रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १०८
वो देवायतकी हरकतोकी कीसीभी बातका विरोध नही कर रहीथी.. वो चाहती थी देवायत आज उसे पुरी तराह मसलदे.. आज वो देवायतको पुरी तराह समर्पीत होजाना चाहती थी.. ओर हो भी क्युना हो..? आखीर वोभी तो अप्सरा लोककी परी थी.. जो अपने स्वामीका प्यार पाना चाहती थी.. तब ना देवायतको पताथा ओर नाही भुमीकाको.. की दोनोके मीलनकी असली वजाह क्या हे.. बस दोनोही प्यार करने मे मसगुल थे.. दोनोही अेक दुसरेके अंदर समा जानेकी कोसीसमे लगे रहे.. तभी....अब आगे
भुमीका : (कीस तोडते कामुक लडखडाती आवाजमे) देवु.. कही मुजे छोडतो नही दोगे..?
देवायत : (उनकी आंखदमे प्यारसे देखते) क्यु..? मुजपे विस्वास नही हे क्या..?
भुमीका : (सरमाकर मुस्कुराते) खुदसे भी ज्यादा हे.., बस फीरभी मुजे यकीन दीलवाओ.. की तुम जींदगीभर मेरा साथ नही छोडोगे..
देवायत : (आंखोमे देखते) कैसे..? बुआ.. यही बात मे आपसे कहु तो..? क्या आप जींदगी भर मेरी बनके रहोगी..? मुजे आप कैसे यकीन दिलवायेगी..?

भुमीका : (होंठोपे चुमते) हां.. कोइ सक..? कहो मे क्या करु जो तुजे यकीन होजाये.. मेरा सबकुछ तुजपे लुटा दुंगी.. मेरा सबकुछ तुजे सोंप दुंगी.. मेरा मन ओर दिलतो तुजे कबसे दे दीया हे.. बोलो अब क्या चाहीये..? मे मेरी सब धन दौलत.. ओर उनसेभी ज्यादा कीमती मेरा ये तन.. आजसे सब कुछ तुजे सोंप दुगी.. अब तो यकीन आगयानां.. की मे तेरा साथ कभी नही छोडुगी.. देवु.. आइ लव यु सो मच..
देवायत : (हसते) हंम.., लव यु टु.. मुजेतो आपपे पुरा यकीन हे.. अब आप कहो.. मे कैसे आपको यकीन दीलवाउ..? मेरा भी सब कुछ आपको सोप दुगां.. क्या ये सब काफी हे..?
भुमीका : (सरारतसे हसते) नही.., पहेले तो तुम मुजे आप आप कहेना छोडदो.. आजसे ये भुमी तेरी होगइ.. तुम मुजे तुम कहेकर बुलाओ.. आजसे मेने तुजे अपना मानलीया हे.. ओर मुजे तेरी धन दोलत नही चाहीये.., क्युकी तुम खुद मेरे हो.. मेरे अपने.. मेरे किशनका अंस.. आजसे मेरे भतीजेके अलावा तुम मेरा बोयफ्रेन्ड भी हो.. मुजे तुम कुछ ओर तरीकेसे यकीन दीलवाओ..हें..हें..हें..
देवायत : (हसते होंठ चुमते) ओर कीस तरीकेसे यकीन दिलवाउ..?
भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? तुम तो काफी होशीयार हो.. थोडा दिमाग लगाओ.. हें..हें..हें.. ये भुमीका तुमको अैसेही नही मीलेगी.. हें..हें..हें.. तुमने मुजे बहुत इन्तजार करवाते तडपाया हे..
देवायत : (कुछ सोचते ही) हंम.. चलो मेरे साथ.. घरको ताला लगादो.. हम कही जा रहे हे..
भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही.. अब हम कल साम तक इस दरवाजेके बहार कदम भी नही रखेगे.. मुजे यही यकीन दिलवाओ.. फीर यहा सबकुछ होगा.. जो मे चाहती हु.. तुम चाहते हो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते होठोपे चुमी लेकर) हंम.. बुआ.. तुमको यहाभी यकीन दिलवा सकता हु.. लेकीन मे कोइ काम कच्चा नही करता.., आज तुमको हर तराह यकीन दिलवा दुंगा.. बस मुजपे विस्वास करो.. चलो तैयार होजाओ.. हमे कही जाना हे.. हम सामको बहारही खाना खाकर आजायेगे.. अब आप कुछ मत बोलना मे जो कहु करती जाओ ओर सब देखती जाओ.. चलो..
कहेते देवायत खडा होगया.. ओर भुमीकाके दोनो पैरके बीच हाथ डालकर उसे अपनी गोदमे उठा लेता हे.. तब भुमीका देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनकी ओर देखते सर्मसार होकर मुस्कुराती रही.. ओर उसने देवायतके सीनेमे सर छुपा लीया.. देवायत उसे लेकर भुमीकाके बेडरुममे चला गया.. तो भुमीकाकी दिलकी धडकन तेज होगइ.. वो समजने लगी की अब देवायत उसे बेडरुममे लेजाकर उनकी चुदाइ कर लेगा..
यही सब सोचकर वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. ओर देवायतके सीनेमे सर छुपाते मुस्कुराती रही.. तभी देवायत बेडरुमके अंदर जातेही भुमीकाको बाथरुमके पास लेजाते गोदसे उतारकर दरवाजेके पास खडी करदीया.. भुमीको अपनी बाहोमे भरते उनके होठोको चुमने लगा.. तब भुमीकाकी सांसे तेज चलने लगी.. उसे अब पुरा यकीन हो गयाकी अब देवायत उनकी चुदाइ करलेगा.. लेकीन भुमीका का अंदाज गलत नीकला..

ओर देवायतने उसे अपनी बाहोसे आजाद करते बाथरुममे धकेल दिया.. तब भुमीका देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते अंदर जाने लगी.. उनकी चुत फडफडाते हरकतमे आ गइथी.. उसे लगाकी देवायतभी उनके साथ बाथरुममे आजायेगा.. ओर वही उनके साथ छेडखानी करते उनकी चुदाइ करलेगा.. लेकीन देवायत उसे बाथरुममे धकेलकर बहार ही बेडपे बैठ गया.. तो भुमीको बडाही आस्चर्य हुआ..
भुमीका अंदर जातेही बाथरुमका दरवाजा बंध करते उनसे सटकर आंख बंध करते अपने दोनो उरोजोपे हाथ रखकर खडी होगइ.. ओर अपनी भारी सांसोको कंट्रोल करने लगी.. उसे अभी भी यकीन नही हो रहाथा की देवायतने उनके साथ बाथरुममे घुसनेकी हिमायत नही की..
आज देवायतके प्रती उनकी चाहत ओर बढ गइ.. ओर वो सरमाते मुस्कुराकर फटाफट नहाने लगी.. जब नहा लीया तब उसे याद आयाकी उसने टोलीया तो लीया ही नही.. ओर अेक बार फीर भुमीकाकी दिलकी धडकन बढ गइ.. वो सोचने लगीकी अब वो अैसेही बहार कैसे नीकलेगी..? ओर वो सरमाते नंगीही दरवाजा धीरेसे खोलती हे..
फीर दरवाजेके पीछे अपना नंगा तन छीपाते धीरेसे थोडा सर नीकालकर देखती हे तो सामने ही देवायत उनके बेडपे वहा पडा कोइ मेगेजीन पढ रहाथा.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर धीरसे भारी दिलकी धडकरनसे देवायतको आवाज लगाते अलमारीसे टोलीया नीकालकर देनेको कहा.. तब उसे लगाकी देवायत टोलीया देनेके बहाने अंदर आजायेगा.. लेकीन देवायतने टोलीया देते भी भुमीका की ओर नही देखा.., तब भुमीका को थोडा अजीब लगा.. ओर वो अेक बार फीर नीरास होगइ..
हमेसा उनके साथ मजाक मस्तीया ओर छेडछाड करने वाला देवायत.. उनके प्रती आज अैसा व्यवहार देखते भुमीकाको अभी भी यकीन नही हो रहाथा.. की ये वही देवु हे..? ओर वो अपना तन पोछकर अपने उरोजोपे टोलीया लपेटकर बहार आगइ.. तब देवायतने उनके कपडे खोजकर बहार रखदीया था.. ओर वो अपने कपडे देखकर आस्चर्यसे देवायतको देखती रही.. क्युकी आज देवायतने उनके लीये अेक फेन्सी ड्रेस नीकालकर बेडपे रखाथा.. तो भुमीका बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतको देखती रेह गइ.. फीर..
भुमीका : (धीरेसे सरमाते) देवु.. ये मेरे कपडे आपने.. प्लीज.. मुजे चेन्ज करना हे.. मुजे ये कपडे नही पहेनना.. अब मे ये नही पहेनती..
देवायत : (हसते खडा होते) हां.. क्यु नही पहेनना..? आज आप यही पहेनोगी.. ओर फटाफट तैयार होकर बहार आजाओ.. हमे देर हो रही हे..
भुमीका : (सरमाते धीरेसे हीचकीचाते) दे..वु.. मे ये कपडे.. प्लीज.. सारी पहेन लुगीनां.. तुम जीद मत करो..
देवायत : (हसते) क्यु..? क्या खराबी हे इन कपडोमे..? नही मतलब नही.. आज आप यही ड्रेस पहेनोगी.. अगर नये नही पहेनती तो उसे अबतक अपनी अलमारीमे क्यु रखा हे..? क्या ये कपडे मेरे बापुने दिलवाया हेनां..?
कहेते देवायत बहार चला गया.. तब भुमीका उसे आस्चर्यसे मुह फाडके देखती ही रही.. की देवायतको इस कपडेके बारेमे कैसे मालुम..? की यें ड्रेस उसे किशनने दिलवाया था.. उनके मनमे कही सवाल आने लगे.. ओर वो कुछभी बोले बीना चुपचाप देवायतने नीकाला हुआ ड्रेस पहेनने लगी.. फीर ड्रेस पहेनकर अपने बालोको सवांरने लगी.. आज उसने अपने बाल खुले रख दीये.. जीसे वो बहुतही छोटी ओर कामुक दीखने लगी.. तब अेकबार तो खुदको आयनेमे देखकर सरमा गइ.. ओर सरमाते मुस्कुराने लगी..

फीर सरमाते धीरेसे दरवाजा खोलकर बहार आगइ.. ओर अपनी नजर जुकाते दरवाजेके पास खडी रेह गइ.. तो देवायत उसे देखतेही सोफेसे खडा होगया.. ओर अेक नजरसे भुमीकाको देखताही रहा.. तब वो बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर धीरे धीरे चलकर देवायतके पास आकर खडी होगइ.. तो अचानकही दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर भुमीका देवायतके सीनेमे सर छुपाकर सरमाती मुस्कुराने लगी.. फीर देवायतने भुमीका चहेरा अपनी हथेलीमे थामलीया.. ओर उनकी आंखोमे देखता रहा..
तब वो आंख बंध करते खडी रही.. जैसे देवायतका उनके होठोपे कीस करनेका इन्तजार कर रही हो.. तभी उसने अपने होठोपे देवायतके गरम होंठ महेसुस हुअे.. ओर वो भी देवायतका होंठ चुमते उनका साथ देने लगी.. आज वो कच्ची कुआरी लडकीकी तराह सरमा रही थी..
अैसा प्यार उसे कीसीसे भी नही मीला था.. तभी देवायतने उनके उरोजोपे हाथ रख दीया ओर हल्केसे मसल दीया तो वो सरसे पांव तक हील गइ.. उनकी चुतकी नाजुक पंखडीया फडफडाने लगी.. ओर भुमीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..
देवायत : (हसते) बुआ.. तो अब चले..? ताला कहा हे..? मे लगा देता हु..
भुमीका : (धीरेसे सरमाते) वही हे.. दरवाजेके पीछे.. चलीये..
कहेते दोनोही अेक दुसरेकी बाहोसे अलग होकर बहार आगये.. देवायतने दरवाजा बंध करके घरको ताला लगा दीया.. तबतक भुमीका वहा खडी रहेते देवायतको तीरछी नजरोसे देखते सरमा रहीथी.. आज वो कीतने बरसोके बाद अैसे कपडे पहेनकर बहार नीकल रहीथी.. तभी अचानक देवायतने फीरसे भुमीकाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर अपनी कारकी ओर चल पडा.. तब भुमीका सर्मसार होते देवायतकी ओर देखती रही.. ओर उसने भुमीकाको कारमे आगे बीठा दीया.. फीर वोभी कारमे ड्रइवींग सीटपे जाकर बैठ गया..
भुमीका : (सरमाते हसते) देवु.. हम कहा जा रहे हे..? कुछतो बताओ..? मुजेतो इन कपडोमे बहुत सरम आ रही हे.. कोइ हमे देखना ले..
देवायत : (हसते) देखने दो.. ओर आपभी देखती जाओ.. आज आपके लीये खास दिन हे.. आज आपको बहुत बडी सरप्राइज मीलने वाली हे.. फीर आपको मुजपे पुरा यकीन हो जायेगा.. की मे आपको कभी नही छोडुंगा.. वोभी जींदगी भरके लीये..
भुमीका : (हसते धीरेसे सरमाते) देवु.. मेतो मजाक कर रहीथी.. मुजे पुरा यकीन हे.. तुम मुजे कभी नही छोडोगे.. बस मेतो सीर्फ अपने दिलको तस्सली देने तुमसे यकीन दिलानेको कहाथा.. जब मुजे पता नहीथा की तुम मेरे किशनके बेटे हो फीरभी मेने तुजपे विस्वास कीयाथा.. ओर तुमनेभी हमारा बहुत काम कीया हे.. ओर अब तो तुम मेरे अपने हो.. मेरे किशनका खुन.. तो अबतो पका यकीन तो होगा ही..
देवायत : (हसते) बुआ.. पता हे जब मे ओर मंजु पहेली बार आपके घर आयेथे..? तबही मे आपको पहेचान गयाथा.. बस आप मंजुकी मम्मीको हमारे बारेमे सब बता ना दे.. इसीलीये मेने अपनी पहेचान आपसे छुपाइ थी.. जब आप पहेचानकी नीकली तब ही हम दोनोने सादी करनेका फैसला करलीया था..
ताकी आप कभी मंजुकी मम्मीको मीले ओर उसे हमारे बारेमे बोलदे ओर हमे सादी करनेमे कोइ मुस्केली होजाये.. तो उसी दिन हम दोनोने आश्रममे जाकर सादी करली.. ओर आपके रुपरके रुममे ही हम दोनोने अपनी सुहागरात मनाली..
भुमीका : (हसते बाजुमे मुका मारते) हंम.. तुमने ओर सृतीने मीलकर मुजे उलु बनाया.. वहा आकर मुजसे जुठ बोला की तुम दोनो सादी सुधा हो.. ओर सहेरमे घुमने आये हो.. वैसे तुम भी तो मेरे किशनकी तराह राजा हो.. अब तक तुमने कीतनी सादिया कीहे.. हें..हें..हें.. कमसे कम दो तीनतो करली होगी..? सच बताना.. अगर जुठ बोलातो तुजे खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) बुआ.. आपसे मे कभी जुठ नही बोलता.. कायदेसे लीगल.. दो.. ओर सीक्रेट बीवी भी दो हे.. ओर सबके बारेमे मेरी मंजु जानती हे.. मे सब काम मेरी मंजुको कहेकर ही करता हु.. अगर नही भी कहु.. फीर भी उसे सब पता चल जाता हे.. इनसेतो अच्छा हे सब उनको कहेकर ही करो.. हें..हें..हें..
भुमीका : (सरमाते हसते) तो क्या आजके बारेमे भी.. मतलब हम दोनोके बारेमे भी उसे पता चल जायेगा..?
देवायत : (हसते) हंम.. सायद.., लेकीन आप फीकर मत करो.. मंजुको मेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. अगर उसे नही पता होगा फीरभी मे सीर्फ उसे मौका मीलतेही सब कुछ बता दुगा..
भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही देवु.. तुम उसे कुछ मत बताना.. मे हम दोनोका रीस्ता सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. तुम मेरे भतीजे हो.. फीरभी मे तेरी ओर आकर्सीत होगइ.. देवु.. जबसे तुमको देखा हे तबसे ही मे तुजे पसंद करने लगी थी..
तभी देवायत सहेरसे बहार नीकलनेसे पहेले अेक मार्केटमे अेक जगाह कार खडी कर देता हे.. ओर भुमीकाको कारमेही बैठे रहेनेको कहेकर दो तीन दुकानमे जाकर कुछ खरीदी करके केरी बेग लेआते पीछेकी सीटमे रख देता हे.. ओर कार अपने गांवके रास्तेकी ओर ले जाता हे.. तब ये रास्ता भुमीकोभी जाना पहेचाना लगा.. वो किशनके साथ ये रास्तेपे कइ बार उनकी हवेलीपे या आश्रमपे जा चुकीथी.. ओर उसने देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखा..
भुमीका : देवु..? क्या हम तेरे गांव या आश्रम जा रहे हे..?
देवायत : (हसते) नही बुआ.. नाही.. हम हमारे गांव जा रहे हे.. ओर नाही आश्रम.. बस आप सीर्फ बैठी रहो.. ओर देखती जाओ.. आज आपको अेक नइ जगाह ही दीखाता हु.. मे वहा कइ बार जा चुका हु..
भुमीका : (जोरोसे हसते) मुजे यकीन दिलवानेके चकरमे कही मे फसतो नही गइ..? हें..हें..हें.. तुम कहा कहा घुमाओगे.. मुजे तो कुछ पताही नही चलता.. हें..हें..हें.. क्या जंगलमे लेजाकर प्यार करोगे..? हें..हें..हें..
देवायत : (हसते कारको जंगलकी ओर मोडते) नही बुआ.. आप यकीन करो.. आज आप अैसी फसोगी.. अैसी फसोगी.. की मुजसे कभी छुट नही पाओगी.. आप मुजे जींदगीभर याद करोगी.. आजका दिन आप कभी नही भुलोगी.. आज आपके लीये बहुतही खास दिन हे.. आज आपको मुजपे पुरा यकीन हो जायेगा..
कहेते दोनोही हसने लगे.. जैसे जैसे कार धने जंगलकी ओर जाने लगी.. भुमीकाकी दिलकी धडकन बढने लगी.. उनके मनमे कइ तराहके सवाल आने लगे.. उसे लगाकी देवायत उसे जंगलमे चोदनेके लीये तो नही लेआया.. ताकी इनकी मेरे साथ पहेली चुदाइ मे याद रख सकु.. वही सब सोचते वो फीरसे रोमांचीत होने लगी.. ओर अेक बार फीरसे उनकी चुत फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी..
वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. जैसे जैसे आगे बढते गये.. भुमीकाकी सांसे भारी होने लगी.. उनके दोनो उरोज उतेजनाकी वजहसे कठोर होने लगे.. तब साम होनेको आइथी.. तभी जंगलके बीचमे अेक खंडहर जैसा बडा मंदिर नजर आया.. ये वोही मंदिर था.. जहा देवायतने चंदासे सादी करली थी.. ओर आज भुमीको लेकर आया था.. ओर देवायतने कारको वही लेजाकर रोक दी.. तब दोनो ही कारसे उतर गये..
तब देवायतने पीछली सीटसे केरी बेग अपने होथोमे लेली तब भुमीका भी कारकी दुसरी ओरसे उतरते आस्चर्यसे सभी ओर नजर घुमाते देखती रही.. तो चारो ओर बडे बडे पेडके अलावा कुछ नही देख रहाथा.. साम होनेकी वजहसे जंगलमे अंधेरे जैसे लगने लगाथा.. वहा सीर्फ पक्षीओकी आवाज ही सुनाइ दे रहीथी.. तो अेक बारतो भुमीका भी डरने लगी.. पेडकी वजहसे वहा धना अंधेरा लग रहाथा तो भुमीका जटसे देवायतके पास आकर खडी होगइ.. ओर उनका हाथ बाजुसे पकड लीया..
भुमीका : (हसते देवायतके पास आकर उनका हाथ पकडते) देवु.. ये तुम मुजे कहा लेकर आये हो..? मे तो इधर कभी नही आइ.. क्या तुम इधर आ चुके हो..? ये किसका मंदिर हे..?
देवायत : (भुमीका हाथ कसके पकडते) बुआ.. ये हम सबके आराध्य देवका मंदिर हे.. पता नही इस मंदिरसे मुजे बहुत लगाव हे.. मे यहा बहुत बार आ चुका हु.. यहा आतेही मुजे बहुत बडा सुकुन महेसुस होता हे.. चलीये अंदर.. यहा बहुतही कम लोग आते हे.. ओर ये आदीवासी कबीले वालोका मंदिर हे.. तो आपको डरनेकी जरुरत नही हे.. चलीये अंदर..
दोनोही अंदर चले गये.. भुमीकाने अबभी देवायतका हाथ थामकर पकडके रखाथा.. तब मंदिरके अंदर पुरे परीसरमे पेडोके सुखे पते चारो ओर चादर बनाते बीखरे पडे थे.. तब भुमीका कसके देवायतके हाथको पकड लेती हे.. वो चारो ओर नजर घुमाते देखती रहेती हे.. ओर दोनो मंदिरके अंदर आगये.. तब बीचमे अेक बडा शीवलींग दीखा.. वहाभी सुखे पते ओर सुखे हुअे फुल बीखरे पडे थे.. तभी देवायत उसे हाथसे साफ करने लगा.. तब भुमीका वही खडे रहेते उसे देखती ही रही..
भुमीका : देवु.. लगता हे इधर कोइ आता नही होगा.. क्या मे आपकी कुछ मदद करु..?
देवायत : (हसते) अरे नही बुआ.. बस होगया.. हमे कहा पुरा मंदिर साफ करना हे.. सीर्फ यहीतो साफ करना हे.. बुआ.. मे जबभी परेसान होता हु यहा आजाता हु.. तो यहा आकर मनको सांती ओर बहुत सुकुन मीलता हे.. मे घंटो तक यहा अकेला बेठता हु.. ओर साम होतेही वापस घर चला जाता हु.. यहा मुजे अेक अपनापन लगता हे.. ये कबीले वालोका मंदिर हे.. वो लोग लडकीको भगाकर यही आकर सादी कर लेते हे.. ओर सब उस सादीको मान लेते हे.. मेरी सब कबीले वालोसे ओर उनके सभी सरदारोसे जान पहेचान हे..
भुमीका : (हसते) अच्छा..? लेकीन वो लोग भागते क्यु सादी करते हे..? क्या वो अेरेन्ज मेरेज नही करते..?
देवायत : (हसते) नही बुआ.. वहा अेरेन्ज मेरेज नही होती.. सब भागकर ही सादी करते हे.. उनकी यही परंपरा हे.. वो मे सब आपको बादमे बता दुंगा.. थोडी लंबी कहानी हे.. चलीये सब साफ होगया.. आप इधर आजाइअे.. ओर मे जैसा कहु करती जाइअे.. आज अभी आपको सब पता चल जायेगा.. अब आपकी सरप्राइजका वक्त आगया हे.. इस दिनको आप कभी नही भुलेगी.. आइअे.. ओर लीजीये इसे पकडीये..
कहेते देवायतने केरी बेगसे अेक हार नीकालकर भुमीकाको दीया.. तब भुमीका नजदीक आगइ ओर हारको हाथमे लेकर देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे हसते हुअे देखती रही.. तभी देवायतभी भुमीकाके साथ उनसे सटकर खडा होगया.. ओर वोभी भुमीने पकडे हुअे हारको हाथ लगाता हे..
फीर दोनोही हारको शीवलींगपे चडा देते हे.. फीर दोनो ही कुछ फुल ओर बेलपत्र लींगपे चडाकर उनका वही पडे पानीसे अभीसेक करते हे.. फीर दोनोही अेक हाथ जोडकर अेक साथ खडे होकर दर्शन करते हे.. तभी देवायत दुसरी केरी बेगसे दो हार नीकालता हे..
देवायत : (हसते) लीजीये बुआ.. इसे पकडीये.. आज हम दोनोकी सादी हे.. मे आपसे गांधर्व विवाह कर रहा हु.. आजसे आप हमेसाके लीये मेरी होजायेगी.. कैसा लगा मेरा सरप्राइज..? हें..हें..हें..
भुमीका : (सोक्ट होकर अेक नजरसे देवायतको देखते) देवु..? ये सब.. लेकीन क्यु..?
देवायत : (मुस्कुराते) बुआ.. आपको यकीन दिलवानेके लीये मे आपसे सादी कर रहा हु.. आपको यकीन दिलवानेका मेरे पास दुसरा कोइ ओर रास्ता नही था.. आप मेरी पत्नी होजायेगी तो मे आपको कैसे छोड सकता हु..? अबतो यकीन होजायेगानां..?
भुमीका : (अेक नजरसे देखते) लेकीन देवु मेतो अेक विधवा हु.. तुमसे उमरमेभी बडी हु.. अेक आधेडसे सादी करोगे..? मत करो ये पाप.. मुजे तुमपे पुरा यकीन हो गया हे.. मत करो मुजसे सादी..
देवायत : (हसते) बुआ.. मेरे तनकी आग मीटानेके लीयेतो गांवमे बहुत सारी ओरते ओर लडकीया हे.. मेने तो आपको दिलसे चाहा हे.. ओर कहेते हे अेक विधवासे सादी करना बहुत बडा पुन्यका काम हे.. आप आधेड नही हो.. मेरी नजरमे आप मेरी मंजुकी तराह अेक सुसील कन्या हो.. ये कोइ पाप नही.. ओर सच्चे दिल वालोकी सादीसे तो भगवान भी खुस होते हे.. मे आपको हमेसाके लीये अपनाना चाहता हु.. आजसे आप अेक विधवा नही अेक सुहागन होजायेगी.. मेरी प्रीग पत्नी.. बुआ मे आपको बहुत चाहता हु..
इतना सुनतेही भुमीका देवायतके सीनेमे सर रखते उनसे लीपट गइ.. ओर फुटफुटके जोरोसे रोने लगी.. तब देवायत हसते हुअे उनकी पीठ सहेलाता रहा.. ओर भुमीका आंसु बहाती रही.. फीर भुमीका देवायतका चहेरा थामते उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. आज वो मनही मन अपने आपको देवायतको पुर्ण समर्पीत कर बैठी.. आज भुमीने मनही मन देवायतपे अपना सबकुछ न्योछावर करने की ठानली..
भुमीका : (प्यारसे गाल सहेलाते) देवु.. तुजे मुजसे सादी करनेकी जरुरत नही हे.. आज मुजे पुरा यकीन हो गया की तुम जींदगी भर मेरा साथ नही छोडोगे.. मेरा इतना बडा इम्तहान मत लो.. आजसे अभीसे मे तुमको पुर्ण समर्पीत होती हु.. मेभी वादा करती हु जींदगीभर मे तेरा साथ कभी नही छोडुगी.. चाहे कुछभी परीणाम क्युना आये.. आजसे ये बुआ.. तेरी होगइ.. मत कर मुजसे सादी.. हम दोनोके रीस्तेमे ये सब जरुरी नही हे..
देवायत : (मुस्कुरते सर चुमते) नही बुआ.. मेने आपको दिलसे प्यार कीया हे.. ओर प्यारकी कोइ हद नही होती.. तो दिलके अेक कोनेमे मुजे क्षोभ होगा की मेने मेरी बुआके साथ कुछ गलत कीया हे.. तब मे आपसे नजरे नही मीला पाउंगा.. बुआ मे प्यारमे सारी हदे पार करना चाहता हु.. जबसे आपको पहेली बार देखा तबसे ही आप मेरी क्रस रही हे.. मे आपको पाना चाहता था.. आपके साथ सारी हदे मीटाना चाहता था.. मे आपके अंदर आपकी आगोसमे पुर्ण समा जाना चाहता हु.. इसीलीये ये सादी जरुरी हे..
भुमीका : (प्यारसे गालपे हाथ रखते) फीरभी देवु.. अेक बार फीर सोचले.. तु जो चाहता हे तुजे सबकुछ मीलेगा.. मे अपने आपको तुजे समर्पीत कर चुकी हु.. तुम जैसेभी प्यार करना चाहते हो मेरे साथ कर सकते हो.. आजसे ये तनभी तेरा हे.. तो फीर सादी करनेकी क्या जरुरत हे.. क्युकी ये बहुतही पवित्र बंधन हे..
देवायत : (हसते) बुआ मुजे सब पता हे.. मे सीर्फ आपको इस जन्ममे नही हर जन्ममे पाना चाहता हु.. सादीतो करुगाही.. भलेही हमे हमारा रीस्ता दुनीयासे छीपाना पडे.. जबतक आप नही चाहोगी तबतक हम दोनो हमारे रीस्तेको छुपायेगे.. मे वादा करता हु.. इस बातका कीसको पता नही चलेगा..
भुमीका : (हसते) अरे मेरा पागल मजनु.. तेरी बुआसे इतना प्यार करता हे..? देवु तु बहुत अच्छा हे.. तेरा दिल बहुत साफ ओर नेक हे.. मेभी तुजे अंधेरेमे रखना नही चाहती थी.. आज मुजेभी अपने मनके बोजसे हल्का करने दो.. मे भी इस भगवानकी साक्षीमे तुमसे कुछ कन्फेस करना चाहती हु..
देवायत : कहो बुआ.. आज हमारे लीये बहुतही पवित्र दिन हे.. अेक भी बात अपने मनमे मत रखो..
भुमीका : (सरमाते नजरे चुुराते) देवु.. जबसे तुजे पहेली बार देखा तबसेही तेरी ओर मे आकसीर्त हो गइथी.. फीर जब नीर्मलासे जाना की तुम मेरे किशनका बेटा हो.. ओर नीमुका तेरे साथभी फीजीकल रीलेशन हे.. तबसे मेभी तुजे हर हालमे पाना चाती थी.. मे जान बुजकर तेरे साथ मस्तीया करती थी..
तुजे इसीलीयेतो मेरे साथ छेडछाड करते नही रोका.. क्युकी मुजे भी नीमुकी तराह तेरे साथ फीजीकल अेक्ट्रेसन होगया था.. मे सीर्फ अपने तनकी प्यास बुजानेके लीये ये सब कर रहीथी.. मे बहुत सालोसे प्यासी हु.. ओर तेरी सासके साथ भी मेरा लेस्बीयन रीस्ता हे..
देवायत : (हसते) क्या..? मतलब..? आप..
भुमीका : (अेकदा सर्र्मसार होते धीरेसे) हां.. देवु.. में.. मे तेरे साथ फीजीकल होना चाहती थी.. मे जबभी तुजे देखती वासनामे अंधी होजाती.. ओर तुमसे जान बुजकर छेडखानी करती.. ताकी तुमभी मेरे साथ छेडखानी करते आगे बढो.. लेकीन तेरा ओर मेरा रीस्ता बुआ भतीजेका था.. तो मे पहेल करनेसे डर रही थी.. इसीलीयेतो आज तुजे मौका मीलतेही बुला लीया..
ताकी मे तेरे साथ सारी हदे पार कर सकु.. लेकीन तुमने तो आज मेरे प्यारका मायना ही बदल दीया.. इसीलीये मे सादी करनेसे हीचकीचा रहीथी.. लेकीन अब नही.. देवु.. मुजे सचमे तुमसे प्यार होगया हे.. ओर मे वादा करती हु.. पत्नीका हर फर्ज मे नीभाउगी.. आजसे तेरी बुआ तुजे समर्पीत होती हे.. बनाले मुजे अपनी बीवी.. मे आजसे बीवीका हर फर्ज नीभाउगी..
देवायत : (हसते) हंम.. तो चले.. हम दोनो सादी करले..? बुआ मे जो करु ओर जो भी कहु आप मेरे साथ दोहराती जाइअे.. यही समजलो.. ये सादी करके हम दोनो सीर्फ इस जन्मके लीये नही.. अगले सभी जन्मोके लीये जुड रहे हे.. मे आपको हर जन्मके लीये पाना चाहता हु..
भुमीका : (हसते गाल सहेलाते) बीलकुल पागल हो.. देवु अेक बात ओर.. हम दोनो हमारे इस रीस्तोको सबसे छुपायेगे.. मरते दम तक.. ओर अब सीर्फ सबकी हाजरीमे ही तुम मुजे बुआ कहोगे.. अकेलेमे मे सीर्फ तुम्हारी भुमी हु.. आजसे ये भुमी तेरी होगइ.. समज गयेनां..?
तब देवायत हां मे गरदन हीलाते हसने लगता हे.. फीर दोनोही अेक दुसरेके सामने हो जाते हे तब भुमीका अेक कुआरी लडकीकी ओर नइ नवेली दुल्हनकी तराह खुब सरमाने लगती हे.. वो कुछ ओर सोचे समजे इनसे पहेलेही देवायतने उनके गलेमे हार पहेना दीया.. तब भुमीकाभी अेक बार अपने दिलकी धडकन चुक गइ.. फीर वोभी अपनी नजरे जुकाते देवायतको हार पहेना देती हे..
तभी देवायत जेबसे अेक डीबी नीकालते उनमेसे अेक मंगलसुत्र नीकालकर भुमीकाको पहेना देता हे.. जो अभी मार्केटसे कुछ सामान खरीदके लाया था.. तब भुमीकाकी आंख गीली होने लगी.. ओर देवायत केरी बेगसे अेक ओर डीबी नीकालकर उनमेसे चुटकी भर सींदुर नीकालता हे.. तो भुमी आस्चर्यसे देवायतको प्यारसे देखती रही.. ओर उनके आंसु छलकने लगे.. तभी देवायत भुमीकाकी मांगमे सीदुर लगाते उनकी मांगको भर देता हे.. तब भुमीकाके सब्रका बांध टुट गया..
ओर वो देवायतके सीनेमे सर छुपाते जोरोसे फुटफुटकर रोने लगी.. तो देवायतने भी उसे अपनी बाहोमे भरलीया.. जीस लडकेको भुमीका अपनी वासना संतोसीके लीये युज करना चाहती थी.. वोही लडकेने आज उसे प्यारके पवित्र बंधनमे बांध लीया था.. ओर भुमीका मनही मन रोते हुअे भगवानसे देवायतको हर जन्ममे पतीके रुपमे मांगनेकी प्रार्थना करने लगी.. तब उसे नही पताथाकी वो ये प्रार्थना हर जन्ममे करती हे.. जीहां.. वो पीछले जन्मकी डोक्टर माधवी हे.. ओर इस जन्ममे भी इसे देवायत पतीके रुपमे मील गया था.. तभी..
देवायत : बुआ.. अब चलीये मे जोभी कहु मेरे साथ दोहराइये..
भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. अब मे आपकी बुआ नही हु.. आजसे मे आपके लीये सीर्फ आपकी भुमी हु.. भुमी आजसे आपकी बीवी होगइ हे.. अब मुजे आप नामसे बुलाइअे.. अब आप ही मेरे पती हो..
देवायत : (हसते) हंम.. भुमी.. तो फीर सुरु करे..?
भुमीका : (सरमाते हसते हां मे गरदन हिलाते) हंम..
देवायत : (लींगके सामने हाथ जोडकर) आजसे मे भगवानको साक्षी मानकर आपको हर जन्मके लीये पत्नी के रुपमे स्वीकार करता हु.. ओर पत्नीका पालन पोसनसे लेकर पतीकाजो भी फर्ज होता हे.. वो हर फर्ज नीभाउगा.. ओर आपका साथ कभी नही छोडुगा..
भुमीका : (दोहराते) आजसे मेभी भगवान को साक्षी मानकर आपको हर जन्मके लीये अपने पतीके रुपमे स्वीकार करती हु.. ओर अपना पत्नीधर्म समजकर पत्त्नीका जोभी धर्म होता हे वो हर धर्म नीभाउगी.. ओर मेभी जींदगीभर आपका साथ नही छोडुयी.. चाहे कुछभी होजाये..
दोनोही वहा साथमे हाथ जोडकर पती पत्नीकी हर कसम खाते हे.. तब कसम खाते खुसीके मारे भुमीकाकी आंख गीली होती रही.. देवायतने हाथ जोडकर दर्शन करलीये फीरभी भुमी आंख बंध करते अबभी प्रार्थना कर रही थी.. वो समजने लगी.. की आज उसे भगवानके रुपमे अपना पती मील गया हे..
वो बहुतही रोमांचीत होने लगी.. अैसी फीलींग्स उसे नरेशके साथ सादी करनेके बावजुद ओर किशनके साथ भी बहेन ओर पत्नीका फर्ज नीभाते भी नही आइ थी.. ओर वो बार बार देवायतको समर्पीत होनेकी प्रार्थना करने लगी.. तब देवायत उसे प्रार्थना करते हसते हुअे देखता ही रहा..
देवायत : (हसते) भुमी.. अब चले..? आजतो तुमने भगवानसे बहुत कुछ मांगलीया.. हें..हें..हें..
भुमाका : (सरमाते हसते देवायतकी बाहोमे समाते) हां.. आज मेने अपने देवुको हमेसाके लीये मांगलीया हे.. ओर वोभी आने वाले सभी जन्मोके लीये.. देवु.. कितना अदभुत हेनां..? हम दोनोके बीच उमरका इतना फर्क होनेके बावजुदभी हम दोनोका प्यार कीतना गहेरा हे.. आज मे आपके प्यारको महेसुस कर रही हु.. कास मे आपको हमारा वारीस दे पाती.. बस अेक यही अफसोस रेह जायेगा.. की मे आपको हमारा बच्चा नही दे पाउगी..
देवायत : (भुमीका सर चुमते) नही भुमी.. अफसोस करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. हम दोनोही आज इश्वरके सामने खडे हे.. मे वादा करता हु.. हम दोनो इस दीनीयाको छोडडर वापस जन्म लेकर आयेगे.. ओर अगले जन्ममे हम दोनोही मीलेगे.. ओर तब हमारा बच्चा भी होगा.. ओर क्या पता इस जन्ममेभी हो.. हें..हें..हें..
भुमीका : (सरमाते हसते सर उठाकर देवायतकी आंखोमे देखते) नही देवु.. इस जन्ममे मुमकीन नही हे.. हांलाकी मुजे अभीभी पीरीयड आ रहा हे.. इस जन्ममे होगातोभी मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. बस सीर्फ सृतीका डर लग रहा हे.. मे उसे क्या जवाब दुगी..? लेकीन मेभी आपसे वादा करती हु..
अगले जन्ममे मे मेरी सृतीके कोखसे ही पैदा होना चाहती हु.. ओर तब मे आपके प्यारका इन्तजार करुगी.. ओर हमारा मीलन भी होगा.. ओर हमारा बच्चाभी पैदा करुगी.. आइ प्रोमीस.. बस आप तब मुजे अपनी पहेचान करवा दीजीयेगा..

देवायत : भुमी.. अगर इस जन्ममे बच्चा होता हे तो हम सृतीको सबकुछ सचाइ बता देगे.. मे कीसीसे छुपकर कुछ करना नही चाहता.. तु फीकर मत कर मेरी मंजु सब सम्हाल लेगी.. वो कोइ सामान्य ओरत नही हे..
कहा तो भुमी देवायतके गले लगतेही उनके होठ चुम लेती हे.. फीर दोनोही प्यार भरी बाते करते अपने फ्युचरकी प्लानींग करते वहा काफी देर तक बैठे रहे.. फीर उठकर कारकी ओर चलने लगते हे.. तब दोनोही सहेरकी ओर वापस नीकल गये.. वहा सहेरमे पहोंचतेही देवायतने अेक बडी आलीसान होटेलकी ओर कारको जाने दीया.. तब पुरे रास्ते भुमीका सीर्फ देवायतको देखती ही रही.. आज वो देवायतको अपनी आंखोमे बसालेना चाहती थी.. उसे अबभी यकीन नही हो रहाथा.. की कोइ लडका उसे इतना प्यार भी कर सकता हे....
कन्टीन्यु