपने उपर चडाके सवारी करवाइ.. दो बार भुमेने देवायतके नीचे लेटकरही उनसे चुदाइ करवाली.. आज भुमीकी चुत देवायतके पानीसे पुरी लबालब भरी पडी थी.. ओर आखीर देवायत भुमीके उपरसे हट गया तब भुमीकी हालत पतली हो चुकीथी..









वो थकके चकनाचुर होकर अ‍ैसेही बेसुध्ध जैसी हालतमे पडी रही.. देवायतने भुमीको पुरी रात चोदकर उनके सरीरका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीयाथा.. दोनोका कामरस भुमीकी चुतसे नीकलते बेडपे गीर रहाथा.. तबभी भुमीकी चुत अ‍ैसे फडफडा रहीथी जैसे अबभी देवायतका लंड उनकी चुतमे हो.. आज भुमीकी सही मायनोमे सुहागरात हुइ थी.. उसे अ‍ेसा अहेसास होने लगाकी वो आज फीरसे अ‍ेक लडकीसे ओरत बन गइ हो..

फीर देवायत भुमीको अ‍ैसेही गोदमे उठाकर बाथरुममे लेजाता हे वहा भुमीकी चुतकी सीकार करके दोनोही नहाकर बहार आजाते हे ओर अपने अपने नाइटके कपडे पहेनकर चदरको चेन्ज करके अ‍ेक दुसरेसे लीपटकर नींदकी आगोसमे चले जाते हे.. दोनोही पुरी रात चुदाइ करते थक चुके थे.. पुरी रातमे देवायतने भुमीकी पांच बार जबरदस्त चुदाइ करलीथी.. तो आज भुमीभी पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी..

सुबह दोनोही १० बजे तब सोते रहे.. तभी भुमीके फोनकी रींग बजने लगी.. ओर दोनोही नींदसे जाग गये.. तब भुमीने साइडमे रखा फोन उठा लीया.. ओर देखातो सृतीका फोन था.. तब भुमीका उठकर सही बैठ गइ.. ओर देवायतको इसारोसे चुप रहेनेको कहेते फोन उठा लीया.. ओर उनसे बाते करने लगी.. तबतक देवायतभी उठकर भुमीसे सटकर बैठ गया ओर भुमीको बाजुसे पकडकर अपनी बाहोमे भीच लीया..

तो भुमी सरमाते सृतीसे फोनपे बात करती रही.. ओर देवायत उनके गालोको चुमने लगा.. तभी भुमीने बाते करते देवायतकी जांगपे अ‍ेक चपत लगादी.. दोनो अभीभी सीर्फ गाउनमे थे..

सृती : (फोनपे) मोम.. आप फीकर मत करना.. सायद मुजे थोडी आनेमे देर होजायेगी.. लेकीन मे साम सात बजे तक पहोंच जाउगी.. क्या आपने चाइ नास्ता करलीया..?

भुमीका : अरे मेरी बच्ची तु मेरी फीकर मत कर.. सब हो गया.. बस तु अपना खयाल रखना ओर टाइमपे खा लेना.. ओर सुन.. कल देवु आयाथा.. साम तक मेरे पास रहा.. फीर खाना खाकर चला गया..

सृती : (हसते) मोम.. तो फीर आप अकेलीथी तो उसे रोक देना चाहीयेनां..? आपकोभी कंपनी मील जाती..

भुमीका : (देवायतके सामने मुस्कुराते) नही बेटी.. अब उनकीभी तो बीवी हे.. तो वो बीवीको छोडकर अकेला थोडीना रहेता.. उसे गांवभीतो जानाथा.. वहा उनका इतना बडा कारोबार हे.. तो मे उसे कैसे रोक सकती हु..

सृती : (हसते) अरे मोम.. वो अ‍ेक बार कहेतेतो देखती वो रुकजाते.. आपके साथतो उनकी बहुत पटती हे.. खैर छोडो.. अब मे साम तकतो आही जाउगी.. ओके.. चलो मे फोन रखती हु.. लव यु मोम..बाय..

भुमीका : (हसते) लव यु टु बेटा.. बाय..

कहेते भुमीने हसते हुअ‍े फोन काट दीया ओर साइडमे रख दीया तो देवायतने उसे खीचकर अपनी गोदमे बीठा लीया ओर उनके होंठ चुमने लगा तो भुमीका सर्मसार होगइ.. ओर देवायतका साथ देने लगी..

भुमीका : (सरमाते गलेमे हाथ डालते) देवु.. आपतो सुबह सुबह सुरु होगये.. पुरी रात मुजे सोने नही दीया.. अभीभी नीचे दर्द हो रहा हे.. आप इतनी बार कैसे कर सकते हो.. कोइ जादु हे आपके पास.. हें..हें..हें..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. हां.. मेरी मंजुने दी हुइ जडी बुटीका कमाल हे.. क्या आपको मजा आया..?

भुमीका : (गाल चुमते) अरे मजा..? जानु मेतो कल स्वर्गकी सैर कर रहीथी.. इतना मजातो मुजे कभी नही आया.. कास हमारे पास चार पांच दिनका वक्त होता.. तो मे आपको लेकर हनीमुनपे चली जाती.. ओर हम दोनो कमरेसे बहारही नही नीकलते.. कीतना मजा आता..

देवायत : (हसते) तो फीर यही समजले ये हमारा छोटा हनीमुन हे.. हम कहा बहार नीकलने वाले हे.. कभी मौका मीलातो हम चले जायेगे.. भुमी.. आज हमारे पास साम तकका वक्त हे.. हम दोनोमेसे कोइ कपडे ही नही पहेनेगे.. तुजे चोद चोदके हमारी नइ सादीके हनीमुनका अहेसास करवा दुगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमते सीनेमे सर छुपाते) ओह.. बापरे.. मतलब दिनमे भी मेरी हालत खराब होनेका खतरा हे.. हें..हें..हें.. देवु.. अ‍ेक बात कहु..? वाकइ कल रात मुजे आपने मेरी जवानीका अहेसास करवा दीया.. इतनातो मे कभी नही चुदी.. नरेशके साथ हमारी पहेली सुहागरातमे भी सीर्फ अ‍ेक बार चुदी हु.. कलतो आपने मेरी हालत खराब करदीथी.. ओ बापरे.. आप कीतना जोसमे चोदते थे.. मजा आगया..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) चल.. अब नहाना नही हे क्या..? कुछ चाइ नास्ताभी करादे.. आज दिनमे भी तुजे आराम नही करने दुगा.. तु हमारी इस सुहागरातको कभी नही भुलेगी..

भुमीका : (सीनेसे लगाते) हां देवु.. वाकइमे मे हमारी इस सुहागरातको कभी नही भुलुगी.. आपने सच कहाथा.. की तुजे हमारी ये सादी याद रहेगी.. जानु आप अ‍ेक काम करदो.. चाइ नास्ता करके मुजे पासके मेडीकलसे आइपील लाकर देदो.. मुजे पक्का यकीन हे.. आपने मुजे प्रेगनेन्ट कर दीया होगा.. कास मे आपका बच्चा पैदा कर सकती.. तो बीलकुल आपके जैसाही लडका आता.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) तो फीर अ‍ेक लडकी भी पैदा करनी पडेगी.. वरना वो सादी कीससे करेगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते हुअ‍े सीनेमे मुका मारते) आप कीतने कमीने हो.. उनकोभी अपनी बहेनसे चुदवाओगे..? हें..हें..हें.. हां.. आपके खानदान मेतो ये परंपरा होगइ हे.. सबने वोही तो कीया हे.. कास मेभी थोडी देरसे आपके खानदानमे ही पैदा होती.. तो यकीनन आज हम दोनो मीया बीवी होते.. ओर हमारे बच्चेभी होते.. हें..हें..हें.. चलीये अब नहा लीजीये तबतक मे चाइ नास्ता बनाती हु.. फीर मेभी नहा लुगी..

देवायत : नही.. आज जोभी करना हे दोनो साथमे ही करेगे.. चल तुभी मेरे साथ नहाने फीर दोनो मीलकर चाइ नास्ता बनायेगे.. आज तुम कीतनी होट ओर सेक्सी दीखती हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरारतसे हसते) मतलब अभी.. खतरा हे.. हें..हें..हें.. देखना बाबा वहा कोइ सरारत मत करना आप.. पुरी राततो मेरी ठुकाइ करते रहे.. चलीये.. मुजे बाथरुममे ले चलीये.. मे कोइ चलने वाली नही हु..

कहातो देवायत बेडसे उतर गया ओर भुमीको अपनी गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर लेगया.. तबतक भुमी देवायतके गलेमे हाथ डालके उनके सामने देखते हसती रही.. आज वो बीलकुल अ‍ेक छोटी लडकीकी तराह देवायतसे सरारत करते बाते कर रहीथी.. आज भुमीका उनकी पीछली सब जींदगी भुल चुकीथी.. ओर नये सीरेसे देवायतके साथ सादीके हर पलको अ‍ेन्जोय कर रहीथी.. अंदर जातेही दोनो बाथ टबमे बैठ गये..

तो वहा देवायतने अ‍ेक बार फीरसे भुमीकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. तो भुमी उनकी इतनी कैर देखते खुस होगइ.. ओर अ‍ेक बार फीरसे मनही मन इ--रको देवायतको पानेकी कामना करने लगी.. तभी अचानक देवायत चुतकी सीकाय करते मस्तीके मुडमे आगया ओर धीरेसे भुमीकी चुतमे उंगली डालदी तब भुमी खुब सरमाइ.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे मुस्कुराते देखने लगी..





वो कुछ कहे इनसे पहेलेही देवायत चुतमे उंगली डालकर अंदर बहार करने लगा.. कुछ देरके बाद भुमीकी चुतमे मुह लगाते उनके चुतके दानेको जीभसे खरोदने लगा.. तो भुमी मुस्कुराते अपने नीचेके होठको दातोमे दबाते देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते मदहोस होने लगी.. तभी कुछही देरमे भुमीकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकलके देवायतके चहेरेको भीगोने लगा.. जीसे देखतेही भुमीका जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. ओर देवायतभी हसते हुअ‍े अपने हाथोसे मुहको पोछते गेन्डीमे अपना मुह धोने लगा..

तो भुमीका उनके सामने देखते हसती रही.. तभी देवायत भुमीकी ओर घुमते उसे हसते हुअ‍े खाजाने वाली नजरोसे देखने लगा.. तो भुमी समज गइ.. ओर जटसे भागनेके लीये बाथटबसे उठते भागने लगी.. तो देवायतने चीतेकी तराह लपकके भुमीको दबोच लीया.. ओर पीछेसे अपनी बाहोमे भुमीको उठालीया तो भुमी जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते अपने हाथ पांव हीलाने लगी.. ओर हसती रही....

कनटीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १११/१

तो भुमीका उनके सामने देखते हसती रही.. तभी देवायत भुमीकी ओर घुमते उसे हसते हुअ‍े खाजाने वाली नजरोसे देखने लगा.. तो भुमी समज गइ.. ओर जटसे भागनेके लीये बाथटबसे उठते भागने लगी.. तो देवायतने चीतेकी तराह लपकके भुमीको दबोच लीया.. ओर पीछेसे अपनी बाहोमे भुमीको उठालीया तो भुमी जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते अपने हाथ पांव हीलाने लगी.. ओर हसती रही....अब आगे

तो देवायतने भुमीको वही दीवालके सहारे उल्टी करते खडा करदीया ओर पीछेसेही दोनो हाथ पकडते लंडको भुमीकी चुतमे घुसा दीया तो भुमीकी हसते हुअ‍े भी चीख नीकल गइ.. ओर देवायत उसे जोरोसे कमर हीलाते पीछेसेही चोदने लगा तो भुमी अभीभी देवायतसे चुदवाते हस रहीथी.. वो हसते हुअ‍े धीरे धीरे मदहोस होने लगी.. देवायतका इस तराह इसे छेडना बहुतही अच्छा लगा.. वो तो चाहती थी की देवायत उसे चोदता ही रहे.. भुमी ओर देवायतके दिलोमे पुरी तराह मस्ती छाइ हुइ थी..





भुमीका : (जोरोसे हसते) देवु.. आप बहुत कमीने हो.. कोइ अपनी बीवीको इस तराह चोदता हे..?

देवायत : (जोरोसे सोट मारते) गालीया दे रही हो.. देखना अबतो तुजे साम तक अ‍ैसेही चोदता रहुगा.. फीर भलेही तेरी हालत खराब हो जाये.. तु सृतीको जवाब देती रहेना.. कहेना तेरे जीजाजीने मुजे चोद लीया..

भुमीका : (चुदवाते जोरोसे हसते) देवु.. कोइ अपनी बीवीके साथ अ‍ैसा करता हे..? आप बहुत बदमास हो गये हो.. हें..हें..हें.. उइइइइ मां... दे..वु.. थोडा धीरेसे चोदोना.. देखना अ‍ेक दिन मे भी बदला लुंगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (पुरा लंड घुसाके जोरोसे चोदते) अभीभी धमकी दे रही हो..? भुमी.. आजतो तु गइ कामसे..

कहेते देवायत भुमीको फीरसे लंड नीकालकर गोदमे उठा लेता हे.. ओर बहारकी ओर चलेते बेडकी ओर लेजाता हे तो भुमीका जोरोसे हसते छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर वो देवायतकी पकडसे छुटकर भागने लगी.. लेकीन जगाह नही मीलनेकी वजहसे ड्रेसींग टेबलकी ओर भाग गइ ओर देवायतने उसे वही घेरकर फीरसे दबोच लीया.. तो भुमीका देवायतसे जोरोसे हसते छोड देनेकी मनते करने लगी..

तभी देवायतने भुमीको उठाकर वही डेंसींग टेबलपे बीठा दीया ओर उनके पैरके बीच आकर अपना तगडा लंड फीरसे भुमीकी चुतमे अ‍ेकही जटकेमे पुरा उतर दीया.. तो भुमीकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. ओर देवायतके गलेमे हाथ डालते उनसे जोरोसे चीपक गइ.. तो देवायत कमर हीलाते जोरोसे भुमीको फीरसे चोदने लगा.. भुमीकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीरभी देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते मुस्कराती रही.. भुमी चाहती थीकी देवायत उसे अ‍ैसेही बेहरहेमीसे चोदता रहे..





दोनोही मस्तीया करते वापस उतेजीत हो गये.. कुछही देरमे भुमीका मदहोस होकर आधी आंख चडाते मजेसे देवायतसे चुदवाने लगी.. दोनोही कामुक होते चुदाइमे मसगुल होगये.. तभी भुमीका जोरोसे देवायतसे चीपक गइ.. ओर आह.. आह.. करेत मुह खुलाही रेह गया.. ओर अपनी आंख चडाते मदहोसीमे जडने लगी.. फीरभी देवायतने उनको चोदना जारी रखा.. भुमीका बहुतही कामुक्त तरीकेसे आहे भरते चुदवाने लगी..

जैसे अभी अभी नइ जवान हुइ हो.. वो अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह चुदवाती रही.. इसी बीच देवायतने उसे अ‍ेक बार ओर जडा दीया.. फीर कुछ देरकी चुदाइके बाद देवायतने उसे जोरोसे बाहोमे भीचते लीपलोक करलीये.. तभी भुमीको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम गरम विर्य महेसुस हुआ.. तो उनकी आंख बडी होगइ.. ओर देवायतसे चीपकते उनके साथ जडने लगी.. तब देवायत अभीभी रुक रुकके अपनी कमरको जटके दे रहाथा..

फीर दोनोही सांत होगये.. तो भुमीका देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखते मुस्मुराने लगी.. ओर जोरोसे देवायतके होंठ चुमलीये.. तो देवायतभी हसने लगा.. तभी देवायत चुतमे लंड रखते भुमीको नीतंबके नीचेसे हाथ डालके भुमीको अपनी गादमे उठा लेता हे.. तो भुमीभी दोनो हाथ देवायतके गलेमे डालते हसते हुअ‍े देवायतको देखती रही.. ओर देवायत उसे फीरसे बाथरुममे लेगया.. ओर वहा दोनोही साथमे नहाने लगे..

दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने हसते रहे ओर अ‍ेक दुसरेको नहेलाते रहे.. फीर दोनोही बहार आगये तब भुमीने सीर्फ अ‍ेक हल्कासा टीसर्ट पहेन लीया तो देवायतने उसे बाकीके कपडे नही पहेनने दीया ओर खुदभी नंगाही रहा तो भुमीका बहुतही सरमाने लगी.. फीर दोनोही बहार आगये तो भुमीका देवायतका हाथ पकडकर कीचनमे चली गइ.. तब देवायतभी उनके पास प्लेटफोर्मपे बैठ गया.. भुमीका नास्ता बनाते अभीभी देवायतके सामने सरारतसे हस रहीथी..

भुमीका : देवु.. आप तो सचमे बहुत रोमांटींक हो.. आज मुजेभी रोमांटीक बना दीया.. मुछे छेडनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडते.. सुबह सुबह ही मुजे गंदी करदी.. क्या घरपेभी आप अ‍ैसेही करते हो..?

देवायत : (हसते) हंम.. जब मे मेरे रुममे होता हु तबतो अ‍ैसाही करता हु.. मेरी मंजुभी तेरी तराह मुजे प्यार करती हे.. क्या तुजे मजा नही आया..?

भुमीका : (सरमाते हसते) अरे मजा..? बाबा बहुत मजा आ रहा हे.. कास सीर्फ हम दोनोही पती पत्नी होते.. ओर हमेसाके लीये साथमे रहेते.. तो मेतो आपको अ‍ैसेही प्यार करती.. जानु.. आप नास्ता करके मुजे पाससे आइपील लाकर दो.. मुजे पेटमे अभीभी गरम महेसुस हो रहा हे.. लगता हे कुछतो गडबड हुइ हे.. आप कीतना पानी नीकालते हो.. मुजेतो डर लग रहा हे.. कही मे प्रेगनेन्ट ना होजाउ..

देवायत : (हसते) तो क्या हुआ.. कर लेन हमारा बच्चा पैदा.. सृतीको भाइ मील जायेगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सर्मसार होते तीरछी नजरोसे) मजाक मत करो.. इस उमरमे बच्चा..? लोग क्या कहेगे..? लोगोकी छोडो सृतीको क्या कहुगी..? अगर मुजे पहेले मीले होते तो मे कुछ सोचती.. मेराभी हम दोनोका बच्चा पैदा करनेका बहुत मन कर रहा हे.. लेकीन हमने बहुत देर करदी हे..

आइ प्रोमीस अगले जन्ममे मे आपकी हर इच्छा पुरी कर दुगी.. मेतो सोचभी नही सकती.. अभीभी अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग राहे की मुजे इतना प्यार करने वाला पती मीला हे.. आइ लव यु देवु.. आइ लव यु सो मच.. बस मुजे आप अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. मुजे ओर कुछ नही चाहीये..

देवायत : (हसते) हंम.. भुमी लव यु टु.. तुम आजभी इतनीही खुबसुरत हो.. जबसे मे तुजे पहेली बार मीला तबही तुजे पानेकी चाहत बढ गइ थी.. ओर आखीर तुम मुजे मील ही गइ.. भुमी.. हम दोनो अ‍ेक बार फीरसे बाबाको मीलने जायेगे.. मुजे हम सबके बारेमे जानना हे.. की हम सब वास्तवमे कौन हे..

दोनोही प्यारभरी बाते करते चाइनास्ता बना रहेथे.. फीर दोनोने मीलकर चाइ नास्ता करलीया तब देवायतने भुमीको अपनी गोदमे बीठाया.. ओर अ‍ेक दुसरेने अपने हाथोसे नास्ता खीलाया.. फीर देवायत कपडे पहेनकर बहार चला गया ओर मेडीकल स्टोरसे अ‍ेक आइपीलकी पुरी स्ट्रीप लेकर भुमीको देदी.. तब भुमीने तबही अ‍ेक गोली खाली.. ताकी उनको गर्भना ठहेरे.. कुछ देर दोनो सोफेपे बेठकर प्यारकी बाते करते होंठ चुमते रहे..





फीर भुमीका देवायतको लेकर खाना बनाने कीचनमे चली गइ.. वहाभी खाना बनाते दोनो अ‍ेक दुसरेके साछ छेडछाड करते उतेजीत होगये.. ओर देवायतने वहाभी भुमीको खडे खडे पीछेसे चोद लीया.. भुमीका हमेसा देवायतसे भुदवानेके लीये तैयार रहेती.. वो अब हदसे ज्यादा देवायतको चाहने लगी थी.. ओर देवायतको अपना पती मानकर उसे अपने आपको पुर्ण समर्पीत कर चुकी थी..





जब खाना बन गया तो इस बार भुमीका खुद देवायतकी गोदमे आकर बैठ गइ.. ओर अपने हाथोसे देवायतको खीलाने लगी.. वो अपने पत्नीधर्मका पालन करनेका अ‍ेकभी मौका गवाना नही चाहती थी.. तो देवातनेभी उसे अपने हाथोसे खीलाया फीर खाना खातेही भुमीने सभी काम फटाफट नीपटा लीया.. ओर देवायतको लेकर अपने बेड रुममे चली गइ.. आज देवायत सामको अपने घर चले जाने वालाथा..

तो भुमीका उनसे सारा प्यार बटोर लेना चाहती थी.. इसीलीये आज दो पहोरका आराम करनेको त्याग दीया.. वो आज सीर्फ देवायतका प्यार लुटना चाहती थी.. इसीलीये रुममे जातेही अपना टीसर्टभी नीकालकर वो देवायतको लेकर अपने बेडपे चली गइ.. देवायत बेडपे बैठाथा तबही वो अपने दोनो पैर फेलाकर देवायतकी गोदमे बैठ गइ.. फीर खुद लंड पकडके अपनी चुतमे घुसाते देवायतको चोदने लगी..





जब वो जड गइ तो लंड नीकालकर चुतको साफ करके बेडपे अपने दोनो पैर फैलाकर लेट गइ.. तो कुछही देरके बार वो देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. ओर देवायत उनके उपर चडकर भुमीके दोनो हाथ कसके पकडकर उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. तो भुमीकाभी देवायतका साथ अपनी कमर उछाल उछालकर दे रहीथी.. वोतो चाहती थी की ये चुदाइ कभी खत्म ही ना हो.. ओर कुछही देरकी चुदाइके बार दोनो जड गये..





देवायत भुमीके उपरही उनकी चुतमे लंड डालकर पडा रहा.. ओर दोनो प्यारकी बाते करते आगे फीरसे मीलनेके लीये प्लानींग करते रहे.. दोनोने मीलनेके लीये बहुत वादे ओर कसमे खाइ.. भुमीने देवायतसे हप्तेमे कमसे कम अ‍ेक बार मीलनेका प्रमीस लेलीया.. आज भुमी पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी.. उनकी बरसोकी प्यास देवायतने मीटादीथी.. जीसे भुमी बहुतही खुस थी.. फीर कुछ देरकी बातोके बाद देवायतने फीरसे अ‍ेक बार भुमीको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया ओर भुमीकी चुतको अपने गरम पानीसे भरके हरी भरी करदी..









जब दोनो साथमे जड गये तब देवायत भुमीको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. तो वहाभी भुमीके कहेने पे देवायतने उसे अ‍ेक बार फीरसे खडे खडे चोद लीया.. फीर दोनोही नहाकर बहार आगये ओर अपने कपडे पहेनके तैयार होने लगे.. तबतक साम चार बज चुके थे.. भुमी अपने बाल बना रहीथी.. तब देवायत उनके पीछे जाकर उसे बाहोमे भर लेता हे तब भुमीका पलटके देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..





दोनो काफी देर अ‍ेक दुरेकी बाहोमे खडे रहे.. फीर भुमीने चाइ नास्ता बनालीया.. तबतक देवागत भुमीका दीदार करता रहा.. तब जुदाइकी वजहसे भुमीके भी आंसु रुके नही रुकतेथे.. उसे देवायतसे बीछडनेका बहुतही गमथा.. फीर दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. तब भुमीने पुरा नास्ता देवायतको अपने हाथोसे खीलाया.. ओर देवायतके जानेका वक्त हो गया.. तब भुमीका देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी.. तब देवायतने उसे बडी मुस्कीलसे सम्हाला..





दोनोके होंठ मील गये.. ओर देवायत बहार चला गया तब भुमीका उसे बहार तक छोडने आइ.. तब कारमे बैठनेसे पहेले भुमीका अ‍ेक बार फीरसे दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायत उनके होठ चुमते भुमीसे अलग होगया.. ओर जल्द वापस आनेको कहेते कारमे बैठकर कार लेकर वहासे नीकल गया.. तबतक भुमीका उसे जाते देखती ही रही.. आज सब कुछ बदल चुकाथा..

जब देवायत भुमीके घरपे आया था.. तब भुमीने सीर्फ अपनी वासना सांत करनेके लीये उसे बुलाया था.. ओर अपने भतीजे देवायतका स्वागत कीया था.. ओर जब उनको बिदाइ देने बहार तक छोडने आइ तब वो उनका पती हो चुकाथा.. अ‍ेकही दिनमे कीतना कुछ बदल गयाथा..

भुमीको अभीभी ये सब स्वप्नकी तराह लग रहाथा.. की उनकी सादी उनके भतीजेके साथ हो चुकी हे.. वो अपनी सुहागरात मनाते पुरा दिन ओर रात भर उसे चुदवाती रही.. भुमीने इतने बरसोसे ना चुदवानेकी सारी कशर उनके भतीजेसे चुदवाकर पुरी करली थी..

(अतीतसे बहार)

भुमीका अ‍ेक हाथ आंखोपे रखते नीर्मलाके पास सोते अपना देवायतके साथ पहेले मीलनको याद करते अपने अतीतके बारेमे सोचती रही.. पुरी रात ओर दिनमे साम तक देवायतने उसे तकरीन आठ बार चोद लीयाथा.. उसे अ‍ैसा लग रहाथा की उस रात देवायतके साथ सुहागरात मनाते उन्होने अपना हनीमुनभी मना लीया हो.. ओर आज फीरसे देवायतको मीलनेकी वजहसे उनकी आंखोमे नींद कोसो दुर थी..

उन दोनोकी सादीके बाद देवायत उनको कइ बार मीलने आ चुकाथा.. जब सृती दो पहोरको खाना खाकर चली जाती.. ओर देवायत भानु सहेरमे जाते तब भानु सब खरीदी करता ओर धान बेचता.. फीर देवायत भानु होटेलमे खाना खाते फीर वो भानुसे कामके लीये जा रहा हु.. कहेते बहाना बनाकर भुमीको मीलने चला जाता.. तब दोनो खुब चुदाइ करते.. ये दो घंटेमे भी भुमी देवायतसे कमसे कम दो बार चुदवा लेती..

ओर कइ बार सृती कीसी कोन्फरन्समे बहारगांव चली जाती तो भुमी देवायतको फोन करके बुला लेती.. लेकीन भुमीकाने आज तक अपना ओर देवायतके रीस्तेको कीसीके सामने उजागर होने नही दीया.. जबभी वो देवायतको मीलती सृतीको यही कहेते रहेती की देवायत उसे कही दिनोने मीलाही नही.. उसे फोन करके बुलाले.. होस्पीटलका भाडा देना हे.. अ‍ैसी बाते करते भुमीका सबको गुमराह करती रहेती.. जबभी दोनो दुसरोकी हाजरीमे मीलते.. सबको यही लगताकी दोनो बहुत समयके बाद मील रहे हे..

अभी दो दिन पहेलेही सब खरीदी करने आयेथे.. ओर मंजुने सृतीकी सादीकी बात चलाइ इनसे अ‍ेक हप्ते पहेलेही देवायतको मीली थी.. जब सृती तीन चार डीलीवरीकी वजहसे पुरा दिन होस्पीटलमे थी तब भुमीने फोन करके देवायतको सुबहसे ही बुला लीयाथा.. भुमी आधेड होनेको आइ थी.. फीरभी वो अ‍ेक जवान लडकीकी तराह कामुक थी.. उनके चहेरेपे काफी नीखार आ चुकाथा.. जीनसे देवायतभी भुमीके पीछे पागल था.. ओर वो भुमीका फोन आतेही उसे मीलने सुबह चला गया..





उस दिन साम चार बजे तक पुरा दिन भुमी ओर देवायत चुदाइ करते रहे.. भुमी अब बहुतही कामुक ओर ठरकी होगइ थी.. खब उसे कीसीभी हालमे देवायतका लंड हप्तेमे अ‍ेक बारतो चाहीये.. चाहीचे.. पुरा दिन दोनोके बीच चार बार धमासान चुदाइ होती रही.. उस दिन वाकइ देवायतने भुमीकी हालत खराब करदी थी..

उस दिन ना देवायतको पता चला.. की ना भुमीको पता चला.. दोनोही कामातुर होकर चुदाइ करते रहे.. ओर देवायत भुमीको चोदते उनकी चुतको अपने पानीसे भरता रहा.. ओर उस दिन भुमी आइपील लेना भुल गइ.. नतीजेके फल स्वरुप देवायतका बीज भुमीके गर्भमे ठहेर गया.. ओर देवायतने भुमीका को प्रेगनेन्ट करदीया.. ओर उस बातपे दोनो ही अन्जान थे..









अबतक दोनोने कइ दिन ओर राते रंगीन करली थी.. यही सब याद करते भुमीने करवट लेते अ‍ैक पैर नीर्मलाकी कमरपे डाल दीया.. तो नीर्मलानेभी आंख खोलकर देख लीया.. तो भुमीको देखकर उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर वोभी भुमीकी ओर करवट लेते अ‍ेक पैर भुमीकी कमरपे डालकर उनसे चीपककर सो जाती हे.. तो मुभीकीभी हसी नीकल गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी पीठमे हाथ रखते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोगइ..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १११/२

आज सुबह सभी जल्दी उठ गये.. सभी अ‍ेकके बाद अ‍ेक फ्रेस होकर नहाकर तैयार होने लगे.. देवायत अभी तब सोता रहा.. तो नीर्मलाभी उठ चुकीथी.. उसने देखा भुमीका अभीभी गहेरी नींदमे सो रहीहे तो उनके चहेरेपे मुस्कुराहट आगइ ओर जुकते भुमीके होंठ चुमलीये.. ओर सीधेही अपना गाउन सही करते बहार चली गइ.. सीधेही राजीवके रुममे चली गइतो राजीवभी जाग चुकाथा.. ओर वो उनके पास चली गइ..

फीर राजीवको ब्रस करवाके उनको फ्रेस करवाया.. जब तक राजीवने नहा नही लीया तब तक उनका वेइट करते वही बैडपे बैठी रही.. फीर राजीवको कंपलीट तैयार करके वापस अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध कर लीया.. तो भुमीकाभी नीर्मलाकी चुमी की वजहसे जाग चुकीथी.. जैसेही नीर्मला वापस आइ तो दरवाजा बंध करके दोनोही अ‍ेक साथ बाथरुममे घुस गइ.. ओर नीत्य क्रम करके साथमे नहाने लगी.. ओर नहाते..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे हसते) भुमी.. रातमे तुम दोनो कीतने बजे आये..? आनेमे बहुत देर करदी..

भुमीका : (सरमाते हसते) अरे वो रश्मीने चाइ बनाली तो वही बैठे रहे.. फीर दोनो घर आगये..क्यु.. कुछ कामथा..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) अरे नही.. बस अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. मेनेतो सौचाथा की तुम आतेही मुजे जगायेगी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) तो कीमीनी बोलनां.. तुजे खुजली हो रहीथी.. तो कहेना चाहीयेना मे देवुको लेकर ही रुममे आजाती.. बहारभी कोइ नही था.. तो तुम दोनो मील लेते.. हें..हें..हें..

नीर्मलम : (सर्मसार होकर हसते) कमीनी.. मेने तुजे हमारी बात बताके गलती करदी.. तुमतो पीछेही पड गइ हे.. अरे बाबा अब हम बहुतही कम मीलते हे.. ओर जब मीलते हे तो कोइना कोइ साथमे होता हे.. तुमभी तो नही मानती.. वरना हम तीनो तेरे घरपे ही मीलते.. कल तेरे पास अच्छा मौका था.. पटालेती उनको हें..हें..हें..

भुमीका : (जुठे गुसेसे) तु फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा वो मेरा भतीजा हे.. (धीरेसे) बेसर्म कहीकी..

नीर्मला : (कातील मुस्कानके साथ) छोड ये सब रीस्ते नाते.. यहातो सब अपनी बहेनकोही चोद लेते हे.. ओर उनके साथ सादीभी करके बच्चेभी पैदा कर लेते हे.. तो बुआ भतीजाके रीस्तेके क्या मायने.. भुमी.. तु कबतक अ‍ैसे धुट धुटके जीयेगी.. मेरी मान.. अभीभी वक्त हे.. तुमने अपनी जवानीतो बरबाद करली..

अब हम दोनो आधेड होनेको आइ हे.. उसे क्यु बरबाद करती हे.. मे सच कहेती हु.. जीले अपनी जींदगी.. अ‍ैसा मौका तुजे जींदगीमे दुबारा नही मीलेगा.. देख मुजे.. जबही हम दोनो मीलते हे वो मेरी हालत खराब कर देता हे.. वो इतना सक्षम हेकी हम दोनोको खुस रखेगा.. कहोतो मे उसे बात करु..?

भुमीका : (नीर्मलाके मनकी बात जाननेके लीये) नही नीमु.. अभी नही.. मुजेभी अ‍ेक मर्दकी कमी महेसुस होती हे.. लेकीन अ‍ेक डरसा लगा रहेता हे.. कही हमारे रीस्ते कही उजागर होगये तो मे क्या करुगी..? मेरे पास मरनेके अलावा कोइ रास्ता नही होगा.. मेरी सृतीको क्या मुह दीखाउगी..? बस सोचतेही डर लग रहा हे.. तु मेरे बारेमे कीतना सोचती हे.. बस तुही तो मेरी बहेन हे.. लव यु नीमु..

नीर्मला : (हसते जोरोसे बाहोमे कसते) हंम.. भुमी.. तु इसकी चीन्ता मत कर.. मुजे पता हे तुजे सीर्फ सृतीकी चीन्ता हे.. अगर बाय चान्स उनको पता चल भी जायेतो वोभी तो ओरत हे.. हमारी सृतीभी समजदार हे.. मुजे पुरा यकीन हे वोभी समयके साथ समजोता कर लेगी.. मेरी मान.. देवुसे अच्छा लडका हमे कही नही मीलेगा.. उनमे कीतना आकर्सण हे.. हेन्डसम हे.. ओर बाबाकी कृपासे आजभी कीसी लडके की तरह उतनाही जवान दीखता हे..

भुमीका : (अलग होते हाथ थामते) नीमु.. मुजेभी पता हे.. वो आजभी जवान हे.. मुजेभी वो अच्छा लगता हे.. फीरभी मुजे अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. मुजसे ये नही होगा.. बस तुम अपनी लाफको अ‍ेन्जोय कर.. अगर भवीस्यमे मुजे अ‍ैसी कोइभी जरुरत पडेगी तो मे सबसे पहेले तुजेही बता दुगी.. अबतो मेभी अ‍ैसे कीसीभी रीस्तेको गलत नही मानती..

नीर्मला : (हसते) ठीक हे भुमी.. लेकीन तुजे जबभी अ‍ैसी जरुरत लगेतो मुजे कहेना.. मे तेरे साथ हु.. मे देवुसे इस बारेमे बात करुगी.. मुजे पका यकीन हे वो मना नही करेगा..

कहेते नीर्मला ओर भुमी वही अ‍ेक दुसरेके सामने खडे रहेते साथमे नहा लीया.. फीर दोनोही बहार आगइ.. ओर अपने अपने कपडे पहेनने लगी.. दोनोने पेटीकोट पहेन लीया.. दोनोही देवायतकी बाते करते गरम हो चुकी थी.. लेकीन कीसीके सामने जाहीर होना नही चाहती थी.. दोनोने अ‍ेक दुसरेके बाल बना दीये.. ओर खडी होगइ.. तब अचानक भुमीने नीर्मलाको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर अ‍ेक दुसरेके होठ लीपलोक करलीया..





दोनोही मदहोस होने लगी.. तभी अचानक भुमीको व्होमीट जैसा लगने लगा.. ओर वो नीर्मलासे अलग होकर जटसे बाथरुममे दोडकर भाग गइ.. ओर गेन्डीमे उल्टीया करने लगी.. तभी उसे अचानक सब याद आने लगा.. की वो दस दिन पहेलेही देवायतसे पुरे दिनमे चार बाद चुदाइ करवा चुकी थी.. तब उस दिन आइपील खतम होगइथी तो लेना भुल गइथी.. याद आतेही वो बहुतही गभरा गइ.. अगर नीर्मला या कीसी ओरको पता चला या सृतीने उसे उल्टीकी वजहसे चेक करलीया तो उनका भांडा फुट जायेगा..





यही सोचते वो गभरा गइ.. ओर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तभी उनको अपनी पीठपे नीर्मलाका हाथ उनकी पीठ सहेलाते महेसुस हुआ.. वो बहुत ही गभराते पलटके पीछे देखने लगी.. तो नीर्मलाने उनकी आंखोमे आंसु देख लीये.. तभी नीर्मला बहुत कुछ समज गइ.. उसने जोरोसे भुमीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके सरको सहेलाने लगी.. तब भुमीका को नीर्मलासे बात करेने अलावा कोइ चारा नही लगा..





आज मजबुरन उसे नीर्मलाको सब सचाइ बतानी पडेगी.. यही सोचते वो नीर्मलाकी बाहोमे उनके कंधेपे सर रखते जोरोसे रोने लगी.. तो नीर्मला उनके रोनेकी आवाज बहार तक नाजाये इसीलीये वो फोरन भुमीके मुहपे हाथ रखते उसे चुप कराने लगी.. तब भुमीकाको रीयलाइज हुआकी वो जोरोसे रो रही हे.. ओर वो फोरन धीमी आवाजसे रोते फीरसे नीर्मलासे लीपट गइ ओर नीर्मला उनकी पीठ सहेलाती रही..

फीर नीर्मलाने भुमीको मुह साफ करवाया.. ओर भुमीको बहार लेकर आगइ.. ओर उसे बेडपे बीठा दीया.. फीर वोभी नीचे घुटनोके बल भुमीके पैरोके बीच सामने बैठ गइ.. ओर अपना सर थोडा उचा करते भुमीकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो भुमीने नीर्मलासे नजरे चुराते अपनी आंख जुकाली.. ओर चुपचाप बैठी रही.. अब नीर्मलासे बात छुपानेका कोइ फायदा नही था.. ओर उसने नीर्मलाको हाथ पकडते खडी करके अपने पास बेडपे बीठा दीया..

नीर्मला : (धीरेसे हाथ पकडते) भुमी.. क्या हुआ..? तेरी तबीयत खराब हे क्या..? कुछ उल्टा सीधा खा लीया हे..? तो अभी सृतीको बोलती हु.. तुजे कुछ दवाइ दे देगी.. तो उल्टीया बंध होजायेगी.. वरना ज्यादा उल्टीया हुइतो तुजे डीहाइड्रेसन होजायेगा.. क्या सृतीको बुलालु..?

भुमीका : (जटसे गरभारते धीरेसे) नही नही.. नीमु.. उसे मत बुलाना.. उसे इस बारेमे कुछ मत कहेना.. वरना वो मुजे चेक करेगी तो.. वो लेडीसकी डोक्टर हे.. उसे सब पता चल जायेगा.. प्लीज.. तुम ये बात कीसीको मत बताना.. तुजे मेरी कसम हे..

नीर्मला : (कुछ आंसकाओके साथ अ‍ेक नजरसे देखते) लेकीन क्यु..? तु उल्टीया होतेही इतनी गभरा क्यु रही हे.. अगर चेक करेगी तभी तो पता चलेगा की तुजे कीस वजहसे उल्टीया हो रही हे.., तुम इसे क्यु छुपाना चाहती हो..? ओर मुजे इतनी छोटीसी बातपे कसम देदी..? क्यु..? भुमी.. कुछतो बात हे.. बता मुजसे क्या छीपा रही हे तु..?

भुमसका : (नजरे चुराते धीरेसे) नीमु प्लीज.. मुजे तेरी मददकी जरुरत हे.. तु इस बातका जीक्र कीसीके सामने मत करना.. वरना मे बरबाद होजाउगी.. तुतो मेरी बेस्ट सहेली हेनां..? मेरी बहेन हेना..? सो प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. आज मे तुजे मेरे बारेमे सब कुछ बता दुगी..

नीर्मला : (भुमीकी आंखोमे देखते धीरेसे) भुमी.. सच बता क्या छुपा रही हे मुजसे..? कमीनी.. तुने मुजेभी बताना जरुरी नही समजा..? बता क्या बात हे..? कही तु प्रगनेन्ट ब्रेगनेन्ट तो नही हुइ..? तेरी उल्टीया बहुत कुछ बया कर रही हे.. कही तेरा कीसीके साथ अफैरतो नही..? भुमी मुजे सबकुछ सच सच बता.. तुजे मेरी कसम हे..

भुमीका : (सरको नीर्मलाके कंधेपे रखते धीरेसे रोते हुअ‍े) नीमु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदे.. मेने तुमसे भी बात छुपाइ हे.. सायद.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. बस मेरी अ‍ेक गलतीकी वजहसे ये सब हुआ.. मे उस दिन आइपील लेना भुल गइथी.. अगर सृतीने मुजे चेक कीया तो उसे सब पता चल जायेगा.. की मे प्रेगनेन्ट हु.. मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. मे मर जाउगी.. ओह.. गोड.. मेने क्या कीया..

नीर्मला : (भुमीके मुहपे हाथ रखते) चुप.. अ‍ेकदम चुप होजा.. अब रोइतो तुजे मेरी कसम हे.. ओर मरनेकी बात तो बीलकुल मत करना.. तु मेरा मरा हुआ मुह दीखेगी.. कमीनी कहीकी.. चल मुजे सबकुछ बता.. कौन हे वो.. जीसे तु प्यार करती हे.. इतनी इम्पोर्टन्ट बात तुने मुजसे छीपाइ ही क्यु..?

क्या मे तुजे मना करती..? अरे पगली मेतो तुजे थोडी देर पहेले यहीतो समजा रही थी.. लेकीन तुमने मुजसे बात छुपाकर आज मुजे बहुत हर्ट कीया.. क्या मुजपे इतनाभी विस्वास नही हे..? कमीनी मेने तो तुजे खुद मेरे जमाइके साथ मेरे रीलेशनकी सारी बात बतादी.. ओर तु हेकी.. भुमी ये तुमने अच्छा नही कीया.. बता कौन हे वो..?

भुमीका : (नीर्मलाके पैरोमे नीचे बेठते उनकी गोदमे सर रखते) नीमु.. आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार मुजे माफ करदे.. आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही करुगी सीर्फ अ‍ेक बार.. मुजे पता हे मे तेरी गुनहगार हु.. तु जो सजा देगी मुजे मंजुर हे.. लेकीन अ‍ैसे मुजसे रुठो मत.. तेरे अलावा मेरा इस दुनीयामे हे ही कौन.. सोरी.. यार.. मेने तुजे ना बताकर बहुत बडी गलती करदी हे.. तुजे मेरे बारेमे सब कुछ बता देना चाहीयेथा.. बस सीर्फ अ‍ेक बार तेरी छोटी बहेन समजकर मुजे काफ करदे.. मे तुजे सब कुछ बता दुगी..

नीर्मला : (हाथ पकडके पास बीठाते) हंम.. चल जा तुजे माफ कीया.. कमीनी अबतो बता.. मेरी इस खुबसुरत बहेनके दिलमे कौन राज कर रहा हे.. जो तुजे प्रेगनेन्ट तक कर दीया..

भुमीका : (सर जुकाते नजरे चुराते धीरेसे) वो.. वो.. हमारा देवु.. नीमु.. जब तु इतने बरसोके बाद मुजे पहेली बार मीली.. तब तुमने देवुके साथ तेरे फीजीकल रीलेशनकी बात कहीथी.. तबसे मेनेभी उनके साथ रीलेशनमे आनेका फैसला करलीया था.. तो इनके दो महीनेके बाद ही हम दोनो रीलेशनमे आगये..

हमने जंगलके अ‍ेक मंदिरमे जाकर सादीभी करली.. तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. बस ये बात मे सबसे छुपाना चाहती थी.. नीमु मे अब विधवा नही हु.. मे हमारे देवुकी सुहागन हु.. हम दोनो तबसे फीजीकल रीलेशनमे हे.. बस मे तुजसे डरती थी.. इसीलीये तुजे नही बताया.. जबभी मे घरमे अकेली होती.. तब देवुको बुला लेती.. ओर हम दोनो मीया बीवीकी तराह सब कुछ करते.. नीमु.. अब तेरी तराह देवु मेरा भी पती हे..

नीर्मला : (खुसीसे भुमीको हग करते हसते) तो कमीनी.. मुजे कहेना चाहीयेना..? मे थोडी तुजे मना करती..? ओर मुजसे डरनेकी क्या जरुरत थी..? मेतो तुजे खुद उनके साथ रीलेशन रखनेको केह रहीथी.. कमीनी कहीकी.. अब फस गइनां..? भुमी आज मे बहुत खुस हु.. अब हम तीनोही मीलकर खुब मजे करेगे.. तु खुसनसीब हेकी तु हमारे देवुका बच्चा पैदा करेगी.. आइ सो हेप्पी.. लव यु भुमी आइ लव यु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हाथ पकडते) नही नही.. नीमु.. मे इस बच्चेको जन्म देना नही चाहती.. मे सबको क्या मुह दीखाउगी..? सबको क्या कहुगी की ये बच्चा कीसका हे..? नही नीमु.. मुजे ये बच्चा गीराना पडेगा.. अभी सीर्फ दस बाराह दीन हुअ‍े होगे.. तो आसानीसे नीकल जायेगा.. बस इसमे मुजे तेरी मददकी जरुरत हे..

नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) पागल होगइ हो क्या..? इसे क्यु गीराना चाहती हो..? अगर तेरी जगाह मे होती तो सबसे बगावत करके मेरे देवुका बच्चा पैदा करती.. फीर चाहे राजीव हो या मंजु.. मे सबको जवाब दे देती.. कमीनी.. मत कर अ‍ैसी गलती.. तु बहुत नसीब वाली हे हमारे देवुका बच्चा तेरे पेटमे हे..

भुमीका : (धीरेसे सरमाते) नही नीमु.. तु समजती क्यु नही..? मे ये नही कर सकती.. सृतीको क्या मुह दीखाउगी..? कभी सोचा हे..? ओर.. ओर.. मे देवुकोभी खोना नही चाहती.. जैसे ही सबको पता चल जायेगा.. मेरा देवुके साथ सभी रीलेशन खतम होजायेगे.. क्या तु चाहती हे मेरा देवुके साथ रीलेशन खतम होजाये..? ओर अभी सृतीकी देवुके साथ सगाइ भी करनी हे..

नीर्मला : (थोडा सेड मुह करते) हंम.. नही.. सायद तु ठीक केह रही हे.. अभी सब छोड मेरे पास उल्टीकी टेबलेट पडी हे.. मे आइपील ओर वो साथमेही रखती हु.. अभी अ‍ेक खाले फीर हम सादीके बाद कुछ सोचते हे.. क्या सचमे सृतीकी सगाइ देवुके साथ हे..?

भुमीका : (हाथ पकढते इमोस्नल होते) हां नीमु.. थेन्क्स.. अगेइन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने तुजे ना बताकर बहुत बडी गलती करदी.. अब मे मेरी कीसीभी बातको तुमसे नही छीपाउगी.. आइ प्रमीस.. नीमु.. हमे इस बारेमे देवुसे भी बात करनी पडेगी..

नीर्मला : (हसते) हंम.. हमारे पतीसे.. हें..हें..हें.. भुमी वो कीतना हेन्डसम हेनां..? मुजेतो उनको देखतेही कुछ होने लगता हे.. की मुजे अभीके अभी पकडके चोदले.. हें..हें..हें.. क्या तुजेभी अ‍ैसा लगता हे..? हें..हें..हें..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) हंम.. कमीनी.. तु कीतनी ठरकी होगइ हे.. हें..हें..हें.. नीमु.. सच कहु..? मेभी इसे देखतेही पागल होजाती हु.. हम दोनो कमसे कम हप्तेमे अ‍ेक बारतो मीलही लेते हे.. तब वो मेरी हालत खराब कर देते हे.. कल रात भी हम मीलेथे.. इसीलीये आनेमे थोडी देर होगइ.. नीमु.. वो कीतना क्युट हे..? बस अ‍ैसा लगता हे उनसे दिन रात चुदवाती ही रहु..





नीर्मला : (हसते) हां.. तभी तो तुजे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. हें..हें..हें.. भुमी तुजे पता हे.. कल वो हमे लेने आये थे.. तब दो पहोरको राजीव सो गया तब तीन घंटेतक हमने यही काम कीया.. उसने मुजे खुब जमकर चौदा.. कमीनी.. अब उनसे अकेली अकेली मत चुदवाना.. मुजेभी बुलाना.. मेभी तेरे घर आजाउगी.. फीर हम तीनो मीलकर खुब मजे करेगे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) हंम.. अबतो तुजे बुलानाही पडेगा.. वरना कीमीनी तुतो मुजे नोचही डालेगी.. हें..हें..हें.. नीमु.. सुन.. अब इनका क्या करेगे.. हमारे सहेरमेतो बहुत रीस्क हे.. अगर कीसीने मुजे पहेचान लीया तो..? नीमु लगता हे हमे दुसरे सहेरमे जाना पडेगा.. जहा हमे कोइ पहेचानता ना हो..

नीर्मला : (हसते) अरे तु टेन्शन मतले.. इस बारेमे हम बादमे कुछ सोचते हे.. अभी अ‍ेक दो महिने तक कुछ प्रोबलेम नही.. में देवुसे भी बात करुगी.. वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. बस अभीतो तु टेन्शन फ्रि होकर सादीको अ‍ेन्जोय कर.. हम सादीके बाद कुछ करते हे.. चल अब बहार नही जाना..? वरना सब कहेगेकी इतनी देर दोनो अंदर क्या कर रही हे.. हें..हें..हें..

अब भुमीको नीर्मलासे बात करके कुछ राहत महेसुस हुइ.. ओर दोनो तैयार होकर बहार आगइ.. ओर सबको गले मीलकर गुडमोर्नींग वीस करने लगी.. ओर दोनो राजीवके पास सोफेपे बैठ गइ.. तो दुसरे रुममे सृती नहाकर नीकली.. तो वंदना बाथरुममे गइ तो पुनमभी दोडके उनके साथ घुस गइ जीसे देखते सृती जोरोसे हसने लगी.. तो इधर मंजु चंदा रमा सरला सभी ओरते तैयर होकर पटाका बनके बहार घुम रहीथी.. तभी भानु ओर लखन भी तैयार होकर नीचे आगये तो लता नहानेके लीये बाथरुममे घुस गइ..

तभी मौका देखतेही नीलम अपनी मम्मीका फोन लेकर दुर लास्ट वाले रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके वही बेडपे बैठकर धिरेनको फोन लगा देती हे.. तो सामने तीन चार रींगके बाद धिरेन फोन उठा लेता हे.. तो नीलम बहुतही सरमाते धीरेसे धिरेनसे बाते करने लगी..

धिरेन : (हसते) हेलो..?

नीलम : (धीरेसे) हेलो.. धिरेन.. मे नीलु बोल रही हु.. जाग गये क्या..? इधर कब आ रहेहो..?

धिरेन : (हसते) अरे नीलु डार्लींग तुम.. कहासे बोल रहीहो..? देखना कुछ गडबड मत करना..

नीलम : (हसते धीरेसे सरमाते) नही धिरेन.. मे लास्ट वाले रुममे उपरकी मंजीलपे हु.. ओर लतादीदी नहाने गइ हे.. तभीतो आपसे बात कर रही हु.. कहोनां कब आओगे.. आपके बीना यहा अच्छा नही लगता..

धिरेन : नीलु मे सामको आ रहा हु.. बस तु अपना खयाल रखना.. हमारे बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. आइ लव यु नीलु.. मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. क्या मे तेरे लीये कुछ लाउ..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही यहा नही.. मेरे पास सब कुछ हे.. अब जोभी चाहीये मे वहा सहेरमे आउगी तब दीलवा दिजीयेगा.. बस अ‍ेक कोइभी छोटासा फोन दीलवा दीजीयेगा.. ताकी हम उनमे बात कर सके..

धिरेन : (हसते) नीलु.. अभी बेंकपे जा रहा हु.. आजही लेलुगा.. वोभी दो फोन लेना हे.. अ‍ेक पुनमके लीयेभी लेना पडेगा.. ओर कुछ उनके लीये हमारी फस्टनाइटके लीये गीफ्ट लेनी हे.. तुजे मे हमारी फस्टनाइटमे देदुगा हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धत्.. आप बहुत नोटी हो.. पहेले पुनमदीदीको तो नीपटालो.. हमारी हम बादमे सोचेगे.. धिरेन.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. बस आप आजाइअ‍े.. हम बादमे बात करेगे लता दीदीने नहालीया होगा वरना मुजे नही दीखेगीतो मुजपे सक करेगी.. वो मुजपे बरोबर ध्यान रख रही हे..

धिरेन : (हसते) हंम.. मुजेभी उनसे बचके रहेना पडेगा.. चल रखता हु.. बस अ‍ेक कीस देदे..

नीलम : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) हंम.. बुच.. बुच.. बुच.. बस..? अब रखु..?

धिरेन : मुहं...हां.. बुच.. बुच.. चल बाय..

कहेते नीलमने फोन काट दीया ओर मनही मन खुस होते हसते हुअ‍े रुमसे बहार आगइ.. ओर दोडके जटसे अपनी मम्मीका फोन उनके रुममे रख दीया ओर जटसे अपने रुममे चली गइ.. तो लता अभी तक नहाकर बहार नही नीकली थी तब नीलमने राहतकी सांसली.. ओर वो अपने कपडे लेकर बेडपे बैठ गइ.. तभी बाथरुमसे लता नीकली तो नीलम हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस गइ.. लता उनको इतनी खुस होते देखती रही..

लता : (मनमे सोचते) लगता हे मे नहाने गइ तब कीमीनीने धिरेनसे फोनपे बात करली होगी.. तभीतो इतनी खुस दीख रही हे.. कुतीयाका ध्यान रखना पडेगा.. वरना वो कुता कभीभी इस कुतीपे चड जायेगा..

सोचते लता अपने कपडे पहेनने लगी.. जबतक वो तैयार होगइ तबतक नीलमभी नहाकर बहार आगइ.. ओर अपने कपडे पहेनकर वोभी गाना गुनगुनाते तैयार होने लगी तो लता वही बेडपे बेठकर उनके सामने देखती रही.. तो नीलम गाना गाते चुप होगइ.. ओर चुपाप तैयार होने लगी.. तभी लताने उसे घुरते कहा..

लता : क्युरे.. आज बहुत खुस हो रही हे..? गाना बाना.. हंम.. कही वो कमीनेसे बाततो नही करली..?

नीलम : (थोडा गुसा होते) क्या दीदी.. आपतो मेरे पीछेही पड गइहो.. मेरे पास फोन हे क्या..? जो आप अ‍ेसे मुजपे सक कर रहीहो.. कीतनी बार बोलाकी मे अब उनसे दुर रहुगी.. सारा दीन आपके साथतो रहेती हु..

लता : चल.. ठीक हे.. ठीक हे.. येतो तुम अभी कुछ ज्यादाही उछल कुद कर रहीथी इसीलीये पुछलीया.. आज वो कमीना आ रहा हे.. ध्यान रखना.. कही कुछ उल्टी सीधी हरकते मत करना.. वरना मुजसे बुरी कोइ ओर नही होगी.. मे आज पुनमदीदीको भी इस बारेमे आगाह करदुगी.. ताकी वोभी उधर उस कमीनेपे ध्यान रख सके.. चल नीचे..

नीलम : (थोडी गभराते साथ चलते धीरेसे) दीदी.. अभीतो उनकी सादी भी नही हुइ.. आप उसे कुछ मत कहेना.. वरना वो क्या सोचेगी..? बेचारीका दिल टुट जायेगा..

लता : (नीलमकी ओर देखते धीरेसे) अगर तु चाहती हेकी उन दोनोकी जींदगी खराब ना होतो तुम ध्यान रखना.. अब ये सब तुजपे डीपेन्ड हे.. अभीतो कुछ नही कहुगी.. लेकीन तुमने कुछ उल्टा सीधा कीया तो पुनमदीदीको जरुर बता दुगी.. उसेभी तो पता चलेकी उनके पीछे उनकी सौतन उनके पतीसे चुदवानेके लीये तैयार ही बैठी हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) क्या दीदी.. आपभी कैसा बोलती हो.. आपकोतो सरमभी नही आती.. क्या मे आपको अ‍ैसी दीखती हु..?

लता : (सीडीया उतरते) हां.. वोतो आगे जाते पता चल ही जायेगा.. आजकल तु जीस तराह आगसे खेलती हेना.. वो आग मेभी खेल चुकी हु.. लेकीन तेरे लखनजीजुके साथ.. समजी.. चल..

दोनोही बाते करते नीचे आगइ.. ओर सीधेही पुनमके पास उनके रुममें चली गइ.. तो वहाभी तीनो तैयार होकर बहार नीकल रहीथी.. तभी चंदा देवायतको जगाने रुममे चली गइ.. वो जानतीथी देवायत जरुर सरारत करेगा.. इसीलीये मुस्कुराते उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर देवायपे जुकते उसे प्यारसे जगाने लगी.. तभी अचानक देवायतने उसे खीचके अपने उपर सुला दीया.. तो चंदा जोरोसे हसते हुअ‍े उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११२

दोनोही बाते करते नीचे आगइ ओर सीधेही पुनमके पास चली गइ तो वहाभी तीनो तैयार होकर बहार नीकल रहीथी.. तभी चंदा देवायतको जगाने रुममे चली गइ.. वो जानतीथी देवायत सरारत जरुर करेगा इसीलीये उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया ओर देवायपे जुकते उसे प्यारसे जगाने लगी.. तभी अचानक देवायतने उसे खीचके अपने उपर सुला दीया तो चंदा हसते हुअ‍े उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी....अब आगे





ओर देवायत उसे बाहोमे लेकर पलट गया.. तो चंदा देवायतके नीचे लेटते छटछपाते मुहको इधर उधर करते नजरे चुराने लगी.. ओर हसती रही.. तभी देवायतने उनके चहेरेके थामते चंदाके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. ओर दोनोही स्मुच करने लगे.. चंदा मदहोस होने लगी.. ओर देवायतके गलेमे हाथ डालके उसे जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. तो दवायत उनकी सारीको उची करते कमर तक लेजाने लगा.. तभी..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. अभी नही.. प्लीज.. सबलोग बहार आपका नास्तेके लीये वेइट कर रहे हे.. ओर मेने कपडेभी नये पहेने हे तो सबको पता चल जायेगा.. प्लीज.. हम दो पहोरको आरामके वक्त करेगेनां..

देवायत : (गाल चुमते) बेबी कलभी तुम सो गइ थी.. तुम अपने वादेसे मुकर रही हो..

चंदा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) सोरी जानु.. सादीका घर हे.. सब लोग हेतो काममे थक जाती हु.. आज पका दुगी.. दो बार बस..? अबतो मेरा जानु खुस..?

देवायत : (हसते चुमते) बस..? सीर्फ दो बार..? डार्लींग पुरी रात तुजे चोदना हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) छीं.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. अरे बाबा कल हमारे लखन पुनोका मंडप मुहुर्त हे.. हमे सुबह जल्दी उठना हे.. अगर मे चलने फीरनेकी लायक नही रही तो..? कुछतो समजीये..

देवायत : हंम चल ठीक हे.. अ‍ेक बार दो पहरको ओर दो बार रातको.. अब तो खुस हेनां..?

चंदा : (सरमाते हसते) हंम.. बतलब आज मेरी तीन बार चुदाइ पकी हे.. आप बहुत कमीने हो.. हें..हें..हें.. चलीये अब फटाफट नहा लीजीये जाइअ‍े.. मेने आपके लीये स्पेसीयल आपके पसंदके आलु पराठे बनाये हे.. ओर वोभी अपने हाथोसे.. सीर्फ मेरे देवुके लीये.. ताकी आपमे ताकात आजाये तो रातमे आसानी रहेगी हें..हें..हें..

तब जाके देवायत हसते हुअ‍े चंदाके उपरसे हट गया.. तो चंदाभी सरमाते बेडसे उतर गइ ओर अपने कपडे सही करने लगी तो देवायतने उसे अ‍ेकबार फीरसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होंठ चुमने लगा तभी कीसीने उनका दरवाजा खटखटाया तो चंदा जटसे देवायतकी बाहोसे अलग होगइ.. ओर दरवाजा खोलदीया तो मंजु हसते हुअ‍े अंदर आगइ.. चंदाके सामने देखकर हसने लगी तब चंदा खुब सर्मसार होते हसती रही..

मंजुला : (हसते) लगता हे दीदी आज आप इनसे महेमानोकी वजहसे बच गइ.. हें..हें..हें.. देवु आप फटाफट नहालो आपको सहेरमे जाना हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) क्यु.. कुछ लेना हे क्या..? अब क्या भुल गइ तुम..?

मंजुला : (हसते) अरे में कुछ नही भुली.. वो सृती कुछ अपना सामान भुल गइ हे.. तो उसे अकेला भेजना ठीक नही हे.. ओर आपके सीवा उनके साथ जायेगा कौन..? लखनको अब बहार नही भेजना.. वरना उसेही भेज देती.. प्लीज.. वो बेचारी तैयार होकर बैठी हे.. आप फटाफट नहालो.. फीर चाइ नास्ता करके नीकल जाना..

देवायत : (सृतीका नाम सुनतेही मनमे खुस होते) हंम.. चल ठीक हे..

कहेते मंजु देवायतके होंठ चुमते बहार चली गइ.. तभी देवायतको मंजुसे रातमे हुइ बाते याद आने लगी.. ओर सृतीके लीये उनके दिलमे हलचल तेज हो गइ.. ओर वो जटसे बाथरुममे नहाने घुस गया तब मंजुने रुमसे बहार आकर भुमीको इसारा करके उनके रुममे बुलाया.. तो भुमीभी सरमाते खडी होकर अपने रुममे चली गइ तब मंजु बेडपे बैठी थी.. तो भुमी भी वही जाकर बैठ गइ.. ओर मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी..

मंजुला : (हसते) बुआ.. अब हमे साम तकतो कोइ खास काम नही हे.. तो क्युनां हम देवु ओर सृतीको साथ मे सहेर कोइ कामके बहाने भेजदे.. ताकी दोनोके बीच कुछ नजदीकीया बढ सके.. क्या कहेती हो आप..?

भुमीका : (खुसीसे हसते) अरे बेटी नेकी ओर पुछ पुछ.. ओर कामके बाने क्यु.. मे अभी सृतीको कहेती हु.. उनके गहेने भुल गइ हु.. जा देवुके साथ जाकर ले आ.. सादीमेतो पहेनना चहीयेनां हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते हग करते) बुआ आपभीनां.. चलो ठीक हे उसी बहाने दोनोको भेजदो.. मेने देवुसे केह दीया हेकी सृती अपना कुछ सामान भुल गइ हे उसे लेने जानाम हे आप उनके साथ चले जाइअ‍े.. अभी वो नहाने गये हे.. चाइनास्ता करके उन दोनोको सहेर भेज देते हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (इमोस्नल होकर) बेटी.. थेन्क्स.. तु वाकइ मेरी महान बेटी हे.. बेटा तुमसे अ‍ेक बात कहेनी हे..?

मंजुला : (हसते) हां बुआ कहीयेनां.. क्या बात कहेनी हे..?

भुमीका : (नजरे चुराते धीरेसे सर्मीन्दा होते) बेटा.. क्या तुजे वाकइ सब पता चल जाता हे..? तो फीर मेरे बोरेमे भी सब जानती होगी..

मंजुला : (समज जाती हे तो हसते) हां बुआ.. अब बाबाने कुछ जीम्वेवारी दी हे.. तो नीभानी तो पडेगी.. मुजे पता हे आप क्या पुछना चाहती हे.. आप गील्टी फील मत करो.. ये सबतो अ‍ेक दिन होनेही वाला था.. मुजे आपके बारेमेभी सब पता हे.. ओर मेरी मम्मीके बारेमे भी सब पता हे.. ओर इनमे मुजे कोइ अ‍ेतराज भी नही हे..

बस ये बात सीर्फ आप हम तीनोके बीच सीमीत रखना.. मुजे वो बातभी पता हे जो बात आज सुबह ही आपको मालुम हुइ.. वो मुजे तबसे पता हे.. जब आप दोनो चंदामौसी ओर देवुकी सादीसे पहेले मीलेथे.. क्या आप प्रेगनेन्ट हेनां..? बुआ.. आप सर्मीन्दा मत होना.. मे सृतीको समजा दुगी..

कहातो भुमीका मंजुके गले लगकर आंसु बहाने लगी.. तब मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही.. काफी देर तक दोनो अ‍ैसेही बेठी रही.. फीर मंजु भुमीको लेकर बाथरुममे चली गइ ओर उनका हुलीया ठीक करवाया..

भुमीका : (नजर जुकाते) बेटी.. मुजे माफ करना.. मे अपने जजबातो पे बाकु नही रख सकी.. मे देवुके बगैर नही रेह सकती.. मे ओर तेरी मम्मी दोनो अ‍ेकही कस्तीपे सवार हे.. हम दोनोकी हालत अ‍ेक जैसी हे.. क्या अबभी तुम सृतीकी सादी देवायतसे करवानेके लीये राजी हो..? तुजे ये सब जानकर दुख नही होता..?

मंजुला : (दोनो बहार रुममे आते) नही बुआ.. क्युकी आप मेरे बारेमे जानती नही.. इसीलीये आप अ‍ैसा पुछ रही हे.. हम सभी हमारे देवुकी रानीया हे.. ओर हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल सकता हे.. हम सबको अ‍ेक साथ संतुस्ट कर सकता हे.. क्युकी वो कामका अंस हे ओर हम सभी रतीके अंस हे.. हम सभी वहा परीया ओर अप्सराये हे.. ओर मे सबकी जननी हु.. वास्तमे आप सभी मेरी ही संतान हे.. तो मुजे मेरे बच्चोका खयालतो रखनाही पडेगा..

कहतो भुमी अ‍ेक नजरसे मंजुको देखतीही रेह गइ.. तो मंजु भुमीकी ओर देखते हसती रही.. तबभी भुमीकाको क्षोभ हो रहाथा.. तभी मंजुने भुमीका क्षोभ दुर करनेके लीये अ‍ैसा कुछ कीया जीसे भुमीका सर्मसार होते हसने लगी.. मंजुने अचानक भुमीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. तो भुमी सर्मसार होते हसने लगी.. ओर मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुका मार दीया.. ओर भुमीका वापस मंजुके गले लग गइ.. ओर कहा..

भुमीका : (हसते) तुमभी बीलकुल अपनी मम्मीकी तराह पागल लडकी हो.. कोइ अपनी बुआके साथ अ‍ैसा करता हे..? हें..हें..हें.. मंजु.. तुमने मेरे दिलका बोज हल्का करदीया.. थेन्क्स..

मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) नही बुआ.. ये मेने अपनी बुआके साथ नही.. मेरी सौतनके साथ कीया हे.. बस अबतो आप ओर मम्मी दोनोही अपनी लाइफ अ‍ेन्जोय करो.. ओर खुस रहो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) बडी बेसर्म लडकी हो तुम.. चल बहार मे सृतीको केह देती हु.. भेजदे दोनोको सहेर.. बेटी आज मे बहुत खुस हु.. दिलका अ‍ेक बोज हल्का हो गया.. वरना तुजे पता चलजानेकी बातसे बहुत डर लग रहा था.. पता नही तुम हम सबके रीस्तोको कैसे अ‍ेक्सेप्ट करलेती हो..

मंजुला : (हाथ पडते बहार लेजाते) बुआ.. छोडीये सब.. आइ लव यु.. बस आप खुस रहो.. ओर जोभी हो रहा हे उसे होने दो.. कुछ उल्टा सीधा मत सोचना..

भुमाका : (सरमाते हसते) हंम.. वाकइ मेरी बेटी समजदार होगइ हे.. हम सबकी मां.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तो नीर्मला दोनोके उपर बरोबर नजरे गडाये बैठीथी.. तो दोनोको हसते हुअ‍े बहार आते देखकर वोभी खुस होते हसने लगी.. ओर भुमीका सृतीके पास चली गइ..

भुमीका : (हसते धीरेसे) सृती बेटा.. वो.. वो मे तेरे गहेने लानातो भुल गइ.. अब तुम सादीमे क्या पहेनोगी..?

सृती : (थोडा जुठेसे नाराज होते) मोम.. आपभीनां..? अब मे सादीमे क्या पहेनुगी..? दो घंटा लगता हे वहा आने जानेमे.. ओर लेकर आजाउ तोभी दो पहोर होजायेगी.. आपभीनां अ‍ेक भी काम ठीकसे नही करती.. अब क्या करुगी में..?

भुमीका : (हसते) अरे सोरी सोरी बाबा.. अब जाकर लेआ.. मे कीसीको साथ भेजती हु.. वैसेभी दो पहर तक कोइ खास काम भी तो नही हे.. क्या मे देवुको तेरे साथ भेजदु.. हें..हें..हें..

सृती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आपभीनां.. सादीकी इतनी दोडधाममे वो कहा फ्रि होगे..? (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही चाहीये गहेने.. अ‍ैसे ही ठीक हु.. जाइअ‍े आप..

भुमीका : (धीरेसे) अरी जाना.. उसे भी कुछ काम नही हे.. मंजुने ही कहा हे.. चली जा..

मंजुला : (पास आते धीरेसे कानमे) हां.. जा कुतीया चली जा.. अच्छा मौका हे.. ओर हो सकेतो सब सेट करके आनां.. चल जा.. मे उनको भेजती हु.. तुम दोनो चाइ नास्ता करके चले जाओ..

सृती : (सरमाते जुठे गुसेसे घुरते) लगता हे तुमने ओर मम्मीने ही कुछ प्लान बनाया हे.. ये जान बुजकर ही गहेने भुल गइ होगी.. मंजु.. कीतनी कमीनी हो तुम.. ओर मोम आपभीनां.. सब क्या कहेगे.. कुछतो सोचते..

मंजुला : (चंदा पासमे आते ही) अरे बडी दीदी देवुने नहालीया होगा.. जाकर उनके कपडे दे दो.. उनको सृतीके साथ सहेर जाना हे.. ये अपना कुछ सामान भुल गइ हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) जी.. अभी देकर आती हु..

सृती : (दांत पीसते गुस्सेसे) कुतीया.. देखना अ‍ेक दिन जरुर मेरे हाथसे पीटेगी.. मोम.. आपकोभी देख लुगी.. दोनोही अ‍ेक जैसी हो.. कमीनी..

भुमीका : (जोरोसे हसते) हां जा जा.. गालीया बादमे देना.. चल मंजु.. हें..हें..हें..

कहेते भुमीका सृतीकी ओर हसते मंजुका हाथ पकडके लेजाने लगी.. तो मंजुभी पलटकर सृतीके सामने देखते हसती रही.. तब सृती होठ फफडाते धीरेसे मंजुको जुठे गुस्सेके साथ गालीया देती रही.. जीसे देखकर भुमी ओर मंजु दोनोही जोरोसे हसने लगी.. ओर दोनो सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर सृती पुनम वंदनाके पास उनके रुममे चली गइ.. तो वहा पुनम ओर वंदना दोनो ही धीरेसे हस हसके बाते कर रहीथी.. तो सृती वहा जाकर बैठ गइ..

पुनम : (हसते) क्यु सृतीदीदी ये चहेरा क्यु लाल हो गया हे.. कही कीसीने कीस बीस या आपके दुधु बुधु तो नही दबा लीया हें..हें..हें..

सृती : ( सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) हां.. अब बाकी रेह गया हो तो तुम भी मेरी टांग खीचलो.. अ‍ेक कमीनी तो अभी मेरी टांग खीचकर गइ.. उपरसे मम्मीने सब गडबड कर दीया.. मेरे गहेनेही घरपे भुल गइ..

पुनम : (जोरोसे हसते) कौन.. मंजुभाभी..? हें..हें..हें.. क्या कीया उसने..?

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम मेरे गहेने लाना भुल गइ हे.. तो अभी मुजे जीजुके साथ घर जाना हे..

पुनम : (हसते धीरेसे) दीदी अबतो जीजु मत कहो.. आपके भी होने वाले पती हे.. अच्छा मौका हे आप चली जाओ.. ओर उसे सेट करके आना.. हें..हें..हें.. जाओ ताकी आपसे मे भाभी तो केह सकु.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) पुनोदीदी मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे.. उनसे कैसे बात करुगी..?

पुनम : (हसते) अरे कुछ नही होता. आप अ‍ेक बार जाओतो सही.. मुजेतो नीकलने नही देते.. वरना मेही आप दोनोके साथ चली आती.. ओर आप दोनोकी सेटींग करवा देती.. सृतीदीदी बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. अब तुम भी सुरु हो गइ.. चलो चाइ नास्ता कर लेते हे.. सब आगये..

कहातो तीनोही हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तबतक सब लोग होलमे आगये.. तो दया ओर रजीया चंपाभाभी रमाभाभी सबको डीस लेकर सभी जहा बैठे थे वही सबको चाइ नास्ता देने लगी.. भानु ओर राजीवभी साथमे बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. लता ने नीलमको अपने साथ ही रखा.. तो सरला भी राजीवके पास बैठकर नास्ता कर रहीथी.. तो राजीव उनको आग्रह करते सब दे रहाथा.. तो नीर्मला राजीवको घुर रहीथी.. तब भुमीका नीर्मलाको देखकर हस रही थी..

सभी लोग अपनी मस्तीमे चाइ नास्ता कर रहेथे.. तभी चंदा अपने रुममे जाकर धिरेनके साथ फोनपे बात कर रहीथी.. ओर उसे आनेके लीये पुछ रहीथी तब धिरेनभी सहेरकी ओर नीकल गयाथा.. ओर बीच रास्तेपे था.. वो सामको जल्दी वहा आनेकी बात करके फोन काट देता हे.. तभी रश्मी भी आगइ.. ओर वोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. आज पुरी हवेली महेमानोसे भरी हुइथी.. तब रमशे ओर सुधीरभी अपनी बीवीओको लेकर आगये..

देवायत : (हसते) आओ रमेश सुधीर बडे टाइमपे आ गये.. तुम चारो भी चाइ नास्ता करने बैठ जाओ..

चारु : (कामुक स्माइल करते) नही देवरजी.. आपही करलो.. हम चारो धरसेही चाइ नास्ता करके आये हे..

मंजुला : (हसते) नीशा भाभी आप बैठ जाओ.. आज आपकी पसंदका नास्ता हे.. चारुभाभी भलेही देखती रहे.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरमाते हसते) नही भाभी.. घरपेभी यही बनाया था.. हें..हें..हें.. सुधीरको भी यही पसंद हे..

देवायत : (हसते) रमेश अब तुम दोनो यही रहेना मुजे जरा सहेर तक जाना पडेगा.. मेरी सालीके साथ..

रमेश : (हसते) अरे भाइ आरामसे जाओ आपका यहा कोइ काम नही हे.. हमने सब काम सेट करदीया हे.. अभी मंडप वाले ओर हलवाइ वाले आ रहे हे.. हम दोनो सब देख लेगे.. ओर दो तीन लोग ओर भी आ रहे हे.. अब आपतो फ्रि.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) यार यहा गांवमे अच्छा हे.. सब मीलबाटके सादी वगैरेके सभी काम नीपटा लेते हे..

मंजुला : (हसते) पापा.. ये रमेशभाइ देवुके खास दोस्त हे.. ओर ये सुधीरभाइतो उनके साथ कोलजमे पढते थे.. तबसे देवुके दोस्त हे.. ओर हमारे गांवमेही डोक्टर हे.. ये उनकी बीवी नीशाभाभी.. ओर ये चारुभाभी रमेशभाइकी बीवी हे.. वो हमारी वंदना हेना.. पुनोके साथ.. इन्हीकी बेटी हे..

राजीव : (हसते) अरे.. मे दोनोके बापुको पहेचानता हु.. तब हमभी सभी दोस्त थे.. सब घरकेही लोग हे..

सृती वंदना पुनम लता ओर नीलम साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो चंदा रमा रश्मीभाभी सब लेडीस साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो इधर राजीव देवायत भानु लखन सरला नीर्मला भुमीका ओर मंजु.. सोफेपे बैठेथे.. अ‍ैसेही बाते करते सबने चाइ नास्ता फीनीस कीया.. तो मंजु देवायतको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर सृतीकोभी अपने रुममे बुला लीया.. तो सृतीभी सरमाती रुममे आगइ..

मंजुला : (हसते) देवु आप सृतीके साथ चले जाओ.. वो अपना सामान ले लेगी.. ओर टाइम मीलेतो आप बाबासेभी मील लेना.. ओर वो आना चाहेतो उसेभी सादीमे बुलालो.. ओर वहाके आपके सेवक लोगकोभी कहे देना.. (सृतीकी ओर) सृती.. दोनो आरामसे जाना देखना ये कोइ जल्द बाजी ना करे.. बहुत फास्ट चलाते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे यार मे बहुत धीमे कार चलाता हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां हां.. पता हे आप कैसे धीमे चलाते हो.. देखना बेचारी सृती डरना जाये..

देवायत : (सृतीकी ओर देखते) कौन ये..? कभी इनको कार चलाते देखा हे..? रेसमे मुजे भी हरा देगी..

सृती : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) जीजु आपतो रहेने ही दो.. आपसे ज्यादा फास्ट मे नही चलाती..

मंजुला : (हसते) अरे दोनो जगडा करना छोडदो.. ओर जाओ फटाफट.. ओर आरामसे आना.. यहा कोइ काम नही हे.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत बहार चलने लगा.. तो सृतीभी मंजुको पीठमे अ‍ेक मुका मारते उनकी ओर देखते सरमाकर हसते जाने लगी.. तभी मंजुने हसते हुअ‍े सृतीको थम्स अपकी साइन दीखाते धीरेसे बेस्ट ओफ लक कहा.. तो सृती सर्मसार होगइ.. ओर जटसे बहार चली गइ.. तभी मंजु भुमीका ओर नीर्मला सृती देवायतको जाते हुअ‍े देखकते खुस होने लगी.. ओर देवायत अपनी बडी कारमे बेठ गया तो सृतीभी सरमाती उनके पास बैठ गइ ओर देवायतने कारको सहेरकी ओर दौडादी..

सृती बहुतही सरमाती रही.. ओर मजेकी बात तो यहीथी की दोनोको पताथा की दोनोकी सादी आपसमे होने वाली हे.. ओर घरवालोने जान बुजकर प्लानींग करके दोनोको साथमे भेजा हे.. सृती देवायतकी कइ बार मस्तीया कर चुकी हे.. लेकीन आज जब देवायतके साथ अकेली थी.. तब वो बहुतही सरमा रही थी.. उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतके साथ कैसे बात करे.. तो इधर देवायतका हाल भी यही था.. तभी..

देवायत : (हसते) सृती.. तुम क्या सामान भुल गइ हो..?

सृती : (सरमाते हसते) जी.. जी.. वो.. वो.. मम्मी मेरे गहेने लेना भुल गइ थी.. मेने उसे मना कीया.. फीरभी मुजे मम्मीने ओर मंजुने जबरदस्ती लेने भेज दीया..

देवायत : (अ‍ेक नजर डालते) सृती.. पता हे तुजे जबरदस्ती क्यु भेजा हे..?

सृती : (सर्मसार होते हां मे गरदन हीलाते) जी.. हम दोनोके लीये.. ताकी हम दोनो अकेलेमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. क्या आपको घरपे काम था..? तो सोरी..

देवायत : (हसते) अरे नही नही.. वहा मुजे कोइ काम नही हे.. ओर सच कहु.. मेभी तुम्हारे साथ अकेले मे टाइम स्पेन्ट करना चाहता था.. इस बारेमे मंजुसे मेरी कलही बात हुइ हे.. क्या तुम हमारे रीस्तेसे राजी हो..?

सृती : (सरमाते हसते नजर जुकाते) जी.. मे भी आपसे सुरुसे ही पसंद करती हु.. ओर बाबानेभी मुजे इस बारेमे कहा था.. की.. मेरी सादी आपसे होगी..

देवायत : (सृतीकी ओर देखते) सृती.. तो फीर मेरे बारेमे क्या जानती हे..? तुजे पता हे मेरी कीतनी बीवीया हे..? मेरा ओर ओरतोके साथभी रीस्ता हे.. दुनीयावालो की नजरमे मे अ‍ेक अयास आदमी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगी..?

सृती : (पहेलीबार देवायतकी ओर देखते) जीजु.. मुजे आपके बारेमे सब कुछ पता हे.. मेरी इस बारेमे मंजुसे सभी बाते होगइ हे.. मंजुने मुजे सब कुछ बतादीया हे.. मुजे आपके कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. ओर मंजुकी मम्मीसे भी बात होगइ हे.. जब आप सब खरीदी करने गये थे.. जीजु.. मुजे इतना पता हे मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. बस.. आइ लव यु.. प्लीज.. मुजे अपनालो.. मेभी आपसे प्यार करती हु.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही..

देवायत : (हसते) हंम.. आइ लव यु टु.. क्या अबभी मुजे जीजु कहेगी..? हंम..?

सृती : (सर्मसार होते मु्स्कुराते नां मे गरदन हीलाते) नही.. सोरी.. देवायतजी..

देवायत : (हसते) देवायत..जी.. नही.. सीर्फ देवु..

सृती : (सरमाते) जी.. देवु.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. क्या पहेले हम आश्रम चले..? मुजे बाबाके दर्शन करने हे..

देवायत : (हसते) हमं.. तुम चीन्ता मत करो.. तुम ना कहेती तो भी मे पहेले वही लेजाता.. मुजेभी बाबाका सुक्रीया अदा करना हे.. इस खुबसुरत बीवी देनेके लीये.. सृती.. आइ लव यु.. तुम मेरी जींदगीका बहुतही महत्वपुर्ण हीसा हो.. क्या तुमने रश्मी ओर पुनोको चेक कर लीया..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. रश्मी भाभी बीलकुल ठीक हे.. मेरीही दवाइ चालु हे.. ओर पुनमदीदी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आप पापा बनने वाले हे.. आपही का बच्चा हेनां..?

देवायत : (हसते) हंम.. लगता हे तेरी मंजुके साथ काफी कुछ बाते होगइ हे.. क्या तुजे मेरीही बहेनके साथ अ‍ैसे रीलेशनसे बुरा नही लगा..?

सृती : (हसते) नही देवु.. मे वो हिमाचलके राजाकी पुरी कहानी जानती हु.. वास्तवमे हम सभीतो उनका हिसा हे.. तो फीर बुरा लगनेकी क्या बात हे.. देवु.. जबसे मुजे मंजुकी बातोसे पता चला तबसे मेने भी प्रकृतीको अपना लीया हे.. ओर ये सब रीस्ते नातेका कोइ मायना नही हे.. सीर्फ सहेर ही नही.. अबतो गांवमेभी कइ अ‍ैसे रीस्ते दीखनेको मीलते हे.. ओर आपके गांवके लोगभी मेरे यहा आते हे..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे देखते) मतलब..? क्या मीया बीवी आते हेनां..?

सृती : (सरमाते हसते) नही देवु.. सीर्फ मीया बीवी नही.. कइ ओर लोगभी आते हे.. मेतो अ‍ैसा काम नही करती.. लेकीन मेरी अ‍ेक सहेली हे.. वो पैसे लेकर यही काम करती हे.. ये इलीगल हे..

देवायत : (हसते) सृती.. क्या हमारे गांवसे अ‍ैसे लोग आते हे..?

सृती : (सरमाते हसते) हां देवु.. मेरे पास आते हे तो मे उनको मेरी सहेलीके वहा भेज देती हु.. आपहीके गांवके कोइ बडी उमरके ---नामके बुजुर्ग आदमी हे.. उनकी बहुसे बात हुइ तो कहेती थी उनका पती दुबइमे हे.. ओर ये मेरे ससुर हे.. हमारे सामने तो सब सचही बोल देती हे.. वो ससुर बहु.. दो बार मेरे पास अपना अ‍ेबोर्सन मतलब बच्चा गीराने आये थे.. तो मेने मेरी सहेलीके पास भेज दीया..

देवायत : (चोंकते) कौन..? वो --लाल..? वो अपनी बहुको..? यकीन नही होता.. दीखनेमे तो बहुतही धार्मीक लगता हे..

सृती : देवु आप बुरा मत मानना.. पती इतने टाइमसे दुबइमे हे.. तो वोभीतो ओरत हे.. उनकीभी नीड होती हे.. तो बेचारी कहा जायेगी..? ओर घरकेही पुरुषसे सबंध रखलीये.. ताकी बहार कीसीको सकभी ना पडे ओर उनकी बदनामी भी नाहो.. मे इस रीस्तेको गलत नही मानती.. इनकी छोडो.. आपके गांवसे कइ लडकेभी आ चुके हे.. पुछते हेतो कहेते हे मेरी गलफ्रेन्ड हे.. लेकीन पुलीसका डर दीखाओतो लडकी सब सच बता देती हे.. वो उनके भाइसे ही प्रेगनेन्ट होती हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) ओह गोड.. बाबा सच कहेते थे.. सृती लगता हे अब वक्त आगया हे.. की हमारे गांवमे.. अरे सीर्फ हमारे गांवमे क्या..? आजु बाजु सभी गांवमे यही होने वाला हे.. कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. सबको मेरी तराह आपसी रीस्ताही पसंद हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) देवु छोडो ये सब बाते.. यहा तो रीस्तेके कोइ मायने ही नही हे.. सीर्फ आपके गांवमे नही सहेरमे भी अ‍ैसे कइ केस आते हे.. कोइ अपनी बडी बहेनको तो कोइ अपनी विधवा बुआको लेकर आते हे.. तो कोइ अपनी भाभी चाची.. मामी.. बहेन.. कीसीको नही छोडते.. ये तनकी आगही अ‍ैसी हे.. जब लगती हे तो कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. सबको अपने तनकी प्यास बुजानी हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? चलो कोइ बात नही.. मेतो समजताथा की सीर्फ हमारे घरमेही ये सब हो रहा हे.. लेकीन यहातो सभीको अ‍ैसे रीस्ते पसंद हे.. हें..हें..हें.. सृती.. हो सकता हे.. आगे जाकर तुजेभी मेरे बारेमे अ‍ैसे रीस्तोका पता चले.. तो फीर तु क्या कहोगी..?

सृती : (थोडा खुलके) देवु.. छोडो ये सब बाते.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे अ‍ेतराज नही.. जब खुदकी बहेनको प्रेगनेन्ट करदीया.. तो फीर दुसरे रीस्तोके क्या मायने.. मुजे ये कहो.. जब हम दोनोकी सादी होजायेगी तो मे रहुगीं कहा..? क्या आपने इस बारेमे कुछ सोचा हे..?

देवायत : (हसते) पहेले तुम कहो.. तुम क्या चाहती हो..? कहा रहेना पसंद करोगी..?

सृती : (जोरोसे हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? आपही कहे दो.. मेतो आपकी बीवी होजाउगी.. तो फीर आप जहा चाहो मे रहेनेके लीये तैयार हु.. बस अ‍ेक मम्मीकी चीन्ता हे..

देवायत : (हसते) नही सृती.. तुजे चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु सहेरमे तेरी मम्मीके साथ ही रहेगी.. मे वहा आता जाता रहुगा.. क्युकी तेरी क्लीनीकभी तो वही हे.. ओर वैसे मेरी अ‍ेक बीवी सहेरमे भी तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते खुसीसे हसते) आप बहुत सरारती हो.. देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने हमारे बारेमे इतना कुछ सोचा.. आइ लव यु.. सो मच.. लेकीन मंजुदीदी ओर चंदादीदीको बुरातो नही लगेगानां..?

देवायत : (हसते) नही.. तु टेन्शन मत ले.. मेरी मंजुनेही कहा हे.. ओर मंजुसे मंजु दी..दी..?

सृती : (सरमाते हसते) हां.. आपको कोइ अ‍ेतराज..? अब वो मुजसे बडी हे.. मेरी सौतन.. हें..हें..हें.. तो अबतो उस कमीनीको दीदी ही कहेना पडेगा हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ैसी प्यारभरी बाते ओर मस्तीया करते करते आश्रमपे पहोंच गये.. तो वहा अ‍ेकल दुकल लोगही दीख रहेथे.. तो सृतीने अपना सर दुपटे से ढक लीया.. ओर देवायतसे सटकर उनके साथही अ‍ेब बीवीकी भांती चलने लगी.. दोनोही मंदिरमे दर्शन करके बाबाके पास चले गये.. तो बाबाभी अ‍ेक सेवकके साथ होलम अकेले तैयार होकर बैठे थे.. तो दोनोको देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ..

बाबा : (हसते) आइअ‍े.. आइअ‍े.. महाराज आजतो सुबह सुबह ही आपके दर्शन होगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (दोनोही पैर छुते) क्या बाबा आपभी.. सुबह सुबह आपको कोइ नही मीला..? अब काहेका महाराज.. अब आपभी मेरी मस्तीया करने लगे..

सृती : (सरमाते हसते) बाबा प्रणाम..

बाबा : (आशीर्वाद देते) जीती रहो बेटा.. क्या दोनोने सादी करली..? ओर कलतो पुनम बीटीया ओर तेरे भाइकी सादी हेनां..? तो तुम दोनो इधर कैसे आगये..?

देवायत : (हसते) बाबा अभी कहा हमने सादी कीहे.. अभीतो इसे सादी करनेके लीये मना रहा हु.. हें..हें..हें.. येतो इनका कुछ सामान भुल गइथी तो सहेर लेने जा रहेथे.. तो कहेती हे बाबाके दर्शन करने हे.. तो दोनो यहा चले आये.. हें..हें..हें..

बाबा : (सृतीको देखते हसते) देखा बीटीया.. मुजे कहेताथा मेरी मसती करते हो.. अब कौन कर रहा हे..? अ‍ेक बार तु इनसे सादी करले.. फीर मार मारके इनको सुधारदे.. बहुत सरारती होगया हे.. क्या ये सादीके लीये मान गया..?

सृती : (सरमाते हसते) जी.. मान गये हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी.. तुजे पताही नही हेकी तुम सब कौन हो.. मेरी मंजु बीटीयाने तुजे बतातो दीया होगा.. बस अब तुजे ओर पुनम बीटीयाकोही सब सम्हालना हे.. मेरी पुनम बेटी बहुतही स्ट्रंोग ओर होनहार हे.. तुम उनका साथ देना.. अभी वो बच्ची हे..

देवायत : (हसते) बाबा आपकी मंजु बीटीयाने आपको सादीका न्योता दीया हे.. आपको ओर सब सेवकोको वहा आना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां वोतो देगीनां मेरी बेटीहे वो.. तुम तो नही देगा.. हें..हें..हें.. लेकीन बेटा मे कही नही जाता.. तो केह देना मंजु बीटीयाको बस यहासे कुछ सेवकको भेज दुगा.. (सृतीकी ओर देखते) ओर बेटी.. अब कभीभी तुजे कुछ संकट जैसा लगेतो यहा चली आना.. मे बाप हु तेरा.. ओर तुजेतो बहुत कुछ देखना हे.. बस कीसीभी अ‍ैसे रीस्तोको देखो तो विचलीत मत होजाना.. क्युकी तुम सब अ‍ेकही हो.. समजी..?

सृती : (हसते) बाबा.. मे कुछ ठीकसे समजी नही.. क्या मुजेभी ये सब देखना हे..? बाबा मे पुनम जीतनी स्ट्रोंगतो नही हु.. लेकीन मे पुनमकी तराह स्टोंग बननेकी कोसीस जरुर करुगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बेटी.. तुजे स्ट्रोंगतो बननाही पडेगा.. क्युकी कुछ रीस्ते अ‍ैसे होगे जो तुम वीचलीत हो सकती हो.. तब तुम्हे अपने आपको सम्हालना होगा.. वरना तुजेही तकलीफ होगी.. वास्तवमे तुम सब अ‍ेकही कस्तीमे सवार हो.. बस यही बात तुजे ध्यानमे रखनी हे.. तो तुजे तकलीफ नही होगी.. तुमतो वो राजाकी कहानी जानती हो.. बस यही समजले उनकी सभी रानीयाही जन्म लेकर तुम सबके रुपमे आइ हे..

सृती : (हसते) जी बाबा.. सुक्रिया.. मे आपकी ज्यादातर बाते समज गइ..

देवायत : (हसते) बाबा तो हम चले..? अभी सहेरभीतो जाना हे..

बाबा : (हसते) हां दोनो सांतीसे जाओ.. ओर बेटा अब तुम दोनो भी सादी करलो.. इनमे देरी करना ठीक नही हे.. मे जो केह रहा हु वो सोच समजकर ही केह रहा हु..

देवायत : जी बाबा.. ये पुनम लखनकी सादी होजाये तो हमभी सादी करलेगे.. फीर आयेगे आपके आशीर्वाद लेने हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां आजाना.. बहुत बदमास होगया हे तु.. हें..हें..हें..

सृती : (नमन करते हसते) जी.. बाबा आज्ञा दीजीये चलते हे हम..

बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी सुखी रहो तुम.. जाओ.. सांतीसे जाना दोनो..

फीर देवायत ओर सृती हसते हुअ‍े वहासे नीकल गये.. ओर कारमे बैठकर सहेरकी ओर जाने लगे तब सृती देवायतकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. इनकोतो पताही नही थाकी देवायतभी अ‍ैसे मस्तीखोर हे.. आज बाबासे जीस तराह मस्तीया करते बात कर रहेथे इनसे सृती देवायतकी ओर काफी प्रभावीत होगइ थी.. आधे घंटेकी ड्राइवके बाद दोनोही सहेरमे आगये.. ओर देवायतने कार सीधेही सृतीके घरपे जानेदी..

सृती कारसे उतरतेही घरकी ओर चली गइ.. ओर ताला खीलकर घरके अंदर आगइ.. तब उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी मर्दके साथ अकेली आइ थी.. तबतक देवायतभी धरके अंदर चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके सोफेपे बेठ गया.. तो सृती कीचनसे पनी लेकर नीकली.. ओर देवायतको पानी देते उनके सामने सरमाते हसती रही.. तभी..

सृती : (हसते) देवु.. दुध तो लाना पडेगा.. क्या मे कुछ ठंडा बनादु..?

देवायत : (हसते) नही.. अभी कुछभी नही पीना.. जा तु अपना सामान लेले.. मे यही बैठा हु..

सृती : (सरमाते हसते) अरे.. यही मम्मीके रुमसेही तो लेना हे.. आपभी चलीयेना यहा अकेले बोर होजायेगे..

कहेते सृती भुमीके रुममे चली गइ.. तो उनके पीछे देवायतभी जाकर बेडपे बैठ गया.. तब भुमीके दिलकी धडकन ओर बढ गइ ओर बहुतही सरमाने लगी.. उसे पताथा देवायत उनके साथ जरुर कोइ सरारत करेगा.. ओर वोभी तो यही चाहती थी.. इसीलीयेतो देवायतको अपने साथ रुममे ले गइ.. सृतीकी चुतसे हल्कासा पानीका रीसाव होने लगा.. वो बहुतही रोमांचीत होते भुमीकी अलमारी खोलकर सभी जगाह अपने गहेने ढुंढने लगी..

सृती : (थोडी परेसान होते) मम्मी भीनां.. पता नही कहा रखा होगा गहेने.. मीलही नही रहा..

देवायत : (हसते) अरे उसे फोन करके पुछले.. क्यु परेसान हो रही हो..?

सृती : (परेसान होते फोन करते) हां.. फोनही करती हु.. मम्मीभीनां.. कोइ काम ठीकसे नही करती..

भुमीका : (सामने फोन उठाते) हां सृती.. पहोंच गये दोनो..?

सृती : (फोनपे परेसान होते) हां.. मम्मी.. घरपे पहोंच गये हे.. कहा रखेहे गहेने.. मुजेतो मील ही नही रहा..

भुमीका : (हसते) अरे वही तीजोरी मे तो रखे हे.. वहीसे ढुंढले.. वहासे कहा जायेगा..?

सृती : (ढुंढते फोनपे) हां थोडी देर ठहेरो.. फोन चालुही रखना.. वही देख रही हु.. दो बारतो देखलीया.. तुमभीनां..

भुमीका : (मनमे हसते) हां ठीकसे देखले सायद उधरही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे गुस्सेसे ढुंढते) सायद..? क्या मोम.. तुजेभी पता नही हे.. यहा कही नही हे.. तुने तेरी बेग मे ठीकसे देखा..? अ‍ेक बार फीर देखले.. मे फोन चालु रखती हु.. तुम अ‍ेक भी काम ठीकसे नही करती..

भुमीका : (हसते) अरे गुस्सा क्यु करती हो..? ठहेर मे देखती हु.. फोन चालु रखना..

कहेते भुमीका अपने रुममे फोनपे बात करते चली गइ.. उनकोभी पताथा की गहेने उनकी बेगमे ही हे.. लेकीन मंजु ओर भुमीने दोनोको साथमे भेजनेका प्लान बनायाथा.. ताकी सृती ओर देवायतके बीच नजदीया बढे.. भुमीका जुठ मुठका देखतेही जटसे बेग चेक करते सृतीसे अपने रुमसे ही बात करने लगी..

भुमीका : (हसते) सोरी बेटा.. यही तेरे कपडे के बीच रखे हुअ‍े थे.. मील गये.. सोरी.. सोरी.. हें..हें..हें..

सृती : (गुस्सा होते) क्या मोम.. आपभी..? पता हे मे यहा कीतनी परेसान हु.. ओर आप हेकी.. अ‍ेक बार ठीकसेतो देख लेती.. हम दोनोका टाइम खराब कीया.. देवुको भी वहा कीतना काम होता हे.. बीना देखेही.. केह दीयाकी गहेने भुल गइ..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे सोरी तो कहा.. अब क्या में तेरे पैर पडु..? ओर यहाभी कोइ काम नही हे.. हमभी तो सब गप्पे लगा रहे हे.. उनके दोस्तोने सब काम नीपटा लीया हे.. तो दोनो आरामसे आना..

कहेतेही भुमीने फोन काट दीया.. ओर सृतीको देवुकी हाजरीका अहेसास हुआ.. वो अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तब देवु उसे देखकर हसता रहा.. उनको पता चल गयाथा की ये सब भुमी ओर मंजुका प्लान था.. उसे सृतीकी सकल देखकर हसी आ रही थी.. तो दुसरी ओर सृतीकोभी समजमे नही आ रहाथा की वो अब देवायतसे क्या बात करे.. अंदाजातो उसेभी हो गया की ये मंजु ओर उनकी मम्मीका ही प्लान होगा..

सृती : (सरमाते) देवु.. सोरी.. गहेने वही मम्मीकी बेगमेही हे.. खामखा आपको परेसान कीया..

देवायत : (खडे होते) हंम.. सुना मेने.. अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तभी मे समज गयाथा.. तु कुछ समजी..?

सृती : (देवायतकी ओर आस्चर्य भावसे देखते) क्या..? मे कुछ समजी नही..

देवायत : (सृतीके पास जाते) अरे डार्लींग.. हम नीकले तबही तुजे भी पता था ओर मुजेभी पताथा की ये तेरी मम्मी ओर मंजुकी चालथी.. ताकी हम दोनो साथमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. बात कुछ समजमे आइ..?

कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके चहेरेपे लाली छागइ.. ओर सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. तभी अचानक देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृतीभी देवायतके सीनेमे सर छुपाते सर्मसार होते हसती रही.. देवायतने उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो सृतीभी अ‍ेक नजर उनकी आंखोमे देखते अपनी नजर सरमके मारे जुका लेती हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११३/१

कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके चहेरेपे लाली छागइ.. ओर सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. तभी अचानक देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृतीभी देवायतके सीनेमे सर छुपाते सर्मसार होते हसती रही.. देवायतने उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो सृतीभी अ‍ेक नजर उनकी आंखोमे देखते अपनी नजर सरमके मारे जुका लेती हे....अब आगे

ओर देवायत अपना चहेरा सृतीके चहेरेकी ओर लेजाने लगा.. तब सृतीने अपनी आंख बंध करली उनके दोनो होंठ फडफडाने लगे.. आखीर वो वक्त आही गया जो सृती चाहती थी.. जबसे मंजुके मुहसे देवायतके लंडकी तारीफ सुनीथी तबसेही सृतीका मन देवायतके लंडको देखनेके लीये मचल रहाथा.. ओर आज उसे मौकाभी मील गया.. तभी उसे देवायतके होंठ अपने होंठोपे महेसुस हुआ....

तो सृती मदहोस होने लगी.. कीतने सालोके बाद आज वो कीसी मर्दसे अकेलेमे मील रहीथी.. जब उनकी सादी हुइथी तब पहेली रातमेही उसे पता चल गयाथा की उनका पती नामर्द हे.. तब सृतीके सभी अरमारन ओर सपने बीखर चुकेथे.. ओर वो डीवोर्स लेकर घर आगइ.. तबसे लेकर आज तक वो मर्दके बीना तडप रहीथी.. तो वोभी देवायतके गलेमे हाथ डालके उनका साथ देने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे..





अ‍ेकतो इतने सालोसे इस आगसे जल रहीथी जो हर लडकीका सपना होता हे.. बस उसे अ‍ेक बार सीर्फ हवाके जोकेका ही इन्तजार था.. जो आज देवायतने दे दीया.. तब कुछही देरमे सृतीभी वासनाकी आगमे जलते खुलकर देवायतका साथ देने लगी.. वोभी मुह खोलकर देवायतके होठोको चुसने लगी.. तब दोनोही कामातुर होने लगे.. देवायत होंठ चुमतेही अ‍ेक हाथ सृतीके बुब्सपे रख देता हे.. ओर उसे हल्केसे दबाते मसलने लगता हे तब सृती सरसे पांव तक कांपने लगी..

वो देवायतको रोकना चाहते हुअ‍ेभी ना रोक सकी.. सृतीने सरमके मारे देवुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर देवायतके होठोको जोरोसे चुमते अपनी कमरको देवुके लंडसे सटाने लगी.. तब सृतीको देवुका लंड उसे कपडेके उपरसे ही अपनी चुतपे ठोकर मारते महेसुस होने लगा.. सृती बहुतही उतेजीत हो चुकीथी.. ओर वो अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको पेन्टके उपरसेही पकडकर मसलने लगी..

सृती : (कामुक आवाजमे) ओह.. सीइइइइ दे..वु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे कुछ हो रहा हे.. आप कुछ कछजीयेनां..

देवायत : (लडखडाती आवाजमे) हंम.. क्या..? यही करना हे..? हंम.. चोदलु तुजे..? हंम.. बोलनां..?

सृती : (सरमाते सीनेके सर छुपाते धीरेसे) मुजे नही पता.. अंह.. आह.. देवु.. नीचे चुभ रहा हे.. मंजु केह रहीथी ये बहुत बडा हे..

देवायत : (सृतीकी चृतको धीरेसे दबोचते) हां.. यहां चुभता हे.. हंम.. बोलनां.. चोदलु तुजे..? हंम..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. आपका बहुत मन कर रहा हे क्या..? हंम..? मुजे कुछ होगातो नही..? तो करलो..

देवायत : (होठ चुमते) हंम.. सहेन करपाओगी..? पहेली बार हेनां..? हंम..

सृती : (सरमाते ओंखोमे देखते) जानु.. कल सादी हे.. अगर मे ठीकसे नही चल पाइतो..? जानु.. इसे हमारी सुहागरातमे करेगे.. मे तबतक इसे सम्हालके रखुगी.. अब ये सीर्फ आपकी अमानत हे.. बुरातो नही लगा..? नहीतो करलो..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) हंम.. नही.. लगा.. कुछ ओर करे..? हंम.. उपरसे..

सृती : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. मुजे अ‍ेक बार वो देखना हे.. बहुत बडा हे क्या..?

देवायत : (मुस्कुराते) तुम खुदही देखलो..

कहेते देवायतने सृतीको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर ले गया.. तब सृती खुब सरमाने लगी.. ओर देवायतके सीनेमे सर छीपाते मुस्कुराती रही.. देवायतने सृतीको बेडपे सुला दीया ओर खुदभी उनके उपर चडके छा गया.. तो सृतीने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतका लंड फीरसे सृतीकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. लेकीन इस बार सृतीने उसकी परवाह नही की ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उनके होठोको जोरोसे चुमने लगी..

फीर धीरेसे सरमाते देवायतकी आंखोमे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब देवायत उसे देखते हसने लगा.. तो सृतीभी कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. ओर सृतीने उनका सर्ट नीकाल दीया..तभी देवायत बेडसे उतरकर खडा हो गया.. तो सृतीभी बेडसे उतरके उनके पैरोके पास नीचे घुटनोके बल बैठ गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी.. आज उसे देवायतके लंडको देखनेकी बडी जल्दी थी..





जब पेन्ट नीकालदी तब देवायत सीर्फ अपने नीकरमेही रेह गया ओर सृतीकी हरकत हसते हुअ‍े देखता रहा.. तभी सृतीने उनकी चडीको पकडकर नीचे कीया तो देवायतका तगडा लंट जटके मारते हवामे लहेराने लगा.. जीसे देखकर सृतीकी आंख फटीकी फटी रेह गइ..

वो बस आंख बडी करते उसे देखती ही रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथाकी कीसी मर्दका लंड इतना बडा भी हो सकता हे.. उनके पहेले पतीका लंडतो इनसे आधाभी नही था.. वो बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. लंड देखतेही सृतीकी आंखोमे चमक आ गइ..

ओर सृतीने धीरेसे डरते देवायतका लंड अपने हाथोमे पकडलीया.. ओर होलेसे सहेलाते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. सृती यही सोचते रोमांचीत होने लगीकी अब यही लंडसे वो चुदने वाली हे.. सृतीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो लंडको मुठीमे पकडते धीरे धीरे हीलाने लगी.. उनकी आंखमे वासनाके डोरे लाल होकर मंडराने लगे.. तब देवायतने सृतीको खडा करदीया ओर सृतीके कपडे नीकालने लगा.. तब सृती बहुतही सरमाते मुस्कुराने लगी..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) देवु.. येतो कीतना बडा हे..? क्या मे इसे जेल पाउगी..? आपका ये हथीयारतो हमारी सुहागरातमे भी मेरी हालत खराब कर देगा.. पता नही मंजु इसे कैसे जेलपाती हे.. कास मे तबही उनके साथ आजाती..

देवायत : (हसते सृतीके कपडे नीकालते) कब..? कब आजाती..? हंम..

सृती : (सरमाते धीरेसे हसते) जब आप दोनो पहेली बार हमारे घर आयेथे ओर सादी करली तब.. कमीनी मुजेभी उनके साथ सामील करना चाहती थी.. तब मेने उसे मना करदीया था.. अगर आगइ होती तो आज मेभी आपकी बीवी होती..

देवायत : (सतीको गोदमे उठाते) हंम.. तो आजाना चाहीयेनां.. तुमतो जानती हो हम कीतनीभी सादी करले.. हमपे कोइ पाबंधी नही हे.. तो तुजेभी अपना लेता..

सृती : (देवायतकी आंखोमे देखते) चलो देरसेही सही आखीर आप मुजे मीलतो गये.. देखना मे अपनी सारी कशर पुरी कर लुगी.. देवु.. पता हे.. जब आप सृतीको लेकर होस्पीटलमे आतेथे तब आपको मेने कीतनी हीन्ट देदीथी.. फीरभी आप कुछ समजे नही.. मेने अपना पर्सनल नंबरभी दीयाथा.. जो सीर्फ आपके लीये था.. वरना तबही हम दोनो रीलेशनमे आजाते.. मेभी आपसे प्यार करने लगी थी..

देवायत : (बेटपे लीटाते) हंम.. पता हे मुजे.. लेकीन मंजुको देखा हे..? नोच डालती मुजे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते देवायतको अपने उपर खीचते) आप बहुतही फंटुस हो.. वोतो कमीनी कबसे मुजे आपके नीचे लीटाना चाहती थी.. जब आप दोनोकी सादीभी नही हुइथी.. ओर जब मेरा डीवोर्स होगया तबभी कइ बार मुजे ओफर करचुकी हे.. उसी कमीनीने तो हमारी बात मोमसे चलाइ हे.. पता नही क्यु..? जानु.. बाबानेभी कहाहे आपही मेरे पती हे.. सायद इसीलीये मंजुने मम्मीसे बात की होगी..

देवायत : (गंभीर होते) सृती.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मुजे तुमसे कुछ कहेना हे.. लेकीन पहेले मेरी बीवीसे प्यारतो करलु.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अ‍ेय मीस्टर.. मे अभी आपकी बीवी नही हुइ.. हां गलफ्रेन्ड समजकर प्यार कर सकते हो.. हें..हें..हें.. अरे.. आजाओ मेरे प्यारे मजनु.. अभीतो मेरी बारी हे.. फीरतो हमारी सुहागरातमे तो आप मेरी हालत बीगाडने ही वाले हो.. हें..हें..हें..





कहेते सृती देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगती हे.. तो देवायतभी उनके संतरे जैसे कठोर बुब्सको मसलने लगा.. ओर उनकी नीपलको चुसने लगा तब सृती बहुतही उतेजनामे आकर कामातुर होने लगी.. ओर देवायतको वाइल्ड कीस करने लगी.. दोनोही बहेकने लगे.. देवायत सृतीके गलेको चुमने लगा तो सृतीने उनके सरको कसके अपने गलेमे दबा लीया.. ओर देवायत उनके पेरके बीच चला गया.. वोतो चाहतीथी की देवायत उसे आजही चोदले.. लेकीन अभी मुमकीन नही था.. तब..

सृती : (सरमाते) देवु.. क्या करने वाले हो..? मेने अ‍ैसा कभी नही कीया.. नीचे कुछ हो रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

दोयत : (हसते) अरे.. तुमतो डोक्टर हो.. ओर वोभी लेडीसकी.. तो तुजे पता नही हे क्या हो रहा हे..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. पता हे तभीतो पुछ रही हु.. अगर मुजसे कंट्रोल नही हुआतो..? देखना बाबा मे ये सब हमारी फस्टनाइटमे करना चाहती हु.. फीर भलेही मेरी हालत बीगड जाये.. देवु.. आइ अ‍ेम वर्जीन..

देवायत : (हसते) क्यु..? तेरे पहेले पतीने तुजे छुआभी नही..?

सृती : (सर्मसार होते) नही.. उस कमीनेका तो खडाभी नही हुआ.. फीरतो मेने उसे हाथभी नही लगाने दीया.. सायद ये सब आपके साथ मेरी कीस्मतमे लीखा होगा..

कहेते ही देवु सृतीकी चुतपे हाथ रखते सहेलाने लगा.. तो सृती मदहोस होते सीसकारीया करने लगी.. सृती बहुतही उतेजीत होने लगी.. ओर आखीर देवायत उनकी चुतपे जुक गया.. ओर धीरेसे चुतपे मुह लगा दीया.. तब सृतीने जोरोसे चदरको मुठीमे पकड लीया.. ओर देवायतने अपनी जीभ नीकालकर सृचीकी चुतमे लगादी.. वो उसे चाटने लगा.. तब सृती कामातुर होते छटपटाने लगी..





ये सृतीकी जींदगीका पहेला अनुभव था वो कोइ मर्द इसे इस तराह प्यारका अहेसास दीलवा रहाथा.. देवायतने चुत चाटते चाटते धीरेसे सृतीकी चुतमे जीभ घुसादी.. ओर उनकी चुतके दानेको अपनी जीभसे छेडने लगा.. तब सृती सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर अपनी आंधी आंख चडाते अपना सब होंस गवा चुकी.. वो चदरको कसके मलसने लगी ओर छटपटाते जोरोसे सीसकारीया करते अपनी कमर उछालने लगी..

तभी इनके तनमे हजारो चीटीया रेंदती चुतकी ओर दोडते महेसुस करने लगी.. वोही प्यारा अहेसास.. जो कइ बार देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालते कर चुकी थी.. ओर वो आंधी आंख चडाते मदहोस होगइ.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तभी चुतसे अ‍ेक तेज धारसे पानीका फवारा नीकल गया जो देवायतके चहेरेके भीगोने लगा.. ओर सृती जड गइ.. तब अपनी सांस कंट्रोल करते अ‍ैसेही सीथील होगइ.. उनकी सासे तेज चल रही थी..

तभी देवायत बेडसे उतरके बाथरुममे चला गया.. ओर अपना मुह साफ करने लगा तब बहार सृती अभीभी अ‍ैसे मदहोस होकर अपनी चुत ओर बुब्सपे हाथ रखते सीथील पडीथी.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की उनके स्वप्नके राजकुमारने इसे इस तराह जडाकर संतुस्ट कर दीयाथा.. वो सर्मसार होते देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. तभी देवायत आकर उनके पास लेट गया तो सृतीने करवट लेकर देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होंठ चुमलीये..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने कीतना प्यारा अहेसास करवाया.. जानु आप जल्द मुजसे सादी करलो.. मे अपना सबकुछ आपपे लुटाना चाहती हु.. मे आजभी कुआरी हु.. जान.. आपही मेरा कौमार्य भंग करोगे.. अभी कल सादी हे वरना आजही बीना सादीके मे सबकुछ करनेको तैयार हु.. फीरभी आपका मन करता हे तो मे रेडी हु.. करलो सब कुछ..

देवायत : (होठं चुमते) नही सृती.. ये अनमोल खजाना हमारी सादी तक सम्हालके रखना.. में इसे इसी घरमे हमारी सुहागरातमे लुट लुगा.. चल अब चलना हे की नही..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. थोडी देर ओर रुकते हेना.. आपने तो मेरा अमृत पीलीया.. अब मेभी आपका अमृत पीना चाहती हु.. मुजे जींदगीका हर मजा चाहीये.. ओर वोभी सीर्फ आपसे.. आप सीधे होकर लेट जाओ.. मुजे आपका अमुत पीना हे..

कहातो देवायत पीठके बल लेट गया तो सृती देवायतके पैरोके बीच चली गइ.. ओर धीरेसे कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते देवायतके लडंपे जुक गइ.. ओर देवायतकी आंखोमे देखेते धीरेसे जीभ नीकालकर देवायतके लंडको चाटने लगी.. सृतीभी इतने सालोसे सेक्ससे वंचीत थी.. तो वोभी अपनी मम्मीकी तराह बहुतही कामी हो चुकीथी.. जब देवायतसे उनकी सरम चली गइ तो उनसे बीन्दास्त बाते करने लगी..





सृतीने धीरेसे लंडको पकडते अपने मुहमे लेलीया ओर सक करते उसे चुसने लगी.. सृती लंडको अ‍ैसे सक कर रहीथी जैसे कोइ मुह लगाते पाइपसे पानी खीच रही हो.. तो देवायतके तनमे भी सुर सुराहट बढ गइ.. उनका लंड कीसीने आज तक अ‍ैसे नही चुसा था.. वो सृतीकी हर हरकतको कोनीके बल बैठकर हसते हुअ‍े देखने लगा.. अब सृती पुरा लंड मुहमे लेके चुस रहीथी.. जीसे देवायतभी मदहोस होने लगा..





तभी सृती लंडको मुहसे बहार नीकालते जोरोसे हाथोसे पकडके हीलाने लगी..ओर देवायतके सरकी ओर बढते उनके होठोको चुमने लगी.. देवायतभी सृतीके गलेमे हाथ डालकर जोरोसे सृतीके होठ चुमने लगा दोनोही मुह खुला रखते अ‍ेक दुसरेकी जीभसे पीच लडाने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. तबभी सृती देवायतका लंड अपननी मुठीमे पकडकर जोरोसे हीला रहीथी..





तब देवायत अपने आपको कंट्रोल करनेमे नाकाम होने लगा ओर वो उतेजनासे कांपने लगा.. तो अचानक सृतीको अपनी बाहोमे भीचते जोरोसे सृतीके होठ काटते चुसने लगा तो सृतीकी आंख दर्दके मारे बडी होगइ सृती उसे कुछ कहे इनसे पहेलेही देवायत सृतीको बाहोमे भीचते पलट गया.. ओर सृतीकी कमरपे बैठकर जोरोसे अपने लंडको मुठीमे पकडते हीलाने लगा.. तब सृतीभी समज गइ ओर अपना मुह खोलकर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखती रही..





तब कुछही देरमे देवायतके लंड से अ‍ेक तेज धार नीकलकर सृतीके मुहकी ओर चली गइ.. कुछ विर्य सृतीके मुहमे चला गया तो बाकीका सृतीके चहेरेको भीगोने लगा.. फीरभी देवायत आहे भरते लंडको जटके मारते जडता रहा.. ओर बहुत सारा पानी सृतीके सीनेपे गीरते उनके बुब्सको भीगोता रहा..

जब देवायत जडकर सांत होगया.. तब सृती देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते अपने बुब्स ओर मुहपे लगे देवायतके विर्यको अपने हाथोसे पोछते अपनी जीभ नीकालकर उसे चाटने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे..

देवायत : (अपना लंड पोछते) सृती तुमतो वाकइ पक्की खीलाडी नीकली.. अ‍ैसातो ना मंजुने कीया हे ओर नाही चंदा ओर पुनोने कीया हे.. कीतना सक करते चुसती थी.. कहासे सीखा ये सब..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) देवु.. लेकीन आपको मजा आयाकी नही..? मेने अ‍ेक पोर्न मुवीमे देखाथा.. तो सोचा चलो आप मेरे होने वाले पतीपे ही ट्राइ करलु.. चलो अब नहाले..? देखो मुजे पुरी गंदी करदी.. आप कीतना पानी नीकालते हो.. इतने पानीसे तो कोइ अ‍ेकही बारमे प्रेगनेन्ट होजायेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर लेजाते) हां.. फीकर मत कर तुजेभी कर दुगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) नही.. मुजे नही होना प्रेगनेन्ट.. देवु मे पुरी लाइफका मजा लेना चाहती हु.. कमसे कम पांच छे सालतो कुछभी नही.. फीर हम सोचेगे.. अब हमारी सगाइ हो जायेतो अच्छा हे..

देवायत : (बाथरुममे खडी करते) हंम.. सृती हम पुनोकी सादीके दिन सगाइ करले..? हंम.. क्या कहेती हो..? सभी लोग होगे.. तो वही साथमे हो जायेगा..

सृती : (सावर चालु करते) देवु.. लेकीन हमने कोइ तैयारीया नहीकी.. ओर मम्मीसेभी बात करनी पडेगी..

देवायत : (हसते) वो सब में देखलुगा.. ओर इसमे तैयारीया क्या करनी हे.. सीर्फ अंगुठीयातो लेनी हे.. हम श्रीफल वैगरे अभी लेकर जाते हे.. मे मंजु ओर भुमी बुआसे बात करलुगा.. तु टेन्शन मत ले.. बस मे जल्दसे जल्द मेरी इस होट बीवीसे मीलना चाहता हु..

सृती : (सरमाते गलेमे हाथ डालते) हंम.. आप कीतना क्युट हो.. अगर मीलना हे तो क्या हे.. अभी मील लेते हे.. जानु.. क्या सचमे मीलना चाहते हो..? तो चलो.. मे रेडी हु.. अबतो मेभी आपसे दुर नही रेह सकती.. जो करना हे करलो..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) नही बेबी.. अगर तेरी हालत बीगड गइतो सबको क्या कहोगी..?

सृती : (लंड पकडकर सहेलाते) हंम.. केह दुगीकी मेरे बोयफ्रन्डने मेरी अ‍ैसी हालत कीहे.. हें..हें..हें..





फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको रगड रगडके नहेलाते हे.. आज सृती बहुतही खुस थी वो अब देवायतसे सब बाते खुलकर कर रहीथी.. अब उसे देवायतसे बात करनेमे कोइ संकोच नही हो रहाथा.. फीर दोनोने नहालीया तब बहार आतेही दोनो तैयार होने लगे.. ओर कंपलीट होगये.. तब सृती अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे चली गइ.. ओर दोनो होंठ मीलाकर स्मुच करने लगे.. फीर घरको ताला लगाकर कार लेकर नीकल गये..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११३/२

रास्तेमे देवायतने अ‍ेक बडे जवेलेरीके शोरुमपे अपनी कार रोकदी.. दोनोही कारसे उतर गयेतो सृती हसते हुअ‍े जटसे देवायतके पास आगइ ओर उनका हाथ पकडलीया.. फीर दोनोही शोरुममे चले गये.. वहा दोनोने अ‍ेक दुसरेकी नापकी अंगुठीया लेली.. ओर सील्वर श्रीफल वगैरे जोभी लेनाथा वो सब लेलीया.. ओर दोनो पेमेन्ट करके कारमे आकर बैठ गये.. फीर देवायतने अ‍ेक ट्रावेल्सकी ओफीसमे कार रोक दी..

तो देवायत सृती दोनोही अंदर चले गये.. ओर वहा दो कपलके लीये अ‍ेक छे दिनका गोवाका हनीमुन पेकेज लेलीया.. ओर देवायतने इसके बारेमे सृतीको कीसीसे ना कहेनेकी सुचना देदी.. वो चारोको सरप्राइज देना चाहता था.. फीर देवायत ओर सृती दोनो कारमे गांवकी ओर आपसमे बाते करते नीकल गये.. अभी सीर्फ ११ बजेथे.. तो दोनोही समयपे पहोचने वाले थे..

सृती : (कारमे देवायतके कंधेपे सर रखते) देवु.. अ‍ेक बात पुछु..? आप दोनो कपलको हनीमुनमे गौवा भेजना चाहते हे.. लेकीन पुनम धिरेनके साथ सेट हो पायेगी..? वो आपको कीतना प्यार करती हे.. जानु आप पुनोदीदीके साथ रीलेशनमे कैसे आगये..? ओर उसे प्रेगनेन्ट तक करदीया.. उनको इतनी जल्दी क्या थी..?

देवायत : हंम.. सृती वो जब स्कुलमे थी.. ओर उसे प्यारकी परीभासा समजमे आइ तबसे मुजे सुरुसेही प्यार करती थी.. फीर बाबाके सम्पर्कमे आइतो बाबाने उसे बहुत कुछ बता दीया.. ओर बाबानेभी मुजे पुनमसे सादीके लीये केह दीया.. जब सृतीकी डीलीवरी हुइ उसी दिन मंदिरमे बाबाने हम दोनोकी सादी करवादी..

ओर उसी रात हम दोनो पहेली बार हमारी सुहागरातमे मील गये.. फीरतो चार दिन सीर्फ मे ओर पुनोही हवेलीपे थे.. हमने वो चार दिन हमारे हनीमुनकी तराह बीताये.. वो चार दिनमे हम दोनोने खुब सेक्स कीया.. उसी दौरान पुनो प्रेगनेन्ट हो गइ.. ओर तबसे हम दोनो अ‍ेक पती पत्नीके तौरपे रीलेशनमे हे..

सृती : (कामुक नजरोसे हसते) जानु आपकेतो मजे हे.. हें..हें..हें.. लेकीन पुनोकी सादी धिरेनसे करना जरुरी था.. मंजुने मुजे सब कुछ बता दीया हे.. पता नही बाबा कीस मक्सदसे ये सब करवा रहे हे.. क्या आपको पता हे..?

देवायत : (हसते) नही.. वोभीतो नही बताते.. लेकीन इतनातो पता चल गया हे की उनका मक्सद बहुत बडा हे.. सब मेरे पोतेके हाथो होगा.. तब क्या पता हम होंगे की नही.. कहेते हे तब तुजे पुनो ओर चंदाकोही सब सम्हालना हे.. सायद आप लोग तब होंगे.. (आंख गीली करते) बस.. मेरी मंजु नही होगी..

सृती : (हसते देवुकी आंख पोछते) हंम.. यही सब सोचके दिल गभरा रहा हे.. पता नही हम तीनो सब हेन्डल कर पायेगी की नही.. जानु तब आपभी होगे.. कीतना अजीब हेनां..? मे अ‍ेक डोक्टर ओर मंजु चंदामौसी.. ओर आपभी अ‍ेक ग्रेज्युअ‍ेट.. इतने पढे लीखे होनेके बावजुद भी हम सभी अ‍ैसी बाते माननेको विवस हे.. ओर ये सच भीतो हे.. बाबाकी आज तक अ‍ेकभी बात गलत नही हुइ.. वो हम सबके बामे कीतना कुछ जानते हे.. मुजेतो अभी भी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे..

देवायत : सृती.. बाबा सीर्फ ना इस जन्मके बारेमे.. बल्की हमारे पीछले जन्मके बारेमे ओर आने वाले जन्मके बारमेभी सब जानते हे.. ओर मुजेभी देखो.. इतनी इतनी खुबसुरत बीवीया होनेके बावजुदभी कीतनी लडकीया ओर ओरतोके साथ रीलेशन रखने पडते हे.. कभी कभीतो इस सब चीजोसे उब जाता हु.. कभी कभी तो लगता हे मे आप सबको धोखातो नही दे रहा हु..?

सृती : (तीरछी नजरसे देखते सरमाते हसते) नही जानु.. अगर आप उब गयेतो हम सब कहा जायेगी..? हें..हें..हें.. अरे बाबा आप अपना काम जारी रखो.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस हमे खुस रखा कीजीये.. ओर आप हमे कोइ धोखा नही दे रहे.. बस आप हम सबके बारेमे ज्यादा कुछ जानते नही इसीलीये आपको अ‍ैसा लगता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. तुमभी मेरी मंजुकी तराह बाते कर रही हो.. वोभी अ‍ैसाही कहेती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) देवु.. अ‍ेक बात कहु..? बस आपका यही हथीयार देखतेही हम खुस होजाती हे.. सायद कीसीके नसीबमे इतना बडा हथीयार नही होगा.. हम सब इनकी दिवानी हे.. मंजुभी मेरे सामने इनकी इतनी तारीफ कर चुकी हेकी मेभी आपको प्यार करने लगी.. हें..हें..हें.. जब ये अंदर जायेगा तब पता नही मेरा क्या होगा.. फट जायेगी मेरी हें..हें..हें.. धीरे प्यारसे करना बाबा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अब बहुत तारीफ मत कर वरना यही बीच रास्तेमेही हमारी सुहागरात मन जायेगी.. हें..हें..हें.. लेकीन सृती अ‍ेक बात कहु..? मुजे लगता हे ये मुजे विरासतमे मीला हे..

सृती : (हसते आस्चर्यसे देखते) विरासतमे..? देवु मे कुछ समजी नही..

देवायत : (हसते) हां रिासतमे.. सुन.. पहेले हमारे खानदानमे सीर्फ अ‍ेकही लडका पैदा होताथा.. मेरे दादाका फीर मेरे बापुका.. ओर अब मेरा.. सबका हथीयार बडा हे.. श्रापकी मुक्तीके बाद लखन आया.. तो उनमे ये सब नही हे.. लेकीन तुमने तो मंजुकी डीलेवरी की हे.. तो तुजे हमारे बेटेमे कोइ फर्क नही दीखा..?

सृती : (आस्चर्यसे) अरे हां.. देवु.. आपके बेटेमे यहीतो फर्क था.. मेने मंजुसेभी इस बारेमे बात कीथी.. उनकाभी नोर्मल लडकेसे काफी बडा दीख रहा हे.. अब बात समजमे आइ.. वाकइ अ‍े वारीसमे मीलता होगा..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते १२ बजेके आसपास हवेलीपे पहोंच गये.. ओर हसते हुअ‍े अंदर आने लगे.. तब मंजु ओर भुमीका दोनोही देवायत सृतीको खुस होते देखकर हसने लगी.. तो सृतीने जातेही मंजुको हसते हुअ‍े पीठमे मुका मारदीया.. ओर सरमाकर हसती हुइ पुनमके रुममे चली गइ.. तो वंदना ओर पुनमभी सृती को देखकर जोरोसे हसने लगी.. तो सृती सर्मसार होते पुनमको मुका मारते उनके पास बैठ गइ ओर हसती रही..

पुनम : (जोरोसे हसते धीरेसे) वंदु.. ये मेरी भाभीतो बीलकुल ठीक चल रही हे.. हें..हें..हें.. लगता हे भाइने इसे छोड दीया हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते) हें..हें..हें.. हां.. सृतीभाभी आपतो बीलकुल ठीक चल रही हो.. दोनोने प्यार ब्यार कीयाकी नही..? आपके पास अच्छा मौका था.. दोनो मजे करके आरामसे आते.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते वंदनाकी जांगपे चपत लगाते) दोनोकी दोनो बेसर्म हो.. कमीनी कहीकी हम वहा मजे करने थोडीना गये थे.. मेरे गहेने मम्मी भुल गइ थी उसे लेने गये थे.. बात करती हे.. ओर बाय धवे.. आज ये तुम दोनोने मेरे आतेही भाभी भाभी क्या लगा रखा हे.. कमीनीओ क्या मे तुम्हारी भाभी हु..?

पुनम : (हसते धीरेसे) सृतीभाभी.. रहेने दिजीये.. वहा सबको पता चल गया हे.. अब आपकी प्रेम कहानी सबको मालुम होगइ हे.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो भुमी बुआ ओर मंजुभाभीने आप दोनोको सहेर भेजाथा.. ओर भाइकोभी सब मालुम था.. सीर्फ आपको नही पता.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे हसते) भाइको मालुम था मतलब..? देवुको आइ मीन जीजुको पता था.. लेकीन क्या..?

पुनम : (हसते धीरेसे) भाभी.. रहेने दिजीये.. अबतो उसे जीजु कहेना छोड दिजीये.. आपके गहेनेतो यही थे.. बस आप दोनोकी अ‍ेंगेजमेन्ट रींग ओर सील्वर श्रीफल लेनाथा.. हमारी सादीके दिनही आप दोनोकी सगाइ रखी हे.. बलकी मंजुभाभी ओर भुमीबुआ नीर्मलाआंटी ओर मेरे ससुरके बीच सब तैय होगया था.. तो सबने मीलकर आपको भाइके साथमे भेजनेका प्लान बनाया.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) हंम.. तो सबने मीलकर मुजे उल्लु बनाया.. ओर देवुभी.. मीलदो मुजे.. तुम सब कीतने कमीने हो.. अ‍ेक अ‍ेक को देख लुगी..

पुनम : (हसते) हां मील लेना अ‍ेकेलेमे.. लेकीन अब आप दोनोकी सगाइके बाद.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) ओह.. गोड.. सबके सब कमीने हे.. मेरी मोमभी.. मीलनेदो उसेभी..

तभी पुनमके रुममे मंजु चंदा लता नीलम रमा सब हसती हुइ आगइ.. ओर सृतीके सामने देखतेही सभी जोरोसे हसने लगी.. तो सृती सर्मसार होते खडी होगइ ओर मंजुके गले लग गइ.. ओर उनकी पीठमे हल्केसे मुके मारने लगी.. तब सभी दोनोकी ओर देखते हस रहीथी.. तब सृती खुब सरमाइ.. तभी दोनो गले लगते खडी थी.. तब सृतीने मंजुको कानमे कहा..

सृती : (हसते कानमे) कमीनी.. ये तुने अच्छा नही कीया.. देखना अ‍ेक दिन मेभी इसका बदला लुंगी.. तुम सब कीतने कमीने हो..

मंजु : (धीरेसे हसते कानमे) हां तबकी तब देखी जायेगी.. ओर कमीनी तुम अ‍ेसे ठीकसे चल कैसे रही हो..? क्या वहा तुम दोनोने कुछ नही कीया..? इसीलीयेतो तुजे वहा भेजाथा.. देवुसे चुदवाकर आरामसे आती..

सृती : (हसते सरमाते कानमें) मंजु.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. अभी यहा नही.. यहा सब हे..

फीर सभी सृतीसे हाथ मीलाते उसे अभीनंदन देने लगी.. तब सृती खुब सरमाइ ओर हसती रही.. देवायतभी बहार सबके साथ बैठ गया तो नीर्मला ओर भुमीका उनके सामने सरारतसे हस रहीथी.. तो देवायत अभी दोनोको इग्नोर करते रमेश ओर सुधीरसे बाते करता रहा.. हवेलीमे सब पंडाल लग चुके थे.. खेतोसे हरीया मालती छोटु उनकी बीवी रीटाभी आज पटाका बनकर काम करने आइथी.. ओर हलवाइभी अपनी सब तैयारीया कर रहाथा.. तभी दया सबको खानेके लीये बुलाने आइ..

सभी लोग खानेके लीये आगये.. सुबह जब देवायत ओर सृती सहेरकी ओर गये तब मंजु ओर भुमीकाने सबको होलमे बुलाकर दोनकी सगाइकी बात करके प्लानींग करली.. तो सभी खुस होगये.. कीसीकोभी देवायतकी या कोइ ओर की दुसरी सादीसे फर्क नही पडाथा.. देवायतकी सगाइकी बात सुनकर अ‍ेक बार फीर वंदनाके साथ आज चारु नीशाभी नीरास होगइ.. लेकीन अपने चहेरेपे जाहीर नही होने दीया..

सबने भोजन करलीया तब वंदनाने आज पुनम ओर लताकी कल सादी होनेसे पहेले मेकअपकी सब तैयारीया करली.. फीर सृतीको ओर दुसरी ओरतोको वेक्सीन बेक्सीन यगैरे करदीया.. आज मंजु चंदा सृती सभी ओरते कलकी तैयारीया कर रहीथी तब लखनभी गांवके नाइके पास चला गया.. ओर वोभी अपनी सब तैयारीया करने लगा तो दुसरी ओर धिरेनभी सहेर गयाथा तो वही सब खुदको सेट बेट करवाने लगा..

फीर कुछ खीरदारी करके वापस अपने गांवमे आगया ओर अपना सब सामान लेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गया.. इसी बीच लताने नीलमको अपने साथही रखा.. वो नीलमको अ‍ेक पलभी अपनेसे दुर नही जाने देती.. देवायत सुधीर रमशे राजीव भानु ओर गांवके दुसरे सदस्यभी आज साथ बेठकर गपे लगा रहेथे.. कुल मीलाके पुरी हवेलीमे सादीका माहोल बन गया था..

गांवकी सभी ओरते आज हवेलीपे जानेके लीये उत्साहीत थी.. तो साम होतेही सादीके गाना गानेके लीये हवेलीपे आगइ.. तब ज्यादातर ओरतोकी बस अ‍ेकही ख्वाहीस थी.. वो थी देवायतको देखने की.. सब गाना गाते चोर नजरसे देवायतको देखती रही.. इनमेसे कुछ ओरते ओर लडकीया देवायतके नीचे लेटनेका सौभाग्य प्राप्त कर चुकी थी.. ओर देवायतभी सभी मर्दोमे अलगही दीख रहा था.. उनका व्यक्तीत्व.. उनका आकर्सण सबको आजभी अपनी खीच रहाथा.. ओर देखनेके लीये विवस कर रहाथा..

तभी हवेलीपे धिरेन आगया.. तो चंदाके चहेरे पे खुसीके मारे स्माइल आगइ.. तब नीलमभी सरमाते खुस होकर हसने लगी.. तो सभी ओरतोका ध्यान धिरेनकी ओर गया तो सभी उन्हीके गाने गाने लगी.. तो धिरेन खुब सरमाया ओर हसते हुअ‍े जटसे होलमे चला गया.. वहा सबके पैर छुकर राजीवके पास चला गया ओर उनके पांव छुते वही उनके पास बैठ गया.. नीर्मला ओर भुमीका.. अपने रुममे बैठकर बाते कर रही थी..

धिरेनने राजीवके पास बैठतेही नीर्मलाके बारेमे पुछा तो राजीवने उनके रुमकी ओर इसारा करदीया.. तो धिरेन हसते हुअ‍े खडा होकर उसी रुममे चला गया.. जैसेही नीर्मलाने धिरेनको देखा वो धिरेन.. चीलाते जटसे खडी होगइ.. ओर दोनो गले लग गये.. तब नीर्मलाने धिरेनका सर चुमलीया.. फीर धिरेनने भुमीकाके पैरभी छु लीये.. तो नीर्मलाने हाथ पकडकर अपने पास बेडपे बीठा लीया.. तब भुमीका धिरेनको देखते हसती रही..

नीर्मला : (हसते) कहो बेटा.. छुटी बुटी लेली.. आनेमे बहुत देर करदी..? हंम..?

धिरेन : (हसते) मौसी वो कुछ खरीदी बरीदी करनीथी.. ओर अपनी भी कुछ तैयारीया करनी थी.. तो सहेर गयाथा.. इसीलीये देर हो गइ..

भुमीका : (हसते) हां भइ.. अब जमाना बदल गया हे.. सीर्फ लडकीयाही थोडी पार्लर जाती हे.. अबतो सहेरमेभी लडकोके लीये पार्लर खुल गये हे.. दैखो.. हमारा बेटा कैसे चमक रहा हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मौसी.. आपभी.. बस थोडा हल्कासा मेकअप करवा लीया.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हंम.. चल कोइ बात नही.. मेरा बेटा दुल्हा हे.. तो जचनातो चाहीयेनां..?

धिरेन : (हसते) मौसी.. वो मंजुदीदी कही दीख नही रही.. कही गइ हे क्या..?

नीर्मला : (हसते सरको सहेलाते) नही.. यही कही होगी.. उनको पता नही होगाकी तु आया हे.. ओर बेटा.. अब मुजे मौसी कहेना बंध करदे.. अबसे मे ही तेरी मां हु.. ओर पुनोभी हमे अपना सास ससुर मानती हे..

धिरेन : (हसते) जी मोम.. हें..हें..हें.. लेकीन अ‍ेक सर्तपे.. आप दोनो मेरे साथ रहेने आजाओ..

नीर्मला : (हसते सर चुमते) नही बेटा.. तुमतो जानते हो.. तुम्हारे मौसा नही मानेगे.. ओर हमारा धंधाभी उधर हे.. फीर आगे देखते हे.. अबतो तुही हमारा वारीस हे..

मंजुला : (अंदर आतेही जोरोसे) अरे धिरेन.. मेरा भाइ.. कब आये तुम..?

कहेते मंजु दोडके धिरेनके गले लग गइ.. तभी भावना ओर चंदा ओर सृतीभी आकर धिरेनको गले लगाते मीली.. सब धिरेनकी खातीदारी करनेमे लगे रहे.. इसी बीच पुनम वंदनासे कुछ बात करती रही.. दोनोको धिरेनके आनेकी खबर मील चुकीथी.. तो पुनम बहुतही सरमा रहीथी.. आखीर धिरेनसे उनकी सादीजो होने वालीथी.. लेकीन मनके अ‍ेक कोनेमे अबभी सादीसे पहेले अ‍ेक बार देवायतको मीलनेकी आस थी.. इसके लीये पुनमने रश्मीभाभीसे बात करके पुरा इन्तजाम करलीया था..

सभी लेडीस साम देर तक नाच गान.. सब धमाल करती रही.. तो सभी जेन्ट्सभी अ‍ेक दुसरेके साथ गपे लगाते हसी मजाक करते रहे.. तो धिरेन लखनभी कुछ दोस्तोके साथ अपनी टोली बनाकर हसी मजाक करते रहे.. जब साम ढल गइ तब सभी लोग खाना खाकर अपने अपने घरकी ओर चलने लगे.. दयाने हरीया ओर मालतीके साथ रामुकाका का टीफीन भेज दीया.. घरके लोगोके अलावा सभी लोगोने भोजन करलीया..

तो लखनने धिरेनको अपने साथ रुममे रुकनेके लीये कहा.. तो धिरनने अपना सब सामान लखनके रुममे ही रखने चला गया.. वहा सामान रखकर बाथरुममे ही फ्रेस होगया.. तो इधर लता ओर नीलमभी खानेसे पहेले फ्रेस होने उपर अपने रुममे जा रहीथी.. ओर जैसेही दोनो उपर गेलेरी मे जा रहीथी.. तब धिरेन बहार नीकला.. ओर उनका सामना लता ओर नीलमसे होगया..

तो धिरेन लताको देखतेही सर जुकाके जटसे चलने लगा.. तो लताके पीछे नीलम आरही थी वो धिरेनकी ओर तीरछी नजरसे देखते मुस्कुराने लगी.. तो लता थोडी देर सडनली रुक गइ ओर नीलमको आगे करदीया तो नीलम सर जुकाते जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर लता धिरेनकी ओर उसे घुरकर जाते हुअ‍े देखती रही.. आज लताको देखतेही धिरेनकी गांड फट गइथी.. ओर वो चुपचाप नीचे सबके पास चला गया..

जब गांवके सभी लोग चले गये तब सीर्फ रमेश सुधीर ओर दोनोकी बीवीया ओर रश्मीही रुक गइ.. फीर वो लोगभी अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब धिरेन ओर नीलम सबकी नजर बचाते अ‍ेक दुसरेको चोर नजरसे देखते मु्सकराते रहे.. तभी नीलमने धिरेनको लताकी ओर आंखोसे इसारा करते केह दीयाकी लताकी नजर हम दोनोपे हे.. तब धिरेनने नीलमकी ओर देखना बंध कर दीया..

इसी बीच सब आपसमे बाते करते खडे खडेही खाना खा रहेथे तब चंदा ओर मंजु सबको मीठाइआ बाटते जबरदस्तीसे खीला रहीथी.. तब देवायत रमशे सुधीर नीशा ओर चारु सब अ‍ेकही साथ खडे होकर खाना खा रहेथे तब देवायतने रमेशको गांवमे सबको भोजनके लीये ओर जीनकीभी जमीन थी उसे कल साम हवेलीपे बुलानेको केह दीया.. सभी खानेमे बीजीथे.. तभी रमशे ओर सुधीर कुछ लेने काउन्टर पले गये.. तो मौका देखतेही देवायतने जेबसे लेटर नीकालके नीशाको स्वीट देनेके बहाने स्वीटके साथ लेटरका कवरभी दे दीया..

तो नीशाके साथ चारुभाभी भी खुस होगइ.. ओर नीशाने सरमाते हसते हुअ‍े जटसे लेटरको डीसके नीचे छीपा लीया.. ओर चारुके साथ सबसे दुर चली गइ.. तो देवायत पुनम ओर लताके पास जाकर खडा होगया तो वहा मंजु ओर चंदा सृतीभी आगइ.. आज सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तो मंजु ओर पुनम चंदा वंदना सब उनकी खीली उडाते मस्तीया कर रहीथी.. तो दुरसे नीर्मला ओर भुमीकाभी सबकी ओर देखते हस रहीथी..

तभी लखनभी धिरेनको लेकर सबके पास आगया तो चंदा धिरेनको देखकर खुस होने लगी.. अबतो पुनमकोभी धिरेनको इग्नोर करना ठीक नही लगा.. तो उसने सरमाते अपनी डीसमे अ‍ेक स्वीटका टुकडा उठाकर धिरेनकी डीसमे रख दीया ओर सरमाते हसने लगी.. तो ये देखकर लखननेभी अ‍ेक स्वीटका टुकडा उठाकर लताके मुहमे ही खीला दीया.. तो लता सर्मसार होगइ.. तो भानु रमा भावु सरला सभी लोग खुसीसे हसने लगे..

भावना : (वहा आते हसते) अरे.. क्या बात हे लखनभौया.. लगता हे हमारी लता अब यहा भुखी नही रहेगी.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते) हां.. तो हमारे जमाइकोभी क्यु अ‍ैसेही भुखे रखे.. लीजीये आज मेरे हाथोसेभी खा लीजीये..

कहेते रमानेभी लखनको खीला दीया.. तब मंजु ओर चंदाभी धिरेनको.. फीर सबको स्वीट खीलाने लगी.. फीर राजीव नीर्मला भुमीका सबको खीलाती रही इसी बीच देवायतनेभी भुमीका ओर नीर्मलाको जबरदस्तीसे खीला दीया.. तो सब लोग देखते हसते रहे.. तो चंदा देवायतको लेकर सृतीके पास चली गइ.. तब सृती ओर देवायतने अ‍ेक दुसरेको खीला दीया तो सृती बहुतही सरमाइ ओर मुस्कुराती रही..

इसी तराह सबने हसी खुसी भोजन संम्पन कीया.. तो रमेश ओर सुधीरभी नीशा चारुको लेकर अपने घर चले गये.. तो बाकीके सभी लोग होलमे आकर बैठ गये ओर गप्पे लगाते अ‍ेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते रहे.. इसी बीत रश्मीने मंजुसे कुछ बाते करली तो मंजुभी पुनोकी ओर देखकर हसने लगी.. ओर उसने हां मे गरदन हीला दीया.. फीर रश्मी पुनम वंदना ओर सृतीसे पास आकर हसते हुअ‍े बाते करने लगी..

तो पुनमभी सरमाकर हसने लगी ओर वंदना सृती देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तो देवायतको कुछ समजमे नही आया.. इधर नीर्मला ओर भुमीकाभी देवायतको अकेलेमे मीलकर कुछ बाते करना चाहती थी.. लेकीन सादीके माहोलकी वजहसे उसे देवायतसे अ‍ेकेले मीलनेका मौका नही मील रहाथा.. तो दुसरी ओर भावनाभी लताके साथ मीलकर देवायतसे अकेले मीलकर बाते करना चाहती थी.. तभी..

मंजुला : (हसते पास आते) देवु.. सभी लडकीया आज रश्मीभाभीके वहा सोने जारही हे.. सुबह उनको जल्दी उठकर तैयार होना हेतो आप सबको रश्मीभाभीके वहा छोडकर आजाइअ‍े आज हमभी जल्दी सो जायेगे.. सुबह चारोका मंडप मुहुर्त हे.. जाइअ‍े.. ओर लता नीलु तुमभी साथ चली जाओ..

कहातो पुनम रश्मीकी ओर देखने लगी.. तभी रश्मीने उसे आंखोके इसारोसे कुछ केह दीया तो पुनमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. तो वंदनानेभी अपने मेकअपका सामान सााथमे लेलीया तो लता नीलमभी अपने कुछ कपडेकी बेग लेकर नीचे आगइ तब नीलम काफी नीरास लग रहीथी ओर वो चोर नजरसे धिरेनको देखने लगी.. सबके सो जानेके बाद वो धिरेनको उपर मीलना चाहती थी.. तो उनका सारा प्लान चोपट होगया..

चंदा : (सबको) देखो वंदना.. तुम ये दोनोको सुबह पहेले जल्दी तैयार करदेना ताकी यहा उनकी जरुरत पडेतो दोनो रेडी होनी चाहीये.. सब कार्य हमे मुहुर्तपे करना हे..

मंजुला : (हसते) अरे दीदी फीकर मत करो.. सुबह जल्दी कोइ मुहुर्त नही हे.. हमे नव बजेके बादही मुहुर्त करना हे..

रमा : (हसते चंदाके कानमे) दीदी.. आज दोनोको आरामसे सोने दो.. फीर कलसेतो हमारी तराह कहा सो पायेगी.. वो सोने देगे तबनां.. हें..हें..हें..

कहातो चंदाने सर्मसार होते हसते रमाको उनकी पीठमे अ‍ेक मुका मार दीया.. फीर दोनोही सबसे थोडी दुर जाते सरमाते हसते हुअ‍े धीरेसे अ‍ेक दुसरेकी सुहागरातके बारेमे बाते करने लगी.. तो सृतीभी भुमीकासे बात करके सबके पास आकर खडी होगइ.. तब मंजुने देवायतकोभी बुला लीया उनके साथ मंजुभी जा रहीथी.. ओर सभी लोग पैडल चलते रातके अंधेरेमे साथ चलते बाते करते रश्मीके घरकी ओर जाने लगे....

कन्टीन्यु
 
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